प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने असम के गुवाहाटी में बागुरुम्बा दहोउ कार्यक्रम को संबोधित किया

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने सरुसजाई स्टेडियम, गुवाहाटी में बागुरुम्बा दहोउ 2026 को संबोधित किया, जो बोडो समुदाय की समृद्ध विरासत का जश्न मनाने वाला ऐतिहासिक सांस्कृतिक कार्यक्रम है। इस अवसर पर अपने संबोधन में प्रधानमंत्री ने कहा कि असम संस्कृति और बोडो समुदाय की परंपराओं को नजदीक से देखने का अवसर पाना उनके लिए सौभाग्य की बात है। उन्होंने रेखांकित किया कि कोई अन्य प्रधानमंत्री इतनी बार असम नहीं आये हैं, जितनी बार वे आये हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी इच्छा रही है कि असम की कला और संस्कृति को एक बड़ा मंच मिले और भव्य उत्सवों के माध्यम से इसे पूरे देश और विश्व में मान्यता मिले। उन्होंने उल्लेख किया कि इस दिशा में निरंतर प्रयास किये गये हैं, उदहारण के तौर पर – बड़े पैमाने पर बिहू उत्सव, झुमोइर बिनोन्दिनी की अभिव्यक्ति, सवा साल पहले नई दिल्ली में आयोजित भव्य बोडो महोत्सव और अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि वे असम की कला और संस्कृति की अनूठी विशेषताओं का अनुभव करने का कोई अवसर नहीं चूकते। उन्होंने कहा कि एक बार फिर, बागुरुम्बा उत्सव आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने इसका वर्णन बोडो पहचान के एक जीवंत उत्सव और असम की विरासत के प्रति श्रद्धांजलि के रूप में किया। श्री मोदी ने इस कार्यक्रम से जुड़े सभी लोगों, विशेष रूप से कलाकारों को अपनी शुभकामनाएं और बधाई दी।

प्रधानमंत्री ने कहा कि बागुरुम्बा दहोउ केवल एक उत्सव नहीं है, बल्कि यह महान बोडो परंपरा को सम्मानित करने और बोडो समाज की महान विभूतियों को याद करने का एक माध्यम है। उन्होंने बोडोफा उपेंद्र नाथ ब्रह्मा, गुरुदेव कालीचरण ब्रह्मा, रूपनाथ ब्रह्मा, सतीश चंद्र बसुमतारी, मोरदाम ब्रह्मा, और काणकेश्वर नार्जारी जैसी विभूतियों को याद किया और सामाजिक सुधार, सांस्कृतिक पुनर्जागरण और राजनीतिक जागरूकता में उनके योगदान का उल्लेख किया। प्रधानमंत्री ने बोडो समुदाय के सभी महान व्यक्तित्वों को सम्मानपूर्वक श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी पार्टी असम की संस्कृति को पूरे देश का गर्व मानती है और भारत का इतिहास असम के अतीत और विरासत के बिना पूरा नहीं हो सकता है। श्री मोदी ने इस बात पर जोर दिया कि उनकी सरकार के तहत बागुरुम्बा दहोउ जैसे भव्य उत्सवों का आयोजन किया जाता है, बिहू को राष्ट्रीय मान्यता दी गई है और चारईदेन मोईदम को यूनेस्को की विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया है। उन्होंने कहा कि असमी भाषा को प्राचीन भाषा का दर्जा दिया गया है, और बोडो भाषा को असम की सहायक आधिकारिक भाषा के रूप में मान्यता दी गई है, और बोडो शिक्षा को सशक्त बनाने के लिए एक अलग निदेशालय स्थापित किया गया है। पीएम मोदी ने यह भी रेखांकित किया कि इस प्रतिबद्धता के कारण बथोऊ धर्म को पूर्ण सम्मान और मान्यता दी गई है, और बथोऊ पूजा को राज्य अवकाश घोषित किया गया है। उन्होंने यह भी बताया कि उनकी सरकार के तहत योद्धा लचित बोरफुकन की भव्य मूर्ति स्थापित की गई है और बोडोफा उपेंद्र नाथ ब्रह्मा की मूर्ति का अनावरण किया गया है। उन्होंने यह भी जोड़ा कि श्रीमंत शंकरदेव की भक्ति और सामाजिक सद्भाव की परंपराओं तथा ज्योति प्रसाद अग्रवाल की कला और चेतना को असम की विरासत के रूप में सम्मानित किया गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि आज ज्योति प्रसाद अग्रवाल की पुण्यतिथि है और उन्हें अपनी श्रद्धांजलि दी।

असम का दौरा करने को लेकर अपनी भावनाओं को व्यक्त करते हुए, श्री मोदी ने कहा कि वे यह देखकर बहुत प्रभावित हैं कि राज्य कितनी प्रगति कर चुका है। उन्होंने याद किया कि ऐसा समय भी था, जब रक्तपात आम था, लेकिन आज संस्कृति के रंग चमक रहे हैं; ऐसा समय था, जब बंदूक की गोली गूँजती थी, लेकिन अब खाम और सिफुंग की मधुर ध्वनियाँ गूंजती हैं; ऐसा समय था, जब कर्फ्यू से सन्नाटा छा जाता था, लेकिन अब संगीत गूँज रहा है; अशांति और अस्थिरता का समय था, लेकिन अब बागुरुम्बा के मनोरम प्रदर्शन हो रहे हैं। पीएम मोदी ने जोर देकर कहा कि ऐसा भव्य उत्सव केवल असम की उपलब्धि नहीं बल्कि भारत की उपलब्धि है, और देश का हर नागरिक असम के बदलाव पर गर्व महसूस करता है।

प्रधानमंत्री ने संतोष व्यक्त किया कि असम की जनता और उनके बोडो भाइयों और बहनों ने उन पर विश्वास किया। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य में उनकी सरकारों को शांति और विकास की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, और लोगों के आशीर्वाद से उस जिम्मेदारी को पूरा किया गया। श्री मोदी ने यह भी रेखांकित किया कि 2020 के बोडो शांति समझौते ने दशकों से चल रहे संघर्ष को समाप्त किया, विश्वास को बहाल किया और हजारों युवाओं को हिंसा छोड़कर मुख्यधारा में शामिल होने का अवसर प्रदान किया। उन्होंने कहा कि समझौते के बाद बोडो क्षेत्र में शिक्षा और विकास में नए अवसर उभरे और शांति रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा बन गई, जिसमें लोगों के प्रयासों ने सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

इस बात पर ज़ोर देते हुए कि असम की शांति, विकास और गर्व के केंद्र में उसके युवा हैं, जिन्होंने शांति का मार्ग चुना है, श्री मोदी ने कहा कि इसे उज्जवल भविष्य की ओर आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने बताया कि शांति समझौते के बाद से सरकार लगातार बोडोलैंड के विकास के लिए काम कर रही है, पुनर्वास प्रक्रिया को गति दे रही है और हजारों युवाओं को नई शुरुआत करने में मदद करने के लिए करोड़ों रुपये की वित्तीय सहायता प्रदान कर रही है।

प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि उनकी सरकार के प्रयासों के परिणाम आज दिखाई दे रहे हैं, प्रतिभाशाली बोडो युवा असम के सांस्कृतिक दूत बन रहे हैं, खेलों में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रहे हैं, नए आत्मविश्वास के साथ सपने देख रहे हैं, उन सपनों को पूरा कर रहे हैं और असम की प्रगति को गति दे रहे हैं।

श्री मोदी ने कहा कि जब भी असम की कला, संस्कृति और पहचान का सम्मान किया जाता है, कुछ लोग परेशान हो जाते हैं। यह पूछते हुए कि असम के सम्मान की सराहना कौन नहीं करता, श्री मोदी ने कहा कि विपक्षी पार्टी ने भूपेन हजारिका को भारत रत्न देने का विरोध किया और ये वही लोग थे जिन्होंने असम में सेमीकंडक्टर इकाई का विरोध किया था। श्री मोदी ने कहा कि आज भी, जब वे असम की संस्कृति से जुड़ी कोई वस्तु पहनते हैं, तो वही विपक्ष इसका मज़ाक उड़ाता है।

प्रधानमंत्री मोदी ने जोर देकर कहा कि असम और बोडोलैंड दशकों तक केवल विपक्ष के कारण मुख्यधारा से कटे रहे। उन्होंने कहा कि उन्होंने राजनीतिक लाभ के लिए असम में अस्थिरता पैदा की और राज्य को हिंसा की आग में धकेल दिया। उन्होंने याद दिलाया कि स्वतंत्रता के बाद असम को चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन समाधान खोजने के बजाय, उस समय की सत्तारूढ़ व्यवस्था ने उन समस्याओं का राजनीतिक लाभ उठाने के लिए दुरुपयोग किया। विपक्षी पार्टी की आलोचना करते हुए, श्री मोदी ने जोर देकर कहा कि जब भरोसे की जरूरत थी, तब उन्होंने विभाजन बोया; जब संवाद की जरूरत थी, तब उन्होंने इसे नजरअंदाज किया और संचार के द्वार बंद कर दिए। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि बोडोलैंड की आवाज कभी ठीक से सुनी नहीं गई। उन्होंने कहा कि जब असम को उपचार और सेवा की जरूरत थी, तब उन्होंने इसके बजाय घुसपैठियों के लिए द्वार खोल दिए और उनके स्वागत पर ध्यान केंद्रित किया।

श्री मोदी ने जोर देकर कहा कि विपक्षी पार्टी असम के लोगों को अपना नहीं मानती, बल्कि विदेशी घुसपैठियों को तरजीह देती है जो उसके वफादार वोट बैंक बन जाते हैं। उन्होंने कहा कि विपक्ष के शासन में घुसपैठिए आते रहे, लाखों बीघा जमीन पर कब्जा किया और उन्हें सरकारों की मदद मिलती रही। पीएम मोदी ने खुशी जताई कि आज, श्री हिमंत बिस्वा सरमा के नेतृत्व में, सरकार लाखों बीघा जमीन को घुसपैठियों से मुक्त करवा रही है और इसे असम के योग्य लोगों को वापस कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि विपक्ष हमेशा असम और पूरे उत्तर-पूर्व को नजरअंदाज करता रहा, जानबूझकर इस क्षेत्र को कठिनाइयों में धकेलता रहा और उसने कभी इसके विकास को महत्वपूर्ण नहीं माना।

प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि विपक्ष के पापों को साफ करने का काम उनकी केंद्र और राज्य की सरकारें कर रही हैं और आज दिखाई दे रही विकास की रफ्तार इसका प्रमाण है। उन्होंने बोडो-कचारी कल्याण स्वायत्त परिषद के गठन, बोडोलैंड के लिए 1500 करोड़ रुपये के विशेष विकास पैकेज का आवंटन, कोकराझार में मेडिकल कॉलेज और अस्पताल की स्थापना और तामुलपुर में मेडिकल कॉलेज के निर्माण की गति तेज करने का उल्लेख किया। उन्होंने आगे कहा कि नर्सिंग कॉलेज और पैरा-मेडिकल संस्थान युवाओं के लिए नए अवसर पैदा कर रहे हैं, जबकि गोबरधना, पर्वतझोरा और होरिसिंगा में पॉलिटेक्निक और प्रशिक्षण संस्थान स्थापित किए गए हैं।

श्री मोदी ने यह रेखांकित किया कि एक पृथक कल्याण विभाग और बोडोलैंड प्रशासनिक कर्मचारी कॉलेज भी स्थापित किए गए हैं, जिससे बोडो समुदाय के कल्याण के लिए बेहतर नीति निर्माण संभव हुआ है। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने बेहतर अवसंरचना के माध्यम से दूरी को पाट दिया है—दिलों के बीच, असम और दिल्ली के बीच, और असम के भीतर भी। पहले जहां पहुंचना कठिन था, अब वहां राजमार्ग हैं, और नई सड़कें अवसर प्रदान कर रही हैं। उन्होंने कोकराझार को भूटान सीमा से जोड़ने वाली बिशमुरी-सरलपारा सड़क परियोजना का उदाहरण दिया, जिसके लिए करोड़ों रुपये आवंटित किए गए हैं, और प्रस्तावित कोकराझार–गेलेफु रेलवे परियोजना का भी जिक्र किया, जिसे विशेष रेलवे परियोजना घोषित किया गया और एक्ट ईस्ट पॉलिसी का हिस्सा बनाया गया है, जो व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा देगी।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि जब समाज अपनी जड़ों से जुड़ा रहता है, जब संवाद और विश्वास मजबूत होते हैं, और जब समान अवसर सभी वर्गों तक पहुँचते हैं, तो सकारात्मक परिवर्तन दिखाई देने लगता है। उन्होंने कहा कि असम और बोडोलैंड इस दिशा में प्रगति कर रहे हैं, असम का आत्मविश्वास, क्षमता और प्रगति भारत की विकास गाथा में नई ताकत जोड़ रही है। पीएम मोदी ने यह भी कहा कि असम खुद को सबसे तेजी से बढ़ते राज्यों में स्थापित कर रहा है, इसकी अर्थव्यवस्था की गति तेज हो रही है, और बोडोलैंड और इसके लोग इस परिवर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने एक बार फिर से सभी को इस दिन के भव्य उत्सव के लिए अपनी हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

इस कार्यक्रम में असम के राज्यपाल श्री लक्ष्मण प्रसाद आचार्य, असम के मुख्यमंत्री श्री हिमंत बिस्वा सरमा, केंद्रीय मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल, श्री पवित्रा मार्गेरिटा सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

पृष्ठभूमि

प्रधानमंत्री ने ‘‘बागुरुम्बा दहोउ 2026’’ में भाग लिया, जो एक ऐतिहासिक सांस्कृतिक कार्यक्रम है और जिसे गुवाहाटी के सरुसजाई स्टेडियम में बोडो समुदाय की समृद्ध विरासत का जश्न मनाने के लिए आयोजित किया गया।

इस अवसर पर, बोडो समुदाय के 10,000 से अधिक कलाकारों ने एक ही, समन्वित प्रस्तुति में बागुरुम्बा नृत्य प्रस्तुत किया। राज्य के 23 जिलों के 81 विधानसभा क्षेत्रों के कलाकारों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया।

बागुरुम्बा बोडो समुदाय के लोक नृत्यों में से एक है, जो प्रकृति से अत्यधिक प्रभावित है। यह नृत्य खिलते फूलों का प्रतीक है और मानव जीवन तथा प्राकृतिक दुनिया के बीच सामंजस्य को दर्शाता है। पारंपरिक रूप से इसे युवा बोडो महिलाओं द्वारा प्रस्तुत किया जाता है, और पुरुष संगीतकार के रूप में साथ देते हैं। इस नृत्य में कोमल, प्रवाहमान भंगिमाएं होती हैं जो तितलियों, पक्षियों, पत्तियों और फूलों का अनुकरण करती हैं। प्रदर्शन आमतौर पर समूहों में आयोजित किए जाते हैं, प्रदर्शन में वृत्त या रेखाओं का निर्माण किया जाता है, जो इसकी दृश्य सुंदरता को बढ़ाते हैं।

बागुरुम्बा नृत्य का बोडो लोगों के लिए गहरा सांस्कृतिक महत्व है। यह शांति, उर्वरता, आनंद और सामूहिक सद्भाव का प्रतीक है, और यह बिसागु, बोडो नववर्ष, और डोमासी जैसे त्योहारों के साथ घनिष्ठ रूप से जुड़ा हुआ है।

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रक्षा सचिव ने एनसीसी गणतंत्र दिवस शिविर का दौरा किया

नई दिल्ली –  रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह ने आज दिल्ली कैंट स्थित राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के गणतंत्र दिवस शिविर (आरडीसी) 2026 का दौरा किया। इस अवसर पर उन्होंने कैडेट्स द्वारा प्रस्तुत किए गए शानदार प्रदर्शन की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह प्रदर्शन कैडेट्स की लगन, प्रतिभा, अनुशासन और उत्साह को दर्शाता है, जो भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता और एनसीसी के ध्येय वाक्य ‘एकता और अनुशासन’ का जीवंत प्रतिबिंब है।

पिछले सात दशकों में एनसीसी द्वारा निभाई गई भूमिका की सराहना करते हुए, रक्षा सचिव ने रेखांकित किया कि एनसीसी ने युवा मानस को अनुशासन, निस्वार्थ सेवा और राष्ट्रीय गौरव के मूल्यों के साथ ढालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने आपदा प्रबंधन, पर्यावरण संरक्षण और राष्ट्र निर्माण के प्रयासों में संगठन के सक्रिय योगदान पर जोर दिया। रक्षा सचिव ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान नागरिक सुरक्षा कर्तव्यों में एनसीसी कैडेट्स द्वारा दिखाए गए असाधारण साहस और समर्पण की प्रशंसा की। साथ ही, उन्होंने यमुना सफाई अभियान, रक्तदान शिविर और केरल के वायनाड में आई बाढ़ के दौरान राहत कार्यों जैसी सरकारी पहलों में उनके उत्कृष्ट योगदान को भी सराहा। कैडेट्स की बहुमुखी प्रतिभा का उल्लेख करते हुए उन्होंने शूटिंग, हॉकी और घुड़सवारी जैसे खेलों में उनकी उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने पर्वतारोहण, नौकायन और पैराशूटिंग जैसी साहसिक गतिविधियों पर एनसीसी के ध्यान की भी प्रशंसा की, जो युवाओं को फिटनेस, अनुशासन और दृढ़ता की ओर प्रेरित करने में मदद करते हैं।

अपने संबोधन के समापन में, श्री राजेश कुमार सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि एनसीसी द्वारा विकसित किए गए मूल्य जीवन भर बने रहते हैं और ऐसे जिम्मेदार नेतृत्वकर्ताओं का निर्माण करते हैं जो स्पष्ट सोच रख सकते हैं, न्यायपूर्ण कार्य कर सकते हैं और ईमानदारी व सत्यनिष्ठा को बनाए रख सकते हैं। कैडेट्स को विकसित भारत के वास्तुकार के रूप में वर्णित करते हुए, उन्होंने उन्हें विनम्र, साहसी, जिज्ञासु और राष्ट्रीय आदर्शों के प्रति प्रतिबद्ध रहने के लिए प्रोत्साहित किया।

कार्यक्रम के भाग के रूप में, रक्षा सचिव को कैडेट्स द्वारा विभिन्न सामाजिक जागरूकता विषयों पर आधारित ‘फ्लैग एरिया’ और ‘हॉल ऑफ फेम’ में प्रदर्शित एनसीसी के समृद्ध इतिहास और उपलब्धियों के बारे में विस्तृत जानकारी दी गई। कैडेट्स ने स्टैटिक फंक्शनल शिप और एयरो मॉडलिंग के माध्यम से अपनी रचनात्मकता और तकनीकी कौशल का प्रदर्शन किया।

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अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह को भारत की ब्लू इकोनॉमी के हब के रूप में विकसित किया जाएगा: डॉ. जितेंद्र सिंह

नई दिल्ली – विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह बात आज अटल सेंटर फॉर ओशन साइंस एंड टेक्नोलॉजी फॉर आइलैंड्स (ACOSTI) के दौरे के दौरान कही। इस अवसर पर उन्होंने अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह में ब्लू इकोनॉमी और आजीविका को सशक्त बनाने के उद्देश्य से प्रमुख समुद्री प्रौद्योगिकी पहलों का शुभारंभ किया तथा उनकी समीक्षा की।

इस अवसर पर वैज्ञानिकों, अधिकारियों और हितधारकों को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि जैसे-जैसे भारत तेजी से दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में शामिल होने की ओर बढ़ रहा है, देश के भविष्य का आर्थिक मूल्य संवर्धन बड़े पैमाने पर अब तक अप्रयुक्त समुद्री संसाधनों से प्राप्त होगा। उन्होंने रेखांकित किया कि ब्लू इकोनॉमी पर सरकार का मजबूत फोकस प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस दृष्टिकोण को दर्शाता है, जिसके अनुसार केवल मुख्य भूमि पर ध्यान केंद्रित कर तथा द्वीप क्षेत्रों और तटीय क्षेत्रों को पीछे छोड़कर भारत का समग्र विकास संभव नहीं है।

यह कार्यक्रम पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय महासागर प्रौद्योगिकी संस्थान (NIOT) की इकाई अटल सेंटर फॉर ओशन साइंस एंड टेक्नोलॉजी फॉर आइलैंड्स में, डॉलीगंज, श्री विजयपुरम (पोर्ट ब्लेयर) में आयोजित किया गया। कार्यक्रम में अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह से माननीय सांसद श्री बिष्णु पद राय, पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय के सचिव डॉ. एम. रविचंद्रन, अंडमान एवं निकोबार प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी, NIOT एवं अन्य अनुसंधान संस्थानों के वैज्ञानिक, तथा स्थानीय विभागों और स्वयं सहायता समूहों के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।

संसद में अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह के निरंतर और ऊर्जावान प्रतिनिधित्व की सराहना करते हुए मंत्री ने कहा कि सतत पक्षधरता के कारण द्वीप विकास की दिशा में राष्ट्रीय स्तर पर ध्यान और संसाधनों का प्रवाह सुनिश्चित हुआ है। उन्होंने स्मरण कराया कि वर्ष 2014 से प्रधानमंत्री ने उत्तर-पूर्वी क्षेत्र और द्वीप क्षेत्रों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है, जिसका प्रभाव अब क्षेत्र में वैज्ञानिक, प्रशासनिक और मंत्रिस्तरीय सहभागिता के बढ़ते स्तर में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है।

डीप ओशन मिशन का उल्लेख करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह गर्व का विषय है कि प्रधानमंत्री ने लाल किले की प्राचीर से इस मिशन की घोषणा एक बार नहीं बल्कि दो बार की, जो ब्लू इकोनॉमी के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है। उन्होंने कहा कि लंबे समय तक कम अन्वेषित रहे समुद्री संसाधन, पारंपरिक संसाधनों के क्षीण होने के साथ, भारत की विकास यात्रा को बनाए रखने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे। ब्लू इकोनॉमी रोजगार सृजन, निर्यात, पर्यावरणीय सततता और समग्र आर्थिक मजबूती में महत्वपूर्ण योगदान देगी।

मंत्री ने कार्यक्रम के दौरान शुरू की गई और प्रदर्शित की गई प्रमुख पहलों पर प्रकाश डाला, जिनमें समुद्री मछलियों की पायलट स्तर की ओपन-सी केज कल्चर और बड़े पैमाने पर समुद्री शैवाल (सीवीड) की खेती शामिल हैं। उन्होंने इस बात पर संतोष व्यक्त किया कि प्रौद्योगिकी हस्तांतरण पहले ही हो चुका है, जो विकसित भारत के निर्माण की दिशा में “समग्र सरकार, समग्र समाज” दृष्टिकोण को दर्शाता है। स्थानीय अनुकूलता के महत्व पर जोर देते हुए उन्होंने कहा कि अंडमान एवं निकोबार क्षेत्र की विशिष्ट समुद्री प्रजातियां और तटीय विशेषताएं ऐसे परियोजनाओं के लिए इसे सबसे उपयुक्त स्थान बनाती हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने महासागर विज्ञान के साथ जैव प्रौद्योगिकी के एकीकरण पर भी विस्तार से चर्चा की। उन्होंने कहा कि भारत उन चुनिंदा देशों में शामिल है जिनके पास जैव प्रौद्योगिकी के लिए समर्पित नीति—बायोE3 (अर्थव्यवस्था, पर्यावरण और रोजगार के लिए जैव प्रौद्योगिकी)—है। उन्होंने बताया कि समुद्री जैव-संसाधन प्लास्टिक के जैव-अपघटनीय विकल्प, नई औषधीय यौगिकों और उच्च मूल्य वाले जैव-उत्पादों का स्रोत बन सकते हैं। ऐसी पहलें एक साथ रोजगार सृजन, पर्यावरण संरक्षण और बायोइकोनॉमी को सशक्त करेंगी।

मंत्री ने गैर-पशु आधारित खाद्य उत्पादों, वैकल्पिक समुद्री पोषण, वेस्ट-टू-वेल्थ प्रौद्योगिकियों और निर्यातोन्मुख समुद्री उत्पादों जैसे उभरते क्षेत्रों का भी उल्लेख किया और कहा कि विशेषकर यूरोप में इनके लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि स्वयं सहायता समूहों और महिलाओं की भागीदारी को बढ़ाया जाना चाहिए, ताकि ये पहलें घरेलू आय में वृद्धि करें और “वोकल फॉर लोकल” तथा “लोकल फॉर ग्लोबल” के दृष्टिकोण को मजबूत करें।

अपने संबोधन के समापन में डॉ. जितेंद्र सिंह ने वैज्ञानिकों और स्थानीय हितधारकों के उत्साह और समर्पण की सराहना की और कहा कि सीएसआईआर तथा जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान केंद्रों की संभावित भागीदारी सहित संस्थागत सहयोग के माध्यम से अंडमान एवं निकोबार द्वीपसमूह भारत की ब्लू इकोनॉमी पहलों का एक प्रमुख केंद्र बन सकता है। उन्होंने क्षेत्र के साथ सतत जुड़ाव के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई और विश्वास व्यक्त किया कि ये प्रयास द्वीपसमूह के लिए दीर्घकालिक वैज्ञानिक, पर्यावरणीय और सामाजिक-आर्थिक लाभ प्रदान करेंगे।

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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले का अवलोकन किया

नई दिल्ली –  केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज भारत मंडपम में आयोजित नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले का अवलोकन किया। गृह मंत्री ने वंदे मातरम पवेलियन और ऑपरेशन सिंदूर पवेलियन का भी दौरा किया। गृह मंत्री ने सरदार वल्लभभाई पटेल के जीवन और योगदान पर बनी प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया।  

X पर किए गए सिलसिलेवार पोस्ट्स में केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा, “पुस्तकें ज्ञान प्राप्त करने का सर्वोत्तम माध्यम हैं, और उम्र चाहे जो भी हो, पढ़ते रहना चाहिए। पढ़ने की आदत तेजी से कम होती जा रही है, और मुझे विश्वास है कि डिजिटल हो या प्रिंट, पुस्तकें अभी भी ज्ञान अर्जित करने का सबसे अच्छा तरीका हैं। आज भारत मंडपम में आयोजित नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले का अवलोकन किया।”

केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने बच्चों को बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की ‘आनंद मठ’ की प्रतियां भी वितरित कीं। उन्होंने कहा, “बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित साहित्यिक कृति ‘आनंद मठ’ ने लाखों भारतीयों को स्वतंत्रता संग्राम छेड़ने और ब्रिटिश शासन को समाप्त करने के लिए प्रेरित कर इतिहास रचा। नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले में बच्चों को ‘आनंद मठ’ की प्रतियां भेंट कीं ताकि उनके मन में हमारे स्वतंत्रता सेनानियों के सपनों की ज्योति जलाई जा सके।”

श्री अमित शाह ने आगे कहा, “आज विश्व पुस्तक मेले में नेशनल बुक ट्रस्ट के वंदे मातरम पवेलियन का दौरा किया। जब राष्ट्र वंदे मातरम के 150 वर्ष मना रहा है, यह पवेलियन हमारे राष्ट्रीय गीत की गौरवशाली गाथा को प्रदर्शित कर रहा है, जिसने स्वतंत्रता सेनानियों में औपनिवेशिक शासन को उखाड़ फेंकने की देशभक्ति की भावना जगाई थी।”

श्री अमित शाह ने पुस्तक मेले में सरदार वल्लभभाई पटेल के जीवन और योगदान पर बनी प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया। उन्होंने कहा, “आज ‘नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेला’ में सरदार साहब के जीवन और योगदान पर बनी प्रदर्शनी का अवलोकन किया। टुकड़ों-टुकड़ों में बँटे देश को एकीकृत कर एक भारत का निर्माण करने वाले सरदार साहब का 150वाँ जयंती वर्ष मनाकर मोदी सरकार उनके महान व्यक्तित्व व विशाल कृतित्व को नई पीढ़ी में अजर-अमर बना रही है। यह प्रदर्शनी युवाओं में देश की रक्षा व अखंडता के संकल्प को और भी मजबूत बनाएगी।”

गृह मंत्री ने कहा, “ऑपरेशन सिंदूर प्रधानमंत्री मोदी जी की दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति, हमारी सशस्त्र सेनाओं की निर्णायक प्रहार क्षमता और सटीक खुफिया जानकारी से संचालित भारत की अजेय सैन्य शक्ति का प्रमाण था। नई दिल्ली विश्व पुस्तक मेले में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ पवेलियन का दौरा किया। यह पवेलियन युवा पीढ़ी को देशभक्ति और राष्ट्र के प्रति समर्पण की प्रेरणा देता है।”

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उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने जागरण फोरम का उद्घाटन किया, सकारात्मक राष्ट्र निर्माण संवाद का आह्वान किया

नई दिल्ली – उपराष्ट्रपति, श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज उत्तराखंड के देहरादून में जागरण फोरम का उद्घाटन किया, जिसका आयोजन राज्य के गठन के 25 साल पूरे होने के उपलक्ष्य में किया गया था। उद्घाटन कार्यक्रम को संबोधित करते हुए, उन्होंने उत्तराखंड को त्याग, सहनशक्ति और राष्ट्र सेवा की भूमि बताया और इस महत्वपूर्ण अवसर पर राज्य के लोगों को हार्दिक बधाई दी।

उत्तराखंड के निर्माण को याद करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि राज्य का गठन पहाड़ के लोगों की लंबे समय से चली आ रही आकांक्षाओं के प्रति एक लोकतांत्रिक प्रतिक्रिया थी और इसने भारत की संघीय प्रणाली की ताकत को फिर से साबित किया। उन्होंने इस प्रक्रिया के साथ अपने व्यक्तिगत जुड़ाव को भी साझा किया, क्योंकि लोकसभा सदस्य के रूप में सेवा करते हुए उन्होंने उत्तराखंड के निर्माण के विधेयक के पक्ष में वोट दिया था।

देवभूमि उत्तराखंड के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह राज्य भारत की सभ्यतागत चेतना में एक विशेष स्थान रखता है। वैदिक और पौराणिक परंपराओं का जिक्र करते हुए, उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सत्यम, शिवम और सुंदरम के सार को दर्शाता है। उन्होंने राज्य के पारिस्थितिक महत्व पर जोर देते हुए कहा कि इसके ग्लेशियर, नदियाँ और जंगल इसकी भौगोलिक सीमाओं से कहीं आगे जीवन को बनाए रखते हैं।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी के दूरदर्शी नेतृत्व में, राज्य ने सड़क, रेल, हवाई और संचार कनेक्टिविटी में अभूतपूर्व प्रगति देखी है।

विकास पर जोर देते हुए, उपराष्ट्रपति ने पर्यावरणीय जिम्मेदारी के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने हरित विकास को बढ़ावा देने में उत्तराखंड के प्रयासों की सराहना की, विशेष रूप से सौर ऊर्जा के क्षेत्र में, और सकल घरेलू उत्पाद के साथ-साथ सकल पर्यावरणीय उत्पाद की अवधारणा करने वाला देश का पहला राज्य होने के लिए राज्य की प्रशंसा की।

उपराष्ट्रपति ने राष्ट्रीय सुरक्षा में राज्य के महत्वपूर्ण योगदान की सराहना करते हुए कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों में बड़ी संख्या में अधिकारी उत्तराखंड से हैं।

उत्तराखंड के रणनीतिक महत्व का जिक्र करते हुए, उपराष्ट्रपति ने जीवंत सीमावर्ती गांवों को आखिरी चौकी नहीं, बल्कि ताकत, विरासत और लचीलेपन की पहली पंक्ति बताया, और माणा गांव को “भारत का पहला गांव” बताने की प्रधानमंत्री की कल्पना को याद किया।

2047 तक आत्मनिर्भर और विकसित भारत बनने की भारत की यात्रा को देखते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि उत्तराखंड नवीकरणीय ऊर्जा, जैविक कृषि, बागवानी, पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों, आयुष, इकोटूरिज्म, स्टार्टअप और कौशल विकास में अपनी विशाल क्षमता के साथ एक अद्वितीय स्थान रखता है।

लोकतंत्र के चौथे स्तंभ के रूप में मीडिया की भूमिका पर ज़ोर देते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह लोगों और सत्ता में बैठे लोगों के बीच एक पुल का काम करता है, जिससे शासन में जवाबदेही और पारदर्शिता मज़बूत होती है। विकास की सकारात्मक कहानियों को उजागर करने के लिए दैनिक जागरण की सराहना करते हुए, उन्होंने मीडिया संगठनों से नियमित रूप से कम से कम दो पेज सकारात्मक और विकास-उन्मुख खबरों के लिए समर्पित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि अखबारों को जागृत होकर सकारात्मकता फैलानी चाहिए, खासकर युवाओं के बीच, क्योंकि रचनात्मक और प्रेरणादायक कथानकों के संपर्क में आने से युवा नागरिक राष्ट्र निर्माण में अधिक सक्रिय रूप से योगदान देने के लिए प्रेरित होंगे।

अपने संबोधन के अंत में, उपराष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि जागरण फोरम में होने वाली चर्चाओं से उत्तराखंड की निरंतर प्रगति के लिए नए विचार उत्पन्न होंगे।

इस कार्यक्रम में उत्तराखंड के राज्यपाल, लेफ्टिनेंट जनरल (सेवानिवृत्त) श्री गुरमीत सिंह; उत्तराखंड के मुख्यमंत्री, श्री पुष्कर सिंह धामी; दैनिक जागरण के वरिष्ठ प्रतिनिधि, जिनमें प्रबंध संपादक श्री तरुण गुप्ता, निदेशक श्री सुनील गुप्ता; और अन्य गणमान्य अतिथि उपस्थित थे।

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भारत में नदी और मुहाना क्षेत्र में पाई जाने वाली डॉल्फ़िन के व्यापक क्षेत्र के आकलन का दूसरा अभियान बिजनौर से शुरू किया गया

नई दिल्ली – पिछले वर्ष मार्च में गुजरात के गिर में राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (एनबीडब्ल्यूएल) में प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा पहले दौर के गणना अनुमान के परिणाम जारी किए जाने के बाद अब देश में डॉल्फ़िन के संरक्षण को आगे बढ़ाने के लिए केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय ने आज उत्तर प्रदेश के बिजनौर से प्रोजेक्ट डॉल्फ़िन के तहत नदी एवं मुहाना क्षेत्र में पाई जाने वाली डॉल्फ़िन का दूसरा व्यापक अनुमान शुरू किया।

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने पिछले वन्यजीव सप्ताह के दौरान देहरादून में डॉल्फ़िन की अखिल भारतीय गणना और उसके गणना प्रोटोकॉल के दूसरे चरण का शुभारंभ किया था। इस कार्यक्रम का समन्वय भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्ल्यूआईआई), देहरादून द्वारा राज्य वन विभागों और सहयोगी संरक्षण संगठनों डब्ल्यूडब्ल्यूएफ इंडिया, आरण्यक और वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के सहयोग से किया जा रहा है।

उत्तर प्रदेश के 13 जिलों के वन कर्मचारियों के लिए कल बिजनौर में एक क्षेत्रीय प्रशिक्षण कार्यशाला आयोजित की गई थी। इसमें सर्वेक्षण की प्रगति के साथ-साथ मानकीकृत क्षेत्रीय क्षमता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक 10-15 जिलों के लिए समय-समय पर आगे प्रशिक्षण आयोजित किया जाएगा।

सर्वेक्षण की शुरुआत तीन नावों में सवार 26 शोधकर्ताओं के साथ हुई जिन्होंने पारिस्थितिक और पर्यावास संबंधी मापदंडों को रिकॉर्ड किया और जलमग्न ध्वनिक निगरानी के लिए हाइड्रोफोन जैसी तकनीकों का उपयोग किया। पहले चरण में सर्वेक्षण बिजनौर से गंगा सागर तक गंगा के मुख्य भाग और सिंधु नदी क्षेत्र में किया जाएगा। दूसरे चरण में यह ब्रह्मपुत्र, गंगा की सहायक नदियों, सुंदरबन और ओडिशा को समाहित करेगा।

गंगा नदी डॉल्फिन के अलावा सर्वेक्षण में सिंधु नदी डॉल्फिन और इरावदी नदी डॉल्फिन की स्थिति का आकलन किया जाएगा। इसके साथ ही उनके आवास की स्थिति खतरों और उनसे संबंधित संरक्षण-प्राथमिकता वाले जीवों का भी अध्ययन किया जाएगा। यह पहल भारत के नदी पारिस्थितिकी तंत्रों के लिए साक्ष्य-आधारित संरक्षण योजना और नीतिगत कार्रवाई का समर्थन करने के लिए ठोस वैज्ञानिक आंकड़े उत्पन्न करेगी।

पिछले राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण (2021-23) में भारत में लगभग 6,327 नदी डॉल्फ़िन की गणना कर उनकी संख्‍या दर्ज की गईं, जिनमें गंगा, यमुना, चंबल, गंडक, घाघरा, कोसी, महानंदा और ब्रह्मपुत्र नदियों में पाई जाने वाली गंगा नदी डॉल्फ़िन और ब्यास नदी में पाई जाने वाली सिंधु नदी डॉल्फ़िन की अपेक्षाकृत कम संख्‍या शामिल है। उत्तर प्रदेश और बिहार में इनकी संख्या सबसे अधिक थी, उसके बाद पश्चिम बंगाल और असम का स्थान था जो डॉल्फ़िन के दीर्घकालिक संरक्षण के लिए गंगा बेसिन के महत्व को दर्शाता है।

वर्तमान सर्वेक्षण में पिछली बार की तरह ही मानकीकृत पद्धति का पालन किया जा रहा है लेकिन इसमें नए क्षेत्रों और परिचालन क्षेत्रों को भी शामिल किया जाएगा जिसमें सुंदरबन और ओडिशा में पाई जाने वाली एक नई प्रजाति, इरावदी डॉल्फिन का अनुमान लगाना भी शामिल है। यह विस्तारित भौगोलिक कवरेज इस प्रजाति की जनसंख्या के अनुमानों को अद्यतन करने, खतरों और आवास की स्थितियों का आकलन करने और प्रोजेक्ट डॉल्फिन के तहत बेहतर संरक्षण योजना बनाने में सहायक होगी।

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने पश्चिम बंगाल के मालदा में 3,250 करोड़ रुपये से अधिक की लागत वाली कई रेल और सड़क बुनियादी परियोजनाओं का उद्घाटन किया और नींव रखी

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने पश्चिम बंगाल के मालदा में 3,250 करोड़ रुपये की लागत वाली कई रेल और सड़क बुनियादी परियोजनाओं का उद्घाटन किया और नींव रखी। इनका उद्देश्य पश्चिम बंगाल और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में संपर्क को मजबूत करना और विकास को गति देना है। इस अवसर पर सभा को संबोधित करते हुए श्री मोदी ने कहा कि आज मालदा से पश्चिम बंगाल की प्रगति को गति देने के अभियान को और गति मिली है।
उन्होंने बताया कि पश्चिम बंगाल के विकास से संबंधित कई परियोजनाओं का अभी-अभी उद्घाटन और लोकार्पण किया गया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल के लिए नई रेल सेवाएं शुरू की गई हैं जिनसे लोगों की यात्रा आसान होगी और व्यापार को भी बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने जोर दिया कि यहां स्थापित नई रेल रखरखाव सुविधाएं बंगाल के युवाओं के लिए नए अवसर प्रदान करेंगी।

श्री मोदी ने इस बात पर जोर देते हुए कहा कि बंगाल की पवित्र भूमि से भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है। उन्होंने बताया कि आज से भारत में वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें शुरू की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि यह नई वंदे भारत स्लीपर ट्रेन नागरिकों की लंबी यात्राओं को अधिक आरामदायक और शानदार बनाएगी।

उन्होंने इस बात पर बल दिया कि विकसित भारत में ट्रेनों का स्वरूप इस वंदे भारत स्लीपर ट्रेन में स्पष्ट रूप से झलकता है। प्रधानमंत्री ने कहा कि कुछ देर पहले उन्होंने मालदा स्टेशन पर कुछ यात्रियों से बातचीत की और सभी ने कहा कि इस ट्रेन में यात्रा करना एक असाधारण अनुभव था। उन्होंने याद दिलाया कि पहले लोग विदेशी ट्रेनों की तस्वीरें देखकर भारत में ऐसी ट्रेनों की कामना करते थे और आज उनका यह सपना साकार हो रहा है।

श्री मोदी ने आगे कहा कि हाल के दिनों में विदेशी पर्यटक भारतीय रेलवे में हो रहे क्रांतिकारी बदलावों के वीडियो बना रहे हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह वंदे भारत ट्रेन ‘मेड इन इंडिया’ है जो भारतीयों की मेहनत और समर्पण से बनी है। श्री मोदी ने कहा कि देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन मां काली की भूमि को मां कामाख्या की भूमि से जोड़ रही है। उन्होंने आगे कहा कि आने वाले समय में इस आधुनिक ट्रेन का पूरे देश में विस्‍तार होगा और उन्होंने इस आधुनिक स्लीपर ट्रेन के लिए बंगाल, असम और पूरे देश को बधाई दी।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा कि भारतीय रेलवे विद्युतीकरण और स्टेशनों के आधुनिकीकरण के साथ परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है। उन्होंने बताया कि आज पश्चिम बंगाल सहित देश भर में 150 से अधिक वंदे भारत ट्रेनें चल रही हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि इसके साथ ही आधुनिक और उच्च गति वाली ट्रेनों का एक संपूर्ण नेटवर्क विकसित किया जा रहा है, जिससे बंगाल के गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों को काफी लाभ मिल रहा है।

उन्होंने घोषणा की कि बंगाल को चार और आधुनिक अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनें मिली हैं – न्‍यू जलपाईगुड़ी-नागरकोइल अमृत भारत एक्सप्रेस, न्‍यू जलपाईगुड़ी-तिरुचिरापल्ली अमृत भारत एक्सप्रेस, अलीपुरद्वार-बेंगलुरु अमृत भारत एक्सप्रेस और अलीपुरद्वार-मुंबई अमृत भारत एक्सप्रेस। उन्होंने जोर दिया कि ये ट्रेनें बंगाल, विशेष रूप से उत्तरी बंगाल, और दक्षिण और पश्चिमी भारत के बीच संपर्क को मजबूत करेंगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि इन अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों से गंगासागर, दक्षिणेश्वर और कालीघाट जाने वाले तीर्थयात्रियों के साथ-साथ तमिलनाडु और महाराष्ट्र जाने वाले यात्रियों की यात्रा भी आसान हो जाएगी।

श्री मोदी ने जोर देते हुए कहा कि भारतीय रेलवे न केवल आधुनिक बन रहा है बल्कि आत्मनिर्भर भी हो रहा है। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत के रेल इंजन, कोच और मेट्रो कोच भारत की प्रौद्योगिकी के प्रतीक के रूप में उभर रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आज भारत अमेरिका और यूरोप से अधिक लोकोमोटिव का निर्माण कर रहा है और कई देशों को यात्री ट्रेन और मेट्रो ट्रेन कोच निर्यात करता है जिससे देश की अर्थव्यवस्था को काफी लाभ होता है और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होते हैं। श्री मोदी ने अपने संबोधन का समापन इस बात पर जोर देते हुए किया कि भारत को जोड़ना एक प्राथमिकता है और दूरियों को कम करना एक मिशन है जो आज के कार्यक्रम में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होता है।

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल श्री सी.वी. आनंद बोस, केंद्रीय मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव, श्री शांतनु ठाकुर, श्री सुकांत मजूमदार सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति इस कार्यक्रम में उपस्थित थे।

पृष्ठभूमि

प्रधानमंत्री ने मालदा टाउन रेलवे स्टेशन का दौरा किया जहां उन्होंने हावड़ा और गुवाहाटी (कामाख्या) के बीच चलने वाली भारत की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। उन्होंने गुवाहाटी (कामाख्या)-हावड़ा वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को वर्चुअल रूप से भी हरी झंडी दिखाई।

आधुनिक भारत की बढ़ती परिवहन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विकसित की गई, पूरी तरह से वातानुकूलित वंदे भारत स्लीपर ट्रेन यात्रियों को किफायती किराए पर हवाई यात्रा जैसा अनुभव प्रदान करेगी। यह लंबी दूरी की यात्राओं को तेज, सुरक्षित और अधिक सुविधाजनक बनाएगी। हावड़ा-गुवाहाटी (कामाख्या) मार्ग पर यात्रा के समय को लगभग 2.5 घंटे तक कम करके, यह ट्रेन धार्मिक यात्रा और पर्यटन को भी काफी बढ़ावा देगी।

प्रधानमंत्री ने पश्चिम बंगाल में चार प्रमुख रेलवे परियोजनाओं की नींव रखी जिनमें बलुरघाट और हिली के बीच नई रेल लाइन, न्यू जलपाईगुड़ी में अगली पीढ़ी की माल ढुलाई रखरखाव सुविधाएं, सिलीगुड़ी लोको शेड का उन्नयन और जलपाईगुड़ी जिले में वंदे भारत ट्रेन रखरखाव सुविधाओं का आधुनिकीकरण शामिल हैं। इन परियोजनाओं से यात्री और माल ढुलाई परिचालन मजबूत होगा, उत्तरी बंगाल में रसद दक्षता में सुधार होगा और क्षेत्र में रोजगार के अवसर पैदा होंगे।

प्रधानमंत्री ने न्यू कूचबिहार-बमनहाट और न्यू कूचबिहार-बॉक्सिरहाट के बीच रेल लाइनों के विद्युतीकरण को राष्ट्र को समर्पित किया, जिससे तेज, स्वच्छ और अधिक ऊर्जा-कुशल ट्रेन संचालन संभव हो सकेगा।

प्रधानमंत्री ने वर्चुअल माध्यम से चार नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया – न्यू जलपाईगुड़ी-नागरकोइल अमृत भारत एक्सप्रेस; न्यू जलपाईगुड़ी-तिरुचिरापल्ली अमृत भारत एक्सप्रेस; अलीपुरद्वार-एसएमवीटी बेंगलुरु अमृत भारत एक्सप्रेस; अलीपुरद्वार-मुंबई (पनवेल) अमृत भारत एक्सप्रेस। इससे किफायती और विश्वसनीय लंबी दूरी के रेल संपर्क में सुधार होगा। ये सेवाएं आम नागरिकों, छात्रों, प्रवासी श्रमिकों और व्यापारियों की आवागमन संबंधी जरूरतों को पूरा करेंगी और साथ ही अंतर-राज्यीय आर्थिक और सामाजिक संबंधों को मजबूत करेंगी।

प्रधानमंत्री ने एलएचबी कोचों से सुसज्जित दो नई ट्रेन सेवाओं – राधिकापुर-एसएमवीटी बेंगलुरु एक्सप्रेस और बालुरघाट-एसएमवीटी बेंगलुरु एक्सप्रेस – को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। ये ट्रेनें क्षेत्र के युवाओं, छात्रों और आईटी पेशेवरों को बेंगलुरु जैसे प्रमुख आईटी और रोजगार केंद्रों तक सीधी, सुरक्षित और आरामदायक यात्रा सुविधा प्रदान करेंगी।

प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय राजमार्ग-31डी के धूपगुड़ी-फलाकाटा खंड के पुनर्निर्माण और चार लेन के निर्माण के लिए नींव रखी। यह एक महत्वपूर्ण सड़क परियोजना है जो क्षेत्रीय सड़क संपर्क में सुधार लाएगी और उत्तरी बंगाल में यात्रियों और माल की सुगम आवाजाही को सुविधाजनक बनाएगी।

ये परियोजनाएं आधुनिक बुनियादी ढांचे के निर्माण और बेहतर संपर्क में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी, जिससे पूर्वी और उत्तर-पूर्वी क्षेत्र राष्ट्र के प्रमुख विकास इंजन के रूप में मजबूत होंगे।

 

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भारतीय नौसेना का पहला प्रशिक्षण स्क्वाड्रन सिंगापुर के चांगी नौसेना बेस पर पहुंचा

नई दिल्ली – भारतीय नौसेना का पहला प्रशिक्षण स्क्वाड्रन (1टीएस), जिसमें आईएनएस तीरआईएनएस शार्दुलआईएनएस सुजाता और भारतीय तटरक्षक जहाज सारथी शामिल हैं, 15 जनवरी 2026 को चांगी नेवल बेस, सिंगापुर पहुंचा। स्क्वाड्रन दक्षिण पूर्व हिंद महासागर क्षेत्र (आईओआर) में प्रशिक्षण तैनाती पर है।

यह तैनाती इसलिए भी महत्वपूर्ण हो जाती है क्योंकि वर्ष 2026 को ‘दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्रों के संघ (आसियान) – भारत समुद्री सहयोग वर्ष 2026’ के रूप में मनाया जा रहा है।

इस यात्रा के दौरान, भारतीय नौसेना और सिंगापुर गणराज्य की नौसेना (आरएसएन) के कर्मी क्षमता बढ़ाने और समुद्री सहयोग बढ़ाने के उद्देश्य से कई बंदरगाह से संबंधित कार्यों और पेशेवर बातचीत में शामिल होंगे। दोनों नौसेनाओं के प्रशिक्षुओं के बीच व्यवस्थित प्रशिक्षण का आदान-प्रदान, संयुक्त योग सत्र और खेल आयोजनों की एक भी योजना बनाई गई है।

सांस्कृतिक बातचीत में सिंगापुर में प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर भारतीय नौसेना बैंड द्वारा प्रदर्शन किया जाएगा। ये जहाज स्कूली बच्चों के प्रवास के दौरान उनके दौरे के लिए खुले रहेंगे।

सिंगापुर में भारत के उच्चायुक्त डॉशिल्पक अंबुले ने आगमन पर 1टीएस के प्रशिक्षुओं के साथ बातचीत की। वरिष्ठ अधिकारी 1टीएस और कमांडिंग अधिकारियों ने समुद्री प्रशिक्षण और सिद्धांत कमान (एमटीडीसी) के कमांडर से भी मुलाकात की। इंटरनेशनल फ्यूजन सेंटर के अंतर्राष्ट्रीय संपर्क अधिकारियों की एक टीम द्वारा यात्रा के दौरान पेशेवर अनुभव साझा किए गए।

यात्रा के दूसरे दिन कम्युनिटी से और रिपब्लिक ऑफ़ सिंगापुर नेवी के साथ बातचीत हुई। इन्फॉर्मेशन फ़्यूज़न सेंटर और आरएसएन  संग्रहालय  का भ्रमण, मैत्रीपूर्ण खेल कार्यक्रम, और श्री नारायण ओल्ड एज एंड नर्सिंग होम में एक आउटरीच कार्यक्रम मुख्य आकर्षण थे।

यह यात्रा भारत की एक्ट ईस्ट नीति को आगे बढ़ाने के लिए दक्षिण पूर्व एशियाई देशों के साथ मजबूत समुद्री साझेदारी और निरंतर जुड़ाव को मजबूत करती है। यह दोनों नौसेनाओं के बीच समुद्री सुरक्षा सहयोग को भी बढ़ाता है, इंडियन ओशियन नेवल सिम्पोजियम (आईओएनएस) के लिए भारत के नेतृत्व और प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करता है, साथ ही साथ यह महासागर (क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति) के दृष्टिकोण के अनुरूप समुद्री सहकारी जुड़ाव को मजबूत करने में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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प्रधानमंत्री ने संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में राष्ट्रमंडल देशों के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन (सीएसपीओसी) में अपने संबोधन की झलकियाँ साझा कीं

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज नई दिल्ली में संसद भवन परिसर के संविधान सदन के केंद्रीय कक्ष में राष्ट्रमंडल देशों के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन (सीएसपीओसी) में अपने संबोधन की झलकियाँ साझा कीं।

श्री मोदी ने X पर अलग-अलग पोस्ट में  कहा:

“नई दिल्ली में राष्ट्रमंडल देशों के अध्यक्षों और पीठासीन अधिकारियों के 28वें सम्मेलन में भारत की लोकतांत्रिक परंपराओं को वैश्विक मंच पर साझा करना एक अविस्मरणीय अनुभव रहा।”

“Democratic Spirit हमारी रगों में, हमारे मन में और हमारे संस्कारों में है और ये संस्कार हमें हमारे लोकतंत्र से मिले हैं।”

“आज जब दुनिया अभूतपूर्व परिवर्तन के दौर से गुजर रही है, तब भारत हर प्लेटफॉर्म पर ग्लोबल साउथ के हितों को पूरी मजबूती से उठा रहा है।”

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तिरुवल्लुवर दिवस पर प्रधानमंत्री ने तिरुवल्लुवर को श्रद्धांजलि दी

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री नरेन्‍द्र मोदी ने तिरुवल्लुवर दिवस के अवसर पर बहुमुखी प्रतिभा के धनी तिरुवल्लुवर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनके कालजयी कार्य और आदर्श पीढ़ियों से अनगिनत लोगों को प्रेरणा देते हैं।

श्री मोदी ने कहा कि तिरुवल्लुवर ने सद्भाव और करुणा पर आधारित समाज की परिकल्पना की थी और ये मूल्य आज भी अत्यंत प्रासंगिक हैं। उन्होंने कहा कि तिरुवल्लुवर तमिल संस्कृति के सर्वोत्तम पहलुओं एवं ज्ञान तथा एकता के प्रतीक हैं। प्रधानमंत्री ने नागरिकों से कवि रूपी संत की गहन शिक्षाओं से जुड़ने का आग्रह किया।

एक्स पर अलग-अलग पोस्ट में श्री मोदी ने कहा:

आज तिरुवल्लुवर दिवस पर, हम बहुमुखी प्रतिभा के धनी तिरुवल्लुवर को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं, उनके कार्यों और आदर्शों से अनगिनत लोग प्रेरित होते हैं। वे एक सद्भाव और करुणामय समाज में विश्वास रखते थे। वे तमिल संस्कृति के सर्वोत्तम स्वरूप का प्रतीक हैं। मैं आप सभी से तिरुक्कुरल पढ़ने का आग्रह करता हूँ, जो महान तिरुवल्लुवर के असाधारण ज्ञान की झलक प्रस्तुत करता है।

 

“திருவள்ளுவர் தினமான இன்று, ஏராளமான மக்களுக்கு உத்வேகம் அளிக்கும் படைப்புகளையும் சிந்தனைகளையும் கொண்ட பன்முக ஆளுமை திருவள்ளுவருக்கு மரியாதை செலுத்துகிறேன். நல்லிணக்கமும் கருணையும் நிறைந்த ஒரு சமூகத்தின் மீது அவர் நம்பிக்கை வைத்தார். தமிழ்க் கலாச்சாரத்தின் சிறந்த அம்சங்களுக்கு அவர் எடுத்துக்காட்டாகத் திகழ்கிறார். திருவள்ளுவப் பெருந்தகையின் சிறப்பான அறிவாற்றலை வெளிப்படுத்தும் திருக்குறளை நீங்கள் அனைவரும் படிக்க வேண்டும் என்று நான் கேட்டுக்கொள்கிறேன்.”

 

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वाइब्रेंट गुजरात क्षेत्रीय प्रदर्शनी-2026 में स्वास्थ्य मंडप का सशक्त जनभागीदारी और सकारात्मक प्रभाव के साथ सफल समापन

नई दिल्ली – गुजरात के राजकोट में मारवाड़ी विश्वविद्यालय में 11 से 15 जनवरी 2026 तक आयोजित वाइब्रेंट गुजरात रीजनल एग्जिबिशन (वीजीआरई) 2026 का समापन भारत और विदेश से आए आगंतुकों की उत्साहपूर्ण भागीदारी के साथ हुआ। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय (एमओएचएफडब्ल्यू) ने हॉल संख्या 6 में एक व्यापक स्वास्थ्य पवेलियन के माध्‍यम से प्रदर्शनी में अपनी महत्वपूर्ण उपस्थिति दर्ज कराई।

लगभग 700 वर्ग मीटर में बनाया गया यह स्वास्थ्य मंडप “स्वस्थ भारतश्रेष्ठ भारत” की थीम पर आधारित है और इसमें भारत सरकार के जन स्वास्थ्य प्रणालियों को मजबूत करने के जन-केंद्रित दृष्टिकोण को प्रदर्शित किया गया। इस मंडप का उद्घाटन 11 जनवरी 2026 को स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों, राज्य सरकार के अधिकारियों और जिला स्वास्थ्य एजेंसियों के अधिकारियों द्वारा संयुक्त रूप से किया गया।

इस पवेलियन में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के 12 कार्यक्रम विभागों के 26 स्टॉल लगाए गए थे जिनमें राज्य सरकार और जिला स्वास्थ्य एजेंसियों की सक्रिय भागीदारी रही। पांच दिवसीय प्रदर्शनी के दौरान, पवेलियन ने आम जनता के लिए व्यापक स्तर पर निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाएं, जांच, परामर्श और जागरूकता गतिविधियां प्रदान कीं। इनमें एचआईवी और मानसिक स्वास्थ्य पर परामर्श; आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी-पीएमजेएवाई), फ्लोरोसिस की रोकथाम, ईट राइट इंडिया, वन हेल्थ और भारत में स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी मूल्यांकन पर जागरूकता सत्र के साथ ही रक्तचाप, रक्त शर्करा, रक्त समूह, मुख कैंसर, नेत्र और कान के स्वास्थ्य की जांच भी शामिल थी। वृद्धावस्था संबंधी आकलन और बुनियादी वृद्धावस्था पुनर्वास से संबंधित सेवाएं भी प्रदान की गईं।

नैदानिक ​​और सूचनात्मक सेवाओं के अलावा, इस पवेलियन में निवारक स्वास्थ्य देखभाल और सामुदायिक भागीदारी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से कई आकर्षक पहुंच गतिविधियां आयोजित की गईं। इनमें गुजरात सरकार की तपेदिक और टीकाकरण टीमों द्वारा नुक्कड़ नाटक प्रदर्शन, नजफगढ़, नई दिल्ली स्थित ग्रामीण स्वास्थ्य प्रशिक्षण केंद्र द्वारा लाइव सीपीआर प्रदर्शन और पुरस्कार वितरण के साथ स्वास्थ्य संबंधी प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता शामिल थी। आगंतुकों, विशेष रूप से बच्चों को आकर्षित करने और स्वस्थ मनोरंजन गतिविधियों को प्रोत्साहित करने के लिए पारंपरिक, स्क्रीन-मुक्त खेलों के लिए एक विशेष स्थल भी बनाया गया था।

स्वास्थ्य मंडप को विदेशी नागरिकों सहित आगंतुकों से जबरदस्त और उत्साहजनक प्रतिक्रिया मिली और यह वाइब्रेंट गुजरात क्षेत्रीय प्रदर्शनी 2026 के प्रमुख आकर्षणों में से एक बनकर उभरा। मजबूत जनभागीदारी ने सरकारी स्वास्थ्य पहलों के प्रति बढ़ती जागरूकता और विश्वास को दर्शाया और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के प्रमुख कार्यक्रमों की व्यापक पहुंच और प्रभाव को उजागर किया।

केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय सतत नवाचार, राज्यों और हितधारकों के साथ सहयोगात्मक प्रयासों और देश भर में समावेशी, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा पहलों के निरंतर कार्यान्वयन के माध्यम से स्वस्थ भारतश्रेष्ठ भारत” की परिकल्पना को आगे बढ़ाने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।

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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने तिरुवल्लुवर दिवस के अवसर पर महान संत तिरुवल्लुवर जी को श्रद्धांजलि अर्पित की

नई दिल्ली – X पर पोस्ट में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता श्री अमित शाह ने कहा, “तिरुवल्लुवर दिवस पर महान संत को अपनी भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करता हूं। तिरुवल्लुवर जी का जीवन और कार्य हमारी सभ्यता के सर्वोच्च गुणों का प्रतीक रहे हैं और उन्होंने पवित्र जीवन और सद्भावपूर्ण समाज निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया। उनकी विरासत महानता की ओर देश की यात्रा में हम सभी का मार्गदर्शन करती रहेगी ।”

 

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सीएसआईआर एकीकृत कौशल पहल: भारत के कुशल कार्यबल को सशक्त बनाना

नई दिल्ली – सीएसआईआर एकीकृत कौशल पहल, भारत के प्रमुख अनुसंधान एवं विकास संगठन, वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) द्वारा कार्यान्वित एक प्रमुख राष्ट्रीय कार्यक्रम है, जो ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘स्किल इंडिया’ के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के साथ निकटता से जुड़ा हुआ है। इसका उद्देश्य एक ओर वैज्ञानिक अनुसंधान और दूसरी ओर उद्योग की आवश्यकताओं तथा रोजगार योग्य कौशलों के बीच के अंतर को कम करना है। इस कार्यक्रम का प्राथमिक उद्देश्य सीएसआईआर के विशाल अनुसंधान अवसंरचना, व्यापक नेटवर्क और देश भर में फैले गहन वैज्ञानिक विशेषज्ञता का लाभ उठाते हुए कौशल विकास को विज्ञान और प्रौद्योगिकी के साथ सहजता से एकीकृत करना है। यह कार्यक्रम विद्यार्थियों, युवा शोधकर्ताओं, तकनीकी कर्मचारियों, कामकाजी पेशेवरों से लेकर स्कूल छोड़ने वाले विद्यार्थियों, आईटीआई डिप्लोमा धारकों, किसानों और ग्रामीण समुदायों तक, लाभार्थियों के विविध समूह को समावेशी पहुंच प्रदान करता है। इस पहल का प्राथमिक महत्त्व कौशल प्रशिक्षण को वास्तविक दुनिया की औद्योगिक, सामाजिक और उद्यमशीलता की मांगों के साथ संरेखित करने पर है।

प्रशिक्षण, इंटर्नशिप, प्रमाणन पाठ्यक्रम और व्यावहारिक प्रयोगशाला अनुभव से युक्त संरचित अल्पकालिक और दीर्घकालिक कौशल विकास मॉड्यूल के माध्यम से, यह पहल प्रतिभागियों को उद्योग की आवश्यकताओं से जुड़ी उन्नत और तेजी से विकसित हो रही प्रौद्योगिकियों में व्यापक कौशल विकास प्रदान करती है। यह कार्यक्रम राष्ट्रीय कौशल विकास मिशन (एनएसडीएम) द्वारा पहचाने गए 36 प्रमुख क्षेत्रीय कौशलों में से 18 को सम्मिलित करता है, जिनमें एयरोस्पेस और विमानन, कृषि, ऑटोमोटिव, निर्माण, पूंजीगत वस्तुएं, इलेक्ट्रॉनिक्स, खाद्य प्रसंस्करण, हरित रोजगार, हाइड्रोकार्बन, स्वास्थ्य सेवा, हस्तशिल्प और कालीन, लोहा और इस्पात, रबर, रसायन और पेट्रोकेमिकल्स, चमड़ा, जीवन विज्ञान, प्रबंधन और उद्यमिता, खनन, वस्त्र और आईटी एवं आईटीईएस प्रौद्योगिकियां शामिल हैं। इस पहल का मुख्य लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि शिक्षार्थी न केवल मजबूत सैद्धांतिक ज्ञान प्राप्त करें, बल्कि रोजगार, उद्यमिता और समग्र कैरियर विकास में सहायक व्यावहारिक दक्षता भी विकसित करें।

सीएसआईआर की एकीकृत कौशल पहल के चरण – I व II के दौरान, ग्रामीण नागरिकों और महिलाओं के लिए विशेष लक्षित पहलों सहित 5200 से अधिक कौशल-आधारित प्रशिक्षणों के माध्यम से 1.90 लाख से अधिक व्यक्तियों को प्रशिक्षित किया है। इस पहल के तीसरे चरण का आधिकारिक शुभारंभ जून 2025 में सीएसआईआर की महानिदेशक और डीएसआईआर की सचिव डॉ. एन. कलैसेल्वी द्वारा किया गया था, जिसमें उन्नत कौशल विकास, शिक्षा जगत और उद्योग के बीच की खाई को पाटने और विकास एवं वृद्धि को गति देने पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित किया गया है। इस पहल के तीसरे चरण के पहले वर्ष में ही देशभर में स्थित सीएसआईआर की 37 प्रयोगशालाओं में 425 से अधिक प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करके 14,000 से अधिक प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षित किया जा चुका है।

सीएसआईआर-मानव संसाधन विकास केंद्र (एचआरडीसी), गाजियाबाद (उत्तर प्रदेश), जो सीएसआईआर की केंद्रीकृत प्रशिक्षण इकाई और सीएसआईआर एकीकृत कौशल पहल का नोडल कार्यालय है, इस पहल के प्रदर्शन की समय-समय पर निगरानी, ​​समन्वय और मूल्यांकन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। गुणवत्ता, प्रासंगिकता और प्रभाव पर विशेष जोर देते हुए, यह पहल एक कुशल, ज्ञानवान और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए समर्पित है।

 

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गांवों का संरक्षण एक महान सांस्कृतिक जागरण है – डॉ. सच्चिदानंद जोशी

नई दिल्ली – मकर संक्रांति के शुभ अवसर पर, जब सूर्य देव धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश करते हैं, और देशभर में यह त्योहार मकर संक्रांति, उत्तरायण, बिहू, पोंगल और खिचड़ी जैसे विभिन्न रूपों में उल्लासपूर्वक मनाया जाता है, उसी अवसर पर इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईजीएनसीए) के राष्ट्रीय सांस्कृतिक मानचित्रण मिशन (एनएमसीएम) प्रभाग ने अपना स्थापना दिवस एक गरिमामय एवं सांस्कृतिक रूप से समृद्ध कार्यक्रम के साथ मनाया। यह कार्यक्रम 14 जनवरी, 2026 को नई दिल्ली स्थित आईजीएनसीए के समवेत सभागार में आयोजित किया गया था।

इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री राजेश कुमार सिंह थे, जबकि विशिष्ट अतिथि भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय के उप सचिव डॉ. शाह फैसल थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता आईजीएनसीए के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने की और स्वागत भाषण कला निधि प्रभाग के प्रमुख और एनएमसीएम के प्रभारी प्रो. (डॉ.) आर.सी. गौर ने दिया। एनएमसीएम के निदेशक डॉ. मयंक शेखर भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

अपने अध्यक्षीय भाषण में डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि मकर संक्रांति का त्योहार पूरे देश में अलग-अलग नामों से मनाया जाता है। कुछ स्थानों पर इसे बिहू, कुछ स्थानों पर पोंगल, कुछ स्थानों पर संक्रांति और अन्य स्थानों पर उत्तरायण कहा जाता है। अलग-अलग तरीकों से मनाए जाने के बावजूद, पूरा देश एक ही समय पर इस त्योहार को मनाता है। उन्होंने सुझाव दिया कि विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों में इस त्योहार को मनाने की परंपराओं, जिनमें खान-पान, वस्त्र, रीति-रिवाज और परंपराएं शामिल हैं, का दस्तावेजीकरण किया जा सकता है। उन्होंने राष्ट्रीय सांस्कृतिक मानचित्रण मिशन (एनएसआई) से आग्रह किया कि वे अगले वर्ष अपने वार्षिक दिवस के अवसर पर भारत भर में मकर संक्रांति कैसे मनाई जाती है, इस पर एक प्रकाशन प्रकाशित करें।

उन्होंने एनएमसीएम की चुनौतियों और उपलब्धियों के बारे में बात करते हुए कहा, “जब हमें यह कार्य सौंपा गया था, तब यह अपने आप में एक बहुत बड़ी चुनौती थी। 650,000 गांवों का दस्तावेजीकरण करना आसान काम नहीं है। लेकिन एनएमसीएम ने जिस तरह से अपना काम शुरू किया, यहां सभी की कड़ी मेहनत और विभिन्न एजेंसियों से मिले सहयोग के कारण आज हम 623,000 गांवों का दस्तावेजीकरण कर चुके हैं।” उन्होंने आगे कहा कि बढ़ते शहरीकरण के बीच, हम अक्सर अपने गांवों को याद करते हैं, जहां हमारी परंपराएं और सांस्कृतिक विरासत आज भी मौजूद हैं। अगर हम इन गांवों को संरक्षित करते हैं, तो निस्संदेह हम इस दौर में एक महत्वपूर्ण सांस्कृतिक जागृति में योगदान देंगे।

मुख्य अतिथि श्री राजेश सिंह ने कहा कि गांवों का सांस्कृतिक मानचित्रण सरकार की एक बहुत ही महत्वाकांक्षी परियोजना है और यह अत्यंत आवश्यक भी है। उन्होंने कहा कि किसी गांव को देखने और उसकी विरासत को समझने की इच्छा रखने वाले व्यक्ति के लिए एक ही स्थान पर प्रामाणिक जानकारी उपलब्ध होने से बढ़कर कोई सुविधा नहीं हो सकती। जब हम अपनी विरासत के बारे में जानेंगे तभी हम उस पर चर्चा कर सकेंगे और उस पर गर्व कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि संविधान में पंचायतों के लिए 29 कार्य निर्धारित हैं, जिनमें से एक सांस्कृतिक गतिविधियां भी हैं। इस पहलू को अब तक नजरअंदाज किया गया था। इसी बात को ध्यान में रखते हुए पंचायती राज मंत्रालय ने ‘पंचायत विरासत’ कार्यक्रम शुरू किया है।

विशिष्ट अतिथि शाह फैसल ने इस बात पर जोर दिया कि भारतीय संस्कृति का सार पीढ़ियों से लिखित संहिताओं के माध्यम से नहीं, बल्कि मौखिक परंपरा और ऐतिहासिक कथाओं के माध्यम से हस्तांतरित होता रहा है। इसलिए, इस जीवंत संस्कृति का दस्तावेजीकरण करना कई चुनौतियों से भरा है। मध्य पूर्व या यूरोप जैसी अन्य सभ्यताओं में लिखित ग्रंथों का अत्यधिक महत्व रहा है, जिससे परिवर्तन की संभावनाएं सीमित हो गई हैं। इसके विपरीत, भारतीय संस्कृति लचीली और निरंतर विकसित होती रही है। उन्होंने कहा कि यदि दस्तावेजीकरण में त्रुटियां हों, अधूरी जानकारी हो, या प्रमाणीकरण में चूक हो, तो यह केवल एक तकनीकी त्रुटि नहीं रह जाती, बल्कि देश की सांस्कृतिक विरासत के साथ अन्याय बन जाती है। इसलिए, इस संपूर्ण कार्य में प्रामाणिकता और अखंडता सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।

अतिथियों का स्वागत करते हुए प्रोफेसर रमेश गौर ने कहा कि भारत त्योहारों की भूमि है। जब सूर्य उत्तर दिशा की ओर बढ़ता है (उत्तरायण), तब मकर संक्रांति, बिहू और पोंगल जैसे त्योहार पूरे देश में मनाए जाते हैं। राष्ट्रीय सांस्कृतिक मानचित्रण मिशन (एनएमसीएम) का शुभारंभ भी 2021 में मकर संक्रांति के अवसर पर किया गया था। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय ने एनएमसीएम की जिम्मेदारी इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र (आईएनजीसीए) को नोडल एजेंसी के रूप में सौंपी थी। इसके बाद डॉ. मयंक शेखर ने विभाग की वार्षिक रिपोर्ट प्रस्तुत की और उसकी उपलब्धियों पर प्रकाश डाला। उन्होंने ‘मेरा गांव मेरी धरोहर’ पोर्टल के बारे में भी कई महत्वपूर्ण जानकारी साझा की।

कार्यक्रम का शुभारंभ दक्षिण भारतीय पारंपरिक वाद्य संगीत ‘पंचवाद्यम’ की प्रभावशाली प्रस्तुति से हुआ, जिसने एक शुभ वातावरण का निर्माण किया। इसके बाद, एनएमसीएम ब्रोशर और इसकी अर्धवार्षिक पत्रिका ‘माटी’ का दूसरा अंक जारी किया गया, जिसे सांस्कृतिक अनुसंधान और जनसंपर्क के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण पहल बताया गया। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में, आओ नागा जनजाति द्वारा पारंपरिक नृत्य और संगीत की मनमोहक प्रस्तुति ने दर्शकों को पूर्वोत्तर भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराया। इसके बाद, प्रज्ञा आर्ट्स की प्रस्तुति और श्री नीतीश कुमार के संगीत कार्यक्रम ने समारोह को और भी जीवंत बना दिया।

कार्यक्रम के समापन सत्र में रंगोली प्रतियोगिता के विजेताओं को पुरस्कार दिए गए और सभी कलाकारों को सम्मानित किया गया। कार्यक्रम का समापन धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। कार्यक्रम के बाद, सभी अतिथियों और आगंतुकों ने मकर संक्रांति के विशेष भोज, चपटे चावल और दही (चूड़ा-दही) का आनंद लिया।

एनएमसीएम का यह स्थापना दिवस न केवल मकर संक्रांति की सांस्कृतिक भावना से जुड़ा हुआ था, बल्कि भारत की विविध लोक, जनजातीय और शास्त्रीय परंपराओं को एक ही मंच पर एकत्र कर राष्ट्रीय सांस्कृतिक एकता का सशक्त संदेश भी देता है।

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वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच ऑपरेशन सिंदूर एक संतुलित सैन्य प्रतिक्रिया थी – रक्षा मंत्री

 यह भारत के साहस, शक्ति, संयम एवं राष्ट्रीय चरित्र का प्रतीक है: सेना दिवस पर जयपुर में रक्षा मंत्री

नई दिल्ली – “ऑपरेशन सिंदूर दुनिया भर में व्याप्त अनिश्चितताओं के बीच एक संतुलित सैन्य प्रतिक्रिया के रूप में उभरा, और इसे इतिहास में भारत के साहस, शक्ति, संयम और राष्ट्रीय चरित्र के प्रतीक के रूप में याद किया जाएगा,” रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 15 जनवरी, 2026 को राजस्थान के जयपुर में 78वें भारतीय सेना दिवस समारोह के दौरान यह बात कही। सैनिकों के अदम्य साहस, अटूट समर्पण और युद्धक्षेत्र की बदलती परिस्थितियों के अनुरूप खुद को ढालने के उनके तरीके की सराहना करते हुए, रक्षा मंत्री ने कहा कि आतंकवादियों के खिलाफ कार्रवाई सावधानीपूर्वक मूल्यांकन और मानवीय मूल्यों का उचित सम्मान करते हुए की गई।

 

श्री राजनाथ सिंह ने जोर देते हुए कहा कि आतंकवादियों ने कभी उस बहादुरी और तत्परता की कल्पना भी नहीं की होगी जिसके साथ भारतीय सशस्त्र बलों ने उनके खिलाफ कार्रवाई की। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि यह सैनिकों की वीरता ही थी जिसने दुश्मन को किसी भी प्रकार की शरारत करने से रोका। उन्होंने कहा, “स्थिति कठिन थी और दबाव भी था, लेकिन हमारे सैनिकों ने जिस संयम, एकता और धैर्य के साथ इस ऑपरेशन को अंजाम दिया, वह अभूतपूर्व और प्रशंसनीय था।” उन्होंने आगे कहा कि ऑपरेशन सिंदूर अभी पूरी तरह से समाप्त नहीं हुआ है, और शांति के लिए भारत के प्रयास तब तक जारी रहेंगे जब तक कि आतंकवादी विचारधारा का जड़ से सफाया नहीं हो जाता।

रक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि ऑपरेशन के दौरान स्वदेशी हथियारों के उपयोग ने इस तथ्य को रेखांकित किया है कि आत्मनिर्भरता केवल गर्व का विषय नहीं बल्कि एक आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि देश आत्मनिर्भरता की राह पर एक लंबी दूरी तय कर चुका है, जिसमें सशस्त्र बल इस प्रयास का नेतृत्व कर रहे हैं और महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं। उन्होंने आने वाले समय में ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए इन प्रयासों को और तेज करने पर जोर दिया। इसके साथ ही, उन्होंने युद्ध के बदलते आयामों को देखते हुए सेना के तीनों अंगों के बीच आपसी समन्वय  को बढ़ाने के महत्व को भी रेखांकित किया।

श्री राजनाथ सिंह ने इस बात पर प्रकाश डाला कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार सशस्त्र बलों को भारत की जरूरतों के अनुरूप स्वदेशी, अत्याधुनिक हथियारों और प्लेटफार्मों से लैस कर रही है। उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भरता की दिशा में किए जा रहे निरंतर प्रयास रंग ला रहे हैं, क्योंकि घरेलू रक्षा उत्पादन, जो 2014 में केवल 46,000 करोड़ रुपये था, आज बढ़कर 1.51 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। उन्होंने आगे कहा कि रक्षा निर्यात, जो 2014 में 1,000 करोड़ रुपये से भी कम था, अब आसमान छूते हुए रिकॉर्ड लगभग 24,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है।

भारतीय सेना द्वारा एक सैनिक को शारीरिक और मानसिक रूप से फिट होने के साथ-साथ तकनीकी रूप से भी अपडेट होना चाहिए’ के मंत्र को अपनाने की सराहना करते हुए, रक्षा मंत्री ने नवीनतम तकनीकी प्रगति के कारण उभरती चुनौतियों से निपटने के लिए सशस्त्र बलों को निरंतर मजबूत करने के सरकार के संकल्प को दोहराया। उन्होंने कहा, “दुनिया एक ऐसे दौर से गुजर रही है जहाँ सभी स्थापित धारणाओं को चुनौती दी जा रही है। ऐसी स्थिति में, सशस्त्र बलों को सशक्त बनाना और उनकी आधुनिकता व आत्मनिर्भरता सुनिश्चित करना पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण है। हमने हमेशा राष्ट्रीय सुरक्षा और अपने सैनिकों की क्षमताओं को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित किया है।”

श्री राजनाथ सिंह ने भारतीय सेना को अदम्य साहस, अटूट समर्पण और अद्वितीय बलिदान की मशाल और विविधता में एकता का एक शानदार उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि देश भर के अलग-अलग संस्कृतियों और पृष्ठभूमियों के सैनिक कम उम्र में ही एक साझा लक्ष्य के लिए एकजुट हो जाते हैं। उन्होंने कहा, “भारतीय सेना ने राष्ट्र की सामाजिक एकता को मजबूत करने में अमूल्य योगदान दिया है। यह केवल एक सैन्य बल नहीं बल्कि राष्ट्र निर्माण का एक प्रमुख स्तंभ है। दुनिया भर के अधिकांश सैन्य बल एक अलग क्षेत्र  के रूप में कार्य करते हैं, लेकिन भारत में सेना नागरिकों के साथ मिलकर काम करती है। जनता का अटूट विश्वास ही सेना की सबसे बड़ी ताकत है। विश्वास का यही बंधन राष्ट्रीय सुरक्षा ढांचे की नींव है।”

रक्षा मंत्री ने संयुक्त राष्ट्र शांति मिशनों में भारतीय सैनिकों के अमूल्य योगदान पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि हमारे सैनिकों ने न केवल शांति बनाए रखी है, बल्कि विभिन्न देशों के नागरिकों को चिकित्सा सहायता, बुनियादी ढांचे का विकास और मानवीय सहायता भी प्रदान की है। उन्होंने अपनी बात समाप्त करते हुए कहा, “हमारी सेना दुनिया के लिए शांति के दूत के रूप में उभरी है। इसने ‘वसुधैव कुटुंबकम’ के भारत के दर्शन को और भी मजबूत किया है।”

श्री राजनाथ सिंह ने वेटरन्स के कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया, जिन्होंने मातृभूमि की सेवा में अपने जीवन के अमूल्य वर्ष समर्पित किए हैं। सशस्त्र बलों में महिलाओं की बढ़ती भूमिका पर उन्होंने कहा: “पहले, महिलाओं को सशस्त्र बलों में सहायक भूमिकाओं में भर्ती किया जाता था, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी ने उनकी भूमिका का विस्तार करने की परिकल्पना की। अब, सेना में महिलाओं को स्थायी कमीशन  दिया जा रहा है, जबकि राष्ट्रीय रक्षा अकादमी ने भी महिलाओं के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं। हमारा प्रयास सशस्त्र बलों में महिलाओं को उनके पुरुष समकक्षों के समान निरंतर समान अवसर प्रदान करना है।”

रक्षा मंत्री ने युवाओं से सशस्त्र बलों में शामिल होने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की अपील की। उन्होंने कहा, “सेना में शामिल होने के लिए केवल शारीरिक शक्ति ही पर्याप्त नहीं है। मानसिक क्षमता, नैतिक साहस, निर्णय लेने की क्षमता और नेतृत्व जैसे गुणों की भी आवश्यकता होती है। युवाओं को ये गुण विकसित करने चाहिए।” श्री राजनाथ सिंह ने आगे कहा कि यह जनता का कर्तव्य है कि वे सैनिकों के परिवारों का ख्याल रखें; राष्ट्र की एकता और अखंडता बनाए रखें ताकि सशस्त्र बलों का बलिदान व्यर्थ न जाए; और देश की प्रगति में योगदान दें क्योंकि केवल एक समृद्ध और शक्तिशाली राष्ट्र ही अपनी सेना को मजबूत कर सकता है।

श्री राजनाथ सिंह की जयपुर यात्रा में जयपुर मिलिट्री स्टेशन पर सैनिकों के साथ बातचीत शामिल थी जिसके बाद दक्षिण-पश्चिमी कमान के तत्वावधान में सेना दिवस समारोह के हिस्से के रूप में, सवाई मानसिंह स्टेडियम में शौर्य संध्या का आयोजन किया गया। यह शाम भारतीय सेना की वीरता, परंपरा और परिचालन तत्परता के प्रदर्शन को समर्पित थी। इस कार्यक्रम ने भारतीय सेना की बहादुरी, बलिदान और अडिग भावना को सम्मानित किया, साथ ही सशस्त्र बलों और नागरिकों के बीच के अटूट बंधन को और मजबूत किया।

कार्यक्रम की शुरुआत पैरामोटर शो और गुब्बारे छोड़ने के साथ हुई। कलारीपयट्टू और मल्लखंब जैसे मंत्रमुग्ध कर देने वाले मार्शल आर्ट्स और पारंपरिक खेलों के प्रदर्शन ने भारतीय सेना की शारीरिक शक्ति, अनुशासन और समृद्ध युद्ध विरासत को दर्शाया। इस शो का एक मुख्य आकर्षण नेपाली सेना के 30 सदस्यीय बैंड का प्रदर्शन था। इस अवसर पर रक्षा मंत्री द्वारा बैंड को सम्मानित भी किया गया।

शाम का समापन ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के शानदार मंचन, एक सिंक्रोनाइज्ड ‘लाइट एंड साउंड’ शो और उसके बाद एक प्रभावशाली ड्रोन डिस्प्ले के साथ हुआ, जिसने दर्शकों को प्रेरित और मंत्रमुग्ध कर दिया।

इस कार्यक्रम के एक हिस्से के रूप में, 50 नमन केंद्रों का वर्चुअल माध्यम से शुभारंभ किया गया। ‘प्रोजेक्ट नमन’ को सेना के पूर्व सैनिकों, पेंशनभोगियों, वीर नारियों और शहीदों के परिजनों (एनओके) को समर्पित सहायता और सेवाएं प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह एक ही सुविधाजनक स्थान पर स्पर्श- सक्षम पेंशन सेवाएं, ‘सरकार से नागरिक’  सेवाएं और ‘व्यवसाय से उपभोक्ता’  सेवाएं प्रदान करता है। यह मुख्य रूप से स्पर्श (पेंशन प्रशासन प्रणाली रक्षा) नामक डिजिटल पेंशन प्रणाली के कार्यान्वयन पर केंद्रित है, जो देश भर में पूर्व सैनिकों और उनके परिजनों के लिए सुलभ सुविधा केंद्रों की महत्वपूर्ण आवश्यकता को पूरा करता है। इसके अंतर्गत स्वागत और सुविधा केंद्रों की स्थापना की जाती है।

इस कार्यक्रम में राजस्थान के राज्यपाल श्री हरिभाऊ किसानराव बागड़े, मिजोरम के राज्यपाल जनरल (डॉ.) विजय कुमार सिंह, राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजन लाल शर्मा, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी, राजस्थान की उपमुख्यमंत्री श्रीमती दीया कुमारी और श्री प्रेम चंद बैरवा, दक्षिण-पश्चिमी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल मंजींदर सिंह, अन्य वरिष्ठ सैन्य अधिकारी, पूर्व सैनिक, एनओके, गणमान्य व्यक्ति और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित थे।

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श्री अर्जुन राम मेघवाल ने जवाहर नवोदय विद्यालयों के लिए 26वें राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिता, 2024-25 के पुरस्कार वितरित किए

जवाहर नवोदय विद्यालयों के लिए 26वें राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिता, 2024-25 का पुरस्कार वितरण समारोह गुरुवार, 15 जनवरी 2026 को नई दिल्ली के रफी मार्ग स्थित संविधान क्लब ऑफ इंडिया के मावलंकर सभागार में आयोजित किया गया।

कानून एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा संसदीय कार्य राज्य मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल ने समारोह की अध्यक्षता की तथा प्रतियोगिता में उत्कृष्ट प्रदर्शन के लिए विजयी जवाहर नवोदय विद्यालयों की टीमों को पुरस्कार वितरित किए।

मंत्री महोदय ने कार्यक्रम के दौरान छात्रों से भी संवाद किया तथा छात्र जीवन को आकार देने में शिक्षकों के महत्व को रेखांकित करते हुए छात्रों को बड़े सपने देखने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम के शब्दों का स्मरण कराया कि सपने वे नहीं होते जो सोते समय आते हैं, बल्कि वे होते हैं जो सोने न दें। इस अवसर पर मंत्री महोदय ने सभी प्रतिभागियों को पर्यावरण संरक्षण के लिए “जीवन प्रतिज्ञा” भी दिलाई।

स्वागत भाषण देते हुए संसदीय कार्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव डॉ. सत्य प्रकाश ने छात्रों से आशा, नवाचार एवं परिवर्तन के ध्वजवाहक बनने तथा 2047 तक विकसित भारत के प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए सक्रिय योगदान देने का आह्वान किया।

इस अवसर पर, जवाहर नवोदय विद्यालयों के लिए 26वीं राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिता, 2024-25 में राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले पीएम श्री स्कूल जवाहर नवोदय विद्यालय, सूरतगढ़, श्रीगंगानगर-II, राजस्थान (जयपुर क्षेत्र) के छात्रों ने “युवा संसद” का पुनरावृत्त प्रदर्शन किया, जिसकी गरिमामय सभा द्वारा उच्च प्रशंसा की गई।

नवोदय विद्यालय समिति (मुख्यालय) के संयुक्त आयुक्त डॉ. समीर पांडे ने युवा संसद की बैठकों के उल्लेखनीय प्रस्तुतीकरण के लिए विजयी टीम को बधाई दी। उन्होंने छात्रों द्वारा संसदीय प्रक्रियाओं को प्रभावी एवं गरिमापूर्ण ढंग से प्रदर्शित करने की प्रशंसा की तथा जवाहर नवोदय विद्यालयों के छात्रों को लोकतांत्रिक मूल्यों को प्रदर्शित करने एवं आत्मसात करने के लिए मूल्यवान मंच प्रदान करने हेतु संसदीय कार्य मंत्रालय के प्रति अपनी कृतज्ञता व्यक्त की।

न्याय विभाग के सचिव तथा संसदीय कार्य मंत्रालय के सचिव (अतिरिक्त प्रभार) श्री नीरज वर्मा ने जवाहर नवोदय विद्यालयों में युवा संसद कार्यक्रम आयोजित करने के लिए संसदीय कार्य मंत्रालय के प्रशंसनीय प्रयासों की सराहना की। उन्होंने युवा संसद कार्यक्रम को युवाओं में लोकतांत्रिक मूल्यों को पोषित करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में रेखांकित किया तथा संसदीय कार्य मंत्रालय को छात्रों के लिए संसद को अधिक सुलभ बनाने वाली योजनाओं के लिए बधाई दी।

संसदीय कार्य मंत्रालय पिछले 29 वर्षों से जवाहर नवोदय विद्यालयों के लिए युवा संसद प्रतियोगिताएं आयोजित करता आ रहा है। जवाहर नवोदय विद्यालयों के लिए राष्ट्रीय युवा संसद प्रतियोगिता योजना के तहत, श्रृंखला की 26वीं प्रतियोगिता 2024-25 के दौरान नवोदय विद्यालय समिति के 8 क्षेत्रों में फैले 88 विद्यालयों के बीच आयोजित की गई।

युवा संसद योजना राष्ट्रव्यापी जवाहर नवोदय विद्यालयों के युवा मनों को एक मंच प्रदान करती है जहां वे अपनी वाक्पटुता, समीक्षात्मक चिंतन तथा नेतृत्व कौशल का प्रदर्शन कर सकें। इसके अलावा, यह योजना छात्रों को संसद की प्रक्रियाओं एवं कार्यवाहियों, चर्चा एवं बहस की तकनीकों से परिचित कराती है तथा उनके आत्मविश्वास, नेतृत्व गुणों तथा प्रभावी वाक्पटुता की कला एवं कौशल के विकास में सहायक होती है। यह प्रतिष्ठित आयोजन जवाहर नवोदय विद्यालयों के सबसे प्रतिभाशाली एवं वाक्यवादी छात्रों को राष्ट्रीय एवं वैश्विक महत्व के मुद्दों पर उत्साही बहस में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करता है।समारोह में राष्ट्रीय स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त करने के लिए रनिंग शील्ड तथा ट्रॉफी पीएम श्री स्कूल जवाहर नवोदय विद्यालय, सूरतगढ़, श्रीगंगानगर-II, राजस्थान (जयपुर क्षेत्र) को प्रदान की गई। इसके अतिरिक्त, निम्नलिखित 7 क्षेत्रीय विजयी विद्यालयों को भी मंत्री महोदय द्वारा पुरस्कार दिए गए

विद्यालय का नाम क्षेत्र का नाम
1 पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय, वलसाड, गुजरात पुणे

 

2 पीएम श्री जवाहर विद्यालय, आंबेडकर नगर, उत्तर प्रदेश लखनऊ
3 पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय, शिमला, हिमाचल प्रदेश चण्डीगढ़
4 पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय, बीरभूम,पश्चिम बंगाल पटना
5 पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय, गोलघाट, असम शिलांग
6 पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय, मेडक, तेलंगाना हैदराबाद
7 पीएम श्री जवाहर नवोदय विद्यालय, महासमुंद, छत्तीसगढ़

भोपाल

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प्रधानमंत्री ने काशी तमिल संगम के विकास पर बल देते हुए अपने विचार साझा किए

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने पोंगल के शुभ अवसर पर काशी तमिल संगम की उल्लेखनीय प्रगति पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने बताया कि किस प्रकार से यह पहल सांस्कृतिक आदान-प्रदान का एक जीवंत मंच बन गई है और यह भारत की विविधता में एकता का महोत्‍सव मनाते हुए परंपराओं, भाषाओं और समुदायों को जोड़ती है।

सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के उपलक्ष्य में सोमनाथ की अपनी हाल की यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री ने नागरिकों से बातचीत की, जिन्होंने काशी तमिल संगम और सौराष्ट्र तमिल संगम जैसी पहलों की सराहना की।

श्री मोदी ने एक्‍स  पर अलग-अलग पोस्ट में कहा:

“सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के दौरान सोमनाथ की अपनी हाल की यात्रा में, मैंने उन लोगों से भेंट की जिन्होंने काशी तमिल संगम और सौराष्ट्र तमिल संगम जैसे प्रयासों की सराहना की। आज, पोंगल के विशेष अवसर पर, मैंने काशी तमिल संगम की प्रगति और यह किस प्रकार ‘एक भारत श्रेष्ठ भारत’ की भावना को परिपुष्‍ट करता है, इस पर अपने विचार साझा किए।”

https://www.narendramodi.in/kashi-tamil-sangamam-and-a-tribute-to-ek-bharat-shreshtha-bharat

 


हाल ही में मुझे #सोमनाथस्वाभिमानपर्व के सिलसिले में सोमनाथ जाने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। इस दौरान मेरी मुलाकात उन लोगों से भी हुई जिन्होंने काशी-तमिल संगम और सौराष्ट्र-तमिल संगम के प्रयासों की बहुत सराहना की। आज, पोंगल के विशेष अवसर पर, मैंने काशी-तमिल संगम की अब तक की यात्रा और ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना को आगे बढ़ाने में इसकी भूमिका पर अपने विचार साझा किए हैं 

https://www.narendramodi.in/hi/kashi-tamil-sangamam-and-a-tribute-to-ek-bharat-shreshtha-bharat


 

“சோம்நாத் சுயமரியாதைப் பெருவிழாவை முன்னிட்டு #SomnathSwabhimanParv அண்மையில் நான் சோம்நாத்திற்குச் சென்றிருந்தபோது, நான் சந்தித்த மக்கள், காசி தமிழ் சங்கமம், சௌராஷ்ட்ர தமிழ் சங்கமம் போன்ற முயற்சிகளைப் பாராட்டினார்கள். இன்று சிறப்புமிக்க பொங்கல் பண்டிகையின் போது, காசி தமிழ் சங்கமத்தின் வளர்ச்சி குறித்தும், ‘ஒரே பாரதம் உன்னத பாரதத்தின்’ உணர்வை அது எவ்வாறு வலுப்படுத்துகிறது என்பது பற்றியும் எனது கருத்துக்களைப் பரிமாறிக் கொண்டேன்.

https://www.narendramodi.in/ta/kashi-tamil-sangamam-and-a-tribute-to-ek-bharat-shreshtha-bharat

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प्रधानमंत्री ने सेना दिवस पर भारतीय सेना के शौर्य को सलाम किया

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज सेना दिवस के अवसर पर भारतीय सेना के अदम्य साहस और दृढ़ प्रतिबद्धता को हृदय से नमन किया है।

श्री मोदी ने सबसे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले निस्वार्थ सेवा के सर्वोच्च आदर्शों के प्रतीक जवानों के अटूट समर्पण की सराहना करते हुए इस भाव से जुड़े संस्कृत के एक सुभाषितम को साझा किया।

प्रधानमंत्री ने भारतीय सेना को सलाम करते हुए उनके शौर्य और बलिदान के लिए राष्ट्र की ओर से शाश्वत कृतज्ञता व्यक्त की।

एक्स पर अलग-अलग पोस्ट साझा करते हुए श्री मोदी ने कहा:

“सेना दिवस के अवसर पर, हम भारतीय सेना के साहस और दृढ़ प्रतिबद्धता को सलाम करते हैं।”

हमारे सैनिक निस्वार्थ सेवा के प्रतीक हैं, जो सबसे चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में भी दृढ़ संकल्प के साथ राष्ट्र की रक्षा करते हैं। कर्तव्य के प्रति उनकी निष्ठा पूरे देश में विश्वास और कृतज्ञता की भावना जगाती है।

हम उन सभी को अत्यंत श्रद्धापूर्वक स्‍मरण करते हैं जिन्होंने कर्तव्य निभाते हुए अपने प्राणों की आहुति दी।

@adgpi”

“दुर्गम स्थानों से लेकर बर्फीली चोटियों तक हमारी सेना का शौर्य और पराक्रम हर देशवासी को गौरवान्वित करने वाला है। सरहद की सुरक्षा में डुटे किले का दिल से समर्पण!

अस्माकमिन्द्रः समृतेषु ध्वजेष्वसमाकं या ईशावस्ता जयन्तु।

अस्माकं वीरा उत्तरे भवन्त्वस्माँ उ देवा अवता हवेषु॥”

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भारत भर में वेटरन्स डे मनाया गया: जयपुर में सेना अलंकरण समारोह आयोजित

नई दिल्ली –  भारतीय सेना ने वेटरन्स डे को देशभर के अपने सैन्य स्टेशनों और प्रतिष्ठानों में पूरे उत्साह और जोश के साथ मनाया। इस अवसर पर पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और उनके परिवारों के लिए कई कल्याणकारी कार्यक्रम आयोजित किए गए। ये कार्यक्रम नई दिल्ली, जयपुर, अमृतसर, लखनऊ, रांची और राजौरी सहित कई स्थानों पर हुए। जयपुर सैन्य स्टेशन में दक्षिण पश्चिम कमान के तत्वावधान में आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता थल सेनाध्यक्ष जनरल उपेन्द्र द्विवेदी ने की। दिन में बाद में थल सेनाध्यक्ष ने एक अलग अलंकरण समारोह में वीर सैनिकों और सैन्य इकाइयों को वीरता पुरस्कार, थल सेनाध्यक्ष प्रशस्ति पत्र और सम्मान भी प्रदान किए।

थल सेनाध्यक्ष (COAS) ने जयपुर सैन्य स्टेशन के पोलो ग्राउंड में आयोजित आर्मी वेटरन्स डे लंच में भाग लिया। इस दौरान उन्होंने पूर्व सैनिकों और वीर नारियों से संवाद किया और सेना की गौरवशाली परंपरा तथा देश की सुरक्षा में उनके अमूल्य योगदान को सराहा। जनरल द्विवेदी ने पूर्व सैनिकों की समस्याओं के समाधान के लिए निरंतर प्रयास करने वाले जिला सैनिक बोर्डों के अधिकारियों को भी सम्मानित किया और भारतीय सेना पूर्व सैनिक निदेशालय द्वारा तैयार की गई पत्रिका सम्मान’ का विमोचन किया। इस अवसर पर आर्मी वुमेन वेलफेयर एसोसिएशन (AWWA) की अध्यक्ष सुश्री सुनीता द्विवेदी ने वीर नारियों और वीर माताओं को सम्मानित किया।

अपने संबोधन में थल सेनाध्यक्ष ने पूर्व सैनिकों, वीर नारियों और उनके परिवारों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं तथा देश के लिए सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने दोहराया कि पूर्व सैनिकों और शहीदों के परिवारों का कल्याण भारतीय सेना की प्राथमिकता और उसकी निरंतर जिम्मेदारी है। युद्ध के बदलते स्वरूप का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि सेना आधुनिकीकरण, नई तकनीकों के समावेश और ऑपरेशनल तैयारियों पर लगातार ध्यान केंद्रित कर रही है, साथ ही सम्मान, साहस और कर्तव्य जैसे अपने मूल मूल्यों को बनाए हुए है। थल सेनाध्यक्ष ने पूर्व सैनिकों को सेना की विचारधारा के आदर्श प्रतीक और आजीवन दूत बताते हुए युवाओं और समाज के साथ उनके निरंतर जुड़ाव का आह्वान किया, ताकि राष्ट्रीय एकता, अनुशासन और मजबूती को और सशक्त किया जा सके। उन्होंने पूर्व सैनिकों से जुड़ी पहलों और कल्याण कार्यक्रमों को मजबूत करने में सहयोग के लिए नागरिक प्रशासन और सभी हितधारकों का आभार भी व्यक्त किया।

सेना अलंकरण समारोह में थल सेनाध्यक्ष ने विभिन्न पुरस्कार प्रदान किए। समारोह की प्रमुख उपलब्धियों में 10 सेना मेडल (वीरता) और 49 थल सेनाध्यक्ष यूनिट प्रशस्ति पत्र शामिल रहे। इसके अलावा 60 यूनिटों को थल सेनाध्यक्ष प्रशंसा प्रमाण पत्र प्रदान किए गए, जिनमें ऑपरेशन सिंदूर के लिए 26 यूनिटें शामिल थीं। ये सम्मान सभी कमानों की यूनिटों के उत्कृष्ट प्रयासों को मान्यता देने के लिए दिए गए। इन सम्मानों के माध्यम से उन कार्मिकों के साहस, समर्पण और उत्कृष्ट सेवा को सम्मानित किया गया, जो निरंतर देश की सेवा में तत्पर हैं। युद्धक्षेत्र से इतर योगदान को भी मान्यता देते हुए छह पूर्व सैनिक उपलब्धि प्राप्तकर्ताओं और तीन नागरिकों को भारतीय सेना के समर्थन में उनके विशिष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया।

ये समारोह 15 जनवरी 2026 को भी जारी रहेंगे। इस दिन आर्मी डे परेड का आयोजन जयपुर के महल रोड पर किया जाएगा। इसके बाद सवाई मानसिंह स्टेडियम, जयपुर में शौर्य संध्या कार्यक्रम आयोजित होगा, जिसमें भारतीय सेना की पेशेवर क्षमता, ऑपरेशनल तैयारी और जनता के साथ उसके मजबूत जुड़ाव का प्रदर्शन किया जाएगा।

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69वीं राष्ट्रीय स्कूल खेल प्रतियोगिता (SGFFI) 2025-26 के अंतर्गत ट्रैक साइक्लिंग प्रतियोगिता का भव्य उद्घाटन

उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने दीप प्रज्ज्वलन कर समारोह का शुभारंभ किया

ट्रैक साइक्लिंग स्पर्धाएं विशेष रूप से 14 से 19 जनवरी 2026 तक निर्धारित हैं

69वीं राष्ट्रीय स्कूली ट्रैक साइक्लिंग में झारखंड के खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन

दो स्वर्ण एवं एक रजत पदक जीतकर राज्य का बढ़ाया मान

रांची,15.01.2026 – झारखंड सरकार खेलों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है और इस तरह के आयोजन युवाओं के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं:-उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री

स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग अंतर्गत झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद, रांची की मेजबानी में आयोजित 69वीं राष्ट्रीय स्कूली ट्रैक साइक्लिंग प्रतियोगिता का आज खेलगांव स्थित सिद्धू कानू वेलोड्रोम स्टेडियम में शुभारंभ किया गया।

इस कार्यक्रम के मुख्य अतिथि उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी रांची, श्री मंजूनाथ भजंत्री ने दीप प्रज्ज्वलित कर प्रतियोगिता का विधिवत उद्घाटन किया।

उन्होंने अपने संबोधन में खिलाड़ियों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि सभी खिलाड़ी स्पष्ट लक्ष्य निर्धारित कर कड़ी मेहनत करें और भविष्य में राज्य व देश का नाम रोशन करें। उन्होंने कहा कि पिछले छह वर्षों में झारखंड में खेल अधोसंरचना (Infrastructure) का तीव्र विकास हुआ है और जिला प्रशासन खिलाड़ियों को हरसंभव सहयोग प्रदान करता रहेगा।

उन्होंने यह भी कहा कि खेल केवल शारीरिक विकास ही नहीं, बल्कि व्यक्तित्व निर्माण का भी सशक्त माध्यम है।

इस अवसर पर अनुमंडल पदाधिकारी रांची श्री कुमार रजत, झारखंड ओलंपिक संघ के महासचिव श्री मधुकांत पाठक, एथलेटिक संघ के श्री एस. के. पांडेय, जिला खेल पदाधिकारी श्री शिवेंद्र सिंह, श्री सुरेश कुमार, श्री शैलेंद्र पाठक, श्री सुरजीत सिंह सहित कई गणमान्य अतिथि उपस्थित थे।

सभी अतिथियों का स्वागत राज्य कार्यक्रम पदाधिकारी सह आयोजन सचिव श्री धीरसेन ए. सोरेंग द्वारा पुष्पगुच्छ, अंगवस्त्र एवं स्मृति-चिह्न भेंट कर किया गया।

आज हुए साइकिलिंग ट्रैक प्रतियोगिता के मुकाबलों में खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन किया। विभिन्न आयु वर्गों की आईटीटी स्पर्धाओं में देशभर के प्रतिभाशाली साइकिलिस्टों ने अपनी उत्कृष्ट क्षमता का परिचय दिया। जिसमें आईटीटी 500 मीटर (बालक अंडर–14) वर्ग में मणिपुर के पोइरेंगानबा चानमबाम ने स्वर्ण, मणिपुर के मयेंगबाम हेंथोई सिंह ने रजत तथा राजस्थान के अभिनव बिश्नोई ने कांस्य पदक जीता।

आईटीटी 500 मीटर (बालक अंडर–17) वर्ग में दिल्ली के नरेंगमाम मैक्सन सिंह ने स्वर्ण, मणिपुर के युमनाम सुशील सिंह ने रजत तथा अंडमान एवं निकोबार के लियोनाल्ड बैकर ने कांस्य पदक प्राप्त किया।

आईटीटी 500 मीटर (बालिका अंडर–17) वर्ग में अंडमान एवं निकोबार की नमिता वॉयलेट ने स्वर्ण, महाराष्ट्र की गायत्री चंद्रशेखर तंबवेकर ने रजत तथा अंडमान एवं निकोबार की आई. एस. ब्रिडनी ने कांस्य पदक जीता।

आईटीटी 500 मीटर (बालिका अंडर–19) वर्ग में झारखंड की सबिना कुमारी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए स्वर्ण पदक जीतकर राज्य को गौरवान्वित किया।

इस स्पर्धा में अंडमान एवं निकोबार की ब्रिटनी को रजत तथा पंजाब की प्रभजोत कौर बेहनीवाल को कांस्य पदक मिला।

वहीं आईटीटी 1000 मीटर (बालक अंडर–19) वर्ग में झारखंड के खिलाड़ियों का दबदबा देखने को मिला। बिकास उरांव ने स्वर्ण तथा नारायण महतो ने रजत पदक जीतकर राज्य का नाम रोशन किया, जबकि पंजाब के अरशदीप सिंह को कांस्य पदक प्राप्त हुआ।

उपायुक्त ने सभी अतिथियों, प्रतिभागियों और समर्थकों का आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि झारखंड सरकार खेलों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है और इस तरह के आयोजन युवाओं के सर्वांगीण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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Ranchi DC श्री मंजूनाथ भजन्त्री से डैंजर्स ऐडवेंचर्स स्पोर्ट्स लॉगेस्ट वर्ल्ड टूर टीम ऑन फुट जर्नी ने की शिष्टाचार मुलाकात

उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री से टीम ने साझा किये अपने अनुभव

केन्द्र एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के उद्देश्यों की पूर्ति हेतु देशभर में जन-जागरूकता अभियान चला रही है टीम

विश्व के 11 देशों में लगभग 4 लाख 54 हजार किलोमीटर की यात्रा पूरी कर चुकी है टीम

रांची,15.01.2026 – डैंजर्स ऐडवेंचर्स स्पोर्ट्स लॉगेस्ट वर्ल्ड टूर ऑन फुट जर्नी के सदस्य व पर्वतारोही, गिनीज बुक, लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर टीम के चार सदस्य श्री अवध बिहारी लाल, श्री जितेन्द्र प्रताप, श्री महेन्द्र प्रताप एवं श्री गोविन्द चन्द्र ने आज उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री से समाहरणालय स्थित कार्यालय कक्ष में शिष्टाचार भेंट की।

इस अवसर पर टीम के सदस्यों ने अपनी विश्वशांति विश्वपदयात्रा/स्थलयात्रा के अनुभव साझा किए तथा भारत सरकार एवं राज्य सरकार द्वारा संचालित विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं के उद्देश्यों की पूर्ति हेतु देशभर में किए जा रहे जन-जागरूकता अभियानों की जानकारी दी। टीम द्वारा पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण, वन एवं वन्यजीव संरक्षण, सड़क सुरक्षा, स्वच्छ भारत, बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ, मतदाता जागरूकता सहित अन्य सामाजिक विषयों पर किए जा रहे कार्यों से उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री को अवगत कराया गया। 20 सदस्यीय टीम झारखण्ड में दिनांक 15.01.2026 से 20.01.2026 तक अपने विभिन्न कार्यक्रमों को संपन्न करेगी।

टीम सदस्यों ने बताया कि अब तक वे पूर्ण कर चुके हैं तथा इस दौरान लाखों पौधों का वृक्षारोपण एवं विद्यालयों, महाविद्यालयों एवं सार्वजनिक स्थलों पर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। झारखंड राज्य के सभी 24 जिलों में भी उनकी यात्रा के दौरान विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाने हैं।

उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजंत्री ने टीम के सदस्यों के प्रयासों की सराहना करते हुए इसे समाज के लिए प्रेरणादायी बताया तथा उनके अभियान को सफल बनाने हेतु शुभकामनाएँ दीं।

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ग्रामीण विकास मंत्रालय ने राष्ट्रीय उद्यमिता अभियान आंरभ किया

नई दिल्ली – दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन का उद्देश्य विविधतापूर्ण और संवहनीय आजीविका को बढ़ावा देकर ग्रामीण महिलाओं की आय बढ़ाना है। इसके लिए गैर-कृषि क्षेत्र के ग्रामीण उद्यमों को बढ़ावा देना महत्वपूर्ण उपाय है। पिछले कुछ वर्षों में, स्टार्ट-अप ग्राम उद्यमिता कार्यक्रम सहित कई गैर-कृषि आजीविका योजनाओं ने प्रशिक्षित सामुदायिक कार्यकर्ताओं के सहयोग से सफल उद्यम मॉडल प्रस्तुत किए हैं। ये कार्यकर्ता जमीनी स्तर पर उत्प्रेरक के रूप में उद्यम की पहचान, स्टार्टअप सहायता, मार्गदर्शन और निरंतर सहयोग देते हैं।

मंत्रालय ने कम से कम 3 करोड़ स्वयं सहायता समूह की महिला सदस्यों- को  लखपति दीदियां बनाने का संकल्प लिया है जिनकी वार्षिक आय एक लाख रुपये या उससे अधिक होगी। इस  लक्ष्य को पूरा करने के लिए इस समूह का बड़े पैमाने पर उन्नयन आवश्यक है।

इन प्राथमिकताओं को ध्यान में रखते हुए, ग्रामीण विकास विभाग अपर सचिव ने 12 जनवरी 2026 को राष्ट्रीय उद्यमिता अभियान आंरभ किया। कार्यक्रम में नीति आयोग के विकास एवं जनसंपर्क सलाहकार, राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक- नाबार्ड  के अध्यक्ष, बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन, आईएफएमआर लीड (केआरईए विश्वविद्यालय), भारतीय उद्यमिता विकास संस्थान- ईडीआईआई और आईआईएम कलकत्ता इनोवेशन पार्क के प्रतिनिधि और राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन के वरिष्ठ निदेशक/सीईओ ने अपनी टीम के साथ भाग लिया।

 

राष्ट्रीय उद्यमिता अभियान का मुख्य उद्देश्य 50 हजार सामुदायिक संसाधन प्रतिनिधियों (सीआरपी) को उद्यम प्रोत्साहन प्रशिक्षण देकर और उनका क्षमता वर्धन तथा दीनदयाल अंत्योदय योजना – राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के 50 लाख स्वयं सहायता समूह के सदस्यों को उद्यमिता विकास प्रशिक्षण प्रदान करना है।

 

 

राष्ट्रीय उद्यमिता अभियान भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यम विकास, स्थानीय आर्थिक विकास गतिविधियों को बढ़ावा देने और स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं की उद्यमशीलता क्षमता बढ़ाने का अवसर प्रदान करता है। यह लक्षित अभियान हजारों सामुदायिक संसाधन प्रतिनिधियां तैयार करने के साथ ही लाखों ग्रामीण उद्यमियों को प्रेरित करेगा, जिससे सुदृढ़, समावेशी और आत्मनिर्भर गैर-कृषि ग्रामीण अर्थव्यवस्था निर्मित होगी और जमीनी स्तर के उद्यमों और उद्यम ऋणों के लिए औपचारिक वित्तीय संस्थानों से संपर्क के अवसर खुलेंगे।

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केंद्रीय मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने स्वच्छ ऊर्जा निवेश और सहयोग पर फोकस के साथ अबू धाबी का दौरा पूरा किया

नई दिल्ली – केंद्रीय नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने संयुक्त अरब अमीरात के अबू धाबी की अपनी आधिकारिक यात्रा पूरी की। यात्रा के दौरान इंटरनेशनल रिन्यूएबल एनर्जी एजेंसी (आईआरईएनए) की 16वीं असेंबली में हिस्सा लेना और भारत के तेजी से बढ़ते रिन्यूएबल एनर्जी सेक्टर में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और निवेश को मजबूत करने के लिए अन्य उच्च-स्तरीय बैठकें शामिल थीं।

 

केंद्रीय मंत्री श्री जोशी ने अबू धाबी में संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) आधारित और वैश्विक वित्तीय संस्थानों, निवेशकों और रिन्यूएबल एनर्जी डेवलपर के साथ एक रिन्यूएबल एनर्जी इन्वेस्टमेंट राउंडटेबल की अध्यक्षता की। चर्चा में डिस्ट्रीब्यूटेड सोलर, ईपीसी, क्लीन एनर्जी मैन्युफैक्चरिंग, एनर्जी स्टोरेज, ग्रीन हाइड्रोजन, वेस्ट-टू-एनर्जी और सस्टेनेबल फाइनेंस जैसे स्वच्छ ऊर्जा के कई खंड शामिल थे। श्री जोशी ने भारत में अक्षय ऊर्जा के विकास की गाथा को साझा किया और मेक इन इंडिया पहल के तहत परियोजना विकास, वित्त पोषण और विनिर्माण के क्षेत्र में उपलब्ध महत्वपूर्ण अवसरों पर प्रकाश डाला, जिससे भारत दीर्घकालिक स्वच्छ ऊर्जा में निवेश के लिए दुनिया के सबसे आकर्षक गंतव्यों में से एक बन गया है।

 

श्री जोशी ने अबू धाबी सस्टेनेबिलिटी वीक में भी हिस्सा लिया। यह संयुक्त अरब अमीरात का एक वैश्विक मंच है। यह मंच सरकार, व्यापार, वित्त और नागरिक समाज के दिग्गजों को एक साथ लाता है ताकि सतत विकास को आगे बढ़ाया जा सके और आपस में जुड़े सेक्टर में भविष्य के लिए तैयार समाधानों को बढ़ावा दिया जा सके। इस दौरान, उन्होंने ग्लोबल क्लीन एनर्जी इकोसिस्टम के हितधारकों के साथ बातचीत की और एक न्यायसंगत, समावेशी तथा मापनयोग्य ऊर्जा परिवर्तन के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया।

 

संयुक्त अरब अमीरात में अपने कार्यक्रमों के हिस्से के रूप में श्री जोशी ने भारतीय समुदाय के सदस्यों से बातचीत की, जिसमें जीवंत कन्नड़ समुदाय भी शामिल था। उन्होंने कन्नड़ पाठशाला जैसी पहलों के जरिए भाषा और संस्कृति को बनाए रखने के उनके प्रयासों की सराहना की, जिसका जिक्र प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने ‘मन की बात’ में भी किया था।

इस दौरे के अवसर पर श्री जोशी ने अबू धाबी में बीएपीएस हिंदू मंदिर, दुबई के जेबेल अली गांव में हिंदू मंदिर और दुबई में गुरुनानक दरबार गुरुद्वारे जैसे प्रमुख सांस्कृतिक और आध्यात्मिक स्थलों का भी दौरा किया और प्रार्थना की। इन मुलाकातों से भारत और संयुक्त अरब अमीरात में जन-जन के बीच मजबूत संबंध और सद्भाव, समावेशिता और आपसी सम्मान के साझा मूल्यों की झलक मिली।

इससे पहले, अबू धाबी में इंटरनेशनल रिन्यूएबल एनर्जी एजेंसी (आईआरईएनए) की 16वीं असेंबली के प्लेनरी सेशन को संबोधित करते हुए, केंद्रीय मंत्री श्री जोशी ने दोहराते हुए कहा था कि भारत का ऊर्जा परिवर्तन वसुधैव कुटुंबकम – एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य के सिद्धांत पर आधारित है, जो समानता, समावेशिता और दीर्घकालिक स्थायी नीति पर टिका है। इंटरनेशनल रिन्यूएबल एनर्जी एजेंसी और खाद्य तथा कृषि संगठन द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित कृषि-खाद्य प्रणालियों में नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ाने पर अंतर-मंत्रालयी संवाद में, श्री जोशी ने जलवायु-अनुकूल कृषि और ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने में विकेन्द्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा की भूमिका पर बल दिया।

केंद्रीय मंत्री श्री जोशी ने भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश और सहयोग को बढ़ावा देने के लिए वैश्विक नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र की अग्रणी हस्तियों और प्रमुख गणमान्य व्यक्तियों के साथ बातचीत भी की। इस यात्रा ने नवीकरणीय ऊर्जा, सतत विकास और स्वच्छ इन्फ्रास्ट्रक्चर में भारत और संयुक्त अरब अमीरात के बीच सहयोग को और मजबूत किया। इतना ही नहीं, इस यात्रा ने नवाचार, निवेश और दीर्घकालिक सहयोग के माध्यम से वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन को गति देने के लिए वैश्विक भागीदारों के साथ काम करने की भारत की तत्परता को भी दर्शाया।

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वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग ने फरीदाबाद नगर निगम द्वारा रख-रखाव किए गए सड़क खंडों का निरीक्षण किया

नई दिल्ली – एनसीआर और आसपास के क्षेत्रों में वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने ग्रेडेड रिस्पांस एक्शन प्लान (जीआरएपी) के तहत अपने गहन प्रवर्तन के हिस्से के रूप में फरीदाबाद नगर निगम (एमसीएफ) द्वारा रखरखाव किए गए सड़क खंडों और सड़क धूल शमन उपायों का आकलन करने के लिए 13 जनवरी, 2026 को हरियाणा के फरीदाबाद में एक निरीक्षण अभियान चलाया।

यह निरीक्षण ऑपरेशन क्लीन एयर के तहत सड़क सफाई और झाड़ू लगाने के उपायों के जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन का आकलन करने और धूल, नगरपालिका ठोस अपशिष्ट संचय और संबंधित समस्याओं से ग्रस्त स्थानों की पहचान करने के लिए किया गया था।

निरीक्षण के लिए हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी) और केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के अधिकारियों सहित कुल 9 टीमें तैनात की गईं। टीमों ने 127 सड़क खंडों का निरीक्षण किया और समेकित निरीक्षण रिपोर्ट के हिस्से के रूप में निरीक्षण के दौरान एकत्र किए गए भू-टैग और समय-मुहर लगे फोटोग्राफिक साक्ष्य आयोग को प्रस्तुत किए।

निरीक्षण के निष्कर्षों से पता चला कि सड़क के कई हिस्सों में धूल का स्तर कम या न के बराबर था, लेकिन कुछ हिस्सों पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। निरीक्षण किए गए कुल हिस्सों में से 17 में धूल का स्तर अधिक और 25 में मध्यम पाया गया, जबकि 66 हिस्सों में धूल का स्तर कम था और 19 हिस्सों में धूल बिल्कुल नहीं थी। अधिक धूल वाले हिस्से कई मामलों में ठोस अपशिष्ट (एमएसडब्ल्यू) और निर्माण एवं विध्वंस (सीएंडडी) कचरे के जमाव से संबंधित थे, विशेष रूप से प्रमुख गलियारों, चौराहों और सेवा सड़कों के किनारे खुले में कचरा जलाने के छिटपुट मामले भी देखे गए।

आयोग ने चिन्हित प्रदूषणकारी क्षेत्रों में तत्काल और निरंतर सुधारात्मक कार्रवाई की आवश्यकता पर बल दिया, जिसमें गहन सफाई, नियमित जल छिड़काव, ठोस अपशिष्ट और निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट का शीघ्र संग्रहण और वैज्ञानिक निपटान तथा अपशिष्ट डंपिंग और खुले में जलाने से रोकने के लिए सख्त प्रवर्तन शामिल है। एमसीएफ को निगरानी तंत्र को मजबूत करने और धूल के पुनः संचय को रोकने के लिए सभी सड़क खंडों पर धूल नियंत्रण उपायों के एकसमान कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने की सलाह दी गई है।

‘ऑपरेशन क्लीन एयर’ के तहत निरीक्षण और प्रवर्तन अभियान पूरे क्षेत्र में नियमित रूप से जारी रहेंगे ताकि वैधानिक निर्देशों और जीआरएपी प्रवर्तन उपायों का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके। सीएक्यूएम पूरे क्षेत्र में स्वच्छ, धूलरहित और सुव्यवस्थित सड़क अवसंरचना सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित एजेंसियों के साथ समन्वय में काम करने की अपनी प्रतिबद्धता को दोहराता है।

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हर समय हर वक्त सच के साथ

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