रक्षा पर संसदीय स्थाई समिति ने नौसेना विज्ञान एवं तकनीकी प्रयोगशाला, विशाखापत्तनम का दौरा किया

नई दिल्ली –  श्री राधा मोहन सिंह की अध्यक्षता में रक्षा पर संसदीय स्थायी समिति ने 20 जनवरी, 2026 को नौसेना विज्ञान और तकनीकी प्रयोगशाला (एनएसटीएल), विशाखापत्तनम का एक जमीनी अध्ययन के लिए दौरा  किया। समिति ने एनएसटीएल द्वारा विकसित उत्पादों का अवलोकन किया, जिनमें टॉरपीडो (एएलडब्लूटी, वरुणास्त्र और ईएचडब्लूटी), माइन्स (एमआईजीएम और पीबीजीएम), डिकॉय (एसएफडी, टॉरबस्टर), स्मार्ट, एचईएयूवी, स्वार्म, अंडर-वाटर सिस्टम, अंडर-वाटर वाहन और अन्य संबंधित रक्षा तकनीकें शामिल थीं।

समिति ने ‘सी-कीपिंग एंड मैन्युवरिंग बेसिन’  परीक्षण सुविधा में एक जहाज के स्केल-डाउन मॉडल पर हाइड्रो-डायनेमिक परीक्षण का लाइव प्रदर्शन भी देखा। प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय नौसेना की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पानी के नीचे के प्लेटफार्मों, हथियारों और संबंधित तकनीकों के विकास में एनएसटीएल के आर एंड डी प्रयासों की सराहना की।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत, महानिदेशक (नौसेना प्रणाली और सामग्री) डॉ. आर.वी. हर प्रसाद और एनएसटीएल के निदेशक डॉ. अब्राहम वर्गीस ने सांसदों, लोकसभा सचिवालय और रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों वाले इस प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया।

एनएसटीएल के निदेशक ने समिति को प्रयोगशाला में चल रही आर एंड डी गतिविधियों, उद्योग जगत और शैक्षणिक संस्थानों के साथ संवाद के बारे में जानकारी दी। उन्होंने भविष्य के तकनीकी रोडमैप के बारे में भी संक्षेप में बताया। समिति ने मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस और अंडरवाटर डोमेन अवेयरनेस जैसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में एनएसटीएल के प्रयासों की प्रशंसा की।

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भारतीय नौसेना का पहला प्रशिक्षण स्क्वाड्रन इंडोनेशिया के बेलावन बंदरगाह पहुंचा

नई दिल्ली  – भारतीय नौसेना के प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन (1टीएस) के पोत आईएनएस तीर, आईएनएस शार्दुल, आईएनएस सुजाता और आईसीजीएस सारथी 20 जनवरी, 2026 को इंडोनेशिया के बेलावन बंदरगाह पर पहुंचे। इस अवसर पर इंडोनेशियाई नौसेना द्वारा स्क्वाड्रन का गर्मजोशी से स्वागत किया गया, जिसके अंतर्गत पारंपरिक नृत्य प्रदर्शन सहित एक स्वागत समारोह आयोजित किया गया। ये जहाज वर्तमान में दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में प्रशिक्षण अभियान पर तैनात हैं।

बेलावन बंदरगाह पर ठहराव के दौरान, भारतीय नौसेना और इंडोनेशिया की नौसेना के कर्मी विभिन्न नौसैन्य एवं सामाजिक गतिविधियों में भाग लेंगे, जिनमें क्रॉस-डेक दौरे और संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम शामिल हैं। इन गतिविधियों का उद्देश्य आपसी सहभागिता को बढ़ाना और समुद्री सहयोग को विस्तारित करना है। इसके अतिरिक्त, सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम के अंतर्गत संयुक्त योग सत्र, स्कूली बच्चों के लिए जहाज भ्रमण, मैत्रीपूर्ण खेल प्रतियोगिताएं और सामुदायिक संपर्क गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी।

इंडोनेशिया में प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन की तैनाती भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति के अनुरूप दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ भारत की निरंतर सहभागिता को उजागर करती है। यह तैनाती हिंद महासागर नौसेना संगोष्ठी (आईओएनएस) के सदस्य देशों के साथ नियमित नौसैन्य संपर्क व प्रशिक्षण आदान-प्रदान के माध्यम से ‘महासागर’(क्षेत्र में सुरक्षा एवं विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति) की परिकल्पना को भी सुदृढ़ करती है।

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DC Ranchi श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने जिले में चल रही परियोजनाओं एवं विभिन्न प्रखंडों के स्वास्थ्य केंद्रों का किया निरीक्षण

डीएमएफटी (DMFT) से निर्मित स्वास्थ्य केंद्रों तथा पुस्तकालयों की गुणवत्ता, सुविधाओं एवं रखरखाव की विस्तृत जांच की

ग्रामीणों से सीधी बातचीत, स्वास्थ्य केंद्रों का अधिक उपयोग करने की अपील

अबुआ साथी व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से शिकायतों का त्वरित समाधान मिल रहा है

उपायुक्त ने झारखंड मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना से लाभान्वित जेएसएलपीएस दीदियों से संवाद किया

पब्लिक लाइब्रेरी, बेड़ो का निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने लाइब्रेरी की प्रशंसा

ओझा-गुनी और क्वाक से दूर रहें, आधुनिक दवाइयों पर भरोसा करें:- उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री

रांची,21.01.2026 – उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने आज दिनांक- 21 जनवरी 2026 को बेड़ो एवं खलारी प्रखंडों के स्वास्थ्य केंद्रों (हेल्थ सेंटर) का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने डीएमएफटी (DMFT) से निर्मित स्वास्थ्य केंद्रों तथा पुस्तकालयों की गुणवत्ता, सुविधाओं एवं रखरखाव की विस्तृत जांच की।

इस दौरान उप विकास आयुक्त राँची, श्री सौरभ भुवनिया, जिला जन संपर्क पदाधिकारी राँची, श्रीमती उर्वशी पांडेय, जिला योजना पदाधिकारी राँची, श्री संजीव कुमार, जिला शिक्षा अधीक्षक राँची, श्री बादल राज, अंचल अधिकारी बेड़ो, लापुंग, ओरमांझी एवं खलारी एवं सम्बंधित पदाधिकारी उपस्थित रहें।

ग्रामीणों से सीधी बातचीत, स्वास्थ्य केंद्रों का अधिक उपयोग करने की अपील

निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने ग्रामीणों से खुली बातचीत की। उन्होंने ग्रामीणों से अनुरोध किया कि वे स्वास्थ्य केंद्रों तथा पुस्तकालयों का अधिक से अधिक उपयोग करें। ये सुविधाएं विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए उपलब्ध कराई गई हैं। उपायुक्त ने कहा, “इन केंद्रों का लाभ उठाकर आप अपनी स्वास्थ्य एवं शिक्षा संबंधी आवश्यकताओं को पूरा कर सकते हैं। अधिक से अधिक लोग इनका उपयोग करें, ताकि इनकी उपयोगिता सिद्ध हो।”

अबुआ साथी व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से शिकायतों का त्वरित समाधान

उपायुक्त ने ग्रामीणों को बताया कि जिला प्रशासन द्वारा “अबुआ साथी” व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया है। यदि किसी आंगनबाड़ी केंद्र, स्वास्थ्य केंद्र या सरकारी कार्यालय में अनियमितता हो या वे बंद रहते हों, तो तुरंत इस ग्रुप पर सूचना दें। हर प्रखंड में अलग-अलग अबुआ साथी ग्रुप सक्रिय हैं, जहां सूचनाओं का तेजी से आदान-प्रदान होता है। उन्होंने अपील की कि अधिक से अधिक लोग इस ग्रुप से जुड़ें और अपनी समस्याओं का समाधान प्राप्त करें।

हर मंगलवार जनता दरबार में समस्याओं का समाधान

उपायुक्त ने जानकारी दी कि जिला एवं प्रखंड स्तर पर हर मंगलवार जनता दरबार आयोजित किया जाता है। इस दौरान पदाधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहते हैं, ताकि लोग अपनी समस्याएं सीधे रख सकें। उन्होंने कहा कि जनता दरबार अत्यंत सफल रहा है और कई सक्सेस स्टोरी सामने आई हैं।

ओझा-गुनी और क्वाक से दूर रहें, आधुनिक दवाइयों पर भरोसा करें

उपायुक्त ने ग्रामीणों से विशेष अनुरोध किया कि स्वास्थ्य संबंधी किसी भी समस्या के लिए स्वास्थ्य केंद्र ही आएं। ओझा-गुनी, क्वाक या जड़ी-बूटियों के चक्कर में न पड़ें। स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक दवाइयां उपलब्ध हैं, तथा बच्चों को आयरन टैबलेट्स एवं अन्य स्वास्थ्य संबंधी दवाइयां सीएचओ (Community Health Officer) एवं एएनएम (ANM) द्वारा प्रदान की जा रही हैं।

उन्होंने चेतावनी दी कि अनजाने में ओझा-गुनी या क्वाक से जड़ी-बूटियां/केमिकल लेने से स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। लोगों को आधुनिक चिकित्सा (मॉडर्न मेडिसिन) पर भरोसा करने की सलाह दी। जिला प्रशासन द्वारा मनकी मुंडा, ग्राम प्रधान, मुखिया एवं आंगनबाड़ी सेविकाओं की मदद से ग्रामीणों को जागरूक करने का अभियान चलाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना से लाभान्वित महिलाओं ने जताया आभार

उपायुक्त ने ग्रामीण महिलाओं से भी बातचीत की। महिलाओं ने मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना की राशि का उपयोग शिक्षा एवं स्वास्थ्य संबंधी कार्यों में करने पर प्रसन्नता जताई। उन्होंने कहा कि इस योजना से उन्हें काफी मदद मिल रही है और वे बहुत खुश हैं।

उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा कि जिला प्रशासन ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा एवं अन्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। ग्रामीणों से अपील की कि वे सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाएं और प्रशासन के साथ सक्रिय रूप से जुड़े रहें।

टीवीएस डिस्ट्रिक्ट सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस, बुकरू का अवलोकन

उपायुक्त ने ASTVS टीवीएस डिस्ट्रिक्ट सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस का अवलोकन किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने निर्देश दिया कि स्कूल परिसर के आसपास किसी भी प्रकार का अतिक्रमण, अड्डाबाजी एवं नशाबाजी न हो। इसके लिए अनुमंडल पदाधिकारी सदर राँची, श्री रजत कुमार को निर्देशित किया कि अंधेरा होने के बाद विशेष निगरानी रखी जाए एवं गश्ती दल को सक्रिय किया जाए। विद्यालय के सुंदरीकरण, सीपेज एवं जल जमाव की समस्या के समाधान हेतु भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

आयुष्मान आरोग्य मंदिर, बुकरू, कांके निरीक्षण

उपायुक्त ने आयुष्मान आरोग्य मंदिर, बुकरू (कांके) का निरीक्षण किया। उन्होंने मौके पर उपस्थित ग्रामीणों से योजना के लाभ, मातृ-शिशु सुरक्षा, टीकाकरण एवं अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी ली। उपायुक्त ने कहा कि एएनएम एवं आंगनबाड़ी सेविकाएं ग्रामीणों को जागरूक करें कि वे ओझा-गुनी के चक्कर में न पड़ें तथा आधुनिक वैज्ञानिक चिकित्सा का ही लाभ लें। ज्ञात हो कि यह केंद्र एनक्यूएएस प्रमाण पत्र प्राप्त कर चुका है।

राजकीय कृत मध्य विद्यालय, मक्का बुढ़मू का औचक निरीक्षण

उपायुक्त ने राजकीय कृत मध्य विद्यालय, मक्का बुढ़मू का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने प्रधानाध्यापक को सफाई पर विशेष ध्यान देने तथा बच्चों में साफ-सफाई के संस्कार विकसित करने का निर्देश दिया। प्रोटीन युक्त आहार, अंडा एवं सोयाबीन नियमित रूप से प्रदान करने के निर्देश दिए गए। विद्यालय के बेहतर रखरखाव एवं रिपेयर कार्यों के लिए संबंधित पदाधिकारियों को निर्देशित किया।

आयुष्मान आरोग्य मंदिर, मक्का बुढ़मू

इस केंद्र के निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने परिसर में रैंप लगाने का निर्देश दिया। उन्होंने योग्य लाभुकों के बीच कंबल वितरण किया तथा चिन्हित लाभुकों को शीघ्र ट्राई साइकिल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय, जोराकाथ, खलारी का निरीक्षण

उपायुक्त ने उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय, जोराकाथ (खलारी) का भ्रमण किया तथा बच्चों से बातचीत की। प्रधानाचार्य को सहायक आचार्य की संख्या बढ़ाने का निर्देश दिया।

झारखंड मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना से लाभान्वित जेएसएलपीएस दीदियों से संवाद

खलारी में जेएसएलपीएस की दीदियों ने अपनी सफलता की यात्रा साझा की। उपायुक्त ने मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना, फूलो झानो आशीर्वाद योजना आदि से लाभान्वित होने वाली दीदियों से बातचीत की। दीदी किरण मिंज ने केज कलर के माध्यम से मछली पालन, रूसिया गुड़िया ने बकरी पालन तथा शोषण देवी ने सुकर एवं बत्तख पालन से आर्थिक मजबूती हासिल करने की बात कही। उपायुक्त ने उनकी समस्याएं सुनीं तथा शराब भट्टी की सूचना अबुआ साथी नंबर पर देने तथा घरों में शौचालय उपयोग करने का निर्देश दिया।

पब्लिक लाइब्रेरी, बेड़ो का निरीक्षण

उपायुक्त ने डीएमएफटी फंड से निर्मित पब्लिक लाइब्रेरी, बेड़ो का निरीक्षण किया, जिसे जेसोवा JIASOWA (Jharkhand IAS Officers Wives Association) द्वारा संचालित किया जा रहा है। उन्होंने लाइब्रेरी की प्रशंसा की तथा जिले में अन्य स्थानों पर ऐसी लाइब्रेरी खोलने की पहल करने का निर्देश दिया।

उपायुक्त ने सभी निरीक्षणों के दौरान संबंधित पदाधिकारियों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण कार्य करने के निर्देश दिए तथा विकास कार्यों में तेजी लाने पर जोर दिया।

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श्री भूपेंद्र यादव ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति बैठक की दिल्ली में अध्यक्षता की

नई दिल्ली – पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की पुनर्गठित हिंदी सलाहकार समिति की पहली बैठक आज दिनांक 20 जनवरी, 2026 को तीस्ता सभागार, इंदिरा पर्यावरण भवन, नई दिल्ली में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता माननीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेन्द्र यादव जी द्वारा की गई। बैठक में संसद के दोनों सदनों के माननीय सांसद श्री मिथलेश कुमार, श्रीमती माया नारोलिया और श्रीमती कमलेश जांगड़े और हिंदी के प्रतिष्ठित विद्वान शामिल हुए। बैठक में मंत्रालय के सचिव, अपर सचिव, अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा मंत्रालय के नियंत्रणाधीन कार्यालयों के प्रभारियों ने भी समिति की बैठक में भाग लिया।

समिति के सदस्यों को संबोधित करते हुए समिति के अध्यक्ष, माननीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री महोदय ने हिंदी के प्रचार-प्रसार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए इस बात पर ज़ोर दिया कि हिंदी भाषा एक बेहतर संपर्क का माध्यम है और सभी को विशेष तौर पर मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों को सरल हिंदी का प्रयोग करना चाहिए, ताकि मंत्रालय की विषय वस्तु और मंत्रालय की योजनाओं को सरलता से आम जनता तक पहुंचाया जा सके तथा आम जनता इसे भली भांति समझ सके। भाषा की जटिलता के बारे में बोलते हुए उन्होने कहा है कि हमें सरल हिंदी का प्रयोग करना चाहिए। किसी व्यक्ति के हस्ताक्षर उनके व्यक्तित्व के परिचायक होते हैं। हमें अपने हस्ताक्षर हिंदी में ही करने चाहिए। उन्होंने कहा कि मंत्रालय के अधिकारी हिंदी में हस्ताक्षर से शुरुआत करके महीने में एक बार कम से कम एक टिप्पणी हिंदी में करें और धीरे-धीरे हिंदी में कार्य करने की आदत डालें।

समिति के माननीय सदस्यों ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और इसके नियंत्रणाधीन कार्यालयों में हिंदी के कार्य को बढ़ावा देने के लिए अपने बहुमूल्य सुझाव दिए। बैठक के अंत में माननीय सचिव महोदय ने समिति के सदस्यों का धन्यवाद देते हुए समिति को यह आश्वासन दिया कि वे सदस्यों द्वारा दिए गए सुझावों पर यथोचित कार्रवाई करेंगे तथा मंत्रालय के कार्यों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।

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युवा शेफ भारत की पाक कला की विरासत के पथप्रदर्शक हैं: श्री गजेंद्र सिंह शेखावत

नई दिल्ली – पुणे स्थित सिम्बायोसिस स्कूल ऑफ कलिनरी आर्ट्स एंड न्यूट्रिशनल साइंसेज ने पहली बार आयोजित पीएचडीसीसीआई नेशनल यंग शेफ कॉम्पिटिशन (एनवाईसीसी) 2025-26 का खिताब जीता। इस कार्यक्रम का ग्रैंड फिनाले इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट (आईएचएम), पूसा, नई दिल्ली में हुआ। महाराष्ट्र स्टेट आईएचएमसीटी, पुणे और आईएचएम पूसा, नई दिल्ली क्रमशः प्रथम और द्वितीय उपविजेता रहे। सर्वश्रेष्ठ भाजा व्यंजन का पुरस्कार शेफ्स किचन इंस्टीट्यूट ऑफ कलिनरी आर्ट्स एंड होटल मैनेजमेंट, कोल्हापुर को दिया गया।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में अपने विचार व्‍यक्‍त करते हुए कहा कि भारतीय व्यंजन हमारी सबसे सशक्त सांस्कृतिक धरोहरों में से एक हैं और पर्यटन आधारित विकास का एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। हमारी व्‍यंजन परंपराएं हमारे क्षेत्रों की विविधता, ज्ञान और जीवंत विरासत को दर्शाती हैं और हमारे युवा शैफ इस विरासत के वाहक हैं। उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण और बदलते उपभोग पैटर्न भारतीय शैफ को पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों पर आधारित मूल्यवर्धित, पौष्टिक रूप से संतुलित और तैयार भोजन समाधानों में नवाचार का नेतृत्व करने का एक अनूठा अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि एनवाईसीसी जैसे मंच उन शैफ को पोषित करते हैं जो परंपराओं में गहराई से जुड़े होने के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर आत्मविश्वास से परिपूर्ण हैं और वैश्विक मंच पर भारत की पाक कला उत्कृष्टता का प्रतिनिधित्व करने में सक्षम हैं।

ग्रैंड फिनाले में देश के चारों क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले 10 प्रमुख आतिथ्य संस्थान-  एशियन क्रिश्चियन कलिनरी एंड एग्रीकल्चरल साइंस इंस्टीट्यूट, होसुर; शेफ्स किचन इंस्टीट्यूट ऑफ कलिनरी आर्ट्स एंड होटल मैनेजमेंट, कोल्हापुर; कलिनरी एकेडमी ऑफ इंडिया, हैदराबाद; आईएचएम भुवनेश्वर; आईएचएम कोलकाता; आईएचएम कुफरी; आईएचएम पूसा, नई दिल्ली; आईएचएम हैदराबाद; महाराष्ट्र स्टेट आईएचएमसीटी, पुणे; और सिम्बायोसिस स्कूल ऑफ कलिनरी आर्ट्स एंड न्यूट्रिशनल साइंसेज, पुणे एक साथ शामिल हुए। यह प्रतियोगिता के अखिल भारतीय स्वरूप को दर्शाता है।

फाइनल में पहुंचने वाले प्रतिभागियों का मूल्यांकन एक प्रतिष्ठित जूरी द्वारा किया गया, जिसमें हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम के उप महाप्रबंधक शैफ नंद लाल शर्मा, पैशन 4 हॉस्पिटैलिटी के सलाहकार शैफ और सह-संस्थापक शैफ देबजीत मजूमदार, जीआईएचएमसीटी नागपुर में खाद्य उत्पादन के प्रोफेसर शैफ नितिन शेंडे, ट्रैवल फूड सर्विसेज के कार्यकारी शेफ श्रीनिवास वी और डॉ. एमजीआर एजुकेशनल एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के संयुक्त रजिस्ट्रार शैफ एम. प्रभु शामिल थे। इस जूरी की अध्यक्षता प्रमाणित वर्ल्डशेफ जज शैफ अनिल ग्रोवर ने की।

पीएचडीसीसीआई द्वारा भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय, इंडियन फेडरेशन ऑफ कलिनरी एसोसिएशंस (आईएफसीए) और टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी स्किल काउंसिल (टीएचएससी) के साथ साझेदारी में आयोजित एनवाईसीसी ने भारत की समृद्ध गैस्ट्रोनॉमिक विरासत का उत्‍सव मनाते हुए भारतीय व्यंजनों के लिए एक केंद्रित राष्ट्रीय मंच बनाने के उद्देश्य से छह महीने की राष्ट्रव्यापी पाक कला यात्रा के शानदार परिणाम को चिह्नित किया।

प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए, पीएचडीसीसीआई के पर्यटन एवं आतिथ्य समिति के अध्यक्ष श्री अनिल पाराशर ने कहा कि एनवाईसीसी की परिकल्पना महज एक प्रतियोगिता के रूप में नहीं, बल्कि युवा पेशेवरों के बीच भारतीय व्यंजनों के प्रति गौरव को पुनर्जीवित करने के लिए एक राष्ट्रीय स्‍तर की पहल के रूप में की गई थी। पूरे भारत के संस्थानों से मिली जबरदस्त प्रतिक्रिया इस पहल की प्रासंगिकता और समयबद्धता को प्रमाणित करती है।

एनवाईसीसी संचालन समिति में आईएफसीए के अध्यक्ष शैफ मनजीत गिल, प्रमाणित वर्ल्डशेफ जज शैफ अनिल ग्रोवर, आईएफसीए के संस्थापक सदस्य शैफ सुधीर सिबल, टीएचएससी के सीईओ श्री राजन बहादुर, आईएचएम पूसा के प्रिंसिपल प्रोफेसर कमल कांत पंत और ले मेरिडियन नई दिल्ली के खरीद निदेशक श्री अमरजीत सिंह आहूजा शामिल थे।

इस अवसर पर आईएफसीए के अध्यक्ष और एनवाईसीसी संचालन समिति के अध्यक्ष शैफ मनजीत गिल ने कहा कि भारतीय व्यंजन केवल व्यंजनों का संग्रह नहीं है; यह इतिहास, विज्ञान और सांस्कृतिक स्मृति से अंकुरित एक दर्शन है। एनवाईसीसी युवा शैफों को भारतीय पाक कला की जड़ों का सम्मान करने और ईमानदारी, कौशल और जिम्मेदारी के साथ उनकी पुनर्व्याख्या करने के लिए प्रोत्साहित करता है।

पीएचडीसीसीआई की पर्यटन एवं आतिथ्य समिति के सह-अध्यक्ष श्री राजन सहगल ने कहा कि एनवाईसीसी उद्योग, शिक्षा जगत और सरकार के बीच सहयोग की शक्ति का उत्कृष्ट उदाहरण है। मार्गदर्शन, राष्ट्रीय स्तर पर पहचान और निष्पक्ष मूल्यांकन के साथ, युवा प्रतिभाएं आत्मविश्वास से परिपूर्ण, रोजगार योग्य और भविष्य के लिए तैयार हो जाती हैं।

ग्रैंड फिनाले में एक विशेष लाइव कुकिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें प्रतिभागियों को ढाई घंटे के भीतर एक पारंपरिक भोजन तैयार करने की चुनौती दी गई- जिसमें भाजा, मुख्य व्यंजन, सब्जी और दालें, दही, चावल या रोटी और एक मिठाई शामिल थीं और इसका मूल्यांकन तकनीक, प्रामाणिकता, नवीनता, स्थिरता और प्रस्तुति के आधार पर किया गया।

एनवाईसीसी की यात्रा और भविष्य की दृष्टि को प्रस्तुत करते हुए, पीएचडीसीसीआई की सहायक महासचिव सुश्री शालिनी एस. शर्मा ने कहा कि उद्घाटन समारोह से लेकर उत्तर, पूर्व, पश्चिम और दक्षिण भारत में चार क्षेत्रीय दौरों तक, एनवाईसीसी ने देशभर में 100 से अधिक आतिथ्य संस्थानों को शामिल किया है। इसे एक सतत राष्ट्रीय मंच के रूप में विकसित करने की योजना है। यह एक सुगठित मार्गदर्शन और उद्योग एकीकरण प्रदान करता है।

पीएचडीसीसीआई की पर्यटन एवं आतिथ्य समिति की सह-अध्यक्ष सुश्री मीना भाटिया ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए, एनवाईसीसी को एक प्रमुख राष्ट्रीय पहल के रूप में संस्थागत रूप देने और आने वाले वर्षों में इसके प्रभाव का विस्तार करने के लिए पीएचडीसीसीआई की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

एनवाईसीसी में टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, ली कुम की, नेस्ले प्रोफेशनल, क्रेमिका फूड इंडस्ट्रीज, वीनस इंडस्ट्रीज, हॉस्पिटैलिटी एंड किचन सॉल्यूशंस (एचएकेएस), हिल्टन, रोजेट होटल्स एंड रिसॉर्ट्स, वाघ बकरी टी ग्रुप, वेलबिल्ट इंडिया, मैक्केन फूड्स, शेफ्स अनलिमिटेड, ली मेरिडियन नई दिल्ली और परचेजिंग प्रोफेशनल फोरम इंडिया (पीपीएफआई) शामिल हैं।

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एपीडा ने असम से कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए जैविक उत्पाद सम्मेलन-सह-खरीदार-विक्रेता बैठक का आयोजन किया

नई दिल्ली –  भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने असम सरकार के सहयोग से गुवाहाटी में एक जैविक सम्मेलन-सह-खरीदार-विक्रेता बैठक का आयोजन किया। इस आयोजन का उद्देश्य कृषि-निर्यात संबंधों को सुदृढ़़ करना और असम के कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के लिए बाजार तक पहुंच में सुधार करना था।
इस सम्मेलन में असम के 30 से अधिक निर्यातकों, 9 आयातकों और लगभग 50 किसान उत्पादक कंपनियों (एफपीसी) ने भाग लिया। क्रेता-विक्रेता बैठक ने व्यापारिक संबंधों के लिए एक संरचित मंच प्रदान किया, जिससे हितधारकों को व्यापार के अवसरों का पता लगाने और घरेलू और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के साथ दीर्घकालिक साझेदारी स्थापित करने में मदद मिली।

असम अपनी समृद्ध कृषि-जलवायु विविधता के साथ निर्यात की अपार संभावनाओं वाली कई वस्तुओं का उत्पादन करता है। असम जोहा चावल और विभिन्न गैर-बासमती विशेष चावल किस्मों के अतिरिक्‍त, केला, अनानास, संतरा, असम नींबू, जैविक अदरक, हल्दी, काली मिर्च जैसे फल और सब्जियां, साथ ही बागवानी और अन्य जैविक उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला, वैश्विक कृषि बाजारों में राज्य की उपस्थिति का विस्तार करने के मजबूत अवसर प्रदान करती है।

सम्मेलन में जैविक उत्पादन के राष्ट्रीय कार्यक्रम (एनपीओपी) के आठवें संस्करण पर एक जागरूकता सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें नियामक ढांचा और लेबलिंग संबंधी आवश्यकताएं शामिल थीं। इस सत्र का उद्देश्य निर्यातकों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), किसान उत्पादक संगठनों और उद्यमियों के बीच जागरूकता बढ़ाना था ताकि अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता और प्रमाणन मानकों का अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके। क्रेता-विक्रेता सम्मेलन ने उत्पादकों, निर्यातकों और खरीदारों के बीच प्रत्‍यक्ष संवाद को सुगम बनाया, जिससे नए व्यापारिक साझेदारियों के विकास में सहायता मिली।

असम सरकार के कृषि, बागवानी और उत्पाद शुल्क मंत्री श्री अतुल बोरा ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि असम और पूर्वोत्तर में उच्च गुणवत्ता वाले, जैविक रूप से उगाए गए कृषि और बागवानी उत्पादों का समृद्ध भंडार है। इनमें जोहा चावल, विशेष चावल की किस्में, मसाले, फल और स्वदेशी उत्पाद शामिल हैं, जिनकी वैश्विक स्तर पर मजबूत मांग है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि एकत्रीकरण, प्रमाणीकरण, अवसंरचना और बाजार पहुंच में केंद्रित सहायता और एपीडा की निरंतर साझेदारी के साथ, राज्य क्षेत्रीय कृषि उत्पादों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी निर्यात में परिवर्तित करने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही, यह किसानों के लिए स्थायी आजीविका सुनिश्चित कर रहा है।

असम सरकार की आयुक्त एवं सचिव-सह-कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती अरुणा राजोरिया, आईएएस ने कहा कि असम में जीआई टैग से प्रमाणित और जैविक रूप से उगाए गए अनूठे कृषि उत्पाद हैं जिनकी वैश्विक स्तर पर प्रबल मांग है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि एपेडा  के साथ घनिष्ठ सहयोग से एकत्रीकरण, प्रमाणीकरण और बाजार संबंधों को मजबूत करने से किसानों और उद्यमियों को टिकाऊ और व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य तरीके से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

अपने संबोधन में, एपीडा के अध्यक्ष श्री अभिषेक देव ने एपीडा की निर्यात प्रोत्साहन कार्यकलापों में असम सरकार के समन्वय और सहयोग की सराहना की। उन्होंने संशोधित राष्ट्रीय खाद्य नीति (एनपीओपी) में किसान-हितैषी प्रावधानों और ऑस्ट्रेलिया एवं न्यूजीलैंड के साथ हाल ही में हस्ताक्षरित जैविक पारस्परिक मान्यता समझौतों के साथ-साथ ब्रिटेन, ओमान और ईएफटीए देशों के साथ हाल ही में अंतिम रूप दिए गए मुक्त व्यापार समझौतों के माध्यम से जैविक उत्पादों के लिए विस्तारित बाजार पहुंच द्वारा समर्थित राज्य से कृषि, बागवानी और जैविक निर्यात की अपार संभावनाओं पर प्रकाश डाला।

उद्घाटन सत्र में असम सरकार के कृषि, बागवानी और उत्पाद शुल्क मंत्री श्री अतुल बोरा उपस्थित थे और इसमें असम सरकार की आयुक्त एवं सचिव-सह-कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती अरुणा राजोरिया, आईएएस; एपीडा के अध्यक्ष श्री अभिषेक देव और असम सरकार के कृषि निदेशक श्री उदय प्रवीण, आईएएस ने भाग लिया।

असम जैविक उत्पाद सम्मेलन-सह-खरीदार-विक्रेता बैठक, भारत के कृषि निर्यात विकास गाथा में क्षेत्रीय शक्तियों को एकीकृत करने के लिए एपीडा के निरंतर प्रयासों को दर्शाती है, साथ ही असम को उच्च मूल्य और टिकाऊ कृषि निर्यात में एक प्रमुख योगदानकर्ता के रूप में स्थापित करती है।

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भारतीय नौसेना का पहला प्रशिक्षण दस्ता सिंगापुर से रवाना

नई दिल्ली – भारतीय नौसेना का प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन (1टीएस) 18 जनवरी 2026 को सिंगापुर से रवाना हुआ, जो जारी प्रशिक्षण अभियान के तहत तीन दिवसीय बंदरगाह प्रवास की सफल समाप्ति का प्रतीक है। इस प्रवास के दौरान, पेशेवर आदान-प्रदान, प्रशिक्षण संबंधी परस्‍पर बातचीत, खेल प्रतियोगिताएं, सांस्कृतिक कार्यकलापों और सामाजिक कार्यक्रम सहित कई प्रकार की द्विपक्षीय गतिविधियां आयोजित की गईं।

पेशेवर मुलाकातों के तहत, प्रथम समुद्री सेवा बल (1टीएस) के वरिष्ठ अधिकारी कैप्टन तिजो के जोसेफ ने आईएनएस शार्दुल, आईएनएस सुजाता और आईसीजीएस सारथी के कमान अधिकारियों के साथ समुद्री प्रशिक्षण एवं सिद्धांत कमान (एमअीडीसी) के कार्यवाहक कमांडर कर्नल ताय चूंग हेर्न से शिष्टाचार भेंट की। चर्चा में भारत और सिंगापुर के बीच छह दशक पुरानी साझेदारी रेखांकित की गई, जिसमें सतत सैन्य सहयोग और साझा समुद्री सुरक्षा हितों पर विशेष बल दिया गया। एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि के रूप में, क्रांजी युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की गई, जहां प्रथम समुद्री सेवा बल के जहाजों के कमान अधिकारियों ने शहीदों को श्रद्धांजलि दी।

सिंगापुर में भारत की उच्चायुक्त डॉ. शिल्पक अंबुले और आईएनएस तिर तथा आईसीजीएस सारथी पर तैनात वरिष्ठ अधिकारी प्रथम टीएस ने संयुक्त रूप से एक स्वागत समारोह का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में सिंगापुर गणराज्य की नौसेना के वरिष्ठ नेतृत्व, मिशन प्रमुखों, भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों, राजनयिकों और अन्य विशिष्ट अतिथियों ने भाग लिया। अपने संबोधन में मुख्य अतिथि कर्नल ताय चूंग हेर्न ने नियमित द्विपक्षीय अभ्यासों और बातचीत के माध्यम से पोषित भारतीय नौसेना और सिंगापुर गणराज्य की नौसेना के बीच मजबूत साझेदारी की सराहना की तथा रक्षा संबंधों को और सुदृढ़ करने के लिए सिंगापुर की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

इस यात्रा का एक अभिन्न अंग सांस्कृतिक गतिविधियां थीं, जिसमें भारतीय नौसेना बैंड ने आवर टैम्पाइन्स मॉल और जीआईआईएस सभागार में मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। खेल आयोजनों के अंतर्गत, भारतीय नौसेना और आरएसएन प्रशिक्षुओं के बीच एक मैत्रीपूर्ण डॉजबॉल मैच आयोजित किया गया।

पेशेवर प्रशिक्षण आदान-प्रदान में डीसी सिम्युलेटर पर प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन (1टीएस) के समुद्री प्रशिक्षुओं के लिए क्षति नियंत्रण (डीसी) प्रशिक्षण और आरएसएन संग्रहालय का दौरा शामिल था, जहां उन्हें रॉयल सिंगापुर नौसेना के इतिहास और विकास की व्यापक जानकारी प्रदान की गई। अंतर्राष्ट्रीय फ्यूजन केंद्र (आईएफसी) सिंगापुर के अंतर्राष्ट्रीय संपर्क अधिकारियों (आईएलओ), भारतीय उच्चायोग के कर्मचारियों, मेहमानों और परिवारों सहित आगंतुकों के लिए जहाज खुले थे। इससे उन्हें भविष्य के नौसैनिक नेतृत्व को आकार देने में प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन की भूमिका को देखने का अवसर प्राप्त हुआ।

स्क्वाड्रन ने परोपकारी कार्यकलापों में भी भाग लिया, जिसमें एक प्रतिनिधिमंडल ने श्री नारायण वृद्धाश्रम और नर्सरी के निवासियों के साथ परस्‍पर बातचीत करते हुए एक दोपहर बिताई, जो सामाजिक जिम्मेदारी और सामुदायिक जुड़ाव के प्रति भारतीय नौसेना की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन की सिंगापुर में तैनाती दोनों देशों के बीच गहरे संबंधों का उदाहरण है और यह महासागर (क्षेत्रीय सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति) की परिकल्पना के अनुरूप है। यह दौरा भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी को और मजबूत करता है, दक्षिण एशिया से परे हिंद महासागर और दक्षिणपूर्व एशियाई क्षेत्र में इसकी समुद्री पहुंच का विस्तार करता है। साथ ही, मित्रता को बढ़ावा देने, प्रशिक्षण अनुभवों को बेहतर बनाने और एक सुरक्षित एवं सहयोगात्मक समुद्री वातावरण में योगदान देने के लिए भारतीय नौसेना की अटूट प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।

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केंद्रीय मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल के कार्यालय ने फर्जी पत्र पर अपना स्पष्टीकरण जारी किया

नई दिल्ली – केंद्रीय मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल के कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि मंत्री के फर्जी आधिकारिक लेटरहेड और हस्ताक्षर वाला एक जाली पत्र दुर्भावनापूर्ण इरादे से प्रसारित किया जा रहा है। कार्यालय की ओर से कहा गया कि पत्र और उसकी सामग्री पूरी तरह से फर्जी और मनगढ़ंत हैं।

इस प्रकार की भ्रामक सामग्री का प्रसार एक गंभीर अपराध है, जिसमें जालसाजी, फर्जी पहचान बनाना और सरकारी दस्तावेजों का दुरुपयोग शामिल है। इसका मुख्य उद्देश्य गलत सूचना फैलाना और संवैधानिक सत्ता की छवि को धूमिल करना है। इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है और कानून प्रवर्तन एजेंसियों से अनुरोध किया गया है कि वे मामले की प्राथमिकता के आधार पर जांच करें और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करें।

आम जनता और मीडिया को सलाह दी जाती है कि वे इस तरह की मनगढ़ंत और अपुष्ट सामग्री पर भरोसा न करें और केवल आधिकारिक और अधिकृत स्रोतों से ही जानकारी की पुष्टि करें।

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उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आत्मकथा ‘पालनिवेलु गट्स’ के हिंदी संस्करण का विमोचन किया

नई दिल्ली – उपराष्ट्रपति, श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज जाने-माने सर्जन डॉ. सी. पलानीवेलु की आत्मकथा ‘पलानीवेलु गट्ज़’ के हिंदी संस्‍करण का विमोचन किया और इस किताब को साहस, लगन और मेडिसिन के क्षेत्र में नैतिक नवोन्‍मेष का एक प्रेरणादायक उदाहरण बताया।

 

इस मौके पर, उपराष्ट्रपति ने डॉ. पलानीवेलु के लेप्रोस्कोपिक और रोबोटिक सर्जरी में अग्रणी योगदान को उजागर किया, और कहा कि उनके काम ने भारत में सर्जिकल तरीकों को बदल दिया है और उन्हें दुनिया भर में पहचान दिलाई है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब देश में मिनिमली इनवेसिव सर्जरी अभी शुरुआती दौर में थी, डॉ. पलानीवेलु ने मरीज़ों की देखभाल में नवोन्‍मेष को गले लगाकर असाधारण दूरदर्शिता और साहस दिखाया।

भारत में लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के शुरुआती दिनों को याद करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि 1990 के दशक की शुरुआत में डॉ. पलानीवेलु उन शुरूआती लोगों में से थे जिन्होंने इसकी क्षमता को पहचाना, तब भी जब इस तकनीक पर संदेह किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि डॉ. पलानीवेलु ने 1991 में कोयंबटूर में लेप्रोस्‍कोपिक सर्जरी शुरू की, और दक्षिण भारत में ऐसा पहला केन्‍द्र स्थापित किया।

किताब के शीर्षक, पालनिवेलु गट्स का ज़िक्र करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह आत्मकथा सिर्फ़ एक सफल सर्जन की कहानी नहीं है, बल्कि एक ऐसे युवा की यात्रा है जिसने साधारण शुरुआत से लेकर अनुशासन, कड़ी मेहनत और नैतिक विश्वास के ज़रिए मुश्किलों और असफलताओं का मुकाबला किया। उन्होंने आगे कहा कि जब तक व्यक्तियों के ईमानदार प्रयासों और अनुकरणीय योगदान को पहचाना और सराहा नहीं जाता, तब तक एक अच्छा समाज नहीं बनाया जा सकता।

भारत की विविधता पर विचार करते हुए, उपराष्ट्रपति ने टिप्पणी की कि इतनी विविधताओं के बावजूद, भारत एक रहा है और साझा मूल्यों और सामूहिक आकांक्षाओं से बंधा हुआ हमेशा एक रहेगा। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि हिंदी संस्करण का विमोचन विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह समाज के एक बड़े वर्ग, विशेष रूप से हिंदी पढ़ने वालों को, इस उल्लेखनीय जीवन यात्रा तक पहुँचने और उससे प्रेरणा लेने में सक्षम बनाएगा।

डॉ. पलानीवेलु के अपने शिक्षकों और गुरुओं के प्रति गहरे सम्मान की सराहना करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि उनके नाम पर पुरस्कार शुरू करने की उनकी प्रथा भारत की “गुरुओं” के प्रति श्रद्धा की सदियों पुरानी परंपरा को दर्शाती है और उत्कृष्टता की खोज में विनम्रता और कृतज्ञता के महत्व को रेखांकित करती है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि समाज हर व्यक्ति को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और समाज को वापस देना हर व्यक्ति का कर्तव्य है। दूरदराज के इलाकों में सर्जनों को प्रशिक्षित करने और लागत प्रभावी सर्जिकल तकनीकों को विकसित करने के डॉ. पलानीवेलु के प्रयासों की सराहना करते हुए, उन्होंने कहा कि इन पहलों ने सामाजिक-आर्थिक समूहों में उन्नत चिकित्सा देखभाल तक पहुंच का काफी विस्तार किया है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पलानीवेलु गट्स पीढ़ियों को बड़े सपने देखने, ईमानदारी से काम करने और निस्वार्थ भाव से समाज की सेवा करने के लिए प्रेरित करेगा।

इस कार्यक्रम में रेल राज्य मंत्री, श्री रवनीत सिंह; नेशनल मेडिकल कमीशन के चेयरमैन, डॉ. अभिजात सेठ; इंटर-यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर टीचर एजुकेशन के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के चेयरमैन, प्रो. डॉ. जे. एस. राजपूत; और जीईएम हॉस्पिटल ग्रुप के सीनियर प्रतिनिधियों सहित कई लोग शामिल हुए।

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भारत स्टील इस्पात के भविष्य पर वैश्विक संवाद को आकार देगा

नई दिल्ली – भारत स्टील 2026 की मेजबानी के लिए देश तैयार है। भारत स्टील इस्पात के भविष्य को नया आकार देने वाला एक वैश्विक मंच है। इसका उद्देश्य इस्पात के अनुसंधान एवं विकास, डिजिटलीकरण, नवाचार और उच्च कुशल इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी मानव संसाधनों तक पहुंच के माध्यम से निर्मित वैश्विक इस्पात उत्पादन के अगले युग को प्रदर्शित करने का है। नई दिल्ली में आयोजित होने वाले इस दो दिवसीय शिखर सम्मेलन का लक्ष्य नीति निर्माताओं, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को एक साथ लाकर इस दशक की प्रमुख चुनौतियों का सामना करना: सुगम आपूर्ति श्रृंखलाओं का निर्माण और कम उत्सर्जन वाले इस्पात उत्पादन की ओर संक्रमण को गति देना है।

भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने जोर देते हुए कहा कि इस्पात ने आधुनिक अर्थव्यवस्थाओं में एक ढाँचे की तरह एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि चाहे गगनचुंबी इमारतें हों, जहाजरानी, ​​राजमार्ग, उच्च गति रेल, स्मार्ट शहर या औद्योगिक गलियारे हों, इस्पात हर सफलता की कहानी की शक्ति है। उन्होंने इंडिया स्टील 2025 के दौरान कहा, “भारत 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रयासरत है, जिसमें इस्पात क्षेत्र इस मिशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।” उन्होंने भारत के विश्व का दूसरा सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक होने पर गर्व व्यक्त किया।

प्रधानमंत्री का यह दृष्टिकोण इस वर्ष के भारत इस्पात शिखर सम्मेलन की आधारशिला है, जिसका उद्देश्य आर्थिक अनिश्चितता, खंडित व्यापार प्रवाह, बढ़ते संरक्षणवादी शुल्क और शुद्ध शून्य लक्ष्यों को प्राप्त करने की तत्काल आवश्यकता के दौर में इस्पात क्षेत्र के लिए एक वैश्विक रूपरेखा तैयार करना है।

भारत का नेतृत्व, क्षमता और महत्वाकांक्षा दोनों में निहित है: एक तो यह कि भारत पहले से ही सबसे बड़े इस्पात उत्पादकों में से एक है, और दूसरा यह कि उसने वर्ष 2030 तक 300 मीट्रिक टन और वर्ष 2047 तक 500 मीट्रिक टन इस्पात उत्पादन क्षमता का राष्ट्रीय लक्ष्य निर्धारित किया है। भारत में इस्पात की मांग बुनियादी ढांचे, आवास, रेलवे, रक्षा और ऊर्जा क्षेत्रों में लगातार बढ़ रही है। लेकिन 500 मीट्रिक टन का लक्ष्य हासिल करने के लिए केवल अतिरिक्त क्षमता की आवश्यकता नहीं है; इसके लिए सुरक्षित कच्चे माल, पूर्वानुमानित नियम और नवाचार-आधारित आधुनिकीकरण की आवश्यकता है। घरेलू प्रसंस्करण को मजबूत करना, कुकिंग कोयले पर निर्भरता कम करना, बेहतर लॉजिस्टिक्स और कुशल अनुमोदन इस आपूर्ति-पक्ष के प्रयासों की रीढ़ हैं।

विशेष इस्पात के लिए सरकार की उत्पादन से संबद्ध प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना इस क्षेत्र को नया रूप दे रही है, जिससे भारत कमोडिटी-ग्रेड उत्पादन से हटकर उच्च-मूल्य वाले सटीक इंजीनियरिंग इस्पात की ओर अग्रसर हो रहा है, जो एयरोस्पेस, ऑटोमोटिव, रक्षा और उन्नत अवसंरचना के लिए आवश्यक है।

‘हरित’ इस्पात भारत की प्रतिस्पर्धा का आधार है। इस्पात मंत्रालय की वर्ष 2024 हरित इस्पात रूपरेखा में स्वच्छ ऊर्जा एकीकरण, हरित हाइड्रोजन प्रायोगिक परियोजनाओं, सीसीयूएस का उपयोग, स्क्रैप के विस्तारित उपयोग और प्रत्यक्ष इलेक्ट्रोलाइसिस जैसे उभरते मार्गों की दिशा में संक्रमण की रूपरेखा दी गई है।

डिजिटलीकरण; जिसमें आईओटी निगरानी, ​​रोबोटिक्स, स्वचालन और पूर्वानुमानित रखरखाव शामिल हैं; शिखर सम्मेलन का एक प्रमुख विषय होगा। एआई-आधारित अनुकूलन से दक्षता में वृद्धि, अपशिष्ट में कमी और गुणवत्ता में सुधार का वादा किया गया है। इस तकनीकी प्रोत्साहन को विस्तारित अनुसंधान एवं विकास, गहन साझेदारी, स्पष्ट प्रौद्योगिकी हस्तांतरण मार्गों और उभरती प्रक्रियाओं के लिए प्रायोगिक-स्तरीय परीक्षणों द्वारा सुदृढ़ किया जाएगा।

वैश्विक व्यापार में कार्बन लेखांकन मानदंडों की ओर बढ़ते कदम के साथ, भारत का लक्ष्य कम कार्बन उत्सर्जन वाले उच्च गुणवत्ता वाले इस्पात के प्रमुख निर्यातक के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करना है। राष्ट्रीय इस्पात रणनीति में हाइड्रोजन आधारित डीआरआई, सीसीयूएस और इलेक्ट्रोलाइसिस प्रौद्योगिकियों में संयुक्त उद्यमों को प्राथमिकता दी गई है, जिन्हें लक्षित निवेश प्रोत्साहनों द्वारा समर्थित किया गया है।

इस प्रकार, भारत स्टील शिखर सम्मेलन एक महत्वपूर्ण क्षण है; एक ऐसा क्षण जिसमें भारत एक ऐसे इस्पात क्षेत्र के लिए वैश्विक रूपरेखा तैयार करना चाहता है जो सुरक्षित, प्रतिस्पर्धी, जलवायु के अनुकूल और भविष्य के लिए तैयार हो। यह दिशा सुनिश्चित करेगी कि इस्पात न केवल भारत के बुनियादी ढांचे की रीढ़ बना रहे, बल्कि टिकाऊ प्रगति और वैश्विक औद्योगिक नेतृत्व का आधार भी हो।

शिखर सम्मेलन में इस्पात मूल्य श्रृंखला के विभिन्न पहलुओं का प्रतिनिधित्व करने वाले 700 से अधिक वैश्विक प्रतिनिधि भाग लेंगे। साझेदार देशों का मंडप, साझेदार राज्यों का मंडप, सार्वजनिक क्षेत्र के “महारत्न”, इस्पात और संबद्ध क्षेत्र के अग्रणी निजी क्षेत्र के उद्यम, स्केल-अप और स्टार्ट-अप, नवप्रवर्तक और निवेशक, आत्मनिर्भरता, नवाचार, तकनीकी रूप से उन्नत और आर्थिक रूप से सुगम देश पर जोर देकर प्रधानमंत्री के विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण को मजबूत करने के शिखर सम्मेलन के व्यापक उद्देश्य के महत्व को बढ़ाएंगे।

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‘मेक इन इंडिया’ बुलेट ट्रेन परियोजना को ताकत दे रहा है

कॉरिडोर में ऊपरी विद्युतीकरण मस्तूल (ओएचई) के स्थापना कार्य के साथ मुंबई–अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में लगातार प्रगति देखी जा रही है। यह विकास भारत की पहली उच्च गति रेल प्रणाली के लिए विद्युत कर्षण सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत जमीन पर हो रहे निरंतर क्रियान्वयन को प्रतिबिंबित करता है। ऐसा करके यह घरेलू निर्माण क्षमताओं को मजबूत कर रहा है और वैश्विक रूप से प्रमाणित उच्च गति रेल तकनीक को अपना रहा है।

 

ओएचई मस्तूलों की स्थापना संरेखण के प्रमुख खंडों, जिसमें वायडक्ट खंड शामिल हैं, में चल रही है ताकि उच्च गति वाली ट्रेनों के सुरक्षित, सुचारू और प्रभावी संचालन को सुनिश्चित किया जा सके। ये मस्तूल  कर्षण अवसंरचना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जो कॉरिडोर पर चलने वाली बुलेट ट्रेनों को विश्वसनीय बिजली आपूर्ति प्रदान करने के लिए आवश्यक हैं।

ओएचई मस्तूलों को भू-स्तर से काफी ऊंचाई पर बने वायाडक्ट्स पर स्थापित किया जा रहा है। कुल मिलाकर, 9.5 से 14.5 मीटर तक की ऊंचाई वाले 20,000 से अधिक मस्तूलों को कॉरिडोर के साथ स्थापित किया जाएगा। ये मस्तूल पूरे 2×25 केवी ऊपरी कर्षण विद्युत प्रणाली का समर्थन करेंगे, जिसमें ऊपरी तार, भू-संपर्क व्यवस्था (अर्थिंग व्यवस्था), फिटिंग और बुलेट ट्रेन संचालन के लिए आवश्यक अन्य सहायक उपकरण शामिल हैं।

निर्बाध कर्षण विद्युत सुनिश्चित करने के लिए, मुंबई–अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के साथ कर्षण उपस्टेशन (टीएसएस) और वितरण उपस्टेशन (डीएसएस ) का एक नेटवर्क विकसित किया जा रहा है।

ओएचई मस्तूल ऊर्ध्वाधर इस्पात संरचनाएं हैं, जो रेलवे लाइन के साथ स्थापित की जाती हैं और ऊपरी विद्युत तारों को सहारा देती हैं। ये तारों की सही ऊंचाई, संरेखण और तन्यता बनाए रखती हैं, जिससे विद्युत चालित रेलों को निरंतर और सुरक्षित विद्युत आपूर्ति मिलती है।

एक बार पूरा होने के बाद, मुंबई–अहमदाबाद बुलेट ट्रेन दो शहरों के बीच यात्रा को तेज और सुविधाजनक बना देगा तथा कॉरिडोर के साथ परिवहन संपर्क में सुधार करेगा। इस परियोजना से रोजगार सृजन और मजबूत विनिर्माण के जरिये यात्रियों, स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं और भारतीय उद्योग को लाभ मिलने की उम्मीद है। यह देश में उन्नत रेलवे तकनीक को अपनाने और विश्व-स्तरीय रेल अवसंरचना के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम को भी रेखांकित करता है।

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DC Ranchi श्री मंजूनाथ भजंत्री और SSP Ranchi श्री राकेश रंजन ने संयुक्त रूप से सर्व धर्म सद्भावना समिति द्वारा आयोजित सद्भावना सम्मान समारोह में भाग लिया

राँची जिला प्रशासन द्वारा सर्वधर्म सदभावना समिति के सहयोग की सराहना

आगामी पर्व-त्योहारों की शांतिपूर्ण तैयारी पर विस्तृत चर्चा

सोशल मीडिया पर गलत संदेशों से सावधान रहने की अपील

रांची,20.01.2026 – उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री एवं वरीय पुलिस अधीक्षक राँची श्री राकेश रंजन ने आज संयुक्त रूप से सर्वधर्म सदभावना समिति द्वारा आयोजित सदभावना सम्मान समारोह में भाग लिया। इस अवसर पर आगामी पर्व-त्योहारों की तैयारी, शांतिपूर्ण आयोजन एवं समाज में भाईचारे को बनाए रखने हेतु विस्तृत चर्चा की गई।

कार्यक्रम में अनुमंडल पदाधिकारी सदर राँची श्री कुमार रजत, अपर जिला दंडाधिकारी (विधि-व्यवस्था) श्री राजेश्वर नाथ, उप प्रशासक राँची नगर निगम राँची, श्री गौतम कुमार, सर्वधर्म सदभावना समिति के प्रमुख सदस्य डॉ. अजीत सहाय, श्री जय सिंह यादव, मो. इस्लाम, बार एसोसिएशन के सचिव और मुमताज़ खान, श्री परमजीत सिंह टिंकू, श्री तपेश्वर केसरी, अकीलुल रहमान एवं समाज के अन्य प्रबुद्धजन विशेष रूप से उपस्थित रहे।

अपने संबोधन में उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने सर्वधर्म सदभावना समिति के निरंतर सहयोग की भूरि-भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा,“सर्वधर्म सदभावना समिति के सदस्यों का जिला प्रशासन को लगातार मिलता रहा सहयोग सराहनीय है। इसी सहयोग के कारण राँची जिले में सभी पर्व-त्योहार भाईचारे एवं शांति के साथ सफलतापूर्वक संपन्न हो रहे हैं। मैं सभी सदस्यों से अपील करता हूँ कि आगामी सभी पर्वों में भी अपनी सक्रिय सहभागिता निभाएँ, ताकि राँची जिला हर वर्ष शांतिपूर्ण ढंग से सभी त्योहार मना सके।”

केवल सत्यापित एवं सकारात्मक संदेशों का ही आदान-प्रदान करें, ताकि समाज में शांति एवं सद्भाव बना रहे

उपायुक्त ने सोशल मीडिया के दुरुपयोग पर विशेष चिंता जताते हुए कहा, “सोशल मीडिया पर अफवाहें, गलत एवं भड़काऊ संदेश समाज में अराजकता फैला सकते हैं। कृपया केवल सत्यापित एवं सकारात्मक संदेशों का ही आदान-प्रदान करें, ताकि समाज में शांति एवं सद्भाव बना रहे।”

वरीय पुलिस अधीक्षक राँची ने अपने संबोधन में कहा,“राँची पुलिस को सर्वधर्म सदभावना समिति एवं समाज के प्रबुद्धजनों का हमेशा पूर्ण सहयोग प्राप्त होता रहा है। इसी सहयोग के बल पर हम राँची जिले में सभी पर्व-त्योहारों को बेहतरीन ढंग से संपन्न कर पाते हैं। हम सभी से अपेक्षा करते हैं कि आगे भी यह सहयोग जारी रहेगा।”

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सभी सदस्यों ने आगामी पर्वों को शांतिपूर्ण बनाने हेतु प्रशासन के साथ मिलकर कार्य करने का संकल्प लिया।

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राँची जिला प्रशासन की पहल: हर मंगलवार प्रखंड एवं अंचल कार्यालयों में जनता दरबार का नियमित आयोजन

उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देश पर त्वरित समाधान सुनिश्चित करने की पहल

*जनता दरबार में ग्रामीणों एवं आम नागरिकों की विभिन्न प्रकार की शिकायतें प्राप्त हो रही हैं जिनमें भूमि विवाद एवं दाखिल-खारिज,जाति, आय, आवासीय एवं स्थानीय प्रमाण-पत्र निर्गमन एवं सुधार एवं अन्य शिकायत

“जनता दरबार प्रशासन और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। हमारा प्रयास है कि कोई भी नागरिक बिना वजह परेशान न हो और उसकी शिकायत का समाधान पारदर्शी एवं त्वरित रूप से हो:- उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री

रांची, 20.01.2026 – उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देशानुसार जिले के सभी प्रखंड एवं अंचल कार्यालयों में प्रत्येक मंगलवार को जनता दरबार का लगातार आयोजन किया जा रहा है।

इस पहल का मुख्य उद्देश्य आम नागरिकों, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों के निवासियों की समस्याओं को सुनना, उनका त्वरित निस्तारण करना तथा प्रशासन को जन-केंद्रित एवं पारदर्शी बनाना है।

जनता दरबार में ग्रामीणों एवं आम नागरिकों की विभिन्न प्रकार की शिकायतें प्राप्त हो रही हैं, जिनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

भूमि विवाद एवं दाखिल-खारिज संबंधी मामले

जाति, आय, आवासीय एवं स्थानीय प्रमाण-पत्र निर्गमन एवं सुधार

पेंशन (वृद्धावस्था, विधवा, दिव्यांग) से जुड़ी शिकायतें

मनरेगा, कृषि ऋण माफी, केसीसी एवं सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के लंबित भुगतान

 अन्य राजस्व एवं प्रशासनिक मामलों से संबंधित परेशानियाँ

इनमें से अधिकांश मामलों का त्वरित गति से निष्पादन किया जा रहा है। कई शिकायतों का मौके पर ही समाधान हुआ। जो मामले जटिल हैं, लंबित हैं या तुरंत समाधान संभव नहीं है, उन पर नियम-संगत कार्रवाई हेतु संबंधित विभागों/कार्यालयों को अग्रसारित कर दिया जाता है।

उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने सभी अंचल अधिकारियों, प्रखंड विकास पदाधिकारियों एवं संबंधित अधिकारियों/कर्मचारियों को सख्त निर्देश दिए हैं कि जनता दरबार के दौरान प्रखंड एवं अंचल कार्यालय में वे स्वयं उपस्थित रहें। इससे आम नागरिकों को बार-बार कार्यालय के चक्कर लगाने से राहत मिलेगी तथा उनकी समस्याओं का प्रभावी एवं समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित होगा।

विभिन्न अंचलों में निष्पादित आवेदनों का विवरण निम्नलिखित है:

अंचल कार्यालय, राहे

कुल निष्पादित मामले: -58

1. पारिवारिक सदस्यता प्रमाण पत्र: 01

2. ऑनलाइन पंजी-II सुधार: 02

3. जाति प्रमाण पत्र: 10

4. आय प्रमाण पत्र: 15

5. आवासीय प्रमाण पत्र: 30

अंचल कार्यालय, अनगड़ा

निष्पादित आवेदन: 106

1. दाखिल-खारिज: 32

2. आवासीय प्रमाण पत्र: 20

3.जाति प्रमाण पत्र: 15

4. आय प्रमाण पत्र: 25

5. पंजी-II सुधार: 09

6. परमिशन: 04

7. पारिवारिक सदस्यता: 01

अंचल कार्यालय, खलारी

कुल निष्पादित आवेदन: *28

1. जाति प्रमाण पत्र: 04

2. आवासीय प्रमाण पत्र: 09

3. तत्काल आवेदन: 06

4. आय प्रमाण पत्र: 06

5. पारिवारिक प्रमाण पत्र: 02

6. आचरण प्रमाण पत्र: 01

अंचल कार्यालय, सिल्ली

कुल निष्पादित आवेदन: 42

1. तत्काल (जाति, आय, आवासीय): 05

2. आचरण प्रमाण पत्र: 04

3. आवासीय प्रमाण पत्र: 11

4. जाति प्रमाण पत्र: 07

5. आय प्रमाण पत्र: 15

अंचल कार्यालय, नगड़ी

कुल निष्पादित आवेदन: 160

1. तत्काल (जाति, आय, आवासीय): 01

2. आवासीय प्रमाण पत्र: 24

3. जाति प्रमाण पत्र: 54

4.+आय प्रमाण पत्र: 69

5. पारिवारिक सदस्यता: 03

6. दाखिल-खारिज: 01

7. सुधार वशुधा: 08

अंचल कार्यालय, बेड़ो

कुल निष्पादित आवेदन: 80

1. दाखिल-खारिज शुद्धि पत्र: 12

2. पंजी-II सुधार: 01

3. पारिवारिक सदस्यता: 01

4. EWS प्रमाण पत्र: 08

5. आवासीय प्रमाण पत्र: 16

6. जाति प्रमाण पत्र: 17

7.आय प्रमाण पत्र: 10

8.:तत्काल आवेदन: 11

9.परमिशन: 04

अंचल कार्यालय, चान्हो

कुल निष्पादित आवेदन: 136

1. दाखिल-खारिज शुद्धि पत्र: 09

2. पारिवारिक सदस्यता: 08

3. आवासीय प्रमाण पत्र: 45

4. जाति प्रमाण पत्र: 30

5. आय प्रमाण पत्र: 30

6. तत्काल आवेदन: 14

अंचल, कार्यालय बुढमू

कुल निष्पादित आवेदन की क्रमवार संख्या- 60

1. आवासीय प्रमाण पत्र- 10

2. जाति प्रमाण पत्र- 8

3. आय प्रमाण पत्र- 21

4. पारिवारिक सदस्यता प्रमाणपत्र – 03

5. DCLR Module- 4

6. 46(i) a अनुमति वाद – 1

7. दाखिल खारिज- 11

8. पंजी II सुधार – 2

श्री भजन्त्री ने कहा, “जनता दरबार प्रशासन और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित करने का एक महत्वपूर्ण माध्यम है। हमारा प्रयास है कि कोई भी नागरिक बिना वजह परेशान न हो और उसकी शिकायत का समाधान पारदर्शी एवं त्वरित रूप से हो। लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।”

यह पहल राज्य सरकार की जन-कल्याणकारी नीतियों के अनुरूप है तथा जिला प्रशासन द्वारा लगातार इसकी निगरानी की जा रही है। नागरिकों से अपील है कि वे अपनी समस्याओं के साथ निकटतम प्रखंड/अंचल कार्यालय में हर मंगलवार को जनता दरबार में पहुंचें तथा लाभ उठाएं।

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DC Ranchi मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में जनता दरबार का आयोजन

अंचल अधिकारी इटकी को कड़ी फटकार लगाते हुए उन्हें शो-कॉज किया एवं नगड़ी के राजस्व कर्मचारी पर कार्रवाई करने का निर्देश

अंचल अधिकारी सोनाहातु एवं कर्मचारी को शो-कॉज करते हुए स्पष्टीकरण मांगा गया

16 परिवारों के लोग पुनः विस्थापित होने की आशंका से भयभीत भू-माफियाओं के विरुद्ध तत्काल कानूनी कार्रवाई करने के निर्देश

100 वर्ष पुराने ऐतिहासिक बसारगढ़ तालाब को जेसीबी मशीन द्वारा तालाब के किनारों को कुछ दिनों पूर्व में काटकर अस्तित्व को समाप्त करने की शिकायत पर कार्रवाई

रांची,20.01.2026 – उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने  19 जनवरी 2025 को समाहरणालय अवस्थीत कार्यालय कक्ष में जनता दरबार का आयोजन किया।

इस दरबार में जिले के सुदूर ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों से सैकड़ों की संख्या में नागरिक अपनी विभिन्न समस्याओं एवं फरियाद लेकर पहुंचे।

लोगों ने मुख्य रूप से भूमि विवाद, सामाजिक सुरक्षा पेंशन से जुड़े मामले, प्रमाण-पत्रों का निर्गमन, राजस्व संबंधी प्रकरण, जनकल्याणकारी योजनाओं के लाभ में विलंब तथा विकास कार्यों से जुड़ी अन्य शिकायतें उपायुक्त के समक्ष रखीं।

श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने प्रत्येक आवेदक की समस्या को पूर्ण गंभीरता एवं संवेदनशीलता से सुना। उन्होंने संबंधित विभागीय पदाधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि सभी मामलों का प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र, गुणवत्तापूर्ण एवं समय-सीमा के भीतर निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। उपायुक्त ने सख्त लहजे में कहा कि किसी भी प्रकार की लापरवाही, विलंब या लंबित शिकायत को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने सभी अधिकारियों को निर्देशित किया कि वे निर्धारित समय-सीमा में कार्रवाई पूरी कर प्रतिवेदन प्रस्तुत करें।

उपायुक्त ने विशेष जोर देते हुए कहा कि जनता दरबार का मूल उद्देश्य आम नागरिकों को एक ही मंच पर सभी विभागों की उपस्थिति में त्वरित, सरल, पारदर्शी और न्यायसंगत समाधान उपलब्ध कराना है। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि आवश्यकता पड़ने पर स्वयं स्थल निरीक्षण कर वस्तुस्थिति की जांच करें तथा गंभीर प्रकृति के मामलों में तथ्यात्मक रिपोर्ट उपलब्ध कराएं।

श्री भजन्त्री ने आगे कहा, “शासन प्रणाली को जन-केन्द्रित एवं उत्तरदायी बनाने की दिशा में जनता दरबार एक महत्वपूर्ण कदम है। इसमें संवेदनशीलता, पारदर्शिता और जवाबदेही सर्वोपरि होनी चाहिए। किसी भी शिकायत का अनावश्यक लंबित रहना प्रशासन के लिए स्वीकार्य नहीं है।”

अंचल अधिकारी इटकी को कड़ी फटकार लगाते हुए उन्हें शो-कॉज किया एवं नगड़ी के राजस्व कर्मचारी पर कार्रवाई करने का निर्देश

अली हसन उम्र -90 वर्ष स्व. पिता शहादत अली इनलोगों में सारें वारिसों में सम्पति का बंटवारा हो चुका है, सभी अपने-अपने हिस्से में काबिज हैं। इन्होंने अपनी पूर्वजों से मिली जमीन का जमाबन्दी कराने के लिए इटकी अंचल में आवेदन दिया। लेकिन इन्हें अंचल अधिकारी और कर्मचारी द्वारा बार-बार दौड़ने की बात उपायुक्त से कही गई, जिसपर वीडियो कॉन्फ्रेंस के माध्यम से अंचल अधिकारी इटकी मो. अनीश को कड़ी फटकार लगाते हुए उन्हें शो-कॉज करते हुए, साथ ही नगड़ी के सम्बंधित राजस्व कर्मचारी अनीता हेमरोम पर कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

अंचल अधिकारी सोनाहातु एवं कर्मचारी से स्पष्टीकरण मांगा गया

प्रकाश कुमार महतो पिता स्व. निशिकांत ग्राम+पोस्ट – सोनाहातु ने सोनाहातु अंचल में पंजी -2 सुधार के लिए अगस्त 2024 में आवेदन दिया। लेकिन इतना समय बीतने के बाद भी इनके पंजी- 2 में सुधार नही किया गया। जनता दरबार में आई शिकायत पर उपायुक्त ने कार्रवाई करते हुए अंचल अधिकारी सोनाहातु श्री मनोज कुमार महथा एवं कर्मचारी को शो-कॉज करते हुए स्पष्टीकरण मांगा गया।

सम्बंधित पदाधिकारी को पुरे मामलें को गंभीरता पूर्वक देखने का निर्देश दिया गया

जनता दरबार में ग्राम बादालु निवासियों ने बसंतपुर से ग्राम बादालु में आदिवासी सरना पूजा स्थल घेराव अनियमिता की शिकायत किया। जिसपर उपायुक्त ने तत्काल निर्देश देते हुए सम्बंधित पदाधिकारी को पुरे मामलें को गंभीरता पूर्वक देखने का निर्देश दिया।

त्वरित संज्ञान लेते हुए सम्बंधित पदाधिकारी को पुरे मामले को की जाँच करने के निर्देश

बुढ़मू निवासी भुटकी देवी ने जनता दरबार में उपायुक्त से शिकायत करते हुए कहा की बुढ़मू थाना में दर्ज कांड में बनाए आरोपी कामेश्वर यादव पिता लुरका यादव, द्वारा दुर्व्यवहार एवं शोषण करने की शिकायत की जिसपर उपायुक्त द्वारा त्वरित संज्ञान लेते हुए सम्बंधित पदाधिकारी को पुरे मामले को की जाँच करने के निर्देश दिया।

16 परिवारों के सदस्य पुनः विस्थापित होने की आशंका से भयभीत भू-माफियाओं के विरुद्ध तत्काल कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश

गेतलसुद डैम से 1962 में विस्थापित 16 परिवारों द्वारा 1966 में बुड़मू अंचल, मौजा साड़म में कुल 104.67 एकड़ जमीन खरीदी गई (खाता 22, 48, 78, 91, 94-96, 100-104, 109, 112, 170 आदि) जिसपर 1966 से निरंतर कब्जा एवं खेती किया जा रहा हैं। 2014 से भूमि अभिलेख ऑनलाइन नहीं हो पाया है, जिस कारण भू-माफियाओं द्वारा वर्तमान में 15-20 एकड़ पर JCB, ट्रेक्टर से अवैध समतलीकरण, घेराबंदी एवं सरकारी तालाब नष्ट करने का प्रयास किया जा रहा है। 16 परिवारों के सदस्य पुनः विस्थापित होने की आशंका से भयभीत भू-माफियाओं के विरुद्ध तत्काल कानूनी कार्रवाई एवं भूमि रिकॉर्ड शीघ्र ऑनलाइन करने की मांग करने की मांग उपायुक्त से की जिसपर उनके द्वारा तत्काल संज्ञान लेते हुए वरीय पुलिस अधीक्षक राँची एवं अनुमंडल पदाधिकारी को जाँच कर कार्रवाई करने का निर्देश दिया।

वरीय पुलिस अधीक्षक और अनुमंडल पदाधिकारी को कार्रवाई करने के लिए निर्देश दिए गए

जनता दरबार में पुनम देवी राँची जिले के बुडमू थाना क्षेत्र के ग्राम साइम की निवासी ने बताया कि इनके पैतृक धार्मिक भूमि पर चोरी हुई, साथ ही इनके मार-पीट की गई जिससे इनके गर्भ में पल रहें चार महीने का गर्भ गिर गया जिसको लेकर इन्होंने स्थानीय थाने में FIR दर्ज कराई लेकिन आरोपी के प्रभावशाली होने के कारण कोई कार्रवाई नहीं हुई। जिसपर उपायुक्त ने इसे गंभीरता से लेते हुए वरीय पुलिस अधीक्षक और अनुमंडल पदाधिकारी को कार्रवाई करने के लिए निर्देश दिया।

आवेदक द्वारा अंचल अधिकारी नामकुम पर मनगढ़ंत आरोप लगाने वाले आवेदक पर जाँच कर कार्रवाई करने के निर्देश

जनता दरबार में सुरेखा कुमारी पिता /पति विनोद यादव ग्राम डुंगरी थाना नामकुम, अंचल नामकुम अपने दाखिल ख़ारिज वाद को लेकर अंचल अधिकारी नामकुम के ऊपर आरोप लगाया, जिसपर उपायुक्त ने तत्काल सत्यता की जाँच करने पर पाया की लगाया गया आरोप सही नही है। इस तरह के आरोप पर उपायुक्त ने सम्बंधित अधिकारी को जाँच करने के निर्देश दिया। ताकि कोई आवेदक ऐसा मनगढ़ंत आरोप किसी भी पदाधिकारी के ऊपर न लगा पाए।

100 वर्ष पुराने ऐतिहासिक बसारगढ़ तालाब को जेसीबी मशीन द्वारा तालाब के किनारों को कुछ दिनों पूर्व में काटकर अस्तित्व को समाप्त करने की शिकायत पर कार्रवाई

जनता दरबार में वार्ड नंबर 53 के वासियों ने वार्ड संख्या-53 के 100 वर्ष पुराने ऐतिहासिक बसारगढ़ तालाब को जेसीबी मशीन द्वारा तालाब के किनारों को कुछ दिनों पूर्व में काटकर अस्तित्व को समाप्त करने की शिकायत की जिसपर उपायुक्त ने इसे गंभीरता पूर्वक लेते हुए सम्बंधित पदाधिकारी को तत्काल जाँच कर अविलंब कार्य रोकने का निर्देश दिया।

जनता दरबार के दौरान कई मामलों का मौके पर ही निस्तारण किया गया, जिससे उपस्थित नागरिकों में राहत एवं संतोष की भावना दिखाई दी। लोगों ने उपायुक्त की इस पहल की खुलकर सराहना की तथा कहा कि इस प्रकार का सीधा संवाद जिला प्रशासन के प्रति जनता का विश्वास और मजबूत करता है।

जिला प्रशासन की यह निरंतर प्रयास आम नागरिकों की समस्याओं के समाधान में तेजी लाने एवं प्रशासन को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में सराहनीय कदम साबित हो रहा है।

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आईएनएस सुदर्शिनी ट्रांसओशनिक सेल अभियान – लोकायन 26 पर रवाना होगा

नई दिल्ली – भारतीय नौसेना का सेल ट्रेनिंग शिप आईएनएस सुदर्शिनी 20 जनवरी 2026 को लोकायन 26 की अपनी मुख्य यात्रा पर निकलेगा, जो 10 महीने का एक ट्रांसओशनिक अभियान है। भारत की समृद्ध समुद्री विरासत और वसुधैव कुटुंबकम की सोच को समुद्रों के पार दर्शाते हुए, यह शिप 13 देशों के 18 विदेशी बंदरगाहों से गुजरते हुए 22,000 नॉटिकल मील से अधिक की यात्रा करेगा।

इस तैनाती का एक मुख्य आकर्षण आईएनएस सुदर्शिनी का प्रतिष्ठित अंतरराष्ट्रीय टॉल-शिप कार्यक्रमों–एस्केल ए सेट फ्रांस में और अमेरिका के न्यूयॉर्क में एसएआईएल 250 में हिस्सा लेना होगा। इन दोनों कार्यक्रमों में, आईएनएस सुदर्शिनी भारत की गौरवशाली समुद्री विरासत और समुद्री परंपराओं का प्रतिनिधित्व करेगा।

यात्रा के दौरान, 200 से अधिक भारतीय नौसेना और भारतीय तटरक्षक बल के प्रशिक्षु गहन सेल प्रशिक्षण लेंगे, जिससे उन्हें लंबी दूरी के समुद्री नेविगेशन और समुद्र में पारंपरिक नौकायन का अमूल्य अनुभव मिलेगा। यह तैनाती प्रशिक्षुओं को बड़े जहाज पर जीवन की बारीकियों से परिचित कराएगी और उन्हें दूसरी नौसेनाओं के प्रशिक्षुओं के साथ बातचीत करने के अवसर प्रदान करेगी, जिससे पेशेवर आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा और दोस्ती के स्थायी बंधन बनेंगे।

आईएनएस सुदर्शिनी आने वाले देशों की नौसेनाओं के साथ प्रशिक्षण क्रियाकलाप और समुद्री साझेदारी कार्यक्रमों में भी हिस्सा लेगी, जिससे सामुद्रिक सहयोग मजबूत होगा और महासागर के विजन को आगे बढ़ाया जा सकेगा। यह यात्रा सांस्कृतिक कूटनीति का एक शक्तिशाली प्रतीक है, जो देशों के बीच सहयोग और आपसी विश्वास के पुल बनाने के लिए भारतीय नौसेना की प्रतिबद्धता की पुष्टि करती है।

आईएनएस सुदर्शिनी, भारतीय नौसेना का दूसरा सेल प्रशिक्षण जहाज अब तक 1,40,000 नॉटिकल मील से अधिक की दूरी तय कर चुका है। लोकायन 26 के जरिए यह वैश्विक मंच पर भारत की सामुद्रिक शक्ति, व्यावसायिकता और सद्भावना की मिसाल बनी हुई है।

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भारतीय रेल ने मौनी अमावस्या के दौरान 244 विशेष रेलगाडि़यां चलाईं

 केवल दो सप्ताह में 4.5 लाख से अधिक यात्रियों को परिवहन प्रदान किया

नई दिल्ली – भारतीय रेल ने मौनी अमावस्या के दौरान रेल यातायात का सफलतापूर्वक प्रबंधन किया और 3 जनवरी 2026 से देशभर में 244 विशेष रेलगाडि़यां चलाईं, जिससे श्रद्धालुओं की सुगम और सुविधाजनक यात्रा सुनिश्चित हुई। उत्तरी रेलवे (एनआर) की 31, उत्तर मध्य रेलवे (एनसीआर) की 158 और उत्तर पूर्वी रेलवे (एनईआर) की 55 रेलगाडि़यों द्वारा संचालित इन रेलगाडि़यां से लगभग 4.5 लाख यात्रियों ने यात्रा की। त्योहारों के दौरान परेशानी मुक्त और सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए विशेष सेवाओं की सावधानीपूर्वक योजना बनाई गई और उनका प्रबंधन किया गया।

प्रयागराज में 18 जनवरी को त्यौहार से जुड़ी सर्वाधिक भीड़-भाड़ रही, जिस दौरान 40 विशेष रेलगाडि़यां चलाई गईं, जिनमें 11 एनआर (राष्ट्रीय रेलवे), 22 एनसीआर (राष्ट्रीय रेलवे) और 7 एनईआर (उत्तर-पूर्वी क्षेत्र) की रेलगाडि़यां शामिल थीं, जिनसे लगभग 1 लाख यात्रियों ने यात्रा की। उल्लेखनीय रूप से ,सभी नियमित रेलगाडि़यां निर्धारित समय पर चलीं, जो भारतीय रेल की प्रभावी योजना और परिचालन दक्षता को दर्शाती हैं।

इन विशेष रेलगाडि़यां का सफल संचालन त्यौहारों के सर्वाधिक व्यस्त समय में यात्रियों को सुरक्षित, सुविधाजनक और निर्बाध सेवाएं प्रदान करने के लिए भारतीय रेलवे की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। रेलवे व्यापक स्तर पर यात्री आवागमन को कुशलतापूर्वक प्रबंधित करने के लिए प्रौद्योगिकी, संसाधन योजना निर्माण और विभिन्न जोनों के बीच समन्वय का निरंतर लाभ उठा  रहा है।

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केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने नई दिल्ली में राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति की 88वीं बैठक की अध्यक्षता की

नई दिल्ली – राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति (एससी-एनबीडब्ल्यूएल) की 88वीं बैठक आज नई दिल्ली में केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में संपन्न हुई।

इस बैठक में स्थायी समिति ने वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के तहत, संरक्षित क्षेत्रों, वन्यजीव अभयारण्यों, बाघ अभ्यारण्यों और पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्रों में और उसके आसपास स्थित सार्वजनिक उपयोगिता सेवाओं, रक्षा आवश्यकताओं और अवसंरचना विकास से संबंधित 70 प्रस्तावों पर विचार किया। इन प्रस्तावों पर पारिस्थितिक संवेदनशीलता, वैधानिक आवश्यकताओं और स्थानीय समुदायों के लिए आवश्यक सेवाओं को सुनिश्चित करने की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए विचार-विमर्श किया गया।

समिति ने जिन प्रमुख सार्वजनिक उपयोगिता प्रस्तावों पर चर्चा की, उनमें जल जीवन मिशन (जेजेएम) के तहत पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करना, प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों की सुविधा, सड़कों का चौड़ीकरण, 4जी मोबाइल टावर की स्थापना और ट्रांसमिशन लाइनों का निर्माण शामिल था। इसके अतिरिक्त, मध्य प्रदेश में मध्यम सिंचाई परियोजना से संबंधित प्रस्तावों पर भी विस्तार से विचार किया गया। यह परियोजना एक तरफ बुंदेलखंड क्षेत्र में पेयजल और सिंचाई जल की बेहतर आपूर्ति प्रदान करने का उद्देश्य रखती है, तो दूसरी तरफ वन्यजीवों और घड़ियालों के लिए उन्नत जल प्रबंधन को बढ़ावा देने में सहायक है।

स्थायी समिति ने लद्दाख और सिक्किम में स्थित सीमावर्ती और उच्च ऊंचाई वाले क्षेत्रों में रणनीतिक अवसंरचना से संबंधित 17 रक्षा संबंधी प्रस्तावों पर भी विचार किया। राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए, वन्यजीव संरक्षण उपायों और पर्यावरण सुरक्षा उपायों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करते हुए, समिति के निर्देशों और लागू वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप इन प्रस्तावों की अनुशंसा की गई।

समिति ने पूर्व की बैठकों में लिए गए निर्णयों और जारी किए गए निर्देशों पर आधारित कार्रवाई रिपोर्ट (एटीआर) की समीक्षा की। इसमें विशेष रूप से नीतिगत सुधारों और प्रक्रियाओं के सरलीकरण पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिसमें ‘परिवेश पोर्टल’ को बेहतर बनाना भी शामिल है। यह निर्णय लिया गया कि वन्यजीव संरक्षण से जुड़ी नीतियों, कार्यक्रमों और एससी-एनबीडब्ल्यूएल के निर्देशों के अनुपालन की प्रभावी निगरानी सुनिश्चित करने के लिए आगामी बैठकों में और गहन चर्चा की जाएगी।

राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत गठित एक वैधानिक निकाय है। इसका उद्देश्य सरकार को वन्यजीवों और वनों के संरक्षण एवं सुरक्षा से जुड़े मामलों में उचित परामर्श देना है। इसके साथ ही, यह समिति संरक्षित क्षेत्रों और उनके आसपास विकास गतिविधियों को संतुलित और टिकाऊ तरीके से सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी निभाती है।

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अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की जैव विविधता, पर्यावरणीय और आर्थिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है: डॉ. जितेंद्र सिंह

नई दिल्ली  – केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा है कि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह की जैव विविधता पर्यावरणीय और आर्थिक सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है।

डॉ. सिंह ने श्री विजयपुरम में भारतीय प्राणी सर्वेक्षण (जेडएसआई) के अंडमान और निकोबार क्षेत्रीय केंद्र का दौरा करते हुए द्वीपों की जैव विविधता के रणनीतिक महत्व को रेखांकित किया।

इस अवसर पर वैज्ञानिकों और अधिकारियों को संबोधित करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि अंडमान और निकोबार द्वीप समूह “जैव विविधता की एक जीवंत प्रयोगशाला” है, जहां अत्याधुनिक विज्ञान को संरक्षण और सतत आजीविका के साथ मिलकर काम करना होगा। उन्होंने कहा कि जेडएसआई जैसे संस्थान प्रामाणिक वैज्ञानिक आंकड़े उत्पन्न करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जो जैव विविधता संरक्षण, जलवायु परिवर्तन से निपटने की क्षमता और महासागर आधारित आर्थिक विकास पर राष्ट्रीय नीतियों का मार्गदर्शन करते हैं।

इस यात्रा के दौरान, डॉ. जितेंद्र सिंह का स्वागत वैज्ञानिक-एफ और प्रभारी अधिकारी डॉ. सी. शिवपेरुमन ने किया। उन्होंने क्षेत्रीय केंद्र के उद्देश्य, हाल जारी अनुसंधान कार्यक्रमों और द्वीपों की अनूठी जीव विविधता के दस्तावेजीकरण, संरक्षण और निगरानी में इसके महत्वपूर्ण योगदान के बारे में केंद्रीय मंत्री को जानकारी दी। उन्हें विशेषकर वर्गीकरण, आणविक प्रणाली विज्ञान, डीएनए बारकोडिंग, जैव विविधता मूल्यांकन और क्षमता निर्माण के क्षेत्र में जेडएसआई के कार्यों की जानकारी दी गई।

1977 में स्थापित, जेडएसआई के अंडमान और निकोबार क्षेत्रीय केंद्र ने निरंतर वैज्ञानिक सेवा के पांच दशक पूरे कर लिए हैं। यह उष्णकटिबंधीय द्वीप जैव विविधता अनुसंधान के लिए एक प्रमुख संस्थान के रूप में उभरा है, जिसने विभिन्न जीव समूहों में लगभग 90 अनुसंधान कार्यक्रम पूरे किए हैं। इस केंद्र के वैज्ञानिकों ने प्रतिष्ठित राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पत्रिकाओं में 85 पुस्तकें और 850 से अधिक शोध पत्र प्रकाशित किए हैं, जिससे भारत के जैव विविधता ज्ञान भंडार में महत्वपूर्ण योगदान हुआ है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने द्वीपसमूह के प्रमुख पर्यटन और शैक्षिक स्थलों में से एक जेडएसआई संग्रहालय का भी दौरा किया जिसमें 22 जीव-जंतु समूहों का प्रतिनिधित्व करने वाले लगभग 3,500 नमूने रखे गए हैं। उन्हें जन-जागरूकता और शिक्षा के क्षेत्र में संग्रहालय की भूमिका के बारे में जानकारी दी गई, जहां छात्रों, शोधकर्ताओं और पर्यटकों सहित प्रतिवर्ष 75,000 से 1,00,000 आगंतुक आते हैं। डॉ. सिंह ने द्वीपसमूह के स्थानिक, लुप्तप्राय और संकटग्रस्त जीव-जंतुओं को प्रदर्शित करने वाले संदर्भ संग्रह, नमूनों और प्रदर्शनियों में गहरी रुचि दिखाई।

उन्हें जानकारी दी गई कि केंद्र के वैज्ञानिकों ने विज्ञान के लिए 20 से अधिक नई प्रजातियों की पहचान की है, जिनमें नारकोंडम ट्री श्रू भी शामिल है। इसके अलावा, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और दक्षिण पूर्व एशिया से करीब 900 नए जीव-जंतुओं के रिकॉर्ड दर्ज किए गए हैं। यह खोज इस क्षेत्र की जैव विविधता के वैश्विक महत्व को उजागर करती है।

डॉ. जितेंद्र सिंह को पोर्ट ब्लेयर स्थित जेडएसआई की भूमिका के बारे में भी जानकारी दी गई जो भारत के पहले राष्ट्रीय प्रवाल भित्ति अनुसंधान संस्थान (एनसीआरआरआई) का नोडल केंद्र है। इसका उद्देश्य भारतीय जलक्षेत्र में प्रवाल भित्ति अनुसंधान और निगरानी को मजबूत करना है। उन्होंने कहा कि ऐसे विशिष्ट संस्थान नाजुक समुद्री पारिस्थितिक तंत्रों की सुरक्षा और साक्ष्य-आधारित समुद्री शासन को बढ़ावा देने के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

केंद्रीय मंत्री ने वैज्ञानिकों और कर्मचारियों से बातचीत करते हुए सार्वजनिक नीति, संरक्षण योजना और सामुदायिक जागरूकता के साथ वैज्ञानिक अनुसंधान के अधिक एकीकरण की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत के पर्यावरणीय लक्ष्यों को प्राप्त करने और सतत तरीके से समुद्री अर्थव्यवस्था की पूरी क्षमता का एहसास कराने के लिए सशक्त वैज्ञानिक संस्थान अत्यंत महत्वपूर्ण हैं

इस केंद्र में हो रहे कार्यों की प्रशंसा करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने विस्तृत जानकारी और संग्रहालय के भ्रमण के लिए डॉ. शिवपेरुमान और जेडएसआई टीम का आभार व्यक्त किया। उन्होंने इस यात्रा को एक “अत्यधिक ज्ञानवर्धक और शिक्षाप्रद अनुभव” के रूप में वर्णित किया। डॉ. सिंह ने कहा कि सुव्यवस्थित प्राणी संग्रह न केवल वैज्ञानिक ज्ञान को प्रोत्साहित करते हैं, बल्कि भारत की समृद्ध जैव विविधता के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

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प्रधानमंत्री ने राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के स्थापना दिवस के अवसर पर उसके वीर कर्मियों को नमन किया

नई दिल्ली – राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के वीर कर्मियों के साहस, समर्पण और निःस्वार्थ सेवा की सराहना करते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज इसके स्थापना दिवस के अवसर पर उन्हें शुभकामनाएँ दीं।

एक एक्‍स पोस्‍ट में उन्‍होंने लिखा:

राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ) के स्थापना दिवस के अवसर पर, हम उन सभी पुरुष तथा महिलाओं के प्रति अपनी गहन सराहना व्यक्त करते हैं, जिनकी पेशेवर दक्षता और दृढ़ संकल्प संकट की घड़ियों में स्पष्ट रूप से परिलक्षित होते हैं। आपदा के समय सदैव अग्रिम पंक्ति में तैनात रहकर, एनडीआरएफ के कर्मचारी अपने परिश्रम से मानव जीवन की रक्षा, राहत कार्यों का संचालन तथा अत्यंत चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में आशा का संचार करते हैं। उनका कौशल और कर्तव्यनिष्ठा सेवा के सर्वोच्च मानकों का उदाहरण प्रस्तुत करती है। इन वर्षों के दौरान, एनडीआरएफ ने आपदा के लिए तैयारी एवं आपदा की स्थिति में प्रतिक्रिया के क्षेत्र में एक मानक के रूप में अपनी पहचान स्थापित की है तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक सम्मान अर्जित किया है।

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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने NDRF जवानों को बल के स्थापना दिवस पर शुभकामनाएं दी

नई दिल्ली – केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) के जवानों को बल के स्थापना दिवस पर शुभकामनाएं दी है।

X पर एक पोस्ट में केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा, “NDRF के कर्मियों को स्थापना दिवस की शुभकामनाएं। आपदा-प्रतिरोधी भारत बनाने के मोदी सरकार के संकल्प को साकार करने में अपनी महत्वपूर्ण भूमिका के जरिए NDRF आज विश्वास का वह स्तंभ बन गया है जिस पर देश आपदाओं के दौरान भरोसा करता है। दूसरों की सुरक्षा के लिए अपना बलिदान देने वाले शहीदों को नमन।”

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भारतीय नौसेना ने लक्षद्वीप के द्वीपों में संयुक्त सेवाओं का मल्टी-स्पेशियलिटी मेडिकल कैंप का समापन किया

नई दिल्ली – भारतीय नौसेना ने 16 जनवरी 2026 को लक्षद्वीप के द्वीपों में पांच दिवसीय संयुक्‍त सेवा मल्टी-स्पेशियलिटी मेडिकल कैंप का सफलतापूर्वक समापन किया। कावारत्ती, अगात्ती, अमीनी, एंड्रोथ और मिनिकॉय द्वीपों पर आयोजित इस कैंप ने बिना किसी रुकावट के इंटर-सर्विसेज सहयोग के ज़रिए दूरदराज के द्वीपीय समुदायों को अच्छी क्वालिटी की स्वास्थ्य सेवा और निवारक सेवाएं देने के लिए सशस्त्र बलों की प्रतिबद्धता की पुष्टि की। इस कैंप का उद्घाटन 12 जनवरी 2026 को हुआ था  और इसे लक्षद्वीप केन्द्र शासित प्रदेश के नागरिक प्रशासन और स्वास्थ्य सेवा विभागों का पूरा समर्थन मिला।

इस कैंप को ज़बरदस्त प्रतिक्रिया मिली, 4,719 मरीज़ों ने स्पेशलिस्ट और सुपर-स्पेशलिस्ट डॉक्टरों से सलाह ली। लक्षद्वीप में पहली बार इतने बड़े पैमाने पर मेडिकल कैंप लगाया गया, जिसमें स्पेशलिस्ट और सुपर-स्पेशलिस्ट डॉक्टरों की एक बड़ी श्रृंखला उपलब्ध थी, जिससे एडवांस्ड हेल्थकेयर तक पहुंच में काफी सुधार हुआ। टीम में न्यूरोलॉजी, कार्डियोलॉजी, नेफ्रोलॉजी, एंडोक्रिनोलॉजी और गैस्ट्रोएंटरोलॉजी के एक्सपर्ट शामिल थे, जिन्हें मेडिसिन, सर्जरी, ईएनटी, ऑप्थल्मोलॉजी, डर्मेटोलॉजी, डेंटल सर्जरी, रेडियोलॉजी और कम्युनिटी मेडिसिन के स्पेशलिस्ट डॉक्टरों का सपोर्ट मिला।

मेडिकल टीमों और उपकरणों की तेज़ी से तैनाती, साथ ही हर द्वीप पर पूरी तरह से काम करने वाली मेडिकल सुविधाओं की स्थापना ने तीनों सेनाओं के बीच उच्च स्तर के तालमेल और एकजुटता को दिखाया। कर्मियों और संवेदनशील मेडिकल उपकरणों की योजनाबद्ध एयरलिफ्ट और सीलिफ्ट ने प्रभावी इंटर-सर्विसेज तालमेल का प्रदर्शन किया।

सभी द्वीपों पर व्यापक मेडिकल और सर्जिकल सेवाएं प्रदान की गईं। कुल 51 सामान्य सर्जिकल प्रक्रियाएं की गईं, जिससे भूमि के मुख्य अस्पतालों में रेफरल की आवश्यकता कम हो गई। नेत्र विज्ञान में, 71 मोतियाबिंद सर्जरी की गईं, जिससे कई बुजुर्ग मरीजों की रोशनी वापस आ गई। उन्नत डायग्नोस्टिक्स में 50 से अधिक एंडोस्कोपिक प्रक्रियाएं, 50 से अधिक इकोकार्डियोग्राफिक जांच और कार्डियक मूल्यांकन के लिए कई ट्रेडमिल टेस्ट शामिल थे। रेडियोलॉजी सेवाओं में 250 से अधिक अल्ट्रासाउंड जांच दर्ज की गईं, जबकि 100 से अधिक डेंटल प्रक्रियाएं और 30 से अधिक छोटी त्वचा संबंधी प्रक्रियाएं की गईं। सभी सेवाएं और दवाएं मुफ्त में प्रदान की गईं।

एक स्थायी योगदान के तौर पर, भारतीय नौसेना ने अगाती और अमीनी में हेल्थकेयर सुविधाओं को दो ईसीजी मशीनें दान कीं। निवारक स्वास्थ्य, स्वस्थ जीवन शैली, कैंसर जागरूकता, मानसिक स्वास्थ्य और बेसिक लाइफ सपोर्ट (बीएलएस) प्रशिक्षण को कवर करते हुए व्यापक सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) गतिविधियाँ भी आयोजित की गईं।

लक्षद्वीप के लोगों और केन्द्र शासित प्रदेश प्रशासन द्वारा व्यापक रूप से सराहे गए, संयुक्त सेवा बहु-विशिष्ट चिकित्सा शिविर अपनी व्यापकता, व्यावसायिकता और ठोस प्रभाव के लिए सबसे अलग रहा। एक एकीकृत त्रि-सेवा प्रयास के माध्यम से उन्नत चिकित्सा देखभाल प्रदान करके और निवारक स्वास्थ्य जागरूकता को मजबूत करके, भारतीय सशस्त्र बलों ने एक बार फिर देश के दूरदराज के क्षेत्रों में नागरिकों के स्वास्थ्य और कल्याण के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

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केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने अंडमान सागर के नॉर्थ बे में भारत की पहली ओपन-सी (खुले समुद्र में) समुद्री मछली पालन परियोजना का शुभारंभ किया

पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय और अंडमान एवं निकोबार केंद्र शासित प्रदेश सरकार के बीच सहयोग होगा

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री, डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज अंडमान सागर से भारत की पहली ओपन-सी (खुले समुद्र में) समुद्री मछली पालन परियोजना का शुभारंभ किया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने इसे भारत के विशाल समुद्री संसाधनों के माध्यम से ब्लू इकोनॉमी को साकार करने की दिशा में पहले बड़े कदमों में से एक बताया, जिसकी कल्पना प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा की गई थी और लगातार इस पर जोर  दिया गया है। इस परियोजना का शुभारंभ अंडमान सागर के खुले जल क्षेत्र के फील्ड दौरे के दौरान, नॉर्थ बे, श्री विजया पुरम में साइट पर ही किया गया।

इस अवसर पर संबोधित करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह पहल भारत के समुद्रों की आर्थिक क्षमता के द्वार खोलने के लिए उठाए गए शुरुआती और सबसे महत्वपूर्ण कदमों में से एक है। उन्होंने उल्लेख किया कि भारत के समुद्रों में भी, हिमालय और मुख्य भूमि के संसाधनों की तरह ही, विशाल और विविध आर्थिक संभावनाएं मौजूद हैं, जिन पर दशकों तक उचित ध्यान नहीं दिया गया था।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद लगभग सत्तर वर्षों तक, भारत के समुद्री संसाधन काफी हद तक अनछुए रहे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि 2014 के बाद से, राष्ट्रीय सोच में एक बुनियादी बदलाव आया है, जिसमें यह स्वीकार किया गया है कि भारत का समुद्री क्षेत्र आर्थिक विकास के लिए समान रूप से संपदा और अवसर रखता है। उन्होंने आगे भारत के समुद्रों की विशिष्ट और विविधतापूर्ण प्रकृति पर प्रकाश डाला और कहा कि पश्चिमी, दक्षिणी और पूर्वी तटों में से प्रत्येक की अपनी अलग विशेषताएं हैं और वे देश के विकास में अद्वितीय योगदान देने की क्षमता रखते हैं।

इस परियोजना को भारत सरकार के पृथ्वी विज्ञान मंत्रालय, इसकी तकनीकी शाखा राष्ट्रीय समुद्र प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईओटी) और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह प्रशासन के बीच सहयोग के माध्यम से कार्यान्वित किया जा रहा है। यह पायलट पहल प्राकृतिक समुद्री परिस्थितियों में समुद्री फिनफिश और समुद्री शैवाल की ओपन-सी खेती पर केंद्रित है, जो वैज्ञानिक नवाचार को आजीविका सृजन के साथ जोड़ती है।

फील्ड विजिट के दौरान, आजीविका को बढ़ावा देने वाले दो प्रमुख कार्य शुरू किए गए। समुद्री वनस्पति के तहत, डॉ. जितेंद्र सिंह द्वारा स्थानीय मछुआरा समुदायों को समुद्री शैवाल के बीज सौंपे गए ताकि खुले समुद्र के गहरे पानी में इसकी खेती को बढ़ावा दिया जा सके। समुद्री जीव वाले हिस्सों में पिंजरा-आधारित पालन के लिए फिनफिश के बीज प्रदान किए गए, जिसे एनआईओटी द्वारा विकसित उन ओपन-सी केज का सपोर्ट प्राप्त है जिन्हें प्राकृतिक समुद्री वातावरण में कार्य करने के लिए डिजाइन किया गया है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि हालांकि वर्तमान परियोजनाएं सरकार के नेतृत्व वाले सहयोग के माध्यम से संचालित की जा रही हैं, लेकिन इनसे प्राप्त अनुभव और फिजिबिलिटी असेसमेंट भविष्य में सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के माध्यम से ऐसी पहलों के विस्तार को सक्षम बना सकते हैं। उन्होंने उल्लेख किया कि यह दृष्टिकोण तकनीक की तैनाती को तेज करने, आजीविका के अवसरों को बढ़ाने और भारत के ब्लू इकोनॉमी इकोसिस्टम को मजबूत करने में मदद करेगा।

बाद में, अपनी अंडमान द्वीप यात्रा के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने वांडूर के पास स्थित महात्मा गांधी समुद्री राष्ट्रीय उद्यान (एमजीएमएनपी) का भी दौरा किया। यह 1983 में स्थापित देश के अपनी तरह के पहले समुद्री उद्यानों में से एक है। 15 द्वीपों में फैले और वांडूर जेट्टी के माध्यम से सुलभ, यह पार्क जॉली बॉय और रेड स्किन जैसे अपने संरक्षित द्वीपों के लिए प्रसिद्ध है। डॉ. सिंह ने पार्क के समृद्ध और आत्मनिर्भर समुद्री इकोसिस्टम का अवलोकन किया, जिसमें जीवंत मूंगा चट्टानें, मैंग्रोव और कछुए व मछलियों की विभिन्न प्रजातियों जैसे विविध समुद्री जीवन शामिल हैं।

नॉर्थ बे से इस परियोजना का शुभारंभ विज्ञान और प्रौद्योगिकी को सीधे कार्यक्षेत्र तक ले जाने की भारत सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। यह सुनिश्चित करता है कि तटीय और द्वीप समुदाय भारत के समुद्र-आधारित आर्थिक विकास में सक्रिय भागीदार बनें।

आईएनएस सागरध्वनि सागर मैत्री V के लिए रवाना

नई दिल्ली – रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की नेवल फिजिकल एंड ओशनोग्राफिक लेबोरेटरी (एनपीओएल) का भारत का समुद्र विज्ञान अनुसंधान पोत आईएनएस सागरध्वनि, 17 जनवरी 2026 को दक्षिणी नौसेना कमानकोच्चि से सागर मैत्री (SM5) पहल के पांचवें संस्करण के लिए रवाना हुआ।

इस पोत को माननीय संसद सदस्य और रक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति के अध्यक्ष श्री राधा मोहन सिंह ने हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।

 इस अवसर पर रक्षा संबंधी संसदीय स्थायी समिति के माननीय सदस्य, डॉ. समीर वी. कामत, सचिव, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग और अध्यक्ष डीआरडीओ; रियर एडमिरल उपल कुंडू, चीफ ऑफ स्टाफ, दक्षिणी नौसेना कमान; डॉ. आर. वी. हारा प्रसाद, महानिदेशक (नौसेना प्रणाली और सामग्री); और डॉ. दुव्वुरी शेषागिरी, निदेशक, एनपीओएल के साथ भारतीय नौसेना और डीआरडीओ के वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे।

सागर मैत्री भारतीय नौसेना और डीआरडीओ की प्रमुख सहयोगी पहल है, जो भारत सरकार के क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए आपसी और समग्र उन्नति (MAHASAGAR)’ के विजन के अनुरूप है। इस पहल का उद्देश्य हिंद महासागर रिम (आईओआर) देशों के बीच सामाजिक-आर्थिक पहलुओं में घनिष्ठ सहयोग और विशेष रूप से समुद्र अनुसंधान में अधिक वैज्ञानिक बातचीत को बढ़ावा देना है।

नेवल फिजिकल एंड ओशनोग्राफिक लेबोरेटरी (एनपीओएल), कोच्चि, आईओआर देशों के बीच वैज्ञानिक सहयोग और क्षमता निर्माण को मजबूत करने के उद्देश्य से सागर मैत्री कार्यक्रम के तहत समुद्र विज्ञान मिशन चला रही है। इस कार्यक्रम के तहत, डीआरडीओ ने समुद्र अनुसंधान और विकास के क्षेत्र में आईओआर देशों के साथ दीर्घकालिक सहयोग स्थापित करने के लिए ‘ मैत्री‘ MAITRI यानी मरीन एंड एलाइड इंटरडिसिप्लिनरी ट्रेनिंग एंड रिसर्च इनिशिएटिव)’ नामक वैज्ञानिक घटक शुरू किया है।

सागर मैत्री कार्यक्रम के तहत, आईएनएस सागरध्वनि आईएनएस कृष्णा के ऐतिहासिक रास्तों पर फिर से चलेगीजिसने 1962-65 के दौरान अंतरराष्ट्रीय हिंद महासागर अभियान में हिस्सा लिया था। इस पहल का उद्देश्य आठ आईओआर देशोंयानी ओमानमालदीवश्रीलंकाथाईलैंडमलेशियासिंगापुरइंडोनेशिया और म्यांमार के साथ लगातार वैज्ञानिक सहयोग करना है। यह मिशन मालदीव के साथ सहयोगी समुद्र विज्ञान अध्ययनों की शुरुआत करता है, जिससे आईओआर देशों के वैज्ञानिकों के बीच संयुक्त अनुसंधान और पेशेवर आदान-प्रदान संभव होगा।

सागर मैत्री भारतीय नौसेना के लिए प्रासंगिक अंडरवाटर डोमेन अवेयरनेस (यूडीए) हासिल करने की दिशा में डीआरडीओ के प्रयासों का मुख्य केंद्र है। इन मिशनों के दौरान, डीआरडीओ के अनुसंधान पोत आईएनएस सागरध्वनि द्वारा तय किए गए ऑब्जर्वेशनल ट्रैक पर महत्वपूर्ण समुद्र विज्ञान और ध्वनिक डेटा इकट्ठा किया जाता है, जो यूडीए से संबंधित नियोजित वैज्ञानिक उद्देश्यों के अनुरूप होता है।

आईएनएस सागरध्वनि विशेष समुद्री ध्वनिक अनुसंधान पोत है जिसे एनपीओएल ने डिज़ाइन किया है और गार्डन रीच शिपबिल्डर्स एंड इंजीनियर्स (जीआरएसई) ने बनाया है। जुलाई 1994 में कमीशन किया गया यह जहाज तीन दशकों से अधिक समय से समुद्री अवलोकन और समुद्री अनुसंधान के लिए एक प्रमुख मंच के रूप में काम कर रहा है, जिसने भारत की समुद्री वैज्ञानिक क्षमताओं में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

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हिंद महासागर क्षेत्र में विदेश में तैनाती के रूप में आईसीजीएस संकल्प का मॉरीशस के पोर्ट लुइस में आगमन

नई दिल्ली –  भारतीय तटरक्षक बल का जहाज (आईसीजीएस) संकल्प, जो एक अपतटीय गश्ती पोत है, 17 जनवरी, 2026 को मॉरीशस के पोर्ट लुइस पहुंचा। यह हिंद महासागर क्षेत्र में मित्र देशों के साथ चल रही अपनी विदेशी तैनाती का भाग है। यह यात्रा समुद्री सहयोग को मजबूत करने, अंतर-संचालनीयता बढ़ाने और मॉरीशस के साथ द्विपक्षीय संबंधों को और गहरा करने के प्रति भारत की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

यह तैनाती भारत के सागर (क्षेत्र में सभी के लिए सुरक्षा और विकास) के समुद्री दृष्टिकोण के अनुरूप है जिसका उद्देश्य क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा, संरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देना है। भारतीय तटरक्षक बल द्वारा समुद्री अभियानों में लैंगिक समावेशिता पर दिए जा रहे जोर को ध्यान में रखते हुए, आईसीजीएस संकल्प पर दो महिला अधिकारियों को तैनात किया गया है जो सेवा में उनकी बढ़ती भूमिका और समुद्री क्षेत्र में महिला सशक्तिकरण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

पोर्ट लुई में अपने प्रवास के दौरान, यह जहाज मॉरीशस के राष्ट्रीय तटरक्षक बल और मॉरीशस की अन्य समुद्री एजेंसियों के साथ कई पेशेवर वार्ताएं करेगा। इन वार्ताओं का उद्देश्य सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को साझा करना और प्रमुख परिचालन क्षेत्रों में सहयोग को मजबूत करना है।

एक व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम की योजना बनाई गई है, जिसमें समुद्री और बंदरगाह अभ्यास, तेल प्रदूषण प्रतिक्रिया अभ्यास, क्षति नियंत्रण (एनबीसीडी) अभ्यास, साथ ही अग्निशमन अभ्यास शामिल हैं। प्रशिक्षण गतिविधियों में परिचालन समन्वय और तत्परता को बढ़ाने के लिए विजिट, बोर्ड, सर्च एंड सीजर (वीबीसीसी) संयुक्त प्रशिक्षण, नेविगेशन ब्रिज और मशीनरी कंट्रोल रूम (एमसीआर) एकीकरण अभ्यास भी शामिल होंगे।

परिचालन संबंधी गतिविधियों के अलावा, बंदरगाह पर होने वाले इस प्रवास में सौहार्दपूर्ण खेल प्रतियोगिताओं और सांस्कृतिक आदान-प्रदान का आयोजन किया जाएगा जिसका उद्देश्य सौहार्द और आपसी जुड़ाव को बढ़ावा देना है। चालक दल के सदस्य सामुदायिक सेवा गतिविधियों में भी भाग लेंगे जो भारत के रचनात्मक सहयोग और सद्भावना के दृष्टिकोण को दर्शाती हैं। यह यात्रा भारत की स्वदेशी जहाज निर्माण क्षमताओं को प्रदर्शित करने का अवसर भी प्रदान करेगी जिससे आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को बल मिलेगा।

आईसीजीएस संकल्प की यह यात्रा हिंद महासागर क्षेत्र में एक विश्वसनीय समुद्री भागीदार के रूप में भारत की भूमिका को मजबूत करती है और मॉरीशस के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करते हुए समुद्री सुरक्षा, क्षमता निर्माण और पर्यावरण संरक्षण के प्रति भारतीय तटरक्षक बल की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।

मॉरीशस की अपनी यात्रा पूरी करने के बाद, आईसीजीएस संकल्प हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी निरंतर विदेशी तैनाती के भाग के रूप में सेशेल्स के लिए रवाना होगा जिससे प्रमुख द्वीप देशों के साथ भारत की समुद्री पहुंच और सहयोग का और विस्तार होगा।

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हर समय हर वक्त सच के साथ

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