देशी पशुधन किसानों की समृद्धि की कुंजी: श्री शिवराज सिंह चौहान

नई दिल्ली – भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भाकृअनुप) ने आज नई दिल्ली स्थित ए. पी. शिंदे ऑडिटोरियम में पशु नस्ल पंजीकरण प्रमाणपत्र एवं नस्ल संरक्षण पुरस्कार वितरण कार्यक्रम का आयोजन किया। कार्यक्रम में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए।

केंद्रीय मंत्री ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जानवरों की इकोलॉजिकल अहमियत और भारत की देसी जानवरों की नस्लों को बचाने के लिए मिलकर काम करने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। श्री चौहान ने कहा कि जानवरों के साथ भारत का रिश्ता सिर्फ़ आर्थिक या न्यूट्रिशन से जुड़ा नहीं है, बल्कि असल में इकोलॉजिकल है।

उन्होंने कहा, “यह बैलेंस का रिश्ता है। इस बैलेंस में किसी भी तरह की गड़बड़ी का सीधा असर पर्यावरण और आखिर में, धरती की भलाई पर पड़ता है।” उन्होंने देसी नस्लों को बचाने के लिए देश भर में काम कर रहे साइंटिस्ट, इंस्टीट्यूशन और किसान समुदायों की बहुत तारीफ की।

उन्होंने कहा, “उनकी कोशिशें जानवरों को बचाने से कहीं आगे हैं। वे बायोडायवर्सिटी की रक्षा कर रहे हैं, गांवों की रोजी-रोटी को मजबूत कर रहे हैं और सस्टेनेबल खेती के भविष्य को सुरक्षित कर रहे हैं।”

देसी जानवरों की नस्लों को बचाने के लिए 2019 में शुरू की गई नेशनल पहल का ज़िक्र करते हुए, मंत्री ने इसे एक अहम और तारीफ़ के काबिल कदम बताया। उन्होंने कहा, “देसी मवेशी, भैंस, मुर्गी और छोटे जुगाली करने वाले जानवर हमारी खेती की इकॉनमी की रीढ़ हैं। उनका विकास सीधे किसानों की खुशहाली, मजबूती और इनकम सिक्योरिटी से जुड़ा है।”

श्री चौहान ने ज़ोर दिया कि इस मिशन को पॉलिसी और कॉन्फ्रेंस से आगे बढ़कर एक जन आंदोलन बनना चाहिए। उन्होंने कहा, “यह काम सिर्फ़ पॉलिसी फ्रेमवर्क या कॉन्फ्रेंस प्लेटफॉर्म तक ही सीमित नहीं रह सकता। इसे गांवों, खेतों और किसान परिवारों तक पहुंचना चाहिए और एक सच्चा जन आंदोलन बनना चाहिए।”

उन्होंने इस नेशनल कोशिश में योगदान देने वालों को पहचानने की अहमियत पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने कहा, “लोगों की पहचान से हिस्सा लेने की प्रेरणा मिलती है, और हिस्सा लेने से लंबे समय तक असर के लिए रफ़्तार बनती है।” मीडिया से एक कंस्ट्रक्टिव भूमिका निभाने की अपील करते हुए, श्री चौहान ने बचाव और सस्टेनेबिलिटी में पॉज़िटिव काम के लिए ज़्यादा विज़िबिलिटी की अपील की। उन्होंने आखिर में कहा, “ज़िंदगी, प्रकृति एवं हमारे साझा भविष्य की रक्षा करने वालों का काम देखा, सुना और मनाया जाना चाहिए।”

डॉ. जाट ने कहा कि विकसित भारत – पशु धन का विज़न लंबे समय तक संरक्षण के साथ-साथ ज़िम्मेदारी से रिसोर्स का इस्तेमाल करने पर केन्द्रित है। उन्होंने पिछले पंद्रह सालों में किसानों की अहम भूमिका पर ज़ोर दिया, और कहा कि वे नस्ल संरक्षण की कोशिशों के केंद्र में बने हुए हैं। 2008 से, 242 जानवरों की नस्लें रजिस्टर की गई हैं। 2047 तक विकसित भारत को पाने के लिए, भाकृअनुप का लक्ष्य सभी देसी जानवरों की नस्लों का 100 परसेंट रजिस्ट्रेशन करना है।

डॉ. जाट ने आर्थिक कारणों से भैंसों की तुलना में मवेशियों की घटती आबादी पर चिंता जताई और सुधार पर ध्यान देने की ज़रूरत पर ज़ोर दिया। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि नस्ल रजिस्ट्रेशन सिर्फ़ संरक्षण से कहीं ज़्यादा है, यह बायोलॉजिकल रिसोर्स पर सॉवरेन अधिकार, किसानों के लिए फायदा-शेयरिंग तथा इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी अधिकारों की सुरक्षा को मुमकिन बनाता है। ज़ीरो नॉन-डिस्क्रिप्ट एनिमल्स मिशन इन लक्ष्यों को आगे बढ़ा रहा है।

डेलीगेट्स का स्वागत करते हुए, डॉ. राघवेंद्र भट्टा, उप-महानिदेशक (पशुविज्ञान), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भाकृअनुप) ने पार्टिसिपेंट्स को रजिस्टर्ड नस्लों के बारे में जानकारी दी और एक सस्टेनेबल एनवायरनमेंट के लिए उनके संरक्षण के महत्व पर ज़ोर दिया।

इस इवेंट में भारत सरकार के देसी जानवरों के जेनेटिक रिसोर्स (एएनजीआर) के बचाव, पहचान और सस्टेनेबल डेवलपमेंट के लिए पक्के वादे को दिखाया गया। सेरेमनी के दौरान, नई पहचानी गई जानवरों तथा पोल्ट्री नस्लों को रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट दिया गया, और किसानों, ब्रीडर्स एवं संस्थाओं को उनके शानदार योगदान के लिए ब्रीड कंजर्वेशन अवार्ड दिया गया।

इस सेरेमनी में प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का पशुधन सेक्टर को मज़बूत करने, किसानों को मज़बूत बनाने, इनकम बढ़ाने तथा सस्टेनेबल खेती के विकास की बुनियाद के तौर पर बायोडायवर्सिटी कंजर्वेशन को बढ़ावा देने का विज़न दिखा। इस कार्यक्रम में देश भर के सीनियर अधिकारियों, साइंटिस्ट्स, रिसर्चर्स, प्रोग्रेसिव किसानों एवं स्टेकहोल्डर्स ने शिरकत की।

नस्ल संरक्षण पुरस्कार

भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (भाकृअनुप) ने स्वदेशी पशु नस्लों के संरक्षण में उनके उत्कृष्ट योगदान को पहचानते हुए वर्ष 2025 के लिए व्यक्तियों और संस्थानों को नस्ल संरक्षण पुरस्कार से सम्मानित किया।

व्यक्तिगत श्रेणी में, श्री जीतुल बुरागोहेन को लुइट भैंस के संरक्षण में उनके अनुकरणीय प्रयासों के लिए प्रथम पुरस्कार प्रदान किया गया, जबकि श्री कुडाला राम दास को पुंगनूर मवेशियों के संरक्षण के लिए द्वितीय पुरस्कार मिला। नस्ल संरक्षण में उनके सराहनीय कार्य के लिए श्री तिरुपति तथा श्री रामचंद्रन काहनार को सांत्वना पुरस्कार प्रदान किए गए।

संस्थागत श्रेणी में, बिनझारपुरी मवेशी प्रमोटर्स एंड प्रोड्यूसर्स सोसाइटी को बिनझारपुरी मवेशियों के संरक्षण में उसकी महत्वपूर्ण भूमिका के लिए प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया। पुलिक्कुलम मवेशियों के संरक्षण के लिए तमिलनाडु पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय को द्वितीय पुरस्कार प्रदान किया गया, जबकि गाओलाओ मवेशियों के संरक्षण के प्रयासों के लिए तृतीय पुरस्कार दिया गया। मेचेरी भेड़ के संरक्षण में योगदान के लिए तमिलनाडु पशु चिकित्सा और पशु विज्ञान विश्वविद्यालय को भी एक सांत्वना पुरस्कार प्रदान किया गया।

पृष्ठभूमि

भारत दुनिया के सबसे समृद्ध पशु आनुवंशिक संसाधनों के भंडार में से एक का घर है, जो स्थायी पशुधन उत्पादन, किसानों की आजीविका एवं राष्ट्रीय खाद्य और पोषण सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं। इसे पहचानते हुए, भाकृअनुप ने 2008 में पशु नस्ल पंजीकरण कार्यक्रम शुरू किया, जिसमें भाकृअनुप–एनबीएजीआर नोडल एजेंसी थी।

इसकी शुरुआत से अब तक, कई प्रजातियों की 242 स्वदेशी पशु नस्लों को पंजीकृत किया गया है। कानूनी मान्यता और संप्रभु सुरक्षा प्रदान करने हेतु, कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (डेयर) ने राजपत्र अधिसूचनाएं शुरू कीं, जिसमें 2019 से आठ अधिसूचना जारी की गई, जिनमें 229 स्वदेशी नस्लों को शामिल किया गया है। ये उपाय बायोपायरेसी से सुरक्षा प्रदान करते हैं, लाभ-साझाकरण का समर्थन करते हैं और नस्ल-विशिष्ट विकास नीतियों को सक्षम बनाते हैं।

इसके समानांतर, भाकृअनुप 2017 से किसानों, प्रजनकों और संस्थानों द्वारा स्वदेशी पशु नस्लों के संरक्षण में किए गए अनुकरणीय प्रयासों को पहचानने के लिए नस्ल संरक्षण पुरस्कार प्रदान कर रहा है। पशु नस्ल पंजीकरण प्रमाण पत्र एवं नस्ल संरक्षण पुरस्कार वितरण समारोह – 2025 भारत के पशुधन क्षेत्र को मजबूत करने, संरक्षण-आधारित विकास को बढ़ावा देने और किसानों की आय बढ़ाने के निरंतर प्रयासों में एक मील का पत्थर साबित होने वाला है।

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श्री धर्मेंद्र प्रधान ने आईआईटी मद्रास में पोंगल पर्व मनाया

नई दिल्ली – केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान आज चेन्नई स्थित भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास में पोंगल उत्सव में शामिल हुए। आईआईटी मद्रास ने श्री धर्मेंद्र प्रधान का हार्दिक स्वागत किया और पारंपरिक पोंगल उत्सव का आयोजन किया।

श्री धर्मेंद्र प्रधान कृतज्ञता, समृद्धि और सांस्कृतिक विरासत का प्रतीक फसल उत्सव मनाने के लिए संस्थान के परिसर सामुदायिक हॉल में आईआईटी मद्रास परिवार में शामिल हुए।

श्री प्रधान ने हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए तमिलनाडु की जनता और देश भर में पोंगल का त्योहार मनाने वाले सभी लोगों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु की जीवंत संस्कृति का पर्याय बन चुका पोंगल समृद्धि, सद्भाव और एकजुटता की भावना को दर्शाता है।

केंद्रीय मंत्री ने आईआईटी मद्रास परिवार के साथ पोंगल मनाने पर अपनी प्रसन्नता व्यक्त की और कहा कि यह त्योहार समृद्धि, स्नेह और एकजुटता की भावना को दर्शाता है। उन्होंने कामना की कि यह अवसर सभी के लिए अच्छे स्वास्थ्य, सुख, शांति, समृद्धि और सद्भाव लेकर आए।

इस कार्यक्रम में उच्च शिक्षा विभाग के सचिव श्री विनीत जोशी, आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामाकोटि, संकाय सदस्य, छात्र, कर्मचारी और परिसर समुदाय के सदस्य उपस्थित थे।

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एक साल, कई यात्राएं हुईं आसान: सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की टोल नीतियां राजमार्ग पर सफर का नया अनुभव करा रही हैं

नई दिल्ली – राष्ट्रीय राजमार्गों में अभूतपूर्व वृद्धि के कारण टोल प्लाजों पर लगने वाली लंबी कतारों से आम यात्रियों को काफी परेशानी झेलनी पड़ी है। हालांकि, पिछले एक दशक में टोल प्रणाली में महत्वपूर्ण तकनीकी बदलाव हुए हैं, जिससे आवागमन तेज हुआ है और सड़क यात्रियों को काफी सुविधा मिली है। इस रूख को आगे बढ़ाते हुए, वर्ष 2025 में जनहितकारी सुधारों और नवाचारों को लागू किया गया, जिससे राजमार्ग यात्रा और भी सुगम और कुशल हो गई है।

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय (एमओआरटीएच) ने एनएचएआई के साथ मिलकर यात्रियों की असल चिंताओं को कम करने के लिए व्यावहारिक समाधानों पर लगन से काम किया है।

फास्‍टैग वार्षिक पास

15 अगस्त 2025 को शुरू किए गए फास्‍टैग वार्षिक पास के साथ, अब यात्रियों को देश भर के 1,159 टोल प्लाजा पर 200 टोल ट्रिप या पूरे एक वर्ष की यात्रा सुविधा, जो भी पहले हो, प्राप्त करने के लिए केवल 3,000 रुपये का भुगतान करना होगा।

उन्नाव के कुशेहरी निवासी ने कहा, “मैंने हाल ही में फास्‍टैग वार्षिक पास लिया है क्योंकि मैं रोजाना उन्नाव से लखनऊ जाता हूं। पहले मुझे टोल शुल्क के रूप में प्रतिदिन लगभग 90 रुपये खर्च करने पड़ते थे। अब वार्षिक पास लेने के बाद मेरा दैनिक खर्च घटकर सिर्फ 30 रुपये रह गया है। समय की भी बचत होती है क्योंकि मैं टोल प्लाजा को मुश्किल से एक मिनट में पार कर लेता हूं।”

देश के अन्य हिस्सों में भी राजमार्गों का नियमित उपयोग करने वालों को इसी तरह की राहत मिल रही है। कई लोगों के लिए, इस वार्षिक पास ने न केवल दैनिक यात्रा खर्च को कम किया है, बल्कि नियमित आवागमन को तनावमुक्त भी बना दिया है।

हरियाणा में यमुना नगर के एक निवासी ने बताया, “मुझे नियमित रूप से चंडीगढ़ जाना पड़ता है। पहले मुझे आने-जाने के लिए कुल 150 रुपये खर्च करने पड़ते थे। लेकिन वार्षिक पास बनवाने के बाद मेरा खर्च घटकर सिर्फ 30 रुपये रह गया है, जिससे मुझे बहुत राहत मिली है।”

इसके अलावा, फास्‍टैग वार्षिक पास ने अनिश्चित मासिक टोल खर्चों को एक निश्चित, तनाव-मुक्त लागत में बदल दिया है, जिससे दैनिक यात्रियों को पूरे वर्ष निश्चितता, बचत तथा सुगम यात्रा मिलती है, और उन्हें अपने फास्‍टैग को लगातार रिचार्ज करने की चिंता करने की जरूरत नहीं पड़ती।

महज कुछ महीनों में ही 40 लाख से अधिक फास्‍टैग वार्षिक पास बिक ​​चुके हैं, और लगभग 20 प्रतिशत कार वालों  ने इसे अपना लिया है, जो इस बात का प्रमाण है कि किफायती और सुविधाजनक दोनों साथ-साथ चल सकते हैं।

डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देना

टोल प्लाजा पर, कभी नकद भुगतान सबसे धीमा और अव्यवस्थित विकल्प हुआ करता था। लंबी कतारें, खुले पैसे की समस्या और विवाद आम बात थी। इस समस्या को दूर करने के लिए, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने पहले नॉन-फास्टैग भुगतानों पर 2 गुना शुल्क लगाया था, जिससे कुछ वाहन वालों के लिए भुगतान महंगा हो जाता था। अब, यूपीआई भुगतानों के लिए इसे घटाकर केवल 1.25 गुना कर दिया गया है, जिससे यह काफी किफायती हो गया है और नकद का यह एक वास्तविक विकल्प बन गया है। पहले, नकद भुगतान का मतलब इंतजार करना और कभी-कभी बहस होना होता था। आज, यूपीआई भुगतानों पर 2 गुना से 1.25 गुना तक की छूट के साथ, यात्रियों को बस स्कैन करना, भुगतान करना और आगे बढ़ना है – जिससे डिजिटल भुगतान सरल, त्वरित और सार्थक हो गया है।

15 नवंबर से 10 दिसंबर 2025 के बीच टोल प्लाजा पर 15 लाख से अधिक यूपीआई लेनदेन दर्ज किए गए, जिनकी कुल राशि 19.44 करोड़ रुपये थी। इसके अलावा, नकद वसूली में 25 प्रतिशत की कमी आई है, जिससे टोल प्लाजा पर भीड़ कम हुई है और पारदर्शिता बढ़ी है।

वर्तमान में, 98 प्रतिशत वाहन पहले से ही फास्‍टैग का उपयोग करते हैं, और शेष अंतर न केवल जुर्माने के माध्यम से, बल्कि उपयोगकर्ता के अनुकूल प्रोत्साहनों के माध्यम से भी लगातार कम हो रहा है।

अब रुकने की कोई ज़रूरत नहीं – टोल प्रणाली का नया रूप आ गया है।

टोल प्लाजा पर रुकने और फिर से चलने वाले ट्रक चालक ईंधन की बर्बादी, थकान और देरी से परेशान रहते थे। हर बार रुकने पर डीजल और समय दोनों की खपत होती है और लंबे मार्गों पर तो यह खर्च और भी बढ़ जाता है।

अब इस समस्या का समाधान भारत की पहली बाधा-मुक्त मल्टी-लेन फ्री फ्लो (एमएलएफएफ) टोलिंग प्रणाली के माध्यम से किया जा रहा है, जिसे गुजरात में एनएच-48 पर चोर्यासी टोल प्लाजा में लागू करने के लिए पहले ही ठेका दिया जा चुका है और इसके 2026 में चालू होने की उम्मीद है। इसके समानांतर, एनएचएआई ने 5 और बाधा-मुक्त टोलिंग प्रणालियों के लिए ठेके दिए हैं, जो आधुनिकीकरण की दिशा में एक बड़ा कदम है।

एक बार लागू हो जाने के बाद, वाहन राजमार्ग की गति से गुजर सकेंगे, और टोल की कटौती बिना किसी बाधा या कतार के स्वचालित रूप से होगी।

निर्माण के दौरानयात्रियों को केवल 50 प्रतिशत टोल का भुगतान करना होगा

राजमार्गों के नवीनीकरण से अक्सर असुविधा होती है। इसे ध्यान में रखते हुए, सड़क परिवहन मंत्रालय के अद्यतन नियम के अनुसार, जब किसी सड़क को पक्के शोल्डर वाली दो लेन से चार, छह या उससे अधिक लेन में अपग्रेड किया जा रहा हो, तो काम पूरा होने तक वाहन वालों को पहले के टोल का केवल आधा (50 प्रतिशत) ही भुगतान करना होगा। उदाहरण के लिए, यदि किसी राष्ट्रीय राजमार्ग पर बहु-लेन विस्तार के दौरान टोल दर 50 रुपये है, तो निर्माण अवधि के दौरान वाहन वालों को केवल 25 रुपये का भुगतान करना होगा। यह स्पष्ट रूप से सड़क की गुणवत्ता में सुधार के प्रति सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। साथ ही, पारदर्शिता और जवाबदेही को बनाए रखते हुए यह सुनिश्चित करता है कि निर्माण के दौरान यात्रियों से अधिक शुल्क न लिया जाए और यात्रा अधिक किफायती और लोगों के लिए सस्ती बनी रहे।

टोल लागत के अलावा, सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने फास्‍टैग व्यवस्था को निम्नलिखित तरीकों से मजबूत किया है:

  • दुरुपयोग रोकने के लिए एक वाहनएक फास्‍टैग
  • वाहन श्रेणी में होने वाली धोखाधड़ी को रोकने के लिए फास्‍टैग जारी करने की प्रक्रिया को वीएएचएएन से जोड़ा गया है।
  • सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए लूज़ फास्‍टैग के लिए शुल्क दोगुना किया गया।
  • शिकायत निवारण के लिए कई चैनल उपलब्ध हैं — 1033 हेल्पलाइनईमेल सहायताबैंक हेल्पलाइन और राजमार्ग यात्रा ऐप।

देश के राजमार्गों पर गुपचुप बदलाव

ये पहलें शायद हमेशा सुर्खियों में न रहें, लेकिन इनका असर हर दिन महसूस होता है, जैसे कि कतारें छोटी होना, खर्च का अनुमान लगाना, यात्रा का सुगम होना और टोल बूथों पर अधिक सहज अनुभव मिलना।

पिछले एक वर्ष में अपनाए गए दृष्टिकोण से यह स्पष्ट होता है कि सुशासन को जनसुविधा और आर्थिक विकास में से किसी एक को चुनने की आवश्यकता नहीं है। स्मार्ट नीति, डिजिटल उपकरणों और सड़क यात्रियों के प्रति सहानुभूति के साथ, दोनों को प्राप्त करना संभव है।

सड़क पर लगातार यात्रा कर रहे लाखों भारतीयों के लिए, निरंतर सुधार और आराम की दिशा में एक यात्रा शुरू हो चुकी है, जिसके परिणामस्वरूप जीवन में सुगमता आएगी।

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प्रधानमंत्री ने नई दिल्ली में पोंगल उत्सव की झलकियां साझा कीं

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय मंत्री डॉ. एल मुरुगन के आवास पर आयोजित पोंगल उत्सव की झलकियां साझा कीं।

श्री मोदी ने एक्स पर अलग-अलग पोस्ट में कहा:

“यहां केंद्रीय मंत्री श्री एल. मुरुगन जी के आवास पर पोंगल उत्सव की कुछ झलकियां हैं।

“श्री एल. मुरुगन जी के घर पर पोंगल का जश्न पोंगल की गर्मजोशी और रौनक को दिखाता है। यह त्योहार सभी के जीवन में खुशियां लाए।

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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने देशवासियों को ऊर्जा, उमंग और उत्साह के पर्व ‘मकर संक्रांति’ की शुभकामनाएं दी

नई दिल्ली – केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज देशवासियों को ऊर्जा, उमंग और उत्साह के पर्व ‘मकर संक्रांति’ की शुभकामनाएं दी। गृह मंत्री ने कर्नाटक के लोगों को भी मकर संक्रांति, आंध्र प्रदेश एवं तेलंगाना के लोगों को भोगी, संक्रांति और कनुमा, गुजरात के लोगों को उत्तरायण और असम के लोगों को माघ बिहू की भी शुभकामनाएं दी।

X पर किए गए एक पोस्ट में केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा, “ऊर्जा, उमंग और उत्साह के पर्व ‘मकर संक्रांति’ की सभी को हार्दिक शुभकामनाएँ। यह उत्सव आप सभी के जीवन में असीम खुशियाँ और समृद्धि लेकर आए।”

एक अन्य पोस्ट में श्री अमित शाह ने कहा कि मकर संक्रांति के अवसर पर कर्नाटक के हमारे सभी बहनों और भाइयों को शुभकामनाएँ। मैं प्रार्थना करता हूँ कि यह पवित्र त्योहार नई उमंग लाए और हमारे रिश्तों को मज़बूत करे, मैं सभी के अच्छे स्वास्थ्य और समृद्धि की कामना करता हूँ।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने एक अन्य पोस्ट में कहा कि हमारे तेलुगु बहनों और भाइयों को मकर संक्रांति की शुभकामनाएँ। भोगी, संक्रांति और कनुमा के त्योहार हर घर में खुशहाली, सुख और अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद बरसाएँ।

श्री अमित शाह ने एक अन्य पोस्ट में उत्तरायण के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएँ देते हुए कहा कि वह भगवान सूर्य नारायण से सभी के कल्याण की कामना करते हैं।

X पर किए गए एक और पोस्ट में गृह मंत्री ने असम के लोगों को माघ बिहू की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि असम में हमारे सभी बहनों और भाइयों को माघ बिहू की हार्दिक शुभकामनाएँ। यह फसल का त्योहार हमारी एकता को मज़बूत करे और सभी को समृद्धि, अच्छे स्वास्थ्य और खुशी का आशीर्वाद दे।

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जी-राम-जी अनुमानों या आशंकाओं पर नहीं बल्कि साक्ष्य एवं अनुभव पर आधारित है; सरकार ग्रामीण मिशनों में पारदर्शी संवाद के लिए प्रतिबद्ध है : डॉ. जितेंद्र सिंह

नई दिल्ली – एक उत्तरदायी सरकार का यह कर्तव्य है कि वह तथ्यों को बिना किसी प्रकार का राजनीतिक रंग दिए हुए स्पष्ट रूप से जनता के सामने रखे, विशेषकर तब जब नीतियां सीधे गांवों, आजीविका एवं दीर्घकालिक राष्ट्रीय परिणामों को प्रभावित करती हों। इसी उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए, केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी एवं पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन विभाग के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने विकसित भारत ऊर्जा रोजगार एवं आजीविका मिशन (ग्रामीण), जिसे लोकप्रिय एवं संक्षिपित रूप में जी-राम-जी के नाम से भी जाना जाता है, पर मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि यह पहल अनुमानों या आशंकाओं के बजाय साक्ष्य, अनुभव एवं जमीनी हकीकतों पर आधारित है।

मीडिया ब्रीफिंग के दौरान डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि जी-राम-जी को पूर्व के रोजगार कार्यक्रमों से सीख लेकर एक डिजिटल रूप से संचालित, विस्तारित एवं परिणाम-उन्मुख संरचना के रूप में तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि इसका मुख्य उद्देश्य पारदर्शिता, जवाबदेही एवं संपत्ति सृजन में सुधार लाना है, साथ ही यह सुनिश्चित करना है कि रोजगार सृजन सार्थक, मापनीय एवं ग्रामीण समुदायों के लिए प्रत्यक्ष रूप से लाभकारी हो। यह मिशन आधुनिक तकनीक जैसे जीपीएस-आधारित मॉनिटरिंग एवं एआई-संचालित मॉडल को एकीकृत करता है ताकि कार्यों और धन के उपयोग की वास्तविक समय में निगरानी सुनिश्चित की जा सके।

केंद्रीय मंत्री ने मंत्री ने कहा कि जी-राम-जी की एक मुख्य शक्तियों में से एक इसका सम्मिलित दृष्टिकोण है जो उन विभिन्न सार्वजनिक कार्यों को एक साथ लाता है जो पहले अलग-अलग लागू होते थे। योजना, क्रियान्वयन एवं परिणामों को एकरूप करके, यह मिशन कार्यों के दोहराव, धन के दुरुपयोग और अल्पकालिक परिसंपत्तियों को रोकने का लक्ष्य निर्धारित करता है जबकि जल सुरक्षा, ग्रामीण अवसंरचना एवं कृषि श्रमिकों की उपलब्धता जैसी दीर्घकालिक आवश्यकताओं को प्राथमिकता प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि प्रत्येक परियोजना स्पष्ट रूप से परिभाषित परिणामों से जुड़ी है ताकि सार्वजनिक व्यय से सतत सामुदायिक परिसंपत्तियां प्राप्त हो।

श्री सिंह ने प्रमुख संरचनात्मक सुधारों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस योजना में गारंटीकृत वेतन रोजगार दिवसों को 100 से बढ़ाकर 125 दिन किया गया है जो आजीविका सुरक्षा को मजबूत करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। फर्जी लाभार्थियों एवं फर्जी नौकरी कार्डों को लेकर लंबे समय से चली आ रही चिंताओं को समाप्त करने के लिए संपूर्ण प्रणाली का डिजिटलीकरण मजबूत नियंत्रण एवं संतुलन के साथ किया गया है, जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि लाभ वास्तविक श्रमिकों तक पहुंचे और भ्रष्टाचार की समाप्ति हो।

वित्तीय सुधार पर केंद्रीय मंत्री ने कहा कि जी-राम-जी मांग-आधारित एवं असीमित आवंटन से अलग वस्तुनिष्ठ मापदंडों पर आधारित राज्य-वार आवंटन मॉडल की ओर अग्रसर है। उन्होंने कहा कि धन का आवंटन केंद्र और राज्य में 60:40 अनुपात में होगा, जिसमें पूर्वोत्तर राज्यों, हिमालयी राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों के लिए आवश्यकतानुसार विशेष प्रावधान होंगे। उन्होंने कहा कि यह संरचना न केवल वित्तीय उत्तरदायित्व को बढ़ावा देती है बल्कि कार्यान्वयन में राज्य की भागीदारी एवं जवाबदेही को भी बढ़ावा देती है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने रोजगार कार्यों को स्थानीय कृषि कैलेंडर के अनुरूप बनाने के महत्व पर भी बल दिया, ताकि ग्रामीण श्रमिक बिना किसी बाधा के कृषि कार्यों एवं मजदूरी रोजगार के बीच संतुलन स्थापित कर सकें। इस प्रणाली में मौसमी लचीलापन एवं प्राकृतिक आपदाओं जैसी आपात स्थितियों में 60 दिनों तक काम रोकने का प्रावधान शामिल किया गया है जिससे संवेदनशीलता और मजबूती दोनों सुनिश्चित होती हैं। मिशन के अंतर्गत मजदूरी का भुगतान अब साप्ताहिक आधार पर होगा जिससे श्रमिकों की आय स्थिरता में बहुत हद तक सुधार होगा।

मिशन के मूल सिद्धांत को दोहराते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि ईमानदार, पारदर्शी एवं उत्पादक रोजगार के माध्यम से गांवों को सशक्त बनाना महात्मा गांधी के ग्रामीण सशक्तिकरण के दृष्टिकोण की भावना के साथ पूर्ण रूप से मेल खाता है। उन्होंने कहा कि यह मिशन प्रतीकात्मक उपायों के बजाय वास्तविक विकास एवं उत्तरदायी शासन के माध्यम से गांवों को सशक्त बनाने पर केंद्रित है।

केंद्रीय मंत्री डॉ सिंह ने अपने संबोधन को समाप्त करते हुए कहा कि सरकार राष्ट्रीय हित में जी-राम-जी से संबंधित तथ्यों को निष्पक्ष रूप से संचारित करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि यह मिशन राजनीतिक विचारों से प्रभावित हुए बिना, गांवों, श्रमिकों एवं देश के कल्याण को सर्वोपरि रखते हुए प्रतिक्रियाओं एवं सुधारों के माध्यम से निरंतर विकसित होता रहेगा।

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प्रधानमंत्री ने उत्तरायण और माघ बिहू के अवसर पर सभी देशवासियों को शुभकामनाएं दीं

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज उत्तरायण और माघ बिहू के अवसर पर सभी देशवासियों को शुभकामनाएं दीं।

श्री मोदी ने एक्स पर अलग-अलग पोस्ट में कहा:

सभी को उत्तरायण की हार्दिक शुभकामनाएं!

सभी देशवासियों को माघ बिहू की हार्दिक शुभकामनाएं!

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प्रधानमंत्री ने मकर संक्रांति के अवसर पर सभी देशवासियों को शुभकामनाएं दीं

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री ने मकर संक्रांति पर बल देते हुए कहा कि मकर संक्रांति एक ऐसा त्योहार है, जो  भारतीय संस्कृति और परंपराओं की समृद्धि को दर्शाता है  और सद्भाव, समृद्धि एवं एकजुटता की भावना का प्रतीक है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि तिल और गुड़ की मिठास सभी के जीवन में प्रसन्‍नता और सफलता लाएगी। साथ ही, उन्‍होंने राष्ट्र के कल्याण के लिए सूर्य देव का आशीर्वाद भी मांगा।

श्री मोदी ने भगवान सूर्य का आशीर्वाद मांगते हुए एक संस्कृत सुभाषितम भी साझा किया, जो इस त्योहार के आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित करता है।

श्री मोदी ने एक्स पर अलग-अलग पोस्ट में लिखा:

“सभी देशवासियों को मकर संक्रांति की असीम शुभकामनाएं। तिल और गुड़ की मिठास से भरा भारतीय संस्कृति एवं परंपरा का यह दिव्य अवसर हर किसी के जीवन में प्रसन्नता, संपन्नता और सफलता लेकर आए। सूर्यदेव सबका कल्याण करें।”

“संक्रांति के इस पावन अवसर को देश के विभिन्न हिस्सों में स्थानीय रीति-रिवाजों के अनुसार मनाया जाता है। मैं सूर्यदेव से सबके सुख-सौभाग्य और उत्तम स्वास्थ्य की कामना करता हूं।

सूर्यो देवो दिवं गच्छेत् मकरस्थो रविः प्रभुः।

उत्तरायणे महापुण्यं सर्वपापप्रणाशनम्॥”

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फ्रांस के राष्‍ट्रपति के राजनयिक सलाहकार ने प्रधानमंत्री से मुलाकात की

नई दिल्ली – फ्रांस के राष्‍ट्रपति के राजनयिक सलाहकार श्री इमैनुएल बॉन ने आज नई दिल्‍ली में प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी से मुलाकात की।

श्री मोदी ने एक्‍स पर एक पोस्‍ट में लिखा :

फ्रांस के राष्‍ट्रपति श्री मैक्रों के राजनयिक सलाहकार श्री इमैनुएल बॉन से मिलकर बहुत प्रसन्‍नता हुई। हमने कई कार्यक्षेत्रों में घनिष्‍ठ सहयोग से चिन्हित एक मजबूत और भरोसेमंद भारत- फ्रांस रणनीतिक साझीदारी की पुष्टि की। विशेष रूप से जब हम भारत-फ्रांस इनोवेशन वर्ष मना रहे हैं तो यह देखकर प्रसन्‍नता हुई कि हमारा सहयोग नवोन्‍मेषण, प्रौद्योगिकी और शिक्षा के क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। हमने प्रमुख क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान प्रदान किया। शीघ्र ही राष्‍ट्रपति श्री मैक्रों का भारत में स्‍वागत करने की उम्‍मीद है।

@EmmanuelMacron”

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असम और पश्चिम बंगाल को भारत के कोने-कोने से जोड़ने वाली नौ अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनों को जल्द ही हरी झंडी दिखाई जाएगी

नई दिल्ली – रेल यात्रा के अनुभव के मामले में नया साल परिवर्तनकारी साबित हो रहा है। चाहे आम आदमी हो या प्रीमियम यात्री, भारतीय रेलवे पूरे भारत में यात्रियों को किफायती, आरामदायक यात्रा का अनुभव प्रदान करने के लिए पूरी तरह तैयार है।

पश्चिम बंगाल और असम से जल्द ही नौ अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनें पूरे भारत में शुरू की जाएंगी, जिससे आधुनिक और किफायती ट्रेनों का दायरा बढ़ेगा। ये ट्रेनें इन दोनों राज्यों से किफायती और लंबी दूरी की कनेक्टिविटी प्रदान करेंगी, जिसमें बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे आबादी वाले राज्य शामिल होंगे। ये तमिलनाडु, महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे दूर-दराज के राज्यों को भी कवर करेंगी, जिससे देश के कई हिस्सों को जोड़ा जा सकेगा। ये सेवाएं रेल यात्रा की बढ़ती मांग को कम करेंगी और यात्रियों को आरामदायक यात्रा का अनुभव भी प्रदान करेंगी।

भारत में पहली ट्रेन यात्रा के लगभग दो सदियों बाद, भारतीय रेलवे ने उन लाखों लोगों के लिए आवागमन को फिर से परिभाषित किया है जो दैनिक आवश्यकताओं के लिए ट्रेनों पर निर्भर हैं। लक्जरी यात्रा से जुड़ी सुविधा और आराम को आम यात्रियों तक पहुंचाकर,  इसने धीरे-धीरे आधुनिक, यात्री-अनुकूल सेवाओं का विस्तार किया है, यह सुनिश्चित करते हुए कि विश्वसनीयता, सुरक्षा और  आराम अब केवल प्रीमियम यात्रियों तक ही सीमित नहीं हैं।

इसी विज़न के तहत, अमृत भारत एक्सप्रेस रोज़मर्रा के यात्रियों के लिए एक वरदान बनकर उभरी है। अमृत काल की एक विशेष पेशकश के रूप में शुरू की गई ये ट्रेनें बिना किसी रुकावट के, नॉन-एसी लंबी दूरी की स्लीपर श्रेणी की यात्रा की सुविधा देती है, जिसका किराया लगभग 500 रुपये प्रति 1000 किलोमीटर है, तथा छोटी और मध्यम दूरी की यात्राओं का किराया उसी हिसाब से  कम होता है, जो अक्सर भूगोल और अवसरों की कमी के कारण अलग-थलग पड़े इलाकों को जोड़ती है। किराये की संरचना सरल और पारदर्शी है, जिसमें कोई डायनामिक प्राइसिंग नहीं है, जो इसे आम आदमी के लिए सुलभ बनाता है।

दिसंबर 2023 में इसकी शुरुआत के बाद से, 30 अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनें चल रही हैं, और सिर्फ़ एक हफ़्ते में नौ नई सेवाएं जोड़ी जाएंगी। अमृत भारत एक्सप्रेस सेवाओँ का एक नया सेट पूर्वी और उप-हिमालयी क्षेत्रों से दक्षिणी, पश्चिमी और मध्य भारत के प्रमुख गंतव्य-स्थलों तक रेल कनेक्टिविटी को बढ़ाएगा।

ये नई अमृत भारत एक्सप्रेस ट्रेनें असम, बिहार और पश्चिम बंगाल से गुज़रने वाले रूटों पर शुरू की जा रही हैं, ये ऐसे क्षेत्र है जहां भारत के प्रवासी मज़दूरों और लंबी दूरी के रेल यात्रियों की एक बड़ी संख्या रहती हैं। अधिक यात्रियों को सुविधा देने के लिए डिज़ाइन की गई ये ट्रेनें, खासकर त्योहारों के मौसम और ज्यादा भीड़भाड़ वाले समय, देश के अलग-अलग हिस्सों में रोज़गार, शिक्षा और पारिवारिक ज़रूरतों के लिए यात्रा करने वाले यात्रियों को भरोसेमंद, किफायती और आरामदायक कनेक्टिविटी प्रदान करेंगी।

किफायती, लंबी दूरी की कनेक्टिविटी को बढ़ाने के लिए भारतीय रेलवे के निरंतर प्रयास के तहत, नौ अमृत भारत एक्सप्रेस सेवाएं प्रमुख कॉरिडोर में शुरू की जा रही हैं। रूट इस प्रकार हैं:

1. गुवाहाटी (कामाख्या)– रोहतक अमृत भारत एक्सप्रेस

2. डिब्रूगढ़-लखनऊ (गोमती नगर) अमृत भारत एक्सप्रेस

3. न्यू जलपाईगुड़ी-नागरकोइल अमृत भारत एक्सप्रेस

4. न्यू जलपाईगुड़ी-तिरुचिरापल्ली अमृत भारत एक्सप्रेस

5. अलीपुरद्वार-एसएमवीटी बेंगलुरु अमृत भारत एक्सप्रेस

6. अलीपुरद्वार-मुंबई (पनवेल) अमृत भारत एक्सप्रेस

7. कोलकाता (संतरागाछी) – तांबरम अमृत भारत एक्सप्रेस

8. कोलकाता (हावड़ा) – आनंद विहार टर्मिनल अमृत भारत एक्सप्रेस

9. कोलकाता (सियालदह) – बनारस अमृत भारत एक्सप्रेस

न्यू जलपाईगुड़ी से, ट्रेनें सीधे उत्तर बंगाल को देश के दक्षिणी छोर और सेंट्रल तमिलनाडु से जोड़ेंगी, जिससे विभिन्न भाषाई, सांस्कृतिक और आर्थिक क्षेत्रों में बिना किसी रुकावट के कॉरिडोर बनेंगे। इन रूटों के प्रवासी मजदूरों, छात्रों, व्यापारियों और परिवारों के लिए महत्वपूर्ण जीवनरेखा बनने की उम्मीद है, जो नियमित रूप से पूर्वी भारत और दक्षिण भारत के शैक्षिक, औद्योगिक और व्यावसायिक केंद्रों के बीच यात्रा करते हैं।

इसी तरह, अलीपुरद्वार से नई सेवाएं पूर्वोत्तर भारत के दुआर क्षेत्र और देश के दक्षिणी एवं पश्चिमी हिस्से में प्रमुख महानगरीय एवं औद्योगिकी केन्द्रों के बीच कनेक्टिविटी को मज़बूत करेंगी। जो क्षेत्र भौगोलिक रूप से दूरस्थ हैं लेकिन रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हैं, उनके लिए ये ट्रेनें मजबूत आर्थिक और सामाजिक कनेक्टर का काम करेंगी, जिससे रोज़गार, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा व बाज़ारों तक पहुंच बढ़ेगी।

बेंगलुरु और चेन्नई जैसे दक्षिणी शहरों की ओर विस्तार करने वाली सेवाएं पूर्वी और पूर्वोत्तर क्षेत्रों को प्रमुख विनिर्माण, आईटी और शिक्षा केंद्रों से जोड़कर कार्यबल के आवागमन और छात्रों की यात्रा में मदद करेंगी। मुंबई और पनवेल से सीधी कनेक्टिविटी पूर्व-पश्चिम एकीकरण को मजबूत करेगी, जिससे बिजनेस संबंधी यात्रा और प्रमुख वाणिज्यिक और लॉजिस्टिक्स केंद्रों तक पहुंच आसान होगी।

ओडिशा और आंध्र प्रदेश से गुज़रने वाले रूट ईस्टर्न कॉरिडोर पर निर्बाध आवाजाही को बेहतर बनाएंगे, जिससे औद्योगिक, तटीय और तीर्थयात्रा वाले इलाकों को लाभ होगा।

यात्री कई आधुनिक सुविधाओं का आनंद ले सकते हैं, जिनमें फोल्डेबल स्नैक टेबल, मोबाइल और बोतल होल्डर, रेडियम फ्लोर स्ट्रिप्स, आरामदायक सीटें और बर्थ, इलेक्ट्रो-न्यूमेटिक फ्लशिंग वाले आधुनिक टॉयलेट, आग बुझाने के सिस्टम और दिव्यांग यात्रियों के लिए भी सुविधाएं शामिल हैं। फास्ट चार्जिंग पॉइंट व पैंट्री कार लंबी दूरी की यात्रा को और भी आरामदायक बनाते हैं।

आम यात्रियों की ज़रूरतों को ध्यान में रखते हुए, अमृत भारत एक्सप्रेस यह साबित करती है कि आधुनिक डिज़ाइन, भरोसेमंद और बेहतर सुविधाएं किफायती किराए पर उपलब्ध करवाई जा सकती हैं। रोज़मर्रा के यात्रियों के लिए नॉन-एसी लंबी दूरी की यात्रा को फिर से परिभाषित करके, यह समावेशी, यात्री-केंद्रित रेल आधुनिकीकरण के लिए एक मिसाल कायम करती है। अमृत भारत ट्रेन  भविष्य के लिए तैयार रेलवे सिस्टम को दर्शाती है, जहां बेहतर डिज़ाइन, स्वदेशी तकनीक और बेहतरीन परिचालन मिलकर आरामदायक, भरोसेमंद और सभी के लिए रेल यात्रा को नया राष्ट्रीय मानक बनाते हैं।

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सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय का कौशल विकास पहल ‘इंस्पायरिंग इनोवेटर्स’ के लिए नेटफ्लिक्स के साथ सहयोग

नई दिल्ली – सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय का नेटफ्लिक्स के साथ सहयोग नेटफ्लिक्स फंड फॉर क्रिएटिव इक्विटी द्वारा विकसित कौशल विकास पहल ‘इंस्पायरिंग इनोवेटर्स – नए भारत की नई पहचान’ परिणति के रूप में सामने आई है। ग्राफीटी स्टूडियोज की साझेदारी में कार्यान्वित यह पहल, कहानी कहने और व्यावहारिक कौशल प्रशिक्षण द्वारा सामाजिक तौर पर प्रासंगिक नवोन्मेष को बढ़ावा देने के लिए भारत के नवाचार और रचनात्मक परितंत्र को साथ जोड़ती है।
इस पहल में नवोन्मेष से सामाजिक प्रभाव को बढ़ावा देने के लिए प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार कार्यालय द्वारा चयनित आठ भारतीय स्टार्टअप्स के योगदान को प्रदर्शित किया गया है। ये स्टार्टअप्स देश भर के आठ विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों द्वारा बनाई गई आठ लघु एनिमेटेड फिल्मों द्वारा दर्शाए गए हैं। फिल्म निर्माण में राष्ट्रीय डिज़ाइन संस्थान, चितकारा विश्वविद्यालय, सत्यजीत रे फिल्म और टेलीविजन संस्थान, और कई अन्य विश्वविद्यालय शामिल हैं। फिल्मों के लिए वॉइसओवर-पार्श्व स्वर, नेटफ्लिक्स और राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम -एनएफडीसी के सहयोग से आरंभ की गई कौशल विकास पहल ‘वॉइसबॉक्स’ के प्रतिभागियों द्वारा रिकॉर्ड किए गए हैं।

 

नेटफ्लिक्स फंड फॉर क्रिएटिव इक्विटी के तहत कहानी कहने और कौशल विकास पर आधारित इस कार्यक्रम ने भारत के विभिन्न हिस्सों से आए 26 छात्रों को व्यावहारिक रचनात्मक अनुभव प्रदान कराया। प्रतिभागियों में 50 प्रतिशत महिलाएं थीं और इनमें से कई प्रतिभागी श्रेणी-दो के शहरों से आए थे। उन्हें अहमदाबाद स्थित राष्ट्रीय डिजाइन संस्थान-एनआईडी और ग्राफिटी स्टूडियो के विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में उद्योग प्रक्रियाओं का व्यावहारिक और वास्तविक अनुभव प्राप्त हुआ।

कार्यक्रम में सांस्कृतिक और रचनात्मक आयाम जोड़ते हुए शंकर महादेवन अकादमी के विद्यार्थियों ने पहल का मूल गान प्रस्तुत किया।

सूचना एवं प्रसारण एवं संसदीय कार्य राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की समृद्ध कथा कहने की परंपरा में हमारे फिल्मकारों के पास आज भारतीय कहानियों को वैश्विक दर्शकों तक पहुंचाने का अवसर है, जिसमें बौद्धिक संपदा ढांचे को सुदृढ़ करने और भविष्य के लिए तैयार सृजनात्मक पारिस्थितिकी तंत्र सक्षम बनाने के लिए सरकार का सहयोग प्राप्त है। डॉ. मुरुगन ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के दृष्टिकोण से प्रेरित यह पहल भारत में सृजन और विश्व के लिए सृजन करने का सही समय है, जिसमें विषयवस्तु, रचनाशीलता और संस्कृति भारत की अर्थव्यवस्था के प्रमुख स्तंभों के रूप में उभर रहे हैं। उन्होंने कहा कि जब फिल्मकारों द्वारा कथा कहने के तरीके उभरती प्रौद्योगिकियों द्वारा आकारित नए युग में प्रवेश कर रही है, इंस्पायरिंग इनोवेटर्स जैसी पहल दर्शाती हैं कि सृजनशीलता का उपयोग समाज सेवा में किस तरह हो सकता है।”

 

 

भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रोफेसर अजय कुमार सूद ने अपने संबोधन में कहा कि इंस्पायरिंग इनोवेटर्स कार्यक्रम का उद्देश्य सामाजिक महत्व वाले नवाचारों को सामने लाना तथा कौशल एवं ज्ञान के विकास को बढ़ावा देना है। उन्होंने कहा कि सृजनात्मक प्रक्रिया द्वारा स्टार्टअप्स और विद्यार्थियों को साथ लाकर, और नेटफ्लिक्स फंड फॉर क्रिएटिव इक्विटी तथा उद्योग मार्गदर्शन के माध्यम से कौशल विकास सहायता प्रदान कर, यह भारत के नवाचार परितंत्र निर्मित करने का समग्र दृष्टिकोण दर्शाता है, जो नीतिगत उद्देश्यों को प्रतिभा विकास और वास्तविक दुनिया में उपयोग से जोड़ता है।

 

केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण सचिव श्री संजय जाजू ने कहा कि भारत में कई उल्लेखनीय नवाचार हो रहे हैं, जिनमें आमतौर पर सामाजिक नवप्रवर्तक रोजमर्रा की चुनौतियों का प्रभावशाली और उद्देश्यपूर्ण समाधान दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि भारत में नेटफ्लिक्स के एक दशक पूरा होने पर, ‘इंस्पायरिंग इनोवेटर्स’ इसका एक सशक्त उदाहरण है कि कैसे कहानी कहने की कला दृश्य-श्रव्य निर्माण से आगे बढ़कर सार्थक कौशल विकास और सशक्तिकरण मंच के रुप में विकसित हो सकती है। यह देश भर की युवा प्रतिभाओं के आत्मविश्वास और उनकी व्यावसायिकता को दर्शाती है। यह वास्तव में सृजनकारों और उनके कथ्य कहने का युग है, और जब हम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित कथाओं को आकार देने के युग में प्रवेश कर रहे हैं, अगली पीढ़ी के विकास और प्रगति को सक्षम बनाने वाली नई तकनीकों को अपनाना आवश्यक है। श्री जाजू ने कहा कि भारत की प्रासंगिक, उद्देश्यपूर्ण कहानियों को दूर-दराज के दर्शकों तक पहुंचते देखना उत्साहजनक है।”

 

 

नेटफ्लिक्स इंडिया की ग्लोबल अफेयर्स डायरेक्टर महिमा कौल ने कहा कि हम भारत के युवा और जीवंत रचनात्मक परितंत्र के कौशल विकास और इसके उन्नयन के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने कहा कि इंस्पायरिंग इनोवेटर्स वास्तविक सामाजिक सहयोग प्रदान करने वाले नवाचार को मान्यता देने की हमारी साझा प्रतिबद्धता दर्शाता है।

 

मंथन-प्रेरित नवाचार

मंथन एक राष्ट्रीय डिजिटल आधार के रूप में कार्य करता है जो उच्च श्रेणी के नवाचारों की पहचान कर, उन्हें सुव्यवस्थित बनाता है और विस्तार के अवसर प्रदान करता है। मंथन प्लेटफॉर्म द्वारा आठ सामाजिक नवाचार स्टार्टअप्स की खोज की गई और उन्हें सहयोग दिया गया। इस पहल के तहत निर्माण की गई आठ फिल्में निम्नलिखित हैं:

  1. नियोमोशन
    यह फिल्म उन नवप्रवर्तकों के बारे में बताता है जो दिव्यांगों को स्वतंत्र रूप से चलने और सम्मानजनक आजीविका अर्जित करने में सक्षम बनाने के लिए अनुकूलित व्हीलचेयर और गतिशीलता समाधान प्रदान करते हैं।

2. ब्लाइंड विजन फाउंडेशन ने
इस फिल्म दिखाया गया है कि ब्लाइंड विजन फाउंडेशन ने कृत्रिम बुद्धिमता-संचालित स्मार्ट चश्मे बनाए हैं जो दृष्टिबाधित व्यक्तियों को पढ़ने, रास्ता खोजने, चेहरों को पहचानने और आत्मविश्वास के साथ स्वतंत्र रूप से जीवन जीने में सक्षम बनाता है।

3. हेल्थकेयर ग्लोबल एंटरप्राइजेज (इनौमेशन)
यह कम कीमत वाली वॉइस प्रोस्थेसिस की कहानी बताती है जो लैरिंजेक्टोमी के बाद गले के कैंसर से बचे लोगों के लिए संवाद, गरिमा और आजीविका पाने में मदद करती है।

4. इनोगल
इसमें भारत की जलजनित अर्थव्यवस्था के लिए समुद्री सुरक्षा, मत्स्य पालन उत्पादकता, महासागर सुरक्षा और आपदा निगरानी में सुधार लाने वाली एआई और जलमग्न प्रौद्योगिकियों की कहानी बताई गई है।

  1. कल्टीवेट
    इसमें स्वयं में पूर्ण, कृत्रिम बुद्धिमता-संचालित सिंचाई प्रणालियों को दर्शाया गया है जो किसानों को जल बचाने, पैदावार बढ़ाने और जलवायु-अनुकूल, कृषि पद्धतियां अपनाने में मदद करती हैं।

6. वीईवीओआईएस लैब्स
इसमें तकनीक-सक्षम अपशिष्ट प्रबंधन दर्शाया गया है जो पृथक्करण, पुनर्चक्रण, सम्मानजनक स्वच्छता कार्य और चक्रीय अर्थव्यवस्था समाधानों के माध्यम से शहरों में बदलाव रहा है।

7. ग्रीनजीन एनवायरनमेंटल टेक्नोलॉजीज
इस फिल्म में सूक्ष्म शैवाल आधारित कार्बन कैप्चर नवाचारों की खोज के बारे में बताया गया है, जो औद्योगिक उत्सर्जन में कमी लाकर  CO₂ को जैव-संसाधनों में स्थायी रूप से परिवर्तित करते हैं।

8. एलसीबी फर्टिलाइजर्स
इस फिल्म में कृषि और औद्योगिक कचरे को बायो-नैनो उर्वरक में परिवर्तित करने की प्रक्रिया दर्शाई गई है, जिससे मृदा स्वास्थ्य, किसानों की आय और संधारणीय कृषि में सुधार हो रहा है।

ये आठों फिल्में नेटफ्लिक्स इंडिया के यूट्यूब चैनल पर देखी जा सकती हैं ।

नेटफ्लिक्स फंड फॉर क्रिएटिव इक्विटी

नेटफ्लिक्स फंड फॉर क्रिएटिव इक्विटी मनोरंजन जगत के कम संसाधन वाले सृजनकारों को सहायता देने का समर्पित प्रयास है। टेलीविजन और फिल्म उद्योगों में अधिक से अधिक लोगों तक पहुंच बनाने के लिए प्रतिबद्ध बाहरी संगठनों का समर्थन करने के साथ ही, यह कोष नेटफ्लिक्स के उन विशेष कार्यक्रमों को भी सहयोग देता है जो वैश्विक स्तर पर उभरती प्रतिभाओं की पहचान कर, उन्हें प्रशिक्षित करने और रोजगार के अवसर प्रदान करने के लिए तैयार किए गए हैं।

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सरकार प्रत्येक नागरिक को विशेषकर दूरस्थ और द्वीपीय क्षेत्रों में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है: रक्षा मंत्री

नई दिल्ली – रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 13 जनवरी 2026 को लक्षद्वीप के कवरत्ती स्थित इंदिरा गांधी अस्पताल में भारतीय नौसेना की ओर से आयोजित लगभग एक सप्ताह के संयुक्त सेवा बहु-विशेषज्ञता शिविर को वर्चुअल रूप से संबोधित करते हुए कहा, “सरकार देश के प्रत्येक नागरिक, विशेषकर दूरस्थ और द्वीपीय क्षेत्रों में रहने वालों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।” यह शिविर इन द्वीपों में पहली बार आयोजित किया गया था। उन्होंने इस पहल को समुद्री सुरक्षा से आगे बढ़कर राष्ट्र निर्माण और मानवीय सहायता में भारतीय नौसेना की महत्वपूर्ण भूमिका का उत्कृष्ट उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि इस शिविर के माध्यम से सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं के तीनों सेवाओं के दल ने उन्नत निदान सुविधाएं और विशेषज्ञ देखभाल सुविधा सीधे लोगों के घर तक पहुंचाई है जिनमें नियोजित शल्य चिकित्सा और मोतियाबिंद के ऑपरेशन जैसी सेवाएं शामिल हैं।

रक्षा मंत्री ने कहा कि व्यापक रूप से जांच, शीघ्र निदान, समय पर चिकित्सा सलाह, चिकित्सा हस्तक्षेप और दवाओं का निःशुल्क वितरण इन द्वीपों के समुदायों के दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ में योगदान देगा। उन्होंने यह भी कहा कि “हम स्वस्थ भारत के संकल्प के साथ काम कर रहे हैं। हमने न केवल स्वास्थ्य क्षेत्र में भौतिक बुनियादी ढांचे को बढ़ावा दिया है बल्कि आयुष्मान भारत और जन औषधि केंद्रों जैसी पहलों के माध्यम से लोगों के कल्याण का भी ध्यान रखा है।”

नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने शिविर का औपचारिक उद्घाटन करते हुए इस पहल को तीन मायनों में अद्वितीय बताया – ‘तालमेल’, क्योंकि यह शिविर तीनों सेनाओं और स्थानीय प्रशासन के पेशेवरों के साथ मिलकर किया गया एक सच्चा संयुक्त प्रयास है; ‘दायरा’, क्योंकि इसमें हृदय रोग, नेत्र रोग, मोतियाबिंद शल्य चिकित्सा, गुर्दे की बीमारी, तंत्रिका विज्ञान, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, त्वचा रोग और अंतःस्रावी रोग जैसे विभिन्न चिकित्सा क्षेत्रों के विशेषज्ञों की भागीदारी है और ‘व्यापकता’, क्योंकि इस शिविर के लिए बड़ी संख्या में चिकित्सा जगत के पेशेवरों और सहायक कर्मियों को तैनात किया गया है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इस तरह की संयुक्त पहल सेवाओं के बीच आपसी तालमेल और नागरिक-सैन्य सहयोग को मजबूत करती है और साथ ही नागरिकों के कल्याण में भी महत्वपूर्ण योगदान देती है।

उद्घाटन समारोह के बाद, नौसेना प्रमुख ने मरीजों से बातचीत की और मोतियाबिंद की शल्य चिकित्सा के लाभार्थियों को चश्मे, आई ड्रॉप और दवाइयां सौंपीं। उद्घाटन समारोह में दक्षिणी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल समीर सक्सेना, सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा की महानिदेशक सर्जन वाइस एडमिरल आरती सरीन, प्रशासक के सलाहकार श्री साई बी दीपक के साथ-साथ सशस्त्र बलों के वरिष्ठ अधिकारी, नागरिक प्रशासन के प्रतिनिधि और स्थानीय जनता के बीच से भी लोग उपस्थित थे।

रक्षा मंत्री की परिकल्पना के अनुसार, भारतीय नौसेना पांच द्वीपों – अमिनी, एंड्रोथ, अगत्ती, कवरत्ती और मिनिकॉय – में बहु-विशेषज्ञता शिविर आयोजित कर रही है ताकि वहां के निवासियों को व्यापक चिकित्सा देखभाल प्रदान की जा सके तथा अधिकतम पहुंच और सुगमता सुनिश्चित की जा सके। जिन रोगियों को आवश्यकता है, उनके मोतियाबिंद की सर्जरी करने के लिए कवरत्ती में एक समर्पित नेत्र रोग टीम तैनात की गई है।

 

इस शिविर के अंतर्गत देशभर के विभिन्न प्रतिष्ठानों से सशस्त्र बलों के 29 चिकित्सा अधिकारी, दो नर्सिंग अधिकारी और 42 पैरामेडिकल कर्मी तैनात किए गए हैं। लक्षद्वीप में पहले से स्थापित सरकारी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली है जिसमें जिला अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और प्राथमिक स्वास्थ्य सुविधाएं शामिल हैं। इन सेवाओं में सहायता के लिए चिकित्सा उपकरण, भंडार और दवाओं की उपलब्धता बढ़ाई गई है जिससे संबंधित स्वास्थ्य केंद्रों पर विशेषज्ञों और विशिष्ट रोगों के विशेषज्ञों की देखभाल तक पहुंच संभव हो सके। अगत्ती और मिनिकॉय में ऑपरेशन और प्रक्रिया संबंधी आवश्यकताओं के प्रबंधन के लिए समर्पित शल्य चिकित्सा दलों को भी तैनात किया गया है।

इस शिविर की एक प्रमुख विशेषता यह है कि इसमें केवल दो दिनों के भीतर लगभग 50 ऐसी शल्य चिकित्सा की गई जिससे लोगों की दृष्टि वापस लाई जा सकी। इसमें आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल) के विशेषज्ञों की ओर से द्वीप के निवासियों को विश्व स्तरीय नेत्र चिकित्सा देखभाल सुविधा प्रदान की जा रही है और आने वाले कुछ दिनों में इस तरह की और भी कई सर्जरी की जाएंगी।

बुजुर्गों को आंखों की रोशनी वापस मिली (कवरत्ती द्वीप)

अमिनी के स्थानीय निवासी 65 वर्षीय कुनी कोया मोतियाबिंद से पीड़ित थे जिसके कारण वे लगभग अंधे हो गए थे। उनकी सफल सर्जरी इस शिविर के मूल उद्देश्य को दर्शाती है – यह सुनिश्चित करना कि भारत के सबसे छोटे केंद्र शासित प्रदेश के निवासी कभी भी अंधेरे में न रह जाएं।

अगत्ती में महत्वपूर्ण सफलता (खालिद सी, 68)

कई वर्षों तक खालिद की दुनिया अपने पुराने स्वरूप की धुंधली परछाई मात्र रह गई थी। आज वह इस ऐतिहासिक मिशन का प्रतीक बन गया क्योंकि अत्याधुनिक तकनीक का पहली बार अगत्ती की धरती पर प्रयोग किया गया। उसने फुसफुसाते हुए कहा, “मुझे लगा जैसे समुद्र का कोहरा मेरी आत्मा में समा गया हो,” उसकी आँखें एक दशक में पहली बार साफ थीं। उसने कहा, “आज, नौसेना ने मुझे मेरे घर का नीला रंग लौटा दिया”।

इस शिविर में चिकित्सकीय उपचार के अतिरिक्त समग्र स्वास्थ्य पर भी विशेष बल दिया गया है जो प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के इस दृष्टिकोण के अनुरूप है कि अच्छा स्वास्थ्य केवल रोगों से मुक्ति ही नहीं, बल्कि सभी के लिए संपूर्ण कल्याण और खुशहाली की गारंटी है। नागरिकों को निवारक स्वास्थ्य देखभाल, जीवनशैली में बदलाव, मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जानकारी और पोषण संबंधी परामर्श दिए गए। भारत की पारंपरिक और टिकाऊ खाद्य प्रणालियों के अंतर्गत बाजरा के लाभों पर प्रकाश डालते हुए आहार संबंधी मार्गदर्शन, साथ ही योग और स्वास्थ्य संबंधी अभ्यास भी प्रदान किए गए ताकि दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ प्राप्त हो सकें।

यह पहल प्रधानमंत्री के उस दृष्टिकोण के अनुरूप है जिसके अंतर्गत देश के सुदूरतम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों सहित प्रत्येक नागरिक तक गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा की समान पहुंच सुनिश्चित की जाती है। आयुष्मान भारत – प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना जैसी प्रमुख राष्ट्रीय पहलों की भावना को दर्शाते हुए यह शिविर उपचारात्मक देखभाल को निवारक और संवर्धक स्वास्थ्य सेवाओं के साथ जोड़ कर देश के वैश्विक स्वास्थ्य दर्शन ‘एक पृथ्वी, एक स्वास्थ्य’ को रेखांकित करता

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नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित राष्ट्रीय युवा महोत्सव 2026 में परिवर्तनकारी डिजिटल शिक्षा अवसरों का प्रदर्शन किया गया

नई दिल्ली – नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में 9 से 12 जनवरी 2026 तक राष्ट्रीय युवा महोत्सव (एनवाईएफ) 2026 का आयोजन किया गया। इसमें भारत के युवाओं की भावना, नवाचार और आकांक्षाओं का उत्सव मनाया गया। इस महोत्सव ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की परिकल्पना के अनुरूप भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय की प्रमुख शिक्षा और कौशल विकास अवसरों को प्रदर्शित करने के लिए एक जीवंत मंच के रूप में कार्य किया।

 

राष्ट्रीय युवा महोत्सव 2026 का प्रमुख आकर्षण राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय है, जो युवाओं को पुस्तकों और शिक्षण संसाधनों के एक समृद्ध डिजिटल भंडार तक पहुंच प्रदान कर रहा है। दीक्षा, वर्चुअल लैब्स और ऑगमेंटेड रियलिटी (एआर) समाधानों के साथ मिलकर ऐसे गहन प्रौद्योगिकी-सक्षम शिक्षण अनुभवों का प्रदर्शन कर रही है जो वैचारिक समझ और व्यावहारिक कौशल को बढ़ाते हैं।

पीएम ई-विद्या पहल को एकीकृत डिजिटल शिक्षा मंच के रूप में प्रदर्शित किया जा रहा है जो ऑनलाइन/ऑन-एयर, डिजिटल और प्रसारण मोड के माध्यम से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक समान पहुंच सुनिश्चित करता है। डिजिटल पहल जैसे कि ‘माई करियर एडवाइजर’ ऐप के माध्यम से करियर की तैयारी और कौशल विकास को बढ़ावा दिया जा रहा है, जो युवाओं को करियर विकल्पों और रोजगार क्षमता की ओर मार्गदर्शन करता है।

यह महोत्सव उल्लास {यूएलएलएएस} (समाज में सभी के लिए आजीवन सीखने को समझना) के माध्यम से आजीवन सीखने पर भी जोर देता है और सामाजिक भागीदारी के माध्यम से वयस्क शिक्षा को प्रोत्साहित करता है। ई-जादुई पिटारा के माध्यम से मूलभूत शिक्षा को मजबूत किया जा रहा है, जो मूलभूत स्तर पर युवा शिक्षार्थियों की देखभाल करने वालों के लिए आनंदमय, खेल-आधारित डिजिटल सामग्री प्रदान करता है।

इसके अतिरिक्त शिक्षा मंत्रालय के विद्यालय शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की ऑनलाइन विद्यालय स्वयंसेवी पहल विद्यांजलि को युवाओं, विद्यालय के पूर्व छात्रों, पेशेवरों, संस्थानों और समाज के लिए स्वयंसेवकों के रूप में सक्रिय रूप से भाग लेने और सरकारी स्कूलों में सीखने को बेहतर बनाने में योगदान देने के लिए एक प्रमुख मंच के रूप में प्रदर्शित किया जा रहा है। विद्यांजलि पोर्टल स्वयंसेवकों को सरकारी स्कूलों से जुड़ने और सामाजिक भागीदारी, सीएसआर भागीदारी और मार्गदर्शन के माध्यम से स्कूली शिक्षा को मजबूत करने में अपने कौशल, ज्ञान और संसाधनों को साझा करने में सक्षम बनाता है।

इन उपक्रमों के माध्यम से एनवाईएफ 2026 युवाओं के लिए समावेशी, प्रौद्योगिकी संचालित और भविष्य के लिए तैयार शिक्षा के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को सक्रिय रूप से मजबूत कर रहा है और एनईपी-2020 के लक्ष्यों को साकार करने में मदद कर रहा है।

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भारत और जर्मनी ने डाक, एक्सप्रेस एवं लॉजिस्टिक्स सेवाओं के क्षेत्र में सहयोग को घनिष्ठ बनाया

नई दिल्ली – भारत और जर्मनी ने 12 जनवरी 2026 को अहमदाबाद में, जर्मनी के संघीय गणराज्य के संघीय चांसलर महामहिम श्री फ्रेडरिक मर्ज की भारत यात्रा के दौरान, दो अहम समझौतों पर हस्ताक्षर व आदान-प्रदान करके डाक, एक्सप्रेस एवं लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में द्विपक्षीय सहयोग को सुदृढ़ करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है।

हस्ताक्षर किए गए दस्तावेजों में शामिल हैं: (i) भारत सरकार के संचार मंत्रालय के डाक विभाग और जर्मनी के संघीय गणराज्य के आर्थिक मामलों एवं ऊर्जा के संघीय मंत्रालय के बीच एक संयुक्त आशय घोषणा (जेडीओआई); और (ii) डाक विभाग और डॉयचे पोस्ट एजी, जो जर्मनी का नामित डाक संचालक है, के बीच एक आशय पत्र (एलओआई)।

संयुक्त आशय घोषणा पर भारत सरकार की ओर से सचिव (डाक) सुश्री वंदिता कौल और जर्मनी सरकार की ओर से भारत में जर्मनी के संघीय गणराज्य के राजदूत डॉ. फिलिप एकरमैन ने हस्ताक्षर किए। आशय पत्र पर डाक विभाग की ओर से महानिदेशक डाक सेवाएं श्री जितेंद्र गुप्ता और डॉयचे पोस्ट की ओर से डॉयचे पोस्ट एजी / डीएचएल ग्रुप के सीईओ श्री टोबियास मेयर ने हस्ताक्षर किए।

इस सहयोग में डाक, एक्सप्रेस एवं लॉजिस्टिक्स सेवाओं को कवर करने वाली एक व्यवस्थित साझेदारी की कल्पना की गई है, जिसमें सीमा-पार ई-कॉमर्स और निर्धारित समय पर अंतरराष्ट्रीय डिलीवरी पर खास ध्यान दिया जाएगा। यह संयुक्त उत्पाद एवं सेवाओं को विकसित करने, नेटवर्क कनेक्टिविटी एवं अंतिम-छोर तक सहयोग को मजबूत करने और पत्र एवं पार्सल के लिए द्विपक्षीय दर व्यवस्था के निर्धारण हेतु एक फ्रेमवर्क प्रदान करता है। यह साझेदारी डिजिटलीकरण, संचालन संबंधी दक्षता, स्थिरता और हरित लॉजिस्टिक्स के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यप्रणालियों के आदान-प्रदान पर भी जोर देती है।

इस सहयोग का एक मुख्य अपेक्षित परिणाम संयुक्त प्रीमियम अंतरराष्ट्रीय एक्सप्रेस उत्पाद का शुभारंभ है, जिसमें एक निश्चित समय आधारित अंतरराष्ट्रीय एक्सप्रेस सेवा शामिल है। यह सेवा इंडिया पोस्ट की बड़े पैमाने पर अंतिम छोर तक पहुंच और डॉयचे पोस्ट-डीएचएल समूह के वैश्विक एक्सप्रेस एवं लॉजिस्टिक्स नेटवर्क का फायदा उठाएगी। उम्मीद है कि यह समन्वित तरीका भारत से भेजे जाने वाले अंतरराष्ट्रीय खेपों के लिए ट्रांजिट टाइम, विश्वसनीयता और एक छोर से दूसरे छोर तक दृश्यता में उल्लेखनीय सुधार करेगा।

यह पहल भारत सरकार के निर्यात को बढ़ावा देने के विजन के अनुरूप है। खासकर एमएसएमई, स्टार्टअप, कारीगरों एवं छोटे निर्माताओं को भरोसेमंद, किफायती एवं वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी लॉजिस्टिक्स समाधान प्रदान करके, अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच बढ़ाकर और भारत के लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम को मजबूत करके, इस सहयोग से अधिक निर्यात, गुणवत्तापूर्ण सेवा और वैश्विक मूल्य श्रृंखला में भारतीय व्यवसायों की अधिक भागीदारी होने की उम्मीद है।

इन समझौतों पर हस्ताक्षर भारत और जर्मनी की आर्थिक सहयोग को घनिष्ठ बनाने, डाक एवं और लॉजिस्टिक्स सेवाओं में नवाचार को बढ़ावा देने और अंतरराष्ट्रीय व्यापार में स्थायी विकास का समर्थन करने की साझा प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं,

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026 को संबोधित किया

नई दिल्ली –  9 जनवरी को नई दिल्ली के भारत मंडपम में शुरू हुआ विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग (वीबीवाईएलडी 2026) का दूसरा संस्करण आज स्वामी विवेकानंद की जयंती के मौके पर राष्ट्रीय युवा दिवस पर खत्म हुआ। चार दिन के इस कार्यक्रम का आखिरी हिस्सा बहुत ज्यादा ऊर्जा और जोश भरे माहौल में हुआ, जब युवा लीडर्स ने डायलॉग के बहुप्रतीक्षित भाग का अनुभव किया। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया, युवाओं से बातचीत की और सीधे उनसे जुड़कर विकसित भारत बनाने के लिए उनके विचार और नजरिए सुने।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026 के समापन सत्र को संबोधित किया। इस मौके पर श्री मोदी ने कहा कि जब उन्होंने पहली बार मुख्यमंत्री के तौर पर शपथ ली थी, तब आज के कई युवा नागरिक पैदा भी नहीं हुए थे, और जब उन्होंने 2014 में प्रधानमंत्री का पद संभाला, तब उनमें से ज्यादातर बच्चे थे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इतना समय बीतने के बावजूद, युवा पीढ़ी पर उनका भरोसा हमेशा बना रहा है और कभी कम नहीं हुआ। श्री मोदी ने कहा, “मैंने हमेशा आपकी काबिलियत, आपकी प्रतिभा, आपकी ऊर्जा से ही ऊर्जा ली है। और, आज देखिए, आप सभी विकसित भारत के लक्ष्य की बागडोर संभाल रहे हैं।”

प्रधानमंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि 2047 तक का समय, जब भारत अपनी आजादी के 100 साल पूरे करेगा, देश और उसके युवाओं दोनों के लिए एक निर्णायक दौर है। उन्होंने कहा कि युवा भारतीयों की ताकत और काबिलियत भारत की ताकत को आकार देगी और उनकी सफलता देश को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगी। विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग के प्रतिभागियों को बधाई देते हुए, प्रधानमंत्री ने विकसित भारत के विजन को हासिल करने में युवा नेतृत्व की अहम भूमिका पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह कार्यक्रम स्वामी विवेकानंद की जयंती के मौके पर हो रहा है। श्री मोदी ने जोर देकर कहा, “स्वामी विवेकानंद को याद करते हुए, हम हर साल 12 जनवरी को राष्ट्रीय युवा दिवस मनाते हैं। उनके आदर्शों से प्रेरित होकर, विकसित भारत युवा नेता संवाद के लिए 12 जनवरी का दिन चुना गया है। स्वामी विवेकानंद का जीवन हम सभी के लिए एक महान मार्गदर्शक है।”

विकसित भारत युवा नेता संवाद की तेजी से हो रही ग्रोथ पर संतोष जताते हुए, श्री मोदी ने इसे एक शक्तिशाली मंच बताया जो भारत के विकास एजेंडा को आकार देने में युवाओं की सीधी भागीदारी को संभव बनाता है। श्री मोदी ने कहा, “इस पहल से करोड़ों युवाओं का जुड़ना, 5 मिलियन से ज्यादा पंजीकरण, 3 मिलियन से ज्यादा युवाओं का विकसित भारत चैलेंज में हिस्सा लेना, और देश के विकास के लिए अपने विचार साझा करना, युवा शक्ति की इतनी बड़े पैमाने पर भागीदारी अभूतपूर्व है।”

इनपुट की गुणवत्ता की तारीफ करते हुए, प्रधानमंत्री ने खास तौर पर महिला-नेतृत्व वाले विकास और लोकतंत्र में युवाओं की भागीदारी जैसे मुख्य विषयों पर पेश किए गए विचारों की सराहना की। कार्यक्रम के दौरान दिए गए प्रस्तुतीकरण का जिक्र करते हुए, उन्होंने कहा कि वे एक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए भारत की अमृत पीढ़ी के मजबूत संकल्प को दिखाते हैं। प्रधानमंत्री ने भारत की जेन जेड की रचनात्मकता और नवाचार की भावना पर भी जोर दिया और इस बातचीत को सफलतापूर्वक आयोजित करने के लिए सभी युवा प्रतिभागियों और मेरा युवा भारत संगठन के सदस्यों को बधाई दी।

प्रधानमंत्री ने भारत की अपनी विरासत को महत्व देते हुए वैश्विक ज्ञान के प्रति खुले रहने के महत्व पर जोर दिया, और वैदिक वाक्य “आनो भद्राः क्रतवो यन्तु विश्वतः” का हवाला दिया, जिसका मतलब है कि शुभ, फायदेमंद और बेहतरीन विचार सभी दिशाओं से हमारे पास आएं। श्री मोदी ने कहा, “आपको दुनिया भर की सबसे अच्छी प्रथाओं से सीखना चाहिए, लेकिन अपनी विरासत और विचारों को कम आंकने की प्रवृत्ति को कभी हावी न होने दें।”

श्री मोदी ने स्वामी विवेकानंद का जिक्र किया, जिन्होंने वैश्विक विचारों को अपनाया लेकिन भारत के बारे में गलतफहमियों को चुनौती दी, और एक बेहतर राष्ट्र के लिए एक विजन को प्रेरित किया। उन्होंने युवाओं को जोश के साथ आगे बढ़ने, फिटनेस बनाए रखने और खुशी अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया, और उनकी क्षमता पर अटूट विश्वास जताया। प्रधानमंत्री ने कहा, “मुझे आप सभी पर, आपकी काबिलियत और ऊर्जा पर पूरा भरोसा है। इन्हीं शब्दों के साथ, मैं एक बार फिर आप सभी को राष्ट्रीय युवा दिवस की बहुत-बहुत शुभकामनाएं देता हूँ।”

प्रधानमंत्री ने 10 थीम पर प्रतिभागियों द्वारा लिखे गए सबसे अच्छे निबंधों का एक संग्रह भी जारी किया। इन थीम में प्रौद्योगिकी, ,स्थायित्व, महिला सशक्तिकरण, विनिर्माण और कृषि जैसे अलग-अलग क्षेत्र शामिल हैं।

आखिरी दिन की शुरुआत विकसित भारत ट्रैक के फाइनलिस्ट के प्रस्तुतीकरण से हुई, जिन्होंने 10 थीम वाले एरिया में अपने आइडिया पेश किए। हर फाइनलिस्ट ने जाने-माने केंद्रीय मंत्रियों के सामने नवाचार और समाधान आधारित प्रस्ताव दिखाए, जो भारत के युवाओं की सोच की गहराई, लीडरशिप की क्षमता और राष्ट्रीय विकास के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दिखाता है। थीम इस प्रकार हैं:

ट्रैक 1 – विकसित भारत के लिए लोकतंत्र और सरकार में युवा

इस सत्र में “लोकतंत्र और सरकार के लिए युवा” विषय पर युवाओं द्वारा प्रस्तुतियां दी गईं, जिसमें लोकतांत्रिक भागीदारी को मजबूत करने और सार्वजनिक सेवा वितरण में सुधार लाने के उद्देश्य से व्यावहारिक शासन ढांचे पर प्रकाश डाला गया। स्थानीय विकास के लिए ग्राम कार्य योजनाएं, जिला प्रशासन के साथ काम करने वाली समस्या-समाधान इकाइयां, शासन में युवाओं की भागीदारी को गहरा करने के लिए नीति और करियर लैब, और सरकारी संस्थानों में प्रशिक्षित युवाओं को शामिल करने के लिए फेलोशिप मॉडल आदि के संबंध में दी गई प्रस्तुतियों में कार्रवाई योग्य पहलों की रूपरेखा बताई गई। इस सत्र में केंद्रीय संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक कार्य मंत्री श्री किरेन रिजिजू; युवा कार्य और खेल राज्य मंत्री श्रीमती रक्षा निखिल खडसे; और कौशल विकास और उद्यमिता मंत्री श्री जयंत चौधरी शामिल हुए, जिन्होंने प्रतिभागियों के साथ बातचीत की और युवाओं द्वारा संचालित शासन विचारों की सराहना की।

 

ट्रैक 2 – महिला नेतृत्व वाला विकास: विकसित भारत की कुंजी

 

युवा प्रतिनिधियों ने महिला नेतृत्व वाले विकास के लिए एक रोडमैप पेश किया, जिसमें भारत की ग्रोथ के ड्राइवर के तौर पर महिलाओं पर फोकस करने की बात कही गई। प्रस्तुतीकरण में “आरआईएसई (RISE)” फ्रेमवर्क – रिप्रेजेंटेशन और अधिकार, समावेशन और नवाचार, कौशल और आत्मनिर्भरता, और आर्थिक सशक्तिकरण को 2047 तक भारत की यात्रा के लिए एक रणनीतिक स्तंभ के रूप में बताया गया।

संसदीय कार्य और अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री श्री किरेन रिजिजू और कौशल विकास और उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री जयंत चौधरी वाले मंत्रिस्तरीय पैनल ने युवाओं के विचारों की सराहना की और महिलाओं को निर्णय लेने वाली और उद्यमी बनाने के सरकार के विजन के साथ उनके विचारों के तालमेल की पुष्टि की।

युवा मामले और खेल राज्य मंत्री श्रीमती रक्षा खडसे ने महिलाओं की फिटनेस और उद्यमिता पर जोर दिया, और अस्मिता लीग जैसी पहलों के साथ इसकी तुलना की।

 

ट्रैक 3 – फिट भारत हिट भारत

ट्रैक 3 में इस बात पर जोर दिया गया कि स्वस्थ आबादी ही एक मजबूत राष्ट्र की नींव है। चर्चाओं में पोषण, खेल, शिक्षा और टेक्नोलॉजी को मिलाकर एक इंटीग्रेटेड नेशनल वेलनेस फ्रेमवर्क की जरूरत पर जोर दिया गया, जिसमें डेटा-आधारित सिस्टम और कम्युनिटी के नेतृत्व वाली पहलों पर ध्यान दिया गया। इस सेशन का मूल्यांकन केंद्रीय मंत्री श्री किरेन रिजिजू और श्री जयंत चौधरी ने किया। “प्ले इन इंडिया, प्ले फॉर इंडिया,” एग्रो ओलंपिक्स और न्यूट्री-स्मार्ट कैंटीन मिशन जैसे नवीन प्रस्ताव पेश किए गए। यह ट्रैक इस संदेश के साथ खत्म हुआ, “सेहत मजबूत, भारत मजबूत।”

 

ट्रैक 4 – भारत को दुनिया की स्टार्टअप राजधानी बनाना

‘दुनिया की स्टार्टअप राजधानी’ ट्रैक में ऐसे प्रस्ताव शामिल थे जिनमें फेलियर को नॉर्मल बनाने और पहले-फेल होने वाले फाउंडर्स का नेटवर्क बनाने के लिए “एक दिन में एग्जिट और एक हफ्ते में रीस्टार्ट” फ्रेमवर्क, खास स्टार्टअप बैंकों की स्थापना, एक स्टार्टअप हेल्थ इंडेक्स, और हर सरकारी विभाग में डेडिकेटेड स्टार्टअप सेल शामिल थे। प्रतिभागियों ने प्री-लॉन्च परीक्षण के लिए आइडिया लैब स्थापित करने, नागरिकों को माइक्रो-इन्वेस्टर के रूप में सक्षम बनाने, प्रकृति से प्रेरित स्टार्टअप और बायोफाउंड्री को बढ़ावा देने और खेलो इंडिया मॉडल की तर्ज पर जमीनी स्तर पर स्टार्टअप चैलेंज आयोजित करने का भी सुझाव दिया। यूपीआई जैसे ग्लोबल-टू-लोकल स्केलिंग मॉडल को बेंचमार्क के तौर पर बताया गया।

 

प्रस्तुतियों पर प्रतिक्रिया देते हुए, केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल और श्रम और रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा, “हमारे स्टार्टअप और इनोवेशन भारतीय मॉडल पर आधारित होने चाहिए। हमें पश्चिम के मॉडल को आँख बंद करके कॉपी नहीं करना चाहिए। इनोवेशन को भारत की स्थानीय और देसी ज़रूरतों के हिसाब से विकसित किया जाना चाहिए। मोटे तौर पर, इनोवेशन दो तरह के होते हैं—एक जो दुनिया की ज़रूरतों को पूरा करता है, और दूसरा जो भारत की अपनी जरूरतों को पूरा करता है। दोनों ही महत्वपूर्ण हैं, लेकिन नींव भारतीय होनी चाहिए।”

 

ट्रैक 5 – भारत की सॉफ्ट पावर: विकसित भारत के लिए सांस्कृतिक कूटनीति और वैश्विक प्रभाव

ट्रैक 5, भारत की सॉफ्ट पावर: विकसित भारत के लिए सांस्कृतिक कूटनीति और वैश्विक प्रभाव के तहत, सत्र में केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल और श्रम और रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (माइटी) के सचिव श्री एस. कृष्णन और युवा कार्यक्रम विभाग के अतिरिक्त सचिव श्री एन. के. मिश्रा मौजूद थे। प्रस्तुतकर्ताओं ने संस्कृति, प्रौद्योगिकी और सहयोग को सामंजस्यपूर्ण ढंग से एकीकृत करके भारत के वैश्विक प्रभाव को मजबूत करने के लिए एक दूरदर्शी, युवा-नेतृत्व वाली दृष्टि की रूपरेखा प्रस्तुत की।

 

भारत की सॉफ्ट पावर के सार पर बोलते हुए, डॉ. मांडविया ने इस बात पर जोर दिया कि ‘सेवा’ भारत के संस्कारों में गहराई से बसी हुई है और यह मुनाफे से चलने वाली कोई व्यावसायिक गतिविधि नहीं है। कोविड-19 महामारी के दौरान भारत के मानवीय प्रयासों को याद करते हुए, उन्होंने कहा कि सेवा भारतीय सभ्यता की एक नैतिक और सांस्कृतिक ज़िम्मेदारी को दिखाती है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि जब सेवा संस्कारों से निर्देशित होती है, तो यह एक जीवित परंपरा बन जाती है जो करुणा, जिम्मेदारी और नैतिक आचरण को बढ़ावा देती है।

ट्रैक 6 – परंपरा के साथ नवाचार: एक आधुनिक भारत का निर्माण

इस सत्र में स्थायी और समावेशी विकास के लिए पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक तकनीक के साथ तालमेल बिठाने के भारत के विज़न पर जोर दिया गया। चर्चा एआई-सक्षम शहरी स्वास्थ्य और जल इंटेलिजेंस सिस्टम, ग्रीन बिल्डिंग, जैव विविधता-एकीकृत बुनियादी ढाँचे, प्रकृति-आधारित समाधान, और समुदाय-आधारित विकास के लिए स्थानीय स्तर पर स्थिरता-केंद्रित पाठ्यक्रम और मज़बूत सहकारी समितियों की जरूरत पर केंद्रित थी। इस सत्र में पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव; कृषि और किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान; और युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय के युवा कार्यक्रम विभाग की सचिव डॉ. पल्लवी जैन गोविल शामिल हुए।

ट्रैक 7 – आत्मनिर्भर भारत: मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड

आत्मनिर्भर भारत ट्रैक के तहत, प्रतिभागियों ने रक्षा विनिर्माण और आर्थिक विकास में भारत की प्रगति पर प्रकाश डाला, और मेक इन इंडिया 3.0, पीएम गति शक्ति के साथ एकीकृत टियर-2 और टियर-3 शहरों में विनिर्माण केंद्रों का विस्तार, नीतिगत सुधारों के माध्यम से पूंजी की सुविधा, और स्वदेशी उत्पादों के वैश्विक प्रचार जैसे विचारों का प्रस्ताव दिया। प्रस्तुतियों में आत्मनिर्भरता और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने के लिए बुनियादी ढांचे के विकास को स्थानीय विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र से जोड़ने पर जोर दिया गया। इस सत्र में डॉ. मनसुख मांडविया, केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल और श्रम और रोजगार मंत्री; श्रीमती रक्षा खडसे, युवा मामले और खेल राज्य मंत्री; श्री एस. कृष्णन, सचिव, इलेक्ट्रॉनिकी और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (माइटी) ने भाग लिया, जिन्होंने आत्मनिर्भर और विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी भारत के लिए युवाओं के नेतृत्व वाले दृष्टिकोण की सराहना की।

 

ट्रैक 8 – स्मार्ट और टिकाऊ खेती के ज़रिए उत्पादकता बढ़ाना

इस सत्र में स्मार्ट और टिकाऊ खेती के जरिए उत्पादकता बढ़ाने पर युवाओं के नेतृत्व वाले नवीन समाधान दिखाए गए। युवा इनोवेटर्स ने केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान के सामने भविष्य की सोच वाले आइडिया पेश किए, जिन्होंने प्रतिभागियों की रचनात्मकता और क्षमता की तारीफ की और 2047 तक विकसित भारत के विजन को साकार करने में युवाओं की अहम भूमिका पर जोर दिया। नौकरी खोजने वालों से नौकरी देने वाले बनने के लिए प्रोत्साहित करते हुए, मंत्री ने युवा नेताओं से एग्री-स्टार्टअप्स की संभावनाएं तलाशने का आग्रह किया और जमीनी स्तर पर नवाचार और कृषि उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए लगातार सरकारी समर्थन का आश्वासन दिया।

 

ट्रैक 9 – एक टिकाऊ और हरित विकसित भारत का निर्माण

प्रतिभागियों ने टिकाऊ विकास में भारत की प्रगति का आकलन किया और एक हरित और लचीले भविष्य की दिशा में रास्ते बताए। चर्चाओं में भारत की नवीकरणीय और सौर ऊर्जा के एक प्रमुख वैश्विक उत्पादक के रूप में स्थिति, साथ ही ‘एक पेड़ मां के नाम’ जैसी प्रमुख राष्ट्रीय पहल, वन्यजीव संरक्षण में नेतृत्व और रामसर स्थलों के विस्तार पर प्रकाश डाला गया। केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने किसान-केंद्रित सुधारों और वैज्ञानिकों और किसानों के बीच मजबूत सहयोग के महत्व पर जोर दिया। युवा प्रतिनिधियों ने उभरती हुई ग्रीन-कॉलर नौकरियों, एआई-सक्षम शहरी जल और स्वास्थ्य प्रणालियों, हरित बुनियादी ढांचे, प्रकृति-आधारित समाधानों और सहकारी समितियों के माध्यम से समुदाय-नेतृत्व वाली स्थिरता पर जोर दिया।

 

ट्रैक 10 – विकसित भारत के लिए भविष्य के लिए तैयार कार्यबल बनाना

इस ट्रैक में रोजगार पाने की क्षमता और युवाओं के लिए तैयार कौशल व्यवस्था को मजबूत करने पर ध्यान दिया गया। इस सत्र में केंद्रीय मंत्री श्री किरेन रिजिजू और श्री जयंत चौधरी शामिल हुए। इसमें नौकरी से जुड़े प्रशिक्षण, नेशनल स्किल पासपोर्ट, गिग-टू-जॉब ट्रांज़िशन के रास्ते, वन नेशन-वन स्किल आइडेंटिटी, और महिलाओं के लिए विलेज स्किल बैंक और वर्क नियर होम क्लस्टर जैसी कम्युनिटी-आधारित पहलों पर युवाओं के सुझावों पर चर्चा हुई। यह ट्रैक विकसित भारत के लक्ष्यों के साथ तालमेल बिठाते हुए एक समावेशी, भविष्य के लिए तैयार कार्यबल बनाने के लिए युवाओं की मजबूत सोच को दिखाता है।

 

विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026 का दूसरा संस्करण एक शक्तिशाली प्लेटफॉर्म के तौर पर खत्म हुआ, जिसने राष्ट्रीय विकास के जरूरी क्षेत्रों में युवाओं की उम्मीदों को काम करने लायक नीतिगत आइडिया में बदला। इस डायलॉग ने गवर्नेंस और नीति बनाने में युवाओं की भागीदारी को संस्थागत बनाने के लिए सरकार की प्रतिबद्थता को फिर से पक्का किया, साथ ही भारत की युवा प्रतिभाओं की गहराई, विविधता और गतिशीलता को भी दिखाया। राष्ट्रीय युवा दिवस पर इसका समापन स्वामी विवेकानंद के आदर्शों की स्थायी प्रासंगिकता को रेखांकित करता है और इस विश्वास को मज़बूत करता है कि सशक्त, प्रेरित और जुड़े हुए युवा भारत को एक विकसित, आत्मनिर्भर और विश्व स्तर पर प्रभावशाली राष्ट्र बनाने की यात्रा में प्रेरक शक्ति होंगे।

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नवीकरणीय ऊर्जा जलवायु-अनुकूल कृषि और ग्रामीण समृद्धि की कुंजी: केंद्रीय मंत्री प्रल्हाद जोशी

नई दिल्ली –  नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने आज अंतर्राष्ट्रीय नवीकरणीय ऊर्जा एजेंसी (IRENA) और खाद्य एवं कृषि संगठन (FAO) द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित कृषि-खाद्य प्रणालियों में नवीकरणीय ऊर्जा विस्तार पर अंतर-मंत्रालयी संवाद को संबोधित करते हुए, ऊर्जा सुरक्षा, जलवायु अनुकूलता और ग्रामीण आजीविका को बढ़ाने के लिए नवीकरणीय ऊर्जा को कृषि एवं खाद्य प्रणालियों के साथ एकीकृत करने को लेकर भारत की प्रतिबद्धता पर बल दिया।

समागम को संबोधित करते हुएकेंद्रीय मंत्री ने कहा कि जब भारत वैश्विक मंचों पर बोलता हैतो वह मानवता का लगभग एकछठा हिस्सा और दुनिया के कुछ सबसे बड़े खाद्य सुरक्षा कार्यक्रमों का प्रतिनिधित्व करता हैसाथ ही सबसे तेजी से बढ़ते नवीकरणीय ऊर्जा बाजारों में से एक का भी। भारत की कृषिप्रधान भावना पर जोर देते हुएउन्होंने कहा कि अन्नदाता के रूप में पूजनीय किसान वितरित नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार के माध्यम से भोजन और स्वच्छ ऊर्जा दोनों के प्रदाताअर्थात् ऊर्जादाता बनते जा रहे हैं।

मंत्री ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा ऊर्जा पहुंचजलवायु कार्रवाईकृषि उत्पादकता और ग्रामीण आजीविका को एक साथ प्रदान करने की बहुआयामी वैश्विक चुनौती का एक एकीकृत समाधान प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि भारत का दृष्टिकोण महत्वाकांक्षा के साथ कार्यान्वयन पर आधारित हैजो मजबूत नीतियोंविकेंद्रीकृत कार्रवाईसमावेशी डिजाइन और मजबूत अंतरमंत्रालयी समन्वय द्वारा समर्थित है।प्रमुख पहलों का विवरण देते हुएश्री जोशी ने 2019 में शुरू की गई पीएमकुसुम योजना का उल्लेख कियाजो स्टैंडअलोन सौर पंपग्रिडकनेक्टेड पंपों के सौरकरण और विकेंद्रीकृत सौर ऊर्जा संयंत्रों के माध्यम से कृषि में सौर ऊर्जा का एकीकरण करती है।

देश में 2025 के अंत तकलगभग 10 लाख स्टैंडअलोन सौर पंप स्थापित किए गए हैं और 11 लाख से अधिक ग्रिडकनेक्टेड पंप सौर ऊर्जा से संचालित किए गए हैंजो 10,200 मेगावाट से अधिक की स्थापित क्षमता प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि इस योजना ने डीजल पर निर्भरता कम की हैसिंचाई लागतों को स्थिर किया हैउत्सर्जन घटाया है और पुनरावर्ती सब्सिडी से दीर्घकालिक संपत्तिआधारित निवेश की ओर वित्तीय समर्थन को स्थानांतरित किया है।

निजी निवेश को अनलॉक करने परश्री जोशी ने कहा कि नीतिगत स्थिरता और राष्ट्रीय योजनाओं के माध्यम से कृषि मांग के समूहन ने पैमानेबैंक योग्यता और व्यावसायिक व्यवहार्यता में सुधार किया है। किसानों द्वारा अधिशेष सौर ऊर्जा की बिक्रीकृषि अवशेषों को ऊर्जा में परिवर्तित करने के लिए राष्ट्रीय बायोएनर्जी कार्यक्रमऔर छत पर सौर ऊर्जा के लिए पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना जैसे प्रयासों ने आय के नए स्रोत बनाए हैंआयात कम किए हैं और ग्रामीण ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया है।

भविष्य की योजनाओं पर नजर डालते हुएकेंद्रीय मंत्री ने घोषणा की कि भारत पीएमकुसुम 2.0 को लॉन्च करने की तैयारी कर रहा हैजिसमें विकेंद्रीकृत सौर समाधानों और कृषिोटोवोल्टिक्स (agri-PV) पर नया जोर होगाजो कृषि और सौर ऊर्जा उत्पादन को एक साथ संचालित करने की अनुमति देगा।

उन्होंने कहा कि अच्छी तरह से डिजाइन किया गया एग्री पीवी (agri-PV ) सिस्टम फसल उपज को बनाए रख सकते हैं या बढ़ा सकते हैंसूक्ष्म जलवायु को संतुलित कर सकते हैंस्वच्छ बिजली उत्पन्न कर सकते हैं और किसानों की आय को विविधीकृत कर सकते हैं।

अपने संबोधन के समापन परश्री जोशी ने आपसी साझेदारियों को गहरा करने और समाधानों को विस्तार देने के लिए भारत की तत्परता की पुनः पुष्टि कीयह नोट करते हुए कि प्रचुर सूर्य प्रकाश और 14.6 करोड़ से अधिक छोटे जोतों के साथदेश नवीकरणीय ऊर्जासक्षम कृषिखाद्य प्रणालियों में वैश्विक नेता के रूप में उभरने के लिए एक अच्छी स्थिति में है।

अंतर्राष्ट्रीय सूर्यनिष्ठ ऊर्जा एजेंसी (IRENA) की 16वीं सभा के साइडलाइन्स परकेंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी ने आइसलैंड के विदेश मंत्रालय में अंतर्राष्ट्रीय विकास सहयोग की महानिदेशक सुश्री एलिन रोस के साथ एक भविष्योन्मुखी बैठक की। चर्चाओं का मुख्य फोकस भारत में स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन के हिस्से के रूप में जियोथर्मल ऊर्जा तैनाती को बढ़ाने के लिए तकनीकी सहयोग को मजबूत करने पर केंद्रित रहा।

अंतरराष्ट्रीय सूर्यनिष्ठ ऊर्जा एजेंसी (IRENA) सभा के साइडलाइन्स पर आयोजित एक अन्य प्रमुख द्विपक्षीय बैठक मेंनवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी ने यूरोपीय आयोग में ऊर्जा की महानिदेशक सुश्री डिट्टे जूल जोर्गेंसन के साथ एक रचनात्मक बैठक की। चर्चाओं में भारतयूरोपीय संघ स्वच्छ ऊर्जा एवं जलवायु साझेदारी के निरंतर गहन होने की समीक्षा की गईजिसमें जमीन पर ठोस परिणाम देने पर साझा जोर दिया गया।

श्री प्रह्लाद जोशी ने संयुक्त अरब अमीरात के निवेश मंत्री माननीय मोहम्मद हसन अलसुवैदी के साथ नवीकरणीय ऊर्जा और स्वच्छ अवसंरचना में भारतयूएई सहयोग को मजबूत करने पर भी एक सकारात्मक चर्चा की। इस संवाद ने द्विपक्षीय निवेश साझेदारियों में मजबूत गति को पुनः परिभाषित कियाजो भारत के गैरजीवाश्म ईंधन क्षमता के तेजी से विस्तारविस्तारित घरेलू विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र तथा दीर्घकालिक निवेशों के लिए अनुकूल स्थिर एवं अनुमानित नीति वातावरण पर आधारित है।

नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने अबू धाबी के लुव्र संग्रहालय का भी दौरा कियाजिसे उन्होंने सांस्कृतिक संवाद और साझा मानवीय विरासत का शक्तिशाली प्रतीक बताया। केंद्रीय मंत्री ने संग्रहालय में क्यूरेटेड कलाकृतियों और प्रदर्शनियों के माध्यम से प्रदर्शित भारत की समृद्ध कलात्मक परंपराओं की उपस्थिति की सराहना करते हुए कहा कि यह देश की गहन सभ्यतागत विरासत को प्रतिबिंबित करता है।

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शिक्षा मंत्रालय ने भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए एक ओरिएंटेशन और ट्रेनिंग वर्कशॉप का आयोजन किया

नई  दिल्ली – भारतीय उच्च शिक्षण संस्थानों (एचईआई) की वैश्विक पहचान और प्रदर्शन को बेहतर बनाने के लगातार प्रयासों के अंतर्गत, शिक्षा मंत्रालय ने क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग पर एचईआई के कुलपति और नोडल अधिकारियों के लिए आधे दिवस की ओरिएंटेशन और ट्रेनिंग वर्कशॉप आयोजित की। यह वर्कशॉप क्यूएस क्वाक्वेरेली साइमंड्स की ओर से आयोजित की गई और इसका उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के उद्देश्यों के अनुसार, वैश्विक रैंकिंग पैमानों, बेहतर अभ्यास और रणनीतिक तरीकों के बारे में संस्थानों की समझ को बेहतर बनाना था।

इस वर्कशॉप में देश भर के केंद्रीय, राज्य और निजी विश्वविद्यालयों, जिनमें स्वायत्त संस्थान भी शामिल हैं, ने बड़े पैमाने पर हिस्सा लिया। लगभग 400 प्रतिभागियों ने ऑनलाइन माध्यम से इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया, जबकि 60 से अधिक प्रतिभागियों ने नई दिल्ली के डॉ. अंबेडकर इंटरनेशनल सेंटर में पहुंचकर कार्यक्रम में भाग लिया।

 

सभा को संबोधित करते हुए, डॉ. विनीत जोशी, सचिव (उच्च शिक्षा), ने भारतीय विश्वविद्यालयों के लिए वैश्विक बेंचमार्किंग और अंतर्राष्ट्रीय मान्यता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने इस पहल की सराहना की और उच्च शिक्षण संस्थानों (एचईआई) को अपनी शैक्षणिक प्रतिष्ठा और वैश्विक स्थिति को मजबूत करने के लिए वैश्विक रैंकिंग फ्रेमवर्क के साथ सक्रिय तौर पर जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया।

शिक्षा मंत्रालय में संयुक्त सचिव श्री आर्मस्ट्रांग पामे ने मंत्रालय की अंतर्राष्ट्रीयकरण पहलों का अवलोकन प्रस्तुत किया, जिसमें एसपीएआरसी, अंतर्राष्ट्रीय छात्रों के लिए अतिरिक्त सीटें और स्टडी इन इंडिया (एसआईआई) पोर्टल शामिल हैं। उन्होंने बेहतर वैश्विक दृश्यता की जरूरत पर प्रकाश डाला, यह देखते हुए कि अंतर्राष्ट्रीयकरण से संबंधित संकेतक वैश्विक रैंकिंग परिणामों में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। उन्होंने संस्थानों को अंतर्राष्ट्रीय छात्र जुड़ाव, संकाय विकास कार्यक्रमों, दीर्घकालिक शैक्षणिक सहयोग और बेहतर संस्थागत आउटरीच पर ध्यान केंद्रित करने को प्रोत्साहित किया।

वर्कशॉप दो चरणों में क्यूएस क्वाक्वेरेली साइमंड्स के कार्यकारी निदेशक डॉ. अश्विन फर्नांडिस की ओर से आयोजित की गई थी। पहले चरण में क्यूएस रैंकिंग कार्यप्रणाली, पात्रता मापदंड, और विश्व, विषय, क्षेत्रीय, व्यापार और संपोषण रैंकिंग के माध्यम से संस्थान की विजिबिलिटी के लिए कई प्रवेश बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया गया, साथ ही क्यूएस हब के माध्यम से डेटा जमा करने पर गाइडेंस भी दी गई।

दूसरे चरण में अनुसंधान के असर और प्रतिष्ठा संकेतकों पर विस्तार से चर्चा की गई, जिसमें क्यूएस की ओर से सालाना आधार पर किए जाने वाले अकादमिक और नियोक्ता प्रतिष्ठा सर्वेक्षण और अनुसंधान विजिबिलिटी और साइटेशन प्रदर्शन को बेहतर बनाने की रणनीति शामिल थीं।

भारतीय एचईआई ने क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग में अपनी मौजूदगी को काफी मजबूत किया है, 2026 संस्करण में रिकॉर्ड 54 संस्थानों को रैंक मिली है, जबकि 2014 में सिर्फ 12 संस्थानों को रैंक मिली थी। यह लगातार ऊपर की ओर जाता हुआ रास्ता भारत की बढ़ती वैश्विक अकादमिक पहचान और प्रदर्शन को दिखाता है।

हालांकि, ये उपलब्धियां ध्यान देने लायक हैं, लेकिन कई पहल करने की जरूरत है, खासकर अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर (अंतर्राष्ट्रीय विद्यार्थी और संकाय), प्रति संकाय अनुसंधान साइटेशन, और संकाय विद्यार्थी अनुपात जैसे क्षेत्रों में, जिनका रैंकिंग कार्यप्रणाली में काफी महत्व है।

इसलिए, इस तरह की वर्कशॉप संस्थागत क्षमता को मजबूत करके और वैश्विक अकादमिक उत्कृष्टता की दिशा में भारत के सामूहिक प्रयासों को आगे बढ़ाकर इन कमियों को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।

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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने राजमाता जीजाबाई जी की जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया

नई दिल्ली  – केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज राजमाता जीजाबाई जी की जयंती पर उन्हें श्रद्धापूर्वक नमन किया और कहा कि उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज जी के मन में हिंदवी स्वराज की स्थापना का संकल्प जागृत कर उन्हें राष्ट्ररक्षा के महान लक्ष्य की ओर प्रेरित किया।

श्री अमित शाह ने X पर किए गए एक पोस्ट में कहा, “राजमाता जीजाबाई जी ने छत्रपति शिवाजी महाराज जी में बाल्यकाल से ही साहस, स्वाभिमान और स्वसंस्कृति की रक्षा के संस्कार भरे। उन्होंने शिवाजी महाराज जी के मन में हिंदवी स्वराज की स्थापना का संकल्प जागृत कर उन्हें राष्ट्ररक्षा के महान लक्ष्य की ओर प्रेरित किया। राजमाता जीजाबाई जी की जयंती पर श्रद्धापूर्वक नमन।”

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इसरो के अंतरिक्ष यात्रियों के साथ प्रेरक संवाद से हुआ विकसित भारत युवा नेता संवाद 2026 के तीसरे दिन का शुभारंभ

नई दिल्ली,13.01.2026 –  युवा मामले और खेल मंत्रालय के तत्वावधान में आयोजित विकसित भारत युवा नेता संवाद 2026 का तीसरा दिन भारत मंडपम में बड़े उत्साह और जोश के साथ प्रारंभ हुआ। इस अवसर पर केंद्रीय युवा मामले एवं खेल और श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया का प्रेरक संबोधन, इसरो के अंतरिक्ष यात्रियों के साथ संवादात्मक सत्र, और भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित करने वाला सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए गए।

युवा प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए डॉ. मनसुख मांडविया ने उन्हें पूरे देश के लगभग 50 लाख युवाओं में से चुने जाने पर बधाई दी और बताया कि उन्हें उनके संबंधित राज्य के मुख्यमंत्री और राज्यपालों द्वारा भेजा गया है, जो राज्यों और राष्ट्र द्वारा उनमें जताए गए विश्वास को दर्शाता है। उन्होंने यह भी बताया कि वी.बी.वाय.एल.डी. के माध्यम से युवा सीधे भारत सरकार से जुड़े हैं और जल्द ही वे अपने विचार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के सामने प्रस्तुत करेंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि यह संवाद बस इस कार्यक्रम के साथ खत्म नहीं हो जाता, बल्कि विकसित भारत के विज़न को वास्तविकता में बदलने की यात्रा अब शुरू होती है।

केंद्रीय मंत्री ने युवा नेताओं से आग्रह किया कि वे माई (एम.वाय.) भारत प्लेटफॉर्म के माध्यम से सक्रिय बने रहें और अपने राज्यों में लौटने के बाद जिला युवा अधिकारियों के साथ जुड़े रहें। उन्हें नशा मुक्त युवा जैसी प्रमुख राष्ट्रीय पहलों का नेतृत्व करने के लिए प्रेरित करते हुए, उन्होंने नशे को एक गंभीर चुनौती बताया और विश्वविद्यालयों तथा स्कूलों में युवा कनेक्ट जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से स्थायी पहुँच बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने प्रतिभागियों को युवा भागीदारी जुटाने, विकसित भारत पर प्रस्तुतियों को शैक्षणिक संस्थानों तक पहुँचाने, और एक करोड़ युवाओं को माई भारत प्लेटफॉर्म से जोड़ने की दिशा में काम करने के लिए प्रोत्साहित किया। युवाओं में अपने विश्वास को दोहराते हुए डॉ. मंडाविया ने कहा कि वी.बी.वाय.एल.डी. युवा नेताओं को अपने विचार और क्षमताओं को प्रदर्शित करने का अवसर देता है। उन्होंने  सफलता की नींव के रूप में अनुशासन और प्रतिबद्धता पर जोर दिया, यह विश्वास व्यक्त करते हुए कि सामूहिक प्रयास विकसित भारत@2047 के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहायक होंगे।

युवा प्रतिनिधियों का ध्यान वन्दे मातरम के 150 वर्ष पूरे होने की ओर आकर्षित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने उन्हें इस पर संसद में हुई चर्चाओं से स्वयं को परिचित रखने का आग्रह किया, जिससे वे इस संवाद में अधिक जागरूकता के साथ भाग ले सकें।

दिन की शुरुआत इसरो के अंतरिक्ष यात्रियों और माई (एम.वाय.) भारत स्वयंसेवकों के साथ प्रेरक संवाद के साथ हुई, जिसमें प्रतिष्ठित अंतरिक्ष यात्री नामांकित ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला और ग्रुप कैप्टन प्रशांत नायर ने देश भर से आए युवा नेताओं के साथ बातचीत की। दोनों अधिकारी भारतीय वायु सेना के दक्ष पायलट हैं, जिन्हें भारत के प्रमुख गगनयान मानव अंतरिक्ष मिशन के लिए चुना गया। इस सत्र ने प्रतिभागियों को भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र के अग्रणी विशेषज्ञों के साथ सीधे संवाद करने और उनके सफर, पेशेवर दृष्टिकोण और राष्ट्र के भविष्य के लिए उनके विज़न से प्रेरणा लेने का दुर्लभ अवसर प्रदान किया।

एक अत्यंत प्रेरक संवाद में, ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला ने अपने अंतरिक्ष उड़ान के अनुभव साझा किए, जिसमें उन्होंने माइक्रोग्रेविटी की अद्भुत प्रकृति का वर्णन किया, जहाँ पारंपरिक दिशा की धारणा अस्तित्वहीन हो जाती है। पृथ्वी की कक्षा से लिए गए भारत के अद्भुत चित्र प्रस्तुत करते हुए, उन्होंने कहा कि उनका यह सफर इस बात का जीवंत प्रमाण है कि सपने सच होते हैं। सफलता की कुंजी के रूप में लचीलेपन पर जोर देते हुए उन्होंने बताया कि असली मंत्र विफलताओं से सीख लेना, मजबूत होकर वापसी करना और संतोष से कभी संतुष्ट न होना है। भारतीय युवाओं का वर्णन “निर्भीक और प्रभावशाली” जैसे शब्दों में करते हुए, उन्होंने युवा नेताओं से दृढ़ संकल्प के साथ आगे बढ़ते रहने का आग्रह किया।

असीमित महत्वाकांक्षा पर जोर देते हुए, उन्होंने कहा, “उड़ान की कभी कोई सीमा नहीं थी – न मेरे लिए, न आपके लिए, और न ही भारत के लिए।”  उन्होंने युवाओं को साहसिक सपने देखने और राष्ट्र के भविष्य में योगदान देने में उत्कृष्टता हासिल करने के लिए प्रोत्साहित किया।

एक माई भारत स्वयंसेवक द्वारा संचालित किए गए संवादात्मक सत्र के दौरान, ग्रुप कैप्टन प्रशांत नायर ने भारत की अंतरिक्ष यात्रा के बढ़ते वैश्विक महत्व को उजागर किया और कहा कि दुनिया अंतरिक्ष अन्वेषण में भारत को वैश्विक दक्षिण की प्रतिनिधि आवाज़ के रूप में देखती है। उन्होंने अपनी प्रेरणा का श्रेय परिवार और मित्रों के अडिग समर्थन और भगवद गीता से प्राप्त प्ररेणा को दिया। अपने वैश्विक अनुभवों को साझा करते हुए उन्होंने कहा कि भारत की ताकत इसके अनूठे मूल्यों और स्वाभाविक क्षमताओं में निहित है, और युवाओं को जीवन भर सीखते रहने और “विद्यार्थी अवस्था” में बने रहने के लिए प्रोत्साहित किया।

इस दिन विकसित भारत के रंग कार्यक्रम भी आयोजित किया गया, जो युवाओं की रचनात्मक और कलात्मक अभिव्यक्तियों का उत्सव था। इस कार्यक्रम में बेहतरीन संगीत, नृत्य और कविता प्रस्तुतियाँ प्रदर्शित की गईं। उत्कृष्ट प्रस्तुतियों और योगदानों को मान्यता देते हुए और उत्कृष्टता तथा युवा-नेतृत्व वाले राष्ट्र निर्माण की भावना को मजबूत करते हुए, केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया और राज्य मंत्री श्रीमती रक्षा निखिल खडसे ने विजेताओं को सम्मानित किया।

प्रतिभागियों ने दिन का समापन राज्य की टीमों के रूप में पुनः समूह बनाकर और केंद्रीय मंत्रियों तथा सांसदों के निवास स्थलों पर रात्रि भोजन के कार्यक्रम में भाग लेकर किया, जिससे साझा चिंतन और राष्ट्र सेवा के प्रति वचनबद्धता के माहौल में सार्थक संवाद, दिशा-निर्देश और अनौपचारिक मार्गदर्शन का अवसर प्राप्त हुआ।

विकसित भारत युवा नेता संवाद 2026 का अंतिम दिन, जो संयोग से स्वामी विवेकानंद जयंती की स्मृति के रूप में मनाए जाने वाले राष्ट्रीय युवा दिवस के साथ ही है, इस चार दिवसीय युवा महोत्सव को सम्पन्न करेगा। इस अवसर पर प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति कार्यक्रम के राष्ट्रीय महत्व और युवाओं के नेतृत्व से राष्ट्र निर्माण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को उजागर करेगी। एक भव्य सर्व-सत्रीय कार्यक्रम, जिसमें टाउन हॉल शैली की बातचीत शामिल होगी, प्रधानमंत्री और युवा नेताओं के बीच प्रत्यक्ष संवाद की सुविधा प्रदान करेगा, जिसमें वे राष्ट्रीय प्राथमिकता वाले विषयों के अनुरूप दस उच्च-प्रभाव वाले आइडिया प्रस्तुत करेंगे। समापन कार्यक्रम से यह अपेक्षा है कि युवा सक्रिय रूप से भारत को विकसित भारत@2047 की ओर ले जाने में योगदान करेंगे, और राष्ट्र के भविष्य को आकार देने में युवा नेताओं की केंद्रीय भूमिका को पुष्ट करेंगे।

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राजनीति और मीडिया दोनों का अंतिम लक्ष्य राष्ट्रहित हो : राज्यपाल शिवप्रताप शुक्ला

रांची प्रेस क्लब में विशिष्ट व्यक्तित्वों के साथ संवाद की शृंखला की हुई शुरुआत

रांची, 12.01.2026 । हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल शिवप्रताप शुक्ला ने सोमवार को रांची प्रेस क्लब में आयोजित संवाद कार्यक्रम में “राजनीति और मीडिया” विषय पर पत्रकारों से विचार साझा करते हुए कहा कि लोकतंत्र में राजनीति और मीडिया के बीच परस्पर पूरक संबंध है। दोनों की भूमिकाएं एक-दूसरे से जुड़ी हुई हैं और दोनों का अंतिम लक्ष्य राष्ट्रीय हितों के प्रति प्रतिबद्धता होना चाहिए।

राज्यपाल ने कहा कि राजनीति शासन की दिशा तय करती है, जबकि मीडिया शासन के निर्णयों को जनता तक पहुंचाने का कार्य करता है। राजनीति की हर गतिविधि पर मीडिया की पैनी निगाह रहती है और जब राजनीति अपनी दिशा से भटकती है, तब मीडिया उस पर अंकुश लगाने की भूमिका निभाती है। यही कारण है कि मीडिया को लोकतंत्र का महत्वपूर्ण स्तंभ माना गया है।

उन्होंने कहा कि मीडिया की आलोचना तथ्यपरक और संतुलित होनी चाहिए। यदि तथ्य मजबूत हों तो उन्हें प्रकाशित-प्रसारित करने से डरना नहीं चाहिए, लेकिन जबरन मसाला डालकर किसी के चरित्र पर हमला करना उचित नहीं है। कभी-कभी पत्रकारिता में त्रुटियां हो जाती हैं, ऐसे में उन्हें स्वीकार कर आत्ममंथन करना चाहिए। राज्यपाल ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि आज राजनीति की तरह मीडिया भी विचारधाराओं में बंटती जा रही है, जो लोकतंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है।

शिवप्रताप शुक्ला ने कहा कि पत्रकारिता अब मूलतः नौकरी बनकर रह गई है। पत्रकारों पर खबरों के साथ-साथ विज्ञापनों का दबाव रहता है, जिसके कारण उन्हें राजनेताओं और नौकरशाही से संबंध बनाए रखने की मजबूरी होती है। इसका सीधा असर खबरों की गुणवत्ता पर पड़ता है। उन्होंने कहा कि हमारी निजी विचारधारा से बड़ा राष्ट्र और समाज है, इस तथ्य को सदैव ध्यान में रखना चाहिए। पारदर्शिता और परस्पर संवाद से ही लोकतंत्र और समाज का सुदृढ़ निर्माण संभव है।

अध्यक्षीय उद्गार में वरिष्ठ पत्रकार पद्मश्री बलबीर दत्त ने कहा कि बाजारवाद के बढ़ते दबाव के कारण मीडिया का मूल उद्देश्य प्रभावित हो रहा है, जिससे पत्रकारिता की आत्मा को नुकसान पहुंच रहा है।

विषय प्रवेश कराते हुए वरिष्ठ पत्रकार बैजनाथ मिश्र ने भारत में ढाई सौ वर्षों के पत्रकारिता इतिहास और उसकी वर्तमान स्थिति पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने मुख्य अतिथि की जीवन यात्रा और सार्वजनिक जीवन में उनके योगदान का भी परिचय दिया।

रांची प्रेस क्लब के अध्यक्ष शंभु नाथ चौधरी ने संवाद शृंखला के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस पहल का उद्देश्य राजनीति, प्रशासन, समाज और मीडिया से जुड़े ज्वलंत मुद्दों पर सार्थक, निष्पक्ष और वैचारिक विमर्श को बढ़ावा देना है, ताकि पत्रकारों और समाज दोनों को व्यापक दृष्टि और नई समझ मिल सके।

स्वागत भाषण में सचिव अभिषेक सिन्हा ने कहा कि रांची प्रेस क्लब पत्रकारों के बौद्धिक विकास, पेशेवर मूल्यों के संरक्षण और लोकतांत्रिक संवाद को सशक्त करने के लिए ऐसे विचारोत्तेजक कार्यक्रमों का निरंतर आयोजन करता रहेगा। धन्यवाद ज्ञापन उपाध्यक्ष बिपिन उपाध्याय ने किया।

कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार अनुज कुमार सिन्हा, डॉ. रामाज्ञा तिवारी, सुमन श्रीवास्तव, ओमरंजन मालवीय, राजेश कुमार सिन्हा, विनय चतुर्वेदी, क्लब के संयुक्त सचिव चंदन भट्टाचार्य, कोषाध्यक्ष कुबेर सिंह, कार्यकारिणी सदस्य राजन बॉबी, संतोष कुमार सिन्हा, अशोक गोप, संजय सुमन, प्रतिमा कुमारी, निर्भय कुमार, चंदन वर्मा, अमित कुमार, विजय गोप, सौरभ शुक्ला, आनंद मोहन, भीष्म सिंह, प्रशांत शरण, राजीव मिश्र, अखिलेश सिंह सहित बड़ी संख्या में पत्रकार उपस्थित रहे।

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विजय त्रिवेदी की नई पुस्तक में अटल बिहारी वाजपेयी के विचार, व्यक्तित्व और राजनीतिक विरासत का जीवंत व प्रभावशाली चित्रण

नई दिल्ली –  भारत रत्न, पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के बहुआयामी व्यक्तित्व, विचारधारा और राजनीतिक जीवन को केंद्र में रखकर वरिष्ठ पत्रकार एवं लेखक श्री विजय त्रिवेदी की नवीन पुस्तक का आज औपचारिक विमोचन किया गया।

इस अवसर पर वक्ताओं ने अटल बिहारी वाजपेयी के राष्ट्रनिर्माण में दिए गए योगदान को स्मरण करते हुए पुस्तक को उनके जीवन और कार्यों का एक प्रेरक दस्तावेज बताया

समारोह में लेखक विजय त्रिवेदी के लेखन की सराहना करते हुए कहा गया यह पुस्तक नई पीढ़ी को अटल जी के विचारों, मूल्यों और नेतृत्व से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

 

पुस्तक में अटल बिहारी वाजपेयी के जीवन और कार्यों को 12 अध्यायों में रोचक, तथ्यपरक और संवेदनशील ढंग से प्रस्तुत किया गया है।

इसमें उनके प्रारम्भिक जीवन से लेकर एक स्वयंसेवक से राष्ट्रीय नेता बनने की यात्रा, कारगिल युद्ध, परमाणु परीक्षण, आर्थिक उदारीकरण, नई टेलीकॉम नीति में उनकी भूमिका, आपातकाल का दौर, पाकिस्तान से मैत्री की पहल, भाषा-प्रेम और कवि मन की अभिव्यक्ति, राजनीति से संन्यास तथा महाप्रयाण तक के सभी प्रमुख पड़ावों का विस्तृत वर्णन किया गया है।

लेखक ने अटल बिहारी वाजपेयी के व्यक्तित्व, विचारधारा और नेतृत्व क्षमता को सरल, सहज और प्रभावशाली शैली में प्रस्तुत किया है, जिससे पाठक राष्ट्रनिर्माण में उनके योगदान को गहराई से समझ सकें।

पत्रकारिता के लगभग चार दशकों के अनुभव के साथ श्री विजय त्रिवेदी टेलीविजन और साहित्य जगत का जाना-पहचाना नाम हैं। वे इससे पूर्व अटल बिहारी वाजपेयी पर आधारित ‘हार नहीं मानूँगा’, ‘यदा यदा ही योगी’, ‘बीजेपी: कल, आज और कल’ तथा राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सौ वर्षों की यात्रा पर केंद्रित ‘संघम् शरणं गच्छामि’ जैसी चर्चित पुस्तकों के लेखक रहे हैं।

कार्यक्रम के दौरान प्रकाशन विभाग की नई संस्कृत- हिन्दी द्विभाषी पत्रिका संगमनीप्रभा के प्रथम अंक का भी लोकार्पण किया गया। दिल्ली विश्वविद्यालय के हिंदू अध्ययन केंद्र के निदेशक प्रो. ओम नाथ बिमली ने पत्रिका का लोकार्पण किया।

‘संगमनीप्रभा’ प्रकाशन विभाग की पहली त्रैमासिक द्विभाषी पत्रिका है। पत्रिका में प्रकाशित मूल सामग्री संस्कृत भाषा में होगी, जबकि हिन्दी भाषी पाठकों के लिए प्रत्येक पृष्ठ पर संस्कृत सामग्री का हिन्दी अनुवाद भी उपलब्ध कराया जाएगा। इस अनूठे प्रयास का उद्देश्य संस्कृत वाङ्मय की अमूल्य ज्ञान-परंपरा से नई पीढ़ी के पाठकों को परिचित कराना और उन्हें संस्कृत भाषा से जोड़ना है।

पत्रिका का मूल्य 25 रुपये निर्धारित किया गया है, जबकि इसकी वार्षिक सदस्यता 100 रुपये में उपलब्ध होगी।पत्रिका के प्रथम अंक की सराहना करते हुए प्रो. बिमली ने कहा कि विषय वस्तु और डिज़ाइन के स्तर पर यह पत्रिका प्रकाशन विभाग के उत्कृष्ट प्रकाशनों की शृंखला में एक महत्वपूर्ण कड़ी है।उन्होंने कहा कि प्रकाशन विभाग विविध विषयों पर श्रेष्ठ पुस्तकों के साथ-साथ योजनाकुरुक्षेत्रबाल भारती और आजकल जैसी प्रतिष्ठित मासिक पत्रिकाओं तथा इम्प्लॉयमेंट न्यूज़ के प्रकाशन के लिए जाना जाता है। अब त्रैमासिक ‘संगमनीप्रभा’ के प्रकाशन के साथ विभाग की पहचान और सशक्त होगी।

इस अवसर पर पुस्तक के लेखक श्री विजय त्रिवेदी, प्रकाशन विभाग के प्रधान महानिदेशक श्री भूपेन्द्र कैन्थोला सहित अनेक प्रतिष्ठित लेखक, साहित्यकार एवं विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

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प्रयागराज में छात्रों के पहले बैच का स्वागत किया गया

नई दिल्ली – काशी तमिल संगमम 4.0 में भाग लेने वाले 200 छात्रों का एक प्रतिनिधिमंडल आज प्रयागराज पहुंचा। इस यात्रा का उद्देश्य एक भारतश्रेष्ठ भारत की भावना के अनुरूप काशी और तमिलनाडु के बीच सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक संबंधों को मजबूत करना है।

यह प्रतिनिधिमंडल संगम पहुंचा और प्रयागराज जिला प्रशासन के अधिकारियों ने उनका पारंपरिक स्वागत किया। प्रत्येक छात्र को भगवद् गीता का तमिल संस्करण भेंट किया गया।

 

संगम के किनारे आयोजित एक सांस्कृतिक संध्या में दोनों क्षेत्रों की कलात्मक परंपराओं का प्रदर्शन किया गया। इस कार्यक्रम में कजरी, भजन और कथक के साथ-साथ तमिल लोक कला रूपों को भी प्रस्तुत किया गया। यह उत्तर और दक्षिण भारत के बीच सांस्कृतिक सद्भाव को दर्शाता है।

इस सांस्कृतिक कार्यक्रम के बाद, छात्रों ने संगम का दर्शन किया और गंगा, यमुना और सरस्वती के संगम के आध्यात्मिक महत्व का अनुभव किया। बाद में उन्होंने श्री बड़े हनुमान जी मंदिर जाकर प्रार्थना की।

इस प्रतिनिधिमंडल ने बाद में स्वामीनारायण मंदिर का दौरा किया। इस यात्रा के दौरान, छात्रों को प्रयागराज की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का समृद्ध अनुभव प्राप्त हुआ।

इस अवसर पर बोलते हुए महापौर उमेश चंद्र ने इस प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया और कहा कि यह यात्रा प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की सांस्कृतिक एकता को मजबूत करने के उनके दृष्टिकोण को दर्शाती है। उन्होंने आगे कहा कि संगम एकता, सद्भाव और आपसी सम्मान का प्रतीक है।

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विकसित भारत युवा नेतृत्व संवाद का दूसरा दिन नई दिल्ली के भारत मंडपम में जारी

नई दिल्ली – युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय द्वारा आयोजित विकसित भारत युवा नेता संवाद का दूसरा दिन आज नई दिल्ली के भारत मंडपम में एक भव्य उद्घाटन सत्र के साथ शुरू हुआ। इस सत्र में केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय तथा श्रम एवं रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार श्री अजीत डोवाल, केंद्रीय युवा मामले एवं खेल राज्य मंत्री श्रीमती रक्षा निखिल खडसे, युवा मामलों के विभाग की सचिव डॉ. पल्लवी जैन गोविल और युवा कार्यक्रम विभाग के अतिरिक्त सचिव श्री नितेश कुमार मिश्रा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी और गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। उद्घाटन समारोह का शुभारंभ स्वामी विवेकानंद को पुष्पांजलि अर्पित करने के साथ हुआ, जिनके युवा सशक्तिकरण, नेतृत्व एवं राष्ट्रीय सेवा के शाश्वत आदर्श पूरे देश के युवा नेताओं को प्रेरित करते रहते हैं, इसके बाद पारंपरिक रूप से दीप प्रज्वलित किया गया।

 

आरंभिक सत्र को संबोधित करते हुए, केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया ने प्रतिभागियों का गर्मजोशी से स्वागत किया और इस पहल पर मिली जबरदस्त प्रतिक्रिया की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रारंभिक क्विज़ राउंड में लगभग 50 लाख युवा शामिल हुए, जिनमें से तीन लाख को 10 पहचाने गए थीमेटिक ट्रैक्स में से किसी एक पर निबंध प्रस्तुत करने के लिए चयनित किया गया। इन निबंधों का मूल्यांकन प्रख्यात प्रोफेसरों द्वारा किया गया, जिसके बाद 30,000 युवाओं को राज्य स्तर पर अपने विचार प्रस्तुत करने के लिए चुना गया। इस समूह में से, अंततः 3,000 युवा नेताओं का चयन किया गया ताकि वे अपने विचारों को परिष्कृत कर सकें और सीधे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के सामने प्रस्तुत कर सकें, जिन्होंने नौजवान भारतीयों पर गहरा विश्वास व्यक्त किया है जो विकसित भारत की यात्रा का नेतृत्व करेंगे और राष्ट्रीय युवा दिवस पर कई घंटे युवा नेताओं के साथ सीधे संवाद करेंगे और उनके विचार को सुनेंगे।

राष्ट्र की गतिशील शक्ति के रूप में युवाओं की बात करते हुए, डॉ. मंडाविया ने इस बात पर प्रकाश डाला कि ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग’ एक ऐसा प्रक्रिया है जो नेतृत्व को जमीनी स्तर से आगे बढ़ने मदद करता है, राजनीतिक समर्थन के बिना और राष्ट्र के भविष्य के नेताओं को पोषित करता है। उन्होंने कहा कि विकसित भारत केवल सरकार के प्रयास से प्राप्त नहीं होगा बल्कि 140 करोड़ नागरिकों के सामूहिक प्रयास से प्राप्त होगा जो राष्ट्र के लिए कल्पित पांच ‘संकल्पों’ द्वारा मार्गदर्शित हैं। ‘नेशन फर्स्ट’ के मंत्र पर बल देते हुए, उन्होंने युवाओं से आग्रह किया कि वे अपने कर्तव्यों को अनुशासन एवं समर्पण के साथ पूरा करें। भारत के अनुकूल जनसांख्यिकीय लाभ का उल्लेख करते हुए, उन्होंने कहा कि देश कोविड महामारी के बाद स्थिर रूप से प्रगति कर रहा है और बेरोजगारी दर में महत्वपूर्ण कमी ला रहा है।

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार श्री अजीत डोभाल ने अपने मुख्य भाषण में अपने युवावस्था पर बात की और व्यक्तिगत जीवन एवं राष्ट्रों के निर्माण के लिए अपने निर्णय पर लंबी चर्चा की। उन्होंने कहा कि किसी के जीवन की गति एवं दिशा उस रोज़ाना लिए जाने वाले निर्णयों की गुणवत्ता पर निर्भर करती है। उन्होंने युवा नेताओं से आग्रह किया कि वे इस क्षमता को प्रारंभिक अवस्था से ही विकसित करें। उन्होंने कहा कि युवाओं की सबसे बड़ी शक्ति सही निर्णय लेने में निहित है और कहा कि अगर वे भारत को विकसित भारत के लक्ष्य की ओर ले जाना चाहते हैं, तो उन्हें निर्णय लेने में दूरदर्शी, अनुशासित और क्रियान्वयन-केंद्रित दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। उन्होंने भारत के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान किए गए बलिदानों को भी याद किया और एक मजबूत एवं आत्मविश्वासी राष्ट्र का निर्माण करने के लिए इतिहास से सीखने के महत्व पर बल दिया।

उन्होंने कहा कि कि प्रेरणा क्षणिक होती है लेकिन अनुशासन स्थायी होता है। उन्होंने युवा नेताओं को अनुशासन को दैनिक जीवन में बदलने और बिना देरी किए कार्य करने की सलाह दी। उन्होंने युवाओं को आत्मविश्वास से भरपूर रहने के लिए प्रोत्साहित किया और उनसे अपने निर्णयों के प्रति पांच साल की प्रतिबद्धता अपनाने का आह्वान किया, यह कहते हुए कि अटूट इच्छाशक्ति समय के साथ अजेयता का निर्माण करती है। श्री डोभाल ने एक संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र के दौरान युवा प्रतिभागियों के साथ बातचीत भी की, जहां उन्होंने दबाव को संभालने और महत्वपूर्ण परिस्थितियों में सही निर्णय लेने के बारे में अपने विचार साझा किए।

अपने स्वागत संबोधन में, डॉ. पल्लवी जैन गोविल ने गणमान्य अतिथियों का आभार व्यक्त किया और उल्लेख किया कि यह संवाद लगभग 50 लाख युवाओं को शामिल करने वाली पांच महीने लंबी राष्ट्रीय प्रक्रिया का परिणाम है, जिसके परिणामस्वरूप सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से उत्कृष्ट युवा नेताओं का चयन हुआ। उन्होंने कहा कि वीबीवाईएलडी एक ऐसा मंच है जहां युवा आवाजों को सुना जा सके और उनके विचारों को नीति निर्धारण में डिज़ाइन-सोच, मानव-केंद्रित दृष्टिकोण के माध्यम से शामिल किया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि 144 शहरों में भारतीय प्रवासी समुदाय की भागीदारी के साथ आयोजित विकसित भारत रन, भारत की सॉफ्ट पावर को प्रदर्शित करने वाली एक प्रमुख पहल थी।

उद्घाटन सत्र का समापन युवा कार्यक्रम विभाग के अतिरिक्त सचिव श्री नितेश कुमार मिश्रा के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने मंच पर उपस्थित गणमान्य लोगों, वक्ताओं, आयोजकों और युवा प्रतिभागियों के सक्रिय सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने सतत संवाद एवं विकसित भारत युवा नेतृत्व संवाद जैसे सहभागी मंचों के माध्यम से युवा नेतृत्व को पोषित करने के लिए मंत्रालय की प्रतिबद्धता को दोहराया और प्रतिभागियों को आगामी सत्रों का भरपूर लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया।

संपूर्ण सत्र के समापन के बाद, प्रतिभागी अपने-अपने स्थानों पर गहन थीम आधारित सत्रों के लिए गए, जो कि 10 पहचानी गई थीमों के लिए आयोजित किए गए थे। इन सत्रों का संचालन मार्गदर्शकों द्वारा किया गया जिन्होंने प्रत्येक थीम का ढांचा एवं उद्देश्य प्रस्तुत किया, इसके बाद विशिष्ट विषय विशेषज्ञों द्वारा चर्चा की गई। इन संवादों ने सहयोगात्मक शिक्षा का एक मंच तैयार किया, जिससे प्रतिभागियों को मुद्दों का गंभीरता से विश्लेषण करने, विचारों का आदान-प्रदान करने और केंद्रित चर्चाओं के माध्यम से विशेषज्ञ मार्गदर्शन प्राप्त करने में मदद मिली। थीम इस प्रकार हैं

ट्रैक 1 – विकसित भारत के लिए लोकतंत्र एवं सरकार में युवाओं की भूमिका

इस सत्र का केंद्र युवाओं, लोकतंत्र और शासन पर आधारित था, जिसमें विशेष जूरी में श्री हेमांग जोशी, वडोदरा से सांसद, और सुश्री भक्ति शर्मा, पूर्व सरपंच और जमीनी स्तर की नेता शामिल थीं। प्रतिभागियों ने नवोन्मेषी शासन मॉडल प्रस्तुत किए, जिनका उद्देश्य युवाओं को सार्वजनिक प्रशासन में एकीकृत करना था, जिसमें गांव स्तर की कार्य योजना, जिला प्रशासन के साथ समस्या-समाधान इकाइयां, नीति और करियर लैब, और संरचित नागरिक सहभागिता पहल शामिल थीं।

ट्रैक 2 – महिला नेतृत्व वाला विकास: विकसित भारत की कुंजी

यह सत्र ‘विकसित भारत @2047’ की परिकल्पना के अनुरूप, शासन और राष्ट्र निर्माण में महिलाओं को अग्रणी भूमिका निभाने के लिए प्रोत्साहित करने पर केंद्रित था। इस सत्र में भारत मंडपम में भारत की पहली एमबीए सरपंच सुश्री छवि राजवत, अर्जुन पुरस्कार विजेता और विधानसभा सदस्य सुश्री श्रेयासी सिंह और किश्तवार से विधायक सुश्री शगुन परिहार सहित विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित विशेषज्ञों के साथ संवाद हुए।

ट्रैक 3 – फिट भारत, हिट भारत

इस सत्र का मुख्य विषय एक सशक्त और सशक्त भारत के निर्माण में स्वास्थ्य, कल्याण, खेल और स्वदेशी ज्ञान प्रणालियों की भूमिका पर केंद्रित था। सत्र में प्रख्यात खिलाड़ियों श्री लिएंडर पेस और श्री पुलेला गोपीचंद के साथ संवाद हुए, जिन्होंने शारीरिक फिटनेस, मानसिक स्वास्थ्य, अनुशासन और योग एवं ध्यान जैसी भारत की पारंपरिक प्रथाओं को एकीकृत करके समग्र कल्याण के महत्व पर प्रकाश डाला।

ट्रैक 4 – भारत को विश्व की स्टार्टअप राजधानी बनाना

इस विषय के अंतर्गत, युवा नेताओं ने अपने विचार प्रस्तुत किए और संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञों के साथ संवादात्मक सत्र में शामिल हुए। इससे प्रतिभागियों को व्यापक स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र पर नीति निर्माताओं और उद्योग जगत के विशेषज्ञों के साथ सीधे संवाद स्थापित करने का अवसर प्राप्त हुआ। सत्र में आंध्र प्रदेश के सांसद श्री हरीश बालायोगी, ज़ेप्टो के सह-संस्थापक और मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी श्री कैवल्य वोहरा, आंध्र प्रदेश सरकार में युवा मामले एवं खेल मंत्री श्री रामप्रसाद रेड्डी और आंध्र प्रदेश खेल प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री रवि नायडू भी शामिल हुए।

ट्रैक 5 – भारत की सॉफ्ट पावर: सांस्कृतिक कूटनीति और वैश्विक प्रभाव

इस सत्र में भारत के सॉफ्ट पावर एवं सांस्कृतिक कूटनीति के माध्यम से बढ़ते वैश्विक प्रभाव पर चर्चा की गई। विशिष्ट वक्ताओं म श्री रोमालो राम, जमीनी स्तर के शासन एवं सामुदायिक विकास से जुड़े लोक सेवक; श्रीमती पाल्की शर्मा, वरिष्ठ पत्रकार एवं टेलीविजन एंकर; श्री सतीश शर्मा, कैबिनेट मंत्री जिनके पास जम्मू और कश्मीर में खाद्य, नागरिक आपूर्ति और उपभोक्ता मामले, परिवहन, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, सूचना प्रौद्योगिकी, युवा सेवा एवं खेल, तथा एआरआई और प्रशिक्षण से संबंधित विभाग हैं; और श्री अर्पित तिवारी, उपनिदेशक, नेहरू युवा केंद्र संगठन शामिल थे। इन वक्ताओं ने सत्र का संचालन किया और प्रतिभागियों के साथ बातचीत की।

ट्रैक 6 – परंपरा के साथ नवाचार: आधुनिक भारत का निर्माण

इस सत्र का मुख्य उद्देश्य नवाचार एवं युवा सशक्तिकरण के माध्यम से भारत की सांस्कृतिक विरासत का उत्सव मनाना था। सत्र का नेतृत्व राष्ट्रीय शैक्षिक प्रौद्योगिकी फोरम और एनएएसी के अध्यक्ष श्री अनिल सहस्रबुद्धे, शिक्षाविद, लेखक और पूर्व सांसद श्री विनय सहस्रबुद्धे और वहदम इंडिया के संस्थापक और सीईओ श्री बाला सरदा जैसे प्रतिष्ठित विशेषज्ञों ने किया।

ट्रैक 7 – आत्मनिर्भर भारत: मेक इन इंडिया, मेक फॉर द वर्ल्ड

इस सत्र में नवाचार आधारित विकास और भारत के आर्थिक भविष्य को आकार देने में युवाओं की भूमिका पर चर्चा हुई। एटमबर्ग टेक्नोलॉजीज के सह-संस्थापक श्री सिबाब्रता दास और एडवर्ब के मुख्य परिचालन अधिकारी श्री प्रतीक जैन ने सत्र का नेतृत्व किया और प्रतिभागियों के साथ व्यापक संवाद किया।

ट्रैक 8 – स्मार्ट एवं सतत कृषि के माध्यम से उत्पादकता बढ़ाना

यह सत्र स्मार्ट एवं सतत कृषि के माध्यम से उत्पादकता बढ़ाने पर केंद्रित था, जिसमें भारतीय खेती के आधुनिकीकरण में व्यावहारिक चुनौतियों से निपटने पर चर्चा हुई। पांच शॉर्टलिस्ट किए गए टीमों ने अपने उत्कृष्ट विचारों को एक पैनल के सामने प्रस्तुत किया, जिसका नेतृत्व श्री अतुल पाटीदार, जमीनी स्तर पर सुशासन के विशेषज्ञ और श्री राजबीर सिंह, उप महानिदेशक (कृषि विस्तार), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद ने किया।

ट्रैक 9 – एक सतत एवं हरित विकसित भारत का निर्माण

इस सत्र का मुख्य विषय “एक सतत एवं हरित विकसित भारत का निर्माण” था, जिसमें एक लचीले एवं समावेशी भविष्य को आकार देने में वर्तमान कार्यों की भूमिका पर प्रकाश डाला गया। चर्चा का नेतृत्व बीच प्लीज इंडिया के संस्थापक श्री मल्हार कलांबे, छत्तीसगढ़ के पूर्व सिविल सेवक श्री ओ. पी. चौधरी और इकोसेंस के संस्थापक और सीईओ श्री अभिषेक मंगलिक ने किया। वक्ताओं ने इस बात पर बल दिया कि सतत भारत की परिकल्पना को दैनिक जीवन, शासन और तकनीकी नवाचार में स्थिरता को समाहित करके ही प्राप्त किया जा सकता है तथा स्वच्छ, हरित और सतत भारत के निर्माण में युवाओं की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित किया।

ट्रैक 10 – विकसित भारत के लिए भविष्य के लिए तैयार कार्यबल का निर्माण

इस सत्र का मुख्य उद्देश्य भारत के युवाओं को बदलते कार्यक्षेत्र के लिए तैयार करना था। इस सत्र का संचालन प्रख्यात शिक्षाविद और सुपर 30 के संस्थापक श्री आनंद कुमार और लोक नीति विशेषज्ञ एवं शोधकर्ता श्री अनिकेत देब ने किया। चर्चा में इस बात पर बल दिया गया कि वर्तमान में रोजगार योग्यता केवल डिग्री तक सीमित नहीं है बल्कि इसमें कौशल, अनुकूलन क्षमता और भविष्य के लिए तत्परता भी शामिल है। इसमें स्व-विकास, अनुशासित शिक्षा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसी तकनीकी चुनौतियों से निपटने पर विशेष जोर दिया गया।

आधिकारिक कार्यक्रम के अंतर्गत, प्रतिभागियों ने दो समूहों में प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय का दौरा किया, जहां उन्हें भारत की नेतृत्व विरासत और लोकतांत्रिक विकास की गहरी समझ प्राप्त हुई। इसके बाद प्रतिभागियों को राज्य टीमों में पुनर्गठित किया गया और वे केंद्रीय मंत्रियों और संसद सदस्यों के आवासों पर रात्रिभोज के लिए रवाना हुए, जहाँ साझा चिंतन और राष्ट्रीय सेवा के माहौल में सार्थक संवाद, मार्गदर्शन और अनौपचारिक सलाह-मशविरा का अवसर मिला।

विकसित भारत युवा नेतृत्व संवाद 2026 का दूसरा दिन एक केंद्रित और अग्रसर दृष्टिकोण के साथ संपन्न हुआ, जिससे सरकार की यह प्रतिबद्धता दोहराई गई कि युवाओं को भारत के राष्ट्र निर्माण यात्रा के केंद्र में रखा जाएगा। थीम आधारित ट्रैकों में समृद्ध विचार-विमर्श और युवा नेताओं द्वारा नीति निर्माताओं और विशेषज्ञों के साथ सक्रिय सहभागिता ने डायलॉग को विचारों, नेतृत्व और सहभागी शासन के लिए एक मजबूत मंच के रूप में और भी सशक्त किया। इस कार्यक्रम का समापन 12 जनवरी 2026 को होगा, जिसमें प्रधानमंत्री देश भर के युवा नेताओं से बातचीत करेंगे। संवाद के तीसरे दिन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के अंतरिक्ष यात्रियों के साथ प्रेरणादायक बातचीत, विषयवार प्रस्तुतियाँ और विकसित भारत की भावना और विविधता को प्रदर्शित करने वाला एक सांस्कृतिक समारोह आयोजित किया जाएगा।

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प्रधानमंत्री ने सोमनाथ की अपनी यात्रा की झलकियां साझा की

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज गुजरात के सोमनाथ यात्रा की कुछ झलकियां साझा की।

श्री मोदी ने एक्स पर अलग-अलग पोस्ट में लिखा:

‘‘सोमनाथ में आकर धन्य महसूस कर रहा हूं। यह हमारे सभ्यतागत साहस का गौरवशाली प्रतीक है।

यह यात्रा #सोमनाथस्वाभिमानपर्व के दौरान हो रही है, जब पूरा देश 1026 में सोमनाथ मंदिर पर हुए पहले हमले के एक हजार साल पूरे होने के उपलक्ष्य में एकजुट हुआ है।

लोगों के गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए आभारी हूं।’’

 

“जय सोमनाथ!

आज का स्वागत बहुत विशेष था।”

 

“आज शाम सोमनाथ में, मैंने श्री सोमनाथ न्‍यास की एक बैठक की अध्यक्षता की। हमने मंदिर परिसर में बुनियादी ढांचे के उन्नयन से संबंधित विभिन्न पहलुओं और सोमनाथ की तीर्थयात्रा को और भी यादगार बनाने के तरीकों की समीक्षा की।”

 

“ॐ हमारे वेदों का, शास्त्रों का, पुराणों का, उपनिषदों और वेदांत का सार है।

ॐ ही ध्यान का मूल है, और योग का आधार है।

ॐ ही साधना में साध्य है।

ॐ ही शब्द ब्रह्म का स्वरूप है।

ॐ से ही हमारे मंत्र प्रारंभ एवं पूर्ण होते हैं।

आज सोमनाथ स्वाभिमान पर्व में 1000 सेकंड्स तक ओंकार नाद के सामूहिक उच्चार का सौभाग्य मिला। उसकी ऊर्जा से अंतर्मन स्पंदित और आनंदित हो रहा है।

ॐ तत् सत्!!”

 

“सोमनाथ स्वाभिमान पर्व के सुअवसर पर सोमनाथ मंदिर परिसर में भव्यता और दिव्यता से भरा ड्रोन शो देखने का सौभाग्य मिला। इस अद्भुत शो में हमारी प्राचीन आस्था के साथ आधुनिक टेक्नोलॉजी का तालमेल हर किसी को मंत्रमुग्ध कर गया। सोमनाथ की पावन धरा से निकला यह प्रकाशपुंज पूरे विश्व को भारत की सांस्कृतिक शक्ति का संदेश दे रहा है।”

 

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हर समय हर वक्त सच के साथ

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