नई दिल्ली – भारत सरकार के भारी उद्योग मंत्रालय के सचिव श्री कामरान रिजवी ने मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में प्रधानमंत्री के नए कार्यालय, सेवा तीर्थ में आयोजित केंद्रीय मंत्रिमंडल की पहली बैठक के ऐतिहासिक अवसर पर आयोजित सेवा संकल्प शपथ ग्रहण समारोह में भाग लिया।
सेवा तीर्थ में पहली कैबिनेट बैठक भारत के शासन सफर में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है। यह इस सामूहिक संकल्प को मजबूत करती है कि सुदृढ़ नीति, ईमानदार इरादे और निर्णायक नेतृत्व के साथ, विकसित भारत के निर्माण का मार्ग दृढ़ और प्रकाशमय बना रहेगा। सेवा तीर्थ की भावना से प्रेरित कार्य संस्कृति भारत को एक सक्षम, सशक्त और आत्मनिर्भर राष्ट्र के रूप में मजबूत बनाने में मार्गदर्शक आधार का काम करेगी।
इस अवसर पर, इस स्थल के ऐतिहासिक महत्व को भी याद किया गया। सेवा तीर्थ की स्थापना ब्रिटिश काल की अस्थायी बैरकों के स्थान पर की गई है। इस स्थल का राष्ट्रीय शासन के एक गतिशील संस्थान में परिवर्तन नए भारत की प्रगति और नवीनीकरण का एक सशक्त प्रतीक है।
सेवा तीर्थ में, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अपने दृढ़ संकल्प को दोहराया कि लिए गए प्रत्येक निर्णय 1.4 अरब नागरिकों की सेवा की अटूट भावना से प्रेरित होंगे और राष्ट्र निर्माण और समावेशी विकास के व्यापक उद्देश्य के साथ दृढ़ता से जुड़े होंगे।
प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में, केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सेवा तीर्थ को संवेदनशील, जवाबदेह और नागरिक-केंद्रित शासन के वैश्विक प्रतीक में बदलने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की है। भारत के 2047 तक एक समृद्ध और विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य की ओर बढ़ने के साथ, यह नया परिसर राष्ट्रीय आकांक्षा, सेवा और परिवर्तनकारी कार्यों के एक शक्तिशाली केंद्र के रूप में खड़ा होगा।
इस राष्ट्रीय परिकल्पना के प्रति मंत्रालय की प्रतिबद्धता की पुष्टि करते हुए, सचिव ने कहा कि भारी उद्योग मंत्रालय भारत के विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करके, उन्नत प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देकर, सतत औद्योगिक विकास का समर्थन करके और स्वच्छ एवं हरित परिवहन की ओर संक्रमण को गति देकर विकसित भारत@2047 के लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए दृढ़ संकल्पित है। नीतिगत हस्तक्षेपों और उद्योग जगत के साथ घनिष्ठ सहयोग के माध्यम से, एमएचआई आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी औद्योगिक आधार के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका
नई दिल्ली – केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज नई दिल्ली के सुषमा स्वराज भवन में शिक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित ‘स्टडी इन इंडिया एजुकेशन-डिप्लोमैटिक कॉन्क्लेव 2026’ को संबोधित किया। इस सम्मेलन में 50 से अधिक देशों के राजदूत, उच्चायुक्त, राजनयिक मिशनों के प्रतिनिधि और मंत्रालय के अधिकारियों ने उच्च शिक्षा में अंतरराष्ट्रीय सहयोग को मजबूत करने पर विचार-विमर्श किया।
श्री धर्मेंद्र प्रधान ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के तहत भारत की शिक्षा प्रणाली में हुए बदलाव का उल्लेख किया और कहा कि भारत शिक्षा के अंतर्राष्ट्रीयकरण में हो रही महत्वपूर्ण प्रगति और गुणवत्ता, नवाचार तथा सामर्थ्य पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
श्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की भारत को वर्ष 2047 तक एक विकसित राष्ट्र बनाने की परिकल्पना स्वतंत्रता की 100वीं वर्षगांठ का प्रतीक होगी। श्री धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि भारत वैश्विक आर्थिक परिदृश्य में सीखने, अनुसंधान, नवाचार और उसे लागू करने के अपार अवसर प्रदान करता है।
उन्होंने कहा कि भारत की सबसे बड़ी ताकत उसका जीवंत ज्ञान तंत्र, जनसांख्यिकीय लाभांश और तेजी से बढ़ती अर्थव्यवस्था है। श्री प्रधान ने कहा कि भारत नई शिक्षा नीति 2020 और ‘स्टडी इन इंडिया’ पहल के माध्यम से छात्रों, शोधकर्ताओं और संस्थानों के लिए वैश्विक अवसरों का विस्तार कर रहा है।
उन्होंने कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव प्रौद्योगिकी और सेमीकंडक्टर से लेकर सतत ऊर्जा तक, भारत एक विश्वसनीय नवाचार भागीदार के रूप में उभर रहा है और सहयोग, क्षमता निर्माण तथा साझा ज्ञान पर आधारित वैश्विक दक्षिण मॉडल को आगे बढ़ा रहा है।
उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अनिश्चितता और तेजी से बदल रहे वैश्विक परिदृश्य में शिक्षा ही समाजों के बीच सबसे मजबूत सेतु है और भारत सहयोगी देशों के साथ ज्ञान के मजबूत सेतु बनाने का प्रयास कर रहा है। उन्होंने राजनयिकों से भारत की तेजी से विकसित हो रही, नवाचार-प्रेरित, बहुविषयक और सुलभ शिक्षा प्रणाली के साथ सहयोग करने का आह्वान किया।
उच्च शिक्षा सचिव डॉ. विनीत जोशी ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने पिछले छह वर्षों में भारत के उच्च शिक्षा सुधारों, विशेष रूप से बहुविषयक शिक्षा को बढ़ावा देने, कौशल विकास को शिक्षा के साथ एकीकृत करने और अंतर्राष्ट्रीयकरण को मजबूत करने के संदर्भ में स्पष्ट दिशा प्रदान की है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारतीय संस्थान संयुक्त, द्विभाषी और विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से वैश्विक जुड़ाव को गहरा कर रहे हैं, जबकि प्रमुख विश्वविद्यालय अपनी अंतर्राष्ट्रीय उपस्थिति का विस्तार कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने एक पारदर्शी और समयबद्ध नियामक ढांचा तैयार किया है, जिससे विदेशी विश्वविद्यालयों को भारत में परिसर स्थापित करने में सुविधा हो रही है, और ऑस्ट्रेलिया, इटली, यूनाइटेड किंगडम और अमेरिका के प्रमुख संस्थानों के आवेदनों को एक महीने के भीतर मंजूरी दी गई है। उन्होंने कहा कि ‘स्टडी इन इंडिया’ पहल भारत के साथ पारस्परिक रूप से लाभकारी वैश्विक शिक्षा साझेदारी का खुला निमंत्रण है।
इस सम्मेलन में निम्नलिखित विषयों पर केंद्रित सत्र आयोजित किए गए:
भारतीय ज्ञान प्रणाली एक वैश्विक शैक्षणिक पेशकश के रूप में
एसपीएआरसी और जीआईएएन के माध्यम से अकादमिक साझेदारी
कृत्रिम बुद्धिमत्ता और उन्नत प्रौद्योगिकियां
भारत में विदेशी विश्वविद्यालय परिसरों के लिए यूजीसी विनियम 2023
अंतर्राष्ट्रीय शाखा परिसर और सहायक ढांचे
भारत की कौशल संरचना का अंतर्राष्ट्रीयकरण
भारत इनोवेट्स 2026
सम्मेलन के दौरान भारत के विकसित हो रहे उच्च शिक्षा तंत्र पर प्रकाश डाला गया जिनमें अंतर्राष्ट्रीय सहयोग छात्र गतिशीलता, संयुक्त कार्यक्रम, अनुसंधान साझेदारी और परिसरों की स्थापना शामिल हैं।
स्टडी इन इंडिया एजुकेशन-डिप्लोमैटिक कॉन्क्लेव 2026 में शिक्षा के क्षेत्र में राजनयिक भागीदारी को मजबूत करने के लिए भागीदार देशों के छात्रों को भारत में उच्च शिक्षा और अल्पकालिक कार्यक्रमों में भाग लेने, संस्थागत सहयोग को प्रोत्साहित करने और विश्व स्तरीय दर्जा प्राप्त विश्वविद्यालयों को भारत में परिसर स्थापित करने के लिए आमंत्रित किया गया।
नई दिल्ली – राज्य सिविल सेवाओं से भर्ती हुए और लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय प्रशासन अकादमी (एलबीएसएनएए) में आयोजित 128वें प्रेरण प्रशिक्षण कार्यक्रम में भाग ले रहे भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों ने आज (2 मार्च, 2026) राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की।
राष्ट्रपति ने अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि राष्ट्र निर्माण की प्रक्रिया में उनकी भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। अब उन पर जिला या राज्य स्तर की प्राथमिकताओं से कहीं अधिक व्यापक जिम्मेदारियां हैं। इन व्यापक जिम्मेदारियों के लिए विभागीय सीमाओं से परे एक दृष्टिकोण की आवश्यकता है जो प्रशासनिक बाधाओं को दूर करे। सहयोगात्मक रूप से कार्य करके वे संस्थागत सामंजस्य बढ़ा सकते हैं और शासन-तंत्र को सुदृढ़ कर सकते हैं। विकासात्मक परिणामों को गति देने और लोक सेवा के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के लिए उनकी सामूहिक कुशलता, समन्वय और प्रतिबद्धता आवश्यक है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि वे अब किसी विशेष क्षेत्र के प्रशासक नहीं हैं। अब वे शासन मानकों के संरक्षक हैं जिन्हें पूरे राष्ट्र में बनाए रखना होगा। उनके द्वारा लिया गया प्रत्येक निर्णय 2047 तक विकसित भारत के निर्माण की समग्र दृष्टि के अनुरूप होना चाहिए।
राष्ट्रपति ने कहा कि आईएएस अधिकारी होने के नाते, उनसे यह अपेक्षा की जाएगी कि वे जनता की आवश्यकताओं और आकांक्षाओं को पूरा करने के लिए नीतियों को प्रभावी ढंग से लागू करें। उन्होंने बताया कि उनका बहुमूल्य अनुभव और ‘राष्ट्र सर्वोपरि’ की भावना, कठिन और जटिल चुनौतियों का सामना करने में उनके लिए मार्गदर्शन का स्रोत बनेगी।
राष्ट्रपति ने कहा कि अधिकारियों से यह उम्मीद की जाती है कि वे समावेशी विकास में अपना योगदान दें। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि विकसित राष्ट्र के रूप में भारत का रूपांतरण तभी सार्थक होगा जब इसका लाभ सबसे कमजोर और वंचित वर्गों तक पहुंचेगा। उन्होंने उनसे यह सुनिश्चित करने के लिए अथक प्रयास करने का आग्रह किया कि कोई भी समुदाय भौगोलिक, सामाजिक या आर्थिक कारणों से पीछे न छूटे। उन्होंने स्थिरता और जलवायु लचीलापन को प्राथमिकता देने पर भी जोर दिया। वरिष्ठ प्रशासकों के रूप में, उन्हें हरित प्रथाओं को बढ़ावा देना चाहिए, जलवायु-अनुकूल शासन को प्रोत्साहित करना चाहिए और सतत विकास को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने कहा कि हमारे आज के सामूहिक प्रयास ही आने वाली पीढ़ियों के जीवन की गुणवत्ता तय करेंगे।
नई दिल्ली – राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (2 मार्च, 2026) नई दिल्ली में आयोजित ‘सशक्त नारी, समृद्ध दिल्ली’ कार्यक्रम में भाग लिया और इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित किया। इस कार्यक्रम का आयोजन दिल्ली सरकार द्वारा किया गया था।
राष्ट्रपति ने इस अवसर पर अपने संबोधन में कहा कि आज महिलाएं हर क्षेत्र में उत्कृष्ट प्रदर्शन कर रही हैं। सैनिक के रूप में वे देश की सीमाओं की रक्षा कर रही हैं। वैज्ञानिक के रूप में वे प्रयोगशालाओं में शोध कर रही हैं। खेल-प्रतियोगिताओं में वे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत का नाम रोशन कर रही हैं। राजनीति, सामाजिक सेवा, प्रशासन और व्यापार जैसे सभी क्षेत्रों में आज महिलाएं नई ऊंचाइयों को छू रही हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि देशभर में दीक्षांत समारोहों में डिग्री और पदक प्राप्त करने वाली छात्राओं की बढ़ती संख्या एक प्रेरणादायक तस्वीर प्रस्तुत करती है। हालांकि यह भी एक सच्चाई है कि महिलाओं को आज भी हिंसा, आर्थिक असमानता, सामाजिक रूढ़िवादिता और स्वास्थ्य संबंधी उपेक्षा का सामना करना पड़ता है। महिला सशक्तिकरण का लक्ष्य इन बाधाओं को दूर करके ही प्राप्त किया जा सकता है। एक महिला सशक्त तभी होगी जब वह स्वतंत्र निर्णय ले सके, आत्मसम्मान से जी सके और उसे समान अवसर व सुरक्षा मिले। एक सशक्त महिला न केवल अपना जीवन बदल सकती है, बल्कि समाज और आने वाली पीढ़ियों की दिशा भी बदल सकती है।
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत सरकार ने महिला सशक्तिकरण के लिए कई कदम उठाए हैं। बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना शिक्षा और लड़कियों की सुरक्षा को बढ़ावा दे रही है। प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना लाखों महिलाओं को धुएं से मुक्ति दिलाकर उनके स्वास्थ्य की रक्षा कर रही है। प्रधानमंत्री मुद्रा योजना महिलाओं को स्वरोजगार के लिए ऋण उपलब्ध करा रही है। लखपति दीदी योजना जैसी पहल महिलाओं को आत्मनिर्भर बनने के अवसर प्रदान कर रही हैं। प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना जैसी पहल महिलाओं के स्वास्थ्य में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि इन सभी प्रयासों से महिलाओं की सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक स्थिति में सुधार हो रहा है। हालांकि हमें यह याद रखना चाहिए कि महिला सशक्तिकरण केवल सरकार की जिम्मेदारी नहीं है। यह समाज के प्रत्येक सदस्य और संस्था की जिम्मेदारी है। महिलाओं को शिक्षित करना, उनका आत्मविश्वास बढ़ाना और उन्हें प्रोत्साहन एवं सहायता प्रदान करना हमारा कर्तव्य है। हमें महिलाओं को आश्वस्त करना चाहिए कि वे सपने देख सकती हैं और उन्हें साकार कर सकती हैं और हम उनके सपनों को साकार करने में उनके साथ खड़े हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि दिल्ली देश की राजधानी है। यहां हर राज्य और क्षेत्र के लोग रहते हैं। यदि दिल्ली की महिलाएं सुरक्षित, शिक्षित और आत्मनिर्भर हों और समाज के हर क्षेत्र में आत्मविश्वासपूर्ण नेतृत्व प्रदान करें, तो इससे पूरे देश को सकारात्मक संदेश मिलेगा। दिल्ली को पूरे देश के लिए महिला नेतृत्व वाले विकास का उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए।
राष्ट्रपति ने कहा कि दिल्ली की महिलाओं को समृद्ध दिल्ली और विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने में अहम भूमिका निभाने के लिए सरकार और समाज को उन्हें फलने-फूलने के लिए बेहतर वातावरण प्रदान करना होगा। उन्हें ऐसा वातावरण मिलना चाहिए जहां वे बिना किसी दबाव या भय के अपने से जुड़े निर्णय स्वतंत्र रूप से ले सकें।
नई दिल्ली – नई दिल्ली के पूसा परिसर स्थित विवेकानंद हॉल में 27 फरवरी 2026 को सीएसआईआर-राष्ट्रीय विज्ञान संचार और नीति अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर) की ओर से ‘भारत के सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करना : नीतियां, चुनौतियां और अवसर’ विषय पर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यशाला में अनुसंधान एवं विकास संस्थान, सरकार, शिक्षा और उद्योग जगत के विशेषज्ञों को एक मंच पर साथ लाया गया ताकि भारत के सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र को सुव्यवस्थित करने के लिए नीतियों, चुनौतियों और रणनीतिक अवसरों पर विचार-विमर्श किया जा सके। सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर द्वारा ‘भारत के सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र की तुलना में वैश्विक सेमीकंडक्टर नीतियों और रणनीतियों का तुलनात्मक विश्लेषण’ पर हाल ही में किए गए अध्ययन को मजबूती प्रदान करने के लिए इस कार्यशाला का आयोजन किया गया था। इस कार्यशाला का आयोजन भारत के सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र के वर्तमान परिदृश्य का आकलन करने, चुनौतियों की पहचान करने, सहयोग के अवसरों का पता लगाने, वैश्विक पद्धतियों और नीतिगत जानकारियों की पहचान करने, नीतिगत पहल पर संवाद को सुगम बनाने और भारत की सेमीकंडक्टर क्षमताओं को मजबूत करने में सहायता के लिए व्यावहारिक सिफारिशें विकसित करने के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए किया गया था।
इस कार्यशाला में इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन, बीआईटीएस पिलानी; नीति आयोग; सीएसआईआर-सीईआरआई पिलानी; सॉलिड स्टेट फिजिक्स लेबोरेटरी (एसएसपीएल), डीआरडीओ, एनआईईएलआईटी, नई दिल्ली; सीएसआईआर-सीएसआईओ, चंडीगढ़; सीएसआईआर-एनपीएल, नई दिल्ली; आईआईटी जोधपुर; आईआईटी दिल्ली; विकासशील देशों के लिए अनुसंधान और सूचना प्रणाली (आरआईएस); दिल्ली तकनीकी विश्वविद्यालय; सीएसआईआर-एनएएल, बेंगलुरु; अमृता विश्वविद्यालय; इंटेल इंडिया; लैम रिसर्च, एप्लाइड मैटेरियल्स, सेमीवर्स सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड; सहस्रा सेमीकंडक्टर प्राइवेट लिमिटेड, नई दिल्ली; और वेरसेमी माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स (पी) लिमिटेड, नोएडा के प्रतिभागियों ने भाग लिया और भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए अपने विचार साझा किए।
उद्घाटन सत्र में सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर की निदेशक डॉ. गीता वानी रायसम ने विज्ञान संचार और नीति अनुसंधान में संस्थान की भूमिका पर प्रकाश डाला और भारत के सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के लिए संवाद के महत्व पर जोर दिया। सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. विपिन कुमार ने भारत की सेमीकंडक्टर संबंधी विरोधाभासी स्थिति, मजबूत वैश्विक डिजाइन नेतृत्व के बावजूद 95% आयात पर निर्भरता और साक्ष्य-आधारित नीति सुधारों पर प्रकाश डाला। साथ ही भारत को 2030 तक एक विश्वसनीय वैश्विक सेमीकंडक्टर हब के रूप में स्थापित करने के लिए साक्ष्य-आधारित नीति सुधारों, आईएसएम 2.0 नवाचार प्रोत्साहन और रणनीतिक आत्मनिर्भरता पर जोर दिया।
बीआईटीएस पिलानी के ग्रुप वाइस चांसलर और ईएस मैन्युफैक्चरिंग कमेटी के पदेन सदस्य प्रोफेसर वी. रामगोपाल राव ने मुख्य अतिथि के रूप में भाषण दिया। उन्होंने राष्ट्रीय प्रतिस्पर्धात्मकता और तकनीकी आत्मनिर्भरता के लिए सेमीकंडक्टरों के रणनीतिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने उन्नत फाउंड्री की मेजबानी करने के बजाय स्वदेशी प्रौद्योगिकी, मिशन-मोड कार्यक्रमों और डीप-टेक स्टार्टअप पर केंद्रित रणनीति को अपनाने पर बल दिया। प्रो. राव ने नवाचारों को निम्न से उच्च टीआरएल में प्रगति करने और ‘वैली ऑफ डेथ’ से उबरने में मदद करने के लिए उत्कृष्टता केंद्रों, अनुसंधान एवं विकास केंद्रों और प्रोटोटाइपिंग सुविधाओं के विस्तार की सिफारिश की।
तकनीकी चर्चा को तीन विषयगत सत्रों में संरचित किया गया था। पहला सत्र ‘अनुसंधान एवं विकास और नवाचार, डिजाइन और विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र’ पर केंद्रित था। इस सत्र के वक्ताओं ने आईएसएम 2.0 से आग्रह किया कि वह पायलट फैब्स, विशिष्ट रक्षा सेमीकंडक्टर, स्वदेशी सामग्रियों/उपकरणों, डिजाइन-आधारित अनुसंधान एवं विकास, फोटोनिक्स/एआई फोकस, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के डिजाइन, उत्पादन, उपयोग और निपटान को उनके पूरे जीवनचक्र में पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार और संसाधन-कुशल तरीके से करने, विविध विनिर्माण, मजबूत आईपी, कौशल, बुनियादी ढांचे, वैश्विक साझेदारी और अनुकूल रणनीतियों के माध्यम से शिक्षा और उद्योग जगत के बीच की खाई को कम करने का प्रयास करे। “कुशल कार्यबल और प्रतिभा विकास के लिए पारिस्थितिकी तंत्र” पर द्वितीय सत्र की अध्यक्षता भारत सेमीकंडक्टर मिशन के निदेशक (प्रौद्योगिकी) डॉ. मनीष के हुडा ने की। इस सत्र के वक्ताओं ने भारत के सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को विकसित करने के लिए संतुलित डिजाइन-विनिर्माण विकास, सीएमओएस-केंद्रित शैक्षणिक कार्यक्रमों, संरचित कौशल विकास पहल, उद्योग जगत से सहयोग और कार्यबल विकास पर जोर दिया।
तृतीय सत्र का मुख्य विषय ‘नीति, शासन और संस्थागत ढांचा’ रहा। इस सत्र में एक अनुकूल सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र का समर्थन करने के लिए आवश्यक नीति और संस्थागत संरचना का परीक्षण किया गया। इस सत्र की अध्यक्षता अमृता विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर और सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर के पूर्व मुख्य वैज्ञानिक प्रोफेसर सुजीत भट्टाचार्य ने की। वक्ताओं ने वैश्विक नीति मॉडलों की तुलना की, एकीकृत शासन और एक राष्ट्रीय अनुसंधान केंद्र की आवश्यकता पर बल दिया। एआई-चिप स्टार्टअप के अवसरों पर प्रकाश डाला। साथ ही सेमीकंडक्टर कूटनीति, दुर्लभ खनिजों तक पहुंच, आपूर्ति शृंखला में अनुकूलन और रणनीतिक स्वायत्तता पर जोर दिया। तृतीय सत्र: नीति, शासन और संस्थागत ढांचा में एक अनुकूल सेमीकंडक्टर पारिस्थितिकी तंत्र का समर्थन करने के लिए आवश्यक नीति और संस्थागत संरचना का परीक्षण किया गया। इस सत्र की अध्यक्षता अमृता विश्वविद्यालय के सहायक प्रोफेसर और सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर के पूर्व मुख्य वैज्ञानिक प्रोफेसर सुजीत भट्टाचार्य ने की।
‘रणनीतिक मार्ग : भारत के सेमीकंडक्टर भविष्य के लिए एक रोडमैप’ पर एक पैनल चर्चा और समापन सत्र के साथ कार्यशाला का समापन हुआ। सत्र की अध्यक्षता भारतीय विज्ञान संस्थान (आईआईएससी, बेंगलुरु) के अंतःविषय विज्ञान प्रभाग के डीन और नैनो विज्ञान एवं इंजीनियरिंग केंद्र के प्रोफेसर नवकांत भट ने की। विशेषज्ञों ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (आईएसएम 1.0 और 2.0) के माध्यम से भारत सरकार की निरंतर प्रगति पर प्रकाश डाला और इस बात पर जोर दिया कि अगले चरण में बेहतर क्रियान्वयन, नवाचार और विस्तार की आवश्यकता है। उद्योग जगत के दृष्टिकोण ने भारतीय विज्ञान संस्थान के साथ साझेदारी सहित शिक्षा-उद्योग सहयोग के माध्यम से उन्नत विनिर्माण क्षमताओं और संरचित कार्यबल के विकास पर जोर दिया।
वक्ताओं ने स्वदेशी एनालॉग (अनुरूप), सेंसर और एप्लीकेशन-विशिष्ट उत्पादों में भारत की ताकत पर जोर दिया, साथ ही विशिष्ट सेमीकंडक्टर क्षेत्रों में उच्च विशिष्ट वैज्ञानिक प्रतिभा की तत्काल आवश्यकता पर भी बल दिया। चिप-टु-चिप-लेस आर्किटेक्चर और क्वांटम-इंटीग्रेटेड सेमीकंडक्टर सिस्टम जैसे उभरते क्षेत्रों को अभूतपूर्व प्रगति के अवसरों के रूप में रेखांकित किया गया। कार्यशाला के समापन पर सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर के मुख्य वैज्ञानिक डॉ. विपिन कुमार और सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर की मुख्य वैज्ञानिक डॉ. चारू वर्मा ने अपने विचार रखे। विभिन्न सत्रों में हुई चर्चाओं ने सामूहिक रूप से वैश्विक सेमीकंडक्टर मूल्य शृंखला में भारत की स्थिति को मजबूत करने के लिए अनुसंधान एवं विकास, डिजाइन, विनिर्माण, कौशल और नीतिगत समर्थन में समन्वित प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। इन चर्चाओं ने साक्ष्य-आधारित नीतिगत सुझाव प्रदान करने और रणनीतिक एसएंडटी डोमेन पर बहु-हितधारक संवाद को सुविधाजनक बनाने में सीएसआईआर-एनआईएससीपीआर की भूमिका को भी रेखांकित किया।
नई दिल्ली – अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन ‘अन्वेष–2026’ (एडवांस्ड नेक्स्ट जेनरेशन विजन फॉर इमर्जिंग एंड सस्टेनेबल हेल्दी फूड्स) का सफलतापूर्वक समापन हुआ। यह सम्मेलन एक ऐसे ऐतिहासिक वैश्विक मंच के रूप में उभरा, जिसने संपूर्ण खाद्य प्रसंस्करण तंत्र को एकजुट किया। ‘अन्वेष-2026’ महज एक अकादमिक सम्मेलन से कहीं बढ़कर था। यह सरकारी एजेंसियों, स्टार्टअप, उद्योग जगत की अग्रणी हस्तियों, प्रदर्शकों, प्रख्यात वैज्ञानिकों, प्रसिद्ध शेफों और टिकाऊ एवं स्वास्थ्यवर्धक खाद्य पदार्थों के भविष्य को आकार देने के लिए प्रतिबद्ध उत्साही प्रतिभागियों का एक गतिशील संगम साबित हुआ।
इसके समापन समारोह में भारत सरकार के पूर्व वाणिज्य और उद्योग मंत्री श्री सुरेश प्रभु मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। अपने विशेष संबोधन में, श्री प्रभु ने खाद्य प्रसंस्करण के क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने में एनआईएफटीईएम-कुंडली की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला। इस संस्थान के 13 वर्षों के उल्लेखनीय सफर का उल्लेख करते हुए, उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन के जरिए एनआईएफटीईएम-कुंडली अगली पीढ़ी के स्वास्थ्यवर्धक एवं टिकाऊ खाद्य पदार्थों के लिए खाद्य पिरामिड को नए सिरे से परिभाषित करने के दृष्टिकोण को आगे बढ़ा रहा है। इस समारोह में विशिष्ट अतिथि, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के विशेष सचिव एवं वित्तीय सलाहकार श्री असित गोपाल भी उपस्थित थे। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि विकसित भारत का सपना केवल नवाचार, ज्ञान और उद्यमिता के जरिए ही साकार हो सकता है। एक अन्य विशिष्ट अतिथि, हल्दीराम समूह के वरिष्ठ उपाध्यक्ष श्री संजय सिंघानिया ने एनआईएफटीईएम-कुंडली की युवा प्रतिभाओं को खाद्य मूल्य श्रृंखला के हर चरण में मूल्य सृजित करने के लिए प्रेरित किया और कहा कि इस संस्थान में “कचरे को खजाने में बदलने” की क्षमता है। इस अवसर पर, एनआईएफटीईएम-के निदेशक डॉ. हरिंदर सिंह ओबेरॉय ने इस सम्मेलन की प्रमुख उपलब्धियों, परिणामों और वैश्विक प्रभाव को रेखांकित करते हुए एक व्यापक सारांश पेश किया।
सम्मेलन के पहले दिन उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए, केन्द्रीय खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री श्री चिराग पासवान ने कहा कि माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा परिकल्पित विकसित भारत-2047 के दृष्टिकोण को साकार करने में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि 1.4 बिलियन लोगों वाले एक देश के लिए प्रौद्योगिकी पर आधारित विकास बेहद जरूरी है। गांवों और शहरों के बीच की खाई को पाटने हेतु नवाचारों, अनुसंधानों एवं आधुनिक प्रौद्योगिकियों को ग्रामीण क्षेत्रों तथा किसानों तक पहुंचाना आवश्यक है।
इस अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन में 25 देशों की भागीदारी हुई। इसमें 3 पैनल चर्चाएं, 113 मौखिक प्रस्तुतियां, 115 आमंत्रित वार्ताएं और 226 पोस्टर प्रस्तुतियां शामिल थीं, जो खाद्य क्षेत्र में अनुसंधान और नवाचार की गहराई एवं विविधता को दर्शाती हैं। इसमें अकादमिक और उद्योग जगत की प्रभावशाली सहभागिता देखने को मिली। विचार-विमर्श में खाद्य संबंधी नवाचार, सुरक्षा, पता लगाने की क्षमता एवं नियामक अनुपालन; पौष्टिक-औषधीय पदार्थों (न्यूट्रास्यूटिकल्स) एवं विशिष्ट खाद्य पदार्थों; वैयक्तिकृत पोषण एवं कार्यात्मक तत्व; टिकाऊ खाद्य प्रसंस्करण, अपशिष्ट का मूल्यवर्धन एवं चक्रीय अर्थव्यवस्था; अपशिष्ट को कम करने हेतु कटाई से इतर की प्रौद्योगिकियां; अगली पीढ़ी की स्मार्ट एवं स्वच्छ लेबल वाली प्रौद्योगिकियों के साथ वैकल्पिक प्रोटीन तथा पादप-आधारित खाद्य पदार्थ; खाद्य प्रसंस्करण एवं आपूर्ति श्रृंखला प्रबंधन में डिजिटल बदलाव; और नीतिगत सुधारों, अनुसंधान नवाचार तथा उद्योग जगत के सहयोग के जरिए भारत के उच्च शिक्षा इकोसिस्टम की पुनर्कल्पना जैसे महत्वपूर्ण व भविष्योन्मुखी विषयों को शामिल किया गया। देश भर के प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थानों व अनुसंधान संगठनों के 40 से अधिक कुलपतियों और निदेशकों की भागीदारी वाली एक गोलमेज बैठक में कौशल विकास की जरूरतों को पूरा करने और उद्योग एवं अकादमिक जगत के बीच के सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से विभिन्न शैक्षणिक सुधारों पर विचार-विमर्श किया गया।
‘अन्वेष-2026’ में एक जीवंत प्रदर्शनी का आयोजन भी किया गया। इस प्रदर्शनी में कॉरपोरेट, स्टार्ट-अप, एमएसएमई और सरकारी विभागों सहित 61 प्रदर्शकों ने भाग लिया। इन प्रदर्शकों ने अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों, नवीन उत्पादों और प्रसंस्करण संबंधी टिकाऊ उपायों का प्रदर्शन किया। इस प्रदर्शनी ने शिक्षा जगत, उद्योग जगत और सहयोग के अवसरों एवं प्रौद्योगिकी को अपनाने की चाहत रखने वाले उद्यमियों का ध्यान आकर्षित किया।
एक अनूठा अनुभवात्मक आयाम जोड़ते हुए, इस सम्मेलन में 22 लाइव कुकरी शो आयोजित किए गए। इनमें उभरती हुई सामग्रियों, पौधों पर आधारित विकल्पों और पोषण से भरपूर खाद्य पदार्थों के वैसे नवीन अनुप्रयोगों को प्रदर्शित किया गया, जो स्थिरता एवं स्वास्थ्य से जुड़ी प्रवृत्तियों के अनुरूप थे।
नीति निर्माताओं, वैश्विक विशेषज्ञों, शोधकर्ताओं और नवोन्मेषकों की भागीदारी के साथ, ‘अन्वेष -2026’ को उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया मिली। इसमें 500 से अधिक पंजीकृत प्रतिभागी और 2000 से अधिक आगंतुक शामिल हुए, जो एक प्रमुख अंतरराष्ट्रीय मंच के रूप में इसकी प्रासंगिकता को रेखांकित करता है। इस सम्मेलन ने टिकाऊ खाद्य प्रणालियों और अगली पीढ़ी के स्वास्थ्यवर्धक खाद्य नवाचारों को बढ़ावा देने के उद्देश्य से सार्थक संवाद, ज्ञान के आदान-प्रदान और साझेदारी को सफलतापूर्वक प्रोत्साहित किया, जिससे वैश्विक खाद्य प्रसंस्करण एवं पोषण परिदृश्य में भारत के नेतृत्व को मजबूती मिली।
नई दिल्ली – भारत के उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन ने आज कोल्लम के पथानापुरम में स्थित सेंट स्टीफंस हायर सेकेंडरी स्कूल के शताब्दी समारोह का उद्घाटन किया।
सभा को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने 100 वर्ष पूरे होने को एक “उल्लेखनीय उपलब्धि” बताया, जो बहुत कम संस्थानों को प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि विद्यालय ने एक सदी तक छात्रों के मस्तिष्क को आकार दिया है, उनके चरित्र का पोषण किया है और उनके भविष्य का निर्माण किया है, जिससे कई पीढ़ियां जिम्मेदार नागरिक, नेता, पेशेवर और दयालु इंसान बनकर उभरी हैं।
उपराष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी संस्थान की असली ताकत उसके ढांचे में नहीं, बल्कि उसके मूल्यों में निहित होती है। उन्होंने रेखांकित किया कि यह उत्सव केवल अतीत के बारे में नहीं, बल्कि भविष्य के बारे में भी है। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी और नवाचार से संचालित तेजी से बदलती दुनिया में, शिक्षा को पाठ्यपुस्तकों से आगे बढ़कर आलोचनात्मक सोच, सहानुभूति, लचीलापन और ईमानदारी को बढ़ावा देना चाहिए। उन्होंने छात्रों को बड़े सपने देखने, कड़ी मेहनत करने, विनम्र रहने और अपने विद्यालय द्वारा दिए गए मूल्यों को बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित किया।
उपराष्ट्रपति ने छात्रों से आग्रह किया कि नशीली दवाओं को ना कहें। उन्होंने नशीली दवाओं के दुरुपयोग को समाज को प्रभावित करने वाले सबसे बड़े अभिशापों में से एक बताया और इस बात पर जोर दिया कि नशीली दवाओं के खिलाफ अभियान एक जन आंदोलन बनना चाहिए जो धर्मों, भाषाओं और राजनीतिक दलों से परे हो।
उन्होंने यह भी कहा कि समाज की सेवा के लिए राजनीतिक दलों के बीच स्वस्थ प्रतिस्पर्धा एक सकारात्मक और स्वागत योग्य कदम है।
संस्था की विरासत को राष्ट्रीय दृष्टिकोण से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की ओर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने आत्मनिर्भर भारत के महत्व पर भी प्रकाश डाला।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि 2047 का भारत आज के छात्रों के विचारों और पहलों से आकार लेगा। उन्होंने छात्रों से न केवल व्यक्तिगत सफलता प्राप्त करने बल्कि समाज पर सकारात्मक प्रभाव डालने का भी आह्वान किया।
शताब्दी वर्ष को नवीनीकरण का समय बताते हुए उन्होंने आशा व्यक्त की कि विद्यालय अपने दूसरे शताब्दी वर्ष में प्रवेश करते हुए आधुनिक शैक्षिक प्रगति को अपनाएगा और साथ ही अपनी नैतिक और सांस्कृतिक नींव से भी जुड़ा रहेगा। उन्होंने संस्थान से आग्रह किया कि वह न केवल अकादमिक रूप से उत्कृष्ट छात्रों का उत्पादन करे बल्कि राष्ट्र निर्माण के प्रति समर्पित जिम्मेदार नागरिकों का भी उत्पादन करे।
केरल में शिक्षा और सामाजिक विकास पर दिए जाने वाले विशेष महत्व को रेखांकित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि सेंट स्टीफंस हाई स्कूल जैसे संस्थानों ने राज्य की शैक्षिक प्रतिष्ठा में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
अपने संबोधन के समापन में उपराष्ट्रपति ने कहा कि शताब्दी वर्ष को ऐसे सार्थक कार्यक्रमों के साथ मनाया जाना चाहिए जो अतीत का सम्मान करें, वर्तमान का जश्न मनाएं और भविष्य की तैयारी करें।
उपराष्ट्रपति ने पठानपुरम के माउंट तबोर दयारा में स्थित चार महानगरों की पवित्र समाधि पर पुष्पांजलि भी अर्पित की।
शताब्दी समारोह में केरल के राज्यपाल श्री राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर, भारत सरकार में पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस एवं पर्यटन राज्य मंत्री श्री सुरेश गोपी, केरल सरकार में परिवहन मंत्री श्री केबी गणेश कुमार, केरल के वित्त मंत्री श्री केएन बालागोपाल, लोकसभा सांसद श्री कोडिकुन्निल सुरेश, पूर्वी क्षेत्र के कैथोलिकोस श्री कोडिकुन्निल सुरेश, कोल्लम धर्मप्रांत के मेट्रोपॉलिटन बेसेलियोस मार्थोमा मैथ्यूज तृतीय, माउंट टैबोर दियारा के सुपीरियर डॉ. जोसेफ मार डायोनिसियस, माउंट टैबोर दियारा के सचिव यूनन सैमुअल रामबन, फिलिप मैथ्यू और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजंत्री ने पेंशन दरबार सह विदाई सम्मान समारोह में 18 शिक्षकों एवं सदर अनुमंडल एवं जिला राजस्व शाखा से सेवा निर्वित होने वाले 02 कर्मीयों को सम्मानित किया, रिटायरमेंट के दिन ही सभी लाभ वितरित
सेवानिवृत्ति के दिन ही सभी पेंशनरी लाभ प्रदान करने की अनूठी पहल
राँची जिला प्रशासन की संवेदनशील पहल: उपायुक्त ने खुद पहुंचकर दी सेवानिवृत्त शिक्षक को सम्मान
“उपायुक्त महोदय का खुद आना और हाथों से सम्मान करना मेरे जीवन का सबसे यादगार पल है।” :- सेवानिवृत्त शिक्षक शिवेश्वर महतो (स.शि., राजकीय उत्क्रमित म.वि., डड़िया, बुढ़मू
रांची,02.03.2026 – जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजंत्री की अध्यक्षता में समाहरणालय के ब्लॉक-ए स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में एक भावुक एवं प्रेरणादायक पेंशन दरबार सह सेवा-निवृत्ति विदाई सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।
इस विशेष कार्यक्रम का उद्देश्य सेवानिवृत्त शिक्षकों के लंबे समय तक चले समर्पित योगदान को सम्मान देना और रिटायरमेंट की तिथि पर ही उन्हें सभी पेंशनरी लाभ उपलब्ध कराना था।
सेवानिवृत्त शिक्षकों के नाम निम्नलिखित है
1. श्री सेवक कुमार साधु, स.शि. रा.उत्क्र.म.वि. लोयो, माण्डर
2. श्रीमती क्लौदिया विलुंग, स.शि. रा.प्रा.वि. सोसई माण्डर
3. श्रीमती उर्सुला कोनगाड़ी, स.शि. रा.म.वि. न्यू टूपूदाना, राँची-2
4.श्री कुमार कनिष्क, स.शि. रा.म.वि. हिन्दपीढ़ी हिन्दी राँची-2
18. श्रीमती बिबियाना तोपनो, स.शि. संत तेरेशा बालिका मध्य विद्यालय माण्डर
सदर अनुमंडल एवं जिला राजस्व शाखा से सेवा निर्वित होने वाले कर्मी के नाम
1. श्रीमती प्रमिला देवी, कार्यालय अधीक्षक, सदर अनुमंडल राँची।
2. मो. जुबेर आलम, उच्च वर्गीय लिपिक, जिला राजस्व शाखा राँची।
राँची जिला प्रशासन की संवेदनशील पहल: उपायुक्त ने खुद पहुंचकर दी सेवानिवृत्त शिक्षक को सम्मान
उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने एक बार फिर मानवीय संवेदना का जीता-जागता उदाहरण पेश किया। ज़ब उन्हें पता चला की शिक्षक पैर की समस्या से जूझ रहे जिसपर सेवानिवृत्त शिक्षक श्री शिवेश्वर महतो (स.शि., राजकीय उत्क्रमित म.वि., डड़िया, बुढ़मू) को सम्मानपूर्वक सेवानिवृत्ति लाभ देने के लिए वे स्वयं समाहरणालय सभागार से मुख्य द्वार तक पहुंचे। और व्यक्तिगत रूप से लाभ सौंपा और उनकी लंबी सेवा के लिए आभार जताया।
भावुक होकर श्री शिवेश्वर महतो ने कहा:
“उपायुक्त महोदय का खुद आना और हाथों से सम्मान करना मेरे जीवन का सबसे यादगार पल है।”
श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा
“शिक्षक समाज के स्तंभ हैं। जरूरत पड़ने पर प्रशासन उनके पास पहुंचे, यही सच्ची सेवा है।”
यह छोटी-सी लेकिन हृदयस्पर्शी घटना राँची प्रशासन की जन-केंद्रित छवि को और मजबूत करती है।
शिक्षकों का योगदान समाज की नींव
कार्यक्रम में उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजंत्री ने कुल 18 सेवानिवृत्त शिक्षकों एवं सदर अनुमंडल एवं जिला राजस्व शाखा से सेवा निर्वित होने वाले 2 कर्मियों को व्यक्तिगत रूप से सम्मानित किया। उन्होंने शॉल ओढ़ाकर, स्मृति चिह्न (मोमेंटो) प्रदान कर और प्रशस्ति पत्र भेंट करके उनके प्रति आभार व्यक्त किया। उपायुक्त ने कहा, “शिक्षक समाज के निर्माण की मूल नींव हैं। उनकी निष्ठा और समर्पण से ही नई पीढ़ियां मजबूत होती हैं। हमारा कर्तव्य है कि उनकी सेवानिवृत्ति को सम्मानजनक बनाया जाए।”
रिटायरमेंट दिवस पर ही पूर्ण लाभ – प्रशासन की प्रतिबद्धता
इस अवसर पर उपायुक्त ने विशेष रूप से जोर दिया कि सेवानिवृत्ति के ठीक उसी दिन पेंशन, ग्रेच्युटी, लीव एनकैशमेंट एवं अन्य सभी रिटायरमेंट लाभ प्रदान करना राँची जिला प्रशासन की कर्मचारी-हितैषी नीति का जीवंत प्रमाण है। उन्होंने कहा, “यह पहल सुनिश्चित करती है कि हमारे शिक्षक किसी भी चिंता के बिना अपनी नई जीवन-यात्रा की शुरुआत कर सकें। पिछले जनवरी 2025 से जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय द्वारा हर माह इस तरह का आयोजन नियमित रूप से किया जा रहा है।”
नई जिंदगी के लिए शुभकामनाएं
शिक्षकों को संबोधित करते हुए उपायुक्त ने कहा, “जीवन की इस नई अध्याय में आप नई ऊर्जा से भरपूर रहें। समाज सेवा में सक्रिय रहें, नई रुचियां विकसित करें, परिवार के साथ समय बिताएं और स्वस्थ जीवन जिएं। ईश्वर आपको लंबी उम्र, अच्छा स्वास्थ्य और सदा सुख-समृद्धि प्रदान करे।”
अन्य विभागों के लिए आदर्श मॉडल
उपायुक्त श्री भजंत्री ने अन्य विभागाध्यक्षों से अपील की कि वे भी इसी तरह के आयोजन शुरू करें। उन्होंने कहा, “यह मॉडल न केवल शिक्षकों के प्रति संवेदनशीलता दर्शाता है, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र के लिए एक आदर्श है। हर विभाग को सेवानिवृत्त कर्मचारियों को सम्मान और समयबद्ध लाभ वितरण सुनिश्चित करना चाहिए।”
कार्यक्रम के सुचारु संचालन के लिए जिला शिक्षा अधीक्षक श्री बादल राज एवं उनकी पूरी टीम और जिला स्थापना उप समाहर्ता राँची, श्री बिवेक कुमार सुमन को विशेष धन्यवाद दिया गया। इस अवसर पर अन्य संबंधित अधिकारी भी मौजूद रहे।
राँची जिला प्रशासन की यह पहल कर्मचारियों—खासकर शिक्षकों—के सम्मान, कल्याण और पारदर्शी लाभ वितरण की निरंतर प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है, जो पूरे जिले में विश्वास और संतुष्टि की भावना को मजबूत कर रही है।
नगरपालिका निर्वाचन शांतिपूर्ण संपन्न कराने पर पदाधिकारियों को दी बधाई
विधानसभा सत्र व पर्व-त्योहारों पर विधि-व्यवस्था को लेकर उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने दिये निर्देश
पर्व-त्योहारों के दौरान ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण हेतु तय मानकों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश
मार्च क्लोजिंग के मद्देनज़र सभी विभागों को फर्जी निकासी पर विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश
रांची,02.03.2026 – उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने आज दिनांक 02.03.2026 को जिलास्तरीय वरीय पदाधिकारियों के साथ समाहरणालय स्थित एनआईसी सभागार में बैठक की। बैठक में सौरभ कुमार भुवनिया (उपविकास आयुक्त), संजय भगत (परियोजना निदेशक, आईटीडीए), राजेश्वरनाथ आलोक (अपर जिला दण्डाधिकारी, विधि-व्यवस्था), कुमार रजत (अनुमण्डल पदाधिकारी, रांची सदर) सहित अन्य वरीय पदाधिकारी उपस्थित थे। उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा जिला प्रशासन की विभिन्न प्राथमिकताओं पर विस्तार से समीक्षा करते हुए समयबद्ध एवं पारदर्शी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने पर बल दिया गया।
बैठक में उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी ने नगरपालिका (आम) निर्वाचन 2026 को शांतिपूर्ण एवं पारदर्शी तरीके से संपन्न कराने के लिए सभी संबंधित पदाधिकारियों को बधाई दी।
मार्च क्लोजिंग के मद्देनज़र उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा सभी विभागों को फर्जी निकासी पर विशेष सतर्कता बरतने तथा अंतिम समय में किसी भी प्रकार की अनियमितता पर रोक सुनिश्चित करने का निर्देश दिया।
विधानसभा सत्र व पर्व-त्योहारों पर विधि-व्यवस्था को लेकर निर्देश
विधानसभा सत्र एवं आगामी पर्व-त्योहारों होली, ईद, सरहुल एवं रामनवमी के दौरान विधि-व्यवस्था संधारण को लेकर उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने एडीएम (लॉ एंड ऑर्डर) को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। होली को लेकर थाना स्तर पर शांति समिति की बैठक आयोजित करने का निर्देश भी दिया गया।
ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण के निर्देश
पर्व-त्योहारों के दौरान ध्वनि प्रदूषण पर नियंत्रण हेतु तय मानकों का सख्ती से अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।
सीसीटीवी संचालन व सभागार जीर्णाेद्धार की समीक्षा
उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने समाहरणालय परिसर में सीसीटीवी कैमरों के 24 घंटे संचालन की जानकारी ली। साथ ही समाहरणालय सभागार के जीर्णाेद्धार कार्य की प्रगति की समीक्षा करते हुए कार्य यथाशीघ्र पूर्ण करने का निर्देश दिया।
शपथ ग्रहण की तैयारी
नगरपालिका (आम) निर्वाचन में चुने गए जनप्रतिनिधियों के शपथ ग्रहण समारोह की तैयारियों को लेकर भी उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। साथ ही उपायुक्त द्वारा नेताजी सुभाष चंद्र बोस पार्क के सौंदर्यीकरण हेतु टेंडर प्रक्रिया पूरी कर कार्य शीघ्र प्रारंभ कराने का निर्देश दिया गया।
जल स्रोतों को अतिक्रमण मुक्त करने के निर्देश
रांची के प्रमुख जल स्रोतों को अतिक्रमण मुक्त कराने के संबंध में माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश संबंधित पदाधिकारियों को दिया गया।
जन्म प्रमाण पत्र व फर्जीवाड़ा रोकथाम
जिला में बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया में तेजी लाने तथा किसी भी प्रकार के फर्जीवाड़े पर सख्त रोक लगाने के निर्देश उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा दिए गए।
आईडी कार्ड वितरण की समीक्षा
अंचल एवं प्रखंड कार्यालयों में बीडीओ/सीओ सहित सभी कर्मियों को आईडी कार्ड उपलब्ध कराने की स्थिति की समीक्षा की गई। संबंधित पदाधिकारी द्वारा बताया गया कि कार्य पूर्ण कर लिया गया है।
योजनाओं की प्रगति की समीक्षा
छात्रवृत्ति, धान अधिप्राप्ति, मंईया सम्मान से स्वावलंबन सहित अन्य योजनाओं की कार्य प्रगति की जानकारी लेते हुए उपायुक्त ने संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक एवं उचित दिशा-निर्देश दिए।
एयर कमोडोर बी एस विजय राव, वीएसएम ने 1 मार्च, 2026 को एयर ऑफिसर कमांडिंग के रूप में नई दिल्ली के पालम में बेस रिपेयर डिपो की कमान संभाली।
नई दिल्ली – एयर कमोडोर विजय राव ने 27 नवंबर, 1995 को भारतीय वायु सेना की वैमानिकी अभियांत्रिकी (इलेक्ट्रॉनिक्स) शाखा में कमीशन प्राप्त किया था। उनको तीन दशकों से अधिक समय की विशिष्ट और गौरवपूर्ण सेवा का व्यापक अनुभव है। वे इलेक्ट्रिकल इंजीनियर तथा कार्यकारी एमबीए उपाधिधारी हैं और प्रतिष्ठित राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय एवं सेना युद्ध महाविद्यालय के पूर्व छात्र रह चुके हैं।
विजय राव ने अपने गौरवपूर्ण करियर के दौरान, प्रमुख सैन्य अड्डों पर मुख्य अभियंता अधिकारी सहित अनेक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय, कार्मिक और परियोजना प्रबंधन दायित्वों का सफलतापूर्वक निर्वहन किया है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने वायु मुख्यालय में संचालन, अनुरक्षण एवं योजना शाखाओं में प्रमुख पदों पर कार्य करते हुए भारतीय वायु सेना के आधुनिकीकरण, अधिग्रहण तथा अनुरक्षण कार्यक्रमों को सुदृढ़ बनाने में उल्लेखनीय योगदान दिया है।
एयर कमोडोर विजय राव ने विदेशों में पेशेवर कार्यों में भारतीय वायु सेना का प्रतिनिधित्व किया है और वे वैश्विक एयरोस्पेस संगठनों के साथ प्रमुख उन्नयन एवं प्रौद्योगिकी हस्तांतरण कार्यक्रमों से जुड़े रहे हैं।
एयर कमोडोर विजय राव को विशिष्ट सेवा के लिए राष्ट्रपति पुरस्कार विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया गया है।
नई दिल्ली – महानियंत्रक संचार लेखा (सीजीसीए), श्रीमती वंदना गुप्ता ने उत्तरी क्षेत्र में फील्ड इकाइयों की परिचालन दक्षता का मूल्यांकन और उसे सुव्यवस्थित करने के लिए उत्तरी क्षेत्रीय समीक्षा बैठक का आधिकारिक तौर पर उद्घाटन किया।
28 फ़रवरी 2026 से 01 मार्च 2026 तक आयोजित इस समीक्षा बैठक में संचार लेखा नियंत्रक (सीसीए) के आठ कार्यालय शामिल थे— जम्मू एवं कश्मीर, हरियाणा, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश (पूर्व), उत्तर प्रदेश (पश्चिम) तथा दिल्ली।
उत्तरीक्षेत्रकारणनीतिकमहत्व
उत्तरी क्षेत्र, सीजीसीए के अंतर्गत आने वाले सबसे महत्वपूर्ण प्रशासनिक क्षेत्रों में से एक है। वर्तमान में यह 850 से अधिक लाइसेंसधारियों के विशाल पोर्टफोलियो का प्रबंधन करता है, जो देश के दूरसंचार पारिस्थितिकी तंत्र में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका को दर्शाता है। चालू वित्तीय वर्ष में अब तक, इस क्षेत्र ने लाइसेंस शुल्क के रूप में ₹6,500 करोड़ से अधिक और स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क (एसयूसी) के रूप में लगभग ₹750 करोड़ एकत्र किए हैं। इसके अलावा, यह क्षेत्र दूरसंचार विभाग (डीओटी), बीएसएनएल और एमटीएनएल के 1.10 लाख से अधिक पेंशनभोगियों के कल्याण का प्रबंधन करके एक महत्वपूर्ण दायित्व भी निभाता है।
परिचालन उत्कृष्टता और रणनीतिक लक्ष्य
कार्यवाही के दौरान, श्रीमती वंदना गुप्ता ने कार्यात्मक गतिविधियों की विस्तृत समीक्षा की, जिसमें सार्वजनिक सेवा वितरण और प्रशासनिक दक्षता में उच्च मानकों को प्राप्त करने के लिए विभाग की अटूट प्रतिबद्धता पर जोर दिया गया। सत्रों में सीजीसीए के जनादेश के कई मुख्य स्तंभों पर ध्यान केंद्रित किया गया:
पेंशनसंबंधीलाभ: पेंशनभोगियों को उनके सभी लाभ समय पर प्राप्त हों, यह सुनिश्चित करने के लिए वितरण प्रक्रिया और शिकायत निवारण तंत्र को सुव्यवस्थित करना।
राजस्वएवंबजट: इस मंच पर वित्तीय प्रवाह की सटीक निगरानी के लिए तंत्रों पर चर्चा की गई ताकि सख्त राजकोषीय अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके। इन चर्चाओं का मुख्य बिंदु इंटरनेट सेवा प्रदाताओं (आईएसपी) को सक्रिय रूप से मार्गदर्शन प्रदान करने की रणनीति थी। स्पष्ट मार्गदर्शन प्रदान करके और प्रशासनिक प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करके, विभाग का उद्देश्य लाइसेंसधारियों के लिए समय पर अनुपालन को सुगम बनाना और परिचालन संबंधी बाधाओं को दूर करना है, जिससे एक मजबूत व्यावसायिक वातावरण को बढ़ावा मिल सके।
आंतरिकलेखापरीक्षा: संस्थागत अखंडता के उच्चतम मानकों को बनाए रखने के लिए निगरानी को मजबूत करना।
अनुभव साझा करने के लिए आयोजित एक विशेष सत्र में क्षेत्रीय इकाइयों के प्रमुखों (सीसीए) को सफल संस्थागत मॉडल प्रस्तुत करने का अवसर मिला। इस आपसी आदान-प्रदान का उद्देश्य सभी क्षेत्रों में उच्च गुणवत्ता वाली सेवा प्रदान करने के मानकीकरण हेतु सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करना था।
श्रीसंजीवसिन्हाद्वाराडिजिटलभारतनिधि और संशोधितभारतनेटकार्यक्रम पर दी गई प्रस्तुति एक महत्वपूर्ण आकर्षण रही। चर्चा में सरकार के इस इरादे पर ज़ोर दिया गया कि वह “आखिरी गांव” और “आखिरी नागरिक” तक तेज़, भरोसेमंद फाइबर कनेक्टिविटी पहुंचाकर डिजिटल डिवाइड को कम करेगी, जिससे नेशनल डिजिटल हाईवे पर पूरी तरह शामिल होना पक्का होगा।
बैठक का समापन स्थानीय प्रशासनिक बाधाओं को दूर करने के उद्देश्य से आयोजित सामूहिक विचार-विमर्श सत्र के साथ हुआ। क्षेत्रीय इकाइयों के प्रमुखों को प्रत्यक्ष मार्गदर्शन प्रदान करते हुए, सीजीसीए ने इस बात पर बल दिया कि प्रभावी शासन विभागीय संचालन का आधार बना रहना चाहिए। श्रीमती वंदना गुप्ता ने इस बात की पुष्टि की कि पेंशनभोगियों के लिए “जीवनकीसुगमता“ और दूरसंचार हितधारकों के लिए “व्यापारकरनेकीसुगमता“ सुनिश्चित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है, और उन्होंने कार्यालयों को आगामी महीनों में पारदर्शिता और दक्षता के साथ अपने लक्ष्यों को प्राप्त करने का स्पष्ट निर्देश दिया
नई दिल्ली – भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने आज केरल के त्रिशूर में चेतना गणाश्रम की नींव रखी। यह सभी धर्मों के लोगों के लिए आध्यात्मिक जागृति का एक सांस्कृतिक और संगीत परिसर होगा।
चेतना गणाश्रम, कुरियाकोस एलियास सर्विस सोसाइटी (केईएसएस) की एक परियोजना और त्रिशूर स्थित सीएमआई देवमाता पब्लिक स्कूल की एक पहल है।
सभा को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत में हजारों वर्षों पुरानी समृद्ध संगीत परंपरा है। “भारत का संगीत मात्र ध्वनि नहीं है, यह एक आध्यात्मिक यात्रा है, एक ध्यान है, एक प्रार्थना है और जीवन का उत्सव है।” उन्होंने संगीत को भारत की प्राचीन सभ्यतागत आत्मा की शुद्धतम अभिव्यक्ति बताया और कहा कि यह एक शक्तिशाली धागा है जो लाखों दिलों को एक साझा लय में पिरोता है।
भारतीय संगीत की सभ्यतागत गहराई के बारे में बोलते हुए उन्होंने कहा कि वेदों की स्तुतियों से लेकर संतों की भक्तिमय अभिव्यक्तियों तक, संगीत पवित्र गंगा की तरह पूरे देश में बहता रहा है।
उपराष्ट्रपति ने प्राचीन दक्षिण भारत की जीवंत संगीत संस्कृति के ऐतिहासिक प्रमाण भी प्रस्तुत किए, जिनमें चोल राजाओं द्वारा निर्मित बृहदीश्वर मंदिर के शिलालेख शामिल हैं, जिनमें सैकड़ों संगीतकारों और नर्तकों की नियुक्ति और समर्थन का उल्लेख है। उन्होंने कहा कि थेवरम जैसे पवित्र स्तुतियां नियमित रूप से मंदिरों में की जाती थी। यह भारत की संगीत विरासत की शाश्वतता को दर्शाती हैं।
भारत की विविध संगीत परंपराओं के बारे में बात करते हुए, उपराष्ट्रपति ने हिंदुस्तानी और कर्नाटक शास्त्रीय संगीत को ध्वनि का गहन विज्ञान बताया। उन्होंने त्यागराज की अमर रचनाओं, तानसेन की प्रतिभा और एम. एस. सुब्बुलक्ष्मी की पवित्र आवाज और रवि शंकर के वैश्विक प्रभाव का उल्लेख करते हुए कहा कि भारतीय संगीत ने सभी को प्रेरित किया है।
उन्होंने कहा कि पश्चिमी या भारतीय, सभी संगीत सात स्वरों पर आधारित है और सप्त स्वर मानवीय भावनाओं को प्रतिध्वनित करते हैं, श्वास को नियंत्रित करते हैं, हृदय गति को स्थिर करते हैं, तनाव कम करते हैं और एकाग्रता बढ़ाते हैं। उन्होंने कहा, ‘‘जब भोर में कोई सुंदर राग बहता है या कोई भक्तिमय भजन किसी पवित्र स्थान को भर देता है, तो संगीत औषधि बन जाता है।’’
उपराष्ट्रपति ने चेतना गणाश्रम के पर्यावरण-अनुकूल संगीत परिसर के रूप में संगीत ध्यान और चिकित्सा के प्रति समर्पित दृष्टिकोण की सराहना की। उन्होंने कहा कि सात स्वर विविधता में एकता का प्रतीक हैं – प्रत्येक अलग होते हुए भी सामंजस्यपूर्ण है, जो मानवता के लिए एक गहरा पाठ सिखाते हैं।
उन्होंने गणाश्रम के समावेशी प्रबंधन की प्रशंसा की। इसमें विभिन्न धर्मों के लोग शामिल हैं, जिनमें गायक श्री के.जे. येसुदास जैसी प्रख्यात हस्तियां भी शामिल हैं। उन्होंने संगीत और ध्यान की आध्यात्मिक छत्रछाया में लोगों को एक साथ लाने के प्रयासों की सराहना की।
उन्होंने पांच प्रस्तावित आलयमों – ध्यान-आलयम (संगीत ध्यान), संगीत-आलयम (स्नायु विज्ञान संगीत चिकित्सा), शब्द-आलयम (ध्वनि चिकित्सा), कला-आलयम (भारतीय संगीत एवं नृत्य), और योग-आलयम (योग चिकित्सा) के बारे में जानकारी देते हुए, उपराष्ट्रपति ने विश्वास व्यक्त किया कि यह संस्थान कई आत्माओं को जागृत और स्वस्थ करेगा।
उन्होंने आगे कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में योग के प्राचीन ज्ञान को अभूतपूर्व वैश्विक पहचान प्राप्त हुई है और यह भारत की सॉफ्ट पावर के प्रतीक के रूप में उभरा है, जो वसुधैव कुटुंबकम के दर्शन को प्रतिबिंबित करता है, यानी विश्व एक परिवार है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने संगीत परंपराओं के आदान-प्रदान के लिए जीवंत मंच तैयार किए हैं, जिससे विविधता में एकता मजबूत हुई है और भारत की सांस्कृतिक विरासत की वैश्विक सराहना हो रही है।
अपने संबोधन के समापन में उपराष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि आज की तेज रफ्तार और अक्सर तनावपूर्ण दुनिया में संगीत की उपचार शक्ति पहले से कहीं अधिक प्रासंगिक है। उन्होंने चेतना गणश्रम की अपार सफलता की कामना की और आशा व्यक्त की कि सा, रे, गा, मा, पा, धा, नी की शाश्वत तरंगें हृदयों को सुकून देती रहेंगी और मानवता को सद्भाव की ओर ले जाएंगी।
इस समारोह में केरल के राज्यपाल श्री राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर; केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस एवं पर्यटन राज्य मंत्री श्री सुरेश गोपी; केरल सरकार में उच्च शिक्षा एवं सामाजिक न्याय मंत्री डॉ. आर. बिंदू; त्रिशूर नगर निगम की महापौर डॉ. निजी जस्टिन; त्रिशूर के आर्कबिशप, मार एंड्रयूज थजाथ; प्रांतीय, सीएमआई देवमाता प्रांत, त्रिशूर की डॉ. जोस नन्दिक्कारा; और चेतना गणाश्रम के कार्यकारी निदेशक, डॉ. पॉल पूवथिंगल, अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
नई दिल्ली – भारत सरकार के विद्युत मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) का 25वां स्थापना दिवस आज नई दिल्ली स्थित इंडिया हैबिटेट सेंटर में वरिष्ठ गणमान्य व्यक्तियों, नीति निर्माताओं, सहयोगी संगठनों और देश भर के हितधारकों की उपस्थिति में मनाया गया।
श्री मनोहर लाल, विद्युत एवं आवासन और शहरी कार्य मंत्री ने मुख्य अतिथि के रूप में इस कार्यक्रम में भाग लिया। श्री पंकज अग्रवाल, विद्युत सचिव ने मुख्य भाषण दिया। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों, राज्य नामित एजेंसियों (एसडीए) और सहयोगी संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
श्री मनोहर लाल ने प्रसिद्ध कहावत, “उपचार से बेहतर रोकथाम है,” का स्मरण करते हुए कहा कि ऊर्जा दक्षता ब्यूरो (बीईई) विद्युत क्षेत्र के लिए एक निवारक संस्था के रूप में कार्य करता है। आज बचाई गई बिजली की प्रत्येक इकाई अतिरिक्त उत्पादन क्षमता की आवश्यकता को कम करने और उत्सर्जन को घटाने में सीधे तौर पर योगदान देती है। ऊर्जा-दक्ष प्रणालियों को अपनाकर हम न केवल पर्यावरण की रक्षा करते हैं बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ और अधिक टिकाऊ भविष्य भी सुनिश्चित करते हैं। उन्होंने देश में ऊर्जा दक्षता पहलों को आगे बढ़ाने में बीईई के महत्वपूर्ण योगदान की भी सराहना की।
श्री मनोहर लाल ने जलवायु संबंधी प्रतिबद्धताओं को पूरा करने और ऊर्जा दक्षता को राष्ट्रीय विकास के मूल स्तंभ के रूप में मजबूत करने में भारत की महत्वपूर्ण प्रगति के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि भारत ने 2005 के स्तर से अपने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की उत्सर्जन तीव्रता में 36 प्रतिशत की कमी की है और 2030 के लक्ष्य से पहले ही 52 प्रतिशत गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित स्थापित क्षमता हासिल कर ली है।
उन्होंने नवीकरणीय ऊर्जा खपत दायित्व (आरसीओ), प्रदर्शन, उपलब्धि और व्यापार (पीएटी) योजना, कार्बन क्रेडिट ट्रेडिंग योजना (सीसीटीएस) के प्रसार, कॉर्पोरेट औसत ईंधन दक्षता (सीएएफई), एमएसएमई के लिए एडीईईटीआईई योजना, मानक और लेबलिंग (एस एंड एल) कार्यक्रम, ऊर्जा संरक्षण और सतत भवन संहिता (ईसीएसबीसी), और परिवहन क्षेत्र दक्षता उपायों सहित प्रमुख बीईई पहलों के तहत प्राप्त प्रमुख उपलब्धियों का उल्लेख किया।
उन्होंने आगे की राह पर जोर देते हुए विकसित भारत @2047 के विजन को प्राप्त करने में ऊर्जा दक्षता की भूमिका का उल्लेख किया साथ ही डेटा सेंटर और कृत्रिम बुद्धिमत्ता जैसे उभरते क्षेत्रों की ओर ध्यान आकर्षित किया। इसके लिए कुशल और टिकाऊ ऊर्जा प्रबंधन समाधानों की आवश्यकता है।
विद्युत सचिव श्री पंकज अग्रवाल ने बढ़ती मांग, गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता के विस्तार और बढ़ते डिजिटलीकरण से भारत के ऊर्जा परिदृश्य के बदलते स्वरूपों का उल्लेख किया। उन्होंने ऊर्जा दक्षता को भारत का ‘‘प्रथम ईंधन’’ और ऊर्जा सुरक्षा, किफायत और स्थिरता के बीच संतुलन स्थापित करने का एक प्रमुख साधन बताया।
उन्होंने एस एंड एल और ईसीएसबीसी के माध्यम से शीतलन दक्षता में बीईई की पहलों, कार्बन मार्केट और एडीईईटीआईई योजना के माध्यम से औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन, ऊर्जा दक्षता केंद्रों की स्थापना और परिवहन क्षेत्र में ईंधन दक्षता सुधारों के बारे में बताया।
इससे पहले, अपने स्वागत भाषण में, बीईई के महानिदेशक श्री कृष्ण चंद्र पाणिग्रही ने ब्यूरो की यात्रा के बारे में बताया और अर्थव्यवस्था के सभी क्षेत्रों में ऊर्जा दक्षता को अपनाने में तेजी लाने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
इस अवसर पर, बीईई के 25वें वर्ष में प्रवेश के उपलक्ष्य में बीईई@25 लोगो का औपचारिक रूप से अनावरण किया गया। यह लोगो ऊर्जा दक्षता, स्थिरता और भविष्योन्मुखी नवाचार के मूल सिद्धांतों को प्रतीकात्मक रूप से दर्शाता है। डिजाइन में ‘‘@25’’ चिन्ह को प्रमुखता से शामिल किया गया है, जो इस महत्वपूर्ण वर्ष को दर्शाता है, साथ ही ऊर्जा, विकास और पर्यावरणीय जिम्मेदारी का प्रतिनिधित्व करने वाले दृश्य तत्वों को भी समाहित करता है। गतिशील शैली और रंग योजना निरंतरता, प्रभाव और भारत के ऊर्जा परिवर्तन में ब्यूरो की विकसित भूमिका को दर्शाती है। यह स्मारक लोगो पूरे वर्ष आधिकारिक संचार, प्रचार अभियानों, प्रकाशनों और जागरूकता पहलों में उपयोग किया जाएगा, जो 25वें वर्ष के समारोहों के लिए दृश्य पहचान के रूप में कार्य करेगा। यह लोगो राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देने के लिए बीईई की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करेगा।
इस कार्यक्रम के दौरान विशेष रूप से तैयार किया गया बीईई की यात्रा का वीडियो दिखाया गया, जिसमें पिछले चौबीस वर्षों में ब्यूरो के विकास, इसकी प्रमुख उपलब्धियों, प्रमुख कार्यक्रमों, संस्थागत साझेदारियों और भारत के ऊर्जा दक्षता तंत्र को मजबूत करने में इसके योगदान के बारे में बताया गया।
इस कार्यक्रम के दौरान, विभिन्न ऊर्जा दक्षता कार्यक्रमों के अंतर्गत हितधारकों के बीच समन्वय को सुव्यवस्थित करने, अनुपालन को सुगम बनाने और निगरानी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में आरसीओ पोर्टल (http://www.rco.beeindia.gov.in) का अनावरण किया गया। आशा है कि यह पोर्टल पारदर्शिता बढ़ाएगा, रिपोर्टिंग तंत्र में सुधार करेगा और कार्यान्वयन ढांचे के भीतर डेटा-आधारित निर्णय लेने में सहायता करेगा।
मंत्री ने सीएलएएसपी के सहयोग से विकसित बीईई स्टार लेबल मोबाइल एप्लिकेशन का भी शुभारंभ किया। इस एप्लिकेशन की सहायता से उपभोक्ता स्टार लेबल वाले उपकरणों पर लगे क्यूआर कोड को स्कैन करके ऊर्जा दक्षता, मॉडल विवरण और अनुपालन स्थिति सहित प्रामाणिक उत्पाद जानकारी तुरंत प्राप्त कर सकेंगे। इस ऐप का उद्देश्य पारदर्शिता बढ़ाना, उपभोक्ताओं में जागरूकता पैदा करना और ऊर्जा दक्षता संबंधी जानकारी को बिक्री केंद्र पर आसानी से उपलब्ध कराकर सोच-समझकर खरीदारी के निर्णय लेने को प्रोत्साहित करना है। यह पहल मानक एवं लेबलिंग कार्यक्रम की विश्वसनीयता को और मजबूत करेगी तथा देश भर में ऊर्जा-दक्ष उपकरणों को अपनाने को बढ़ावा देगी।
इस समारोह में ऊर्जा दक्षता अर्थव्यवस्था (बीईई) के पूर्व महानिदेशकों के साथ अनौपचारिक बातचीत भी हुई, जिसका संचालन एलायंस फॉर एन एनर्जी एफिशिएंट इकोनॉमी (एईईई) के अध्यक्ष और कार्यकारी निदेशक डॉ. सतीश कुमार ने किया। राज्य स्तर पर ऊर्जा संरक्षण पहलों को आगे बढ़ाने में समर्पित सेवा और बहुमूल्य योगदान के लिए राज्य नामित एजेंसियों के सेवानिवृत्त अधिकारियों को सम्मानित किया गया।
25वें स्थापना दिवस समारोह ने सतत विकास, राष्ट्रीय ऊर्जा सुरक्षा और पर्यावरणीय जिम्मेदारी के वाहक के रूप में ऊर्जा दक्षता को बढ़ावा देने और विकसितएवंआत्मनिर्भर भारत का मार्ग प्रशस्त करने के लिए बीईई के निरंतर संकल्प को दोहराया।
नई दिल्ली – 28 फरवरी 1928 को सी.वी. रमन द्वारा रमन प्रभाव की खोज की ऐतिहासिक घोषणा की स्मृति में, सीएसआईआर की राष्ट्रीय भौतिक प्रयोगशाला (सीएसआईआर-एनपीएल) ने 28 फरवरी 2026 को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस (एनएसडी-2026) मनाया। एनएसडी 2026 के अंतर्गत सुबह ‘‘राष्ट्रीय विज्ञान सम्मेलन’’ और दोपहर में ‘‘राष्ट्रीय विज्ञान दिवस व्याख्यान’’ का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम का शुभारंभ राष्ट्रीय विज्ञान सम्मेलन के साथ हुआ। इस कार्यक्रम ने 40 वर्ष से कम आयु के शोधकर्ताओं, छात्रों और युवा वैज्ञानिकों को तीन व्यापक विषयगत क्षेत्रों – सामग्री विज्ञान और प्रौद्योगिकी (एमएसटी), भौतिकी, अभियांत्रिकी और मापिकी (पीईएम), और पर्यावरण, स्वास्थ्य और रसायन विज्ञान (ईएचसी) – के अंतर्गत पोस्टर प्रस्तुतियों के माध्यम से अपने शोध को प्रदर्शित करने के लिए एक जीवंत मंच प्रदान किया। चयनित सर्वश्रेष्ठ पोस्टरों को योग्यता प्रमाण पत्र से सम्मानित किया गया। इस सत्र का उद्देश्य युवा वैज्ञानिक प्रतिभाओं को बढ़ावा देना और अंतःविषयक अनुसंधान को बढ़ावा देना था।
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस व्याख्यान का शुभारंभ सीएसआईआर-एनपीएल के निदेशक प्रोफेसर वेणु गोपाल अचंता के उद्घाटन भाषण और उपस्थित विशिष्ट अतिथियों के हार्दिक स्वागत के साथ हुआ। प्रोफेसर अचंता ने श्री के.एस. कृष्णन के माध्यम से सीएसआईआर-एनपीएल और रमन प्रभाव के बीच ऐतिहासिक संबंध को बखूबी बताया। श्री के.एस. कृष्णन ने रमन प्रभाव के निर्णायक प्रमाण खोजे थे। वे सीएसआईआर-एनपीएल के संस्थापक निदेशक भी हैं। प्रोफेसर अचंता ने स्थानीय और वैश्विक समस्याओं के स्थानीय समाधान खोजने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने क्वांटम मापिकी में उभरती चुनौतियों को स्वीकार करने और सामाजिक उपयोग के लिए विज्ञान और प्रौद्योगिकी के अग्रणी क्षेत्रों में मापिकी उपायों को आगे बढ़ाने के महत्व पर भी बल दिया।
राष्ट्रीय विज्ञान दिवस पर मुख्य अतिथि प्रोफेसर भीम सिंह, विज्ञान श्री, एएनआरएफ राष्ट्रीय विज्ञान चेयर प्रोफेसर और आईआईटी दिल्ली के मानद प्रोफेसर (एमेरिटस/मानद प्रोफेसर) ने व्याख्यान दिया। उनका विषय था “इलेक्ट्रिक वाहन – एक सतत ऊर्जा क्रांति”। प्रोफेसर सिंह ने सतत ऊर्जा क्रांति के रूप में इलेक्ट्रिक वाहनों के विकास, प्रौद्योगिकियों, चार्जिंग प्रणालियों और मिशन-आधारित रोडमैप पर जोर दिया। विशिष्ट अतिथि का व्याख्यान दिल्ली प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर प्रतीक शर्मा ने दिया। उन्होंने सामाजिक समस्याओं का एक संग्रह बनाने और शिक्षाविदों और अनुसंधान प्रयोगशालाओं के सहयोग से उनके समाधान खोजने पर अपने विचार साझा किए और शिक्षा-अनुसंधान के मध्य तालमेल और नवाचार-संचालित विकास के अपने दृष्टिकोण से श्रोताओं को प्रेरित किया।
कार्यक्रम का समापन एनएसडी-2026 के संयोजक डॉ. गोविंद गुप्ता के औपचारिक धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। उन्होंने प्रथम राष्ट्रीय विज्ञान सम्मेलन के आयोजन सहित सीएसआईआर-एनपीएल द्वारा किए गए कार्यों के बारे में बताया, साथ ही कैटेलिसिस विकसित भारत सीएसआईआर-एनपीएल में विज्ञान के क्षेत्र में महिलाओं का भी उल्लेख किया।
नई दिल्ली – भारतीय नौसेना का प्रशिक्षण पोत आईएनएस तरंगिनी27 फरवरी 2026 को प्रशिक्षण दौरे पर श्रीलंका के त्रिंकोमाली पत्तन पर पहुंचा। श्रीलंका नौसेना के पूर्वी नौसेना क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने पोत का गर्मजोशी से स्वागत किया। यह दौरा विशाखापत्तनम में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय बेड़ा समीक्षा 2026 में पोत की हालिया भागीदारी के बाद हुआ है।
पत्तन पर रुकने के दौरान, तरंगिनी के कमांडिंग ऑफिसरने पूर्वी नौसेना क्षेत्र के डिप्टी कमांडर कमोडोर हरिथा जयदेवथे से भेंट की और नौकायन प्रशिक्षण में सहयोग के अवसरों पर चर्चा की। पोत ने श्रीलंकाई रक्षा कर्मियों, उनके परिवारों और प्रशिक्षु अधिकारियों को पोत पर परिचयात्मक दौरे के लिए आमंत्रित किया। पोत के पत्तन पर रुकने के दौरान सामुदायिक सहभागिता गतिविधियों और प्रशिक्षण आदान-प्रदान की योजना बनाई गई है।
श्रीलंका नौसेना एवं समुद्री अकादमी से चयनित प्रशिक्षु अधिकारी तरंगिनी पोत से कोलंबो की यात्रा पर रवाना होंगे। इस यात्रा के दौरान, प्रशिक्षुओं को नौकायन प्रशिक्षण के विभिन्न पहलुओं से अवगत कराया जाएगा।
आईएनएस तरंगिनी का यह दौरा भारतीय नौसेना और श्रीलंका नौसेना के बीच लंबे समय से चले आ रहे समुद्री संबंधों और बढ़ते सहयोग को दर्शाता है।
नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने माइक्रोन टेक्नोलॉजी की सेमीकंडक्टर असेंबली, टेस्ट और पैकेजिंग(एटीएमपी) सुविधा के गुजरात के साणंद में उद्घाटन के अवसर पर दिए गए अपने संबोधन की झलकियां साझा कीं।
एक्स पोस्ट की एक श्रृंखला में, प्रधान मंत्री मोदी ने कहा;
“माइक्रोन की सेमीकंडक्टर सुविधा का उद्घाटन तकनीकी नेतृत्व की दिशा में भारत की यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।”
“साणंद में माइक्रोन की एटीएमपी सुविधा में वाणिज्यिक उत्पादन शुरू होने के साथ, भारत वैश्विक सेमीकंडक्टर मूल्य शृंखला का एक अभिन्न हिस्सा बनेगा और इस क्षेत्र में हमारी भूमिका और भी अधिक सशक्त होगी।”
“आज भारत जिस तेज़ी से आगे बढ़ रहा है, उसकी स्पष्ट झलक साणंद में माइक्रोन की सुविधा में साफ दिखाई देता है।”
“भारत तैयार है। भारत विश्वसनीय है। भारत परिणाम देता है।”
“इस वर्ष के बजट में हमने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 की घोषणा की है, जिससे भारत के भीतर ही सामग्री, घटकों और सेवाओं की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।”
“मैं भारत के साझेदारों और वैश्विक निवेशकों को भरोसा दिलाता हूं…”
“भारत के लिए गर्व का दिन!
आज इससे पहले साणंद में माइक्रोन टेक्नोलॉजी की सेमीकंडक्टर एटीएमपी सुविधा का उद्घाटन किया गया।
नई दिल्ली – केंद्रीय शिक्षा एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास राज्य मंत्री डॉ. सुकांत मजूमदार ने आज पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय, दक्षिण दिनाजपुर में आयोजित फुटबॉल वितरण कार्यक्रम की अध्यक्षता की। यह कार्यक्रम फुटबॉल फॉर स्कूल्स (F4S) पहल के अंतर्गत आयोजित किया गया।
यह आयोजन शिक्षा मंत्रालय द्वारा ऑल इंडिया फुटबॉल फेडरेशन(एआईएफएफ) तथा फेडरेशन इंटरनेशनेल डी फुटबॉल एसोसिएशन(फीफा) के सहयोग से किया गया।
कार्यक्रम के तहत दक्षिण दिनाजपुर जिले के लगभग 250 स्कूलों में करीब 1,700 फीफा फुटबॉल बांटे गए हैं। राज्य-स्तर पर पश्चिम बंगाल में 87,000 से अधिक फुटबॉल बांटे जा रहे हैं, जिससे लाखों छात्रों को लाभ मिल रहा है।
फुटबॉल फॉर स्कूल्स कार्यक्रम अब 33 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सफलतापूर्वक लागू किया जा चुका है, जिससे इसका राष्ट्रव्यापी कवरेज सुनिश्चित हुआ है। इस पहल के तहत देशभर में लगभग 9.80 लाख फीफा फुटबॉल बांटे जा रहे हैं, जिससे पीएम श्री स्कूलों, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों और एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालयों सहित1.5 लाख से अधिक स्कूलों को लाभ मिल रहा है।
निर्धारित नोडल संस्थानों, नवोदय विद्यालय समिति और केंद्रीय विद्यालय संगठन, के माध्यम से लगभग 625 जिलों में 7 लाख से अधिक फुटबॉल बांटे जा रहे हैं। इस वितरण के साथ-साथ, विद्यालयों की नियमित गतिविधियों में फुटबॉल को प्रभावी और टिकाऊ रूप से शामिल करने के लिए शारीरिक शिक्षा शिक्षकों हेतु संरचित क्षमता-निर्माण कार्यक्रम भी आयोजित किए गए।
यह कार्यक्रम समावेशन पर विशेष जोर देता है, ताकि लड़कियों तथा ग्रामीण और आकांक्षी जिलों के बच्चों की भागीदारी को बढ़ावा देकर खेल अवसरों तक समान पहुंच सुनिश्चित किया जा सके। स्कूल के पारिस्थितिकी तंत्र में फुटबॉल को शामिल करके, इस पहल का मकसद छात्रों में खेल भावना, टीम वर्क और फिजिकल फिटनेस का कल्चर बढ़ाना है, जिससे पूरे देश में खेल भावना मजबूत हो।
नई दिल्ली – केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने आज भोपाल में राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड (एससी-एनबीडब्ल्यूएल) की स्थायी समिति की 89वीं बैठक की अध्यक्षता की।
बैठक के दौरान स्थायी समिति ने वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के प्रावधानों के अनुसार संरक्षित क्षेत्रों, वन्यजीव अभयारण्यों, बाघ अभ्यारण्यों और पर्यावरण-संवेदनशील क्षेत्रों और उसके आसपास स्थित वन्यजीव संरक्षण और विकास परियोजनाओं से संबंधित प्रस्तावों पर चर्चा की। पारिस्थितिकीय संवेदनशीलता, वैधानिक आवश्यकताओं और निर्धारित जोखिमों को कम करने या रोकने के उपायों को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावों की जांच पड़ताल की गई।
समिति ने संचार अवसंरचना, ऑप्टिकल फाइबर केबल, बिजली ट्रांसमिशन लाइन, सड़क परियोजनाएं, पेयजल आपूर्ति, तापीय ऊर्जा, रक्षा, सिंचाई और अन्य अवसंरचना जैसे क्षेत्रों में कुल 58 नए प्रस्तावोंपर विचार किया।
समिति ने कई महत्वपूर्ण नीतिगत मामलों पर भी विचार-विमर्श किया। इनमें डॉल्फिन, घड़ियाल आदि जैसे जलीय जीवों के संरक्षण के लिए चंबल नदी में पर्यावरणीय प्रवाह (ई-फ्लो) बनाए रखने का पारिस्थितिक महत्व, बाघ अभ्यारण्यों के भीतर स्थित गांवों के सामाजिक, आर्थिक और पारिस्थितिक पहलुओं की स्थिति, वन्यजीव प्रबंधन के लिए घास के मैदानों का महत्व और मानव-तेंदुआ संबंधों की वर्तमान चुनौतियों के प्रबंधन की रणनीतियों पर चर्चा की गई।
बैठक में भारतीय वन्यजीव संस्थान, भारतीय वानिकी अनुसंधान और शिक्षा परिषद और केंद्रीय जल आयोग सहित वैज्ञानिक और तकनीकी संस्थानों की भागीदारीपर भी जोर दिया गया, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि संरक्षण नीतियों को मजबूत अनुसंधान और अंतर-क्षेत्रीय समन्वय द्वारा समर्थित किया जा सके।
राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की स्थायी समिति वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत गठित एक वैधानिक निकाय है। इसे वन्यजीवों और वनों के संरक्षण और सुरक्षा से संबंधित मामलों पर सरकार को सलाह देने का अधिकार दिया गया है। साथ ही यह सुनिश्चित करना भी इसका दायित्व है कि संरक्षित क्षेत्रों में और उसके आसपास विकास गतिविधियों को स्थायी और संतुलित तरीके से किया जाए।
नई दिल्ली – केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय श्री भूपेंद्र यादव की अध्यक्षता में आज भोपाल में केंद्रीय प्लेटफॉर्म (तीसरा चरण – क्षमता विकास सहायता) के अंतर्गत उच्चाधिकार प्राप्त संचालन समिति की बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और सभी एनआईआरएएनटीएआर संस्थानों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया।
क्षमता विकास खंड के प्रमुख संस्थान के रूप में भारतीय वन प्रबंधन संस्थान, भोपाल ने उठाए गए क्षमता निर्माण पहलों एवं एनआईआरएएनटीएआर प्लेटफॉर्म के अंतर्गत भविष्य की विस्तृत योजना प्रस्तुति दी।
प्रस्तुति में अल्पकालिक एवं मध्यकालिक कार्य योजनाओं, वैज्ञानिक विकास कार्यक्रमों, संयुक्त प्रशिक्षण मॉड्यूल एवं शामिल होने वाले संस्थानों के बीच सहयोगात्मक पहलों का विवरण दिया गया। समन्वित प्रशिक्षण प्रयासों को मजबूत करने, मिश्रित प्रशिक्षण योजनाओं को विकसित करने और संस्थानों के बीच ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ावा देने पर बल दिया गया।
अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि एनआईआरएएनटीएआर को संस्थागत तालमेल बढ़ाने, मांग-आधारित अनुसंधान को बढ़ावा देने तथा वानिकी एवंपर्यावरण क्षेत्रों में पेशेवर क्षमता निर्माण के लिए एक सहयोगात्मक तंत्र के रूप में परिकल्पित किया गया है।
श्री भूपेंद्र यादव ने सतत वन प्रबंधन एवं जलवायु परिवर्तन के प्रति लचीलापन सहित राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के साथ संस्थागत प्रयासों के एकीकृत नियोजन, नवाचार एवं समन्वय की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने सभी संस्थानों प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए समन्वित रूप से कार्य करने का
नई दिल्ली – वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग (डीएफएस), भारत सरकार ने 27-28 फरवरी, 2026 को बैंक ऑफ बड़ौदा (बीओबी) अकादमी, अहमदाबाद में एक दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया। यह कार्यशाला सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएबी), सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों (पीएसआईसी), क्षेत्रीय नियामकों और सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों (पीएफआई) में भारत सरकार की आरक्षण नीति के कार्यान्वयन तथा दिव्यांगजनों के लिए वित्तीय सेवाओं की सुगम्यता बढ़ाने के उपायों पर केंद्रित थी।
इस कार्यशाला का आयोजन सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों में आरक्षण नीतियों और कल्याणकारी उपायों के समान और प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने हेतु संस्थागत क्षमता को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया था। यह आयोजन समावेशिता को बढ़ावा देने और वित्तीय सेवाओं तक सभी की समान पहुंच सुनिश्चित करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को भी पुख्ता करता है।
इस कार्यशाला में भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए), भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) के वरिष्ठ पदाधिकारियों के साथ-साथ सभी 12 सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, 7 सार्वजनिक क्षेत्र की बीमा कंपनियों और 7 सार्वजनिक वित्तीय संस्थानों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
सुगम्य भारत पहल के तहत, सुगम्यता मानकों (एक्सेसिबिलिटी स्टैंडर्ड्स) और कम्प्लायंस आवश्यकताओं पर एक सेंसिटाइज़ेशन सेशन आयोजित किया गया। इसके बाद सुगम्यता से संबंधित कानूनी प्रावधानों पर एक राउंडटेबल चर्चा हुई, जिसमें प्रतिभागियों ने व्यावहारिक चुनौतियों, निर्धारित लक्ष्यों और वास्तविक स्थिति पर विचार-विमर्श किया और विभिन्न संस्थानों में सुगम्यता बढ़ाने के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा किया।
कार्यशाला का समापन एक इंटरैक्टिव प्रश्नोत्तर सत्र के साथ हुआ, जिसमें प्रतिभागियों ने ऑपरेशनल संबंधी चुनौतियों और वित्तीय सेवा इकोसिस्टम में समावेशिता, सुगम्यता और आरक्षण नीतियों के समान कार्यान्वयन को और अधिक सुदृढ़ करने हेतु व्यावहारिक उपायों पर गहन विचार-विमर्श किया।
नई दिल्ली – माननीय प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में जनजातीय कार्य मंत्रालय मार्च 2026 में कई ऐतिहासिक राष्ट्रीय पहलों का आयोजन कर रहा है। ये सभी पहलें मिलकर जनजातीय विरासत के संरक्षण, रचनात्मक उत्कृष्टता को बढ़ावा देने, उद्यमिता को सशक्त करने, बाज़ार तक पहुंच का विस्तार करने तथा सतत जनजातीय विकास के लिए कॉरपोरेट साझेदारियों को मज़बूत करने का एक समेकित ढांचा प्रस्तुत करती हैं।
आज आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री श्री जुएल ओराम ने इन पहलों की व्यापक रूपरेखा और रणनीतिक दृष्टि पर विस्तार से प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आगामी कार्यक्रमों को इस प्रकार तैयार किया गया है कि जनजातीय समुदायों को सांस्कृतिक संरक्षण, उद्यम विकास और राष्ट्रीय प्रगति के केंद्र में रखते हुए दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक प्रभाव सुनिश्चित किया जा सके।
इस अवसर पर माननीय केंद्रीय मंत्री ने ‘ट्राइब्स आर्ट फेस्ट’, ‘लिविंग रूट्स फेस्टिवल – साउंडस्केप्स ऑफ ट्राइबल इंडिया’ और ‘भारत ट्राइब्स फेस्ट 2026’ के लोगो (Logo) का भी औपचारिक अनावरण किया।
इस कार्यक्रम में जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके, रंजना चोपड़ा (सचिव), श्री अनंत प्रकाश पांडेय (संयुक्त सचिव), श्री एम. राजा मुरुगन (प्रबंध निदेशक, टीआरआईएफईडी ) तथा पत्र सूचना कार्यालय के श्री धर्मेंद्र तिवारी भी मौजूद रहे।
ट्राइब्स आर्ट फेस्ट (टीएएफ ) 2026|तिथि: 02–13 मार्च 2026| स्थान: त्रावणकोर पैलेस, नई दिल्ली
इस उत्सव में देशभर से 70 से अधिक प्रतिष्ठित जनजातीय कलाकारों को एक मंच पर लाएगा तथा 30 विशिष्ट जनजातीय कला शैलियों से जुड़ी लगभग 1,000 कलाकृतियों को प्रदर्शित किया जाएगा। भारत की जनजातीय दृश्य कला परंपराओं के लिए एक राष्ट्रीय मंच के रूप में परिकल्पित इस महोत्सव में क्यूरेटेड वॉकथ्रू, लाइव पेंटिंग डेमोंस्ट्रेशन, चित्रात्मक व्याख्यान, मेंटरशिप कार्यशालाएं, सहभागितापूर्ण सत्र और पैनल चर्चाएं आयोजित की जाएंगी, जिनमें कलाकारों, क्यूरेटरों, डिज़ाइनरों और संग्रहकर्ताओं की भागीदारी होगी।
विशेष आकर्षणों में समकालीन कलाकारों के साथ सहयोग, महिला-नेतृत्व वाली लाइव पेंटिंग प्रस्तुतियां और विरासत से बाजार तक के रास्तों पर संरचित संवाद शामिल हैं। प्रदर्शनी, बाजार सुविधा और क्षमता निर्माण के माध्यम से जनजातीय कलाकारों को राष्ट्रीय व वैश्विक मंचों से जोड़ते हुए यह महोत्सव दृश्यता, सम्मान और सतत आजीविका के अवसर बढ़ाने का प्रयास करता है, साथ ही जनजातीय कला को भारत की रचनात्मक अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण अंग स्थापित करता है।
इस प्रदर्शनी में कलाकारों को अपनी पेंटिंग्स की प्रत्यक्ष बिक्री की सुविधा भी उपलब्ध होगी, जिससे आगंतुक और संग्रहकर्ता सीधे सृजनकर्ताओं से कलाकृतियां खरीद सकेंगे और कलाकारों को उचित पारिश्रमिक व मज़बूत बाजार संपर्क मिलेगा।
लिविंग रूट्स फेस्टिवल – साउंडस्केप्स ऑफ ट्राइबल इंडिया
*तिथि: 13–15 मार्च 2026, स्थान: बीकानेर हाउस एवं इंडिया गेट*
लिविंग रूट्स फेस्टिवल भारत की जीवंत जनजातीय संगीत परंपराओं का तीन दिवसीय उत्सव होगा। इसका उद्देश्य जनजातीय संगीत को एक समकालीन, सम्मानित और आर्थिक रूप से व्यवहार्य सांस्कृतिक शक्ति के रूप में स्थापित करना है, साथ ही सामुदायिक स्वामित्व से जुड़े मूल्यों को बनाए रखना है। दिन में आयोजित सत्र (दोपहर 1:30 से शाम 5:00 बजे तक) बीकानेर हाउस में आयोजित होंगे, जिनमें मुख्य भाषण, बेहतरीन प्रस्तुतियां, संरक्षण और नवाचार पर पैनल चर्चाएं तथा बौद्धिक संपदा अधिकार, स्वामित्व और नैतिक सहयोग पर केंद्रित सत्र शामिल होंगे। संध्याकालीन सांस्कृतिक कार्यक्रम (शाम 5:00 से रात 9:15 बजे तक) कर्तव्य पथ पर आयोजित किए जाएंगे, जहां तीन दिनों में 15 चयनित प्रस्तुतियां होंगी। ये प्रस्तुतियां देश के विविध क्षेत्रों और परंपराओं का प्रतिनिधित्व करेंगी और जनजातीय संगीत को भारत के सबसे प्रतिष्ठित सार्वजनिक स्थलों में से एक तक पहुंचाएंगी। इस उत्सव का उद्देश्य प्रदर्शन, संवाद और मेंटरशिप के माध्यम से जनजातीय संगीतकारों के लिए स्थायी पहचान और अवसर सुनिश्चित करना है।
भारत ट्राइब्स फेस्ट (बीटीएफ ) 2026|तिथि: 18–30 मार्च 2026| स्थान: सुंदर नर्सरी
भारत ट्राइब्स फेस्ट (बीटीएफ ) 2026 एक व्यापक राष्ट्रीय बाज़ार और सांस्कृतिक मंच के रूप में आयोजित होगा, जिसमें 1,000 से अधिक जनजातीय कारीगर, वन धन विकास केंद्र (वीडीवीके ), जनजातीय शेफ और सांस्कृतिक दल भाग लेंगे। 200 से अधिक क्यूरेटेड स्टॉल्स के माध्यम से कला, शिल्प और व्यंजन प्रस्तुत किए जाएंगे। प्रमुख आकर्षणों में उच्च-स्तरीय जनजातीय उत्पादों के लिए सिग्नेचर पवेलियन और मंत्रालय के “आरआईएसए” ब्रांड का शुभारंभ शामिल है, जिसका उद्देश्य जनजातीय फैशन और शिल्प को प्रीमियम तथा वैश्विक बाज़ारों में स्थापित करना है। अंतरराष्ट्रीय पवेलियन में ऑस्ट्रेलिया, फिजी और वियतनाम जैसे देशों के स्वदेशी कारीगर भाग लेंगे, जिससे वैश्विक जनजातीय सहयोग को बढ़ावा मिलेगा। 21 राज्यों का प्रतिनिधित्व करता जनजातीय फूड कोर्ट, लाइव डेमोंस्ट्रेशन और विभिन्न राज्यों की सांस्कृतिक प्रस्तुतियां इस उत्सव को एक समृद्ध अनुभवात्मक क्षेत्र बनाएंगी। यह महोत्सव जनजातीय उत्पादकों को प्रत्यक्ष बाज़ार पहुंच प्रदान करने और उनकी आय में वृद्धि सुनिश्चित करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
जनजातीय व्यापार सम्मेलन- भारत ट्राइब्स फेस्ट 2026 के हिस्से के रूप में का एक महत्वपूर्ण स्तंभ 14-दिवसीय राष्ट्रीय व्यापार सम्मेलन होगा, जिसका उद्देश्य जनजातीय उद्यमिता को बढ़ावा देना और जनजातीय उद्यमों को घरेलू व वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं से जोड़ना है। इसमें वन-आधारित खाद्य मूल्य श्रृंखलाएं, सतत वस्त्र व हस्तशिल्प, नैतिक लक्ज़री बाज़ार, नवाचार व तकनीक एकीकरण, कौशल विकास व रोज़गार, बौद्धिक संपदा संरक्षण, पारंपरिक ज्ञान का नैतिक व्यावसायीकरण और समुदाय-आधारित पर्यटन जैसे विषयों पर सत्र आयोजित होंगे।
सीएसआर शिखर सम्मेलन| तिथि: 24 मार्च 2026 | जगह : सुंदर नर्सरी, नई दिल्ली
मंत्रालय 24 मार्च 2026 को एक राष्ट्रीय सीएसआर शिखर सम्मेलन आयोजित करेगा, जिसमें कॉरपोरेट जगत के नेता, सीएसआर प्रमुख, क्रियान्वयन साझेदार और राज्य जनजातीय कल्याण विभाग एक मंच पर आएंगे। इस सम्मेलन का उद्देश्य सीएसआर सहयोग की आवश्यकता वाले प्राथमिक क्षेत्रों को प्रस्तुत करना, जनजातीय विकास में योगदान देने वाले कॉरपोरेट साझेदारों को सम्मानित करना और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप संरचित सहयोग को बढ़ावा देना है।
मीडिया को संबोधित करते हुए माननीय मंत्री ने जोर देकर कहा कि ये सभी पहलें संस्कृति, वाणिज्य और कॉरपोरेट साझेदारी को एकीकृत करने वाले समग्र दृष्टिकोण को दर्शाती हैं। उन्होंने मीडिया से जनजातीय कार्यक्रमों और पहलों को मुख्यधारा में लाने में सहयोग का अनुरोध किया, ताकि आम जनता में व्यापक जागरूकता उत्पन्न हो सके।
*सामूहिक रूप से, ये पांचों पहलें—ट्राइब्स आर्ट फेस्ट 2026, लिविंग रूट्स फेस्टिवल, भारत ट्राइब्स फेस्ट 2026, ट्राइबल बिजनेस कॉन्क्लेव और सीएसआर समिट—सांस्कृतिक संरक्षण और आर्थिक सशक्तिकरण के लिए एक एकीकृत राष्ट्रीय संरचना का निर्माण करती हैं। ये पहलें माननीय प्रधानमंत्री के ‘विकसित भारत 2047’ के दृष्टिकोण के अनुरूप हैं, जो जनजातीय समुदायों को केवल लाभार्थी के रूप में नहीं, बल्कि सांस्कृतिक नेतृत्वकर्ता और आर्थिक योगदानकर्ता के रूप में स्थापित करती हैं।
नई दिल्ली – केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने 28 फरवरी, 2026 को बोत्सवाना से प्राप्त नौ चीतों को मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में बने संगरोध बाड़ों में छोड़ा। इन चीतों को प्राकृतिक वातावरण में छोड़ने से पहले अनुकूलन और स्वास्थ्य निगरानी के चरण से गुजरना होगा।
श्री यादव ने अपनी एक एक्स सोशल मीडिया पोस्ट में बोत्सवाना से नौ चीतों (6 मादा और 3 नर) के मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में आगमन की घोषणा की।
मंत्री महोदय ने बताया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के पर्यावरण के प्रति जागरूक नेतृत्व में चीता परियोजना को बड़ी सफलता मिली है। भारत में अब 48 चीतों की अच्छी-खासी आबादी है, जिनमें 28 भारत में जन्मे शावक शामिल हैं।
यात्रा
दिसंबर 2024 में, भारत सरकार ने चीतों की खरीद के लिए बोत्सवाना गणराज्य की सरकार के साथ औपचारिक बातचीत शुरू की, ताकि भारत के प्रमुख वन्यजीव संरक्षण कार्यक्रम ‘प्रोजेक्ट चीता’ को और मजबूत किया जा सके। यह प्रस्ताव बोत्सवाना गणराज्य के पर्यावरण और पर्यटन मंत्री श्री बोइपुसो विंटर ममोलोत्सी के परामर्श से श्री भूपेंद्र यादव द्वारा औपचारिक रूप से प्रस्तुत किया गया था।
भारत की चीता पुनर्प्रवेश योजना को ध्यान में रखते हुए बोत्सवाना ने भारत के साथ साझेदारी करने पर सहमति जताई। यह सहयोग वैश्विक चीता संरक्षण प्रयासों को मजबूत करने और अफ्रीका में इसके पारंपरिक क्षेत्र से बाहर इस प्रजाति की एक अतिरिक्त सुरक्षित आबादी बनाने की साझा प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है, जिससे इसकी दीर्घकालिक सहनशीलता में वृद्धि होगी।
इस साझेदारी को क्रियान्वित करने के लिए, एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने सितंबर 2025 में बोत्सवाना का दौरा किया। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य अंतर्राष्ट्रीय वन्यजीव स्थानांतरण मानकों के अनुरूप परिचालन तौर-तरीकों, परिवहन व्यवस्था और नियामक स्वीकृतियों का प्रारूप तैयार करना था। उचित वैज्ञानिक मूल्यांकन के बाद, बोत्सवाना के ग़ांज़ी क्षेत्र से आठ चीतों की पहचान करते हुए उन्हें पकड़ा गया। बाद में, पशु चिकित्सा की निरंतर निगरानी में चीतों को लगभग 700 किलोमीटर दूर सड़क मार्ग से गैबोरोन ले जाया गया।
नवंबर 2025 में, राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु की बोत्सवाना यात्रा के दौरान, आठ चीतों को औपचारिक रूप से भारत सरकार को सौंप दिया गया। उन्हें मोकोलोडी प्रकृति अभ्यारण्य में संगरोध बाड़ों में छोड़ दिया गया।
भारतीय प्रतिनिधिमंडल ने नवंबर 2025 में संगरोध व्यवस्था की समीक्षा करने, बाड़ों की स्थिति का आकलन करने और अंतर्राष्ट्रीय स्थानांतरण की तैयारियों को सुनिश्चित करने के लिए बोत्सवाना का दौरा किया। दिसंबर 2025 में, बोत्सवाना प्रतिनिधिमंडल ने अंतिम रसद संबंधी तैयारियों की समीक्षा करने और मध्य प्रदेश के कूनो राष्ट्रीय उद्यान में जारी चीता संरक्षण प्रयासों का अवलोकन करने के लिए भारत का दौरा किया।
27 फरवरी, 2026 को चीतों को मोकोलोडी प्रकृति अभ्यारण्य से गैबोरोन हवाई अड्डे तक ले जाया गया। भारतीय वायु सेना के सहयोग से, चीतों को नियंत्रित और निगरानी वाले वातावरण में भारत के ग्वालियर ले जाया गया ताकि यात्रा के दौरान उनकी सुरक्षा और कल्याण सुनिश्चित हो सके। भारत पहुंचने पर, चीतों को हेलीकॉप्टर द्वारा कूनो राष्ट्रीय उद्यान में स्थानांतरित कर दिया गया।
एक अन्य सोशल मीडिया पोस्ट में, श्री यादव ने भारतीय वायु सेना द्वारा प्रदर्शित निर्बाध समन्वय, सटीक उड़ान और अटूट प्रतिबद्धता के लिए अपनी सराहना व्यक्त की, जिसने इन चीतों की भारत तक सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित की।
India’s sky high efforts for cheetahs 🐆 🇮🇳!
The cheetahs from Botswana were extended a smooth air ride to India by IAF’s C17 Globemaster from 81 squadron (the Skylords), and further to Kuno by IAF’s helicopters.
हार्दिक प्रयास से संचालित प्रोजेक्ट चीता को मजबूत वैश्विक साझेदारियों और ठोस वैज्ञानिक निगरानी के साथ निरंतर प्रगति प्राप्त हो रही है। बोत्सवाना के चीतों का सफल आगमन भारत के इस संकल्प को और मजबूत करता है कि वह एक स्थायी, स्वतंत्र रूप से विचरण करने वाली चीता आबादी का निर्माण करे और वैश्विक संरक्षण प्रयासों में सार्थक योगदान दे।
नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज अजमेर में एक जनसभा को संबोधित किया। उन्होंने आज के दिन को राजस्थान के विकास पथ में बड़ा पड़ाव बताया। प्रधानमंत्री ने सुरसुरा के तेजाजी धाम और मेजर दलपत सिंह की वीरता सहित इस क्षेत्र की सांस्कृतिक और वीरता की विरासत को श्रद्धांजलि अर्पित की, जिनकी हाइफ़ा को मुक्त कराने में भूमिका को आज भी इज़राइल में सम्मानित किया जाता है।
प्रधानमंत्री ने संतोष व्यक्त किया कि राजस्थान में “दो इंजन वाली सरकार” ने तीव्र प्रगति के दो वर्ष पूरे कर लिए हैं। श्री मोदी ने जोर देते हुए कहा, “सरकार विकास के उन वादों को पूरा कर रही है जो उन्होंने जनता से किए थे, और आज का दिन विकास के इस अभियान को और तेज करने का दिन है।” प्रधानमंत्री ने आगे बताया कि आज के कार्यक्रम में सड़क, बिजली, जल, स्वास्थ्य और शिक्षा सहित विभिन्न क्षेत्रों में लगभग 17,000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया गया, जिनसे राजस्थान के लोगों की सुविधा बढ़ेगी और युवाओं के लिए रोजगार के अपार अवसर पैदा होंगे।
श्री मोदी ने आज 21,000 से अधिक नए रंगरूटों को नियुक्ति पत्र सौंपकर राज्य के युवाओं के लिए एक नए युग की शुरुआत का जिक्र किया। इसके अलावा, प्रधानमंत्री ने अजमेर से राष्ट्रव्यापी एचपीवी टीकाकरण अभियान का शुभारंभ किया और इसे भारत की ‘नारी शक्ति’ को सशक्त बनाने और माताओं तथा बेटियों के स्वास्थ्य को बेहतर करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। श्री मोदी ने कहा, “हम सभी जानते हैं कि जब परिवार में मां बीमार पड़ती है, तो घर बिखर जाता है। मां स्वस्थ रहती है, तो परिवार हर संकट का सामना करने में सक्षम रहता है। इसी भावना के साथ सरकार ने महिलाओं को सहायता प्रदान करने के लिए कई योजनाएं चलाई हैं।”
प्रधानमंत्री ने शौचालयों, सैनिटरी पैड्स और उज्ज्वला गैस योजना के लिए “मिशन मोड” समाधानों के सफल कार्यान्वयन का उल्लेख करते हुए महिलाओं के स्वास्थ्य और गरिमा के प्रति सरकार के संवेदनशील दृष्टिकोण का विस्तार से वर्णन किया। उन्होंने सुरक्षित मातृत्व योजना का भी जिक्र किया, जिसके तहत गर्भावस्था के दौरान पौष्टिक भोजन सुनिश्चित करने के लिए बहनों के खातों में 5,000 रुपये जमा किए जाते हैं, जो उपेक्षा की संस्कृति से संवेदनशीलता की संस्कृति की ओर एक कदम है।
बुनियादी ढांचे पर चर्चा करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि सड़क, रेल और हवाई मार्ग के माध्यम से आधुनिक संपर्क राजस्थान का भविष्य बदल रहा है। उन्होंने बताया कि कैसे बेहतर यात्रा व्यवस्था अजमेर-पुष्कर जैसे स्थानों पर पर्यटन को बढ़ावा दे रही है, जिससे स्थानीय व्यवसायों, कारीगरों और टैक्सी चालकों को सीधा लाभ मिल रहा है। श्री मोदी ने कहा, “दिल्ली-मुंबई औद्योगिक गलियारे के आसपास बन रहा बुनियादी ढांचा राजस्थान को वैश्विक निवेश के लिए ‘अवसरों की भूमि’ बना रहा है।”
भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा पर प्रकाश डालते हुए, श्री मोदी ने हाल ही में दिल्ली में आयोजित विश्व के सबसे बड़े एआई शिखर सम्मेलन और इज़राइल की अपनी यात्रा का जिक्र किया, जहां भारत की प्रगति और कौशल की सराहना की गई। श्री मोदी ने कहा, “इसमें दुनिया के कई देशों के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति आए; बड़ी कंपनियों के प्रमुख आए; सभी ने खुले मन से भारत की प्रशंसा की।”
पिछले 11 वर्षों में भारत के सशस्त्र बलों की सफलता को रेखांकित करते हुए श्री मोदी ने कहा, “भारतीय सेना ने हर मोर्चे पर आतंकवादियों और देश के दुश्मनों पर करारा प्रहार किया है। हमारी सेना हर मोर्चे पर, हर अभियान में विजयी रही है। सर्जिकल स्ट्राइक से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक, उन्होंने अपनी क्षमता साबित की है।”
किसानों की लंबे समय से चली आ रही शिकायतों का समाधान करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार ईआरसीपी परियोजना को साकार करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नदियों को जोड़ने का अभियान झालावाड़, बारां, कोटा और बूंदी के किसानों को निश्चित और महत्वपूर्ण लाभ प्रदान करेगा। उन्होंने बताया कि इस अभियान में संशोधित ‘पार्वती-कालीसिंध-चंबल’ और ‘यमुना-राजस्थान’ लिंक परियोजनाएं शामिल हैं,
प्रधानमंत्री ने सूर्य से समृद्धि अर्जित करने की राजस्थान की क्षमता पर प्रकाश डाला। पीएम सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत, सरकार छतों पर सौर पैनल लगाने के लिए 78,000 रुपये की सहायता प्रदान करती है। राजस्थान में 1.25 लाख से अधिक परिवार पहले ही इस योजना से जुड़ चुके हैं, जिससे कई परिवारों के बिजली बिल लगभग शून्य हो गए हैं। श्री मोदी ने “विकसित राजस्थान से विकसित भारत” के मंत्र को दोहराते हुए अपने संबोधन का समापन किया। उन्होंने राज्य के प्रत्येक परिवार के लिए एक समृद्ध जीवन की परिकल्पना प्रस्तुत की।
नई दिल्ली – रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने ओडिशा के तट से दूर चांदीपुर स्थित एकीकृत परीक्षण रेंज (आईटीआर) से अत्यंत कम दूरी की वायु रक्षा प्रणाली (वीएसएचओआरएडीएस) के तीन सफल उड़ान परीक्षण किए हैं। ये परीक्षण विभिन्न गति, दूरी और ऊंचाई पर उड़ने वाले उच्च गति वाले खतरों को बेअसर करने में वीएसएचओआरएडीएस मिसाइल प्रणाली की क्षमता को पुनः सत्यापित करने के लिए किए गए थे।
इन परीक्षणों में यह देखा गया कि टेस्ट मिसाइल तेज रफ्तार से उड़ने वाले दुश्मन के विमानों व अन्य लक्ष्यों को अलग-अलग दूरी और ऊंचाई पर कितने प्रभावी तरीके से मार गिरा सकती है। हर बार मिसाइल ने अपने निशाने पर सटीक वार किया और लक्ष्य को हवा में ही नष्ट कर दिया। खास बात यह रही कि ये परीक्षण उसी अंतिम तैनाती रूप में किए गए, जिसमें सेना के जवान खुद लक्ष्य साधने और मिसाइल दागने की प्रक्रिया में शामिल थे।
चांदीपुर स्थित आईटीआर द्वारा तैनात टेलीमेट्री, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल ट्रैकिंग सिस्टम और रडार जैसे विभिन्न उपकरणों द्वारा प्राप्त उड़ान डेटा ने हवाई खतरों की एक विस्तृत शृंखला के खिलाफ वीएसएचओआरएडीएस की प्रभावशीलता को प्रमाणित किया गया। परीक्षण के दौरान संयुक्त बलों के प्रतिनिधि, डीआरडीओ के वरिष्ठ अधिकारी और इस सिस्टम के उत्पादन से जुड़े हितधारक भी मौजूद रहे।
वीएसएचओआरएडीएस एक मानव-चालित वायु रक्षा प्रणाली है जिसे अनुसंधान केंद्र इमारत द्वारा अन्य डीआरडीओ प्रयोगशालाओं और विकास सह उत्पादन भागीदारों के सहयोग से स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित किया गया है। यह मिसाइल प्रणाली सशस्त्र बलों की तीनों शाखाओं, जैसे भारतीय सेना, नौसेना और वायु सेना की जरूरतों को पूरा करने की क्षमता रखती है।
रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने सिस्टम के सफल उड़ान परीक्षणों के लिए डीआरडीओ, सशस्त्र बलों और उद्योग जगत को बधाई दी। उन्होंने कहा कि वीएसएचओआरएडीएस के लगातार तीन सफल उड़ान परीक्षण एक बड़ी सफलता है और इस प्रणाली को जल्द ही सशस्त्र बलों में शामिल किया जा सकता है।
रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने सिस्टम के डिजाइन और विकास में शामिल संपूर्ण डीआरडीओ टीम, सशस्त्र बलों और उद्योग भागीदारों को बधाई दी।