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शिक्षा मंत्रालय ने नई दिल्ली में केंद्र शासित प्रदेशों के साथ एक दिवसीय संवादात्मक कार्यशाला का आयोजन किया

नई दिल्ली  – शिक्षा मंत्रालय के स्‍कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग (डीओएसईएल) ने 13 मार्च 2026 को डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र (डीएआईसी), नई दिल्ली में केंद्र शासित प्रदेशों के साथ एक दिवसीय संवादात्मक कार्यशाला का आयोजन किया।

इस कार्यशाला में शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, अन्य मंत्रालयों/विभागों के प्रतिनिधि और सभी केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारी एक साथ आए और केंद्र शासित प्रदेशों में स्कूली शिक्षा से संबंधित प्रमुख प्रशासनिक, वित्तीय और कानूनी मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।

स्‍कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग (डीओएसईएल)  के सचिव श्री संजय कुमार ने कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए केंद्र शासित प्रदेशों के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया ताकि समन्वय को मजबूत किया जा सके और शिक्षा कार्यक्रमों के कार्यान्वयन में सुधार किया जा सके। उन्होंने शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक पदों की रिक्तियों को समय पर भरने, राज्‍य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी), जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्‍थान (डीआईईटी) और राज्‍य शिक्षा संस्‍थान (एसआईई) जैसे शैक्षणिक संस्थानों को सुदृढ़ करने और संसदीय मामलों एवं वित्तीय प्रस्तावों पर शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

स्‍कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग (डीओएसईएल)  की आर्थिक सलाहकार श्रीमती ए. श्रीजा ने कार्यशाला के संदर्भ में कहा कि यह मंच विचारों के आदान-प्रदान को सुगम बनाएगा और शिक्षा क्षेत्र में केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा सामना की जाने वाली परिचालन संबंधी चुनौतियों के समाधान को सक्षम करेगा।

उद्घाटन सत्र के दौरान, स्‍कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग (डीओएसईएल)   के अपर सचिव श्री धीरज साहू ने प्रतिभागियों को संबोधित किया और केंद्र शासित प्रदेशों में संस्थागत क्षमता को मजबूत करने और प्रशासनिक दक्षता में सुधार करने के महत्व पर जोर दिया।

इसके बाद विधि कार्य विभाग के संयुक्त सचिव श्री अजय गुप्ता ने अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने मुकदमेबाजी और न्‍यायालयी मामलों के संचालन से संबंधित प्रमुख पहलुओं पर बात की।

स्‍कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग (डीओएसईएल) की संयुक्त सचिव श्रीमती प्राची पांडे ने इस बात पर जोर दिया कि केंद्र शासित प्रदेशों के सभी स्कूलों को केंद्रीय माध्‍यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से संबद्ध होना चाहिए।

शिक्षा मंत्रालय के प्रधान मुख्य लेखा नियंत्रक श्री भूपाल नंदा ने भी सभा को संबोधित किया और शिक्षा क्षेत्र में वित्तीय प्रबंधन और लेखा प्रणाली से संबंधित मुद्दों के बारे में बताया।

तकनीकी सत्रों में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। इन विषयों में निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 12(1)(सी) का कार्यान्वयन, साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण के लिए शैक्षिक संकेतक और डेटा रिपोर्टिंग, विधानमंडल वाले केंद्र शासित प्रदेशों को एसएनए-स्पर्श प्लेटफॉर्म से जोड़ना और डिजिटल वित्तीय प्रबंधन प्रणालियों को सुदृढ़ करने के लिए संबंधित लेखांकन मामले शामिल थे। इसके अतिरिक्त, सत्रों में न्‍यायालयी मामलों की प्रभावी निगरानी में विधिक सूचना प्रबंधन एवं ब्रीफिंग प्रणाली (लिम्‍बस) की भूमिका के बारे में बताया गया और सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जैम) पोर्टल पर खरीद संबंधी मुद्दों पर चर्चा की गई। इसमें सरकारी खरीद में पारदर्शिता और दक्षता में सुधार पर विशेष जोर दिया गया।

जम्मू एवं कश्मीर, लद्दाख, पुद्दुचेरी, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, चंडीगढ़, दादरा एवं नागर हवेली और दमन एवं दीव, लक्षद्वीप और दिल्ली के प्रतिनिधियों ने न्‍यायालयी मामलों की स्थिति, विशेष शिक्षकों सहित शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों की रिक्तियों, एससीईआरटी, डीआईईटी और एसआईई में रिक्तियों, समग्र शिक्षा के अंतर्गत निधि जारी करने, वार्षिक रिपोर्ट और लेखापरीक्षित खातों की प्रस्तुति, संसदीय मामलों और जैम पोर्टल पर आने वाली समस्याओं पर प्रस्तुतियां दी। इन चर्चाओं से केंद्र शासित प्रदेशों को अपने अनुभव साझा करने और मंत्रालय तथा अन्य हितधारकों से मार्गदर्शन प्राप्त करने का अवसर मिला।

कार्यशाला का समापन एक संवादात्मक चर्चा और प्रमुख निष्कर्षों के सारांश के साथ हुआ। विचार-विमर्श में शिक्षा मंत्रालय और केंद्र शासित प्रदेशों की सामूहिक प्रतिबद्धता दोहराई गई कि वे समन्वय को मजबूत करेंगे, संस्थागत क्षमता को बढ़ाएंगे और केंद्र शासित प्रदेशों में बेहतर शैक्षिक परिणामों के लिए स्कूली शिक्षा पहलों के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करेंगे।

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ईद, सरहुल एवं रामनवमी पर्व को लेकर महत्वपूर्ण बैठक

उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में बैठक

आगामी ईद, सरहुल एवं रामनवमी पर्व के दौरान विधि-व्यवस्था संधारण को लेकर संबंधित पदाधिकारियों को दिए गए आवश्यक दिशा-निर्देश

रांची,15.03.2026 – आगामी ईद, सरहुल एवं रामनवमी पर्व के मद्देनजर आज दिनांक 15.03.2026 को रांची समाहरणालय में उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में पुलिस अधीक्षक (यातायात), पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण), अपर जिला दण्डाधिकारी (विधि-व्यवस्था), अनुमंडल पदाधिकारी, जिला स्तरीय पदाधिकारी एवं संबंधित प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी उपस्थित थे।

बैठक में उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री आगामी पर्वों को शांतिपूर्ण, सुरक्षित एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में सम्पन्न कराने को लेकर विस्तृत चर्चा की गई तथा सुरक्षा एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष निगरानी का निर्देश

उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि जिले के संवेदनशील एवं भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों की पहचान कर वहां विशेष सतर्कता बरती जाए। उन्होंने कहा कि पर्व के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या अप्रिय घटना को रोकने के लिए पुलिस बल की पर्याप्त प्रतिनियुक्ति सुनिश्चित की जाए तथा सभी अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार भ्रमण कर स्थिति पर नजर रखें।

जुलूस मार्ग एवं आयोजन स्थलों की निगरानी

बैठक में निर्देश दिया गया कि रामनवमी जुलूस मार्ग, सरना स्थलों तथा ईद की नमाज के प्रमुख स्थलों पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। सभी संबंधित पदाधिकारी आयोजन समितियों के साथ समन्वय स्थापित कर आवश्यक व्यवस्थाओं का समय पर निरीक्षण करेंगे, ताकि पर्व के दौरान किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न न हो।

सीसीटीवी, ड्रोन एवं तकनीकी निगरानी

उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने निर्देश दिया कि प्रमुख चौक-चौराहों, जुलूस मार्गों एवं भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरा एवं ड्रोन के माध्यम से निगरानी की प्रभावी व्यवस्था की जाए। इसके साथ ही नियंत्रण कक्ष को सक्रिय रखते हुए सभी सूचनाओं की त्वरित निगरानी एवं समन्वय सुनिश्चित किया जाएगा।

सोशल मीडिया पर विशेष नजर

बैठक में सोशल मीडिया पर विशेष निगरानी रखने का निर्देश दिया गया। उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा कि किसी भी प्रकार की भ्रामक सूचना, अफवाह या आपत्तिजनक पोस्ट के माध्यम से सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास करने वालों की पहचान कर उनके विरुद्ध तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए संबंधित टीमों को सक्रिय रहने का निर्देश दिया गया।

सफाई, बिजली-पानी एवं यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश

उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि पर्व के दौरान सभी प्रमुख स्थलों पर साफ-सफाई, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था एवं यातायात प्रबंधन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। नगर निगम, बिजली विभाग एवं अन्य संबंधित विभागों को समन्वय के साथ कार्य करने का निर्देश दिया गया।

अधिकारियों को फील्ड में सक्रिय रहने का निर्देश

बैठक में सभी पुलिस पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि पर्व के दौरान वे अपने-अपने क्षेत्रों में सतत निगरानी रखें तथा किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहें।

बैठक के दौरान यह निर्णय लिया गया कि प्रशासन एवं पुलिस के समन्वित प्रयास से जिले में आगामी ईद, सरहुल एवं रामनवमी पर्व को शांतिपूर्ण, सुरक्षित एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में सम्पन्न कराया जाएगा।

उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी गंभीरता एवं जिम्मेदारी के साथ सुनिश्चित करें, ताकि जिले में सामाजिक सद्भाव एवं भाईचारे का वातावरण बना रहे।

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आगामी ईद, सरहुल और रामनवमी पर्व को लेकर केन्द्रीय शांति समिति की बैठक

उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में बैठक सम्पन्न

सौहार्दपूर्ण वातावरण में त्योहार मनाने की अपील

सोशल मीडिया पर प्रशासन-पुलिस की रहेगी कड़ी निगरानी

पर्व के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होंगे : एसएसपी

शांति समिति के सुझावों पर जिला प्रशासन करेगा कार्य

रांची,15.03.2026 – जिला में त्योहारों के सफल आयोजन के लिए उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजंत्री ने की केन्द्रीय शांति समिति, महावीर मण्डल, केन्द्रीय सरना समिति, रामनवमी श्रृंगार समिति,चैती दुर्गा पूजा समिति, सेंट्रल मोहर्रम कमिटी, अंजुमन इस्लामिया, गुरुनानक समिति, अन्य सभी रामनवमी, ईद एवं सरहुल पर्व आयोजन समितियों एवं अखाड़ा समिति की सराहना

आगामी ईद, सरहुल एवं रामनवमी पर्व को लेकर  15.03.2026 को उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में केन्द्रीय शांति समिति की बैठक आयोजित की गई। रांची समाहरणालय के ब्लॉक-B स्थित कमरा संख्या-505 में आयोजित बैठक में वरीय पुलिस अधीक्षक, रांची श्री राकेश रंजन, पुलिस अधीक्षक (यातायात), पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण), अपर जिला दण्डाधिकारी (विधि-व्यवस्था), अनुमंडल पदाधिकारी सदर एवं बुण्डू, उपसमाहर्ता भूमि सुधार, जिला परिवहन पदाधिकारी, जिला आपूर्ति पदाधिकारी, जिला नजारत उप समाहर्ता सहित संबंधित पुलिस-प्रशासनिक पदाधिकारी एवं महावीर मण्डल, केन्द्रीय सरना समिति, रामनवमी श्रृंगार समिति, राँची चैती दुर्गा पूजा समिति, सेंट्रल मोहर्रम कमिटी, अंजुमन इस्लामिया, गुरुनानक समिति, पंजाबी हिंदू बिरादरी, राँची/डोरंडा,
अन्य सभी रामनवमी / ईद / सरहुल पर्व आयोजन समितियों, के अध्यक्ष, सचिव एवं सदस्य उपस्थित थे।

बैठक के दौरान आगामी पर्वों को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सौहार्दपूर्ण वातावरण में सम्पन्न कराने को लेकर विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

शांति समिति के सदस्यों ने दिये महत्वपूर्ण सुझाव

बैठक में केन्द्रीय शांति समिति के सदस्यों ने बारी-बारी से अपने सुझाव रखे। सदस्यों द्वारा पर्व के दौरान सीसीटीवी कैमरों एवं ड्रोन के माध्यम से निगरानी, आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों की पहचान कर त्वरित कार्रवाई, साफ-सफाई की समुचित व्यवस्था, बिजली-पानी की निर्बाध आपूर्ति तथा सुरक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने जैसे महत्वपूर्ण सुझाव दिये गये।

समिति के सदस्यों ने विशेष रूप से पर्व के दौरान पर्याप्त संख्या में महिला पुलिसकर्मियों की प्रतिनियुक्ति सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि महिलाओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

सदस्यों के सुझावों पर जिला प्रशासन करेगा आवश्यक कार्रवाई

उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा कि शांति समिति के सदस्यों द्वारा दिये गये सभी सुझावों पर जिला प्रशासन गंभीरतापूर्वक विचार कर आवश्यक कार्रवाई करेगा। उन्होंने कहा कि पूर्व में भी रांची में सभी पर्व-त्योहार शांति एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुए हैं, जिसमें केन्द्रीय शांति समिति, महावीर मण्डल, केन्द्रीय सरना समिति, रामनवमी श्रृंगार समिति, राँची चैती दुर्गा पूजा समिति, सेंट्रल मोहर्रम कमिटी, अंजुमन इस्लामिया, गुरुनानक समिति अन्य सभी रामनवमी / ईद / सरहुल पर्व आयोजन समितियों एवं अखाड़ा समिति के सदस्यों का सहयोग अत्यंत सराहनीय रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी के सहयोग, समन्वय और सामूहिक प्रयास से आगामी त्योहार भी शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में सम्पन्न होंगे।

शांतिपूर्ण माहौल में त्योहार सम्पन्न कराना हम सबकी जिम्मेवारी – उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री

उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा कि रांची को राज्य ही नहीं, बल्कि पूरे देश में सामाजिक सौहार्द और भाईचारे की मिसाल बनाना है। इसके लिए सभी नागरिकों, शांति समिति के सदस्यों तथा प्रशासन को मिलकर अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्होंने जिले के सभी थाना प्रभारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में शांति समिति की बैठक आयोजित करने का निर्देश दिया।

सोशल मीडिया पर प्रशासन-पुलिस की कड़ी निगरानी

उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा कि आगामी पर्व-त्योहारों के दौरान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जिला प्रशासन और पुलिस की कड़ी निगरानी रहेगी। उन्होंने आम नागरिकों से किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक पोस्ट या अफवाहों पर प्रतिक्रिया देने से बचने और जिम्मेदार नागरिक का परिचय देते हुए ऐसी किसी भी सामग्री की जानकारी तुरंत पुलिस-प्रशासन को देने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाले तत्वों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

पर्व के दौरान सुरक्षा के होंगे पुख्ता इंतजाम : एसएसपी

बैठक के दौरान वरीय पुलिस अधीक्षक, रांची श्री राकेश रंजन ने कहा कि आगामी पर्वों को लेकर पुलिस प्रशासन द्वारा व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने शांति समिति, पूजा समिति एवं अखाड़ा समिति के सदस्यों से प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर सतर्कता के साथ कार्य करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित अधिकारी मैदान स्तर पर सक्रिय रहकर कार्य करें, ताकि किसी भी स्थिति से समय रहते निपटा जा सके। उन्होंने आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों को चेतावनी देते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था बिगाड़ने का प्रयास करने वालों के खिलाफ पुलिस सख्त कार्रवाई करने से नहीं चूकेगी।

बैठक के अंत में प्रशासन और शांति समिति के सदस्यों ने मिलकर यह संकल्प लिया कि ईद, सरहुल और रामनवमी के पर्व को आपसी भाईचारे, सद्भाव और शांति के साथ मनाया जाएगा।

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आगामी सरहुल पर्व के मद्देनजर सरना स्थलों का निरीक्षण

उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री एवं वरीय पुलिस अधीक्षक, रांची श्री राकेश रंजन ने संयुक्त रूप से किया निरीक्षण

सिरम टोली एवं हातमा सरना स्थलों की व्यवस्थाओं का लिया गया जायजा

श्रद्धालुओं की सुविधा और सुगम आवागमन पर विशेष ध्यान

सरहुल पर्व के सफल आयोजन में जिला प्रशासन देगा हरसंभव सहयोग

सुरक्षा के होंगे पुख्ता इंतजाम, सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश

सरहुल झारखंड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति एवं परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व – उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री

रांची,15.03.2026 – आगामी सरहुल पर्व को शांतिपूर्ण, सुव्यवस्थित एवं भव्य तरीके से संपन्न कराने के उद्देश्य से आज दिनांक 15 मार्च 2026 को उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री एवं वरीय पुलिस अधीक्षक, रांची श्री राकेश रंजन द्वारा शहर के प्रमुख सिरम टोली एवं हातमा स्थित सरना स्थलों का संयुक्त निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान दोनों वरीय पदाधिकारियों ने सरना स्थलों पर उपलब्ध व्यवस्थाओं का जायजा लिया तथा सरना समितियों के प्रतिनिधियों से विस्तृत बातचीत कर आवश्यक तैयारियों की समीक्षा की।

इस दौरान पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) श्री प्रवीण पुष्कर, पुलिस अधीक्षक (यातायात) श्री राकेश सिंह, अपर जिला दंडाधिकारी (विधि व्यवस्था) श्री आर.एन. आलोक, अनुमंडल पदाधिकारी (सदर) श्री कुमार रजत, उप समाहर्ता जिला नजारत श्री सुदेश कुमार सहित अन्य संबंधित प्रशासनिक एवं पुलिस पदाधिकारी उपस्थित थे।

सिरम टोली एवं हातमा सरना स्थलों की व्यवस्थाओं का लिया गया जायजा

निरीक्षण के क्रम में उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री एवं वरीय पुलिस अधीक्षक ने सरना स्थलों के प्रवेश मार्ग, पूजा स्थल, श्रद्धालुओं के आवागमन के रास्ते, साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था, पेयजल, पार्किंग तथा सुरक्षा व्यवस्था की बारीकी से समीक्षा की।

सरना समितियों के सदस्यों ने प्रशासन को अवगत कराया कि सरहुल पर्व के अवसर पर श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या सरना स्थलों पर पहुंचती है, इसलिए लाइटिंग, सड़क समतलीकरण, पेयजल व्यवस्था, जेनरेटर, मोबाइल टॉयलेट, बैरिकेडिंग तथा साफ-सफाई की समुचित व्यवस्था आवश्यक है।

इस पर उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि सरना स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए सभी आवश्यक तैयारियां समय रहते पूरी कर ली जाएं।

सरहुल पर्व के सफल आयोजन में जिला प्रशासन देगा हरसंभव सहयोग

उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा कि सरहुल झारखंड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति एवं परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है और इसे श्रद्धा, उत्साह एवं सामाजिक सौहार्द के साथ मनाया जाता है। जिला प्रशासन का प्रयास रहेगा कि यह पर्व पूरी शांति, सुरक्षा और गरिमा के साथ संपन्न हो। उन्होंने कहा कि सरना समितियों के सुझावों के आधार पर सरना स्थलों पर आवश्यक सुविधाओं की विस्तृत योजना तैयार कर ली गई है तथा संबंधित पदाधिकारियों को समन्वय स्थापित कर सभी तैयारियां समयबद्ध तरीके से पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।

उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य है कि सरना स्थलों पर आने वाले श्रद्धालु सुगमता और सुरक्षित वातावरण में पूजा-अर्चना कर सकें तथा पूजा के उपरांत बिना किसी परेशानी के अपने घरों के लिए प्रस्थान कर सकें। इसके लिए आवागमन, सुरक्षा, साफ-सफाई और बुनियादी सुविधाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।

श्रद्धालुओं की सुविधा और सुगम आवागमन पर विशेष ध्यान

उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा कि सरहुल पर्व के अवसर पर श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, मोबाइल शौचालय, चिकित्सा सहायता, साफ-सफाई एवं ट्रैफिक प्रबंधन को लेकर विशेष व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें, ताकि सरहुल पूजा से जुड़ी सभी तैयारियां समय से पहले पूर्ण कर ली जाएं और श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

सुरक्षा व्यवस्था के होंगे पुख्ता इंतजाम

इस अवसर पर वरीय पुलिस अधीक्षक, रांची श्री राकेश रंजन ने कहा कि सरहुल पर्व के दौरान सुरक्षा के दृष्टिकोण से पर्याप्त संख्या में पुलिस बल की तैनाती की जाएगी। प्रमुख सरना स्थलों एवं जुलूस मार्गों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे तथा ड्रोन कैमरों के माध्यम से निगरानी की जाएगी, ताकि किसी भी प्रकार की असामाजिक गतिविधि पर तुरंत नियंत्रण किया जा सके। उन्होंने बताया कि ट्रैफिक प्रबंधन के लिए विशेष योजना तैयार की जा रही है, जिसके तहत आवश्यकतानुसार कुछ मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्जन किया जाएगा। इस संबंध में आम नागरिकों को पूर्व में ही मीडिया के माध्यम से सूचित किया जाएगा, ताकि लोगों को आवागमन में किसी प्रकार की असुविधा न हो।

जिला प्रशासन ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे सरहुल पर्व को आपसी भाईचारे, अनुशासन और परंपरागत गरिमा के साथ मनाएं तथा प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन कर शांतिपूर्ण आयोजन में सहयोग करें।

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भारत निर्वाचन आयोग आज रविवार, 15 मार्च को पांच राज्यों में चुनाव की तारीखों का एलान कर सकता है

नई दिल्ली – भारत निर्वाचन आयोग आज रविवार, 15 मार्च को पांच राज्यों में चुनाव की तारीखों का एलान कर सकता है।

इस साल पांच राज्यों पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में चुनाव होने हैं। चुनाव की तारीखों के एलान के लिए आज शाम 4 बजे नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस रखी गई है।

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केंद्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने एमडीओएनईआर सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता की

 पूर्वोत्तर में निवेश, एमएसएमई विकास और रोजगार में एनईडीएफआई के योगदान की समीक्षा की

नई दिल्ली – केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री (डीओएनईआर) श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने 12 मार्च 2026 को नई दिल्ली स्थित संसद भवन एनेक्स में पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय की सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में समिति के सदस्य, एमडीओएनईआर के सचिव और विभिन्न मंत्रालयों, एनईसी और उत्तर पूर्वी विकास वित्त निगम लिमिटेड (एनईडीएफआई) के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक के दौरान, मंत्री जी ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहन देने, रोजगार निर्माण करने और उद्यमिता को मजबूत करने में एनईडीएफआई की ओर से निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा, “एनईडीएफआई पूर्वोत्तर में उद्यम के लिए एक संरचनात्मक प्रवर्तक के तौर पर तेजी से उभर रहा है—उद्यमिता को प्रोत्साहन दे रहा है, एमएसएमई क्रेडिट अंतराल को भर रहा है, निजी निवेश को गति दे रहा है और पूरे क्षेत्र में आजीविका का सहयोग कर रहा है।”

मजबूतवित्तीयप्रभावऔररोजगारनिर्माण

एनईडीएफआई के हस्तक्षेपों के वित्तीय प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए, श्री सिंधिया ने कहा कि मार्च 2025 तक, संस्था ने 26,835 इकाइयों को 9114 करोड़ रुपये दिए हैं, जिसने लगभग 23670 करोड़ रुपये के निजी निवेश को प्रोत्साहन दिया है और पूर्वोत्तर में लगभग 15 लाख लोगों के लिए रोजगार में सहयोग किया है।

मंत्री जी ने बताया कि एनईडीएफआई की ओर से निवेश किए गए प्रत्येक 1 रुपये पर निजी क्षेत्र से 2.6 रुपये का निवेश मिला है, जो निवेशकों के मजबूत विश्वास को दर्शाता है। उन्होंने पूंजी के बेहतर इस्तेमाल पर भी जोर देते हुए कहा कि निवेश किए गए प्रत्येक 1 करोड़ रुपये पर लगभग 165 रोजगार निर्मित होते हैं।

एमएसएमईक्रेडिटअंतरकोभरना

श्री सिंधिया ने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र में एमएसएमई क्रेडिट अंतर को पाटने में एनईडीएफआई की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने संस्था को अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाने और सूक्ष्म उद्यमों के अलावा लघु उद्यमों को भी शामिल करने का निर्देश दिया, जिससे क्षेत्र में व्यवसायों की एक विस्तृत श्रृंखला को सहायता मिल सके।

संस्था के वित्तीय अनुशासन की सराहना करते हुए मंत्री जी ने उल्लेख किया कि एनईडीएफआई ने 289.11 करोड़ रुपये के ब्याज-मुक्त लोन बिना किसी चूक के चुका दिए हैं।

उन्होंने इस बात पर भी संतोष जताया कि हाल ही में किए गए वितरण में से 468 करोड़ रुपये संस्था द्वारा आंतरिक रूप से जुटाए गए, जबकि 580 करोड़ रुपये एमडीओएनईआर की ओर से प्रदान किए गए, जो संस्था की बढ़ती आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।

निवेशकीस्थापनाऔरक्षेत्रीयविकास

मंत्री ने पूर्वोत्तर निवेशक शिखर सम्मेलन के बाद हुई प्रगति पर भी प्रकाश डाला और बताया कि विभिन्न राज्यों में लगभग 35,000 करोड़ रुपये का निवेश स्थापित किया जा चुका है, जबकि निवेश के लिए 4.48 लाख करोड़ रुपये की रुचि दिखाई गई है।

क्षेत्रीय विकास के चालक के रूप में पर्यटन के महत्व पर जोर देते हुए, श्री सिंधिया ने कहा कि मंत्रालय समग्र पर्यटक अनुभव पर केंद्रित सुनियोजित पर्यटन सर्किट तैयार कर रहा है, जिसके तहत मेघालय के सोहरा और त्रिपुरा के माताबारी में प्रायोगिक पहल चल रही हैं।

उन्होंने अरुणाचल प्रदेश के कीवी, त्रिपुरा के क्वीन पाइनएप्पल, सिक्किम के जैविक उत्पाद, नागालैंड की कॉफी, असम के मूगा रेशम, मणिपुर के पोलो, मिजोरम के मिजो अदरक और मेघालय की लकाडोंग हल्दी सहित राज्य-विशिष्ट गुणों को प्रोत्साहन देने पर मंत्रालय के फोकस को भी दोहराया।

व्यापकसंपर्कऔरसमन्वय

श्री सिंधिया ने पूर्वोत्तर राज्यों की अपनी यात्राओं के बारे में भी जानकारी दी, जहां वे प्रत्येक राज्य में 3-4 दिन बिताएंगे, जिसका उद्देश्य जून में मॉनसून शुरू होने से पहले सभी आठ राज्यों का दौरा करना है। विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों के छात्रों के साथ संवाद उनकी यात्राओं का अटूट अंग है।

नगालैंड और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में भूमि संपार्श्विक मानदंडों से संबंधित मुद्दों पर मंत्री जी ने स्पष्ट किया कि वित्तीय संस्थानों को आरबीआई के दिशानिर्देशों का पालन करना होगा और ऐसे मामले संबंधित राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि बराक घाटी में बाढ़ प्रबंधन संबंधी मुद्दों के समाधान के लिए जल शक्ति मंत्रालय और जर्मन एजेंसी केएफडब्ल्यू के साथ तकनीकी समन्वय चल रहा है।

मंत्री जी ने एक वर्ष में समिति की चार बैठकें आयोजित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

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मातृ मृत्यु दर में कमी लाने के लिए उठाए गए कदम

नई दिल्ली –   देश में मातृ मृत्यु दर घटकर प्रति लाख जीवित जन्म 88 हुई; पिछले तीन वर्षों में देश में 5.93 करोड़ से अधिक संस्थागत प्रसव हुए

जननी सुरक्षा योजना एवं जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम नकद प्रोत्साहन एवं शून्य-लागत देखभाल के साथ संस्थागत प्रसव को बढ़ावा दे रहे हैं

मातृ मृत्यु को रोकने के विशेषज्ञ जांच एवं प्रोत्साहन के माध्यम से पीएमएसएमए और विस्तारित पीएमएसएमए के अंतर्गत उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं को ट्रैक किया जाता है

लाक्श्या और सुमन सम्मानजनक एवं उच्च गुणवत्ता वाली प्रसव कक्ष देखभाल सुनिश्चित करते हैं, जिसमें सेवाओं से इनकार नहीं किया जाता

प्राथमिक रेफरल यूनिट, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य विंग और प्रसव गृह जैसी बुनियादी ढांचागत सुविधाओं के उन्नयन से मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) में देशव्यापी स्तर पर कमी लाने के लिए पहुंच, स्क्रीनिंग एवं समय पर मध्यवर्तम में सुधार हुआ है

Posted On: 13 MAR 2026 4:36PM by PIB Delhi

भारत के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा 2021-23 के लिए मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) जारी नवीनतम बुलेटिन के अनुसार, देश की एमएमआर प्रति लाख जीवित जन्म 88 है। राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के अनुसार एमएमआर का विवरण अनुलग्नक I में दिया गया है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत, भारत सरकार ने देश के ग्रामीण एवं पिछड़े क्षेत्रों सहित सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मातृ मृत्यु दर में कमी लाने के लिए विभिन्न पहलें की हैं जिससे मातृ स्वास्थ्य लक्ष्यों के साथ-साथ सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को भी प्राप्ति की जा सके। ये पहलें निम्नलिखित हैं:

जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई) संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए एक मांग प्रोत्साहन और सशर्त नकद हस्तांतरण योजना है।

जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (जेजेएसके) सभी गर्भवती महिलाओं को जो सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव करती हैं, पूर्णतः निःशुल्क और बिना किसी खर्च के प्रसव, जिसमें सिजेरियन सेक्शन शामिल है, का अधिकार देता है।

इन सुविधाओं में मुफ्त दवाएं, उपभोग्य वस्तुएं, ठहरने के दौरान मुफ्त भोजन, मुफ्त निदान, मुफ्त परिवहन और आवश्यकता पड़ने पर मुफ्त रक्त संचारण शामिल हैं। एक वर्ष तक के बीमार शिशुओं के लिए भी इसी प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध हैं।

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) गर्भवती महिलाओं को हर महीने की 9 तारीख को एक निश्चित दिन, नि:शुल्क, सुनिश्चित और गुणवत्तापूर्ण प्रसवपूर्व जांच की सुविधा प्रदान करता है, जो किसी विशेषज्ञ/चिकित्सा अधिकारी द्वारा की जाती है।

विस्तारित पीएमएसएमए रणनीति गर्भवती महिलाओं, विशेष रूप से उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं (एचआरपी) को गुणवत्तापूर्ण प्रसवपूर्व देखभाल (एएनसी) सुनिश्चित करती है और पीएमएसएमए दौरे के अलावा अतिरिक्त 3 दौरों के लिए वित्तीय प्रोत्साहन के माध्यम से पहचान की गई उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं और उनके साथ आने वाली आशा कार्यकर्ताओं के लिए सुरक्षित प्रसव प्राप्त होने तक व्यक्तिगत एचआरपी ट्रैकिंग सुनिश्चित करती है।

लाक्श्या प्रसव कक्ष और प्रसूति ऑपरेशन थिएटरों में देखभाल की गुणवत्ता में सुधार लाता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि गर्भवती महिलाओं को प्रसव के दौरान एवं प्रसव के तुरंत बाद सम्मानजनक और गुणवत्तापूर्ण देखभाल प्राप्त हो।

सुरक्षित मातृत्व आश्वासन (सुमन) सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में आने वाली प्रत्येक गर्भवती महिला एवं नवजात शिशु को नि:शुल्क और बिना किसी इनकार के सुनिश्चित, गरिमापूर्ण, सम्मानजनक और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रदान करता है, ताकि सभी रोकने योग्य मातृ एवं नवजात मृत्यु को समाप्त किया जा सके।

प्रसवोत्तर देखभाल को अनुकूलित करने का उद्देश्य माताओं में खतरे के संकेतों का पता लगाने और उच्च जोखिम वाली प्रसवोत्तर माताओं की शीघ्र पहचान, रेफरल एवं उपचार के लिए मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (आशा) को प्रोत्साहित करके प्रसवोत्तर देखभाल की गुणवत्ता को मजबूत करना है।

आंगनवाड़ी केंद्रों में मासिक ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस (वीएचएसएनडी) एक आउटरीच गतिविधि है जो आईसीडीएस के साथ समन्वय में मातृ एवं शिशु देखभाल सेवाओं के प्रावधान को सुनिश्चित करती है।

स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को बढ़ावा देने के लिए, विशेष रूप से जनजातियय एवं दुर्गम क्षेत्रों में, आउटरीच शिविरों का आयोजन किया जाता है। इसका उपयोग मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने, सामुदायिक लामबंदी करने और उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं पर नज़र रखने के लिए किया जाता है।

गर्भवती महिलाओं को आहार, आराम, गर्भावस्था के खतरे के संकेत, लाभ योजनाओं और संस्थागत प्रसव के बारे में जानकारी देने के लिए मातृ एवं शिशु संरक्षण (एमसीपी) कार्ड और सुरक्षित मातृत्व पुस्तिका वितरित की जाती है।

अवसंरचना को मजबूत करना, जिसमें प्राथमिक रेफरल इकाइयों (एफआरयू) का संचालन, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य (एमसीएच) विंग की स्थापना, प्रसूति उच्च निर्भरता इकाइयों एवं गहन देखभाल इकाइयों (ऑब्स्टेट्रिक एचडीयू और आईसीयू) का संचालन, दुर्गम भूभाग, दूरस्थ एवं जनजातिय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं तक बेहतर पहुंच और संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए प्रसव प्रतीक्षा गृहों (बीडब्ल्यूएच) की स्थापना शामिल है।

देश में मातृ मृत्यु दर में कमी लाने में संस्थागत प्रसव एवं प्रसवपूर्व देखभाल की महत्वपूर्ण भूमिका है। कुशल प्रसव सहायकों (एसबीए) की सहायता से स्वास्थ्य संस्थानों में होने वाले प्रसव गर्भावस्था, प्रसव या प्रसवोत्तर काल में उत्पन्न होने वाली जटिलताओं के प्रबंधन में सहायक होते हैं।

प्रसवपूर्व देखभाल गर्भावस्था का शीघ्र पंजीकरण, नियमित स्वास्थ्य जांच, स्क्रीनिंग एवं उच्च जोखिम वाली गर्भधारण की पहचान, आयरन और फोलिक एसिड, कैल्शियम और विटामिन डी3 जैसे आवश्यक पूरक दवाओं का प्रावधान और जन्म की तैयारी एवं जटिलताओं के प्रबंधन पर परामर्श सुनिश्चित करती है, जिससे समय पर रेफरल एवं जटिलताओं का प्रबंधन संभव हो पाता है।

पिछले तीन वर्षों में संपन्न संस्थागत प्रसवों की संख्या अनुलग्नक II में दी गई है।

यहा जानकारी केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने आज लोकसभा में लिखित उत्तर में दी।

अवसरों के द्वार खोलते हुए: राजमार्ग प्रवेश पोर्टल राष्ट्रीय राजमार्गों पर ईंधन स्टेशनों, रेस्तरां और सड़क किनारे सुविधाओं तक पहुंच पहले से कहीं अधिक आसान बनाता है

नई दिल्ली – कल्पना कीजिए कि आप भारत के किसी व्यस्त राष्ट्रीय राजमार्ग पर पेट्रोल पंप, रेस्तरां या होटल या गेस्ट हाउस स्थापित करने की योजना बना रहे हैं। कुछ समय पहले तक, आवश्यक अनुमति प्राप्त करने की प्रक्रिया में कई कार्यालयों से अनुमति लेना, कागजी कार्रवाई और लंबा इंतजार करना पड़ता था। आज यह प्रक्रिया काफी सरल हो गई है। उन्नत राजमार्ग प्रवेश ऑनलाइन पोर्टल के साथ, राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे निर्माण की अनुमति प्राप्त करना अब पहले से कहीं अधिक तेज़, पारदर्शी और सुविधाजनक हो गया है।

यह प्लेटफॉर्म ईंधन स्टेशनों, सड़क किनारे की सुविधाओं, आवासीय संपत्तियों, विश्राम क्षेत्र परिसरों और राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़ने वाली सड़कों जैसी सुविधाओं के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्राप्त करने की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए बनाया गया है । केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी द्वारा हाल ही में लॉन्च किया गया यह पोर्टल, तकनीकी रूप से सक्षम शासन के माध्यम से अधिक दक्षता और पारदर्शिता लाने के सरकारी प्रयासों में एक और कदम है।

कई स्वीकृतियों को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाकर, उन्नत राजमार्ग प्रवेश का उद्देश्य व्यवसायों, संगठनों और नागरिकों के लिए भारत के विस्तारित राजमार्ग नेटवर्क को सहारा देने वाले बुनियादी ढांचे का विकास करना आसान बनाना है। अब निजी संपत्तियों, उद्योगों और सड़क किनारे की सुविधाओं के लिए राजमार्गों से पहुंच सम्बंधी अनुमतियों के लिए कुछ ही क्लिक में ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है।

इसी माध्यम से सरकार और निजी दोनों पक्ष राष्ट्रीय राजमार्गों के समानांतर या उसके पार पानी और गैस पाइपलाइन, ऑप्टिकल फाइबर केबल और बिजली की लाइनें जैसी महत्वपूर्ण उपयोगिताओं को बिछाने के लिए अनुमोदन प्राप्त कर सकते हैं।

आवेदन प्रणाली के डिजिटलीकरण के साथ, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय का लक्ष्य जवाबदेही को केंद्र में रखते हुए प्रक्रिया को अधिक समयबद्ध और कुशल बनाना है। ऑनलाइन पोर्टल से कागजी कार्रवाई में उल्लेखनीय कमी आने, आवेदनों की ट्रैकिंग सक्षम होने और देरी कम होने की उम्मीद है, इससे हितधारकों के लिए बहुमूल्य समय और परिचालन लागत की बचत होगी। उन्नत राजमार्ग प्रवेश पोर्टल से राजमार्ग क्षेत्र में डिजिटल शासन को और मजबूत करने के साथ-साथ वास्तविक समय ट्रैकिंग के माध्यम से अधिकारियों और आवेदकों के बीच समन्वय में सुधार होने और प्रक्रिया को अधिक सुगम बनाने की आशा है।

अनुमतियों और एनओसी के लिए एकल खिड़की समाधान के रूप में मार्ग प्रवेश

देश का राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क 1.46 लाख किलोमीटर से अधिक तक फैल चुका है और सड़कें केवल स्थानों को जोड़ने से कहीं अधिक कार्य कर रही हैं। ये सड़कें नए व्यवसायों, बेहतर सेवाओं और मजबूत बुनियादी ढांचे के विकास के द्वार खोल रही हैं। इन सुविधाओं के निर्माण और उपयोग को आसान बनाने के लिए, राजमार्ग प्रवेश पोर्टल राष्ट्रीय राजमार्गों से सम्बंधित पहुंच अनुमतियोंमार्ग अधिकार अनुमतियों और राष्ट्रीय राजमार्ग स्वीकृति प्रमाणपत्रों के लिए एक ही स्थान पर सभी समाधान उपलब्ध कराने वाला डिजिटल मंच है।

राजमार्ग प्रवेश पोर्टल पर आवेदन के प्रकार :

• वाणिज्यिक प्रतिष्ठान – राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे पेट्रोल पंप, रेस्तरां, ढाबे और विश्राम क्षेत्र स्थापित करने की योजना बना रहे व्यवसाय पोर्टल के माध्यम से आवश्यक अनुमतियों के लिए आवेदन कर सकते हैं।

• अवसंरचना तक पहुंच – उद्योग, आवासीय क्षेत्र और निजी भूस्वामी अपनी संपत्तियों को पास के राष्ट्रीय राजमार्गों से जोड़ने वाली संपर्क सड़कों के लिए अनुमोदन प्राप्त कर सकते हैं।

• मार्गवर्ती सुविधाएं – यह प्लेटफॉर्म विश्राम केंद्रों और विशेष लॉजिस्टिक्स सुविधाओं के विकास के लिए आवेदन का समर्थन करता है जो यात्रियों और माल ढुलाई के लिए सुविधा को बढ़ाते हैं।

• आवश्यक सुविधाओं का विस्तार – राजमार्ग गलियारों के साथ भूमिगत जल पाइपलाइन, गैस पाइपलाइन, ऑप्टिकल फाइबर केबल और बिजली लाइनें बिछाने के लिए भी अनुमति प्राप्त की जा सकती है।

तब और अब: प्रक्रिया में कैसे बदलाव आया है

पहले, आवेदकों को अक्सर कई फील्ड कार्यालयों में जाना पड़ता था, कागजी कार्रवाई पूरी करनी पड़ती थी और लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। इस प्रक्रिया में अक्सर निम्नलिखित शामिल होते थे:

•व्यक्तिगत रूप से कागजी कार्रवाई और फाइलों की आवाजाही
• आवेदनों की स्थिति जानने के लिए सीमित ट्रैकिंग सुविधा, जिसके कारण अक्सर देरी होती है
• खंडित क्षेत्राधिकार प्रबंधन, जहां सही प्राधिकारी की पहचान करने के लिए कभी-कभी अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है और इससे प्रसंस्करण समय बढ़ जाता है

इससे प्रक्रिया समय लेने वाली और कम पारदर्शी हो गई।

नया डिजिटल प्लेटफॉर्म कई महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है:

• रीयल-टाइम ट्रैकिंगआवेदक 24×7 ऑनलाइन अपनी वर्तमान स्थिति देख सकते हैं ।
• समयबद्ध प्रतिक्रियाएं, इससे यह सुनिश्चित होता है कि अनुमोदन या प्रतिक्रिया एक निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रदान की जाए, जिससे अनावश्यक देरी कम होती है।
• पेपरलेस सबमिशन , जहां दस्तावेज़ डिजिटल रूप से अपलोड किए जा सकते हैं और प्रक्रिया शुल्क डिजिटल पेमेंट गेटवे के माध्यम से सुरक्षित रूप से भुगतान किया जा सकता है।
• जवाबदेही सुनिश्चित करने और विवादों के त्वरित समाधान के लिए प्रत्येक कार्रवाई और दस्तावेज़ का पूर्ण ऑडिट ट्रेल।

• सही चेनेज (चेनेज ‘ शब्द का प्रयोग किसी काल्पनिक रेखा, जैसे कि सड़क या रेलवे की केंद्र रेखा, के अनुदिश मीटर में मापी गई दूरी को संदर्भित करने के लिए किया जाता है) और अधिकार क्षेत्र की पहचान करने के लिए जीआईएस-सक्षम ऑटो-डिटेक्शन, डेटा-संचालित निर्णय लेने में सहायता करता है और मैन्युअल त्रुटियों की संभावना को कम करता है।

अपने अनेक लाभों के साथ, उन्नत राजमार्ग प्रवेश ऑनलाइन पोर्टल अब भारत के राजमार्गों के किनारे निर्माण करने वाले सभी लोगों के लिए विचार से लेकर अनुमोदन तक की प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए तैयार है।

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डीआरआई ने ऑपरेशन “व्हाइट हैमर” के तहत आंध्र प्रदेश में अवैध अल्प्राजोलम फैक्ट्री पर छापा

नई दिल्ली – डीआरआई ने ऑपरेशन “व्हाइट हैमर” के तहत आंध्र प्रदेश में अवैध अल्प्राजोलम फैक्ट्री पर छापा मारा; 47 करोड़ रुपये मूल्य की 237 किलोग्राम ड्रग्स और 3.5 टन से अधिक केमिकल जब्त किए गए; दो गिरफ्तार

सिंथेटिक ड्रग्स के अवैध निर्माण पर महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए, राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआई) ने आंध्र प्रदेश के एनटीआर जिले के कोंडापल्ली औद्योगिक विकास क्षेत्र में एनडीपीएस अधिनियम, 1985 के अंतर्गत पंजीकृत मनोरोगी पदार्थ अल्प्राजोलम के उत्पादन में लगी एक गुप्त फैसिलिटी का भंडाफोड़ किया है।

खुफिया जानकारी पर आधारित और सुव्यवस्थित रूप से संचालित ऑपरेशन व्हाइट हैमर नामक अभियान 11 और 12 मार्च 2026 को चलाया गया था, जिसमें एक रासायनिक मैन्युफैक्चरिंग इकाई की आड़ में चल रहे अल्प्राजोलम उत्पादन के एक पूर्ण विकसित औद्योगिक सेटअप का खुलासा हुआ।

परिसर की तलाशी के दौरान 237 किलोग्राम अल्प्राजोलम जब्त किया गया, जिसकी बाजार में अनुमानित कीमत 47 करोड़ रुपये है, साथ ही 800 किलोग्राम से अधिक प्रमुख कच्चा माल, कुल 2,860 लीटर के कई केमिकल और औद्योगिक स्तर के उपकरण जैसे रिएक्टर, ड्रायर और सेंट्रीफ्यूज भी जब्त किए गए, जो एक संगठित, बड़े पैमाने पर गुप्त मैन्युफैक्चरिंग सुविधा का संकेत देते हैं।

शुरुआती जांच में पता चला कि इस ऑपरेशन को रसायन और दवा क्षेत्र में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक केमिस्ट ने अपने सहयोगी के साथ मिलकर अंजाम दिया था। सहयोगी हैदराबाद में कच्चे माल और वितरण का काम करता था। आरोपियों ने अल्प्राजोलम के गुप्त उत्पादन के लिए कारखाने का परिसर किराए पर लिया था। दोनों मुख्य साजिशकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया गया है।

 

मौजूदा वित्त वर्ष के दौरान, डीआरआई ने खुफिया जानकारी पर आधारित अभियानों के माध्यम से आठ गुप्त दवा निर्माण इकाइयों को नष्ट कर दिया है, जो सरकार के नशा मुक्त भारत अभियान के प्रति अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता और समाज और लोगों को मादक और मनोरोगी पदार्थों के खतरे से बचाने के प्रति उसकी प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।

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राँची में जवाहर नवोदय विद्यालय प्रवेश परीक्षा (LEST-XI 2026) के सुचारु एवं शांतिपूर्ण संचालन हेतु 200 मीटर परिधि में निषेधाज्ञा जारी

जवाहर नवोदय विद्यालय प्रवेश परीक्षा, 2026 (LEST-XI 2026)  15 मार्च 2026 को राँची के एक उप-केन्द्र पर आयोजित की जा रही है

 15 मार्च 2026 को प्रातः 6:00 बजे से अपराह्न 8:00 बजे तक निषेधाज्ञा प्रभावी रहेगी

यह निषेधाज्ञा परीक्षा के सुचारु संचालन, छात्रों की सुरक्षा एवं सार्वजनिक शांति बनाए रखने के उद्देश्य से जारी की गई है। उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध BNSS की संबंधित धाराओं के अंतर्गत सख्त कार्रवाई की जाएगी

राँची,14.03.2026 – अनुमंडल दंडाधिकारी, सदर, राँची द्वारा जारी आदेश के अनुसार, जवाहर नवोदय विद्यालय, मेसरा, राँची में कक्षा 11वीं में नामांकन के लिए आयोजित जवाहर नवोदय विद्यालय प्रवेश परीक्षा, 2026 (LEST-XI 2026) दिनांक 15 मार्च 2026 को राँची के एक उप-केन्द्र पर आयोजित की जा रही है।

परीक्षा केन्द्र: Marwari Plus 2 High School, Shaheed Chowk, Ranchi

प्राचार्य, पी.एम. श्री स्कूल, जवाहर नवोदय विद्यालय के पत्रांक-2178, दिनांक 11.01.2026 से प्राप्त सूचना के आधार पर यह परीक्षा निर्धारित है। परीक्षा के दौरान कदाचारमुक्त वातावरण सुनिश्चित करने एवं विधि-व्यवस्था बनाए रखने हेतु उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री एवं अपर जिला दंडाधिकारी, विधि-व्यवस्था, राँची के आदेश ज्ञापांक-451/वि.व्य., दिनांक 14.03.2026 द्वारा पुलिस बल एवं दंडाधिकारी की प्रतिनियुक्ति की गई है।

हालांकि, ऐसी आशंका व्यक्त की गई है कि परीक्षा में शामिल छात्रों, उनके अभिभावकों या असामाजिक तत्वों द्वारा परीक्षा केन्द्र पर भीड़ जमा कर विधि-व्यवस्था भंग करने का प्रयास किया जा सकता है।

इस संदर्भ में, अनुमंडल दंडाधिकारी, सदर, राँची, श्री कुमार रजत ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा-163 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए परीक्षा केन्द्र के 200 मीटर की परिधि में निम्नलिखित निषेधाज्ञा जारी की है, जो *दिनांक 15 मार्च 2026 को प्रातः 6:00 बजे से अपराह्न 8:00 बजे तक प्रभावी रहेगी:

1. पाँच या पाँच से अधिक व्यक्तियों का एक जगह जमा होना (सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों/कर्मचारियों तथा सरकारी कार्यक्रम एवं शवयात्रा को छोड़कर) निषिद्ध।

2. किसी प्रकार के ध्वनि विस्तारक यंत्र (लाउडस्पीकर, माइक आदि) का उपयोग करना निषिद्ध।

3. किसी प्रकार के अस्त्र-शस्त्र (बंदूक, राइफल, रिवॉल्वर, बम, बारूद आदि) लेकर चलना निषिद्ध (सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों/कर्मचारियों को छोड़कर)।

4. किसी प्रकार के हरवे हथियार (लाठी-डंडा, तीर-धनुष, गड़ासा-भाला आदि) लेकर चलना निषिद्ध (सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों/कर्मचारियों को छोड़कर)।

5. किसी प्रकार की बैठक या आमसभा का आयोजन निषिद्ध।

यह निषेधाज्ञा परीक्षा के सुचारु संचालन, छात्रों की सुरक्षा एवं सार्वजनिक शांति बनाए रखने के उद्देश्य से जारी की गई है। उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध BNSS की संबंधित धाराओं के अंतर्गत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सभी अभिभावकों, छात्रों एवं आम नागरिकों से अपील है कि वे परीक्षा केन्द्र के आसपास अनावश्यक भीड़ न लगाएँ तथा प्रशासन का पूर्ण सहयोग करें ताकि परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।

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राँची जिला में भारत की जनगणना 2027 के प्रथम चरण (मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना) के लिए त्रिदिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक सम्पन्न

प्रशिक्षण के दौरान जनगणना 2027 के विभिन्न चरणों, कार्यप्रणाली, डिजिटल उपकरणों (जैसे House Listing Operation Mobile App) के उपयोग तथा CMMS Web Portal पर डाटा प्रबंधन, रीयल-टाइम अपलोड, सत्यापन एवं सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर गहन चर्चा की गई

जनगणना 2027 दो चरणों में आयोजित होगी

यह जनगणना भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें स्व-गणना की सुविधा उपलब्ध होगी

कार्यक्रम का प्रारंभ उपायुक्त-सह-प्रधान जनगणना पदाधिकारी, श्री मंजूनाथ भजंत्री द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर की गई, इस अवसर पर उन्होंने कहा कि जनगणना किसी भी देश के विकास के लिए योजनाओं एवं नीतियों के निर्माण करने के लिए अति महत्वपूर्ण है

रांची,14.03.2026 – भारत की आगामी जनगणना 2027 की तैयारियों के अंतर्गत राँची जिला में प्रथम चरण – मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना – से जुड़े महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन राँची समाहरणालय, ब्लॉक-बी, कमरा संख्या 505 में दिनांक 12 मार्च 2026 से 14 मार्च 2026 तक किया गया। इस तीन दिवसीय प्रशिक्षण का आज अपराह्न में सफल समापन हुआ।

यह प्रशिक्षण जनगणना कार्य निदेशालय, राँची से आए विशेष प्रशिक्षकों श्री केश्या नायक आर., उप निदेशक तथा श्री संजीव कुमार मांझी, जिला नोडल (जनगणना) द्वारा संचालित किया गया। प्रशिक्षकों ने प्रतिभागियों को व्यावहारिक उदाहरणों, वेब पोर्टल तथा मोबाइल ऐप के माध्यम से मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना की समस्त प्रक्रियाओं का विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान किया। साथ ही, स्व-जनगणना (Self-Enumeration) की सुविधा के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई, जो इस जनगणना की एक प्रमुख विशेषता है।

प्रशिक्षण के दौरान जनगणना 2027 के विभिन्न चरणों, कार्यप्रणाली, डिजिटल उपकरणों (जैसे House Listing Operation Mobile App) के उपयोग तथा CMMS Web Portal पर डाटा प्रबंधन, रीयल-टाइम अपलोड, सत्यापन एवं सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर गहन चर्चा की गई। यह जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी, जिसमें टैबलेट/मोबाइल आधारित ऐप के जरिए डेटा संग्रहण किया जाएगा, ताकि सटीकता, गति और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

कार्यक्रम में श्री रामनारायण सिंह, अपर समाहर्ता, राँची, श्री सुदर्शन मुर्मू, अपर समाहर्ता (नक्सल), श्री कुमार रजत, अनुमंडल पदाधिकारी, सदर राँची, श्री किस्टो कुमार बेसरा, अनुमंडल पदाधिकारी, बुण्डू,श्री संजय भगत, परियोजना निदेशक, आई०टी०डी०ए०, श्री शेषनाथ बैठा, जिला सांख्यिकी पदाधिकारी, श्रीमती मनीषा तिर्की, कार्यपालक दण्डाधिकारी, श्री रविशंकर मिश्रा, सहायक निदेशक-सह-मास्टर ट्रेनर,
तथा सभी संबंधित सांख्यिकी कर्मी, सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी (राँची) एवं सम्बंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।

प्रशिक्षण के समापन पर श्री शेषनाथ बैठा, जिला सांख्यिकी पदाधिकारी, राँची द्वारा सभी प्रतिभागियों, प्रशिक्षकों एवं उपस्थित अधिकारियों को धन्यवाद ज्ञापित किया गया। उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण जिला स्तर पर जनगणना की तैयारियों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण कदम है।

जनगणना 2027 दो चरणों में आयोजित होगी:

– प्रथम चरण: मकान सूचीकरण एवं आवास जनगणना (House Listing and Housing Census) – अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच (राज्यों द्वारा निर्धारित 30-दिवसीय अवधि में)

– द्वितीय चरण: जनसंख्या गणना (Population Enumeration) – फरवरी 2027 में (संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027)

यह जनगणना भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें स्व-गणना की सुविधा उपलब्ध होगी। प्रशिक्षण प्राप्त अधिकारी अब अपने-अपने क्षेत्रों में फील्ड कार्य के लिए तैयार हैं, जो आगामी अप्रैल 2026 से शुरू होने वाले प्रथम चरण को सुचारू रूप से क्रियान्वित करने में सहायक सिद्ध होंगे।

जिला प्रशासन ने सभी प्रतिभागियों से अपील की है कि वे प्राप्त ज्ञान का उपयोग कर जनगणना प्रक्रिया को पारदर्शी, सटीक और समयबद्ध बनाएं, ताकि देश के विकास योजनाओं के लिए विश्वसनीय आंकड़े उपलब्ध हो सकें।

जानकारी हो की कार्यक्रम का प्रारंभ उपायुक्त-सह-प्रधान जनगणना पदाधिकारी, श्री मंजूनाथ भजंत्री द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर की गई, इस अवसर पर उन्होंने कहा कि जनगणना किसी भी देश के विकास के लिए योजनाओं एवं नीतियों के निर्माण करने के लिए अति महत्वपूर्ण है।

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मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के तहत, आंगनवाड़ी केन्‍द्रों पर बुनियादी ढांचा सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए विभिन्न कदम उठाए गए

नई दिल्ली – मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के तहत, आंगनवाड़ी केन्‍द्रों (एडब्‍ल्‍यूसी) में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए अनेक कदम उठाए गए हैं। 15वें वित्त आयोग के चक्र के दौरान, मनरेगा के साथ तालमेल बिठाते हुए 50,000 आंगनवाड़ी केन्‍द्रों का निर्माण किया जा रहा है (हर साल 10,000 केन्‍द्र)। इसमें मनरेगा के तहत 8.00 लाख रुपये, 15वें वित्त आयोग (एफसी) (या किसी अन्य बिना शर्त वाले फंड) के तहत 2.00 लाख रुपये, और एमडब्‍ल्‍यूसीडी द्वारा प्रति केन्‍द्र 2.00 लाख रुपये दिए जाते हैं; यह राशि केन्‍द्र और राज्यों/केन्‍द्र शासित प्रदेशों के बीच तय लागत-बंटवारे के अनुपात में साझा की जाती है।

इसके अलावा, राज्यों/केन्‍द्र शासित प्रदेशों को यह भी सलाह दी गई है कि वे आंगनवाड़ी केन्‍द्रों की इमारतों के निर्माण के लिए विभिन्न योजनाओं, जैसे कि सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एमपीलैड), ग्रामीण बुनियादी ढांचा विकास कोष (आरआईडीएफ), पंचायती राज संस्थाओं के लिए वित्त आयोग के अनुदान, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के बहु-क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम (एमएसडीपी) आदि से फंड लेना जारी रखें।

आदिवासी आबादी के लक्षित विकास के लिए पीएम जनमन और ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ के तहत, तथा उत्तरी सीमावर्ती क्षेत्रों पर केन्‍द्रित ‘वीवीपी (वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम) – चरण I’ के अंतर्गत, आंगनवाड़ी केन्‍द्रों (एडब्‍ल्‍यूसी) के निर्माण के लिए कई अन्य पहलें की गई हैं।

इसके अलावा, आंगनवाड़ी केन्‍द्रों पर बुनियादी ढांचा सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए मंत्रालय द्वारा कई कदम उठाए गए हैं; इनमें अन्य बातों के साथ-साथ, आंगनवाड़ी केन्‍द्रों में पीने के पानी की सुविधाओं और शौचालयों के लिए मिलने वाली धनराशि को क्रमशः 10,000 रुपये से बढ़ाकर 17,000 रुपये और 12,000 रुपये से बढ़ाकर 36,000 रुपये करना शामिल है।

‘मिशन पोषण 2.0’ के तहत, 15वें वित्त आयोग के चक्र में, सरकारी भवनों में स्थित दो लाख आंगनवाड़ी केन्‍द्रों (प्रति वर्ष 40,000 की दर से) को बेहतर पोषण प्रदान करने और ‘प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा’ (ईसीसीई) के लिए ‘सक्षम आंगनवाड़ी’ के रूप में सुदृढ़ किया जा रहा है। पारंपरिक आंगनवाड़ी केन्‍द्रों की तुलना में सक्षम आंगनवाड़ियों को बेहतर बुनियादी ढांचा प्रदान किया जाता है, जिसमें एलईडी स्क्रीन, जल-छनन प्रणाली, ‘पोषण वाटिका’, र्ईसीसीई सामग्री और ‘बिल्डिंग एज़ लर्निंग एड’ (बीएएलए) पेंटिंग्स शामिल हैं।

शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग के साथ मिलकर, ईसीसीई और बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान (एफएलएन) सेवाओं को मज़बूत करने के लिए, सरकारी प्राथमिक स्कूलों के परिसर में ही आंगनवाड़ी केन्‍द्रों (एडब्‍ल्‍यूसी) को स्थापित करने के संबंध में दिशानिर्देश 3 सितम्‍बर, 2025 को संयुक्त रूप से जारी किए गए हैं। जिन स्थानों पर भौतिक रूप से एक ही परिसर में स्थापित करना संभव नहीं है, वहाँ आंगनवाड़ी केन्‍द्रों को निकटतम प्राथमिक स्कूल के साथ जोड़ा जाएगा।

ख. मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 एक केन्‍द्र प्रायोजित योजना है। इस योजना का कार्यान्वयन राज्य सरकारों और केन्‍द्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों के दायरे में आता है। कार्यरत आंगनवाड़ी केन्‍द्रों का राज्य और केन्‍द्र शासित प्रदेश-वार विवरण, साथ ही उनमें नामांकित लाभार्थियों की संख्या, इस लिंक पर उपलब्ध है: https://www.poshantracker.in/statistics

(ग) आँगनवाड़ी केन्‍द्रों (एडब्‍ल्‍यूसी), आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और लाभार्थियों की निर्धारित संकेतकों पर निगरानी और ट्रैकिंग की सुविधा के लिए पोषण ट्रैकर एप्लिकेशन को एक महत्वपूर्ण शासन उपकरण के रूप में लागू किया गया है। बच्चों में स्टंटिंग (नाटापन), वेस्टिंग (दुबलापन) और कम वजन की व्यापकता की गतिशील पहचान के लिए पोषण ट्रैकर की तकनीक का लाभ उठाया जा रहा है। इसने आँगनवाड़ी सेवाओं जैसे—केन्‍द्रों का खुलना, बच्चों की दैनिक उपस्थिति, ईसीसीई गतिविधियाँ, बच्चों की वृद्धि निगरानी, गर्म पका हुआ भोजन और टेक होम राशन का प्रावधान आदि के लिए वास्तविक समय के करीब डेटा संग्रह की सुविधा प्रदान की है।

सेवा वितरण की अंतिम छोर तक ट्रैकिंग के लिए, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने टेक-होम राशन के वितरण के लिए चेहरा पहचान प्रणाली विकसित की है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि लाभ केवल पोषण ट्रैकर में पंजीकृत लक्षित लाभार्थी को ही उनकी पहचान स्थापित होने के बाद दिया जाए।

‘सक्षम आँगनवाड़ी और मिशन पोषण 2.0’ के तहत सभी गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और किशोरियों को टेक-होम राशन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पोषण ट्रैकर में ‘नॉमिनी मॉड्यूल’ शुरू किया गया है। यदि किसी कारणवश पंजीकृत लाभार्थी (गर्भवती महिला, स्तनपान कराने वाली माता और किशोरी) एफआरएस के माध्यम से अपना टीएचआर प्राप्त करने के लिए आँगनवाड़ी केन्‍द्र जाने में असमर्थ है, तो वह अपनी ओर से टीएचआर प्राप्त करने के लिए एक नामांकित व्यक्ति को नामित कर सकती है। नामांकित व्यक्ति को केवल एक बार ई-केवाईसी करानी होगी। लेकिन लाभार्थी की ओर से टीएचआर प्राप्त करने के लिए हर बार चेहरा मिलान किया जाएगा। नॉमिनी जोड़ने के बाद भी, यदि नॉमिनी ने राशन प्राप्त नहीं किया है, तो लाभार्थी स्वयं आँगनवाड़ी केंद्र पर जाकर टीएचआर प्राप्त कर सकती है।

यह जानकारी महिला एवं बाल विकास केंद्रीय मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में दी।

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केंद्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया मध्य प्रदेश के गुना जिले के उमरी गांव में फिजीटल सेवाओं के लिए प्रायोगिक परियोजना ‘समृद्ध ग्राम’ का उद्घाटन करेंगे

नई दिल्ली – केंद्रीय संचार और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एमसिंधिया, 14 मार्च को मध्य प्रदेश के गुना जिले के उमरी गांव में समृद्धि केंद्र का उद्घाटन करेंगे। यह केंद्र एकीकृत फिजीटल (भौतिक + डिजिटल) सेवा केंद्र है, जिसे दूरसंचार विभाग की समृद्ध ग्राम फिजीटल सेवा प्रायोगिक पहल के अंतर्गत स्थापित किया गया है।

केंद्रीय मंत्री इस अवसर पर प्रमुख सेवाओं के प्रदर्शन की समीक्षा भी करेंगे; स्थानीय लाभार्थियों से बातचीत करेंगे; और स्वास्थ्य जांच तथा मोतियाबिंद जागरूकता अभियान का उद्घाटन करेंगे। इसके अलावा, वे इस अवसर पर जनसभा को भी संबोधित करेंगे।

इस पहल का उद्देश्य यह दिखाना है कि ‘भारतनेट’ के अंतर्गत निर्मित उच्च-गति वाले डिजिटल बुनियादी ढांचे का उपयोग किस प्रकार गांव-स्तर पर नागरिकों को एकीकृत सेवाएं प्रदान करने के लिए किया जा सकता है। गौरतलब है कि भारतनेट दुनिया के सबसे बड़े ग्रामीण ब्रॉडबैंड कार्यक्रमों में से एक है।

उमरी गांव में शुरू की गई ‘समृद्ध ग्राम प्रायोगिक परियोजना’ यह दर्शाती है कि किस प्रकार एकीकृत सेवाएं ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक विकास को गति प्रदान कर सकती हैं। ये सेवाएं ‘समृद्धि केंद्र’ के माध्यम से उपलब्ध कराई जाती हैं, जो पंचायत भवन में स्थित ‘वन-स्टॉप हब’ (एक ही जगह पर सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने वाला केंद्र) है। यह केंद्र कई क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार की सेवाएं प्रदान करता है, जिनमें शामिल हैं: शिक्षा और कौशल विकास, कृषि, स्वास्थ्य और टेलीमेडिसिन, ई-गवर्नेंस, वित्तीय समावेशन तथा ई-कॉमर्स, कनेक्टिविटी एवं डिजिटल पहुंच, तथा निगरानी और सुरक्षा।

उमरी बड़ी प्रायोगिक परियोजना का हिस्सा है, जिसमें दो और गाँव शामिल हैं – गुंटूर ज़िले (आंध्र प्रदेशका नारकोदुरु और मुज़फ़्फ़रनगर ज़िले (उत्तर प्रदेश) का चौरवाला। ये गाँव अलग-अलग तरह की आबादी वाले हैं – हर समृद्धि केंद्र अपने आस-पास के 5 किलोमीटर के दायरे में आने वाले कई गाँवों को सेवाएँ देता है।

इस परियोजना को दूरसंचार विभाग, डिजिटल सशक्तिकरण प्रतिष्ठान (डीईएफ) के सहयोग से लागू कर रहा है। डीईएफ इस परियोजना में ज़मीनी स्तर पर काम करने और लोगों को जोड़ने वाले साझेदार की भूमिका निभा रहा है।

‘समृद्ध ग्राम फ़िजिटल सर्विसेज़ पायलट’ से यह सीखने को मिलने की उम्मीद है कि BharatNet कनेक्टिविटी का इस्तेमाल करके, सेवाओं को एक साथ पहुँचाने वाले मॉडल कैसे बनाए जा सकते हैं।

इस परियोजना का उद्देश्य ऐसा मॉडल तैयार करना है जिसे दोहराया जा सके। इस मॉडल के ज़रिए कनेक्टिविटी, सेवा पहुँचाने वाले प्लेटफ़ॉर्म और लोगों की भागीदारी को एक साथ लाकर, गाँवों में डिजिटल सेवाओं की संपूर्ण प्रणाली को मज़बूत बनाया जाएगा।

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जनजातियों हेतु थारुहट क्षेत्र का विकास

नई दिल्ली – केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके ने लोकसभा को सूचित किया कि माननीय प्रधानमंत्री द्वारा 2 अक्टूबर, 2024 को शुरू किए गए धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (डीएजेजीयूए) का लक्ष्य 30 राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों के 549 जिलों और 2,911 प्रखंडों (ब्लॉकों) में 63,843 गांवों के जनजातीय लोगों के लिए अवसंरचनात्मक अंतरों को संतृप्त करना, स्वास्थ्य, शिक्षा, आंगनवाड़ी सुविधाओं, सड़कें, पेयजल, बिजली तक बेहतर पहुंच और आजीविका के अवसर प्रदान करना है।

(ख) धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (डीएजेजीयूए) की अवधि 2 अक्टूबर, 2024 से 31 मार्च, 2029 तक है। इस अभियान में 17 मंत्रालयों के 25 उपाय एकीकृत (शामिल) हैं। प्रमुख बहु-क्षेत्रीय उपायों में निम्नलिखित शामिल हैंः

क्र.

सं.

मंत्रालय गतिविधि मिशन लक्ष्य (2024-2028)
1 ग्रामीण विकास मंत्रालय

(एमओआरडी)

प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) – ग्रामीण (ग्रामीण विकास मंत्रालय) 20 लाख पक्के मकान
2 प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना पीएमजीएसवाई – (ग्रामीण विकास मंत्रालय) 25000 कि.मीसड़क
3 जल शक्ति मंत्रालय जल जीवन मिशन (जेजेएम) हर पात्र गांव/बस्ती ~ 63000 गांव
4 विद्युत मंत्रालय नवस्वरूपित वितरण क्षेत्र योजना – आरडीएसएस प्रत्येक अविद्युतीकृत आवास और असंबद्ध सार्वजनिक संस्थान (~2.35 लाख)
5 नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय नई सौर ऊर्जा योजना- पीएम सूर्य प्रत्येक अविद्युतीकृत आवास और सार्वजनिक संस्थान जो ग्रिड के अंतर्गत नहीं आते हैं
6 स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय पीएम आयुष्‍मान भारत स्‍वास्‍थ्‍य अवसंरचना मिशनपीएम अभिम (एबीएचआईएम) 1000 एमएमयू
7 महिला एवं बाल विकास मंत्रालय आंगनवाड़ी केंद्र- पोषण 2.0 (आईसीडीएस) 8000 सक्षम आंगनवाड़ी केन्द्र (2000 नये आंगनवाड़ी केन्द्र और 6000 का उन्नयन)
8 स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग, शिक्षा मंत्रालय समग्र शिक्षा अभियान (एसएसए) 1000 छात्रावास
9 आयुष मंत्रालय राष्ट्रीय आयुष मिशन ईएमआरएस में 700 पोषण वाटिकाएं
10 संचार मंत्रालय सार्वभौमिक सेवा दायित्व निधि (यूएसओएफ) 5252 गांव
11 पर्यटन मंत्रालय उत्तरदायी पर्यटन (स्वदेश दर्शन) 1000 गृह प्रवास (होम स्टे)
12 कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय जन शिक्षण संस्थान (जेएसएस) योजना (i) जनजातीय जिलों में कौशल केंद्र (ii) 1000 वन धन विकास केंद्रों और जनजातीय समूहों का प्रशिक्षण
13 कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) एफआरए पट्टाधारकों को सतत कृषि सहायता (~ 2 लाख)
14 मत्स्य पालन विभाग प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) जनजातीय मछुआरों को सहायता10,000 आईएफआर और 1000 सीएफआर
15 पशुपालन और डेयरी विभाग राष्ट्रीय पशुधन मिशन 8500 आईएफआर धारकों को पशुधन प्रबंधन सहायता
16 पंचायती राज मंत्रालय क्षमता निर्माण –

राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आरजीएसए)

एफआरए से संबंधित कार्य करने वाले उप-मंडल, जिला और राज्य स्तर की सभी ग्राम सभाएं और संबंधित अधिकारी
17 जनजातीय कार्य मंत्रालय पीएमएएजीवाई/टीडी को एससीए 100 टीएमएमसी – बहुउद्देशीय विपणन केंद्र
जनजातियों के लिए आश्रम विद्यालयों/सरकारी विद्यालयों और छात्रावासों का उन्नयन
एफआरए दावा समर्थन
17 राज्यों में सिकल सेल रोग के लिए सीओसी

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निजी विद्यालयों की प्रारंभिक कक्षाओं (Entry Level Classes) में 25% आरक्षित सीटों पर नामांकन की प्रक्रिया प्रारम्भ

रांची जिले में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009 के अंतर्गत कमजोर एवं अभिवंचित वर्ग (Disadvantaged Groups & Weaker Sections) के बच्चों के लिए मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों की प्रारंभिक कक्षाओं (Entry Level Classes) में 25% आरक्षित सीटों पर नामांकन की प्रक्रिया चल रही है

उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी रांची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देश पर आवेदनों को ऑनलाइन जमा करने की अंतिम तिथि एक सप्ताह बढ़ाकर 22 मार्च 2026 निर्धारित की गई

सभी योग्य एवं पात्र अभिभावक 22 मार्च 2026 तक आवश्यक रूप से अपना आवेदन *rteranchi.in पोर्टल पर जमा करें

*हेल्पलाइन:
किसी भी असुविधा या तकनीकी समस्या होने पर निम्न नंबरों पर संपर्क करें :
– 9304240308 (WhatsApp only)
– 8757221429

रांची,14.03.2026 – रांची जिले में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009 के अंतर्गत कमजोर एवं अभिवंचित वर्ग (Disadvantaged Groups & Weaker Sections) के बच्चों के लिए मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों की प्रारंभिक कक्षाओं (Entry Level Classes) में 25% आरक्षित सीटों पर नामांकन हेतु आवेदन लिया जा रहा है ।

आवेदन प्रक्रिया: ऑनलाइन पोर्टल rteranchi.in* के माध्यम से आवेदन आमंत्रित किए गए है।
*मूल अंतिम तिथि: 15 मार्च 2026।

* प्राप्त आवेदन: अभी तक लगभग 900 आवेदन प्राप्त हुए हैं।

*अंतिम तिथि में विस्तार: अभिभावकों के अनुरोध पर उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी रांची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री * के निर्देश पर आवेदनों को ऑनलाइन जमा करने की अंतिम तिथि *एक सप्ताह बढ़ाकर 22 मार्च 2026 निर्धारित कर दी है।

सभी योग्य एवं पात्र अभिभावक 22 मार्च 2026 तक आवश्यक रूप से अपना आवेदन rteranchi.in पोर्टल पर जमा करें। यह सुनिश्चित करें कि सभी आवश्यक दस्तावेज़ (जैसे आय प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण, जन्म प्रमाण पत्र आदि) अपलोड कर दिए जाएं।

*हेल्पलाइन:
किसी भी असुविधा या तकनीकी समस्या होने पर निम्न नंबरों पर संपर्क करें।
*9304240308 (WhatsApp only)
*8757221429

यह निर्णय समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने और अधिक से अधिक पात्र बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। जल्द से जल्द आवेदन पूरा करें, क्योंकि सीटें सीमित हैं (रांची जिले में सत्र 2026-27 के लिए कुल 1161 आरक्षित सीटें घोषित की गई हैं)। अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक पोर्टल www.rteranchi.in पर जाएं।

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आगामी रामनवमी पर्व की तैयारियों एवं शांति व्यवस्था को लेकर DC Ranchi श्री मंजूनाथ भजन्त्री से श्री महावीर मंडल एवं रामनवमी श्रृंगार समिति के सदस्यों ने मुलाकात की

आगामी रामनवमी पर्व को लेकर विस्तृत चर्चा की गई

जिला प्रशासन पर्व को पूरी तरह शांतिपूर्ण, सुव्यवस्थित एवं सफल बनाने के लिए हरसंभव सहयोग करेगा

महावीर मंडल एवं रामनवमी श्रृंगार समिति के सदस्यों ने उपायुक्त के सहयोगात्मक दृष्टिकोण की सराहना की और आभार व्यक्त किया

रांची,14.03.2026 – उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री से आज श्री महावीर मंडल, राँची एवं रामनवमी श्रृंगार समिति, केंद्रीय शांति समिति के प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की। मुलाकात के दौरान आगामी रामनवमी पर्व को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।

प्रतिनिधिमंडल ने पर्व के दौरान शहर में निकलने वाली विभिन्न शोभायात्राओं, झांकी प्रदर्शन, झंडा पूजन, महाआरती एवं अन्य धार्मिक आयोजनों की रूपरेखा से उपायुक्त को अवगत कराया।

साथ ही, शहर के विभिन्न इलाकों में शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने, ट्रैफिक व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा के दृष्टिकोण से आवश्यक सहयोग एवं समन्वय की अपील की। प्रतिनिधिमंडल में शामिल सदस्यों ने पर्व को भव्य एवं सुरक्षित बनाने के लिए जिला प्रशासन के साथ मिलकर कार्य करने की इच्छा जताई।

उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने मुलाकात का स्वागत करते हुए कहा कि रामनवमी जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व राँची शहर की सांस्कृतिक धरोहर एवं सामाजिक एकता का प्रतीक हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि जिला प्रशासन पर्व को पूरी तरह शांतिपूर्ण, सुव्यवस्थित एवं सफल बनाने के लिए हरसंभव सहयोग करेगा।

उन्होंने निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर जोर दिया:

* सभी शोभायात्राओं एवं आयोजनों के मार्ग, समय एवं संख्या की पूर्व सूचना संबंधित थाना एवं अनुमंडल पदाधिकारी को उपलब्ध कराई जाए।

*केंद्रीय शांति समिति एवं स्थानीय शांति समितियों के साथ निरंतर समन्वय स्थापित किया जाए।

* विधि-व्यवस्था, ट्रैफिक एवं अग्निशमन विभाग को अलर्ट मोड पर रखा जाएगा।

* किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से बचने हेतु पूर्व में ही संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर आवश्यक बल तैनात किया जाएगा।

* सभी पक्षों से अपील की गई कि पर्व का उत्सव उत्साहपूर्ण हो, किंतु किसी भी प्रकार की उत्तेजक टिप्पणी, ध्वनि प्रदूषण या नियमों का उल्लंघन न हो।

इस दौरान नव निर्वाचित अध्यक्ष रांची महावीर मंडल सागर वर्मा, श्री जय सिंह यादव, सागर कुमार, उदय रविदास, मयंक गिरी, बब्लु यादव,
नीलेश यादव, शंकर सिन्हा,अजय वर्मा, रिंकू वर्मा, रविंदर वर्मा एवं महावीर मंडल एवं रामनवमी श्रृंगार समिति के सदस्य मौजूद थे।

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रांची जिला प्रशासन द्वारा घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु महत्वपूर्ण कदम

रांची जिले में हाल के दिनों में घरेलू एलपीजी (रसोई गैस) सिलेंडरों की उपलब्धता को लेकर उत्पन्न हुई कुछ असुविधाओं एवं उपभोक्ताओं की शिकायतों पर गंभीर संज्ञान लेते हुए बैठक

उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में बैठक

सभी संबंधित तेल विपणन कंपनियों, गैस एजेंसियों एवं आपूर्ति विभाग को निर्देश जारी किए गए

PNG कनेक्शन इच्छुक ग्राहक टोल-फ्री नंबर 1800-123-121111 पर संपर्क करके कनेक्शन प्रक्रिया शुरू करवा सकते हैं

एलपीजी सिलेंडरों की ब्लैक मार्केटिंग, कालाबाजारी या अवैध भंडारण करने वालों की शिकायत अबुआ साथी हेल्पलाइन नंबर 9430328080पर दे सकते हैं

13.03.2026 – रांची जिले में हाल के दिनों में घरेलू एलपीजी (रसोई गैस) सिलेंडरों की उपलब्धता को लेकर उत्पन्न हुई कुछ असुविधाओं एवं उपभोक्ताओं की शिकायतों पर गंभीर संज्ञान लेते हुए उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने आज देर शाम एक गहन समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।

इस बैठक में उप विकास आयुक्त रांची, श्री सौरभ भुवनिया, अनुमंडल पदाधिकारी सदर रांची, श्री कुमार रजत, अपर जिला दंडाधिकारी रांची, श्री राजेश्वर नाथ आलोक, विशिष्ट अनुभाजन पदाधिकारी रांची, श्रीमती मोनी कुमारी, जिला आपूर्ति पदाधिकारी रांची, श्री रामगोपाल पाण्डेय एवं इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL – इंडेन), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL – एचपी गैस), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL – भारत गैस), GAIL तथा जिला आपूर्ति विभाग के वरिष्ठ पदाधिकारी एवं प्रतिनिधि विशेष रूप से उपस्थित रहे। बैठक का मुख्य उद्देश्य रांची जिले में घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा करना, उपभोक्ताओं को होने वाली किसी भी प्रकार की परेशानी को तत्काल दूर करना तथा भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न न होने देने के लिए ठोस कदम उठाना था।

उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने बैठक को संबोधित करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि गैस ग्राहकों को कम से कम असुविधा हो। उन्होंने सभी संबंधित तेल विपणन कंपनियों, गैस एजेंसियों एवं आपूर्ति विभाग को निम्नलिखित प्रमुख निर्देश जारी किए:

एलपीजी सिलेंडरों की ब्लैक मार्केटिंग, कालाबाजारी या अवैध भंडारण करने वालों के विरुद्ध सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी। ऐसी किसी भी गतिविधि की सूचना मिलने पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उपभोक्ता ऐसी जानकारी अबुआ साथी हेल्पलाइन नंबर 9430328080 पर दे सकते हैं।

(आपातकालीन स्थिति में उपभोक्ता 5 किलोग्राम के छोटे सिलेंडर प्राप्त कर सकते हैं, जो बाजार में पर्याप्त मात्रा में HPCL एवं BPCL के पास उपलब्ध हैं। आधार कार्ड दिखाकर इन्हें आसानी से प्राप्त किया जा सकता है।

जिन अपार्टमेंट्स/क्षेत्रों में पाइपलाइन गैस की सुविधा उपलब्ध है, वहां के निवासी टोल-फ्री नंबर 18001231211 पर संपर्क कर कनेक्शन प्राप्त कर सकते हैं। रांची में वर्तमान में 24,000 से अधिक घरों में यह सुविधा उपलब्ध है।

उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि वे पैनिक न करें तथा अनावश्यक रूप से अधिक बुकिंग न करें, क्योंकि इससे सॉफ्टवेयर पर अतिरिक्त भार पड़ सकता है। कंपनियां बता रही हैं कि घरेलू गैस की पर्याप्त आपूर्ति है तथा स्थिति सामान्य है।

उपायुक्त ने बैठक में उपस्थित सभी पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे जनता के साथ बेहतर संवाद स्थापित करें, हेल्पलाइन सेवाओं को मजबूत बनाएं तथा किसी भी शिकायत पर त्वरित प्रतिक्रिया दें। जिला प्रशासन प्रतिबद्ध है कि रांची जिले में एलपीजी सिलेंडरों की उपलब्धता एवं वितरण व्यवस्था सुचारू रूप से चले तथा आमजन को कम से कम असुविधा हो।

GAIL (India) Limited द्वारा संचालित सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) प्रोजेक्ट के तहत रांची में Piped Natural Gas (PNG) की पहुंच तेजी से बढ़ रही है। वर्तमान में शहर के 24,000 से अधिक घरों में PNG पाइपलाइन कनेक्शन स्थापित हो चुका है।
जिन अपार्टमेंट्स/सोसायटीज में पहले से PNG पाइपलाइन नेटवर्क उपलब्ध है, वहाँ रहने वाले निवासी आसानी से अपने फ्लैट/घर के लिए नया PNG कनेक्शन प्राप्त कर सकते हैं। GAIL के पदाधिकारियों ने बैठक में बताया कि इच्छुक ग्राहक टोल-फ्री नंबर 1800-123-121111 पर संपर्क करके कनेक्शन प्रक्रिया शुरू करवा सकते हैं।

झलक इण्डेन, डोरंडा के सभी उपभोक्ताओं रिफिल बुकिंग से संबंधित किसी भी जानकारी के लिए कृपया निम्नलिखित नंबरों पर कॉल/WhatsApp करें
📞 6204801046
📞 6204801051

मैन्युअल बुकिंग के लिए जारी मोबाइल नंबर इस प्रकार हैं—

(1) Sk Gas सर्विस
बारियातु
7033632177
8809313177

(2) वैष्णवी इंडियन गैस एजेंसी धुर्वा
9430329616

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अदालती अभिलेखों के 660.36 करोड़ से अधिक पृष्ठों का डिजिटलीकरण किया जा चुका है

नई दिल्ली – सरकार ने न्यायपालिका द्वारा मामलों के त्वरित निपटान के लिए एक अनुकूल वातावरण प्रदान करने हेतु कई पहलें की हैं। इन पहलों में अन्य बातों के अलावा, ई-कोर्ट मिशन मोड परियोजना के तहत न्याय की सुलभता बढ़ाने और अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु  नवीनतम प्रौद्योगिकियों का एकीकरण शामिल है। इनमें न्यायपालिका के लिए अवसंरचना संबंधी सुविधाओं के विकास हेतु केन्द्र प्रायोजित योजना के तहत जिला एवं अधीनस्थ न्यायपालिका को उपयुक्त अवसंरचना संबंधी सुविधाएं प्रदान करने हेतु राज्य सरकारों/केन्द्र-  शासित प्रदेशों के संसाधनों की आपूर्ति भी शामिल है।

ई-कोर्ट मिशन मोड परियोजना के तहत डिजिटल न्याय प्रणाली ने न्यायिक प्रक्रियाओं को त्वरित एवं सरल बनाया है और न्याय प्रदान करने वाली प्रणाली में पारदर्शिता एवं सुलभता को भी बेहतर बनाया है। विवरण इस प्रकार हैं:

प्रथम चरण, जिसकी शुरुआत 2011 में 935 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ हुई थी, मुख्य रूप से न्यायपालिका के मूलभूत डिजिटल अवसंरचना की स्थापना पर केन्द्रित था। इसके तहत 14,249 जिला एवं अधीनस्थ न्यायालयों का कम्प्यूटरीकरण, 13,683 न्यायालयों में लोकल एरिया नेटवर्क (एलएएन) की स्थापना और 13,672 न्यायालयों में मामलों के डिजिटल प्रबंधन हेतु सॉफ्टवेयर की सुविधा के साथ-साथ 493 न्यायालयों और 347 जेलों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा उपलब्ध कराई गई।

इस आधारभूत कार्य को आगे बढ़ाते हुए, द्वितीय चरण, जिसे 2015 से 2023 तक1,670 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ कार्यान्वित किया गया, ने बुनियादी कम्प्यूटरीकरण से लेकर नागरिक-केन्द्रित डिजिटल सेवाओं के प्रावधान तक दायरे का विस्तार किया। कम्प्यूटरीकृत न्यायालयों की संख्या बढ़कर 18,735 हो गई, जो प्रथम चरण की तुलना में 31.5 प्रतिशत  की वृद्धि दर्शाती है।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधाओं का विस्तार पांच गुना से अधिक हुआ, जिसमें 3,240 न्यायालय (557 प्रतिशत की वृद्धि) और 1,272 जेल (266 प्रतिशत की वृद्धि) शामिल हैं, जो डिजिटल सुनवाई पर बढ़ती निर्भरता को दर्शाता है। डब्ल्यूएएन कनेक्टिविटी 99.5 प्रतिशत न्यायालय परिसरों तक पहुंच गई, जिससे मजबूत नेटवर्क की सुलभता सुनिश्चित हुई। इस चरण में स्वतंत्र एवं ओपन-सोर्स वाली मामलों की सूचना प्रणाली (सीआईएस), मामलों से जुड़े डेटा के पारदर्शी ऑनलाइन भंडार के रूप में नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड (एनजेडीजी) जैसे प्रमुख प्लेटफार्मों की शुरुआत हुई और नागरिकों तथा वकीलों को प्रत्यक्ष सुविधा सेवाएं प्रदान करने हेतु ई-सेवा केन्द्रों की स्थापना की गई।

सरकार ने उन्नत डिजिटल अवसंरचना के साथ न्यायपालिका के आधुनिकीकरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित करते हुए तीसरे चरण (2023-2027) के बजट को बढ़ाकर 7,210 करोड़ रुपये कर दिया है। इस चरण में भारतीय न्यायालयों को डिजिटल और कागज-रहित न्यायालयों में परिवर्तित करने की परिकल्पना की गई है।

इसके तहत पुराने और वर्तमान मामलों के अभिलेखों का डिजिटलीकरण, सभी न्यायालयों, जेलों एवं अस्पतालों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा का विस्तार और यातायात संबंधी उल्लंघनों से परे ऑनलाइन न्यायालयों का विस्तार किया जाएगा। इसका उद्देश्य ई-सेवा केन्द्रों का सर्वव्यापी विस्तार, डिजिटल न्यायालय के अभिलेखों एवं आवेदनों के भंडारण के लिए अत्याधुनिक क्लाउड-आधारित डेटा भंडार का निर्माण और मामलों के विश्लेषण एवं पूर्वानुमान के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तथा ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (ओसीआर) जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों का उपयोग करना भी है।

वर्तमान में, अदालती अभिलेखों के 660.36 करोड़ से अधिक पृष्ठों का डिजिटलीकरण किया जा चुका है और नागरिक को बेहतर सेवा प्रदान करने हेतु 2,444 ई-सेवा केन्द्र स्थापित किए गए हैं। न्यायालयों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधाओं के जरिए 3.97 करोड़ से अधिक सुनवाई की हैं। ई-फाइलिंग प्लेटफॉर्म के जरिए लगभग 1.07 करोड़ मामले इलेक्ट्रॉनिक रूप से दर्ज किए गए हैं।

अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग का विस्तार उत्तराखंड, कोलकाता, तेलंगाना और मेघालय सहित चार अतिरिक्त उच्च न्यायालयों तक किया गया है, जिससे इनकी संख्या बढ़कर 11 हो गई है। सभी ई-कोर्ट पोर्टल अब एनआईसी के क्लाउड अवसंरचना पर होस्ट किए गए हैं और जिला न्यायालयों की वेबसाइटों को सेफ, स्केलेबल और सुगम्य वेबसाइट एज ए सर्विस (एस3डब्ल्यूएएएस) प्लेटफॉर्म पर स्थानांतरित कर दिया गया है।

इसके अलावा, मामलों की सूचना प्रणाली (सीआईएस) को संस्करण 4.0 में उन्नत कर दिया  गया है, जिससे मामलों के प्रबंधन में अधिक निष्पक्षता, पारदर्शिता और गति आई है। एआई/एमएल-आधारित दोष पहचान मॉड्यूल, जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने आईआईटी मद्रास के सहयोग से विकसित किया है और लीगल रिसर्च एंड एनालिसिस असिस्टेंट (एलईजीआरएए), जिसे एनआईसी के उकृष्टता केन्द्र ने ई-समिति के मार्गदर्शन में विकसित किया है, जैसे उन्नत एआई-आधारित उपकरणों को न्यायिक कार्यप्रवाह में एकीकृत किया जा रहा है। डिजिटल कोर्ट प्लेटफॉर्म न्यायाधीशों को सभी केस-संबंधित दस्तावेजों, दलीलों और साक्ष्यों को डिजिटल रूप से एक्सेस करने में सक्षम बनाता है, जो कागज रहित न्यायालय प्रणाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

यह जानकारी विधि एवं न्याय राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और संसदीय कार्य राज्यमंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

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स्वदेश दर्शन परियोजनाएं

नई दिल्ली – केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने आज राज्यसभा में लिखित उत्तर में बताया कि पर्यटन मंत्रालय ने देश में थीम आधारित पर्यटन सर्किट विकसित करने हेतु वर्ष 2014-15 में स्वदेश दर्शन योजना आरंभ की और 5290.33 करोड़ रुपये के परिव्यय से देश में पर्यटन अवसंरचना विकसित करने की 76 पर्यटन परियोजनाओं को मंजूरी दी।
इनमें से 75 परियोजनाओं की संरचना पूरी हो चुकी हैं। स्वदेश दर्शन योजना को सतत और दायित्वपूर्ण पर्यटन स्थलों के विकास के उद्देश्य से स्वदेश दर्शन द्वितीय के रूप में संशोधित किया गया और मंत्रालय ने इसके अंतर्गत 2208.31 करोड़ रुपये की 53 परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जो संबंधित राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों द्वारा कार्यान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं।
मंत्रालय ने स्वदेश दर्शन के अंतर्गत ‘चुनौती आधारित गंतव्य विकास – सीबीडीडी’ पहल के तहत राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों से प्रस्ताव आमंत्रित किए और संस्कृति एवं विरासत, आध्यात्मिक पर्यटन, जीवंत गांव और पर्यावरण पर्यटन एवं अमृत धरोहर स्थलों जैसी चार श्रेणियों के तहत 697.94 करोड़ रुपये की 38 परियोजनाओं को मंजूरी दी। चुनौती आधारित गंतव्य विकास पहल का प्राथमिक उद्देश्य पर्यटन स्थलों को समग्रता से विकसित करना है ताकि पर्यटन अनुभव बेहतर बनाया जा सके और पर्यटन स्थलों को संवहनीय और दायित्वपूर्ण स्थलों में परिवर्तित किया जा सके।

देश में प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों को विकसित करने के उद्देश्य से, पर्यटन मंत्रालय ने राज्यों को पूंजी निवेश हेतु विशेष सहायता योजना के तहत परिचालन दिशानिर्देशों के साथ ही विस्तृत परियोजना रिपोर्ट प्रारूप जारी किए हैं। इसके अनुरूप, वित्तीय वर्ष 2024-25 में योजना के तहत 3295.76 करोड़ रुपए की 40 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई।

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नागर विमानन मंत्रालय पश्चिम एशिया में हवाई यात्रा की स्थिति की निरंतर निगरानी कर रहा है; भारतीय विमानन कंपनियों ने रियाद के लिए उड़ानें फिर से शुरू कीं

नई दिल्ली – नागर विमानन मंत्रालय पश्चिम एशिया क्षेत्र में उभरती स्थिति और भारत तथा इस क्षेत्र के देशों के बीच हवाई यात्रा पर इसके प्रभाव की निरंतर निगरानी कर रहा है। विमानन कंपनियां यात्री सुरक्षा और उड़ान परिचालनों के व्यवस्थित संचालन को सुनिश्चित करने के लिए वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए आवश्यक परिचालन बदलाव कर रही हैं।

इस संदर्भ में, भारतीय विमानन कंपनियों द्वारा रियाद से आने-जाने वाली उड़ानों का परिचालन 12 मार्च 2026 से पुनः प्रारंभ कर दिया गया है। बहाली के पहले दिन, एयर इंडिया और इंडिगो द्वारा मुंबई के लिए तीन उड़ानों का संचालन किया जा रहा है तथा एयर इंडिया एक्सप्रेस द्वारा कालीकट के लिए एक उड़ान संचालित की जा रही है। इसके साथ ही भारत और रियाद के बीच महत्वपूर्ण हवाई संपर्क फिर से बहाल हो गया है।

28 फरवरी से 11 मार्च 2026 की अवधि के दौरान, खाड़ी देशों से कुल 1,50,457 हवाई यात्रियों ने भारत की यात्रा की।

इसके अतिरिक्त, भारतीय विमानन कंपनियों ने 12 मार्च 2026 को पश्चिम एशिया के विभिन्न शहरों—जैसे कि अबू धाबी, दुबई, फुजैरा, जेद्दा, मस्कट, रास अल खैमाह, रियाद और शारजाह—से भारत आने वाली कुल 57 उड़ानों का समय निर्धारित किया है, जो परिचालन व्यवहार्यता और वर्तमान परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

मंत्रालय यात्रियों की सुचारू आवाजाही की सुविधा के लिए एयरलाइंस और अन्य संबंधित हितधारकों के साथ निकट समन्वय बनाए हुए है। हवाई किरायों की भी निरंतर निगरानी की जा रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि टिकट की कीमतें उचित रहें और इस अवधि के दौरान किराए में कोई अनुचित वृद्धि न हो।

यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे उड़ान समय-सारणी और यात्रा व्यवस्था के संबंध में नवीनतम जानकारी के लिए अपनी संबंधित एयरलाइन के संपर्क में रहें।

मंत्रालय स्थिति की समीक्षा करना जारी रखेगा और आवश्यकतानुसार आगे की जानकारी/अपडेट प्रदान करेगा।

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“आदि संस्कृति” डिजिटल अधिगम मंच

नई दिल्ली – केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके ने लोकसभा को सूचित किया कि जनजातीय कला रूपों और विरासत के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म “आदि संस्कृति” का बीटा संस्करण 10 सितंबर 2025 को शुरू किया गया था। ‘आदि संस्कृति’ का नाम बदलकर ‘ट्राइबएक्स’ कर दिया गया है और इसमें निम्नलिखित घटक शामिल हैं:
  • डिजिटल ई-लर्निंग अकादमी – जनजातीय चित्रकला, संगीत, वस्त्र, कलाकृतियाँ और कौशल निर्माण आदि पर संरचित ऑनलाइन शिक्षण मॉड्यूल के रूप में डिजिटल पाठ्यक्रम डिज़ाइन किए गए हैं।
  • सामाजिक-सांस्कृतिक भंडार (रिपॉजिटरी) – एक डिजिटल संग्रह जिसमें कला, संगीत, वस्त्र और कलाकृतियों जैसे विषयों पर जनजातीय विरासत से संबंधित 5,000 से अधिक संकलित दस्तावेज होंगे।
  • ऑनलाइन मार्केटप्लेस – ट्राइबल कोऑपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ट्राइफेड) से जुड़ा हुआ एक ई-कॉमर्स इंटरफेस है, ताकि जनजातीय कारीगर अपने उत्पादों को सीधे उपभोक्ताओं को प्रदर्शित कर सकें और बेच सकें।

 

झारखंड के जनजातीय समुदायों के संदर्भ में, सोहराई और डोकरा कला पर डिजिटल पाठ्यक्रम विकसित किए गए हैं, जिनमें क्षेत्र के जनजातीय कलाकारों के वीडियो आधारित निर्देशात्मक मॉड्यूल शामिल हैं। इसमें इन दोनों कला रूपों से संबंधित अन्य दस्तावेज भी संग्रह में शामिल किए जाएंगे।

इस मंच (प्लेटफॉर्म) को जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा राज्य जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (टीआरआई) के साथ साझेदारी में विकसित किया गया है ताकि सामग्री, विकास और सामग्री संकलन के सटीक और प्रामाणिक दस्तावेजीकरण को सुनिश्चित किया जा सके। झारखंड के संदर्भ में, जनजातीय अनुसंधान संस्थान – झारखंड ने राज्य की कला शैलियों के प्रलेखन और विकास में योगदान दिया है।

सरकार का दीर्घकालिक दृष्टिकोण इस मंच (प्लेटफॉर्म) को एक पूर्ण विकसित डिजिटल विश्वविद्यालय के रूप में विकसित करने का है, जो प्रत्येक पाठ्यक्रम के लिए प्रमाण-पत्र प्रदान करेगा। आवश्यकता पड़ने पर, राज्य जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (टीआरआई) और अन्य संस्थानों के सहयोग से इस मंच का चरणबद्ध तरीके से विस्तार किया जाएगा, जिसमें अतिरिक्त पाठ्यक्रम और संग्रह शामिल होंगे।

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पीएम राहत- सड़क दुर्घटना पीड़ितों का कैशलेस इलाज

नई दिल्ली – मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 162 के अंतर्गत कानूनी प्रावधान के अनुसार प्रधानमंत्री – सड़क दुर्घटना पीड़ितों के अस्पताल में भर्ती एवं सुनिश्चित उपचार (PM-RAHAT) योजना” को दिनांक 05.05.2025 की अधिसूचना S.O. 2015(E) के माध्यम से अधिसूचित किया गया है। इसके अतिरिक्त, योजना के कार्यान्वयन के लिए प्रक्रिया प्रवाह, संबंधित हितधारकों की भूमिकाएं और जिम्मेदारियां तथा मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) से संबंधित विस्तृत दिशानिर्देश दिनांक 04.06.2025 की अधिसूचना S.O. 2489(E) के माध्यम से जारी किए गए हैं।

इस योजना का शुभारंभ प्रधानमंत्री द्वारा 13.02.2026 को किया गया और इसे दिनांक 19.02.2026 की अधिसूचना S.O. 952(E) के माध्यम से प्रधानमंत्री – सड़क दुर्घटना पीड़ितों के अस्पताल में भर्ती एवं सुनिश्चित उपचार (PM-RAHAT) योजना नाम दिया गया। योजना की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—

(i) किसी भी श्रेणी की सड़क पर होने वाली दुर्घटना में शामिल प्रत्येक पीड़ित को दुर्घटना की तिथि से अधिकतम 7 दिनों तक, प्रति पीड़ित ₹1.5 लाख तक के उपचार का प्रावधान किया जाएगा। यह उपचार सुविधा मोटर वाहन के उपयोग से होने वाली सड़क दुर्घटनाओं के सभी पीड़ितों के लिए उपलब्ध होगी।

(ii) प्रत्येक सड़क दुर्घटना पीड़ित को निर्धारित अस्पतालों में गैर-जीवन-घातक मामलों में 24 घंटे तक तथा जीवन-घातक मामलों में 48 घंटे तक स्थिरीकरण उपचार प्रदान किया जाएगा, जो पुलिस की प्रतिक्रिया पर निर्भर होगा।

(iii) यह वैधानिक योजना किसी भी अन्य केंद्रीय या राज्य स्तर की योजनाओं पर प्राथमिकता रखेगी।

(iv) इस योजना को दो मौजूदा प्लेटफॉर्म—पुलिस अधिकारियों द्वारा दुर्घटना रिपोर्टिंग के लिए उपयोग किए जाने वाले eDAR (इलेक्ट्रॉनिक विस्तृत दुर्घटना रिपोर्ट) और अस्पतालों द्वारा उपचार, दावा प्रस्तुत करने तथा भुगतान प्रक्रिया के लिए उपयोग किए जाने वाले नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (NHA) के TMS 2.0 (लेनदेन प्रबंधन प्रणाली)—के एकीकरण के माध्यम से सफलतापूर्वक लागू किया गया है।

अस्पतालों को प्रतिपूर्ति मोटर वाहन दुर्घटना निधि (MVAF) के माध्यम से की जा रही है। यह निधि उन मामलों में सामान्य बीमा कंपनियों के योगदान से संचालित होती है, जहाँ दोषी मोटर वाहन बीमित होता है, तथा बिना बीमा वाले और हिट-एंड-रन मामलों में बजटीय सहायता के माध्यम से वित्तपोषित होती है।

112 आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (ERSS) के साथ एकीकरण के माध्यम से पीड़ित या कोई भी गुड समैरिटन (RAH-VEER) निकटतम निर्धारित अस्पताल की जानकारी प्राप्त कर सकता है, एम्बुलेंस का अनुरोध कर सकता है या स्थिति की आवश्यकता के अनुसार दोनों सेवाएँ प्राप्त कर सकता है। जैसे ही पीड़ित को अस्पताल में भर्ती किया जाता है, NHA द्वारा विकसित हेल्थ बेनिफिट पैकेज के आधार पर उपचार प्रक्रिया शुरू करनी होती है।

उपचार शुरू करते समय समानांतर रूप से TMS प्लेटफॉर्म पर पुलिस द्वारा पीड़ित की प्रमाणीकरण प्रक्रिया भी शुरू की जाती है। अस्पताल TMS पर उपचार आईडी तैयार कर उन्हें eDAR के माध्यम से जिला पुलिस को भेजता है। eDAR पर पुलिस की प्रतिक्रिया के लिए समय सीमा सामान्य मामलों में 24 घंटे तथा जीवन-घातक मामलों में 48 घंटे तक होगी, जैसा कि अस्पताल प्रशासक द्वारा निर्धारित किया जाएगा।

इस योजना के अंतर्गत दुर्घटना की रिपोर्टिंग से लेकर पीड़ित के अस्पताल में भर्ती होने, उपचार, पुलिस प्रमाणीकरण, दावा प्रक्रिया और अंतिम भुगतान तक पूरी प्रक्रिया का एक डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होता है, जो 112 ERSS प्लेटफॉर्म से शुरू होकर पूरी प्रणाली में उपलब्ध रहता है।

उपचार सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (NHA) ने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अतिरिक्त अस्पतालों को नामित और शामिल करने के संबंध में विस्तृत दिशानिर्देश दिनांक 20.05.2025 के कार्यालय ज्ञापन S-12018/81/2024 के माध्यम से जारी किए हैं। योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार, दिनांक 04.06.2025 की अधिसूचना S.O. 2489(E) के तहत इस योजना में नामित अस्पताल—जिसमें आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY) के अंतर्गत पैनल में शामिल वे अस्पताल भी शामिल हैं जो NHA द्वारा जारी दिशानिर्देशों का पालन करते हैं—योजना के लिए नामित अस्पताल माने जाएंगे।

09.03.2026 तक आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत NHA के साथ सूचीबद्ध अस्पतालों की संख्या 36,112 है।

पारदर्शिता सुनिश्चित करने और दुरुपयोग को रोकने के लिए योजना को TMS 2.0 और eDAR प्लेटफॉर्म के एकीकृत एंड-टू-एंड डिजिटल वर्कफ्लो के माध्यम से संचालित किया जाता है, जिससे प्रत्येक मामले में दुर्घटना के विवरण और उपचार रिकॉर्ड के बीच इलेक्ट्रॉनिक लिंक स्थापित होता है। साथ ही, योजना के अंतर्गत नकद रहित उपचार प्रदान करने वाले अस्पतालों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए यह प्रावधान किया गया है कि राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (SHA) द्वारा दावा स्वीकृत किए जाने की तिथि से 10 दिनों के भीतर जिला कलेक्टर या जनरल इंश्योरेंस (GI) काउंसिल द्वारा, जैसा भी लागू हो, भुगतान किया जाएगा।

योजना में जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर एक संरचित शिकायत निवारण और निगरानी तंत्र का भी प्रावधान किया गया है, ताकि प्रभावी क्रियान्वयन और समय पर समस्याओं का समाधान सुनिश्चित किया जा सके। योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार जिला स्तर पर समग्र निगरानी और समन्वय के लिए जिला सड़क सुरक्षा समितियां (DRSCs) जिम्मेदार हैं। योजना से संबंधित शिकायतों के निवारण के लिए DRSC द्वारा जिला स्तर पर एक समर्पित शिकायत निवारण अधिकारी (GRO) या संपर्क बिंदु नियुक्त किया जाना आवश्यक है।

यदि किसी शिकायत का समाधान जिला स्तर पर संतोषजनक ढंग से नहीं होता है, तो मामले को पहले जिला कलेक्टर के पास और उसके बाद राज्य सड़क सुरक्षा परिषद (SRSC) के पास भेजा जा सकता है, जो संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में योजना के कार्यान्वयन के लिए नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करती है। राष्ट्रीय स्तर पर एक अंतर-मंत्रालयी संचालन समिति योजना के समग्र क्रियान्वयन और निगरानी की देखरेख करती है तथा इसके कार्यान्वयन के दौरान उत्पन्न होने वाले मुद्दों की समीक्षा करती है।

यह योजना मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 162 के वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप तैयार की गई है, जिसका मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटना पीड़ितों को, विशेष रूप से गोल्डन ऑवर के दौरान, समय पर और निर्बाध चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करना है।

यह जानकारी केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री श्री नितिन जयराम गडकरी ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

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आपकी सुरक्षा, हमारी जिम्मेदारी है – हेमन्त सोरेन मुख्यमंत्री, झारखण्ड

जोहार!

झारखण्डवासियों की सुरक्षा को और मजबूत करने के उद्देश्य से अबुआ सरकार ने राज्य के सभी थानों के लिए 1255 चार पहिया वाहन एवं 1697 दो पहिया वाहन स्वीकृत किए हैं। पहले चरण में 636 चार पहिया और 849 दो पहिया वाहन खरीदे जा चुके हैं, जिन्हें 13 मार्च 2026 को विभिन्न थानों को सौंपा जा रहा है ।

साथ ही 12 जिलों में अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त 12 संयुक्त थाने (एक ही परिसर में महिला थाना, साइबर थाना, AHTU थाना, एवं SC/ST थाना) के निर्माण की भी शुरुआत की जा रही है। यह पीडि़त-केन्द्रित पुलिसिंग व्यवस्था के लिए अबुआ सरकार की पहल है।

आपकी सुरक्षा, हमारी जिम्मेदारी है।

हेमन्त सोरेन
मुख्यमंत्री, झारखण्ड

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सरकार, सामाजिक संगठन और तकनीकी क्षेत्र के शीर्ष लोग श्रवण बाधित व्यक्तियों के लिए भारत का पहला एकीकृत जीवन-चक्र सहायता मॉडल बनाने के लिए एकजुट हुए

नई दिल्ली – भारत में समावेशी विकास और सुलभता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अधीन दिव्यांग व्यक्तियों के सशक्तिकरण विभाग (डीईपीडब्लूडी) ने श्रवणबाधित व्यक्तियों के सशक्तिकरण और अवसरों को गति देने के लिए “कोएलिशन ऑफ द विलिंग” के साथ एक ऐतिहासिक साझेदारी की है। 12 मार्च 2026 को नई दिल्ली में सचिव श्रीमती वी. विद्यावती, अपर सचिव सुश्री मनमीत कौर नंदा, डीईपीडब्लूडी के निदेशक प्रदीप ए. और आईएसएलआरटीसी के निदेशक श्री कुमार राजू की उपस्थिति में हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (एमओयू) एक सहयोगात्मक राष्ट्रीय ढांचे की शुरुआत का प्रतीक है जो बधिर और कम सुनने वाले लोगों के लिए व्यापक और स्थायी सहायता प्रणाली के निर्माण हेतु सरकारी संस्थानों, सामाजिक संगठनों और प्रौद्योगिकी नवप्रवर्तकों को एक साथ लाता है। इस साझेदारी का उद्देश्य सशक्तिकरण के एकीकृत जीवन-चक्र मॉडल का नेतृत्व करना है जो श्रवणबाधित व्यक्तियों को प्रारंभिक हस्तक्षेप और शिक्षा से लेकर कौशल विकास, रोजगार और सामाजिक समावेशन तक हर स्तर पर सहायता प्रदान करता है। संस्थागत विशेषज्ञता, तकनीकी नवाचार और सामुदायिक संपर्क को समन्वित करके, यह पहल एक ऐसा प्रणालीगत परिवर्तन लाने का प्रयास करती है जो देश भर में श्रवण बाधित व्यक्तियों के लिए पहुंच में सुधार करे, अवसरों का विस्तार करे और उनकी गरिमा और स्वतंत्रता को मजबूत करे।

इच्छुक संगठनों का गठबंधन प्रौद्योगिकी, शिक्षा, सुलभता और सामाजिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में विविध विशेषज्ञता रखने वाले संगठनों का एक समूह है। इसमें यूनिकी (गोपालकृष्णन फाउंडेशन फॉर द डेफ), ब्ली टेक इनोवेशन्स प्राइवेट लिमिटेड, ट्रेनिंग एंड एजुकेशनल सेंटर फॉर हियरिंग इम्पेयर्ड (टीच), विनविनया फाउंडेशन, बडी4स्टडी इंडिया फाउंडेशन, वीक्रॉप टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड और इंडियन साइन लैंग्वेज रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर (आईएसएलआरटीसी) शामिल हैं। डीईपीडब्ल्यूडी के साथ मिलकर, यह गठबंधन सशक्तिकरण के विभिन्न आयामों हेतु अभिनव हस्तक्षेपों को डिजाइन और कार्यान्वित करने के लिए काम करेगा।

यह सहयोग जागरूकता पैदा करने, सुलभता और सहायक प्रौद्योगिकियों का विस्तार करने, प्रारंभिक पहचान और शैक्षिक सहायता को मजबूत करने, कौशल विकास और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने, छात्रवृत्ति प्रदान करने, भारतीय सांकेतिक भाषा सीखने और डिजिटल सामग्री विकसित करने और स्थायी आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने जैसे प्रमुख प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर केंद्रित होगा। नीतिगत समर्थन को तकनीकी समाधानों और समुदाय-प्रेरित पहलों के साथ जोड़कर, इस साझेदारी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि श्रवण बाधित व्यक्ति सामाजिक और आर्थिक जीवन में पूर्ण और आत्मविश्वास से भाग ले सकें। अधिकारियों ने बताया कि यह पहल सार्वजनिक-निजी-नागरिक समाज सहयोग का एक प्रगतिशील उदाहरण है, जहां प्रत्येक भागीदार समावेश की जटिल चुनौतियों का समाधान करने के लिए विशेष ज्ञान और संसाधनों का योगदान देता है। डिजिटल नवाचार, प्रशिक्षण प्रणालियों और सामुदायिक नेटवर्क का लाभ उठाकर, इस साझेदारी से ऐसे व्यापक मॉडल तैयार होने की उम्मीद है जिनसे शहरी और ग्रामीण भारत में श्रवण बाधित व्यक्तियों को लाभ मिल सके।

इस रणनीतिक सहयोग के माध्यम से, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग एक समावेशी भारत के निर्माण की अपनी प्रतिबद्धता को आगे बढ़ा रहा है, जहाँ प्रत्येक दिव्यांगजन को सुलभता, अवसर और सहभागिता प्राप्त हो। यह पहल एक व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाती है, जिसके तहत प्रौद्योगिकी, शिक्षा और साझेदारी मिलकर दि

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