09.04.2026 – मुम्बई के रहेजा क्लासिक क्लब में के सी एफ एन जी ओ के तरफ से 4 मई को आयोजित लिजेंड दादासाहेब फाल्के अवॉर्ड 2026 समारोह समारोह में ब्यूटी आइकन मेगा मॉडल वैशाली भाऊरजार को अवार्ड दे कर सम्मानित किया जाएगा।
नारी शक्ति सम्मान से सम्मानित की जा चुकी बेहद चर्चित मॉडलवैशाली भाऊरजार को डॉ कृष्णा चौहान द्वारा मुंबई में आयोजित राष्ट्रीय रत्न सम्मान 2026 समारोह के दौरान भी अवॉर्ड दे कर सम्मानित किया जा चुका है। इसके पूर्व इसके पूर्व वैशाली भाऊरजार को सुपर ह्यूमन एक्सीलेंस अवॉर्ड 2024 और अखंड भारत गौरव अवॉर्ड 2024 (मुंबई ग्लोबल) भी बॉलीवुड के विख्यात सिंगर पद्मश्री उदित नारायण के कर-कमलों से प्राप्त हो चुके हैं।
सिंगर उदित नारायण के द्वारा तीन बार और सिंगर दीपा नारायण के द्वारा दो बार वैशाली सम्मानित की जा चुकी हैं। मेगामॉडल वैशाली भाऊरज़ार को महात्मा गांधी रतन अवॉर्ड 2025 मिस इंडिया विनर, बॉलीवुड लीजेंड फिल्म फेस्टिवल 2025 और मुंबई ग्लोबल की ओर से अखंड भारत गौरव सम्मान 2025 जैसे प्रतिष्ठित सम्मानों से भी नवाज़ा जा चुका है। लगातार मिल रहे ये राष्ट्रीय स्तर के पुरस्कार इस बात को दर्शाते हैं कि वैशाली आज न केवल फैशन इंडस्ट्री की सशक्त आवाज़ हैं, बल्कि देश की प्रेरणास्रोत व्यक्तित्वों में से एक बन चुकी हैं।
फैशन और समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए उन्हें बॉलीवुड आइकॉनिक अवॉर्ड 2025 से भी सम्मानित किया जा चुका है। यह अवॉर्ड उन्हें निर्माता, निर्देशक और अभिनेता डॉ. धीरज कुमार के हाथों बेस्ट सुपर मॉडल के रूप में प्रदान किया गया था। वर्ष 2025 के वैलेंटाइन डे के अवसर पर उन्होंने एक सामाजिक पहल करते हुए यह दिन सुरक्षा हेल्थ एंड एजुकेशन वेलफेयर एसोसिएशन (NGO) की टीम और बच्चों के साथ मनाया था। उन्होंने इस मौके पर बच्चों के साथ समय बिताकर समाज सेवा का संदेश दिया था कि विशेष दिन केवल उत्सव के लिए नहीं, बल्कि सेवा के लिए भी होते हैं।
वैशाली वर्तमान समय में कई प्रतिष्ठित ब्रांड्स की ब्रांड एम्बेसडर हैं और उनकी लोकप्रियता राष्ट्रीय ही नहीं, अंतरराष्ट्रीय स्तर तक फैली हुई है। वैशाली को नेहरू युवा केन्द्र, मुंबई द्वारा महाराष्ट्र युथ अफेयर्स एंड स्पोर्ट्स मंत्रालय की ओर से राष्ट्रीय सम्मान चिन्ह भी प्रदान किया जा चुका है। विदित हो कि वैशाली बीएसएनएल सहित कई अन्य छोटे-बड़े विज्ञापन अभियानों में अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुकी हैं। एक विशेष अवसर पर जब मुंबई में 38 डिग्री तापमान में आईपीएल क्रिकेट मैच आयोजित किया गया था, तब उन्होंने वहाँ पहुँचकर खिलाड़ियों का मनबल बढ़ाया था और दर्शकों का ध्यान आकर्षित किया था।
छत्तीसगढ़ राज्य के भिलाई की मूल निवासी वैशाली भाऊरज़ार की मॉडल बनने की कहानी काफी दिलचस्प और प्रेरणादायक है। वैशाली प्रारंभ में एयर होस्टेस बनना चाहती थी और वह बनी भी। किंगफिशर एयरलाइंस के साथ उन्होंने एक्स कैबिन क्रू (एयरहोस्टेस) के रूप में काम भी किया मगर उनकी किस्मत ने उन्हें मॉडलिंग की दुनिया मे ला दिया। अपनी मेहनत, आत्मबल और कला कौशल के बल पर वैशाली भाऊरज़ार ने फैशन और समाज सेवा दोनों क्षेत्रों में स्थायी और प्रभावशाली पहचान बनाई है। फिलवक्त वैशाली एक सफल मॉडल के रूप में युवाओं की प्रेरणा श्रोत बन चुकी हैं।
08.04.2026 – महाराजा म्यूज़िक के बैनर तले निर्मित और अश्विन महाराज द्वारा प्रस्तुत नया म्यूजिक वीडियो ‘जश्न की ज़ुबान हूँ मैं’ रिलीज कर दिया गया है। बाली की खूबसूरत लोकेशंस पर शूट किया गया यह गाना इंटरनेशनल विजुअल्स और कैची बीट्स के साथ हर तरह के जश्न के लिए एक परफेक्ट पार्टी ट्रैक बनकर उभरता है।
यह गाना ग्लैमर, म्यूज़िक और सेलिब्रेशन का परफेक्ट मेल पेश करता है। गाने को शंकर दास और सतीश त्रिपाठी ने अपनी आवाज़ दी है। म्यूज़िक और लिरिक्स भी सतीश त्रिपाठी के हैं।
गाने का निर्देशन अश्विन महाराज ने किया है, जबकि कोरियोग्राफी आनंद भाकुनी ने संभाली है।
इसमें अप्रिलियानी पुत्री और गुंग चिंटा की स्टाइलिश परफॉर्मेंस देखने को मिलती है।
उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देश पर आज राँची जिले के सभी 18 अंचलों में जनता दरबार का आयोजन किया गया
जनता दरबार में भूमि संबंधी सुधार, प्रमाण-पत्र जारी करना, दाखिल-खारिज तथा अन्य प्रशासनिक सेवाओं से जुड़े आवेदनों पर विशेष ध्यान दिया गया
उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने सभी अंचल अधिकारियों को निर्देश दिया कि जनता की समस्याओं का निराकरण पारदर्शी, त्वरित एवं प्रभावी तरीके से किया जाए
जिला प्रशासन, राँची का यह प्रयास शासन की जन-केंद्रित नीति को मजबूत करता है और नागरिकों के बीच प्रशासनिक विश्वास को बढ़ावा देता है
राँची,07.04.2026 – उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देश पर (07.04.2026) राँची जिले के सभी 18 अंचलों में जनता दरबार का आयोजन किया गया।
इस कार्यक्रम के माध्यम से आम जनता की विभिन्न शिकायतों एवं आवेदनों का त्वरित निराकरण किया गया।
जनता दरबार में भूमि संबंधी सुधार, प्रमाण-पत्र जारी करना, दाखिल-खारिज तथा अन्य प्रशासनिक सेवाओं से जुड़े आवेदनों पर विशेष ध्यान दिया गया।
अधिकांश आवेदनों को निष्पादित करते हुए लाभार्थियों को राहत प्रदान की गई।
अंचलवार निष्पादित आवेदनों का विवरण:
अनगड़ा अंचल
कुल निष्पादित आवेदन: 125
दाखिल खारिज: 08
शुद्धि पत्र में जाति सुधार: 02
आवासीय प्रमाण पत्र: 32
जाति प्रमाण पत्र: 28
आय प्रमाण पत्र: 38
पंजी 2 सुधार: 12
परमिशन: 03
पारिवारिक सदस्यता: 02
इसके अतिरिक्त, अंचल कार्यालय अनगड़ा में ऑनलाइन पंजी II में प्लॉट संख्या दर्ज करने, दोहरा जमाबंदी सुधार, खाता-नाम सुधार, लगान अद्यतन तथा रसीद निर्गत करने संबंधी कई व्यक्तिगत आवेदनों (जैसे अभय अमला तिर्की, संजीत कुमार, मदन लाल महतो, झुबरा गंझु, पिंकी चौधरी, राजेन्द्र महतो, ललकी देवी आदि) का त्वरित निपटारा किया गया।
चान्हो अंचल
कुल निष्पादित आवेदन: 78
निष्पादित आवेदन (दाखिल-खारिज शुद्धि पत्र): 04
पंजी II सुधार: 03 (हुरहुरी, बरहे, चोरेया ग्राम के आवेदकों के लगान अद्यतन, प्लॉट एवं रकबा सुधार)
जाति प्रमाण-पत्र: 65
तत्काल आवेदन: 03
नकल आवेदन: 03
खलारी अंचल
कुल निष्पादित आवेदन: 22
जाति प्रमाण-पत्र: 05
आवासीय प्रमाण पत्र: 04
तत्काल आवेदन: 02
आय प्रमाण पत्र: 07
पारिवारिक प्रमाण पत्र: 02
आचरण प्रमाण पत्र: 01
पंजी II सुधार: 01
राहे अंचल
कुल निष्पादित मामले: 128
पारिवारिक सदस्यता प्रमाण पत्र: 02
आय प्रमाण पत्र: 45
आवासीय प्रमाण पत्र: 46
जाति प्रमाण पत्र: 35
सिल्ली अंचल
कुल निष्पादित आवेदन: 54
पारिवारिक सदस्यता: 02
तत्काल (जाति, आय, आवासीय): 04
आचरण प्रमाण पत्र: 04
आवासीय प्रमाण पत्र: 11
जाति प्रमाण पत्र: 12
आय प्रमाण पत्र: 15
पंजी II सुधार: 06
मांडर अंचल*कुल निष्पादित आवेदन: 58
आवासीय प्रमाण पत्र: 15
जाति प्रमाण पत्र: 12
आय प्रमाण पत्र: 18
पारिवारिक सदस्यता: 03
दाखिल-खारिज: 01
सुधार वशुधा: 01
सर्वजन पेंशन: 08
प्रखंड सह अंचल कार्यालय रातु
कुल 178 आवेदनों का निष्पादन किया गया
जिसमें दाखिल खारिज 23
ऑनलाइन सुधार 05
जाति प्रमाण पत्र 26
आवासीय प्रमाण पत्र 29
आय प्रमाण पत्र 53
जन्म प्रमाण पत्र 10
मृत्यु प्रमाण पत्र 04
सर्वजन पेंशन 22
अंचल का नाम – अरगोड़ा अंचल
पंजी II सुधार – 08
पारिवारिक सूचि – 02
दा ० खा ० वाद -01
वृद्धा एम् विधवा व विकलांग पेंशन -04
आय प्रमाण पत्र – 16
स्थानीय प्रमाण पत्र – 09
जाति प्रमाण पत्र – 12
नक़ल से सम्बंधित प्रतिवेदन -02
निष्पादित आवेदनों की संख्या – 37कुल प्राप्त आवेदन -54
आज के जनता दरबार में राँची जिले के विभिन्न अंचलों में सैकड़ों आवेदनों का त्वरित निपटारा किया गया। इससे आम नागरिकों को प्रमाण-पत्र, भूमि सुधार तथा अन्य आवश्यक सेवाएँ समयबद्ध रूप से उपलब्ध हुईं।
उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने सभी अंचल अधिकारियों को निर्देश दिया कि जनता की समस्याओं का निराकरण पारदर्शी, त्वरित एवं प्रभावी तरीके से किया जाए। जनता दरबार को नियमित रूप से जारी रखने का निर्णय लिया गया है, ताकि प्रशासन जन-समस्याओं के प्रति और अधिक संवेदनशील बने।
रांची,07.04.2026 – दो प्रमुख मार्गों पर अभियान जुर्माना भी वसूला गया. रांची नगर निगम की इंफोर्समेंट टीम द्वारा शहर के दो प्रमुख मार्गों पर अतिक्रमण मुक्त अभियान चलाया गया.
यह अभियान अल्प परमवीर अल्वर्ट एक्का चौक से जेल मोड तक एवं किशोरी यादव चौक से हरमू चौक तक संचालित किया गया. अभियान के दौरान सड़क किनारे पर किए गए अतिक्रमणों को हटाते हुए अस्थाई संरचनाओं को ध्वस्त किया गया तथा विभिन्न सामग्रियों को जप्त किया गया.
परमवीर अल्वर्ट एक्का चौक से जेल मोड तक दो ठेला एक चौकी अस्थाई सेट बस्बाला एवं अन्य सामान व्याप्त किए गए वहीं किशोरी यादव चौक से हरमू चौक तक एक काउंटर एक वाटर टैंक दो कुर्सियां दो ठेला एक बेंच सहित अन्य सामग्री जप्त की गई.
इसके अतिरिक्त सिंगल यूज प्लास्टिक का उपयोग करने गंदगी फैलाने तथा अवैध डिजिटल विज्ञापन प्रदर्शित करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध कार्रवाई करते हुए कुल 7000 का जुर्माना अधिरोपित किया गया.
रांची नगर निगम द्वारा सभी अतिक्रमणकारियों को सख्त निर्देश दिया गया है कि भविष्य में पुनः अतिक्रमण न करें.
नगर निगम द्वारा यह अभियान आगे भी निरंतर चलता रहेगा.
रांची,07.04.2026 – सात अप्रैल को चुनाव प्रचार खत्म हो रहा है। बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी गांडेय विधायक कल्पना सोरेन समेत जेएमएम की टीम सात अप्रैल की शाम सात बजे तक रांची लौट आयेंगे। हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन ने चुनाव प्रचार के अंतिम दिन JMM उम्मीदवार के समर्थन में प्रचार किया। मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने गुवाहाटी स्थित शक्तिपीठ माँ कामाख्या मंदिर में पूजा-अर्चना की। मुख्यमंत्री ने माँ के चरणों में शीश नवाकर समस्त झारखण्ड वासियों की समृद्धि एवं खुशहाली की कामना की। इसके बाद रांची लौटेंगे। मंत्री चमरा लिंडा पड़ोसी राज्य मेघालय में ही रूकेंगे और असम विधानसभा के मतदान के दिन मॉनिटरिंग करेंगे।
असम विधानसभा चुनाव की वोटिंग 9 अप्रैल को होनी है।
हेमंत सोरेन के हेलीकॉप्टर को असम में उड़ने की नहीं मिली अनुमति,
फोन के माध्यम से सभा को किया संबोधित
हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन ने असम विधानसभा चुनाव में कई सभाएं की।
पहले हेमंत सोरेन और फिर कल्पना सोरेन ने पार्टी के 18 उम्मीदवारों के समर्थन में सभाएं की।
रविवार को कल्ना सोरेन को सभा की अनुमति नहीं दी गयी थी.
फिर सोमवार को हेमंत सोरेन को रोंगोनदी और चाबुआ विधानसभा क्षेत्रों में सभा करनी थी।
प्रधानमंत्री के कार्यक्रम की वजह से उनके हेलीकॉप्टर को उड़ान भरने की अनुमति नहीं दी गयी।
सभा में जाने की अनुमति नहीं मिलने के बाद हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन ने मोबाइल फोन से भा को संबोधित किया। उन्होंने इसे लोकतंत्र की आवाज दबाने की कोशिश कहा। जेएमएम के स्टार प्रचारक के रूप में हेमंत सोरेन और कल्पना सोरेन ने अलग-अलग सभाएं करके पार्टी उम्मीदवार के लिए वोट मांगा। उन्होंने आदिवासी वोटरों को ध्यान में रखकर अपनी सभाएं की। असम विधानसभा की 126 सीटों पर 9 अप्रैल को वोट डाले जाएंगे और चार मई को 5 राज्यों का चुनाव परिणाम एक साथ आएगा।
नई दिल्ली – गवर्नमेंट ई मार्केटप्लेस (जेम) ने कुल मिलाकर 18.4 लाख करोड़ रुपये का सकल व्यापार मूल्य (जीएमवी) हासिल किया है, जिसमें वित्तीय वर्ष 2025-26 में 5 लाख करोड़ रुपये जीएमवी का आंकड़ा पार करना भी शामिल है। यह प्लेटफॉर्म एक पारदर्शी, कुशल और समावेशी डिजिटल सार्वजनिक खरीद प्रणाली के रूप में लगातार विकसित हो रहा है, जो भारत की सार्वजनिक अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में योगदान दे रहा है।
यह उपलब्धि सरकारी संस्थाओं में बड़े पैमाने पर खरीद प्रक्रिया को सक्षम बनाने वाले सार्वजनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म के रूप में जेम की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है। यह प्लेटफॉर्म खरीद संबंधी निर्णयों को सुगम बनाता है, विभिन्न क्षेत्रों के उद्यमों को सरकारी मांग से जोड़ता है और सार्वजनिक व्यय में आर्थिक समावेशन, स्थिरता और पारदर्शिता को बढ़ावा देता है।
मीडिया को संबोधित करते हुए, गवर्नमेंट ई मार्केटप्लेस के मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री मिहिर कुमार ने कहा कि 18.4 लाख करोड़ रुपये के संचयी जीएमवी को पार करना एक पारदर्शी और प्रौद्योगिकी-संचालित खरीद प्रणाली में खरीदारों, विक्रेताओं और संस्थानों के विश्वास को दर्शाता है।
जेम ने सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों (एमएसई), महिला उद्यमियों, अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के उद्यमों और स्टार्टअप उद्यमों के लिए पहुंच बढ़ाने हेतु समावेशी दृष्टिकोण अपनाया है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान, कुल ऑर्डरों में से 68 प्रतिशत एमएसई द्वारा निष्पादित किए गए, जो कुल सकल बाजार मूल्य (जीएमवी) का 47.1 प्रतिशत था।
इस प्लेटफॉर्म पर 11 लाख से अधिक लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसई) पंजीकृत हैं और वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान इन्हें 2.36 लाख करोड़ रुपये मूल्य के 51 लाख से अधिक ऑर्डर प्राप्त हुए हैं, जो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में 20 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्शाते हैं। पोर्टल पर 2.1 लाख से अधिक महिला नेतृत्व वाले एमएसई पंजीकृत हैं और इन्हें 28,000 करोड़ रुपये से अधिक के ऑर्डर प्राप्त हुए हैं, जो लगभग 28 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाते हैं। अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति के एमएसई को 6,000 करोड़ रुपये से अधिक के ऑर्डर प्राप्त हुए हैं, जो लगभग 28 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाते हैं। स्टार्टअप उद्यमों ने भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है और इसी अवधि के दौरान 19,000 करोड़ रुपये से अधिक के ऑर्डर प्राप्त किए हैं, जो 36 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि दर्शाते हैं।
जेम के संचालन में प्रौद्योगिकी की केंद्रीय भूमिका बनी हुई है। यह प्लेटफॉर्म खरीद प्रक्रियाओं में पारदर्शिता, दक्षता और अखंडता बढ़ाने के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), मशीन लर्निंग (एमएल) और उन्नत विश्लेषण का उपयोग करता है। प्रमुख प्रौद्योगिकी-आधारित उपायों में त्रुटियों को कम करने के लिए एमएल-आधारित कैटलॉग सत्यापन और पूर्व-जांच, और लेनदेन की निगरानी और अनियमितताओं का पता लगाने के लिए वास्तविक समय विश्लेषण शामिल हैं।
उन्नत विश्लेषणात्मक उपकरणों का उपयोग असामान्य मूल्य निर्धारण, संदिग्ध मिलीभगत वाली बोली प्रक्रिया, तकनीकी अस्वीकृति संबंधी विसंगतियों और संभावित क्रेता-विक्रेता मिलीभगत जैसे पैटर्न की पहचान करने के लिए किया जाता है। बिड हेल्थ स्कोर सहित सिस्टम-आधारित उपकरण बेहतर निर्णय लेने में सहायता करते हैं और खरीद प्रणाली में विश्वास को मजबूत करते हैं।
केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों और केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसई) द्वारा व्यापक रूप से अपनाए जाने के बाद, जेम में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की भागीदारी भी बढ़ रही है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान राज्यों द्वारा की गई खरीद में 38.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो प्लेटफॉर्म के विस्तार में उनकी बढ़ती भूमिका को दर्शाती है।
राज्यों द्वारा इसे अधिकाधिक अपनाना एक पारदर्शी, कुशल और जवाबदेह खरीद प्रणाली के रूप में जेम में बढ़े हुए विश्वास को दर्शाता है, जो विभिन्न क्षेत्रों में सार्वजनिक खरीद की व्यापक पहुंच और गहन पैठ को सुविधाजनक बनाता है।
नई दिल्ली – केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की पहल पर केंद्र द्वारा राज्य सरकार के सहयोग से मध्य प्रदेश के रायसेन में आयोजित कृषि मेला वास्तव में आधुनिक तकनीक के ज़रिये खेती को नई रफ़्तार देने वाला राष्ट्रीय उत्सव बनेगा, जहाँ किसान खेत‑खेत तक पहुँच चुकी ड्रोन, नैनो‑उर्वरक, सूक्ष्म सिंचाई और जलवायु‑स्मार्ट खेती के सबसे सफल मॉडल एक ही जगह पर लाइव देखेंगे और सीखेंगे।
केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि यह तीन दिवसीय महोत्सव 11 से 13 अप्रैल तक रायसेन के दशहरा मैदान में वृहद प्रदर्शनी, प्रशिक्षण और लाइव डेमो के रूप में आयोजित होगा, जिसका उद्देश्य प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन अनुसार “विकसित खेती–समृद्ध किसान” के संकल्प को ज़मीन पर उतारना है।
आधुनिक यंत्रों का साथ, खेती में प्रगति हाथों‑हाथ
राष्ट्रीय कृषि मेले के विशेष मशीनरी‑ज़ोन में ग्रीनलैंड एग्रो‑टेक, एग्री किंग, सोनालिका, शक्तिमान, वीएसटी, न्यू हॉलैंड, स्वराज, ग्रीव्स जैसी अग्रणी कंपनियाँ रीपर‑बाइंडर, सेल्फ‑प्रोपेल्ड रीपर‑बाइंडर, रोटावेटर, कॉर्न पिकर विद साइलज, विभिन्न क्षमता के ट्रैक्टर, स्क्वायर व राउंड बेलर, PTO हे रेक, रोटरी स्लैशर, रोटरी मल्चर, सुपर सीडर, पावर सीडर, शुगरकेन हार्वेस्टर, राइस ट्रांसप्लांटर, कॉटन पिकर‑हार्वेस्टर, पावर वीडर, ब्रश कटर, चाफ कटर और बूम स्प्रेयर जैसे अत्याधुनिक कृषि यंत्रों का लाइव प्रदर्शन करेंगी। किसान मशीनों के संचालन, रखरखाव, लागत‑लाभ, फसल‑अनुरूप उपयोग और सुरक्षा उपायों पर लाइव प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे तथा कई यंत्रों पर विशेष छूट और वित्तीय विकल्पों की जानकारी भी दी जाएगी, ताकि “आधुनिक यंत्रों का साथ, खेती में प्रगति हाथों‑हाथ” का संदेश व्यवहार में बदल सके।
ड्रोन, नैनो‑उर्वरक और स्मार्ट फार्मिंग: खेती का नया गेम चेंजर
केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह के अनुसार, डेमो‑प्लॉट पर ड्रोन के माध्यम से नैनो‑उर्वरक और कीटनाशकों के सटीक छिड़काव का प्रदर्शन किया जाएगा, जिससे किसान प्रत्यक्ष रूप से देख सकेंगे कि कम समय, कम श्रम और कम लागत में बड़े क्षेत्र पर समान एवं परिशुद्ध स्प्रे कैसे संभव है। विशेषज्ञ किसान‑समूहों को ड्रोन‑ऑपरेशन, फसल‑निगरानी, डिजिटल मैपिंग और स्मार्ट फार्मिंग समाधान (सेंसर, मोबाइल‑एप आधारित सलाह, डेटा‑ड्रिवन निर्णय) से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं पर मार्गदर्शन देंगे, जिससे “ड्रोन, नैनो‑उर्वरक और स्मार्ट फार्मिंग: खेती का नया गेम चेंजर की अवधारणा खेत‑खलिहान तक मज़बूती से पहुँचे।
ड्रिप‑स्प्रिंकलर से प्रति बूंद अधिक फसल और जल संरक्षण
सूक्ष्म सिंचाई एवं जल‑प्रबंधन सेक्शन में जैन इरिगेशन, नेताफ़िम, फिनोलेक्स, महिंद्रा ईपीसी, रिवुलिस, अशीरवाद, ड्रिप इंडिया, ऑटोमैट और अन्य कंपनियाँ ड्रिप एवं स्प्रिंकलर सिस्टम, ऑटोमेशन यूनिट, फर्टिगेशन (उर्वरक मिश्रित सिंचाई), “ड्रिप फॉर राइस एंड व्हीट”, सोलर पंप और वाटरशेड मॉडल प्रदर्शित करेंगी। “जल संरक्षण से खेती को दे नई ऊर्जा” और “जल की बचत, ज़्यादा उपज– स्मार्ट खेती की नई पहचान” जैसे किसान हितैषी संदेशों को ध्यान में रखते हुए “प्रति बूंद-अधिक फसल” की अवधारणा का प्रैक्टिकल डेमो किया जाएगा, जहाँ किसान सीखेंगे कि कैसे सीमित जल‑संसाधन के बावजूद पैदावार बढ़ाई जा सकती है और खेत को सूखा‑बाढ़ दोनों से अधिक लचीला बनाया जा सकता है।
पॉलीहाउस, कोल्ड‑स्टोरेज और समेकित कृषि प्रणाली से जलवायु‑स्मार्ट खेती
उन्होंने बताया कि हॉर्टिकल्चर डिवीजन द्वारा पॉलीहाउस डेमो, मोबाइल कोल्ड‑स्टोरेज, शेड‑नेट और देशभर की पौध‑नर्सरी के माध्यम से उच्च उपज देने वाले प्रमाणित बीजों, फूलों और सब्ज़ियों की संरक्षित खेती, जलवायु‑जोखिम प्रबंधन और नर्सरी‑उद्यमिता के अवसर किसानों को समझाये जाएँगे, जिससे “मौसम की मार से बचाव, उन्नत बीजों से बेहतर समाधान” तथा “आधुनिक खेती से बढ़ाएँ पैदावार” जैसे संदेश व्यवहार में उतरेंगे। ICAR द्वारा समेकित कृषि प्रणाली (Integrated Farming System), मल्टी‑लेयर फार्मिंग, फसल‑ठंडा रखने की तकनीक, जलवायु‑नियंत्रित संरचनाएँ और जलवायु‑स्मार्ट खेती के मॉडल के साथ‑साथ पराली प्रबंधन हेतु हैपी सीडर, सुपर सीडर व अन्य यंत्रों का प्रदर्शन तथा नुक्कड़ नाटक के माध्यम से “पराली अब समस्या नहीं, बल्कि खेत की समृद्धि का आधार – ‘कचरे से कंचन’” का व्यवहारिक संदेश दिया जाएगा, जिससे आय‑विविधीकरण, पर्यावरण‑संरक्षण और जलवायु‑अनुकूल खेती का मज़बूत रोडमैप तैयार हो सके।
नई दिल्ली – उपराष्ट्रपति श्री सी.पी राधाकृष्णन ने आज हरियाणा के सोनीपत जिले के मुरथल में स्थित दीनबंधु छोटू राम विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के 8वें दीक्षांत समारोह को संबोधित किया।
उपराष्ट्रपति ने हरियाणा के ‘धर्म क्षेत्र’ की पवित्र भूमि पर अपनी उपस्थिति पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने दीनबंधु छोटू राम को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उन्हें सत्यनिष्ठा, सामाजिक न्याय और दूरदर्शी नेतृत्व का प्रतीक बताया। उन्होंने कहा कि दीनबंधु छोटू राम ने अपना जीवन किसानों और वंचित समुदायों के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया और उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार लाने एवं उनके सम्मान को पुनर्स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
उपराष्ट्रपति ने उनके योगदानों को रेखांकित करते हुए कहा कि सहकारी संस्थाओं और न्यायसंगत भूमि प्रथाओं पर उनके जोर ने एक मजबूत कृषि ढांचे की नींव रखी। उन्होंने कहा कि इन प्रयासों ने हरियाणा को एक प्रगतिशील और समृद्ध कृषि प्रधान राज्य के रूप में उभरने में महत्वपूर्ण योगदान दिया, जिसने भारत की खाद्य सुरक्षा और ग्रामीण विकास में अहम भूमिका निभाई।
उपराष्ट्रपति ने स्नातक छात्रों को बधाई देते हुए प्रसन्नता व्यक्त की कि स्वर्ण पदक विजेताओं में लगभग 64 प्रतिशत महिलाएं थीं और कुल स्नातक छात्रों में महिलाओं की संख्या लगभग 50 प्रतिशत थी। उन्होंने इसे हाल के वर्षों में महिला-केंद्रित विकास के माध्यम से आए परिवर्तनकारी बदलावों का प्रतिबिंब बताया। उन्होंने कहा कि जागरूकता अभियानों और बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ जैसी पहलों के माध्यम से किए गए निरंतर प्रयासों से हरियाणा में जेंडर अनुपात में उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जो सामाजिक परिवर्तन और समावेशिता का एक प्रेरक उदाहरण है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत की परिकल्पना का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने इस बात पर बल दिया कि आत्मनिर्भर भारत का आह्वान नवोन्मेषण, आत्मविश्वास और स्वदेशी समाधानों का आह्वान है।
उपराष्ट्रपति ने कोविड-19 महामारी के दौरान भारत की प्रतिक्रिया को याद करते हुए कहा कि जब दुनिया इस संकट से जूझ रही थी, तब कई देशों और बहुराष्ट्रीय दवा कंपनियों ने टीके विकसित किए, जिनमें से कुछ ने अधिक लाभ के लिए उनका पेटेंट कराने की कोशिश की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने टीके विकसित किए और उन्हें अपनी जनता को नि:शुल्क उपलब्ध कराया, साथ ही 100 से अधिक देशों को भी इनकी आपूर्ति की। उन्होंने कहा कि यह भारत की भावना और महानता को दर्शाता है।
उपराष्ट्रपति ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग, रोबोटिक्स, क्वांटम कंप्यूटिंग और हरित प्रौद्योगिकियों के परिवर्तनकारी प्रभाव की चर्चा की। उन्होंने छात्रों से इन उभरते क्षेत्रों को जिज्ञासा और जिम्मेदारी के साथ अपनाने तथा अपने ज्ञान का उपयोग राष्ट्र निर्माण के साधन के रूप में करने का आग्रह किया।
उपराष्ट्रपति ने नशीले पदार्थों के दुरुपयोग के खतरे पर चिंता व्यक्त करते हुए युवाओं से मादक पदार्थों का दृढ़तापूर्वक त्याग करने और स्वास्थ्य, उद्देश्य और सकारात्मकता का मार्ग अपनाने का आह्वान किया। उन्होंने युवाओं को नशामुक्त समाज के राजदूत बनने के लिए प्रोत्साहित किया।
उपराष्ट्रपति ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में सफलता केवल उपलब्धियों से ही नहीं, बल्कि चरित्र, ईमानदारी और विफलताओं से उबरने की क्षमता से भी परिभाषित होती है। उन्होंने कहा कि जो लोग धैर्य के साथ कठिनाइयों और अन्याय को सहते हैं, वे अंततः विजयी होते हैं। उन्होंने छात्रों को धैर्य धारण करने और जीवन की चुनौतियों का साहस तथा सकारात्मकता के साथ सामना करने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि धर्म को अधर्म से पराजित नहीं किया जा सकता।
उन्होंने मानसिकता को उपनिवेशवाद से मुक्त करने के महत्व पर भी बल दिया और कहा कि सच्ची शिक्षा को विचारों को मुक्त करना चाहिए, भारत की विरासत में विश्वास पैदा करना चाहिए और इसकी बौद्धिक परंपराओं में गर्व की भावना को बढ़ावा देना चाहिए।
उपराष्ट्रपति ने चरित्र और ईमानदारी के महत्व पर जोर देते हुए छात्रों को अपनी शैक्षणिक यात्रा के दौरान प्राप्त मूल्यों को आगे बढ़ाने की सलाह दी। उन्होंने छात्रों से उत्कृष्टता के लिए प्रयास करने, समाज में सार्थक योगदान देने और मजबूत एवं विकसित भारत के निर्माण में अपनी भूमिका निभाने का आग्रह किया।
इस अवसर पर हरियाणा के राज्यपाल और विश्वविद्यालय के कुलाधिपति प्रोफेसर आशीष कुमार घोष; हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी; हरियाणा के मंत्रिमंडल मंत्री श्री अरविंद कुमार शर्मा और विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर श्री प्रकाश सिंह उपस्थित थे।
नई दिल्ली – रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 262वें सेना चिकित्सा कोर स्थापना दिवस के उपलक्ष्य के हिस्से के तौर पर आज दिल्ली कैंट स्थित आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल) में नेत्र विज्ञान, कैंसर रोग चिकित्सा-ऑन्कोलॉजी और जॉइंट रिप्लेसमेंट केंद्रों की आधारशिला रखी और बेस हॉस्पिटल में नए बुनियादी ढांचे का शिलान्यास किया। आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रेफरल) में अत्याधुनिक सुविधाओं से सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं की तृतीयक देखभाल क्षमताओं (वरिष्ठ डॉक्टरों द्वारा उन्नत तकनीक का उपयोग कर विशेषज्ञ सेवा) उच्च विशिष्ट, जटिल चिकित्सा सेवाओं में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। विशेष रूप से नेत्र देखभाल, कैंसर उपचार और जटिल जॉइंट रिप्लेसमेंट सर्जरी के क्षेत्रों में इससे उन्नत सेवा प्रदान की जा सकेगी। बेस हॉस्पिटल में नए अस्पताल के आधारभूत ढांचे को 998 बिस्तरों की क्षमता के साथ विकसित किया जा रहा है, जिसमें रक्षाकर्मियों की नियमित और आपातकालीन स्वास्थ्य देखभाल आवश्यकताएं पूरी करने के लिए आपातस्थिति में अतिरिक्त 100 बिस्तरों का विस्तार भी शामिल है।
रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में सैन्य चिकित्सा के क्षेत्र में उभरती चुनौतियों का सामना करने के लिए निरंतर नवाचार, क्षमता वर्धन और आधुनिक प्रौद्योगिकियों के एकीकरण के महत्व पर बल दिया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि आधुनिक प्रौद्योगिकी और बुनियादी अवसंरचना से युक्त नई सुविधाओं से सेवारत सैनिकों, पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा मिलेगी।
श्री राजनाथ सिंह ने देश के प्रत्येक कोने में, ऊंचे पहाड़ी स्थानों से लेकर दुर्गम जंगलों तक तथा शांति काल से लेकर आपदा के क्षणों तक, हर जगह सेवा प्रदान करने वाले सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा कर्मियों के समर्पण, पेशेवर दृष्टिकोण और करुणापूर्ण भावना की सराहना की। उन्होंने देश और नेपाल सहित पड़ोसी देशों में चिकित्सा शिविर संचालित करने के लिए उनकी सराहना की और विशेष रूप से उनके ग्लूकोमा सर्जरी और नेत्र देखभाल सेवाओं के सफल संचालन का उल्लेख किया। रक्षा मंत्री ने कहा कि ऐसी पहल मित्र देशों के साथ हमारे संबंधों को सुदृढ़ बनाती हैं और लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाती हैं। उन्होंने चिकित्सकों से कहा कि उनकी सेवा भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ का सशक्त प्रमाण हैं।
रक्षा मंत्री ने सैनिकों और उनके परिवार को विश्व स्तरीय स्वास्थ्य सुविधाए प्रदान करने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराते हुए इसे सर्वोच्च प्राथमिकता बताया। उन्होंने सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा से ‘अनुसंधान’ पर विशेष जोर देने को कहा और लोगों के लिए प्रभावी स्वास्थ्य सेवा मॉडल प्रस्तुत करने हेतु आधुनिक चिकित्सा विज्ञान और प्राचीन दर्शन के एकीकरण पर बल दिया। रक्षा मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश ने चिकित्सा क्षेत्र में उल्लेखनीय प्रगति की है, जिसमें स्वास्थ्य सेवा ढांचे का निरंतर विस्तार, अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान-एम्स जैसे संस्थानों की संख्या में बढोतरी, आयुष्मान कार्ड द्वारा सबको स्वास्थ्य सुविधाओं की उपलब्धता और कैंसर उपचार, बाईपास सर्जरी और गहन चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में प्रगति शामिल है। उन्होंने कहा कि अत्याधुनिक तकनीक और गहन अनुसंधान के क्षेत्र में अभी भी हमें लंबा सफर तय करना है। श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि कैंसर अनुसंधान, विशेष रूप से आरंभिक पहचान तकनीकों और व्यक्तिगत चिकित्सा में, कई देश अभी हमसे आगे हैं। हमें हृदय रोगों के लिए उन्नत पूर्वानुमान मॉडल विकसित करने के साथ ही मानसिक स्वास्थ्य संबंधी तंत्रिका अनुसंधान में भी क्षमता और मजबूत करनी होगी।
श्री राजनाथ सिंह ने औषधि क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि भारत दवाओं का एक प्रमुख वैश्विक आपूर्तिकर्ता है, फिर भी उच्च स्तरीय दवा नवाचार और मौलिक अनुसंधान के क्षेत्र में बाहरी स्रोतों पर निर्भरता स्पष्ट रूप से दिखती है। उन्होंने जेनेरिक दवाओं के उत्पादन से आगे बढ़कर अब नवाचार-आधारित दवा पारितंत्र विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इसके साथ ही, नई दवाओं की खोज, नैदानिक अनुसंधान सुदृढ बनाने और वैश्विक गुणवत्ता मानकों को अपनाने को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने दवा नवाचार परिदृश्य में लघु एवं मध्यम उद्यमों और स्टार्टअप्स के एकीकरण, मजबूत जांच अवसंरचना के विकास और कुशल कार्यबल के संवर्धन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि यह नजरिया घरेलू आवश्यकताओं की पूर्ति के साथ ही भारत को इन क्षेत्रों में विश्व में अग्रणी बनने में भी सक्षम बनाएगा।
क्लिनिकल ट्रायल्स (नई दवाओं, टीकों, उपकरणों या उपचार विधियों की सुरक्षा और प्रभावशीलता का पता लगाने) के महत्वपूर्ण विषय पर रक्षा मंत्री ने कहा कि कई विकसित देशों में क्लिनिकल ट्रायल्स उद्योग द्वारा प्रायोजित होते हैं और अनुसंधान, उपचार और नवाचार पर समान जोर रहता है। उन्होंने कहा कि भारत में भी इस दिशा में प्रयास जारी हैं, लेकिन क्लिनिकल ट्रायल ढांचे में सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि हमें यह पता लगाना होगा कि सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा इसमें अपना सार्थक योगदान किस तरह दे सकता है, ताकि हमारी चिकित्सा क्षमता केवल उपचारात्मक तक ही सीमित न रहें, बल्कि नए ज्ञान के सृजन को भी शामिल करें।
श्री राजनाथ सिंह ने विशिष्ट रोगों से संबंधित नैदानिक अनुभव व्यवस्थित माध्यमों से अन्य डॉक्टरों और अस्पतालों तक पहुंचाने के लिए सुदृढ़ मानक संचालन प्रक्रियाओं और मानकीकृत प्रोटोकॉल बनाने का पक्ष लिया। उन्होंने कहा कि इससे उपचार अधिक तीव्रता, कुशलता और साक्ष्य-आधारित होगा, जिससे व्यक्तिगत क्षमता के साथ ही समग्र प्रणालीगत दक्षता भी बढेगी। उन्होंने कहा कि इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर डेटा पूल स्थापित करना महत्वपूर्ण कदम होगा, जिससे नीति निर्माण के लिए बेहतर जानकारी, नई चिकित्सा पद्धतियों के सत्यापन में सहायता और प्रभावी उपचारों का बड़े पैमाने पर अनुकरण संभव होगा। इससे हमारी स्वास्थ्य सेवा प्रणाली धीरे-धीरे प्रतिक्रियात्मक मॉडल से सक्रिय मॉडल में बदल जाएगी।
अस्पतालों में काम के भारी बोझ पर रक्षा मंत्री ने कहा कि डॉक्टर लगातार इलाज और शल्य चिकित्सा में व्यस्त रहते हैं, जिससे अनुसंधान, प्रशिक्षण और शिक्षण जैसे महत्वपूर्ण पहलू अक्सर उपेक्षित रह जाते हैं और इस व्यावहारिक चुनौती को स्वीकार करने की आवश्यकता है। उन्होंने सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं का आह्वान किया कि वह इसे प्रभावी तरीके से संतुलित करने के उपाय तलाशे।
श्री राजनाथ सिंह ने सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाओं से कहा कि वे देश के चारों कोनों में आर्मी हॉस्पिटल (रिसर्च एंड रैफरल) जैसे संस्थान स्थापित करने की संभावना का पता लगाएं, ताकि प्रत्येक क्षेत्र और स्थान पर तैनात सैनिकों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं प्रदान की जा सकें। उन्होंने कहा कि यह आवश्यक नहीं है कि कोई नई परियोजना आरंभ की जाए या सर्वथा नया संस्थान स्थापित किया जाए। इसमें पहले से चल रही परियोजनाओं (ब्राउनफील्ड प्रोजेक्ट्स) में भी अपार संभावनाएं हैं। विभिन्न स्थानों पर स्थित कमांड अस्पतालों या बेस अस्पतालों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करके इसी स्तर तक उन्नत किया जा सकता है।
रक्षा मंत्री ने जोर देकर कहा कि आज के संदर्भ में ‘सुरक्षा’ का अर्थ केवल सीमाओं की रक्षा करना ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सुरक्षा भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर जैसे बड़े अभियानों को सफलतापूर्वक अंजाम देने में स्वास्थ्य सुरक्षा अहम भूमिका निभाती है। जब हमारे सैनिकों को यह भरोसा होता है कि उन्हें बेहतर चिकित्सा सहायता उपलब्ध है, तो वे बिना किसी भय के अपने सैन्य अभियान को पूरा करते हैं। इसलिए, स्वास्थ्य सुरक्षा के प्रति निरंतर सक्रियता और सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना अनिवार्य है।
रक्षामंत्री ने कहा कि किसी राष्ट्र के विकास के मापदंड केवल आर्थिक नहीं होते, बल्कि इसमें अन्य महत्वपूर्ण आयाम भी शामिल होते हैं; जिनमें सबसे महत्वपूर्ण है लोगों का स्वास्थ्य। उन्होंने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र को लगातार विकसित हो रही चुनौतियों को समझना, उनका प्रभावी समाधान और बदलते समय के साथ तालमेल बिठाते हुए खुद को निरंतर आधुनिक बनाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि हमें ऐसे नजरिए के साथ आगे बढ़ना होगा, जहां प्रगति केवल आर्थिक विकास तक ही सीमित न हो, बल्कि स्वास्थ्य को विकास का केंद्रीय स्तंभ, मानते हुए समग्रतापूर्ण हो।
रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में सैन्य नर्सिंग सेवा की सराहना करते हुए उन्हें चिकित्सा बलों का आधार बताया। उन्होंने कहा कि सेवानिवृत्ति के बाद उन्हें ‘पूर्व सैनिक’ का दर्जा देने का हाल का निर्णय रक्षा बलों के कर्मियों के साथ ही चिकित्सा पेशेवरों के कल्याण के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता रेखांकित करती है।
श्री राजनाथ सिंह ने अपने दौरे एक लाइव प्रदर्शन का भी अवलोकन किया और प्रौद्योगिकी प्रदर्शनी क्षेत्र का दौरा किया, जहां युद्धकालीन चिकित्सा देखभाल में अत्याधुनिक नवाचारों और प्रगति प्रदर्शित की गई है। इनमें आघात प्रबंधन, युद्धक्षेत्र निकासी प्रणाली, कृत्रिम अंग, टेलीमेडिसिन और गहन देखभाल प्रौद्योगिकी के विकास में शामिल रहे, जो आधुनिकीकरण और आत्मनिर्भरता की दिशा में सशस्त्र सैन्य चिकित्सा सेवा के निरंतर प्रयासों को दर्शाते हैं।
श्री राजनाथ सिंह ने सशस्त्र सैन्य चिकित्सा सेवा के सर्वश्रेष्ठ अस्पताल की रक्षा मंत्री ट्रॉफी कमान अस्पताल (दक्षिणी कमान) पुणे को प्रदान की, जबकि द्वितीय सर्वश्रेष्ठ अस्पताल का पुरस्कार इंडियन नेवल हॉस्पिटल शिप, अश्विनी, मुंबई को दिया गया। ये पुरस्कार रक्षा बलों के अस्पताल नेटवर्क में इन दोनों अस्पतालों के उत्कृष्ट प्रदर्शन, रोगी देखभाल में उत्कृष्टता, नवाचार और प्रशासनिक दक्षता के लिए दिए गए। रक्षा मंत्री ने इन सम्मानों को उनके सामूहिक समर्पण और अथक कार्यों का प्रमाण बताया।
रक्षा मंत्री ने ‘प्रेसिशन प्रोटोकॉल‘इन अर्ली न्यूरोडेवलपमेंटल इंटरवेंशन’नामक पुस्तक का भी विमोचन किया , जो न्यूरोडेवलपमेंटल (मस्तिष्क विकार) स्थितियों के प्रारंभिक निदान और पहल को मानकीकृत और बेहतर बनाने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण अकादमिक योगदान है। यह प्रकाशन अनुसंधान और साक्ष्य-आधारित चिकित्सा पद्धतियों पर सैन्य बल चिकित्सा सेवा के बढ़ते ध्यान को रेखांकित करता है।
इस कार्यक्रम में प्रमुख सेना अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान, नौसेना अध्यक्ष एडमिरल दिनेश के.त्रिपाठी, सेना अध्यक्ष जनरल उपेंद्र द्विवेदी, रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह, एएफएमएस महानिदेशक सर्जन वाइस एडमिरल आरती सरीन, वायु सेना उपाध्यक्ष एयर मार्शल नागेश कपूर और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
नई दिल्ली – साधना सप्ताह 2026 के छठे दिन का मुख्य उद्देश्य ठोस परिणाम अर्जित करने पर केंद्रित होगा, जिसके लिए 7 अप्रैल 2026 को विशेषज्ञों के नेतृत्व में वेबिनार आयोजित किए जाएंगे। इन सत्रों में सार्वभौमिक स्वास्थ्य आश्वासन, स्थिरता के लिए प्रणालीगत सोच और सामाजिक सुरक्षा एवं समग्र समावेशन के लिए डेटा-आधारित दृष्टिकोणों पर चर्चा की जाएगी।
कई केंद्रीय मंत्रालय, विभाग और राज्य सरकारें नागरिक-केंद्रित सेवाओं, क्षमता विकास, डेटा प्रबंधन, प्रशासन में नैतिकता और परिणाम मापन ढांचे पर विशेष वेबिनार का आयोजन भी करेंगी।
मुख्य बातें (7 अप्रैल, 2026):
1. डॉ. के. श्रीनाथ रेड्डी:
विषय: भारत के लिए सार्वभौमिक स्वास्थ्य बीमा की ओर
समय: सुबह 10:30 से 11:30 बजे तक
डॉ. रेड्डी (पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के संस्थापक अध्यक्ष) सार्वभौमिक स्वास्थ्य बीमा की दिशा में भारत की यात्रा पर चर्चा करेंगे। सत्र में सभी नागरिकों के लिए गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा की समान पहुंच सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक नीतिगत ढांचे, वितरण तंत्र और वित्तपोषण मॉडल की खोज की जाएगी, जिसमें मापनीय परिणामों और टिकाऊ स्वास्थ्य प्रणालियों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
2. श्री अशोक खोसला:
विषय: स्थिर राष्ट्र के लिए प्रणालीगत चिंतन
समय: दोपहर 12:00 बजे से दोपहर 1:00 बजे तक
श्री खोसला (अध्यक्ष, डेवलपमेंट अल्टरनेटिव्स) इस बात का विश्लेषण करेंगे कि किस प्रकार प्रणालीगत सोच भारत को सतत विकास की ओर अग्रसर कर सकती है। सत्र में विकास, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास के एकीकृत दृष्टिकोणों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जिसमें विभिन्न क्षेत्रों के बीच अंतर्संबंधों और दीर्घकालिक परिणामों के लिए समग्र समाधानों के महत्व पर बल दिया जाएगा।
3. श्री सौरभ तिवारी:
विषय: डीबीटी, लाभार्थी विश्लेषण, सामाजिक सुरक्षा, समग्र समावेशन
समय: दोपहर 3:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक
श्री तिवारी (अपर सचिव – डीबीटी, कैबिनेट सचिवालय) प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण, लाभार्थी विश्लेषण और सामाजिक सुरक्षा कार्यक्रमों में समग्र समावेशन सुनिश्चित करने की कार्यनीतियों पर चर्चा करेंगे। सत्र में यह प्रदर्शित किया जाएगा कि डेटा-आधारित दृष्टिकोण और डिजिटल प्लेटफॉर्म किस प्रकार लक्षित लाभ को बेहतर बना रहे हैं, राजस्व रिसाव को कम कर रहे हैं और यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि लाभ लक्षित लाभार्थियों तक प्रभावी ढंग से पहुंचे।
मंत्रालय/विभाग और राज्य स्तरीय वेबिनार:
ग्रामीण विकास विभाग – डॉ. वी. सुरेश बाबू, सहायक प्रोफेसर, एनआईआरडी एवं पीआर (सुबह 10:00 बजे):
विषय: “वीबी–जी राम (जी)” पर अनुकूलन
डॉ. सुरेश बाबू परिणाम मापन संरचना पर एक अनुकूलन सत्र आयोजित करेंगे। इस सत्र में जमीनी स्तर पर विकास परिणामों की निगरानी और मूल्यांकन के लिए कार्यप्रणाली, टूल्स और प्रक्रियाओं की व्याख्या की जाएगी, जिससे अधिकारियों को ग्रामीण विकास कार्यक्रमों के प्रभाव को मापने में सहायता मिलेगी।
डाक विभाग – पीटीसी दरभंगा (सुबह 10:30 बजे):
विषय: नागरिक केंद्रित सेवाएं
पीटीसी दरभंगा डाक क्षेत्र में नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण पर प्रस्तुति देगा। सत्र में डाक संचालन में सेवा की गुणवत्ता, पहुंच और नागरिकों की आवश्यकताओं के प्रति जवाबदेही में सुधार के लिए की गई पहलों और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों पर प्रकाश डाला जाएगा।
डेयर-आईसीएआर – डॉ. एस.के. शर्मा, एडीजी (एचआरएम), आईसीएआर मुख्यालय (सुबह 11:00 बजे):
विषय: क्षमता विकास की अनिवार्यता @ICAR
आरंभिक टिप्पणी: डॉ. गोपाल लाल, निदेशक, आईसीएआर-एनएएआरएम, हैदराबाद
डॉ. शर्मा आईसीएआर में कृषि अनुसंधान और विस्तार लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए क्षमता विकास की अनिवार्यता पर चर्चा करेंगे। सत्र में कृषि संस्थानों को सुदृढ़ बनाने और परिणामों में सुधार लाने के लिए आवश्यक मानव संसाधन विकास रणनीतियों, प्रशिक्षण आवश्यकताओं और योग्यता ढांचों को शामिल किया जाएगा।
डेयर-आईसीएआर – डॉ. कैरम नरसैया, निदेशक, आईसीएआर-आईएएसआरआई, नई दिल्ली (दोपहर 3:00 बजे):
विषय: आईसीएआर में डेटा प्रबंधन
प्रारंभिक टिप्पणी: डॉ. एस.पी. अहलावत, पीएस (एचआरएम), आईसीएआर मुख्यालय
डॉ. नरसैया आईसीएआर में डेटा प्रबंधन प्रथाओं और प्रणालियों पर चर्चा करेंगे। सत्र में कृषि अनुसंधान में साक्ष्य-आधारित निर्णय लेने के लिए डेटा संग्रह, भंडारण, विश्लेषण और उपयोग को शामिल किया जाएगा, जिसमें अनुसंधान परिणामों और प्रभाव को मापने के लिए मजबूत डेटा प्रणालियों के महत्व पर जोर दिया जाएगा।
छत्तीसगढ़ राज्य – डॉ. के. सुब्रमण्यम, सदस्य, छत्तीसगढ़ राज्य योजना आयोग (शाम 5:00 बजे):
विषय: प्रशासन में नैतिकता और मूल्य
डॉ. सुब्रमण्यम लोक प्रशासन में नैतिकता और मूल्यों की भूमिका पर चर्चा करेंगे। इस सत्र में यह पता लगाया जाएगा कि नैतिक ढाँचे और मूल्य-आधारित शासन किस प्रकार बेहतर परिणाम, पारदर्शिता और सरकारी संस्थानों एवं कार्यक्रमों में जनविश्वास को बढ़ावा देते हैं।
नई दिल्ली – खेती की गई फसलों और जंगली घासों के बीच परागकणों में अंतर करने का एक नया तरीका वैज्ञानिकों को भारत की कृषि उत्पत्ति की कहानी, विशेष रूप से मध्य गंगा मैदान में, को उजागर करने में सक्षम बनाता है। यह इस बात की एक सशक्त झलक प्रदान करता है कि मानव समाजों ने सहस्राब्दियों से भूदृश्य को कैसे आकार दिया।
भारत विश्व के प्रमुख खाद्य पदार्थों, गेहूं और चावल का दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है। अनाज और गैर-अनाज घासों के लिए क्षेत्र-विशिष्ट जैवमापी मानदंड स्थापित करना, खेती की जाने वाली और जंगली घासों के पराग की सटीक पहचान के लिए आवश्यक है, जिससे भारत में अतीत की मानव बस्तियों और कृषि पद्धतियों के पुनर्निर्माण में सहायता मिल सकती है।
गेहूं, चावल, जौ और बाजरा जैसी अधिकांश अनाज फसलें पोएसी (घास) परिवार से संबंधित हैं, जिनके परागकण जंगली घासों के परागकणों से काफी मिलते-जुलते हैं। सूक्ष्मदर्शी से देखने पर इनमें अंतर करना लंबे समय से कठिन रहा है। चूंकि परागकण तलछट में संरक्षित रहते हैं, इसलिए इनका संयोजन होलोसीन काल (पिछले 11,700 वर्ष) के दौरान कृषि, वनों की कटाई और बस्तियों के बारे में जानकारी दे सकता है।
पराग कणों की सूक्ष्म-आकृति विज्ञान, विशेष रूप से समग्र अनाज के आकार और वलय व्यास (छिद्र के चारों ओर का वलय), अतीत के मानव प्रभाव और पुरावनस्पतिविज्ञान के पुनर्निर्माण के लिए खेती वाले अनाजों को जंगली अनाजों से अलग करने का एक प्रमुख मानदंड है।
फिर भी, पोएसी (घास) परिवार की प्रमुख खाद्य फसलों और उनसे संबंधित जंगली प्रजातियों के परागकणों के सूक्ष्म-आकृति विज्ञान संबंधी विस्तृत विश्लेषण के लिए अभी तक कोई व्यापक अध्ययन नहीं किया गया है। इसलिए, पिछले कुछ सहस्राब्दियों में मानव गतिविधियों के पुनर्निर्माण के लिए जीवाश्म मानवजनित परागकणों की सटीक पहचान अत्यंत महत्वपूर्ण है।
भारत में अपनी तरह के पहले अध्ययन में, विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के एक स्वायत्त संस्थान, बीरबल साहनी पुरावनस्पतिविज्ञान संस्थान (बीएसआईपी) के वैज्ञानिकों ने सहयोगियों के साथ मिलकर लाइट माइक्रोस्कोपी (एलएम), कॉन्फोकल लेजर स्कैनिंग माइक्रोस्कोपी (सीएलएसएम) और फील्ड एमिशन स्कैनिंग इलेक्ट्रॉन माइक्रोस्कोपी (एफईएसईएम) का उपयोग करके 22 अनाज और गैर-अनाज प्रजातियों का विश्लेषण किया ताकि एक विश्वसनीय बायोमेट्रिक सीमा स्थापित की जा सके। उन्होंने मध्य गंगा मैदान पर ध्यान केंद्रित किया।
इसका कारण यह है कि अनाज और गैर-अनाज वाली घासों के लिए क्षेत्र-विशिष्ट बायोमेट्रिक सीमाएं स्थापित करना, जंगली घासों से खेती वाली घासों को विश्ष्टि रूप से अलग करने के लिए आवश्यक है, जिससे भारत में अतीत के मानव निवास और कृषि पद्धतियों के सटीक पुनर्निर्माण के लिए एक मजबूत उपकरण उपलब्ध होता है, और व्यापक फसल भूमि और कृषि विविधता वाला क्षेत्र, मध्य गंगा मैदान (सीजीपी), इस अध्ययन के लिए उपयुक्त था।
इससे शोधकर्ताओं को अतीत के वातावरण का पुनर्निर्माण करने में मदद मिली, जिससे वहां उगने वाले पौधों का पता लगाने, भूदृश्यों में आए बदलावों और यहां तक कि मनुष्यों द्वारा इकोसिस्टम को प्रभावित करने के तरीकों का पता लगाने में सहायता मिली।
पत्रिका ‘द होलोसीन’ (सेज प्रकाशन) में प्रकाशित इस अध्ययन में एक स्पष्ट “युग्मित बायोमेट्रिक सीमा” स्थापित की गई है, जहां अनाज के पराग का व्यास आमतौर पर 46 µm और वलय का आकार 9 µm से अधिक होता है (बाजरा को छोड़कर, जो छोटा होता है), जबकि जंगली घास का आकार छोटी होती है।
यह अवसंरचना मध्य गंगा मैदान, जो भारत की कृषि क्षेत्र है, में अनाज और गैर-अनाज के परागों के बीच अंतर करने और प्राचीन कृषि पद्धतियों की शुरुआत और तेजी से सटीक पता लगाने के लिए एक मजबूत उपकरण प्रदान करता है।
यह पहली बार है जब गंगा के मैदानी क्षेत्र से प्राप्त स्वदेशी आंकड़ों का उपयोग करके इस तरह का एक अनुरूप मॉडल विकसित किया गया है, जिससे वैज्ञानिकों को यूरोपीय पराग संदर्भ डेटाबेस पर निर्भर रहने के बजाय स्थानीय साक्ष्यों के आधार पर क्षेत्र के कृषि इतिहास का पुनर्निर्माण करने में मदद मिलेगी।
चित्र 1: गैर-अनाज परागकणों की सूक्ष्म-आकृति विज्ञान
इस अध्ययन का नेतृत्व लखनऊ स्थित बीरबल साहनी पुरावनस्पतिविज्ञान संस्थान (बीएसआईपी) की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. स्वाति त्रिपाठी ने डॉ. आरती गर्ग (भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण, प्रयागराज), आर्य पांडे और अनुपम शर्मा (बीएसआईपी), प्रियंका सिंह (भारतीय भूचुंबकत्व संस्थान, मुंबई) और अंशिका सिंह (लखनऊ विश्वविद्यालय) के सहयोग से किया।
इस खोज से प्राचीन कृषि, भूमि उपयोग और इकोसिस्टम पर मानव प्रभाव से संबंधित शोध की सटीकता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी। इससे पुरातत्वविदों और पर्यावरण इतिहासकारों को यह समझने में मदद मिलेगी कि किस प्रकार मनुष्यों ने धीरे-धीरे गंगा के उपजाऊ मैदानों को एक प्रमुख कृषि केंद्र में परिवर्तित कर दिया।
चित्र 2. अनाज के परागकणों की सूक्ष्म-आकृति विज्ञान
यह अध्ययन भारत को कृषि और मानव बस्तियों की उत्पत्ति का पता लगाने के लिए पहला स्पष्ट, क्षेत्र-विशिष्ट वैज्ञानिक उपकरण प्रदान करता है, जिससे यह काम कहीं अधिक सटीकता के साथ किया जा सकता है।
नई दिल्ली – जनजातीय मामलों के मंत्रालय की एक प्रमुख पहल, भारत ट्राइब्स फेस्ट 2026, जिसका आयोजन ट्राइफेड के सहयोग से किया गया था, का आज नई दिल्ली के सुंदर नर्सरी में भव्य समापन समारोह के साथ संपन्न हुआ। यह 19 दिनों तक चले जनजातीय संस्कृति, शिल्प कौशल और उद्यम के उत्सव का समापन था।
समापन समारोह में दस श्रेणियों – मिट्टी के बर्तन, बेंत और बांस, आभूषण, व्यंजन, उपहार और मिश्रित वस्तुएं, धातु, प्राकृतिक वस्तुएं, चित्रकला, वस्त्र और वन धन विकास केंद्र (वीडीवीके) में शीर्ष प्रदर्शन करने वाले जनजातीय कारीगरों और विक्रेताओं को सम्मानित किया गया। पुरस्कार ट्राइफेड के प्रबंध निदेशक श्री एम. राजामुरुगन, आईपीएस और जनजातीय मामलों के मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री अनंत प्रकाश पांडे द्वारा गणमान्य व्यक्तियों और हितधारकों की उपस्थिति में प्रदान किए गए।
यह उत्सव देश भर के जनजातीय कारीगरों, स्वयं सहायता समूहों, वन धन विकास केंद्रों और उद्यमियों के लिए एक व्यापक मंच के रूप में कार्य करता है, जिससे उन्हें सीधे बाजार तक पहुंच प्राप्त करने और स्थायी आजीविका को बढ़ावा देने में मदद मिलती है।
महोत्सव की प्रमुख विशेषताएं इस प्रकार थीं:
200 से अधिक स्टॉल जिनमें आदिवासी हस्तशिल्प, हथकरघा और प्राकृतिक उत्पाद प्रदर्शित किए गए
300 से अधिक आदिवासी कारीगरों और शिल्पकारों की भागीदारी
75 से अधिक वन धन विकास केंद्रों का प्रतिनिधित्व
17 लाइव शिल्प प्रदर्शन
30 से अधिक आदिवासी खाद्य स्टॉल जिनमें 120 से अधिक आदिवासी रसोइयों ने भाग लिया
आगंतुकों ने आदिवासी कला, वस्त्र, आभूषण, वन-आधारित उत्पाद और प्रामाणिक व्यंजनों की एक जीवंत प्रदर्शनी का अनुभव किया। प्रमुख आकर्षणों में समकालीन आदिवासी डिज़ाइन को बढ़ावा देने वाला आरआईएसए पवेलियन, बाज़ार संपर्क स्थापित करने वाला BTF बाज़ार और एक विशाल आदिवासी फ़ूड कोर्ट शामिल थे।
त्योहार का एक प्रमुख आकर्षण 18 मार्च, 2026 को आरआईएसए ब्रांड का शुभारंभ था, जो समकालीन और वैश्विक बाज़ारों में आदिवासी शिल्प कौशल को स्थापित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। केंद्रीय जनजातीय मामलों के मंत्री श्री जुअल ओराम और महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर द्वारा शुरू की गई यह पहल, डिज़ाइन नवाचार, स्थिरता और बेहतर बाज़ार पहुँच के माध्यम से आदिवासी उद्यम को बढ़ावा देने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
त्योहार में भारत ट्राइब्स बिज़नेस कॉन्क्लेव, सीएसआर कॉन्क्लेव और वन धन कॉन्क्लेव का भी आयोजन किया गया, जिसमें नीति निर्माताओं, उद्योगपतियों, कॉरपोरेट जगत के नेताओं और सामुदायिक हितधारकों को बाज़ार पहुँच, ब्रांडिंग, नवाचार और स्थायी आजीविका जैसे मुद्दों पर विचार-विमर्श करने के लिए एक साथ लाया गया।
इस आयोजन को जनता की जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली, जिसमें 15 लाख से अधिक आगंतुक आए और करोड़ों रुपये की बिक्री हुई, जो आदिवासी उत्पादों के प्रति बढ़ती सराहना और मांग को दर्शाती है।
इस अवसर पर बोलते हुए श्री अनंत प्रकाश पांडे ने कहा, “भारत जनजाति महोत्सव आदिवासी उत्पादों को मुख्यधारा के बाजारों से जोड़ने और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में कार्य करता है।”
श्री एम. राजामुरुगन ने कहा, “उत्सव की सफलता आदिवासी उद्यम की बढ़ती ताकत को दर्शाती है, जो कारीगरों को पहचान, बाजार तक पहुंच और स्थायी आजीविका के अवसर प्रदान करती है।”
भारत जनजाति महोत्सव 2026 का सफल समापन आदिवासी सशक्तिकरण, ‘वोकल फॉर लोकल’ को बढ़ावा देने और समावेशी आर्थिक विकास के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।
07.04.2026 – मित्रवृन्दा प्रोडक्शन हाउस की शॉर्ट फिल्म ‘मेरा वाला अलग है’ यूट्यूब चैनल पर लॉन्च कर दी गई है। लगभग अठारह मिनट की इस शॉर्ट फिल्म में भावनाओं, रिश्तों और यथार्थ का गहरा चित्रण किया गया है। फिल्म का निर्माण बबिता सहगल और मयूर पटेल ने किया है, जबकि इसका निर्देशन और लेखन नितीश कुमार ने किया है। सह निर्माता हर्षिका कोटिलिंगल है।
यह फिल्म निर्देशक नितीश कुमार के करियर की दूसरी निर्देशित फिल्म है। इससे पहले वे अभिनय के क्षेत्र में भी सक्रिय रहे हैं और अब निर्देशन के माध्यम से अपनी रचनात्मकता को एक नई दिशा दे रहे हैं। इस फिल्म की मुख्य भूमिकाओं में विशाल के, उर्मिला पाल और मुदित भारद्वाज नजर आते हैं, जिन्होंने अपने अभिनय से कहानी को जीवंत बना दिया है।
फिल्म ‘मेरा वाला अलग है’ एक ऐसी कथा प्रस्तुत करती है, जो आज के युवा वर्ग, विशेषकर युवतियों के जीवन से गहराई से जुड़ी हुई है। यह कहानी उन लड़कियों की मनःस्थिति को दर्शाती है, जो प्रेम और भावनाओं में बहकर वास्तविकता को नजरअंदाज कर देती हैं और ऐसे जाल में फंस जाती हैं, जहां से बाहर निकलना अत्यंत कठिन हो जाता है। फिल्म इस बात पर जोर देती है कि जीवन के महत्वपूर्ण निर्णय भावनाओं के बजाय समझदारी और विवेक से लेने चाहिए।
इस फिल्म के माध्यम से मित्रवृन्दा प्रोडक्शन हाउस ने यह साबित किया है कि सीमित समय में भी एक प्रभावशाली और विचारोत्तेजक कहानी प्रस्तुत की जा सकती है। यह शॉर्ट फिल्म न केवल दर्शकों का मनोरंजन करती है, बल्कि उन्हें सोचने पर भी मजबूर करती है। अंततः, ‘मेरा वाला अलग है’ एक ऐसी प्रस्तुति है, जो भावनाओं, यथार्थ और सामाजिक चेतना का सुंदर संगम है। यह फिल्म विशेष रूप से युवाओं के लिए एक आईना है, जो उन्हें अपने निर्णयों के प्रति सजग रहने की प्रेरणा देती है।
जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने सभी आयोजन समितियों एवं सामाजिक संगठनों का जताया आभार
केन्द्रीय शांति समिति, महावीर मण्डल, तपोवन मंदिर पूजा समिति, रामनवमी श्रृंगार समिति, चैती दुर्गा पूजा समिति, केन्द्रीय सरना समिति, सभी सरना समिति, सेंट्रल मोहर्रम कमिटी, अंजुमन इस्लामिया, गुरुनानक समिति सहित सभी पर्व आयोजन समितियों एवं अखाड़ा समिति के सदस्यों के समर्पण, अनुशासन एवं उत्कृष्ट समन्वय की सराहना
आस्था एवं परंपरा के साथ-साथ विज्ञान और स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी अत्यंत आवश्यक-जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री पुलिस पदाधिकारियों/कर्मियों के साथ-साथ नगर निगम एवं बिजली विभाग द्वारा किए गए उत्कृष्ट कार्यों की भी सराहना
युवाओं एवं महिलाओं की अधिक से अधिक सहभागिता सुनिश्चित करने पर बल
रांची को विधि-व्यवस्था, विकास एवं स्वच्छता के क्षेत्र में देश का रोल मॉडल बनाने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक -जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री
रांची,06.04.2026 – जिला प्रशासन, रांची द्वारा विभिन्न पर्व-त्योहारों के शांति एवं सौहार्दपूर्ण आयोजन के उपलक्ष्य में समीक्षा-सह-चर्चा (Debriefing) का आयोजन किया गया। इस अवसर पर जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने सभी आयोजन समितियों एवं सामाजिक संगठनों की भूमिका की सराहना करते हुए उन्हें “टीम रांची” की भावना का सशक्त उदाहरण बताया।
जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कार्यक्रम में उपस्थित केन्द्रीय शांति समिति, महावीर मण्डल, तपोवन मंदिर पूजा समिति, रामनवमी श्रृंगार समिति, चैती दुर्गा पूजा समिति, केन्द्रीय सरना समिति, सभी सरना समिति, सेंट्रल मोहर्रम कमिटी, अंजुमन इस्लामिया, गुरुनानक समिति सहित सभी पर्व आयोजन समितियों एवं अखाड़ा समिति के सदस्यों के समर्पण, अनुशासन एवं उत्कृष्ट समन्वय की भूरी-भूरी प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि रांची में सभी पर्व अभूतपूर्व शांति, सौहार्द और सामाजिक समरसता के साथ संपन्न हुए हैं, जो पूरे देश के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है।
जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा कि हम सभी की जिम्मेदारी लगातार बढ़ रही है। आने वाले समय में पर्व-त्योहारों के साथ-साथ विकास कार्यों को भी इसी टीम भावना के साथ और बेहतर ढंग से संपन्न करना होगा।
जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने यह भी कहा कि वर्तमान समय में परंपरा एवं आस्था के साथ-साथ विज्ञान और स्वास्थ्य का ध्यान रखना भी अत्यंत आवश्यक है। किसी भी प्रकार की आस्था के साथ छेड़छाड़ का उद्देश्य कोर्ट या प्रशासन का नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी व्यक्ति को स्वास्थ्य संबंधी परेशानी न हो।
जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने सभी आयोजकों को एकता, प्रतिष्ठा, सम्मान के साथ सफल आयोजन के लिए धन्यवाद देते हुए जिला प्रशासन की ओर से आभार व्यक्त किया। साथ ही पुलिस पदाधिकारियों एवं कर्मियों के साथ-साथ नगर निगम एवं बिजली विभाग द्वारा किए गए उत्कृष्ट कार्यों की भी सराहना की।
उन्होंने कार्यक्रमों में सभी समुदायों की सक्रिय भागीदारी को सराहते हुए विशेष रूप से महिला प्रतिनिधित्व को सकारात्मक बताया और भविष्य में युवाओं एवं महिलाओं की अधिक से अधिक सहभागिता सुनिश्चित करने पर बल दिया।
सोशल मीडिया के इस दौर में अफवाहों पर नियंत्रण बनाए रखने में सभी संगठनों के सहयोग के लिए जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने विशेष धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि रांची ने देश के सामने जो सौहार्द और अनुशासन की मिसाल पेश की है, उसे भविष्य में भी बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। रांची को विधि-व्यवस्था, विकास एवं स्वच्छता के क्षेत्र में देश का रोल मॉडल बनाने के लिए सामूहिक प्रयास आवश्यक है।
वरीय पुलिस अधीक्षक, रांची श्री राकेश रंजन ने अपने संबोधन में कहा कि “आप सभी की भूमिका ही रांची की सामाजिक एकता को बनाए रखती है। आपसी भाईचारे की यह भावना ही इस शहर की सबसे बड़ी ताकत है। अपने शहर को सुंदर, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाए रखने की जिम्मेदारी हम सभी की है।
कार्यक्रम में उपविकास आयुक्त श्री सौरभ कुमार भुवनिया, पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) श्री प्रवीण पुष्कर, पुलिस अधीक्षक (शहर) श्री पारस राणा, पुलिस अधीक्षक (यातायात) श्री राकेश सिंह, अपर जिला दण्डाधिकारी (विधि-व्यवस्था) श्री राजेश्वरनाथ आलोक, अनुमण्डल पदाधिकारी (सदर) श्री कुमार रजत सहित विभिन्न समितियों के अध्यक्ष एवं सदस्य उपस्थित थे।
लापरवाही पर अधिकारियों-कर्मचारियों को स्पष्टीकरण नोटिस
लापरवाह कर्मचारी पर 48 घंटे में शोकॉज और आरोप पत्र गठित करने का आदेश
नगड़ी सीओ को सीआई और कर्मचारी पर आरोप पत्र गठित करने का निर्देश
रांची,06.04.2026 – जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने आज आयोजित जनता दरबार में विभिन्न मामलों की सुनवाई करते हुए अधिकारियों एवं कर्मचारियों की लापरवाही पर कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
नगड़ी अंचल से जुड़े एक गंभीर मामले में, एक ही प्लॉट नंबर पर दाखिल-खारिज को स्वीकृत और अस्वीकृत करने की शिकायत पर जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने अंचल अधिकारी को कड़ी फटकार लगाई। उन्होंने संबंधित कर्मचारी को 48 घंटे के भीतर शोकॉज जारी कर आरोप पत्र गठित करने का निर्देश देते हुए चेतावनी दी कि ऐसा नहीं होने पर संबंधित पदाधिकारी के खिलाफ ही आरोप गठित किया जाएगा।
इसी अंचल के एक अन्य म्यूटेशन आवेदन को लंबे समय तक लंबित रखने पर जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने अंचल अधिकारी, सीआई एवं संबंधित कर्मचारी तीनों के खिलाफ स्पष्टीकरण मांगने का आदेश दिया। उन्होंने कहा कि जनता दरबार में पहले भी इस मामले की शिकायत की गई थी, लेकिन समाधान नहीं होने पर यह गंभीर लापरवाही का मामला है।
शिक्षा से जुड़े एक संवेदनशील मामले में, एक प्रतिष्ठित स्कूल द्वारा सातवीं कक्षा उत्तीर्ण छात्र को रिपोर्ट कार्ड की जगह ट्रांसफर सर्टिफिकेट (टीसी) दिए जाने की शिकायत पर जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने जिला शिक्षा पदाधिकारी एवं जिला शिक्षा अधीक्षक को तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए। उन्होंने सुनिश्चित करने को कहा कि छात्र का भविष्य प्रभावित न हो।
एक अन्य मामले में, रांची निवासी द्वारा अपने देवर पर मानसिक रूप से बीमार पति के नाम पर फर्जी बैंक खाता खोलकर धोखाधड़ी एवं पुश्तैनी संपत्ति हड़पने का आरोप लगाया गया। इस मामले में आरोपी एक सरकारी शिक्षक है। जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने जिला शिक्षा पदाधिकारी को जांच कर आरोपी शिक्षक के वेतन पर रोक लगाने का निर्देश दिया।
जनता दरबार में पहुंचे बुजुर्ग भोलाराम की पेंशन समस्या का त्वरित समाधान करते हुए पाया गया कि आधार सीडिंग नहीं होने के कारण राशि खाते में नहीं जा रही थी। जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने एलडीएम को निर्देश देते हुए संबंधित बैंक शाखा द्वारा शीघ्र आधार सीडिंग सुनिश्चित कराने को कहा।
मंईयां सम्मान योजना के लाभ से वंचित लाभुकों की शिकायतों पर भी जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने संज्ञान लेते हुए सहायक निदेशक सामाजिक सुरक्षा को आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए। सोनाहातू के हीरामणि प्रसाद ने भौतिक सत्यापन के बावजूद लाभ नहीं मिलने की समस्या रखी थी।
अनुकंपा के आधार पर नौकरी की मांग को लेकर पहुंची एक छात्रा के मामले में, जिसकी शिक्षिका मां का कैंसर से निधन हो चुका है, जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने सभी दस्तावेजों का अवलोकन कर नियमानुसार उचित निर्णय का आश्वासन दिया।
इसके अतिरिक्त, शिक्षा के अधिकार के तहत नामांकन, भूमि विवाद, अवैध कब्जा, प्रमाण पत्र निर्गत करने सहित अन्य मामलों पर भी उपायुक्त ने संबंधित पदाधिकारियों को त्वरित एवं नियमानुसार कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा एक बार फिर से स्पष्ट किया गया कि जनता दरबार आम लोगों की समस्याओं के समाधान का सशक्त माध्यम है और इसमें आने वाली प्रत्येक शिकायत का समयबद्ध एवं पारदर्शी निष्पादन प्रशासन की प्राथमिकता है।
नई दिल्ली – भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के प्रौद्योगिकी विकास बोर्ड (टीडीबी) ने “इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग नवोन्मेषण सशक्तिकरण” नामक परियोजना के लिए मेसर्स एसचार्ज प्राइवेट लिमिटेड के साथ एक समझौता किया है। यह परियोजना औद्योगिक स्थिरता के लिए भारत-ब्रिटेन सहयोगात्मक अनुसंधान एवं विकास कार्यक्रम के तहत समर्थित है और ब्रिटेन स्थित अल्ब्राइट प्रोडक्ट डिजाइन लिमिटेड के साथ साझेदारी में इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) चार्जिंग अवसंरचना के लिए उन्नत और कुशल समाधान विकसित करने के उद्देश्य से चलाई जा रही है।
इस समर्थित परियोजना का मुख्य उद्देश्य वाणिज्यिक बेड़े और डिपो संचालन के लिए तैयार किए गए अगली पीढ़ी के इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग समाधान का विकास करना है। यह प्रौद्योगिकी एसचार्ज प्राइवेट लिमिटेड द्वारा विकसित एक नवोन्मेषी इलेक्ट्रिक वाहन चार्जर चार्ज कंट्रोलर को ब्रिटेन के भागीदार के पेटेंट प्राप्त स्वचालित केबल प्रबंधन प्रणाली के साथ एकीकृत करती है। इस एकीकृत दृष्टिकोण को उच्च मांग वाले इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग वातावरण में परिचालन दक्षता, सुरक्षा और उपयोगिता में सुधार करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।
यह समाधान विशेष रूप से फ्लीट-आधारित अनुप्रयोगों के लिए डिज़ाइन की गई एक मोटरयुक्त ओवरहेड केबल प्रबंधन प्रणाली प्रस्तुत करता है, जो मैन्युअल हैंडलिंग को कम करके, केबलों की क्षति को न्यूनतम करके और उपयोगकर्ता की सुविधा को बढ़ाकर चार्जिंग संचालन को सुव्यवस्थित करता है। यह प्रणाली विद्यमान एसी टाइप-2 ईवी चार्जर के अनुकूल है और डिपो में सुरक्षित तथा व्यवस्थित अवसंरचना सुनिश्चित करते हुए चार्जिंग टर्नअराउंड समय को बेहतर बनाने का लक्ष्य रखती है।
केबल प्रबंधन, उपकरण सुरक्षा और कार्यप्रवाह अनुकूलन जैसी प्रमुख परिचालन चुनौतियों का समाधान करने के जरिए इस प्रौद्योगिकी द्वारा इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग डिपो की दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि किए जाने की उम्मीद है। साथ ही, केबल क्षति, तोड़फोड़ और परिचालन संबंधी खतरों को कम करके यह सुरक्षा मानकों को बेहतर बनाने में भी योगदान देती है।
एसचार्ज प्राइवेट लिमिटेड एक उभरती हुई भारतीय इलेक्ट्रिक वाहन प्रौद्योगिकी कंपनी है, जो उन्नत पावर इलेक्ट्रॉनिक्स और स्मार्ट चार्जिंग सिस्टम विकसित करने पर केंद्रित है। इस परियोजना के माध्यम से, कंपनी का लक्ष्य इलेक्ट्रिक वाहन चार्जिंग प्रौद्योगिकियों में स्वदेशी क्षमताओं को सुदृढ़ करना और बढ़ते इलेक्ट्रिक मोबिलिटी सेक्टर के लिए परिमाणयोग्य और टिकाऊ बुनियादी ढांचा तैयार करना है।
टीडीबी के सचिव श्री राजेश कुमार पाठक ने इस अवसर पर कहा कि भारत-ब्रिटेन कार्यक्रम जैसी सहयोगात्मक अनुसंधान एवं विकास पहलें उन्नत, उद्योग-अनुकूल प्रौद्योगिकियों के विकास में तेजी लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक मोबिलिटी को तेजी से अपनाने और भारत में एक मजबूत, कुशल और भविष्य के लिए तैयार इकोसिस्टम के निर्माण के लिए ईवी चार्जिंग बुनियादी ढांचे में नवोन्मेषण आवश्यक हैं।
एसचार्ज प्राइवेट लिमिटेड के प्रमोटर ने समर्थन के लिए आभार व्यक्त किया और रेखांकित किया कि यह परियोजना कंपनी को बाजार में अभिनव, विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी ईवी चार्जिंग समाधान लाने में सक्षम बनाएगी, जिससे फ्लीट ऑपरेटरों और बुनियादी ढांचा प्रदाताओं की बढ़ती आवश्यकताओं को पूरा किया जा सकेगा।
नई दिल्ली – नवी मुंबई की टेक्सटाइल रिकवरी फैसिलिटी, चक्रीय प्रणालियों और सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से वस्त्र अपशिष्ट को अवसरों में बदलने का काम कर रही है। स्वच्छ भारत मिशन-अर्बन 2.0 के अंतर्गत यह पहल न केवल लैंडफिल कचरे को कम कर रही है, बल्कि रोजगार के नए रास्ते भी खोल रही है और शहरी भारत के लिए एक प्रभावी व विस्तार योग्य मॉडल पेश कर रही है।
भारत में हर साल लगभग 78 लाख मीट्रिक टन वस्त्र अपशिष्ट उत्पन्न होता है, जो घरों, संस्थानों और उद्योगों द्वारा उपयोग किए जाने वाले वस्त्रों की व्यापकता और विविधता को स्पष्ट रूप से दर्शाता है। साड़ियों और वर्दी से लेकर डेनिम और घरेलू लिनेन तक, कपड़े शहरी कचरे के प्रवाह का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जिसे अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है। शहरों में वस्त्रों की रिकवरी, पुन: उपयोग और पुनर्चक्रण के लिए सुनियोजित प्रणालियां विकसित करने की आवश्यकता को तेजी से महसूस की जा रही है। चक्रीय अर्थव्यवस्था के दृष्टिकोण और संसाधन दक्षता पर बढ़ते ध्यान के साथ, नगरपालिकाएं ऐसे नवीन समाधानों की खोज कर रही हैं जो वस्त्रों को लैंडफिल में जाने से रोकते हैं।
स्वच्छ भारत मिशन-अर्बन 2.0 के तहत, नवी मुंबई नगर निगम (एनएमएमसी) इस मामले में राष्ट्रीय स्तर पर अग्रणी बनकर उभरा है। व्यवस्थित उपायों के माध्यम से वस्त्र अपशिष्ट की समस्या से निपटने के अवसर को पहचानते हुए, एनएमएमसी ने नवी मुंबई के बेलापुर में भारत की पहली नगर निगम टेक्सटाइल रिकवरी फैसिलिटी (टीआरएफ) स्थापित की। विकेंद्रीकृत संग्रहण, वैज्ञानिक छंटाई, पता लगाने की क्षमता और महिलाओं के नेतृत्व में आजीविका सृजन को एकीकृत करके, टीआरएफ वस्त्र अपशिष्ट को एक उपेक्षित धारा से शहरी चक्रीय अर्थव्यवस्था के एक मूल्यवान घटक के रूप में पुनर्स्थापित करता है।
नवी मुंबई की टेक्सटाइल रिकवरी फैसिलिटी (टीआरएफ) की परिकल्पना, एक स्वतंत्र संग्रह केंद्र के रूप में नहीं, बल्कि एक व्यापक चक्रीय इकोसिस्टम के रूप में की गई है जो संग्रह, छंटाई, प्रौद्योगिकी और आजीविका सृजन को जोड़ता है।
इस मॉडल की शुरुआत विकेंद्रीकृत संग्रहण प्रणाली से होती है, जिसके तहत सभी 8 नगर निगम वार्डों में स्थित हाउसिंग सोसाइटियों में ब्रांडेड कपड़े के कूड़ेदान लगाए गए हैं। अब तक 140 कूड़ेदान स्थापित किए जा चुके हैं और 250 कूड़ेदान लगाने का लक्ष्य है जिससे जमीनी स्तर पर सुलभता और नागरिक भागीदारी सुनिश्चित हो सके।
बेलापुर के एक पुराने शहरी स्वास्थ्य केंद्र में स्थापित अंतरिम टीआरएफ में, वैज्ञानिक छंटाई और अनुरेखण क्षमता पर ध्यान केंद्रित किया गया है। एकत्रित वस्त्रों का वजन किया जाता है, उन पर टैग लगाए जाते हैं और उन्हें व्यवस्थित रूप से पुन: प्रयोज्य, पुनर्चक्रण योग्य, अपसाइक्लिंग योग्य, डाउनसाइक्लिंग योग्य और अस्वीकृत श्रेणियों में वर्गीकृत किया जाता है। कोशा हैंडहेल्ड स्कैनर के एकीकरण से कपास, पॉलीकॉटन, पॉलिएस्टर, ऊन और रेशम सहित रेशों की तत्काल पहचान संभव हो पाती है, जिससे वैज्ञानिक वर्गीकरण को मजबूती मिलती है और सामग्री की पुनर्प्राप्ति को अनुकूलित किया जाता है।
दाता से अंतिम उत्पाद तक वस्तु की यात्रा को ट्रैक करने के लिए एक विशेष एमआईएस प्लेटफॉर्म विकसित करता है, जो डिजिटल निगरानी, पारदर्शिता, जवाबदेही और डेटा-आधारित निर्णय प्रक्रिया को बढ़ावा देता है। पहचान के बाद, आगे की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए वस्त्रों को कपड़े के प्रकार, रंग और स्थिति के आधार पर अलग किया जाता है। छांटे गए पदार्थों को पुनः उपयोग में लाने से पहले स्वच्छता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अच्छी तरह से कीटाणुरहित किया जाता है।
उपयुक्त कपड़ों को स्वयं-सहायता समूहों की कुशल महिलाओं द्वारा हस्तनिर्मित बैग, चटाई, सहायक उपकरण, परिधान और घरेलू सजावट की वस्तुओं में परिवर्तित किया जाता है। इन पुनर्निर्मित उत्पादों को बाद में प्रदर्शनियों में प्रदर्शित और बेचा जाता है। इससे उन सामग्रियों को नया जीवन और अर्थ मिलता है, जिन्हें कभी बेकार समझा जाता था।
300 से अधिक महिलाओं ने फाइबर की पहचान, पृथक्करण प्रोटोकॉल, मरम्मत तकनीक और अपसाइक्लिंग कौशल को कवर करने वाले 8 दिवसीय प्रशिक्षक प्रशिक्षण (टीओटी) मॉड्यूल में भाग लिया है। 150 से अधिक महिलाएं अब कपड़ा छंटाई, सिलाई और उत्पाद रूपांतरण के माध्यम से प्रति माह 9,000 रुपए से 15,000 रुपए के बीच से कमा रही हैं।
इस पहल ने एक क्रांतिकारी बदलाव लाया है। इसने गृहिणियों को कुशल चक्रीय अर्थव्यवस्था के प्रणेता के रूप में उभरने में सक्षम बनाया है। यह संयंत्र एक समर्पित अपसाइक्लिंग केंद्र के रूप में कार्य करता है जहां स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) के सदस्य पुराने वस्त्रों से बैग, कपड़े, पाउच और घरेलू सजावट के उत्पाद बनाते हैं। वस्त्र पुनर्चक्रण एक सुनियोजित आजीविका का साधन बनकर उभरा है जो हरित रोजगार सृजित करता है, स्थानीय उद्यम को मजबूत करता है और शहरी स्थिरता के ढांचे के भीतर श्रम की गरिमा को सुदृढ़ करता है।
टीआरएफ मॉडल ने उपभोक्ता द्वारा इस्तेमाल किए गए 30 मीट्रिक टन वस्त्र अपशिष्ट को इकट्ठा करने में मदद की है जिसमें से 25.5 मीट्रिक टन को वैज्ञानिक तरीके से छांटा गया है। प्रतिदिन औसतन लगभग 500 वस्तुओं की दर से 41,000 से अधिक वस्तुओं का प्रसंस्करण किया गया है। इस पहल ने 1,14,575 से ज्यादा परिवारों तक पहुंच बनाई है, 75 से अधिक आईईसी कार्यशालाएं आयोजित की हैं और 350 से अधिक समाज प्रतिनिधियों को जोड़ा है, जिससे नागरिक भागीदारी और संस्थागत सहयोग को बल मिला है। 400 से अधिक अपसाइकल्ड उत्पादों के नमूने विकसित किए गए हैं, जिसमें अस्वीकृत वस्त्र अपशिष्ट से तैयार किया गया कागज का एक सफल प्रायोगिक बैच भी शामिल है। यह पहल संसाधन पुनर्प्राप्ति में नए और रचनात्मक समाधानों को दर्शाती है।
जागरूकता बढ़ाने और बाजार अवसरों का विस्तार करने के लिए, टीआरएफ ने 30 से अधिक प्रदर्शनियों और सार्वजनिक कार्यक्रमों में सक्रिय रूप से भाग लिया है। इन मंचों ने उपभोक्ता द्वारा उपयोग किए गए वस्त्रों के पुनर्चक्रण और पुन: उपयोग के महत्व के बारे में जागरूकता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इसके साथ ही महिला कारीगरों को अपने उत्पादों को प्रदर्शित करने और बेचने के अवसर भी प्रदान किए हैं।
नवी मुंबई में टीआरएफ के कार्यान्वयन में शुरुआती दौर में कई चुनौतियां सामने आईं, जिनमें कूड़ेदान लगाने में प्रतिरोध, वस्त्र पृथक्करण के बारे में सीमित जागरूकता और मिश्रित रेशों की छटाई में जटिलताए शामिल थीं। इन चुनौतियों को चरणबद्ध कार्यान्वयन, निरंतर नागरिक सहभागिता, अंतर-एजेंसी समन्वय और फाइबर-स्कैनिंग तकनीक को अपनाकर दूर किया गया।
बेलापुर में अंतरिम टीआरएफ की सफलता के आधार पर, अगले चरण में निसर्ग उद्यान के पास कोपरखैरान में एक स्थायी, उच्च क्षमता वाली टेक्सटाइल रिकवरी फैसिलिटी की परिकल्पना की गई है।
नवी मुंबई स्थित टेक्सटाइल रिकवरी फैसिलिटी साबित करती है कि आमतौर पर बेकार माने जाने वाले अपशिष्ट पदार्थों को आर्थिक और पर्यावरणीय लाभ के स्रोत के रूप में पुनर्जीवित किया जा सकता है। यह स्वच्छ भारत 2.0, स्मार्ट सिटी मिशन और सतत विकास लक्ष्य 12- जिम्मेदार उपभोग और उत्पादन के सिद्धांतों के अनुरूप है।
रामगढ़,06.04.2026 – राहुल दुबे गैंग और पुलिस के बीच एनकाउंटर की घटना हुई है. यह घटना सोमवार की सुबह भुरकुंडा में दोमुहान मंदिर के पास हुई. यह घटना सोमवार की सुबह भुरकुंडा में दोमुहान मंदिर के पास हुई है, जहां राहुल दुबे गैंग के सन्नी सिंह नाम के एक अपराधी को गोली लगी है.
गौरतलब है, कि एसपी अजय कुमार ने राहुल दुबे गिरोह के अपराधियों के विरुद्ध छापामारी करने हेतु एसआईटी टीम का गठन किया गया था और लगातार छापामारी की जा रही थी.
इसी क्रम मे गुप्त सूचना प्राप्त हुई कि राहुल दुबे गिरोह के सक्रिय सदस्य सनी सिंह भूरकुंडा क्षेत्र में भ्रमणशील है और अपने गिरोह के अपराधकार्मियों के साथ मिलकर दुबारा इस क्षेत्र में कोई बड़ी घटना को अंजाम दे सकता है. सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम के द्वारा भूरकुंडा और पतरातू क्षेत्र में छापेमारी किया जा रहा था, इसी क्रम मे सूचना प्राप्त हुआ कि भूरकुंडा स्थित दुमहान मंदिर के पास एक व्यक्ति बैठा हुआ है और उसका गतिविधि संदिग्ध है.
इस सूचना पर भूरकुंडा क्षेत्र अंतर्गत दुमुहाना मंदिर के पास तलाशी और छापामारी किया गया. छापामारी के क्रम मे अज्ञात अपराधकर्मी के द्वारा पुलिस कि गाडी देखते ही पुलिस पर लक्षित कर फायरिंग करने लगा, जिससे थाना प्रभारी पतरातू कि गाडी के सीसा और बम्फर मे गोली लगा, जिसमें थाना प्रभारी बाल बाल बच गए.
इसके बाद जवाबी करवाई मे फायरिंग करने वाले अपराधकर्मी के दाहिने पैर मे गोली लगा और जख़्मी होकर गिर गया जिससे नाम पता पूछने पर उक्त अपराधकर्मी के द्वारा अपना नाम सनी सिंह ग्राम रैलीगाढ़ा बताया गया जिसे घटनास्थल पर ही बैण्डज़ पट्टी कर जख़्मी हालत मे तुरंत सीसीएल अस्पताल भूरकुंडा भेजा गया. घटना स्थल पर सनी सिंह का दो देसी पिस्तौल एक मोबाइल एक लेदर बैग गिरा पड़ा मिला है.
नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय समुद्री दिवस के अवसर पर भारत की समृद्ध समुद्री विरासत को याद किया और इस क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों के अमूल्य योगदान को स्वीकार किया।
श्री मोदी ने कहा कि समुद्री क्षेत्र में कार्यरत व्यक्तियों का समर्पण देश की अर्थव्यवस्था, व्यापार और संपर्क को मजबूत करता है।
प्रधानमंत्री ने देश के समृद्ध भविष्य को सुनिश्चित करने के लिए समुद्री क्षेत्र की अपार क्षमता का उपयोग करने की सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई।
प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा;
“राष्ट्रीय समुद्री दिवस पर, हम भारत की समुद्री विरासत और इस क्षेत्र से जुड़े सभी लोगों के अमूल्य योगदान को याद करते हैं। उनका समर्पण हमारी अर्थव्यवस्था, व्यापार और संपर्क को मजबूत करता है।
हम एक समृद्ध भविष्य के लिए अपने समुद्री क्षेत्र की अपार क्षमता का उपयोग करना जारी रखेंगे।”
नई दिल्ली – इस्पात मंत्रालय के अधीन सार्वजनिक क्षेत्र की सबसे बड़ी स्टील उत्पादक महारत्न कंपनी स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) ने नीलगिरी-श्रेणी (प्रोजेक्ट 17A) के चौथे स्टील्थ फ्रिगेट, आईएनएस तारागिरी (INS Taragiri) को भारतीय नौसेना में शामिल किए जाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस युद्धपोत को 03 अप्रैल, 2026 को नौसेना में शामिल किया गया।
इस युद्धपोत का निर्माण मझगाँव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा किया गया है, जिसमें सेल द्वारा आपूर्ति किए गए लगभग 4,000 टन विशेष ग्रेड के स्टील प्लेटों की पूरी ज़रूरत का उपयोग किया गया है। इस विशेष इस्पात का उत्पादन सेल के बोकारो, भिलाई और राउरकेला स्थित एकीकृत इस्पात संयंत्रों में किया गया है, जो कंपनी की उन्नत धातुकर्म क्षमताओं और निरंतर गुणवत्ता मानकों को प्रदर्शित करता है।
सेल भारत के रक्षा स्वदेशीकरण प्रयासों में प्रमुख रूप से अपनी भूमिका निभा रहा है और सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत‘ और ‘मेक इन इंडिया‘ मिशन को लगातार मजबूती प्रदान कर रहा है। कंपनी ने इससे पहले भी कई महत्वपूर्ण नौसैनिक प्लेटफार्मों के लिए स्पेशल स्टील की आपूर्ति की है, जिसमें स्वदेशी विमान वाहक आईएनएस विक्रांत और प्रोजेक्ट 17A श्रेणी के पहले तीन जहाज—आईएनएस नीलगिरी, आईएनएस हिमगिरि और आईएनएस उदयगिरि शामिल हैं।
आईएनएस तारागिरी का नौसेना में शामिल होना रक्षा विनिर्माण के क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता का एक बड़ा प्रमाण है और यह दिखाता है कि देश की समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने में घरेलू इस्पात उद्योग का कितना बड़ा योगदान है।
नई दिल्ली – केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने राष्ट्रीय समुद्री दिवस के अवसर पर भारत के समुद्री क्षेत्र से जुड़े सभी कर्मियों को अपनी शुभकामनाएँ दीं।
X पर जारी पोस्ट में, श्री अमित शाह ने कहा, “राष्ट्रीय समुद्री दिवस पर भारत के समुद्री क्षेत्र से जुड़े सभी कर्मियों को शुभकामनाएँ। आपकी पेशेवर क्षमता और साहस ने देश की प्रगति को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है, चाहे वह शांति का समय हो या चुनौतीपूर्ण परिस्थितियाँ। राष्ट्र आपकी प्रतिबद्धता को सलाम करता है।”
नई दिल्ली – उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज भारत मंडपम में आयोजित ध्यान नेताओं के वैश्विक सम्मेलन – समग्र जीवन और शांतिपूर्ण विश्व के लिए ध्यान को संबोधित किया। इस सम्मेलन का आयोजन पिरामिड स्पिरिचुअल सोसाइटीज मूवमेंट और बुद्ध-सीईओ क्वांटम फाउंडेशन ने किया।
उपराष्ट्रपति ने आयोजकों, वक्ताओं, ध्यान गुरुओं और प्रतिभागियों को बधाई देते हुए समग्र जीवन और वैश्विक शांति के मार्ग के रूप में ध्यान को बढ़ावा देने के प्रति उनके समर्पण की सराहना की।
श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने पूजनीय तमिल संत तिरुमूलर की शिक्षाओं को याद करते हुए कहा कि ध्यान एक आंतरिक दीपक जलाने के समान है जो अज्ञान को दूर करता है और सत्य एवं शांति की ओर ले जाता है। उन्होंने कहा कि तिरुमूलर ने मानव शरीर को मंदिर और ध्यान को भीतर के दैवीय स्वरूप को जानने का साधन बताया है।
आज विश्व कई चुनौतियों से जूझ रहा है, इस बात को देखते हुए उन्होंने कहा कि द्वंद्व केवल बाहरी ही नहीं, बल्कि व्यक्तियों के भीतर भी होता है। इस संदर्भ में उन्होंने जोर दिया कि ध्यान शांति, स्पष्टता और सकारात्मक दृष्टिकोण प्रदान करके दूसरों को सुनने और समझने की क्षमता को बढ़ाने में एक परिवर्तनकारी भूमिका निभा सकता है।
उपराष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि ध्यान की असली शक्ति मनुष्य के रूपांतरण में निहित है। उन्होंने कहा कि ध्यान तनाव कम करने, एकाग्रता बढ़ाने, भावनात्मक लचीलापन बढ़ाने और अत्यधिक सोचने और अत्यधिक काम करने जैसी समस्याओं से निपटने में सहायक होता है।
उपराष्ट्रपति ने सार्थक जीवन की कीमत पर भौतिक सफलता की निरंतर खोज के प्रति आगाह किया और कहा कि धन सुख-सुविधाओं का साधन तो होना चाहिए लेकिन जीवन पर हावी नहीं होना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि ध्यान चिंतन को बढ़ाता है और व्यक्तियों को संतुलित और संतुष्ट जीवन जीने में सक्षम बनाता है। उन्होंने इस धारणा को भी खारिज किया कि ध्यान केवल आध्यात्मिक साधकों के लिए है और कहा कि यह सभी के लिए है और सामान्य व्यक्तियों को उच्च चेतना की ओर ले जा सकता है।
उन्होंने 2047 तक विकसित भारत के दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए कहा कि आर्थिक विकास के साथ-साथ मानसिक स्वास्थ्य भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि ध्यान आंतरिक शांति, भावनात्मक संतुलन और विचारों की स्पष्टता विकसित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। यह एक प्रगतिशील राष्ट्र के लिए आवश्यक है।
मादक पदार्थों के दुरुपयोग से निपटने के प्रति अपनी दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का उल्लेख करते हुए उपराष्ट्रपति ने मादक पदार्थों के उन्मूलन के उद्देश्य से वर्ष 2004 में की गई अपनी पदयात्रा को याद किया। उन्होंने विशेष रूप से युवाओं में बढ़ते मादक पदार्थों के सेवन पर चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि ध्यान व्यसन से निपटने में एक शक्तिशाली माध्यम के रूप में काम कर सकता है। यह व्यक्तियों को तनाव, चिंता और दिशाहीनता से उबरने में सहायता करता है।
उपराष्ट्रपति ने दार्शनिक जिद्दू कृष्णमूर्ति को उद्धृत करते हुए कहा, ‘‘बिना मूल्यांकन किए अवलोकन करने की क्षमता ही बुद्धिमत्ता का सर्वोच्च रूप है।’’ उन्होंने कहा कि ध्यान व्यक्तियों को रूकने और बिना किसी पूर्वाग्रह के अपने विचारों का अवलोकन करने में सक्षम बनाता है। इससे व्यक्तिगत परिवर्तन होता है। उन्होंने आगे कहा कि ऐसा परिवर्तन अधिक बुद्धिमान व्यक्तियों, सामंजस्यपूर्ण समुदायों, करुणामय नेतृत्व और अधिक मानवीय संस्थानों को बढ़ावा देता है।
उपराष्ट्रपति ने आंतरिक परिवर्तन की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि एक बेहतर विश्व का निर्माण एक बेहतर और शांत मन को विकसित करने से शुरू होता है और ध्यान उस यात्रा का प्रारंभ है।
इस अवसर पर सीबीआई और सीआरपीएफ के पूर्व निदेशक श्री डी.आर. कार्तिकेयन, अध्यक्ष एवं आध्यात्मिक प्रमुख, परमार्थ निकेतन आश्रम, ऋषिकेश; स्वामी चिदानंद सरस्वती जी, अध्यक्ष, क्वांटम लाइफ यूनिवर्सिटी; डॉ. न्यूटन कोंडावेटी, संस्थापक, बुद्ध-सीईओ क्वांटम फाउंडेशन; श्री चंद्र पुलमरसेट्टी, अध्यक्ष, पिरामिड स्पिरिचुअल ट्रस्ट (हैदराबाद); श्री विजय भास्कर रेड्डी के साथ ही ध्यान नेता, नीति निर्माता और विद्वान भी उपस्थित थे।
गुप्त सूचना के आधार पर जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देशानुसार जिला स्तरीय टीम ने ओरमांझी थाना क्षेत्र के ईरवा स्थित दिल्ली दरबार बिरयानी दुकान में छापेमारी की
छापेमारी के दौरान दुकान से 09 (नौ) व्यवसायिक गैस सिलेंडर बरामद किए गए, जिनका कुल वजन 19.02 किलोग्राम
जप्ती सूची के आधार पर गिरफ्तार व्यक्ति की निशानदेही पर आरोपी के घर (ग्राम थाना ओरमांझी) पर घेराबंदी कर छापेमारी की गई
अवैध रूप से व्यवसायिक गैस सिलेंडरों का भंडारण, रिफिलिंग एवं बिक्री करना रेगुलेशन ऑफ सप्लाई एंड डिस्ट्रीब्यूशन ऑर्डर-2000, आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 तथा अन्य सुसंगत धाराओं के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया
जिले में किसी भी प्रकार की कालाबाजारी, अवैध भंडारण या रिफिलिंग की गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आम जनता से अपील की जाती है कि यदि किसी को ऐसी कोई अवैध गतिविधि की जानकारी हो तो तुरंत जिला प्रशासन या संबंधित थाने को सूचित करें
राँची,05.04.2026 – जिला प्रशासन राँची द्वारा अवैध गैस सिलेंडर की कालाबाजारी, भंडारण एवं रिफिलिंग की गतिविधियों पर सख्त नजर रखी जा रही है। आज दिनांक 04.04.2026 को प्राप्त गुप्त सूचना के आधार पर जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देशानुसार प्रखंड विकास पदाधिकारी ओरमांझी के नेतृत्व में जिला स्तरीय टीम ने ओरमांझी थाना क्षेत्र के ग्राम ईरवा स्थित दिल्ली दरबार बिरयानी दुकान में छापेमारी की।
छापेमारी के दौरान दुकान से 09 (नौ) व्यवसायिक गैस सिलेंडर बरामद किए गए, जिनका वजन 19.02 किलोग्राम था। बरामद सिलेंडरों का विवरण निम्नानुसार है:
इनमें से छह सिलेंडर सील किए हुए थे। दुकान संचालक से पूछताछ में पता चला कि ये सिलेंडर ग्राम थाना ओरमांझी के एक बिचौलिए द्वारा बैगनआर कार से लाए गए थे। बिचौलिए द्वारा अवैध रूप से रिफिलिंग कर इन सिलेंडरों की बिक्री की जा रही थी और बिक्री से प्राप्त मुनाफे में हिस्सेदारी दी जा रही थी।
बरामद सिलेंडरों के संबंध में स्वतंत्र साक्षी की अनुपलब्धता के कारण साथ गए चौकीदार को साक्षी मानते हुए विधिवत जप्ती सूची तैयार कर सभी सिलेंडर जब्त कर लिए गए।
आरोपी के घर पर भी छापेमारी
जप्ती सूची के आधार पर गिरफ्तार व्यक्ति की निशानदेही पर आरोपी के घर (ग्राम थाना ओरमांझी) पर घेराबंदी कर छापेमारी की गई। छापेमारी के दौरान घर से 01 HP GAS सिलेंडर (वजन 19.02 किग्रा, जिसमें 10.00 किग्रा गैस भरी हुई थी) बरामद किया गया, जिसमें रिफिलिंग करने वाला नोजल लगा हुआ था। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक तराजू भी बरामद किया गया। छापेमारी के समय आरोपी अपने घर से फरार पाया गया। बरामद सभी सामग्री की भी विधिवत जप्ती सूची तैयार कर जब्त कर ली गई।
कानूनी कार्रवाई
अवैध रूप से व्यवसायिक गैस सिलेंडरों का भंडारण, रिफिलिंग एवं बिक्री करना रेगुलेशन ऑफ सप्लाई एंड डिस्ट्रीब्यूशन ऑर्डर-2000, आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 तथा अन्य सुसंगत धाराओं के अंतर्गत संज्ञेय अपराध है।
इस मामले में ग्राम थाना ओरमांझी, जिला राँची के विरुद्ध उचित कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। फरार आरोपी की तलाश की जा रही है।
जिले में किसी भी प्रकार की कालाबाजारी, अवैध भंडारण या रिफिलिंग की गतिविधियों पर कानूनी कारवाई किया जाएगा। सभी से अपील की जाती है कि यदि किसी को ऐसी कोई अवैध गतिविधि की जानकारी हो तो तुरंत जिला प्रशासन या संबंधित थाने को सूचित करें।
अवैध गतिविधियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई जारी रहेगी.
योजना अंतर्गत मार्च महीने की सम्मान राशि (2500 रूपये) का भुगतान
रांची जिला में 3 लाख 89 हजार 296 लाभुकों के खाते में किया गाय आधार बेस्ड भुगतान
लाभुकों के मध्य 97 करोड़ 32 लाख 40 हजार की राशि का भुगतान
रांची,05.04.2026 – राज्य सरकार के महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना अंतर्गत रांची जिले में लाभुकों के मध्य मार्च महीने की सम्मान राशि का भुगतान कर दिया गया है। योजना के तहत जिले की कुल 3 लाख 89 हजार 296 महिलाओं के बैंक खातों में आधार बेस्ड डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से 2500 रुपये प्रति लाभुक की दर से कुल 97 करोड़ 32 लाख 40 हजार रुपये की राशि का भुगतान कर दिया गया है।
मार्च माह में विभिन्न प्रखंड एवं शहरी क्षेत्रों में भुगतान की स्थिति निम्न है :-
अनगड़ा – 16,701 लाभुक
अरगोड़ा शहरी क्षेत्र – 13360 लाभुक
बड़गाईं शहरी क्षेत्र – 9,683 लाभुक
बेड़ो – 20,571 लाभुक
बुण्डू – 8,440 लाभुक
बुण्डू नगर पंचायत – 3,502 लाभुक
बुढ़मू – 17816 लाभुक
चान्हो – 19,699 लाभुक
हेहल शहरी क्षेत्र – 15,245 लाभुक
ईटकी – 10,334 लाभुक
कांके – 31,548 लाभुक
कांके शहरी क्षेत्र – 1,313 लाभुक
खलारी – 9,580 लाभुक
लापुंग – 11,342 लाभुक
माण्डर – 23,079 लाभुक
नगड़ी – 17,856 लाभुक
नगड़ी शहरी क्षेत्र – 8250 लाभुक
नामकुम – 17847 लाभुक
नामकुम शहरी क्षेत्र – 9489 लाभुक
ओरमांझी – 18,147 लाभुक
राहे – 9,522 लाभुक
रातू – 18,545 लाभुक
सिल्ली – 21,120 लाभुक
सोनाहातू – 13,036 लाभुक
तमाड़ – 18,491 लाभुक
सदर शहरी क्षेत्र – 24,780 लाभुक
जिला दंडाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजंत्री ने कहा कि जिला प्रशासन, रांची द्वारा यह सुनिश्चित किया गया है कि सभी पात्र लाभुकों को योजना का लाभ समय पर एवं पारदर्शी तरीके से प्राप्त हो। संबंधित विभागों को निर्देशित किया गया है कि भुगतान प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की त्रुटि या विलंब न हो तथा यदि किसी लाभुक को राशि प्राप्ति में समस्या हो तो उसका त्वरित समाधान किया जाए, जिला प्रशासन इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है।