जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में बैठक
विभिन्न विभागों द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक प्राप्त राजस्व की प्रगति की समीक्षा
“राजस्व संग्रहण जिला प्रशासन की प्राथमिकता”
राँची,11.04.2026 – जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में 11.04.2026 को समाहरणालय ब्लॉक-A, कमरा संख्या-203 के सभागार में आंतरिक संसाधनों से राजस्व संग्रहण संबंधी समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
बैठक में अपर समाहर्ता राँची, श्री रामनारायण सिंह, जिला परिवहन पदाधिकारी राँची, श्री अखिलेश कुमार, जिला खनन पदाधिकारी राँची, अबु हुसैन, रजिस्टार, जिला मत्स्य पदाधिकारी, राँची, जिला नीलाम पत्र पदाधिकारी, राँची, एवं सम्बंधित सभी पदाधिकारी उपस्थित थे।
विभिन्न विभागों द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक प्राप्त राजस्व की प्रगति की समीक्षा
बैठक में विभिन्न विभागों द्वारा वित्तीय वर्ष 2025-26 में अब तक प्राप्त राजस्व की प्रगति की समीक्षा की गई तथा आगामी वित्तीय वर्ष में शत-प्रतिशत लक्ष्य हासिल करने के निर्देश दिए गए।
बैठक में प्रस्तुत प्रमुख बिंदु एवं निर्देश:
1. परिवहन विभाग: जिला परिवहन पदाधिकारी ने बताया कि वित्तीय वर्ष 2025-26 का वार्षिक लक्ष्य ₹41047.51 लाख था , जिसके विरुद्ध ₹47501.13. लाख प्राप्त हुआ। जो 115 % है।
2. उत्पाद विभाग: सहायक आयुक्त उत्पाद ने बताया कि वार्षिक लक्ष्य के विरुद्ध 123.98% कल वसूली की गई।
3. खनन विभाग: जिला खनन पदाधिकारी ने बताया कि गतिवितीय वर्ष में लक्ष्य के विरुद्ध 129.6 0% राजस्व संग्रहण किया गया।
4. मत्स्य विभाग: जिला मत्स्य पदाधिकारी ने बताया कि वार्षिक लक्ष्य के विरुद्ध 60.52% राजस्व संग्रहण किया गया। जिसपर उपायुक्त ने सम्बंधित पदाधिकारी को निर्देश दिया की शत-प्रतिशत लक्ष्य सुनिश्चित करें।
“राजस्व संग्रहण जिला प्रशासन की प्राथमिकता”
जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त, राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने सभी विभागों द्वारा विगत वित्तीय वर्ष में लक्ष्य प्राप्ति की समीक्षा करते हुए स्पष्ट निर्देश दिया कि आगामी वित्तीय वर्ष में राजस्व संग्रहण को गति प्रदान की जाए और लक्ष्य की पूर्ति के लिए प्रभावी कदम उठाए जाएं। उन्होंने कहा कि राजस्व संग्रहण जिला प्रशासन की प्राथमिकता है।
जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त-सह-अध्यक्ष अनुकंपा समिति श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में बैठक
समिति द्वारा की गयी कुल 27 अभ्यावेदनों की समीक्षा
समिति द्वारा 06 अभ्यावेदन को किया गया स्वीकृत
रांची,11.06.2026 – जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त-सह-अध्यक्ष अनुकंपा समिति श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में 11.04.2026 जिलास्तरीय अनुकंपा समिति की बैठक आयोजित की गयी।
बैठक में समिति द्वारा सामान्य एवं चौकीदार से संबंधित अभ्यावेदनों की विस्तार से समीक्षा की गई। समिति द्वारा कुल 27 अभ्यावेदनों की समीक्षा की गयी। अभ्यावेदनों पर विचार विमर्श के बाद समिति ने 06 अभ्यावेदनों पर स्वीकृति प्रदान की गयी। शेष अन्य अभ्यावेदनों पर त्रुटि सुधार का निर्देश दिया गया।
बैठक में अपर समाहर्त्ता रांची, प्रभारी जिला स्थापना उप समाहर्त्ता-सह- सामान्य शाखा, कार्यपालक अभियंता भवन निर्माण विभाग, रांची एवं संबंधित विभाग के पदाधिकारी/प्रतिनिधि उपस्थित थे।
जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निदेशानुसार बैठक
गैस एजेंसियों को बैकलॉग शीघ्र खत्म करने और होम डिलीवरी सुनिश्चित करने का निर्देश
IOCL प्रतिनिधि को एजेंसियों को समय पर पर्याप्त मात्रा में गैस सिलेंडर की आपूर्ति सुनिश्चित करने का निर्देश
रांची,11.06.2026 – जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निदेशानुसार घरेलू गैस आपूर्ति व्यवस्था को सुदृढ़ एवं सुचारू बनाने के उद्देश्य से अनुमण्डल पदधिकारी-सह-नोडल पदाधिकारी श्री कुमार रजत की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गयी। बैठक में जिला विशिष्ट अनुभाजन पदाधिकारी, रांची, जिला आपूर्ति पदाधिकारी, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड के प्रतिनिधि तथा उरांव गैस एजेंसी, आनंद गैस एजेंसी एवं इंद्रप्रस्थ गैस एजेंसी के प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
बैठक के दौरान अनुमंडल पदाधिकारी द्वारा तीनों गैस एजेंसियों की बैकलॉग की समीक्षा की। समीक्षा में यह पाया गया कि इंद्रप्रस्थ गैस एजेंसी में 4164, आनंद गैस एजेंसी में 6800 तथा उरांव गैस एजेंसी में 3733 गैस सिलेंडरों की डिलीवरी लंबित है, जिनके डीएसी नंबर भी जनरेट किए जा चुके हैं। इस पर अनुमंडल पदाधिकारी ने सभी एजेंसियों को निर्देश दिया कि वे यथाशीघ्र उपभोक्ताआंे को गैस की डिलीवरी सुनिश्चित करें। साथ ही, इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड के प्रतिनिधि को स्पष्ट निर्देश दिया गया कि एजेंसियों को समय पर पर्याप्त मात्रा में गैस सिलेंडर की आपूर्ति सुनिश्चित करें, जिससे वितरण प्रक्रिया बाधित न हो।
भीड़ नियंत्रण एवं उपभोक्ताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए सभी गैस एजेंसियों को निर्देश दिया गया कि वे अधिक से अधिक होम डिलीवरी व्यवस्था को प्रभावी बनाएं, ताकि सड़कों पर अनावश्यक भीड़ को कम किया जा सके और उपभोक्ताओं को घर बैठे गैस सिलेंडर की सुविधा उपलब्ध हो।
रांची,11.04.2026 – महात्मा ज्योतिराव फुले जयंती और राष्ट्रीय सुरक्षित मातृत्व दिवस के उपलक्ष्य में कॉसमॉस युथ क्लब चैरिटेबल ट्रस्ट, लालपुर, रांची द्वारा आयोजित नि:शुल्क स्वास्थ्य चिकित्सा शिविर में आए 66 से अधिक मरीजों के स्वास्थ्य की जांच की गई।
मेदांता हॉस्पिटल के पेट एवं आँत रोग विशेषज्ञ डॉ. अभिषेक कुमार, हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. उज्जवल सिन्हा और ई.एन.टी रोग विशेषज्ञ डॉ. कृष्णा किंकर दास तथा बी.पी. एवं मधुमेह के सामान्य जांच के साथ शिविर में कुल 66 लोगों की जांच हुई.
पेट एवं आँत रोग में 21 मरीज, ई.एन.टी रोग में 33 मरीज तथा हड्डी रोग में 12 मरीजों को जांच किया गया।
स्वास्थ्य परीक्षण उपरांत चिकित्सकों ने उन्हे उचित परामर्श दिए।
जांच के दौरान पाए गए 7 गंभीर मरीजों को मेदांता हॉस्पिटल में भर्ती कर उनका इलाज शुरू किया जायेगा।
इस अवसर पर संस्था के संस्थापक श्री देबाशीष राय, सदस्य रथिन रॉय, पिंटू गुप्ता और सभी सदस्य मौजूद थे,
नई दिल्ली – रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह ने 10 अप्रैल, 2026 को तमिलनाडु के वेलिंगटन स्थित रक्षा सेवा स्टाफ कॉलेज (डीएसएससी) में 81वेंस्टाफ कोर्स के दीक्षांत समारोह में भाग लिया। उन्होंने 44 विदेशी प्रतिभागियों सहित छात्र अधिकारियों से बातचीत की और प्रतिष्ठित स्टाफ कोर्स के सफल समापन पर उन्हें बधाई दी। इसके साथ ही उनके समर्पण और कड़ी मेहनत की सराहना की।
रक्षा सचिव ने अपने-अपने देशों और भारत के बीच सहयोग को मजबूत करने और संबंधों को बढ़ावा देने में अधिकारियों के योगदान की सराहना की और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उन्होंने रक्षा बलों के भावी वरिष्ठ नेतृत्व को आकार देने में डीएसएससी की महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला और कॉलेज में आयोजित प्रशिक्षण की प्रशंसा करते हुए भारतीय रक्षा बलों के अधिकारियों के बीच तालमेल और संयुक्तता को बढ़ावा देने वाली पहलों की विशेष सराहना की। दीक्षांत समारोह में कई मित्र देशों के रक्षा अटैची उपस्थित थे। (रक्षा अटैची विदेशी दूतावास में अपने देश की सेना का कूटनीतिक प्रतिनिधि ऑफिसर होता है।)
1948 में स्थापित डीएसएससी एक प्रमुख त्रि-सेवा प्रशिक्षण संस्थान है जो भारतीय रक्षा बलों के साथ-साथ मित्र देशों के चयनित मध्य-स्तरीय अधिकारियों को पेशेवर शिक्षा प्रदान करता है। संस्थान का उद्देश्य उन्हें उच्च जिम्मेदारियों के लिए तैयार करना है। वर्षों से, डीएसएससी में 2,000 से अधिक अंतर्राष्ट्रीय अधिकारियों और 19,500 भारतीय अधिकारियों ने प्रशिक्षण प्राप्त किया है, जिनमें से कई विश्व भर की सरकारों और सेनाओं में महत्वपूर्ण नेतृत्व पदों पर आसीन हुए हैं।
नई दिल्ली – स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय कैबिनेट सचिवालय द्वारा जारी कैलेंडर के अनुसार, 1 अप्रैल से 15 अप्रैल 2026 तक अपने सभी अस्पतालों और संस्थानों में स्वच्छता पखवाड़ा 2026 का आयोजन कर रहा है।
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती पुण्य सलीला श्रीवास्तव ने इसी सिलसिले में आज अखिल भारतीय आयुर्वेद विज्ञान संस्थान (एआईआईएमएस), मंगलगिरी का दौरा किया। इस दौरे का उद्देश्य स्वच्छता पखवाड़े के तहत चल रही गतिविधियों की प्रगति की समीक्षा करना था। इसके साथ ही, उन्होंने नवनिर्मित स्नातक बालिका छात्रावास का उद्घाटन करते हुए इसे संस्थान को समर्पित किया।
केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने अभियान के अंतर्गत लागू की जा रही स्वच्छता और सफाई संबंधी पहलों की व्यापक समीक्षा की। समीक्षा में अस्पताल परिसर, रोगी देखभाल सुविधाएं, अपशिष्ट प्रबंधन प्रणाली और सार्वजनिक उपयोग के स्थान जैसे प्रमुख क्षेत्र शामिल थे। सचिव ने स्वच्छता, अपशिष्ट पृथक्करण और कर्मचारियों, छात्रों और रोगियों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए संस्थान के प्रयासों की सराहना की। एम्स मंगलगिरी ने पखवाड़ा के दौरान कई गतिविधियां की हैं, जिनमें स्वच्छता अभियान, जागरूकता अभियान और जैव चिकित्सा अपशिष्ट प्रबंधन और संक्रमण नियंत्रण उपायों को मजबूत करने के उद्देश्य से की गई पहल शामिल हैं।
इसके बाद संस्थान के सभागार में एक संवाद सत्र आयोजित किया गया जिसमें सचिव ने विभागाध्यक्षों, संकाय सदस्यों, कर्मचारियों और छात्रों से बातचीत की। लोगों को संबोधित करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने कहा कि स्वच्छता पखवाड़ा प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत के दृष्टिकोण के अनुरूप कार्यान्वित किया जा रहा है, जिसमें स्वच्छता को राष्ट्रीय विकास का मूलभूत स्तंभ माना गया है। उन्होंने यह भी कहा कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री के मार्गदर्शन में, यह पहल स्वास्थ्य सेवा के निवारक और संवर्धक पहलुओं को मजबूत करने पर केंद्रित है। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि स्वच्छता और साफ-सफाई न केवल निवारक स्वास्थ्य सेवाओं का आधार हैं, बल्कि वे रोगों के बोझ को कम करने और सार्वजनिक स्वास्थ्य परिणामों में सुधार करने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। सचिव ने एम्स मंगलगिरी की सराहना करते हुए कहा कि इस संस्थान ने समावेशी, सुलभ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने में सक्रिय योगदान दिया है, खासकर सुपर-स्पेशियलिटी देखभाल के क्षेत्र में।
सचिव ने स्वच्छता पखवाड़े पर आधारित सूचना, शिक्षा और संचार (आईईसी) सामग्री की एक प्रदर्शनी का अवलोकन किया और जागरूकता बढ़ाने व व्यवहार परिवर्तन को प्रोत्साहित करने के प्रयासों की प्रशंसा की
इस दौरे के दौरान, सचिव ने ‘कचरे से कला’ अभियान गैलरी का निरीक्षण किया जहां पुनर्चक्रित सामग्रियों का उपयोग करके छात्रों द्वारा निर्मित अभिनव मॉडल प्रदर्शित किए गए थे। उन्होंने विभिन्न प्रदर्शनों के साथ-साथ स्वच्छता पखवाड़े की थीम पर विकसित कैनवास पेंटिंग, स्लोगन कार्ड और पॉट पेंटिंग में परिलक्षित रचनात्मकता की सराहना की। उन्होंने अभी चल रहे हस्ताक्षर अभियान के तहत स्वच्छता प्रतिज्ञा पत्र पर हस्ताक्षर भी किए।
इस अवसर पर स्वच्छता से संबंधित प्रतियोगिताओं में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले छात्रों को पुरस्कार प्रदान किए गए। सचिव ने अभियान के दौरान स्वच्छ, सुरक्षित और रोगी-अनुकूल अस्पताल वातावरण बनाए रखने में योगदान देने वाले सफाईकर्मियों, सुरक्षाकर्मियों और अन्य कर्मचारियों को भी सम्मानित किया।
संस्थागत समीक्षा के अंतर्गत, सचिव ने अस्पताल की प्रमुख सुविधाओं का दौरा किया। इनमें आभा पंजीकरण क्षेत्र, बाह्य रोगी विभाग (ओपीडी), रेडियोलॉजी सेवाएं जैसे मैमोग्राफी, एक्स-रे और अल्ट्रासाउंड इकाइयां इकाइयां शामिल थीं। उन्होंने विकिरण ऑन्कोलॉजी इकाई का भी दौरा किया, जो लीनियर एक्सेलेरेटर (लिनैक) और ब्रैकीथेरेपी जैसी उन्नत कैंसर देखभाल सुविधाओं से लैस है। इसके अलावा, भर्ती वार्ड और ट्रॉमा एवं आपातकालीन/दुर्घटनाग्रस्त सेवाओं की भी समीक्षा की गई।
इस यात्रा के दौरान, केंद्रीय स्वास्थ्य सचिव ने स्नातक छात्राओं के लिए एक जी+9 मंजिला आवासीय सुविधा वाले छात्रावास ब्लॉक का उद्घाटन किया। इस सुविधा का उद्देश्य आवास क्षमता में वृद्धि करना और महिला स्नातक छात्राओं को एक सुरक्षित एवं सहज रहने का वातावरण तायार कराना है।
इस दौरे में संकाय सदस्यों, छात्रों और प्रशासनिक कर्मचारियों के साथ बातचीत भी शामिल थी, जिसमें संस्थागत विकास, शैक्षणिक उत्कृष्टता और रोगी देखभाल सेवाओं से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर चर्चा की गई। सचिव ने स्वास्थ्य सेवा पेशेवरों के समर्पण की सराहना की और गुणवत्तापूर्ण सेवा प्रदान करने पर निरंतर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता पर बल दिया। दौरे की शुरुआत परिसर में वृक्षारोपण अभियान से हुई, जो स्वच्छता के साथ-साथ पर्यावरण सुरक्षा के प्रति मंत्रालय की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
इस दौरे के दौरान स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, कार्यकारी निदेशक, संकाय सदस्य और एम्स मंगलगिरी के कर्मचारी उपस्थित थे।
नई दिल्ली – देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, 140 करोड़ से अधिक आबादी वाले भारत के हर नागरिक तक पोषणयुक्त आहार पहुँचाना और खेती पर निर्भर 46% आबादी की आय लगातार बढ़ाना केंद्र सरकार की शीर्ष प्राथमिकता है और इसी विज़न को ज़मीन पर उतारने के लिए केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने रायसेन में 11 से 13 अप्रैल तक होने वाले राष्ट्रीय स्तर के ‘उन्नत कृषि महोत्सव’ को खेती की सूरत बदलने वाला बड़ा कदम बताया है।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज भोपाल में प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में सरकार का मूल उद्देश्य देश की खाद्य सुरक्षा, किसानों की आय में वृद्धि और जनता को संतुलित पोषण देना है। उन्होंने कहा कि भारत की 140 करोड़ से अधिक आबादी में से लगभग 46% जनसंख्या आज भी सीधे खेती पर निर्भर है, इसलिए किसानों की आजीविका सुरक्षित रखना और उनकी आय बढ़ाना सरकार का केन्द्रीय सरोकार है।
श्री चौहान ने स्पष्ट किया कि अब लक्ष्य केवल अनाज उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं, बल्कि अनाज के साथ फल, सब्जियाँ, दूध, श्री अन्न और दालों की पर्याप्त उपलब्धता कराकर ठीक पोषण सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि सरकार एक साथ उत्पादन बढ़ाने, लागत घटाने, किसानों की आय बढ़ाने, फसल विविधीकरण, प्राकृतिक खेती और वैज्ञानिक पद्धतियों के विस्तार पर काम कर रही है।
गेहूं–धान में पर्याप्त भंडार, दाल–तिलहन में आत्मनिर्भरता का लक्ष्य
केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि गेहूं और धान के मामले में हमारे भंडार भरे हुए हैं, लेकिन दलहन और तिलहन में आज भी भारत को आयात पर निर्भर रहना पड़ता है। उन्होंने कहा कि भारत दालों का सबसे बड़ा उत्पादक और उपभोक्ता देश होते हुए भी अभी पूर्ण आत्मनिर्भर नहीं है, इसलिए अब नीति का फोकस दलहन–तिलहन के क्षेत्र और उत्पादकता बढ़ाने पर है, ताकि देश इन फसलों में भी आत्मनिर्भर बन सके।
छोटी जोत की चुनौती, समाधान के रूप में इंटीग्रेटेड फार्मिंग
श्री चौहान ने कहा कि भारत में औसत कृषि जोत लगभग 0.96 हेक्टेयर रह गई है, जबकि ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, अमेरिका, ब्राजील जैसे देशों में 10–15 हज़ार हेक्टेयर तक के फार्म हाउस हैं। उन्होंने कहा कि इतनी छोटी जोत में खेती को लाभकारी बनाना और आय बढ़ाना बड़ी चुनौती है। उन्होंने याद दिलाया कि सहकारी खेती का प्रयोग पहले हुआ, लेकिन अपेक्षित सफलता नहीं मिली, ऐसे में अब मंत्रालय का फोकस इंटीग्रेटेड फार्मिंग (समेकित कृषि प्रणाली) पर है।
केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह ने बताया कि सरकार ने एक हेक्टेयर के मॉडल तैयार किए हैं, जिनमें किसान एक ही जमीन पर अनाज, फल, सब्जियाँ, पशुपालन, मधुमक्खी पालन, मछली पालन और कृषि वानिकी जैसी एक से अधिक गतिविधियाँ एक साथ कर सकेगा। उन्होंने कहा कि केवल अनाज पैदा करने से आय सीमित रहेगी, इसलिए कई गतिविधियों को जोड़कर छोटे किसान की आमदनी बढ़ाना उनका प्रमुख फोकस है।
रीजनल कॉन्फ्रेंस और ‘लैब टू लैंड’की नई दिशा
श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि पहले राष्ट्रीय स्तर की एक–दो बैठकों से बात आगे नहीं बढ़ पाती थी इसलिए अब पूरे देश को पाँच हिस्सों में बाँटकर रीजनल कॉन्फ्रेंस आयोजित की जा रही हैं। उन्होंने बताया कि पहली रीजनल कॉन्फ्रेंस जयपुर में संपन्न हो चुकी है, दूसरी 24 तारीख को लखनऊ में होगी, और पूर्वोत्तर व हिल स्टेट्स के लिए अलग कॉन्फ्रेंस का आयोजन प्रस्तावित है, ताकि हर क्षेत्र की अलग एग्रो–क्लाइमेटिक कंडीशन के अनुसार फसलें, किस्में और खेती की पद्धतियाँ तय की जा सकें।
उन्होंने कहा कि हमारे पास हज़ारों कृषि वैज्ञानिक हैं, जिन्होंने रिसर्च के दम पर उत्पादन बढ़ाया है, लेकिन कई बार शोध लैब तक सीमित रह जाता है, खेत तक नहीं पहुँचता। इसीलिए अब नीति यह है कि “रिसर्च को लैब से लैंड तक ले जाएँ”, यानी वैज्ञानिक और किसान सीधे जुड़ें, प्रयोग खेतों में हों और परिणाम किसानों तक पहुँचें। इसी उद्देश्य से पिछले वर्ष शुरू किए गए ‘विकसित कृषि संकल्प अभियान’ को इस साल हर राज्य की जलवायु और फसल चक्र के अनुरूप समय चुनकर चलाने का निर्णय लिया गया है, जिसमें वैज्ञानिकों और कृषि विशेषज्ञों की टीमें किसानों के बीच जाकर प्रशिक्षण देंगी।
रायसेन में 11–13 अप्रैल तक राष्ट्रीय ‘उन्नत कृषि महोत्सव’
प्रेस वार्ता में श्री चौहान ने बताया कि केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा 11, 12 और 13 अप्रैल को रायसेन (मध्य प्रदेश) में राष्ट्रीय स्तर का ‘उन्नत कृषि महोत्सव – किसान मेला’ आयोजित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि यह केवल मेला नहीं, आधुनिक कृषि पद्धतियाँ सिखाने का एक तरह से प्रशिक्षण शिविर है। इसे हमने कर्मकांड नहीं, गंभीर प्रयास की तरह आयोजित किया है। महोत्सव का उद्घाटन रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह और मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव करेंगे जबकि समापन 13 अप्रैल को केंद्रीय सड़क परिवहन मंत्री श्री नितिन गडकरी द्वारा किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि केंद्रीय मंत्रालय के सचिव सहित अन्य अधिकारी, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद के डीजी और देशभर के शीर्ष कृषि वैज्ञानिक इस महोत्सव में भाग लेंगे।
20 तकनीकी सत्र, चार हॉल और लाइव डेमोंस्ट्रेशन
उन्नत कृषि महोत्सव के दौरान कुल 20 विषय–आधारित सत्र आयोजित किए जाएँगे, जिनके लिए चार अलग–अलग सेमिनार हॉल बनाए गए हैं। इन सत्रों में प्रमुख रूप से निम्न विषय शामिल होंगे –
फसल कटाई के बाद का प्रबंधन (पोस्ट–हार्वेस्ट मैनेजमेंट), कृषि क्षेत्र में एआई समाधान और आधुनिक तकनीक का उपयोग, कृषि मशीनीकरण के माध्यम से आय में वृद्धि, दलहन में उत्पादकता वृद्धि और क्षेत्र विस्तार, हॉर्टिकल्चर और उच्च मूल्य की फसलों के अवसर, इंटीग्रेटेड कृषि – अनाज, फल, सब्जियाँ, पशुपालन, मधुमक्खी पालन, मछली पालन और कृषि वानिकी, प्राकृतिक खेती और वैज्ञानिक खेती के समन्वित मॉडल। हर सत्र में चार विशेषज्ञ– कृषि वैज्ञानिक, कृषि विशेषज्ञ, उन्नत किसान और अधिकारी पहले प्रेज़ेंटेशन देंगे, उसके बाद किसानों के सवालों के जवाब देंगे।
श्री शिवराज सिंह ने कहा कि यह सत्र एकतरफा भाषण नहीं होंगे, बल्कि इंटरैक्टिव प्रशिक्षण होंगे, जिनका उद्देश्य है कि किसान बारीकियों को समझकर अपनी खेती में लागू कर सकें। उन्होंने बताया कि सिर्फ सुनाने की बजाय दिखाकर सिखाने के लिए महोत्सव में कई विषयों पर लाइव डेमोंस्ट्रेशन रखे गए हैं। कृषि मशीनीकरण के तहत रीपर, पावर वीडर, स्प्रेयर, सीडर, बेलर, रोटावेटर और कृषि ड्रोन का प्रदर्शन होगा। माइक्रो इरिगेशन और प्रिसिजन फार्मिंग के अंतर्गत फर्टिगेशन, ऑटोमेशन, सोलर पंपिंग और इंटीग्रेटेड इरिगेशन सिस्टम दिखाए जाएँगे। हॉर्टिकल्चर में पॉली हाउस, ग्रीन हाउस, मोबाइल कोल्ड स्टोरेज, नर्सरी, मधुमक्खी पालन और ग्राफ्टिंग की तकनीक का व्यावहारिक प्रदर्शन होगा। पशुपालन और मत्स्य पालन के लिए भी जीवंत मॉडल तैयार किए गए हैं, ताकि किसान देख सकें कि एक हेक्टेयर में इंटीग्रेटेड फार्मिंग की कितनी संभावनाएँ हैं।
प्राकृतिक खेती की बीज आवरण, घनजीव आवरण जैसी प्रक्रियाएँ भी लाइव दिखाकर समझाई जाएँगी।
MP का ‘कृषक कल्याण वर्ष’और ज़िलेवार कृषि रोडमैप
श्री चौहान ने बताया कि मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने इस वर्ष को ‘कृषक कल्याण वर्ष’ घोषित किया है। महोत्सव के दौरान राज्य सरकार के मंत्री और अधिकारी भी अलग–अलग सत्रों में भाग लेकर केंद्र और राज्य की योजनाओं की जानकारी देंगे ताकि किसान नई पद्धतियाँ सीखने के साथ–साथ योजनाओं का लाभ लेने के तरीके भी समझ सकें। श्री शिवराज सिंह कहा कि कृषि राज्यों का विषय है, केंद्र सहयोगी की भूमिका में है। केंद्र सरकार ने निर्णय लिया है कि हर राज्य की जलवायु, मिट्टी और संसाधनों के अनुरूप कृषि रोडमैप बनाया जाएगा। उन्होंने कहा कि एक ही राज्य में भी जिलों की परिस्थितियाँ अलग होती हैं, इसलिए अब एग्रो–क्लाइमेटिक जोन के आधार पर भी रोडमैप तैयार किए जाएँगे। रायसेन महोत्सव के दौरान सिहोर, विदिशा, रायसेन और देवास जिलों के लिए कृषि वैज्ञानिकों द्वारा तैयार विशेष कृषि रोडमैप किसानों के सामने रखा जाएगा, जिसमें मिट्टी, तापमान, वर्षा, पानी की उपलब्धता जैसी बातों के आधार पर उपयुक्त फसलें, किस्में और हॉर्टिकल्चर विकल्प सुझाए जाएँगे। शाम के समय लोकनाट्य और नुक्कड़ नाटक जैसी लोक विधाओं के माध्यम से भी किसानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
प्राकृतिक खेती का विस्तार, 18 लाख किसान और 8 लाख हेक्टेयर का लक्ष्य
प्राकृतिक खेती पर श्री चौहान ने कहा कि मंत्रालय ने इस वर्ष 1 करोड़ किसानों को प्राकृतिक खेती के प्रति संवेदनशील करने और कम से कम 18 लाख किसानों द्वारा प्राकृतिक खेती अपनाने का लक्ष्य रखा था। उन्होंने बताया कि लगभग 18 लाख किसानों और करीब 8 लाख हेक्टेयर जमीन पर प्रमाणित प्राकृतिक खेती की दिशा में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि वैज्ञानिक अध्ययन बताते हैं कि यदि प्राकृतिक खेती की पद्धतियाँ सही तरीके से अपनाई जाएँ, तो उत्पादन घटे बिना लागत में कमी की जा सकती है और इससे फर्टिलाइज़र आयात पर निर्भरता घटाने में भी मदद मिलेगी।
फर्टिलाइज़र पर सब्सिडी
फर्टिलाइज़र व्यवस्था पर श्री चौहान ने कहा कि कच्चे माल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ने के बावजूद सरकार ने फैसला किया है कि यूरिया की बोरी 266 रुपये और डीएपी की बोरी 1350 रुपये में ही किसानों को मिलेगी। इसके लिए हाल ही में कैबिनेट ने 41,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त व्यवस्था की है, ताकि बढ़ी हुई लागत का पूरा बोझ सरकार उठाए और किसान पर भार न पड़े। उन्होंने कहा कि सब्सिडी वाला खाद कई बार दूसरे उद्योगों या गैर–कृषि उपयोग में डायवर्ट हो जाता है। इसे रोकने के लिए फार्मर आईडी आधारित मॉडल विकसित किया जा रहा है, जिसके तहत हर किसान की जमीन, फसल और परिवार का डेटा एक एकीकृत आईडी से जुड़ा होगा। फार्मर आईडी के आधार पर यह तय होगा कि कितनी जमीन और कौन–सी फसल के लिए कितना खाद पर्याप्त है, ताकि किसान को कमी न हो, पर अतिरिक्त उठाव, जमाखोरी और ब्लैक मार्केटिंग पर रोक लगे।
उन्होंने बताया कि अब तक 9 करोड़ 29 लाख से अधिक फार्मर आईडी बन चुकी हैं और लक्ष्य है कि इसे लगभग 13 करोड़ किसानों तक विस्तारित किया जाए। जहाँ बटाई या पट्टे पर खेती की परंपरा है, वहाँ भूमि मालिक के लिखित प्रमाण के आधार पर भटाईदार किसान को भी खाद उपलब्ध कराने का मॉडल मध्य प्रदेश और हरियाणा में सफल रहा है, जिसे और परिष्कृत कर देशभर में लागू करने पर काम हो रहा है।
मौसम की मार, फसल क्षति और पारदर्शी सर्वे
असामान्य मौसम और ओलावृष्टि से हुई फसल क्षति पर प्रश्न के उत्तर में श्री चौहान ने बताया कि उन्होंने सभी राज्य सरकारों से तुरंत नुकसान का आकलन करने को कहा है। उन्होंने निर्देश दिए हैं कि क्रॉप कटिंग एक्सपेरिमेंट समय पर और वैज्ञानिक तरीके से हों, राजस्व, कृषि और पंचायत/ग्रामीण विकास – तीन विभाग संयुक्त सर्वे करें, नुकसान की सूची गाँव–गाँव के पंचायत भवनों पर चस्पा की जाए, ताकि किसान आपत्ति या सुधार के लिए आवेदन दे सकें। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत पूरी टीम सक्रिय है, लेकिन मौसम की मार विभिन्न चरणों में पड़ने और आँकड़े लगातार अपडेट होने के कारण अभी अंतिम कुल नुकसान बताना संभव नहीं है। फिर भी उन्होंने आश्वस्त किया कि किसान को हरसंभव राहत और बीमा लाभ दिलाने में कोई कमी नहीं रखी जाएगी।
वैश्विक संकट, एक्सपोर्ट और भारतीय किसान की सुरक्षा
पश्चिम एशिया के संकट और वैश्विक हालात से कृषि निर्यात और फर्टिलाइज़र आपूर्ति पर क्या असर पड़ रहा है, इस पर केंद्रीय कृषि मंत्री श्री चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के नेतृत्व में निरंतर उच्च स्तरीय बैठकें हो रही हैं।
उन्होंने माना कि कई अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों का प्रभाव एक्सपोर्ट पर पड़ता है, लेकिन सरकार की प्राथमिकता यह है कि किसान को उसकी उपज का उचित मूल्य मिले, फर्टिलाइज़र की उपलब्धता बनी रहे और किसान पर वैश्विक संकट का बोझ न्यूनतम रहे।
‘लखपति दीदी’और महिला आरक्षण पर मजबूत संदेश
श्री चौहान ने बताया कि अब तक करीब 3 करोड़ ‘लखपति दीदी’ तैयार हो चुकी हैं और लक्ष्य है कि यह संख्या 6 करोड़ तक पहुँचे। उन्होंने कहा कि केवल एक बार आय बढ़ने को पर्याप्त नहीं माना जाता, बल्कि हर महीने मॉनिटरिंग करके यह सुनिश्चित किया जाता है कि छह महीने तक उनकी आय स्थिर रूप से ऊँची बनी रहे, तभी उन्हें ‘लखपति दीदी’ माना जाता है। महिला आरक्षण पर उन्होंने कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम के तहत लोकसभा और विधानसभाओं में 33% आरक्षण देने का संकल्प प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारतीय जनता पार्टी और एनडीए का है। उन्होंने कहा कि 2029 के चुनाव इस प्रावधान के साथ कराने का लक्ष्य है और इसके लिए विशेष सत्र बुलाकर पूरी विधायी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है।
विपक्षी आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए श्री चौहान ने कहा कि जो भी व्यक्ति या संगठन किसानों की भलाई के लिए सकारात्मक काम करना चाहता है, उसका स्वागत है लेकिन उन्होंने यह भी कहा कि केवल राजनीति के लिए गंभीर कृषि मुद्दों पर हंगामा खड़ा करना उचित नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन और आंदोलन लोकतांत्रिक अधिकार हैं, पर बिना सूचना के कहीं भी अचानक ट्रैक्टर–ट्रॉली लेकर पहुँच जाना, खासकर वरिष्ठ नेताओं के लिए, स्वस्थ परंपरा नहीं मानी जानी चाहिए। उन्होंने दोहराया कि सरकार संवाद और समाधान में विश्वास रखती है और किसानों के हित में हर मुद्दे पर बात करने को तैयार है।
उन्होंने किसानों से आह्वान किया कि वे उन्नत कृषि महोत्सव में अधिक से अधिक संख्या में भाग लें, विशेषज्ञों से सवाल पूछें, बारीकियाँ सीखें और अपने खेतों में नई तकनीक, इंटीग्रेटेड फार्मिंग और प्राकृतिक खेती अपनाएँ। उन्होंने कहा कि सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, मेरी हसरत है कि खेती–किसानी की सूरत बदले और उन्नत कृषि महोत्सव को इसी संकल्प की दिशा में एक बड़ा, गंभीर और ठोस कदम बताया।
कृषि महोत्सव में प्रदर्शनी एवं प्रशिक्षण सत्रों की रूपरेखा
11 अप्रैल को पहले दिन दोपहर 2 से 3:30 बजे तक विभिन्न हॉलों में समानांतर तकनीकी सत्र आयोजित होंगे। हॉल-1 में “फसल कटाई के बाद प्रबंधन : कृषि अवसंरचना कोष के उपयोग से उन्नत कृषि” विषय पर सत्र होगा, जबकि हॉल-2 में “भारत विस्तार : कृषि के क्षेत्र में एआई से समाधान” पर तकनीकी चर्चा की जाएगी। इसी अवधि में हॉल-3 में “मधुमक्खी पालन से कृषि आय में वृद्धि” विषयक सत्र होगा तथा मेन हॉल में “मशीनीकरण के माध्यम से कृषि में उन्नति” पर विशेष सत्र आयोजित किया जाएगा। इसी दिन अगला चरण 3:45 से 5:15 बजे तक चलेगा, जिसमें हॉल-1 में “दलहन में उत्पादकता वृद्धि एवं क्षेत्र विस्तार”, हॉल-2 में “प्राकृतिक खेती”, हॉल-3 में “तिलहन में उत्पादकता वृद्धि एवं क्षेत्र विस्तार” तथा मेन हॉल में “पराली प्रबंधन : वेस्ट टू वेल्थ” पर सत्र के साथ-साथ नुक्कड़ नाटक के माध्यम से किसानों को जागरूक किया जाएगा।
दूसरे दिन 12 अप्रैल को 11 से 12:30 बजे तक विभिन्न विषयों पर तकनीकी सत्र आयोजित होंगे। हॉल-1 में किसानों और उत्पादक संगठनों के लिए विशेष “एफपीओ मीट”, हॉल-2 में “मृदा स्वास्थ्य के माध्यम से हरित और सुरक्षित कृषि की दिशा”, हॉल-3 में “बागवानी फसलों की संरक्षित खेती: जलवायु-अनुकूल कृषि के लिए एक सतत दृष्टिकोण (फसलों के उदाहरण, किसानों के लाभ एवं एकीकृत बागवानी विकास मिशन (MIDH) कार्यक्रम के विषय में परिचर्चा)” तथा मेन हॉल में “फसल बीमा जागरूकता और संवाद कार्यशाला” के साथ नुक्कड़ नाटक आयोजित होगा। इसके बाद मेन हॉल में 1 से 2 बजे तक “कृषि रोडमैप पर कार्यक्रम” का आयोजन किया जाएगा, जिसमें केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान, राज्य मंत्री श्री भागीरथ चौधरी, मध्य प्रदेश के मंत्री श्री प्रहलाद पटेल की उपस्थिति रहेगी। दोपहर 2:30 से 4 बजे की अवधि में एक और तकनीकी सत्र चरण चलेगा, जिसमें हॉल-1 में “एकीकृत कृषि प्रणाली : आवश्यकता एवं महत्व”, हॉल-2 में “एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन : किसानों में व्यवहार परिवर्तन के माध्यम से धरती माता की रक्षा”, हॉल-3 में “फूलों और सब्जी की खेती” तथा मेन हॉल में “एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) तथा बायो पेस्टिसाइड का उपयोग” विषयक सत्र आयोजित किए जाएंगे। इसके उपरांत 4:15 से 5:45 बजे के बीच हॉल-1 में “नर्सरी प्रबंधन एवं गुणवत्तापूर्ण रोपण सामग्री का उत्पादन : कलम (ग्राफ्टिंग) सहित विभिन्न तकनीकें तथा किसानों को होने वाले लाभ”, हॉल-2 में “प्रति बूंद अधिक फसल, सूक्ष्म सिंचाई और फर्टिगेशन : स्मार्ट खेती, संतुलित पोषण और आय में वृद्धि”, हॉल-3 में “हाइड्रोपोनिक्स, प्रिसिजन फार्मिंग और वर्टिकल फार्मिंग” तथा मेन हॉल में “कीटनाशकों की गुणवत्ता तथा उचित एवं सुरक्षित उपयोग” पर सत्र के साथ नुक्कड़ नाटक के माध्यम से जागरूकता कार्यक्रम आयोजित होगा।
तीसरे दिन 13 अप्रैल को 10:30 से 12 बजे तक हॉल-1 में “केवीके मीट”, हॉल-2 में “धान में आत्मनिर्भरता हेतु बीज प्रणाली”, हॉल-3 में “मत्स्य पालन और मोती पालन” तथा मेन हॉल में “कृषि ऋण और किसान क्रेडिट कार्ड” विषय पर सत्र आयोजित किए जाएंगे।इसके बाद 12:15 से 1:45 बजे तक हॉल-1 में “मध्य प्रदेश की जलवायु आधारित डेयरी संवर्धन एवं पशु पालन”, हॉल-2 में “धान की सीधी बुआई : बेहतर प्रणाली प्रबंधन”, हॉल-3 में “मुर्गी पालन, बकरी पालन से आय में वृद्धि” तथा मेन हॉल में “धरती बचाओ” विषय पर नुक्कड़ नाटक के माध्यम से किसानों एवं आमजन को जागरूक किया जाएगा। अंतिम चरण में दोपहर 3 से 5 बजे तक मेन हॉल में “समापन सत्र” आयोजित किया जाएगा, जिसमें पूरे कृषि महोत्सव, प्रदर्शनी एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम की समीक्षा, महत्वपूर्ण निष्कर्षों की प्रस्तुति तथा भविष्य की कार्य योजना पर चर्चा की जाएगी।
नई दिल्ली – वर्ष 2018 में पोषण अभियान के आरंभ के बाद से एक जन आंदोलन के तहत लगातार की जा रही कोशिशों की बदौलत देश भर में 150 करोड़ से ज़्यादा जागरूकता गतिविधियाँ और 9.8 करोड़ से ज़्यादा समुदाय आधारित कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं। इसी रफ़्तार को आगे बढ़ाते हुए, पोषण पखवाड़ा 2026 का उद्देश्य प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विज़न के अनुसार, बच्चों के लिए बेहतर पोषण, प्रारंभिक बाल्यावस्था विकास और बेहतर परिणामों के लिए जागरूकता और सामूहिक कार्रवाई को और मज़बूती प्रदान करना है।
इस राष्ट्रीय अभियान को जारी रखते हुए महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने आज (9 अप्रैल, 2026) विज्ञान भवन में पोषण पखवाड़े के 8वें संस्करण का शुभारंभ किया। इसके साथ ही 9 अप्रैल से 23 अप्रैल, 2026 तक चलने वाले राष्ट्रव्यापी अभियान की शुरुआत हो गई।
पखवाड़े के शुभारंभ के अवसर पर केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी की गरिमामयी उपस्थिति रही। इस अवसर पर महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर और महिला एवं बाल विकास सचिव श्री अनिल मलिक के साथ-साथ राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साझेदार मंत्रालयों और हितधारकों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे।
पोषण पखवाड़ा 2026 का विषय “जीवन के पहले छह वर्षों में मस्तिष्क के विकास को अधिकतम करना” इस तथ्य को मान्यता देता है कि प्रारंभिक बाल्यावस्था —विशेष रूप से पहले 1,000 दिन—मस्तिष्क के विकास, शारीरिक विकास और समग्र स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण हैं। वैज्ञानिक प्रमाण बताते हैं कि मस्तिष्क का 85 प्रतिशत से अधिक विकास छह वर्ष की आयु तक हो जाता है, जो इष्टतम पोषण, संवेदनशील देखभाल और प्रारंभिक शिक्षा के महत्व को रेखांकित करता है।
इस अवसर पर अपने संबोधन में केंद्रीय मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने ज़ोर देकर कहा, “पोषण माह और पोषण पखवाड़ा एक सच्चे जन आंदोलन का रूप ले चुका है, जिसके तहत देश भर में करोड़ों गतिविधियाँ आयोजित की जा रही हैं। हमारी आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, आंगनवाड़ी सहायक और आशा दीदी प्रधानमंत्री के विज़न और लक्ष्यों को सामूहिक प्रयासों के साथ हर घर तक पहुंचाने के लिए जी-जान से मेहनत कर रही हैं। महिला एवं बाल विकास मंत्रालय का दायित्व बहुत बड़ा है और हम देश भर में प्रत्येक घर और प्रत्येक बच्चे तक अपनी सेवाएं पहुँचाने का प्रयास कर रहे हैं। आज, 14 लाख से ज़्यादा आंगनवाड़ी केंद्रों के साथ, हमारी आंगनवाड़ी दीदी धूप या बारिश की परवाह न करते हुए गर्भवती माताओं, दूध पिलाने वाली माताओं, किशोरियों और बच्चों तक पहुँच रही हैं और लगभग 8.9 करोड़ लाभार्थियों की सेवा कर रही हैं।” उन्होंने कहा, “हमारे बच्चे देश का भविष्य हैं और वे विकसित भारत के संकल्प को आगे बढ़ाएंगे। उन्हें बेहतर पोषण मिलना सुनिश्चित करना, एक ऐसी ज़िम्मेदारी है जिसे हम सभी को एक जन आंदोलन के तौर पर मिलकर आगे बढ़ाना चाहिए।” उन्होंने राज्यों से एक-दूसरे से सीखने, सर्वोत्तम तरीकों को अपनाने और उनके अनुसार ढलने, तथा ज़िलों, खासकर आकांक्षी ज़िलों में बेहतर प्रदर्शन को बढ़ावा देने का अनुरोध किया। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि पोषण लगातार चलने वाली प्रकिया है और बच्चों के समग्र और मानिसक विकास में मदद के लिए ज़्यादा समय, देखभाल और सामुदायिक भागीदारी की ज़रूरत है।
महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने अपने संबोधन में कहा, ‘प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में, 2018 से 8 पोषण माह और 7 पोषण पखवाड़े आयोजित किए जा चुके हैं। यह देश में पोषण के परिणामों को बेहतर बनाने की दिशा में सरकार की प्रतिबद्धता और समर्पण को दिखाता है।’ पोषण पखवाड़ा 2026 के विषय, “जीवन के पहले छह वर्षों में मस्तिष्क के विकास को अधिकतम करना” पर ज़ोर देते हुए उन्होंने कहा कि यह समय बहुत महत्वपूर्ण है, क्योंकि मस्तिष्क का 85 प्रतिशत से अधिक विकास शुरुआती वर्षों में होता है, जिसमें पहले 1,000 दिन खास तौर पर महत्वपूर्ण होते हैं। उन्होंने इस बात का भी उल्लेख किया कि सिर्फ़ पोषण पर ही ध्यान केंद्रित करने की बजाए बच्चों का समग्र विकास सुनिश्चित करने के लिए संवेदनशील देखभाल और शुरुआती पढ़ाई पर भी उतना ही ध्यान देने की ज़रूरत है।
महिला एवं बाल विकास सचिव श्री अनिल मलिक ने ‘पोषण’ की अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका पर ज़ोर दिया। सही खान-पान की आदतों की ज़रूरत पर ज़ोर देते हुए उन्होंने याद दिलाया कि माननीय प्रधानमंत्री ने बार-बार खान-पान की स्वस्थ आदतों की अहमियत पर ज़ोर दिया है, जिसमें तेल का इस्तेमाल कम करना और पौष्टिक भोजन पर ध्यान देना शामिल है।
उद्घाटन कार्यक्रम के दौरान आरंभिक बाल्यावस्था देखभाल और विकास पर ज़ोर देने वाली खास पहल दिखाई गईं, जिसमें विद्यारंभ प्रमाणपत्र बांटना और एक ऑडियो-विज़ुअल फिल्म दिखाना शामिल था, जिसमें एक आंगनवाड़ी कार्यकर्ता की ज़िंदगी का एक दिन दिखाया गया, जिसमें आंगनवाड़ी केंद्रों पर सेवाएं प्रदान करने और आरंभिक बाल्यावस्था में मदद किए जाने को दिखाया गया।
संयुक्त सचिव सुश्री राधिका झा ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए समस्त गणमान्य हस्तियों और हितधारकों का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने आंगनवाड़ी सेवाओं के फील्ड अधिकारियों की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनकी अथक कोशिशों से ही विकसित भारत का सपना साकार हो रहा है।
पोषण पखवाड़ा 2026 (9 अप्रैल से 23 अप्रैल 2026) को एक देशव्यापी अभियान के तौर पर मनाया जा रहा है, जिसका उद्देश्य पोषण के बारे में जागरूकता बढ़ाना, प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और विकास में सुधार लाना और मिशन पोषण 2.0 के तहत सामुदायिक भागीदारी को मज़बूत करना है।
शुभारंभ दिवस पर कार्यक्रम का सीधा प्रसारण एनआईसी वेबकास्ट प्लेटफॉर्म (https://webcast.gov.in/mwcd) और मंत्रालय के यूट्यूब चैनल के माध्यम से किया गया, जिससे देश भर से 4.2 लाख से अधिक हितधारकों, क्षेत्र के कार्यकर्ताओं और नागरिकों की भागीदारी संभव हुई।
भारत सरकार के सभी मंत्रालय और विभाग, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर, देश भर के आंगनवाड़ी केंद्रों के साथ इस साल के विषय के तहत मुख्य फोकस क्षेत्रों पर समुदायों को जागरूक करने के लिए कई तरह की गतिविधियाँ कर रहे हैं, जिनमें निम्नलिखित शामिल हैं:
मातृ एवं शिशु पोषण – गर्भावस्था के दौरान इष्टतम पोषण को बढ़ावा देना, केवल स्तनपान कराना और आयु के अनुसार पूरक आहार प्रदान करना।
मस्तिष्क के विकास के लिए प्रारंभिक प्रोत्साहन (0-3 वर्ष) – संवेदनशील देखभाल और प्रारंभिक शिक्षण की बातचीत को प्रोत्साहित करना।
प्रारंभिक वर्षों में खेल-आधारित शिक्षा (3-6 वर्ष) – समग्र विकास और विद्यालय जाने की तैयारी में सहयोग।
स्क्रीन टाइम को कम करने में माता-पिता और समुदाय की भूमिका – स्वस्थ आदतों और सक्रिय भागीदारी को बढ़ावा देना।
सामुदायिक भागीदारी के माध्यम से आंगनवाड़ी केंद्रों को मजबूत बनाना–जन भागीदारी और सीएसआर के माध्यम से बुनियादी ढांचे और सेवा वितरण को बढ़ाना।
पखवाड़े के दौरान, देश भर के आंगनवाड़ी केंद्र जागरूकता सत्र आयोजित कर रहे हैं, घर-घर जा रहे हैं, पोषण मेले लगा रहे हैं, माँ के पोषण और शिशु आहार के बारे में परामर्श दे रहे हैं, खेल-खेल में सीखने का तरीका समझा रहे हैं, और सक्रिय जीवन शैली को बढ़ावा देने और स्क्रीन टाइम कम करने के लिए सामुदायिक गतिविधयाँ कर रहे हैं।
यह अभियान आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं, आशा,एएनएम, स्व सहायता समूहों, शिक्षकों, पंचायती राज संस्थाओं और समुदायों को एक साथ लाता है, जन आंदोलन के तरीके को मज़बूत करता है और बेहतर पोषण और बच्चों के विकास के परिणामों के लिए मिलकर काम करने को बढ़ावा देता है।
पोषण पखवाड़ा सामुदायिक भागीदारी और व्यवहार में बदलाव लाने के एक प्लेटफॉर्म के तौर पर काम करता है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि हर बच्चे को ज़िंदगी के सबसे ज़रूरी वर्षों में सही पोषण, देखभाल और शुरुआती सीखने के अवसर प्राप्त हों।
नई दिल्ली – संगठित सोने की तस्करी पर एक बड़ी कार्रवाई करते हुए, राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआई) ने एक गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस कार्रवाई में 37.74 करोड़ रुपये मूल्य का 29.37 किलोग्राम सोना जब्त किया गया है और 24 तस्करों को गिरफ्तार किया गया है।
विशिष्ट खुफिया जानकारी पर कार्रवाई करते हुए, डीआरआई के अधिकारियों ने कल नैरोबी से मुंबई के छत्रपति शिवाजी महाराज अंतर्राष्ट्रीय (सीएसएमआई) हवाई अड्डे पर पहुंची महिला तस्करों के एक समूह की पहचान की। ये महिलाएं बड़ी मात्रा में सोने की तस्करी करने की कोशिश कर रही थीं।
‘ऑपरेशन दहाबू ब्लिट्ज’ के तहत, 24 विदेशी नागरिकों को रोका गया। त्वरित और समन्वित कार्रवाई के परिणामस्वरूप, इन यात्रियों से 25.10 किलोग्राम सोने की छड़ें और 4.27 किलोग्राम सोने के आभूषण बरामद किए गए।
यह मामला एक ऐसे बेहद संगठित गिरोह का खुलासा करता है, जो पकड़े जाने से बचने के लिए प्रशिक्षित वाहकों और सुनियोजित तरीकों का इस्तेमाल करता है।
डीआरआई सोने की तस्करी करने वाले ऐसे नेटवर्क को खत्म करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है, जो देश की आर्थिक और राजकोषीय व्यवस्था को कमजोर करते हैं और राष्ट्रीय हितों के लिए खतरा पैदा करते हैं।
नई दिल्ली – भारतीय रेलवे के वंदे भारत एक्सप्रेस नेटवर्क पर यात्रियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। केवल वित्त वर्ष 2025-26 में लगभग 3.98 करोड़ यात्रियों ने यात्रा की, जो वित्त वर्ष 2024-25 के 2.97 करोड़ यात्रियों की तुलना में लगभग 34 प्रतिशत की मजबूत वार्षिक वृद्धि दर्शाती है। यह तीव्र वृद्धि देश भर के यात्रियों के बीच तेज, आरामदायक और आधुनिक रेल यात्रा के लिए बढ़ती प्राथमिकता को उजागर करती है। वंदे भारत एक्सप्रेस ने इसकी शुरुआत से लेकर अब तक, 1 लाख यात्राओं के माध्यम से 9.1 करोड़ से अधिक यात्रियों को सेवा प्रदान की है, जो व्यापक जनविश्वास और निरंतर मांग को दर्शाती है।
भारतीय रेलवे, देश की पहली स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित सेमी-हाई-स्पीड रेलगाड़ी, वंदे भारत एक्सप्रेस के साथ यात्रियों की यात्रा को लगातार नया रूप दे रहा है। फरवरी 2019 में नई दिल्ली-वाराणसी मार्ग पर शुरू की गई यह सेवा, मेक इन इंडिया पहल के तहत गति, आराम और आत्मनिर्भरता का प्रतीक बन चुकी है और एक राष्ट्रव्यापी नेटवर्क में विकसित हो गई है।
नई दिल्ली-वाराणसी मार्ग सबसे व्यस्त मार्ग बना हुआ है। इस मार्ग पर अब तक 73 लाख से अधिक यात्री वंदे भारत रेलगाड़ी से यात्रा कर चुके हैं। नई दिल्ली-श्री माता वैष्णो देवी कटरा मार्ग पर लगभग 56 लाख यात्रियों ने वंदे भारत रेलगाड़ी से यात्रा की है, जो तीर्थयात्रा के लिए इसके महत्व को रेखांकित करता है। दक्षिण भारत में, सिकंदराबाद-विशाखापत्तनम मार्ग पर 48 लाख से अधिक यात्रियों ने यात्रा की है, जबकि पुरची थलाइवर डॉ. एमजीआर सेंट्रल (चेन्नई)-मैसूरु मार्ग पर 36 लाख से अधिक यात्रियों ने वंदे भारत रेलगाड़ी से यात्रा की है, जो मजबूत क्षेत्रीय मांग को दर्शाता है। ये सेवाएं पर्यटन के लिए महत्वपूर्ण साधन के रूप में उभरी हैं, जो प्रमुख धार्मिक, सांस्कृतिक और तटीय स्थलों तक पहुंच में सुधार के साथ-साथ स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं और पर्यटकों की संख्या में वृद्धि कर रही हैं।
भारतीय रेलवे ने लंबी दूरी के संपर्क को और मजबूत करते हुए जनवरी 2026 में वंदे भारत शयनयान सेवा शुरू की। परिचालन के पहले तीन महीनों में ही, इस सेवा ने 119 फेरों में 1.21 लाख यात्रियों को वंदे भारत शयनयान सेवा से यात्रा कराई, जिससे 100 प्रतिशत से अधिक की ऑक्यूपेंसी दर प्राप्त हुई, जो मजबूत मांग और प्रीमियम रात्रिकालीन रेल यात्रा में यात्रियों के बढ़ते विश्वास को दर्शाती है।
वंदे भारत एक्सप्रेस भारतीय रेलवे की नवाचार, यात्री-केंद्रित सेवा और स्वदेशी विनिर्माण के की दिशा में प्रतिबद्धता का प्रमाण है। महानगरों, तीर्थ स्थलों, विरासत शहरों और उभरते आर्थिक केंद्रों को जोड़ने वाले निरंतर विस्तार और शयनयान श्रेणी के जुड़ने से भारतीय रेलवे तेज, सुरक्षित और अधिक आरामदायक यात्राएं प्रदान करने की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है और वंदे भारत एक्सप्रेस भारत में आधुनिक रेल यात्रा के परिवर्तन का नेतृत्व कर रही है।
नई दिल्ली – हिंदू कॉलेज द्वारा आयोजित वक्तव्य 2026 को संबोधित करते हुए, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा विभाग और अंतरिक्ष विभाग के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित प्रोटोटाइप फास्ट ब्रीडर रिएक्टर (पीएफबीआर) के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह आत्मनिर्भर ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में भारत की यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
उन्होंने कहा कि यह रिएक्टर तरल सोडियम को शीतलक के रूप में उपयोग करते हुए प्लूटोनियम का प्रयोग करता है, जिससे कम लागत में अधिक ऊर्जा उत्पादन सुनिश्चित होता है और भारत के विशाल थोरियम भंडार का लाभ उठाते हुए थोरियम आधारित रिएक्टरों के लिए मार्ग प्रशस्त होगा। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह विकास भारत की क्षमता को मजबूत करता है और दीर्घकालिक स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को प्राप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
उभरती प्रौद्योगिकियों की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डालते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने रेखांकित किया कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता अब वैकल्पिक नहीं बल्कि अपरिहार्य है और शासन तथा दैनिक कार्यों का अभिन्न अंग बनती जाएगी। उन्होंने कहा कि एआई एक शक्तिशाली सहायक उपकरण के रूप में अनुसंधान, विश्लेषण और निर्णय लेने में मदद कर सकता है, लेकिन इसका उपयोग सावधानीपूर्वक किया जाना चाहिए ताकि मानवीय बुद्धिमत्ता दब न जाए। उन्होंने इसे एक संकर मॉडल बताया जहां प्रौद्योगिकी मानवीय क्षमताओं की पूरक है।
भारत के स्टार्टअप इकोसिस्टम का जिक्र करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि देश अब वैश्विक स्तर पर अग्रणी स्टार्टअप देशों में शुमार है, और पिछले एक दशक में स्टार्टअप्स की संख्या 2 लाख से अधिक हो गई है, जिसमें उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने बताया कि इन स्टार्टअप्स में से लगभग 50% सोनीपत, पानीपत और सूरत जैसे टियर-2 और टियर-3 शहरों से उभर रहे हैं, जो अवसरों के लोकतंत्रीकरण और महानगरों से परे नवाचार के प्रसार को दर्शाता है। उन्होंने स्टार्टअप इकोसिस्टम में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का भी उल्लेख किया।
डॉ. सिंह ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के परिवर्तनकारी प्रभाव के बारे में विस्तार से बताते हुए इसे एक महत्वपूर्ण बदलाव बताया, जिसने छात्रों को शैक्षणिक मार्ग चुनने और बदलने की स्वतंत्रता और लचीलापन प्रदान किया है। उन्होंने कहा कि छात्र अब कठोर विषय धाराओं से बंधे नहीं हैं और अंतर्विषयक शिक्षा का लाभ उठा सकते हैं, जिससे वे अपनी शिक्षा को अपनी विकसित रुचियों और योग्यताओं के अनुरूप ढाल सकते हैं।
प्रतिभा और नवाचार को बढ़ावा देने वाली पहलों पर प्रकाश डालते हुए, केंद्रीय मंत्री ने “वैभव” कार्यक्रम का उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य भारतीय वैज्ञानिक समुदाय को घरेलू संस्थानों से जोड़ना और सहयोग के अवसर पैदा करना है। उन्होंने कहा कि ऐसी पहल एक ऐसा अनुकूल वातावरण बनाने में मदद कर रही हैं जहां वैश्विक विशेषज्ञता भारत के वैज्ञानिक विकास में योगदान दे सकती है।
उन्होंने “प्रतिभा सेतु” पोर्टल के बारे में भी बात की, जिसे यूपीएससी परीक्षा के उन्नत चरणों में पहुंचने वाले उम्मीदवारों को संभावित नियोक्ताओं से जोड़ने के लिए बनाया गया है। उन्होंने बताया कि यह प्लेटफॉर्म संगठनों को सत्यापित उम्मीदवारों की प्रोफाइल तक पहुंच प्रदान करता है, जिससे उन लोगों के लिए अवसर पैदा होते हैं जो अंतिम चयन में भले ही न पहुंच पाएं लेकिन उनमें मजबूत क्षमताएं हों।
छात्रों के साथ बातचीत के दौरान, मंत्री जी ने मानसिकता में बदलाव की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि आज की परस्पर जुड़ी दुनिया में विकास अलग-थलग रहकर नहीं हो सकता। उन्होंने छात्रों को पारंपरिक करियर विकल्पों से परे विविध अवसरों का पता लगाने और उपलब्ध तकनीकी उपकरणों का प्रभावी ढंग से उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया।
अपने संबोधन के समापन में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सूचना की सुलभता, तकनीकी प्रगति और नीतिगत सुधारों के कारण वर्तमान युग युवाओं के लिए अभूतपूर्व अवसर प्रदान करता है। उन्होंने छात्रों से इस अनुकूल वातावरण का भरपूर लाभ उठाने और भारत की प्रगति में सक्रिय योगदान देने का आग्रह किया।
नई दिल्ली – केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी ने आज निर्माण क्षेत्र में नवाचार, प्रौद्योगिकी और सतत पद्धतियों के महत्व पर बल दिया, साथ ही अवसंरचना विकास के भविष्य के लिए वैकल्पिक ईंधन और नई प्रौद्योगिकियों को बढ़ावा देने की आवश्यकता का उल्लेख किया।
नई दिल्ली में आयोजित 17वें सीआईडीसी विश्वकर्मा पुरस्कार एवं प्रदर्शनी ‘विकसित भारत 2047’ में सभा को संबोधित करते हुए श्री नितिन गडकरी ने कहा कि ज्ञान को धन में परिवर्तित करने के लिए नवाचार, उद्यमिता, विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और कुशल कार्यप्रणालियां आवश्यक हैं। उन्होंने कहा कि निरंतर अनुसंधान, नवाचार और तकनीकी परिवर्तनों के कारण निर्माण क्षेत्र लगातार विकसित हो रहा है।
श्री गडकरी ने निर्माण लागत कम करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि आधुनिक तकनीकों को अपनाने और प्रक्रियाओं में सुधार करने से दक्षता में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है और परियोजना लागत में कमी आ सकती है। उन्होंने कहा कि अवसंरचना विकास के लिए त्वरित निर्णय लेने, बेहतर परियोजना योजना बनाने और गुणवत्ता के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता की आवश्यकता है।
श्री गडकरी ने बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के सुचारू क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए भूमि अधिग्रहण और वैधानिक स्वीकृतियों जैसी प्रमुख पूर्व-आवश्यकताओं को समय से पहले पूरा करने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि अतीत में लंबित स्वीकृतियों और प्रक्रियात्मक अड़चनों के कारण हुई देरी ने परियोजना की समयसीमा और ठेकेदारों की वित्तीय स्थिति को बुरी तरह प्रभावित किया था।
श्री गडकरी ने परियोजना कार्यान्वयन में गुणवत्ता आधारित मूल्यांकन सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर भी बल देते हुए कहा कि लागत संबंधी विचारों के साथ-साथ गुणवत्ता और प्रदर्शन को उच्च प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
सतत समाधानों पर बल देते हुए उन्होंने हितधारकों से जैव ईंधन, जैव द्रव्यमान आधारित ईंधन और अन्य वैकल्पिक ईंधनों के उपयोग की संभावना तलाशने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ऐसी प्रौद्योगिकियां पारंपरिक ईंधनों पर निर्भरता कम करने और परिचालन लागत को घटाने में मदद कर सकती हैं। उन्होंने सड़क निर्माण में प्लास्टिक कचरे और इस्तेमाल किए गए टायरों के पुनर्चक्रण सहित अपशिष्ट-से-धन प्रौद्योगिकियों के अधिक उपयोग का भी आह्वान किया।
श्री गडकरी ने सफल नवाचारों का जिक्र करते हुए कहा कि सड़क निर्माण में प्लास्टिक कचरे के उपयोग से नागपुर में कार्यान्वित परियोजनाओं जैसे कार्यों में पहले ही सकारात्मक परिणाम देखने को मिल चुके हैं, जो बुनियादी ढांचे के विकास में टिकाऊ सामग्रियों की क्षमता को प्रदर्शित करते हैं।
उन्होंने भविष्योन्मुखी प्रौद्योगिकियों और अनुसंधान-आधारित समाधानों को अपनाने के महत्व पर भी प्रकाश डाला और नवीन निर्माण प्रौद्योगिकियों के विकास के लिए उद्योग, अनुसंधान संस्थानों और शिक्षा जगत के बीच मजबूत सहयोग को प्रोत्साहित किया।
श्री गडकरी ने कहा कि भारतीय अवसंरचना कंपनियों ने दुबई, कतर और कई अफ्रीकी देशों में प्रमुख परियोजनाओं को सफलतापूर्वक पूरा करके वैश्विक स्तर पर अपनी क्षमता का प्रदर्शन किया है। उन्होंने कहा कि उच्च गुणवत्ता मानकों को बनाए रखना और शॉर्टकट से बचना भारत के निर्माण उद्योग की वैश्विक प्रतिष्ठा को और बढ़ाएगा।
श्री गडकरी ने समारोह में विजेताओं को 17वें सीआईडीसी विश्वकर्मा पुरस्कार प्रदान किए और निर्माण एवं अवसंरचना क्षेत्र में गुणवत्ता और नवाचार में उनके योगदान के लिए उन्हें बधाई दी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस क्षेत्र से जुड़े इंजीनियर, बिल्डर और पेशेवर विश्व स्तरीय अवसंरचना के निर्माण तथा विकसित भारत 2047 के विजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
नई दिल्ली – भारत सरकार के खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय (एमओएफपीआई) ने आज शिलांग में कोर्टयार्ड बाय मैरियट होटल में संसदीय परामर्श समिति की बैठक और उसके बाद एनआईएफटीईएम परिषद की बैठक का आयोजन किया।
खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्री श्री चिराग पासवान की अध्यक्षता में हुई इन बैठकों में मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। इनमें खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय के सचिव श्री अविनाश जोशी और संयुक्त सचिव श्री देवेश देवल और संसद सदस्य व अन्य हितधारक उपस्थित थे।
संसदीय परामर्श समिति की बैठक के दौरान खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की व्यापक समीक्षा की गई। इसमें मंत्रालय की ओर से चलाए रहे सुधार कार्यक्रमों और नीतिगत पहलों को भी शामिल किया गया। एमओएफपीआई द्वारा कार्यान्वित और प्रस्तावित सुधारों पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी गई। इसके बाद समिति के सदस्यों ने इस क्षेत्र को सुदृढ़ करने और इसकी पहुंच व प्रभाव को बेहतर बनाने को लेकर सुझाव दिए।
एनआईएफटीईएम परिषद की बैठक में देश में क्षमता निर्माण, अनुसंधान और खाद्य प्रसंस्करण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने से संबंधित प्रमुख संस्थागत और नीतिगत मामलों पर विचार-विमर्श किया गया। सदस्यों ने संस्थागत ढांचों को उद्योग की आवश्यकताओं और इस क्षेत्र में उभरते अवसरों के अनुरूप बनाने के तरीकों पर चर्चा की।
बैठकों को संबोधित करते हुए मंत्री ने फसल कटाई के बाद होने वाले नुकसान को कम करने और कृषि उत्पादों में मूल्यवर्धन बढ़ाने में खाद्य प्रसंस्करण की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने बुनियादी ढांचे की कमियों, वित्त तक पहुंच और तकनीकी बाधाओं सहित इस क्षेत्र में मौजूदा चुनौतियों का समाधान करने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। मंत्री ने व्यापार करने में आसानी के लिए अंतर-मंत्रालयी समन्वय के महत्व को भी रेखांकित किया और जीएसटी को युक्तिसंगत बनाने, खाद्य सुरक्षा नियमों को सुव्यवस्थित करने और सभी विभागों के प्रयासों के समन्वय पर सरकार की पहल की प्रशंसा की।
इन चर्चाओं में खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र को सुदृढ़ करने, नवाचार और उद्यमिता को बढ़ावा देने, प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों के प्रति सकारात्मक धारणा बनाने और मूल्य शृंखला में किसानों और हितधारकों के लिए अधिक लाभ के साथ सतत विकास सुनिश्चित करने की साझा प्रतिबद्धता झलकती है।
मंत्रालय ने नीतिगत समर्थन, संस्थागत सुदृढ़ीकरण और सहयोगात्मक दृष्टिकोण के माध्यम से इस क्षेत्र में विकास को गति देने पर अपना ध्यान केंद्रित करने की प्रतिबद्धता जताई, ताकि भारत को खाद्य प्रसंस्करण में वैश्विक लीडर के रूप में स्थापित किया जा सके।
मुख्य चुनाव आयुक्त श्री ज्ञानेश कुमार ने, चुनाव आयुक्तों डॉ. एस.एस. संधू और डॉ. विवेक जोशी के साथ मिलकर, आज तमिलनाडु राज्य में तैनात केंद्रीय पर्यवेक्षकों (सामान्य, पुलिस, व्यय) के साथ एक समीक्षा बैठक की; तमिलनाडु में 23 अप्रैल, 2026 को मतदान होना निर्धारित है।
तमिलनाडु के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) सहित कुल 326 केंद्रीय पर्यवेक्षकों और विशेष व्यय पर्यवेक्षकों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से ब्रीफिंग में भाग लिया। पर्यवेक्षकों का विवरण इस प्रकार है:
तमिलनाडु में आम चुनावों में तैनात केंद्रीय पर्यवेक्षकों की संख्या
एसी की संख्या
सामान्य पर्यवेक्षकों की संख्या
पुलिस पर्यवेक्षकों की संख्या
व्यय की संख्या
कुल केंद्रीय पर्यवेक्षक
234
136
40
150
326
आयोग ने पर्यवेक्षकों को निर्देश दिया कि वे यह सुनिश्चित करें कि चुनाव उत्सव के माहौल में, स्वतंत्र एवं निष्पक्ष रूप से तथा किसी भी प्रकार के प्रलोभन, धमकी या हिंसा से मुक्त होकर संपन्न हों।
आयोग ने आदर्श आचार संहिता के कड़ाई से पालन और उल्लंघन की किसी भी शिकायत के मामले में त्वरित कार्रवाई पर भी जोर दिया।
पर्यवेक्षकों से यह भी अनुरोध किया गया था कि वे अपने संपर्क नंबरों और जनता/राजनीतिक दलों/उम्मीदवारों या उनके प्रतिनिधियों से शिकायतें सुनने के स्थान और समय को सार्वजनिक रूप से प्रचारित करें।
उन्हें यह भी निर्देश दिया गया था कि वे इस बात की निगरानी करें कि पीठासीन अधिकारियों का प्रशिक्षण ठीक से हुआ है या नहीं, जिसमें ईसीआईएनईटी के मतदाता मतदान मॉड्यूल पर प्रत्येक 2 घंटे और मतदान बंद होने के समय मतदाता मतदान और अन्य डेटा की समय पर फीडिंग, अमिट स्याही का उचित उपयोग, फॉर्म 17-सी भरना और मतदान बंद होने के समय उपस्थित मतदान एजेंटों के साथ साझा करना, नकली मतदान डेटा को हटाना आदि पर विशेष जोर दिया गया हो।
पर्यवेक्षकों को यह सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया था कि सभी मतदान केंद्रों पर मोबाइल फोन जमा करने की सुविधा और मतदाता कतारों में बैठने के लिए बेंच सहित न्यूनतम आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हों। उन्हें यह भी निर्देश दिया गया था कि भीषण गर्मी को देखते हुए सभी मतदान केंद्रों पर पर्याप्त पेयजल की उपलब्धता और छाया की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।
वेबकास्टिंग मॉनिटरिंग कंट्रोल रूम की व्यवस्थाओं की ठीक से जांच की जानी चाहिए और वहां निगरानी के लिए तैनात सभी कर्मचारियों की उपस्थिति में एक परीक्षण चलाया जाना चाहिए, जिन्हें त्रुटियों की पहचान करने और यदि कोई त्रुटि हो तो उसे चिह्नित करने के लिए अच्छी तरह से प्रशिक्षित किया जाना चाहिए।
नई दिल्ली – राष्ट्रीय व्यापारी कल्याण बोर्ड (एनटीडब्ल्यूबी) की 9वीं बैठक श्री सुनील जे. सिंघी की अध्यक्षता में वाणिज्य भवन, नई दिल्ली में आयोजित की गई।
अध्यक्ष ने जन विश्वास संशोधन का स्वागत किया और व्यवसाय करने में आसानी को बढ़ावा देने के उद्देश्य से किये गये कई महत्वपूर्ण सुधारों और पहलों पर प्रकाश डाला:
जन विश्वास (संशोधन) विधेयक, 2026: जन विश्वास (प्रावधानों का संशोधन) विधेयक, 2026 में 79 केंद्रीय कानूनों के 784 प्रावधानों में संशोधन किया गया है, जिसमें 717 प्रावधानों को अपराध से मुक्त करना शामिल है, ताकि अनुपालन का बोझ कम हो और व्यवसाय करने की आसानी को बढ़ावा मिले।
भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (एफएसएसएआई): खाद्य व्यवसायों के लिए लाइसेंस और पंजीकरण की प्रक्रिया को सरल बनाया गया है, जिससे विशेष रूप से छोटे व्यापारियों के लिए अनुपालन आसान हो गया है।
राजस्थान व्यापार प्रोत्साहन नीति, 2025: ई-कॉमर्स को बढ़ावा देने के लिए प्लेटफ़ॉर्म शुल्क (शिपिंग शुल्क को छोड़कर) की 75% वापसी के जरिये समर्थन दिया जा रहा है, जो एक वर्ष के लिए ₹50,000 तक है।
उद्यम पंजीकरण और प्रधानमंत्री मुद्रा योजना: ये पहलें व्यापारियों और छोटे व्यवसायों को बिना गिरवी के ऋण प्रदान कर रही हैं, जिससे उद्यमिता और व्यापार विस्तार को प्रोत्साहन मिल रहा है।
डिजिटल सशक्तिकरण के क्षेत्र में, ओएनडीसी टीम द्वारा “डिजीदुकान” पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी गई, जो एक बी 2 बी प्लेटफार्म है और वर्तमान में हैदराबाद में संचालित हो रहा है। इसकी योजना जयपुर और बेंगलुरु में विस्तार करने की है। इस प्लेटफ़ॉर्म का उद्देश्य छोटे खुदरा विक्रेताओं और किराना स्टोरों को उनकी डिजिटल क्षमताओं और बाजार पहुँच बढ़ाने के जरिये सशक्त बनाना है।
इस बात पर भी जोर दिया गया कि, व्यापक राष्ट्रीय स्तर पर आउटरीच और राज्य सरकारों, उद्योग विभागों और व्यापार संघों के साथ समन्वय के माध्यम से, राज्य-स्तरीय व्यापारी कल्याण बोर्डों की स्थापना की आवश्यकता को प्रभावी ढंग से सुदृढ़ किया गया है। पश्चिम बंगाल में पहले ही एक राज्य व्यापारी कल्याण बोर्ड का गठन किया गया है, जबकि मध्य प्रदेश, तेलंगाना, छत्तीसगढ़, चंडीगढ़, जम्मू और कश्मीर तथा अन्य राज्यों/केंद्रशासित प्रदेशों में प्रयास जारी हैं।
विभिन्न मंत्रालयों और विभागों के साथ निरंतर समन्वय के माध्यम से, बोर्ड देश भर के व्यापारियों और व्यापार निकायों से प्राप्त प्रस्तुतियों का समयबद्ध और परिणामोन्मुख समाधान सुनिश्चित कर रहा है। व्यापक लक्ष्य व्यापार को आसान बनाना, व्यापारियों को सशक्त करना और सहभागी एवं समावेशी आर्थिक विकास सुनिश्चित करना है।
बैठक में विभिन्न व्यापार संघों और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करने वाले गैर-आधिकारिक सदस्य तथा भारत सरकार के नौ मंत्रालयों और विभागों के पदेन सदस्य उपस्थित थे।
नई दिल्ली – तीनों सेनाओं की रणनीतिक संगोष्ठी रण संवाद का दूसरा संस्करण 9 अप्रैल 2026 को बेंगलुरु में मुख्यालय एकीकृत रक्षा स्टाफ (आईडीएस) के तत्वावधान में प्रारंभ हुआ। वायु सेना प्रशिक्षण कमान द्वारा आयोजित की जा रही इस दो दिवसीय संगोष्ठी का उद्घाटन चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने किया। संगोष्ठी का विषय “बहु-क्षेत्रीय अभियान: पारंपरिक और अनियमित खतरों से निपटने की अनिवार्यता” है। एमडीओ सिद्धांत का उद्देश्य सैन्य और गैर-सैन्य संस्थाओं के विभिन्न हितधारकों के बीच समन्वय स्थापित कर भारत की संयुक्त युद्ध क्षमता को सभी छह क्षेत्रों—स्थल, समुद्र, वायु, अंतरिक्ष, साइबर और संज्ञानात्मक—में सशक्त बनाना है।
चीफ ऑफ इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ टू द चेयरमैन, चीफ्स ऑफ स्टाफ कमेटी (सीआईएससी) एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने अपने मुख्य भाषण में बहु-क्षेत्रीय अभियान (एमडीओ) पर केंद्रित भारत के सैन्य भविष्य के लिए एक परिवर्तनकारी विजन प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि युद्ध का स्वरूप मौलिक रूप से बदल चुका है और अब यह सिलसिलेवार नहीं रहा, बल्कि अंतरिक्ष, साइबर स्पेस, विद्युत-चुंबकीय स्पेक्ट्रम और संज्ञानात्मक क्षेत्र में एक साथ संचालित होता है। उन्होंने यह भी कहा कि भारत के लिए बहु-क्षेत्रीय अभियान कोई भविष्य की अवधारणा नहीं, बल्कि वर्तमान की अनिवार्यता है।
आधुनिक युग को “विखंडित, अघोषित विश्व युद्ध” के रूप में वर्णित करते हुए सेना प्रमुख (सीओएएस) जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने जोर देकर कहा कि युद्धक्षेत्र अब केवल नक्शे तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह एक बहु-स्तरीय और जटिल अनुकूलनशील प्रणाली बन चुका है। उन्होंने “स्थायी संघर्ष” वाली दुनिया की वास्तविकता को रेखांकित करते हुए बताया कि एक थल सेना कमांडर को अब विभिन्न क्षेत्रों में फैल रहे युद्ध को समझना चाहिए और यह भी देखना चाहिए कि कार्रवाइयों के दौरान ये क्षेत्र किस प्रकार परस्पर क्रिया करते हैं। उन्होंने कहा कि सेना एमडीओ को एक अवधारणा से आगे बढ़ाकर वास्तविक क्षमता में बदल रही है। उनके अनुसार, एमडीओ का आशय छह क्षेत्रों का समानांतर संचालन नहीं, अपितु यह निरंतर और गतिशील अंतःक्रिया है, जहां महत्व बदलता है और नेतृत्व भी परिवर्तित होता है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि सेना “डोमेन शुद्धता” से आगे बढ़कर पूर्ण “डोमेन फ्यूजन” की दिशा में अग्रसर होने के लिए एकीकरण, सूचनाकरण और इंटेलिजेंटाइजेशन की प्रक्रिया को तेज कर रही है।
ऑपरेशनल उपलब्धियों की चर्चा करते हुए जनरल द्विवेदी ने बताया कि भारतीय सेना ने एकीकृत युद्ध समूह (आईबीजी), दिव्यास्त्र ड्रोन बैटरीज और कमांड साइबर ऑपरेशन्स प्रकोष्ठों सहित अनेक क्षमताओं को संचालित किया है। उन्होंने एक ऐसी नई कमांड संस्कृति की आवश्यकता पर बल दिया, जहां नेतृत्व को “केवल तकनीक का उपयोग करने के बजाय उसे कमांड करना चाहिए”, ताकि निर्णय लेने में फायदा सुनिश्चित हो सके। उन्होंने कहा कि यद्यपि ऑपरेशन सिंदूर ने भारत की एकजुटता सिद्ध की है, लेकिन अंतिम लक्ष्य एक ऐसे बेजोड़ “संपूर्ण राष्ट्र” की संरचना करना है, जहां विभिन्न क्षेत्रों के बीच की सीमाएं पूरी तरह समाप्त हो जाएं।
नौसेना प्रमुख (सीएनएस) एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने अपने संबोधन में बहु-क्षेत्रीय अभियान का व्यापक समुद्री दृश्यांकन प्रस्तुत किया, जिसमें आधुनिक नौसैनिक रणनीति को तकनीक के मेल और कौटिल्य की समझ दोनों आधार पर दिखाया गया। उन्होंने आधुनिक समुद्री क्षेत्र को समुद्र की गहराइयों से लेकर अंतरिक्ष तक फैले परस्पर जुड़े ग्रिड के रूप में परिभाषित किया। उन्होंने विस्तार से बताया कि किस प्रकार समुद्री युद्धक्षेत्र अब एक सघन, पारदर्शी और गहराई से परस्पर जुड़ा हुआ नेटवर्क बन चुका है, जो गति, पैमाने और एक साथ होने वाली गतिविधियों से आकार लेता है।
नौसेना प्रमुख ने कहा कि भारतीय नौसेना 2035 तक 200 से अधिक जहाजों वाली नौसेना बनने की दिशा में दृढ़तापूर्वक अग्रसरहै और शामिल किए जाने वाले हर नए जहाज में प्रतिरूपकता और तकनीकी विकास पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। उन्होंने बताया कि इसके साथ ही, नौसेना “मानव रहित प्रणालियों के लिए भारतीय नौसेना का विजन 2022-30” के अनुरूप विभिन्न क्षेत्रों में मानवरहित और स्वायत्त प्रणालियों के माध्यम से अपनी फ्लीट क्षमताओं को बढ़ाने की कोशिश कर रही है।
यह दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी तीनों सेनाओं के बीच क्रमिक आधार पर प्रतिवर्ष आयोजित की जाती है। इसमें तीनों सेनाओं के वरिष्ठ अधिकारी, शिक्षाविद, थिंक-टैंक के विशेषज्ञ, उद्योग जगत के दिग्गज तथा मित्र देशों के विदेश सेवा अताशे सम्मिलित होते हैं और विभिन्न विषयों पर विचार-विमर्श सत्रों में भाग लेते हैं। यह संगोष्ठी भारतीय सशस्त्र बलों को बहु-क्षेत्रीय संघर्ष के लिए तैयार करने से लिए एक सहयोगात्मक रोडमैप के साथ 10 अप्रैल 2026 को समाप्त संपन्न होगी।
सिंधी भाषा में संविधान के विमोचन समारोह में उपराष्ट्रपति ने भारतीय भाषाओं में संविधान उपलब्ध कराने के प्रयासों की सराहना की
“भाषाएं संस्कृति, परंपरा और पहचान की वाहक हैं” – उपराष्ट्रपति
उपराष्ट्रपति ने कहा, “मातृभाषा में संविधान नागरिकों को सशक्त बनाता है”
नई दिल्ली – उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन ने आज उपराष्ट्रपति भवन में आयोजित कार्यक्रम में देवनागरी और फारसी दोनों लिपियों में संविधान का सिंधी भाषा में, नवीनतम संस्करण जारी किया
उपराष्ट्रपति ने सिंधी भाषा दिवस के अवसर पर सिंधी भाषी समुदाय को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि सिंधी सबसे प्राचीन भाषाओं में से एक है और इसकी साहित्यिक परंपरा वेदांतिक दर्शन और सूफी विचारों के अनूठे संगम को दर्शाती है, जो एकता, प्रेम और भाईचारे के सार्वभौमिक मूल्यों को बढ़ावा देती है।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि स्वतंत्रता के बाद पहली बार सिंधी भाषा में विशेष रूप से देवनागरी लिपि में संविधान का प्रकाशन, भाषाई समावेशिता को बढ़ावा देने में एक महत्वपूर्ण कदम है। उन्होंने कहा कि संविधान केवल एक कानूनी दस्तावेज नहीं है, बल्कि राष्ट्र की जीवंत आत्मा है, जो इसकी आकांक्षाओं को समाहित करती है, अधिकारों की रक्षा करती है और लोकतांत्रिक शासन का मार्गदर्शन करती है
उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार द्वारा संविधान को अनेक भारतीय भाषाओं में सुलभ बनाने के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पहल नागरिकों और शासन के बीच के अंतर को कम करने में सहायक होती है, क्योंकि इससे लोग संविधान को अपनी मातृभाषा में समझ पाते हैं, जिससे लोकतांत्रिक भागीदारी और विश्वास मजबूत होता है।
उपराष्ट्रपति ने संविधान को बोडो, डोगरी, संथाली, तमिल, गुजराती और नेपाली आदि भाषाओं में उपलब्ध कराने के प्रयासों का उल्लेख करते हुए कहा कि ये प्रयास भारत की भाषाई विविधता का सम्मान करते हैं और लोकतांत्रिक मूल्यों को सुदृढ़ बनाते हैं।
सिंधी समुदाय की ऐतिहासिक यात्रा का वर्णन करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि विभाजन के बाद के कठिन समय में यह भाषा दृढ़ता और एकता का प्रतीक रही। उन्होंने कहा कि सिंधी भाषा को 1967 में 21वें संवैधानिक संशोधन के माध्यम से संविधान की आठवीं अनुसूची में शामिल किया गया था, जिससे इसके सांस्कृतिक महत्व को मान्यता मिली और आने वाली पीढ़ियों के लिए इसका संरक्षण सुनिश्चित हुआ।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि मातृभाषा के साथ-साथ सभी भाषाओं को समान महत्व और सम्मान मिलना चाहिए। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारत की शक्ति उसकी विविधता में निहित है और भाषाएं संस्कृति, परंपरा और पहचान की महत्वपूर्ण वाहक हैं।
उपराष्ट्रपति ने संविधान को क्षेत्रीय भाषाओं में सुलभ बनाने के लिए विधि एवं न्याय मंत्रालय, विशेषकर क्षेत्रीय भाषा अधिकारियों के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसी पहल नागरिकों को सशक्त बनाने और वर्ष 2047 तक विकसित भारत के दृष्टिकोण को मजबूत करने में योगदान देगी।
उपराष्ट्रपति ने विविधता में एकता की भावना और “राष्ट्र प्रथम” के मार्गदर्शक सिद्धांत को दोहराते हुए नागरिकों से अपनी मातृभाषाओं के साथ-साथ राष्ट्र की सामूहिक भाषाई विरासत का सम्मान करने का आग्रह किया।
इस अवसर पर केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल, राजस्थान विधानसभा के अध्यक्ष श्री वासुदेव देवनानी, लोकसभा सांसद श्री शंकर लालवानी और विधायी विभाग के सचिव डॉ. राजीव मणि सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
रांची,10.04.2026 – केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने सीआरपीएफ शौर्य दिवस के अवसर पर केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के वीर जवानों को श्रद्धांजलि अर्पित की।
X पर जारी पोस्ट में, श्री अमित शाह ने कहा, “सीआरपीएफ वीरता दिवस पर हमारे वीर जवानों के अदम्य साहस और बलिदान को नमन। 1965 में आज ही के दिन सीआरपीएफ के वीर जवानों ने कच्छ का रण के सरदार पोस्ट पर दुश्मनों के मंसूबों को ध्वस्त करते हुए बहादुरी का स्वर्णिम अध्याय रचा। राष्ट्र की सुरक्षा और सम्मान के लिए अपने प्राणों का बलिदान देने वाले शहीदों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि।”
नई दिल्ली – रेल यात्रा अब और भी सुरक्षित व आरामदायक होगी। रेल मंत्रालय में हुई बैठक में रेल मंत्री जी ने आज कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए।
महत्वपूर्ण निर्णय में यह तय किया कि ब्रिज एप्रोच एवं पॉइंट्स, क्रॉसिंग में प्रयोग किए जाने वाले स्लीपर अब कॉम्पोजिट होंगे।
ब्रिज अप्रोचेज़
लोहे तथा कंक्रीट के मौजूदा भारी स्लीपरों के मुकाबले ये नए स्लीपर न सिर्फ हल्के हैं बल्कि अधिक लोड लेने में सक्षम हैं। इसकी कुशनिंग बेहतर है। इन्हें बिछाना और इनकी मरम्मत आसान है।
ये स्लीपर ऐसे हैं कि जिस स्थान पर इन्हें लगाना है, वहां की विशेष परिस्थितियों के अनुसार बनाया व लगाया जा सकता है। इनके लगने से पुलों और पॉइंट्स, क्रॉसिंग से गुजरते समय रेल यात्रा में यात्रियों का अनुभव और बेहतर होगा।
कंक्रीट पुल पर टर्नआउट्स
रेल भवन, नई दिल्ली में आज अधिकारियों के साथ हुई एक समीक्षा बैठक में रेल मंत्री ने यह बड़ा निर्णय लिया। कंक्रीट और लोहे के मुकाबले कॉम्पोजिट पदार्थों से बने ये कॉम्पोजिट स्लीपर प्रति वर्ग सेंटीमीटर 700 किलोग्राम तक का भार उठा सकते हैं। ये कॉम्पोजिट स्लीपर अधिक समय तक भी चलेंगे। इनके लगने से रेलवे को मौजूदा स्लीपरों के रखरखाव में आने वाली लागत में भी कमी आएगी।
एक अन्य महत्वपूर्ण फैसले में यह तय किया गया कि रेलवे ट्रैक की निगरानी अब एआई की मदद से होगी। इसके लिए उपयोग में लाई जा रही निरीक्षण गाड़ियों में एआई तकनीक से लैस एक विशेष डिवाइस लगाई जाएगी। ग्राउंड पेनिट्रेशन रडार नाम की यह डिवाइस रेलवे ट्रैक के आधार का जायजा लेगी।
रेल पटरियों में होने वाली वेल्डिंग की गुणवत्ता को और बढ़ाने के लिए एक नई तकनीक—मैग्नेटिक पार्टिकल टेस्टिंग—के उपयोग का निर्णय लिया गया। यह परीक्षण आपस में जोड़े जाने वाली वेल्डिंग के सूक्ष्म दोषों को पहचानने में काफी कारगर है।
आज लिए गए सभी निर्णय भारतीय रेल की लोगों की सुरक्षा को लेकर संवेदनशीलता को दर्शाते हैं। ये निर्णय यात्रियों के प्रति रेल परिवार की सुरक्षा तथा सुविधाजनक यात्रा के लिए लगातार किए जा रहे प्रयासों और हमारी प्रतिबद्धता को भी दर्शाते हैं।
नई दिल्ली – रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में मंत्रियों के अनौपचारिक समूह (आईजीओएम) ने 08 अप्रैल, 2026 को नई दिल्ली के कर्तव्य भवन-2 में आयोजित अपनी तीसरी बैठक के दौरान, पश्चिम एशिया में हाल के घटनाक्रमों के मद्देनजर भारत की तैयारियों का जायजा लिया। इस बैठक में वित्त एवं कारपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण; विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर; कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान; वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल; रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा; पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी; उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी; रेल, सूचना एवं प्रसारण तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव; संसदीय कार्य मंत्री श्री किरेन रिजिजू; नागरिक उड्डयन मंत्री श्री किंजरापु राममोहन नायडू; और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह शामिल हुए।
अपने संबोधन में, रक्षा मंत्री ने सभी विभागों को निर्देश दिया कि वे किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार रहने हेतु तत्परता, समन्वय और लचीलापन बढ़ाने पर लगातार ध्यान केंद्रित करते रहें। एक्स पर एक पोस्ट में, उन्होंने कहा कि सरकार एलपीजी, पेट्रोल और डीजल की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित कर रही है, किसानों के लिए उर्वरक उपलब्ध करा रही है और देश में आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति को सुगम बना रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में, सरकार नागरिकों को संघर्ष के प्रभावों से बचाने के लिए असाधारण कार्य कर रही है।
आईजीओएम को बताया गया कि भारत ने पिछले 40 दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य से किसी भी अन्य देश की तुलना में सबसे ज्यादा जहाजों को सुरक्षित निकालने का काम किया है। कुल 8 एलपीजी जहाज सफलतापूर्वक इस जलडमरूमध्य से गुजर गए, जिनमें लगभग 340टीएम एलपीजी थी और भारत की लगभग 11 दिनों की आयात जरूरत के बराबर है। इससे देश की ऊर्जा सुरक्षा और आपूर्ति की स्थिरता मजबूत हुई है। एलपीजी डिस्ट्रीब्यूटरशिप पर एलपीजी की कमी की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है और पूरे देश में घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की डिलीवरी लगातार जारी है।
प्रवासी मजदूरों सहित कमजोर समुदायों की मदद के लिए, 7 अप्रैल को प्राथमिकता वाले वर्गों के लिए तय की गई 20% हिस्सेदारी के अलावा, 5 किग्रा वाले मुफ्त एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति दोगुनी कर दी गई है। सरकारी तेल कंपनियों (पीएसयू) के रिटेल पंप आउटलेट सार्वजनिक परिवहन की जरूरतों को पूरा करने के लिए ऑटो एलपीजी देना जारी रखे हुए हैं। हालांकि, निजी ऑपरेटरों को अपनी खरीद से जुड़ी चुनौतियों के कारण आपूर्ति में कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, जिससे सरकारी आउटलेट पर लोगों की भीड़ बढ़ गई है।
8 अप्रैल को एक बड़ा फैसला लिया गया, जिसके तहत औद्योगिक क्षेत्र को एलपीजी की आपूर्ति और आसान बनाने के लिए, ईंधन की कुल मांग का 70% हिस्सा गैर घरेलू थोक ग्राहकों को आवंटित किया गया। इसमें फार्मा, फूड, पॉलिमर, खेती, पैकेजिंग, पेंट, इस्पात, रक्षा से जुड़े सामान जैसे अहम क्षेत्रों को आपूर्ति में प्राथमिकता दी गई। इस कदम से उम्मीद है कि आपूर्ति श्रृंखला में रुकावटें नहीं आएंगी, जरूरी सामान की कमी नहीं होगी और मौजूदा वैश्विक संकट के बावजूद औद्योगिक कामकाज बिना किसी रुकावट के चलता रहेगा।
जहां भी मुमकिन है, वहां पाइप्ड नैचुरल गैस (पीएनजी) को जोर-शोर से बढ़ावा दिया जा रहा है। एलपीजी पर निर्भरता कम करने के लिए शुरू किए गए पीएनजी कनेक्शन कैंपेन से लोगों में जागरूकता बढ़ी है, जिसके चलते 3.16 लाख नए पीएनजी कनेक्शन जोड़े गए। यह मार्च 2025 के स्तर के मुकाबले तीन गुना ज्यादा है। इस अभियान का नतीजा यह भी रहा कि नागरिकों ने 16,700 से ज्यादा एलपीजी कनेक्शन सरेंडर कर दिए, जो इस बात का संकेत है कि लोग अब तेजी से पीएनजी को अपना रहे हैं।
आईजीओएम को संघर्ष-विराम के मद्देनजर ऊर्जा की कीमतों में आई नरमी के बारे में भी जानकारी दी गई। मंत्रियों को सूचित किया गया कि प्रमुख क्षेत्रीय मापदंडों पर लगातार बारीकी से नजर रखी जाएगी और उचित कदम उठाए जाएंगे।
आईजीओएम को खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग द्वारा उठाए गए पर्याप्त उपायों के बारे में भी अवगत कराया गया।
खाद्य सुरक्षा की तैयारी
चावल और गेहूं का पर्याप्त बफर स्टॉक उपलब्ध है, जिससे पीडीएस के लिए और किसी भी आपातकालीन जरूरत को पूरा करने के लिए पर्याप्त आपूर्ति सुनिश्चित होती है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम कमजोर वर्गों के लिए खाद्यान्न की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित करता है।
बाजार में हस्तक्षेप: खुली बाजार बिक्री योजना (घरेलू) – ओएमएसएस (डी)
सरकार खाद्यान्न की कीमतों पर नजर रखती है और जरूरत पड़ने पर, ओएमएसएस (डी) के जरिए बाजार में हस्तक्षेप करती है। भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) आपूर्ति बढ़ाने, कीमतों को स्थिर करने और महंगाई को नियंत्रित करने के लिए खुले बाजार में अतिरिक्त गेहूं और चावल जारी करता है। ऐसे हस्तक्षेपों के लिए एफसीआई के पास पर्याप्त स्टॉक उपलब्ध है। यह योजना राज्य सरकारों को उनकी अतिरिक्त जरूरतों के लिए रियायती निश्चित कीमतों पर चावल बेचने की सुविधा भी देती है।
खरीद: रबी विपणन सत्र (आरएमएस) 2026–27
एमएसपी संचालन के तहत गेहूं की खरीद शुरू हो गई है, जो मुख्य रूप से राज्य सरकार की एजेंसियों के माध्यम से की जा रही है। विभाग राज्यों के साथ समन्वय स्थापित करते हुए तैयारियों की नियमित रूप से समीक्षा कर रहा है। खरीद कार्यों के लिए पर्याप्त पैकेजिंग सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित की जा रही है।
खाद्यान्न पैकेजिंग
आरएमएस 2026–27 के दौरान पैकेजिंग सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय कदम उठाए गए हैं। विभाग, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय तथा रसायन और पेट्रो रसायन विभाग के परामर्श से, पैकेजिंग के स्रोतों में विविधता ला रहा है और किसी भी संभावित कमी से निपटने के लिए आकस्मिक उपाय किए जा रहे हैं।
खाद्य तेल की स्थिति
वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद, खाद्य तेलों की घरेलू उपलब्धता संतोषजनक बनी हुई है। प्रमुख साझेदारों (इंडोनेशिया, मलेशिया, अर्जेंटीना, ब्राजील) से आयात लगातार जारी है। सरसों के उत्पादन में सुधार से घरेलू आपूर्ति मजबूत हुई है। कुल आपूर्ति स्थिर बनी हुई है; सरकार इस पर कड़ी नजर रखे हुए है और जरूरत पड़ने पर हस्तक्षेप करेगी।
चीनी क्षेत्र
चीनी का पर्याप्त बफर स्टॉक उपलब्ध है। 2025-26 में चीनी उत्पादन पर्याप्त रहने की उम्मीद है। 15.80 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) चीनी के निर्यात की अनुमति दी गई है, जिसमें से अब तक 3.73 एलएमटी चीनी का निर्यात किया जा चुका है। निर्यात मुख्य रूप से श्रीलंका, पश्चिम एशिया और पूर्वी अफ्रीका को किया जा रहा है। खुदरा कीमतें स्थिर बनी हुई हैं और पिछले तीन वर्षों में मुद्रास्फीति (महंगाई) का स्तर कम (~3%) रहा है।
मंत्रियों को सूचित किया गया कि उपभोक्ता मामले विभाग देश भर के 578 केंद्रों से प्राप्त होने वाली 40 खाद्य वस्तुओं की दैनिक कीमतों पर नज़र रख रहा है। मध्य पूर्व में युद्ध छिड़ने के बाद कीमतों में किसी भी तरह की असामान्य अस्थिरता पर बारीकी से नज़र रखी जा रही है। अब तक, कीमतों में कोई असामान्य अस्थिरता देखने को नहीं मिली है और अधिकांश वस्तुओं की कीमतें स्थिर हैं; केवल खाद्य तेलों की कीमतों में मामूली वृद्धि देखी गई है।
सरसों के तेल के घरेलू उत्पादन में सुधार होने की उम्मीद है (~5% ज्यादा उत्पादन), जिससे आयात पर निर्भरता कुछ हद तक कम होगी। कीमतों को स्थिर रखने के लिए बफर स्टॉक के लिए प्याज की खरीद जल्द ही शुरू होगी, जिससे मंडी की कीमतों को सहारा मिलेगा। नेशनल एग्रीकल्चरल कोऑपरेटिव मार्केटिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड और नेशनल कोऑपरेटिव कंज्यूमर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड ने खरीद की तैयारी शुरू कर दी है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान प्याज का निर्यात 15.40 एलएमटी रहा, जो पिछले वर्ष से ज्यादा था और इस वर्ष इसमें और सुधार होने की उम्मीद है।
नई दिल्ली – कोयला एवं खान मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी की अध्यक्षता एवं कोयला एवं खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे की सह-अध्यक्षता में कोयला मंत्रालय द्वारा दिनांक 8 व 9 अप्रैल, 2026 को कौशल भवन, नई दिल्ली में दो दिवसीय अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन का आयोजन किया गया। इस सम्मेलन में श्री सुधांशु त्रिवेदी, सांसद, राज्यसभा विशिष्ट अतिथि के रूप में सम्मिलित हुए। इस सम्मेलन को संबोधित करते हुए कोयला एवं खान मंत्री श्री जी. किशन रेड्डी जी ने कहा की प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय मंचों पर हिंदी में अपनी बात रख कर हिंदी और देश का गौरव बढ़ाया है, हम सभी को उनसे सीखने की आवश्यकता है। श्री रेड्डी ने यह भी उल्लेख किया कि हिंदी के साथ-साथ अपनी मातृभाषा को भी महत्व दिया जाना चाहिए। आगे उन्होंने कहा कि मंत्रालय को राजभाषा हिंदी के विकास हेतु प्रतिबद्ध होकर कार्य करना होगा।
कोयला एवं खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे ने अपने संबोधन में कहा कि हम हिंदी को केवल राजभाषा के रूप में ही नहीं, अपितु जन-जन की भाषा, ज्ञान की भाषा और भविष्य की भाषा बनाने के लिए प्रयासरत रहेंगे।
उन्होंने कोयला मंत्रालय में राजभाषा हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए किए जा रहे कार्यों के बारे में भी अवगत कराया।
विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद श्री सुधांशु त्रिवेदी ने भारतीय भाषाओं के अंतर संबंध के बारे में विस्तार से बताया और शब्दों की उत्पत्ति तथा विकास के संदर्भ में अपनी बात रखी। साथ ही, उन्होंने भारतीय संस्कृति के महत्व एवं गौरव पर भी प्रकाश डाला।
वार्षिक प्रारूप एवं टिप्पण-लेखन प्रोत्साहन योजना के विजेताओं को मंत्रीगणों के कर-कमलों से शील्ड प्रदान की गई। इस सम्मेलन में कोयला मंत्रालय के ध्येय गीत को प्रदर्शित किया गया।
इसके अलावा पर्यावरण आधारित संगीतबद्ध नाट्य प्रस्तुति, भारतीय संस्कृति की झलक को दर्शाते हुए नृत्य प्रस्तुति, कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।
इस सम्मेलन के दूसरे दिन श्री बालेंदु शर्मा दाधीच द्वारा ‘हिंदी और तकनीकी दुनियां’, श्री अनिल शर्मा जोशी द्वारा ‘वैश्विक स्तर पर हिंदी की स्थिति और चुनौतियां’ तथा श्री राजेश चेतन द्वारा ‘संवाद की कला’, विषय पर वक्तव्य दिये गए।
इस सम्मेलन के समापन सत्र में कोयला मंत्रालय और अधीनस्थ कंपनियों के प्रतिभागियों द्वारा हिंदी के प्रचार-प्रसार के संबंध में अपने-अपने विचार रखे गए और काव्य प्रस्तुतियाँ दी गईं।
इस अवसर पर कोयला मंत्रालय के अपर सचिव, संयुक्त सचिव, आर्थिक सलाहकार, निदेशक, अवर सचिव, अनुभाग अधिकारियों और एनएलसी के अध्यक्ष-सह प्रबंध निदेशक, कोल इंडिया लिमिटेड और सभी अनुषंगी कंपनियों के निदेशक (मानव संसाधन), कोयला खान भविष्य निधि संगठन व कोयला नियंत्रक कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
नई दिल्ली – सरकार के जनजातीय मामलों के मंत्रालय के अधीन एक सार्वजनिक क्षेत्र का उपक्रम, राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति वित्त और विकास निगम (एनएसटीएफडीसी), 10 अप्रैल, 2026 को नई दिल्ली स्थित विश्व युवा केंद्रमें अपना 25वां स्थापना दिवस मनाने जा रहा है।
वर्ष 2001 में स्थापित, एनएसटीएफडीसी देशभर में अनुसूचित जनजातियों के आर्थिक विकास के लिए समर्पित एक सर्वोच्च संगठन के रूप में कार्य करता है। निगम आय सृजन गतिविधियों के लिए राज्य चैनलिंग एजेंसियों के माध्यम से रियायती वित्तीय सहायता प्रदान करके आजीविका के अवसरों को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
जनजातीय मामलों के माननीय केंद्रीय मंत्री श्री जुएल ओराम इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे। इस कार्यक्रम में जनजातीय मामलों के माननीय राज्य मंत्री श्री दुर्गा दास उइके और जनजातीय मामलों के मंत्रालय की सचिव श्रीमती रंजना चोपड़ा के साथ-साथ पूर्व सीएमडी, वरिष्ठ अधिकारी और विशिष्ट अतिथि भी शामिल होंगे। उपस्थित लोगों का स्वागत एनएसटीएफडीसी के सीएमडी श्री टी. रूमुआन पैते करेंगे ।
समारोह के अंतर्गत, एनएसटीएफडीसी भारत भर के उन सफल अनुसूचित जनजाति उद्यमियों को सम्मानित करेगा जिन्होंने एनएसटीएफडीसी योजनाओं के तहत वित्तीय सहायता प्राप्त करके स्थायी उद्यम स्थापित किए हैं। ये लाभार्थी विभिन्न जनजातीय समुदायों का प्रतिनिधित्व करते हैं और उन्होंने पारंपरिक व्यंजन, स्वास्थ्य सेवाएँ, मुर्गी पालन, डेयरी, हस्तशिल्प, मत्स्य पालन, खुदरा व्यवसाय, सिलाई आदि जैसे विभिन्न क्षेत्रों में उद्यम स्थापित किए हैं।
इस कार्यक्रम में आदिवासी नृत्यों और नुक्कड़ नाटक सहित सांस्कृतिक कार्यक्रम भी शामिल होंगे , जो आदिवासी समुदायों की समृद्ध विरासत और परंपराओं को दर्शाते हैं।
एनएसटीएफडीसी के अधिकारी इस समारोह का आयोजन बड़े उत्साह के साथ कर रहे हैं और आदिवासी सशक्तिकरण और समावेशी विकास की दिशा में समर्पित सेवा के 25 वर्षों के इस महत्वपूर्ण अवसर पर गणमान्य व्यक्तियों, हितधारकों और प्रतिभागियों का स्वागत करने के लिए उत्सुक हैं।
नई दिल्ली – केंद्रीय विद्युत एवं आवासन और शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल ने भूटान नरेश जिग्मे खेसर नामग्याल वांगचुक से मुलाकात की।
केंद्रीय मंत्री ने भारत सरकार और लोगों की ओर से भूटान नरेश को हार्दिक शुभकामनाएं दीं। उन्होंने भारत और भूटान के बीच विशिष्ट और प्रगाढ़ मैत्री तथा साझेदारी को और अधिक सुदृढ़ बनाने में भूटान नरेश के निरंतर मार्गदर्शन और नेतृत्व के प्रति सराहना व्यक्त की।
बातचीत में श्री मनोहर लाल ने भूटान के राष्ट्रीय सेवा कार्यक्रम, ग्यालसुंग के लिए बधाई दी, जो युवाओं में कौशल एवं राष्ट्र निर्माण पर केन्द्रित सामुदायिक भावना को बढ़ावा देता है। उन्होंने सतत एवं नियोजित विकास के लिए भूटान नरेश के गेलेफू माइंडफुलनेस सिटी दृष्टिकोण की भी सराहना की।
केंद्रीय विद्युत मंत्री ने भूटान नरेश को बताया कि वे पुनात्सांगछू-I जलविद्युत परियोजना के बांध निर्माण कार्य आरंभ होने के अवसर पर उपस्थित रहेंगे, जिससे इस परियोजना के पूर्ण होने का मार्ग प्रशस्त होगा। विद्युत मंत्री ने कहा कि यह प्रक्रिया भारत-भूटान ऊर्जा सहयोग की तेज़ गति को दर्शाती है।
श्री मनोहर लाल ने भूटान नरेश को आज सुबह पुनात्सांगछू-II जलविद्युत परियोजना के निर्यात दर संबंधी समझौते पर हस्ताक्षर होने की जानकारी दी। 1020 मेगावाट की पुनात्सांगछू-II जलविद्युत परियोजना का संयुक्त उद्घाटन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और भूटान नरेश ने 11 नवंबर, 2025 को किया था और इससे 19 सितंबर, 2025 से ही आपसी सहमति से तय प्रारंभिक दर पर भारत को अधिशेष बिजली का निर्यात आरंभ हो गया था।
केंद्रीय विद्युत मंत्री ने भूटान नरेश को यह भी बताया कि वे भूटान के ऊर्जा मंत्री के साथ 10 अप्रैल, 2026 को पुनात्सांगछू-I जलविद्युत परियोजना बांध में कंक्रीट डालने के समारोह में शामिल होंगे। यह दोनों देशों के लोगों के लिए 1200 मेगावाट की पुनात्सांगछू-I जलविद्युत परियोजना में बांध निर्माण कार्य आरंभ होने का महत्वपूर्ण अवसर होगा।
श्री मनोहर लाल ने भूटान नरेश को, ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर केंद्रित, वहां के प्रधानमंत्री और ऊर्जा एवं प्राकृतिक संसाधन मंत्री सहित भूटान नेतृत्व के साथ अपनी रचनात्मक बातचीत की जानकारी दी।
केंद्रीय विद्युत मंत्री श्री मनोहर लाल ने इस बात पर बल दिया कि ऊर्जा सहयोग भारत-भूटान संबंधों का प्रमुख स्तंभ है। उन्होंने इसके ठोस क्रियान्वयन से दोनों देशों की परस्पर लाभकारी साझेदारी रेखांकित की।
नई दिल्ली – सड़क परिवहन तथा राजमार्ग एवं कॉर्पोरेट कार्य राज्य मंत्री श्री हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि सड़क सुरक्षा जागरूकता पहल केवल अलग-थलग घटनाएं नहीं हैं, बल्कि देश भर में जिम्मेदार सड़क उपयोग की संस्कृति को बढ़ावा देने के उद्देश्य से चलाए जा रहे एक व्यापक राष्ट्रीय आंदोलन के अभिन्न अंग हैं।
श्री मल्होत्रा ने पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) द्वारा आयोजित उत्तराखंड एडवेंचर राइड के तीसरे संस्करण को झंडी दिखाकर सड़क सुरक्षा को सुदृढ़ करने और जिम्मेदार ड्राइविंग व्यवहार को बढ़ावा देने के प्रति अपनी अटूट प्रतिबद्धता की पुष्टि की।
श्री मल्होत्रा ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व और सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी के मार्गदर्शन में भारत ने सड़क अवसंरचना के विस्तार और आधुनिकीकरण में उल्लेखनीय प्रगति की है। उन्होंने यह भी कहा कि सुरक्षा सुनिश्चित करना अंततः नागरिकों की सामूहिक जिम्मेदारी और आचरण पर निर्भर करता है।
उन्होंने इस पहल के महत्व को रेखांकित करते हुए उत्तराखंड एडवेंचर राइड के सफल आयोजन और विभिन्न हितधारकों को एक साथ लाने के लिए पीएचडी चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (पीएचडीसीसीआई) की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह पहल साहसिक पर्यटन को जन जागरूकता के साथ प्रभावी ढंग से जोड़ती है, जिससे समाज के विभिन्न वर्गों के बीच सड़क सुरक्षा के महत्वपूर्ण संदेश को व्यापक रूप से पहुंचाया जा सकता है।
श्री मल्होत्रा ने इस चुनौती की गंभीरता को रेखांकित करते हुए बताया कि भारत में सड़क दुर्घटनाएं सार्वजनिक सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा बनी हुई हैं, जिनमें प्रतिवर्ष लगभग 1.8 लाख मौतें होती हैं। उन्होंने यह भी बताया कि इन दुर्घटनाओं में से लगभग 45 प्रतिशत दोपहिया वाहनों से संबंधित होती हैं, जो चालकों के लिए सुरक्षित और जिम्मेदार व्यवहार अपनाने की तत्काल आवश्यकता को दर्शाता है। उन्होंने नागरिकों, विशेष रूप से युवाओं से, सड़क सुरक्षा के राजदूत के रूप में कार्य करने और उदाहरण प्रस्तुत करने का आग्रह किया।
सरकार के सक्रिय और व्यापक दृष्टिकोण को दोहराते हुए, श्री हर्ष मल्होत्रा ने मंत्रालय की 4ई रणनीति—इंजीनियरिंग, प्रवर्तन, शिक्षा और आपातकालीन देखभाल —के बारे में विस्तार से बताया, जो भारत के सड़क सुरक्षा ढांचे की आधारशिला है। उन्होंने सड़क इंजीनियरिंग में सुधार, दुर्घटना संभावित क्षेत्रों को सुधारने, मोटर वाहन (संशोधन) अधिनियम, 2019 जैसे विधायी उपायों के माध्यम से प्रवर्तन को सुदृढ़ करने और देशव्यापी आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र को बढ़ाने में हुई महत्वपूर्ण प्रगति पर प्रकाश डाला।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में, दुर्घटना पीड़ितों को समय पर सहायता पहुंचाने के लिए पीएम राहत योजना और राह-वीर योजना जैसी कई नागरिक-केंद्रित पहलें शुरू की गई हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि मृत्यु दर को कम करने और दुर्घटना के बाद देखभाल प्रणालियों को मजबूत करने के लिए संवेदनशील और सहानुभूतिपूर्ण समाज का निर्माण करना आवश्यक है।
युवाओं की सहभागिता पर दिए जा रहे बल की सराहना करते हुए श्री मल्होत्रा ने कहा कि संवादात्मक सत्रों और जागरूकता कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं को जागरूक किया जा रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि देश में सड़क अनुशासन की दीर्घकालिक संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए कम उम्र से ही जिम्मेदार ड्राइविंग की आदतें विकसित करना अत्यंत महत्वपूर्ण है।
उन्होंने सभी सड़क उपयोगकर्ताओं से यातायात नियमों का सख्ती से पालन करने और हेलमेट के बिना वाहन चलाना, तेज गति से वाहन चलाना, वाहन चलाते समय मोबाइल फोन का उपयोग करना और कम उम्र में वाहन चलाना जैसे जोखिम भरे व्यवहारों से बचने का आग्रह किया।
श्री मल्होत्रा ने सुरक्षा के महत्व पर जोर देते हुए टिप्पणी की:
“हेलमेट पहनना कोई विकल्प नहीं है, यह सुरक्षा का साधन है।”
“गति शक्ति नहीं, जोखिम है।”
“जीवन महत्वपूर्ण है—सुरक्षा से बढ़कर कोई और जरूरी पुकार नहीं है।”
प्रौद्योगिकी की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डालते हुए, श्री मल्होत्रा ने सड़क सुरक्षा परिणामों में सुधार लाने में एआई-आधारित यातायात निगरानी प्रणालियों, इंटेलिजेंट ट्रांसपोर्ट सिस्टम (आईटीएस), स्वचालित प्रवर्तन तंत्र और फास्टैग-सक्षम निर्बाध गतिशीलता के उपयोग का उल्लेख किया। हालांकि, उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सार्थक और स्थायी परिणाम प्राप्त करने के लिए प्रौद्योगिकीय प्रगति के साथ-साथ जिम्मेदार मानवीय व्यवहार भी आवश्यक है।
इस कार्यक्रम में सशस्त्र बलों, सरकारी मंत्रालयों, कंपनियों और मोटरसाइकिल समुदाय का प्रतिनिधित्व करने वाले 40 सवारों ने भाग लिया। श्री मल्होत्रा ने उनके समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि इस तरह की बहु-हितधारक भागीदारी सुरक्षित सड़कों के निर्माण की दिशा में एक एकीकृत राष्ट्रीय प्रयास को दर्शाती है।
अपने संबोधन के समापन करते हुए श्री मल्होत्रा ने सभी नागरिकों से यातायात नियमों का पालन करने, जिम्मेदारी से वाहन चलाने और अपने समुदायों में जागरूकता फैलाने का सामूहिक संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने दोहराया कि सड़क सुरक्षा एक साझा जिम्मेदारी है, जिसके लिए सरकार, संस्थानों और नागरिकों के निरंतर एवं सहयोगात्मक प्रयासों की आवश्यकता है।