ओरमांझी क्षेत्र में अवैध गैस सिलेंडर रिफिलिंग एवं कालाबाजारी का भंडारण करते दोषियों पर जिला प्रशासन की सख्त कार्रवाई

गुप्त सूचना के आधार पर जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देशानुसार जिला स्तरीय टीम ने ओरमांझी थाना क्षेत्र के ईरवा स्थित दिल्ली दरबार बिरयानी दुकान में छापेमारी की

छापेमारी के दौरान दुकान से 09 (नौ) व्यवसायिक गैस सिलेंडर बरामद किए गए, जिनका कुल वजन 19.02 किलोग्राम

जप्ती सूची के आधार पर गिरफ्तार व्यक्ति की निशानदेही पर आरोपी के घर (ग्राम थाना ओरमांझी) पर घेराबंदी कर छापेमारी की गई

अवैध रूप से व्यवसायिक गैस सिलेंडरों का भंडारण, रिफिलिंग एवं बिक्री करना रेगुलेशन ऑफ सप्लाई एंड डिस्ट्रीब्यूशन ऑर्डर-2000, आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 तथा अन्य सुसंगत धाराओं के अंतर्गत मामला दर्ज किया गया

जिले में किसी भी प्रकार की कालाबाजारी, अवैध भंडारण या रिफिलिंग की गतिविधियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आम जनता से अपील की जाती है कि यदि किसी को ऐसी कोई अवैध गतिविधि की जानकारी हो तो तुरंत जिला प्रशासन या संबंधित थाने को सूचित करें

राँची,05.04.2026 – जिला प्रशासन राँची द्वारा अवैध गैस सिलेंडर की कालाबाजारी, भंडारण एवं रिफिलिंग की गतिविधियों पर सख्त नजर रखी जा रही है। आज दिनांक 04.04.2026 को प्राप्त गुप्त सूचना के आधार पर जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देशानुसार प्रखंड विकास पदाधिकारी ओरमांझी के नेतृत्व में जिला स्तरीय टीम ने ओरमांझी थाना क्षेत्र के ग्राम ईरवा स्थित दिल्ली दरबार बिरयानी दुकान में छापेमारी की।

छापेमारी के दौरान दुकान से 09 (नौ) व्यवसायिक गैस सिलेंडर बरामद किए गए, जिनका वजन 19.02 किलोग्राम था। बरामद सिलेंडरों का विवरण निम्नानुसार है:

*HP GAS: 04.00 किग्रा, 17.100 किग्रा, खाली, 16.200 किग्रा, 16.600 किग्रा, 17.00 किग्रा

*INDANE GAS: 16.700 किग्रा, 17.300 किग्रा, 17.300 किग्रा

इनमें से छह सिलेंडर सील किए हुए थे। दुकान संचालक से पूछताछ में पता चला कि ये सिलेंडर ग्राम थाना ओरमांझी के एक बिचौलिए द्वारा बैगनआर कार से लाए गए थे। बिचौलिए द्वारा अवैध रूप से रिफिलिंग कर इन सिलेंडरों की बिक्री की जा रही थी और बिक्री से प्राप्त मुनाफे में हिस्सेदारी दी जा रही थी।

बरामद सिलेंडरों के संबंध में स्वतंत्र साक्षी की अनुपलब्धता के कारण साथ गए चौकीदार को साक्षी मानते हुए विधिवत जप्ती सूची तैयार कर सभी सिलेंडर जब्त कर लिए गए।

आरोपी के घर पर भी छापेमारी

जप्ती सूची के आधार पर गिरफ्तार व्यक्ति की निशानदेही पर आरोपी के घर (ग्राम थाना ओरमांझी) पर घेराबंदी कर छापेमारी की गई। छापेमारी के दौरान घर से 01 HP GAS सिलेंडर (वजन 19.02 किग्रा, जिसमें 10.00 किग्रा गैस भरी हुई थी) बरामद किया गया, जिसमें रिफिलिंग करने वाला नोजल लगा हुआ था। साथ ही इलेक्ट्रॉनिक तराजू भी बरामद किया गया। छापेमारी के समय आरोपी अपने घर से फरार पाया गया। बरामद सभी सामग्री की भी विधिवत जप्ती सूची तैयार कर जब्त कर ली गई।

कानूनी कार्रवाई

अवैध रूप से व्यवसायिक गैस सिलेंडरों का भंडारण, रिफिलिंग एवं बिक्री करना रेगुलेशन ऑफ सप्लाई एंड डिस्ट्रीब्यूशन ऑर्डर-2000, आवश्यक वस्तु अधिनियम 1955 तथा अन्य सुसंगत धाराओं के अंतर्गत संज्ञेय अपराध है।

इस मामले में ग्राम थाना ओरमांझी, जिला राँची के विरुद्ध उचित कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। फरार आरोपी की तलाश की जा रही है।

जिला प्रशासन का सख्त  संदेश

जिले में किसी भी प्रकार की कालाबाजारी, अवैध भंडारण या रिफिलिंग की गतिविधियों पर कानूनी कारवाई किया जाएगा। सभी से अपील की जाती है कि यदि किसी को ऐसी कोई अवैध गतिविधि की जानकारी हो तो तुरंत जिला प्रशासन या संबंधित थाने को सूचित करें।

अवैध गतिविधियों पर सख्त से सख्त कार्रवाई जारी रहेगी.

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झारखंड मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना अंतर्गत रांची जिला के लाभुकों को सम्मान राशि का भुगतान

योजना अंतर्गत मार्च महीने की सम्मान राशि (2500 रूपये) का भुगतान

रांची जिला में 3 लाख 89 हजार 296 लाभुकों के खाते में किया गाय आधार बेस्ड भुगतान

लाभुकों के मध्य 97 करोड़ 32 लाख 40 हजार की राशि का भुगतान

रांची,05.04.2026 – राज्य सरकार के महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना अंतर्गत रांची जिले में लाभुकों के मध्य मार्च महीने की सम्मान राशि का भुगतान कर दिया गया है। योजना के तहत जिले की कुल 3 लाख 89 हजार 296 महिलाओं के बैंक खातों में आधार बेस्ड डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से 2500 रुपये प्रति लाभुक की दर से कुल 97 करोड़ 32 लाख 40 हजार रुपये की राशि का भुगतान कर दिया गया है।

मार्च माह में विभिन्न प्रखंड एवं शहरी क्षेत्रों में भुगतान की स्थिति निम्न है :-

अनगड़ा – 16,701 लाभुक

अरगोड़ा शहरी क्षेत्र – 13360 लाभुक

बड़गाईं शहरी क्षेत्र – 9,683 लाभुक

बेड़ो – 20,571 लाभुक

बुण्डू – 8,440 लाभुक

बुण्डू नगर पंचायत – 3,502 लाभुक

बुढ़मू – 17816 लाभुक

चान्हो – 19,699 लाभुक

हेहल शहरी क्षेत्र – 15,245 लाभुक

ईटकी – 10,334 लाभुक

कांके – 31,548 लाभुक

कांके शहरी क्षेत्र – 1,313 लाभुक

खलारी – 9,580 लाभुक

लापुंग – 11,342 लाभुक

माण्डर – 23,079 लाभुक

नगड़ी – 17,856 लाभुक

नगड़ी शहरी क्षेत्र – 8250 लाभुक

नामकुम – 17847 लाभुक

नामकुम शहरी क्षेत्र – 9489 लाभुक

ओरमांझी – 18,147 लाभुक

राहे – 9,522 लाभुक

रातू – 18,545 लाभुक

सिल्ली – 21,120 लाभुक

सोनाहातू – 13,036 लाभुक

तमाड़ – 18,491 लाभुक

सदर शहरी क्षेत्र – 24,780 लाभुक

जिला दंडाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजंत्री ने कहा कि जिला प्रशासन, रांची द्वारा यह सुनिश्चित किया गया है कि सभी पात्र लाभुकों को योजना का लाभ समय पर एवं पारदर्शी तरीके से प्राप्त हो। संबंधित विभागों को निर्देशित किया गया है कि भुगतान प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की त्रुटि या विलंब न हो तथा यदि किसी लाभुक को राशि प्राप्ति में समस्या हो तो उसका त्वरित समाधान किया जाए, जिला प्रशासन इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है।

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मुंबई में सार्वभौमिक पारसी पंजीकरण अभियान में लोगों की उत्साहजनक भागीदारी रही

नई दिल्ली – अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय की ओर से बॉम्बे पारसी पंचायत के सहयोग से मुंबई में आयोजित सार्वभौमिक पारसी पंजीकरण अभियान के विशेष सुविधा शिविर में आज लोगों की उत्साहजनक भागीदारी रही। शिविर के दौरान जियो पारसी पोर्टल पर लगभग 300 नए पंजीकरण पूरे हुए जो समुदाय के भीतर पहुंच को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

 

जियो पारसी भारत सरकार की एक प्रमुख केंद्रीय क्षेत्र योजना है जिसका उद्देश्य पारसी समुदाय की घटती संख्या पर रोक लगाना है।

वर्ष 2013-14 में शुरू की गई इस योजना का उद्देश्य सुनियोजित समाधानों और वैज्ञानिक सहायता के माध्यम से पारसी आबादी को स्थिर करना और बढ़ाना है।

इस योजना में निम्नलिखित प्रावधान हैं:

  • प्रजनन उपचार और गर्भावस्था संबंधी देखभाल के लिए चिकित्सा सहायता
  • सामुदायिक स्वास्थ्य सहायता में बच्चों की देखभाल और आश्रित बुजुर्गों की देखभाल के लिए वित्तीय सहायता
  • परामर्श, जागरूकता अभियान और आउटरीच कार्यक्रमों जैसी उपयुक्त पहलें।

 

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के संयुक्त सचिव श्री श्यामा प्रसाद रॉय ने सभा को संबोधित करते हुए पारसी समुदाय को सरकार की ओर से उनके कल्याण के प्रति निरंतर प्रतिबद्धता का आश्वासन दिया। उन्होंने पात्र लाभार्थियों को आगे आकर योजना का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया और पंजीकृत सदस्यों से इसके कार्यान्वयन को और मजबूत बनाने के लिए अपनी प्रतिक्रिया साझा करने का आग्रह किया।

शिविर का सफल संचालन इस योजना के प्रति बढ़ती जागरूकता और विश्वास को दर्शाता है, और पारसी समुदाय की समृद्ध सांस्कृतिक और जनसांख्यिकीय विरासत को संरक्षित करने के लिए सरकार के संकल्प को मजबूत करता है।

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राँची में एलपीजी गैस की होम डिलीवरी अनिवार्य, गोदाम से उठाने पर सख्त पाबंदी; कालाबाजारी करने वालों पर होगी FIR

राँची जिले में एलपीजी गैस की उपलब्धता, समय पर होम डिलीवरी सुनिश्चित करने और कालाबाजारी रोकने को लेकर गैस तेल कंपनियों के उच्च अधिकारियों व प्रतिनिधियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक

जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में बैठक

राँची में एलपीजी गैस की होम डिलीवरी अनिवार्य, गोदाम से उठाने पर सख्त पाबंदी; कालाबाजारी करने वालों पर होगी FIR

एलपीजी गैस सिलेंडर की डिलीवरी हर हालत में उपभोक्ताओं के घर पर ही सुनिश्चित करने के निर्देश

अगर किसी उपभोक्ता को तत्काल गैस की आवश्यकता हो तो वह गैस एजेंसी में 5 किलोग्राम का छोटा सिलेंडर ले सकता है

यदि कोई भी व्यक्ति, गैस एजेंसी संचालक या कर्मचारी गैस सिलेंडर की कालाबाजारी, ब्लैक मार्केटिंग या अनुचित मूल्य पर बिक्री करते पाए गए तो उनके विरुद्ध तत्काल प्राथमिकी दर्ज की जाएगी और कड़ी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी

जिला प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया कि उपभोक्ताओं की सुविधा और गैस वितरण व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे

राँची,04.04.2026 – जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने आज समाहरणालय ब्लॉक-ए स्थित कार्यालय कक्ष में राँची जिले में एलपीजी गैस की उपलब्धता, होम डिलीवरी सुनिश्चित करने और कालाबाजारी रोकने को लेकर गैस तेल कंपनियों के उच्च अधिकारियों व प्रतिनिधियों के साथ महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की।

इस बैठक अनुमंडल पदाधिकारी राँची, श्री कुमार रजत एवं जिला आपूर्ति पदाधिकारी राँची, श्री रामगोपाल पांडेय उपस्थित थे।

एलपीजी गैस सिलेंडर की डिलीवरी हर हालत में उपभोक्ताओं के घर पर ही सुनिश्चित की जाए

बैठक में उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने वर्तमान वस्तुस्थिति की समीक्षा करते हुए गैस कंपनियों के प्रतिनिधियों को कड़े निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि एलपीजी गैस सिलेंडर की डिलीवरी हर हालत में उपभोक्ताओं के घर पर ही सुनिश्चित की जाए। किसी भी उपभोक्ता को गैस गोदाम या डिपो से सिलेंडर उठाने के लिए नहीं भेजा जाए। होम डिलीवरी को अनिवार्य रूप से लागू किया जाए।

अगर किसी उपभोक्ता को तत्काल गैस की आवश्यकता हो तो वह गैस एजेंसी में 5 किलोग्राम का छोटा सिलेंडर ले सकता है

उपायुक्त ने कहा कि अगर किसी उपभोक्ता को तत्काल गैस की आवश्यकता हो तो वह गैस एजेंसी में 5 किलोग्राम का छोटा सिलेंडर ले सकता है। इसके अलावा सामान्य 14.2 किग्रा सिलेंडर की डिलीवरी केवल घर पर ही होगी।

कालाबाजारी पर सख्त चेतावनी

उपायुक्त श्री भजन्त्री ने साफ चेतावनी दी कि यदि कोई भी व्यक्ति, गैस एजेंसी संचालक या कर्मचारी गैस सिलेंडर की कालाबाजारी, ब्लैक मार्केटिंग या अनुचित मूल्य पर बिक्री करते पाए गए तो उनके विरुद्ध तत्काल प्राथमिकी दर्ज की जाएगी और कड़ी कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। जिले के वरिष्ठ पदाधिकारी इस मामले की लगातार मॉनिटरिंग कर रहे हैं।

गैस गोदामों में अनावश्यक भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कुछ स्थानों पर पुलिस बल एवं मजिस्ट्रेट की तैनाती के निर्देश

गैस गोदामों में अनावश्यक भीड़ को नियंत्रित करने के लिए कुछ स्थानों पर पुलिस बल एवं मजिस्ट्रेट की तैनाती की जाएगी। गैस एजेंसियों को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि किसी भी परिस्थिति में गोदाम से सीधे सिलेंडर का वितरण न किया जाए।

आने वाले दिनों में सप्लाई पर सतर्कता

बैठक में यह भी चर्चा हुई कि आने वाले समय में गैस की सप्लाई प्रभावित होने की संभावना है। उपायुक्त ने उपभोक्ताओं से अपील की कि वे पैनिक बुकिंग न करें। केवल अपनी तय बुकिंग सीमा के अनुसार ही बुकिंग करें, ताकि व्यवस्था बनी रहे और सभी उपभोक्ताओं को नियमित रूप से गैस सिलेंडर उपलब्ध हो सके।

उपभोक्ताओं से अपील

उपायुक्त ने सभी जिले वासियों से अपील की कि गैस सिलेंडर के लिए लाइन में नहीं लगाना है। सभी ग्राहकों को उनके घर पर ही होम डिलीवरी की जाएगी। केवल अति-आवश्यक स्थिति में ही 5 किलोग्राम का छोटा सिलेंडर गैस एजेंसी से लिया जा सकता है।

जिला प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया कि उपभोक्ताओं की सुविधा और गैस वितरण व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे

बैठक में गैस कंपनियों के प्रतिनिधियों ने उपायुक्त के निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने का आश्वासन दिया। जिला प्रशासन ने स्पष्ट कर दिया कि उपभोक्ताओं की सुविधा और गैस वितरण व्यवस्था को सुचारू रखने के लिए हर संभव कदम उठाए जाएंगे।

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भू-राजस्व से संबंधित मामलों की समीक्षात्मक बैठक में Ranchi DC श्री मंजूनाथ भजन्त्री दिखे सख्त

अंचल कार्यालयों से मिल रही शिकायतों पर कार्रवाई की चेतावनी

कांके के एक राजस्व कर्मचारी को निलंबित करने का आदेश

लंबित दाखिल-खारिज आवेदनों की समीक्षा, अनगड़ा कर्मचारी को शोकॉज

10 डिसमिल से कम म्यूटेशन का मामलों को युद्ध स्तर में निष्पादन करने का निर्देश

रिजेक्ट म्यूटेशन केस की होगी समीक्षा, गड़बड़ी करनेवालों पर होगी कार्रवाई

सभी सीाओ को पिछले 2 महीने में पंजी-2 में सुधार का रिपोर्ट देने का निर्देश

अंचल अधिकारियों को निर्देश, कार्यालय कर्मियों को रखें नियंत्रित

रांची,04.04.2026 – ‘‘.कोई भी सीओ जमीन माफिया के साथ सांठगांठ न करे, कोई भी सीआई और कर्मचारी गलत चीजों में इन्वॉल्व न हो… नहीं तो कार्रवाई सुनिश्चित है। भू-राजस्व से संबंधित समीक्षात्मक बैठक में जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने आज सख्त लहजे में सभी को चेतावनी दी।

कांके के एक राजस्व कर्मचारी को निलंबित करने का आदेश

जिला के विभिन्न अंचलों से भू-राजस्व से संबंधित मामले में मिल रही शिकायतों पर जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री सख्त नजर आये। उन्होंने सीओ, सीआई और कर्मचारियों को चेतावनी देते हुए कहा कि नियम विरुद्ध गलत करनेवालों को किसी भी परिस्थ्तिि में नहीं बख्शा जायेगा, उनपर सख्त कार्रवाई की जायेगी। जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा कांके अंचल में जमीन में अवैध रुप से बाउंड्री वॉल निर्माण के मामले में एक राजस्व कर्मचारी को निलंबित करने का निर्देश दिया गया।

लंबित दाखिल-खारिज आवेदनों की समीक्षा, अनगड़ा कर्मचारी को शोकॉज

बैठक में जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा सभी अंचलों में लंबित दाखिल-खारिज मामलों की समीक्षा की गयी। अंचलवार लंबित मामलों की समीक्षा करते हुए उन्होंने सभी सीआई और कर्मचारियों से कारण पूछा। अनगड़ा अंचल में 90 दिनों से ज्यादा म्यूटेशन के लंबित आवेदन को ससमय निष्पादित नहीं करने पर जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा कर्मचारी को शोकॉज करने का आदेश दिया गया।

” 10 डिसमिल से कम का म्यूटेशन युद्ध स्तर पर प्राथमिकता के आधार पर निष्पादन करें ”

10 डिसमिल से कम म्यूटेशन के मामलों के निष्पादन के लिए अंचलवार रांची में कई बार शिविर लगाकर आवेदनों का निष्पादन किया गया एवं आवेदक को करेक्शन स्लिप भी दिया गया। बैठक में जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा कि 10 डिसमिल से कम के म्यूटेशन के मामलों का त्वरित निष्पादन करें, उन्होंने चेतावनी भी दी कि अगर जिला प्रशासन द्वारा आयोजित जनता दरबार में 10 डिसमिल से कम के लंबित म्यूटेशन का मामला आता है तो कर्मचारी पर कार्रवाई होगी।

रिजेक्ट म्यूटेशन केस की होगी समीक्षा गड़बड़ी पायी गयी तो कार्रवाई

जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने अपर समाहर्त्ता, रांची को प्रत्येक अंचल से रिजेक्ट हुए 10-10 म्यूटेशन के मामलों की रैंडम सिलेक्शन कर समीक्षा करने का निर्देश दिया गया। उन्होंने कहा कि जांच में यदि पाया जाता है कि गलत तरीके से आवेदन अस्वीकृत किया गया तो सभी संबंधित के खिलाफ आरोप पत्र गठित करें।

पंजी-2 में सुधार का रिपोर्ट देने का निर्देश

बैठक में जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा अंचलवार पंजी-2 में सुधार की भी समीक्षा की गयी। उन्होंने कहा कि सभी अंचल अधिकारी पिछले दो महीने में पंजी-2 में सुधार से संबंधित रिपोर्ट उपलब्ध करायें। उन्होंने जनता दरबार में पंजी-2 में सुधार से संबंधित शिकायत आने पर आरोप पत्र गठित कर कार्रवाई करने के निर्देश दिये।

‘‘तकनीकी कारण से म्यूटेशन लंबित तो ससमय जानकारी दें‘‘

लंबित दाखिल-खारिज आवेदनों की समीक्षा के दौरान सीओ द्वारा बताया गया कि तकनीकी कारण से भी मामले लंबित हैं। इस पर जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा कहा गया कि तकनीकी कारण से राजस्व कार्य बाधित न हो इसके लिए ससमय राजस्व कार्यालय को सूचित करें ताकि यथाशीघ्र समाधान किया जा सके।

अंचल अधिकारियों को निर्देश, कार्यालय कर्मियों को रखें नियंत्रित

जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा सभी अंचल अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि वो अपने कार्यालय कर्मियों को नियंत्रण में रखें। किसी भी तरह से भूमाफिया के साथ सांठगांठ एवं गलत कार्याें में संलिप्तता पर कार्रवाई करें।

इकसे अतिरिक्त जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा आंगनवाड़ी केन्द्रों के भूमि चिन्हितीकरण, हिट एंड रन एवं आपदा मामले में मुआवजा राशि भुगतान संबंधित अन्य राजस्व कार्याें के ससमय निष्पादन के निर्देश दिये।

समाहरणाल ब्लॉक-ए स्थित उपायुक्त सभागर में आयोजित बैठक में अपर समाहर्त्ता, रांची, सभी प्रखण्ड के जिलास्तरीय वरीय पदाधिकारी, विभिन्न अंचल के अंचल अधिकारी, सीआई, कर्मचारी उपस्थित थे।

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रांची में शनिवार को(04.04.2026) कोकर-ओरमांझी में बिजली रहेगी बंद

रांची,04.04.2026 – रांची में शनिवार (04.04.2026) को कई इलाकों में बिजली नहीं रहेगी। बिजली विभाग आरडीएसएस योजना के तहत तार बदलने, कवर केबल लगाने और पोल खड़ा करने का काम कर रहा है। इसी वजह से अलग-अलग डिवीजन में तय समय के अनुसार बिजली काटी जाएगी।

कोकर इलाके में 6 घंटे तक नहीं रहेगी बिजली

कोकर डिवीजन के आरएमसीएच सब डिवीजन में बड़गाईं और न्यू मोरहाबादी फीडर से जुड़े इलाकों में सुबह 10:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक बिजली बंद रहेगी। इन इलाकों में असर दिखेगा- कृष्णा पुरी कॉलोनी, हरिहर सिंह रोड, प्रगतिशील कॉलोनी, महावीर नगर। यहां ट्रांसफार्मर बंद रखकर पुराने नंगे तारों को कवर केबल में बदला जाएगा।

ओरमांझी और इरबा क्षेत्र में भी कटौती

रांची (पूर्वी) डिवीजन के ओरमांझी सब डिवीजन में भी अलग-अलग समय पर बिजली कटेगी।

इरबा बाजार टांड़ और आसपास: सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक

शिवाजी नगर, बूटी: सुबह 11 बजे से दोपहर 2 बजे तक

यहां 11 केवी ओरमांझी-1, ओरमांझी-2 और बूटी फीडर पर काम होगा।

डोरंडा में भी रहेगा असर

डोरंडा डिवीजन के अनंतपुर और एचएसएल फीडर से जुड़े इलाकों में सुबह 10:30 बजे से शाम 4 बजे तक बिजली आपूर्ति बंद रहेगी।

क्यों हो रही है कटौती

बिजली विभाग के मुताबिक यह काम भविष्य में बेहतर और सुरक्षित बिजली आपूर्ति के लिए किया जा रहा है। कवर केबल लगाने से तार टूटने और फॉल्ट की समस्या कम होगी। बिजली विभाग ने लोगों से अपील की है कि तय समय के अनुसार अपने काम निपटा लें और इस दौरान सहयोग करें, ताकि काम समय पर पूरा हो सके।

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पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव ने देशभर में ईंधन आपूर्ति की स्थिति पर राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के साथ समीक्षा बैठक की

नई दिल्ली – सचिव (पेट्रोलियम) ने देशभर में ईंधन आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा करने के लिए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के अपर मुख्य सचिवों तथा प्रधान सचिवों (खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति) के साथ बैठक की अध्यक्षता की।

उन्होंने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को आवश्यक पेट्रोलियम ईंधनों की आपूर्ति को सुगम बनाने के लिए सरकार द्वारा उठाए गए कदमों से अवगत कराया और साथ ही बदलती स्थिति से निपटने के लिए केंद्र सरकार के साथ मिलकर कार्य करने हेतु संबंधित राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की सराहना की।

सचिव (पेट्रोलियम) ने इस बात पर जोर दिया कि राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को घरेलू उपभोक्ताओं और आवश्यक क्षेत्रों के लिए निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने हेतु एलपीजी वितरण का सक्रिय रूप से प्रबंधन और प्राथमिकता निर्धारण करना चाहिए। राज्यों को यह भी सलाह दी गई कि वे जमाखोरी, डायवर्जन और भ्रामक जानकारी के प्रसार पर कड़ी निगरानी रखें, ताकि अनावश्यक घबराहट की स्थिति उत्पन्न न हो।

अनियमितताओं पर अंकुश लगाने हेतु छापेमारी सहित सक्रिय प्रवर्तन कार्रवाइयाँ करने के लिए उत्तर प्रदेश, गुजरात, हरियाणा, दिल्ली, महाराष्ट्र और आंध्र प्रदेश जैसे राज्यों की सराहना की गई। अन्य राज्यों से निगरानी और प्रवर्तन को और सुदृढ़ करने तथा दोषियों के विरुद्ध अनुकरणीय कार्रवाई करने का आग्रह किया गया। राज्यों से यह भी अनुरोध किया गया कि वे आपूर्ति के संबंध में भ्रामक जानकारी और झूठी अफवाहें फैलाने के प्रयासों को सक्रिय रूप से विफल करें।

प्रवासी श्रमिकों के लिए एफटीएल एलपीजी आपूर्ति से संबंधित रिपोर्टों पर राज्यों ने स्पष्ट किया कि एलपीजी आपूर्ति में ऐसे कोई बाधा नहीं है, जिससे प्रवासी श्रमिक प्रभावित हों और आपूर्ति स्थिर बनी हुई है। सचिव ने बताया कि राज्य, स्थानीय आवश्यकताओं के आधार पर, ओएमसी के साथ मिलकर 5 किलोग्राम एफटीएल एलपीजी सिलेंडरों के लक्षित वितरण का प्रबंधन करने पर विचार कर सकते हैं। ऑटो के लिए एलपीजी के संबंध में यह स्पष्ट किया गया कि इस मांग को पूरा करने के प्रयास जारी हैं, और जो ऑटो एलपीजी तथा पेट्रोल दोनों पर चल सकते हैं, उन्हें पेट्रोल के उपयोग के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

सचिव (पेट्रोलियम) ने सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सहयोग की सराहना की तथा आपूर्ति की स्थिरता सुनिश्चित करने और जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए निरंतर पैनी निगरानी बनाए रखने का आह्वान किया।

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गरीब व मध्यम वर्ग को एक अच्छी सवारी तथा बेहतर अनुभव देने की भारतीय रेलवे की हर सम्भव कोशिश: रेल मंत्री

नई दिल्ली – गरीब और मध्यम वर्ग को एक अच्छी सवारी तथा बेहतर अनुभव देना रेलवे की हर सम्भव कोशिश है। इस उद्देश्य के लिए हम सभी मिल कर काम करें। रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज देश भर के अधिकारियों के साथ एक समीक्षा बैठक में ये आह्वान किया। ये बैठक रेल भवन, नई दिल्ली से की गई।

रेल मंत्री ने रेल परिवार को पिछले वर्ष में अच्छा काम करने के लिए बधाई देते हुए, बैठक की शुरुआत की साथ ही नए उत्साह के साथ, इस वर्ष काम करने के लिए अपनी नई प्राथमिकताएँ तय करने को भी कहा। उन्होंने कहा कि पिछले साल रेल दुर्घटनाओं में आई एतिहासिक कमी और रिकॉर्ड माल ढुलाई ने देश भर में रेलवे की छवि सुधारने का काम किया है। बड़ी संख्या में विशेष ट्रेन चलाकर त्यौहारों के दौरान रेल यात्रा की बढ़ी हुई माँग को भी बड़ी ही प्रभावी तरीके से अधिकारियों ने पूरा किया है।

रेल मंत्री ने जोर देकर कहा कि रेलवे स्टेशन देश के लोगों के सामने हमारा चेहरा है। वो साफ़ सुथरे होने चाहिए। इस दिशा में देश भर के अधिकारियों को जी तोड़ मेहनत करनी चाहिए अधिकारियों को प्रेरित करते हुए रेल मंत्री ने कहा कि रेलवे में पिछले एक दशक में आधुनिकीकरण के लिए एक रिकार्ड आवंटन हुआ है। अतः अधिकारियों की जिम्मेदारी बनती है कि इस आवंटन का उचित उपयोग कर देश भर के रेलवे स्टेशनों की तस्वीर बदलें। सुनिश्चित करें कि अपने-अपने कार्य क्षेत्रों में धन राशि का आवंटन, स्टेशन में जन उपयोगी सुविधाओं का विकास करने में खर्च करें। ताकि सामान्य दिनों में यात्रियों का स्टेशन पर अनुभव और बेहतर किया जा सके।

त्यौहारों पर भीड़ को नियंत्रित कर प्लेटफॉर्म तक यात्रियों को बिना किसी भी दिक्कत के पहुँचाना हमारी प्राथमिकता है ताकि रेल गाड़ियों में चढ़ना सुगम हो सके। अधिकारी ये सुनिश्चित करें कि इस दिशा में भी आवंटित धन राशि का उपयोग किया जाए मौजूदा रेलवे प्रोजेक्ट्स में लंबित भूमि अधिग्रहण का मुद्दा भी बैठक में उठा। रेल मंत्री ने जोर देकर कहा कि लंबित भूमि अधिग्रहण द्रुत गति से आगे बढ़ायें। इसके लिए आवश्यक हो तो राज्य सरकारों के राजस्व व वन विभाग के अनुभवी सेवा निवृत्त अधिकारियों के अनुभव का लाभ भी लें।

रेल मंत्री ने कहा कि लोगों की आजीविका से जुड़े इस संवेदनशील मामले को एक मानवीय दृष्टिकोण से हल किया जाना आवश्यक है। देश के कई शहरी इलाकों में ये एक बड़ी समस्या है, जिसका समयबद्ध तरीके से निदान जरूरी है अपनी पिछली बैठक में देश भर में भूमिगत रेल पुलियाएँ बनाने के निर्णय पर भी आज की बैठक में महत्वपूर्ण चर्चा हुई। ये तय किया गया कि रेलवे पटरियों को पार करने के लिए अब जहाँ तक हो सके भूमिगत पुलियाएँ ही बनाई जाएँ। धीरे-धीरे हम रेलवे फुटओवर पुलों को कम बनाएँ, बैठक में चर्चा के दौरान ये महसूस किया गया। रेल मंत्री ने कहा, भले ही रेलवे स्टेशन हो या फिर स्टेशन परिसर के बाहर की पटरियाँ, दोनों में ही पहली कोशिश भूमिगत सुविधाजनक पुलिया बनाने की होनी चाहिए।

स्वाभाविक है कि पुल चढ़ने के बजाय पुलिया को लोग ज्यादा उपयोग करेंगे चर्चा के दौरान ये निर्णय लिया गया कि देश के कई हिस्सों में एक पायलट प्रोजेक्ट के तहत ऐसी पुलियाएँ बनवाई जाएँ जो सुविधाजनक हों। पैदल लोगों के साथ साथ ये पुलियाएँ लोगों को साइकिल, स्कूटर व मोटर साइकिल ले जाने में भी सहायक बनें। ज्यादा चौड़ी ऐसी रेल पुलियाएँ भी बनाए जाने का निर्णय लिया गया जिनसे ट्रैक्टर सहित अन्य गाड़ियाँ भी निकल सकें। शहरी व ग्रामीण दोनों इलाकों की अलग अलग जरूरतों के हिसाब से सुविधाजनक रेल पुलियाएँ बन सकें। इस दिशा में सभी अधिकारी प्रयास करेंगे।

समय पर रेल चलाने वाले ज़ोन को उनके अच्छे प्रदर्शन पर भी रेल मंत्री ने बधाई दी देश के उन सभी ज़ोन की भी रेल मंत्री ने प्रशंसा की जिन्होंने 85% से अधिक रेल गाड़ियों को तमाम जमीनी चुनौतियों के बाबजूद समय पर चला कर स्वयं का पुराना प्रदर्शन सुधारा।

रेल मंत्री ने दोहराया कि सतत प्रयासों, प्रभावी योजना और यात्री केंद्रित दृष्टिकोण के साथ, भारतीय रेल देशभर के यात्रियों के लिए सुरक्षा, सेवा गुणवत्ता और समग्र यात्रा अनुभव को लगातार बेहतर बनाती रहेगी।

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भारतीय नौसेना के नवीनतम युद्ध पोत ‘आईएनएस तारागिरी’ को विशाखापत्तनम में नौसेना में शामिल किया गया

नई दिल्ली – प्रोजेक्ट 17-ए श्रेणी का चौथा शक्तिशाली युद्धपोत, आईएनएस तारागिरी, 3 अप्रैल 2026 को आंध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह की उपस्थिति में भारतीय नौसेना में सम्मिलित हो गया। आधुनिक नौसैनिक जहाज निर्माण का उत्कृष्ट नमूना, लगभग 6,670 टन विस्थापन वाला यह नवीनतम युद्धक जहाज़, युद्धपोत डिजाइन ब्यूरो द्वारा डिजाइन किया गया है और एमएसएमई के सहयोग से माझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड द्वारा बहु-भूमिका संचालन के लिए निर्मित किया गया है। यह उन्नत स्टील्थ तकनीक का उपयोग करके रडार पर अपनी उपस्थिति को काफी कम कर देता है, जिससे चुनौतीपूर्ण वातावरण में इसे घातक बढ़त मिलती है।

75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री और बेहद कम समय में निर्मित आईएनएस तारागिरी, भारत की पोत निर्माण क्षमता और मजबूत सार्वजनिक-निजी भागीदारी का उत्कृष्ट उदाहरण है।

रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में आईएनएस तारागिरी को केवल एक युद्धपोत नहीं बल्कि भारत की बढ़ती प्रौद्योगिकी क्षमता, आत्मनिर्भरता और दुर्जेय नौसैनिक शक्ति का प्रतीक बताया।

श्री राजनाथ सिंह ने कहा, “यह पोत तेज गति से आवागमन करने में सक्षम है और लंबे समय तक समुद्र में तैनात रह सकता है।

यह दुश्मन की गतिविधियों पर नजर रखने, अपनी सुरक्षा सुनिश्चित करने और जरूरत पड़ने पर तुरंत जवाबी कार्रवाई करने के लिए डिज़ाइन की गई प्रणाली से सुसज्जित है।

इसमें आधुनिक रडार, सोनार और मिसाइल प्रणाली, जैसे ब्रह्मोस और सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें हैं, जो इसकी परिचालन क्षमता को और बढ़ाती हैं।

उच्च तीव्रता वाले युद्ध से लेकर समुद्री सुरक्षा, समुद्री डकैती विरोधी अभियान, तटीय निगरानी और मानवीय मिशन तक, यह हर भूमिका में पूरी तरह से फिट बैठता है, जो इसे एक अद्वितीय नौसैनिक मंच बनाता है।”

रक्षा मंत्री ने जोर देते हुए कहा कि 11,000 किलोमीटर से अधिक लंबी तटरेखा वाला भारत तीन तरफ से समुद्र से घिरा हुआ है और वह समुद्र से अलग होकर अपने विकास की कल्पना नहीं कर सकता।

उन्होंने कहा कि देश का लगभग 95 प्रतिशत व्यापार समुद्री मार्गों से होता है और ऊर्जा सुरक्षा समुद्र पर निर्भर है, इसलिए एक मजबूत और सक्षम नौसेना का निर्माण केवल एक विकल्प नहीं बल्कि एक परम आवश्यकता है।

श्री राजनाथ सिंह ने बदलते सुरक्षा परिदृश्य में समुद्री क्षेत्र के अपार महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय नौसेना हिंद महासागर क्षेत्र में चौबीसों घंटे अपनी उपस्थिति बनाए रखती है। उन्होंने कहा, “समुद्र की विशालता में अनेक संवेदनशील बिंदु हैं, जहां हमारी नौसेना माल की सुचारू आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए लगातार सक्रिय उपस्थिति बनाए रखती है। जब भी तनाव बढ़ता है, भारतीय नौसेना वाणिज्यिक जहाजों और तेल टैंकरों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए आगे आती है। यह न केवल भारत के राष्ट्रीय हितों की रक्षा करती है, बल्कि विश्व भर में हमारे नागरिकों और व्यापार मार्गों की सुरक्षा के लिए हर आवश्यक उपाय करने के लिए भी तैयार है। यही क्षमता भारत को एक जिम्मेदार और शक्तिशाली समुद्री शक्ति के रूप में स्थापित करती है।”

रक्षा मंत्री ने कहा कि आधुनिक डिजिटल युग में, दुनिया का अधिकांश डेटा समुद्र के नीचे बिछी इंटरनेट केबलों के माध्यम से प्रवाहित होता है, और इनमें किसी भी प्रकार की क्षति वैश्विक व्यवस्था को बाधित कर सकती है।

उन्होंने समुद्री सुरक्षा के पारंपरिक दृष्टिकोण से आगे बढ़कर एक व्यापक, भविष्य के लिए तैयार ढांचे के माध्यम से इसे देखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा,

“हमें केवल अपनी तटरेखाओं की सुरक्षा तक ही सीमित नहीं रहना चाहिए; हमें महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों, चोक पॉइंट्स और डिजिटल बुनियादी ढांचे की सुरक्षा भी सुनिश्चित करनी चाहिए जो हमारे राष्ट्रीय हितों से अटूट रूप से जुड़े हुए हैं।

भारतीय नौसेना इन सभी सुरक्षा प्रयासों में सक्रिय रूप से लगी हुई है। यह दृष्टिकोण हमें भविष्य की चुनौतियों के लिए तैयार करता है। जब भी भारत आईएनएस तारागिरी जैसे उन्नत जहाजों का निर्माण और तैनाती करता है, तो यह पूरे क्षेत्र के लिए शांति और समृद्धि की गारंटी के रूप में कार्य करता है।”

श्री राजनाथ सिंह ने यह भी बताया कि जब भी कोई संकट उत्पन्न होता है, चाहे वह निकासी अभियान हो या मानवीय सहायता, भारतीय नौसेना सदैव अग्रणी भूमिका निभाती है, जो भारत के मुख्य मूल्यों और अटूट प्रतिबद्धता का प्रतीक है। उन्होंने कहा, “आईएनएस तारागिरी हमारी नौसेना की शक्ति, मूल्यों और प्रतिबद्धता को और मजबूत करेगी।”

रक्षा मंत्री ने स्वदेशी उद्योग के समर्थन से भारतीय नौसेना को आने वाले समय में विश्व की सबसे शक्तिशाली नौसेनाओं में से एक बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराई।

श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में रक्षा विनिर्माण एक राष्ट्रीय मिशन के रूप में आगे बढ़ रहा है। उन्होंनेकहा,“आज हम केवल अपनी आवश्यकताओं को पूरा करने तक सीमित नहीं हैं; हम वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में अपना स्थान सुरक्षित करने के लिए सक्रिय रूप से प्रयासरत हैं। डिजाइन और विकास से लेकर अंतिम तैनाती तक, हर चरण में भारत की भागीदारी अभिन्न है। इससे हमें विश्वास होता है कि हमारे पास न केवल अपनी सुरक्षा बल्कि अपने भविष्य को भी आकार देने की क्षमता है। आईएनएस तारागिरी इसी परिकल्पना का प्रतीक है।”

श्री राजनाथ सिंह ने पिछले एक दशक में देश में हुए बदलावों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सरकार ने युवाओं और उद्योग जगत के लिए एक ऐसा वातावरण तैयार किया है जो नवाचार, उत्पादन और निर्यात को निरंतर बढ़ावा देता है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान अनिश्चित समय में तैयार रहने के लिए भारत के पास रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

उन्होंने कहा कि सुरक्षा प्रयास केवल थल, जल और वायु तक ही सीमित नहीं रहने चाहिए, बल्कि अंतरिक्ष, साइबरस्पेस और आर्थिक क्षेत्रों तक भी विस्तारित होने चाहिए।

उन्होंने बताया कि सरकार ने इसी दृष्टिकोण से प्रेरित होकर  कई महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिए हैं, जिनके परिणाम अब स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं।

रक्षा मंत्री ने भारत की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने में निरंतर सकारात्मक योगदान के लिए मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड और अन्य रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों (डीपीएसयू) की प्रशंसा की। उन्होंने इन 16 डीपीएसयू को रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता का केंद्र बताया। रक्षा मंत्री ने वित्त वर्ष 2025-26 में रक्षा निर्यात को सर्वकालिक उच्च स्तर 38,424 करोड़ रुपये तक पहुंचाने में रक्षा उपक्रमों (डीपीएसयू) और निजी क्षेत्र के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा, “13-14 वर्ष पहले हम 1,200 करोड़ रुपये के रक्षा सामान निर्यात करते थे। आज यह लगभग 39,000 करोड़ रुपये तक पहुंच गया है। यह इस बात का प्रमाण है कि भारत की आत्मनिर्भरता लगातार बढ़ रही है, जो यह दर्शाती है कि हम अपने पैरों पर खड़े हैं।”

नौसेना प्रमुख (सीएनएस) एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने इस अवसर पर अपने संबोधन में आईएनएस तारागिरी की समृद्ध विरासत पर प्रकाश डाला।

उन्होंने वर्ष 1980 में कमीशन किए गए पूर्व लिएंडर श्रेणी के युद्धपोत को याद किया, जिसने भारत की पनडुब्बी रोधी युद्ध क्षमताओं और परिचालन नवाचार को आगे बढ़ाने में अग्रणी भूमिका निभाई थी। बदलते समुद्री सुरक्षा परिवेश के बारे में उन्होंने गतिशील भू-राजनीति, उभरती प्रौद्योगिकियों और गैर-पारंपरिक खतरों से आकारित हिंद महासागर क्षेत्र की बढ़ती जटिलताओं को रेखांकित किया। एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने राष्ट्रीय समुद्री हितों की रक्षा के लिए, किसी भी समय, कहीं भी, किसी भी तरह से, युद्ध के लिए तैयार, विश्वसनीय, एकजुट और भविष्य के लिए तैयार बल बने रहने के लिए नौसेना की प्रतिबद्धता पर बल दिया।

इस महत्वपूर्ण अवसर पर कमीशनिंग पताका को औपचारिक रूप से फहराया गया और जहाज पर पहली बार राष्ट्र ध्वज फहराया गया। इस उद्घाटन समारोह के दौरान प्रमुख रक्षा अध्यक्ष जनरल अनिल चौहान; फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन चीफ, पूर्वी नौसेना कमान वाइस एडमिरल संजय भल्ला;  मजगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड के सीएमडी कैप्टन जगमोहन (सेवानिवृत्त) सहित कई अन्य लोग उपस्थित थे।

आईएनएस तारागिरी के बारे में

यह युद्धपोत अपने पूर्ववर्ती डिज़ाइनों की तुलना में एक पीढ़ीगत उत्कृष्टता का प्रतिनिधित्व करता है, जो अधिक सुव्यवस्थित रूप और काफी कम रडार क्रॉस-सेक्शन प्रदान करता है, जिससे यह घातक स्टील्थ के साथ संचालन करने में सक्षम होता है।

75 प्रतिशत से अधिक स्वदेशी सामग्री के साथ, यह जहाज घरेलू औद्योगिक इकोसिस्टम की परिपक्वता को दर्शाता है, जिसमें अब 200 से अधिक सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) शामिल हैं।

यह एमएसएमई सरकार की आत्मनिर्भरता पहल में योगदान दे रहे हैं और हजारों भारतीय रोजगारों का समर्थन कर रहे हैं।

इसके सुव्यवस्थित, मॉड्यूलर बाहरी ढांचे के नीचे एक शक्तिशाली व्यवस्था है जो संयुक्त डीजल या गैस प्रणोदन इंजन द्वारा संचालित है और अत्याधुनिक एकीकृत प्लेटफॉर्म प्रबंधन प्रणाली द्वारा प्रबंधित है।

यह तकनीकी परिष्कार सुनिश्चित करता है कि यह पोत एक बहुमुखी संपत्ति बना रहे, जो किसी भी समय और कहीं भी, जहाज को सौंपे गए किसी भी मिशन को पूरा करने में सक्षम है।

इस पोत की युद्धक क्षमता विश्वस्तरीय है, जिसमें घातक सुपरसोनिक सतह से सतह पर मार करने वाली मिसाइलें, मध्यम दूरी की सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइलें और उन्नत स्वदेशी पनडुब्बी रोधी प्रणाली शामिल हैं। हिंद प्रशांत क्षेत्र की बदलती सुरक्षा स्थिति में, इसका शामिल होना एक महत्वपूर्ण भू-राजनीतिक संदेश देता है: भारत अब जटिल युद्धपोतों का अग्रणी निर्माता है, जो संभावित शत्रुओं को रोकने और महासागर की परिकल्पना के अंतर्गत सामूहिक क्षेत्रीय स्थिरता में योगदान देने के लिए एक विश्वसनीय स्थिति बनाए रखने में सक्षम है।

जैसे ही आईएनएस तारागिरी पूर्वी तट पर पूर्वी बेड़े में शामिल होता है।

यह पोत अपने पूर्ववर्ती की गौरवशाली विरासत को आगे बढ़ाता है और उस नाम का सम्मान करता है जिसने दशकों तक राष्ट्र की सेवा की है। युद्धपोत पर आज दिया गया संदेश स्पष्ट था: भारत के महासागरों की रक्षा भारतीयों द्वारा डिजाइन किए गए, भारतीयों द्वारा निर्मित और भारतीयों द्वारा संचालित जहाजों द्वारा की जाती है।

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डॉ. जितेंद्र सिंह ने ‘सेंट्रल फूड टेक्नोलॉजी रिसर्च इंस्टीट्यूट’ मैसूर में प्रशिक्षुओं के लिए 30 एकल अधिभोग हॉस्टल का शिलान्यास किया

नई दिल्ली  – मैसूर3 अप्रैलभारत के बाजरा अभियान को आज प्रौद्योगिकी और जमीनी क्षमता दोनों को बढ़ाने के लिए दोहरी संस्थागत मजबूती मिलीजब केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉजितेंद्र सिंह ने यह बताया कि भारतीय प्रौद्योगिकी से विकसित बाजरा व्यंजन मैकडॉनल्ड्स सहित अंतरराष्ट्रीय फूड चेन द्वारा परोसे जा रहे हैं।

केंद्र अब जम्मूश्मीर के ऊधमपुर से उत्पन्न लोकप्रिय पनीर उत्पाद कलारी” से इसी तरह के टिकाऊ खाद्य व्यंजन विकसित करने पर काम कर रहा हैमंत्री ने सूचित किया।

देश के पहले समर्पित बाजरा उत्कृष्टता केंद्र‘ का दौरा करते हुएसेंट्रल फूड टेक्नोलॉजी एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट में डजितेंद्र सिंह ने देखा कि इस केंद्र की नवाचारें पहले ही वैश्विक फूड चेन में प्रवेश कर चुकी हैंऔर अब इसे देशव्यापी पहुंच बढ़ाने के लिए एक नई आवासीय प्रशिक्षण पारिस्थितिकी तंत्र से पूरक किया जाएगा।

इससे पहलेमंत्री ने राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाईके तहत 30 एकल अधिभोग हॉस्टल सुविधा के लिए भूमि पूजा कीजो प्रशिक्षुओंकिसानोंकिसान उत्पादक संगठनों (एफपीओऔर स्वयं सहायता समूहों के लिए क्षमता निर्माण विस्तार की शुरुआत का प्रतीक हैसाथ ही उन्होंने संस्थान के बाजरा पारिस्थितिकी तंत्र को पारंपरिक फसलों को स्केलेबलबाजारतैयार उत्पादों में बदलने के मॉडल के रूप में स्थापित किया।

एम.जीहल्ली कैंपस में आगामी हॉस्टल कॉम्प्लेक्स में लगभग 50 प्रतिभागियों की सुविधाआवासरसोई और भोजन व्यवस्था शामिल होगीऔर इसे एक वर्ष के भीतर पूरा होने की उम्मीद है। यह सुविधा आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रमों का समर्थन करने के लिए डिजाइन की गई हैजो पूरे देश से भागीदारी को सक्षम बनाएगीविशेष रूप से उन लोगों के लिए जो आवास का खर्च वहन नहीं कर सकतेऔर खाद्य प्रसंस्करणउद्यमिता तथा मूल्य संवर्धन में कौशल विकास को मजबूत करेगी।

अधिकारियों ने कहा कि यह परियोजना संरचित प्रशिक्षण की बढ़ती मांग को पूरा करती हैसंस्थान पहले ही किसानोंउद्यमियों और उद्योग हितधारकों के लिए सालाना दर्जनों कार्यक्रम चला रहा है। आवासीय प्रारूप से भागीदारी और परिणामों में उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद हैजो कौशल भारत और आजीविका सृजन पहलों के अनुरूप व्यावहारिक और गहन प्रशिक्षण प्रदान करेगा।

भारत की खाद्य और पोषण रणनीति के केंद्र में बाजरा को स्थापित करते हुएडॉजितेंद्र सिंह ने सीएफटीआरआई के उत्कृष्टता केंद्र को संभवतः वैश्विक स्तर पर पहला” बतायाजो उस समय विकसित किया गया जब भारत ने संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतरराष्ट्रीय बाजरा वर्ष की घोषणा सहित अंतरराष्ट्रीय बाजरा आंदोलन का नेतृत्व किया। उन्होंने कहा कि संस्थान ने प्रदर्शित किया है कि पारंपरिक अनाजों को लोहे और प्रोटीन से भरपूरफिर भी स्वादिष्ट आधुनिक खाद्य उत्पादों में कैसे बदला जा सकता हैवैश्विक फूड चेन द्वारा अपनाना उनकी व्यावसायिक व्यवहार्यता और उपभोक्ता स्वीकृति को दर्शाता है।

बाजरा उत्कृष्टता केंद्र का दौरा करते हुएडॉजितेंद्र सिंह ने सुविधा की एकीकृत प्रसंस्करण अवसंरचना की समीक्षा कीजिसमें सात प्रसंस्करण लाइनें और सभी प्रमुख बाजारों के प्राथमिक एवं द्वितीयक प्रसंस्करण को सक्षम करने वाली समर्पित प्रयोगशाला शामिल है। केंद्र सफाईधुलाईपॉलिशिंग और छंटाई के लिए विशेष लाइनों से सुसज्जित हैसाथ ही फ्लेक्सएक्सट्रूडेड आइटमबेकरी उत्पाद और सूजी जैसे मूल्यसंवर्धित उत्पादों के लिए। इसमें बाजरा आटे की शेल्फ लाइफ को लगभग एक महीने से बढ़ाकर करीब दस महीने तक करने वाली तकनीकें भी शामिल हैंजो व्यावसायिक व्यवहार्यता को काफी बढ़ाती हैं।

स्वचालित संचालन और 300 किग्रा से 1,000 किग्रा प्रति घंटा की प्रसंस्करण क्षमता के साथ, सुविधा किसानों, स्वयं सहायता समूहों और स्टार्टअप्स को बाजार-तैयार बाजरा-आधारित उत्पाद विकसित करने में सहायता करने के लिए डिजाइन की गई है।

आरकेवीवाई के तहत 20 करोड़ रुपये से समर्थित बाजरा सुविधासभी नौ किस्मों के बाजरों को एक ही सिस्टम में संभालने वाली उन्नत प्रसंस्करण तकनीकों को एकीकृत करती है। 60-70 टन प्रतिदिन की सफाई क्षमता और 12-15 टन प्रतिदिन की मिलिंग क्षमता के साथयह आटासूजी (सूजी और रवाऔर भूसी सहित मूल्यसंवर्धित उत्पादों का उत्पादन करती हैसाथ ही उच्च पोषक तत्व प्रतिधारणबेहतर शेल्फ लाइफ और स्वच्छस्वचालित वातावरण में औद्योगिक स्तर की दक्षता सुनिश्चित करती है।

डॉजितेंद्र सिंह ने जोर दिया कि विकास का अगला चरण ऐसी तकनीकों के आसपास व्यावसायिक और उद्यमी पारिस्थितिकी तंत्र को विस्तारित करने में निहित है। उन्होंने मजबूत पहुंच बढ़ाने की मांग कीजिसमें डिजिटल प्रसार और स्टार्टअप्स तथा एमएसएमई के साथ लक्षित जुड़ाव शामिल हैविशेष रूप से रेडीटूईट और शहरी उपभोग पैटर्न के अनुरूप कैरीहोम” खाद्य उत्पादों जैसे उभरते क्षेत्रों में।

नोट करते हुए कि सीएफटीआरआई जैसे संस्थानों ने पहले ही सैकड़ों प्रौद्योगिकियां विकसित की हैं जिनका उच्च व्यावसायिक अपनापन हैमंत्री ने कहा कि अब फोकस व्यापक बाजार पहुंच और अंतिम छोर वितरण सुनिश्चित करने पर होना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि वैज्ञानिक नवाचार को प्रयोगशालाओं से आगे बढ़कर आजीविकाओं का सीधा समर्थन करना चाहिएविशेष रूप से किसानोंमहिला समूहों और छोटे उद्यमों के साथ साझेदारियों के माध्यम से।

शुक्रवार को अनावृत दोहरी पहलों — वैश्विक स्तर पर मान्य बाजरा नवाचार प्लेटफॉर्म और समर्पित आवासीय प्रशिक्षण सुविधा — खाद्य नीति के लिए अधिक एकीकृत दृष्टिकोण का संकेत देती हैंजो अनुसंधानकौशल विकास और उद्यम सृजन को जोड़ती हैं। जबकि बाजरा केंद्र मूल्यसंवर्धितपोषणउन्मुख उत्पादों के लिए प्रौद्योगिकीय रीढ़ प्रदान करता हैहॉस्टल सुविधा इन नवाचारों को अपनाने और स्केल करने में सक्षम प्रशिक्षित हितधारकों की संख्या बढ़ाने की उम्मीद है।

जलवायुप्रतिरोधी फसलों और टिकाऊ पोषण पर वैश्विक ध्यान केंद्रित होने के साथबाजरा भारत की खाद्य अर्थव्यवस्था के लिए रणनीतिक फोकस क्षेत्र के रूप में उभर रहा है। सीएफटीआरआई मॉडलजो वैज्ञानिक अनुसंधानउद्योग संपर्क और जमीनी क्षमता निर्माण को जोड़ता हैइस अवसर को आर्थिक विकास और पोषण परिणामों में बदलने के लिए एक टेम्प्लेट के रूप में स्थापित किया जा रहा है।

 

फोटो कैप्शन– केंद्रीय मंत्री डॉजितेंद्र सिंह सेंट्रल फूड टेक्नोलॉजी रिसर्च इंस्टीट्यूट‘ (सीएफटीआरआईमैसूर में प्रशिक्षुओं के लिए 30 एकल अधिभोग हॉस्टल भवन का शिलान्यास रखते हुए।

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साधना सप्ताह 2026, दिवस 3: क्वांटम प्रौद्योगिकी, डिजिटल अवसंरचना एवं एआई पर विशेषज्ञ वेबिनार

नई दिल्ली –  साधना सप्ताह 2026 के तीसरे दिन का केंद्र प्रौद्योगिकी पर रहेगा, जिसमें 4 अप्रैल 2026 को विशेषज्ञों द्वारा संचालित वेबिनार आयोजित किए जाएंगे। इन सत्रों में क्वांटम कंप्यूटिंग, डिजिटल अवसंरचना तथा कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहित उभरती प्रौद्योगिकियों के प्रति भारत के दृष्टिकोण पर विचार किया जाएगा। सरकार, शैक्षणिक जगत के विशेषज्ञों तथा अन्य वैश्विक विशेषज्ञ इन प्रौद्योगिकियों के माध्यम से शासन को सुदृढ़ करने एवं सार्वजनिक सेवा वितरण में सुधार लाने के उपायों पर अपने विचार साझा करेंगे।

केंद्रीय मंत्रालय एवं विभाग शासन में प्रौद्योगिकी के उपयोग को प्रदर्शित करने हेतु विशेष वेबिनार भी आयोजित करेंगे। ये सत्र लोक अधिकारियों को बेहतर निर्णय-निर्माण तथा नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण के लिए नई प्रौद्योगिकियों को समझने एवं अपनाने में सहायता प्रदान करने के उद्देश्य से तैयार किए गए हैं।

4 अप्रैल 2026: दिन के प्रमुख बिंदु

1. प्रो. अजय कुमार सूद:

विषय: क्वांटम के लिए भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रौद्योगिकी सहभागिता रणनीति

समय: 10:30 पूर्वाह्न से 11:30 पूर्वाह्न

प्रो. सूद (प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार, भारत सरकार) क्वांटम प्रौद्योगिकियों पर भारत की रणनीति पर चर्चा करेंगे, जिसमें क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम संचार तथा क्वांटम सेंसिंग शामिल हैं। यह सत्र इस बात पर प्रकाश डालेगा कि ये प्रौद्योगिकियां शासन, सुरक्षा तथा अनुसंधान को कैसे रूपांतरित करेंगी, साथ ही इस महत्वपूर्ण उभरते क्षेत्र में भारत के अंतरराष्ट्रीय सहयोग एवं स्वदेशी क्षमताओं के विकास की योजनाओं पर भी प्रकाश डाला जाएगा।

 

2. डॉ. अरविंद गुप्ता:

विषय: डिजिटल हाईवे का निर्माण: एक जुड़े हुए, समावेशी भारत के लिए अवसंरचना

समय: 12:00 अपराह्न से 1:00 अपराह्न

 

डॉ. गुप्ता (प्रमुख एवं सह-संस्थापक, Digital India Foundation) समावेशी विकास एवं नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण को सक्षम बनाने में डिजिटल अवसंरचना की आधारभूत भूमिका का विश्लेषण करेंगे। यह सत्र इस बात पर केंद्रित होगा कि डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना शासन को किस प्रकार परिवर्तित कर रही है, अंतिम छोर तक कनेक्टिविटी को सुदृढ़ कर रही है तथा डिजिटल विभाजन को कम कर रही है, ताकि शहरी एवं ग्रामीण भारत में प्रौद्योगिकी-सक्षम सेवाओं तक समान पहुंच सुनिश्चित की जा सके।

 

3. श्री शांतनु चौधरी:

विषय: एआई-सक्षम पूर्वानुमान आधारित रखरखाव हेतु क्षमता निर्माण (सिविल अवसंरचना)

समय: 3:00 अपराह्न से 4:00 अपराह्न

श्री चौधरी (प्रोफेसर, IIT दिल्ली) यह बताएंगे कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उपयोग सड़कों, पुलों तथा सार्वजनिक भवनों जैसी महत्वपूर्ण सिविल अवसंरचना के पूर्वानुमान आधारित रखरखाव के लिए कैसे किया जा सकता है। यह सत्र एआई-आधारित विश्लेषण के माध्यम से अवसंरचना की निगरानी में सुधार, रखरखाव लागत में कमी, सुरक्षा में वृद्धि तथा डेटा-आधारित निर्णय-निर्माण के जरिए सार्वजनिक परिसंपत्तियों की आयु बढ़ाने पर अंतर्दृष्टि प्रदान करेगा।

 

4. डीएसी प्रभाग, डाक विभाग:

समय: 10:00 पूर्वाह्न

विषय: डिजिटल एड्रेस (डीपीआई): शासन एवं डाक सेवा वितरण में परिवर्तन

डीएसी प्रभाग यह प्रस्तुत करेगा कि डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना के रूप में डिजिटल एड्रेस किस प्रकार अद्वितीय एवं सत्यापन योग्य डिजिटल पतों के माध्यम से डाक सेवाओं तथा शासन में परिवर्तन ला रहा है। यह सत्र अंतिम छोर तक वितरण, आपातकालीन सेवाओं, वित्तीय समावेशन तथा नागरिक सेवा वितरण में इसके उपयोगों को रेखांकित करेगा और यह दर्शाएगा कि यह नवाचार विभिन्न क्षेत्रों में दक्षता एवं सुलभता को कैसे बढ़ाता है।

 

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रक्षा मंत्री के नेतृत्व में नई दिल्ली में पश्चिम एशिया की स्थिति पर ‘मंत्रियों के अनौपचारिक समूह’ (आईजीओएम) की दूसरी बैठक का आयोजन किया गया

नई दिल्ली,04.04.2026 – नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन-2 में 2 अप्रैल, 2026 को रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में पश्चिम एशिया में उत्पन्न हो रही स्थिति की निगरानी करने और भारत पर उसके प्रभाव को कम करने के लिए सक्रिय उपायों का सुझाव देने हेतु गठित ‘मंत्रियों के अनौपचारिक समूह’ (आईजीओएम) की दूसरी बैठक आयोजित की गई।

‘मंत्रियों के अनौपचारिक समूह’ (आईजीओएम) ने हाल के घटनाक्रमों पर विस्तार से विचार-विमर्श किया और पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के कारण उत्पन्न होने वाले किसी भी प्रतिकूल प्रभाव को कम करने के लिए सरकार द्वारा उठाए जाने वाले अगले कदमों पर चर्चा की।

 

इस बैठक में वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण; पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी; विद्युत मंत्री श्री मनोहर लाल; रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा; विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर; उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी; विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह और रेल, सूचना एवं प्रसारण, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव भी उपस्थित थे।

‘अनिश्चितता की स्थिति’ को ध्यान में रखते हुए रक्षा मंत्री ने स्थिति पर 24 घंटे निगरानी रखने और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए समन्वित तरीके से प्रतिक्रिया देने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने यह सुनिश्चित करने को कहा कि देश के लोगों पर इस संघर्ष का कम से कम प्रभाव पड़े।

बैठक के दौरान सचिवों के सात अधिकार प्राप्त समूहों ने आईजीओएम को स्थिति से निपटने के लिए उठाए जा रहे कदमों के बारे में जानकारी दी। वैश्विक व्यापार व्यवधानों के कारण उत्पन्न चिंताओं को दूर करने और उद्योग, विशेष रूप से विनिर्माण क्षेत्र को राहत और समर्थन प्रदान करने तथा निवेशकों का विश्वास बढ़ाने के लिए वित्त मंत्रालय द्वारा उठाए गए कदमों से ‘मंत्रियों के अनौपचारिक समूह’ (आईजीओएम) को अवगत कराया गया। इनमें निम्नलिखित शामिल हैं:

दिनांक 1 अप्रैल, 2026 को जारी अधिसूचना में 30 जून, 2026 तक 40 महत्वपूर्ण पेट्रोकेमिकल उत्पादों पर पूर्ण सीमा शुल्क छूट से संबंधित प्रावधान किए गए हैं।

एसईजेड में पात्र इकाइयों को घरेलू बाजार में अपने उत्पाद बेचने के लिए एक बार की गारंटी के तौर पर सीमा शुल्क में छूट दी जाएगी और यह छूट 1 अप्रैल, 2026 से 31 मार्च, 2027 तक प्रभावी रहेगी।

राजस्व विभाग द्वारा 31 मार्च, 2026 को जारी अधिसूचना में यह स्पष्ट किया गया कि 1 अप्रैल, 2017 को या उसके बाद किए गए निवेशों पर जीएएआर व्यवस्था लागू नहीं होगी।

इन उपायों से कपड़ा, पैकेजिंग और फार्मास्यूटिकल्स सहित अन्य क्षेत्रों पर लागत का दबाव कम होगा, देश में आपूर्ति स्थिरता को बढ़ावा मिलेगा और भारत में निवेश करने की योजना बना रहे निवेशकों को आवश्यक स्पष्टता प्राप्त होगी।

श्री राजनाथ सिंह ने घरेलू उड़ानों के लिए विमानन टरबाइन ईंधन की कीमतों में मासिक वृद्धि पर 25% की सीमा लगाने के सरकार के निर्णय की सराहना की, जो 1 अप्रैल, 2026 से प्रभावी है। उन्होंने कहा कि इस कदम से लोगों को अचानक किराया बढ़ने से बचाने में मदद मिलेगी।

सरकार ने घरेलू एलपीजी आपूर्ति को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है, और खपत की आवश्यकताओं को पूरी तरह से पूरा करने के लिए रिफाइनरी उत्पादन को बढ़ाया गया है। मंत्रियों के समूह को बताया गया कि एलपीजी वितरकों की ओर से कमी की कोई रिपोर्ट नहीं मिली है और घरेलू एलपीजी सिलेंडरों का वितरण सामान्य कार्यक्रम के अनुसार जारी है। जमाखोरी और कालाबाजारी की घटनाओं के कारण आपूर्ति संबंधी अस्थायी चिंताएं उत्पन्न हुईं, जिससे कुछ इलाकों में घबराहट फैल गई थी।

मंत्रियों को सूचित किया गया कि एलपीजी की जमाखोरी और कालाबाजारी पर अंकुश लगाने के लिए कई राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में छापेमारी की जा रही है और सख्त कार्रवाई की जा रही है। कुछ एलपीजी वितरकों के खिलाफ भी कार्रवाई की गई है जो अनियमितताओं में लिप्त थे।

प्रवासी श्रमिकों और कम खपत वाले परिवारों का सहयोग करने के लिए सरकार 5 किलोग्राम के फ्री ट्रेड एलपीजी सिलेंडरों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित कर रही है और 23 मार्च, 2026 से अब तक 4.3 लाख से अधिक ऐसे सिलेंडर बेचे जा चुके हैं। ऐसे राज्यों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है जहां मांग अधिक है।

आईजीओएम को बताया गया कि कमर्शियल एलपीजी पर निर्भर उद्योगों की जरूरतें पूरी की जा रही हैं। काम-काज में कोई रुकावट न आए, यह सुनिश्चित करने के लिए संकट से पहले के सप्लाई लेवल का 80% से ज्दाया हिस्सा बनाए रखा गया है। विभिन्न मंत्रालयों और विभिन्न उद्योगों से जुड़े लोगों के साथ उनकी मांग को समझने और उनकी जरूरतों को पूरा करने के लिए विशेष बैठकें आयोजित की गई हैं। तेल सार्वजनिक उपक्रम पूरे देश में ऑटो एलपीजी की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित कर रहे हैं। हालांकि, निजी ऑपरेटरों को खरीद संबंधी चुनौतियों के कारण आपूर्ति संबंधी कुछ दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है, यही वजह है कि सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों के ऑटो एलपीजी पंपों पर लंबी कतारें देखी जा रही हैं। जहां भी ऑटो चालित वाहन ड्यूल फीड हैं और पेट्रोल का उपयोग कर सकते हैं, वहां उन्हें पेट्रोल का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।

मंत्रियों को सूचित किया गया कि घबराहट में की गई खरीदारी के कारण मांग में अचानक हुई वृद्धि को पूरा करने के लिए प्रतिदिन एलपीजी की डिलीवरी की संख्या में काफी वृद्धि की गई है, जिससे उपभोक्ताओं के लिए किसी भी प्रकार की कमी न हो। जहां भी संभव हो औद्योगिक उपयोग के लिए पाइपयुक्त प्राकृतिक गैस (पीएनजी) को एक विश्वसनीय विकल्प के रूप में सक्रिय रूप से बढ़ावा दिया जा रहा है। जिन क्षेत्रों में पहले से ही पीएनजी का उपयोग हो रहा है, वहां औद्योगिक उपयोग के लिए इसकी आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है, जिससे परिचालन की निरंतरता बनी रहे।

आईजीओएम को यह भी जानकारी दी गई कि कुछ शरारती तत्व जानबूझकर सोशल मीडिया पर फोटोशॉप और मॉर्फ की गई तस्वीरें और भ्रामक सामग्री प्रसारित करके दहशत फैलाने की कोशिश कर रहे हैं।  इस तरह की गतिविधियों पर कड़ी नजर रखी जा रही है। लोगों को सलाह दी जाती है कि वे अपुष्ट जानकारी पर विश्वास न करें और न ही उसे साझा करें तथा सटीक जानकारी के लिए केवल आधिकारिक स्रोतों पर ही भरोसा करें।

आईजीओएम की पहली बैठक 28 मार्च 2026 को आयोजित की गई। इस बैठक में रक्षा मंत्री ने अधिकारियों को स्थिति पर बारीकी से नजर रखने, मध्यम से दीर्घकालिक तैयारी का दृष्टिकोण अपनाने, उच्च-स्तरीय समन्वय बनाए रखने और त्वरित निर्णय सुनिश्चित करने का निर्देश दिया था।

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केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की पहल पर रायसेन में 11 से 13 अप्रैल तक होगा राष्ट्रीय स्तर का उन्नत कृषि महोत्सव

रायसेन में राष्ट्रीय कृषि मेला का उद्घाटन रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह और मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव करेंगे, समापन सत्र में शामिल होंगे केंद्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरी

रायसेन से उठेगी खेती‑किसानी में बदलाव की लहर, रायसेन-विदिशा–सीहोर सहित पूरे क्षेत्र के लिए बनेगा कृषि रोडमैप–श्री शिवराज सिंह चौहान

एक ही जगह में खेती की नई तकनीक, प्रशिक्षण और बाजार का पूरा समाधान- श्री चौहान

बीज से बाजार तक, प्रयोगशाला से खेत तक– कृषि मेला किसानों को देगा उन्नत खेती का पूरा नक्शा- श्री शिवराज सिंह चौहान

ड्रोन, सूक्ष्म सिंचाई, आधुनिक मशीनें, एफपीओ सहित एक ही मंच पर किसानों के लिए सारी जानकारी- केंद्रीय कृषि मंत्री श्री चौहान

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण व ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की पहल पर रायसेन के दशहरा मैदान में 11 से 13 अप्रैल 2026 तक आयोजित होने वाला राष्ट्रीय स्तर का उन्नत कृषि महोत्सव–प्रदर्शनी एवं प्रशिक्षण देश के किसानों को “प्रयोगशाला से खेत तक” और “बीज से बाजार तक” की पूरी यात्रा एक ही मैदान पर दिखाते हुए विकास की राह पर लेकर जाएगा। श्री चौहान ने कहा कि यह सिर्फ मेला नहीं, बल्कि तीन दिनों का ऐसा कृषि महाकुंभ है जो किसानों की तकदीर बदलने का सबसे बड़ा मौका है, जहाँ एक तरफ उद्घाटन सत्र में रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह किसानों का उत्साह बढ़ाएँगे, साथ ही मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव भी विशेष रूप से उपस्थित रहेंगे, तो दूसरी तरफ 13 अप्रैल को समापन सत्र में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी की उपस्थिति में क्षेत्र के लिए समग्र कृषि रोडमैप जारी किया जाएगा।

 

केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने इस आयोजन के संबंध में आज क्षेत्र के प्रबुद्धजनों, प्रगतिशील किसानों और पदाधिकारियों तथा सभी जनप्रतिनिधियों की बैठक लेकर विस्तृत चर्चा की और कहा कि रायसेन (म.प्र.) में 11 से 13 अप्रैल तक होने वाला राष्ट्रीय स्तर का उन्नत कृषि महोत्सव खेती‑किसानी का असली गेम चेंजर साबित होगा। दशहरा मैदान, रायसेन में लगने वाले इस विशाल राष्ट्रीय कृषि मेले में नई खेती तकनीकों, उन्नत बीज, ड्रोन व आधुनिक मशीनों, सूक्ष्म सिंचाई, पशुपालन–मत्स्यपालन, प्रसंस्करण, किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) और ग्रामीण आजीविका के सैकड़ों स्टॉल लगेंगे, जहाँ किसान देखेंगे भी, सीखेंगे भी और तुरंत लाभ लेने के तरीके भी समझेंगे।

उन्होंने बताया कि समापन सत्र में रायसेन, विदिशा, सीहोर और आसपास के समान एग्रो‑क्लाइमेटिक कृषि‑जलवायु क्षेत्र के लिए विशेष कृषि रोडमैप प्रस्तुत किया जाएगा, जिसमें उत्पादन बढ़ाने से लेकर बाजार तक पहुँच मजबूत करने की स्पष्ट दिशा दी जाएगी और जिसका विमोचन केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी की गरिमामय उपस्थिति में होगा।

मेले की मुख्य बातें

श्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि लगभग तीन सौ स्टॉलों वाली यह बहु‑क्षेत्रीय प्रदर्शनी खेती के हर चरण– इनपुट से लेकर प्रसंस्करण और विपणन तक के समाधान एक ही जगह उपलब्ध कराएगी। इसमें कृषि, बागवानी, सूक्ष्म सिंचाई, कृषि मशीनरी व टेक्नोलॉजी, उर्वरक, कीटनाशक, बीज कंपनियाँ, डिजिटल कृषि, फसल बीमा, भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR), स्टेट एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी (SAU), कृषि विज्ञान केंद्र (KVK), पशुपालन, मत्स्य, ग्रामीण विकास, खाद्य प्रसंस्करण, माइक्रो–स्मॉल एंड मीडियम इंटरप्राइजेज (MSME), भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (NAFED), एफपीओ और स्टार्ट‑अप्स की सक्रिय भागीदारी रहेगी। श्री चौहान ने कहा कि किसानों के लिए विषयवार सेमिनार–प्रशिक्षण सत्र, लाइव डेमो, नुक्कड़ नाटक, सांस्कृतिक कार्यक्रम और अलग‑अलग राज्यों से आए प्रगतिशील किसानों के अनुभव साझा करने के विशेष कार्यक्रम भी आयोजित होंगे, जिससे “खेती का गेम चेंजर– राष्ट्रीय कृषि मेला, रायसेन” का संदेश सिर्फ पोस्टर तक सीमित न रहकर जमीन पर दिखे।

प्रशिक्षण, डेमो और सुविधाएँ

श्री शिवराज सिंह ने बताया कि मेले में अलग‑अलग हॉल में तीनों दिन लगातार सेमिनार और प्रशिक्षण सत्र होंगे, जिनमें फसल कटाई के बाद प्रबंधन, दलहन–तिलहन उत्पादकता वृद्धि, मृदा स्वास्थ्य, प्राकृतिक खेती, एकीकृत पोषक तत्व प्रबंधन, कीट प्रबंधन, बीज प्रणाली, फसल बीमा, एआई आधारित डिजिटल कृषि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, हाइड्रोपोनिक्स (जल‑आधारित खेती), प्रिसिजन फार्मिंग (सटीक खेती) और वर्टिकल फार्मिंग (ऊर्ध्वाधर खेती) जैसे विषय शामिल हैं। फील्ड में लाइव डेमो के जरिए ड्रिप और स्प्रिंकलर सूक्ष्म सिंचाई, फर्टिगेशन (उर्वरक मिश्रित सिंचाई), न्यूट्री‑केयर से संतुलित पोषण, ऑटोमेशन‑आधारित स्मार्ट फार्मिंग, टिश्यू कल्चर पौध, ड्रोन से छिड़काव, रीपर–बाइंडर, हैप्पी सीडर, सुपर सीडर, बेलर, रोटावेटर जैसी आधुनिक मशीनें किसानों को चलाकर दिखाई जाएँगी और उन्हें हाथों‑हाथ प्रशिक्षण दिया जाएगा।

ICAR द्वारा मृदा परीक्षण की मोबाइल मिनी‑लैब, समेकित कृषि प्रणाली (Integrated Farming System) व प्राकृतिक खेती के लाइव मॉडल, डेयरी, बकरीपालन, कुक्कुट व मत्स्यपालन की यूनिट, मोबाइल वेटरनरी यूनिट, बीज मिनीकिट वितरण, बीमा कंपनियों द्वारा मौके पर फसल बीमा और किसान शिकायत व परामर्श के लिए हेल्पडेस्क की विशेष व्यवस्था रहेगी, जिससे “बीज से बाजार तक, प्रयोगशाला से खेत तक” की पूरी कड़ी एक ही परिसर में दिखाई देगी।

मेले में ये सब होंगे शामिल

श्री शिवराज सिंह ने बताया कि कृषि मंत्रालय के विभिन्न विभाग, ICAR, कृषि विश्वविद्यालय, KVK, उर्वरक व कीटनाशक कंपनियाँ, बीज कंपनियाँ, माइक्रो‑इरिगेशन और मशीनरी निर्माता, बैंक व क्रेडिट संस्थान, बीमा कंपनियाँ, किसान उत्पादक संगठन (FPOs), स्टार्ट‑अप्स, MSMEs, NAFED, पशुपालन व मत्स्य विभाग और ग्रामीण विकास मंत्रालय के साथ‑साथ अनेक निजी व सहकारी संस्थान सक्रिय रूप से भाग लेंगे।

केंद्रीय कृषि मंत्री श्री चौहान के अनुसार, मध्य प्रदेश सहित देशभर से प्रगतिशील किसानों, महिला स्वयं सहायता समूहों, कृषि‑सखी, ड्रोन दीदी, एफपीओ प्रतिनिधियों और ग्रामीण उद्यमियों को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया है, ताकि वे अपने अनुभव साझा कर सकें और दूसरे किसान उनके मॉडल को अपनाने की प्रेरणा ले सकें। 13 अप्रैल को आयोजित KVK सम्मेलन, एफपीओ मीट, बीज व तकनीक पर विशेष सत्र तथा किसान–वैज्ञानिक संवाद कार्यक्रमों में क्षेत्र‑विशेष की जरूरतों के आधार पर स्थानीय समाधान तैयार किए जाएँगे, जो आगे चलकर कृषि रोडमैप का आधार बनेंगे।

रोडमैप और आगे की दिशा

केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि समापन सत्र में रायसेन, विदिशा, सीहोर और आसपास के जिलों के लिए एक समग्र कृषि रोडमैप रखा जाएगा, जिसमें फसल विविधीकरण, जल‑संरक्षण, सूक्ष्म सिंचाई विस्तार, एकीकृत खेती, पशुपालन–मत्स्यपालन, प्रसंस्करण इकाइयों, एफपीओ और बाजार लिंकेज को बढ़ाने के ठोस लक्ष्य तय किए जाएँगे। रोडमैप में बीज से लेकर बाजार तक पूरी वैल्यू‑चेन मजबूत करने के लिए आधुनिक तकनीक, एआई‑आधारित सेवाएँ, डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म, फसल बीमा, सस्ती ऋण सुविधा और ग्रामीण विकास योजनाओं के संगम से किसानों की आमदनी बढ़ाने का स्पष्ट मार्ग निर्धारित किया जाएगा, जिसका दिशा-निर्देशन समापन सत्र में केंद्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरी और कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह संयुक्त रूप से करेंगे।

कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने विश्वास व्यक्त किया कि यह महोत्सव केवल तीन दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि रायसेन, विदिशा, सीहोर और आसपास के पूरे क्षेत्र की खेती को अधिक उत्पादक, लाभकारी और टिकाऊ बनाने की दीर्घकालिक शुरुआत साबित होगा, जिसमें हर किसान की सक्रिय भागीदारी सबसे बड़ी ताकत बनेगी और यही “खेती का , गेम चेंजर राष्ट्रीय कृषि मेला” होने का वास्तविक प्रमाण होगा।

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लोकसभा अध्यक्ष राष्ट्रीय जनगणना 2027 में हुए शामिल; डिजिटल ‘स्व-गणना’ पूरी की

नई दिल्ली – लोकसभा अध्यक्ष श्री ओम बिरला ने आज नई दिल्ली स्थित अपने सरकारी आवास पर अपनी ‘स्व-गणना’ (selfenumeration) पूरी कर जनगणना 2027 के पहले चरण में भागीदारी की।

​इस अवसर पर इस प्रक्रिया के महत्व को रेखांकित करते हुए श्री बिरला ने कहा कि राष्ट्रीय जनगणना शासन के एक नए युग की शुरुआत है। उन्होंने इस बात पर हर्ष व्यक्त किया कि भारत के इतिहास में पहली बार पूरी जनगणना प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से संचालित की जा रही है. उन्होंने कहा कि यह बदलाव प्रत्येक नागरिक को अपने घर और परिवार का विवरण स्वयं दर्ज करने का अधिकार और सुविधा प्रदान करता है, जो कि अत्यंत सुरक्षित, सटीक और सुगम प्रक्रिया है।

​श्री बिरला ने आगे कहा कि डिजिटल गणना की ओर यह कदम भारत की तकनीकी प्रगति का प्रमाण है, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि राष्ट्रीय डेटा अधिक सटीक हो और जमीनी हकीकत को बेहतर ढंग से दर्शाए।

​’जनगणना से जनकल्याण’ के ध्येय को दोहराते हुए, अध्यक्ष महोदय ने सभी देशवासियों से इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेने की भावपूर्ण अपील की।

उन्होंने नागरिकों से स्वयं अपनी जानकारी दर्ज करने और दूसरों को भी इसके लिए प्रेरित करने का आग्रह किया, ताकि एक ‘सशक्त और

समृद्ध भारत’ के निर्माण में योगदान दिया जा सके।

​स्वगणना की इस प्रक्रिया के दौरान, भारत के महारजिस्ट्रार और जनगणना आयुक्त श्री मृत्युंजय कुमार नारायण पंजीकरण में सहयोग हेतु उपस्थित रहे।

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केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने जन विश्वास विधेयक, 2026 के पारित होने का स्वागत किया

जन विश्वास विधेयक Ease of Living और Ease of Business को बढ़ावा देगा

अनेक कानूनी प्रावधानों को कम करके यह विधेयक मोदी जी के नए भारत के सपने को साकार कर रहा

इससे आम लोगों का जीवन आसान और व्यवसाय करना सरल होगा

नई दिल्ली – केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने संसद में जन विश्वास विधेयक, 2026 के पारित होने का स्वागत किया है।

X पर एक पोस्ट में श्री अमित शाह ने कहा, “संसद में जन विश्वास विधेयक 2026 का पारित होना भारत में आसान जीवन (Ease of Living) और आसान व्यापार (Ease of Business) को गति देने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है। अनेक कानूनी प्रावधानों को कम करके यह विधेयक मोदी जी के नए भारत के सपने को साकार कर रहा है, जिससे आम लोगों का जीवन आसान और व्यवसाय करना सरल हो जाएगा।”

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने गुड फ्राइडे के अवसर पर सद्भाव और करुणा के मूल्यों पर प्रकाश डाला

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि गुड फ्राइडे हमें ईसा मसीह के बलिदान की याद दिलाता है।

श्री मोदी ने आशा व्यक्त की कि यह दिन सद्भाव, करुणा और क्षमा के मूल्यों को और गहरा करेगा।

उन्होंने कहा कि भाईचारा और आशा हरेक का मार्गदर्शन करें।

एक एक्स पोस्ट में, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा;

“गुड फ्राइडे हमें ईसा मसीह के बलिदान की याद दिलाता है। यह दिन सद्भाव, करुणा और क्षमा के मूल्यों को और गहरा करे। भाईचारा और आशा हम सभी का मार्गदर्शन करे।”

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आम चुनाव और उपचुनाव 2026: मतदान के दिन सवेतन अवकाश

  1. भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने 15 मार्च, 2026 को असम, केरल, पुदुच्‍चेरी, तमिलनाडु तथा पश्चिम बंगाल की विधानसभाओं के लिए आम चुनाव और गोवा, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, नागालैंड तथा त्रिपुरा के 8 (आठ) विधानसभा क्षेत्रों के लिए उपचुनाव का कार्यक्रम घोषित किया।
  2. राज्यों में मतदान निम्नलिखित कार्यक्रम के अनुसार किया जाएगा:

 

राज्य/केंद्र शासित प्रदेश जहां आम चुनाव/उपचुनाव होने हैं मतदान की तिथि
असम, केरल, पुदुच्‍चेरी, गोवा, कर्नाटक, नागालैंड और त्रिपुरा 09.04.2026
तमिलनाडु, गुजरात और महाराष्ट्र 23.04.2026
पश्चिम बंगाल 23.04.2026  (पहला चरण)
29.04.2026  (दूसरा चरण)
  1. जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 135B के अनुसार, किसी भी व्यवसाय, व्यापार, औद्योगिक उपक्रम या किसी अन्य संस्था में कार्यरत प्रत्येक व्यक्ति, जिसे लोक सभा या राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की विधानसभाओं के चुनाव या किसी संसदीय/विधानसभा क्षेत्र में उपचुनाव में मतदान का अधिकार प्राप्त है, उसे मतदान के दिन सवैतनिक अवकाश प्रदान किया जाएगा।
  2. ऐसे सवैतनिक अवकाश के कारण किसी भी कर्मचारी के वेतन में कटौती नहीं की जाएगी। कोई भी नियोक्ता जो इन प्रावधानों का उल्लंघन करता है, उसे जुर्माने का सामना करना पड़ेगा। सभी दैनिक वेतन भोगी और आकस्मिक मजदूरों को भी मतदान के दिन सवैतनिक अवकाश का अधिकार होगा।
  3. आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि ऐसे मतदाता (जिसमें आकस्मिक और दैनिक वेतन भोगी श्रमिक शामिल हैं) जो अपने निर्वाचन क्षेत्र के बाहर स्थित औद्योगिक या वाणिज्यिक संस्थानों में कार्यरत हैं लेकिन मतदान होने वाले किसी निर्वाचन क्षेत्र में पंजीकृत हैं, उन्हें भी मतदान के दिन सवैतनिक अवकाश का लाभ मिलेगा, जिससे वे अपने मताधिकार का प्रयोग कर सकें।
    1. आयोग ने सभी राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों को निर्देश दिया है कि वे सभी संबंधित अधिकारियों को इन प्रावधानों के सख्त पालन के लिए आवश्यक निर्देश जारी करें और यह सुनिश्चित करें कि सभी मतदाता अपने मताधिकार का स्वतंत्र और सुविधाजनक रूप से प्रयोग कर सकें।

कौशल विकास और चलो इंडिया

नई दिल्ली – केंद्रीय बजट 2026 ने भारत भर के 20 प्रतिष्ठित पर्यटन स्थलों में 10,000 गाइडों के अपस्किलिंग के लिए एक पायलट योजना की घोषणा कीजो 12 सप्ताह के संरचित शैक्षणिक और क्षेत्रीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के माध्यम से राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचा (एनएसक्यूएफऔर राष्ट्रीय क्रेडिट ढांचा (एनसीआरएफके अनुरूप गुणवत्तापरिणाम और प्रमाणीकरण के संदर्भ में है। पर्यटक गाइडों के इस अपस्किलिंग का उद्देश्य देश में पेशेवर रूप से प्रशिक्षितज्ञानवान और जिम्मेदार गाइड विकसित करना है।

यह कार्यक्रम भारतीय पर्यटन एवं यात्रा प्रबंधन संस्थानभारतीय प्रबंधन संस्थानपुरातत्व सर्वेक्षण ऑफ इंडियाकौशल विकास एवं उद्यमिता मंत्रालय और अन्य हितधारकों जैसे विभिन्न हितधारकों के सहयोग से चलाया जा रहा है। प्रशिक्षण वित्तीय वर्ष 2026-27 में आयोजित किया जाएगा।

चलो इंडिया पहल को पर्यटन मंत्रालय द्वारा भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों को अविश्वसनीय भारत दूत बनने के लिए शुरू किया गया हैजो हर साल अपने गैरभारतीय मित्रों को भारत आने के लिए प्रोत्साहित करेंगे। इस पहल का उद्देश्य वैश्विक पर्यटन बाजार में भारत के हिस्से को बढ़ानादेश के पर्यटन स्थलों और पर्यटन उत्पादों को बढ़ावा देना है।

पर्यटन मंत्रालय संभावित स्रोत बाजारों में विदेशी भारतीय मिशनोंयात्रा व्यापार उद्योग और राज्य सरकारों/केंद्रशासित प्रदेश प्रशासनों के सहयोग से पर्यटन प्रचार गतिविधियां आयोजित करता है, ताकि देश में पर्यटकों की संख्या बढ़े।

केंद्रीय बजट 2026 ने राष्ट्रीय आतिथ्य संस्थान (एनआईएचकी स्थापना की घोषणा कीजो मौजूदा राष्ट्रीय होटल प्रबंधन एवं कैटरिंग प्रौद्योगिकी परिषद (एनसीएचएमसीटीको अपग्रेड करके स्थापित किया जाएगाताकि वर्तमान आतिथ्य उद्योग की मांग के अनुसार शिक्षाउद्योग और सरकार को जोड़ा जा सके। एनसीएचएमसीटी के पाठ्यक्रम को अद्यतन बनाना एक विकसित प्रक्रिया हैताकि कोर्स और पाठ्यक्रम को वैश्विक रुझानों और आतिथ्य उद्योग के निरंतर विकसित होने के अनुरूप रखा जा सके।

पर्यटन मंत्रालय ने देखो अपना देशपीपुल्स चॉइस 2024’ को मार्च 2024 को श्रीनगर में शुरू कियाजो भारत की जनता’ की नब्ज को समझने के लिए पहला राष्ट्रव्यापी आईपी (बौद्धिक संपदाहै। इस राष्ट्रव्यापी सर्वेक्षण का उद्देश्य नागरिकों को संलग्न करके सबसे पसंदीदा पर्यटन आकर्षणों की पहचान करना और आध्यात्मिकसांस्कृतिक एवं विरासतप्रकृति एवं वन्यजीवसाहसिक और अन्य पर्यटन श्रेणियों में पर्यटक धारणाओं को समझना था।

पर्यटन मंत्रालय ने केंद्र विद्यालय (केवीऔर नवोदय विद्यालय (एनवीके छात्रों के लिए देखो अपना देश (डीएडीहस्तलिखित ब्रोशर प्रतियोगिता भी शुरू कीताकि छात्रों को अपने जिले में मौजूद पर्यटन आकर्षणों के प्रति जागरूक बनाया जा सके। छात्रों को अपने स्कूल के आसपास एएसआई स्मारकों और अन्य स्थलों का दौरा करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

इस पहल के दौरान निम्नलिखित गतिविधियां आयोजित की गईं:

  • पर्यटन मंत्रालय ने लगभग 10 राज्यों में पर्यटन शिक्षा एक्सपो 2026 का आयोजन कियाजिसका उद्देश्य स्कूली छात्रों और उनके अभिभावकों में आतिथ्य और पर्यटन में करियर के अवसरों के बारे में जागरूकता पैदा करना था।
  • करियर काउंसलिंग सत्रपर्यटन एवं आतिथ्य के प्रमुख व्यक्तित्वों के साथ बातचीतसंस्थानों का कैंपस टूर आदि आयोजित किए गएताकि पर्यटन मंत्रालय के तहत पर्यटन और आतिथ्य शिक्षा के प्रमुख संस्थानों को बढ़ावा दिया जा सके।
  • डीएडी स्कूल प्रतियोगिता के लिए से पृष्ठों का हस्तलिखित प्रचारात्मक ब्रोशर तैयार करना। छात्रों द्वारा लगभग 2000 हस्तलिखित ब्रोशर तैयार किए गए।
  • विभिन्न राज्यों में फरवरी 2026 से विजेताओं के समारोह में विजेता स्कूलों और छात्रों को सम्मानित किया गया।
  • पसंदीदा स्मारक का चित्रणबिना आग के खाना बनानापर्यटन पर क्विज प्रतियोगिता आदि जैसे स्पॉट प्रतियोगिताएं भी आयोजित की गईं।

पर्यटन शिक्षा एक्सपो तथा देखो अपना देश हस्तलिखित ब्रोशर निर्माण प्रतियोगिता ने छात्रों को पर्यटन शिक्षा की ओर प्रोत्साहित किया।

यह जानकारी आज राज्यसभा में लिखित उत्तर में पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत द्वारा दी गई।

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राँची के कई इलाकों में घंटों बिजली आपूर्ति बाधित रहेगी

राँची,03.04.2026 – जिले के कई इलाकों में  शुक्रवार को बिजली सुधार योजना और मेंटेनेंस कार्यों के चलते शहर के कई इलाकों में घंटों बिजली आपूर्ति बाधित रहेगी।

मिली जानकारी के अनुसार, आरडीएसएस के तहत 33 केवी कांके लाइन की मरम्मत के कारण सुबह 10 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक आपूर्ति बंद रहेगी, जिससे ब्लॉक चौक, बोड़ैया, कांके बाजार टांड़, सुकुरहुटू, बुकरू, होचर सहित आसपास के क्षेत्रों में करीब ढाई घंटे बिजली नहीं रहेगी।

वहीं, कोकर डिवीजन अंतर्गत सुबह 10:30 बजे से शाम 4:30 बजे तक कृष्णापुरी, छठ तालाब पावर हाउस के आसपास, चुटिया, साईं कॉलोनी और केतारी बागान रोड नंबर-13 में बिजली आपूर्ति प्रभावित रहेगी।

डोरंडा डिवीजन में तार बदलने के कार्य के कारण अलग-अलग समय स्लॉट में शुक्ला कॉलोनी, बंधु नगर और गांधी नगर में भी बिजली कटौती होगी। इसके अलावा उद्धव बाबू लेन और ऑर्किड हॉस्पिटल के आसपास भी पूरे दिन बिजली बाधित रहने की संभावना है।

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श्री चंचल कुमार ने सूचना एवं प्रसारण सचिव का कार्यभार संभाला

नई दिल्ली – भारतीय प्रशासनिक सेवा के 1992 बैच के बिहार कैडर के अधिकारी, श्री चंचल कुमार ने 1 अप्रैल 2026 को सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के सचिव का कार्यभार संभाल लिया। श्री चंचल कुमार के कार्यभार ग्रहण करने के अवसर पर निवर्तमान सचिव श्री संजय जाजू और मंत्रालय तथा विभिन्न मीडिया इकाइयों के अधिकारियों ने उनका स्वागत किया। श्री संजय जाजू को अब पूर्वोत्‍तर क्षेत्र विकास मंत्रालय के सचिव का कार्यभार सौंपा गया है।

 

इससे पहले, श्री कुमार पूर्वोत्‍तर क्षेत्र विकास मंत्रालय और नागर विमानन मंत्रालय में सचिव रहे हैं और भारत सरकार में कई वरिष्ठ पदों पर सेवाएं दे चुके हैं। उन्होंने राष्ट्रीय राजमार्ग एवं अवसंरचना विकास निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक के रूप में भी कार्य किया है, जहां रणनीतिक राजमार्गों और ढांचागत परियोजनाओं में उनका विशिष्‍ट योगदान रहा है।

बिहार सरकार में कई जिलों में जिला मजिस्ट्रेट रहने के अलावा वे मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव और मुख्यमंत्री के सचिव सहित कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत रहे।

श्री चंचल कुमार ने आईआईटी कानपुर से बी.टेक और एम.टेक की डिग्री और पटना विश्वविद्यालय से अर्थशास्त्र में पीएचडी की उपाधि प्राप्त की है, जो उनके प्रशासनिक करियर में सुदृढ़ अकादमिक और नीतिगत पृष्ठभूमि प्रदान करती है।

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विधानसभा चुनाव और उपचुनाव 2026: साइलेंस पीरियड के दौरान चुनाव सामग्री और एग्जिट पोल प्रदर्शित करना प्रतिबंधित

 

  1. निर्वाचन आयोग ने 15 मार्च, 2026 को असम, केरल, पुद्दुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल विधानसभाओं के लिए चुनाव और गोवा, गुजरात, कर्नाटक, महाराष्ट्र, नागालैंड तथा त्रिपुरा के 8 (आठ) विधानसभा क्षेत्रों के लिए उपचुनाव कार्यक्रम घोषित किया है।
  2. लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126 (1)(ख) के अनुसार किसी भी मतदान क्षेत्र में मतदान पूरा होने के निर्धारित समय से अड़तालीस घंटे पहले से साइलेंस पीरियड (मौन अवधि) के दौरान टेलीविजन या ऐसे किसी माध्यम से चुनाव सामग्री प्रदर्शित करना प्रतिबंधित होता है।
  3. राज्यों में चुनाव नीचे दिए कार्यक्रम के अनुसार निर्धारित हैं:
विधानसभा चुनाव कराए जाने वाले राज्‍य/केन्‍द्रशासित प्रदेश मतदान तिथि साइलेंस पीरियड
असम 09.04.2026 शाम 5:00 बजे (07.04.2026)

शाम 5:00 बजे तक (09.04.2026)

केरल और पुद्दुचेरी 09.04.2026 शाम 6:00 बजे (07.04.2026)

शाम 6:00 बजे तक (09.04.2026)

तमिलनाडु 23.04.2026 शाम 6:00 बजे (21.04.2026)

शाम 6:00 बजे तक (23.04.2026)

पश्चि‍म बंगाल 23.04.2026 (प्रथम चरण) शाम 6:00 बजे (21.04.2026)

शाम 6:00 बजे तक (23.04.2026)

29.04.2026 (द्वितीय चरण) शाम 6:00 बजे (27.04.2026)

शाम 6:00 बजे तक (29.04.2026)

  1. इसी अनुसार निर्वाचन आयोग ने फिर कहा है कि टीवी/रेडियो चैनल और केबल नेटवर्क सुनिश्चित करें कि उपर्युक्त अवधि के दौरान उनके द्वारा प्रसारित/दिखाए जाने वाले कार्यक्रमों में कोई भी ऐसी सामग्री शामिल न हो, जिसमें पैनलिस्टों/प्रतिभागियों के विचार/अपील शामिल रहें, जिन्हें किसी विशेष पार्टी या उम्मीदवार की संभावनाओं को बढ़ावा देने/विरोध करने या चुनाव परिणाम को प्रभावित करने के रूप में समझा जा सकता है। इसमें किसी भी जनमत सर्वेक्षण का प्रदर्शन भी शामिल है।
  2. लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम, 1951 की धारा 126 के तहत आयोग ने अधिसूचित किया है कि अप्रैल, 2026 (बृहस्‍पतिवार) को सुबह 7:00 बजे से 29 अप्रैल, 2026 (बुधवार) को शाम 6:30 बजे के बीच एक्‍जि‍ट पोल और प्रिंट या इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के माध्यम से उनके परिणामों को दिखाना प्रतिबंधित है। लोक प्रतिनिधित्‍व अधिनियम, 1951 की धारा 126ए के उल्लंघन पर दो वर्ष तक की कैद, जुर्माना या दोनों हो सकते हैं।
  3. आयोग सभी मीडिया संस्थानों को सलाह देता है कि वे इस संबंध में दिए गए निर्देशों का पालन इसी भावना के अनुरूप करें।

साधना सप्ताह के उद्घाटन अवसर पर कैबिनेट सचिव डॉ. टी. वी. सोमनाथन ने कहा कि सिविल सेवाओं में भविष्य के नेतृत्व का निर्धारण केवल वरिष्ठता से नहीं, बल्कि योग्यता से होगा

नई दिल्ली – भारत सरकार के कैबिनेट सचिव डॉ. टी. वी. सोमनाथन ने ‘कर्मयोगी साधना सप्ताह’ के दौरान वरिष्ठ अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि सरकारी संस्थानों के भीतर एक मज़बूत सीखने की संस्कृति का निर्माण मूल रूप से नेतृत्व पर निर्भर करता है। उन्होंने कहा कि जब वरिष्ठ अधिकारी सीखने की प्रक्रिया में गंभीरता से शामिल होते हैं और स्वयं उदाहरण बनकर नेतृत्व करते हैं, तो यह पूरे संगठन के व्यवहार को आकार देता है।
मिशन कर्मयोगी को एक राष्ट्रीय पहल बताते हुए उन्होंने कहा कि इसका वास्तविक प्रभाव तब दिखाई देगा, जब यह जिलों और ज़मीनी स्तर तक पहुंचेगा, जहां नागरिक सीधे तौर पर शासन का अनुभव करते हैं। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि अग्रिम पंक्ति के अधिकारियों को प्रभावी ढंग से काम करने के लिए आवश्यक कौशल, प्रेरणा और दक्षताओं से लैस होना चाहिए।

निरंतर सीखने के महत्व पर जोर देते हुए, कैबिनेट सचिव ने कहा कि जहां सिविल सेवाओं में करियर में तरक्की वरिष्ठता के आधार पर स्वाभाविक रूप से ऊपर की ओर जाने वाला मार्ग लग सकती है, वहीं वास्तविक ज़िम्मेदारी वाले पदों तक पहुंचना अब अधिक से अधिक काबिलियत और काम करके दिखाने की क्षमता पर निर्भर करता है।

एक तुलना करते हुए, उन्होंने कहा कि जहां “वरिष्ठता एक ऐसी शक्ति की तरह काम कर सकती है जो करियर को ऊपर की ओर ले जाती है, वहीं यह काबिलियत ही है जो यह तय करती है कि कोई व्यक्ति वस्ताव में कितना ऊपर तक पहुंचता है।” उन्होंने यह भी कहा कि तेजी से बदलती दुनिया में, जहां ज्ञान और कौशल जल्दी ही पुराने पड़ जाते हैं, निरंतर सीखना न केवल शासन के परिणामों को बेहतर बनाने के लिए, बल्कि व्यक्तियों को अपनी पूरी पेशेवर क्षमता का एहसास कराने में सक्षम बनाने के लिए भी आवश्यक है।

यह संबोधन नई दिल्ली स्थित डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र में आयोजित ‘कर्मयोगी साधना सप्ताह’ के एक विशेष सत्र के दौरान दिया गया, जिसमें भारत सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया। यह सत्र प्रशिक्षण संस्थानों और गुणवत्ता ढांचों पर हुई विषयगत चर्चाओं के बाद, दोपहर के भोजन के उपरांत आयोजित कार्यक्रम का एक हिस्सा था। इस सत्र में कैबिनेट सचिव ने शासन प्रणालियों में क्षमता निर्माण को सुदृढ़ करने पर अपने विचार साझा किए।

इससे पहले दिन में, भारत सरकार के मुख्य आर्थिक सलाहकार डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन ने क्षमता निर्माण के माध्यम से एक अनुकूलनीय और उद्यमशील राज्य बनाने पर एक मास्टरक्लास दी। उन्होंने शासन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की भूमिका के बारे में बात की और इस बात पर ज़ोर दिया कि ऐसे दौर में, जहां बदलाव तेजी से होते हैं, सरकारों को सीखने, खुद को ढालने और प्रभावी ढंग से प्रतिक्रिया देने की क्षमता विकसित करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उत्कृष्टता की चाह में समयबद्धता की अनदेखी नहीं की जानी चाहिए, और जटिलता व अनिश्चितता से निपटने के लिए सीखने पर आधारित शासन प्रणालियां अत्यंत आवश्यक हैं।

दिन में दो मुख्य विषयगत सत्र भी आयोजित किए गए। सिविल सेवा प्रशिक्षण संस्थानों के राष्ट्रीय सम्मेलन में केंद्रीय और राज्य प्रशिक्षण संस्थानों, पीएसयू और मंत्रालयों के 600 से अधिक प्रतिनिधियों ने भाग लिया, ताकि चार कार्यबलों द्वारा तैयार की गई व्यावहारिक सिफारिशों पर चर्चा की जा सके। इन सिफारिशों में सहयोगात्मक क्षमता निर्माण, संस्थागत नेतृत्व, एआई-सक्षम प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार और सतत वित्तपोषण तंत्र जैसे क्षेत्र शामिल थे; ये सिफारिशें 150 से अधिक अधिकारियों के साथ परामर्श और विभिन्न क्षेत्रों के 62 प्रशिक्षण संस्थानों के साथ सहभागिता पर आधारित थीं।

कर्मयोगी क्वालिटी फ्रेमवर्क पर हुए एक सत्र में एक ऐसे विकसित दृष्टिकोण को प्रदर्शित किया गया, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि आईजीओटी प्लेटफॉर्म पर सीखी गई बातें, बेहतर निर्णय लेने और सेवा प्रदान करने में बदल सकें। यह फ्रेमवर्क, जिसे उद्योग, शिक्षा जगत और सरकार के विशेषज्ञों की भागीदारी वाली एक बहु-विषयक परामर्श प्रक्रिया के ज़रिए तैयार किया गया है, गुणवत्ता के लिए एक एकीकृत जीवनचक्र दृष्टिकोण प्रदान करता है। यह दृष्टिकोण खोज, डिज़ाइन, विकास, वितरण, मूल्यांकन और सुधार के सभी चरणों में लागू होता है। कार्यबल के सदस्यों की एक पैनल चर्चा में, सीखने की प्रक्रिया को वास्तविक प्रशासनिक संदर्भों से जोड़ने के महत्व पर ज़ोर दिया गया। साथ ही, सदस्यों को उनके योगदान के लिए सम्मानित भी किया गया।

डॉ. सोमनाथन ने राज्य सरकारों से मिशन कर्मयोगी को सक्रिय रूप से अपनाने और उसका विस्तार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि यह केवल केंद्र सरकार की पहल नहीं है, बल्कि एक राष्ट्रीय प्रयास है जिसके लिए सभी स्तरों पर शासनाधिकार की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि राज्यों को विशेष रूप से ज़िला और उप-ज़िला स्तरों पर अपनी शासन प्रणालियों में क्षमता निर्माण को शामिल करने में अग्रणी भूमिका निभानी चाहिए।

उन्होंने आगे कहा कि कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग, क्षमता निर्माण आयोग और कर्मयोगी भारत जैसे संस्थान साझे ढांचों, डिजिटल प्लेटफ़ॉर्मों और विभिन्न पहलों के माध्यम से इस विस्तार में सहयोग कर रहे हैं। इन पहलों को स्थानीय ज़रूरतों और संदर्भों के अनुकूल बनाया जा सकता है।

उन्होंने यह भी कहा कि शासन और ज्ञान प्रणालियों में बदलाव की गति काफी तेज हो गई है, जिससे निरंतर कौशल उन्नयन के बिना प्रभावी बने रहना मुश्किल हो गया है। उन्होंने बताया कि पहले सीमित स्रोतों के माध्यम से अपडेटेड रहना संभव था, लेकिन आज व्यवस्थित और निरंतर सीखने की प्रक्रिया आवश्यक है। उन्होंने कहा कि भविष्य की शासन प्रणालियों में प्रदर्शन और क्षमता पर अधिक ज़ोर दिए जाने की संभावना है; ऐसे में, निरंतर क्षमता-निर्माण न केवल लोक सेवा के लिए एक आवश्यकता है, बल्कि यह किसी व्यक्ति के अपने पेशेवर विकास में किया गया एक निवेश भी है।

2 अप्रैल से 8 अप्रैल, 2026 तक आयोजित किया जा रहा कर्मयोगी साधना सप्ताह, ‘मिशन कर्मयोगी’ के तहत एक राष्ट्रव्यापी पहल है, जिसका उद्देश्य सिविल सेवाओं में निरंतर सीखने की प्रक्रिया को मजबूत बनाना है। यह कार्यक्रम ‘प्रौद्योगिकी’, ‘परंपरा’ और ‘ठोस परिणामों’ जैसे प्रमुख विषयों पर केंद्रित है, और भविष्योन्मुखी, नागरिक-केंद्रित शासन व्यवस्था बनाने के लिए मंत्रालयों, राज्यों और सिविल सेवा प्रशिक्षण संस्थानों को एक साथ लाता है। यह पहल मिशन कर्मयोगी के पांच वर्ष पूरे होने और क्षमता निर्माण की विभिन्न नई पहलों के शुभारंभ का प्रतीक है।

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DC Ranchi श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा अंचल कार्यालय नामकुम का निरीक्षण

विगत छः माह से बिना किसी सूचना या अनुमति के अनुपस्थित रह रहे निम्नवर्गीय लिपिक श्री राम चरित्र मिस्त्री पर अंचल अधिकारी, नामकुम को तत्काल इनके विरुद्ध आरोप पत्र गठित करने का निर्देश

3 माह से लंबित दाखिल-खारिज के वादों तथा आम नागरिकों द्वारा प्राप्त आवेदनों का शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित करने के निर्देश

राँची,03.04.2026 – उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने आज को अंचल कार्यालय, नामकुम का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने कार्यालय में कार्यरत सभी कर्मियों की उपस्थिति पंजी की विस्तृत जाँच की और सभी कर्मियों को ससमय कार्यालय में उपस्थित रहने का सख्त निर्देश दिया।

निरीक्षण के क्रम में उपायुक्त श्री भजन्त्री ने कार्यालय के महत्वपूर्ण रजिस्टरों का भी निरीक्षण किया। उन्होंने कैश बुक, सर्विस बुक, आगत निर्गत पंजी, अतिक्रमण पंजी आदि का अवलोकन किया।

प्रधान सहायक को लॉग बुक पंजी को नियमानुसार नियमित रूप से अद्यतन रखने का निर्देश दिया गया।

विगत छः माह से बिना किसी सूचना या अनुमति के अनुपस्थित रह रहे निम्नवर्गीय लिपिक श्री राम चरित्र मिस्त्री पर अंचल अधिकारी, नामकुम को तत्काल इनके विरुद्ध आरोप पत्र गठित करने का निर्देश

विगत छः माह से बिना किसी सूचना या अनुमति के अनुपस्थित रह रहे निम्नवर्गीय लिपिक श्री राम चरित्र मिस्त्री के प्रति गहरी नाराजगी व्यक्त
सर्विस बुक के निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने विगत छः माह से बिना किसी सूचना या अनुमति के अनुपस्थित रह रहे निम्नवर्गीय लिपिक श्री राम चरित्र मिस्त्री के प्रति गहरी नाराजगी व्यक्त की। इस संबंध में उन्होंने अंचल अधिकारी, नामकुम को तत्काल इनके विरुद्ध प्रपत्र-क गठित कर भेजने का निर्देश दिया।

दाखिल-खारिज व आमजन के आवेदनों पर सख्त निर्देश

निरीक्षण के दौरान उपस्थित अंचल निरीक्षक एवं सभी राजस्व उप-निरीक्षकों को उपायुक्त श्री भजन्त्री ने निर्देशित किया कि 3 माह से लंबित दाखिल-खारिज के वादों तथा आम नागरिकों द्वारा प्राप्त आवेदनों का शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित किया जाए।

उपायुक्त महोदय ने विशेष रूप से चेतावनी देते हुए कहा कि 10 डिसमिल से कम भूमि के दाखिल-खारिज मामले यदि 3 माह से अधिक समय तक बिना किसी उचित कारण के कर्मचारी स्तर पर लंबित रखे गए तो संबंधित कर्मचारी के विरुद्ध सीधी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सख्त शब्दों में कहा कि आम नागरिकों को बार-बार कार्यालय के चक्कर लगवाने वाले कर्मचारियों के खिलाफ भी कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। किसी भी प्रकार की लापरवाही या जानबूझकर देरी बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

निरीक्षण के दौरान अपर समाहर्ता, राँची, श्री रामनारायण सिंह, अंचल अधिकारी, नामकुम : श्री कमल किशोर सिंह, एवं जिला जन संपर्क पदाधिकारी, राँची श्रीमती उर्वशी पांडेय मौजूद थे।

उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने स्पष्ट निर्देश दिया कि जिला प्रशासन आम जनता को शीघ्र, पारदर्शी और सुगम सेवाएं उपलब्ध कराये।

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सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम को जमानत देने से किया इनकार

रांची,02.04.2026 –   सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व ग्रामीण विकास मंत्री आलमगीर आलम और उनके आप्त सचिव संजीव लाल को जमानत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने मामले में महत्वपूर्ण गवाहों की जांच चार सप्ताह के भीतर पूरी करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही न्यायालय ने जांच के बाद अगली सुनवाई की तिथि निर्धारित करने को कहा है।

मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश एमएम सुंदरेश और न्यायाधीश एन. कोटेश्वर सिंह की पीठ में हुई। सुनवाई के दौरान दोनों पक्षों की दलीलें सुनी गईं, जिसके बाद कोर्ट ने जमानत याचिका खारिज कर दी।

गौरतलब है कि ग्रामीण विकास विभाग के टेंडर में कमीशनखोरी और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप में तत्कालीन मंत्री आलमगीर आलम और उनके आप्त सचिव संजीव लाल मई 2024 से जेल में बंद हैं। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए गवाहों की जल्द जांच पूरी करने पर जोर दिया है।

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