परीक्षा के सुचारू संचालन एवं विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक

झारखण्ड लोक सेवा आयोग, राँची द्वारा आयोजित झारखण्ड संयुक्त असैनिक सेवा (सीधी भर्ती) प्रारंभिक प्रतियोगिता परीक्षा-2025 के सफल एवं निष्पक्ष संचालन को लेकर व्यापक तैयारियाँ

बैठक में परीक्षा से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए

परीक्षा का आयोजन परीक्षा का आयोजन 96 उप-केंद्रों पर प्रथम पाली एवं द्वितीय पाली में किया जा रहा है

सभी अभ्यर्थियों से अपील की वे परीक्षा संबंधी सभी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करें तथा परीक्षा केंद्र पर समय से पहले पहुंचें

=====================
रांची,17.04.2026 – झारखण्ड लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित झारखण्ड संयुक्त असैनिक सेवा (सीधी भर्ती) प्रारंभिक प्रतियोगिता परीक्षा-2025 19 अप्रैल 2026 (रविवार) को दो पालियों में विभिन्न परीक्षा केंद्रों पर आयोजित की जाएगी।

पहली पाली सुबह 10:00 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक तथा द्वितीय पाली दोपहर 3:00 बजे से शाम 5:00 बजे तक चलेगी। राँची जिले में इस परीक्षा के सुचारू संचालन एवं विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में आज समाहरणालय ब्लॉक – बी के सभागार में सभी संबंधित दंडाधिकारियों, पुलिस पदाधिकारियों तथा केंद्र अधीक्षकों के साथ एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई।

बैठक में अपर जिला दंडाधिकारी राँची, श्री राजेश्वर नाथ आलोक, पुलिस अधीक्षक नगर राँची, श्री पारस राणा, अनुमंडल पदाधिकारी सदर राँची, श्री कुमार रजत, झारखण्ड लोक सेवा आयोग के प्रतिनिधि एवं परीक्षा से जुड़े सभी सम्बंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।

बैठक में परीक्षा से संबंधित विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए गए, जिसमें परीक्षा केंद्रों पर सख्त सुरक्षा व्यवस्था, नकल रोकथाम, अभ्यर्थियों की सुविधा तथा किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए समन्वय पर विशेष जोर दिया गया।

परीक्षा का आयोजन
परीक्षा का आयोजन 96 उप-केंद्रों पर प्रथम पाली एवं द्वितीय पाली में किया जा रहा है। इन केंद्रों पर अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए सभी आवश्यक व्यवस्थाएँ जैसे पर्याप्त बैठने की क्षमता, पेयजल, शौचालय, प्रकाश एवं विद्युत व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।

बैठक में दिए गए प्रमुख दिशा-निर्देश

श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने बैठक में निम्नलिखित प्रमुख निर्देश दिए:

– सभी केंद्र अधीक्षक परीक्षा शुरू होने से पहले केंद्रों का निरीक्षण सुनिश्चित करें तथा किसी भी प्रकार की कमी को तुरंत दूर करें।

– परीक्षा केंद्रों के आसपास 100-200 मीटर तक निषिद्ध क्षेत्र घोषित किया जाएगा, जिसमें मोबाइल फोन, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण या किसी भी प्रकार की प्रतिलिपि सामग्री ले जाना सख्ती से प्रतिबंधित रहेगा।

– पुलिस बल की पर्याप्त तैनाती के साथ फ्लाइंग स्क्वॉड, स्टैटिक ड्यूटी तथा वाहन चेकिंग व्यवस्था को मजबूत किया जाएगा।

– अभ्यर्थियों को समय से पहले केंद्र पर पहुंचने के लिए जागरूक किया जाए तथा प्रवेश पत्र (एडमिट कार्ड) के साथ मूल पहचान पत्र अनिवार्य रूप से साथ लाने का निर्देश दिया जाए।

– किसी भी प्रकार की अनियमितता या शिकायत पर तत्काल कार्रवाई के लिए कंट्रोल रूम स्थापित किया जाएगा।

– महिला अभ्यर्थियों की सुरक्षा एवं सुविधा के लिए विशेष प्रबंध किए जाएंगे।

– परीक्षा केंद्र में प्रतिनियुक्त सभी अधिकारी पदाधिकारी को परीक्षा हेतु दिए पहचान पत्र रखना अनिवार्य।

उपायुक्त ने सभी अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया झारखण्ड लोक सेवा आयोग के निर्देशानुसार कि परीक्षा पूर्ण रूप से निष्पक्ष, पारदर्शी एवं शांतिपूर्ण वातावरण में संपन्न हो, यह सुनिश्चित करना हमारा सामूहिक दायित्व है।

सभी अभ्यर्थियों से अपील की वे परीक्षा संबंधी सभी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करें तथा परीक्षा केंद्र पर समय से पहले पहुंचें

राँची जिला प्रशासन सभी अभ्यर्थियों से अपील करता है कि वे परीक्षा संबंधी सभी दिशा-निर्देशों का कड़ाई से पालन करें तथा परीक्षा केंद्र पर समय से पहले पहुंचें। किसी भी प्रकार की समस्या होने पर निकटतम पुलिस अधिकारी या कंट्रोल रूम से संपर्क करें।

****************************

 

आईएनएस सुदर्शिनी मोरक्को के कैसाब्लांका पहुँचा

नई दिल्ली – भारतीय नौसेना का नौकायन प्रशिक्षण पोत, आईएनएस सुदर्शनी 15 अप्रैल 2026 को मोरक्को के प्रमुख बंदरगाह कैसाब्लांका पहुँचा। यह यात्रा ‘लोकायन 26’ के तहत इसके चल रहे महासागरीय मिशन का एक हिस्सा है। इस प्रतिष्ठित बंदरगाह पर जहाज का आगमन भारत की ‘महासागर’ (MAHASAGAR) परिकल्पना के अनुरूप समुद्री जुड़ाव बढ़ाने के प्रयासों को दर्शाता है, जिसका उद्देश्य क्षेत्र में सुरक्षा और विकास को बढ़ावा देना है। यह दौरा भारत और मोरक्को के बीच द्विपक्षीय संबंधों और नौसैनिक सहयोग की मजबूती का प्रतीक है।

कैसाब्लांका पहुँचने पर आईएनएस सुदर्शिनी के कमांडिंग ऑफिसर ने मोरक्को नौसेना के ‘सेंट्रल मैरीटाइम सेक्टर’ के कमांडर कमोडोर हसन अकुली और ‘रॉयल नेवल स्कूल’ के निदेशक कमोडोर उमर नासरी से शिष्टाचार भेंट की। इन बैठकों के दौरान दोनों नौसेनाओं के बीच समुद्री सहयोग और प्रशिक्षण आदान-प्रदान को बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा की गई।

तीन दिवसीय इस यात्रा के दौरान, आईएनएस सुदर्शिनी के चालक दल रॉयल मोरक्कन नौसेना के कर्मियों के साथ संवाद करेंगे, जहाज पर वरिष्ठ अधिकारियों एवं विशिष्ट अतिथियों की मेजबानी करेंगे, तथा पेशेवर और सांस्कृतिक गतिविधियों में हिस्सा लेंगे। इन पहलों का उद्देश्य नौसैनिक सहयोग, कूटनीतिक संबंधों और आपसी सद्भावना को और मजबूत करना है। यह यात्रा चालक दल और प्रशिक्षुओं को महत्वपूर्ण अनुभव प्रदान करने के साथ-साथ भारत की बढ़ती समुद्री भागीदारी, अंतरराष्ट्रीय पहुंच और महासागरीय नौवहन में दक्षता को भी प्रदर्शित करती है।

आपको बता दें कि पिछले एक वर्ष में भारतीय नौसेना के चार जहाज-आईएनएस तबर, आईएनएस तरकश, आईएनएस सुमेधा और आईएनएस तुशील-कैसाब्लांका का दौरा कर चुके हैं जिससे आपसी विश्वास और परस्पर संचालन क्षमता में बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा, इसके अलावा, नवंबर 2025 में रॉयल मोरक्कन नेवी के इंस्पेक्टर रियर एडमिरल मोहम्मद ताहिन ने भी भारत के दक्षिणी नौसेना कमान का दौरा किया था।

आईएनएस सुदर्शिनी अपनी यात्रा को ऐतिहासिक समुद्री मार्गों और अंतरराष्ट्रीय समुद्री गलियारों के माध्यम से जारी रखते हुए ‘वसुधैव कुटुम्बकम्’ की भावना को बढ़ावा दे रहा है, जो वैश्विक समुद्री सहयोग और सद्भावना के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है।

***********************

 

यह हमारी नारी शक्ति को सशक्त बनाने का एक ऐतिहासिक अवसर है : प्रधानमंत्री

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा को संबोधित किया

निर्णय लेने की प्रक्रिया में नारी शक्ति को सम्मिलित करना एक विकसित भारत के निर्माण की कुंजी है: प्रधानमंत्री मोदी

अधिक से अधिक महिलाएं जमीनी स्तर पर नेतृत्व कर रही हैं: प्रधानमंत्री

हमें यह नहीं सोचना चाहिए कि हम नारी शक्ति को कुछ दे रहे हैं; यह उनका अधिकार है: प्रधानमंत्री मोदी

हमारे संसदीय लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी केवल संख्या की बात नहीं है, बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के लिए प्रतिबद्धता है: प्रधानमंत्री

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री मोदी ने स्वीकार किया कि महत्वपूर्ण विधेयक पर चर्चा सुबह जल्दी शुरू हो गई थी। उन्होंने कहा कि कई सहयोगियों ने तथ्यों और तर्क पर भरोसा करते हुए महत्वपूर्ण मुद्दों को प्रभावी ढंग से उठाया।

प्रधानमंत्री ने राष्ट्र के जीवन में महत्वपूर्ण क्षणों के आने का उल्लेख करते हुए कहा कि उस समय की सामाजिक मानसिकता और नेतृत्व क्षमता ऐसे क्षणों को भुनाकर एक मजबूत राष्ट्रीय विरासत का निर्माण करती है।

श्री मोदी ने पुष्टि करते हुए कहा कि वर्तमान समय भारत के संसदीय लोकतंत्र में एक समान ऐतिहासिक क्षण का प्रतिनिधित्व करता है। उन्होंने कहा कि इस विचार को आज परिपक्वता तक पहुंचने के लिए 25 से 30 वर्ष पहले पूरी तरह से लागू किया जाना चाहिए था।

भारत को लोकतंत्र की जननी बताते हुए, उन्होंने कहा कि सदन के सभी सदस्यों को एक हजार वर्ष पुरानी विरासत में एक नया, सुधारवादी आयाम जोड़ने का शुभ अवसर मिला है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि हम सब भाग्यवान हैं कि राष्ट्र निर्माण में देश की आधी आबादी को हिस्सेदार बनाने का सौभाग्य मिल रहा है। उन्होंने संसद के सभी सदस्यों से इस महत्वपूर्ण अवसर को हाथ से न जाने देने का आग्रह किया।

वर्तमान परिवर्तनकारी प्रयासों पर विशेष ध्यान देते हुए, उन्होंने कहा कि सभी भारतीय मिलकर शासन प्रणाली में गहरी संवेदनशीलता लाने की तैयारी कर रहे हैं ताकि देश के भविष्य का निर्धारण हो सके। श्री मोदी ने कहा,

“मुझे विश्वास है कि इस मंथन से जो अमृत निकलेगा, वह देश की दशा और दिशा तय करने वाला है।”

प्रधानमंत्री ने 21वीं सदी में भारत के नए आत्मविश्वास को स्वीकार करते हुए कहा कि पूरा देश वर्तमान में व्यापक वैश्विक स्वीकृति का अनुभव कर रहा है, जो एक विकसित भारत के संकल्प से जुड़ा एक अत्यंत गौरवपूर्ण क्षण है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एक विकसित भारत की उनकी परिकल्पना उत्कृष्ट अवसंरचना से कहीं अधिक है और इसके लिए नीति निर्माण में ‘सबका साथ, सबका विकास’ के मंत्र का सार्थक एकीकरण आवश्यक है।

उन्होंने इस बात पर बल दिया कि देश की 50 प्रतिशत जनसंख्या नीति निर्धारण का हिस्सा बने।

श्री मोदी ने बताया कि पिछली देरी के बावजूद, उनके व्यापक निजी परामर्शों के दौरान किसी भी दल ने सैद्धांतिक रूप से विधेयक का विरोध नहीं किया।

उन्होंने कहा कि इतिहास सिद्ध करता है कि सामूहिक कार्रवाई अंततः व्यक्तिगत राजनीतिक दलों के बजाय राष्ट्र के लोकतंत्र के हित में होती है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इसका श्रेय केवल सत्ता पक्ष या स्वयं उन्हें नहीं बल्कि पूरे सदन को जाता है। श्री मोदी ने कहा, “इसलिए, मुझे लगता है कि इसे राजनीतिक रंग देने की बिल्कुल आवश्यकता नहीं है, क्योंकि इसका समर्थन करने में ही सभी का वास्तविक लाभ है।”

प्रधानमंत्री ने औपचारिक सुशासन से बाहर एक संगठनात्मक कार्यकर्ता के रूप में अपने अतीत पर विचार किया।

श्री मोदी ने पंचायत स्तर पर आरक्षण को जिस आसानी से और चुनिंदा तरीके से दिया जाता था, उस पर होने वाली आम चर्चाओं का स्मरण किया।

उन्होंने कहा कि नेता पंचायतों में कोटा आवंटित करने में सहज महसूस करते थे, क्योंकि उन्हें अपने पद या सत्ता खोने का डर नहीं था। प्रधानमंत्री ने अपने हितों को खतरे में डालने वाले कोटा को लागू करने के प्रति उच्च अधिकारियों की गहरी अनिच्छा की ओर इशारा किया। श्री मोदी ने कहा, “इस सुरक्षात्मक मानसिकता ने संसद को प्रभावित किए बिना स्थानीय आरक्षण को सफलतापूर्वक 50 प्रतिशत तक पहुंचने दिया।”

प्रधानमंत्री ने ऐतिहासिक बदलावों को कम आंकने के प्रति आगाह करते हुए कहा कि 25 या 30 वर्ष पहले के विपरीत, वर्तमान में महिलाओं के अधिकारों का विरोध राजनीतिक सतह के नीचे गहराई तक गूंज रहा है।

उन्होंने बताया कि एक गहन राजनीतिक चेतना विकसित हुई है और पंचायत चुनाव जीतने वाली लाखों महिलाएं मूक दर्शक से बदलकर जमीनी स्तर पर मुखर राय बनाने वाली बन गई हैं।

उन्होंने स्वीकार किया कि इन अनुभवी महिलाओं ने जनता की शिकायतों को गहराई से समझकर दूर किया है और अब वे अत्यधिक आंदोलन कर रही हैं तथा विधानसभाओं और संसद की प्राथमिक निर्णय लेने की प्रक्रियाओं में शामिल होने की मांग कर रही हैं।

प्रधानमंत्री ने सभी महत्वाकांक्षी राजनेताओं को इस बदलाव को पहचानने की सलाह देते हुए जोर दिया कि ये लाखों महिला नेता अब सभी निर्वाचन क्षेत्रों में भविष्य के चुनावी परिणामों को बहुत प्रभावित करेंगी।

श्री मोदी ने सदन से देश की महिलाओं की समझ पर पूरा भरोसा रखने का आग्रह किया।

उन्होंने बताया कि एक बार 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व हासिल हो जाने पर, महिला विधायक पितृसत्तात्मक निगरानी के बिना विभिन्न वर्गों और समूहों के लिए आगे के उप-आवंटन तय करने में पूरी तरह सक्षम होंगी।

अपनी पृष्ठभूमि को अत्यंत पिछड़े समुदाय से जुड़ा मानते हुए, उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चलना उनका सर्वोपरि संवैधानिक कर्त्तव्य है। प्रधानमंत्री ने कहा कि संविधान उनके लिए सर्वोपरि है।

श्री मोदी ने इसे वह शक्ति बताया जिसने एक हाशिए पर रहने वाले व्यक्ति को इतनी बड़ी राष्ट्रीय ज़िम्मेदारी संभालने का अवसर दिया। श्री मोदी ने कहा, “हम उनकी क्षमताओं पर संदेह क्यों करते हैं; महिलाओं को आगे आकर निर्णय लेने दीजिए।”

प्रधानमंत्री ने जीवन के सभी क्षेत्रों में अभूतपूर्व उपलब्धियों का अवलोकन करते हुए कहा कि राष्ट्र के गौरव को बढ़ाने और राष्ट्र का परचम फहराने में नारी शक्ति किसी से कम नहीं है।

उन्होंने कहा कि माताएँ, बहनें और बेटियाँ ऐसे महत्वपूर्ण और उत्कृष्ट योगदान दे रही हैं जिनसे पूरा देश गर्व से अपना सिर ऊंचा कर सकता है।

इतनी सक्षम आबादी को रोकने के लिए इतनी अधिक राजनीतिक ऊर्जा खर्च करने के औचित्य पर सवाल उठाते हुए, उन्होंने बताया कि महिलाओं को विधायी निकायों में शामिल करने से राष्ट्र की समग्र क्षमता में कई गुना वृद्धि होगी।

प्रधानमंत्री ने स्पष्ट रूप से सांसदों से अपील की कि वे इस ऐतिहासिक कदम का मूल्यांकन तुच्छ चुनावी गणना के बजाय राष्ट्रीय हित के आधार पर करें। श्री मोदी ने कहा, “मैं आप सभी से अपील करता हूं कि इसे राजनीति के तराजू पर न तौलें।”

प्रधानमंत्री ने तात्कालिक कार्य पर प्रकाश डालते हुए कहा कि विकसित भारत के निर्माण में महिलाओं की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए खुले मन से एकजुट होकर सोचने का यह अवसर है।

उन्होंने दोहराया कि जहां पूरा देश अंतिम विधायी निर्णय का विश्लेषण करेगा, वहीं महिला मतदाता इसके पीछे के इरादों की और भी बारीकी से जांच करेंगी।

उन्होंने राजनीतिक दुर्भावना के परिणामों के प्रति आगाह करते हुए कहा कि इरादों में जानबूझकर की गई किसी भी चूक का कड़ा विरोध किया जाएगा। श्री मोदी ने कहा, “इस देश की नारी शक्ति हमारे इरादों में किसी भी चूक को कभी माफ नहीं करेगी।”

वर्ष 2023 में नए संसद भवन में इस अधिनियम की सर्वसम्मति और हर्षोल्लासपूर्ण स्वीकृति को याद करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इसने पूरे देश में सकारात्मक और गैर-पक्षपातपूर्ण माहौल बनाने में सफलता प्राप्त की।

जनगणना के आंकड़ों और परिसीमन से संबंधित चिंताओं के बारे में प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि ऐतिहासिक समय सीमा और कोविड-19 महामारी के कारण हुई व्यापक बाधाओं से कार्यान्वयन में देरी स्पष्ट रूप से समझ में आती है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2023 में हुई व्यापक चर्चाओं में त्वरित कार्रवाई की व्यापक आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि हालांकि वर्ष 2024 से पहले तत्काल कार्यान्वयन असंभव था, लेकिन 2029 का अवसर चूकने से जनता का विश्वास हमेशा के लिए टूट जाएगा। प्रधानमंत्री ने कहा कि अंतहीन देरी से महिला वर्ग को यह विश्वास दिलाना असंभव हो जाएगा कि राजनीतिक व्यवस्था वास्तव में उनके सशक्तिकरण के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने कहा कि राजनीतिक दलों और कार्यकर्ताओं के साथ व्यापक संरचनात्मक और अनौपचारिक परामर्श आयोजित किए गए हैं और ये संवाद एक व्यवहार्य मार्ग तैयार करने के लिए महत्वपूर्ण हैं। श्री मोदी ने कहा, “यह समय की बडी मांग है कि हम इसमें और देरी न करें।”

संवैधानिक कर्त्तव्यों की कड़ी याद दिलाते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सदन में बैठे किसी भी सदस्य को देश को खंडित रूप में देखने या भौगोलिक आधार पर विभाजित निर्णय लेने का अधिकार नहीं है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि चाहे कश्मीर हो या कन्याकुमारी, सांसदों द्वारा ली गई पवित्र शपथ उन्हें एक एकीकृत राष्ट्र के रूप में कार्य करने का मूलभूत दायित्व सौंपती है।

सरासर झूठ के माध्यम से पैदा किए गए निराधार राजनीतिक बवाल की कड़ी निंदा करते हुए उन्होंने सदन के पवित्र तल से कहा कि नई परिसीमन प्रक्रिया किसी भी राज्य या क्षेत्र के साथ किसी भी प्रकार का भेदभाव नहीं करेगी।

प्रधानमंत्री ने आश्वासन दिया कि पिछली सरकारों के दौरान स्थापित जनसांख्यिकीय अनुपात को सख्ती से बनाए रखा जाएगा, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि सीटों में वृद्धि निष्पक्ष रूप से हो और कोई भी प्रतिकूल परिवर्तन न हो।

अपनी पूर्ण निष्ठा का दावा करते हुए उन्होंने कहा कि वे राजनीतिक बयानबाजी की किसी भी आवश्यकता को समाप्त करने के लिए तमिल में क्षेत्रीय शब्दों सहित, आश्वासन के सबसे कड़े शब्दों का उपयोग करने के लिए पूरी तरह से तैयार हैं। श्री मोदी ने कहा, “यह निर्णय प्रक्रिया किसी के साथ भी अन्याय नहीं करेगी।”

प्रधानमंत्री ने सांसदों को संबोधित करते हुए कहा कि किसी को भी इस घमंड में नहीं जीना चाहिए कि वे भारत की महिलाओं को उदारतापूर्वक कुछ ‘उपहार’ दे रहे हैं, क्योंकि यह उनका अधिकार है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पूरा राजनीतिक तंत्र दशकों से इस अधिकार को छीनने का दोषी है, इसलिए यह विधेयक प्रायश्चित का एक आवश्यक कदम है।

उन्होंने उस ऐतिहासिक पाखंड की ओर इशारा किया, जहां राजनेता दिखावटी समर्थन करते हुए तकनीकी जटिलताओं के जरिए विधेयक को व्यवस्थित रूप से बाधित करते रहे। श्री मोदी ने कहा कि आरक्षण का खुलेआम विरोध करने का युग अब बीत चुका है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि देश की महिलाओं को अब जटिल प्रक्रियात्मक बहाने बनाकर प्रगति में देरी करने के लिए गुमराह नहीं किया

जा सकता।

सदस्यों से अवरोध छोड़ने का आग्रह करते हुए उन्होंने तर्क दिया कि विभिन्न तकनीकी जटिलताओं का इस्तेमाल करके तीन दशकों तक बाधा डालना पिछली असफलताओं पर विचार करने के लिए पर्याप्त समय है। श्री मोदी ने कहा, “आपने इसे तीन दशकों तक रोके रखा है, अब आपको आखिरकार इसे करना ही होगा।”

व्यक्तिगत या पार्टीगत श्रेय लेने में पूर्ण अरुचि व्यक्त करते हुए, उन्होंने कहा कि एक एकीकृत दृष्टिकोण पूरी तरह से परिदृश्य को बदल देता है और पक्षपातपूर्ण लाभों को बेअसर कर देता है।

प्रधानमंत्री ने विधेयक के दार्शनिक संदर्भ को रेखांकित करते हुए कहा कि संसदीय लोकतंत्र में महिलाओं की भागीदारी मात्र सांख्यिकीय समायोजन से कहीं अधिक है और लोकतंत्र की जननी के रूप में भारत की गहरी सांस्कृतिक प्रतिबद्धता का प्रतिनिधित्व करती है।

उन्होंने बताया कि इसी प्रतिबद्धता के कारण 20 से अधिक राज्यों में पंचायतों में 50 प्रतिशत आरक्षण सफलतापूर्वक स्थापित हुआ है, जिससे बेहद सकारात्मक परिणाम प्राप्त हुए हैं।

मुख्यमंत्री के रूप में अपने लंबे कार्यकाल पर विचार करते हुए, उन्होंने बताया कि जमीनी स्तर पर महिला नेतृत्व के साथ उनके प्रत्यक्ष अनुभव से समस्या-समाधान के प्रति उनका अत्यंत प्रभावी और संवेदनशील दृष्टिकोण सामने आया है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि महिला नेता सहानुभूतिपूर्ण सुशासन के माध्यम से विकास की व्यापक यात्रा को गति देने में लगातार महत्वपूर्ण उत्प्रेरक की भूमिका निभाती रही हैं।

श्री मोदी ने कहा कि इस विशाल जनसांख्यिकी को सदन में शामिल करने से राष्ट्रीय नीति निर्माण को नई शक्ति मिलेगी। उन्होंने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि वास्तविक अनुभव को तथ्यात्मक तर्क के साथ मिलाने से विधायी क्षमता में कई गुना वृद्धि होती है। श्री मोदी ने कहा,

“उनकी आवाजें एक शक्तिशाली नई ताकत बनेंगी और सदन को गहराई से समृद्ध करेंगी।” प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में अत्यधिक अनुभवी और सक्षम महिला शक्ति प्रचुर मात्रा में मौजूद है, जो सेवा करने के लिए तत्पर हैं।

उन्होंने कहा कि इन महिलाओं पर दृढ़ विश्वास रखने से राष्ट्र के शासन में असाधारण और अत्यंत लाभकारी योगदान सुनिश्चित होगा। वर्तमान में कार्यरत महिला प्रतिनिधियों के बारे में उन्होंने कहा कि जब भी उन्हें बोलने का अवसर मिलता है, वे हमेशा सुस्पष्ट और गहन दृष्टिकोण प्रस्तुत करती हैं। श्री मोदी ने कहा, “उन्होंने अपने सक्षम योगदान से सदन को पहले ही समृद्ध कर दिया है।”

प्रधानमंत्री ने अपने रुख को मज़बूत आंकड़ों से पुष्ट करते हुए कहा कि वर्तमान में लगभग 275 महिलाएं 650 से अधिक जिला पंचायतों का नेतृत्व कर रही हैं, जो भारी जिम्मेदारियों और ऐसे बजट का प्रबंधन कर रही हैं जो अक्सर केंद्रीय कैबिनेट मंत्री के बजट से भी अधिक होते हैं। उन्होंने कहा कि लगभग 6,700 ब्लॉक पंचायतों में से 2,700 से अधिक महिलाएं प्रत्यक्ष और सक्षम नेतृत्व में सफलतापूर्वक कार्य कर रही हैं। शहरी क्षेत्रों में उनके प्रभाव को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि महिलाएं 900 से अधिक शहरों में महापौर और स्थायी समिति प्रमुख के

रूप में सशक्त रूप से स्थानीय निकायों का संचालन कर रही हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि आरक्षण विधेयक पारित करना देश के लिए इन जमीनी स्तर के नेताओं के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने और देश की तीव्र प्रगति के लिए उनके ऋण को चुकाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। श्री मोदी ने कहा,”जब यह विशाल प्रशासनिक अनुभव सदन में शामिल होगा, तो हमारी शक्ति में बहुत अधिक वृद्धि होगी।”

श्री मोदी ने कहा कि वर्तमान समय में राष्ट्रीय विकास में महिला शक्ति की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए अतीत की सीमाओं से मुक्त होना आवश्यक है।

सदन से पूर्ण सर्वसम्मति से विधेयक पारित करने का आग्रह करते हुए उन्होंने कहा कि सामूहिक सहमति से सत्ता पक्ष पर सकारात्मक दबाव बनता है, जिससे सभी के अधिकारों का सम्मान बिना किसी नुकसान के होता है। श्री मोदी ने कहा, “सामूहिक शक्ति से हमें कई असाधारण परिणाम मिलते हैं।”

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन का समापन करते हुए दोहराया कि आधी आबादी को सदन में बैठने का निर्विवाद अधिकार है।

सीटों की संख्या से संबंधित बहसों के बारे में उन्होंने कहा कि कुल सीटों का विस्तार करने से मौजूदा सदस्यों को विस्थापित किए बिना या स्थापित अधिकारों का उल्लंघन किए बिना 33 प्रतिशत कोटा सुचारू रूप से पूरा हो जाता है।

श्री मोदी ने कहा कि नए संसद भवन की योजना विशेष रूप से इस अतिरिक्त विधायी शक्ति को समायोजित करने के लिए बनाई गई थी।

 

****************************

रांची जिले ने झारखंड एकेडमिक काउंसिल की कक्षा 8वीं बोर्ड परीक्षा में हासिल किया प्रथम स्थान

96.8 प्रतिशत उत्तीर्णता दर के साथ रांची जिला बना टॉपर, पिछले वर्ष द्वितीय स्थान से किया सुधार

जिला प्रशासन द्वारा संचालित प्रोजेक्ट टीम का सार्थक प्रयास

रांची,16.04.2026 – झारखंड एकेडमिक काउंसिल (JAC) द्वारा आयोजित कक्षा आठवीं की बोर्ड परीक्षाओं के परिणाम आज घोषित कर दिए गए हैं। रांची जिले ने शानदार प्रदर्शन करते हुए 96.8 प्रतिशत उत्तीर्णता दर हासिल की है और पूरे झारखंड में प्रथम स्थान प्राप्त किया है। पिछले वर्ष रांची जिला दूसरे स्थान पर रहा था।

जिला प्रशासन द्वारा संचालित प्रोजेक्ट टीम के प्रयासों को इस सफलता का मुख्य श्रेय दिया जा रहा है। प्रोजेक्ट टीम के अंतर्गत जिले के सभी प्राथमिक एवं मध्य विद्यालयों में विशेष रणनीति अपनाई गई, जिसके फलस्वरूप छात्र-छात्राओं का प्रदर्शन अभूतपूर्व रहा।

प्रोजेक्ट टीम की प्रमुख पहल

निरंतर उपस्थिति सुनिश्चित करना: टीम ने सभी छात्रों की नियमित उपस्थिति पर विशेष नजर रखी।

जनवरी माह में प्री-बोर्ड परीक्षाओं का आयोजन: सभी छात्रों को प्री-बोर्ड परीक्षा में शामिल कराया गया।

 कमजोर छात्रों की पहचान एवं विशेष कक्षाएं: परीक्षा परिणाम के विश्लेषण के आधार पर कमजोर छात्रों की पहचान की गई और उनके लिए लक्षित विशेष कक्षाओं की व्यवस्था की गई।

तीन पूर्व अभ्यास परीक्षाएं एवं एक मॉक टेस्ट: बोर्ड परीक्षा से पहले छात्रों को पर्याप्त अभ्यास कराने के लिए तीन पूर्व अभ्यास परीक्षाएं और एक पूर्ण मॉक टेस्ट आयोजित किया गया।

इन व्यवस्थित प्रयासों से छात्रों में न केवल ज्ञान का स्तर सुधरा, बल्कि आत्मविश्वास भी बढ़ा। परिणामस्वरूप वे बोर्ड परीक्षा में पूर्ण तैयारी के साथ शामिल हुए और जिले का समग्र परिणाम अत्यंत उत्साहजनक रहा।

इस उपलब्धि पर जिला शिक्षा अधीक्षक, जिला शिक्षा परियोजना कार्यालय तथा सभी संबंधित ब्लॉक शिक्षा अधिकारियों ने भी प्रसन्नता व्यक्त की है।

**************************

 

राँची जिला अंतर्गत जनगणना 2027 के प्रथम चरण (HLO) के फील्ड ट्रेनर्स का द्वितीय बैच प्रशिक्षण सफलतापूर्वक सम्पन्न

उपायुक्त-सह-प्रधान जिला जनगणना पदाधिकारी, राँची के निर्देशानुसार जनगणना 2027 के प्रथम चरण का बेहतरीन प्रशिक्षण दिया गया

प्रशिक्षित फील्ड ट्रेनर्स अब अपने-अपने चार्ज क्षेत्रों में प्रगणकों (Enumerators) एवं सुपरवाइजर्स को प्रशिक्षण देंगे, जिससे जनगणना 2027 के प्रथम चरण को पूर्णतः डिजिटल, सटीक, पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा सके

देश की विकास योजनाओं एवं नीति निर्धारण के लिए आधारभूत एवं विश्वसनीय आंकड़े उपलब्ध कराएगी

HLO Mobile Application के माध्यम से फील्ड ट्रेनरों को क्षेत्र कार्य में पूछे जाने वाले सभी 33 प्रश्नों से संबंधित प्रशिक्षण दिया गया

राँची,16.04.2026 – उपायुक्त-सह-प्रधान जिला जनगणना पदाधिकारी, राँची के निर्देशानुसार जनगणना 2027 के प्रथम चरण (मकानसूचीकरण एवं मकानों की गणना – HLO) के सफल संचालन हेतु फील्ड ट्रेनर्स का तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आज दिनांक 16 अप्रैल 2026 को समाहरणालय, राँची के बी ब्लॉक, कमरा संख्या 505 में सफलतापूर्वक सम्पन्न हो गया।

द्वितीय बैच में कुल 35 फील्ड ट्रेनर्स को CMMS पोर्टल एवं मोबाइल एप के माध्यम से पूर्णतः डिजिटल प्रशिक्षण प्रदान किया गया। यह प्रशिक्षण दिनांक 13, 15 एवं 16 अप्रैल 2026 को आयोजित किया गया था। प्रशिक्षण जिला स्तर के मास्टर ट्रेनर्स श्री रविशंकर मिश्रा एवं श्री संजीव कुमार द्वारा दिया गया, जिसमें जनगणना कार्य निदेशालय, झारखण्ड, राँची के मार्गदर्शन में CMMS Portal, Mobile App, मकान सूचीकरण, मकानों की गणना, डिजिटल डेटा संग्रहण तथा हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन (HLO) से संबंधित विस्तृत जानकारी प्रदान की गई।

संबद्ध क्षेत्र (द्वितीय बैच):

 नगर पंचायत बुण्डू

चान्हो

रातु

 खलारी

ओरमांझी

नामकुम

 ईटकी

 अनगड़ा

प्रशिक्षित फील्ड ट्रेनर्स अब अपने-अपने चार्ज क्षेत्रों में प्रगणकों (Enumerators) एवं सुपरवाइजर्स को प्रशिक्षण देंगे, जिससे जनगणना 2027 के प्रथम चरण को पूर्णतः डिजिटल, सटीक, पारदर्शी एवं समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा सके।

HLO Mobile Application के माध्यम से फील्ड ट्रेनरों को क्षेत्र कार्य में पूछे जाने वाले सभी 33 प्रश्नों से संबंधित प्रशिक्षण दिया गया।

प्रशिक्षण के दौरान चार्ज पदाधिकारी उपस्थित रहे। प्रथम दिन, श्री रामनारायण सिंह, अपर समाहर्ता राँची, श्री सुदर्शन मुर्मू, अपर समाहर्त्ता (नक्सल) सह-नोडल पदाधिकारी तथा श्री शेषनाथ बैठा, जिला सांख्यिकी पदाधिकारी-सह-उप जिला जनगणना पदाधिकारी, राँची विशेष रूप से उपस्थित थे।

जनगणना 2027 भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण जन-कल्याणकारी योजना है, जो देश की विकास योजनाओं एवं नीति निर्धारण के लिए आधारभूत एवं विश्वसनीय आंकड़े उपलब्ध कराएगी।

**************************

 

जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त, राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देश पर राँची जिले में सड़क सुरक्षा एवं यातायात अनुशासन अभियान चलाया गया

जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के दिशा-निर्देश पर जिला परिवहन पदाधिकारी राँची श्री अखिलेश कुमार के पर्यवेक्षण में नगड़ी, नामकुम तथा बेड़ो थाना क्षेत्रों में व्यापक वाहन कागजात जाँच अभियान चलाया गया

अभियान के दौरान कुल 153 वाहनों के विभिन्न दस्तावेजों की सघन जाँच की गई

24 दोषी वाहनों पर कुल रु. 7,64,154.00 (सात लाख चौंसठ हजार एक सौ चौवन रुपये मात्र) का दंड शुल्क अधिरोपित किया गया

सड़क सुरक्षा, राँची द्वारा Symbiosis Public School, Edalhatu, Bundu में एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया

राँची,16.04.2026 – जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के दिशा-निर्देश पर जिला परिवहन पदाधिकारी राँची श्री अखिलेश कुमार के पर्यवेक्षण में नगड़ी, नामकुम तथा बेड़ो थाना क्षेत्रों में व्यापक वाहन कागजात जाँच अभियान चलाया गया।

इस अभियान के दौरान कुल 153 वाहनों के विभिन्न दस्तावेजों की सघन जाँच की गई। जाँच में शामिल दस्तावेजों में वाहन टैक्स, फिटनेस प्रमाण-पत्र, इंश्योरेंस, प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण-पत्र (PUC), परमिट, ड्राइविंग लाइसेंस तथा ओवरलोडिंग संबंधी दस्तावेज शामिल थे।

24 दोषी वाहनों पर कुल रु. 7,64,154.00 (सात लाख चौंसठ हजार एक सौ चौवन रुपये मात्र) का दंड शुल्क अधिरोपित किया गया

जाँच के दौरान 24 वाहनों में कागजात अपूर्ण पाए गए अथवा नियमों का उल्लंघन पाया गया। इनमें टैक्स न जमा करने, फिटनेस एवं इंश्योरेंस की समाप्ति, प्रदूषण प्रमाण-पत्र न होने, बिना परमिट के संचालन, ओवरलोडिंग तथा अन्य यातायात नियमों का उल्लंघन प्रमुख थे। इन 24 दोषी वाहनों पर कुल रु. 7,64,154.00 (सात लाख चौंसठ हजार एक सौ चौवन रुपये मात्र) का दंड शुल्क अधिरोपित किया गया।

विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया

इस अवसर पर अनुमंडल पदाधिकारी, बुण्डू, श्री किस्टो बेसरा जिला परिवहन पदाधिकारी राँची, श्री अखिलेश कुमार द्वारा Symbiosis Public School, Edalhatu, Bundu में एक विशेष जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के दौरान स्कूली छात्रों को सड़क सुरक्षा के महत्व, यातायात नियमों का पालन, हेलमेट एवं सीट बेल्ट का उपयोग, ओवर स्पीडिंग एवं मोबाइल फोन का उपयोग न करने तथा जिम्मेदार नागरिक के रूप में सड़क पर सुरक्षित व्यवहार के संबंध में विस्तृत जानकारी दी गई। छात्रों ने कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भाग लिया और सड़क सुरक्षा शपथ भी ली।

युवा पीढ़ी को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम

यह अभियान जिला प्रशासन द्वारा सड़क दुर्घटनाओं को कम करने, यातायात नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने तथा आम जनमानस विशेषकर युवा पीढ़ी को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। जिला दंडाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने स्पष्ट निर्देश दिया है कि ऐसे अभियान नियमित रूप से चलाए जाएंगे और दोषी वाहनों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।

जिला प्रशासन का आह्वान:

जिला परिवहन विभाग ने आम नागरिकों से अपील की है कि वे अपने वाहनों के सभी दस्तावेज पूर्ण रखें, यातायात नियमों का पूर्ण पालन करें तथा ओवरलोडिंग से बचें। सड़क सुरक्षा हर नागरिक की जिम्मेदारी है।

***********************

 

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने एम्स नागपुर के दीक्षांत समारोह में शिरकत की

राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (15 अप्रैल, 2026) महाराष्ट्र के नागपुर में एम्स नागपुर के दीक्षांत समारोह में शिरकत की और संबोधित किया।

नई दिल्ली – इस अवसर पर अपने संबोधन में राष्ट्रपति ने कहा कि चिकित्सा क्षेत्र केवल एक पेशा नहीं है; यह संवेदनशीलता के साथ मानवता की सेवा करने का मार्ग है। एक डॉक्टर न केवल बीमारियों का इलाज करता है, बल्कि बीमार लोगों के मन में उम्‍मीद भी जगाता है। डॉक्टरों द्वारा दी जाने वाली सहानुभूतिपूर्ण सलाह न केवल रोगी को, बल्कि उनके परिवार को भी शक्ति प्रदान करती है। अक्सर, डॉक्टरों को चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों का सामना करना पड़ता है। फिर भी, ऐसी परिस्थितियों में भी, उन्हें रोगी और उनके परिवार के प्रति संवेदनशीलता बनाए रखनी चाहिए। रोगियों और उनके परिवारों को भी हमेशा चिकित्सा पेशेवरों के प्रति सम्मान का भाव रखना चाहिए। यह डॉक्टर और रोगी के बीच विश्वास के बंधन को बनाए रखने के लिए अनिवार्य है।

राष्ट्रपति ने कहा कि नागरिकों का अच्छा स्वास्थ्य राष्ट्र की प्रगति के लिए उतना ही महत्वपूर्ण है जितना कि उनका व्यक्तिगत कल्याण। नागरिकों के स्वस्थ रहने और राष्ट्र निर्माण में अपनी पूरी क्षमता से योगदान देने में सक्षम होने के लिए, भारत सरकार ने पिछले एक दशक में कई महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि देशभर में नए एम्स की स्थापना से न केवल बेहतर चिकित्सा उपचार तक पहुंच बढ़ी है, बल्कि चिकित्सा शिक्षा के अवसर भी व्यापक हुए हैं। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि स्थापना के कुछ ही वर्षों के भीतर, एम्स नागपुर ने चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और उत्कृष्ट स्वास्थ्य सेवाओं के अग्रणी केंद्र के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर ली है।

राष्ट्रपति ने कहा कि वर्तमान युग स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में तीव्र परिवर्तन का समय है। विश्व भर में कृत्रिम बुद्धिमत्ता, डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं और उन्नत अनुसंधान जैसी नई तकनीकों के माध्यम से चिकित्सा क्षेत्र में अभूतपूर्व प्रगति हो रही है। हमें इन परिवर्तनों को स्‍वीकार करते हुए आगे बढ़ना चाहिए। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच स्वास्थ्य सुविधाओं में मौजूद असमानता को दूर करने और यह सुनिश्चित करने के लिए कि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा सभी तक पहुंचे, तकनीकी विकास का लाभ उठाया जाना चाहिए। उन्होंने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि एम्स नागपुर इस दिशा में निरंतर कार्य कर रहा है।

राष्ट्रपति ने कहा कि समाज में डॉक्टरों का उच्च स्थान है। लोग उनका सम्मान करते हैं और उन पर भरोसा करते हैं। वे डॉक्टरों को अपने और अपने प्रियजनों के स्वास्थ्य और जीवन की रक्षा का दायित्व सौंपते हैं। इसलिए, डॉक्टरों का यह सामाजिक और नैतिक कर्तव्य है कि वे अपने मरीजों के हितों को सर्वोपरि रखें। इस कर्तव्य का निष्ठापूर्वक निर्वाह करके वे अपनी और चिकित्सा के पेशे की प्रतिष्ठा को और बढ़ा सकते हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि सेवा भाव के साथ-साथ डॉक्टरों में आजीवन सीखने की प्रतिबद्धता भी होनी चाहिए। जिज्ञासा ही प्रगति की नींव है। चिकित्सा विज्ञान में नए समाधान खोजने की ललक न केवल उन्हें असाधारण डॉक्टर बनने में मदद करेगी, बल्कि उन्हें सेवा के अधिक अवसर भी प्रदान करेगी। उन्होंने युवा डॉक्टरों को नवाचार, अनुसंधान और निरंतर सीखने के उत्‍साह को आत्मसात करने की सलाह दी। उन्होंने यह भी कहा कि वे हमेशा इस बात को ध्यान में रखें कि चिकित्सा के क्षेत्र में नैतिक मूल्यों का सर्वोच्च स्थान है। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी कितनी भी उन्नत क्यों न हो जाए, वह करुणा, ईमानदारी और रोगी-केंद्रित दृष्टिकोण का स्थान कभी नहीं ले सकती। उन्होंने उनसे करुणा की भावना को हमेशा पोषित करने का आग्रह किया।

राष्ट्रपति ने कहा कि चिकित्सा जगत से जुड़े लोग मानवता की सेवा करने का अनूठा अवसर पाकर सौभाग्यशाली हैं। उन्हें इस जिम्मेदारी पर गर्व करना चाहिए और इसे संवेदनशीलता से निभाना चाहिए। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि स्नातक छात्र न केवल अपने व्यक्तिगत जीवन में सफल होंगे बल्कि साथी नागरिकों को स्वस्थ रखने में भी योगदान देंगे। ऐसे प्रयासों के बल पर हम स्वतंत्रता के शताब्दी वर्ष तक एक विकसित भारत का लक्ष्य प्राप्त करने में सफल होंगे।

******************************

 

प्रथम नौसेना कमांडर सम्मेलन नई दिल्ली के नौ सेना भवन में शुरू

नई दिल्ली – प्रथम भारतीय नौसेना कमांडर सम्मेलन 2026 14 अप्रैल2026 को नौ सेना भवन में नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के. त्रिपाठी के उद्घाटन भाषण के साथ शुरू हुआ। इस अवसर पर उन्होंने वरिष्ठ नौसेना नेतृत्वबाहरी संचालन और क्षेत्र कमांडरों तथा कमांड मुख्यालय और नौसेना मुख्यालय के कर्मचारियों को संबोधित किया।

नौसेना प्रमुख ने पश्चिम एशिया में चल रहे संघर्ष के बीच ऊर्जा सुरक्षा सहित भारत के समुद्री हितों की रक्षा करने, अभियानों की गति बढ़ाने और अंतर-सेवा समन्वय को मजबूत करने में नौसेना की उपलब्धियों की सराहना की। नौसेना प्रमुख ने भविष्य के लिए तैयार बल के निर्माण हेतु युद्ध की तैयारी पर निरंतर ध्यान केंद्रित करने और उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाने पर बल दिया।

नौसेना प्रमुख ने उभरते भू-रणनीतिक परिदृश्य में हिंद महासागर क्षेत्र और उससे परे भारतीय नौसेना की प्रतिबद्धताओं को दोहराते हुए बहुपक्षीय और द्विपक्षीय अभ्यासों में मित्र देशों (एफएफसी) के साथ सक्रिय जुड़ाव के माध्यम से एकजुट और विश्वसनीय दृष्टिकोण के महत्व पर बल दिया।

सम्मेलन के दौरान संयुक्तताक्षमता संवर्धन (समुद्री और जमीनी स्तर पर)रखरखाव और मरम्मतबहु-क्षेत्रीय सुरक्षा पद्धतियांप्रशिक्षणविदेशी सहयोगमानव संसाधन मुद्दे और नवाचार एवं स्वदेशीकरण से संबंधित प्रमुख मुद्दों सहित संचालन संबंधी मुख्य बिंदुओं पर चर्चा की गई।

चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने बदलते भू-राजनीतिक उथल-पुथल से संबंधित मामलों पर नौसेना कमांडरों को संबोधित किया और उनसे बातचीत की। उन्‍होंने नौसेना से आर्थिक और तकनीकी घटकों सहित युद्ध के तेजी से विकसित हो रहे स्वरूप के लिए योजना बनाने का आग्रह किया।

**************************

 

प्रधानमंत्री ने दिल्ली–देहरादून आर्थिक गलियारे के उद्घाटन के अवसर पर अपने भाषण की झलकियाँ साझा कीं

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने दिल्ली–देहरादून आर्थिक गलियारे के उद्घाटन के अवसर पर अपने भाषण की झलकियाँ साझा कीं।

एक्स पर पोस्ट की श्रृंखला में श्री मोदी ने कहा:

“बाबासाहेब डॉ. अम्बेडकर का जीवन गरीबों, वंचितों और शोषितों को न्यायपूर्ण व्यवस्था देने के लिए समर्पित था। हमारी सरकार भी आज उसी भावना के साथ सबको सच्चा सामाजिक न्याय देने में जुटी है।”

“देश की सड़कें, हाइवे, एक्सप्रेसवे, एयरवे, रेलवे और वाटरवे विकास की भाग्य रेखाएं हैं। बीते एक दशक से हमारी सरकार इनके निर्माण में निरंतर प्रयासरत है।”

“आज जिस देहरादून-दिल्ली इकोनॉमिक कॉरिडोर का उद्घाटन हुआ है, उससे इस पूरे क्षेत्र का कायाकल्प होने जा रहा है। इससे न केवल आना-जाना सस्ता और तेज होगा, बल्कि उत्तराखंड के टूरिज्म और व्यापार को भी बहुत फायदा होगा।”

“उत्तराखंड में देश-दुनिया से आने वाले सभी पर्यटकों और तीर्थयात्रियों से मेरी यह विशेष अपील…”

“देवभूमि उत्तराखंड से देश के सभी दलों से मेरा एक बार फिर आग्रह है कि वे नारीशक्ति वंदन अधिनियम में संशोधन का समर्थन जरूर करें। हम 2029 से ही देश की माताओं-बहनों को उनका हक देकर रहेंगे।”

“सेना के सामर्थ्य को सशक्त करना हो या हमारे सैनिक परिवारों की सुविधा और सम्मान की बात, हमारी सरकार इस दिशा में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रही है।”

************************

केंद्रीय मंत्री अर्जुन राम मेघवाल ने स्वच्छता पखवाड़े के तहत स्वच्छता और हरित पहल की सराहना की

नई दिल्ली – केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री अर्जुन राम मेघवाल ने 14.04.2026 को स्वच्छता पखवाड़े के तहत नई दिल्ली में जनपथ के विंडसर प्लेस गोलचक्कर के पास एनडीएमसी पार्क में पौधरोपण अभियान और श्रमदान का नेतृत्व किया।

पर्यावरण को बढ़ावा और स्वच्छता के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता पर जोर देते हुए मंत्री ने स्वच्छता पखवाड़े के तहत एक पौधा लगाया और सभी को पौधरोपण में दिल से योगदान देने के लिए प्रोत्साहित किया। उनके साथ विधि सचिव डॉ. राजीव मणि और विधि कार्य विभाग के अधिकारी और कर्मचारी भी शामिल हुए।

सभी ने प्रकृति के प्रति सामूहिक जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा दिया। इस अवसर पर श्री मेघवाल ने डॉ. बी.आर. अंबेडकर की शिक्षा, दूरदर्शिता और प्रेरणा पर जोर दिया, जिनके महत्वपूर्ण प्रयासों ने भारत की संस्कृति और परंपरा से सीधे प्रेरणा लेते हुए  संविधान की प्रस्तावना में ‘समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व’ के आदर्शों को जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने पौधरोपण के महत्व को उजागर करने के लिए संत कबीर की शिक्षाओं का भी आह्वान किया।

पौधरोपण कार्यक्र में भाग लेने के बाद श्री अर्जुन राम मेघवाल ने परिसर के भीतर श्रमदान कर स्वभाव स्वच्छता – संस्कार स्वच्छता का उदाहरण पेश किया।

इस तरह का आयोजन व्यापक स्वच्छ भारत मिशन का हिस्सा है। इसका उद्देश्य पर्यावरणीय क्षति को कम करना और हरित आवरण को बढ़ाना है। विधि एवं न्याय मंत्रालय के विधि कार्य विभाग ने इन राष्ट्रीय अभियानों में सक्रिय रूप से भाग लिया, जिससे स्वच्छ और स्वास्थ्यकर कार्य वातावरण सुनिश्चित करने के साथ-साथ पारिस्थितिक संतुलन को बढ़ावा दिया जा सके।

मंत्री ने श्रमदान में उत्साहपूर्वक भाग लेने के लिए अधिकारियों और कर्मचारियों की प्रशंसा की और दैनिक जीवन में भी पर्यावरण के अनुकूल कार्यप्रणाली को अपनाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

इस अवसर पर विधि सचिव ने कहा कि स्वच्छ और स्वास्थ्यकर कार्य वातावरण हमारी कार्यक्षमता को बढ़ाता है और सभी के लिए सकारात्मक वातावरण बनाता है। उन्होंने अपील की कि हमें अपने कार्यस्थलों को स्वच्छ, व्यवस्थित और बेहतर रखना चाहिए और विकसित भारत के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए पूरी लगनता और मेहनत से काम करना चाहिए।

*************************

 

मंगलवार को अवकाश के कारण बुधवार को अंचलों में जनता दरबार का किया गया आयोजन

जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देशानुसार अंचलों में जनता दरबार का आयोजन

राजस्व, प्रमाण पत्र, पेंशन, आपदा सहायता सहित विभिन्न जनकल्याणकारी मामलों का निष्पादन

रातू में 197, ओरमांझी में 216, नगड़ी में 126, सिल्ली में 60 तथा खलारी अंचल में 58 मामलों का निष्पादन

राहे में 121, अरगोड़ा में 76, चान्हो अंचल में 111, सोनाहातु में 58, माण्डर में 131 मामलों का निष्पादन

रांची,15.04.2026 – मंगलवार को अवकाश रहने के कारण जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देश पर बुधवार को जिले के सभी अंचलों में जनता दरबार का आयोजन किया गया। इस दौरान राजस्व, प्रमाण पत्र, पेंशन, आपदा सहायता सहित विभिन्न जनकल्याणकारी मामलों का त्वरित निष्पादन कर आमजनों को राहत प्रदान की गई।

जनता दरबार में जिले के विभिन्न अंचलों में बड़ी संख्या में आवेदनों का निष्पादन किया गया। प्रखंड सह अंचल कार्यालय रातु में कुल 197 मामलों का निष्पादन हुआ, जिसमें दाखिल-खारिज, ऑनलाइन सुधार, जाति, आय एवं आवासीय प्रमाण पत्र के साथ-साथ पेंशन, जन्म एवं अन्य प्रमाण पत्र शामिल रहे। इसी प्रकार ओरमांझी अंचल में 216, नगड़ी में 126, सिल्ली में 60 तथा खलारी अंचल में 58 मामलों का सफलतापूर्वक निष्पादन किया गया।

अरगोड़ा अंचल में कुल 80 प्राप्त आवेदनों में से 76 का निष्पादन किया गया। यहां पंजी-2 सुधार, आय, जाति एवं स्थानीय प्रमाण पत्र से संबंधित मामलों का समाधान किया गया। साथ ही आवेदिका मुस्कान तिर्की को मुआवजा राशि का चेक प्रदान किया गया तथा गुरुदर्शन कौर को पारिवारिक सदस्यता प्रमाण पत्र उपलब्ध कराया गया।

चान्हो अंचल में 111 मामलों का निष्पादन किया गया, जिसमें आय, आवासीय एवं जाति प्रमाण पत्र के साथ पंजी सुधार एवं नकल से जुड़े मामले शामिल रहे। सोनाहातु अंचल में 58 मामलों का निष्पादन हुआ, जहां आय, जाति एवं आवासीय प्रमाण पत्र प्रमुख रहे।

मांडर अंचल में 131 मामलों का निष्पादन करते हुए आय प्रमाण पत्र, सर्वजन पेंशन एवं अन्य राजस्व मामलों का निपटारा किया गया। इस दौरान ग्राम कन्दरी के राजेन्द्र उरांव का लगान दर्ज किया गया, नगड़ा के बिनोद टोप्पो के प्लॉट एवं रकबा में सुधार किया गया तथा सकरपदा के संदीप कुमार ठाकुर के प्लॉट में त्रुटि सुधार किया गया। साथ ही आशीष टोप्पो को जाति प्रमाण पत्र प्रदान किया गया।

अनगड़ा अंचल में लखीन्द्र बेदिया के बहु-प्लॉट से संबंधित मामलों का ऑनलाइन पंजीकरण कर आवेदन का निष्पादन किया गया। राहे अंचल में 121 मामलों का समाधान किया गया, जिसमें जाति, आवासीय प्रमाण पत्र के साथ आपदा से जुड़े 6 मामलों में सहायता प्रदान की गई। इन मामलों में वज्रपात, सड़क दुर्घटना एवं डूबने से हुई मृत्यु के मामलों में लाभुकों को सहायता दी गई।

ईटकी अंचल में कुल 68 मामलों का निष्पादन हुआ, जिसमें जन्म, आय एवं जाति प्रमाण पत्र के अलावा पेंशन से संबंधित मामलों का समाधान किया गया।

जिला प्रशासन द्वारा आयोजित जनता दरबार के माध्यम से आम नागरिकों की समस्याओं का त्वरित एवं प्रभावी समाधान सुनिश्चित किया गया। विशेष रूप से राजस्व से जुड़े मामलों, प्रमाण पत्र निर्गमन, पेंशन स्वीकृति एवं आपदा सहायता को प्राथमिकता देते हुए लोगों को राहत पहुंचाई गई।

यह पहल जिला प्रशासन की जनसेवा, पारदर्शिता एवं जवाबदेही के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिससे आम जनता को सीधे लाभ मिल रहा है।

**************************

 

एनएफडीसी ने 24 अप्रैल 2026 को अपनी मलयालम फीचर फिल्म ‘अचप्पाज़ एल्बम’ को देशभर में रिलीज करने की घोषणा की है

नई दिल्ली – सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम लिमिटेड (एनएफडीसी) अपनी नवीनतम मलयालम फिल्म ‘अचप्पाज़ एल्बम’ (ग्रैम्पाज़ एल्बम) को रिलीज करने के लिए तैयार है। कल्पना पर आधारित पारिवारिक जीवन, हास्य और भावनाओं के अनूठा संगम के रूप में यह फिल्म समय-यात्रा से जुड़ी कहानी को दर्शाती है और 24 अप्रैल 2026 को सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने वाली है।

दीप्ति पिल्लै सिवन के निर्देशन में बनी इस फिल्म की कहानी संजीव सिवन, अनिर्बान भट्टाचार्य और उमेश नायर ने लिखी है। यह फिल्म अतीत को पुनः जीने की ओर शाश्वत आकर्षण को दर्शाती है। कहानी एक पिता और पुत्र के इर्द-गिर्द घूमती है जो भाग्य के एक अप्रत्याशित मोड़ के कारण एक-दूसरे का जीवन जीने लगते हैं। यह परिवर्तन पीढ़ीगत दृष्टिकोणों और जीवन विकल्पों की मर्मस्पर्शी और हास्यपूर्ण पड़ताल का आधार बनता है।

​इस फिल्म में दिग्गज अभिनेता मोहन अगाशे के साथ-साथ अंजना अप्पुकुट्टन, आदिनाथ कोठारे, प्रियंका नायर और सिद्धांशु संजीव सिवन जैसे कई उल्लेखनीय कलाकार शामिल हैं। तकनीकी टीम में मनोज पिल्लई जैसे सिने छायाकार, राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता संपादक श्रीकर प्रसाद और गुलराज सिंह जैसे जाने-माने पेशेवर संगीतकार शामिल हैं।

फिल्म के बारे में बात करते हुए निर्देशक दीप्ति पिल्लै सिवन ने कहा कि “यह फिल्म एक सरल किन्तु आकर्षक समय-यात्रा की कथा के माध्यम से गहरे मानवीय संबंधों की पड़ताल करती है। इस कहानी को रुपहले पर्दे पर लाने में एनएफडीसी के महत्वपूर्ण सहयोग के लिए हम आभारी हैं।”

एनएफडीसी के प्रबंध निदेशक श्री प्रकाश मगदुम ने विविध प्रकार के सिनेमा को बढ़ावा देने में एनएफडीसी की भूमिका पर प्रकाश डालते हुए कहा, “यह फिल्म भारतीय सिनेमा में अनूठी ध्वनियों को बढ़ावा देने की हमारी प्रतिबद्धता को दर्शाती है। अचप्पाज़ एल्बम अपनी कल्पनाशील अवधारणा और भावनात्मक गहराई के संयोजन से सभी पीढ़ियों के दर्शकों के दिलों को छूने की क्षमता रखती है।”

वर्तमान में एनएफडीसी के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर इस फिल्म का पहला टीज़र उपलब्ध है और आधिकारिक ट्रेलर जल्द ही जारी होने की उम्मीद है। टीज़र को इस लिंक पर देखा जा सकता है: [ https://www.youtube.com/watch?v=G6WDgZNA5u8 ]

एनएफडीसी के बारे में:

1975 में स्थापित राष्ट्रीय फिल्म विकास निगम लिमिटेड (एनएफडीसी) सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के अधीन भारतीय सिनेमा के विकास के लिए सर्वोच्च निकाय है। यह विभिन्न भारतीय भाषाओं में फिल्मों के निर्माण, प्रचार और संरक्षण सहित संपूर्ण फिल्म निर्माण प्रणाली में सहयोग करता है।

**************************

 

प्रधानमंत्री ने उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन से भेंट की

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने उपराष्ट्रपति श्री सी.पी राधाकृष्णन से भेंट की और पुथांडु के विशेष अवसर पर उन्‍हें शुभकामनाएं दीं।

प्रधानमंत्री ने आगामी वर्ष के लिए अच्छे स्वास्थ्य और प्रसन्‍नता से परिपूर्ण एक सुखद वर्ष की प्रार्थना की।

प्रधानमंत्री ने एक्‍स पोस्‍ट में लिखा;

“उपराष्ट्रपति श्री सीपी राधाकृष्णन जी से भेंट की और पुथांडु के विशेष अवसर पर उन्हें शुभकामनाएं दीं। उनके लिए आने वाले वर्ष में अच्छे स्वास्थ्य और प्रसन्‍नता से परिपूर्ण रहने की प्रार्थना करता हूं।”

@VPIndia

@CPR_VP

 

***********************

 

‘माई भारत बजट क्वेस्ट 2026’ का 17 जोन में भव्य समापन

नई दिल्ली – नीति-निर्माण में युवाओं की भागीदारी को गहरा करने के लिए एक परिवर्तनकारी पहल के रूप में शुरू किया गया माई भारत बजट क्वेस्ट 2026 (MY Bharat Budget Quest 2026) एक राष्ट्रीय मंच के तौर पर परिकल्पित किया गया था, जिसका उद्देश्य युवा नागरिकों को शासन प्रक्रियाओं और केंद्रीय बजट से जोड़ना है। इस पहल को ‘विकसित भारत युवा नेता संवाद’ (वीबीवाईएलडी) 2026 की परामर्श-आधारित भावना से प्रेरणा मिली है, जहां युवाओं की आवाजों ने राष्ट्रीय प्राथमिकताओं में सार्थक योगदान दिया और उनके कई विचार केंद्रीय बजट 2026 में भी परिलक्षित हुए। इसी नींव पर आगे बढ़ते हुए, बजट क्वेस्ट (Budget Quest) युवाओं की आकांक्षाओं को नीतिगत विमर्श में शामिल करने के लिए एक सुव्यवस्थित तंत्र के रूप में उभरा है।

.इस राष्ट्रव्यापी पहल के एक हिस्से के तौर पर, युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय ने ‘मेरा युवा भारत’ (माई भारत) के माध्यम से 12 अप्रैल 2026 को ‘नारी शक्ति युवा संसद’ का आयोजन किया। यह आयोजन देश भर के 17 जोनों में संपन्न हुआ, जो ‘बजट क्वेस्ट’ यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ। “नारी शक्ति: विकसित भारत की आवाज, समावेशी लोकतंत्र को मजबूत बनाना” विषय पर आधारित इस पहल ने 7,000 से अधिक युवतियों को लोकतांत्रिक भागीदारी और नीतिगत संवाद के एक अभूतपूर्व अभ्यास के लिए एक मंच पर एकजुट किया।

पूरे देश में फैली इस युवा संसद का आयोजन मुंबई, अमरावती, बेंगलुरु, भोपाल, रायपुर, भुवनेश्वर, हिसार, दिल्ली, चंडीगढ़, शिलांग, अहमदाबाद, हैदराबाद, जयपुर, रांची, लखनऊ, पटना और श्रीनगर में एक साथ किया गया। यह आयोजन इस कार्यक्रम के व्यापक विस्तार, विविधता और समावेशिता को दर्शाता है। विभिन्न शैक्षणिक, सामाजिक और क्षेत्रीय पृष्ठभूमि से आए प्रतिभागियों ने संसदीय शैली की व्यवस्थित चर्चाओं में भाग लिया और इस दौरान उन्होंने अपने सुविज्ञ दृष्टिकोण तथा ‘जनभागीदारी’ के प्रति अपनी गहरी प्रतिबद्धता का प्रदर्शन किया।

बजट क्वेस्ट 2026 के उद्देश्यों के अनुरूप, सभी जोनों में मानव पूंजी विकास, कृषि और ग्रामीण अर्थव्यवस्था, भविष्य की अर्थव्यवस्था, महिला-नेतृत्व वाला विकास और सतत विकास जैसे प्रमुख विषयों पर पैनल चर्चाएं आयोजित की गईं, जिससे प्रतिभागियों को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के साथ सार्थक रूप से जुड़ने का अवसर मिला।

इन चर्चाओं का एक प्रमुख परिणाम सभी 17 जोनों में एक औपचारिक प्रस्ताव को अपनाना था, जिसमें सामूहिक रूप से संविधान (संशोधन) विधेयक, 2026 का समर्थन किया गया। इस विधेयक में लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 816 करने और महिलाओं के लिए 33% आरक्षण का प्रस्ताव है। इस प्रस्ताव में ‘नारी शक्ति वंदन अधिनियम, 2023’ को 2029 के आम चुनावों से समय पर लागू करने पर भी जोर दिया गया और साथ ही यह भी वकालत की गई कि महिलाओं के राजनीतिक प्रतिनिधित्व की प्रभावी और तत्काल प्राप्ति सुनिश्चित करने के लिए, इसके कार्यान्वयन को परिसीमन संबंधी बाधाओं से अलग रखा जाए।

सभी जोनों में हुई गतिविधियों में राष्ट्र-निर्माण की एक मजबूत भावना झलक रही थी। इनकी शुरुआत स्वामी विवेकानंद को ‘माल्यार्पण’ से हुई, जो युवाओं के नेतृत्व में होने वाले बदलाव के उनके दृष्टिकोण से मिली प्रेरणा का प्रतीक था; और फिर “वंदे मातरम” के सामूहिक गायन के साथ यह भावना और भी मुखर हो उठी, जिसने एकता और राष्ट्रीय गौरव को और भी सुदृढ़ किया।

कई गणमान्य व्यक्तियों ने इन कार्यक्रमों की शोभा बढ़ाई, जिनमें विभिन्न राज्यों के माननीय राज्यपाल, मुख्यमंत्री और जन-प्रतिनिधि शामिल थे। इन सभी ने भारत की विकास यात्रा में ‘नारी शक्ति’ द्वारा निभाई जा रही उस परिवर्तनकारी भूमिका को रेखांकित किया, जिसमें वे नेताओं और निर्णय-निर्माताओं के रूप में अपनी अहम भूमिका निभा रही हैं।

 

इस पहल के महत्व को और मजबूत करते हुए, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इस अवसर पर दिए गए अपने संदेश में युवाओं की व्यापक भागीदारी की सराहना की। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस तरह के संवाद युवा प्रतिभाओं की रचनात्मक क्षमता को उजागर करते हैं और सहभागी शासन को मजबूत बनाते हैं, साथ ही भारत के भविष्य के विकास पथ को भी आकार देते हैं।

प्रतिभागियों को संबोधित करते हुए, केंद्रीय युवा कार्यक्रम और खेल तथा श्रम और रोजगार मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने इस बात पर जोर दिया कि लोकतंत्र को मजबूत करने में युवाओं को केंद्रीय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने रेखांकित किया कि ‘राष्ट्र प्रथम’ और ‘कर्तव्य’ की भावना ही उनके कार्यों का मार्गदर्शन होनी चाहिए। माननीय प्रधानमंत्री के ‘पंच प्रण’ के दृष्टिकोण को दोहराते हुए, उन्होंने युवा नागरिकों से आह्वान किया कि वे ‘विकसित भारत’ के संकल्प को सक्रिय रूप से जिएं और उसे अपने आचरण में उतारें; साथ ही, अपनी जागरूक भागीदारी और जिम्मेदार नेतृत्व के माध्यम से अपने सपनों के भारत का निर्माण करें।

युवाओं को जोड़ने के भविष्य के रोडमैप पर रोशनी डालते हुए, केंद्रीय मंत्री ने घोषणा की कि ‘विकसित भारत युवा नेता संवाद’ (वीबीवाईएलडी) इस साल से एक विकेंद्रीकृत स्वरूप अपनाएगा। इसकी शुरुआत राज्य-स्तरीय संस्करणों और क्विज से होगी, जिसमें जीतने वाले प्रतिभागी राष्ट्रीय स्तर पर आगे बढ़ेंगे। यह पहले के केंद्रीकृत स्वरूप से एक बदलाव है, जिससे पूरे देश में युवाओं की व्यापक भागीदारी और जमीनी स्तर पर गहरी जुड़ाव संभव हो सकेगा।

उन्होंने आगे कहा कि ऐसी पहलें केवल संवाद के मंच ही नहीं हैं, बल्कि जिम्मेदार नागरिकों की एक ऐसी पीढ़ी को तैयार करने के साधन हैं जो शासन और राष्ट्र-निर्माण में सक्रिय रूप से योगदान देती है।

इस राष्ट्रव्यापी नीतिगत जुड़ाव के पूरक के तौर पर, मंत्रालय ने कई जगहों पर “रविवार को साइकिल” ( Sundays on Cycle) का भी आयोजन किया। इसके जरिए पर्यावरण जागरूकता, फिटनेस और टिकाऊ जीवन शैली को बढ़ावा दिया गया और इस तरह युवाओं को संगठित करने का एक समग्र मॉडल पेश किया गया।

17 जोन में ‘नारी शक्ति युवा संसद’ का सफल समापन, माई भारत की उस संस्थागत क्षमता का प्रमाण है जिसके तहत वह बड़े पैमाने पर युवाओं को संगठित कर सकता है और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं को जमीनी स्तर पर सार्थक जुड़ाव में बदल सकता है।

जैसे-जैसे भारत ‘विकसित भारत @2047’ के विजन की ओर आगे बढ़ रहा है, यह पहल एक ऐसी पीढ़ी के उदय को दर्शाती है जो जागरूक, मुखर और कर्मठ है; एक ऐसी पीढ़ी जहां ‘नारी शक्ति’ न केवल शासन-प्रशासन में हिस्सा ले रही है, बल्कि देश के भविष्य को सक्रिय रूप से आकार भी दे रही है।

****************************

 

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ में अपने संबोधन की झलकियां साझा की

नई दिल्ली  – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित ‘नारी शक्ति वंदन सम्मेलन’ में अपने संबोधन की झलकियां साझा कीं। उन्होंने महिला-नेतृत्व वाले विकास और सशक्तिकरण के प्रति देश की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

प्रधानमंत्री ने एक्स(X) पर पोस्ट की एक श्रृंखला में लिखा:

“नई दिल्ली में नारी शक्ति वंदन सम्मेलन में माताओं, बहनों और बेटियों के उत्साह और आत्मविश्वास ने नई ऊर्जा से भर दिया।”

“वर्ष 2029 में नारी शक्ति वंदन अधिनियम लागू करने को लेकर विपक्ष की भावनाओं का भी पूरा ध्यान रखा गया है। 16 अप्रैल से संसद में इस पर होने वाली चर्चा में हमारा पूरा प्रयास है कि यह प्रक्रिया संवाद, सहयोग और सहभागिता से आगे बढ़े।”

“जब निर्णय प्रक्रियाओं में महिलाओं की सहभागिता बढ़ती है तो व्यवस्थाओं में भी संवेदनशीलता आती है। जल जीवन मिशन सहित हमारी कई योजनाओं की सफलता इसका बड़ा उदाहरण है।”

“गुजरात के खेड़ा जिले की एक पंचायत की महिला सदस्यों ने विकास को लेकर अपनी जो भावनाएं व्यक्त की थीं, उनसे पता चलता है कि जमीनी अनुभव से निकली वाणी कैसे वेद-वाक्य बन जाती है। इसके बारे में हर देशवासी को जरूर जानना चाहिए…”

माताओं-बहनों और बेटियों को और सशक्त बनाने के लिए हमने अपनी योजनाओं के माध्यम से निरंतर प्रयास किए हैं। इसके एक नहीं अनेक उदाहरण हैं…

*************************

रायसेन में उन्नत कृषि महोत्सव का भव्य समापन- कृषि परिवर्तन पर केंद्रित रहा कार्यक्रम

नई दिल्ली – रायसेन में राष्ट्रीय स्तर का कृषि मेला ‘उन्नत कृषि महोत्सव’ अभूतपूर्व उत्साह के साथ हजारों किसानों की भागीदारी और नवाचार के साथ संपन्न हुआ। समापन समारोह में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी और केंद्रीय कृषि और किसान कल्याण एवं ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान उपस्थित थे। इस अवसर पर श्री नितिन गडकरी ने सड़कों के विकास, आधुनिक कृषि प्रौद्योगिकियों, जल संरक्षण, वैकल्पिक ऊर्जा और गांवों की समृद्धि के लिए व्यापक दृष्टिकोण प्रस्तुत किया वहीं श्री शिवराज सिंह चौहान ने जमीनी स्तर पर ‘बीज से बाजार तक’ के लिए कृषि रोडमैप को लागू करने की अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराई।

क्षेत्र के विकास के संबंध में प्रमुख घोषणाएं

श्री शिवराज सिंह चौहान की ओर से क्षेत्र के संबंध में की गई मांगों का उत्तर देते हुए श्री नितिन गडकरी ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने विस्तृत परियोजना रिपोर्ट तैयार करने और राज्य सरकार की ओर से भूमि अधिग्रहण में सहायता प्रदान करने सहित रायसेन रिंग रोड/पूर्वी बाईपास परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए सैद्धांतिक तौर पर सहमति व्यक्त की। उन्होंने पुलों के सौंदर्यीकरण के लिए भी सहायता प्रदान करने और अन्य सुसंगत सड़क अवसंरचना प्रस्तावों पर सहयोग का आश्वासन दिया।

ज्ञान को संपदा में परिवर्तित करना आवश्यक

श्री नितिन गडकरी ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि वे इस कार्यक्रम में मंत्री के रूप में नहीं बल्कि किसान के रूप में आए हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि कृषि का भविष्य कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मौसम केंद्रों, उपग्रह आधारित प्रणालियों, ड्रोन और नैनो यूरिया जैसी प्रौद्योगिकियों से गहराई से जुड़ा हुआ है। उन्होंने किसानों से इस सिलसिले में हो रहे परिवर्तनों को अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ज्ञान सबसे बड़ी शक्ति है और ज्ञान को संपदा में बदलना आज कृषि क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण आवश्यकता है। उन्होंने किसानों को उत्पादकता बढ़ाने और लागत कम करने के लिए नवाचार, अनुसंधान और प्रौद्योगिकी आधारित पद्धतियों को अपनाने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने यह भी बताया कि किसान केवल खाद्य प्रदाता ही नहीं रहेंगे बल्कि ऊर्जा, ईंधन, विमानन ईंधन, बिटुमेन और हाइड्रोजन के आपूर्तिकर्ता भी बनेंगे। कृषि अवशेष, बायोमास, इथेनॉल, सीएनजी और हाइड्रोजन से आय के नए अवसर खुलेंगे, आयात कम होगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था सुदृढ़ होगी।

जल संरक्षण पर विशेष ध्यान

श्री गडकरी ने जल संरक्षण पर बल देते हुए कहा कि जल का बेकार बहने की गति धीमी करने, उसे संग्रहित करने और उसके पुनः उपयोग के लिए भू-जल स्तर को बहाल करने की सुविधा होनी चाहिए। उन्होंने जल संरक्षण को पैसों की बचत की तरह महत्वपूर्ण बताते हुए उस पर बल देते हुए यह संदेश दिया कि “गांव का पानी गांव में, खेतों का पानी खेतों में और घरेलू पानी घरों में ही रहना चाहिए”। उन्होंने यह भी कहा कि जिन क्षेत्रों में सीधे सिंचाई की सुविधा नहीं है वहां जल संरक्षण संबंधी संरचनाएं महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं।

दुग्ध उत्पादन, मत्स्य पालन और मूल्यवर्धन का महत्व

श्री गडकरी ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए दुग्ध उत्पादन, मत्स्य पालन और जल-आधारित या समुद्री अर्थव्यवस्था को प्रमुख क्षेत्र बताया। उन्होंने दूध उत्पादन, मत्स्य पालन और इनसे संबंधित गतिविधियों पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने इस बात पर भी बल दिया किया कि केवल उत्पादन बढ़ाना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि प्रसंस्करण, शीत गृह में भंडारण, प्री-कूलिंग और मूल्यवर्धन के लिए सुदृढ़ प्रणालियां भी आवश्यक हैं। ये सुविधाएं नहीं हों तो अधिक उत्पादन होने से कीमतें गिरती हैं जिससे किसानों को नुकसान होता है। उचित भंडारण और प्रसंस्करण अवसंरचना बेहतर लाभ सुनिश्चित करने में सहायक हो सकती है। उन्होंने किसानों को मशीनरी के प्रदर्शन, पॉलीहाउस, ग्रीनहाउस, हाइड्रोपोनिक्स, एक एकड़ कृषि मॉडल, बकरी पालन और मत्स्य पालन सहित विभिन्न क्षेत्रों के बारे में जानकारी के लिए प्रदर्शनी का अवलोकन करने और उससे सीखने के लिए प्रोत्साहित किया और इन जानकारियों को अपने यहां लागू करने के लिए प्रेरित किया।

श्री शिवराज सिंह चौहान के कार्यकाल के दौरान मध्य प्रदेश में कृषि की प्रगति की सराहना

श्री नितिन गडकरी ने श्री शिवराज सिंह चौहान के मुख्यमंत्री के रूप में कार्यकाल के दौरान कृषि क्षेत्र में हासिल की गई मध्य प्रदेश की उपलब्धियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस तरह की पहलें किसानों को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं और उन्हें भविष्य के लिए प्रेरित करती हैं।

यह अंत नहीं, बल्कि एक शुरूआत है

श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि उन्नत कृषि महोत्सव मात्र एक औपचारिक आयोजन नहीं है और इसका समापन एक नई शुरूआत का प्रतीक है। उन्होंने इस चार दिवसीय आयोजन को किसानों के लिए शिक्षित होने का ऐसा मंच बताया जो व्यावहारिक ज्ञान, प्रौद्योगिकी, नवाचार और विकास को एक साथ प्रस्तुत करता है। उन्होंने बताया कि क्षेत्र की मिट्टी, जलवायु, जल उपलब्धता और संसाधनों के आधार पर एक विस्तृत ‘बीज से बाजार तक’ का रोडमैप तैयार किया गया है। इस रोडमैप से क्षेत्र के लिए उपयुक्त फसलों, फलों और सब्जियों की पहचान होगी और उनके उत्पादन, प्रसंस्करण और विपणन की योजनाओं की रूपरेखा बनेगी।

दलहन और बागवानी का विस्तार

श्री चौहान ने यह घोषणा की है कि गुणवत्तापूर्ण बीजों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए प्रत्येक प्रखंड में ‘बीज ग्राम’ विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि दलहन और बागवानी का विस्तार किया जाएगा और इस क्षेत्र को बागवानी केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने ड्रिप और स्प्रिंकलर सिंचाई प्रणालियों के माध्यम से जल के कुशल उपयोग पर जोर दिया। किसानों को आधुनिक कृषि मशीनरी सुलभ बनाने के लिए पंचायत स्तर पर कस्टम हायरिंग सेंटर और मशीन बैंक स्थापित किए जाएंगे। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण नर्सरियों और स्वच्छ पौध केंद्रों के विकास, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ) को सुदृढ़ करने और किसानों को उत्पादन से लेकर बाजार तक सहयोग देने के लिए पैक हाउस और कोल्ड स्टोरेज अवसंरचना के विस्तार की भी घोषणा की। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि एकीकृत कृषि मॉडल छोटे भू-जोतों पर भी आय में उल्लेखनीय वृद्धि कर सकते हैं और किसानों की आय बढ़ाने के लिए सरकार की प्रतिबद्धता को दोहराया।

कार्यान्वयन के लिए कार्य बल

श्री चौहान ने घोषणा की है कि रोडमैप के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए समर्पित कार्यबल का गठन किया जाएगा और साथ ही राष्ट्रीय स्तर की संचालन समिति भी बनाई जाएगी। केंद्र और राज्य सरकारों की टीमें मिलकर यह सुनिश्चित करेंगी कि योजनाओं को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू किया जाए।

किसान पहचान पत्र के लिए अपील

उन्होंने कृषकों से अपना किसान पहचान पत्र बनवाने का आग्रह किया और कहा कि इससे भविष्य में कृषि सेवाओं, योजनाओं और प्रक्रियाओं तक पहुंच आसान हो जाएगी। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार किसानों की आजीविका में सुधार लाने और कृषि को लाभदायक क्षेत्र बनाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

विकसित भारत की परिकल्पना में कृषि का केंद्रीय महत्व

श्री चौहान ने श्री नितिन गडकरी का स्वागत करते हुए उन्हें नवाचार और कार्यक्षमता के माध्यम से परिणाम देने वाला नेता बताया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में कृषि विकसित भारत के निर्माण में केंद्रीय भूमिका निभाएगी और किसानों की सेवा करना सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी रहेगी।

लाभों का वितरण

कृषि महोत्सव के समापन सत्र के दौरान किसानों के बीच विभिन्न सरकारी योजनाओं के अंतर्गत लाभों का वितरण किया गया। केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर और हरियाणा के कृषि मंत्री श्री श्याम सिंह राणा ने भी सभा को संबोधित किया। इस कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के उपमुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा, कई मंत्री, सांसद, विधायक, जन प्रतिनिधि, कृषि वैज्ञानिक, विशेषज्ञ, वरिष्ठ अधिकारी और हजारों किसान उपस्थित थे।

******************************

 

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) के नैदानिक ​​कार्यप्रवाह को सुदृढ़ करने के लिए मोबाइल एप्लिकेशन लॉन्च किया।

नई दिल्ली – प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा वितरण को मजबूत करने और डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने आज देश भर में सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों (सीएचओ) के नैदानिक ​​कार्यप्रवाह को समर्थन और सुव्यवस्थित करने के लिए डिज़ाइन किया गया एक समर्पित मोबाइल एप्लिकेशन लॉन्च किया।

 

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (ICMR) द्वारा विकसित यह मोबाइल एप्लिकेशन, उप-केंद्र आयुष्मान आरोग्य मंदिरों (SC-AAM) में तैनात प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल पेशेवरों (CHOs) के लिए एक व्यापक नैदानिक ​​निर्णय-सहायता और कार्य-सहायता उपकरण के रूप में कार्य करता है। इसे व्यापक प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल (CPHC) के अंतर्गत विस्तारित 12 सेवा पैकेजों के अनुरूप बनाया गया है।

यह एप्लिकेशन संरचित नैदानिक ​​कार्यप्रवाह प्रदान करता है जो एससी-एएएम में बाह्य रोगी सेवाओं के लिए आने वाले रोगियों के प्रबंधन हेतु त्वरित संदर्भ चेकलिस्ट के रूप में कार्य करता है। यह रोगी के आकलन पर व्यावहारिक, चरण-दर-चरण मार्गदर्शन प्रदान करता है, जिसमें रोगी के लक्षणों के आधार पर इतिहास लेना, शारीरिक परीक्षण और प्रासंगिक नैदानिक ​​परीक्षण शामिल हैं।

इन कार्यप्रवाहों के माध्यम से, प्राथमिक स्वास्थ्य अधिकारी (सीएचओ) उन मामलों की तुरंत पहचान कर सकते हैं जिन्हें उच्च स्तरीय आपातकालीन देखभाल सुविधाओं में तत्काल रेफरल की आवश्यकता होती है। यह एप्लिकेशन रोगियों को स्थिर करने के लिए रेफरल से पहले के प्रबंधन पर मार्गदर्शन भी प्रदान करता है। गैर-आपातकालीन मामलों के लिए, यह एससी-एएएम में उचित प्रबंधन, रेफरल मार्गों या उच्च केंद्रों के साथ टेलीकंसल्टेशन के लिए सिफारिशें प्रदान करके नैदानिक ​​निर्णय लेने में सहायता करता है। एप्लिकेशन को तीन मुख्य भागों में संरचित किया गया है: कार्यप्रवाह, मूल्यांकन उपकरण और उपचार एवं परामर्श। नैदानिक ​​निर्णय लेने को सरल बनाने के लिए एक रंग-कोडित प्रणाली को शामिल किया गया है: लाल (जीवन या अंग के लिए संभावित तत्काल खतरे को दर्शाता है, जिसके लिए तत्काल रेफरल की आवश्यकता होती है); नारंगी (विशेषज्ञ या चिकित्सक मूल्यांकन की आवश्यकता का सुझाव देता है); पीला (एससी-एएएम में टेलीकंसल्टेशन के साथ या उसके बिना प्रबंधनीय हल्की से मध्यम स्थितियों को कवर करता है); हरा (सुविधा स्तर पर प्रबंधनीय हल्की स्थितियों या स्वस्थ मामलों को दर्शाता है)।

इस एप्लिकेशन में रोगी पंजीकरण, इलेक्ट्रॉनिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड (ईएचआर), टेलीकंसल्टेशन सहायता, निदान रिपोर्टिंग और फॉलो-अप ट्रैकिंग जैसी प्रमुख सुविधाएं शामिल हैं। यह मौजूदा राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफार्मों के साथ सहज एकीकरण की सुविधा भी प्रदान करता है, जिससे देखभाल की निरंतरता और बेहतर स्वास्थ्य परिणाम सुनिश्चित होते हैं।

सभा को संबोधित करते हुए नीति आयोग के सदस्य (स्वास्थ्य) डॉ. वी.के. पॉल ने समग्र स्वास्थ्य प्रणाली को सुदृढ़ करने में प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल की महत्वपूर्ण भूमिका पर बल दिया। उन्होंने कहा कि प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल किसी भी राष्ट्र की स्वास्थ्य संरचना की नींव है और इस बात पर जोर दिया कि सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज की दिशा में भारत की यात्रा सुदृढ़ प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों पर दृढ़ता से आधारित है।

डॉ. पॉल ने बताया कि इस एप्लिकेशन का विकास आयुष्मान आरोग्य मंदिर पहल के आठ वर्ष पूरे होने के साथ हुआ है, जो एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। उन्होंने संतोष व्यक्त किया कि देश भर के प्रत्येक सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी को एक व्यावहारिक और प्रभावशाली डिजिटल उपकरण उपलब्ध कराया जा रहा है।

विकास टीम द्वारा अपनाए गए व्यवस्थित और साक्ष्य-आधारित दृष्टिकोण की सराहना करते हुए, उन्होंने एप्लिकेशन को और अधिक परिष्कृत और मजबूत बनाने के लिए निरंतर प्रतिक्रिया तंत्र को शामिल करने के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने प्लेटफ़ॉर्म में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) क्षमताओं को एकीकृत करने की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि इस तरह की प्रगति इसकी उपयोगिता को काफी बढ़ाएगी, नैदानिक ​​निर्णय लेने में सुधार करेगी और जमीनी स्तर पर स्वास्थ्य सेवा वितरण की समग्र गुणवत्ता को बढ़ाएगी।

इस अवसर पर बोलते हुए, स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव और आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने इस बात पर प्रकाश डाला कि इस एप्लिकेशन का शुभारंभ प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा स्तर पर डिजिटल नैदानिक ​​सहायता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण शुरुआत है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि क्षेत्र में इसके उपयोग और सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारियों तथा अन्य हितधारकों से प्राप्त प्रतिक्रिया के आधार पर एप्लिकेशन का निरंतर विकास होता रहेगा।

उन्होंने एप्लिकेशन के विकास से लेकर मूल्यांकन तक, इसमें शामिल सभी टीमों के सामूहिक प्रयासों की सराहना की और कहा कि इस तरह के सहयोगात्मक और पुनरावर्ती दृष्टिकोण मजबूत, उपयोगकर्ता-केंद्रित डिजिटल स्वास्थ्य समाधानों के निर्माण के लिए आवश्यक हैं। उन्होंने फ्रंटलाइन स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं की जरूरतों को बेहतर ढंग से पूरा करने और सेवा वितरण परिणामों को बढ़ाने के लिए उपकरण में निरंतर सुधार करने के लिए आईसीएमआर की प्रतिबद्धता को भी दोहराया।

इस साक्ष्य-आधारित डिजिटल उपकरण से प्राथमिक स्वास्थ्य सेवा स्तर पर दी जाने वाली देखभाल की गुणवत्ता, एकरूपता और समयबद्धता में सुधार होने की उम्मीद है, साथ ही यह सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (सीएचओ) को सुलभ और मानकीकृत नैदानिक ​​प्रोटोकॉल के साथ सशक्त बनाएगा।

*************************

 

राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की प्रगति पर केंद्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरी की समीक्षा बैठक

नई दिल्ली – केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी का सोमवार, 13 अप्रैल 2026 को जिला रायसेन, मध्यप्रदेश में दौरा हुआ। इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री श्री गडकरी ने  सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) तथा भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (NHAI), भोपाल क्षेत्र के अधिकारियों के साथ प्रदेश में संचालित राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के संबंध में विस्तृत चर्चा की।

इस अवसर पर केंद्रीय मंत्री श्री गडकरी ने राष्ट्रीय राजमार्गों पर सड़क सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने पर बल दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि प्रदेश में चिन्हित सभी ब्लैक स्पॉट्स की समुचित पहचान कर उनका निर्धारित समय-सीमा में स्थायी सुधार सुनिश्चित किया जाए।

उन्होंने कहा कि प्रत्येक ब्लैक स्पॉट पर आवश्यकतानुसार ज्योमेट्रिकल सुधार, उपयुक्त साइनेज, क्रैश बैरियर, रोड मार्किंग, लाइटिंग तथा अन्य इंजीनियरिंग उपायों को प्रभावी रूप से लागू किया जाए, ताकि सड़क दुर्घटनाओं में कमी लाई जा सके और यातायात अधिक सुरक्षित बनाया जा सके।

मंत्री श्री गडकरी ने विभिन्न परियोजनाओं की प्रगति, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता, भूमि अधिग्रहण की स्थिति तथा कार्यान्वयन से संबंधित विभिन्न पहलुओं की जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा में पूर्ण करते हुए गुणवत्ता के उच्चतम मानकों का अनुपालन सुनिश्चित किया जाए।

उन्होंने कहा कि सड़क अवसंरचना का विकास केवल कनेक्टिविटी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह देश की आर्थिक प्रगति तथा क्षेत्रीय संतुलित विकास का एक महत्वपूर्ण आधार है।

इस दौरान यह अवगत कराया गया कि राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं के माध्यम से मध्यप्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों के मध्य कनेक्टिविटी को सुदृढ़ किया जा रहा है, जिससे यात्रा समय में कमी, ईंधन की बचत तथा सड़क सुरक्षा में सुधार परिलक्षित हो रहा है। साथ ही, बेहतर सड़क नेटवर्क के परिणामस्वरूप कृषि उत्पादों एवं औद्योगिक वस्तुओं के आवागमन में तेजी आई है, लॉजिस्टिक्स लागत में कमी आई है तथा सप्लाई चेन अधिक प्रभावी हुई है।

मंत्री श्री गडकरी ने कहा कि इन परियोजनाओं के पूर्ण होने से औद्योगिक एवं व्यापारिक गतिविधियों को प्रोत्साहन मिल रहा है तथा स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी सृजित हो रहे हैं।

इसके अतिरिक्त, बेहतर कनेक्टिविटी के कारण प्रदेश के पर्यटन स्थलों तक पहुंच अधिक सुगम हुई है, जिससे पर्यटन क्षेत्र को भी गति मिल रही है।

MoRTH एवं NHAI के अधिकारियों द्वारा मंत्री श्री गडकरी को अवगत कराया गया कि प्रदेश की अनेक प्रमुख राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाएं तीव्र गति से प्रगति पर हैं तथा कुछ महत्वपूर्ण खंडों के पूर्ण होने के साथ ही आमजन को बेहतर, सुरक्षित एवं सुगम यात्रा का लाभ मिलना प्रारंभ हो गया है।

विशेष रूप से बायपास, सर्विस रोड, मार्ग पुनर्संरेखन तथा आधुनिक इंजीनियरिंग तकनीकों के उपयोग से सड़कों का इस प्रकार विकास किया जा रहा है कि यातायात का दबाव कम हो और यात्रा अधिक सुविधाजनक बन सके।

***********************

 

गोवा में DRS: कचरा प्रबंधन को मिल रही नई दिशा

नई दिल्ली – आवासन एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) के स्वच्छ भारत मिशन – शहरी (SBM-U) 2.0 के अंतर्गत ‘वेस्ट टू वेल्थ’ का संकल्प साकार करते हुए गोवा एक अनूठे पर्यावरण हितकारी परिवर्तन का साक्षी बनने जा रहा है। राज्य सरकार की इस ‘डिपॉजिट रिफंड स्कीम’ (Deposit Refund Scheme – DRS) के माध्यम से गोवा, भारत के उन चुनिंदा राज्यों में शामिल होने जा रहा है, जो ज़िम्मेदार कचरा प्रबंधन (Responsible Waste Management) को एक वित्तीय प्रोत्साहन देने वाले मॉडल के रूप में लागू कर रहे हैं। गोवा में पणजी नगर निगम (Corporation of the City of Panaji – CCP) के मुताबिक इस योजना का प्रथम चरण जल्द ही पूरे राज्य में प्रभावी रूप से लागू कर दिया जाएगा।

शहरी और पर्यटन अर्थव्यवस्था की चुनौतियां : भारतीय शहरों में पैकेजिंग वेस्ट, विशेष रूप से पेय पदार्थों की खपत से उत्पन्न होने वाले कूड़े में लगातार वृद्धि देखी जा रही है। प्लास्टिक एवं कांच की बोतलें, एल्युमीनियम की कैन और मल्टी-लेयर पैकेजिंग (Multilayer Packaging – MLP) जैसा अपशिष्ट अक्सर वर्तमान कचरा संग्रह प्रणालियों से बाहर रह जाता है। ये अपशिष्ट सामग्री विशेष रूप से समुद्र तटों, सड़कों, बाजारों और परिवहन केंद्रों पर अक्सर देखने को मिलती है। गोवा, एक प्रमुख पर्यटन स्थल होने के नाते, इस चुनौती का सामना और भी तीव्रता से कर रहा है।

योजना के तीन प्राथमिक उद्देश्य : नगर निगम और राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (Goa State Pollution Control Board – GSPCB) द्वारा साझा की गई रिपोर्ट्स के अनुसार, इस नीति का प्राथमिक उद्देश्य राज्य के ईको-सिस्टम को पूरी तरह अपशिष्ट एवं प्रदूषण मुक्त बनाए रखना है। यह योजना तीन मुख्य उद्देश्यों को हासिल करना चाहती है, जिनमें पहली स्रोत पर अपशिष्ट की रिकवरी कर कचरे को मैटेरियल रिकवरी फैसिलिटी (MRF) सेंटर्स पर पहुंचाकर मिश्रित कचरे में मिलने से पहले ही रोकना है। अक्सर दिखाई देने वाले कचरे को खत्म कर सार्वजनिक स्थलों और समुद्र तटों जैसे संवेदनशील क्षेत्रों को साफ बनाए रखना है। रीसाइक्लिंग में दक्षता हासिल करना है, ताकि स्वच्छ सामग्री के प्रवाह (Cleaner Material Streams) से रीसाइक्लिंग प्रक्रिया को मजबूत बनाए रखना भी अहम है।

नागरिकों पर केंद्रित रिवॉर्ड सिस्टम : इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता इसका नागरिकों पर केंद्रित रिवॉर्ड सिस्टम है। इसके तहत, चिन्हित उत्पादों की खरीदारी के दौरान उनके बाजार मूल्य (Maximum Retail Price – MRP) के ऊपर मामूली ‘रिफंडेबल डिपॉजिट’ या ग्रीन डिपॉजिट देना होगा। ग्राहक द्वारा जमा की गई यह अतिरिक्त राशि तब तक पैकेजिंग यूनिट से जुड़ी रहती है, जब तक उसे वापस नहीं किया जाता। इस्तेमाल के बाद, उपभोक्ता द्वारा खाली पैकेजिंग या बोतल आदि को विभागों द्वारा निर्धारित केंद्रों पर लौटाने पर यह राशि तुरंत उसे लौटा दी जाएगी। योजना के अंतर्गत खरीदारी के समय ग्राहकों को QR-लिंक्ड उत्पाद (QR-linked products at purchase) उपलब्ध कराए जाएंगे, जो लौटाए जाने पर भुगतान से पहले आसानी से स्कैन किए जा सकेंगे।

शुरुआती चरण में, इस नीति को रणनीतिक रूप से केवल कांच की बोतलों (Glass Bottles) पर लागू किया जा रहा है, क्योंकि पर्यटन प्रधान राज्य होने के नाते गोवा में कांच का कचरा एक बड़ी चुनौती रहा है। आगामी चरणों में इसे मल्टी-लेयर प्लास्टिक (Multi-Layer Plastic – MLP) और पॉलीइथाइलीन टेरेफ्थेलेट (Polyethylene Terephthalate – PET) बोतलों तक विस्तारित करने की योजना है। खरीदारी के समय जमा की जाने वाली राशि प्रति बोतल ₹2 से ₹10 तक होगी, जो एक ‘behaviour-change incentive’ (व्यवहार बदलने वाले प्रोत्साहन) के रूप में कार्य करेगी।

व्यापक रिटर्न ईकोसिस्टम (Multi-channel Return Infrastructure) : इस पहल के अंतर्गत नागरिकों की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए सरकार ने बहु-स्तरीय ढांचा तैयार किया है, जिसमें संग्रहण केंद्रों (Collection Centres) को शहरी ही नहीं, ग्रामीण क्षेत्रों में स्थापित किया जा रहा है। इसके अंतर्गत रिटेल और कम्युनिटी पॉइंट्स को भी जोड़ा गया है, जिसमें खुदरा दुकानें और सामुदायिक प्रतिष्ठान भी शामिल हैं। यह सेवाएं डोर-स्टेप के कॉन्सेप्ट पर भी विकसित की जा रही हैं, ताकि घरों से लेकर बड़े संस्थानों (Bulk Generators) के लिए संग्रह की सुविधाएं सुनिश्चित की जा सकें।

DRS फ्रेमवर्क के तहत, हर एक बोतल या यूनिट पर एक निश्चित रिफंडेबल डिपॉजिट तय है। यह ‘पर-यूनिट वैल्यू मैकेनिज्म’ खास तौर पर सफाईमित्रों को कुछ सामग्रियों से काफी अधिक कमाई करने की अवसर देगा, जिससे उनकी सामाजिक और आर्थिक स्थिति में सुधार हो सकेगा। यह योजना न केवल सड़कों और लैंडफिल से कचरे का बोझ कम करेगी, बल्कि मुख्य रूप से समुद्र तटों की स्वच्छता व सुंदरता में भी अभूतपूर्व परिवर्तन लाने का काम करेगी। यह योजना स्वच्छता एवं पर्यावरण संरक्षण सुनिश्चित करने के साथ-साथ ‘ईज ऑफ लिविंग’ (Ease of Living) और सर्कुलर इकॉनमी को भी बढ़ावा देगी।

***************************

 

श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने राष्ट्रीय कैरियर सेवा (एनसीएस) पोर्टल के माध्यम से रोजगार माध्यम बढ़ाने के लिए पोर्टर और गिगिन टेक्नोलॉजीज के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए

नई दिल्ली – श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने आज केंद्रीय श्रम एवं रोजगार एवं युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया और श्रम एवं रोजगार मंत्रालय की सचिव सुश्री वंदना गुरनानी की उपस्थिति में पोर्टर और गिगिन टेक्नोलॉजीज के साथ समझौता ज्ञापनों (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए। इसका उद्देश्य राष्ट्रीय कैरियर सेवा (एनसीएस) पोर्टल के माध्यम से रोजगार के अवसरों का विस्तार करना और डिजिटल नौकरी मिलान को मजबूत करना है।

इस अवसर पर, श्रम एवं रोजगार एवं युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा, “एनसीएस प्लेटफॉर्म युवाओं के लिए उनकी कौशल क्षमता के अनुरूप रोजगार के अवसर तलाशने का एक प्रभावी और संपूर्ण समाधान बनकर उभरा है। पोर्टल पर वर्तमान में 7 लाख से अधिक रिक्तियां सक्रिय हैं और लगभग 59 लाख प्रतिष्ठान एनसीएस पर पंजीकृत हैं, इससे युवा नौकरी चाहने वालों के लिए अनेक अवसर खुल गए हैं।” केंद्रीय मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि एनसीएस की गिगिन और पोर्टर प्लेटफॉर्म के साथ साझेदारी सभी हितधारकों के लिए पारस्परिक रूप से लाभकारी सिद्ध होगी और एनसीएस पोर्टल को और सशक्त बनाएगी।

डॉ. मांडविया ने एनसीएस पोर्टल के ई-माइग्रेट, एसआईडीएच और माय भारत प्लेटफॉर्म के साथ-साथ विभिन्न राज्यों के पोर्टलों के साथ एकीकरण पर प्रकाश डाला। इससे यह वास्तव में व्यापक और परिवर्तनकारी पहुंच वाला पोर्टल बन गया है। कौशल अंतर की समस्या को दूर करने की आवश्यकता पर बल देते हुए, उन्होंने एनसीएस के साथ-साथ गिगिन और पोर्टर से पंजीकृत नौकरी चाहने वालों को सॉफ्ट स्किल्स में प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए तंत्र विकसित करने का आग्रह किया। उन्होंने सुझाव दिया, “नौकरी चाहने वालों की मांग और उद्योग की आवश्यकताओं के अनुसार तैयार किए गए अल्पकालिक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम, कौशल अंतर को पाटने और हमारे युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाने में बहुत सहायक होंगे।”

 

श्रम एवं रोजगार सचिव, सुश्री वंदना गुरनानी ने एनसीएस पोर्टल के व्यापक पैमाने और प्रभाव के बारे में कहा कि इसकी स्थापना के बाद से ही इसने 6 करोड़ से अधिक नौकरी चाहने वालों को पंजीकृत करने के साथ ही 9 करोड़ से अधिक रिक्तियों को सृजित किया है। यह भारत के रोजगार तंत्र के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में इसकी बढ़ती भूमिका को दर्शाता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पोर्टर और गिगिन टेक्नोलॉजीज के साथ साझेदारी से बढ़ी हुई भागीदारी और सहयोग के माध्यम से इस मंच को और मजबूती मिलेगी। सचिव ने इस पहल को सफल बनाने में दोनों भागीदारों की सक्रिय भागीदारी की आशा व्यक्त की और कहा कि यह सहयोग देश भर में बड़ी संख्या में युवा नौकरी चाहने वालों के लिए स्थायी और सम्मानजनक आजीविका के अवसर खोलेगा, इससे अधिक समावेशी और भविष्य के लिए तैयार श्रम बाजार में योगदान मिलेगा।

स्मार्टशिफ्ट लॉजिस्टिक्स सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड (पोर्टर) के प्रतिनिधि ने बताया कि पोर्टर एक अग्रणी प्रौद्योगिकी-आधारित माल परिवहन एजेंसी है जो तकनीकी प्लेटफार्मों के माध्यम से निर्बाध और टिकाऊ शहरी लॉजिस्टिक्स सेवाएं प्रदान करती है। एनसीएस पोर्टल के साथ अपनी साझेदारी के माध्यम से, पोर्टर ड्राइविंग और लॉजिस्टिक्स से सम्बंधित अवसरों को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देगा, पोर्टल की व्यापक पहुंच का लाभ उठाते हुए संभावित श्रमिकों और सेवा प्रदाताओं के लिए संरचित और पारदर्शी आजीविका के अवसरों तक वास्तविक समय में पहुंच प्रदान करेगा। पोर्टर का लक्ष्य लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में रोजगार के लिए एक संरचित और विस्तार योग्य मार्ग तैयार करने के लिए एनसीएस प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्रतिवर्ष लगभग 6 लाख अवसर और 2030 तक लगभग 30 लाख अवसर सृजित करना है।

गिगिन के प्रतिनिधि ने बताया कि यह प्लेटफॉर्म एक बहुआयामी प्रौद्योगिकी इको-सिस्टम के रूप में कार्य करता है, जो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), सत्यापन बुद्धिमत्ता और सर्वव्यापी पहुंच का उपयोग करके सम्मानजनक और सत्यापित रोजगार के अवसर प्रदान करता है। यह समझौता ज्ञापन सरकार के रोजगार सुविधा तंत्र के साथ डिजिटल भर्ती और सत्यापित नौकरी मिलान को एकीकृत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इस सहयोग के तहत, गिगिन प्रतिवर्ष कम से कम 2-3 लाख प्रामाणिक रोजगार के अवसर सृजित करने और 1.5 लाख से अधिक नियोक्ताओं के साथ जुड़ने में सहायता करेगा। इस साझेदारी के माध्यम से, नौकरी की सत्यापित सूचियां और नियोक्ता संपर्क एनसीएस पोर्टल के माध्यम से प्रसारित किए जाएंगे। इससे पंजीकृत उम्मीदवारों के लिए पारदर्शी, विश्वसनीय और भरोसेमंद रोजगार के अवसरों तक पहुंच का विस्तार होगा। इस पहल से नौकरी मिलान की दक्षता में सुधार, नियोक्ताओं की भागीदारी में वृद्धि और पहुंच में विस्तार होने की उम्मीद है। इससे अधिक समावेशी, प्रौद्योगिकी-सक्षम और उत्तरदायी श्रम बाजार इको-सिस्टम में योगदान मिलेगा।

 

इन सहयोगों से पहुंच मजबूत होने, रोजगार के अवसरों की जानकारी बढ़ाने और प्रौद्योगिकी-आधारित एवं पारदर्शी प्रणाली के माध्यम से श्रम बाजार में अधिक समावेश को बढ़ावा मिलने की आशा है। देश भर में समावेशी, सुरक्षित और डिजिटल रूप से सक्षम आजीविका को बढ़ावा देने के मंत्रालय के दृष्टिकोण के अनुरूप, ये सहयोग नवोन्मेषी भारतीय कंपनियों के साथ काम करने और देश के कार्यबल के लिए टिकाऊ, सम्मानजनक, सुलभ और भविष्य के लिए तैयार रोजगार मार्ग सृजित करने हेतु डिजिटल नवाचार और विश्वसनीय साझेदारियों का लाभ उठाने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाते हैं।

 

************************

 

रायसेन में उन्नत कृषि महोत्सव का भव्य समापन, हजारों किसानों के साथ कृषि बदलाव का नया संकल्प

नई दिल्ली – राष्ट्रीय स्तर के महत्वपूर्ण कृषि मेले “उन्नत कृषि महोत्सव” का रायसेन में अत्यंत उत्साह, उमंग, नवाचार और हजारों किसानों की गरिमामयी उपस्थिति के बीच भव्य समापन हुआ। समापन सत्र में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी ने जहां सड़क विकास, कृषि तकनीक, जल संरक्षण, वैकल्पिक ऊर्जा और ग्रामीण समृद्धि का व्यापक विजन रखा, वहीं केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने बीज से बाजार तक तैयार रोडमैप को जमीन पर उतारने का दृढ़ संकल्प दोहराया।

 

शिवराज सिंह चौहान द्वारा रखी गई क्षेत्रीय मांगों पर महत्वपूर्ण घोषणाएँ

रायसेन में केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की पहल पर आयोजित “उन्नत कृषि महोत्सव” के समापन सत्र में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी ने केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा रखी गई क्षेत्रीय मांगों पर महत्वपूर्ण घोषणाएँ करते हुए विकास की नई सौगात दी। उन्होंने रायसेन रिंग रोड/पूर्वी बायपास के प्रस्ताव को आगे बढ़ाने, संबंधित डीपीआर तैयार करने, भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया राज्य सरकार द्वारा बढ़ाए जाने और पुलों के सौंदर्यीकरण संबंधी मांगों पर सकारात्मक सहमति व्यक्त की। उन्होंने यह भी कहा कि अन्य सड़क संबंधी प्रस्तावों पर भी जो संभव सहयोग होगा, वह किया जाएगा।

ज्ञान को संपत्ति में बदलना आज कृषि क्षेत्र की सबसे बड़ी जरूरत है

अपने संबोधन में श्री गडकरी ने कहा कि वे इस कार्यक्रम में मंत्री के रूप में नहीं, बल्कि किसान के रूप में आए हैं। उन्होंने कहा कि खेती का भविष्य अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, वेदर स्टेशन, सैटेलाइट आधारित सूचना, ड्रोन, नैनो यूरिया और आधुनिक कृषि तकनीकों से जुड़ चुका है, इसलिए किसानों को समय के साथ बदलना होगा। उन्होंने कहा कि ज्ञान सबसे बड़ी शक्ति है और ज्ञान को संपत्ति में बदलना आज कृषि क्षेत्र की सबसे बड़ी जरूरत है। उन्होंने किसानों से इनोवेशन, रिसर्च, सफल प्रयोगों और तकनीक-आधारित खेती को अपनाने का आह्वान किया, ताकि कम लागत में अधिक उत्पादन संभव हो सके।

श्री गडकरी ने कहा कि किसान केवल अन्नदाता नहीं रहेगा, बल्कि ऊर्जा दाता, ईंधन दाता, हवाई ईंधन दाता, डामर दाता और हाइड्रोजन दाता भी बनेगा। उन्होंने कहा कि कृषि अवशेष, पराली, बायोमास, इथेनॉल, सीएनजी और हाइड्रोजन के माध्यम से किसानों के लिए आय के नए रास्ते खुलेंगे, आयात घटेगा और गांवों की अर्थव्यवस्था को नई ताकत मिलेगी।

जल संरक्षण पर विशेष बल

जल संरक्षण पर विशेष बल देते हुए श्री गडकरी ने कहा कि दौड़ते हुए पानी को चलने के लिए, चलने वाले पानी को रुकने के लिए और रुके हुए पानी को जमीन को पिलाने के लिए लगाना होगा। उन्होंने “गांव का पानी गांव में, खेत का पानी खेत में, घर का पानी घर में” का संदेश देते हुए कहा कि जैसे पैसा बैंक में जमा किया जाता है, वैसे ही पानी को जमीन में डिपॉजिट करना होगा।

उन्होंने कहा कि जहां सिंचाई का पानी सीधे नहीं पहुँच सकता, वहां जल संरक्षण की संरचनाएँ बड़ी भूमिका निभा सकती हैं।

उन्होंने डेयरी, मत्स्य पालन और ब्लू इकोनॉमी को किसानों की आय बढ़ाने के बड़े माध्यम बताते हुए कहा कि दुग्ध उत्पादन, मत्स्य उत्पादन और उससे जुड़ी गतिविधियों पर गंभीरता से ध्यान देना होगा। श्री गडकरी ने कहा कि केवल उत्पादन बढ़ाना काफी नहीं है, बल्कि प्रोसेसिंग प्लांट, कोल्ड स्टोरेज, प्री-कूलिंग सिस्टम और वैल्यू एडिशन की मजबूत व्यवस्था भी बनानी होगी। उन्होंने कहा कि जब बाजार में उत्पादन अधिक होता है तो कीमतें गिर जाती हैं, इसलिए भंडारण और प्रसंस्करण की मजबूत व्यवस्था किसानों को बेहतर दाम दिलाने के लिए आवश्यक है।

उन्होंने किसानों से आग्रह किया कि वे मेले में लगे स्टॉल, मशीनरी प्रदर्शन, पॉलीहाउस, ग्रीनहाउस, हाइड्रोपोनिक्स, एक एकड़ खेती के मॉडल, बकरी पालन, मछली पालन और अन्य तकनीकी सत्रों को देखकर जाएँ, सीखकर जाएँ और उसे खेत में लागू करें। उन्होंने कहा कि यही ज्ञान, यही तकनीक और यही प्रयोग किसानों का भविष्य बदलेंगे, गांवों को समृद्ध बनाएंगे और स्मार्ट सिटी के साथ स्मार्ट विलेज की दिशा को मजबूत करेंगे।

शिवराज सिंह के मुख्यमंत्रीत्व कार्यकाल की म.प्र. की कृषि उपलब्धियों की सराहना

श्री गडकरी ने शिवराज सिंह के मुख्यमंत्रीत्व कार्यकाल में मध्य प्रदेश की कृषि उपलब्धियों की सराहना करते हुए कहा कि किसानों को उन्नत बनाने के लिए इस तरह के आयोजन बेहद महत्वपूर्ण हैं और यह महोत्सव किसानों को भविष्य की नई प्रेरणा देने वाला सिद्ध होगा।

यह समापन नहीं, बल्कि नई शुरुआत है

केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि “उन्नत कृषि महोत्सव” कोई कर्मकांड नहीं है और यह समापन नहीं, बल्कि नई शुरुआत है। उन्होंने कहा कि चार दिनों तक चले इस आयोजन ने किसानों के लिए पाठशाला का काम किया, जहाँ मिट्टी की महक, मशीन की शक्ति, नवाचार, तकनीक और विकास का अद्भुत संगम देखने को मिला। श्री चौहान ने कहा कि इस क्षेत्र की माटी, जलवायु, जल उपलब्धता और संसाधनों के आधार पर बीज से बाजार तक का विस्तृत रोडमैप तैयार किया गया है। उन्होंने कहा कि इस रोडमैप में यह तय किया गया है कि इस क्षेत्र में कौन-कौन सी फसलें, फल और सब्जियाँ अच्छी हो सकती हैं और उनके उत्पादन, प्रोसेसिंग तथा मार्केटिंग की संपूर्ण योजना कैसे बनेगी।

दलहन और बागवानी क्षेत्र का विस्तार किया जाएगा, इस क्षेत्र को हॉर्टिकल्चर हब के रूप में विकसित किया जाएगा

उन्होंने कहा कि अच्छे बीज की आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए हर ब्लॉक में बीज ग्राम बनाए जाएंगे, दलहन और बागवानी क्षेत्र का विस्तार किया जाएगा और इस क्षेत्र को हॉर्टिकल्चर हब के रूप में विकसित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ड्रिप और स्प्रिंकलर के माध्यम से पानी की एक-एक बूंद का उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा तथा कस्टम हायरिंग सेंटर और पंचायतों में मशीन बैंक बनाए जाएंगे, ताकि किसानों को आधुनिक मशीनें आसानी से मिल सकें। श्री चौहान ने कहा कि अच्छी नर्सरी और क्लीन प्लांट सेंटर स्थापित किए जाएंगे, एफपीओ को मजबूत किया जाएगा, बैक हाउस और कोल्ड हाउस बनाए जाएंगे और किसानों को उत्पादन से बाजार तक बेहतर ढांचा उपलब्ध कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि एकीकृत खेती के मॉडल के माध्यम से छोटे खेत के टुकड़े पर भी अधिक आमदनी प्राप्त की जा सकती है और सरकार किसानों की आय बढ़ाकर ही चैन की सांस लेगी।

रोडमैप की मॉनिटरिंग के लिए टास्क फोर्स बनाई जाएगी

उन्होंने स्पष्ट किया कि इस पूरे रोडमैप की मॉनिटरिंग के लिए टास्क फोर्स बनाई जाएगी तथा राष्ट्रीय स्तर की संचालन समिति गठित की जाएगी। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार की टीमें मिलकर यह सुनिश्चित करेंगी कि जो संकल्प लिए गए हैं, वे केवल घोषणा बनकर न रह जाएँ, बल्कि पूरी ताकत के साथ जमीन पर उतरें।

किसानों से फार्मर आईडी बनवाने की अपील

श्री चौहान ने किसानों से फार्मर आईडी बनवाने की अपील करते हुए कहा कि भविष्य में खेती से जुड़ी अनेक सेवाएँ, योजनाएँ और प्रक्रियाएँ इससे आसान होंगी। उन्होंने किसानों को भरोसा दिलाया कि उनकी जिंदगी बदलने, उनके चेहरे पर मुस्कान लाने और खेती को लाभ का धंधा बनाने में सरकार कोई कसर नहीं छोड़ेगी।

प्रधानमंत्री जी के नेतृत्व में विकसित भारत के निर्माण में कृषि को पीछे नहीं रहने दिया जाएगा

अपने संबोधन में श्री चौहान ने केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी का स्वागत करते हुए कहा कि वे ऐसे मंत्री हैं जो असंभव को संभव करके दिखाते हैं, नई तकनीक और नवाचार से देश में समृद्धि लाने का काम करते हैं और समयबद्ध कार्यशैली के लिए पहचाने जाते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में विकसित भारत के निर्माण में कृषि को पीछे नहीं रहने दिया जाएगा और किसानों की सेवा ही सरकार के लिए सर्वोच्च दायित्व है।

किसानों को हितलाभों का वितरण

समापन सत्र में किसानों को हितलाभों का वितरण भी किया गया। इस अवसर पर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर और हरियाणा के कृषि मंत्री श्री श्याम सिंह राणा ने भी संबोधित किया। कार्यक्रम में मध्य प्रदेश के उप मुख्यमंत्री श्री जगदीश देवड़ा, मंत्री श्री करण सिंह वर्मा, श्री नारायण सिंह पवार, श्री नरेंद्र शिवाजी पटेल, सांसद श्री दर्शन सिंह चौधरी, विधायक डॉ. सुरेन्द्र चौधरी, श्री रमाकांत भार्गव, श्री हरि सिंह रघुवंशी, श्री हरि सिंह सप्रे, श्री मुकेश टंडन, श्री गोपाल सिंह इंजीनियर, श्री आशीष शर्मा, अन्य जनप्रतिनिधि, कृषि वैज्ञानिक, विशेषज्ञ, वरिष्ठ अधिकारी तथा हजारों किसान भाई-बहन उपस्थित रहे।

*************************

राष्ट्रीय कैडेट कोर ने कैडेटों के लिए राष्ट्रव्यापी साइबर सुरक्षा क्षमता निर्माण कार्यक्रम शुरू किया

नई दिल्ली – राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) ने राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईईएलआईटी) के सहयोग से कैडेटों को साइबर जागरूकता, डिजिटल स्वच्छता और व्यावहारिक साइबर सुरक्षा कौशल में संरचित प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए व्यापक साइबर सुरक्षा क्षमता निर्माण कार्यक्रम शुरू किया है। एनसीसी के महानिदेशक लेफ्टिनेंट जनरल वीरेंद्र वत्स और एनआईईएलआईटी के महानिदेशक डॉ. मदन मोहन त्रिपाठी की उपस्थिति में एनसीसी और एनआईईएलआईटी के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए।

 

पहले चरण में साइबर सुरक्षा जागरूकता कार्यक्रम होगा। यह एक 15 घंटे का ऑनलाइन प्रशिक्षण मॉड्यूल है। इसे डिजिटल साक्षरता, सुरक्षित इंटरनेट उपयोग, साइबर स्वच्छता और साइबर खतरों के बारे में बुनियादी जानकारी प्रदान करने के लिए तैयार किया गया है। यह चरण देश भर के सभी पंजीकृत एनसीसी कैडेटों के लिए खुला रहेगा और इसे एनआईईएलआईटी डिजिटल यूनिवर्सिटी प्लेटफॉर्म के माध्यम से संचालित किया जाएगा।

दूसरें चरण में साइबर रक्षा कार्यक्रम होगा। यह एक गहन 60 घंटे का ऑफ़लाइन प्रशिक्षण है। इसे योग्यता-आधारित स्क्रीनिंग प्रक्रिया के माध्यम से चयनित कैडेटों के लिए तैयार किया गया है। इस चरण में व्यावहारिक प्रशिक्षण, वास्तविक जीवन के सिमुलेशन और साइबर सुरक्षा उपकरणों और तकनीकों के व्यावहारिक अनुभव पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। इससे कैडेट साइबर खतरों को प्रभावी ढंग से पहचानने और उनसे निपटने में सक्षम होंगे।

इस पहल का उद्देश्य जमीनी स्तर पर साइबर जागरूकता फैलाने, सुरक्षित डिजिटल तौर-तरिकों को बढ़ावा देने और साइबर सुरक्षा पहलों का समर्थन करने में योगदान देने के लिए प्रशिक्षित एनसीसी साइबर कैडेटों का एक समूह तैयार करना है। यह कार्यक्रम डिजिटल इंडिया और राष्ट्रीय कौशल योग्यता ढांचा (एनएसक्यूएफ) के तहत राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप भी है।

************************

 

राँची जिला अंतर्गत भारत की जनगणना 2027 के प्रथम चरण (मकानसूचीकरण एवं मकानों की गणना-HLO) हेतु फील्ड ट्रेनर्स का प्रशिक्षण कार्यक्रम प्रारंभ

उपायुक्त-सह-प्रधान जिला जनगणना पदाधिकारी, राँची की अध्यक्षता में जनगणना 2027 के प्रथम चरण के सफल संचालन के लिए फील्ड ट्रेनर्स (Field Trainers) का विस्तृत प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है

प्रशिक्षित फील्ड ट्रेनर्स आगे अपने-अपने चार्ज क्षेत्रों में प्रगणकों (Enumerators) एवं सुपरवाइजर्स को प्रशिक्षण देंगे, जिससे जनगणना 2027 के प्रथम चरण को पूर्णतः डिजिटल, सटीक एवं समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा सके

राँची,13.04.2026 – उपायुक्त-सह-प्रधान जिला जनगणना पदाधिकारी, राँची की अध्यक्षता में जनगणना 2027 के प्रथम चरण के सफल संचालन के लिए फील्ड ट्रेनर्स (Field Trainers) का विस्तृत प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है।

द्वितीय बैच का तीन दिवसीय प्रशिक्षण आज दिनांक 13 अप्रैल 2026 से CMMS पोर्टल एवं मोबाइल एप के माध्यम से डिजिटल प्रशिक्षण के रूप में आयोजित किया जा रहा है। राँची जिले में कुल 70 फील्ड ट्रेनर्स* को दो बैचों में विभाजित किया गया है, जिसमें प्रत्येक बैच में 35 फील्ड ट्रेनर्स शामिल हैं।

द्वितीय बैच (35 फील्ड ट्रेनर्स) का प्रशिक्षण दिनांक 13, 15 एवं 16 अप्रैल 2026 को समाहरणालय के बी ब्लॉक, कमरा संख्या 505 में जिला स्तर के मास्टर ट्रेनर्स द्वारा दिया जा रहा है। इस प्रशिक्षण में जनगणना कार्य निदेशालय, झारखण्ड, राँची के मार्गदर्शन में श्री रविशंकर मिश्रा एवं श्री संजीव कुमार द्वारा CMMS Portal एवं Mobile App के उपयोग, मकान सूचीकरण, मकानों की गणना, डिजिटल डेटा संग्रहण तथा हाउस लिस्टिंग ऑपरेशन (HLO) संबंधी विस्तृत जानकारी प्रदान की जा रही है।

संबद्ध क्षेत्र (द्वितीय बैच):

 नगर पंचायत बुण्डू

चान्हो

रातु

खलारी

ओरमांझी

 नामकुम

ईटकी

अनगड़ा

प्रशिक्षित फील्ड ट्रेनर्स आगे अपने-अपने चार्ज क्षेत्रों में प्रगणकों (Enumerators) एवं सुपरवाइजर्स को प्रशिक्षण देंगे, जिससे जनगणना 2027 के प्रथम चरण को पूर्णतः डिजिटल, सटीक एवं समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा सके।

जनगणना 2027 भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण जन-कल्याणकारी योजना है, जो देश की विकास योजनाओं एवं नीति निर्धारण के लिए आधारभूत आंकड़े उपलब्ध कराएगी।

प्रशिक्षण के प्रथम दिन चार्ज पदाधिकारी प्रशिक्षण में उपस्थित रहे।

इस दौरान श्री सुदर्शन मुर्मू, अपर समाहर्त्ता (नक्सल) सह- नोडल पदाधिकारी, श्री शेषनाथ बैठा, जिला सांख्यिकी पदाधिकारी-सह-उप जिला जनगणना पदाधिकारी, राँची उपस्थित थे।

*****************************

 

जनता दरबार बना राहत का दरबार, दिव्यांग को मिली नई राह

जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के जनता दरबार में विभिन्न विभागों से जुड़ी शिकायतों पर त्वरित और प्रभावी कार्रवाई

अनगड़ा सीओ को शोकॉज, फर्जी दस्तावेज के माध्यम से जमीन हड़पने की शिकायत पर जांच के आदेश

मंगलवार की जगह बुधवार को अंचल में आयोजित होगा जनता दरबार

रांची,13.04.2026 – बहुत अच्छा लगा…. आप लोगों को बहुत-बहुुत धन्यवाद करते हैं… हम आशा जो किये और वो पूरा हुआ… आज आये और एक बार एप्लीकेशन लिख कर दिये तो सीएम साहब ने निराश करके नहीं भेजे, हमको इलेक्ट्रिक ट्राईसाइकिल मिल गया… ये शब्द दिव्यांग रामेश्वर महतो के हैं, जो ईटकी से जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री के जनता दरबार में आये थे। उन्होंने इलेक्ट्रिक ट्राईसाइकिल के लिए आवेदन दिया, जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने फौरन उन्हें साईकिल उपलब्ध कराने के निर्देश दिये और रामेश्वर महतो बैशाखी के बजाए इलेक्ट्रिक ट्राईसाइकिल से अपने घर लौटे।

रांची जिला प्रशासन द्वारा आयोजित जनता दरबार एक बार फिर आमजन के लिए राहत और न्याय का सशक्त मंच साबित हुआ। जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में आयोजित इस दरबार में विभिन्न विभागों से जुड़ी शिकायतों पर त्वरित और प्रभावी कार्रवाई की गई।

अनगड़ा सीओ को शोकॉज, जांच के आदेश

अनगड़ा अंचल के सुदेश कुमार ने जनता दरबार में अपनी जमीन की फर्जी दस्तावेज के माध्यम से जमीन हड़पने की शिकायत की। अनगड़ा सीओ से फौरन ऑनलाइन बात करते हुए जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने पूरी जानकारी ली। उन्होंने अनगड़ी सीओ को शोकॉज करने के साथ पूरे मामले की जांच सहायक बंदोबस्त पदाधिकारी द्वारा करने और प्रतिवेदन समर्पित करने के आदेश दिये।

पंजी-2 सुधार से संबंधित जनता दरबार में कई आवेदन प्राप्त हुए, जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा संबंधित सीओ से तत्काल ऑनलाइन माध्यम से जानकारी लेते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिये गये। बेड़ो अंचल से संबंधित पजी-2 सुधार के मामले में जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने अंचल में आयोजित होनेवाले जनता दरबार में मामले का निष्पादन सुनिश्चित करने के निर्देश दिये।

इसके अतिरिक्त, भूमि सीमांकन, दाखिल-खारिज में विलंब, अतिक्रमण, एवं रसीद निर्गत नहीं होने जैसी शिकायतें भी सामने आईं। जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने इन सभी मामलों को प्राथमिकता के आधार पर निष्पादित करने का निर्देश देते हुए कहा कि राजस्व से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

झारखण्ड मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना से संबंधित शिकायतों पर भी संज्ञान लेते हुए जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने संबंधित पदाधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए, ताकि पात्र लाभुकों को योजना का लाभ समय पर मिल सके।

मंगलवार की जगह बुधवार को अंचल में आयोजित होगा जनता दरबार

इस अवसर पर जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने एक महत्वपूर्ण निर्देश देते हुए कहा कि मंगलवार को अवकाश के कारण अब सभी अंचलों में जनता दरबार बुधवार को आयोजित किया जाएगा। उन्होंने सभी अंचल अधिकारियों को निर्देशित किया कि अधिक से अधिक राजस्व मामलों का निष्पादन सुनिश्चित कर आम जनता को राहत प्रदान करें।

*****************************