हिन्दी में विधायी प्रारूपण क्षमता सुदृढ़ करने हेतु आईएलडीआर का तीसरा बुनियादी प्रशिक्षण पाठ्यक्रम आरंभ

नई दिल्ली – विधायी प्रारूपण और अनुसंधान संस्थान ने भारत सरकार की नीति के अंतर्गत हिन्दी में मूल प्रारूपण का प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए तीसरा बुनियादी पाठ्यक्रम तैयार किया है, जिसका उद्देश्य राज्य सरकारों/संघ राज्य क्षेत्रों के अधिकारियों को प्रशिक्षण देना है, ताकि हिन्दी में विधायी प्रारूपण की क्षमता का विकास किया जा सके और हिन्दी में विधायी प्रारूपण को प्राथमिकता दी जा सके। इसी क्रम में, विधि और न्याय मंत्रालय के विधायी विभाग के तत्वावधान में स्थापित विधायी प्रारूपण और अनुसंधान संस्थान (आई.एल.डी.आर.) द्वारा हिन्दी में मूल प्रारूपण के प्रशिक्षण हेतु एक माह के तीसरे बुनियादी पाठ्यक्रम का आयोजन विधायी प्रशिक्षण सभागार, कर्त्तव्य भवन-2, नई दिल्ली में किया जा रहा है।

उक्त तीसरे बुनियादी पाठ्यक्रम का शुभारंभ डॉ. मनोज कुमार, अपर सचिव एवं पाठ्यक्रम निदेशक (आई.एल.डी.आर.) ने किया, इस अवसर पर डॉ के वी कुमार, अपर सचिव, डॉ ब्रजेश कुमार सिंह, संयुक्त सचिव एवं विधायी परामर्शी, श्री अश्वनी, संयुक्त सचिव एवं विधायी परामर्शी, श्री पुण्डरीक शर्मा, संपादक, डॉ सुधा चौधरी, उप विधायी परामर्शी, श्री कृष्ण कुमार शर्मा, उप विधायी परामर्शी तथा विधायी विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

इस पाठ्यक्रम में विधायी प्रारूपण के सैद्धांतिक पहलुओं के अतिरिक्त व्यावहारिक प्रशिक्षण का भी समावेश किया गया है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में भारत सरकार के पाँच मंत्रालयों/विभागों तथा तीन राज्य सरकार—छत्तीसगढ़, बिहार और उत्तराखंड—के अधिकारी भाग ले रहे हैं। यह कार्यक्रम समकालीन विधायी प्रारूपण कौशल को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है। साथ ही, इस पाठ्यक्रम में सरल एवं स्पष्ट (Plainlanguage) भाषा में विधायी प्रारूपण पर विशेष बल दिया जा रहा है, ताकि विधायी प्रावधान अधिक सुगम, बोधगम्य और जन-सामान्य के लिए सहज रूप से समझने योग्य बन सकें।

 

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केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने वर्ष 2026 के पहले तीन महीनों में 73 मादक पदार्थ अपराधियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए NCB को बधाई दी

हमारे युवाओं को नशे के अभिशाप से बचाने के लिए मोदी सरकार नशा तस्करी के गिरोहों का निर्ममता से सफाया कर रही है और उनके दोषसिद्धि सुनिश्चित भी कर रही है

हम पूरी शक्ति के साथ नशा तस्करी के हर संभावित ठिकाने और गुंजाइश को समाप्त करने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं

इसके परिणामस्वरूप दोषसिद्धि दर में लगातार वृद्धि हुई है—2024 में 60.5% से बढ़कर 2025 में 65.5% और अब 2026 की पहली तिमाही में 68.6% हो गई है

नई दिल्ली – केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने वर्ष 2026 के पहले तीन महीनों में 73 मादक पदार्थ अपराधियों को कड़ी सजा दिलाने के लिए नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) को बधाई दी।

श्री अमित शाह ने X पर जारी एक पोस्ट में कहा, “हमारे युवाओं को नशीले पदार्थों की महामारी से बचाने के लिए मोदी सरकार दृढ़ता से ड्रग कार्टलों का सफाया कर रही है और उनकी सजा सुनिश्चित कर रही है। इस मिशन के तहत नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने 2026 के पहले तीन महीनों में 73 ड्रग अपराधियों को दोषी ठहराकर सख्त से सख्त सजा दिलाई है। हम ड्रग रैकेटों की साँस लेने की हर एक जगह बंद करने के लिए अपनी पूरी ताकत के साथ संकल्पबद्ध हैं। NCB को इस उपलब्धि के लिए बधाई। “

वर्ष 2026 की पहली तिमाही यानी जनवरी से मार्च तक, एनसीबी ने 35 मामलों में 73 ड्रग अपराधियों को दोषी करार दिया है। इनमें से चार अपराधियों को अधिकतम 20 वर्ष की सजा सुनाई गई, जबकि 54 अन्य को 10 वर्ष या उससे अधिक की सजा दी गई। दोषियों पर कुल 1.22 करोड़ रुपये का जुर्माना भी लगाया गया।

NCB की मुकदमों की निगरानी पर केंद्रित रणनीति के कारण दोषसिद्धि दर में निरंतर वृद्धि हुई है। यह दर वर्ष 2024 में 60.5 प्रतिशत से बढ़कर वर्ष 2025 में 65.5 प्रतिशत हो गई और अब वर्ष 2026 की पहली तिमाही में 68.6 प्रतिशत पहुंच गई है।

महत्वपूर्ण दोषसिद्धियों में वर्ष 2021 में अहमदाबाद एयरपोर्ट पर 2.757 किलोग्राम हेरोइन जब्ती का अंतरराष्ट्रीय हेरोइन तस्करी मामला और वर्ष 2022 में फाजिल्का इंडोपाक बॉर्डर पर 4.235 किलोग्राम हेरोइन जब्ती का मामला शामिल हैं। इन दोनों मामलों में दो विदेशी तस्करों को 20 वर्ष की कठोर कारावास की सजा सुनाई गई है।एक अन्य महत्वपूर्ण दोषसिद्धि वर्ष 2023 के स्यूडोएफेड्रिन (pseudoephedrineडायवर्सन मामले में प्राप्त हुई, जिसमें हरियाणा का सोनीपत स्थित एम/एस आल्प्स लाइफ साइंसेज प्राइवेट लिमिटेड शामिल था। इस मामले में डायरेक्टर समेत तीन आरोपियों को सात वर्ष की कठोर कारावास की सजा के साथसाथ प्रत्येक पर 1.5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। कंपनी को भी दोषी ठहराया गया और 1.5 लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया। एनसीबी द्वारा कंपनी को स्यूडोएफेड्रिन निर्माण की अनुमति भी वापस ले ली गई है।

एनसीबी ने अन्य केंद्रीय और राज्य प्रवर्तन एजेंसियों से अपील की है कि वे ड्रग किंगपिन्स से संबंधित महत्वपूर्ण लंबित मुकदमों की पहचान करें और प्रभावी अभियोजन सुनिश्चित करें। ड्रग कार्टेल्स को तोड़ने की यह रणनीति देश में ड्रग तस्करी की चुनौती से निपटने की प्रवर्तन रणनीति का प्रमुख तत्व है तथा सरकार की ड्रग्स के प्रति जीरो टॉलरेंस की नीति की पुष्टि करती है।

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सी-डॉट ने “साइबर सुरक्षा जागरूकता बढ़ाने पर केंद्रित गेमिफिकेशन प्लेटफॉर्म के सहयोगात्मक विकास” के लिए जंप्स ऑटोमेशन के साथ साझेदारी की

इस प्लेटफॉर्म में गेमिंग एरिना, लीडरबोर्ड, लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम, चर्चा मंच और वास्तविक सिमुलेशन-आधारित परिदृश्य शामिल होंगे, जिनका उद्देश्य साइबर जागरूकता पैदा करना और संगठनों की साइबर सुरक्षा तैयारियों को बढ़ाना है

सेंटर फॉर डेवलपमेंट ऑफ टेलीमैटिक्स (सी-डॉट) ने सी-डॉट कोलैबोरेटिव रिसर्च प्रोग्राम (सीसीआरपी) के तहत जंप्स ऑटोमेशन एलएलपी के साथ एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इसका उद्देश्य व्यक्तियों और उद्यमों में साइबर सुरक्षा जागरूकता बढ़ाने के लिए एक नवोन्‍मेषी गेमिफिकेशन प्लेटफॉर्म विकसित करना है।

एक समारोह के दौरान इस समझौते पर हस्ताक्षर किया गया, जिसमें सी-डॉट के सीईओ डॉ. राजकुमार उपाध्याय, जंप्स ऑटोमेशन एलएलपी के प्रौद्योगिकी प्रमुख श्री रोहन चंदक, बोर्ड के सदस्य और सी-डॉट के अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

 

कार्यक्रम के दौरान उपस्थित सी-डॉट के सीईओ डॉ. राजकुमार उपाध्यायजंप्स ऑटोमेशन एलएलपी के प्रौद्योगिकी प्रमुख श्री रोहन चंदकबोर्ड के सदस्य और सी-डॉट के अन्य वरिष्ठ अधिकारी

इस महत्वपूर्ण साझेदारी का मुख्य उद्देश्य साइबर सुरक्षा जागरूकता को सुदृढ़ करना, साइबर सुरक्षा तैयारियों को बढ़ाना और पारंपरिक प्रशिक्षण को एक आकर्षक, संवादमूलक और प्रभावी शिक्षण अनुभव में बदलना है। इस प्लेटफॉर्म में गेमिंग एरिना, लीडरबोर्ड, लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम, चर्चा मंच और फिशिंग, सोशल इंजीनियरिंग, मैलवेयर से बचाव और समय सीमा के भीतर संकट प्रबंधन जैसे विषयों पर आधारित वास्तविक सिमुलेशन परिदृश्य शामिल होंगे। इस प्लेटफॉर्म के माध्यम से संगठन साइबर सुरक्षा को और अधिक मजबूत बना सकते हैं।

इस सॉल्‍यूशन में एक सशक्त पुरस्कार और प्रदर्शन ट्रैकिंग प्रणाली के साथ-साथ एक एआई-संचालित व्यवहार विश्लेषण इंजन शामिल होगा जो उपयोगकर्ता के प्रदर्शन का निरंतर मूल्यांकन करेगा, चुनौती की जटिलता को गतिशील रूप से समायोजित करेगा और उभरते साइबर खतरों के साथ सामग्री को अपडेट रखेगा। इसे जंप्स ऑटोमेशन की एआई और स्वचालन विशेषज्ञता एवं सी-डॉट की स्वदेशी दूरसंचार तथा सुरक्षा प्रौद्योगिकी क्षमताओं के संयोजन से बनाया जाएगा।

यह भारत में स्वदेशी प्रौद्योगिकी का उपयोग करके सामाजिक प्रभाव डालने और साइबर सुरक्षा की मजबूत संस्कृति विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह परियोजना नई दिल्ली स्थित सी-डॉट सुविधाओं में संपूर्ण सत्यापन के साथ एक संरचित विकास, परीक्षण और स्वीकृति प्रक्रिया का पालन करेगी। इस प्लेटफॉर्म को भविष्य में उद्यमों के साथ एकीकृत करने के प्रावधानों के साथ एक वाणिज्यिक-स्तरीय एसएएएस सॉल्‍यूशन के रूप में तैनात किए जाने की उम्मीद है।

साइबर सुरक्षा विभाग (सी-डॉट) के सीईओ डॉ. राजकुमार उपाध्याय ने एक प्रभावी साइबर सुरक्षा जागरूकता मंच विकसित करने में इस सहयोग के रणनीतिक महत्व पर प्रकाश डाला और आत्मनिर्भर भारत के विजन के प्रति सी-डॉट की अटूट प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने कहा कि इस मंच का उद्देश्य उपयोगकर्ताओं को साइबर खतरों को प्रभावी ढंग से पहचानने और उनसे निपटने, घटना प्रतिक्रिया क्षमताओं को मजबूत करने और वैश्विक सर्वोत्तम प्रणालियों को अपनाने में सक्षम बनाना है, जिससे देश में साइबर सुरक्षा जागरूकता और लचीलेपन की संस्कृति को मजबूत करने में योगदान मिलेगा।

इस अवसर पर श्री रोहन चंदक ने साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण को संवादमूलक और प्रभावशाली बनाने में प्लेटफॉर्म की परिवर्तनकारी क्षमता को रेखांकित किया, जिसका उद्देश्य व्यवहारिक परिवर्तन लाना और मानव-संबंधित साइबर जोखिमों को कम करना है।

सी-डॉट के बारे में:

टेलीमैटिक्स विकास केंद्र (सी-डॉट) भारत सरकार का प्रमुख दूरसंचार अनुसंधान एवं विकास केंद्र है, जो देश की रणनीतिक और सामाजिक-आर्थिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अत्याधुनिक संचार प्रौद्योगिकियों के डिजाइन, विकास और तैनाती से जुड़ा है। सी-डॉट ने उद्योग, शिक्षा जगत, स्टार्टअप और अन्य हितधारकों के साथ साझेदारी के माध्यम से दूरसंचार और संबंधित प्रौद्योगिकियों के विकास को बढ़ावा देने के लिए सी-डॉट सहयोगी अनुसंधान कार्यक्रम (सीसीआरपी) आरंभ किया है। इस सहयोगी अनुसंधान एवं विकास नीति ढांचे के तहत, सी-डॉट अपने नेतृत्व वाली परियोजनाओं की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए भारतीय स्टार्टअप, संगठनों, अनुसंधान और शैक्षणिक संस्थानों की भागीदारी आमंत्रित करता है। फंडों के अतिरिक्‍त, सी-डॉट स्वदेशी अनुसंधान और उत्पाद विकास को बढ़ावा देने के लिए एक सूत्रधार, एकीकरणकर्ता और संसाधन प्रदाता के रूप में कार्य करता है।

जंप्स ऑटोमेशन एलएलपी के बारे में:

जंप्स ऑटोमेशन एलएलपी एक प्रौद्योगिकी सॉल्‍यूशन कंपनी है जिसकी एआई, स्वचालन और अनुकूलित उद्यम एआई सॉफ्टवेयर विकास में विशेषज्ञता है। कंपनी जटिल व्यावसायिक और सामाजिक चुनौतियों को हल करने के लिए नवोनमेषी, डेटा-संचालित समाधान प्रदान करने पर ध्यान केंद्रित करती है।

कार्यक्रम के दौरान सी-डॉट के सीईओ डॉ. राजकुमार उपाध्याय प्रतिनिधिमंडल को संबोधित करते हुए।

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विधानसभाओं के लिए आम चुनाव और उपचुनाव 2026

‘ड्राई-डे’ का क्रियान्‍वयन

  1. निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने 15 मार्च, 2026 को असम, केरल, पुद्दुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की विधानसभाओं के लिए आम चुनाव और 6 राज्यों में उपचुनावों के कार्यक्रम की घोषणा की थी।
  2. तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में (चरण-1) मतदान 23 अप्रैल, 2026 तथा पश्चिम बंगाल (चरण-II) के लिए मतदान 29 अप्रैल, 2026  को होगा। सभी मतदान वाले राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के लिए मतों की गिनती 4 मई, 2026 को होगी।
  3. लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 135सी के अनुसार किसी भी मतदान क्षेत्र में चुनाव के लिए निर्धारित मतदान के समापन के अड़तालीस घंटे पहले की अवधि के दौरान उस क्षेत्र के भीतर किसी होटल, भोजनालय, मदिरालय, दुकान या किसी अन्य सार्वजनिक या निजी स्थान पर कोई भी मदिरा, मादक पेय या उसी प्रकृति के अन्य पदार्थ बेचे, दिए या वितरित नहीं किए जाएंगे।
  4. उपरोक्त वैधानिक प्रावधान के आलोक में संबंधित राज्‍य/केन्‍द्रशासित प्रदेश के प्रासंगिक कानूनों के अंतर्गत जिस मतदान क्षेत्र में विधानसभा का आम चुनाव वाले हो रहा है, वहां मतदान दिवस के लिए निर्धारित मतदान समाप्ति के समय से पूर्ववर्ती 48 घंटे की अवधि के लिए ‘ड्राई-डे’ घोषित एवं अधिसूचित किया जाएगा। इसमें पुनर्मतदान की तिथि (यदि कोई हो) भी शामिल होगी ।
  5. आयोग ने यह भी निर्देश दिया है कि जिस दिन मतों की गिनती होनी है, यानी 4 मई 2026, उसे भी संबंधित राज्‍य/केंद्र शासित प्रदेश के कानूनों के तहत ‘ड्राई-डे’ घोषित किया जाएगा।
  6. उपर्युक्त दिनों में कोई भी मदिरा दुकान, होटल, रेस्तरां, क्लब या अन्य प्रतिष्ठान जो मदिरा की बिक्री या परोसने का कार्य करते है, किसी भी व्‍यक्ति को मदिरा बेचने/परोसने की अनुमति नहीं होगी।
  7. गैर-स्वामित्व वाले क्लब, स्टार होटल, रेस्तरां आदि तथा विभिन्‍न प्रकार के लाइसेंस के अंतर्गत मदिरा के भंडारण एवं आपूर्ति करने वाले होटलों को इन दिनों में मदिरा परोसने के लिए अनुमति नहीं होगी।
  8. उपर्युक्त अवधि के दौरान व्यक्तियों द्वारा मदिरा के भंडारण में कटौती की जाएगी और बिना लाइसेंस वाले परिसरों में मदिरा के भंडारण पर उत्पाद शुल्क कानून के प्रतिबंधों को सख्‍ती से लागू किया जाएगा।

भारतीय रेलवे के परिवीक्षाधीन अधिकारियों और केंद्रीय इंजीनियरिंग सेवा के सहायक कार्यकारी इंजीनियरों ने राष्ट्रपति से मुलाकात की

नई दिल्ली – भारतीय रेलवे के परिवीक्षाधीन अधिकारियों (2022 और 2023 बैच) और केंद्रीय इंजीनियरिंग सेवा (सड़क) के सहायक कार्यकारी इंजीनियरों (2021, 2022, 2023 और 2024 बैच) ने आज (20 अप्रैल, 2026) राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात की।

राष्ट्रपति ने इन अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि वे देश के विकास के एक महत्वपूर्ण मोड़ पर सार्वजनिक सेवा में शामिल हुए हैं। राष्ट्र एक विकसित भारत के निर्माण के सामूहिक संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है। भारतीय रेलवे और केंद्रीय इंजीनियरिंग सेवा (सड़क) के युवा अधिकारी होने के नाते, वे ऐसी भूमिकाओं में कदम रख रहे हैं जो लाखों नागरिकों के जीवन को सीधे प्रभावित करती हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उनके निर्णय और कार्य नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता पर सीधा और दीर्घकालिक प्रभाव डालेंगे।

राष्ट्रपति ने कहा कि बुनियादी ढांचा ही आधुनिक राष्ट्रों की नींव है। रेल और राजमार्ग केवल परिवहन के साधन नहीं हैं; वे आर्थिक विस्तार, सामाजिक समावेशन और राष्ट्रीय एकता के उपकरण हैं। जब कोई रेल किसी दूरदराज के गांव तक पहुंचती है या कोई राजमार्ग किसी दूरस्थ क्षेत्र से जुड़ता है, तो इससे उन क्षेत्रों के सामाजिक-आर्थिक विकास के अपार अवसर खुल जाते हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि मजबूत बुनियादी ढांचा लॉजिस्टिक्स लागत को कम करता है, व्यापार को बढ़ावा देता है, निवेश आकर्षित करता है और उत्पादकता बढ़ाता है। यह क्षेत्रों और लोगों को करीब लाकर राष्ट्रीय एकता को मजबूत करता है। उन्होंने अधिकारियों को याद दिलाया कि केवल आंकड़े ही सफलता का पैमाना नहीं होते। उनके काम की असली कसौटी यह है कि इससे लोगों के जीवन में कितना सुधार होता है।

राष्ट्रपति ने अधिकारियों से सत्यनिष्ठा, जवाबदेही और उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता जैसे लोक सेवा के मूल्यों को बनाए रखने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि चुनौतियां और कठिन निर्णय लेने के क्षण अवश्य आएंगे। ऐसे क्षणों में, उनके मूल्य ही उनका मार्गदर्शन करेंगे। राष्ट्रपति ने उन्हें हमेशा जिज्ञासु बने रहने, सीखते रहने और नवाचार को बढ़ावा देने की सलाह दी। श्रीमती मुर्मु ने कहा कि उनके लिए गए निर्णय, उनके निर्धारित मानक और उनका समर्पण अमिट छाप छोड़ेगा। वे केवल प्रशासक ही नहीं, बल्कि प्रगति के सूत्रधार और आम लोगों के भरोसे के संरक्षक भी हैं।

राष्ट्रपति का भाषण देखने के लिए कृपया यहां क्लिक करें-

 

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आईएनएस सुदर्शनी मोरक्को के कैसाब्लांका से रवाना

नई दिल्ली – भारतीय नौसेना के सेल प्रशिक्षण पोत, आईएनएस सुदर्शनी, ने 18 अप्रैल 2026 को मोरक्को के कैसाब्लांका में अपनी सफल और सार्थक बंदरगाह यात्रा सम्‍पन्‍न की। यह यात्रा मौजूदा ‘लोकयान 26’ तैनाती के हिस्‍से के रूप में भारत-मोरक्को समुद्री साझेदारी को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

बंदरगाह यात्रा के दौरान आईएनएस सुदर्शनी के कमांडिंग ऑफिसर ने मोरक्को के वरिष्ठ नौसेना अधिकारियों के साथ पेशेवर बातचीत की, जिसमें मुख्‍य रूप से प्रशिक्षण आदान-प्रदान और समुद्री सहयोग पर ध्यान केंद्रित किया गया। ‘लोकयान’ के मूल भाव को सक्रिय प्रशिक्षण गतिविधियों के माध्‍यम से प्रदर्शित किया गया, जहां भारतीय नौसेना के प्रशिक्षुओं ने ‘क्रॉस डेक’ दौरों और मैत्रीपूर्ण खेल प्रतियोगिताओं के दौरान रॉयल मोरक्कन नेवल स्कूल के कैडेटों के साथ बातचीत की। राजनयिक पहुंच को और बढाते हुए आईएनएस सुदर्शनी पर एक स्वागत समारोह आयोजित किया गया, जिसके जवाब में रॉयल मोरक्कन नौसेना ने भी एक दोपहर के भोज की मेजबानी की, जिससे पेशवर एवं सांस्‍कृतिक संबंधों को मजबूती मिली।

यह यात्रा साझा समुद्री हितों और रणनीतिक तालमेल से प्रेरित दोनों देशों के बीच गहरे होते समुद्री संबंधों की पुन: पुष्टि करती है। आईएनएस सुदर्शनी अब‘वसुधैव कुटुंबकम ‘ और समुद्र के पार सद्भावना का संदेश लेकर स्पेन के लास पाल्मास के लिए रवाना हो गई है।

 

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विरासत और बुद्धिमत्ता का संगम: एआई के जरिए कारीगरों का सशक्तिकरण

सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय ने पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत एक परिवर्तनकारी पहल में 2,500 से अधिक कारीगरों को प्रशिक्षित किया

नई दिल्ली – समावेशी डिजिटल परिवर्तन की दिशा में एक अग्रणी कदम उठाते हुए, भारत सरकार के सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्रालय ने पीएम विश्वकर्मा योजना के तहत 2,500 से अधिक लाभार्थियों – जिनमें पारंपरिक कारीगर और शिल्पकार शामिल हैं – को अपनी आजीविका और व्यावसायिक संभावनाओं को बेहतर बनाने हेतु कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के उपकरणों का उपयोग करने के संबंध में सफलतापूर्वक प्रशिक्षित किया है।

यह पहल “सामाजिक कल्याण हेतु एआई” की परिकल्पना के अनुरूप है। माननीय प्रधानमंत्री ने इंडियाएआई इम्पैक्ट समिट के दौरान इस परिकल्पना पर जोर दिया था और यह दिल्ली घोषणापत्र में भी परिलक्षित होती है। यह भारत सरकार के मंत्रालयों द्वारा किया गया अपनी तरह का पहला प्रयास है, जिसका उद्देश्य जमीनी स्तर के कारीगरों को तेजी से विकसित हो रहे एआई इकोसिस्टम में एकीकृत करना है।

यह प्रशिक्षण कार्यक्रम व्यावहारिक एवं प्रायोगिक सत्रों के जरिए आयोजित किया गया। इसे सरल भाषा में प्रस्तुत किया गया और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप तैयार किया गया, ताकि विभिन्न व्यवसायों के कारीगरों के लिए इसकी सुलभता एवं प्रासंगिकता सुनिश्चित हो सके।

प्रतिभागियों को चैटजीपीटी, इंडस और गूगल जेमिनी जैसे प्रमुख एआई प्लेटफॉर्म से परिचित कराया गया, ताकि वे वास्तविक दुनिया के अनुप्रयोगों के लिए प्रौद्योगिकी का लाभ उठा सकें।

इस प्रशिक्षण की मुख्य विशेषताएं

इस कार्यक्रम का उद्देश्य कारीगरों को व्यावहारिक एआई-आधारित कौशल से सशक्त बनाना था, जिनमें शामिल हैं:

* कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) से परिचय और व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले एआई उपकरणों का संक्षिप्त विवरण

* ब्रांडिंग, उत्पाद डिजाइन, पैकेजिंग और विपणन संबंधी रणनीतियां

* डिजिटल और एआई-आधारित उपायों का उपयोग करके व्यावसायिक दक्षता बढ़ाना

* ग्राहकों के साथ जुड़ाव और बाजार के पहुंच के विस्तार हेतु एआई का लाभ उठाना

* एआई-जनित उत्पाद विवरण और उच्च-गुणवत्ता वाली दृश्य सामग्री तैयार करना

अखिल भारतीय कवरेज

इस पहल में कई राज्यों और केन्द्र-शासित प्रदेशों की व्यापक भागीदारी देखी गई। लाभार्थियों का विवरण इस प्रकार है:

* तेलंगाना – 387

* महाराष्ट्र – 295

* गुजरात – 262

* राजस्थान – 251

* बिहार – 250

* कर्नाटक – 248

* उत्तर प्रदेश – 210

* पंजाब – 100

* दिल्ली – 82

* ओडिशा – 70

* गोवा – 68

* उत्तराखंड – 51

* मेघालय – 51

* त्रिपुरा – 50

* झारखंड – 43

* दमन एवं दीव – 38

* चंडीगढ़ – 36

* हिमाचल प्रदेश – 31

* सिक्किम – 20

* कुल लाभार्थी: 2,543

प्रौद्योगिकी के साथ परंपरा का सशक्तिकरण

पारंपरिक शिल्पकला में एआई को एकीकृत करके, मंत्रालय का लक्ष्य है:

* जमीनी स्तर के उद्यमियों के बीच व्याप्त डिजिटल विभाजन को पाटना

* उत्पाद मूल्य और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना

* कारीगरों को नए बाजारों और ग्राहक वर्गों तक पहुंच प्रदान करना

* सतत एवं समावेशी आर्थिक विकास को बढ़ावा देना

यह पहल भारतीय शिल्पकला की समृद्ध विरासत को डिजिटल रूप से सशक्त और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी क्षेत्र में बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

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ओडिशा में भारत की पहली उन्नत 3डी सेमीकंडक्टर पैकेजिंग इकाई का शिलान्यास; एआई, 5जी और रक्षा तकनीक को बड़ा समर्थन

ओडिशा पीएम मोदी के सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण में भारत को आत्मनिर्भर बनाने के दृष्टिकोण को गति देने के लिए तैयार: मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी

मजबूत इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण के साथ ओडिशा तेजी से बढ़ते आईटी और सेमीकंडक्टर केंद्र के रूप में उभर रहा है: केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव

नई दिल्ली – भारत के सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षाओं और ओडिशा के भविष्य के लिए तैयार प्रौद्योगिकी गंतव्य के रूप में उदय के एक निर्णायक क्षण में, देश की पहली उन्नत 3D चिप पैकेजिंग इकाई का शिलान्यास आज इन्फो वैली, भुवनेश्वर में किया गया। यह परियोजना भारत की घरेलू सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम को मजबूत करने और उच्च-स्तरीय इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण में आत्मनिर्भर भारत के दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम को प्रतिबिंबित करती है।

 

 

 

हेटरोजीनियस इंटीग्रेशन पैकेजिंग सॉल्यूशंस परियोजना, जिसे 3D ग्लास सॉल्यूशंस समर्थन दे रहा है, का शिलान्यास मुख्यमंत्री श्री मोहन चरण माझी और रेल, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी और सूचना एवं प्रसारण मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव की उपस्थिति में किया गया। इस परियोजना के शुभारंभ के साथ, ओडिशा दुनिया की सबसे उन्नत चिप पैकेजिंग प्रौद्योगिकियों में से एक बन जाएगा।

सभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री श्री मोहन चरन माझी ने इस परियोजना को ओडिशा और देश के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि भारत में पहली बार, एक उन्नत 3डी ग्लास सॉल्यूशंस सेमीकंडक्टर परियोजना स्थापित की जा रही है, जो राज्य के लिए अत्यधिक गर्व की बात है। उन्होंने उल्लेख किया कि प्रौद्योगिकी की विश्व-स्तरीय अग्रणी कंपनियां जैसे इंटेल, लॉकहीड मार्टिन, और एप्लाइड मैटेरियल्स अत्याधुनिक पैकेजिंग तकनीकों से जुड़ी हुई हैं और ओडिशा में उनकी रुचि राज्य की बढ़ती औद्योगिक शक्ति को प्रतिबिंबित करती है।

मुख्यमंत्री ने संकेत दिया कि राज्य में निर्मित उत्पाद अगली पीढ़ी के क्षेत्रों जैसे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, उच्च प्रदर्शन कंप्यूटिंग, रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स, दूरसंचार, और उन्नत डिजिटल प्रणालियाँ का समर्थन करेंगे। उन्होंने कहा, “ओडिशा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के भारत को सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्माण में आत्मनिर्भर बनाने के दृष्टिकोण को साकार करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार है।”

श्री माझी ने जानकारी दी कि कंपनी इस परियोजना में लगभग ₹2,000 करोड़ निवेश कर रही है और इस सुविधा-केंद्र से प्रति वर्ष 70,000 ग्लास पैनल, 50 मिलियन असेंबल किए गए यूनिट और लगभग 13,000 उन्नत 3डीएचआई मॉड्यूल का उत्पादन होने की उम्मीद है। उन्होंने कहा कि ओडिशा देश का एकमात्र ऐसा राज्य बन गया है जहां भारत की पहली कंपाउंड सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन यूनिट और पहली 3D ग्लास सब्सट्रेट पैकेजिंग सुविधा स्थापित की जा रही हैं।

उन्होंने आगे कहा कि ओडिशा में बढ़ता सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम; इंजीनियरिंग स्नातकों, डिप्लोमा धारकों और आईटीआई छात्रों के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसरों का सृजन करेगा, जिससे राज्य को संसाधन-आधारित अर्थव्यवस्था से तकनीक-आधारित विकास केंद्र में बदलने में मदद मिलेगी।

सभा को संबोधित करते हुए, केंद्रीय मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने इस ऐतिहासिक पहल के लिए ओडिशा के लोगों को बधाई दी और राज्य सरकार द्वारा दिए गए सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में, भारत का सेमीकंडक्टर क्षेत्र तेजी से विकास कर रहा है और इस बदलाव में ओडिशा एक महत्वपूर्ण योगदानकर्ता के रूप में उभर रहा है।

श्री वैष्णव ने कहा कि ओडिशा, जो पारंपरिक रूप से खनिजों, धातुओं और ऊर्जा के क्षेत्र में अपनी मजबूती के लिए जाना जाता है, अब इलेक्ट्रॉनिक्स, आईटी और सेमीकंडक्टर जैसे उन्नत क्षेत्रों में भी धीरे-धीरे अपनी जगह बना रहा है। इस परियोजना को अपनी तरह की सबसे उन्नत विनिर्माण पहलों में से एक बताते हुए, उन्होंने कहा कि यह भारत की सेमीकंडक्टर मूल्य श्रृंखला को काफी मजबूत करेगी।

इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र में देश की प्रगति पर प्रकाश डालते हुए, श्री वैष्णव ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में इस क्षेत्र में उत्पादन छह गुना बढ़ गया है। उन्होंने आगे कहा, “भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल फोन निर्माता बन गया है और 2025 में मोबाइल फोन के अग्रणी निर्यातक के रूप में उभरा है।”

उन्होंने आगे बताया कि भारत सेमीकंडक्टर मिशन के तहत ओडिशा के लिए दो सेमीकंडक्टर परियोजनाएं पहले ही मंज़ूर की जा चुकी हैं, जबकि इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर से जुड़े तीन और प्रस्ताव मौजूद हैं। उन्होंने कहा, “राज्य में भविष्य के निवेश के लिए इंटेल समेत दुनिया की बड़ी कंपनियों के साथ बातचीत चल रही है।”

रेलवे अवसंरचना के बारे में श्री वैष्णव ने कहा कि वर्तमान में ओडिशा में ₹90,000 करोड़ से अधिक की परियोजनाओं का क्रियान्वय चल रहा है, जो रेल संपर्क के अभूतपूर्व विस्तार को प्रतिबिंबित करती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि राज्य को रिकॉर्ड रेलवे बजट आवंटन ₹10,928 करोड़ प्राप्त हुआ है, जबकि 59 स्टेशनों का अमृत भारत स्टेशन योजना के तहत पुनर्विकास किया जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि नियोजित कार्यक्रमों के माध्यम से ओडिशा के सभी 30 जिलों को रेल परिवहन सुविधा के तहत लाया जा रहा है, साथ ही बालासोर से बेरहामपुर तक प्रस्तावित चार-लाइन तटीय रेल गलियारे जैसी प्रमुख परियोजनाओं पर भी काम चल रहा है। श्री वैष्णव ने जोर देकर कहा कि ये परिवर्तनकारी पहलें क्षेत्रीय परिवहन संपर्क को मजबूत करेंगी, आर्थिक विकास का समर्थन करेंगी, और ओडिशा को राष्ट्रीय माल और यात्री नेटवर्क के साथ अधिक निकटता से जोड़ेंगी।

सरकार के विज़न को दोहराते हुए, उन्होंने पुष्टि की कि ओडिशा में रेलवे अवसंरचना को गति, सुरक्षा और यात्री सुविधा पर ध्यान केंद्रित करते हुए लगातार उन्नत किया जाएगा, जिससे राज्य के सभी भागों में संतुलित और समावेशी विकास सुनिश्चित होगा।

राज्य के इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री डॉ. मुकेश महालिंग ने कहा कि ओडिशा तेजी से एक सेमीकंडक्टर हब के रूप में उभर रहा है, भारत सेमीकंडक्टर मिशन के तहत दो स्वीकृत परियोजनाएं हैं, जिनमें आज उद्घाटन किया गया उन्नत 3डी ग्लास यूनिट भी शामिल है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की आईटी, एआई, जीसीसी और सेमीकंडक्टर नीतियां 2025 नवाचार को बढ़ावा देंगी और निवेश को आकर्षित करेंगी। कौशल विकास पर जोर देते हुए, उन्होंने कहा कि इंजीनियरिंग छात्रों के लिए छात्रवृत्ति समर्थन प्रदान किया जा रहा है, ताकि उद्योग के लिए तैयार कार्यबल का निर्माण किया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि ब्लैकस्वान समिट 2026 जैसी पहलों और बढ़ते एआई निवेश से रोजगार के अवसरों का सृजन होगा और भविष्य की तकनीकों में ओडिशा की अग्रणी स्थिति मजबूत होगी।

यह परियोजना 3डी ग्लास सॉल्यूशंस इंक. (3डीजीएस), यूएसए द्वारा इसकी पूरी स्वामित्व वाली भारतीय सहायक कंपनी हेटेरोजीनियस इंटीग्रेशन पैकेजिंग सॉल्यूशंस प्रा. लि. (एचआईपीएसपीएल) के माध्यम से खोरधा जिले के इन्फो वैली में कार्यान्वित की जा रही है। यह एक ग्रीनफील्ड, ऊर्ध्वाधर रूप से एकीकृत उन्नत पैकेजिंग और अंतर्निहित काँच आधार (एम्बेडेड ग्लास सब्सट्रेट) एटीएमपी सुविधा-केंद्र है।

परियोजना में कुल निवेश ₹1,943.53 करोड़ है, जिसमें अनुमोदित केंद्रीय वित्तीय सहायता ₹799 करोड़ और अतिरिक्त राज्य सहायता लगभग ₹399.5 करोड़ शामिल है।

यह सुविधा डेटा सेंटर, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, मशीन लर्निंग, 5जी/6जी संचार, ऑटोमोटिव रडार, रक्षा इलेक्ट्रॉनिक्स, अंतरिक्ष अनुप्रयोग और फोटोनिक्स जैसे उच्च-वृद्धि वाले क्षेत्रों को सेवाएँ प्रदान करेगी। वाणिज्यिक उत्पादन अगस्त 2028 तक शुरू होने की उम्मीद है, जबकि पूर्ण पैमाने पर उत्पादन का लक्ष्य अगस्त 2030 निर्धारित है।

इस कार्यक्रम में कई गणमान्य व्यक्तियों ने भाग लिया, जिनमें श्री एस. कृष्णन, सचिव, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय, भारत सरकार, श्रीमती अनु गर्ग, मुख्य सचिव, ओड़िशा, श्री हेमंत शर्मा, अपर मुख्य सचिव, उद्योग विभाग, श्री विशाल कुमार देव, अपर मुख्य सचिव, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी विभाग, और श्री बाबू मंडावा, चेयरमैन और सीईओ, 3डी ग्लास सॉल्यूशंस शामिल हैं।

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61वें फेमिना मिस इंडिया में ‘विश्व सूत्र’ कलेक्शन के माध्यम से भारतीय हथकरघा बुनाई को वैश्विक परिप्रेक्ष्य में प्रस्तुत किया गया

भारतीय हथकरघा का वैश्विक रूपांतरण: ‘‘विश्व सूत्र’’ में 30 देशों से प्रेरित 30 बुनाई शैलियों का अनूठा प्रदर्शन

अपनी तरह की पहली पहल में, भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय के विकास आयुक्त (हथकरघा) कार्यालय और राष्ट्रीय फैशन प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईएफटी) ने भुवनेश्वर में आयोजित 61वें फेमिना मिस इंडिया में ‘‘विश्व सूत्र – दुनिया के लिए भारत की बुनाई’’ नामक एक डिजाइनर संग्रह का अनावरण किया है, जो भारतीय हथकरघा को समकालीन वैश्विक डिजाइन कथा के भीतर स्थापित करता है।

भारत की इस पहल में 30 विशिष्ट हथकरघा बुनाई शैलियों को एक साथ लाया गया है, जिनमें से प्रत्येक एक अलग राज्य का प्रतिनिधित्व करती है, और 30 देशों से प्राप्त प्रेरणाओं के माध्यम से उनकी पुनर्व्याख्या की गई है, जो विविध सांस्कृतिक तत्वों, आकृतियों और डिजाइन संवेदनाओं को प्रदर्शित करती हैं।

विश्व सूत्र भारतीय हथकरघा को वैश्विक स्तर पर प्रासंगिक और डिजाइन के मामले में अग्रणी बनाने का एक रणनीतिक प्रयास है, साथ ही इसकी प्रामाणिकता को भी बरकरार रखता है। यह भारत की हथकरघा परंपराओं की गहराई और निरंतरता को भी दर्शाता है—पीढ़ियों से संरक्षित और परिष्कृत तकनीकें, जो देश की जीवंत सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग हैं।

वैश्विक फैशन के नजरिए से तैयार किए गए इस संग्रह में भारतीय बुनाई को विशिष्ट सांस्कृतिक आकृतियों के साथ जोड़ा गया है—ओडिशा इकत को ग्रीक रूपों के साथ, कांचीपुरम को नॉर्वेजियन लाइनों के साथ, मूगा को मिस्र के तत्वों के साथ, पटोला को स्पेनिश प्रभावों के साथ और बनारसी को यूएई से प्रेरित परिधानों के साथ—जो भारत की हथकरघा कला को एक नया डिजाइन परिप्रेक्ष्य प्रदान करता है।

विश्व सूत्र – दुनिया के लिए भारत की बुनाई’ ने भारतीय हथकरघा की भव्यता को मूर्त रूप दियाजिसे 61वें फेमिना मिस इंडिया के उद्घाटन दौर में 30 राज्य विजेताओं द्वारा प्रदर्शित किया गया

विकास आयुक्त (हथकरघा) डॉ. एम. बीना ने मीडिया को संबोधित करते हुए बताया कि भारत की सांस्कृतिक पहचान को बनाए रखने, आजीविका को सहारा देने और महिला नेतृत्व वाले उद्यमों को बढ़ावा देने में हथकरघा क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने प्रधानमंत्री के ‘‘गांव से वैश्विक’’ दृष्टिकोण को रेखांकित करते हुएपारंपरिक बुनाई को आधुनिक डिजाइन और बदलते बाजार परिदृश्य से जोड़ने के महत्व पर जोर दिया।

61वीं फेमिना मिस इंडिया की विजेता साध्वी सतीश सैल ने पारंपरिक कुनबी बुनाई से बनी स्कर्ट पहनी हैजिसे मध्य यूरोपीय शैली में नया रूप दिया गया है। अपनी समृद्ध विरासत के लिए मशहूर कुनबी बुनाईजो कुन (परिवार) और बी (बीज) से मिलकर बनी हैपीढ़ी दर पीढ़ी चली आ रही कुशलता और समुदाय के अटूट बंधन का प्रतीक है

इस पहल के द्वारा भारत सरकार की पारंपरिक उद्योगों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी क्षेत्रों में परिवर्तित करने की प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है, जो कि ‘‘लोकल से ग्लोबल तक वोकल’’ की दृष्टि और प्रधानमंत्री के 5एफ ढांचे (फार्म टू फाइबर टू फैक्ट्री टू फैशन टू फॉरेन) के अंतर्गत आती है। यह सांस्कृतिक उद्योगों को सुदृढ़ करने, स्थायी आजीविका का निर्माण करने और वैश्विक वस्त्र एवं फैशन बाजारों में भारत की उपस्थिति को बढ़ाने में हथकरघा की रणनीतिक भूमिका को भी दर्शाती है।

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रक्षा मंत्री तीन दिवसीय जर्मनी यात्रा पर जाएंगे

रक्षा औद्योगिक सहयोग को सुदृढ़ करने, सैन्य-से-सैन्य सहभागिता को बढ़ाने तथा उभरते हुए क्षेत्रों में नए अवसरों की खोज पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह दोनों देशों के बीच रणनीतिक रक्षा साझेदारी को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से 21 से 23 अप्रैल, 2026 तक जर्मनी की आधिकारिक यात्रा पर रहेंगे। इस यात्रा के दौरान, रक्षा मंत्री अपने जर्मन समकक्ष श्री बोरिस पिस्टोरियस और सरकार के अन्य वरिष्ठ नेताओं के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।

चर्चा का मुख्य उद्देश्य रक्षा उद्योग में सहयोग बढ़ाना, सैन्य संबंधों को मजबूत करना और साइबर सुरक्षा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और ड्रोन जैसे उभरते क्षेत्रों में अवसरों की खोज करना होगा और दोनों रक्षा मंत्रियों की उपस्थिति में रक्षा औद्योगिक सहयोग रोडमैप और संयुक्त राष्ट्र शांतिरक्षा अभियानों के प्रशिक्षण में सहयोग हेतु कार्यान्वयन समझौते पर हस्ताक्षर होने की संभावना है।

इस दौरे से चल रही रक्षा सहयोग पहलों की समीक्षा करने और दोनों देशों के रक्षा उद्योगों के बीच सहयोग के नए अवसरों की खोज का अवसर भी मिलेगा। श्री राजनाथ सिंह के जर्मनी के रक्षा उद्योग के प्रमुख प्रतिनिधियों से भी बातचीत करने की उम्मीद है, जिससे मेक-इन-इंडिया पहल के अंतर्गत संयुक्त विकास और सह-उत्पादन को बढ़ावा दिया जा सके।

रक्षा मंत्री की यह यात्रा सात साल के अंतराल के बाद हो रही है। इससे पहले भारतीय रक्षा मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण के नेतृत्व में फरवरी 2019 में जर्मनी की यात्रा की गई थी। श्री बोरिस पिस्टोरियस ने जून 2023 में भारत की यात्रा की और साथ ही श्री राजनाथ सिंह के साथ व्यापक वार्ता की थी।

भारत और जर्मनी लोकतांत्रिक मूल्यों, विधि के शासन और नियम-आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था के प्रति साझा प्रतिबद्धता पर आधारित एक मजबूत और बहुआयामी रणनीतिक साझेदारी साझा करते हैं। हाल के वर्षों में रक्षा और सुरक्षा सहयोग इस साझेदारी का एक महत्वपूर्ण स्तंभ बनकर उभरा है। इस यात्रा का उद्देश्य द्विपक्षीय संबंधों को और अधिक मजबूत करना तथा क्षेत्रीय और वैश्विक शांति, स्थिरता और समृद्धि में योगदान देना है।

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हिंद महासागर का जहाज सागर थाईलैंड के फुकेट से रवाना हुआ

हिंद महासागर जहाज (आईओएस) सागर – आईएनएस सुनायना ने तीन दिवसीय तीव्र गति वाले परिचालन बदलाव (ओटीआर) को पूरा करने के बाद 17 अप्रैल 2026 को फुकेट, थाईलैंड से प्रस्थान किया, जो चल रही तैनाती के दौरान उसके दूसरे पत्तन आह्वान की सफल समाप्ति का प्रतीक है।

फुकेत की यात्रा के दौरान, आईओएस सागर ने रॉयल थाई नौसेना (आरटीएन) के साथ कई पेशेवर, रणनीतिक और सांस्कृतिक बैठकें कीं, जिससे द्विपक्षीय नौसैनिक सहयोग को महत्वपूर्ण मजबूती मिली। आईएनएस सुनायना के कमान अधिकारी कमांडर सिद्धार्थ चौधरी ने आरटीएन के तीसरे नौसेना क्षेत्र कमान के चीफ ऑफ स्टाफ रियर एडमिरल सथापोर्न वजारत से मुलाकात की और समुद्री सहयोग के प्रति साझा प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

आईओएस सागर और आरटीएन के दल के सदस्यों द्वारा एक मैत्रीपूर्ण फुटबॉल मैच और संयुक्त योग सत्र के माध्यम से पेशेवर और व्यक्तिगत संबंधों को मजबूती मिली। जहाज पर आयोजित औपचारिक स्वागत समारोह में नौसेना के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे, जिससे आईओएस सागर मिशन पर अपने विचार साझा करने और समुद्री सहयोग तथा क्षेत्रीय सुरक्षा पर चर्चा करने का अवसर मिला। लोगों के बीच आपसी संपर्क को बढ़ावा देने के लिए जहाज आगंतुकों के लिए भी खुला रहा।

एचटीएमएस क्लोनग्याई के साथ एक पैसेज एक्सरसाइज (पासेक्स) के दौरान, परिचालन संबंधी अंतरसंचालनीयता का प्रदर्शन किया गया, जिसमें संचार अभ्यास और गठन युद्धाभ्यास शामिल थे, जो दोनों नौसेनाओं के बीच निर्बाध समन्वय और ‘‘प्लग-एंड-प्ले’’ क्षमता को उजागर करते हैं। यह दौरा भारत और थाईलैंड के बीच मजबूत और स्थायी समुद्री साझेदारी को रेखांकित करता है, जो क्षेत्रीय सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति के महासागर दृष्टिकोण के अनुरूप है।

आईओएस सागर अब अपने अगले पड़ाव के लिए इंडोनेशिया के जकार्ता की ओर रवाना हो गई है, और दक्षिणपूर्वी हिंद महासागर क्षेत्र में समुद्री सहयोग को मजबूत करने के अपने मिशन को जारी रखे हुए है।

 

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आम चुनाव और उपचुनाव 2026: गैरकानूनी सोशल मीडिया सामग्री पर भारत निर्वाचन आयोग की कार्रवाई

  1. भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने दोहराया है कि सभी हितधारक सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000, आईटी नियम, 2021 और आदर्श आचार संहिता सहित मौजूदा कानूनी प्रावधानों के अनुपालन में सोशल मीडिया और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जिम्मेदार और नैतिक उपयोग को सुनिश्चित करेंगे।
  2. आयोग ने आगे निर्देश दिया था कि एआई द्वारा उत्पन्न या हेरफेर की गई किसी भी भ्रामक या गैरकानूनी सामग्री के बारे में सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को जानकारी मिलने के 3 घंटे के भीतर कार्रवाई की जाएगी।
  3. राजनीतिक दलों, उम्मीदवारों और अभियान प्रतिनिधियों को यह सुनिश्चित करना आवश्यक है कि प्रचार के लिए उपयोग की जाने वाली किसी भी कृत्रिम रूप से निर्मित या एआई-संशोधित सामग्री को स्पष्ट रूप से ‘‘एआई-जनित’’, ‘‘डिजिटल रूप से संवर्धित’’ या ‘‘कृत्रिम सामग्री’’ के रूप में लेबल किया जाए, साथ ही मूल संस्था का खुलासा भी किया जाए, ताकि पारदर्शिता और मतदाताओं का विश्वास बना रहे।
  4. असम, केरल, तमिलनाडु, पुडुचेरी और पश्चिम बंगाल की विधानसभाओं के लिए चल रहे चुनावों में, सोशल मीडिया पर प्रसारित सामग्री जैसे कि एमसीसी का उल्लंघन करने वाली पोस्ट, कानून व्यवस्था को बाधित करने वाली या बाधित करने की क्षमता रखने वाली पोस्ट, मतदान प्रक्रिया या मशीनरी के खिलाफ झूठी बातें फैलाने वाली पोस्ट की निगरानी की जा रही है और आईटी अधिनियम के तहत अधिसूचित संबंधित राज्य आईटी नोडल अधिकारियों द्वारा उन पर कार्रवाई की जा रही है।
  5. तदनुसार, 15 मार्च 2026 को चुनावों की घोषणा के बाद से, चल रहे चुनावों में 11 हजार से अधिक ऐसे सोशल मीडिया पोस्ट/यूआरएल की पहचान की गई है और उन पर कार्रवाई की गई है, जिसमें सामग्री को हटाना, एफआईआर दर्ज करना, स्पष्टीकरण देना और खंडन करना शामिल है।
  6. आयोग ने लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 126 के प्रावधानों को भी दोहराया, जो मतदान समाप्त होने से पहले 48 घंटे की मौन अवधि के दौरान मतदान क्षेत्रों में किसी भी चुनावी सामग्री के प्रदर्शन पर रोक लगाते हैं। टेलीविजन, रेडियो, प्रिंट और सोशल मीडिया सहित सभी मीडिया प्लेटफॉर्मों को इन प्रावधानों का सख्ती से पालन करना आवश्यक है।
  7. इसके अतिरिक्त, नागरिक/राजनीतिक दल/उम्मीदवार ईसीआईएनईटी पर सी-विजिल मॉड्यूल का उपयोग करके एमसीसी उल्लंघनों की रिपोर्ट कर सकते हैं। 15 मार्च से 19 अप्रैल तक इन चुनावों में सी-विजिल ऐप के माध्यम से 3,23,099 शिकायतें दर्ज की गई हैं। इनमें से 3,10,393 शिकायतें, यानी 96.01 प्रतिशत शिकायतें, 100 मिनट की निर्धारित समयावधि में हल कर दी गईं।

गुजरात के उधना स्टेशन पर विशेष ट्रेनों और प्रभावी भीड़ प्रबंधन के ज़रिए रेलवे ने गर्मी की छुट्टियों की भीड़भाड़ के बीच सुगम यात्रा के इंतज़ाम किए

उधना में 23,000 से अधिक यात्रियों को सुविधा प्रदान की गई, रात में दो और विशेष ट्रेनें चलाई जाएंगी

यात्रियों ने व्यस्त मौसम के दौरान बेहतर सुविधाओं, कर्मचारियों के सहयोग और विशेष ट्रेन व्यवस्था की सराहना की

भारतीय रेलवे 2026 के गर्मियों के मौसम में यात्रियों की बढ़ती मांग को देखते हुए और सुगम तथा सुविधाजनक यात्रा के लिए विशेष ट्रेनें चला रहा है।

गर्मों की छुट्टियों के दौरान अपने गृह नगर जा रहे यात्रियों ने गुजरात के उधना रेलवे स्टेशन पर पश्चिमी रेलवे द्वारा की गई व्यवस्थाओं पर संतोष जताया है। समन्वित उपायों से व्यस्ततम समय में भी सुगम एवं सुविधाजनक यात्रा मुमकिन हो पा रही है।

आज नियमित और विशेष ट्रेन सेवाओं के माध्यम से 23,000 से अधिक यात्रियों को सुविधा प्रदान की गई, साथ ही भीड़भाड़ को और कम करने के लिए दो अतिरिक्त विशेष ट्रेनें रात 9:40 बजे और 11:30 बजे रवाना होंगी। विशेष ट्रेनों के संचालन से स्टेशन पर भीड़ प्रबंधन में खासा सुधार हुआ है। यात्रियों ने बताया कि नियमित बोर्डिंग और व्यवस्थित कतार प्रबंधन ने उनकी यात्रा को पिछले वर्षों की तुलना में अधिक आरामदायक बना दिया है।

उधना रेलवे स्टेशन पर प्रभावी भीड़ और कतार प्रबंधन प्रणालियों ने यात्रियों की सुचारू आवाजाही सुनिश्चित की है। निरंतर निगरानी, ​​जमीनी कर्मचारियों की तैनाती और आवश्यक सुविधाओं के होने से मुसाफिरों को सुरक्षित और आरामदायक यात्रा का अनुभव हो रहा है। भारतीय रेलवे लगातार मांग का आकलन कर रही है और आवश्यकतानुसार अतिरिक्त सेवाएं संचालित कर रही है, साथ ही यात्रियों को भी सलाह दी जा रही है कि वे केवल आधिकारिक सूचनाओं पर ही भरोसा करें और गलत सूचनाओं से बचें।

 

यात्रियों ने व्यवस्थाओं पर संतोष व्यक्त किया

यात्रियों ने स्टेशन पर उपलब्ध सुविधाओं की सराहना की और बताया कि बैठने की व्यवस्था और नियमित रूप से चढ़ने की व्यवस्था में काफी सुधार हुआ है। कई यात्रियों ने कहा कि विशेष ट्रेनों की उपलब्धता से भीड़ कम हुई है और यात्रा अधिक व्यवस्थित हुई है।

 

बनारस जा रहे एक यात्री ने यात्रियों की सहायता में रेलवे कर्मचारियों की भूमिका पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि कर्मचारी लाइनों को व्यवस्थित रूप से प्रबंधित कर रहे हैं और यात्रियों को ट्रेनों में चढ़ने में मदद कर रहे हैं, जिससे सुरक्षा और समय पर प्रस्थान हो पा रहा है।

 

वलसाद से मऊ जा रहे एक यात्री ने बताया कि अतिरिक्त हॉल्ट और बेहतर समन्वय से उन्हें अपने गंतव्य तक पहुंचने में अधिक सुविधा मिली है। उन्होंने व्यस्त मौसम के दौरान यात्रियों की सुविधा और समग्र यात्रा स्थितियों में सुधार के लिए किए गए प्रयासों की सराहना की।

 

भारतीय रेलवे विशेष रूप से गर्मियों की छुट्टियों जैसे व्यस्त यात्रा समय के दौरान सुरक्षित, कुशल और सुव्यवस्थित यात्री परिचालन के लिए प्रतिबद्ध है। सभी यात्रियों को सुगम और आरामदायक यात्रा का अनुभव प्रदान करने के लिए लगातार निगरानी, ​​सेवाओं में समय पर वृद्धि और समन्वित ज़मीनी प्रयास किए जा रहे हैं।

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ऑपरेशन “संरक्षा” के तहत आरपीएफ पोस्ट रांची द्वारा प्रतिबंधित पटाखों की बरामदगी

रांची,19.04.2026  – मंडलीय सुरक्षा आयुक्त श्री पवन कुमार के निर्देशानुसार आरपीएफ अपने कर्तव्यों के प्रति सतर्क है। इसी क्रम में आरपीएफ पोस्ट रांची द्वारा ऑपरेशन “संरक्षा” के अंतर्गत दिनांक 18.04.2026 को रांची रेलवे स्टेशन के मुख्य द्वार स्थित लगेज स्कैनर पर सघन जांच के दौरान एक यात्री संदिग्ध वस्तु के साथ पाया गया।

पूछताछ के क्रम में उसकी पहचान पंकज कुमार (आयु 24 वर्ष), निवासी पलामू (झारखंड) के रूप में हुई। उसके दो बैग की तलाशी लेने पर कुल 09 पैकेट पटाखे, जिनकी अनुमानित कीमत ₹6,800/- है, बरामद किए गए। उक्त पटाखे ज्वलनशील (inflammable) होने के कारण रेलवे परिसर में ले जाना प्रतिबंधित है।

अभियुक्त इनके संबंध में कोई वैध अनुमति प्रस्तुत नहीं कर सका।तत्पश्चात बरामद सामग्री को विधिवत जब्त कर अभियुक्त को गिरफ्तार किया गया। इस संबंध में आरपीएफ पोस्ट रांची में दिनांक 18.04.2026 को धारा 164 रेलवे अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूर्ण करने के उपरांत अभियुक्त को पोस्ट लाया गया तथा दिनांक 19.04.2026 को माननीय न्यायालय, रांची में प्रस्तुत किया जाएगा.

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अल्पसंख्यक भाषा एआई परिवेश को आगे बढ़ाने के लिए दिल्ली विश्वविद्यालय के एसजीटीबी खालसा कॉलेज में गुरुमुखी भाषा पर ‘भाषिणी’ संचालन/सेवा कार्यशाला आयोजित

नई दिल्ली – एआई आधारित नवाचार के माध्यम से अल्पसंख्यक भाषाओं के संरक्षण को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, ‘गुरुमुखी भाषा संरक्षण और डिजिटल एआई मॉडल विकास’ पर ‘भाषिनी’ संचालन/सेवा कार्यशाला 17 अप्रैल 2026 को दिल्ली विश्वविद्यालय के एसजीटीबी खालसा कॉलेज में आयोजित की गई। इस कार्यशाला का आयोजन इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत डिजिटल इंडिया भाषिनी प्रभाग द्वारा एसजीटीबी खालसा कॉलेज के सहयोग से किया गया था।

कार्यशाला में गुरुमुखी लिपि पर विशेष बल दिया गया।  गुरुमुखी पंजाबी भाषा और साहित्य का अभिन्न अंग है और विशेष रूप से सिख परंपराओं और शास्त्रों में गहरा सांस्कृतिक, ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व रखती है। एआई इकोसिस्टम में एक भाषा संसाधन के रूप में, गुरुमुखी को डिजिटल प्लेटफॉर्म और सेवाओं में प्रभावी ढंग से एकीकृत करने के लिए डिजिटलीकरण, डेटासेट निर्माण और भाषाई सत्यापन  में व्यवस्थित प्रयासों की आवश्यकता है। यह पहल अल्पसंख्यक और परंपरागत भाषाओं के संरक्षण और प्रचार-प्रसार में सहायता करने के अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के व्यापक दृष्टिकोण के अनुरूप है।

एसजीटीबी खालसा कॉलेज ने एक प्रमुख शैक्षणिक और ज्ञान साझीदार के रूप में अपना योगदान दिया। कॉलेज ने भाषा के एआई के क्षेत्र में की जा रही पहलकदमियों में भाषाई सटीकता और सांस्कृतिक संदर्भ सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक विशेषज्ञता और संस्थागत सहायता प्रदान की। यह सहयोग अल्प-संसाधन और विरासत भाषाओं के लिए अनुसंधान, ज्ञान विकास और इकोसिस्टम-निर्माण को मजबूत करने के निरंतर प्रयासों को दर्शाता है।

कार्यशाला के दौरान, डिजिटल इंडिया भाषिनी प्रभाग के वरिष्ठ महाप्रबंधक, श्री शैलेंद्र पाल सिंह ने भारतीय भाषाओं के माध्यम से ज्ञान प्रणालियों और डिजिटल सेवाओं तक समावेशी पहुंच को सक्षम करने के लिए एआई का लाभ उठाने के महत्व पर जोर दिया और गुरुमुखी के लिए उच्च गुणवत्ता वाले डेटासेट और मजबूत भाषा मॉडल बनाने में शैक्षणिक संस्थानों और भाषा समुदायों की सक्रिय भागीदारी की आवश्यकता पर प्रकाश डाला।

कार्यशाला में लक्षित डेटा संग्रह, सत्यापन ढांचे और समुदाय संचालित भागीदारी के माध्यम से गुरुमुखी भाषा के लिए एआई मॉडल के विकास पर ध्यान केंद्रित किया गया। कार्यक्रम में गुरुमुखी की भाषाई और सांस्कृतिक प्रासंगिकता पर सत्र आयोजित किये गए थे। साथ ही संरचित डेटा गुणवत्ता फ्रेमवर्क द्वारा समर्थित टेक्स्ट कॉर्पोरा, ऑडियो रिकॉर्डिंग और पांडुलिपियों के डिजिटलीकरण जैसे डेटासेट आवश्यकताओं पर विस्तृत चर्चा हुई। कुशल वक्ताओं द्वारा संरचित डेटा योगदान और समुदाय के नेतृत्व वाले सत्यापन को सक्षम करने के लिए ‘भाषादान’  प्लेटफॉर्म का एक व्यापक विवरण भी प्रस्तुत किया गया।

कार्यशाला के हिस्से के रूप में, ‘भाषिनी’  टीम ने अपनी प्रमुख भाषा एआई प्रौद्योगिकियों और अनुप्रयोगों का लाइव प्रदर्शन किया, जिसमें टेक्स्ट, स्पीच और दस्तावेज़ के क्षेत्र में बहुभाषी क्षमताओं का प्रदर्शन किया गया। इन प्रदर्शनों में पाठ-से-पाठ का अनुवाद, स्पीच रिकग्निशन (आवाज़ की पहचान), ऑप्टिकल कैरेक्टर पहचान  और बहुभाषी टूल शामिल थे। साथ ही शासन, शिक्षा और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना में इनके उपयोग के उदाहरण भी प्रस्तुत किए गए।

एसजीटीबी खालसा कॉलेज के प्रिंसिपल, प्रो. गुरमोहिंदर सिंह ने कार्यक्रम में इस बात पर जोर देते हुए कहा, “भारतीय भाषाओं में डिजिटल खाई को पाटने में ‘भाषिनी’ अत्यधिक योगदान देगी। हम, एसजीटीबी खालसा कॉलेज में, गुरुमुखी अनुप्रयोगों में योगदान देने के लिए इस टीम के साथ दीर्घकालिक सहयोग करेंगे।”

इन प्रदर्शनों और चर्चाओं में रीयल-टाइम इन्फरेंसिंग, स्केलेबल परिनियोजन और एपीआई-आधारित एकीकरण क्षमताओं पर प्रकाश डाला गया। इसने बहुभाषी पहुँच, समावेशन और डिजिटल सशक्तिकरण को सक्षम करने वाले एक राष्ट्रीय मंच के रूप में ‘भाषिनी’  की भूमिका को और सुदृढ़ किया है।  साथ ही, यह शैक्षणिक संस्थानों और भाषा समुदायों के साथ सहयोगात्मक इकोसिस्टम को मजबूत करने के निरंतर प्रयासों को भी दर्शाता है।

डिजिटल इंडिया भाषिनी प्रभाग के बारे में:

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के तहत डिजिटल इंडिया भाषिनी प्रभाग, एआई-संचालित भाषा प्रौद्योगिकी और बहुभाषी डिजिटल समावेशन के लिए भारत की एक राष्ट्रीय पहल है। केवल एक मॉडल प्रदाता होने के अलावा, ‘भाषिनी’ ने नेशनल हब फॉर लैंग्वेज टेक्नोलॉजी (एनएचएलटी) विकसित किया है, जो दुनिया के सबसे बड़े एआई इन्फरेंसिंग प्लेटफार्मों में से एक है। यह उन्नत स्पीच और टेक्स्ट प्रौद्योगिकियों के माध्यम से भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय भाषाओं में बहुभाषी क्षमताओं को सक्षम बनाता है। डिजिटल इंडिया भाषिनी प्रभाग एक ऐसा मजबूत ओपन-सोर्स सिस्टम चलाता है, जिसका मुख्य काम एआई  मॉडल को बेहतर बनाना, तकनीकी प्रोग्राम (एपीआई) का प्रबंधन करना और सरकारी व संस्थागत स्तर पर इनका सही इस्तेमाल सुनिश्चित करना है।

यह फीडबैक के आधार पर अपने मॉडल को लगातार सुधारता रहता है। साथ ही, ‘भाषादान’ जैसी पहलों के माध्यम से अलग-अलग भाषाओं और आवाज़ों का ढेर सारा डेटा इकट्ठा करके अपनी सेवाओं को और बेहतर बनाता है। यह प्लेटफॉर्म 800 से अधिक सरकारी वेबसाइटों को अपनी सेवाएं दे रहा है और हर दिन 1.5 करोड़ से ज्यादा बार इस्तेमाल (इनफ्रेंस) किया जाता है। यह 36 लिखित भाषाओं और 23 बोलियों (जिनमें जनजातीय बोलियाँ भी शामिल हैं) में 20 से अधिक विशेष भाषा तकनीक सेवाएं प्रदान करता है। डिजिटल इंडिया भाषिनी प्रभाग  न केवल शोध और विकास को बढ़ावा देता है, बल्कि भाषा एआई के क्षेत्र में स्टार्टअप्स और शिक्षण संस्थानों के साथ मिलकर काम करता है। यह अंतर्राष्ट्रीय सहयोग को भी आगे बढ़ाता है, जिससे ‘भाषिनी’ देश के लिए एक समावेशी और भविष्य के लिए तैयार डिजिटल अवसंरचना के रूप में स्थापित हो रही है।

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रक्षा मंत्री की अध्यक्षता में अनौपचारिक मंत्रियों के समूह ने पश्चिम एशिया की स्थिति और भारत की तैयारियों की समीक्षा की

भारत को तनाव में कमी तथा संभावित पुनः वृद्धि—दोनों परिस्थितियों के लिए तैयार रहना चाहिए: रक्षा मंत्री

“प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार संभावित चुनौतियों से निपटने के लिए त्वरित और प्रभावी कदम उठा रही है”

नई दिल्ली – रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में गठित आईजीओएम ने 18 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली स्थित कर्तव्य भवन-2 में अपनी चौथी बैठक के दौरान पश्चिम एशिया की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की तथा भारत की तैयारियों और भावी कार्य योजना पर विचार-विमर्श किया। बैठक में विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर; रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा; पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी; उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी; नागरिक उड्डयन मंत्री श्री किन्जारापु राममोहन नायडू; पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री श्री सर्वानंद सोनोवाल; विद्युत मंत्री श्री मनोहर लाल; श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया; तथा विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह उपस्थित रहे।

रक्षा मंत्री ने संघर्ष की जमीनी स्थिति को अनिश्चित एवं परिवर्तनीय बताते हुए इस बात पर बल दिया कि भारत को न केवल तनाव में कमी बल्कि संभावित पुनः वृद्धि की स्थिति के लिए भी तैयार रहना चाहिए। उन्होंने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार किसी भी संभावित जोखिम या समस्या को कम करने के लिए त्वरित और प्रभावी कदम उठा रही है।

रक्षा मंत्री ने ‘भारत मैरिटाइम इंश्योरेंस पूल” के गठन के प्रस्ताव को केंद्रीय मंत्रिमंडल द्वारा दी गई मंजूरी का विशेष उल्लेख किया, जिसके तहत 12,980 करोड़ रुपये की संप्रभु गारंटी प्रदान की गई है, ताकि समुद्री बीमा कवरेज की निरंतर उपलब्धता सुनिश्चित की जा सके। यह घरेलू बीमा पूल सुनिश्चित करता है कि अंतरराष्ट्रीय स्रोतों से भारतीय बंदरगाहों तक तथा वापसी मार्ग में माल ले जाने वाले पोतों के लिए, यहां तक कि अस्थिर समुद्री गलियारों से गुजरते समय भी, किफायती और निरंतर बीमा कवरेज उपलब्ध रहे। उन्होंने कहा कि यह निर्णय भारत के समुद्री व्यापार के लिए किफायती और निरंतर बीमा कवरेज सुनिश्चित करेगा तथा आयात-निर्यात परिचालन की सुरक्षा और स्थिरता को सुदृढ़ करेगा।

आईजीओएम को अवगत कराया गया कि वैश्विक आपूर्ति में बड़े झटके के बावजूद भारत ने ईंधन का पर्याप्त भंडार बनाए रखा है और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सक्रिय प्रयास किए जा रहे हैं। वर्तमान में भारत के पास कच्चे तेल, पेट्रोल, डीज़ल और एटीएफ का 60 दिनों से अधिक का भंडार उपलब्ध है, जबकि एलएनजी का लगभग 50 दिन और एलपीजी का लगभग 40 दिन का भंडार घरेलू उत्पादन के साथ बनाए रखा गया है। हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य पर निर्भरता से उत्पन्न जोखिमों को कम करने के लिए सरकार ने आयात स्रोतों का विविधीकरण किया है और अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया तथा लैटिन अमेरिका सहित विभिन्न क्षेत्रों से कच्चे तेल, एलएनजी और एलपीजी की आपूर्ति सुनिश्चित की है। अप्रैल और मई 2026 के लिए आयात आवश्यकताएं अधिकांशतः सुनिश्चित कर ली गई हैं, जिससे आपूर्ति की निरंतरता बनी हुई है।

जहां संभव हो, एलपीजी पर निर्भरता कम करने के लिए पाइप्ड नेचुरल गैस (पीएनजी) को बढ़ावा दिया जा रहा है। मार्च 2026 से अब तक 4.76 लाख से अधिक पीएनजी कनेक्शन प्रचालित किए जा चुके हैं तथा 5.33 लाख से अधिक नए कनेक्शनों के लिए पंजीकरण किया गया है। 17 अप्रैल 2026 तक 37,500 से अधिक उपभोक्ताओं ने MYPNGD.in पोर्टल के माध्यम से अपने एलपीजी कनेक्शन समर्पित कर दिए हैं, जो पीएनजी की ओर बढ़ते रुझान को दर्शाता है।

पेट्रोकेमिकल फीडस्टॉक की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए एक अंतर-मंत्रालयी संयुक्त कार्य समूह का गठन किया गया है। 1 अप्रैल 2026 के आदेश के माध्यम से सरकार ने तेल रिफाइनरी कंपनियों, जिनमें पेट्रोकेमिकल कॉम्प्लेक्स शामिल हैं, को C3 एवं C4 स्ट्रीम्स की न्यूनतम मात्रा महत्वपूर्ण क्षेत्रों के लिए उपलब्ध कराने की अनुमति दी है। फार्मास्यूटिकल्स विभाग, रसायन एवं पेट्रोकेमिकल्स विभाग (डीसीपीसी) तथा उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के अनुरोधों के आधार पर एलपीजी पूल से प्रतिदिन 1000 मीट्रिक टन की व्यवस्था की गई है। 9 अप्रैल 2026 से अब तक लगभग 3200 मीट्रिक टन प्रोपिलीन की बिक्री की जा चुकी है।

मंत्रियों को अवगत कराया गया कि थोक मूल्य सूचकांक (डब्ल्यूपीआई) तथा सभी खाद्य वस्तुओं के खुदरा मूल्य स्थिर और सीमित दायरे में हैं। आईएमसी द्वारा 25 लाख मीट्रिक टन गेहूं के अतिरिक्त निर्यात की सिफारिश की गई है। राष्ट्रीय उपभोक्ता हेल्पलाइन 1915 पर एलपीजी से संबंधित शिकायतों में कमी का रुझान देखा गया है। प्रोपिलीन और मेथनॉल की आपूर्ति क्रमशः बीपीसीएल कोच्चि एवं मुंबई रिफाइनरियों तथा असम पेट्रोकेमिकल्स और जीएनएफसी के साथ सुनिश्चित की गई है।

उर्वरकों के संदर्भ में, भारत के पास यूरिया, डीएपी, एनपीके, एसएसपी और एमओपी का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है। 1 मार्च से 16 अप्रैल 2026 के बीच कुल 47.50 लाख टन उर्वरकों की आपूर्ति से भंडार और सुदृढ़ हुआ है। यूरिया उत्पादन के लिए एलएनजी की व्यवस्था पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सहयोग से सफलतापूर्वक की गई है। फॉस्फोरिक एसिड की समस्या का समाधान कर लिया गया है तथा वैकल्पिक उर्वरक के रूप में अमोनियम सल्फेट के आयात की व्यवस्था की जा रही है।

सरकार ने बताया कि विदेशों में भारतीय मिशन विभिन्न प्रकार के उर्वरकों और इनपुट की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए समन्वय कर रहे हैं। जमाखोरी, कालाबाजारी और अनुचित बिक्री के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई की जा रही है। राज्यों के साथ समन्वय बैठकों के अतिरिक्त 459 जिला स्तरीय टास्क फोर्स सक्रिय हैं तथा 1.85 लाख से अधिक निगरानी समितियां उर्वरकों के संतुलित उपयोग के लिए जागरूकता अभियान चला रही हैं।

रक्षा मंत्री ने भारतीय प्रवासी समुदाय के कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए उनके साथ निरंतर संवाद बनाए रखने पर बल दिया। उन्होंने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में उठाए जा रहे कदमों में एकरूपता सुनिश्चित करने तथा सर्वोत्तम प्रथाओं के दस्तावेजीकरण पर जोर दिया।

उन्होंने कहा कि अन्य देशों द्वारा अपनाए जा रहे उपायों का भी समुचित संज्ञान लिया जाना चाहिए। नीतिगत कदमों और सर्वोत्तम प्रथाओं को व्यवस्थित रूप से प्रलेखित किया जाना चाहिए ताकि आवश्यकता पड़ने पर उनसे सीख लेकर हमारी प्रतिक्रिया तंत्र को और सुदृढ़ किया जा सके ।

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किसानों के हित में केंद्र पूरी तरह सतर्क: कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने की खरीफ तैयारियों की समीक्षा

समीक्षा बैठक में कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह ने कहा- हमारे लिए किसान हित सर्वोपरि, संभावित अल नीनो प्रभाव को लेकर सरकार तैयार

मानसून पूर्वानुमान के बीच कृषि मंत्रालय की तैयारी: पानी, बीज और अन्य बातों को लेकर श्री शिवराज सिंह ने दिए दिशा-निर्देश

बेहतर जल भंडारण और समय पर तैयारी से केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह के नेतृत्व में खरीफ पर असर सीमित रखने की रणनीति

नई दिल्ली – केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज कृषि क्षेत्र की वर्तमान स्थिति तथा आगामी खरीफ मौसम की तैयारियों की उच्चस्तरीय समीक्षा करते हुए कृषि सचिव और संबंधित वरिष्ठ अधिकारियों को किसानों के हितों की रक्षा के लिए सभी आवश्यक प्रबंध समय रहते सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। बैठक में मौसम पूर्वानुमान, जल उपलब्धता, फसलों की स्थिति, बीज एवं अन्य कृषि आदानों की व्यवस्था, राज्यों की तैयारियों तथा संभावित प्रतिकूल मौसम परिस्थितियों से निपटने की कार्ययोजना पर विस्तार से चर्चा की गई। समीक्षा बैठक में कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि हमारे लिए किसान हित सर्वोपरि है और संभावित अल नीनो प्रभाव को लेकर सरकार तैयार है।

बैठक में बताया गया कि भारतीय मौसम विज्ञान विभाग ने वर्ष 2026 के दक्षिण-पश्चिम मानसून के सामान्य से कम रहने की संभावना व्यक्त की है और मौसमी वर्षा देशभर में दीर्घकालीन औसत के लगभग 92 प्रतिशत रहने का अनुमान है। साथ ही यह भी संकेत दिया गया है कि मानसून सीजन के दौरान अल नीनो की स्थिति विकसित हो सकती है, हालांकि अंतिम और अद्यतन आकलन मई 2026 के अंतिम सप्ताह में जारी किया जाएगा। बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने समीक्षा के दौरान स्पष्ट किया कि मौसम संबंधी पूर्वानुमान को गंभीरता से लेते हुए सरकार पूरी तैयारी के साथ आगे बढ़ रही है और किसानों को किसी प्रकार की चिंता की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्य सरकारों के समन्वित प्रयास, बेहतर जल प्रबंधन, उन्नत तकनीक, सिंचाई सुविधाओं के विस्तार और जलवायु-सहनशील कृषि उपायों के कारण संभावित चुनौतियों का प्रभाव काफी हद तक नियंत्रित किया जा सकता है।

बैठक में यह महत्वपूर्ण तथ्य सामने रखा गया कि वर्तमान समय में देश के जलाशयों का जलस्तर संतोषजनक स्थिति में है और समग्र भंडारण सामान्य से बेहतर है। उपलब्ध आकलन के अनुसार जलाशयों का भंडारण इस अवधि के सामान्य स्तर के 127.01 प्रतिशत पर है, जिससे खरीफ मौसम में सिंचाई आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण सहायता मिलेगी और नमी की कमी के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकेगा। इस आधार पर बैठक में यह आकलन व्यक्त किया गया कि संभावित अल नीनो प्रभाव के बावजूद कृषि क्षेत्र पर इसका असर पहले की तुलना में अपेक्षाकृत सीमित रहने की संभावना है। विशेष रूप से बेहतर जल उपलब्धता, सूक्ष्म सिंचाई, वैज्ञानिक सलाह, फसल विविधीकरण और समय पर हस्तक्षेप के कारण खेती अब पहले की अपेक्षा अधिक सक्षम और अनुकूलनशील बनी है।

समीक्षा के दौरान यह भी उल्लेख किया गया कि वर्ष 2000 से 2016 के बीच अल नीनो का प्रभाव कृषि उत्पादन पर अपेक्षाकृत अधिक स्पष्ट दिखता था, क्योंकि उस समय वर्षा-निर्भरता अधिक थी और जलवायु जोखिमों से निपटने की व्यवस्थाएं वर्तमान की तुलना में सीमित थीं। हाल के वर्षों में तकनीकी प्रगति, बेहतर कृषि प्रबंधन, जल संरक्षण, सिंचाई नेटवर्क के विस्तार और उन्नत बीजों के उपयोग से फसलों की उत्पादकता में अधिक स्थिरता आई है। बैठक में यह भी रेखांकित किया गया कि कुछ फसलें, विशेषकर धान, अपेक्षाकृत अधिक स्थिरता दिखाती हैं, जबकि अन्य फसलों के लिए भी उपयुक्त प्रबंधन उपाय पहले से तैयार किए जा रहे हैं। केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि सरकार का जोर इस बात पर है कि क्षेत्र-विशिष्ट और फसल-विशिष्ट रणनीति अपनाकर किसानों को समय पर सलाह, बीज, संसाधन और विकल्प उपलब्ध कराए जाएं।

कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी राज्य किसी भी विपरीत मौसम की स्थिति से निपटने के लिए पूर्ण तैयारी रखें और जिला स्तर तक आकस्मिक योजनाओं को सक्रिय किया जाए। उन्होंने कहा कि बीज, उर्वरक और अन्य आवश्यक कृषि आदानों की उपलब्धता सुनिश्चित करने के साथ-साथ वैकल्पिक फसल विकल्प, देरी से बुवाई की रणनीति और सूखा-सहनशील किस्मों को बढ़ावा दिया जाए, ताकि किसानों को व्यवहारिक और त्वरित समाधान मिल सकें। बैठक में यह भी बताया गया कि खरीफ और रबी दोनों मौसमों के लिए बीज उपलब्धता आवश्यकता से अधिक है तथा आकस्मिक स्थितियों के लिए राष्ट्रीय बीज रिजर्व की व्यवस्था भी रखी गई है। यह तैयारी इस उद्देश्य से की गई है कि यदि किसी क्षेत्र में मौसम का प्रतिकूल प्रभाव दिखे तो वहां वैकल्पिक बीज और उपयुक्त किस्में तुरंत उपलब्ध कराई जा सकें।

श्री चौहान ने स्पष्ट किया कि किसानों को किसी प्रकार की कठिनाई से बचाने के लिए निगरानी तंत्र सक्रिय है और स्थिति की नियमित समीक्षा की जा रही है। राज्यों के साथ सतत समन्वय, फसल मौसम निगरानी, जिला कृषि आकस्मिक योजनाओं का अद्यतन और संकट प्रबंधन संबंधी संस्थागत व्यवस्था के माध्यम से समय पर निर्णय सुनिश्चित किए जा रहे हैं। श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि केंद्र सरकार का उद्देश्य केवल संभावित जोखिम का आकलन करना नहीं बल्कि समय रहते ऐसे सभी कदम उठाना है जिससे किसानों का आत्मविश्वास बना रहे, खेती की निरंतरता प्रभावित न हो और खरीफ सीजन सुचारु रूप से आगे बढ़े। उन्होंने भरोसा जताया कि बेहतर जल प्रबंधन, तकनीकी विकास, उन्नत कृषि पद्धतियों और समय पर की गई तैयारियों के बल पर संभावित चुनौतियों का प्रभाव कम किया जा सकेगा और किसानों के हितों की पूरी रक्षा की जाएगी।

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन की झलकियां साझा कीं

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्र के नाम अपने संबोधन की झलकियां साझा की हैं।

एक्स(X) पर किए गए कई पोस्ट की एक श्रृंखला में श्री मोदी ने कहा;

“महिला आरक्षण का विरोध करके विपक्षी दलों ने संविधान निर्माताओं की भावनाओं का अपमान किया है। देश की नारी शक्ति के स्वाभिमान और आत्मसम्मान पर चोट करने वाले अब माताओं-बहनों और बेटियों के आक्रोश से बच नहीं पाएंगे।”

 

“नारी शक्ति वंदन अधिनियम से जुड़ा संशोधन भारतवर्ष की नारी को नई उड़ान देने का महायज्ञ था। लेकिन कांग्रेस, TMC, समाजवादी पार्टी और DMK जैसे दलों ने इसकी भ्रूणहत्या कर दी।”

 

“मुझे व्यक्तिगत तौर पर आशा थी कि महिला आरक्षण को लेकर कांग्रेस अपने पापों का प्रायश्चित करेगी। लेकिन उसने एक बार फिर इस अवसर को खो दिया।”

 

“नारी शक्ति वंदन अधिनियम के विरोध की एक बड़ी वजह है- परिवारवादी पार्टियों का डर! उन्हें लगता है कि महिलाएं सशक्त हो गईं, तो उनका नेतृत्व खतरे में पड़ जाएगा।”

 

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डॉ. जितेंद्र सिंह ने ‘साधना सप्ताह-2026’ में शीर्ष प्रदर्शन करने वाले मंत्रालयों और राज्यों को सम्मानित किया

नई दिल्ली – विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (स्वतंत्र प्रभार) एवं पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री और प्रधानमंत्री कार्यालय, परमाणु ऊर्जा विभाग, अंतरिक्ष विभाग, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन विभाग के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने “साधना सप्ताह-2026” समारोह में शीर्ष प्रदर्शन करने वाले मंत्रालयों, विभागों और राज्यों को सम्मानित किया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि पुरस्कार प्रणाली को व्यक्तिगत प्रोफाइलिंग से हटाकर प्रमुख कार्यक्रमों से जुड़े प्रदर्शन और जिला स्तर पर जटिल चुनौतियों के समाधान पर केंद्रित किया गया है, जो शासन में परिणाम-आधारित मूल्यांकन की ओर एक बदलाव का संकेत है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने भागीदारी की व्यापकता पर कहा कि सप्ताह भर चलने वाली इस पहल में 31.8 करोड़ से अधिक लोगों ने पाठ्यक्रम पूरे किए, जिसमें लगभग 47 लाख सरकारी कर्मचारियों ने भाग लिया। इनमें से 33 लाख से अधिक लोगों ने निर्धारित चार घंटे का प्रशिक्षण पूरा किया। यह गतिविधि पिछले राष्ट्रीय शिक्षा सप्ताह की तुलना में लगभग आठ गुना अधिक थी, जो इसकी व्यापकता और सरकारी क्षेत्र में निरंतर सीखने की दिशा में आए बदलाव को दर्शाती है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने “साधना सप्ताह” को “जन-प्रेरित आंदोलन” बताते हुए कहा कि इस पहल ने एक ऐसी संस्कृति को बढ़ावा दिया है जहां विभिन्न स्तरों के अधिकारी मजबूरी के बजाय पेशेवर प्रतिबद्धता के कारण सीखने में संलग्न हैं, जो सिविल सेवाओं के अंदर पेशेवर गौरव और आत्म-सुधार की दिशा में एक व्यापक बदलाव में योगदान दे रहा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यह पहल उल्लेखनीय रूप से समावेशी रही है, जिसमें वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ ग्रुप सी और डी के कर्मचारियों और फ्रंटलाइन कार्यकर्ताओं की भी मजबूत भागीदारी रही है। इससे इस विचार को बल मिलता है कि क्षमता-निर्माण में पदानुक्रम की सीमाओं को पार करना आवश्यक है और इससे सेवा वितरण और जन विश्वास को सीधे तौर पर मजबूती मिलनी चाहिए।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की भूमिका पर भी जोर दिया और विशेष रूप से जमीनी स्तर पर भागीदारी बढ़ाने में उनके नेतृत्व और सक्रिय भागीदारी का उल्लेख किया, जहां बेहतर कौशल का प्रभाव नागरिक-उन्मुख सेवाओं में तुरंत दिखाई देता है।

उन्होंने संस्थागत तंत्रों का जिक्र करते हुए क्षमता निर्माण आयोग के योगदान पर प्रकाश डाला, जो एक अपेक्षाकृत नई पहल है जिसने व्यापक पहुंच और सहयोग को सक्षम बनाया है, जिसमें निजी क्षेत्र के साथ जुड़ाव भी शामिल है, जिससे पूरे सिस्टम में क्षमता-निर्माण प्रयासों को बढ़ाने में मदद मिली है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार प्रशिक्षण के दायरे को विज्ञान प्रशासकों और शिक्षाविदों सहित नए क्षेत्रों तक विस्तारित कर रही है, और सांसदों और मंत्रियों के लिए भी इसी तरह के प्रशिक्षण प्रयासों पर विचार किया जा रहा है, जो शासन की बदलती मांगों के लिए संस्थानों को तैयार करने के व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता और डिजिटल उपकरणों को भविष्य के लिए तैयार शासन के प्रमुख साधन बताया। सरकारी कर्मचारी बदलते परिवेश के साथ तालमेल बिठाने के लिए उभरती हुई दक्षताओं को तेजी से अपना रहे हैं। उन्होंने आगाह किया कि प्रौद्योगिकी को मानवीय विवेक का पूरक होना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सत्यनिष्ठा सार्वजनिक सेवा का मूलमंत्र है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने सरकार के शिक्षण मंच के “प्राचीन” शुरुआत से लेकर व्यापक रूप से उपयोग किए जाने वाले इंटरफेस में विकसित होने की ओर भी इशारा किया, जो विभागों में बड़े पैमाने पर भागीदारी और निरंतर जुड़ाव का समर्थन करता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने मंत्रालयों, राज्यों, प्रशिक्षण संस्थानों और इकोसिस्टम के भागीदारों सहित पुरस्कार विजेताओं को बधाई देते हुए कहा कि इस तरह की मान्यता व्यापक मिशन कर्मयोगी ढांचे के लिए मानदंड स्थापित करती है और शासन के अभिन्न अंग के रूप में निरंतर सीखने की भावना को आगे बढ़ाने की आवश्यकता को सुदृढ़ करती है।

ये घटनाक्रम क्षमता-निर्माण को एक सतत प्रक्रिया के रूप में संस्थागत रूप देने के लिए केंद्र के निरंतर प्रयासों को रेखांकित करते हैं, जिसमें सीखने के परिणामों को शासन प्रदर्शन से जोड़ा जाता है और साथ ही उभरती तकनीकी और प्रशासनिक चुनौतियों के लिए सिविल सेवाओं को तैयार किया जाता है।

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह शुक्रवार को नई दिल्ली के विज्ञान भवन में “साधना सप्ताह-2026” के समापन सत्र को संबोधित करते हुए।

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बेहतर ट्रैक, विश्वस्तरीय रखरखाव और उन्नत मॉनिटरिंग सिस्टम रेल यात्राओं को अधिक सुरक्षित बना रहे हैं और पूरे देश में यात्रियों का भरोसा जीत रहे हैं

नई दिल्ली – दुनिया के सबसे विशाल और जटिल रेल नेटवर्कों में से एक, भारतीय रेलवे प्रतिदिन 14,000 से अधिक यात्री ट्रेनों सहित कुल 25,000 से ज्यादा ट्रेनें संचालित करता है, जिनमें रोजाना दो करोड़ से अधिक लोग सफर करते हैं। दशकों तक, रेलवे को लेकर होने वाली सार्वजनिक चर्चाओं का केंद्र केवल विस्तार और कनेक्टिविटी ही रहा। हालांकि, वर्ष 2014 के बाद से एक बुनियादी नीतिगत बदलाव के जरिए सुरक्षा को सभी परिचालनों के केंद्र में रखा गया। इसके परिणाम अब ठोस आंकड़ों में स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं, जो संरचनात्मक, तकनीकी और वित्तीय स्तर पर हुए समान रूप से महत्त्वपूर्ण बदलावों को दर्शाते हैं।

एक राष्ट्रीय प्रकाशन में अपने लेख के माध्यम से केंद्रीय रेल मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने रेखांकित किया कि वैश्विक स्तर पर रेल सुरक्षा का आकलन प्रति बिलियन पैसेंजर-किलोमीटर होने वाली मृत्यु या दुर्घटनाओं के आधार पर किया जाता है, जिससे अलग-अलग स्तर के रेल सिस्टम के बीच तुलना संभव हो पाती है। श्री वैष्णव ने इस बात पर जोर दिया कि प्रधानमंत्री श्री मोदी के पहले कार्यकाल के दौरान ही एक स्पष्ट संदेश दे दिया गया था: सुरक्षा सर्वोपरि। इसी विजन के साथ, 2014 से भारतीय रेलवे ने अपनी सुरक्षा व्यवस्था के कायाकल्प के लिए तकनीकी-आधारित, व्यापक और निरंतर वित्तीय निवेश वाली रणनीति अपनाई है।

 

केंद्रीय मंत्री ने इस बात का भी उल्लेख किया कि यूरोपीय संघ, जिसे सुरक्षा के मामले में एक मानक माना जाता है, वहाँ रेल यात्रा के दौरान मृत्यु का जोखिम लगभग 0.09 फेटालिटी प्रति बिलियन पैसेंजर-किलोमीटर है। यह रेल यात्रा को सड़क परिवहन से कहीं अधिक सुरक्षित और हवाई यात्रा के बराबर बनाता है। श्री वैष्णव ने कहा कि भारत की इस सफलता को केवल बराबरी के दावों से नहीं, बल्कि बदलाव की रफ्तार और नीयत से समझा जा सकता है। उन्होंने आगे बताया कि कॉन्सीक्वेंशियल एक्सीडेंट इंडेक्स अब घटकर 0.01 पर आ गया है, जो अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं द्वारा ट्रैक किए जाने वाले दुनिया के बड़े रेल नेटवर्कों के औसत से भी बेहतर है।

बीता दशक बनाम आज का दशक: रेलवे का कायाकल्प

श्री वैष्णव ने ‘व्यवस्थागत बदलाव के सबसे स्पष्ट प्रमाण’ के रूप में, पिछले एक दशक के दौरान हुई रेल दुर्घटनाओं के तुलनात्मक आंकड़े प्रस्तुत किए। उन्होंने रेखांकित किया कि इस बड़े बदलाव का मुख्य संकेतक ‘कॉन्सीक्वेंशियल ट्रेन एक्सीडेंट्स’ (गंभीर रेल दुर्घटनाओं) में आई भारी कमी है। साल 2014-15 में जहाँ ऐसी 135 दुर्घटनाएं दर्ज की गई थीं, वहीं 2025-26 में यह संख्या घटकर मात्र 16 रह गई है। यह लगभग 89 प्रतिशत की प्रभावशाली कमी है और खास बात यह है कि यह उपलब्धि तब हासिल हुई है जब यात्री और मालगाड़ी परिचालन में पहले के मुकाबले भारी बढ़ोतरी हुई है। वहीं, ट्रेनों द्वारा तय की गई दूरी के आधार पर दुर्घटनाओं को मापने वाला ‘कॉन्सीक्वेंशियल एक्सीडेंट इंडेक्स’ (गंभीर दुर्घटना सूचकांक) भी 0.11 से गिरकर 0.01 पर आ गया है। लगभग 91 प्रतिशत का यह सुधार दर्शाता है कि भारतीय रेल का पूरा ढांचा अब पहले से कहीं अधिक सुरक्षित हो चुका है।

उन्होंने कहा कि इन उपलब्धियों ने भारतीय रेलवे को दुनिया के अग्रणी रेल नेटवर्कों की श्रेणी में मजबूती से खड़ा कर दिया है। यह सफलता दुनिया के सबसे जटिल रेल नेटवर्क में से एक को संचालित करते हुए हासिल की गई है, जहाँ यात्री ट्रेनें, मालगाड़ियाँ, उपनगरीय (लोकल) और एक्सप्रेस सेवाएँ एक ही ट्रैक/कॉरिडोर साझा करती हैं। केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि सुरक्षा में यह सुधार तब हुआ है, जब परिचालन का दायरा लगातार बढ़ाया जा रहा है—यानी अब पहले से अधिक ट्रेनें चल रही हैं, अधिक यात्री सफर कर रहे हैं और ट्रेनें पहले से कहीं ज्यादा दूरी तय कर रही हैं।

केंद्रीय मंत्री ने जोर देते हुए कहा कि जो बात सबसे ज्यादा मायने रखती है, वह है बचाई गई जान। उन्होंने आगे कहा कि दुर्घटनाओं में होने वाली मौतों की संख्या में आई यह बड़ी कमी इस बात का संकेत है कि अब हमारा सिस्टम महज हादसों पर प्रतिक्रिया देने के बजाय, उन्हें होने से रोकने के लिए बनाया गया है। अब व्यवस्था ऐसी है जो बड़े हादसों की आशंका को जड़ से खत्म करने की दिशा में काम करती है।

सुरक्षा ही प्राथमिकता: निर्बाध निवेशनिरंतर सुधार

श्री वैष्णव ने इस बात पर जोर दिया कि सुरक्षा का यह कायाकल्प केवल नेक इरादों से नहीं, बल्कि अभूतपूर्व वित्तीय निवेश के दम पर मुमकिन हुआ है। सुरक्षा से संबंधित बजट, जो साल 2013-14 में ₹39,200 करोड़ था, वह 2025-26 में बढ़कर ₹1,17,693 करोड़ और 2026-27 के लिए ₹1,20,389 करोड़ तय किया गया है। वार्षिक सुरक्षा खर्च में यह तीन गुना से भी अधिक की बढ़ोतरी है। इसी भारी निवेश की बदौलत ट्रैक, सिग्नल प्रणाली, रोलिंग स्टॉक और सुरक्षा प्रणालियों का आधुनिकीकरण बिना किसी देरी या ढिलाई के संभव हो पाया है। केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट रूप से कहा कि लगातार एक दशक से बजट में दिखाई गई यह प्रतिबद्धता ही एक स्थायी सुधार और एक अस्थायी प्रयास के बीच का बड़ा अंतर है।

कवच: आत्मनिर्भर भारत की तकनीकसुरक्षा का नया मानक

सुरक्षा के क्षेत्र में केंद्रीय मंत्री द्वारा किए गए सबसे महत्वपूर्ण सुधारों में से एक ‘कवच’ है। यह भारत की अपनी स्वदेशी ‘ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम’ है। अंतरराष्ट्रीय स्तर के उच्चतम सुरक्षा मानकों पर खरी उतरने वाली यह तकनीक उस स्थिति में ट्रेन को स्वतः नियंत्रित कर लेती है, जब या तो ड्राइवर से सिग्नल छूट जाए या ट्रेन की रफ्तार तय सीमा से ज्यादा हो। ‘कवच 4.0’ को अब दिल्ली-मुंबई और दिल्ली-हावड़ा जैसे व्यस्त रेल मार्गों के 1,452 रूट किलोमीटर हिस्से में सफलतापूर्वक लागू कर दिया गया है।

हादसों का डर खत्म : मानवरहित फाटकों से मुक्त भारतीय रेल

श्री वैष्णव ने ब्रॉड गेज नेटवर्क से मानवरहित रेलवे क्रॉसिंग को पूरी तरह से खत्म करने को सुरक्षा के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह रेल परिचालन और आम लोगों के साथ होने वाले हादसों के सबसे बड़े जोखिम को हमेशा के लिए खत्म कर देती है। जनवरी 2019 तक पूरे ब्रॉड गेज नेटवर्क से सभी मानवरहित क्रॉसिंग हटा ली गईं। इस मिशन को सफल बनाने के लिए देशभर में 14,000 से अधिक रोड ओवरब्रिज और अंडरपास का निर्माण किया गया, जिसने रेल सफर के साथ-साथ सड़क यातायात को भी सुरक्षित और बाधा रहित बना दिया है।

रोलिंग स्टॉक और ट्रैक: सुरक्षा ही रेलवे की नई संरचना

केंद्रीय मंत्री ने रेखांकित किया कि सुरक्षा में सुधार केवल प्रणालियों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह अब भारतीय रेलवे के फिजिकल हार्डवेयर का भी अभिन्न हिस्सा बन चुका है। साल 2014 से 2025 के बीच भारतीय रेल ने 42,600 से अधिक एलएचबी कोच का निर्माण किया, जबकि 2004-2014 के दौरान यह संख्या मात्र 2,300 थी। एलएचबी कोच विशेष रूप से इस तरह डिजाइन किए गए हैं कि टक्कर की स्थिति में वे एक-दूसरे के ऊपर नहीं चढ़ते, जिससे यात्रियों की सुरक्षा कई गुना बढ़ जाती है। वित्त वर्ष 2025-26 में ‘मेक इन इंडिया’ प्रयासों को और मजबूती देते हुए 1,674 इंजनों का रिकॉर्ड उत्पादन किया गया और साथ ही 6,677 नए एलएचबी कोच तैयार किए गए, जो रेल सफर को पहले से कहीं अधिक सुरक्षित और आरामदायक बनाते हैं।

ट्रैक की गुणवत्ता पर चर्चा करते हुए श्री वैष्णव ने कहा कि 60 किलोग्राम की भारी पटरियों, लंबे वेल्डेड रेल पैनलों, उन्नत वेल्डिंग तकनीकों और अत्याधुनिक अल्ट्रासोनिक फ्लॉ डिटेक्शन टेस्टिंग को व्यापक स्तर पर अपनाने से रेल फ्रैक्चर में 92 प्रतिशत और वेल्ड फेलियर में 93 प्रतिशत की भारी कमी आई है। पटरियों की मजबूती और निगरानी में आए इस सुधार ने सीधे तौर पर ट्रैक की खामियों के कारण होने वाली पटरी से उतरने की घटनाओं के जोखिम को न्यूनतम कर दिया है।

जीपीएस आधारित फॉग डिवाइस और डिजिटल स्टेशन: जमीनी स्तर पर तकनीकी क्रांति

श्री वैष्णव ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि बड़े इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश के साथ-साथ जमीनी स्तर पर तकनीक को अपनाना सुरक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है। सर्दियों में कम विज़िबिलिटी के दौरान लोको पायलटों की मदद करने वाले जीपीएस आधारित ‘फॉग सेफ्टी डिवाइस’ की संख्या में भारी बढ़ोतरी की गई है—जहाँ पहले ये केवल 90 यूनिट थे, वहीं अब कोहरा प्रभावित क्षेत्रों में लगभग 30,000 डिवाइस लगाए जा चुके हैं। यह तकनीक लोको पायलट को आने वाले सिग्नल, रेलवे क्रॉसिंग और अन्य लैंडमार्क्स की रियल-टाइम सटीक जानकारी प्रदान करती है। श्री वैष्णव ने यह भी रेखांकित किया कि अब लगभग 4,000 रेलवे स्टेशन पूरी तरह से डिजिटल हो चुके हैं, जबकि 2014 से पहले के दशक में यह संख्या 900 से भी कम थी। इस डिजिटल बदलाव ने केंद्रीकृत और रियल-टाइम परिचालन निगरानी को उस स्तर पर संभव बना दिया है, जिसकी पहले कल्पना भी नहीं की जा सकती थी।

मानवीय आधार: कर्मचारियों का कल्याणसुरक्षा का सबसे बड़ा निवेश

केंद्रीय मंत्री ने सुरक्षा के उस पहलू पर प्रकाश डाला जिसकी सार्वजनिक चर्चाओं में अक्सर अनदेखी कर दी जाती है। श्री वैष्णव ने जोर देकर कहा कि कोई भी तकनीक मानवीय सतर्कता का विकल्प नहीं हो सकती, इसीलिए भारतीय रेलवे ने अपने रनिंग स्टाफ (लोको पायलट और सहायक) की कार्य स्थितियों को बेहतर बनाने के लिए व्यवस्थित निवेश किया है। पूरे रेल नेटवर्क में अब वातानुकूलित विश्राम कक्ष, ड्यूटी के तय घंटे, नियमित काउंसलिंग और बेहतर आराम सुविधाओं का विस्तार किया गया है। केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कहा: ‘आज सुरक्षा केवल प्रणालियों के भरोसे नहीं, बल्कि उन लोगों के भरोसे भी मजबूत हुई है जो इन प्रणालियों को चलाते हैं।’ मानवीय और तकनीकी पहलुओं का यह समन्वय दर्शाता है कि भारतीय रेलवे सुरक्षा को केवल मशीनी नजरिए से नहीं, बल्कि एक समग्र और एकीकृत दृष्टिकोण से देख रही है।

सफलता का नया मानक: सुरक्षा के प्रति रेलवे का अटूट संकल्प

केंद्रीय मंत्री ने सुरक्षा के वास्तविक स्वरूप पर गहराई से प्रकाश डालते हुए कहा कि रेलवे सुरक्षा का स्वभाव ऐसा है कि जब यह सुचारू रूप से काम करती है, तो शायद ही किसी का ध्यान इस ओर जाता है। उन्होंने मार्मिक शब्दों में कहा, जो ट्रेनें दुर्घटनाग्रस्त नहीं होतीं, वे सुर्खियाँ नहीं बनतीं। लेकिन खबरों का यही अभाव इस बात का सबसे बड़ा प्रमाण है कि हमारे लिए हर एक नागरिक का जीवन अनमोल है। श्री वैष्णव ने तर्क दिया कि सुरक्षा संस्कृति में आए इस क्रांतिकारी बदलाव का सबसे बड़ा सबूत कोई एक नाटकीय घटना नहीं, बल्कि पिछले एक दशक से दुर्घटनाओं और हताहतों की संख्या में आ रही निरंतर और डेटा-आधारित गिरावट है। इतने व्यापक रेल नेटवर्क पर, निरंतर और निर्बाध सुरक्षा सुनिश्चित करना उस बदली हुई कार्य-संस्कृति का प्रमाण है, जिसे पिछले वर्षों में ठोस निवेश और अटूट संकल्प के जरिए धरातल पर उतारा गया है।

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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज लोक सभा में परिसीमन विधेयक 2026, संविधान (131 वां संशोधन) विधेयक, 2026 और संघ राज्यक्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक, 2026 पर चर्चा का उत्तर दिया

नई  दिल्ली – केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज लोक सभा में परिसीमन विधेयक 2026, संविधान (131 वां संशोधन) विधेयक 2026 और संघ राज्यक्षेत्र विधि (संशोधन) विधेयक 2026 पर चर्चा का उत्तर दिया।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि इस चर्चा में 130 सदस्यों ने अपनी बात रखी है जिनमे 56 महिलाएं हैं। उन्होंने कहा कि चर्चा के दौरान विपक्षी गठबंधन ने स्पष्ट रूप से महिला आरक्षण विधेयक का विरोध किया है। उन्होंने कहा कि यह विरोध अमल के तरीकों का नहीं बल्कि सिर्फ और सिर्फ महिला आरक्षण का विरोध है। उन्होंने कहा कि हमारा उद्देश्य है कि संविधान सभा द्वारा हमारे लोकतंत्र की नींव में रखे गए एक व्यक्ति, एक वोट और एक मूल्य के सिद्धांत को लागू किया जाए।

श्री अमित शाह ने कहा कि हमारे संविधान में समय-समय पर परिसीमन का प्रावधान किया गया है और परिसीमन के प्रावधान से ही अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की संख्या बढ़ती है। उन्होंने कहा कि परिसीमन का विरोध करने वाले अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति की सीटों में वृद्धि का विरोध कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि संतुलित, समावेशी और व्यावहारिक लोकतांत्रिक ढांचा तैयार करने की ज़िम्मेदारी संविधान ने सरकार को दी है और अभी यह ज़िम्मेदारी नरेन्द्र मोदी जी की सरकार को दी गई है। श्री शाह ने कहा कि संघीय संतुलन बनाए रखना, लोक सभा में जनसंख्या के अनुरूप प्रतिनिधित्व लाना औऱ राज्यों की शक्तियों के बीच संतुलन बनाना भी परिसीमन के उद्देश्य हैं। उन्होंने कहा कि इसके साथ-साथ नए भूगोल, प्रशासनिक वास्तविकताओं, शहरीकरण और सड़क, रेल आदि से बढ़ी हुई कनेक्टिविटी और नए ज़िलों का संज्ञान भी परिसीमन मे लेना होता है। श्री शाह ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 81, 82 और 170 में इन सभी सिद्धांतों को समाहित किया गया है औऱ उनके निर्वहन के लिए नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में सरकार ये संविधान संशोधन लाई है। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तीकरण, समान प्रतिनिधित्व और संतुलित संघीय ढांचे के निर्माण करने की ज़िम्मेदारी के निर्वहन से ही ये विधेयक आए हैं।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नारीशक्ति वंदन अधिनियम में जिक्र किया गया है कि 2026 के बाद होने वाली जनगणना के बाद होने वाले परिसीमन में महिलाओं के लिए आरक्षण सुनिश्चित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि 1971 में विपक्षी पार्टी की सरकार ने इसे फ्रीज़ किया था और इसी कारण हमें इसका जिक्र करना पड़ा है। उन्होंने कहा कि 1971 से अब तक सीटों की संख्या फ्रीज़ रही है और आज 127 सीटें ऐसी हैं जिनमें 20 लाख से अधिक वोटर्स हैं। इन सीटों पर एक मत, एक वोटर और एक मूल्य के सिद्धांत का पूर्ण उल्लंघन होता है।

श्री अमित शाह ने कहा कि सबसे पहले 1972 में तत्कालीन प्रधानमंत्री ने परिसीमन विधेयक लाकर सीटों को 525 से बढ़ाकर 545 किया और फिर इसे फ्रीज कर दिया। उन्होंने कहा कि 1976 में सत्ता बचाने के लिए आपातकाल के दौरान 42वें संशोधन द्वारा परिसीमन पर रोक लगा दी गई थी। उस वक्त भी मुख्य विपक्षी पार्टी ने ही परिसीमन से देश की जनता को वंचित रखा था और आज भी मुख्य विपक्षी पार्टी ही देश को परिसीमन से वंचित रख रही है। उन्होंने कहा कि 2001 में 84वां संशोधन हुआ और 2026 तक सीटों की संख्या को फ्रीज कर दिया गया। 1976 से 2026 तक के 50 वर्षों तक देश की जनता को जनसंख्या के अनुपात में प्रतिनिधित्व नहीं मिला। श्री शाह ने कहा कि 2026 में यह सीमा समाप्त हो गई है और अब परिसीमन करने पर यह प्रक्रिया 2029 से पहले पूरी नहीं हो सकता क्योंकि परिसीमन आयोग को हर मतक्षेत्र में जाकर पब्लिक हियरिंग देनी होती है।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि 1976 में देश की आबादी 54.79 करोड़ थी और आज 140 करोड़ है। उन्होंने कहा कि सरकार का दायित्व है कि जब सदन के सदस्यों की संख्या बढ़ेगी तो सरकार सदन के कामकाज के दिनों की संख्या भी बढ़ाए। उन्होंने कहा कि हम हर राज्य की सीटों में 50 प्रतिशत वृद्धि कर रहे हैं जिससे किसी भी राज्य का प्रोरेटा नहीं हो। उन्होंने कहा कि कुछ सदस्यों ने सवाल उठाया कि जनगणना समय पर क्यों नहीं हुई। श्री शाह ने कहा कि 2021 में जनगणना होनी थी लेकिन उसी समय इस सदी की सबसे बड़ी महामारी कोविड का संकट आया और उसके कारण जनगणना संभव नहीं हो सकी। उन्होंने कहा कि कोविड का संकट समाप्त होने के बाद देश को इससे उबरने में काफी समय लगा। श्री शाह ने कहा कि जब 2024 में जनगणना की शुरुआत हुई तब कुछ दलों ने उचित मांग उठाई कि जाति के आधार पर जनगणना करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सबके साथ चर्चा के बाद निर्णय लिया गया कि हम जाति जनगणना कराएंगे। अब जो जनगणना हो रही है उसमें जाति की गणना भी होगी। श्री शाह ने कहा कि मुख्य विपक्षी पार्टी के समय में पहले जो भी जनगणना हुई, उस समय जाति जनगणना नहीं होती थी और न ही कभी धर्म पूछा जाता था। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने 2026 की जनगणना जाति के साथ कराने का निर्णय किया है।

श्री अमित शाह ने कहा कि जब से यह बिल आया है तब से विपक्ष ने भ्रांतियां फैलानी शुरू कर दी हैं। उन्होंने कहा कि सबसे पहली भ्रांति फैलाई गई कि जाति जनगणना को टालने के लिए सरकार यह संविधान संशोधन लेकर आई है। श्री शाह ने कहा कि सरकार तीन माह पहले ही जाति जनगणना का पूरा टाइम टेबल घोषित कर चुकी है, इसीलिए जाति जनगणना को टालने का सवाल ही नहीं उठता। उन्होंने कहा कि एक और भ्रांति फैलाई गई कि दक्षिण के राज्यों के साथ अन्याय होगा। श्री शाह ने कहा कि दक्षिण के राज्यों का भी इस सदन पर उतना ही अधिकार है जितना उत्तर के राज्यों का अधिकार है। उन्होंने कहा कि लक्षद्वीप का भी इस सदन पर उतना ही अधिकार है जितना उत्तर प्रदेश, गुजरात और बिहार का। गृह मंत्री ने कहा कि विपक्ष को उत्तर-दक्षिण के नैरेटिव के साथ देश के टुकड़े-टुकड़े नहीं करने चाहिए बल्कि इससे ऊपर उठना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिन्होंने संविधान हाथ में लेकर शपथ ली है, वे लोग उत्तर-दक्षिण का भेद करना चाहते हैं जो हम कभी नहीं होने देंगे। श्री शाह ने कहा कि जो भी सदस्य संसद में शपथ लेता है, वह भारत को अक्षुण्ण रखने और और पूरे भारत के कल्याण की शपथ लेता है। उन्होंने कहा कि कोई भी सदस्य अपनी कॉन्स्टिट्यूएंसी, अपने राज्य, अपने धर्म और अपनी जाति की शपथ नहीं लेता है। गृह मंत्री ने कहा कि देश का विभाजन कर कोई सत्ता प्राप्त नहीं कर सकता।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि परिसीमन आयोग और संवैधानिक सुधार को लेकर यह नैरेटिव फैलाया जा रहा है कि इसमें प्रतिनिधित्व की दृष्टि से दक्षिण के राज्यों का नुकसान होगा, जबकि यह सच नहीं है। उन्होंने कहा कि वर्तमान में कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु और केरल में लोक सभा की सीटों की कुल संख्या 129 हैं, जो देश में लोक सभा की कुल 543 सीटों का 23.76 प्रतिशत है। अगर इसमें 50 प्रतिशत सीटों की वृद्धि करके पांचों राज्यों में सीटों का आवंटन किया जाएगा, तब सीटों की संख्या 129 से बढ़ कर 195 हो जाएगी। उन्होंने कहा कि परिसीमन के बाद देश में लोक सभा की कुल सीटों की संख्या जब 816 हो जाएगी, तब दक्षिणी राज्यों को आवंटित होने वाली सीटें कुल सीटों का 23.87 प्रतिशत होगी। उन्होंने कहा कि देश की कुल लोक सभा सीटों में अभी पाँच दक्षिणी राज्यों की हिस्सेदारी 23.76 प्रतिशत, जो परिसीमन के बाद थोड़ा बढ़कर 23.87 प्रतिशत हो जाएगी।

गृह मंत्री ने कहा कि सदन में कुछ सदस्यों ने एक और भ्रांति फैलाई कि मुस्लिम महिलाओं को भी आरक्षण मिले। उन्होंने कहा कि भारत के संविधान, सरकार और हमारी पार्टी की नीति स्पष्ट है कि भारतीय संविधान धर्म के आधार पर आरक्षण को स्वीकार नहीं करता। आरक्षण जन्म से ही मिलता है, किसी प्रकार से प्राप्त नहीं किया जा सकता। श्री शाह ने कहा कि संविधान में कहीं भी धर्म के आधार पर आरक्षण देने का प्रावधान नहीं है। उन्होंने कहा कि विपक्षी गठबंधन के नेता तुष्टीकरण की राजनीति के कारण इस देश में मुस्लिम आरक्षण की मांग करना चाहते हैं और फिर संविधान की बातें भी करते हैं। उन्होंने कहा कि धर्म के आधार पर आरक्षण हम न देंगे और न ही कभी किसी को देने देंगे।

श्री अमित शाह ने कहा कि इस देश में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) की सबसे बड़ा विरोधी पार्टी अगर कोई है तो वह मुख्य विपक्षी पार्टी है। उन्होंने कहा कि 1957 में ओबीसी को आरक्षण की सिफारिश करने वाली काकासाहेब कालेलकर समिति के सुझाव आए, लेकिन उस समय की सरकार में रही मुख्य विपक्षी पार्टी ने वह रिपोर्ट ठंडे बस्ते में डाल दी। जब मंडल आयोग की रिपोर्ट आई, तो विपक्षी पार्टी की सरकार ने उसे भी ठंडे बस्ते में डाल दिया। जब 1990 में वीपी सिंह जी की सरकार बनी, तब उन्होंने मंडल आयोग की रिपोर्ट को लागू किया। उस वक्त विपक्षी पार्टी के सबसे बड़े नेता ने अपने जीवन का सबसे लंबा भाषण मंडल आयोग का विरोध करने के लिए दिया। श्री शाह ने कहा कि विपक्षी पार्टी ने 1951 और 1971 दोनों में जाति जनगणना का भी विरोध किया।

श्री अमित शाह ने कहा कि विपक्ष के लिए चुनाव जीतना सर्वोपरि है, लेकिन हमारे लिए राष्ट्र और राष्ट्र की जनता सर्वोपरि है। राष्ट्र की जनता का प्रतिनिधित्व और भागीदारी का हित सबसे जरूरी है। संविधान को लागू करने के लिए जवाबदेही, पारदर्शिता, समान अवसर और न्याय की रक्षा हमारे लिए बेहद जरूरी है। विपक्ष का दिखावटी प्रेम पूरे देश की जनता भी जानती है, और आज से देश की महिलाएं भी जानेंगी कि उनका अधिकार विपक्षी पार्टी ने छीना है।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि सबसे पहले 1992 में श्री नरसिम्हा राव जी की सरकार 72वें और 73वें संविधान संशोधन को लेकर आई और महिलाओं को पंचायत में 33% आरक्षण देने का सराहनीय काम किया। उन्होंने कहा कि इसके बाद 1996 में एच डी देवगौड़ा जी प्रधानमंत्री बने और 81वां संविधान संशोधन विधेयक सितंबर 1996 में लाया गया, जिसका कुछ पार्टियों ने विरोध किया। फिर विधेयक पर विचार के लिए गीता मुखर्जी कमेटी का गठन किया गया। जब तक गीता मुखर्जी समिति की रिपोर्ट आई, तब तक 11वीं लोकसभा का विघटन हो गया और बिल लैप्स हो गया। फिर 1998 में 84वां संविधान संशोधन आया, लेकिन उन्हीं पार्टियों ने फिर से विरोध किया, बिल को सदन में प्रस्तुत करने की स्थिति भी नहीं रही और 12वीं लोकसभा के विघटन पर वह बिल लैप्स हो गया। श्री शाह ने कहा कि 1999 से 2003 तक 85वां संविधान संशोधन विधेयक आया। फिर से उन्हीं पार्टियों ने विरोध किया और बिल लैप्स हो गया। 2008 से 2014 तक मनमोहन सिंह जी 108वां संविधान संशोधन विधेयक लेकर आए और राज्यसभा में प्रस्तुत किया। राज्यसभा में बिल पारित भी हुआ, मगर उस बिल ने लोकसभा का दरवाजा कभी नहीं देखा। श्री शाह ने कहा कि हमारी पार्टी ने उसका विरोध नहीं किया था, बल्कि सरकार को समर्थन देने वाली पार्टियों ने ही विरोध किया। इसका स्पष्ट अर्थ है कि सरकार के इशारे पर, सरकार का हिस्सा बनी हुई पार्टियों ने लोकसभा में इस बिल को पेश नहीं होने दिया।

श्री अमित शाह ने कहा कि 2023 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी जानबूझकर महिला आरक्षण विधेयक लाए। उन्हें मालूम था कि 2024 में चुनाव है। कितनी भी बनावट हो, लेकिन विपक्षी पार्टी इसका विरोध नहीं कर पाएगी। जब यह नया संसद भवन बना, तब सर्वानुमति से सबसे पहले नारी शक्ति वंदन अधिनियम पारित हुआ। राज्यसभा में भी यह पारित हुआ। लेकिन जब इसे लागू करने की बात आई तब विपक्ष आज फिर से इसका विरोध कर रहा है, देश की महिलाएं यह कभी नहीं भूलेंगी। उन्होंने कहा कि विपक्षी पार्टियां जब चुनाव में जाएंगी तो उन्हें महिलाओं के आक्रोश का सामना करना पड़ेगा।

गृह मंत्री ने कहा कि कुछ लोग पूछते हैं कि बदलाव की जरूरत क्या है? उन्होंने कहा कि पहली लोकसभा में 22 महिला सदस्य चुनकर आई। छठी लोकसभा में 19, आठवीं में 44, 14वीं में 51, 17वीं में रिकॉर्ड 78 और 18वीं लोकसभा में में 75 महिला सदस्य चुनकर आईं। उन्होंने कहा कि ये आंकड़े हमारी माताओं-बहनों की राजनीति में हिस्सेदारी लेने की उत्सुकता को प्रदर्शित करते हैं।

श्री अमित शाह ने कहा कि हमने letter and spirit में महिला आरक्षण के लिए ‘women led development’ का अनुसरण किया है। प्रधानमंत्री जी के पहले मंत्रिमंडल में 10 महिलाएं थीं। सुषमा स्वराज जी दिल्ली की, उमा भारती जी मध्य प्रदेश और वसुंधरा राजे जी राजस्थान की पहली मुख्यमंत्री बनीं। आनंदीबेन पटेल गुजरात की पहली मुख्यमंत्री बनीं। उन्होंने कहा कि 70 साल में विपक्षी पार्टी ने कभी इन राज्यों में महिला मुख्यमंत्री को जगह नहीं दी। उन्होंने कहा कि हमने श्रीमती द्रौपदी मुर्मू को इस देश की पहली आदिवासी महिला राष्ट्रपति बनाया। हम तीन दशकों से रिजेक्ट हो रहे बिल को लेकर आए। मगर दुख है कि पहले भी जिस बिल को विपक्ष ने पारित नहीं करने दिया, और आज फिर किंतु-परंतु, अगर-मगर से विरोध करने के लिए खड़े हो गए। गृह मंत्री ने कहा कि 14 लाख महिलाएं अब तक जनप्रतिनिधि के रूप में देश की पंचायतों में काम कर चुकी हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सबल बनाने और विधायी संस्थाओं में उन्हे हिस्सेदारी देने के लिए किसी भी विरोध का सामना करना पड़े, हम संघर्ष करते रहेंगे।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि ऐसा नहीं है कि सिर्फ महिला आरक्षण विधेयक का विरोध हो रहा है। हमने जब धारा 370 समाप्त की तो विपक्ष ने उसका विरोध किया। राम मंदिर बनाया तो विरोध किया, सीएए लाए, तो विरोध किया गया। ट्रिपल तलाक समाप्त किया, तो विरोध हुआ। जीएसटी लाए, तो विरोध किया। आयुष्मान भारत योजना का विरोध किया। नया संसद भवन बनाया, तब विरोध हुआ। मत्स्य पालन और सहकारिता मंत्रालय बनाया, तो विरोध किया। सीडीएस का पद बनाया तो विरोध हुआ। नक्सलवाद खत्म किया, तो विरोध किया। आतंकवाद पर सख्ती का विरोध किया। सर्जिकल स्ट्राइक का विरोध किया। एयर स्ट्राइक का विरोध किया। ऑपरेशन सिंदूर का विरोध किया। उन्होंने कहा कि मोदी जी जो कुछ भी कर रहे हैं, विपक्ष उसका विरोध करता है। आज देश की माताओं-बहनों के लिए आरक्षण आ रहा है, इसका विरोध नहीं होना चाहिए था, लेकिन विपक्ष इसका भी विरोध कर रहा है।

गृह मंत्री ने कहा कि विपक्ष इसका विरोध इसलिए कर रहा क्योंकि यह मोदी जी ला रहे हैं। अगर महिला आरक्षण हो जाता है तो देश की माताओं-बहनों में मोदी जी का यश बढ़ेगा। विपक्ष को लगता है कि महिलाएं मोदी जी को ज्यादा वोट देती हैं। उन्हें भला क्यों रिजर्वेशन दे? उन्होंने कहा कि 2023 में इस सदन में सभी पार्टियों और सभी सदस्यों ने देश की महिलाओं को 33% आरक्षण का वादा किया था, लेकिन आज विपक्ष इससे पीछे हट रहा। यह पहली बार नहीं हुआ। विपक्ष शाहबानो मामले में भी पीछे हटा। ट्रिपल तलाक में भी पीछे हटा और अब तक जितनी बार महिला आरक्षण आया, वह सभी में पीछे हटा।

श्री अमित शाह ने कहा कि हमारे नेता ने तो कहा कि सभी सदस्य अंतरात्मा की आवाज से वोट करें। लेकिन यहां आत्मा ही नदारद है, अंतरात्मा कहां से लाएं? उन्होंने कहा कि ये रूथलेस पॉलिटिक्स है। विपक्ष के नेता चुनाव में जहां-जहां जाएंगे, उन्हे इस देश की महिलाओं के आक्रोश को सहन करना पड़ेगा।

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चर्चाओं के बीच : अदाकारा प्रियंका अग्रवाल

18.04.2026 – अदाकारा प्रियंका अग्रवाल इन दिनों अपनी एक अपकमिंग कन्नड़ फिल्म को लेकर बॉलीवुड में चर्चा का विषय बनी हुई हैं। इस फिल्म में वो मुख्य भूमिका निभा रही हैं, जिसमें उनके साथ अभिनेता श्री किशोर नजर आएंगे। यह फिल्म उनके करियर का एक महत्वपूर्ण पड़ाव मानी जा रही है और इससे दक्षिण भारतीय सिनेमा में उनकी पकड़ और मजबूत होने की उम्मीद है।

उनकी एक हिंदी फिल्म भी जल्द ही लाइनअप में है। प्रियंका अग्रवाल ने शुरुआती दौर में ही ‘विल्स इंडिया फैशन वीक’ और ‘लैक्मे इंडिया फैशन वीक’ जैसे बड़े फैशन मंचों पर रैंप वॉक कर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया। इसके बाद उन्होंने कई नामी फैशन डिजाइनर्स के साथ काम किया और मॉडलिंग इंडस्ट्री में मजबूत पहचान बनाई।

विज्ञापन जगत में भी उनका सफर बेहद सफल रहा है। उन्होंने मशहूर निर्देशक प्रियदर्शन के साथ ‘लॉयड एयर कंडीशनर’ के विज्ञापन में मोहनलाल के साथ स्क्रीन साझा की, जिसे दर्शकों ने खूब पसंद किया। इसके अलावा उन्होंने कई बड़े ब्रांड्स के लिए 100 से अधिक विज्ञापन और ब्रांड शूट्स पूरे किए हैं। म्यूजिक वीडियो इंडस्ट्री में भी प्रियंका अग्रवाल ने अपनी अलग पहचान बनाई है।

उन्होंने ‘जान’ (पंजाबी), ‘तुझे पाने को’ (टी-सीरीज), ‘जादू’ (टिप्स), ‘तेरा साथ’ और ‘जिंदगी लौट आई है’ जैसे कई लोकप्रिय म्यूजिक वीडियो में काम किया है, जिन्हें दर्शकों से शानदार प्रतिक्रिया मिली है। विशेष रूप से ‘जिंदगी लौट आई है’ म्यूजिक वीडियो में उन्होंने पनोरमा म्यूजिक और निर्माता कुमार मंगत पाठक के साथ काम किया, जिसे दर्शकों ने काफी सराहा।

फिल्मी करियर की बात करें तो प्रियंका ने ‘रेडियो’ (2015), ‘1971: बियॉन्ड बॉर्डर्स’ (2017) और ‘युद्धभूमि 1971 भारत सीमा’ (2018) जैसी फिल्मों में काम किया है। फिल्म ‘1971: बियॉन्ड बॉर्डर्स’ में उन्होंने बॉलीवुड अभिनेता अरुणोदय सिंह के साथ मुख्य भूमिका निभाई, जहां उनके अभिनय को काफी सराहा गया। दक्षिण भारतीय सिनेमा में भी प्रियंका अग्रवाल ने अपनी मजबूत उपस्थिति दर्ज कराई है। उन्होंने सुपरस्टार मोहनलाल के साथ भी काम किया है, जिससे उनकी लोकप्रियता और बढ़ी है।

प्रियंका अग्रवाल का कहना है कि उनका सपना हमेशा से ऐसे बड़े निर्देशकों के साथ काम करने का रहा है जैसे राजकुमार हिरानी, संजय लीला भंसाली और आदित्य धर। वहीं उनके पसंदीदा अभिनेता रणवीर सिंह, सलमान खान और अक्षय कुमार हैं, जिनके साथ वह भविष्य में काम करना चाहती हैं। सोशल मीडिया पर भी प्रियंका की मजबूत फैन फॉलोइंग है और उनके मिलियन में फॉलोअर्स हैं। वह अब तक 25 से अधिक म्यूजिक वीडियो कर चुकी हैं और लगातार नए प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही हैं।

प्रियंका का मानना है कि सफलता तुरंत नहीं मिलती, इसके लिए लगातार मेहनत, धैर्य और सीखना जरूरी है। वह युवाओं और खासकर लड़कियों को संदेश देती हैं कि वे आत्मनिर्भर बनें, अपने करियर पर ध्यान दें और अपनी अलग पहचान खुद बनाएं। उनका कहना है कि असफलताएं भी सफलता की सीढ़ी होती हैं और हर रिजेक्शन के बाद ही असली जीत मिलती है।

भविष्य में वह फैशन, कॉस्मेटिक या ज्वेलरी ब्रांड लॉन्च करने की भी इच्छा रखती हैं, लेकिन फिलहाल उनका पूरा ध्यान अभिनय पर ही है। मॉडलिंग से अपने करियर की शुरुआत करने वाली प्रियंका फिलवक़त अपनी मेहनत, धैर्य और आत्मविश्वास के दम पर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान बनाने की दिशा में अग्रसर हैं। प्रियंका वर्तमान समय में मॉडलिंग, फिल्म, विज्ञापन और म्यूजिक वीडियो हर क्षेत्र में अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया है और लगातार आगे बढ़ रही हैं।

प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

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सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय ने डेटा-ड्रिवन लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए NICDC लॉजिस्टिक्स डेटा सर्विसेज के साथ एमओयू साइन किया

नई दिल्ली – सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय ने लॉजिस्टिक्स दक्षता बढ़ाने और इस क्षेत्र के लिए आंकड़ा-आधारित नीतिनिर्माण को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकास निगम की डिजिटल और डेटा इकाई, एनएलडीएस, के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।

 

एनएलडीएस, राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकास और कार्यान्वयन ट्रस्ट के मार्गदर्शन और सहयोग के तहत कार्य करता है, जो भारत सरकार की उस संस्थागत व्यवस्था का प्रतिनिधित्व करता है जिसका उद्देश्य लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक अवसंरचना में प्रौद्योगिकी आधारित सुधारों को आगे बढ़ाना है।

यह सहयोग सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय और एनएलडीएस के बीच सुचारु रूप से आंकड़ों के आदान-प्रदान के लिए एक मजबूत डिजिटल ढांचा स्थापित करने का लक्ष्य रखता है, जिसे अनुप्रयोग प्रोग्रामिंग अंतरफलक के माध्यम से जोड़ा जाएगा। इस पहल से मंत्रालय को वास्तविक समय में लॉजिस्टिक्स से जुड़े आंकड़ों का उपयोग करने में मदद मिलेगी, जिससे बेहतर और सूचित निर्णय लिए जा सकेंगे तथा इस क्षेत्र की आपूर्ति श्रृंखला की समग्र दक्षता में सुधार होगा।

 

यह साझेदारी सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों को व्यापक लॉजिस्टिक्स जानकारी उपलब्ध कराकर उन्हें सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इससे अक्षमताओं में कमी आएगी, लागत का बेहतर प्रबंधन संभव होगा और घरेलू तथा वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ेगी।

इस समझौता ज्ञापन पर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम विकास आयुक्त कार्यालय की उप महानिदेशक श्रीमती अनुजा बापट और एनएलडीएस के मुख्य परिचालन अधिकारी श्री अरविंद देवराज ने मंत्रालय और एनएलडीएस के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में हस्ताक्षर किए।

इस अवसर पर अधिकारियों ने कहा कि लॉजिस्टिक्स से जुड़े डिजिटल आंकड़ों को सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम प्रणाली के साथ जोड़ना एक सशक्त और प्रौद्योगिकी-आधारित उद्यम तंत्र के निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। यह पहल भारत सरकार के कारोबार करने में सुगमता बढ़ाने और देश की लॉजिस्टिक्स अवसंरचना को मजबूत करने के दृष्टिकोण के अनुरूप है।

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय नवाचार को बढ़ावा देने, दक्षता में सुधार करने और रणनीतिक साझेदारियों तथा डिजिटल रूपांतरण पहलों के माध्यम से उद्यमों को समर्थन देने के लिए प्रतिबद्ध है।

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा में अपने संबोधन की मुख्य बातें साझा कीं

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने लोकसभा में दिए गए अपने संबोधन की मुख्य बातें साझा की हैं।

एक्स(X) पर किए गए पोस्ट की एक श्रृंखला में, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कहा;

“हम सब भाग्यवान हैं कि हमें राष्ट्र निर्माण में देश की आधी आबादी को हिस्सेदार बनाने का सौभाग्य मिल रहा है। यह समय की मांग है कि हमारी नारी शक्ति देश के नीति-निर्धारण का हिस्सा बने।”

 

“पिछले 25-30 वर्षों में लाखों महिलाएं ग्रास रूट लेवल पर लीडर और ओपिनियन मेकर बन चुकी हैं। इसलिए अब उनका विरोध करने वालों को लंबे समय तक इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी।”

 

“देश की नारी शक्ति को आरक्षण राष्ट्रहित का निर्णय है, जिसमें माताएं-बहनें और बेटियां हमारी नीयत को देखेंगी। इसलिए इसे राजनीति के तराजू से मत तोलिए।”

 

“हम इस भ्रम में न रहें कि देश की नारी शक्ति को कुछ दे रहे हैं, बल्कि ये उसका हक है। हमारी भावना क्रेडिट लेने की नहीं, बल्कि महिलाओं को और सशक्त बनाने की है।”

 

“हमारे देश में अनुभवी नारी शक्ति की कोई कमी नहीं है। हमें भरोसा है कि वे सदन के साथ-साथ राष्ट्र को समृद्ध करने में अपना अमूल्य योगदान देंगी।”

 

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