केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने गायत्री परिवार द्वारा आयोजित ‘शताब्दी वर्ष समारोह – 2026’ को संबोधित किया

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज हरिद्वार में माता भगवती देवी शर्मा जी की जन्म शताब्दी एवं अखंड दीप शताब्दी वर्ष पर

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज उत्तराखंड के हरिद्वार में परम वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा जी की जन्म शताब्दी एवं अखंड दीप शताब्दी वर्ष पर गायत्री परिवार द्वारा आयोजित ‘शताब्दी वर्ष समारोह – 2026’ को संबोधित किया। इस अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि हरिद्वार आस्था, अध्यात्म और संस्कृति का संगम स्थल है और आज ‘अखंड ज्योति सम्मेलन’ में आकर अखंड ऊर्जा और चेतना की अनुभूति कर रहा हूँ। उन्होंने कहा कि पं श्रीराम शर्मा जी ने आस्था, अध्यात्म और संस्कृति से व्यक्ति निर्माण, व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण और राष्ट्र निर्माण से युग निर्माण की संकल्पना रखी। उन्होंने हर व्यक्ति के अंदर बसी परमात्मा रूपी आत्मा को जागृत और ऊर्जावान करने का कार्य किया है। श्री शाह ने यह कहा कि जो लोग सनातन धर्म को जानते हैं, भारतीय संस्कृति को समझते हैं और भारत के इतिहास से परिचित हैं, उन्हें दृढ़ विश्वास है कि विश्व की समस्त समस्याओं का समाधान यदि किसी एक जगह है, तो वह भारतीय परंपरा में ही है।

श्री अमित शाह ने कहा कि आध्यात्मिक रूप से भारत का पुनर्निर्माण केवल भारत के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व के लिए कल्याणकारी होगा। स्वामी विवेकानंद जी, महर्षि अरविंद जी और पूजनीय पंडित राम शर्मा जी जैसे सभी महान द्रष्टाओं ने अपनी ओजस्वी वाणी में यह विश्वास व्यक्त किया है कि जब भारत अपने पूर्ण तेज के साथ जागृत होगा, तो वह पूरे विश्व को और समस्त ब्रह्मांड को तेजोमय बना देगा। श्री शाह ने कहा कि ऐसे महान मनुष्यों और द्रष्टाओं की वाणी कभी विफल नहीं होती। उनके मुख से निकले सत्य वचनों को हम सभी को ब्रह्मा का वचन मानकर ही आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि पंडित श्री राम शर्मा जी ने गायत्री मंत्र के माध्यम से भक्ति को मंदिर के गर्भगृह से बाहर निकालकर आम लोगों के मुख और आत्मा तक पहुँचाने का कार्य किया।

 

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि युगदृष्टा पंडित श्री राम शर्मा आचार्य और वंदनीय माता भगवती देवी ने अपने जीवनकाल में ही अनेक युगों का कार्य करके दिखाया है। उन्होंने एक ऐसा वटवृक्ष बनाया, जिसकी छाया में आज 100 से अधिक देशों के 15 करोड़ से ज्यादा अनुयायी अध्यात्म के मार्ग पर चलते हुए अपनी आत्मा के कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 1925-26 से लेकर 2026 तक एक ही मार्ग पर, एक ही लक्ष्य के साथ न केवल एक व्यक्ति और एक विचार, बल्कि करोड़ों लोगों को साथ लेकर चलने से सिद्ध होता है कि पंडित जी के जीवन, उनके विचारों और कर्मों में कितनी ऊर्जा होगी। श्री शाह ने कहा कि पंडित जी के जाने के इतने वर्षों बाद भी अखंड ज्योति न केवल जलती रही, बल्कि उसने करोड़ों लोगों के हृदय में दीपक के रूप में स्थायी स्थान ले लिया है।

श्री अमित शाह ने कहा कि 1925-26 राष्ट्रीय पुनर्जागरण का वर्ष रहा। उसी वर्ष राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना हुई और संघ भी अपनी जन्मशती मना रहा है। गीता प्रेस गोरखपुर भी अपनी स्थापना के 100 वर्ष मना रहा है और यह वंदनीय माता जी का भी जन्मशती वर्ष है। उन्होंने कहा कि एक ही वर्ष में इन सभी के सूत्रबद्ध होने का अर्थ है कि ईश्वर ने उस वर्ष को भारत के पुनर्जागरण के लिए ही निर्मित किया होगा।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि यह गायत्री परिवार के शताब्दी वर्ष का कार्यक्रम है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति के लिए 100 वर्ष का जीवन एक प्रकार से पूर्णता माना जाता है, परंतु व्यक्ति-निर्माण और पुनर्जागरण के लिए जो संस्थाएँ कार्य करती हैं, उनके लिए यह शैशव काल होता है, जिसमें नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ा जाता है। श्री शाह ने कहा कि आज गायत्री मंत्र, गायत्री उपासना और गायत्री साधना के साथ करोड़ों लोगों को पंडित श्री राम शर्मा जी ने जोड़ा है। भारत पंडित श्री राम शर्मा जी के उपकारों से कभी मुक्त नहीं हो पाएगा। उन्होंने करोड़ों लोगों को व्यक्ति-निर्माण के आंदोलन और भक्ति से जोड़ने, अध्यात्म के मार्ग पर प्रशस्त करने और गायत्री मंत्र को पुनर्जीवन प्रदान करने का कार्य किया। उन्होंने हर जाति, हर समाज और लिंग भेद के बिना, गायत्री मंत्र के माध्यम से हर आत्मा को कल्याण का मार्ग प्रशस्त करने का रास्ता दिखाया। गृहह मंत्री ने कहा कि पंडित श्री राम शर्मा जी ने महामना मदन मोहन मालवीय जी से गायत्री मंत्र के ज्ञान को जन-जन तक पहुंचाने की सीख प्राप्त की और उसे अपना जीवन-मंत्र बना लिया।

श्री अमित शाह ने कहा कि 1971 में इस पुण्य भूमि पर ज्योति का प्राकट्य हुआ, शांतिकुंज की स्थापना हुई और गुरुदेव के बताए मार्ग पर करोड़ों लोगों ने चलना शुरू किया। उन्होंने कहा कि कोई धर्म, धर्माचार्य या दर्शन युग नहीं बदल सकता। पंडित जी ने सूत्र दिया कि ‘हम बदलेंगे, युग बदलेगा’, और इस सूत्र ने पूरे भारत को मार्ग दिखाया। उन्होंने कहा कि जब तक व्यक्ति, राष्ट्र और समय नहीं बदलता, तब तक युग बदलने का सवाल ही नहीं उठता। यदि हर व्यक्ति अध्यात्म के मार्ग पर चल पड़े, तो युग परिवर्तन अपने आप हो जाता है। देखते-देखते 15 करोड़ परिवार इस आंदोलन से जुड़ गए। श्री शाह ने कहा कि ‘हम बदलेंगे, युग बदलेगा’ और गायत्री मंत्र दोनों के बीच गहरा संबंध है। गायत्री मंत्र मात्र संस्कृत में रचा गया मंत्र नहीं है, इस मंत्र के 24 अक्षर 24 सद्ग्रंथियों को जागृत करते हैं। उन्होंने कहा कि गायत्री मंत्र के 24 अक्षर 24 गुणों से संबंधित ग्रंथियों को संतुलित करते हैं, जब ये 24 गुण विकसित होते हैं, तो परमार्थ, वीरता और बुद्धि बढ़ती है। पद्मासन में बैठकर नाभि से बोला गया गायत्री मंत्र हमारे भीतर की सद्ग्रंथियों को जागृत कर उन्हें सक्रिय करता है।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि पंडित श्री राम शर्मा जी ने ‘हम बदलेंगे, युग बदलेगा’ के नारे को गायत्री मंत्र के साथ जोड़ा। उन्होंने कहा कि ‘हम बदलेंगे, युग बदलेगा’ का संदेश देकर पंडित आचार्य शर्मा जी ने पूरे राष्ट्र को नई दिशा और संकल्प शक्ति दी। उन्होंने कहा कि गायत्री मंत्र की रचना पृथ्वी पर बसे मानव के कल्याण के लिए की गई थी, मगर धीरे-धीरे यह मात्र कर्मकांड बनकर रह गया था। पंडित राम शर्मा जी ने गायत्री मंत्र को वैज्ञानिक आधार देकर उसमें नई ऊर्जा का संचार किया। उन्होंने कहा कि एक बार मन से प्रयोग करके देखिए—पंडित शर्मा जी के आशीर्वाद से स्वार्थ छूट जाएगा, परमार्थ बढ़ेगा, कायरता निकल जाएगी, हिंसा रहित वीरता अपना स्थान ले लेगी और बुद्धि सदमार्ग पर प्रभुत्व प्राप्त कर लेगी।

श्री अमित शाह ने कहा कि ‘अखंड ज्योति’ पत्रिका बिना किसी विज्ञापन और बाहरी सहायता के 100 से अधिक भाषाओं में करोड़ों लोगों तक पहुँच रही है। यह पंडित श्री राम शर्मा जी और वंदनीय माता जी की तपस्या का प्रत्यक्ष परिणाम है। गृह मंत्री ने कहा कि आज़ादी के आंदोलन से लेकर समाज सुधार तक, पंडित श्री राम शर्मा जी ने राष्ट्रनिर्माण में अहम भूमिका निभाई। पंडित श्री राम शर्मा जी ने नमक सत्याग्रह में भाग लिया, अंग्रेजों की लाठियाँ खाईं और आजादी के बाद समाज में व्याप्त कुरीतियों के खिलाफ आंदोलन छेड़ा। उन्होंने जात-पात की बेड़ियाँ तोड़ीं, समाज को समानता का मार्ग दिखाया और महिलाओं को गायत्री मंत्र की उपासना करने का अधिकार प्रदान किया। उन्होंने दहेज मुक्त विवाह को अपनाने का आह्वान किया। रचनात्मक दृष्टि से समाज की कुरीतियों को दूर किया। व्यसन से मुक्ति और गंगा सफाई अभियान चलाने के साथ ही उन्होंने वृक्षारोपण का कार्य भी किया।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि श्री राम शर्मा जी ने सूत्र दिया कि‘ अपने आप को सुधारना ही संसार की सबसे बड़ी सेवा है’। इस सूत्र ने अनेक लोगों के जीवन में प्रकाश भर दिया। उन्होंने कहा कि देश पर जब भी कोई संकट आता है—चाहे बाढ़ हो, भूकंप हो या महामारी—उस समय सेवा करने वाली संस्थाओं की सूची में गायत्री परिवार हमेशा आगे रहता है। मुट्ठी भर अन्न और समिधा दान से लेकर देशभर में समाज के उत्थान के लिए कार्य करने वाला यह संगठन अनुकरणीय सूत्र बन चुका है।

श्री अमित शाह ने कहा कि जब 1990 में आचार्य श्री ने शरीर त्यागा, तो माताजी ने 15 लाख लोगों के बीच घोषणा की कि यह मिशन देव द्वारा संचालित मिशन है—यह रुकेगा नहीं, बल्कि तेजी से बढ़ेगा। उन्होंने चित्रकूट में एक यज्ञ किया, जिसमें 1008 कुंडों में 10 लाख लोगों ने अपने व्यसनों से मुक्ति पाई। यह सनातन धर्म के इतिहास में पहला ऐसा अश्वमेध यज्ञ था जिसमें 10 लाख लोगों ने अपने व्यसनों की बलि चढ़ाई। इस आंदोलन ने सनातन धर्म को वैज्ञानिकता प्रदान करने का कार्य किया।

उन्होंने कहा कि पंडित राम शर्मा जी ने कहा था कि धर्म और विज्ञान एक-दूसरे के पूरक हैं, विरोधी नहीं। सनातन धर्म और विज्ञान तो एक-दूसरे के पूरक ही हैं। जिन्हें धर्म का ज्ञान नहीं है, वे इसे अंधविश्वास मानते हैं, जबकि जिन्हें धर्म का सच्चा ज्ञान है, वे इसे वैज्ञानिक रूप से आंक सकते हैं। आध्यात्म को तर्क की कसौटी पर कसने की पहली शुरुआत पंडित राम शर्मा जी ने ही की। उन्होंने कहा कि जब इस देश का युवा वेद-उपनिषद और पुराणों को आगे बढ़ाते हुए साथ में विज्ञान का आधार भी अपनाएगा, तब हम निश्चित रूप से हम आगे बढ़ेंगे। श्री शाह ने कहा कि गायत्री परिवार में बच्चों के एक हाथ में वेद और दूसरे हाथ में लैपटॉप देखकर यह स्पष्ट हो जाता है कि परंपरा और प्रगति साथ-साथ चल सकती हैं।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि भारत की आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने आजादी के आंदोलन का इतिहास इस देश के किशोरों और युवाओं के सामने रखा। गाँव-गाँव में स्वतंत्रता सेनानियों को खोजकर उनका महिमामंडन किया गया। आजादी के 75वें वर्ष में ‘अमृत काल’ की घोषणा की गई, जो आजादी के 75 से 100 वर्षों की यात्रा है।

उन्होंने कहा कि जब हम सभी भारतीय 15 अगस्त 2047 को आजादी की शताब्दी मनाएँगे, तो एक ऐसे भारत की रचना करेंगे जो हर क्षेत्र में विश्व में सर्वप्रथम होगा। श्री शाह ने कहा कि मोदी जी ने एक पूर्ण विकसित, परंतु भौतिकता से परे आध्यात्मिकता के मार्ग पर अग्रसर भारत की संकल्पना प्रस्तुत की है। यह संकल्प अब 140 करोड़ लोगों का संकल्प बन चुका है। इस संकल्प को समाजसेवी संस्थाओं के बिना पूरा नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि पूर्ण विकसित भारत बनाने और भारत माता को विश्व के सर्वोच्च स्थान पर विराजमान करने का संकल्प गायत्री परिवार का भी संकल्प है।

गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि बीते 10 वर्षों में देश में अभूतपूर्व परिवर्तन हुए हैं। 550 वर्षों से रामलला अपमानित व्यवस्था में विराजमान थे, आज वहाँ अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण हो चुका है।

औरंगजेब द्वारा तोड़ा गया काशी विश्वनाथ मंदिर आज पुनर्निर्मित होकर अपनी पूर्ण भव्यता में स्थापित हो गया है। 16 बार टूटने के बाद आज सोमनाथ का मंदिर अद्वितीय मान-मर्यादा के साथ सनातन की भव्य ध्वजा को शिखर तक पहुँचा रहा है। श्री शाह ने कहा कि धारा 370 हट चुकी है और देश कॉमन सिविल कोड के मार्ग पर आगे बढ़ चुका है। उन्होंने कहा कि एक जमाने में लोग हिंदुत्व की बात करने में भी झिझकते थे, आज वे गर्व से अपने धर्म की बात करते हैं।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज हरिद्वार में पतंजलि इमरजेंसी एवं क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल का उद्घाटन भी किया।

 

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आईसीएमआर ने असम सरकार को मोबाइल स्ट्रोक यूनिट सौंपा

इससे ग्रामीण, दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के घरों तक जीवन रक्षक स्ट्रोक उपचार सुगमता से पहुंचेगा

नई दिल्ली – भारत में स्ट्रोक मृत्यु और दीर्घकालिक विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक है। स्ट्रोक की स्थिति में हर मिनट महत्वपूर्ण है—उपचार में देरी होने पर लगभग 1.9 बिलियन मस्तिष्क कोशिकाएं प्रति मिनट नष्ट हो जाती हैं। सही समय पर उपचार मिलने से मृत्यु और आजीवन विकलांगता में अत्यधिक कमी आ सकती है। यद्पि, स्ट्रोक के उपचार में सबसे बड़ी चुनौती रोगियों को स्ट्रोक के लिए तैयार अस्पताल तक पहुंचने में लगने वाला समय है।

भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने इस गंभीर समस्या में कमी लाने के लिए असम सरकार को दो मोबाइल स्ट्रोक यूनिट (एमएसयू) सौंपी हैं। यह दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले स्ट्रोक रोगियों के लिए अस्पतालों तक शीघ्र पहुंचने की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव है। अब अस्पताल ही सीधे रोगियों तक पहुंचने लगे हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा के मार्गदर्शन में विकसित यह पहल, सरकार की इस प्रतिबद्धता को दर्शाती है कि सबसे चुनौतीपूर्ण भौगोलिक क्षेत्रों में भी, सबसे निर्धन, वंचित और निर्बल आबादी, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं, तक उन्नत स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचें।

 

स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव और आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने असम सरकार को मोबाइल स्ट्रोक यूनिट (एमएसयू) सौंपते हुए कहा, “मोबाइल स्ट्रोक यूनिट सबसे पहले जर्मनी में विकसित की गई थीं और बाद में प्रमुख वैश्विक शहरों में इनका मूल्यांकन किया गया। भारत ने पूर्वोत्तर भारत के ग्रामीण, दूरस्थ और दुर्गम भूभागों में ऐसी यूनिटों का मूल्यांकन किया है। हम ग्रामीण क्षेत्रों में तीव्र इस्केमिक स्ट्रोक के रोगियों के उपचार के लिए आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के साथ एमएसयू के सफल एकीकरण की रिपोर्ट करने वाला विश्व स्तर पर दूसरा देश भी हैं।”

असम सरकार में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव एवं आयुक्त श्री पी. अशोक बाबू ने राज्य के अनुभव को साझा करते हुए कहा कि “इस हस्तांतरण से असम की आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली मजबूत होगी और राज्य में इस जीवन रक्षक सेवा की निरंतरता सुनिश्चित होगी।” उन्होंने कहा कि आईसीएमआर के साथ सहयोग से स्ट्रोक रोगियों के लिए त्वरित उपचार, बेहतर समन्वय और बेहतर परिणाम संभव हुए हैं और विस्तार के लिए एक मजबूत आधार तैयार हुआ है।

एमएसयू एक चलता-फिरता अस्पताल है, जो सीटी स्कैनर, विशेषज्ञों से टेलीकंसल्टेशन, प्वाइंट-ऑफ-केयर प्रयोगशाला और रक्त के थक्के तोड़ने वाली दवाओं से सुसज्जित है। यह रोगी के घर पर या उसके आस-पास ही स्ट्रोक का शीघ्र निदान और उपचार करने में सक्षम बनाता है। यह नवोन्मेषण विशेष रूप से दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां अस्पतालों तक पहुंचने में कई घंटे लग सकते हैं। विशेषज्ञ टेलीकंसल्टेशन के माध्यम से, एमएसयू स्ट्रोक के प्रकार की शीघ्र पहचान और उपचार की त्वरित शुरुआत को संभव बनाता है-जिससे जीवन बचता है और विकलांगता को रोका जा सकता है।

पूर्वोत्तर में स्ट्रोक का प्रकोप बहुत अधिक है। दुर्गम भूभाग, लंबी दूरी और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाओं की सीमित उपलब्धता के कारण हमेशा समय पर स्ट्रोक का उपचार चुनौतीपूर्ण रहा है। इस समस्या के समाधान के लिए आईसीएमआर ने डिब्रूगढ़ स्थित असम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में न्यूरोलॉजिस्ट के नेतृत्व में एक स्ट्रोक यूनिट और तेजपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल एवं बैपटिस्ट क्रिश्चियन अस्पताल में चिकित्सकों के नेतृत्व में स्ट्रोक यूनिट स्थापित की है। मोबाइल स्ट्रोक यूनिट को अस्पताल पहुंचने से पहले ही स्ट्रोक की देखभाल की इस व्यवस्था में शामिल किया गया है।

 

इसके परिणाम रूपांतरकारी रहे हैं। इस मॉडल ने उपचार का समय लगभग 24 घंटे से घटाकर लगभग 2 घंटे कर दिया, मृत्यु दर में एक तिहाई की कमी आई और विकलांगता आठ गुना कम हो गई। 2021 से अगस्त 2024 के बीच, एमएसयू को 2,300 से अधिक आपातकालीन कॉल प्राप्त हुए। प्रशिक्षित नर्सों ने स्ट्रोक के 294 संदिग्ध मामलों की जांच की, जिनमें से 90 प्रतिशत रोगियों का उपचार उनके घर पर ही किया गया। एमएसयू को 108 आपातकालीन एम्बुलेंस सेवा के साथ एकीकृत करने से इसकी पहुंच 100 किलोमीटर के दायरे तक बढ़ गई।

इस कार्यक्रम में केंद्र और राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ आईसीएमआर के शीर्ष अधिकारियों, जिनमें तेलंगाना सरकार की स्वास्थ्य सचिव डॉ. क्रिस्टीना जेड. चोंगथू, आईसीएमआर की अपर महानिदेशक डॉ. संघमित्रा पति, आईसीएमआर की अपर महानिदेशक डॉ. अलका शर्मा, वरिष्ठ महानिदेशक (प्रशासन) सुश्री मनीषा सक्सेना और एनसीडी के प्रमुख डॉ. आर.एस. धालीवाल उपस्थित थे।

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नेताजी सुभाषचंद्र बोस की जयंती पर DC Ranchi श्री मंजूनाथ भजंत्री एवं SSP Ranchi श्री राकेश रंजन ने दी श्रद्धांजलि

कचहरी चौक स्थित पार्क में स्थापित प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर दी श्रद्धांजलि

नेताजी सुभाषचंद्र बोस का जीवन साहस, त्याग और देशभक्ति की प्रेरणादायी मिसाल- उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री

रांची,23.01.2026 – नेताजी सुभाषचंद्र बोस की जयंती के अवसर पर उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री ने कचहरी चौक स्थित पार्क में स्थापित नेताजी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी श्री मंजूनाथ भजंत्री ने नेताजी सुभाषचंद्र बोस के राष्ट्र निर्माण में अतुलनीय योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि उनका जीवन साहस, त्याग और देशभक्ति की प्रेरणादायी मिसाल है। नेताजी के विचार आज भी युवाओं को राष्ट्रसेवा एवं कर्तव्यनिष्ठा के मार्ग पर अग्रसर होने की प्रेरणा देते हैं।

इस दौरान वरीय पुलिस अधीक्षक, रांची श्री राकेश रंजन, अनुमंडल पदाधिकारी रांची, सदर श्री रजत कुमार, उपसमाहर्ता नजारत श्री सुदेश कुमार ने भी नेताजी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी एवं उनके आदर्शों को आत्मसात करने एवं उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।

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वंदे मातरम के 150 वर्ष पूर्ण होने का उत्सव

नई दिल्ली – भारत अपने राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूर्ण होने का उत्‍सव देश भर के प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर सामूहिक गायन, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और मिलिट्री बैंड प्रदर्शन के माध्यम से मना रहा है। इस उत्सव का उद्देश्य राष्ट्रीय गौरव और एकता को बढ़ावा देना है।

इन समारोहों के एक अंग के रूप में भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के 31 संगीतकारों से युक्‍त बैंड ने 21 जनवरी 2026 को नई दिल्ली के राजीव चौक स्थित एम्फीथिएटर में प्रदर्शन किया। 45 मिनट की इस प्रस्तुति में ब्रास, बांसुरी, स्ट्रिंग और इलेक्ट्रॉनिक वाद्ययंत्रों से ग्यारह मनमोहक धुनें प्रस्तुत की गईं। इस प्रस्‍तुति में ‘वंदे मातरम’ और ‘सिंदूर’ गीत, जिन्‍हें ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों की वीरता को याद करने के लिए तैयार किया गया था, प्रस्तुति के मुख्य आकर्षण रहे।

संगीत सदियों से भारतीय संस्कृति का एक अनमोल रत्न रहा है. यह भारत की समृद्ध सैन्य विरासत का भी अभिन्न अंग है, जो एकता को सुदृढ़ करता है और वीरता की प्रेरणा देता है। 1944 में अपनी स्थापना के बाद से भारतीय वायु सेना बैंड, भारतीय और पश्चिमी संगीत की विविधतापूर्ण प्रस्तुतियों के साथ, देश की सैन्य परंपरा का एक महत्वपूर्ण स्तंभ रहा है। भारतीय वायु सेना बैंड का उद्देश्य अपने मनमोहक प्रदर्शनों के माध्यम से देशभक्ति की भावना को प्रेरित करना और एकता का प्रसार करना है.

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संस्कृति मंत्रालय 2026 के गणतंत्र दिवस पर ‘वंदे मातरम् के 150 वर्ष’ विषय पर झांकी प्रस्तुत करेगा

नई दिल्ली – संस्कृति मंत्रालय 2026 की गणतंत्र दिवस परेड में ‘वंदे मातरम् के 150 वर्ष’ विषय पर एक झांकी प्रस्तुत करेगा, जिसमें राष्ट्रीय गीत को भारत की सभ्यतागत स्मृति, सामूहिक चेतना और सांस्कृतिक निरंतरता की एक जीवंत अभिव्यक्ति के रूप में दिखाया जाएगा।

इस विषय(थीम) की जानकारी देते हुए संस्कृति मंत्रालय के सचिव श्री विवेक अग्रवाल ने कहा कि भारत की गणतंत्र दिवस झांकियां सिर्फ औपचारिक प्रदर्शन नहीं होतीं, बल्कि वे राष्ट्र की सभ्यतागत स्मृति के चलते-फिरते अभिलेख होती हैं। हर वर्ष, ये झांकियां विचारों, मूल्यों और ऐतिहासिक अनुभवों को एक साझा दृश्य भाषा में रूपांतरित करती हैं और यह पुनः स्थापित करती हैं कि संस्कृति गणराज्य का सिर्फ एक अलंकरण मात्र नहीं है, बल्कि उसकी जीवंत आत्मा है। इसी निरंतर परंपरा में वंदे मातरम् का स्थान विशिष्ट और शाश्वत है।

उन्होंने कहा कि एक समय क्रांतिकारियों के ओठों पर गूंजने वाला और कारागारों, सभाओं तथा जुलूसों में गाया जाने वाला वंदे मातरम् सिर्फ एक गीत नहीं है। श्री अरबिंदो ने इसमें ऐसी आध्यात्मिक शक्ति देखी थी जो सामूहिक चेतना को जगाने में सक्षम थी—एक ऐसा विजन जिसे इतिहास ने सच साबित किया है। वर्ष 1875 में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित इस गीत ने राष्ट्र को ‘माता’ के रूप में कल्पित किया गया—सुजलाम्, सुफलाम्—जो प्रकृति, पालन-पोषण और आंतरिक शक्ति से परिपूर्ण है। औपनिवेशिक काल में इसने आत्मसम्मान और आत्मविश्वास को पुनर्स्थापित किया, भक्ति को साहस में, कविता को संकल्प में बदला और भारतवासियों को क्षेत्र, भाषा और धर्म से परे एक साझा स्वतंत्रता की आकांक्षा में एकजुट किया।

संस्कृति मंत्रालय की 2026 की गणतंत्र दिवस झांकी इस लंबी और बहुआयामी यात्रा को एक सशक्त दृश्य रूप प्रदान करती है। झांकी में चलते हुए ट्रैक्टर पर वंदे मातरम् की मूल पांडुलिपि प्रदर्शित की गई है, जिसके पीछे भारत के चारों दिशाओं से आए लोक कलाकार हैं, जो देश की सांस्कृतिक विविधता को दिखा रहे हैं। झांकी के केंद्र में वर्तमान पीढ़ी को ‘जेन-जी’ के रूप में दर्शाया गया है, जो विष्णुपंत पगनिस की ऐतिहासिक प्रस्तुति से प्रेरित होकर वंदे मातरम् गा रही है। राग सारंग में उनके द्वारा रिकॉर्ड किया गया यह संस्करण, जिसमें औपनिवेशिक सेंसरशिप से बचने के लिए पदों के क्रम में परिवर्तन किया गया था, स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कलात्मक प्रतिरोध का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया।

वर्ष 2021 से इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र(आईजीएनसीए) को संस्कृति मंत्रालय की गणतंत्र दिवस झांकी की परिकल्पना और क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन वर्षों में आईजीएनसीए ने भारत की दार्शनिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नींव पर आधारित थीम तैयार किया है और उन्हें एक ऐसे दृश्य माध्यम से पेश किया है जो सभी पीढ़ियों को पसंद आते हैं और उनके बीच संवाद स्थापित करते हैं। वर्ष 2026 की झांकी भी इसी विजन को आगे बढ़ाती है और वंदे मातरम् को सिर्फ एक ऐतिहासिक रचना नहीं, बल्कि नैतिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक प्रेरणा के सतत स्रोत के रूप में स्थापित करती है।

इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र(आईजीएनसीए) के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि संस्कृति मंत्रालय की झांकी किसी एक मंत्रालय या विभाग का प्रतिनिधित्व ही नहीं करती, बल्कि देश की सामूहिक भावनाओं, इतिहास और राष्ट्रीय चेतना को अभिव्यक्त करती है। उन्होंने बताया कि गणतंत्र दिवस परेड के लिए संस्कृति मंत्रालय की झांकी का विषय(थीम) ‘वंदे मातरम् के 150 वर्ष’ तय किया गया है, जो कलात्मक अभिव्यक्ति के जरिए राष्ट्रीय गीत की प्रेरणादायक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक यात्रा को दिखाएगी।

डॉ. जोशी ने यह भी बताया कि पिछले छह वर्षों से आईजीएनसीए संस्कृति मंत्रालय की गणतंत्र दिवस झांकी को परिकल्पित करने और उसे बनाने की ज़िम्मेदारी संभाल रहा है। जबकि अधिकांश मंत्रालय और राज्य अपनी विशिष्ट उपलब्धियों या कार्यक्रमों को प्रदर्शित करते हैं, वहीं संस्कृति मंत्रालय एक अलग तरीका अपनाते हुए विविध सांस्कृतिक आयामों को एक साथ समाहित करता है—-और यही विजन वर्ष 2026 के लिए ‘वंदे मातरम् के 150 वर्ष’ विषय(थीम) में परिलक्षित होता है।

जब भारत गणतंत्र दिवस 2026 का उत्सव मनाएगा, तब वंदे मातरम् देश से सिर्फ आजादी को स्मरण करने का ही नहीं, बल्कि उसके योग्य बने रहने का भी आह्वान करेगा। इस प्रस्तुति के माध्यम से संस्कृति मंत्रालय राष्ट्रीय गीत को भारत की एकता, सांस्कृतिक गहराई और शाश्वत चेतना के प्रतीक के रूप में पुनः स्थापित करना चाहता है—जो स्वतंत्रता संग्राम की स्मृतियों को वर्तमान की जिम्मेदारियों और भविष्य की आकांक्षाओं से जोड़ता है।

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विश्व आर्थिक मंच में इरेडा के सीएमडी ने भारत के सौर ऊर्जा क्षेत्र में नेतृत्व को रेखांकित किया

नई दिल्ली – भारतीय अक्षय ऊर्जा विकास संस्था लिमिटेड (आईआरईडीए) के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक श्री प्रदीप कुमार दास ने आज विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) दावोस 2026 में एक पैनल चर्चा में हिस्सा लिया। सत्र का विषय “जहां सौर ऊर्जा महत्त्वपूर्ण है, वहां इसका विस्तार करना: ग्लोबल साउथ के लिए छत, कृषि और विकेंद्रीकृत ऊर्जा पर भारत की सीख”, था।

इससे पहले दिन में, माननीय केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने मंच पर प्रमुख भाषण दिया, जिसमें उन्होंने समावेशी एवं संपोषित विकास के लिए सौर ऊर्जा समाधानों को आगे बढ़ाने में भारत के अनुभवों और नेतृत्व पर प्रकाश डाला।

सत्र में वितरित सौर ऊर्जा में भारत के वैश्विक नेतृत्व और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए इसके बढ़ते महत्व को रेखांकित किया गया। उन्होंने आगे कहा कि विकेंद्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा को अपनाने से प्रणाली की दक्षता में बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे सरकारी सब्सिडी और एटीएंडसी घाटे में कमी आएगी, जो लागत को काफी हद तक कम कर सकता है और इसकी सामर्थ्य सुनिश्चित कर सकता है।

श्री दास ने इस विषय पर जोर दिया कि नवीकरणीय ऊर्जा के उभरते क्षेत्रों को रिस्क प्रोफाइलिंग के लिहाज से चुनौतीपूर्ण माना जाता है, लेकिन प्रभावी परियोजना डिजाइन और विवेकपूर्ण जोखिम प्रबंधन से इन क्षेत्रों में जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। यह बात इरेडा के असाधारण तौर पर केवल 149 करोड़ रुपये के कुल राइट-ऑफ से स्पष्ट है, जो स्थापना के बाद से लगभग 1.81 लाख करोड़ रुपये के वित्तपोषण के बावजूद है, जो कंपनी के मजबूत मूल्यांकन और निगरानी प्रणालियों को दर्शाता है।

उन्होंने बताया कि इरेडा रूफटॉप सोलर और पीएम-कुसुम योजनाओं के अंतर्गत परियोजना लागत का 70-80% वित्तपोषण एग्रीगेटर मोड में करता है, जिससे ग्रामीण भारत में स्वच्छ ऊर्जा तक पहुंच में बड़ी तेजी आई है।

श्री दास ने केंद्रीय मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी को विश्व आर्थिक मंच पर इरेडा को भारत की नवीकरणीय ऊर्जा बढ़ोतरी को प्रदर्शित करने का मंच प्रदान करने के लिए धन्यवाद दिया, जो एक परिपक्व और सुविकसित इकोसिस्टम की मदद से संभव हुई है।

उन्होंने इस विषय पर भी प्रकाश डाला कि यह मंच भारत के नवीकरणीय ऊर्जा परिवर्तन को दिशा देने में इरेडा की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करने का अवसर प्रदान करता है, और कहा कि देश का अनुभव और संस्थागत ढांचा नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे अन्य देशों के लिए एक मूल्यवान सीख साबित हो सकता है।

कृषि सौर ऊर्जा के क्षेत्र में महाराष्ट्र की प्रगति का उदाहरण देते हुए, उन्होंने इस क्षेत्र के जोखिम को कम करने और धैर्यवान वैश्विक पूंजी को आकर्षित करने के लिए एक अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की जरूरत पर बल दिया।

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समावेशी और समान शिक्षा, विकसित भारत की दृष्टि के केंद्र में है: श्री धर्मेंद्र प्रधान

नई दिल्ली – केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज नई दिल्ली में तीन दिवसीय समावेशी शिक्षा शिखर सम्मेलन 2026 का उद्घाटन किया, जो स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग (डीओएसईएल), शिक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित किया गया है। यह सम्मेलन 21 से 23 जनवरी, 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। इस अवसर पर, उन्होंने एक प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया, जिसमें विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (सीडब्ल्यूएसएन) के लिए तकनीकी-सक्षम नवीनतम सहायक उपकरण दिखाए जा रहे हैं।

इस अवसर पर श्री संजय कुमार, सचिव, डीओएसईएल; श्री दिनेश प्रसाद सकलानी, निदेशक, एनसीईआरटी; डॉ. मल्लिका नड्डा, अध्यक्ष, विशेष ओलंपिक भारत तथा शिक्षा मंत्रालय, एनसीईआरटी, राष्ट्रीय संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी और अन्य हितधारक उपस्थित थे।

इस अवसर पर श्री प्रधान ने कहा कि समावेशी शिक्षा शिखर सम्मेलन का आयोजन समावेशी शिक्षा के प्रति राष्ट्रीय प्रतिबद्धता को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया है। उन्होंने जोर दिया कि समावेशी शिक्षा किसी एक योजना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर बच्चे के लिए सम्मान, समान अवसर और आत्मनिर्भर भविष्य सुनिश्चित करने के सामूहिक संकल्प का प्रतिनिधित्व करती है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ के दृष्टिकोण को दोहराते हुए, उन्होंने रेखांकित किया कि एक विकसित भारत की नींव ऐसी शिक्षा के माध्यम से रखी जा सकती है जो समान, संवेदनशील और समावेशी हो। उन्होंने उल्लेख किया कि दिव्यांगता श्रेणियों का छह से इक्कीस तक विस्तार करना इस समावेशी दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करता है।

उन्होंने सीखने की चुनौतियों जैसे कि डिस्लेक्सिया और डिस्कैलकुलिया की समय पर पहचान के महत्व को रेखांकित किया और जोर देकर कहा कि समावेशी शिक्षा केवल स्कूलों या परिवारों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह समाज की एक साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यह सामूहिक दृष्टिकोण, जो समान अवसर, सम्मान और भागीदारी पर आधारित है, विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने का मार्ग प्रशस्त करेगा।

केंद्रीय मंत्री ने समावेशी शिक्षा शिखर सम्मेलन में आयोजित प्रदर्शनी का दौरा किया, जिसमें सहायक उत्पादों, समाधानों और स्मार्ट तकनीकों को दिखाया गया है। उन्होंने विशेष जरूरत वाले बच्चों (सीडब्ल्यूएसएन) और दिव्यांगजनों (पीडब्ल्यूडी) की विविध आवश्यकताओं को पूरा करने तथा शिक्षा को अधिक समावेशी बनाने के लिए भारतीय स्टार्ट-अप्स द्वारा विकसित अभिनव और विश्वस्तरीय समाधानों की सराहना की।

उन्होंने जोर दिया कि दिव्यांगजनों के लिए गरिमा, सुलभता, और समान अवसर सुनिश्चित करना सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि विकसित भारत के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए सक्षम कानूनों, सुलभ अवसंरचना, समावेशी नीतियों और सतत नवाचार के माध्यम से निरंतर प्रयासों की आवश्यकता है।

श्री संजय कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एक समावेशी शिक्षा प्रणाली की परिकल्पना करती है, जो ‘कोई भी बच्चा स्कूल से बाहर न रहे’ को सुनिश्चित करती है और 2030 तक माध्यमिक स्तर पर 100 प्रतिशत सकल नामांकन हासिल करने का स्पष्ट लक्ष्य रखती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि समावेश केवल पहुँच तक सीमित नहीं है, और शिक्षा प्रणाली में प्रवेश करने वाले हर बच्चे को सीखने के सार्थक परिणाम का अनुभव मिलना चाहिए, उसे सुरक्षित महसूस करना चाहिए, उसे सामाजिक रूप से विकसित होना चाहिए, और उसे विशेष रूप से प्रारंभिक वर्षों में किसी भी विशेष शिक्षण अक्षमता के लिए प्रारंभिक पहचान और समय पर हस्तक्षेप के माध्यम से समर्थन मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यह दृष्टि केवल समाज और सरकार के समग्र दृष्टिकोण के माध्यम से ही साकार की जा सकती है। सभी बच्चों और शिक्षकों में सहानुभूति की भावना विकसित की जानी चाहिए, ताकि हम अन्य सभी की विभिन्न आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील हो सकें।

शिखर सम्मेलन का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम (आरपीपीडब्ल्यूडी) 2016 के अनुरूप विशेष जरूरतों वाले बच्चों (सीडब्ल्यूएसएन) के सन्दर्भ में समावेशी शिक्षा के लिए नीतियों, प्रथाओं और नवाचारों को सुदृढ़ करना है। इसकी परिकल्पना चिंतन और सीखने के एक सामूहिक मंच के रूप में की गयी है, शिखर सम्मेलन नीति निर्माताओं, राष्ट्रीय संस्थाओं, राज्यों और संघ शासित प्रदेशों, शिक्षा बोर्डों, विशेषज्ञों, नागरिक समाज संगठनों, स्टार्ट-अप्स और उद्योग जगत के सहयोगियों को एक साथ लाता है ताकि वे सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा कर सकें, नवाचारों को प्रदर्शित कर सकें और भारत में समावेशी शिक्षा के लिए भविष्य का मार्ग निर्धारित कर सकें।

श्रीमती ए. श्रीजा, आर्थिक सलाहकार, स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग (डीओएसईएल) ने शिखर सम्मेलन के संदर्भ निर्धारण का कार्य किया। उन्होंने बताया कि सम्मेलन हितधारकों को एक साथ लाकर सामूहिक प्रयासों को मजबूत करने के लिए आयोजित किया गया है, ताकि एक ऐसा शिक्षा प्रणाली बनाई जा सके जो प्रत्येक बच्चे के लिए उपयोगी हो तथा प्रारंभिक पहचान और सीखने से लेकर भागीदारी, कौशल और आजीविका तक समावेशी शिक्षा की निरंतरता को संबोधित करती हो। समावेशी शिक्षा की सतत प्रक्रिया को शुरू से ही पहचान और सीखने से लेकर भागीदारी, कौशल और आजीविका तक संबोधित करे। इसमें स्कूल बोर्डों के साथ समावेशी मूल्यांकन और परीक्षा व्यवस्था पर भी चर्चा हुई, साथ ही विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों (सीडब्ल्यूएसएन) के लिए कौशल विकास और रोजगार के उपायों पर विचार-विमर्श भी किया गया।

विशिष्ट क्षेत्र, जिन पर शिखर सम्मेलन में ध्यान केंद्रित किया गया

तीन दिवसीय शिखर सम्मेलन की संरचना मुख्य विषयगत क्षेत्रों पर आधारित है:

दिन 1: समावेशी शिक्षा के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकी और सहायक उपकरण का लाभ उठाना

पहले दिन में सीडब्ल्यूएसएन के लिए पहुँच, भागीदारी और सीखने के परिणामों में सुधार में डिजिटल प्रौद्योगिकियों और सहायक उपकरणों की भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। दृष्टि, श्रवण, गतिशीलता, बौद्धिक और बहु विकलांगताओं से संबंधित नवोन्मेषी समाधानों को स्टार्ट-अप, अनुसंधान संस्थानों और राष्ट्रीय संगठनों द्वारा सीधा प्रसारण और प्रदर्शनी के माध्यम से दिखाया जाएगा।

दिन 2: समावेशी शिक्षा के मार्ग – राष्ट्रीय मॉडल, उपकरण और प्रशिक्षण

दूसरा दिन प्रमुख राष्ट्रीय पहलों और क्षमता निर्माण उपायों पर प्रकाश डालेगा, जिनमें शामिल हैं:

  • प्रशस्त 2.0, उन्नत दिव्यांगता स्क्रीनिंग और ट्रैकिंग उपकरण जो यूडीआईएसई+ के साथ एकीकृत है
  • समावेशी कक्षाओं के लिए शिक्षक प्रशिक्षण और शिक्षण तथा गैर-शिक्षण कर्मियों को संवेदनशील बनाना
  • प्रस्तावित राष्ट्रीय दिशानिर्देशों के माध्यम से संसाधन कक्षों और संसाधन केंद्रों को मजबूत करना
  • सीडब्ल्यूएसएन के लिए समावेशी खेल और व्यावसायिक शिक्षा उपायों को बढ़ावा देना
  • चर्चाओं में शिक्षा मंत्रालय, एनसीईआरटी, भारत पुनर्वास परिषद (आरसीआई), दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (डीईपीडब्ल्यूडी), खेल विभाग और अन्य राष्ट्रीय संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।

दिन 3: विशिष्ट शिक्षण अक्षमताएँ, न्यूरोडाइवर्सिटी, और सीडब्ल्यूएसएन के लिए भविष्य के अवसर

अंतिम दिन विशिष्ट शिक्षण अक्षमताओं (एसएलडी) और न्यूरोडाइवर्सिटी के व्यापक आयाम पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिसमें पहचान, पाठ्यक्रम अनुकूलन, शिक्षण पद्धति, मूल्यांकन और बोर्ड-स्तरीय प्रावधान से संबंधित मुद्दों पर चर्चा होगी। सुधारात्मक शिक्षा, कौशल विकास, और शिक्षा-से-रोज़गार जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा, जिसमें शिक्षा बोर्ड और निजी क्षेत्र के हितधारक भी भाग लेंगे।

समावेशी शिक्षा शिखर सम्मेलन का उद्देश्य है:

– समावेशी शिक्षा के लिए नीति और प्रथाओं को मजबूत करना

– सहायक प्रौद्योगिकियों और डिजिटल उपकरणों को अपनाने को बढ़ावा देना

– शिक्षक क्षमता और संस्थागत तैयारी का निर्माण करना

– अंतर-क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देना

– सीडब्ल्यूएसएन के लिए शिक्षा-से-रोज़गार मार्गों की भविष्य की दिशा की पहचान करना

 

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मुक्ति गैस एजेंसी बंद होने के बाद जिला प्रशासन की पहल

रांची,22.01.2026 – उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देश पर आम उपभोक्ताओं के हित में IOCL द्वारा की गई वैकल्पिक व्यवस्था

17,162 घरेलू गैस उपभोक्ताओं को वैकल्पिक एजेंसियों से जोड़ा गया

संबंधित उपभोक्ताओं को पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एसएमएस के माध्यम से उपलब्ध कराई गई आवश्यक जानकारी

Smart Booking Modes से होगी आसान बुकिंग

मुक्ति गैस एजेंसी के बंद होने तथा उससे संबद्ध घरेलू एलपीजी गैस उपभोक्ताओं को गैस आपूर्ति में हो रही असुविधा की जानकारी मिलने पर जिला प्रशासन द्वारा स्थिति को गंभीरता से लिया गया। उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देश पर आम उपभोक्ताओं के हित में IOCL द्वारा वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।

IOCL द्वारा मुक्ति गैस एजेंसी से संबद्ध कुल 17,162 घरेलू गैस उपभोक्ताओं को निर्बाध गैस आपूर्ति उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उन्हें नजदीकी अन्य एलपीजी गैस एजेंसियों के साथ संबद्ध किया गया है। इस संबंध में सभी संबंधित उपभोक्ताओं को उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एसएमएस के माध्यम से आवश्यक जानकारी उपलब्ध करा दी गई है, ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा न हो।

जिला प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्था के तहत उपभोक्ता अब ऑनलाइन बुकिंग कर संबद्ध गैस एजेंसी से गैस सिलेंडर प्राप्त कर सकते हैं।

वैकल्पिक गैस एजेंसियों एवं उनके क्षेत्रवार विवरण निम्नवत हैं:-

1. झलक इंडेन गैस एजेंसी
मोबाइल नंबर: 9431169469
संबद्ध क्षेत्र:

हरमू हाउसिंग कॉलोनी
हरमू
न्यू एरिया पाइपरटोली

2. ओरांव गैस डिस्ट्रीब्यूटर
मोबाइल नंबर: 9431170156
संबद्ध क्षेत्र:

अपर बाजार
इरगू टोली एवं चुना भट्ठा

3. जयंत गैस कंपनी
मोबाइल नंबर: 9470193803
संबद्ध क्षेत्र:

पुरानी रांची
हरमू रोड
भुइयां टोली
मुक्ति गैस गोदाम के आसपास का क्षेत्र
निजाम नगर

4. एस.के. गैस सर्विस
मोबाइल नंबर: 9431115677
संबद्ध क्षेत्र:

आनंद नगर
भवानी नगर

घरेलू गैस उपभोक्ताओं की सुविधा जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी उपभोक्ता को गैस आपूर्ति से संबंधित समस्या होने पर संबंधित गैस एजेंसी से संपर्क करने अथवा जिला प्रशासन को अवगत कराने का अनुरोध किया गया है, ताकि समस्या का शीघ्र समाधान किया जा सके।

जिला प्रशासन द्वारा यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि मुक्ति गैस एजेंसी के बंद होने के कारण किसी भी घरेलू गैस उपभोक्ता को आवश्यक ईंधन की आपूर्ति में अनावश्यक कठिनाई न हो।

इंडियन ऑयल के स्मार्ट बुकिंग मोड्स निम्नलिखित हैं :-

* व्हाट्सएप बुकिंग: 7588888824

* मिस्ड कॉल बुकिंग: 8454955555

* एसएमएस/आईवीआरएस बुकिंग: 7718955555

* इंडियन ऑयल वन मोबाइल ऐप

* भारत बिल पेमेंट सिस्टम (BBPS)

* ऑनलाइन पोर्टल: https://cx.indianoil.in

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स्वास्थ्य विभाग एवं समाज कल्याण विभाग से संबंधित विभिन्न योजनाओं की क्रमवार समीक्षा बैठक

उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी रांची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता

महिलाओं, बच्चों एवं कमजोर वर्गों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं की प्रगति का विस्तृत मूल्यांकन किया गया

हाल में हुई बच्चे चोरी के घटना के आलोक में यदि किसी को कोई संदिग्ध व्यक्ति जो उस इलाके से बाहर हैं, नजर आते हैं, तो तुरंत इसकी सूचना दें। ऐसी सूचनाएं स्थानीय पुलिस, प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ), या अंचल अधिकारी (सीओ) को दी जा सकती हैं।:- उपायुक्त राँची

जिले के ग्रामीण इलाकों में अवैध भट्टी शराब के उत्पादन और बिक्री पर रोक लगाने के निर्देश, नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी गांव में अवैध शराब की जानकारी मिले, तो इसकी सूचना तुरंत जिला प्रशासन को दे

जिले में अवैध शराब की नशा पान पर पूर्ण रोक लगाने के लिए सभी विभागों, सामाजिक संगठनों एवं आम नागरिकों से सहयोग की अपील

आगामी 10 फरवरी से जिले में शुरू होने वाले फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम (Mass Drug Administration – MDA) में सभी नागरिकों से बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि फाइलेरिया जैसी बीमारी को जड़ से समाप्त करने के लिए निर्धारित दवा का सेवन करने की अपील

लोग अपने स्वास्थ्य को लेकर ओझा-गुणी या तंत्र-मंत्र के चक्कर में न पड़ें। ऐसे गैर-वैज्ञानिक इलाज में कई बार मरीजों की जान भी चली जाती है और इनके द्वारा दी जाने वाली दवाओं से गंभीर बीमारियां हो सकती हैं:- उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी रांची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री

रांची,22.01.2026 – उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी रांची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में आज समाहरणालय सभागार में स्वास्थ्य विभाग एवं समाज कल्याण विभाग से संबंधित विभिन्न योजनाओं की क्रमवार समीक्षा बैठक आयोजित की गई।

बैठक में महिलाओं, बच्चों एवं कमजोर वर्गों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं की प्रगति का विस्तृत मूल्यांकन किया गया तथा उन्हें और अधिक प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

जिले में स्वास्थ्य, पोषण एवं महिला कल्याण योजनाओं का समयबद्ध एवं पारदर्शी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना तथा अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना को लेकर विस्तृत चर्चा।

बैठक उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा
“महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण को मजबूत करने के लिए इन योजनाओं का क्रियान्वयन अत्यंत महत्वपूर्ण है। किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी पदाधिकारी मिलकर लक्ष्यों की प्राप्ति सुनिश्चित करें।”

योजनाओं की क्रमवार समीक्षा

टीकाकरण अभियान

राँची जिले में चल रहे टीकाकरण कार्यक्रम की विस्तृत समीक्षा की गई। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि सभी बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं का शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित किया जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में डोर-टू-डोर अभियान चलाकर छूटे हुए मामलों को कवर करने तथा टीकाकरण दर को 95% से अधिक करने पर विशेष जोर दिया गया।

एएनसी (Antenatal Care – गर्भावस्था पूर्व देखभाल)

गर्भवती महिलाओं की एएनसी जांच की प्रगति पर चर्चा हुई। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि प्रत्येक गर्भवती महिला को कम से कम चार एएनसी जांच अनिवार्य रूप से कराई जाए। उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की समय पर पहचान एवं हस्तक्षेप पर बल दिया गया।

संस्थागत प्रसव

संस्थागत प्रसव की दर बढ़ाने के प्रयासों की समीक्षा की गई। आशा कार्यकर्ताओं एवं एएनएम को अधिक सक्रिय भूमिका निभाने का निर्देश दिया गया। जिले में संस्थागत प्रसव की दर को 100% करने के लिए सामुदायिक जागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया गया।

कम जन्म वजन एवं एसएएम + एमटीसी

कम जन्म वजन वाले बच्चों की पहचान एवं उपचार पर फोकस किया गया। गंभीर कुपोषण (एसएएम) से ग्रस्त बच्चों के लिए एमटीसी सेंटरों की क्षमता बढ़ाने तथा उनके पोषण प्रबंधन पर चर्चा हुई। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि सभी एसएएम बच्चों को तत्काल एमटीसी में भर्ती कराया जाए।

एमएएम (Moderate Acute Malnutrition – मध्यम कुपोषण)

उपायुक्त द्वारा एमएएम बच्चों की पहचान एवं प्रबंधन की समीक्षा की गई। आंगनबाड़ी केंद्रों को नियमित स्क्रीनिंग के माध्यम से ऐसे बच्चों को चिह्नित कर पोषाहार वितरण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।

कम वजन वाले बच्चे

कम वजन वाले बच्चों की संख्या कम करने के लिए चलाए जा रहे पोषण अभियान की प्रगति पर उपायुक्त द्वारा समीक्षा किया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में पोषण वाटिका विकसित करने एवं स्थानीय स्तर पर पोषक आहार उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया।

अपर आईडी

अपर आईडी से संबंधित मामलों की समीक्षा में उपायुक्त ने निर्देश दिया कि सभी पात्र बच्चों की आईडी अपडेट की जाए तथा किसी भी विसंगति को तुरंत दूर किया जाए।

बाहर चले गए बच्चे (प्रवासी बच्चे)

प्रवासी बच्चों की ट्रैकिंग एवं उनके कल्याण पर चर्चा हुई। उपायुक्त ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि ऐसे बच्चों की सूची तैयार कर उनके स्वास्थ्य एवं शिक्षा का उचित प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए।

बुनियादी ढांचा (भवन, शौचालय, पीने का पानी, बिजली, पोषण वाटिका एवं वर्षा जल संचयन)

आंगनवाड़ी केंद्रों एवं स्वास्थ्य सुविधाओं के बुनियादी ढांचे की समीक्षा की गई। उपायुक्त ने समयबद्ध योजना बनाकर भवन निर्माण, शौचालय, स्वच्छ पेयजल, बिजली, पोषण वाटिका एवं वर्षा जल संचयन जैसी सुविधाओं को मजबूत करने का निर्देश दिया। स्वच्छता एवं जल संरक्षण को प्राथमिकता देने पर बल दिया गया।

सक्षम आंगनवाड़ी केंद्र (Saksham AWC)

सक्षम आंगनवाड़ी केंद्रों की प्रगति पर विचार किया गया। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि सभी आंगनवाड़ी केंद्रों को डिजिटल रूप से सक्षम बनाया जाए तथा पोषण एवं शिक्षा कार्यक्रमों को इनके माध्यम से और मजबूत किया जाए।

पीएमएमवीवाई (प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना)

योजना के अंतर्गत गर्भवती महिलाओं को मिलने वाली आर्थिक सहायता की समीक्षा की गई। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि सभी पात्र लाभार्थियों का पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए तथा भुगतान में किसी भी प्रकार का विलंब न हो। योजना की कवरेज बढ़ाने के लिए जागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया गया।

बैठक में उप विकास आयुक्त रांची, श्री सौरभ भुवनिया, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, श्रीमती सुरभि सिंह, सिविल सर्जन, डॉ. प्रभात कुमार, सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी, आंगनवाड़ी पर्यवेक्षक, आशा कार्यकर्ता एवं अन्य संबंधित विभागों के पदाधिकारी उपस्थित थे।

जिले के नागरिकों से स्वास्थ्य के प्रति सजगता बरतने की अपील

उपायुक्त ने स्वास्थ्य एवं समाज कल्याण विभाग की समीक्षा बैठक में जिले के लोगों से स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरूक रहने की अपील की। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि लोग अपने स्वास्थ्य को लेकर ओझा-गुणी या तंत्र-मंत्र के चक्कर में न पड़ें। ऐसे गैर-वैज्ञानिक इलाज में कई बार मरीजों की जान भी चली जाती है और इनके द्वारा दी जाने वाली दवाओं से गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। उपायुक्त ने लोगों से आग्रह किया कि किसी भी स्वास्थ्य समस्या में तुरंत सरकारी चिकित्सालयों या योग्य डॉक्टरों से संपर्क करें तथा केवल प्रमाणित दवाओं का ही सेवन करें।

नशा मुक्ति अभियान को मजबूत करने का आह्वान

उपायुक्त ने जिले में अवैध शराब की नशा पान पर पूर्ण रोक लगाने के लिए सभी विभागों, सामाजिक संगठनों एवं आम नागरिकों से सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि लोगों को नशे से दूर रखने और इसके दुष्प्रभावों के बारे में निरंतर जागरूक किया जाए। यदि कोई संदिग्ध बच्चा या युवा नशा करते हुए दिखाई दे, तो तुरंत समाज कल्याण विभाग को सूचना दें।
उपायुक्त ने विशेष चिंता जताई कि हाल के दिनों में कॉटन कैंडी में केमिकल युक्त रंगों का प्रयोग बढ़ गया है, जो बच्चों के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को ऐसे केमिकल युक्त एवं रंगीन खाद्य पदार्थों से दूर रखें तथा स्वस्थ एवं प्राकृतिक आहार पर ध्यान दें।

10 फरवरी से शुरू होने वाले फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी की अपील

उपायुक्त ने आगामी 10 फरवरी से जिले में शुरू होने वाले फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम (Mass Drug Administration – MDA) में सभी नागरिकों से बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि फाइलेरिया जैसी बीमारी को जड़ से समाप्त करने के लिए निर्धारित दवा का सेवन बहुत आवश्यक है। उपायुक्त ने सभी परिवारों से अपील की कि वे अपने घरों में आने वाले स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं से दवा अवश्य लें और पूर्ण कोर्स पूरा करें। इस कार्यक्रम के सफल संचालन से जिले को फाइलेरिया मुक्त बनाने में बड़ी सफलता मिलेगी।

*स्वच्छता अभियान: खुले में शौच को रोकने के ख़िलाफ़ सभी को लगातार काम करने की आवश्यकता *

उपायुक्त ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत स्वच्छता पर विशेष जोर देते हुए कहा कि लोग खुले में शौच बिल्कुल न करें। उन्होंने सभी परिवारों से अपील की कि वे अपने घरों में शौचालय का निर्माण एवं उपयोग अवश्य करे । शौचालय निर्माण से न केवल स्वच्छता बनी रहेगी, बल्कि डायरिया, हैजा, टाइफाइड जैसी कई संक्रामक बीमारियों से भी बचा जा सकेगा।
उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में शौचालय निर्माण को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाएं तथा पात्र लाभार्थियों को शौचालय निर्माण के लिए उपलब्ध सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया जाए।

सभी विभागों को सक्रियता से कार्य करने के निर्देश

उपायुक्त ने बैठक में सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को इन सभी मुद्दों पर तत्परता से कार्य करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य, नशा मुक्ति, स्वच्छता एवं फाइलेरिया उन्मूलन जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से जिले की जनता को स्वस्थ एवं जागरूक बनाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी जाएगी।
उपायुक्त ने आम जनता से अपील की कि वे इन सरकारी अभियानों में सक्रिय रूप से भाग लें और एक-दूसरे को जागरूक करें ताकि जिला समग्र रूप से स्वस्थ, स्वच्छ एवं नशा मुक्त बने।

उपायुक्त द्वारा अवैध शराब और बाल चोरी की घटनाओं पर सख्त निर्देश दिए गए

उपायुक्त ने ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध शराब (भट्टी शराब) के उत्पादन और वितरण को रोकने तथा बाल चोरी जैसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए नागरिकों से सक्रिय सहयोग की अपील की है। उपायुक्त ने कहा कि समाज की सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जनता की भागीदारी आवश्यक है। इस संबंध में जारी एक बयान में उपायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल नजदीकी पुलिस थाने को दी जाए।

अवैध शराब के उत्पादन पर कड़ी नजर रखने के निर्देश

उपायुक्त ने जिले के ग्रामीण इलाकों में भट्टी शराब के उत्पादन और बिक्री की समस्या पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी गांव में अवैध शराब की जानकारी मिले, तो इसे तुरंत रिपोर्ट करें। उपायुक्त ने कहा अवैध शराब न केवल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, बल्कि यह अपराध और सामाजिक अशांति को भी बढ़ावा देती है। जिला प्रशासन द्वारा इस मुद्दे पर विशेष अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें पुलिस और आबकारी विभाग की टीमें सक्रिय रूप से शामिल हैं। नागरिकों को सूचना देने के लिए हेल्पलाइन नंबर 100 (पुलिस) या स्थानीय आबकारी अधिकारी से संपर्क करने की सलाह दी गई है। उपायुक्त ने आश्वासन दिया कि सूचना देने वालों की पहचान गोपनीय रखी जाएगी और उनके योगदान को सराहा जाएगा।

बाल चोरी की घटनाओं को रोकने के लिए सतर्कता बरतने के निर्देश

उपायुक्त ने जिले में बाल चोरी या अपहरण की संभावित घटनाओं पर विशेष जोर दिया है। उन्होंने कहा कि यदि किसी नागरिक को कोई संदिग्ध बच्चा दिखाई दे, जो चोरी या अपहरण का शिकार लगता हो, तो तुरंत इसकी सूचना दें। ऐसी सूचनाएं स्थानीय पुलिस, प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ), या अंचल अधिकारी (सीओ) को दी जा सकती हैं। जिला प्रशासन ऐसी घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई करेगी। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करें और पड़ोसियों तथा समुदाय के सदस्यों को भी सतर्क रहने के लिए प्रेरित करें। इस मुद्दे पर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, जिसमें स्कूलों और ग्राम सभाओं में विशेष सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।

उपायुक्त ने सभी पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि अगली समीक्षा बैठक में प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए तथा लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए टीम वर्क पर विशेष ध्यान दिया जाए।

यह बैठक जिले में समाज कल्याण योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी, जिससे महिलाओं एवं बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण स्तर में उल्लेखनीय सुधार आएगा।

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रांची में परिवहन विभाग की सघन जांच: 17 वाहनों पर कार्रवाई, 5.50 लाख रुपये से अधिक जुर्माना वसूला गया

उपायुक्त राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देशानुसार व्यापक वाहन जांच अभियान चलाया गया

सभी वाहन चालकों एवं मालिकों से अपील की कि वे फिटनेस, परमिट, प्रदूषण प्रमाण पत्र तथा ओवरलोडिंग नियमों का सख्ती से पालन करें

राँची,22.01.2026 – उपायुक्त राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देशानुसार जिला परिवहन पदाधिकारी, रांची श्री अखिलेश कुमार के नेतृत्व में  22.01.2026 को मोहराबादी, करमटोली, कांके रोड, ओरमांझी एवं आसपास के क्षेत्रों में व्यापक वाहन जांच अभियान चलाया गया। उपायुक्त के निर्देशानुसार आयोजित इस जांच में कुल 153 वाहनों की जांच की गई, जिसमें 17 वाहनों में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। जांच के दौरान ओवरलोडिंग, फिटनेस प्रमाण पत्र की अनुपस्थिति, परमिट की कमी तथा प्रदूषण प्रमाण पत्र न होने जैसी कमियां सामने आईं।

ओवरलोडिंग एवं दस्तावेजों की कमी पर सख्त कार्रवाई

जांच टीम ने पाया कि कई वाहन निर्धारित भार क्षमता से अधिक लोडेड थे तथा आवश्यक दस्तावेज जैसे फिटनेस सर्टिफिकेट, परमिट एवं प्रदूषण प्रमाण पत्र पूर्ण नहीं थे। झारखंड राज्य से बाहर के वाहनों में भी ये कमियां पाई गईं। परिणामस्वरूप, 17 वाहनों पर कुल 5,49,800 रुपये (लगभग 5.50 लाख रुपये) का दंड वसूला गया। उपायुक्त के निर्देश पर यह अभियान सड़क सुरक्षा, यातायात व्यवस्था एवं पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है।

तीन वाहनों को जब्त कर थाने में सुरक्षित रखा गया

कार्रवाई के दौरान तीन वाहन ऐसे पाए गए जिनमें दस्तावेज पूरी तरह अनुपस्थित थे तथा ओवरलोडिंग की स्थिति अत्यधिक थी। इन वाहनों को मोहराबादी थाना (टीओपी) में जब्त कर सुरक्षित रखा गया है। एक अन्य वाहन को भी रातू थाना क्षेत्र में जब्त किया गया। जिला परिवहन पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि ऐसी कार्रवाई नियमित रूप से जारी रहेगी ताकि सड़कों पर अनुशासन बनाए रखा जा सके।

सड़क सुरक्षा एवं नियमों का पालन जरूरी

जिला परिवहन पदाधिकारी श्री अखिलेश कुमार ने कहा कि यह अभियान केवल दंडात्मक नहीं, बल्कि जागरूकता बढ़ाने वाला भी है। उन्होंने सभी वाहन चालकों एवं मालिकों से अपील की कि वे फिटनेस, परमिट, प्रदूषण प्रमाण पत्र तथा ओवरलोडिंग नियमों का सख्ती से पालन करें। नियमों का उल्लंघन न केवल जुर्माने का कारण बनता है, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण भी होता है। अभियान के दौरान टीम ने वाहन चालकों को नियमों के प्रति जागरूक भी किया।

परिवहन विभाग द्वारा आने वाले दिनों में भी ऐसे सघन जांच अभियान विभिन्न क्षेत्रों में चलाए जाएंगे। नागरिकों से अपील है कि वे नियमों का पालन करें तथा किसी भी अनियमितता की सूचना परिवहन विभाग या पुलिस को दें।

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लखनऊ उत्तर प्रदेश का पहला ऐसा शहर बना जहां ताजा कचरे का डंपिंग स्थल शून्य है

नई दिल्ली – शिवारी सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के शुभारंभ के साथ लखनऊ ने शहरी स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है और स्वच्छ भारत मिशन-शहरी के तहत नगरपालिका ठोस कचरे के 100 प्रतिशत वैज्ञानिक प्रसंस्करण को प्राप्त किया है।

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, लगभग 40 लाख निवासियों और 7.5 लाख प्रतिष्ठानों के साथ तेजी से विकसित हो रहा एक शहरी केंद्र है। इस तीव्र विकास के कारण अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरणीय स्थिरता में जटिल चुनौतियां उत्पन्न हो रही हैं। लखनऊ नगर निगम (एलएमसी) वैज्ञानिक अपशिष्ट निपटान, संसाधन पुनर्प्राप्ति और सतत शहरी विकास पर केंद्रित बहुआयामी रणनीति के माध्यम से इन चुनौतियों का समाधान कर रहा है, जिससे शहर में जन स्वास्थ्य और पर्यावरण की गुणवत्ता दोनों में सुधार हो रहा है।

लखनऊ ने अपशिष्ट प्रबंधन के प्रति अपने वैज्ञानिक और टिकाऊ दृष्टिकोण के अनुरूप, शिवारी संयंत्र में अपनी तीसरी ताजे अपशिष्ट प्रसंस्करण सुविधा का उद्घाटन किया है। इसके साथ ही यह उत्तर प्रदेश का पहला शहर बन गया है जिसने नगरपालिका ठोस अपशिष्ट का 100 प्रतिशत वैज्ञानिक प्रसंस्करण हासिल किया है और आधिकारिक तौर पर ‘शून्य ताजे अपशिष्ट डंप’ शहर का दर्जा प्राप्त कर लिया है।

नवस्थापित संयंत्र की प्रसंस्करण क्षमता 700 मीट्रिक टन प्रतिदिन है। लखनऊ नगर-निगम अब दो मौजूदा संयंत्रों के साथ प्रतिदिन उत्पन्न होने वाले 2,100 मीट्रिक टन से अधिक कचरे का वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण करने में सक्षम है। इससे खुले में कचरा फेंकने की आवश्यकता समाप्त हो गई है और यह टिकाऊ शहरी अपशिष्ट प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

शहर में प्रतिदिन लगभग 2,000 मीट्रिक टन कचरा उत्पन्न होता है। इसके प्रबंधन के लिए लखनऊ नगर निगम और भूमि ग्रीन एनर्जी ने 700 मीट्रिक टन प्रतिदिन की क्षमता वाले तीन कचरा प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किए हैं। कचरे को जैविक (55 प्रतिशत) और अजैविक (45 प्रतिशत) भागों में अलग किया जाता है। जैविक कचरे को खाद और बायोगैस में परिवर्तित किया जाता है, जबकि अजैविक कचरे को पुनर्चक्रण के लिए छांटा जाता है या सीमेंट और कागज उद्योगों में उपयोग के लिए अपशिष्ट-व्युत्पन्न ईंधन (आरडीएफ) में परिवर्तित किया जाता है। लखनऊ में घर-घर कचरा संग्रहण की दक्षता बढ़कर 96.53 प्रतिशत हो गई है और स्रोत पर ही कचरे को अलग करने का स्तर 70 प्रतिशत से अधिक है।

नगर निगम द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार शहर में लगभग 18.5 लाख मीट्रिक टन पुराने कचरे में से लगभग 12.86 लाख मीट्रिक टन का वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण किया गया है। इससे प्राप्त अपशिष्ट आधारित ईंधन (आरडीएफ), निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट, जैव-मिट्टी और मोटे कणों का उपयोग पर्यावरण के अनुकूल तरीकों जैसे पुनर्चक्रण, सह-प्रसंस्करण और निचले इलाकों में भूमि भराव के लिए किया गया है। कचरे के प्रसंस्करण से कई मूल्यवान उप-उत्पाद उत्पन्न हो रहे हैं। लगभग 2.27 लाख मीट्रिक टन अपशिष्ट आधारित ईंधन (आरडीएफ) को भारत भर के उद्योगों में सीमेंट और कागज निर्माण में सह-प्रसंस्करण के लिए भेजा गया है। मोटे कणों (4.38 लाख मीट्रिक टन), जैव-मिट्टी (0.59 लाख मीट्रिक टन) और निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट (2.35 लाख मीट्रिक टन) जैसी अक्रिय सामग्रियों का उपयोग निचले इलाकों में भूमि भराव और अवसंरचना विकास के लिए किया गया है।

इससे धीरे-धीरे एक महत्वपूर्ण परिवर्तन आया। साइट पर 25 एकड़ से अधिक भूमि का पुनर्विकास किया गया है, जिसे अब 2,100 मीट्रिक टन की दैनिक प्रसंस्करण क्षमता वाली एक पूर्णतः कार्यरत ताजे अपशिष्ट उपचार सुविधा के रूप में विकसित किया जा रहा है। साइट पर अब विंडरो पैड, आंतरिक सड़कें, शेड, समर्पित वजन मापने वाले पुल और एक संपूर्ण अपशिष्ट प्रसंस्करण प्रणाली मौजूद है।

आगे की योजना के तहत एलएमसी शिवारी में अपशिष्ट-से-ऊर्जा (डब्ल्यूटीई) संयंत्र स्थापित करने की तैयारी कर रहा है। प्रस्तावित संयंत्र अपशिष्ट से प्राप्त कच्चे ईंधन (आरडीएफ) को बिजली में परिवर्तित करेगा। योजनाबद्ध 15 मेगावाट का डब्ल्यूटीई संयंत्र प्रतिदिन 1,000-1,200 मीट्रिक टन आरडीएफ का उपयोग करेगा, जिससे लगभग 500 किलोमीटर दूर स्थित सीमेंट कारखानों तक आरडीएफ के परिवहन की लागत और दूरी कम करने में मदद मिलेगी।

लखनऊ का अपशिष्ट प्रबंधन मॉडल चक्रीय अर्थव्यवस्था के सिद्धांतों के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है—जिसमें संसाधनों की अधिकतम पुनर्प्राप्ति, अपशिष्ट पदार्थों का न्यूनतम उपयोग और पुनर्चक्रण योग्य सामग्रियों के पुन: उपयोग को बढ़ावा देना शामिल है। लखनऊ नगर निगम की ये पहलें भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अन्य शहरों और एजेंसियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।

स्वच्छ आदत से स्वच्छ भारत

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महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026’ में झारखंड से आए युवकों के साथ वार्तालाप किया

नई दिल्ली – महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026’ में झारखंड से आए युवकों के साथ वार्तालाप किया |

अपने सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने कहा, “नई दिल्ली में विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026 के दौरान झारखंड से आए युवा प्रतिनिधियों से सार्थक संवाद हुआ।

भारत के इतिहास में हर परिवर्तन की अगुवाई युवाओं ने की है। Young Leaders Dialogue 2026 युवाओं से आह्वान करता है कि वे राष्ट्र निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाएँ, राष्ट्रीय चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करें और अपने सपनों को Viksit Bharat के संकल्प से जोड़ें।

Young Leaders Dialogue 2026 में सहभागी झारखंड दल को मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ।”

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केंद्रीय मंत्री श्री प्रह्लाद जोशी ने दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच 2026 में वैश्विक निवेशकों से भारत के स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र में तेजी से हो रहे विस्तार में भागीदार बनने का आह्वान किया

नई दिल्ली – दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच की वार्षिक बैठक 2026 में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन की असली चुनौती ऐसे बुनियादी ढांचे के निर्माण में निहित है जो अनुकूल, विस्तार योग्य और निवेश के लिए तैयार हो।

‘विकास के लिए अनुकूल बुनियादी ढांचा’ सत्र में केंद्रीय मंत्री ने प्रणालीगत अनुकूलन के साथ व्यापकता को संयोजित करने के भारत के अनुभव पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश ने दिसंबर 2025 तक 267 गीगावॉट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता हासिल कर ली है और 2030 के अपने लक्ष्यों को पूरा करने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है। यह सुदृढ़ नीतियों, मजबूत घरेलू विनिर्माण, ग्रिड आधुनिकीकरण, ऊर्जा भंडारण समाधान और भूतापीय एवं परमाणु ऊर्जा के लिए उभरते ढांचों द्वारा समर्थित है। उन्होंने सतत और समावेशी वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन को संभव बनाने के लिए दीर्घकालिक निवेश पूंजी, मिश्रित वित्त और सरकारों, निजी क्षेत्र तथा बहुपक्षीय विकास बैंकों के बीच गहन सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।

आर्थिक विकास के केंद्र बिंदु के रूप में स्थिरता

केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने दावोस में ‘व्यापक स्तर पर स्थिरता प्रदान करना: वैश्विक परिवर्तन के मार्ग’ विषय पर आयोजित गोलमेज सम्मेलन में अपना भाषण दिया। इसमें उन्होंने इस बात पर भारत का दृष्टिकोण साझा किया कि कैसे स्थिरता आर्थिक विकास और प्रगति के मूल में आ गई है। श्री जोशी ने इस बात पर जोर दिया कि स्थिरता अब कोई परिधीय चिंता का विषय नहीं है, बल्कि प्रतिस्पर्धात्मकता, अनुकूलन और दीर्घकालिक विकास का एक केंद्रीय चालक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस दशक की सबसे बड़ी चुनौती यह नहीं है कि दुनिया को परिवर्तन करना चाहिए या नहीं बल्कि यह है कि स्थिरता को बड़े पैमाने पर, तेजी से और आर्थिक रूप से मजबूत तरीके से कैसे हासिल किया जा सकता है।

भारत का ऊर्जा परिवर्तन दर्शन या सिद्धांत

केंद्रीय मंत्री ने 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन हासिल करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए इस बात पर जोर दिया कि देश का दृष्टिकोण वसुधैव कुटुम्बकम -एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य के सिद्धांत द्वारा निर्देशित है। उन्होंने कहा कि भारत स्थिरता को केवल एक तकनीकी बदलाव के बजाय अर्थव्यवस्था और समाज के एक रणनीतिक परिवर्तन के रूप में देखता है। साथ ही विकास के लिए सबसे विश्वसनीय, किफायती और भविष्य के लिए तैयार मार्ग के रूप में दृढ़ विश्वास के साथ नवीकरणीय ऊर्जा को अपना रहा है।

उद्योग जगत के दिग्गजों के साथ द्विपक्षीय बातचीत और बैठकें

ओमान के उप प्रधानमंत्री के आर्थिक मामलों के कार्यालय में आर्थिक सलाहकार डॉ. सईद मोहम्मद अहमद अल सकरी के साथ बैठक में केंद्रीय मंत्री ने शुष्क और रेगिस्तानी इलाकों सहित सौर, पवन, हरित हाइड्रोजन और ऊर्जा भंडारण समाधानों को बड़े पैमाने पर लागू करने की भारत की प्रमाणित क्षमता पर प्रकाश डाला। चर्चा में सहयोग के संभावित क्षेत्रों जैसे सौर मॉड्यूल, इलेक्ट्रोलाइजर और हरित हाइड्रोजन के निर्माण और निर्यात पर संयुक्त सहयोग, नवीकरणीय ऊर्जा से चलने वाले हाइड्रोजन हब में निवेश, एकीकृत ऊर्जा परियोजनाएं और बंदरगाह-आधारित निर्यात अवसंरचना और भारत-ओमान सीईपीए का लाभ उठाने और अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड पहल के तहत सहयोग जैसे विषयों को शामिल किया गया।

 

केंद्रीय मंत्री ने बेल्जियम के उप प्रधानमंत्री और विदेश मामलों, यूरोपीय मामलों और विकास सहयोग मंत्री श्री मैक्सिम प्रीवोट के साथ भी बैठक की। इन चर्चाओं ने आपसी विश्वास, पूर्वानुमानशीलता और साझा लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित भारत-बेल्जियम साझेदारी की मजबूती को लेकर प्रतिबद्धता जताई।

 

केंद्रीय मंत्री ने कुवैत के विद्युत, जल और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री सुबैह अब्दुल अजीज अल-मुखैजीम के साथ एक रचनात्मक बैठक भी की। इसमें नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश से संबंधित मुद्दों पर विचार विमर्श किया गया।

वार्षिक बैठक के दौरान श्री जोशी ने स्वच्छ ऊर्जा में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और निवेश को मजबूत करने के लिए उच्च स्तरीय द्विपक्षीय वार्ताओं की एक शृंखला आयोजित की।

वैश्विक निवेशकों के साथ जुड़ाव

श्री जोशी ने ला काइस के अध्यक्ष और सीईओ चार्ल्स एमोंड और सीओओ सुश्री सारा बौचार्ड के साथ भारत में दीर्घकालिक जलवायु और स्वच्छ ऊर्जा निवेश को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करते हुए विस्तार से चर्चा भी की। उन्होंने ‘पार्टनर विद इंडिया’ पहल को और बड़े स्तर पर बढ़ाने की वकालत की, ताकि 2030 तक जलवायु कार्यों के लिए तय 400 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश का फायदा भारत को मिल सके। साथ ही  भारत की स्वच्छ ऊर्जा महत्वाकांक्षाओं और ला काइस की जलवायु निवेश रणनीति के बीच मजबूत तालमेल पर प्रकाश डाला।

 

केंद्रीय मंत्री ने इंग्का ग्रुप के सीईओ और अध्यक्ष श्री जुवेन्सियो माएज़्टू से मुलाकात की, जो आईकिया के खुदरा कारोबार का संचालन करता है। इंग्का समूह ने भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में विशेष रूप से सौर, पवन और संकर समाधानों में महत्वपूर्ण तरीके से प्रवेश करने में गहरी रुचि व्यक्त की। श्री जोशी ने समूह को भारत की स्थिर नीतियों और निवेश-अनुकूल वातावरण का लाभ उठाते हुए भारत में अपनी भागीदारी बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया।

मंत्री जी का एक्स पर पोस्ट

दावोस के विश्व आर्थिक मंच में भारत के पवेलियन के उद्घाटन में श्री प्रह्लाद जोशी ने अन्य केंद्रीय मंत्रियों, राज्य के मुख्यमंत्रियों और विभिन्न राज्यों के मंत्रियों के साथ भाग लिया। इनमें आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री एन. चंद्रबाबू नायडू, असम के मुख्यमंत्री श्री हिमंता बिस्वा सरमा, केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री श्री राम मोहन नायडू और कर्नाटक सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग एवं अवसंरचना मंत्री श्री एम.बी. पाटिल शामिल थे। इंडिया पवेलियन के उद्घाटन के दौरान श्री प्रह्लाद जोशी ने ‘द इंडिया स्टोरी’ नामक एक ग्रीन इन्वेस्टमेंट हैंडबुक का भी विमोचन किया।

 

यह पवेलियन भारत को वैश्विक साझेदारी और निवेश के लिए एक विश्वसनीय, प्रतिस्पर्धी और भविष्य के लिए तैयार गंतव्य के रूप में प्रदर्शित करता है, जिसमें नीतिगत स्थिरता, सुधार-आधारित विकास और एक पूर्वानुमानित नियामक वातावरण पर प्रकाश डाला गया है। यह भारत की विनिर्माण, अवसंरचना, नवीकरणीय ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में मौजूद शक्तियों को प्रदर्शित करता है, जो विकसित भारत 2047 की परिकल्पना और सतत एवं समावेशी विकास के प्रति प्रतिबद्धता के अनुरूप है।

भारत एक विश्वसनीय वैश्विक भागीदार के रूप में

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वैश्विक मंदी और आपूर्ति शृंखला में व्यवधान के दौर में भी भारत ने दीर्घकालिक दृष्टि के साथ लचीलापन अपना कर और क्षमताओं का विस्तार करके अपने विकास को तेज किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत वैश्विक निवेश के लिए एक विश्वसनीय और भविष्य के लिए तैयार गंतव्य के रूप में उभर रहा है, जो स्थिर रिटर्न, मजबूत नीतिगत निश्चितता और नवाचार, विस्तार और टिकाऊ मूल्य सृजन के लिए दीर्घकालिक अवसर प्रदान कर रहा है।

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रक्षा पर संसदीय स्थाई समिति ने नौसेना विज्ञान एवं तकनीकी प्रयोगशाला, विशाखापत्तनम का दौरा किया

नई दिल्ली –  श्री राधा मोहन सिंह की अध्यक्षता में रक्षा पर संसदीय स्थायी समिति ने 20 जनवरी, 2026 को नौसेना विज्ञान और तकनीकी प्रयोगशाला (एनएसटीएल), विशाखापत्तनम का एक जमीनी अध्ययन के लिए दौरा  किया। समिति ने एनएसटीएल द्वारा विकसित उत्पादों का अवलोकन किया, जिनमें टॉरपीडो (एएलडब्लूटी, वरुणास्त्र और ईएचडब्लूटी), माइन्स (एमआईजीएम और पीबीजीएम), डिकॉय (एसएफडी, टॉरबस्टर), स्मार्ट, एचईएयूवी, स्वार्म, अंडर-वाटर सिस्टम, अंडर-वाटर वाहन और अन्य संबंधित रक्षा तकनीकें शामिल थीं।

समिति ने ‘सी-कीपिंग एंड मैन्युवरिंग बेसिन’  परीक्षण सुविधा में एक जहाज के स्केल-डाउन मॉडल पर हाइड्रो-डायनेमिक परीक्षण का लाइव प्रदर्शन भी देखा। प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय नौसेना की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए पानी के नीचे के प्लेटफार्मों, हथियारों और संबंधित तकनीकों के विकास में एनएसटीएल के आर एंड डी प्रयासों की सराहना की।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत, महानिदेशक (नौसेना प्रणाली और सामग्री) डॉ. आर.वी. हर प्रसाद और एनएसटीएल के निदेशक डॉ. अब्राहम वर्गीस ने सांसदों, लोकसभा सचिवालय और रक्षा मंत्रालय के अधिकारियों वाले इस प्रतिनिधिमंडल का स्वागत किया।

एनएसटीएल के निदेशक ने समिति को प्रयोगशाला में चल रही आर एंड डी गतिविधियों, उद्योग जगत और शैक्षणिक संस्थानों के साथ संवाद के बारे में जानकारी दी। उन्होंने भविष्य के तकनीकी रोडमैप के बारे में भी संक्षेप में बताया। समिति ने मैरीटाइम डोमेन अवेयरनेस और अंडरवाटर डोमेन अवेयरनेस जैसे रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्रों में एनएसटीएल के प्रयासों की प्रशंसा की।

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भारतीय नौसेना का पहला प्रशिक्षण स्क्वाड्रन इंडोनेशिया के बेलावन बंदरगाह पहुंचा

नई दिल्ली  – भारतीय नौसेना के प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन (1टीएस) के पोत आईएनएस तीर, आईएनएस शार्दुल, आईएनएस सुजाता और आईसीजीएस सारथी 20 जनवरी, 2026 को इंडोनेशिया के बेलावन बंदरगाह पर पहुंचे। इस अवसर पर इंडोनेशियाई नौसेना द्वारा स्क्वाड्रन का गर्मजोशी से स्वागत किया गया, जिसके अंतर्गत पारंपरिक नृत्य प्रदर्शन सहित एक स्वागत समारोह आयोजित किया गया। ये जहाज वर्तमान में दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में प्रशिक्षण अभियान पर तैनात हैं।

बेलावन बंदरगाह पर ठहराव के दौरान, भारतीय नौसेना और इंडोनेशिया की नौसेना के कर्मी विभिन्न नौसैन्य एवं सामाजिक गतिविधियों में भाग लेंगे, जिनमें क्रॉस-डेक दौरे और संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम शामिल हैं। इन गतिविधियों का उद्देश्य आपसी सहभागिता को बढ़ाना और समुद्री सहयोग को विस्तारित करना है। इसके अतिरिक्त, सांस्कृतिक आदान-प्रदान कार्यक्रम के अंतर्गत संयुक्त योग सत्र, स्कूली बच्चों के लिए जहाज भ्रमण, मैत्रीपूर्ण खेल प्रतियोगिताएं और सामुदायिक संपर्क गतिविधियां भी आयोजित की जाएंगी।

इंडोनेशिया में प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन की तैनाती भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति के अनुरूप दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों के साथ भारत की निरंतर सहभागिता को उजागर करती है। यह तैनाती हिंद महासागर नौसेना संगोष्ठी (आईओएनएस) के सदस्य देशों के साथ नियमित नौसैन्य संपर्क व प्रशिक्षण आदान-प्रदान के माध्यम से ‘महासागर’(क्षेत्र में सुरक्षा एवं विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति) की परिकल्पना को भी सुदृढ़ करती है।

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DC Ranchi श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने जिले में चल रही परियोजनाओं एवं विभिन्न प्रखंडों के स्वास्थ्य केंद्रों का किया निरीक्षण

डीएमएफटी (DMFT) से निर्मित स्वास्थ्य केंद्रों तथा पुस्तकालयों की गुणवत्ता, सुविधाओं एवं रखरखाव की विस्तृत जांच की

ग्रामीणों से सीधी बातचीत, स्वास्थ्य केंद्रों का अधिक उपयोग करने की अपील

अबुआ साथी व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से शिकायतों का त्वरित समाधान मिल रहा है

उपायुक्त ने झारखंड मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना से लाभान्वित जेएसएलपीएस दीदियों से संवाद किया

पब्लिक लाइब्रेरी, बेड़ो का निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने लाइब्रेरी की प्रशंसा

ओझा-गुनी और क्वाक से दूर रहें, आधुनिक दवाइयों पर भरोसा करें:- उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री

रांची,21.01.2026 – उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने आज दिनांक- 21 जनवरी 2026 को बेड़ो एवं खलारी प्रखंडों के स्वास्थ्य केंद्रों (हेल्थ सेंटर) का औचक निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने डीएमएफटी (DMFT) से निर्मित स्वास्थ्य केंद्रों तथा पुस्तकालयों की गुणवत्ता, सुविधाओं एवं रखरखाव की विस्तृत जांच की।

इस दौरान उप विकास आयुक्त राँची, श्री सौरभ भुवनिया, जिला जन संपर्क पदाधिकारी राँची, श्रीमती उर्वशी पांडेय, जिला योजना पदाधिकारी राँची, श्री संजीव कुमार, जिला शिक्षा अधीक्षक राँची, श्री बादल राज, अंचल अधिकारी बेड़ो, लापुंग, ओरमांझी एवं खलारी एवं सम्बंधित पदाधिकारी उपस्थित रहें।

ग्रामीणों से सीधी बातचीत, स्वास्थ्य केंद्रों का अधिक उपयोग करने की अपील

निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने ग्रामीणों से खुली बातचीत की। उन्होंने ग्रामीणों से अनुरोध किया कि वे स्वास्थ्य केंद्रों तथा पुस्तकालयों का अधिक से अधिक उपयोग करें। ये सुविधाएं विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के लिए उपलब्ध कराई गई हैं। उपायुक्त ने कहा, “इन केंद्रों का लाभ उठाकर आप अपनी स्वास्थ्य एवं शिक्षा संबंधी आवश्यकताओं को पूरा कर सकते हैं। अधिक से अधिक लोग इनका उपयोग करें, ताकि इनकी उपयोगिता सिद्ध हो।”

अबुआ साथी व्हाट्सएप ग्रुप के माध्यम से शिकायतों का त्वरित समाधान

उपायुक्त ने ग्रामीणों को बताया कि जिला प्रशासन द्वारा “अबुआ साथी” व्हाट्सएप ग्रुप बनाया गया है। यदि किसी आंगनबाड़ी केंद्र, स्वास्थ्य केंद्र या सरकारी कार्यालय में अनियमितता हो या वे बंद रहते हों, तो तुरंत इस ग्रुप पर सूचना दें। हर प्रखंड में अलग-अलग अबुआ साथी ग्रुप सक्रिय हैं, जहां सूचनाओं का तेजी से आदान-प्रदान होता है। उन्होंने अपील की कि अधिक से अधिक लोग इस ग्रुप से जुड़ें और अपनी समस्याओं का समाधान प्राप्त करें।

हर मंगलवार जनता दरबार में समस्याओं का समाधान

उपायुक्त ने जानकारी दी कि जिला एवं प्रखंड स्तर पर हर मंगलवार जनता दरबार आयोजित किया जाता है। इस दौरान पदाधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहते हैं, ताकि लोग अपनी समस्याएं सीधे रख सकें। उन्होंने कहा कि जनता दरबार अत्यंत सफल रहा है और कई सक्सेस स्टोरी सामने आई हैं।

ओझा-गुनी और क्वाक से दूर रहें, आधुनिक दवाइयों पर भरोसा करें

उपायुक्त ने ग्रामीणों से विशेष अनुरोध किया कि स्वास्थ्य संबंधी किसी भी समस्या के लिए स्वास्थ्य केंद्र ही आएं। ओझा-गुनी, क्वाक या जड़ी-बूटियों के चक्कर में न पड़ें। स्वास्थ्य केंद्रों में आवश्यक दवाइयां उपलब्ध हैं, तथा बच्चों को आयरन टैबलेट्स एवं अन्य स्वास्थ्य संबंधी दवाइयां सीएचओ (Community Health Officer) एवं एएनएम (ANM) द्वारा प्रदान की जा रही हैं।

उन्होंने चेतावनी दी कि अनजाने में ओझा-गुनी या क्वाक से जड़ी-बूटियां/केमिकल लेने से स्वास्थ्य पर बुरा प्रभाव पड़ता है। लोगों को आधुनिक चिकित्सा (मॉडर्न मेडिसिन) पर भरोसा करने की सलाह दी। जिला प्रशासन द्वारा मनकी मुंडा, ग्राम प्रधान, मुखिया एवं आंगनबाड़ी सेविकाओं की मदद से ग्रामीणों को जागरूक करने का अभियान चलाया जा रहा है।

मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना से लाभान्वित महिलाओं ने जताया आभार

उपायुक्त ने ग्रामीण महिलाओं से भी बातचीत की। महिलाओं ने मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना की राशि का उपयोग शिक्षा एवं स्वास्थ्य संबंधी कार्यों में करने पर प्रसन्नता जताई। उन्होंने कहा कि इस योजना से उन्हें काफी मदद मिल रही है और वे बहुत खुश हैं।

उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा कि जिला प्रशासन ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा एवं अन्य सुविधाओं को मजबूत करने के लिए निरंतर प्रयासरत है। ग्रामीणों से अपील की कि वे सरकारी योजनाओं का अधिकतम लाभ उठाएं और प्रशासन के साथ सक्रिय रूप से जुड़े रहें।

टीवीएस डिस्ट्रिक्ट सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस, बुकरू का अवलोकन

उपायुक्त ने ASTVS टीवीएस डिस्ट्रिक्ट सीएम स्कूल ऑफ एक्सीलेंस का अवलोकन किया। निरीक्षण के दौरान उन्होंने निर्देश दिया कि स्कूल परिसर के आसपास किसी भी प्रकार का अतिक्रमण, अड्डाबाजी एवं नशाबाजी न हो। इसके लिए अनुमंडल पदाधिकारी सदर राँची, श्री रजत कुमार को निर्देशित किया कि अंधेरा होने के बाद विशेष निगरानी रखी जाए एवं गश्ती दल को सक्रिय किया जाए। विद्यालय के सुंदरीकरण, सीपेज एवं जल जमाव की समस्या के समाधान हेतु भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

आयुष्मान आरोग्य मंदिर, बुकरू, कांके निरीक्षण

उपायुक्त ने आयुष्मान आरोग्य मंदिर, बुकरू (कांके) का निरीक्षण किया। उन्होंने मौके पर उपस्थित ग्रामीणों से योजना के लाभ, मातृ-शिशु सुरक्षा, टीकाकरण एवं अन्य स्वास्थ्य सुविधाओं की जानकारी ली। उपायुक्त ने कहा कि एएनएम एवं आंगनबाड़ी सेविकाएं ग्रामीणों को जागरूक करें कि वे ओझा-गुनी के चक्कर में न पड़ें तथा आधुनिक वैज्ञानिक चिकित्सा का ही लाभ लें। ज्ञात हो कि यह केंद्र एनक्यूएएस प्रमाण पत्र प्राप्त कर चुका है।

राजकीय कृत मध्य विद्यालय, मक्का बुढ़मू का औचक निरीक्षण

उपायुक्त ने राजकीय कृत मध्य विद्यालय, मक्का बुढ़मू का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने प्रधानाध्यापक को सफाई पर विशेष ध्यान देने तथा बच्चों में साफ-सफाई के संस्कार विकसित करने का निर्देश दिया। प्रोटीन युक्त आहार, अंडा एवं सोयाबीन नियमित रूप से प्रदान करने के निर्देश दिए गए। विद्यालय के बेहतर रखरखाव एवं रिपेयर कार्यों के लिए संबंधित पदाधिकारियों को निर्देशित किया।

आयुष्मान आरोग्य मंदिर, मक्का बुढ़मू

इस केंद्र के निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने परिसर में रैंप लगाने का निर्देश दिया। उन्होंने योग्य लाभुकों के बीच कंबल वितरण किया तथा चिन्हित लाभुकों को शीघ्र ट्राई साइकिल उपलब्ध कराने के निर्देश दिए।

उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय, जोराकाथ, खलारी का निरीक्षण

उपायुक्त ने उत्क्रमित प्राथमिक विद्यालय, जोराकाथ (खलारी) का भ्रमण किया तथा बच्चों से बातचीत की। प्रधानाचार्य को सहायक आचार्य की संख्या बढ़ाने का निर्देश दिया।

झारखंड मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना से लाभान्वित जेएसएलपीएस दीदियों से संवाद

खलारी में जेएसएलपीएस की दीदियों ने अपनी सफलता की यात्रा साझा की। उपायुक्त ने मुख्यमंत्री मंईयां सम्मान योजना, फूलो झानो आशीर्वाद योजना आदि से लाभान्वित होने वाली दीदियों से बातचीत की। दीदी किरण मिंज ने केज कलर के माध्यम से मछली पालन, रूसिया गुड़िया ने बकरी पालन तथा शोषण देवी ने सुकर एवं बत्तख पालन से आर्थिक मजबूती हासिल करने की बात कही। उपायुक्त ने उनकी समस्याएं सुनीं तथा शराब भट्टी की सूचना अबुआ साथी नंबर पर देने तथा घरों में शौचालय उपयोग करने का निर्देश दिया।

पब्लिक लाइब्रेरी, बेड़ो का निरीक्षण

उपायुक्त ने डीएमएफटी फंड से निर्मित पब्लिक लाइब्रेरी, बेड़ो का निरीक्षण किया, जिसे जेसोवा JIASOWA (Jharkhand IAS Officers Wives Association) द्वारा संचालित किया जा रहा है। उन्होंने लाइब्रेरी की प्रशंसा की तथा जिले में अन्य स्थानों पर ऐसी लाइब्रेरी खोलने की पहल करने का निर्देश दिया।

उपायुक्त ने सभी निरीक्षणों के दौरान संबंधित पदाधिकारियों को समयबद्ध एवं गुणवत्तापूर्ण कार्य करने के निर्देश दिए तथा विकास कार्यों में तेजी लाने पर जोर दिया।

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श्री भूपेंद्र यादव ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की हिंदी सलाहकार समिति बैठक की दिल्ली में अध्यक्षता की

नई दिल्ली – पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय की पुनर्गठित हिंदी सलाहकार समिति की पहली बैठक आज दिनांक 20 जनवरी, 2026 को तीस्ता सभागार, इंदिरा पर्यावरण भवन, नई दिल्ली में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता माननीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेन्द्र यादव जी द्वारा की गई। बैठक में संसद के दोनों सदनों के माननीय सांसद श्री मिथलेश कुमार, श्रीमती माया नारोलिया और श्रीमती कमलेश जांगड़े और हिंदी के प्रतिष्ठित विद्वान शामिल हुए। बैठक में मंत्रालय के सचिव, अपर सचिव, अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के अलावा मंत्रालय के नियंत्रणाधीन कार्यालयों के प्रभारियों ने भी समिति की बैठक में भाग लिया।

समिति के सदस्यों को संबोधित करते हुए समिति के अध्यक्ष, माननीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री महोदय ने हिंदी के प्रचार-प्रसार के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त करते हुए इस बात पर ज़ोर दिया कि हिंदी भाषा एक बेहतर संपर्क का माध्यम है और सभी को विशेष तौर पर मंत्रालय के अधिकारियों और कर्मचारियों को सरल हिंदी का प्रयोग करना चाहिए, ताकि मंत्रालय की विषय वस्तु और मंत्रालय की योजनाओं को सरलता से आम जनता तक पहुंचाया जा सके तथा आम जनता इसे भली भांति समझ सके। भाषा की जटिलता के बारे में बोलते हुए उन्होने कहा है कि हमें सरल हिंदी का प्रयोग करना चाहिए। किसी व्यक्ति के हस्ताक्षर उनके व्यक्तित्व के परिचायक होते हैं। हमें अपने हस्ताक्षर हिंदी में ही करने चाहिए। उन्होंने कहा कि मंत्रालय के अधिकारी हिंदी में हस्ताक्षर से शुरुआत करके महीने में एक बार कम से कम एक टिप्पणी हिंदी में करें और धीरे-धीरे हिंदी में कार्य करने की आदत डालें।

समिति के माननीय सदस्यों ने पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय और इसके नियंत्रणाधीन कार्यालयों में हिंदी के कार्य को बढ़ावा देने के लिए अपने बहुमूल्य सुझाव दिए। बैठक के अंत में माननीय सचिव महोदय ने समिति के सदस्यों का धन्यवाद देते हुए समिति को यह आश्वासन दिया कि वे सदस्यों द्वारा दिए गए सुझावों पर यथोचित कार्रवाई करेंगे तथा मंत्रालय के कार्यों में हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।

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युवा शेफ भारत की पाक कला की विरासत के पथप्रदर्शक हैं: श्री गजेंद्र सिंह शेखावत

नई दिल्ली – पुणे स्थित सिम्बायोसिस स्कूल ऑफ कलिनरी आर्ट्स एंड न्यूट्रिशनल साइंसेज ने पहली बार आयोजित पीएचडीसीसीआई नेशनल यंग शेफ कॉम्पिटिशन (एनवाईसीसी) 2025-26 का खिताब जीता। इस कार्यक्रम का ग्रैंड फिनाले इंस्टीट्यूट ऑफ होटल मैनेजमेंट (आईएचएम), पूसा, नई दिल्ली में हुआ। महाराष्ट्र स्टेट आईएचएमसीटी, पुणे और आईएचएम पूसा, नई दिल्ली क्रमशः प्रथम और द्वितीय उपविजेता रहे। सर्वश्रेष्ठ भाजा व्यंजन का पुरस्कार शेफ्स किचन इंस्टीट्यूट ऑफ कलिनरी आर्ट्स एंड होटल मैनेजमेंट, कोल्हापुर को दिया गया।

पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने इस अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में अपने विचार व्‍यक्‍त करते हुए कहा कि भारतीय व्यंजन हमारी सबसे सशक्त सांस्कृतिक धरोहरों में से एक हैं और पर्यटन आधारित विकास का एक महत्वपूर्ण स्तंभ हैं। हमारी व्‍यंजन परंपराएं हमारे क्षेत्रों की विविधता, ज्ञान और जीवंत विरासत को दर्शाती हैं और हमारे युवा शैफ इस विरासत के वाहक हैं। उन्होंने कहा कि तेजी से बढ़ते शहरीकरण और बदलते उपभोग पैटर्न भारतीय शैफ को पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों पर आधारित मूल्यवर्धित, पौष्टिक रूप से संतुलित और तैयार भोजन समाधानों में नवाचार का नेतृत्व करने का एक अनूठा अवसर प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि एनवाईसीसी जैसे मंच उन शैफ को पोषित करते हैं जो परंपराओं में गहराई से जुड़े होने के साथ-साथ वैश्विक स्तर पर आत्मविश्वास से परिपूर्ण हैं और वैश्विक मंच पर भारत की पाक कला उत्कृष्टता का प्रतिनिधित्व करने में सक्षम हैं।

ग्रैंड फिनाले में देश के चारों क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले 10 प्रमुख आतिथ्य संस्थान-  एशियन क्रिश्चियन कलिनरी एंड एग्रीकल्चरल साइंस इंस्टीट्यूट, होसुर; शेफ्स किचन इंस्टीट्यूट ऑफ कलिनरी आर्ट्स एंड होटल मैनेजमेंट, कोल्हापुर; कलिनरी एकेडमी ऑफ इंडिया, हैदराबाद; आईएचएम भुवनेश्वर; आईएचएम कोलकाता; आईएचएम कुफरी; आईएचएम पूसा, नई दिल्ली; आईएचएम हैदराबाद; महाराष्ट्र स्टेट आईएचएमसीटी, पुणे; और सिम्बायोसिस स्कूल ऑफ कलिनरी आर्ट्स एंड न्यूट्रिशनल साइंसेज, पुणे एक साथ शामिल हुए। यह प्रतियोगिता के अखिल भारतीय स्वरूप को दर्शाता है।

फाइनल में पहुंचने वाले प्रतिभागियों का मूल्यांकन एक प्रतिष्ठित जूरी द्वारा किया गया, जिसमें हिमाचल प्रदेश पर्यटन विकास निगम के उप महाप्रबंधक शैफ नंद लाल शर्मा, पैशन 4 हॉस्पिटैलिटी के सलाहकार शैफ और सह-संस्थापक शैफ देबजीत मजूमदार, जीआईएचएमसीटी नागपुर में खाद्य उत्पादन के प्रोफेसर शैफ नितिन शेंडे, ट्रैवल फूड सर्विसेज के कार्यकारी शेफ श्रीनिवास वी और डॉ. एमजीआर एजुकेशनल एंड रिसर्च इंस्टीट्यूट के संयुक्त रजिस्ट्रार शैफ एम. प्रभु शामिल थे। इस जूरी की अध्यक्षता प्रमाणित वर्ल्डशेफ जज शैफ अनिल ग्रोवर ने की।

पीएचडीसीसीआई द्वारा भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय, इंडियन फेडरेशन ऑफ कलिनरी एसोसिएशंस (आईएफसीए) और टूरिज्म एंड हॉस्पिटैलिटी स्किल काउंसिल (टीएचएससी) के साथ साझेदारी में आयोजित एनवाईसीसी ने भारत की समृद्ध गैस्ट्रोनॉमिक विरासत का उत्‍सव मनाते हुए भारतीय व्यंजनों के लिए एक केंद्रित राष्ट्रीय मंच बनाने के उद्देश्य से छह महीने की राष्ट्रव्यापी पाक कला यात्रा के शानदार परिणाम को चिह्नित किया।

प्रतिनिधियों का स्वागत करते हुए, पीएचडीसीसीआई के पर्यटन एवं आतिथ्य समिति के अध्यक्ष श्री अनिल पाराशर ने कहा कि एनवाईसीसी की परिकल्पना महज एक प्रतियोगिता के रूप में नहीं, बल्कि युवा पेशेवरों के बीच भारतीय व्यंजनों के प्रति गौरव को पुनर्जीवित करने के लिए एक राष्ट्रीय स्‍तर की पहल के रूप में की गई थी। पूरे भारत के संस्थानों से मिली जबरदस्त प्रतिक्रिया इस पहल की प्रासंगिकता और समयबद्धता को प्रमाणित करती है।

एनवाईसीसी संचालन समिति में आईएफसीए के अध्यक्ष शैफ मनजीत गिल, प्रमाणित वर्ल्डशेफ जज शैफ अनिल ग्रोवर, आईएफसीए के संस्थापक सदस्य शैफ सुधीर सिबल, टीएचएससी के सीईओ श्री राजन बहादुर, आईएचएम पूसा के प्रिंसिपल प्रोफेसर कमल कांत पंत और ले मेरिडियन नई दिल्ली के खरीद निदेशक श्री अमरजीत सिंह आहूजा शामिल थे।

इस अवसर पर आईएफसीए के अध्यक्ष और एनवाईसीसी संचालन समिति के अध्यक्ष शैफ मनजीत गिल ने कहा कि भारतीय व्यंजन केवल व्यंजनों का संग्रह नहीं है; यह इतिहास, विज्ञान और सांस्कृतिक स्मृति से अंकुरित एक दर्शन है। एनवाईसीसी युवा शैफों को भारतीय पाक कला की जड़ों का सम्मान करने और ईमानदारी, कौशल और जिम्मेदारी के साथ उनकी पुनर्व्याख्या करने के लिए प्रोत्साहित करता है।

पीएचडीसीसीआई की पर्यटन एवं आतिथ्य समिति के सह-अध्यक्ष श्री राजन सहगल ने कहा कि एनवाईसीसी उद्योग, शिक्षा जगत और सरकार के बीच सहयोग की शक्ति का उत्कृष्ट उदाहरण है। मार्गदर्शन, राष्ट्रीय स्तर पर पहचान और निष्पक्ष मूल्यांकन के साथ, युवा प्रतिभाएं आत्मविश्वास से परिपूर्ण, रोजगार योग्य और भविष्य के लिए तैयार हो जाती हैं।

ग्रैंड फिनाले में एक विशेष लाइव कुकिंग प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें प्रतिभागियों को ढाई घंटे के भीतर एक पारंपरिक भोजन तैयार करने की चुनौती दी गई- जिसमें भाजा, मुख्य व्यंजन, सब्जी और दालें, दही, चावल या रोटी और एक मिठाई शामिल थीं और इसका मूल्यांकन तकनीक, प्रामाणिकता, नवीनता, स्थिरता और प्रस्तुति के आधार पर किया गया।

एनवाईसीसी की यात्रा और भविष्य की दृष्टि को प्रस्तुत करते हुए, पीएचडीसीसीआई की सहायक महासचिव सुश्री शालिनी एस. शर्मा ने कहा कि उद्घाटन समारोह से लेकर उत्तर, पूर्व, पश्चिम और दक्षिण भारत में चार क्षेत्रीय दौरों तक, एनवाईसीसी ने देशभर में 100 से अधिक आतिथ्य संस्थानों को शामिल किया है। इसे एक सतत राष्ट्रीय मंच के रूप में विकसित करने की योजना है। यह एक सुगठित मार्गदर्शन और उद्योग एकीकरण प्रदान करता है।

पीएचडीसीसीआई की पर्यटन एवं आतिथ्य समिति की सह-अध्यक्ष सुश्री मीना भाटिया ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत करते हुए, एनवाईसीसी को एक प्रमुख राष्ट्रीय पहल के रूप में संस्थागत रूप देने और आने वाले वर्षों में इसके प्रभाव का विस्तार करने के लिए पीएचडीसीसीआई की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

एनवाईसीसी में टाटा कंज्यूमर प्रोडक्ट्स, ली कुम की, नेस्ले प्रोफेशनल, क्रेमिका फूड इंडस्ट्रीज, वीनस इंडस्ट्रीज, हॉस्पिटैलिटी एंड किचन सॉल्यूशंस (एचएकेएस), हिल्टन, रोजेट होटल्स एंड रिसॉर्ट्स, वाघ बकरी टी ग्रुप, वेलबिल्ट इंडिया, मैक्केन फूड्स, शेफ्स अनलिमिटेड, ली मेरिडियन नई दिल्ली और परचेजिंग प्रोफेशनल फोरम इंडिया (पीपीएफआई) शामिल हैं।

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एपीडा ने असम से कृषि निर्यात को बढ़ावा देने के लिए जैविक उत्पाद सम्मेलन-सह-खरीदार-विक्रेता बैठक का आयोजन किया

नई दिल्ली –  भारत सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अधीन कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास प्राधिकरण (एपीडा) ने असम सरकार के सहयोग से गुवाहाटी में एक जैविक सम्मेलन-सह-खरीदार-विक्रेता बैठक का आयोजन किया। इस आयोजन का उद्देश्य कृषि-निर्यात संबंधों को सुदृढ़़ करना और असम के कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों के लिए बाजार तक पहुंच में सुधार करना था।
इस सम्मेलन में असम के 30 से अधिक निर्यातकों, 9 आयातकों और लगभग 50 किसान उत्पादक कंपनियों (एफपीसी) ने भाग लिया। क्रेता-विक्रेता बैठक ने व्यापारिक संबंधों के लिए एक संरचित मंच प्रदान किया, जिससे हितधारकों को व्यापार के अवसरों का पता लगाने और घरेलू और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के साथ दीर्घकालिक साझेदारी स्थापित करने में मदद मिली।

असम अपनी समृद्ध कृषि-जलवायु विविधता के साथ निर्यात की अपार संभावनाओं वाली कई वस्तुओं का उत्पादन करता है। असम जोहा चावल और विभिन्न गैर-बासमती विशेष चावल किस्मों के अतिरिक्‍त, केला, अनानास, संतरा, असम नींबू, जैविक अदरक, हल्दी, काली मिर्च जैसे फल और सब्जियां, साथ ही बागवानी और अन्य जैविक उत्पादों की एक विस्तृत श्रृंखला, वैश्विक कृषि बाजारों में राज्य की उपस्थिति का विस्तार करने के मजबूत अवसर प्रदान करती है।

सम्मेलन में जैविक उत्पादन के राष्ट्रीय कार्यक्रम (एनपीओपी) के आठवें संस्करण पर एक जागरूकता सत्र भी आयोजित किया गया, जिसमें नियामक ढांचा और लेबलिंग संबंधी आवश्यकताएं शामिल थीं। इस सत्र का उद्देश्य निर्यातकों, किसान उत्पादक संगठनों (एफपीओ), किसान उत्पादक संगठनों और उद्यमियों के बीच जागरूकता बढ़ाना था ताकि अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता और प्रमाणन मानकों का अनुपालन सुनिश्चित किया जा सके। क्रेता-विक्रेता सम्मेलन ने उत्पादकों, निर्यातकों और खरीदारों के बीच प्रत्‍यक्ष संवाद को सुगम बनाया, जिससे नए व्यापारिक साझेदारियों के विकास में सहायता मिली।

असम सरकार के कृषि, बागवानी और उत्पाद शुल्क मंत्री श्री अतुल बोरा ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि असम और पूर्वोत्तर में उच्च गुणवत्ता वाले, जैविक रूप से उगाए गए कृषि और बागवानी उत्पादों का समृद्ध भंडार है। इनमें जोहा चावल, विशेष चावल की किस्में, मसाले, फल और स्वदेशी उत्पाद शामिल हैं, जिनकी वैश्विक स्तर पर मजबूत मांग है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि एकत्रीकरण, प्रमाणीकरण, अवसंरचना और बाजार पहुंच में केंद्रित सहायता और एपीडा की निरंतर साझेदारी के साथ, राज्य क्षेत्रीय कृषि उत्पादों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी निर्यात में परिवर्तित करने के लिए प्रतिबद्ध है। साथ ही, यह किसानों के लिए स्थायी आजीविका सुनिश्चित कर रहा है।

असम सरकार की आयुक्त एवं सचिव-सह-कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती अरुणा राजोरिया, आईएएस ने कहा कि असम में जीआई टैग से प्रमाणित और जैविक रूप से उगाए गए अनूठे कृषि उत्पाद हैं जिनकी वैश्विक स्तर पर प्रबल मांग है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि एपेडा  के साथ घनिष्ठ सहयोग से एकत्रीकरण, प्रमाणीकरण और बाजार संबंधों को मजबूत करने से किसानों और उद्यमियों को टिकाऊ और व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य तरीके से अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच प्राप्त करने में मदद मिलेगी।

अपने संबोधन में, एपीडा के अध्यक्ष श्री अभिषेक देव ने एपीडा की निर्यात प्रोत्साहन कार्यकलापों में असम सरकार के समन्वय और सहयोग की सराहना की। उन्होंने संशोधित राष्ट्रीय खाद्य नीति (एनपीओपी) में किसान-हितैषी प्रावधानों और ऑस्ट्रेलिया एवं न्यूजीलैंड के साथ हाल ही में हस्ताक्षरित जैविक पारस्परिक मान्यता समझौतों के साथ-साथ ब्रिटेन, ओमान और ईएफटीए देशों के साथ हाल ही में अंतिम रूप दिए गए मुक्त व्यापार समझौतों के माध्यम से जैविक उत्पादों के लिए विस्तारित बाजार पहुंच द्वारा समर्थित राज्य से कृषि, बागवानी और जैविक निर्यात की अपार संभावनाओं पर प्रकाश डाला।

उद्घाटन सत्र में असम सरकार के कृषि, बागवानी और उत्पाद शुल्क मंत्री श्री अतुल बोरा उपस्थित थे और इसमें असम सरकार की आयुक्त एवं सचिव-सह-कृषि उत्पादन आयुक्त श्रीमती अरुणा राजोरिया, आईएएस; एपीडा के अध्यक्ष श्री अभिषेक देव और असम सरकार के कृषि निदेशक श्री उदय प्रवीण, आईएएस ने भाग लिया।

असम जैविक उत्पाद सम्मेलन-सह-खरीदार-विक्रेता बैठक, भारत के कृषि निर्यात विकास गाथा में क्षेत्रीय शक्तियों को एकीकृत करने के लिए एपीडा के निरंतर प्रयासों को दर्शाती है, साथ ही असम को उच्च मूल्य और टिकाऊ कृषि निर्यात में एक प्रमुख योगदानकर्ता के रूप में स्थापित करती है।

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भारतीय नौसेना का पहला प्रशिक्षण दस्ता सिंगापुर से रवाना

नई दिल्ली – भारतीय नौसेना का प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन (1टीएस) 18 जनवरी 2026 को सिंगापुर से रवाना हुआ, जो जारी प्रशिक्षण अभियान के तहत तीन दिवसीय बंदरगाह प्रवास की सफल समाप्ति का प्रतीक है। इस प्रवास के दौरान, पेशेवर आदान-प्रदान, प्रशिक्षण संबंधी परस्‍पर बातचीत, खेल प्रतियोगिताएं, सांस्कृतिक कार्यकलापों और सामाजिक कार्यक्रम सहित कई प्रकार की द्विपक्षीय गतिविधियां आयोजित की गईं।

पेशेवर मुलाकातों के तहत, प्रथम समुद्री सेवा बल (1टीएस) के वरिष्ठ अधिकारी कैप्टन तिजो के जोसेफ ने आईएनएस शार्दुल, आईएनएस सुजाता और आईसीजीएस सारथी के कमान अधिकारियों के साथ समुद्री प्रशिक्षण एवं सिद्धांत कमान (एमअीडीसी) के कार्यवाहक कमांडर कर्नल ताय चूंग हेर्न से शिष्टाचार भेंट की। चर्चा में भारत और सिंगापुर के बीच छह दशक पुरानी साझेदारी रेखांकित की गई, जिसमें सतत सैन्य सहयोग और साझा समुद्री सुरक्षा हितों पर विशेष बल दिया गया। एक भावपूर्ण श्रद्धांजलि के रूप में, क्रांजी युद्ध स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की गई, जहां प्रथम समुद्री सेवा बल के जहाजों के कमान अधिकारियों ने शहीदों को श्रद्धांजलि दी।

सिंगापुर में भारत की उच्चायुक्त डॉ. शिल्पक अंबुले और आईएनएस तिर तथा आईसीजीएस सारथी पर तैनात वरिष्ठ अधिकारी प्रथम टीएस ने संयुक्त रूप से एक स्वागत समारोह का आयोजन किया। इस कार्यक्रम में सिंगापुर गणराज्य की नौसेना के वरिष्ठ नेतृत्व, मिशन प्रमुखों, भारतीय प्रवासी समुदाय के सदस्यों, राजनयिकों और अन्य विशिष्ट अतिथियों ने भाग लिया। अपने संबोधन में मुख्य अतिथि कर्नल ताय चूंग हेर्न ने नियमित द्विपक्षीय अभ्यासों और बातचीत के माध्यम से पोषित भारतीय नौसेना और सिंगापुर गणराज्य की नौसेना के बीच मजबूत साझेदारी की सराहना की तथा रक्षा संबंधों को और सुदृढ़ करने के लिए सिंगापुर की प्रतिबद्धता की पुष्टि की।

इस यात्रा का एक अभिन्न अंग सांस्कृतिक गतिविधियां थीं, जिसमें भारतीय नौसेना बैंड ने आवर टैम्पाइन्स मॉल और जीआईआईएस सभागार में मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। खेल आयोजनों के अंतर्गत, भारतीय नौसेना और आरएसएन प्रशिक्षुओं के बीच एक मैत्रीपूर्ण डॉजबॉल मैच आयोजित किया गया।

पेशेवर प्रशिक्षण आदान-प्रदान में डीसी सिम्युलेटर पर प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन (1टीएस) के समुद्री प्रशिक्षुओं के लिए क्षति नियंत्रण (डीसी) प्रशिक्षण और आरएसएन संग्रहालय का दौरा शामिल था, जहां उन्हें रॉयल सिंगापुर नौसेना के इतिहास और विकास की व्यापक जानकारी प्रदान की गई। अंतर्राष्ट्रीय फ्यूजन केंद्र (आईएफसी) सिंगापुर के अंतर्राष्ट्रीय संपर्क अधिकारियों (आईएलओ), भारतीय उच्चायोग के कर्मचारियों, मेहमानों और परिवारों सहित आगंतुकों के लिए जहाज खुले थे। इससे उन्हें भविष्य के नौसैनिक नेतृत्व को आकार देने में प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन की भूमिका को देखने का अवसर प्राप्त हुआ।

स्क्वाड्रन ने परोपकारी कार्यकलापों में भी भाग लिया, जिसमें एक प्रतिनिधिमंडल ने श्री नारायण वृद्धाश्रम और नर्सरी के निवासियों के साथ परस्‍पर बातचीत करते हुए एक दोपहर बिताई, जो सामाजिक जिम्मेदारी और सामुदायिक जुड़ाव के प्रति भारतीय नौसेना की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन की सिंगापुर में तैनाती दोनों देशों के बीच गहरे संबंधों का उदाहरण है और यह महासागर (क्षेत्रीय सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक और समग्र उन्नति) की परिकल्पना के अनुरूप है। यह दौरा भारत की एक्ट ईस्ट पॉलिसी को और मजबूत करता है, दक्षिण एशिया से परे हिंद महासागर और दक्षिणपूर्व एशियाई क्षेत्र में इसकी समुद्री पहुंच का विस्तार करता है। साथ ही, मित्रता को बढ़ावा देने, प्रशिक्षण अनुभवों को बेहतर बनाने और एक सुरक्षित एवं सहयोगात्मक समुद्री वातावरण में योगदान देने के लिए भारतीय नौसेना की अटूट प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।

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केंद्रीय मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल के कार्यालय ने फर्जी पत्र पर अपना स्पष्टीकरण जारी किया

नई दिल्ली – केंद्रीय मंत्री श्री सर्बानंद सोनोवाल के कार्यालय ने स्पष्ट किया है कि मंत्री के फर्जी आधिकारिक लेटरहेड और हस्ताक्षर वाला एक जाली पत्र दुर्भावनापूर्ण इरादे से प्रसारित किया जा रहा है। कार्यालय की ओर से कहा गया कि पत्र और उसकी सामग्री पूरी तरह से फर्जी और मनगढ़ंत हैं।

इस प्रकार की भ्रामक सामग्री का प्रसार एक गंभीर अपराध है, जिसमें जालसाजी, फर्जी पहचान बनाना और सरकारी दस्तावेजों का दुरुपयोग शामिल है। इसका मुख्य उद्देश्य गलत सूचना फैलाना और संवैधानिक सत्ता की छवि को धूमिल करना है। इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई है और कानून प्रवर्तन एजेंसियों से अनुरोध किया गया है कि वे मामले की प्राथमिकता के आधार पर जांच करें और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करें।

आम जनता और मीडिया को सलाह दी जाती है कि वे इस तरह की मनगढ़ंत और अपुष्ट सामग्री पर भरोसा न करें और केवल आधिकारिक और अधिकृत स्रोतों से ही जानकारी की पुष्टि करें।

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उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आत्मकथा ‘पालनिवेलु गट्स’ के हिंदी संस्करण का विमोचन किया

नई दिल्ली – उपराष्ट्रपति, श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज जाने-माने सर्जन डॉ. सी. पलानीवेलु की आत्मकथा ‘पलानीवेलु गट्ज़’ के हिंदी संस्‍करण का विमोचन किया और इस किताब को साहस, लगन और मेडिसिन के क्षेत्र में नैतिक नवोन्‍मेष का एक प्रेरणादायक उदाहरण बताया।

 

इस मौके पर, उपराष्ट्रपति ने डॉ. पलानीवेलु के लेप्रोस्कोपिक और रोबोटिक सर्जरी में अग्रणी योगदान को उजागर किया, और कहा कि उनके काम ने भारत में सर्जिकल तरीकों को बदल दिया है और उन्हें दुनिया भर में पहचान दिलाई है। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में जब देश में मिनिमली इनवेसिव सर्जरी अभी शुरुआती दौर में थी, डॉ. पलानीवेलु ने मरीज़ों की देखभाल में नवोन्‍मेष को गले लगाकर असाधारण दूरदर्शिता और साहस दिखाया।

भारत में लेप्रोस्कोपिक सर्जरी के शुरुआती दिनों को याद करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि 1990 के दशक की शुरुआत में डॉ. पलानीवेलु उन शुरूआती लोगों में से थे जिन्होंने इसकी क्षमता को पहचाना, तब भी जब इस तकनीक पर संदेह किया जा रहा था। उन्होंने कहा कि डॉ. पलानीवेलु ने 1991 में कोयंबटूर में लेप्रोस्‍कोपिक सर्जरी शुरू की, और दक्षिण भारत में ऐसा पहला केन्‍द्र स्थापित किया।

किताब के शीर्षक, पालनिवेलु गट्स का ज़िक्र करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह आत्मकथा सिर्फ़ एक सफल सर्जन की कहानी नहीं है, बल्कि एक ऐसे युवा की यात्रा है जिसने साधारण शुरुआत से लेकर अनुशासन, कड़ी मेहनत और नैतिक विश्वास के ज़रिए मुश्किलों और असफलताओं का मुकाबला किया। उन्होंने आगे कहा कि जब तक व्यक्तियों के ईमानदार प्रयासों और अनुकरणीय योगदान को पहचाना और सराहा नहीं जाता, तब तक एक अच्छा समाज नहीं बनाया जा सकता।

भारत की विविधता पर विचार करते हुए, उपराष्ट्रपति ने टिप्पणी की कि इतनी विविधताओं के बावजूद, भारत एक रहा है और साझा मूल्यों और सामूहिक आकांक्षाओं से बंधा हुआ हमेशा एक रहेगा। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि हिंदी संस्करण का विमोचन विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह समाज के एक बड़े वर्ग, विशेष रूप से हिंदी पढ़ने वालों को, इस उल्लेखनीय जीवन यात्रा तक पहुँचने और उससे प्रेरणा लेने में सक्षम बनाएगा।

डॉ. पलानीवेलु के अपने शिक्षकों और गुरुओं के प्रति गहरे सम्मान की सराहना करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि उनके नाम पर पुरस्कार शुरू करने की उनकी प्रथा भारत की “गुरुओं” के प्रति श्रद्धा की सदियों पुरानी परंपरा को दर्शाती है और उत्कृष्टता की खोज में विनम्रता और कृतज्ञता के महत्व को रेखांकित करती है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि समाज हर व्यक्ति को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और समाज को वापस देना हर व्यक्ति का कर्तव्य है। दूरदराज के इलाकों में सर्जनों को प्रशिक्षित करने और लागत प्रभावी सर्जिकल तकनीकों को विकसित करने के डॉ. पलानीवेलु के प्रयासों की सराहना करते हुए, उन्होंने कहा कि इन पहलों ने सामाजिक-आर्थिक समूहों में उन्नत चिकित्सा देखभाल तक पहुंच का काफी विस्तार किया है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पलानीवेलु गट्स पीढ़ियों को बड़े सपने देखने, ईमानदारी से काम करने और निस्वार्थ भाव से समाज की सेवा करने के लिए प्रेरित करेगा।

इस कार्यक्रम में रेल राज्य मंत्री, श्री रवनीत सिंह; नेशनल मेडिकल कमीशन के चेयरमैन, डॉ. अभिजात सेठ; इंटर-यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर टीचर एजुकेशन के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के चेयरमैन, प्रो. डॉ. जे. एस. राजपूत; और जीईएम हॉस्पिटल ग्रुप के सीनियर प्रतिनिधियों सहित कई लोग शामिल हुए।

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भारत स्टील इस्पात के भविष्य पर वैश्विक संवाद को आकार देगा

नई दिल्ली – भारत स्टील 2026 की मेजबानी के लिए देश तैयार है। भारत स्टील इस्पात के भविष्य को नया आकार देने वाला एक वैश्विक मंच है। इसका उद्देश्य इस्पात के अनुसंधान एवं विकास, डिजिटलीकरण, नवाचार और उच्च कुशल इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी मानव संसाधनों तक पहुंच के माध्यम से निर्मित वैश्विक इस्पात उत्पादन के अगले युग को प्रदर्शित करने का है। नई दिल्ली में आयोजित होने वाले इस दो दिवसीय शिखर सम्मेलन का लक्ष्य नीति निर्माताओं, प्रौद्योगिकी विशेषज्ञों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों को एक साथ लाकर इस दशक की प्रमुख चुनौतियों का सामना करना: सुगम आपूर्ति श्रृंखलाओं का निर्माण और कम उत्सर्जन वाले इस्पात उत्पादन की ओर संक्रमण को गति देना है।

भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने जोर देते हुए कहा कि इस्पात ने आधुनिक अर्थव्यवस्थाओं में एक ढाँचे की तरह एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि चाहे गगनचुंबी इमारतें हों, जहाजरानी, ​​राजमार्ग, उच्च गति रेल, स्मार्ट शहर या औद्योगिक गलियारे हों, इस्पात हर सफलता की कहानी की शक्ति है। उन्होंने इंडिया स्टील 2025 के दौरान कहा, “भारत 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए प्रयासरत है, जिसमें इस्पात क्षेत्र इस मिशन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।” उन्होंने भारत के विश्व का दूसरा सबसे बड़ा इस्पात उत्पादक होने पर गर्व व्यक्त किया।

प्रधानमंत्री का यह दृष्टिकोण इस वर्ष के भारत इस्पात शिखर सम्मेलन की आधारशिला है, जिसका उद्देश्य आर्थिक अनिश्चितता, खंडित व्यापार प्रवाह, बढ़ते संरक्षणवादी शुल्क और शुद्ध शून्य लक्ष्यों को प्राप्त करने की तत्काल आवश्यकता के दौर में इस्पात क्षेत्र के लिए एक वैश्विक रूपरेखा तैयार करना है।

भारत का नेतृत्व, क्षमता और महत्वाकांक्षा दोनों में निहित है: एक तो यह कि भारत पहले से ही सबसे बड़े इस्पात उत्पादकों में से एक है, और दूसरा यह कि उसने वर्ष 2030 तक 300 मीट्रिक टन और वर्ष 2047 तक 500 मीट्रिक टन इस्पात उत्पादन क्षमता का राष्ट्रीय लक्ष्य निर्धारित किया है। भारत में इस्पात की मांग बुनियादी ढांचे, आवास, रेलवे, रक्षा और ऊर्जा क्षेत्रों में लगातार बढ़ रही है। लेकिन 500 मीट्रिक टन का लक्ष्य हासिल करने के लिए केवल अतिरिक्त क्षमता की आवश्यकता नहीं है; इसके लिए सुरक्षित कच्चे माल, पूर्वानुमानित नियम और नवाचार-आधारित आधुनिकीकरण की आवश्यकता है। घरेलू प्रसंस्करण को मजबूत करना, कुकिंग कोयले पर निर्भरता कम करना, बेहतर लॉजिस्टिक्स और कुशल अनुमोदन इस आपूर्ति-पक्ष के प्रयासों की रीढ़ हैं।

विशेष इस्पात के लिए सरकार की उत्पादन से संबद्ध प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना इस क्षेत्र को नया रूप दे रही है, जिससे भारत कमोडिटी-ग्रेड उत्पादन से हटकर उच्च-मूल्य वाले सटीक इंजीनियरिंग इस्पात की ओर अग्रसर हो रहा है, जो एयरोस्पेस, ऑटोमोटिव, रक्षा और उन्नत अवसंरचना के लिए आवश्यक है।

‘हरित’ इस्पात भारत की प्रतिस्पर्धा का आधार है। इस्पात मंत्रालय की वर्ष 2024 हरित इस्पात रूपरेखा में स्वच्छ ऊर्जा एकीकरण, हरित हाइड्रोजन प्रायोगिक परियोजनाओं, सीसीयूएस का उपयोग, स्क्रैप के विस्तारित उपयोग और प्रत्यक्ष इलेक्ट्रोलाइसिस जैसे उभरते मार्गों की दिशा में संक्रमण की रूपरेखा दी गई है।

डिजिटलीकरण; जिसमें आईओटी निगरानी, ​​रोबोटिक्स, स्वचालन और पूर्वानुमानित रखरखाव शामिल हैं; शिखर सम्मेलन का एक प्रमुख विषय होगा। एआई-आधारित अनुकूलन से दक्षता में वृद्धि, अपशिष्ट में कमी और गुणवत्ता में सुधार का वादा किया गया है। इस तकनीकी प्रोत्साहन को विस्तारित अनुसंधान एवं विकास, गहन साझेदारी, स्पष्ट प्रौद्योगिकी हस्तांतरण मार्गों और उभरती प्रक्रियाओं के लिए प्रायोगिक-स्तरीय परीक्षणों द्वारा सुदृढ़ किया जाएगा।

वैश्विक व्यापार में कार्बन लेखांकन मानदंडों की ओर बढ़ते कदम के साथ, भारत का लक्ष्य कम कार्बन उत्सर्जन वाले उच्च गुणवत्ता वाले इस्पात के प्रमुख निर्यातक के रूप में अपनी स्थिति मजबूत करना है। राष्ट्रीय इस्पात रणनीति में हाइड्रोजन आधारित डीआरआई, सीसीयूएस और इलेक्ट्रोलाइसिस प्रौद्योगिकियों में संयुक्त उद्यमों को प्राथमिकता दी गई है, जिन्हें लक्षित निवेश प्रोत्साहनों द्वारा समर्थित किया गया है।

इस प्रकार, भारत स्टील शिखर सम्मेलन एक महत्वपूर्ण क्षण है; एक ऐसा क्षण जिसमें भारत एक ऐसे इस्पात क्षेत्र के लिए वैश्विक रूपरेखा तैयार करना चाहता है जो सुरक्षित, प्रतिस्पर्धी, जलवायु के अनुकूल और भविष्य के लिए तैयार हो। यह दिशा सुनिश्चित करेगी कि इस्पात न केवल भारत के बुनियादी ढांचे की रीढ़ बना रहे, बल्कि टिकाऊ प्रगति और वैश्विक औद्योगिक नेतृत्व का आधार भी हो।

शिखर सम्मेलन में इस्पात मूल्य श्रृंखला के विभिन्न पहलुओं का प्रतिनिधित्व करने वाले 700 से अधिक वैश्विक प्रतिनिधि भाग लेंगे। साझेदार देशों का मंडप, साझेदार राज्यों का मंडप, सार्वजनिक क्षेत्र के “महारत्न”, इस्पात और संबद्ध क्षेत्र के अग्रणी निजी क्षेत्र के उद्यम, स्केल-अप और स्टार्ट-अप, नवप्रवर्तक और निवेशक, आत्मनिर्भरता, नवाचार, तकनीकी रूप से उन्नत और आर्थिक रूप से सुगम देश पर जोर देकर प्रधानमंत्री के विकसित भारत 2047 के दृष्टिकोण को मजबूत करने के शिखर सम्मेलन के व्यापक उद्देश्य के महत्व को बढ़ाएंगे।

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‘मेक इन इंडिया’ बुलेट ट्रेन परियोजना को ताकत दे रहा है

कॉरिडोर में ऊपरी विद्युतीकरण मस्तूल (ओएचई) के स्थापना कार्य के साथ मुंबई–अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना में लगातार प्रगति देखी जा रही है। यह विकास भारत की पहली उच्च गति रेल प्रणाली के लिए विद्युत कर्षण सक्षम बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है और ‘मेक इन इंडिया’ पहल के तहत जमीन पर हो रहे निरंतर क्रियान्वयन को प्रतिबिंबित करता है। ऐसा करके यह घरेलू निर्माण क्षमताओं को मजबूत कर रहा है और वैश्विक रूप से प्रमाणित उच्च गति रेल तकनीक को अपना रहा है।

 

ओएचई मस्तूलों की स्थापना संरेखण के प्रमुख खंडों, जिसमें वायडक्ट खंड शामिल हैं, में चल रही है ताकि उच्च गति वाली ट्रेनों के सुरक्षित, सुचारू और प्रभावी संचालन को सुनिश्चित किया जा सके। ये मस्तूल  कर्षण अवसंरचना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जो कॉरिडोर पर चलने वाली बुलेट ट्रेनों को विश्वसनीय बिजली आपूर्ति प्रदान करने के लिए आवश्यक हैं।

ओएचई मस्तूलों को भू-स्तर से काफी ऊंचाई पर बने वायाडक्ट्स पर स्थापित किया जा रहा है। कुल मिलाकर, 9.5 से 14.5 मीटर तक की ऊंचाई वाले 20,000 से अधिक मस्तूलों को कॉरिडोर के साथ स्थापित किया जाएगा। ये मस्तूल पूरे 2×25 केवी ऊपरी कर्षण विद्युत प्रणाली का समर्थन करेंगे, जिसमें ऊपरी तार, भू-संपर्क व्यवस्था (अर्थिंग व्यवस्था), फिटिंग और बुलेट ट्रेन संचालन के लिए आवश्यक अन्य सहायक उपकरण शामिल हैं।

निर्बाध कर्षण विद्युत सुनिश्चित करने के लिए, मुंबई–अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के साथ कर्षण उपस्टेशन (टीएसएस) और वितरण उपस्टेशन (डीएसएस ) का एक नेटवर्क विकसित किया जा रहा है।

ओएचई मस्तूल ऊर्ध्वाधर इस्पात संरचनाएं हैं, जो रेलवे लाइन के साथ स्थापित की जाती हैं और ऊपरी विद्युत तारों को सहारा देती हैं। ये तारों की सही ऊंचाई, संरेखण और तन्यता बनाए रखती हैं, जिससे विद्युत चालित रेलों को निरंतर और सुरक्षित विद्युत आपूर्ति मिलती है।

एक बार पूरा होने के बाद, मुंबई–अहमदाबाद बुलेट ट्रेन दो शहरों के बीच यात्रा को तेज और सुविधाजनक बना देगा तथा कॉरिडोर के साथ परिवहन संपर्क में सुधार करेगा। इस परियोजना से रोजगार सृजन और मजबूत विनिर्माण के जरिये यात्रियों, स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं और भारतीय उद्योग को लाभ मिलने की उम्मीद है। यह देश में उन्नत रेलवे तकनीक को अपनाने और विश्व-स्तरीय रेल अवसंरचना के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम को भी रेखांकित करता है।

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