ओएचई मस्तूलों की स्थापना संरेखण के प्रमुख खंडों, जिसमें वायडक्ट खंड शामिल हैं, में चल रही है ताकि उच्च गति वाली ट्रेनों के सुरक्षित, सुचारू और प्रभावी संचालन को सुनिश्चित किया जा सके। ये मस्तूल कर्षण अवसंरचना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, जो कॉरिडोर पर चलने वाली बुलेट ट्रेनों को विश्वसनीय बिजली आपूर्ति प्रदान करने के लिए आवश्यक हैं।
ओएचई मस्तूलों को भू-स्तर से काफी ऊंचाई पर बने वायाडक्ट्स पर स्थापित किया जा रहा है। कुल मिलाकर, 9.5 से 14.5 मीटर तक की ऊंचाई वाले 20,000 से अधिक मस्तूलों को कॉरिडोर के साथ स्थापित किया जाएगा। ये मस्तूल पूरे 2×25 केवी ऊपरी कर्षण विद्युत प्रणाली का समर्थन करेंगे, जिसमें ऊपरी तार, भू-संपर्क व्यवस्था (अर्थिंग व्यवस्था), फिटिंग और बुलेट ट्रेन संचालन के लिए आवश्यक अन्य सहायक उपकरण शामिल हैं।
निर्बाध कर्षण विद्युत सुनिश्चित करने के लिए, मुंबई–अहमदाबाद हाई स्पीड रेल कॉरिडोर के साथ कर्षण उपस्टेशन (टीएसएस) और वितरण उपस्टेशन (डीएसएस ) का एक नेटवर्क विकसित किया जा रहा है।
ओएचई मस्तूल ऊर्ध्वाधर इस्पात संरचनाएं हैं, जो रेलवे लाइन के साथ स्थापित की जाती हैं और ऊपरी विद्युत तारों को सहारा देती हैं। ये तारों की सही ऊंचाई, संरेखण और तन्यता बनाए रखती हैं, जिससे विद्युत चालित रेलों को निरंतर और सुरक्षित विद्युत आपूर्ति मिलती है।
एक बार पूरा होने के बाद, मुंबई–अहमदाबाद बुलेट ट्रेन दो शहरों के बीच यात्रा को तेज और सुविधाजनक बना देगा तथा कॉरिडोर के साथ परिवहन संपर्क में सुधार करेगा। इस परियोजना से रोजगार सृजन और मजबूत विनिर्माण के जरिये यात्रियों, स्थानीय अर्थव्यवस्थाओं और भारतीय उद्योग को लाभ मिलने की उम्मीद है। यह देश में उन्नत रेलवे तकनीक को अपनाने और विश्व-स्तरीय रेल अवसंरचना के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम को भी रेखांकित करता है।
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