प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने स्वास्थ्य और व्यायाम के महत्व का उल्‍लेख करते हुए संस्कृत सुभाषितम साझा किया

रांची,17.03.2026 – प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने कहा है कि अच्‍छा स्वास्‍थ्‍य ही जीवन का सबसे बड़ा धन है और इसे बनाए रखने में व्यायाम की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने सभी देशवासियों के स्वस्थ और सुखी जीवन की कामना की है।

प्रधानमंत्री ने संस्कृत में एक सुभाषितम साझा किया।

“व्यायामाल्लभते स्वास्थ्यं दीर्घायुष्यं बलं सुखम्। आरोग्यं परमं भाग्यं स्वास्थ्यं सर्वार्थसाधनम्॥”

सुभाषितम् में कहा गया है कि व्यायाम से उत्तम स्वास्थ्य, दीर्घायु, शक्ति और सुख प्राप्त होता है। उत्तम स्वास्थ्य सबसे बड़ा वरदान है। स्वास्थ्य ही सब कुछ का आधार है।

प्रधानमंत्री ने ‘एक्‍स’ पर एक पोस्‍ट में लिखा;

“अच्छा स्वास्थ्य ही जीवन की सबसे बड़ी संपत्ति है, जिसमें व्यायाम की भूमिका बहुत महत्वपूर्ण है। मैं सभी देशवासियों के स्वस्थ और सुखी जीवन की कामना करता हूं।

व्यायामाल्लभते स्वास्थ्यं दीर्घायुष्यं बलं सुखम्।

आरोग्यं परमं भाग्यं स्वास्थ्यं सर्वार्थसाधनम्॥”

 

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नि:शुल्क स्वास्थ्य जागरूकता एवं एक दिवसीय एक्युप्रेशर चिकित्सा शिविर का आयोजन

रांची,16.03.2026 – फेडरेशन ऑफ झारखंड चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज एवं डॉ. लालचंद बगड़िया एक्युप्रेशर संस्थान, रांची के संयुक्त तत्वावधान में चैंबर भवन में नि:शुल्क स्वास्थ्य जागरूकता एवं एक दिवसीय एक्युप्रेशर चिकित्सा शिविर का आयोजन किया गया। यह शिविर सुबह 10 बजे से दोपहर 1 बजे तक आयोजित हुआ, जिसमें विभिन्न रोगों से ग्रसित लगभग 30 लोगों को एक्युप्रेशर चिकित्सा के माध्यम से उपचार एवं परामर्श प्रदान किया गया। शिविर का शुभारंभ चैंबर के उपाध्यक्ष प्रवीण लोहिया, महासचिव रोहित अग्रवाल तथा संस्थान के अध्यक्ष रमा शंकर बगड़िया द्वारा गुरुजी के चित्र पर माल्यार्पण एवं दीप प्रज्वलित कर किया गया। इस अवसर पर महासचिव रोहित अग्रवाल ने संस्थान के थैरेपिस्टों एवं उपस्थित सदस्यों का स्वागत करते हुए कहा कि चैंबर व्यवसायियों एवं उद्यमियों के व्यवसायिक विकास के साथ-साथ उनके स्वस्थ जीवन को भी उतना ही महत्वपूर्ण मानता है। इसी उद्देश्य से स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन किया जाता है।

उपाध्यक्ष प्रवीण लोहिया ने कहा कि ब्रह्मलीन गुरुदेव स्व. लालचंद बगड़िया ने वर्ष 1989 में रांची के बड़ा तालाब के पास लक्ष्मीनारायण मंदिर के ऊपर एक्युप्रेशर चिकित्सा केंद्र की शुरुआत की थी। एक्युप्रेशर के माध्यम से शरीर के हाथ-पैर के विभिन्न बिंदुओं पर दबाव देकर रक्त संचार को संतुलित किया जाता है, जिससे कई प्रकार के रोगों में लाभ मिलता है। उन्होंने कहा कि आज व्यवसायिक तनाव के कारण कई लोग अपने स्वास्थ्य पर पर्याप्त ध्यान नहीं दे पाते, ऐसे में एक्युप्रेशर जैसी प्राकृतिक पद्धति काफी लाभकारी साबित हो रही है। संस्थान के अध्यक्ष रमा शंकर बगड़िया ने कहा कि चैंबर के सहयोग से एक्युप्रेशर चिकित्सा पद्धति के प्रचार-प्रसार को और बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। सुश्री खुशी गुप्ता ने स्वास्थ्य जागरूकता विषय पर प्रकाश डालते हुए कहा कि आधुनिक जीवनशैली, फास्ट फूड और शारीरिक श्रम की कमी के कारण लोग विभिन्न बीमारियों से ग्रसित हो रहे हैं। हमें अपनी जीवनशैली में सुधार करते हुए योग, ध्यान, व्यायाम और संतुलित आहार को अपनाना चाहिए।

डॉ. संतोष झा ने एक्युप्रेशर के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह पूर्णत: भारतीय चिकित्सा पद्धति है, जिसका उल्लेख अथर्ववेद में मर्म चिकित्सा के रूप में मिलता है। इसमें शरीर के विभिन्न बिंदुओं पर दबाव देकर रोगों से राहत दिलाई जाती है और यह पद्धति आज काफी लोकप्रिय हो चुकी है। शिविर में मुख्य रूप से शुगर, बीपी, जोड़ों का दर्द, कमर दर्द, घुटने का दर्द तथा माइग्रेन से ग्रसित रोगियों का उपचार किया गया। शिविर को सफल बनाने में संस्थान के लगभग 30 थैरेपिस्टों ने अपना सहयोग दिया। कार्यक्रम का संचालन प्रदीप चौधरी ने किया तथा अंत में राष्ट्रगान के साथ शिविर का समापन हुआ।

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झारखंड विधानसभा परिसर में रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया

रांची,16.03.2026 – आज झारखंड विधानसभा परिसर में रक्तदान शिविर का आयोजन किया गया। यह एक बेहतरीन पहल है, जिससे जनता को यह एहसास हुआ कि हमारी सरकार संवेदनशील है और जरूरत पड़ने पर लोगों की जान बचाने के लिए रक्तदान करने से भी पीछे नहीं हटेगी।

इस अवसर पर राज्य के लोकप्रिय मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन जी Hemant Soren , झारखंड विधानसभा के माननीय अध्यक्ष रवींद्र नाथ महतो जी, गांडेय की लोकप्रिय विधायक श्रीमती Kalpana Murmu Soren कल्पना सोरेन जी सहित कई माननीय मंत्रियों एवं जनप्रतिनिधियों ने रक्तदान कर समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाई।

निश्चित तौर पर रक्तदान महादान है—आपकी एक बूंद रक्त किसी जरूरतमंद की जान बचा सकती है।

स्वास्थ्य मंत्री होने के नाते मैं इस पुनीत पहल के लिए माननीय मुख्यमंत्री जी, माननीय स्पीकर साहब एवं सभी जनप्रतिनिधियों का हृदय से आभार व्यक्त करता हूं। रक्त संग्रहण की दिशा में यह एक अत्यंत सराहनीय और प्रेरणादायक कदम है।

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बिहार राज्यसभा चुनाव में एनडीए का क्लीन स्वीप, सभी पांच सीटों पर दर्ज की जीत

पटना,16.03.2026 – बिहार में राज्यसभा की पांच सीटों के लिए हुई वोटिंग का रिजल्ट आ गया है।इस चुनाव में एनडीए ने सभी पांच सीटों पर जीत दर्ज कर ली है।

एनडीए को कुल 202 वोट मिले हैं, जबकि महागठबंधन को सिर्फ 37 वोट ही मिल पाए।वोटिंग के दौरान महागठबंधन को एक झटका लगा।

उसके चार विधायक मतदान के लिए विधानसभा नहीं पहुंचे।इनमें तीन विधायक कांग्रेस के और एक विधायक राजद के थे।

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सरहुल पर्व को शांतिपूर्ण एवं भव्य रूप से मनाने को लेकर महत्वपूर्ण बैठक

उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में बैठक

पर्व के भव्य आयोजन, ट्रैफिक, सुरक्षा व साफ-सफाई पर विशेष जोर

बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना जिला प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता-उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री

प्रशासन और सरना समितियों के बीच समन्वय एवं संवाद बनाए रखना अत्यंत आवश्यक-उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री

रांची,16.03.2026 – प्रकृति पर्व सरहुल के सफल एवं शांतिपूर्ण आयोजन को लेकर उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में समाहरणालय स्थित उपायुक्त सभागार में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में केंद्रीय सरना समिति के साथ-साथ विभिन्न आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया और सरहुल पर्व के आयोजन को लेकर अपने सुझाव जिला प्रशासन के समक्ष रखे।

बैठक में वरीय पुलिस अधीक्षक रांची श्री राकेश रंजन, पुलिस अधीक्षक (यातायात) श्री राकेश सिंह, अपर जिला दण्डाधिकारी (विधि-व्यवस्था) श्री राजेश्वरनाथ आलोक, अनुमण्डल पदाधिकारी सदर श्री कुमार रजत, परियोजना निदेशक आईटीडीए श्री संजय भगत, जिला परिवहन पदाधिकारी श्री अखिलेश कुमार, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी श्रीमती उर्वशी पांडेय, नगर निगम सहित अन्य संबंधित विभागों के पदाधिकारी उपस्थित थे।

बैठक के दौरान केंद्रीय सरना समिति एवं अन्य आदिवासी संगठनों के प्रतिनिधियों ने सरहुल पर्व के दौरान ट्रैफिक व्यवस्था, सुरक्षा, साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था तथा शोभायात्रा के सुचारु संचालन को लेकर कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। बैठक में निर्णय लिया गया कि सरहुल पर्व को पूरे उत्साह, अनुशासन और सौहार्दपूर्ण वातावरण में मनाया जाएगा।

बैठक में नगर निगम द्वारा प्रमुख सरना स्थलों एवं शोभायात्रा मार्गों पर साफ-सफाई और लाइट की बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित करने की बात कही गई। साथ ही प्रमुख स्थानों पर शोभायात्रा में शामिल श्रद्धालुओं को उनके घर तक पहुंचाने के लिए नगर निगम की ओर से बस सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो।

बिजली विभाग के अधिकारियों ने सभी सरना समितियों से अनुरोध किया कि माननीय उच्च न्यायालय के निर्देशों के आलोक में झंडा एवं झांकी की ऊंचाई 6 मीटर से अधिक न रखी जाए, जिससे किसी भी प्रकार की दुर्घटना की संभावना से बचा जा सके। साथ ही सरना समितियों द्वारा ध्वनि प्रदूषण को लेकर नियम का अनुपालन सुनिश्चित करने की बात कही गयी।

बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना जिला प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता – उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री

इस अवसर पर उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा कि सरहुल पर्व के दौरान श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना जिला प्रशासन की सर्वाेच्च प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि प्रशासन और सरना समितियों के बीच समन्वय एवं संवाद बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने सरना समिति के सदस्यों से प्रशासन द्वारा बनाए गए व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ने का आग्रह किया, ताकि सूचना का त्वरित आदान-प्रदान हो सके।

उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा कि माननीय मुख्यमंत्री की सकारात्मक सोच के साथ हम “टीम रांची” के रूप में मिलकर आगे बढ़ेंगे और सरहुल पर्व को सफल बनाएंगे। उन्होंने आदिवासी संस्कृति और परंपरा के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि पिछले वर्ष राज्य स्थापना दिवस के अवसर पर आयोजित “दुनिया की जतरा” कार्यक्रम माननीय मुख्यमंत्री की पहल से ही संभव हो पाया, जिसमें पूरे राज्य से आदिवासी कलाकारों ने भाग लिया और दुनिया ने आदिवासी अस्मिता और संस्कृति की झलक देखी।

उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने यह भी कहा कि प्रशासन द्वारा सुरक्षा के दृष्टिकोण से कुछ व्यवस्थाएं और नियम बनाए जाते हैं, जिनका उद्देश्य सभी की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि प्रशासन और समाज के सहयोग से सरहुल पर्व पूरे उल्लास और गरिमा के साथ मनाया जाएगा।

वरीय पुलिस अधीक्षक श्री राकेश रंजन ने कहा कि पर्व के दौरान सुरक्षा की पर्याप्त व्यवस्था की जायेगी। सभी के सहयोग से सरहुल पर्व का सफल एवं शांतिपूर्ण आयोजन होगा।

बैठक में सरहुल पर्व के दौरान सुरक्षा व्यवस्था, ट्रैफिक प्रबंधन, साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था, पेयजल, स्वास्थ्य सुविधा तथा शोभायात्रा के सुचारु संचालन को लेकर विस्तृत चर्चा की गई और संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए गए।

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राजस्वो आसूचना निदेशालय (डीआरआई) ने दिल्ली और कोलकाता में सक्रिय सोने की संगठित तस्करी और अवैध रूप से सोना पिघलाने वाले गिरोह पर कड़ी कार्यवाही की

14.13 करोड़ रुपये मूल्य का सोना, चांदी और नकदी जब्त की गई; छह लोगों को गिरफ्तार किया गया

नई दिल्ली – राजस्‍व आसूचना निदेशालय (डीआरआई) ने विदेशी मूल के सोने की भारत में तस्करी, रेल मार्ग से परिवहन, अवैध संयंत्रों में पिघलाने और उसमें मिलावट करने तथा घरेलू बाजार में गुपचुप तरीके से बिक्री करने वाले एक संगठित गिरोह का भंडाफोड़ किया है। इस अभियान में 14.13 करोड़ रुपये से अधिक मूल्य का सोना, चांदी और भारतीय मुद्रा जब्त की गई और छह लोगों को गिरफ्तार किया गया।

सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के प्रावधानों के अंतर्गत कुल मिलाकर, 13.41 करोड़ रुपये मूल्य का 8286.81 ग्राम सोना, 19.67 लाख रुपये मूल्य का 7350.4 ग्राम चांदी और 51,74,100 रुपये की भारतीय मुद्रा जब्त की गई।

विशिष्ट खुफिया जानकारी के आधार पर, डीआरआई के अधिकारियों ने कोलकाता से ट्रेन द्वारा नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर आए एक यात्री को रोका जिसके पास विदेशी मुहर वाला सोना था जिसे स्टेशन के बाहर एक प्राप्तकर्ता को सौंपना था। यात्री और प्राप्तकर्ता दोनों को गिरफ्तार कर लिया गया।

प्राप्त जानकारियों के आधार पर दिल्ली में तलाशी अभियान चलाया गया, जिसके परिणामस्वरूप दिल्ली में सोने की पिघलाने की एक अवैध स्‍थान का पता चला। इस स्‍थान का उपयोग विदेशी मूल के सोने को स्थानीय बाजार में बेचने से पहले उसमें मिलावट करने के लिए किया जाता था। परिसर से अतिरिक्त सोना, चांदी और भारतीय मुद्रा बरामद की गई और स्‍थान का संचालन करने वाले प्रबंधक को भी गिरफ्तार कर लिया गया।

आगे की जांच कोलकाता तक पहुंची, जहां गिरोह के सरगना का पता एक अन्य अवैध सोना पिघलाने वाली इकाई में चला। वहां उसके पास और भी मिलावटी सोना था। उसे सोना ले जाने वाले दो व्‍यक्तियों के साथ गिरफ्तार किया गया। उन्होंने स्वीकार किया कि भारत में तस्करी करके लाया गया विदेशी चिह्नों वाला सोना उन्होंने प्राप्त किया था, उस पर से पहचान चिह्न हटाने के लिए उसे पिघलाया था, और आगे देने के लिए रेल मार्ग से दिल्ली ले जाया जाना था।

सोने की तस्करी, परिवहन, पिघलाने और निपटान में शामिल सभी छह व्यक्तियों को गिरफ्तार कर सक्षम न्यायालय के समक्ष पेश किया गया है। आगे की जांच जारी है।

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केंद्रीय संचार मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने मध्य प्रदेश के गुना जिले के उमरी गांव में “समृद्ध ग्राम फिजिटल सेवाएं” पहल के अंतर्गत समृद्धि केंद्र का उद्घाटन किया

नई दिल्ली – केंद्रीय संचार मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने दूरसंचार विभाग की “समृद्ध ग्राम फिजिटल सेवाएं” पायलट पहल के अंतर्गत मध्य प्रदेश के गुना जिले के उमरी गांव में एकीकृत फिजिटल (भौतिक + डिजिटल) सेवा केंद्र समृद्धि केंद्र का उद्घाटन किया।

यह पहल भारतनेट के तहत निर्मित उच्च गति ब्रॉडबैंड अवसंरचना का उपयोग करते हुए डिजिटल कनेक्टिविटी को ग्रामीण क्षेत्रों में नागरिक-केंद्रित सेवाओं की एकीकृत आपूर्ति के मंच में परिवर्तित करने का प्रयास करती है।

समृद्धि केंद्र की परिकल्पना एक सिंगल-विंडो ग्रामीण सेवा केंद्र के रूप में की गई है, जहाँ स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास, कृषि, वित्तीय सेवाएं, ई-गवर्नेंस सहायता, उद्यमिता प्रोत्साहन तथा डिजिटल कनेक्टिविटी सेवाएं एक ही स्थान पर उपलब्ध होंगी।

कनेक्टिविटी से ग्रामीण सशक्तिकरण की ओर

इस अवसर पर श्री सिंधिया ने कहा, “गुना के उमरी में समृद्ध ग्राम पहल के शुभारंभ के साथ हम दुनिया को उमरी तक ला रहे हैं। शिक्षा और कृषि से लेकर स्वास्थ्य तथा सरकारी सेवाओं तक, प्रौद्योगिकी हमारे नागरिकों के हाथों में नए अवसर सीधे पहुंचा रही है।”

पहल के लाभों का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा, “डिजिटल उपकरणों के माध्यम से किसानों को मिट्टी की नमी, पोषक तत्वों तथा फसल के स्वास्थ्य से संबंधित जानकारी प्राप्त होगी, जिससे कृषि अधिक स्मार्ट और उत्पादक बनेगी। छात्रों को आधुनिक शिक्षण संसाधनों तक पहुंच मिलेगी। उमरी के नागरिकों को यहीं पर जांच सुविधाएं तथा दिल्ली और अन्य राज्यों के चिकित्सकों से टेली-परामर्श के माध्यम से त्वरित स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध होंगी। रक्त परीक्षण रिपोर्ट 30 मिनट से भी कम समय में प्राप्त की जा सकेगी। प्रमाणपत्रों से लेकर ई-बैंकिंग तक आवश्यक सरकारी सेवाएं अब समृद्ध ग्राम के भीतर ही उपलब्ध होंगी। यह वास्तव में ‘भविष्य का कार्यक्रम’ है, जो यह सुनिश्चित करता है कि विकास की गति हर गांव और हर नागरिक तक पहुंचे।”

मंत्री श्री सिंधिया ने कहा कि भारतनेट के माध्यम से देश में विश्व की सबसे बड़ी ग्रामीण ब्रॉडबैंड अवसंरचनाओं में से एक का निर्माण हुआ है। भारत के डिजिटल परिवर्तन के अगले चरण में इस कनेक्टिविटी का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि गांवों में जीवन की गुणवत्ता में सुधार हो सके।

माननीय मंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि एकीकृत फिजिटल सेवा केंद्र ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, वित्तीय तथा ई-गवर्नेंस सेवाएँ उपलब्ध कराने के लिए माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी की परिकल्पना को साकार करने में सहायक होगा। उन्होंने आगे कहा कि समृद्ध ग्राम पहल केवल कनेक्टिविटी उपलब्ध कराने तक सीमित न रहकर, ग्रामीण भारत में एकीकृत डिजिटल सेवा वितरण तंत्र विकसित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतीक है।

श्री सिंधिया ने यह भी कहा कि इस प्रकार के फिजिटल सेवा केंद्र डिजिटल समावेशनग्रामीण उद्यमिता को बढ़ावा देनेसरकारी सेवाओं तक बेहतर पहुंच सुनिश्चित करनेअंतिम छोर तक सेवा वितरण को सुदृढ़ करने तथा स्थानीय रोजगार सृजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

समृद्धि केंद्र में उपलब्ध सेवाएं

उमरी (गुना) स्थित समृद्धि केंद्र में विभिन्न प्रकार की एकीकृत सेवाएं उपलब्ध कराई जाएंगी, जिनमें टेलीमेडिसिन परामर्श, बुनियादी स्वास्थ्य जांच के लिए हेल्थ एटीएम तथा प्रधानमंत्री भारतीय जनऔषधि परियोजना के माध्यम से किफायती दवाओं की उपलब्धता शामिल है।

 

 

केंद्र में शिक्षा एवं कौशल विकास के लिए स्मार्ट क्लासरूम अवसंरचनाडिजिटल लर्निंग सुविधाएंराष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान द्वारा समर्थित डिजिटल प्रशिक्षण कार्यक्रम तथा ग्रामीण युवाओं के लिए कौशल विकास कार्यक्रम उपलब्ध होंगे।

कृषि संबंधी सेवाओं के अंतर्गत मिट्टी परीक्षण सहायताकृषि परामर्श सेवाएंआधुनिक खेती की तकनीकों तक पहुंच तथा ड्रोन आधारित कृषि सेवाएं प्रदान की जाएंगी, जिससे क्षेत्र के किसानों को लाभ मिलेगा।

केंद्र के माध्यम से गवर्नेंस सेवाओं तक सहायक पहुंच भी उपलब्ध होगी, जिसमें सरकारी योजनाओं की जानकारी, प्रमाणपत्र जारी करना, डिजिटल दस्तावेजीकरण तथा ऑनलाइन नागरिक सेवाओं में सहायता शामिल है।

वित्तीय और डिजिटल सेवाओं के अंतर्गत बैंकिंग एवं डिजिटल भुगतान सेवाएंवित्तीय साक्षरता सहायता तथा कॉमर्स प्लेटफार्मों तक सहायक पहुंच प्रदान की जाएगी।

कनेक्टिविटी सेवाएं भारतनेट समर्थित उच्च गति एफटीटीएच (FTTH) ब्रॉडबैंड तथा पीएमवाणी ढांचे के अंतर्गत सार्वजनिक वाईफाई के माध्यम से उपलब्ध कराई जा रही हैं।

समृद्धि केंद्र के माध्यम से समुदाय सुरक्षा के लिए डिजिटल निगरानी तथा सरकारी जनसंपर्क शिविरों एवं सेवा वितरण कार्यक्रमों के आयोजन में सहयोग भी प्रदान किया जाएगा।

समुदाय आधारित और सतत मॉडल

यह केंद्र समुदाय आधारित मॉडल पर संचालित होगा, जिसमें प्रशिक्षित स्थानीय युवा विलेज लेवल एंटरप्रेन्योर (VLE) के रूप में कार्य करेंगे। इससे ग्रामीण रोजगार को प्रोत्साहन मिलेगा तथा पहल की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित होगी।

इस पहल का क्रियान्वयन दूरसंचार विभाग द्वारा डिजिटल एम्पावरमेंट फाउंडेशन के साथ साझेदारी में किया जा रहा है। यह संस्था क्षेत्रीय संचालन तथा सामुदायिक सहभागिता के लिए सहयोगी भागीदार के रूप में कार्य करते हुए स्थानीय भागीदारी, क्षमता निर्माण तथा संचालन प्रबंधन में सहयोग प्रदान कर रही है।

इस मॉडल में सेवा वितरण से प्राप्त राजस्व, सामुदायिक सहभागिता, डिजिटल उद्यमिता तथा विभिन्न सरकारी कार्यक्रमों के साथ समन्वय के माध्यम से एक सतत (टिकाऊ) व्यवस्था को शामिल करता है।

अपेक्षित प्रभाव

समृद्धि केंद्र से उमरी तथा आसपास के गांवों के निवासियों को स्वास्थ्य सेवाओं और सरकारी सेवाओं तक बेहतर पहुंच प्राप्त होगी। इसके साथ ही डिजिटल शिक्षा एवं कौशल विकास के अवसर उपलब्ध होंगे, किसानों को आधुनिक कृषि सेवाओं का लाभ मिलेगा, डिजिटल तथा वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिलेगा तथा स्थानीय स्तर पर आजीविका के अवसर सृजित होंगे।

यह पहल एकीकृत सेवा वितरण के माध्यम से आसपास के क्षेत्र के हजारों ग्रामीण नागरिकों को लाभान्वित करने की अपेक्षा रखती है और यह दर्शाती है कि किस प्रकार डिजिटल अवसंरचना का उपयोग समावेशी ग्रामीण विकास को बढ़ावा देने के लिए किया जा सकता है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने पश्चिम बंगाल के कोलकाता में विभिन्न विकास परियोजनाओं के उद्घाटन और शिलान्यास समारोह में अपने भाषण की कुछ झलकियाँ साझा कीं

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने पश्चिम बंगाल के कोलकाता में 18,000 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं की आधारशिला रखने और उद्घाटन समारोह की झलकियाँ साझा कीं। सभा को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पश्चिम बंगाल और पूर्वी भारत के लिए विकास का एक नया अध्याय लिखा जा रहा है।

श्री मोदी ने एक्स पर कई पोस्टों की एक श्रृंखला में कहा:

“देशभर में रेलवे को आधुनिक बनाने के हमारे अभियान में पश्चिम बंगाल पीछे न रहे, इसलिए हम यहां भी रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर का तेजी से विस्तार कर रहे हैं। छह अमृत भारत स्टेशनों के उद्घाटन और पुरुलिया-आनंद विहार टर्मिनल के बीच नई एक्सप्रेस ट्रेन का शुभारंभ भी इसी दिशा में अहम कदम हैं।”

“कोलकाता में आज पोर्ट इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़ी जिन परियोजनाओं का शिलान्यास और लोकार्पण हुआ है, उनसे न केवल कार्गो ऑपरेशन और तेज होगा, बल्कि बंदरगाह की क्षमता बढ़ने के साथ ही व्यापार के लिए भी नई सुविधाएं तैयार होंगी।”

“कोलकाता के विकास कार्यक्रम को लेकर पश्चिम बंगाल के लोगों का जोश अभिभूत कर देने वाला है।”

“कोलकाता के विकास कार्यक्रम को लेकर पश्चिम बंगाल के लोगों का जोश अभिभूत कर देने वाला है।”

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केन्द्रीय मंत्रियों डॉ. मनसुख मांडविया और श्री एच. डी. कुमारस्वामी ने कर्नाटक के मांड्या में इनडोर खेल परिसर की आधारशिला रखी

नई दिल्ली – केन्द्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया तथा केंद्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री श्री एच. डी. कुमारस्वामी ने शनिवार को कर्नाटक के मांड्या में भारत सरकार की ‘खेलो इंडिया’ योजना के अंतर्गत स्वीकृत 14 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले बहुउद्देश्यीय इनडोर खेल परिसर के लिए भूमि पूजन किया और आधारशिला रखी।

यह नई सुविधा मांड्या के वीसी फार्म स्थित कृषि विज्ञान विश्वविद्यालय परिसर में स्थापित की जा रही है। आधारशिला रखते हुए, दोनों मंत्रियों ने जिले के युवाओं से “खेलो इंडिया! वाइब्रेंट मांड्या!” के नारे के अनुरूप मांड्या में खेल संस्कृति को सुदृढ़ करने और इस क्षेत्र से अधिक-से-अधिक चैंपियन खिलाड़ी तैयार करने का आह्वान किया।

इस अवसर पर, दोनों केन्द्रीय मंत्रियों ने शिलान्यास कार्यक्रम के विधि-विधानों में भाग लिया। पूर्व मंत्री श्री सी.एस. पुट्टाराजू, मेलुकोटे के विधायक श्री दर्शन पुट्टन्नैया, के.आर. पेटे के विधायक श्री मंजूनाथ, तथा कई जन प्रतिनिधि और जिले के वरिष्ठ अधिकारी भी इस अवसर पर उपस्थित थे।

खेल उपलब्धियों के लिए मांड्या की सराहना

मंच कार्यक्रम के दौरान सभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने कहा कि खेलो इंडिया पहल केंद्र सरकार द्वारा शुरू किया गया एक राष्ट्रीय कार्यक्रम है, जिसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर खेल संस्कृति को पुनर्जीवित करना और भारत को एक अग्रणी खेल राष्ट्र के रूप में स्थापित करना है।

केन्द्रीय खेल मंत्री ने कहा कि मांड्या में इस सुव्यवस्थित खेल परिसर की स्थापना उनके मंत्रिमंडलीय सहयोगी और एनडीए नेता श्री एच. डी. कुमारस्वामी के प्रयासों से संभव हो पाया है।

श्री कुमारस्वामी को संबोधित करते हुए श्री मांडविया ने कहा कि लोगों द्वारा दिखाया गया स्नेह उनके द्वारा किए गए कार्यों को दर्शाता है।

उन्होंने दिव्यांगजनों के प्रति श्री कुमारस्वामी की करुणा और प्रतिबद्धता की भी सराहना की। श्री मांडविया ने कहा कि उन्होंने स्वयं दिव्यांगजनों के प्रति श्री कुमारस्वामी की चिंता को देखा है और इलेक्ट्रिक वाहनों के वितरण की इस पहल को अत्यंत सराहनीय बताया।

उन्होंने कहा कि इस प्रकार के प्रयास न सिर्फ दिव्यांगजनों के उनके दैनिक जीवन को सुगम बनाने में सहायक होते हैं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी सकारात्मक योगदान देते हैं।

श्री मांडविया ने आगे कहा कि मांड्या ने कई ऐसे खिलाड़ी दिए है जिन्होंने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर न सिर्फ राज्य बल्कि देश का भी नाम भी रोशन किया है। उन्होंने विकास गौड़ा और के.पी. शिल्पा जैसे खिलाड़ियों का उल्लेख किया, जिन्होंने मांड्या की प्रतिष्ठा को और बढ़ाया है।

विशेष रूप से उन्होंने व्हीलचेयर टेनिस खिलाड़ी के.पी. शिल्पा का उल्लेख किया, जो वर्तमान में भारत की नंबर एक व्हीलचेयर टेनिस खिलाड़ी हैं और राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का नाम रोशन कर रही हैं।

उन्होंने आशा व्यक्त करते हुए कहा कि आने वाले वर्षों में मांड्या से और अधिक प्रतिभाशाली खिलाड़ी उभरकर सामने आएं और खेल के क्षेत्र में उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल करें।

केन्द्रीय मंत्री ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने पिछले 11 वर्षों में भारत में खेल पारिस्थितिकी तंत्र को सुदृढ़ करने के लिए व्यापक कार्य किया है। उन्होंने बताया कि हालिया केंद्रीय बजट में खेल अवसंरचना को मजबूत करने के लिए 4,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जबकि एक दशक पहले यह राशि 1,200 करोड़ रुपये थी। इस प्रकार खेल क्षेत्र के लिए आवंटन में तीन गुना से अधिक वृद्धि की गई है।

आदिचुंचनगिरि मठ के पीठाधीश्वर का आशीर्वाद प्राप्त हुआ

आदिचुंचनगिरि महासंस्थान के पीठाधीश्वर जगद्गुरु श्री डॉ. निर्मलानंदनाथ महास्वामीजी ने इस अवसर की शोभा बढ़ाई और अपने आशीर्वचन प्रदान किए।

इस अवसर पर पूर्व मंत्री श्री सी.एस. पुट्टराजू और श्री डी.सी. थम्मन्ना, विधायक श्री मंजुनाथ, पूर्व विधायक डॉ. के. अन्नादानी, विधान परिषद सदस्य श्री विवेकानंद, मांड्या जिला जेडी(एस) अध्यक्ष श्री रमेश सहित कई अन्य गणमान्य व्यक्ति और नेता उपस्थित थे।

दिव्यांगजनों को इलेक्ट्रिक वाहनों का वितरण

मंच कार्यक्रम के पश्चात 388 दिव्यांगजनों को इलेक्ट्रिक वाहनों का वितरण किया गया। ये वाहन टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज(टीसीएस) और स्टील प्राधिकरण ऑफ इंडिया लिमिटेड(सेल) के कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व(सीएसआग) पहलों के अंतर्गत प्रदान किए गए।

इसके अलावा, इन्फोसिस द्वारा दिए गए 500-डेस्कटॉप और 100-लैपटॉप सरकारी विद्यालयों को प्रदान किए गए। साथ ही हिंदुजा समूह द्वारा सीएसआर पहल के तहत प्रदान किया गया एक संपूर्ण सुसज्जित एम्बुलेंस मांड्या चिकित्सा विज्ञान संस्थान(एमआईएमएस) को सौंपा गया।

श्री कुमारस्वामी के लिए भावुक पल

केंद्रीय मंत्री श्री एच.डी. कुमारस्वामी दिव्यांगजनों को इलेक्ट्रिक वाहन सौंपते समय भावुक हो गए। जब लाभार्थियों ने वाहन प्राप्त करते समय उनके प्रति आभार व्यक्त किया, तो मंत्री स्पष्ट रूप से भावुक नजर आए। आंखों में आंसू लिए श्री कुमारस्वामी ने उन सभी का धन्यवाद किया, जो वाहन प्राप्त करने के लिए दूर-दराज से आए थे।

इस भावनात्मक क्षण के साक्षी केन्द्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया, आदिचुंचनगिरि मठ के पीठाधीश्वर, तथा कई अन्य गणमान्य व्यक्ति बने।

गुड़ की माला से भव्य स्वागत

इनडोर स्टेडियम के भूमि पूजन के बाद दोनों केन्द्रीय मंत्रियों को एक भव्य खुली गाड़ी के जुलूस में मंच कार्यक्रम स्थल तक ले जाया गया।

वीसी फार्म के गेट पर समर्थकों ने मांड्या की विशिष्टता गुड़ से बनी भव्य माला से उनका स्वागत किया। इस अनोखे स्वागत को देखकर श्री मांडविया साफ तौर पर हैरान रह गए।

श्री कुमारस्वामी ने उन्हें मांड्या के गुड़ के महत्व और प्रतिष्ठा के बारे में बताया, जो अपनी उच्च गुणवत्ता के लिए व्यापक रूप से जाना जाता है।

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वस्त्र मंत्रालय ने नागपुर में “कपास की उत्पादकता को दोगुना करने तथा उच्च गुणवत्ता वाले रेशे को बढ़ाने के लिए रणनीतिक रूपरेखा” विषय पर चिंतन शिविर का आयोजन किया

नई दिल्ली – वस्त्र मंत्रालय ने आज नागपुर में “कपास की उत्पादकता को दोगुना करने तथा उच्च गुणवत्ता वाले रेशे को बढ़ाने के लिए एक रणनीतिक रूपरेखा” विषय पर एक चिंतन शिविर का आयोजन किया। इस मंच पर नीति-निर्माताओं, वैज्ञानिकों, उद्योग जगत के प्रेणेताओं तथा कृषि विशेषज्ञों को एक साथ लाया गया, जहां कपास की उत्पादकता बढ़ाने, रेशे की गुणवत्ता में सुधार करने और वैश्विक कपास मूल्य श्रृंखला में भारत की स्थिति को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से रणनीतिक पहलों पर विचार-विमर्श किया गया।

सभा को संबोधित करते हुए वस्त्र मंत्रालय की सचिव श्रीमती नीलम शमी राव ने विचार-विमर्श को ठोस और क्रियान्वित किए जा सकने वाले परिणामों में बदलने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि भारत के कपास क्षेत्र की प्रगति के लिए पूरे मूल्य शृंखला में सुधारों तथा नवाचार को आगे बढ़ाना आवश्यक है। यह कार्य सुधार, प्रदर्शन, परिवर्तन और जानकारी के मार्गदर्शक स्तंभों के तहत किया जाना चाहिए, ताकि एक मजबूत और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी कपास पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण किया जा सके।

 

 

 

 

 

 

 

 

सचिव ने उल्लेख किया कि ड्रिप सिंचाई के विस्तार, कृषि प्रसार तंत्र को सुदृढ़ करने, किसानों को बेहतर परामर्श उपलब्ध कराने तथा जिला स्तर पर मृदा मानचित्रण के माध्यम से किसानों को उपयुक्त कपास किस्मों के चयन में मार्गदर्शन देकर कपास की उत्पादकता में उल्लेखनीय वृद्धि की जा सकती है। उन्होंने कपास बीज पारिस्थितिकी तंत्र में अधिक नवाचार तथा स्वस्थ प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर भी बल दिया। उन्होंने इसके साथ ही किसानों को सर्वोत्तम कृषि पद्धतियों के बारे में मार्गदर्शन देने के लिए क्षेत्र-विशिष्ट ‘कॉटन कैलेंडर’ विकसित करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।

इस अवसर पर बोलते हुए वस्त्र मंत्रालय की संयुक्त सचिव(फाइबर) श्रीमती पद्मिनी सिंगला ने कहा कि कपास क्षेत्र को सुदृढ़ बनाने के लिए पूरे मूल्य शृंखला में समन्वित तथा एकीकृत दृष्टिकोण अपनाना आवश्यक है, जिससे उत्पादकता बढ़ाई जा सके, रेशे की गुणवत्ता में सुधार हो तथा किसानों की आय में वृद्धि हो। उन्होंने उभरती चुनौतियों का समाधान करने और क्षेत्र के लिए नए अवसरों को सामने लाने हेतु सामूहिक विचार-विमर्श तथा सहयोगात्मक नीति-निर्माण के महत्व पर भी बल दिया।

चिंतन शिविर में चार विषयगत सत्र आयोजित किए गए, जिनमें कपास मूल्य शृंखला के प्रमुख आयामों पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया:

सत्र 1: समृद्ध किसान– उत्पादकता दोगुनी, आय दोगुनी विषय के अंतर्गत उत्पादकता बढ़ाने और किसानों की आय में वृद्धि के लिए मृदा आधारित फसल योजना, उच्च घनत्व रोपण प्रणालियां(एचडीपीएस), कृषि मशीनीकरण, कृत्रिम बुद्धिमत्ता(एआई) आधारित कीट निगरानी, तथा सुदृढ़ डिजिटल परामर्श प्रणालियों जैसी रणनीतियों पर प्रकाश डाला गया।

सत्र 2: प्रिसिजन जिनिंग और गुणवत्ता आश्वासन विषय के अंतर्गत आधुनिक जिनिंग प्रौद्योगिकियों को अपनाने, संदूषण नियंत्रण उपायों को सुदृढ़ करने, उन्नत फाइबर परीक्षण प्रणालियों के उपयोग तथा मजबूत पता लगाने वाले तंत्र विकसित करने पर बल दिया गया, ताकि वैश्विक बाजारों में प्रीमियम गुणवत्ता वाला कपास उपलब्ध कराया जा सके।

सत्र 3: स्थिरता और परिपत्रता विषय के अंतर्गत जलवायु- अनुकूल कृषि पद्धतियों, टिकाऊ कपास उत्पादन प्रणालियों, परिपत्र वस्त्र अर्थव्यवस्था मॉडलों तथा विकसित हो रहे वैश्विक सततता मानकों के अनुरूपता पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया।

सत्र 4: कस्तूरी कॉटन भारत– भारत को एक वैश्विक प्रीमियम ब्रांड के रूप में स्थापित करना विषय के अंतर्गत पता लगाने की प्रणालियों को सुदृढ़ करने, गुणवत्ता प्रमाणन ढांचे को मजबूत बनाने, ब्रांडिंग रणनीतियों को विकसित करने तथा कस्तूरी कॉटन भारत को भारत के प्रीमियम कपास ब्रांड के रूप में वैश्विक स्तर पर बढ़ावा देने पर विचार-विमर्श किया गया।

अपने समापन संबोधन में वस्त्र सचिव ने कपास पारिस्थितिकी तंत्र को और अधिक सुदृढ़, दक्ष, प्रौद्योगिकी-संचालित तथा उभरती चुनौतियों के प्रति सक्षम बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने उत्पादकता बढ़ाने, उच्च गुणवत्ता वाले रेशे को सुनिश्चित करने तथा कपास क्षेत्र में समग्र मूल्य संवर्धन को बढ़ाने के लिए आधुनिक प्रौद्योगिकियों के उपयोग, डेटा-आधारित निर्णय-निर्माण तथा नवोन्मेषी कृषि एवं औद्योगिक पद्धतियों को अपनाने के महत्व को रेखांकित किया।

उन्होंने भविष्य के लिए तैयार कपास पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण तथा कपास और वस्त्र क्षेत्र में वैश्विक अग्रणी केंद्र के रूप में भारत की स्थिति को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए राज्य सरकारों, अनुसंधान संस्थानों, उद्योग जगत से जुड़े हितधारकों और किसानों के बीच निरंतर सहयोग की आवश्यकता पर भी बल दिया।

चिंतन शिविर का समापन केंद्रीय वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह के मार्गदर्शन में कपास मूल्य शृंखला को सुदृढ़ करने की साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ। यह पहल प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के 5एफ परिकल्पना— फार्म टू फाइबर(खेत से रेशा), फाइबर टू फैब्रिक(रेशे से कपड़ा), फैब्रिक टू फैशन(कपड़े से फैशन) और फैशन टू फॉरेन(फैशन से वैश्विक बाज़ार/निर्यात तक) के अनुरूप है। विचार-विमर्श के दौरान किसानों की समृद्धि, कपास का टिकाऊ उत्पादन, उच्च गुणवत्ता वाले रेशे तथा वस्त्र मूल्य शृंखला में वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को सुदृढ़ करने के प्रति सामूहिक संकल्प की पुनः पुष्टि की गई।

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वाणिज्य विभाग की ओर से भारत के चिकित्सा उपकरणों के निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने को लेकर चिंतन शिविर का आयोजन किया गया

नई दिल्ली – वाणिज्य विभाग ने आज नई दिल्ली के वाणिज्य भवन में औषधि विभाग और चिकित्सा उपकरणों के लिए निर्यात संवर्धन परिषद (ईपीसीएमडी) के सहयोग से ‘भारत के चिकित्सा उपकरणों के निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करना’ विषय पर एक चिंतन शिविर का आयोजन किया।
इस आयोजन के दौरान मेडटेक क्षेत्र में भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धा को मजबूत करने के लिए रणनीतियों पर विचार-विमर्श करने के लिए नीति निर्माताओं, नियामकों, उद्योगपतियों, निर्यातकों और इस क्षेत्र के विशेषज्ञों को एक मंच पर एक साथ लाया गया।

“2030 तक 30 बिलियन अमेरिकी डॉलर बाजार का आकार हासिल करना” विषय के तहत इन चर्चाओं का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में सरकार, उद्योग जगत, नियामक निकायों और व्यापक चिकित्सा उपकरण पारिस्थितिकी तंत्र से 150 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।

चिंतन शिविर ने प्रमुख नीतिगत प्राथमिकताओं की पहचान करने, नियामक और बुनियादी ढांचे की बाधाओं को दूर करने और भारत के चिकित्सा उपकरणों के निर्माण पारिस्थितिकी तंत्र और निर्यात क्षमताओं को मजबूत करने के लिए उभरते अवसरों का पता लगाने के लिए सरकार और उद्योग जगत के हितधारकों के बीच विशेष तरह के जुड़ाव के लिए एक मंच के रूप में काम किया।

भारत का चिकित्सा उपकरण क्षेत्र देश के स्वास्थ्य सेवा और विनिर्माण परिदृश्य का एक महत्वपूर्ण घटक बनकर उभरा है। सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा तकनीकों की बढ़ती वैश्विक मांग के साथ भारत खुद को एक विश्वसनीय विनिर्माण और निर्यात केंद्र के रूप में तेजी से स्थापित कर रहा है।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए एसोसिएशन ऑफ इंडियन मेडिकल डिवाइस इंडस्ट्री (एआईएमईडी) के फोरम समन्वयक श्री राजीव नाथ ने उद्योग जगत का दृष्टिकोण साझा किया और वैश्विक नियामक चुनौतियों से निपटने एवं घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने के लिए सरकार और उद्योग जगत के बीच निरंतर सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।

इस अवसर पर उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए औषधि विभाग के संयुक्त सचिव श्री अमन शर्मा ने देश में चिकित्सा उपकरणों के निर्माण की गुणवत्ता पर ध्यान केंद्रित करने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि उद्योग जगत और नियामक दोनों को इस उद्देश्य की दिशा में मिलकर काम करने की आवश्यकता है।

अपने विशेष संबोधन में अतिरिक्त सचिव और विदेश व्यापार महानिदेशालय (डीजीएफटी) के महानिदेशक श्री लव अग्रवाल ने संरचनात्मक मुद्दों को संबोधित करके तेजी से विकास करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने वैश्विक चिकित्सा उपकरण बाजारों में भारत की उपस्थिति का विस्तार करने में व्यापार नीति उपायों और निर्यात प्रोत्साहन उपक्रमों की भूमिका पर प्रकाश डाला।

चिंतन शिविर का औपचारिक उद्घाटन वाणिज्य विभाग के सचिव श्री राजेश अग्रवाल ने किया। अपने उद्घाटन भाषण में उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत को ‘विश्व की फार्मेसी’ के रूप में अपनी पहचान से आगे बढ़कर एक वैश्विक मेडटेक विनिर्माण केंद्र के रूप में सामने आना होगा।

वित्त वर्ष 2025 में भारत के चिकित्सा उपकरण निर्यात 4 अरब अमेरिकी डॉलर से अधिक होने का उल्लेख करते हुए श्री अग्रवाल ने उच्च मूल्य वाले विनिर्माण, अनुसंधान और विकास में पंूजी निवेश, क्रमिक नवाचार और नियामक सामंजस्य पर ध्यान केंद्रित करते हुए अगले दशक में भारत की वैश्विक बाजार हिस्सेदारी को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने भारत के महत्वपूर्ण घरेलू बाजार का लाभ उठाते हुए 2030 तक 30 अरब अमेरिकी डॉलर के चिकित्सा उपकरण बाजार को हासिल करने के व्यापक लक्ष्य पर भी जोर दिया।

चिंतन शिविर में भारत के चिकित्सा उपकरण निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने के प्रमुख पहलुओं पर केंद्रित तीन विषयगत सत्र आयोजित किए गए।

पहले सत्र का शीर्षक था ‘वैश्विक व्यापार समझौते और भारत का मेडटेक निर्यात: वैश्विक मुक्त व्यापार समझौतों द्वारा खोले गए नए रास्ते,’ जिसमें भारत के व्यापार समझौतों के बढ़ते नेटवर्क से उत्पन्न होने वाले अवसरों और वैश्विक बाजारों में अपनी पहुंच बढ़ाने की रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया गया।

दूसरे सत्र में ‘मेडिकल टेक्नोलॉजी निर्यात अवसंरचना और वैश्विक ब्रांड निर्माण’ पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिसमें विनिर्माण समूहों को मजबूत करने, परीक्षण संरचना का विस्तार करने और भारतीय चिकित्सा उपकरणों के लिए वैश्विक ब्रांड पहचान बनाने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला गया।

तीसरे सत्र में ‘चिकित्सा उपकरण निर्यात को समर्थन देने के लिए नियामक ढांचे का विकास’ विषय पर चर्चा हुई। इसमें नियामक सामंजस्य, अनुमोदन प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने और निर्यात को सुविधाजनक बनाने के लिए उद्योग और नियामकों के बीच समन्वय में सुधार पर जोर दिया गया।

चिंतन शिविर का समापन भारत के चिकित्सा उपकरण विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने और निर्यात प्रतिस्पर्धा को बढ़ाने के लिए व्यावहारिक उपायों पर चर्चा के साथ हुआ।

चिंतन शिविर से मिली जानकारी वाणिज्य विभाग को भारत के चिकित्सा उपकरण उद्योग के लाभों का फायदा उठाने और औषधि विभाग, सीडीएससीओ और ईपीसीएमडी के साथ सक्रिय जुड़ाव के माध्यम से एक जीवंत निर्यात पारिस्थितिकी तंत्र को बढ़ावा देने में मदद करेगी।

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शिक्षा मंत्रालय ने नई दिल्ली में केंद्र शासित प्रदेशों के साथ एक दिवसीय संवादात्मक कार्यशाला का आयोजन किया

नई दिल्ली  – शिक्षा मंत्रालय के स्‍कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग (डीओएसईएल) ने 13 मार्च 2026 को डॉ. अंबेडकर अंतर्राष्ट्रीय केंद्र (डीएआईसी), नई दिल्ली में केंद्र शासित प्रदेशों के साथ एक दिवसीय संवादात्मक कार्यशाला का आयोजन किया।

इस कार्यशाला में शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी, अन्य मंत्रालयों/विभागों के प्रतिनिधि और सभी केंद्र शासित प्रदेशों के अधिकारी एक साथ आए और केंद्र शासित प्रदेशों में स्कूली शिक्षा से संबंधित प्रमुख प्रशासनिक, वित्तीय और कानूनी मुद्दों पर विचार-विमर्श किया।

स्‍कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग (डीओएसईएल)  के सचिव श्री संजय कुमार ने कार्यशाला का उद्घाटन करते हुए केंद्र शासित प्रदेशों के साथ निरंतर संपर्क बनाए रखने के महत्व पर जोर दिया ताकि समन्वय को मजबूत किया जा सके और शिक्षा कार्यक्रमों के कार्यान्वयन में सुधार किया जा सके। उन्होंने शैक्षणिक एवं गैर-शैक्षणिक पदों की रिक्तियों को समय पर भरने, राज्‍य शैक्षिक अनुसंधान एवं प्रशिक्षण परिषद (एससीईआरटी), जिला शिक्षा एवं प्रशिक्षण संस्‍थान (डीआईईटी) और राज्‍य शिक्षा संस्‍थान (एसआईई) जैसे शैक्षणिक संस्थानों को सुदृढ़ करने और संसदीय मामलों एवं वित्तीय प्रस्तावों पर शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया।

स्‍कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग (डीओएसईएल)  की आर्थिक सलाहकार श्रीमती ए. श्रीजा ने कार्यशाला के संदर्भ में कहा कि यह मंच विचारों के आदान-प्रदान को सुगम बनाएगा और शिक्षा क्षेत्र में केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा सामना की जाने वाली परिचालन संबंधी चुनौतियों के समाधान को सक्षम करेगा।

उद्घाटन सत्र के दौरान, स्‍कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग (डीओएसईएल)   के अपर सचिव श्री धीरज साहू ने प्रतिभागियों को संबोधित किया और केंद्र शासित प्रदेशों में संस्थागत क्षमता को मजबूत करने और प्रशासनिक दक्षता में सुधार करने के महत्व पर जोर दिया।

इसके बाद विधि कार्य विभाग के संयुक्त सचिव श्री अजय गुप्ता ने अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने मुकदमेबाजी और न्‍यायालयी मामलों के संचालन से संबंधित प्रमुख पहलुओं पर बात की।

स्‍कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग (डीओएसईएल) की संयुक्त सचिव श्रीमती प्राची पांडे ने इस बात पर जोर दिया कि केंद्र शासित प्रदेशों के सभी स्कूलों को केंद्रीय माध्‍यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से संबद्ध होना चाहिए।

शिक्षा मंत्रालय के प्रधान मुख्य लेखा नियंत्रक श्री भूपाल नंदा ने भी सभा को संबोधित किया और शिक्षा क्षेत्र में वित्तीय प्रबंधन और लेखा प्रणाली से संबंधित मुद्दों के बारे में बताया।

तकनीकी सत्रों में कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। इन विषयों में निःशुल्क एवं अनिवार्य बाल शिक्षा अधिकार अधिनियम, 2009 की धारा 12(1)(सी) का कार्यान्वयन, साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण के लिए शैक्षिक संकेतक और डेटा रिपोर्टिंग, विधानमंडल वाले केंद्र शासित प्रदेशों को एसएनए-स्पर्श प्लेटफॉर्म से जोड़ना और डिजिटल वित्तीय प्रबंधन प्रणालियों को सुदृढ़ करने के लिए संबंधित लेखांकन मामले शामिल थे। इसके अतिरिक्त, सत्रों में न्‍यायालयी मामलों की प्रभावी निगरानी में विधिक सूचना प्रबंधन एवं ब्रीफिंग प्रणाली (लिम्‍बस) की भूमिका के बारे में बताया गया और सरकारी ई-मार्केटप्लेस (जैम) पोर्टल पर खरीद संबंधी मुद्दों पर चर्चा की गई। इसमें सरकारी खरीद में पारदर्शिता और दक्षता में सुधार पर विशेष जोर दिया गया।

जम्मू एवं कश्मीर, लद्दाख, पुद्दुचेरी, अंडमान और निकोबार द्वीप समूह, चंडीगढ़, दादरा एवं नागर हवेली और दमन एवं दीव, लक्षद्वीप और दिल्ली के प्रतिनिधियों ने न्‍यायालयी मामलों की स्थिति, विशेष शिक्षकों सहित शैक्षणिक और गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों की रिक्तियों, एससीईआरटी, डीआईईटी और एसआईई में रिक्तियों, समग्र शिक्षा के अंतर्गत निधि जारी करने, वार्षिक रिपोर्ट और लेखापरीक्षित खातों की प्रस्तुति, संसदीय मामलों और जैम पोर्टल पर आने वाली समस्याओं पर प्रस्तुतियां दी। इन चर्चाओं से केंद्र शासित प्रदेशों को अपने अनुभव साझा करने और मंत्रालय तथा अन्य हितधारकों से मार्गदर्शन प्राप्त करने का अवसर मिला।

कार्यशाला का समापन एक संवादात्मक चर्चा और प्रमुख निष्कर्षों के सारांश के साथ हुआ। विचार-विमर्श में शिक्षा मंत्रालय और केंद्र शासित प्रदेशों की सामूहिक प्रतिबद्धता दोहराई गई कि वे समन्वय को मजबूत करेंगे, संस्थागत क्षमता को बढ़ाएंगे और केंद्र शासित प्रदेशों में बेहतर शैक्षिक परिणामों के लिए स्कूली शिक्षा पहलों के प्रभावी कार्यान्वयन को सुनिश्चित करेंगे।

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ईद, सरहुल एवं रामनवमी पर्व को लेकर महत्वपूर्ण बैठक

उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में बैठक

आगामी ईद, सरहुल एवं रामनवमी पर्व के दौरान विधि-व्यवस्था संधारण को लेकर संबंधित पदाधिकारियों को दिए गए आवश्यक दिशा-निर्देश

रांची,15.03.2026 – आगामी ईद, सरहुल एवं रामनवमी पर्व के मद्देनजर आज दिनांक 15.03.2026 को रांची समाहरणालय में उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में पुलिस अधीक्षक (यातायात), पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण), अपर जिला दण्डाधिकारी (विधि-व्यवस्था), अनुमंडल पदाधिकारी, जिला स्तरीय पदाधिकारी एवं संबंधित प्रशासनिक एवं पुलिस अधिकारी उपस्थित थे।

बैठक में उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री आगामी पर्वों को शांतिपूर्ण, सुरक्षित एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में सम्पन्न कराने को लेकर विस्तृत चर्चा की गई तथा सुरक्षा एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं को लेकर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

संवेदनशील क्षेत्रों पर विशेष निगरानी का निर्देश

उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि जिले के संवेदनशील एवं भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों की पहचान कर वहां विशेष सतर्कता बरती जाए। उन्होंने कहा कि पर्व के दौरान किसी भी प्रकार की अव्यवस्था या अप्रिय घटना को रोकने के लिए पुलिस बल की पर्याप्त प्रतिनियुक्ति सुनिश्चित की जाए तथा सभी अधिकारी अपने-अपने क्षेत्रों में लगातार भ्रमण कर स्थिति पर नजर रखें।

जुलूस मार्ग एवं आयोजन स्थलों की निगरानी

बैठक में निर्देश दिया गया कि रामनवमी जुलूस मार्ग, सरना स्थलों तथा ईद की नमाज के प्रमुख स्थलों पर विशेष सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। सभी संबंधित पदाधिकारी आयोजन समितियों के साथ समन्वय स्थापित कर आवश्यक व्यवस्थाओं का समय पर निरीक्षण करेंगे, ताकि पर्व के दौरान किसी प्रकार की समस्या उत्पन्न न हो।

सीसीटीवी, ड्रोन एवं तकनीकी निगरानी

उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने निर्देश दिया कि प्रमुख चौक-चौराहों, जुलूस मार्गों एवं भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में सीसीटीवी कैमरा एवं ड्रोन के माध्यम से निगरानी की प्रभावी व्यवस्था की जाए। इसके साथ ही नियंत्रण कक्ष को सक्रिय रखते हुए सभी सूचनाओं की त्वरित निगरानी एवं समन्वय सुनिश्चित किया जाएगा।

सोशल मीडिया पर विशेष नजर

बैठक में सोशल मीडिया पर विशेष निगरानी रखने का निर्देश दिया गया। उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा कि किसी भी प्रकार की भ्रामक सूचना, अफवाह या आपत्तिजनक पोस्ट के माध्यम से सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने का प्रयास करने वालों की पहचान कर उनके विरुद्ध तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए संबंधित टीमों को सक्रिय रहने का निर्देश दिया गया।

सफाई, बिजली-पानी एवं यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश

उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि पर्व के दौरान सभी प्रमुख स्थलों पर साफ-सफाई, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था एवं यातायात प्रबंधन की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। नगर निगम, बिजली विभाग एवं अन्य संबंधित विभागों को समन्वय के साथ कार्य करने का निर्देश दिया गया।

अधिकारियों को फील्ड में सक्रिय रहने का निर्देश

बैठक में सभी पुलिस पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि पर्व के दौरान वे अपने-अपने क्षेत्रों में सतत निगरानी रखें तथा किसी भी परिस्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहें।

बैठक के दौरान यह निर्णय लिया गया कि प्रशासन एवं पुलिस के समन्वित प्रयास से जिले में आगामी ईद, सरहुल एवं रामनवमी पर्व को शांतिपूर्ण, सुरक्षित एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में सम्पन्न कराया जाएगा।

उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे अपने-अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी गंभीरता एवं जिम्मेदारी के साथ सुनिश्चित करें, ताकि जिले में सामाजिक सद्भाव एवं भाईचारे का वातावरण बना रहे।

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आगामी ईद, सरहुल और रामनवमी पर्व को लेकर केन्द्रीय शांति समिति की बैठक

उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में बैठक सम्पन्न

सौहार्दपूर्ण वातावरण में त्योहार मनाने की अपील

सोशल मीडिया पर प्रशासन-पुलिस की रहेगी कड़ी निगरानी

पर्व के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होंगे : एसएसपी

शांति समिति के सुझावों पर जिला प्रशासन करेगा कार्य

रांची,15.03.2026 – जिला में त्योहारों के सफल आयोजन के लिए उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजंत्री ने की केन्द्रीय शांति समिति, महावीर मण्डल, केन्द्रीय सरना समिति, रामनवमी श्रृंगार समिति,चैती दुर्गा पूजा समिति, सेंट्रल मोहर्रम कमिटी, अंजुमन इस्लामिया, गुरुनानक समिति, अन्य सभी रामनवमी, ईद एवं सरहुल पर्व आयोजन समितियों एवं अखाड़ा समिति की सराहना

आगामी ईद, सरहुल एवं रामनवमी पर्व को लेकर  15.03.2026 को उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में केन्द्रीय शांति समिति की बैठक आयोजित की गई। रांची समाहरणालय के ब्लॉक-B स्थित कमरा संख्या-505 में आयोजित बैठक में वरीय पुलिस अधीक्षक, रांची श्री राकेश रंजन, पुलिस अधीक्षक (यातायात), पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण), अपर जिला दण्डाधिकारी (विधि-व्यवस्था), अनुमंडल पदाधिकारी सदर एवं बुण्डू, उपसमाहर्ता भूमि सुधार, जिला परिवहन पदाधिकारी, जिला आपूर्ति पदाधिकारी, जिला नजारत उप समाहर्ता सहित संबंधित पुलिस-प्रशासनिक पदाधिकारी एवं महावीर मण्डल, केन्द्रीय सरना समिति, रामनवमी श्रृंगार समिति, राँची चैती दुर्गा पूजा समिति, सेंट्रल मोहर्रम कमिटी, अंजुमन इस्लामिया, गुरुनानक समिति, पंजाबी हिंदू बिरादरी, राँची/डोरंडा,
अन्य सभी रामनवमी / ईद / सरहुल पर्व आयोजन समितियों, के अध्यक्ष, सचिव एवं सदस्य उपस्थित थे।

बैठक के दौरान आगामी पर्वों को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सौहार्दपूर्ण वातावरण में सम्पन्न कराने को लेकर विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।

शांति समिति के सदस्यों ने दिये महत्वपूर्ण सुझाव

बैठक में केन्द्रीय शांति समिति के सदस्यों ने बारी-बारी से अपने सुझाव रखे। सदस्यों द्वारा पर्व के दौरान सीसीटीवी कैमरों एवं ड्रोन के माध्यम से निगरानी, आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों की पहचान कर त्वरित कार्रवाई, साफ-सफाई की समुचित व्यवस्था, बिजली-पानी की निर्बाध आपूर्ति तथा सुरक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने जैसे महत्वपूर्ण सुझाव दिये गये।

समिति के सदस्यों ने विशेष रूप से पर्व के दौरान पर्याप्त संख्या में महिला पुलिसकर्मियों की प्रतिनियुक्ति सुनिश्चित करने की आवश्यकता पर बल दिया, ताकि महिलाओं को किसी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।

सदस्यों के सुझावों पर जिला प्रशासन करेगा आवश्यक कार्रवाई

उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा कि शांति समिति के सदस्यों द्वारा दिये गये सभी सुझावों पर जिला प्रशासन गंभीरतापूर्वक विचार कर आवश्यक कार्रवाई करेगा। उन्होंने कहा कि पूर्व में भी रांची में सभी पर्व-त्योहार शांति एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुए हैं, जिसमें केन्द्रीय शांति समिति, महावीर मण्डल, केन्द्रीय सरना समिति, रामनवमी श्रृंगार समिति, राँची चैती दुर्गा पूजा समिति, सेंट्रल मोहर्रम कमिटी, अंजुमन इस्लामिया, गुरुनानक समिति अन्य सभी रामनवमी / ईद / सरहुल पर्व आयोजन समितियों एवं अखाड़ा समिति के सदस्यों का सहयोग अत्यंत सराहनीय रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी के सहयोग, समन्वय और सामूहिक प्रयास से आगामी त्योहार भी शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में सम्पन्न होंगे।

शांतिपूर्ण माहौल में त्योहार सम्पन्न कराना हम सबकी जिम्मेवारी – उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री

उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा कि रांची को राज्य ही नहीं, बल्कि पूरे देश में सामाजिक सौहार्द और भाईचारे की मिसाल बनाना है। इसके लिए सभी नागरिकों, शांति समिति के सदस्यों तथा प्रशासन को मिलकर अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी। उन्होंने जिले के सभी थाना प्रभारियों को अपने-अपने क्षेत्रों में शांति समिति की बैठक आयोजित करने का निर्देश दिया।

सोशल मीडिया पर प्रशासन-पुलिस की कड़ी निगरानी

उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा कि आगामी पर्व-त्योहारों के दौरान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जिला प्रशासन और पुलिस की कड़ी निगरानी रहेगी। उन्होंने आम नागरिकों से किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक पोस्ट या अफवाहों पर प्रतिक्रिया देने से बचने और जिम्मेदार नागरिक का परिचय देते हुए ऐसी किसी भी सामग्री की जानकारी तुरंत पुलिस-प्रशासन को देने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाले तत्वों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

पर्व के दौरान सुरक्षा के होंगे पुख्ता इंतजाम : एसएसपी

बैठक के दौरान वरीय पुलिस अधीक्षक, रांची श्री राकेश रंजन ने कहा कि आगामी पर्वों को लेकर पुलिस प्रशासन द्वारा व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने शांति समिति, पूजा समिति एवं अखाड़ा समिति के सदस्यों से प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर सतर्कता के साथ कार्य करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित अधिकारी मैदान स्तर पर सक्रिय रहकर कार्य करें, ताकि किसी भी स्थिति से समय रहते निपटा जा सके। उन्होंने आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों को चेतावनी देते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था बिगाड़ने का प्रयास करने वालों के खिलाफ पुलिस सख्त कार्रवाई करने से नहीं चूकेगी।

बैठक के अंत में प्रशासन और शांति समिति के सदस्यों ने मिलकर यह संकल्प लिया कि ईद, सरहुल और रामनवमी के पर्व को आपसी भाईचारे, सद्भाव और शांति के साथ मनाया जाएगा।

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आगामी सरहुल पर्व के मद्देनजर सरना स्थलों का निरीक्षण

उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री एवं वरीय पुलिस अधीक्षक, रांची श्री राकेश रंजन ने संयुक्त रूप से किया निरीक्षण

सिरम टोली एवं हातमा सरना स्थलों की व्यवस्थाओं का लिया गया जायजा

श्रद्धालुओं की सुविधा और सुगम आवागमन पर विशेष ध्यान

सरहुल पर्व के सफल आयोजन में जिला प्रशासन देगा हरसंभव सहयोग

सुरक्षा के होंगे पुख्ता इंतजाम, सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरतने का निर्देश

सरहुल झारखंड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति एवं परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व – उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री

रांची,15.03.2026 – आगामी सरहुल पर्व को शांतिपूर्ण, सुव्यवस्थित एवं भव्य तरीके से संपन्न कराने के उद्देश्य से आज दिनांक 15 मार्च 2026 को उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री एवं वरीय पुलिस अधीक्षक, रांची श्री राकेश रंजन द्वारा शहर के प्रमुख सिरम टोली एवं हातमा स्थित सरना स्थलों का संयुक्त निरीक्षण किया गया। निरीक्षण के दौरान दोनों वरीय पदाधिकारियों ने सरना स्थलों पर उपलब्ध व्यवस्थाओं का जायजा लिया तथा सरना समितियों के प्रतिनिधियों से विस्तृत बातचीत कर आवश्यक तैयारियों की समीक्षा की।

इस दौरान पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) श्री प्रवीण पुष्कर, पुलिस अधीक्षक (यातायात) श्री राकेश सिंह, अपर जिला दंडाधिकारी (विधि व्यवस्था) श्री आर.एन. आलोक, अनुमंडल पदाधिकारी (सदर) श्री कुमार रजत, उप समाहर्ता जिला नजारत श्री सुदेश कुमार सहित अन्य संबंधित प्रशासनिक एवं पुलिस पदाधिकारी उपस्थित थे।

सिरम टोली एवं हातमा सरना स्थलों की व्यवस्थाओं का लिया गया जायजा

निरीक्षण के क्रम में उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री एवं वरीय पुलिस अधीक्षक ने सरना स्थलों के प्रवेश मार्ग, पूजा स्थल, श्रद्धालुओं के आवागमन के रास्ते, साफ-सफाई, प्रकाश व्यवस्था, पेयजल, पार्किंग तथा सुरक्षा व्यवस्था की बारीकी से समीक्षा की।

सरना समितियों के सदस्यों ने प्रशासन को अवगत कराया कि सरहुल पर्व के अवसर पर श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या सरना स्थलों पर पहुंचती है, इसलिए लाइटिंग, सड़क समतलीकरण, पेयजल व्यवस्था, जेनरेटर, मोबाइल टॉयलेट, बैरिकेडिंग तथा साफ-सफाई की समुचित व्यवस्था आवश्यक है।

इस पर उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि सरना स्थलों पर आने वाले श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो, इसके लिए सभी आवश्यक तैयारियां समय रहते पूरी कर ली जाएं।

सरहुल पर्व के सफल आयोजन में जिला प्रशासन देगा हरसंभव सहयोग

उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा कि सरहुल झारखंड की समृद्ध आदिवासी संस्कृति एवं परंपरा का महत्वपूर्ण पर्व है और इसे श्रद्धा, उत्साह एवं सामाजिक सौहार्द के साथ मनाया जाता है। जिला प्रशासन का प्रयास रहेगा कि यह पर्व पूरी शांति, सुरक्षा और गरिमा के साथ संपन्न हो। उन्होंने कहा कि सरना समितियों के सुझावों के आधार पर सरना स्थलों पर आवश्यक सुविधाओं की विस्तृत योजना तैयार कर ली गई है तथा संबंधित पदाधिकारियों को समन्वय स्थापित कर सभी तैयारियां समयबद्ध तरीके से पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं।

उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा कि प्रशासन का उद्देश्य है कि सरना स्थलों पर आने वाले श्रद्धालु सुगमता और सुरक्षित वातावरण में पूजा-अर्चना कर सकें तथा पूजा के उपरांत बिना किसी परेशानी के अपने घरों के लिए प्रस्थान कर सकें। इसके लिए आवागमन, सुरक्षा, साफ-सफाई और बुनियादी सुविधाओं की समुचित व्यवस्था सुनिश्चित की जाएगी।

श्रद्धालुओं की सुविधा और सुगम आवागमन पर विशेष ध्यान

उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा कि सरहुल पर्व के अवसर पर श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को देखते हुए पेयजल, प्रकाश व्यवस्था, मोबाइल शौचालय, चिकित्सा सहायता, साफ-सफाई एवं ट्रैफिक प्रबंधन को लेकर विशेष व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें, ताकि सरहुल पूजा से जुड़ी सभी तैयारियां समय से पहले पूर्ण कर ली जाएं और श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

सुरक्षा व्यवस्था के होंगे पुख्ता इंतजाम

इस अवसर पर वरीय पुलिस अधीक्षक, रांची श्री राकेश रंजन ने कहा कि सरहुल पर्व के दौरान सुरक्षा के दृष्टिकोण से पर्याप्त संख्या में पुलिस बल की तैनाती की जाएगी। प्रमुख सरना स्थलों एवं जुलूस मार्गों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे तथा ड्रोन कैमरों के माध्यम से निगरानी की जाएगी, ताकि किसी भी प्रकार की असामाजिक गतिविधि पर तुरंत नियंत्रण किया जा सके। उन्होंने बताया कि ट्रैफिक प्रबंधन के लिए विशेष योजना तैयार की जा रही है, जिसके तहत आवश्यकतानुसार कुछ मार्गों पर ट्रैफिक डायवर्जन किया जाएगा। इस संबंध में आम नागरिकों को पूर्व में ही मीडिया के माध्यम से सूचित किया जाएगा, ताकि लोगों को आवागमन में किसी प्रकार की असुविधा न हो।

जिला प्रशासन ने सभी नागरिकों से अपील की है कि वे सरहुल पर्व को आपसी भाईचारे, अनुशासन और परंपरागत गरिमा के साथ मनाएं तथा प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों का पालन कर शांतिपूर्ण आयोजन में सहयोग करें।

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भारत निर्वाचन आयोग आज रविवार, 15 मार्च को पांच राज्यों में चुनाव की तारीखों का एलान कर सकता है

नई दिल्ली – भारत निर्वाचन आयोग आज रविवार, 15 मार्च को पांच राज्यों में चुनाव की तारीखों का एलान कर सकता है।

इस साल पांच राज्यों पश्चिम बंगाल, असम, केरल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में चुनाव होने हैं। चुनाव की तारीखों के एलान के लिए आज शाम 4 बजे नई दिल्ली स्थित विज्ञान भवन में प्रेस कॉन्फ्रेंस रखी गई है।

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केंद्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने एमडीओएनईआर सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता की

 पूर्वोत्तर में निवेश, एमएसएमई विकास और रोजगार में एनईडीएफआई के योगदान की समीक्षा की

नई दिल्ली – केंद्रीय संचार एवं पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री (डीओएनईआर) श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने 12 मार्च 2026 को नई दिल्ली स्थित संसद भवन एनेक्स में पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय की सलाहकार समिति की बैठक की अध्यक्षता की। बैठक में समिति के सदस्य, एमडीओएनईआर के सचिव और विभिन्न मंत्रालयों, एनईसी और उत्तर पूर्वी विकास वित्त निगम लिमिटेड (एनईडीएफआई) के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।

बैठक के दौरान, मंत्री जी ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में निवेश को प्रोत्साहन देने, रोजगार निर्माण करने और उद्यमिता को मजबूत करने में एनईडीएफआई की ओर से निभाई गई महत्वपूर्ण भूमिका पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा, “एनईडीएफआई पूर्वोत्तर में उद्यम के लिए एक संरचनात्मक प्रवर्तक के तौर पर तेजी से उभर रहा है—उद्यमिता को प्रोत्साहन दे रहा है, एमएसएमई क्रेडिट अंतराल को भर रहा है, निजी निवेश को गति दे रहा है और पूरे क्षेत्र में आजीविका का सहयोग कर रहा है।”

मजबूतवित्तीयप्रभावऔररोजगारनिर्माण

एनईडीएफआई के हस्तक्षेपों के वित्तीय प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए, श्री सिंधिया ने कहा कि मार्च 2025 तक, संस्था ने 26,835 इकाइयों को 9114 करोड़ रुपये दिए हैं, जिसने लगभग 23670 करोड़ रुपये के निजी निवेश को प्रोत्साहन दिया है और पूर्वोत्तर में लगभग 15 लाख लोगों के लिए रोजगार में सहयोग किया है।

मंत्री जी ने बताया कि एनईडीएफआई की ओर से निवेश किए गए प्रत्येक 1 रुपये पर निजी क्षेत्र से 2.6 रुपये का निवेश मिला है, जो निवेशकों के मजबूत विश्वास को दर्शाता है। उन्होंने पूंजी के बेहतर इस्तेमाल पर भी जोर देते हुए कहा कि निवेश किए गए प्रत्येक 1 करोड़ रुपये पर लगभग 165 रोजगार निर्मित होते हैं।

एमएसएमईक्रेडिटअंतरकोभरना

श्री सिंधिया ने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र में एमएसएमई क्रेडिट अंतर को पाटने में एनईडीएफआई की महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने संस्था को अपने पोर्टफोलियो में विविधता लाने और सूक्ष्म उद्यमों के अलावा लघु उद्यमों को भी शामिल करने का निर्देश दिया, जिससे क्षेत्र में व्यवसायों की एक विस्तृत श्रृंखला को सहायता मिल सके।

संस्था के वित्तीय अनुशासन की सराहना करते हुए मंत्री जी ने उल्लेख किया कि एनईडीएफआई ने 289.11 करोड़ रुपये के ब्याज-मुक्त लोन बिना किसी चूक के चुका दिए हैं।

उन्होंने इस बात पर भी संतोष जताया कि हाल ही में किए गए वितरण में से 468 करोड़ रुपये संस्था द्वारा आंतरिक रूप से जुटाए गए, जबकि 580 करोड़ रुपये एमडीओएनईआर की ओर से प्रदान किए गए, जो संस्था की बढ़ती आत्मनिर्भरता को दर्शाता है।

निवेशकीस्थापनाऔरक्षेत्रीयविकास

मंत्री ने पूर्वोत्तर निवेशक शिखर सम्मेलन के बाद हुई प्रगति पर भी प्रकाश डाला और बताया कि विभिन्न राज्यों में लगभग 35,000 करोड़ रुपये का निवेश स्थापित किया जा चुका है, जबकि निवेश के लिए 4.48 लाख करोड़ रुपये की रुचि दिखाई गई है।

क्षेत्रीय विकास के चालक के रूप में पर्यटन के महत्व पर जोर देते हुए, श्री सिंधिया ने कहा कि मंत्रालय समग्र पर्यटक अनुभव पर केंद्रित सुनियोजित पर्यटन सर्किट तैयार कर रहा है, जिसके तहत मेघालय के सोहरा और त्रिपुरा के माताबारी में प्रायोगिक पहल चल रही हैं।

उन्होंने अरुणाचल प्रदेश के कीवी, त्रिपुरा के क्वीन पाइनएप्पल, सिक्किम के जैविक उत्पाद, नागालैंड की कॉफी, असम के मूगा रेशम, मणिपुर के पोलो, मिजोरम के मिजो अदरक और मेघालय की लकाडोंग हल्दी सहित राज्य-विशिष्ट गुणों को प्रोत्साहन देने पर मंत्रालय के फोकस को भी दोहराया।

व्यापकसंपर्कऔरसमन्वय

श्री सिंधिया ने पूर्वोत्तर राज्यों की अपनी यात्राओं के बारे में भी जानकारी दी, जहां वे प्रत्येक राज्य में 3-4 दिन बिताएंगे, जिसका उद्देश्य जून में मॉनसून शुरू होने से पहले सभी आठ राज्यों का दौरा करना है। विश्वविद्यालयों और तकनीकी संस्थानों के छात्रों के साथ संवाद उनकी यात्राओं का अटूट अंग है।

नगालैंड और अन्य पूर्वोत्तर राज्यों में भूमि संपार्श्विक मानदंडों से संबंधित मुद्दों पर मंत्री जी ने स्पष्ट किया कि वित्तीय संस्थानों को आरबीआई के दिशानिर्देशों का पालन करना होगा और ऐसे मामले संबंधित राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में आते हैं।

उन्होंने यह भी बताया कि बराक घाटी में बाढ़ प्रबंधन संबंधी मुद्दों के समाधान के लिए जल शक्ति मंत्रालय और जर्मन एजेंसी केएफडब्ल्यू के साथ तकनीकी समन्वय चल रहा है।

मंत्री जी ने एक वर्ष में समिति की चार बैठकें आयोजित करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।

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मातृ मृत्यु दर में कमी लाने के लिए उठाए गए कदम

नई दिल्ली –   देश में मातृ मृत्यु दर घटकर प्रति लाख जीवित जन्म 88 हुई; पिछले तीन वर्षों में देश में 5.93 करोड़ से अधिक संस्थागत प्रसव हुए

जननी सुरक्षा योजना एवं जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम नकद प्रोत्साहन एवं शून्य-लागत देखभाल के साथ संस्थागत प्रसव को बढ़ावा दे रहे हैं

मातृ मृत्यु को रोकने के विशेषज्ञ जांच एवं प्रोत्साहन के माध्यम से पीएमएसएमए और विस्तारित पीएमएसएमए के अंतर्गत उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं को ट्रैक किया जाता है

लाक्श्या और सुमन सम्मानजनक एवं उच्च गुणवत्ता वाली प्रसव कक्ष देखभाल सुनिश्चित करते हैं, जिसमें सेवाओं से इनकार नहीं किया जाता

प्राथमिक रेफरल यूनिट, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य विंग और प्रसव गृह जैसी बुनियादी ढांचागत सुविधाओं के उन्नयन से मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) में देशव्यापी स्तर पर कमी लाने के लिए पहुंच, स्क्रीनिंग एवं समय पर मध्यवर्तम में सुधार हुआ है

Posted On: 13 MAR 2026 4:36PM by PIB Delhi

भारत के रजिस्ट्रार जनरल द्वारा 2021-23 के लिए मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) जारी नवीनतम बुलेटिन के अनुसार, देश की एमएमआर प्रति लाख जीवित जन्म 88 है। राज्य/केंद्र शासित प्रदेशों के अनुसार एमएमआर का विवरण अनुलग्नक I में दिया गया है।

राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के अंतर्गत, भारत सरकार ने देश के ग्रामीण एवं पिछड़े क्षेत्रों सहित सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मातृ मृत्यु दर में कमी लाने के लिए विभिन्न पहलें की हैं जिससे मातृ स्वास्थ्य लक्ष्यों के साथ-साथ सतत विकास लक्ष्यों (एसडीजी) को भी प्राप्ति की जा सके। ये पहलें निम्नलिखित हैं:

जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई) संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए एक मांग प्रोत्साहन और सशर्त नकद हस्तांतरण योजना है।

जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम (जेजेएसके) सभी गर्भवती महिलाओं को जो सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में प्रसव करती हैं, पूर्णतः निःशुल्क और बिना किसी खर्च के प्रसव, जिसमें सिजेरियन सेक्शन शामिल है, का अधिकार देता है।

इन सुविधाओं में मुफ्त दवाएं, उपभोग्य वस्तुएं, ठहरने के दौरान मुफ्त भोजन, मुफ्त निदान, मुफ्त परिवहन और आवश्यकता पड़ने पर मुफ्त रक्त संचारण शामिल हैं। एक वर्ष तक के बीमार शिशुओं के लिए भी इसी प्रकार की सुविधाएं उपलब्ध हैं।

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान (पीएमएसएमए) गर्भवती महिलाओं को हर महीने की 9 तारीख को एक निश्चित दिन, नि:शुल्क, सुनिश्चित और गुणवत्तापूर्ण प्रसवपूर्व जांच की सुविधा प्रदान करता है, जो किसी विशेषज्ञ/चिकित्सा अधिकारी द्वारा की जाती है।

विस्तारित पीएमएसएमए रणनीति गर्भवती महिलाओं, विशेष रूप से उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं (एचआरपी) को गुणवत्तापूर्ण प्रसवपूर्व देखभाल (एएनसी) सुनिश्चित करती है और पीएमएसएमए दौरे के अलावा अतिरिक्त 3 दौरों के लिए वित्तीय प्रोत्साहन के माध्यम से पहचान की गई उच्च जोखिम वाली गर्भवती महिलाओं और उनके साथ आने वाली आशा कार्यकर्ताओं के लिए सुरक्षित प्रसव प्राप्त होने तक व्यक्तिगत एचआरपी ट्रैकिंग सुनिश्चित करती है।

लाक्श्या प्रसव कक्ष और प्रसूति ऑपरेशन थिएटरों में देखभाल की गुणवत्ता में सुधार लाता है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि गर्भवती महिलाओं को प्रसव के दौरान एवं प्रसव के तुरंत बाद सम्मानजनक और गुणवत्तापूर्ण देखभाल प्राप्त हो।

सुरक्षित मातृत्व आश्वासन (सुमन) सार्वजनिक स्वास्थ्य सुविधाओं में आने वाली प्रत्येक गर्भवती महिला एवं नवजात शिशु को नि:शुल्क और बिना किसी इनकार के सुनिश्चित, गरिमापूर्ण, सम्मानजनक और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा प्रदान करता है, ताकि सभी रोकने योग्य मातृ एवं नवजात मृत्यु को समाप्त किया जा सके।

प्रसवोत्तर देखभाल को अनुकूलित करने का उद्देश्य माताओं में खतरे के संकेतों का पता लगाने और उच्च जोखिम वाली प्रसवोत्तर माताओं की शीघ्र पहचान, रेफरल एवं उपचार के लिए मान्यता प्राप्त सामाजिक स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं (आशा) को प्रोत्साहित करके प्रसवोत्तर देखभाल की गुणवत्ता को मजबूत करना है।

आंगनवाड़ी केंद्रों में मासिक ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस (वीएचएसएनडी) एक आउटरीच गतिविधि है जो आईसीडीएस के साथ समन्वय में मातृ एवं शिशु देखभाल सेवाओं के प्रावधान को सुनिश्चित करती है।

स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच को बढ़ावा देने के लिए, विशेष रूप से जनजातियय एवं दुर्गम क्षेत्रों में, आउटरीच शिविरों का आयोजन किया जाता है। इसका उपयोग मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने, सामुदायिक लामबंदी करने और उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं पर नज़र रखने के लिए किया जाता है।

गर्भवती महिलाओं को आहार, आराम, गर्भावस्था के खतरे के संकेत, लाभ योजनाओं और संस्थागत प्रसव के बारे में जानकारी देने के लिए मातृ एवं शिशु संरक्षण (एमसीपी) कार्ड और सुरक्षित मातृत्व पुस्तिका वितरित की जाती है।

अवसंरचना को मजबूत करना, जिसमें प्राथमिक रेफरल इकाइयों (एफआरयू) का संचालन, मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य (एमसीएच) विंग की स्थापना, प्रसूति उच्च निर्भरता इकाइयों एवं गहन देखभाल इकाइयों (ऑब्स्टेट्रिक एचडीयू और आईसीयू) का संचालन, दुर्गम भूभाग, दूरस्थ एवं जनजातिय क्षेत्रों में स्वास्थ्य सुविधाओं तक बेहतर पहुंच और संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने के लिए प्रसव प्रतीक्षा गृहों (बीडब्ल्यूएच) की स्थापना शामिल है।

देश में मातृ मृत्यु दर में कमी लाने में संस्थागत प्रसव एवं प्रसवपूर्व देखभाल की महत्वपूर्ण भूमिका है। कुशल प्रसव सहायकों (एसबीए) की सहायता से स्वास्थ्य संस्थानों में होने वाले प्रसव गर्भावस्था, प्रसव या प्रसवोत्तर काल में उत्पन्न होने वाली जटिलताओं के प्रबंधन में सहायक होते हैं।

प्रसवपूर्व देखभाल गर्भावस्था का शीघ्र पंजीकरण, नियमित स्वास्थ्य जांच, स्क्रीनिंग एवं उच्च जोखिम वाली गर्भधारण की पहचान, आयरन और फोलिक एसिड, कैल्शियम और विटामिन डी3 जैसे आवश्यक पूरक दवाओं का प्रावधान और जन्म की तैयारी एवं जटिलताओं के प्रबंधन पर परामर्श सुनिश्चित करती है, जिससे समय पर रेफरल एवं जटिलताओं का प्रबंधन संभव हो पाता है।

पिछले तीन वर्षों में संपन्न संस्थागत प्रसवों की संख्या अनुलग्नक II में दी गई है।

यहा जानकारी केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने आज लोकसभा में लिखित उत्तर में दी।

अवसरों के द्वार खोलते हुए: राजमार्ग प्रवेश पोर्टल राष्ट्रीय राजमार्गों पर ईंधन स्टेशनों, रेस्तरां और सड़क किनारे सुविधाओं तक पहुंच पहले से कहीं अधिक आसान बनाता है

नई दिल्ली – कल्पना कीजिए कि आप भारत के किसी व्यस्त राष्ट्रीय राजमार्ग पर पेट्रोल पंप, रेस्तरां या होटल या गेस्ट हाउस स्थापित करने की योजना बना रहे हैं। कुछ समय पहले तक, आवश्यक अनुमति प्राप्त करने की प्रक्रिया में कई कार्यालयों से अनुमति लेना, कागजी कार्रवाई और लंबा इंतजार करना पड़ता था। आज यह प्रक्रिया काफी सरल हो गई है। उन्नत राजमार्ग प्रवेश ऑनलाइन पोर्टल के साथ, राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे निर्माण की अनुमति प्राप्त करना अब पहले से कहीं अधिक तेज़, पारदर्शी और सुविधाजनक हो गया है।

यह प्लेटफॉर्म ईंधन स्टेशनों, सड़क किनारे की सुविधाओं, आवासीय संपत्तियों, विश्राम क्षेत्र परिसरों और राष्ट्रीय राजमार्गों से जुड़ने वाली सड़कों जैसी सुविधाओं के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) प्राप्त करने की प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करने के लिए बनाया गया है । केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी द्वारा हाल ही में लॉन्च किया गया यह पोर्टल, तकनीकी रूप से सक्षम शासन के माध्यम से अधिक दक्षता और पारदर्शिता लाने के सरकारी प्रयासों में एक और कदम है।

कई स्वीकृतियों को एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाकर, उन्नत राजमार्ग प्रवेश का उद्देश्य व्यवसायों, संगठनों और नागरिकों के लिए भारत के विस्तारित राजमार्ग नेटवर्क को सहारा देने वाले बुनियादी ढांचे का विकास करना आसान बनाना है। अब निजी संपत्तियों, उद्योगों और सड़क किनारे की सुविधाओं के लिए राजमार्गों से पहुंच सम्बंधी अनुमतियों के लिए कुछ ही क्लिक में ऑनलाइन आवेदन किया जा सकता है।

इसी माध्यम से सरकार और निजी दोनों पक्ष राष्ट्रीय राजमार्गों के समानांतर या उसके पार पानी और गैस पाइपलाइन, ऑप्टिकल फाइबर केबल और बिजली की लाइनें जैसी महत्वपूर्ण उपयोगिताओं को बिछाने के लिए अनुमोदन प्राप्त कर सकते हैं।

आवेदन प्रणाली के डिजिटलीकरण के साथ, सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय का लक्ष्य जवाबदेही को केंद्र में रखते हुए प्रक्रिया को अधिक समयबद्ध और कुशल बनाना है। ऑनलाइन पोर्टल से कागजी कार्रवाई में उल्लेखनीय कमी आने, आवेदनों की ट्रैकिंग सक्षम होने और देरी कम होने की उम्मीद है, इससे हितधारकों के लिए बहुमूल्य समय और परिचालन लागत की बचत होगी। उन्नत राजमार्ग प्रवेश पोर्टल से राजमार्ग क्षेत्र में डिजिटल शासन को और मजबूत करने के साथ-साथ वास्तविक समय ट्रैकिंग के माध्यम से अधिकारियों और आवेदकों के बीच समन्वय में सुधार होने और प्रक्रिया को अधिक सुगम बनाने की आशा है।

अनुमतियों और एनओसी के लिए एकल खिड़की समाधान के रूप में मार्ग प्रवेश

देश का राष्ट्रीय राजमार्ग नेटवर्क 1.46 लाख किलोमीटर से अधिक तक फैल चुका है और सड़कें केवल स्थानों को जोड़ने से कहीं अधिक कार्य कर रही हैं। ये सड़कें नए व्यवसायों, बेहतर सेवाओं और मजबूत बुनियादी ढांचे के विकास के द्वार खोल रही हैं। इन सुविधाओं के निर्माण और उपयोग को आसान बनाने के लिए, राजमार्ग प्रवेश पोर्टल राष्ट्रीय राजमार्गों से सम्बंधित पहुंच अनुमतियोंमार्ग अधिकार अनुमतियों और राष्ट्रीय राजमार्ग स्वीकृति प्रमाणपत्रों के लिए एक ही स्थान पर सभी समाधान उपलब्ध कराने वाला डिजिटल मंच है।

राजमार्ग प्रवेश पोर्टल पर आवेदन के प्रकार :

• वाणिज्यिक प्रतिष्ठान – राष्ट्रीय राजमार्गों के किनारे पेट्रोल पंप, रेस्तरां, ढाबे और विश्राम क्षेत्र स्थापित करने की योजना बना रहे व्यवसाय पोर्टल के माध्यम से आवश्यक अनुमतियों के लिए आवेदन कर सकते हैं।

• अवसंरचना तक पहुंच – उद्योग, आवासीय क्षेत्र और निजी भूस्वामी अपनी संपत्तियों को पास के राष्ट्रीय राजमार्गों से जोड़ने वाली संपर्क सड़कों के लिए अनुमोदन प्राप्त कर सकते हैं।

• मार्गवर्ती सुविधाएं – यह प्लेटफॉर्म विश्राम केंद्रों और विशेष लॉजिस्टिक्स सुविधाओं के विकास के लिए आवेदन का समर्थन करता है जो यात्रियों और माल ढुलाई के लिए सुविधा को बढ़ाते हैं।

• आवश्यक सुविधाओं का विस्तार – राजमार्ग गलियारों के साथ भूमिगत जल पाइपलाइन, गैस पाइपलाइन, ऑप्टिकल फाइबर केबल और बिजली लाइनें बिछाने के लिए भी अनुमति प्राप्त की जा सकती है।

तब और अब: प्रक्रिया में कैसे बदलाव आया है

पहले, आवेदकों को अक्सर कई फील्ड कार्यालयों में जाना पड़ता था, कागजी कार्रवाई पूरी करनी पड़ती थी और लंबी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता था। इस प्रक्रिया में अक्सर निम्नलिखित शामिल होते थे:

•व्यक्तिगत रूप से कागजी कार्रवाई और फाइलों की आवाजाही
• आवेदनों की स्थिति जानने के लिए सीमित ट्रैकिंग सुविधा, जिसके कारण अक्सर देरी होती है
• खंडित क्षेत्राधिकार प्रबंधन, जहां सही प्राधिकारी की पहचान करने के लिए कभी-कभी अतिरिक्त मेहनत करनी पड़ती है और इससे प्रसंस्करण समय बढ़ जाता है

इससे प्रक्रिया समय लेने वाली और कम पारदर्शी हो गई।

नया डिजिटल प्लेटफॉर्म कई महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है:

• रीयल-टाइम ट्रैकिंगआवेदक 24×7 ऑनलाइन अपनी वर्तमान स्थिति देख सकते हैं ।
• समयबद्ध प्रतिक्रियाएं, इससे यह सुनिश्चित होता है कि अनुमोदन या प्रतिक्रिया एक निर्धारित समय सीमा के भीतर प्रदान की जाए, जिससे अनावश्यक देरी कम होती है।
• पेपरलेस सबमिशन , जहां दस्तावेज़ डिजिटल रूप से अपलोड किए जा सकते हैं और प्रक्रिया शुल्क डिजिटल पेमेंट गेटवे के माध्यम से सुरक्षित रूप से भुगतान किया जा सकता है।
• जवाबदेही सुनिश्चित करने और विवादों के त्वरित समाधान के लिए प्रत्येक कार्रवाई और दस्तावेज़ का पूर्ण ऑडिट ट्रेल।

• सही चेनेज (चेनेज ‘ शब्द का प्रयोग किसी काल्पनिक रेखा, जैसे कि सड़क या रेलवे की केंद्र रेखा, के अनुदिश मीटर में मापी गई दूरी को संदर्भित करने के लिए किया जाता है) और अधिकार क्षेत्र की पहचान करने के लिए जीआईएस-सक्षम ऑटो-डिटेक्शन, डेटा-संचालित निर्णय लेने में सहायता करता है और मैन्युअल त्रुटियों की संभावना को कम करता है।

अपने अनेक लाभों के साथ, उन्नत राजमार्ग प्रवेश ऑनलाइन पोर्टल अब भारत के राजमार्गों के किनारे निर्माण करने वाले सभी लोगों के लिए विचार से लेकर अनुमोदन तक की प्रक्रिया को सुगम बनाने के लिए तैयार है।

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डीआरआई ने ऑपरेशन “व्हाइट हैमर” के तहत आंध्र प्रदेश में अवैध अल्प्राजोलम फैक्ट्री पर छापा

नई दिल्ली – डीआरआई ने ऑपरेशन “व्हाइट हैमर” के तहत आंध्र प्रदेश में अवैध अल्प्राजोलम फैक्ट्री पर छापा मारा; 47 करोड़ रुपये मूल्य की 237 किलोग्राम ड्रग्स और 3.5 टन से अधिक केमिकल जब्त किए गए; दो गिरफ्तार

सिंथेटिक ड्रग्स के अवैध निर्माण पर महत्वपूर्ण कार्रवाई करते हुए, राजस्व आसूचना निदेशालय (डीआरआई) ने आंध्र प्रदेश के एनटीआर जिले के कोंडापल्ली औद्योगिक विकास क्षेत्र में एनडीपीएस अधिनियम, 1985 के अंतर्गत पंजीकृत मनोरोगी पदार्थ अल्प्राजोलम के उत्पादन में लगी एक गुप्त फैसिलिटी का भंडाफोड़ किया है।

खुफिया जानकारी पर आधारित और सुव्यवस्थित रूप से संचालित ऑपरेशन व्हाइट हैमर नामक अभियान 11 और 12 मार्च 2026 को चलाया गया था, जिसमें एक रासायनिक मैन्युफैक्चरिंग इकाई की आड़ में चल रहे अल्प्राजोलम उत्पादन के एक पूर्ण विकसित औद्योगिक सेटअप का खुलासा हुआ।

परिसर की तलाशी के दौरान 237 किलोग्राम अल्प्राजोलम जब्त किया गया, जिसकी बाजार में अनुमानित कीमत 47 करोड़ रुपये है, साथ ही 800 किलोग्राम से अधिक प्रमुख कच्चा माल, कुल 2,860 लीटर के कई केमिकल और औद्योगिक स्तर के उपकरण जैसे रिएक्टर, ड्रायर और सेंट्रीफ्यूज भी जब्त किए गए, जो एक संगठित, बड़े पैमाने पर गुप्त मैन्युफैक्चरिंग सुविधा का संकेत देते हैं।

शुरुआती जांच में पता चला कि इस ऑपरेशन को रसायन और दवा क्षेत्र में 20 वर्षों से अधिक का अनुभव रखने वाले एक केमिस्ट ने अपने सहयोगी के साथ मिलकर अंजाम दिया था। सहयोगी हैदराबाद में कच्चे माल और वितरण का काम करता था। आरोपियों ने अल्प्राजोलम के गुप्त उत्पादन के लिए कारखाने का परिसर किराए पर लिया था। दोनों मुख्य साजिशकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया गया है।

 

मौजूदा वित्त वर्ष के दौरान, डीआरआई ने खुफिया जानकारी पर आधारित अभियानों के माध्यम से आठ गुप्त दवा निर्माण इकाइयों को नष्ट कर दिया है, जो सरकार के नशा मुक्त भारत अभियान के प्रति अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता और समाज और लोगों को मादक और मनोरोगी पदार्थों के खतरे से बचाने के प्रति उसकी प्रतिबद्धता की पुष्टि करता है।

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राँची में जवाहर नवोदय विद्यालय प्रवेश परीक्षा (LEST-XI 2026) के सुचारु एवं शांतिपूर्ण संचालन हेतु 200 मीटर परिधि में निषेधाज्ञा जारी

जवाहर नवोदय विद्यालय प्रवेश परीक्षा, 2026 (LEST-XI 2026)  15 मार्च 2026 को राँची के एक उप-केन्द्र पर आयोजित की जा रही है

 15 मार्च 2026 को प्रातः 6:00 बजे से अपराह्न 8:00 बजे तक निषेधाज्ञा प्रभावी रहेगी

यह निषेधाज्ञा परीक्षा के सुचारु संचालन, छात्रों की सुरक्षा एवं सार्वजनिक शांति बनाए रखने के उद्देश्य से जारी की गई है। उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध BNSS की संबंधित धाराओं के अंतर्गत सख्त कार्रवाई की जाएगी

राँची,14.03.2026 – अनुमंडल दंडाधिकारी, सदर, राँची द्वारा जारी आदेश के अनुसार, जवाहर नवोदय विद्यालय, मेसरा, राँची में कक्षा 11वीं में नामांकन के लिए आयोजित जवाहर नवोदय विद्यालय प्रवेश परीक्षा, 2026 (LEST-XI 2026) दिनांक 15 मार्च 2026 को राँची के एक उप-केन्द्र पर आयोजित की जा रही है।

परीक्षा केन्द्र: Marwari Plus 2 High School, Shaheed Chowk, Ranchi

प्राचार्य, पी.एम. श्री स्कूल, जवाहर नवोदय विद्यालय के पत्रांक-2178, दिनांक 11.01.2026 से प्राप्त सूचना के आधार पर यह परीक्षा निर्धारित है। परीक्षा के दौरान कदाचारमुक्त वातावरण सुनिश्चित करने एवं विधि-व्यवस्था बनाए रखने हेतु उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री एवं अपर जिला दंडाधिकारी, विधि-व्यवस्था, राँची के आदेश ज्ञापांक-451/वि.व्य., दिनांक 14.03.2026 द्वारा पुलिस बल एवं दंडाधिकारी की प्रतिनियुक्ति की गई है।

हालांकि, ऐसी आशंका व्यक्त की गई है कि परीक्षा में शामिल छात्रों, उनके अभिभावकों या असामाजिक तत्वों द्वारा परीक्षा केन्द्र पर भीड़ जमा कर विधि-व्यवस्था भंग करने का प्रयास किया जा सकता है।

इस संदर्भ में, अनुमंडल दंडाधिकारी, सदर, राँची, श्री कुमार रजत ने भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS), 2023 की धारा-163 के अंतर्गत प्रदत्त शक्तियों का प्रयोग करते हुए परीक्षा केन्द्र के 200 मीटर की परिधि में निम्नलिखित निषेधाज्ञा जारी की है, जो *दिनांक 15 मार्च 2026 को प्रातः 6:00 बजे से अपराह्न 8:00 बजे तक प्रभावी रहेगी:

1. पाँच या पाँच से अधिक व्यक्तियों का एक जगह जमा होना (सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों/कर्मचारियों तथा सरकारी कार्यक्रम एवं शवयात्रा को छोड़कर) निषिद्ध।

2. किसी प्रकार के ध्वनि विस्तारक यंत्र (लाउडस्पीकर, माइक आदि) का उपयोग करना निषिद्ध।

3. किसी प्रकार के अस्त्र-शस्त्र (बंदूक, राइफल, रिवॉल्वर, बम, बारूद आदि) लेकर चलना निषिद्ध (सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों/कर्मचारियों को छोड़कर)।

4. किसी प्रकार के हरवे हथियार (लाठी-डंडा, तीर-धनुष, गड़ासा-भाला आदि) लेकर चलना निषिद्ध (सरकारी कार्य में लगे पदाधिकारियों/कर्मचारियों को छोड़कर)।

5. किसी प्रकार की बैठक या आमसभा का आयोजन निषिद्ध।

यह निषेधाज्ञा परीक्षा के सुचारु संचालन, छात्रों की सुरक्षा एवं सार्वजनिक शांति बनाए रखने के उद्देश्य से जारी की गई है। उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध BNSS की संबंधित धाराओं के अंतर्गत सख्त कार्रवाई की जाएगी।

सभी अभिभावकों, छात्रों एवं आम नागरिकों से अपील है कि वे परीक्षा केन्द्र के आसपास अनावश्यक भीड़ न लगाएँ तथा प्रशासन का पूर्ण सहयोग करें ताकि परीक्षा शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके।

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राँची जिला में भारत की जनगणना 2027 के प्रथम चरण (मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना) के लिए त्रिदिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम सफलतापूर्वक सम्पन्न

प्रशिक्षण के दौरान जनगणना 2027 के विभिन्न चरणों, कार्यप्रणाली, डिजिटल उपकरणों (जैसे House Listing Operation Mobile App) के उपयोग तथा CMMS Web Portal पर डाटा प्रबंधन, रीयल-टाइम अपलोड, सत्यापन एवं सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर गहन चर्चा की गई

जनगणना 2027 दो चरणों में आयोजित होगी

यह जनगणना भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें स्व-गणना की सुविधा उपलब्ध होगी

कार्यक्रम का प्रारंभ उपायुक्त-सह-प्रधान जनगणना पदाधिकारी, श्री मंजूनाथ भजंत्री द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर की गई, इस अवसर पर उन्होंने कहा कि जनगणना किसी भी देश के विकास के लिए योजनाओं एवं नीतियों के निर्माण करने के लिए अति महत्वपूर्ण है

रांची,14.03.2026 – भारत की आगामी जनगणना 2027 की तैयारियों के अंतर्गत राँची जिला में प्रथम चरण – मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना – से जुड़े महत्वपूर्ण प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन राँची समाहरणालय, ब्लॉक-बी, कमरा संख्या 505 में दिनांक 12 मार्च 2026 से 14 मार्च 2026 तक किया गया। इस तीन दिवसीय प्रशिक्षण का आज अपराह्न में सफल समापन हुआ।

यह प्रशिक्षण जनगणना कार्य निदेशालय, राँची से आए विशेष प्रशिक्षकों श्री केश्या नायक आर., उप निदेशक तथा श्री संजीव कुमार मांझी, जिला नोडल (जनगणना) द्वारा संचालित किया गया। प्रशिक्षकों ने प्रतिभागियों को व्यावहारिक उदाहरणों, वेब पोर्टल तथा मोबाइल ऐप के माध्यम से मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना की समस्त प्रक्रियाओं का विस्तृत प्रशिक्षण प्रदान किया। साथ ही, स्व-जनगणना (Self-Enumeration) की सुविधा के बारे में भी विस्तार से जानकारी दी गई, जो इस जनगणना की एक प्रमुख विशेषता है।

प्रशिक्षण के दौरान जनगणना 2027 के विभिन्न चरणों, कार्यप्रणाली, डिजिटल उपकरणों (जैसे House Listing Operation Mobile App) के उपयोग तथा CMMS Web Portal पर डाटा प्रबंधन, रीयल-टाइम अपलोड, सत्यापन एवं सुरक्षा जैसे महत्वपूर्ण बिंदुओं पर गहन चर्चा की गई। यह जनगणना पूरी तरह डिजिटल होगी, जिसमें टैबलेट/मोबाइल आधारित ऐप के जरिए डेटा संग्रहण किया जाएगा, ताकि सटीकता, गति और पारदर्शिता सुनिश्चित हो सके।

कार्यक्रम में श्री रामनारायण सिंह, अपर समाहर्ता, राँची, श्री सुदर्शन मुर्मू, अपर समाहर्ता (नक्सल), श्री कुमार रजत, अनुमंडल पदाधिकारी, सदर राँची, श्री किस्टो कुमार बेसरा, अनुमंडल पदाधिकारी, बुण्डू,श्री संजय भगत, परियोजना निदेशक, आई०टी०डी०ए०, श्री शेषनाथ बैठा, जिला सांख्यिकी पदाधिकारी, श्रीमती मनीषा तिर्की, कार्यपालक दण्डाधिकारी, श्री रविशंकर मिश्रा, सहायक निदेशक-सह-मास्टर ट्रेनर,
तथा सभी संबंधित सांख्यिकी कर्मी, सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी (राँची) एवं सम्बंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।

प्रशिक्षण के समापन पर श्री शेषनाथ बैठा, जिला सांख्यिकी पदाधिकारी, राँची द्वारा सभी प्रतिभागियों, प्रशिक्षकों एवं उपस्थित अधिकारियों को धन्यवाद ज्ञापित किया गया। उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण जिला स्तर पर जनगणना की तैयारियों को मजबूत बनाने में महत्वपूर्ण कदम है।

जनगणना 2027 दो चरणों में आयोजित होगी:

– प्रथम चरण: मकान सूचीकरण एवं आवास जनगणना (House Listing and Housing Census) – अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच (राज्यों द्वारा निर्धारित 30-दिवसीय अवधि में)

– द्वितीय चरण: जनसंख्या गणना (Population Enumeration) – फरवरी 2027 में (संदर्भ तिथि 1 मार्च 2027)

यह जनगणना भारत की पहली पूर्णतः डिजिटल जनगणना होगी, जिसमें स्व-गणना की सुविधा उपलब्ध होगी। प्रशिक्षण प्राप्त अधिकारी अब अपने-अपने क्षेत्रों में फील्ड कार्य के लिए तैयार हैं, जो आगामी अप्रैल 2026 से शुरू होने वाले प्रथम चरण को सुचारू रूप से क्रियान्वित करने में सहायक सिद्ध होंगे।

जिला प्रशासन ने सभी प्रतिभागियों से अपील की है कि वे प्राप्त ज्ञान का उपयोग कर जनगणना प्रक्रिया को पारदर्शी, सटीक और समयबद्ध बनाएं, ताकि देश के विकास योजनाओं के लिए विश्वसनीय आंकड़े उपलब्ध हो सकें।

जानकारी हो की कार्यक्रम का प्रारंभ उपायुक्त-सह-प्रधान जनगणना पदाधिकारी, श्री मंजूनाथ भजंत्री द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर की गई, इस अवसर पर उन्होंने कहा कि जनगणना किसी भी देश के विकास के लिए योजनाओं एवं नीतियों के निर्माण करने के लिए अति महत्वपूर्ण है।

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मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के तहत, आंगनवाड़ी केन्‍द्रों पर बुनियादी ढांचा सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए विभिन्न कदम उठाए गए

नई दिल्ली – मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के तहत, आंगनवाड़ी केन्‍द्रों (एडब्‍ल्‍यूसी) में बुनियादी सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए अनेक कदम उठाए गए हैं। 15वें वित्त आयोग के चक्र के दौरान, मनरेगा के साथ तालमेल बिठाते हुए 50,000 आंगनवाड़ी केन्‍द्रों का निर्माण किया जा रहा है (हर साल 10,000 केन्‍द्र)। इसमें मनरेगा के तहत 8.00 लाख रुपये, 15वें वित्त आयोग (एफसी) (या किसी अन्य बिना शर्त वाले फंड) के तहत 2.00 लाख रुपये, और एमडब्‍ल्‍यूसीडी द्वारा प्रति केन्‍द्र 2.00 लाख रुपये दिए जाते हैं; यह राशि केन्‍द्र और राज्यों/केन्‍द्र शासित प्रदेशों के बीच तय लागत-बंटवारे के अनुपात में साझा की जाती है।

इसके अलावा, राज्यों/केन्‍द्र शासित प्रदेशों को यह भी सलाह दी गई है कि वे आंगनवाड़ी केन्‍द्रों की इमारतों के निर्माण के लिए विभिन्न योजनाओं, जैसे कि सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास योजना (एमपीलैड), ग्रामीण बुनियादी ढांचा विकास कोष (आरआईडीएफ), पंचायती राज संस्थाओं के लिए वित्त आयोग के अनुदान, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के बहु-क्षेत्रीय विकास कार्यक्रम (एमएसडीपी) आदि से फंड लेना जारी रखें।

आदिवासी आबादी के लक्षित विकास के लिए पीएम जनमन और ‘धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान’ के तहत, तथा उत्तरी सीमावर्ती क्षेत्रों पर केन्‍द्रित ‘वीवीपी (वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम) – चरण I’ के अंतर्गत, आंगनवाड़ी केन्‍द्रों (एडब्‍ल्‍यूसी) के निर्माण के लिए कई अन्य पहलें की गई हैं।

इसके अलावा, आंगनवाड़ी केन्‍द्रों पर बुनियादी ढांचा सुविधाओं को बेहतर बनाने के लिए मंत्रालय द्वारा कई कदम उठाए गए हैं; इनमें अन्य बातों के साथ-साथ, आंगनवाड़ी केन्‍द्रों में पीने के पानी की सुविधाओं और शौचालयों के लिए मिलने वाली धनराशि को क्रमशः 10,000 रुपये से बढ़ाकर 17,000 रुपये और 12,000 रुपये से बढ़ाकर 36,000 रुपये करना शामिल है।

‘मिशन पोषण 2.0’ के तहत, 15वें वित्त आयोग के चक्र में, सरकारी भवनों में स्थित दो लाख आंगनवाड़ी केन्‍द्रों (प्रति वर्ष 40,000 की दर से) को बेहतर पोषण प्रदान करने और ‘प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा’ (ईसीसीई) के लिए ‘सक्षम आंगनवाड़ी’ के रूप में सुदृढ़ किया जा रहा है। पारंपरिक आंगनवाड़ी केन्‍द्रों की तुलना में सक्षम आंगनवाड़ियों को बेहतर बुनियादी ढांचा प्रदान किया जाता है, जिसमें एलईडी स्क्रीन, जल-छनन प्रणाली, ‘पोषण वाटिका’, र्ईसीसीई सामग्री और ‘बिल्डिंग एज़ लर्निंग एड’ (बीएएलए) पेंटिंग्स शामिल हैं।

शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा और साक्षरता विभाग के साथ मिलकर, ईसीसीई और बुनियादी साक्षरता और संख्या ज्ञान (एफएलएन) सेवाओं को मज़बूत करने के लिए, सरकारी प्राथमिक स्कूलों के परिसर में ही आंगनवाड़ी केन्‍द्रों (एडब्‍ल्‍यूसी) को स्थापित करने के संबंध में दिशानिर्देश 3 सितम्‍बर, 2025 को संयुक्त रूप से जारी किए गए हैं। जिन स्थानों पर भौतिक रूप से एक ही परिसर में स्थापित करना संभव नहीं है, वहाँ आंगनवाड़ी केन्‍द्रों को निकटतम प्राथमिक स्कूल के साथ जोड़ा जाएगा।

ख. मिशन सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 एक केन्‍द्र प्रायोजित योजना है। इस योजना का कार्यान्वयन राज्य सरकारों और केन्‍द्र शासित प्रदेशों के प्रशासनों के दायरे में आता है। कार्यरत आंगनवाड़ी केन्‍द्रों का राज्य और केन्‍द्र शासित प्रदेश-वार विवरण, साथ ही उनमें नामांकित लाभार्थियों की संख्या, इस लिंक पर उपलब्ध है: https://www.poshantracker.in/statistics

(ग) आँगनवाड़ी केन्‍द्रों (एडब्‍ल्‍यूसी), आँगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और लाभार्थियों की निर्धारित संकेतकों पर निगरानी और ट्रैकिंग की सुविधा के लिए पोषण ट्रैकर एप्लिकेशन को एक महत्वपूर्ण शासन उपकरण के रूप में लागू किया गया है। बच्चों में स्टंटिंग (नाटापन), वेस्टिंग (दुबलापन) और कम वजन की व्यापकता की गतिशील पहचान के लिए पोषण ट्रैकर की तकनीक का लाभ उठाया जा रहा है। इसने आँगनवाड़ी सेवाओं जैसे—केन्‍द्रों का खुलना, बच्चों की दैनिक उपस्थिति, ईसीसीई गतिविधियाँ, बच्चों की वृद्धि निगरानी, गर्म पका हुआ भोजन और टेक होम राशन का प्रावधान आदि के लिए वास्तविक समय के करीब डेटा संग्रह की सुविधा प्रदान की है।

सेवा वितरण की अंतिम छोर तक ट्रैकिंग के लिए, महिला एवं बाल विकास मंत्रालय ने टेक-होम राशन के वितरण के लिए चेहरा पहचान प्रणाली विकसित की है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि लाभ केवल पोषण ट्रैकर में पंजीकृत लक्षित लाभार्थी को ही उनकी पहचान स्थापित होने के बाद दिया जाए।

‘सक्षम आँगनवाड़ी और मिशन पोषण 2.0’ के तहत सभी गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और किशोरियों को टेक-होम राशन की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए पोषण ट्रैकर में ‘नॉमिनी मॉड्यूल’ शुरू किया गया है। यदि किसी कारणवश पंजीकृत लाभार्थी (गर्भवती महिला, स्तनपान कराने वाली माता और किशोरी) एफआरएस के माध्यम से अपना टीएचआर प्राप्त करने के लिए आँगनवाड़ी केन्‍द्र जाने में असमर्थ है, तो वह अपनी ओर से टीएचआर प्राप्त करने के लिए एक नामांकित व्यक्ति को नामित कर सकती है। नामांकित व्यक्ति को केवल एक बार ई-केवाईसी करानी होगी। लेकिन लाभार्थी की ओर से टीएचआर प्राप्त करने के लिए हर बार चेहरा मिलान किया जाएगा। नॉमिनी जोड़ने के बाद भी, यदि नॉमिनी ने राशन प्राप्त नहीं किया है, तो लाभार्थी स्वयं आँगनवाड़ी केंद्र पर जाकर टीएचआर प्राप्त कर सकती है।

यह जानकारी महिला एवं बाल विकास केंद्रीय मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में दी।

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केंद्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया मध्य प्रदेश के गुना जिले के उमरी गांव में फिजीटल सेवाओं के लिए प्रायोगिक परियोजना ‘समृद्ध ग्राम’ का उद्घाटन करेंगे

नई दिल्ली – केंद्रीय संचार और पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एमसिंधिया, 14 मार्च को मध्य प्रदेश के गुना जिले के उमरी गांव में समृद्धि केंद्र का उद्घाटन करेंगे। यह केंद्र एकीकृत फिजीटल (भौतिक + डिजिटल) सेवा केंद्र है, जिसे दूरसंचार विभाग की समृद्ध ग्राम फिजीटल सेवा प्रायोगिक पहल के अंतर्गत स्थापित किया गया है।

केंद्रीय मंत्री इस अवसर पर प्रमुख सेवाओं के प्रदर्शन की समीक्षा भी करेंगे; स्थानीय लाभार्थियों से बातचीत करेंगे; और स्वास्थ्य जांच तथा मोतियाबिंद जागरूकता अभियान का उद्घाटन करेंगे। इसके अलावा, वे इस अवसर पर जनसभा को भी संबोधित करेंगे।

इस पहल का उद्देश्य यह दिखाना है कि ‘भारतनेट’ के अंतर्गत निर्मित उच्च-गति वाले डिजिटल बुनियादी ढांचे का उपयोग किस प्रकार गांव-स्तर पर नागरिकों को एकीकृत सेवाएं प्रदान करने के लिए किया जा सकता है। गौरतलब है कि भारतनेट दुनिया के सबसे बड़े ग्रामीण ब्रॉडबैंड कार्यक्रमों में से एक है।

उमरी गांव में शुरू की गई ‘समृद्ध ग्राम प्रायोगिक परियोजना’ यह दर्शाती है कि किस प्रकार एकीकृत सेवाएं ग्रामीण क्षेत्रों में सामाजिक-आर्थिक विकास को गति प्रदान कर सकती हैं। ये सेवाएं ‘समृद्धि केंद्र’ के माध्यम से उपलब्ध कराई जाती हैं, जो पंचायत भवन में स्थित ‘वन-स्टॉप हब’ (एक ही जगह पर सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने वाला केंद्र) है। यह केंद्र कई क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार की सेवाएं प्रदान करता है, जिनमें शामिल हैं: शिक्षा और कौशल विकास, कृषि, स्वास्थ्य और टेलीमेडिसिन, ई-गवर्नेंस, वित्तीय समावेशन तथा ई-कॉमर्स, कनेक्टिविटी एवं डिजिटल पहुंच, तथा निगरानी और सुरक्षा।

उमरी बड़ी प्रायोगिक परियोजना का हिस्सा है, जिसमें दो और गाँव शामिल हैं – गुंटूर ज़िले (आंध्र प्रदेशका नारकोदुरु और मुज़फ़्फ़रनगर ज़िले (उत्तर प्रदेश) का चौरवाला। ये गाँव अलग-अलग तरह की आबादी वाले हैं – हर समृद्धि केंद्र अपने आस-पास के 5 किलोमीटर के दायरे में आने वाले कई गाँवों को सेवाएँ देता है।

इस परियोजना को दूरसंचार विभाग, डिजिटल सशक्तिकरण प्रतिष्ठान (डीईएफ) के सहयोग से लागू कर रहा है। डीईएफ इस परियोजना में ज़मीनी स्तर पर काम करने और लोगों को जोड़ने वाले साझेदार की भूमिका निभा रहा है।

‘समृद्ध ग्राम फ़िजिटल सर्विसेज़ पायलट’ से यह सीखने को मिलने की उम्मीद है कि BharatNet कनेक्टिविटी का इस्तेमाल करके, सेवाओं को एक साथ पहुँचाने वाले मॉडल कैसे बनाए जा सकते हैं।

इस परियोजना का उद्देश्य ऐसा मॉडल तैयार करना है जिसे दोहराया जा सके। इस मॉडल के ज़रिए कनेक्टिविटी, सेवा पहुँचाने वाले प्लेटफ़ॉर्म और लोगों की भागीदारी को एक साथ लाकर, गाँवों में डिजिटल सेवाओं की संपूर्ण प्रणाली को मज़बूत बनाया जाएगा।

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हर समय हर वक्त सच के साथ

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