प्रथम चरण के अंतर्गत होगा मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य
प्रथम चरण दो भागों में विभाजित, 1-15 मई 2026 तक स्व-गणना (Self Enumeration) एवं 16 मई से 14 जून 2026 तक होगा मकान सूचीकरण एवं घर-घर गणना कार्य
रांची जिला में जनगणना कार्य के संपादन हेतु 4232 पदाधिकारियों/कर्मियों की प्रतिनियुक्ति
नागरिकों को सुविधा प्रदान करने हेतु स्व-गणना की व्यवस्था
नागरिक ऑनलाइन पोर्टल (se.census.gov.in) पर स्वयं कर सकते हैं अपना विवरण दर्ज
जनगणना से संबंधित किसी भी प्रकार की जानकारी या सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर 1855 उपलब्ध
प्रधान जनगणना पदाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री की जिलेवाासियों से अपील, जनगणना में सक्रिय भागीदारी निभाएँ, सही जानकारी उपलब्ध कराएँ
रांची,30.04.2026 – हमारी जनगणना, हमारा विकास के मूल मंत्र के साथ आगामी जनगणना-2027 के प्रथम चरण की तैयारियाँ पूरी हो चुकी हैं। प्रथम चरण के अंतर्गत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य जिला में निर्धारित समयावधि के अनुसार संपन्न किया जाएगा। इस संबंध में प्रधान जनगणना पदाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये गये हैं।
चार हजार से ज्यादा पदाधिकारियों/कर्मियों की प्रतिनियुक्ति
रांची जिला में जनगणना कार्य के संपादन हेतु 4232 पदाधिकारियों/कर्मियों की प्रतिनियुक्ति की गयी है, साथ ही संबंधित पदाधिकारियों एवं क्षेत्र प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण भी पूर्ण हो चुका है। 4134 प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को नियुक्त किया गया है, जिनमें महिला प्रगणकों और पर्यवेक्षकों की संख्या 1727 और पुरुष प्रगणकों और पर्यवेक्षकों की संख्या 2407 है।
प्रथम चरण दो भागों में विभाजित
जनगणना-2027 के प्रथम चरण को दो भागों में विभाजित किया गया है। 1 मई से 15 मई 2026 तक स्व-गणना (सेल्फ इनुमेरिशन) एवं 16 मई से 14 जून 2026 तक मकान सूचीकरण एवं घर-घर गणना कार्य पूर्ण किया जायेगा। इस अवधि में जिला के प्रत्येक क्षेत्र के हर मकान का विस्तृत विवरण दर्ज किया जाएगा।
स्व-गणना (Self Enumeration) की प्रक्रिया
नागरिकों को सुविधा प्रदान करने हेतु स्व-गणना की व्यवस्था की गई है। स्व-गणना की अवधि 1 मई से 15 मई 2026 निर्धारित है। यह प्रक्रिया ऐच्छिक है, अनिवार्य नहीं। नागरिक ऑनलाइन पोर्टल (se.census.gov.in) पर जाकर स्वयं अपना विवरण दर्ज कर सकते हैं। नागरिक को स्व-गणना के बाद प्राप्त SE-ID को सुरक्षित रखना होगा। जिसे प्रगणक के घर आने पर साझा करना होगा। यदि कोई व्यक्ति स्व-गणना नहीं करता है, तो भी चिंता की आवश्यकता नहीं है। प्रगणक निर्धारित अवधि में घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करेंगे।
मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना (House Listing & Housing Census)
16 मई से 14 जून 2026 के बीच प्रगणक प्रत्येक घर का दौरा करेंगे। इस दौरान मकान का विवरण, घर की स्थिति, उपलब्ध सुविधाएँ एवं अन्य मूलभूत जानकारी दर्ज की जाएगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रत्येक परिवार का सही और पूर्ण विवरण दर्ज हो।
गोपनीयता और सुरक्षा की गारंटी
जनगणना से संबंधित सभी सूचनाओं की गोपनीयता सुनिश्चित की गई है। जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत सभी जानकारी पूर्णतः गोपनीय रखी जाती है। डेटा सुरक्षित सर्वर पर एन्क्रिप्टेड रूप में संग्रहित किया जाता है। प्रकाशित रिपोर्ट में केवल सामूहिक आँकड़े ही प्रदर्शित किए जाते हैं। किसी भी व्यक्ति का नाम या व्यक्तिगत जानकारी साझा नहीं की जाती। इस जानकारी का उपयोग टैक्स, पुलिस या किसी जांच कार्य में नहीं किया जाता है।
नागरिकों के लिए सहायता
जनगणना से संबंधित किसी भी प्रकार की जानकारी या सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर उपलब्ध है। हेल्पलाइन नंबर – 1855 है।
जनभागीदारी का आह्वान
जनगणना एक राष्ट्रीय दायित्व है, जो देश के विकास की आधारशिला तैयार करता है। प्रधान जनगणना पदाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा जिला के नागरिकों से अपील की गयी है कि वे इसमें सक्रिय भागीदारी निभाएँ और सही जानकारी उपलब्ध कराएँ।
वृद्धजनों की देखभाल और चिकित्सा व्यवस्था पर दिया विशेष ध्यान, अस्वस्थ वृद्धों के तत्काल इलाज के दिए निर्देश
संत मदर टेरेसा क्लिनिक का भी गहन निरीक्षण किया, जहाँ क्लिनिक में उपलब्ध दवाओं, चिकित्सा सुविधाओं और इलाज की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी ली
“वृद्ध आश्रम में रहने वाले बुजुर्ग हमारे समाज के अनुभवी नागरिक हैं। उनकी देखभाल, आरामदायक आवास, पौष्टिक भोजन और समय पर चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करना हमारा नैतिक दायित्व है:- जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री
रांची,30.04.2026 – जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने आज बिहार समाज कल्याण संस्थान (ओल्ड एज होम) कुलगु पिस्का नगड़ी पहुंच कर बुजुर्गों से मिलकर उनका हाल जाना। निरीक्षण के दौरान उन्होंने वृद्ध आश्रम में रहने वाले बुजुर्गों की रहने की व्यवस्था, भोजन, स्वच्छता तथा चिकित्सा सुविधाओं का जायजा लिया।
इस दौरान जिला जन संपर्क पदाधिकारी राँची, श्रीमती उर्वशी पाण्डेय एवं आश्रम के केयर टेकर उपस्थित थे।
उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने आश्रम परिसर में एक-एक कर सभी रूम, किचन, डाइनिंग एरिया और कैंपस का विस्तृत निरीक्षण किया। उन्होंने संत मदर टेरेसा क्लिनिक का भी गहन निरीक्षण किया, जहाँ उन्होंने क्लिनिक में उपलब्ध दवाओं, चिकित्सा सुविधाओं और इलाज की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी ली।
बुजुर्गों का उचित चिकित्सा उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश
निरीक्षण के दौरान उपायुक्त को सूचना मिली कि वृद्ध आश्रम में दो बुजुर्ग अस्वस्थ हैं और उन्हें वृद्धावस्था से संबंधित बीमारियाँ हैं। इस पर श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने तत्काल सिविल सर्जन सदर को निर्देश देते हुए कहा कि दोनों बुजुर्गों का उचित चिकित्सा उपचार सुनिश्चित किया जाए और उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर निरंतर नजर रखी जाए।
उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा, “वृद्ध आश्रम में रहने वाले बुजुर्ग हमारे समाज के अनुभवी नागरिक हैं। उनकी देखभाल, आरामदायक आवास, पौष्टिक भोजन और समय पर चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करना हमारा नैतिक दायित्व है।
निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने आश्रम प्रबंधन को निर्देश दिए कि:
सभी कमरों में स्वच्छता और वेंटिलेशन का पूरा ध्यान रखा जाए
किचन और डाइनिंग एरिया में बेहतर स्वच्छता एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन की व्यवस्था हो
क्लिनिक में नियमित एएनएम की उपस्थिति और पर्याप्त दवाओं का स्टॉक बना रहे।
बुजुर्गों की स्वास्थ्य जांच नियमित रूप से की जाए।
किसी भी आपात स्थिति में तत्काल अस्पताल रेफर करने की व्यवस्था रखी जाए
बिहार समाज कल्याण संस्थान (ओल्ड एज होम) कुलगु पिस्का नगड़ी में वर्तमान में कई वृद्धजन रह रहे हैं, जिन्हें आश्रम द्वारा आवास, भोजन और आधारभूत सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।
उपायुक्त सह जिला निर्वाचन पदाधिकारी राँची, श्री मंजूनाथ भजंत्री ने किया निरीक्षण
भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराने का निर्देश
30.04.2026 – उपायुक्त सह जिला निर्वाचन पदाधिकारी राँची, श्री मंजूनाथ भजंत्री ने आज दिनांक 30 अप्रैल 2026 को नगड़ी स्थित ईवीएम वेयर हाउस का मासिक (बाह्य) निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उप निर्वाचन पदाधिकारी, रांची श्री विवेक कुमार सुमन एवं अन्य संबंधित कर्मी उपस्थित थे।
ईवीएम वेयर हाउस के निरीक्षण के दौरान उपायुक्त सह जिला निर्वाचन पदाधिकारी राँची, श्री मंजूनाथ भजंत्री ने उप निर्वाचन पदाधिकारी को भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिये।
जानकारी हो की निर्धारित समय पर इवीएम वेयर हाउस की स्थिति का निरीक्षण कर रख-रखाव, सुरक्षा एवं तकनीकी उपकरणों की स्थिति से संबंधित रिपोर्ट राज्य निर्वाचन विभाग को समर्पित करना होता है।
30.04.2026 – गोरेगाँव (मुम्बई) स्थित दादा साहेब फाल्के चित्रनगरी, फिल्म सिटी स्टूडियो में भारतीय सिनेमा के पितामह दादा साहेब फाल्के की 156 वीं जन्म जयंती के अवसर पर फिल्मसिटी स्टूडियो प्रबंधन द्वारा आयोजित भव्य समारोह में दादा साहेब फाल्के के ग्रैंडसन चंद्रशेखर पुसलकर अपने परिवार के अन्य सदस्यों के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस समारोह में भारतीय फिल्म जगत से जुड़ी संस्थाओं के प्रतिनिधियों, बॉलीवुड के नामचीन शख्सियतों व महाराष्ट्र सरकार के प्रशासनिक पदाधिकारियों के अलावा देश के अन्य राज्यों से आये लोगों ने भारतीय सिनेमा के पितामह दादा साहेब फाल्के की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और आदरांजलि अर्पित की।
भारतीय सिनेमा के जन्मदाता दादा साहब ने फिल्म इंडस्ट्री में अपने 19 साल के करियर में 121 फिल्में बनाई, जिसमें 26 शॉर्ट फिल्में शामिल हैं। दादा साहेब सिर्फ एक निर्देशक ही नहीं बल्कि एक मशहूर निर्माता और स्क्रीन राइटर भी थे। उनकी आखिरी मूक फिल्म ‘सेतुबंधन’ थी और आखिरी फीचर फिल्म ‘गंगावतरण’ थी। उनका निधन 16 फरवरी 1944 को नासिक में हुआ था। उनके सम्मान में भारत सरकार ने 1969 में ‘दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड’ देना शुरू किया। यह भारतीय सिनेमा का सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार है। सबसे पहले यह पुरस्कार पाने वाली देविका रानी चौधरी थीं। 1971 में भारतीय डाक विभाग ने दादा साहेब फाल्के के सम्मान में एक डाक टिकट भी जारी किया।
व्यक्तिगत जीवन …….*
भारतीय सिनेमा के जन्मदाता दादा साहेब फाल्के का जन्म 30 अप्रैल 1870 को बंबई प्रेसीडेंसी के त्रिंबक में एक मराठी परिवार में धुंडिराज फाल्के के रूप में हुआ था। धुंडीराज फाल्के के पिता गोविंद सदाशिव फाल्के एक संस्कृत विद्वान और हिंदू पुजारी थे। उनकी मां द्वारकाबाई एक गृहिणी थीं। फाल्के ने अपनी प्राथमिक स्कूली शिक्षा त्र्यंबकेश्वर में और मैट्रिक की पढ़ाई बॉम्बे में पूरी की। 1885 में फाल्के ने सर जेजे स्कूल ऑफ आर्ट्स, बॉम्बे से एक साल का ड्राइंग कोर्स पूरा किया। इसके बाद वह बड़ौदा के महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय में कला भवन में शामिल हो गए और 1890 में तेल चित्रकला और जल रंग चित्रकला में पाठ्यक्रम पूरा किया। वह वास्तुकला और मॉडलिंग में भी सक्षम थे। फाल्के ने उसी वर्ष एक फिल्म कैमरा खरीदा और फोटोग्राफी, मुद्रण और प्रसंस्करण के साथ प्रयोग करना शुरू किया।
करियर की शुरुआत………..*
कला भवन के उपकरणों का उपयोग करने की अनुमति मिलने पर उन्होंने एक फोटो स्टूडियो स्थापित किया जिसे श्री फाल्के एनग्रेविंग एंड फोटो प्रिंटिंग के नाम से जाना जाता है। प्रारंभिक चरण में असफल होने के बाद उन्होंने नाटक संगठनों के लिए मंच पर काम करते हुए प्रगति की। एसोसिएशन को इसके फायदे भी मिले। फाल्के को उनके नाटकों में छोटी-छोटी भूमिकाएं मिलने लगीं। उन्होंने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के लिए एक फोटोग्राफर के रूप में भी कुछ समय बिताया। 1912 में फाल्के ने एक व्यापक पद संभाला जहां उन्होंने फिल्म की शूटिंग के लिए एक छोटा सा कांच का स्थान बनाया। उन्होंने फिल्मों को संसाधित करने की योजना के साथ एक अंधेरे कमरे की भी पूर्व-व्यवस्था की। कुछ चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से गुजरने के बाद फाल्के ने पहली फिल्म ‘राजा हरिश्चंद्र’ बनाई जिसका प्रीमियर बॉम्बे के ओलंपिया थिएटर में हुआ। यह एक ऐसी फिल्म थी जिसने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन किया और फिल्म उद्योग की स्थापना की।
भारतीय सिनेमा में फीमेल आर्टिस्ट को दिए रोल ………*
जब अंग्रेज भारत में पश्चिमी फिल्में दिखा रहे थे तो फाल्के ने भारतीयों को अपनी जड़ों से जोड़ने के लिए पौराणिक कथाओं को एक उपकरण के रूप में शामिल किया जो एक आसान लेकिन प्रगतिशील कदम था। जब फाल्के ने राजा हरिश्चंद्र बनाई तो एक महिला अभिनेता का सामान्य विचार समाज के लिए अभिशाप था। उन्हें राजा हरिश्चंद्र की पत्नी, रानी तारामती की भूमिका निभाने के लिए एक आदमी (अन्ना सालुंके) को प्रोजेक्ट करने की जरूरत थी।
किसी भी स्थिति में उन्होंने अपनी दूसरी मूक फिल्म मोहिनी भस्मासुर (1913) में इसे सही किया जब उन्होंने दुर्गाबाई कामत को पार्वती की भूमिका और उनकी किशोर बेटी कमलाबाई गोखले को मोहिनी की भूमिका की पेशकश की। कामत जो एकल माता-पिता थे को यह भूमिका निभाने के लिए उनके समाज द्वारा अस्वीकार कर दिया गया था। लेकिन उन्होंने महिलाओं के लिए फिल्मों में मुख्य भूमिका निभाना संभव बना दिया। वर्षों बाद फाल्के ने लंका दहन (1917) और श्री कृष्ण जन्म (1918) में अपनी बेटी मंदाकिनी फाल्के को कास्ट किया। फाल्के की पत्नी सरस्वतीबाई ने भी भारतीय फिल्म में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह भारत की पहली फिल्म संपादक थीं जिन्होंने ‘राजा हरिश्चंद्र’ जैसी फिल्मों में काम किया। भारतीय सिनेमा का कारोबार आज करीब साढ़े तीन अरब का हो चला है और लाखों लोग इस उद्योग में लगे हुए हैं लेकिन दादा साहब फाल्के ने महज 20-25 हजार की लागत से इसकी शुरुआत की थी। आज भले ही दादा साहेब फाल्के हमारे बीच नहीं हैं लेकिन आज भी उनका संदेश व उनके संघर्षों को बयां करते पदचिन्ह, भारतीय फिल्म जगत के फिल्मकारों को कर्मपथ पर धैर्य के साथ अग्रसर रहने के लिए सदैव प्रेरित करता है और युगों युगों तक करता रहेगा।
30.04.2026 – बॉलीवुड के चर्चित डायरेक्टर अनिल शर्मा के सबसे छोटे भाई कपिल कौस्तुभ शर्मा के भतीजे की शादी में शामिल होने के बाद से अभिनेत्री अनन्या दत्ता इन दिनों सुर्खियों में हैं। कपिल कौस्तुभ शर्मा और अनन्या ने साथ मिलकर कई प्रोजेक्ट्स में काम किया है, जिनमें से आखिरी एक प्यारी और इमोशनल फ़िल्म ‘ज़िंदगी फिर भी खूबसूरत है’ थी।
अनन्या ने नई दिल्ली में हुई इस शादी में खूब मज़े किए और यहाँ तक कि संगीत सेरेमनी में परफ़ॉर्म भी किया। विदित हो कि अभिनय के अलावा मॉडलिंग और विज्ञापन की दुनिया में भी इन दिनों अनन्या दत्ता एक जाना-पहचाना चेहरा हैं। उन्होंने रैंप वॉक, मॉडलिंग असाइनमेंट और प्रिंट शूट में हिस्सा लिया है।
उन्होंने वीडियोकॉन, क्लोज़-अप, स्प्राइट, थम्स अप, वॉक्सवैगन, नेस्ले, ओनिडा, मारुति ओमनी, कैस्ट्रोल, टेटली टी, वासमोल और डी बीयर्स जैसे बड़े ब्रांड्स के साथ काम किया है। प्रिंट विज्ञापन के क्षेत्र में भी वह कोलगेट, बिसलेरी, VIP, सिटीबैंक, मोटोरोला और IBM जैसे जाने-माने नामों से जुड़ी रही हैं।
उन्होंने L’Oréal, Sabyasachi और Shaina NC जैसे टॉप फैशन डिज़ाइनरों के लिए रैंप वॉक भी किया है, और Femina, Elle और Society जैसी जानी-मानी मैगज़ीन में भी उन्हें जगह मिली है।
नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज उत्तर प्रदेश के हरदोई में 594 किलोमीटर लंबे एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया। भगवान नरसिम्हा की पवित्र भूमि और कुछ किलोमीटर दूर बहने वाली मां गंगा की दिव्य उपस्थिति को नमन करते हुए अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि पूरा क्षेत्र नदी की आध्यात्मिक और पोषणकारी कृपा से धन्य एक तीर्थस्थल है। श्री मोदी ने कहा कि उत्तर प्रदेश को एक्सप्रेसवे का वरदान मिलना स्वयं मां गंगा का आशीर्वाद है और बताया कि कैसे यह एक्सप्रेसवे कुछ ही घंटों में पवित्र स्थलों की यात्रा को संभव बना देगा।
मां गंगा के शाश्वत महत्व और आधुनिक बुनियादी ढांचे के बीच तुलना करते हुए प्रधानमंत्री ने राज्य के विकास में एक्सप्रेसवे की परिवर्तनकारी भूमिका पर बल दिया। इन नवनिर्मित राजमार्गों को विकासशील भारत की जीवनरेखा बताते हुए श्री मोदी ने कहा कि ये आधुनिक जीवनरेखाएं आज भारत के उज्ज्वल भविष्य की घोषणा कर रही हैं।
हाल ही में अपने आध्यात्मिक अनुभवों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में माँ गंगा के निकट उनकी उपस्थिति 24 अप्रैल को बंगाल से लेकर कल और फिर आज सुबह काशी तक आस्था और अवसंरचना विकास का एक अद्भुत संगम है। राज्य सरकार द्वारा एक्सप्रेसवे का नाम माँ गंगा के नाम पर रखने के निर्णय पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए श्री मोदी ने कहा कि यह विकास के प्रति हमारे विजन को दर्शाता है और हमारी विरासत की झलक प्रस्तुत करता है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार ने अवसंरचना निर्माण की गति को अभूतपूर्व रूप से तेज किया है। उन्होंने बताया कि देश के सबसे लंबे हरित गलियारे वाले एक्सप्रेसवे में से एक, गंगा एक्सप्रेसवे, को पांच वर्ष से भी कम समय में पूरा किया गया है। तीव्र गति से आधुनिकीकरण के अपने विजन को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि यह वर्तमान सरकार के काम की गति है! यह वर्तमान सरकार के काम करने का तरीका है।
इस एक्सप्रेसवे के रणनीतिक महत्व को बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि लगभग 600 किलोमीटर लंबा यह मार्ग पश्चिमी उत्तर प्रदेश के वाणिज्यिक केंद्रों को मध्य उत्तर प्रदेश के कृषि प्रधान क्षेत्रों और पूर्वी उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक स्थलों से जोड़ेगा। इससे बारह जिलों के करोड़ों नागरिकों को लाभी मिलेगा। श्री मोदी ने कहा कि गंगा एक्सप्रेसवे सिर्फ एक तेज रफ्तार सड़क नहीं है। यह नई संभावनाओं, नए सपनों और नए अवसरों का द्वार है।
कृषि समुदाय द्वारा सामना की जाने वाली गंभीर चुनौतियों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इन उपजाऊ क्षेत्रों के किसान ऐतिहासिक रूप से अपर्याप्त रसद अवसंरचना और कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं के कारण प्रमुख बाजारों तक पहुंचने में संघर्ष करते रहे हैं। बेहतर कनेक्टिविटी की परिवर्तनकारी क्षमता को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि इससे हमारे किसानों की आय में वृद्धि होगी।
एक्सप्रेसवे के कनेक्टिविटी लाभों पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह उत्तर प्रदेश के एक छोर को दूसरे छोर से जोड़ता है, साथ ही राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की अपार संभावनाओं को भी करीब लाता है, जिसके किनारों पर वाहनों के दौड़ने के साथ-साथ नए औद्योगिक अवसर सृजित होंगे।
एक्सप्रेसवे के साथ उभरते औद्योगिक अवसरों पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हरदोई जैसे जिलों में रणनीतिक रूप से औद्योगिक गलियारों का विकास किया जा रहा है, ताकि फार्मास्यूटिकल्स, वस्त्र, हथकरघा, चमड़े के सामान और हस्तशिल्प जैसे उद्योगों को आकर्षित किया जा सके और युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकें। मुद्रा योजना और ओडीओपी (एक जिला एक उत्पाद) जैसी योजनाओं से सशक्त राज्य के युवाओं की उद्यमशीलता की भावना की प्रशंसा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि लघु उद्योगों और एमएसएमई को बढ़ावा मिल रहा है और बेहतर कनेक्टिविटी उनके लिए नए रास्ते खोलेगी। श्री मोदी ने कहा कि इन सभी से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक बड़े पैमाने पर पहुंच बनेगी। इससे लाखों परिवारों की आय में वृद्धि होगी।
उत्तर प्रदेश के उल्लेखनीय परिवर्तन पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि कभी पिछड़ा और ‘बीमारू’ कहलाने वाला यह राज्य आज एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। राज्य की अपार क्षमता और देश की विशाल युवा आबादी की अपार संभावनाओं के कारण यह एक बहुत बड़ा लक्ष्य है, जिसके लिए उतनी ही बड़ी तैयारी भी की जा रही है। इस जनसांख्यिकीय लाभांश का लाभ उठाने की रणनीति बताते हुए पीएम मोदी ने समझाया कि इस शक्ति का उपयोग यूपी को विनिर्माण केंद्र बनाने के लिए किया जा रहा है, जहां नए उद्योग और कारखाने स्थापित किए जाएंगे, बड़े पैमाने पर निवेश आएगा, आर्थिक प्रगति में तेजी आएगी और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे। उन्होंने कहा कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता बन गया है, जिसका आधा उत्पादन यूपी में होता है।
अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में राज्य की उभरती भूमिका को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने नोएडा में हाल ही में हुए सेमीकंडक्टर परियोजना की आधारशिला रखे जाने का उल्लेख करते हुए कहा कि यह राज्य भविष्य की एआई आधारित अर्थव्यवस्था में अग्रणी बन रहा है।
उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक रणनीतिक संपत्ति बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के दो रक्षा गलियारों में से एक इस राज्य के भीतर से होकर गुजरता है, जहां प्रमुख रक्षा निर्माता इकाइयां स्थापित हैं। उत्तर प्रदेश में ब्रह्मोस मिसाइलों जैसी विश्व स्तर पर प्रशंसित प्रणालियों के निर्माण का उल्लेख करते हुए श्री मोदी ने कहा कि उत्तर प्रदेश का औद्योगिक विकास आज भारत के लिए एक रणनीतिक शक्ति बन रहा है।
उन्होंने राज्य में कनेक्टिविटी के व्यापक विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि पहले जहां बहुत कम हवाई अड्डे थे, आज 21 हवाई अड्डें संचालित हो रहे हैं, जिनमें 5 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे शामिल हैं। उन्होंने नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का भी उल्लेख किया, जो गंगा एक्सप्रेसवे कॉरिडोर से कुछ ही घंटों की दूरी पर है।
उत्तर प्रदेश के अतीत और वर्तमान की तुलना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि एक पिछला दौर था, जब राज्य अपराध और अराजकता से जुड़ा था, लेकिन आज कानून-व्यवस्था एक मिसाल बन गई है। श्री मोदी ने कहा कि अब उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था का उदाहरण पूरे देश में दिया जाता है।
भारत की व्यापक सभ्यतागत और आर्थिक महत्वाकांक्षाओं के संदर्भ में उत्तर प्रदेश के विकास को रखते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्य का परिवर्तन राष्ट्र के मूल संकल्प को साकार करता है। श्री मोदी ने कहा कि आज पूरा देश एक ही संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है – विकसित भारत का संकल्प! इस संकल्प को पूरा करने में उत्तर प्रदेश की एक महत्वपूर्ण भूमिका है।
वैश्विक अस्थिरता और भारत के उदय के बाहरी विरोध को स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री ने बाहरी खतरों के बावजूद विकास के प्रति राष्ट्र की अटूट प्रतिबद्धता की पुष्टि की। श्री मोदी ने कहा कि हम न केवल सुरक्षित हैं, बल्कि विकास की नई उपलब्धियां भी हासिल कर रहे हैं। हम आत्मनिर्भर भारत अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं। हम अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे का निर्माण कर रहे हैं।
गंगा एक्सप्रेसवे को इस व्यापक विकास प्रतिमान का प्रतीक बताते हुए प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में उत्तर प्रदेश के लोगों पर भरोसा जताया कि वे उभरते अवसरों को वास्तविक समृद्धि में बदल देंगे। श्री मोदी ने कहा कि मुझे विश्वास है कि गंगा एक्सप्रेसवे जो अवसर लेकर आएगा, उत्तर प्रदेश के लोग उन अवसरों को अपनी कड़ी मेहनत और प्रतिभा से साकार कर देंगे।
नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज काशी स्थित बाबा विश्वनाथ मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना की, जहां उन्होंने देशवासियों के सुख, समृद्धि और आरोग्यपूर्ण जीवन के लिए कामना की।
“हर हर महादेव!
काशी में बाबा विश्वनाथ मंदिर में दर्शन और पूजन का सौभाग्य मिला। यहां भगवान भोलेनाथ से समस्त देशवासियों के लिए सुख-समृद्धि और आरोग्यपूर्ण जीवन की कामना की।
माँ अन्नपूर्णा एवं माँ गंगा के दर्शन से असीम शांति मिली। उनकी कृपा से हर किसी में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो !
नई दिल्ली – उत्तर क्षेत्र के मुख्य आयकर आयुक्त (अंतर्राष्ट्रीय कर) ने आज नई दिल्ली में ‘सीमाओं को जोड़ना, विश्वास का निर्माण’ शीर्षक से एक व्यापक जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित किया। इस जनसंपर्क कार्यक्रम का उद्देश्य हितधारकों के बीच नए आयकर अधिनियम, 2025; आयकर नियम, 2026 तथा नए फॉर्मों के प्रावधानों के बारे में जागरूकता बढ़ाना था, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय कराधान, हस्तांतरण मूल्य निर्धारण और अग्रिम मूल्य निर्धारण समझौतों पर विशेष जोर दिया गया। .
अपने मुख्य भाषण में, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के सदस्य (विधान) श्री प्रसेनजीत सिंह ने कानूनों और नियमों को सरल बनाने तथा विश्वास-आधारित शासन को बढ़ावा देने के लिए सरकार के प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने आयकर अधिनियम के कई प्रावधानों के अपराध से मुक्ति, करदाताओं को समय पर सेवाएं सुनिश्चित करने के उपायों तथा स्वैच्छिक अनुपालन को प्रोत्साहित करने के लिए आंकड़ा-आधारित ‘नज’ (NUDGE) अभियानों पर भी चर्चा की।
कार्यक्रम के दौरान, श्री प्रसेंजीत सिंह ने अंतर्राष्ट्रीय कर के प्रमुख पहलुओं जैसे सेफ हार्बर, एपीए, विदेशी कर क्रेडिट और टीआरसी पर नौ पुस्तिकाओं का भी विमोचन किया, जिसका उद्देश्य करदाताओं को प्रभावी मार्गदर्शन प्रदान करना है। विभाग के एआई-संचालित चैटबॉट ‘कर साथी’ के बारे में भी बताया।
यह जनसंपर्क कार्यक्रम विभाग की प्रमुख हितधारक सहभागिता श्रृंखला, ‘प्रारंभ’का हिस्सा है। इसमें उद्योग जगत, बहुराष्ट्रीय कंपनियों (एमएनसी), आईसीएआई, कर विशेषज्ञों और विभाग के अधिकारियों सहित लगभग 150 प्रतिभागियों ने भाग लिया।
इससे पहले अपने उद्घाटन संबोधन में, प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त (अंतर्राष्ट्रीय कराधान) सुश्री मोनिका भाटिया ने वैश्वीकरण की अर्थव्यवस्था में कर-निश्चितता, एकरूपता और विश्वसनीयता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय कर विभाग द्वारा विदेशों में स्थित भारतीय दूतावासों के सहयोग से आयोजित किए जाने वाले आगामी वैश्विक जनसंपर्क कार्यक्रमों की भी घोषणा की।
विभिन्न संगठनों, आईसीएआई, उद्योग जगत और कर परामर्श फर्मों से आए प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और विभाग के इस जनसंपर्क कार्यक्रम की सराहना की। उन्होंने अनेक प्रश्न पूछे, जिनका उत्तर केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के कर नीति प्रभाग और विदेशी कर प्रभाग के संयुक्त सचिव और निदेशक उत्तर विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दिया गया। प्रतिभागियों ने दिए गए उत्तरों के लिए आभार व्यक्त किया।
नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज वाराणसी में आयोजित महिला सम्मेलन की झलकियां साझा कीं, जिसमें उन्होंने महिला सशक्तिकरण के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता, नारी शक्ति की प्रेरणादायी भागीदारी और काशी के निरंतर विकास पर जोर दिया।
एक्स पर पोस्ट की एक श्रृंखला में, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने लिखा:
“वाराणसी के महिला सम्मेलन में हमारी नारीशक्ति की सहभागिता अत्यंत प्रेरणादायक रही।”
“हमारी सरकार की नीतियों के केंद्र में बहनों-बेटियों को रखा गया है। काशी में महिला सम्मेलन का अवसर भी नारीशक्ति के वंदन और विकास का उत्सव है।”
“उत्तर प्रदेश में बनास डेयरी से जुड़ी लाखों बहनें बहुत ही शानदार काम कर रही हैं। आज इन बहनों को सीधे उनके बैंक खातों में बोनस मिले हैं। मैं इन सभी बहनों को बहुत-बहुत बधाई देता हूं।”
“देश की बहनें-बेटियां महिला आरक्षण पर ब्रेक लगाने वाले परिवारवादी और तुष्टिकरण में डूबे दलों की कुटिल मंशा को पहचान गई हैं। असम, केरलम, पुडुचेरी, बंगाल और तमिलनाडु में रिकॉर्ड मतदान इन्हें सजा देने के लिए ही है।”
“कनेक्टिविटी हो, हेल्थकेयर इकोसिस्टम हो या फिर काशी की विरासत का संरक्षण, यहां के लोगों का जीवन आसान बनाने के लिए हम कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रहे हैं।”
नई दिल्ली – रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 28 अप्रैल, 2026 को किर्गिस्तान के बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के रक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान अपने किर्गिजस्तान, कज़ाखस्तान और बेलारूसी समकक्षों के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं। किर्गिजस्तान के रक्षा मंत्री मेजर जनरल मुकाम्बेटोव रुस्लान मुस्तफ़ाएविच के साथ हुई बैठक में दोनों पक्षों ने मौजूदा द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को और सुदृढ़ बनाने के उपायों पर चर्चा की।
रक्षा मंत्री ने किर्गिज पक्ष को भारत में स्वदेशी रूप से विकसित हुए दो ‘भीष्म आरोग्य मैत्री हेल्थ क्यूब’ भेंट किए। इनका उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान मानवीय सहायता, आपदा राहत तथा खोज एवं बचाव अभियानों को बेहतर बनाना है।
श्री राजनाथ सिंह ने किर्गिज मिलिट्री इंस्टीट्यूट, बिश्केक और मिलिट्री यूनिट 36806-ओश के आईटी केंद्रों में 12-12 कंप्यूटर सिस्टम सेट उपलब्ध कराने की परियोजना पूर्ण होने की भी घोषणा की। इसके तहत वॉरगेमिंग सॉफ्टवेयर का सफलतापूर्वक इंस्टॉलेशन किया गया तथा किर्गिज सशस्त्र बलों के कर्मियों को ऑन-द-जॉब प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
श्री राजनाथ सिंह ने कज़ाखस्तान के रक्षा मंत्री के साथ अपनी बैठक में इस बात पर बल दिया कि दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग विविध क्षेत्रों तक फैला हुआ है और यह द्विपक्षीय साझेदारी का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।
श्री राजनाथ सिंह ने बेलारूस के रक्षा मंत्री लेफ्टिनेंट जनरल विक्टर ख्रेनिन के साथ बैठक के दौरान, इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत बेलारूस के साथ आपसी रूप से लाभकारी साझेदारी विकसित करने को उच्च प्राथमिकता देता है और उन्होंने क्षमता निर्माण तथा प्रशिक्षण को सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में से एक के रूप में रेखांकित किया।
इसके अतिरिक्त, रक्षा मंत्री ने चीन के रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जून और रूस के रक्षा मंत्री आंद्रेई बेलौसोव के साथ भी संक्षिप्त बातचीत की। इस दौरान मंत्रियों ने क्षेत्रीय एवं वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य, विशेषकर पश्चिम एशिया में जारी घटनाक्रमों पर अपने विचारों का आदान-प्रदान किया।
इससे पहले, श्री राजनाथ सिंह और अन्य रक्षा मंत्रियों ने किर्गिज राष्ट्रपति श्री सादिर ज़ापारोव से शिष्टाचार भेंट की।
रक्षा मंत्रियों ने बिश्केक के विक्ट्री स्क्वायर पर माल्यार्पण भी किया।
29.04.2026 – हाई-ऑक्टेन एक्शन थ्रिलर ‘धुरंधर (पार्ट वन), अपने शानदार और रिकॉर्ड तोड़ ग्लोबल बॉक्स ऑफिस सफर के बाद अब 10 जुलाई को जापान में थिएटर रिलीज के लिए तैयार है। जियो स्टूडियोज और बी62 स्टूडियोज की इस फिल्म को आदित्य धर ने डायरेक्ट किया है। अपने बड़े पैमाने, दमदार कहानी और अलग जॉनर अपील के साथ, ‘धुरंधर’ जापान के दर्शकों से जुड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है।
फिल्म में जबरदस्त एक्शन, इमोशन और गहराई से बुनी कहानी देखने को मिलती है, जो इसे एक संदेशपरक फिल्म के रूप में परिभाषित करतीं है और सभी के लिए एंगेजिंग सिनेमाई अनुभव बनाती है। हाल के समय की सबसे चर्चित हिंदी फिल्मों में से एक ‘धुरंधर’ देशप्रेम को दर्शकों का भरपूर प्यार मिला है और इसने कई बॉक्स ऑफिस रिकॉर्ड भी तोड़े हैं।
फिल्म में रणवीर सिंह के साथ संजय दत्त, अक्षय खन्ना, आर. माधवन, अर्जुन रामपाल और सारा अर्जुन जैसे कलाकार नजर आते हैं। धुरंधर (पार्ट 1) ने इंटरनेशनल मार्केट में भी बड़ा मुकाम हासिल किया।
यह नॉर्थ अमेरिका में अब तक की नंबर 1 हिंदी फिल्म बनी, वहीं कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्म रही और यूके में भी टॉप परफॉर्म करने वाली भारतीय फिल्मों की श्रेणी में शामिल हुई है। इस स्पाई एक्शन एंटरटेनर ने पूर्व में, दुनियाभर में 1328 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार किया था।
नई दिल्ली – गांधीनगर स्थित एक शैक्षणिक संस्थान दो बायोगैस संयंत्रों से प्रतिदिन 500 से अधिक लोगों के लिए भोजन तैयार करता है, जिससे एलपीजी पर निर्भरता समाप्त हो जाती है। यह दर्शाता है कि कुशल अपशिष्ट प्रबंधन ऊर्जा आत्मनिर्भरता और स्थिरता को सक्षम बनाता है।
स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के तहत नवाचार के एक प्रभावशाली उदाहरण के रुप में, गुजरात के गांधीनगर स्थित शैक्षणिक संस्थान ने यह दर्शाया है कि वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन ऊर्जा आत्मनिर्भरता और स्थिरता को बढ़ावा दे सकता है।
अडालज के पास स्थित वासुमति चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा संचालित श्रीमती मानेकबा विनय विहार शैक्षणिक परिसर ने खाना पकाने के लिए बायोगैस आधारित प्रणाली अपनाकर पारंपरिक एलपीजी पर अपनी निर्भरता समाप्त कर दी है। परिसर में अब प्रतिदिन 500 से अधिक लोगों के लिए भोजन तैयार किया जाता है, जिनमें लगभग 250 छात्रावास के छात्र और 15 कर्मचारियों के परिवार शामिल हैं इन्हें दिन में दो बार भोजन परोसा जाता है।
संस्था दो बायोगैस संयंत्रों का संचालन करती है जिनकी संयुक्त क्षमता 90 घन मीटर प्रतिदिन है। इन संयंत्रों में संस्था के गौशाला में रखी गई 222 गायों के गोबर, रसोई के कचरे और आसपास के खेतों से प्राप्त कृषि अवशेषों का उपयोग करके बायोगैस बनाई जाती है जो संस्था की संपूर्ण ईंधन आवश्यकता को पूरा करती है, जिससे एलपीजी सिलेंडरों की आवश्यकता पूरी तरह समाप्त हो जाती है।
शैक्षणिक संस्थान के अधिकारियों ने बताया कि “गुजरात सरकार की संस्थागत बायोगैस संयंत्र योजना के तहत हम खाना पकाने की गैस के मामले में आत्मनिर्भर हो गए हैं। गायें पर्याप्त गोबर देती हैं, और गैस उत्पादन के बाद बनने वाले स्लरी का उपयोग खेतों में खाद के रूप में किया जाता है, जिससे पूरी तरह से जैविक खेती संभव हो पाती है। इस संयंत्र के बिना, हमें हर महीने लगभग 30 एलपीजी सिलेंडरों की आवश्यकता होती,”
जैविक अपशिष्ट से बनी बायोगैस, खाना पकाने के लिए उपलब्ध सबसे व्यवहार्य, किफायती और पर्यावरण के अनुकूल ईंधनों में से एक है। नाइट्रोजन से भरपूर उप-उत्पाद स्लरी, एक प्रभावी जैविक उर्वरक के रूप में प्रयोग की जाती है, जिससे रासायनिक पदार्थों पर निर्भरता कम होती है, लागत घटती है और मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है। इस प्रकार एक ही प्रयास से दोहरा लाभ प्राप्त होता है।
गुजरात ऊर्जा विकास एजेंसी (जीईडीए) 25 से 85 घन मीटर क्षमता वाले बायोगैस संयंत्रों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है। गैर-लाभकारी संस्थाएं 75 प्रतिशत तक सब्सिडी के लिए पात्र हैं, जिससे संगठनों की एक विस्तृत श्रृंखला के लिए यह परिवर्तन आर्थिक रूप से सुलभ हो जाता है।
पिछले पांच वर्षों में, गुजरात भर में लगभग 193 संस्थागत बायोगैस संयंत्र लगाए गए हैं। गुजरात वैकल्पिक ऊर्जा और सतत विकास को बढ़ावा देने, प्रदूषण कम करने, ऊर्जा आत्मनिर्भरता प्राप्त करने और गौशालाओं और शैक्षणिक संस्थानों से प्राप्त जैविक कचरे के वैज्ञानिक निपटान की दिशा में निरंतर प्रगति कर रहा है।
स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के उद्देश्यों के अनुरूप, ये पहलें दर्शाती हैं कि शहर और संस्थान सतत विकास की दिशा में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। अपशिष्ट प्रबंधन के लिए नवीन, चक्रीय दृष्टिकोण अपनाकर, वे न केवल पर्यावरणीय प्रभाव को कम कर रहे हैं, बल्कि अपशिष्ट को एक संसाधन के रूप में भी उपयोग में ला रहे हैं। स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन से लेकर जैविक प्रथाओं को बढ़ावा देने तक, ये प्रयास, वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन, सामुदायिक भागीदारी और दूरदर्शी नीतियां मिलकर देश में स्वच्छ, हरित और अधिक आत्मनिर्भर शहरों का मार्ग प्रशस्त करती हैं।
नई दिल्ली – इस्पात मंत्रालय के सचिव श्री संदीप पौंड्रिक ने मंडी गोबिंदगढ़ स्थित राष्ट्रीय द्वितीयक इस्पात प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईएसएसटी) में कौशल विकास प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों का उद्घाटन किया। इस नवोन्मेषी पहल का उद्देश्य आईटीआई छात्रों और द्वितीयक इस्पात क्षेत्र के कर्मचारियों की रोजगार क्षमता को बढ़ाना और उन्हें उद्योग – प्रासंगिक कौशल के साथ सशक्त बनाना है। इस कार्यक्रम में इस्पात मंत्रालय के संयुक्त सचिवों और अन्य अधिकारियों, उद्योग संघों और द्वितीयक क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।
इस्पात सचिव ने इस बात पर प्रकाश डाला कि 2030 तक इस्पात उत्पादन क्षमता लगभग 200 से 300 मिलियन टन तक पहुंच जाएगी। उन्होंने समझाया कि यदि 1 मिलियन टन इस्पात उत्पादन के लिए 1,500 से 2,000 श्रमिकों की आवश्यकता होती है, तो अतिरिक्त 80 मिलियन टन उत्पादन से रोजगार के व्यापक अवसर पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि कुशल मानव संसाधन की कमी रोजगार के क्षेत्र में चुनौतियां पैदा करती हैं, इसलिए कौशल विकास आवश्यक है। उन्होंने सलाह दी कि ध्यान केवल सैद्धांतिक शिक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उद्योग की मांगों के अनुरूप व्यावहारिक प्रशिक्षण की ओर बढ़ना चाहिए। सचिव महोदय ने सभी संगठनों से अनुरोध किया कि एनआईएसएसटी के साथ समझौता ज्ञापन के तहत आईटीआई छात्रों और कार्यरत कर्मचारियों के लिए कम से कम एक पाठ्यक्रम प्रायोजित करें। उन्होंने यह कहते हुए अपनी बात समाप्त की कि एनआईएसएसटी का लक्ष्य स्वयं को द्वितीयक इस्पात क्षेत्र के लिए एक आवासीय संस्थान के रूप में स्थापित करना है, जो केवल स्थानीय मानव संसाधन तक सीमित न रहकर पूरे देश के प्रशिक्षुओं की जरूरतों को पूरा करे।
उद्योग जगत ने भी आईटीआई छात्रों और इस उद्योग के कर्मचारियों दोनों के लिए इस पहल का समर्थन करने हेतु कदम आगे बढाए हैं।
इस्पात मंत्रालय की यह पहल औद्योगिक विकास और नवाचार, विशेष रूप से द्वितीयक इस्पात क्षेत्र में एक कुशल कार्यबल तैयार करने के सरकार के व्यापक विजन के अनुरूप है।
पर्यावरणीय रूप से सतत प्रथाओं को अपनाने और हरित इस्पात उत्पादन की दिशा में प्रगति के लिए चार उद्योगिक इकाइयों को ‘ग्रीन स्टील प्रमाणन’ भी प्रदान किया गया।
नई दिल्ली, 26 अप्रैल – केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज भारत भर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में अंतरिक्ष प्रयोगशालाएं स्थापित करने की योजनाओं की समीक्षा की, जिसके तहत पहले चरण में सात ऐसी प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी ताकि छात्रों को उपग्रह प्रणालियों, रॉकेटरी और मिशन डिजाइन में व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया जा सके।
इस पहल का उद्देश्य भारत के तेजी से बढ़ते अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए कुशल युवाओं की एक मजबूत श्रृंखला तैयार करना है, जिसने गैर-सरकारी संस्थाओं के लिए इस क्षेत्र को खोलने के बाद पिछले पांच वर्षों में 600 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का निजी निवेश आकर्षित किया है।
यह समीक्षा इन-स्पेस के अध्यक्ष डॉ. पवन गोयनका द्वारा दी गई विस्तृत जानकारी के बाद हुई, जिन्होंने भारत के अंतरिक्ष सुधारों में हुई प्रगति और मूल्य श्रृंखला में निजी खिलाड़ियों की बढ़ती भागीदारी का अवलोकन प्रस्तुत किया।
भारत का निजी अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र तेजी से विकसित हुआ है, और स्टार्टअप्स की संख्या 2019 में एकल अंक से बढ़कर 2026 की शुरुआत तक 400 से अधिक हो गई है। ये स्टार्टअप्स अब प्रक्षेपण यान, उपग्रह और पेलोड निर्माण, जमीनी अवसंरचना, डेटा सेवाओं और उभरते इन-ऑर्बिट क्षेत्रों में सक्रिय हैं। बढ़ती वैश्विक रुचि स्थापित अंतरिक्ष यात्री देशों सहित अंतर्राष्ट्रीय ग्राहकों के साथ बढ़ते जुड़ाव में भी परिलक्षित होती है।
इस गति को बनाए रखने के लिए कई लक्षित पहलें शुरू की गई हैं। विकास के चरण में स्टार्टअप्स को सहयोग देने के लिए एसआईडीबीआई के साथ मिलकर 1,000 करोड़ रुपये का वेंचर कैपिटल फंड शुरू किया जा रहा है, वहीं 500 करोड़ रुपये का टेक्नोलॉजी एडॉप्शन फंड शुरुआती चरण के नवाचारों को व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य उत्पादों में परिवर्तित करने में मदद कर रहा है। सीड फंड योजना के तहत विचार और प्रोटोटाइप चरण में स्टार्टअप्स को 1 करोड़ रुपये तक का अनुदान, मार्गदर्शन और इकोसिस्टम सहायता प्रदान की जा रही है।
कुशल कार्यबल तैयार करने के प्रयास भी जारी हैं, जिसके तहत 17 विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरे किए जा चुके हैं और उपग्रह निर्माण, प्रक्षेपण यान प्रणाली और अंतरिक्ष साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में लगभग 900 प्रतिभागियों को प्रमाणित किया जा चुका है। विश्वविद्यालयों में स्थापित होने वाली आगामी अंतरिक्ष प्रयोगशालाओं से व्यावहारिक और प्रायोगिक शिक्षण के अवसर प्रदान करके इस प्रतिभा भंडार को और मजबूत करने की उम्मीद है।
बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में, सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के तहत निजी नेतृत्व वाले पृथ्वी अवलोकन उपग्रह समूह, स्टार्टअप्स के लिए साझा उपग्रह बस प्लेटफॉर्म का विकास, और अहमदाबाद स्थित इन-स्पेस तकनीकी केंद्र में डिजाइन, एकीकरण और परीक्षण सुविधाओं तक विस्तारित पहुंच जैसी पहलों के माध्यम से नए अवसर सृजित हो रहे हैं। उद्योग की भागीदारी के साथ लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान (एसएसएलवी) सहित प्रौद्योगिकी हस्तांतरण कार्यक्रम भी प्रगति कर रहे हैं।
अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की वैश्विक भागीदारी लगातार मजबूत होती जा रही है, और अब इसकी साझेदारी 45 से अधिक देशों तक फैली हुई है। हाल के सहयोगों में सिंगापुर और संयुक्त अरब अमीरात के साथ समझौते, अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष मंचों में भारतीय कंपनियों की भागीदारी और घरेलू स्टार्टअप को वैश्विक बाजारों से जोड़ने की पहल शामिल हैं।
स्थापना के बाद से, इन-स्पेस को स्टार्टअप्स, एमएसएमई, शैक्षणिक संस्थानों और उद्योग से 1,000 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, और इसने 129 प्राधिकरण प्रदान किए हैं, जो भारत के सुधारित अंतरिक्ष इको-सिस्टम में बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।
फोटो – केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह को नई दिल्ली में इन-स्पेस के अध्यक्ष डॉ. पवन गोयनका द्वारा जानकारी दी जा रही है
नई दिल्ली – रक्षा विभाग (आरएंडडी) के सचिव और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने 25 अप्रैल, 2026 को महाराष्ट्र के अहिल्यानगर स्थित डीआरडीओ प्रयोगशाला परिसर में उन्नत बख्तरबंद वाहनों (ट्रैक्ड एवं व्हील्ड) का अनावरण किया। इन अत्याधुनिक वाहनों को व्हीकल्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (वीआरडीई) द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया है। आधुनिक तकनीक से लैस ये बख्तरबंद वाहन सशस्त्र बलों की बदलती और जटिल परिचालन आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किए गए हैं।
दोनों उन्नत बख्तरबंद वाहनों को स्वदेशी रूप से डिजाइन एवं विकसित 30 मिमी के क्रूलेस टरेट से सुसज्जित किया गया है, जो गतिशीलता, मारक क्षमता और सुरक्षा की आधुनिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है। इन वाहनों में हाई-पावर इंजन और ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन का समावेश किया गया है, जिससे उच्च पावर-टू-वेट अनुपात, बेहतर गति, तीव्र ढलानों एवं कठिन बाधाओं को पार करने की क्षमता सुनिश्चित होती है। सुरक्षा के दृष्टिकोण से, इनमें चारों ओर मॉड्यूलर ब्लास्ट और बैलिस्टिक प्रोटेक्शन प्रदान किया गया है, जो एसटीएएनएजी लेवल 4 तथा 5 के मानकों के अनुरूप है। इसके अतिरिक्त, हाइड्रो जेट प्रणाली से युक्त यह एम्फीबियन प्लेटफ़ॉर्म जल अवरोधों को पार करने में सक्षम है, जिससे इसकी ऑपरेशनल लचीलापन और बहुउद्देशीय उपयोगिता में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।
30 मिमी का क्रू-लेस टरेट 7.62 मिमी पीकेटी गन के साथ एकीकृत है और इसे एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलों के प्रक्षेपण के लिए भी कॉन्फ़िगर किया गया है, जिससे इसकी मारक क्षमता व बहुआयामी उपयोगिता और बढ़ जाती है। इसके मूल डिजाइन में लचीलापन रखा गया है, जिससे इसे विभिन्न परिचालन भूमिकाओं के अनुरूप आसानी से कॉन्फ़िगर किया जा सकता है। इन उन्नत बख्तरबंद वाहनों में स्वदेशी सामग्री की हिस्सेदारी वर्तमान में लगभग 65 प्रतिशत है, जिसे भविष्य में बढ़ाकर 90 प्रतिशत तक ले जाने की योजना है, जो रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को और सुदृढ़ करेगा।
इन वाहनों का निर्माण दो औद्योगिक साझेदारों टाटा एडवांस्ड सिस्टमस लिमिटेड और भारत फोर्ज लिमिटेड द्वारा किया गया है, जिन्हें कई एमएसएमई का सहायता प्राप्त है। इस सहयोग के परिणामस्वरूप, विकसित हो रहे रक्षा इकोसिस्टम को मजबूती मिली है।
इस कार्यक्रम में प्रतिष्ठित वैज्ञानिक और आर्मामेंट एंड कॉम्बैट इंजीनियरिंग सिस्टम्स (एसीई); प्रोडक्शन, कोऑर्डिनेशन एंड सर्विसेज इंटरैक्शन (पीसीएंडएसआई) के महानिदेशक; टीएएसएल पुणे के सीईओ व एमडी; बीएफएल पुणे के वाइस चेयरमैन तथा जॉइंट एमडी; एवं उद्योग जगत के अन्य प्रतिनिधि शामिल हुए। कार्यक्रम में विभिन्न डीआरडीओ प्रयोगशालाओं के निदेशक और वैज्ञानिक भी उपस्थित थे, जिनमें व्हीकल्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट, आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट, डिफेंस मेटलर्जिकल रिसर्च लैबोरेटरी, हाई एनर्जी मैटेरियल्स रिसर्च लैबोरेटरी, कॉम्बैट व्हीकल्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट, और रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (इंजीनियर्स) शामिल हैं।
नई दिल्ली – केंद्रीय श्रम और रोजगार तथा युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने आज बडगाम के ओमपोरा में 30 बिस्तरों वाले कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) अस्पताल का उद्घाटन किया। इससे जम्मू-कश्मीर में श्रमिकों और उनके परिवारों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और सामाजिक सुरक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी। नव उद्घाटन किया गया यह अस्पताल कश्मीर का पहला ईएसआईसी अस्पताल है, जो इस क्षेत्र में श्रमिक कल्याण सेवाओं के विस्तार में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है।
सभा को संबोधित करते हुए डॉ. मांडविया ने कहा, “जो देश अपने श्रमिकों की गरिमा को महत्व देता है, वह प्रगति के पथ पर अजेय है।” उन्होंने आगे कहा कि यह कार्यबल ही है जिसके अथक प्रयासों से राष्ट्र आगे बढ़ता है, और इसलिए श्रमिकों का कल्याण शासन के केंद्र में रहना चाहिए। उन्होंने जोर देते हुए कहा, “प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार देश के प्रत्येक श्रमिक के लिए गरिमा, सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।”
डॉ. मांडविया ने कहा, “श्रमिक कल्याण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को वैश्विक मान्यता मिली है। 2025 में, अंतर्राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा संघ ने हमारे देश को ‘सामाजिक सुरक्षा में उत्कृष्टता’ पुरस्कार से सम्मानित किया। अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन द्वारा प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार, हमारी सामाजिक सुरक्षा कवरेज 2015 में 19 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 64.3 प्रतिशत हो गई है।”
पिछले वर्ष लागू किए गए चार श्रम संहिताओं के परिवर्तनकारी प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इन सुधारों ने भारत के श्रम तंत्र को आधुनिक बनाया है और इसे अधिक श्रमिक-केंद्रित, पारदर्शी और भविष्य के लिए तैयार किया है। उन्होंने कहा, “नई श्रम संहिताएं श्रमिकों के लिए कई लंबे समय से प्रतीक्षित सुरक्षा उपायों की गारंटी देती हैं, जिनमें वार्षिक स्वास्थ्य जांच, अनिवार्य नियुक्ति पत्र और न्यूनतम मजदूरी शामिल हैं। ईएसआईसी अस्पतालों के माध्यम से वार्षिक स्वास्थ्य जांच का प्रावधान बीमारियों का शीघ्र पता लगाने, श्रमिकों के लिए निवारक स्वास्थ्य देखभाल सुनिश्चित करने और उनके भविष्य को सुरक्षित करने में सहायक होगा।”
मंत्री जी ने कहा कि 1952 में अपनी स्थापना के बाद से ईएसआईसी देश में श्रमिक कल्याण के सबसे मजबूत स्तंभों में से एक बन गया है। आज, यह योजना पूरे भारत में 3.84 करोड़ बीमित व्यक्तियों और लगभग 15 करोड़ लाभार्थियों को स्वास्थ्य सेवा और सामाजिक सुरक्षा लाभ प्रदान करती है। उन्होंने यह भी कहा कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के साथ ईएसआईसी के एकीकरण से सूचीबद्ध अस्पतालों में लाभार्थियों के लिए कैशलेस उपचार की सुविधा और भी व्यापक हो गई है।
इस कार्यक्रम के अंतर्गत, डॉ. मनुस्क मांडविया ने ओमपोरा में अस्पताल के निर्माण में योगदान देने वाले श्रमिकों को सम्मानित किया और जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के बीमित व्यक्तियों को विभिन्न सामाजिक सुरक्षा लाभ भी प्रदान किए।
165 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस अस्पताल में 100 बिस्तरों तक विस्तार की सुविधा है और इससे 50,000 से अधिक श्रमिकों और उनके परिवार के सदस्यों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है। ईएसआई योजना 16 अक्टूबर, 1989 को जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश में शुरू की गई थी, जिसमें जम्मू, कठुआ और श्रीनगर के लगभग 7,000 श्रमिकों को शामिल किया गया था। वर्तमान में, ईएसआई योजना जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के सभी जिलों में लागू है, जिससे लगभग 1,83,119 बीमित व्यक्तियों और लगभग 7,00,000 लाभार्थियों को लाभ मिल रहा है। इसका संचालन जम्मू स्थित ईएसआईसी क्षेत्रीय कार्यालय और जम्मू-कश्मीर कर्मचारी राज्य बीमा सोसायटी (जेकेईएसआईएस) के माध्यम से किया जाता है।
उद्घाटन समारोह में श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, ईएसआईसी, स्थानीय प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी तथा जन प्रतिनिधि उपस्थित थे।
रांची,28.04.2026 – हरमू जतरा मैदान और हरमू नदी के किनारे(27.04.2026) रांची पुलिस ने कारवाई करते हुए नशा और कार्ड खेल रहे लोगों को खदेड़ा।
पुलिस की छापेमारी से हड़कंप मच गया और अफरा तफरी के बीच लोग भागते नजर आए इस दौरान पुलिस ने 2 दर्जन से अधिक लोगों को डिटेन कर पूछताछ भी की।
जुआ खेलने वाला कार्ड सहित कई आपत्तिजनक वस्तुओं को नष्ट किया गया, पूरी कारवाई रांची अरगोड़ा, कोतवाली और सुखदेव नगर थाना प्रभारी के नेतृत्व में की जा रही थी
रांची,28.04.2026 – रांची समर्पण शाखा द्वारा अध्यक्षा शुभा अग्रवाल के नेतृत्व में सेवा कार्यों की श्रृंखला के अंतर्गत “अमृतधारा सेवा” का आयोजन किया गया।
शाखा द्वारा शहर के 21 विभिन्न स्थानों पर अमृतधारा प्याऊ सफलतापूर्वक स्थापित की गई।
भीषण गर्मी को देखते हुए इस सेवा के अंतर्गत राहगीरों एवं जरूरतमंद लोगों को शीतल जल पिलाकर राहत प्रदान की गई।
इस अवसर पर अध्यक्षा शुभा अग्रवाल , सचिव रेखा राइका, वर्षा धानुका, वीना शर्मा, कृष्णा अग्रवाल एवं अन्य सदस्यगण उपस्थित रहीं। सभी सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर इस पुनीत कार्य को सफल बनाया।
समर्पण शाखा सदैव समाज सेवा के लिए तत्पर है और आगे भी इसी प्रकार जनहित में कार्य करती रहेगी।
नई दिल्ली – भारतीय नौसेना के नौकायन प्रशिक्षण पोत, आईएनएस सुदर्शनी ने 26 अप्रैल, 2026 को कैनरी द्वीप समूह के लास पाल्मास में अपना तीन दिवसीय ऐतिहासिक पड़ाव पूरा किया, जो लोकायन 26 समुद्री अभियान में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। स्पेनिश द्वीपसमूह की इस यात्रा ने समुद्री कूटनीति और पेशेवर सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया।
आईएनएस सुदर्शनी के कमांडिंग ऑफिसर ने कैनरी द्वीप नौसेना कमान के प्रमुख रियर एडमिरल सैंटियागो डी कोल्सा ट्रूबा से मुलाकात की। इस मुलाकात में दोनों नौसेनाओं के बीच सुदृढ़ होते द्विपक्षीय संबंधों और गहरी होती साझेदारी को रेखांकित किया गया।
पोर्ट कॉल के दौरान, जहाज आगंतुकों के लिए खुला था, जिसमें स्थानीय समुदाय और भारतीय प्रवासी समुदाय के बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। भारत की गौरवशाली समुद्री विरासत को प्रदर्शित करते हुए आगंतुकों को जहाज का निर्देशित दौरा कराया गया। इससे उन्हें समुद्री यात्रा के अमूल्य अनुभव प्राप्त हुए और समुद्री मित्रता के बंधन मजबूत हुए।
आईएनएस सुदर्शनी अब अपने अगले गंतव्य-मिंडेलो, केप वर्डे के लिए रवाना हो रही है, जो अटलांटिक पार यात्रा शुरू करने से पहले अफ्रीका में उसका अंतिम पड़ाव होगा। पश्चिम एशिया, भूमध्य सागर, यूरोप और अफ्रीका की नौसेनाओं के साथसात बंदरगाहों पर भ्रमण और समुद्री देशों के साथ सहयोग बढ़ाने की यह यात्रा भारतीय नौसेना की विभिन्न देशों के बीच मित्रता और परस्पर विश्वास के सेतु बनाने की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।
नई दिल्ली – संचार मंत्रालय के अधीन डाक विभाग और डीटीडीसी एक्सप्रेस लिमिटेड ने देश भर में लॉजिस्टिक्स और ई-कॉमर्स इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। डाक विभाग के पार्सल निदेशालय के महाप्रबंधक श्री नीरज कुमार झा और डीटीडीसी एक्सप्रेस लिमिटेड के राष्ट्रीय चैनल प्रमुख श्री जतिंदर सेठी ने दोनों संगठनों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में आज नई दिल्ली में इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।
(डाक विभाग और डीटीडीसी एक्सप्रेस लिमिटेड के अधिकारियों ने डाक भवन, नई दिल्ली में समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान किया)
इस साझेदारी का उद्देश्य देश भर में पार्सल डिलीवरी सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए डाक विभाग के विशाल बुनियादी ढांचे और नेटवर्क के साथ-साथ डीटीडीसी के लॉजिस्टिक्स अनुभव का लाभ उठाना है। समझौता ज्ञापन दोनों पक्षों के बीच वर्ष 2025 में शुरू हुए निरंतर सहयोग को दर्शाता है।
समझौता ज्ञापन की मुख्य विशेषताएं:
उद्देश्य: लॉजिस्टिक्स और व्यावसायिक संचालन में अवसरों का पता लगाना और उनका विस्तार करना, जिससे डीटीडीसी देश भर में पार्सल डिलीवरी के लिए डीओपी के व्यापक डाक नेटवर्क का उपयोग कर सके। इसमें कैश ऑन डिलीवरी (सीओडी) सेवाएं भी शामिल हैं।
सहयोग में वृद्धि: समझौता ज्ञापन संयुक्त लॉजिस्टिक्स संचालन, क्षमता साझाकरण, पार्सल उद्योग में सर्वोत्तम प्रथाओं, परिचालन दक्षता और सेवा गुणवत्ता के लिए विपणन रणनीतियों के समन्वय पर केंद्रित है।
नियमित समीक्षा तंत्र: दोनों पक्ष साझेदारी की प्रगति का आकलन करने, अपनी प्रणालियों के एकीकरण को सुनिश्चित करने और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को बढ़ाने के लिए नए अवसरों की खोज करने के लिए त्रैमासिक बैठकें करेंगे।
डीटीडीसी को मिलने वाले लाभ:
डीटीडीसी को देश भर में फैले डाक विभाग के 1.64 लाख डाकघरों के अद्वितीय नेटवर्क तक पहुंच प्राप्त होगी। यह साझेदारी डीटीडीसी को अपने लॉजिस्टिक्स का विस्तार करने, डिलीवरी की गति में सुधार करने और देश के ई-कॉमर्स क्षेत्र, विशेष रूप से दूरस्थ क्षेत्रों की बढ़ती मांगों को पूरा करने में सक्षम बनाएगी।
डाक विभाग को होने वाले लाभ:
यह सहयोग डीओपी के लिए उसके पार्सल व्यवसाय को बढ़ावा देगा, जिससे तेज गति से डिलीवरी सेवाएं मिलेंगी और इनका नेटवर्क भी विस्तारित होगा। डीटीडीसी के साथ साझेदारी करके, डीओपी का लक्ष्य देश के लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में अपनी भूमिका को और मजबूत करना है, जिससे भारत के वैश्विक लॉजिस्टिक्स हब बनने के लक्ष्य में योगदान मिलेगा।
डाक विभाग के बारे में:
संचार मंत्रालय के अधीन डाक विभाग, देश भर में 1.64 लाख से अधिक डाकघरों के साथ विश्व का सबसे बड़ा डाक नेटवर्क संचालित करता है। यह देश में ई-कॉमर्स के विकास को गति देने पर विशेष ध्यान देने के साथ-साथ संचार, लॉजिस्टिक्स और वित्तीय सेवाएं प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
डीटीडीसी एक्सप्रेस लिमिटेड के बारे में:
डीटीडीसी देश की अग्रणी एक्सप्रेस पार्सल डिलीवरी कंपनियों में से एक है, जो घरेलू और अंतरराष्ट्रीय ई-कॉमर्स के लिए अभिनव लॉजिस्टिक्स समाधान प्रदान करती है। कंपनी विभिन्न क्षेत्रों के व्यवसायों को सहयोग प्रदान करते हुए विश्वसनीय और लागत प्रभावी लॉजिस्टिक्स सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।
यह समझौता प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में आर्थिक साझेदारी और अवसरों के एक नए युग की शुरुआत है
न्यूजीलैंड के व्यापार और निवेश मंत्री टॉड मैक्ले ने कहा कि भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता नई पीढ़ी के लिए अवसरों को खोलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है और साथ ही द्विपक्षीय सम्बंधों में एक नया अध्याय जोड़ता है
2047 तक विकसित भारत के लिए एक नई पीढ़ी का व्यापार समझौता टैरिफ, प्रतिभा, निवेश और कृषि उत्पादकता से युवाओं, किसानों, महिलाओं, कारीगरों और लघु एवं मध्यम उद्यमों को सशक्त बनाता है
यह समझौता कई मायनों में अभूतपूर्व है: 100 प्रतिशत शुल्क-मुक्त पहुंच, फार्मा क्षेत्र में त्वरित पहुंच, कृषि उत्पादकता साझेदारी, प्रतिभा गतिशीलता, आयुष का वैश्विक विस्तार और मजबूत बौद्धिक संपदा
कपड़ा, चमड़ा, जूते, इंजीनियरिंग सामान और प्रसंस्कृत खाद्य क्षेत्रों जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को सशक्त बनाने के लिए विस्तारित बाजार पहुंच
कृषि, मछली पालन और फैक्ट्रियों को बढ़ावा: भारत के 100 प्रतिशत एक्सपोर्ट पर ज़ीरो-ड्यूटी बाजार पहुंच भारत ने 70 प्रतिशत लाइनों में बाजर पहुंच की पेशकश की है, इसमें न्यूज़ीलैंड के 95 प्रतिशत द्विपक्षीय व्यापार शामिल हैं
भारत में कृषि, विनिर्माण उद्योग, ढांचागत विकास, स्टार्ट-अप, आविष्कारक और उभरती टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने के लिए 20 अरब अमरीकी डॉलर के निवेश का वादा
किसानों, ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं और घरेलू उद्योग को सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, बाजार पहुंच में कॉफ़ी, दूध, क्रीम, चीज़, दही, मट्ठा, दुग्ध प्रोटीन, प्याज़, चीनी, मसाले, खाने के तेल, रबर जैसे डेयरी और मुख्य कृषि उत्पाद शामिल नहीं हैं
न्यूज़ीलैंड द्वारा अब तक की सबसे बेहतरीन बाजार पहुंच और सेवाओं की पेशकश, इससे कुशल पेशेवरों, स्टार्ट-अप और सेवा-आधारित उद्यमों के लिए उच्च-मूल्य वाले अवसर खुलेंगे। इसमें 118 सेवा क्षेत्र शामिल हैं, इनमें कंप्यूटर-सम्बंधी सेवाएं, पेशेवर सेवाएं, श्रव्य-दृश्य सेवाएं, दूरसंचार सेवाएं, विनिर्माण सेवाएं, पर्यटन और यात्रा-सम्बंधी सेवाएं शामिल हैं, लगभग 139 उप-क्षेत्रों में सबसे पसंदीदा राष्ट्र का वादा
न्यूज़ीलैंड में पढ़ाई के बाद काम करने वाले वीज़ा और पेशेवर तौर तरीकों से छात्रों की आवाजाही को बढ़ावा, जिसमें कोई संख्यात्मक सीमा नहीं है: छात्र अपनी वैश्विक सीख को वैश्विक अनुभव में बदल सकते हैं। स्टेम (विज्ञान, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और गणित) में बैचलर और मास्टर डिग्री वाले छात्रों को 3 साल तक और डॉक्टरेट शोधकर्ताओं को 4 साल तक पढ़ाई के बाद काम करने का अधिकार मिलेगा
भारतीय पेशेवरों और छात्रों के लिए आवाजाही के रास्तों के ज़रिए वैश्विक करियर को बढ़ावा
भारतीय पेशेवरों के लिए ‘अस्थायी रोज़गार प्रवेश वीज़ा’ का 5,000 का विशेष कोटा, नए अवसरों का विस्तार
निर्माण की प्रतिस्पर्धात्मकता को मज़बूत करने और लचीली सप्लाई चेन बनाने के लिए शुल्क-मुक्त इनपुट: लकड़ी के लट्ठे, कोकिंग कोयला, धातु का कचरा और स्क्रैप
उत्पादकता, किसानों की आय और ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ाने के लिए सेब, कीवी फल और मनुका शहद के लिए कृषि उत्पादकता साझेदारी और ‘उत्कृष्टता केंद्र’
कृषि उत्पादकता सहयोग के साथ-साथ कोटा और न्यूनतम आयात कीमतों के माध्यम से नियंत्रित बाजार पहुंच से घरेलू उत्पादकों के लिए सुरक्षा सुनिश्चित
वैश्विक बाज़ारों में जैविक उत्पाद और ‘आयुष’ मुख्य आकर्षण बन रहे हैं
स्वास्थ्य और पारंपरिक ज्ञान के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक सहयोग न्यूज़ीलैंड द्वारा अपनी तरह का पहला प्रयास है। यह आयुर्वेद, योग और अन्य पारंपरिक प्रणालियों को बढ़ावा देता है, साथ ही आयुष, वेलनेस सेवाओं और महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों में भारत के वैश्विक नेतृत्व को मज़बूत करता है
न्यूजीलैंड भारतीय भौगोलिक संकेतकों के पंजीकरण को सक्षम बनाने, ग्रामीण कारीगरों और पारंपरिक उद्योगों का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है
न्यूजीलैंड भारतीय भौगोलिक संकेतकों के पंजीकरण को सक्षम बनाने, ग्रामीण कारीगरों और पारंपरिक उद्योगों का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है
भारत और न्यूजीलैंड ने आज नई दिल्ली के भारत मंडपम में भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (आईएन-एनजेड एफटीए) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण और नेतृत्व में भारत की वैश्विक आर्थिक साझेदारियों को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री माननीय टॉड मैक्ले ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए।
इस हस्ताक्षर समारोह में दोनों देशों के व्यवसायों और उद्योग जगत के अग्रणी एक साथ आए। इसमें व्यापार और निवेश मंत्री टॉड मैक्ले ने संसद सदस्यों और 30 से अधिक न्यूजीलैंड व्यवसायों के एक बहुदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया।
श्री मैक्ले ने कहा कि भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर द्विपक्षीय सम्बंधों में एक नया और महत्वपूर्ण अध्याय है। यह साझी महत्वाकांक्षा, गहन जुड़ाव और पारस्परिक रूप से लाभकारी विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर के अवसर पर अपने संदेश में न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने इसे एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया और कहा कि यह समझौता दोनों देशों के लिए व्यापार, निवेश और नवाचार के व्यापक अवसर खोलता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इससे बाजार पहुंच का विस्तार होगा, निर्यात वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा और कृषि जैसे क्षेत्रों में सहयोग संभव होगा। साथ ही, यह स्थिर, नियम-आधारित व्यापार और घनिष्ठ जन-संबंधों के प्रति साझा प्रतिबद्धता को भी मजबूत करेगा।
इस अवसर पर श्री मैक्ले ने कहा कि यह समझौता वर्तमान पीढ़ी के लिए सबसे बड़ा अवसर है। यह निर्यातकों के लिए नए रास्ते खोलेगा, रोजगार सृजित करेगा और महत्वपूर्ण आर्थिक संभावनाओं को उजागर करेगा। इससे न केवल मौजूदा व्यापारिक सम्बंध मजबूत होंगे बल्कि नई साझेदारियों के विकास में भी तेजी आएगी, इससे दोनों देशों के बीच समग्र आर्थिक सहयोग बढ़ेगा।
न्यूजीलैंड की मजबूत भागीदारी के बारे में उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए निर्यातकों, क्षेत्र के अग्रणियों और व्यावसायिक हितधारकों सहित 40 से अधिक प्रतिनिधि भारत आए है। इससे समझौते के महत्व का पता चलता है।
इस समझौते से बाजार पहुंच में सुधार, बाधाओं में कमी और स्पष्ट एवं पूर्वानुमानित नियमों की स्थापना के माध्यम से व्यापार और निवेश प्रवाह में वृद्धि होने की उम्मीद है। यह लघु एवं मध्यम उद्यमों सहित सभी आकार के व्यवसायों को सहयोग प्रदान करेगा और व्यापार के लाभों का व्यापक वितरण सुनिश्चित करेगा।
श्री मैक्ले ने द्विपक्षीय सम्बंधों के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में जन-जन सम्बंधों की भूमिका पर भी बल दिया। उन्होंने बताया कि न्यूजीलैंड की लगभग 6 प्रतिशत आबादी की जड़ें भारत से जुड़ी हैं। भारतीय प्रवासी व्यापार, शिक्षा, विज्ञान, संस्कृति, खेल और सार्वजनिक जीवन जैसे विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।
उन्होंने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान साझा सैन्य इतिहास और खेल जगत के स्थायी जुड़ाव, विशेष रूप से क्रिकेट में, दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक सम्बंधों पर भी प्रकाश डाला, जो द्विपक्षीय भागीदारी को मजबूत करना जारी रखता है।
यह समझौता वैश्विक और क्षेत्रीय परिस्थितियों में हो रहे बदलावों के दौर में हुआ है, जहां विश्वसनीय साझेदारियां और भी महत्वपूर्ण हो गई हैं। न्यूजीलैंड भारत को क्षेत्रीय स्थिरता, आर्थिक मजबूती और साझा समृद्धि को बढ़ावा देने में एक प्रमुख भागीदार मानता है।
भारत के तीव्र आर्थिक परिवर्तन को स्वीकार करते हुए, श्री मैक्ले ने वैश्विक आर्थिक गतिविधि में इसकी बढ़ती भूमिका का उल्लेख किया और भारत की विकास यात्रा में साझेदारी करने के लिए न्यूजीलैंड की प्रतिबद्धता को दोहराया।
श्री मैक्ले ने वार्ता में शामिल अधिकारियों के पेशेवर रवैये और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि यह समझौता संतुलित, दूरदर्शी और व्यावहारिक परिणाम दर्शाता है। अब दोनों पक्ष समझौते के प्रभावी कार्यान्वयन और क्रियान्वयन के लिए मिलकर काम करेंगे।
अपने संबोधन के समापन में उन्होंने ने दोनों देशों के नेतृत्व को उनकी दूरदर्शिता और प्रतिबद्धता के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि यह समझौता आपसी सम्मान, साझा हितों और आने वाले वर्षों में सम्बंधों को और मजबूत करने की स्पष्ट महत्वाकांक्षा पर आधारित है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री श्री क्रिस्टोफर लक्सन की द्विपक्षीय बैठक की पूर्व संध्या पर 16 मार्च, 2025 को आधिकारिक तौर पर यह बातचीत शुरू हुई थी। यह समझौता दोनों देशों के बीच गहरे आपसी सम्बंधों और जीवंत लोकतंत्रों की साझेदारी पर आधारित है, इसका उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में व्यापार, आर्थिक सहयोग और रणनीतिक जुड़ाव को बढ़ावा देना है। 2024-25 में ओशिनिया और भारत के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 26 अरब अमरीकी डॉलर था। न्यूजीलैंड ओशिनिया क्षेत्र में भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जिसके साथ द्विपक्षीय व्यापार का मूल्य लगभग 1.3 अरब अमरीकी डॉलर है। भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते के लागू होने के साथ, बेहतर बाजार पहुंच, अधिक व्यापार सुविधा और दोनों देशों के बीच गहरे आर्थिक जुड़ाव के कारण द्विपक्षीय व्यापार में और वृद्धि होने की आशा है।
वार्ता के पांच औपचारिक दौरों और कई अंतर-सत्रों के माध्यम से, दोनों देशों ने 22 दिसंबर 2025 को शुरु होने के महज नौ महीने बाद ही समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए। इससे यह भारत द्वारा किसी विकसित देश के साथ किए गए सबसे तेजी से संपन्न होने वाले मुक्त व्यापार समझौतों में से एक बन गया।
समझौते पर हस्ताक्षर के अवसर पर वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने कहा, “ भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता विकसित देशों के साथ भारत के सम्बंधों में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह समझौता हमारे किसानों, महिलाओं, युवाओं, कारीगरों और उद्यमियों के लिए वैश्विक आर्थिक साझेदारी के सम्बंध में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण को दर्शाता है। पिछले कुछ वर्षों में 38 विकसित देशों के साथ भारत का यह नौवां समझौता है। समझौते का मूल उद्देश्य निर्यात, कृषि उत्पादकता, छात्र आवागमन, कौशल विकास, निवेश और सेवाओं को सशक्त बनाना है। न्यूजीलैंड द्वारा 20 अरब अमरीकी डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता भारत की विकास गाथा में मजबूत विश्वास का संकेत है। यह समझौता लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को मजबूत करने, नवाचार को बढ़ावा देने और महिला नेतृत्व वाले उद्यमों को वैश्विक बाजारों में फलने-फूलने में सक्षम बनाने पर विशेष बल देता है।”
वाणिज्य सचिव श्री राजेश अग्रवाल ने एक संदेश में कहा, “भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता हमारी आर्थिक साझेदारी में एक नए युग की शुरुआत करता है, यह विश्वास और पूरक शक्तियों पर आधारित है। अब न्यूजीलैंड के साथ निर्यात के लिए भारत के पास समान अवसर उपलब्ध हैं। यह मुक्त व्यापार समझौता कृषि उत्पादकता, जैविक उत्पादों, सेवाओं, परिवहन, आयुष और फार्मा क्षेत्रों तक पहुंच को बढ़ाता है, इससे अवसर व्यापक और भविष्य के अनुकूल हो जाते हैं। यह समझौता भारत के श्रम-प्रधान क्षेत्रों को मजबूत प्रतिस्पर्धात्मक बढ़ावा देता है। भारत के निर्यातकों को अब न्यूजीलैंड और व्यापक क्षेत्रीय व्यापार इको-सिस्टम में शून्य शुल्क की पहुंच प्राप्त है। भारतीय निर्यातक हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अधिक व्यापक स्तर पर और विविधीकरण के साथ काम कर सकते हैं। यह समझौता आज की पल-पल बदलती दुनिया में स्थायित्व प्रदान करता है।”
भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में हस्ताक्षरित किया गया। यह समझौता एक नई पीढ़ी की रणनीतिक व्यापार साझेदारी का प्रतिनिधित्व करता है, जो व्यापक, समावेशी, आत्मविश्वासपूर्ण, सुनियोजित और राष्ट्रीय हित पर आधारित है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, भारत विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ ऐसी साझेदारियां स्थापित कर रहा है जो हमारे श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए वास्तविक बाजार पहुंच और समग्र आर्थिक साझेदारियां सुनिश्चित करती हैं। यह मुक्त व्यापार समझौता 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की ओर अग्रसर एक नए दृष्टिकोण का प्रमाण है। यह व्यापार रोजगार सृजन करेगा, युवाओं, महिलाओं और लघु एवं मध्यम उद्यमों को सशक्त बनाएगा और समावेशी विकास और आर्थिक लचीलेपन की परिकल्पना के साथ पूर्णतः संरेखित होगा। यह मुक्त व्यापार समझौता दोनों देशों में सभी घरेलू प्रक्रियाओं के पूर्ण होने और अनुसमर्थन के बाद लागू होगा।
उत्पादकता से लोगों की समृद्धि तक: विकसित भारत 2047 के लिए शुल्क, प्रतिभा और परिवर्तन
वस्तु व्यापार: लागू होने पर न्यूजीलैंड के बाजार में अभूतपूर्व 100 प्रतिशतशुल्क-मुक्त पहुंच
यह मुक्त व्यापार समझौता भारत के न्यूजीलैंड को होने वाले 100 प्रतिशत निर्यात के लिए शुल्क-मुक्त पहुंच प्रदान करता है, इसमें सभी शुल्कलाइनें शामिल हैं, और इससे कपड़ा, परिधान, चमड़ा, जूते, रत्न और आभूषण, इंजीनियरिंग सामान और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाकर लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) और रोजगार को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा मिलने की आशा है।
इससे पहले, न्यूजीलैंड ने सिरेमिक, कालीन, ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स सहित प्रमुख भारतीय निर्यातों पर 10 प्रतिशत तक के उच्चतम शुल्क को बरकरार रखा था।
न्यूजीलैंड के अन्य व्यापारिक साझेदारों की तरह, भारतीय उत्पादों को प्रवेश के समय से ही शून्य शुल्क बाजार पहुंच प्राप्त होगी, इससे वे न्यूजीलैंड में पूरी तरह से प्रतिस्पर्धी होंगे और उन्हें समान अवसर मिलेंगे, जो भारत भर में श्रमिकों, कारीगरों, महिला उद्यमियों, युवाओं और लघु एवं मध्यम उद्यमों को सीधे तौर पर समर्थन प्रदान करेगा।
महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत अपने विनिर्माण क्षेत्र के लिए लकड़ी के लट्ठे, कोकिंग कोयला और धातुओं के अपशिष्ट और स्क्रैप सहित शुल्क-मुक्त इनपुट भी प्राप्त करता है, इससे उत्पादन लागत कम होती है और भारतीय उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ती है।
बाजार पहुंच को संतुलित किया गया और संवेदनशील क्षेत्रों को संरक्षित किया गया।
भारत ने द्विपक्षीय व्यापार मूल्य के 95 प्रतिशतहिस्से को कवर करने वाली 70.03 प्रतिशत शुल्कलाइनों पर शुल्कउदारीकरण की पेशकश की है, इसके साथ ही भारत के संवेदनशील क्षेत्रों की रक्षा के लिए 29.97 प्रतिशत शुल्क लाइनों को इससे बाहर रखा है।
जिन उत्पादों को प्रतिबंधित रखा गया है, उनमें मुख्य रूप से शामिल हैं – दुग्ध उत्पाद (दूध, क्रीम, मट्ठा, दही, पनीर आदि), पशु उत्पाद (भेड़ के मांस के अलावा), कृषि उत्पाद (प्याज, चना, मटर, मक्का, बादाम आदि), चीनी, कृत्रिम शहद, पशु, वनस्पति या सूक्ष्मजीवों से प्राप्त वसा और तेल, हथियार और गोला-बारूद, रत्न और आभूषण, तांबा और उससे बनी वस्तुएं (कैथोड, कारतूस, छड़ें, कॉइल आदि), एल्युमीनियम और उससे बनी वस्तुएं (पिंड, बिलेट, तार की छड़ें) आदि।
30.00 प्रतिशत शुल्कमदों पर तत्काल शुल्क समाप्त कर दिया जाएगा, इसमें लकड़ी, ऊन, भेड़ का मांस, चमड़ा-कच्ची खाल आदि शामिल हैं।
35.60 प्रतिशत शुल्कको 3, 5, 7 और 10 वर्षों में चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जाना है, इसमें पेट्रोलियम तेल, माल्ट का अर्क, वनस्पति तेल और चुनिंदा विद्युत और यांत्रिक मशीनरी, पेप्टोन आदि शामिल हैं।
शराब, फार्मास्युटिकल दवाएं, पॉलिमर, एल्युमीनियम, लोहा और इस्पात से बने सामान आदि जैसे 4.37 प्रतिशत उत्पादों पर शुल्क में कटौती की गई है ।
0.06 प्रतिशत शुल्कदर कोटा के अंतर्गत आते हैं, इनमें मनुका शहद, सेब, कीवी फल और दूध एल्ब्यूमिन सहित एल्ब्यूमिन शामिल हैं।
कृषि उत्पादकता साझेदारी, किसानों की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ावा देना
इस साझेदारी में उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना, बेहतर रोपण सामग्री, उत्पादकों के लिए क्षमता निर्माण, सहयोगात्मक अनुसंधान और बाग प्रबंधन, फसल कटाई के बाद की प्रक्रियाओं, आपूर्ति श्रृंखला प्रदर्शन और खाद्य सुरक्षा के लिए तकनीकी सहायता शामिल है। सेब उत्पादकों और टिकाऊ मधुमक्खी पालन तौर-तरीकों से सम्बंधित परियोजनाएं उत्पादन और गुणवत्ता मानकों को बढ़ाएंगी।
न्यूजीलैंड से चयनित कृषि उत्पादों (सेब, कीवी फल और मनुका शहद) और एल्ब्यूमिन के लिए बाजार पहुंच को न्यूनतम आयात मूल्य और अन्य सुरक्षा उपायों के साथ शुल्कदर कोटा प्रणाली के माध्यम से प्रबंधित किया जाएगा, इससे घरेलू किसानों की सुरक्षा के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण आयात और उपभोक्ता विकल्प सुनिश्चित होंगे।
सेब, कीवी और मनुका के लिए सभी शुल्कदर कोटा कृषि उत्पादकता कार्य योजनाओं के कार्यान्वयन के साथ जुड़े हुए हैं और एक संयुक्त कृषि उत्पादकता परिषद (जेएपीसी) द्वारा निगरानी की जाती है। यह संवेदनशील घरेलू कृषि क्षेत्रों के संरक्षण के साथ बाजार पहुंच को संतुलित करती है।
मनुका शहद: वर्तमान में लागू शुल्क: 66 प्रतिशत; न्यूजीलैंड से वर्तमान आयात: 14.2 मीट्रिक टन (0.3 मिलियन अमरीकी डॉलर) और विश्व से: 356.8 मीट्रिक टन (1.9 मिलियन अमरीकी डॉलर); कोटा के अंतर्गत आयात मात्रा: 200 मीट्रिक टन प्रति वर्ष, जिसमें 20 अमरीकी डॉलर प्रति किलोग्राम का न्यूनतम आयात मूल्य और 5 वर्षों में 75 प्रतिशत शुल्क कटौती शामिल है; कोटा से बाहर: 30 अमरीकी डॉलर प्रति किलोग्राम का न्यूनतम आयात मूल्य और 5 वर्षों में 75 प्रतिशत शुल्क कटौती शामिल है। शुल्क पहले वर्ष में 56.1 प्रतिशत, दूसरे वर्ष में 46.2 प्रतिशत, तीसरे वर्ष में 36.3 प्रतिशत, चौथे वर्ष में 26.4 प्रतिशत और पांचवें वर्ष से आगे 16.5 प्रतिशत होगा।
सेब: वर्तमान में लागू शुल्क: 50 प्रतिशत; न्यूजीलैंड से वर्तमान आयात: 31,392.6 मीट्रिक टन (32.4 मिलियन अमरीकी डॉलर) और विश्व से: 519,651.8 मीट्रिक टन (424.6 मिलियन अमरीकी डॉलर); कोटा के भीतर आयात मात्रा: 32,500 मीट्रिक टन (वर्ष 1) जो बढ़कर 45,000 मीट्रिक टन (वर्ष 6) हो जाएगी, 25 प्रतिशत शुल्क और 1.25 अमरीकी डॉलर/किलोग्राम के न्यूनतम आयात मूल्य (एमआईपी) के साथ (मौसमी अवधि: 1 अप्रैल-31 अगस्त); कोटा से बाहर: लागू प्रचलित शुल्क।
कीवी फल: वर्तमान में लागू शुल्क: 33 प्रतिशत; न्यूजीलैंड से वर्तमान आयात: 5,840 मीट्रिक टन (16.9 मिलियन अमरीकी डॉलर) और विश्व से: 49,167 मीट्रिक टन (61.4 मिलियन अमरीकी डॉलर); कोटा के भीतर आयात मात्रा: 6,250 मीट्रिक टन (वर्ष 1) जो बढ़कर 15,000 मीट्रिक टन (वर्ष 6) हो जाएगी, 0 प्रतिशत शुल्क और 1.80 अमरीकी डॉलर/किलोग्राम के न्यूनतम आयात मूल्य के साथ (मौसमी अवधि: 1 अप्रैल-15 अक्टूबर); कोटा से बाहर: 50 प्रतिशत और 2.50 अमरीकी डॉलर/किलोग्राम के न्यूनतम आयात मूल्य के साथ।
दूध एल्ब्यूमिन सहित एल्ब्यूमिन: वर्तमान में लागू शुल्क: 22 प्रतिशत; न्यूजीलैंड से वर्तमान आयात: 3,429.7 मीट्रिक टन (28.9 मिलियन अमरीकी डॉलर) और विश्व से: 18,801.4 मीट्रिक टन (175.3 मिलियन अमरीकी डॉलर); कोटा के भीतर आयात मात्रा: 1,000 मीट्रिक टन (वर्ष 1) जो बढ़कर 3,000 मीट्रिक टन (वर्ष 5) हो जाती है, इस पर कोटा से बाहर: लागू प्रचलित शुल्क 11 प्रतिशत शुल्क लागू होता है।
सेवाएं: न्यूजीलैंड का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रस्ताव हमारे युवाओं, महिलाओं और पेशेवरों को सशक्त बनाता है।
न्यूजीलैंड में भारत के लिए लगभग 118 सेवा क्षेत्रों में बाजार पहुंच सम्बंधी प्रतिबद्धताएं हैं, इनमें भारत के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं जैसे कि कंप्यूटर सम्बंधी सेवाएं, पेशेवर सेवाएं, दृश्य-श्रव्य सेवाएं, अन्य व्यावसायिक सेवाएं, दूरसंचार सेवाएं, निर्माण सेवाएं, वितरण सेवाएं, शिक्षा सेवाएं, पर्यावरण सेवाएं, वित्तीय सेवाएं, पर्यटन और यात्रा संबंधी सेवाएं आदि।
भारत के प्रमुख हित क्षेत्रों सहित लगभग 139 उप-क्षेत्रों में सबसे पसंदीदा राष्ट्र प्रतिबद्धता लागू है।
कुशल रोजगार के अवसर और वैश्विक अनुभव प्रदान करना:
एफटीए (मुक्त व्यापार समझौता) कुशल व्यवसायों में कार्यरत भारतीय पेशेवरों के लिए एक नया अस्थायी रोजगार प्रवेश (टीईई) वीजा मार्ग स्थापित करता है, इसमें किसी भी समय 5,000 वीजा का कोटा होता है और अधिकतम तीन साल तक का प्रवास संभव होता है।
यह मार्ग आयुष चिकित्सकों, योग प्रशिक्षकों, भारतीय रसोइयों और संगीत शिक्षकों जैसे भारतीय व्यवसायों के साथ-साथ आईटी, इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और निर्माण जैसे उच्च मांग वाले क्षेत्रों को भी शामिल करता है, इससे कुशल कार्यबल की गतिशीलता और सेवा व्यापार को मजबूती मिलती है।
भारतीय पेशेवरों, छात्रों और युवाओं के लिए सुगम आवागमन के बेहतर रास्ते
किसी भी देश के साथ पहली बार , न्यूजीलैंड ने भारत के साथ छात्र गतिशीलता और अध्ययन के बाद कार्य वीजा के लिए एक समर्पित मार्ग बनाया है। यह समझौता भारतीय छात्रों पर संख्यात्मक सीमा को हटाता है, अध्ययन के दौरान प्रति सप्ताह कम से कम 20 घंटे काम की गारंटी देता है, और अध्ययन के बाद विस्तारित कार्य अवसर प्रदान करता है – विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित में स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों के लिए तीन वर्ष तक और डॉक्टरेट धारकों के लिए चार वर्ष तक – इससे कौशल विकास और वैश्विक करियर के लिए स्पष्ट मार्ग प्रशस्त होते हैं।
यह समझौता प्रतिवर्ष 1,000 युवा भारतीयों के लिए 12 महीने की वैधता वाले बहु-प्रवेश कार्य अवकाश वीजा के माध्यम से युवा गतिशीलता को और बढ़ाता है। इससे वैश्विक अनुभव, कौशल अधिग्रहण और लोगों के बीच आपसी संबंध को बढ़ावा मिलता है।
निवेश: हमारे नवप्रवर्तकों, उद्योग और स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए 20 बिलियन अमरीकी डॉलर की प्रतिबद्धता
इस मुक्त व्यापार समझौते में भारत में 20 अरब अमरीकी डॉलर के निवेश को सुगम बनाने , दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग को मजबूत करने और ‘मेक इन इंडिया’ की परिकल्पना के तहत भारत के विकास और प्रगति के उद्देश्यों का समर्थन करने की प्रतिबद्धता शामिल है ।
निवेश, अनुसंधान और नवाचार , प्रौद्योगिकी प्रवाह और कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त रणनीतियों , विशेष रूप से नवीकरणीय ऊर्जा, डिजिटल सेवाओं और आधुनिक बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में, को पूरी तरह से शामिल किया गया है।
निवेश वितरण में किसी भी कमी को दूर करने के लिए एक ढांचा प्रदान करने के लिए समझौते में एक पुनर्संतुलन खंड शामिल किया गया है।इसका उद्देशय मजबूत और ठोस आर्थिक परिणाम सुनिश्चित करना है।
विकसित फार्मास्युटिकल और मेडिकल डिवाइस मार्केट में तेजी से प्रवेश: एक बड़ी सफलता
एफटीए ( मुक्त व्यापार समझौता) यूएस एफडीए, ईएमए, यूके एमएचआरए, हेल्थ कनाडा और अन्य तुलनीय नियामकों द्वारा अनुमोदित जीएमपी और जीसीपी निरीक्षण रिपोर्टों की स्वीकृति को सक्षम बनाकर फार्मास्यूटिकल्स और चिकित्सा उपकरणों के लिए पहुंच को सुव्यवस्थित करता है।
इससे दोहराव वाले निरीक्षण कम होंगे , अनुपालन लागत कम होगी और उत्पाद अनुमोदन में तेजी आएगी। इससे बाजार तक सुगम पहुंच सुनिश्चित होगी और न्यूजीलैंड को भारत के फार्मास्युटिकल और चिकित्सा उपकरण निर्यात में वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा।
बौद्धिक संपदा अधिकार
न्यूजीलैंड का मौजूदा जीआई कानून केवल भारत की वाइन और स्पिरिट के पंजीकरण की अनुमति देता है।
बौद्धिक संपदा के सम्बंध में, न्यूजीलैंड ने समझौते के लागू होने के 18 महीनों के भीतर अपने घरेलू भौगोलिक संकेत कानून में संशोधन करने की प्रतिबद्धता जताई है इसका उद्देश्य भारत की शराब, स्पिरिट और ‘अन्य वस्तुओं‘ का पंजीकरण सक्षम करना है, इसके साथ ही भारत को वही प्राथमिकता प्रदान करवाना है जो पहले यूरोपीय संघ को दी जाता थी।
इससे न्यूजीलैंड के बाजार में प्रतिष्ठित भारतीय सैनिकों को औपचारिक संरक्षण प्रदान करने का रास्ता खुल जाता है ।
लघु एवं मध्यम उद्यमों, महिला उद्यमियों, इनक्यूबेटरों और वैश्विक मूल्य श्रृंखला एकीकरण को बढ़ावा देना
यह समझौता समावेशी और भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण से तैयार किया गया है, श्रम-प्रधान क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाकर लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) और रोजगार को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा देने की उम्मीद है।
व्यापार बाधाओं में कमी और नियामकीय निश्चितता से वस्त्र, परिधान, इंजीनियरिंग सामान, रसायन, खाद्य प्रसंस्करण और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्रों में लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए भारतीय विनिर्माण और वैश्विक मूल्य श्रृंखला एकीकरण को मजबूती मिलेगी।
लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए संरचित सहयोग में व्यापार से सम्बंधित जानकारी तक बेहतर पहुंच, निर्यात तत्परता कार्यक्रम और न्यूजीलैंड के एसएमई इकोसिस्टम के साथ सम्बंध शामिल हैं। इसमें विशेष रूप से स्टार्टअप और महिलाओं और युवाओं के स्वामित्व वाले उद्यमों पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
किसानों, लघु एवं मध्यम उद्यमों, स्टार्टअप्स, छात्रों और पेशेवरों को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं तक बेहतर पहुंच, व्यापार बाधाओं में कमी और विकास और नवाचार के लिए बेहतर अवसरों से लाभ होने की उम्मीद है।
उत्पत्ति के नियम: एक संतुलित और सुदृढ़ ढांचा
यह समझौता उत्पाद विशिष्ट उत्पत्ति नियमों (पीएसआर) के लिए एक संतुलित और मजबूत ढांचा प्रदान करता है। यह दोनों पक्षों के क्षेत्रों के भीतर पर्याप्त परिवर्तन सुनिश्चित करता है और प्रमुख क्षेत्रों की मौजूदा आपूर्ति श्रृंखलाओं के साथ संरेखित रहता है।
इन नियमों के पूरक के रूप में गैर-पात्रतापूर्ण और न्यूनतम संचालन सम्बंधी प्रावधान हैं, साथ ही एक व्यापक, समयबद्ध और मजबूत सत्यापन तंत्र भी है। इसमें तरजीही शुल्कव्यवहार से इनकार करने और अस्थायी रूप से निलंबित करने के प्रावधान शामिल हैं।
ये सभी उपाय मिलकर मूल नियमों के मानदंडों के उल्लंघन, दुरुपयोग या जालसाजी को प्रभावी ढंग से रोकते हैं। इससे यह सुनिश्चित होता है कि समझौते का लाभ केवल वास्तविक भारतीय निर्यातकों को ही मिले।
व्यापारिक उपाय: भारत के घरेलू उद्योग की सुरक्षा
यह समझौता डंपिंग-विरोधी, सब्सिडी और प्रतिपूरक उपायों तथा वैश्विक सुरक्षा उपायों पर डब्ल्यूटीओ समझौतों के तहत दोनों पक्षों की प्रतिबद्धताओं की पुष्टि करता है।
यदि एफटीए से किसी घरेलू उद्योग को गंभीर क्षति पहुंचती है या पहुंचने का खतरा होता है तो एक द्विपक्षीय सुरक्षा तंत्र का प्रावधान है जो इस समझौते के तहत शुल्क कटौती के परिणामस्वरूप आयात में अचानक वृद्धि होने की स्थिति में लागू किया जा सकता है।
उपलब्ध उपायों में शुल्क में और कटौती को निलंबित करना या शुल्क दरों में वृद्धि करना शामिल है। ये प्रचलित एमएफएन लागू दर या समझौते के लागू होने के समय लागू एमएफएन दर में से जो भी कम हो, उससे अधिक नहीं होगी।
निर्यात विनिर्माण, सीमा शुल्क प्रक्रिया और व्यापार सुविधा के लिए उपयोग की जाने वाली आयात सम्बंधी त्वरित प्रक्रिया व्यवस्था:
मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) में लेन-देन की लागत को कम करने, पारदर्शिता बढ़ाने और सीमा प्रक्रियाओं को आधुनिक बनाने के लिए व्यापार सुविधा उपायों का एक व्यापक समूह शामिल है।
मानक कार्गो निकासी 48 घंटों के भीतर करने का वादा किया गया है, जबकि एक्सप्रेस शिपमेंट और नाशवान वस्तुओं की निकासी 24 घंटों के भीतर की जाती है।
इस समझौते में अधिकृत आर्थिक संचालकों, स्वचालन और कागज रहित एकल-खिड़की मंजूरी प्रणालियों का प्रावधान है।
निर्यात विनिर्माण के लिए इनपुट के रूप में काम करने वाले आयात के लिए तेज गति से काम करने वाले तंत्र यह सुनिश्चित करते हैं कि शुल्क रियायतें विशेष रूप से एमएसएमई और कृषि निर्यातकों के लिए प्रभावी बाजार पहुंच में बदलें।
इससे सीमा शुल्क प्रक्रियाओं का आधुनिकीकरण होता है, इससे व्यापार भागीदारों के बीच व्यापार में पूर्वानुमान, पारदर्शिता और एकरूपता सुनिश्चित होती है।
सुरक्षित और सुगम व्यापार के लिए स्मार्ट विनियमन: स्वच्छता और पौध-स्वच्छता उपाय
इस समझौते में स्वच्छता और पादप स्वच्छता (एसपीएस ) और व्यापार में तकनीकी बाधाओं (टीबीटी) के लिए समर्पित अध्याय शामिल हैं जो पारस्परिक आधार पर बाजार पहुंच आवेदनों की त्वरित प्रक्रिया को बढ़ावा देते हैं, प्रमाणीकरण और आयात परमिट प्रक्रियाओं को सरल बनाते हैं, और इलेक्ट्रॉनिक एसपीएस प्रमाणीकरण का प्रावधान करते हैं।
टीबीटी अध्याय के तहत बढ़ी हुई नियामक सहयोग और पारदर्शिता, शुल्क से परे प्रक्रियात्मक बाधाओं को कम करती है। इससे भारतीय निर्यातकों, विशेष रूप से खाद्य, कृषि और विनिर्माण क्षेत्रों में, न्यूजीलैंड के बाजार में पूर्वानुमानित और लागत प्रभावी पहुंच सुनिश्चित होती है।
ये नियम मानव, पशु और वनस्पति जीवन या स्वास्थ्य की सुरक्षा और वस्तुओं के व्यापार को सुगम बनाने के बीच सबसे बढ़िया संतुलन सुनिश्चित करते हैं।
न्यूजीलैंड के उच्च नियामक मानकों को देखते हुए, यह मान्यता वैश्विक बाजार तक पहुंच को काफी हद तक बढ़ाएगी, लेनदेन लागत को कम करेगी और आवश्यक स्वास्थ्य और सुरक्षा सुरक्षा उपायों को सुनिश्चित करते हुए सुगम बाजार पहुंच को सुविधाजनक बनाएगी।
अग्रणी आर्थिक सहयोग और तकनीकी साझेदारी
एफटीए दोनों पक्षों को कृषि और गैर-कृषि से संबंधित विभिन्न विषयगत क्षेत्रों में सहयोगात्मक गतिविधियों में संलग्न होने के अवसर प्रदान करता है।
सहकारी गतिविधियों में क्षमता निर्माण, तकनीकी सहायता और उत्पादकता बढ़ाने, किसानों की आय बढ़ाने में सहायता करने, कौशल विकास और व्यापार से परे अनुसंधान और विकास, प्रशिक्षण और नवाचार में सहयोग के विविधीकरण के लिए अन्य पहलें शामिल हैं।
कृषि के अंतर्गत सहयोग के क्षेत्रों में बागवानी, शहद उत्पादन, वानिकी, पशुधन, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन और शराब क्षेत्र शामिल हैं।
गैर-कृषि क्षेत्रों में, सहयोग पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों (आयुष), पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण, दृश्य-श्रव्य और रचनात्मक उद्योगों, खेल और पर्यटन तक फैला हुआ है। इसका उद्देश्य सांस्कृतिक आदान-प्रदान और क्षेत्रीय नवाचार को मजबूत करना है।
सांस्कृतिक व्यापार, पारंपरिक ज्ञान और जन-सहयोग: मुक्त व्यापार समझौतों में एक अभूतपूर्व पहल
संस्कृति, व्यापार, पारंपरिक ज्ञान और आर्थिक सहयोग पर समर्पित एक अध्याय दोनों पक्षों के लोगों की आर्थिक और सांस्कृतिक आकांक्षाओं को सक्षम बनाने और आगे बढ़ाने के लिए पारस्परिक सहयोग को बढ़ावा देता है।
न्यूजीलैंड ने अपने व्यापार समझौतों में पहली बार स्वास्थ्य और पारंपरिक चिकित्सा सेवाओं के लिए एक विशेष प्रावधान शामिल किया है। यह ऐतिहासिक प्रावधानभारत की आयुष प्रणालियों की वैश्विक मान्यता को बढ़ावा देता है , चिकित्सा सम्बंधी यात्रा को प्रोत्साहित करता है, स्वास्थ्य सेवाओं में सहयोग को बढ़ावा देता है और स्वास्थ्य, कल्याण और पारंपरिक चिकित्सा सेवाओं के वैश्विक केंद्र के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत करता है।
यह भारत के आयुष विषयों (आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सोवा-रिग्पा, सिद्धा और होम्योपैथी) के साथ-साथ माओरी स्वास्थ्य पद्धतियों को भी प्रमुखता देता है ।
यह दृश्य-श्रव्य और रचनात्मक उद्योगों में सहयोग को बढ़ावा देता है, पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों, खेल और पर्यटन के संरक्षण को प्रोत्साहित करता है, और भारत-न्यूजीलैंड सम्बंधों के सांस्कृतिक और मानवीय आयामों को मजबूत करता है।
इससे रचनात्मक उद्योगों, सांस्कृतिक आदान-प्रदान और जन-केंद्रित विकास के लिए नए रास्ते खुलते हैं ।
पारस्परिक मान्यता समझौते के माध्यम से जैविक उत्पादों का व्यापार: हिंद-प्रशांत क्षेत्र का प्रवेश द्वार
इस समझौते के तहत एक प्रारंभिक कदम के रूप में, पारस्परिक मान्यता व्यवस्था (एमआरए ) को लागू किया जाएगा, यह किसी तीसरे देश (ऑस्ट्रेलिया) के पारस्परिक रूप से स्वीकृत मानक की स्वीकृति पर आधारित है।
भारत वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान 80 से अधिक जैविक उत्पादों का निर्यात कर रहा है। इसी अवधि में, भारत से न्यूजीलैंड को कुल जैविक निर्यात 2,401.53 मीट्रिक टन रहा, इसका मूल्य 3.18 मिलियन अमरीकी डॉलर था। पारस्परिक मान्यता समझौते (एमआरए) के बाद बासमती चावल, अलसी, अरेबिका चेरी, इसबगोल, सोयाबीन तेल खली, जैविक काली चाय आदि जैविक उत्पादों की मांग में और वृद्धि होने की आशा है।
द्विपक्षीय व्यापार: प्रबल गति, अपार संभावनाएं
वस्तुओं और सेवाओं का कुल व्यापार 2024 में 2.4 अरब अमरीकी डॉलर तक पहुंच गया। भारत-न्यूजीलैंड द्विपक्षीय व्यापार ने हाल के वर्षों में मजबूत वृद्धि दर्ज की है, वित्त वर्ष 2024-25 में द्विपक्षीय व्यापार 1.3 अरब अमरीकी डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष के व्यापार की तुलना में 49 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।
एफटीए पर हस्ताक्षर होने के बाद, शुल्कसमाप्त होने, सेवाओं तक पहुंच बढ़ने, 20 अरब अमरीकी डॉलर के निवेश को सुरक्षित करने और मजबूत संस्थागत ढांचे की स्थापना के साथ, भारत-न्यूजीलैंड एफटीए से आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि होने, रोजगार के अवसर पैदा होने, निर्यात बढ़ने और दोनों देशों के बीच एक गहरी और अधिक लचीली आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने की आशा है।
खेती-बाड़ी, मत्स्य पालन से लेकर कारखानों तक: सौदे की शक्ति प्रमुख क्षेत्रों और राज्यों को प्रभावित करती है
शून्य शुल्क वाले बाज़ार पहुंच से भारत के प्रमुख निर्यात क्षेत्रों को महत्वपूर्ण बढ़ावा मिलेगा। निर्यात का एक मुख्य आधार माने जाने वाले वस्त्र और परिधान क्षेत्र में, परिधान, घरेलू साज-सज्जा, रेशे और हथकरघा उत्पादों सहित विभिन्न क्षेत्रों में उच्च वृद्धि और रोजगार सृजन देखने को मिलेगा। फलों, मसालों, अनाज, कॉफी और कोको जैसे उत्पादों पर शुल्क समाप्त होने से कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे। चमड़ा और जूते-चप्पल क्षेत्र को भी अधिकतम शुल्क हटाने से लाभ होगा, इससे भारत की वैश्विक स्थिति मजबूत होगी। साथ ही, मशीनरी, ऑटोमोटिव, इलेक्ट्रॉनिक्स, रसायन, प्लास्टिक और रबर सहित इंजीनियरिंग, विनिर्माण और औद्योगिक क्षेत्रों को भी शुल्क कटौती से लाभ होगा, इससे भारत का विविध निर्यात आधार मजबूत होगा और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में इसका गहरा एकीकरण होगा।
भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता व्यापक लाभ प्रदान करने के लिए तैयार है। यह भारत के निर्यात परिदृश्य की विविधतापूर्ण और विशिष्ट प्रकृति को दर्शाता है। गुजरात के रसायन और रत्न, महाराष्ट्र के फार्मास्यूटिकल्स और ऑटो कंपोनेंट्स, तमिलनाडु के वस्त्र, चमड़ा और ऑटो कल-पुर्जे, उत्तर प्रदेश के चमड़ा, कालीन और हस्तशिल्प, पंजाब के कृषि उत्पाद, कर्नाटक के फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स, और पश्चिम बंगाल के चाय और इंजीनियरिंग सामान जैसे प्रमुख निर्यातक राज्यों को बेहतर मूल्य प्रतिस्पर्धा से लाभ मिलने की संभावना है। आंध्र प्रदेश और केरल जैसे तटीय राज्यों को समुद्री निर्यात से अधिक मूल्य प्राप्त होने की संभावना है। इसके साथ ही उत्तर-पूर्वी राज्यों को चाय, मसाले, बांस और जैविक उत्पादों के लिए बेहतर बाजार पहुंच मिल सकती है। कुल मिलाकर, इस समझौते से भारत के निर्यात प्रोफाइल में और अधिक विविधता और मजबूती आने की आशा है।
भारत निर्वाचन आयोग ने 15 मार्च, 2026 को असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की विधानसभाओं के आम चुनाव और उपचुनाव के कार्यक्रम की घोषणा की। आयोग ने राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों को आदर्श आचार संहिता का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
इससे पहले आयोग ने चुनाव वाले राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और उनके सीमावर्ती राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों, सीईओ, डीजीपी और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ प्रवर्तन एजेंसियों के प्रमुखों के साथ कई समीक्षा बैठकें की हैं। आयोग ने हिंसा-मुक्त, धमकी-मुक्त और प्रलोभन-मुक्त चुनाव सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
शिकायतों का निपटारा 100 मिनट के भीतर सुनिश्चित करने के लिए, सभी राज्यों में 2,728 से अधिक फ्लाइंग स्क्वाड टीमें तैनात की गई हैं। इसके अलावा, विभिन्न स्थानों पर अचानक नाकेबंदी करने के लिए 3,142 से अधिक स्टैटिक सर्विलांस टीमें (नकद, शराब, हथियार का परिवहन को रोकने के लिए चुनाव आयोग द्वारा गठित विशेष दल) भी तैनात की गई हैं।अवैध शराब के निर्माण, भंडारण और वितरण के खिलाफ विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं।
26 फरवरी, 2026 कोचुनाव जब्ती प्रबंधन प्रणाली के सक्रिय होने के बाद से, 27 अप्रैल, 2026 तक के आंकड़े इस प्रकार है।
राज्य
नकद (करोड़ रुपये में)
शराब कीमात्रा (लीटर में)
शराब का मूल्य(करोड़ रुपये में)
नशीले पदार्थ का मूल्य(करोड़ रुपये में)
कीमतीधातु(करोड़ रुपये में)
मुफ्त बांटी जाने वाली चीजें/अन्य(करोड़ रुपये में)
कुल(करोड़ रुपये में)
पश्चिम बंगाल
30.00
48,46,183
126.85
110.12
58.28
184.85
510.10
इसके साथ ही पश्चिम बंगाल में अवैध प्रलोभनों की कुल ज़ब्ती 510 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है। यह राज्य में विधानसभा चुनाव, 2021 के दौरान दर्ज की गई 339 करोड़ रुपये की ज़ब्ती से भी अधिक है।
आंध्र प्रदेश निवेश और नवाचार के एक प्रमुख केन्द्र के रूप में उभर रहा है: उपराष्ट्रपति
अमरावती को स्थायी राजधानी बनाना जनता की आकांक्षाओं को दर्शाता है: उपराष्ट्रपति
‘विकसित भारत के लिए विकसित राज्यों की आवश्यकता है’: उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की बात को दोहराया
नई दिल्ली – उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज विशाखापत्तनम में आयोजित आंध्र विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोह में भाग लिया।
सभा को संबोधित करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि आंध्र विश्वविद्यालय की उत्कृष्टता की एक शताब्दी पूरे होने के इस ऐतिहासिक अवसर का हिस्सा बनना उनके लिए सौभाग्य की बात है। यह एक ऐसा संस्थान है जो न केवल इतिहास का साक्षी रहा है, बल्कि उसे आकार देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि पिछले सौ वर्षों के दौरान, यह विश्वविद्यालय विचारों का एक संगम स्थल रहा है और इसने राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले विद्यार्थियों की कई पीढ़ियों को निखारा है।
विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति और भारत के सबसे प्रतिष्ठित दार्शनिकों एवं राजनीतिज्ञों में से एक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की विरासत को अत्यंत सम्मानपूर्वक याद करते हुए, उपराष्ट्रपति ने शिक्षा को बुद्धि और चरित्र, दोनों के विकास का साधन मानने के उनके दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह दृष्टिकोण आज भी अत्यंत प्रासंगिक है।
उपराष्ट्रपति ने नोबेल पुरस्कार विजेता सी.वी. रमन सहित विशाखापत्तनम से जुड़े कई प्रख्यात व्यक्तियों का उल्लेख किया। सी.वी. रमन ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा इसी शहर में प्राप्त की थी और पूर्व उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडू आंध्र विश्वविद्यालय के एक प्रतिष्ठित पूर्व छात्र हैं। उपराष्ट्रपति ने कहा कि शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार, पद्म विभूषण, पद्म श्री और साहित्य अकादमी सम्मान प्राप्त करने वाली कई प्रख्यात हस्तियां आंध्र विश्वविद्यालय की देन हैं।
30वें सीआईआई साझेदारी शिखर सम्मेलन में भाग लेने हेतु विशाखापत्तनम के अपने पूर्व दौरे का उल्लेख करते हुए, उपराष्ट्रपति ने मुख्यमंत्री श्री एन. चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व में आंध्र प्रदेश द्वारा की गई तीव्र प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस राज्य ने अपने विकास की गति को तेज किया है, महत्वपूर्ण निवेश आकर्षित किए हैं और नवाचार एवं विकास के केन्द्र के रूप में अपनी स्थिति को मजबूत किया है। उन्होंने राज्य के प्रौद्योगिकी इकोसिस्टम को बढ़ावा देने में सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री नारा लोकेश की भूमिका की भी सराहना की।
आंध्र प्रदेश में बढ़ते वैश्विक विश्वास पर प्रकाश डालते हुए, उपराष्ट्रपति ने गूगल जैसी अग्रणी प्रौद्योगिकी कंपनियों की रुचि और निवेश का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विशाखापत्तनम विकास के एक प्रमुख केन्द्र के रूप में उभर रहा है। विशेष रूप से डेटा सेंटर, आईटी, पर्यटन, इलेक्ट्रॉनिक्स और डिजिटल अवसंरचना जैसे क्षेत्रों में, जिसमें हाइपरस्केल डेटा सेंटर और आईटी निवेश सहित प्रमुख परियोजनाएं शामिल हैं।
उपराष्ट्रपति ने संसद में अमरावती से संबंधित विधेयक पारित होने के बाद इस शहर को राज्य की स्थायी राजधानी घोषित किए जाने पर आंध्र प्रदेश की जनता को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस विधेयक के पारित होने के दौरान उन्हें राज्यसभा की अध्यक्षता करने और जनता की खुशी तथा गर्व का साक्षी बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उन्होंने इस निर्णय को जनता की सामूहिक आकांक्षाओं का प्रतिबिंब बताया और कहा कि यह राज्य के प्रशासनिक भविष्य को स्पष्टता, स्थिरता और दिशा प्रदान करेगा।
विकसित भारत की परिकल्पना का उल्लेख करते हुए, उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के इस कथन को याद किया कि “विकसित भारत केवल विकसित राज्यों के जरिए ही साकार हो सकता है।” उन्होंने कहा कि दूरदर्शी नेतृत्व, सशक्त शासन और प्रभावी क्रियान्वयन के बल पर आंध्र प्रदेश सबसे तेजी से विकास करने वाले राज्यों में से एक बनकर उभरा है।
उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश निवेश का एक प्रमुख गंतव्य बन गया है और इसने 2025-26 में देश के प्रस्तावित निवेशों के 25 प्रतिशत से अधिक का योगदान दिया है। उन्होंने समयबद्ध मंजूरी, पारदर्शी शासन और भूमि, बिजली, कनेक्टिविटी एवं कुशल कार्यबल तक निर्बाध पहुंच प्रदान करने वाली एक ठोस एकल-खिड़की प्रणाली सहित निवेशकों के अनुकूल राज्य की नीतियों पर प्रकाश डाला।
यह बताते हुए कि सफलता में समय लगता है, उपराष्ट्रपति ने कहा कि सचिन तेंदुलकर, जिन्हें प्यार से “क्रिकेट का भगवान” कहा जाता है, को भी शतकों का शतक बनाने के लिए इंतजार करना पड़ा था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सफलता प्राप्त करने के लिए धैर्य अत्यंत आवश्यक है।
उन्होंने आगे कहा कि व्यक्ति को आंतरिक दबाव को संभालना सीखना चाहिए। उन्होंने कहा कि असफलताएं मूल्यवान सबक सिखाती हैं और इससे मनोबल नहीं गिरने नहीं देना चाहिए। उन्होंने सभी से आत्मविश्वास के साथ जीवन का सामना करने का आग्रह किया।
इस अवसर पर, उपराष्ट्रपति ने भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू; ओडिशा के राज्यपाल के. हरि बाबू; जीएमआर समूह के संस्थापक एवं अध्यक्ष ग्रांधी मल्लिकार्जुन राव; भारत सरकार के पूर्व केन्द्रीय गृह सचिव के. पद्मनाभैया; साइएंट के संस्थापक एवं कार्यकारी अध्यक्ष बी. वी. आर. मोहन रेड्डी; लॉरस लैब्स के संस्थापक एवं सीईओ सत्यनारायण चावा; भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली के पूर्व निदेशक वी. एस. राजू; भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर के पूर्व प्रोफेसर एम. आर. माधव; प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया के सीईओ विजय जोशी और फिल्म निर्माता त्रिविक्रम श्रीनिवास को विशिष्ट पूर्व छात्र पुरस्कार से सम्मानित किया।
इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने एक स्मारक सिक्का, एक स्मारक डाक टिकट और एक कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी किया। उपराष्ट्रपति की उपस्थिति में आंध्र विश्वविद्यालय और संयुक्त राज्य अमेरिका के फ्लोरिडा विश्वविद्यालय, ऑक्समिक लैब्स इंक. और भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) के बीच तीन समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान भी हुआ। बाद में, उन्होंने आंध्र विश्वविद्यालय के इतिहास और उसके विकास को दर्शाने वाली एक फोटो प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।
आंध्र प्रदेश के राज्यपाल और आंध्र विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री अब्दुल नजीर; पूर्व उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडू; मुख्यमंत्री श्री एन. चंद्रबाबू नायडू; केन्द्रीय नागर विमानन मंत्री श्री किंजरापु राममोहन नायडू; दिग्गज क्रिकेटर श्री सचिन तेंदुलकर; ओडिशा के राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभमपति; केन्द्रीय राज्यमंत्री श्री भूपति राजू श्रीनिवास वर्मा; सूचना प्रौद्योगिकी एवं मानव संसाधन विकास मंत्री श्री नारा लोकेश; समाज कल्याण मंत्री श्री डोला श्री बाला वीरंजनेय स्वामी; कुलपति प्रो. जी. पी. राजा शेखर; विद्यार्थी, संकाय सदस्य, कर्मचारी और पूर्व छात्र इस अवसर पर उपस्थित थे।
इससे पहले आज, उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने श्रीकाकुलम जिले में श्री कूर्मनाथ स्वामी मंदिर और अरासवल्ली श्री सूर्यनारायण स्वामी मंदिर में पूजा-अर्चना की।
उपायुक्त-सह-प्रधान जिला जनगणना पदाधिकारी, राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देशानुसार प्रशिक्षण शुरू
सभी प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों को व्यावहारिक उदाहरणों, CMMS वेब पोर्टल तथा मोबाइल ऐप के माध्यम से मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना से संबंधित समस्त प्रक्रियाओं का विस्तृत प्रशिक्षण दिया जा रहा है
जनगणना संबंधी किसी भी जानकारी, सहायता या स्व-जनगणना पोर्टल के उपयोग के लिए नागरिक CMMS वेब पोर्टल एवं संबंधित मोबाइल ऐप का उपयोग कर सकते हैं
राँची,27.04.2026 – राँची जिला अंतर्गत भारत जनगणना 2027 के प्रथम चरण मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना की तैयारी में उपायुक्त-सह-प्रधान जिला जनगणना पदाधिकारी, राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देशानुसार आज दिनांक 27.04.2026 से चार्ज स्तर पर प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों का प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हो गया है।
सभी प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों को व्यावहारिक उदाहरणों, CMMS वेब पोर्टल तथा मोबाइल ऐप के माध्यम से मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना से संबंधित समस्त प्रक्रियाओं का विस्तृत प्रशिक्षण दिया जा रहा है
यह प्रशिक्षण दिनांक 09.05.2026 तक चलेगा।राँची जिले के कुल 19 चार्जों में आयोजित इस प्रशिक्षण में चार्ज स्तर के फील्ड ट्रेनरों द्वारा सभी प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों को व्यावहारिक उदाहरणों, CMMS वेब पोर्टल तथा मोबाइल ऐप के माध्यम से मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना से संबंधित समस्त प्रक्रियाओं का विस्तृत प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण में स्व-जनगणना (Self Enumeration) की प्रक्रिया, जनगणना 2027 के विभिन्न चरणों, कार्यप्रणाली, डिजिटल उपकरणों के उपयोग तथा CMMS वेब पोर्टल पर डेटा प्रबंधन के महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर विशेष जोर दिया जा रहा है।प्रशिक्षण कार्यक्रम की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए राँची जिले के सभी प्रखंडों के चार्ज/नोडल पदाधिकारी अपने-अपने चार्ज में उपस्थित रहकर निगरानी कर रहे हैं।
मुख्य तिथियाँ:प्रशिक्षण अवधि: 27 अप्रैल 2026 से 09 मई 2026 तक
स्व-जनगणना (Self Enumeration) विकल्प: 01 मई 2026 से 15 मई 2026 तक
मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना: 16 मई 2026 से 14 जून 2026 तक
सभी प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों से अपेक्षा है कि वे प्रशिक्षण को गंभीरता से लें और मैदान में उतरकर उच्च गुणवत्ता वाला कार्य सुनिश्चित करें
जिला प्रशासन का प्रयास है कि जनगणना 2027 का यह प्रथम चरण पूर्णतः डिजिटल, पारदर्शी, सटीक और समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए। प्रशिक्षित प्रगणक एवं पर्यवेक्षक क्षेत्र में जाकर प्रत्येक मकान का सूचीकरण करेंगे तथा आवासीय विवरण एकत्रित करेंगे। उपायुक्त-सह-प्रधान जिला जनगणना पदाधिकारी, राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा कि जनगणना एक राष्ट्रीय महत्व का कार्य है। राँची जिला इसे पूरी निष्ठा और प्रोफेशनलिज्म के साथ संपन्न करेगा। सभी प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों से अपेक्षा है कि वे प्रशिक्षण को गंभीरता से लें और मैदान में उतरकर उच्च गुणवत्ता वाला कार्य सुनिश्चित करें।
जनगणना संबंधी किसी भी जानकारी, सहायता या स्व-जनगणना पोर्टल के उपयोग के लिए नागरिक CMMS वेब पोर्टल एवं संबंधित मोबाइल ऐप का उपयोग कर सकते हैं
जनगणना संबंधी किसी भी जानकारी, सहायता या स्व-जनगणना पोर्टल के उपयोग के लिए नागरिक CMMS वेब पोर्टल एवं संबंधित मोबाइल ऐप का उपयोग कर सकते हैं। जिला जनगणना कार्यालय, राँची द्वारा इस कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।
जिला स्तर के वरीय पदाधिकारियों द्वारा प्रशिक्षण की गुणता पर विशेष ध्यान रखी जा रही है। साथ ही इसका निरीक्षण भी किया जा रहा है।