रांची,27.04.2026 – झारखंड कांग्रेस मुख्यालय, रांची में जिलों एवं महानगरों के जिला अध्यक्षों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के स्थायी आमंत्रित सदस्य सह झारखंड प्रभारी श्री के. राजू, सह प्रभारी डॉ. श्रीबेला प्रसाद, प्रदेश अध्यक्ष श्री केशव महतो कमलेश और विधायक दल के नेता श्री प्रदीप यादव की उपस्थिति में आयोजित की गई।
बैठक में संगठन की मजबूती, आगामी कार्यक्रमों की रणनीति और जमीनी स्तर पर पार्टी की गतिविधियों की समीक्षा की गई।
बैठक में प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष श्री बंधु तिर्की, श्री जलेश्वर महतो, श्री शाहज़ादा अनवर, कार्यालय प्रभारी श्री अभिलाष शाहू तथा सह-प्रभारी श्री राजन वर्मा सहित सभी जिला अध्यक्ष शामिल हुए।
28 अप्रैल को संध्या 5 बजे जिला स्कूल मैदान से अल्बर्ट एक्का चौक तक निकाला जाएगा विशाल मशाल जुलूस
रांची,27.04.2026 – भाजपा नेत्री एवं जमशेदपुर पूर्वी की विधायक पूर्णिमा साहू ने कहा कि 16-17 अप्रैल को संसद में देश की आधी आबादी को समान अधिकार और भागीदारी देने का एक ऐतिहासिक अवसर आया था। किंतु दुर्भाग्यपूर्ण है कि कांग्रेस और इंडी गठबंधन के दलों ने इसका विरोध कर महिलाओं के साथ विश्वासघात किया। श्रीमति साहू भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित कर रही थी।
श्रीमती साहू ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन में स्पष्ट कहा है कि महिलाओं को सम्मान, अधिकार और नीति-निर्माण में भागीदारी देना कोई उपकार नहीं, बल्कि उनका स्वाभाविक अधिकार है।
उन्होंने विपक्ष पर हमला करते हुए कहा कि विपक्षी दलों ने वर्षों तक न विधानसभा में और न ही लोकसभा में महिलाओं को पर्याप्त अवसर दिया। लेकिन जब महिलाओं को अधिकार देने का समय आया, तब उनका महिला-विरोधी चरित्र उजागर हो गया।
श्रीमती साहू ने आगे कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी सदन में स्पष्ट किया है कि परिसीमन से किसी राज्य को नुकसान नहीं होगा, बल्कि इसका उद्देश्य जनसंख्या के आधार पर संतुलित और न्यायसंगत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है। इसके बावजूद कांग्रेस और इंडी गठबंधन देशभर में भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं और महिलाओं को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं।
उन्होंने कहा कि “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” पहले से ही जनगणना और परिसीमन से जुड़ा हुआ है। वर्ष 2023 में जब यह अधिनियम सदन में प्रस्तुत किया गया था, तब किसी भी विपक्षी दल ने इसका विरोध नहीं किया। उस समय लोकसभा चुनाव नजदीक होने के कारण कांग्रेस ने जल्दबाजी में समर्थन दिया, लेकिन अब जब इसे लागू करने की बात आई है, तो वही दल आज विरोध कर रहे हैं।
श्रीमति साहू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पंचायत से लेकर संसद तक महिलाओं को अधिक से अधिक अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जबकि कांग्रेस का इतिहास महिलाओं के प्रति नकारात्मक रहा है। उन्होंने कांग्रेस नेताओं पर महिलाओं के प्रति अपमानजनक और असंवेदनशील बयान देने का आरोप भी लगाया।
उन्होंने कहा कि आज की महिलाएं मूकदर्शक नहीं, बल्कि सशक्त और जागरूक हैं। वे अपने अधिकारों के प्रति सजग हैं और उन्हें पाने के लिए आवाज उठाने को पूरी तरह तैयार हैं।
प्रेस वार्ता में पूर्णिमा साहू ने जानकारी देते हुए कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन और इंडी गठबंधन के महिला विरोधी मानसिकता को लेकर 28 अप्रैल को संध्या 5 बजे हजारों महिलाओं द्वारा जिला स्कूल मैदान से अल्बर्ट एक्का चौक तक एक विशाल मशाल जुलूस निकाला जाएगा, जो नारी शक्ति, सम्मान और अधिकारों की मजबूत अभिव्यक्ति होगा।
इस अवसर पर आरती कुजूर, सीमा सिंह, रफिया नाज़ एवं बबीता झा भी उपस्थित थीं।
रामगढ़,27.04.2026 – रामगढ़ पुलिस ने राहुल दुबे गैंग के एक सक्रिय सदस्य को पतरातू क्षेत्र से गिरफ्तार किया, आरोपी के पास से 9 एमएम का पिस्टल भी बरामद हुआ है।
एसडीपीओ राघवेंद्र शर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि सोलिया गांव निवासी अनीश अंसारी अवैध हथियार के साथ घूम रहा है। पुलिस टीम ने सोलिया गांव में कार्रवाई करते हुए अनीश अंसारी को गिरफ्तार कर लिया।
उसकी निशानदेही पर उसके घर से 9 एमएम पिस्टल बरामद की गई। पूछताछ में आरोपी ने खुलासा किया कि यह हथियार उसे राहुल दुबे गैंग के एक सदस्य ने रखने के लिए दिया था। अनीश अंसारी के खिलाफ पहले से भी पतरातू थाना में मामला दर्ज है
गांव को मजबूत करने की दिशा में हमारी सरकार निरंतर प्रयासरत
खेतों में सोलर पावर प्लांट लगाकर आय सृजन करें ग्रामीण
आम जनमानस की अपेक्षाओं पर खरा उतरें जनप्रतिनिधि – हेमन्त सोरेन, मुख्यमंत्री
हरिवंश टाना भगत इंडोर स्टेडियम, खेलगांव, रांची,24.04.2026 – मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि राज्य के समग्र विकास एवं ग्रामीण सशक्तिकरण की दिशा में जनप्रतिनिधियों की भूमिका महत्वपूर्ण है, आप सभी ऐसे लोग हैं जो ग्रामीणों के सबसे करीब रहते हैं। आप सभी लोग ग्राम-पंचायत व्यवस्था का अभिन्न अंग हैं। आपकी कार्य कुशलता से ही राज्य का सर्वांगीण विकास का रास्ता तय किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य का विकास तभी होगा जब गांव का विकास होगा। गांव राज्य के जड़ हैं, जब जड़ मजबूत होगी तभी पेड़ मजबूत होगी। गांव को मजबूत करने की दिशा में हमारी सरकार निरंतर सकारात्मक कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार राजधानी रांची या हेडक्वार्टर से नहीं बल्कि गाँवों से चलने वाली सरकार है, क्योंकि विकास की असली नींव गाँवों में ही निहित है। भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती गाँवों से शुरू होती है। गाँवों को सशक्त किए बिना राज्य और देश के विकास की कल्पना अधूरी है। सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि योजनाओं का लाभ विकास की राह में खड़े समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे। पहले जहाँ यह शिकायत मिलती थी कि सुदूरवर्ती क्षेत्रों तक न तो सरकार की आवाज़ पहुँचती थी और न योजनाएँ, वहीं अब पंचायत स्तर पर कैंप लगाकर समस्याओं का समाधान किया जा रहा है और यह प्रक्रिया निरंतर जारी रहेगी। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन आज हरिवंश टाना भगत इंडोर स्टेडियम, खेलगांव, रांची में आयोजित “मुख्यमंत्री पंचायत प्रोत्साहन पुरस्कार समारोह-सह-मुखिया सम्मेलन 2026 (दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल)” को संबोधित कर रहे थे।
उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित करना एक अच्छी पहल है
मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि राज्य में पंचायत सेवकों से लेकर उच्च अधिकारियों तक एक सशक्त प्रशासनिक ढांचा कार्य कर रहा है, वहीं पंचायत से लेकर मुख्यमंत्री तक जनप्रतिनिधियों की एक समानांतर व्यवस्था है। इन दोनों के समन्वय से ही विकास की गति तेज होगी। जनप्रतिनिधि सरकार की योजनाओं और संसाधनों को अपनी जिम्मेदारी समझें, तभी उनका सही उपयोग सुनिश्चित हो सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कार्यक्रम के में राज्य सरकार द्वारा करोड़ों रुपये की प्रोत्साहन राशि का वितरण किया गया है जो उत्कृष्ट कार्य करने वालों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता और सम्मान का प्रतीक है। अच्छे कार्यों की पहचान किया जाना और बेहतर कार्य के लिए सम्मानित करना आवश्यक है, ताकि इस पहल से अन्य लोग भी प्रेरित हों और बेहतर कार्य करने की दिशा में आगे बढ़ें। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा ‘मुख्यमंत्री पंचायत प्रोत्साहन पुरस्कार योजना’ की शुरुआत की गई है। यह योजना केवल एक पुरस्कार योजना नहीं है बल्कि यह एक परिवर्तनकारी पहल है जिसका उद्देश्य ग्रामीण सेवाओं को अधिक प्रभावी और सुदृढ़ बनाना तथा पंचायतों को नवाचार एवं उत्कृष्ट कार्यो के लिए प्रेरित करना भी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के माध्यम से विकास की गति को तेज किया जा सकता है। ग्रामीण स्तर पर सुशासन, पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करना हम सभी की जिम्मेदारी है।
जनप्रतिनिधि जल संकट से उबरने की रखें पूरी तैयारी
मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि बीते वर्षों में राज्य में भूख से किसी भी व्यक्ति की मृत्यु नहीं होना इस बात का प्रमाण है कि सरकार अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से निभा रही है। समाज का एक बहुत बड़ा वर्ग कोई आपदा या संकट के समय सबसे अधिक प्रभावित होता है, ऐसे में सरकार को संवेदनशील निर्णय लेने होते हैं, जो हमारी सरकार निरन्तर करती रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी गर्मी का मौसम है। गर्मी के समय में अक्सर देखा जाता है कि ग्रामीण क्षेत्र एवं शहरों में जल संकट की समस्या उत्पन्न होती है। इस समय पुराने तालाबों की सफाई और गहरीकरण कार्य किया जाए, ताकि वर्षा जल का अधिकतम संचयन हो सके। साथ ही चापाकलों के पास सोक पिट निर्माण को बढ़ावा दिया जाये। जिससे भूजल स्तर बना रहे और जल संकट से राहत मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्राम पंचायतों में पानी की समस्याओं को देखना जनप्रतिनिधियों का कार्य है। चापकलों के समीप किस प्रकार सोक पीट बनाई जाए इस निमित्त विभाग लोगों को प्रशिक्षण दे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों को बड़ी राशि हस्तांतरित की गई है। यह संसाधन ग्राम पंचायतों को और अधिक सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। जनप्रतिनिधि ग्रामीणों से बेहतर समन्वय बनाकर योजनाओं को चुने। जब आप आवश्यकता के अनुरूप योजनाओं का चुनाव कर उन्हें कार्यान्वित करें तभी बदलाव संभव हो सकेगा।
खेतों में सोलर पावर प्लांट लगाकर आय सृजन करें ग्रामीण
मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि खेतों का उपयोग केवल पारंपरिक खेती तक सीमित न रखते हुए खाली जमीन पर सोलर प्लांट लगाकर बिजली उत्पादन किया जा सकता है, जिसे सरकार खरीदेगी। इससे ग्रामीणों की आय में वृद्धि होगी और वे आत्मनिर्भर बन सकेंगे। राज्य में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए लिफ्ट इरिगेशन जैसी योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है, जिसमें संताल परगना में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। भविष्य में इन योजनाओं को अन्य क्षेत्रों में भी लागू किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में वैसी भूमि जहां खेती का कार्य कम अवधि के लिए किया जाता है या खेत बंजर रह जाते हैं वहां सामूहिक रूप से ग्राम सभा कर सोलर पावर प्लांट लगाकर ग्रामीण समृद्ध हो सकते हैं।
जनप्रतिनिधि और आम जनमानस के बीच होनी चाहिए बेहतर समन्वय
मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि पंचायत स्तर पर ही विभिन्न सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है, जिसमें आधार (UID) से जुड़े कार्य भी शामिल हैं। इसके लिए एमओयू किया गया है, जिससे ग्रामीणों को गांव के ही कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) में सुविधा मिलेगी और उन्हें बार-बार दूरस्थ स्थानों पर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार और जनप्रतिनिधियों के बीच निरंतर संपर्क और संवाद बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है, संपर्क बना रहने से योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन संभव होता है और समस्याओं का समाधान भी तेजी से किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज आयोजित इस सम्मेलन का उद्देश्य जनप्रतिनिधि और जनता के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत करना भी है।
आम जनमानस की अपेक्षाओं पर खरा उतरें
मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने सभी जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करें और आम जनमानस की अपेक्षाओं पर खरा उतरें। मुख्यमंत्री ने कहा सरकार द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे संसाधनों और जनप्रतिनिधियों के सक्रिय सहयोग से झारखण्ड के गांव निरंतर विकास की दिशा में आगे बढ़ेंगे और आमजन की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित किया जा सकेगा।
इस अवसर पर मंत्री श्रीमती दीपिका पांडेय सिंह, मंत्री डॉ० इरफान अंसारी, मंत्री श्रीमती शिल्पी नेहा तिर्की, विधायक श्री सुरेश बैठा, विधायक श्रीमती ममता देवी, विधायक श्री राजेश कच्छप, मुख्य सचिव श्री अविनाश कुमार, निदेशक पंचायती राज श्रीमती बी० राजेश्वरी एवं निदेशक UIDAI, RO श्री नीरज कुमार सहित बड़ी संख्या में ग्राम पंचायतों से पहुंचे जनप्रतिनिधि सहित अन्य लोग उपस्थित थे।
नई दिल्ली – केंद्रीय संचार एवं उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने 22 अप्रैल को उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय की प्रमुख पहल, अष्टलक्ष्मी दर्शन युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम के विद्यार्थियों के साथ आभासी रूप से संवाद किया। कार्यक्रम में मंत्रालय के सचिव संजय जाजू, संयुक्त सचिव नीरज कुमार और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के अंतर्गत श्री सिंधिया ने आईआईटी गुवाहाटी, असम विश्वविद्यालय और तेजपुर विश्वविद्यालय में क्रमशः 13वें, 14वें और 15वें बैच के विद्यार्थियों के साथ बातचीत की। प्रत्येक बैच में 100 छात्र शामिल हुए, जिनमें छत्तीसगढ़, नई दिल्ली, मध्य प्रदेश, राजस्थान और गोवा से 20-20 विद्यार्थियों ने भाग लिया। इन सभी विद्यार्थियों ने 15 मार्च, 2026 से 10 अप्रैल, 2026 तक चलने वाले युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम में भाग लिया।
संवादात्मक कार्यक्रम का शुभारंभ उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास (डीओएनईआर) के संयुक्त सचिव श्री नीरज कुमार के उद्घाटन उद्बोधन से हुआ, जिसके बाद केंद्रीय उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने इसे मुख्य रूप से संबोधित किया। संवादात्मक सत्र के दौरान, विद्यार्थियों ने अनुभव यात्रा (शैक्षणिक भ्रमण) से संबंधित अपने अनुभव और विचार साझा किए।
छत्तीसगढ़ के दुर्ग की सुश्री रागिनी साहू ने पूर्वोत्तर क्षेत्र के अनूठे पहलुओं का उल्लेख किया, जिसमें विभिन्न स्थानों की यात्राएं शामिल रहीं। उन्होंने कहा कि इस तरह की अनुभव यात्राएं अत्यंत मूल्यवान होती हैं और पूरे देश के छात्रों को ऐसी यात्राओं के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।
छत्तीसगढ़ के एक अन्य प्रतिभागी श्री हरीश कुमार साहू ने बताया कि पूर्वोत्तर क्षेत्र की यात्रा के बाद, उन्हें वास्तविक रूप से समझ आया कि इस क्षेत्र को “अष्टलक्ष्मी” क्यों कहा जाता है, जो इसकी समृद्धि और विविधता का प्रतीक है।
नई दिल्ली स्थित जामिया मिलिया इस्लामिया की सुश्री इफराह कावा ने अपने अनुभव साझा करते हुए इस क्षेत्र के आत्मीयता से भरे आतिथ्य सत्कार की सराहना की और पूर्वोत्तर क्षेत्र के आतिथ्य प्रबंधन और सांस्कृतिक समृद्धि का उल्लेख किया।
मध्य प्रदेश के भोपाल स्थित बरकतउल्ला विश्वविद्यालय की सुश्री शैली तिवारी ने अपनी यात्रा में हासिल समृद्ध अनुभव की चर्चा की। इसमें वायुसेना स्टेशन का दौरा, असम राइफल्स के अधिकारियों के साथ बातचीत, सीढ़ीदार खेती, बांस के घरों को देखने का अनुभव और क्षेत्र की विविध आदिवासी संस्कृतियों से परिचय शामिल रहा।
राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय के विकास बाली ने बताया कि उत्तर पूर्वी क्षेत्र की उनकी यात्रा निश्चित रूप से ज्ञानवर्धक रही। उन्होंने बताया कि पूर्वोत्तर क्षेत्र को प्रत्यक्षतः देखने से वहां की प्राकृतिक सुंदरता, संस्कृति और विविधता की गहरी समझ मिली, जिससे यह ज्ञानवर्धक और यादगार अनुभव रहा।
गोवा के वालपोई स्थित सरकारी उच्च माध्यमिक विद्यालय की सुश्री दीक्षा डी. गांवकर का संवाद सबसे रोचक रहा। पूर्वोत्तर क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता, लोगों और स्थानीय व्यंजनों की सराहना करते हुए उन्होंने अपने अनुभव को यादगार बताया। संवाद में उनके साथ गोवा के अन्य छात्र भी शामिल हुए, जिन्होंने असमिया भाषा में एक गीत गाया, जो इस क्षेत्र के प्रति उनकी सांस्कृतिक सराहना और भावनात्मक जुड़ाव को दर्शाता है।
श्री सिंधिया ने विद्यार्थियों द्वारा साझा किए गए अनुभवों की सराहना की और उन्हें अपने राज्यों में पूर्वोत्तर क्षेत्र के राजदूत के तौर पर कार्य करने को प्रोत्साहित किया। श्री सिंधिया ने उन्हें राष्ट्रीय एकता, परस्पर सम्मान और देश के युवाओं में साझा दायित्व की भावना सुदृढ़ बनाने में इस तरह के युवा आदान-प्रदान कार्यक्रमों के महत्व पर जोर दिया।
केंद्रीय उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री ने दोहराया कि अष्टलक्ष्मी दर्शन युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम माननीय प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण से प्रेरित है कि युवाओं को पूर्वोत्तर भारत की वास्तविक संस्कृति, लोगों और परंपराओं का अनुभव कराया जाए और वे वहां से एकता और एकीकरण के राजदूत के रूप में वापस लौटें।
उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास सचिव श्री संजय जाजू के संबोधन से कार्यक्रम का समापन हुआ। उन्होंने इस पहल को सफल बनाने के लिए सभी सहभागी विद्यार्थियों, सहयोगी संस्थानों और हितधारकों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम का सफल आयोजन राष्ट्रीय एकता और युवा सहभागिता की बढ़ती भावना दर्शाता है। उन्होंने सभी विद्यार्थियों को उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं और उनसे कार्यक्रम के दौरान प्राप्त ज्ञान और अनुभवों को आगे ले जाने तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र के राजदूत के रूप में पूरे देश में कार्य करने को प्रोत्साहित किया।
अष्टलक्ष्मी दर्शन – युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम
उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय (एमडीओएनईआर) ने हाल ही में माननीय प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में “अष्टलक्ष्मी दर्शन – युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम” नामक एक अग्रणी पहल शुरू की है। अष्टलक्ष्मी पूर्वोत्तर भारत के 8 राज्यों के समूह को कहा जाता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा और सिक्किम को देश की समृद्धि और विकास के प्रतीक के रूप में ‘अष्टलक्ष्मी’ का नाम दिया है। उत्तर पूर्वी परिषद (एनईसी) द्वारा कार्यान्वित इस कार्यक्रम का उद्देश्य भावनात्मक मेल-मिलाप को बढ़ावा देना, लोगों के आपसी संबंधों को प्रगाढ़ बनाना, उत्तर पूर्वी क्षेत्र (एनईआर) के बारे में समझ बढ़ाना और साझा दायित्व की भावना मजबूत करना है। इसमें 28 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की भागीदारी का विचार किया गया है, जो 14 दिवसीय गहन अनुभव यात्राओं, शैक्षणिक सत्रों, विरासत स्थलों के भ्रमण और स्थानीय समुदाय के साथ संवाद द्वारा युवाओं के बीच सार्थक जुड़ाव, सांस्कृतिक समझ और सराहना को बढ़ावा देती है।
1 नवंबर, 2025 को औपचारिक शुभारंभ के बाद से यह कार्यक्रम अत्यंत सफल रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 15 समूहों में 530 विद्यार्थियों ने युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम में भाग लिया और पूर्वोत्तर क्षेत्र के 8 राज्यों का दौरा किया तथा 11 विश्वविद्यालयों और संस्थानों के साथ जुड़ाव स्थापित किया।
दंतेवाड़ा – समावेशी विकास की दिशा में एक सक्रिय कदम के रूप में, एनएमडीसी लिमिटेड के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक श्री अमिताभ मुखर्जी ने वरिष्ठ नेतृत्व के साथ दंतेवाड़ा में एनएमडीसी की परियोजनाओं के आसपास के गांवों के पंचायत प्रमुखों के साथ एक बैठक की। बातचीत में जमीनी स्तर की समस्याओं को दूर करने और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए सहयोग बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया।
गुमीयापाल, समालवार, कालेपाल, चोलनार, कदम्पाल, हिरोली, बेनपाल, कोडेनार, मदकामिरस और कुट्रेम गांवों सहित एक दर्जन से अधिक सरपंचों और उनके प्रतिनिधियों ने पेयजल, सड़क संपर्क, स्वास्थ्य देखभाल, स्ट्रीट लाइटिंग, खेल सुविधाओं और समग्र ग्रामीण बुनियादी ढांचे से संबंधित रोजमर्रा की चुनौतियों के बारे में बात की।
बैठक में श्री कृष्ण कुमार ठाकुर, निदेशक (कार्मिक) के साथ साथ परियोजना के वरिष्ठ अधिकारी श्री के. श्रीधर कोडाली, मुख्य महाप्रबंधक (खनन), बचेली कॉम्प्लेक्स और श्री रबीन्द्र नारायण, अधिशासी निदेशक, किरंदुल कॉम्प्लेक्स शामिल हुए।
सभा को संबोधित करते हुए सीएमडी ने इस बात पर बल दिया कि एनएमडीसी न केवल एक प्रमुख खनन संगठन बल्कि सार्वजनिक क्षेत्र के एक जिम्मेदार उद्यम की भी भूमिका निभा रहा है जो क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक ताने-बाने को समृद्ध करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उन्होंने कहा कि कंपनी की ताकत उन समुदायों के विश्वास में निहित है जिनकी वह सेवा करती है, और उनकी चिंताएं एनएमडीसी के कार्यों का मार्गदर्शन करती हैं। साथ ही, समुदायों की प्रगति एनएमडीसी की सफलता को परिभाषित करती है। उन्होंने कहा,”हम इन गांवों के साथ मिलकर काम करेंगे ताकि उन्हें आत्मनिर्भर बस्तियों में बदला जा सके जो विकसित भारत की भावना को दर्शाती है।“
एनएमडीसी की बैलाडीला खदानों के आस पास के ग्रामीणों ने बेहतर पानी, सड़कों और स्वास्थ्य देखभाल जैसी सुविधाओं पर हुई चर्चा पर प्रसन्नता व्यक्त की। स्थानीय पंचायत के एक प्रतिनिधि ने कहा, “वरिष्ठ निदेशकों ने हमसे आमने-सामने बातचीत की और वास्तव में हमारी परेशानियों को सुना।“ कंपनी के वरिष्ठ निदेशकों की इस प्रत्यक्ष पहुंच ने ठोस बदलाव के लिए नई उम्मीद जगाई है।
श्री कृष्ण कुमार ठाकुर, निदेशक (कार्मिक) ने आश्वासन दिया कि एनएमडीसी स्थानीय समुदायों के साथ निरंतर संवाद करता रहेगा और इस बातचीत में साझा की गई समस्याओं से आगामी विकास पहलों को दिशा मिलेगी।
बैलाडीला में 1968 में परिचालन शुरू करने के बाद से, एनएमडीसी ने अपने बचेली और किरंदुल परिसरों के माध्यम से औद्योगिक विकास और क्षेत्रीय प्रगति दोनों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
इन वर्षों में कंपनी दंतेवाड़ा में आर्थिक और बुनियादी ढांचे के विकास के उत्प्रेरक के रूप में उभरी है।
भारत के सबसे बड़े लौह अयस्क उत्पादक के रूप में एनएमडीसी का दंतेवाड़ा में 68 वर्षों से गहन विश्वास सहज रूप से पनपा है।
एनएमडीसी ने पेयजल परियोजनाएं, सड़कें, खेल के मैदान, क्लीनिक जैसे बड़े बदलाव किए हैं।
आज जमीनी स्तर पर हुई बातचीत और आदिवासियों की मूलभूत समस्याओं के आलोक में कमियों को दूर करते हुए इन कार्यों को और आगे बढ़ाया जाएगा।
रांची,24.04.2026 – जगन्नाथपुर थाना क्षेत्र स्थित जगन्नाथपुर मंदिर में गुरुवार की देर रात गार्ड की हत्या कर दी गई. अज्ञात अपराधियों ने मंदिर में मौजूद गार्ड की हत्या कर दी. इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए रांची एसएसपी राकेश रंजन खुद घटनास्थल पर पहुंचे हैं और पूरे मामले की जांच कर रहे हैं.
जानकारी के अनुसार, बदमाशों ने वारदात को अंजाम देने के बाद मंदिर की दान पेटी से नकदी भी निकाल ली. इससे घटना को लूट और हत्या दोनों एंगल से जोड़कर देखा जा रहा है.
जांच में जुटी पुलिस
घटना की सूचना मिलते ही एसएसपी सहित पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच शुरू कर दी है. पुलिस टीम मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है, ताकि अपराधियों की पहचान की जा सके. फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है।
सीसीटीवी में कैद हुआ आरोपी की तस्वीर।
नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज केंद्रीय मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव द्वारा लिखित एक लेख साझा किया, जिसमें बताया गया है कि रेल पटरियों का आधुनिकीकरण किस प्रकार एक तेज़ और अधिक भरोसेमंद नेटवर्क को बढ़ावा दे रहा है। श्री मोदी ने कहा कि पटरियों के नवीनीकरण, उन्नत परीक्षण और मशीनीकृत रखरखाव से यात्रा की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और गति में वृद्धि सुनिश्चित हुई है। श्री मोदी ने कहा कि इन बदलावों से समय की बचत होने के साथ-साथ यात्रा सुगम हो रही है और रेलवे को देश भर में बढ़ती यात्री और माल ढुलाई की मांग को पूरा करने में सहायता मिल रही है।
श्री मोदी ने एक्स पर पोस्ट में लिखा:
“रेलवे पटरियों का आधुनिकीकरण एक तेज और अधिक भरोसेमंद नेटवर्क को शक्ति प्रदान कर रहा है।”
पटरियों का नवीनीकरण, उन्नत परीक्षण और मशीनीकृत रखरखाव से यात्रा की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और गति में वृद्धि सुनिश्चित हुई है। इन बदलावों से समय की बचत हो रही है, यात्रा सुगम हो रही है और रेलवे को देश भर में बढ़ती यात्री और माल ढुलाई की मांग को पूरा करने में सहायता मिल रही है।
केंद्रीय मंत्री श्री @AshwiniVaishnaw द्वारा लिखित यह लेख अवश्य पढ़ें।
नई दिल्ली – रक्षा सचिव राजेश सिंह ने 23 अप्रैल 2026 को दिल्ली कैंट स्थित कैंटोनमेंट जनरल अस्पताल में रोबोटिक ऑर्थोपेडिक चिकित्सा प्रणाली एवं मातृत्व ऑपरेशन थियेटर का उद्घाटन किया। इस अवसर पर रक्षा संपदा महानिदेशक शोभा गुप्ता तथा अन्य विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। ये सुविधाएँ कैंटोनमेंट एवं आसपास के नगर निकाय क्षेत्रों के लोगों को उन्नत स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने में सहायक सिद्ध होंगी।
इस अवसर पर लोगों को संबोधित करते हुए रक्षा सचिव ने कैंटोनमेंट क्षेत्रों में स्वास्थ्य अवसंरचना के आधुनिकीकरण के महत्व पर बल दिया तथा निवासियों को उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सेवाएँ सुनिश्चित करने के प्रति सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।
रक्षा संपदा महानिदेशक ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के विकास से कैंटोनमेंट क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं सुदृढ़ होगी तथा समग्र सामुदायिक कल्याण को बढ़ावा मिलेगा।
यह नई रोबोटिक ऑर्थोपेडिक चिकित्सा प्रणाली एक महत्वपूर्ण तकनीकी उन्नयन का प्रतिनिधित्व करती है, जो सटीकता–आधारित शल्य प्रक्रियाओं, रिकवरी के समय को कम करने और मरीजों के स्वास्थ्य में बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने में सक्षम है। अत्याधुनिक रोबोटिक प्रणाली से सुसज्जित यह इकाई हड्डियों से जुड़े जटिल रोग संबंधी मामलों को अधिक सटीकता और दक्षता के साथ संभालने में अस्पताल की क्षमता को बढ़ावा देगी। मातृत्व ऑपरेशन थियेटर को गर्भवती महिलाओं के लिए व्यापक एवं सुरक्षित शल्य चिकित्सा सेवाएँ प्रदान करने हेतु विशेष रूप से डिजाइन किया गया है।
इस अवसर पर कैंटोनमेंट जनरल अस्पताल में प्रस्तावित अन्य उन्नयन कार्यों पर एक संक्षिप्त प्रस्तुति भी दी गई, जिसमें आगामी तीन महीनों के भीतर डायलिसिस केंद्र, केंद्रीय निर्जीवीकरण सेवा विभाग (सीएसएसडी), आईसीयू उन्नयन तथा प्रयोगशाला विस्तार शामिल हैं। इसके अतिरिक्त, आगामी एक वर्ष में शिशु गहन चिकित्सा इकाई (पीडियाट्रिक आईसीयू), नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू), सीटी स्कैन, एमआरआई, कैंसर स्क्रीनिंग इकाई, उच्च निर्भरता इकाई, मल्टी डिसिपलनरी वार्ड तथा सर्जिकल आईसीयू जैसी सुविधाओं के विकास की भी योजना है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके।
नई दिल्ली – अखिल भारतीय आयुर्वेद विज्ञान संस्थान (एआईआईएमएस) ऋषिकेश का छठा दीक्षांत समारोह आज उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन की गरिमामय उपस्थिति में संपन्न हुआ। यह समारोह संस्थान की शैक्षणिक उत्कृष्टता और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस समारोह में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी और उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) भी उपस्थित थे।
इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने संस्थान की वार्षिक पत्रिका “रुद्राक्ष” को जारी किया, जिसमें पिछले वर्ष के दौरान एम्स ऋषिकेश की प्रमुख उपलब्धियों, नवाचारों और शैक्षणिक प्रगति का संकलन है। यह प्रकाशन चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और रोगी देखभाल में उत्कृष्टता के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
आज एम्स ऋषिकेश के छठे दीक्षांत समारोह में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए श्री राधाकृष्णन ने ग्रेजुएटिंग चिकित्सा पेशेवरों के लिए इस अवसर के महत्व को संक्रमण, चिंतन और जिम्मेदारी के क्षण के रूप में रेखांकित किया।
ग्रेजुएटिंग छात्रों को बधाई देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह अवसर वर्षों के अनुशासन, परिश्रम और त्याग का परिणाम है, साथ ही यह समाज और राष्ट्र के प्रति गहन पेशेवर प्रतिबद्धता की शुरुआत भी है। उन्होंने स्नातकों से अपने करियर में उच्चतम नैतिक मानकों, करुणा और सेवा भावना को बनाए रखने का आग्रह किया।
कोविड-19 महामारी के दौरान प्रति भारत की प्रतिक्रिया पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में देश की दृढ़ता और निर्णायक नेतृत्व पर जोर दिया। उन्होंने विश्व के सबसे बड़े टीकाकरण अभियानों में से एक के सफल कार्यान्वयन पर प्रकाश डाला, जिसके तहत 140 करोड़ से अधिक नागरिकों को मुफ्त टीकाकरण सुनिश्चित किया गया, जिससे स्वास्थ्य सेवा में समानता और समावेश के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को बल मिला।
उपराष्ट्रपति ने महामारी के दौरान भारत की वैश्विक भूमिका पर भी जोर दिया, जिसमें वैक्सीन आउटरीच पहल ‘वैक्सीन मैत्री’ का जिक्र किया गया, जिसके तहत 100 से अधिक देशों को टीके उपलब्ध कराए गए। उन्होंने कहा कि भारत के प्रयासों ने ‘वसुधैव कुटुंबकम’ की भावना को दर्शाया और करुणा, एकजुटता एवं साझा वैश्विक प्रगति पर आधारित नेतृत्व का प्रदर्शन किया।
स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना को मजबूत करने पर सरकार के फोकस पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि देशभर में एम्स संस्थानों के विस्तार से गुणवत्तापूर्ण तृतीयक चिकित्सा देखभाल तक पहुंच में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि ये संस्थान नैदानिक देखभाल, अकादमिक उत्कृष्टता, अनुसंधान, नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व को एकीकृत करते हुए उत्कृष्टता का एक आदर्श प्रस्तुत करते हैं।
उत्तराखंड की अनूठी भौगोलिक चुनौतियों का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने इस क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवा केंद्र के रूप में उभरने के लिए एम्स ऋषिकेश की सराहना की। उन्होंने कहा कि संस्थान ने टेलीमेडिसिन जैसे नवोन्मेषी पद्धतियों को अपनाकर पारंपरिक स्वास्थ्य सेवा वितरण से आगे बढ़कर काम किया है, जिससे दूरदराज और पहाड़ी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की सुलभता में सुधार हुआ है।
उन्होंने संस्थान की आपातकालीन हेलीकॉप्टर सेवाओं की भी सराहना की, जिसने दुर्गम इलाकों में आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमताओं को काफी मजबूत किया है। चार धाम यात्रा के दौरान आवश्यक दवाओं की आपूर्ति के लिए ड्रोन के उपयोग को भी सार्वजनिक स्वास्थ्य नवाचार के एक उल्लेखनीय उदाहरण के रूप उजागर किया गया है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की समय पर डिलीवरी सुनिश्चित हुई। उपराष्ट्रपति ने एनआईआरएफ रैंकिंग में देश के शीर्ष चिकित्सा संस्थानों में एम्स ऋषिकेश के लगातार स्थान बनाए रखने पर भी संतोष व्यक्त किया।
स्नातकों को संबोधित करते हुए उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि स्वास्थ्य सेवा एक सार्वजनिक विश्वास है और चिकित्सा पेशेवरों की भूमिका न केवल नैदानिक देखभाल में, बल्कि एक स्वस्थ और अधिक सशक्त भारत के व्यापक राष्ट्रीय दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने उनसे अपने पेशेवर जीवन में सहानुभूति, ईमानदारी और सेवा भावना से प्रेरित रहने का आग्रह किया।
इस अवसर पर बोलते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने स्नातक छात्रों को उनके समर्पण और चिकित्सा पेशे के प्रति प्रतिबद्धता के लिए बधाई दी।
उन्होंने युवा डॉक्टरों के लिए चार प्रमुख सिद्धांतों पर जोर दिया। प्रथम उन्होंने कहा कि चिकित्सा पेशा मानवता की सेवा के उच्चतम रूपों में से एक है और इसके लिए अटूट समर्पण, नैतिक आचरण और रोगियों के विश्वास को बनाए रखने के लिए ईमानदारी की आवश्यकता होती है। दूसरा, चिकित्सा विज्ञान में तीव्र प्रगति को देखते हुए आजीवन सीखना और कौशल उन्यनन अत्यंत आवश्यक है। तीसरा, प्रभावी संचार गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा का आधार है और रोगी परिणामों को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। चौथा, उन्होंने समाज के प्रति जिम्मेदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि माता-पिता, शिक्षक और राष्ट्र के योगदान को ध्यान में रखते हुए सेवा के माध्यम से समाज को वापस देना चाहिए।
स्नातकों पर विश्वास व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि वे माननीय प्रधानमंत्री द्वारा परिकल्पित 2047 तक ‘विकसित भारत’ के विजन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
स्वास्थ्य क्षेत्र में हाल ही में हुई प्रगति पर प्रकाश डालते हुए मंत्री महोदया ने कहा कि भारत में स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है और चिकित्सा शिक्षा में रिकॉर्ड विस्तार हुआ है, जिसका उद्देश्य 140 करोड़ से अधिक नागरिकों को किफायती और विश्वसनीय स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय अब 1.06 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है, जिससे लोगों के जेब से होने वाला खर्च 62.5 प्रतिशत से घटकर 39.4 प्रतिशत तक हो गया है।
उन्होंने समग्र और एकीकृत स्वास्थ्य सेवा पर सरकार के विशेष जोर को रेखांकित किया। एम्स ऋषिकेश के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि संस्थान ने एक एकीकृत चिकित्सा मॉडल स्थापित किया है, जो व्यापक रोगी देखभाल के लिए पारंपरिक और आधुनिक चिकित्सा प्रणालियों को जोड़ता है। उन्होंने ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण पर भी बल दिया, जो समन्वित अंतर-क्षेत्रीय कार्रवाई के माध्यम से मानव, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य को जोड़ता है।
वैश्विक स्तर पर भारत के योगदान का जिक्र करते हुए उन्होंने तपेदिक, मलेरिया और एचआईवी/एड्स जैसी प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने में देश की प्रगति का उल्लेख किया। उन्होंने भारत के सफल कोविड-19 टीकाकरण अभियान पर भी प्रकाश डाला, जिसके दौरान स्वदेशी रूप से विकसित टीकों की 220 करोड़ से अधिक खुराकें, जिनमें बूस्टर खुराकें भी शामिल हैं, दी गईं।
श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने उत्तराखंड जैसे भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण राज्य में एम्स ऋषिकेश की प्रभावशाली पहलों की सराहना की। उन्होंने टेलीमेडिसिन, हेलीकॉप्टर एम्बुलेंस सेवाएं, ड्रोन द्वारा चिकित्सा सहायता और उधम सिंह नगर में एक सैटेलाइट सेंटर के विकास जैसी प्रमुख सेवाओं पर प्रकाश डाला और कहा कि इन प्रयासों से दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में इस अवसर को स्नातक छात्रों के जीवन में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह दिन एक नए चरण की शुरुआत है, जहां वे अपने चुने हुए चिकित्सा पेशे के माध्यम से मानवता की सेवा के लिए आगे बढ़ रहे हैं।
उन्होंने युवा डॉक्टरों से आग्रह किया कि वे दूरदराज और दुर्गम इलाकों में रहने वाले लोगों की सेवा के लिए खुद को समर्पित करें, विशेष रूप से उत्तराखंड जैसे भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण राज्य में, जहां स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच एक गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है।
मुख्यमंत्री ने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए अखिल भारतीय आयुर्वेद विज्ञान संस्थान ऋषिकेश के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह संस्थान उन्नत चिकित्सा देखभाल का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरा है और इस पूरे क्षेत्र में स्वास्थ्य परिणामों में सुधार लाने में एक परिवर्तनकारी भूमिका निभा रहा है।
समारोह के दौरान विभिन्न विषयों के ग्रेजुएटिंग छात्रों को उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों और समर्पण को मान्यता देते हुए डिग्रियां प्रदान की गईं। साथ ही, उपराष्ट्रपति ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्रों को 11 पुरस्कार और स्वर्ण पदक प्रदान किए।
नई दिल्ली – केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ स्थित शेखा झील पक्षी अभयारण्य को रामसर स्थल घोषित करने की घोषणा की, जिससे भारत में ऐसे अभयारण्यों की कुल संख्या 99 और राज्य में 12 हो गई है।
श्री भूपेंद्र यादव ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में यह जानकारी देते हुए लिखा- “उत्तर प्रदेश ने देशभर के इस आंकड़ें को 99 तक ले जाने का श्रेय प्राप्त कर लिया है! शेखा झील पक्षी अभयारण्य (अलीगढ़, उत्तर प्रदेश) को रामसर स्थल घोषित करते हुए मुझे बेहद प्रसन्नता का अनुभव हो रहा है।” उन्होंने कहा कि इस घोषणा से स्थानीय आजीविका और वैश्विक जैव विविधता के साथ-साथ जल और जलवायु सुरक्षा को भी बढ़ावा मिलेगा और यह “भारत की 99वीं वर्षगांठ” का प्रतीक है, जो हमें ऐतिहासिक शताब्दी के और निकट ले जाता है।
केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने कहा, “प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत के पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्विकसित करने अभियान के अंतर्गत आर्द्रभूमि और पशुओं, विशेष रूप से पक्षियों के प्राकृतिक आवास के संरक्षण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को वैश्विक समुदाय से एक बार फिर सराहना मिली है।”
इस स्थल के पारिस्थितिक महत्व का उल्लेख करते हुए श्री यादव ने कहा कि शेखा झील मध्य एशियाई फ्लाईवे पर एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जो सर्दियों के मौसम में हंस, पेंटेड स्टॉर्क और विभिन्न प्रकार की बत्तखों जैसे प्रवासी पक्षियों के लिए एक महत्वपूर्ण पर्यावास प्रदान करती है। मंत्री महोदय ने लोगों को इस स्थल का भ्रमण करने के लिए भी प्रोत्साहित किया।
नई दिल्ली – रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 21 अप्रैल 2026 को बर्लिन में जर्मन सांसदों को संबोधित करते हुए कहा “आत्मनिर्भर भारत केवल एक खरीद कार्यक्रम नहीं है; यह साथ मिलकर निर्माण, सह-विकास और साझा नवाचार का एक सशक्त आमंत्रण है।” इस अवसर पर उन्होंने भारत एवं जर्मनी के रक्षा औद्योगिक तंत्रों के बीच सहयोग को और अधिक सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर जोर दिया। रक्षा मंत्री ने अपनी तीन-दिवसीय जर्मनी यात्रा के पहले दिन, रक्षा एवं सुरक्षा संबंधी जर्मन संसदीय स्थायी समिति को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में दुनिया नए और जटिल सुरक्षा खतरों का सामना कर रही है, जहां तीव्र तकनीकी बदलावों ने चुनौतियों को और अधिक परस्पर जुड़ा हुआ बना दिया है। श्री राजनाथ सिंह ने इस बात पर बल दिया कि बदलते सुरक्षा वातावरण के अनुरूप स्वयं को ढालने की दृढ़ इच्छाशक्ति और एक नए, दूरदर्शी दृष्टिकोण की आज अत्यंत आवश्यकता है।
रक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत का रक्षा क्षेत्र अभूतपूर्व परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है और जर्मन उद्योग के साथ बढ़ती साझेदारियां दोनों देशों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकती हैं। श्री राजनाथ सिंह ने कहा, “हम जर्मनी के प्रमुख औद्योगिक उद्यमों की स्थापित क्षमताओं को भली-भांति पहचानते हैं, साथ ही उन्नत एवं उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में प्रसिद्ध जर्मन मिटेलस्टैंड—यानी छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों—की ऊर्जा और गतिशीलता की भी सराहना करते हैं।” उन्होंने कहा कि भारत में भी हमारे स्टार्ट-अप और निजी उद्यम तेजी से उभरते हुए बड़े और स्थापित रक्षा उद्योगों की क्षमताओं को सुदृढ़ और पूरक बना रहे हैं। यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां भारत तथा जर्मनी स्वाभाविक रूप से एक-दूसरे के पूरक हैं, और इससे हमारी साझेदारी को अधिक गहराई दी जा सकती है।
श्री राजनाथ सिंह ने आधुनिक वैश्विक चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए समन्वित प्रतिक्रियाओं और विश्वसनीय रणनीतिक साझेदारियों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और जर्मन चांसलर श्री फ्रेडरिक मर्ज़ ने इस रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर विशेष जोर दिया है। हम यूरोपीय संघ के स्तर पर भी विचारों में स्पष्ट सामंजस्य देखते हैं, जो भारत के साथ बढ़ती भागीदारी में परिलक्षित होता है—जिसमें भारत-यूरोपीय संघ रक्षा और व्यापक रणनीतिक सहयोग भी शामिल है।
रक्षा मंत्री ने दोहराया कि भारत और जर्मनी केवल रणनीतिक साझेदार ही नहीं हैं, बल्कि वर्तमान वैश्विक विमर्श को दिशा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा, “हम साझा मूल्यों से जुड़े परिपक्व लोकतंत्र हैं और लचीलेपन, नवाचार तथा सुदृढ़ औद्योगिक भावना से संचालित गतिशील अर्थव्यवस्थाएं हैं। श्री सिंह ने कहा कि कानून निर्माता व समिति के सम्मानित सदस्यों के रूप में, आपका मार्गदर्शन, आपकी आवाज तथा आपका समर्थन हमारे रक्षा एवं रणनीतिक सहयोग के भविष्य को और अधिक सशक्त तथा समृद्ध बना सकता है। उन्होंने कहा कि जब इस युग का इतिहास लिखा जाएगा, तब भारत-जर्मनी साझेदारी कूटनीति के एक उत्कृष्ट उदाहरण के रूप में सामने आएगी—एक ऐसी साझेदारी, जो किसी संकट की प्रतिक्रिया में नहीं, बल्कि दो परिपक्व लोकतंत्रों के साझा संकल्प और दूरदृष्टि के आधार पर विकसित हुई है।
श्री राजनाथ सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान भू-राजनीतिक अस्थिरता को अब केवल क्षेत्रीय परिप्रेक्ष्य में नहीं देखा जा सकता। उन्होंने कहा कि इसके प्रभाव वैश्विक होते हैं और ये केवल स्थानीय अशांति नहीं, बल्कि ऐसी गंभीर परिस्थितियां हैं जिनका ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा तथा वैश्विक आर्थिक स्थिरता पर व्यापक एवं दूरगामी असर पड़ता है, साथ ही इनसे भारी मानवीय क्षति भी होती है। उन्होंने कहा, “भारत जैसे विकासशील देश के लिए, जो अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के एक बड़े हिस्से के लिए पश्चिम एशिया पर निर्भर है, होर्मुजजलडमरूमध्य में किसी भी प्रकार की बाधा कोई दूरस्थ घटना नहीं है; यह एक ऐसी वास्तविकता है, जिसका हमारी सुरक्षा एवं आर्थिक स्थिरता पर सीधा व तात्कालिक प्रभाव पड़ता है।”
रक्षा मंत्री ने इन चुनौतियों और उनके प्रत्यक्ष प्रभावों को ध्यान में रखते हुए कहा कि भारत ने एक सक्रिय एवं समन्वित रणनीति अपनाई है। उन्होंने सांसदों को बताया कि पश्चिम एशिया से जुड़े मामलों पर मंत्रियों का एक समूह निरंतर बदलती परिस्थितियों का आकलन कर रहा है और उनके प्रभाव को कम करने के लिए समयबद्ध सुझाव दे रहा है। श्री सिंह ने कहा, “प्रमुख मंत्रालयों के बीच समन्वय स्थापित करते हुए हमारी प्राथमिकता ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखना, आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना, महंगाई के दबाव को नियंत्रित करना तथा नागरिकों और उद्योगों को बाहरी व्यवधानों से सुरक्षित रखना रही है। यह वैश्विक संकटों का सामना शांत संयम, दूरदर्शिता एवं प्रभावी संस्थागत तालमेल के साथ करने की भारत की क्षमता को दर्शाता है।”
सांसद एवं समिति के अध्यक्ष श्री थॉमस रोवेकैम्प ने सांसदों के साथ संवाद के लिए श्री राजनाथ सिंह का स्वागत किया। इससे पहले रक्षा मंत्री ने बर्लिन स्थित हम्बोल्ट विश्वविद्यालय परिसर में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर को पुष्पांजलि अर्पित की और भारत तथा जर्मनी के बीच के चिरस्थायी सांस्कृतिक एवं बौद्धिक संबंधों को रेखांकित किया।
गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर का 20वीं सदी की शुरुआत में जर्मनी के साथ गहरा और सार्थक संबंध रहा, जिसकी पहचान उनके व जर्मन विचारकों, कलाकारों तथा बुद्धिजीवियों के बीच पारस्परिक सम्मान और प्रशंसा से होती थी। जर्मनी के साथ उनका यह जुड़ाव सांस्कृतिक आदान-प्रदान, समृद्ध बौद्धिक संवाद और साझा मानवीय मूल्यों पर आधारित था। जर्मनी ने पूरे यूरोप में उनके साहित्य और विचारों को परिचित कराने तथा लोकप्रिय बनाने में एक अहम भूमिका निभाई।
रक्षा मंत्री के बर्लिन हवाई अड्डे पर पहुंचने पर उनका सैन्य सम्मान के साथ गरिमापूर्ण स्वागत किया गया। म्यूनिख से बर्लिन की अपनी यात्रा के दौरान उन्हें जर्मन वायु सेना के विशेष विमान से लाया गया, जिसकी सुरक्षा के लिए लड़ाकू विमान भी साथ-साथ उड़ान भर रहे थे।
नई दिल्ली – केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जे.पी. नड्डा ने आज यहां नई दिल्ली में सिविल सेवा दिवस समारोह के अवसर पर “भारत में गैर-संक्रामक रोगों का समाधान: रोकथाम से लेकर उपचार तक” विषय पर सत्र की अध्यक्षता की। केन्द्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती पुण्य सलिला श्रीवास्तव भी इस अवसर पर उपस्थित थीं।
सभा को संबोधित करते हुए श्री जे.पी. नड्डा ने सत्र के थीम के महत्व पर जोर दिया और भारत की स्वास्थ्य सेवा पद्धति में रोकथाम से उपचार तक हुए बदलाव पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि “वर्ष 2017 में हमने एक समग्र और समावेशी स्वास्थ्य नीति प्रस्तुत की, जिसमें हमने निवारक, प्रोत्साहक, उपचारात्मक, जेरियाट्रिक(वृद्धजन देखभाल), पुनर्वास और उपशामक देखभाल पर ध्यान केंद्रित किया।”
श्री नड्डा ने बताया कि संक्रामक रोगों के मोर्चे पर देश ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है, जबकि गैर-संक्रामक रोगों(एनसीडी) पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है, क्योंकि इनके परिणाम सामने आने में अधिक समय लगता है और इस क्षेत्र में जानकारी का अभाव भी है, जिसे दूर करना अति-आवश्यक है।
देश में एनसीडी की समस्या को स्वीकार करते हुए, श्री नड्डा ने कहा कि “देश में कुल मृत्यु के लगभग 60% मामले एनसीडी के कारण होते हैं, इसलिए इस क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है और इसे प्राथमिकता दी जा रही है।” उन्होंने आगे कहा कि “एनसीडी की रोकथाम और नियंत्रण के राष्ट्रीय कार्यक्रम के अंतर्गत बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने, प्रारंभिक निदान और शीघ्र पहचान, स्वास्थ्य संवर्धन तथा रोग प्रबंधन और समय पर रेफरल पर विशेष ध्यान दिया गया है।” उन्होंने यह भी कहा कि “स्वास्थ्य संवर्धन एक प्रमुख क्षेत्र है, और रोग का प्रबंधन तथा समय पर रेफरल भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ये सभी प्रमुख मुद्दे हैं, जिन पर हम काम कर रहे हैं।” “स्वास्थ्य संवर्धन निश्चित रूप से प्रमुख क्षेत्रों में से एक है, और रोग का प्रबंधन तथा समय पर रेफरल भी बहुत महत्वपूर्ण हैं। इसलिए, जहां तक गैर-संक्रामक रोगों का संबंध है, ये वे मुख्य मुद्दे हैं जिन्हें हम हल करने का प्रयास कर रहे हैं।”
सरकार के प्रयासों को पर जोर देते हुए श्री नड्डा ने कहा कि “पिछले छह वर्षों में हम 1.85 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्थापित करने में सफल रहे हैं, जो 1.45 अरब लोगों और स्वास्थ्य संस्थानों के बीच पहला संपर्क केन्द्र है। प्रत्येक आयुष्मान केंद्र पर एक आशा कार्यकर्ता होती है, और जहां संभव हो, अन्य अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कर्मी भी तैनात होते हैं।” उन्होंने आगे कहा कि “वर्ष 2017 में हमने स्वैच्छिक और विस्तारित स्क्रीनिंग की दिशा में आगे बढ़ने का निर्णय लिया था।”
श्री नड्डा ने इन प्रयासों के सकारात्मक परिणामों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “हमने जिला स्तर पर लगभग 107 एनसीडी क्लीनिक और 233 कार्डियक केयर यूनिट विकसित किए हैं।” उन्होंने आगे कहा कि “इसी बजट में यह घोषणा की गई है कि हर जिले में एक डे-केयर कैंसर सेंटर स्थापित किया जाएगा।”
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने देश में एनसीडी से निपटने के लिए बड़े पैमाने पर किए जा रहे स्क्रीनिंग प्रयासों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि “वर्ष 2017 से अब तक 41.5 करोड़ लोगों की उच्च रक्तचाप(हाइपरटेंशन) के लिए जांच की गई है, जिनमें से 7.1 करोड़ का उपचार हुआ है और 5.7 करोड़ लोगों को सूचित किया गया है।” उन्होंने आगे कहा कि “हमने भारत को स्वस्थ बनाने के लिए शीघ्र पहचान सुनिश्चित करने का प्रयास किया है। उदाहरण के तौर पर, 41.3 करोड़ लोगों की मधुमेह (डायबिटीज) के लिए जांच की गई है, जिनमें से 4.7 करोड़ लोग मधुमेह से पीड़ित पाए गए हैं और 3.4 करोड़ लोगों का उपचार चल रहा है। मुख के कैंसर के लिए अब तक 35.3 करोड़ लोगों की जांच की गई है, जिनमें 2.3 लाख लोगों में कैंसर का पता चला है और लगभग 2 लाख लोगों का इलाज किया जा रहा है। वहीं, 16.5 करोड़ से अधिक लोगों की स्तन कैंसर के लिए जांच की गई है।”
श्री नड्डा ने यह भी बताया कि “सर्वाइकल कैंसर के लिए 8.73 करोड़ स्क्रीनिंग की गई है, जिनमें से 1.1 लाख महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का पता चला है और इनमें से लगभग 97,000 का इलाज चल रहा है।” उन्होंने कैंसर की प्रारंभिक अवस्था में पहचान सुनिश्चित करने, हृदय संबंधी रोगों, गुर्दा विफलता, यकृत संबंधी समस्याओं तथा अन्य जटिलताओं के बोझ को कम करने में सरकार की सक्रिय भूमिका के बारे में भी बताया।
श्री नड्डा ने दूसरे और तीसरे स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण और विस्तार के प्रयासों के बारे में बात करते हुए कहा कि “आज हमारे पास 880 मेडिकल कॉलेज हैं, जो पहले की तुलना में काफी अधिक हैं, तथा 23 अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान(एम्स) हैं, जिनमें से 20 पहले ही कार्य कर रहे हैं। इन संस्थानों में कार्डियोलॉजी के पूर्ण विकसित विभाग और सुपर-स्पेशियलिटी कैंसर विभाग उपलब्ध हैं।” उन्होंने आगे कहा कि “स्वास्थ्य बुनियादे ढ़ांचे मिशन के तहत पहले और दूसरे स्तर के स्वास्थ्य सेवाओं के बीच की खाई को पाटने के लिए ₹64,000 करोड़ आवंटित किए गए हैं।”
श्री नड्डा ने जोर देते हुए कहा कि “टेली-परामर्श एक ऐसा क्षेत्र है जहां ई-संजीवनी ने बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह सेवा प्रदाता-से-सेवा प्रदाता और मरीज-से-सेवा प्रदाता दोनों रूपों में उपलब्ध है। जब हम सेवा प्रदाता-से-सेवा प्रदाता की बात करते हैं, तो स्वास्थ्य और वेलनेस केंद्र में कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर इस बातचीत को सुगम बनाता है, अनुवाद करता है, तस्वीरें साझा करता है और विशेषज्ञ के साथ मरीज की लाइव बातचीत सुनिश्चित करता है। इसी तरह, मरीज-से-डॉक्टर संचार में मरीज सीधे प्लेटफॉर्म के माध्यम से डॉक्टर से जुड़कर बात करता है।” उन्होंने आगे कहा कि “अब तक 46.4 करोड़ से अधिक मरीजों ने टेली-परामर्श सेवाओं का लाभ उठाया है और हम इसके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में बीमारियों के बोझ को कम करने का प्रयास कर रहे हैं।”
श्री नड्डा ने ने यह भी स्वीकार किया कि “लगभग 70% एनसीडी के जोखिम जीवनशैली से जुड़े होते हैं और यदि हम रोकथाम पर ध्यान केंद्रित करें, तो उस बोझ के एक बड़े हिस्से को कम कर सकते हैं, जिस पर हम काम कर रहे हैं।” उन्होंने जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से निपटने के लिए सरकार की विभिन्न पहलों—जैसे “ईट राइट इंडिया” और “फिट इंडिया” पर जोर दिया।
उन्होंने माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के इस आह्वान को दोहराया कि हम अपने तेल के उपयोग को 10% तक कम करने तथा नमक और चीनी का कम सेवन करने की बात कही थी। उन्होंने सूचना, शिक्षा और संचार के महत्व पर भी जोर दिया और बताया कि तंबाकू के क्षेत्र में काफी जागरूकता पैदा की जा रही है। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि “सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों पर कानून बनाने के मामले में भारत अग्रणी देशों में से एक है और धूम्रपान में भी काफी कमी देखने को मिली है, लेकिन तंबाकू के अन्य रूपों के सेवन को अभी भी नियंत्रित करने की आवश्यकता है।”
श्री नड्डा ने ने शारीरिक गतिविधि के महत्व और इस दिशा में सरकार की पहलों के बारे में भी बात की। उन्होंने जागरूकता के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि “जागरूकता की शुरुआत हमें स्वयं से करना चाहिए। हमें समझना होगा कि हमारी जीवनशैली ही सबसे अहम है, और हमें इसके लिए स्वयं, अपने परिवार तथा अपने समुदाय को जागरूक करना चाहिए।” उन्होंने यह भी बताया कि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए सरकार योग के विस्तार और सुदृढ़ीकरण पर विशेष ध्यान दे रही है।
उफस्थित लोगों को संबोधित करते हुए श्रीमती पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने एनसीडी से निपटने के लिए भारत की रणनीति और मोटापे की समस्या से निपटने के महत्व पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने बताया कि “भारत में संक्रामक रोगों से गैर-संक्रामक रोगों—जैसे हृदय संबंधी बीमारियां, कैंसर, मधुमेह और श्वसन संबंधी रोग—की ओर बदलाव देखा जा रहा है। इनका समाधान एनपी-एनसीडी के तहत बहुआयामी, पूरे-सरकार और पूरे-समाज के दृष्टिकोण अपनाकर किया जा रहा है, जिसमें जागरूकता, जनसंख्या-आधारित स्क्रीनिंग और देखभाल की निरंतरता शामिल है।”
उन्होंने आगे 75×25 पहल और “स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान” जैसी प्रमुख पहलों पर भी प्रकाश डालते हुए रोकथाम, बीमारी का जल्दी पता लगाने और सामुदायिक भागीदारी पर जोर दिया। उन्होंने मोटापे को एनसीडी का एक प्रमुख कारण बताते हुए कहा कि एनएपएचएस-5 के आंकड़ों के अनुसार 24% महिलाएं और 23% पुरुष अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त हैं, जिसमें शहरी क्षेत्रों की प्रवृत्ति और बच्चों में बढ़ता मोटापा प्रमुख चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि इसके लिए खान-पान की अस्वस्थ आदतें जिम्मेदार हैं, और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के एक अध्ययन का हवाला देते हुए बताया कि वसा, तेल और प्रसंस्कृत(प्रोसेस्ड) खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन इसका मुख्य कारण है।
राष्ट्रीय प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि “माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने मोटापे के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई का आह्वान किया है, जिसमें खाद्य तेल के उपयोग को कम करना भी शामिल है।” उन्होंने आगे कहा कि मंत्रालय, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण(एफएसएसएआई), राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम और विभिन्न जागरूकता अभियानों के सहयोग से व्यवहार में बदलाव को बढ़ावा दे रहा है, जिसमें अभियान, जनसंपर्क और स्कूल-आधारित पहल शामिल हैं। अपने समापन वक्तव्य में उन्होंने कार्यस्थल पर स्वास्थ्य (वर्कप्लेस वेलनेस), स्वस्थ जीवनशैली और नियमित जांच के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि छोटे-छोटे बदलावों से सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़े लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं।
यकृत एवं पित्त विज्ञान संस्थान(आईएलबीएस) के निदेशक प्रो. (डॉ.) एस. के. सरीन ने बीमारियों के बोझ को कम करने और समग्र स्वास्थ्य परिणामों को बेहतर बनाने के लिए प्रारंभिक जांच और निवारक उपायों की आवश्यकता पर जोर दिया।
इस अवसर पर स्वास्थ्य सेवा निदेशालय के उप-महानिदेशक डॉ. एल. स्वस्तिचरण, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में संयुक्त सचिव श्री पुष्पेन्द्र राजपूत और केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
नई दिल्ली – पोषण पखवाड़ा के तहत चल रहे कार्यक्रमों के अंतर्गत, मिजोरम के मामित जिले में रीएक आईसीडीएस परियोजना के तहत एक आंगनवाड़ी केंद्र में प्रकृति भ्रमण दिवस का सफल आयोजन किया गया। इस पहल का उद्देश्य प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा को बढ़ावा देना और छोटे बच्चों में प्राकृतिक पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।
इस कार्यकलाप के दौरान, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायक और अभिभावकों के साथ बच्चों को निकटवर्ती क्षेत्रों में थोड़ी देर सैर पर ले जाया गया। इस सैर ने बच्चों को प्रकृति के विभिन्न तत्वों जैसे पेड़, फूल, पक्षी, तालाब, कुएं और पत्थर आदि से परिचित कराने का एक प्रायोगिक शिक्षा का अवसर प्रदान किया।
बच्चों को अपने परिवेश में रंगों, ध्वनियों और आकृतियों का बारीकी से अवलोकन करने के लिए प्रोत्साहित किया गया, जिससे उनके संवेदी विकास और संज्ञानात्मक क्षमताओं को बढ़ावा मिला। गतिविधि की अंतःक्रियात्मक प्रकृति ने जिज्ञासा को बढ़ावा दिया, अवलोकन क्षमता को बढ़ाया और बच्चों में प्रकृति के प्रति सराहना और प्रेम की भावना पैदा की।
पोषण पखवाड़ा के अंतर्गत ऐसी गतिविधियां प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा के साथ पोषण जागरूकता को एकीकृत करके बच्चों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। अभिभावकों की सहभागिता से बच्चों के लिए पोषणपूर्ण वातावरण के महत्व के प्रति सामुदायिक भागीदारी और जागरूकता को और मजबूती मिलती है।
रीएक आईसीडीएस प्रोजेक्ट में आयोजित नेचर वॉक डे को काफी सराहा गया और यह एक सार्थक और ज्ञानवर्धक अनुभव साबित हुआ, जिसने बच्चों के समग्र विकास में सकारात्मक योगदान दिया।
रांची,23.04.2026 – शहर में सुगम, सुरक्षित एवं व्यवस्थित यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से रांची नगर निगम, ट्रैफिक पुलिस, जिला प्रशासन, एनएचएआई, पथ निर्माण विभाग एवं जेबीवीएनएल द्वारा संयुक्त रूप से व्यापक अभियान प्रारंभ किया गया है।
इसी कड़ी में आज 23.04.2026 को अपर नगर आयुक्त श्री संजय कुमार एवं पुलिस अधीक्षक (यातायात) श्री राकेश सिंह के नेतृत्व में उक्त सभी विभागों की टीम के द्वारा कचहरी रोड से नागा बाबा खटाल स्थित वेजिटेबल मार्केट होते हुए किशोरी यादव चौक एवं रातु रोड चौक तक का स्थलीय निरीक्षण किया गया।
निरीक्षण के दौरान यातायात बाधाओं, अतिक्रमण, अव्यवस्थित ऑटो संचालन, अवैध वसूली एवं जाम के प्रमुख कारणों का गहन आकलन कर त्वरित एवं दीर्घकालिक समाधान हेतु कार्ययोजना तैयार की गई एवं आवश्यक दिशानिर्देश दिए गए।
इस दौरान उप नगर आयुक्त श्री रविंद्र कुमार, उप नगर आयुक्त श्री गौतम प्रसाद साहू, पुलिस उपाधीक्षक, सहायक नगर आयुक्त, नगर प्रबंधक, निगम, ट्रैफिक विभाग, एनएचएआई, पथ निर्माण विभाग, जेबीवीएनएल एवं जिला प्रशासन की अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।
राँची,22.04.2026 – राँची के धुर्वा के पूर्व पार्षद और पंडरा में जमीन कारोबारी की गोली मारकर हत्या करने वाला शूटर सत्यम पाठक का राँची पुलिस ने एनकाउंटर किया है।
बुधवार की सुबह पंडरा ओपी क्षेत्र के कांके डैम के पास शूटर सत्यम पाठक के साथ राँची पुलिस की मुठभेड़ हो गई।इस दौरान पुलिस के द्वारा किए गए आत्मरक्षा में फायरिंग में सत्यम पाठक के दोनों पैर में गोली लगी है।
नई दिल्ली – भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (20 अप्रैल 2026) राष्ट्रपति भवन में कोरिया गणराज्य के राष्ट्रपति, महामहिम ली जे-म्युंग का स्वागत किया। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने उनके सम्मान में भोज का भी आयोजन किया।
भारत की अपनी पहली यात्रा पर राष्ट्रपति म्युंग का स्वागत करते हुए, राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने भारत-कोरिया द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूत करने, विशेष रूप से ‘कोरिया-भारत संसदीय मैत्री समूह’ के अध्यक्ष के रूप में उनके महत्वपूर्ण योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के रूप में उनके कार्यकाल के पहले वर्ष के भीतर ही यह यात्रा, हमारे संबंधों को दिए जाने वाले उनके महत्व को दर्शाती है।
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत और कोरिया दोनों ही जीवंत लोकतंत्र हैं जो समान मूल्यों को साझा करते हैं। उन्हें यह जानकर प्रसन्नता हुई कि भारत की संसद में हाल ही में ‘भारत-कोरिया संसदीय मैत्री समूह’ का गठन किया गया है। उन्होंने कहा कि इससे भारतीय संसद और कोरियाई नेशनल असेंबली के बीच संवाद और आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा। इससे आपसी समझ और विश्वास और अधिक मज़बूत होंगे।
राष्ट्रपति को यह जानकर खुशी हुई कि दोनों पक्षों ने जहाज़ निर्माण, बंदरगाह विकास, डिजिटल सहयोग, लघु और मध्यम उद्यम, इस्पात, शिक्षा, अनुसंधान, संस्कृति और लोगों से लोगों के बीच संपर्क सहित कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग के लिए महत्वाकांक्षी कार्यक्रम निर्धारित किया है। उन्होंने यह भी बताया कि दोनों पक्षों ने ‘व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते’ (सीईपीए) पर वार्ता फिर से शुरू करने के लिए संयुक्त घोषणा को अपनाया है। उन्होंने कहा कि भारत पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार संबंधों को आगे बढ़ाने और एआई, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, स्वच्छ ऊर्जा, सेवाओं और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में कोरिया के साथ सहयोग को मज़बूत करने के लिए तत्पर है।
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत के पास कौशल, गति और व्यापक संभावनाएं हैं, जबकि कोरिया के पास हाई-टेक विनिर्माण में विशेषज्ञता है। अपनी ताकतों को मिलाकर, हम अपने युवाओं के लिए अनगिनत अवसर सर्जित कर सकते हैं।
राष्ट्रपति ने कहा कि भारत और कोरिया को मानवता के लिए स्थायी भविष्य सुनिश्चित करने हेतु हरित और स्वच्छ ऊर्जा, के साथ ही अन्य जलवायु प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में सहयोग के अवसरों की तलाश करनी चाहिए।
दोनों नेता इस बात पर सहमत हुए कि भारत और कोरिया के बीच घनिष्ठ सहयोग से हमारे लोगों को अपार लाभ मिल सकता है और दोनों एक-दूसरे से बहुत कुछ सीख सकते हैं। पर्यावरण, नवाचार, शिक्षा, कौशल विकास और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम करके हमारे लोग लाभान्वित हो सकते हैं।
राष्ट्रपति का भाषण देखने के लिए कृपया यहाँ क्लिक करें–
पोषण पखवाड़ा के आठवें चरण के तहत, जो पूरे देश में मनाया जा रहा है, कटिहार बिहार में पोषण जागरूकता गतिविधियाँ आयोजित की गईं।
नई दिल्ली – 22.04.2026 – आज 20.04.2026 को श्री आशुतोष द्विवेदी, भा०प्रा०से०, जिला पदाधिकारी महोदय द्वारा कटिहार सदर के 3 बच्चे एवं कटिहार ग्रामीण के 2 बच्चे (कुल 5 बच्चों) को आंगनबाड़ी केंद्र पर प्रारंभिक स्कूल पूर्व शिक्षा पूर्ण होने के पश्चात विद्यारंभ प्रमाण पत्र देकर प्रोत्साहित किया गया । जिला पदाधिकारी महोदय द्वारा उपस्थित बच्चे के साथ मृदुल संवाद किया गया।
जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के दिशा-निर्देश पर राँची जिले के सभी अंचलों में जनता दरबार का आयोजन
राँची में जनता दरबार का निरंतर आयोजन: हर सोमवार उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा एवं हर मंगलवार अंचलों में जन समस्याओं का त्वरित समाधान
राँची,21.04.2026 – जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के कुशल नेतृत्व में राँची जिले में आमजन की समस्याओं के त्वरित एवं पारदर्शी समाधान के लिए जनता दरबार का नियमित आयोजन किया जा रहा है।
श्री मंजूनाथ भजन्त्री स्वयं हर सोमवार को समाहरणालय स्थित अपने कार्यालय कक्ष में जनता दरबार का आयोजन करते हैं, जिसमें जिले के ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों से बड़ी संख्या में आम नागरिक अपनी शिकायतें एवं समस्याएं लेकर पहुंचते हैं। उनके दिशा-निर्देश पर हर मंगलवार को राँची जिले के सभी अंचलों में अंचल स्तरीय जनता दरबार लगाए जा रहे हैं।
इस पहल से प्रशासन जनता के द्वार तक पहुंच रहा है और समस्याओं का मौके पर ही निपटारा संभव हो पा रहा है।जनता दरबार में मुख्य रूप से भूमि विवाद, राजस्व संबंधी मामले, दाखिल-खारिज, सरकारी योजनाओं का लाभ, जल-बिजली-सड़क जैसी आधारभूत सुविधाएं, पेंशन, सामाजिक सुरक्षा योजनाएं, आवास योजना तथा अन्य विभागीय शिकायतें उठाई जा रही हैं।
उपायुक्त श्री भजन्त्री एक-एक फरियादी की समस्या ध्यानपूर्वक सुनते हैं और संबंधित अधिकारियों को तत्काल कार्रवाई के निर्देश देते हैं। कई मामलों में ऑन-द-स्पॉट समाधान भी किया जा रहा है।श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने स्पष्ट रूप से कहा है कि जनता दरबार आम लोगों की समस्याओं के समाधान का सशक्त माध्यम है।
उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों को चेतावनी दी है कि किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। यदि जनता दरबार में कोई पुरानी शिकायत दोहराई जाती है तो संबंधित कर्मचारियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने सभी अंचल अधिकारियों को निर्देश दिया है कि प्राप्त आवेदनों का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित किया जाए और आम नागरिकों को संवेदनशील एवं जवाबदेह प्रशासन उपलब्ध कराया जाए।
इस निरंतर प्रयास से राँची जिले में प्रशासनिक पारदर्शिता बढ़ी है और जनता में प्रशासन के प्रति विश्वास मजबूत हुआ है। जिला प्रशासन का प्रयास है कि हर नागरिक को न्याय और सुविधाएं समय पर मिलें तथा कोई भी व्यक्ति अपनी समस्या लेकर बिना सहारे के न रहे।
जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के दिशा-निर्देश पर राँची जिले के सभी अंचलों में हर मंगलवार को आयोजित जनता दरबार में आमजन की समस्याओं का तेजी से निराकरण हो रहा है।
21 अप्रैल 2026 को जनता दरबार में मुख्य रूप से आवासीय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, दाखिल-खारिज, पंजी-II सुधार, पारिवारिक सदस्यता, तत्काल प्रमाण पत्र, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, सर्वजन पेंशन, CNT एक्ट की धारा 46 के अंतर्गत अनुमति तथा अन्य राजस्व संबंधी मामलों का निपटारा किया गया।
अंचलवार निष्पादित आवेदनों का विवरण निम्नलिखित है:
अंचल कार्यालय, ईटकी: कुल 61 आवेदन निष्पादित
आवासीय प्रमाण पत्र – 09, जाति प्रमाण पत्र – 36, आय प्रमाण पत्र – 13, KCC – 01, छोटानागपुर कास्तकारी अधिनियम 1908 की धारा 46 के अंतर्गत अनुमति – 02
अंचल कार्यालय, राहे:
कुल 60 आवेदन निष्पादित
जमाबंदी की प्रविष्टि – 01, पारिवारिक सदस्यता – 04, आय प्रमाण पत्र – 15, आवासीय प्रमाण पत्र – 15, जाति प्रमाण पत्र – 20, पंजी-2 सुधार – 04, दाखिल-खारिज – 01
अंचल कार्यालय, सोनाहातु:
कुल 63 आवेदन निष्पादित
आवासीय प्रमाण पत्र – 19, जाति प्रमाण पत्र – 16, आय प्रमाण पत्र – 22, पारिवारिक सदस्यता – 02, तत्काल आय प्रमाण पत्र – 03, तत्काल जाति प्रमाण पत्र – 01
इसके अतिरिक्त, ग्राम बरेन्दा के आवेदक श्री अतुल प्रसाद महतो को वज्रपात से मृत हुए 2 पशुओं का निर्धारित मुआवजा राशि 50,000 रुपये प्रदान किया गया।
अंचल कार्यालय, चान्हो:
कुल 107 आवेदन निष्पादित
दाखिल-खारिज शुद्धि पत्र – 03, पंजी-II सुधार (बसुधा) – 02, DCLR आवेदन (नामान्तरण शुद्धि पत्र में जाति सुधार) – 01, जाति प्रमाण पत्र – 56, आय प्रमाण पत्र – 16, आवासीय प्रमाण पत्र – 08, तत्काल आवेदन – 12, नकल – 04, पारिवारिक सदस्यता प्रमाण पत्र – 04
अंचल कार्यालय, सिल्ली:
कुल 55 आवेदन निष्पादित
तत्काल (जाति, आय, आवासीय) – 01, आचरण प्रमाण पत्र – 01, आवासीय प्रमाण पत्र – 13, जाति प्रमाण पत्र – 11, आय प्रमाण पत्र – 23, पंजी-II सुधार – 06
अंचल कार्यालय, मांडर:
कुल 102 आवेदन निष्पादित
आवासीय प्रमाण पत्र – 39, जाति प्रमाण पत्र – 20, आय प्रमाण पत्र – 10, पारिवारिक सदस्यता – 01, दाखिल-खारिज – 04, सुधार (बसुधा) – 03, सर्वजन पेंशन – 18, परमिशन – 07, KCC – 01
प्रखंड सह अंचल कार्यालय, रातु:
कुल 164 आवेदन निष्पादित
दाखिल-खारिज – 30, LRDC अपील दाखिल-खारिज – 01, ऑनलाइन सुधार – 12, जाति प्रमाण पत्र – 07, आवासीय प्रमाण पत्र – 33, आय प्रमाण पत्र – 40, पारिवारिक सूची – 01, नकल – 01, जाति-आवासीय सत्यापन – 01, धारा 46 CNT परमिशन – 03, भूमि सीमांकन – 03, जन्म प्रमाण पत्र – 25, सर्वजन पेंशन – 07
अंचल का नाम- खलारी
1. निष्पादित आवेदन- 61
2. आवासीय प्रमाण पत्र- 18
3. जाति प्रमाण पत्र- 10
4. आय प्रमाण पत्र- 24
5. पारिवारिक सदस्यता- 01
6. दाखिल-ख़ारिज- 00
7. सुधार वशुधा- 01
8.अन्य – 07
निष्पादित आवेदन की कुल संख्या- 61
अंचल कार्यालय का नाम – अंचल कार्यालय, बेड़ो (राँची)।
1. दाखिल खारिज – 08
2. सीमांकन – 00
3. पंजी 2 सूधार – 02
4. लगान निर्गत – 02
5. तत्काल आवेदन – 13
6. आवासीय प्रमाण पत्र – 65
7. जाति प्रमाण पत्र – 32
8. आय प्रमाण पत्र – 58
9. पारिवारिक सदस्यता – 7
10. किसान क्रेडिट कार्ड सत्यापन – 4
*निष्पादित आवेदन की कुल संख्या- 191
जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के दिशा-निर्देश पर राँची जिले के सभी अंचलों में हर मंगलवार को आयोजित जनता दरबार में आमजन की समस्याओं का तेजी से निराकरण हो रहा है। आज दिनांक 21 अप्रैल 2026 को छह अंचलों — ईटकी, राहे, सोनाहातु, चान्हो, सिल्ली एवं मांडर तथा प्रखंड सह अंचल कार्यालय रातु में कुल 602 से अधिक आवेदनों का निष्पादन किया गया। जनता दरबार में मुख्य रूप से आवासीय प्रमाण पत्र, जाति प्रमाण पत्र, आय प्रमाण पत्र, दाखिल-खारिज, पंजी-II सुधार, पारिवारिक सदस्यता, तत्काल प्रमाण पत्र, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र, सर्वजन पेंशन, CNT एक्ट की धारा 46 के अंतर्गत अनुमति तथा अन्य राजस्व संबंधी मामलों का निपटारा किया गया।
झारखंड ओलंपिक एसोसिएशन के महासचिव डॉ. मधुकांत पाठक के नेतृत्व में की मुलाकात
जिला दंडाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजंत्री ने सभी खिलाड़ियों को उनकी उपलब्धियों के लिए दी बधाई
रांची,21.04.2026 – एशियन चैंपियनशिप में शानदार प्रदर्शन करने वाले झारखंड के खिलाड़ियों ने जिला दंडाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री से शिष्टाचार मुलाकात की।
झारखंड ओलंपिक एसोसिएशन के महासचिव डॉ. मधुकांत पाठक के नेतृत्व में दिनेश कुमार, रेशमा कुमारी और बसंती कुमारी ने जिला दंडाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजंत्री से मुलाकात की।
जिला दंडाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजंत्री ने सभी खिलाड़ियों को उनकी उपलब्धियों के लिए बधाई देते हुए उनका हौसला बढ़ाया। उन्होंने कहा कि झारखंड के खिलाड़ी निरंतर राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं, जो राज्य के लिए गर्व की बात है। उन्होंने खिलाड़ियों को भविष्य में और बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित किया तथा हर संभव प्रशासनिक सहयोग का आश्वासन दिया।
दिनांक 06 अप्रैल 2026 से 11 अप्रैल 2026 तक दिल्ली में आयोजित एशियन चैंपियनशिप में इन खिलाड़ियों ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कई पदक अपने नाम किए। इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में दिनेश कुमार ने दो स्वर्ण पदक जीतकर राज्य का गौरव बढ़ाया। वहीं, रेशमा कुमारी ने एक रजत एवं एक कांस्य पदक हासिल किया। जबकि बसंती कुमारी ने महिला अंडर-25 वर्ग में स्वर्ण पदक जीतकर उत्कृष्ट प्रदर्शन किया।
21.04.2026 – कृष्णा चौहान फाउंडेशन (केसीएफ) के संस्थापक डॉ. कृष्णा चौहान अपने जन्मदिन (4 मई) के अवसर पर लीजेंड दादा साहेब फाल्के अवार्ड 2026 समारोह (7वें सीजन) का आयोजन मुम्बई महानगर के प्रसिद्ध उपनगर अंधेरी पश्चिम स्थित रहेजा क्लासिक क्लब में करेंगे। इस आशय की जानकारी डॉ कृष्णा चौहान ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर मीडिया को दी है।
इस अवॉर्ड समारोह में उन शख्सियतों को सम्मानित किया जाएगा जिन्होंने फिल्मी दुनिया में अपनी प्रतिभा के बदौलत अपनी विशिष्ट पहचान स्थापित की है साथ ही समाज सेवा और मानव सेवा का सराहनीय कार्य किया है।
केसीएफ के बैनर तले आयोजित यह एवॉर्ड फंक्शन बॉलीवुड के लिए यादगार फंक्शन साबित होगा जहां भारतीय फिल्म जगत के पितामह दादा साहेब फाल्के को बॉलीवुड के नामचीन शख्सियतों के द्वारा उनको याद करते हुए श्रद्धा सुमन भी अर्पित किया जाएगा।
फिल्म निर्देशक व अवार्ड समारोह के आयोजक कृष्णा चौहान इस एवार्ड के अलावा प्रत्येक वर्ष बॉलीवुड आयकोनिक एवार्ड, बॉलीवुड लिजेंड एवार्ड, नारी शक्ति सम्मान, राष्ट्रीय रत्न सम्मान और महात्मा गांधी रत्न अवॉर्ड का आयोजन भी करते चले आ रहे हैं।
विदित हो कि पिछले 22 वर्षों से बॉलीवुड में सक्रिय गोरखपुर (उत्तर प्रदेश) के मूल निवासी डॉ.कृष्णा चौहान न केवल एक कामयाब फ़िल्म निर्देशक एवं चर्चित समाज सेवक हैं बल्कि अवार्ड्स फंक्शन करने के मामले में सबसे अधिक सुर्खियों में रहने वाले पर्सनाल्टी माने जाते हैं। इन्होंने अपना फिल्मी सफर बतौर सहयक निर्देशक शुरू किया था। इन्होंने कई एड फिल्म्स, म्यूजिक वीडियो बनाया है।
मंत्री ने उदाहरण देते हुए बताया कि सरकार के स्वच्छता अभियान के दौरान सिर्फ़ ई-कचरे से ही 4,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा की कमाई हुई
रीसाइक्लिंग और बायोटेक्नोलॉजी से संचालित नवाचार से समर्थित सर्कुलर इकॉनमी का उभरता हुआ मॉडल, सभी क्षेत्रों में औद्योगिक विकास और स्थिरता को फिर से परिभाषित करने के लिए तैयार: मंत्री
नीतिगत समर्थन, स्टार्टअप और उद्योग की भागीदारी भारत के सर्कुलर इकॉनमी में बदलाव को तेज़ कर रही
नई दिल्ली – विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार), और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि दुनिया “सर्कुलर इकॉनमी” की ओर बड़ा बदलाव देख रही है।
उन्होंने कहा कि आर्थिक सोच में निर्णायक बदलाव आया है, जहाँ “कचरे” का विचार तेज़ी से विलुप्त हो रहा है और हर फेंकी हुई चीज़ को आर्थिक मूल्य के स्रोत के रूप में देखा जा रहा है। उन्होंने उदाहरण देते हुए बताया कि सरकार के स्वच्छता अभियान के दौरान सिर्फ़ ई-कचरे से ही 4,000 करोड़ रुपये से ज़्यादा की कमाई हुई।
मंत्री ने कहा कि रीसाइक्लिंग और बायोटेक्नोलॉजी से संचालित नवाचार से समर्थित सर्कुलर इकॉनमी (चक्रीय अर्थव्यवस्था) का उभरता मॉडल, सभी क्षेत्रों में औद्योगिक विकास और स्थिरता को फिर से परिभाषित करने के लिए तैयार है।
डॉ. जितेंद्र सिंह नई दिल्ली में “संसाधन दक्षता और सर्कुलर इकॉनमी पर वैश्विक संगोष्ठी और पुरस्कार” के दूसरे संस्करण समारोह को
संबोधित कर रहे थे।
इस कार्यक्रम में सरकार, उद्योग, अनुसंधान संस्थानों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों ने भाग लिया, जिनमें यूरोपीय और जर्मन मिशनों से जुड़े प्रतिनिधि, तथा “संसाधन दक्षता और सर्कुलर इकॉनमी उद्योग गठबंधन” के प्रमुख हितधारक भी शामिल थे।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि पिछले कुछ वर्षों में पर्यावरण पर चर्चा का स्वरूप काफ़ी बदल गया है; अब इसका ज़ोर केवल संरक्षण पर नहीं, बल्कि इसके मज़बूत आर्थिक आयाम को पहचानने पर है।
उन्होंने कहा कि यह बढ़ती हुई समझ कि स्थिरता से राजस्व भी कमाया जा सकता है, इस आंदोलन में ज़्यादा गंभीरता और व्यापक भागीदारी लेकर आई है।
मंत्री ने कहा कि औद्योगिक विकास का अगला चरण मुख्य रूप से रीसाइक्लिंग, बायोटेक्नोलॉजी और जेनेटिक प्रक्रियाओं से संचालित होगा। उन्होंने यह भी कहा कि दुनिया भर के विशेषज्ञ पहले से ही इस बदलाव को अगली औद्योगिक क्रांति की नींव के रूप में देख रहे हैं।
डॉ. सिंह ने व्यावहारिक उदाहरण देते हुए कहा कि प्लास्टिक, इस्तेमाल किया हुआ खाना पकाने का तेल और स्टील स्लैग जैसे औद्योगिक उप-उत्पाद जैसी चीज़ों को कभी कचरा माना जाता था लेकिन उन्हें अब मूल्यवान संसाधनों में बदला जा रहा है।
इनमें सड़क निर्माण सामग्री, बायोफ्यूल और व्यावसायिक रूप से उपयोगी औद्योगिक सामग्री शामिल हैं।
उन्होंने कहा कि जिन उद्योगों को पहले ऐसे कचरे के निपटान के लिए खर्च करना पड़ता था, वे अब इससे आर्थिक लाभ कमा रहे हैं।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि स्वच्छता और रीसाइक्लिंग के लगातार प्रयासों से पहले ही ठोस वित्तीय परिणाम सामने आए हैं।
विशेष राष्ट्रव्यापी अभियान का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि मात्र इलेक्ट्रॉनिक कचरे के संग्रह से ही ₹4,000 करोड़ से अधिक का राजस्व प्राप्त हुआ है, जो संसाधन पुनर्प्राप्ति की विशाल और अब तक अप्रयुक्त क्षमता को दर्शाता है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सर्कुलर इकॉनमी के लाभ केवल बड़े उद्योगों तक ही सीमित नहीं हैं, बल्कि घरों और अनौपचारिक क्षेत्रों से लेकर स्टार्टअप और एमएसएमई तक पूरे आर्थिक क्षेत्र में फैले हैं जो कई स्तरों पर आजीविका और व्यवसाय के नए अवसर सर्जित कर रहे हैं।
मंत्री ने जनभागीदारी और व्यवहार में बदलाव के महत्व पर भी बात की।
उन्होंने कहा कि बड़े पैमाने पर बदलाव के लिए सरकारी योजनाओं से परे सामूहिक भागीदारी की आवश्यकता होगी। उन्होंने कहा कि जैसे-जैसे सरकार विभिन्न क्षेत्रों को खोल रही है और सहयोग को बढ़ावा दे रही है, वैसेवैसे उद्योग, स्टार्टअप और नागरिक समाज को निवेश करने, नवाचार करने और इन प्रयासों में भाग लेने के लिए सक्रिय रूप से आगे आना चाहिए।
बदलती आर्थिक परिपाटियों का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा कि भारत ऐसे बदलाव का साक्षी बन रहा है, जहाँ मूल्य श्रृंखलाओं को फिर से परिभाषित किया जा रहा है और कचरा प्रबंधन, हरित प्रौद्योगिकियों और चक्रीय उत्पादन प्रणालियों जैसे क्षेत्रों में नए अवसर उभर रहे हैं। उन्होंने यह भी कहा कि यह बदलाव 2070 तक ‘नेटज़ीरो’ उत्सर्जन (शून्य शुद्ध उत्सर्जन) हासिल करने की भारत की प्रतिबद्धता में भी महत्वपूर्ण योगदान देगा।
बीआईआरएसी के प्रबंध निदेशक डॉ. जितेंद्र कुमार ने भारत की पारंपरिक ताकतों के बारे में बात की, जो देश की सांस्कृतिक और कृषि प्रणालियों में निहित चक्रीय प्रथाओं पर आधारित हैं उन्होंने इस विरासत को आधुनिक वैज्ञानिक नवाचार के साथ जोड़ने की ज़रूरत पर भी ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि बीआईआरएसी उन स्टार्टअप्स को लगातार सहयोग दे रहा है जो हरित तकनीकों और टिकाऊ समाधानों पर काम कर रहे हैं। इसके साथ ही बीआईआरएसी जीवनचक्र-आधारित दृष्टिकोणों तथा कार्बन क्रेडिट जैसी व्यवस्थाओं को भी बढ़ावा दे रहा है।
यह संगोष्ठी नीतिगत ढांचों, साझेदारियों और कार्यान्वयन रणनीतियों पर विचार-विमर्श का मंच साबित हुई. इसका उद्देश्य भारत को संसाधन-कुशल और चक्रीय अर्थव्यवस्था की ओर तेज़ी से आगे बढ़ाना है।
पहल का उद्देश्य प्रौद्योगिकी आधारित कौशल प्रदान कर अल्पसंख्यक युवाओं की रोजगार क्षमता और रोजगार अवसर सुलभ बनाना है
नई दिल्ली – अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने भविष्य अनुरूप कौशल विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए प्रधानमंत्री विरासत का संवर्धन योजना – प्रधानमंत्री विकास के तहत भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, पटना (आईआईटी), के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं।
अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय की निदेशक सुश्री नेहा गिरी, आईआईटी पटना के निदेशक प्रोफेसर टीएन सिंह और दोनों संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर और आदान-प्रदान किए गए।
इस विशेष सहयोग के तहत, बिहार के 600 अल्पसंख्यक युवाओं को एआई टेक्नोक्रेट और बिजनेस एनालिटिक्स एग्जीक्यूटिव जैसे उभरते और उच्च मांग वाले रोजगार पदों के लिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। प्रतिभागियों को बाजार की सामयिक आवश्यकताओं के अनुरूप उद्योग-संबंधी कौशल प्रदान करने के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम तैयार किया गया है।
इस पहल का उद्देश्य प्रौद्योगिकी आधारित आधुनिक कौशल प्रदान कर अल्पसंख्यक युवाओं की रोजगार क्षमता बढ़ाना और उन्हें रोजगार के अवसर सुलभ कराना है। यह प्रधानमंत्री विरासत का संवर्धन योजना-पीएम विकास योजना का मूल उद्देश्य रेखांकित करता है। इसका लक्ष्य कौशल अंतर में कमी लाकर और समकालीन प्रशिक्षण द्वारा स्थायी आजीविका के अवसर प्रदान करना है। आईआईटी पटना जैसे प्रमुख संस्थान के साथ साझेदारी कर अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय लाभार्थियों के लिए गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण, उद्योग अनुभव और बेहतर कैरियर परिणाम सुनिश्चित करना चाहता है, जिससे समावेशी विकास और सशक्तिकरण में योगदान हो।
यह सहयोग पीएम विकास योजना के तहत मंत्रालय के निरंतर प्रयासों को आगे बढ़ाता है। अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने गुणवत्तापूर्ण, उद्योग-उन्मुख कौशल विकास कार्यक्रम प्रदान करने वाले प्रमुख संस्थानों के अपने नेटवर्क का विस्तार करते हुए पिछले सप्ताह, भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान, धारवाड़; राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान, मणिपुर; वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद् के केंद्रीय यांत्रिक अभियांत्रिकी अनुसंधान संस्थान, दुर्गापुर; और अरुणाचल प्रदेश वन निगम लिमिटेड के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए थे।
नई दिल्ली – विधायी प्रारूपण और अनुसंधान संस्थान ने भारत सरकार की नीति के अंतर्गत हिन्दी में मूल प्रारूपण का प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए तीसरा बुनियादी पाठ्यक्रम तैयार किया है, जिसका उद्देश्य राज्य सरकारों/संघ राज्य क्षेत्रों के अधिकारियों को प्रशिक्षण देना है, ताकि हिन्दी में विधायी प्रारूपण की क्षमता का विकास किया जा सके और हिन्दी में विधायी प्रारूपण को प्राथमिकता दी जा सके। इसी क्रम में, विधि और न्याय मंत्रालय के विधायी विभाग के तत्वावधान में स्थापित विधायी प्रारूपण और अनुसंधान संस्थान (आई.एल.डी.आर.) द्वारा हिन्दी में मूल प्रारूपण के प्रशिक्षण हेतु एक माह के तीसरे बुनियादी पाठ्यक्रम का आयोजन विधायी प्रशिक्षण सभागार, कर्त्तव्य भवन-2, नई दिल्ली में किया जा रहा है।
उक्त तीसरे बुनियादी पाठ्यक्रम का शुभारंभ डॉ. मनोज कुमार, अपर सचिव एवं पाठ्यक्रम निदेशक (आई.एल.डी.आर.) ने किया, इस अवसर पर डॉ के वी कुमार, अपर सचिव, डॉ ब्रजेश कुमार सिंह, संयुक्त सचिव एवं विधायी परामर्शी, श्री अश्वनी, संयुक्त सचिव एवं विधायी परामर्शी, श्री पुण्डरीक शर्मा, संपादक, डॉ सुधा चौधरी, उप विधायी परामर्शी, श्री कृष्ण कुमार शर्मा, उप विधायी परामर्शी तथा विधायी विभाग के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।
इस पाठ्यक्रम में विधायी प्रारूपण के सैद्धांतिक पहलुओं के अतिरिक्त व्यावहारिक प्रशिक्षण का भी समावेश किया गया है। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में भारत सरकार के पाँच मंत्रालयों/विभागों तथा तीन राज्य सरकार—छत्तीसगढ़, बिहार और उत्तराखंड—के अधिकारी भाग ले रहे हैं। यह कार्यक्रम समकालीन विधायी प्रारूपण कौशल को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया है। साथ ही, इस पाठ्यक्रम में सरल एवं स्पष्ट (Plainlanguage) भाषा में विधायी प्रारूपण पर विशेष बल दिया जा रहा है, ताकि विधायी प्रावधान अधिक सुगम, बोधगम्य और जन-सामान्य के लिए सहज रूप से समझने योग्य बन सकें।