जनजातियों हेतु थारुहट क्षेत्र का विकास

नई दिल्ली – केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके ने लोकसभा को सूचित किया कि माननीय प्रधानमंत्री द्वारा 2 अक्टूबर, 2024 को शुरू किए गए धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (डीएजेजीयूए) का लक्ष्य 30 राज्यों/संघ राज्यक्षेत्रों के 549 जिलों और 2,911 प्रखंडों (ब्लॉकों) में 63,843 गांवों के जनजातीय लोगों के लिए अवसंरचनात्मक अंतरों को संतृप्त करना, स्वास्थ्य, शिक्षा, आंगनवाड़ी सुविधाओं, सड़कें, पेयजल, बिजली तक बेहतर पहुंच और आजीविका के अवसर प्रदान करना है।

(ख) धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान (डीएजेजीयूए) की अवधि 2 अक्टूबर, 2024 से 31 मार्च, 2029 तक है। इस अभियान में 17 मंत्रालयों के 25 उपाय एकीकृत (शामिल) हैं। प्रमुख बहु-क्षेत्रीय उपायों में निम्नलिखित शामिल हैंः

क्र.

सं.

मंत्रालय गतिविधि मिशन लक्ष्य (2024-2028)
1 ग्रामीण विकास मंत्रालय

(एमओआरडी)

प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) – ग्रामीण (ग्रामीण विकास मंत्रालय) 20 लाख पक्के मकान
2 प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना पीएमजीएसवाई – (ग्रामीण विकास मंत्रालय) 25000 कि.मीसड़क
3 जल शक्ति मंत्रालय जल जीवन मिशन (जेजेएम) हर पात्र गांव/बस्ती ~ 63000 गांव
4 विद्युत मंत्रालय नवस्वरूपित वितरण क्षेत्र योजना – आरडीएसएस प्रत्येक अविद्युतीकृत आवास और असंबद्ध सार्वजनिक संस्थान (~2.35 लाख)
5 नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय नई सौर ऊर्जा योजना- पीएम सूर्य प्रत्येक अविद्युतीकृत आवास और सार्वजनिक संस्थान जो ग्रिड के अंतर्गत नहीं आते हैं
6 स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय पीएम आयुष्‍मान भारत स्‍वास्‍थ्‍य अवसंरचना मिशनपीएम अभिम (एबीएचआईएम) 1000 एमएमयू
7 महिला एवं बाल विकास मंत्रालय आंगनवाड़ी केंद्र- पोषण 2.0 (आईसीडीएस) 8000 सक्षम आंगनवाड़ी केन्द्र (2000 नये आंगनवाड़ी केन्द्र और 6000 का उन्नयन)
8 स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग, शिक्षा मंत्रालय समग्र शिक्षा अभियान (एसएसए) 1000 छात्रावास
9 आयुष मंत्रालय राष्ट्रीय आयुष मिशन ईएमआरएस में 700 पोषण वाटिकाएं
10 संचार मंत्रालय सार्वभौमिक सेवा दायित्व निधि (यूएसओएफ) 5252 गांव
11 पर्यटन मंत्रालय उत्तरदायी पर्यटन (स्वदेश दर्शन) 1000 गृह प्रवास (होम स्टे)
12 कौशल विकास और उद्यमिता मंत्रालय जन शिक्षण संस्थान (जेएसएस) योजना (i) जनजातीय जिलों में कौशल केंद्र (ii) 1000 वन धन विकास केंद्रों और जनजातीय समूहों का प्रशिक्षण
13 कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (आरकेवीवाई) एफआरए पट्टाधारकों को सतत कृषि सहायता (~ 2 लाख)
14 मत्स्य पालन विभाग प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) जनजातीय मछुआरों को सहायता10,000 आईएफआर और 1000 सीएफआर
15 पशुपालन और डेयरी विभाग राष्ट्रीय पशुधन मिशन 8500 आईएफआर धारकों को पशुधन प्रबंधन सहायता
16 पंचायती राज मंत्रालय क्षमता निर्माण –

राष्ट्रीय ग्राम स्वराज अभियान (आरजीएसए)

एफआरए से संबंधित कार्य करने वाले उप-मंडल, जिला और राज्य स्तर की सभी ग्राम सभाएं और संबंधित अधिकारी
17 जनजातीय कार्य मंत्रालय पीएमएएजीवाई/टीडी को एससीए 100 टीएमएमसी – बहुउद्देशीय विपणन केंद्र
जनजातियों के लिए आश्रम विद्यालयों/सरकारी विद्यालयों और छात्रावासों का उन्नयन
एफआरए दावा समर्थन
17 राज्यों में सिकल सेल रोग के लिए सीओसी

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निजी विद्यालयों की प्रारंभिक कक्षाओं (Entry Level Classes) में 25% आरक्षित सीटों पर नामांकन की प्रक्रिया प्रारम्भ

रांची जिले में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009 के अंतर्गत कमजोर एवं अभिवंचित वर्ग (Disadvantaged Groups & Weaker Sections) के बच्चों के लिए मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों की प्रारंभिक कक्षाओं (Entry Level Classes) में 25% आरक्षित सीटों पर नामांकन की प्रक्रिया चल रही है

उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी रांची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देश पर आवेदनों को ऑनलाइन जमा करने की अंतिम तिथि एक सप्ताह बढ़ाकर 22 मार्च 2026 निर्धारित की गई

सभी योग्य एवं पात्र अभिभावक 22 मार्च 2026 तक आवश्यक रूप से अपना आवेदन *rteranchi.in पोर्टल पर जमा करें

*हेल्पलाइन:
किसी भी असुविधा या तकनीकी समस्या होने पर निम्न नंबरों पर संपर्क करें :
– 9304240308 (WhatsApp only)
– 8757221429

रांची,14.03.2026 – रांची जिले में शिक्षा का अधिकार अधिनियम (RTE) 2009 के अंतर्गत कमजोर एवं अभिवंचित वर्ग (Disadvantaged Groups & Weaker Sections) के बच्चों के लिए मान्यता प्राप्त निजी विद्यालयों की प्रारंभिक कक्षाओं (Entry Level Classes) में 25% आरक्षित सीटों पर नामांकन हेतु आवेदन लिया जा रहा है ।

आवेदन प्रक्रिया: ऑनलाइन पोर्टल rteranchi.in* के माध्यम से आवेदन आमंत्रित किए गए है।
*मूल अंतिम तिथि: 15 मार्च 2026।

* प्राप्त आवेदन: अभी तक लगभग 900 आवेदन प्राप्त हुए हैं।

*अंतिम तिथि में विस्तार: अभिभावकों के अनुरोध पर उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी रांची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री * के निर्देश पर आवेदनों को ऑनलाइन जमा करने की अंतिम तिथि *एक सप्ताह बढ़ाकर 22 मार्च 2026 निर्धारित कर दी है।

सभी योग्य एवं पात्र अभिभावक 22 मार्च 2026 तक आवश्यक रूप से अपना आवेदन rteranchi.in पोर्टल पर जमा करें। यह सुनिश्चित करें कि सभी आवश्यक दस्तावेज़ (जैसे आय प्रमाण पत्र, निवास प्रमाण, जन्म प्रमाण पत्र आदि) अपलोड कर दिए जाएं।

*हेल्पलाइन:
किसी भी असुविधा या तकनीकी समस्या होने पर निम्न नंबरों पर संपर्क करें।
*9304240308 (WhatsApp only)
*8757221429

यह निर्णय समावेशी शिक्षा को बढ़ावा देने और अधिक से अधिक पात्र बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने की दिशा में महत्वपूर्ण है। जल्द से जल्द आवेदन पूरा करें, क्योंकि सीटें सीमित हैं (रांची जिले में सत्र 2026-27 के लिए कुल 1161 आरक्षित सीटें घोषित की गई हैं)। अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक पोर्टल www.rteranchi.in पर जाएं।

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आगामी रामनवमी पर्व की तैयारियों एवं शांति व्यवस्था को लेकर DC Ranchi श्री मंजूनाथ भजन्त्री से श्री महावीर मंडल एवं रामनवमी श्रृंगार समिति के सदस्यों ने मुलाकात की

आगामी रामनवमी पर्व को लेकर विस्तृत चर्चा की गई

जिला प्रशासन पर्व को पूरी तरह शांतिपूर्ण, सुव्यवस्थित एवं सफल बनाने के लिए हरसंभव सहयोग करेगा

महावीर मंडल एवं रामनवमी श्रृंगार समिति के सदस्यों ने उपायुक्त के सहयोगात्मक दृष्टिकोण की सराहना की और आभार व्यक्त किया

रांची,14.03.2026 – उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री से आज श्री महावीर मंडल, राँची एवं रामनवमी श्रृंगार समिति, केंद्रीय शांति समिति के प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की। मुलाकात के दौरान आगामी रामनवमी पर्व को लेकर विस्तृत चर्चा की गई।

प्रतिनिधिमंडल ने पर्व के दौरान शहर में निकलने वाली विभिन्न शोभायात्राओं, झांकी प्रदर्शन, झंडा पूजन, महाआरती एवं अन्य धार्मिक आयोजनों की रूपरेखा से उपायुक्त को अवगत कराया।

साथ ही, शहर के विभिन्न इलाकों में शांतिपूर्ण माहौल बनाए रखने, ट्रैफिक व्यवस्था, भीड़ प्रबंधन, सुरक्षा के दृष्टिकोण से आवश्यक सहयोग एवं समन्वय की अपील की। प्रतिनिधिमंडल में शामिल सदस्यों ने पर्व को भव्य एवं सुरक्षित बनाने के लिए जिला प्रशासन के साथ मिलकर कार्य करने की इच्छा जताई।

उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने मुलाकात का स्वागत करते हुए कहा कि रामनवमी जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक पर्व राँची शहर की सांस्कृतिक धरोहर एवं सामाजिक एकता का प्रतीक हैं। उन्होंने आश्वासन दिया कि जिला प्रशासन पर्व को पूरी तरह शांतिपूर्ण, सुव्यवस्थित एवं सफल बनाने के लिए हरसंभव सहयोग करेगा।

उन्होंने निम्नलिखित प्रमुख बिंदुओं पर जोर दिया:

* सभी शोभायात्राओं एवं आयोजनों के मार्ग, समय एवं संख्या की पूर्व सूचना संबंधित थाना एवं अनुमंडल पदाधिकारी को उपलब्ध कराई जाए।

*केंद्रीय शांति समिति एवं स्थानीय शांति समितियों के साथ निरंतर समन्वय स्थापित किया जाए।

* विधि-व्यवस्था, ट्रैफिक एवं अग्निशमन विभाग को अलर्ट मोड पर रखा जाएगा।

* किसी भी प्रकार की अप्रिय स्थिति से बचने हेतु पूर्व में ही संवेदनशील क्षेत्रों की पहचान कर आवश्यक बल तैनात किया जाएगा।

* सभी पक्षों से अपील की गई कि पर्व का उत्सव उत्साहपूर्ण हो, किंतु किसी भी प्रकार की उत्तेजक टिप्पणी, ध्वनि प्रदूषण या नियमों का उल्लंघन न हो।

इस दौरान नव निर्वाचित अध्यक्ष रांची महावीर मंडल सागर वर्मा, श्री जय सिंह यादव, सागर कुमार, उदय रविदास, मयंक गिरी, बब्लु यादव,
नीलेश यादव, शंकर सिन्हा,अजय वर्मा, रिंकू वर्मा, रविंदर वर्मा एवं महावीर मंडल एवं रामनवमी श्रृंगार समिति के सदस्य मौजूद थे।

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रांची जिला प्रशासन द्वारा घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु महत्वपूर्ण कदम

रांची जिले में हाल के दिनों में घरेलू एलपीजी (रसोई गैस) सिलेंडरों की उपलब्धता को लेकर उत्पन्न हुई कुछ असुविधाओं एवं उपभोक्ताओं की शिकायतों पर गंभीर संज्ञान लेते हुए बैठक

उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में बैठक

सभी संबंधित तेल विपणन कंपनियों, गैस एजेंसियों एवं आपूर्ति विभाग को निर्देश जारी किए गए

PNG कनेक्शन इच्छुक ग्राहक टोल-फ्री नंबर 1800-123-121111 पर संपर्क करके कनेक्शन प्रक्रिया शुरू करवा सकते हैं

एलपीजी सिलेंडरों की ब्लैक मार्केटिंग, कालाबाजारी या अवैध भंडारण करने वालों की शिकायत अबुआ साथी हेल्पलाइन नंबर 9430328080पर दे सकते हैं

13.03.2026 – रांची जिले में हाल के दिनों में घरेलू एलपीजी (रसोई गैस) सिलेंडरों की उपलब्धता को लेकर उत्पन्न हुई कुछ असुविधाओं एवं उपभोक्ताओं की शिकायतों पर गंभीर संज्ञान लेते हुए उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने आज देर शाम एक गहन समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की।

इस बैठक में उप विकास आयुक्त रांची, श्री सौरभ भुवनिया, अनुमंडल पदाधिकारी सदर रांची, श्री कुमार रजत, अपर जिला दंडाधिकारी रांची, श्री राजेश्वर नाथ आलोक, विशिष्ट अनुभाजन पदाधिकारी रांची, श्रीमती मोनी कुमारी, जिला आपूर्ति पदाधिकारी रांची, श्री रामगोपाल पाण्डेय एवं इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (IOCL – इंडेन), हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (HPCL – एचपी गैस), भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (BPCL – भारत गैस), GAIL तथा जिला आपूर्ति विभाग के वरिष्ठ पदाधिकारी एवं प्रतिनिधि विशेष रूप से उपस्थित रहे। बैठक का मुख्य उद्देश्य रांची जिले में घरेलू एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति व्यवस्था की विस्तृत समीक्षा करना, उपभोक्ताओं को होने वाली किसी भी प्रकार की परेशानी को तत्काल दूर करना तथा भविष्य में ऐसी स्थिति उत्पन्न न होने देने के लिए ठोस कदम उठाना था।

उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने बैठक को संबोधित करते हुए स्पष्ट निर्देश दिए कि गैस ग्राहकों को कम से कम असुविधा हो। उन्होंने सभी संबंधित तेल विपणन कंपनियों, गैस एजेंसियों एवं आपूर्ति विभाग को निम्नलिखित प्रमुख निर्देश जारी किए:

एलपीजी सिलेंडरों की ब्लैक मार्केटिंग, कालाबाजारी या अवैध भंडारण करने वालों के विरुद्ध सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी। आवश्यक वस्तु अधिनियम के तहत जीरो टॉलरेंस नीति अपनाई जाएगी। ऐसी किसी भी गतिविधि की सूचना मिलने पर तुरंत कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। उपभोक्ता ऐसी जानकारी अबुआ साथी हेल्पलाइन नंबर 9430328080 पर दे सकते हैं।

(आपातकालीन स्थिति में उपभोक्ता 5 किलोग्राम के छोटे सिलेंडर प्राप्त कर सकते हैं, जो बाजार में पर्याप्त मात्रा में HPCL एवं BPCL के पास उपलब्ध हैं। आधार कार्ड दिखाकर इन्हें आसानी से प्राप्त किया जा सकता है।

जिन अपार्टमेंट्स/क्षेत्रों में पाइपलाइन गैस की सुविधा उपलब्ध है, वहां के निवासी टोल-फ्री नंबर 18001231211 पर संपर्क कर कनेक्शन प्राप्त कर सकते हैं। रांची में वर्तमान में 24,000 से अधिक घरों में यह सुविधा उपलब्ध है।

उपभोक्ताओं से अपील की गई है कि वे पैनिक न करें तथा अनावश्यक रूप से अधिक बुकिंग न करें, क्योंकि इससे सॉफ्टवेयर पर अतिरिक्त भार पड़ सकता है। कंपनियां बता रही हैं कि घरेलू गैस की पर्याप्त आपूर्ति है तथा स्थिति सामान्य है।

उपायुक्त ने बैठक में उपस्थित सभी पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि वे जनता के साथ बेहतर संवाद स्थापित करें, हेल्पलाइन सेवाओं को मजबूत बनाएं तथा किसी भी शिकायत पर त्वरित प्रतिक्रिया दें। जिला प्रशासन प्रतिबद्ध है कि रांची जिले में एलपीजी सिलेंडरों की उपलब्धता एवं वितरण व्यवस्था सुचारू रूप से चले तथा आमजन को कम से कम असुविधा हो।

GAIL (India) Limited द्वारा संचालित सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन (CGD) प्रोजेक्ट के तहत रांची में Piped Natural Gas (PNG) की पहुंच तेजी से बढ़ रही है। वर्तमान में शहर के 24,000 से अधिक घरों में PNG पाइपलाइन कनेक्शन स्थापित हो चुका है।
जिन अपार्टमेंट्स/सोसायटीज में पहले से PNG पाइपलाइन नेटवर्क उपलब्ध है, वहाँ रहने वाले निवासी आसानी से अपने फ्लैट/घर के लिए नया PNG कनेक्शन प्राप्त कर सकते हैं। GAIL के पदाधिकारियों ने बैठक में बताया कि इच्छुक ग्राहक टोल-फ्री नंबर 1800-123-121111 पर संपर्क करके कनेक्शन प्रक्रिया शुरू करवा सकते हैं।

झलक इण्डेन, डोरंडा के सभी उपभोक्ताओं रिफिल बुकिंग से संबंधित किसी भी जानकारी के लिए कृपया निम्नलिखित नंबरों पर कॉल/WhatsApp करें
📞 6204801046
📞 6204801051

मैन्युअल बुकिंग के लिए जारी मोबाइल नंबर इस प्रकार हैं—

(1) Sk Gas सर्विस
बारियातु
7033632177
8809313177

(2) वैष्णवी इंडियन गैस एजेंसी धुर्वा
9430329616

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अदालती अभिलेखों के 660.36 करोड़ से अधिक पृष्ठों का डिजिटलीकरण किया जा चुका है

नई दिल्ली – सरकार ने न्यायपालिका द्वारा मामलों के त्वरित निपटान के लिए एक अनुकूल वातावरण प्रदान करने हेतु कई पहलें की हैं। इन पहलों में अन्य बातों के अलावा, ई-कोर्ट मिशन मोड परियोजना के तहत न्याय की सुलभता बढ़ाने और अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने हेतु  नवीनतम प्रौद्योगिकियों का एकीकरण शामिल है। इनमें न्यायपालिका के लिए अवसंरचना संबंधी सुविधाओं के विकास हेतु केन्द्र प्रायोजित योजना के तहत जिला एवं अधीनस्थ न्यायपालिका को उपयुक्त अवसंरचना संबंधी सुविधाएं प्रदान करने हेतु राज्य सरकारों/केन्द्र-  शासित प्रदेशों के संसाधनों की आपूर्ति भी शामिल है।

ई-कोर्ट मिशन मोड परियोजना के तहत डिजिटल न्याय प्रणाली ने न्यायिक प्रक्रियाओं को त्वरित एवं सरल बनाया है और न्याय प्रदान करने वाली प्रणाली में पारदर्शिता एवं सुलभता को भी बेहतर बनाया है। विवरण इस प्रकार हैं:

प्रथम चरण, जिसकी शुरुआत 2011 में 935 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ हुई थी, मुख्य रूप से न्यायपालिका के मूलभूत डिजिटल अवसंरचना की स्थापना पर केन्द्रित था। इसके तहत 14,249 जिला एवं अधीनस्थ न्यायालयों का कम्प्यूटरीकरण, 13,683 न्यायालयों में लोकल एरिया नेटवर्क (एलएएन) की स्थापना और 13,672 न्यायालयों में मामलों के डिजिटल प्रबंधन हेतु सॉफ्टवेयर की सुविधा के साथ-साथ 493 न्यायालयों और 347 जेलों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग की सुविधा उपलब्ध कराई गई।

इस आधारभूत कार्य को आगे बढ़ाते हुए, द्वितीय चरण, जिसे 2015 से 2023 तक1,670 करोड़ रुपये के परिव्यय के साथ कार्यान्वित किया गया, ने बुनियादी कम्प्यूटरीकरण से लेकर नागरिक-केन्द्रित डिजिटल सेवाओं के प्रावधान तक दायरे का विस्तार किया। कम्प्यूटरीकृत न्यायालयों की संख्या बढ़कर 18,735 हो गई, जो प्रथम चरण की तुलना में 31.5 प्रतिशत  की वृद्धि दर्शाती है।

वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधाओं का विस्तार पांच गुना से अधिक हुआ, जिसमें 3,240 न्यायालय (557 प्रतिशत की वृद्धि) और 1,272 जेल (266 प्रतिशत की वृद्धि) शामिल हैं, जो डिजिटल सुनवाई पर बढ़ती निर्भरता को दर्शाता है। डब्ल्यूएएन कनेक्टिविटी 99.5 प्रतिशत न्यायालय परिसरों तक पहुंच गई, जिससे मजबूत नेटवर्क की सुलभता सुनिश्चित हुई। इस चरण में स्वतंत्र एवं ओपन-सोर्स वाली मामलों की सूचना प्रणाली (सीआईएस), मामलों से जुड़े डेटा के पारदर्शी ऑनलाइन भंडार के रूप में नेशनल ज्यूडिशियल डेटा ग्रिड (एनजेडीजी) जैसे प्रमुख प्लेटफार्मों की शुरुआत हुई और नागरिकों तथा वकीलों को प्रत्यक्ष सुविधा सेवाएं प्रदान करने हेतु ई-सेवा केन्द्रों की स्थापना की गई।

सरकार ने उन्नत डिजिटल अवसंरचना के साथ न्यायपालिका के आधुनिकीकरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता प्रदर्शित करते हुए तीसरे चरण (2023-2027) के बजट को बढ़ाकर 7,210 करोड़ रुपये कर दिया है। इस चरण में भारतीय न्यायालयों को डिजिटल और कागज-रहित न्यायालयों में परिवर्तित करने की परिकल्पना की गई है।

इसके तहत पुराने और वर्तमान मामलों के अभिलेखों का डिजिटलीकरण, सभी न्यायालयों, जेलों एवं अस्पतालों में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा का विस्तार और यातायात संबंधी उल्लंघनों से परे ऑनलाइन न्यायालयों का विस्तार किया जाएगा। इसका उद्देश्य ई-सेवा केन्द्रों का सर्वव्यापी विस्तार, डिजिटल न्यायालय के अभिलेखों एवं आवेदनों के भंडारण के लिए अत्याधुनिक क्लाउड-आधारित डेटा भंडार का निर्माण और मामलों के विश्लेषण एवं पूर्वानुमान के लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) तथा ऑप्टिकल कैरेक्टर रिकग्निशन (ओसीआर) जैसी उभरती प्रौद्योगिकियों का उपयोग करना भी है।

वर्तमान में, अदालती अभिलेखों के 660.36 करोड़ से अधिक पृष्ठों का डिजिटलीकरण किया जा चुका है और नागरिक को बेहतर सेवा प्रदान करने हेतु 2,444 ई-सेवा केन्द्र स्थापित किए गए हैं। न्यायालयों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग सुविधाओं के जरिए 3.97 करोड़ से अधिक सुनवाई की हैं। ई-फाइलिंग प्लेटफॉर्म के जरिए लगभग 1.07 करोड़ मामले इलेक्ट्रॉनिक रूप से दर्ज किए गए हैं।

अदालती कार्यवाही की लाइव स्ट्रीमिंग का विस्तार उत्तराखंड, कोलकाता, तेलंगाना और मेघालय सहित चार अतिरिक्त उच्च न्यायालयों तक किया गया है, जिससे इनकी संख्या बढ़कर 11 हो गई है। सभी ई-कोर्ट पोर्टल अब एनआईसी के क्लाउड अवसंरचना पर होस्ट किए गए हैं और जिला न्यायालयों की वेबसाइटों को सेफ, स्केलेबल और सुगम्य वेबसाइट एज ए सर्विस (एस3डब्ल्यूएएएस) प्लेटफॉर्म पर स्थानांतरित कर दिया गया है।

इसके अलावा, मामलों की सूचना प्रणाली (सीआईएस) को संस्करण 4.0 में उन्नत कर दिया  गया है, जिससे मामलों के प्रबंधन में अधिक निष्पक्षता, पारदर्शिता और गति आई है। एआई/एमएल-आधारित दोष पहचान मॉड्यूल, जिसे सर्वोच्च न्यायालय ने आईआईटी मद्रास के सहयोग से विकसित किया है और लीगल रिसर्च एंड एनालिसिस असिस्टेंट (एलईजीआरएए), जिसे एनआईसी के उकृष्टता केन्द्र ने ई-समिति के मार्गदर्शन में विकसित किया है, जैसे उन्नत एआई-आधारित उपकरणों को न्यायिक कार्यप्रवाह में एकीकृत किया जा रहा है। डिजिटल कोर्ट प्लेटफॉर्म न्यायाधीशों को सभी केस-संबंधित दस्तावेजों, दलीलों और साक्ष्यों को डिजिटल रूप से एक्सेस करने में सक्षम बनाता है, जो कागज रहित न्यायालय प्रणाली की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

यह जानकारी विधि एवं न्याय राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और संसदीय कार्य राज्यमंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

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स्वदेश दर्शन परियोजनाएं

नई दिल्ली – केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने आज राज्यसभा में लिखित उत्तर में बताया कि पर्यटन मंत्रालय ने देश में थीम आधारित पर्यटन सर्किट विकसित करने हेतु वर्ष 2014-15 में स्वदेश दर्शन योजना आरंभ की और 5290.33 करोड़ रुपये के परिव्यय से देश में पर्यटन अवसंरचना विकसित करने की 76 पर्यटन परियोजनाओं को मंजूरी दी।
इनमें से 75 परियोजनाओं की संरचना पूरी हो चुकी हैं। स्वदेश दर्शन योजना को सतत और दायित्वपूर्ण पर्यटन स्थलों के विकास के उद्देश्य से स्वदेश दर्शन द्वितीय के रूप में संशोधित किया गया और मंत्रालय ने इसके अंतर्गत 2208.31 करोड़ रुपये की 53 परियोजनाओं को मंजूरी दी है, जो संबंधित राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों द्वारा कार्यान्वयन के विभिन्न चरणों में हैं।
मंत्रालय ने स्वदेश दर्शन के अंतर्गत ‘चुनौती आधारित गंतव्य विकास – सीबीडीडी’ पहल के तहत राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों से प्रस्ताव आमंत्रित किए और संस्कृति एवं विरासत, आध्यात्मिक पर्यटन, जीवंत गांव और पर्यावरण पर्यटन एवं अमृत धरोहर स्थलों जैसी चार श्रेणियों के तहत 697.94 करोड़ रुपये की 38 परियोजनाओं को मंजूरी दी। चुनौती आधारित गंतव्य विकास पहल का प्राथमिक उद्देश्य पर्यटन स्थलों को समग्रता से विकसित करना है ताकि पर्यटन अनुभव बेहतर बनाया जा सके और पर्यटन स्थलों को संवहनीय और दायित्वपूर्ण स्थलों में परिवर्तित किया जा सके।

देश में प्रसिद्ध पर्यटन स्थलों को विकसित करने के उद्देश्य से, पर्यटन मंत्रालय ने राज्यों को पूंजी निवेश हेतु विशेष सहायता योजना के तहत परिचालन दिशानिर्देशों के साथ ही विस्तृत परियोजना रिपोर्ट प्रारूप जारी किए हैं। इसके अनुरूप, वित्तीय वर्ष 2024-25 में योजना के तहत 3295.76 करोड़ रुपए की 40 परियोजनाओं को मंजूरी दी गई।

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नागर विमानन मंत्रालय पश्चिम एशिया में हवाई यात्रा की स्थिति की निरंतर निगरानी कर रहा है; भारतीय विमानन कंपनियों ने रियाद के लिए उड़ानें फिर से शुरू कीं

नई दिल्ली – नागर विमानन मंत्रालय पश्चिम एशिया क्षेत्र में उभरती स्थिति और भारत तथा इस क्षेत्र के देशों के बीच हवाई यात्रा पर इसके प्रभाव की निरंतर निगरानी कर रहा है। विमानन कंपनियां यात्री सुरक्षा और उड़ान परिचालनों के व्यवस्थित संचालन को सुनिश्चित करने के लिए वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए आवश्यक परिचालन बदलाव कर रही हैं।

इस संदर्भ में, भारतीय विमानन कंपनियों द्वारा रियाद से आने-जाने वाली उड़ानों का परिचालन 12 मार्च 2026 से पुनः प्रारंभ कर दिया गया है। बहाली के पहले दिन, एयर इंडिया और इंडिगो द्वारा मुंबई के लिए तीन उड़ानों का संचालन किया जा रहा है तथा एयर इंडिया एक्सप्रेस द्वारा कालीकट के लिए एक उड़ान संचालित की जा रही है। इसके साथ ही भारत और रियाद के बीच महत्वपूर्ण हवाई संपर्क फिर से बहाल हो गया है।

28 फरवरी से 11 मार्च 2026 की अवधि के दौरान, खाड़ी देशों से कुल 1,50,457 हवाई यात्रियों ने भारत की यात्रा की।

इसके अतिरिक्त, भारतीय विमानन कंपनियों ने 12 मार्च 2026 को पश्चिम एशिया के विभिन्न शहरों—जैसे कि अबू धाबी, दुबई, फुजैरा, जेद्दा, मस्कट, रास अल खैमाह, रियाद और शारजाह—से भारत आने वाली कुल 57 उड़ानों का समय निर्धारित किया है, जो परिचालन व्यवहार्यता और वर्तमान परिस्थितियों पर निर्भर करेगा।

मंत्रालय यात्रियों की सुचारू आवाजाही की सुविधा के लिए एयरलाइंस और अन्य संबंधित हितधारकों के साथ निकट समन्वय बनाए हुए है। हवाई किरायों की भी निरंतर निगरानी की जा रही है ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि टिकट की कीमतें उचित रहें और इस अवधि के दौरान किराए में कोई अनुचित वृद्धि न हो।

यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे उड़ान समय-सारणी और यात्रा व्यवस्था के संबंध में नवीनतम जानकारी के लिए अपनी संबंधित एयरलाइन के संपर्क में रहें।

मंत्रालय स्थिति की समीक्षा करना जारी रखेगा और आवश्यकतानुसार आगे की जानकारी/अपडेट प्रदान करेगा।

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“आदि संस्कृति” डिजिटल अधिगम मंच

नई दिल्ली – केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके ने लोकसभा को सूचित किया कि जनजातीय कला रूपों और विरासत के लिए एक डिजिटल प्लेटफॉर्म “आदि संस्कृति” का बीटा संस्करण 10 सितंबर 2025 को शुरू किया गया था। ‘आदि संस्कृति’ का नाम बदलकर ‘ट्राइबएक्स’ कर दिया गया है और इसमें निम्नलिखित घटक शामिल हैं:
  • डिजिटल ई-लर्निंग अकादमी – जनजातीय चित्रकला, संगीत, वस्त्र, कलाकृतियाँ और कौशल निर्माण आदि पर संरचित ऑनलाइन शिक्षण मॉड्यूल के रूप में डिजिटल पाठ्यक्रम डिज़ाइन किए गए हैं।
  • सामाजिक-सांस्कृतिक भंडार (रिपॉजिटरी) – एक डिजिटल संग्रह जिसमें कला, संगीत, वस्त्र और कलाकृतियों जैसे विषयों पर जनजातीय विरासत से संबंधित 5,000 से अधिक संकलित दस्तावेज होंगे।
  • ऑनलाइन मार्केटप्लेस – ट्राइबल कोऑपरेटिव मार्केटिंग डेवलपमेंट फेडरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (ट्राइफेड) से जुड़ा हुआ एक ई-कॉमर्स इंटरफेस है, ताकि जनजातीय कारीगर अपने उत्पादों को सीधे उपभोक्ताओं को प्रदर्शित कर सकें और बेच सकें।

 

झारखंड के जनजातीय समुदायों के संदर्भ में, सोहराई और डोकरा कला पर डिजिटल पाठ्यक्रम विकसित किए गए हैं, जिनमें क्षेत्र के जनजातीय कलाकारों के वीडियो आधारित निर्देशात्मक मॉड्यूल शामिल हैं। इसमें इन दोनों कला रूपों से संबंधित अन्य दस्तावेज भी संग्रह में शामिल किए जाएंगे।

इस मंच (प्लेटफॉर्म) को जनजातीय कार्य मंत्रालय द्वारा राज्य जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (टीआरआई) के साथ साझेदारी में विकसित किया गया है ताकि सामग्री, विकास और सामग्री संकलन के सटीक और प्रामाणिक दस्तावेजीकरण को सुनिश्चित किया जा सके। झारखंड के संदर्भ में, जनजातीय अनुसंधान संस्थान – झारखंड ने राज्य की कला शैलियों के प्रलेखन और विकास में योगदान दिया है।

सरकार का दीर्घकालिक दृष्टिकोण इस मंच (प्लेटफॉर्म) को एक पूर्ण विकसित डिजिटल विश्वविद्यालय के रूप में विकसित करने का है, जो प्रत्येक पाठ्यक्रम के लिए प्रमाण-पत्र प्रदान करेगा। आवश्यकता पड़ने पर, राज्य जनजातीय अनुसंधान संस्थानों (टीआरआई) और अन्य संस्थानों के सहयोग से इस मंच का चरणबद्ध तरीके से विस्तार किया जाएगा, जिसमें अतिरिक्त पाठ्यक्रम और संग्रह शामिल होंगे।

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पीएम राहत- सड़क दुर्घटना पीड़ितों का कैशलेस इलाज

नई दिल्ली – मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 162 के अंतर्गत कानूनी प्रावधान के अनुसार प्रधानमंत्री – सड़क दुर्घटना पीड़ितों के अस्पताल में भर्ती एवं सुनिश्चित उपचार (PM-RAHAT) योजना” को दिनांक 05.05.2025 की अधिसूचना S.O. 2015(E) के माध्यम से अधिसूचित किया गया है। इसके अतिरिक्त, योजना के कार्यान्वयन के लिए प्रक्रिया प्रवाह, संबंधित हितधारकों की भूमिकाएं और जिम्मेदारियां तथा मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) से संबंधित विस्तृत दिशानिर्देश दिनांक 04.06.2025 की अधिसूचना S.O. 2489(E) के माध्यम से जारी किए गए हैं।

इस योजना का शुभारंभ प्रधानमंत्री द्वारा 13.02.2026 को किया गया और इसे दिनांक 19.02.2026 की अधिसूचना S.O. 952(E) के माध्यम से प्रधानमंत्री – सड़क दुर्घटना पीड़ितों के अस्पताल में भर्ती एवं सुनिश्चित उपचार (PM-RAHAT) योजना नाम दिया गया। योजना की मुख्य विशेषताएँ निम्नलिखित हैं—

(i) किसी भी श्रेणी की सड़क पर होने वाली दुर्घटना में शामिल प्रत्येक पीड़ित को दुर्घटना की तिथि से अधिकतम 7 दिनों तक, प्रति पीड़ित ₹1.5 लाख तक के उपचार का प्रावधान किया जाएगा। यह उपचार सुविधा मोटर वाहन के उपयोग से होने वाली सड़क दुर्घटनाओं के सभी पीड़ितों के लिए उपलब्ध होगी।

(ii) प्रत्येक सड़क दुर्घटना पीड़ित को निर्धारित अस्पतालों में गैर-जीवन-घातक मामलों में 24 घंटे तक तथा जीवन-घातक मामलों में 48 घंटे तक स्थिरीकरण उपचार प्रदान किया जाएगा, जो पुलिस की प्रतिक्रिया पर निर्भर होगा।

(iii) यह वैधानिक योजना किसी भी अन्य केंद्रीय या राज्य स्तर की योजनाओं पर प्राथमिकता रखेगी।

(iv) इस योजना को दो मौजूदा प्लेटफॉर्म—पुलिस अधिकारियों द्वारा दुर्घटना रिपोर्टिंग के लिए उपयोग किए जाने वाले eDAR (इलेक्ट्रॉनिक विस्तृत दुर्घटना रिपोर्ट) और अस्पतालों द्वारा उपचार, दावा प्रस्तुत करने तथा भुगतान प्रक्रिया के लिए उपयोग किए जाने वाले नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (NHA) के TMS 2.0 (लेनदेन प्रबंधन प्रणाली)—के एकीकरण के माध्यम से सफलतापूर्वक लागू किया गया है।

अस्पतालों को प्रतिपूर्ति मोटर वाहन दुर्घटना निधि (MVAF) के माध्यम से की जा रही है। यह निधि उन मामलों में सामान्य बीमा कंपनियों के योगदान से संचालित होती है, जहाँ दोषी मोटर वाहन बीमित होता है, तथा बिना बीमा वाले और हिट-एंड-रन मामलों में बजटीय सहायता के माध्यम से वित्तपोषित होती है।

112 आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (ERSS) के साथ एकीकरण के माध्यम से पीड़ित या कोई भी गुड समैरिटन (RAH-VEER) निकटतम निर्धारित अस्पताल की जानकारी प्राप्त कर सकता है, एम्बुलेंस का अनुरोध कर सकता है या स्थिति की आवश्यकता के अनुसार दोनों सेवाएँ प्राप्त कर सकता है। जैसे ही पीड़ित को अस्पताल में भर्ती किया जाता है, NHA द्वारा विकसित हेल्थ बेनिफिट पैकेज के आधार पर उपचार प्रक्रिया शुरू करनी होती है।

उपचार शुरू करते समय समानांतर रूप से TMS प्लेटफॉर्म पर पुलिस द्वारा पीड़ित की प्रमाणीकरण प्रक्रिया भी शुरू की जाती है। अस्पताल TMS पर उपचार आईडी तैयार कर उन्हें eDAR के माध्यम से जिला पुलिस को भेजता है। eDAR पर पुलिस की प्रतिक्रिया के लिए समय सीमा सामान्य मामलों में 24 घंटे तथा जीवन-घातक मामलों में 48 घंटे तक होगी, जैसा कि अस्पताल प्रशासक द्वारा निर्धारित किया जाएगा।

इस योजना के अंतर्गत दुर्घटना की रिपोर्टिंग से लेकर पीड़ित के अस्पताल में भर्ती होने, उपचार, पुलिस प्रमाणीकरण, दावा प्रक्रिया और अंतिम भुगतान तक पूरी प्रक्रिया का एक डिजिटल रिकॉर्ड तैयार होता है, जो 112 ERSS प्लेटफॉर्म से शुरू होकर पूरी प्रणाली में उपलब्ध रहता है।

उपचार सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए नेशनल हेल्थ अथॉरिटी (NHA) ने राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों द्वारा अतिरिक्त अस्पतालों को नामित और शामिल करने के संबंध में विस्तृत दिशानिर्देश दिनांक 20.05.2025 के कार्यालय ज्ञापन S-12018/81/2024 के माध्यम से जारी किए हैं। योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार, दिनांक 04.06.2025 की अधिसूचना S.O. 2489(E) के तहत इस योजना में नामित अस्पताल—जिसमें आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (AB PM-JAY) के अंतर्गत पैनल में शामिल वे अस्पताल भी शामिल हैं जो NHA द्वारा जारी दिशानिर्देशों का पालन करते हैं—योजना के लिए नामित अस्पताल माने जाएंगे।

09.03.2026 तक आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत NHA के साथ सूचीबद्ध अस्पतालों की संख्या 36,112 है।

पारदर्शिता सुनिश्चित करने और दुरुपयोग को रोकने के लिए योजना को TMS 2.0 और eDAR प्लेटफॉर्म के एकीकृत एंड-टू-एंड डिजिटल वर्कफ्लो के माध्यम से संचालित किया जाता है, जिससे प्रत्येक मामले में दुर्घटना के विवरण और उपचार रिकॉर्ड के बीच इलेक्ट्रॉनिक लिंक स्थापित होता है। साथ ही, योजना के अंतर्गत नकद रहित उपचार प्रदान करने वाले अस्पतालों को समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए यह प्रावधान किया गया है कि राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (SHA) द्वारा दावा स्वीकृत किए जाने की तिथि से 10 दिनों के भीतर जिला कलेक्टर या जनरल इंश्योरेंस (GI) काउंसिल द्वारा, जैसा भी लागू हो, भुगतान किया जाएगा।

योजना में जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर एक संरचित शिकायत निवारण और निगरानी तंत्र का भी प्रावधान किया गया है, ताकि प्रभावी क्रियान्वयन और समय पर समस्याओं का समाधान सुनिश्चित किया जा सके। योजना के दिशा-निर्देशों के अनुसार जिला स्तर पर समग्र निगरानी और समन्वय के लिए जिला सड़क सुरक्षा समितियां (DRSCs) जिम्मेदार हैं। योजना से संबंधित शिकायतों के निवारण के लिए DRSC द्वारा जिला स्तर पर एक समर्पित शिकायत निवारण अधिकारी (GRO) या संपर्क बिंदु नियुक्त किया जाना आवश्यक है।

यदि किसी शिकायत का समाधान जिला स्तर पर संतोषजनक ढंग से नहीं होता है, तो मामले को पहले जिला कलेक्टर के पास और उसके बाद राज्य सड़क सुरक्षा परिषद (SRSC) के पास भेजा जा सकता है, जो संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश में योजना के कार्यान्वयन के लिए नोडल एजेंसी के रूप में कार्य करती है। राष्ट्रीय स्तर पर एक अंतर-मंत्रालयी संचालन समिति योजना के समग्र क्रियान्वयन और निगरानी की देखरेख करती है तथा इसके कार्यान्वयन के दौरान उत्पन्न होने वाले मुद्दों की समीक्षा करती है।

यह योजना मोटर वाहन अधिनियम, 1988 की धारा 162 के वैधानिक प्रावधानों के अनुरूप तैयार की गई है, जिसका मुख्य उद्देश्य सड़क दुर्घटना पीड़ितों को, विशेष रूप से गोल्डन ऑवर के दौरान, समय पर और निर्बाध चिकित्सा सहायता सुनिश्चित करना है।

यह जानकारी केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री श्री नितिन जयराम गडकरी ने राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

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आपकी सुरक्षा, हमारी जिम्मेदारी है – हेमन्त सोरेन मुख्यमंत्री, झारखण्ड

जोहार!

झारखण्डवासियों की सुरक्षा को और मजबूत करने के उद्देश्य से अबुआ सरकार ने राज्य के सभी थानों के लिए 1255 चार पहिया वाहन एवं 1697 दो पहिया वाहन स्वीकृत किए हैं। पहले चरण में 636 चार पहिया और 849 दो पहिया वाहन खरीदे जा चुके हैं, जिन्हें 13 मार्च 2026 को विभिन्न थानों को सौंपा जा रहा है ।

साथ ही 12 जिलों में अत्याधुनिक सुविधाओं से युक्त 12 संयुक्त थाने (एक ही परिसर में महिला थाना, साइबर थाना, AHTU थाना, एवं SC/ST थाना) के निर्माण की भी शुरुआत की जा रही है। यह पीडि़त-केन्द्रित पुलिसिंग व्यवस्था के लिए अबुआ सरकार की पहल है।

आपकी सुरक्षा, हमारी जिम्मेदारी है।

हेमन्त सोरेन
मुख्यमंत्री, झारखण्ड

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सरकार, सामाजिक संगठन और तकनीकी क्षेत्र के शीर्ष लोग श्रवण बाधित व्यक्तियों के लिए भारत का पहला एकीकृत जीवन-चक्र सहायता मॉडल बनाने के लिए एकजुट हुए

नई दिल्ली – भारत में समावेशी विकास और सुलभता को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय के अधीन दिव्यांग व्यक्तियों के सशक्तिकरण विभाग (डीईपीडब्लूडी) ने श्रवणबाधित व्यक्तियों के सशक्तिकरण और अवसरों को गति देने के लिए “कोएलिशन ऑफ द विलिंग” के साथ एक ऐतिहासिक साझेदारी की है। 12 मार्च 2026 को नई दिल्ली में सचिव श्रीमती वी. विद्यावती, अपर सचिव सुश्री मनमीत कौर नंदा, डीईपीडब्लूडी के निदेशक प्रदीप ए. और आईएसएलआरटीसी के निदेशक श्री कुमार राजू की उपस्थिति में हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन (एमओयू) एक सहयोगात्मक राष्ट्रीय ढांचे की शुरुआत का प्रतीक है जो बधिर और कम सुनने वाले लोगों के लिए व्यापक और स्थायी सहायता प्रणाली के निर्माण हेतु सरकारी संस्थानों, सामाजिक संगठनों और प्रौद्योगिकी नवप्रवर्तकों को एक साथ लाता है। इस साझेदारी का उद्देश्य सशक्तिकरण के एकीकृत जीवन-चक्र मॉडल का नेतृत्व करना है जो श्रवणबाधित व्यक्तियों को प्रारंभिक हस्तक्षेप और शिक्षा से लेकर कौशल विकास, रोजगार और सामाजिक समावेशन तक हर स्तर पर सहायता प्रदान करता है। संस्थागत विशेषज्ञता, तकनीकी नवाचार और सामुदायिक संपर्क को समन्वित करके, यह पहल एक ऐसा प्रणालीगत परिवर्तन लाने का प्रयास करती है जो देश भर में श्रवण बाधित व्यक्तियों के लिए पहुंच में सुधार करे, अवसरों का विस्तार करे और उनकी गरिमा और स्वतंत्रता को मजबूत करे।

इच्छुक संगठनों का गठबंधन प्रौद्योगिकी, शिक्षा, सुलभता और सामाजिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में विविध विशेषज्ञता रखने वाले संगठनों का एक समूह है। इसमें यूनिकी (गोपालकृष्णन फाउंडेशन फॉर द डेफ), ब्ली टेक इनोवेशन्स प्राइवेट लिमिटेड, ट्रेनिंग एंड एजुकेशनल सेंटर फॉर हियरिंग इम्पेयर्ड (टीच), विनविनया फाउंडेशन, बडी4स्टडी इंडिया फाउंडेशन, वीक्रॉप टेक्नोलॉजीज प्राइवेट लिमिटेड और इंडियन साइन लैंग्वेज रिसर्च एंड ट्रेनिंग सेंटर (आईएसएलआरटीसी) शामिल हैं। डीईपीडब्ल्यूडी के साथ मिलकर, यह गठबंधन सशक्तिकरण के विभिन्न आयामों हेतु अभिनव हस्तक्षेपों को डिजाइन और कार्यान्वित करने के लिए काम करेगा।

यह सहयोग जागरूकता पैदा करने, सुलभता और सहायक प्रौद्योगिकियों का विस्तार करने, प्रारंभिक पहचान और शैक्षिक सहायता को मजबूत करने, कौशल विकास और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देने, छात्रवृत्ति प्रदान करने, भारतीय सांकेतिक भाषा सीखने और डिजिटल सामग्री विकसित करने और स्थायी आजीविका के अवसर उपलब्ध कराने जैसे प्रमुख प्राथमिकता वाले क्षेत्रों पर केंद्रित होगा। नीतिगत समर्थन को तकनीकी समाधानों और समुदाय-प्रेरित पहलों के साथ जोड़कर, इस साझेदारी का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि श्रवण बाधित व्यक्ति सामाजिक और आर्थिक जीवन में पूर्ण और आत्मविश्वास से भाग ले सकें। अधिकारियों ने बताया कि यह पहल सार्वजनिक-निजी-नागरिक समाज सहयोग का एक प्रगतिशील उदाहरण है, जहां प्रत्येक भागीदार समावेश की जटिल चुनौतियों का समाधान करने के लिए विशेष ज्ञान और संसाधनों का योगदान देता है। डिजिटल नवाचार, प्रशिक्षण प्रणालियों और सामुदायिक नेटवर्क का लाभ उठाकर, इस साझेदारी से ऐसे व्यापक मॉडल तैयार होने की उम्मीद है जिनसे शहरी और ग्रामीण भारत में श्रवण बाधित व्यक्तियों को लाभ मिल सके।

इस रणनीतिक सहयोग के माध्यम से, दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग एक समावेशी भारत के निर्माण की अपनी प्रतिबद्धता को आगे बढ़ा रहा है, जहाँ प्रत्येक दिव्यांगजन को सुलभता, अवसर और सहभागिता प्राप्त हो। यह पहल एक व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाती है, जिसके तहत प्रौद्योगिकी, शिक्षा और साझेदारी मिलकर दि

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संस्कृति मंत्रालय ‘वरिष्ठ कलाकारों के लिए वित्तीय सहायता योजना’ नाम की एक योजना चलाता है

वरिष्ठ कलाकारों को पेंशन

संस्कृति मंत्रालय ‘वरिष्ठ कलाकारों के लिए वित्तीय सहायता योजना’ नाम की एक योजना चलाता है, जिसके तहत चुने हुए अनुभवी कलाकारों को वित्तीय मदद दी जाती है। इस योजना के तहत उन कलाकारों को रखा गया है जिन्हें किसी भी तरह की पेंशन नहीं है। पिछले तीन सालों में इस योजना के तहत वित्तीय मदद पाने वाले वरिष्ठ कलाकारों की संख्या और दी गई रकम नीचे दी गई है:

वित्तीय वर्ष कितने वरिष्ठ कलाकारों को वित्तीय सहायता दी गई दी गई रकम (करोड़ में)
2022-23 3651 18.59
2023-24 3811 28.96
2024-25 4636 26.09

 

योजना के तहत वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए पात्रता मानदंड निम्नलिखित हैं:

  • आवेदक कलाकार ने अपनी सक्रिय आयु के दौरान कला, साहित्य आदि के अपने विशिष्ट क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दिया हो या अभी भी योगदान दे रहे हों;
  • आवेदक कलाकार की आयु 60 वर्ष या उससे अधिक होनी चाहिए;
  • आवेदक की वार्षिक आय 72,000/- रुपये से अधिक नहीं होनी चाहिए;
  • आवेदक कलाकार संबंधित राज्य सरकार/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन से कम से कम 500/- रुपये प्रति माह की कलाकार पेंशन प्राप्त कर रहा हो, अथवा आवेदक की कलात्मक साख संस्कृति मंत्रालय के संबंधित क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र  द्वारा सत्यापित और अनुशंसित होनी चाहिए।
  • आवेदक कलाकार संस्कृति मंत्रालय की किसी अन्य योजना के तहत वित्तीय सहायता प्राप्त नहीं कर रहा होना चाहिए।

इस योजना के तहत चयनित अनुभवी कलाकारों को जीवन भर के लिए 6,000/- रुपये प्रति माह तक की वित्तीय सहायता राशि प्रदान की जा रही है।

उक्त योजना के तहत चयनित कलाकारों को वित्तीय सहायता का वितरण कुछ अनिवार्य दस्तावेजों को जमा करने पर निर्भर करता है, जिनमें वर्ष में एक बार डिजिटल जीवन प्रमाण पत्र, हर पांच साल में वार्षिक आय प्रमाण पत्र और संबंधित राज्य या केंद्र शासित प्रदेश से प्राप्त होने वाली कलाकार पेंशन (यदि कोई हो) के दस्तावेज शामिल हैं। कभी-कभी कलाकारों द्वारा इन दस्तावेजों को जमा न करने के कारण सहायता राशि के भुगतान में देरी हो जाती है, परंतु एक बार सभी आवश्यक दस्तावेज प्राप्त हो जाने पर जो कि वर्ष भर चलने वाली एक निरंतर प्रक्रिया है—वित्तीय सहायता को शीघ्रता से वितरित करने के हर संभव प्रयास किए जाते हैं।

इस योजना के तहत चयनित लाभार्थियों को होने वाली कठिनाइयों को कम करने के लिए, हाल के वर्षों में मंत्रालय द्वारा निम्नलिखित कदम उठाए गए हैं:

  • जून, 2022 से इस योजना के तहत दी जाने वाली वित्तीय सहायता की राशि को 4,000/- रुपये प्रति माह से बढ़ाकर 6,000/- रुपये प्रति माह कर दिया गया है;
  • अगस्त, 2023 से वार्षिक आय की सीमा को 48,000/- रुपये प्रति वर्ष से संशोधित कर 72,000/- रुपये प्रति वर्ष कर दिया गया है।
  • अब हर साल आय प्रमाण पत्र जमा करने की आवश्यकता को समाप्त कर दिया गया है और इसके बजाय अब इसे पांच साल में एक बार जमा करना आवश्यक है;
  • पहले, इस योजना के तहत आवेदन करने वाले कलाकार के लिए संबंधित राज्य सरकार/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन से कम से कम 500/- रुपये प्रति माह की कलाकार पेंशन प्राप्त करना अनिवार्य था। अब इस शर्त में ढील दी गई है और यह प्रावधान किया गया है कि यदि आवेदक को राज्य सरकार/केंद्र शासित प्रदेश से पेंशन नहीं मिल रही है, तो उसकी कलात्मक साख का सत्यापन और सिफारिश संस्कृति मंत्रालय के संबंधित क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्र द्वारा की जा सकती है।

यह जानकारी केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

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राष्ट्रीय कैडेट कोर के दो दिवसीय एडीजी/डीडीजी सम्मेलन का नई दिल्ली में शुभारंभ हुआ

नई दिल्ली – राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के अपर महानिदेशकों (एडीजी) और उप महानिदेशकों (डीडीजी) का दो दिवसीय सम्मेलन 12 मार्च 2026 को नई दिल्ली स्थित मानेकशॉ सेंटर में प्रारंभ हुआ। सम्मेलन के उद्घाटन दिवस पर रक्षा सचिव राजेश कुमार सिंह ने प्रतिभागियों को संबोधित किया।

अपने संबोधन में रक्षा सचिव ने 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य के अनुरूप राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) को रूपांतरित करने के महत्व पर बल दिया। उन्होंने देशभर में संचालित विभिन्न सामाजिक कार्यक्रमों और जनहितकारी पहलों में एनसीसी के महत्वपूर्ण योगदान की भी सराहना की।

रक्षा सचिव ने सभी राष्ट्रीय कैडेट कोर निदेशालयों के एडीजी और डीडीजी के साथ बातचीत के दौरान केंद्र सरकार की नीतियों एवं कार्यक्रमों के अनुरूप समन्वित प्रयासों का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ऐसे प्रयास राष्ट्रीय कैडेट कोर के लक्ष्यों और उद्देश्यों की प्राप्ति को अधिक प्रभावी व सुदृढ़ बनाने में सहायक सिद्ध होंगे।

राष्ट्रीय कैडेट कोर (एनसीसी) के महानिदेशक वीरेंद्र वत्स ने एनसीसी के विस्तार तथा बुनियादी ढांचे और रसद सहायता को सुदृढ़ बनाने के लिए पिछले वर्ष शुरू की गई विभिन्न गतिविधियों का उल्लेख किया। सम्मेलन में प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार, बुनियादी ढांचे के विकास तथा ड्रोन और साइबर प्रशिक्षण जैसे उभरते क्षेत्रों से जुड़े प्रमुख मुद्दों पर भी व्यापक चर्चा की गई।

यह सम्मेलन एनसीसी के वरिष्ठ नेतृत्व के लिए प्रमुख नीतिगत मुद्दों पर विचार-विमर्श करने, सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों को साझा करने व आने वाले वर्षों में संगठन एवं उसके प्रशिक्षण ढांचे को पहले से अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से एक प्रभावी रोडमैप तैयार करने का महत्वपूर्ण मंच प्रदान करता है।

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डाक विभाग पार्सल और ई-कॉमर्स क्षेत्र में कई पहल कर रहा है

नई दिल्ली – संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्र शेखर ने  लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि डाक विभाग ने पार्सल एवं ई-कॉमर्स क्षेत्र में कई पहलें की हैं। इसका उद्देश्य एक प्रमुख सार्वजनिक लॉजिस्टिक्स संगठन के रूप में विकसित होना और देशभर में सेवाओं को सुदृढ़ करना है। इनमें पार्सल प्रसंस्करण एवं वितरण प्रणाली का आधुनिकीकरण शामिल है। इसका उद्देश्य देश भर में मानकीकृत प्रणालियों के माध्यम से गति, विश्वसनीयता और ग्राहक अनुभव को बेहतर बनाना है।

मैकेनाइज्ड (मशीनों से काम करना) और डेडिकेटेड पार्सल डिलीवरी (ऐसी डिलीवरी सेवा का चयन करना जो आपके मुनाफे और ग्राहकों की संतुष्टि पर सकारात्मक प्रभाव डाले,) के लिए नोडल डिलीवरी सेंटर्स के माध्यम से अंतिम गंतव्य तक डिलीवरी को मजबूत किया गया है। एडवांस्ड पोस्टल टेक्नोलॉजी 2.0 प्रोजेक्ट के तहत, रियल-टाइम डिलीवरी अपडेट, वन-टाइम पासवर्ड (ओटीपी) आधारित डिलीवरी और ई-कॉमर्स पार्टनर्स के साथ एप्लीकेशन प्रोग्रामिंग इंटरफेस इंटीग्रेशन शुरू किया गया है। मेल एंड पार्सल ऑप्टिमाइजेशन प्रोजेक्ट ने मानकीकृत कार्य व्यवहार और रियल-टाइम ट्रैकिंग के माध्यम से एंड-टू-एंड प्रोसेस ऑप्टिमाइजेशन(किसी भी प्रणाली, प्रक्रिया, या डिज़ाइन को इस तरह से बेहतर या संवैधानिक बनाना कि वह सीमित सामग्री के साथ सर्वोत्तम परिणाम दे सके) को सक्षम बनाया है।

विभाग ने प्रमुख ई-कॉमर्स और लॉजिस्टिक्स कंपनियों के साथ साझेदारी की है और सूक्ष्म, मध्यम और लघु उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) सहित कई सरकारी मंत्रालयों को पार्सल डिलीवरी सेवाएं प्रदान कर रहा है। एमएसएमई, कारीगरों, स्वयं सहायता समूहों और छोटे व्यवसायों, विशेष रूप से ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में निर्यात को बढ़ावा देने के लिए डाक निर्यात केंद्र (डीएनके) स्थापित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, विभाग ने अमेज़न, शिपरोकेट, डेकाथलॉन, ओएनडीसी आदि जैसे प्रमुख ई-कॉमर्स कंपनियों के साथ रणनीतिक साझेदारी की है।

पार्सल और ई-कॉमर्स क्षेत्र में वाणिज्य विभाग द्वारा किए गए सुधारों के परिणामस्वरूप, पिछले तीन वर्षों [2023-24 से 2025-26 (फरवरी)] में पार्सल राजस्व 755.47 करोड़ रुपये से बढ़कर 802.11 करोड़ रुपये हो गया है।

एमपीओपी के तहत, कार्यप्रवाहों को पुनर्व्यवस्थित करने और दक्षता में सुधार लाने के लिए व्यावसायिक प्रक्रिया पुनर्रचना (बीपीआर) पूरी हो चुकी है। देश भर में पार्सल हब नेटवर्क, वितरण केंद्रों और सड़क परिवहन नेटवर्क के युक्तिकरण को अंतिम रूप दे दिया गया है। यह बढ़ते पार्सल और ई-कॉमर्स उद्योग के अनुरूप है। वास्तविक समय ट्रैकिंग और डिजिटल एकीकरण के लिए एपीटी 2.0 द्वारा इसे समर्थन प्राप्त है। ये पहलें बेंगलुरु सहित पूरे भारत में लागू हैं।

डाक के माध्यम से प्रतिबंधित वस्तुओं के परिवहन को रोकने और सुरक्षा बढ़ाने के लिए कई उपाय किए गए हैं। इनमें दिशानिर्देश जारी करना, कर्मचारियों के लिए प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना और डाकघरों में प्रतिबंधित वस्तुओं की सूची प्रदर्शित करना शामिल है। विभाग ने केवाईसी सम्बंधी निर्देश जारी किए हैं और अंतरराष्ट्रीय वस्तुओं के लिए स्व-सत्यापित पहचान प्रमाण अनिवार्य कर दिया है। घरेलू पार्सल खेपों के लिए ग्राहक घोषणा पत्र और अंतरराष्ट्रीय पार्सल खेपों के लिए सीमा शुल्क घोषणा पत्र और केवाईसी अनिवार्य कर दिए गए हैं। ट्रैकिंग सेवाओं को सक्षम करने के लिए अब सभी पार्सलों को जवाबदेही योग्य वस्तुओं के रूप में वर्गीकृत किया गया है।

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आदि-वाणी, जनजातीय भाषाओं के लिए एआई-संचालित मंच

नई दिल्ली – केंद्रीय जनजातीय कार्य राज्य मंत्री श्री दुर्गादास उइके ने लोकसभा को सूचित किया कि आदि-वाणी एक एआई-संचालित अनुवाद मंच है जो जनजातीय भाषाओं के दस्तावेजीकरण (प्रलेखन) और डिजिटलीकरण के लिए भी एक मंच है। वर्तमान में, ऐप और वेब पोर्टल निम्न भाषाओं को समर्थन (सपोर्ट) करता है:
  • छत्तीसगढ़ की गोंडी
  • झारखंड की मुंडारी
  • मध्य प्रदेश की भीली
  • ओडिशा की संताली

 

दो भाषाएँ, अर्थात् ओडिशा की कुई और मेघालय की गारो, विकास के चरण में हैं। परियोजना, के दूसरे चरण में, निम्नलिखित सात भाषाएं आदि वाणी में शामिल करने के लिए प्रस्तावित हैं:

  • कटकरी – महाराष्ट्र
  • कोया – आंध्र प्रदेश
  • कोकबोरोक – त्रिपुरा
  • बेट्टा कुरुबा – कर्नाटक
  • थोडू कुकी और तांगखुल – मणिपुर
  • चौदरी – गुजरात

सरकार इस बात से अवगत है कि विभिन्न कारणों, जैसे आधुनिकीकरण, सामाजिक-आर्थिक परिवर्तन आदि के कारण इन जनजातीय समुदायों की भाषाई एवं सांस्कृतिक परंपराएँ परिवर्तन के दौर से गुजर रही हैं।

इन भाषाओं को आदि वाणी परियोजना के आगामी चरण में शामिल करने पर विचार किया जा सकता है, जिसका उद्देश्य दस्तावेज़ीकरण (प्रलेखन), संरक्षण और डिजिटल पहुँच के लिए देश भर में और अधिक जनजातीय भाषाओं तक उत्तरोत्तर कवरेज का विस्तार करना है। प्रस्तावित समुदायों की भाषाओं के लिए दस्तावेज़ीकरण (प्रलेखन) और डिजिटलीकरण गतिविधियाँ संबंधित राज्य जनजातीय अनुसंधान संस्थान (टीआरआई) के साथ समन्वय में चरणबद्ध तरीके से की जाएंगी और इसकी विशिष्ट समयावधि स्थानीय हितधारकों के साथ सहयोग और क्षेत्र दस्तावेज़ीकरण (प्रलेखन) के प्रयोजन पर निर्भर करेगी।

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संरक्षित स्मारकों का संरक्षण

नई दिल्ली – देश भर में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) की देखरेख और रखरखाव में 3,686 केंद्रीय संरक्षित स्मारक/स्थल हैं। इन स्मारकों/स्थलों के संरक्षण और देखभाल का कार्य एक सतत प्रक्रिया है और इसे आवश्यकता और संसाधनों की उपलब्धता के अनुसार ‘राष्ट्रीय संरक्षण नीति’ के तहत किया जाता है।
एएसआई के अधिकारियों द्वारा समय-समय पर इन सभी स्मारकों/स्थलों का नियमित निरीक्षण किया जाता है ताकि उनकी स्थिति की समीक्षा की जा सके और उसी के अनुसार संरक्षण, मरम्मत और रखरखाव के कार्य किए जा सकें। सभी स्मारक/स्थल वर्तमान में संरक्षण की अच्छी स्थिति में हैं।
भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण द्वारा राष्ट्रीय महत्व के संरक्षित स्मारकों के लिए ‘अडॉप्ट ए हेरिटेज 2.0’ कार्यक्रम शुरू किया गया है, ताकि निजी/सार्वजनिक क्षेत्रों और गैर-सरकारी संगठनों के सहयोग से स्मारकों पर बेहतर सुविधाएं विकसित कर पर्यटकों के अनुभव को सुखद बनाया जा सके।
इस कार्यक्रम के तहत हितधारकों की भूमिका केवल गैर-संरक्षण कार्यों तक सीमित है, जैसे कि एएसआई के मार्गदर्शन में परिसर की सफाई, पेयजल, शौचालय, बेंच, प्रकाश व्यवस्था और ‘प्रकाश एवं ध्वनि शो’ जैसी बुनियादी सुविधाएं प्रदान करना, जिसके अंतर्गत अब तक कुल 30 समझौता ज्ञापनों  पर हस्ताक्षर किए जा चुके हैं।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण स्मारकों/स्थलों की आवश्यकता और संसाधनों की उपलब्धता के अनुसार केंद्रीय रूप से संरक्षित स्मारकों/स्थलों के संरक्षण और मरम्मत का कार्य करता है। एएसआई के अधिकार क्षेत्र में ऐसा कोई भी स्मारक नहीं है जो जर्जर या खराब स्थिति में हो।

यह जानकारी केंद्रीय संस्कृति और पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी

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इंडेन के उपभोक्ता गैस रिफिलिंग के लिए कर सकेंगे मैन्युअल बुकिंग

मैन्युअल बुकिंग के लिए फोन नंबर जारी

IOCL (इंडेन) के सर्वर अपग्रेडेशन की प्रक्रिया जारी

सर्वर अपग्रेडेशन के बाद सामान्य रूप से हो सकेगी बुकिंग

रांची,12.03.2026 – इंडेन गैस उपभोक्ताओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए IOCL (इंडेन गैस) द्वारा गैस रिफिलिंग के लिए मैन्युअल बुकिंग की व्यवस्था की गई है। कंपनी के सर्वर में अपग्रेडेशन की प्रक्रिया जारी रहने के कारण फिलहाल उपभोक्ताओं को बुकिंग में आ रही असुविधा को देखते हुए यह वैकल्पिक व्यवस्था की गई है।

IOCL (इंडेन गैस) के पदाधिकारी द्वारा बताया गया कि कंपनी के सर्वर में भारी संख्या में बुकिंग आने के कारण तकनीकी अपग्रेडेशन की आवश्यकता पड़ी है। सर्वर अपग्रेडेशन का कार्य जारी है और इसके पूरा होते ही उपभोक्ता सामान्य रूप से गैस सिलेंडर की ऑनलाइन/सामान्य बुकिंग कर सकेंगे।

उन्होंने बताया कि रांची में इंडेन गैस के लगभग डेढ़ लाख उपभोक्ता हैं। कंपनी द्वारा गैस की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है और प्रतिदिन पूर्व की भांति लगभग 10,500 गैस सिलेंडरों की डिलीवरी उपभोक्ताओं के बीच की जा रही है।

IOCL (इंडेन गैस) के पदाधिकारी ने उपभोक्ताओं से पैनिक बुकिंग नहीं करने की अपील करते हुए कहा कि गैस की पर्याप्त उपलब्धता है और सभी उपभोक्ताओं तक नियमित रूप से आपूर्ति सुनिश्चित की जा रही है।

इस बीच उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए रांची के विभिन्न इंडेन गैस वितरकों द्वारा मैन्युअल बुकिंग के लिए मोबाइल नंबर जारी किए गए हैं, जिन पर संपर्क कर उपभोक्ता अपने गैस सिलेंडर की बुकिंग करा सकते हैं।

रांची में IOCL (इंडेन गैस) उपभोक्ताओं के लिए मैन्युअल बुकिंग हेतु मोबाइल नंबर जारी किए गए हैं। उपभोक्ता सुबह 10:00 से शाम 5:00 बजे तक इन फोन नंबर पर कॉल कर बुकिंग कर सकते हैं।

मैन्युअल बुकिंग के लिए जारी मोबाइल नंबर इस प्रकार हैं—

1. Aditi Indane – 7762920033, 7352711020

2. Shantanu Indane – 9431357871, 9304355563

3. Devi Gas – 9835442494, 9693503031

4. Anand Gas – 9603045000, 9279081713

5. Alpha Indane – 9835156074, 8789572926

6. Ranchi Gas – 9708788000, 9264249483

7. Oraon Gas Distributor – 8210675171, 8210974502

8. Jhalak Indane – 8986643888, 9835906302

9. Bariatu Indane – 8294727527, 7808782500

10. Indraprastha Gas – 9835149400, 9955361339

11. Tatisilway Indane – 9835910816, 7903209760

12. Ormanjhi Indane – 9308080951, 9709269265

13. City Indane – 9430376633, 8434013040

14. FFCCS – 9334721626, 8448674159

15. Madhuri Indane – 9470193803, 9507035277

16. Jayant Gas – 9431115028

17. Pratap Indane – 6205562676, 9006643039

18. GK Indane – 9334917448, 6201206442

19. Arav Indane – 6514667727

20. Sumati Gas – 7903625376

21. Jharkhand State Food and Civil Supply – 6512251098

IOCL (इंडेन गैस) द्वारा बताया गया कि सर्वर अपग्रेडेशन का कार्य पूरा होते ही गैस बुकिंग की प्रक्रिया पुनः सामान्य रूप से शुरू कर दी जाएगी। इस दौरान उपभोक्ताओं से सहयोग और धैर्य बनाए रखने का अनुरोध किया गया है।

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LPG सिलेंडरों की उपलब्धता एवं आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा

देर शाम उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित

गैस कंपनियों का उभोक्ताओं से पैनिक बुकिंग नहीं करने का आग्रह

सामान्य दिनों की तरह IOCL (इंडेन गैस) द्वारा प्रतिदिन 10500, HPCL एवं BPCL द्वारा प्रतिदिन करीब 2000 गैस सिलेंडर की डिलिवरी

भारी संख्या में बुकिंग के कारण IOCL (इंडेन गैस) के सर्वर की अपग्रेडेशन की आवश्यकता

सर्वर अपग्रेडेशन का कार्य जारी, जल्द हो सकेगी सामान्य रुप से बुकिंग

आपातकालीन स्थिति में HPCL और BPCL के 5 लीटर के सिलेंडर प्राप्त कर सकते हैं उपभोक्ता

आपातकालीन स्थिति में आधार कार्ड ले जाकर 5 लीटर गैस सिलेंडर प्राप्त कर सकते हैं उपभोक्ता

गैस सिलेंडर के कालाबाजारी और अवैध भंडारण को लेकर जिला प्रशासन सख्त, होगी कड़ी कार्रवाई

लोग गैस सिलेंडर की कालाबाजारी और अवैध भंडारण की जानकारी अबुआ साथी पर दें

रांची,12.03.2026 – रांची जिले में LPG सिलेंडरों की उपलब्धता एवं आपूर्ति की स्थिति की समीक्षा को लेकर आज देर शाम उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक में जिले में एलपीजी सिलेंडरों की संभावित कमी, आपूर्ति श्रृंखला की स्थिति तथा आम उपभोक्ताओं को समय पर गैस उपलब्ध कराने की समीक्षा की गई।

उभोक्ताओं से पैनिक बुकिंग नहीं करने का आग्रह

बैठक में एक बार फिर से गैस कंपनियों के प्रतिनिधियों द्वारा उपभोक्ताओं से पैनिक बुकिंग नहीं करने आग्रह किया गया है, IOCL (इंडेन गैस) के पदाधिकारी द्वारा बताया गया कि भारी संख्या में बुकिंग के कारण सर्वर में अपग्रेडेशन की आवश्यकता है और यह प्रक्रिया जारी है। सर्वर के अपग्रेडेशन की प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही लोग सामान्य रूप से बुकिंग कर पाएंगे।

गैस की पर्याप्त आपूर्ति

रांची में घरेलू गैस की आपूर्ति की समीक्षा के दौरान IOCL (इंडेन गैस) के पदाधिकारी द्वारा बताया गया कि गैस की पर्याप्त आपूर्ति है। कंपनी के लगभग डेढ़ लाख उपभोक्ताओं के बीच पिछले दिनों की तरह ही प्रतिदिन करीब 10500 गैस सिलेंडर की डिलीवरी की जा रही है। कंपनी का कहना है कि ज्यादा संख्या में बुकिंग होने के कारण आपूर्ति प्रभावित हुई है जो जल्दी सामान्य हो जाएगी। HPCL और BPCL के करीब 25-25 हजार उपभोक्ताओं के बीच रोजाना 2000 से ज्यादा गैस सिलेंडर की डिलीवरी की जा रही है।

आपातकालीन स्थिति में उपभोक्ता 5 लीटर के सिलेंडर प्राप्त कर सकते हैं। प्रतिनिधियों ने बताया कि HPCL और BPCL के 5 लीटर के सिलेंडर बाजार में पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध, आधार कार्ड लेकर उपभोक्ता गैस प्राप्त कर सकते हैं।

PNG पाइपलाइन कनेक्शन की भी सुविधा

रांची में 24000 से ज्यादा घरों में PNG की पाइपलाइन कनेक्शन है, बैठक GAIL के पदाधिकारी द्वारा बताया गया कि जिन अपार्टमेंट में पीएनजी पाइपलाइन कनेक्शन है, वहां फ्लैट में रह रहे लोग टोल फ्री नंबर पर संपर्क कर कनेक्शन करवा सकते हैं। पीएनजी पाइपलाइन कनेक्शन के लिए टोल फ्री नंबर 18001231211 पर कॉल किया जा सकता है।

गैस की कालाबाजारी की जानकारी मिले तो प्रशासन को बताएं

बैठक में उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री ने एक बार फिर से गैस की कालाबाजारी के खिलाफ सख्त चेतावनी दी है, उन्होंने कहा कि अगर लोगों को किसी प्रकार से घरेलू गैस की कालाबाजारी या भंडारण की जानकारी मिलती है तो अबुआ साथी (9430328080) पर इसकी जानकारी दें। कालाबाजारी या अवैध भंडारण करनेवालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जायेगी।

उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने संबंधित अधिकारियों एवं तेल कंपनियों के प्रतिनिधियों को निर्देश दिया कि एलपीजी सिलेंडरों की आपूर्ति में किसी प्रकार की बाधा उत्पन्न न हो तथा उपभोक्ताओं को निर्धारित समय पर गैस उपलब्ध कराना सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि वितरण प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ बनाने तथा संभावित कमी की स्थिति से निपटने के लिए समन्वय के साथ कार्य किया जाए।

बैठक में उप विकास आयुक्त, अपर जिला दंडाधिकारी (विधि-व्यवस्था), अनुमंडल पदाधिकारी रांची सदर, विशिष्ट अनुभाजन पदाधिकारी, जिला आपूर्ति पदाधिकारी सहित इंडियन ऑयल कॉर्पाेरेशन लिमिटेड (IOCL) एवं गैस अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (GAIL) के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

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रांची समाहरणालय में लोगों को मिलेगी आधुनिक लिफ्ट सुविधा

उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने की शुरुआत

ब्लॉक-A में 02 एवं ब्लॉक-B में 03 आधुनिक लिफ्ट

नई तकनीक से लैस लिफ्ट, बिजली बाधित होने पर भी ‘सेल्फ रेस्क्यू’ प्रणाली से निकटतम फ्लोर तक पहुंच सकेंगे लोग

समाहरणालय में तीन और लिफ्ट का निर्माण कार्य शीघ्र होगा पूरा

रांची,12.03.2026 – समाहरणालय रांची में अब लोगों को आधुनिक लिफ्ट सुविधा मिलेगी। उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री ने आज नवनिर्मित लिफ्ट की शुरुआत की। उन्होंने ब्लॉक-A में स्थापित 02 तथा ब्लॉक-B में स्थापित 03 (कुल 05) लिफ्ट की शुरुआत कर आम नागरिकों एवं पदाधिकारियों/कर्मियों के उपयोग के लिए समर्पित किया।

इसके अलावा अब समाहरणालय में नया सभागार भी तैयार है। उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी श्री मंजूनाथ भजंत्री द्वारा नवीनीकरण के बाद समाहरणालय सभागार का भी निरीक्षण किया गया। सभागार के नवीनीकरण से अब यहां आयोजित होने वाली बैठकों एवं प्रशासनिक कार्यक्रमों के संचालन में और अधिक सुविधा एवं बेहतर व्यवस्था सुनिश्चित हो सकेगी।

लिफ्ट की शुरुआत के अवसर पर उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी श्री मंजूनाथ भजंत्री ने कहा कि समाहरणालय में प्रतिदिन बड़ी संख्या में आम नागरिक विभिन्न कार्यों के लिए आते हैं। ऐसे में आधुनिक लिफ्ट सुविधा शुरू होने से लोगों को विभिन्न तलों पर स्थित कार्यालयों तक पहुंचने में काफी सुविधा होगी। विशेष रूप से वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगजनों, महिलाओं तथा दूर-दराज से आने वाले लोगों को इससे काफी राहत मिलेगी।

समाहरणालय में स्थापित ये सभी लिफ्ट आधुनिक तकनीक से लैस हैं। इनमें सेल्फ रेस्क्यू (Self Rescue) तकनीक की व्यवस्था की गई है। यदि किसी कारणवश अचानक बिजली आपूर्ति बाधित हो जाती है तो यह प्रणाली स्वतः सक्रिय होकर लिफ्ट को निकटतम फ्लोर तक ले जाएगी, जिससे लिफ्ट के अंदर मौजूद लोग सुरक्षित रूप से बाहर निकल सकेंगे।

उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी श्री मंजूनाथ भजंत्री द्वारा संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि लिफ्टों के नियमित रख-रखाव, सुरक्षा मानकों और सुचारू संचालन पर विशेष ध्यान दिया जाए ताकि आम लोगों को बेहतर सुविधा मिल सके।

आपको बताएं कि समाहरणालय परिसर में तीन और लिफ्ट का निर्माण कार्य प्रगति पर है, जिसे जल्द ही पूरा कर लिया जाएगा। इसके बाद समाहरणालय में आने वाले लोगों को और भी बेहतर एवं सुगम सुविधाएं उपलब्ध होंगी।

इस अवसर पर समाहरणालय के विभिन्न विभागों के पदाधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित थे।

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जनगणना-2027 को लेकर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरूआत

उपायुक्त-सह-प्रधान जनगणना पदाधिकारी, श्री मंजूनाथ भजंत्री तथा जिला के वरीय पदाधिकारियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर की गई शुरुआत

जनगणना की प्रक्रिया, मोबाइल एप के उपयोग और स्व-गणना प्रणाली की दी गई विस्तृत जानकारी

रांची,12.03.2026 – रांची जिले में भारत की जनगणना 2027 के प्रथम चरण मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना के लिए जिला व चार्ज अधिकारियों तथा तकनीकी सहायकों के तीन दिवसीय प्रशिक्षण रांची समाहरणालय, ब्लॉक-बी कक्ष संख्या – 505 में दिनांक 12.03.2026 से 14.03.2026 तक कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। कार्यक्रम का प्रारंभ उपायुक्त-सह-प्रधान जनगणना पदाधिकारी, श्री मंजूनाथ भजंत्री द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर की गई, इस अवसर पर उन्होंने कहा कि जनगणना किसी भी देश के विकास के लिए योजनाओं एवं नीतियों के निर्माण करने के लिए अति महत्वपूर्ण है।

जनगणना के आंकड़ों के आधार पर ही भविष्य की योजनाएं एवं नीतियों का निर्धारण किया जाता है। उन्होंने कहा कि लगभग डेढ़ दशक के बाद यह जनगणना कार्यक्रम आयोजित की जा रही है अतः सभी पदाधिकारी एवं कर्मी इसे पूरी गंभीरता एवं जिम्मेदारी के साथ सम्पन्न करें। इस अवसर पर प्रशिक्षण के प्रतिभागी अधिकारियों, जिनमें प्रखंड विकास पदाधिकारी-सह-चार्ज पदाधिकारी, सहायक चार्ज पदाधिकारी समेत अन्य पदाधिकारी और तकनीकी सहायक को कहा कि प्रशिक्षण के दौरान बताई जा रही सभी बातों को ध्यानपूर्वक समझें एवं प्रशिक्षण को सफल बनाएं। प्रशिक्षण कार्यक्रम में जनगणना से जुड़े विभिन्न पहलुओं, प्रश्नों के उपयोग, डेटा संकलन की प्रक्रिया तथा क्षेत्र में कार्य करने की सही तौर तरीकों की विस्तृत जानकारी दी जा रही है।

जनगणना कार्य निदेशालय, रांची से आए हुए प्रशिक्षक श्री केशव नायक आर., उप निदेशक तथा श्री संजीव कुमार मांझी, सांख्यिकी अन्वेषक द्वारा सभी प्रतिभागियों को व्यावहारिक उदाहरणों एवं पोर्टल एवं मोबाइल ऐप के माध्यम से मकानसूचीकरण एवं भवनों की गणना से संबंधित विभिन्न प्रक्रियाओं को समझाया जा रहा है। त्रिदिवसीय इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिले के सभी संबंधित जिला एवं चार्ज अधिकारी तथा तकनीकी सहायक भाग ले रहे हैं। प्रशिक्षण के उपरांत सभी चार्ज अधिकारी अपने-अपने चार्ज अंतर्गत जनगणना 2027 प्रथम चरण के तहत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना कार्य संपन्न करेंगे। प्रशिक्षण में बताया गया कि इस बार की जनगणना पूर्ण रूप से डिजिटल माध्यम से सम्पन्न की जाएगी। मोबाइल ऐप के माध्यम से प्रगणक हर घर व हर ब्लॉक का डेटा संकलन किया जायेगा। डिजिटल जनगणना से सूचनाओं का संधारण, तेजी, सटीकता एवं सम्यक तरीके से किया जा सकेगा।

प्रशिक्षण कार्यक्रम में श्री रामनारायण सिंह, अपर समाहर्ता, रांची, श्री सुदर्शन मुर्मू, अपर समाहर्ता (नक्सल), श्री कुमार रजत, अनुमंडल पदाधिकारी, सदर रांची, श्री क्रिस्टोफर बेसरा, अनुमंडल पदाधिकारी, बुंडू, श्री संजय भगत, परियोजना निदेशक आईटीडीए, श्री शशांक बेहरा, जिला सांख्यिकी पदाधिकारी, श्रीमती मनीषा तिर्की, कार्यपालक दंडाधिकारी, श्री रविंद्रेंद्र मिश्र, सहायक निदेशक-सह-मास्टर ट्रेनर एवं संबंधित सभी सांख्यिकी कर्मी, सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी, रांची सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने सीएसडब्ल्यू-70 के दौरान अन्‍य देशों के समकक्ष मंत्रियों और संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय बैठकें की

नई दिल्ली – न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में महिला स्थिति आयोग (सीएसडब्ल्यू-70) के 70वें सत्र के दौरान, महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने 10 मार्च 2026 को लैंगिक समानता और महिला सशक्तिकरण में सहयोग पर अन्‍य देशों के समकक्ष मंत्रियों और संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ नेतृत्व के साथ द्विपक्षीय बैठक की।

फ्रांस के साथ द्विपक्षीय बैठक

फ्रांस सरकार में महिला एवं पुरुष समानता एवं लैंगिक भेदभाव समाप्‍त करने से संबंधित   प्रधानमंत्री की प्रतिनिधि मंत्री सुश्री ऑरोर बर्गे के साथ श्रीमती सावित्री ठाकुर ने द्विपक्षीय बैठक की। बातचीत में समावेशी एवं दायित्‍वपूर्ण कृत्रिम बुद्धिमत्ता के क्षेत्र में सहयोग सुदृढ बनाने पर जोर दिया गया। दोनों पक्षों ने उभरती प्रौद्योगिकी के युग में लैंगिक समानता बढ़ाने पर सहयोग और ज्ञान साझाकरण के उपायों पर चर्चा की। महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री ने भारत सरकार की महिला सशक्तिकरण से जुड़ी प्रमुख पहल और कार्यक्रमों का उल्‍लेख किया। फ्रांस की मंत्री ने अपने देश के घरेलू हिंसा कानून को मजबूत बनाए जाने और उनके कार्यान्वयन की चर्चा की। दोनों पक्षों ने आगे सहयोग और बढाने पर सहमति जताई।

संयुक्त राष्ट्र महिला नेतृत्व के साथ बातचीत

श्रीमती सावित्री ठाकुर ने सीएसडब्ल्यू-70 के दौरान आयोजित एक कार्यक्रम में संयुक्त राष्ट्र के वरिष्ठ महिला नेतृत्व से भी बातचीत की। कार्यक्रम में संयुक्त राष्ट्र महिला आयोग की कार्यकारी निदेशक सुश्री सीमा बहौस, आयोग की क्षेत्रीय निदेशक सुश्री क्रिस्टीन अरब, भारत बहु-देशीय कार्यालय में उप प्रतिनिधि (कार्यक्रम एवं संचालन) सुश्री कांता सिंह और नीति, कार्यक्रम एवं अंतर-सरकारी प्रभाग की उप निदेशक सुश्री शोको इशिकावा ने भाग लिया।  श्रीमती सावित्री ठाकुर ने अपने संबोधन में महिला सशक्तिकरण और लैंगिक समानता की दिशा में भारत के निरंतर प्रयासों का उल्‍लेख करते हुए लैंगिक संवेदनशील नीतियों एवं कार्यक्रमों में तेजी लाने के लिए भारत और संयुक्त राष्ट्र के देशों के बीच सहयोग मजबूत करने पर जोर दिया।

महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री ने भारत की जी20 अध्यक्षता के दौरान, संयुक्त राष्ट्र महिला आयोग की महिला हित से जुडे (डब्ल्यू20) मुद्दे प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ाने में भारत के साथ उसकी साझेदारी का उल्‍लेख किया। संयुक्त राष्ट्र महिला आयोग लैंगिक समानता  और महिला सशक्तिकरण को बढ़ावा देने की पहल पर महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और नीति आयोग के साथ मिलकर काम कर रहा है।

श्रीमती सावित्री ठाकुर ने भारत में संयुक्त राष्ट्र महिला प्रतिनिधि के रूप में सुश्री शोको इशिकावा की आगामी भूमिका का भी स्वागत किया। उन्‍होंने विश्वास व्यक्त किया कि लैंगिक समानता तथा महिला सशक्तिकरण के साझा लक्ष्यों को आगे बढ़ाने में भारत और संयुक्त राष्ट्र महिला आयोग के बीच साझेदारी और सुदृढ होगी।

कनाडा के साथ द्विपक्षीय बैठक

महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री ने कनाडा सरकार की महिला एवं लैंगिक समानता और लघु व्यवसाय एवं पर्यटन संबंधी विदेश मंत्री सुश्री रेची वाल्डेज़ के साथ भी द्विपक्षीय बैठक की।

बातचीत में भारत-कनाडा संबंधों की नई भविष्‍य योजना की चर्चा की गई, जिसे अक्टूबर 2025 में दोनों देशों के विदेश मंत्रियों ने आरंभ किया था। दोनों महिला मंत्रियों ने स्‍वीकार किया कि इसके आरंभ होने के बाद से भारत-कनाडा संबंध मजबूत हुए हैं और कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग को गति मिली है।

श्रीमती सावित्री ठाकुर ने कहा कि द्विपक्षीय संबंधों में प्रगति के साथ भारत और कनाडा विश्वसनीय साझेदार के रूप में उभर रहे हैं। उन्‍होंने कहा कि विशेष रूप से प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा, स्वास्थ्य और संज्ञानात्मक विकास के क्षेत्रों में बढती साझेदारी दोनों देशों के लोगों की दीर्घकालिक समृद्धि और कल्याण में सहायक होगी।

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केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने इथियोपिया की महिला सांसदों के प्रतिनिधिमंडल से बातचीत की

उन्होंने भारत की विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त शासन संबंधी कुछ बेहतरीन कार्यप्रणालियों को साझा किया

नई दिल्ली – यहां इथियोपिया की 32 महिला सांसदों के एक समूह के साथ बातचीत करते हुए, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने नई दिल्ली में राष्ट्रीय सुशासन केंद्र (एनसीजीजी) में इथियोपिया के एक संसदीय प्रतिनिधिमंडल के साथ हुई बातचीत के दौरान शासन में भारत की कुछ विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा किया और सहकारी संघवाद, डिजिटल प्रशासन और महिला नेतृत्व वाले विकास पर आधारित भारत के शासन मॉडल पर चर्चा की।

केंद्रीय मंत्री, प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग के अंतर्गत एनसीजीजी द्वारा आयोजित “21वीं सदी की महिला पेशेवरों के लिए नेतृत्व” विषय पर एक सप्ताह के विशेष क्षमता निर्माण कार्यक्रम के प्रतिभागियों से बातचीत कर रही थीं। इस कार्यक्रम का उद्देश्य इथियोपिया की महिला नेताओं और वरिष्ठ अधिकारियों के नेतृत्व एवं शासन कौशल को सुदृढ़ करना है।

इथियोपियाई प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व जन प्रतिनिधि सभा की उपाध्यक्ष सुश्री लोमी बेडो कुम्बी ने किया। उनके साथ राज्य मंत्री सुश्री मेसेरेट हैले मसरेशा, स्थायी समिति के सदस्य श्री वर्कसेमु मामो मेकोनेन, संसद सदस्य और इथियोपियाई महिला संघ, प्रॉस्पेरिटी पार्टी महिला विंग और क्षेत्रीय महिला एवं सामाजिक मामलों के ब्यूरो के वरिष्ठ प्रतिनिधि भी शामिल थे। कुल मिलाकर, इथियोपिया के 32 वरिष्ठ गणमान्य व्यक्ति इस कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं।

भारत और इथियोपिया के बीच लंबे समय से चली आ रही साझेदारी का जिक्र करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि दोनों देश मजबूत लोकतांत्रिक परंपराओं को साझा करते हैं और संसदीय आदान-प्रदान, क्षमता निर्माण, व्यापार, सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी, कृषि और लोगों के बीच संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग का विस्तार कर रहे हैं।

उन्होंने याद दिलाया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने दिसंबर 2025 में इथियोपियाई संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित किया था, जो अफ्रीका के विकास साझेदारी के प्रति भारत की गहरी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री को इथियोपिया के सर्वोच्च नागरिक सम्मान, “ग्रेट ऑनर निशान ऑफ इथियोपिया” से भी सम्मानित किया गया, जो दोनों देशों के बीच आपसी सम्मान और सौहार्द का प्रतीक है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत की शासन प्रणाली की व्याख्या की, जो 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों की संघीय संरचना के माध्यम से संचालित होती है, जहां संघ सूची, राज्य सूची और समवर्ती सूची के अनुसार जिम्मेदारियों का वितरण किया गया है। उन्होंने कहा कि यह प्रणाली केंद्र और राज्यों के बीच समन्वय सुनिश्चित करती है और सहकारी संघवाद के सिद्धांत द्वारा निर्देशित है।

उन्होंने आकांक्षी जिला कार्यक्रम के बारे में भी जानकारी साझा की, जो स्वास्थ्य, पोषण, शिक्षा, जल उपलब्धता और बुनियादी ढांचे जैसे मापने योग्य संकेतकों का उपयोग करके चयनित जिलों में विकास को गति देने के लिए डिज़ाइन की गई एक डेटा-आधारित पहल है। इस पहल ने उत्साहजनक परिणाम दिए हैं और अब आकांक्षी ब्लॉक कार्यक्रम के माध्यम से इसका और विस्तार किया जा रहा है।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि प्रौद्योगिकी आधारित शासन व्यवस्था ने भारत में पारदर्शिता और कार्यकुशलता में उल्लेखनीय सुधार किया है, और अधिकांश प्रशासनिक प्रक्रियाएं, शिकायत निवारण प्रणालियां और सेवा वितरण मंच ऑनलाइन संचालित हो रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि कई देश अब भारत के डिजिटल शासन मॉडल का अध्ययन कर रहे हैं, जिनमें सार्वजनिक शिकायत पोर्टल और डिजिटल निगरानी डैशबोर्ड शामिल हैं।

भारत में महिला सशक्तिकरण की दिशा में हुई प्रगति पर प्रकाश डालते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने संसद में महिलाओं के लिए एक तिहाई आरक्षण प्रदान करने वाले कानून का उल्लेख किया और इसे निर्णय लेने में महिलाओं के अधिक प्रतिनिधित्व की दिशा में एक बड़ा कदम बताया। उन्होंने यह भी कहा कि विज्ञान, उद्यमिता और शासन सहित विभिन्न क्षेत्रों में महिलाएं तेजी से नेतृत्व की भूमिका निभा रही हैं।

उन्होंने भारत के तेजी से बढ़ते स्टार्ट-अप इकोसिस्टम के बारे में बात की, जो अब दो लाख से अधिक स्टार्ट-अप के साथ दुनिया के सबसे बड़े स्टार्ट-अप में से एक है, जिनमें से एक महत्वपूर्ण अनुपात महिला उद्यमियों द्वारा संचालित है।

इस संवाद के दौरान, केंद्रीय मंत्री ने भारत के शासन सुधारों के उदाहरण भी साझा किए, जिनमें प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी), स्वयं सहायता समूह आंदोलन, एआई-आधारित शासन पहल, भू-स्थानिक नीति सुधार और पीएम गति शक्ति प्लेटफॉर्म के माध्यम से बुनियादी ढांचे की निगरानी शामिल हैं, इन सभी ने त्वरित निर्णय लेने और विभागों के बीच बेहतर समन्वय में योगदान दिया है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने आयुष ढांचे के अंतर्गत भारत की पारंपरिक स्वास्थ्य प्रणालियों के बारे में भी बात की, जो आयुर्वेद, योग और अन्य पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों को आधुनिक स्वास्थ्य देखभाल के साथ एकीकृत करती हैं। उन्होंने बताया कि संयुक्त राष्ट्र में भारत की पहल के बाद हर साल 21 जून को विश्व स्तर पर मनाया जाने वाला अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस, समग्र स्वास्थ्य पद्धतियों के बारे में विश्व भर में जागरूकता फैलाने में सहायक रहा है।

भारत को दुनिया के सबसे विविध समाजों में से एक बताते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भाषाई, सांस्कृतिक और क्षेत्रीय मतभेदों के बावजूद, पहचान की एक साझा भावना और लोकतांत्रिक मूल्य देश को एक साथ बांधे रखते हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय सुशासन केंद्र लोक प्रशासन में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण मंच के रूप में उभरा है। इस संस्थान ने अब तक 50 से अधिक देशों के 6,000 से अधिक सिविल सेवकों को प्रशिक्षित किया है, जिससे शासन और प्रशासनिक सुधारों में वैश्विक ज्ञान आदान-प्रदान में योगदान मिला है।

उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि ऐसे कार्यक्रम भारत-इथियोपिया साझेदारी को और मजबूत करेंगे तथा शासन, लोक प्रशासन और नेतृत्व विकास में दोनों देशों के बीच गहन सहयोग को प्रोत्साहित करेंगे।

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केंद्रीय वस्त्र मंत्री द्वारा भारत टेक्स 2026 का शुभारंभ

नई दिल्ली – केंद्रीय वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह ने आज भारत के प्रमुख वैश्विक वस्त्र सम्‍मेलन, भारत टेक्स 2026 के आयोजन की पहल आरंभ की, जो वैश्विक वस्त्र अर्थव्यवस्था में देश के बढ़ते नेतृत्व का संकेत है। श्री गिरिराज सिंह ने वस्‍त्र उद्योग, सरकार और व्यापार संगठनों के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत टेक्स को एक ऐसे वृहद वैश्विक मंच के रूप में परिकल्पित किया गया है, जिसमें फाइबर और यार्न से लेकर कपड़े, परिधान, तकनीकी वस्त्र और सतत नवाचार तक संपूर्ण वस्त्र मूल्य श्रृंखला शामिल होगी।
उन्होंने इसे अब तक का सबसे बड़ा और सबसे व्यापक वस्त्र आयोजन बताते हुए, वस्त्र-निर्यात संवर्धन परिषदों (ईपीसी) और अन्य उद्योग निकायों की प्रतिबद्धता की सराहना की, जिन्होंने भारत टेक्स के दायरे में वस्त्रों की संपूर्ण मूल्य श्रृंखला लाने के लिए समर्पित भाव से अ‍थक प्रयास किए। वस्‍त्र मंत्री ने कहा कि भारत टेक्स वस्त्रों के लिए विश्वसनीय, सतत स्रोत केंद्र और बड़े पैमाने पर निवेश स्‍थल के रूप में आकर्षक गंतव्‍य बनाएगा। उन्होंने कहा कि यह आयोजन नवाचार, सहयोग और मेक इन इंडिया की भावना मूल में रखते हुए प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के वस्‍त्र क्षेत्र  के 5एफ विजन फार्म (खेत) से फाइबर (रेशा), फाइबर से फैक्‍ट्री (कारखाना), फैक्‍ट्री से फैशन, और फैशन से फॉरेन (विदेश) शामिल हैं, जिसका लक्ष्‍य कृषि, रोजगार और निर्यात को बढाना है) का साकार रूप है।

आयोजन में वस्त्र सचिव श्रीमती नीलम शमी राव, अपर सचिव श्री रोहित कंसल, निर्यात संवर्धन परिषदों के वरिष्ठ प्रतिनिधि और उद्योग जगत के नेता उपस्थित रहे।

भारत टेक्स 2026

पिछले दो आयोजनों की उल्लेखनीय सफलता पर आधारित भारत टेक्स 2026 अब तक का सबसे बड़ा और सबसे प्रभावशाली संस्करण होगा। इसे 14 से 17 जुलाई 2026 को भारत मंडपम, नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा। इस बार के आयोजन में 3,500 से अधिक व्यावसायिक प्रदर्शकों, 140 से अधिक देशों के 7,000 से अधिक अंतरराष्ट्रीय खरीदारों और 1,30,000 से अधिक व्यापारिक आगंतुकों की व्यापक भागीदारी की संभावना है। यह आयोजन फाइबर और यार्न, कपड़े, परिधान और फैशन, घरेलू वस्त्र, तकनीकी वस्त्र, हस्तशिल्प, हथकरघा और आधुनिक विनिर्माण प्रौद्योगिकियों सहित संपूर्ण वस्त्र पारिस्थितिकी तंत्र को प्रदर्शित करेगा। यह आयोजन विनिर्माण, डिजाइन, प्रौद्योगिकी और व्यापार में भारत की एकीकृत शक्ति को दर्शाता है।

भारत टेक्स 2026, वर्ष 2024 और 2025 के पिछले सफल आयोजनों पर आधारित है और प्रदर्शनियों, ज्ञान सत्रों, खरीदार-विक्रेता बैठकों और नीतिगत संवादों का एक अनूठा संगम होगा, जिसका उद्देश्य चर्चाओं को व्यावहारिक परिणामों में बदलना है। विशेष फोकस क्षेत्रों में संवहनीय और चक्रीय वस्त्र, तकनीकी वस्त्र, सूक्ष्‍म, लघु और मध्‍यम उद्यम एकीकरण, नवाचार और वैश्विक बाजार पहुंच शामिल हैं।

यह आयोजन सूक्ष्‍म, लघु एवं मध्यम उद्यमों, प्रदर्शकों, स्टार्टअप्स, शिक्षाविदों और डिजाइनरों को अपने नवीनतम वस्त्र नवाचारों प्रदर्शित करने, वैश्विक निर्माताओं और खरीदारों से जुड़ने, उच्च स्तरीय चर्चाओं में शामिल होने और रणनीतिक साझेदारी स्थापित करने का मंच प्रदान करेगा। यह आयोजन केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा निवेश आकर्षित करने, व्यापार को बढ़ावा देने और भारत के विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र और पारंपरिक हथकरघा क्षेत्रों को दीर्घकालिक रूप से सुदृढ़ करने की गई प्रमुख नीतिगत पहलों और सुधारों को भी प्रदर्शित करेगा।

एक वैश्विक वस्त्र संवाद

भारत टेक्स 2026 का एक प्रमुख आकर्षण ग्लोबल टेक्सटाइल डायलॉग होगा, जिसमें नीति निर्माताओं, वैश्विक उद्योग जगत के नेताओं और नवप्रवर्तकों को एक साथ लाने वाले ज्ञान सत्रों की एक श्रृंखला आयोजित होगी, जिससे वैश्विक व्यापार गतिशीलता, स्थिरता और ईएसजी मानक, इंडस्ट्री 5.0, तकनीकी वस्त्र और स्थिति अनुकूल आपूर्ति श्रृंखला जैसे उभरते रुझानों पर विचार-विमर्श होगा। इससे उद्योग हितधारकों और एमएसएमई को लाभकारी अंतर्दृष्टि प्राप्‍त होगी।

उद्योग नेतृत्व की पहल

यह आयोजन उद्योग जगत की पहल है और इसका आयोजन भारत टेक्सटाइल ट्रेड फेडरेशन (बीटीटीएफ) द्वारा किया जाएगा, जो वस्त्र उद्योग से संबंधित 11 निर्यात संवर्धन परिषदों (ईपीसी) और अन्य उद्योग निकायों का एक समूह है। बीटीटीएफ के अध्यक्ष श्री नरेन गोयनका और सह-अध्यक्ष श्री भद्रेश डोडिया ने आयोजन संबंधी गतिविधियों की जानकारी दी।

भारत टेक्स 2026 एक्सपो के बारे में अधिक जानकारी www.bharat-tex.com पर उपलब्ध है।

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दिल्ली के कॉलेजों में विकसित भारत युवा कनेक्ट कार्यक्रम जारी है; इसमें युवाओं की भागीदारी बढ़ी है

नई दिल्ली – भारत सरकार के युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय ने मेरा युवा भारत (एमवाई भारत) के माध्यम से 10 मार्च 2026 को राष्ट्रीय राजधानी के कॉलेजों में विकसित भारत युवा कनेक्ट कार्यक्रम (वीबीवाईसीपी) के चरण-2 के प्रचार-प्रसार को जारी रखा, जिससे विकसित भारत@2047 के विजन के साथ युवाओं की भागीदारी को और सुदृढ़ किया जा सके।

यह कार्यक्रम दिल्ली में शुरू की गई विस्तारित चरण-2 पहल का हिस्सा है। इसका उद्देश्य संवाद सत्रों, संवादों और युवा-नेतृत्व वाली सहभागिता गतिविधियों के माध्यम से 35 से अधिक कॉलेजों में 10,000 से अधिक युवाओं को शामिल करना है।

 

दिल्ली में आयोजित कार्यक्रम के दूसरे दिन युवा आइकन रमनदीप सिंह, लविशा अरोड़ा, स्नेहा भारद्वाज, अंकित कुमार और साक्षी शाह ने राष्ट्रीय राजधानी के प्रमुख कॉलेजों में छात्रों के साथ संवाद सत्रों का नेतृत्व किया। डॉ. बी.आर. आंबेडकर विश्वविद्यालय दिल्ली, जगन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज (जेआईएमएस), केशव महाविद्यालय, महाराजा अग्रसेन कॉलेज और महर्षि वाल्मीकि कॉलेज ऑफ एजुकेशन में इन कार्यक्रमों का आयोजन किया गया।

इन गतिविधियों में 900 से अधिक छात्रों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया, जो राष्ट्रीय विकास एजेंडा में सक्रिय रूप से शामिल होने के लिए युवा शक्ति के बीच बढ़ती रुचि को दर्शाता है। सत्रों के दौरान युवा आइकनों ने छात्रों के साथ बातचीत की और विभिन्न राष्ट्रीय युवा पहल से अपने अनुभव साझा किए। साथ ही युवा प्रतिभागियों को 2047 तक आत्मनिर्भर और विकसित भारत के निर्माण की दिशा में अपने विचारों और दृष्टिकोण का योगदान करने के लिए प्रोत्साहित किया गया।

 

इन सत्रों में आकर्षक प्रस्तुतियां और युवा संवाद संबंधी बातचीत शामिल रही, जहां छात्रों ने राष्ट्र निर्माण, नेतृत्व और शासन एवं विकास में युवाओं की भागीदारी पर चर्चा की। इस कार्यक्रम का उद्देश्य एक ऐसा मंच तैयार करना है जहां अमृत पीढ़ी की आवाजें जनभागीदारी की भावना के माध्यम से भारत की विकास यात्रा में सार्थक योगदान दें।

व्यापक सहभागिता प्रयासों के तहत कार्यक्रम से पहले की गतिविधि में भाग लेने वाले संस्थानों में ‘एमवाई भारत’ जागरूकता और पंजीकरण अभियान आयोजित किए गए ताकि युवाओं को ‘एमवाई भारत’ मंच से जुड़ने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाली स्वयंसेवी पहलों में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।

इस दृष्टिकोण के अनुरूप विकसित भारत युवा संपर्क कार्यक्रम युवाओं को भारत के विकास के दृष्टिकोण से जोड़ने के लिए एक व्यापक मंच के रूप में कार्य करता है, जिससे वे राष्ट्र के भविष्य को आकार देने में सक्रिय भागीदार बन सकते हैं।

अधिक जानकारी के लिए https://mybharat.gov.in पर जाएं।

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