नई दिल्ली – वायु सेना के ‘गरुड़’ बल के विशेष बलों के जवानों के प्रशिक्षण के सफल समापन के उपलक्ष्य में, 23 मई 2026 को गरुड़ रेजिमेंटल ट्रेनिंग सेंटर (जीआरटीसी), वायु सेना स्टेशन चांदीनगर में मैरून बेरेट औपचारिक परेड का आयोजन किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में एवीएम राहुल गुप्ता, एसीएएस ऑपरेशन (अंतरिक्ष) ने परेड का निरीक्षण किया।
गरुड़ रेजिमेंटल ट्रेनिंग सेंटर के कमांडेंट ने मुख्य अतिथि का स्वागत किया और उन्हें प्रशिक्षण के विभिन्न पहलुओं की जानकारी दी। मुख्य अतिथि ने गरुड़ कमांडो को उनकी सफल पासिंग आउट पर बधाई दी। उन्होंने युवा कमांडो को संबोधित करते हुए तेजी से बदलते सुरक्षा परिदृश्य के अनुरूप कठोर प्रशिक्षण और विशेष बलों के कौशल को निखारने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने सफल गरुड़ प्रशिक्षुओं को मैरून बेरेट, गरुड़ प्रवीणता बैज और विशेष बल टैब प्रदान किए और पुरस्कार विजेताओं को ट्राफियां वितरित की।
पासिंग आउट समारोह के दौरान, ‘गरुड़ों’ ने युद्धक फायरिंग, बंधक बचाव, फायरिंग ड्रिल, विस्फोटक सामग्री का उपयोग, बाधा पार करना, दीवार पर चढ़ना, रेंगना, रस्सियों से उतरना और सैन्य मार्शल आर्ट जैसे विभिन्न कौशल का प्रदर्शन किया।
मैरून बेरेट सेरेमोनियल परेड ‘गरुड़ों’ के लिए गौरव और उपलब्धि का क्षण होता है। यह एक अत्यंत कठिन प्रशिक्षण कार्यक्रम की उपयुक्त परिणति और विशिष्ट ‘गरुड़’ बल में शामिल ‘युवा विशेष बल संचालकों’ के रूप में उनके परिवर्तन का प्रतीक है।
ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय वायु सेना के विशेष बलों की भूमिका को देखते हुए, हाल ही में पास आउट विशेष बल संचालक नए विशेष अभियानों को अंजाम देने के लिए भारतीय वायु सेना की क्षमता को और मजबूत करेंगे।
रांची,27.05.2026 – झारखंड में भीषण गर्मी से परेशान लोगों के लिए राहत की खबर है। मौसम विभाग ने संकेत दिया है कि अगले दो दिनों तक तापमान में ज्यादा बदलाव नहीं होगा, लेकिन 29 मई से मौसम बदलने लगेगा। राज्य के कई हिस्सों में तापमान 3 से 4 डिग्री सेल्सियस तक गिर सकता है। इसके साथ ही तेज हवा, बारिश और वज्रपात को लेकर अलर्ट जारी किया गया है।
मौसम विज्ञान केंद्र रांची के अनुसार राज्य के उत्तर-पूर्वी और मध्य हिस्सों में मौसम अचानक करवट ले सकता है। देवघर, दुमका, गोड्डा, पाकुड़, जामताड़ा, गिरिडीह, साहिबगंज, रांची, रामगढ़, हजारीबाग, खूंटी, धनबाद, बोकारो, गुमला, कोडरमा और लोहरदगा में 50 से 60 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से तेज हवा चलने और आकाशीय बिजली गिरने की आशंका जताई गई है। इन जिलों के लिए ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है।
वहीं पलामू, गढ़वा, चतरा और लातेहार जैसे उत्तर-पश्चिमी जिलों में फिलहाल गर्मी और लू से राहत मिलने के आसार नहीं हैं। मौसम विभाग ने इन इलाकों में हीट वेव की स्थिति बने रहने की चेतावनी दी है। दोपहर के समय तेज धूप और गर्म हवाओं ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। राज्य के करीब 10 जिलों का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच चुका है।
पिछले 24 घंटे के दौरान पूर्वी सिंहभूम के दारीसाई में सबसे ज्यादा 19.5 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई। वहीं डाल्टनगंज राज्य का सबसे गर्म शहर रहा, जहां अधिकतम तापमान 45.7 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। राजधानी रांची का अधिकतम तापमान 39.8 डिग्री और न्यूनतम तापमान 26.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।
मौसम विज्ञानी अभिषेक आनंद ने बताया कि 27 और 28 मई तक तापमान में किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं है। हालांकि 29 मई से 1 जून के बीच तापमान में 3 से 4 डिग्री तक गिरावट आ सकती है। राज्य के ज्यादातर हिस्सों में आंशिक बादल छाए रहेंगे और कई जिलों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।
नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा गुरुवार शाम मंत्रिपरिषद की बैठक में दिए गए दिशा-निर्देशों के पालन को लेकर केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने अगले ही दिन आज अपने दोनों मंत्रालयों के अंतर्गत आने वाले विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों की उच्चस्तरीय बैठक लेकर साफ कहा कि सरकार का काम फाइलों में नहीं, जनता के जीवन में दिखना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि किसान, गरीब, ग्रामीण और आम नागरिक को योजनाओं का लाभ पाने या शिकायतों के समाधान के लिए भटकना न पड़े, इसके लिए योजनाबद्ध, समयबद्ध और परिणाममुखी व्यवस्था तुरंत खड़ी की जाए।
केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने बैठक में कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि आम आदमी को लड़ना न पड़े, उसे दर-दर भटकना न पड़े और उसे योजनाओं का लाभ सहज, सरल और समय पर मिलना चाहिए। इसी को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए उन्होंने कृषि, ग्रामीण विकास, भूमि संसाधन और आईसीएआर समेत संबंधित इकाइयों में शिकायत निवारण तंत्र को मजबूत, प्रभावी और जवाबदेह बनाने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि अभी विभिन्न योजनाओं और विभागों में शिकायतों के निपटारे की अलग-अलग व्यवस्थाएं हैं, जैसे अलग पोर्टल, अलग तंत्र और अलग प्रणाली, लेकिन अब इस व्यवस्था को ज्यादा प्रभावी और परिणामकारी बनाने की जरूरत है। इसके लिए कृषि और ग्रामीण विकास, दोनों विभागों में कम से कम 10-10 अधिकारियों की टीम गठित करने को कहा गया, जो प्रतिदिन शिकायतों, जनसमस्याओं, पत्रों, जनप्रतिनिधियों के प्रतिवेदनों और विभिन्न पोर्टलों पर आई समस्याओं की समीक्षा करे।
श्री चौहान ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि शिकायतों का समाधान केवल कागज पर “डिस्पोजल” दिखाने तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि यह देखा जाए कि लाभार्थी को वास्तविक राहत मिली या नहीं, योजना का लाभ वास्तव में पहुंचा या नहीं, और कहीं ऐसा तो नहीं कि रिकॉर्ड में वितरण दिख रहा हो लेकिन जमीन पर लाभार्थी को कुछ मिला ही न हो।
बैठक में केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने अपने उस अनुभव का भी उल्लेख किया, जिसमें लाभार्थियों को फोन कर सत्यापन करने पर कुछ मामलों में कागज और वास्तविकता के बीच अंतर सामने आया था। उन्होंने साफ कहा कि यह समस्या आसान नहीं, बल्कि जटिल है, इसलिए शिकायतों की प्रकृति, क्षेत्रवार प्रवृत्ति और योजनावार अड़चनों की पहचान कर तंत्र में आवश्यक बदलाव करना होगा।
उन्होंने निर्देश दिया कि हर महीने शिकायत निवारण व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी। श्री शिवराज सिंह ने कहा कि महीने के पहले सोमवार को समीक्षा की जाएगी, हालांकि जून में खरीफ कार्यों की व्यस्तता को देखते हुए दूसरे सोमवार को विस्तृत समीक्षा की जाएगी, लेकिन तब तक तंत्र और अधिक व्यवस्थित, उत्तरदायी और प्रभावी हो जाना चाहिए।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा रिफॉर्म्स पर दिए जा रहे लगातार जोर का उल्लेख करते हुए श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि अब हर डिवीजन, हर योजना और हर विभाग अपने स्तर पर यह पहचाने कि आखिर कठिनाई कहां है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री आवास योजना, सड़क योजना, कृषि योजनाएं, बागवानी, बीमा, विपणन या अन्य कार्यक्रमों में जहां कहीं लाभार्थी बेवजह चक्कर काट रहा है, वहां नियम, प्रक्रिया, तंत्र और कार्यप्रणाली को सरल बनाना ही होगा।
केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने साफ कहा कि प्रक्रियाओं का सरलीकरण किया जाए और पुराने-अप्रासंगिक रेगुलेशंस को खत्म करना अब जरूरी है। उन्होंने पूछा कि हर चीज के लिए लाइसेंस की जरूरत क्यों हो, कई जगह पंजीकरण या आसान प्रणाली से काम क्यों नहीं हो सकता। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि एक सप्ताह के भीतर विभिन्न योजनाओं में बाधा पैदा करने वाले प्रावधानों, जटिल प्रक्रियाओं और सुधार योग्य बिंदुओं की पहचान कर ली जाए, ताकि आगे त्वरित निर्णय लिया जा सके।
बैठक में एआई और टेक्नोलॉजी के उपयोग पर महत्वपूर्ण रूप से बात करते हुए श्री चौहान ने कहा कि कृषि, ग्रामीण विकास, भूमि संसाधन और आईसीएआर सहित सभी क्षेत्रों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल प्लेटफॉर्म, डेटा शेयरिंग, डेटा आधारित निर्णय, मॉनिटरिंग और इंटर-डिपार्टमेंटल समन्वय को और मजबूत किया जाना चाहिए। उन्होंने इसके लिए अलग टीम बनाकर अध्ययन करने और उपयोगी प्रस्ताव उनके सामने प्रस्तुत करने के निर्देश दिए।
उन्होंने कहा कि डिजिटल गवर्नेंस के माध्यम से पारदर्शिता और दक्षता दोनों बढ़ाई जा सकती हैं, लेकिन इसके लिए विभागों के बीच साझा कामकाज और डेटा इंटीग्रेशन जरूरी है। बैठक में यह भी सामने आया कि विभिन्न शिकायत डेटाबेस को जोड़ने की दिशा में काम चल रहा है, ताकि केवल एक पोर्टल की नहीं बल्कि समेकित शिकायत-प्रणाली के आधार पर विभागीय मूल्यांकन हो सके।
श्री चौहान ने प्रशासनिक कार्यसंस्कृति में बदलाव पर भी खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि फाइल नीचे से बनकर ऊपर आती है और कई बार नीचे का पुराना माइंडसेट ही पूरी प्रक्रिया को उलझा देता है। इसलिए केवल ऊपर के स्तर पर नहीं, बल्कि नीचे से फाइल निर्माण, नोटिंग, निर्णय-तैयारी और ड्राफ्टिंग की गुणवत्ता सुधारने की जरूरत है। उन्होंने ड्राफ्टिंग को अत्यंत महत्वपूर्ण विषय बताते हुए कहा कि विभागों में ऐसे अधिकारी विकसित किए जाएं जो फाइलें और नोट्स मजबूत, स्पष्ट और नीति-संगत तरीके से तैयार कर सकें। इसके लिए प्रशिक्षण, क्षमता निर्माण और दक्षता वृद्धि की व्यवस्था की जाए, ताकि फाइलें अनावश्यक रूप से न अटकें और निर्णय की गुणवत्ता भी बेहतर हो।
न्यायालयों में लंबित मामलों को लेकर भी केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने चिंता जताई। उन्होंने कहा कि कई मामलों में सरकार इसलिए कमजोर पड़ जाती है क्योंकि सरकारी पक्ष समय पर और प्रभावी ढंग से अदालत में रखा ही नहीं जाता। उन्होंने सभी विभागों से कहा कि वे लंबित कोर्ट केसों की सूची निकालें, उनकी समीक्षा करें, नोडल अधिकारी तय करें, विधिक तैयारी मजबूत करें और जरूरत पड़े तो बेहतर वकीलों की व्यवस्था करें, क्योंकि सरकार की हार का सीधा नुकसान सार्वजनिक हित को होता है।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी द्वारा विकास कार्यों में बाधाओं की पहचान और समाधान पर दिए गए संदेश को आगे बढ़ाते हुए केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि हर डिवीजन यह बताए कि काम किस वजह से अटकता है, कौन सी बाधाएं फैसलों, क्रियान्वयन और लाभ वितरण में देरी करती हैं, और उन्हें दूर करने के लिए क्या सुधार किए जा सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह कवायद एक साथ चलनी चाहिए- रिफॉर्म, परफॉर्म और ट्रांसफॉर्म के साथ-साथ इन्फॉर्म भी।
उन्होंने कहा कि कई बार योजनाएं अच्छी होती हैं, सुधार भी किए जाते हैं, लेकिन जनता को जानकारी ही नहीं होती। इसलिए हितधारकों से संवाद, किसान संगठनों के साथ बैठक, मजदूरों और सरपंचों से बातचीत, जनप्रतिनिधियों के माध्यम से सूचना, सोशल मीडिया, ग्राफिक्स, वीडियो, रील्स और रचनात्मक संचार माध्यमों से योजनाओं और सुधारों को जनता तक पहुंचाया जाए।
बैठक में यह भी कहा गया कि जो सुधार पहले ही किए जा चुके हैं, उनका “रिफॉर्म उत्सव” की तरह प्रचार-प्रसार होना चाहिए। श्री चौहान ने कहा कि केवल सुधार कर देना काफी नहीं है, बल्कि जिनके लिए सुधार किए गए हैं, उन्हें बुलाकर संवाद किया जाना चाहिए, बताया जाना चाहिए कि क्या बदला है, उससे क्या लाभ होगा और आगे क्या और किया जा सकता है।
श्री चौहान ने राज्यों के साथ साझेदारी को कृषि और ग्रामीण विकास की सफलता की कुंजी बताया। उन्होंने कहा कि असली काम राज्यों में होता है, इसलिए राज्यों के साथ रोडमैप आधारित साझेदारी, ज़ोनल कॉन्फ्रेंस, योजनावार समन्वय और समस्या-आधारित संवाद को और मजबूत किया जाए। उन्होंने संकेत दिया कि जो राज्य संकोच करते हैं, उनके साथ भी संवाद बढ़ाया जाएगा, क्योंकि केंद्र का दायित्व पूरे देश की जनता के प्रति है।
उन्होंने कृषि, पशुपालन, मत्स्य, फूड प्रोसेसिंग और अन्य संबद्ध क्षेत्रों के बीच बेहतर समन्वय की भी जरूरत बताई। उनका कहना था कि इंटीग्रेटेड फार्मिंग, प्रसंस्करण, मूल्य संवर्धन और क्षेत्रीय कृषि रोडमैप जैसे मुद्दों पर अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों को साथ बैठकर काम करना होगा।
बैठक में विकसित भारत 2047 के लक्ष्य के अनुरूप विभागीय विजन दस्तावेज तैयार करने पर भी बल दिया गया। केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने कहा कि प्रत्येक विभाग अपना 2047 विजन, इस वर्ष के लक्ष्य, वार्षिक, छह-माही, तिमाही, साप्ताहिक और दैनिक कार्ययोजना तैयार करे, ताकि मॉनिटरिंग मजबूत हो और काम का आकलन स्पष्ट रूप से हो सके।
उन्होंने सरकारी भवनों और संस्थानों में पीएम सूर्य घर जैसी पहलों के अनुरूप सोलराइजेशन को भी आगे बढ़ाने की बात कही और कहा कि जहां काम हो चुका है और जहां बाकी है, उसका स्पष्ट आकलन तैयार कर समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के मौजूदा कार्यकाल के दो वर्ष और समग्र 12 वर्षों की उपलब्धियों के प्रभावी प्रस्तुतीकरण पर भी बैठक में चर्चा हुई। श्री चौहान ने कहा कि विभाग अपनी उपलब्धियों को अभी से व्यवस्थित करें और प्रेस कॉन्फ्रेंस के साथ ही गांव स्तर तक जाने वाले कार्यक्रम, प्रेजेंटेशन, रचनात्मक कंटेंट, वीडियो और सोशल मीडिया अभियानों के माध्यम से जनता के बीच ले जाएं। उन्होंने सोशल मीडिया के प्रभाव को देखते हुए छोटे वीडियो, ग्राफिक्स, लाभार्थी कहानियों और योजनाओं से जीवन में आए बदलावों को केंद्र में रखने का सुझाव दिया। उनका मानना था कि अखबार और टीवी के साथ-साथ डिजिटल प्लेटफॉर्म पर दमदार प्रस्तुतीकरण आज ज्यादा असरकारी हो सकता है।
बैठक में विदेश यात्राओं को लेकर भी प्रधानमंत्री श्री मोदी के निर्देशों का उल्लेख करते हुए श्री चौहान ने अधिकारियों से कहा कि अनावश्यक विदेश यात्राओं से बचा जाए और केवल अत्यंत जरूरी मामलों में ही ऐसे प्रस्ताव आगे आएं। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस समय प्राथमिकता देश के भीतर काम की गति, गुणवत्ता और परिणाम को बेहतर बनाना है।
फाइलों के निस्तारण को लेकर श्री चौहान ने कहा कि उनकी प्राथमिकता केवल तेजी नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण और परिणाममूलक निर्णय है। उन्होंने कहा कि कोई भी नियम या फाइल कई लोगों की जिंदगी पर असर डाल सकती है, इसलिए उसे समझकर, परखकर और सकारात्मक दृष्टिकोण के साथ निर्णय लेना जरूरी है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि ऐसी व्यवस्था बनाई जाए जिससे अनावश्यक देरी न हो और महत्वपूर्ण मामलों पर समय रहते चर्चा हो सके।
बैठक में केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने अधिकारियों को स्पष्ट संदेश दिया कि कोई भी विभाग पीछे नहीं रहना चाहिए। शिकायत निवारण से लेकर रिफॉर्म, टेक्नोलॉजी, कोर्ट केस, राज्यों से समन्वय, जनसंवाद, 2047 रोडमैप और उपलब्धियों के प्रस्तुतीकरण तक हर मोर्चे पर सक्रिय, समयबद्ध और जवाबदेह कार्यशैली अपनानी होगी, ताकि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के सुशासन विजन के अनुरूप सरकार का लाभ अंतिम व्यक्ति तक प्रभावी ढंग से पहुंच सके।
अनुमंडल पदाधिकारी सदर श्री कुमार रजत के नेतृत्व में लोवाडीह से दुर्गा सोरेन चौक तक चला गया जांच अभियान
अनावश्यक रूप से जमावड़ा लगाने वाले युवकों को दी गई सख्त चेतावनी
रांची, 27.05.2026 – जिला दंडाधिकारी-सह-उपायुक्त रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देशानुसार शहर में सड़कों पर अड्डाबाजी, अनावश्यक जमावड़ा एवं नशापान की रोकथाम को लेकर सख्ती बरती जा रही है। इसी क्रम में अनुमंडल पदाधिकारी सदर श्री कुमार रजत के नेतृत्व में लोवाडीह से दुर्गा सोरेन चौक तक जांच अभियान चलाया गया।
अभियान के दौरान सड़क किनारे कुछ युवक अनावश्यक रूप से जमावड़ा लगाए हुए पाए गए। युवकों से पूछताछ की गई तथा सार्वजनिक स्थानों पर अड्डाबाजी एवं नशे से संबंधित गतिविधियों पर चेतावनी दी गई। अनुमंडल पदाधिकारी श्री कुमार रजत द्वारा सभी युवकों को कड़ी चेतावनी देते हुए भविष्य में ऐसी गतिविधियों से दूर रहने का निर्देश दिया गया।
जिला प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक स्थलों पर अड्डाबाजी, नशापान एवं कानून-व्यवस्था प्रभावित करने वाली गतिविधियों को किसी भी स्थिति में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। शहर में शांति व्यवस्था बनाए रखने तथा आम नागरिकों को सुरक्षित वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इस प्रकार के अभियान आगे भी लगातार जारी रहेंगे।
जिला प्रशासन द्वारा युवाओं से अपील की गई है कि वे सकारात्मक गतिविधियों में भाग लें तथा सामाजिक वातावरण को बेहतर बनाने में सहयोग करें।
नई दिल्ली – आंध्र प्रदेश के राज्यपाल श्री एस. अब्दुल नज़ीर ने 18 मई, 2026 को युवा संगम कार्यक्रम के अंतर्गत भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान तिरुपति का दौरा कर रहे महाराष्ट्र के युवा प्रतिनिधिमंडल से बातचीत की।
पुणे स्थित भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान- आईआईएसईआर के नेतृत्व में यह प्रतिनिधिमंडल देश भर में अंतर्राज्यीय समझ और युवाओं के बीच जुड़ाव बढ़ाने के उद्देश्य से शैक्षणिक, सांस्कृतिक और अनुभवकारी गतिविधियों में भाग ले रहा है।
श्री एस. अब्दुल नज़ीर ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भागीदारी के महत्व का उल्लेख किया और भारत की विविधता में एकता मजबूत बनाने में सांस्कृतिक समझ और अंतर्राज्यीय सहयोग की भूमिका रेखांकित की। उन्होंने कहा कि युवा संगम जैसी पहल युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों, संस्कृतियों और परंपराओं से जुड़ने के सार्थक अवसर प्रदान करती हैं, जिससे भावनात्मक एकीकरण और राष्ट्रीय सद्भाव को बढ़ावा मिलता है।
राज्यपाल महोदय ने लोगों के बीच आपसी संपर्क बढाने और विद्यार्थियों को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विकास उपलब्धियों का प्रत्यक्ष अनुभव प्रदान करने में युवा संगम की भूमिका की सराहना की। उन्होंने प्रतिनिधियों को राष्ट्रीय एकता के दूत के रूप में आपसी सम्मान, ज्ञान और सहयोग की भावना आगे बढ़ाने को प्रोत्साहित किया।
प्रतिनिधिमंडल ने यात्रा के दौरान, आईआईटी तिरुपति के संकाय सदस्यों, शोधकर्ताओं, नवोन्मेषकों और विद्यार्थियों के साथ बातचीत की और अत्याधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान, अकादमिक उत्कृष्टता और तकनीकी प्रगति से अवगत हुए। सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सामुदायिक सहभागिता गतिविधियों द्वारा उन्हें दक्षिण भारत की जीवंत सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं का भी अनुभव प्राप्त हुआ।
शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा आरंभ युवा संगम का छठा चरण गहन शैक्षिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान से राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक सद्भाव और भावनात्मक एकीकरण सुदृढ बनाने का प्रयास है। इस पहल में 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिभागी साथ जुड़े हैं, जिससे भारत की विविधता, नवाचार पारितंत्र और राष्ट्र निर्माण की साझा आकांक्षाओं की गहरी समझ विकसित करने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
रांची के हरमू रोड स्थित भाजपा कार्यालय के बाहर हंगामा हुआ है. भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) और नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) के कार्यकर्ता आपस में भिड़ गए. दोनों पक्षों के बीच जमकर नारेबाजी हुई, जो देखते ही देखते झड़प में बदल गई. एनएसयूआई के कार्यकर्ता किसी विषय को लेकर विरोध प्रदर्शन करते हुए भाजपा कार्यालय की ओर बढ़ रहे थे. इसी दौरान वहां पहले से मौजूद एबीवीपी के कार्यकर्ताओं के साथ उनकी बहस हो गई. बहस इतनी बढ़ी कि दोनों पक्षों के छात्र नेता और कार्यकर्ता आपस में उलझ गए.
मामले की जानकारी मिलने के बाद अरगोड़ा, पुंदाग थाना समेत कई अन्य थाने की पुलिस घटनास्थल पर पहुंची. पुलिस ने स्थिति को शांत कराया. जानकारी मिली है कि इस झड़प में दोनों पक्षों के कुछ कार्यकर्ताओं को चोटें लगी हैं. एहतियात के तौर पर भाजपा कार्यालय के आसपास पर्याप्त संख्या में पुलिस बलों की तैनाती कर दी गई है. पुलिस मामले की जांच कर रही है और आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज भी खंगाल रही है.
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को शैक्षणिक योजनाओं का लाभ समयबद्धता के साथ विद्यार्थियों तक पहुंचाए जाने का दिया निर्देश ।
मुख्यमंत्री ने वित्तीय वर्ष 2025-26 की उपलब्धियों एवं वित्तीय वर्ष 2026-27 की कार्य योजना की विस्तृत समीक्षा की ।
ड्रॉप आउट मामलों में हो रहा निरंतर सुधार, राष्ट्रीय औसत से आगे है झारखंड।
सीएम स्कूल ऑफ़ एक्सीलेंस की संख्या बढ़ाकर 5 हजार किए जाने की योजना पर तेज गति से करें कार्य
ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों तक गुणवत्ता शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करना प्राथमिकता
विद्यालयों में क्वालिटी एजुकेशन के साथ-साथ खेल गतिविधियों को दें बढ़ावा
शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया को गति दें – श्री हेमन्त सोरेन, मुख्यमंत्री, झारखण्ड।
झारखंड मंत्रालय, रांची,26.05.2026 – मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन की अध्यक्षता में आज झारखंड मंत्रालय में स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की अद्यतन कार्य प्रगति की समीक्षा बैठक संपन्न हुई। बैठक में मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को विभाग द्वारा संचालित योजनाओं, विद्यालयों में शैक्षणिक व्यवस्थाएं, आधारभूत संरचनाओं तथा विद्यार्थियों को उपलब्ध कराई जा रही सुविधाओं की विस्तृत समीक्षा की।
मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य सरकार द्वारा विद्यालयों से जुड़ी योजनाओं एवं कार्यक्रमों को प्रभावी तरीके से पारदर्शिता के साथ अध्यनरत छात्र-छात्राओं तक ससमय पहुंचाना सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि राज्य सरकार झारखंड के बच्चों को बेहतर एवं क्वालिटी एजुकेशन प्रदान करने हेतु प्रतिबद्ध है। सभी सरकारी विद्यालयों में आधारभूत संरचना और मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने के साथ-साथ पठन-पाठन की नवीनतम एवं आधुनिक तकनीक से संबंधित संसाधन उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के परीक्षा परिणाम में निरंतर सुधार हो रहा है, बच्चों का रिजल्ट और ज्यादा अच्छा हो इस निमित्त शिक्षकों के प्रशिक्षण कार्य सहित सभी पहलुओं पर विशेष ध्यान केंद्रित करें। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि शिक्षक नियुक्ति प्रक्रिया को गति दें। शिक्षकों के शत प्रतिशत पदों को भरना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ महीनों में हजारों की संख्या शिक्षकों की बहाली हुई है, नियुक्ति प्रक्रिया निरंतर जारी रखते हुए रिक्त पदों को भरा जाए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि नव नियुक्त शिक्षकों को ससमय वेतन मिले इस निमित्त सभी वेरिफिकेशन कार्य इस माह के अंत तक पूर्ण करना सुनिश्चित की जाए।
ड्रॉप आउट मामलों में हो रहा निरंतर सुधार, राष्ट्रीय औसत से आगे है झारखंड
मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने अधिकारियों से कहा कि शिक्षा किसी भी राज्य की आधारशिला होती है। राज्य सरकार का उद्देश्य है कि ग्रामीण एवं दूरस्थ क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित हो तथा प्रत्येक बच्चे को बेहतर शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराया जाय। बैठक में मुख्यमंत्री को अधिकारियों ने अवगत कराया कि प्राथमिक एवं माध्यमिक शिक्षा में ड्रॉप आउट बच्चों की संख्या में कमी आई है। ड्रॉप आउट के मामले में झारखंड राष्ट्रीय औसत से अच्छा है। शिक्षा विभाग द्वारा अभियान चलाकर ड्रॉप आउट बच्चों का नामांकन सुनिश्चित किया जा रहा है।
श्रम विभाग से समन्वय स्थापित कर वैसे बच्चों का चिन्हित किया जा रहा है, जो बच्चे मजदूरी या कोई अन्य कार्य से जुड़े हैं और स्कूली शिक्षा से वंचित हैं। किताब, पठन-पाठन सामग्री एवं साइकिल वितरण कार्य भी समयबद्ध तरीके से किया जा रहा है। अब बच्चे मैट्रिक परीक्षा में अच्छे अंकों के साथ उतीर्ण हो रहे हैं, जिन विद्यालयों में बच्चों का रिजल्ट ठीक नहीं रहा है, वैसे विद्यालयों को चिन्हित कर सभी सुविधा, व्यवस्था एवं शिक्षकों की उपलब्धता सहित प्रत्येक बिंदुओं पर सुधार हेतु विभाग विशेष ध्यान केंद्रित कर रहा है। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी सरकारी विद्यालयों में इंटरनेट की सुविधा उपलब्ध कराई जाए एवं आईसीटी लैब की सुविधा दुरुस्त करें।
सीएम स्कूल ऑफ़ एक्सीलेंस की संख्या बढ़ाकर 5 हजार किए जाने की कार्य योजना पर तेजी से कार्य करें
मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने अधिकारियों से कहा कि राज्य के भीतर सीएम स्कूल ऑफ़ एक्सीलेंस की संख्या बढ़ाकर 5 हजार किए जाने की कार्य योजना पर तेजी से कार्य करें, ताकि प्रत्येक पंचायत तक स्कूलों में अध्यनरत छात्र-छात्राओं को क्वालिटी एजुकेशन पहुंचाई जा सके। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि अगले 6 से 8 महीने के भीतर यह सुनिश्चित करें कि कोई भी विद्यालय सिंगल टीचर के भरोसे न चले। विद्यालय प्रबंध समितियों से समन्वय स्थापित कर स्थानीय पढ़े-लिखे अहर्ता रखने वाले इच्छुक युवाओं को शिक्षक के रूप में जोड़ें।
विशेष कर छात्राओं को भी मौका दें, ताकि शिक्षकों की कमी से किसी भी विद्यालय में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित नहीं हो। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य के प्रत्येक पंचायतों में अच्छे स्कूल होंगे, तभी बच्चे गुणवत्तापूर्ण शिक्षा ग्रहण कर अपना भविष्य उज्ज्वल करेंगे। सभी सरकारी विद्यालयों के पठन-पाठन कार्य में एकरूपता लाना सुनिश्चित करें । मुख्यमंत्री ने अधिकारियों से कहा कि पायलट प्रोजेक्ट के तहत परिवहन सुविधा का संचालन करें, ताकि छात्र-छात्राओं को समय के अनुसार घर से स्कूल एवं स्कूल से घर तक पहुंचाया जा सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि सभी सरकारी विद्यालयों के परिसरों व्यापक रूप से वृक्षारोपण का अभियान शुरू कराएं।
अभिवंचित बच्चों को आवासीय सुविधा और क्वालिटी एजुकेशन प्रदान करें
मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य के भीतर संचालित नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालयों में अध्ययनरत अभिवंचित वर्ग के बच्चे-बच्चियों को आवासीय सुविधा सहित क्वालिटी एजुकेशन प्रदान करें। बैठक में अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि राज्य के भीतर नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालयों की कुल संख्या 26 है। इन स्कूलों में लगभग 4 हजार विभिन्न प्रकार के अभिवंचित बच्चों को रहने-खाने की पूरी सुविधा के साथ निःशुल्क शिक्षा प्रदान की जा रही है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालयों के भवनों के रख-रखाव सहित सभी कार्यों को सुदृढ़ किया गया है।
विद्यालयों में क्वालिटी एजुकेशन के साथ-साथ खेल गतिविधियों को दें बढ़ावा
मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सरकारी विद्यालयों में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के बीच शिक्षा के साथ-साथ खेल गतिविधियों को भी बढ़ावा दें। वैसे बच्चे-बच्चियों को चिन्हित करें, जो खेल प्रतिस्पर्धा में बहुत अच्छा परफॉर्मेंस कर रहे हैं ताकि उन्हें खेल के क्षेत्र में और आगे बढ़ाया जा सके। राज्य के भीतर खेल के क्षेत्र में हमारे कई बच्चों ने झारखंड का नाम भी रोशन किया है। अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को अवगत कराया कि विद्यालयों में बच्चों को स्पोर्ट्स किट्स उपलब्ध कराया जा रहा है। राष्ट्रीय विद्यालय खेल प्रतियोगिता के तहत झारखंड के बच्चों की पूर्ण भागीदारी सुनिश्चित की जा रही है। शारीरिक शिक्षा के शिक्षक खेल गतिविधियों की बेहतरी के लिए कार्य कर रहे हैं।
प्रस्तावित दिशोम गुरु शिबू सोरेन विद्यालय की स्थापना हेतु एक सप्ताह के भीतर डीपीआर प्रस्तुत करने का निर्देश
बैठक में मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन के समक्ष अधिकारियों ने जगुआर कैंपस रांची में बनाए जाने वाले प्रस्तावित दिशोम गुरु शिबू सोरेन विद्यालय की स्थापना हेतु चिन्हित भूमि का पीपीटी प्रजेंटेशन रखा। मुख्यमंत्री को अवगत कराया गया कि जगुआर कैंपस रांची में ही 6 एकड़ भूमि विद्यालय निर्माण हेतु विभाग द्वारा चिन्हित किया गया है। मुख्यमंत्री को विद्यालय स्थापना की कार्य योजना से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराई गई। मुख्यमंत्री ने इस संबंध में अधिकारियों को कई अहम दिशा-निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को एक सप्ताह के भीतर राज्य सरकार को इस प्रस्ताव से संबंधित डीपीआर समर्पित करने का निर्देश दिया। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार द्वारा दिशोम गुरु शिबू सोरेन विद्यालय शहीद पुलिस कर्मियों के बच्चों को निःशुल्क शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से स्थापित किया जा रहा है।
मौके पर मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ऑनलाइन माध्यम से कस्तूरबा गांधी आवासीय विद्यालय, बुंडू के स्कूल प्रबंधन के साथ जुड़े एवं स्कूल में स्थापित सभी सुविधाओं की जानकारी ली।
बैठक में राज्य के मुख्य सचिव श्री अविनाश कुमार, अपर मुख्य सचिव श्री अजय कुमार सिंह, स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव श्री उमा शंकर सिंह, राज्य परियोजना निदेशक श्री शशि रंजन, निदेशक माध्यमिक शिक्षा श्री राजेश प्रसाद, निदेशक प्राथमिक शिक्षा श्री मनोज कुमार रंजन सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
रांची,26.05.2026 – झारखंडवासियों के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आ रही है। मुख्यमंत्री Hemant Soren के नेतृत्व में राज्य सरकार जल्द ही आधुनिक इलेक्ट्रिक बस सेवा शुरू करने की तैयारी में है। इस पहल का उद्देश्य लोगों को सस्ती, सुरक्षित और पर्यावरण अनुकूल परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है। विभिन्न रिपोर्टों के अनुसार बुजुर्गों, छात्र-छात्राओं और अन्य पात्र वर्गों को मुफ्त या विशेष रियायती यात्रा सुविधा देने की योजना पर भी सरकार काम कर रही है।
सरकार का मानना है कि इलेक्ट्रिक बसों के संचालन से प्रदूषण में कमी आएगी
, यात्रियों को बेहतर सफर का अनुभव मिलेगा और शहरों के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों की कनेक्टिविटी भी मजबूत होगी। पहले से संचालित ग्राम गाड़ी योजना के तहत वरिष्ठ नागरिकों और छात्रों को निःशुल्क यात्रा सुविधा देने की घोषणा की जा चुकी है, जिसे आगे और विस्तार दिए जाने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री ने राज्य में बेहतर परिवहन
व्यवस्था को विकास की गति से जोड़ते हुए कहा है कि सरकार आम जनता को सुविधाएं उनके द्वार तक पहुंचाने के लिए लगातार काम कर रही है। इलेक्ट्रिक बस सेवा शुरू होने से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और झारखंड आधुनिक परिवहन व्यवस्था की दिशा में एक और बड़ा कदम आगे बढ़ाएगा।
झारखंडवासियों के लिए संदेश
:
“हरित परिवहन, बेहतर सफर और आम जनता को राहत” — यही है झारखंड सरकार की नई पहल का उद्देश्य। यदि योजना तय समय पर लागू होती है तो लाखों छात्रों, बुजुर्गों और दैनिक यात्रियों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।
जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त, राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में बैठक
सहकारिता क्षेत्र को मजबूत करने एवं विभिन्न योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तृत चर्चा की गई तथा अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए
इन निर्णयों से जिले में सहकारिता आंदोलन को नई गति मिलेगी और किसानों तथा आमजनों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी
राँची,26.05.2026 – जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त, राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में समाहरणालय ब्लॉक – ए सभागार में जिला सहकारी विकास समिति (DCDC) की बैठक का आयोजन किया गया।
बैठक में अपर समाहर्ता रांची, SAR रांची, जिला सहकारिता पदाधिकारी रांची, वन्य क्षेत्र पदाधिकारी, जिला कृषि पदाधिकारी रांची, जिला पशुपालन पदाधिकारी रांची, एवं सम्बंधित पदाधिकारी उपस्थित थे।
बैठक में सहकारिता क्षेत्र को मजबूत करने एवं विभिन्न योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन पर विस्तृत चर्चा की गई तथा अनेक महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
बैठक में लिए गए प्रमुख निर्णय:
1. पैक्स कम्प्यूटराइजेशन योजना:
केन्द्रीय प्रायोजित योजना “कम्प्यूटराइजेशन ऑफ पैक्स” के अंतर्गत राँची जिला के 306 लैम्पसों में से प्रथम चरण में 169 लैम्पसों को कंप्यूटर उपलब्ध कराए जा चुके हैं। द्वितीय चरण के लिए 28 लैम्पसों का चयन किया गया है। उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने इन 28 लैम्पसों को District Level Implementing & Monitoring Committee (DLIMC) से अनुमोदन प्राप्त कर शीघ्र विभाग को प्रस्ताव भेजने का निर्देश दिया।
2. गोदाम एवं कार्यालय भवन निर्माण:
गोदाम एवं कार्यालय भवन विहीन सहकारी समितियों को जमीन आवंटन कराने हेतु संबंधित अंचलाधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कर आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश जिला सहकारिता पदाधिकारी को दिया गया। इस संबंध में सभी अंचलाधिकारियों को पत्र जारी किया जा चुका है।
3. निष्क्रिय सहकारी समितियों का परिसमापन:
निष्क्रिय एम०पी०सी०एस०, मत्स्य एवं दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों के परिसमापन पर चर्चा की गई। उपायुक्त ने जिला सहकारिता पदाधिकारी को इन समितियों की सूची तैयार कर परिसमापन की कार्रवाई करने तथा उनके स्थान पर नई समितियों का गठन करने का निर्देश दिया।
4. निबंधन की स्थिति:
वर्ष 2025 में 12 मत्स्यजीवी सहयोग समितियों एवं 58 दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों का निबंधन किया गया। वर्ष 2026 में अब तक 5 मत्स्यजीवी एवं 7 दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों का निबंधन हुआ है।
5. झारसेवा पोर्टल पर सुविधा:
CSC ID प्राप्त MPCS को झारसेवा की सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया गया। कुल 169 समितियों में से 70 को सुविधा उपलब्ध करा दी गई है। शेष 7 समितियों के लिए संबंधित प्रखण्ड सहकारिता प्रसार पदाधिकारी को पत्र जारी किया गया है।
6. खाद-बीज लाइसेंस एवं प्रशिक्षण:
वित्तीय वर्ष 2023-24 में 78 समितियों द्वारा 15 दिवसीय प्रशिक्षण प्राप्त कर खाद का लाइसेंस लिया गया। उपायुक्त ने इन समितियों को “पी०एस० किसान समृद्धि केन्द्र” के रूप में अपग्रेड करने का निर्देश दिया।
7.जन औषधि केन्द्र:
अनगड़ा प्रखण्ड के सालहन लैम्पस द्वारा जन औषधि केन्द्र का सफल संचालन किया जा रहा है। उपायुक्त ने अन्य समितियों को भी जन औषधि केन्द्र खोलने के लिए प्रेरित करने एवं आवश्यक कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
8. राष्ट्रीय सहकारी डेटाबेस:
उपायुक्त ने National Cooperative Database को नियमित रूप से अद्यतन करने का निर्देश दिया।
बैठक में जिला सहकारिता पदाधिकारी, राँची द्वारा सभी बिंदुओं पर विस्तृत प्रस्तुतीकरण दिया गया।
जानकारी हो की इन निर्णयों से जिले में सहकारिता आंदोलन को नई गति मिलेगी और किसानों तथा आमजनों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को प्रगति की नियमित समीक्षा तथा निर्धारित समयसीमा के भीतर लक्ष्यों की प्राप्ति सुनिश्चित करने का निर्देश दिया
मुख्यमंत्री ने कहा – बजट प्रबंधन और राजस्व लक्ष्यों की प्राप्ति पर विशेष दें
खनन राजस्व में झारखंड की स्थिति ओडिशा और छत्तीसगढ़ से बेहतर
प्रशासनिक पारदर्शिता के लिए बायोमैट्रिक प्रणाली लागू करने पर जोर
झारखंड मंत्रालय, रांची,25.05.2026 – झारखंड मंत्रालय में आज मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन की अध्यक्षता में वित्त एवं वाणिज्य-कर विभाग के अधिकारियों के साथ उच्च स्तरीय समीक्षात्मक बैठक संपन्न हुई। बैठक में राज्य की वित्तीय स्थिति, राजस्व संग्रहण, बजट प्रावधानों के प्रभावी क्रियान्वयन तथा विभागों द्वारा संचालित योजनाओं एवं विकास कार्यों की प्रगति की विस्तृत समीक्षा की गई।
बजट प्रबंधन एवं राजस्व लक्ष्यों पर विशेष जोर
वित्त विभाग की समीक्षा के दौरान बजट आकलन, बजट प्राक्कलन, राजस्व लक्ष्य, स्थापना व्यय, पूंजीगत प्राप्तियां तथा भारत सरकार से प्राप्त सहायता अनुदान सहित विभिन्न वित्तीय विषयों पर विस्तारपूर्वक चर्चा की गई। बैठक में राज्य के आय-व्यय की समग्र स्थिति पर बिंदुवार चर्चा की गई तथा वित्तीय संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन एवं उनके समुचित उपयोग पर विशेष बल दिया गया। समीक्षा के क्रम में विभाग द्वारा संचालित योजनाओं एवं कार्यक्रमों की वर्तमान प्रगति की विस्तृत जानकारी प्रस्तुत की गई। योजनाओं के क्रियान्वयन की स्थिति, व्यय की गति, लक्ष्य की प्राप्ति तथा संभावित चुनौतियों पर भी विस्तार से विचार-विमर्श किया गया।
खनन राजस्व में झारखंड की स्थिति मजबूत
बैठक में विभिन्न वित्तीय वर्षों के आंकड़ों के आधार पर यह सामने आया कि पड़ोसी राज्यों ओडिशा एवं छत्तीसगढ़ की अपेक्षा झारखंड का खनन राजस्व बेहतर स्थिति में है। संबंधित अधिकारियों द्वारा अवगत कराया गया कि राज्य में खनिज संसाधनों के सुव्यवस्थित प्रबंधन, पारदर्शी नीतिगत व्यवस्था एवं प्रभावी निगरानी तंत्र के परिणामस्वरूप राजस्व संग्रह में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने उक्त उपलब्धि पर संतोष व्यक्त करते हुए निर्देश दिया कि इस सकारात्मक स्थिति को बनाए रखने के साथ-साथ इसे और अधिक सुदृढ़ करने हेतु आवश्यक कदम उठाए जाएं। उन्होंने खनन क्षेत्र में पारदर्शिता सुनिश्चित करने, अवैध खनन पर कठोर नियंत्रण स्थापित करने तथा आधुनिक तकनीकों के उपयोग को प्रोत्साहित करने पर विशेष बल दिया।
पारदर्शिता के लिए बायोमैट्रिक एवं ई-गवर्नेंस प्रणाली पर जोर
मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कार्यों में पारदर्शिता एवं शुद्धता सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बायोमैट्रिक प्रणाली के प्रभावी एवं व्यापक उपयोग पर विशेष बल दिया। उन्होंने निर्देश दिया कि सभी संबंधित कार्यालयों एवं विभागों में उपस्थिति तथा कार्यप्रणाली से जुड़े प्रक्रियाओं में बायोमैट्रिक व्यवस्था को सख्ती से लागू किया जाए, ताकि जवाबदेही सुनिश्चित हो और प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता बढ़े।
विभागों के बीच समन्वय से विकास को मिलेगी गति
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि योजनाओं के क्रियान्वयन में किसी प्रकार की समन्वय की कमी न रहे तथा सभी विभाग निर्धारित लक्ष्यों के अनुरूप कार्य करते हुए एक साझा दृष्टिकोण के साथ आगे बढ़ें। उन्होंने कहा कि समन्वित कार्यप्रणाली से न केवल योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी, बल्कि संसाधनों का बेहतर उपयोग भी सुनिश्चित किया जा सकेगा।
वाणिज्य-कर विभाग की समीक्षा में राजस्व वृद्धि पर फोकस
वाणिज्य-कर विभाग की समीक्षा बैठक के दौरान राज्य में कर संग्रह की वर्तमान स्थिति, जीएसटी अनुपालन की प्रगति, राजस्व वृद्धि के उपायों तथा विभागीय कार्यप्रणाली की व्यापक एवं गहन समीक्षा की गई। बैठक में अधिकारियों द्वारा विभिन्न कर मदों के अंतर्गत प्राप्त राजस्व के आंकड़ों का विश्लेषण प्रस्तुत किया गया, साथ ही कर संग्रह में आ रही चुनौतियों एवं संभावनाओं पर विस्तार से चर्चा की गई। समीक्षा के क्रम में वस्तु एवं सेवा कर (GST), मूल्य वर्धित कर (VAT), प्रोफेशनल टैक्स तथा अन्य राज्य स्तरीय करों के निर्धारण, वसूली, निगरानी एवं प्रवर्तन से संबंधित महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तारपूर्वक विचार-विमर्श किया गया। करदाताओं के बीच अनुपालन बढ़ाने, कर वंचना पर नियंत्रण स्थापित करने तथा तकनीकी साधनों के माध्यम से निगरानी प्रणाली को सुदृढ़ बनाने पर विशेष जोर दिया गया। इसके अतिरिक्त, विभागीय प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी, प्रभावी एवं जवाबदेह बनाने हेतु आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने के निर्देश भी दिए गए।
समीक्षा के क्रम में कर निर्धारण, वसूली, निगरानी एवं प्रवर्तन से संबंधित महत्वपूर्ण पहलुओं पर विशेष ध्यान दिये जाने पर बल दिया गया। करदाताओं के बीच स्वैच्छिक अनुपालन को प्रोत्साहित करने, कर चोरी पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करने तथा आधुनिक तकनीकी साधनों के माध्यम से निगरानी प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ बनाने पर भी बल दिया गया।
पारदर्शिता एवं जवाबदेही बढ़ाने के निर्देश
बैठक में यह भी निर्देश दिया गया कि विभागीय प्रक्रियाओं को अधिक पारदर्शी, सरल एवं जवाबदेह बनाया जाए, ताकि करदाताओं को सुविधा मिल सके और राजस्व संग्रह में निरंतर वृद्धि सुनिश्चित की जा सके। अधिकारियों को निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु सक्रियता से कार्य करने तथा समय-समय पर प्रगति की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए।
उक्त बैठक में विभागीय मंत्री श्री राधा कृष्ण किशोर, मुख्य सचिव श्री अविनाश कुमार, विकास आयुक्त श्री अजय कुमार सिंह, वित्त सचिव श्री प्रशांत कुमार तथा वाणिज्य-कर विभाग के सचिव श्री अमित कुमार सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारीगण उपस्थित थे।
जनता दरबार में तमाड़ अंचल के कर्मचारी की शिकायत पर सख्त चेतावनी
शिकायत लेकर आने वाले लोगों से दुर्व्यवहार किया तो कार्रवाई होगी – जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री
सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों से पहुंचे लोगों की समस्याएं प्राथमिकता से सुनी गयीं
राजस्व संबंधित मामलों के त्वरित निष्पादन का निर्देश
जन्म प्रमाण पत्र एवं आधार बनाने में आ रही समस्याओं के समाधान का निर्देश
जनता दरबार का उद्देश्य आम लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना है – जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री
रांची,25.05.2026 – जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने ये सख्त चेतावनी दिया कि आवेदन लेकर कार्यालय आने वाले लोगों के साथ किसी भी प्रकार का दुर्व्यवहार बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
दरअसल जनता दरबार में एक आवेदक द्वारा शिकायत की गयी कि अंचल कार्यालय का एक कर्मचारी उसके साथ दुर्व्यवहार करता है। इस पर जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कड़ा रुख अपनाते हुए कहा कि आम जनता की शिकायतों का ससमय एवं संवेदनशीलता के साथ निष्पादन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने कहा कि यदि किसी मामले में अग्रेतर कार्रवाई की आवश्यकता हो तो उसकी जानकारी भी आवेदक को अवश्य दी जाए।
सुदूर ग्रामीण क्षेत्रों से पहुंचे लोगों की समस्याएं प्राथमिकता से सुनी गयीं
आज भी जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के जनता दरबार में काफी संख्या में लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचे। जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा सुदूर ग्रामीण इलाकों से आये लोगों की समस्याओं को प्राथमिकता के आधार पर पहले सुना गया तथा संबंधित विभागीय अधिकारियों को त्वरित कार्रवाई के निर्देश दिए गए।
जनता दरबार में राजस्व, सामाजिक सुरक्षा, भूमि विवाद, आधार कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र, पेंशन, राशन कार्ड एवं पेयजल जैसी समस्याओं से संबंधित आवेदन प्राप्त हुए।
राजस्व मामलों के त्वरित निष्पादन का निर्देश
जनता दरबार में आज राजस्व से जुड़े अधिकांश मामले सामने आये। पंजी-2 सुधार, लगान रसीद निर्गत करने, भूमि माफियाओं द्वारा अवैध कब्जा एवं जमीन से संबंधित अन्य शिकायतों पर जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने संबंधित अंचल अधिकारियों एवं राजस्व कर्मियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने निर्देश दिया कि लंबित राजस्व मामलों का समयबद्ध निष्पादन सुनिश्चित किया जाए तथा आम लोगों को कार्यालयों का अनावश्यक चक्कर न लगाना पड़े।
जन्म प्रमाण पत्र एवं आधार बनाने में आ रही समस्याओं के समाधान का निर्देश
अनगड़ा प्रखण्ड से पहुंची कुछ महिलाओं ने जनता दरबार में जन्म प्रमाण पत्र एवं आधार कार्ड बनाने में आ रही परेशानियों की शिकायत की। इस पर जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने संबंधित प्रखण्ड विकास पदाधिकारी को पंचायत भवन में संचालित प्रज्ञा केन्द्र का निरीक्षण करने का निर्देश दिया। इसके साथ ही उन्होंने आधार कार्ड निर्माण हेतु विशेष कैंप आयोजित करने तथा ग्रामीणों को निर्धारित समय पर सुविधा उपलब्ध कराने का निर्देश दिया।
उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने सहायक निदेशक, सामाजिक सुरक्षा को आवश्यक जांच कर सर्वजन पेंशन योजना के पात्र लाभुकों को योजना का लाभ सुनिश्चित कराने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना प्रशासन की प्राथमिकता है।
अन्य शिकायतों पर भी त्वरित कार्रवाई के निर्देश
जनता दरबार में प्राप्त अन्य शिकायतों में राशन कार्ड में नाम जोड़ने, वृद्धावस्था पेंशन स्वीकृति, पेयजल संकट, विद्युत आपूर्ति, सड़क निर्माण, भूमि मापी, आपसी भूमि विवाद एवं स्वास्थ्य सुविधाओं से संबंधित आवेदन शामिल थे।
जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने संबंधित विभागीय अधिकारियों को सभी मामलों में संवेदनशीलता के साथ कार्रवाई करने तथा निर्धारित समय सीमा के भीतर निष्पादन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि जनता दरबार का उद्देश्य आम लोगों की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करना है।
रांची- अंडर 12 आरएसए किड्स प्रीमियर लीग के फाइनल मुकाबले में आरएसए येलो ने आरएसए ग्रीन को शिकस्त देकर फाइनल अपने नाम किया।
टॉस हारकर येलो ने पहले बल्लेबाजी करते हुए 15 ओवर में 8 विकेट पर 177 रन का विशाल स्कोर खड़ा किया।
टीम येलो की ओर से नमिश रंजन ने शानदार बल्लेबाजी करते हुए 52 रन बनाए। वही आरिज ने 21 रन का योगदान दिया। आरएसए ग्रीन की ओर से कप्तान स्नेह सृजन ने 29 रन देकर 2 और कलीम ने 51 रन देकर 2 विकेट लिए।
जवाब में उतरी टीम ग्रीन की ओर से कप्तान स्नेह सृजन ने 34 रन की साहसिक पारी खेली। लेकिन उसके आउट होते ही टीम दवाब में निरंतर विकेट खोती चली गई और आरएसए येलो ने 68 रन से फाइनल मैच अपने कब्जे में कर लिया।
फाइनल मैच के मुख्य अतिथि आजसू पार्टी के मोसिन खान और विशेष अतिथि सिया शंकर सिंह ने विजेता और उपविजेता को ट्रॉफी दिया।
आरएसए ग्रीन के कप्तान स्नेह सृजन को पूरे टूर्नामेंट में शानदार प्रदर्शन के लिए मैन ऑफ द सीरीज और बेस्ट बैट्समेन का अवॉर्ड मिला। वहीं नमिश रंजन फाइनल के मैन ऑफ द मैच बने। अर्णव राज ने बेस्ट बॉलर और मोहम्मद तल्हा ने बेस्ट फील्डर का खिताब जीता।
नागरिक सुविधाओं एवं सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर हुई विस्तृत चर्चा
सरकारी योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने, स्वच्छता एवं महिला सुरक्षा पर विशेष जोर
रांची को आदर्श शहर बनाने में वार्ड पार्षदों की भूमिका अहम-जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री
रांची,25.05.2026 – जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री से रांची शहर के विभिन्न वार्डों के पार्षदों ने मुलाकात कर शहर की मूलभूत समस्याओं, नागरिक सुविधाओं एवं सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर विस्तृत चर्चा की। इस दौरान पार्षदों द्वारा शहर को स्वच्छ, सुरक्षित एवं व्यवस्थित बनाने तथा आमजन तक सरकारी योजनाओं का लाभ सुगमता से पहुंचाने को लेकर ज्ञापन भी सौंपा गया।
जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा कि रांची को एक आदर्श एवं नागरिक सुविधाओं से सुसज्जित शहर बनाने के लिए जनप्रतिनिधियों एवं प्रशासन के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है।
बैठक के दौरान वार्डों में नियमित साफ-सफाई एवं सार्वजनिक स्थलों की स्वच्छता जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा की गयी। जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा कि प्रत्येक वार्ड में स्वच्छता को जनआंदोलन का स्वरूप देने की आवश्यकता है ताकि नागरिकों की सहभागिता से शहर को स्वच्छ एवं सुंदर बनाया जा सके।
महिला सुरक्षा को लेकर जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने सभी वार्ड पार्षदों से अपने-अपने क्षेत्रों में व्यापक जनजागरूकता अभियान चलाने की अपील की। उन्होंने कहा कि महिलाओं एवं किशोरियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सामुदायिक सहभागिता अत्यंत आवश्यक है। वार्ड स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम, विद्यालयों एवं मोहल्लों में संवाद तथा हेल्पलाइन की जानकारी आमजन तक पहुंचाने पर भी जोर दिया गया।
विशेष गहन पुनरीक्षण के तहत कोई भी पात्र मतदाता सूची से वंचित न रहे, इसे लेकर जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने सभी पार्षदों को अपने-अपने क्षेत्रों में लोगों को जागरूक करने तथा बीएलओ के साथ समन्वय स्थापित कर अभियान को सफल बनाने को कहा गया। उन्होंने कहा कि शुद्ध एवं अद्यतन मतदाता सूची लोकतंत्र की मजबूती का आधार है और इसमें जनप्रतिनिधियों की सक्रिय भूमिका आवश्यक है।
बैठक में नशामुक्त समाज के निर्माण को लेकर भी गंभीर चर्चा की गयी। जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा कि युवाओं में बढ़ते नशे के प्रभाव को रोकने के लिए सामाजिक जागरूकता, सामुदायिक निगरानी एवं परिवार स्तर पर संवाद को बढ़ावा देना जरूरी है। उन्होंने वार्ड स्तर पर सकारात्मक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने सभी बिंदुओं पर जिला प्रशासन की ओर से हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।
बैठक में वार्ड पार्षद मोहम्मद सलाउद्दीन के साथ शबाना खान, बबली सोनी, गजाला परवीन, बटर सिंह देओल, प्रदीप कुमार, सुनील यादव, मोहम्मद एहतेशाम एवं मोहम्मद असलम सहित अन्य जनप्रतिनिधि उपस्थित थे।
जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त,रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में बैठक
सौहार्दपूर्ण वातावरण में त्योहार मनाने की अपील
सोशल मीडिया पर प्रशासन की रहेगी कड़ी निगरानी
पर्व के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होंगे : एसएसपी
प्रबुद्ध लोगों की सुझावों पर जिला प्रशासन करेगा कार्य
रांची,25.05.2026 – आगामी ईद-उल-अजहा (बकरीद) पर्व को लेकर (24.05.2026) को जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त,रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता एक बैठक आयोजित की गई। कार्यालय कक्ष में आयोजित बैठक में वरीय पुलिस अधीक्षक, रांची श्री राकेश रंजन, पुलिस अधीक्षक (नगर), पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण), अपर जिला दण्डाधिकारी (विधि-व्यवस्था), अनुमंडल पदाधिकारी सदर, जिला नजारत उप समाहर्ता सहित संबंधित पुलिस-प्रशासनिक पदाधिकारी एवं महावीर मण्डल, सेंट्रल मोहर्रम कमिटी, अंजुमन इस्लामिया, गुरुनानक समिति, पंजाबी हिंदू बिरादरी, राँची के सदस्य उपस्थित थे।
बैठक के दौरान आगामी पर्व को शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सौहार्दपूर्ण वातावरण में सम्पन्न कराने को लेकर विभिन्न पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई।
बैठक में उपस्थित लोगो ने दिये महत्वपूर्ण सुझाव
बैठक में उपस्थित सदस्यों ने बारी-बारी से अपने सुझाव रखे। सदस्यों द्वारा पर्व के दौरान निगरानी, आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों की पहचान कर त्वरित कार्रवाई, साफ-सफाई की समुचित व्यवस्था, बिजली-पानी की निर्बाध आपूर्ति तथा सुरक्षा व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने जैसे महत्वपूर्ण सुझाव दिये गये।
सदस्यों के सुझावों पर जिला प्रशासन करेगा आवश्यक कार्रवाई
जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त,रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा कि सदस्यों द्वारा दिये गये सभी सुझावों पर जिला प्रशासन गंभीरतापूर्वक विचार कर आवश्यक कार्रवाई करेगा। उन्होंने कहा कि पूर्व में भी रांची में सभी पर्व-त्योहार शांति एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में सम्पन्न हुए हैं, जिसमें केन्द्रीय शांति समिति, महावीर मण्डल, केन्द्रीय सरना समिति, रामनवमी श्रृंगार समिति, राँची चैती दुर्गा पूजा समिति, सेंट्रल मोहर्रम कमिटी, अंजुमन इस्लामिया, गुरुनानक समिति अन्य सभी रामनवमी / ईद / सरहुल पर्व आयोजन समितियों एवं अखाड़ा समिति के सदस्यों का सहयोग अत्यंत सराहनीय रहा है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि सभी के सहयोग, समन्वय और सामूहिक प्रयास से आगामी त्योहार भी शांतिपूर्ण एवं सौहार्दपूर्ण वातावरण में सम्पन्न होगा।
शांतिपूर्ण माहौल में त्योहार सम्पन्न कराना हम सबकी जिम्मेवारी – जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त,रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री
जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त,रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा कि रांची को राज्य ही नहीं, बल्कि पूरे देश में सामाजिक सौहार्द और भाईचारे की मिसाल बनाना है। इसके लिए सभी नागरिकों, शांति समिति के सदस्यों तथा प्रशासन को मिलकर अपनी जिम्मेदारी निभानी होगी।
सोशल मीडिया पर प्रशासन की कड़ी निगरानी
जिला दण्डाधिकारी-सह-उपायुक्त,रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा कि आगामी पर्व के दौरान सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जिला प्रशासन की कड़ी निगरानी रहेगी। उन्होंने आम नागरिकों से किसी भी प्रकार की आपत्तिजनक पोस्ट या अफवाहों पर प्रतिक्रिया देने से बचने और जिम्मेदार नागरिक का परिचय देते हुए ऐसी किसी भी सामग्री की जानकारी तुरंत पुलिस-प्रशासन को देने की अपील की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाले तत्वों को चिन्हित कर उनके विरुद्ध कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पर्व के दौरान सुरक्षा के होंगे पुख्ता इंतजाम : एसएसपी
बैठक के दौरान वरीय पुलिस अधीक्षक, रांची श्री राकेश रंजन ने कहा कि बकरीद पर्व को लेकर पुलिस प्रशासन द्वारा व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की जाएगी। उन्होंने सदस्यों से प्रशासन के साथ समन्वय बनाकर सतर्कता के साथ कार्य करने की अपील की। उन्होंने कहा कि सभी संबंधित अधिकारी मैदान स्तर पर सक्रिय रहकर कार्य करें, ताकि किसी भी स्थिति से समय रहते निपटा जा सके। उन्होंने आपराधिक प्रवृत्ति के लोगों को चेतावनी देते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था बिगाड़ने का प्रयास करने वालों के खिलाफ पुलिस सख्त कार्रवाई करने से नहीं चूकेगी।
बैठक के अंत में प्रशासन और सदस्यों ने मिलकर यह संकल्प लिया कि सभी की धार्मिक भावनाओं का ख्याल रखते हुए पर्व आपसी भाईचारे, सद्भाव और शांति के साथ मनाया जाएगा।
23.05.2026 – अपनी मेहनत और लगातार अभ्यास के दम पर रोशनी ठाकुर आज बेली डांस की दुनिया में तेजी से उभरता हुआ नाम बन चुकी हैं। उनका डांस स्टाइल बेहद आकर्षक और ऊर्जा से भरपूर माना जाता है। अपनी खूबसूरती, आत्मविश्वास, मेहनत और शानदार डांसिंग स्टाइल के दम पर उन्होंने डिजिटल प्लेटफॉर्म पर लाखों लोगों का दिल जीता है। सोशल मीडिया पर उनके वीडियो को दर्शकों का भरपूर प्यार मिलता है और यही वजह है कि आज उनके लाखों फॉलोवर्स हैं।
उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि सोशल मीडिया स्टार एल्विश यादव और अभिनेता करण वीर बोहरा जैसे कलाकारों की ओर से भी उन्हें डांस वीडियो के प्रस्ताव मिले। हालांकि रोशनी हमेशा ऐसे प्रोजेक्ट्स का हिस्सा बनना चाहती हैं, जहां उनकी कला को एक नया और अलग मंच मिल सके। कोलकाता (पश्चिम बंगाल) की मूल निवासी रोशनी ठाकुर बचपन से ही डांस के प्रति बेहद जुनूनी थीं। हालांकि वह हमेशा कुछ अलग और हटकर करना चाहती थीं।
इसी सोच ने उन्हें अरेबिक डांस फॉर्म ‘बेली डांस’ की ओर आकर्षित किया। उन्होंने भारत की प्रसिद्ध बेली डांसर मेहर मलिक से भी डांस की बारीकियां सीखीं। बेली डांस को भारत में लोकप्रिय बनाने में मेहर मलिक का बड़ा योगदान माना जाता है। रोशनी ठाकुर को ‘मिस एशियन सुपर मॉडल’ जैसे प्रतिष्ठित खिताब से सम्मानित किया जा चुका है। इसके अलावा उन्हें कई मंचों पर अवॉर्ड भी मिल चुके हैं। अभिनेत्री नेहा धूपिया के हाथों सम्मान प्राप्त करना उनके करियर की खास उपलब्धियों में शामिल है। डांस के साथ-साथ रोशनी अभिनय में भी काफी रुचि रखती हैं। उन्होंने एक्टिंग क्लासेज भी जॉइन की हैं और अभिनय कला में खुद को निखारा है।
बांग्ला इंडस्ट्री में काम करने के बाद रोशनी ने अपने सपनों को नई उड़ान देने के लिए मायानगरी मुंबई का रुख किया। उनका मानना है कि जो लोग भीड़ से अलग रास्ता चुनते हैं, उन्हें संघर्ष जरूर करना पड़ता है, लेकिन अगर इंसान अपनी कला और मेहनत पर विश्वास रखे तो सफलता जरूर मिलती है। उनकी बहुमुखी प्रतिभा उन्हें आने वाले समय में फिल्मों, वेब सीरीज़ और म्यूजिक वीडियो के लिए एक मजबूत चेहरा बनाती है।
रोशनी का सपना है कि बेली डांस को भारत में एक नई ऊंचाई तक पहुंचाया जाए। वह फिल्मों, म्यूजिक वीडियो और आइटम सॉन्ग्स में ऐसा नया डांस रूप प्रस्तुत करना चाहती हैं, जो दर्शकों को कुछ अलग अनुभव दे।
फिलवक्त रोशनी ठाकुर लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुकी हैं। वह लगातार अपनी कला को निखारने में जुटी हैं और आने वाले समय में मनोरंजन जगत में अपनी एक विशिष्ट पहचान बनाने की तैयारी कर रही हैं।
नई दिल्ली – ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (ईओडीबी) यानी कारोबारी सुगमता को बनाए रखने और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला में उभरती चुनौतियों के बीच निर्बाध कारोबारी परिचालन सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार ने एक निर्णायक कदम उठाया है। इसके तहत, एग्जिम समुदाय द्वारा उठाई गई चिंताओं को दूर करने के लिए सरकार ने एक समन्वित “समग्र-सरकारी” प्रतिक्रिया शुरू की है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल और केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने ‘ऑल इंडिया लिक्विड बल्क इम्पोर्टर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन’ के प्रतिनिधियों के साथ एक उच्च-स्तरीय बैठक की। इस बैठक का उद्देश्य मौजूदा स्थिति की समीक्षा करना और कार्गो की सुचारू व त्वरित आवाजाही में आने वाली परिचालन संबंधी बाधाओं को दूर करने के लिए तत्काल और दीर्घकालिक उपायों पर चर्चा करना था।
इस बैठक का मुख्य जोर कंटेनरों की आवाजाही को बेहतर बनाने पर था, क्योंकि खाड़ी देशों की ओर जाने वाले कंटेनरों का रास्ता बदलकर उन्हें जवाहरलाल नेहरू पत्तन प्राधिकरण (जेएनपीए) की ओर मोड़ने से बंदरगाह और लॉजिस्टिक्स के बुनियादी ढांचे पर अतिरिक्त दबाव पड़ रहा है।
हालात पर तेजी से कार्रवाई करते हुए, जेएनपीए ने टर्मिनलों पर दबाव कम करने और कार्गो को जल्दी से निकालने के लिए कई तरह के संचालन उपाय लागू किए। कंटेनरों को रेलगाड़ियों के जरिए पास के उन कंटेनर फ्रेट स्टेशनों (सीएफएस) तक भी भेजा गया, जहां रेलवे साइडिंग की सुविधा मौजूद थी; साथ ही, प्रोसेसिंग में लगने वाले समय को कम करने के लिए एक साथ दो कंटेनरों की स्कैनिंग की सुविधा भी शुरू की गई।
केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री (एमओपीएसडब्ल्यू) श्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “मैंने अपने वरिष्ठ सहयोगी, केंद्रीय मंत्री श्री पीयूष गोयल जी के साथ एक अत्यंत सार्थक बैठक की। इस बैठक का उद्देश्य वैश्विक परिस्थितियों से उत्पन्न चुनौतियों का समाधान करना और व्यापारिक समुदाय के लिए सुगम व्यापार सुविधा सुनिश्चित करना था। ‘समग्र सरकार’ दृष्टिकोण से निर्देशित होकर, हम ‘आत्मनिर्भर भारत’ और ‘विकसित भारत’ की परिकल्पना के अनुरूप, ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ (ईओडीबी) को बनाए रखने, आपूर्ति श्रृंखला की सुदृढ़ता को मजबूत करने और एक विश्व-स्तरीय प्रतिस्पर्धी समुद्री पारिस्थितिकी तंत्र निर्मित करने हेतु, बंदरगाहों और लॉजिस्टिक्स प्रणालियों में समन्वित एवं सक्रिय उपाय अपना रहे हैं।”
व्यापार से जुड़े लोगों को राहत देने के लिए, इंटर-टर्मिनल रेलवे हैंडलिंग ऑपरेशन (आईटीआरएचओ) शुल्क और परिवहन के तरीके में बदलाव के शुल्क माफ कर दिए गए। पोर्ट टर्मिनलों ने भी, हर मामले की जरूरत के हिसाब से, जमीन के किराए पर छूट और रियायतें दीं। खाली ट्रेलरों के लिए सभी टर्मिनलों पर खास ग्रीन चैनल बनाए गए, ताकि काम तेजी से हो सके। एक और बड़ी पहल के तहत, जाने-माने सीएफएस ऑपरेटरों ने मिलकर लगभग 100 ट्रेलर जुटाए, ताकि कंटेनरों के पूरे ढेर को उठाया जा सके; इससे भीड़भाड़ वाले यार्डों में लंबे समय से पड़े और दबे हुए कंटेनरों को बाहर निकालना मुमकिन हो पाया। इन मिलकर किए गए प्रयासों से यार्ड प्रबंधन में काफी सुधार हुआ है, और टर्मिनलों पर पड़े पुराने कंटेनरों की संख्या में कमी आई है।
सर्बानंद सोनोवाल ने आगे कहा, “माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व के अनुरूप, सरकार एक मज़बूत, कुशल और भविष्य के लिए तैयार व्यापार और लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। हम एग्जिम समुदाय के हितों की रक्षा के लिए त्वरित और समन्वित कदम उठाने के लिए दृढ़ संकल्पित हैं। पीएम मोदी जी द्वारा परिकल्पित ‘समग्र सरकार’ दृष्टिकोण से निर्देशित होकर, हम आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करने, अपने व्यापारिक हितों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाए रखने और अपनी अर्थव्यवस्था की ईओडीबी (कारोबारी सुगमता) को बनाए रखने की दिशा में काम कर रहे हैं।”
लंबे समय तक टिके रहने की रणनीति के तहत, जेएनपीए ने लॉजिस्टिक्स की तैयारी और भविष्य में कार्गो संभालने की क्षमताओं को मजबूत करने के लिए एक विस्तृत रोडमैप भी तैयार किया है। इन उपायों में सीएफएस ऑपरेटरों और ट्रांसपोर्टरों द्वारा चालकों की उपलब्धता बढ़ाने के लिए प्रयास तेज करना, रेलवे के जरिए कार्गो की निकासी में बढ़ोतरी और प्रशिक्षित ट्रेलर ड्राइवरों का एक बड़ा समूह तैयार करने के लिए मोटर ड्राइविंग ट्रेनिंग स्कूलों के साथ जुड़ना शामिल है। पत्तन प्राधिकरण, काम-काज में स्थिरता और चालकों के आराम को बेहतर बनाने के लिए धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने की भी योजना बना रही है। इसके अलावा, टर्मिनल गेट पर आवाजाही को बेहतर बनाने के लिए एक ‘ट्रक अपॉइंटमेंट सिस्टम’ शुरू किया जा रहा है, जबकि टर्मिनलों को बढ़ते कार्गो की मात्रा को संभालने के लिए अतिरिक्त हैंडलिंग उपकरण लगाने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है।
नई दिल्ली – राष्ट्रीय राजमार्ग अवसंरचना के विकास के लिए तकनीकी विशेषज्ञता को मजबूत करने के लिए भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) ने हाल ही में ओस्लो में नॉर्वे के जियोटेक्निकल इंस्टीट्यूट (एनजीआई) के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। यह सहयोग भारत के राष्ट्रीय राजमार्गों को वैश्विक मानकों के अनुरूप विकसित और रखरखाव करने के प्रति एनएचएआई की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। एनएचएआई भू-तकनीकी अभियांत्रिकी और प्राकृतिक आपदाओं के निवारण में एनजीआई की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त विशेषज्ञता का लाभ उठाएगा। भूगर्भीय रूप से संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण भूभागों में अभियांत्रिकी क्षमताओं को बढ़ावा देने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।
इस समझौता ज्ञापन का उद्देश्य सुरंग निर्माण, ढलान स्थिरता विश्लेषण, ढलानों की निगरानी और संस्थागत क्षमता निर्माण के क्षेत्रों में महत्वपूर्ण अवसंरचना परियोजनाओं की योजना, डिजाइन, मूल्यांकन और निगरानी में सहयोग हेतु उन्नत अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञता का लाभ उठाना है। इस समझौता ज्ञापन के तहत, एनजीआई विभिन्न परामर्श सेवाएं प्रदान करेगा इनमें सुरंग परियोजनाओं के लिए स्थल का विशिष्टीकरण, आगामी सुरंग परियोजनाओं के लिए व्यवहार्यता अध्ययन और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करना, परिचालन सुरंगों का संरचनात्मक मूल्यांकन और सुरक्षा लेखापरीक्षा, साथ ही संभावित खतरों की पहचान करने और उपयुक्त शमन उपायों की सिफारिश करने के लिए उन्नत ढलान स्थिरता मूल्यांकन शामिल हैं। इस सहयोग में ढलानों के लिए इनसार डेटा का विश्लेषण और व्याख्या तथा अवसंरचना सुरक्षा में सुधार लाने के उद्देश्य से प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों का विकास भी शामिल है।
समझौता ज्ञापन में इसके अतिरिक्त, संस्थागत क्षमता निर्माण और ज्ञान आदान-प्रदान पर बल दिया गया है। दोनों संगठन प्राकृतिक आपदाओं को कम करने से संबंधित अनुसंधान और विकास पहलों पर सहयोग करेंगे। संयुक्त कार्यशालाओं, सेमिनारों, तकनीकी प्रशिक्षण कार्यक्रमों और विशेष तकनीकी साहित्य के प्रकाशन के माध्यम से राजमार्ग क्षेत्र की तकनीकी क्षमताओं को बढ़ाया जाएगा।
दोनों संगठन पहचान किये गये क्षेत्रों में मिलकर काम करने का प्रयास करेंगे। यह समझौता परियोजना-दर-परियोजना आधार पर लागू होगा, इससे प्रत्येक पक्ष को आवश्यकतानुसार अन्य संगठनों के साथ स्वतंत्र रूप से सहयोग करने की सुविधा मिलेगी। यह समझौता ज्ञापन पांच वर्षों की अवधि के लिए वैध रहेगा।
एनएचएआई और एनजीआई के बीच सहयोग से सुरक्षित, टिकाऊ और विश्व स्तरीय राष्ट्रीय राजमार्ग अवसंरचना के विकास में तकनीकी क्षमताओं को मजबूती मिलेगी। यह साझेदारी अवसंरचना विकास, प्रौद्योगिकी आदान-प्रदान और टिकाऊ इंजीनियरिंग पद्धतियों के क्षेत्र में भारत और नॉर्वे के बीच बढ़ते सहयोग को भी दर्शाती है। इससे द्विपक्षीय संबंध और गहरे होंगे और दीर्घकालिक संस्थागत सहयोग को बढ़ावा मिलेगा।
नई दिल्ली – केंद्रीय भारी उद्योग और इस्पात मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने आज एचएमटी मशीन टूल्स लिमिटेड (एचएमटी), कलामासेरी का व्यापक दौरा किया। इस दौरान उन्होंने संयंत्र की विनिर्माण क्षमताओं की समीक्षा की, दक्षिण अफ्रीका के लिए निर्यात खेप को रवाना किया, एचएमटी, एफसीआरआई और इंस्ट्रूमेंटेशन लिमिटेड (आईएल) के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठकें कीं तथा श्रमिक संघ के प्रतिनिधियों तथा कर्मचारियों के साथ बातचीत की।
इस दौरे की विशेष बात एचएमटी कलामासेरी में विनिर्मित एनएच सीरीज़ की एक मशीन को दक्षिण अफ्रीका निर्यात करने के लिए रवाना करना था। यह भारत की स्वदेशी इंजीनियरिंग और विनिर्माण क्षमताओं पर दुनिया के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है। अधिकारियों ने मंत्री को बताया कि एचएमटी को लगातार सटीक इंजीनियरिंग वाले मशीन टूल्स और औद्योगिक प्रणाली (इंडस्ट्रियल सिस्टम) के लिए अंतरराष्ट्रीय निर्यात ऑर्डर मिल रहे हैं।
इस अवसर पर एच.डी. कुमारस्वामी ने कहा कि, “एचएमटी में विनिर्मित स्वदेशी मशीन टूल्स का अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में निर्यात भारत के विनिर्माण क्षेत्र के लिए एक गौरवपूर्ण क्षण है। यह भारतीय इंजीनियरिंग की उत्कृष्टता और तकनीकी क्षमता के प्रति बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाता है।”
मंत्री ने संयंत्र के दौरे के दौरान, मशीन टूल अनुभाग, फाउंड्री डिवीज़न और इसके सामरिक विनिर्माण अनुभागों में चल रहे कार्यों और बुनियादी ढांचे की समीक्षा की। उन्होंने सीएनसी सिस्टम, सटीक मशीन टूल्स, विशेष इंजीनियरिंग उपकरणों और भारतीय नौसेना के प्लेटफ़ॉर्म के लिए स्वदेश में विकसित सोनार डायरेक्टिंग गियर सिस्टम के विनिर्माण, असेंबली और परीक्षण प्रक्रियाओं का भी अवलोकन किया।
मंत्री जी को एचएमटी के रक्षा, रेलवे, एयरोस्पेस, भारी इंजीनियरिंग और उन्नत विनिर्माण सहित सामरिक क्षेत्रों में दिए गए योगदान के बारे में जानकारी दी गई। उन्होंने नौसेना और रक्षा कार्यों के लिए विकसित स्वदेशी प्रणालियों की समीक्षा भी की। केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने कहा, “एचएमटी जैसे संस्थान भारत के सार्वजनिक क्षेत्र के इंजीनियरिंग परितंत्र की ताकत को दर्शाते हैं। यहां की तकनीकी विशेषज्ञता, विनिर्माण क्षमता और कर्मचारियों का समर्पण रणनीतिक आत्मनिर्भरता की दिशा में लगातार महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।”
बाद में, केंद्रीय मंत्री ने एचएमटी मशीन टूल्स लिमिटेड, फ्लूइड कंट्रोल रिसर्च इंस्टीट्यूट (एफसीआरआई) और इंस्ट्रूमेंटेशन लिमिटेड (आईएल) की शीर्ष टीमों के साथ विस्तार से समीक्षा बैठकें कीं। इन चर्चाओं का मुख्य केंद्र परिचालन निष्पादन, प्रौद्योगिकी उन्नयन, विनिर्माण क्षमताएं, आधुनिकीकरण, नवाचार-आधारित विकास और सामरिक क्षेत्रों में भागीदारी बढ़ाना रहा।
बैठकों में स्वदेशी विनिर्माण क्षमता को सुदृढ़ करने, परिचालन दक्षता में सुधार लाने और वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने के भविष्य के अवसरों की भी समीक्षा की गई।
इस दौरान, एच.डी. कुमारस्वामी ने एचएमटी के विभिन्न श्रमिक संघों और कर्मचारी संघों के प्रतिनिधियों के साथ बातचीत की। उन्होंने कर्मचारियों के कल्याण, आधुनिकीकरण और संस्थान के भविष्य के विकास से संबंधित उनकी चिंताओं, सुझावों और अनुरोधों को धैर्यपूर्वक सुना।
कर्मचारियों को पूर्ण सहयोग का आश्वासन देते हुए मंत्री ने कहा: “सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों के विकास और सफलता के लिए श्रमिकों और कर्मचारियों का कल्याण सर्वोपरि है। भारत के औद्योगिक विकास में उनका अमूल्य योगदान है।”
पीएसयू को मज़बूत करने के प्रति केंद्र की प्रतिबद्धता पर ज़ोर देते हुए केंद्रीय मंत्री एच.डी. कुमारस्वामी ने कहा: “माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में, पूरे देश में पीएसयू को मज़बूत करने, बुनियादी ढांचे का आधुनिकीकरण करने, प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने और विकास, नवाचार तथा रोज़गार के अधिक अवसर सृजित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।”
इस दौरे से सामरिक विनिर्माण को मज़बूत करने, स्वदेशी तकनीकी क्षमताओं को बढ़ावा देने और ‘आत्मनिर्भर भारत’ तथा ‘विकसित भारत 2047’ के विज़न को आगे बढ़ाने के प्रति भारत सरकार की प्रतिबद्धता को बल मिला है।
नई दिल्ली – केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह आज नई दिल्ली में सीमा सुरक्षा बल के अलंकरण समारोह और रुस्तमजी स्मृति व्याख्यान में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर निदेशक, आसूचना ब्यूरो, सचिव, सीमा प्रबंधन और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के महानिदेशक सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
अपने संबोधन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि यह अलंकरण समारोह बल की अडिग निष्ठा, कतर्व्यपरायणता और राष्ट्र के प्रति पूर्ण समर्पण का प्रतीक है। 1965 के युद्ध के बाद सीमाओं की सुरक्षा व्यवस्था में पाए गए गैप्स और कमियों का गहन अध्ययन करने के बाद एक ऐसे बल की आवश्यकता महसूस की गई जो शांति काल में भी हमारी सीमाओं की सुरक्षा करे। उस समय पद्म विभूषण श्री के एफ रुस्तम जी के नेतृत्व में बीएसएफ का गठन हुआ और तब से इस बल ने पूरे देश की सीमाओं की सुरक्षा को सुनिश्चित किया है। उन्होंने कहा कि श्री रुस्तम जी ने सीमा सुरक्षा बल की जो नींव डाली उस पर सुरक्षा के क्षेत्र में एक भव्य इमारत बनाने का काम आज बीएसएफ ने किया है जो देश के लिए गौरव की बात है।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने बीएसएफ की महिला टीम द्वारा माउंट एवरेस्ट पर सफल आरोहण करने की ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए दल के सभी सदस्यों और सीमा सुरक्षा बल के सभी जवानों को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि एवरेस्ट की चोटी पर जब वंदे मातरम गाया जाता है तो यहां दिल्ली में बैठकर भी हमारे मन में बहुत आनंद और संतोष की अनुभूति होती है। गृह मंत्री ने कहा कि सीमा सुरक्षा बल की वीरांगनाओं को विश्व की सबसे ऊंची चोटी पर वंदे मातरम का गान करने का सौभाग्य मिला है।
श्री अमित शाह ने कहा कि सीमा सुरक्षा के क्षेत्र में आज कई प्रकार की नई चुनौतियां हमारे सामने खड़ी हैं। अवैध घुसपैठ, नारकोटिक्स की तस्करी, गौ तस्करी, नकली करेंसी, संगठित अपराध, ड्रोन से हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी सहित कई प्रकार की चुनौतियां सीमा सुरक्षा बल के सामने हैं, लेकिन बीएसएफ ने लगातार इन चुनौतियों से निपटने का सुनियोजित प्रयास किया है। श्री शाह ने कहा कि बीएसएफ ने अपने पास उपलब्ध संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग करते हुए इन सभी चुनौतियों के बखूबी सामना कर देश की सुरक्षा करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में इस बल की भूमिका को और अधिक समन्वित और व्यापक करना होगा।
श्री अमित शाह ने कहा कि अब हम केवल पारंपरिक तरीके से सीमाओं की सुरक्षा नहीं कर सकते। हमें राज्य पुलिस, केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPFs), अन्य सशस्त्र बल, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), खुफिया एजेंसियों और राज्य प्रशासन के साथ मिलकर सुरक्षा ग्रिड को मजबूत करना पड़ेगा तभी हम इन नई चुनौतियों का सामना कर सकेंगे। हमें सीमा सुरक्षा को एक आइसोलेटेड ज़िम्मेदारी के रूप में देखने की जगह एक टेरिटोरियल रिस्पांसिबिलिटी के रूप में देखना होगा तभी हम इन सभी चुनौतियों को पार करने में सफल होंगे। श्री शाह ने यह भी कहा कि हमें आने वाले खतरों को भी देखना पड़ेगा। हमारी जिम्मेदारी है कि सीमापार से घुसपैठ द्वारा कृत्रिम तरीके से जनसांख्यिकी में किए जा रहे बदलाव को रोकने के लिए भी हमें सतर्क और सजग रहना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि नार्कोटिक्स और फेक करंसी के हमले से हमारे अर्थ तंत्र को खोखला करने के प्रयास के प्रति भी हमें सतर्क रहना होगा। साइबर चुनौतियां, हाइब्रिड वॉरफेयर और ड्रोन के खतरों के लिए एक नई रणनीति के साथ हमें काम करना होगा।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि सियाचिन और कश्मीर की बर्फीली पहाड़ियां, कुपवाड़ा, केरन और उरी जैसे दुर्गम क्षेत्र, राजस्थान का रण, कच्छ का छोटा रण, सरक्रीक के दलदली नाले, सुंदरवन के घने जंगल, त्रिपुरा, मेघालय और मिजोरम की कठिन पूर्वी सीमाएं और ब्रह्मपुत्र से जुड़े कठिन संवेदनशील नदी क्षेत्रों के बीच सीमा सुरक्षा बल डटा हुआ है। इसी कारण 1965 में महज 25 बटालियनों से अल्प संसाधनों के साथ शुरू हुआ सीमा सुरक्षा बल, आज 2,70,000 की नफरी के साथ विश्व का सबसे बड़ा सीमा सुरक्षा बल बन गया है।
श्री अमित शाह ने कहा कि 2014 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद हमारी रक्षा नीति और सीमाओं की सुरक्षा के बारे में हमारे नजरिए में आमूलचूल परिवर्तन आया है। पाकिस्तान द्वारा किए गए तीनों हमलों का हमने जवाब दिया है, चाहे उरी हो, पुलवामा हो या पहलगाम हो। हमने सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से पाकिस्तान के अंदर उनके मर्मस्थान पर प्रहार कर मुंहतोड़ जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि वह ज़माना गया कि आतंकी हमलों के बाद वार्ताएं होती थीं, नक्सलवादी बेखौफ होकर जनसंहार करते थे और सरकारें सिर्फ़ वार्ता करती थीं। हमने अपने सुरक्षा परिदृश्य को भारत के संविधान की स्पिरिट के साथ मज़बूत बनाने का काम किया है। यह एक प्रकार से नए Defence Doctrine की घोषणा है और इसमें सीमा सुरक्षा बल का बहुत बड़ा योगदान रहा है।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि भारत सरकार और गृह मंत्रालय, सीमा को एक स्मार्ट बॉर्डर बनाने में सीमा सुरक्षा बल को तकनीकी सहायता प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि बीएसएफ़ द्वारा किए जा रहे कई प्रयोगों के साथ एक मजबूत सुरक्षा ग्रिड बनाने की दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं। आने वाले 1 साल के अंदर ही स्मार्ट बॉर्डर कंसेप्ट के साथ सीमा सुरक्षा की सुरक्षा में सभी प्रकार की तकनीक को समाहित कर एक अभेद्य बॉर्डर का सुरक्षा ग्रिड बनाने का काम आगे बढ़ रहा है। गृह मंत्रालय बहुत जल्दी, ड्रोन, रडार, आधुनिक कैमरा और अन्य नई तकनीक के साथ एक स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट को देश के सामने लेकर आएगा। गृह मंत्री ने कहा कि इस शुरूआत के बाद सीमा सुरक्षा बल का काम काफी सरल भी हो जाएगा और इसे मजबूती भी मिलेगी।
श्री अमित शाह ने कहा कि सीमा सुरक्षा बल की स्थापना के 60वें साल में ही हम स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट की शुरूआत कर बांग्लादेश और पाकिस्तान की पूरी सीमा को अभेद्य बना देंगे जिससे बीएसएफ़ को बहुत बड़ी तकनीकी सहायता उपलब्ध हो जाएगी। इससे पराक्रम, शौर्य, समर्पण, देशभक्ति के साथ-साथ एक मजबूत तकनीकी सपोर्ट भी बल के पास उपलब्ध होगा जिससे हम दोनों सीमाओं को और अधिक सुरक्षित कर देंगे।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में भारत सरकार ने तय किया है कि हम न केवल घुसपैठ को रोकेंगे, बल्कि एक-एक घुसपैठिए को चुन-चुन कर देश से बाहर निकाल देंगे और अपनी जनसांख्यिकी में कृत्रिम बदलाव नहीं होने देंगे। सीमा सुरक्षा बल को जनसांख्यिकी में बदलाव करने के षड्यंत्र को रोकना होगा। उन्होंने कहा कि अब त्रिपुरा, असम और पश्चिम बंगाल में ऐसी सरकारें हैं जो नीतिगत रूप से मानती है कि देश में घुसपैठ नहीं होनी चाहिए। यह सीमा सुरक्षा बल की जिम्मेदारी है कि हम न केवल सीमाओं की सुरक्षा करें बल्कि गांव के पटवारी, थाने, डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर, DDO, जिला पुलिस अधीक्षक के साथ हमारा संवाद होना चाहिए। कौन नया घुसपैठिया आया है, उसके आने का क्या रूट है, कहां से तस्करी, गौ तस्करी हो रही है? इन सभी रूट्स को चुन-चुन कर बंद करना और समाप्त करना बीएसएफ की जिम्मेदारी है। इनसे मिली हुई सारी सूचना का उपयोग कर घुसपैठियों को निकालने और रोकने की एक सुचारू व्यवस्था बनानी चाहिए। गृह मंत्री ने कहा कि अब समय आ गया है कि सालों से बेरोक-टोक चल रही घुसपैठ को हमें रोकना होगा।
श्री अमित शाह ने कहा कि भारत सरकार के अडिग और दृढ़ निश्चय के कारण पांच दशक पुरानी नक्सलवाद की समस्या आज समाप्त हो गई है और भारत नक्सल मुक्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि हमारे जवानों ने यह कर दिखाया है। गृह मंत्री ने कहा कि समस्या को बनाए रखना या कंट्रोल में रखना सुरक्षा का दृष्टिकोण नहीं हो सकता, बल्कि समस्या को समूल समाप्त करना ही सुरक्षा का दृष्टिकोण हो सकता है। उन्होंने कहा कि अब घुसपैठ के लिए भी बीएसएफ को इसी दृढ़ता के साथ आगे बढ़ना चाहिए।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि वाइब्रेंट विलेजेज-1 और वाइब्रेंट विलेजेज -2 सीमा सुरक्षा बल के सहयोग से एक लोकतांत्रिक तरीके से चलाया गया विकास कार्यक्रम है। बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र को 15 किलोमीटर से बढ़ाकर हमने 50 किलोमीटर किया है और पश्चिम बंगाल सरकार को जो भूमि देनी थी उसका निर्णय भी हो चुका है।
श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी ने High-Powered Demography Mission की घोषणा की है और जल्दी ही इसकी कमेटी बना कर काम शुरू हो जाएगा। हमें दोनों देशों की सीमाओं पर आने वाले दिनों में एक मजबूत सुरक्षा ग्रिड बनानी होगी और इसके लिए एक बहुत बड़ा अभियान भी चलाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि बीएसएफ का 60वां वर्ष एक स्मार्ट बॉर्डर बनाने और बीएसएफ के जवानों के कल्याण का भी वर्ष है। श्री शाह ने कहा कि दो महीने के अंदर ही नरेन्द्र मोदी सरकार बीएसएफ और सभी सीएपीएफ के जवानों के कल्याण के लिए एक बहुत बड़ा कार्यक्रम लाएगी। इसके बाद हमारे जवान सुनिश्चित होकर सीमाओं की सुरक्षा कर सकेंगे और उनके परिवारजनों की चिंता भारत सरकार का गृह मंत्रालय करेगा।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नारकोटिक्स के खिलाफ भी हम देश में एक बहुत बड़ा अभियान चलाने जा रहे हैं और इसमें भी सीमा सुरक्षा बल की बहुत अहम भूमिका होगी। बीएसएफ़ की सतर्कता से दोनों तरफ की सूचनाएं एकत्रित कर नारकोटिक्स के खिलाफ लड़ाई में भी इस बल का बहुत बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा कि आने वाले तीन-चार साल सीमा सुरक्षा में संपूर्ण बदलाव के वर्ष होंगे। उन्होंने कहा कि तकनीकी सहायता मिलने से जवानों की जिम्मेदारी कम नहीं होती, बल्कि बढ़ती है। श्री शाह ने कहा कि तकनीक को आत्मसात कर, स्थानीय लोगों से संवाद प्रस्थापित कर, स्थानीय प्रशासन से तालमेल बढ़ाते हुए हमें इस देश को घुसपैठ से मुक्त करने का लक्ष्य हासिल करना है।
प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कल आयोजित मंत्रिपरिषद की सफल बैठक के संबंध में आज विस्तृत जानकारी साझा की।
प्रधानमंत्री ने कहा कि परिषद ने ‘जीवन में सुगमता’ और ‘कारोबार में सुगमता’ को बढ़ावा देने से संबंधित महत्वपूर्ण दृष्टिकोणों और सर्वोत्तम कार्य-प्रणालियों पर विचार-विमर्श किया। श्री मोदी ने जानकारी दी कि चर्चा का मुख्य केंद्र बिंदु विकसित भारत के साझा स्वप्न को साकार करने के लिए प्रभावी ढंग से सुधारों को कैसे आगे बढ़ाया जाए, इस विषय पर केंद्रित था।
प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट में लिखा :
“कल मंत्रिपरिषद की एक सार्थक बैठक हुई। हमने ‘जीवन में सुगमता’ और ‘कारोबार में सुगमता’ को बढ़ावा देने से संबंधित दृष्टिकोणों और सर्वोत्तम कार्य-प्रणालियों का आदान-प्रदान किया और ‘विकसित भारत’ के हमारे साझा स्वप्न को साकार करने के लिए भविष्य में सुधार के तरीकों पर चर्चा की।”
नई दिल्ली – भारत के अपतटीय प्रतिष्ठानों और महत्वपूर्ण ऊर्जा अवसंरचना के लिए सुरक्षा ढांचे की समीक्षा और उसे मजबूत करने के उद्देश्य से भारतीय तटरक्षक बल के महानिदेशक परमेश शिवमणि की अध्यक्षता में 21 मई, 2026 को अहमदाबाद में 138वीं अपतटीय सुरक्षा समन्वय समिति (ओएससीसी) की बैठक आयोजित की गई।
बैठक में समुद्री क्षेत्र की जागरूकता बढ़ाने, अंतर-एजेंसी समन्वय को मजबूत करने, निगरानी क्षमताओं को बढ़ाने और उभरती अपतटीय सुरक्षा चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए संयुक्त प्रतिक्रिया तंत्र में सुधार करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। बैठक के दौरान, बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा परिवेश, मानवरहित और ड्रोन-सम्बंधी खतरों सहित आधुनिक युद्ध के पहलूओं और अंडमान और निकोबार क्षेत्र में विस्तारित अपतटीय अन्वेषण गतिविधियों पर विचार-विमर्श किया गया।
भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी), भारतीय नौसेना, भारतीय वायु सेना, गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, महानिदेशक हाइड्रोग्राफर, महानिदेशक जहाजरानी, खुफिया ब्यूरो, तेल और प्राकृतिक गैस आयोग और राज्य पुलिस बलों के प्रतिनिधियों ने इस बैठक में भाग लिया।
भारत की अपतटीय संपत्तियों और महत्वपूर्ण समुद्री बुनियादी ढांचे की मजबूत सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रति सभी हितधारकों की प्रतिबद्धता की पुष्टि भी इस बैठक में की गई।
नई दिल्ली – राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) की गुवाहाटी क्षेत्रीय इकाई ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में कल और इस सप्ताह की शुरुआत में संचालित किए गए दो बड़े अभियानों में लगभग 60,000 किलोग्राम तस्करी की गई विदेशी सुपारी जब्त की है।
डीआरआई ने विशिष्ट खुफिया जानकारी के आधार पर मिजोरम और असम में अभियान संचालित करते हुए ये ज़ब्ती की। शुरुआती जांच में पता चला कि इस विदेशी सूखी सुपारी की म्यांमा-मिजोरम सीमा के रास्ते म्यांमा से भारत में तस्करी की जा रही थी। इस अभियान में डीआरआई को असम राइफल्स की 38वीं बटालियन का सहयोग मिला। अब तक इन अभियानों में 5 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।
पड़ोसी देश से सुपारी की अवैध आवक घरेलू सुपारी उत्पादकों को गंभीर आर्थिक नुकसान पहुंचा रही है और सीमावर्ती क्षेत्रों में आर्थिक सुरक्षा को कमजोर कर रही है।
नई दिल्ली – आंध्र प्रदेश के राज्यपाल श्री एस. अब्दुल नज़ीर ने 18 मई, 2026 को युवा संगम कार्यक्रम के अंतर्गत भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान तिरुपति का दौरा कर रहे महाराष्ट्र के युवा प्रतिनिधिमंडल से बातचीत की।
पुणे स्थित भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान- आईआईएसईआर के नेतृत्व में यह प्रतिनिधिमंडल देश भर में अंतर्राज्यीय समझ और युवाओं के बीच जुड़ाव बढ़ाने के उद्देश्य से शैक्षणिक, सांस्कृतिक और अनुभवकारी गतिविधियों में भाग ले रहा है।
श्री एस. अब्दुल नज़ीर ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भागीदारी के महत्व का उल्लेख किया और भारत की विविधता में एकता मजबूत बनाने में सांस्कृतिक समझ और अंतर्राज्यीय सहयोग की भूमिका रेखांकित की। उन्होंने कहा कि युवा संगम जैसी पहल युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों, संस्कृतियों और परंपराओं से जुड़ने के सार्थक अवसर प्रदान करती हैं, जिससे भावनात्मक एकीकरण और राष्ट्रीय सद्भाव को बढ़ावा मिलता है।
राज्यपाल महोदय ने लोगों के बीच आपसी संपर्क बढाने और विद्यार्थियों को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विकास उपलब्धियों का प्रत्यक्ष अनुभव प्रदान करने में युवा संगम की भूमिका की सराहना की। उन्होंने प्रतिनिधियों को राष्ट्रीय एकता के दूत के रूप में आपसी सम्मान, ज्ञान और सहयोग की भावना आगे बढ़ाने को प्रोत्साहित किया।
प्रतिनिधिमंडल ने यात्रा के दौरान, आईआईटी तिरुपति के संकाय सदस्यों, शोधकर्ताओं, नवोन्मेषकों और विद्यार्थियों के साथ बातचीत की और अत्याधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान, अकादमिक उत्कृष्टता और तकनीकी प्रगति से अवगत हुए। सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सामुदायिक सहभागिता गतिविधियों द्वारा उन्हें दक्षिण भारत की जीवंत सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं का भी अनुभव प्राप्त हुआ।
शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा आरंभ युवा संगम का छठा चरण गहन शैक्षिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान से राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक सद्भाव और भावनात्मक एकीकरण सुदृढ बनाने का प्रयास है। इस पहल में 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिभागी साथ जुड़े हैं, जिससे भारत की विविधता, नवाचार पारितंत्र और राष्ट्र निर्माण की साझा आकांक्षाओं की गहरी समझ विकसित करने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।
नई दिल्ली – भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 के तहत, दूरसंचार विभाग ने सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) में सहयोग के लिए ब्रिक्स कार्य समूह की दूसरी बैठक का सफलतापूर्वक आयोजन और उसकी अध्यक्षता की। यह बैठक 21 मई 2026 को वर्चुअल माध्यम से आयोजित की गई। बैठक में डिजिटल प्रौद्योगिकियों, भविष्य के नेटवर्क, नवाचार ईकोसिस्टम, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) और सतत एवं समावेशी सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए क्षमता निर्माण में सहयोग को मजबूत करने के प्रति ब्रिक्स देशों की साझा प्रतिबद्धता दिखाई दी।
इस बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों के प्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने पर विचार-विमर्श किया। भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के मुख्य विषय – “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण” – और ICT ट्रैक के विषय – “लचीले भविष्य के लिए नवाचार, सहयोग और परिवर्तन (ICT)” – के तहत आयोजित इस बैठक में डिजिटल विभाजन को पाटने, नवाचार-आधारित विकास को बढ़ावा देने, डिजिटल लचीलेपन को बढ़ाने और उभरती अर्थव्यवस्थाओं में किफायती और सार्थक कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए सहयोगात्मक दृष्टिकोणों पर ध्यान केंद्रित किया गया।
भारत ने ब्रिक्स देशों के बीच विश्वसनीय डिजिटल अवसंरचना, संस्थागत क्षमता निर्माण और प्रौद्योगिकी साझेदारी के महत्व पर प्रकाश डाला। भारत ने इस बात पर बल दिया कि सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) में सहयोग नागरिकों को सशक्त बनाने, सार्वजनिक सेवा वितरण को बेहतर बनाने, नवाचार को बढ़ावा देने और ग्लोबल साउथ में समावेशी विकास को गति देने के लिए महत्वपूर्ण है।
बैठक का एक प्रमुख आकर्षण भारत द्वारा ब्रिक्स ICT ट्रैक के अंतर्गत ब्रिक्स क्षमता निर्माण केंद्रों पर अवधारणा नोट की प्रस्तुति थी। इस पहल का उद्देश्य ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच उभरती डिजिटल और दूरसंचार प्रौद्योगिकियों में कौशल विकास, ज्ञान का आदान-प्रदान, तकनीकी प्रशिक्षण, अनुसंधान सहयोग और क्षमता विकास के लिए सहयोगी संस्थागत तंत्र स्थापित करना है।
बैठक में बच्चों के ऑनलाइन संरक्षण और ब्रिक्स डिजिटल ईकोसिस्टम सहयोग को मजबूत करने से संबंधित प्रस्तावों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। सदस्य देशों ने सुरक्षित और विश्वसनीय कनेक्टिविटी, लचीली डिजिटल अवसंरचना, सुरक्षित डिजिटल वातावरण और उभरते डिजिटल क्षेत्रों में बेहतर सहयोग के बढ़ते महत्व पर जोर दिया।
ब्रिक्स इंस्टीट्यूट फॉर फ्यूचर नेटवर्क्स (BIFN), डिजिटल ब्रिक्स टास्क फोर्स (DBTF) और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस ग्रुप (DPI) के तहत गतिविधियों पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।
कार्य समूह ने ब्रिक्स ICT सहयोग की चल रही पहल पर हुई प्रगति की भी समीक्षा की और ब्रिक्स ICT ट्रैक के तहत आगामी गतिविधियों के लिए रोडमैप पर चर्चा की, जिसमें वेबिनार, तकनीकी चर्चाएं, मंत्रिस्तरीय बैठकें और डिजिटल परिवर्तन, दूरसंचार में AI, भविष्य के नेटवर्क नवाचार और संस्थागत सुदृढ़ीकरण पर केंद्रित सहयोगी गतिविधियां शामिल हैं।
बैठक का समापन ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) क्षेत्र में सहयोगात्मक नवाचार, संस्थागत साझेदारी, विश्वसनीय डिजिटल अवसंरचना, क्षमता निर्माण और ज्ञान के आदान-प्रदान तंत्रों के माध्यम से सहयोग को और गहरा करने की साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ। आशा है कि ये चर्चाएं ब्रिक्स देशों और व्यापक ग्लोबल साउथ में लचीले डिजिटल समाजों को बढ़ावा देने, समावेशी डिजिटल विकास को प्रोत्साहित करने और सतत विकास उद्देश्यों का सहयोग करने में और अधिक योगदान देंगी।