नई दिल्ली – केंद्रीय वित्त और कॉरपोरेट कार्य मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज नई दिल्ली में राज्यों और विधानमंडल वाले केंद्र शासित प्रदेशों के साथ बजट पूर्व परामर्श बैठक की अध्यक्षता की।
इस बैठक में वित्त राज्य मंत्री श्री पंकज चौधरी, मणिपुर के राज्यपाल, गोवा, हरियाणा, मेघालय, सिक्किम, दिल्ली और जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री, अरुणाचल प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा, राजस्थान और तेलंगाना के उपमुख्यमंत्री, राज्यों और विधानमंडल वाले केंद्र शासित प्रदेशों के वित्त मंत्री और अन्य मंत्री उपस्थित थे। इसके अलावा आर्थिक मामलों, व्यय और राजस्व विभागों के सचिवों और केंद्रीय वित्त मंत्रालय तथा राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की सरकारों के अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी बैठक में भाग लिया।
प्रतिभागियों ने वित्त वर्ष 2026-27 के केंद्रीय बजट के संबंध में केंद्रीय वित्त मंत्री को कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। विशेष रूप से कई प्रतिभागियों ने इस बात पर प्रकाश डाला कि राज्यों को पूंजी निवेश के लिए विशेष सहायता योजना (एसएएससीआई) को अधिक आवंटन के साथ जारी रखा जाना चाहिए क्योंकि यह परिसंपत्ति निर्माण में तेजी लाने में मदद करती है और राज्यों और विधानमंडल वाले केंद्र शासित प्रदेशों में पूंजी निवेश का समर्थन करती है।
गौरतलब है कि 2020-21 से केंद्र सरकार ने एसएएससीआई के तहत राज्यों को 50 वर्षों के लिए ब्याज मुक्त ऋण के रूप में 4.25 लाख करोड़ रुपये से अधिक का वितरण किया है।
केंद्रीय वित्त मंत्री ने उपस्थित सभी गणमान्य व्यक्तियों को धन्यवाद दिया और आश्वासन दिया कि उनके द्वारा दिए गए सुझावों की विधिवत जांच की जाएगी और बजट 2026-27 तैयार करते समय उन पर उचित रूप से विचार किया जाएगा
नई दिल्ली – तृतीय अंतरराष्ट्रीय भारतीय भाषा सम्मेलन–2026 का उद्घाटन सत्र इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र, जनपथ, नई दिल्ली में आयोजित किया गया, जो इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र(आईजीएनसीए), संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार, अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद, वैश्विक हिन्दी परिवार, और दिल्ली विश्वविद्यालय के भारतीय भाषाओं और साहित्यिक अध्ययन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में हुआ। इस सम्मेलन का उद्घाटन भारत के माननीय उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने किया।
इस अवसर पर पूर्व केन्द्रीय शिक्षा मंत्री और उत्तराखंड के पूर्व मुख्यमंत्री, डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’, मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। उद्घाटन सत्र की अध्यक्षता आईजीएनसीए के अध्यक्ष और प्रख्यात विद्वान, पद्म भूषण श्री राम बहादुर राय ने की। श्री श्याम परांडे, अंतरराष्ट्रीय सहयोग परिषद के महासचिव, और प्रसिद्ध जापानी भाषाविद् पद्म श्री टोमियो मिसोकामी विशेष अतिथि के रूप में उपस्थित थे। डॉ. सचिदानंद जोशी, सदस्य सचिव, आईजीएनसीए, और प्रो. रवि प्रकाश टेकचंदानी, विभागाध्यक्ष, भारतीय भाषा और साहित्यिक अध्ययन विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय, भी इस अवसर पर मौजूद थे। सत्र का संचालन अंतरराष्ट्रीय भारतीय भाषा सम्मेलन के निदेशक अनिल जोशी ने किया।
तृतीय अंतरराष्ट्रीय भारतीय भाषा सम्मेलन में बोलते हुए उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने कहा कि भाषाएँ सभ्यता की जीवंत चेतना हैं, क्योंकि वे सिर्फ संचार का साधन नहीं हैं, बल्कि स्मृति, संस्कृति, परंपरा और पीढ़ी-दर-पीढ़ी हस्तांतरित होने वाले मूल्यों की वाहक भी हैं। भारत की एकता कभी समानता पर आधारित नहीं रही; बल्कि यह कई भाषाओं के आपसी सम्मान से बनी है, जो साझा सभ्यतात्मक दृष्टि और धर्म द्वारा एक-दूसरे से बंधी हुई हैं। भारतीय भाषाएँ विरोधाभासी नहीं हैं; बल्कि ये लगातार एक-दूसरे में योगदान देती हैं, जिससे दर्शन, ज्ञान और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति समृद्ध होती है।
प्राचीन शिलालेखों और ताड़पत्र की पांडुलिपियों से लेकर आज के डिजिटल रूपों तक, भाषाओं ने सोच को आकार दिया है, ज्ञान को सहेजा है और सामूहिक कल्पना को पल्लवित-पोषित किया है। चूंकि भाषाएँ हमेशा सीमाओं से परे यात्रा करती रही हैं, यहाँ तक कि कूटनीति से भी बहुत पहले, इसलिए आज हमारा कर्तव्य सिर्फ भाषाई विविधता की रक्षा करना ही नहीं है, बल्कि लुप्तप्राय भाषाओं को समर्थन देना और उन्हें शिक्षा व तकनीक के माध्यम से आत्मविश्वासके साथ भविष्य में ले जाना भी है। इस तरह, हरेक भाषा का जश्न मनाते हुए हम हर भारतीय की गरिमा को बनाए रखते हैं, क्योंकि भारत एक है और हमेशा एक रहेगा।
इस अवसर पर डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ ने भारतीय भाषाओं के महत्व पर अपने विचार साझा किए। उन्होंने कहा कि भारतीय भाषाएँ सिर्फ संचार का साधन नहीं हैं, बल्कि संस्कृति, ज्ञान, दर्शन और सामाजिक मूल्यों की वाहक हैं।
डॉ. निशंक ने यह भी बताया कि हमारी भाषाओं ने मानव चेतना और परंपराओं को संरक्षित किया है, साथ ही पूरी दुनिया में भारत की सभ्यता और ज्ञान का प्रचार किया है। उन्होंने उल्लेख किया कि योग, आयुर्वेद, साहित्य और दर्शन जैसी अमूल्य धरोहरें हमारी भाषाओं के माध्यम से विश्वभर में फैली हैं। उन्होंने यह स्पष्ट किया कि भारतीय भाषाएँ संघर्ष नहीं सिखातीं, बल्कि सह-अस्तित्व, समानता और सामंजस्य का पाठ भी पढ़ाती हैं। ये सिर्फ संचार का माध्यम नहीं हैं, बल्कि समाज और व्यक्ति के विकास की आधारशिला भी हैं। डॉ. निशंक ने कहा कि भारतीय भाषाएँ एकता और ज्ञान को बढ़ावा देती हैं, न कि विभाजन को, और यही उनकी शक्ति और गौरव का स्रोत है।
अपने अध्यक्षीय भाषण में श्री राम बहादुर राय ने कहा कि यह सम्मेलन भाषाओं पर विचार करने और उनके विकास के लिए कार्य करने का एक अवसर है। उन्होंने बताया कि कुछ भ्रमित विद्वानों और भाषाविदों ने यह विचार फैलाया कि भारतीय भाषाएँ चार परिवारों में विभाजित हैं। हालांकि, अब यह स्थापित हो चुका है कि सभी भारतीय भाषाएँ एक ही परिवार से संबंधित हैं। इसे पहचानने से कृत्रिम विभाजन खत्म होता है। उन्होंने भारतीय भाषाओं के बीच संवाद बढ़ाने के प्रयासों पर बल दिया। जैसे-जैसे संवाद बढ़ेगा, यह एक लहर पैदा करेगा—भाषाओं की लहर, भाषाई एकता की लहर और सांस्कृतिक एकता की लहर। यह लहर वही भावना होगी जो भाषाओं को जोड़ती है और भाषाई समुदायों को एक साथ लाती है। विशेष अतिथि के रूप में बोलते हुए, पद्म श्री टोमियो मिसोकामी ने उपस्थित दर्शकों को हिन्दी में संबोधित करते हुए कहा, “लोग कहते हैं कि मैं भारतीय हूँ, हालाँकि मैं गलती से जापान में पैदा हुआ था।”
तीन दिवसीय यह सम्मेलन भारतीय भाषाओं के वैश्विक प्रचार, समकालीन चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर केन्द्रित एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक और सांस्कृतिक मंच के रूप में कार्य करेगा। यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, न्यूजीलैंड, ऑस्ट्रेलिया, सिंगापुर, श्रीलंका, नेपाल, नीदरलैंड, फ्रांस, मॉरिशस, थाईलैंड और जापान सहित 70 से अधिक देशों के 100 से अधिक अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया। इसके अतिरिक्त, भारत के विभिन्न राज्यों, भाषाओं और बोलियों का प्रतिनिधित्व करने वाले 100 से अधिक प्रतिष्ठित विद्वानों, लेखकों और भाषायी कार्यकर्ताओं ने भी सम्मेलन की प्रतिष्ठा बढ़ाने में योगदान दिया।
नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज सोमनाथ के ऐतिहासिक महत्व को पुनः रेखांकित करते हुए इसे भारत की आध्यात्मिक शक्ति और अटूट श्रद्धा का शाश्वत स्वरूप बताया।
प्रधानमंत्री ने इस बात पर विशेष बल दिया कि सोमनाथ केवल एक पवित्र तीर्थ स्थल ही नहीं, बल्कि भारत की सभ्यतागत निरंतरता का प्रकाश स्तंभ भी है, जो अपनी आस्था, अटूट जीवटता और एकता के संदेश से पीढ़ियों को प्रेरित करता आ रहा है।
प्रधानमंत्री ने एक्स पर अपनी पोस्ट में उल्लेख किया:
“भगवान श्री सोमनाथ सृष्टि के कण-कण में विराजते हैं। उनकी अखंड आस्था अनंत काल से निरंतर प्रवाहित हो रही है। वे सदैव भारत की आध्यात्मिक ऊर्जा के प्रतीक रहेंगे।”
नई दिल्ली – उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज पंजाब के फगवाड़ा में लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (एलपीयू) के दीक्षांत समारोह को संबोधित किया और युवाओं से राष्ट्र एवं मानवता की सेवा में पेशेवर उत्कृष्टता को नैतिक जिम्मेदारी के साथ जोड़ने का आह्वान किया।
विकसित भारत @2047 के विजन के बारे में बोलते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत अपनी आजादी की शताब्दी की दिशा में बढ़ते हुए एक अहम मोड़ पर खड़ा है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में देश ने एक विकसित, आत्मनिर्भर, समावेशी और आत्मविश्वासी भारत के निर्माण का एक महत्वाकांक्षी लेकिन हासिल किए जाने योग्य लक्ष्य निर्धारित किया है। उन्होंने कहा कि यह विजन सिर्फ आर्थिक विकास तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इसमें सामाजिक सद्भाव, नैतिक नेतृत्व, सांस्कृतिक आत्मविश्वास, तकनीकी आत्मनिर्भरता और समावेशी विकास भी शामिल है। इस विजन की सफलता काफी हद तक युवाओं की ऊर्जा, क्षमता और चरित्र पर निर्भर करती है।
एक बड़ी वैश्विक शक्ति के तौर पर उभरने की भारत की आकांक्षा को स्पष्ट करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि उद्देश्य छोटे देशों पर अपनी शर्तें थोपना नहीं है, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि कोई अन्य देश भारत पर अपनी शर्तें न थोप सके।
तेजी से बदलते वैश्विक परिदृश्य को रेखांकित करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि जो चीज पांच वर्ष पहले जरूरी थी, वह जल्द ही अपनी प्रासंगिकता खो सकती है। उन्होंने कहा कि बदलाव ही एकमात्र स्थिर चीज है और निरंतर सफलता के लिए अनुकूलनशीलता एवं आजीवन सीखते रहने की ललक आवश्यक है।
उपराष्ट्रपति ने विद्यार्थियों को सलाह दी कि वे अपनी सफलता या असफलता की तुलना दूसरों से कभी न करें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि हर व्यक्ति की अपनी एक अलग जीवन यात्रा और गति होती है। अब्राहम लिंकन और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के जीवन का उदाहरण देते हुए, उन्होंने कहा कि निरंतर प्रयास, लगन और ईमानदारी किसी भी व्यक्ति को साधारण शुरुआत से बड़ी जिम्मेदारी वाले पदों तक ले जा सकती है। उन्होंने कहा कि अपने लिए जीना गलत नहीं है, लेकिन सिर्फ अपने लिए ही जीने से जीवन का बड़ा उद्देश्य खत्म हो जाता है।
विद्यार्थियों के लिए आवश्यक तीन मार्गदर्शक सिद्धांतों के बारे में बताते हुए, उपराष्ट्रपति ने उनसे समय का प्रभावी प्रबंधन करने, दीर्घकालिक सफलता को नुकसान पहुंचाने वाले शॉर्टकट से बचने तथा कभी हार न मानने का आग्रह किया और स्वामी विवेकानंद के प्रेरणादायक कथन – “उठो, जागो और तब तक मत रुको जब तक लक्ष्य प्राप्त न हो जाए” – की याद दिलाई।
उपराष्ट्रपति ने यूनिवर्सिटी की जय जवान स्कॉलरशिप की भी सराहना की, जो सशस्त्र बलों के जवानों एवं उनके परिवारों के बलिदानों को सार्थक शैक्षिक सहायता देकर सम्मानित करती है। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान यूनिवर्सिटी के काम का उल्लेख करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि ऐसी पहलें इस बात की पुष्टि करती हैं कि विश्वविद्यालय सिर्फ सीखने के केन्द्र भर नहीं होते, बल्कि वे ऐसी संस्थाएं हैं जो राष्ट्रीय चरित्र के निर्माण में मदद करती हैं।
विश्वविद्यालय परिसरों में मादक पदार्थों के बढ़ते खतरे पर चिंता जताते हुए, उपराष्ट्रपति ने इसे युवाओं और समाज के लिए एक गंभीर खतरा बताया और विद्यार्थियों से अनुशासन, सार्थक उद्देश्य और स्वास्थ्य जीवनशैली चुनकर मादक पदार्थों को साफ और सीधे तौर पर “ना” कहने की अपील की।
अपने संबोधन का समापन करते हुए, उपराष्ट्रपति ने विद्यार्थियों को याद दिलाया कि वे अपने माता-पिता और गुरुओं के प्रति सदा आभारी रहें, जिनका मार्गदर्शन, बलिदान और मूल्य उनके चरित्र एवं भविष्य को आकार देते हैं।
दीक्षांत समारोह में पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ के प्रशासक गुलाब चंद कटारिया; पंजाब सरकार में रक्षा सेवा कल्याण, स्वतंत्रता सेनानी तथा बागवानी मंत्री श्री मोहिंदर भगत; और सांसद (राज्यसभा) तथा लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी के संस्थापक एवं चांसलर डॉ. अशोक कुमार मित्तल सहित कई गणमान्य लोग शामिल हुए
उपायुक्त ने अधिकारियों को तैयारी से संबंधित दिये आवश्यक व उचित दिशा-निर्देश
झारखंड सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं, नीतियों पर केंद्रित तथा राज्य की समृद्ध कला, संस्कृति, परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहर को जीवंत रूप में प्रस्तुत करने वाली झांकियों का प्रभावशाली प्रदर्शन
रांची,10.01.2026 – उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी रांची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा मोरहाबादी मैदान में गणतंत्र दिवस समारोह-2026 की तैयारियों को लेकर आज दिनांक 10 जनवरी 2026 को समाहरणालय ब्लॉक ए स्थित सभागार में बैठक आयोजित की गई।
बैठक में वरीय पुलिस अधीक्षक राँची, श्री राकेश रंजन, उप विकास आयुक्त राँची, श्री सौरभ कुमार भुवनिया, अपर जिला दंडाधिकारी राँची, श्री राजेश्वर नाथ आलोक, पुलिस अधीक्षक (शहर) रांची एवं ट्रैफ़िक, अनुमंडल पदाधिकारी (सदर), रांची, श्री कुमार रजत, निदेशक आइटीडीए, श्री संजय कुमार भगत, निदेशक डी.आर.डी.ए., श्री सुदर्शन मुर्मू, विशिष्ट अनुभाजन पदाधिकारी राँची, श्रीमती मोनी कुमारी, ज़िला परिवहन पदाधिकारी, श्री अखिलेश कुमार, जिला शिक्षा पदाधिकारी राँची, श्री विनय कुमार, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी राँची, श्री सुरभि सिंह, जिला शिक्षा अधीक्षक राँची, श्री बादल राज, एल. आर. डी.सी. रांची, श्री मुकेश कुमार , जिला नजारत उपसमाहर्त्ता रांची, डॉ सुदेश कुमार, जिला जन संपर्क पदाधिकारी रांची, श्रीमती उर्वशी पांडेय, कार्यपालक अभियंता भवन प्रमंडल-1 एवं कार्यपालक अभियंता विद्युत कार्य प्रमंडल, रांची, टाटीसिलवे रांची, समादेष्टा सी.आई.एस.एफ., एच.ई. सी., अग्निश्मन पदाधिकारी रांची, कमांडिंग ऑफिसर एन. सी. सी. रांची, सहित संबंधित पुलिस एवं प्रशासनिक पदाधिकारी उपस्थित थे।
बैठक के दौरान उपायुक्त रांची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने गणतंत्र दिवस समारोह की तैयारी और सफल संचलान को लेकर विचार-विमर्श करते हुए संबंधित पदाधिकारियों को कई आवश्यक दिशा-निर्देश दिये
मोरहाबादी मैदान में गणतंत्र दिवस समारोह की तैयारी पर विचार विमर्श करते हुए उपायुक्त रांची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा कार्यपालक अभियंता भवन प्रमंडल-1 को आगन्तुकों के लिए मैदान के दोनों ओर वाटरप्रूफ पण्डाल/गैलरी/कुर्सी की व्यवस्था, मैदान समतलीकरण एवं बैरिकेटिंग, स्टेज एवं साउंड बॉक्स के लिए टॉवर निर्माण की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।
उपायुक्त रांची द्वारा जिला नजारत उपसमाहर्त्ता को मंच के दोनों तरफ वाटरप्रूफ पंडाल, मंच पर वीवीआईपी के बैठने की व्यवस्था, मिनट-टू-मिनट कार्यक्रम, परेड में शामिल कैडेटों के लिए अल्पाहार एवं पुष्प सज्जा की व्यवस्था आदि से संबंधित तैयारी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।
उपायुक्त रांची, द्वारा कार्यपालक अभियंता विद्युत कार्य प्रमंडल, रांची को विद्युत व्यवस्था एवं साउण्ड प्रूफ जेनरेटर की व्यवस्था को लेकर अंतिम रुप से तैयारी सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।
उपायुक्त रांची, द्वारा कार्यक्रम स्थल में पेयजल आपूर्ति, वीआईपी टॉयलेट की व्यवस्था, परेड पूर्वाभ्यास में भाग लेने वाले कैडेटों के लिए मोरहाबादी मैदान में अस्थायी शौचालय की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निदेश कार्यपालक अभियंता, पेय जल एवं स्वच्छता विभाग वितरण प्रमण्डल गोंदा को निर्देश दिया गया।
उपायुक्त रांची, द्वारा मोरहाबादी की ओर जानेवाली सड़कों की मरम्मती एवं साफ-सफाई, चिकित्सा मेडिकल कैंप और अग्निशमन की व्यवस्था को लेकर ससमय पूरी तैयारी करने का निर्देश संबंधित पदाधिकारी को दिया गया।
उपायुक्त द्वारा गणतंत्र दिवस समारोह में आयोजित होने वाले झांकी और परेड से संबंधित जानकारी भी संबंधित पदाधिकारी से ली गयी।
उपायुक्त रांची, द्वारा पार्किंग व्यवस्था को लेकर पुलिस अधीक्षक (यातायात) रांची, को निर्देश देते हुए कहा की वे मोरहाबादी मैदान में वाहनों की पार्किंग की व्यवस्था, झांकी के लिए ट्रेलर/ बड़े वाहन की व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे।
उपायुक्त रांची, द्वारा सिविल सर्जन (सदर) रांची, को निर्देश देते हुए कहा की वे चिकत्सा व्यवस्था / मेडिकल कैंप एवं एम्बुलेंस की व्यवस्था सुनिश्चित कराने कहा।
उपायुक्त रांची, द्वारा नगर निगम रांची को निर्देश देते हुए कहा की वे समारोह स्थल की सफाई एवं आस-पास की सफाई एवं समाहरोह स्थल की तरफ आने वाली सभी प्रमुख सड़को की सफाई कराना सुनिश्चित करेंगे।
मोरहाबादी मैदान में गणतंत्र दिवस समारोह की तैयारी से संबंधित अन्य बिन्दुओं पर चर्चा करते हुए उपायुक्त ने ससमय तैयारी पूरी करने के निर्देश सभी सम्बंधित पदाधिकारियों को दिया गया।
झारखंड सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं, नीतियों पर केंद्रित तथा राज्य की समृद्ध कला, संस्कृति, परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहर को जीवंत रूप में प्रस्तुत करने वाली झांकियों का प्रभावशाली प्रदर्शन
उपायुक्त रांची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने बताया इस बार गणतंत्र दिवस समारोह 2026 में मुख्य आकर्षण यहाँ की झांकियों का प्रदर्शन रहेगा एवं गणतंत्र दिवस समारोह के अवसर पर झारखंड सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं, नीतियों पर केंद्रित तथा राज्य की समृद्ध कला, संस्कृति, परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहर को जीवंत रूप में प्रस्तुत करने वाली झांकियों का प्रभावशाली प्रदर्शन किया जाएगा। जिससे यहाँ के लोग सरकार के सरकार की महत्वपूर्ण योजनाओं/ नीतियों पर आधारित तथा झारखण्ड की उत्कृष्ट कला, संस्कृति, परम्परा एवं धरोहर का दीदार इन झांकी के माध्यम से करेंगे।
झांकियों का प्रदर्शन विभागवार
गणतंत्र दिवस समारोह 2026 जो रांची के मोरहबादी में इस बार कुल-12 विभागों की झांकियों का प्रदर्शन किया जाएगा। जो निम्नवत है-
1. वन पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग
2. ग्रामीण विकास विभाग
3. गृह, कारा एवं आपदा प्रबंधन विभाग
4. स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग
5. कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता विभाग
6.सूचना एवं जन संपर्क विभाग
7. पर्यटन, कला संस्कृति, खेलकूद एवं युवा कार्य विभाग
8. स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा एवं परिवार कल्याण विभाग
9. खादी ग्रामोद्योग बोर्ड
10. परिवहन विभाग
11. महिला, बाल विकास एवं सामाजिक सुरक्षा विभाग
12.उच्च तकनिकी शिक्षा विभाग
लगभग 15 प्लाटून के द्वारा परेड
उपायुक्त रांची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने बताया की गणतंत्र दिवस समारोह 2026 जो रांची के मोरहबादी में हो रहा है, इस बार लगभग 15 प्लाटून और 03 बैन्ड़ के द्वारा किया जाएगा।
18 जनवरी 2026 से दिनांक 23 जनवरी 2026 तक, दिनांक 24 जनवरी 2026 तक अंतिम रिहार्सल पूरा लिया जाएगा।
नई दिल्ली, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने शुक्रवार को नई दिल्ली स्थित कृषि भवन में गुजरात एवं पंजाब के कृषि मंत्रियों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की। बैठक का उद्देश्य प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM-RKVY), कृषोन्नति योजना (KY) सहित अन्य प्रमुख केंद्रीय कृषि योजनाओं के तहत राज्यों में हो रहे कार्यों की प्रगति की समीक्षा करना था। इस दौरान योजनाओं के राज्यवार क्रियान्वयन, भौतिक एवं वित्तीय प्रगति, लंबित प्रस्तावों तथा बजट उपयोग की स्थिति पर विस्तार से चर्चा की गई।
श्री शिवराज सिंह चौहान ने दोनों राज्यों को निर्देश दिए कि केंद्र सरकार द्वारा विभिन्न योजनाओं के अंतर्गत जारी की गई धनराशि का समयबद्ध, पारदर्शी एवं नियमों के अनुरूप उपयोग सुनिश्चित किया जाए, ताकि किसानों को योजनाओं का अधिकतम लाभ मिल सके। उन्होंने कहा कि जिन राज्यों द्वारा धनराशि का प्रभावी एवं समय पर उपयोग किया जाएगा, उन्हें आगामी बजट में पर्याप्त एवं निर्बाध वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा सकेगी।
केंद्रीय मंत्री ने यह भी स्पष्ट किया कि केंद्रांश के ब्याज की निर्धारित राशि समय पर जमा करना अनिवार्य है। इसमें किसी भी प्रकार की देरी से योजनाओं के क्रियान्वयन में बाधा उत्पन्न होती है और इसका प्रतिकूल प्रभाव अगली किस्त की स्वीकृति पर भी पड़ सकता है।
बैठक के दौरान श्री चौहान ने गुजरात में दलहन एवं तिलहन की उत्पादन क्षमता, किसानों की भागीदारी तथा न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर खरीद की स्थिति पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने विशेष रूप से उड़द की खरीद को और अधिक गति देने तथा किसानों तक खरीद प्रक्रिया को सरल और सुगम बनाने पर जोर दिया।
श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि किसानों के हितों की रक्षा, आय में वृद्धि तथा कृषि क्षेत्र के समग्र विकास की निरंतरता सुनिश्चित करने के लिए आवंटित बजट का प्रभावी, योजनाबद्ध एवं परिणामोन्मुखी उपयोग अत्यंत आवश्यक है। समय पर एवं उचित वित्तीय उपयोग से ही योजनाओं के वास्तविक प्रभाव का सही आकलन किया जा सकता है, जिसके आधार पर केंद्र सरकार द्वारा अगली किस्त समय पर जारी की जा सकेगी।
बैठक में पंजाब के कृषि मंत्री श्री गुरमीत सिंह खुड्डियां, गुजरात के कृषि राज्य मंत्री श्री रमेशभाई कटारा, कृषि मंत्रालय के सचिव श्री देवेश चतुर्वेदी सहित मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी एवं संबंधित विभागों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
नई दिल्ली – चौथे काशी तमिल संगमम के अंतर्गत आयोजित ऐतिहासिक ऋषि अगस्त्य वाहन अभियान (एसएवीई) दल नौ दिवसीय यात्रा सफलतापूर्वक पूरी कर आज काशी पहुंचा। वाराणसी के आयुक्त श्री एस. राजलिंगम ने नमो घाट पर प्रतिभागियों का स्वागत किया।
अभियान यात्रा के दौरान ऋषि अगस्त्य से संबंधित मार्ग का अनुसरण कर लगभग 100 प्रतिभागियों ने तेनकासी से काशी तक 2,460 किलोमीटर की दूरी तय की।
गांवों, कस्बों और शहरों से गुज़रते हुए अभियान दल का विभिन्न समुदायों के लोगों ने गर्मजोशी और उत्साह से स्वागत किया। इस अभियान से सिद्ध चिकित्सा के प्रति जागरूकता भी बढ़ी, जिसमें इसके निवारक स्वास्थ्य देखभाल दृष्टिकोण और समग्र जीवन शैली को बल मिला।
नई दिल्ली – आईएनएस चिल्का में प्रशिक्षुओं के बैच 02/25 की पासिंग आउट परेड 8 जनवरी 2026 को आयोजित की गई। यह परेड 16 सप्ताह के कठोर प्रशिक्षण की सफल समाप्ति का प्रतीक है। सूर्यास्त के बाद आयोजित इस भव्य समारोह में प्रशिक्षुओं ने परेड में हिस्सा लिया जो उनके अनुशासित, दृढ़ और युद्ध के लिए तैयार नौसैनिक पेशेवर बनने की प्रक्रिया का प्रतीक था। इस पासिंग आउट बैच में 2,172 प्रशिक्षु शामिल थे। इनमें 2,103 अग्निवीर (113 महिला अग्निवीर सहित), 270 एसएसआर (चिकित्सा सहायक), भारतीय नौसेना के 44 खेल प्रवेश कर्मी और भारतीय तटरक्षक बल के 295 नाविक शामिल थे।
दक्षिणी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ वाइस एडमिरल समीर सक्सेना परेड के मुख्य अतिथि और निरीक्षण अधिकारी थे। आईएनएस चिल्का के कमान अधिकारी, कमोडोर बी दीपक अनील, संचालन अधिकारी थे। समारोह में विशिष्ट पूर्व सैनिक, प्रसिद्ध खेल हस्तियां, वरिष्ठ नौसेना अधिकारी, अन्य गणमान्य व्यक्ति और उत्तीर्ण होने वाले प्रशिक्षुओं के परिवार के सदस्य उपस्थित थे।
परेड में प्रशिक्षुओं ने अपने अभ्यास, अनुशासन और पेशेवर कौशल के उत्कृष्ट मानकों का शानदार प्रदर्शन किया। पुरुष साथियों के साथ महिला अग्निवीरों की भागीदारी ने परिचालन भूमिकाओं में समावेशिता और लैंगिक समानता के प्रति भारतीय नौसेना की प्रतिबद्धता को एक बार फिर मजबूती से दर्शाया है।
दक्षिणी नौसेना कमान के फ्लैग ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ ने परेड को संबोधित करते हुए प्रशिक्षण के सफल समापन पर प्रशिक्षुओं को बधाई दी। उन्होंने प्रशिक्षुओं को अपने पेशेवर कौशल को निखारने और तकनीकी रूप से जागरूक होने के साथ-साथ कर्तव्य, सम्मान और साहस जैसे नौसेना के मूल मूल्यों को आत्मसातकरने के लिए प्रेरित किया।उन्होंने प्रशिक्षुओं को साहस और दृढ़ संकल्प के साथ अपने रास्ते को चुनते हुए देश की शान बनाए रखने की प्रेरणा दी। उन्होंने अग्निवीरों के अभिभावकों के राष्ट्र के प्रति योगदान की सराहना की। मुख्य अतिथि ने नौसेना और राष्ट्र के परिवर्तन को आकार देने में टीम चिल्का के अथक प्रयासों और महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की।
मुख्य अतिथि ने मेधावी अग्निवीरों को पदक और ट्राफियां प्रदान कीं। शशि बी. केंचावगोल और जतिन मिश्रा को क्रमशः सर्वश्रेष्ठ अग्निवीर (एसएसआर) और सर्वश्रेष्ठ अग्निवीर (एमआर) के लिए नौसेना प्रमुख रोलिंग ट्रॉफी और स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया। अनीता यादव को समग्र योग्यता क्रम में सर्वश्रेष्ठ महिला अग्निवीर के लिए जनरल बिपिन रावत रोलिंग ट्रॉफी से सम्मानित किया गया। केशव सूर्यवंशी और सोनेंद्र को क्रमशः सर्वश्रेष्ठ नाविक (जीडी) और सर्वश्रेष्ठ नाविक (डीबी) चुना गया।
समापन समारोह के पहले, खारवेला डिवीजन को समग्र चैम्पियनशिप ट्रॉफी प्रदान की गई, जबकि अशोक डिवीजन को उपविजेता के तौर पर चुना गया। इसी अवसर पर आईएनएस चिल्का की द्विभाषी प्रशिक्षु पत्रिका ‘अंकुर 2025’ के दूसरे संस्करण का भी विमोचन हुआ। इस पत्रिका में अग्निवीरों के अनुभवों और उनके प्रेरणादायक बदलाव के सफर को विस्तार से प्रस्तुत किया गया है।
नई दिल्ली – भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय ने आज गुवाहाटी में “भारत के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र के वस्त्र क्षेत्र को सुदृढ़ और सशक्त बनाना” विषय पर एक उच्च स्तरीय सम्मेलन का आयोजन किया। इस सम्मेलन ने नीतिगत समन्वय, निवेश प्रोत्साहन, कौशल विकास, मूल्यवर्धन और बेहतर बाजार पहुंच के माध्यम से उत्तर-पूर्वी राज्यों में वस्त्र क्षेत्र के विकास को गति देने के लिए व्यापक विचार-विमर्श के लिए एक केंद्रित मंच प्रदान किया।
इस सम्मेलन में माननीय केंद्रीय वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह, माननीय वस्त्र राज्य मंत्री श्री पबित्रा मार्गेरिटा, वस्त्र एवं उद्योग मंत्री, संसद सदस्य और पूर्वोत्तर राज्यों तथा केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी तथा वस्त्र क्षेत्र के प्रमुख संस्थानों के प्रतिनिधि उपस्थित थे।
सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह ने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र देश के वस्त्र क्षेत्र का अभिन्न अंग है और केंद्र सरकार इसके विकास के लिए प्रतिबद्ध है।
विचार-विमर्श के दौरान पूर्वोत्तर क्षेत्र की अनूठी खूबियों-इसकी समृद्ध हथकरघा विरासत, जीआई-टैग वाले उत्पाद, रेशम की विविध किस्में, बांस शिल्प और महिला कारीगरों और बुनकरों की सशक्त भागीदारी पर प्रकाश डाला गया।
सम्मेलन में मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करने, निर्यात बढ़ाने, निवेश आकर्षित करने और पारंपरिक कौशल को आधुनिक प्रौद्योगिकी, डिजाइन नवाचार और बाजार संबंधों के साथ संयोजित करने के लिए एक समन्वित और एकीकृत दृष्टिकोण की आवश्यकता पर जोर दिया गया।
नई दिल्ली – 25वें अखिल भारतीय प्रमुख पत्तन सांस्कृतिक सम्मेलन 2025-26 का उद्घाटन गुरुवार को पारादीप पत्तन के जयदेव सदन में किया गया। इस चार दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन पारादीप पत्तन प्राधिकरण द्वारा मेजर पोर्ट्स स्पोर्ट्स कंट्रोल बोर्ड के तत्वाधान में किया जा रहा है।
पारादीप पत्तन प्राधिकरण के अध्यक्ष श्री पी. एल. हरनाध ने मुख्य अतिथि के रूप में सम्मेलन का उद्घाटन किया। इस दौरान उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि संस्कृति मानवीय भावना की आंतरिक सुंदरता को दर्शाती है और एकता एवं सद्भाव को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
उन्होंने कहा कि ओडिशा में सांस्कृतिक सम्मेलन के 25वें संस्करण की मेज़बानी करना पारादीप पत्तन के लिए गर्व की बात है, ओडिशा एक ऐसा राज्य है जो अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, शास्त्रीय ओडिसी नृत्य और कलात्मक उत्कृष्टता के लिए जाना जाता है।
उन्होंने देश भर के प्रमुख पत्तनों की टीमों की उत्साहपूर्ण भागीदारी की सराहना की और कहा कि रंगारंग उद्घाटन परेड, इस सम्मेलन के लिए प्लान किए गए शानदार सांस्कृतिक कार्यक्रमों को दर्शाती है। इस बात पर ज़ोर देते हुए कि भागीदारी और सांस्कृतिक आदान-प्रदान प्रतिस्पर्धा से अधिक महत्वपूर्ण है, उन्होंने कहा कि भारत में पत्तन कर्मचारियों में पेशेवर भूमिकाओं के अलावा भी ज़बरदस्त सांस्कृतिक प्रतिभा है।
उन्होंने सभी प्रतिभागियों को भरोसा दिलाया कि उनके आराम के लिए सभी आवश्यक इंतज़ाम किए गए हैं और सभी को एक यादगार व अच्छा अनुभव मिले, इसकी शुभकामनाएं दीं। इन बातों के साथ, उन्होंने सम्मलेन के शुभारंभ की घोषणा की।
उद्घाटन समारोह की अध्यक्षता आयोजन समिति के अध्यक्ष श्री हिमांशु शेखर राउत ने की। इस अवसर पर एफए एवं सीएओ श्री अशोक कुमार साहू; मुख्य यांत्रिक अभियंता श्री सुशील चंद्र नाहक; और मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. विभूति भूषण दास भी उपस्थित थे। आयोजन समिति के सचिव डॉ. डी. पी. सेठी ने स्वागत भाषण दिया।
इस सम्मेलन में चेन्नई, कोचीन, दीनदयाल, जवाहरलाल नेहरू पत्तन प्राधिकरण, कोलकाता, मुंबई, विशाखापत्तनम, वी.ओ. चिदंबरनार और मेजबान पारादीप पत्तन सहित नौ प्रमुख पत्तनों के 200 से ज़्यादा प्रतिभागी भाग ले रहे हैं। क्लासिकल वोकल, लाइट वोकल, इंस्ट्रूमेंटल म्यूज़िक, डांस और ड्रामा कैटेगरी में प्रतियोगिताएं हो रही हैं।
मुंबई पत्तन प्राधिकरण द्वारा उद्घाटन के दौरान सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया, जिसके बाद विशाखापत्तनम पत्तन प्राधिकरण ने अगले कुछ दिनों में होने वाले शानदार कार्यक्रमों के लिए माहौल तैयार किया।
25वां अखिल भारतीय प्रमुख पत्तन सांस्कृतिक सम्मेलन 11 जनवरी, 2026 को एक समापन समारोह और पुरस्कार वितरण समारोह के साथ संपन्न होगा।
नई दिल्ली – सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्री डॉ वीरेंद्र कुमार की अध्यक्षता में ‘ट्रांसजेंडर व्यक्तियों और भिखारियों के कल्याण और पुनर्वास’ पर एक बैठक कल नई दिल्ली के डॉ अंबेडकर अंतरराष्ट्रीय केंद्र में आयोजित की गई।
बैठक में चर्चा छह महानगरों- दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, चेन्नई, बेंगलूरू और हैदराबाद को भिखारी मुक्त बनाने पर केंद्रित रही। इस उद्देश्य के लिए अभियान नगर निगमों, शहरी स्थानीय निकायों, राज्य समाज कल्याण विभागों, केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों और अन्य प्रमुख हितधारकों के बीच नजदीकी तालमेल से चलाया जाएगा।
हाइब्रिड तरीके से आयोजित इस बैठक में दिल्ली, चेन्नई, मुंबई और बेंगलूरू के नगर निगमों और संबंधित राज्य समाज कल्याण विभागों के प्रतिनिधियों, विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों के अधिकारियों तथा अन्य हितधारकों ने हिस्सा लिया।
बैठक में, सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग के सचिव ने सूचित किया कि ट्रांसजेंडर व्यक्ति (अधिकारों का संरक्षण) अधिनियम, 2019 और नियम, 2020 के लागू होने के बावजूद, प्रमुख महानगरों में ट्रैफिक सिग्नलों पर ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के भिक्षावृत्ति में निरंतर संलिप्त रहने के संबंध में प्रधानमंत्री कार्यालय में हुई एक बैठक में पहले भी चिंता जताई गई थी। सुरक्षा और गरिमा का ध्यान रखते हुए, यह तय किया गया कि शुरुआत में छह पहचान किये गए मेट्रो शहरों पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा ताकि वहां भिक्षावृति समाप्त की जा सके।
सरकार की मुख्य पहलों पर भी ज़ोर दिया गया, जिनमें ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के लिए समान अवसर नीति (2024), नेशनल ट्रांसजेंडर पोर्टल, ट्रांसजेंडर पहचान पत्र और आयुष्मान कार्ड जारी करना, गरिमा गृहों की स्थापना और स्माइल योजना (आजीविका और उद्यम के लिए हाशिए पर पड़े व्यक्तियों के लिए सहायता योजना) का कार्यान्वयन शामिल है। इसके अंतर्गत ट्रांसजेंडर और भिक्षावृत्ति दोनों उप-योजनाएं शामिल हैं। बैठक में देशव्यापी अभियान “भिक्षावृत्ति मुक्त भारत” की भी समीक्षा की गई जिसके पहले चरण में 181 शहर शामिल हैं।
कल्याणकारी उपायों को लागू करने की स्थिति, भीख मांगने वाले ट्रांसजेंडर व्यक्तियों के पुनर्वास में आने वाली चुनौतियों और ‘स्माइल’ (भिक्षावृत्ति) योजना के तहत हुई प्रगति पर बैठक के दौरान प्रेजेंटेशन दिए गए। यह योजना अभी दिल्ली और हैदराबाद में लागू है और इसे दूसरे शहरों में भी लागू करने का प्रस्ताव है।
मंत्री महोदय ने राज्यों को गैर-सरकारी संगठनों के सहयोग से एक महीने का गहन अभियान चलाने का निर्देश दिया, जिसमें ट्रैफिक सिग्नलों पर भिक्षावृत्ति में लगे व्यक्तियों के कौशल विकास, रोजगार और पुनर्वास पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। उन्होंने समाज के वंचित वर्गों के लिए सुरक्षित, संरक्षित और गरिमापूर्ण जीवन सुनिश्चित करने हेतु केंद्रीय मंत्रालयों, राज्य सरकारों, नगर निगमों और शहरी स्थानीय निकायों द्वारा समन्वित और निरंतर प्रयासों की आवश्यकता पर बल दिया। बैठक में भिक्षावृत्ति-मुक्त दर्जा प्राप्त करने वाले शहरों को पुरस्कृत करने का भी संकेत दिया गया।
बैठक का समापन सभी हितधारकों की उस सामूहिक प्रतिबद्धता के दोहराव के साथ हुआ, जिसमें शहरों को भिक्षावृत्ति-मुक्त बनाने और ट्रांसजेंडर व्यक्तियों एवं भिक्षुओं के सामाजिक समावेशन और सशक्तिकरण को बढ़ावा देने का लक्ष्य रखा गया.
नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज पावन सोमनाथ धाम में श्रद्धांजलि अर्पित की और राष्ट्र की सामूहिक चेतना को जागृत करने में इसकी शाश्वत भूमिका को रेखांकित किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि पावन सोमनाथ धाम ने सदियों से अपनी दिव्य ऊर्जा के माध्यम से पीढ़ियों को प्रेरित किया है। उन्होंने उल्लेख किया कि यह ऊर्जा आज भी आस्था, साहस और आत्मसम्मान के मार्ग को आलोकित करती हुई युगों से सभी भारतवासियों के लिए एक मार्गदर्शक प्रकाश के रूप में कार्य कर रही है।
एक संस्कृत श्लोक को एक्स पर उद्धृत करते हुए श्री मोदी ने लिखा:
“पावन-पुनीत सोमनाथ धाम की भव्य विरासत सदियों से जन-जन की चेतना को जागृत करती आ रही है। यहां से निकलने वाली दिव्य ऊर्जा युग-युगांतर तक आस्था, साहस और स्वाभिमान का दीप प्रज्वलित करती रहेगी।
रांची,08.01.2026 – अध्यक्ष शंभु नाथ चौधरी के नेतृत्व में 5 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल ने मुलाकात की. मुलाकात के दौरान राज्यपाल महोदय का निम्नांकित बिंदुओं की तरफ ध्यान आकर्षित कराते हुए ज्ञापन सौंपा गया.
1.सेवानिवृत पत्रकारों के लिए पेंशन स्कीम के कार्यान्वयन का प्रस्ताव.
2.पत्रकारों के लिए रांची और राज्य के अन्य प्रमुख शहरों में आवासीय कॉलोनी के विकास संबंधित प्रस्ताव.
3.पत्रकारों के स्वास्थ्य बीमा और पत्रकार सुरक्षा कानून शीघ्र लाने संबंधी प्रस्ताव.
4. रांची प्रेस क्लब में राज्यपाल महोदय के साथ ’संवाद’ कार्यक्रम के तहत पत्रकारों के साथ बातचीत का प्रस्ताव जिसपर उन्होंने निकट भविष्य में आयोजन पर सहमति जताई.
प्रतिनिधिमंडल में उपाध्यक्ष बिपिन उपाध्याय, सचिव अभिषेक सिन्हा, संयुक्त सचिव चन्दन भट्टाचार्य एवं कार्यकारिणी सदस्य प्रतिमा कुमारी शामिल थे.
उक्त जानकारी रांची प्रेस क्लब के सचिव अभिषेक सिन्हा ने दी.
मौसम विभाग द्वारा जारी चेतावनी के बाद उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा जारी किया गया आदेश
वर्ग KG से वर्ग 12वीं तक की कक्षाएं स्थगित
रांची,08.01.2026 – रांची जिला अंतर्गत संचालित सभी सरकारी, गैर सरकारी सहायता प्राप्त, गैर सहायता प्राप्त (अल्पसंख्यक सहित) एवं सभी निजी विद्यालयों में कक्षाएं 09 से 10 जनवरी तक बंद
सभी कोटि के सरकारी विद्यालयों में कार्यरत शिक्षक एवं शिक्षकेतर कर्मी उक्त अवधि में विद्यालयों में अपनी उपस्थिति दर्ज करते हुए गैर-शैक्षणिक कार्यों का करेंगे निष्पादन
11 जनवरी 2026 को टाना भगत स्टेडियम खेलगांव में आयोजित होगा कार्यक्रम
कार्यक्रम की तैयारी को लेकर उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने की संबंधित पदाधिकारियों के साथ बैठक
उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा तैयारी को लेकर संबंधित पदाधिकारियों को दिए गए आवश्यक निर्देश
रांची,08.01.2026 – दिशोम गुरु शिबू सोरेन के जन्म दिवस के अवसर पर दिनांक 11 जनवरी 2026 को टाना भगत स्टेडियम, खेलगांव, रांची में गुरुजी स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना” संवाद कार्यक्रम का आयोजन किया जायेगा। कार्यक्रम में माननीय मुख्यमंत्री, झारखंड श्री हेमंत सोरेन राज्य के 10वीं से 12वीं कक्षा में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं से संवाद करेंगे।
कार्यक्रम की तैयारियों को लेकर उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में बैठक आयोजित की गयी। इसमें कार्यक्रम के सफल एवं सुव्यवस्थित आयोजन को लेकर विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा की गई।
उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने बताया कि कार्यक्रम के माध्यम से राज्य के 10वीं से 12वीं कक्षा में अध्ययनरत छात्र-छात्राओं को गुरुजी क्रेडिट कार्ड योजना के अंतर्गत लाभ प्रदान किया जाएगा। यह योजना विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा हेतु वित्तीय सहायता उपलब्ध कराने की दिशा में राज्य सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है।
उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, पार्किंग, मंच एवं पंडाल निर्माण, बैठने की समुचित व्यवस्था, पेयजल, शौचालय, स्वच्छता, विद्युत आपूर्ति, अग्नि सुरक्षा, चिकित्सा सुविधा तथा आपातकालीन सेवाओं को सुदृढ़ रखने के निर्देश दिए। उन्होंने संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ कार्य करने को कहा, ताकि कार्यक्रम के दौरान किसी भी प्रकार की असुविधा उत्पन्न न हो।
उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि विद्यार्थियों के आगमन एवं निकासी की व्यवस्था सुव्यवस्थित हो, पंजीकरण प्रक्रिया सुचारु रूप से संचालित की जाए तथा योजना से संबंधित सभी आवश्यक दस्तावेजों एवं जानकारी की पूर्व तैयारी सुनिश्चित की जाए। उपायुक्त द्वारा सभी पदाधिकारियों को अपने-अपने दायित्वों का गंभीरता से निर्वहन और समयबद्ध तरीके से तैयारियां पूर्ण करने का निर्देश दिया गया। करें।
बैठक में उप विकास आयुक्त, रांची, पुलिस अधीक्षक नगर/ यातायात, राँची, परियोजना निदेशक, समेकित जनजाति विकास अभिकरण, राँची, अपर जिला दण्डाधिकारी, विधि-व्यवस्था, राँची, अनुमण्डल पदाधिकारी, सदर, राँची, जिला आपूर्ति पदाधिकारी, जिला परिवहन पदाधिकारी, जिला पंचायती राज पदाधिकारी, उप प्रशासक, नगर निगम, राँची, विशेष विनियमन पदाधिकारी, जिला नजारत उपसमाहर्ता, जिला जन सम्पर्क पदाधिकारी, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, सहायक निदेशक, सामाजिक सुरक्षा, जिला शिक्षा पदाधिकारी, राँची, जिला शिक्षा अधीक्षक, जिला खेल पदाधिकारी, अग्रणी जिला प्रबंधक उपस्थित थे।
नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आंध्र प्रदेश के विशाख रिफाइनरी में हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (एचपीसीएल) के अवशिष्ट उन्नयन इकाई (आरयूएफ) के सफल संचालन की सराहना की। उन्होंने इसे ऊर्जा सुरक्षा और आत्मनिर्भरता की दिशा में एक निर्णायक कदम बताया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यह अत्याधुनिक इकाई आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य के अनुरूप ऊर्जा स्वतंत्रता को बढ़ावा देने के राष्ट्र के प्रयासों में अहम भूमिका निभाएगी।
केंद्रीय मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी के ‘एक्स’ पर किए गए एक पोस्ट पर प्रतिक्रिया देते हुए श्री मोदी ने लिखा:
“यह अत्याधुनिक इकाई ऊर्जा सुरक्षा को बढ़ावा देने के हमारे प्रयासों को नई दिशा प्रदान करेगी जिससे हम इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनेंगे। @HardeepSPuri”
नई दिल्ली – केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने तमिलनाडु के श्रीरंगम के पवित्र अरुलमिगु अरंगनाथ स्वामी मंदिर और तिरुचिरापल्ली में तिरुवनई कोविल के अरुलमिगु जंबुकेश्वर मंदिर में पूजा-अर्चना की। केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में पोंगल उत्सव समारोह में भी हिस्सा लिया।
X प्लेटफॉर्म पर पोस्ट्स की श्रृंखला में केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि तमिलनाडु के श्रीरंगम में पवित्र अरुलमिगु अरंगनाथ स्वामी मंदिर में पूजा करने का सौभाग्य मिला। हमारे देश के सभी नागरिकों की भलाई के लिए आशीर्वाद मांगा।
श्री अमित शाह ने कहा कि तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली के थिरुवनई कोविल में अरुलमिगु जंबुकेश्वरार मंदिर में प्रार्थना करने का सौभाग्य मिला।
केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि आज तमिलनाडु के तिरुचिरापल्ली में पोंगल समारोह में शामिल होकर बहुत खुशी हुई। उन्होंने कहा कि यह एक पवित्र त्योहार है जो कृतज्ञता और सद्भाव के ज़रिए प्रकृति और हमारे समुदायों के साथ हमारे गहरे संबंध को फिर से जागृत करता है। यह सभी के लिए समृद्धि, खुशी और अच्छे स्वास्थ्य का आशीर्वाद लाए।
नई दिल्ली – केंद्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरी जी ने सोमवार को नई दिल्ली के भारत मण्डपम में मध्य प्रदेश और उत्तराखंड में करोड़ों की लागत से चल रही राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजना को लेकर केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की।
केंद्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरी जी ने मध्य में 29,278 करोड़ रुपए की लागत से चल रही कुल 1,832 किमी लंबाई वाली 45 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं को लेकर समीक्षा बैठक की। बैठक में 6-लेन एक्सेस कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे अटल प्रोग्रेस-वे (चंबल एक्सप्रेस-वे) के एलाइनमेंट पर सकारात्मक चर्चा हुई।
इस बैठक में मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री मोहन यादव जी, केंद्रीय पर्यावरण मंत्री श्री भूपेंद्र यादव जी, केंद्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य सिंधिया जी, केंद्रीय राज्यमंत्री श्री अजय टम्टा जी, केंद्रीय राज्यमंत्री श्री हर्ष मल्होत्रा जी, मध्य प्रदेश विधानसभा के अध्यक्ष श्री नरेंद्र सिंह तोमर जी, मध्य प्रदेश के लोकनिर्माण विभाग मंत्री श्री राकेश सिंह जी तथा केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारी भी शामिल हुए।
साथ ही, केंद्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरी जी ने उत्तराखंड में 13,783 करोड़ रुपए की लागत से चल रही कुल 656 किमी लंबाई वाली 25 राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं लेकर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी जी, केंद्रीय राज्यमंत्री श्री अजय टम्टा जी, श्री हर्ष मल्होत्रा जी तथा केंद्र और राज्य सरकार के अधिकारियों के साथ समीक्षा की।
बैठक में उत्तराखंड के चार प्रमुख तीर्थस्थलों – केदारनाथ, बद्रीनाथ, यमुनोत्री और गंगोत्री को सड़कों से जोड़ने वाली चारधाम परियोजना की समीक्षा की गई। साथ ही भूस्खलन से बचाव के कार्य और राष्ट्रीय राजमार्ग स्ट्रेच के रखरखाव के स्थिति की समीक्षा की गई।
रांची,06.01.2026 – मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन से रांची स्थित मुख्यमंत्री आवासीय कार्यालय में प्रशासनिक एवं पुलिस विभाग के अधिकारियों ने शिष्टाचार भेंट की। इस अवसर पर मुख्यमंत्री को सभी ने नव वर्ष की हार्दिक बधाई एवं शुभकामनाएं दी।
मौके पर मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने सभी का हार्दिक स्वागत एवं नववर्ष शुभकामनाओं के लिए उनके प्रति आभार प्रकट किया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि नव वर्ष नया संकल्प, नई ऊर्जा तथा नए अवसरों को लेकर आता है।
हम सभी लोग इस नव वर्ष में सकारात्मक ऊर्जा एवं प्रतिबद्धता के साथ राज्य के सर्वांगीण विकास में अपनी महत्ती भूमिका निभाने को लेकर दृढ़ संकल्पित रहेंगे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2026 झारखंड की विकास यात्रा में मील का पत्थर साबित हो, इस लक्ष्य के साथ राज्य सरकार आगे बढ़ेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि शासन-प्रशासन और जनता के सहयोग से झारखंड को देश के अग्रणी राज्यों की श्रेणी में शुमार करने की दिशा में यह वर्ष एक महत्वपूर्ण पड़ाव सिद्ध होगा।
मुख्यमंत्री ने सभी लोगों से एकजुट होकर सरकार की विकास योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने का आह्वान किया। मुख्यमंत्री ने अपनी ओर से समस्त राज्यवासियों के सुख, समृद्धि, उन्नति और खुशहाली की कामना की तथा नववर्ष की शुभकामनाएं दी।
मुख्यमंत्री से मुलाकात करने वाले प्रशासनिक अधिकारियों में अध्यक्ष, राज्य वित्त आयोग श्री अमरेंद्र प्रताप सिंह, सीईओ जेएसएलपीएस श्री अनन्य मित्तल, अपर सचिव उद्योग श्रीमती प्रीति रानी, अपर सचिव वित्त श्री धनंजय सिंह, अपर सचिव स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता श्रीमती सीता पुष्पा, निदेशक सामाजिक सुरक्षा श्री विजय कुमार सिंह, उपायुक्त पूर्वी सिंहभूम श्री कर्ण सत्यार्थी, उपायुक्त सरायकेला-खरसावां श्री नीतीश कुमार सिंह, उपायुक्त कोडरमा श्री ऋतुराज वहीं पुलिस अधिकारियों में डीजी होमगार्ड श्री एम० एस० भाटिया, डीआईजी दुमका श्री अमर लकड़ा, एसपी लोहरदगा श्री सादिक अनवर रिज़वी, एसपी सरायकेला-खरसावां श्री मुकेश कुमार लुनायत, एसपी गोड्डा श्री मुकेश कुमार, एसपी गुमला श्री हारिश बिन जमां, एसपी खूंटी श्री मनीष टोप्पो, एसपी ट्रेनिंग सेंटर मुसाबनी श्री विजय आशीष कुजूर सहित अन्य अधिकारी सम्मिलित थे।
उपायुक्त-सह-जिला रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु), रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा प्रशिक्षण कार्यक्रम का किया गया था शुभारंभ
दिनांक 02.01.2026, 05.01.2026 एवं 06.01.2026 को आयोजित किया गया प्रशिक्षण कार्यक्रम
नागरिक निबंधन कार्य (जन्म-मृत्यु) से जुड़े पदाधिकारियों/कर्मचारियों को दिया गया प्रशिक्षण
पदाधिकारी एवं कर्मियों को निर्धारित समय सीमा (21 दिनों के अंदर जन्म-मृत्यु) का निबंधन पूर्ण करवाने का निर्देश
निबंधन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी बर्दाश्त नहीं की जायेगी – उपायुक्त-सह-जिला रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु), रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री
रांची,06.01.2026 – रांची जिले में नागरिक निबंधन प्रणाली को और अधिक सुदृढ़, पारदर्शी तथा समयबद्ध बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। दिनांक 02.01.2026, 05.01.2026 एवं 06.01.2026 को समाहरणालय ब्लॉक-बी स्थित कमरा संख्या- 505 में नागरिक निबंधन कार्य (जन्म-मृत्यु) से जुड़े पदाधिकारियों/कर्मचारियों को प्रशिक्षण दिया गया।
उपायुक्त-सह-जिला रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु), रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा दिनांक 02.01.2026 को दीप प्रज्वलित कर प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया था। इस दौरान उन्होंन कहा कि निबंधन प्रक्रिया में किसी भी प्रकार की लापरवाही या देरी बर्दाश्त नहीं की जायेगी। प्रशिक्षण में सभी पदाधिकारी एवं कर्मी को यह सुनिश्चित करने की सलाह दी गई कि निर्धारित समय सीमा (21 दिनों के अंदर जन्म/मृत्यु) का निबंधन पूर्ण कराया जाये। उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा निर्देश दिया गया कि पदाधिकारी/कर्मी प्रशिक्षण का उपयोग कर अपनी कार्य कुशलता बढ़ाएं एवं आम नागरिकों को दलालों के चक्कर से मुक्त दिलाते हुए त्वरित एवं पारदर्शी सेवा प्रदान करें।
दिनांक 06.01.2026 को त्रिदिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन जिला सांख्यिकी पदाधिकारी-सह-अपर जिला रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) रांची श्री शेषनाथ बैठा द्वारा किया गया। उन्होंने कहा कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम जिला प्रशासन की उस प्रतिबद्धता का हिस्सा है जिसमें सरकारी सेवाओं को जनता के द्वार तक पहुंचाने तथा डिजिटल इंडिया की भावना को साकार करने के साथ जन्म-मृत्यु निबंधन में शत प्रतिशत लक्ष्य प्राप्त करने पर जोर दिया जा रहा है।
जन्म और मृत्यु रजिस्ट्रेशन अधिनियम 1969 में निहित प्रावधान के अंतर्गत राज्य में होने वाली प्रत्येक जन्म-मृत्यु की घटना का रजिस्ट्रेशन अनिवार्य है। यह न केवल व्यक्ति के मूलभूत अधिकारों की रक्षा करता है, अपितु जन्म की तिथि एवं स्थान का यह एक प्रमाणिक दस्तावेज है। स्कूल में प्रवेश, राशन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, विदेश यात्राओं के लिए पासपोर्ट, मताधिकार प्राप्त करने के लिए, वृद्धावस्था पेंशन, बालिका समृद्धि योजना, बच्चों के स्वास्थ्य संबंधी, देश की वर्तमान जनसंख्या की स्थिति एवं मृत्यु की तारीख का एक प्रमाणिक दस्तावेज है। संपत्ति के दावे, कोर्ट कचहरी में मृत्यु का साक्ष्य, जीवन बीमा, बैंक खातों, दुर्घटना आदि, देश की वर्तमान जनसंख्या, चिकित्सा विज्ञान, शिशु मृत्यु दर, संपत्ति हस्तांतरण तथा विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त करने में सहायक होता है।
प्रशिक्षण कार्यक्रम में अनुमंडल पदाधिकारी, सदर रांची श्री कुमार रजत, अपर समाहर्ता, रांची श्री रामनारायण सिंह, जनगणना कार्य निदेशालय, रांची के संयुक्त निदेशक श्री सत्येन्द्र कुमार गुप्ता, उप नगर प्रशासक-सह-रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु) श्रीमती निहारिका तिर्की, सहायक निदेशक श्री ज्ञानचन्द्र महतो, जिला सांख्यिकी पदाधिकारी श्री शेषनाथ बैठा एवं संबंधित सभी सांख्यिकी कर्मी, प्रखंड विकास पदाधिकारी, प्रखंड पंचायती राज पदाधिकारी, सभी प्रखंड सांख्यिकी पर्यवेक्षक, सभी पंचायत सचिव-सह-रजिस्ट्रार (जन्म-मृत्यु), रांची संबंधित सभी कंप्यूटर ऑपरेटर उपस्थित थे।
सभी शिकायतों को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित विभागीय पदाधिकारियों को मौके पर ही निर्देशित किया कि प्राप्त फरियादों का समयबद्ध एवं पारदर्शी ढंग से निष्पादन सुनिश्चित किया जाए
जनता की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता पर किया जाए तथा किसी भी स्तर पर शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी:-उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजंत्री
राँची,06.01.2026 – उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजंत्री, ने 06 जनवरी 2026 को समाहरणालय स्थित अपने कार्यालय कक्ष में आम जनता से मिल कर उनकी समस्याओं को सुना एवं उनकी शिकायतें एवं समस्याएं सुनी तथा संबंधित पदाधिकारियों को त्वरित निष्पादन हेतु आवश्यक निर्देश दिए गए।
इस दौरान मुख्य रूप से भूमि संबंधी विवाद, भूमि उपयोग की अनुमति (परमिशन) तथा अन्य विविध समस्याओं से जुड़ी शिकायतें प्राप्त हुईं। उपायुक्त ने सभी शिकायतों को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित विभागीय पदाधिकारियों को मौके पर ही निर्देशित किया कि प्राप्त फरियादों का समयबद्ध एवं पारदर्शी ढंग से निष्पादन सुनिश्चित किया जाए। उन्होंने यह कहा कि जनता की समस्याओं का समाधान प्राथमिकता पर किया जाए तथा किसी भी स्तर पर शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजंत्री ने कहा कि जिला प्रशासन का उद्देश्य आमजन तक सरकारी योजनाओं एवं सेवाओं को सुगमता से पहुंचाना है। जनता दरबार जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से प्रशासन और जनता के बीच सीधा संवाद स्थापित होता है, जिससे समस्याओं का त्वरित समाधान संभव हो पाता है।
इस दौरान राष्ट्रीय जतरा महोत्सव के आयोजकों के प्रतिनिधि मंडल ने उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री से मुलाकात की। उन्होंने ज्ञापन देते हुए कहा की विगत कई वर्षों से रांची के ऐतिहासिक मोरहाबादी मैदान में सफलतापूर्वक आयोजित हो रहे इस महोत्सव के बैनर तले आदिवासी समाज की प्राचीन परंपराओं, रीति-रिवाजों, लोककला एवं सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण एवं संवर्धन किया जाता रहा है।
इस महोत्सव में झारखंड सहित देश के विभिन्न राज्यों से आदिवासी कलाकार एवं खोड़ा दल एकत्रित होकर अपनी पारंपरिक कला, संस्कृति एवं सामाजिक एकता का जीवंत प्रदर्शन करते हैं। यह आयोजन आने वाली पीढ़ियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का सशक्त माध्यम है। प्रतिनिधियों ने उपायुक्त से विनम्र अनुरोध किया कि इस वर्ष राष्ट्रीय जतरा महोत्सव के आयोजन हेतु 31 जनवरी से मोराबादी मैदान आवंटित किया जाए, ताकि यह सांस्कृतिक कार्यक्रम पूर्ववत शांतिपूर्ण, गरिमामय एवं सफलतापूर्वक संपन्न हो सके। जिसपर उपायुक्त ने उनके अनुरोध पर विचार करने का आश्वासन दिया।
उपायुक्त-सह-जिला दण्डाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देशानुसार विभिन्न अंचलों आयोजित जनता दरबार में सैकड़ों आवेदनों का ऑन द स्पॉट निष्पादन
चान्हो में 89, बेड़ो में 136, राहे में 95, सिल्ली में 51, अरगोड़ा में 72, बुढ़मू में 66, खलारी में 24 तथा बुंडू में 43 आवेदनों का निष्पादन
अन्य अंचलों में भी कई आवेदनों का निष्पादन
रांची,06.01.2025 – उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निदेशानुसार जिले के सभी प्रखंडों एवं अंचलों में प्रत्येक मंगलवार को जनता दरबार का आयोजन किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य आम नागरिकों की समस्याओं का त्वरित, पारदर्शी एवं समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करना है। इसी क्रम में आज दिनांक 06.01.2026 को जिले के विभिन्न अंचलों में आयोजित जनता दरबार में बड़ी संख्या में प्राप्त आवेदनों का मौके पर ही निष्पादन किया गया।
अंचल कार्यालय सोनाहातू में चिरगाडीह पंचायत की यमुना देवी को पारिवारिक सदस्यता प्रमाण पत्र तथा बुद्धेश्वर पुरान को आचरण प्रमाण पत्र निर्गत किया गया। सिल्ली अंचल के तिरगा ग्राम की नीलम देवी को पारिवारिक प्रमाण पत्र प्रदान किया गया।
अनगड़ा अंचल अंतर्गत बरवादाग अंचल के आवेदक दुलाल महतो द्वारा पंजी-2 में सुधार हेतु दिए गए आवेदन का निष्पादन किया गया। इसी अंचल के चिलदाग ग्राम के विनोद कुमार महतो एवं जमल मुंडा के पंजी-2 सुधार संबंधी आवेदनों का भी निस्तारण किया गया। साथ ही चिलदाग सोसो ग्राम के राजू कुमार एवं ग्राम जराटोली के मार्शल उरांव के शुद्धि पत्र में जाति सुधार किया गया।
मांडर अंचल में आयोजित जनता दरबार में आवेदिका बेबी कुमारी एवं गुलशन खातून को जाति प्रमाण पत्र निर्गत किया गया। नगड़ी अंचल के ग्राम टुण्डूल की दीपिका को लगान रसीद प्रदान की गई।
चान्हो अंचल में दाखिल-खारिज, पंजी-2 सुधार, पारिवारिक सदस्यता प्रमाण पत्र, ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र, आवासीय/जाति/आय प्रमाण पत्र, सामाजिक सुरक्षा सहित कुल 89 आवेदनों का निष्पादन किया गया। वहीं बेड़ो में 136, राहे में 95, सिल्ली में 51, अरगोड़ा में 72, बुढ़मू में 66, खलारी में 24 तथा बुंडू में 43 आवेदनों का निष्पादन किया गया। इसके अतिरिक्त अन्य अंचलों में भी कई आवेदनों का समाधान किया गया।
उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा कि नागरिकों को कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें और उनकी समस्याओं का समाधान समय पर पारदर्शी तरीके से हो। उन्होंने कहा कि जनता से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता के साथ कार्य करें और अधिक से अधिक आवेदनों का ऑन द स्पॉट निष्पादन सुनिश्चित करें।
नई दिल्ली – एयरोनॉटिकल डेवलपमेंट एजेंसी (एडीए) द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘एयरोनॉटिक्स 2047’ का शुभारंभ 4 जनवरी, 2026 को बेंगलुरु स्थित सेंटर फॉर एयरबोर्न सिस्टम्स (सीएबीएस) में हुआ। संगोष्ठी का उद्घाटन वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने किया। अपने संबोधन में वायुसेना प्रमुख ने लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (एलसीए) तेजस के 25 वर्ष पूरे होने पर एडीए को बधाई दी और आज के निरंतर बदलते समय में भारतीय वायु सेना (आईएएफ) को परिचालन रूप से तैयार रखने के लिए सुपुर्दगी की समयसीमा का पालन करने की आवश्यकता पर बल दिया।
इस अवसर पर बोलते हुए, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने आयात पर निर्भरता को कम करने के लिए स्वदेशी अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी के विकास के महत्व पर जोर दिया जिससे 2047 तक विकसित भारत के परिकल्पना को साकार किया जा सके।
इस संगोष्ठी में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ, औद्योगिक भागीदार, शिक्षाविद, विमानन क्षेत्र के अग्रणी और एयरोस्पेस क्षेत्र के वक्ता एक साथ आए हैं ताकि वे वैमानिकी के विकास, डिजाइन नवाचार, विनिर्माण और भविष्य की संभावनाओं पर अपने विचार साझा कर सके। एयरोनॉटिक्स-2047 का मुख्य उद्देश्य आधुनिक एयरोस्पेस प्रौद्योगिकियों के विभिन्न पहलुओं का पता लगाना है, जिनमें अगली पीढ़ी के विमानों के लिए विनिर्माण और असेंबली, डिजिटल विनिर्माण, अगली पीढ़ी के लड़ाकू विमानों के लिए वायुगतिकी, प्रणोदन प्रौद्योगिकियां, उड़ान परीक्षण तकनीकें, डिजिटल ट्विन प्रौद्योगिकी, प्रमाणन चुनौतियां, उड़ान नियंत्रण प्रणाली और एवियोनिक्स, लड़ाकू विमानों में रखरखाव संबंधी चुनौतियां, विमान डिजाइन में एआई और एक्चुएटर्स के लिए सटीक विनिर्माण शामिल हैं।
इस संगोष्ठी में भारतीय अंतरिक्ष प्रौद्योगिकियों के भविष्य और एलसीए तेजस के प्रारंभिक डिजाइन से लेकर स्क्वाड्रन में शामिल होने तक के सफर पर चर्चा की जाएगी। एडीए ने एलसीए तेजस को डिजाइन और विकसित किया है। इसके 5,600 से अधिक सफल उड़ान परीक्षण हो चुके हैं। इस कार्यक्रम में सरकारी प्रयोगशालाओं, शैक्षणिक संस्थानों और उद्योगों सहित 100 से अधिक डिजाइन कार्य केंद्र शामिल थे। एलसीए को चौथी पीढ़ी का लड़ाकू विमान बनाने के लिए कार्बन कंपोजिट, हल्के पदार्थ, फ्लाई-बाय-वायर फ्लाइट कंट्रोल, डिजिटल यूटिलिटी मैनेजमेंट सिस्टम, ग्लास कॉकपिट आदि जैसी कई विशिष्ट प्रौद्योगिकियों का विकास किया गया।
एलसीए एमके1ए स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित लड़ाकू विमान का एक उन्नत संस्करण है और यह भारतीय वायु सेना की परिचालन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए एक शक्तिशाली मंच के रूप में कार्य करेगा। एलसीए एमके II और एलसीए नेवी पर वर्तमान में कार्य चल रहा है। संगोष्ठी के दौरान, तेजस कार्यक्रम से जुड़े प्रतिष्ठित और प्रसिद्ध वक्ताओं द्वारा तकनीकी वार्ता की एक श्रृंखला प्रस्तुत की जाएगी।
भारत को एलसीए तेजस के विकास से अपार लाभ हुआ है क्योंकि अब उसके पास स्वदेशी रूप से लड़ाकू विमान बनाने की क्षमता और सामर्थ्य दोनों हैं। एलसीए कार्यक्रम सबसे सफल स्वदेशी रक्षा कार्यक्रमों में से एक है जिसके माध्यम से भारतीय वायु सेना को असाधारण वायु श्रेष्ठता वाला लड़ाकू विमान प्राप्त हुआ। अब तक, 38 विमान (32 लड़ाकू विमान और 6 प्रशिक्षण विमान) भारतीय वायु सेना के दो स्क्वाड्रनों में शामिल किए जा चुके हैं।
संगोष्ठी के एक भाग के रूप में, बड़ी संख्या में सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (पीएसयू), डीपीएसयू, उद्योग और एमएसएमई अपने स्वदेशी रूप से डिजाइन और विकसित किए गए उत्पादों का प्रदर्शन कर रहे हैं जो हवाई अनुप्रयोगों के लिए उपयुक्त हैं।
नई दिल्ली – केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज नई दिल्ली के एनएएससी कॉम्प्लेक्स स्थित ए.पी. शिंदे ऑडिटोरियम में भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद द्वारा विकसित 25 फील्ड फसलों की 184 उन्नत किस्मों का अनावरण किया। यह कार्यक्रम भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (आईसीएआर) के तत्वावधान में आयोजित किया गया जिसमें वैज्ञानिकों, वरिष्ठ अधिकारियों और कृषि विशेषज्ञों ने सहभागिता की।
इस अवसर पर केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत ने उच्च उत्पादक बीजों के विकास में अभूतपूर्व सफलता हासिल की है। वर्ष 1969 में शुरू हुई गजट अधिसूचना प्रक्रिया के बाद अब तक कुल 7205 फसल प्रजातियों को अधिसूचित किया जा चुका है जिनमें धान, गेहूं, ज्वार, मक्का, दलहन, तिलहन, रेशेदार और अन्य फसलें शामिल हैं, वहीं प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 11–12 वर्षों में नई किस्मों के विकास की गति और तेज हुई है, अकेले इस अवधि में 3236 उच्च उत्पादक प्रजातियों को मंजूरी मिली है, जबकि 1969 से 2014 तक 3969 प्रजातियों को अधिसूचित किया गया था। अब अधिसूचित 184 उन्नत किस्मों का लोकार्पण किया गया है, जो देश के किसानों को अधिक उपज, बेहतर गुणवत्ता और जलवायु सहनशीलता जैसे लाभ देंगी।
उन्होंने बताया कि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की फसल संबंधी समन्वित परियोजनाओं के तहत परिषद की संस्थाओं, राज्य व केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालयों और निजी बीज कंपनियों ने मिलकर इन किस्मों के विकास में अहम योगदान दिया है। विशेष गुणों वाली कई प्रजातियां, जैसे सूखा सहनशील, लवणीय‑क्षारीय मिट्टी में उपज देने वाली और रोग‑कीट प्रतिरोधी किस्में, किसानों को बदलते मौसम और जलवायु संकट से सुरक्षा कवच देंगी।
श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि भारत उच्च उत्पादक और जलवायु सहनशील बीजों के विकास के दम पर कृषि में नई क्रांति के दौर में प्रवेश कर चुका है। केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि यह उपलब्धि भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की फसलों की अखिल भारतीय समन्वित परियोजनाओं, राज्य व केंद्रीय कृषि विश्वविद्यालयों और निजी बीज कंपनियों के सामूहिक प्रयास का परिणाम है। कुल 184 हाल की प्रजातियों के विकास में परिषद की संस्थाओं, विश्वविद्यालयों और निजी क्षेत्र की बीज कंपनियों ने क्रमशः 60, 62 और 62 प्रजातियों के साथ योगदान दिया है।
श्री शिवराज सिंह चौहान ने बताया कि कई नई लोकार्पित किस्मों में सूखा, बाढ़, लवणीयता और रोग‑कीट प्रतिरोध जैसे विशेष गुण निहित हैं, जो मौसम की अनिश्चितता के बीच स्थिर उत्पादन सुनिश्चित करेंगे। उच्च पैदावार के साथ‑साथ इन किस्मों में बेहतर गुणवत्ता, पोषण‑समृद्धि और प्रसंस्करण‑उपयुक्तता जैसे गुण भी हैं, जिससे किसानों को बाजार में बेहतर दाम और उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण खाद्यान्न मिलेगा। यह ‘लैब से लैंड’ की यात्रा का सफल मॉडल है।
उन्होंने कहा कि हमारा संकल्प है कि हर किसान के खेत तक उच्च गुणवत्ता वाले बीज पहुंचें, ताकि भारत न सिर्फ अपने लिए बल्कि पूरे विश्व के लिए अन्न उत्पादन करने वाला देश बने। केंद्रीय कृषि मंत्री ने भारतीय कृषि को ‘विकसित भारत’ के निर्माण की आधारशिला बताते हुए कहा कि देश ने चावल उत्पादन में चीन को पीछे छोड़कर 150.18 मिलियन टन उत्पादन के साथ नया कीर्तिमान स्थापित किया है। उन्होंने कहा कि भारत अब खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित कर चुका है और दुनिया को अन्न प्रदान करने वाला राष्ट्र बन गया है। केंद्रीय मंत्री ने इस उपलब्धि के लिए किसानों, वैज्ञानिकों, शोध संस्थानों और निजी क्षेत्र को बधाई दी।
केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में आत्मनिर्भर और शक्तिशाली भारत के निर्माण का महायज्ञ चल रहा है, जिसमें कृषि क्षेत्र की अहम भूमिका है। उन्होंने बताया कि बीज किसी भी उत्पादन प्रणाली की आत्मा है और अब भारत केवल अन्न ही नहीं बल्कि पोषणयुक्त अन्न के उत्पादन की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है। देश भर के किसानों के लिए 25 फसलों की 184 नवीन प्रजातियां जारी की गई हैं, जिन्हें तीन वर्षों के भीतर किसानों तक पहुँचाने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने कहा कि सरकार कृषि योजनाओं के साथ ‘विकसित भारत जी-राम-जी’ जैसी नई योजनाओं का कन्वर्जेन्स बढ़ाकर जल संरक्षण, कृषि वानिकी और पशुपालन जैसे क्षेत्रों में कार्य करेगी। केंद्रीय मंत्री ने दलहन-तिलहन उत्पादन बढ़ाने पर भी जोर दिया और कहा कि इस क्षेत्र में उत्पादकता बढ़ाना, मूल्य स्थिर रखना और प्रोसेसिंग व्यवस्था विकसित करना केंद्र की प्राथमिकता है।
कार्यक्रम में कुल 122 अनाज फसलों की किस्में जारी की गईं, जिनमें धान की 60 और मक्का की 50 नई किस्में प्रमुख हैं। इनमें ज्वार, बाजरा, रागी, लघु मिलेट्स और प्रोसो मिलेट की भी उन्नत किस्में शामिल हैं, जो पोषण सुरक्षा और जलवायु सहनशीलता को मजबूत करेंगी। दलहनों की 6 नई किस्में (अरहर, मूंग और उड़द) जारी की गई हैं जो प्रोटीन सुरक्षा और फसल विविधीकरण को गति देंगी। तिलहनों के लिए सरसों, कुसुम, तिल, मूंगफली, गोभी सरसों और अरंडी सहित 13 नई किस्में तथा 11 चारा फसलों की किस्में पशुपालकों के लिए महत्वपूर्ण संसाधन साबित होंगी। कार्यक्रम में गन्ने की 6 और कपास की 24 किस्में, जिनमें 22 बीटी कपास भी शामिल हैं, किसानों के लिए जारी की गईं। जूट और तंबाकू की एक-एक नई किस्म भी रिलीज की गई जो संबंधित क्षेत्रों के किसानों के लिए अधिक उत्पादन और बेहतर रिटर्न का अवसर प्रदान करेगी।
इन 184 किस्मों को आईसीएआर के वैज्ञानिकों ने विभिन्न कृषि-जलवायु परिस्थितियों, मिट्टी के प्रकार और खेती की पद्धतियों को ध्यान में रखते हुए वर्षों के शोध, परीक्षण और मूल्यांकन के बाद विकसित किया है।
कार्यक्रम के दौरान कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय के सचिव डॉ देवेश चतुर्वेदी, आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट भी उपस्थित थे जिन्होंने अपने विचार व्यक्त किए। वहीं, राष्ट्रीय बीज निगम (NSC) की अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक और केंद्रीय कृषि मंत्रालय की अतिरिक्त सचिव डॉ. श्रीमती मनिंदर कौर द्विवेदी ने NSC की ओर से 33.26 करोड़ रुपए के लाभांश का चेक केंद्रीय कृषि मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान को भेंट किया।