नई दिल्ली – भारत की प्रमुख अंतरराष्ट्रीय साइक्लिंग प्रतियोगिता, बजाज पुणे ग्रैंड टूर, आज अत्यधिक ऊर्जा से भरे वातावरण में पुरस्कार वितरण समारोह के साथ सम्पन्न हुई, जिसमें विश्व स्तरीय खेल-कौशल, दृढ़ता तथा कड़ी प्रतिस्पर्धा प्रदर्शित की गई। इस आयोजन ने पुणे और भारत को वैश्विक खेल मंच पर शक्तिशाली केंद्र के रूप में स्थापित किया और फिट इंडिया मिशन के तहत नागरिकों को फिटनेस और सक्रिय जीवनशैली अपनाने के लिए प्रेरित किया।
बालगंधर्व रंगमंदिर, जे.एम. रोड, पुणे में आयोजित समापन समारोह में श्रीमती रक्षा खडसे, राज्य मंत्री (खेल और युवा मामले); श्री चंद्रकांत पाटिल, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री, महाराष्ट्र; श्री राजीव बजाज, प्रबंध निदेशक, बजाज ऑटो; श्री अतुल चोर्डिया, अध्यक्ष, पंचशील रियल्टी; श्रीमती मेधा कुलकर्णी, सांसद; और जिले तथा पुलिस प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे। विभिन्न श्रेणियों के विजेताओं को उनके साहस, दृढ़ता और खेल उत्कृष्टता का जश्न मनाते हुए सम्मानित किया गया।
श्रीमती खडसे ने बजाज ऑटो, श्री जितेंद्र डूडी, जिला कलेक्टर, पुणे के नेतृत्व में जिले के प्रशासन, श्री नवल किशोर राम, आईएएस, आयुक्त के नेतृत्व में पुणे नगर निगम और पुलिस टीमों के अथक प्रयासों की सराहना की, जिन्होंने एक ऐसा आयोजन सफलतापूर्वक आयोजित किया जो अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप है।
437 कि.मी. के पूरे रूट पर, 20 लाख से अधिक दर्शक सड़कों पर खड़े होकर खिलाडि़यों का उत्साह बढ़ाते रहे व उन्हें प्रेरित करते रहे, यह साबित करते हुए कि भारत में खेल अब केवल स्टेडियम तक ही सीमित नहीं रह गए हैं—ये गाँवों, शहरों और हर नागरिक तक पहुँच रहे हैं। यह टूर खेलों को सफलतापूर्वक लोगों तक पहुँचाने में सक्षम रहा, और जमीनी स्तर पर इसने फिटनेस तथा प्रतिस्पर्धात्मक भावना को प्रज्वलित किया।
श्रीमती खडसे ने रेखांकित किया कि बजाज पुणे ग्रैंड टूर जैसे आयोजन भारत के ओलंपिक विज़न को आगे बढ़ाते हैं, अगली पीढ़ी के खिलाडि़यों को प्रेरित करते हैं, और पुणे को एक वैश्विक खेल केंद्र के रूप में मजबूती से स्थापित करते हैं। उन्होंने पूरे देश में स्वास्थ्य, अनुशासन और उत्कृष्टता की संस्कृति को विकसित करने तथा एक मजबूत खेल पारिस्थितिकी तंत्र बनाने में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व की सराहना की।
बजाज पुणे ग्रैंड टूर केवल एक प्रतियोगिता नहीं है—यह एक आंदोलन है जो फिटनेस को बढ़ावा देता है, भारत की खेल क्षमताओं को प्रदर्शित करता है, और राष्ट्र को वैश्विक खेल गौरव बनने के लिए तैयार करता है।
नई दिल्ली – पराक्रम दिवस 2026, नेताजी सुभाष चंद्र बोस की अदम्य भावना और अमिट विरासत को सम्मान देने के लिए, अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के श्री विजयपुरम में बड़े देशभक्तिपूर्ण उत्साह के साथ मनाया गया। इस अवसर पर अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के उप-राज्यपाल, एडमिरल वी. के. जोशी(सेवानिवृत्त) मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। इस ऐतिहासिक दिन पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने अपने वीडियो संदेश के माध्यम से सभा को संबोधित किया।
अपने संबोधन में, प्रधानमंत्री ने नेताजी सुभाष चंद्र बोस को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके अद्वितीय साहस, दूरदर्शी नेतृत्व और भारत की आजादी की लड़ाई के प्रति उनके अटूट समर्पण को याद किया। अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के साथ नेताजी के गहरे ऐतिहासिक संबंधों का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि नेताजी का विजन आज भी एक सशक्त, आत्मनिर्भर और विकसित भारत की यात्रा में राष्ट्र को लगातार प्रेरित कर रहा है।
समारोह के दौरान इण्डियन नेशनल आर्मी(INA) यानि आजाद हिन्द फौज के वरिष्ठ सैनिक श्री माधवन पिल्लै को नेताजी के नेतृत्व में राष्ट्र के प्रति उनके अमूल्य योगदान और आजीवन समर्पण के लिए सम्मानित किया गया। संस्कृति मंत्रालय के सचिव श्री विवेक अग्रवाल ने पराक्रम दिवस समारोह 2026 के महत्व और अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह के लिए इसकी विशेष प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए महत्वपूर्ण बातें कहीं।
नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वीप पर एक महीने तक चलने वाली प्रदर्शनी, साथ ही 24 और 25 जनवरी को आईटीएफ ग्राउंड में होने वाले विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों का उद्घाटन मुख्य अतिथि ने रिमोट से किया।
इस कार्यक्रम में देशभक्ति की भावना को समर्पित अनेक जीवंत सांस्कृतिक प्रस्तुतियां दी गईं। एक भव्य ड्रोन शो ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया, जिसमें नेताजी सुभाष चंद्र बोस और आज़ाद हिंद फौज के जीवन, आदर्शों और ऐतिहासिक यात्रा को को बखूबी सजीव रूप से प्रस्तुत किया गया।
इस गरिमामय आयोजन में गणमान्य व्यक्तियों, सशस्त्र बलों के सदस्यों, विद्यार्थियों और नागरिकों की उपस्थिति रही, जिन्होंने एक साथ भारत के सबसे सम्मानित स्वतंत्रता सेनानियों में से एक को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए एक साथ आए थे।
अंडमान एवं निकोबार द्वीप समूह में आयोजित मुख्य समारोहों के साथ-साथ, पराक्रम दिवस देशभर के 13 प्रमुख स्थानों—कटक, कोडालिया, रामगढ़, हरिपुरा, जबलपुर, कोलकाता, मुर्शिदाबाद, डलहौजी, दिल्ली, मोइरांग, कोहिमा, गोमो और मेरठ—में भी मनाया गया, जो नेताजी के जीवन और विरासत से करीब से जुड़े हैं।
सांस्कृतिक संध्या में देशभर से आए प्रसिद्ध कलाकारों ने दिल को छू लेने वाली प्रस्तुतियां दीं। मशहूर सरोद वादक उस्ताद अमजद अली खान ने अपने बेटों अमान अली बंगश और अयान अली बंगश के साथ राग बागेश्री की भावपूर्ण प्रस्तुति देकर श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। प्रख्यात जोड़ी सौरेंद्रो–सौम्योजित ने कालजयी देशभक्ति रचना “धन धान्य पुष्प भरा” प्रस्तुत किया, वहीं लोकप्रिय लोक गायिका मंगली ने प्रभावशाली शिव स्तोत्र का गायन कर गहन आध्यात्मिक भावना जगाई। प्रसिद्ध गायक पापोन ने “सुभाष जी” के माध्यम से नेताजी को संगीतमय श्रद्धांजलि दी। इंडियन नेशनल आर्मी के राष्ट्रगान “शुभ सुख चैन की” की विशेष रूप से तैयार की गई सामूहिक प्रस्तुति ने त्याग और राष्ट्रीय एकता की भावना को सशक्त रूप से प्रतिध्वनित किया। प्रख्यात गायिका श्रीमती प्रतिभा सिंह बघेल ने “ऐ मेरे वतन के लोगों” की भावुक प्रस्तुति से सभा को भावविभोर कर दिया, जबकि प्रसिद्ध संगीतकार रघु दीक्षित ने “तिरंगा” की ऊर्जावान और प्रेरणादायक प्रस्तुति के साथ संध्या का समापन किया, जिससे दर्शकों में देशभक्ति का जोश भर गया।
पराक्रम दिवस 2026 के अंतर्गत संस्कृति मंत्रालय की पहल ने एकता, संप्रभुता और राष्ट्रीय गौरव के प्रति भारत के अटूट संकल्प की एक सशक्त याद दिलाई।
नई दिल्ली – भारत सरकार के कौशल विकास और उद्यमिता राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और शिक्षा राज्य मंत्री श्री जयंत चौधरी ने आज नई दिल्ली में समावेशी शिक्षा शिखर सम्मेलन के समापन सत्र को संबोधित किया।
शिक्षा मंत्रालय के स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग (डीओएसईएल) द्वारा आयोजित तीन दिवसीय समावेशी शिक्षा शिखर सम्मेलन आज संपन्न हुआ। इसमें “विशिष्ट सीखने की अक्षमता, न्यूरोडाइवर्सिटी, और विशेष ज़रूरतों वाले बच्चों (सीडब्ल्यूएसएन) के लिए भविष्य के रास्ते” पर गहन विचार-विमर्श किया गया।
अंतिम दिन न्यूरोडाइवर्स बच्चों के लिए सीखने के समान अवसर सुनिश्चित करने के लिए शुरुआती पहचान, समावेशी पारिस्थितिकी तंत्र और साक्ष्य-आधारित हस्तक्षेपों के महत्व पर बल दिया गया।
दिन की शुरुआत सीआईईटी- एनसीईआरटी की प्रोफेसर भारती कौशिक के संदर्भ-निर्धारण संबोधन से हुई। उन्होंने कमी-आधारित दृष्टिकोण से शक्ति-आधारित ढांचे की ओर बदलाव पर ज़ोर दिया। उन्होंने उत्तरदायी पाठ्यक्रम, शिक्षकों की तैयारी और सीखने की विविध ज़रूरतों के प्रति प्रणालीगत संवेदनशीलता की आवश्यकता पर बल दिया।
समाजशास्त्री टॉम शेक्सपियर का हवाला देते हुए, श्री जयंत चौधरी ने कहा कि “दिव्यांगता कोई व्यक्तिगत समस्या नहीं है, बल्कि यह लोगों और उनके रहने के वातावरण के बीच मेल न होना है।” मंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि समावेशन का मतलब बच्चे को ठीक करना नहीं है, बल्कि प्रणाली को बदलना है, जिसमें क्लासरूम, पाठ्यक्रम, सोच और सीखने के तरीके शामिल हैं।
मंत्री ने इस बात पर बल दिया कि शुरुआती पहचान के बाद सार्थक शैक्षणिक और चिकित्सीय सहायता, प्रशिक्षित शिक्षकों की उपलब्धता, लचीला पाठ्यक्रम और संस्थागत तैयारी होनी चाहिए। शिक्षकों की केंद्रीय भूमिका की जानकारी देते हुए, उन्होंने समावेशी शिक्षाशास्त्र को मजबूत करने के महत्व पर ज़ोर दिया। उन्होंने कहा कि समावेशी शिक्षा को स्कूली शिक्षा से आगे बढ़कर समावेशी कौशल और रोज़गार की नींव बनानी चाहिए। इस दौरान यह सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि शिक्षा के रास्ते आजीविका, काम की गरिमा और समाज में पूरी भागीदारी से सार्थक रूप से जुड़ें।
इस कार्यक्रम में स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग (डीओएसईएल) के सचिव श्री संजय कुमार; दिव्यांगजनों का सशक्तिकरण विभाग (डीईपीडब्ल्यूडी) की सुश्री वी. विद्यावती; डीओएसईएल की आर्थिक सलाहकार श्रीमती ए. श्रीजा; डीओएसईएल की उप सचिव सुश्री इरा सिंघल; और डीओएसईएल के संयुक्त निदेशक श्री राम सिंह, साथ ही डीओएसईएल, शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी और राष्ट्रीय संस्थानों, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और भागीदार संगठनों के प्रतिनिधि शामिल हुए।
नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री और भारत रत्न से सम्मानित श्री कर्पूरी ठाकुर को उनकी जयंती पर श्रद्धांजलि अर्पित की।
प्रधानमंत्री ने कहा कि समाज के शोषित, वंचित और कमजोर वर्गों का उत्थान ही कर्पूरी ठाकुर की राजनीति के केंद्र में था। उन्होंने कहा कि जननायक कर्पूरी ठाकुर को उनकी सादगी और जीवन भर जनसेवा के प्रति उनके समर्पण के लिए हमेशा याद किया जाएगा और उनका अनुकरण किया जाएगा।
प्रधानमंत्री ने एक्स पर अपनी पोस्ट में कहा;
“बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर जी को उनकी जयंती पर सादर नमन। समाज के शोषित, वंचित और कमजोर वर्गों का उत्थान हमेशा उनकी राजनीति के केंद्र में रहा। अपनी सादगी और जनसेवा के प्रति समर्पण भाव को लेकर वे सदैव स्मरणीय एवं अनुकरणीय रहेंगे।”
नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के स्थापना दिवस के मौके पर राज्य के सभी लोगों को हार्दिक शुभकामनाएं दीं हैं और भारत की समृद्ध संस्कृति और विरासत में उनके अमूल्य योगदान की सराहना की है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि दोहरी इंजन वाली सरकार और विकास के प्रति समर्पित जनता की सक्रिय भागीदारी से उत्तर प्रदेश ने पिछले नौ सालों में ‘बीमारू’ राज्य से एक अनुकरणीय राज्य के रूप में अपना लंबा सफर तय किया है।
राज्य के भविष्य में भरोसा जताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि उत्तर प्रदेश की अपार क्षमता राष्ट्र के विकास को गतिशील और प्रगतिशील बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएगी।
प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा;
“भारतीय संस्कृति और विरासत की समृद्धि में अमूल्य योगदान देने वाले उत्तर प्रदेश के अपने सभी परिवारजनों को राज्य के स्थापना दिवस की बहुत-बहुत बधाई। डबल इंजन सरकार और विकास को समर्पित यहां के लोगों की सहभागिता से हमारे इस राज्य ने बीते नौ वर्षों में बीमारू से बेमिसाल प्रदेश बनने का सफर तय किया है। मेरा दृढ़ विश्वास है कि देश की प्रगति को गतिशील बनाए रखने में उत्तर प्रदेश का सामर्थ्य बहुत काम आने वाला है।”
मोरहाबादी मैदान में राज्यस्तरीय समारोह की तैयारियों का किया गया रियल टाइम अभ्यास
उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी,रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री एवं वरीय पुलिस अधीक्षक श्री राकेश रंजन की देखरेख में हुआ फुल ड्रेस रिहर्सल
प्रतिनियुक्त पदाधिकारियों की हुई ज्वाइंट ब्रीफिंग, दिए गए आवश्यक दिशा निर्देश
रांची, रांची के मोरहाबादी मैदान में आगामी 26 जनवरी 2026 को आयोजित होने वाले गणतंत्र दिवस के राज्यस्तरीय समारोह की तैयारियों के क्रम में आज दिनांक 24 जनवरी 2026 को फुल ड्रेस रिहर्सल का आयोजन किया गया।
फुल ड्रेस रिहर्सल का आयोजन उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री एवं वरीय पुलिस अधीक्षक, रांची श्री राकेश रंजन की देखरेख में किया गया।
रिहर्सल के दौरान गणतंत्र दिवस के अवसर पर आयोजित होने वाले सभी कार्यक्रमों को रियल टाइम बेसिस पर दुहराया गया, ताकि समारोह के दौरान किसी भी प्रकार की त्रुटि से बचा जा सके। उपायुक्त एवं वरीय पुलिस अधीक्षक द्वारा परेड का निरीक्षण करते हुए मार्च पास्ट की सलामी ली गई। इस दौरान परेड में शामिल सभी टुकड़ियों को संबोधित करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश भी दिए गए।
प्रतिनियुक्त पदाधिकारियों की हुई संयुक्त ब्रीफिंग
फुल ड्रेस रिहर्सल के उपरांत समारोह में प्रतिनियुक्त सभी पदाधिकारियों की संयुक्त ब्रीफिंग आयोजित की गई। ब्रीफिंग के दौरान जिला स्तरीय पदाधिकारियों के साथ पुलिस पदाधिकारी भी उपस्थित रहे। इस अवसर पर अपर जिला दंडाधिकारी, रांची द्वारा गणतंत्र दिवस समारोह के लिए जारी संयुक्त आदेश के संबंध में सभी प्रतिनियुक्त पदाधिकारियों को विस्तृत जानकारी दी गई।
उचित समन्वय के साथ कर्तव्य निर्वहन करें – उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री
संयुक्त ब्रीफिंग को संबोधित करते हुए उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा सभी प्रतिनियुक्त पदाधिकारियों को समय पर अपने-अपने प्रतिनियुक्ति स्थल पर उपस्थित होकर सौंपे गए दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करने का निर्देश दिया गया। उन्होंने कहा कि समारोह के सफल आयोजन के लिए सभी विभागों के बीच बेहतर समन्वय आवश्यक है। उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने झांकियों के निर्धारित समय-सीमा में प्रदर्शन, मेडिकल व्यवस्था की सुदृढ़ता तथा अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं को सुनिश्चित करने का निर्देश दिये।
सुरक्षा व्यवस्था को लेकर दिए गए विशेष निर्देश
वरीय पुलिस अधीक्षक, रांची श्री राकेश रंजन ने समारोह के दौरान सुरक्षा व्यवस्था को लेकर प्रतिनियुक्त पुलिस पदाधिकारियों एवं पुलिस बलों को आवश्यक निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम स्थल पर प्रवेश से पूर्व उचित फ्रीस्किंग सुनिश्चित की जाए तथा सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन हो।
झांकियों के प्रदर्शन को लेकर दिशा-निर्देश
उप विकास आयुक्त, रांची श्री सौरभ कुमार भुवनिया द्वारा गणतंत्र दिवस के अवसर पर झांकियों के सुचारू एवं अनुशासित प्रदर्शन हेतु संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
परेड में भाग लेने वाले प्लाटून
मोरहाबादी मैदान में आयोजित राज्यस्तरीय गणतंत्र दिवस समारोह में निम्नलिखित प्लाटून परेड में हिस्सा लेंगेः
1. भारतीय सेना
2. सी.आई.एस.एफ.
3. सी.आर.पी.एफ.
4. आई.टी.बी.पी.
5. झारखंड जगुआर
6. जे.ए.पी.-1
7. जे.ए.पी.-2
8. डी.ए.पी. (पुरुष)
9. डी.ए.पी. (महिला)
10. एस.एस.बी.
11. छत्तीसगढ़ पुलिस
12. जे.ए.पी.-10 (महिला बटालियन)
13. होमगार्ड
14. एन.सी.सी. (गर्ल्स)
15. एन.सी.सी. (ब्वॉयज)
बैण्ड पार्टी
समारोह में निम्नलिखित बैण्ड पार्टियां भाग लेंगीः
1. आर्मी
2. जे.ए.पी.-1
3. होमगार्ड
4. जे.ए.पी.-10 (महिला)
गणतंत्र दिवस के अवसर पर परेड का समादेशन कैप्टन मोहित कुमार सुमन, भारतीय सेना, रांची द्वारा किया जाएगा। वहीं श्री सुशांत कुमार, परिचारी प्रवर-1, रांची परेड के द्वितीय समादेशक होंगे।
नई दिल्ली – प्रधानमंत्री संग्रहालय में आज एक प्रदर्शनी का उद्घाटन किया। इसमें भारत के पहले स्वदेशी रूप से निर्मित विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत के रणनीतिक महत्व और राष्ट्र की रक्षा क्षमताओं और समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने में इसकी भूमिका पर प्रकाश डाला गया। इस अवसर पर नौसेना के पूर्व प्रमुख एडमिरल आर. हरि कुमार ने प्रधानमंत्री संग्रहालय और पुस्तकालय (पीएमएमएल) के निदेशक श्री अश्विनी लोहानी की उपस्थिति में प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।
एडमिरल आर. हरि कुमार ने पीएमएमएल के निदेशक के साथ मिलकर आईएनएस विक्रांत के स्केल मॉडल प्रदर्शनी का उद्घाटन किया।
आईएनएस विक्रांत भारत में निर्मित पहला विमानवाहक पोत होने के नाते एक ऐतिहासिक उपलब्धि का प्रतिनिधित्व करता है, जो आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना के तहत रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में देश की प्रगति का प्रतीक है। लगभग 76% स्वदेशी सामग्री से निर्मित यह विमानवाहक पोत जटिल रक्षा प्लैटफॉर्मों में भारत की बढ़ती तकनीकी और औद्योगिक क्षमता को दर्शाता है।
एडमिरल आर. हरि कुमार, आईएनएस विक्रांत के स्केल मॉडल की प्रदर्शनी के साथ।
प्रधानमंत्री संग्रहालय के भीतर रणनीतिक रूप से स्थित आईएनएस विक्रांत के स्केल मॉडल का प्रदर्शन आगंतुकों को भारत के राष्ट्रीय हितों की रक्षा करने और रक्षा तैयारियों को बढ़ाने में ऐतिहासिक, रणनीतिक और प्रतीकात्मक महत्व की प्रासंगिक जानकारी प्रदान करता है। यह स्केल मॉडल इससे पहले एडमिरल आर. हरि कुमार द्वारा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी को भेंट किया गया था।
प्रधानमंत्री संग्रहालय में प्रदर्शन के लिए आईएनएस विक्रांत का स्केल मॉडल
आज के उद्घाटन समारोह में एडमिरल आर. हरि कुमार ने कहा कि आईएनएस विक्रांत भारत को वैश्विक स्तर पर विमानवाहक पोत बनाने की क्षमता रखने वाले नौ चुनिंदा देशों के समूह में शामिल करता है, जो स्वदेशी रक्षा को मजबूत करने और ‘मेक इन इंडिया’ हथियार प्रणालियों के महत्व को रेखांकित करता है।
पीएमएमएल के निदेशक अश्विनी लोहानी ने कहा कि इस तरह की प्रदर्शनियां आगंतुकों के बीच राष्ट्रीय गौरव की भावना को मजबूत करती हैं।
नई दिल्ली – नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रल्हाद जोशी ने कहा है कि भारत का ऊर्जा परिवर्तन जानबूझकर खासकर उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए औद्योगिक विकास, रोज़गार सृजन और वैश्विक प्रतिस्पर्धा के लिए उपकरण के रूप में डिज़ाइन किया गया है।
केंद्रीय मंत्री ने दावोस में विश्व आर्थिक मंच की वार्षिक बैठक 2026 में“ऊर्जा: फंडिंग में विशाल अंतर“ पर उच्च-स्तरीय सत्र को संबोधित किया। श्री जोशी ने इस बात पर बल दिया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, भारत ने अपने स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को जन-केंद्रित विकास आंदोलन में बदल दिया है। इसके साथ ही ऊर्जा सुरक्षा को मज़बूत किया है और उद्योग के लिए लागत कम की है।
भारत की विकास रणनीति के केंद्र में नवीकरणीय ऊर्जा
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत ने पहले ही 267 GW स्थापित गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता हासिल कर ली है, जिसमें अब नवीकरणीय ऊर्जा देश की कुल स्थापित बिजली क्षमता का लगभग 52% है, जो पहले की समय-सीमा से काफी आगे है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारत ऊर्जा परिवर्तन को केवल पर्यावरणीय अनिवार्यता के रूप में नहीं, बल्कि विकास को बढ़ावा देने वाले कारक के रूप में देखता है, जो तेज़ी से औद्योगीकरण का समर्थन करता है और व्यवसायों और घरों दोनों के लिए बिजली को अधिक किफायती बनाता है।
जन–केंद्रित योजनाएँ सामाजिक–आर्थिक परिवर्तन को शक्ति दे रही हैं
प्रमुख विकेन्द्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए, मंत्री ने कहा कि पिछले दो वर्षों में अकेले पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना ने 2.7 मिलियन घरों में रूफटॉप सौर प्रणालियों की स्थापना को सक्षम बनाया है। इसका लक्ष्य 10 मिलियन घरों का है, जिससे लगभग 30 GW बिजली उत्पन्न होने की आशा है।
पीएम-कुसुम के अंतर्गत देश भर में 2.1 मिलियन से ज़्यादा किसानों के सिंचाई पंपों को सोलर से जोड़ा गया है। इससे सब्सिडी वाली ग्रिड बिजली पर निर्भरता काफी कम हुई है और किसानों को अतिरिक्त बिजली बेचकर अतिरिक्त आय कमाने का अवसर मिल रहा है।
मंत्री ने कहा, “ये पहल न सिर्फ सस्ती ऊर्जा दे रही हैं, बल्कि उपभोक्ताओं को ‘प्रोसमर्स’ (ऐसा व्यक्ति जो उत्पादक और उपभोक्ता दोनों हो)में भी बदल रही हैं। इससे घरों की आय और ग्रामीण आजीविका में सुधार हो रहा है।”
कम बिजली लागत, मज़बूत उद्योग
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि नवीकरणीय ऊर्जा ने बिजली शुल्क कम करने में कैसे मदद की है। उन्होंने पंपों के सोलराइज़ेशन के ज़रिए कृषि बिजली सप्लाई सुधारों का उदाहरण दिया, जिससे वितरण कंपनियों पर सब्सिडी का बोझ काफी कम हुआ है।
महंगी सब्सिडी वाली बिजली को कम लागत वाली सोलर पावर से बदलने से, बचत का फायदा उद्योग और घरों के लिए कम शुल्क के रूप में मिला है, जो भारत के बिजली क्षेत्र में ऐतिहासिक बदलाव है। उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा क्रांति के कारण बिजली शुल्क कम हो रहे हैं।
संपूर्ण स्वच्छ ऊर्जा विनिर्माण पारिस्थितिकी बनाना
केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर बल दिया कि भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा मूल्य शृंखला में मज़बूत घरेलू विनिर्माण आधार बनाया है। उन्होंने बताया कि देश ने पहले ही 144 GW सोलर मॉड्यूल विनिर्माण क्षमता स्थापित कर ली है, जबकि सोलर सेल विनिर्माण क्षमता 27 GW तक पहुँच गई है। आशा है कि आने वाले समय में यह लगभग 50 GW तक बढ़ जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि भारत सम्पूर्ण विनिर्माण चक्र को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिसमें वेफर्स और इनगॉट्स का नियोजित विनिर्माण जल्द ही शुरू होने वाला है।
सोलर विनिर्माण के साथ-साथ, केंद्रीय मंत्री ने पवन ऊर्जा, बैटरी स्टोरेज और पंप्ड स्टोरेज सॉल्यूशंस के तेजी से विस्तार पर बल दिया, जो विश्वसनीयता और ग्रिड स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए बहुत ज़रूरी हैं। उन्होंने कहा कि ये प्रयास न केवल भारत की स्वच्छ ऊर्जा आपूर्ति शृंखला को मजबूत कर रहे हैं, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार भी उपलब्ध करा रहे हैं और देश की औद्योगिक प्रतिस्पर्धा को बढ़ा रहे हैं।
ऊर्जा सुरक्षा और विश्वसनीयता के लिए एकीकृत दृष्टिकोण
ग्रिड विश्वसनीयता के बारे में चिंताओं को दूर करते हुए, केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत नवीकरणीय ऊर्जा को ऊर्जा भंडारण, पंप्ड स्टोरेज हाइड्रो और परमाणु ऊर्जा के साथ मिलाकर एकीकृत रणनीति अपना रहा है। उन्होंने कहा कि भारत ने बेस-लोड क्षमता को मजबूत करने के लिए परमाणु ऊर्जा का विस्तार करने के लिए कानूनी और नीतिगत सुधार किए हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत का अनुभव दिखाता है कि ऊर्जा सुरक्षा, सामर्थ्य और स्थिरता एक-दूसरे की विरोधी प्राथमिकताएं नहीं हैं, बल्कि सुसंगत नीति डिजाइन, पैमाने और घरेलू विनिर्माण के माध्यम से एक साथ हासिल की जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि भारत की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं को व्यावहारिक सीख देती है जो ऊर्जा परिवर्तन के माध्यम से विकास, रोजगार और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना चाहती हैं।
विश्व आर्थिक मंच की बैठकों से अलग केंद्रीय मंत्री जोशी ने स्वच्छ ऊर्जा निवेश, प्रौद्योगिकी सहयोग और भारत के ऊर्जा परिवर्तन लक्ष्यों के अनुरूप अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए वैश्विक उद्योग जगत के नेताओं और विदेश मंत्रियों के साथ कई उच्च-स्तरीय द्विपक्षीय बातचीत की।
द्विपक्षीय राजनयिक बैठकों के सिलसिले में श्री जोशी ने जॉर्डन के निवेश मंत्री डॉ. तारेक अबू ग़ज़ालेह और योजना और अंतरराष्ट्रीय सहयोग मंत्री सुश्री ज़ीना टोकन से मुलाकात की, और बेहतर सहयोग और निवेश साझेदारी के अवसरों पर चर्चा की।
केंद्रीय मंत्री ने ज़िम्बाब्वे के विदेश मामलों और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मंत्री एच.ई. एमोन मुरविरा से भी मुलाकात की और नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत-ज़िम्बाब्वे सहयोग को और प्रगाढ़ करने पर चर्चा की। उन्होंने ज़िम्बाब्वे द्वारा भारत के समर्थन की सराहना पर ध्यान दिया, जिसमें अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन के माध्यम से ज़िम्बाब्वे में STAR-C सेंटर की स्थापना शामिल है। ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों के लिए विकेन्द्रीकृत सौर समाधान, साथ ही ग्रीन हाइड्रोजन, बायोएनर्जी और विकेन्द्रीकृत ऊर्जा प्रणालियों जैसे उभरते क्षेत्रों पर भी चर्चा हुई।
श्री प्रल्हाद जोशी ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के कार्यकारी निदेशक डॉ. फातिह बिरोल से मुलाकात की। इस दौरान भारत-विशिष्ट डेटा, विश्लेषण और नीतिगत सिफारिशों पर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के फोकस को मजबूत करने, साथ ही पूंजी की लागत को कम करने में मदद करने के लिए नवीन वित्तपोषण दृष्टिकोणों की खोज पर चर्चा की गई।
वैश्विक उद्योग जगत के नेताओं के साथ बातचीत
केंद्रीय मंत्री ने एकोनिया SA के चीफ फाइनेंशियल और सस्टेनेबिलिटी ऑफिसर, जोस एंट्रेकैनालेस कैरियन के साथ भारत में नवीकरणीय ऊर्जा और टिकाऊ अवसंरचना के अवसरों को बढ़ाने पर दूरदर्शी चर्चा की। चर्चा में यूटिलिटी-स्केल सोलर, ऑनशोर विंड, हाइब्रिड विंड-सोलर स्टोरेज सॉल्यूशन और 2030 तक भारत के 500 GW गैर-जीवाश्म क्षमता के लक्ष्य के साथ 24 घंटे नवीकरणीय ऊर्जा पर फोकस किया गया।
एक और बैठक में, श्री जोशी ने ENGIE की मुख्य कार्यकारी अधिकारी कैथरीन मैकग्रेगर के साथ बातचीत की। उन्होंने भारत की तेजी से बढ़ती स्वच्छ ऊर्जा पारिस्थितिकी में प्रगाढ़ और लगातार निवेश को बढ़ावा दिया। भारत को दीर्घावधि स्वच्छ ऊर्जा निवेश के लिए दुनिया के सबसे आकर्षक देशों में से एक बताते हुए, केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत में नवीकरणीय ऊर्जा अब अधिक स्वच्छ, सस्ती है और पारदर्शी, मार्केट-बेस्ड मैकेनिज्म द्वारा संचालित है।
स्वच्छ ऊर्जा के लिए वित्तीय और मार्केट फ्रेमवर्क
केंद्रीय मंत्री ने S&P ग्लोबल के अध्यक्ष डेव अर्न्सबर्गर के साथ नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में क्रेडिट असेसमेंट, ESG स्टैंडर्ड और प्राइस डिस्कवरी के लिए मजबूत ग्लोबल फ्रेमवर्क बनाने पर भी चर्चा की। चर्चा में ऐसे एकीकृत फ्रेमवर्क की ज़रूरत पर ध्यान दिया गया जो भारत के नवीकरणीय ऊर्जा बाज़ार के स्केल, नीतिगत स्थिरता और संचालन वास्तविकता को दिखाते हों, जिसमें नवीकरणीय परियोजना के लिए डेडिकेटेड क्रेडिट रेटिंग दृष्टिकोण शामिल हैं।
श्री जोशी ने ब्लूम एनर्जी के कार्यकारी उपाध्यक्ष और मुख्य वाणिज्यिक अधिकारी अमन जोशी से भी मुलाकात की और स्वच्छ, भरोसेमंद और डिस्ट्रिब्यूटेड पावर सॉल्यूशंस, खासकर इंडस्ट्रियल क्लस्टर और डेटा सेंटर के लिए फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी पर चर्चा की।
नई दिल्ली – भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज नई दिल्ली में आयोजित एक समारोह में भगवान श्री रमण महर्षि की 146वीं जयंती के अवसर पर संबोधित किया और उनके सम्मान में एक स्मारक सिक्का जारी किया।
इस अवसर पर बोलते हुए उपराष्ट्रपति ने भगवान श्री रमण महर्षि को आधुनिक भारत के सबसे पूजनीय आध्यात्मिक संतों में से एक बताया, जिनका राष्ट्र की आध्यात्मिक और सभ्यतागत विरासत में एक विशिष्ट स्थान है। उन्होंने कहा कि जहाँ अनेक संतों ने वैराग्य का जीवन व्यतीत किया, वहीं श्री रमण महर्षि की विशिष्टता यह थी कि वे स्वयं अपने अनुकरणीय त्याग के जीवन से भी अनासक्त रहे।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि रमण महर्षि का जीवन और उनकी शिक्षाएँ सत्य, आत्मज्ञान और आंतरिक स्वतंत्रता की भारत की शाश्वत खोज का सार हैं। उन्होंने आत्मविचार (आत्म-जांच) के उनके प्रमुख उपदेश पर प्रकाश डालते हुए कहा कि महर्षि द्वारा आंतरिक अनुभूति पर दिए गए बल ने विश्वभर के आध्यात्मिक साधकों को प्रेरित किया है, जिससे वे भारत के सबसे सर्वमान्य आध्यात्मिक गुरुओं में से एक बन गए हैं।
उपराष्ट्रपति ने कहा कि भगवान श्री रमण महर्षि की करुणा मनुष्य, पशु और सभी जीवित प्राणियों के प्रति समान रूप से व्याप्त थी, जो भारत की सभ्यतागत भावना और सार्वभौमिक सद्भाव की परंपरा से गहराई से मेल खाती है।
उन्होंने रमण महर्षि के शाश्वत ज्ञान को संरक्षित और प्रसारित करने में तिरुवनमलाई स्थित श्री रमण आश्रम और भारत एवं विदेश में स्थित रमण केंद्रों की अत्यावश्यक भूमिका की सराहना की। आश्रम की सामुदायिक सेवा पहलों की प्रशंसा करते हुए उन्होंने नि:शुल्क चिकित्सा औषधालयों, साधुओं और वंचितों को भोजन उपलब्ध कराने और पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों पर प्रकाश डाला। इतिहास का स्मरण करते हुए उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी ने स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान अक्सर स्वतंत्रता सेनानियों को शक्ति, स्पष्टता और शांति प्राप्त करने के लिए आश्रम आने के लिए प्रोत्साहित किया था।
वित्त मंत्रालय द्वारा स्मारक सिक्के के विमोचन को एक उपयुक्त श्रद्धांजलि बताते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह भगवान श्री रमण महर्षि के चिरस्थायी आध्यात्मिक प्रभाव और श्री रमण आश्रम की ऐतिहासिक भूमिका दोनों का सम्मान करता है। उन्होंने कहा कि यह सिक्का केवल एक मुद्रात्मक सम्मान ही नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध आध्यात्मिक विरासत और आंतरिक जागृति के संदेश की एक स्थायी स्मृति के रूप में भी कार्य करेगा।
भारत और विदेश में रहने वाले भक्तों और अनुयायियों को हार्दिक शुभकामनाएं और बधाई देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि भगवान श्री रमण महर्षि जैसे संत को सच्ची श्रद्धांजलि केवल उत्सव मनाने में नहीं, बल्कि उनके आदर्शों – सादगी, आत्म-जागरूकता और दयालुता – को सच्चे मन से अपनाने में निहित है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि भगवान की शिक्षाएं राष्ट्र को अधिक सद्भाव, ज्ञान और आंतरिक शक्ति की ओर मार्गदर्शन करती रहेंगी।
इस कार्यक्रम में श्री रमण आश्रमम, तिरुवनमलाई (तमिलनाडु) के अध्यक्ष डॉ. वेंकट एस. रामानन; रमना केंद्र दिल्ली के अध्यक्ष, न्यायमूर्ति के. राममूर्ति (सेवानिवृत्त) अन्य गणमान्य व्यक्तियों के साथ मौजूद रहे।
नई दिल्ली – डाक विभाग ने आज नई दिल्ली में केंद्रीय संचार एवं उत्तर-पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री की अध्यक्षता में वित्त वर्ष 2025-26 की तीसरी तिमाही के लिए ‘त्रैमासिक बिजनेस समीक्षा बैठक’ आयोजित की। इस बैठक में देशभर के वरिष्ठ अधिकारियों और सर्किलों के प्रमुखों ने हिस्सा लिया, ताकि प्रमुख व्यावसायिक क्षेत्रों के प्रदर्शन की समीक्षा की जा सके और विकास को गति देने के लिए सुधारात्मक उपायों की पहचान की जा सके।
बैठक की शुरुआत में, केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इंडिया पोस्ट ने वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ₹17,546 करोड़ का महत्वाकांक्षी राजस्व लक्ष्य निर्धारित किया है, जो पिछले वर्ष की तुलना में काफी अधिक है। उन्होंने उल्लेख किया कि इंडिया पोस्ट इस लक्ष्य को प्राप्त करने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है और चालू वित्त वर्ष की पहली तीन तिमाहियों के दौरान पहले ही ₹10,155 करोड़ प्राप्त कर चुका है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि यह प्रगति इंडिया पोस्ट के पार्सल और लॉजिस्टिक्स-संचालित संगठन बनने की ओर रणनीतिक बदलाव को दर्शाती है, जो ई-कॉमर्स, एकीकृत आपूर्ति श्रृंखला और नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण की बढ़ती मांगों के अनुरूप है।
बिजनेस मीट 2025-26 की तीसरी तिमाही समीक्षा बैठक में केंद्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया और डाक विभाग की सचिव सुश्री वंदिता कौल
तीसरी तिमाही के प्रदर्शन की समीक्षा करते हुए, केंद्रीय मंत्री ने गौर किया कि हालांकि समग्र विकास के रुझान सकारात्मक हैं, लेकिन मुख्य कार्यक्षेत्रों—विशेष रूप से पार्सल, मेल और अंतर्राष्ट्रीय डाक—का प्रदर्शन अपेक्षा से कम रहा है। इस बात पर जोर देते हुए कि इंडिया पोस्ट का भविष्य का विकास काफी हद तक इसके कोर लॉजिस्टिक्स इंजन की मजबूती पर निर्भर करता है, केंद्रीय मंत्री ने जोर दिया कि पार्सल और डाक सेवाओं को अब “पूरी क्षमता के साथ” काम करना शुरू करना होगा। उन्होंने केरल, कर्नाटक, तमिलनाडु, महाराष्ट्र और दिल्ली जैसे प्रमुख सर्किलों को—जो इंडिया पोस्ट के संभावित व्यवसाय का लगभग 60 प्रतिशत हिस्सा हैं—तत्काल सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को अपनाने का निर्देश दिया।
सर्किल-वार प्रदर्शन की विस्तृत समीक्षा की गई। राजस्थान समग्र रूप से सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले सर्किल के रूप में उभरा, जिसने तीसरी तिमाही के 82 प्रतिशत लक्ष्यों को प्राप्त किया। ‘पोस्ट ऑफिस सेविंग्स बैंक’ खंड में, कर्नाटक ने अपने तीसरी तिमाही लक्ष्य का 112 प्रतिशत हासिल किया। ‘नागरिक केंद्रित सेवाओं’ (सीसीएस) में दिल्ली (240 प्रतिशत) ने असाधारण प्रदर्शन किया, जिसके बाद महाराष्ट्र (166 प्रतिशत) और राजस्थान (165 प्रतिशत) का स्थान रहा। ‘पोस्टल लाइफ इंश्योरेंस’ (डाक जीवन बीमा) में, उत्तर प्रदेश 129 प्रतिशत उपलब्धि के साथ शीर्ष प्रदर्शनकर्ता बनकर उभरा। मेल ऑपरेशन में राजस्थान ने 153 प्रतिशत उपलब्धि हासिल की।
छह कार्यक्षेत्रों के प्रदर्शन का मूल्यांकन करते हुए, केंद्रीय संचार मंत्री ने ‘नागरिक केंद्रित सेवा’ वर्टिकल के शानदार प्रदर्शन की सराहना की, जिसने 2024-25 ते तीसरी तिमाही की तुलना में 95% की असाधारण वृद्धि दर्ज की है। अन्य बेहतर प्रदर्शन करने वाले वर्टिकल में पार्सल (12% वृद्धि), डाक जीवन बीमा (11% वृद्धि) और पोस्ट ऑफिस सेविंग्स बैंक (07% वृद्धि) शामिल हैं। केंद्रीय मंत्री ने सभी वर्टिकल प्रमुखों को विभिन्न सर्किलों का दौरा करने और जमीनी स्तर पर अपने वर्टिकल के प्रदर्शन का विश्लेषण करने का निर्देश दिया।
डाक सेवा बोर्ड के वरिष्ठ अधिकारी और सर्किलों के मुख्य पोस्टमास्टर जनरल
रणनीतिक पहलों पर प्रकाश डालते हुए, केंद्रीय मंत्री ने उल्लेख किया कि इंडिया पोस्ट अमेज़न और शिपरॉकेट जैसे प्रमुख ई-कॉमर्स और लॉजिस्टिक्स प्लेटफार्मों के साथ गठजोड़ के माध्यम से अपने पार्सल व्यवसाय को मजबूत कर रहा है। उन्होंने गवर्मेंट टू गवर्मेंट के विस्तार पर भी जोर दिया, जिसमें कीटनाशक सत्यापन के लिए कृषि मंत्रालय और स्वयं सहायता समूहों को सहायता प्रदान करने के लिए ग्रामीण विकास मंत्रालय के साथ किए गए एमओयू का जिक्र किया। वित्तीय समावेशन के मोर्चे पर एएमएफआई, बीएसई और एनएसई के साथ साझेदारी को मजबूत किया गया, जिससे विशेष रूप से ग्रामीण और वंचित क्षेत्रों में एक भरोसेमंद ‘लास्ट-माइल’ संस्था के रूप में इंडिया पोस्ट की भूमिका और सुदृढ़ हुई है।
भविष्य की राह पर जोर देते हुए, केंद्रीय मंत्री ने तत्काल ‘पीयर लर्निंग’ और ‘बेंचमार्किंग’ का निर्देश दिया, ताकि कम प्रदर्शन करने वाले सर्किल पंजाब, दिल्ली, राजस्थान और तेलंगाना जैसे अग्रणी प्रदर्शन करने वाले सर्किलों की सर्वोत्तम प्रथाओं को अपना सकें। उन्होंने पार्सल, मेल, सीसीएस और पीएलआई/आरपीएलआई पर चुनिंदा सर्किलों द्वारा केंद्रित प्रस्तुति देने का आह्वान किया। उन्होंने मापने योग्य परिणामों के साथ स्पष्ट जवाबदेही, खराब प्रदर्शन के प्रति जीरो टालरेंस और सभी सर्किलों से संतुलित योगदान की आवश्यकता पर बल दिया।
केंद्रीय मंत्री ने रेखांकित किया कि इंडिया पोस्ट ने वित्त वर्ष 2025-26 की पहली तीन तिमाहियों में ₹10,155 करोड़ का राजस्व प्राप्त किया है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि के दौरान यह ₹9,385 करोड़ था, जो तीसरी तिमाही तक साल-दर-साल 8.2 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है। उन्होंने अगले 4-5 वर्षों के भीतर राजस्व वृद्धि और दक्षता में सुधार के माध्यम से संगठन को एक ‘प्रॉफिट सेंटर’ बनाने के उद्देश्य को दोहराया।
चौथी तिमाही के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए, केंद्रीय मंत्री ने उल्लेख किया कि पिछले वर्ष अकेले चौथी तिमाही ने लगभग ₹4,500 करोड़ का योगदान दिया था। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इसी तरह की बढ़ोतरी इंडिया पोस्ट को वित्त वर्ष 2025-26 के लिए ₹17,546 करोड़ के अपने महत्वाकांक्षी राजस्व लक्ष्य के करीब पहुंचने में मदद करेगी, बशर्ते पार्सल और डाक सेवाएं मजबूत विकास इंजन के रूप में उभरें और सभी सर्किल संतुलित प्रदर्शन करें।
समीक्षा का समापन करते हुए, केंद्रीय मंत्री ने देशभर में इंडिया पोस्ट के कर्मचारियों के समर्पित प्रयासों की सराहना की और “डाक सेवा, जन सेवा” के आदर्श वाक्य से प्रेरित होकर नागरिक-केंद्रित सेवा वितरण के प्रति संगठन की अटूट प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने विकसित भारत के राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अनुरूप, इंडिया पोस्ट को एक आधुनिक, प्रतिस्पर्धी और ग्राहक-केंद्रित लॉजिस्टिक्स और सेवा संगठन में बदलने के लिए अनुशासित निष्पादन, पीयर लर्निंग और प्रभावी नेतृत्व को प्रमुख कारकों के रूप में रेखांकित किया। वित्त वर्ष 2025-26 के समापन के उपलक्ष्य में, चौथी तिमाही की समीक्षा अप्रैल में निर्धारित की गई है।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज हरिद्वार में माता भगवती देवी शर्मा जी की जन्म शताब्दी एवं अखंड दीप शताब्दी वर्ष पर
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज उत्तराखंड के हरिद्वार में परम वंदनीया माता भगवती देवी शर्मा जी की जन्म शताब्दी एवं अखंड दीप शताब्दी वर्ष पर गायत्री परिवार द्वारा आयोजित ‘शताब्दी वर्ष समारोह – 2026’ को संबोधित किया। इस अवसर पर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि हरिद्वार आस्था, अध्यात्म और संस्कृति का संगम स्थल है और आज ‘अखंड ज्योति सम्मेलन’ में आकर अखंड ऊर्जा और चेतना की अनुभूति कर रहा हूँ। उन्होंने कहा कि पं श्रीराम शर्मा जी ने आस्था, अध्यात्म और संस्कृति से व्यक्ति निर्माण, व्यक्ति निर्माण से राष्ट्र निर्माण और राष्ट्र निर्माण से युग निर्माण की संकल्पना रखी।उन्होंने हर व्यक्ति के अंदर बसी परमात्मा रूपी आत्मा को जागृत और ऊर्जावान करने का कार्य किया है। श्री शाह ने यह कहा कि जो लोग सनातन धर्म को जानते हैं, भारतीय संस्कृति को समझते हैं और भारत के इतिहास से परिचित हैं, उन्हें दृढ़ विश्वास है कि विश्व की समस्त समस्याओं का समाधान यदि किसी एक जगह है, तो वह भारतीय परंपरा में ही है।
श्री अमित शाह ने कहा कि आध्यात्मिक रूप से भारत का पुनर्निर्माण केवल भारत के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे विश्व के लिए कल्याणकारी होगा। स्वामी विवेकानंद जी, महर्षि अरविंद जी और पूजनीय पंडित राम शर्मा जी जैसे सभी महान द्रष्टाओं ने अपनी ओजस्वी वाणी में यह विश्वास व्यक्त किया है कि जब भारत अपने पूर्ण तेज के साथ जागृत होगा, तो वह पूरे विश्व को और समस्त ब्रह्मांड को तेजोमय बना देगा। श्री शाह ने कहा कि ऐसे महान मनुष्यों और द्रष्टाओं की वाणी कभी विफल नहीं होती। उनके मुख से निकले सत्य वचनों को हम सभी को ब्रह्मा का वचन मानकर ही आगे बढ़ना होगा। उन्होंने कहा कि पंडित श्री राम शर्मा जी ने गायत्री मंत्र के माध्यम से भक्ति को मंदिर के गर्भगृह से बाहर निकालकर आम लोगों के मुख और आत्मा तक पहुँचाने का कार्य किया।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि युगदृष्टा पंडित श्री राम शर्मा आचार्य और वंदनीय माता भगवती देवी ने अपने जीवनकाल में ही अनेक युगों का कार्य करके दिखाया है। उन्होंने एक ऐसा वटवृक्ष बनाया, जिसकी छाया में आज 100 से अधिक देशों के 15 करोड़ से ज्यादा अनुयायी अध्यात्म के मार्ग पर चलते हुए अपनी आत्मा के कल्याण का मार्ग प्रशस्त कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 1925-26 से लेकर 2026 तक एक ही मार्ग पर, एक ही लक्ष्य के साथ न केवल एक व्यक्ति और एक विचार, बल्कि करोड़ों लोगों को साथ लेकर चलने से सिद्ध होता है कि पंडित जी के जीवन, उनके विचारों और कर्मों में कितनी ऊर्जा होगी। श्री शाह ने कहा कि पंडित जी के जाने के इतने वर्षों बाद भी अखंड ज्योति न केवल जलती रही, बल्कि उसने करोड़ों लोगों के हृदय में दीपक के रूप में स्थायी स्थान ले लिया है।
श्री अमित शाह ने कहा कि 1925-26 राष्ट्रीय पुनर्जागरण का वर्ष रहा। उसी वर्ष राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना हुई और संघ भी अपनी जन्मशती मना रहा है। गीता प्रेस गोरखपुर भी अपनी स्थापना के 100 वर्ष मना रहा है और यह वंदनीय माता जी का भी जन्मशती वर्ष है। उन्होंने कहा कि एक ही वर्ष में इन सभी के सूत्रबद्ध होने का अर्थ है कि ईश्वर ने उस वर्ष को भारत के पुनर्जागरण के लिए ही निर्मित किया होगा।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि यह गायत्री परिवार के शताब्दी वर्ष का कार्यक्रम है। उन्होंने कहा कि व्यक्ति के लिए 100 वर्ष का जीवन एक प्रकार से पूर्णता माना जाता है, परंतु व्यक्ति-निर्माण और पुनर्जागरण के लिए जो संस्थाएँ कार्य करती हैं, उनके लिए यह शैशव काल होता है, जिसमें नई ऊर्जा के साथ आगे बढ़ा जाता है। श्री शाह ने कहा कि आज गायत्री मंत्र, गायत्री उपासना और गायत्री साधना के साथ करोड़ों लोगों को पंडित श्री राम शर्मा जी ने जोड़ा है। भारत पंडित श्री राम शर्मा जी के उपकारों से कभी मुक्त नहीं हो पाएगा। उन्होंने करोड़ों लोगों को व्यक्ति-निर्माण के आंदोलन और भक्ति से जोड़ने, अध्यात्म के मार्ग पर प्रशस्त करने और गायत्री मंत्र को पुनर्जीवन प्रदान करने का कार्य किया। उन्होंने हर जाति, हर समाज और लिंग भेद के बिना, गायत्री मंत्र के माध्यम से हर आत्मा को कल्याण का मार्ग प्रशस्त करने का रास्ता दिखाया। गृहह मंत्री ने कहा कि पंडित श्री राम शर्मा जी ने महामना मदन मोहन मालवीय जी से गायत्री मंत्र के ज्ञान को जन-जन तक पहुंचाने की सीख प्राप्त की और उसे अपना जीवन-मंत्र बना लिया।
श्री अमित शाह ने कहा कि 1971 में इस पुण्य भूमि पर ज्योति का प्राकट्य हुआ, शांतिकुंज की स्थापना हुई और गुरुदेव के बताए मार्ग पर करोड़ों लोगों ने चलना शुरू किया। उन्होंने कहा कि कोई धर्म, धर्माचार्य या दर्शन युग नहीं बदल सकता। पंडित जी ने सूत्र दिया कि ‘हम बदलेंगे, युग बदलेगा’, और इस सूत्र ने पूरे भारत को मार्ग दिखाया। उन्होंने कहा कि जब तक व्यक्ति, राष्ट्र और समय नहीं बदलता, तब तक युग बदलने का सवाल ही नहीं उठता। यदि हर व्यक्ति अध्यात्म के मार्ग पर चल पड़े, तो युग परिवर्तन अपने आप हो जाता है। देखते-देखते 15 करोड़ परिवार इस आंदोलन से जुड़ गए। श्री शाह ने कहा कि ‘हम बदलेंगे, युग बदलेगा’ और गायत्री मंत्र दोनों के बीच गहरा संबंध है। गायत्री मंत्र मात्र संस्कृत में रचा गया मंत्र नहीं है, इस मंत्र के 24 अक्षर 24 सद्ग्रंथियों को जागृत करते हैं। उन्होंने कहा कि गायत्री मंत्र के 24 अक्षर 24 गुणों से संबंधित ग्रंथियों को संतुलित करते हैं, जब ये 24 गुण विकसित होते हैं, तो परमार्थ, वीरता और बुद्धि बढ़ती है।पद्मासन में बैठकर नाभि से बोला गया गायत्री मंत्र हमारे भीतर की सद्ग्रंथियों को जागृत कर उन्हें सक्रिय करता है।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि पंडित श्री राम शर्मा जी ने ‘हम बदलेंगे, युग बदलेगा’ के नारे को गायत्री मंत्र के साथ जोड़ा। उन्होंने कहा कि ‘हम बदलेंगे, युग बदलेगा’ का संदेश देकर पंडित आचार्य शर्मा जी ने पूरे राष्ट्र को नई दिशा और संकल्प शक्ति दी।उन्होंने कहा कि गायत्री मंत्र की रचना पृथ्वी पर बसे मानव के कल्याण के लिए की गई थी, मगर धीरे-धीरे यह मात्र कर्मकांड बनकर रह गया था। पंडित राम शर्मा जी ने गायत्री मंत्र को वैज्ञानिक आधार देकर उसमें नई ऊर्जा का संचार किया। उन्होंने कहा कि एक बार मन से प्रयोग करके देखिए—पंडित शर्मा जी के आशीर्वाद से स्वार्थ छूट जाएगा, परमार्थ बढ़ेगा, कायरता निकल जाएगी, हिंसा रहित वीरता अपना स्थान ले लेगी और बुद्धि सदमार्ग पर प्रभुत्व प्राप्त कर लेगी।
श्री अमित शाह ने कहा कि ‘अखंड ज्योति’ पत्रिका बिना किसी विज्ञापन और बाहरी सहायता के 100 से अधिक भाषाओं में करोड़ों लोगों तक पहुँच रही है। यह पंडित श्री राम शर्मा जी और वंदनीय माता जी की तपस्या का प्रत्यक्ष परिणाम है। गृह मंत्री ने कहा कि आज़ादी के आंदोलन से लेकर समाज सुधार तक, पंडित श्री राम शर्मा जी ने राष्ट्रनिर्माण में अहम भूमिका निभाई।पंडित श्री राम शर्मा जी ने नमक सत्याग्रह में भाग लिया, अंग्रेजों की लाठियाँ खाईं और आजादी के बाद समाज में व्याप्त कुरीतियों के खिलाफ आंदोलन छेड़ा। उन्होंने जात-पात की बेड़ियाँ तोड़ीं, समाज को समानता का मार्ग दिखाया और महिलाओं को गायत्री मंत्र की उपासना करने का अधिकार प्रदान किया। उन्होंने दहेज मुक्त विवाह को अपनाने का आह्वान किया। रचनात्मक दृष्टि से समाज की कुरीतियों को दूर किया। व्यसन से मुक्ति और गंगा सफाई अभियान चलाने के साथ ही उन्होंने वृक्षारोपण का कार्य भी किया।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि श्री राम शर्मा जी ने सूत्र दिया कि‘ अपने आप को सुधारना ही संसार की सबसे बड़ी सेवा है’। इस सूत्र ने अनेक लोगों के जीवन में प्रकाश भर दिया। उन्होंने कहा कि देश पर जब भी कोई संकट आता है—चाहे बाढ़ हो, भूकंप हो या महामारी—उस समय सेवा करने वाली संस्थाओं की सूची में गायत्री परिवार हमेशा आगे रहता है। मुट्ठी भर अन्न और समिधा दान से लेकर देशभर में समाज के उत्थान के लिए कार्य करने वाला यह संगठन अनुकरणीय सूत्र बन चुका है।
श्री अमित शाह ने कहा कि जब 1990 में आचार्य श्री ने शरीर त्यागा, तो माताजी ने 15 लाख लोगों के बीच घोषणा की कि यह मिशन देव द्वारा संचालित मिशन है—यह रुकेगा नहीं, बल्कि तेजी से बढ़ेगा। उन्होंने चित्रकूट में एक यज्ञ किया, जिसमें 1008 कुंडों में 10 लाख लोगों ने अपने व्यसनों से मुक्ति पाई। यह सनातन धर्म के इतिहास में पहला ऐसा अश्वमेध यज्ञ था जिसमें 10 लाख लोगों ने अपने व्यसनों की बलि चढ़ाई। इस आंदोलन ने सनातन धर्म को वैज्ञानिकता प्रदान करने का कार्य किया।
उन्होंने कहा कि पंडित राम शर्मा जी ने कहा था कि धर्म और विज्ञान एक-दूसरे के पूरक हैं, विरोधी नहीं। सनातन धर्म और विज्ञान तो एक-दूसरे के पूरक ही हैं। जिन्हें धर्म का ज्ञान नहीं है, वे इसे अंधविश्वास मानते हैं, जबकि जिन्हें धर्म का सच्चा ज्ञान है, वे इसे वैज्ञानिक रूप से आंक सकते हैं। आध्यात्म को तर्क की कसौटी पर कसने की पहली शुरुआत पंडित राम शर्मा जी ने ही की। उन्होंने कहा कि जब इस देश का युवा वेद-उपनिषद और पुराणों को आगे बढ़ाते हुए साथ में विज्ञान का आधार भी अपनाएगा, तब हम निश्चित रूप से हम आगे बढ़ेंगे। श्री शाह ने कहा कि गायत्री परिवार में बच्चों के एक हाथ में वेद और दूसरे हाथ में लैपटॉप देखकर यह स्पष्ट हो जाता है कि परंपरा और प्रगति साथ-साथ चल सकती हैं।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि भारत की आजादी की 75वीं वर्षगांठ पर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने आजादी के आंदोलन का इतिहास इस देश के किशोरों और युवाओं के सामने रखा। गाँव-गाँव में स्वतंत्रता सेनानियों को खोजकर उनका महिमामंडन किया गया। आजादी के 75वें वर्ष में ‘अमृत काल’ की घोषणा की गई, जो आजादी के 75 से 100 वर्षों की यात्रा है।
उन्होंने कहा कि जब हम सभी भारतीय 15 अगस्त 2047 को आजादी की शताब्दी मनाएँगे, तो एक ऐसे भारत की रचना करेंगे जो हर क्षेत्र में विश्व में सर्वप्रथम होगा। श्री शाह ने कहा कि मोदी जी ने एक पूर्ण विकसित, परंतु भौतिकता से परे आध्यात्मिकता के मार्ग पर अग्रसर भारत की संकल्पना प्रस्तुत की है। यह संकल्प अब 140 करोड़ लोगों का संकल्प बन चुका है। इस संकल्प को समाजसेवी संस्थाओं के बिना पूरा नहीं किया जा सकता। उन्होंने कहा कि पूर्ण विकसित भारत बनाने और भारत माता को विश्व के सर्वोच्च स्थान पर विराजमान करने का संकल्प गायत्री परिवार का भी संकल्प है।
गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि बीते 10 वर्षों में देश में अभूतपूर्व परिवर्तन हुए हैं। 550 वर्षों से रामलला अपमानित व्यवस्था में विराजमान थे, आज वहाँ अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण हो चुका है।
औरंगजेब द्वारा तोड़ा गया काशी विश्वनाथ मंदिर आज पुनर्निर्मित होकर अपनी पूर्ण भव्यता में स्थापित हो गया है। 16 बार टूटने के बाद आज सोमनाथ का मंदिर अद्वितीय मान-मर्यादा के साथ सनातन की भव्य ध्वजा को शिखर तक पहुँचा रहा है। श्री शाह ने कहा कि धारा 370 हट चुकी है और देश कॉमन सिविल कोड के मार्ग पर आगे बढ़ चुका है। उन्होंने कहा कि एक जमाने में लोग हिंदुत्व की बात करने में भी झिझकते थे, आज वे गर्व से अपने धर्म की बात करते हैं।
केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज हरिद्वार में पतंजलि इमरजेंसी एवं क्रिटिकल केयर हॉस्पिटल का उद्घाटन भी किया।
इससे ग्रामीण, दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के घरों तक जीवन रक्षक स्ट्रोक उपचार सुगमता से पहुंचेगा
नई दिल्ली – भारत में स्ट्रोक मृत्यु और दीर्घकालिक विकलांगता के प्रमुख कारणों में से एक है। स्ट्रोक की स्थिति में हर मिनट महत्वपूर्ण है—उपचार में देरी होने पर लगभग 1.9 बिलियन मस्तिष्क कोशिकाएं प्रति मिनट नष्ट हो जाती हैं। सही समय पर उपचार मिलने से मृत्यु और आजीवन विकलांगता में अत्यधिक कमी आ सकती है। यद्पि, स्ट्रोक के उपचार में सबसे बड़ी चुनौती रोगियों को स्ट्रोक के लिए तैयार अस्पताल तक पहुंचने में लगने वाला समय है।
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) ने इस गंभीर समस्या में कमी लाने के लिए असम सरकार को दो मोबाइल स्ट्रोक यूनिट (एमएसयू) सौंपी हैं। यह दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले स्ट्रोक रोगियों के लिए अस्पतालों तक शीघ्र पहुंचने की दिशा में एक महत्वपूर्ण बदलाव है। अब अस्पताल ही सीधे रोगियों तक पहुंचने लगे हैं। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा के मार्गदर्शन में विकसित यह पहल, सरकार की इस प्रतिबद्धता को दर्शाती है कि सबसे चुनौतीपूर्ण भौगोलिक क्षेत्रों में भी, सबसे निर्धन, वंचित और निर्बल आबादी, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं, तक उन्नत स्वास्थ्य सेवाएं पहुंचें।
स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग के सचिव और आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने असम सरकार को मोबाइल स्ट्रोक यूनिट (एमएसयू) सौंपते हुए कहा, “मोबाइल स्ट्रोक यूनिट सबसे पहले जर्मनी में विकसित की गई थीं और बाद में प्रमुख वैश्विक शहरों में इनका मूल्यांकन किया गया। भारत ने पूर्वोत्तर भारत के ग्रामीण, दूरस्थ और दुर्गम भूभागों में ऐसी यूनिटों का मूल्यांकन किया है। हम ग्रामीण क्षेत्रों में तीव्र इस्केमिक स्ट्रोक के रोगियों के उपचार के लिए आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं के साथ एमएसयू के सफल एकीकरण की रिपोर्ट करने वाला विश्व स्तर पर दूसरा देश भी हैं।”
असम सरकार में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के सचिव एवं आयुक्त श्री पी. अशोक बाबू ने राज्य के अनुभव को साझा करते हुए कहा कि “इस हस्तांतरण से असम की आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली मजबूत होगी और राज्य में इस जीवन रक्षक सेवा की निरंतरता सुनिश्चित होगी।” उन्होंने कहा कि आईसीएमआर के साथ सहयोग से स्ट्रोक रोगियों के लिए त्वरित उपचार, बेहतर समन्वय और बेहतर परिणाम संभव हुए हैं और विस्तार के लिए एक मजबूत आधार तैयार हुआ है।
एमएसयू एक चलता-फिरता अस्पताल है, जो सीटी स्कैनर, विशेषज्ञों से टेलीकंसल्टेशन, प्वाइंट-ऑफ-केयर प्रयोगशाला और रक्त के थक्के तोड़ने वाली दवाओं से सुसज्जित है। यह रोगी के घर पर या उसके आस-पास ही स्ट्रोक का शीघ्र निदान और उपचार करने में सक्षम बनाता है। यह नवोन्मेषण विशेष रूप से दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां अस्पतालों तक पहुंचने में कई घंटे लग सकते हैं। विशेषज्ञ टेलीकंसल्टेशन के माध्यम से, एमएसयू स्ट्रोक के प्रकार की शीघ्र पहचान और उपचार की त्वरित शुरुआत को संभव बनाता है-जिससे जीवन बचता है और विकलांगता को रोका जा सकता है।
पूर्वोत्तर में स्ट्रोक का प्रकोप बहुत अधिक है। दुर्गम भूभाग, लंबी दूरी और विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधाओं की सीमित उपलब्धता के कारण हमेशा समय पर स्ट्रोक का उपचार चुनौतीपूर्ण रहा है। इस समस्या के समाधान के लिए आईसीएमआर ने डिब्रूगढ़ स्थित असम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में न्यूरोलॉजिस्ट के नेतृत्व में एक स्ट्रोक यूनिट और तेजपुर मेडिकल कॉलेज अस्पताल एवं बैपटिस्ट क्रिश्चियन अस्पताल में चिकित्सकों के नेतृत्व में स्ट्रोक यूनिट स्थापित की है। मोबाइल स्ट्रोक यूनिट को अस्पताल पहुंचने से पहले ही स्ट्रोक की देखभाल की इस व्यवस्था में शामिल किया गया है।
इसके परिणाम रूपांतरकारी रहे हैं। इस मॉडल ने उपचार का समय लगभग 24 घंटे से घटाकर लगभग 2 घंटे कर दिया, मृत्यु दर में एक तिहाई की कमी आई और विकलांगता आठ गुना कम हो गई। 2021 से अगस्त 2024 के बीच, एमएसयू को 2,300 से अधिक आपातकालीन कॉल प्राप्त हुए। प्रशिक्षित नर्सों ने स्ट्रोक के 294 संदिग्ध मामलों की जांच की, जिनमें से 90 प्रतिशत रोगियों का उपचार उनके घर पर ही किया गया। एमएसयू को 108 आपातकालीन एम्बुलेंस सेवा के साथ एकीकृत करने से इसकी पहुंच 100 किलोमीटर के दायरे तक बढ़ गई।
इस कार्यक्रम में केंद्र और राज्यों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ आईसीएमआर के शीर्ष अधिकारियों, जिनमें तेलंगाना सरकार की स्वास्थ्य सचिव डॉ. क्रिस्टीना जेड. चोंगथू, आईसीएमआर की अपर महानिदेशक डॉ. संघमित्रा पति, आईसीएमआर की अपर महानिदेशक डॉ. अलका शर्मा, वरिष्ठ महानिदेशक (प्रशासन) सुश्री मनीषा सक्सेना और एनसीडी के प्रमुख डॉ. आर.एस. धालीवाल उपस्थित थे।
कचहरी चौक स्थित पार्क में स्थापित प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर दी श्रद्धांजलि
नेताजी सुभाषचंद्र बोस का जीवन साहस, त्याग और देशभक्ति की प्रेरणादायी मिसाल- उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री
रांची,23.01.2026 – नेताजी सुभाषचंद्र बोस की जयंती के अवसर पर उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री ने कचहरी चौक स्थित पार्क में स्थापित नेताजी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी श्री मंजूनाथ भजंत्री ने नेताजी सुभाषचंद्र बोस के राष्ट्र निर्माण में अतुलनीय योगदान को स्मरण करते हुए कहा कि उनका जीवन साहस, त्याग और देशभक्ति की प्रेरणादायी मिसाल है। नेताजी के विचार आज भी युवाओं को राष्ट्रसेवा एवं कर्तव्यनिष्ठा के मार्ग पर अग्रसर होने की प्रेरणा देते हैं।
इस दौरान वरीय पुलिस अधीक्षक, रांची श्री राकेश रंजन, अनुमंडल पदाधिकारी रांची, सदर श्री रजत कुमार, उपसमाहर्ता नजारत श्री सुदेश कुमार ने भी नेताजी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी एवं उनके आदर्शों को आत्मसात करने एवं उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया।
नई दिल्ली – भारत अपने राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ के 150 वर्ष पूर्ण होने का उत्सव देश भर के प्रमुख सार्वजनिक स्थलों पर सामूहिक गायन, सांस्कृतिक कार्यक्रमों और मिलिट्री बैंड प्रदर्शन के माध्यम से मना रहा है। इस उत्सव का उद्देश्य राष्ट्रीय गौरव और एकता को बढ़ावा देना है।
इन समारोहों के एक अंग के रूप में भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के 31 संगीतकारों से युक्त बैंड ने 21 जनवरी 2026 को नई दिल्ली के राजीव चौक स्थित एम्फीथिएटर में प्रदर्शन किया। 45 मिनट की इस प्रस्तुति में ब्रास, बांसुरी, स्ट्रिंग और इलेक्ट्रॉनिक वाद्ययंत्रों से ग्यारह मनमोहक धुनें प्रस्तुत की गईं। इस प्रस्तुति में ‘वंदे मातरम’ और ‘सिंदूर’ गीत, जिन्हें ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सशस्त्र बलों की वीरता को याद करने के लिए तैयार किया गया था, प्रस्तुति के मुख्य आकर्षण रहे।
संगीत सदियों से भारतीय संस्कृति का एक अनमोल रत्न रहा है. यह भारत की समृद्ध सैन्य विरासत का भी अभिन्न अंग है, जो एकता को सुदृढ़ करता है और वीरता की प्रेरणा देता है। 1944 में अपनी स्थापना के बाद से भारतीय वायु सेना बैंड, भारतीय और पश्चिमी संगीत की विविधतापूर्ण प्रस्तुतियों के साथ, देश की सैन्य परंपरा का एक महत्वपूर्ण स्तंभ रहा है। भारतीय वायु सेना बैंड का उद्देश्य अपने मनमोहक प्रदर्शनों के माध्यम से देशभक्ति की भावना को प्रेरित करना और एकता का प्रसार करना है.
नई दिल्ली – संस्कृति मंत्रालय 2026 की गणतंत्र दिवस परेड में ‘वंदे मातरम् के 150 वर्ष’ विषय पर एक झांकी प्रस्तुत करेगा, जिसमें राष्ट्रीय गीत को भारत की सभ्यतागत स्मृति, सामूहिक चेतना और सांस्कृतिक निरंतरता की एक जीवंत अभिव्यक्ति के रूप में दिखाया जाएगा।
इस विषय(थीम) की जानकारी देते हुए संस्कृति मंत्रालय के सचिव श्री विवेक अग्रवाल ने कहा कि भारत की गणतंत्र दिवस झांकियां सिर्फ औपचारिक प्रदर्शन नहीं होतीं, बल्कि वे राष्ट्र की सभ्यतागत स्मृति के चलते-फिरते अभिलेख होती हैं। हर वर्ष, ये झांकियां विचारों, मूल्यों और ऐतिहासिक अनुभवों को एक साझा दृश्य भाषा में रूपांतरित करती हैं और यह पुनः स्थापित करती हैं कि संस्कृति गणराज्य का सिर्फ एक अलंकरण मात्र नहीं है, बल्कि उसकी जीवंत आत्मा है। इसी निरंतर परंपरा में वंदे मातरम् का स्थान विशिष्ट और शाश्वत है।
उन्होंने कहा कि एक समय क्रांतिकारियों के ओठों पर गूंजने वाला और कारागारों, सभाओं तथा जुलूसों में गाया जाने वाला वंदे मातरम् सिर्फ एक गीत नहीं है। श्री अरबिंदो ने इसमें ऐसी आध्यात्मिक शक्ति देखी थी जो सामूहिक चेतना को जगाने में सक्षम थी—एक ऐसा विजन जिसे इतिहास ने सच साबित किया है। वर्ष 1875 में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित इस गीत ने राष्ट्र को ‘माता’ के रूप में कल्पित किया गया—सुजलाम्, सुफलाम्—जो प्रकृति, पालन-पोषण और आंतरिक शक्ति से परिपूर्ण है। औपनिवेशिक काल में इसने आत्मसम्मान और आत्मविश्वास को पुनर्स्थापित किया, भक्ति को साहस में, कविता को संकल्प में बदला और भारतवासियों को क्षेत्र, भाषा और धर्म से परे एक साझा स्वतंत्रता की आकांक्षा में एकजुट किया।
संस्कृति मंत्रालय की 2026 की गणतंत्र दिवस झांकी इस लंबी और बहुआयामी यात्रा को एक सशक्त दृश्य रूप प्रदान करती है। झांकी में चलते हुए ट्रैक्टर पर वंदे मातरम् की मूल पांडुलिपि प्रदर्शित की गई है, जिसके पीछे भारत के चारों दिशाओं से आए लोक कलाकार हैं, जो देश की सांस्कृतिक विविधता को दिखा रहे हैं। झांकी के केंद्र में वर्तमान पीढ़ी को ‘जेन-जी’ के रूप में दर्शाया गया है, जो विष्णुपंत पगनिस की ऐतिहासिक प्रस्तुति से प्रेरित होकर वंदे मातरम् गा रही है। राग सारंग में उनके द्वारा रिकॉर्ड किया गया यह संस्करण, जिसमें औपनिवेशिक सेंसरशिप से बचने के लिए पदों के क्रम में परिवर्तन किया गया था, स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान कलात्मक प्रतिरोध का एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन गया।
वर्ष 2021 से इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र(आईजीएनसीए) को संस्कृति मंत्रालय की गणतंत्र दिवस झांकी की परिकल्पना और क्रियान्वयन की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इन वर्षों में आईजीएनसीए ने भारत की दार्शनिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक नींव पर आधारित थीम तैयार किया है और उन्हें एक ऐसे दृश्य माध्यम से पेश किया है जो सभी पीढ़ियों को पसंद आते हैं और उनके बीच संवाद स्थापित करते हैं। वर्ष 2026 की झांकी भी इसी विजन को आगे बढ़ाती है और वंदे मातरम् को सिर्फ एक ऐतिहासिक रचना नहीं, बल्कि नैतिक, सांस्कृतिक और भावनात्मक प्रेरणा के सतत स्रोत के रूप में स्थापित करती है।
इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र(आईजीएनसीए) के सदस्य सचिव डॉ. सच्चिदानंद जोशी ने कहा कि संस्कृति मंत्रालय की झांकी किसी एक मंत्रालय या विभाग का प्रतिनिधित्व ही नहीं करती, बल्कि देश की सामूहिक भावनाओं, इतिहास और राष्ट्रीय चेतना को अभिव्यक्त करती है। उन्होंने बताया कि गणतंत्र दिवस परेड के लिए संस्कृति मंत्रालय की झांकी का विषय(थीम) ‘वंदे मातरम् के 150 वर्ष’ तय किया गया है, जो कलात्मक अभिव्यक्ति के जरिए राष्ट्रीय गीत की प्रेरणादायक ऐतिहासिक और सांस्कृतिक यात्रा को दिखाएगी।
डॉ. जोशी ने यह भी बताया कि पिछले छह वर्षों से आईजीएनसीए संस्कृति मंत्रालय की गणतंत्र दिवस झांकी को परिकल्पित करने और उसे बनाने की ज़िम्मेदारी संभाल रहा है। जबकि अधिकांश मंत्रालय और राज्य अपनी विशिष्ट उपलब्धियों या कार्यक्रमों को प्रदर्शित करते हैं, वहीं संस्कृति मंत्रालय एक अलग तरीका अपनाते हुए विविध सांस्कृतिक आयामों को एक साथ समाहित करता है—-और यही विजन वर्ष 2026 के लिए ‘वंदे मातरम् के 150 वर्ष’ विषय(थीम) में परिलक्षित होता है।
जब भारत गणतंत्र दिवस 2026 का उत्सव मनाएगा, तब वंदे मातरम् देश से सिर्फ आजादी को स्मरण करने का ही नहीं, बल्कि उसके योग्य बने रहने का भी आह्वान करेगा। इस प्रस्तुति के माध्यम से संस्कृति मंत्रालय राष्ट्रीय गीत को भारत की एकता, सांस्कृतिक गहराई और शाश्वत चेतना के प्रतीक के रूप में पुनः स्थापित करना चाहता है—जो स्वतंत्रता संग्राम की स्मृतियों को वर्तमान की जिम्मेदारियों और भविष्य की आकांक्षाओं से जोड़ता है।
नई दिल्ली – भारतीय अक्षय ऊर्जा विकास संस्था लिमिटेड (आईआरईडीए) के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक श्री प्रदीप कुमार दास ने आज विश्व आर्थिक मंच (डब्ल्यूईएफ) दावोस 2026 में एक पैनल चर्चा में हिस्सा लिया। सत्र का विषय “जहां सौर ऊर्जा महत्त्वपूर्ण है, वहां इसका विस्तार करना: ग्लोबल साउथ के लिए छत, कृषि और विकेंद्रीकृत ऊर्जा पर भारत की सीख”, था।
इससे पहले दिन में, माननीय केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी ने मंच पर प्रमुख भाषण दिया, जिसमें उन्होंने समावेशी एवं संपोषित विकास के लिए सौर ऊर्जा समाधानों को आगे बढ़ाने में भारत के अनुभवों और नेतृत्व पर प्रकाश डाला।
सत्र में वितरित सौर ऊर्जा में भारत के वैश्विक नेतृत्व और उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए इसके बढ़ते महत्व को रेखांकित किया गया। उन्होंने आगे कहा कि विकेंद्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा को अपनाने से प्रणाली की दक्षता में बढ़ोतरी हो सकती है, जिससे सरकारी सब्सिडी और एटीएंडसी घाटे में कमी आएगी, जो लागत को काफी हद तक कम कर सकता है और इसकी सामर्थ्य सुनिश्चित कर सकता है।
श्री दास ने इस विषय पर जोर दिया कि नवीकरणीय ऊर्जा के उभरते क्षेत्रों को रिस्क प्रोफाइलिंग के लिहाज से चुनौतीपूर्ण माना जाता है, लेकिन प्रभावी परियोजना डिजाइन और विवेकपूर्ण जोखिम प्रबंधन से इन क्षेत्रों में जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है। यह बात इरेडा के असाधारण तौर पर केवल 149 करोड़ रुपये के कुल राइट-ऑफ से स्पष्ट है, जो स्थापना के बाद से लगभग 1.81 लाख करोड़ रुपये के वित्तपोषण के बावजूद है, जो कंपनी के मजबूत मूल्यांकन और निगरानी प्रणालियों को दर्शाता है।
उन्होंने बताया कि इरेडा रूफटॉप सोलर और पीएम-कुसुम योजनाओं के अंतर्गत परियोजना लागत का 70-80% वित्तपोषण एग्रीगेटर मोड में करता है, जिससे ग्रामीण भारत में स्वच्छ ऊर्जा तक पहुंच में बड़ी तेजी आई है।
श्री दास ने केंद्रीय मंत्री श्री प्रल्हाद जोशी को विश्व आर्थिक मंच पर इरेडा को भारत की नवीकरणीय ऊर्जा बढ़ोतरी को प्रदर्शित करने का मंच प्रदान करने के लिए धन्यवाद दिया, जो एक परिपक्व और सुविकसित इकोसिस्टम की मदद से संभव हुई है।
उन्होंने इस विषय पर भी प्रकाश डाला कि यह मंच भारत के नवीकरणीय ऊर्जा परिवर्तन को दिशा देने में इरेडा की महत्वपूर्ण भूमिका को रेखांकित करने का अवसर प्रदान करता है, और कहा कि देश का अनुभव और संस्थागत ढांचा नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में आगे बढ़ रहे अन्य देशों के लिए एक मूल्यवान सीख साबित हो सकता है।
कृषि सौर ऊर्जा के क्षेत्र में महाराष्ट्र की प्रगति का उदाहरण देते हुए, उन्होंने इस क्षेत्र के जोखिम को कम करने और धैर्यवान वैश्विक पूंजी को आकर्षित करने के लिए एक अनुकूल पारिस्थितिकी तंत्र के निर्माण की जरूरत पर बल दिया।
नई दिल्ली – केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज नई दिल्ली में तीन दिवसीय समावेशी शिक्षा शिखर सम्मेलन 2026 का उद्घाटन किया, जो स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग (डीओएसईएल), शिक्षा मंत्रालय द्वारा आयोजित किया गया है। यह सम्मेलन 21 से 23 जनवरी, 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। इस अवसर पर, उन्होंने एक प्रदर्शनी का भी उद्घाटन किया, जिसमें विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (सीडब्ल्यूएसएन) के लिए तकनीकी-सक्षम नवीनतम सहायक उपकरण दिखाए जा रहे हैं।
इस अवसर पर श्री संजय कुमार, सचिव, डीओएसईएल; श्री दिनेश प्रसाद सकलानी, निदेशक, एनसीईआरटी; डॉ. मल्लिका नड्डा, अध्यक्ष, विशेष ओलंपिक भारत तथा शिक्षा मंत्रालय, एनसीईआरटी, राष्ट्रीय संस्थानों के वरिष्ठ अधिकारी और अन्य हितधारक उपस्थित थे।
इस अवसर पर श्री प्रधान ने कहा कि समावेशी शिक्षा शिखर सम्मेलन का आयोजन समावेशी शिक्षा के प्रति राष्ट्रीय प्रतिबद्धता को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया है। उन्होंने जोर दिया कि समावेशी शिक्षा किसी एक योजना तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हर बच्चे के लिए सम्मान, समान अवसर और आत्मनिर्भर भविष्य सुनिश्चित करने के सामूहिक संकल्प का प्रतिनिधित्व करती है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास’ के दृष्टिकोण को दोहराते हुए, उन्होंने रेखांकित किया कि एक विकसित भारत की नींव ऐसी शिक्षा के माध्यम से रखी जा सकती है जो समान, संवेदनशील और समावेशी हो। उन्होंने उल्लेख किया कि दिव्यांगता श्रेणियों का छह से इक्कीस तक विस्तार करना इस समावेशी दृष्टिकोण को प्रतिबिंबित करता है।
उन्होंने सीखने की चुनौतियों जैसे कि डिस्लेक्सिया और डिस्कैलकुलिया की समय पर पहचान के महत्व को रेखांकित किया और जोर देकर कहा कि समावेशी शिक्षा केवल स्कूलों या परिवारों की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि यह समाज की एक साझा जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि यह सामूहिक दृष्टिकोण, जो समान अवसर, सम्मान और भागीदारी पर आधारित है, विकसित भारत के लक्ष्य को हासिल करने का मार्ग प्रशस्त करेगा।
केंद्रीय मंत्री ने समावेशी शिक्षा शिखर सम्मेलन में आयोजित प्रदर्शनी का दौरा किया, जिसमें सहायक उत्पादों, समाधानों और स्मार्ट तकनीकों को दिखाया गया है। उन्होंने विशेष जरूरत वाले बच्चों (सीडब्ल्यूएसएन) और दिव्यांगजनों (पीडब्ल्यूडी) की विविध आवश्यकताओं को पूरा करने तथा शिक्षा को अधिक समावेशी बनाने के लिए भारतीय स्टार्ट-अप्स द्वारा विकसित अभिनव और विश्वस्तरीय समाधानों की सराहना की।
उन्होंने जोर दिया कि दिव्यांगजनों के लिए गरिमा, सुलभता, और समान अवसर सुनिश्चित करना सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि विकसित भारत के दृष्टिकोण को साकार करने के लिए सक्षम कानूनों, सुलभ अवसंरचना, समावेशी नीतियों और सतत नवाचार के माध्यम से निरंतर प्रयासों की आवश्यकता है।
श्री संजय कुमार ने अपने संबोधन में कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 एक समावेशी शिक्षा प्रणाली की परिकल्पना करती है, जो ‘कोई भी बच्चा स्कूल से बाहर न रहे’ को सुनिश्चित करती है और 2030 तक माध्यमिक स्तर पर 100 प्रतिशत सकल नामांकन हासिल करने का स्पष्ट लक्ष्य रखती है। उन्होंने जोर देकर कहा कि समावेश केवल पहुँच तक सीमित नहीं है, और शिक्षा प्रणाली में प्रवेश करने वाले हर बच्चे को सीखने के सार्थक परिणाम का अनुभव मिलना चाहिए, उसे सुरक्षित महसूस करना चाहिए, उसे सामाजिक रूप से विकसित होना चाहिए, और उसे विशेष रूप से प्रारंभिक वर्षों में किसी भी विशेष शिक्षण अक्षमता के लिए प्रारंभिक पहचान और समय पर हस्तक्षेप के माध्यम से समर्थन मिलना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि यह दृष्टि केवल समाज और सरकार के समग्र दृष्टिकोण के माध्यम से ही साकार की जा सकती है। सभी बच्चों और शिक्षकों में सहानुभूति की भावना विकसित की जानी चाहिए, ताकि हम अन्य सभी की विभिन्न आवश्यकताओं के प्रति संवेदनशील हो सकें।
शिखर सम्मेलन का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 और दिव्यांगजन अधिकार अधिनियम (आरपीपीडब्ल्यूडी) 2016 के अनुरूप विशेष जरूरतों वाले बच्चों (सीडब्ल्यूएसएन) के सन्दर्भ में समावेशी शिक्षा के लिए नीतियों, प्रथाओं और नवाचारों को सुदृढ़ करना है। इसकी परिकल्पना चिंतन और सीखने के एक सामूहिक मंच के रूप में की गयी है, शिखर सम्मेलन नीति निर्माताओं, राष्ट्रीय संस्थाओं, राज्यों और संघ शासित प्रदेशों, शिक्षा बोर्डों, विशेषज्ञों, नागरिक समाज संगठनों, स्टार्ट-अप्स और उद्योग जगत के सहयोगियों को एक साथ लाता है ताकि वे सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा कर सकें, नवाचारों को प्रदर्शित कर सकें और भारत में समावेशी शिक्षा के लिए भविष्य का मार्ग निर्धारित कर सकें।
श्रीमती ए. श्रीजा, आर्थिक सलाहकार, स्कूल शिक्षा और साक्षरता विभाग (डीओएसईएल) ने शिखर सम्मेलन के संदर्भ निर्धारण का कार्य किया। उन्होंने बताया कि सम्मेलन हितधारकों को एक साथ लाकर सामूहिक प्रयासों को मजबूत करने के लिए आयोजित किया गया है, ताकि एक ऐसा शिक्षा प्रणाली बनाई जा सके जो प्रत्येक बच्चे के लिए उपयोगी हो तथा प्रारंभिक पहचान और सीखने से लेकर भागीदारी, कौशल और आजीविका तक समावेशी शिक्षा की निरंतरता को संबोधित करती हो। समावेशी शिक्षा की सतत प्रक्रिया को शुरू से ही पहचान और सीखने से लेकर भागीदारी, कौशल और आजीविका तक संबोधित करे। इसमें स्कूल बोर्डों के साथ समावेशी मूल्यांकन और परीक्षा व्यवस्था पर भी चर्चा हुई, साथ ही विशेष आवश्यकताओं वाले बच्चों (सीडब्ल्यूएसएन) के लिए कौशल विकास और रोजगार के उपायों पर विचार-विमर्श भी किया गया।
विशिष्ट क्षेत्र, जिन पर शिखर सम्मेलन में ध्यान केंद्रित किया गया
तीन दिवसीय शिखर सम्मेलन की संरचना मुख्य विषयगत क्षेत्रों पर आधारित है:
दिन 1: समावेशी शिक्षा के लिए डिजिटल प्रौद्योगिकी और सहायक उपकरण का लाभ उठाना
पहले दिन में सीडब्ल्यूएसएन के लिए पहुँच, भागीदारी और सीखने के परिणामों में सुधार में डिजिटल प्रौद्योगिकियों और सहायक उपकरणों की भूमिका पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। दृष्टि, श्रवण, गतिशीलता, बौद्धिक और बहु विकलांगताओं से संबंधित नवोन्मेषी समाधानों को स्टार्ट-अप, अनुसंधान संस्थानों और राष्ट्रीय संगठनों द्वारा सीधा प्रसारण और प्रदर्शनी के माध्यम से दिखाया जाएगा।
दिन 2: समावेशी शिक्षा के मार्ग – राष्ट्रीय मॉडल, उपकरण और प्रशिक्षण
दूसरा दिन प्रमुख राष्ट्रीय पहलों और क्षमता निर्माण उपायों पर प्रकाश डालेगा, जिनमें शामिल हैं:
प्रशस्त 2.0, उन्नत दिव्यांगता स्क्रीनिंग और ट्रैकिंग उपकरण जो यूडीआईएसई+ के साथ एकीकृत है
समावेशी कक्षाओं के लिए शिक्षक प्रशिक्षण और शिक्षण तथा गैर-शिक्षण कर्मियों को संवेदनशील बनाना
प्रस्तावित राष्ट्रीय दिशानिर्देशों के माध्यम से संसाधन कक्षों और संसाधन केंद्रों को मजबूत करना
सीडब्ल्यूएसएन के लिए समावेशी खेल और व्यावसायिक शिक्षा उपायों को बढ़ावा देना
चर्चाओं में शिक्षा मंत्रालय, एनसीईआरटी, भारत पुनर्वास परिषद (आरसीआई), दिव्यांगजन सशक्तिकरण विभाग (डीईपीडब्ल्यूडी), खेल विभाग और अन्य राष्ट्रीय संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल होंगे।
दिन 3: विशिष्ट शिक्षण अक्षमताएँ, न्यूरोडाइवर्सिटी, और सीडब्ल्यूएसएन के लिए भविष्य के अवसर
अंतिम दिन विशिष्ट शिक्षण अक्षमताओं (एसएलडी) और न्यूरोडाइवर्सिटी के व्यापक आयाम पर विशेष ध्यान दिया जाएगा, जिसमें पहचान, पाठ्यक्रम अनुकूलन, शिक्षण पद्धति, मूल्यांकन और बोर्ड-स्तरीय प्रावधान से संबंधित मुद्दों पर चर्चा होगी। सुधारात्मक शिक्षा, कौशल विकास, और शिक्षा-से-रोज़गार जैसे विषयों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा, जिसमें शिक्षा बोर्ड और निजी क्षेत्र के हितधारक भी भाग लेंगे।
समावेशी शिक्षा शिखर सम्मेलन का उद्देश्य है:
– समावेशी शिक्षा के लिए नीति और प्रथाओं को मजबूत करना
– सहायक प्रौद्योगिकियों और डिजिटल उपकरणों को अपनाने को बढ़ावा देना
– शिक्षक क्षमता और संस्थागत तैयारी का निर्माण करना
– अंतर-क्षेत्रीय सहयोग को बढ़ावा देना
– सीडब्ल्यूएसएन के लिए शिक्षा-से-रोज़गार मार्गों की भविष्य की दिशा की पहचान करना
रांची,22.01.2026 – उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देश पर आम उपभोक्ताओं के हित में IOCL द्वारा की गई वैकल्पिक व्यवस्था
17,162 घरेलू गैस उपभोक्ताओं को वैकल्पिक एजेंसियों से जोड़ा गया
संबंधित उपभोक्ताओं को पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एसएमएस के माध्यम से उपलब्ध कराई गई आवश्यक जानकारी
Smart Booking Modes से होगी आसान बुकिंग
मुक्ति गैस एजेंसी के बंद होने तथा उससे संबद्ध घरेलू एलपीजी गैस उपभोक्ताओं को गैस आपूर्ति में हो रही असुविधा की जानकारी मिलने पर जिला प्रशासन द्वारा स्थिति को गंभीरता से लिया गया। उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देश पर आम उपभोक्ताओं के हित में IOCL द्वारा वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की गई है।
IOCL द्वारा मुक्ति गैस एजेंसी से संबद्ध कुल 17,162 घरेलू गैस उपभोक्ताओं को निर्बाध गैस आपूर्ति उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उन्हें नजदीकी अन्य एलपीजी गैस एजेंसियों के साथ संबद्ध किया गया है। इस संबंध में सभी संबंधित उपभोक्ताओं को उनके पंजीकृत मोबाइल नंबर पर एसएमएस के माध्यम से आवश्यक जानकारी उपलब्ध करा दी गई है, ताकि उन्हें किसी प्रकार की असुविधा न हो।
जिला प्रशासन द्वारा की गई व्यवस्था के तहत उपभोक्ता अब ऑनलाइन बुकिंग कर संबद्ध गैस एजेंसी से गैस सिलेंडर प्राप्त कर सकते हैं।
वैकल्पिक गैस एजेंसियों एवं उनके क्षेत्रवार विवरण निम्नवत हैं:-
घरेलू गैस उपभोक्ताओं की सुविधा जिला प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी उपभोक्ता को गैस आपूर्ति से संबंधित समस्या होने पर संबंधित गैस एजेंसी से संपर्क करने अथवा जिला प्रशासन को अवगत कराने का अनुरोध किया गया है, ताकि समस्या का शीघ्र समाधान किया जा सके।
जिला प्रशासन द्वारा यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि मुक्ति गैस एजेंसी के बंद होने के कारण किसी भी घरेलू गैस उपभोक्ता को आवश्यक ईंधन की आपूर्ति में अनावश्यक कठिनाई न हो।
इंडियन ऑयल के स्मार्ट बुकिंग मोड्स निम्नलिखित हैं :-
उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी रांची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता
महिलाओं, बच्चों एवं कमजोर वर्गों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं की प्रगति का विस्तृत मूल्यांकन किया गया
हाल में हुई बच्चे चोरी के घटना के आलोक में यदि किसी को कोई संदिग्ध व्यक्ति जो उस इलाके से बाहर हैं, नजर आते हैं, तो तुरंत इसकी सूचना दें। ऐसी सूचनाएं स्थानीय पुलिस, प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ), या अंचल अधिकारी (सीओ) को दी जा सकती हैं।:- उपायुक्त राँची
जिले के ग्रामीण इलाकों में अवैध भट्टी शराब के उत्पादन और बिक्री पर रोक लगाने के निर्देश, नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी गांव में अवैध शराब की जानकारी मिले, तो इसकी सूचना तुरंत जिला प्रशासन को दे
जिले में अवैध शराब की नशा पान पर पूर्ण रोक लगाने के लिए सभी विभागों, सामाजिक संगठनों एवं आम नागरिकों से सहयोग की अपील
आगामी 10 फरवरी से जिले में शुरू होने वाले फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम (Mass Drug Administration – MDA) में सभी नागरिकों से बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि फाइलेरिया जैसी बीमारी को जड़ से समाप्त करने के लिए निर्धारित दवा का सेवन करने की अपील
लोग अपने स्वास्थ्य को लेकर ओझा-गुणी या तंत्र-मंत्र के चक्कर में न पड़ें। ऐसे गैर-वैज्ञानिक इलाज में कई बार मरीजों की जान भी चली जाती है और इनके द्वारा दी जाने वाली दवाओं से गंभीर बीमारियां हो सकती हैं:- उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी रांची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री
रांची,22.01.2026 – उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी रांची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में आज समाहरणालय सभागार में स्वास्थ्य विभाग एवं समाज कल्याण विभाग से संबंधित विभिन्न योजनाओं की क्रमवार समीक्षा बैठक आयोजित की गई।
बैठक में महिलाओं, बच्चों एवं कमजोर वर्गों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं की प्रगति का विस्तृत मूल्यांकन किया गया तथा उन्हें और अधिक प्रभावी बनाने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।
जिले में स्वास्थ्य, पोषण एवं महिला कल्याण योजनाओं का समयबद्ध एवं पारदर्शी क्रियान्वयन सुनिश्चित करना तथा अंतिम व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना को लेकर विस्तृत चर्चा।
बैठक उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा
“महिलाओं और बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण को मजबूत करने के लिए इन योजनाओं का क्रियान्वयन अत्यंत महत्वपूर्ण है। किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सभी पदाधिकारी मिलकर लक्ष्यों की प्राप्ति सुनिश्चित करें।”
योजनाओं की क्रमवार समीक्षा
टीकाकरण अभियान
राँची जिले में चल रहे टीकाकरण कार्यक्रम की विस्तृत समीक्षा की गई। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि सभी बच्चों एवं गर्भवती महिलाओं का शत-प्रतिशत टीकाकरण सुनिश्चित किया जाए। ग्रामीण क्षेत्रों में डोर-टू-डोर अभियान चलाकर छूटे हुए मामलों को कवर करने तथा टीकाकरण दर को 95% से अधिक करने पर विशेष जोर दिया गया।
एएनसी (Antenatal Care – गर्भावस्था पूर्व देखभाल)
गर्भवती महिलाओं की एएनसी जांच की प्रगति पर चर्चा हुई। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि प्रत्येक गर्भवती महिला को कम से कम चार एएनसी जांच अनिवार्य रूप से कराई जाए। उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं की समय पर पहचान एवं हस्तक्षेप पर बल दिया गया।
संस्थागत प्रसव
संस्थागत प्रसव की दर बढ़ाने के प्रयासों की समीक्षा की गई। आशा कार्यकर्ताओं एवं एएनएम को अधिक सक्रिय भूमिका निभाने का निर्देश दिया गया। जिले में संस्थागत प्रसव की दर को 100% करने के लिए सामुदायिक जागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया गया।
कम जन्म वजन एवं एसएएम + एमटीसी
कम जन्म वजन वाले बच्चों की पहचान एवं उपचार पर फोकस किया गया। गंभीर कुपोषण (एसएएम) से ग्रस्त बच्चों के लिए एमटीसी सेंटरों की क्षमता बढ़ाने तथा उनके पोषण प्रबंधन पर चर्चा हुई। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि सभी एसएएम बच्चों को तत्काल एमटीसी में भर्ती कराया जाए।
एमएएम (Moderate Acute Malnutrition – मध्यम कुपोषण)
उपायुक्त द्वारा एमएएम बच्चों की पहचान एवं प्रबंधन की समीक्षा की गई। आंगनबाड़ी केंद्रों को नियमित स्क्रीनिंग के माध्यम से ऐसे बच्चों को चिह्नित कर पोषाहार वितरण सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।
कम वजन वाले बच्चे
कम वजन वाले बच्चों की संख्या कम करने के लिए चलाए जा रहे पोषण अभियान की प्रगति पर उपायुक्त द्वारा समीक्षा किया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में पोषण वाटिका विकसित करने एवं स्थानीय स्तर पर पोषक आहार उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया गया।
अपर आईडी
अपर आईडी से संबंधित मामलों की समीक्षा में उपायुक्त ने निर्देश दिया कि सभी पात्र बच्चों की आईडी अपडेट की जाए तथा किसी भी विसंगति को तुरंत दूर किया जाए।
बाहर चले गए बच्चे (प्रवासी बच्चे)
प्रवासी बच्चों की ट्रैकिंग एवं उनके कल्याण पर चर्चा हुई। उपायुक्त ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि ऐसे बच्चों की सूची तैयार कर उनके स्वास्थ्य एवं शिक्षा का उचित प्रबंधन सुनिश्चित किया जाए।
बुनियादी ढांचा (भवन, शौचालय, पीने का पानी, बिजली, पोषण वाटिका एवं वर्षा जल संचयन)
आंगनवाड़ी केंद्रों एवं स्वास्थ्य सुविधाओं के बुनियादी ढांचे की समीक्षा की गई। उपायुक्त ने समयबद्ध योजना बनाकर भवन निर्माण, शौचालय, स्वच्छ पेयजल, बिजली, पोषण वाटिका एवं वर्षा जल संचयन जैसी सुविधाओं को मजबूत करने का निर्देश दिया। स्वच्छता एवं जल संरक्षण को प्राथमिकता देने पर बल दिया गया।
सक्षम आंगनवाड़ी केंद्र (Saksham AWC)
सक्षम आंगनवाड़ी केंद्रों की प्रगति पर विचार किया गया। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि सभी आंगनवाड़ी केंद्रों को डिजिटल रूप से सक्षम बनाया जाए तथा पोषण एवं शिक्षा कार्यक्रमों को इनके माध्यम से और मजबूत किया जाए।
पीएमएमवीवाई (प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना)
योजना के अंतर्गत गर्भवती महिलाओं को मिलने वाली आर्थिक सहायता की समीक्षा की गई। उपायुक्त ने निर्देश दिया कि सभी पात्र लाभार्थियों का पंजीकरण सुनिश्चित किया जाए तथा भुगतान में किसी भी प्रकार का विलंब न हो। योजना की कवरेज बढ़ाने के लिए जागरूकता अभियान चलाने पर जोर दिया गया।
बैठक में उप विकास आयुक्त रांची, श्री सौरभ भुवनिया, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, श्रीमती सुरभि सिंह, सिविल सर्जन, डॉ. प्रभात कुमार, सभी प्रखंड विकास पदाधिकारी, आंगनवाड़ी पर्यवेक्षक, आशा कार्यकर्ता एवं अन्य संबंधित विभागों के पदाधिकारी उपस्थित थे।
जिले के नागरिकों से स्वास्थ्य के प्रति सजगता बरतने की अपील
उपायुक्त ने स्वास्थ्य एवं समाज कल्याण विभाग की समीक्षा बैठक में जिले के लोगों से स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरूक रहने की अपील की। उन्होंने विशेष रूप से कहा कि लोग अपने स्वास्थ्य को लेकर ओझा-गुणी या तंत्र-मंत्र के चक्कर में न पड़ें। ऐसे गैर-वैज्ञानिक इलाज में कई बार मरीजों की जान भी चली जाती है और इनके द्वारा दी जाने वाली दवाओं से गंभीर बीमारियां हो सकती हैं। उपायुक्त ने लोगों से आग्रह किया कि किसी भी स्वास्थ्य समस्या में तुरंत सरकारी चिकित्सालयों या योग्य डॉक्टरों से संपर्क करें तथा केवल प्रमाणित दवाओं का ही सेवन करें।
नशा मुक्ति अभियान को मजबूत करने का आह्वान
उपायुक्त ने जिले में अवैध शराब की नशा पान पर पूर्ण रोक लगाने के लिए सभी विभागों, सामाजिक संगठनों एवं आम नागरिकों से सहयोग की अपील की। उन्होंने कहा कि लोगों को नशे से दूर रखने और इसके दुष्प्रभावों के बारे में निरंतर जागरूक किया जाए। यदि कोई संदिग्ध बच्चा या युवा नशा करते हुए दिखाई दे, तो तुरंत समाज कल्याण विभाग को सूचना दें।
उपायुक्त ने विशेष चिंता जताई कि हाल के दिनों में कॉटन कैंडी में केमिकल युक्त रंगों का प्रयोग बढ़ गया है, जो बच्चों के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत हानिकारक है। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों को ऐसे केमिकल युक्त एवं रंगीन खाद्य पदार्थों से दूर रखें तथा स्वस्थ एवं प्राकृतिक आहार पर ध्यान दें।
10 फरवरी से शुरू होने वाले फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम में सक्रिय भागीदारी की अपील
उपायुक्त ने आगामी 10 फरवरी से जिले में शुरू होने वाले फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम (Mass Drug Administration – MDA) में सभी नागरिकों से बढ़-चढ़कर हिस्सा लेने की अपील की। उन्होंने कहा कि फाइलेरिया जैसी बीमारी को जड़ से समाप्त करने के लिए निर्धारित दवा का सेवन बहुत आवश्यक है। उपायुक्त ने सभी परिवारों से अपील की कि वे अपने घरों में आने वाले स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं से दवा अवश्य लें और पूर्ण कोर्स पूरा करें। इस कार्यक्रम के सफल संचालन से जिले को फाइलेरिया मुक्त बनाने में बड़ी सफलता मिलेगी।
*स्वच्छता अभियान: खुले में शौच को रोकने के ख़िलाफ़ सभी को लगातार काम करने की आवश्यकता *
उपायुक्त ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत स्वच्छता पर विशेष जोर देते हुए कहा कि लोग खुले में शौच बिल्कुल न करें। उन्होंने सभी परिवारों से अपील की कि वे अपने घरों में शौचालय का निर्माण एवं उपयोग अवश्य करे । शौचालय निर्माण से न केवल स्वच्छता बनी रहेगी, बल्कि डायरिया, हैजा, टाइफाइड जैसी कई संक्रामक बीमारियों से भी बचा जा सकेगा।
उपायुक्त ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया कि ग्रामीण एवं शहरी क्षेत्रों में शौचालय निर्माण को बढ़ावा देने के लिए जागरूकता अभियान चलाए जाएं तथा पात्र लाभार्थियों को शौचालय निर्माण के लिए उपलब्ध सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाया जाए।
सभी विभागों को सक्रियता से कार्य करने के निर्देश
उपायुक्त ने बैठक में सभी संबंधित विभागों के अधिकारियों को इन सभी मुद्दों पर तत्परता से कार्य करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य, नशा मुक्ति, स्वच्छता एवं फाइलेरिया उन्मूलन जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से जिले की जनता को स्वस्थ एवं जागरूक बनाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी जाएगी।
उपायुक्त ने आम जनता से अपील की कि वे इन सरकारी अभियानों में सक्रिय रूप से भाग लें और एक-दूसरे को जागरूक करें ताकि जिला समग्र रूप से स्वस्थ, स्वच्छ एवं नशा मुक्त बने।
उपायुक्त द्वारा अवैध शराब और बाल चोरी की घटनाओं पर सख्त निर्देश दिए गए
उपायुक्त ने ग्रामीण क्षेत्रों में अवैध शराब (भट्टी शराब) के उत्पादन और वितरण को रोकने तथा बाल चोरी जैसी घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए नागरिकों से सक्रिय सहयोग की अपील की है। उपायुक्त ने कहा कि समाज की सुरक्षा और कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए जनता की भागीदारी आवश्यक है। इस संबंध में जारी एक बयान में उपायुक्त ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल नजदीकी पुलिस थाने को दी जाए।
अवैध शराब के उत्पादन पर कड़ी नजर रखने के निर्देश
उपायुक्त ने जिले के ग्रामीण इलाकों में भट्टी शराब के उत्पादन और बिक्री की समस्या पर चिंता व्यक्त की है। उन्होंने नागरिकों से अपील की है कि यदि किसी गांव में अवैध शराब की जानकारी मिले, तो इसे तुरंत रिपोर्ट करें। उपायुक्त ने कहा अवैध शराब न केवल स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है, बल्कि यह अपराध और सामाजिक अशांति को भी बढ़ावा देती है। जिला प्रशासन द्वारा इस मुद्दे पर विशेष अभियान चलाया जा रहा है, जिसमें पुलिस और आबकारी विभाग की टीमें सक्रिय रूप से शामिल हैं। नागरिकों को सूचना देने के लिए हेल्पलाइन नंबर 100 (पुलिस) या स्थानीय आबकारी अधिकारी से संपर्क करने की सलाह दी गई है। उपायुक्त ने आश्वासन दिया कि सूचना देने वालों की पहचान गोपनीय रखी जाएगी और उनके योगदान को सराहा जाएगा।
बाल चोरी की घटनाओं को रोकने के लिए सतर्कता बरतने के निर्देश
उपायुक्त ने जिले में बाल चोरी या अपहरण की संभावित घटनाओं पर विशेष जोर दिया है। उन्होंने कहा कि यदि किसी नागरिक को कोई संदिग्ध बच्चा दिखाई दे, जो चोरी या अपहरण का शिकार लगता हो, तो तुरंत इसकी सूचना दें। ऐसी सूचनाएं स्थानीय पुलिस, प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ), या अंचल अधिकारी (सीओ) को दी जा सकती हैं। जिला प्रशासन ऐसी घटनाओं पर त्वरित कार्रवाई करेगी। उन्होंने अभिभावकों से अपील की कि वे अपने बच्चों की सुरक्षा सुनिश्चित करें और पड़ोसियों तथा समुदाय के सदस्यों को भी सतर्क रहने के लिए प्रेरित करें। इस मुद्दे पर जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, जिसमें स्कूलों और ग्राम सभाओं में विशेष सत्र आयोजित किए जा रहे हैं।
उपायुक्त ने सभी पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि अगली समीक्षा बैठक में प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए तथा लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए टीम वर्क पर विशेष ध्यान दिया जाए।
यह बैठक जिले में समाज कल्याण योजनाओं को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित होगी, जिससे महिलाओं एवं बच्चों के स्वास्थ्य एवं पोषण स्तर में उल्लेखनीय सुधार आएगा।
उपायुक्त राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देशानुसार व्यापक वाहन जांच अभियान चलाया गया
सभी वाहन चालकों एवं मालिकों से अपील की कि वे फिटनेस, परमिट, प्रदूषण प्रमाण पत्र तथा ओवरलोडिंग नियमों का सख्ती से पालन करें
राँची,22.01.2026 – उपायुक्त राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देशानुसार जिला परिवहन पदाधिकारी, रांची श्री अखिलेश कुमार के नेतृत्व में 22.01.2026 को मोहराबादी, करमटोली, कांके रोड, ओरमांझी एवं आसपास के क्षेत्रों में व्यापक वाहन जांच अभियान चलाया गया। उपायुक्त के निर्देशानुसार आयोजित इस जांच में कुल 153 वाहनों की जांच की गई, जिसमें 17 वाहनों में गंभीर अनियमितताएं पाई गईं। जांच के दौरान ओवरलोडिंग, फिटनेस प्रमाण पत्र की अनुपस्थिति, परमिट की कमी तथा प्रदूषण प्रमाण पत्र न होने जैसी कमियां सामने आईं।
ओवरलोडिंग एवं दस्तावेजों की कमी पर सख्त कार्रवाई
जांच टीम ने पाया कि कई वाहन निर्धारित भार क्षमता से अधिक लोडेड थे तथा आवश्यक दस्तावेज जैसे फिटनेस सर्टिफिकेट, परमिट एवं प्रदूषण प्रमाण पत्र पूर्ण नहीं थे। झारखंड राज्य से बाहर के वाहनों में भी ये कमियां पाई गईं। परिणामस्वरूप, 17 वाहनों पर कुल 5,49,800 रुपये (लगभग 5.50 लाख रुपये) का दंड वसूला गया। उपायुक्त के निर्देश पर यह अभियान सड़क सुरक्षा, यातायात व्यवस्था एवं पर्यावरण संरक्षण को मजबूत करने के उद्देश्य से चलाया जा रहा है।
तीन वाहनों को जब्त कर थाने में सुरक्षित रखा गया
कार्रवाई के दौरान तीन वाहन ऐसे पाए गए जिनमें दस्तावेज पूरी तरह अनुपस्थित थे तथा ओवरलोडिंग की स्थिति अत्यधिक थी। इन वाहनों को मोहराबादी थाना (टीओपी) में जब्त कर सुरक्षित रखा गया है। एक अन्य वाहन को भी रातू थाना क्षेत्र में जब्त किया गया। जिला परिवहन पदाधिकारी ने स्पष्ट किया कि ऐसी कार्रवाई नियमित रूप से जारी रहेगी ताकि सड़कों पर अनुशासन बनाए रखा जा सके।
सड़क सुरक्षा एवं नियमों का पालन जरूरी
जिला परिवहन पदाधिकारी श्री अखिलेश कुमार ने कहा कि यह अभियान केवल दंडात्मक नहीं, बल्कि जागरूकता बढ़ाने वाला भी है। उन्होंने सभी वाहन चालकों एवं मालिकों से अपील की कि वे फिटनेस, परमिट, प्रदूषण प्रमाण पत्र तथा ओवरलोडिंग नियमों का सख्ती से पालन करें। नियमों का उल्लंघन न केवल जुर्माने का कारण बनता है, बल्कि सड़क दुर्घटनाओं का प्रमुख कारण भी होता है। अभियान के दौरान टीम ने वाहन चालकों को नियमों के प्रति जागरूक भी किया।
परिवहन विभाग द्वारा आने वाले दिनों में भी ऐसे सघन जांच अभियान विभिन्न क्षेत्रों में चलाए जाएंगे। नागरिकों से अपील है कि वे नियमों का पालन करें तथा किसी भी अनियमितता की सूचना परिवहन विभाग या पुलिस को दें।
नई दिल्ली – शिवारी सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट के शुभारंभ के साथलखनऊ ने शहरी स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की हैऔर स्वच्छ भारत मिशन-शहरी के तहत नगरपालिका ठोस कचरे के 100 प्रतिशत वैज्ञानिक प्रसंस्करण को प्राप्त किया है।
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ, लगभग 40 लाख निवासियों और 7.5 लाख प्रतिष्ठानों के साथ तेजी से विकसित हो रहा एक शहरी केंद्र है। इस तीव्र विकास के कारण अपशिष्ट प्रबंधन और पर्यावरणीय स्थिरता में जटिल चुनौतियां उत्पन्न हो रही हैं। लखनऊ नगर निगम (एलएमसी) वैज्ञानिक अपशिष्ट निपटान, संसाधन पुनर्प्राप्ति और सतत शहरी विकास पर केंद्रित बहुआयामी रणनीति के माध्यम से इन चुनौतियों का समाधान कर रहा है, जिससे शहर में जन स्वास्थ्य और पर्यावरण की गुणवत्ता दोनों में सुधार हो रहा है।
लखनऊ ने अपशिष्ट प्रबंधन के प्रति अपने वैज्ञानिक और टिकाऊ दृष्टिकोण के अनुरूप, शिवारी संयंत्र में अपनी तीसरी ताजे अपशिष्ट प्रसंस्करण सुविधा का उद्घाटन किया है। इसके साथ ही यह उत्तर प्रदेश का पहला शहर बन गया है जिसने नगरपालिका ठोस अपशिष्ट का 100 प्रतिशत वैज्ञानिक प्रसंस्करण हासिल किया है और आधिकारिक तौर पर ‘शून्य ताजे अपशिष्ट डंप’ शहर का दर्जा प्राप्त कर लिया है।
नवस्थापित संयंत्र की प्रसंस्करण क्षमता 700 मीट्रिक टन प्रतिदिन है। लखनऊ नगर-निगम अब दो मौजूदा संयंत्रों के साथ प्रतिदिन उत्पन्न होने वाले 2,100 मीट्रिक टन से अधिक कचरे का वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण करने में सक्षम है। इससे खुले में कचरा फेंकने की आवश्यकता समाप्त हो गई है और यह टिकाऊ शहरी अपशिष्ट प्रबंधन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।
शहर में प्रतिदिन लगभग 2,000 मीट्रिक टन कचरा उत्पन्न होता है। इसके प्रबंधन के लिए लखनऊ नगर निगम और भूमि ग्रीन एनर्जी ने 700 मीट्रिक टन प्रतिदिन की क्षमता वाले तीन कचरा प्रसंस्करण संयंत्र स्थापित किए हैं। कचरे को जैविक (55 प्रतिशत) और अजैविक (45 प्रतिशत) भागों में अलग किया जाता है। जैविक कचरे को खाद और बायोगैस में परिवर्तित किया जाता है, जबकि अजैविक कचरे को पुनर्चक्रण के लिए छांटा जाता है या सीमेंट और कागज उद्योगों में उपयोग के लिए अपशिष्ट-व्युत्पन्न ईंधन (आरडीएफ) में परिवर्तित किया जाता है। लखनऊ में घर-घर कचरा संग्रहण की दक्षता बढ़कर 96.53 प्रतिशत हो गई है और स्रोत पर ही कचरे को अलग करने का स्तर 70 प्रतिशत से अधिक है।
नगर निगम द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार शहर में लगभग 18.5 लाख मीट्रिक टन पुराने कचरे में से लगभग 12.86 लाख मीट्रिक टन का वैज्ञानिक तरीके से प्रसंस्करण किया गया है। इससे प्राप्त अपशिष्ट आधारित ईंधन (आरडीएफ), निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट, जैव-मिट्टी और मोटे कणों का उपयोग पर्यावरण के अनुकूल तरीकों जैसे पुनर्चक्रण, सह-प्रसंस्करण और निचले इलाकों में भूमि भराव के लिए किया गया है। कचरे के प्रसंस्करण से कई मूल्यवान उप-उत्पाद उत्पन्न हो रहे हैं। लगभग 2.27 लाख मीट्रिक टन अपशिष्ट आधारित ईंधन (आरडीएफ) को भारत भर के उद्योगों में सीमेंट और कागज निर्माण में सह-प्रसंस्करण के लिए भेजा गया है। मोटे कणों (4.38 लाख मीट्रिक टन), जैव-मिट्टी (0.59 लाख मीट्रिक टन) और निर्माण एवं विध्वंस अपशिष्ट (2.35 लाख मीट्रिक टन) जैसी अक्रिय सामग्रियों का उपयोग निचले इलाकों में भूमि भराव और अवसंरचना विकास के लिए किया गया है।
इससे धीरे-धीरे एक महत्वपूर्ण परिवर्तन आया। साइट पर 25 एकड़ से अधिक भूमि का पुनर्विकास किया गया है, जिसे अब 2,100 मीट्रिक टन की दैनिक प्रसंस्करण क्षमता वाली एक पूर्णतः कार्यरत ताजे अपशिष्ट उपचार सुविधा के रूप में विकसित किया जा रहा है। साइट पर अब विंडरो पैड, आंतरिक सड़कें, शेड, समर्पित वजन मापने वाले पुल और एक संपूर्ण अपशिष्ट प्रसंस्करण प्रणाली मौजूद है।
आगे की योजना के तहत एलएमसी शिवारी में अपशिष्ट-से-ऊर्जा (डब्ल्यूटीई) संयंत्र स्थापित करने की तैयारी कर रहा है। प्रस्तावित संयंत्र अपशिष्ट से प्राप्त कच्चे ईंधन (आरडीएफ) को बिजली में परिवर्तित करेगा। योजनाबद्ध 15 मेगावाट का डब्ल्यूटीई संयंत्र प्रतिदिन 1,000-1,200 मीट्रिक टन आरडीएफ का उपयोग करेगा, जिससे लगभग 500 किलोमीटर दूर स्थित सीमेंट कारखानों तक आरडीएफ के परिवहन की लागत और दूरी कम करने में मदद मिलेगी।
लखनऊ का अपशिष्ट प्रबंधन मॉडल चक्रीय अर्थव्यवस्था के सिद्धांतों के प्रति दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है—जिसमें संसाधनों की अधिकतम पुनर्प्राप्ति, अपशिष्ट पदार्थों का न्यूनतम उपयोग और पुनर्चक्रण योग्य सामग्रियों के पुन: उपयोग को बढ़ावा देना शामिल है। लखनऊ नगर निगम की ये पहलें भारत और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अन्य शहरों और एजेंसियों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
नई दिल्ली – महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने ‘विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026’ में झारखंड से आए युवकों के साथ वार्तालाप किया |
अपने सोशल मीडिया पोस्ट में उन्होंने कहा, “नई दिल्ली में विकसित भारत यंग लीडर्स डायलॉग 2026 के दौरान झारखंड से आए युवा प्रतिनिधियों से सार्थक संवाद हुआ।
भारत के इतिहास में हर परिवर्तन की अगुवाई युवाओं ने की है। Young Leaders Dialogue 2026 युवाओं से आह्वान करता है कि वे राष्ट्र निर्माण में अग्रणी भूमिका निभाएँ, राष्ट्रीय चुनौतियों का समाधान प्रस्तुत करें और अपने सपनों को Viksit Bharat के संकल्प से जोड़ें।
Young Leaders Dialogue 2026 में सहभागी झारखंड दल को मेरी हार्दिक शुभकामनाएँ।”
नई दिल्ली – दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच की वार्षिक बैठक 2026 में नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने इस बात पर जोर दिया कि वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन की असली चुनौती ऐसे बुनियादी ढांचे के निर्माण में निहित है जो अनुकूल, विस्तार योग्य और निवेश के लिए तैयार हो।
‘विकास के लिए अनुकूल बुनियादी ढांचा’ सत्र में केंद्रीय मंत्री ने प्रणालीगत अनुकूलन के साथ व्यापकता को संयोजित करने के भारत के अनुभव पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में देश ने दिसंबर 2025 तक 267 गीगावॉट गैर-जीवाश्म ईंधन क्षमता हासिल कर ली है और 2030 के अपने लक्ष्यों को पूरा करने की दिशा में मजबूती से आगे बढ़ रहा है। यह सुदृढ़ नीतियों, मजबूत घरेलू विनिर्माण, ग्रिड आधुनिकीकरण, ऊर्जा भंडारण समाधान और भूतापीय एवं परमाणु ऊर्जा के लिए उभरते ढांचों द्वारा समर्थित है। उन्होंने सतत और समावेशी वैश्विक ऊर्जा परिवर्तन को संभव बनाने के लिए दीर्घकालिक निवेश पूंजी, मिश्रित वित्त और सरकारों, निजी क्षेत्र तथा बहुपक्षीय विकास बैंकों के बीच गहन सहयोग की आवश्यकता पर बल दिया।
आर्थिक विकास के केंद्र बिंदु के रूप में स्थिरता
केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने दावोस में ‘व्यापक स्तर पर स्थिरता प्रदान करना: वैश्विक परिवर्तन के मार्ग’ विषय पर आयोजित गोलमेज सम्मेलन में अपना भाषण दिया। इसमें उन्होंने इस बात पर भारत का दृष्टिकोण साझा किया कि कैसे स्थिरता आर्थिक विकास और प्रगति के मूल में आ गई है। श्री जोशी ने इस बात पर जोर दिया कि स्थिरता अब कोई परिधीय चिंता का विषय नहीं है, बल्कि प्रतिस्पर्धात्मकता, अनुकूलन और दीर्घकालिक विकास का एक केंद्रीय चालक है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इस दशक की सबसे बड़ी चुनौती यह नहीं है कि दुनिया को परिवर्तन करना चाहिए या नहीं बल्कि यह है कि स्थिरता को बड़े पैमाने पर, तेजी से और आर्थिक रूप से मजबूत तरीके से कैसे हासिल किया जा सकता है।
भारत का ऊर्जा परिवर्तन दर्शन या सिद्धांत
केंद्रीय मंत्री ने 2070 तक नेट-जीरो उत्सर्जन हासिल करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए इस बात पर जोर दिया कि देश का दृष्टिकोण वसुधैव कुटुम्बकम -एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य के सिद्धांत द्वारा निर्देशित है। उन्होंने कहा कि भारत स्थिरता को केवल एक तकनीकी बदलाव के बजाय अर्थव्यवस्था और समाज के एक रणनीतिक परिवर्तन के रूप में देखता है। साथ ही विकास के लिए सबसे विश्वसनीय, किफायती और भविष्य के लिए तैयार मार्ग के रूप में दृढ़ विश्वास के साथ नवीकरणीय ऊर्जा को अपना रहा है।
उद्योग जगत के दिग्गजों के साथ द्विपक्षीय बातचीत और बैठकें
ओमान के उप प्रधानमंत्री के आर्थिक मामलों के कार्यालय में आर्थिक सलाहकार डॉ. सईद मोहम्मद अहमद अल सकरी के साथ बैठक में केंद्रीय मंत्री ने शुष्क और रेगिस्तानी इलाकों सहित सौर, पवन, हरित हाइड्रोजन और ऊर्जा भंडारण समाधानों को बड़े पैमाने पर लागू करने की भारत की प्रमाणित क्षमता पर प्रकाश डाला। चर्चा में सहयोग के संभावित क्षेत्रों जैसे सौर मॉड्यूल, इलेक्ट्रोलाइजर और हरित हाइड्रोजन के निर्माण और निर्यात पर संयुक्त सहयोग, नवीकरणीय ऊर्जा से चलने वाले हाइड्रोजन हब में निवेश, एकीकृत ऊर्जा परियोजनाएं और बंदरगाह-आधारित निर्यात अवसंरचना और भारत-ओमान सीईपीए का लाभ उठाने और अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन और वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड पहल के तहत सहयोग जैसे विषयों को शामिल किया गया।
केंद्रीय मंत्री ने बेल्जियम के उप प्रधानमंत्री और विदेश मामलों, यूरोपीय मामलों और विकास सहयोग मंत्री श्री मैक्सिम प्रीवोट के साथ भी बैठक की। इन चर्चाओं ने आपसी विश्वास, पूर्वानुमानशीलता और साझा लोकतांत्रिक मूल्यों पर आधारित भारत-बेल्जियम साझेदारी की मजबूती को लेकर प्रतिबद्धता जताई।
केंद्रीय मंत्री ने कुवैत के विद्युत, जल और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री सुबैह अब्दुल अजीज अल-मुखैजीम के साथ एक रचनात्मक बैठक भी की। इसमें नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में निवेश से संबंधित मुद्दों पर विचार विमर्श किया गया।
वार्षिक बैठक के दौरान श्री जोशी ने स्वच्छ ऊर्जा में अंतरराष्ट्रीय सहयोग और निवेश को मजबूत करने के लिए उच्च स्तरीय द्विपक्षीय वार्ताओं की एक शृंखला आयोजित की।
वैश्विक निवेशकों के साथ जुड़ाव
श्री जोशी ने ला काइस के अध्यक्ष और सीईओ चार्ल्स एमोंड और सीओओ सुश्री सारा बौचार्ड के साथ भारत में दीर्घकालिक जलवायु और स्वच्छ ऊर्जा निवेश को बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करते हुए विस्तार से चर्चा भी की। उन्होंने ‘पार्टनर विद इंडिया’ पहल को और बड़े स्तर पर बढ़ाने की वकालत की, ताकि 2030 तक जलवायु कार्यों के लिए तय 400 अरब अमेरिकी डॉलर के निवेश का फायदा भारत को मिल सके। साथ ही भारत की स्वच्छ ऊर्जा महत्वाकांक्षाओं और ला काइस की जलवायु निवेश रणनीति के बीच मजबूत तालमेल पर प्रकाश डाला।
केंद्रीय मंत्री ने इंग्का ग्रुप के सीईओ और अध्यक्ष श्री जुवेन्सियो माएज़्टू से मुलाकात की, जो आईकिया के खुदरा कारोबार का संचालन करता है। इंग्का समूह ने भारत के नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में विशेष रूप से सौर, पवन और संकर समाधानों में महत्वपूर्ण तरीके से प्रवेश करने में गहरी रुचि व्यक्त की। श्री जोशी ने समूह को भारत की स्थिर नीतियों और निवेश-अनुकूल वातावरण का लाभ उठाते हुए भारत में अपनी भागीदारी बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया।
मंत्री जी का एक्स पर पोस्ट
दावोस के विश्व आर्थिक मंच में भारत के पवेलियन के उद्घाटन में श्री प्रह्लाद जोशी ने अन्य केंद्रीय मंत्रियों, राज्य के मुख्यमंत्रियों और विभिन्न राज्यों के मंत्रियों के साथ भाग लिया। इनमें आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री एन. चंद्रबाबू नायडू, असम के मुख्यमंत्री श्री हिमंता बिस्वा सरमा, केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री श्री राम मोहन नायडू और कर्नाटक सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग एवं अवसंरचना मंत्री श्री एम.बी. पाटिल शामिल थे। इंडिया पवेलियन के उद्घाटन के दौरान श्री प्रह्लाद जोशी ने ‘द इंडिया स्टोरी’ नामक एक ग्रीन इन्वेस्टमेंट हैंडबुक का भी विमोचन किया।
यह पवेलियन भारत को वैश्विक साझेदारी और निवेश के लिए एक विश्वसनीय, प्रतिस्पर्धी और भविष्य के लिए तैयार गंतव्य के रूप में प्रदर्शित करता है, जिसमें नीतिगत स्थिरता, सुधार-आधारित विकास और एक पूर्वानुमानित नियामक वातावरण पर प्रकाश डाला गया है। यह भारत की विनिर्माण, अवसंरचना, नवीकरणीय ऊर्जा, प्रौद्योगिकी और नवाचार के क्षेत्र में मौजूद शक्तियों को प्रदर्शित करता है, जो विकसित भारत 2047 की परिकल्पना और सतत एवं समावेशी विकास के प्रति प्रतिबद्धता के अनुरूप है।
भारत एक विश्वसनीय वैश्विक भागीदार के रूप में
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि वैश्विक मंदी और आपूर्ति शृंखला में व्यवधान के दौर में भी भारत ने दीर्घकालिक दृष्टि के साथ लचीलापन अपना कर और क्षमताओं का विस्तार करके अपने विकास को तेज किया है। उन्होंने जोर देकर कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत वैश्विक निवेश के लिए एक विश्वसनीय और भविष्य के लिए तैयार गंतव्य के रूप में उभर रहा है, जो स्थिर रिटर्न, मजबूत नीतिगत निश्चितता और नवाचार, विस्तार और टिकाऊ मूल्य सृजन के लिए दीर्घकालिक अवसर प्रदान कर रहा है।