केंद्रीय मंत्री ने दावोस में विश्व आर्थिक मंच की वार्षिक बैठक 2026 में “ऊर्जा: फंडिंग में विशाल अंतर“ पर उच्च-स्तरीय सत्र को संबोधित किया। श्री जोशी ने इस बात पर बल दिया कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, भारत ने अपने स्वच्छ ऊर्जा परिवर्तन को जन-केंद्रित विकास आंदोलन में बदल दिया है। इसके साथ ही ऊर्जा सुरक्षा को मज़बूत किया है और उद्योग के लिए लागत कम की है।
भारत की विकास रणनीति के केंद्र में नवीकरणीय ऊर्जा
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत ने पहले ही 267 GW स्थापित गैर-जीवाश्म ऊर्जा क्षमता हासिल कर ली है, जिसमें अब नवीकरणीय ऊर्जा देश की कुल स्थापित बिजली क्षमता का लगभग 52% है, जो पहले की समय-सीमा से काफी आगे है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि भारत ऊर्जा परिवर्तन को केवल पर्यावरणीय अनिवार्यता के रूप में नहीं, बल्कि विकास को बढ़ावा देने वाले कारक के रूप में देखता है, जो तेज़ी से औद्योगीकरण का समर्थन करता है और व्यवसायों और घरों दोनों के लिए बिजली को अधिक किफायती बनाता है।
जन–केंद्रित योजनाएँ सामाजिक–आर्थिक परिवर्तन को शक्ति दे रही हैं
प्रमुख विकेन्द्रीकृत नवीकरणीय ऊर्जा कार्यक्रमों की जानकारी देते हुए, मंत्री ने कहा कि पिछले दो वर्षों में अकेले पीएम सूर्य घर: मुफ्त बिजली योजना ने 2.7 मिलियन घरों में रूफटॉप सौर प्रणालियों की स्थापना को सक्षम बनाया है। इसका लक्ष्य 10 मिलियन घरों का है, जिससे लगभग 30 GW बिजली उत्पन्न होने की आशा है।
पीएम-कुसुम के अंतर्गत देश भर में 2.1 मिलियन से ज़्यादा किसानों के सिंचाई पंपों को सोलर से जोड़ा गया है। इससे सब्सिडी वाली ग्रिड बिजली पर निर्भरता काफी कम हुई है और किसानों को अतिरिक्त बिजली बेचकर अतिरिक्त आय कमाने का अवसर मिल रहा है।
मंत्री ने कहा, “ये पहल न सिर्फ सस्ती ऊर्जा दे रही हैं, बल्कि उपभोक्ताओं को ‘प्रोसमर्स’ (ऐसा व्यक्ति जो उत्पादक और उपभोक्ता दोनों हो)में भी बदल रही हैं। इससे घरों की आय और ग्रामीण आजीविका में सुधार हो रहा है।”
कम बिजली लागत, मज़बूत उद्योग
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि नवीकरणीय ऊर्जा ने बिजली शुल्क कम करने में कैसे मदद की है। उन्होंने पंपों के सोलराइज़ेशन के ज़रिए कृषि बिजली सप्लाई सुधारों का उदाहरण दिया, जिससे वितरण कंपनियों पर सब्सिडी का बोझ काफी कम हुआ है।
महंगी सब्सिडी वाली बिजली को कम लागत वाली सोलर पावर से बदलने से, बचत का फायदा उद्योग और घरों के लिए कम शुल्क के रूप में मिला है, जो भारत के बिजली क्षेत्र में ऐतिहासिक बदलाव है। उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा क्रांति के कारण बिजली शुल्क कम हो रहे हैं।
संपूर्ण स्वच्छ ऊर्जा विनिर्माण पारिस्थितिकी बनाना
केंद्रीय मंत्री ने इस बात पर बल दिया कि भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा मूल्य शृंखला में मज़बूत घरेलू विनिर्माण आधार बनाया है। उन्होंने बताया कि देश ने पहले ही 144 GW सोलर मॉड्यूल विनिर्माण क्षमता स्थापित कर ली है, जबकि सोलर सेल विनिर्माण क्षमता 27 GW तक पहुँच गई है। आशा है कि आने वाले समय में यह लगभग 50 GW तक बढ़ जाएगी। उन्होंने यह भी कहा कि भारत सम्पूर्ण विनिर्माण चक्र को पूरा करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है, जिसमें वेफर्स और इनगॉट्स का नियोजित विनिर्माण जल्द ही शुरू होने वाला है।
सोलर विनिर्माण के साथ-साथ, केंद्रीय मंत्री ने पवन ऊर्जा, बैटरी स्टोरेज और पंप्ड स्टोरेज सॉल्यूशंस के तेजी से विस्तार पर बल दिया, जो विश्वसनीयता और ग्रिड स्थिरता सुनिश्चित करने के लिए बहुत ज़रूरी हैं। उन्होंने कहा कि ये प्रयास न केवल भारत की स्वच्छ ऊर्जा आपूर्ति शृंखला को मजबूत कर रहे हैं, बल्कि बड़े पैमाने पर रोजगार भी उपलब्ध करा रहे हैं और देश की औद्योगिक प्रतिस्पर्धा को बढ़ा रहे हैं।
ऊर्जा सुरक्षा और विश्वसनीयता के लिए एकीकृत दृष्टिकोण
ग्रिड विश्वसनीयता के बारे में चिंताओं को दूर करते हुए, केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत नवीकरणीय ऊर्जा को ऊर्जा भंडारण, पंप्ड स्टोरेज हाइड्रो और परमाणु ऊर्जा के साथ मिलाकर एकीकृत रणनीति अपना रहा है। उन्होंने कहा कि भारत ने बेस-लोड क्षमता को मजबूत करने के लिए परमाणु ऊर्जा का विस्तार करने के लिए कानूनी और नीतिगत सुधार किए हैं।
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत का अनुभव दिखाता है कि ऊर्जा सुरक्षा, सामर्थ्य और स्थिरता एक-दूसरे की विरोधी प्राथमिकताएं नहीं हैं, बल्कि सुसंगत नीति डिजाइन, पैमाने और घरेलू विनिर्माण के माध्यम से एक साथ हासिल की जा सकती हैं। उन्होंने कहा कि भारत की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं को व्यावहारिक सीख देती है जो ऊर्जा परिवर्तन के माध्यम से विकास, रोजगार और प्रतिस्पर्धा को बढ़ावा देना चाहती हैं।
विश्व आर्थिक मंच की बैठकों से अलग केंद्रीय मंत्री जोशी ने स्वच्छ ऊर्जा निवेश, प्रौद्योगिकी सहयोग और भारत के ऊर्जा परिवर्तन लक्ष्यों के अनुरूप अंतरराष्ट्रीय साझेदारी को आगे बढ़ाने के लिए वैश्विक उद्योग जगत के नेताओं और विदेश मंत्रियों के साथ कई उच्च-स्तरीय द्विपक्षीय बातचीत की।
द्विपक्षीय राजनयिक बैठकों के सिलसिले में श्री जोशी ने जॉर्डन के निवेश मंत्री डॉ. तारेक अबू ग़ज़ालेह और योजना और अंतरराष्ट्रीय सहयोग मंत्री सुश्री ज़ीना टोकन से मुलाकात की, और बेहतर सहयोग और निवेश साझेदारी के अवसरों पर चर्चा की।
श्री प्रल्हाद जोशी ने अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के कार्यकारी निदेशक डॉ. फातिह बिरोल से मुलाकात की। इस दौरान भारत-विशिष्ट डेटा, विश्लेषण और नीतिगत सिफारिशों पर अंतरराष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के फोकस को मजबूत करने, साथ ही पूंजी की लागत को कम करने में मदद करने के लिए नवीन वित्तपोषण दृष्टिकोणों की खोज पर चर्चा की गई।
वैश्विक उद्योग जगत के नेताओं के साथ बातचीत
स्वच्छ ऊर्जा के लिए वित्तीय और मार्केट फ्रेमवर्क
श्री जोशी ने ब्लूम एनर्जी के कार्यकारी उपाध्यक्ष और मुख्य वाणिज्यिक अधिकारी अमन जोशी से भी मुलाकात की और स्वच्छ, भरोसेमंद और डिस्ट्रिब्यूटेड पावर सॉल्यूशंस, खासकर इंडस्ट्रियल क्लस्टर और डेटा सेंटर के लिए फ्यूल सेल टेक्नोलॉजी पर चर्चा की।
****************************
