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सियालदह-बनगांव रूट पर दौड़ी पहली एसी लोकल ट्रेन

कोलकाता 05 Sep, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी) ।आखिरकार लंबे इंतजार के बाद सियालदह-बनगांव शाखा पर आज से वातानुकूलित लोकल ट्रेन की शुरुआत हो गई। सुबह यह ट्रेन रानाघाट से बनगांव पहुंची और फिर वहां से सियालदह के लिए रवाना हुई।

रेलवे अधिकारियों के मुताबिक, इस नई सुविधा को लेकर यात्रियों में जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। सुबह 7 बजकर 11 मिनट पर रानाघाट से प्रथम वातानुकूलित लोकल ट्रेन ने बनगांव की ओर प्रस्थान किया और 7 बजकर 44 मिनट पर बनगांव स्टेशन पहुंची।

इसके बाद 7 बजकर 55 मिनट पर यह ट्रेन सियालदह के लिए रवाना हुई। करीब 80 किलोमीटर की दूरी तय करते हुए यह ट्रेन ठाकुरनगर, गोबरडांगा, हाबरा, दत्तपुकुर, बारासात, मध्य्मग्राम, दमदम कैंटोनमेंट, दमदम जंक्शन और विधाननगर रोड जैसे महत्वपूर्ण स्टेशनों पर रुकी और 9 बजकर 37 मिनट पर सियालदह पहुंची।

रेलवे के बयान के अनुसार, शाम को 6 बजकर 14 मिनट पर यह ट्रेन सियालदह से रवाना होगी और 8 बजकर 5 मिनट पर बनगांव पहुंचेगी। अंतिम स्टेशन रानाघाट पर यह ट्रेन रात 8 बजकर 41 मिनट पर पहुंचेगी।

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भूटान के प्रधानमंत्री दासो शेरिंग टोबेगो ने रामलला के किए दर्शन

पत्नी के साथ करीब दो घंटे राम जन्मभूमि परिसर में बिताए

अयोध्या 05 Sep, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)।  भूटान के प्रधानमंत्री दासो शेरिंग टोबेगो शुक्रवार की सुबह रामनगरी अयोध्या पहुंचे और पहले विदेशी प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने अपनी पत्नी के साथ रामलला के दर्शन किए।

भूटान के प्रधानमंत्री शुक्रवार को सुबह 9ः30 बजे अपने तय कार्यक्रम के अनुसार भारतीय वायु सेना के विशेष विमान से बिहार के गया से अयोध्या एयरपोर्ट पहुंचे। यहां पर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रतिनिधि के रूप में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही समेत विदेश मंत्रालय, शासन, प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने उनका स्वागत किया।

यहां से प्रधानमंत्री सड़क मार्ग से सीधे राम मंदिर के लिए रवाना हुए। इस दौरान थोड़ी देर के लिए हाईवे पर यातायात प्रतिबंधित कर दिया गया। भूटान के पीएम सुबह 10ः00 बजे राम मंदिर पहुंचे। करीब एक घंटे 40 मिनट के राम मंदिर प्रवास में उन्होंने रामलला और राम दरबार के दर्शन किए।

इसके साथ ही कुबेर टीला, जटायु और सप्त मंडपम के मंदिरों में भी दर्शन पूजन किया। उन्होंने लोअर प्लिंथ के चारों ओर लगने वाले म्यूरल के साथ परकोटा की दीवार पर लगने वाले ब्रांज के म्यूरल को भी निहारा। इस दौरान अपने मोबाइल से रामजन्मभूमि परिसर की तस्वीरें कैद करते रहे। राम मंदिर की नक्काशी उनको बहुत अच्छी लगी। राम मंदिर में दर्शन और भ्रमण के दौरान वह काफी प्रसन्न थे।

रामलला के दरबार में उन्होंने तीन बार साष्टांग प्रणाम किया। रामलला की आरती उतारी और पुष्प अर्पित किया। इसके बाद चरणामृत प्रसाद ग्रहण किया। राम मंदिर से प्रधानमंत्री होटल रामायणा पहुंचे। यहां पर भूटान की पारंपरिक शैली में सांस्कृतिक कार्यक्रम के माध्यम से उनका स्वागत किया गया।

प्रदेश सरकार की पहल पर जिला प्रशासन की ओर से उनके सम्मान में दोपहर भोज का आयोजन किया गया। दोपहर भोज में शामिल होने के बाद प्रधानमंत्री अयोध्या एयरपोर्ट आए और यहां से भारतीय वायुसेना के विमान से नई दिल्ली के लिए रवाना हो गए।

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ये हर किसी के लिए सबक है, पीएम मोदी और ट्रंप की दोस्ती पर पूर्व अमेरिकी एनएसए का खुलासा

वाशिंगटन ,05 सितंबर (एजेंसी) । अमेरिका के पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार जॉन बोल्टन ने दावा किया है कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच रही गहरी निजी दोस्ती अब खत्म हो चुकी है।

ब्रिटिश मीडिया पोर्टल *एलबीसी* को दिए एक इंटरव्यू में बोल्टन ने कहा कि ट्रंप अंतरराष्ट्रीय रिश्तों को केवल नेताओं के साथ अपनी व्यक्तिगत समीपता के नजरिए से आंकते हैं।

उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि यदि ट्रंप की व्लादिमीर पुतिन से अच्छी दोस्ती है, तो वे मान लेते हैं कि अमेरिका-रूस संबंध भी मजबूत हैं, जबकि हकीकत इससे अलग होती है। इसी तरह मोदी के साथ भी उनकी दोस्ती पहले मजबूत थी, लेकिन अब वह खत्म हो चुकी है।

बोल्टन के अनुसार, ट्रंप प्रशासन की नीतियों ने भारत-अमेरिका संबंधों को दशकों पीछे धकेल दिया है। विशेषकर, रूसी तेल खरीदने के मुद्दे पर भारत पर लगाए गए टैरिफ ने नई दिल्ली को रूस और चीन के नजदीक कर दिया है।

उन्होंने इसे ट्रंप की बड़ी गलती बताते हुए कहा कि अमेरिका लंबे समय से चाहता था कि भारत रूस से दूरी बनाए और चीन को अपनी सबसे बड़ी सुरक्षा चुनौती माने, लेकिन ट्रंप की नीतियों ने इस प्रयास को नुकसान पहुंचाया।

बोल्टन ने चेतावनी दी कि विश्व नेताओं के साथ निजी दोस्ती उन्हें ट्रंप की नीतियों के नकारात्मक असर से नहीं बचा सकती। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात भारत-अमेरिका संबंधों के लिए बेहद कठिन समय हैं और चीन इस स्थिति का फायदा उठाकर खुद को अमेरिका के विकल्प के रूप में पेश कर रहा है।

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आम आदमी पार्टी के सभी सांसदों द्वारा विशेषाधिकार फंड बाढ़ राहत कार्यों के लिए इस्तेमाल करने का ऐलान

चंडीगढ़ 05 Sep, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)- पंजाब में आई भीषण बाढ़ से उत्पन्न स्थिति से निपटने के लिए प्रदेश के आम आदमी पार्टी के सांसदों ने अपने विशेषाधिकार फंड बाढ़ राहत कार्यों के लिए उपयोग करने का ऐलान किया है। इसके साथ ही आप के लोकसभा और राज्यसभा सांसद बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में लोगों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़े हैं।

राज्यसभा सदस्य डॉ. संदीप पाठक ने फिरोजपुर के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर बचाव कार्यों का जायजा लिया और बाढ़ प्रभावित लोगों के लिए अपने सांसद फंड से 5 करोड़ रुपए देने का ऐलान किया। इसी तरह राज्यसभा सदस्य राघव चड्ढा ने गुरदासपुर जिले के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और राहत कार्यों के लिए अपने सांसद फंड से 3.60 करोड़ रुपए देने का ऐलान किया।

राज्यसभा सदस्य संत बलवीर सिंह सीचेवाल लगातार कई दिनों से कपूरथला जिले के विभिन्न क्षेत्रों में राहत कार्य चला रहे हैं और उन्होंने अपने सांसद फंड से 50 लाख रुपए की अनुदान राशि देने का ऐलान किया है। इसके अलावा उन्होंने बाढ़ पीड़ितों के लिए सहायता नंबर भी जारी किए हैं।

राज्यसभा सदस्य हरभजन सिंह ने अपने फंड से मोबाइल टैंकरों और फॉगिंग मशीनों के लिए 30 लाख रुपए जारी किए हैं। इसके अलावा फिरोजपुर के लिए 17.32 लाख रुपए की तीन नावें, कपूरथला के लिए दो नावें और गुरदासपुर के लिए एक नाव के लिए फंड जारी किये हैं। जालंधर के लिए चार नावों का ऐलान किया गया है।

होशियारपुर से लोकसभा सदस्य डॉ. राज कुमार चब्बेवाल ने सांसद फंड से 50 लाख रुपए देने का ऐलान किया है। यह राशि जिले के विभिन्न बांधों को मजबूत करने पर खर्च की जाएगी। संगरूर से लोकसभा सदस्य गुरमीत सिंह मीत हेयर, जो अमृतसर के अजनाला क्षेत्र में राहत कार्यों में जुटे हुए हैं, ने जिला प्रशासन अमृतसर को अपने सांसद फंड से 25 लाख रुपए देने का ऐलान किया।

राज्यसभा सदस्य डॉ. अशोक कुमार मित्तल ने भी अपने सांसद फंड से अमृतसर के लिए 20 लाख रुपए जारी किए हैं। आनंदपुर साहिब से लोकसभा सदस्य मालविंदर सिंह कंग ने नवांशहर जिले के बेला ताजोवाल में सतलुज नदी के किनारों का जायजा लेने के अलावा मोहाली जिले के नयागांव से गुजरने वाले पटियाला की राव से लगी सड़क पर बने गड्ढों का भी जायजा लिया। श्री कंग ने बेला ताजोवाल स्थित सतलुज के बांध को मजबूत करने के लिए सांसद फंड से 20 लाख रुपए तुरंत जारी कर दिए हैं।

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त्योहारों से पहले खुशियों का तोहफा… PM मोदी बोले- GST 2.0 देश के लिए सपोर्ट और ग्रोथ का डबल डोज

नई दिल्ली 05 Sep, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी) – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता शिक्षकों के साथ बातचीत की। उन्होंने कहा कि शिक्षकों का काम कक्षाओं से कहीं आगे तक जाता है। वे युवा शक्ति के चरित्र निर्माण और जिज्ञासा को बढ़ावा देते हैं। पीएम मोदी ने कहा कि जीएसटी रिफॉर्म से भारत की अर्थव्यवस्था में पंचरत्न जुड़े हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि इस पुरस्कार के लिए आपका चयन, आपका परिश्रम, आपकी निरंतर साधना का एक प्रकार से प्रमाण है, तभी ये सब संभव होता है। एक शिक्षक सिर्फ वर्तमान नहीं होता, बल्कि देश की भावी पीढ़ी को भी गढ़ता है, वो भविष्य को निखारता है।

उन्होंने कहा कि मैं समझता हूं कि ये भी देश सेवा की श्रेणी में किसी भी प्रकार से किसी की भी देश सेवा से कम नहीं है। हमारा देश हमेशा से गुरु-शिष्य परंपरा का उपासक रहा है। गुरु को जीवन का मार्गदर्शक माना गया है। मां जन्म देती है और गुरु जीवन देता है। आज जब हम विकसित भारत के निर्माण का लक्ष्य लेकर चल रहे हैं, तब ये गुरु-शिष्य परंपरा भी हमारी बहुत बड़ी ताकत है। शिक्षक एक मजबूत देश, एक सशक्त समाज की बुनियाद होते हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि मैंने इस बार 15 अगस्त को लाल किले से कहा था कि भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए नेक्स्ट जेनरेशन रिफॉर्म करना बहुत जरूरी है। मैंने देशवासियों से भी ये वादा किया था कि इस दिवाली और छठ पूजा से पहले खुशियों का डबल धमाका होगा।

भारत सरकार ने बुधवार को राज्य के साथ मिलकर के बहुत बड़ा निर्णय किया है। अब जीएसटी और भी ज्यादा सरल हो गया है। जीएसटी के मुख्यतः दो ही रेट 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत रह गए हैं। 22 सितंबर, सोमवार, नवरात्र के पहले दिन से जीएसटी की नई दरें लागू हो जाएंगी।

उन्होंने आगे कहा कि इस बार धनतेरस की रौनक भी और ज्यादा रहेगी, क्योंकि दर्जनों चीजों पर टैक्स अब बहुत ही कम हो गया है। 8 साल पहले जब जीएसटी लागू हुआ तो कई दशकों का सपना साकार हुआ। यह आजाद भारत के सबसे बड़े आर्थिक सुधारों में से एक है। पीएम मोदी ने कहा कि 21वीं सदी में आगे बढ़ते भारत में जीएसटी में भी नेक्स्ट जेनरेशन रिफॉर्म किया गया है।

जीएसटी 2.0 ये देश के लिए सपोर्ट और ग्रोथ की डबल डोज है। नए जीएसटी रिफॉर्म से देश के हर परिवार को बहुत बड़ा फायदा होगा। गरीब, नव मध्यम वर्ग, मध्यम वर्ग महिलाएं, स्टूडेंट्स, किसान, नौजवान, सभी को जीएसटी टैक्स कम करने से जबर्दस्त फायदा होगा। पीएम मोदी ने कहा कि जीएसटी में रिफॉर्म से भारत की शानदार अर्थव्यवस्था में पंचरत्न जुड़े हैं। पहला, टैक्स सिस्टम कहीं अधिक सिंपल हुआ।

दूसरा, भारतीय नागरिकों के जीवन की गुणवत्ता और बढ़ेगी। तीसरा, उपभोग और वृद्धि दोनों को नया बूस्टर मिलेगा। चौथा, व्यापार करने में आसानी से निवेश और नौकरी को बल मिलेगा। पांचवां, विकसित भारत के लिए सहकारी संघवाद और मजबूत होगा। उन्होंने आगे कहा कि पहले की सरकारों में सामानों पर कितनी बड़ी मात्रा में टैक्स लिया जाता था।

2014 में मेरे आने से पहले रसोई का सामान हो, खेती किसानी से जुड़े सामान हो या फिर दवाइयां हों, यहां तक कि जीवन बीमा पर भी, ऐसी अनेक चीजों पर कांग्रेस सरकार अलग-अलग टैक्स लेती थी। अगर वही दौर होता तो आज आपको 100 रुपए की कोई चीज खरीदते तो आपको 20-25 रुपए टैक्स देना होता, लेकिन हमारी सरकार का मकसद है कि आम लोगों के जीवन में बचत ज्यादा से ज्यादा कैसे हो, लोगों का जीवन बेहतर बने।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि मैं आज देशवासियों से फिर कहूंगा कि भारत को आत्मनिर्भर बनाने के लिए रिफॉर्म्स का ये सिलसिला रुकने वाला नहीं है। भारत के लिए आत्मनिर्भरता ये कोई नारा नहीं है, इस दिशा में ठोस प्रयास हो रहे हैं।

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जालसाजी का चौंकाने वाला मामला : मजदूर को मिला 4.42 करोड़ का GST नोटिस, महीने का टर्न ओवर था 24.55 करोड़

जौनपुर 05 Sep, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी) : जिले के मुंगराबादशाहपुर थाना क्षेत्र से एक हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है, जहां एक मजदूरी करके जीवन यापन करने वाले युवक के नाम पर फर्जी तरीके से फर्म संचालित कर एक महीने में 24 करोड़ 55 लाख 80 हजार रुपये का टर्नओवर किया गया। इस फर्जीवाड़े का खुलासा तब हुआ जब उस गरीब मजदूर रोहित सरोज के नाम पर 4 करोड़ 42 लाख 4 हजार 400 रुपये का जीएसटी बकाया का नोटिस आ गया।

 धौरहरा गांव निवासी रोहित सरोज और उनके भाई दिहाड़ी मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते हैं। रोहित ने कभी कोई व्यापार नहीं किया, लेकिन अचानक 30 अगस्त को जीएसटी विभाग की ओर से एक नोटिस प्राप्त हुआ, जिसमें दावा किया गया कि आर.के. ट्रेडर्स नामक एक फर्म के माध्यम से उन्होंने करोड़ों रुपये का व्यापार किया है, लेकिन जीएसटी जमा नहीं की गई।

अधिकारियों की जांच में पता चला कि जिस फर्म से लेनदेन हुआ वह मुंगराबादशाहपुर के ही नीभापुर गांव में पंजीकृत है। फर्म के जरिए जून 2025 में उक्त भारी-भरकम टर्नओवर दर्शाया गया, लेकिन फर्म से जुड़े किसी भी व्यक्ति की पहचान स्पष्ट नहीं है। फर्म में उपयोग किए गए दस्तावेज **रोहित सरोज** के हैं।

पीड़ित रोहित सरोज ने बताया कि कुछ समय पहले एक अज्ञात व्यक्ति ने खुद को उनका दूर का रिश्तेदार बताते हुए नौकरी दिलाने का लालच दिया था। उस व्यक्ति ने आधार कार्ड, पैन कार्ड की कॉपी और एक बार ओटीपी भी फोन पर लेकर उनसे साझा करवा लिया था। इसके बाद वह व्यक्ति फिर कभी संपर्क में नहीं आया।

4.42 करोड़ रुपये के नोटिस ने रोहित और उनके परिवार को सकते में डाल दिया है। उनका कहना है कि वे मजदूरी करके पेट पालते हैं, इतनी बड़ी रकम कैसे चुका सकते हैं? अब वे न्याय की गुहार लेकर पुलिस महानिरीक्षक और अन्य अधिकारियों के पास दौड़ लगा रहे हैं।

फिलहाल मुंगराबादशाहपुर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और जालसाजों की तलाश कर रही है। साथ ही 10 सितंबर को रोहित को जीएसटी कार्यालय में दस्तावेजों के साथ उपस्थित होने को कहा गया है। यह मामला न सिर्फ जालसाजी का गंभीर उदाहरण है, बल्कि यह भी दिखाता है कि कैसे तकनीकी जानकारी की कमी और मासूमियत का फायदा उठाकर अपराधी आम जनता को फंसा रहे हैं।

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सुक्खू सरकार आपदा प्रबंधन में पूरी तरह फेल : अनुराग ठाकुर

हमीरपुर 04 Sep, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी) । पूर्व केंद्रीय मंत्री और हमीरपुर लोकसभा सीट से सांसद अनुराग सिंह ठाकुर ने प्रदेश की सुक्खू सरकार पर जुबानी हमला किया। हमीरपुर में पत्रकारों को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार आपदा के समय जनता को राहत पहुंचाने में पूरी तरह विफल साबित हुई है।

अनुराग ठाकुर ने आरोप लगाया कि आपदा की घड़ी में सरकार लोगों को एक तिरपाल तक उपलब्ध कराने में नाकाम रही। उन्होंने कहा कि केंद्र की एनडीए सरकार ने आपदा के समय हिमाचल प्रदेश को कांग्रेस की यूपीए सरकार से कई गुना अधिक आर्थिक मदद दी है।

सांसद ने कहा कि एनडीए सरकार ने बीते 10 वर्षों में हिमाचल को एसडीआरएफ में तीन गुना और एनडीआरएफ में दस गुना अधिक धनराशि मुहैया करवाई। इसके बावजूद प्रदेश सरकार जनता को बुनियादी सुविधाएं देने में असफल रही है।

भाजपा सांसद ने सवाल उठाया कि 2023 में आई विनाशकारी आपदा से प्रदेश सरकार ने क्या सबक लिया? उन्होंने कहा कि हालात यह हैं कि लोगों को आज नालियां खुलवाने तक के लिए अपनी जेब से पैसा खर्च करना पड़ रहा है।

कई ठेकेदारों के पुराने बिल का आज तक भीगतान नहीं हुआ। सरकार भरोसा खो चुकी है। राज्य सरकार अपने नागरिकों को बुनियादी सुविधाएं देने में भी सक्षम नहीं है।

उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार अब न तो जनता का विश्वास जीत पा रही है और न ही स्थानीय ठेकेदारों का भरोसा। उन्होंने सरकार से मांग की कि वह एक श्वेत पत्र जारी कर स्पष्ट करे कि आपदा राहत के लिए मिले पैसों का उपयोग कहां-कहां किया गया है।

इससे पहले, अनुराग ठाकुर ने बुधवार को ‘एक्स’ पोस्ट में लिखा, “विगत कुछ दिनों से हिमाचल प्रदेश भारी बारिश व जगह जगह बादल फटने की घटना से प्राकृतिक आपदा की मार झेल रहा है।

प्रदेश के कई जिलों में इस आपदा के चलते सामान्य जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है जिससे प्रदेश को हजारों करोड़ का नुकसान व जान-माल की हानि हुई है। मेरे हमीरपुर संसदीय क्षेत्र के बिलासपुर जिले के कई अन्य हिस्सों में बारिश ने भयंकर तबाही मचाई है।

आपदा का यह रूप अत्यंत हृदयविदारक है और बनी बनाई व्यवस्था व मकानों-इमारतों को जमींदोज होते देखना अत्यंत कष्टदाई है। नुकसान सरकार व जनता दोनों का हुआ है। हमारा प्रयास है कि लोगों की जान, घर व उनके सामान सुरक्षित रहें।”

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बाढ़ और अवैध पेड़ कटाई पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, पंजाब, हिमाचल, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर को नोटिस

नई दिल्ली ,04 सितंबर (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में उत्तर भारत के कई राज्यों में आई बाढ़ और भूस्खलन पर गंभीर चिंता जताई है। अदालत ने इस मामले पर सुनवाई करते हुए चार राज्यों को नोटिस जारी कर जवाब दाखिल करने की बात कही।

सुप्रीम कोर्ट ने जिन चार राज्यों को नोटिस जारी किया, उसमें पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर शामिल हैं।

कोर्ट ने इन राज्यों की सरकारों को नोटिस जारी कर उनसे दो हफ्तों के भीतर जवाब दाखिल करने को कहा है।
मुख्य न्यायाधीश बीआर गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि बड़े पैमाने पर अवैध पेड़ कटाई की गई है और यही हालिया आपदा का एक बड़ा कारण हो सकता है।

अदालत ने मीडिया रिपोर्टों पर संज्ञान लेते हुए कहा कि हमने हिमाचल प्रदेश के दृश्य देखे, जहां बड़ी संख्या में लकड़ी के ग_र बाढ़ में बहते हुए नजर आए। यह अनियंत्रित पेड़ कटाई का संकेत है। वहीं, पंजाब में खेत और गांव तबाह हो गए हैं। विकास जरूरी है, लेकिन वह संतुलित होना चाहिए।

सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने भी मामले की गंभीरता को रेखांकित किया।

उन्होंने कहा कि हमने प्रकृति के साथ इतनी छेड़छाड़ की है कि अब प्रकृति हमें उसका जवाब दे रही है। उन्होंने कोर्ट को भरोसा दिलाया कि इस मुद्दे पर वे पर्यावरण मंत्रालय के सचिव से बात करेंगे और संबंधित राज्यों के मुख्य सचिवों से भी संवाद स्थापित करेंगे।

सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि प्रभावित राज्यों को इस पर ठोस जवाब देना होगा कि बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए और आगे ऐसी आपदाओं से बचाव के लिए उनकी क्या योजना है।

बता दें कि कई राज्यों में हुई बारिश के कारण जनजीवन पूरी तरीके से प्रभावित है। पंजाब, हिमाचल, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के कई शहरों में जलजमाव है। पंजाब में हालात सबसे खराब हैं, जहां पर कई गांवों में पानी भर गया है।

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यूपी को एआई साइबर सिक्योरिटी और सस्टेनेबल डेवलपमेंट पर मंथन से मिलेगी नई दिशा : सीएम योगी

कानपुर ,04 सितंबर (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आईआईटी कानपुर के समन्वय से उद्योग-अकादमिक जुड़ाव कार्यक्रम में सम्मिलित हुए। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि आज इंडस्ट्री और अकादमिक संस्थानों के सहयोग का मुद्दा केवल शोध और नवाचार तक सीमित नहीं है, बल्कि यह सीधे-सीधे आम नागरिक के जीवन स्तर, वैश्विक चुनौतियों और सतत विकास से जुड़ा हुआ है।

आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी और सस्टेनेबिलिटी जैसे विषयों पर मंथन भारत को न केवल आत्मनिर्भर और विकसित राष्ट्र बनाएगा, बल्कि तकनीक और विकास का वैश्विक केंद्र स्थापित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

सीएम योगी ने कहा कि आज हम जिस विषय पर एकत्र हुए हैं, वह केवल इंडस्ट्री-एकेडमिया सहयोग का ‘समन्वय’ ही नहीं है, बल्कि पूरी दुनिया के सामने खड़ी चुनौतियों से जुड़ा हुआ है। ये चुनौतियां सीधे-सीधे आम नागरिक के जीवन स्तर को प्रभावित करती हैं।

इसीलिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी और सतत विकास जैसे तीन महत्वपूर्ण स्तंभों पर तकनीकी सत्र होंगे और चर्चा होगी। कभी 17वीं शताब्दी तक भारत विश्व की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था।

वैश्विक जीडीपी में हमारा योगदान 25 प्रतिशत तक था। लेकिन, 150-200 वर्षों में ऐसा क्या कुछ हुआ कि यह लगातार गिरता गया और 1947 तक आते-आते भारत का योगदान केवल 2 प्रतिशत रह गया?

उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों में हमने भारत को बदलते हुए देखा है। आज भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और अगले दो वर्षों में तीसरी अर्थव्यवस्था बनने की राह पर है।

आगे चलकर हमें दूसरी अर्थव्यवस्था बनने का अवसर भी मिलेगा। यह यात्रा केवल आर्थिक विकास की नहीं है, बल्कि ‘विकसित भारत’ और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में है।

आईआईटी कानपुर का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि आईआईटी कानपुर का गौरवशाली इतिहास है। पिछले छह दशकों में इस संस्थान ने देश को तकनीक की दिशा में बहुत कुछ दिया है। हाल ही में मैंने नोएडा में ड्रोन टेक्नोलॉजी केंद्र का दौरा किया। वहां आईआईटी कानपुर से जुड़े लोग भी मिले।

मैंने देखा कि हमारे युवा नई सामरिक चुनौतियों का सामना करने के लिए कैसे तैयार हो रहे हैं। आईआईटी कानपुर भी उसमें अपना योगदान दे रहा है। हमें हमेशा यह विश्वास रखना चाहिए कि हम कर सकते हैं। दुनिया का सबसे प्राचीन विश्वविद्यालय तक्षशिला भी भारत में था। वहीं से चरक और सुश्रुत जैसे आयुर्वेदाचार्य निकले।

यही हमारी परंपरा है कि हर अक्षर, हर वनस्पति और हर मनुष्य में कुछ बनने की क्षमता होती है। बस एक जोडऩे वाले की आवश्यकता होती है। मुझे विश्वास है कि आईआईटी जैसे संस्थान वही जोडऩे का काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि 1947 में उत्तर प्रदेश का योगदान राष्ट्रीय जीडीपी में 14 प्रतिशत तक था। लेकिन, 2017 तक यह घटकर केवल 7-8 प्रतिशत रह गया। निराशा का माहौल था, उद्योग निवेश नहीं करना चाहते थे, युवा पलायन कर रहे थे। कभी समृद्ध रहा प्रदेश बीमारू कहलाने लगा।

पिछले आठ वर्षों में उत्तर प्रदेश की तस्वीर बदली है। आज प्रदेश, देश की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। बेहतर सुरक्षा, निवेश, बुनियादी ढांचा और सुशासन के साथ यूपी ने नए मानक स्थापित किए हैं। हर क्षेत्र में परिवर्तन दिखाई दे रहा है। सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स के क्षेत्र में भी उत्तर प्रदेश ने नेतृत्व किया है।

प्रदेश की विधानसभा देश की पहली विधानसभा है, जिसने लगातार 36 घंटे चर्चा कर यह तय किया कि कैसे सस्टेनेबल डेवलपमेंट गोल्स पूरे किए जा सकते हैं। आज शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, जल प्रबंधन हर क्षेत्र में ठोस काम हो रहा है।
सीएम योगी ने बुंदेलखंड का उदाहरण देते हुए कहा कि कभी यह इलाका सूखे, पलायन और डकैतों की समस्या से जूझता था।

आज यहां हर घर नल से जल पहुंच रहा है, खेतों तक सिंचाई हो रही है और डिफेंस कॉरिडोर के दो महत्वपूर्ण नोड (चित्रकूट और झांसी) में निवेश आ रहा है। फॉरेस्ट रिसर्च इंस्टीट्यूट भी मान चुका है कि उत्तर प्रदेश में वन क्षेत्र बढ़ा है। यही सतत विकास की ओर हमारे प्रयासों का प्रमाण है।

साइबर सुरक्षा आज की सबसे बड़ी चुनौती है। 2017 में केवल दो साइबर थाने थे, वह भी सक्रिय नहीं थे। आज प्रदेश के 75 जिलों में साइबर थाने हैं, 1,500 से अधिक थानों में साइबर डेस्क है और राज्य साइबर एवं फॉरेंसिक संस्थान की स्थापना भी हो चुकी है। लेकिन, अभी बहुत कुछ करना बाकी है। इसी दिशा में हम आईआईटी कानपुर के साथ मिलकर कार्य करना चाहते हैं।

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चिदंबरम ने जीएसटी सुधारों को सराहा, कहा- गलती सुधारने में लगे 8 साल

मदुरै ,04 सितंबर (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने गुरुवार को मदुरै एयरपोर्ट पर पत्रकारों से बातचीत के दौरान केंद्र सरकार के हालिया जीएसटी दरों में बदलाव पर अपनी बेबाक राय रखी। उन्होंने कहा कि सरकार के इस फैसले का स्वागत किया जाना चाहिए, लेकिन यह भी सच है कि उसे अपनी गलती स्वीकार करने में आठ साल का समय लग गया।

चिदंबरम ने कहा कि हम जीएसटी में बदलाव का स्वागत करते हैं, लेकिन सरकार ने आठ साल बाद अपनी गलती को समझा है। जब 1 जुलाई 2017 को यह कानून लागू हुआ था, तभी हमने कहा था कि यह गलती है और इतने तरह-तरह के टैक्स स्लैब नहीं होने चाहिए।

मुख्य आर्थिक सलाहकार अरविंद सुब्रमणियन ने भी यह सलाह दी थी, लेकिन वित्त मंत्रियों और अन्य नेताओं ने उस समय किसी की बात नहीं सुनी। हमने संसद में भी कई बार इस मुद्दे को उठाया था।

कांग्रेस नेता ने आगे कहा कि कई नेताओं और अर्थशास्त्रियों ने बार-बार इन गलतियों को सुधारने की मांग की थी। अब कम से कम सरकार ने यह मान लिया और सुधार किया, इसके लिए मैं धन्यवाद देता हूं। बीते आठ सालों तक मध्यम वर्ग और गरीबों पर बोझ डाला गया।

अब जाकर 12 फीसदी और 18 फीसदी दर को घटाकर 5 फीसदी किया गया है। इतने सालों तक यही लोग 18 फीसदी टैक्स देते रहे। अगर आज यह दर सही है, तो क्या यह पिछले साल या उससे पहले सही नहीं थी? सरकार ने जनता को निचोड़कर उनका पैसा वसूला और अब जाकर दरें घटाई हैं, जिसके लिए मैं उन्हें सराहता हूं।

बता दें कि वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद ने हानिकारक और विलासिता की वस्तुओं पर 40 प्रतिशत कर की दर को मंजूरी दे दी है, जो वर्तमान की 28 प्रतिशत से बढ़कर 22 सितंबर, 2025 से प्रभावी होगी। जीएसटी 2.0 सुधार ने करों को मुख्य रूप से दो दरों 5 प्रतिशत और 18 प्रतिशत में बांट दिया है।

जिन वस्तुओं पर पहले तंबाकू, शुगर वाले ड्रिक्स और महंगे वाहनों जैसी हानिकारक या विलासिता की वस्तुओं पर 28 प्रतिशत कर लगता था, उन्हें अब 40 प्रतिशत कर स्लैब में डाल दिया गया है।

तंबाकू उत्पाद जैसे सिगरेट, सिगार, चुरूट, सिगारिलो, गुटखा, चबाने वाला तंबाकू (जैसे जर्दा), अनमैन्युफैक्चर्ड तंबाकू, बीड़ी, सुगंधित तंबाकू और पान मसाला पर 40 प्रतिशत कर लगेगा।

पेट्रोल के लिए 1200 सीसी और डीजल के लिए 1500 सीसी से ज्यादा इंजन वाली लग्जरी कारों के साथ-साथ मीठे, फ्लेवर्ड और कार्बोनेटेड पेय पदार्थों पर 40 प्रतिशत का नया कर स्लैब लागू होगा।

सिन टैक्स, हानिकारक या सामाजिक रूप से महंगी वस्तुओं पर लगाया जाने वाला उत्पाद शुल्क है, जो जन कल्याण के लिए अतिरिक्त राजस्व उत्पन्न करते हुए इनके उपयोग को हतोत्साहित करने के लिए लगाया जाता है।

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प्राकृतिक आपदाओं पर मायावती की प्रतिक्रिया, केंद्र और राज्य सरकारों से मानवीय रुख अपनाने की अपील

लखनऊ ,04 सितंबर (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने देश के कई हिस्सों में भारी बारिश, बाढ़ और भूस्खलन से उत्पन्न हालात पर चिंता जताई है।

उन्होंने कहा कि इन आपदाओं के कारण पंजाब, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर, दिल्ली, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, असम सहित कई राज्यों में ग्रामीण क्षेत्रों में जान-माल और पशुधन की भारी क्षति हो रही है। साथ ही गुरुग्राम और नोएडा जैसे शहरी इलाकों में जलभराव की समस्या ने करोड़ों लोगों की जिंदगी को प्रभावित किया है।

बसपा सुप्रीमो मायावती ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कहा कि इन कठिन हालातों में जनता को भारी परेशानियों और आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ रहा है।

उन्होंने कहा कि पीडि़तों की मदद के लिए आम लोगों की तरफ से स्वयं आगे आने की खबरें और तस्वीरें संतोषजनक हैं और यह मानवता की भावना को दर्शाता है।

उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों से अपील की कि वे इस आपदा के समय अपनी जिम्मेदारी पूरी निष्ठा से निभाएं और पीडि़तों की हर संभव सहायता करें। मायावती ने कहा कि सरकारों को मानवीय दृष्टिकोण अपनाते हुए तत्काल राहत पहुंचाने के लिए कदम उठाने चाहिए।

इसके साथ ही बसपा सुप्रीमो मायावती ने सुझाव दिया कि भविष्य में इस तरह की आपदाओं से निपटने के लिए बुनियादी जनसुविधाओं और ढांचे पर लगातार ध्यान दिया जाना चाहिए, ताकि हर साल आम जनजीवन, खासकर किसानों, गरीबों, मजदूरों और मेहनतकश लोगों की रोजी-रोटी पर इस तरह का विपरीत असर न पड़े।

गौरतलब है कि इस बार मानसून में पहाड़ों से लेकर मैदानी क्षेत्रों में भारी बारिश हुई है। पहाड़ों में बारिश के साथ भूस्खलन और बादल फटने जैसे घटनाएं भी हुईं।

पहाड़ों पर भारी बारिश और बादल फटने जैसे घटनाओं के कारण मैदानी इलाकों में हालात और गंभीर हुए हैं। नदियां उफान पर हैं। पिछले दो महीने में बारिश, बाढ़ और भूस्खलन की इन घटनाओं में सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है।

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जीएसटी में बदलाव देश की अर्थव्यस्था में मील का पत्थर साबित होंगे : सीएम रेखा गुप्ता

नई दिल्ली ,04 सितंबर (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)।  दिल्ली की मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने कहा कि जीएसटी काउंसिल के नए सुधार भारत की अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाले हैं और आने वाले वर्षों में यह मील का पत्थर साबित होंगे। मुख्यमंत्री ने स्वास्थ्य और जीवन बीमा पर जीएसटी को पूरी तरह से शून्य करने को भी एक ऐतिहासिक कदम बताया।

जीएसटी काउंसिल की बैठक के बाद घोषित नए सुधारों पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि दिल्ली सरकार और दिल्ली के नागरिक इन सुधारों का हृदय से स्वागत करते हैं। उन्होंने आदरणीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी तथा वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण जी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इन निर्णयों से आम नागरिक को सीधा लाभ मिलेगा।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि अब हर नागरिक स्वतंत्र रूप से अपना जीवन बीमा ले सकेगा, अपनी जिंदगी को मूल्य दे सकेगा। यह कदम न केवल आर्थिक सुरक्षा देगा बल्कि सामाजिक न्याय को भी सशक्त करेगा।

शिक्षा क्षेत्र में राहत की सराहना करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि शैक्षणिक सामग्री पर जीएसटी खत्म करना विद्यार्थियों और अभिभावकों के लिए बहुत बड़ी राहत है।

उन्होंने कहा कि इससे शिक्षा सस्ती और सुलभ होगी तथा हर बच्चा बेहतर भविष्य की ओर कदम बढ़ा सकेगा। नए बदलावों में देश के हर वर्ग का ध्यान रखा गया है।

मुख्यमंत्री श्रीमती रेखा गुप्ता ने यह भी कहा कि कृषि क्षेत्र और नवीकरणीय ऊर्जा पर दी गई जीएसटी छूट से देश और दिल्ली दोनों को व्यापक लाभ मिलेगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली सरकार लंबे समय से सौर ऊर्जा और ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए प्रयासरत है और यह निर्णय उन प्रयासों को नई गति देगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि काउंसिल की बैठक में प्रत्येक बिंदु पर गहन विचार-विमर्श के बाद जो फैसले लिए गए, वे न केवल दूरदर्शी हैं बल्कि देश की आर्थिक विकास यात्रा में बेहद मजबूत कदम साबित होंगे। मुख्यमंत्री के अनुसार यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि कांग्रेस इस विषय को भी राजनीति से जोड़ रही है।

यह समय राजनीति करने का नहीं, बल्कि देश और नागरिकों के हित में उठाए गए इन कदमों का समर्थन करने का है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इन सुधारों से दिल्ली सहित पूरे देश की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, नागरिकों का जीवन आसान होगा और भारत आत्मनिर्भरता की दिशा में एक और बड़ा कदम आगे बढ़ाएगा।

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विधानसभा बनी अखाड़ा, टीएमसी और बीजेपी विधायकों के बीच हाथापाई, फेकी बोतलें

कोलकाता ,04 सितंबर (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। पश्चिम बंगाल विधानसभा में उस वक्त जबरदस्त हंगामा हो गया, जब बीजेपी और टीएमसी विधायक आपस में भिड़ गए। जानकारी के अनुसार अल्पसंख्यकों से जुड़े एक बिल पर चर्चा के दौरान हंगामा शुरू हुआ।

जिस की वजह से विधानसभा स्पीकर को मार्शल बुलाने पड़े। इस दौरान बीजेपी के चीफ व्हिप शंकर घोष को विधानसभा से निलंबित कर दिया गया। उनके अलावा बीजेपी के 4 और विधायकों को भी सस्पेंड कर दिया गया।

हंगामे के दौरान टीएमसी और बीजेपी विधायकों के बीच हाथापाई भी हुई। इस दौरान जब पश्चिम बंगाल विधानसभा के अध्यक्ष बिमान बनर्जी ने बीजेपी विधायक और पार्टी के मुख्य सचेतक डॉ. शंकर घोष को निलंबित करने के बाद उन्हें बाहर निकालने के लिए मार्शल बुलाए, तो तनाव पैदा हो गया।

बीजेपी विधायक आसन के सामने आ गए। उन्होंने जय श्री राम के नारे लगाए और कार्यवाही बाधित की। जबकि तृणमूल कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार बीजेपी शासित राज्यों में बंगाली प्रवासी कामगारों पर हमलों की निंदा करते हुए एक प्रस्ताव पारित करने की कोशिश कर रही थी। शंकर घोष के साथ भगवा पार्टी की अग्निमित्रा पॉल को भी पश्चिम बंगाल विधानसभा से निलंबित कर दिया गया।

स्पीकर बिमान बनर्जी ने उन्हें बाहर निकालने के लिए महिला मार्शल बुलाए। इसके अलावा तीन अन्य बीजेपी विधायकों अशोक डिंडा, बमकिन घोष और मिहिर गोस्वामी को भी सदन से निलंबित कर दिया गया हैं। बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि हंगामे के दौरान सत्ता पक्ष की बेंच से उन पर पानी की बोतलें फेंकी गईं।

सीएम ममता ने बीजेपी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर बंगाल विरोधी होने और बंगालियों के उत्पीडऩ पर चर्चा को रोकने का आरोप लगाया। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी प्रस्ताव पर बोलने वाली थीं, तभी भाजपा विधायकों ने नारेबाजी शुरू कर दी जिसके बाद घोष को निलंबित कर दिया गया।

बीजेपी विधायकों ने जानना चाहा कि दो सितंबर को विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी को क्यों निलंबित किया गया था। जब घोष ने जाने से इनकार किया तो मार्शल की मदद से उन्हें सदन से बाहर निकाल दिया गया। मुख्यमंत्री ने भाजपा विधायकों के असंसदीय आचरण की निंदा की।

ममता बनर्जी ने कहा कि वे बंगाली प्रवासियों के अधिकारों और सुरक्षा से संबंधित एक गंभीर चर्चा को बाधित करने की कोशिश कर रहे थे। हंगामे के बीच सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों ने नारेबाजी शुरू कर दी, जिसके कारण कई बार सदन की कार्यवाही स्थगित करनी पड़ी।

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झारखंड में सुरक्षाबलों और नक्सलियों के बीच मुठभेड़, दो जवान शहीद; एक गंभीर घायल

पलामू 04 Sep, (एजेंसी): झारखंड के पलामू जिले में पुलिस और प्रतिबंधित संगठन तृतीय सम्मेलन प्रस्तुति कमेटी (टीएसपीसी) के नक्सलियों के बीच बुधवार की देर रात हुई मुठभेड़ में दो जवान शहीद हो गए, जबकि एक जवान गंभीर रूप से घायल हो गया।

घटना मनातू थाना क्षेत्र के केदल जंगल में रात लगभग एक से डेढ़ बजे के बीच हुई। पलामू एसपी रीष्मा रमेशन ने मुठभेड़ और शहादत की पुष्टि की है। जानकारी के मुताबिक, पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि टीएसपीसी का 10 लाख का इनामी जोनल कमांडर शशिकांत गंझू करमा पर्व पर अपने गांव केदल पहुंच सकता है।

इसी आधार पर पुलिस ने विशेष सर्च अभियान चलाया। जैसे ही पुलिस टीम गांव के करीब पहुंची, नक्सलियों को इसकी भनक लग गई। शशिकांत गंझू और उसके दस्ते ने अचानक गोलीबारी शुरू कर दी। पुलिस ने भी मोर्चा संभालते हुए जवाबी कार्रवाई की।

गोलीबारी के दौरान तीन पुलिसकर्मी घायल हो गए। सभी को तुरंत डालटनगंज स्थित मेदिनीराय मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने दो जवानों को मृत घोषित कर दिया। शहीद जवानों की पहचान संतन कुमार और सुनील राम के रूप में की गई है। इनमें से एक जवान पलामू एएसपी का अंगरक्षक था। घायल जवान का इलाज जारी है और उसकी हालत गंभीर बताई जा रही है।

यह इलाका लंबे समय से टीएसपीसी का गढ़ माना जाता है। शशिकांत गंझू इसी क्षेत्र से पलामू और चतरा जिलों में संगठन की गतिविधियों को नियंत्रित करता रहा है। झारखंड सरकार ने उस पर दस लाख रुपए का इनाम घोषित कर रखा है।

पुलिस सूत्रों के अनुसार, शशिकांत और उसके दस्ते की इलाके में सक्रियता की लगातार सूचना मिल रही थी, जिसके बाद अभियान चलाया गया। मुठभेड़ के बाद सुरक्षा बलों ने पूरे क्षेत्र को घेर लिया है और तलाशी अभियान तेज कर दिया गया है। आसपास के गांवों में भी पुलिस ने चौकसी बढ़ा दी है।

पलामू एसपी रीष्मा रमेशन ने शहीद जवानों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि उनका बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। उन्होंने बताया कि घायल जवान के इलाज की हर संभव व्यवस्था की गई है।

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जीएसटी 2.0 पर जयराम रमेश का सवाल,क्या परिषद एक औपचारिकता रह गई है?

नई दिल्ली 04 Sep, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी) । कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश ने जीएसटी 2.0 को लेकर केंद्र सरकार की हालिया घोषणाओं पर प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लंबे समय से जीएसटी 2.0 की वकालत करती रही है। मैं पूछता हूं कि क्या जीएसटी परिषद अब केवल एक औपचारिकता बनकर रह गई है?

कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस लंबे समय से जीएसटी 2.0 की वकालत करती रही है, जो दरों की संख्या घटाए, बड़े पैमाने पर उपभोग होने वाली वस्तुओं पर टैक्स की दरें कम करे, टैक्स चोरी, गलत वर्गीकरण और विवादों को न्यूनतम करे, इनवर्टेड ड्यूटी स्ट्रक्चर (जहां इनपुट पर आउटपुट की तुलना में अधिक टैक्स लगता है) समाप्त करे, एमएसएमई पर प्रक्रियागत नियमों का बोझ कम करे और जीएसटी के दायरे का विस्तार करे।

केंद्रीय वित्त मंत्री ने कल शाम संवैधानिक निकाय जीएसटी परिषद की बैठक के बाद बड़े ऐलान किए। हालांकि, जीएसटी परिषद की बैठक से पहले ही प्रधानमंत्री ने 15 अगस्त, 2025 के अपने स्वतंत्रता दिवस भाषण में इसके निर्णयों की सारगर्भित घोषणा कर दी थी। क्या जीएसटी परिषद अब केवल एक औपचारिकता बनकर रह गई है?”

जयराम रमेश ने जीएसटी 1.0 पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा, “निजी खपत में कमी, निजी निवेश की सुस्त दरें और अंतहीन वर्गीकरण विवादों के बीच केंद्र सरकार को अब मानना पड़ा है कि जीएसटी 1.0 अपनी अंतिम सीमा तक पहुंच चुका है।

दरअसल, जीएसटी 1.0 की डिजाइन ही त्रुटिपूर्ण थी और कांग्रेस ने जुलाई 2017 में ही इस पर ध्यान दिला दिया था, जब प्रधानमंत्री ने अपना यू-टर्न लेकर इसे लागू करने का निर्णय लिया था। इसे गुड एंड सिंपल टैक्स कहा गया था, लेकिन यह ग्रोथ सप्रेसिंग टैक्स साबित हुआ।”

उन्होंने कहा, “कल की घोषणाओं ने सुर्खियां बटोरीं, क्योंकि प्रधानमंत्री पहले ही प्री-दीवाली डेडलाइन तय कर चुके थे। यह माना जा रहा है कि दर कटौती के लाभ उपभोक्ताओं तक पहुंचेंगे। हालांकि, असली जीएसटी 2.0 का इंतजार अभी भी जारी है।

क्या यह नया जीएसटी 1.5 (अगर इसे ऐसा कहा जा सके) निजी निवेश, विशेषकर विनिर्माण क्षेत्र को प्रोत्साहित करेगा, यह देखना बाकी है। क्या इससे एमएसएमई पर बोझ कम होगा, यह तो समय ही बताएगा।”

जयराम रमेश ने राज्यों की मांग का जिक्र करते हुए कहा, “इस बीच, राज्यों की एक अहम मांग, जो कि सहकारी संघवाद की सच्ची भावना से की गई थी, यानी राजस्व की पूर्ण सुरक्षा के लिए पांच और वर्षों तक मुआवजा अवधि का विस्तार, अभी भी अनसुलझी है। वास्तव में, दर कटौती के बाद इस मांग का महत्व और भी बढ़ गया है।”

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दिल्ली में बाढ़ ने मचाई तबाही, यमुना नदी का जलस्तर 207 मीटर के पार; निचले इलाकों में घुसा पानी

नई दिल्ली 04 Sep,(Final Justice Digital News Desk/एजेंसी): दिल्ली में यमुना नदी का जलस्तर लगातार बढ़ता ही जा रहा है। गुरुवार सुबह 7 बजे पुराने रेलवे ब्रिज पर 207.48 मीटर दर्ज किया गया। नदी के उफान के कारण दिल्ली के कई निचले इलाकों में बाढ़ का पानी घुस गया है।

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, सुबह 6 बजे से 7 बजे तक जलस्तर 207.48 मीटर पर स्थिर रहा। अधिकारियों ने बताया कि सुबह 5 बजे यह 207.47 मीटर था और रात 2 बजे से सुबह 5 बजे तक यह इसी स्तर पर बना रहा।

बाढ़ का पानी दिल्ली सचिवालय की ओर बढ़ गया, जहां मुख्यमंत्री, कैबिनेट मंत्रियों और वरिष्ठ नौकरशाहों के कार्यालय स्थित हैं। इसके अलावा, वासुदेव घाट के आसपास के क्षेत्र भी पानी में डूब गए हैं।

यमुना के बढ़ते जलस्तर ने यमुना बाजार, गीता कॉलोनी, मजनू का टीला, कश्मीरी गेट, गढ़ी मांडू और मयूर विहार जैसे इलाकों को बुरी तरह प्रभावित किया है, जहां आवासीय और व्यावसायिक इमारतें स्थित हैं।

अधिकारियों के अनुसार, अब तक 14,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। राहत और बचाव कार्य जारी हैं। प्रभावित लोगों के लिए आईटीओ, मयूर विहार और गीता कॉलोनी में राहत शिविर स्थापित किए गए हैं। राजस्व विभाग के अनुसार, 8,018 लोगों को तंबुओं में और 2,030 लोगों को 13 स्थायी आश्रय स्थलों में स्थानांतरित किया गया है।

बाढ़ का पानी दिल्ली के सबसे पुराने और व्यस्त निगमबोध घाट में भी घुस गया है, जिससे वहां अंतिम संस्कार की प्रक्रिया बाधित होने की आशंका बढ़ गई है। कश्मीरी गेट के पास श्री मरघट वाले हनुमान बाबा मंदिर तक भी पानी पहुंच गया है।

बुधवार शाम को जारी बाढ़ नियंत्रण बुलेटिन में कहा गया है कि गुरुवार सुबह 8 बजे पुराने रेलवे ब्रिज पर जलस्तर 207.48 मीटर रहेगा, लेकिन इसके बाद नदी के जलस्तर में कमी आने की संभावना है। पुराने रेलवे ब्रिज यमुना के प्रवाह और बाढ़ के जोखिम का आकलन करने के लिए एक महत्वपूर्ण निगरानी बिंदु बना हुआ है।

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32 हजार प्राथमिक शिक्षकों की नौकरी मामले पर हाईकोर्ट ने उठाया सीबीआई जांच पर सवाल

कोलकाता 03 Sep, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। कलकत्ता उच्च न्यायालय की खंडपीठ आज 32,000 अप्रशिक्षित प्राथमिक शिक्षकों के मामले में अहम टिप्पणी की है। कलकत्ता उच्च न्यायालय ने प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती में भ्रष्टाचार के मामले की सीबीआई जांच की प्रगति पर सवाल उठाए हैं। अदालत पूछ रही है कि जांच कब पूरी होगी।

न्यायमूर्ति तपोव्रत चक्रवर्ती और न्यायमूर्ति रीताब्रत कुमार मित्रा की खंडपीठ ने कहा, “हममें से कोई नहीं जानता कि प्राथमिक शिक्षकों की भर्ती में भ्रष्टाचार की जांच कब पूरी होगी।” उच्च न्यायालय ने यह भी कहा, “जब तक जांच पूरी नहीं हो जाती, यह जानना संभव नहीं है कि भ्रष्टाचार के ज़रिए किसने नौकरी पाई और उस भ्रष्टाचार में कौन शामिल है।”

हाईकोर्ट ने सवाल किया कि योग्य और अयोग्य उम्मीदवारों में अंतर कैसे संभव है। हाईकोर्ट के न्यायाधीशों ने सवाल किया, “किसने योग्यता परीक्षा पास की है और किसने नहीं, किसने भ्रष्टाचार के ज़रिए नौकरी पाई है और किसने नहीं? भला न्यायालय उन्हें कैसे अलग करेगा? न्यायालय के लिए यह चयन करना संभव नहीं है।” बता दे कि,

पूर्व न्यायाधीश (अब भाजपा सांसद) अभिजीत गंगोपाध्याय ने 32,000 से ज़्यादा नौकरियों को रद्द कर दिया था। न्यायमूर्ति तपोब्रत चक्रवर्ती और न्यायमूर्ति रीताब्रत कुमार मित्रा की खंडपीठ ने मंगलवार को उस मामले की सुनवाई में उपरोक्त टिप्पणी की।

आज सुनवाई के दौरान, न्यायमूर्ति तपोब्रत चक्रवर्ती ने वादी पक्ष की वकील सौम्या मजूमदार से कहा, “आपने भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। लेकिन हमें इसके समर्थन में सबूत नहीं मिल रहे हैं। आरोप है कि योग्यता परीक्षा आयोजित नहीं की गई थी। लेकिन कुछ लोग कह रहे हैं कि यह आयोजित की गई थी।

कुछ लोग कह रहे हैं कि यह आयोजित नहीं की गई थी।” उन्होंने आगे कहा, “अप्रशिक्षित लोगों को नौकरी पर रखने के आरोप लगे हैं। आप कह रहे हैं कि भ्रष्टाचार हुआ है। नौकरियां इसलिए नहीं दी गईं क्योंकि वे भुगतान नहीं कर सकते थे। आप यह भी कह रहे हैं कि अप्रशिक्षित लोगों को नौकरी दी गई है।

मान लीजिए हम आपकी बात मान लेते हैं। अनियमितताएं हुई हैं। फिर हम इन नौकरियों को कैसे रद्द कर सकते हैं? हम ‘अलग’ नहीं कर सकते।”

पीठ ने आगे कहा, “अगर हम उपरोक्त हज़ारो लोगों की नौकरियां रद्द कर देते हैं, तो इस आदेश से प्रभावित होने वाले लोग अदालत आएंगे। हमें उनकी भी बात सुननी होगी। फिर हमें साल-दर-साल मामले की सुनवाई करनी होगी। ऐसे अगर भ्रष्टाचार के आरोप सही पाए जाते हैं, तो कोई उम्मीदवार भ्रष्टाचार का सहारा लेने के बाद भी 7-8 साल तक नौकरी करता रहेगा!”

इस मामले की सुनवाई 11 सितंबर को फिर होगी। अदालत ने वादी पक्ष की वकील सौम्या मजूमदार को उस दिन अपना बयान दर्ज कराने का आदेश दिया है।

इस दिन वकील सौम्या मजूमदार ने कहा, “2016 के प्राइमरी में 42 हज़ार नियुक्तियां हुई थीं। नियमानुसार पैनल प्रकाशित करना अनिवार्य है। लेकिन प्राथमिक शिक्षा बोर्ड ने नियमानुसार पैनल प्रकाशित नहीं किया। बोर्ड ने खुद कहा कि चयन समिति ने ज़िलेवार सूची प्रकाशित की थी।

लेकिन वह पैनल आरक्षण के नियमों के अनुसार प्रकाशित नहीं किया गया। क्योंकि, आरक्षित वर्ग के उम्मीदवारों के लिए अलग से पैनल प्रकाशित किया जाना चाहिए।” वकील के बयान के आधार पर, न्यायमूर्ति तपोब्रत चक्रवर्ती की पीठ ने पूछा कि अदालत को क्या करना चाहिए। वकील अगली सुनवाई में इसकी जानकारी देंगे।

12 मई, 2023 को तत्कालीन न्यायमूर्ति अभिजीत गंगोपाध्याय ने 36,000 कार्यरत प्राथमिक शिक्षकों को सेवा से बर्खास्त करने का आदेश दिया था। बाद में इसे घटाकर 32,000 कर दिया गया।

प्राथमिक शिक्षा बोर्ड ने 2014 की टीईटी परीक्षा के आधार पर 2016 में लगभग 42,942 शिक्षकों की भर्ती की थी। इस बीच, प्रियंका नस्कर नामक एक अभ्यर्थी सहित लगभग 140 लोगों ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया और दावा किया कि भर्ती में कई अनियमितताएं थीं।

अभियोगी ने आरोप लगाया कि इन शिक्षकों की भर्ती में नियमों के अनुसार योग्यता परीक्षा आयोजित नहीं की गई थी। बिना प्रशिक्षण के अभ्यर्थियों को शिक्षक के रूप में भर्ती किया गया था।

शिक्षकों की भर्ती आरक्षण सूची के अनुसार नहीं की गई थी। न्यायमूर्ति अभिजीत गंगोपाध्याय के आदेश को चुनौती देते हुए, प्राथमिक शिक्षा बोर्ड ने उसी वर्ष 15 मई को कलकत्ता उच्च न्यायालय की खंडपीठ में एक आवेदन दायर किया। तब न्यायमूर्ति सुब्रत तालुकदार और न्यायमूर्ति सुप्रतिम भट्टाचार्य की खंडपीठ ने नियुक्ति रद्द करने पर रोक लगा दी थी। तब से इस पर सुनवाई चल रही है।

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अखिलेश यादव का भाजपा सरकार पर हमला

कहा—2027 में समाजवादी पार्टी की सरकार बनेगी, मिलेगा सबको न्याय और सम्मान

लखनऊ,03 Sep, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी) समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोलते हुए कहा है कि उत्तर प्रदेश से सामाजिक न्याय की स्थापना और अन्याय मिटाने के लिए भाजपा को सत्ता से हटाना बेहद जरूरी है।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार में निर्दोष लोगों को झूठे मुकदमों में फंसाया जाता है और संविधान के साथ लगातार खिलवाड़ हो रहा है।प्रदेश मुख्यालय पर विभिन्न जिलों से आए नेताओं और कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि भाजपा सरकार ने महंगाई, बेरोजगारी और भ्रष्टाचार को चरम पर पहुंचा दिया है। शिक्षा और स्वास्थ्य व्यवस्था पूरी तरह बर्बाद हो चुकी है। अस्पतालों में दवा और इलाज की सुविधा नहीं है, एम्बुलेंस सेवाएं ठप पड़ी हैं। प्रशासन का खुलेआम दुरुपयोग किया जा रहा है।

उन्होंने केंद्र सरकार पर भी निशाना साधते हुए कहा कि भाजपा के तीसरे कार्यकाल में देश की जनता को परेशानी और तबाही के अलावा कुछ नहीं मिला। नोटबंदी का परिणाम आज तक सामने नहीं आया। प्रधानमंत्री के संसदीय क्षेत्र वाराणसी में विकास क्यों नहीं हुआ? वहां आई बाढ़ की भयावह तस्वीरों को सबने देखा। भाजपा ने झूठे सपने दिखाकर जनता को विनाश के कगार पर पहुंचा दिया है।

अखिलेश यादव ने भाजपा को “इस्तेमाल करने वाली पार्टी” बताते हुए कहा कि यह लोगों का इस्तेमाल कर उन्हें बर्बाद कर देती है। जीएसटी को इतना जटिल बना दिया गया कि व्यापार और व्यापारी उलझकर रह गए। उन्होंने कहा कि व्यापार करना आसान होना चाहिए, टैक्स की प्रक्रिया सरल होनी चाहिए लेकिन भाजपा ने इसे उलझाकर रख दिया। भाजपा सरकार के पास बेरोजगारी और महंगाई का कोई समाधान नहीं है। आउटसोर्सिंग से बेरोजगारी का स्थायी हल नहीं होगा।

उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा ने अपने नौ साल के कार्यकाल में एक भी यूनिट बिजली का उत्पादन नहीं बढ़ाया, कोई नया बिजली कारखाना नहीं लगाया। जनता का भाजपा पर से भरोसा उठ चुका है। समाजवादी पार्टी की नीतियों और कार्यक्रमों पर ही जनता का विश्वास कायम है। सपा सरकार में किसानों, नौजवानों और सभी वर्गों के हित में फैसले लिए गए, विकास के अनेक कार्य हुए।

अखिलेश यादव ने विश्वास जताया कि समाजवादी पार्टी की सरकार बनने पर प्रदेश में सामाजिक न्याय का राज स्थापित होगा। हर वर्ग को न्याय और सम्मान मिलेगा, सबका विकास होगा और प्रदेश में खुशहाली आएगी। उन्होंने कहा कि 2027 में भाजपा सरकार को कोई नहीं बचा पाएगा।

इस अवसर पर नेता विरोधी दल माता प्रसाद पांडेय, राष्ट्रीय सचिव एवं पूर्व कैबिनेट मंत्री राजेंद्र चौधरी, प्रदेश अध्यक्ष श्याम लाल पाल, शिक्षक सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रो. बी. पांडेय, पूर्व मंत्री नरेंद्र वर्मा, विजमा यादव, अताउर्रहमान, कमला कांत राजभर, शोएब अंसारी, पूर्व मंत्री शेख सुलेमान और सलामतुल्ला समेत बड़ी संख्या में विधायक, नेता और कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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हिंद मोटर अपार्टमेंट के एमिनेंट कॉम्प्लेक्स में ईडी का छापा

हुगली 03 Sep, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी) । जिले में आज तब एक बार फिर हड़कंप मच गया जब हिंद मोटर अपार्टमेंट में ईडी ने वित्तीय अनियमितताओं को लेकर सघन छापेमारी की। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने हुगली के हिंद मोटर स्थित एमिनेंट कॉम्प्लेक्स के एक अपार्टमेंट पर छापा मारा है।

यह छापा विकास लछिया नामक एक व्यक्ति के घर पर मारा गया, लछिया एक अकाउंटेंट है और कथित तौर पर कोलकाता की एक निजी फर्म में काम करता है। ईडी अधिकारियों और केंद्रीय सुरक्षाकर्मियों की एक बड़ी टीम के साथ की गई इस कार्रवाई से स्थानीय लोगों में हड़कंप मच गया है।

ईडी की टीम तीन वाहनों में एमिनेंट कॉम्प्लेक्स के सी-ब्लॉक पहुँची, जिसमें पांच अधिकारी और छह केंद्रीय सुरक्षा गार्ड शामिल थे। टीम पहली मंजिल पर स्थित एक फ्लैट में दाखिल हुई और गहन तलाशी अभियान शुरू किया। यह छापेमारी मनी लॉन्ड्रिंग और धोखाधड़ी सहित वित्तीय अपराधों में संलिप्ता को लेकर की गई है।

जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि लछिया लछिरामका डायमंड इन्फोटेक प्राइवेट लिमिटेड नामक कंपनी में एकाउंटेंट के रूप में काम कर रहा था। हालांकि आरोपों की सटीक प्रकृति अभी तक सार्वजनिक नहीं हुई है। एजेंसी लछिया और जिस फर्म में वह काम करता था, उससे जुड़े वित्तीय लेनदेन और रिकॉर्ड की जांच कर रही है।

खबरों के अनुसार, विकास लछिया झारखंड के जामताड़ा का मूल निवासी बताया जा रहा है। इस जानकारी ने जांचकर्ताओं की दिलचस्पी बढ़ा दी है, क्योंकि जामताड़ा ज़िला विभिन्न साइबर अपराधों और वित्तीय घोटालों का केंद्र होने के लिए कुख्यात रहा है।

वै़से तलाशी अभियान खबर के लिखे जाने तक जारी था। ईडी के अधिकारी अपार्टमेंट में मिले दस्तावेज़ों, इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों और अन्य संपत्तियों की जांच कर रहे हैं।

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राज्यों को केंद्र का निर्देश, अवैध घुसपैठियों के लिए बनाएं डिटेंशन सेंटर

विदेशी न्यायाधिकरण को मिले नए अधिकार

नई दिल्ली 03 Sep, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी): केंद्र सरकार ने अवैध विदेशी घुसपैठियों पर शिकंजा कसते हुए सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अपने-अपने क्षेत्रों में डिटेंशन सेंटर (विशेष हिरासत केंद्र) स्थापित करने का निर्देश दिया है।

मंगलवार को केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जारी एक गजट नोटिफिकेशन में यह आदेश दिया गया, ताकि देश से बाहर निकाले जाने से पहले अवैध घुसपैठियों की गतिविधियों को सीमित किया जा सके और उन्हें इन केंद्रों में रखा जा सके।

सरकार ने ‘आव्रजन एवं विदेशी आदेश, 2025′ के माध्यम से विदेशी न्यायाधिकरणों (Foreigners’ Tribunals) की शक्तियों में भी विस्तार किया है। इस नए आदेश के तहत, यदि कोई व्यक्ति जिसकी नागरिकता पर संदेह है, वह न्यायाधिकरण के समक्ष पेश होने में विफल रहता है, तो न्यायाधिकरण उसकी हिरासत का आदेश जारी कर सकता है।

नोटिफिकेशन में स्पष्ट किया गया कि जो व्यक्ति यह साबित करने के लिए सबूत पेश नहीं कर पाता कि वह विदेशी नहीं है, और अपने दावे के संबंध में जमानत की व्यवस्था करने में भी असमर्थ है तो उसे डिटेंशन सेंटर में रखा जाएगा।

विदेशियों के रोजगार पर भी नए नियम

अधिसूचना में निजी क्षेत्र में विदेशियों को रोजगार देने को लेकर भी सख्त दिशानिर्देश जारी किए गए हैं। इसके मुताबिक, वैध वर्क वीजा रखने वाला कोई भी विदेशी नागरिक, नागरिक प्राधिकरण की अनुमति के बिना बिजली, पानी या पेट्रोलियम जैसे संवेदनशील क्षेत्रों से जुड़े किसी भी निजी उपक्रम में काम नहीं कर सकेगा।

इसके अलावा, रक्षा, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, परमाणु ऊर्जा या मानवाधिकार जैसे क्षेत्रों में किसी विदेशी नागरिक को नियुक्त करने से पहले केंद्र सरकार की पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा।

नेपाल-भूटान के नागरिकों को राहत

एक अन्य अधिसूचना में यह भी स्पष्ट किया गया है कि नेपाल और भूटान के नागरिकों को जमीन या हवाई मार्ग से भारत में आने-जाने के लिए पासपोर्ट और वीजा की आवश्यकता नहीं है।

यह नियम उन तिब्बती शरणार्थियों पर भी लागू होगा जो 1959 के बाद लेकिन 30 मई, 2003 से पहले भारत में प्रवेश कर चुके हैं और संबंधित अधिकारियों के पास पंजीकृत हैं।

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पवन खेड़ा की पत्नी कोटा नीलिमा पर दो वोटर आईडी रखने का आरोप

अमित मालवीय ने की जांच की मांग

नई दिल्ली 03 Sep, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी): कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता पवन खेड़ा के बाद उनकी पत्नी कोटा नीलिमा दो वोटर आईडी को लेकर विवादों में आ गई हैं।

भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने दावा किया है कि तेलंगाना के खैरताबाद से चुनाव लड़ने वाली नीलिमा के पास दो सक्रिय मतदाता पहचान पत्र हैं। मालवीय ने चुनाव आयोग से इसकी जांच करने की मांग की है।

भाजपा आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर मतदाता सूची शेयर करते हुए आरोप लगाया कि कोटा नीलिमा का नाम खैरताबाद और नई दिल्ली, दोनों जगहों की वोटर लिस्ट में दर्ज है।

उनके मुताबिक, नीलिमा ने 2023 में दाखिल शपथपत्र में अपने खैरताबाद स्थित ऐपिक नंबर टीजीजेड2666014 का उल्लेख किया था, जो 2025 तक भी सक्रिय है। यह ऐपिक ‘गफ्फर खान कॉलोनी रोड नं. 10’ पते पर पंजीकृत था, जो अब ‘गौरी शंकर नगर वेलफेयर एसोसिएशन’ पते पर दर्ज है।

इसके साथ ही मालवीय ने यह भी दावा किया कि कोटा नीलिमा के पास एक और एपिक नंबर (एसजेई0755975) है, जिसमें नई दिल्ली विधानसभा क्षेत्र के काका नगर इलाके का पता दर्ज है। इस एपिक में नाम ‘के. नीलिमा’ लिखा है और पति के नाम में पवन खेड़ा का उल्लेख है।

अमित मालवीय ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि पार्टी के कई नेता ‘वोट चोरी’ में लिप्त हैं और खुद को ईमानदार दिखाते हुए आम नागरिकों पर सवाल खड़ा कर रहे हैं।

उन्होंने राहुल गांधी पर आरोप लगाया कि वे प्रेस कॉन्फ्रेंस में बिना पर्याप्त जांच के आम वोटरों की पहचान उजागर कर उन्हें खतरे में डालते हैं, जबकि अपनी पार्टी के नेताओं की कथित गड़बड़ियों पर चुप्पी साधे रहते हैं।

कांग्रेस पर हमला बोलते हुए भाजपा नेता ने कहा, “राहुल गांधी ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की और बिना किसी उचित जांच-पड़ताल के ईमानदार मतदाताओं को निशाना बनाया और उन्हें बदनाम किया, यहां तक कि बिना सहमति के उनकी पहचान उजागर करके उन्हें खतरे में डाल दिया।

उन्होंने युवा, तरक्की की राह पर अग्रसर पेशेवरों और बेहतर अवसरों की तलाश में शहर बदलने वाले गरीब दिहाड़ी मजदूरों की पहचान उजागर की। फिर भी उन्होंने इस चौंकाने वाले खुलासे पर चुप्पी साधे रखी है कि उनके करीबी सहयोगी के पास दो एपिक नंबर हैं।”

पवन खेड़ा और उनकी पत्नी कोटा नीलिमा का उदाहरण देते हुए अमित मालवीय ने कहा कि यह बिल्कुल स्पष्ट है कि कांग्रेस नेताओं के पास कई एपिक नंबर हैं और वे एक से ज्यादा जगहों पर पंजीकृत मतदाता हैं।

यह कोई संयोग नहीं है। ‘वोट चोरी’ में लिप्त लोग ही आम नागरिकों को उनके लोकतांत्रिक अधिकारों का प्रयोग करने और हमारी संस्थाओं को कमजोर करने के लिए बदनाम कर रहे हैं।

भाजपा नेता ने अपनी पोस्ट में लिखा, “यह मामला सिर्फ पवन खेड़ा और उनके परिवार तक सीमित नहीं है, बल्कि कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व तक फैला हुआ है।”

सोनिया गांधी का नाम लेते हुए उन्होंने दावा किया कि 1980 में उन्होंने इटली की नागरिक होने के बावजूद भारत की वोटर लिस्ट में अपना नाम जुड़वाया था।

मालवीय ने आरोप लगाए, “कांग्रेस और ‘इंडिया’ गठबंधन अवैध प्रवासियों और गैर-भारतीयों का बचाव करने के लिए हमारे अपने लोगों पर ही आरोप लगा रहे हैं।”

मालवीय ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर सीधा हमला करते हुए कहा कि वे अपने ही दल के भीतर, खासकर सार्वजनिक पद के इच्छुक लोगों और अपने करीबी लोगों के साथ, इन आपराधिक कृत्यों से खुद को मुक्त नहीं कर सकते। उन्हें बोलना चाहिए।

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हिमाचल से लेकर ओडिशा तक अगले 3 घंटे होगी भारी बारिश, IMD ने जारी किया अलर्ट

नई दिल्ली 03 Sep, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी) : भारत मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने बुधवार को देश के कई राज्यों में भारी बारिश के लिए अलर्ट जारी किया है। आईएमडी के मुताबिक, अगले 3 घंटों के दौरान जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तर-पश्चिम और पूर्वी मध्य प्रदेश समेत कई राज्यों में भारी बारिश का पूर्वानुमान है। आईएमडी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स के माध्यम से इसकी जानकारी दी है।

मौसम विभाग ने कई राज्यों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। आईएमडी के मुताबिक, अगले 3 घंटों के दौरान जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तरी पंजाब, उत्तरी हरियाणा, पूर्वी राजस्थान, दक्षिण-पश्चिम उत्तर प्रदेश, उत्तर-पश्चिम और पूर्वी मध्य प्रदेश और ओडिशा में मध्यम से तेज बारिश हो सकती है।

आईएमडी ने जानकारी दी है कि उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में एक निम्न दबाव का क्षेत्र बुधवार सुबह 5:30 बजे तक उसी क्षेत्र में स्पष्ट रूप से चिह्नित हो गया है। यह अगले 24 घंटों में पश्चिम-उत्तर-पश्चिम दिशा में ओडिशा की ओर बढ़ने की संभावना है। इस सिस्टम के प्रभाव से ओडिशा और आसपास के क्षेत्रों में भारी बारिश हो सकती है।

मौसम विभाग ने पिछले 24 घंटे में जम्मू-कश्मीर में हुई भारी बारिश के बारे में भी जानकारी दी। आईएमडी के अनुसार, जम्मू-कश्मीर में 2 सितंबर 2025 की सुबह 8:30 बजे से 3 सितंबर 2025 की सुबह 5:30 बजे तक रिकॉर्ड बारिश दर्ज की गई है। जम्मू-कश्मीर के रियासी में 230.5 मिमी (अत्यधिक भारी बारिश), कटरा में 193 मिमी, बटोत में 157.3 मिमी, डोडा में 114 मिमी, बदरवाह में 96.2 मिमी, बनिहाल में 95 मिमी, रामबन में 82 मिमी, जम्मू वेधशाला में 81 मिमी, कोकेरनाग में 68.2 मिमी, काजीगुंड में 68 मिमी, राजौरी में 57.4 मिमी, पहलगाम में 55 मिमी, किश्तवाड़ में 50 मिमी, सांबा में 48 मिमी और श्रीनगर वेधशाला में 32 मिमी बारिश दर्ज की गई है।

मौसम विभाग ने बताया कि पिछले 24 घंटे में जम्मू-कश्मीर में भारी से अत्यधिक भारी बारिश, छत्तीसगढ़ में भारी बारिश और हरियाणा, उत्तराखंड, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, बिहार, पश्चिम बंगाल, तटीय ओडिशा, तटीय महाराष्ट्र, तटीय कर्नाटक और अंडमान निकोबार द्वीप समूह में मध्यम बारिश दर्ज की गई है।

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क्या पूरा जिला दे देंगे?’…3000 बीघा जमीन प्राइवेट कंपनी को देने पर भड़का HC

सरकार से मांगा जवाब

गुवाहाटी 03 Sep,(Final Justice Digital News Desk/एजेंसी) : असम के आदिवासी बहुल दीमा हसाओ जिले में एक निजी सीमेंट कंपनी को 3,000 बीघा (करीब 1,000 एकड़) जमीन आवंटित करने के मामले पर गौहाटी हाई कोर्ट ने नाराजगी और हैरानी जताई है।

22 स्थानीय निवासियों की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की, “क्या हो रहा है? एक निजी कंपनी को 3,000 बीघा जमीन दी जा रही है… क्या पूरा जिला दे देंगे?”

सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस संजय कुमार मेधी ने कहा कि अदालत इतने बड़े भू-भाग के आवंटन से ‘परेशान और स्तब्ध’ है। हाई कोर्ट ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि क्या इस विशाल परियोजना के लिए पर्यावरण मंजूरी ली गई थी।

सुनवाई के दौरान जस्टिस मेधी और राज्य के महाधिवक्ता देबोजीत सैकिया के बीच इस बात पर तीखी बहस हुई कि संविधान की छठी अनुसूची के तहत आने वाले क्षेत्र में महाबल सीमेंट को इतनी अधिक जमीन क्यों दी गई।

जब मामले से संबंधित भूमि का अधिकार क्षेत्र रखने वाली एनसी हिल्स स्वायत्त परिषद (NCHAC) के वकील ने कुछ दस्तावेज पेश किए, तो कोर्ट ने उन्हें पूरी फाइल पेश करने का निर्देश दिया।

जस्टिस मेधी ने कहा, “हमारा उद्देश्य कुछ कागजात देखना नहीं, बल्कि उस पूरी फाइल को देखना है जिसमें जमीन के इतने बड़े हिस्से को एक निजी फर्म को आवंटित करने का निर्णय लिया गया।”

महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि कंपनी ने 2 लाख रुपये प्रति बीघा की दर से जमीन खरीदी है और राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति भी बनाई थी, जिसने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है।

कोर्ट ने सरकार को आज यानी 3 सितंबर तक अपना हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है और NCHAC को अगली सुनवाई में पूरी फाइल के साथ पेश होने को कहा है।

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सिर्फ आधार कार्ड ही अकेले नागरिकता का सबूत नहीं’ एसआईआर पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम टिप्पणी

नई दिल्ली 03 Sep, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)  सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक दलों को कड़ी फटकार लगाते हुए कहा कि आधार को नागरिकता का प्रमाणपत्र मानने की कोशिशें स्वीकार्य नहीं हैं। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट किया कि आधार कार्ड को पहचान पत्र के तौर पर देखा जा सकता है, न कि इसे नागरिकता के लिए माना जा सकता है।

न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ ने स्पष्ट किया कि आधार पहचान पत्र के रूप में इस्तेमाल किया जा सकता है, लेकिन इसे अकेले नागरिकता साबित करने के लिए नहीं माना जा सकता। पीठ ने कहा, “हम आधार की स्थिति को न तो आधार अधिनियम से परे बढ़ा सकते हैं और न ही पुट्टस्वामी मामले के फैसले से आगे ले जा सकते हैं।”

बता दें कि आधार अधिनियम की धारा 9 में स्पष्ट प्रावधान है कि आधार न तो नागरिकता देता है और न ही निवास का अधिकार। साथ ही, 2018 के पुट्टस्वामी केस में भी सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आधार नागरिकता का सबूत नहीं है।

दरअसल, बिहार की मतदाता सूची से 65 लाख नाम हटाए जाने के बाद राजद समेत कुछ दलों ने आधार को मतदाता पंजीकरण के लिए अंतिम प्रमाण बनाने की मांग की थी। इस पर कोर्ट ने सख्त लहजे में पूछा, “आधार पर इतना जोर क्यों?”

चुनाव आयोग ने कोर्ट को बताया कि बिहार के कई जिलों में आधार सैचुरेशन 140 प्रतिशत से अधिक है, जो बड़े पैमाने पर फर्जी नामांकन को दर्शाता है। केंद्र सरकार ने भी जानकारी दी कि कई राज्यों में बांग्लादेशी घुसपैठियों और रोहिंग्या शरणार्थियों ने धोखाधड़ी से आधार कार्ड हासिल कर लिए हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने राजनीतिक दलों को सलाह दी कि वे असली मतदाताओं की मदद के लिए जमीनी स्तर पर काम करें और बूथ लेवल एजेंटों के जरिए दावे-आपत्तियां दाखिल करवाएं, बजाय इसके कि शॉर्टकट ढूंढकर मतदाता सूची को कमजोर करें।

अदालत का दो टूक संदेश है कि आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं है। फर्जी मतदाताओं को भारतीय लोकतंत्र को कमजोर करने की इजाजत नहीं दी जाएगी।

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