सरकार से मांगा जवाब
गुवाहाटी 03 Sep,(Final Justice Digital News Desk/एजेंसी) : असम के आदिवासी बहुल दीमा हसाओ जिले में एक निजी सीमेंट कंपनी को 3,000 बीघा (करीब 1,000 एकड़) जमीन आवंटित करने के मामले पर गौहाटी हाई कोर्ट ने नाराजगी और हैरानी जताई है।
22 स्थानीय निवासियों की एक याचिका पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी की, “क्या हो रहा है? एक निजी कंपनी को 3,000 बीघा जमीन दी जा रही है… क्या पूरा जिला दे देंगे?”
सोमवार को हुई सुनवाई के दौरान जस्टिस संजय कुमार मेधी ने कहा कि अदालत इतने बड़े भू-भाग के आवंटन से ‘परेशान और स्तब्ध’ है। हाई कोर्ट ने इस बात पर भी सवाल उठाया कि क्या इस विशाल परियोजना के लिए पर्यावरण मंजूरी ली गई थी।
सुनवाई के दौरान जस्टिस मेधी और राज्य के महाधिवक्ता देबोजीत सैकिया के बीच इस बात पर तीखी बहस हुई कि संविधान की छठी अनुसूची के तहत आने वाले क्षेत्र में महाबल सीमेंट को इतनी अधिक जमीन क्यों दी गई।
जब मामले से संबंधित भूमि का अधिकार क्षेत्र रखने वाली एनसी हिल्स स्वायत्त परिषद (NCHAC) के वकील ने कुछ दस्तावेज पेश किए, तो कोर्ट ने उन्हें पूरी फाइल पेश करने का निर्देश दिया।
जस्टिस मेधी ने कहा, “हमारा उद्देश्य कुछ कागजात देखना नहीं, बल्कि उस पूरी फाइल को देखना है जिसमें जमीन के इतने बड़े हिस्से को एक निजी फर्म को आवंटित करने का निर्णय लिया गया।”
महाधिवक्ता ने कोर्ट को बताया कि कंपनी ने 2 लाख रुपये प्रति बीघा की दर से जमीन खरीदी है और राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति भी बनाई थी, जिसने अपनी रिपोर्ट सौंप दी है।
कोर्ट ने सरकार को आज यानी 3 सितंबर तक अपना हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया है और NCHAC को अगली सुनवाई में पूरी फाइल के साथ पेश होने को कहा है।
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