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राष्ट्रपति ने डॉ. राजेंद्र प्रसाद को उनकी जयंती पर पुष्पांजलि अर्पित की

नई दिल्ली – राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (3 दिसंबर, 2025) राष्ट्रपति भवन में भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद को उनकी जयंती पर पुष्पांजलि अर्पित की।
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सुश्री अपर्णा गर्ग ने रेलवे बोर्ड में सदस्य (वित्त) का पदभार ग्रहण किया

नई दिल्ली – 1987 बैच की भारतीय रेलवे लेखा सेवा (आईआरएएस) अधिकारी सुश्री अपर्णा गर्ग ने 01 दिसम्बर, 2025 को रेलवे बोर्ड में सदस्य (वित्त) के रूप में कार्यभार संभाला। वे भारत सरकार के वरिष्ठतम सिविल सेवकों में से एक हैं, जिनके पास 36 वर्षों से अधिक का अनुभव है।

 

सुश्री गर्ग ने कई प्रमुख पदों पर कार्य किया है, जिनमें मैसूर में मंडल रेल प्रबंधक, रेल व्हील फैक्ट्री में प्रधान वित्तीय सलाहकार तथा आईआरआईएफएम में महानिदेशक शामिल हैं।

वे शेवनिंग फेलो हैं और उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स, ब्रिटेन से परिवहन अर्थशास्त्र में एडवांस्ड मास्टर डिग्री प्राप्त की है। उन्होंने बोकोनी स्कूल ऑफ मैनेजमेंट, मिलान; आईएनएसईएडी, सिंगापुर; और इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस, हैदराबाद से एग्जीक्यूटिव प्रशिक्षण भी प्राप्त किया है।

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डॉ. जितेंद्र सिंह ने संसद को बताया कि एकीकृत मुख्य पैराशूट एयरड्रॉप का सफल परीक्षण भारत के पहले मानव अंतरिक्ष मिशन गगनयान की इसरो की अच्छी तैयारी दर्शाता है

केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री; प्रधानमंत्री कार्यालय में अंतरिक्ष राज्य मंत्री,  डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज संसद को बताया कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन-इसरो द्वारा हाल में एकीकृत मुख्य पैराशूट एयरड्रॉप का सफल परीक्षण भारत के पहले मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम, गगनयान, के लिए मिशन-तैयारी योजना को मज़बूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। लोकसभा में प्रश्नों के उत्तर में, डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि यह परीक्षण, अंतरिक्ष यान चालक दल के पैराशूट-आधारित मंदन प्रणाली के योग्यता अभियान का महत्वपूर्ण घटक है, जो इस मिशन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।

डॉ. सिंह ने बताया कि नवीनतम एकीकृत मुख्य पैराशूट एयरड्रॉप में सबसे चरम अवतरण स्थितियों में से एक का अनुकरण किया गया और दो मुख्य पैराशूटों के बीच डिसरीफिंग क्रम में जानबूझकर समय का अंतर रखा गया। इसमें असममित बलों के तहत प्रणाली की संरचनात्मक जुड़ाव और भार वहन क्षमता, दोनों की पुष्टि हुई। श्री सिंह ने कहा कि यह सफल परीक्षण मानव-योग्यता निर्धारण प्रक्रिया को महत्वपूर्ण रूप से आगे बढ़ाता है और 2027 की पहली तिमाही तक पहला मानवयुक्त गगनयान मिशन प्रक्षेपित करने के सरकार के लक्ष्य का समर्थन करता है।

संसद में प्रश्नकाल के दौरान तृतीय-पक्ष सत्यापन और तकनीकी निगरानी पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर में डॉ. सिंह ने कहा कि इसरो नियमित रूप से क्रू मॉड्यूल पैराशूट प्रणाली और उससे संबंधित सभी परीक्षण परिणामों की स्वतंत्र और कठोर समीक्षा करता है। इनमें डिज़ाइन समीक्षा दल, स्वतंत्र मूल्यांकन समिति और मानव योग्यता निर्धारण एवं प्रमाणन के लिए देश भर के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों वाली राष्ट्रीय सलाहकार समिति शामिल हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि ये संस्थागत मंच सभी मानव-मूल्यांकन तत्वों की गहन जांच करते हैं।

पारदर्शिता से संबंधित मुद्दों पर श्री सिंह ने कहा कि इसरो निरंतर और समय-समय पर प्रमुख परीक्षण परिणामों की जानकारी देता रहता है, जिसमें हाल ही किये गए आई.एम.ए.टी. के परिणाम भी शामिल हैं। वह आगे भी कार्यक्रम की प्रगति के बारे में सूचित करना जारी रखेगा।

यान चालक दल की तैयारियों से संबंधित मुददों पर, डॉ. सिंह ने दोहराया कि गगनयान मिशन के लिए  उनकी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने कहा कि सभी प्रणालियों का गहन परीक्षण और विशेषज्ञ समीक्षा की जाती है, और प्रत्येक योग्यता परीक्षण के परिणामों का सावधानीपूर्वक विश्लेषण कर प्रणाली में सुधार किया जाता है। इसके बाद फिर उनका पुनर्मूल्यांकन किया जाता है। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष यात्रियों के प्रशिक्षण में आपातकालीन परिदृश्यों का व्यापक अनुकरण, ऑफ-नॉमिनल लैंडिंग की उत्तरजीविता प्रक्रियाएं, आपातकालीन किट का संचालन और गगनयात्रियों की समग्र तैयारी सुनिश्चित करने के लिए निरंतर मनोवैज्ञानिक परामर्श शामिल है।

श्री सिंह ने सदन को यह भी बताया कि इसरो ने स्थापित वैश्विक मानकों के अनुरूप सुदृढ़ जोखिम-मूल्यांकन और न्यूनीकरण ढांचे को संस्थागत रूप दिया है। मानव मूल्यांकन प्रमाणन बोर्ड और राष्ट्रीय सलाहकार पैनल जैसी संस्थाएं इन प्रक्रियाओं की निगरानी करती हैं ताकि सुनिश्चित हो कि समग्र मिशन के दौरान जोखिम नियंत्रण में रहे।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने दोहराया कि हाल के आईएमएटी सहित प्रत्येक परीक्षण का महत्वपूर्ण प्रणालियों को मान्य बनाने के साथ ही चालक दल के प्रशिक्षण, ग्राउंड रिकवरी तैयारियों और भारत के ऐतिहासिक मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन के सुरक्षित निष्पादन में योगदान है।

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भारतीय तटरक्षक जहाज आईसीजीएस विग्रह ने आसियान देशों में अपनी विदेशी तैनाती के क्रम में इंडोनेशिया का एक महत्वपूर्ण परिचालन दौरा किया

आसियान देशों में अपनी विदेशी तैनाती के तहत भारतीय तटरक्षक पोत (आईसीजीएस) विग्रह 2 से 5 दिसंबर, 2025 तक इंडोनेशिया में जकार्ता की यात्रा पर है। इस तीन दिवसीय दौरे के दौरान भारतीय तटरक्षक और इंडोनेशियाई तटरक्षक बल (बाकमला) के कर्मी पेशेवर बातचीत, टेबलटॉप अभ्यास, जहाज-आधारित ड्रिल और संयुक्त प्रशिक्षण सत्रों सहित गतिविधियों के विस्तृत कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं।

यह यात्रा क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा, संरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को सुदृढ़ करने में तटरक्षक-से-तटरक्षक सहयोग के बढ़ते महत्व को रेखांकित करती है। साथ ही, यह दोनों बलों के बीच परिचालन तालमेल, आपसी विश्वास एवं सहयोग की निरंतर प्रतिबद्धता को और मजबूत बनाती है।

 

इन गतिविधियों का केंद्र बिंदु समुद्री कानून प्रवर्तन, समुद्री प्रदूषण रोधी कार्रवाई तथा समुद्री खोज एवं बचाव जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर है, जहां दोनों संगठन अपने विस्तृत विशिष्ट आर्थिक क्षेत्रों और भारी समुद्री यातायात के कारण महत्त्वपूर्ण परिचालन जिम्मेदारियां साझा करते हैं।

संयुक्त अभ्यास अवैध, अप्रतिबंधित एवं अनियमित मछली पकड़ने, समुद्री डकैती, तस्करी, समुद्री दुर्घटनाओं तथा पर्यावरणीय खतरों से संबंधित परिस्थितियों में आपसी आपसी सहभागिता को और सुदृढ़ करेंगे। परिचालन सामंजस्य, संचार प्रक्रियाओं एवं नाविक कौशल के समन्वय को और बेहतर बनाने के लिए दोनों तटरक्षक सेवाओं के बीच एक मार्ग अभ्यास (पासेक्स) भी आयोजित किया जाएगा। यह अभ्यास समुद्री संचालन में समन्वय, प्रतिक्रिया क्षमता और सहयोग को नई मजबूती प्रदान करेगा।

वर्तमान यात्रा में शिष्टाचार भेंट, जहाजों का दौरा, योग एवं खेल स्पर्धाएं और समुद्री प्रशिक्षण प्रतिष्ठानों में कार्यात्मक आदान-प्रदान भी शामिल हैं। ये सभी गतिविधियां दोनों देशों के कर्मियों के बीच सौहार्द को बढ़ावा देने, लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने और प्रभावी परिचालन सहयोग के लिए आवश्यक विश्वास-आधार को सशक्त करने में सहायक होंगी।

भारत और इंडोनेशिया दोनों ही देश प्रमुख समुद्री लोकतंत्र के नाते हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नियम आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था (आरबीआईओ) को बनाए रखने के लिए समान रूप से प्रतिबद्ध हैं। नियमित समुद्री प्रवर्तन, संयुक्त प्रतिक्रिया तंत्र और रणनीतिक समुद्री मार्गों की समन्वित निगरानी के माध्यम से इस सिद्धांत को व्यवहार में लागू करने में तटरक्षक-से-तटरक्षक सहयोग एक निर्णायक भूमिका निभाता है।

 

भारत–इंडोनेशिया समुद्री साझेदारी का एक महत्वपूर्ण स्तंभ जुलाई 2020 में भारतीय तटरक्षक और इंडोनेशियाई तटरक्षक बल के बीच हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन है। इस ऐतिहासिक दस्तावेज ने दोनों एजेंसियों के बीच परिचालन जुड़ाव के लिए एक सुव्यवस्थित और संस्थागत ढांचा स्थापित किया, जिसके परिणामस्वरूप समुद्री कानून प्रवर्तन, समन्वित गश्त, खोज एवं बचाव, समुद्री प्रदूषण प्रतिक्रिया, सूचना साझाकरण और क्षमता निर्माण जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को नई मजबूती मिली।

समझौता प्रभावी होने के बाद से दोनों तटरक्षक बलों के बीच सतत संपर्क, पेशेवर संवाद और संयुक्त गतिविधियों को प्रोत्साहन मिला है। इससे सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों का आदान-प्रदान, उन्नत प्रशिक्षण अवसरों की उपलब्धता और संयुक्त समुद्री अभियानों के दौरान अंतर-संचालन क्षमता में उल्लेखनीय सुधार सुनिश्चित हुआ है।

पिछले कुछ वर्षों में, भारतीय तटरक्षक और इंडोनेशियाई तटरक्षक बल ने नियमित उच्च-स्तरीय यात्राओं, द्विपक्षीय प्रशिक्षण आदान-प्रदान, समन्वित गश्तों तथा आसियान-नेतृत्व वाली और हिंद-प्रशांत समुद्री गतिविधियों के माध्यम से सहयोग की एक सुदृढ़ परंपरा विकसित की है।

इंडोनेशिया लगातार आईसीजी द्वारा संचालित क्षमता-निर्माण कार्यक्रमों एवं विशिष्ट प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी करता रहा है, जबकि इंडोनेशियाई बंदरगाहों पर आने वाले आईसीजी जहाजों ने व्यावहारिक प्रशिक्षण, साझा संचालन और क्रॉस-डेक बातचीत को महत्वपूर्ण रूप से प्रोत्साहित किया है।

जकार्ता में आईसीजीएस विग्रह की वर्तमान उपस्थिति न केवल सहयोगी समुद्री सुरक्षा के प्रति भारत की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है, बल्कि यह क्षेत्रीय साझेदारों की समुद्री क्षमताओं और परिचालन तत्परता को सुदृढ़ करने में भारत की सक्रिय भूमिका का भी प्रतीक है।

जकार्ता दौरे के पूर्ण होने के बाद आईसीजीएस विग्रह मलेशिया के पोर्ट क्लैंग के लिए प्रस्थान करेगा और आसियान देशों में अपनी परिचालन तैनाती को आगे बढ़ाएगा। इस तैनाती का उद्देश्य क्षेत्रीय जुड़ाव को सुदृढ़ करना, सहयोगात्मक प्रतिक्रिया तंत्र को बेहतर बनाना और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री शांति, स्थिरता एवं सुव्यवस्था को बनाए रखने में सक्रिय योगदान देना है।

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बढ़ती ठंड को देखते हुए राँची जिला प्रशासन द्वारा जिले भर में अलाव की व्यवस्था सुनिश्चित की गई

उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देशानुसार पूरे राँची जिले में आमजन, विशेषकर जरूरतमंद, बेघर, दिहाड़ी मजदूर, रिक्शा चालक, फुटपाथ पर सोने वाले तथा रात में ड्यूटी करने वाले व्यक्तियों के लिए अलाव की व्यापक व्यवस्था की गई

“जिला प्रशासन की प्राथमिकता है कि ठंड से किसी भी नागरिक को परेशानी न हो। हमने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि अलाव नियमित रूप से जलें और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त अलाव की व्यवस्था तुरंत की जाए।”:- उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री

राँची,03.12.2025 – राज्य सरकार के निर्देश के आलोक में बढ़ती शीत लहर और रात के तापमान में निरंतर गिरावट को ध्यान में रखते हुए उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देशानुसार पूरे राँची जिले में आमजन, विशेषकर जरूरतमंद, बेघर, दिहाड़ी मजदूर, रिक्शा चालक, फुटपाथ पर सोने वाले तथा रात में ड्यूटी करने वाले व्यक्तियों के लिए अलाव की व्यापक व्यवस्था की गई है।

जिला प्रशासन द्वारा राँची शहर के प्रमुख चौक-चौराहे में अलाव की व्यवस्था की गई है।

जिले के सभी 18 प्रखंडों के प्रखंड मुख्यालयों, पंचायत भवनों, प्रमुख हाट-बाजारों, प्रमुख चौक-चौराहों तथा जरूरतमंद आबादी वाले स्थानों पर अलाव की व्यवस्था की गई है। प्रत्येक प्रखंड में कई जगहों में अलाव जलाए जा रहे हैं।

उपायुक्त ने इस संबंध में जिले के सभी अंचल अधिकारियों, प्रखंड विकास पदाधिकारियों को पूर्व में ही स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए थे कि अलाव की व्यवस्था प्रारंभ कर दी जाए तथा लकड़ी, केरोसिन आदि की कोई कमी न हो।

उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा कि “जिला प्रशासन की प्राथमिकता है कि ठंड से किसी भी नागरिक को परेशानी न हो। हमने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि अलाव नियमित रूप से जलें और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त अलाव की व्यवस्था तुरंत की जाए।”

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डीआरआई ने ई-सिगरेट तस्करी गिरोह के बड़े रैकेट का भंडाफोड़ किया

 तूतीकोरिन में 10.42 करोड़ रुपये मूल्य की 45,984 ई-सिगरेट जब्त की, 3 गिरफ्तार

तूतीकोरिन बंदरगाह – राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने तूतीकोरिन बंदरगाह पर 10.41 करोड़ रुपये की प्रतिबंधित इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट से जुड़े एक बड़े तस्करी रैकेट का सफलतापूर्वक भंडाफोड़ किया है। इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

डीआरआई अधिकारियों को विशिष्ट खुफिया जानकारी मिली थी कि ई-सिगरेट की तस्करी में शामिल एक गिरोह ने छतरी के साथ तूतीकोरिन बंदरगाह के माध्यम से चीन से ई-सिगरेट वाले एक कंटेनर को भारत में आयात करने की योजना बनाई है। उक्त जानकारी के आधार पर डीआरआई के अधिकारियों ने 27 नवंबर, 2025 को तूतीकोरिन में उक्त कंटेनर को रोका और उसकी जांच की।

उक्त कंटेनर की जांच के दौरान, कुछ डिब्बों में छतरियों का घोषित कार्गो पाया गया, जबकि एक बड़े हिस्से में छुपा कर रखी गई ई-सिगरेट पाई गई। सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के प्रावधानों के तहत 27 नवंबर, 2025 को 4.30 लाख रुपये मूल्य के 4,300 छतरियों के साथ छुपाई गई मिश्रित स्वादों की कुल 45,984 ई-सिगरेट मिलीं, जिनकी कुल कीमत 10.41 करोड़ रुपये है।

 

तेजी से कार्रवाई करते हुए, अधिकारियों ने खेप को ले जाने में शामिल चेन्नई के तीन व्यक्तियों को पकड़ लिया और सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार कर लिया।

ई-सिगरेट का आयात इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट निषेध अधिनियम, 2019 (पीईसीए अधिनियम) के साथ पठित डीजीएफटी अधिसूचना सं. 20/2015-2020 दिनांक 26 सितंबर, 2019 के तहत और सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के प्रावधानों के तहत प्रतिबंधित है।

डीआरआई देश भर में निरंतर सतर्कता और प्रवर्तन की कार्रवाइयों के माध्यम से ई-सिगरेट जैसे प्रतिबंधित और हानिकारक सामानों की तस्करी पर अंकुश लगाकर देश के आर्थिक हितों और सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद की जयंती पर श्रद्धांजलि

उपायुक्त–सह–जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री एवं वरीय पुलिस अधीक्षक, रांची श्री राकेश रंजन ने राजेंद्र चौक स्थित प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर दी श्रद्धांजलि

रांची, 03.12.2025 – भारत के प्रथम राष्ट्रपति स्वर्गीय डॉ. राजेंद्र प्रसाद की जयंती के अवसर पर उपायुक्त–सह–जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री एवं वरीय पुलिस अधीक्षक, रांची श्री राकेश रंजन ने राजेंद्र चौक स्थित प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।

इस अवसर पर उपायुक्त–सह–जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री ने कहा कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के अग्रणी योद्धा, संविधान निर्माण के प्रमुख स्तंभ तथा नैतिक मूल्यों के प्रतीक थे।

उनकी सादगी, कर्तव्यनिष्ठा और आदर्श जीवन से प्रेरणा लेकर हम सभी को राष्ट्रहित में अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए।

वरीय पुलिस अधीक्षक ने भी उनके कार्यों एवं योगदान को स्मरण किया।

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ऑपरेशन सिंदूर इस बात का प्रमाण है कि शांति और सद्भाव की भाषा न समझने वालों को भारत करारा जवाब देता है: रक्षा मंत्री

वडोदरा, गुजरात  – रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर इस बात का सबूत है कि भारत उन लोगों को करारा जवाब देता है जो शांति और सद्भाव की भाषा नहीं समझते। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ भारत की कार्रवाई की तुलना सरदार वल्लभभाई पटेल की सुदृढ़ इच्छाशक्ति और नेतृत्‍व से की। उन्होंने कहा कि पटेल ने हमेशा संवाद के ज़रिए समस्याओं को सुलझाने की कोशिश की, लेकिन ज़रूरत पड़ने पर कभी भी साहसी रास्ता चुनने में हिचकिचाए नहीं, जैसा कि हैदराबाद को भारत में विलय के मामले में हुआ था। रक्षा मंत्री 2 दिसंबर, 2025 को गुजरात के वडोदरा में सरदार सभा को संबोधित कर रहे थे। यह सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय के तहत मेरा युवा (एमवाई) भारत द्वारा आयोजित ‘एकता मार्च’ का हिस्सा था।

 

ऑपरेशन सिंदूर को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए सशस्‍त्र बलों के साहस और समर्पण की सराहना करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि आज (वर्तमान समय में) विश्‍व भारतीय सैनिकों की वीरता और क्षमता को स्‍वीकार कर रहा है। उन्होंने आगे कहा कि इस अभियान ने स्‍पष्‍ट संकेत दिया है कि ‘‘हम शांतिप्रिय राष्‍ट्र हैं, जो किसी देश को उकसाते नहीं, लेकिन यदि कोई उकसाये तो उसे बख्‍शते भी नहीं।”

श्री राजनाथ सिंह ने सरदार पटेल को देश को एक करने में अहम योगदान देने वाला बताया और कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के नेतृत्व में ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का उनका सपना और मज़बूत हुआ है। अनुच्‍छेद 370 के निर्सन का उल्‍लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस निर्णय ने जम्मू-कश्मीर को देश की मुख्यधारा में पूरी तरह से जोड़ दिया।

रक्षा मंत्री ने रेखांकित किया कि सरकार सरदार पटेल द्वारा दिखाए गए रास्‍ते पर  चल रही है, जिसके परिणामस्‍वरूप एक समय संदेहों से घिरा भारत आज अपनी शर्तों पर विश्‍व से संवाद कर रहा है। उन्होंने कहा कि आज पूर्व की तुलना में अब अंतरराष्‍ट्रीय मंचों पर भारत की बात ध्‍यानपूर्वक सुनी जाती है। उन्होंने आगे कहा, “भारत एक बड़ी आर्थिक और सामरिक शक्ति बनने की दिशा में अग्रसर है। यह सरदार पटेल अमूल्‍य योगदान का परिणाम है।”

सरकार के राष्‍ट्रीय हितों की रक्षा के संकल्‍प से बताते हुए रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि 2014 से पहले भारत विश्‍व की 11वीं सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था थी और आज यह चौथी सबसे बड़ी अर्थव्‍यवस्‍था है तथा शीघ्र ही शीर्ष तीन  अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार ‘न्‍यूनतम सरकार, अधिकतम शासन’ के लक्ष्य के साथ काम कर रही है, जबकि राजनीतिक और भौगोलिक एकता के ज़रिए यह एक स्‍वतंत्र राष्‍ट्र की सरदार पटेल की विरासत को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार भारत को सांस्कृतिक, सामाजिक, आध्यात्मिक और आर्थिक एकता के सूत्र में पिरो रही है। हम ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के विज़न के साथ आगे बढ़ रहे हैं। हमारा लक्ष्य 2047 तक एक विकसित भारत का निर्माण करना है।”

रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार सरदार पटेल के राष्ट्रीय सुरक्षा विज़न को आगे बढ़ा रही है, जिन्होंने रक्षा आधुनिकीकरण और रक्षा हथियारों व गोला-बारूद के स्वदेशी उत्‍पादन पर ज़ोर दिया था। उन्होंने कहा, “आज, ‘मेक-इन-इंडिया’ पहल के कारण हम रक्षा उत्‍पादन में आत्मनिर्भर बन रहे हैं, जबकि मित्र देशों को सैन्‍य उपकरण निर्यात कर रहे हैं। पिछले 11 वर्षों में हमारा रक्षा निर्यात लगभग 34 गुना बढ़ गया है। हमारा लक्ष्य 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपये का रक्षा उत्‍पादन और  50,000 करोड़ रुपये का रक्षा निर्यात हासिल करना है।”

श्री राजनाथ सिंह ने आगे कहा कि सरदार पटेल का पूरा जीवन पवित्रता और ईमानदारी का प्रतीक था और इन उच्‍च आदर्शों से प्रेरित होकर सरकार का लक्ष्य संसद में संविधान (130वां संशोधन) विधेयक 2025 को पारित कराना है, जो उच्‍चतम पदों पर आसीन लोगों से भ्रष्टाचार के खिलाफ नैतिक व्‍यवहार करने की मांग करता है। उन्होंने कहा, “इसका मतलब है कि यदि पद पर आसीन किसी व्‍यक्ति को किसी गंभीर आरोप के तहत गिरफ्तार किया जाता है और 30 दिनों के भीतर ज़मानत नहीं मिलती है, तो वे अपने आप अपने पद से मुक्त हो जाएंगे।”

रक्षा मंत्री ने युवाओं से एक विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए प्रयास करने का आग्रह किया। ​​उन्होंने कहा कि राष्‍ट्र की एकता, अखंडता और संप्रभुता बनाए रखना एक ज़िम्मेदारी है, जिसे सरदार पटेल ने देश की भावी  पीढ़ियों के लिए छोड़ा था। उन्होंने कहा, “देश और समाज को एकजुट रखना हमारा  दायित्‍व है। हमें संकल्‍प लेना होगा कि हम न केवल सरदार पटेल के मूल्यों को पूर्व निष्‍ठा से आत्‍मसात करेंगे, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी इसके लिए तैयार करेंगे। यही सरदार पटेल की विरासत को एक सच्ची श्रद्धांजलि होगी।”

इस अवसर पर पंजाब के राज्‍यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी, श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया, केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम तथा श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री श्रीमती शोभा करंदलाजे और राज्य सरकार के अन्‍य अधिकारी उपस्थित थे।

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भारतीय रेलवे चौथे काशी तमिल संगमम के लिए तमिलनाडु से वाराणसी के लिए सात विशेष ट्रेनें चला रहा है

नई दिल्ली – भारतीय रेलवे कन्याकुमारी, चेन्नई, कोयंबटूर और वाराणसी के बीच सात विशेष रेलगाडियों का संचालन कर रहा है ताकि चौ‍थे काशी तमिल संगमम में बड़े पैमाने पर भागीदारी सुनिश्चित की जा सके और तमिल भाषी क्षेत्र व काशी के प्राचीन आध्यात्मिक केंद्र के बीच सांस्कृतिक संबंधों को और सुदृढ़ किया जा सके। इन विशेष ट्रेनों को इस बहु-दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम में आने वाले लोगों के लिए निर्बाध यात्रा, आरामदायक लंबी दूरी की कनेक्टिविटी और समय पर आगमन सुनिश्चित करने के लिए निर्धारित किया गया है।

29 नवंबर 2025 को कन्याकुमारी से पहली ट्रेन के रवाना होने के साथ इन सेवाओं की शुरुआत हुई थी। इसके बाद आज चेन्नई से एक अतिरिक्त विशेष ट्रेन रवाना हुई। अगली प्रस्थान 3 दिसंबर को कोयंबटूर से, 6 दिसंबर को चेन्नई से, 7 दिसंबर को कन्याकुमारी से, 9 दिसंबर को कोयंबटूर से और 12 दिसंबर 2025 को चेन्नई से एक और सेवा निर्धारित है। इन नियोजित प्रस्थानों के साथ, तमिलनाडु के प्रमुख शहरों से बनारस के लिए कुल सात विशेष ट्रेनें एक सुव्यवस्थित और चरणबद्ध तरीके से चलेंगी।

समय पर वापसी की यात्रा सुनिश्चित करने के लिए, भारतीय रेलवे ने बनारस से कई विशेष रेलगाडियों की व्यवस्था की है। इनमें 5 दिसंबर को कन्याकुमारी, 7 दिसंबर को चेन्नई और 9 दिसंबर को कोयंबटूर के लिए ट्रेन शामिल हैं। इसके अलावा 11 दिसंबर को चेन्नई, 13 दिसंबर को कन्याकुमारी, 15 दिसंबर को कोयंबटूर और 17 दिसंबर 2025 को चेन्नई के लिए भी अतिरिक्‍त रेलगाडि़यां चलेंगी।

आज से शुरू हो रहा काशी तमिल संगमम का चौथा संस्‍करण तमिलनाडु और काशी के बीच लंबे समय से चले आ रहे सांस्कृतिक संबंध को निरंतरता देता है। यह संस्करण “आइए तमिल सीखें-तमिल करकलम” विषय पर केंद्रित है, जो वाराणसी के स्कूलों में तमिल शिक्षण पहल, काशी क्षेत्र के छात्रों के लिए तमिलनाडु के अध्ययन दौरों और तेनकाशी से काशी तक प्रतीकात्मक ऋषि अगस्त्य वाहन अभियान के माध्यम से दोनों क्षेत्रों के बीच भाषाई और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देता है।

काशी तमिल संगमम 4.0, एक भारत श्रेष्ठ भारत के सार को दर्शाता है जो लोगों को अपनी संस्कृति के अलावा अन्‍य समृद्ध संस्कृतियों को समझने और उसकी सराहना करने के लिए प्रोत्साहित करता है। यह पहल शिक्षा मंत्रालय द्वारा संचालित है जिसमें आईआईटी मद्रास और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय प्रमुख ज्ञान भागीदार के रूप में शामलि हैं। रेलवे सहित दस मंत्रालयों की भागीदारी से, यह कार्यक्रम दोनों क्षेत्रों के छात्रों, कारीगरों, विद्वानों, आध्यात्मिक गुरुओं, शिक्षकों और सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं को एक साथ जोड़ता है, जिससे उनके बीच विचारों, सांस्कृतिक विधियों और पारंपरिक ज्ञान का आदान-प्रदान सुगम होता है।

इन सात विशेष रेलगाड़ियों के माध्‍यम से सांस्कृतिक रूप से समृद्ध इस यात्रा कार्यक्रम का समन्वय कर, भारतीय रेलवे देश के विविध क्षेत्रों को जोड़ने तथा तमिलनाडु व काशी के बीच

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अटल पेंशन योजना में हुए नामांकन 8.34 करोड़ के पार; महिलाओं की हिस्सेदारी 48%

नई दिल्ली – जागरूकता अभियान, स्थानीय भाषाओं तक पहुंच, क्षमता निर्माण पहल और डिजिटल ऑनबोर्डिंग चैनल देश भर में अटल पेंशन योजना को सशक्त करने में अपना योगदान दे रहे हैं

अटल पेंशन योजना (एपीवाई) 09.05.2015 को शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य सभी भारतीयों, विशेषकर गरीबों, वंचितों और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए एक सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा प्रणाली बनाना है। यह योजना 18-40 वर्ष की आयु के सभी भारतीय नागरिकों के लिए उपलब्ध है, जिनका बैंक या डाकघर में बचत खाता हो। इस योजना के अनुसार, ग्राहक को 60 वर्ष की आयु प्राप्त करने पर पेंशन लाभ मिलेगा। इसलिए, एपीवाई के अंतर्गत पेंशन लाभ 2035 से शुरू होने की उम्मीद है। हालांकि, 31.10.2025 तक अटल पेंशन योजना के तहत कुल नामांकन 8,34,13,738 है।

सरकार और पेंशन निधि नियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) ने ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों सहित पूरे देश में एपीवाई के बारे में जागरूकता और कवरेज बढ़ाने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए हैं:

  1. जागरूकता पैदा करने के लिए प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया में समय-समय पर विज्ञापन प्रकाशित किए जाते हैं।
  2. एपीवाई सब्सक्राइबर सूचना ब्रोशर 13 स्थानीय भाषाओं में।
  3. पात्र लाभार्थियों के बीच एपीवाई का प्रचार-प्रसार करने के लिए बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट (बीसी) और बैंकों के क्षेत्रीय कर्मचारियों, स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) के सदस्यों, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एसआरएलएम) की बैंक-सखियों के लिए वर्चुअल क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
  4. भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालय, राष्ट्रीय वित्तीय शिक्षा केंद्र (एनसीएफई), राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड), राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) और एसआरएलएम, एपीवाई के बारे में जागरूकता फैलाने और इसके कवरेज के लिए कार्यरत हैं।
  5. आसान ऑनलाइन ऑनबोर्डिंग के लिए ई-एपीवाई, नेट-बैंकिंग, मोबाइल ऐप और बैंक के वेब-पोर्टल जैसे ऑनलाइन चैनलों को सक्रिय किया जा रहा है।
  6. भारतीय स्तर पर बैंकों और एसएलबीसी/ एलडीएम के सहयोग से एपीवाई आउटरीच कार्यक्रम नियमित आधार पर आयोजित किए जाते हैं।
  7. हाल ही में, पेंशन के लिए पूरे भारत में वित्तीय समावेशन अभियान चलाए गए।

31 अक्टूबर 2025 तक, एपीवाई के अंतर्गत महिलाओं का नामांकन 4,04,41,135 है, जो कुल नामांकन का 48% है। एपीवाई का डाक विभाग (डीओपी) और पब्लिक सेक्टर बैंकों, प्राइवेट बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, लघु वित्त बैंकों, भुगतान बैंकों, सहकारी बैंकों सहित बैंकिंग संस्थानों के जरिए किया जा रहा है। ये संस्थान पीएफआरडीए के साथ प्वॉइंट्स ऑफ प्रेजेंस – एपीवाई (पीओपी-एपीवाई) के रूप में पंजीकृत हैं और एपीवाई के वितरण और एपीवाई ग्राहकों की सेवा के लिए जिम्मेदार हैं।

यह जानकारी केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में दी।

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भारतीय रेलवे ने महिला क्रिकेट विश्व कप चैंपियन प्रतीका रावल, स्नेह राणा और रेणुका सिंह ठाकुर को ओएसडी (खेल) के पद पर पदोन्नत किया

नई दिल्ली – भारतीय रेलवे ने तीन प्रतिष्ठित महिला क्रिकेटरों प्रतीका रावल, स्नेह राणा और रेणुका सिंह ठाकुर को भारत के 2025 आईसीसी महिला विश्व कप अभियान में उनके असाधारण प्रदर्शन को देखते देते हुए आउट-ऑफ-टर्न प्रमोशन के माध्यम से विशेष कार्य अधिकारी (खेल) के ग्रुप ‘बी’ अधिकारी-ग्रेड पद पर पदोन्नत किया है।

ये तीनों खिलाड़ी सातवें वेतन आयोग के अनुसार वेतन मैट्रिक्स के लेवल-8 के अंतर्गत ग्रुप ‘बी’ राजपत्रित अधिकारी के वेतन और लाभ की हकदार होंगी। रेलवे खेल संवर्धन बोर्ड (आरएसपीबी) की यह पहल न केवल तीनों महिला क्रिकेटरों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करेगी, बल्कि उन्हें प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी सौंपेगी।

इससे पहले नवंबर में केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण और तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने  रेल भवन में तीनों खिलाड़ियों को सम्मानित किया था।

 

उत्तर रेलवे में वरिष्ठ लिपिक के पद पर कार्यरत प्रतीका रावल को अब ओएसडी (खेल) के ग्रुप ‘बी’ राजपत्रित पद पर पदोन्नत किया गया है। दिल्ली की सलामी बल्लेबाज प्रतीका रावल ने विश्व कप में भारत की जीत में महत्वपूर्ण योगदान दिया था।

उत्तर रेलवे में कनिष्ठ लिपिक के पद पर कार्यरत रेणुका सिंह ठाकुर को अब ओएसडी (खेल) के ग्रुप ‘बी’ राजपत्रित पद पर पदोन्नत किया गया है। दाएं हाथ की मध्यम तेज गेंदबाज रेणुका सिंह ठाकुर ने महत्वपूर्ण मैचों में निर्णायक गेंदबाजी करके लगातार विजयी प्रदर्शन किया है।

उत्तर रेलवे में कमर्शियल कम टिकट क्लर्क (सीसीटीसी) के पद पर कार्यरत स्नेह राणा को अब ओएसडी (खेल) के ग्रुप ‘बी’ राजपत्रित पद पर पदोन्नत किया गया है। उत्तराखंड की इस ऑलराउंडर खिलाड़ी ने बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।

भारतीय रेलवे की खेल प्रतिभाओं को सहयोग और प्रोत्साहन देने की एक लंबी परंपरा रही है। रेलवे के कई एथलीटों ने लगातार वैश्विक स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया है।

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केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जे. पी. नड्डा ने विज्ञान भवन में विश्व एड्स दिवस 2025 कार्यक्रम का उद्घाट

विश्व एड्स दिवस के अवसर पर, केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने आज यहां विज्ञान भवन में विश्व एड्स दिवस 2025 के राष्ट्रीय समारोह का उद्घाटन किया और एड्स को एक सार्वजनिक स्वास्थ्य खतरे के रूप में समाप्त करने से संबंधित प्रगति में तेजी लाने के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को दोहराया।

 

अपने मुख्य भाषण में, केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि यह दिन हमारी प्रतिबद्धता को दोहराने, अतीत से सीखे गए सबक पर विचार करने और वर्तमान एवं भविष्य के लिए कारगर  रणनीतियां अपनाने का एक महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने राष्ट्रीय एड्स एवं यौन संचारित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत भारत की निरंतर प्रगति पर प्रकाश डाला और अधिकार-आधारित, कलंक-मुक्त और समावेशी एचआईवी प्रतिक्रिया के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता दोहराई। केन्द्रीय मंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि प्रमुख कार्यक्रम क्षेत्रों में ठोस और निरंतर गति प्रदर्शित करते हुए एनएसीपी-V के तहत रोकथाम, परीक्षण और उपचार सेवाओं की सुलभता का लगातार  विस्तार हुआ है।

 

श्री नड्डा ने इस तथ्य को रेखांकित किया कि भारत का एचआईवी और यौन संचारित रोग (एसटीडी) कार्यक्रम लगातार ठोस परिणाम दे रहा है, जो नए संक्रमणों और मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी के साथ-साथ आवश्यक सेवाओं की सुलभता में हुई वृद्धि से स्पष्ट होता है। वर्ष 2010 और 2024 के बीच, नए एचआईवी संक्रमणों में 48.7 प्रतिशत, एड्स से संबंधित मौतों में 81.4 प्रतिशत और मां से बच्चे में होने वाले संक्रमण में 74.6 प्रतिशत की कमी आई है। परीक्षण कवरेज 2020-21 में 4.13 करोड़ से बढ़कर 2024-25 में 6.62 करोड़ हो गया, जबकि उपचाराधीन लोगों की संख्या 14.94 लाख से बढ़कर 18.60 लाख हो गई। वायरल लोड परीक्षण में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है – जो 8.90 लाख से बढ़कर 15.98 लाख परीक्षण हो गए हैं।

उन्होंने कहा कि ये उपलब्धियां इसी अवधि के वैश्विक औसत से अधिक हैं और मजबूत राजनीतिक प्रतिबद्धता, सतत घरेलू निवेश, साक्ष्य-आधारित कार्यक्रम वाली रणनीतियों तथा निरंतर सामुदायिक सहभागिता को दर्शाती हैं।

भारत की प्रगति के नवीनतम संकेतकों को साझा करते हुए, श्री नड्डा ने इस तथ्य को रेखांकित किया कि देश ने एचआईवी के नए संक्रमणों में 35 प्रतिशत की कमी (वैश्विक स्तर 32 प्रतिशत की तुलना में) और एचआईवी से संबंधित मौतों में 69 प्रतिशत की कमी हासिल की है, जोकि वैश्विक स्तर पर हुई 37 प्रतिशत की कमी से कहीं अधिक है। एचआईवी की स्थिति के बारे में जागरूकता 85 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जबकि राष्ट्रीय लक्ष्य 95 प्रतिशत का है। उपचार कवरेज अब 88 प्रतिशत है और वायरल लोड में कमी 97 प्रतिशत के असाधारण उच्च स्तर पर बना हुआ है। भारतीय दवा उद्योग के प्रयासों की सराहना करते हुए, श्री नड्डा ने कहा कि भारत पूरी मानवता के प्रति अपनी ज़िम्मेदारी निभाते हुए वैश्विक स्तर पर एड्स के खिलाफ लड़ाई का नेतृत्व कर रहा है। उन्होंने आगे कहा, भारत न केवल अपने लोगों की रक्षा कर रहा है, बल्कि दुनिया भर में सस्ती एवं गुणवत्तापूर्ण दवाओं की आपूर्ति करके एड्स नियंत्रण में दुनिया का सहयोग भी कर रहा है।

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने देश भर में एचआईवी सेवाओं को मजबूत बनाने में नाको और सभी राज्य एड्स नियंत्रण समितियों के निरंतर प्रयासों एवं समर्पण की सराहना की। उन्होंने कहा कि अब प्रत्येक जिले के हर अनुमंडल में एआरटी केन्द्र सुलभ हैं, जिससे बेहतर उपचार तक पहुंच, शीघ्र चिकित्सा की शुरुआत और देखभाल की निरंतरता सुनिश्चित हो रही है।

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत 2030 तक वैश्विक 95-95-95 लक्ष्यों को हासिल करने की दिशा में दृढ़ता से अग्रसर है। सह-संक्रमणों के बारे में बोलते हुए, केन्द्रीय मंत्री ने इस तथ्य को रेखांकित किया कि टीबी के रोगियों की एक बड़ी संख्या एचआईवी के साथ भी जी रही है और इस बात पर जोर दिया कि खराब अनुपालन – जैसे कि एआरटी गोलियां नियमित रूप से न लेना या एआरटी केन्द्रों पर न जाना – एक चुनौती बनी हुई है, जिसके लिए गहन परामर्श, अनुवर्ती कार्रवाई और सामुदायिक समर्थन की आवश्यकता है।

श्री नड्डा ने इस बात पर जोर दिया कि प्रगति की वर्तमान गति के साथ, भारत अपने 2030 के लक्ष्यों को हासिल करने के लिए तैयार तो है, लेकिन अधिक से अधिक लोगों को जागरूक करना होगा और सामुदायिक भागीदारी को निरंतर बढ़ाना होगा। उन्होंने 2017 में लागू किए गए ऐतिहासिक एचआईवी/एड्स (रोकथाम एवं नियंत्रण) अधिनियम, 2014 पर प्रकाश डाला, जो कानूनी रूप से सुरक्षित, भेदभाव-मुक्त वातावरण प्रदान करता है और एचआईवी से पीड़ित लोगों के अधिकारों और सम्मान को मजबूत करता है।

इस आयोजन के एक भाग के रूप में, माननीय मंत्री ने तीन विषयों – युवाओं में जागरूकता; एचआईवी एवं सिफलिस के ऊर्ध्वाधर संचरण का उन्मूलन; और कलंक एवं भेदभाव की समाप्ति – पर आधारित एक राष्ट्रीय मल्टीमीडिया अभियान श्रृंखला का शुभारंभ भी किया। उन्होंने संकलक के 7वें संस्करण, भारत एचआईवी अनुमान 2025, अनुसंधान संग्रह और एक आईटी-आधारित वर्चुअल प्लेटफॉर्म ‘ब्रेकफ्री’ (https://breakfreeindia.org/) सहित प्रमुख कार्यक्रम दस्तावेज जारी किए, जो गोपनीय जोखिम मूल्यांकन, परीक्षण लिंकेज और रोकथाम, उपचार और देखभाल सेवाओं के बारे में युवाओं के अनुकूल जानकारी प्रदान करते हैं। इस कार्यक्रम में एक प्रदर्शनी जोन भी था जिसमें डिजिटल समाधान, समुदाय के नेतृत्व वाले मॉडल और युवाओं पर केन्द्रित प्लेटफॉर्म को प्रदर्शित करने वाले संवाददात्मक स्टॉल थे, जिनमें नागालैंड के सिटी बार्न यूथ स्पेस और मुंबई के फास्ट-ट्रैक सिटी मॉडल जैसी नवीन पहल शामिल थीं।

उन्होंने राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण कार्यक्रम में उनकी विशिष्ट सेवा और दीर्घकालिक योगदान के लिए तीन प्रतिष्ठित वरिष्ठ तकनीकी विशेषज्ञों को सम्मानित किया। इसके अलावा, उन्होंने एचआईवी से पीड़ित दो व्यक्तियों को भी सम्मानित किया जिन्होंने अपनी व्यक्तिगत यात्रा के बारे में जानकारियां साझा कीं और इस बीमारी के खिलाफ अपनी लड़ाई में हुई महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाया। उनकी कहानियों ने उपचार, सहायता और जागरूकता की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर दिया, जो उनकी दृढ़ता और सशक्तिकरण के लिए महत्वपूर्ण रहे हैं।

इस अवसर पर बोलते हुए, केन्द्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने इस बात पर प्रकाश डाला कि भारत की एचआईवी प्रतिक्रिया “एक मामूली पहल के रूप में शुरू हुई थी जो अब देश के सबसे व्यापक और प्रभावशाली सार्वजनिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में से एक बन गई है और हमारी सामूहिक प्रतिबद्धता एवं दृढ़ संकल्प का एक स्थायी प्रमाण है।” उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि एड्स के खिलाफ भारत की लड़ाई, वर्तमान में जारी सघन टीबी मुक्त भारत अभियान सहित अन्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य पहलों के लिए भी महत्वपूर्ण है।

इस अवसर पर स्वास्थ्य सेवाओं की महानिदेशक डॉ. सुनीता शर्मा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव श्रीमती वी. हेकाली झिमोमी, तथा राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण संगठन (एनएसीओ) के अलावा विकास एजेंसियों, सामुदायिक संगठनों, युवा नेटवर्क और अग्रिम पंक्ति के कार्यक्रम टीमों के प्रतिनिधि भी उपस्थित थे।

इस समारोह का समापन सामूहिक जिम्मेदारी के नए आह्वान के साथ हुआ, जिसमें यह सुनिश्चित किया गया कि पहचान, लिंग, भूगोल या परिस्थिति से परे जाकर हर व्यक्ति को कलंक-मुक्त, गोपनीय और उच्च-गुणवत्ता वाली एचआईवी सेवाएं मिलें। डिजिटल नवाचार और युवा नेतृत्व को आगे रखते हुए, भारत एक ऐसे भविष्य को सुदृढ़ कर रहा है जहां एचआईवी सेवाएं अधिक सुलभ, कलंक-मुक्त और जन-केन्द्रित होंगी।

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डीआरडीओ ने नई दिल्ली में उद्योग संपर्क कार्यक्रम का आयोजन किया

नई दिल्ली – आत्मनिर्भरता और विकसित भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने के सरकार के दृष्टिकोण के अनुरूप, डीआरडीओ ने 01 दिसंबर, 2025 को डीआरडीओ भवन, नई दिल्ली में एक उद्योग संपर्क कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम में उत्तर भारत की डीआरडीओ प्रयोगशालाओं और उनके उद्योग भागीदारों को शामिल किया गया, जिसमें 18 डीआरडीओ प्रयोगशालाओं से विशिष्ट और महत्वपूर्ण रक्षा प्रौद्योगिकियों पर काम करने वाले 220 वैज्ञानिकों और रक्षा उद्योगों के विविध समूह से जुड़े 271 उद्योग नेताओं ने भाग लिया।

रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत मुख्य अतिथि थे और सचिव (रक्षा उत्पादन) श्री संजीव कुमार विशिष्ट अतिथि थे। इस कार्यक्रम के दौरान, ‘डीआरडीओ की टीओटी नीति-2025’ के कार्यान्वयन हेतु एक नई प्रक्रिया जारी की गई।

 

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण ओपन हाउस चर्चा थी, जिसमें विशिष्ट अतिथियों और डीआरडीओ विशेषज्ञों के पैनल ने सचिव (रक्षा उत्पादन) के साथ मिलकर उद्योग जगत के विभिन्न प्रश्नों, चिंताओं और सुझावों पर विचार किया और सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों और निजी उद्योगों से जुड़े स्वदेशी रक्षा उत्पादन से जुड़े जटिल और चुनौतीपूर्ण मुद्दों का समाधान खोजने का संकल्प लिया। इस कार्यक्रम में डीआरडीओ मुख्यालय के विभिन्न कॉर्पोरेट निदेशालयों और डीआरडीओ प्रयोगशालाओं के वैज्ञानिकों के साथ आंतरिक विचार-मंथन भी शामिल था। कॉर्पोरेट निदेशकों ने डीआरडीओ प्रयोगशालाओं में स्वदेशी अनुसंधान परियोजनाओं से जुड़ी विभिन्न नीतियों और प्रक्रियाओं और सैन्य सेवाओं के लाभ के लिए उनके परिणामों पर प्रकाश डाला।

अपने संबोधन में, डीआरडीओ के अध्यक्ष ने भारतीय उद्योग जगत की क्षमताओं में आशावाद व्यक्त किया और विश्वास व्यक्त किया कि अगले पाँच वर्षों में, विभिन्न सरकारी नीतियाँ परिपक्व होंगी और स्वदेशी रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र कई गुना विकसित होगा, जिससे आत्मनिर्भरता का विजन साकार होगा। उन्होंने सशस्त्र बलों और अन्य सरकारी एजेंसियों की तकनीकी ज़रूरतों को पूरा करने के लिए डीआरडीओ के साथ साझेदारी में उद्योगों के लिए विभिन्न अवसरों की रूपरेखा प्रस्तुत की।

सचिव (रक्षा उत्पादन) ने स्वदेशी उत्पादन को बढ़ावा देने में सरकार की नीतियों पर प्रकाश डाला और इस बात पर जोर दिया कि सच्ची आत्मनिर्भरता तभी प्राप्त की जा सकती है जब डिजाइनिंग से लेकर विनिर्माण और बड़े पैमाने पर उत्पादन का पूरा चक्र देश में ही संचालित किया जाए।

बातचीत की शुरुआत करते हुए, महानिदेशक (उत्पादन समन्वय एवं सेवा संपर्क) डॉ. (श्रीमती) चंद्रिका कौशिक ने स्वदेशीकरण को बढ़ावा देने और रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र के विकास की दिशा में डीआरडीओ की विभिन्न पहलों पर प्रकाश डाला। उन्होंने उस बढ़ती प्रवृत्ति पर प्रकाश डाला, जिसमें भारत अब रक्षा उपकरणों के आयातक से शुद्ध निर्यातक के रूप में उभर रहा है। उन्होंने भारतीय उद्योगों को निरंतर अनुसंधान एवं विकास तथा डीआरडीओ के साथ गहरे सहयोग के लिए प्रोत्साहित किया।

परमवीर चक्र विजेता लांस नायक अल्बर्ट एक्का की पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि

उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री तथा वरीय पुलिस अधीक्षक, रांची श्री राकेश रंजन ने अल्बर्ट एक्का चौक स्थित उनकी प्रतिमा पर पुष्प गुच्छ अर्पित कर दी श्रद्धांजलि

परमवीर चक्र विजेता लांस नायक अल्बर्ट एक्का का बलिदान युवाओं और देशवासियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा – उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री

रांची,03.12.2025  –  परमवीर चक्र विजेता लांस नायक अल्बर्ट एक्का की पुण्यतिथि पर उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री तथा वरीय पुलिस अधीक्षक, रांची श्री राकेश रंजन ने रांची की हृदयस्थली अल्बर्ट एक्का चौक स्थित उनकी प्रतिमा पर पुष्प गुच्छ अर्पित कर विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित की।

उपायुक्त-सह-जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री ने इस अवसर पर कहा कि परमवीर चक्र विजेता लांस नायक अल्बर्ट एक्का का सर्वोच्च बलिदान राष्ट्र की अमूल्य धरोहर है। उन्होंने 1971 के युद्ध में अदम्य साहस, कर्तव्यनिष्ठा और वीरता का परिचय देकर देश की रक्षा हेतु अपना सर्वस्व न्योछावर किया। उनका बलिदान युवाओं और देशवासियों के लिए सदैव प्रेरणास्रोत रहेगा।

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने फिटनेस के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए ‘फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल’ कार्यक्रम की प्रशंसा की

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के दौरान ‘फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल’ पहल पर चर्चा की।

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने ‘मन की बात’ के 128वें एपिसोड में कहा कि ऐसी कई अन्य प्रतियोगिताएं भी हैं जो हमारे युवा मित्रों के बीच बहुत लोकप्रिय हो रही हैं। कई लोग ‘फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल’ जैसे कार्यक्रमों में भाग लेने के लिए एक साथ आ रहे हैं। ये सभी फिटनेस को बढ़ावा देने के तरीके हैं।

रविवार को राष्ट्रव्यापी साइकिलिंग अभियान का 51वां संस्करण सफलतापूर्वक आयोजित किया गया, जिसमें एथेंस 2004 ओलंपिक रजत पदक विजेता और राजस्थान के खेल मंत्री राज्यवर्धन सिंह राठौर ने जयपुर में इस आयोजन का नेतृत्व किया।

 

कर्नल राठौर ने बेहतर स्वास्थ्य और कल्याण की संस्कृति को आगे बढ़ाने में राष्ट्र को दिए गए प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के निरंतर प्रोत्साहन की सराहना की।

कर्नल राठौर ने जयपुर के अमर जवान ज्योति पर आयोजित “संडे ऑन साइकिल” कार्यक्रम के दौरान कहा कि विश्‍व में ऐसे बहुत कम प्रधानमंत्री हैं जो अपने नागरिकों के स्वास्थ्य और कल्याण पर ध्यान केंद्रित करते हुए इतने स्पष्ट आह्वान करते हैं। श्री नरेन्‍द्र मोदी जी ने कई बार फिट इंडिया की बात की है।

कर्नल राठौर ने कहा कि तेल की खपत कम करने से लेकर श्री अन्न खाने और मोटापा कम करने के लिए समर्पित भाव से काम करने तक, हमारे प्रधानमंत्री ने हमेशा हमें फिट रहने के लिए हर संभव उपाय अपनाने का आग्रह किया है, चाहे वह योग हो, साइकिल चलाना हो, दौड़ना हो या अन्य कई तरीके। संडे ऑन साइकिल के ज़रिए देश में शुरू किया गया आंदोलन इसका एक स्पष्ट उदाहरण है। जयपुर में लगभग 1000 बच्चे इसमें हिस्सा ले रहे हैं। उनके लिए साइकिलें भी उपलब्ध हैं। कर्नल राठौर को आज़ादी के बाद ओलंपिक में व्यक्तिगत रजत पदक जीतने वाले पहले भारतीय होने का गौरव प्राप्त है।

फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल के 30 नवंबर के संस्करण में देश भर के पत्रकारों ने अपने-अपने राज्यों और क्षेत्रों से रैली में भाग लिया।

राजस्थान में चल रहे खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स के अवसर पर, जयपुर के सवाई मान सिंह स्टेडियम में एक विशेष फिट इंडिया जोन भी स्थापित किया गया है, जो सभी आगंतुकों के लिए एक गतिशील, गहन और इंटरैक्टिव अनुभव के लिए प्रमुख फिटनेस तत्वों को एक साथ लाता है।

इस जोन में तीन प्रमुख तत्व शामिल हैं: उच्च-ऊर्जा फिटनेस चैलेंज जोन जिसमें रोमांचक पुरस्कारों के साथ ज़ुम्बा और रस्सी कूदना शामिल है, एक समर्पित साइकिलिंग जोन और अभिनव बिंद्रा टारगेट परफॉर्मेंस द्वारा संचालित व्यापक शारीरिक और मानसिक फिटनेस आकलन।
केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मंडाविया के मार्गदर्शन में, फिट इंडिया संडे ऑन साइकिल की शुरुआत दिसंबर 2024 में हुई थी।

अब यह एक साप्ताहिक कार्यक्रम बन गया है जो प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के ‘फिटनेस का डोज, आधा घंटा रोज’ और ‘मोटापे के खिलाफ लड़ाई’ के दृष्टिकोण को पुष्ट करता है।

आज संडे ऑन साइकिल एक वास्तविक जन आंदोलन बन गया है, जिसमें देश भर में आम नागरिक अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं।

4000 से ज़्यादा नमो फिट इंडिया साइक्लिंग क्लब, लाखों आम नागरिकों के साथ, नियमित रूप से साइकिल चलाते हैं और हर हफ़्ते इसमें भाग लेते हैं, जिससे यह पहल एक राष्ट्रव्यापी सामुदायिक-नेतृत्व वाली फिटनेस क्रांति बन गई है। इन क्लबों द्वारा यह कार्यक्रम साप्ताहिक रूप से आयोजित किया जाता है।

भारतीय खेल प्राधिकरण अपने प्रशिक्षण केंद्रों (एसटीसीएस) के नेटवर्क में आयोजित खेलो इंडिया गतिविधियों के माध्यम से एक मजबूत राष्ट्रव्यापी उपस्थिति सुनिश्चित करता है, जिनमें असम में कोकराझार, पंजाब में जगतपुर और बादल, मणिपुर में उत्लू, लद्दाख में कारगिल और कई अन्य शामिल हैं। इसका आयोजन देश भर में 23  राष्ट्रीय उत्कृष्टता केंद्रों (एनसीओई) के अलावा, भद्रक, झारसुगुड़ा, ढेंकनाल सहित कई खेलो इंडिया केंद्रों में भी हर रविवार को किया जा रहा है।

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रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने कानपुर स्थित डीआरडीओ प्रयोगशाला के अंतर्गत रक्षा सामग्री एवं भंडार अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान का दौरा किया

नई दिल्ली – रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 30 नवंबर, 2025 को रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) की कानपुर स्थित प्रयोगशाला के अंतर्गत रक्षा सामग्री एवं भंडार अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान (डीएमएसआरडीई) का दौरा किया। उन्होंने प्रयोगशाला में चल रहे अत्याधुनिक रक्षा सामग्री अनुसंधान और नवाचारों का अवलोकन किया।

 

रक्षा मंत्री श्री सिंह को रक्षा सामग्री एवं भंडार अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान के निदेशक द्वारा प्रयोगशाला के विज़न, मिशन, चार्टर, चल रही परियोजनाओं और प्रौद्योगिकी केंद्रित क्षेत्रों के बारे में जानकारी दी गई। रक्षा सामग्री एवं भंडार अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान द्वारा सिरेमिक और सिरेमिक मैट्रिक्स कंपोजिट, स्टील्थ और कैमोफ्लेज सामग्री, नैनो सामग्री, कोटिंग्स, पॉलिमर और रबर, ईंधन और लुब्रीकेन्‍ट्स, तकनीकी वस्त्र और व्यक्तिगत सुरक्षा प्रणालियों में विकसित सामग्री, प्रौद्योगिकियों और उत्पादों का भी प्रदर्शन किया गया।

श्री राजनाथ सिंह ने रक्षा उत्पादों, विशेष रूप से बुलेटप्रूफ जैकेट (स्तर-6), ब्रह्मोस मिसाइल के लिए नैफ्थिल ईंधन, भारतीय तटरक्षक जहाजों के लिए उच्च दाब पॉलीमेरिक मेंब्रेन, सिलिकॉन कार्बाइड फाइबर, सक्रिय कार्बन फैब्रिक-आधारित रासायनिक, जैविक, रेडियोलॉजिकल और परमाणु सूट तथा विभिन्न अन्य स्टील्थ उत्पादों के सफल निर्माण में प्रयोगशाला के प्रयासों की सराहना की। उन्होंने कहा कि प्रौद्योगिकी विकास को अंतिम उपयोगकर्ता की आवश्यकताओं के अनुरूप होना चाहिए।

रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने सरकार के ‘आत्मनिर्भर भारत’ के सपने को साकार करने के लिए पिछले दो वर्षों में बड़ी संख्या में प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण के लिए रक्षा सामग्री एवं भंडार अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान की सराहना की। उन्होंने विकसित रक्षा उत्पादों/प्रौद्योगिकियों की निर्यात संभावनाओं का पता लगाने का आह्वान किया। उन्‍होंने कहा कि उद्योगों की आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए डीटीटीसी, लखनऊ में एमएसएमई और उद्योगों के बीच बातचीत बढ़ाई जानी चाहिए। उन्होंने प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के विकसित भारत@2047 के सपने को साकार करने में उद्योग और शिक्षा क्षेत्र के साथ प्रयोगशाला के बढ़ते तालमेल की सराहना की।

श्री राजनाथ सिंह ने इससे पहले परिसर में पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न डॉ. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम की प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित की। रक्षा विभाग (अनुसंधान एवं विकास) के सचिव एवं रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने उनका स्वागत किया।

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एयर मार्शल तेजबीर सिंह ने महानिदेशक (निरीक्षण एवं सुरक्षा) के रूप में पदभार संभाला

नई दिल्ली – एयर मार्शल तेजबीर सिंह ने 01 दिसंबर, 2025 को वायु सेना मुख्यालय में महानिदेशक (निरीक्षण और सुरक्षा) यानी डीजी (आई एंड एस) के रूप में पदभार ग्रहण किया।

वायु सेना अधिकारी ने अपने 37 वर्षों के शानदार करियर में, विभिन्न कमान और स्टाफ पदों पर कार्य किया है, जिनमें बांग्लादेश में हमारे एयर अटैची, राष्ट्रीय रक्षा कॉलेज, नई दिल्ली में वरिष्ठ निर्देशन स्टाफ (वायुसेना) और वायु सेना मुख्यालय में सहायक वायु सेना संचालन प्रमुख (टी एंड एच) शामिल हैं। वे रॉयल कॉलेज ऑफ डिफेंस स्टडीज, ब्रिटेन के पूर्व-छात्र हैं।

एयर मार्शल तेजबीर सिंह के पास व्यापक संचालन का अनुभव है और उनके नाम 7000 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव है। वे भारतीय वायु सेना में सी-130जे ‘सुपर हरक्यूलिस’ विमान को शामिल करने और संयुक्त अभियानों के उद्देश्य से पहली ‘स्पेशल ऑप्स’ स्क्वाड्रन की स्थापना में अग्रणी रहे हैं। एयर ऑफिसर ने दो प्रमुख उड़ान अड्डों, एक प्रमुख प्रशिक्षण अड्डे और उत्तरी क्षेत्र को सहायता प्रदान करने वाले एक अग्रिम पंक्ति के परिचालन हवाई अड्डे की कमान संभाली है। मुख्यालय प्रशिक्षण कमान में वरिष्ठ वायु कर्मचारी अधिकारी के रूप में अपने पिछले कार्यकाल में, उन्होंने प्रशिक्षण दर्शन को संचालन संबंधी उद्देश्यों के साथ तालमेल बिठाने के लिए एक रणनीतिक परिवर्तन का नेतृत्व किया।

एयर मार्शल तेजबीर सिंह को उनकी विशिष्ट सेवा के सम्मान में 2010 में वायु सेना पदक और 2018 में अति विशिष्ट सेवा पदक से सम्मानित किया गया।

उन्‍होंने एयर मार्शल मकरंद भास्कर रानाडे का स्थान लिया, जो 39 वर्षों की विशिष्ट सेवा के बाद 30 नवंबर, 2025 को सेवानिवृत्त हुए।

 

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नालंदा में उत्खनन और संरक्षण

नई दिल्ली – सरकार नालंदा में पुरातात्विक उत्खनन और संरक्षण कार्य के लिए भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) को पर्याप्त धन और संसाधन उपलब्ध करा रही है।

एएसआई के पास उत्खनन और संरक्षण कार्य के लिए एक अनुभवी टीम है। उत्खनन और संरक्षण कार्य में स्थानीय समुदायों की भागीदारी से स्थानीय लोगों को रोजगार मिलता है और साथ ही उन्हें अपनी विरासत के संरक्षण में भाग लेने में सक्षम बनाता है।

नालंदा, संरक्षण कार्यों और पुरातात्विक उत्खनन के माध्यम से एक प्रमुख पर्यटन स्थल बन गया है। नालंदा 2010 से विश्व धरोहर स्थल है।

यह जानकारी केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

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विलुप्तप्राय भाषाओं की सुरक्षा

नई दिल्ली – भारत की जनगणना 2011 (भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त का कार्यालय) के अनुसार, देश में कुल 121 भाषाएँ सूचित की गई हैं। इनमें से कई भाषाओं की अपनी विशिष्ट लिपियां हैं, जबकि अन्य साझा लिपि या क्षेत्रीय लिपियों में लिखी जाती हैं।

शिक्षा मंत्रालय द्वारा भारत की विलुप्तप्राय भाषाओं की सुरक्षा और संरक्षण स्कीम (एसपीपीईएल) के अंतर्गत केन्‍द्रीय भारतीय भाषा संस्थान (सीआईआईएल), मैसूरु के माध्‍यम से 10,000 से कम लोगों द्वारा बोली जाने वाली भारत की उन सभी मातृभाषाओं/भाषाओं जिन्हें विलुप्तप्राय भाषाएं कहा जाता है, के संरक्षण, परिरक्षण और प्रलेखन का कार्य किया जाता है। स्कीम के प्रथम चरण में, पूरे भारत से 117 विलुप्तप्राय भाषाओं/मातृभाषाओं को अध्‍ययन और प्रलेखन के लिए चुना गया है, जिनका ब्यौरा अनुलग्नक में दिया गया है।

संस्कृति मंत्रालय साहित्य अकादमी के माध्यम से 24 मान्यताप्राप्त भाषाओं और अनेक जनजातीय और गैर-मान्यताप्राप्त भाषाओं में पुरस्कारों, अनुवादों और कार्यक्रमों के माध्यम से साहित्यिक संवाद और प्रकाशन को बढ़ावा देता है। यह मौखिक और जनजातीय साहित्य के प्रलेखन और संरक्षण के लिए विशेष कार्यक्रम और केन्द्र भी सृजित करता है, जैसे वाचिक एवं जनजातीय साहित्य केन्द्र और कम मान्यताप्राप्त भाषाओं में काम करने वाले विद्वानों को भाषा सम्मान प्रदान करता है।

यह जानकारी केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

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अस्सी घाट पर सजी रंग–बिरंगी रंगोलियाँ, काशी तमिल संगमम् 4.0 के तहत रंगोली प्रतियोगिता का सफल आयोजन

काशी के प्रसिद्ध अस्सी घाट पर मंगलवार को काशी तमिल संगमम् 4.0 के अंतर्गत भव्य रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन किया गया। इस विशेष कार्यक्रम में 150 से अधिक छात्र-छात्राओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और काशी व तमिल संस्कृति की समृद्ध विरासत को रंगों के माध्यम से अभिव्यक्त किया। घाट पर सुबह से ही रंगों की रौनक देखकर स्थानीय लोगों के साथ-साथ देश-विदेश से आए पर्यटक भी आकर्षित हुए।

प्रतियोगिता में प्रतिभागियों ने काशी और तमिलनाडु के मंदिर स्थापत्य, लोककला, पौराणिक कथाओं और सांस्कृतिक प्रतीकों को अपनी रचनात्मकता से उकेरा। किसी ने मदुरै के मीनाक्षी मंदिर को रंगों में सँवारा तो किसी ने काशी विश्वनाथ धाम को केंद्र में रखकर अद्भुत कला प्रस्तुत की। दोनों संस्कृतियों के संगम की झलक इन रंगोलियों में स्पष्ट दिखाई दी। कई विदेशी मेहमानों ने भी कार्यक्रम में शिरकत किया और कलाकारों से उनकी कृतियों और भारतीय सांस्कृतिक परंपराओं के बारे में जानकारी प्राप्त की।

इस भव्य रंगोली प्रतियोगिता का आयोजन बीएचयू द्वारा कराया गया । पूरे कार्यक्रम का संचालन और पर्यवेक्षण नोडल अधिकारी प्रोफेसर अंचल श्रीवास्तव, ज्ञानेंद्र कुमार तथा डॉ. ललित मोहन (डिपार्टमेंट ऑफ पेंटिंग) की अध्यक्षता में संपन्न हुआ। आयोजन समिति के सदस्यों ने प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम युवाओं को अपनी जड़ों और भारतीय कला परंपराओं से जोड़ने का महत्वपूर्ण माध्यम हैं।

अस्सी घाट पर दिनभर चली इस रंगोली प्रतियोगिता ने न केवल सांस्कृतिक समन्वय की मिसाल पेश की बल्कि काशी तमिल संगमम् 4.0  के उद्देश्य को देश के विभिन्न हिस्सों तक पहुंचाया। प्रतियोगिता के अंत में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया, वहीं उपस्थित दर्शकों ने इस अनोखी कलात्मक प्रस्तुति की सराहना की।

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प्रधानमंत्री ने नारी शक्ति को भारत के भविष्य के केंद्र में बताते हुए एक लेख साझा किया

नई दिल्ली, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज केंद्रीय मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी द्वारा लिखा एक लेख साझा किया, जिसमें बताया गया है कि इस प्रकार नारी शक्ति भारत के भविष्य के केंद्र में है। श्री मोदी ने कहा, “भारत अमृत काल में प्रवेश कर रहा है, यह शब्द अब केवल एक नारा नहीं रह गया है; यह एक राष्ट्रीय मिशन है। वन-स्टॉप सेंटर से लेकर फास्ट-ट्रैक कोर्ट तक, हेल्पलाइन से लेकर सामाजिक सुरक्षा केंद्रों तक, मिशन शक्ति के तहत सरकार महिलाओं के लिए सम्मान और अवसर सुनिश्चित कर रही है।”

श्री मोदी ने केंद्रीय मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी द्वारा एक्स पर लिखे गए एक पोस्ट पर अपनी राय व्‍यक्‍त करते हुए कहा:

“नारी शक्ति भारत के भविष्य का केंद्र है। जैसे-जैसे भारत अमृत काल में प्रवेश कर रहा है, यह शब्द अब केवल एक नारा नहीं रह गया है; यह एक राष्ट्रीय मिशन है। वन-स्टॉप सेंटर से लेकर फास्ट-ट्रैक कोर्ट तक, हेल्पलाइन से लेकर सामाजिक-सुरक्षा केंद्रों तक, मिशन शक्ति के तहत, सरकार महिलाओं के लिए सम्मान और अवसर सुनिश्चित कर रही है।

केंद्रीय मंत्री श्रीमती @Annapurna4BJP का एक बहुत ही विवेकपूर्ण आत्मचिंतन। अवश्‍य पढ़ें!”

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“एक भारत की मशाल लेकर चलने वाले हैं युवा”: वडोदरा में सरदार@150 मार्च में केद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल

नई दिल्ली, केंद्रीय मंत्री, पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय (एमओपीएसडब्लू)  सर्बानंद सोनोवाल ने आज वडोदरा में अन्य नेताओं के साथ सरदार@150 मार्च में भाग लिया। सोनोवाल ने कहा कि सरदार@150 राष्ट्रीय एकता मार्च ने “पूरे भारत में देशभक्ति की एक शक्तिशाली लहर पैदा की है और एक अखंड भारत के सरदार वल्लभभाई पटेल के दृष्टिकोण को बनाए रखने के लिए देश के युवाओं के दृढ़ संकल्प को प्रदर्शित किया है”।

पदयात्रा के तीसरे दिन वडोदरा में प्रवेश करने पर आरणा लॉन्स, सेवासी में आयोजित उद्घाटन सांस्कृतिक कार्यक्रम में बोलते हुए, केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि यह मार्च सामूहिक संकल्प और राष्ट्रीय गौरव का एक प्रमाण है। सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “हमारे युवाओं का उत्साह साबित करता है कि ‘एक भारत’ की भावना हर नागरिक को प्रेरित करती रहेगी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के गतिशील नेतृत्व में, भारत ‘श्रेष्ठ भारत’ और ‘विकसित भारत’ के मिशन के साथ आगे बढ़ रहा है।”

पदयात्रा की शुरुआत अंकलाव में हरे कृष्ण मंदिर से हुई और इसमें छात्रों, सांस्कृतिक समूहों और सामुदायिक संगठनों की भारी भागीदारी रही। माई भारत के अनुसार, इस पहल में पहले ही 620 से अधिक जिलों और 440 लोकसभा निर्वाचन क्षेत्रों में 1,514 पदयात्राएँ हो चुकी हैं, जिनमें 15 लाख से अधिक नागरिकों ने भाग लिया है, जिन्होंने सामूहिक रूप से देश भर में 10,007 किलोमीटर की दूरी तय की है।

उद्घाटन कार्यक्रम में “विट्ठलभाई – मणिबेन – सरदार” पर आधारित सरदार गाथा की प्रस्तुति हुई, जिसके बाद ग्राम सभा, नृत्य नाटिका और भजन संध्या सहित सांस्कृतिक प्रदर्शन हुए, जिन्होंने कला और विरासत के माध्यम से एकता का उत्सव मनाया।

पदयात्रा शनिवार को वडोदरा के प्रमुख स्थानों से होकर गुजरेगी, जिसका समापन एक बड़े सांस्कृतिक कार्यक्रम के लिए नवलखी मैदान में होगा।

सरदार पटेल की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में यह 11 दिवसीय मार्च, राष्ट्रीय एकीकरण और आत्मनिर्भरता के आदर्शों के इर्द-गिर्द युवा भारत को लगातार प्रेरित कर रहा है।

केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल के साथ अन्य गणमान्य व्यक्ति भी शामिल हुए, जिनमें डॉ. मनसुख मंडाविया, केंद्रीय युवा मामले और खेल तथा श्रम और रोजगार मंत्री, अजय टम्टा, सड़क परिवहन और राजमार्ग राज्य मंत्री, शीशपाल राजपूत, अध्यक्ष, गुजरात राज्य योग बोर्ड, जगदीशभाई मकवाना, विधायक और उप मुख्य सचेतक, गुजरात विधान सभा, विजयभाई पटेल, विधायक और उप मुख्य सचेतक, गुजरात विधान सभा, हेमांग जोशी, संसद सदस्य (सांसद), श्रीमती रंजनबेन भट्ट, पूर्व सांसद, नरहरि अमीन, गुजरात के पूर्व उपमुख्यमंत्री और सांसद और जशुभाई भीलुभाई राठवा, सांसद रहे।

 

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वरिष्ठ नागरिकों में वृद्धावस्था के प्रति जागरूकता और अंतर-पीढ़ीगत संबंधों को बढ़ावा देने के लिए “आराधना” सांस्कृतिक कार्यक्रम

नई दिल्ली, भारत सरकार के सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग ने वरिष्ठ नागरिकों के लिए वृद्धजन दिवस (आईडीओपी)-2025 के समारोहों की श्रृंखला के क्रम में वृद्धावस्था के प्रति जागरूकता बढ़ाने और अंतर-पीढ़ीगत संबंधों को बढ़ावा देने के लिए 28.11.2025 को जनपथ, नई दिल्ली स्थित डीआईएसी के भीम हॉल में एक सांस्कृतिक कार्यक्रम “आराधना” का आयोजन किया। इस कार्यक्रम का विषय “अनुभव से ऊर्जा तक” था।

इस सत्र में माननीय केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री श्री बी.एल.वर्मा, सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग के सचिव, सामाजिक न्याय और अधिकारिता विभाग के वरिष्ठ अधिकारी, विद्यार्थी, वरिष्ठ नागरिक और विभिन्न गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) के प्रतिनिधि उपस्थित थे।

 

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 41 के अंतर्गत, राज्य को वरिष्ठ नागरिकों के कल्याण के लिए प्रभावी प्रावधान करने का अधिकार दिया गया है। इसी भावना से माता-पिता और वरिष्ठ नागरिकों का भरण-पोषण एवं कल्याण अधिनियम, 2007 लागू किया गया था। यह ऐतिहासिक कानून हमारे सांस्कृतिक मूल्यों का प्रतीक है—देखभाल, कर्तव्य और प्रेम को प्रवर्तनीय अधिकारों में परिवर्तित करता है। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय वरिष्ठ नागरिकों से संबंधित मामलों के लिए नोडल विभाग है।

2011 की जनगणना के अनुसार, देश में लगभग 10 करोड़ वरिष्ठ नागरिक हैं। 2036 तक यह संख्या बढ़कर 22 करोड़ होने का अनुमान है। यह बढ़ती जनसंख्या एक चुनौती के साथ-साथ वरिष्ठ नागरिक केंद्रित नीतियों पर अपना ध्यान केंद्रित करने का अवसर भी प्रस्तुत करती है। हमारे देश ने नीतिगत और कानूनी ढाँचे, दोनों स्तरों पर इस दिशा में पहले ही कई पहल की हैं।

सांस्कृतिक कार्यक्रम के दौरान वायुसेना बैंड ने स्पेस फ़्लाइट, सुजलाम सुफलाम, रिजॉइस इन रइसाना, इवनिंग स्टार, वंदे मातरम और सारे जहाँ से अच्छा जैसे गीतों की धुनें बजाईं। वायुसेना बैंड द्वारा बजाई गई धुनों ने उपस्थित लोगों में भारत माता के प्रति गौरव, राष्ट्रवाद और देशभक्ति की भावना जगाई। इसने एक बार पुन: मातृभूमि के प्रति प्रेम को जागृत कर दिया।

पद्मश्री गीता चंद्रन ने अपनी टीम के साथ भरतनाट्यम का प्रदर्शन किया। लवंगी राग में त्रिधारा, नमः शिवाय, ओंकार कारिणी और संकीर्तन का प्रदर्शन किया। भारतीय नृत्य शैलियों की इन भावपूर्ण प्रस्तुतियों ने सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया।

अपने संबोधन में, माननीय केंद्रीय सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री, श्री बी.एल. वर्मा ने कहा कि हमारे वरिष्ठ नागरिकों को सदैव ज्ञान, धैर्य और मूल्य-आधारित जीवन का प्रतीक माना गया है। उनके जीवन का प्रत्येक अध्याय—कड़ी मेहनत, संघर्ष, त्याग और उपलब्धियों से भरा—युवा पीढ़ी के लिए एक मार्गदर्शक का काम करता है। यह सांस्कृतिक कार्यक्रम इसलिए विशेष है क्योंकि संगीत, नृत्य और कला मिलकर अनुभवों को अभिव्यक्त करते हैं और ऊर्जा को एक सुंदर रूप प्रदान करते हैं, जैसा कि भारतीय वायु सेना के संगीत बैंड द्वारा प्रस्तुत किया गया—सेवा और एकता की मधुर अभिव्यक्ति—और भारत की सुप्रसिद्ध नृत्यांगना पद्मश्री सुश्री गीता चंद्रन का सम्मानित नृत्य और संगीत प्रदर्शन।

यह आयोजन इसलिए यादगार है क्योंकि आज तीन पीढ़ियाँ इस मंच पर एक साथ हैं—हमारे बुजुर्गों की संगीतमय प्रस्तुतियाँ, हमारे युवाओं की कलात्मक अभिव्यक्तियाँ और बच्चों की आनंदमय उपस्थिति। सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय इसी दिशा में कार्यरत है, क्योंकि इसका प्रत्येक कार्यक्रम हमारे वरिष्ठ नागरिकों के सम्मान, सुरक्षा, सक्रिय जीवन और भागीदारी को सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता से प्रेरित है।

सांस्कृतिक कार्यक्रम “आराधना” ने वृद्धावस्था के प्रति जागरूकता और अंतर-पीढ़ीगत संबंधों को बढ़ावा देने के लिए वरिष्ठ नागरिकों, विद्यार्थी, नीति निर्माताओं, गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) को एक मंच पर एकत्रित किया।

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प्रधानमंत्री ने अपने उडुपी, कर्नाटक दौरे की झलकियाँ साझा कीं

उडुपी, कर्नाटक – प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी ने आज अपने उडुपी, कर्नाटक दौरे की झलकियाँ साझा कीं। उन्होंने उडुपी स्थित श्री कृष्ण मठ में दर्शन किए और लक्ष कंठ गीता पारायणा कार्यक्रम में भाग लिया — यह एक भक्ति आयोजन है जिसमें 1,00,000 प्रतिभागी शामिल हैं, जिनमें छात्र, साधु-संत, विद्वान और विभिन्न क्षेत्रों से आए नागरिक सम्मिलित हैं, जो सामूहिक रूप से श्रीमद्भगवद्गीता का पाठ कर रहे हैं।

प्रधानमंत्री ने कृष्ण गर्भगृह के सामने स्थित सुवर्ण तीर्थ मंटप का उद्घाटन किया और पवित्र कनकना किंडि – वह पवित्र झरोखा जिसके माध्यम से संत कनकदास के बारे में माना जाता है कि उन्होंने भगवान कृष्ण के दिव्य दर्शन प्राप्त किए थे – के लिए कनक कवच (स्वर्ण आवरण) समर्पित किया। उडुपी का श्री कृष्ण मठ लगभग 800 वर्ष पहले वेदांत के द्वैत दर्शन के प्रवर्तक श्री माधवाचार्य द्वारा स्थापित किया गया था।

एक्स पर विभिन्न पोस्ट में श्री मोदी ने कहा:

“उडुपी में होने की मुझे बेहद खुशी है। यह भक्ति, ज्ञान और परंपरा से जुड़ी हुई भूमि है। उडुपी में मिला स्वागत मेरी स्मृतियों में हमेशा अंकित रहेगा। जनता के प्रति मैं हृदय से कृतज्ञ हूँ।”

“ಭಕ್ತಿ, ಕಲಿಕೆ ಮತ್ತು ಸಂಪ್ರದಾಯಕ್ಕೆ ಹೆಸರಾದ ಸ್ಥಳ ಉಡುಪಿಗೆ ಭೇಟಿ ನೀಡಿದ್ದು ಸಂತೋಷವಾಯಿತು. ಉಡುಪಿಯಲ್ಲಿ ನನಗೆ ದೊರೆತ ಸ್ವಾಗತ ಸದಾ ನೆನಪಿನಲ್ಲಿ ಉಳಿಯುತ್ತದೆ. ಜನತೆಗೆ ನನ್ನ ಕೃತಜ್ಞತೆಗಳು.”

“उडुपी धर्म, करुणा और सामाजिक उत्थान से गहराई से जुड़ी हुई भूमि है।”

“भगवान श्रीकृष्ण हमें गरीबों की सहायता करने का पाठ पढ़ाते हैं। इसी भावना ने आयुष्मान भारत, प्रधानमंत्री आवास योजना और अन्य कई पहलों को प्रेरित किया है।”

“गीता से प्रेरित होकर, मैं विनम्रतापूर्वक आप सभी से आग्रह करता हूँ कि अपने वर्तमान और भविष्य के कल्याण के लिए ये नौ संकल्प लें…”

“लक्ष कंठ गीता के भव्य और दिव्य पाठ ने सभी को ऊर्जा और गहन भक्ति से भर दिया। इतनी विशाल सभा द्वारा एकस्वर में गीता का पाठ होते देखना एक अविस्मरणीय क्षण था।”

“आज उडुपी स्थित श्री कृष्ण मठ का दौरा बहुत विशेष रहा। गीता का पाठ एक अविस्मरणीय अनुभव था। सुवर्ण तीर्थ मंटप का उद्घाटन किया और कनकना किंडी के लिए कनक कवच समर्पित किया। कनकना किंडी से भगवान श्री कृष्ण की अर्चना की।। श्री कनकदास को श्रद्धांजलि अर्पित करना भी मेरे लिए सम्मान की बात थी।”

“उडुपी के श्री कृष्ण मठ से कुछ और झलकियाँ प्रस्तुत हैं।”

“ಉಡುಪಿಯು ಧರ್ಮ, ಸಹಾನುಭೂತಿ ಮತ್ತು ಸಾಮಾಜಿಕ ಉನ್ನತಿಯಲ್ಲಿ ಆಳವಾಗಿ ಬೇರೂರಿರುವ ಸ್ಥಳ.”

“ಗೀತೆಯಿಂದ ಪ್ರೇರಿತರಾಗಿ, ನಮ್ಮ ವರ್ತಮಾನ ಮತ್ತು ಭವಿಷ್ಯದ ಒಳಿತಿಗಾಗಿ ಈ ಒಂಬತ್ತು ಸಂಕಲ್ಪಗಳನ್ನು ಮಾಡುವಂತೆ ನಾನು ನಿಮ್ಮೆಲ್ಲರನ್ನು ವಿನಮ್ರವಾಗಿ ಕೋರುತ್ತೇನೆ…”

“ಭಗವಾನ್ ಶ್ರೀ ಕೃಷ್ಣ ಬಡವರಿಗೆ ಸಹಾಯ ಮಾಡುವ ಮಾರ್ಗವನ್ನು ನಮಗೆ ಕಲಿಸಿದ್ದಾರೆ. ಆ ಮನೋಭಾವವೇ ಆಯುಷ್ಮಾನ್ ಭಾರತ್, ಪ್ರಧಾನಮಂತ್ರಿ ಆವಾಸ್ ಯೋಜನೆ ಮತ್ತು ಇನ್ನೂ ನಮ್ಮ ಅನೇಕ ಉಪಕ್ರಮಗಳಿಗೆ ಸ್ಫೂರ್ತಿಯಾಗಿದೆ.”

“ಗೀತೆಯ ಭವ್ಯ ಮತ್ತು ದಿವ್ಯ ಲಕ್ಷ ಕಂಠ ಪಠಣವು ಎಲ್ಲರಲ್ಲೂ ಶಕ್ತಿ ಮತ್ತು ಆಳವಾದ ಭಕ್ತಿಯನ್ನು ತುಂಬಿತು. ಇಷ್ಟೊಂದು ದೊಡ್ಡ ಜನಸಮೂಹವು ಏಕಸ್ವರದಲ್ಲಿ ಗೀತಾ ಪಠಣ ಮಾಡುವುದನ್ನು ನೋಡುವುದು ಮರೆಯಲಾಗದ ಕ್ಷಣವಾಗಿತ್ತು.”

“ಉಡುಪಿಯ ಶ್ರೀ ಕೃಷ್ಣ ಮಠಕ್ಕೆ ಇಂದಿನ ಭೇಟಿ ಅತ್ಯಂತ ವಿಶೇಷವಾಗಿತ್ತು. ಗೀತಾ ಪಠಣವು ಅವಿಸ್ಮರಣೀಯ ಅನುಭವವಾಗಿತ್ತು. ಸುವರ್ಣ ತೀರ್ಥ ಮಂಟಪವನ್ನು ಉದ್ಘಾಟಿಸಿ, ಕನಕನ ಕಿಂಡಿಗೆ ಕನಕ ಕವಚವನ್ನು ಸಮರ್ಪಿಸಲಾಯಿತು. ಕನಕನ ಕಿಂಡಿಯಿಂದ ಶ್ರೀ ಕೃಷ್ಣ ಪರಮಾತ್ಮನಿಗೆ ಪ್ರಾರ್ಥನೆ ಸಲ್ಲಿಸಲಾಯಿತು. ಶ್ರೀ ಕನಕದಾಸರಿಗೆ ನಮನ ಸಲ್ಲಿಸುವುದು ಕೂಡ ಒಂದು ಗೌರವವಾಗಿತ್ತು.”

“ಉಡುಪಿಯ ಶ್ರೀ ಕೃಷ್ಣ ಮಠದ ಕೆಲವು ನೋಟಗಳು ಇಲ್ಲಿವೆ.”

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