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कानूनी गारंटी वाले एमएसपी का कार्यान्वयन

नई दिल्ली – सरकार प्रत्येक वर्ष, राज्य सरकारों और संबंधित केंद्रीय मंत्रालयों/विभागों के अभिमतों पर विचार करने के पश्चात कृषि लागत और मूल्य आयोग (सीएसीपी) की सिफारिशों के आधार पर 22 अधिदेशित कृषि फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) निर्धारित करती है।

वर्ष 2018-19 के केंद्रीय बजट में एमएसपी को उत्पादन लागत के कम से कम डेढ़ गुना के स्तर पर रखने के पूर्व-निर्धारित सिद्धांत की घोषणा की गई थी। तदनुसार, सरकार ने वर्ष 2018-19 से सभी अधिदेशित खरीफ, रबी और अन्य वाणिज्यिक फसलों के लिए एमएसपी में अखिल भारतीय भारित औसत उत्पादन लागत पर कम से कम 50 प्रतिशत लाभ के साथ वृद्धि की है।

एमएसपी नीति के उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए, एमएसपी की घोषणा के पश्चात, सरकार किसानों को मूल्य समर्थन प्रदान करने के लिए भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) और अन्य नामित राज्य एजेंसियों के माध्यम से अनाज और मोटे अनाज की खरीद करती है। जब दलहन, तिलहन और कोपरा का बाजार मूल्य एमएसपी से कम हो जाता है, तब संबंधित राज्य सरकारों के परामर्श से इन उत्पादों की खरीद, प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान (पीएम-आशा) की समग्र योजना के अंतर्गत मूल्य समर्थन योजना के अंतर्गत की जाती है। पीएम-आशा योजना के तहत खरीद एजेंसियां ​​भारतीय राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ लिमिटेड (नेफेड) और भारतीय राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता संघ लिमिटेड (एनसीसीएफ) हैं। सरकार द्वारा कपास और पटसन की खरीद भी क्रमशः भारतीय कपास निगम (सीसीआई) और भारतीय पटसन निगम (जेसीआई) के माध्यम से एमएसपी पर की जाती है।

सरकार निर्दिष्ट खरीद एजेंसियों के माध्यम से कृषि फसलों की खरीद करने की पेशकश करती है और किसानों के पास अपनी उपज सरकारी एजेंसियों को या खुले बाजार में जो भी उनके लिए लाभप्रद हो, बेचने का विकल्प है।

बढ़ी हुई एमएसपी से देश के किसान लाभान्वित हुए हैं, जो खरीद के आंकड़ों और किसानों को दी गई एमएसपी राशि से स्पष्ट है। 2024-25 (फसल वर्ष) के दौरान खरीद और किसानों को दी गई एमएसपी राशि का विवरण निम्नानुसार है:  

कुल खरीद (एलएमटी में) कुल एमएसपी मूल्य (लाख करोड़ में)
1,223

3.47

यह जानकारी कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर ने आज लोकसभा में एक लिखित जवाब में दी।

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क्रिएट इन इंडिया चैलेंज के विजेता 12 से 14 दिसंबर, 2025 तक जेएलएन स्टेडियम में 15वें राष्ट्रीय स्ट्रीट फूड फेस्टिवल में प्रस्तुति देंगे

नई दिल्ली – सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की प्रमुख पहल, वेव्स और क्रिएट इन इंडिया चैलेंज (सीआईसी), भारत की उभरती रचनात्मक प्रतिभाओं को दुनिया के सामने ला रही है। दो चुनौतियों, बैटल ऑफ़ बैंड्स और सिम्फनी ऑफ़ इंडिया के विजेता, राष्ट्रीय स्ट्रीट फ़ूड फेस्टिवल (एनएसएसएफ) के 15वें संस्करण में मुख्य आकर्षण बन रहे हैं। यह दिल्ली के प्रतिष्ठित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में से एक है, जो भारत के समृद्ध पाक कला परिदृश्य का जश्न मनाने के लिए आयोजित किया जाता है। यह उत्सव क्षेत्रीय व्यंजनों से लेकर लोकप्रिय स्ट्रीट फ़ूड तक, विविध स्वादों को एक साथ लाता है।

इस वर्ष, यह महोत्सव 12 से 14 दिसंबर, 2025 तक जवाहरलाल नेहरू स्टेडियम, नई दिल्ली में आयोजित किया जाएगा, जिसमें क्रिएट इन इंडिया चैलेंज – सीजन 1 के विजेताओं की समृद्ध और विविध प्रतिभा का प्रदर्शन किया जाएगा, साथ ही प्रसिद्ध गायक कैलाश खेर, अभिनेता आशीष विद्यार्थी, श्रीलंकाई पॉप कलाकार योहानी, गीतकार और गायक अमिताभ एस वर्मा और हिप-हॉप कलाकार एमसी स्क्वायर और कुल्लर जी भी प्रस्तुति देंगे।

 

तीन दिवसीय सांस्कृतिक समारोह में रोमांचक सीआईसी संगीत कार्यक्रम शामिल होंगे:

1. बैंड शिवोहम (बैटल ऑफ़ बैंड्स) – सदस्य पैडी, सनी, आशु और हितेश सूफ़ी धुनें और बॉलीवुड के क्लासिक गाने प्रस्तुत करेंगे।

2. चिराग तोमर (सिम्फनी ऑफ़ इंडिया) – तालवादक साहिल वर्मा के साथ लोकप्रिय बॉलीवुड हिट गाने प्रस्तुत करेंगे।

3. निशु शर्मा (बैटल ऑफ़ बैंड्स) – राजस्थानी लोक संगीत प्रस्तुत करेंगे।

4. नयन कृष्णा (सिम्फनी ऑफ़ इंडिया) – बाँसुरी वादन प्रस्तुत करेंगे।

5. मालदीव का एक विजेता बैंड पहली बार भारत में प्रस्तुति देगा, जिससे इस कार्यक्रम में एक अंतर्राष्ट्रीय आयाम जुड़ जाएगा।

सीआईसी और वेव्स पहल के तहत विकसित यह युवा कलाकार राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर अपनी पहचान बना रहे हैं। बैटल ऑफ़ बैंड्स और सिम्फनी ऑफ़ इंडिया के विजेताओं ने वेव्स, मुंबई में अपनी कलात्मक विविधता से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और मेलबर्न में प्रमुख वेव्स बाज़ार ग्लोबल आउटरीच इवेंट्स, ओसाका वर्ल्ड एक्सपो और टोरंटो अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया है। राष्ट्रीय स्ट्रीट फ़ूड महोत्सव में उनकी भागीदारी उनकी रचनात्मक यात्रा में एक और महत्वपूर्ण मील का पत्थर है, जो उन्हें और भी व्यापक और विविध दर्शकों से जुड़ने में मदद करती है।

भारत की रचनात्मक अर्थव्यवस्था को बढ़ावा

यह पहल कलाकारों और उत्साही लोगों को अपनी रचनात्मकता को निखारने, उसे वेव्स मंच के माध्यम से प्रदर्शित करने और अपनी प्रतिभा व रचनात्मकता से धन कमाने के लिए राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर पहुँच बनाने के अवसर प्रदान करने के लिए बनाई गई है, जिससे भारत की रचनात्मक अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

वेव्स और क्रिएट इन इंडिया चैलेंज (सीआईसी) के बारे में

क्रिएट इन इंडिया चैलेंज (सीआईसी) सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की प्रमुख ‘वेव्स’ पहल के अंतर्गत एक पहल है, जिसका उद्देश्य संगीत, फिल्म, एनीमेशन, वीएफएक्स, गेमिंग, कॉमिक्स, एआई, एक्सआर और डिजिटल मीडिया जैसे विभिन्न मीडिया और मनोरंजन क्षेत्रों में भारत की रचनात्मक प्रतिभाओं की पहचान, पोषण, चयन और प्रदर्शन करना है।

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‘आपकी पूंजी, आपका अधिकार’ अभियान से लावारिस संपत्तियों के निपटान में तेजी

नई दिल्ली – भारत सरकार ने बैंक जमा, बीमा, डिविडेंड, शेयर, म्यूचुअल फंड और पेंशन समेत अदावाकृत वित्तीय संपत्तियों को उनके वैध दावेदारों तक पहुंचाने के लिए “आपकी पूंजी, आपका अधिकार” नामक एक राष्ट्रव्यापी अभियान शुरू किया है।

4 अक्टूबर 2025 को शुरू किया गया यह अभियान 3ए फ्रेमवर्क – जागरूकता, पहुंच और कार्यवाही पर आधारित है। यह तीन महीने का अभियान (अक्टूबर-दिसंबर 2025) सभी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश में लागू किया जाएगा। अक्टूबर से 5 दिसंबर 2025 तक, 477 जिलों में जनप्रतिनिधियों, जिला प्रशासन और वित्तीय संस्थानों के अधिकारियों की भागीदारी से शिविर आयोजित किए गए हैं।

अभियान के दौरान पहुंच को उच्चतम करने के लिए, मानक संचालन प्रक्रियाएं (एसओपी), आमतौर पर पूछे जाने वाले प्रश्न (एफएक्यू), और प्रमुख क्षेत्रीय भाषाओं में जागरूकता सामग्री,  साथ ही लघु वीडियो संदेश, का व्यापक रूप से प्रचार-प्रसार किया गया है। दावा प्रक्रिया को सरल बनाने के लिए जिला-स्तरीय शिविरों का आयोजन किया जा रहा है, जिनमें जमीनी स्तर पर डिजिटल प्रदर्शन, हेल्पडेस्क और निर्देशित सहायता शामिल है।

इस अभियान में वित्तीय क्षेत्र के सभी प्रमुख निधि नियामकों – भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई), भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (सेबी), भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई), पेंशन निधि विनियामक और विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) और विनिधानकर्ता शिक्षा और संरक्षण निधि प्राधिकरण (आईईपीएफए) की सहयोगी भागीदारी शामिल है। आरबीआई के उद्गम (अदावाकृत बैंक जमाओं के लिए), आईआरडीएआई के बीमा भरोसा (अदावाकृत बीमा राशि के लिए) और सेबी के मित्रा (अदावाकृत म्यूचुअल फंडों के लिए) जैसे मौजूदा प्लेटफॉर्म ने नागरिकों को अपनी अदावाकृत संपत्तियों का अधिक कुशलता से पता लगाने में योग्य बनाया है। अभियान के पहले दो महीनों के दौरान, लगभग ₹2,000 करोड़ मूल्य की अदावाकृत धनराशि पर उनके वास्तविक स्वामियों की ओर से दावा किया गया है।

यह जानकारी वित्त राज्य मंत्री श्री पंकज चौधरी ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में दी।

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श्री वी सोमन्ना ने तिरुपति-साईनगर शिरडी एक्सप्रेस को हरी झंडी दिखाई

नई दिल्ली – रेल और जल शक्ति राज्यमंत्री श्री वी सोमन्ना ने तिरुपति-साईनगर शिरडी एक्सप्रेस का  नई दिल्ली स्थित रेल भवन से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हरी झंडी दिखा कर शुभारंभ किया।

तिरुपति-साईनगर शिरडी एक्सप्रेस शुरू किए जाने से कई दूरगामी लाभ होंगे। इससे आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक और महाराष्ट्र के बीच रेल संपर्क को काफी मजबूती मिलेगी। यह श्रद्धालुओं के लिए आंध्र प्रदेश की दक्षिण तटीय पट्टी से शिरडी के लिए पहली सीधी ट्रेन सेवा है। यह ट्रेन भारत के दो प्रमुख तीर्थ स्थलों, तिरुपति और शिरडी को सीधे जोड़ कर तीर्थयात्रियों की सुविधा बढ़ाएगी।

इस नई ट्रेन से इसके मार्ग में तीर्थ पर्यटन और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा तथा यह क्षेत्रीय विकास में सहायक होगी। यह यात्रियों को सुरक्षित, आरामदेह और निर्बाध अंतरराज्यीय यात्रा का विकल्प मुहैया कराएगी। इससे तीर्थयात्रियों के समग्र रेल यात्रा अनुभव में वृद्धि होगी। इस साप्ताहिक ट्रेन से तीर्थयात्री निर्बाध यात्रा कर सकेंगे। ट्रेन को एक तरफ की यात्रा पूरी करने में लगभग 30 घंटों का समय लगेगा।

श्री वी सोमन्ना ने तिरुपति-साईनगर शिरडी एक्सप्रेस के शुभारंभ को चार राज्यों के श्रद्धालुओं के लिए एक ऐतिहासिक दिन बताया। उन्होंने कहा कि भारतीय रेल सिर्फ परिवहन का माध्यम नहीं है। यह देश की जीवन रेखा के रूप में क्षेत्रों और संस्कृतियों को जोड़ती भी है।

रेल और जल शक्ति राज्यमंत्री ने कहा कि अब तिरुपति और शिरडी सीधी ट्रेन सेवा से जुड़ गए हैं। यह ट्रेन नेल्लोर, गुंटूर, सिकंदराबाद, बीदर और मनमाड़ समेत 31 महत्वपूर्ण स्थानों पर रुकेगी। उन्होंने कहा कि इस ट्रेन से तीर्थ पर्यटन और कनेक्टिविटी को बढ़ावा मिलने के साथ ही इसके मार्ग और आसपास के क्षेत्रों में आर्थिक गतिविधियों को भी प्रोत्साहन मिलेगा। उन्होंने बताया कि यह ट्रेन महाराष्ट्र, उत्तर कर्नाटक और सिकंदराबाद से सीधी कनेक्टिविटी मुहैया कराएगी। अपने मार्ग में यह एक महत्वपूर्ण शैव मंदिर परली वैजनाथ को भी जोड़ेगी।

श्री वी सोमन्ना ने कहा कि आंध्र प्रदेश में 2014 से रेल अवसंरचना में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि 2009 से 2014 तक आंध्र प्रदेश और तेलंगाना का साझा औसत रेल बजट 886 करोड़ रुपए का था। यह 11 गुना बढ़ कर 2025-26 में 9417 करोड़ रुपए का हो गया। राज्य में 93000 करोड़ रुपए से ज्यादा की परियोजनाओं पर काम जारी है। आंध्र प्रदेश में 2014 से अब तक 1580 किलोमीटर नई रेल पटरियां बिछाई गईं और 100 प्रतिशत विद्युतीकरण पूरा किया गया। राज्य में वर्तमान में 73 अमृत स्टेशन हैं। श्री सोमन्ना ने 800 फ्लाईओवरों और पुलों के निर्माण, 110 लिफ्ट और 40 एस्केलेटर लगाए जाने तथा 16 वंदे भारत (8 जोड़ी) और 6 अमृत भारत (3 जोड़ी) ट्रेन सेवाओं की शुरुआत का भी जिक्र किया।

उन्होंने बताया कि भारतीय रेलवे तिरुपति में तिरुपति अमृत स्टेशन समेत 312 करोड़ रुपए की परियोजनाओं का क्रियान्वयन कर रही है। प्रमुख जारी परियोजनाओं में तिरुपति-पकाला-कटपड़ी मार्ग पर 105 किलोमीटर का दोहरीकरण 1215 करोड़ रुपए के खर्च से किया जा रहा है। कुल 83 किलोमीटर की गुडूर-रेनिगुंटा तीसरी लाइन पर 875 करोड़ रुपए खर्च होंगे। नादिकुड़ी-श्रीकालाहस्ती 310 किलोमीटर नई लाइन पर 5900 करोड़ रुपए का खर्च आएगा। इसके अलावा, 287 किलोमीटर की विजयवाड़ा-गुडूर तीसरी लाइन पर 6235 करोड़ रुपए और 25 किलोमीटर की येरपेडु-पुडी बाईपास लाइन पर 490 करोड़ रुपए खर्च होंगे।

आंध्र प्रदेश के सड़क और भवन तथा अवसंरचना और निवेश मंत्री श्री बीसी जनार्दन रेड्डी ने मुख्य अतिथि के तौर पर समारोह में हिस्सा लिया। इसमें उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों में तिरुपति के सांसद डॉ मदिला गुरुमूर्ति, विधान परिषद सदस्य श्री बी कल्याण चक्रवर्ती, तिरुपति से विधानसभा सदस्य श्री ए श्रीनिवासुलु तथा तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) बोर्ड के सदस्य श्री भानु प्रकाश रेड्डी भी शामिल थे।

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सरकार ने एमएसएमई को वित्तीय, प्रौद्योगिकी और व्यापार सहायता प्रदान करने के लिए कई कदम उठाए हैं

नई दिल्ली  –  सरकार ने देश में सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम-एमएसएमई क्षेत्र से संबंधित चुनौतियों के समाधान के लिए निम्‍नलिखित कदम उठाए हैं।

एमएसएमई को परिभाषित करने के लिए वर्ष 2020 में नए संशोधित मानदंड अपनाए गए। जिन्‍हें 01.04.2025 से पुन:संशोधित किया गया है।

  • i. 01.07.2020 से व्यापार में आसानी के लिए एमएसएमई के लिए उद्यम पंजीकरण।
  1. 02.07.2021 से खुदरा और थोक व्यापारियों को एमएसएमई के रूप में शामिल किया गया है।
  2. एमएसएमई की स्थिति में परिवर्तन होने पर गैर-कर लाभ 3 वर्ष के लिए बढ़ा दिया गया।
  3. प्राथमिकता क्षेत्र ऋण के तहत लाभ प्राप्त करने के लिए अनौपचारिक सूक्ष्म उद्यमों को औपचारिक दायरे में लाने के लिए 11.01.2023 को उद्यम असिस्ट प्लेटफॉर्म का शुभारंभ किया जाएगा।
  • v. एमएसएमई में इक्विटी निवेश के लिए आत्मनिर्भर भारत कोष का परिचालन।
  1. एमएसएमई सहित व्यवसायों के लिए 5 लाख करोड़ रुपये की आपद्कालिक ऋण-व्यवस्था गारंटी योजना (ईसीएलजीएस) की शुरूआत की गई थी। यह योजना 31.03.2023 तक लागू थी। ईसीएलजीएस पर भारतीय स्टेट बैंक की 23.01.2023 की एक शोध रिपोर्ट के अनुसार, लगभग 14.6 लाख एमएसएमई खाते, जिनमें से लगभग 98.3% खाते सूक्ष्म और लघु उद्यम श्रेणियों में थे को गैर-निष्पादित परिसंपत्ति में जाने से बचाया गया।

चमड़ा और वस्त्र क्षेत्र सहित विभिन्न एमएसएमई को पर्याप्त वित्तीय, प्रौद्योगिकी तथा व्यापार सहायता प्रदान करने के लिए कई उपाय किए गए हैं, जिनमें बैंक ऋण पर मार्जिन मनी सब्सिडी प्रदान करके गैर-कृषि क्षेत्र में नए सूक्ष्म उद्यमों की स्थापना के लिए प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, संयंत्र और मशीनरी/उपकरण की खरीद के लिए संस्थागत वित्त पर एससी/एसटी एमएसई को 25% सब्सिडी के प्रावधान के साथ विशेष क्रेडिट लिंक्ड कैपिटल सब्सिडी योजना, 10 करोड़ रुपये तक के गारंटी कवरेज के साथ सूक्ष्म और लघु उद्यमों के लिए संपार्श्विक मुक्त ऋण के लिए क्रेडिट गारंटी योजना, अनौपचारिक सूक्ष्म उद्यमों के लिए 20 लाख रुपये तक के संपार्श्विक मुक्त ऋण, पीएम विश्वकर्मा योजना, मुद्रा ऋण आदि जैसी योजनाएं शामिल हैं।

एमएसएमई चैंपियंस योजना का उद्देश्य प्रक्रियाओं का आधुनिकीकरण, अपव्यय को कम करना, उद्यमों की व्यावसायिक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाना और उनकी राष्ट्रीय एवं वैश्विक पहुँच एवं उत्कृष्टता को सुगम बनाना है। इसके अतिरिक्त, सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्रालय ने एमएसएमई को तकनीकी रूप से विकसित करने और उनकी प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने में सहायता करने के लिए देश भर में प्रौद्योगिकी केंद्र (टीसी) और विस्तार केंद्र (ईसी) स्थापित किए हैं। ये टीसी/ईसी एमएसएमई और कौशल इच्‍छुकों को प्रौद्योगिकी सहायता, कौशल विकास, इनक्यूबेशन और परामर्श जैसी विभिन्न सेवाएं प्रदान करते हैं।

यह जानकारी सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम राज्य मंत्री सुश्री शोभा करंदलाजे ने आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

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आरपीएफ हटिया और फ्लाइंग टीम रांची ने मिलकर हटिया स्टेशन से साढ़े ग्यारह लाख का गाँजा किया बरामद

रांची,09.12.2025   –  आरपीएफ रांची के कमांडेंट श्री पवन कुमार के निर्देश पर आरपीएफ हटिया और फ्लाइंग टीम रांची द्वारा दिनांक 08.12.2025 को हटिया रेलवे स्टेशन में संयुक्त कार्रवाई के दौरान बड़ी सफलता हासिल की गई।

ड्यूटी पर तैनात उपनिरीक्षक संतोष कुमार सिंह और फ्लाइंग टीम ने संदिग्ध रूप से बैठे दो व्यक्तियों की जांच की, जिनके बैगों से प्लास्टिक में पैक कुल 23 किलोग्राम गांजा बरामद किया गया, जिसकी अनुमानित कीमत ₹11,50,000 है। आरपीएफ के सहायक सुरक्षा आयुक्त, रांची श्री अशोक कुमार सिंह की उपस्थिति में सभी कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए चारों पैकेटों की DD किट से जांच की गई, जो पॉजिटिव पाए गए।

बाद मे उक्त गांजे को जब्त कर उन्हें आगे की कानूनी कार्रवाई हेतु जीआरपी हटिया को सुपुर्द कर दिया गया। इस कार्रवाई में आरपीएफ हटिया के उपनिरीक्षक एस.के. सिंह तथा फ्लाइंग टीम रांची के स्टाफ दिनेश प्रसाद, आर.के. सिंह, हेमंत और वी.एल. मीणा की महत्वपूर्ण भूमिका रही।

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जल सुरक्षा ही राष्ट्रीय सुरक्षा है: भारत ने नागालैंड में मिशन वाटरशेड को आगे बढ़ाया

कोहिमा  – ग्रामीण विकास और संचार राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्रशेखर ने भारत की जल सुरक्षा को सुदृढ़ करने और सतत ग्रामीण विकास को आगे बढ़ाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम के रूप में, कोहिमा के नागा सॉलिडेरिटी पार्क में राज्य स्तरीय वाटरशेड महोत्सव 2025 का शुभारंभ किया।

 

यह कार्यक्रम जल-अभावग्रस्त क्षेत्रों को जल-सुरक्षित, जलवायु-अनुकूल परिदृश्यों में रूपांतरित करने की भारत सरकार की प्रतिबद्धता में एक प्रमुख उपलब्धि है। यह प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व के अनुरूप है, जिन्होंने उत्तर पूर्वी राज्यों को निरंतर भारत की विकास यात्रा के केंद्र में रखा है।

डॉ. पेम्मासानी ने मिशन वाटरशेड पुनरुत्थान का शुभारंभ करते हुए रेखांकित किया कि जल सुरक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा है। यह मिशन पारंपरिक जल निकायों को पुनर्जीवित करने, बंजर भूमि को बहाल करने, जल संचयन प्रणालियों को मजबूत करने और सामुदायिक भागीदारी तथा मनरेगा जैसी योजनाओं के साथ संयोजन के माध्यम से स्थायी आजीविका सुनिश्चित करने पर केंद्रित है।

डॉ. पेम्मासानी ने कहा कि भविष्य उन लोगों का है जो अपनी प्राकृतिक नींव को संरक्षित रखते हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि वाटरशेड विकास का मतलब सिर्फ जल प्रबंधन नहीं है, बल्कि ग्रामीण भारत की पारिस्थितिकी बुनियाद का पुनर्निर्माण करना, आजीविका का सृजन करना और आने वाली पीढ़ियों के लिए समृद्धि सुनिश्चित करना है।

उन्होंने कहा कि अपनी समृद्ध पारिस्थितिक और सांस्कृतिक विरासत के साथ, नागालैंड समुदाय-नेतृत्व वाले वाटरशेड प्रबंधन में अग्रणी है। यहां झरनों का जीर्णोद्धार, जल संचयन संरचनाओं का नवीनीकरण और भूमि संसाधनों का पुनरुद्धार केवल एक पर्यावरणीय प्रयास नहीं है – यह भावी पीढ़ियों के लिए जीवन रेखा है।

नागालैंड मानवीय भावना और सांस्कृतिक गतिशीलता का एक सशक्त प्रतीक है। इसकी समृद्ध परंपराएं, विविध भाषाएं, जीवंत संगीत, जटिल शिल्प और मनाए जाने वाले प्रसिद्ध त्यौहार, गरिमा और साहस में निहित एक सभ्यता को दर्शाते हैं और साथ-साथ विश्व के समक्ष असाधारण गर्मजोशी भी प्रदर्शित करते हैं। नागालैंड का अनुभव करने के लिए यह अवलोकन करना आवश्यक है कि किस प्रकार नागालैंडवासी गर्व के साथ अपनी पहचान को संजोते हैं, साथ ही एकता, परंपरा और अपनी पैतृक विरासत से अटूट जुड़ाव के माध्यम से जीवन का निरंतर उत्सव मनाते हैं।

दशकों तक, पूर्वोत्तर को राष्ट्रीय मुख्यधारा से अलग-थलग समझा जाता रहा। विकास के वर्तमान विजन के तहत, नागालैंड को अब एक दूरस्थ सीमा के रूप में नहीं, बल्कि भारत की विकास यात्रा में एक केंद्रीय भागीदार के रूप में देखा जाता है। बढ़ती कनेक्टिविटी, मज़बूत बुनियादी ढांचे और बेहतर डिजिटल पहुंच के साथ, यह राज्य पर्यटन, व्यापार, कृषि और सांस्कृतिक आदान-प्रदान के केंद्र के रूप में तेज़ी से उभर रहा है। यह सिद्ध करता है कि इसकी सबसे बड़ी शक्ति इसकी गहरी विरासत में निहित है, जो भविष्य के नए अवसरों से सुसज्जित है।

पीएमकेएसवाई और वाटरशेड विकास के अंतर्गत नागालैंड में प्रमुख उपलब्धियां:

  • राज्य में 14 वाटरशेड परियोजनाओं को मंजूरी
  • 140 करोड़ रुपए स्वीकृत, जिसमें से 80 करोड़ रुपए पहले ही जारी किए जा चुके हैं
  • 555 जल संचयन संरचनाओं का नवीनीकरण
  • 6,500 से अधिक किसान लाभान्वित
  • पहाड़ी और जनजातीय क्षेत्रों के लिए महत्वपूर्ण 120 झरनों का जीर्णोद्धार

डॉ. पेम्मासानी ने रेखांकित किया कि अन्य राज्यों के विपरीत, जहां परियोजना वित्तपोषण 60:40 केन्द्र-राज्य अनुपात पर आधारित है, नागालैंड सहित पूर्वोत्तर राज्यों को 90 प्रतिशत केन्द्रीय सहायता प्राप्त होती है, जो इस क्षेत्र में विकास को गति देने पर सरकार के विशेष फोकस को दर्शाता है।

उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत में विश्व का केवल 4 प्रतिशत नवीकरणीय ताज़ा पानी उपलब्ध है, लेकिन वैश्विक जनसंख्या में उसकी 18 प्रतिशत हिस्सेदारी है। इसलिए देश को अनिवार्य रूप से प्रणालीगत जल संरक्षण और कुशल संसाधन प्रबंधन को प्राथमिकता देनी चाहिए। वर्तमान में प्रति व्यक्ति जल उपलब्धता पहले से ही जल-संकट के मानक से नीचे है, ऐसे में प्रधानमंत्री कृषि सिंचाई योजना (पीएमकेएसवाई) और वाटरशेड कार्यक्रम कदम जैसे कि- किसानों की आय में वृद्धि, भूजल स्तर में सुधार और बहु-फसल चक्रों को सक्षम बनाना-रूपांतरकारी साबित हुए हैं।

डॉ. पेम्मासानी चंद्रशेखर ने मुख्यमंत्री श्री नेफ्यू रियो के मार्गदर्शन में नागालैंड सरकार के नेतृत्व, इसके प्रभावी कार्यान्वयन और जन-केंद्रित दृष्टिकोण के लिए सराहना की। उन्होंने जमीनी स्तर पर प्रभावशाली बदलाव लाने के लिए डॉ. जी. हुकुघा सेमा, आईआरएस और श्री जी. इकुतो झिमोमी सहित अधिकारियों के प्रयासों की भी प्रशंसा की।

जनभागीदारी के माध्यम से अधिकाधिक सामुदायिक भागीदारी की अपील करते हुए डॉ. पेम्मासानी ने नागरिकों से जल और भूमि संसाधनों के संरक्षण और सतत उपयोग में सक्रिय रूप से शामिल होने का आग्रह किया।

यह कार्यक्रम प्रधानमंत्री के जल सुरक्षित भारत के विजन को साकार करने के लिए सहकारी संघवाद की भावना से केन्द्र और राज्य द्वारा मिलकर काम करने का एक सशक्त उदाहरण है।

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राँची जिले में बड़े पैमाने पर विभिन्न प्रकार के वाहनों की सघन जाँच अभियान

उपायुक्त सह जिला दण्डाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देश में राँची जिले के विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार के वाहनों (ट्रक,

हाइवा, डंपर आदि) के विरुद्ध अभियान चलाया गया

कागजात पूर्ण नहीं रखने पर 72,650 रुपये का जुर्माना, 05 वाहन जप्त

नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के विरुद्ध लगातार इस प्रकार के सघन अभियान चलाए जाते रहेंगे तथा कड़ी कार्रवाई की जाएगी

रांची,08.12.2025  –  उपायुक्त सह जिला दण्डाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देश में आज दिनांक 08.12.2025 को जिला परिवहन पदाधिकारी, राँची श्री अखिलेश कुमार के नेतृत्व एवं पर्यवेक्षण में राँची जिले के विभिन्न क्षेत्रों में विभिन्न प्रकार के वाहनों (ट्रक, हाइवा, डंपर आदि) के विरुद्ध अभियान चलाया गया।

अभियान का मुख्य उद्देश्य सड़क सुरक्षा सुनिश्चित करना, ओवरलोडिंग पर अंकुश लगाना तथा मोटरयान अधिनियम एवं नियमों का कड़ाई से अनुपालन कराना रहा।

निम्न स्थानों में चला वाहन जाँच अभियान

मोरहाबादी, बोडया, रिंग रोड,बीआईटी मेसरा,सिल्ली थाना क्षेत्र

जाँच के दौरान पाई गई प्रमुख अनियमितताएँ

टैक्स अपडेट नहीं

फिटनेस प्रमाण-पत्र समाप्त

वैध बीमा (इंश्योरेंस) का अभाव

प्रदूषण नियंत्रण प्रमाण-पत्र (PUC) नहीं
परमिट के बिना संचालन

वैध ड्राइविंग लाइसेंस का अभाव
निर्धारित भार से अधिक माल लादकर ओवरलोडिंग

कुल 05 व्यवसायिक वाहनों पर मोटरयान अधिनियम की विभिन्न धाराओं के अंतर्गत कुल रु. 72,650/- (बहत्तर हजार छह सौ पचास रुपये) का दण्ड अधिरोपित किया गया।

गम्भीर अनियमितताओं के कारण निम्नलिखित वाहनों को जप्त कर सुरक्षित स्थानों पर रखा गया :

01 हाइवा → मोराहबादी TOP पर जप्त।

01 वाहन → सिल्ली थाना में जप्त

03 वाहन → बीआईटी मेसरा TOP पर जप्त

नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के विरुद्ध लगातार इस प्रकार के सघन अभियान चलाए जाते रहेंगे तथा कड़ी कार्रवाई की जाएगी

जिला प्रशासन द्वारा विभिन्न प्रकार वाहन चालकों एवं मालिकों से अपील की गई है कि वे अपने वाहनों के सभी आवश्यक दस्तावेज (टैक्स, फिटनेस, इंश्योरेंस, PUC, परमिट, ड्राइविंग लाइसेंस) को सदैव अद्यतन रखें तथा निर्धारित भार से अधिक माल नहीं लादें। नियमों का उल्लंघन करने वाले वाहनों के विरुद्ध लगातार इस प्रकार के सघन अभियान चलाए जाते रहेंगे तथा कड़ी कार्रवाई की जाएगी।

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झारखंड के युवाओं का सेना में प्रवेश जारी, ARO रांची से अग्निवीर अभ्यर्थियों का चरणबद्ध डिस्पैच, दूसरी मेरिट लिस्ट भी जल्द जारी किया जाएगा

आर्मी रिक्रूटमेंट ऑफिस (ARO) रांची द्वारा अगस्त–सितंबर 2025 में आयोजित भर्ती रैली में सफल हुए अग्निवीर अभ्यर्थियों का रेजिमेंटल सेंटरों के लिए चरणबद्ध डिस्पैच जारी

अग्निवीर जीडी, क्लर्क/एसकेटी, ट्रेड्समैन, टेक्निकल और नर्सिंग असिस्टेंट सहित सभी श्रेणियों के अभ्यर्थी में अब तक लगभग 750 उम्मीदवारों का चयन हो चुका है

रांची,08.12.2025  –   झारखंड — झारखंड के युवाओं के लिए भारतीय सेना में शामिल होने का मार्ग लगातार आगे बढ़ रहा है। आर्मी रिक्रूटमेंट ऑफिस (ARO) रांची द्वारा अगस्त–सितंबर 2025 में आयोजित भर्ती रैली में सफल हुए अग्निवीर अभ्यर्थियों का रेजिमेंटल सेंटरों के लिए चरणबद्ध डिस्पैच जारी है।

अग्निवीर जीडी, क्लर्क/एसकेटी, ट्रेड्समैन, टेक्निकल और नर्सिंग असिस्टेंट सहित सभी श्रेणियों के अभ्यर्थी में अब तक लगभग 750 उम्मीदवारों का चयन हो चुका है

अब तक लगभग 750 उम्मीदवारों का चयन हो चुका है, जिनमें अग्निवीर जीडी, क्लर्क/एसकेटी, ट्रेड्समैन, टेक्निकल और नर्सिंग असिस्टेंट सहित सभी श्रेणियों के अभ्यर्थी शामिल हैं।

सभी को एक बार में नहीं भेजा जा रहा है, बल्कि प्रतिदिन छोटे-छोटे बैचों में उम्मीदवारों का डिस्पैच किया जा रहा है, जिससे प्रक्रिया व्यवस्थित और त्रुटिरहित बनी रहे।

ARO रांची की टीम डॉक्यूमेंटेशन, मेडिकल वेरिफिकेशन, क्लियरेंस और रेजिमेंट-वार अलॉटमेंट की प्रक्रिया को अत्यंत सावधानी और निरंतर प्रयासों के साथ पूरा कर रही है। अधिकारियों ने बताया कि चरणबद्ध डिस्पैच का उद्देश्य है कि हर उम्मीदवार को सही मार्गदर्शन और व्यक्तिगत सहायता मिल सके।

दूसरी मेरिट लिस्ट जल्द होगी जारी होगी

ARO रांची ने यह भी बताया है कि दूसरी मेरिट लिस्ट शीघ्र जारी की जाएगी। इसके अंतर्गत और भी योग्य उम्मीदवारों को चयनित किया जाएगा।

अभ्यर्थियों अपने सभी आवश्यक दस्तावेज़ पहले से तैयार रखें

अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे अपने सभी आवश्यक दस्तावेज़ पहले से तैयार रखें, क्योंकि मेरिट लिस्ट जारी होने के बाद डिस्पैच के लिए समय कम मिलेगा और प्रक्रिया तेज़ी से पूरी की जाएगी।

चरणबद्ध डिस्पैच के माध्यम से ये युवा विभिन्न रेजिमेंटल सेंटरों में प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे और भारतीय सेना की शक्ति में नया जोश भरेंगे

अग्निवीर योजना ने झारखंड के युवाओं को न केवल रोजगार का अवसर दिया है, बल्कि अनुशासन, साहस और राष्ट्रसेवा की राह भी प्रदान की है। चरणबद्ध डिस्पैच के माध्यम से ये युवा विभिन्न रेजिमेंटल सेंटरों में प्रशिक्षण प्राप्त करेंगे और भारतीय सेना की शक्ति में नया जोश भरेंगे।

ARO रांची ने सभी चयनित उम्मीदवारों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा है कि पूरी प्रक्रिया समयबद्ध तरीके से पूरी की जाएगी और अभ्यर्थियों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाएगी।

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जेसीआई रांची का चुनाव संपन्न, अभिषेक जैन बने टीम 2026 के अध्यक्ष, सचिव साकेत अग्रवाल

रांची – जेसीआई रांची की टीम 2026 का गठन हुआ, जिसमें जेसी अभिषेक जैन सर्वसम्मति से नव निर्वाचित अध्यक्ष वहीं साकेत अग्रवाल सचिव घोषित हुए। नई टीम 2026 के उपाध्यक्ष के पद पर आदित्य जालान, अनुभव अग्रवाल, अनिमेष निखिल, रवि आनंद, निशांत मोदी और निखिल अग्रवाल चुने गए। सह सचिव मनदीप सिंह व कोषाध्यक्ष ऋषभ जैन चुने गए। साथ ही संस्था के निदेशक ऋषभ जालान, अमन सिंघानिया, निखिल मोदी, ऋषभ छापड़िया, नितिन पोद्दार, उदित तुलस्यान, अमन पोद्दार, अग्निश मित्रा, किशन अग्रवाल, अनीश जैन, मयंक अग्रवाल, ऋषभ अग्रवाल, दीपक कुमार पटेल, रविकांत समोटा, अभिषेक नर्नोली, शुभम बुधिया, मोहित बागला, अंकित अग्रवाल, सृजन हेतमसरिया व अंकित मोदी चुने गए।

चुनाव प्रक्रिया में मुख्य चुनाव आयुक्त का पदभार पूर्व अध्यक्ष विक्रम चौधरी, अमित खोवाल व गौरव अग्रवाल ने निष्ठापूर्वक निभाया।
तत्कालीन अध्यक्ष प्रतीक जैन ने नव निर्वाचित अध्यक्ष को माला पहना कर उन्हें बधाई दी, वही साकेत अग्रवाल ने धन्यवाद ज्ञापन कर सभी का धन्यवाद किया।

चुनाव प्रक्रिया में पूर्व अध्यक्ष राकेश जैन, आनंद धानुका, अभिषेक केडिया, मनीष रामसिसरिया, नारायण मुरारका, अरविंद राजगढ़िया, दीपक कुमार अग्रवाल का विशेष योगदान रहा।

यह जानकारी संस्था के प्रवक्ता आदित्य जालान ने सांझा की।

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बिहार में एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय

नई दिल्ली – वर्ष 2018-19 के केंद्रीय बजट में, भारत सरकार ने घोषणा की, कि जनजातीय बच्चों को उनके अपने वातावरण में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा प्रदान करने के लिए, 50% से अधिक अनुसूचित जनजाति आबादी और कम से कम 20,000 जनजातीय लोगों (2011 की जनगणना के अनुसार) वाले प्रत्येक प्रखंड में ईएमआरएस स्थापित किए जाएंगे। बिहार के भागलपुर जिले का कोई भी प्रखंड इन दोहरे मानदंडों को पूरा नहीं करता है।

बिहार में स्वीकृत ईएमआरएस का ब्यौरा निम्नानुसार है:

1. झाझा, जमुई जिला

2. रामनगर, पश्चिम चंपारण जिला

3. अधौरा, कैमूर जिला

पूर्णिया, बांका और मुंगेर जिलों का कोई भी प्रखंड, ईएमआरएस मंज़ूरी के लिए आवश्यक दोहरे मापदंडों को पूरा नहीं करता है।

ईएमआरएस की आवश्यकता की समय-समय पर समीक्षा की जाती है।

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केवल वित्तपोषण ही नहीं, बल्कि मार्गदर्शन भी स्टार्टअप्स की अगली पीढ़ी को आकार देगा: डॉ. जितेंद्र सिंह

नई दिल्ली – केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्टार्टअप्स को भारत के भविष्य के विकास का एक प्रमुख चालक बताते हुए कहा कि केवल वित्तपोषण ही नहीं, बल्कि मार्गदर्शन भी स्टार्टअप्स की अगली पीढ़ी को आकार देगा।

मंत्री ने आज यहां भारत अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव (आईआईएसएफ) में उद्यमियों और छात्रों के साथ बातचीत करते हुए मजबूत मार्गदर्शन, अनुसंधान में जोखिम उठाने और युवा नवप्रवर्तकों को सहायता प्रदान करने की आवश्यकता पर बल दिया।

महोत्सव के दूसरे दिन “स्टार्टअप जर्नी” पर एक पैनल चर्चा के दौरान, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत विज्ञान शिक्षा तक सीमित पहुंच जैसी स्थिति से एक ऐसे चरण में पहुंच गया है जहां अवसरों का लोकतांत्रिकीकरण हो रहा है तथआ छोटे शहरों एवं सामान्य पृष्ठभूमि की प्रतिभाओं को उद्यमिता का अवसर प्राप्त हो रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार का ध्यान नीतिगत मुद्दों से हटकर विचारों को बाज़ार से जोड़ने वाले सहायक तंत्रों के निर्माण पर केंद्रित हो गया है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के निरंतर प्रयासों से बार्क, राष्ट्रीय मिशन और क्षेत्र-विशिष्ट कार्यक्रमों जैसे योजना बनाने में मदद मिली है, जो स्टार्टअप्स को वित्त पोषण, उद्योग भागीदारों एवं मार्गदर्शकों से जोड़ते हैं। इस बात पर बल देते हुए कि नवाचार में अनिवार्य रूप से विफलता शामिल होती है, उन्होंने कहा कि अगर स्टार्टअप्स को वैश्विक स्तर पर आगे बढ़ना है और प्रतिस्पर्धा करनी है, तो भारत को अनुसंधान एवं विकास में जोखिम की पहचान एवं स्वीकार करना सीखना होगा।

मंत्री ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कैसे विज्ञान की प्रगति से भारत में रोज़मर्रा की ज़िंदगी बदल गई है। उन्होंने स्वास्थ्य सेवा प्रौद्योगिकियों एवं जैव प्रौद्योगिकी में हुई प्रगति का हवाला दिया जो एक समय में केवल विदेशों में ही सुलभ थी। व्यापक समानता का उदाहरण देते हुए उन्होंने कहा कि आज देश न केवल वैश्विक प्रौद्योगिकियों को अपना रहा है बल्कि जीवन विज्ञान से लेकर डिजिटल प्लेटफ़ॉर्म तक, सभी क्षेत्रों में मौलिक समाधानों में तेजी से योगदान भी दे रहा है।

युवा उद्यमियों, जिनमें से कई छात्र थे, के सवालों का जवाब देते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्टार्टअप शुरू करने से पहले उद्देश्य एवं योग्यता के महत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि युवा नवप्रवर्तकों को अपनी ताकत समझने, विचारों को निखारने और आम गलतियों से बचने में मदद करने के लिए शुरुआती स्तर पर मार्गदर्शन बहुत आवश्यक है। सरकारी पहलों का उल्लेख करते हुए, उन्होंने कहा कि छात्रों, विशेषकर लड़कियों के लिए बनाए गए कार्यक्रमों का विस्तार किया जा रहा है ताकि प्रतिभा की जल्द पहचान हो सके और उन्हें व्यवस्थित मार्गदर्शन प्राप्त हो सके।

प्रतिभागियों द्वारा उठाई गई नियामक चिंताओं पर, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार धीरे-धीरे उद्यमियों पर बोझ कम करने के लिए विनियमन में ढील, लाइसेंस खत्म करने एवं अपराधमुक्त करने की दिशा में बढ़ रही है। उन्होंने कहा कि इन सुधारों का उद्देश्य स्टार्टअप्स को अनुपालन के बजाय नवाचार पर ध्यान केंद्रित करने देना साथ ही जवाबदेही सुनिश्चित करना है।

कार्यक्रम में स्टार्टअप संस्थापकों एवं वरिष्ठ प्रशासकों ने अपना अनुभव भी साझा किया, जिनमें स्वास्थ्य सेवा और जैव प्रौद्योगिकी में प्रौद्योगिकी-आधारित समाधानों का उदाहरण शामिल था जो वंचित आबादी तक पहुंच रहे हैं। डॉ. जितेंद्र सिंह ने इन अनुभवों का स्वागत किया और कहा कि सार्वजनिक-निजी भागीदारी भारत की नवाचार रणनीति का केंद्रबिंदु बनी हुई है।

अपनी वक्तव्य को समाप्त करते हुए, केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आईआईएसएफ जैसे मंच नीति निर्माताओं, वैज्ञानिकों एवं महत्वाकांक्षी उद्यमियों को एक साथ लाने के लिए हैं। उन्होंने कहा कि बच्चों में जिज्ञासा जगाना एवं उन्हें प्रश्न पूछने का आत्मविश्वास देना, वित्त पोषण या अवसंरचना जितना ही महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत अपने नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र को 2047 के लिए निर्धारित लक्ष्यों के लिए तैयार कर रहा है।

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रक्षा मंत्री ने वीर नारियों, भूतपूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों के कल्याण के लिए सशस्त्र सेना झंडा दिवस कोष में उदारतापूर्वक योगदान देने की अपील की

नई दिल्ली  – राष्ट्र 7 दिसंबर, 2025 को सशस्त्र सेना झंडा दिवस (एएफएफडी) मना रहा है जो सशस्त्र बलों की बहादुरी, समर्पण, बलिदान और अटूट प्रतिबद्धता का सम्मान करने का एक पवित्र अवसर है। रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने बाहरी और आंतरिक, दोनों ही चुनौतियों से राष्ट्र की रक्षा करने वाले वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की और एएफएफडी कोष में उदारतापूर्वक योगदान के माध्यम से पूर्व सैनिकों, विकलांग कर्मियों और उनके परिवारों के कल्याणकारी कार्यक्रमों का समर्थन करने वाले नागरिकों और संगठनों के प्रति गहरा आभार व्यक्त किया। उन्होंने लोगों से इस कोष में दान देना जारी रखने और भूतपूर्व सैनिकों, वीर नारियों और शहीद नायकों के आश्रितों के सम्मानजनक पुनर्वास और कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराने का आह्वान किया।

 

रक्षा मंत्री ने इस अवसर पर अपने संदेश में कहा, ‘‘सशस्त्र सेना झंडा दिवस पर, मैं हमारे सशस्त्र बलों के पराक्रम और बलिदान को नमन करता हूं। उनका साहस हमारे राष्ट्र की रक्षा करता है और उनकी निस्वार्थ सेवा हमें उस ऋण की याद दिलाती है जिसे हम कभी चुका नहीं सकते। मैं सभी से सशस्त्र सेना झंडा दिवस कोष में उदारतापूर्वक योगदान देने का आग्रह करता हूं। आपका समर्थन उनके समर्पण का सम्मान करता है और हमारी रक्षा करने वालों को मजबूती प्रदान करता है।’’

 

रक्षा राज्य मंत्री श्री संजय सेठ ने भारत की संप्रभुता की रक्षा में सशस्त्र बलों की महत्वपूर्ण भूमिका और रक्षा तथा मानवीय कार्यों में उनकी असाधारण प्रतिबद्धता का उल्‍लेख किया। उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर जैसे अभियानों को उनकी कुशलता और साहस का प्रमाण बताया।

 

सचिव (सैन्य मामलों के विभाग) और चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने भारत की रक्षा तैयारियों और राष्ट्रीय सुरक्षा में सेवारत कर्मियों, पूर्व सैनिकों और वीर नारियों की दृढ़ सेवा, अदम्य साहस और निरंतर योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा, ‘‘हम अपने सैनिकों, नौसैनिकों और वायु योद्धाओं की अटूट प्रतिबद्धता, असाधारण वीरता और सर्वोच्च बलिदान का सम्मान करते हैं जिन्होंने सभी सीमाओं और क्षेत्रों में राष्ट्र की संप्रभुता की दृढ़ता से रक्षा की है।’’

रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह ने कहा कि राष्ट्र सशस्त्र बलों के साहस, वीरता और कर्तव्य के प्रति अटूट समर्पण के लिए उनका ऋणी है। उन्होंने आगे कहा, ‘‘सशस्त्र बल न केवल हमारी सीमाओं की रक्षा करते हैं, बल्कि आतंकवाद और उग्रवाद का भी मुकाबला करते हैं। इस कर्तव्य का पालन करते हुए, अनेक सैनिक मातृभूमि की सेवा में अपना सर्वोच्च बलिदान देते हैं।’’

रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव तथा डीआरडीओ के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत और सचिव (रक्षा उत्पादन) श्री संजीव कुमार ने भी सशस्त्र बलों के कर्मियों और उनके परिवारों को शुभकामनाएं दीं तथा राष्ट्रीय हितों की रक्षा में उनके साहस और देशभक्ति को नमन किया।

सचिव (पूर्व सैनिक कल्याण विभाग) श्रीमती सुकृति लिखी ने विभिन्न खतरों से राष्ट्र की रक्षा करने तथा प्राकृतिक आपदाओं के दौरान सहायता प्रदान करने के लिए बहादुर सशस्त्र बलों के प्रति आभार व्यक्त किया।

भूतपूर्व सैनिक कल्याण विभाग, वीर नारियों, शहीद सैनिकों के आश्रितों और पूर्व सैनिकों, जिनमें विकलांग भी शामिल हैं उनके कल्याण और पुनर्वास के लिए उनकी पहचान की गई व्यक्तिगत आवश्यकताओं के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए कार्यरत है। एएफएफडी कोष के माध्यम से एकत्रित धनराशि का उपयोग विवाह, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि के लिए सहायता और वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए किया जाता है। 1 नवंबर, 2025 से निर्धनता अनुदान 4,000 रुपये से दोगुना होकर 8,000 रुपये प्रति माह, पुत्री विवाह अनुदान 50,000 रुपये से बढ़कर 1,00,000 रुपये और शिक्षा अनुदान 1,000 रुपये से बढ़कर 2,000 रुपये प्रति माह प्रति बच्चा हो गया है।

वर्ष 2024-25 के दौरान, 1.78 लाख से अधिक लाभार्थियों को कल्याणकारी सहायता के रूप में लगभग 370 करोड़ रुपये वितरित किए गए। इसके अलावा, देश भर में 36 युद्ध स्मारक छात्रावासों, किरकी और मोहाली स्थित पैराप्लेजिक पुनर्वास केंद्रों और देहरादून, लखनऊ तथा दिल्ली स्थित चेशायर होम्स को संस्थागत अनुदान प्रदान किए गए।

एएफएफडी कोष में योगदान आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80जी(5)(vi) के तहत आयकर से मुक्त है। योगदान निम्नलिखित बैंक खातों में चेक/डीडी/एनईएफटी/आरटीजीएस के माध्यम से किया जा सकता है:

क्र. सं. बैंक का नाम और पता खाता संख्या आईएफएससी कोड
1 पंजाब नेशनल बैंक, सेवा भवन, आर.के.पुरम, नई दिल्ली-110066 3083000100179875 पीयूएनबी0308300
2 भारतीय स्टेट बैंक आर.के.पुरम नई दिल्ली-110066 34420400623 एसबीआईएन0001076
3 आईसीआईसीआई बैंक आईडीए हाउस, सेक्टर-4, आरके पुरम नई दिल्ली-110022 182401001380 आईसीआईसी0001824

लोग यूपीआई आईडी: affdf@icici के जरिए भी योगदान दे सकते हैं। कोष में दान करने के लिए निम्नलिखित क्‍यूआर कोड को भी स्कैन किया जा सकता है:

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श्री मनोहर लाल ने कहा कि एआई और मशीन लर्निंग आधारित अनुप्रयोग भारत के विद्युत क्षेत्र में परिवर्तन लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे

नई दिल्ली  – विद्युत मंत्री श्री मनोहर लाल ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और मशीन लर्निंग (एमएल) आधारित अनुप्रयोग बुद्धिमान, उपभोक्ता-केंद्रित, स्व-अनुकूलित वितरण नेटवर्क के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। मंत्री महोदय नई दिल्ली के भारत मंडपम में विद्युत वितरण क्षेत्र में एआई/एमएल प्रौद्योगिकियों के उपयोग पर केंद्रित दो दिवसीय राष्ट्रीय सम्मेलन के प्रतिभागियों को संबोधित किया।

उन्होंने कहा कि एआई/एमएल आधारित समाधान, स्मार्ट मीटर एनालिटिक्स, डिजिटल ट्विन्स, पूर्वानुमानित रखरखाव, चोरी का पता लगाने वाली इंटेलिजेंस, उपकरण-स्तरीय उपभोक्ता अंतर्दृष्टि, स्वचालित आउटेज पूर्वानुमान और जेनएआई-आधारित निर्णय समर्थन उपभोक्ता अनुभव और परिचालन दक्षता दोनों को बदल सकते हैं।

 

श्री मनोहर लाल ने राष्ट्रीय सम्मेलन में उद्योग, राज्यों, नवप्रवर्तकों, शिक्षाविदों और प्रौद्योगिकी भागीदारों की सक्रिय भागीदारी की प्रशंसा की। उन्होंने वितरण कंपनियों (डिस्कॉम), उन्नत मीटरिंग अवसंरचना सेवा प्रदाताओं (एएमआईएसपी), प्रौद्योगिकी समाधान प्रदाताओं (टीएसपी) और गृह स्वचालन समाधान प्रदाताओं (एचएएसपी) द्वारा प्रस्तुत एआई/एमएल उपायों की प्रशंसा की।

मंत्री महोदय ने सभी डिस्कॉम कंपनियों से स्मार्ट, विश्वसनीय और उपभोक्ता-केंद्रित वितरण प्रणालियों की ओर बढ़ने के लिए इको-सिस्टम के साथ हितधारकों को मिलकर काम करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं को सक्रिय रूप से शामिल करने की भी आवश्यकता है। नई तकनीकों के बारे में कभी-कभी होने वाली गलत सूचनाओं को दूर करना और इस क्षेत्र में तकनीक को अपनाने के लिए उपभोक्ताओं का बहुमूल्य समर्थन हासिल करना महत्वपूर्ण है।

श्री लाल ने कहा कि एआई/एमएल आधारित समाधान प्रौद्योगिकी के एक शक्तिशाली आख्यान को उजागर करते हैं जो विश्वास बहाल करता है, परिवारों को अपनी खपत को बेहतर ढंग से प्रबंधित करने के लिए सशक्त बनाता है, बिजली कटौती को होने से पहले ही रोक देता है, ईमानदार उपभोक्ताओं को चोरी के बोझ से बचाता है और डिस्कॉम को घाटे को कम करने, बिजली खरीद लागत को अनुकूलित करने और मजबूत बुनियादी ढांचे में पुनर्निवेश करने में सक्षम बनाता है – जिससे भारत डिजिटल बिजली सुधार और भविष्य के लिए तैयार ग्रिड शासन में एक वैश्विक नेता के रूप में स्थापित होता है।

राष्ट्रीय सम्मेलन में बोलते हुए, विद्युत मंत्रालय के सचिव, श्री पंकज अग्रवाल ने डिस्कॉम कंपनियों में डिजिटलीकरण को मज़बूत करने और मापनीय परिचालन और वित्तीय सुधार प्रदान करने वाले एआई/एमएल-आधारित समाधानों को अपनाने को बढ़ावा देने के लिए मंत्रालय की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डाला। उन्होंने क्षमता निर्माण, सुरक्षित डेटा-साझाकरण ढाँचे और अंतर-संचालनीयता के महत्व पर ज़ोर दिया ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि सम्मेलन के दौरान प्रदर्शित नवाचारों को देश भर में ऊर्जा परिवर्तन को सुगम बनाने के लिए देशव्यापी स्तर पर लागू किया जा सके।

इस सम्मेलन में नवाचार के लिए एक राष्ट्रीय आह्वान किया गया और डिस्कॉम, एएमआईएसपी, प्रौद्योगिकी समाधान प्रदाताओं (टीएसपी) और गृह स्वचालन समाधान प्रदाताओं से 195 आवेदन प्राप्त हुए। प्रारंभिक जांच के बाद, सम्मेलन के पहले दिन (6 दिसंबर, 2025) विस्तृत जूरी मूल्यांकन के लिए 51 समाधानों को चुना गया।

विस्तृत मूल्यांकन के बाद, डिस्कॉम श्रेणी में टीएनपीडीसीएल (तमिलनाडु), एमपी ईस्ट (एमपी), एएमआईएसपी श्रेणी में टाटा पावर और अप्रावा, समाधान प्रदाता श्रेणी में प्रवाह और फ्लॉक एनर्जी तथा होम ऑटोमेशन समाधान श्रेणी में टाटा पावर को विजेता घोषित किया गया।

आज, विजेताओं ने अपनी प्रस्तुतियाँ दीं, जिनमें विभिन्न डेटा-आधारित नवाचारों पर प्रकाश डाला गया, जैसे तमिलनाडु द्वारा राजस्व संरक्षण हेतु उन्नत स्मार्ट मीटर विश्लेषण, और मध्य प्रदेश पूर्व द्वारा घाटे को कम करने हेतु सटीक उपभोक्ता सूचकांकीकरण। टीपी पावर प्लस और अप्रावा एनर्जी जैसे एएमआईएसपी ने व्यवहारिक माँग प्रतिक्रिया और एआई-आधारित परिचालन स्वचालन का प्रदर्शन किया, जबकि प्रवाह और फ्लॉक एनर्जी जैसे टीएसपी ने एकीकृत रीयल-टाइम ग्रिड इंटेलिजेंस और उपभोक्ता उपकरण विश्लेषण का प्रदर्शन किया। टाटा पावर ने ऊर्जा उपयोग की निगरानी और नियंत्रण के लिए भविष्योन्मुखी और उपयोगकर्ता-अनुकूल समाधान प्रस्तुत किया।

विद्युत मंत्री ने विजेताओं को सम्मानित किया और उन्हें राज्यों में ऐसे समाधानों को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहित किया।

विद्युत मंत्री श्री मनोहर लाल ने केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण (सीईए) द्वारा विकसित STELLAR (दीर्घकालिक भार पर्याप्तता एवं लचीलेपन के लिए रणनीतिक विस्तार) का भी शुभारंभ किया, जो डिस्कॉम को संसाधन पर्याप्तता अध्ययन करने और दीर्घकालिक पर्याप्तता योजनाएँ तैयार करने में सक्षम बनाएगा। इसके अलावा, इंडिया स्मार्ट ग्रिड फोरम (आईएसजीएफ) ने एआई, एमएल, एआर/वीआर और रोबोटिक्स समाधानों पर हैंडबुक और इलेक्ट्रिक यूटिलिटीज के लिए रोडमैप प्रस्तुत किया, जिसमें 174 उपयोग मामलों पर प्रकाश डाला गया, जिनमें से 45 भारतीय यूटिलिटीज के थे।

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भारतीय नौसेना अकादमी प्रतिष्ठित एडमिरल कप-2025 की मेजबानी करेगी

नई दिल्ली – भारतीय नौसेना अकादमी (आईएनए), एझिमाला—नौसेना अधिकारी प्रशिक्षण के लिए भारत का प्रमुख संस्थान—एडमिरल्स कप 2025 की मेजबानी करने पर गर्व है। इसका आयोजन से 13 दिसंबर 2025 तक किया जाएगा। दुनिया की सबसे प्रतिष्ठित नौसेना नौकायन चैंपियनशिप में से एक के रूप में मान्यता प्राप्त, इस वर्ष के 14वें संस्करण में 35 अंतर्राष्ट्रीय देश भाग लेंगे, जो विश्वस्तरीय प्रतिनिधित्व में विकास को दर्शाता है और अंतरराष्ट्रीय समुद्री समुदाय में इस आयोजन की बढ़ती प्रमुखता की पुष्टि करता है।

2010 में स्थापित, एडमिरल कप का उद्देश्य मित्र विदेशी नौसेनाओं के प्रशिक्षु अधिकारियों के बीच सौहार्द, समुद्री सहयोग और आपसी समझ को बढ़ावा देना है। पिछले कुछ वर्षों में, यह चैंपियनशिप एक प्रतिष्ठित वैश्विक आयोजन के रूप में विकसित हुई है, जो दुनिया भर की नौसेना अकादमियों से शीर्ष नौकायन प्रतिभाओं को आकर्षित करती है। यह प्रतियोगिता अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रशंसित आईएलसीए-6 श्रेणी की सेलबोट्स का उपयोग करके मैच रेसिंग प्रारूप में आयोजित की जाती है, जो अपनी सामरिक कुशाग्रता, शारीरिक मजबूती और सटीक नाविक कौशल के लिए जानी जाती हैं।

इस वर्ष के आयोजन में एशियायूरोपअफ्रीकाओशिनिया और अमेरिका सहित एक विस्तृत भौगोलिक क्षेत्र की टीमें भाग लेंगी, जो विविध समुद्री संस्कृतियों को एक ही प्रतिस्पर्धी मंच पर लाएंगी। यह आयोजन न केवल स्वस्थ खेल प्रतिद्वंद्विता को बढ़ावा देता है, बल्कि विश्व की नौसेनाओं के भावी नेतृत्व के बीच पेशेवर संबंधों को भी मज़बूत करता है।

आईएनए का असाधारण प्रशिक्षण इको-सिस्टम, आधुनिक आउटडोर नौकायन परिसर और एझिमाला के तटीय जल की अनुकूल नौकायन परिस्थितियां इस स्तर की प्रतियोगिता के लिए एक आदर्श वातावरण प्रदान करती हैं। दौड़ के अलावा, मेहमान टीमें सांस्कृतिक आदान-प्रदान, संवाद और आउटरीच गतिविधियों की एक श्रृंखला के माध्यम से अकादमी की परंपराओं, बुनियादी ढांचे और भारतीय नौसेना के लोकाचार का भी अनुभव करेंगी।

दिसंबर 2025 को उद्घाटन समारोह के साथ चैंपियनशिप का औपचारिक उद्घाटन होगा, जिसके बाद चुनौतीपूर्ण समुद्री और तेज़ हवाओं के बीच चार दिनों तक कड़ी प्रतिस्पर्धा होगी। यह आयोजन 13 दिसंबर 2025 को समापन समारोह के साथ समाप्त होगा, जहां सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाली टीमों और उत्कृष्ट व्यक्तिगत नाविकों को पुरस्कार प्रदान किए जाएंगे।

समुद्री साझेदारी की भावना को उजागर करते हुए, एडमिरल कप 2025 वैश्विक नौसैनिक सहयोगअधिकारी प्रशिक्षुओं के व्यावसायिक विकास औरटीम वर्कअनुशासन और खेल कौशल के साझा मूल्यों के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को मजबूत बनाता है।

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संघर्ष को शक्ति में बदलना: रायपुर-विजाग कॉरिडोर का मानवीय प्रभाव

रायपुर – आगामी रायपुर-विशाखापत्तनम आर्थिक गलियारा उन लोगों के लिए एक लंबे समय से प्रतीक्षित समाधान जैसा लगता है जिनकी आजीविका इन दोनों शहरों के बीच के मार्ग पर निर्भर करती है। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय द्वारा विकसित किया जा रहा रायपुर-विशाखापत्तनम आर्थिक गलियारा, छत्तीसगढ़ के जंगलों, ओडिशा के खनिज-समृद्ध क्षेत्रों और आंध्र प्रदेश की पहाड़ियों तक फैला हुआ है। यह गलियारा कुल 16,482 करोड़ रुपये की लागत से बनाया जा रहा है और इसके दिसंबर 2026 तक पूरा होने की उम्मीद है। इससे मौजूदा एनएच-26 की 597 किमी की दूरी घटकर 465 किमी हो जाएगी – जिससे दूरी में 132 किमी और यात्रा समय में लगभग सात घंटे की बचत होगी। इससे ईंधन की बड़ी बचत होगी, जनता और माल ढुलाई ऑपरेटरों के लिए परिवहन लागत कम होगी।

जो काम पहले 12 घंटे में पूरा होता था, वह अब केवल 5 घंटे में पूरा हो जाएगा और प्रधानमंत्री गति शक्ति विजन के तहत तेज लॉजिस्टिक्स और निर्बाध कनेक्टिविटी के द्वार खुलेंगे। छत्तीसगढ़ और ओडिशा के उद्योगों को भी बड़ा बढ़ावा मिलेगा क्योंकि वे सीधे विशाखापत्तनम बंदरगाह और चेन्नई-कोलकाता राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़ जाएंगे। इसका मतलब होगा बंदरगाहों और औद्योगिक केंद्रों से बेहतर कनेक्टिविटी, तेज निर्यात, सुचारू आपूर्ति श्रृंखला और व्यापार को एक मजबूत बढ़ावा, जिससे लॉजिस्टिक्स दक्षता में भारी वृद्धि होगी। यह गलियारा पर्यटन को भी बढ़ावा देगा और रोजगार सृजन तथा रियल एस्टेट विकास के माध्यम से आर्थिक विकास को गति देगा।

तथ्य

  • 6-लेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर छत्तीसगढ़, ओडिशा और आंध्र प्रदेश को जोड़ता है
  • यह 465 किलोमीटर लंबा राष्ट्रीय राजमार्ग है
  • 7 घंटे और 132 किलोमीटर की दूरी कम करने में मदद मिलेगी
  • वित्त वर्ष 2026-27 में जनता के लिए खोला जाएगा
  • आदिवासी एवं दूरस्थ क्षेत्रों तक तीव्र पहुंच

घर से दूर रातें बिताने वाले ट्रक ड्राइवरों, अपनी उपज के बाजार पहुंचने का बेसब्री से इंतजार करने वाले किसानों और नए अवसरों की तलाश में जुटे परिवारों के लिए यह गलियारा एक ज्‍यादा आशाजनक भविष्य की ओर ले जाने वाला रास्ता लगता है। रायपुर से विशाखापत्तनम तक नियमित रूप से माल भेजने वाले एक ट्रक मालिक विशाल कहते हैं कि यह नया गलियारा ट्रांसपोर्टरों के काम करने के तरीके में आमूल-चूल परिवर्तन लाएगा। वे कहते हैं, ‘‘पहले, यात्रा में डेढ़ दिन लगता था। अब, मैं दिन में शुरू कर सकता हूं और रात तक गंतव्य तक पहुंच सकता हूं।’’ वे बताते हैं कि दूरी कम होने से सीधे तौर पर डीजल की खपत कम होगी और ट्रकों की टूट-फूट भी कम होगी जिससे उनके जैसे ऑपरेटरों को ठोस आर्थिक राहत मिलेगी।

किसान भी अपने आर्थिक दृष्टिकोण में स्पष्ट बदलाव महसूस कर रहे हैं। एक किसान बताते हैं कि ग्रीनफील्ड हाईवे परियोजना शुरू होने के बाद से जमीन की कीमतें कैसे बढ़ गई हैं। वे कहते हैं, ‘‘पहले हमारी जमीन की कीमत लगभग 15 लाख रुपये प्रति एकड़ थी। अब यह लगभग 1.5 करोड़ रुपये हो गई है। यहां के किसान वाकई खुश हैं।’’ वे बताते हैं कि कैसे कनेक्टिविटी-आधारित विकास ग्रामीण संभावनाओं को नया रूप दे रहा है।

विजयनगरम के एक स्थानीय निवासी ने ईमानदारी से बताया कि इस परियोजना ने उनके समुदाय को कैसे प्रभावित किया है। वे कहते हैं, ‘‘हम किसान हैं। पहले तो हमें ग्रीनफील्ड हाईवे के लिए अपनी जमीन देने में दुख हुआ। यह आसान नहीं था। लेकिन अब, जैसे-जैसे गलियारा तैयार हो रहा है, हमें उम्मीद जगी है। हमारी जमीन की कीमत दोगुनी से भी ज्‍यादा हो गई है, और हम जानते हैं कि यह विकास हमारे परिवारों के लिए और ज्‍यादा अवसर लेकर आएगा। हमने जो खोया था, वह अब बेहतर भविष्य में बदल रहा है।’’ आंध्र प्रदेश के विजयनगरम ज‍िले के जामी गांव में रहने वाले एक और किसान श्रीनिवासुलु अपना अनुभव साझा करते हैं। वे कहते हैं, ‘‘मैंने ग्रीनफील्ड हाईवे के लिए 1.10 एकड़ जमीन दी है, जिसके लिए मुझे उचित मुआवजा मिला है। इसके अलावा, बाकी जमीन की कीमत में भी काफी व‍ृद्धि हुई है। गांव के ग्रामीण और किसान इस बनने वाले ग्रीनफील्ड हाईवे को लेकर खुश हैं।’’

आर्थिक लाभों के अलावा, रायपुर-विशाखापत्तनम गलियारा धमतरी, केशकाल, कांकेर (छत्तीसगढ़), बोरीगुम्मा, नबरंगपुर, कोरापुट (ओडिशा), और रामभद्रपुरम, अराकू (आंध्र प्रदेश) जैसे आदिवासी और दूरदराज के जिलों की गतिशीलता में उल्लेखनीय सुधार लाएगा। इन क्षेत्रों को प्रमुख बाजारों और आवश्यक सेवाओं के करीब लाकर, इस कॉरिडोर का उद्देश्य उन्हें मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था में अधिक प्रभावी ढंग से एकीकृत करना है। नया प्रवेश-नियंत्रित, 6-लेन वाला रायपुर-विशाखापत्तनम आर्थिक गलियारा पुराने 2-लेन एनएच-26 पर भीड़भाड़ को भी कम करेगा जिससे यात्रा आरामदायक और सड़क सुरक्षा में सुधार होगा। 100 किमी/घंटा की गति के लिए डिजाइन किया गया, यह यात्रियों और मालवाहक ऑपरेटरों, दोनों के लिए बेहतर पूर्वानुमान, विश्वसनीयता और लागत-दक्षता का वादा करता है।

तीन राज्यों में 15 नियोजित परियोजनाओं के माध्यम से निर्मित, रायपुर-विशाखापत्तनम आर्थिक गलियारा, जीवन में बदलाव लाने वाले बुनियादी ढांचे के विकास के लिए सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय की प्रतिबद्धता का प्रमाण है। जैसे-जैसे यह परियोजना पूरी होने के करीब पहुंच रही है, यह मंत्रालय के उस दृष्टिकोण को दर्शाता है जिसके तहत ऐसे राजमार्ग बनाए जाएंगे जो न केवल स्थानों को जोड़ेंगे, बल्कि लाखों लोगों के लिए संभावनाओं को भी जोड़ेंगे।

 

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केंद्रीय वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह ने मेघालय के वस्त्र भविष्य के लिए एक ऐतिहासिक कदम- एकता मेघालय और आईटीटीसी का उद्घाटन किया

मेघालय – केन्द्रीय वस्त्र मंत्री श्री गिरिराज सिंह ने मेघालय के नोंगपोह में एकता (एकेटीए) मेघालय (वस्त्र विकास के लिए प्रदर्शनी सह ज्ञान साझाकरण) और एकीकृत वस्त्र पर्यटन केन्द्र (आईटीटीसी) का उद्घाटन किया। इस कार्यक्रम में वस्त्र एवं विदेश राज्य मंत्री श्री पबित्रा मार्गेरिटा; मेघालय के वस्त्र विभाग के राज्य मंत्री श्री मेतबाह लिंगदोह; केंद्रीय रेशम बोर्ड (सीएसबी) के सदस्य सचिव श्री पी. शिवकुमार और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित हुए।

वस्त्र मंत्रालय के अंतर्गत केन्द्रीय रेशम बोर्ड (सीएसबी) ने वस्त्र विभाग, मेघालय सरकार के सहयोग से एकीकृत वस्त्र पर्यटन केंद्र (आईटीटीसी), नोंगपोह में एकता मेघालय (वस्त्र विकास के लिए प्रदर्शनी सह ज्ञान साझाकरण) के दौरान प्रदर्शनी स्टॉल लगाए।

एकीकृत वस्त्र पर्यटन केंद्र (आईटीटीसी), मेघालय वस्त्र विभाग और भारत सरकार के वस्त्र मंत्रालय की एक खास पहल है। आईटीटीसी को एक व्यापक सांस्कृतिक पहल के तौर पर डिज़ाइन किया गया है, जो मेघालय की अनूठी टेक्सटाइल परंपरा, खासकर एरी सिल्क को उजागर करते हुए अपनी तरह के पहले एक्सपेरिमेंटल डेस्टिनेशन के तहत शिल्प कौशल, संस्कृति, कौशल विकास और आगंतुक अनुभव को एक मंच पर लाता है। एकता मेघालय रेशम, हथकरघा, हस्तशिल्प, जूट और तकनीकी वस्त्रों को एक मंच पर लाता है, जिससे ज्ञान साझाकरण, नवाचार, बाज़ार संपर्क और अंतर-राज्यीय सहयोग को बढ़ावा मिलता है।

श्री गिरिराज सिंह ने अपने संबोधन में वस्त्र उद्योग में पूर्वोत्तर की परिवर्तनकारी क्षमता पर प्रकाश डाला तथा एरी और मुगा रेशम, मूल्य संवर्धन और आजीविका-संचालित विकास पर बल दिया।

श्री पबित्रा मार्गेरिटा ने अपने संबोधन में कारीगरों के सशक्तिकरण, कौशल विकास, प्रौद्योगिकी अपनाने और युवा उद्यमिता पर ध्यान केंद्रित किया तथा एरी सिल्क में मेघालय के नेतृत्व की प्रशंसा की।

श्री पी. शिवकुमार ने रेशम उत्पादन मूल्य श्रृंखला को मजबूत करने के लिए सीएसबी की पहलों पर प्रकाश डाला तथा वैज्ञानिक और बाजार-आधारित हस्तक्षेपों के माध्यम से एरी और मुगा उत्पादन को बढ़ाने के लिए सहयोग की पुष्टि की।

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उम्मीद केंद्रीय पोर्टल की समय सीमा पूरी हुई

नई दिल्ली – केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री श्री किरेन रिजिजू द्वारा भारत में वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन के लिए 6 जून 2025 को शुरू किया गया केंद्रीय पोर्टल उम्मीद भारत के माननीय सर्वोच्‍च न्‍यायालय के स्‍पष्‍ट निर्देशों और उम्‍मीद अधिनियम, 1995 के अनुसार 6 माह की विंडो पूरी होने पर आधिकारिक तौर पर 6 दिसंबर 2025 (शनिवार) को अपलोड के लिए बंद कर दिया गया।

अंतिम गणना में, समय सीमा नजदीक आते ही गति में उल्लेखनीय वृद्धि हुई। कई समीक्षा बैठकों, प्रशिक्षण कार्यशालाओं और सचिव स्तर तक के उच्च-स्तरीय हस्तक्षेपों ने इस प्रक्रिया में नई गति ला दी, जिससे अंतिम घंटों में अपलोड में तेजी आई।

  • पोर्टल पर 5,17,040 वक्फ संपत्तियों को शामिल किया गया
  • नामित अनुमोदकों द्वारा 2,16,905 संपत्तियों को मंजूरी दी गई
  • निर्माताओं द्वारा 2,13,941 संपत्तियां प्रस्तुत की गई हैं और समय सीमा तक प्रक्रियाधीन है
  • सत्यापन के दौरान 10,869 संपत्तियां अस्वीकृत कर दी गई

इस व्यापक राष्ट्रीय कार्य में सहयोग प्रदान करने के लिए, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने राज्य/केन्‍द्र शासित प्रदेशों के वक्फ बोर्डों और अल्पसंख्यक विभागों के साथ निरंतर कार्यशालाएं और प्रशिक्षण सत्र आयोजित किए। वक्फ बोर्डों और राज्य/केन्‍द्र शासित प्रदेशों के अधिकारियों को अपलोड करने की प्रक्रिया का व्यावहारिक प्रशिक्षण देने के लिए दिल्ली में दो दिवसीय मास्टर ट्रेनर कार्यशाला भी आयोजित की गई।

राज्यों में वरिष्ठ तकनीकी और प्रशासनिक टीमों को तैनात किया गया और देश भर में 7 क्षेत्रीय बैठकें आयोजित की गई। तकनीकी सहायता और अपलोड के दौरान आने वाली समस्याओं के त्वरित समाधान के लिए मंत्रालय के कार्यालय में एक समर्पित हेल्पलाइन भी स्थापित की गई।

पोर्टल के प्रारंभ होने के बाद से, अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय के सचिव डॉ. चंद्रशेखर कुमार ने 20 से अधिक समीक्षा बैठकें की और मौजूदा वक्फ संपत्तियों के विवरण को समय पर और सटीक रूप से अपलोड करने के लिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों को लगातार मार्गदर्शन, प्रोत्साहन और निगरानी की। इस चरण का समापन, उम्मीद फ्रेमवर्क के तहत पूरे भारत में वक्फ संपत्तियों में पारदर्शिता, दक्षता और एकीकृत डिजिटल प्रबंधन लाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

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भारतीय रेलवे आज से अगले 3 दिनों में कई ज़ोन में 89 विशेष ट्रेनें (100 से ज़्यादा फेरे) चलाएगा

नई दिल्ली – व्यापक मांग के बाद, भारतीय रेलवे ने सर्दियों के मौसम में व्यापक उड़ान रद्द होने और अतिरिक्त भीड़ के मद्देनजर सुगम यात्रा सुनिश्चित करने हेतु मदद के लिए हाथ बढ़ाया है। आज से, अगले तीन दिनों में कई ज़ोनों में 89 विशेष रेलगाड़ियाँ (100 से ज़्यादा फेरे) चलेंगी। इससे रेल यात्रा की बढ़ती माँग के बीच सुगम यात्रा सुनिश्चित करने और पर्याप्त संपर्क सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

बढ़ती यात्री मांग को पूरा करने के लिए मध्य रेल 14 विशेष रेल सेवाएं संचालित करेगा। इनमें ट्रेन संख्या 01413/01414 पुणे-बेंगलुरु-पुणे 6 और 7 दिसंबर को, 01409/01410 पुणे-हजरत निजामुद्दीन-पुणे 7 और 9 दिसंबर को, 01019/01020 लोकमान्य तिलक टर्मिनस (एलटीटी)-मडगांव-एलटीटी 7 और 8 दिसंबर को, 01077/01078 छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस (सीएसएमटी)-हजरत निजामुद्दीन-सीएसएमटी 6 और 7 दिसंबर को, 01015/01016 एलटीटी-लखनऊ-एलटीटी 6 और 7 दिसंबर को, 01012/01011 नागपुर-सीएसएमटी-नागपुर 6 और 7 दिसंबर को, 05587/05588 गोरखपुर-एलटीटी-गोरखपुर 7 और 9 दिसंबर को और 08245/08246 बिलासपुर-एलटीटी-बिलासपुर 10 और 12 दिसंबर को चलेंगी।

दक्षिण पूर्व रेलवे ने हाल ही में उड़ान रद्द होने के बाद बढ़ती माँग को पूरा करने के लिए विशेष ट्रेनों की योजना बनाई है। इनमें ट्रेन संख्या 08073/08074 संतरागाछी-येलहंका-संतरागाछी शामिल हैं, जिनमें से 08073, 7 दिसंबर को संतरागाछी से और 08074, 9 दिसंबर को येलहंका से वापस आएगी। ट्रेन संख्या 02870/02869 हावड़ा-सीएसएमटी-हावड़ा स्पेशल चलेगी, जिसमें ट्रेन 02870 हावड़ा से 6 दिसंबर को और 02869 सीएसएमटी से 8 दिसंबर को रवाना होगी। ट्रेन संख्या 07148/07149 चेरलापल्ली-शालीमार-चेरलापल्ली ट्रेन, 07148 चेरलापल्ली से 6 दिसंबर को और 07149 शालीमार से 8 दिसंबर को रवाना होगी।

यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को नियंत्रित करने के लिए, दक्षिण मध्य रेलवे आज, 6 दिसंबर 2025 को तीन विशेष ट्रेनें चला रहा है। चेरलापल्ली से शालीमार के लिए ट्रेन संख्या 07148, सिकंदराबाद से चेन्नई एग्मोर के लिए ट्रेन संख्या 07146 और हैदराबाद से मुंबई एलटीटी के लिए ट्रेन संख्या 07150 आज रवाना हुईं।

पूर्वी रेलवे भी हावड़ा, सियालदह और प्रमुख गंतव्यों के बीच विशेष ट्रेन सेवाएँ संचालित करेगा। ट्रेन संख्या 03009/03010 हावड़ा-नई दिल्ली-हावड़ा स्पेशल में, ट्रेन संख्या 03009 हावड़ा से 6 दिसंबर को और 03010 नई दिल्ली से 8 दिसंबर को प्रस्थान करेगी। ट्रेन संख्या 03127/03128 सियालदह-एलटीटी-सियालदह स्पेशल, ट्रेन संख्या 03127 सियालदह से 6 दिसंबर को और 03128 एलटीटी से 9 दिसंबर को प्रस्थान करेगी।

बढ़ती यात्रा मांग को पूरा करने के लिए पश्चिम रेलवे, सात विशेष ट्रेनें चलाएगा। इनमें ट्रेन संख्या 09001/09002 मुंबई सेंट्रल-भिवानी सुपरफास्ट स्पेशल (द्वि-साप्ताहिक) शामिल है, जो 9 से 30 दिसंबर के बीच मुंबई सेंट्रल से प्रत्येक मंगलवार और शुक्रवार को और 10 से 31 दिसंबर के बीच भिवानी से प्रत्येक बुधवार और शनिवार को कुल 14 यात्राओं के लिए संचालित होगी। रास्ते में यह ट्रेन दोनों दिशाओं में बोरीवली, पालघर, वापी, वलसाड, सूरत, भरूच, वडोदरा, रतलाम, मंदसौर, नीमच, चित्तौड़गढ़, भीलवाड़ा, बिजयनगर, नसीराबाद, अजमेर, किशनगढ़, जयपुर, गांधी नगर जयपुर, बांदीकुई, अलवर, रेवाड़ी, कोसली और चरखी दादरी स्टेशन पर रुकेगी। ट्रेन संख्या 09003/09004 मुंबई सेंट्रल-शकूर बस्ती सुपरफास्ट स्पेशल, 8 से 29 दिसंबर के बीच मुंबई सेंट्रल से मंगलवार और शुक्रवार को छोड़कर प्रतिदिन और 9 से 30 दिसंबर के बीच शकूर बस्ती से बुधवार और शनिवार को छोड़कर प्रतिदिन चलेगी। यह कुल 32 फेरे लगाएगी और इसकी बुकिंग 6 दिसंबर से शुरू हो गई। ट्रेन संख्या 09730/09729 बांद्रा टर्मिनस-दुर्गापुरा सुपरफास्ट स्पेशल, 09730, 8 दिसंबर को बांद्रा टर्मिनस से और 09729, 7 दिसंबर को दुर्गापुरा से प्रस्थान करेगी। इसकी बुकिंग 6 दिसंबर से शुरू हो गई। इस ट्रेन में फर्स्ट एसी, एसी-2 टियर, एसी-3 टियर, स्लीपर क्लास और जनरल सेकंड क्लास कोच होंगे।

यात्रियों की बढ़ती माँग को देखते हुए, भारतीय रेलवे गोरखपुर से अतिरिक्त सेवाएँ संचालित करेगा। ट्रेन संख्या 05591/05592 गोरखपुर-आनंद विहार टर्मिनल-गोरखपुर दो फेरों में चलेगी, जो 7 और 8 दिसंबर को गोरखपुर से और 8 और 9 दिसंबर को आनंद विहार टर्मिनल से प्रस्थान करेगी। ट्रेन संख्या 05587/05588 गोरखपुर-एलटीटी-गोरखपुर, 7 दिसंबर को गोरखपुर से और 9 दिसंबर को एलटीटी से प्रस्थान करेगी।

बिहार से शीतकालीन यात्रा को सुविधाजनक बनाने के लिए, पूर्व मध्य रेलवे पटना और दरभंगा से आनंद विहार टर्मिनल के लिए विशेष ट्रेनें चलाएगा। ट्रेन संख्या 02309/02310 पटना-आनंद विहार टर्मिनल-पटना, 6 और 8 दिसंबर को पटना से और 7 और 9 दिसंबर को आनंद विहार टर्मिनल से प्रस्थान करेगी। ट्रेन संख्या 02395/02396 पटना-आनंद विहार टर्मिनल-पटना, 02395, 7 दिसंबर को पटना से और 02396, 8 दिसंबर को आनंद विहार टर्मिनल से खुलेगी। ट्रेन संख्या 05563/05564 दरभंगा-आनंद विहार टर्मिनल-दरभंगा, 05563, 7 दिसंबर को दरभंगा से और 05564, 9 दिवंसबर को आनंद विहार से चलेगी।

आगामी यात्रा अवधि के दौरान यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को कम करने के लिए उत्तर पश्चिम रेलवे एक-ट्रिप के आधार पर दो विशेष किराया स्पेशल ट्रेनें चलाएगा। ट्रेन संख्या 04725 हिसार-खड़की स्पेशल 7 दिसंबर 2025 को हिसार से रवाना होगी, जबकि वापसी सेवा में, ट्रेन संख्या 04726 खड़की-हिसार स्पेशल, 8 दिसंबर 2025 को खड़की से रवाना होगी। उत्तर पश्चिम रेलवे 7 दिसंबर 2025 को दुर्गापुरा से प्रस्थान करने वाली एक-ट्रिप विशेष किराया स्पेशल ट्रेन संख्या 09729 दुर्गापुरा-बांद्रा टर्मिनस स्पेशल भी चलाएगा। वापसी सेवा, ट्रेन संख्या 09730, बांद्रा टर्मिनस-दुर्गापुरा स्पेशल, 8 दिसंबर 2025 को बांद्रा टर्मिनस से रवाना होगी।

यात्रियों की सुविधा के लिए, उत्तर मध्य रेलवे प्रयागराज और नई दिल्ली के बीच विशेष ट्रेनें चलाएगा। ट्रेन संख्या 02417, 6 और 8 दिसंबर को प्रयागराज से प्रस्थान करेगी और 7 और 9 दिसंबर को नई दिल्ली से ट्रेन संख्या 02418 बनकर वापस आएगी। यह दोनों दिशाओं में कुल दो फेरे लगाएगी। इसी प्रकार, ट्रेन संख्या 02275, 7 दिसंबर को प्रयागराज से प्रस्थान करेगी और 8 दिसंबर को नई दिल्ली से ट्रेन संख्या 02276 बनकर वापस आएगी। यह दोनों दिशाओं में एक दिन में एक फेरा लगाएगी।

उत्तर रेलवे 6 दिसंबर 2025 को 02439 नई दिल्ली-शहीद कैप्टन तुषार महाजन उधमपुर वंदे भारत ट्रेन चलाएगा, साथ ही उसी दिन 02440 उधमपुर-नई दिल्ली वंदे भारत ट्रेन भी चलाएगा, जिससे राष्ट्रीय राजधानी और जम्मू-कश्मीर के बीच तेज और अधिक आरामदायक यात्रा मुमकिन हो सकेगी। उत्तर और पश्चिम के बीच लंबी दूरी की आवाजाही को सुविधाजनक बनाने के लिए, ट्रेन 04002 नई दिल्ली-मुंबई सेंट्रल 6 दिसंबर 2025 को चलेगी, जबकि वापसी सेवा 04001 मुंबई सेंट्रल-नई दिल्ली 7 दिसंबर 2025 को चलेगी। उत्तर रेलवे 6 दिसंबर 2025 को निर्धारित 04080 हज़रत निज़ामुद्दीन-तिरुवनंतपुरम सेंट्रल स्पेशल के ज़रिए दिल्ली को दक्षिणी रेलवे से भी जोड़ेगा। दक्षिण मध्य रेलवे नेटवर्क में क्षेत्रीय गतिशीलता को मजबूत करते हुए, ट्रेन 07703 चालिपल्ली-जालिमार 7 दिसंबर 2025 को संचालित होगी।

सर्दियों में होने वाली भीड़ को नियंत्रित करने के लिए दुर्ग और हज़रत निज़ामुद्दीन के बीच एक विशेष ट्रेन चलाई जाएगी। ट्रेन 08760 दुर्ग से 7 दिसंबर 2025 को और ट्रेन 08761 हज़रत निज़ामुद्दीन से 8 दिसंबर 2025 को रवाना होगी।

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आशा का पुल: साहिबगंज का गंगा पार मार्ग राहत, रोज़गार और कनेक्टिविटी का वादा करता है

साहिबगंज – दशकों से साहिबगंज (झारखंड) और आसपास के ज़िलों के लोग दो वास्तविकता के बीच जी रहे हैं। एक गंगा के उस पार और दूसरा उस पार। किलोमीटरों में दूरी भले ही कम हो, लेकिन संघर्ष लंबा रहा है, महँगी नाव यात्राएँ, छूटे हुए अपॉइंटमेंट, समय पर अस्पताल न पहुँच पाने वाले परिवार और सामान देर से पहुँचने के कारण व्यापारियों को ज़्यादा पैसे देने पड़ते हैं। अब जब झारखंड में एन एच-133B को बिहार में एन एच-131A से जोड़ने वाला नया पुल तैयार हो रहा है, तो उम्मीदें स्टील और कंक्रीट का मूर्त रूप ले चुकी हैं।

महादेव गंज के निवासी रामकेश कहते हैं “हमारे लिए नाव के लिए 100 रूपये बहुत बड़ी रकम है।” वे लंबे इंतज़ार, अप्रत्याशित स्टीमर और मनिहारी या कटिहार जाने के अतिरिक्त तनाव का ज़िक्र करते हैं। वे कहते हैं, “हम अपनी मर्ज़ी से यात्रा नहीं कर पाते। इस पुल के बनने से हमारी नदी की समस्या आखिरकार खत्म हो जाएगी और कटिहार पहुँच आसान हो जाने पर कई ज़रूरी चीज़ें सस्ती हो जाएँगी।”

त्वरित तथ्य:

  • परियोजना की लंबाई 8 किलोमीटर
  • कुल परियोजना लागत: 1,977.66 करोड़ रूपये
  • समापन तिथि वित्तीय वर्ष 2026-2027

झारखंड और बिहार के बीच हर मौसम में सीधा संपर्क प्रदान कर यह पुल माल ढुलाई, खासकर झारखंड के संसाधन-समृद्ध क्षेत्रों से खनिज माल ढुलाई को तेज़ करेगा। इससे परिवहन तेज़ और अधिक कुशल हो जाएगा। कम परिवहन समय से ईंधन और रसद लागत में कमी आएगी, उपभोक्ताओं के लिए कीमतें कम होंगी और स्थानीय व्यापारियों को बेहतर प्रतिस्पर्धा करने में मदद मिलेगी।

सुशील याद करते हैं “कभी-कभी तो शादियाँ भी समय पर नहीं हो पाती थीं,” उन्हें याद है कि कैसे स्टीमर न होने से यात्रियों को लंबे चक्कर लगाने पड़ते थे। उनके लिए यह पुल गरिमा और विश्वसनीयता का प्रतीक है। हम समय और पैसा बचाएँगे। जीवन ज़्यादा शांतिपूर्ण होगा।”

आपातकालीन पहुँच एक और जीवन बदलने वाला वादा है। एक दुकानदार अब्दुल कहते हैं “आपात स्थिति में रात हमारी दुश्मन बन जाती है।” एम्बुलेंस नौका सेवा के इंतज़ार में रुकी रहती थीं और मरीज़ों को भारी देरी का सामना करना पड़ता था। स्थायी सड़क मार्ग होने से लोगों तक चिकित्सा सहायता तेज़ी से पहुँच सकेगी। यह पुल बाढ़ के दौरान स्थानीय लोगों की सुरक्षा को भी मज़बूत करेगा क्योंकि जलमार्गों में उफान आने पर यह एक भरोसेमंद मार्ग प्रदान करेगा।

व्यक्तिगत राहत के अलावा क्षेत्रीय संपर्क में भी बदलाव आएगा। इस पुल से संथाल परगना (झारखंड) को बिहार, पश्चिम बंगाल और पूर्वोत्तर राज्यों से निर्बाध रूप से जोड़ने और नेपाल, भूटान और बांग्लादेश की ओर व्यापार गलियारों में सुधार की उम्मीद है। मौसमी अलगाव के आदी समुदायों के लिए इसका मतलब है नए बाज़ार, सीमा पार व्यापार में सुगमता और क्षेत्र में निवेश के लिए एक मज़बूत आधार।

अब्दुल कहते हैं “पत्थर, रेत और अन्य सामग्री ढोने वाले ट्रकों से डीज़ल और समय की बचत होगी। इससे यहाँ की लागत कम होगी। लोग अलग-अलग ज़िलों में काम करके उसी दिन वापस आ सकते हैं।”

आज नदी के किनारे खड़े होकर क्रेनों को गर्डर उठाते हुए देखने वाले लोगों के लिए, यह पुल पहले से ही उनकी उम्मीदों का भार उठा रहा है।

जो कभी विभाजक धारा थी, अब अवसरों की राह बन रही है। रामकेश, सुशील और अब्दुल के लिए और साहिबगंज और उसके आसपास के हज़ारों लोगों के लिए यह पुल सिर्फ़ बुनियादी ढाँचे से कहीं बढ़कर है: यह एक पूरा हुआ वादा है, रोज़मर्रा का बोझ हल्का हुआ है और एक ऐसा भविष्य है.जो आखिरकार नज़दीक आ गया है।

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प्रधानमंत्री राष्ट्रीय संग्रहालय में आयोजित डॉ. भीमराव आंबेडकर की महापरिनिर्वाण दिवस पर राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के उपलक्ष में समारोह

नई दिल्ली – राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) ने  नई दिल्ली स्थित प्रधानमंत्री राष्ट्रीय संग्रहालय में एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया। यह कार्यक्रम डॉ. भीमराव आंबेडकर की महापरिनिर्वाण दिवस पर उनकी स्मृति में तथा सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के उपलक्ष में आयोजित किया गया, जो सरदार पटेल एकता मार्च के समापन के साथ भी संयोगित था।

कार्यक्रम का संचालन माननीय अध्यक्ष, एनसीएससी की अध्यक्षता में हुआ तथा आयोग के माननीय सदस्य भी इस अवसर पर उपस्थित रहे। इस अवसर पर सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री, डॉ. वीरेंद्र कुमार मुख्य अतिथि के रूप में पधारे और उन्होंने कार्यक्रम की गरिमा में वृद्धि की।

 

कार्यक्रम में प्रख्यात इतिहासकार एवं प्रधानमंत्री राष्ट्रीय संग्रहालय के सदस्य, प्रो. रिज़वान क़ादरी ने मुख्य वक्ता के रूप में संबोधन दिया। उन्होंने डॉ. आंबेडकर और सरदार पटेल के ऐतिहासिक योगदानों का उल्लेख करते हुए बताया कि कैसे दोनों महान नेताओं ने भारत में सामाजिक न्याय की स्थापना, राष्ट्रीय एकता को सुदृढ़ करने और संवैधानिक शासन को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने अस्पृश्यता उन्मूलन, सामाजिक सुधार, शिक्षा के प्रसार तथा वंचित समुदायों के सशक्तिकरण के प्रति दोनों नेताओं की प्रतिबद्धता पर बल दिया।

इससे पूर्व, श्री गुड़े श्रीनिवास, सचिव, एनसीएससी ने स्वागत भाषण दिया।

उन्होंने डॉ. आंबेडकर एवं सरदार पटेल द्वारा अनुसूचित जातियों, महिलाओं, श्रमिकों एवं सामाजिक रूप से वंचित समूहों के उत्थान हेतु किए गए आजीवन प्रयासों का स्मरण कराया।

उन्होंने यह भी बताया कि किस प्रकार डॉ. आंबेडकर ने भेदभाव के विरुद्ध संघर्ष किया और संविधान में कमजोर वर्गों के लिए महत्वपूर्ण सुरक्षा प्रावधान सुनिश्चित किए।

साथ ही, उन्होंने सरदार पटेल द्वारा 562 रियासतों के एकीकरण के माध्यम से “अखंड भारत” की नींव को मजबूत करने की भूमिका पर प्रकाश डाला।

आयोग के माननीय सदस्य, श्री लव कुश कुमार एवं श्री वड्ढेपल्ली रामचंदर ने भी सभा को संबोधित किया और दोनों राष्ट्रीय नेताओं के समतामूलक समाज निर्माण में दिए गए योगदानों को रेखांकित किया।

माननीय अध्यक्ष,श्री किशोर मकवाना, एनसीएससी ने डॉ. भीमराव आंबेडकर और सरदार वल्लभभाई पटेल के बीच हुए महत्वपूर्ण ऐतिहासिक संवादों का उल्लेख किया।

उन्होंने बताया कि सामाजिक अशांति के समय सरदार पटेल ने अस्पृश्यों के अधिकारों की जिस दृढ़ता से रक्षा की, उसकी स्वयं डॉ. आंबेडकर ने प्रशंसा की थी।

माननीय अध्यक्ष ने यह भी रेखांकित किया कि राष्ट्र सदैव किसी भी व्यक्ति या संगठन से ऊपर होता है और राष्ट्रीय एकता एवं राष्ट्रीय हित को सर्वोपरि माना जाना चाहिए।

अपने समापन संबोधन में माननीय केंद्रीय मंत्री, डॉ. वीरेंद्र कुमार ने इस संगोष्ठी के सफल आयोजन हेतु आयोग की सराहना की तथा दोनों महान राष्ट्र-निर्माताओं को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि राष्ट्र-निर्माण में उनके असाधारण योगदान आज भी हमारे पथप्रदर्शक हैं। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरदार पटेल की राष्ट्र निर्माण की विचारधारा को पूर्ण निष्ठा के साथ आगे बढ़ाया जा रहा है।

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डॉ. जितेंद्र सिंह ने पंचकूला में उत्सव, संचार और करियर पर आधारित आईआईएसएफ विज्ञान महोत्सव का उद्घाटन किया

नई दिल्ली – पंचकूला, 6 दिसंबर: केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज हरियाणा के पंचकूला में भारतीय अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव (आईआईएस) का उद्घाटन किया। उन्होंने इसे तीन “सी” – उत्सव, संचार और करियर – के आस-पास परिभाषित किया। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत की वैज्ञानिक प्रगति प्रयोगशालाओं से आगे बढ़नी चाहिए और नागरिकों, छात्रों और युवा पेशेवरों को सार्थक तरीके से इसमें शामिल करना चाहिए। इस महोत्सव का 11वां संस्करण 6 से 9 दिसंबर तक आयोजित किया जा रहा है।

उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव की परिकल्पना एक नियमित शैक्षणिक सम्मेलन के रूप में नहीं, बल्कि एक खुले, जन-केंद्रित मंच के रूप में की गई है जो विज्ञान को लोगों के करीब लाता है। उन्होंने कहा कि यह महोत्सव वैज्ञानिकों और वैज्ञानिक अनुसंधान के लक्षित लाभार्थियों के बीच संवाद को प्रोत्साहित करता है, जो विज्ञान मंत्रालयों और विभागों के बीच बेहतर समन्वय और सामंजस्य पर सरकार के प्रयास को प्रदर्शित करता है।

तीन “सी” के बारे में विस्तार से बताते हुए, मंत्री महोदय ने कहा कि आईआईएसएफ भारत की वैज्ञानिक यात्रा और विभिन्न क्षेत्रों में उपलब्धियों का उत्‍सव मनाता है, शैक्षणिक और शोध संस्थानों से परे वैज्ञानिक ज्ञान का संचार करता है, और युवा प्रतिभागियों के लिए करियर की खोज के एक मंच के रूप में कार्य करता है। उन्होंने कहा कि छात्रों, शोधकर्ताओं और पहली बार सीखने वाले छात्रों को महोत्सव के दौरान संरचित सत्रों के साथ-साथ अनौपचारिक नेटवर्किंग के माध्यम से अनुसंधान, स्टार्टअप और उद्योग में उभरते अवसरों से परिचित होने का अवसर मिलता है।

आईआईएसएफ को विकसित भारत@2047 के व्यापक राष्ट्रीय दृष्टिकोण के अंतर्गत रखते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी आर्थिक विकास और सामाजिक परिवर्तन की नींव रखते हैं। उन्होंने कहा कि पिछले एक दशक में, भारत ने विज्ञान के प्रति एक मिशन-संचालित वि‍ज़न अपनाया है, जिसे सुधारों, बुनियादी ढाँचे में बढ़े हुए निवेश और प्रतिभा विकास पर ज़ोर देने से बल मिला है। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक प्रगति अब सीधे तौर पर शासन और सार्वजनिक सेवा वितरण को बढ़ावा दे रही है, जिसमें बेहतर मौसम पूर्वानुमान और पूर्व चेतावनी प्रणालियों से लेकर ध्रुवीय अनुसंधान और डिजिटल तकनीकें शामिल हैं।

आईआईएसएफ 2025 की थीम “विज्ञान से समृद्धि: आत्मनिर्भर भारत की ओर” का उल्लेख करते हुए, मंत्री महोदय ने कहा कि विज्ञान में आत्मनिर्भरता धीरे-धीरे आकार ले रही है। उन्होंने स्वदेशी स्तर पर प्रमुख वैज्ञानिक संपत्तियों के निर्माण की पहलों पर प्रकाश डाला, जिनमें एक बहुउद्देशीय, सभी मौसमों में काम करने वाला अनुसंधान पोत, जिसके 2028 में शुरू होने की उम्मीद है, और देश का चल रहा मानव पनडुब्बी कार्यक्रम शामिल है। उन्होंने आगे कहा कि भारतीय संस्थान जलवायु डेटा और मॉडल भी प्रदान कर रहे हैं जिनका अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उपयोग किया जाता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने नवाचार, अनुसंधान उत्पादन और उद्यमिता के क्षेत्र में भारत की बेहतर वैश्विक स्थिति पर प्रकाश डाला और स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र के विकास, निवासी भारतीयों द्वारा पेटेंट आवेदनों में वृद्धि और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के उभरते क्षेत्रों में मान्यता का हवाला दिया। उन्होंने चंद्रयान-3 मिशन, कोविड-19 महामारी के दौरान स्वदेशी वैक्सीन विकास और जैव प्रौद्योगिकी में प्रगति जैसी उपलब्धियों का उल्लेख अनुसंधान के मजबूत परिणाम देने वाले उदाहरणों के रूप में किया।

युवाओं तक पहुँच बढ़ाने पर ज़ोर देते हुए, मंत्री महोदय ने कहा कि आईआईएसएफ की गतिविधियों का एक बड़ा हिस्सा स्कूली बच्चों, कॉलेज के छात्रों और युवा शोधकर्ताओं के लिए डिज़ाइन किया गया है। उन्होंने विज्ञान के क्षेत्र में करियर के बारे में समझ को व्यापक बनाने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया और इस बात पर ज़ोर दिया कि आज अवसर सरकारी रोज़गार से कहीं आगे बढ़कर स्टार्टअप, उद्योग-आधारित अनुसंधान और अनुप्रयुक्त नवाचार तक फैले हुए हैं। क्वांटम तकनीक, जैव प्रौद्योगिकी, नीली अर्थव्यवस्था और गहन तकनीकी उद्यमिता जैसे क्षेत्रों पर सत्र इस वर्ष के कार्यक्रम का हिस्सा हैं।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने सार्वजनिक अनुसंधान संस्थानों और निजी उद्योग के बीच मज़बूत सहयोग के महत्व पर भी ज़ोर दिया और कहा कि जब नीतिगत समर्थन, वित्त पोषण और उद्यम मिलकर काम करते हैं, तो नवाचार फलता-फूलता है। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष, स्वास्थ्य प्रौद्योगिकी और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में निजी भागीदारी को और अधिक बढ़ाने की अनुमति देने वाले हालिया नीतिगत उपायों का उद्देश्य एक अधिक सक्षम नवाचार पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है।

मंत्री महोदय ने उद्घाटन कार्यक्रम में विज्ञान-प्रौद्योगिकी-रक्षा-अंतरिक्ष प्रदर्शनी और “विज्ञान पर एक क्षेत्र” प्रदर्शनी का उद्घाटन किया, जो इंटरैक्टिव डिस्प्ले के माध्यम से वैज्ञानिक क्षमताओं और चल रहे अनुसंधान को प्रदर्शित करती है। उन्होंने अंटार्कटिका में भारत के अनुसंधान केंद्र, भारती के शोधकर्ताओं के साथ लाइव इंटरफ़ेस के माध्यम से बातचीत भी की और चरम ध्रुवीय परिस्थितियों में किए जा रहे वैज्ञानिक कार्यों की समीक्षा की, जिसमें भारत के बढ़ते ध्रुवीय अनुसंधान प्रयासों और स्वदेशी क्षमताओं पर प्रकाश डाला गया।

अगले चार दिनों में आयोजित होने वाले प्रदर्शनियों, व्याख्यानों और इंटरैक्टिव सत्रों के साथ, भारत अंतर्राष्ट्रीय विज्ञान महोत्सव का उद्देश्य विज्ञान के साथ जनता की सहभागिता को गहरा करना है, साथ ही अनुसंधान, नवाचार और मानव संसाधन विकास में दीर्घकालिक राष्ट्रीय उद्देश्यों में योगदान देना है।

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दूरसंचार विभाग ने प्रो टेम प्रमाणपत्र की वैधता मौजूदा 6 महीने से बढ़ाकर 2 वर्ष की

नई दिल्ली – कारोबार करने में सुगमता बढ़ाने तथा उद्योग के लिए व्यवसाय की निरंतरता सुनिश्चित करने की दिशा में एक और कदम उठाते हुए, भारत सरकार के दूरसंचार विभाग के अंतर्गत राष्ट्रीय संचार सुरक्षा केंद्र (एनसीसीएस) ने प्रो टेम सुरक्षा प्रमाणन की वैधता को मौजूदा 6 महीनों से बढ़ाकर 2 वर्ष कर दिया है।

6 महीने की वैधता के साथ प्रो टेम प्रमाणन अक्टूबर 2024 में शुरू किया गया था, ताकि उद्योग को आईपी राउटर और वाई-फाई सीपीई उत्पादों की व्यापारिक प्रक्रियाओं में किसी भी बाधा से बचने में मदद मिल सके, जिन्हें अन्यथा उन्‍हें 1 अक्टूबर 2024 से सुरक्षा प्रमाणन अनिवार्य रूप से प्राप्त करना होता। प्रो टेम प्रमाणन के तहत, ओईएम अनुरूपता की घोषणा प्रस्तुत करते हैं, जिसमें इस बात की पुष्टि की जाती है कि उनका उपकरण भारतीय दूरसंचार सुरक्षा आश्वासन आवश्यकताओं (आईटीएसएआर) के अनुसार लागू आईपी राउटर और वाई-फाई सीपीई उत्पादों के अधिकांश सुरक्षा मानकों का पालन करता है।

साथ ही, उपकरण को परीक्षण के लिए दूरसंचार सुरक्षा परीक्षण प्रयोगशाला (टीएसटीएल) को भेजा जाता है। ओईएम यह वचन भी देते हैं कि परीक्षण के दौरान पहचानी गई किसी भी कमी को प्रमाणपत्र की वैधता अवधि के भीतर दूर कर दिया जाएगा। प्रो टेम प्रमाणन के दायरे का और विस्तार किया गया है, जिसमें अब 5जी कोर एसएमएफ, ऑप्टिकल लाइन टर्मिनल (ओएलटी), ऑप्टिकल नेटवर्किंग टर्मिनल (ओएनटी) और नए उत्पाद लॉन्च भी शामिल होंगे।

अब तक, एनसीसीएस ने 102 प्रो टेम प्रमाणपत्र जारी किए हैं, जिन्‍होंने ओईएम की व्यापारिक प्रक्रियाओं की निरंतरता बिना किसी बाधा के बनी रहने को सुगम बनाया है। प्रो टेम प्रमाणपत्र की वैधता को 2 वर्ष तक बढ़ाने से उद्योग पर बार-बार नवीनीकरण करने का दबाव कम होगा।

जुलाई 2025 में, दूरसंचार विभाग (डीओटी) ने दूरसंचार और आईसीटी उत्पादों के लिए सुरक्षा परीक्षण मूल्यांकन शुल्क में 95% तक की बड़ी कमी की घोषणा की। डीओटी ने अत्यधिक विशिष्ट उपकरणों (एचएसई) और एंड ऑफ सेल/एंड ऑफ लाइफ दूरसंचार उत्पादों के लिए भी सुरक्षा परीक्षण और अनुपालन प्रक्रिया को सरल बना दिया है। ये कदम सरकार के इस संकल्प को दर्शाते हैं कि वह दूरसंचार/आईसीटी क्षेत्र में देशी और अंतरराष्ट्रीय मूल उपकरण विनिर्माताओं (ओईएम) के लिए कारोबार करने में सुगमता को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है।

पृष्‍ठभूमि

दूरसंचार विभाग (डीओटी) के अंतर्गत राष्ट्रीय संचार सुरक्षा केंद्र (एनसीसीएस) को कॉमसेक योजना के तहत सुरक्षा परीक्षण और प्रमाणन लागू करने का दायित्व सौंपा गया है। अद्यतन ढांचे के अनुसार, भारत में दूरसंचार उपकरण बेचने, आयात करने या उपयोग करने के इच्‍छुक ओईएम, आयातकों और डीलरों को अपने उत्पादों का इस योजना के तहत सुरक्षा परीक्षण और प्रमाणन प्रक्रिया से गुजरना सुनिश्चित करना होगा। यह योजना व्यापक दूरसंचार उपकरणों के अनिवार्य परीक्षण और प्रमाणन (एमटीसीटीई) ढांचे का हिस्सा है, जिसे पहली बार सितंबर 2017 में अधिसूचित किया गया था और बाद में दूरसंचार (मानकों को अधिसूचित करने, अनुरूपता मूल्यांकन और प्रमाणन के लिए ढांचानियम,2025 द्वारा प्रतिस्थापित किया गया।

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केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने महापरिनिर्वाण दिवस पर डॉ. बाबासाहेब अंबेडकर को पुष्पांजलि अर्पित की

नई दिल्ली  –  डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर के 70वें महापरिनिर्वाण दिवस के अवसर पर केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण, तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने नई दिल्ली स्थित रेल भवन में पुष्पांजलि अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।

 

केंद्रीय मंत्री ने एक्स पर एक पोस्ट में भारत रत्न डॉ. बाबासाहेब अम्बेडकर को नमन करते हुए उन्हें समानता और न्याय का मार्गदर्शक बताया।

 

इस कार्यक्रम में रेलवे बोर्ड के अध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री सतीश कुमार, वरिष्ठ अधिकारी, रेलवे बोर्ड के सदस्य और अखिल भारतीय अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति रेलवे कर्मचारी संघ के प्रतिनिधि उपस्थित थे। कार्यक्रम में बाबासाहेब के योगदान संविधान निर्माण में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका और समानता, न्याय एवं निष्पक्षता पर आधारित उनके विचारों को याद किया गया।

 

महापरिनिर्वाण दिवस प्रतिवर्ष 6 दिसंबर को भारत रत्न डॉ. भीमराव रामजी आंबेडकर, जिन्हें बाबासाहेब आंबेडकर के नाम से भी जाना जाता है की पुण्यतिथि के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। वे भारतीय संविधान के मुख्य शिल्पी थे। 14 अप्रैल, 1891 को मध्य प्रदेश के महू में जन्मे डॉ. भीमराव आंबेडकर ने अपना जीवन उपेक्षित समुदायों, विशेषकर दलितों, महिलाओं और मजदूरों के उत्थान के लिए समर्पित कर दिया जिन्हें व्यवस्थागत सामाजिक भेदभाव का सामना करना पड़ा था। देश में लाखों लोग इस पावन दिवस पर उनकी शिक्षाओं और एक न्यायपूर्ण एवं समावेशी समाज के निर्माण के प्रति उनकी प्रतिबद्धता पर विचार करके उनकी विरासत को श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।

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