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सुशासन सप्ताह 2025 का शुभारंभ; जमीनी स्तर पर जागरूकता फैलाने के लिए ‘प्रशासन गांव की ओर’ पहल का आयोजन

नई दिल्ली – प्रशासनिक सुधार एवं लोक शिकायत विभाग (डीएआरपीजी) ने 19 से 25 दिसंबर तक मनाए जाने वाले सुशासन सप्ताह 2025 का शुभारंभ किया। डीएआरपीजी की सचिव रचना शाह ने आज राष्ट्रव्यापी ‘प्रशासन गांव की ओर’ अभियान के लिए दिशानिर्देश जारी किए। इस शुभारंभ के साथ ही एक सप्ताह तक चलने वाले प्रशासनिक अभियान की शुरुआत हुई है, जिसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर सेवाओं के कार्यान्वयन पर विशेष ध्यान देते हुए नागरिक-केंद्रित शासन को मजबूत करना है।

शुभारंभ समारोह को संबोधित करते हुए सचिव रचना शाह ने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की जयंती (25 दिसंबर) के उपलक्ष्य में प्रतिवर्ष मनाया जाने वाला सुशासन सप्ताह, वर्षों से एक स्मृति उत्सव से विकसित होकर एक केंद्रित और कार्य-उन्मुख शासन पहल बन चुका है। उन्होंने कहा कि सुशासन केवल नीतियों और संस्थागत ढांचों में ही नहीं, बल्कि इस बात में भी परिलक्षित होता है कि सार्वजनिक सेवाएं नागरिकों तक कितनी प्रभावी ढंग से पहुंचती हैं और शिकायतों का कितनी तत्परता से समाधान किया जाता है।

‘प्रशासन गांव की ओर’ पहल सुशासन सप्ताह अभियान का मुख्य आधार बनी हुई है, यह शिकायत निवारण और जनसेवा वितरण में जिला प्रशासनों की अग्रणी भूमिका को दर्शाती है। दिशा-निर्देशों के अनुसार, देशभर के जिला कलेक्टर तहसील, ब्लॉक और पंचायत स्तर पर विशेष शिविरों का आयोजन करेंगे, जिससे अधिकारियों और नागरिकों के बीच सीधा संवाद स्थापित हो सकेगा और शिकायतों का मौके पर ही समाधान हो सकेगा, साथ ही जनसेवाओं का बेहतर वितरण सुनिश्चित होगा। यह अभियान दो चरणों में संचालित जा रहा है इनमें पहला चरण 11 से 18 दिसंबर तक तैयारी के लिए और दूसरा चरण 19 से 25 दिसंबर तक सुशासन सप्ताह के दौरान कार्यान्वयन के लिए है।

कार्यान्वयन चरण के दौरान, जिले विशेष शिविरों, सीपीग्राम और राज्य शिकायत पोर्टलों के माध्यम से हल की गई शिकायतों, सेवा वितरण आवेदनों के निपटान, ऑनलाइन सेवाओं के विस्तार और सुशासन प्रथाओं के दस्तावेजीकरण सहित प्रमुख मापदंडों पर दैनिक प्रगति रिपोर्ट करेंगे। तैयारी चरण के तहत, जिला कलेक्टरों और जिला मजिस्ट्रेटों ने अभियान पोर्टल पर शिकायत निवारण, सेवा वितरण और शासन संबंधी पहलों से संबंधित जिला स्तरीय डेटा अपलोड करना शुरू कर दिया है। अभियान अवधि की शुरुआत तक सीपीग्राम और राज्य शिकायत पोर्टलों के माध्यम से प्राप्त शिकायतों का सप्ताह के दौरान समयबद्ध समाधान किया जा रहा है।

सुशासन सप्ताह 2025 की तैयारियों के दौरान, राज्यों और जिलों ने उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। 17 दिसंबर, 2025 तक की दैनिक प्रगति रिपोर्ट के अनुसार, राज्य शिकायत पोर्टलों के माध्यम से कुल 2,11,098 शिकायतों का निवारण किया गया है, जबकि सहभागी जिलों में 21,71,179 सेवा वितरण आवेदनों का निपटारा किया गया है। इसके अतिरिक्त, जिला स्तर पर 330 कार्यशालाएं और शिकायत निवारण शिविर आयोजित किए गए हैं। तैयारियों के चरण में 137 सुशासन प्रथाओं और सार्वजनिक शिकायत निवारण से संबंधित 21 दस्तावेजित सफलता की गाथाओं की पहचान भी हुई है, जिन्हें अभियान के दौरान व्यापक रूप से प्रसारित किया जाएगा।

अभियान के अगले चरण के रूप में, 23 दिसंबर, 2025 को सभी जिलों में जिला स्तरीय प्रसार कार्यशालाओं का आयोजन किया जाएगा। इन कार्यशालाओं में जिला-100 के विषय पर चर्चा, पिछले पांच वर्षों में कार्यान्वित की गई कम से कम तीन सुशासन पहलों की प्रस्तुति और नागरिकों, शिक्षाविदों और जिला स्तरीय अधिकारियों के साथ संवाद पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा। कार्यशालाओं में जिला प्रशासनों द्वारा प्रस्तुतियाँ, स्थानीय नवाचारों पर चर्चा, प्रश्नोत्तर सत्र और अभियान पोर्टल पर साझा करने के लिए सर्वोत्तम प्रथाओं का दस्तावेजीकरण शामिल होगा।

पूर्व संस्करणों के परिणामों का उल्लेख करते हुए सचिव ने बताया कि सुशासन सप्ताह 2024 के दौरान देशभर में 18 लाख से अधिक जन शिकायतों का निपटारा किया गया और लगभग तीन करोड़ सेवा वितरण आवेदनों पर कार्रवाई की गई। इसके साथ ही एक हजार से अधिक सुशासन प्रथाओं और सैकड़ों नवाचार-आधारित सफलताओं का दस्तावेजीकरण भी किया गया। उन्होंने कहा कि ये परिणाम जमीनी स्तर पर प्रशासनिक जवाबदेही में सुधार को दर्शाते हैं।

सचिव ने जिला प्रशासनों से अभियान को मिशन की तरह चलाने का आग्रह करते हुए स्पष्ट और मापने योग्य परिणामों की मांग की। उन्होंने कहा कि राज्यों और जिलों की निरंतर भागीदारी यह सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण होगी कि अभियान से नागरिकों को ठोस लाभ प्राप्त हों।

शिकायत निवारण, सेवा वितरण और नवाचारों के दस्तावेजीकरण में शुरुआती गति पहले से ही दिखाई दे रही है, अधिकारियों ने कहा कि सुशासन सप्ताह 2025 से विश्वास-आधारित और समावेशी शासन को और मजबूत करने की आशा है, जिससे देश भर में दैनिक प्रशासनिक प्रथाओं में जवाबदेही और उत्तरदायित्व को शामिल करने के प्रयासों को बल मिलेगा।

महाराष्ट्र सरकार के मुख्य सचिव ने संबोधित किया, जबकि बिहार सरकार के मुख्य सचिव ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सभा को संबोधित किया। देश के विभिन्न हिस्सों के जिला प्रशासनों ने भी वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए इस अभियान में भाग लिया, जो इस अभियान के प्रति राष्ट्रव्यापी भागीदारी को दर्शाता है। अतिरिक्त सचिव पुनीत यादव ने कार्यक्रम का समन्वय और प्रबंधन किया और अपने संबोधन में सभी उपस्थित अधिकारियों से ‘प्रशासन गांव की ओर’ पहल में सक्रिय रूप से भाग लेने और सुशासन सप्ताह अभियान के सफल कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए सामूहिक रूप से काम करने का आग्रह किया।

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नए अध्ययन से आकाशगंगाओं के चारों ओर मौजूद हेलो के द्रव्यमान को मापने के तरीके में बदलाव आ सकता है

नई दिल्ली – विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के एक स्वायत्त संस्थान, रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट (आरआरआई) के एक नए शोध अध्ययन से पता चला है कि अंतर-आकाशगंगा माध्यम में मौजूद पदार्थ का योगदान आकाशगंगा के चारों ओर फैले विसरित आवरण के मापन को प्रभावित कर सकता है। इस अध्ययन के दूरगामी निहितार्थ हैं, क्योंकि यह आवरण आकाशगंगाओं के निर्माण या विघटन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है और आकाशगंगाओं के निर्माण की प्रक्रिया को समझने के लिए इसके द्रव्यमान का मापन अत्यंत महत्वपूर्ण है।

आकाशगंगा को देखते ही मन में धूल और तारों की सुंदर सर्पिलाकार आकृतियों की चमक उभरती है। लेकिन आकाशगंगा के बाहरी किनारों से परे एक धुंधला, रहस्यमय प्रभामंडल फैला हुआ है, जो आकाशगंगा के आकार से 10-20 गुना अधिक दूर तक फैला हुआ है। आकाशगंगा का अधिकांश द्रव्यमान तारों के परे इसी प्रभामंडल में स्थित है, जो रहस्यमय डार्क मैटर (ब्रह्मांड को एक साथ रखने वाला अदृश्य गोंद) और गैस से बना है। प्रभामंडल के गैसीय भाग को परि-आकाश गंगा माध्यम (सीजीएम) कहा जाता है। परि-आकाशगंगा माध्यम के बाहर का क्षेत्र अंतर-आकाशगंगा माध्यम (आईजीएम) कहलाता है।

आकाशगंगा को ब्रह्मांडीय जाल (कॉस्मिक वेब) से जोड़ने के कारण, आकाशगंगा में गैस के वितरण का मानचित्रण अत्यंत महत्वपूर्ण है। ब्रह्मांडीय जाल वह तंतुमय संरचना है जो पूरे ब्रह्मांड में व्याप्त है। ऐसा करके, आकाशगंगा में गैस के अंतर्प्रवाह और बहिर्प्रवाह को नियंत्रित करके, आकाशगंगा के विकास में परि-आकाशगंगा माध्‍यम महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। परि-आकाशगंगा माध्यम में मौजूद अत्यधिक आयनित ऑक्सीजन (जिसमें से पाँच इलेक्ट्रॉन अलग हो गए हों) की मात्रा को मापकर, खगोलविद आकाशगंगा के द्रव्यमान का अनुमान लगाते हैं।

खगोलविद दूर स्थित आकाशगंगाओं के बेहद चमकीले केंद्रों से आने वाले प्रकाश का उपयोग करके केंद्र परि-आकाशगंगा माध्यम का मानचित्रण करते हैं। जब ऐसे किसी पृष्ठभूमि पिंड से आने वाला प्रकाश अग्रभूमि परि-आकाशगंगा माध्यम के केंद्र-आसमान में मौजूद गैस से होकर गुजरता है, तो कुछ तत्व विशेष तरंग दैर्ध्य को अवशोषित कर लेते हैं।

लेकिन अवलोकन तकनीक में एक अंतर्निहित समस्या है। जब खगोलविद अवलोकन करते हैं, तो मापा गया आयनित ऑक्सीजन दृष्टि रेखा के अनुदिश कुल एकीकृत मान होता है।

चूंकि परि-आकाशगंगा माध्यम और अंतर-आकाशगंगा माध्यम दोनों दृष्टि रेखा के समानांतर स्थित हैं, इसलिए प्रेक्षित मानों में परि-आकाशगंगा माध्यम और अंतर-आकाशगंगा माध्यम के योगदान को अलग-अलग बताना संभव नहीं है। वर्तमान मॉडल प्रेक्षित सभी आयनित ऑक्सीजन को परि-आकाशगंगा माध्यम से प्राप्त मानते हैं।

चित्र 1. आकाशगंगा के चारों ओर फैले परि-आकाशगंगा माध्यम का कलात्मक चित्रण।

रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट के इस नए शोध में मॉडलों का उपयोग करते हुए यह सुझाव दिया गया है कि परि-आकाशगंगा माध्यम से जुड़ी अधिकांश गैस अंतर-आकाशगंगा माध्यम से आ सकती है।

रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट के खगोल विज्ञान और खगोल भौतिकी विभाग में कार्यरत खगोल भौतिक विज्ञानी और द एस्ट्रोफिजिकल जर्नल में प्रकाशित नए शोध पत्र के लेखक डॉ. कार्तिक सरकार, परि-आकाशगंगा माध्यम और अंतर-आकाशगंगा माध्यम के बीच संबंध को एक सादृश्य के माध्यम से समझाते हैं।

डॉ. सरकार ने कहा कि कल्पना कीजिए कि एक सड़क पर जादूगर अपने करतब दिखा रहा है। लोग धीरे-धीरे उसके चारों ओर इकट्ठा होने लगते हैं… और भीड़ बढ़ती जाती है। शुरुआत में, लोग शो देखने के लिए दौड़ पड़ते हैं। लेकिन जैसे ही वे भीड़ की सीमा तक पहुंचते हैं, वे रुक जाते हैं। डॉ. सरकार के उदाहरण में जादूगर आकाशगंगा है और भीड़ परि-आकाशगंगा माध्यम है। उन्होंने बताया, “जादूगर जितना बड़ा होगा, भीड़ उतनी ही बड़ी होगी। परि-आकाशगंगा माध्‍यम के बाहर का वह क्षेत्र, जो आकाशगंगा के गुरुत्वाकर्षण से बंधा नहीं है, अंतर-आकाशगंगा माध्यम कहलाता है।

चित्र 2. आकाशगंगाओं के चारों ओर आयनित ऑक्सीजन की उपस्थिति का कलात्मक चित्रणऔर उनके अवलोकन का सिद्धांत।

डॉ. सरकार कहते हैं कि हम इस धारणा को चुनौती दे रहे हैं कि संपूर्ण आयनित ऑक्सीजन परि-आकाशगंगा माध्यम से संबंधित है। टीम ने परि-आकाशगंगा माध्यम और अंतर-आकाशगंगा माध्यम से उसमें गिरने वाली गैस का गणितीय विवरण इस्तेमाल किया। फिर उन्होंने प्रत्येक में मौजूद आयनित ऑक्सीजन (ब्रह्मांड में सबसे प्रचुर मात्रा में पाए जाने वाले तत्वों में से एक) की मात्रा की गणना की और इसकी तुलना प्रेक्षणों से की।

डॉ. सरकार का कहना है कि हमारा सुझाव है कि आयनित ऑक्सीजन का अपेक्षाकृत छोटा अंश परि-आकाशगंगा माध्यम से आ रहा है और परि-आकाशगंगा माध्यम के चारों ओर अंतर-आकाशगंगा माध्यम की एक परत मौजूद है जो प्रेक्षित ऑक्सीजन में योगदान दे रही है। अंतर-आकाशगंगा माध्यम द्वारा परि-आकाशगंगा माध्यम का यह संदूषण परि-आकाशगंगा माध्यम  के द्रव्यमान के अधिक अनुमान का कारण बन सकता है।

चित्र 3. कम द्रव्यमान वाली आकाशगंगाओं के मामले में अंतर-आकाशगंगा माध्यम में आयनित ऑक्सीजन की उपस्थिति का कलात्मक चित्रण।

डॉ. सरकार और उनके सहयोगियों को पहली बार गड़बड़ी का आभास तब हुआ जब उन्होंने देखा कि परि-आकाशगंगा माध्यम द्रव्यमान के मॉडल कम द्रव्यमान वाली आकाशगंगाओं के प्रेक्षणों से मेल नहीं खाते। अंतर-आकाशगंगा माध्यम द्वारा परि-आकाशगंगा माध्यम मापों को भ्रमित करने का उनका वर्तमान सिद्धांत सभी द्रव्यमानों की आकाशगंगाओं पर लागू होता है और कम द्रव्यमान वाली आकाशगंगाओं में देखी गई विसंगति को समझाने में सहायक हो सकता है।

डॉ. सरकार कहते हैं कि हमारी आकाशगंगा जैसी उच्च द्रव्यमान वाली आकाशगंगाओं के लिए, परि-आकाशगंगा माध्यम आयनित ऑक्सीजन में केवल 50 प्रतिशत का योगदान दे सकता है, शेष अंतर-आकाशगंगा माध्यम से आता है। कम द्रव्यमान वाली आकाशगंगाओं के लिए, यह 30 प्रतिशत तक कम हो सकता है। यह अध्ययन परि-आकाशगंगा माध्यम प्रेक्षणों की व्याख्या करते समय अंतर-आकाशगंगा माध्यम के योगदान पर विचार करने की आवश्यकता पर प्रकाश डालता है।

रमन रिसर्च इंस्‍टीट्यूट शोधकर्ता, इज़राइल के यरुशलम स्थित हिब्रू विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं के साथ मिलकर, अपने मूल मॉडल को अधिक यथार्थवादी और व्यापक मॉडल में उन्नत करने की दिशा में काम कर रहे हैं, जिसमें शामिल मापदंडों की संख्या अधिक हो। डॉ. सरकार कहते हैं कि हमें यकीन है कि इसमें कुछ विसंगति है। अब हम इस विसंगति को सटीक रूप से मापने का प्रयास कर रहे हैं।

प्रकाशन लिंक: अंतर-आकाशगंगा अवशोषण परि-आकाशगंगा प्रेक्षणों को भ्रमित करता है – आईओपीसाइंस

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बाढ़ के भय से मुक्ति तक: कोसी नदी पर आशा का एक नया पुल

नई दिल्ली – कोसी नदी के तट पर, जहां दशकों से लोग बाढ़, अलगाव और लंबे चक्करों से जूझ रहे हैं, एक नया सपना साकार हो रहा है। 13.3 किलोमीटर लंबा भेजा-बकौर कोसी पुल अब निर्माण के अंतिम चरण में है। कोसी नदी पर बना यह पुल एक बार चालू होने के बाद यात्रा की दूरी को 44 किलोमीटर कम कर देगा। यह बाढ़ प्रभावित, सुविधाओं से वंचित मधुबनी और सुपौल क्षेत्रों को सीधे एनएच-27 और पटना से जोड़ देगा। इससे नेपाल और पूर्वोत्तर के लिए भी सुगम मार्ग खुलेंगे। इससे सीमा पार व्यापार, क्षेत्रीय वाणिज्य और बहुप्रतीक्षित निवेश को बढ़ावा मिलेगा। यह विकास बिहार में भारतमाला परियोजना के प्रथम चरण की बस रैपिड ट्रांजिट (बीआरटी) योजना के अंतर्गत ईपीसी मोड पर हो रहा है। 1101.99 करोड़ रूपये के निवेश से निर्मित यह पुल क्षेत्र में कनेक्टिविटी को बदलने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। परियोजना के वित्त वर्ष 2026-2027 में पूरा होने का लक्ष्य है।

तीर्थयात्रियों को भगवती उच्चैत, बिदेश्वर धाम, उग्रतारा मंदिर और सिंहेश्वर स्थान जैसे पवित्र स्थलों तक आसानी से पहुंच मिलेगी। किसानों को बाढ़ के दौरान फंसे रहने का डर नहीं रहेगा। छात्र बिना किसी डर के स्कूल पहुंच सकेंगे। व्यापारी समय पर सामान पहुंचा सकेंगे। छोटी दुकानें बढ़ेंगी; परिवहन सेवाएं बेहतर होंगी; स्थानीय युवाओं को नए रोजगार मिलेंगे।

एक समय उग्र नदी से संघर्षों के लिए मशहूर इस क्षेत्र में, यह पुल संभावनाओं को नए सिरे से परिभाषित कर रहा है। और जैसे ही कोसी पुल निर्माण के अंतिम चरण के नजदीक आ रहा है, उत्तरी बिहार के लोग एक ही भावना से एकजुट हो जाते हैं – उनकी दुनिया हमेशा के लिए बदलने वाली है।

संक्षिप्त तथ्य:

  • परियोजना की लंबाई (किलोमीटर में): 13.300 किलोमीटर
  • अनुमानित सिविल परियोजना लागत: 1101.99 करोड़ रुपये
  • पूर्ण होने की तिथि: वित्तीय वर्ष 2026-2027

यह पुल मधुबनी, सुपौल, सहरसा और आसपास के जिलों के लोगों के लिए मात्र इस्पात और कंक्रीट से कहीं अधिक है। यह एक जीवन रेखा है, आशा की एक अटूट कड़ी है, जो कोसी नदी के बाढ़ के मैदानों की चुनौतियों से प्रभावित समुदायों के लिए जीवन को सुगम बनाती है।

सहरसा के रहने वाले शिक्षक रोशन कुमार, जो मधुबनी के एक प्लस-टू स्कूल में रोज़ाना पढ़ाने जाते हैं, उनके लिए यह पुल वर्षों की थका देने वाली यात्राओं से मुक्ति का प्रतीक है। वे बताते हैं, “अभी भेजा पहुंचने के लिए मुझे बलवाहा पुल और कोसी तटबंध से होते हुए लगभग 70 किलोमीटर अतिरिक्त यात्रा करनी पड़ती है। पहले हमें दरभंगा या फुलपरास होकर जाना पड़ता था जो 150 से 200 किलोमीटर का सफर होता था। पुल चालू होने बाद सहरसा से मधुबनी की दूरी लगभग 70 किलोमीटर कम हो जाएगी। यह बदलाव जीवन बदल देने वाला है।” उनकी आवाज़ में नरमी आ जाती है जब वे आगे कहते हैं, “यह सिर्फ एक पुल नहीं है। इससे शिक्षकों, छात्रों, व्यापारियों… सभी के लिए समय, पैसा और ऊर्जा की बचत होगी।”

क्षेत्र में एक मेडिकल शॉप के मालिक पंकज के लिए, इस परियोजना का भावनात्मक महत्व और भी गहरा है। वे कहते हैं, “हमने बहुत कष्ट झेला है। मरीजों को अस्पतालों तक ले जाना एक बुरे सपने जैसा था। बाढ़ के कारण हमारा संपर्क टूट जाता था, नौकाएं बंद हो जाती थीं, और कई बार मदद देर से पहुंचने के कारण लोगों की जान चली जाती थी।” बन रही संरचना को देखकर उनकी आंखों में गर्व की चमक आ जाती है। “अब एम्बुलेंस आधे घंटे में पुल पार कर जाएगी। मरीज समय पर पहुंचेंगे। यह सम्मान की बात है। यह सुरक्षा की बात है। हमें गर्व है कि हमारे जिले में ऐसा पुल बन रहा है।”

क्षेत्र के युवाओं में भी यही उत्साह है। ग्यारहवीं कक्षा की छात्रा नेहा बताती हैं कि मानसून के दौरान इलाके को कितनी परेशानी झेलनी पड़ी थी। “लोग पार करने से डरते थे। सड़कें बह जाती थीं। लेकिन अब सब कुछ बदल जाएगा। हम सुरक्षित स्कूल पहुंचेंगे। हमारा इलाका आखिरकार राज्य के बाकी हिस्सों से जुड़ पाएगा।” इस पुल का परिवर्तनकारी प्रभाव इन व्यक्तिगत अनुभवों से कहीं अधिक व्यापक है।

 

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केंद्र सरकार ने विश्व स्तरीय मुंबई मरीना के लिए 887 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी, जिसका उद्देश्य तटीय नौवहन और समुद्री पर्यटन को बढ़ावा देना है

नई दिल्ली – केंद्र सरकार ने मुंबई हार्बर में 887 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से एक विश्व स्तरीय मरीना विकसित करने की योजना को मंजूरी दी है, इस कदम से देश की वित्तीय राजधानी में तटीय नौवहन, समुद्री पर्यटन और वॉटरफ्रंट के नेतृत्व वाले शहरी विकास को महत्वपूर्ण बढ़ावा मिलने की आशा  है।

प्रस्तावित ‘विकसित भारत मुंबई मरीना’ को पोर्ट्स, शिपिंग और जलमार्ग मंत्रालय द्वारा मंजूरी मिल चुकी है, जो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा वैश्विक मानक के पर्यटन स्थलों के निर्माण और भारत की समुद्री अर्थव्यवस्था को सशक्त बनाने के लिए व्यक्त किए गए दृष्टिकोण के अनुरूप है।

इस अवसर पर  केंद्रीय पत्तनपोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “‘विकसित भारत मुंबई मरीना’ की यह मंजूरी तटीय नौवहन और समुद्री पर्यटन को मजबूत करने के हमारे प्रयासों में एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के दृष्टिकोण से निर्देशित, यह परियोजना विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचे का निर्माण करेगी, सार्वजनिक उपयोग के लिए तट खोलेगी, निजी निवेश को प्रोत्साहन देगी और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगी। यह भारत के व्यापक नीली अर्थव्यवस्था लक्ष्यों को आगे बढ़ाते हुए मुंबई को वैश्विक समुद्री पर्यटन केंद्र के रूप में स्थापित करने में मदद करेगा।

इस परियोजना को हाइब्रिड डेवलपमेंट मॉडल के माध्यम से लागू किया जाएगा, जिसके तहत मुंबई पोर्ट अथॉरिटी ईपीसी आधार पर कोर मरीना इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण के लिए लगभग 470 करोड़ रुपये का निवेश करेगी, जबकि एक निजी ऑपरेटर 417 करोड़ रुपये के अनुमानित निवेश के साथ तटवर्ती सुविधाओं का विकास करेगा। मंत्रालय ने बंदरगाह प्राधिकरण के निवेश को मंजूरी दे दी है, और निविदाएं जारी कर दी गई हैं, जिनकी बोलियां 29 दिसंबर, 2025 को बंद होगी ।

केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “यह प्रोजेक्ट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी के मुंबई को ग्लोबल मरीना डेस्टिनेशन बनाने के विज़न को दिखाता है। यह प्रोजेक्ट मैरीटाइम टूरिज्म को मज़बूत करेगा, प्राइवेट इन्वेस्टमेंट को आकर्षित करेगा और इससे जुड़े सेक्टर्स में 2,000 से ज़्यादा नौकरियां पैदा करेगा, साथ ही कोस्टल और ब्लू इकॉनमी एक्टिविटीज़ में नए मौके खोलेगा।”

लगभग 12 हेक्टेयर जल क्षेत्र में योजनाबद्ध, मरीना में 30 मीटर तक की लंबाई की 424 नौकाओं को रखने की क्षमता होगी। समुद्री बुनियादी ढांचे में एक एप्रोच ट्रेस्टल, पाइल्ड ब्रेकवाटर, सर्विस प्लेटफॉर्म, पोंटून और गैंगवे शामिल होंगे जिन्हें सुरक्षित और कुशल नौका संचालन का समर्थन करने के लिए डिज़ाइन किया गया है।

निजी ऑपरेटर द्वारा विकसित की जाने वाली तटवर्ती सुविधाओं में एक मरीना टर्मिनल भवन, एक नमो भारत अंतर्राष्ट्रीय नौकायन स्कूल, एक समुद्री पर्यटन विकास केंद्र, होटल और क्लब हाउस सुविधाएं, एक कौशल विकास केंद्र और नौका स्टैकिंग और मरम्मत बुनियादी ढांचा शामिल होंगे।

यह प्रोजेक्ट मैरीटाइम इंडिया विजन (एमआईवी) 2030, मैरीटाइम अमृत काल विजन (एमएकेवी) 2047, सागरमाला कार्यक्रम  और क्रूज़ भारत मिशन जैसे मुख्य नेशनल फ्रेमवर्क के साथ-साथ मुंबई पोर्ट अथॉरिटी के पोर्ट मास्टर प्लान 2047 के साथ संरेखित  है।

यह मरीना 2,000 से अधिक रोजगार सृजित करने की उम्मीद है, जो मरीना संचालन, क्रूज़ सेवाएं, आतिथ्य और संबद्ध गतिविधियों में होंगे, जबकि तटीय अवसंरचना में निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देगा। इसका उद्देश्य सार्वजनिक पहुँच को जलतट तक बेहतर बनाना और मुंबई को एक प्रमुख समुद्री पर्यटन और क्रूज़ यातायात केंद्र के रूप में मजबूती से स्थापित करना है।

फोटो कैप्शन: प्रस्तावित ‘विकसित भारत मुंबई मरीना’ का कलात्मक चित्रण, जिसे मुंबई पोर्ट अथॉरिटी द्वारा विश्वस्तरीय समुद्री पर्यटन अवसंरचना को बढ़ावा देने के लिए विकसित किया जा रहा है।

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श्री धर्मेंद्र प्रधान ने शिक्षण और अध्‍ययन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के उपयोग पर तीसरी परामर्शी समिति की बैठक की अध्यक्षता की

नई दिल्ली – केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज नई दिल्ली में शिक्षण और अध्‍ययन में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के उपयोग पर परामर्शी समिति की तीसरी बैठक की अध्यक्षता की। शिक्षा एवं पूर्वोत्‍तर क्षेत्र विकास (डोनर) राज्य मंत्री श्री सुकांत मजूमदार; कौशल विकास एवं उद्यमिता (स्वतंत्र प्रभार) एवं शिक्षा राज्य मंत्री श्री जयंत चौधरी; समिति के सदस्य, विद्यालय शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव श्री संजय कुमार; उच्च शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. विनीत जोशी और मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी बैठक में उपस्थित थे।

इस अवसर पर श्री प्रधान ने कहा कि एआई में शिक्षा के क्षेत्र में कुछ सबसे बड़ी चुनौतियों- विशेष रूप से गुणवत्तापूर्ण शिक्षा को अधिक समावेशी, सुलभ और न्यायसंगत बनाने की दिशा में- का समाधान करने की क्षमता है।

उन्होंने सदस्यों के बहुमूल्य सुझावों और विचारों की सराहना की और उन्हें धन्यवाद दिया। उन्होंने कहा कि हम अध्‍ययन को विद्यार्थी-केंद्रित और व्यक्तिगत बनाने, अध्‍ययन परिणामों में सुधार करने, हमारे विविध विद्यार्थी समुदाय की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करने के साथ-साथ विद्यार्थियों और शिक्षकों को सशक्त बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।

 

स्कूली शिक्षा संबंधी उपायों पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी गई, जिसमें रेखांकित किया गया कि एनईपी 2020 के अनुरूप आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को स्कूली शिक्षा प्रणाली में किस प्रकार व्यवस्थित रूप से एकीकृत किया जा रहा है। प्रस्तुति में पाठ्यक्रम सुधारों- जैसे कि आधारभूत स्तर से ही आयु-उपयुक्त गणनात्मक सोच और एआई साक्षरता, परियोजना-आधारित शिक्षा और माध्यमिक स्तर पर एक कौशल विषय के रूप में एआई का औपचारिक परिचय- को शामिल किया गया। इसमें दीक्षा 2.0, ई-जादुई पिटारा, गुरु-मित्र, तारा ऐप, माई करियर एडवाइजर और विद्या समीक्षा केंद्र सहित प्रमुख राष्ट्रीय डिजिटल उपायों को भी प्रदर्शित किया गया, जो व्यक्तिगत अध्‍ययन, शिक्षक सहायता, कैरियर मार्गदर्शन, मूल्यांकन, बहुभाषी पहुंच और छात्र प्रगति की वास्तविक समय निगरानी के लिए एआई का लाभ उठा रहे हैं।

उच्च शिक्षा में किए जा रहे उपायों पर एक विस्तृत प्रस्तुति भी दी गई, जिसमें शिक्षण-अध्‍ययन प्रक्रियाओं, अनुसंधान, नवोन्‍मेषण और रोजगार क्षमता को सुदृढ़ करने में एआई की रूपांतरकारी भूमिका पर बल दिया गया। चर्चा में केंद्र द्वारा वित्त पोषित संस्थानों में एआई-सक्षम पाठ्यक्रम अद्यतन, कौशल-आधारित और अंतःविषयक पाठ्यक्रमों का एकीकरण और उन्नत शिक्षा तथा अनुसंधान में सहायता करने के लिए डिजिटल और वास्‍तविक अवसंरचना के संवर्धन की रूपरेखा प्रस्तुत की गई। प्रस्तुति में रेखांकित किया गया कि इन उपायों का उद्देश्य भविष्य के लिए तैयार स्नातकों का निर्माण करना, उच्च शिक्षा संस्थानों के भीतर नवोन्‍मेषण इकोसिस्‍टम को बढ़ावा देना और यह सुनिश्चित करना है कि भारत की उच्च शिक्षा प्रणाली वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी और समावेशी बनी रहे।

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संसद द्वारा सबका बीमा सबकी रक्षा (बीमा कानून संशोधन) विधेयक, 2025 पारित, बीमा कंपनियों में 100 प्रतिशत तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति

नई दिल्ली – संसद ने 17.12.2025 को सबका बीमा सबकी रक्षा (बीमा कानून संशोधन) विधेयक, 2025 पारित कर दिया है। यह विधेयक बीमा क्षेत्र से संबंधित तीन प्रमुख अधिनियमों में संशोधन करता है: बीमा अधिनियम, 1938, भारतीय जीवन बीमा निगम अधिनियम, 1956 और भारतीय बीमा विनियामक एवं विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1999।

इस विधेयक की एक प्रमुख विशेषता बीमा कंपनियों में 100 प्रतिशत तक प्रत्यक्ष विदेशी निवेश की अनुमति देना है, जिससे भारत में अधिक विदेशी कंपनियों के लिए रास्ते खुल जाएंगे। यह कदम पूंजी विस्तार, उन्नत तकनीक को अपनाने और वैश्विक सर्वोत्तम कार्यप्रणालियों को लाने के साथ-साथ रोजगार के अवसर बढ़ाने में भी सहायक होगा। बढ़ती प्रतिस्पर्धा से उत्पादों और सेवाओं में दक्षता आएगी, जो नागरिकों के लिए फायदेमंद साबित होगी।

इंटरमीडियरीज के लिए वन-टाइम लाइसेंसिंग और लाइसेंस को सीधे रद्द करने के बजाय लाइसेंस निलंबन के प्रावधान के माध्यम से व्यापार सुगमता को बढ़ावा दिया जा रहा है। बीमाकर्ताओं के लिए, शेयर पूंजी के हस्तांतरण हेतु पूर्व नियामक अनुमोदन की सीमा को 1 प्रतिशत से बढ़ाकर 5 प्रतिशत कर दिया गया है और फॉरेन रीइंश्योरेंस ब्रांच के लिए नेट ओन्ड फंड की आवश्यकता को 5,000 करोड़ रुपये से घटाकर 1,000 करोड़ रुपये कर दिया गया है। इसके अलावा, एलआईसी को देश में क्षेत्रीय कार्यालय खोलने और अपने विदेशी कार्यालयों को संबंधित देशों के कानूनों एवं विनियमों के अनुरूप ढालने की स्वायत्तता प्रदान की गई है।

पॉलिसीधारकों के हितों की रक्षा के लिए, बीमा के प्रति जागरूकता फैलाने हेतु पॉलिसीधारक शिक्षा एवं संरक्षण कोष नामक एक समर्पित फंड स्थापित किया जाएगा। अब पॉलिसीधारकों का डेटा डीपीडीपी अधिनियम 2023 के अनुरूप एकत्र और संरक्षित करना अनिवार्य होगा।

विनियमन बनाने के लिए मानक संचालन प्रक्रिया शुरू करके और परामर्श प्रक्रिया को अनिवार्य बनाकर नियामक गवर्नेंस को मजबूत किया जा रहा है। आईआरडीएआई को बीमाकर्ताओं और मध्यस्थों द्वारा किए गए अनुचित लाभ को वापस वसूलने की शक्ति दी जा रही है। साथ ही, दंड के प्रावधानों को तर्कसंगत बनाया जा रहा है और जुर्माना लगाने के मानकों को परिभाषित किया जा रहा है।

इन सुधारों का उद्देश्य आम लोगों, परिवारों और उद्यमों तक बीमा कवरेज का विस्तार करना, इंश्योरेंस कवरेज का विस्तार करने, व्यापार सुगमता को बढ़ावा देने और नियामक निगरानी एवं गवर्नेंस में सुधार करना है। ये सभी उपाय भारतीय बीमा क्षेत्र को मजबूत करेंगे, जिससे भारतीय अर्थव्यवस्था को वित्तीय मजबूती प्राप्त होगी।

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संसदीय प्रश्न: राष्ट्रीय रोजगार मेला

नई दिल्ली – राष्ट्रीय रोजगार मेला पहल अक्टूबर 2022 में शुरू की गई थी। विभिन्न राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 40-50 शहरों में राष्ट्रीय स्तर पर अब तक 17 रोजगार मेला आयोजित किए जा चुके हैं। इन रोजगार मेलों में भाग लेने वाले मंत्रालयों/विभागों/संगठनों आदि द्वारा कई लाख नियुक्ति पत्र जारी किए गए हैं।

विभिन्न राज्यों/जिलों के उम्मीदवारों को जारी किए गए नियुक्ति पत्रों का विवरण संबंधित मंत्रालयों/विभागों/संगठनों आदि द्वारा रखा जाता है।

ओडिशा में भुवनेश्वर, कटक और संबलपुर सहित विभिन्न स्थानों पर 17 राष्ट्रीय रोजगार मेला आयोजित किए जा चुके हैं।

राष्ट्रीय रोजगार मेला युवाओं के बीच रोजगार सृजन को सर्वोच्च प्राथमिकता देने की सरकार की प्रतिबद्धता को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। रोजगार मेला केंद्रीय सरकारी मंत्रालयों/विभागों/संगठनों आदि में मिशन मोड में रिक्त पदों को शीघ्रता से भरने के लिए उत्प्रेरक का काम करता है।

रोजगार मेला आयोजनों के माध्यम से नियुक्ति पत्रों के वितरण से विभिन्न सरकारी कार्यों के निर्वहन और नागरिक सेवाओं के कुशल वितरण के लिए महत्वपूर्ण मानव संसाधनों की तैनाती में सुविधा हुई है, जिससे देश भर में रोजगार/स्वरोजगार के सृजन में सकारात्मक प्रभाव उत्पन्न हुआ है।

इसके अलावा, भर्ती प्रक्रिया के संपूर्ण डिजिटलीकरण के लिए विभिन्न पहलों के माध्यम से, जिनमें कंप्यूटर आधारित परीक्षाओं का संचालन और अभ्यर्थियों को विभिन्न क्षेत्रीय भाषाओं में कुछ परीक्षाएं देने की सुविधा प्रदान करना शामिल है। देश के सभी हिस्सों के अभ्यर्थियों को रोजगार के अवसरों में अधिक समानता और व्यापक पहुंच का लाभ मिला है। इनमें आदिवासी और आकांक्षी जिलों के अभ्यर्थी भी शामिल हैं।

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प्रधानमंत्री पारंपरिक चिकित्सा पर विश्व स्वास्थ्य संगठन के दूसरे वैश्विक शिखर सम्मेलन के समापन समारोह को संबोधित करेंगे

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 19 दिसंबर, 2025 को शाम 4:30 बजे भारत मंडपम, नई दिल्ली में पारंपरिक चिकित्सा पर दूसरे डब्ल्यूएचओ वैश्विक शिखर सम्मेलन के समापन समारोह में भाग लेंगे। प्रधानमंत्री समापन समारोह के दौरान सभा को भी संबोधित करेंगे। यह कार्यक्रम वैश्विक, विज्ञान-आधारित और जन-केंद्रित पारंपरिक चिकित्सा एजेंडे को आकार देने में भारत के बढ़ते नेतृत्व और अग्रणी पहल को दर्शाता है।

प्रधानमंत्री ने अनुसंधान, मानकीकरण और वैश्विक सहयोग के माध्यम से पारंपरिक चिकित्सा और भारतीय ज्ञान प्रणाली को मुख्यधारा में लाने पर लगातार जोर दिया है। इस दृष्टिकोण के अनुरूप, कार्यक्रम के दौरान, प्रधानमंत्री आयुष क्षेत्र के लिए एक मास्टर डिजिटल पोर्टल, माई आयुष इंटीग्रेटेड सर्विसेज पोर्टल (एमएआईएसपी) सहित कई ऐतिहासिक आयुष पहलों का शुभारंभ करेंगे। वे आयुष मार्क का भी शुभारंभ करेंगे, जिसकी परिकल्पना आयुष उत्पादों और सेवाओं की गुणवत्ता के लिए एक वैश्विक बेंचमार्क के रूप में की गई है।

इस अवसर पर, प्रधानमंत्री योग के प्रशिक्षण पर डब्ल्यूएचओ की तकनीकी रिपोर्ट और पुस्तक “फ्रॉम रूट्स टू ग्लोबल रीच: 11 इयर्स ऑफ ट्रांसफॉर्मेशन इन आयुष” का विमोचन करेंगे। वे अश्वगंधा पर एक स्मारक डाक टिकट भी जारी करेंगे, जो भारत की पारंपरिक औषधीय विरासत की वैश्विक प्रतिध्वनि का प्रतीक है।

प्रधानमंत्री दिल्ली में नए डब्ल्यूएचओ दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्रीय कार्यालय परिसर का भी उद्घाटन करेंगे, जिसमें डब्ल्यूएचओ इंडिया कंट्री ऑफिस भी होगा, जो विश्व स्वास्थ्य संगठन के साथ भारत की साझेदारी में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।

प्रधानमंत्री योग के प्रति उनके निरंतर समर्पण और इसके वैश्विक प्रचार को मान्यता देते हुए, योग के प्रचार और विकास में उत्कृष्ट योगदान के लिए वर्ष 2021-2025 के लिए प्रधानमंत्री पुरस्कार प्राप्त करने वालों को सम्मानित करेंगे। ये पुरस्कार योग को संतुलन, कल्याण और सद्भाव के लिए एक कालातीत अभ्यास के रूप में पुष्टि करते हैं, जो एक स्वस्थ और मजबूत नए भारत में योगदान देता है।

प्रधानमंत्री ट्रेडिशनल मेडिसिन डिस्कवरी स्पेस को भी देखेंगे, जो भारत और दुनिया भर में पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान प्रणालियों की विविधता, गहराई और समकालीन प्रासंगिकता को दर्शाने वाली एक प्रदर्शनी है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) और आयुष मंत्रालय, भारत सरकार द्वारा संयुक्त रूप से आयोजित, शिखर सम्मेलन 17 से 19 दिसंबर, 2025 तक भारत मंडपम, नई दिल्ली में “संतुलन की पुनर्स्थापना: स्वास्थ्य और कल्याण का विज्ञान और अभ्यास ” विषय के तहत आयोजित किया जा रहा है। शिखर सम्मेलन में वैश्विक हस्तियों, नीति निर्माताओं, वैज्ञानिकों, चिकित्सकों, स्वदेशी ज्ञान धारकों और नागरिक समाज के प्रतिनिधियों के बीच न्यायसंगत, टिकाऊ और साक्ष्य-संचालित स्वास्थ्य प्रणालियों को आगे बढ़ाने पर गहन विचार-विमर्श हुआ।

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अमूर्त सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण एवं संवर्धन

नई दिल्ली – अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (आईसीएच) की राष्ट्रीय सूची, जिसमें राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों से प्राप्त पात्र आईसीएच तत्त्व शामिल हैं, का केंद्रीय स्तर पर संधारण संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत संगीत नाटक अकादमी (एसएनए) द्वारा किया जाता है। इस सूची का निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों तथा अन्य हितधारकों द्वारा प्रस्तुत अपेक्षित प्रलेखन के आधार पर नियमित रूप से अद्यतन किया जाता है, जिसमें निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुसार, वंचित, जनजातीय एवं स्वदेशी परंपराओं से संबंधित तत्त्व भी सम्मिलित होते हैं। अमूर्त सांस्‍कृतिक विरासतों की राष्ट्रीय सूची निम्नलिखित लिंक पर उपलब्ध है: https://www.sangeetnatak.gov.in/sections/ICH.

संस्कृति मंत्रालय के क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्रों (जोनल कल्चरल सेंटर्स–जेडसीसी) की गुरु-शिष्य परंपरा योजना के अंतर्गत शिष्यों को वरिष्ठ कलाकारों द्वारा विभिन्न कला रूपों में प्रशिक्षण प्रदान किया जाता है, जिसमें दुर्लभ एवं लुप्तप्राय: कला रूप भी शामिल हैं।

इस योजना के अंतर्गत गुरु को ₹7,500/-, संगतकार को ₹3,750/- तथा शिष्यों को ₹1,500/- प्रति माह का मानदेय प्रदान किया जाता है। यह मानदेय एक कला रूप के लिए न्यूनतम छह माह से अधिकतम एक वर्ष की अवधि के लिए देय होता है। गुरुओं के नामों की अनुशंसा राज्य के संस्कृति कार्य विभागों द्वारा की जाती है।

जोनल सांस्कृतिक केंद्र (जेडसीसी) उभरते कलाकारों के लिए मंच उपलब्ध कराकर, विद्यार्थियों एवं युवा समूहों की सहभागिता को प्रोत्साहित करके तथा शैक्षणिक संस्थानों और स्थानीय समुदायों को जोड़कर ज्ञान के एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी को हस्तांतरण सुनिश्चित करते हैं। ये प्रयास युवाओं की भागीदारी बढ़ाने, सामुदायिक गौरव को सुदृढ़ करने और पारंपरिक सांस्कृतिक अभिव्यक्तियों में निरंतर जन-रुचि उत्पन्न करने के माध्यम से संकटग्रस्त कला रूपों के पुनर्जीवन में प्रभावी सिद्ध हुए हैं।

छठ महापर्व का नामांकन दस्तावेज़ संस्कृति मंत्रालय के अंतर्गत एक स्वायत्त निकाय तथा अमूर्त सांस्कृतिक विरासत (आईसीएच) से संबंधित मामलों की नोडल एजेंसी, संगीत एवं नाटक अकादमी द्वारा क्षेत्रीय निकायों एवं अन्य हितधारकों की सक्रिय सहभागिता के साथ तैयार किया गया है। यह नामांकन दस्तावेज़ 2026–27 चक्र के लिए मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में सम्मिलित किए जाने हेतु यूनेस्को को प्रस्तुत किया गया है।

भारत सरकार द्वारा स्थापित सभी जोनल सांस्कृतिक केंद्र (जेडसीसी) युवाओं पर केंद्रित विभिन्न कार्यक्रमों का क्रियान्वयन करते हैं, जो संकटग्रस्त कला रूपों के संरक्षण में महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। इन पहलों में राष्ट्रीय संस्कृति महोत्सवों (आरएसएम), सांस्कृतिक उत्सवों तथा अंतर-राज्यीय विनिमय कार्यक्रमों का आयोजन शामिल है, जिनके माध्यम से युवाओं को विविध पारंपरिक प्रथाओं से परिचित कराया जाता है। इसके अतिरिक्त, कार्यशालाओं, प्रशिक्षण शिविरों एवं शिल्प प्रदर्शनियों के माध्यम से लोक नृत्य, संगीत, रंगमंच और शिल्प के क्षेत्रों में उन्हें व्यावहारिक कौशल भी प्रदान किए जाते हैं।

जोनल सांस्कृतिक केंद्र (जेडसीसी) अपने कार्यक्रमों, गतिविधियों तथा प्रदर्शन कलाओं का डिजिटल रूप में प्रलेखन करने में संलग्न हैं। इसके अंतर्गत संकटग्रस्त लोक-कला रूपों की रिकॉर्डिंग एवं दस्तावेज़ीकरण के साथ-साथ लोककथा एवं मौखिक इतिहास से संबंधित पुस्तकों, प्रतिवेदनों तथा लोक-कथाओं का मुद्रण भी किया जाता है।

यह जानकारी आज राज्यसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत द्वारा दी गई।

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श्री अमित शाह ने भारत-ओमान CEPA को किसानों, कारीगरों, महिलाओं और MSMEs की समृद्धि के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के राजनीतिक कौशल की जीत बताया

नई दिल्ली – X प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि किसानों, कारीगरों, महिलाओं और MSMEs की समृद्धि के लिए प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी का राजनीतिक कौशल जीत गया। उन्होंने कहा कि भारत-ओमान CEPA के तहत कुल भारतीय एक्सपोर्ट के 99.38% हिस्से पर ओमान की 98.08% टैरिफ लाइन्स पर ज़ीरो-ड्यूटी एक्सेस मिलेगी, जो कि मील का पत्थर सिद्ध होगा। श्री शाह ने कहा कि हमारे मेहनती लोगों और उद्योगों के लिए नए अवसर खोलते हुए, यह समझौता प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में हमारी व्यापार कूटनीति में आए बदलाव का प्रमाण है, जिसमें जनता के हित वैश्विक समझौतों में सबसे आगे रहते हैं।

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सरकार पूरे भारत में कैंसर देखभाल, अनुसंधान और किफायती उन्नत उपचारों को बढ़ा रही है : डॉ. जितेंद्र सिंह

नई दिल्ली – देश में कैंसर के बढ़ते बोझ पर संसद में कई प्रश्नों के उत्तर में विज्ञान और प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान और प्रधानमंत्री कार्यालय में राज्य मंत्री, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कैंसर की रोकथाम, निदान, उपचार, अनुसंधान और विशेष रूप से आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए वहनीयता को मजबूत करने के लिए सरकार की बहुआयामी, भविष्य के लिए तैयार रणनीति की जानकारी दी।

मंत्री ने अस्पताल में भर्ती, कैंसर के बढ़ते मामले, दवाओं की सामर्थ्य, टीके, वैश्विक सहयोग और उन्नत परमाणु उपचार तक पहुंच से संबंधित चिंताओं को दूर किया। उन्होंने कहा कि सरकार अनुसंधान, प्रौद्योगिकी और सार्वजनिक स्वास्थ्य एकीकरण द्वारा संचालित कैंसर देखभाल को चुनिंदा उत्कृष्टता से सार्वभौमिक पहुंच में बदल रही है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने स्वीकार किया कि कैंसर रोगियों और उनके परिवारों को अक्सर अस्पताल में भर्ती के दौरान भावनात्मक और लॉजिस्टिकल तनाव का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि सरकार प्रवेश प्रक्रियाओं को सुव्यवस्थित करने की दिशा में काम कर रही है, साथ ही तृतीयक अस्पतालों पर रेफरल दबाव को कम करने के लिए जिला स्तर पर कैंसर विज्ञान सुविधाओं का विस्तार कर रही है।

मंत्री ने बताया कि 2014 से देश भर में 11 टाटा मेमोरियल सेंटर अस्पताल स्थापित किए गए हैं। इसके साथ ही 300 से ज़्यादा अस्पतालों को कवर करने वाला नेशनल कैंसर केयर ग्रिड भी बनाया गया है, जो मरीज़ों के घरों के पास स्टैंडर्ड और आसानी से मिलने वाली कैंसर सेवाएं सुनिश्चित करता है। नवी मुंबई में प्लेटिनम ब्लॉक सहित बड़े विस्तार कार्य भी चल रहे हैं।

कैंसर के बढ़ते मामलों पर चिंताओं को दूर करते हुए, डॉ. सिंह ने कहा कि यह बढ़ोतरी ग्लोबल घटना है। इसके लंबी उम्र, पर्यावरणीय कारक, जीवनशैली में बदलाव और गैर-संक्रामक बीमारियों की जल्दी शुरुआत जैसे कारण हैं। मंत्री ने कहा, “आज कैंसर सिर्फ़ बुढ़ापे की बीमारी नहीं रही। शुरुआती जांच ने कई कैंसर को जानलेवा से ठीक होने लायक बना दिया है।”

डॉ. जितेंद्र सिंह ने सदन को बताया कि बोर्ड ऑफ़ रेडिएशन एंड आइसोटोप टेक्नोलॉजी (बीआरआईटी), टाटा मेमोरियल सेंटर और टीचिंग अस्पतालों जैसे संस्थानों के ज़रिए बड़े पैमाने पर रिसर्च चल रही है। यह न सिर्फ़ कैंसर पर, बल्कि रेडियोप्रोटेक्टिव एजेंटों और सटीक-लक्षित टेक्नोलॉजी के ज़रिए कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी के साइड इफ़ेक्ट को कम करने पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार की कैंसर देखभाल नीति में किफ़ायती इलाज सबसे अहम है। टाटा मेमोरियल सेंटर में, लगभग 60% मरीज़ों को आयुष्मान भारत जैसी योजनाओं के तहत मुफ़्त या बहुत कम कीमत पर इलाज मिलता है, जबकि सशुल्क सेवाएं भी कॉर्पोरेट अस्पतालों की तुलना में काफ़ी सस्ती हैं।

मंत्री ने कहा कि सरकार सरकारी अस्पतालों और देश में दवाओं के निर्माण के ज़रिए ज़रूरी कैंसर दवाओं की समय पर उपलब्धता सुनिश्चित कर रही है, जिससे महंगे  आयात पर निर्भरता कम हो रही है। डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह भी बताया कि भारत ने अपनी पहली स्वदेशी एचपीवी वैक्सीन विकसित की है, जो जैव प्रौद्योगिकी विभाग की बड़ी उपलब्धि है। यह वैक्सीन सर्वाइकल कैंसर से बचाव में मदद करती है, जो युवा भारतीय महिलाओं में सबसे आम कैंसर में से एक है।

अंतरराष्ट्रीय सहयोग के बारे में डॉ. जितेंद्र सिंह ने “रेज़ ऑफ़ होप” पहल के तहत टाटा मेमोरियल सेंटर की अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के साथ साझेदारी पर बल दिया, जो कम और मध्यम आय वाले देशों के हेल्थकेयर प्रोफेशनल्स को प्रशिक्षण दे रही है। उन्होंने कहा कि टाटा मेमोरियल मरीज़ों की देखभाल, शिक्षण और अत्याधुनिक रिसर्च को अनोखे तरीके से जोड़ता है, डीम्ड यूनिवर्सिटी के रूप में काम करता है और असम सहित कई राज्यों में कैंसर विज्ञान, पीडियाट्रिक ऑन्कोलॉजी और न्यूक्लियर मेडिसिन में सुपर-स्पेशियलिटी प्रशिक्षण देता है।

प्रोस्टेट कैंसर के लिए ल्यूटेटियम-177 पीएसएमए -617 जैसे एडवांस्ड थेरानोस्टिक्स पर प्रश्नों के उत्तर में, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत ने पिछले एक दशक में डायग्नोस्टिक और थेराप्यूटिक इस्तेमाल के लिए 24 स्वदेशी रेडियोआइसोटोप विकसित किए हैं। इनमें प्रोस्टेट कैंसर और बचपन के ब्लड कैंसर के लिए विश्व स्तरीय नवाचार शामिल हैं, जो यह सुनिश्चित करते हैं कि अत्याधुनिक न्यूक्लियर मेडिसिन लॉजिस्टिक्स की चुनौतियों वाले ग्रामीण इलाकों में भी किफायती और आसानी से उपलब्ध हो।

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वैज्ञानिकों ने धातु  प्रदूषण से निपटने में स्पंजी सूक्ष्मजीवों के महत्व को उजागर किया

नई दिल्ली – ताजे पानी के स्पंजी जीव पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण विविध सूक्ष्मजीव समुदाय से होते हैं और उनमें यह क्षमता होती है कि वे जैव-सूचक तथा आर्सेनिक, सीसा, और कैडमियम जैसे विषैले धातुओं के शोषक दोनों रूप में कार्य कर सकते हैं और जैव उपचार के लिए एक संभावित समाधान हो सकते हैं।

जैसे-जैसे प्रदूषण पूरे विश्व में जलीय पारिस्थितिक तंत्र के लिए खतरा बनता जा रहा है, प्रकृति के अपने जल शोधक स्वच्छ वातावरण के संघर्ष में शक्तिशाली सहयोगी के रूप में उभर रहे हैं।

मीठे पानी के स्पंज, जो सबसे शुरुआती बहुकोशिकीय यूकैरियोट्स होते हैं, बड़ी मात्रा में पानी को छानते हैं और पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण होते हैं।

माइक्रोबायोलॉजी स्पेक्ट्रम (अमेरिकन सोसाइटी फॉर माइक्रोबायोलॉजी) में प्रकाशित एक हालिया अध्ययन में, बोस इंस्टीट्यूट, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार का एक स्वायत्त संस्थान, के वैज्ञानिकों ने सुंदरबन डेल्टा से मीठे पानी के स्पंजों का अध्ययन किया और विषाक्त धातु प्रदूषण के जैव संकेतक के रूप में कार्य करने की उनकी क्षमता की पहचान की।

चित्र: स्पंज में धातु के अवशोषण एवं संचय को दर्शाने वाला आरेखसाथ ही जीवाणु समुदायों की विविधता जो भारी धातु प्रतिरोध और संचलन में सक्षम हैं

जीव विज्ञान विभाग के डॉ. अभ्रज्योति घोष और उनकी टीम ने बताया कि स्पंज से जुड़े सूक्ष्मजीव समुदाय प्रदूषित जल को विषमुक्त करने और पारिस्थितिकी तंत्र के स्वास्थ्य को बनाए रखने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

यह अध्ययन, डॉ. ध्रुबा भट्टाचार्य को प्रदान की गई डीएसटी एसईआरबी राष्ट्रीय पोस्ट-डॉक्टोरल फेलोशिप द्वारा समर्थित है और सुंदरबन के ताजे पानी के स्पंजों के बीच जीवाणु विविधता पर रिपोर्ट करने वाला पहला अध्ययन भी है, जो एक अल्प अन्वेषित क्षेत्र में नई अंतर्दृष्टि प्रदान करता है।

इस अध्ययन से पता चला कि स्पंजों में पाए जाने वाले जीवाणु समुदाय आसपास के पानी से भिन्न होते हैं, जो प्रजातियों और आवास द्वारा निर्धारित होते हैं। महत्वपूर्ण बात यह है कि स्पंजों में आर्सेनिक, सीसा और कैडमियम जैसी जहरीली धातुओं का स्तर बहुत ज्यादा पाया गया, जो उनकी मजबूत जैव संचय क्षमता को प्रदर्शित करता है। गंगा के मैदानी क्षेत्र में व्यापक भारी धातु प्रदूषण के मद्देनजर ये स्पंज जैव उपचार के लिए एक आशाजनक समाधान प्रस्तुत करते हैं।

अध्ययन में यह सामने आया कि स्पंज से जुड़े जीवाणुओं में धातु आयन परिवहन, धातु प्रतिरोध एवं रोगाणुरोधी प्रतिरोध से संबंधित जीन प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं, जो केवल संचय तक ही सीमित नहीं है। ये अनुकूलनीय विशेषताएं दर्शाती हैं कि जीवाणु सहजीवी न केवल जीवित रहते हैं बल्कि विषहरण करने एवं पर्यावरणीय तनाव को कम करने में सक्रिय योगदान देते हैं, विशेष रूप से धातु-दूषित आवासों में। यह शोध स्पंज-सूक्ष्मजीव समुदाय के पारिस्थितिक महत्व को उजागर करता है और मुहाना और मीठे पानी के पारिस्थितिक तंत्र में जल की गुणवत्ता और प्रदूषण स्तर की निगरानी के लिए प्रभावी जैव संकेतक के रूप में मीठे पानी के स्पंज की भूमिका को मजबूत करता है।

माइक्रोबायोलॉजी स्पेक्ट्रम नामक पत्रिका में प्रकाशित यह अध्यन स्पंज सूक्ष्मजीव पारिस्थितिकी के संदर्भ में हमारी समझ को व्यापक बनाता है और सतत जल गुणवत्ता प्रबंधन एवं जैव उपचार रणनीतियों के लिए नए मार्ग खोलता है।

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सीबीसी ने “दक्ष पीएसई@2047 के जरिए भारत की विकास यात्रा को आकार देना” विषय पर भारत सीपीएसई परामर्शी सम्मेलन का आयोजन किया

नई दिल्ली – क्षमता निर्माण आयोग (सीबीसी) ने सार्वजनिक उद्यम विभाग (डीपीई), वित्त मंत्रालय के सहयोग से आज नई दिल्ली में ‘भारत सीपीएसई परामर्शी सम्मेलन’ का आयोजन किया। “दक्ष पीएसई @2047 के माध्यम से भारत की विकास गाथा को आकार देना” विषय पर आधारित इस सम्मेलन में केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सीपीएसई), केंद्रीय मंत्रालयों और प्रमुख संस्थागत हितधारकों के वरिष्ठ नेतृत्व ने भाग लिया। इस सम्मेलन का आयोजन ‘मिशन कर्मयोगी’—सिविल सेवा क्षमता निर्माण के लिए भारत के राष्ट्रीय कार्यक्रम—के अनुरूप सीपीएसई के लिए एक साझा और संरचित क्षमता निर्माण रोडमैप विकसित करने के उद्देश्य से किया गया था। इसका लक्ष्य सीपीएसई की मानव पूंजी रणनीतियों में सुशासन (गुड गवर्नेंस) के सिद्धांतों को एकीकृत करना, नेतृत्व और उत्तराधिकार योजना  को मजबूत करना और ‘विकसित भारत @2047’ के राष्ट्रीय दृष्टिकोण को समर्थन देने के लिए अंतर-सीपीएसई सहयोग को बढ़ावा देना था।

कार्यक्रम का संचालन क्षमता निर्माण आयोग की सदस्य (प्रशासन) डॉ. अल्का मित्तल द्वारा किया गया। सम्मेलन का संदर्भ प्रस्तुत करते हुए, डॉ. मित्तल ने राष्ट्र-निर्माण के लिए सीपीएसई की रणनीतिक भूमिका पर जोर दिया और कहा कि उनकी भूमिका केवल व्यावसायिक लक्ष्यों तक सीमित नहीं है। उन्होंने रेखांकित किया कि सीपीएसई न केवल आर्थिक विकास के इंजन हैं, बल्कि सार्वजनिक मूल्यों, शासन मानकों और दीर्घकालिक संस्थागत क्षमता के संरक्षक भी हैं।

क्षमता निर्माण आयोग  की अध्यक्ष सुश्री एस. राधा चौहान ने भारत के व्यापक सिविल सेवा सुधार एजेंडे के हिस्से के रूप में सीपीएसई के भीतर योग्यता-आधारित शासन, नेतृत्व विकास और परफार्मेंस लिंक्ड लर्निंग  को शामिल करने के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने शासन के विकेंद्रीकरण (विभागीय सीमाओं को खत्म करने) और सीखने के लोकतंत्रीकरण पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक सेवा के प्रत्येक वितरण में ‘कर्मयोगी’ का भाव समाहित होना चाहिए।

उद्घाटन भाषण सार्वजनिक उद्यम विभाग के सचिव श्री के. मोजेज चैल्लई द्वारा दिया गया, जिन्होंने इस तथ्य पर जोर दिया कि नेतृत्व अत्यंत महत्वपूर्ण है और हमें दूरदर्शी नेताओं की आवश्यकता है। उन्होंने आगे कहा कि हमें बदलाव के लिए तैयार रहना चाहिए और अच्छे बदलावों को अपनाना चाहिए।

लोक उद्यम चयन बोर्ड (पीएसईबी) के सदस्यों, श्री अल्केश कुमार शर्मा और श्री रूप नारायण सुंकर ने भी अपने प्रमुख विचार साझा किए।

लार्सन एंड टुब्रो (एल एंड टी) लिमिटेड के कार्यकारी उपाध्यक्ष और कॉर्पोरेट मानव संसाधन प्रमुख डॉ. सी. जयकुमार ने “उद्देश्य-प्रेरित नेतृत्व के लिए एचआर रणनीतियाँ” विषय पर एक रणनीतिक मुख्य सत्र को संबोधित किया। उनका ध्यान लचीली नेतृत्व पाइपलाइन बनाने और संगठनात्मक मूल्यों को राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के साथ जोड़ने पर केंद्रित था।

इसके बाद स्कोप के महानिदेशक श्री अतुल सोबती द्वारा ‘दक्ष’ (डेवलपमेंट ऑफ एस्पैरेशन, नॉलेज, सक्सेसन एंड हारमोनी) पर एक प्रस्तुति दी गई, जिसमें सीपीएसई में नेतृत्व विकास, उत्तराधिकार योजना और एचआर सुधारों के लिए एक संरचित ढांचे की रूपरेखा प्रस्तुत की गई।

उद्घाटन सत्र के दौरान एमएनआरई  के सचिव श्री संतोष कुमार सारंगी, सीबीसी के सदस्य (एचआर) डॉ. आर. बालसुब्रमण्यम, कर्मयोगी भारत (केबी) की सीईओ सुश्री छवि भारद्वाज, तथा डीपीई, विभिन्न मंत्रालयों और सीबीसी के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

इस सम्मेलन में “उच्च-प्रभाव वाले सीबीएसई प्रदर्शन के लिए एचआर प्रणालियों की पुनर्कल्पना” और “दृष्टिकोण को क्रियान्वयन में बदलना: सीपीएसई एचआर रणनीति” विषयों पर केंद्रित राउंडटेबल चर्चाएं आयोजित की गईं। इन चर्चाओं ने नेतृत्व विकास, सीखने और विकास प्रणालियों, उत्तराधिकार योजना और शासन एवं प्रदर्शन परिणामों के साथ एचआर नीतियों के तालमेल पर सीपीएसई के बीच ‘पीयर लर्निंग’  को सक्षम बनाया।

प्रतिभागियों ने वित्तीय लाभ से इतर दक्षता, नवाचार और सार्वजनिक मूल्य निर्माण को बढ़ाने के लिए संस्थागत सहयोग, साझा ज्ञान मंचों और एकीकृत क्षमता-निर्माण प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। इन चर्चाओं ने मिशन कर्मयोगी के तहत सीपीएसई की मानव पूंजी रणनीतियों को राष्ट्रीय विकास प्राथमिकताओं और शासन सुधारों के साथ जोड़ने के महत्व को सुदृढ़ किया।

उम्मीद है कि यह सम्मेलन एक “सीपीएसई क्षमता निर्माण संग्रह” के विकास के साथ संपन्न होगा, जो अगले 6-12 महीनों में सर्वोत्तम प्रथाओं, क्षमता अंतराल और अंतर-सीपीएसई क्षमता विकास के लिए सहयोगी मॉडलों को संकलित करेगा।

सीबीसी शासन के क्षेत्र में कर्मयोगी क्षमता निर्माण प्रयासों के अनुरूप सहयोग के लिए प्रशिक्षण संस्थानों, पीएसयू और राज्यों को भी एक साझा मंच पर लाएगा।

इस सम्मेलन के फालो अप के रूप में सीबीसी द्वारा सीपीएसई के क्षमता निर्माण के लिए निम्नलिखित विषयगत कार्यक्रमों की योजना बनाई जा रही है:

· वित्तीय प्रबंधन: दीर्घकालिक पूंजी नियोजन, जोखिम ढांचा, शासन उत्कृष्टता (एफएसआईबी क्षेत्र सहित)।

· आरएंडडी, प्रौद्योगिकी और नवाचार इकोसिस्टम: तकनीक अपनाने के मार्ग, नवाचार साझेदारी, डिजिटल परिवर्तन (अकादमिक जगत, एएनआरएफ और अनुसंधान परिषदों के साथ)।

· सी.एस.आर, ई.एस.जी और स्थिरता नेतृत्व: जिम्मेदार व्यवसाय, ईएसजी मानक, जलवायु-अनुकूल रणनीतियाँ।

· इंजीनियरिंग, परियोजना और संपत्ति प्रबंधन उत्कृष्टता: सर्वश्रेष्ठ परियोजना प्रबंधन मॉडल, मेगा-प्रोजेक्ट निष्पादन, परिचालन लचीलापन।

· सीखना, विकास और प्रशिक्षण पारिस्थितिकी तंत्र: क्षमताओं को सुदृढ़ करना, अंतर-पीएसई ज्ञान का आदान-प्रदान, अनुसंधान-आधारित प्रशिक्षण मॉडल।

कार्यक्रम का समापन क्षमता निर्माण आयोग  के सचिव श्री एस. पी. रॉय के समापन भाषण के साथ हुआ, जिन्होंने कहा कि सीबीसी सदैव सीपीएसई की क्षमता निर्माण पहलों का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है। धन्यवाद ज्ञापन क्षमता निर्माण आयोग की निदेशक सुश्री नवनीत कौर द्वारा दिया गया।

‘भारत सीपीएसई परामर्शी सम्मेलन’ भारत के दीर्घकालिक विकास दृष्टिकोण के अनुरूप सीपीएसई के नेतृत्व, शासन और संस्थागत क्षमता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

 

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असंगठित श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा

नई दिल्ली – केंद्र सरकार ने पिछले 29 केंद्रीय श्रम अधिनियमों के प्रासंगिक प्रावधानों को समेकित, सरलीकृत और तर्कसंगत बनाकर चार श्रम संहिताएं तैयार की हैं, जिनके नाम हैं: मजदूरी संहिता, 2019, औद्योगिक संबंध संहिता, 2020, सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 और व्यावसायिक सुरक्षा, स्वास्थ्य और कार्य स्थितियों संहिता, 2020। देश भर में चारों श्रम संहिताएं 21 नवंबर 2025 से प्रभावी हो गई हैं।

चारों श्रम संहिताएं परिभाषाओं और प्राधिकरणों की बहुलता को कम करती हैं, प्रौद्योगिकी के उपयोग को सुगम बनाती हैं तथा प्रवर्तन में पारदर्शिता और जवाबदेही लाती हैं। साथ ही, यह असंगठित श्रमिकों सहित श्रमिकों को उपलब्ध सुरक्षा को मजबूत करती है। श्रम संहिता में देश के असंगठित श्रमिकों की सामाजिक सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई प्रावधान हैं।

सामाजिक सुरक्षा संहिता2020 के अंतर्गत:

• असंगठित श्रमिकों, गिग (अस्थायी) और प्लेटफॉर्म कर्मचारियों सहित सभी श्रमिकों को सामाजिक सुरक्षा कवर प्रदान किया जाता है।

• रोजगार के नए स्वरूपों को ध्यान में रखते हुए, एग्रीगेटर (एक डिजिटल मध्यवर्ती या मार्केट प्लेस जहां कोई खरीदार या सेवा का उपयोगकर्ता विक्रेता या सेवा प्रदाता से जुड़ सकता है), गिग और प्लेटफॉर्म कामगारों की परिभाषाएं प्रस्तुत की गईं।

• वर्तमान में केवल अधिसूचित जिलों/क्षेत्रों तक सीमित कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) के कवरेज को बढ़ाकर पूरे भारत में सार्वभौमिक रूप से लागू किया गया है।

• कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) की सुविधाएं 10 से कम कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों तक स्वैच्छिक आधार पर विस्तारित की गई हैं।

• अगर खतरनाक व्यवसाय करने वाले किसी भी प्रतिष्ठान में चाहे उसमें एक भी कर्मचारी कार्यरत हो, उसमें ईएसआईसी कवरेज अनिवार्य है।

• कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) की सार्वभौमिक कवरेज अब 20 या अधिक कर्मचारियों को रोजगार देने वाले सभी प्रतिष्ठानों पर लागू होती है।

• सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 की धारा 45 के अनुसार, केंद्र सरकार अधिसूचना द्वारा असंगठित श्रमिकों, गिग और प्लेटफॉर्म कर्मचारियों तथा उनके परिवार के सदस्यों के लिए निगम द्वारा अध्याय IV (ईएसआईसी) के तहत स्वीकार्य लाभ प्रदान करने हेतु योजना बना सकती है।

वेतन संहिता 2019 के अंतर्गत:

• पूर्व अधिनियम में अनुसूचित रोजगारों के विपरीत, सभी रोजगारों के लिए न्यूनतम मजदूरी का सार्वभौमीकरण।

• न्यूनतम मजदूरी को वैधानिक बना दिया गया है, जिसे केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित किया जाएगा। संबंधित सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम मजदूरी दर न्यूनतम मजदूरी से कम नहीं होगी।

• लैंगिक समानता को बढ़ावा दिया जाए और भर्ती एवं वेतन भुगतान में भेदभाव को प्रतिबंधित किया जाए, जिसमें ट्रांसजेंडर भी शामिल हों।

• सभी कर्मचारियों को समय पर वेतन का भुगतान।

• वेतन के 50 प्रतिशत से अधिक भत्ते वेतन का हिस्सा बनाए जाएंगे, जिससे मातृत्व लाभ, ग्रेच्युटी, कर्मचारी भविष्य निधि (ईपीएफ), कर्मचारी पेंशन योजना (ईपीएस) अंशदान आदि में वृद्धि होगी।

ओएसएच और डब्ल्यूसी संहिता 2020 के अंतर्गत:

• नियोक्ता को निर्धारित आयु से अधिक आयु के कर्मचारियों के लिए निःशुल्क वार्षिक स्वास्थ्य जांच प्रदान करनी होगी।

• अंतर-राज्यीय प्रवासी कामगार की परिभाषा का विस्तार किया गया है जिसमें ठेकेदार द्वारा नियोजित प्रवासी कामगार और स्व-प्रवासन करने वाले श्रमिक भी शामिल हैं। वे (क) वार्षिक एकमुश्त यात्रा भत्ता और (ख) लाभों की पोर्टेबिलिटी पाने के हकदार हैं।

अधिसूचित जिलों/क्षेत्रों तक सीमित कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) के कवरेज को बढ़ाकर पूरे भारत में सार्वभौमिक रूप से लागू किया गया है। इसके अलावा, 10 से कम कर्मचारियों वाले प्रतिष्ठानों के लिए स्वैच्छिक आधार पर ईएसआईसी कवरेज की सुविधा शुरू की गई है। इसके अलावा, केंद्र सरकार द्वारा अधिसूचित खतरनाक व्यवसाय करने वाले किसी भी प्रतिष्ठान में, चाहे उसमें एक भी कर्मचारी कार्यरत हो, ईएसआईसी के तहत लाभ लागू किए जा सकते हैं।

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नैशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डिवेलपमेंट कॉरपोरेशन (एनआईसीडीसी ) ने वस्त्र मंत्रालय के साथ मिलकर पीएम मित्र पार्कों के विकास के लिएपरामर्श किया

नैशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डिवेलपमेंट कॉरपोरेशन (एनआईसीडीसी ) ने वस्त्र मंत्रालय के साथ मिलकर पीएम मित्र पार्कों के विकास के लिए डिवेलपर्स के साथ परामर्श किया, ताकि पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल के तहत साझेदारी की संभावनाओं को तलाशा जा सके

नैशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डिवेलपमेंट कॉरपोरेशन (एनआईसीडीसी ) ने वस्त्र मंत्रालय के सहयोग से डिजाइन, निर्माण, वित्त, संचालन और हस्तांतरण (डीबीएफओटी) मॉडल के तहत स्थापित किए जा रहे पीएम मेगा एकीकृत वस्त्र क्षेत्र और परिधान (पीएम मित्र) पार्कों के विकास के लिए भागीदारी के अवसरों का पता लगाने के लिए हितधारक परामर्श बैठक का आयोजन किया। बाजार संबंधी जानकारियों की श्रृंखला के तहत इस परामर्श बैठक का आयोजन किया गया, जिसका उद्देश्य समय पर और प्रभावी कार्यान्वयन का सहयोग करने के लिए एक मजबूत, बाजार-अनुकूल ढांचा तैयार करना है।

डीबीएफओटी के अंतर्गत पीएम मित्र पार्क (पीपीपी – ग्रीनफील्ड)

परामर्श बैठक में विशेष रूप से पीपीपी/डीबीएफओटी के तहत प्रस्तावित तीन ग्रीनफील्ड पार्कों के लिए संभावित मास्टर डिवेलपर्स को शामिल करने पर ध्यान केंद्रित किया गया:

  • लखनऊ, उत्तर प्रदेश (1,000 एकड़): प्रमुख परिवहन केंद्रों से निकटता सहित मजबूत बहु-मार्गी पहुंच।
  • कलबुर्गी, कर्नाटक (1,000 एकड़): यह स्थल NH-50 के निकट स्थित है और प्रमुख क्षेत्रीय केंद्रों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।
  • नवसारी, गुजरात (1,142 एकड़): बंदरगाहों/लॉजिस्टिक्स से रणनीतिक संपर्क; सड़क, रेल और हवाई अड्डे तक पहुंच।

परामर्श के मुख्य बिंदु

वस्त्र मंत्रालय (एमओटी) की सचिव श्रीमती नीलम शमी राव ने अपने संबोधन में भागीदारों के साथ अपने बहुमूल्य सुझाव साझा किए और पीएम मित्र पार्कों के सफल विकास और कार्यान्वयन के लिए एक मजबूत, सहयोगात्मक ढांचा तैयार करने में उनकी सक्रिय भागीदारी को प्रोत्साहित किया।

एमओटी के अतिरिक्त सचिव श्री रोहित कंसल ने एक परिवर्तनकारी पहल के रूप में पीएम मित्र के रणनीतिक इरादे को रेखांकित करते हुए कहा कि उन्हें कम से कम 1,000 एकड़ के बड़े, एकीकृत कपड़ा पार्क के रूप में विकसित किया जा रहा है। उन्होंने बताया कि पीपीपी मोड के तहत प्रस्तावित 3 राज्यों में लगभग 5,567 करोड़ रुपये के डीपीआर को पहले ही अंतिम रूप दिया जा चुका है।

एनआईसीडीसी के सीईओ और एमडी श्री रजत कुमार सैनी ने पीएम मित्र पार्कों के 5एफ विजन और पीएम मित्र पहल के प्रति उद्योग की मजबूत प्रतिक्रिया पर प्रकाश डाला। इसमें तीन राज्यों में निवेशकों की रुचि 20,054 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है, जो मुख्य रूप से मिश्रित वस्त्र क्षेत्र से प्रेरित है। उन्होंने वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बुनियादी ढांचे को सक्षम बनाने पर सरकार के फोकस की रूपरेखा प्रस्तुत की। इनमें प्लग-एंड-प्ले औद्योगिक सुविधाएं, परीक्षण प्रयोगशालाएं, सिंगल-विंडो क्लीयरेंस, एकीकृत लॉजिस्टिक्स, सामाजिक बुनियादी ढांचा और विश्वसनीय ग्रिड-कनेक्टेड स्वच्छ ऊर्जा शामिल हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पीएम मित्र पार्क संपूर्ण मूल्य शृंखला एकीकरण और वैश्विक स्तर पर मानकीकृत विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को सक्षम बनाने के लिए डिजाइन किए गए हैं।

 

हितधारकों से मिली सकारात्मक प्रतिक्रिया और आगे की राह

इस परामर्श में भावी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय प्रमुख विकासकर्ताओं (मास्टर डिवेलपर्स) और उद्योग जगत के हितधारकों ने व्यापक रूप से भाग लिया। चर्चाओं में उपयोगिता नियोजन पर ध्यान केंद्रित किया गया, जिसमें स्टीम सिस्टम, सीईटीपी/जेडएलडी एकीकरण, मॉड्यूलर प्लॉट विकास और एमएसएमई और बड़े यूनिट दोनों का समर्थन करने वाले एक पारिस्थितिकी तंत्र को सुनिश्चित करना शामिल था।

श्री कंसल ने कहा कि इस तरह के परामर्श उन कमियों की पहचान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे, जिन पर विचार-विमर्श करके वस्त्र क्षेत्र के लिए एक मजबूत तंत्र विकसित किया जा सकता है, साथ ही उन्होंने वस्त्र मंत्रालय द्वारा इस क्षेत्र को मजबूत करने और आजीविका में सुधार लाने के प्रयासों की सराहना की।

श्री सैनी ने संकेत दिया कि यह कवायद बाजार की दिलचस्पी के सत्यापन, मास्टर डिवेलपर मॉडल के परिष्करण, बेहतर परियोजना संरचना और बैंक क्षमता, प्रारंभिक जोखिम पहचान, बुनियादी ढांचे के चरणबद्ध कार्यान्वयन, निवेशक आकर्षण रणनीतियों, वैश्विक सर्वोत्तम कार्य प्रणाली के साथ बेंचमार्किंग और बोली लगाने की बेहतर तैयारी से पीएम मित्र पार्कों के समय पर विकास और सफल संचालन में योगदान मिलेगा।

कुल मिलाकर यह परामर्श पीएम मित्र योजना में हितधारकों के मजबूत विश्वास को दर्शाता है। इसके डिजाइन और कार्यान्वयन दृष्टिकोण को लेकर प्रतिभागी आशान्वित दिखे। परामर्श सत्र को रचनात्मक प्रतिक्रिया और कार्रवाई योग्य सुझावों से लाभ हुआ, जो रूपरेखा को और परिष्कृत करने और पीएम मित्र पार्कों के सफल वितरण के लिए आगे का मार्ग प्रशस्त करने में मदद करेगा।

पीएम मित्रा पार्क्स के बारे में

तमिलनाडु, तेलंगाना, गुजरात, कर्नाटक, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश और महाराष्ट्र में सात पीएम मित्र (पीएम मेगा एकीकृत वस्त्र क्षेत्र और परिधान ) पार्क की घोषणा की गई है। प्रधानमंत्री के 5एफ विजन ((फार्म से फाइबर, फाइबर से फैक्ट्री, फैक्ट्री से फैशन, फैशन से फॉरेन) से प्रेरित इन पार्कों का उद्देश्य पूर्णतः एकीकृत, बड़े पैमाने पर वस्त्र पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना है। इनसे सामूहिक रूप से लगभग ₹70,000 करोड़ का निवेश आकर्षित होने की उम्मीद है। प्रत्येक पार्क से लगभग 10 लाख रोजगार के अवसर सृजित होने की उम्मीद है। प्रत्येक पार्क में कताई और बुनाई से लेकर प्रसंस्करण, रंगाई, छपाई और वस्त्र निर्माण तक की संपूर्ण वस्त्र मूल्य शृंखला एक ही स्थान पर मौजूद होगी। विश्व स्तरीय औद्योगिक अवसंरचना से सुसज्जित, पीएम मित्र पार्क अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों को अपनाने में सक्षम बनाएंगे, प्रत्यक्ष विदेशी निवेश और घरेलू निवेश को बढ़ावा देंगे और लॉजिस्टिक लागत को काफी कम करेंगे, जिससे भारत के कपड़ा क्षेत्र की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता में वृद्धि होगी।

एनआईसीडीसी के बारे में

वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (डीपीआईआईटी) के तहत नैशनल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर डिवेलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (एनआईसीडीसी) को विश्व स्तरीय ग्रीनफील्ड औद्योगिक स्मार्ट शहरों का विकास करने का दायित्व सौंपा गया है जो विनिर्माण प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाते हैं, निवेश आकर्षित करते हैं और रोजगार के अवसर सृजित करते हैं। एनआईसीडीसी भारत के औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स परिवर्तन का सहयोग करने के लिए 13 राज्यों में 20 परियोजनाओं और यूएलआईपी, एलडीबी और आईआईएलबी जैसे डिजिटल उपक्रमों को लागू कर रहा है।

वस्त्र मंत्रालय पीएम मित्र योजना के लिए नोडल मंत्रालय है, जबकि एनआईसीडीसी परियोजना प्रबंधन एजेंसी (पीएमए) के रूप में कार्य कर रहा है। एनआईसीडीसी राष्ट्रीय औद्योगिक कॉरिडोर विकास कार्यक्रम के तहत औद्योगिक स्मार्ट शहरों की योजना बनाने और उन्हें लागू करने के अपने अनुभव का लाभ उठाता है और पीएम मित्र पार्कों के लिए संपूर्ण तकनीकी, वित्तीय और कार्यक्रम प्रबंधन सहायता प्रदान करता है। इसमें डीपीआर और मास्टर प्लान की समीक्षा, डीबीएफओटी ढांचे के तहत पीपीपी संरचना, नीलामी प्रक्रिया प्रबंधन, गुणवत्ता और समयसीमा की निगरानी और राज्यों, प्रमुख विकासकर्ताओं और निवेशकों के साथ समन्वय शामिल है।

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ट्राई ने सूरत शहर और आसपास के क्षेत्रों में मोबाइल की गुणवत्ता का आकलन किया

नई दिल्ली – भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (टीआरएआई-ट्राई) ने नवंबर 2025 के दौरान गुजरात के सूरत शहर में आयोजित स्वतंत्र ड्राइव टेस्ट (आईडीटी) के निष्कर्ष दूरसंचार उपभोक्ताओं की जानकारी के लिए जारी किए हैं। इस ड्राइव टेस्ट का उद्देश्य दूरसंचार सेवा प्रदाताओं (टीएसपी) की मोबाइल नेटवर्क सेवाओं (वॉयस और डेटा दोनों) की वास्तविक गुणवत्ता का आकलन और सत्यापन करना है।

आईडीटी (आईडीटी) के दौरान, ट्राई सभी सेवा प्रदाताओं के मोबाइल नेटवर्क के लाइव प्रदर्शन डेटा को कॉल सेटअप सफलता दर, डेटा डाउनलोड एवं अपलोड गति, ध्वनि गुणवत्ता आदि जैसे प्रमुख प्रदर्शन संकेतकों (केपीआई) पर एकत्रित करता है। इसके लिए कई उन्नत परीक्षण हैंडसेट का उपयोग किया जाता है और सत्रों की तत्‍क्षण निगरानी की जाती है। इसमें उन्नत सॉफ्टवेयर सिस्टम का उपयोग करके उनका विश्लेषण किया जाता है। आईडीटी के परिणाम ट्राई की वेबसाइट और समाचार पत्रों में प्रकाशित किए जाते हैं ताकि उपभोक्ताओं को सूचित किया जा सके और टीएसपी को अपनी सेवाओं में सुधार करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।

ट्राई के जयपुर क्षेत्रीय कार्यालय ने अपनी नियुक्त एजेंसी के माध्यम से 3 नवंबर 2025 से 7 नवंबर 2025 के दौरान गुजरात एलएसए में 412 किलोमीटर के शहरी ड्राइव, 14 हॉटस्पॉट स्थानों और 2.0 किलोमीटर के वॉक टेस्ट सहित विस्तृत ड्राइव टेस्ट आयोजित किए। सूरत शहर में ओपन मोड ( 5जी/4जी/3जी/2जी) में मोबाइल सेवाओं के आईडीटी निष्कर्षों का सारांश नीचे दिया गया है:

(i) वॉइस सेवाएं:

क्र.सं. प्रमुख संकेतक
(3जी/2जी मोड)
मापा गया एयरटेल बीएसएनएल आरजेआईएल वीआईएल
1 कॉल सेटअप सफलता दर प्रतिशत प्रतिशत 99.55 92.82 100.00 100.00
2 ड्रॉप कॉल दर प्रतिशत प्रतिशत 0.00 4.10 0.15 0.00
3 कॉल सेटअप समय औसत (सेकंड) सेकंड 1.24 1.15 0.56 0.66
4 कॉल साइलेंस रेट (म्यूट कॉल) प्रतिशत 0.62 7.14 0.76 0.92
5 औसत राय स्कोर (एमओएस) 1-5 4.01 3.40 3.86 4.48

(ii) डाटा सेवाएं

 

क्र.सं. प्रमुख संकेतक
(ऑटो सेक्‍शन मोड (5जी/4जी/3जी/2जी)
मापा गया एयरटेल बीएसएनएल आरजेआईएल वीआईएल
1 औसत डाउनलोड क्षमता (मेगाबिट्स/सेकंड) 149.11 4.83 279.36 45.02
2 औसम अपडोड क्षमता (मेगाबिट्स/सेकंड) 39.01 6.60 46.54 23.24
3 विलंबता (50वां प्रतिशतक) एमएस में 40.73 41.88 22.74 21.36

 

सूरत में आयोजित ड्राइव टेस्ट में सूरत शहर के सभी महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल थे। इनमें डायमंड नगर, अंबाबा कॉमर्स कॉलेज, ट्रांसपोर्ट नगर, पर्वत पाटिया, डिंडोली, उधना बस डिपो, भेस्तान, उन्‍न पाटिया, सचिन आईएनए, शिव नगर, राज नगर, दिलदार नगर, बमरोली, न्यू सिटी लाइट, गांधी कुटीर, पांदेसरा, पार्ले पॉइंट, गावियर, वेसु, अडाजन गांव, इच्छापुर, भेसान, पाल गांव, रंदर, कतरगाम, मोटा वराछा, पटेल नगर, वनकला आदि शामिल हैं।

इस आईडीटी रिपोर्ट के निष्कर्ष संबंधित टीएसपी के साथ साझा किए गए हैं ताकि वे आवश्यकतानुसार आगे की कार्रवाई कर सकें। आईडीटी की विस्तृत रिपोर्ट ट्राई की वेबसाइट www.trai.gov.in पर उपलब्ध है। किसी भी स्पष्टीकरण या अतिरिक्त जानकारी के लिए, ट्राई जयपुर क्षेत्रीय कार्यालय के आईडी adv.jaipur@trai.gov.in पर ईमेल भेजा जा सकता है।

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सोशल मीडिया से लेकर ओटीटी प्लेटफॉर्म तक: सरकार ने अश्लीलता, भ्रामक सूचना और ऑनलाइन साइबर अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए सख्त जवाबदेही लागू की

नई दिल्ली  –  सरकार की नीतियों का उद्देश्य महिलाओं और बच्चों सहित इसके उपयोगकर्ताओं के लिए एक मुक्त, सुरक्षित, विश्वसनीय और जवाबदेह इंटरनेट सुनिश्चित करना है।

सरकार यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि भारत में इंटरनेट किसी भी प्रकार की गैरकानूनी सामग्री या जानकारी, विशेष रूप से अश्लील और आपत्तिजनक सामग्री से मुक्त हो।

डिजिटल प्लेटफार्मों पर गैरकानूनी सामग्री का मुकाबला करने के लिए कानूनी ढांचा

सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) अधिनियम, 2000

आईटी अधिनियम और सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया नैतिकता संहिता) नियम, 2021 (आईटी नियम, 2021) ने संयुक्त रूप से डिजिटल क्षेत्र में गैरकानूनी और हानिकारक सामग्री से निपटने के लिए एक सख़्त ढांचा तैयार किया है।

यह मध्यस्थों पर जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए स्पष्ट दायित्व डालता है।

आईटी अधिनियम विभिन्न साइबर अपराधों जैसे निजता का उल्लंघन (धारा 66ई), अश्लील या यौन रूप से स्पष्ट सामग्री प्रकाशित करना या प्रसारित करना (धारा 67, 67ए, 67बी) के लिए दंड का प्रावधान करता है।

यह पुलिस को अपराधों की जांच करने (धारा 78), सार्वजनिक स्थान में प्रवेश करने और संदिग्ध व्यक्ति की तलाशी लेने और उसे गिरफ्तार करने (धारा 80) का अधिकार भी देता है।

आईटी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021

आईटी नियम, 2021 सोशल मीडिया मध्यस्थों सहित मध्यस्थों पर उचित सावधानी बरतने का दायित्व डालते हैं और उनसे यह अपेक्षा करते हैं कि वे गैरकानूनी सामग्री के प्रसारण को रोकने के लिए इन दायित्वों को प्रभावी ढंग से लागू करें।

आईटी नियम, 2021 के अंतर्गत प्रमुख प्रावधान:

प्रावधान विवरण
प्रतिबंधित जानकारी

नियम 3(1)(ख) के अंतर्गत

ऐसी जानकारी/सामग्री को होस्ट करने, स्टोर करने, प्रसारित करने, प्रदर्शित करने या प्रकाशित करने पर प्रतिबंध लगाता है जो अन्य बातों के अलावा, निम्न प्रकार की हो:
  • अश्लील, पोर्नोग्राफिक, किसी दूसरे की निजता का उल्लंघन करने वाला, लिंग के आधार पर अपमानजनक या उत्पीड़न करने वाला, नस्लीय या जातीय रूप से आपत्तिजनक, या घृणा या हिंसा को बढ़ावा देने वाला;
  • बच्चे के लिए हानिकारक;
  • धोखा देना या गुमराह करना, जिसमें डीपफेक के माध्यम से भी शामिल है;
  • कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहित अन्य लोगों का रूप धारण करता है;
  • राष्ट्रीय सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था को खतरा;
  • किसी भी लागू कानून का उल्लंघन करता है।
उपयोगकर्ता जागरूकता

दायित्वों

मध्यस्थों को सेवा की शर्तों और उपयोगकर्ता समझौतों के माध्यम से उपयोगकर्ताओं को गैरकानूनी सामग्री साझा करने के परिणामों के बारे में स्पष्ट रूप से सूचित करना चाहिए, जिसमें सामग्री को हटाना, खाते को निलंबित करना या समाप्त करना शामिल है।
सामग्री हटाने में जवाबदेही मध्यस्थों को अदालती आदेशों, सरकार से प्राप्त तर्कसंगत सूचना या उपयोगकर्ता की शिकायतों पर निर्धारित समयसीमा के भीतर गैरकानूनी सामग्री को हटाने के लिए शीघ्रता से कार्रवाई करनी चाहिए।
शिकायत निवारण
  • मध्यस्थों को शिकायत अधिकारी नियुक्त करने होंगे
  • अवैध सामग्री को 72 घंटों के भीतर हटाकर शिकायतों का समाधान करने का आदेश दिया गया है।
  • निजता का उल्लंघन करने वाली, व्यक्तियों का रूप धारण करने वाली या नग्नता दिखाने वाली सामग्री को ऐसी किसी भी शिकायत के खिलाफ 24 घंटों के भीतर हटा दिया जाना चाहिए।
शिकायत अपीलीय समितियों (जीएसी) की कार्यप्रणाली यदि मध्यस्थों के शिकायत अधिकारी उनकी शिकायतों का समाधान नहीं करते हैं, तो उपयोगकर्ता www.gac.gov.in पर ऑनलाइन अपील कर सकते हैं । जीएसी सामग्री मॉडरेशन संबंधी निर्णयों में जवाबदेही और पारदर्शिता सुनिश्चित करते हैं।
 

सरकारी एजेंसियों को मध्यस्थों द्वारा सहायता

मध्यस्थों को पहचान सत्यापन के लिए, या साइबर सुरक्षा घटनाओं सहित अपराधों की रोकथाम, पता लगाने, जांच या अभियोजन के लिए अधिकृत सरकारी एजेंसियों को अपने नियंत्रण में मौजूद जानकारी या सहायता प्रदान करनी होगी अतिरिक्त दायित्व

महत्वपूर्ण सामाजिक

मीडिया मध्यस्थ

(एसएसएमआई) (अर्थात, सामाजिक

मीडिया मध्यस्थ

जिनमें 50 लाख या उससे अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता आधार हो

भारत)

अतिरिक्त दायित्व

महत्वपूर्ण सामाजिक

मीडिया मध्यस्थ

(एसएसएमआई) (अर्थात, सामाजिक

मीडिया मध्यस्थ

जिनमें 50 लाख या उससे अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता आधार हो

भारत)

  • संदेश भेजने की सेवाएं प्रदान करने वाले सामाजिक-आर्थिक माध्यमों (एसएसएमआई) को कानून प्रवर्तन एजेंसियों को गंभीर या संवेदनशील सामग्री के मूल रचनाकारों का पता लगाने में मदद करनी चाहिए।
  • सामाजिक सुरक्षा और प्रबंधन संस्थान (एसएसएमआई) कुछ गैरकानूनी सामग्री के प्रसार का पता लगाने और उसे सीमित करने के लिए स्वचालित उपकरणों का उपयोग करेंगे।
  • सामाजिक एवं माध्यमिक शिक्षा संस्थानों (एसएसएमआई) को अनुपालन रिपोर्ट प्रकाशित करनी होगी, स्थानीय अधिकारियों की नियुक्ति करनी होगी और अनुपालन एवं कानून प्रवर्तन समन्वय के लिए भारत में स्थित  पते साझा करने होंगे।
  • सामाजिक सुरक्षा और प्रबंधन संस्थाओं (एसएसएमआई) को स्वैच्छिक उपयोगकर्ता सत्यापन, आंतरिक अपील और स्वतः संज्ञान लेने से पहले निष्पक्ष सुनवाई की पेशकश करनी होगी।

यदि मध्यस्थ आईटी नियम, 2021 में दिए गए कानूनी दायित्वों का पालन करने में विफल रहते हैं, तो वे आईटी अधिनियम की धारा 79 के तहत प्रदान की गई तृतीय पक्ष सूचना से छूट खो देते हैं।

वे किसी भी मौजूदा कानून के तहत प्रदान की गई परिणामी कार्रवाई या अभियोजन के लिए उत्तरदायी हैं।

भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस), 2023

बीएनएस, 2023 ऑनलाइन नुकसान, अश्लीलता, भ्रामक सूचना और अन्य साइबर- अपराधों से निपटने के लिए कानूनी ढांचे को मजबूत करता है, जिसमें सोशल मीडिया प्लेटफार्मों के माध्यम से किए गए अपराध भी शामिल हैं।

  • यह विधेयक अश्लील कृत्यों (धारा 296), अश्लील सामग्री की बिक्री, जिसमें इलेक्ट्रॉनिक रूप में ऐसी सामग्री का प्रदर्शन भी शामिल है (धारा 294) जैसे अपराधों के लिए दंड का प्रावधान करता है।

इसी प्रकार, ओटीटी प्लेटफॉर्म पर हानिकारक सामग्री के नकारात्मक प्रभावों से निपटने के लिए, सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के तहत 25.02.2021 को सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशानिर्देश और डिजिटल मीडिया, आचार संहिता) नियम, 2021 को अधिसूचित किया है।

  • नियमों के भाग-III में डिजिटल समाचार प्रकाशकों और ऑनलाइन क्यूरेटेड सामग्री (ओटीटी प्लेटफॉर्म) के प्रकाशकों के लिए एक आचार संहिता का प्रावधान है।
  • ओटीटी प्लेटफॉर्म पर यह दायित्व है कि वे ऐसी कोई भी सामग्री प्रसारित न करें जो वर्तमान में लागू कानून द्वारा प्रतिबंधित है।
  • सरकार ने अब तक अश्लील सामग्री प्रदर्शित करने वाले 43 ओटीटी प्लेटफार्मों के लिए भारत में सार्वजनिक पहुंच को प्रतिबंधित कर दिया है।

सूचना एवं प्रसारण एवं संसदीय कार्य राज्य मंत्री डॉ. एल. मुरुगन ने आज लोकसभा में श्री निशिकांत दुबे द्वारा उठाए गए एक प्रश्न के उत्तर में यह जानकारी दी।

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‘मिशन शक्ति’ का लक्ष्‍य महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षा और सशक्तिकरण के लिए हस्‍तक्षेपों को सुदृढ़ करना है

नई दिल्ली – केन्‍द्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों द्वारा महिलाओं के वित्तीय और सामाजिक सशक्तिकरण के लिए कई योजनाएं लागू की जा रही हैं, जिनमें विधवाएं, एकल माताएं और कठिन परिस्थितियों में रहने वाली महिलाएं शामिल हैं।

इस संबंध में केन्‍द्र सरकार की प्रमुख योजनाएं और कार्यक्रम निम्नलिखित हैं:

(i) महिला एवं बाल विकास मंत्रालय, 15वें वित्त आयोग के कार्यकाल के दौरान, वित्तीय वर्ष 2022-23 से प्रभावी, देश में महिलाओं और बच्चों के कल्याण के लिए केंद्र प्रायोजित योजनाओं का कार्यान्वयन कर रहा है, जिन्हें तीन श्रेणियों के अंतर्गत रखा गया है, अर्थात्: (1) मिशन शक्ति, महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षण और सशक्तिकरण के लिए; (2) सक्षम आंगनवाड़ी एवं पोषण 2.0, देश में पोषण एवं स्वास्थ्य संकेतकों में सुधार के लिए; और (3) मिशन वात्सल्य, कठिन परिस्थितियों में कमजोर बच्चों के संरक्षण और कल्याण के लिए। योजनाओं का विवरण इस प्रकार है:

(क) मिशन शक्ति : ‘मिशन शक्ति’ का उद्देश्य महिलाओं की सुरक्षा, संरक्षा और सशक्तिकरण के लिए हस्‍तक्षेपों को मजबूत करना है। इसमें महिलाओं की सुरक्षा और संरक्षा के लिए दो उप-योजनाएं ‘संबल’ और और महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए ‘समर्थ्य’ शामिल हैं। ‘संबल’ उप-योजना महिलाओं की सुरक्षा और सरंक्षा के लिए है और इसके प्रमुख घटक हैं, वन स्टॉप सेंटर (ओएससी), जो जिला स्तर पर स्थित एक संस्था है और महिलाओं को एक ही छत के नीचे तत्काल सहायता प्रदान करती है, जैसे कि अस्थायी आश्रय, चिकित्सा एवं पुलिस सहायता, परामर्श और कानूनी सहायता। महिला हेल्पलाइन (डब्ल्यूएचएल) 181 महिलाओं को सहायता और जानकारी प्राप्त करने के लिए 24 घंटे टोल-फ्री दूरसंचार सेवा प्रदान करती है। ‘समर्थ्य’ उप-योजना महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए है। इसके अंतर्गत निम्नलिखित घटक शामिल हैं: प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना (पीएमएमवीवाई), जिसके तहत गर्भवती महिलाओं और स्तनपान कराने वाली माताओं को पहले बच्चे के लिए प्रत्यक्ष लाभ हस्तांतरण (डीबीटी) के माध्यम से 5,000/- रुपये की नकद प्रोत्साहन राशि सीधे उनके बैंक/डाकघर खाते में जमा की जाती है। पीएमएमवीवाई के तहत पात्र लाभार्थियों को दूसरे बच्चे (यदि वह लड़की हो) के लिए 6,000/- रुपये की नकद प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जाती है। शक्ति सदन संकटग्रस्त और कठिन परिस्थितियों में फंसी महिलाओं, जिनमें तस्करी की शिकार महिलाएं भी शामिल हैं, के लिए एक एकीकृत राहत एवं पुनर्वास केंद्र है। उत्तर प्रदेश के वृंदावन में विधवाओं के लिए कृष्ण कुटीर‘ नामक एक गृह स्थापित किया गया है, जिसमें 1,000 निवासियों को रहने की सुविधा प्रदान की जाती है और उन्हें सुरक्षित आवास, स्वास्थ्य सेवाएं, पौष्टिक भोजन, कानूनी और परामर्श सेवाएं उपलब्ध कराई जाती हैं। सखी निवास (कार्यरत महिला छात्रावास) का उद्देश्य शहरी, अर्ध-शहरी और यहां तक ​​कि ग्रामीण क्षेत्रों में कामकाजी महिलाओं के लिए सुरक्षित और सुविधाजनक स्‍थानों पर आवास की उपलब्धता को बढ़ावा देना है, जहां महिलाओं के लिए रोजगार के अवसर मौजूद हैं। पालना डे-केयर क्रेच सुविधाओं का एक हिस्सा है, जो बच्चों के लिए एक सुरक्षित और संरक्षित स्थान प्रदान करता है। क्रेच सेवाएं उन शिशु देखभाल सुविधाओं को औपचारिक रूप देती हैं, जिन्हें अब तक घरेलू कार्य का हिस्सा माना जाता था और आंगनवाड़ी के बुनियादी ढांचे का उपयोग करके अंतिम छोर तक देखभाल सुविधाओं की डिलीवरी सुनिश्चित करती हैं। संकल्प: महिला सशक्तिकरण केंद्र (एचईडब्‍ल्‍यू) महिलाओं के लिए उपलब्ध योजनाओं और सुविधाओं के बारे में जानकारी और ज्ञान के बीच के अंतर को पाटने का एक साधन है।

(ख) मिशन पोषण 2.0 के अंतर्गत आंगनवाड़ी सेवाओं, पोषण अभियान और किशोरियों के लिए योजना को 3 प्राथमिक श्रेणियों में पुनर्गठित किया गया है: (i) 6 वर्ष से कम आयु के बच्चों, गर्भवती महिलाओं, स्तनपान कराने वाली माताओं और किशोरियों (14-18 वर्ष) के लिए पोषण संबंधी स्वास्थ्य और कल्याण को बढ़ावा देना; (ii) प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा [3-6 वर्ष] और (iii) आधुनिक, उन्नत सक्षम आंगनवाड़ी सहित आंगनवाड़ी अवसंरचना।

(ii) गृह मंत्रालय निर्भया निधि के अंतर्गत मानव तस्करी रोधी इकाइयों (एएचटीयू) की स्थापना एवं सुदृढ़ीकरण‘ नामक परियोजना का कार्यान्वयन कर रहा है। अब तक देश भर में 827 एएचटीयू कार्यरत हैं, जिनमें राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में 807, सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) में 15 और सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) में 5 शामिल हैं। एसएसबी ने एक समर्पित हेल्पलाइन नंबर 1903 भी स्थापित किया है। यह सुनिश्चित करने के लिए कि पुलिस स्टेशन महिलाओं के लिए अधिक अनुकूल और सुलभ हों, क्योंकि वे किसी भी संकटग्रस्‍त महिला के लिए, जिनमें तस्करी और शोषण की शिकार महिलाएं भी शामिल हैं, पुलिस स्टेशन में प्रवेशन करने पर पहला और एकमात्र संपर्क बिंदु होंगी, निर्भया निधि के अंतर्गत 14,658 महिला सहायता डेस्क (डब्ल्यूएचडी) स्थापित किए गए हैं, जिनमें से 13,743 का नेतृत्व महिला पुलिस अधिकारी कर रही हैं। जरूरतमंद और संकटग्रस्त महिलाओं को सहायता और समर्थन प्रदान करने के लिए विभिन्न आपात स्थितियों के लिए सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में आपातकालीन प्रतिक्रिया सहायता प्रणाली (ईआरएसएस-112) स्थापित की गई है, जिसमें फील्ड/पुलिस संसाधनों की कंप्यूटर-सहायता प्राप्त तैनाती की सुविधा है। ईआरएसएस के अतिरिक्त, एक समर्पित महिला हेल्पलाइन (डब्ल्यूएचएल-181) देश भर में कार्यरत है।

(iii) आयुष्मान भारत योजना के तहत सरकार 1200 से अधिक चिकित्सा पैकेजों के माध्यम से 55 करोड़ से अधिक नागरिकों को निःशुल्क उपचार प्रदान कर रही है। इनमें से 141 से अधिक चिकित्सा पैकेज विशेष रूप से महिलाओं की चिकित्सा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए तैयार किए गए हैं। इस योजना के अंतर्गत सात प्रकार की जांच (टीबी, उच्च रक्तचाप, मधुमेह, मुख कैंसर, स्तन कैंसर, सर्वाइकल कैंसर और मोतियाबिंद) उपलब्ध कराई जाती हैं, जिनसे करोड़ों महिलाओं को लाभ हुआ है। शहरी और ग्रामीण दोनों क्षेत्रों में 1,50,000 से अधिक स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्र (एबी-एचडब्ल्यूसी) हैं, जिन्हें आयुष्मान आरोग्य मंदिर के रूप में भी जाना जाता है और ये स्वास्थ्य सेवा को समुदाय के करीब लाते हैं। आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (एबी पीएमजेएवाई) विश्व की सबसे बड़ी सार्वजनिक वित्त पोषित स्वास्थ्य बीमा योजना है, जिसका विशेष ध्यान गरीब और वंचित महिलाओं पर है। देश भर में 16,000 से अधिक प्रधानमंत्री भारतीय जन औषधि केंद्र (पीएमबीजेके) कार्यरत हैं। बीमा कवरेज और पेंशन के माध्यम से सामाजिक सुरक्षा प्रदान करने के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सहायता कार्यक्रम (एनएसएपी), अटल पेंशन योजना (एपीवाई), प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (पीएमएसबीवाई) और प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (पीएमजेजेबीवाई) लागू की गई है।

(iv) पैन कार्ड नियमों में संशोधन किया गया है, ताकि यह प्रावधान किया जा सके कि यदि माता एकल अभिभावक है, तो आवेदक आवश्यक विवरण प्रदान करके पैन कार्ड पर केवल माता का नाम दर्ज कराने का विकल्प चुन सकता है। पहले, पैन आवेदन प्रपत्रों में पिता का नाम देना अनिवार्य था।

(v) एकल माताओं के हित में पासपोर्ट नियमों में संशोधन किया गया है। अब पासपोर्ट आवेदन पत्र में माता या पिता दोनों में से किसी का भी नाम दिया जा सकता है और आवेदन के दौरान विवाह/तलाक प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने की आवश्यकता नहीं है। पहले पासपोर्ट आवेदन पत्रों में पिता का नाम देना अनिवार्य था।

(vi) प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना (पीएमयूवाई) योजना जिसके तहत विधवाओं, एकल माताओं और हाशिए पर रहने वाली महिलाओं सहित गरीब परिवारों की वयस्क महिलाओं को बिना जमा के एलपीजी कनेक्शन प्रदान किए जाते हैं। इस योजना का उद्देश्य गरीब परिवारों को स्वच्छ खाना पकाने का ईंधन उपलब्ध कराना, लकड़ी और गोबर जैसे पारंपरिक ईंधनों से होने वाले स्वास्थ्य जोखिमों को कम करना, घर के अंदर वायु प्रदूषण को कम करना, महिलाओं के श्रम को कम करना और वनों की कटाई को रोकने में मदद करना है।

(vii) केन्‍द्र सरकार ने सार्वजनिक खरीद नीति के माध्यम से यह अनिवार्य कर दिया है कि सभी केंद्रीय मंत्रालय/विभाग/सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यम अपनी वार्षिक खरीद का कम से कम 3 प्रतिशत महिला स्वामित्व वाले सूक्ष्म और लघु उद्यमों से प्राप्त करें।

(viii) सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्रालय (एमएसएमई) द्वारा संचालित “कौशल उन्नयन एवं महिला कॉयर योजना” कॉयर विकास योजना के अंतर्गत कॉयर क्षेत्र में कार्यरत महिला कारीगरों के कौशल विकास हेतु एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम है। एमएसएमई के अंतर्गत पीएम विश्वकर्मा योजना 18 व्यवसायों में कार्यरत पारंपरिक कारीगरों और शिल्पकारों, जिनमें महिलाएं भी शामिल हैं, को अनेक लाभ प्रदान करती है। सूक्ष्म एवं लघु उद्यमों के लिए ऋण गारंटी योजना के तहत एमएसएमई ने 1.12.2022 से सूक्ष्म एवं लघु महिला उद्यमियों के लिए उन्नत प्रावधान लागू किए हैं, जिनमें अन्य उद्यमियों के लिए 75 प्रतिशत की तुलना में 90 प्रतिशत तक की गारंटी कवरेज और वार्षिक गारंटी शुल्क में 10 प्रतिशत की छूट शामिल है। एमएसएमई ने “यशस्विनी” नामक एक जागरूकता अभियान शुरू किया है, जिसका उद्देश्य एमएसएमई मंत्रालय की विभिन्न योजनाओं के बारे में मौजूदा और इच्छुक महिला उद्यमियों में जागरूकता पैदा करना है और उन्हें मार्गदर्शन, सलाह और क्षमता निर्माण के माध्यम से निरंतर सहायता प्रदान करना है।

(ix) मुद्रा योजना, स्टैंड-अप इंडिया, स्टार्ट-अप इंडिया, प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर्स आत्मनिर्भर निधि (पीएम स्वनिधि), प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (पीएमईजीपी) और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (एमजीएनआरईजीएस) आदि जैसी योजनाएं रोजगार/स्वरोजगार के अवसर और ऋण सुविधाएं प्रदान करती हैं। इन योजनाओं के लाभार्थियों में अधिकांश महिलाएं हैं।

केन्‍द्रीय महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने यह जानकारी आज राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में दी।

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प्रधानमंत्री ने इथोपिया में संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित किया

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज इथोपिया की संसद के संयुक्‍त सत्र को संबोधित किया। यह प्रधानमंत्री के लिए एक विशेष सम्मान था, जो इथोपिया की अपनी पहली द्विपक्षीय यात्रा पर हैं।

प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन की शुरुआत भारत के लोगों की ओर से इथोपिया के सांसदों को दोस्ती और सद्भावना की शुभकामनाएं देकर की। उन्होंने कहा कि संसद को संबोधित करना और लोकतंत्र के इस मंदिर के जरिए इथोपिया के आम लोगों, किसानों, उद्यमियों, गर्वित महिलाओं और युवाओं से बात करना उनके लिए सौभाग्य की बात है, जो देश के भविष्य को आकार दे रहे हैं। उन्होंने इथोपिया के लोगों और सरकार को उन्हें सर्वोच्च सम्‍मान यानी ग्रेट ऑनर निशान ऑफ इथोपिया देने के लिए धन्‍यवाद दिया। संबंधों के महत्व को देखते हुए, प्रधानमंत्री ने गहरी संतुष्टि व्यक्त करते हुए कहा कि इस यात्रा के दौरान दोनों देशों के बीच पुराने संबंधों को रणनीतिक साझेदारी में बदला गया है।

भारत और इथोपिया के बीच सभ्यतागत संबंधों को याद करते हुए, प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देश प्राचीन ज्ञान को आधुनिक महत्वाकांक्षा के साथ जोड़ते हैं। इस संदर्भ में, उन्होंने कहा कि भारत का राष्ट्रीय गीत वंदे मातरम और इथोपिया का राष्‍ट्र गान दोनों अपनी भूमि को माता के रूप में संबोधित करते हैं। प्रधानमंत्री ने दोनों देशों के साझा संघर्ष का जिक्र करते हुए कहा कि 1941 में इथोपिया की मुक्ति हेतु भारतीय सैनिकों ने वहां के सैनिकों के साथ मिलकर लड़ाई में अपना योगदान दिया था। उन्होंने कहा कि इथोपिया के लोगों के बलिदानों का प्रतीक अदवा विजय स्मारक को श्रद्धांजलि देना उनके लिए सम्मान की बात है।

प्रधानमंत्री ने भारत-इथोपिया साझेदारी को बढ़ाने और मजबूत बनाने के लिए भारत की प्रतिबद्धता जताई। इस संबंध में, उन्होंने इथोपिया के विकास और समृद्धि में भारतीय शिक्षकों और भारतीय व्यापारियों के योगदान को याद किया। उन्होंने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर, खाद्य प्रसंस्‍करण और नवाचार सहित भारत के विकास के अनुभवों को साझा किया और इथोपिया की प्राथमिकताओं के अनुसार उसे विकास संबंधी सहायता जारी रखने के लिए भारत की तत्परता व्यक्त की। “वसुधैव कुटुंबकम” [पूरी दुनिया एक परिवारहै] के सिद्धांत में निहित मानवता की सेवा करने की भारत की प्रतिबद्धता को व्यक्त करते हुए, उन्होंने बताया कि कोविड महामारी के दौरान इथोपिया को वैक्सीन की आपूर्ति करना भारत के लिए सौभाग्य की बात थी।

प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि विकासशील देशों के तौर पर भारत और इथोपिया को विकासशील देशों की आवाज को मजबूत करने के लिए एक साथ खड़ा होना चाहिए। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ वैश्विक लड़ाई को मजबूत करने में एकजुटता दिखाने के लिए इथोपिया को धन्यवाद दिया।

अफ्रीकी एकता के सपनों को साकार करने में अफ्रीकी संघ के मुख्यालय, अदीस अबाबा की अहम भूमिका पर जोर देते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत को अपनी अध्यक्षता के दौरान जी20 में अफ्रीकी संघ का स्थायी सदस्य के तौर पर स्वागत करते हुए गर्व महसूस हुआ। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार के 11 सालों में भारत-अफ्रीका संबंध कई गुना बढ़े हैं और दोनों पक्षों के राष्ट्राध्यक्षों और सरकार के प्रमुखों के स्तर पर 100 से अधिक दौरे हुए हैं। उन्होंने अफ्रीका के विकास के प्रति भारत की गहरी प्रतिबद्धता पर बात करते हुए जोहान्सबर्ग जी-20 शिखर सम्मेलन में महाद्वीप में दस लाख प्रशिक्षकों को प्रशिक्षित करने के लिए “अफ्रीका स्किल्स मल्टीप्लायर इनिशिएटिव” शुरू करने के अपने प्रस्ताव पर जोर दिया।

प्रधानमंत्री ने एक साथी लोकतांत्रिक देश के साथ भारत की यात्रा साझा करने का मौका देने के लिए माननीय स्पीकर को धन्यवाद देते हुए कहा कि विकासशील देश अपना भविष्य खुद लिख रहे हैं।

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राष्ट्रपति ने राष्ट्रपति भवन में परमवीर दीर्घा का उद्घाटन किया

नई दिल्ली – राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (16 दिसंबर, 2025) विजय दिवस के अवसर पर राष्ट्रपति भवन में परमवीर दीर्घा का उद्घाटन किया।

इस गैलरी में परम वीर चक्र से सम्मानित सभी 21 विजेताओं के चित्र प्रदर्शित हैं। गैलरी का उद्देश्य आगंतुकों को हमारे उन राष्ट्रीय नायकों के बारे में जानकारी प्रदान करना है जिन्होंने हमारे राष्ट्र की रक्षा में अदम्य संकल्प और साहस का प्रदर्शन किया। यह उन वीर योद्धाओं की स्मृति को सम्मान देने की एक पहल है जिन्होंने मातृभूमि की सेवा में अपने प्राणों की आहुति दी।

जिन गलियारों में यह परम वीर दीर्घा बनाई गई है, वहां पहले ब्रिटिश सहायक अधिकारियों के चित्र लगे होते थे। भारतीय राष्ट्रीय नायकों के चित्र प्रदर्शित करने की यह पहल औपनिवेशिक मानसिकता को त्यागने और भारत की समृद्ध संस्कृति, विरासत और शाश्वत परंपराओं को गर्व से अपनाने की दिशा में एक सार्थक कदम है।

परम वीर चक्र भारत का सर्वोच्च सैन्य सम्मान है जो युद्ध के दौरान असाधारण वीरता, साहस और आत्मबलिदान के लिए प्रदान किया जाता है।

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प्रधानमंत्री ने विजय दिवस पर वीर सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित की

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने विजय दिवस के अवसर पर उन वीर सैनिकों को याद किया जिनके साहस और बलिदान ने 1971 में भारत को ऐतिहासिक जीत दिलाई। श्री मोदी ने कहा कि वीर सैनिकों के पक्के इरादे और निस्वार्थ सेवा ने राष्ट्र की रक्षा की और भारत के इतिहास में गौरव का एक पल दर्ज किया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि विजय दिवस पर उनकी बहादुरी को सलाम है और आज का दिन उनकी बेमिसाल भावना की याद दिलाता है। उन्होंने यह भी कहा कि सैनिकों की वीरता देश की पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।

प्रधानमंत्री ने कहा:

“विजय दिवस पर हम उन वीर सैनिकों को याद करते हैं जिनके साहस और बलिदान ने 1971 में भारत को ऐतिहासिक जीत दिलाई। उनके दृढ़ संकल्प और निस्वार्थ सेवा ने हमारे राष्ट्र की रक्षा की और हमारे इतिहास में गौरव का एक पल अंकित किया। यह दिन उनके बेमिसाल साहस की याद दिलाता है। उनकी वीरता देश की पीढ़ियों को प्रेरित करती रहेगी।”

 

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श्री धर्मेंद्र प्रधान ने लोकसभा में विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक- 2025 पेश किया

नई दिल्ली –  केंद्रीय शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान ने आज लोकसभा में विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक-2025 पेश किया। इस विधेयक का उद्देश्य भारत के उच्च शिक्षा संस्थानों (एचईआईएस) को प्रभावी समन्वय और मानकों के निर्धारण के माध्यम से उत्कृष्टता प्राप्त करने के लिए सशक्त बनाना है।

राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 को व्यापक राष्ट्रव्यापी परामर्शों के माध्यम से तैयार किया गया था और जैसा कि अध्याय 18 में परिकल्पित है यह उच्च शिक्षा नियामक प्रणाली में मौलिक परिवर्तन का आह्वान करती है। एनईपी मसौदा समिति के अध्यक्ष और इसरो के पूर्व प्रमुख स्वर्गीय डॉ. के. कस्तूरीरंगन के दूरदर्शी नेतृत्व में यह नीति एक समग्र और भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण द्वारा निर्देशित है जो भारतीय मूल्यों में निहित अकादमिक स्वायत्तता, बहुविषयक शिक्षा, अनुसंधान उत्कृष्टता और वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर जोर देती है। इस समावेशी परामर्श प्रक्रिया के आधार पर विधेयक तैयार किया गया और इसमें प्रासंगिक वैश्विक सर्वोत्तम व्यवस्थाओं को शामिल किया गया है। इनका सावधानीपूर्वक अध्ययन किया गया और उन्हें प्रासंगिक बनाया गया। साथ ही  और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं और डॉ. कस्तूरीरंगन के न्यायसंगत, लचीली और नवाचार-संचालित शिक्षा प्रणाली के दृष्टिकोण के अनुरूप भारतीय उच्च शिक्षा संदर्भ में उपयुक्त रूप से अनुकूलित किया गया है।

12 दिसंबर, 2025 को प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने संसद में पेश करने के लिए विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक-2025 को मंजूरी दी।

यह विधेयक भारत के संविधान की सातवीं अनुसूची में संघ सूची की प्रविष्टि 66 के प्रावधानों के तहत पेश किया जा रहा है। इसमें ‘उच्च शिक्षा या अनुसंधान संस्थानों और वैज्ञानिक एवं तकनीकी संस्थानों में समन्वय और मानकों के निर्धारण’ का प्रावधान है।

विधेयक में तीन परिषदों के साथ एक शीर्ष निकाय के रूप में विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान की स्थापना का प्रावधान है: इसमें विकसित भारत शिक्षा विनियमन परिषद (नियामक परिषद), विकसित भारत शिक्षा गुणवत्ता परिषद (मान्यता परिषद), और विकसित भारत शिक्षा मानक परिषद (मानक परिषद) शामिल हैं। इस विधेयक में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग अधिनियम (यूजीसी), 1956, अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद अधिनियम (एआईसीटीई), 1987 और राष्ट्रीय शिक्षक शिक्षा परिषद अधिनियम (एनसीटीई), 1993 को निरस्त करने का भी प्रावधान है। शिक्षा मंत्रालय, यूजीसी, एआईसीटीई और एनसीटीई के दायरे में आने वाले सभी उच्च शिक्षण संस्थान मानकों के निर्धारण के लिए विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान के दायरे में होंगे। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 में परिकल्पित वास्तुकला परिषद (सीओए) व्यावसायिक मानक निर्धारण निकाय (पीएसएसबी) के रूप में कार्य करेगी। यह विधेयक राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों को दी गई स्वायत्तता के वर्तमान स्तर को बनाए रखने को सुनिश्चित करता है।

अधिष्ठान उच्च शिक्षा के समग्र विकास के लिए रणनीतिक दिशा प्रदान करेगा और परिषदों के बीच समन्वय सुनिश्चित करेगा। मानक परिषद उच्च शिक्षा संस्थानों में न्यूनतम शैक्षणिक मानकों के समन्वय और निर्धारण के लिए जिम्मेदार होगी। नियामक परिषद इन मानकों के समन्वय और रखरखाव को सुनिश्चित करेगी और मान्यता परिषद एक मजबूत और विश्वसनीय मान्यता  पारिस्थितिकी तंत्र की देखरेख करने वाले एक स्वतंत्र मान्यता  प्राधिकरण के रूप में कार्य करेगी।

नियामक परिषद का सार्वजनिक पोर्टल जो उच्च शिक्षा संस्थानों द्वारा शासन, वित्तीय, शैक्षणिक और संस्थागत प्रदर्शन डेटा के प्रकटीकरण को अनिवार्य बनाता है मान्यता के लिए मूलभूत आधार के रूप में भी कार्य करेगा। यह एकीकृत दृष्टिकोण पारदर्शिता, जवाबदेही और दक्षता सुनिश्चित करेगा साथ ही उच्च शिक्षा में भागीदारों के लिए व्यवस्थाओं को सरल बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता को मजबूत करेगा।

अधिष्ठान और विभिन्न परिषदों की सदस्यता में मुख्य रूप से प्रख्यात शिक्षाविद, संबंधित क्षेत्र के विशेषज्ञ और राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों, राज्य के उच्च शिक्षा संस्थानों और राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों के प्रतिनिधि शामिल होते हैं, जो संतुलित प्रतिनिधित्व और बेहतर निर्णय लेने को सुनिश्चित करते हैं।

वर्तमान परिदृश्य में उच्च शिक्षण संस्थानों को विभिन्न नियामक निकायों से कई स्वीकृति प्राप्त करने, कई तरह के निरीक्षण से गुजरने आदि की आवश्यकता होती है, जिसके परिणामस्वरूप इस क्षेत्र का अत्यधिक विनियमन और नियंत्रण का दोहराव होता है। देश में उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए सरलीकृत नियामक प्रणाली उपलब्ध कराने की आवश्यकता है।

ऐसे में प्रस्तावित विधेयक एक एकीकृत और सुव्यवस्थित नियामक संरचना को लागू करके जटिलताओं को दूर करने का प्रयास करता है। संपूर्ण नियामक ढांचा प्रौद्योगिकी-संचालित, फेसलेस, सिंगल विंडो इंटरएक्टिव सिस्टम के माध्यम से संचालित होगा, जो सार्वजनिक स्व-प्रकटीकरण और विश्वास-आधारित विनियमन के सिद्धांतों पर आधारित होगा।

नियामक परिषद एक व्यापक सार्वजनिक डिजिटल पोर्टल का रखरखाव करेगी। यहां उच्च शिक्षा संस्थानों को वित्तीय ईमानदारी, शासन व्यवस्था, वित्त, लेखापरीक्षा, प्रक्रियाओं, बुनियादी ढांचे, फैकल्टी और कर्मचारियों, शैक्षणिक कार्यक्रमों और शैक्षिक परिणामों से संबंधित जानकारी देनी होगी। इस सार्वजनिक पोर्टल पर प्रस्तुत डेटा मान्यता के प्राथमिक आधार के रूप में भी काम करेगा, जिससे उच्च शिक्षा प्रणाली में पारदर्शिता, जवाबदेही और एकरूपता सुनिश्चित होगी।

प्रस्तावित विधेयक के प्रमुख परिणाम

1. युवा सशक्तिकरण

पारदर्शी और छात्र-केंद्रित व्यवस्था गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा संस्थानों तक आसान पहुंच सुनिश्चित करेंगी, जिससे बेहतर पहुंच और उच्च सकल नामांकन अनुपात (जीईआर) प्राप्त होगा।

शिक्षा के लिए एक समग्र दृष्टिकोण छात्रों के बीच विवेचनात्मक सोच, रचनात्मकता और नवाचार को पोषित करते हुए अकादमिक उत्कृष्टता पर ध्यान केंद्रित करेगा।

अंतःविषय और लचीला शैक्षणिक ढांचा शिक्षार्थियों को विविध विषयों का पता लगाने और निरंतर कौशल विकास और उन्नयन करने की अनुमति देंगे।

अनुसंधान, नवाचार और उद्यमिता पर विशेष जोर देने से युवाओं में समस्या-समाधान की क्षमता, रचनात्मकता और आत्मनिर्भरता मजबूत होगी।

छात्र शैक्षणिक गुणवत्ता, बुनियादी ढांचे, शासन और समग्र शिक्षण अनुभव पर संरचित प्रतिक्रिया के माध्यम से उच्च शिक्षा संस्थानों की रैंकिंग और मूल्यांकन में सक्रिय रूप से योगदान देंगे, जिससे जवाबदेही और निरंतर सुधार सुनिश्चित होगा।

एक निष्पक्ष, पारदर्शी और सशक्त शिकायत निवारण तंत्र छात्रों की समस्याओं का समय पर और प्रभावी समाधान सुनिश्चित करेगा, जिससे संस्थागत कार्य प्रणालियों में विश्वास सुदृढ़ होगा।

इस विधेयक का उद्देश्य ऐसे जानकार, कुशल, जिम्मेदार और वैश्विक स्तर पर सक्षम नागरिक तैयार करना है जो राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सार्थक योगदान देने में सक्षम हों।

2. विश्व की सर्वोत्तम व्यवस्थाओं को अपनाना

उच्च शिक्षा में विश्व की सर्वोत्तम व्यवस्थाओं को अपनाने से भारतीय उच्च शिक्षा संस्थानों की गुणवत्ता, प्रतिस्पर्धात्मकता और अंतरराष्ट्रीय विश्वसनीयता में वृद्धि होगी।

इससे देश के भीतर वैश्विक स्तर पर मानकीकृत संस्थानों की स्थापना में सुविधा होगी, जिससे भारत को ज्ञान के केंद्र के रूप में स्थापित किया जा सकेगा। साथ ही घरेलू प्रतिभा को बनाए रखा जा सकेगा और अंतरराष्ट्रीय छात्रों और शिक्षकों को आकर्षित किया जा सकेगा।

3. नियामक सुधार

स्वतंत्र परिषदों के माध्यम से मानक निर्धारण, विनियमन और मान्यता का स्पष्ट कार्यात्मक पृथक्करण निष्पक्षता, विश्वसनीयता और हितों के टकराव से मुक्ति सुनिश्चित करेगा।

नियमन के लिए सामंजस्यपूर्ण मानदंड न्यूनतम गुणवत्ता मानकों में एकरूपता सुनिश्चित करेंगे, साथ ही संस्थागत उद्देश्यों और शैक्षणिक प्रस्तावों में लचीलापन और विविधता की अनुमति भी देंगे।

उद्देश्यपूर्ण, पारदर्शी, प्रौद्योगिकी-सक्षम, फेसलेस सिंगल विंडो सिस्टम, जो सार्वजनिक परीक्षण के लिए खुली है वह प्रक्रियाओं को सरल बनाएगी, मनमानी को कम करेगी और दक्षता और जवाबदेही को बढ़ाएगी।

सार्वजनिक प्रकटीकरण पर आधारित, उत्तरदायी और न्यूनतम विनियमन संस्थानों को प्रक्रियात्मक अनुपालन के बजाय अकादमिक उत्कृष्टता पर ध्यान केंद्रित करने में सक्षम बनाएगा।

एक पारदर्शी और सुदृढ़ मान्यता ढांचा गुणवत्ता विश्वास तंत्र को और मजबूत करेगा।

अच्छी तरह से प्रदर्शन करने वाले उच्च शिक्षा संस्थानों के लिए बढ़ी हुई स्वायत्तता उन्हें स्वतंत्र और स्व-शासित संस्थानों के रूप में कार्य करने में सक्षम बनाएगी, जिससे नवाचार, दक्षता (कुशलता) और बेहतर शैक्षणिक परिणामों को बढ़ावा मिलेगा।

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क्षमता विकास आयोग ने “केन्द्रीय प्रशिक्षण संस्थानों की भविष्य की तैयारी” विषय पर राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया

नई दिल्ली – क्षमता विकास आयोग (सीबीसी) ने आज नई दिल्ली में “केन्द्रीय प्रशिक्षण संस्थानों (सीटीआई) की भविष्य की तैयारी” विषय पर एक राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया। कार्यशाला के प्रारंभिक सत्र में सिविल सेवाओं के प्रशिक्षण के भविष्य पर नए सिरे से सोचने और शासन संबंधी उभरती चुनौतियों का सामना करने के लिए संस्थागत तैयारी को मजबूत करने पर ध्यान दिया गया।

इस अवसर पर बोलते हुए, सीबीसी की अध्यक्ष सुश्री एस. राधा चौहान ने कहा कि मिशन कर्मयोगी की सफलता के लिए प्रशिक्षण संस्थान बेहद महत्वपूर्ण हैं। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि प्रशिक्षण संस्थानों को बड़ी चुनौतियों का सामना करने के लिए अलग दिखना होगा, और कहा कि उन्हें लगातार बदलते प्रशिक्षण इकोसिस्टम, जहां आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस एक महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, में अपनी भूमिकाओं के बारे में नए सिरे से सोचना, उन्हें नया रूप देना और पुनर्परिभाषित करना होगा। उन्होंने आगे कहा कि प्रशिक्षण को गतिशील होना चाहिए और सीखने, भुलाने एवं  फिर से सीखने पर ध्यान देना चाहिए। अध्यक्ष महोदया ने मानवीय तत्व के महत्व को रेखांकित किया, जिसे तकनीक द्वारा संचालित माहौल में विकसित भारत के लिए नागरिक-केन्द्रित शासन के लक्ष्य को पूरा करने में अपनी भूमिका निभानी होगी।

इस कार्यशाला का संदर्भ बताते हुए, सीबीसी की प्रधान सलाहकार सुश्री चंद्रलेखा मुखर्जी ने केन्द्रीय प्रशिक्षण संस्थानों की भविष्य की तैयारी पर एक विस्तृत प्रस्तुति दी। उन्होंने बताया कि अब एनएससीएसटीआई 2.O फ्रेमवर्क के अनुसार पांच (5) सीटीआई को 5-सितारा वाली  रेटिंग मिली है। उन्होंने आगे कहा कि अब ध्यान रेटिंग से हटकर उत्कृष्टता केन्द्र, योग्यता-संचालित प्रशिक्षण और नागरिक-केन्द्रित नतीजों पर दिया जा रहा है। सुश्री मुखर्जी ने अगले चरण के लिए प्रशिक्षण संस्थानों में ऐसे बदलावों की जरूरत पर बल दिया, जिसमें भूमिकाओं और मेंटरशिप के बारे में नए सिरे से सोचने, तकनीक का इस्तेमाल करने और संसाधनों, फैकल्टी, कंटेंट एवं बुनियादी ढांचे को मिलकर साझा करने पर ध्यान दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि विशिष्ट डोमेन–केन्द्रित क्षमता की बढ़ती मांग, शासन में बदलाव और तेजी से हो रहे तकनीकी बदलावों, लगातार मूल्यांकन एवं अनुकूलन संबंधी कार्यप्रणाली की जरूरत और डेटा-आधारित जानकारियों की जरूरत को पूरा करने के लिए नए मानक स्थापित करने की आवश्यकता है।

ऑनलाइन माध्यम से दर्शकों को संबोधित करते हुए, सीबीसी के पूर्व अध्यक्ष श्री आदिल जैनुलभाई ने प्रशिक्षण संस्थानों को उनके अब तक की यात्रा के लिए बधाई दी। भविष्य की तैयारियों के संदर्भ में संस्थानों के लिए तीन लक्ष्य बताते हुए, उन्होंने कहा कि आगे चलकर उन सभी को पांच-सितारा रेटिंग वाले विश्वस्तरीय प्रशिक्षण संस्थान बनने का लक्ष्य रखना चाहिए; आपस में और अकादमिक संस्थानों व थिंक टैंक के साथ सहयोग करना चाहिए; तीसरा लक्ष्य वास्तविक और डिजिटल प्रशिक्षण इकोसिस्टम को निर्बाध तरीके से एकीकृत करने में अग्रणी बनना और अंततः इसे दुनिया में सबसे अच्छा बनाना है।

कर्मयोगी भारत के मुख्य संचालन अधिकारी श्री राकेश वर्मा ने एआई-केन्द्रित क्षमता निर्माण  योजना (सीबीपी) उपकरण पेश किया और विभिन्न प्रशिक्षण संस्थानों, मंत्रालयों, विभागों एवं संगठनों की बदलती ज़रूरतों के अनुरूप योग्यता-संचालित प्रशिक्षण योजना को डिजाइन करने में संस्थानों को समर्थन देने की इसकी क्षमता पर बल दिया।

इस कार्यशाला की मुख्य विशेषता तीन समानांतर सत्र थे, जिनके माध्यम से भविष्य की तैयारी के अहम पहलुओं पर चर्चा हुई। इन विषयों में भूमिकाओं, जिम्मेदारियों और तकनीक-आधारित गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण के जरिए उत्कृष्टता हासिल करना, एनएससीएसटीआई  फ्रेमवर्क को मजबूत करना एवं संसाधनों के साझाकरण को संभव बनाना और एआई उपकरणों एवं डोमेन कोर्स आइडेंटिफिकेशन के जरिए आईजीओटी पर पाठ्यक्रम को बेहतर बनाना शामिल था। इन सत्रों का संचालन सीबीसी की प्रधान सलाहकार सुश्री चंद्रलेखा मुखर्जी और केन्द्रीय प्रशिक्षण संस्थानों के वरिष्ठ फैकल्टी ने किया, जिनमें सुश्री एनसीए-एफ की महानिदेशक माधवी दास, एलबीएसएनएए की उप निदेशक (वरीय) सुश्री शनमुगा प्रिया मिश्रा, आरएकेएनपीए की संयुक्त निदेशक सुश्री अर्चना गोपीनाथ, केबी के सीओओ श्री राकेश वर्मा, सीबीसी की सलाहकार सुश्री उमा एस., और सीबीसी टीम के अन्य सदस्य शामिल थे। चर्चाओं में संस्थानों के लिए उत्कृष्टता हासिल करने के बाद की भूमिकाओं, जिम्मेदारियों और रास्तों में बदलाव, प्रशिक्षण की गुणवत्ता को बेहतर बनाने के लिए तकनीक का उपयोग, भविष्य के लिए तैयार प्रशिक्षण मानक, समग्र सरकार वाला दृष्टिकोण, सीबीपी और संस्थान के संदर्भ में इसके उपयोग के तरीकों और पाठ्यक्रम की पहचान एवं मानकों पर ध्यान केन्द्रित किया गया।

तीनों सत्रों के निष्कर्षों को दर्शकों के सामने पेश किया गया, जिससे कार्रवाई योग्य सिफारिशों और लागू करने के तरीकों पर सहमति बनी।

समापन सत्र के दौरान, सीबीसी की सदस्य (एचआर) डॉ. अलका मित्तल ने चर्चाओं के दौरान सक्रिय भागीदारी के लिए सभी समूहों की प्रशंसा की। उन्होंने बताया कि आगे बढ़ने के लिए बहुत सारे सुझाव मिले हैं। उन्होंने कहा कि उत्कृष्टता मंजिल नहीं, बल्कि एक जिम्मेदारी है। उन्होंने आगे कहा कि विरासत को आगे बढ़ाना चाहिए और आने वाली पीढ़ियों को सौंपना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि संस्थानों को न सिर्फ स्तरीयता बनाए रखनी चाहिए, बल्कि मार्गदर्शक की भूमिका भी निभानी चाहिए। उन्होंने अपील की कि हमें यह सुनिश्चित करना चाहिए कि हम सब एक साथ आएं। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण का भविष्य पाठ्यक्रमों की संख्या पर नहीं, बल्कि हमारी बनाई गई क्षमताओं पर निर्भर करता है और यह भूमिका संस्थानों को निभानी होगी।

कार्यशाला का समापन सीबीसी के सचिव श्री एस. पी. रॉय के समापन भाषण के साथ हुआ। उन्होंने मिशन कर्मयोगी के तहत केन्द्रीय प्रशिक्षण संस्थानों को चुस्त, तकनीक–संचालित और भविष्य के लिए तैयार संस्थान बनाने में सीबीसी की प्रतिबद्धता को फिर से दोहराया। उन्होंने संसाधनों के साझाकरण और क्षमता की जरूरत पर आधारित प्रशिक्षण पर बल दिया।

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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने विजय दिवस पर, युद्ध में अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर शहीदों को नमन किया

नई दिल्ली – केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने विजय दिवस पर, युद्ध में अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर शहीदों को नमन किया।

X प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा “वर्ष 1971 में आज ही के दिन सुरक्षा बलों ने अदम्य साहस और सटीक रणनीति के बल पर पाकिस्तानी सेना को परास्त कर उसे आत्मसमर्पण करने के लिए मजबूर किया था। इस विजय ने अन्याय और अत्याचार के खिलाफ ढाल बन, विश्वभर में मानवता की रक्षा का आदर्श उदाहरण पेश किया और भारतीय सेनाओं की अद्वितीय सैन्य क्षमता और पराक्रम का लोहा मनवाया। विजय दिवस पर, युद्ध में अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर शहीदों को नमन करता हूँ।”

 

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