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आईएनएस सुदर्शनी ने कैनरी द्वीप समूह के लास पाल्मास में पोर्ट कॉल पूरा किया

नई दिल्ली – भारतीय नौसेना के नौकायन प्रशिक्षण पोतआईएनएस सुदर्शनी ने 26 अप्रैल, 2026 को कैनरी द्वीप समूह के लास पाल्मास में अपना तीन दिवसीय ऐतिहासिक पड़ाव पूरा किया, जो लोकायन 26 समुद्री अभियान में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। स्पेनिश द्वीपसमूह की इस यात्रा ने समुद्री कूटनीति और पेशेवर सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर प्रदान किया।

आईएनएस सुदर्शनी के कमांडिंग ऑफिसर ने कैनरी द्वीप नौसेना कमान के प्रमुख रियर एडमिरल सैंटियागो डी कोल्सा ट्रूबा से मुलाकात की। इस मुलाकात में दोनों नौसेनाओं के बीच सुदृढ़ होते द्विपक्षीय संबंधों और गहरी होती साझेदारी को रेखांकित किया गया।

पोर्ट कॉल के दौरान, जहाज आगंतुकों के लिए खुला था, जिसमें स्थानीय समुदाय और भारतीय प्रवासी समुदाय के बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। भारत की गौरवशाली समुद्री विरासत को प्रदर्शित करते हुए आगंतुकों को जहाज का निर्देशित दौरा कराया गया। इससे उन्हें समुद्री यात्रा के अमूल्य अनुभव प्राप्त हुए और समुद्री मित्रता के बंधन मजबूत हुए।

आईएनएस सुदर्शनी अब अपने अगले गंतव्य-मिंडेलोकेप वर्डे के लिए रवाना हो रही हैजो अटलांटिक पार यात्रा शुरू करने से पहले अफ्रीका में उसका अंतिम पड़ाव होगा। पश्चिम एशियाभूमध्य सागरयूरोप और अफ्रीका की नौसेनाओं के साथ सात बंदरगाहों पर भ्रमण और समुद्री देशों के साथ सहयोग बढ़ाने की यह यात्रा भारतीय नौसेना की विभिन्न देशों के बीच मित्रता और परस्पर विश्वास के सेतु बनाने की प्रतिबद्धता का प्रतीक है।

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डाक विभाग और डीटीडीसी ने देश भर में लॉजिस्टिक्स और ई-कॉमर्स को बढ़ावा देने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए

नई दिल्ली – संचार मंत्रालय के अधीन डाक विभाग और डीटीडीसी एक्सप्रेस लिमिटेड ने देश भर में लॉजिस्टिक्स और ई-कॉमर्स इकोसिस्टम को बढ़ावा देने के लिए समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए हैं। डाक विभाग के पार्सल निदेशालय के महाप्रबंधक श्री नीरज कुमार झा और डीटीडीसी एक्सप्रेस लिमिटेड के राष्ट्रीय चैनल प्रमुख श्री जतिंदर सेठी ने दोनों संगठनों के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में आज नई दिल्ली में इस समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए।

(डाक विभाग और डीटीडीसी एक्सप्रेस लिमिटेड के अधिकारियों ने डाक भवननई दिल्ली में समझौता ज्ञापन का आदान-प्रदान किया)

इस साझेदारी का उद्देश्य देश भर में पार्सल डिलीवरी सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए डाक विभाग के विशाल बुनियादी ढांचे और नेटवर्क के साथ-साथ डीटीडीसी के लॉजिस्टिक्स अनुभव का लाभ उठाना है। समझौता ज्ञापन दोनों पक्षों के बीच वर्ष 2025 में शुरू हुए निरंतर सहयोग को दर्शाता है।

समझौता ज्ञापन की मुख्य विशेषताएं:

  • उद्देश्य: लॉजिस्टिक्स और व्यावसायिक संचालन में अवसरों का पता लगाना और उनका विस्तार करना, जिससे डीटीडीसी देश भर में पार्सल डिलीवरी के लिए डीओपी के व्यापक डाक नेटवर्क का उपयोग कर सके। इसमें कैश ऑन डिलीवरी (सीओडी) सेवाएं भी शामिल हैं।
  • सहयोग में वृद्धि: समझौता ज्ञापन संयुक्त लॉजिस्टिक्स संचालन, क्षमता साझाकरण, पार्सल उद्योग में सर्वोत्तम प्रथाओं, परिचालन दक्षता और सेवा गुणवत्ता के लिए विपणन रणनीतियों के समन्वय पर केंद्रित है।
  • नियमित समीक्षा तंत्र: दोनों पक्ष साझेदारी की प्रगति का आकलन करने, अपनी प्रणालियों के एकीकरण को सुनिश्चित करने और लॉजिस्टिक्स नेटवर्क को बढ़ाने के लिए नए अवसरों की खोज करने के लिए त्रैमासिक बैठकें करेंगे।

डीटीडीसी को मिलने वाले लाभ:

डीटीडीसी को देश भर में फैले डाक विभाग के 1.64 लाख डाकघरों के अद्वितीय नेटवर्क तक पहुंच प्राप्त होगी। यह साझेदारी डीटीडीसी को अपने लॉजिस्टिक्स का विस्तार करने, डिलीवरी की गति में सुधार करने और देश के ई-कॉमर्स क्षेत्र, विशेष रूप से दूरस्थ क्षेत्रों की बढ़ती मांगों को पूरा करने में सक्षम बनाएगी।

डाक विभाग को होने वाले लाभ:

यह सहयोग डीओपी के लिए उसके पार्सल व्यवसाय को बढ़ावा देगा, जिससे तेज गति से डिलीवरी सेवाएं मिलेंगी और इनका नेटवर्क भी विस्तारित होगा। डीटीडीसी के साथ साझेदारी करके, डीओपी का लक्ष्य देश के लॉजिस्टिक्स क्षेत्र में अपनी भूमिका को और मजबूत करना है, जिससे भारत के वैश्विक लॉजिस्टिक्स हब बनने के लक्ष्य में योगदान मिलेगा।

डाक विभाग के बारे में:

संचार मंत्रालय के अधीन डाक विभाग, देश भर में 1.64 लाख से अधिक डाकघरों के साथ विश्व का सबसे बड़ा डाक नेटवर्क संचालित करता है। यह देश में ई-कॉमर्स के विकास को गति देने पर विशेष ध्यान देने के साथ-साथ संचार, लॉजिस्टिक्स और वित्तीय सेवाएं प्रदान करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

डीटीडीसी एक्सप्रेस लिमिटेड के बारे में:

डीटीडीसी देश की अग्रणी एक्सप्रेस पार्सल डिलीवरी कंपनियों में से एक है, जो घरेलू और अंतरराष्ट्रीय ई-कॉमर्स के लिए अभिनव लॉजिस्टिक्स समाधान प्रदान करती है। कंपनी विभिन्न क्षेत्रों के व्यवसायों को सहयोग प्रदान करते हुए विश्वसनीय और लागत प्रभावी लॉजिस्टिक्स सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है।

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भारत और न्यूजीलैंड ने ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर किए

यह समझौता प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में आर्थिक साझेदारी और अवसरों के एक नए युग की शुरुआत है

न्यूजीलैंड के व्यापार और निवेश मंत्री टॉड मैक्ले ने कहा कि भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता नई पीढ़ी के लिए अवसरों को खोलने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है और साथ ही द्विपक्षीय सम्बंधों में एक नया अध्याय जोड़ता है

2047 तक विकसित भारत के लिए एक नई पीढ़ी का व्यापार समझौता टैरिफ, प्रतिभा, निवेश और कृषि उत्पादकता से युवाओं, किसानों, महिलाओं, कारीगरों और लघु एवं मध्यम उद्यमों को सशक्त बनाता है

यह समझौता कई मायनों में अभूतपूर्व है: 100 प्रतिशत शुल्क-मुक्त पहुंच, फार्मा क्षेत्र में त्वरित पहुंच, कृषि उत्पादकता साझेदारी, प्रतिभा गतिशीलता, आयुष का वैश्विक विस्तार और मजबूत बौद्धिक संपदा

कपड़ा, चमड़ा, जूते, इंजीनियरिंग सामान और प्रसंस्कृत खाद्य क्षेत्रों जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों को सशक्त बनाने के लिए विस्तारित बाजार पहुंच

कृषि, मछली पालन और फैक्ट्रियों को बढ़ावा: भारत के 100 प्रतिशत एक्सपोर्ट पर ज़ीरो-ड्यूटी बाजार पहुंच भारत ने 70 प्रतिशत लाइनों में बाजर पहुंच की पेशकश की है, इसमें न्यूज़ीलैंड के 95 प्रतिशत द्विपक्षीय व्यापार शामिल हैं

भारत में कृषि, विनिर्माण उद्योग, ढांचागत विकास, स्टार्ट-अप, आविष्कारक और उभरती टेक्नोलॉजी को बढ़ावा देने के लिए 20 अरब अमरीकी डॉलर के निवेश का वादा

किसानों, ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं और घरेलू उद्योग को सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए, बाजार पहुंच में कॉफ़ी, दूध, क्रीम, चीज़, दही, मट्ठा, दुग्ध प्रोटीन, प्याज़, चीनी, मसाले, खाने के तेल, रबर जैसे डेयरी और मुख्य कृषि उत्पाद शामिल नहीं हैं

न्यूज़ीलैंड द्वारा अब तक की सबसे बेहतरीन बाजार पहुंच और सेवाओं की पेशकश, इससे कुशल पेशेवरों, स्टार्ट-अप और सेवा-आधारित उद्यमों के लिए उच्च-मूल्य वाले अवसर खुलेंगे। इसमें 118 सेवा क्षेत्र शामिल हैं, इनमें कंप्यूटर-सम्बंधी सेवाएं, पेशेवर सेवाएं, श्रव्य-दृश्य सेवाएं, दूरसंचार सेवाएं, विनिर्माण सेवाएं, पर्यटन और यात्रा-सम्बंधी सेवाएं शामिल हैं, लगभग 139 उप-क्षेत्रों में सबसे पसंदीदा राष्ट्र का वादा

न्यूज़ीलैंड में पढ़ाई के बाद काम करने वाले वीज़ा और पेशेवर तौर तरीकों से छात्रों की आवाजाही को बढ़ावा, जिसमें कोई संख्यात्मक सीमा नहीं है: छात्र अपनी वैश्विक सीख को वैश्विक अनुभव में बदल सकते हैं। स्टेम (विज्ञान, टेक्नोलॉजी, इंजीनियरिंग और गणित) में बैचलर और मास्टर डिग्री वाले छात्रों को 3 साल तक और डॉक्टरेट शोधकर्ताओं को 4 साल तक पढ़ाई के बाद काम करने का अधिकार मिलेगा

भारतीय पेशेवरों और छात्रों के लिए आवाजाही के रास्तों के ज़रिए वैश्विक करियर को बढ़ावा

भारतीय पेशेवरों के लिए ‘अस्थायी रोज़गार प्रवेश वीज़ा’ का 5,000 का विशेष कोटा, नए अवसरों का विस्तार

निर्माण की प्रतिस्पर्धात्मकता को मज़बूत करने और लचीली सप्लाई चेन बनाने के लिए शुल्क-मुक्त इनपुट: लकड़ी के लट्ठे, कोकिंग कोयला, धातु का कचरा और स्क्रैप

उत्पादकता, किसानों की आय और ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ाने के लिए सेब, कीवी फल और मनुका शहद के लिए कृषि उत्पादकता साझेदारी और ‘उत्कृष्टता केंद्र’

कृषि उत्पादकता सहयोग के साथ-साथ कोटा और न्यूनतम आयात कीमतों के माध्यम से नियंत्रित बाजार पहुंच से घरेलू उत्पादकों के लिए सुरक्षा सुनिश्चित

वैश्विक बाज़ारों में जैविक उत्पाद और ‘आयुष’ मुख्य आकर्षण बन रहे हैं

स्वास्थ्य और पारंपरिक ज्ञान के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक सहयोग न्यूज़ीलैंड द्वारा अपनी तरह का पहला प्रयास है। यह आयुर्वेद, योग और अन्य पारंपरिक प्रणालियों को बढ़ावा देता है, साथ ही आयुष, वेलनेस सेवाओं और महिलाओं के नेतृत्व वाले उद्यमों में भारत के वैश्विक नेतृत्व को मज़बूत करता है

न्यूजीलैंड भारतीय भौगोलिक संकेतकों के पंजीकरण को सक्षम बनाने, ग्रामीण कारीगरों और पारंपरिक उद्योगों का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है

न्यूजीलैंड भारतीय भौगोलिक संकेतकों के पंजीकरण को सक्षम बनाने, ग्रामीण कारीगरों और पारंपरिक उद्योगों का समर्थन करने के लिए प्रतिबद्ध है

 

भारत और न्यूजीलैंड ने आज नई दिल्ली के भारत मंडपम में भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते (आईएन-एनजेड एफटीए) पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण और नेतृत्व में भारत की वैश्विक आर्थिक साझेदारियों को मजबूत करने के उद्देश्य से किया गया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल और न्यूजीलैंड के व्यापार एवं निवेश मंत्री माननीय टॉड मैक्ले ने इस समझौते पर हस्ताक्षर किए।

इस हस्ताक्षर समारोह में दोनों देशों के व्यवसायों और उद्योग जगत के अग्रणी एक साथ आए। इसमें व्यापार और निवेश मंत्री टॉड मैक्ले ने संसद सदस्यों और 30 से अधिक न्यूजीलैंड व्यवसायों के एक बहुदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व किया।

श्री मैक्ले ने कहा कि भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर द्विपक्षीय सम्बंधों में एक नया और महत्वपूर्ण अध्याय है। यह साझी महत्वाकांक्षा, गहन जुड़ाव और पारस्परिक रूप से लाभकारी विकास के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते पर हस्ताक्षर के अवसर पर अपने संदेश में न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन ने इसे एक ऐतिहासिक उपलब्धि बताया और कहा कि यह समझौता दोनों देशों के लिए व्यापार, निवेश और नवाचार के व्यापक अवसर खोलता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इससे बाजार पहुंच का विस्तार होगा, निर्यात वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा और कृषि जैसे क्षेत्रों में सहयोग संभव होगा। साथ ही, यह स्थिर, नियम-आधारित व्यापार और घनिष्ठ जन-संबंधों के प्रति साझा प्रतिबद्धता को भी मजबूत करेगा।

इस अवसर पर श्री मैक्ले ने कहा कि यह समझौता वर्तमान पीढ़ी के लिए सबसे बड़ा अवसर है। यह निर्यातकों के लिए नए रास्ते खोलेगा, रोजगार सृजित करेगा और महत्वपूर्ण आर्थिक संभावनाओं को उजागर करेगा। इससे न केवल मौजूदा व्यापारिक सम्बंध मजबूत होंगे बल्कि नई साझेदारियों के विकास में भी तेजी आएगी, इससे दोनों देशों के बीच समग्र आर्थिक सहयोग बढ़ेगा।

न्यूजीलैंड की मजबूत भागीदारी के बारे में उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए निर्यातकों, क्षेत्र के अग्रणियों और व्यावसायिक हितधारकों सहित 40 से अधिक प्रतिनिधि भारत आए है। इससे समझौते के महत्व का पता चलता है।

इस समझौते से बाजार पहुंच में सुधार, बाधाओं में कमी और स्पष्ट एवं पूर्वानुमानित नियमों की स्थापना के माध्यम से व्यापार और निवेश प्रवाह में वृद्धि होने की उम्मीद है। यह लघु एवं मध्यम उद्यमों सहित सभी आकार के व्यवसायों को सहयोग प्रदान करेगा और व्यापार के लाभों का व्यापक वितरण सुनिश्चित करेगा।

श्री मैक्ले ने द्विपक्षीय सम्बंधों के एक प्रमुख स्तंभ के रूप में जन-जन सम्बंधों की भूमिका पर भी बल दिया। उन्होंने बताया कि न्यूजीलैंड की लगभग 6 प्रतिशत आबादी की जड़ें भारत से जुड़ी हैं। भारतीय प्रवासी व्यापार, शिक्षा, विज्ञान, संस्कृति, खेल और सार्वजनिक जीवन जैसे विभिन्न क्षेत्रों में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं।

उन्होंने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान साझा सैन्य इतिहास और खेल जगत के स्थायी जुड़ाव, विशेष रूप से क्रिकेट में, दोनों देशों के बीच लंबे समय से चले आ रहे ऐतिहासिक और सांस्कृतिक सम्बंधों पर भी प्रकाश डाला, जो द्विपक्षीय भागीदारी को मजबूत करना जारी रखता है।

यह समझौता वैश्विक और क्षेत्रीय परिस्थितियों में हो रहे बदलावों के दौर में हुआ है, जहां विश्वसनीय साझेदारियां और भी महत्वपूर्ण हो गई हैं। न्यूजीलैंड भारत को क्षेत्रीय स्थिरता, आर्थिक मजबूती और साझा समृद्धि को बढ़ावा देने में एक प्रमुख भागीदार मानता है।

भारत के तीव्र आर्थिक परिवर्तन को स्वीकार करते हुए, श्री मैक्ले ने वैश्विक आर्थिक गतिविधि में इसकी बढ़ती भूमिका का उल्लेख किया और भारत की विकास यात्रा में साझेदारी करने के लिए न्यूजीलैंड की प्रतिबद्धता को दोहराया।

श्री मैक्ले ने वार्ता में शामिल अधिकारियों के पेशेवर रवैये और समर्पण की सराहना करते हुए कहा कि यह समझौता संतुलित, दूरदर्शी और व्यावहारिक परिणाम दर्शाता है। अब दोनों पक्ष समझौते के प्रभावी कार्यान्वयन और क्रियान्वयन के लिए मिलकर काम करेंगे।

अपने संबोधन के समापन में उन्होंने ने दोनों देशों के नेतृत्व को उनकी दूरदर्शिता और प्रतिबद्धता के लिए धन्यवाद दिया और कहा कि यह समझौता आपसी सम्मान, साझा हितों और आने वाले वर्षों में सम्बंधों को और मजबूत करने की स्पष्ट महत्वाकांक्षा पर आधारित है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री श्री क्रिस्टोफर लक्सन की द्विपक्षीय बैठक की पूर्व संध्या पर 16 मार्च, 2025 को आधिकारिक तौर पर यह बातचीत शुरू हुई थी। यह समझौता दोनों देशों के बीच गहरे आपसी सम्बंधों और जीवंत लोकतंत्रों की साझेदारी पर आधारित है, इसका उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में व्यापार, आर्थिक सहयोग और रणनीतिक जुड़ाव को बढ़ावा देना है। 2024-25 में ओशिनिया और भारत के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगभग 26 अरब अमरीकी डॉलर था। न्यूजीलैंड ओशिनिया क्षेत्र में भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है, जिसके साथ द्विपक्षीय व्यापार का मूल्य लगभग 1.3 अरब अमरीकी डॉलर है। भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौते के लागू होने के साथ, बेहतर बाजार पहुंच, अधिक व्यापार सुविधा और दोनों देशों के बीच गहरे आर्थिक जुड़ाव के कारण द्विपक्षीय व्यापार में और वृद्धि होने की आशा है।

वार्ता के पांच औपचारिक दौरों और कई अंतर-सत्रों के माध्यम से, दोनों देशों ने 22 दिसंबर 2025 को शुरु होने के महज नौ महीने बाद ही समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए। इससे यह भारत द्वारा किसी विकसित देश के साथ किए गए सबसे तेजी से संपन्न होने वाले मुक्त व्यापार समझौतों में से एक बन गया।

समझौते पर हस्ताक्षर के अवसर पर वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री श्री पीयूष गोयल ने कहा, “ भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता विकसित देशों के साथ भारत के सम्बंधों में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह समझौता हमारे किसानों, महिलाओं, युवाओं, कारीगरों और उद्यमियों के लिए वैश्विक आर्थिक साझेदारी के सम्बंध में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दृष्टिकोण को दर्शाता है। पिछले कुछ वर्षों में 38 विकसित देशों के साथ भारत का यह नौवां समझौता है। समझौते का मूल उद्देश्य निर्यात, कृषि उत्पादकता, छात्र आवागमन, कौशल विकास, निवेश और सेवाओं को सशक्त बनाना है। न्यूजीलैंड द्वारा 20 अरब अमरीकी डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता भारत की विकास गाथा में मजबूत विश्वास का संकेत है। यह समझौता लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को मजबूत करने, नवाचार को बढ़ावा देने और महिला नेतृत्व वाले उद्यमों को वैश्विक बाजारों में फलने-फूलने में सक्षम बनाने पर विशेष बल देता है।”

वाणिज्य सचिव श्री राजेश अग्रवाल ने एक संदेश में कहा, “भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता हमारी आर्थिक साझेदारी में एक नए युग की शुरुआत करता है, यह विश्वास और पूरक शक्तियों पर आधारित है। अब न्यूजीलैंड के साथ निर्यात के लिए भारत के पास समान अवसर उपलब्ध हैं। यह मुक्त व्यापार समझौता कृषि उत्पादकता, जैविक उत्पादों, सेवाओं, परिवहन, आयुष और फार्मा क्षेत्रों तक पहुंच को बढ़ाता है, इससे अवसर व्यापक और भविष्य के अनुकूल हो जाते हैं। यह समझौता भारत के श्रम-प्रधान क्षेत्रों को मजबूत प्रतिस्पर्धात्मक बढ़ावा देता है। भारत के निर्यातकों को अब न्यूजीलैंड और व्यापक क्षेत्रीय व्यापार इको-सिस्टम में शून्य शुल्क की पहुंच प्राप्त है। भारतीय निर्यातक हिंद-प्रशांत क्षेत्र में अधिक व्यापक स्तर पर और विविधीकरण के साथ काम कर सकते हैं। यह समझौता आज की पल-पल बदलती दुनिया में स्थायित्व प्रदान करता है।”

भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में हस्ताक्षरित किया गया। यह समझौता एक नई पीढ़ी की रणनीतिक व्यापार साझेदारी का प्रतिनिधित्व करता है, जो व्यापक, समावेशी, आत्मविश्वासपूर्ण, सुनियोजित और राष्ट्रीय हित पर आधारित है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, भारत विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ ऐसी साझेदारियां स्थापित कर रहा है जो हमारे श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए वास्तविक बाजार पहुंच और समग्र आर्थिक साझेदारियां सुनिश्चित करती हैं। यह मुक्त व्यापार समझौता 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की ओर अग्रसर एक नए दृष्टिकोण का प्रमाण है। यह व्यापार रोजगार सृजन करेगा, युवाओं, महिलाओं और लघु एवं मध्यम उद्यमों को सशक्त बनाएगा और समावेशी विकास और आर्थिक लचीलेपन की परिकल्पना के साथ पूर्णतः संरेखित होगा। यह मुक्त व्यापार समझौता दोनों देशों में सभी घरेलू प्रक्रियाओं के पूर्ण होने और अनुसमर्थन के बाद लागू होगा।

 

उत्पादकता से लोगों की समृद्धि तक: विकसित भारत 2047 के लिए शुल्कप्रतिभा और परिवर्तन

वस्तु व्यापार: लागू होने पर न्यूजीलैंड के बाजार में अभूतपूर्व 100 प्रतिशत शुल्क-मुक्त पहुंच

  • यह मुक्त व्यापार समझौता भारत के न्यूजीलैंड को होने वाले 100 प्रतिशत निर्यात के लिए शुल्क-मुक्त पहुंच प्रदान करता है, इसमें सभी शुल्कलाइनें शामिल हैं, और इससे कपड़ा, परिधान, चमड़ा, जूते, रत्न और आभूषण, इंजीनियरिंग सामान और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थों जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाकर लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) और रोजगार को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा मिलने की आशा है।
  • इससे पहले, न्यूजीलैंड ने सिरेमिक, कालीन, ऑटोमोबाइल और ऑटो कंपोनेंट्स सहित प्रमुख भारतीय निर्यातों पर 10 प्रतिशत तक के उच्चतम शुल्क को बरकरार रखा था।
  • न्यूजीलैंड के अन्य व्यापारिक साझेदारों की तरह, भारतीय उत्पादों को प्रवेश के समय से ही शून्य शुल्क बाजार पहुंच प्राप्त होगी, इससे वे न्यूजीलैंड में पूरी तरह से प्रतिस्पर्धी होंगे और उन्हें समान अवसर मिलेंगेजो भारत भर में श्रमिकों, कारीगरों, महिला उद्यमियों, युवाओं और लघु एवं मध्यम उद्यमों को सीधे तौर पर समर्थन प्रदान करेगा।
  • महत्वपूर्ण बात यह है कि भारत अपने विनिर्माण क्षेत्र के लिए लकड़ी के लट्ठे, कोकिंग कोयला और धातुओं के अपशिष्ट और स्क्रैप सहित शुल्क-मुक्त इनपुट भी प्राप्त करता है, इससे उत्पादन लागत कम होती है और भारतीय उद्योग की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ती है।

बाजार पहुंच को संतुलित किया गया और संवेदनशील क्षेत्रों को संरक्षित किया गया।

  • भारत ने द्विपक्षीय व्यापार मूल्य के 95 प्रतिशत हिस्से को कवर करने वाली 70.03 प्रतिशत शुल्कलाइनों पर शुल्कउदारीकरण की पेशकश की है, इसके साथ ही भारत के संवेदनशील क्षेत्रों की रक्षा के लिए 29.97 प्रतिशत शुल्क लाइनों को इससे बाहर रखा है।
  • जिन उत्पादों को प्रतिबंधित रखा गया हैउनमें मुख्य रूप से शामिल हैं – दुग्ध उत्पाद (दूध, क्रीम, मट्ठा, दही, पनीर आदि), पशु उत्पाद (भेड़ के मांस के अलावा), कृषि उत्पाद (प्याज, चना, मटर, मक्का, बादाम आदि), चीनी, कृत्रिम शहद, पशु, वनस्पति या सूक्ष्मजीवों से प्राप्त वसा और तेल, हथियार और गोला-बारूद, रत्न और आभूषण, तांबा और उससे बनी वस्तुएं (कैथोड, कारतूस, छड़ें, कॉइल आदि), एल्युमीनियम और उससे बनी वस्तुएं (पिंड, बिलेट, तार की छड़ें) आदि।
  • 30.00 प्रतिशत शुल्कमदों पर तत्काल शुल्क समाप्त कर दिया जाएगा, इसमें लकड़ी, ऊन, भेड़ का मांस, चमड़ा-कच्ची खाल आदि शामिल हैं।
  • 35.60 प्रतिशत शुल्कको 3, 5, 7 और 10 वर्षों में चरणबद्ध तरीके से समाप्त किया जाना है, इसमें पेट्रोलियम तेल, माल्ट का अर्क, वनस्पति तेल और चुनिंदा विद्युत और यांत्रिक मशीनरी, पेप्टोन आदि शामिल हैं।
  • शराब, फार्मास्युटिकल दवाएं, पॉलिमर, एल्युमीनियम, लोहा और इस्पात से बने सामान आदि जैसे 4.37 प्रतिशत उत्पादों पर शुल्क में कटौती की गई है ।
  • 0.06 प्रतिशत शुल्कदर कोटा के अंतर्गत आते हैं, इनमें मनुका शहद, सेब, कीवी फल और दूध एल्ब्यूमिन सहित एल्ब्यूमिन शामिल हैं।

कृषि उत्पादकता साझेदारीकिसानों की आय और ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं को बढ़ावा देना

  • इस साझेदारी में उत्कृष्टता केंद्रों की स्थापना, बेहतर रोपण सामग्री, उत्पादकों के लिए क्षमता निर्माण, सहयोगात्मक अनुसंधान और बाग प्रबंधन, फसल कटाई के बाद की प्रक्रियाओं, आपूर्ति श्रृंखला प्रदर्शन और खाद्य सुरक्षा के लिए तकनीकी सहायता शामिल है। सेब उत्पादकों और टिकाऊ मधुमक्खी पालन तौर-तरीकों से सम्बंधित परियोजनाएं उत्पादन और गुणवत्ता मानकों को बढ़ाएंगी।
  • न्यूजीलैंड से चयनित कृषि उत्पादों (सेब, कीवी फल और मनुका शहद) और एल्ब्यूमिन के लिए बाजार पहुंच को न्यूनतम आयात मूल्य और अन्य सुरक्षा उपायों के साथ शुल्कदर कोटा प्रणाली के माध्यम से प्रबंधित किया जाएगा, इससे घरेलू किसानों की सुरक्षा के साथ-साथ गुणवत्तापूर्ण आयात और उपभोक्ता विकल्प सुनिश्चित होंगे।
  • सेब, कीवी और मनुका के लिए सभी शुल्कदर कोटा कृषि उत्पादकता कार्य योजनाओं के कार्यान्वयन के साथ जुड़े हुए हैं और एक संयुक्त कृषि उत्पादकता परिषद (जेएपीसी) द्वारा निगरानी की जाती है। यह संवेदनशील घरेलू कृषि क्षेत्रों के संरक्षण के साथ बाजार पहुंच को संतुलित करती है।
  • मनुका शहद: वर्तमान में लागू शुल्क: 66 प्रतिशत; न्यूजीलैंड से वर्तमान आयात: 14.2 मीट्रिक टन (0.3 मिलियन अमरीकी डॉलर) और विश्व से: 356.8 मीट्रिक टन (1.9 मिलियन अमरीकी डॉलर); कोटा के अंतर्गत आयात मात्रा: 200 मीट्रिक टन प्रति वर्ष, जिसमें 20 अमरीकी डॉलर प्रति किलोग्राम का न्यूनतम आयात मूल्य और 5 वर्षों में 75 प्रतिशत शुल्क कटौती शामिल है; कोटा से बाहर: 30 अमरीकी डॉलर प्रति किलोग्राम का न्यूनतम आयात मूल्य और 5 वर्षों में 75 प्रतिशत शुल्क कटौती शामिल है। शुल्क पहले वर्ष में 56.1 प्रतिशत, दूसरे वर्ष में 46.2 प्रतिशत, तीसरे वर्ष में 36.3 प्रतिशत, चौथे वर्ष में 26.4 प्रतिशत और पांचवें वर्ष से आगे 16.5 प्रतिशत होगा।
  • सेब: वर्तमान में लागू शुल्क: 50 प्रतिशत; न्यूजीलैंड से वर्तमान आयात: 31,392.6 मीट्रिक टन (32.4 मिलियन अमरीकी डॉलर) और विश्व से: 519,651.8 मीट्रिक टन (424.6 मिलियन अमरीकी डॉलर); कोटा के भीतर आयात मात्रा: 32,500 मीट्रिक टन (वर्ष 1) जो बढ़कर 45,000 मीट्रिक टन (वर्ष 6) हो जाएगी, 25 प्रतिशत शुल्क और 1.25 अमरीकी डॉलर/किलोग्राम के न्यूनतम आयात मूल्य (एमआईपी) के साथ (मौसमी अवधि: 1 अप्रैल-31 अगस्त); कोटा से बाहर: लागू प्रचलित शुल्क।
  • कीवी फल: वर्तमान में लागू शुल्क: 33 प्रतिशत; न्यूजीलैंड से वर्तमान आयात: 5,840 मीट्रिक टन (16.9 मिलियन अमरीकी डॉलर) और विश्व से: 49,167 मीट्रिक टन (61.4 मिलियन अमरीकी डॉलर); कोटा के भीतर आयात मात्रा: 6,250 मीट्रिक टन (वर्ष 1) जो बढ़कर 15,000 मीट्रिक टन (वर्ष 6) हो जाएगी, 0 प्रतिशत शुल्क और 1.80 अमरीकी डॉलर/किलोग्राम के न्यूनतम आयात मूल्य के साथ (मौसमी अवधि: 1 अप्रैल-15 अक्टूबर); कोटा से बाहर: 50 प्रतिशत और 2.50 अमरीकी डॉलर/किलोग्राम के न्यूनतम आयात मूल्य के साथ।
  • दूध एल्ब्यूमिन सहित एल्ब्यूमिन: वर्तमान में लागू शुल्क: 22 प्रतिशत; न्यूजीलैंड से वर्तमान आयात: 3,429.7 मीट्रिक टन (28.9 मिलियन अमरीकी डॉलर) और विश्व से: 18,801.4 मीट्रिक टन (175.3 मिलियन अमरीकी डॉलर); कोटा के भीतर आयात मात्रा: 1,000 मीट्रिक टन (वर्ष 1) जो बढ़कर 3,000 मीट्रिक टन (वर्ष 5) हो जाती है, इस पर कोटा से बाहर: लागू प्रचलित शुल्क 11 प्रतिशत शुल्क लागू होता है।

 

सेवाएं: न्यूजीलैंड का अब तक का सर्वश्रेष्ठ प्रस्ताव हमारे युवाओंमहिलाओं और पेशेवरों को सशक्त बनाता है।

  • न्यूजीलैंड में भारत के लिए लगभग 118 सेवा क्षेत्रों में बाजार पहुंच सम्बंधी प्रतिबद्धताएं हैं, इनमें भारत के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र शामिल हैं जैसे कि कंप्यूटर सम्बंधी सेवाएं, पेशेवर सेवाएं, दृश्य-श्रव्य सेवाएं, अन्य व्यावसायिक सेवाएं, दूरसंचार सेवाएं, निर्माण सेवाएं, वितरण सेवाएं, शिक्षा सेवाएं, पर्यावरण सेवाएं, वित्तीय सेवाएं, पर्यटन और यात्रा संबंधी सेवाएं आदि।
  • भारत के प्रमुख हित क्षेत्रों सहित लगभग 139 उप-क्षेत्रों में सबसे पसंदीदा राष्ट्र प्रतिबद्धता लागू है।

कुशल रोजगार के अवसर और वैश्विक अनुभव प्रदान करना:

  • एफटीए (मुक्त व्यापार समझौता) कुशल व्यवसायों में कार्यरत भारतीय पेशेवरों के लिए एक नया अस्थायी रोजगार प्रवेश (टीईई) वीजा मार्ग स्थापित करता है, इसमें किसी भी समय 5,000 वीजा का कोटा होता है और अधिकतम तीन साल तक का प्रवास संभव होता है।
  • यह मार्ग आयुष चिकित्सकों, योग प्रशिक्षकों, भारतीय रसोइयों और संगीत शिक्षकों जैसे भारतीय व्यवसायों के साथ-साथ आईटी, इंजीनियरिंग, स्वास्थ्य सेवा, शिक्षा और निर्माण जैसे उच्च मांग वाले क्षेत्रों को भी शामिल करता है, इससे कुशल कार्यबल की गतिशीलता और सेवा व्यापार को मजबूती मिलती है।

भारतीय पेशेवरोंछात्रों और युवाओं के लिए सुगम आवागमन के बेहतर रास्ते

  • किसी भी देश के साथ पहली बार , न्यूजीलैंड ने भारत के साथ छात्र गतिशीलता और अध्ययन के बाद कार्य वीजा के लिए एक समर्पित मार्ग बनाया है। यह समझौता भारतीय छात्रों पर संख्यात्मक सीमा को हटाता है, अध्ययन के दौरान प्रति सप्ताह कम से कम 20 घंटे काम की गारंटी देता है, और अध्ययन के बाद विस्तारित कार्य अवसर प्रदान करता है – विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित में स्नातक और स्नातकोत्तर छात्रों के लिए तीन वर्ष तक और डॉक्टरेट धारकों के लिए चार वर्ष तक – इससे कौशल विकास और वैश्विक करियर के लिए स्पष्ट मार्ग प्रशस्त होते हैं।
  • यह समझौता प्रतिवर्ष 1,000 युवा भारतीयों के लिए 12 महीने की वैधता वाले बहु-प्रवेश कार्य अवकाश वीजा के माध्यम से युवा गतिशीलता को और बढ़ाता है। इससे वैश्विक अनुभव, कौशल अधिग्रहण और लोगों के बीच आपसी संबंध को बढ़ावा मिलता है।

निवेश: हमारे नवप्रवर्तकोंउद्योग और स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए 20 बिलियन अमरीकी डॉलर की प्रतिबद्धता

  • इस मुक्त व्यापार समझौते में भारत में 20 अरब अमरीकी डॉलर के निवेश को सुगम बनाने , दीर्घकालिक आर्थिक सहयोग को मजबूत करने और ‘मेक इन इंडिया’ की परिकल्पना के तहत भारत के विकास और प्रगति के उद्देश्यों का समर्थन करने की प्रतिबद्धता शामिल है ।
  • निवेश, अनुसंधान और नवाचार , प्रौद्योगिकी प्रवाह और कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए संयुक्त रणनीतियों विशेष रूप से नवीकरणीय ऊर्जाडिजिटल सेवाओं और आधुनिक बुनियादी ढांचे के क्षेत्र मेंको पूरी तरह से शामिल किया गया है।
  • निवेश वितरण में किसी भी कमी को दूर करने के लिए एक ढांचा प्रदान करने के लिए समझौते में एक पुनर्संतुलन खंड शामिल किया गया है इसका उद्देशय मजबूत और ठोस आर्थिक परिणाम सुनिश्चित करना है।

विकसित फार्मास्युटिकल और मेडिकल डिवाइस मार्केट में तेजी से प्रवेश: एक बड़ी सफलता

  • एफटीए ( मुक्त व्यापार समझौता) यूएस एफडीए, ईएमए, यूके एमएचआरए, हेल्थ कनाडा और अन्य तुलनीय नियामकों द्वारा अनुमोदित जीएमपी और जीसीपी निरीक्षण रिपोर्टों की स्वीकृति को सक्षम बनाकर फार्मास्यूटिकल्स और चिकित्सा उपकरणों के लिए पहुंच को सुव्यवस्थित करता है।
  • इससे दोहराव वाले निरीक्षण कम होंगे , अनुपालन लागत कम होगी और उत्पाद अनुमोदन में तेजी आएगी। इससे बाजार तक सुगम पहुंच सुनिश्चित होगी और न्यूजीलैंड को भारत के फार्मास्युटिकल और चिकित्सा उपकरण निर्यात में वृद्धि को बढ़ावा मिलेगा।

बौद्धिक संपदा अधिकार

  • न्यूजीलैंड का मौजूदा जीआई कानून केवल भारत की वाइन और स्पिरिट के पंजीकरण की अनुमति देता है।
  • बौद्धिक संपदा के सम्बंध में, न्यूजीलैंड ने समझौते के लागू होने के 18 महीनों के भीतर अपने घरेलू भौगोलिक संकेत कानून में संशोधन करने की प्रतिबद्धता जताई है इसका उद्देश्य भारत की शराब, स्पिरिट और ‘अन्य वस्तुओं का पंजीकरण सक्षम करना है, इसके साथ ही भारत को वही प्राथमिकता प्रदान करवाना है जो पहले यूरोपीय संघ को दी जाता थी।
  • इससे न्यूजीलैंड के बाजार में प्रतिष्ठित भारतीय सैनिकों को औपचारिक संरक्षण प्रदान करने का रास्ता खुल जाता है ।

लघु एवं मध्यम उद्यमोंमहिला उद्यमियोंइनक्यूबेटरों और वैश्विक मूल्य श्रृंखला एकीकरण को बढ़ावा देना

  • यह समझौता समावेशी और भविष्योन्मुखी दृष्टिकोण से तैयार किया गया है, श्रम-प्रधान क्षेत्रों में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाकर लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) और रोजगार को महत्वपूर्ण रूप से बढ़ावा देने की उम्मीद है।
  • व्यापार बाधाओं में कमी और नियामकीय निश्चितता से वस्त्र, परिधान, इंजीनियरिंग सामान, रसायन, खाद्य प्रसंस्करण और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्रों में लघु एवं मध्यम उद्यमों के लिए भारतीय विनिर्माण और वैश्विक मूल्य श्रृंखला एकीकरण को मजबूती मिलेगी।
  • लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए संरचित सहयोग में व्यापार से सम्बंधित जानकारी तक बेहतर पहुंच, निर्यात तत्परता कार्यक्रम और न्यूजीलैंड के एसएमई इकोसिस्टम के साथ सम्बंध शामिल हैं। इसमें विशेष रूप से स्टार्टअप और महिलाओं और युवाओं के स्वामित्व वाले उद्यमों पर ध्यान केंद्रित किया गया है।
  • किसानोंलघु एवं मध्यम उद्यमोंस्टार्टअप्सछात्रों और पेशेवरों को वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं तक बेहतर पहुंच, व्यापार बाधाओं में कमी और विकास और नवाचार के लिए बेहतर अवसरों से लाभ होने की उम्मीद है।

उत्पत्ति के नियम: एक संतुलित और सुदृढ़ ढांचा

  • यह समझौता उत्पाद विशिष्ट उत्पत्ति नियमों (पीएसआर) के लिए एक संतुलित और मजबूत ढांचा प्रदान करता है। यह दोनों पक्षों के क्षेत्रों के भीतर पर्याप्त परिवर्तन सुनिश्चित करता है और प्रमुख क्षेत्रों की मौजूदा आपूर्ति श्रृंखलाओं के साथ संरेखित रहता है।
  • इन नियमों के पूरक के रूप में गैर-पात्रतापूर्ण और न्यूनतम संचालन सम्बंधी प्रावधान हैं, साथ ही एक व्यापक, समयबद्ध और मजबूत सत्यापन तंत्र भी है। इसमें तरजीही शुल्कव्यवहार से इनकार करने और अस्थायी रूप से निलंबित करने के प्रावधान शामिल हैं।
  • ये सभी उपाय मिलकर मूल नियमों के मानदंडों के उल्लंघनदुरुपयोग या जालसाजी को प्रभावी ढंग से रोकते हैं। इससे यह सुनिश्चित होता है कि समझौते का लाभ केवल वास्तविक भारतीय निर्यातकों को ही मिले।

व्यापारिक उपाय: भारत के घरेलू उद्योग की सुरक्षा

  • यह समझौता डंपिंग-विरोधी, सब्सिडी और प्रतिपूरक उपायों तथा वैश्विक सुरक्षा उपायों पर डब्ल्यूटीओ समझौतों के तहत दोनों पक्षों की प्रतिबद्धताओं की पुष्टि करता है।
  • यदि एफटीए से किसी घरेलू उद्योग को गंभीर क्षति पहुंचती है या पहुंचने का खतरा होता है तो एक द्विपक्षीय सुरक्षा तंत्र का प्रावधान है जो इस समझौते के तहत शुल्क कटौती के परिणामस्वरूप आयात में अचानक वृद्धि होने की स्थिति में लागू किया जा सकता है।
  • उपलब्ध उपायों में शुल्क में और कटौती को निलंबित करना या शुल्क दरों में वृद्धि करना शामिल है। ये प्रचलित एमएफएन लागू दर या समझौते के लागू होने के समय लागू एमएफएन दर में से जो भी कम हो, उससे अधिक नहीं होगी।

निर्यात विनिर्माणसीमा शुल्क प्रक्रिया और व्यापार सुविधा के लिए उपयोग की जाने वाली आयात सम्बंधी त्वरित प्रक्रिया व्यवस्था:

  • मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) में लेन-देन की लागत को कम करने, पारदर्शिता बढ़ाने और सीमा प्रक्रियाओं को आधुनिक बनाने के लिए व्यापार सुविधा उपायों का एक व्यापक समूह शामिल है।
  • मानक कार्गो निकासी 48 घंटों के भीतर करने का वादा किया गया हैजबकि एक्सप्रेस शिपमेंट और नाशवान वस्तुओं की निकासी 24 घंटों के भीतर की जाती है।
  • इस समझौते में अधिकृत आर्थिक संचालकोंस्वचालन और कागज रहित एकल-खिड़की मंजूरी प्रणालियों का प्रावधान है।
  • निर्यात विनिर्माण के लिए इनपुट के रूप में काम करने वाले आयात के लिए तेज गति से काम करने वाले तंत्र यह सुनिश्चित करते हैं कि शुल्क रियायतें विशेष रूप से एमएसएमई और कृषि निर्यातकों के लिए प्रभावी बाजार पहुंच में बदलें।
  • इससे सीमा शुल्क प्रक्रियाओं का आधुनिकीकरण होता है, इससे व्यापार भागीदारों के बीच व्यापार में पूर्वानुमान, पारदर्शिता और एकरूपता सुनिश्चित होती है।

सुरक्षित और सुगम व्यापार के लिए स्मार्ट विनियमन: स्वच्छता और पौध-स्वच्छता उपाय

  • इस समझौते में स्वच्छता और पादप स्वच्छता (एसपीएस ) और व्यापार में तकनीकी बाधाओं (टीबीटी) के लिए समर्पित अध्याय शामिल हैं जो पारस्परिक आधार पर बाजार पहुंच आवेदनों की त्वरित प्रक्रिया को बढ़ावा देते हैं, प्रमाणीकरण और आयात परमिट प्रक्रियाओं को सरल बनाते हैं, और इलेक्ट्रॉनिक एसपीएस प्रमाणीकरण का प्रावधान करते हैं।
  • टीबीटी अध्याय के तहत बढ़ी हुई नियामक सहयोग और पारदर्शिता, शुल्क से परे प्रक्रियात्मक बाधाओं को कम करती है। इससे भारतीय निर्यातकों, विशेष रूप से खाद्य, कृषि और विनिर्माण क्षेत्रों में, न्यूजीलैंड के बाजार में पूर्वानुमानित और लागत प्रभावी पहुंच सुनिश्चित होती है।
  • ये नियम मानवपशु और वनस्पति जीवन या स्वास्थ्य की सुरक्षा और वस्तुओं के व्यापार को सुगम बनाने के बीच सबसे बढ़िया संतुलन सुनिश्चित करते हैं।
  • न्यूजीलैंड के उच्च नियामक मानकों को देखते हुए, यह मान्यता वैश्विक बाजार तक पहुंच को काफी हद तक बढ़ाएगी, लेनदेन लागत को कम करेगी और आवश्यक स्वास्थ्य और सुरक्षा सुरक्षा उपायों को सुनिश्चित करते हुए सुगम बाजार पहुंच को सुविधाजनक बनाएगी।

अग्रणी आर्थिक सहयोग और तकनीकी साझेदारी

  • एफटीए दोनों पक्षों को कृषि और गैर-कृषि से संबंधित विभिन्न विषयगत क्षेत्रों में सहयोगात्मक गतिविधियों में संलग्न होने के अवसर प्रदान करता है।
  • सहकारी गतिविधियों में क्षमता निर्माणतकनीकी सहायता और उत्पादकता बढ़ाने, किसानों की आय बढ़ाने में सहायता करने, कौशल विकास और व्यापार से परे अनुसंधान और विकास, प्रशिक्षण और नवाचार में सहयोग के विविधीकरण के लिए अन्य पहलें शामिल हैं।
  • कृषि के अंतर्गत सहयोग के क्षेत्रों में बागवानीशहद उत्पादनवानिकीपशुधनमत्स्य पालनमधुमक्खी पालन और शराब क्षेत्र शामिल हैं।
  • गैर-कृषि क्षेत्रों में, सहयोग पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों (आयुष)पारंपरिक ज्ञान के संरक्षणदृश्य-श्रव्य और रचनात्मक उद्योगोंखेल और पर्यटन तक फैला हुआ है। इसका उद्देश्य सांस्कृतिक आदान-प्रदान और क्षेत्रीय नवाचार को मजबूत करना है।

सांस्कृतिक व्यापारपारंपरिक ज्ञान और जन-सहयोग: मुक्त व्यापार समझौतों में एक अभूतपूर्व पहल

  • संस्कृतिव्यापारपारंपरिक ज्ञान और आर्थिक सहयोग पर समर्पित एक अध्याय दोनों पक्षों के लोगों की आर्थिक और सांस्कृतिक आकांक्षाओं को सक्षम बनाने और आगे बढ़ाने के लिए पारस्परिक सहयोग को बढ़ावा देता है।
  • न्यूजीलैंड ने अपने व्यापार समझौतों में पहली बार स्वास्थ्य और पारंपरिक चिकित्सा सेवाओं के लिए एक विशेष प्रावधान शामिल किया है। यह ऐतिहासिक प्रावधान भारत की आयुष प्रणालियों की वैश्विक मान्यता को बढ़ावा देता है , चिकित्सा सम्बंधी यात्रा को प्रोत्साहित करता है, स्वास्थ्य सेवाओं में सहयोग को बढ़ावा देता है और स्वास्थ्य, कल्याण और पारंपरिक चिकित्सा सेवाओं के वैश्विक केंद्र के रूप में भारत की स्थिति को मजबूत करता है।
  • यह भारत के आयुष विषयों (आयुर्वेद, योग और प्राकृतिक चिकित्सा, यूनानी, सोवा-रिग्पा, सिद्धा और होम्योपैथी) के साथ-साथ माओरी स्वास्थ्य पद्धतियों को भी प्रमुखता देता है ।
  • यह दृश्य-श्रव्य और रचनात्मक उद्योगों में सहयोग को बढ़ावा देता है, पारंपरिक ज्ञान प्रणालियों, खेल और पर्यटन के संरक्षण को प्रोत्साहित करता है, और भारत-न्यूजीलैंड सम्बंधों के सांस्कृतिक और मानवीय आयामों को मजबूत करता है।
  • इससे रचनात्मक उद्योगोंसांस्कृतिक आदान-प्रदान और जन-केंद्रित विकास के लिए नए रास्ते खुलते हैं ।

पारस्परिक मान्यता समझौते के माध्यम से जैविक उत्पादों का व्यापार: हिंद-प्रशांत क्षेत्र का प्रवेश द्वार

  • इस समझौते के तहत एक प्रारंभिक कदम के रूप में, पारस्परिक मान्यता व्यवस्था (एमआरए ) को लागू किया जाएगा, यह किसी तीसरे देश (ऑस्ट्रेलिया) के पारस्परिक रूप से स्वीकृत मानक की स्वीकृति पर आधारित है।
  • भारत वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान 80 से अधिक जैविक उत्पादों का निर्यात कर रहा है। इसी अवधि में, भारत से न्यूजीलैंड को कुल जैविक निर्यात 2,401.53 मीट्रिक टन रहा, इसका मूल्य 3.18 मिलियन अमरीकी डॉलर था। पारस्परिक मान्यता समझौते (एमआरए) के बाद बासमती चावल, अलसी, अरेबिका चेरी, इसबगोल, सोयाबीन तेल खली, जैविक काली चाय आदि जैविक उत्पादों की मांग में और वृद्धि होने की आशा है।

द्विपक्षीय व्यापार: प्रबल गतिअपार संभावनाएं

  • वस्तुओं और सेवाओं का कुल व्यापार 2024 में 2.4 अरब अमरीकी डॉलर तक पहुंच गया। भारत-न्यूजीलैंड द्विपक्षीय व्यापार ने हाल के वर्षों में मजबूत वृद्धि दर्ज की है, वित्त वर्ष 2024-25 में द्विपक्षीय व्यापार 1.3 अरब अमरीकी डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष के व्यापार की तुलना में 49 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।
  • एफटीए पर हस्ताक्षर होने के बाद, शुल्कसमाप्त होने, सेवाओं तक पहुंच बढ़ने, 20 अरब अमरीकी डॉलर के निवेश को सुरक्षित करने और मजबूत संस्थागत ढांचे की स्थापना के साथ, भारत-न्यूजीलैंड एफटीए से आने वाले वर्षों में द्विपक्षीय व्यापार में उल्लेखनीय वृद्धि होने, रोजगार के अवसर पैदा होने, निर्यात बढ़ने और दोनों देशों के बीच एक गहरी और अधिक लचीली आर्थिक साझेदारी को मजबूत करने की आशा है।

खेती-बाड़ीमत्स्य पालन से लेकर कारखानों तक: सौदे की शक्ति प्रमुख क्षेत्रों और राज्यों को प्रभावित करती है

शून्य शुल्क वाले बाज़ार पहुंच से भारत के प्रमुख निर्यात क्षेत्रों को महत्वपूर्ण बढ़ावा मिलेगा। निर्यात का एक मुख्य आधार माने जाने वाले वस्त्र और परिधान क्षेत्र में, परिधान, घरेलू साज-सज्जा, रेशे और हथकरघा उत्पादों सहित विभिन्न क्षेत्रों में उच्च वृद्धि और रोजगार सृजन देखने को मिलेगा। फलों, मसालों, अनाज, कॉफी और कोको जैसे उत्पादों पर शुल्क समाप्त होने से कृषि और प्रसंस्कृत खाद्य पदार्थ अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे। चमड़ा और जूते-चप्पल क्षेत्र को भी अधिकतम शुल्क हटाने से लाभ होगा, इससे भारत की वैश्विक स्थिति मजबूत होगी। साथ ही, मशीनरी, ऑटोमोटिव, इलेक्ट्रॉनिक्स, रसायन, प्लास्टिक और रबर सहित इंजीनियरिंग, विनिर्माण और औद्योगिक क्षेत्रों को भी शुल्क कटौती से लाभ होगा, इससे भारत का विविध निर्यात आधार मजबूत होगा और वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में इसका गहरा एकीकरण होगा।

भारत-न्यूजीलैंड मुक्त व्यापार समझौता व्यापक लाभ प्रदान करने के लिए तैयार है। यह भारत के निर्यात परिदृश्य की विविधतापूर्ण और विशिष्ट प्रकृति को दर्शाता है। गुजरात के रसायन और रत्न, महाराष्ट्र के फार्मास्यूटिकल्स और ऑटो कंपोनेंट्स, तमिलनाडु के वस्त्र, चमड़ा और ऑटो कल-पुर्जे, उत्तर प्रदेश के चमड़ा, कालीन और हस्तशिल्प, पंजाब के कृषि उत्पाद, कर्नाटक के फार्मा और इलेक्ट्रॉनिक्स, और पश्चिम बंगाल के चाय और इंजीनियरिंग सामान जैसे प्रमुख निर्यातक राज्यों को बेहतर मूल्य प्रतिस्पर्धा से लाभ मिलने की संभावना है। आंध्र प्रदेश और केरल जैसे तटीय राज्यों को समुद्री निर्यात से अधिक मूल्य प्राप्त होने की संभावना है। इसके साथ ही उत्तर-पूर्वी राज्यों को चाय, मसाले, बांस और जैविक उत्पादों के लिए बेहतर बाजार पहुंच मिल सकती है। कुल मिलाकर, इस समझौते से भारत के निर्यात प्रोफाइल में और अधिक विविधता और मजबूती आने की आशा है।

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विधानसभा चुनाव और उपचुनाव 2026 के दौरान पश्चिम बंगाल में अब तक 510 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध राशि जब्त की गई

भारत निर्वाचन आयोग ने 15 मार्च, 2026 को असम, केरल, पुडुचेरी, तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल की विधानसभाओं के आम चुनाव और उपचुनाव के कार्यक्रम की घोषणा की। आयोग ने राज्य/केंद्र शासित प्रदेश सरकारों को आदर्श आचार संहिता का कड़ाई से अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।

  1.  इससे पहले आयोग ने चुनाव वाले राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और उनके सीमावर्ती राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों, सीईओ, डीजीपी और वरिष्ठ अधिकारियों के साथ-साथ प्रवर्तन एजेंसियों के प्रमुखों के साथ कई समीक्षा बैठकें की हैं। आयोग ने हिंसा-मुक्तधमकी-मुक्त और प्रलोभन-मुक्त चुनाव सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
  1. शिकायतों का निपटारा 100 मिनट के भीतर सुनिश्चित करने के लिए, सभी राज्यों में 2,728 से अधिक फ्लाइंग स्क्वाड टीमें तैनात की गई हैं। इसके अलावा, विभिन्न स्थानों पर अचानक नाकेबंदी करने के लिए 3,142 से अधिक स्टैटिक सर्विलांस टीमें (नकदशराबहथियार का परिवहन को रोकने के लिए चुनाव आयोग द्वारा गठित विशेष दल) भी तैनात की गई हैं। अवैध शराब के निर्माण, भंडारण और वितरण के खिलाफ विशेष अभियान चलाए जा रहे हैं।
  2. 26 फरवरी, 2026 को चुनाव जब्ती प्रबंधन प्रणाली के सक्रिय होने के बाद से, 27 अप्रैल, 2026 तक के आंकड़े इस प्रकार है।
राज्य नकद (करोड़ रुपये में) शराब की मात्रा (लीटर में) शराब का मूल्य (करोड़ रुपये में) नशीले पदार्थ का मूल्य (करोड़ रुपये में) कीमती धातु (करोड़ रुपये में) मुफ्त बांटी जाने वाली चीजें/अन्य (करोड़ रुपये में) कुल (करोड़ रुपये में)
पश्चिम बंगाल 30.00 48,46,183 126.85 110.12 58.28 184.85 510.10
  1. इसके साथ ही पश्चिम बंगाल में अवैध प्रलोभनों की कुल ज़ब्ती 510 करोड़ रुपये से अधिक हो गई है। यह राज्य में विधानसभा चुनाव, 2021 के दौरान दर्ज की गई 339 करोड़ रुपये की ज़ब्ती से भी अधिक है।

आंध्र विश्वविद्यालय ‘विचारों और नेतृत्व का संगम’ है, उपराष्ट्रपति ने विशाखापत्तनम में आयोजित आंध्र विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोह में कहा

आंध्र प्रदेश निवेश और नवाचार के एक प्रमुख केन्द्र के रूप में उभर रहा है: उपराष्ट्रपति

अमरावती को स्थायी राजधानी बनाना जनता की आकांक्षाओं को दर्शाता है: उपराष्ट्रपति

‘विकसित भारत के लिए विकसित राज्यों की आवश्यकता है’: उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की बात को दोहराया

नई दिल्ली – उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने आज विशाखापत्तनम में आयोजित आंध्र विश्वविद्यालय के शताब्दी समारोह में भाग लिया।

सभा को संबोधित करते हुए, उपराष्ट्रपति ने कहा कि आंध्र विश्वविद्यालय की उत्कृष्टता की  एक शताब्दी पूरे होने के इस ऐतिहासिक अवसर का हिस्सा बनना उनके लिए सौभाग्य की बात है। यह एक ऐसा संस्थान है जो न केवल इतिहास का साक्षी रहा है, बल्कि उसे आकार देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा कि पिछले सौ वर्षों के दौरान, यह विश्वविद्यालय विचारों का एक संगम स्थल रहा है और इसने राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले विद्यार्थियों की कई पीढ़ियों को निखारा है।

विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति और भारत के सबसे प्रतिष्ठित दार्शनिकों एवं राजनीतिज्ञों में से एक डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की विरासत को अत्यंत सम्मानपूर्वक याद करते हुए, उपराष्ट्रपति ने शिक्षा को बुद्धि और चरित्र, दोनों के विकास का साधन मानने के उनके दृष्टिकोण पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि यह दृष्टिकोण आज भी अत्यंत प्रासंगिक है।

उपराष्ट्रपति ने नोबेल पुरस्कार विजेता सी.वी. रमन सहित विशाखापत्तनम से जुड़े कई प्रख्यात व्यक्तियों का उल्लेख किया। सी.वी. रमन ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा इसी शहर में प्राप्त की थी और पूर्व उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडू आंध्र विश्वविद्यालय के एक प्रतिष्ठित पूर्व छात्र  हैं। उपराष्ट्रपति ने कहा कि शांति स्वरूप भटनागर पुरस्कार, पद्म विभूषण, पद्म श्री और साहित्य अकादमी सम्मान प्राप्त करने वाली कई प्रख्यात हस्तियां आंध्र विश्वविद्यालय की देन हैं।

30वें सीआईआई साझेदारी शिखर सम्मेलन में भाग लेने हेतु विशाखापत्तनम के अपने पूर्व दौरे का उल्लेख करते हुए, उपराष्ट्रपति ने मुख्यमंत्री श्री एन. चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व में आंध्र प्रदेश द्वारा की गई तीव्र प्रगति पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इस राज्य ने अपने विकास  की गति को तेज किया है, महत्वपूर्ण निवेश आकर्षित किए हैं और नवाचार एवं विकास के केन्द्र के रूप में अपनी स्थिति को मजबूत किया है। उन्होंने राज्य के प्रौद्योगिकी इकोसिस्टम  को बढ़ावा देने में सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री नारा लोकेश की भूमिका की भी सराहना की।

आंध्र प्रदेश में बढ़ते वैश्विक विश्वास पर प्रकाश डालते हुए, उपराष्ट्रपति ने गूगल जैसी अग्रणी प्रौद्योगिकी कंपनियों की रुचि और निवेश का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि विशाखापत्तनम विकास के एक प्रमुख केन्द्र के रूप में उभर रहा है। विशेष रूप से डेटा सेंटर, आईटी, पर्यटन, इलेक्ट्रॉनिक्स और डिजिटल अवसंरचना जैसे क्षेत्रों में, जिसमें हाइपरस्केल डेटा सेंटर और आईटी निवेश सहित प्रमुख परियोजनाएं शामिल हैं।

उपराष्ट्रपति ने संसद में अमरावती से संबंधित विधेयक पारित होने के बाद इस शहर को राज्य की स्थायी राजधानी घोषित किए जाने पर आंध्र प्रदेश की जनता को बधाई दी। उन्होंने कहा कि इस विधेयक के पारित होने के दौरान उन्हें राज्यसभा की अध्यक्षता करने और जनता की खुशी तथा गर्व का साक्षी बनने का सौभाग्य प्राप्त हुआ। उन्होंने इस निर्णय को जनता की सामूहिक आकांक्षाओं का प्रतिबिंब बताया और कहा कि यह राज्य के प्रशासनिक भविष्य को स्पष्टता, स्थिरता और दिशा प्रदान करेगा।

विकसित भारत की परिकल्पना का उल्लेख करते हुए, उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र  मोदी के इस कथन को याद किया कि “विकसित भारत केवल विकसित राज्यों के जरिए ही साकार हो सकता है।” उन्होंने कहा कि दूरदर्शी नेतृत्व, सशक्त शासन और प्रभावी क्रियान्वयन के बल पर आंध्र प्रदेश सबसे तेजी से विकास करने वाले राज्यों में से एक बनकर उभरा है।

उन्होंने कहा कि आंध्र प्रदेश निवेश का एक प्रमुख गंतव्य बन गया है और इसने 2025-26 में देश के प्रस्तावित निवेशों के 25 प्रतिशत से अधिक का योगदान दिया है। उन्होंने समयबद्ध मंजूरी, पारदर्शी शासन और भूमि, बिजली, कनेक्टिविटी एवं कुशल कार्यबल तक निर्बाध पहुंच प्रदान करने वाली एक ठोस एकल-खिड़की प्रणाली सहित निवेशकों के अनुकूल राज्य की नीतियों पर प्रकाश डाला।

यह बताते हुए कि सफलता में समय लगता है, उपराष्ट्रपति ने कहा कि सचिन तेंदुलकर, जिन्हें प्यार से “क्रिकेट का भगवान” कहा जाता है, को भी शतकों का शतक बनाने के लिए इंतजार करना पड़ा था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सफलता प्राप्त करने के लिए धैर्य अत्यंत आवश्यक है।

उन्होंने आगे कहा कि व्यक्ति को आंतरिक दबाव को संभालना सीखना चाहिए। उन्होंने कहा कि असफलताएं मूल्यवान सबक सिखाती हैं और इससे मनोबल नहीं गिरने नहीं देना चाहिए। उन्होंने सभी से आत्मविश्वास के साथ जीवन का सामना करने का आग्रह किया।

इस अवसर पर, उपराष्ट्रपति ने भारत के पूर्व उपराष्ट्रपति एम. वेंकैया नायडू; ओडिशा के राज्यपाल के. हरि बाबू; जीएमआर समूह के संस्थापक एवं अध्यक्ष ग्रांधी मल्लिकार्जुन राव; भारत सरकार के पूर्व केन्द्रीय गृह सचिव के. पद्मनाभैया; साइएंट के संस्थापक एवं कार्यकारी अध्यक्ष बी. वी. आर. मोहन रेड्डी; लॉरस लैब्स के संस्थापक एवं सीईओ सत्यनारायण चावा; भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान दिल्ली के पूर्व निदेशक वी. एस. राजू; भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान कानपुर के पूर्व प्रोफेसर एम. आर. माधव; प्रेस ट्रस्ट ऑफ इंडिया के सीईओ विजय जोशी और फिल्म निर्माता त्रिविक्रम श्रीनिवास को विशिष्ट पूर्व छात्र पुरस्कार से सम्मानित किया।

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने एक स्मारक सिक्का, एक स्मारक डाक टिकट और एक कॉफी टेबल बुक का विमोचन भी किया। उपराष्ट्रपति की उपस्थिति में आंध्र विश्वविद्यालय और संयुक्त राज्य अमेरिका के फ्लोरिडा विश्वविद्यालय, ऑक्समिक लैब्स इंक. और भारतीय उष्णकटिबंधीय मौसम विज्ञान संस्थान (आईआईटीएम) के बीच तीन समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान भी हुआ। बाद में, उन्होंने आंध्र विश्वविद्यालय के इतिहास और उसके विकास को दर्शाने वाली एक फोटो प्रदर्शनी का अवलोकन भी किया।

 

आंध्र प्रदेश के राज्यपाल और आंध्र विश्वविद्यालय के कुलाधिपति श्री अब्दुल नजीर; पूर्व उपराष्ट्रपति श्री एम. वेंकैया नायडू; मुख्यमंत्री श्री एन. चंद्रबाबू नायडू; केन्द्रीय नागर विमानन  मंत्री श्री किंजरापु राममोहन नायडू; दिग्गज क्रिकेटर श्री सचिन तेंदुलकर; ओडिशा के राज्यपाल डॉ. हरि बाबू कंभमपति; केन्द्रीय राज्यमंत्री श्री भूपति राजू श्रीनिवास वर्मा; सूचना प्रौद्योगिकी  एवं मानव संसाधन विकास मंत्री श्री नारा लोकेश; समाज कल्याण मंत्री श्री डोला श्री बाला वीरंजनेय स्वामी; कुलपति प्रो. जी. पी. राजा शेखर; विद्यार्थी, संकाय सदस्य, कर्मचारी और पूर्व छात्र इस अवसर पर उपस्थित थे।

इससे पहले आज, उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने श्रीकाकुलम जिले में श्री कूर्मनाथ स्वामी मंदिर और अरासवल्ली श्री सूर्यनारायण स्वामी मंदिर में पूजा-अर्चना की।

 

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राँची जिला में भारत जनगणना 2027 के प्रथम चरण (मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना) हेतु चार्ज स्तर पर प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों का प्रशिक्षण शुरू

उपायुक्त-सह-प्रधान जिला जनगणना पदाधिकारी, राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देशानुसार प्रशिक्षण शुरू

सभी प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों को व्यावहारिक उदाहरणों, CMMS वेब पोर्टल तथा मोबाइल ऐप के माध्यम से मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना से संबंधित समस्त प्रक्रियाओं का विस्तृत प्रशिक्षण दिया जा रहा है

जनगणना संबंधी किसी भी जानकारी, सहायता या स्व-जनगणना पोर्टल के उपयोग के लिए नागरिक CMMS वेब पोर्टल एवं संबंधित मोबाइल ऐप का उपयोग कर सकते हैं

राँची,27.04.2026 –  राँची जिला अंतर्गत भारत जनगणना 2027 के प्रथम चरण मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना की तैयारी में उपायुक्त-सह-प्रधान जिला जनगणना पदाधिकारी, राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देशानुसार आज दिनांक 27.04.2026 से चार्ज स्तर पर प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों का प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू हो गया है।

सभी प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों को व्यावहारिक उदाहरणों, CMMS वेब पोर्टल तथा मोबाइल ऐप के माध्यम से मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना से संबंधित समस्त प्रक्रियाओं का विस्तृत प्रशिक्षण दिया जा रहा है

यह प्रशिक्षण दिनांक 09.05.2026 तक चलेगा।राँची जिले के कुल 19 चार्जों में आयोजित इस प्रशिक्षण में चार्ज स्तर के फील्ड ट्रेनरों द्वारा सभी प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों को व्यावहारिक उदाहरणों, CMMS वेब पोर्टल तथा मोबाइल ऐप के माध्यम से मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना से संबंधित समस्त प्रक्रियाओं का विस्तृत प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षण में स्व-जनगणना (Self Enumeration) की प्रक्रिया, जनगणना 2027 के विभिन्न चरणों, कार्यप्रणाली, डिजिटल उपकरणों के उपयोग तथा CMMS वेब पोर्टल पर डेटा प्रबंधन के महत्वपूर्ण बिन्दुओं पर विशेष जोर दिया जा रहा है।प्रशिक्षण कार्यक्रम की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए राँची जिले के सभी प्रखंडों के चार्ज/नोडल पदाधिकारी अपने-अपने चार्ज में उपस्थित रहकर निगरानी कर रहे हैं।

मुख्य तिथियाँ:प्रशिक्षण अवधि: 27 अप्रैल 2026 से 09 मई 2026 तक

स्व-जनगणना (Self Enumeration) विकल्प: 01 मई 2026 से 15 मई 2026 तक

मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना: 16 मई 2026 से 14 जून 2026 तक

सभी प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों से अपेक्षा है कि वे प्रशिक्षण को गंभीरता से लें और मैदान में उतरकर उच्च गुणवत्ता वाला कार्य सुनिश्चित करें

जिला प्रशासन का प्रयास है कि जनगणना 2027 का यह प्रथम चरण पूर्णतः डिजिटल, पारदर्शी, सटीक और समयबद्ध तरीके से पूरा किया जाए। प्रशिक्षित प्रगणक एवं पर्यवेक्षक क्षेत्र में जाकर प्रत्येक मकान का सूचीकरण करेंगे तथा आवासीय विवरण एकत्रित करेंगे। उपायुक्त-सह-प्रधान जिला जनगणना पदाधिकारी, राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा कि जनगणना एक राष्ट्रीय महत्व का कार्य है। राँची जिला इसे पूरी निष्ठा और प्रोफेशनलिज्म के साथ संपन्न करेगा। सभी प्रगणकों एवं पर्यवेक्षकों से अपेक्षा है कि वे प्रशिक्षण को गंभीरता से लें और मैदान में उतरकर उच्च गुणवत्ता वाला कार्य सुनिश्चित करें।

जनगणना संबंधी किसी भी जानकारी, सहायता या स्व-जनगणना पोर्टल के उपयोग के लिए नागरिक CMMS वेब पोर्टल एवं संबंधित मोबाइल ऐप का उपयोग कर सकते हैं

जनगणना संबंधी किसी भी जानकारी, सहायता या स्व-जनगणना पोर्टल के उपयोग के लिए नागरिक CMMS वेब पोर्टल एवं संबंधित मोबाइल ऐप का उपयोग कर सकते हैं। जिला जनगणना कार्यालय, राँची द्वारा इस कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है।

जिला स्तर के वरीय पदाधिकारियों द्वारा प्रशिक्षण की गुणता पर विशेष ध्यान रखी जा रही है। साथ ही इसका निरीक्षण भी किया जा रहा है।

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कांग्रेस का रांची में जिलों एवं महानगरों के जिला अध्यक्षों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक

रांची,27.04.2026 – झारखंड कांग्रेस मुख्यालय, रांची में जिलों एवं महानगरों के जिला अध्यक्षों के साथ एक महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के स्थायी आमंत्रित सदस्य सह झारखंड प्रभारी श्री के. राजू, सह प्रभारी डॉ. श्रीबेला प्रसाद, प्रदेश अध्यक्ष श्री केशव महतो कमलेश और विधायक दल के नेता श्री प्रदीप यादव की उपस्थिति में आयोजित की गई।

बैठक में संगठन की मजबूती, आगामी कार्यक्रमों की रणनीति और जमीनी स्तर पर पार्टी की गतिविधियों की समीक्षा की गई।

बैठक में प्रदेश कार्यकारी अध्यक्ष श्री बंधु तिर्की, श्री जलेश्वर महतो, श्री शाहज़ादा अनवर, कार्यालय प्रभारी श्री अभिलाष शाहू तथा सह-प्रभारी श्री राजन वर्मा सहित सभी जिला अध्यक्ष शामिल हुए।

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नारी शक्ति वंदन अधिनियम पर भ्रम फैला रहा विपक्ष, महिलाओं के साथ किया विश्वासघात: पूर्णिमा साहू

महिला अधिकारों पर विपक्ष का विरोध दुर्भाग्यपूर्ण।

28 अप्रैल को संध्या 5 बजे जिला स्कूल मैदान से अल्बर्ट एक्का चौक तक निकाला जाएगा विशाल मशाल जुलूस

रांची,27.04.2026 – भाजपा नेत्री एवं जमशेदपुर पूर्वी की विधायक पूर्णिमा साहू ने कहा कि 16-17 अप्रैल को संसद में देश की आधी आबादी को समान अधिकार और भागीदारी देने का एक ऐतिहासिक अवसर आया था। किंतु दुर्भाग्यपूर्ण है कि कांग्रेस और इंडी गठबंधन के दलों ने इसका विरोध कर महिलाओं के साथ विश्वासघात किया। श्रीमति साहू भाजपा प्रदेश कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता को संबोधित कर रही थी।

श्रीमती साहू ने कहा कि देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सदन में स्पष्ट कहा है कि महिलाओं को सम्मान, अधिकार और नीति-निर्माण में भागीदारी देना कोई उपकार नहीं, बल्कि उनका स्वाभाविक अधिकार है।

उन्होंने विपक्ष पर हमला करते हुए कहा कि विपक्षी दलों ने वर्षों तक न विधानसभा में और न ही लोकसभा में महिलाओं को पर्याप्त अवसर दिया। लेकिन जब महिलाओं को अधिकार देने का समय आया, तब उनका महिला-विरोधी चरित्र उजागर हो गया।

श्रीमती साहू ने आगे कहा कि केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी सदन में स्पष्ट किया है कि परिसीमन से किसी राज्य को नुकसान नहीं होगा, बल्कि इसका उद्देश्य जनसंख्या के आधार पर संतुलित और न्यायसंगत प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करना है। इसके बावजूद कांग्रेस और इंडी गठबंधन देशभर में भ्रम फैलाने का काम कर रहे हैं और महिलाओं को गुमराह करने का प्रयास कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि “नारी शक्ति वंदन अधिनियम” पहले से ही जनगणना और परिसीमन से जुड़ा हुआ है। वर्ष 2023 में जब यह अधिनियम सदन में प्रस्तुत किया गया था, तब किसी भी विपक्षी दल ने इसका विरोध नहीं किया। उस समय लोकसभा चुनाव नजदीक होने के कारण कांग्रेस ने जल्दबाजी में समर्थन दिया, लेकिन अब जब इसे लागू करने की बात आई है, तो वही दल आज विरोध कर रहे हैं।

श्रीमति साहू ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पंचायत से लेकर संसद तक महिलाओं को अधिक से अधिक अवसर देने के लिए प्रतिबद्ध हैं, जबकि कांग्रेस का इतिहास महिलाओं के प्रति नकारात्मक रहा है। उन्होंने कांग्रेस नेताओं पर महिलाओं के प्रति अपमानजनक और असंवेदनशील बयान देने का आरोप भी लगाया।

उन्होंने कहा कि आज की महिलाएं मूकदर्शक नहीं, बल्कि सशक्त और जागरूक हैं। वे अपने अधिकारों के प्रति सजग हैं और उन्हें पाने के लिए आवाज उठाने को पूरी तरह तैयार हैं।

प्रेस वार्ता में पूर्णिमा साहू ने जानकारी देते हुए कहा कि नारी शक्ति वंदन अधिनियम के समर्थन और इंडी गठबंधन के महिला विरोधी मानसिकता को लेकर 28 अप्रैल को संध्या 5 बजे हजारों महिलाओं द्वारा जिला स्कूल मैदान से अल्बर्ट एक्का चौक तक एक विशाल मशाल जुलूस निकाला जाएगा, जो नारी शक्ति, सम्मान और अधिकारों की मजबूत अभिव्यक्ति होगा।

इस अवसर पर आरती कुजूर, सीमा सिंह, रफिया नाज़ एवं बबीता झा भी उपस्थित थीं।

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रामगढ़ पुलिस ने राहुल दुबे गैंग के एक सक्रिय सदस्य को पतरातू क्षेत्र से किया गिरफ्तार

रामगढ़,27.04.2026 –  रामगढ़ पुलिस ने राहुल दुबे गैंग के एक सक्रिय सदस्य को पतरातू क्षेत्र से गिरफ्तार किया, आरोपी के पास से 9 एमएम का पिस्टल भी बरामद हुआ है।

एसडीपीओ राघवेंद्र शर्मा ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में बताया कि पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि सोलिया गांव निवासी अनीश अंसारी अवैध हथियार के साथ घूम रहा है। पुलिस टीम ने सोलिया गांव में कार्रवाई करते हुए अनीश अंसारी को गिरफ्तार कर लिया।

उसकी निशानदेही पर उसके घर से 9 एमएम पिस्टल बरामद की गई। पूछताछ में आरोपी ने खुलासा किया कि यह हथियार उसे राहुल दुबे गैंग के एक सदस्य ने रखने के लिए दिया था। अनीश अंसारी के खिलाफ पहले से भी पतरातू थाना में मामला दर्ज है

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रांची में आयोजित “मुख्यमंत्री पंचायत प्रोत्साहन पुरस्कार समारोह-सह-मुखिया सम्मेलन 2026

 गांव के विकास से ही राज्य का विकास संभव

 जल संकट से उबरने की रखें पूरी तैयारी

गांव को मजबूत करने की दिशा में हमारी सरकार निरंतर प्रयासरत

खेतों में सोलर पावर प्लांट लगाकर आय सृजन करें ग्रामीण

 आम जनमानस की अपेक्षाओं पर खरा उतरें जनप्रतिनिधि –  हेमन्त सोरेन, मुख्यमंत्री

हरिवंश टाना भगत इंडोर स्टेडियम, खेलगांव, रांची,24.04.2026 – मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि राज्य के समग्र विकास एवं ग्रामीण सशक्तिकरण की दिशा में जनप्रतिनिधियों की भूमिका महत्वपूर्ण है, आप सभी ऐसे लोग हैं जो ग्रामीणों के सबसे करीब रहते हैं। आप सभी लोग ग्राम-पंचायत व्यवस्था का अभिन्न अंग हैं। आपकी कार्य कुशलता से ही राज्य का सर्वांगीण विकास का रास्ता तय किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य का विकास तभी होगा जब गांव का विकास होगा। गांव राज्य के जड़ हैं, जब जड़ मजबूत होगी तभी पेड़ मजबूत होगी। गांव को मजबूत करने की दिशा में हमारी सरकार निरंतर सकारात्मक कार्य कर रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार राजधानी रांची या हेडक्वार्टर से नहीं बल्कि गाँवों से चलने वाली सरकार है, क्योंकि विकास की असली नींव गाँवों में ही निहित है। भारत की लोकतांत्रिक व्यवस्था की मजबूती गाँवों से शुरू होती है। गाँवों को सशक्त किए बिना राज्य और देश के विकास की कल्पना अधूरी है। सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि योजनाओं का लाभ विकास की राह में खड़े समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे। पहले जहाँ यह शिकायत मिलती थी कि सुदूरवर्ती क्षेत्रों तक न तो सरकार की आवाज़ पहुँचती थी और न योजनाएँ, वहीं अब पंचायत स्तर पर कैंप लगाकर समस्याओं का समाधान किया जा रहा है और यह प्रक्रिया निरंतर जारी रहेगी। मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन आज हरिवंश टाना भगत इंडोर स्टेडियम, खेलगांव, रांची में आयोजित “मुख्यमंत्री पंचायत प्रोत्साहन पुरस्कार समारोह-सह-मुखिया सम्मेलन 2026 (दक्षिणी छोटानागपुर प्रमंडल)” को संबोधित कर रहे थे।

उत्कृष्ट कार्य करने वालों को सम्मानित करना एक अच्छी पहल है

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि राज्य में पंचायत सेवकों से लेकर उच्च अधिकारियों तक एक सशक्त प्रशासनिक ढांचा कार्य कर रहा है, वहीं पंचायत से लेकर मुख्यमंत्री तक जनप्रतिनिधियों की एक समानांतर व्यवस्था है। इन दोनों के समन्वय से ही विकास की गति तेज होगी। जनप्रतिनिधि सरकार की योजनाओं और संसाधनों को अपनी जिम्मेदारी समझें, तभी उनका सही उपयोग सुनिश्चित हो सकेगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि इस कार्यक्रम के में राज्य सरकार द्वारा करोड़ों रुपये की प्रोत्साहन राशि का वितरण किया गया है जो उत्कृष्ट कार्य करने वालों के प्रति सरकार की संवेदनशीलता और सम्मान का प्रतीक है। अच्छे कार्यों की पहचान किया जाना और बेहतर कार्य के लिए सम्मानित करना आवश्यक है, ताकि इस पहल से अन्य लोग भी प्रेरित हों और बेहतर कार्य करने की दिशा में आगे बढ़ें। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा ‘मुख्यमंत्री पंचायत प्रोत्साहन पुरस्कार योजना’ की शुरुआत की गई है। यह योजना केवल एक पुरस्कार योजना नहीं है बल्कि यह एक परिवर्तनकारी पहल है जिसका उद्देश्य ग्रामीण सेवाओं को अधिक प्रभावी और सुदृढ़ बनाना तथा पंचायतों को नवाचार एवं उत्कृष्ट कार्यो के लिए प्रेरित करना भी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्वस्थ प्रतिस्पर्धा के माध्यम से विकास की गति को तेज किया जा सकता है। ग्रामीण स्तर पर सुशासन, पारदर्शिता एवं जवाबदेही सुनिश्चित करना हम सभी की जिम्मेदारी है।

जनप्रतिनिधि जल संकट से उबरने की रखें पूरी तैयारी

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि बीते वर्षों में राज्य में भूख से किसी भी व्यक्ति की मृत्यु नहीं होना इस बात का प्रमाण है कि सरकार अपनी जिम्मेदारी को गंभीरता से निभा रही है। समाज का एक बहुत बड़ा वर्ग कोई आपदा या संकट के समय सबसे अधिक प्रभावित होता है, ऐसे में सरकार को संवेदनशील निर्णय लेने होते हैं, जो हमारी सरकार निरन्तर करती रही है। मुख्यमंत्री ने कहा कि अभी गर्मी का मौसम है। गर्मी के समय में अक्सर देखा जाता है कि ग्रामीण क्षेत्र एवं शहरों में जल संकट की समस्या उत्पन्न होती है। इस समय पुराने तालाबों की सफाई और गहरीकरण कार्य किया जाए, ताकि वर्षा जल का अधिकतम संचयन हो सके। साथ ही चापाकलों के पास सोक पिट निर्माण को बढ़ावा दिया जाये। जिससे भूजल स्तर बना रहे और जल संकट से राहत मिल सके। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्राम पंचायतों में पानी की समस्याओं को देखना जनप्रतिनिधियों का कार्य है। चापकलों के समीप किस प्रकार सोक पीट बनाई जाए इस निमित्त विभाग लोगों को प्रशिक्षण दे। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार द्वारा ग्राम पंचायतों को बड़ी राशि हस्तांतरित की गई है। यह संसाधन ग्राम पंचायतों को और अधिक सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। जनप्रतिनिधि ग्रामीणों से बेहतर समन्वय बनाकर योजनाओं को चुने। जब आप आवश्यकता के अनुरूप योजनाओं का चुनाव कर उन्हें कार्यान्वित करें तभी बदलाव संभव हो सकेगा।

खेतों में सोलर पावर प्लांट लगाकर आय सृजन करें ग्रामीण

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि खेतों का उपयोग केवल पारंपरिक खेती तक सीमित न रखते हुए खाली जमीन पर सोलर प्लांट लगाकर बिजली उत्पादन किया जा सकता है, जिसे सरकार खरीदेगी। इससे ग्रामीणों की आय में वृद्धि होगी और वे आत्मनिर्भर बन सकेंगे। राज्य में सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए लिफ्ट इरिगेशन जैसी योजनाओं पर कार्य किया जा रहा है, जिसमें संताल परगना में उल्लेखनीय प्रगति हुई है। भविष्य में इन योजनाओं को अन्य क्षेत्रों में भी लागू किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में वैसी भूमि जहां खेती का कार्य कम अवधि के लिए किया जाता है या खेत बंजर रह जाते हैं वहां सामूहिक रूप से ग्राम सभा कर सोलर पावर प्लांट लगाकर ग्रामीण समृद्ध हो सकते हैं।

जनप्रतिनिधि और आम जनमानस के बीच होनी चाहिए बेहतर समन्वय

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि पंचायत स्तर पर ही विभिन्न सेवाओं का विस्तार किया जा रहा है, जिसमें आधार (UID) से जुड़े कार्य भी शामिल हैं। इसके लिए एमओयू किया गया है, जिससे ग्रामीणों को गांव के ही कॉमन सर्विस सेंटर (सीएससी) में सुविधा मिलेगी और उन्हें बार-बार दूरस्थ स्थानों पर जाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार और जनप्रतिनिधियों के बीच निरंतर संपर्क और संवाद बनाए रखना अत्यंत आवश्यक है, संपर्क बना रहने से योजनाओं का बेहतर क्रियान्वयन संभव होता है और समस्याओं का समाधान भी तेजी से किया जा सकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज आयोजित इस सम्मेलन का उद्देश्य जनप्रतिनिधि और जनता के बीच कनेक्टिविटी को मजबूत करना भी है।

आम जनमानस की अपेक्षाओं पर खरा उतरें

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने सभी जनप्रतिनिधियों से अपील की कि वे अपने दायित्वों का ईमानदारी से निर्वहन करें और आम जनमानस की अपेक्षाओं पर खरा उतरें। मुख्यमंत्री ने कहा सरकार द्वारा उपलब्ध कराए जा रहे संसाधनों और जनप्रतिनिधियों के सक्रिय सहयोग से झारखण्ड के गांव निरंतर विकास की दिशा में आगे बढ़ेंगे और आमजन की समस्याओं का समाधान सुनिश्चित किया जा सकेगा।

इस अवसर पर मंत्री श्रीमती दीपिका पांडेय सिंह, मंत्री डॉ० इरफान अंसारी, मंत्री श्रीमती शिल्पी नेहा तिर्की, विधायक श्री सुरेश बैठा, विधायक श्रीमती ममता देवी, विधायक श्री राजेश कच्छप, मुख्य सचिव श्री अविनाश कुमार, निदेशक पंचायती राज श्रीमती बी० राजेश्वरी एवं निदेशक UIDAI, RO श्री नीरज कुमार सहित बड़ी संख्या में ग्राम पंचायतों से पहुंचे जनप्रतिनिधि सहित अन्य लोग उपस्थित थे।

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केंद्रीय संचार एवं उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने अष्टलक्ष्मी दर्शन युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम के प्रतिभागियों से बातचीत की

नई दिल्ली – केंद्रीय संचार एवं उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने 22 अप्रैल को उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय की प्रमुख पहल, अष्टलक्ष्मी दर्शन युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम के विद्यार्थियों के साथ आभासी रूप से संवाद किया। कार्यक्रम में मंत्रालय के सचिव संजय जाजू, संयुक्त सचिव नीरज कुमार और अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।

कार्यक्रम के अंतर्गत श्री सिंधिया ने आईआईटी गुवाहाटी, असम विश्वविद्यालय और तेजपुर विश्वविद्यालय में क्रमशः 13वें, 14वें और 15वें बैच के विद्यार्थियों के साथ बातचीत की। प्रत्येक बैच में 100 छात्र शामिल हुए, जिनमें छत्तीसगढ़, नई दिल्ली, मध्य प्रदेश, राजस्थान और गोवा से 20-20 विद्यार्थियों ने भाग लिया। इन सभी विद्यार्थियों ने 15 मार्च, 2026 से 10 अप्रैल, 2026 तक चलने वाले युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम में भाग लिया।

संवादात्मक कार्यक्रम का शुभारंभ उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास (डीओएनईआर) के संयुक्त सचिव श्री नीरज कुमार के उद्घाटन उद्बोधन से हुआ, जिसके बाद केंद्रीय उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने इसे मुख्य रूप से संबोधित किया। संवादात्मक सत्र के दौरान, विद्यार्थियों ने अनुभव यात्रा (शैक्षणिक भ्रमण) से संबंधित अपने अनुभव और विचार साझा किए।

छत्तीसगढ़ के दुर्ग की सुश्री रागिनी साहू ने पूर्वोत्तर क्षेत्र के अनूठे पहलुओं का उल्लेख किया, जिसमें विभिन्न स्थानों की यात्राएं शामिल रहीं। उन्होंने कहा कि इस तरह की अनुभव यात्राएं अत्यंत मूल्यवान होती हैं और पूरे देश के छात्रों को ऐसी यात्राओं के लिए प्रोत्साहित किया जाना चाहिए।

छत्तीसगढ़ के एक अन्य प्रतिभागी श्री हरीश कुमार साहू ने बताया कि पूर्वोत्तर क्षेत्र की यात्रा के बाद, उन्हें वास्तविक रूप से समझ आया कि इस क्षेत्र को “अष्टलक्ष्मी” क्यों कहा जाता है, जो इसकी समृद्धि और विविधता का प्रतीक है।

नई दिल्ली स्थित जामिया मिलिया इस्लामिया की सुश्री इफराह कावा ने अपने अनुभव साझा करते हुए इस क्षेत्र के आत्मीयता से भरे आतिथ्य सत्कार की सराहना की और पूर्वोत्तर क्षेत्र के आतिथ्य प्रबंधन और सांस्कृतिक समृद्धि का उल्लेख किया।

मध्य प्रदेश के भोपाल स्थित बरकतउल्ला विश्वविद्यालय की सुश्री शैली तिवारी ने अपनी यात्रा में हासिल समृद्ध अनुभव की चर्चा की। इसमें वायुसेना स्टेशन का दौरा, असम राइफल्स के अधिकारियों के साथ बातचीत, सीढ़ीदार खेती, बांस के घरों को देखने का अनुभव और क्षेत्र की विविध आदिवासी संस्कृतियों से परिचय शामिल रहा।

राजस्थान केंद्रीय विश्वविद्यालय के विकास बाली ने बताया कि उत्तर पूर्वी क्षेत्र की उनकी यात्रा निश्चित रूप से ज्ञानवर्धक रही। उन्होंने बताया कि पूर्वोत्तर क्षेत्र को प्रत्यक्षतः देखने से वहां की प्राकृतिक सुंदरता, संस्कृति और विविधता की गहरी समझ मिली, जिससे यह ज्ञानवर्धक और यादगार अनुभव रहा।

गोवा के वालपोई स्थित सरकारी उच्च माध्यमिक विद्यालय की सुश्री दीक्षा डी. गांवकर का संवाद सबसे रोचक रहा। पूर्वोत्तर क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता, लोगों और स्थानीय व्यंजनों की सराहना करते हुए उन्होंने अपने अनुभव को यादगार बताया। संवाद में उनके साथ गोवा के अन्य छात्र भी शामिल हुए, जिन्होंने असमिया भाषा में एक गीत गाया, जो इस क्षेत्र के प्रति उनकी सांस्कृतिक सराहना और भावनात्मक जुड़ाव को दर्शाता है।

श्री सिंधिया ने विद्यार्थियों द्वारा साझा किए गए अनुभवों की सराहना की और उन्हें अपने राज्यों में पूर्वोत्तर क्षेत्र के राजदूत के तौर पर कार्य करने को प्रोत्साहित किया। श्री सिंधिया ने उन्हें राष्ट्रीय एकता, परस्पर सम्मान और देश के युवाओं में साझा दायित्व की भावना सुदृढ़ बनाने में इस तरह के युवा आदान-प्रदान कार्यक्रमों के महत्व पर जोर दिया।

केंद्रीय उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्री ने दोहराया कि अष्टलक्ष्मी दर्शन युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम माननीय प्रधानमंत्री के दृष्टिकोण से प्रेरित है कि युवाओं को पूर्वोत्तर भारत की वास्तविक संस्कृति, लोगों और परंपराओं का अनुभव कराया जाए और वे वहां से एकता और एकीकरण के राजदूत के रूप में वापस लौटें।

उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास सचिव श्री संजय जाजू के संबोधन से कार्यक्रम का समापन हुआ। उन्होंने इस पहल को सफल बनाने के लिए सभी सहभागी विद्यार्थियों, सहयोगी संस्थानों और हितधारकों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि कार्यक्रम का सफल आयोजन राष्ट्रीय एकता और युवा सहभागिता की बढ़ती भावना दर्शाता है। उन्होंने सभी विद्यार्थियों को उनके उज्ज्वल भविष्य की शुभकामनाएं दीं और उनसे कार्यक्रम के दौरान प्राप्त ज्ञान और अनुभवों को आगे ले जाने तथा पूर्वोत्तर क्षेत्र के राजदूत के रूप में पूरे देश में कार्य करने को प्रोत्साहित किया।

अष्टलक्ष्मी दर्शन – युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम

उत्तर पूर्वी क्षेत्र विकास मंत्रालय (एमडीओएनईआर) ने हाल ही में माननीय प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में “अष्टलक्ष्मी दर्शन – युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम” नामक एक अग्रणी पहल शुरू की है। अष्टलक्ष्मी पूर्वोत्तर भारत के 8 राज्यों के समूह को कहा जाता है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अरुणाचल प्रदेश, असम, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नागालैंड, त्रिपुरा और सिक्किम को देश की समृद्धि और विकास के प्रतीक के रूप में ‘अष्टलक्ष्मी’ का नाम दिया है। उत्तर पूर्वी परिषद (एनईसी) द्वारा कार्यान्वित इस कार्यक्रम का उद्देश्य भावनात्मक मेल-मिलाप को बढ़ावा देना, लोगों के आपसी संबंधों को प्रगाढ़ बनाना, उत्तर पूर्वी क्षेत्र (एनईआर) के बारे में समझ बढ़ाना और साझा दायित्व की भावना मजबूत करना है। इसमें 28 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की भागीदारी का विचार किया गया है, जो 14 दिवसीय गहन अनुभव यात्राओं, शैक्षणिक सत्रों, विरासत स्थलों के भ्रमण और स्थानीय समुदाय के साथ संवाद द्वारा युवाओं के बीच सार्थक जुड़ाव, सांस्कृतिक समझ और सराहना को बढ़ावा देती है।

1 नवंबर, 2025 को औपचारिक शुभारंभ के बाद से यह कार्यक्रम अत्यंत सफल रहा है। वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान 15 समूहों में 530 विद्यार्थियों ने युवा आदान-प्रदान कार्यक्रम में भाग लिया और पूर्वोत्तर क्षेत्र के 8 राज्यों का दौरा किया तथा 11 विश्वविद्यालयों और संस्थानों के साथ जुड़ाव स्थापित किया।

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एनएमडीसी के शीर्ष नेतृत्व ने दंतेवाड़ा के पंचायत प्रमुखों से की मुलाकात, जल, बिजली और सड़कों पर कार्रवाई का दिलाया भरोसा

दंतेवाड़ा – समावेशी विकास की दिशा में एक सक्रिय कदम के रूप में, एनएमडीसी लिमिटेड के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक श्री अमिताभ मुखर्जी ने वरिष्ठ नेतृत्व के साथ दंतेवाड़ा में एनएमडीसी की परियोजनाओं के आसपास के गांवों के पंचायत प्रमुखों के साथ एक बैठक की। बातचीत में जमीनी स्तर की समस्याओं को दूर करने और स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र के लिए सहयोग बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया गया।

गुमीयापाल, समालवार, कालेपाल, चोलनार, कदम्पाल, हिरोली, बेनपाल, कोडेनार, मदकामिरस और कुट्रेम गांवों सहित एक दर्जन से अधिक सरपंचों और उनके प्रतिनिधियों ने पेयजल, सड़क संपर्क, स्वास्थ्य देखभाल, स्ट्रीट लाइटिंग, खेल सुविधाओं और समग्र ग्रामीण बुनियादी ढांचे से संबंधित रोजमर्रा की चुनौतियों के बारे में बात की।

बैठक में श्री कृष्ण कुमार ठाकुर, निदेशक (कार्मिक) के साथ साथ परियोजना के वरिष्ठ अधिकारी  श्री के. श्रीधर कोडाली, मुख्य महाप्रबंधक (खनन), बचेली कॉम्प्लेक्स और श्री रबीन्द्र नारायण, अधिशासी निदेशक, किरंदुल कॉम्प्लेक्स शामिल हुए।

सभा को संबोधित करते हुए सीएमडी ने इस बात पर बल दिया कि एनएमडीसी न केवल एक प्रमुख खनन संगठन बल्कि सार्वजनिक क्षेत्र के एक जिम्मेदार उद्यम की भी भूमिका निभा रहा है जो क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक ताने-बाने को समृद्ध करने के लिए प्रतिबद्ध है।

उन्होंने कहा कि कंपनी की ताकत उन समुदायों के विश्वास में निहित है जिनकी वह सेवा करती है, और उनकी चिंताएं एनएमडीसी के कार्यों का मार्गदर्शन करती हैं। साथ ही, समुदायों की प्रगति एनएमडीसी की सफलता को परिभाषित करती है। उन्होंने कहा,”हम इन गांवों के साथ मिलकर काम करेंगे ताकि उन्हें  आत्मनिर्भर बस्तियों में बदला जा सके जो विकसित भारत की भावना को दर्शाती है।“

एनएमडीसी की बैलाडीला खदानों के आस पास के ग्रामीणों ने बेहतर पानी, सड़कों और स्वास्थ्य देखभाल जैसी सुविधाओं पर हुई चर्चा पर प्रसन्नता व्यक्त की। स्थानीय पंचायत के एक प्रतिनिधि ने कहा, “वरिष्ठ निदेशकों  ने हमसे आमने-सामने बातचीत की और वास्तव में हमारी परेशानियों को सुना।“ कंपनी के वरिष्ठ निदेशकों की इस प्रत्यक्ष पहुंच ने ठोस बदलाव के लिए नई उम्मीद जगाई है।

श्री कृष्ण कुमार ठाकुर, निदेशक (कार्मिक)  ने आश्वासन दिया कि एनएमडीसी स्थानीय समुदायों के साथ निरंतर संवाद करता रहेगा और इस बातचीत में साझा की गई समस्याओं से आगामी विकास पहलों को दिशा मिलेगी।

बैलाडीला में 1968 में परिचालन शुरू करने के बाद से, एनएमडीसी ने अपने बचेली और किरंदुल परिसरों के माध्यम से औद्योगिक विकास और क्षेत्रीय प्रगति दोनों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

इन वर्षों में कंपनी दंतेवाड़ा  में आर्थिक और बुनियादी ढांचे के विकास के उत्प्रेरक के रूप में उभरी है।

भारत के सबसे बड़े लौह अयस्क उत्पादक के रूप में एनएमडीसी का दंतेवाड़ा में 68 वर्षों से गहन विश्वास सहज रूप से पनपा है।

एनएमडीसी ने पेयजल परियोजनाएं, सड़कें, खेल के मैदान, क्लीनिक जैसे बड़े बदलाव किए हैं।

आज जमीनी स्तर पर हुई बातचीत और आदिवासियों की मूलभूत समस्याओं के आलोक में कमियों को दूर करते हुए इन कार्यों को और आगे बढ़ाया जाएगा।

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जगन्नाथपुर मंदिर में अज्ञात अपराधियों ने गार्ड की हत्या कर दी..

रांची,24.04.2026 – जगन्नाथपुर थाना क्षेत्र स्थित जगन्नाथपुर मंदिर में गुरुवार की देर रात गार्ड की हत्या कर दी गई. अज्ञात अपराधियों ने मंदिर में मौजूद गार्ड की हत्या कर दी. इसके बाद मामले की गंभीरता को देखते हुए रांची एसएसपी राकेश रंजन खुद घटनास्थल पर पहुंचे हैं और पूरे मामले की जांच कर रहे हैं.

जानकारी के अनुसार, बदमाशों ने वारदात को अंजाम देने के बाद मंदिर की दान पेटी से नकदी भी निकाल ली. इससे घटना को लूट और हत्या दोनों एंगल से जोड़कर देखा जा रहा है.

जांच में जुटी पुलिस

घटना की सूचना मिलते ही एसएसपी सहित पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और जांच शुरू कर दी है. पुलिस टीम मंदिर परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है, ताकि अपराधियों की पहचान की जा सके. फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रही है।
सीसीटीवी में कैद हुआ आरोपी की तस्वीर।

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प्रधानमंत्री ने रेलवे ट्रैक के आधुनिकीकरण से अधिक भरोसेमंद नेटवर्क को बढ़ावा मिलने की जानकारी से युक्‍त एक लेख साझा किया

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज केंद्रीय मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव द्वारा लिखित एक लेख साझा किया, जिसमें बताया गया है कि रेल पटरियों का आधुनिकीकरण किस प्रकार एक तेज़ और अधिक भरोसेमंद नेटवर्क को बढ़ावा दे रहा है। श्री मोदी ने कहा कि पटरियों के नवीनीकरण, उन्नत परीक्षण और मशीनीकृत रखरखाव से यात्रा की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और गति में वृद्धि सुनिश्चित हुई है। श्री मोदी ने कहा कि इन बदलावों से समय की बचत होने के साथ-साथ यात्रा सुगम हो रही है और रेलवे को देश भर में बढ़ती यात्री और माल ढुलाई की मांग को पूरा करने में सहायता मिल रही है।

श्री मोदी ने एक्‍स पर पोस्ट में लिखा:

“रेलवे पटरियों का आधुनिकीकरण एक तेज और अधिक भरोसेमंद नेटवर्क को शक्ति प्रदान कर रहा है।”

पटरियों का नवीनीकरण, उन्नत परीक्षण और मशीनीकृत रखरखाव से यात्रा की गुणवत्ता में सुधार हुआ है और गति में वृद्धि सुनिश्चित हुई है। इन बदलावों से समय की बचत हो रही है, यात्रा सुगम हो रही है और रेलवे को देश भर में बढ़ती यात्री और माल ढुलाई की मांग को पूरा करने में सहायता मिल रही है।

केंद्रीय मंत्री श्री @AshwiniVaishnaw द्वारा लिखित यह लेख अवश्य पढ़ें।

indianexpress.com/article/opinio…

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रक्षा सचिव ने दिल्ली कैंटोनमेंट जनरल अस्पताल में रोबोटिक ऑर्थोपेडिक चिकित्सा प्रणाली एवं मातृत्व ऑपरेशन थियेटर का उद्घाटन किया

नई दिल्ली – रक्षा सचिव राजेश सिंह ने 23 अप्रैल 2026 को दिल्ली कैंट स्थित कैंटोनमेंट जनरल अस्पताल में रोबोटिक ऑर्थोपेडिक चिकित्सा प्रणाली एवं मातृत्व ऑपरेशन थियेटर का उद्घाटन किया। इस अवसर पर रक्षा संपदा महानिदेशक शोभा गुप्ता तथा अन्य विशिष्ट अतिथि उपस्थित रहे। ये सुविधाएँ कैंटोनमेंट एवं आसपास के नगर निकाय क्षेत्रों के लोगों को उन्नत स्वास्थ्य सेवाएँ प्रदान करने में सहायक सिद्ध होंगी।

इस अवसर पर लोगों को संबोधित करते हुए रक्षा सचिव ने कैंटोनमेंट क्षेत्रों में स्वास्थ्य अवसंरचना के आधुनिकीकरण के महत्व पर बल दिया तथा निवासियों को उच्च गुणवत्ता वाली चिकित्सा सेवाएँ सुनिश्चित करने के प्रति सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता को रेखांकित किया।

रक्षा संपदा महानिदेशक ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस प्रकार के विकास से कैंटोनमेंट क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं सुदृढ़ होगी तथा समग्र सामुदायिक कल्याण को बढ़ावा मिलेगा।

यह नई रोबोटिक ऑर्थोपेडिक चिकित्सा प्रणाली एक महत्वपूर्ण तकनीकी उन्नयन का प्रतिनिधित्व करती हैजो सटीकताआधारित शल्य प्रक्रियाओंरिकवरी के समय को कम करने और मरीजों के स्वास्थ्य में बेहतर परिणाम सुनिश्चित करने में सक्षम है। अत्याधुनिक रोबोटिक प्रणाली से सुसज्जित यह इकाई हड्डियों से जुड़े जटिल रोग संबंधी मामलों को अधिक सटीकता और दक्षता के साथ संभालने में अस्पताल की क्षमता को बढ़ावा देगी। मातृत्व ऑपरेशन थियेटर को गर्भवती महिलाओं के लिए व्यापक एवं सुरक्षित शल्य चिकित्सा सेवाएँ प्रदान करने हेतु विशेष रूप से डिजाइन किया गया है।

इस अवसर पर कैंटोनमेंट जनरल अस्पताल में प्रस्तावित अन्य उन्नयन कार्यों पर एक संक्षिप्त प्रस्तुति भी दी गईजिसमें आगामी तीन महीनों के भीतर डायलिसिस केंद्रकेंद्रीय निर्जीवीकरण सेवा विभाग (सीएसएसडी), आईसीयू उन्नयन तथा प्रयोगशाला विस्तार शामिल हैं। इसके अतिरिक्तआगामी एक वर्ष में शिशु गहन चिकित्सा इकाई (पीडियाट्रिक आईसीयू), नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू), सीटी स्कैनएमआरआईकैंसर स्क्रीनिंग इकाईउच्च निर्भरता इकाईमल्टी डिसिपलनरी वार्ड तथा सर्जिकल आईसीयू जैसी सुविधाओं के विकास की भी योजना हैजिससे स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके।

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उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने एम्स ऋषिकेश के छठे दीक्षांत समारोह को संबोधित किया; नैतिक, करूणामयी और भविष्य के लिए तैयार स्वास्थ्य देखभाल कार्यबल आह्वान किया

नई दिल्ली – अखिल भारतीय आयुर्वेद विज्ञान संस्थान (एआईआईएमएस) ऋषिकेश का छठा दीक्षांत समारोह आज उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन की गरिमामय उपस्थिति में संपन्न हुआ। यह समारोह संस्थान की शैक्षणिक उत्कृष्टता और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में राष्ट्र निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस समारोह में केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी और उत्तराखंड के राज्यपाल लेफ्टिनेंट जनरल गुरमीत सिंह (सेवानिवृत्त) भी उपस्थित थे।

इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने संस्थान की वार्षिक पत्रिका रुद्राक्ष को जारी किया, जिसमें पिछले वर्ष के दौरान एम्स ऋषिकेश की प्रमुख उपलब्धियों, नवाचारों और शैक्षणिक प्रगति का संकलन है। यह प्रकाशन चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और रोगी देखभाल में उत्कृष्टता के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

आज एम्स ऋषिकेश के छठे दीक्षांत समारोह में उपस्थित लोगों को संबोधित करते हुए श्री राधाकृष्णन ने ग्रेजुएटिंग चिकित्सा पेशेवरों के लिए इस अवसर के महत्व को संक्रमण, चिंतन और जिम्मेदारी के क्षण के रूप में रेखांकित किया।

ग्रेजुएटिंग छात्रों को बधाई देते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि यह अवसर वर्षों के अनुशासन, परिश्रम और त्याग का परिणाम है, साथ ही यह समाज और राष्ट्र के प्रति गहन पेशेवर प्रतिबद्धता की शुरुआत भी है। उन्होंने स्नातकों से अपने करियर में उच्चतम नैतिक मानकों, करुणा और सेवा भावना को बनाए रखने का आग्रह किया।

कोविड-19 महामारी के दौरान प्रति भारत की प्रतिक्रिया पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति ने प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के मार्गदर्शन में देश की दृढ़ता और निर्णायक नेतृत्व पर जोर दिया। उन्होंने विश्व के सबसे बड़े टीकाकरण अभियानों में से एक के सफल कार्यान्वयन पर प्रकाश डाला, जिसके तहत 140 करोड़ से अधिक नागरिकों को मुफ्त टीकाकरण सुनिश्चित किया गया, जिससे स्वास्थ्य सेवा में समानता और समावेश के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को बल मिला।

उपराष्ट्रपति ने महामारी के दौरान भारत की वैश्विक भूमिका पर भी जोर दिया, जिसमें वैक्सीन आउटरीच पहल ‘वैक्सीन मैत्री’ का जिक्र किया गया, जिसके तहत 100 से अधिक देशों को टीके उपलब्ध कराए गए। उन्होंने कहा कि भारत के प्रयासों ने ‘वसुधैव कुटुंबकम की भावना को दर्शाया और करुणा, एकजुटता एवं साझा वैश्विक प्रगति पर आधारित नेतृत्व का प्रदर्शन किया।

स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना को मजबूत करने पर सरकार के फोकस पर प्रकाश डालते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि देशभर में एम्स संस्थानों के विस्तार से गुणवत्तापूर्ण तृतीयक चिकित्सा देखभाल तक पहुंच में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। उन्होंने कहा कि ये संस्थान नैदानिक ​​देखभाल, अकादमिक उत्कृष्टता, अनुसंधान, नवाचार और सामाजिक उत्तरदायित्व को एकीकृत करते हुए उत्कृष्टता का एक आदर्श प्रस्तुत करते हैं।

उत्तराखंड की अनूठी भौगोलिक चुनौतियों का जिक्र करते हुए उपराष्ट्रपति ने इस क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण स्वास्थ्य सेवा केंद्र के रूप में उभरने के लिए एम्स ऋषिकेश की सराहना की। उन्होंने कहा कि संस्थान ने टेलीमेडिसिन जैसे नवोन्मेषी पद्धतियों को अपनाकर पारंपरिक स्वास्थ्य सेवा वितरण से आगे बढ़कर काम किया है, जिससे दूरदराज और पहाड़ी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की सुलभता में सुधार हुआ है।

उन्होंने संस्थान की आपातकालीन हेलीकॉप्टर सेवाओं की भी सराहना की, जिसने दुर्गम इलाकों में आपातकालीन प्रतिक्रिया क्षमताओं को काफी मजबूत किया है। चार धाम यात्रा के दौरान आवश्यक दवाओं की आपूर्ति के लिए ड्रोन के उपयोग को भी सार्वजनिक स्वास्थ्य नवाचार के एक उल्लेखनीय उदाहरण के रूप उजागर किया गया है, जिससे स्वास्थ्य सेवाओं की समय पर डिलीवरी सुनिश्चित हुई। उपराष्ट्रपति ने एनआईआरएफ रैंकिंग में देश के शीर्ष चिकित्सा संस्थानों में एम्स ऋषिकेश के लगातार स्थान बनाए रखने पर भी संतोष व्यक्त किया।

स्नातकों को संबोधित करते हुए उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि स्वास्थ्य सेवा एक सार्वजनिक विश्वास है और चिकित्सा पेशेवरों की भूमिका न केवल नैदानिक ​​देखभाल में, बल्कि एक स्वस्थ और अधिक सशक्त भारत के व्यापक राष्ट्रीय दृष्टिकोण को आगे बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने उनसे अपने पेशेवर जीवन में सहानुभूति, ईमानदारी और सेवा भावना से प्रेरित रहने का आग्रह किया।

इस अवसर पर बोलते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण राज्य मंत्री श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने स्नातक छात्रों को उनके समर्पण और चिकित्सा पेशे के प्रति प्रतिबद्धता के लिए बधाई दी।

उन्होंने युवा डॉक्टरों के लिए चार प्रमुख सिद्धांतों पर जोर दिया। प्रथम उन्होंने कहा कि चिकित्सा पेशा मानवता की सेवा के उच्चतम रूपों में से एक है और इसके लिए अटूट समर्पण, नैतिक आचरण और रोगियों  के विश्वास को बनाए रखने के लिए ईमानदारी की आवश्यकता होती है। दूसरा, चिकित्सा विज्ञान में तीव्र प्रगति को देखते हुए आजीवन सीखना और कौशल उन्यनन अत्यंत आवश्यक है। तीसरा, प्रभावी संचार गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवा का आधार है और रोगी परिणामों को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। चौथा, उन्होंने समाज के प्रति जिम्मेदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि माता-पिता, शिक्षक और राष्ट्र के योगदान को ध्यान में रखते हुए सेवा के माध्यम से समाज को वापस देना चाहिए।

स्नातकों पर विश्वास व्यक्त करते हुए उन्होंने कहा कि वे माननीय प्रधानमंत्री द्वारा परिकल्पित 2047 तक ‘विकसित भारत’ के विजन को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

स्वास्थ्य क्षेत्र में हाल ही में हुई प्रगति पर प्रकाश डालते हुए मंत्री महोदया ने कहा कि भारत में स्वास्थ्य सेवा अवसंरचना में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है और चिकित्सा शिक्षा में रिकॉर्ड विस्तार हुआ है, जिसका उद्देश्य 140 करोड़ से अधिक नागरिकों को किफायती और विश्वसनीय स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करना है। उन्होंने कहा कि सार्वजनिक स्वास्थ्य व्यय अब 1.06 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है, जिससे लोगों के जेब से होने वाला खर्च 62.5 प्रतिशत से घटकर 39.4 प्रतिशत तक हो गया है।

उन्होंने समग्र और एकीकृत स्वास्थ्य सेवा पर सरकार के विशेष जोर को रेखांकित किया। एम्स ऋषिकेश के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि संस्थान ने एक एकीकृत चिकित्सा मॉडल स्थापित किया है, जो व्यापक रोगी देखभाल के लिए पारंपरिक और आधुनिक चिकित्सा प्रणालियों को जोड़ता है। उन्होंने ‘वन हेल्थ’ दृष्टिकोण पर भी बल दिया, जो समन्वित अंतर-क्षेत्रीय कार्रवाई के माध्यम से मानव, पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य को जोड़ता है।

वैश्विक स्तर पर भारत के योगदान का जिक्र करते हुए उन्होंने तपेदिक, मलेरिया और एचआईवी/एड्स जैसी प्रमुख सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौतियों से निपटने में देश की प्रगति का उल्लेख किया। उन्होंने भारत के सफल कोविड-19 टीकाकरण अभियान पर भी प्रकाश डाला, जिसके दौरान स्वदेशी रूप से विकसित टीकों की 220 करोड़ से अधिक खुराकें, जिनमें बूस्टर खुराकें भी शामिल हैं, दी गईं।

श्रीमती अनुप्रिया पटेल ने उत्तराखंड जैसे भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण राज्य में एम्स ऋषिकेश की प्रभावशाली पहलों की सराहना की। उन्होंने टेलीमेडिसिन, हेलीकॉप्टर एम्बुलेंस सेवाएं, ड्रोन द्वारा चिकित्सा सहायता और उधम सिंह नगर में एक सैटेलाइट सेंटर के विकास जैसी प्रमुख सेवाओं पर प्रकाश डाला और कहा कि इन प्रयासों से दूरस्थ और दुर्गम क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन में इस अवसर को स्नातक छात्रों के जीवन में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह दिन एक नए चरण की शुरुआत है, जहां वे अपने चुने हुए चिकित्सा पेशे के माध्यम से मानवता की सेवा के लिए आगे बढ़ रहे हैं।

उन्होंने युवा डॉक्टरों से आग्रह किया कि वे दूरदराज और दुर्गम इलाकों में रहने वाले लोगों की सेवा के लिए खुद को समर्पित करें, विशेष रूप से उत्तराखंड जैसे भौगोलिक रूप से चुनौतीपूर्ण राज्य में, जहां स्वास्थ्य सेवा तक पहुंच एक गंभीर चिंता का विषय बनी हुई है।

मुख्यमंत्री ने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में अग्रणी भूमिका निभाने के लिए अखिल भारतीय आयुर्वेद विज्ञान संस्थान ऋषिकेश के प्रति आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि यह संस्थान उन्नत चिकित्सा देखभाल का एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभरा है और इस पूरे क्षेत्र में स्वास्थ्य परिणामों में सुधार लाने में एक परिवर्तनकारी भूमिका निभा रहा है।

समारोह के दौरान विभिन्न विषयों के ग्रेजुएटिंग छात्रों को उनकी शैक्षणिक उपलब्धियों और समर्पण को मान्यता देते हुए डिग्रियां प्रदान की गईं। साथ ही, उपराष्ट्रपति ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले मेधावी छात्रों को 11 पुरस्कार और स्वर्ण पदक प्रदान किए।

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श्री भूपेन्द्र यादव ने शेखा झील पक्षी अभयारण्य को भारत का 99वां रामसर स्थल घोषित किया; उत्तर प्रदेश में इन स्‍थलों संख्या बढ़कर 12 हुई

नई दिल्ली – केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ स्थित शेखा झील पक्षी अभयारण्य को रामसर स्थल घोषित करने की घोषणा की, जिससे भारत में ऐसे अभयारण्यों की कुल संख्या 99 और राज्य में 12 हो गई है।

श्री भूपेंद्र यादव ने अपनी सोशल मीडिया पोस्ट में यह जानकारी देते हुए लिखा- “उत्तर प्रदेश ने देशभर के इस आंकड़ें को 99 तक ले जाने का श्रेय प्राप्‍त कर लिया है! शेखा झील पक्षी अभयारण्य (अलीगढ़, उत्तर प्रदेश) को रामसर स्थल घोषित करते हुए मुझे बेहद प्रसन्‍नता का अनुभव हो रहा है।” उन्होंने कहा कि इस घोषणा से स्थानीय आजीविका और वैश्विक जैव विविधता के साथ-साथ जल और जलवायु सुरक्षा को भी बढ़ावा मिलेगा और यह “भारत की 99वीं वर्षगांठ” का प्रतीक है, जो हमें ऐतिहासिक शताब्दी के और निकट ले जाता है।

केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने कहा, “प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत के पारिस्थितिकी तंत्र को पुनर्विकसित करने अभियान के अंतर्गत आर्द्रभूमि और पशुओं, विशेष रूप से पक्षियों के प्राकृतिक आवास के संरक्षण के प्रति हमारी प्रतिबद्धता को वैश्विक समुदाय से एक बार फिर सराहना मिली है।”

इस स्थल के पारिस्थितिक महत्व का उल्‍लेख करते हुए श्री यादव ने कहा कि शेखा झील मध्य एशियाई फ्लाईवे पर एक महत्वपूर्ण पड़ाव है, जो सर्दियों के मौसम में हंस, पेंटेड स्टॉर्क और विभिन्न प्रकार की बत्तखों जैसे प्रवासी पक्षियों के लिए एक महत्वपूर्ण पर्यावास प्रदान करती है। मंत्री महोदय ने लोगों को इस स्थल का भ्रमण करने के लिए भी प्रोत्साहित किया।

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रक्षा मंत्री ने बर्लिन में जर्मन सांसदों को संबोधित करते हुए भारत व जर्मनी के बीच रक्षा औद्योगिक सहयोग को और अधिक मजबूत बनाने का आह्वान किया

नई दिल्ली – रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 21 अप्रैल 2026 को बर्लिन में जर्मन सांसदों को संबोधित करते हुए कहा “आत्मनिर्भर भारत केवल एक खरीद कार्यक्रम नहीं है; यह साथ मिलकर निर्माण, सह-विकास और साझा नवाचार का एक सशक्त आमंत्रण है।” इस अवसर पर उन्होंने भारत एवं जर्मनी के रक्षा औद्योगिक तंत्रों के बीच सहयोग को और अधिक सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर जोर दिया। रक्षा मंत्री ने अपनी तीन-दिवसीय जर्मनी यात्रा के पहले दिन, रक्षा एवं सुरक्षा संबंधी जर्मन संसदीय स्थायी समिति को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिदृश्य में दुनिया नए और जटिल सुरक्षा खतरों का सामना कर रही है, जहां तीव्र तकनीकी बदलावों ने चुनौतियों को और अधिक परस्पर जुड़ा हुआ बना दिया है। श्री राजनाथ सिंह ने इस बात पर बल दिया कि बदलते सुरक्षा वातावरण के अनुरूप स्वयं को ढालने की दृढ़ इच्छाशक्ति और एक नए, दूरदर्शी दृष्टिकोण की आज अत्यंत आवश्यकता है।

रक्षा मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में भारत का रक्षा क्षेत्र अभूतपूर्व परिवर्तन के दौर से गुजर रहा है और जर्मन उद्योग के साथ बढ़ती साझेदारियां दोनों देशों के लिए अत्यंत लाभकारी सिद्ध हो सकती हैं। श्री राजनाथ सिंह ने कहा, “हम जर्मनी के प्रमुख औद्योगिक उद्यमों की स्थापित क्षमताओं को भली-भांति पहचानते हैं, साथ ही उन्नत एवं उभरती प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में प्रसिद्ध जर्मन मिटेलस्टैंड—यानी छोटे और मध्यम आकार की कंपनियों—की ऊर्जा और गतिशीलता की भी सराहना करते हैं।” उन्होंने कहा कि भारत में भी हमारे स्टार्ट-अप और निजी उद्यम तेजी से उभरते हुए बड़े और स्थापित रक्षा उद्योगों की क्षमताओं को सुदृढ़ और पूरक बना रहे हैं। यह एक ऐसा क्षेत्र है जहां भारत तथा जर्मनी स्वाभाविक रूप से एक-दूसरे के पूरक हैं, और इससे हमारी साझेदारी को अधिक गहराई दी जा सकती है।

श्री राजनाथ सिंह ने आधुनिक वैश्विक चुनौतियों का प्रभावी ढंग से सामना करने के लिए समन्वित प्रतिक्रियाओं और विश्वसनीय रणनीतिक साझेदारियों की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और जर्मन चांसलर श्री फ्रेडरिक मर्ज़ ने इस रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने पर विशेष जोर दिया है। हम यूरोपीय संघ के स्तर पर भी विचारों में स्पष्ट सामंजस्य देखते हैं, जो भारत के साथ बढ़ती भागीदारी में परिलक्षित होता है—जिसमें भारत-यूरोपीय संघ रक्षा और व्यापक रणनीतिक सहयोग भी शामिल है।

रक्षा मंत्री ने दोहराया कि भारत और जर्मनी केवल रणनीतिक साझेदार ही नहीं हैं, बल्कि वर्तमान वैश्विक विमर्श को दिशा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने कहा, “हम साझा मूल्यों से जुड़े परिपक्व लोकतंत्र हैं और लचीलेपन, नवाचार तथा सुदृढ़ औद्योगिक भावना से संचालित गतिशील अर्थव्यवस्थाएं हैं। श्री सिंह ने कहा कि कानून निर्माता व समिति के सम्मानित सदस्यों के रूप में, आपका मार्गदर्शन, आपकी आवाज तथा आपका समर्थन हमारे रक्षा एवं रणनीतिक सहयोग के भविष्य को और अधिक सशक्त तथा समृद्ध बना सकता है। उन्होंने कहा कि जब इस युग का इतिहास लिखा जाएगा, तब भारत-जर्मनी साझेदारी कूटनीति के एक उत्कृष्ट उदाहरण के रूप में सामने आएगी—एक ऐसी साझेदारी, जो किसी संकट की प्रतिक्रिया में नहीं, बल्कि दो परिपक्व लोकतंत्रों के साझा संकल्प और दूरदृष्टि के आधार पर विकसित हुई है।

श्री राजनाथ सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि वर्तमान भू-राजनीतिक अस्थिरता को अब केवल क्षेत्रीय परिप्रेक्ष्य में नहीं देखा जा सकता। उन्होंने कहा कि इसके प्रभाव वैश्विक होते हैं और ये केवल स्थानीय अशांति नहीं, बल्कि ऐसी गंभीर परिस्थितियां हैं जिनका ऊर्जा सुरक्षा, खाद्य सुरक्षा तथा वैश्विक आर्थिक स्थिरता पर व्यापक एवं दूरगामी असर पड़ता है, साथ ही इनसे भारी मानवीय क्षति भी होती है। उन्होंने कहा, “भारत जैसे विकासशील देश के लिए, जो अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं के एक बड़े हिस्से के लिए पश्चिम एशिया पर निर्भर है, होर्मुजजलडमरूमध्य में किसी भी प्रकार की बाधा कोई दूरस्थ घटना नहीं है; यह एक ऐसी वास्तविकता है, जिसका हमारी सुरक्षा एवं आर्थिक स्थिरता पर सीधा व तात्कालिक प्रभाव पड़ता है।”

रक्षा मंत्री ने इन चुनौतियों और उनके प्रत्यक्ष प्रभावों को ध्यान में रखते हुए कहा कि भारत ने एक सक्रिय एवं समन्वित रणनीति अपनाई है। उन्होंने सांसदों को बताया कि पश्चिम एशिया से जुड़े मामलों पर मंत्रियों का एक समूह निरंतर बदलती परिस्थितियों का आकलन कर रहा है और उनके प्रभाव को कम करने के लिए समयबद्ध सुझाव दे रहा है। श्री सिंह ने कहा, “प्रमुख मंत्रालयों के बीच समन्वय स्थापित करते हुए हमारी प्राथमिकता ऊर्जा आपूर्ति को सुरक्षित रखना, आवश्यक वस्तुओं की उपलब्धता सुनिश्चित करना, महंगाई के दबाव को नियंत्रित करना तथा नागरिकों और उद्योगों को बाहरी व्यवधानों से सुरक्षित रखना रही है। यह वैश्विक संकटों का सामना शांत संयम, दूरदर्शिता एवं प्रभावी संस्थागत तालमेल के साथ करने की भारत की क्षमता को दर्शाता है।”

सांसद एवं समिति के अध्यक्ष श्री थॉमस रोवेकैम्प ने सांसदों के साथ संवाद के लिए श्री राजनाथ सिंह का स्वागत किया। इससे पहले रक्षा मंत्री ने बर्लिन स्थित हम्बोल्ट विश्वविद्यालय परिसर में गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर को पुष्पांजलि अर्पित की और भारत तथा जर्मनी के बीच के चिरस्थायी सांस्कृतिक एवं बौद्धिक संबंधों को रेखांकित किया।

गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर का 20वीं सदी की शुरुआत में जर्मनी के साथ गहरा और सार्थक संबंध रहा, जिसकी पहचान उनके व जर्मन विचारकों, कलाकारों तथा बुद्धिजीवियों के बीच पारस्परिक सम्मान और प्रशंसा से होती थी। जर्मनी के साथ उनका यह जुड़ाव सांस्कृतिक आदान-प्रदान, समृद्ध बौद्धिक संवाद और साझा मानवीय मूल्यों पर आधारित था। जर्मनी ने पूरे यूरोप में उनके साहित्य और विचारों को परिचित कराने तथा लोकप्रिय बनाने में एक अहम भूमिका निभाई।

रक्षा मंत्री के बर्लिन हवाई अड्डे पर पहुंचने पर उनका सैन्य सम्मान के साथ गरिमापूर्ण स्वागत किया गया। म्यूनिख से बर्लिन की अपनी यात्रा के दौरान उन्हें जर्मन वायु सेना के विशेष विमान से लाया गया, जिसकी सुरक्षा के लिए लड़ाकू विमान भी साथ-साथ उड़ान भर रहे थे।

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केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जे.पी. नड्डा ने नई दिल्ली में 18वें सिविल सेवा दिवस समारोह के दौरान “भारत में गैर-संक्रामक रोगों का समाधान: रोकथाम से लेकर उपचार तक” विषय पर सत्र की अध्यक्षता की

नई दिल्ली – केन्द्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जे.पी. नड्डा ने आज यहां नई दिल्ली में सिविल सेवा दिवस समारोह के अवसर पर “भारत में गैर-संक्रामक रोगों का समाधान: रोकथाम से लेकर उपचार तक” विषय पर सत्र की अध्यक्षता की। केन्द्रीय स्वास्थ्य सचिव श्रीमती पुण्य सलिला श्रीवास्तव भी इस अवसर पर उपस्थित थीं।

सभा को संबोधित करते हुए श्री जे.पी. नड्डा ने सत्र के थीम के महत्व पर जोर दिया और भारत की स्वास्थ्य सेवा पद्धति में रोकथाम से उपचार तक हुए बदलाव पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि “वर्ष 2017 में हमने एक समग्र और समावेशी स्वास्थ्य नीति प्रस्तुत की, जिसमें हमने निवारक, प्रोत्साहक, उपचारात्मक, जेरियाट्रिक(वृद्धजन देखभाल), पुनर्वास और उपशामक देखभाल पर ध्यान केंद्रित किया।”

श्री नड्डा ने बताया कि संक्रामक रोगों के मोर्चे पर देश ने बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है, जबकि गैर-संक्रामक रोगों(एनसीडी) पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है, क्योंकि इनके परिणाम सामने आने में अधिक समय लगता है और इस क्षेत्र में जानकारी का अभाव भी है, जिसे दूर करना अति-आवश्यक है।

देश में एनसीडी की समस्या को स्वीकार करते हुए, श्री नड्डा ने कहा कि “देश में कुल मृत्यु के लगभग 60% मामले एनसीडी के कारण होते हैं, इसलिए इस क्षेत्र पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है और इसे प्राथमिकता दी जा रही है।” उन्होंने आगे कहा कि “एनसीडी की रोकथाम और नियंत्रण के राष्ट्रीय कार्यक्रम के अंतर्गत बुनियादी ढांचे को सुदृढ़ करने, प्रारंभिक निदान और शीघ्र पहचान, स्वास्थ्य संवर्धन तथा रोग प्रबंधन और समय पर रेफरल पर विशेष ध्यान दिया गया है।” उन्होंने यह भी कहा कि “स्वास्थ्य संवर्धन एक प्रमुख क्षेत्र है, और रोग का प्रबंधन तथा समय पर रेफरल भी अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। ये सभी प्रमुख मुद्दे हैं, जिन पर हम काम कर रहे हैं।” “स्वास्थ्य संवर्धन निश्चित रूप से प्रमुख क्षेत्रों में से एक है, और रोग का प्रबंधन तथा समय पर रेफरल भी बहुत महत्वपूर्ण हैं। इसलिए, जहां तक ​​गैर-संक्रामक रोगों का संबंध है, ये वे मुख्य मुद्दे हैं जिन्हें हम हल करने का प्रयास कर रहे हैं।”

सरकार के प्रयासों को पर जोर देते हुए श्री नड्डा ने कहा कि “पिछले छह वर्षों में हम 1.85 लाख से अधिक आयुष्मान आरोग्य मंदिर स्थापित करने में सफल रहे हैं, जो 1.45 अरब लोगों और स्वास्थ्य संस्थानों के बीच पहला संपर्क केन्द्र है। प्रत्येक आयुष्मान केंद्र पर एक आशा कार्यकर्ता होती है, और जहां संभव हो, अन्य अग्रिम पंक्ति के स्वास्थ्य कर्मी भी तैनात होते हैं।” उन्होंने आगे कहा कि “वर्ष 2017 में हमने स्वैच्छिक और विस्तारित स्क्रीनिंग की दिशा में आगे बढ़ने का निर्णय लिया था।”

श्री नड्डा ने इन प्रयासों के सकारात्मक परिणामों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि “हमने जिला स्तर पर लगभग 107 एनसीडी क्लीनिक और 233 कार्डियक केयर यूनिट विकसित किए हैं।” उन्होंने आगे कहा कि “इसी बजट में यह घोषणा की गई है कि हर जिले में एक डे-केयर कैंसर सेंटर स्थापित किया जाएगा।”

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने देश में एनसीडी से निपटने के लिए बड़े पैमाने पर किए जा रहे स्क्रीनिंग प्रयासों के बारे में बताया। उन्होंने कहा कि “वर्ष 2017 से अब तक 41.5 करोड़ लोगों की उच्च रक्तचाप(हाइपरटेंशन) के लिए जांच की गई है, जिनमें से 7.1 करोड़ का उपचार हुआ है और 5.7 करोड़ लोगों को सूचित किया गया है।” उन्होंने आगे कहा कि “हमने भारत को स्वस्थ बनाने के लिए शीघ्र पहचान सुनिश्चित करने का प्रयास किया है। उदाहरण के तौर पर, 41.3 करोड़ लोगों की मधुमेह (डायबिटीज) के लिए जांच की गई है, जिनमें से 4.7 करोड़ लोग मधुमेह से पीड़ित पाए गए हैं और 3.4 करोड़ लोगों का उपचार चल रहा है। मुख के कैंसर के लिए अब तक 35.3 करोड़ लोगों की जांच की गई है, जिनमें 2.3 लाख लोगों में कैंसर का पता चला है और लगभग 2 लाख लोगों का इलाज किया जा रहा है। वहीं, 16.5 करोड़ से अधिक लोगों की स्तन कैंसर के लिए जांच की गई है।”

श्री नड्डा ने यह भी बताया कि “सर्वाइकल कैंसर के लिए 8.73 करोड़ स्क्रीनिंग की गई है, जिनमें से 1.1 लाख महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर का पता चला है और इनमें से लगभग 97,000 का इलाज चल रहा है।” उन्होंने कैंसर की प्रारंभिक अवस्था में पहचान सुनिश्चित करने, हृदय संबंधी रोगों, गुर्दा विफलता, यकृत संबंधी समस्याओं तथा अन्य जटिलताओं के बोझ को कम करने में सरकार की सक्रिय भूमिका के बारे में भी बताया।

श्री नड्डा ने दूसरे और तीसरे स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं के सुदृढ़ीकरण और विस्तार के प्रयासों के बारे में बात करते हुए कहा कि “आज हमारे पास 880 मेडिकल कॉलेज हैं, जो पहले की तुलना में काफी अधिक हैं, तथा 23 अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान(एम्स) हैं, जिनमें से 20 पहले ही कार्य कर रहे हैं। इन संस्थानों में कार्डियोलॉजी के पूर्ण विकसित विभाग और सुपर-स्पेशियलिटी कैंसर विभाग उपलब्ध हैं।” उन्होंने आगे कहा कि “स्वास्थ्य बुनियादे ढ़ांचे मिशन के तहत पहले और दूसरे स्तर के स्वास्थ्य सेवाओं के बीच की खाई को पाटने के लिए ₹64,000 करोड़ आवंटित किए गए हैं।”

श्री नड्डा ने जोर देते हुए कहा कि “टेली-परामर्श एक ऐसा क्षेत्र है जहां ई-संजीवनी ने बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यह सेवा प्रदाता-से-सेवा प्रदाता और मरीज-से-सेवा प्रदाता दोनों रूपों में उपलब्ध है। जब हम सेवा प्रदाता-से-सेवा प्रदाता की बात करते हैं, तो स्वास्थ्य और वेलनेस केंद्र में कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर इस बातचीत को सुगम बनाता है, अनुवाद करता है, तस्वीरें साझा करता है और विशेषज्ञ के साथ मरीज की लाइव बातचीत सुनिश्चित करता है। इसी तरह, मरीज-से-डॉक्टर संचार में मरीज सीधे प्लेटफॉर्म के माध्यम से डॉक्टर से जुड़कर बात करता है।”  उन्होंने आगे कहा कि “अब तक 46.4 करोड़ से अधिक मरीजों ने टेली-परामर्श सेवाओं का लाभ उठाया है और हम इसके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में बीमारियों के बोझ को कम करने का प्रयास कर रहे हैं।”

श्री नड्डा ने ने यह भी स्वीकार किया कि “लगभग 70% एनसीडी के जोखिम जीवनशैली से जुड़े होते हैं और यदि हम रोकथाम पर ध्यान केंद्रित करें, तो उस बोझ के एक बड़े हिस्से को कम कर सकते हैं, जिस पर हम काम कर रहे हैं।” उन्होंने जीवनशैली से जुड़ी बीमारियों से निपटने के लिए सरकार की विभिन्न पहलों—जैसे “ईट राइट इंडिया” और “फिट इंडिया” पर जोर दिया।

उन्होंने माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के इस आह्वान को दोहराया कि हम अपने तेल के उपयोग को 10% तक कम करने तथा नमक और चीनी का कम सेवन करने की बात कही थी।  उन्होंने सूचना, शिक्षा और संचार के महत्व पर भी जोर दिया और बताया कि तंबाकू के क्षेत्र में काफी जागरूकता पैदा की जा रही है। उन्होंने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि “सिगरेट और अन्य तंबाकू उत्पादों पर कानून बनाने के मामले में भारत अग्रणी देशों में से एक है और धूम्रपान में भी काफी कमी देखने को मिली है, लेकिन तंबाकू के अन्य रूपों के सेवन को अभी भी नियंत्रित करने की आवश्यकता है।”

श्री नड्डा ने ने शारीरिक गतिविधि के महत्व और इस दिशा में सरकार की पहलों के बारे में भी बात की। उन्होंने जागरूकता के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि “जागरूकता की शुरुआत हमें स्वयं से करना चाहिए। हमें समझना होगा कि हमारी जीवनशैली ही सबसे अहम है, और हमें इसके लिए स्वयं, अपने परिवार तथा अपने समुदाय को जागरूक करना चाहिए।” उन्होंने यह भी बताया कि शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए सरकार योग के विस्तार और सुदृढ़ीकरण पर विशेष ध्यान दे रही है।

उफस्थित लोगों को संबोधित करते हुए श्रीमती पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने एनसीडी से निपटने के लिए भारत की रणनीति और मोटापे की समस्या से निपटने के महत्व पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने बताया कि “भारत में संक्रामक रोगों से गैर-संक्रामक रोगों—जैसे हृदय संबंधी बीमारियां, कैंसर, मधुमेह और श्वसन संबंधी रोग—की ओर बदलाव देखा जा रहा है। इनका समाधान एनपी-एनसीडी के तहत बहुआयामी, पूरे-सरकार और पूरे-समाज के दृष्टिकोण अपनाकर किया जा रहा है, जिसमें जागरूकता, जनसंख्या-आधारित स्क्रीनिंग और देखभाल की निरंतरता शामिल है।”

उन्होंने आगे 75×25 पहल और “स्वस्थ नारी, सशक्त परिवार अभियान” जैसी प्रमुख पहलों पर भी प्रकाश डालते हुए रोकथाम, बीमारी का जल्दी पता लगाने और सामुदायिक भागीदारी पर जोर दिया। उन्होंने मोटापे को एनसीडी का एक प्रमुख कारण बताते हुए कहा कि एनएपएचएस-5 के आंकड़ों के अनुसार 24% महिलाएं और 23% पुरुष अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त हैं, जिसमें शहरी क्षेत्रों की प्रवृत्ति और बच्चों में बढ़ता मोटापा प्रमुख चिंता का विषय है। उन्होंने कहा कि इसके लिए खान-पान की अस्वस्थ आदतें जिम्मेदार हैं, और भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद के एक अध्ययन का हवाला देते हुए बताया कि वसा, तेल और प्रसंस्कृत(प्रोसेस्ड) खाद्य पदार्थों का अधिक सेवन इसका मुख्य कारण है।

राष्ट्रीय प्रयासों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने बताया कि “माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने मोटापे के खिलाफ सामूहिक कार्रवाई का आह्वान किया है, जिसमें खाद्य तेल के उपयोग को कम करना भी शामिल है।” उन्होंने आगे कहा कि मंत्रालय, भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण(एफएसएसएआई), राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम और विभिन्न जागरूकता अभियानों के सहयोग से व्यवहार में बदलाव को बढ़ावा दे रहा है, जिसमें अभियान, जनसंपर्क और स्कूल-आधारित पहल शामिल हैं। अपने समापन वक्तव्य में उन्होंने कार्यस्थल पर स्वास्थ्य (वर्कप्लेस वेलनेस), स्वस्थ जीवनशैली और नियमित जांच के महत्व पर जोर देते हुए कहा कि छोटे-छोटे बदलावों से सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में बड़े लाभ प्राप्त किए जा सकते हैं।

यकृत एवं पित्त विज्ञान संस्थान(आईएलबीएस) के निदेशक प्रो. (डॉ.) एस. के. सरीन ने बीमारियों के बोझ को कम करने और समग्र स्वास्थ्य परिणामों को बेहतर बनाने के लिए प्रारंभिक जांच और निवारक उपायों की आवश्यकता पर जोर दिया।

इस अवसर पर स्वास्थ्य सेवा निदेशालय के उप-महानिदेशक डॉ. एल. स्वस्तिचरण, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय में  संयुक्त सचिव श्री पुष्पेन्द्र राजपूत और केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

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पोषण पखवाड़ा 2026 के तहत, मिजोरम के आंगनवाड़ी केंद्र में प्रारंभिक शिक्षा और पर्यावरण जागरूकता को बढ़ावा देने के लिए प्रकृति भ्रमण दिवस का आयोजन किया गया

नई दिल्ली – पोषण पखवाड़ा के तहत चल रहे कार्यक्रमों के अंतर्गत, मिजोरम के मामित जिले में रीएक आईसीडीएस परियोजना के तहत एक आंगनवाड़ी केंद्र में प्रकृति भ्रमण दिवस का सफल आयोजन किया गया। इस पहल का उद्देश्य प्रारंभिक बाल्यावस्था शिक्षा को बढ़ावा देना और छोटे बच्चों में प्राकृतिक पर्यावरण के प्रति जागरूकता बढ़ाना था।

इस कार्यकलाप के दौरान, आंगनवाड़ी कार्यकर्ता, सहायक और अभिभावकों के साथ बच्चों को निकटवर्ती क्षेत्रों में थोड़ी देर सैर पर ले जाया गया। इस सैर ने बच्चों को प्रकृति के विभिन्न तत्वों जैसे पेड़, फूल, पक्षी, तालाब, कुएं और पत्थर आदि से परिचित कराने का एक प्रायोगिक शिक्षा का अवसर प्रदान किया।

बच्चों को अपने परिवेश में रंगों, ध्वनियों और आकृतियों का बारीकी से अवलोकन करने के लिए प्रोत्साहित किया गया, जिससे उनके संवेदी विकास और संज्ञानात्मक क्षमताओं को बढ़ावा मिला। गतिविधि की अंतःक्रियात्मक प्रकृति ने जिज्ञासा को बढ़ावा दिया, अवलोकन क्षमता को बढ़ाया और बच्चों में प्रकृति के प्रति सराहना और प्रेम की भावना पैदा की।

 

पोषण पखवाड़ा के अंतर्गत ऐसी गतिविधियां प्रारंभिक बाल्यावस्था देखभाल और शिक्षा के साथ पोषण जागरूकता को एकीकृत करके बच्चों के समग्र विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। अभिभावकों की सहभागिता से बच्चों के लिए पोषणपूर्ण वातावरण के महत्व के प्रति सामुदायिक भागीदारी और जागरूकता को और मजबूती मिलती है।

रीएक आईसीडीएस प्रोजेक्ट में आयोजित नेचर वॉक डे को काफी सराहा गया और यह एक सार्थक और ज्ञानवर्धक अनुभव साबित हुआ, जिसने बच्चों के समग्र विकास में सकारात्मक योगदान दिया।

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शहर में यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से व्यापक अभियान प्रारंभ

रांची,23.04.2026 – शहर में सुगम, सुरक्षित एवं व्यवस्थित यातायात व्यवस्था सुनिश्चित करने के उद्देश्य से रांची नगर निगम, ट्रैफिक पुलिस, जिला प्रशासन, एनएचएआई, पथ निर्माण विभाग एवं जेबीवीएनएल द्वारा संयुक्त रूप से व्यापक अभियान प्रारंभ किया गया है।

इसी कड़ी में आज 23.04.2026 को अपर नगर आयुक्त श्री संजय कुमार एवं पुलिस अधीक्षक (यातायात) श्री राकेश सिंह के नेतृत्व में उक्त सभी विभागों की टीम के द्वारा कचहरी रोड से नागा बाबा खटाल स्थित वेजिटेबल मार्केट होते हुए किशोरी यादव चौक एवं रातु रोड चौक तक का स्थलीय निरीक्षण किया गया।

निरीक्षण के दौरान यातायात बाधाओं, अतिक्रमण, अव्यवस्थित ऑटो संचालन, अवैध वसूली एवं जाम के प्रमुख कारणों का गहन आकलन कर त्वरित एवं दीर्घकालिक समाधान हेतु कार्ययोजना तैयार की गई एवं आवश्यक दिशानिर्देश दिए गए।

इस दौरान उप नगर आयुक्त श्री रविंद्र कुमार, उप नगर आयुक्त श्री गौतम प्रसाद साहू, पुलिस उपाधीक्षक, सहायक नगर आयुक्त, नगर प्रबंधक, निगम, ट्रैफिक विभाग, एनएचएआई, पथ निर्माण विभाग, जेबीवीएनएल एवं जिला प्रशासन की अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।

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शूटर सत्यम पाठक का राँची पुलिस ने किया एनकाउंटर,पैरों में लगी गोली

राँची,22.04.2026 – राँची के धुर्वा के पूर्व पार्षद और पंडरा में जमीन कारोबारी की गोली मारकर हत्या करने वाला शूटर सत्यम पाठक का राँची पुलिस ने एनकाउंटर किया है।

बुधवार की सुबह पंडरा ओपी क्षेत्र के कांके डैम के पास शूटर सत्यम पाठक के साथ राँची पुलिस की मुठभेड़ हो गई।इस दौरान पुलिस के द्वारा किए गए आत्मरक्षा में फायरिंग में सत्यम पाठक के दोनों पैर में गोली लगी है।

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भारत की राष्ट्रपति ने कोरिया गणराज्य के राष्ट्रपति की मेज़बानी की

नई दिल्ली – भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (20 अप्रैल 2026) राष्ट्रपति भवन में कोरिया गणराज्य के राष्ट्रपति, महामहिम ली जे-म्युंग का स्वागत किया। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने उनके सम्मान में भोज का भी आयोजन किया।

भारत की अपनी पहली यात्रा पर राष्ट्रपति म्युंग का स्वागत करते हुए, राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने भारत-कोरिया द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूत करने, विशेष रूप से ‘कोरिया-भारत संसदीय मैत्री समूह’ के अध्यक्ष के रूप में उनके महत्वपूर्ण योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपति के रूप में उनके कार्यकाल के पहले वर्ष के भीतर ही यह यात्रा, हमारे संबंधों को दिए जाने वाले उनके महत्व को दर्शाती है।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत और कोरिया दोनों ही जीवंत लोकतंत्र हैं जो समान मूल्यों को साझा करते हैं। उन्हें यह जानकर प्रसन्नता हुई कि भारत की संसद में हाल ही में ‘भारत-कोरिया संसदीय मैत्री समूह’ का गठन किया गया है। उन्होंने कहा कि इससे भारतीय संसद और कोरियाई नेशनल असेंबली के बीच संवाद और आदान-प्रदान को बढ़ावा मिलेगा। इससे आपसी समझ और विश्वास और अधिक मज़बूत होंगे।

राष्ट्रपति को यह जानकर खुशी हुई कि दोनों पक्षों ने जहाज़ निर्माण, बंदरगाह विकास, डिजिटल सहयोग, लघु और मध्यम उद्यम, इस्पात, शिक्षा, अनुसंधान, संस्कृति और लोगों से लोगों के बीच संपर्क सहित कई क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग के लिए महत्वाकांक्षी कार्यक्रम निर्धारित किया है। उन्होंने यह भी बताया कि दोनों पक्षों ने ‘व्यापक आर्थिक साझेदारी समझौते’ (सीईपीए) पर वार्ता फिर से शुरू करने के लिए संयुक्त घोषणा को अपनाया है। उन्होंने कहा कि भारत पारस्परिक रूप से लाभकारी व्यापार संबंधों को आगे बढ़ाने और एआई, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, स्वच्छ ऊर्जा, सेवाओं और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में कोरिया के साथ सहयोग को मज़बूत करने के लिए तत्पर है।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत के पास कौशल, गति और व्यापक संभावनाएं हैं, जबकि कोरिया के पास हाई-टेक विनिर्माण में विशेषज्ञता है। अपनी ताकतों को मिलाकर, हम अपने युवाओं के लिए अनगिनत अवसर सर्जित कर सकते हैं।

राष्ट्रपति ने कहा कि भारत और कोरिया को मानवता के लिए स्थायी भविष्य सुनिश्चित करने हेतु हरित और स्वच्छ ऊर्जा, के साथ ही अन्य जलवायु प्रौद्योगिकियों के क्षेत्र में सहयोग के अवसरों की तलाश करनी चाहिए।

दोनों नेता इस बात पर सहमत हुए कि भारत और कोरिया के बीच घनिष्ठ सहयोग से हमारे लोगों को अपार लाभ मिल सकता है और दोनों एक-दूसरे से बहुत कुछ सीख सकते हैं। पर्यावरण, नवाचार, शिक्षा, कौशल विकास और प्रौद्योगिकी जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम करके हमारे लोग लाभान्वित हो सकते हैं।

राष्ट्रपति का भाषण देखने के लिए कृपया यहाँ क्लिक करें

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कटिहार में 8वें Poshan Pakhwada के तहत विभिन्न पोषण जागरूकता गतिविधियाँ आयोजित की गईं

पोषण पखवाड़ा के आठवें चरण के तहत, जो पूरे देश में मनाया जा रहा है, कटिहार बिहार में पोषण जागरूकता गतिविधियाँ आयोजित की गईं।

नई दिल्ली – 22.04.2026 – आज  20.04.2026 को श्री आशुतोष द्विवेदी, भा०प्रा०से०, जिला पदाधिकारी महोदय द्वारा कटिहार सदर के 3 बच्चे एवं कटिहार ग्रामीण के 2 बच्चे (कुल 5 बच्चों) को आंगनबाड़ी केंद्र पर प्रारंभिक स्कूल पूर्व शिक्षा पूर्ण होने के पश्चात विद्यारंभ प्रमाण पत्र देकर प्रोत्साहित किया गया । जिला पदाधिकारी महोदय द्वारा उपस्थित बच्चे के साथ मृदुल संवाद किया गया।

 

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