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सोना- चांदी के भाव में मजबूती

इंदौर 25 मार्च (एजेंसी)। स्थानीय सर्राफा बाजार में सोना एवं चांदी बढ़कर बिकी।
उल्लेखनीय है कि सोना- चांदी के भाव में देर रात तक फेरबदल होता रहता है।
सोना 58300 रुपये प्रति 10 ग्राम।
चांदी 68000 रुपये प्रति किलोग्राम।
चांदी सिक्का 750 रुपये प्रति नग।

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बैंकों में जरूरी काम निपटाने वाले रखें ध्यान, 31 मार्च तक खुली रहेंगी सभी शाखाएं

नई दिल्ली 23 मार्च (एजेंसी)। अगर आप ने बैंक से जुड़े काम निपटाने हैं तो आपके लिए अच्छी खबर है। रिजर्व बैंक आफ इंडिया ने बैंकों की सभी ब्रांचें 31 मार्च तक खुली रखने को कहा है।

हालांकि 1 और 2 अप्रैल को बैंकों में कामकाज नहीं होगा। आरबीआई ने कहा कि 31 मार्च को फाइनेंशियल ईयर 2022-23 खत्म हो जाएगा। सरकार से जुड़े सभी ट्रांजैक्शंस इस तारीख तक सेटल हो जाने चाहिए।

आरबीआई की प्रेस रिलीज में कहा गया है, सभी एजेंसी बैंकों को अपने ब्रांचेस को सरकार से जुड़े ओवर द काउंटर ट्रांजेक्शन के लिए 31 मार्च को नॉर्मल वर्किंग आवर तक खुला रखना होगा।

केंद्रीय बैंक ने यह भी कहा है कि नेशनल इलेक्ट्रॉनिक फंड्स ट्रांसफर और रियल टाइम ग्रॉस सेटलमेंट सिस्टम के जरिए होने वाले ट्रांजेक्शंस 31 मार्च को 24:00 (रात 12 बजे) तक जारी रहेंगे।

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हिंडनबर्ग का ट्वीट, एक और बड़े खुलासे की तैयारी!

नई दिल्ली 23 मार्च (एजेंसी)। अडानी ग्रुप पर बड़ा धमाका करने के बाद हिंडनबर्ग एक और रिपोर्ट लाने जा रहा है। अमेरिका की शॉर्ट सेलिंग कंपनी हिंडनबर्ग ने ये जानकारी खुद ट्वीट करके दी है। बता दें कि हिंडनबर्ग की रिपोर्ट आने के बाद ही शेयर बाजार में अडानी ग्रुप की कंपनियों के शेयरे औंधे मुंह गिर गए थे जिसकी वजह से समूह को भारी नुकसान उठाना पड़ा।

23 जनवरी तक अडानी ग्रुप की कंपनियां लगातार बड़ी बढ़त हासिल करने में सफल हो रही थी। अडानी ग्रुप की इस रफ्तार पर 24 जनवरी को ब्रेक लग गई। शॉर्ट सेलिंग कंपनी हिंडनबर्ग की एक रिपोर्ट ने स्थिति को बिगाड़ कर रख दिया।

अडानी ग्रुप इस रिपोर्ट के लेकर सफाई देता रहा, लेकिन कंपनियों के शेयरों में भारी गिरावट को नहीं रोका जा सका।

अडानी ग्रुप के मुखिया गौतम अडानी की संपत्ति सितंबर 2022 में 150 अरब डॉलर थी। जोकि इस रिपोर्ट के आने के बाद घटकर 53 अरब डॉलर के लेवल पर आ गई थी।

इस एक रिपोर्ट ने अडानी ग्रुप को फोर्ब्स की अमीरों की सूची में 35 स्थान से बाहर कर दिया था।

अडानी ग्रुप पर धमाका करने के बाद हिंडनबर्ग का अगला निशाना किस पर होगा यह एक बड़ा सवाल है। आज सुबह कंपनी ने ट्विटर पर लिखा, एक नई और बड़ी रिपोर्ट जल्द.।

यह ट्वीट ऐसे समय में आया है जब अमेरिका की बैंकिंग स्थिति खराब है और उसको लेकर लगातार सवाल खड़े किए जा रहे हैं।

हिंडनबर्ग के इस ट्वीट पर एक भारतीय ने कमेंट करते हुए लिखा कि उम्मीद है कि अगला निशाना इंडियन कंपनी नहीं होगी। चीनी कंपनियों पर कुछ रिपोर्ट करिए।

बता दें कि हिंडनबर्ग की रिपोर्ट को आधार बनाते हुए कांग्रेस सहित तमाम विपक्षी दल इस मसले पर जेपीसी के गठन की मांग कर रहे हैं।

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सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया ने किया अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन का आयोजन

नई दिल्ली 22 मार्च (एजेंसी)। सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, आंचलिक कार्यालय, दिल्ली में केंद्रीय कार्यालय मुम्बई के तत्वावधान में अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन का सफल आयोजन को किया गया।

इस सम्मेलन में मुख्य अतिथि के तौर पर अंशुली आर्या, सचिव राजभाषा विभाग, गृह मंत्रालय उपस्थित हुई। केंद्रीय कार्यालय मुम्बई से कार्यपालक निदेशक राजीव पुरी जी भी उपस्थित थे।

आंचलिक कार्यालय दिल्ली से अंचल प्रमुख जेएससाहनी, केंद्रीय कार्यालय मुम्बई से सहायक महाप्रबंधक राजभाषा राजीव वार्ष्णेय, आंचलिक कार्यालय दिल्ली के मुख्य प्रबंधक राजभाषा अशोक तनेजा जी भी उपस्थित थे। इस सम्मेलन में बैंक के अन्य आंचलिक कार्यालयों के राजभाषा अधिकारी उपस्थित हुए।

इस अवसर पर मुख्य अतिथि अंशुली आर्या द्वारा सभी राजभाषा अधिकारियों द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी का अवलोकन किया गया एवं किए जा रहे कार्य की भूरि-भूरि प्रशंसा की गई। इस अवसर पर उन्होंने अपने संबोधन में सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया द्वारा राजभाषा कार्यान्वयन के क्षेत्र में किए जा रहे नवोन्मेषी कार्यों की प्रशंसा की तथा राजभाषा कार्यान्वयन में श्रेष्ठ कार्य करने वाले अधिकारियों को प्रमाण पत्र भी प्रदान किए।

कार्यपालक निदेशक राजीव पुरी ने अपने संबोधन में अंशुली आर्या का स्वागत करते हुए कहा की आपके आगमन से हमारे राजभाषा अधिकारियों को विशेष प्रोत्साहन मिला है तथा राजभाषा कार्यान्वयन और तीर्व गति से होगा।

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रुपया तीन पैसे फिसला

मुंबई 22 मार्च (एजेंसी)। आयातकों और बैंकरों की लिवाली के दबाव में आज अंतरबैंकिंग मुद्रा बाजार में रुपया तीन पैसे फिसलकर 82.60 रुपये प्रति डॉलर रह गया।

इसके पिछले कारोबारी दिवस रुपया 82.57 रुपये प्रति डॉलर रहा था।

शुरुआती कारोबार में रुपया एक पैसे सुधरकर 82.56 रुपये प्रति डॉलर पर खुला और यही इसका दिवस का उच्चतम स्तर भी रहा।

हालांकि सत्र के दौरान लिवाली के दबाव में यह 82.70 रुपये प्रति डॉलर के निचले स्तर पर भी रहा।

अंत में पिछले दिवस के 82.57 रुपये प्रति डॉलर की तुलना में तीन पैसे फिसलकर 82.60 रुपये प्रति डॉलर रह गया।

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सोने में उछाल बैंकिंग संकट के चलते, अभी तेजी बनी रहेगी : कॉलिन शाह

मुंबई 21 मार्च (एजेंसी)। सोने की कीमतों में उछाल के बीच बाजार के विशेषज्ञ एवं रत्न आभूषण निर्यात परिषद के पूर्व अध्यक्ष कॉलिन शाह ने कहा कि यह उछाल मुख्य रूप से पश्चिमी देशों में इस समय चल रहे बैंकिंग संकट के कारण है क्योंकि निवेशक के लिए सोने पर दबाव अधिक सुरक्षित लगने लगा है।

सोने की कीमतें मुंबई बाजार में सोना कारोबार के दौरान 60 हजार रुपये प्रति 10 ग्राम के रिकार्ड स्तर को छू गयी हैं। कामा ज्यूलरी के संस्थापक एवं प्रबंध निदेशक श्री शाह ने सोने की इस चमक पर कहा, पिछले एक महीने में सोने की कीमतें लगभग 7-8 प्रतिशत बढ़ी हैं। पीली धातु में तेजी मुख्य रूप से पश्चिम में बैंकिंग संकट के कारण है।

उनकी राय में आने वाले कुछ महीनों तक सोने में तेजी बनी रहेगी और इसे भारत में आगामी त्योहारों से भी समर्थन
मिलेगा। इससे घरेलू बाजार में भाव 62,000 रुपये तक भी जा सकते हैं।

श्री शाह का कहना है कि बैंकिंग संकट के कारण बाजार को लग रहा है कि केंद्रीय बैंक अपनी नीतिगत ब्याज दरों में वृद्धि और धन का प्रवाह कम करने के अपने नीतिगत रुख में कुछ ठहराव या नरमी ला सकते हैं।

उन्होंने कहा, केंद्रीय बैंकों द्वारा बैंकिंग प्रणाली में तरलता (धन का प्रवाह) बढ़ाने और नीतिगत ब्याज दर में वृद्धि का अंश कम करने या कोई वद्धि न करने की उम्मीदें सोने की कीमतों को बढ़ा रही हैं। सोना ऐतिहासिक रूप से निवेश का एक सुरक्षित ठिकाना रहा है। अनिश्चितता के दौर में उसका महत्व और बढ़ा है।

उन्होंने कहा कि सोने की कीमतों का इस समय नयी ऊंचाई पर पहुंचना आर्थिक वृद्धि के और धीमा पडऩे तथा बैंकों में पर्याप्त तरलता के साथ कम ब्याज दरों में कमी किए जाने का संकेत है ताकि बैंकिंग प्रणाली को मौजूदा संकट से निपटने में मदद मिल सके।

उन्होंने सोने के बाजार में अभी कुछ समय तक तेजी बने रहने का अनुमान जताते हुए कहा कि विश्व स्तर पर मौजूदा स्थिति को स्पष्ट होने में कुछ समय लग सकता है। विश्व स्तर पर, केंद्रीय बैंक अपने स्वर्ण भंडार को बढ़ा भी रहे हैं। इसी तरह भारत में गुड़ी पड़वा से शुरू होने वाले त्योहारी सीजन की शुरुआत से खुदरा स्तर पर मांग को समर्थन मिलेगा।

श्री शाह ने कहा,  हमें उम्मीद है कि अगले कुछ महीनों में सोने में और तेजी आएगी और नयी ऊंचाई को छुएगा। घरेलू बाजार में इसके 61,000-62,000 प्रति 10 ग्राम के दायरे में रहने की उम्मीद है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में पीली धातु 2,050-2100 डालर प्रति औंस के स्तर तक जा सकती है।

उल्लेखनीय है कि अमेरिका में सिलीकान वैली बैंक (एसवीबी) के डूबने में फेडरल रिजर्व बैंक की कर्ज महंगा करने की नीति है, जिससे वहां सरकारी बांडों के दामों में भारी गिरावट आने से उनमें लगाए गए धन पर बैंकों को भारी घाटा उठाना पड़ रहा है। अटकले हैं कि फेडरल रिजर्व इस सप्ताह अपनी नीतिगत बैठक में ब्याज में वृद्धि को कुछ हल्का कर सकता है या वृद्धि करने में कुछ ठहर सकता है ताकि बैंकिंग क्षेत्र को लेकर चिंता कुछ हल्की हो।

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रुपया दो पैसे टूटा

मुंबई 21 मार्च (एजेंसी)। शेयर बाजार में गिरावट से विदेशी मुद्रा प्रवाह में कमी आने के दबाव में आज अंतरबैंकिंग मुद्रा बाजार में रुपया दो पैसे टूटकर 82.61 रुपये प्रति डॉलर पर रहा। रुपया पिछले सत्र में 82.59 रुपये प्रति डॉलर पर रहा था।

रुपया आज 11 पैसे की मजबूती के साथ 82.48 रुपये प्रति डॉलर पर खुला।

सत्र के शुरूआत में ही यह 82.45 रुपये प्रति डॉलर के उच्चतम स्तर तक चढ़ा लेकिन डॉलर की मांग आने के दबाव में यह 82.70 रुपये प्रति डॉलर के निचले स्तर तक टूटा।

अंत में यह पिछले दिवस के 82.59 रुपये प्रति डॉलर की तुलना में दो पैसे टूटकर 82.61 रुपये प्रति डॉलर पर रहा।

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शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया 11 पैसे चढ़कर 82.48 पर पहुंचा

मुंबई, 20 मार्च (एजेंसी)। कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट के बीच रुपया सोमवार को शुरुआती कारोबार में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 11 पैसे चढ़कर 82.48 पर पहुंच गया। कारोबारियों ने कहा कि अमेरिकी डॉलर की मजबूती और घरेलू शेयर बाजार के साथ-साथ वैश्विक शेयर बाजारों में कमजोर रूख से रुपये की बढ़त सीमित रही।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया डॉलर के मुकाबले 82.48 पर मजबूत खुला, फिर कुछ गिरावट के साथ 82.52 के स्तर पर आ गया। कुछ देर बाद रुपया 11 पैसे की बढ़त दर्ज करते हुए 82.48 पर कारोबार कर रहा था।

घरेलू मुद्रा 82.46 से 82.55 के दायरे में कारोबार कर रहा था। रुपया शुक्रवार को अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 82.59 के स्तर पर बंद हुआ था। इस बीच छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की स्थिति को दर्शाने वाला डॉलर सूचकांक 0.16 फीसदी बढ़कर 103.87 पर पहुंच गया।

वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड वायदा 0.52 प्रतिशत गिरकर 75.59 डॉलर प्रति बैरल के भाव पर था। विदेशी निवेशक शुक्रवार को भी शुद्ध बिकवाल रहे और उन्होंने इस दिन 1,766.53 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।

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कमजोर वैश्विक संकेतों के बीच सेंसेक्स 474 अंक टूटा, निफ्टी 17,000 के नीचे पहुंचा

मुंबई, 20 मार्च (एजेंसी)। वैश्विक बाजारों के कमजोर रुख और बैंकिंग, आईटी तथा वाहन कंपनियों के शेयरों में बिकवाली की वजह से सोमवार को शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी में लगभग एक प्रतिशत की गिरावट आई.

इस दौरान, बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 474.96 अंक यानी 0.82 प्रतिशत टूटकर 57,514.94 अंक पर आ गया. इसके 28 शेयर नुकसान में कारोबार कर रहे थे. वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 139.10 अंक या 0.81 प्रतिशत के नुकसान के साथ 16,960.95 अंक पर कारोबार कर रहा था. अडाणी एंटरप्राइजेज, जेडब्ल्यूएस स्टील और हिंडाल्को समेत इसके 45 शेयर नुकसान में थे.

सेंसेक्स में महिंद्रा एंड महिंद्रा में सबसे ज्यादा करीब 1.86 प्रतिशत की गिरावट आई. टाटा स्टील, टाटा मोटर्स, इंडसइंड बैंक, टेक महिंद्रा, इंफोसिस और टीसीएस में एक प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई. रिलायंस, एसबीआई, आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी, एचडीएफसी बैंक और एक्सिस बैंक के शेयर भी नुकसान में थे. दूसरी ओर, हिंदुस्तान यूनिलीवर तथा कोटक बैंक करीब 0.24 प्रतिशत के लाभ में कारोबार कर रहे थे.

विश्लेषकों ने कहा कि अमेरिका में बैंकिंग क्षेत्र के संकट से धारणा प्रभावित हो रही है, इसके अलावा विदेशी पूंजी की लगातार निकासी से भी चिंता बढ़ रही है. ज्यादातर एशियाई बाजारों में गिरावट रही है. हांगकांग, तोक्यो, दक्षिण कोरिया और सिंगापुर के बाजारों में गिरावट रही जबकि चीन का शेयर बाजार लाभ में रहा. अमेरिकी बाजार शुक्रवार को बंद थे. शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने शुक्रवार को शुद्ध रूप से 1,766.53 करोड़ रुपये के शेयर बेचे.

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जी कृष्णकुमार भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के नए अध्यक्ष

नई दिल्ली 19 मार्च (एजेंसी)। जी कृष्णकुमार को भारत पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन लिमिटेड (बीपीसीएल) का अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक नियुक्त किया गया है, एक बयान में यह जानकारी दी गई।

वर्तमान में बीपीसीएल के कार्यकारी निदेशक, वह तेल प्रमुख के साथ अपने 36 साल के सहयोग में व्यवसायों और कार्यात्मक डोमेन में विविध नेतृत्व के अनुभव के साथ उद्योग के दिग्गज हैं।

वह देश में डाउनस्ट्रीम ईंधन खुदरा उद्योग में क्रांति लाने में बीपीसीएल के अग्रणी कार्य के मूल में रहे हैं। कृष्णकुमार एनआईटी (पूर्ववर्ती क्षेत्रीय इंजीनियरिंग कॉलेज), तिरुचिरापल्ली से इलेक्ट्रिकल इंजीनियर हैं और उन्होंने जमनालाल बजाज इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट स्टडीज, मुंबई से वित्तीय प्रबंधन में स्नातकोत्तर किया है।

कंपनी की ओर से जारी बयान में कहा गया है कि उन्होंने सुविधा खुदरा बिक्री और प्रीमियम ईंधन में संगठन के ग्राहक-केंद्रित उद्यमों का नेतृत्व किया है और कंपनी में नई तकनीक और डिजिटल पहल शुरू करने वाले भी हैं, जो भारतीय तेल उद्योग में पहली बार है।

बयान में कहा गया- उन्होंने पेट्रो कार्ड, स्मार्टफ्लीट, स्पीड, इन एंड आउट जैसे ब्रांडों को भी विकसित और पोषित किया, जो बाजार में बीपीसीएल के अलग-अलग ग्राहक मूल्य प्रस्ताव में महत्वपूर्ण योगदानकर्ता रहे हैं, जो प्योर फॉर श्योर ग्राहक के वादे को मजबूत करते हैं।

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भारत में अच्छी तरह से विनियमित और निगरानी वाला बैंकिंग क्षेत्र है : आरबीआई गवर्नर

कोच्चि 19 मार्च(एजेंसी)। भारतीय रिजर्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने शुक्रवार को देश की बैंकिंग प्रणाली को हरी झंडी दिखाते हुए इस बात पर जोर दिया कि कैसे अमेरिका में हाल की घटनाओं ने बैंकिंग क्षेत्र के नियमन और पर्यवेक्षण की अहमियत को सामने ला दिया है।

उन्होंने केपी हॉरमिस स्मारक व्याख्यान देते हुए कहा- आज हमारे पास भारत में एक अच्छी तरह से विनियमित और अच्छी तरह से पर्यवेक्षित बैंकिंग क्षेत्र है। यह आरबीआई के डोमेन के तहत एनबीएफसी क्षेत्र और अन्य वित्तीय संस्थाओं पर लागू होगा।

होर्मिस केरल मुख्यालय वाले फेडरल बैंक के संस्थापक थे। दास ने बताया कि अब केवल लक्षणों से निपटने के बजाय कमजोरियों के मूल कारण की पहचान करने पर अधिक ध्यान दिया जाता है।

उन्होंने कहा- हमने वित्तीय संस्थाओं के निरीक्षण और आश्वासन कार्यों पर संशोधित दिशानिर्देश भी जारी किए हैं। उन्नत डेटा एनालिटिक्स का उपयोग हमारी पर्यवेक्षी प्रक्रिया का पूरक है।

साइबर लचीलापन को मजबूत करने के लिए, डिजिटल भुगतान सुरक्षा नियंत्रण दिशानिर्देशों के साथ बैंकों के लिए एक व्यापक साइबर सुरक्षा ढांचा जारी किया गया है। हमने पर्यवेक्षकों के कॉलेज की भी स्थापना की है और हाल के वर्षों में कर्मचारियों की संख्या में काफी वृद्धि की है।

दास ने इस बात पर ध्यान केंद्रित किया कि कैसे अमेरिकी बैंकिंग प्रणाली में हाल के घटनाक्रमों ने बैंकिंग क्षेत्र के विनियमन और पर्यवेक्षण की महत्वपूर्णता को सामने लाया है।

ये ऐसे क्षेत्र हैं जिनका हर देश की वित्तीय स्थिरता को बनाए रखने पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। अधिक विशेष रूप से, यूएस में ये विकास विवेकपूर्ण परिसंपत्ति देयता प्रबंधन, मजबूत जोखिम प्रबंधन, और देनदारियों और संपत्तियों में सतत विकास, समय-समय पर तनाव परीक्षण करने, और किसी भी अप्रत्याशित भविष्य के तनाव के लिए पूंजीगत बफर्स का निर्माण सुनिश्चित करने के महत्व को प्रेरित करते हैं।

उन्होंने कहा- वह यह भी बताते हैं कि क्रिप्टो मुद्राएं/संपत्ति या जैसे, प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से बैंकों के लिए एक वास्तविक खतरा हो सकता है। दास ने कहा- रिजर्व बैंक ने इन सभी क्षेत्रों में आवश्यक कदम उठाए हैं।

वित्तीय क्षेत्र और विनियमित संस्थाओं के विनियमन और पर्यवेक्षण को उपयुक्त रूप से मजबूत किया गया है।

नियामक कदमों में, अन्य बातों के अलावा, उत्तोलन अनुपात (जून 2019) का कार्यान्वयन, बड़े एक्सपोजर फ्रेमवर्क (जून 2019), वाणिज्यिक बैंकों में शासन पर दिशानिर्देश (अप्रैल 2021), मानक संपत्तियों के प्रतिभूतिकरण पर दिशानिर्देश (सितंबर 2021), एनबीएफसी के लिए स्केल-आधारित नियामक (एसबीआर) ढांचा (अक्टूबर 2021), माइक्रोफाइनेंस के लिए संशोधित नियामक ढांचा ( अप्रैल 2022), शहरी सहकारी बैंकों (यूसीबी) के लिए संशोधित नियामक ढांचा (जुलाई 2022) और डिजिटल ऋण देने पर दिशानिर्देश (सितंबर 2022) शामिल हैं।

भारत की जी20 अध्यक्षता पर, दास ने कहा कि यह ऐसे समय में आया है जब देश एक बार फिर दुनिया में सबसे तेजी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में उभरा है। उन्होंने कहा- वैश्विक आर्थिक व्यवस्था को नया रूप देने के लिए रचनात्मक योगदान देने की भारत की क्षमता पर अंतर्राष्ट्रीय विश्वास बढ़ रहा है।

कठिन अवतरण का जोखिम दुनिया भर में समाप्त हो गया है, यहां तक कि अपस्फीति की गति वांछनीय से कम बनी हुई है।

भू-आर्थिक विखंडन के प्रपाती प्रभावों से पहले वैश्विक ²ष्टिकोण को और कम करना, सहयोग के माध्यम से विश्वास का पुनर्निर्माण करना और महत्वपूर्ण वैश्विक चुनौतियों का समाधान करने के लिए बहुपक्षीय रूपरेखाओं को फिर से प्रतिबद्ध करना आवश्यक हो गया है।

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एक लाख लोगों के रोजगार पर संकट, दुनिया के इस बैंक ने खुद को घोषित किया दिवालिया

नई दिल्ली 18 मार्च (एजेंसी)। सिलिकॉन वैली बैंक ने आधिकारिक तौर पर खुद के दिवालियापन की घोषणा कर दी है। बैंक ने चैप्टर 11 बैंकरप्सी प्रोटेक्शन के लिए फाइल किया है।

एक अनुमान के मुताबिक बैंक के दिवालिया होने से एक लाख से ज्यादा लोगों के रोजगार पर संकट के बादल मंडराने लगे हैं। 10 हजार से ज्यादा स्टार्टअप्स पर इसका सीधा असर हो सकता है।

वहीं अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने कहा कि अमेरिकी करदाता असफल बैंक से हुए नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे। इससे पहले यूएस प्रशासन ने एक बड़ी घोषणा की। दिवालिया हुए बैंक में जमाकर्ताओं के बचाव के लिए अमेरिकी करदाता पर कोई अंकुश नहीं होगा।

सिलिकॉन वैली बैंक की मूल कंपनी फ़ाइनेंशियल ग्रुप ने अमेरिकी कानून के अध्याय 11 के तहत दिवाला संरक्षण के लिए आवेदन किया है। गौरतलब है कि अमेरिका ने पिछले सप्ताह एसवीबी को बंद कर दिया था।

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विदेशी मुद्रा भंडार 2.4 अरब डॉलर घटकर 560 अरब डॉलर पर

मुंबई 18 मार्च (एजेंसी)। विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति, स्वर्ण, विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास आरक्षित निधि में भारी कमी आने से 10 मार्च को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 2.4 अरब डॉलर घटकर 560 अरब डॉलर रह गया जबकि इसके पिछले सप्ताह यह 1.5 अरब डॉलर बढ़कर 562.4 अरब डॉलर पर रहा था।

रिजर्व बैंक की ओर से जारी साप्ताहिक आंकड़े के अनुसार, 10 मार्च को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार के सबसे बड़े घटक विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति 2.22 अरब डॉलर की गिरावट के साथ 494.9 अरब डॉलर रह गयी। इसी तरह इस अवधि में स्वर्ण भंडार में 11 करोड़ डॉलर की कमी हुई और यह गिरकर 41.9 अरब डॉलर पर आ गया।

आलोच्य सप्ताह विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) में 5.3 करोड़ डॉलर की कमी हुई और यह घटकर 18.1 अरब डॉलर रह गया। इस अवधि में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के पास आरक्षित निधि 1.1 लाख डॉलर कम होकर 5.1 अरब डॉलर पर आ गई।

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गौतम अडानी को राहत, बीएसई-एनएसई ने ग्रुप की 3 कंपनियों को निगरानी से हटाया

नई दिल्ली 17 मार्च (एजेंसी)। मुश्किलों में घिरे गौतम अडानी को बीएसई-एनएसई की तरफ से बड़ी राहत मिली है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज के एक फैसले से अरबपति उद्योगपति गौतम अडानी को बड़ी राहत मिली है।

एनएसई और बीएसई ने अडानी ग्रुप की तीन कंपनियां- अडानी एंटरप्राइजेज, अडानी पॉवर और अडानी विल्मर के शेयर्स पर से निगरानी (शॉर्ट टर्म सर्विलांस) हटा दी है। सर्कुलर के मुताबिक 17 मार्च से इन स्टॉक्स को शॉर्ट टर्म सर्विलांस से बाहर रखा जाएगा।

एनएसई और बीएसई ने ग्रुप की इन 3 कंपनियों को 8 मार्च से सर्विलांस के दायरे में रखा था। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस शॉर्ट टर्म सर्विलांस के हटने से इन कंपनियों के शेयर प्राइस में तेजी देखने को मिल सकती है।

शुक्रवार को बीएसई सेंसेक्स 443 अंक की बढ़त के साथ 58,078.11 अंक पर खुला। जबकि एनएसई निफ्टी में 147.80 अंक की तेजी देखी गई और ये 17,133.40 अंक पर खुला।

सर्विलांस के रहते इन कंपनियों के शेयर्स में इंट्रा-डे ट्रेडिंग के लिए 100 फीसदी अपफ्रंट मार्जिन की आवश्यकता होती है।बाजार में हाई लेवल पर उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों की सुरक्षा के लिए कुछ शेयर्स को शॉर्ट टर्म सर्विलांस फ्रेमवर्क में रखा जाता है।

बता दें कि निगरानी में रखे जाने के बाद 9 मार्च से इन शेयरों में गिरावट देखने मिली है। अडानी एंटरप्राइजेज के शेयर में 6त्न और अडानी विल्मर में 11त्न की गिरावट आई है, हालांकि अडानी पावर में 1.5त्न की वृद्धि हुई है।

अडानी ट्रांसमिशन, अडानी ग्रीन एनर्जी और अडानी टोटल गैस के शेयर्स अभी लंबी अवधि तक अतिरिक्त निगरानी के लिए शॉर्ट टर्म सर्विलांस के तहत बने रहेंगे।

जनवरी के अंत में अमेरिका की शॉर्ट सेलर कंपनी हिंडनबर्ग रिसर्च ने अडानी ग्रुप के खिलाफ एक रिपोर्ट जारी की थी। इसके बाद से अडानी समूह के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई है।

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रुपया 10 पैसे गिरा

मुंबई 17 मार्च (एजेंसी)।  आयातकों और बैंकरों की लिवाली से आज अंतरबैंकिंग मुद्रा बाजार में रुपया 10 पैसे गिरकर 82.75 रुपये प्रति डॉलर पर आ गया।

इसके पिछले कारोबारी दिवस रुपया 82.65 रुपये प्रति डॉलर पर रहा था।

कारोबार की शुरुआत में रुपया 13 पैसे लुढ़ककर 82.78 रुपये प्रति डॉलर पर खुला और सत्र के दौरान लिवाली के दबाव में 82.80 रुपये प्रति डॉलर के निचले स्तर तक लुढ़क गया। वहीं, बिकवाली की बदौलत यह 82.61 रुपये प्रति डॉलर के उच्चतम स्तर पर भी रहा। अंत में पिछले दिवस के 82.65 रुपये प्रति डॉलर के मुकाबले 10 पैसे गिरकर 82.75 रुपये प्रति डॉलर पर आ गया।

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ऐतिहासिक पहाड़ी मार्गो पर चलेगी 35 हाइड्रोजन ट्रेन

नई दिल्ली 16 मार्च (एजेंसी)।  रेल मंत्रालय बजट 2023-24 में 2800 करोड़ रुपए की लागत से विभिन्न विरासत व पहाड़ी मार्गो के लिए 35 हाइड्रोजन फ्यूल सेल आधारित ट्रेनों के लिए विकास कार्य कर रहा है।

रेल मंत्रालय को 2023-24 के दौरान पूंजीगत व्यय के लिए सकल बजट समर्थन (जीबीएस) के रूप में 2,40,000 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इसमें पूंजी के तहत 1,85,000 करोड़ रुपये, रेलवे सुरक्षा कोष के तहत 45,000 करोड़ रुपये और राष्ट्रीय रेल सुरक्षा कोष में योगदान के रूप में 10,000 करोड़ रुपये शामिल हैं।

2023-24 के लिए योजना शीर्ष ‘नई लाइनें’ के लिए सकल बजटीय सहायता में से कुल 31,850 करोड़ आवंटित किए गए हैं। 2023-24 के लिए नई लाइनों के लिए क्षेत्रवार निधि आवंटन किया गया है। इसके तहत केंद्रीय रेलवे को 1234.95 करोड़,

पूर्व रेलवे को 432.95 करोड़, उत्तरी रेलवे को 11617.30 करोड़, उत्तर पूर्वी रेलवे को 792.00 करोड़, पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे को 6591.00 करोड़, दक्षिण रेलवे को 1158.15 करोड़, दक्षिण केंद्रीय रेलवे को 819.50 करोड़, दक्षिण पूर्वी रेलवे 14.90 करोड़, पश्चिमी रेलवे 1011.70 करोड़, पूर्व मध्य रेलवे को 1518.02 करोड़, पूर्वी तट रेलवे 1984.00, उत्तर मध्य रेलवे 2.13 करोड़, उत्तर पश्चिमी रेल को 861.65 करोड़, दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे 389.00, दक्षिण पश्चिमी रेलवे 1408.35 और पश्चिम मध्य को 2014.40 करोड़ आवंटित किए हैं।

उन्होंने कहा कि नई ट्रेनों की शुरुआत रेलवे के नियमित दैनिक परिचालन का एक हिस्सा है। 2023-24 के लिए योजना शीर्ष ‘ग्राहक सुविधाएं’ के लिए सकल बजटीय सहायता में से 13,150 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।

बजट 2023-24 में 2800 करोड़ रुपये की लागत से विभिन्न विरासत व पहाड़ी मार्गो के लिए 35 हाइड्रोजन फ्यूल सेल आधारित ट्रेनों के विकास को शामिल किया गया है। इसके अलावा 600 करोड़ रुपए की लागत से विरासत मार्गो के लिए हाइड्रोजन इंफ्रास्ट्रक्चर को भी तैयार किया जा रहा है।

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रुपया 38 पैसे लुढ़का

मुंबई 16 मार्च (एजेंसी)। आयातकों और बैंकरों की लिवाली के दबाव में आज अंतरबैंकिंग मुद्रा बाजार में रुपया 38 पैसे लुढ़ककर 82.75 रुपये प्रति डॉलर रह गया। इसके पिछले कारोबारी दिवस रुपया 82.37 रुपये प्रति डॉलर रहा था।

शुरुआती कारोबार में रुपया चार पैसे की बढ़त लेकर 82.33 रुपये प्रति डॉलर पर खुला। सत्र के दौरान बिकवाली होने से यह 82.31 रुपये प्रति डॉलर के उच्चतम स्तर पर पहुंचा।

वहीं, लिवाली के दबाव में 82.80 रुपये प्रति डॉलर के निचले स्तर तक लुढ़क गया।

अंत में पिछले दिवस के 82.37 रुपये प्रति डॉलर की तुलना में 38 पैसे की गिरावट लेकर 82.75 रुपये प्रति डॉलर रह गया।

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अदाणी समूह ने समय से पहले चुकाया 2.15 अरब डॉलर का लोन, अंबुजा फाइनेंसिंग में इक्विटी बढ़ाई

मुंबई 13 मार्च (एजेंसी)। प्रमोटर लीवरेज चुकाने के लिए अपने प्रमोटरों की प्रतिबद्धता को जारी रखते हुए अडानी समूह ने 31 मार्च की प्रतिबद्ध समय-सीमा से काफी पहले मार्जिन लिंक्ड शेयर समर्थित वित्तपोषण का पूर्ण पूर्व भुगतान पूरा कर लिया है, जो कुल मिलाकर 2.15 अरब डॉलर है।

इसके अलावा, प्रमोटरों ने अंबुजा अधिग्रहण वित्तपोषण के लिए ली गई 50 करोड़ डॉलर की सुविधा का प्रीपेड भी लिया है। यह इक्विटी अंशदान बढ़ाने के लिए प्रवर्तकों की प्रतिबद्धता के अनुरूप है और प्रवर्तकों ने अब अंबुजा और एसीसी के लिए 6.6 अरब डॉलर के कुल अधिग्रहण मूल्य में से 2.6 अरब डॉलर का निवेश किया है।

बयान में कहा गया है कि 2.65 अरब डॉलर का पूरा पूर्व भुगतान कार्यक्रम 6 सप्ताह के भीतर पूरा हो गया है, जो मजबूत तरलता प्रबंधन और प्रायोजक स्तर पर पूंजी तक पहुंच को प्रमाणित करता है, जो सभी पोर्टफोलियो कंपनियों में अपनाई गई ठोस पूंजी विवेकशीलता का पूरक है।

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महिलाओं व वरिष्ठ नागरिकों के लिए नई जमा योजना की सीमा बढ़ी

नई दिल्ली 13 मार्च (एजेंसी)। आजादी का अमृत महोत्सव मनाने के लिए एक बार की नई छोटी बचत योजना, महिला सम्मान बचत प्रमाणपत्र मार्च 2025 तक उपलब्ध कराया जाएगा। यह घोषणा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बुधवार को केंद्रीय बजट 2023-24 पेश करते हुए की। यह आंशिक निकासी विकल्प के साथ 7.5 प्रतिशत की निश्चित ब्याज दर पर दो साल की अवधि के लिए महिलाओं या लड़कियों के नाम पर 2 लाख रुपये तक की जमा सुविधा प्रदान करेगा।

वरिष्ठ नागरिकों के लिए, वरिष्ठ नागरिक बचत योजना के तहत अधिकतम जमा सीमा 15 लाख रुपये से बढ़ाकर 30 लाख रुपये की जाएगी।
मासिक आय खाता योजना के लिए अधिकतम जमा सीमा एकल खाते के लिए 4.5 लाख रुपये से बढ़ाकर 9 लाख रुपये और संयुक्त खाते के लिए 9 लाख रुपये से बढ़ाकर 15 लाख रुपये की जाएगी।

बजट में कुल कैपेक्स परिव्यय को 33 प्रतिशत बढ़ाकर 7.5 लाख करोड़ रुपये से 10 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है।
अपने संबोधन में सीतारमण ने घोषणा की कि पूंजी निवेश परिव्यय को लगातार तीसरे वर्ष 33 प्रतिशत बढ़ाकर 10 लाख करोड़ रुपये किया जा रहा है, जो कि सकल घरेलू उत्पाद का 3.3 प्रतिशत होगा।

यह 2019-20 में परिव्यय का लगभग तीन गुना होगा।

केंद्र द्वारा प्रत्यक्ष पूंजी निवेश राज्यों को सहायता अनुदान के माध्यम से पूंजीगत संपत्ति के निर्माण के लिए किए गए प्रावधान द्वारा पूरक है। केंद्र के प्रभावी पूंजीगत व्यय का बजट 13.7 लाख करोड़ रुपए रखा गया है, जो जीडीपी का 4.5 फीसदी होगा।

एक्यूइट रेटिंग्स एंड रिसर्च के कार्यकारी निदेशक और मुख्य विश्लेषणात्मक अधिकारी सुमन चौधरी ने कहा कि बाजार सरकार से सार्वजनिक पूंजीगत व्यय के लिए एक और प्रतिबद्धता की उम्मीद कर रहा था और इसने निराश नहीं किया है।

केंद्रीय बजट में कुल कैपेक्स परिव्यय को 33 प्रतिशत बढ़ाकर 7.5 लाख करोड़ रुपये से 10.0 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है, जो इसे सकल घरेलू उत्पाद के 3 प्रतिशत के सर्वकालिक उच्च स्तर पर ले जाता है।

यह न केवल बुनियादी ढांचा क्षेत्र को बढ़ावा देगा बल्कि रोजगार और विकास के लिए भी सकारात्मक होगा।

आनंद राठी समूह के संस्थापक और अध्यक्ष आनंद राठी ने कहा कि पूंजीगत व्यय में 33 प्रतिशत की वृद्धि से यह 10 लाख करोड़ रुपये हो गया है, जो सड़कों, बंदरगाहों और हवाईअड्डों के निर्माण में सबसे ज्यादा लंबा रास्ता तय करेगा।

रेलवे में 2.4 लाख करोड़ रुपये का निवेश सराहनीय है।

राठी ने कहा कि अगले साल के लिए 15.43 लाख करोड़ रुपये की सकल उधारी का अनुमान सर्वेक्षण के 15.77 लाख करोड़ रुपये के अनुमान से कम है। उम्मीद है, इससे बॉन्ड बाजारों को खुशी मिलेगी।

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राज्यों के लिए 1.40 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि जारी

नयी दिल्ली 11 मार्च (एजेंसी)।  केन्द्र सरकार ने राज्यों के लिए केन्द्रीय कर में हिस्सेदारी के तौर पर आज 140318 करोड़ रुपये की 14वीं किश्त जारी की।
वित्त मंत्रालय ने आज यहां जारी बयान में कहा कि आमतौर पर हर महीने 70159 करोड़ रुपये जारी किये जाते हैं लेकिन राज्यों को आर्थिक तौर पर सशक्त बनाने की केन्द्र की प्रतिबद्धता के तहत इस बार 140318 करोड़ रुपये जारी किये गये हैं।

यह राशि 28 राज्यों को जारी की गयी है।

इसमें सबसे अधिक राशि 24783 करोड़ रुपये उत्तर प्रदेश को, 14232 करोड़ रुपये बिहार को, 11108 करोड़ रुपये मध्य प्रदेश को, 10642 करोड़ रुपये पश्चिम बंगाल को, 8535 करोड़ रुपये राजस्थान को, 6399 करोड़ रुपये ओडिशा को, 5474 करोड़ रुपये आंध्र प्रदेश को, 5125 करोड़ रुपये कर्नाटक को, 4929 करोड़ रुपये गुजरात को, 4827 करोड़ रुपये छत्तीसगढ़ को, 4681 करोड़ रुपये झारखंड को, 4417 करोड़ रुपये असम को जारी किये गये हैं।

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विदेशी मुद्रा भंडार 1.5 अरब डॉलर बढ़कर 562.4 अरब डॉलर पर

मुंबई 11 मार्च (एजेंसी)। विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति, स्वर्ण और अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) के पास आरक्षित निधि बढऩे से 03 मार्च को समाप्त सप्ताह में देश का विदेशी मुद्रा भंडार 1.5 अरब डॉलर बढ़कर 562.4 अरब डॉलर पर पहुंच गया जबकि इसके पिछले सप्ताह यह 32.5 करोड़ डॉलर घटकर 560.9 अरब डॉलर रहा था।

रिजर्व बैंक की ओर से जारी साप्ताहिक आंकड़े के अनुसार, 03 मार्च को समाप्त सप्ताह में विदेशी मुद्रा भंडार के सबसे बड़े घटक विदेशी मुद्रा परिसंपत्ति 1.2 अरब डॉलर की बढ़ोतरी लेकर 497.1 अरब डॉलर हो गयी। इसी तरह इस अवधि में स्वर्ण भंडार में 28.2 करोड़ डॉलर की बढ़त हुई और यह बढ़कर 42.03 अरब डॉलर पर पहुंच गया।

वहीं, आलोच्य सप्ताह विशेष आहरण अधिकार (एसडीआर) में 1.3 करोड़ डॉलर की कमी हुई और यह घटकर 18.17 अरब डॉलर रह गया। इस अवधि में अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष के पास आरक्षित निधि 80 लाख डॉलर बढ़कर 5.12 अरब डॉलर पर पहुंच गई।

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सेंसेक्स, निफ्टी में शुरुआती कारोबार में गिरावट

मुंबई,10 मार्च। वैश्विक बाजारों के कमजोर रुख तथा वित्तीय, आईटी और पूंजीगत सामान शेयरों में भारी बिकवाली से शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में शेयर बाजार में एक प्रतिशत से अधिक की गिरावट आई।

बीएसई का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स शुरुआती कारोबार में 730.17 अंक यानी 1.22 प्रतिशत टूटकर 59,076.11 अंक पर आ गया। शुरुआती कारोबार में सूचकांक गिरावट के साथ खुला और 59,062.72 के निचले स्तर तक गिर गया।

वहीं नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 201.05 अंक या 1.14 प्रतिशत के नुकसान से 17,388.55 अंक पर कारोबार कर रहा था।
45 निफ्टी शेयरों में अडाणी एंटरप्राइजेज, एचडीएफसी ट्विन्स (एचडीएफसी एवं एचडीएफसी बैंक) और इंडसइंड बैंक सबसे ज्यादा नुकसान में थे।

विश्लेषकों के अनुसार, सुस्त एशियाई बाजारों और अमेरिकी बाजार में रात भर के नुकसान ने वित्तीय, बैंकिंग, आईटी और पूंजीगत वस्तुओं के शेयरों में भारी बिकवाली की, तथा बेंचमार्क सूचकांकों में गिरावट आई।

सेंसेक्स की कंपनियों में एचडीएफसी के शेयर 2.53 प्रतिशत की गिरावट के साथ सबसे अधिक नुकसान में रहे। इसके अलावा इंडसइंड बैंक, एचडीएफसी बैंक, एलएंडटी, आईसीआईसीआई बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज, एक्सिस बैंक, इंफोसिस, टीसीएस और अल्ट्राटेक सीमेंट के शेयरों में गिरावट आई।

वहीं दूसरी ओर टाटा मोटर्स 0.75 प्रतिशत की तेजी के साथ लाभ में रहा। भारती एयरटेल और मारुति के शेयर भी लाभ में थे। एशियाई बाजारों में, अमेरिकी शेयरों में गिरावट के बाद हांगकांग, शंघाई, टोक्यो और सियोल के बाजारों में गिरावट आई।

पिछले कारोबारी सत्र में सेंसेक्स 541.81 अंक या 0.90 प्रतिशत की गिरावट के साथ 59,806.28 अंक पर रहा था। वहीं निफ्टी 164.80 अंक या 0.93 प्रतिशत टूटकर 17,589.60 अंक पर बंद हुआ था।

शेयर बाजार के आंकड़ों के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने बृहस्पतिवार को शुद्ध रूप से 561.78 करोड़ रुपये के शेयर बेचे।

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शुरुआती कारोबार में रुपया आठ पैसे टूटकर 82.14 प्रति डॉलर पर

मुंबई, 10 मार्च  (एजेंसी)। अमेरिकी मुद्रा में मजबूती के रुख के बीच शुक्रवार को शुरुआती कारोबार में रुपया आठ पैसे टूटकर 82.14 रुपये प्रति डॉलर पर आ गया।

अंतरबैंक विदेशी मुद्रा विनिमय बाजार में रुपया 82.12 प्रति डॉलर पर कमजोर स्थिति में खुलने के बाद और टूटकर 82.14 प्रति डॉलर पर आ गया। बृहस्पतिवार को रुपया 82.06 प्रति डॉलर पर बंद हुआ था।

अन्य मुद्राओं की तुलना में अमेरिकी मुद्रा की मजबूती का आकलन करने वाला डॉलर सूचकांक 0.11 प्रतिशत गिरकर 105.18 पर आ गया। वैश्विक मानक ब्रेंट कच्चा तेल वायदा 0.54 प्रतिशत की गिरावट के साथ 81.15 डॉलर प्रति बैरल पर था।

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बाजार में भारी उठापटक के बावजूद शेयरों में म्युचुअल फंड निवेश 1.5 लाख करोड़ के पार

नईदिल्ली,07 मार्च (एजेंसी)। चालू वित्त वर्ष के दौरान शेयर बाजार में तमाम उठापटक और बाधाओं के बावजूद शेयर बाजार पर देसी म्युचुअल फंडों का भरोसा बना हुआ है। वित्त वर्ष 2023 में म्युचुअल फंडों ने शेयरों में 1.5 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा शुद्ध निवेश किया है। यह लगातार दूसरा साल है, जब इतना अधिक निवेश हुआ है।

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड के आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष 2023 में 1 मार्च तक म्युचुअल फंडों ने शेयरों में 1.53 लाख करोड़ रुपये का शुद्ध निवेश किया है, जबकि वित्त वर्ष 2022 में 1.72 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया गया था। वित्त वर्ष 2015 से अभी तक केवल वित्त वर्ष 2021 को छोड़कर (2021 में 1.21 लाख करोड़ रुपये की बिकवाली की गई थी) म्युचुअल फंड शेयरों के शुद्ध लिवाल रहे। आंकड़ों से पता चलता है कि वित्त वर्ष 2015 से वित्त वर्ष 2023 तक पिछले 9 वित्त वर्ष में म्युचुअल फंडों ने देसी शेयर बाजार में 6.90 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया है।

मिरे ऐसेट इन्वेस्टमेंट मैनेजर्स (इंडिया) के मुख्य कार्याधिकारी और निदेशक स्वरूप मोहंती मानते हैं कि भारत में मजबूत आर्थिक वृद्धि देखकर म्युचुअल फंडों का शेयर बाजार में भरोसा बढ़ा है और उनके निवेश में तेजी आई है। मोहंती ने कहा, ‘मजबूत आर्थिक पैमानों के अलावा शेयरों में लगातार निवेश बढऩे के पीछे खुदरा निवेशकों के व्यवहार में बदलाव भी अहम है, जो पिछले कई वर्षों से सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के जरिये म्युचुअल फंडों में लगातार निवेश कर रहे हैं। इसने देसी शेयर बाजार का ढांचा बदल दिया है। इससे हर बार गिरावट के दौरान बाजार को म्युचुअल फंडों के निवेश से थोड़ी राहत मिलती है।

दूसरी ओर विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों ने चालू वित्त वर्ष में जमकर बिकवाली की है और शेयर बाजार से अभी तक 36,538 करोड़ रुपये निकाल लिए हैं। एनएसडीएल के आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2022 में उन्होंने 1.42 लाख करोड़ रुपये की निकासी की थी।

तुलनात्मक आधार पर देखें तो बाजार में भारी उतार-चढ़ाव के बावजूद पिछले दो वित्त वर्ष (मार्च 2021 से) में म्युचुअल फंडों ने देसी शेयर बाजार में 3.25 लाख करोड़ रुपये का निवेश किया है, जबकि विदेशी निवेशकों ने इस दौरान 1.78 लाख करोड़ रुपये निकाले हैं। इसकी वजह से चालू वित्त वर्ष में बीएसई सेंसेक्स 2.12 फीसदी बढ़ा है, जबकि बीएसई मिडकैप में 2 फीसदी की तेजी आई है। स्मॉलकैप सूचकांक 2.3 फीसदी गिरा है।

ऐसे में सवाल उठता है कि वित्त वर्ष 2024 में शेयर बाजार का रुख कैसा रहेगा। क्या बाजार में म्युचुअल फंडों का निवेश बरकरार रहेगा? विदेशी निवेश की क्या स्थिति रहेगी?

मोहंती मानते हैं कि वित्त वर्ष 2024 थोड़ा अलग रह सकता है। अगले वित्त वर्ष में अर्थव्यवस्था की वृद्धि की रफ्तार थोड़ी नरम पड़ सकती है, जिसका असर शेयर बाजार में निवेश पर भी दिख सकता है।

उन्होंने कहा, ‘पिछले दो साल में शेयर बाजार में निवेश शुरू करने वाले निवेशकों को लाभ नहीं हुआ है। आंकड़ों से पता चलता है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था भी ज्यादा मजबूत नहीं है। निवेशक इसे ध्यान में रखते हुए शेयर बाजार में निवेश कम कर सकते हैं।’

बीएनपी पारिबा में भारत में इक्विटी शोध प्रमुख कुणाल वोरा ने कहा, ‘घरेलू बाजार में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों की हिस्सेदारी दशक में सबसे कम है। चीन के बाजार खुलने और भारत में शेयरों का मूल्यांकन ज्यादा होने से विदेशी निवेशक 2023 में भी बिकवाली जारी रख सकते हैं।

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