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भारतीय शेयर बाजार तेजी के साथ बंद, निवेशकों ने कमाए करोड़ों रुपए

मुंबई ,08 अक्टूबर (एजेंसी) । भारतीय शेयर बाजार मंगलवार के कारोबारी सत्र में हरे निशान में बंद हुआ। दिन के अंत में सेंसेक्स 136.63 अंक या 0.17 प्रतिशत की बढ़त के साथ 81,926.75 और निफ्टी 30.65 अंक या 0.12 प्रतिशत की मजबूती के साथ 25,108.30 पर था।

लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप में खरीदारी देखी गई। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 274.30 अंक या 0.47 प्रतिशत की मजबूती के साथ 58,289.40 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 55.35 अंक या 0.31 प्रतिशत की बढ़त के साथ 17,983.40 पर था।

बाजार को ऊपर खींचने का काम रियल्टी शेयरों ने किया। निफ्टी रियल्टी इंडेक्स 1.09 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ। निफ्टी ऑटो (0.28 प्रतिशत), निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज (0.24 प्रतिशत), निफ्टी फार्मा (0.24 प्रतिशत), निफ्टी एनर्जी (0.28 प्रतिशत) और निफ्टी इन्फ्रा (0.37 प्रतिशत) हरे निशान में बंद हुआ। दूसरी तरफ निफ्टी पीएसयू बैंक (0.41 प्रतिशत), निफ्टी एफएमसीजी (0.53 प्रतिशत), निफ्टी मेटल (0.28 प्रतिशत) और निफ्टी मीडिया (0.48 प्रतिशत) की गिरावट के साथ बंद हुआ।

सेंसेक्स पैक में भारती एयरटेल, एचसीएल टेक, अल्ट्राटेक सीमेंट, पावर ग्रिड, बजाज फाइनेंस, एचडीएफसी बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, टाटा स्टील, इटरनल (जोमैटो) और मारुति सुजुकी टॉप गेनर्स थे। एक्सिस बैंक, टाटा मोटर्स, ट्रेंट, इन्फोसिस, एसबीआई, एचयूएल, कोटक महिंद्रा, बीईएल, टाइटन और टीसीएस टॉप लूजर्स थे।

बाजार के जानकारों ने कहा कि वैश्विक बाजारों से सकारात्मक रुझान के कारण घरेलू इक्विटी बाजार तेजी के साथ बंद हुए। आगामी आय सीजन में अच्छे अनुमान के कारण यह तेजी बनी रहनी की संभावना है।

उन्होंने आगे कहा कि सेक्टोरल प्रदर्शन मिश्रित रहा, जहां आरबीआई की पिछली नीतिगत बैठक में घोषित सुधारों के कारण वित्तीय शेयरों में तेजी आई, वहीं एफएमसीजी शेयर कमजोर नतीजों के अनुमान के कारण लाल निशान में बंद हुए। भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत तेजी के साथ हुई थी। सुबह 9:22 सेंसेक्स 124 अंक या 0.15 प्रतिशत की तेजी के साथ 81,914 और निफ्टी 40 अंक या 0.15 प्रतिशत की बढ़त के साथ 25,115 के ऊपर था।

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सोने ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, पहली बार 1.30 लाख रुपए के पार पहुंचा भाव; चांदी भी चमकी

नई दिल्ली 07 Oct,(एजेंसी) : त्योहारी सीजन से पहले भारतीय सर्राफा बाजार में सोमवार को सोने की कीमतों में सुनामी जैसी तेजी देखने को मिली। दिल्ली के सर्राफा बाजार में सोने का भाव ₹9,700 प्रति 10 ग्राम की एकदिनी उछाल के साथ ₹1,30,300 प्रति 10 ग्राम के अब तक के सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया। इस ऐतिहासिक वृद्धि के बाद अब 10 ग्राम सोने के आभूषण खरीदने के लिए ग्राहकों को सवा लाख रुपये से भी ज्यादा चुकाने होंगे।

सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी आग लग गई। चांदी का वायदा भाव ₹2,233 की तेजी के साथ ₹1,47,977 प्रति किलोग्राम के नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया।

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, इस अभूतपूर्व तेजी के पीछे कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय कारण जिम्मेदार हैं। इनमें सबसे प्रमुख वैश्विक अनिश्चितता है, जिसके तहत अमेरिका में सरकारी कामकाज को लेकर बने गतिरोध (शटडाउन) और बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के कारण निवेशक शेयर बाजार जैसे जोखिम भरे विकल्पों से पैसा निकालकर सोने में लगा रहे हैं, जिसे सबसे सुरक्षित निवेश (सेफ हेवन) माना जाता है।

इसके अलावा, डॉलर के मुकाबले रुपये में आई कमजोरी ने भी सोने के आयात को महंगा कर दिया है, जिसका सीधा असर घरेलू कीमतों पर पड़ा है।

साथ ही, मजबूत हाज-पड़ोस की मांग को देखते हुए सटोरियों ने वायदा बाजार में भी सोने की जमकर खरीदारी की है, जिसके चलते मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर दिसंबर डिलीवरी वाले सोने का भाव ₹1,20,075 प्रति 10 ग्राम और फरवरी 2026 डिलीवरी का भाव ₹1,21,350 प्रति 10 ग्राम के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया।

वैश्विक स्तर पर भी सोने-चांदी की कीमतों में जबरदस्त तेजी दर्ज की गई। दिसंबर में आपूर्ति वाले सोने का वायदा भाव दो प्रतिशत की बढ़त के साथ $3,973.60 डॉलर प्रति औंस के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया, जबकि चांदी की कीमत भी $48.58 डॉलर प्रति औंस के नए शिखर पर रही।

विश्लेषकों का मानना है कि जब तक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आर्थिक और राजनीतिक अनिश्चितता का माहौल बना रहेगा, कीमती धातुओं में तेजी का रुख जारी रह सकता है।

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अनिल अंबानी की कंपनी पर 14,000 करोड़ से ज्यादा के लोन फ्रॉड का आरोप

सीबीआई केस की तैयारी

नई दिल्ली ,25 जुलाई (एजेंसी)। रिलायंस कम्युनिकेशंस लिमिटेड और इसके प्रमोटर अनिल अंबानी पर बड़ा आरोप लगा है। कंपनी पर 14,000 करोड़ रुपये से ज्यादा के लोन फ्रॉड का मामला सामने आया है। यह जानकारी संसद में खुद केंद्रीय वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने दी है।

उन्होंने बताया कि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया ने रिलायंस कम्युनिकेशंस और अनिल अंबानी को रिजर्व बैंक की गाइडलाइंस के तहत धोखाधड़ी यानी फ्रॉड की कैटेगरी में डाल दिया है। सीबीआई ने इस फ्रॉड की जानकारी क्रक्चढ्ढ को दे दी है और अब ष्टक्चढ्ढ में केस दर्ज करने की तैयारी चल रही है।

रिलायंस कम्युनिकेशंस पर केनरा बैंक से भी 1,050 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का आरोप है। बैंकिंग सिस्टम में इतना बड़ा घोटाला सामने आने के बाद अब इसकी जांच और एजेंसियों के हाथ में है। सूत्रों के मुताबिक अनिल अंबानी और उनकी कंपनियों के विदेशों में छुपे बैंक अकाउंट्स और प्रॉपर्टी की भी जांच शुरू हो चुकी है।

माना जा रहा है कि आने वाले दिनों में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं। अब जब स्क्चढ्ढ ने धोखाधड़ी की पुष्टि कर दी है और ष्टक्चढ्ढ में शिकायत दर्ज की जा रही है, तो आने वाले वक्त में अनिल अंबानी की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। अन्य एजेंसियां भी इस मामले में एक्टिव हो सकती हैं।

ईडी ने गुरुवार को अनिल अंबानी से जुड़े अलग-अलग ठिकानों पर छापेमारी की है। ये छापेमारी दिल्ली और मुंबई में की गई है। मनी लॉन्ड्रिंग की जांच के लिए अनिल अंबानी के नेतृत्व वाले रिलायंस समूह से संबंधित 35 से ज्यादा परिसरों, 50 कंपनियों और 25 से अधिक लोगों के कई ठिकानों पर छापे मारे हैं।

सूत्रों के अनुसार, इस मामले में नेशनल हाउसिंग बैंक, सेबी, नेशनल फाइनेंशियल रिपोर्टिंग अथॉरिटी (एनएफआरए), बैंक ऑफ बड़ौदा जैसी अन्य एजेंसियों और संस्थानों ने भी ईडी के साथ जानकारी साझा की।

ईडी की प्रारंभिक जांच में बैंकों, शेयरधारकों, निवेशकों और अन्य सार्वजनिक संस्थानों के साथ धोखाधड़ी करके जनता के पैसों को इधर-उधर करने/निपटाने की एक सुनियोजित और सोची-समझी योजना का खुलासा हुआ है। साथ ही, यस बैंक लिमिटेड के प्रमोटर सहित बैंक अधिकारियों को रिश्वत देने का अपराध भी जांच के दायरे में है।

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फेसबूक-इंस्टा चलाते हैं तो हो जाएं अलर्ट! आपकी एक गलती खाली कर सकती है बैंक अकाउंट

सरकार ने जारी की एडवाइजरी

नई दिल्ली ,24 जुलाई (एजेंसी)।  अगर आप फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स (ट्विटर) और वाट्सऐप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स का इस्तेमाल करते हैं, तो यह खबर आपके लिए है। आपकी एक छोटी सी लापरवाही साइबर अपराधियों को आपके बैंक खाते तक पहुंचा सकती है।

देश में बढ़ते ऑनलाइन फ्रॉड को देखते हुए राष्ट्रीय साइबर क्राइम रिपोर्टिंग पोर्टल ने करोड़ों सोशल मीडिया यूजर्स के लिए एक एडवाइजरी जारी की है, जिसमें ऑनलाइन सुरक्षित रहने के तरीके बताए गए हैं।

पोर्टल के अनुसार, साइबर अपराधी अब सोशल मीडिया के जरिए ही अपने शिकार की तलाश कर रहे हैं। वे आपकी प्रोफाइल, आपकी पोस्ट्स और आपकी ऑनलाइन गतिविधियों पर नजर रखकर निजी जानकारियां जुटाते हैं.

फिर मौका देखकर आपको अपने जाल में फंसाकर बड़ा वित्तीय फ्रॉड करते हैं। सरकार का कहना है कि सोशल मीडिया का इस्तेमाल करना गलत नहीं है, लेकिन डिजिटल दुनिया में हर कदम सावधानी से उठाने की जरूरत है।

साइबर फ्रॉड से बचने के लिए बरतें ये 5 अहम सावधानियां

1. अजनबियों से बातचीत में सतर्कता: सोशल मीडिया पर किसी भी अनजान व्यक्ति से बातचीत करते समय सतर्क रहें। यह पहचानना मुश्किल होता है कि सामने वाला व्यक्ति असली है या कोई स्कैमर। ऐसे लोगों को अपनी कोई भी निजी जानकारी जैसे कि फोन नंबर, पता या वित्तीय जानकारी कभी न दें।

2. लुभावने विज्ञापनों को करें नजरअंदाज: सोशल मीडिया पर दिखने वाले हर विज्ञापन पर भरोसा न करें। स्कैमर्स अक्सर फर्जी विज्ञापन चलाकर लोगों को अपनी वेबसाइट पर ले जाते हैं और वहां जानकारी दर्ज कराते ही आपका डेटा चुरा लेते हैं, जिससे फ्रॉड हो सकता है।

3. मजबूत पासवर्ड और 2स्न्र का इस्तेमाल: अपने सभी सोशल मीडिया अकाउंट्स के लिए एक मजबूत और अलग-अलग पासवर्ड बनाएं। साथ ही, टू-फैक्टर ऑथेंटिकेशन  को हमेशा ऑन रखें। इससे अगर किसी को आपका पासवर्ड पता भी चल जाए, तो भी वह आपके अकाउंट में लॉग-इन नहीं कर पाएगा।

4. निजी जानकारी शेयर करने से बचें: लाइक्स और कमेंट्स के चक्कर में अपनी निजी तस्वीरें, लाइव लोकेशन, घर का पता या फोन नंबर जैसी संवेदनशील जानकारियां सोशल मीडिया पर कभी शेयर न करें। अपराधी इसी जानकारी का इस्तेमाल आपके खिलाफ कर सकते हैं।

5. प्राइवेसी सेटिंग्स को मजबूत करें: अपने सभी सोशल मीडिया अकाउंट्स की प्राइवेसी सेटिंग्स पर सेट करें। इससे कोई भी अनजान व्यक्ति आपकी प्रोफाइल और निजी जानकारी नहीं देख पाएगा और आप सुरक्षित रहेंगे।

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अमेरिकी शेयरों में जमकर पैसा लगा रहे भारतीय, इन कंपनियों में कर रहे सबसे ज्यादा निवेश

नई दिल्ली ,17 जुलाई (एजेंसी) । घरेलू शेयर बाजार के साथ-साथ अमेरिकी बाजार में भी भारतीय जमकर पैसा ला रहे हैं। घरेलू निवेशकों ने सबसे ज्यादा ट्रेड यूएस की चिप कंपनी एनवीडिया में किया है, जिसने हाल ही में चार ट्रिलियन डॉलर की मार्केटकैप की उपलब्धि हासिल की है। यह जानकारी बुधवार को जारी हुई एक रिपोर्ट में दी गई।

वेस्टेड फाइनेंस की ‘ग्लोबल इन्वेस्टिंग बिहेवियर रिपोर्ट के मुताबिक, अप्रैल-जून की अवधि में भारतीयों की ओर से अमेरिकी शेयरों में एनवीडिया को सबसे ज्यादा ट्रेड किया गया। कुल बाय वॉल्यूम में इसकी हिस्सेदारी 6.4 प्रतिशत थी, जबकि सेल वॉल्यूम में इसकी हिस्सेदारी 8.3 प्रतिशत थी।

रिपोर्ट में बताया गया कि सबसे ज्यादा नेट इनफ्लो गूगल की पेरेंट कंपनी अल्फाबेट में दर्ज किया गया। यूनिक निवेशकों में 113 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई है। इसके अलावा भारतीयों ने अन्य दिग्गज अमेरिकी कंपनियों जैसे टेस्ला, एडवांस्ड माइक्रो डिवाइस (एएमडी) और एप्पल आदि में भी निवेश किया है।

इसके अतिरिक्त, अन्य अमेरिकी कंपनी डुओलिंगो में निवेशकों की संख्या में 2,255 प्रतिशत की वृद्धि देखी गई, जबकि यूनाइटेडहेल्थ ग्रुप और नोवो नॉर्डिस्क जैसी स्वास्थ्य सेवा की दिग्गज कंपनियों के निवेशक आधार में 500 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि देखी गई।

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में खुदरा निवेशकों ने अमेरिकी टैरिफ के झटके और एसएंडपी 500 में उतार-चढ़ाव के बीच दूसरी तिमाही में वैश्विक निवेश दोगुना कर दिया।

वेस्टेड प्लेटफॉर्म पर खरीदारी की मात्रा में तिमाही-दर-तिमाही 20.47 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि प्रबंधनाधीन परिसंपत्तियों (एयूएम) में तिमाही-दर-तिमाही 35.4 प्रतिशत और साल-दर-साल 140 प्रतिशत की वृद्धि हुई। वर्ष की दूसरी तिमाही में ईटीएफ में भी अच्छी तेजी देखी गई।

रिपोर्ट में कहा गया, निवेशकों ने इन्वेस्को नैस्डैक 100 ईटीएफ (क्यूक्यूक्यूएम), आईशेयर्स सेमीकंडक्टर ईटीएफ (एसओएक्सएक्स), और वैनगार्ड एसएंडपी 500 ईटीएफ (वीओओ) जैसे फंडों के माध्यम से विविधीकरण की ओर रुख किया, जिससे निवेशकों की संख्या में क्रमश: 131 प्रतिशत, 101 प्रतिशत और 47 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

रिपोर्ट के अनुसार, जैसे-जैसे अमेरिकी डॉलर कमजोर हुआ और केंद्रीय बैंक की नीतियां अलग-अलग हुई हैं, भारतीय निवेशकों ने ईटीएफ के माध्यम से यूरोप, चीन और ब्राजील में निवेश अवसर खोजे हैं।

रिपोर्ट में कहा गया कि भारतीय निवेशक केवल समाचारों की सुर्खियों पर प्रतिक्रिया देने के बजाय दृढ़ विश्वास से प्रेरित पोर्टफोलियो बना रहे हैं क्योंकि स्वास्थ्य सेवा, सेमीकंडक्टर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) जैसे उद्योग मुख्यधारा में आ रहे हैं और वैश्विक एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) गति पकड़ रहे हैं।

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पीएफ धारकों के लिए अच्छी खबर, सरकार ने नियमों में किया ये बदलाव

नई दिल्ली ,14 जुलाई (एजेंसी) । भारत सरकार ने कर्मचारी भविष्य निधि के नियमों में बदलाव किए हैं। पीएफ के नए नियम में पैसे निकालने की समयसीमा भी घटा दी गई है। पहली बार घर खरीदने वालों के लिए अब पीएफ का पैसा निकालना आसान हो जाएगा।

पीएफ स्कीम के पैरा 68-अंतर्गत अब ईपीएफओ सदस्य अपने पीएफ अकाउंट से 90 प्रतिशत तक का पैसा निकाल सकेंगे। हालांकि, यह रकम सिर्फ नया घर खरीदने, निर्माण कार्य या घर की किश्तें चुकाने की शर्त पर ही निकाली जा सकती है।

पहले पीएफ अकाउंट खुलने के 5 साल बाद ही इसका पैसा निकाला जा सकता था, लेकिन अब इसे घटाकर 3 साल कर दिया गया है। वहीं, पहले घर खरीदने के लिए सिर्फ 36 महीने तक का ही पीएफ निकाला जा सकता था, लेकिन अब इसे भी बदलकर 90 प्रतिशत कर दिया गया है।

जून 2025 से किसी आपात स्थिति में यूपीआई और एटीएम के माध्यम से पीएफ अकाउंट से 1 लाख रुपये तक निकाला जा सकता है। पीएफ की ऑटो सेटेलमेंट लिमिट पहले 1 लाख रुपये तक ही थी, जिसे बढ़ाकर 5 लाख रुपये कर दिया गया है।

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नेशनल हाईवे पर अब आधा लगेगा टोल टैक्स

सरकार ने 50प्रतिशत तक की कटौती, जानिए नया नियम

नई दिल्ली ,07 जुलाई (एजेंसी)। सरकार ने टोल टैक्स के नियमो में बदलाव किया है। जिसके तहत सरकार ने कुछ खास हाइवेज पर टोल टैक्स में 50 प्रतिशत से ज्यादा की कटौती कर दी है।

सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय ने टोल टैक्स के नए नियमों को लेकर अधिसूचना जारी कर दी है, जिसके चलते अब लंबी दूरी तय करने वाले वाहन चालकों को कम टोल देने होगा। नए नियमों के तहत टोल टैक्स की गणना अब दो अलग-अलग तरीके से की जाएगी।

हृ॥्रढ्ढ के आदेश के मुताबिक, नए नियम के अनुसार, अगर हाईवेज में पुल, सुरंग, फ्लाईओवर या एलिवेटेड रोड होंगे तो टोल की गणना दो तरीके से की जाएगी। पहला, संरचना की लंबाई को 10 गुना करके अन्य सड़क की लंबाई में जोड़ा जाएगा।

इसके अलावा पूरी संरचना की लंबाई को पांच गुना करके, दोनों में से जो भी कम होगा, वही टोल की गणना का आधार बनेगा। इस नियम का लाभ एक्सप्रेस-वे या लंबी दूरी के यात्रियों को ज्यादा होगा।

इस नए नियम के जरिए सरकार का मकसद यात्रा के खर्च को कम करना है। नए नियमों का सबसे ज्यादा फायदा बाइपास और रिंग रोड्स पर सफर करने वाले लोगों को मिलेगा।

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किसानों के लिए बड़ी खबर! 20 जून को आएगी पीएम किसान की 20वीं किस्त

नई दिल्ली,12 जून (एजेंसी)। केंद्र सरकार के पीएम किसान सम्मान निधि (पीएम-किसान) की 20वीं किस्त इसी महीने जारी किए जाने की उम्मीद है. इस साल के लिए इस योजना की दूसरी किस्त 20 जून को 9.8 करोड़ पात्र किसानों के बैंक खातों में जमा की जाएगी.

भारत सरकार और कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि योजना (पीएम-किसान) शुरू की है, जिसके तहत भारत के प्रत्येक पात्र किसान को 6,000 रुपये की वार्षिक सब्सिडी मिलेगी, जो हर चार महीने में 2,000 रुपये के तीन बराबर भुगतानों में दी जाएगी.

लेटेस्ट घोषणा में भारत सरकार ने अधिसूचित और अनिवार्य किया है कि केवल वे किसान ही पीएम-किसान सम्मान निधि योजना के लाभ के लिए पात्र होंगे जिन्होंने रजिस्ट्रेशन प्रोसस पूरी कर ली है.

20वीं किस्त प्राप्त करने के लिए किसान किसान रजिस्ट्री यूपी मोबाइल ऐप, आधिकारिक पीएम किसान वेबसाइट या किसी भी सार्वजनिक सेवा सुविधा पर जाकर रजिस्ट्रेशन प्रोसस पूरी कर सकते हैं.

पीएम-किसान पूरे भारत में गरीब किसानों के लिए एक जीवन रेखा है. पीएम मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार की शुरू की गई यह योजना पात्र किसानों को प्रति वर्ष 6,000 रुपये देती है.

2019 में शुरू की गई पीएम-किसान योजना, गरीब और हाशिए पर पड़े किसानों को तीन बराबर किस्तों में प्रति वर्ष 6,000 रुपये देती है. मानसून की बुवाई के करीब होने के साथ, जून की किस्त खरीफ फसल के मौसम की तैयारी कर रहे लाखों ग्रामीण परिवारों के लिए महत्वपूर्ण है. सबसे बढ़कर, यह उस अवधि के दौरान समय पर वित्तीय सहायता भी देता है जब इनपुट लागत बढ़ जाती है.

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घरेलू यात्रियों में वृद्धि से भारत का टूरिज्म सेक्टर 2035 तक 42 लाख करोड़ रुपए का हो जाएगा : रिपोर्ट

नई दिल्ली ,05 जून(एजेंसी)। भारत के ट्रैवल और टूरिज्म सेक्टर का योगदान देश की अर्थव्यवस्था में 2035 तक बढ़कर 42 लाख करोड़ रुपए पहुंचने का अनुमान है। वर्ल्ड ट्रैवल एंड टूरिज्म काउंसिल (डब्ल्यूटीटीसी) की रिपोर्ट में यह जानकारी दी गई।

रिपोर्ट में बताया गया कि देश को प्रतिस्पर्धी बने रहने और इस सेक्टर की विकास की गति को बनाए रखने के लिए इन्फ्रास्ट्रक्चर और डेस्टिनेशन मार्केटिंग में अधिक निवेश करने की आवश्यकता है।

रिपोर्ट के अनुसार, 2024 में अंतरराष्ट्रीय यात्रियों द्वारा देश में किया जाने वाला खर्च प्री-कोविड स्तर को पीछे छोड़ते हुए ऑल-टाइम हाई 3.1 लाख करोड़ रुपए रहा था। इस दौरान घरेलू यात्रियों ने करीब 15.5 लाख करोड़ रुपए खर्च किए थे, जो कि 2019 के मुकाबले 22 प्रतिशत अधिक है।

इसके अतिरिक्त, डब्ल्यूटीटीसी की ओर से बताया गया कि भारत के ट्रैवल और टूरिज्म सेक्टर में 2035 तक नौकरियों की संख्या बढ़कर 6.4 करोड़ तक पहुंच जाएगी, जो कि फिलहाल 4.65 करोड़ पर है।

हाल ही में राष्ट्रीय राजधानी में सीआईआई ‘एनुअल बिजनेस समिट 2025Ó में केंद्रीय पर्यटन मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने कहा था कि ग्लोबल इकोनॉमी में 10 प्रतिशत योगदान टूरिज्म सेक्टर का होता है और मुझे यकीन है कि ग्लोबल पैरामीटर के तहत 2030 तक हमारा पर्यटन क्षेत्र भी देश की जीडीपी में 10 प्रतिशत का योगदान देगा। हम इस विजन पर तेजी से काम कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, भारत के टूरिज्म सेक्टर को प्रमोट करने और वैश्विक स्तर पर देश की क्षमता को बढ़ाने के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर क्रिएशन पहली जरूरत थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में सड़कें, एक्सप्रेसवे और डेढ़ लाख किलोमीटर के हाइवे बने, नया मॉडर्न रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार हुआ। नए एयरपोर्ट्स बने।

उन्होंने आगे कहा, हालांकि, अभी भी बहुत से काम किए जाने बाकी हैं। फ्लाइट्स की संख्या बढ़ाए जाने की जरूरत है। भविष्य में 3,000 एयरक्राफ्ट्स आने वाले हैं। एयरक्राफ्ट्स की बढ़ती संख्या इस बात का संकेत है कि दुनिया का भारत को देखने का नजरिया बदल रहा है।

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मोदी सरकार का पेंशन स्कीम पर बड़ा फैसला, केंद्रीय कर्मचारियों पर पड़ेगा असर

नई दिल्ली ,31 मई (एजेंसी)।  वित्त मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि 31 मार्च 2025 को या उससे पहले न्यूनतम 10 वर्ष की सेवा पूरी कर रिटायर हुए केंद्र सरकार के एनपीएस खाताधारक या उनके जीवनसाथी एकीकृत पेंशन योजना (यूपीएस) के तहत अतिरिक्त लाभ का दावा कर सकते हैं।

यूपीएस का विकल्प चुनने वाले रिटायर कर्मचारी को प्रत्येक पूर्ण की गई छह महीने की सेवा के लिए अंतिम मूल वेतन और उस पर महंगाई भत्ते के दसवें हिस्से का एकमुश्त भुगतान मिलेगा। साथ ही एनपीएस के तहत मासिक टॉप-अप राशि की गणना स्वीकार्य यूपीएस भुगतान और महंगाई राहत (डीआर) से एनपीएस के तहत प्राप्त पेंशन राशि को घटाकर की जाती है।

इसमें कहा गया कि सेवानिवृत्त कर्मचारियों को लागू पीपीएफ दरों के अनुसार साधारण ब्याज भी दिया जाएगा। ऐसे कर्मचारियों या उनके जीवनसाथी द्वारा दावा करने की अंतिम तारीख 30 जून, 2025 है। बता दें कि वित्त मंत्रालय ने जनवरी में एकीकृत पेंशन योजना (यूपीएस) को अधिसूचित किया था, जो सेवानिवृत्ति से पहले पिछले 12 महीनों में मिले औसत मूल वेतन के 50 प्रतिशत के बराबर पेंशन का वादा करती है।

यूपीएस उन केंद्रीय सरकारी कर्मचारियों पर लागू होगा जो राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली के तहत आते हैं और जो यह विकल्प चुनते हैं। अधिसूचना के अनुसार, पूरी तरह सुनिश्चित भुगतान की दर सेवानिवृत्ति से ठीक पहले 12 महीने के औसत मूल वेतन का 50 प्रतिशत होगी। इससे 23 लाख सरकारी कर्मचारियों को यूपीएस और एनपीएस के बीच चयन करने का विकल्प मिला। एनपीएस एक जनवरी, 2004 को लागू हुआ था।

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शेयर बाजार धड़ाम, सेंसेक्स 930 अंक गिरा, निवेशकों के 10 लाख करोड़ रुपए स्वाहा

मुंबई ,05 अपै्रल(एजेंसी)। भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार के कारोबार सत्र में लाल निशान में बंद हुआ। बाजार में चौतरफा बिकवाली देखने को मिली। कारोबार के अंत में सेंसेक्स 930 अंक या 1.22 प्रतिशत की गिरावट के साथ 75,364 और निफ्टी 345 अंक या 1.49 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 22,904 पर था। इसके चलते शेयर बाजार में आज निवेशकों के करीब 10 लाख करोड़ रुपये डूब गए।

गिरावट का असर लार्जकैप की अपेक्षा मिडकैप और स्मॉलकैप पर अधिक दिखा। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 1,516 अंक या 2.91 प्रतिशत की गिरावट के साथ 50,645 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 579 अंक या 3.57 प्रतिशत की कमजोरी के साथ 15,675 पर था। सेक्टोरल आधार पर ऑटो, आईटी, पीएसयू बैंक, फार्मा, मेटल, एनर्जी, इन्फ्रा और कमोडिटी इंडेक्स लाल निशान में बंद हुए। केवल फाइनेंशियल सर्विसेज और एफएमसीजी इंडेक्स ही हरे निशान में बंद हुए हैं।

सेंसेक्स पैक में बजाज फाइनेंस, एचडीएफसी बैंक, नेस्ले, आईसीआईसीआई बैंक, एशियन पेंट्स और आईटीसी टॉप गेनर्स थे। टाटा स्टील , टाटा मोटर्स, एलएंडटी, इंडसइंड बैंक, रिलायंस इंडस्ट्रीज, टेक महिंद्रा, सन फार्मा और एचसीएल टेक टॉप लूजर्स थे।

जियोजित इन्वेस्टमेंट लिमिटेड के रिसर्च हेड, विनोद नायर ने कहा कि हाल ही में अमेरिका द्वारा अनुमान से अधिक टैरिफ लागू किए जाने का वैश्विक बाजारों पर काफी असर हुआ है और निवेशक इससे हुए नुकसान की स्थिति का आकलन कर रहे हैं।

अमेरिका के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की संभावना ने अनिश्चितता को और बढ़ा दिया है। इससे अमेरिकी बॉन्ड यील्ड और कच्चे तेल की कीमतों में कमी आई है, जो संभावित आर्थिक मंदी और मंदी के बढ़ते जोखिम को लेकर चिंताओं को दर्शाता है।

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की ओर से रेसिप्रोकल टैरिफ के बाद यूएस के बाजारों में गुरुवार को भारी बिकवाली हुई। डाओ करीब 4 प्रतिशत और टेक्नोलॉजी इंडेक्स नैस्डैक करीब 6 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुआ।

विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने 3 अप्रैल को लगातार चौथे सत्र में अपनी बिकवाली का सिलसिला जारी रखा और 2,806 करोड़ रुपये के शेयर बेचे। इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशक (डीआईआई) लगातार पांचवें दिन शुद्ध खरीदार बने रहे और उन्होंने 221.47 करोड़ रुपये के शेयर खरीदे।

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रुपये में तेजी जारी, डॉलर के मुकाबले 3 महीने के उच्चतम स्तर पर पहुंचा

नई दिल्ली ,04 अपै्रल (एजेंसी)। डॉलर के मुकाबले रुपये में तेजी का दौर जारी है। शुक्रवार को यह 85 के नीचे पहुंच गया, जो कि अमेरिकी मुद्रा के खिलाफ तीन महीने का सबसे उच्चतम स्तर है।

कारोबारी सत्र की शुरुआत में डॉलर के मुकाबले रुपया 85.04 पर खुला और शुरुआती कारोबार में ही यह 84.99 पर पहुंच गया है, जो पिछले सत्र में डॉलर के मुकाबले रुपया की क्लोजिंग 85.44 से 40 पैसे अधिक है।

डॉलर के मुकाबले रुपये में तेजी की वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से लगाए गए रेसिप्रोकल टैरिफ से डॉलर के कमजोर होने और कच्चे तेल में गिरावट को माना जा रहा है।

ट्रंप द्वारा टैरिफ के ऐलान के बाद से दुनिया के छह बड़े देशों की मुद्रा के खिलाफ अमेरिकी मुद्रा की मजबूती दर्शाने वाले डॉलर इंडेक्स में बड़ी गिरावट देखी गई है। यह कमजोर होकर 101.69 के करीब आ गया है। टैरिफ ऐलान के समय गुरुवार को डॉलर 104 के आसपास था।

जानकारों का कहना है कि राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ उम्मीद से ज्यादा हैं, जिसके कारण अमेरिकी अर्थव्यवस्था के मंदी में जाने का खतरा है और इस कारण डॉलर में कमजोरी देखी जा रही है।

डॉलर के मुकाबले रुपये में मजबूती की एक वजह कच्चे तेल में बड़ी गिरावट होना है। ब्रेंट क्रूड 69.64 डॉलर प्रति बैरल के करीब बना हुआ है।
भारत अपनी जरूरत का 80 प्रतिशत से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, ऐसे में जब भी कच्चे तेल की कीमत में गिरावट आती है तो देश को बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा बचत करने में मदद मिलती है और इससे रुपये को सहारा मिलता है।

एलकेपी सिक्योरिटी में वीपी रिसर्च एनालिस्ट (कमोडिटी और करेंसी), जतिन त्रिवेदी ने कहा कि डॉलर के मुकाबले रुपये में तेज रिकवरी देखने को मिली है। वैश्विक संकेतों और एफआईआई फ्लो के कारण डॉलर के मुकाबले रुपया 85 से 85.90 के बीच में रह सकता है।

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आज से बदल जाएंगे इनकम टैक्स के कई नियम

12 लाख रुपये तक की रकम होगी टैक्स फ्री

नई दिल्ली, 01 अपै्रल(एजेंसी)। नया वित्त वर्ष आज से शुरू हो रहा है. इसके साथ ही इनकम टैक्स से जुड़े कई नियम बदलने जा रहे हैं.

आम बजट 2025 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कई अहम घोषणाएं कीं, जो 1 अप्रैल से लागू हो रही हैं, जिसका सीधा असर नौकरीपेशा लोगों की जेब पर पड़ेगा. इन नए नियमों में आयकर में अधिक छूट और टीडीएस नियमों में बदलाव शामिल हैं.

बजट में वित्त मंत्री द्वारा घोषित नई कर व्यवस्था के तहत आयकर में बढ़ी हुई छूट 1 अप्रैल से लागू हो रही है. अब 12 लाख रुपये तक की सालाना आय वाले लोग आयकर छूट के दायरे में आएंगे. पहले यह आंकड़ा 7 लाख रुपये था.

इसके अलावा अगर वेतनभोगियों को दी जाने वाली 75,000 रुपये की मानक कटौती को जोड़ दिया जाए तो आयकर छूट बढ़कर 12.75 लाख रुपये हो जाती है.

हालांकि आयकर छूट में पूंजीगत लाभ को शामिल नहीं किया गया है. इस पर अलग से टैक्स लगेगा.

सरकार ने नई कर व्यवस्था के तहत नए टैक्स स्लैब भी पेश किए हैं, जबकि पुरानी कर व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं किया गया है.

अब नई कर व्यवस्था के तहत 4 लाख रुपये तक की आय कर मुक्त होगी, जबकि 4 लाख रुपये से 8 लाख रुपये तक की आय पर 5 फीसदी टैक्स लगेगा.

जैसे-जैसे आय बढ़ेगी, कर की दरें धीरे-धीरे बढ़ेंगी और 24 लाख रुपये से अधिक की आय पर यह 30 फीसदी तक पहुंच जाएगी.

केंद्र सरकार ने बजट में धारा 87ए के तहत कर छूट को 25,000 रुपये से बढ़ाकर 60,000 रुपये कर दिया है, जिससे नई कर व्यवस्था में 12 लाख रुपये तक की आय कर-मुक्त हो जाएगी.

बैंक जमा पर मिलने वाले ब्याज पर टीडीएस कटौती की सीमा 40,000 रुपये से बढ़ाकर 50,000 रुपये कर दी गई है. इसका मतलब है कि अब बैंक जमा पर मिलने वाली 50,000 रुपये तक की राशि पर कोई टीडीएस नहीं काटा जाएगा.

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यूपीआई इस्तेमाल करने वालों के लिए जरूरी खबर

1 अप्रैल से इन मोबाइल नंबर्स पर बंद हो जाएगी सेवा

नई दिल्ली ,24 मार्च(एजेंसी)। यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) का उपयोग करने वाले करोड़ों लोगों के लिए एक महत्वपूर्ण खबर सामने आई है। यदि आपका बैंक खाते से जुड़ा मोबाइल नंबर लंबे समय से निष्क्रिय है, तो उसे तुरंत सक्रिय करा लें, अन्यथा आप 1 अप्रैल से यूपीआई सेवाओं का इस्तेमाल नहीं कर पाएंगे।

दरअसल, डिजिटल धोखाधड़ी को रोकने के उद्देश्य से 1 अप्रैल से यूपीआई भुगतान प्रणाली में एक नया नियम लागू होने जा रहा है। इस नए नियम के तहत, सभी बैंकों और भुगतान सेवा प्रदाताओं (पीएसपी) को 31 मार्च से पहले अपने डेटाबेस को अपडेट करना होगा। इस अपडेट के माध्यम से निष्क्रिय या बदले हुए मोबाइल नंबरों को सिस्टम से हटाया जाएगा। बैंकों को इस प्रक्रिया के तहत 31 मार्च तक निष्क्रिय मोबाइल

नंबरों को अपने डेटाबेस से अनिवार्य रूप से हटाना होगा।

नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) ने धोखाधड़ी की घटनाओं पर अंकुश लगाने के लिए डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (डीआईपी) पर उपलब्ध मोबाइल नंबर रिवोकेशन लिस्ट (एमएनआरएल) का उपयोग करने का सख्त निर्देश दिया है। इस प्रक्रिया के पूरा होने के बाद, निष्क्रिय मोबाइल नंबरों से जुड़े सभी यूपीआई खाते स्वत: ही बंद हो जाएंगे।

एनपीसीआई ने इस संबंध में बैंकों और गूगल पे, फोन पे जैसे प्रमुख यूपीआई ऐप के लिए सप्ताह में कम से कम एक बार मोबाइल नंबर रिकॉर्ड को अपडेट करना अनिवार्य कर दिया है। यूपीआई सेवाएं प्रदान करने वाली कंपनियों को संदिग्ध गतिविधियों की पहचान करने और उन्हें सिस्टम से हटाने के लिए एमएनआरएल या डिजिटल इंटेलिजेंस प्लेटफॉर्म (डीआईपी) का नियमित रूप से उपयोग करना होगा।

किन लोगों की यूपीआई सेवा हो सकती है बंद?

ऐसे उपयोगकर्ता जिन्होंने अपना मोबाइल नंबर बदल लिया है, लेकिन इसे अपने बैंक खाते के साथ अपडेट नहीं कराया है।
वे लोग जिन्होंने अपने मोबाइल नंबर को निष्क्रिय कर दिया है और बैंक में इसकी सूचना नहीं दी है।
जिन निष्क्रिय मोबाइल नंबरों का उपयोग कॉल, एसएमएस जैसी सामान्य सेवाओं के लिए भी नहीं किया जा रहा है, उन्हें यूपीआई नेटवर्क से हटा दिया जाएगा।

यूपीआई सेवा बंद होने से कैसे बचें?

यह सुनिश्चित करें कि आपके बैंक खाते से जुड़ा मोबाइल नंबर सक्रिय है और नियमित रूप से उपयोग किया जा रहा है। यदि यह निष्क्रिय है, तो इसे जल्द से जल्द रिचार्ज कराकर सक्रिय करें।

यदि आपने अपना मोबाइल नंबर बदल लिया है, तो तुरंत अपने बैंक में जाकर इसे अपडेट कराएं।

यदि आपकी यूपीआई आईडी किसी ऐसे मोबाइल नंबर से जुड़ी है जो निष्क्रिय है, तो 1 अप्रैल से पहले सेवा बंद होने से बचने के लिए आप एक नया सक्रिय मोबाइल नंबर प्राप्त कर सकते हैं और उसे अपने बैंक खाते और यूपीआई आईडी से लिंक कर सकते हैं।

यह नया नियम यूपीआई उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा को बढ़ाने और डिजिटल धोखाधड़ी को कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। सभी उपयोगकर्ताओं को सलाह दी जाती है कि वे अंतिम तिथि से पहले अपने मोबाइल नंबर की स्थिति की जांच कर लें और आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करें।

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केंद्र ने -15जी इनोवेशन हैकाथॉन 2025′ की घोषणा की

नई दिल्ली ,17 मार्च(एजेंसी)। दूरसंचार विभाग (डीओटी) ने सोमवार को ‘5त्र इनोवेशन हैकाथॉन 2025Ó की घोषणा की। छह महीने की अवधि वाली इस पहल का उद्देश्य सामाजिक और औद्योगिक चुनौतियों से निपटने के लिए इनोवेटिव 5जी पावर्ड सॉल्यूशन के विकास में तेजी लाना है।

संचार मंत्रालय के अनुसार, छात्रों, स्टार्टअप और पेशेवरों के लिए यह कार्यक्रम मेंटरशिप, फंडिंग और 100 से अधिक 5जी यूज केस लैब तक पहुंच प्रदान करता है। इससे प्रतिभागियों को दूरदर्शी विचारों को स्केलेबल टेक्नोलॉजी में बदलने में मदद मिलती है।

विजेताओं को पुरस्कार भी दिए जाएंगे, जिसमें प्रथम स्थान के लिए 5,00,000 रुपये, दूसरे स्थान के लिए 3,00,000 रुपये और तीसरे स्थान के लिए 1,50,000 रुपये तय किए गए हैं।

इसके अलावा, सर्वश्रेष्ठ विचार और मोस्ट इनोवेटिव प्रोटोटाइप को भी सम्मानित किया जाएगा, जिसके लिए प्रत्येक को 50,000 रुपये मिलेंगे।

दस प्रयोगशालाओं को सर्वश्रेष्ठ 5त्र उपयोग मामले के लिए प्रशंसा प्रमाण पत्र और उभरते संस्थान से सर्वश्रेष्ठ विचार के लिए एक प्रमाण पत्र भी दिया जाएगा।

बेस्ट 5जी यूज केस के लिए 10 लैब्स को सर्टिफिकेट्स दिए जाएंगे। इसके अलावा, उभरते संस्थानों में से एक को बेस्ट आइडिया के लिए सर्टिफिकेट दिया जाएगा।

हैकाथॉन प्रमुख 5जी एप्लीकेशन पर केंद्रित प्रपोजल को इनवाइट कर रहा है, जिसमें एआई-ड्रिवन नेटवर्क का रखरखाव, आईओटी-इनेबल्ड सॉल्यूशन, 5जी ब्रॉडकास्टिंग, स्मार्ट हेल्थ, कृषि, इंडस्ट्रियल ऑटोमेशन, गैर-स्थलीय नेटवर्क (एनटीएन), डीटूएम, वीटूएक्स और क्वांटम कम्युनिकेशन शामिल हैं।

प्रतिभागियों को वास्तविक दुनिया से जुड़ी परेशानियों के समाधान के लिए नेटवर्क स्लाइसिंग, क्वालिटी ऑफ सर्विस और कॉल-फ्लो परिदृश्यों जैसी 5जी सर्विस का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

हैकाथॉन प्रतिभागियों को उनके इनोवेशन को नेक्स्ट लेवल पर ले जाने में मदद करने के लिए मददगार है।

प्रतिभागियों को उनकी आईपी संपत्तियों को कमर्शियलाइज करने के लिए आईपीआर फाइलिंग में मदद मिलेगी।

हैकाथॉन कई चरणों में होगा। हर चरण को सावधानीपूर्वक डिजाइन किया गया है, ताकि आखिरी मूल्यांकन के लिए जमा किए गए प्रस्ताव से नए विचार सामने लाए जा सकें।

दूरसंचार विभाग की स्क्रीनिंग के लिए हर संस्थान को अधिकतम पांच प्रपोजल पेश करने का अवसर मिलेगा। इसके बाद क्षेत्रीय समितियां आगे के इवैल्यूशन (मूल्यांकन) के लिए सर्वोत्तम प्रविष्टियां चुनेंगी।

अंतिम चरण, मूल्यांकन और प्रदर्शन (इवैल्यूएशन और शोकेस), सितंबर 2025 के अंत में होगा। इस चरण में टीम अपने प्रोटोटाइप को टेक्निकल एक्सपर्ट इवैल्यूएशन कमिटी के सामने पेश करेंगी।

विजेताओं की घोषणा अक्टूबर में की जाएगी, जिसमें टॉप टीम देश के सबसे प्रतिष्ठित तकनीकी आयोजनों में से एक इंडिया मोबाइल कांग्रेस (आईएमसी) 2025 में अपने इनोवेश को पेश करेंगी।

1.5 करोड़ रुपये के बजट से समर्थित इस कार्यक्रम में सीड फंडिंग, आईपीआर असिस्टेंस, मेंटरशिप और परिचालन लागत शामिल हैं।

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भारत इस साल करेगा 800 अरब डॉलर से अधिक का निर्यात : पीयूष गोयल

नई दिल्ली ,17 मार्च(एजेंसी)। केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कहा कि सर्विसेज की बड़ी हिस्सेदारी के साथ भारत इस साल 800 अरब डॉलर से अधिक का निर्यात करने की राह पर है।

बदलते वैश्विक माहौल के बीच केंद्रीय मंत्री ने भरोसा दिलाया कि सरकार इसके लिए लगातार काम कर रही है और भारतीय निर्यातकों (माल और सेवा) का अच्छा भविष्य सुनिश्चित करने और देश के हितों की रक्षा करने में कोई कसर नहीं छोड़ेगी।

एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (ईपीसी) और इंडस्ट्री एसोसिएशन को अपने संबोधन के दौरान, मंत्री ने निर्यातक समुदाय के बीच सकारात्मकता और इस संकट को, जिसका आज दुनिया सामना कर रही है, एक अवसर में बदलने के लिए उनके आशावान होने की सराहना भी की।

अमेरिका के संबंध में उद्योग की चिंताओं को दूर करते हुए, केंद्रीय मंत्री ने ईपीसी से अपनी ताकत पर विचार करने और अमेरिका के साथ बेहतर जुड़ाव के लिए सरकार के साथ अपनी मांगों को साझा करने को कहा।

द्विपक्षीय समझौतों पर चल रहे प्रयासों पर गोयल ने कहा कि सरकार एक साथ कई ट्रैक पर काम कर रही है और उनमें से प्रत्येक ट्रैक का उद्देश्य भारतीय निर्यातकों के सर्वोत्तम हित को सुनिश्चित करना है।

केंद्रीय मंत्री ने संकेत दिया कि सरकार विशेष रूप से कुछ के साथ मुक्त व्यापार समझौतों (एफटीए) के अंतिम चरण में पहुंच गई है। गोयल इस बात को लेकर भी आश्वस्त थे कि इससे भारतीय निर्यातकों के लिए बेहतर अवसर पैदा होंगे और अधिक निवेश भी आएगा।

पारस्परिक टैरिफ पर बातचीत करते हुए गोयल ने कहा कि ईपीसी को अपनी संरक्षणवादी मानसिकता से बाहर आना होगा और उन्हें साहसी होने और अपनी ताकत एवं आत्मविश्वास से दुनिया से निपटने के लिए तैयार होने के लिए प्रोत्साहित किया है।

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AI की रेस में एलन मस्क ने भी रखा कदम

लॉन्च किया दुनिया का सबसे पावरफुल एआई Grok 3

नई दिल्ली 19 Feb,(एजेंसी) – दुनिया के सबसे अमीर शख्स और अमेरिका के बड़े कारोबारी एलन मस्क ने नया एआई चैटबॉट Grok 3 लॉन्च कर दिया है। एलन मस्क ने इसे दुनिया का सबसे स्मार्ट एआई बताया है। बता दें कि Grok 3 का सीधा मुकाबला चाइनीज DeepSeek और ChatGPT से होगा।

एलन मस्क एआई चैटबॉट Grok 3

एलन मस्क ने हाल ही में एक्स पर पोस्ट करते हुए Grok 3 के लॉन्च होने की घोषणा की थी, जिसके बाद अब एलन मस्क द्वारा नया एआई चैटबॉट Grok 3 लॉन्च कर दिया गया है। एआई चैटबॉट Grok 3 का इस्तेमाल पहले केवल एक्स के प्रीमियम यूजर्स कर पाएंगे। इसके लिए यूजर्स को एक्स को अपडेट करना होगा।

इसके अलावा एआई चैटबॉट Grok 3 के इस्तेमाल के लिए अलग से सब्सक्रिप्शन लॉन्च भी किए जाएंगे। दावा किया जा रहा है कि एआई चैटबॉट Grok 3 अबतक का सबसे स्मार्ट एआई होने वाला है, जिसे एक लाख Nvidia GPU की मदद से ट्रेनिंग दी गई है।

एलन मस्क ने बताया कि Grok 3 AI में वॉइस इंटरैक्शन फीचर पर काम किया जा रहा है, जिससे रियल टाइम बातचीत के लिए भी एक टूल मिलेगा। इस एआई के कई फीचर्स पर अभी काम किया जा रहा है।

मस्क ने यह भी बताया कि कंपनी ने अपने चैटबॉट का नाम ‘Grok’ क्यों रखा। उन्होंने कहा, “यह शब्द रॉबर्ट हेनलेन के उपन्यास ‘स्ट्रेंजर इन अ स्ट्रेंज लैंड’ से लिया गया है। इसमें यह शब्द मंगल ग्रह पर पले-बढ़े एक पात्र द्वारा इस्तेमाल किया जाता है, जिसका मतलब होता है किसी चीज़ को पूरी तरह से और गहराई से समझना।

” डेमो इवेंट में करीब 1 लाख लोग शामिल हुए। xAI ने बेंचमार्क दिखाए, जिसमें ग्रोक 3 ने विज्ञान, कोडिंग और गणित में जेमिनी 2 प्रो, डीपसीक वी3 और चैटGPT को पीछे छोड़ दिया। उन्होंने आगे कहा कि ‘ग्रोक’ शब्द गहरी समझ को दर्शाता है और “सहानुभूति इसका एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।”

आपको बता दें कि एलन मस्क का यह एआई चैटबॉट Grok 3 केवल 8 महीनों में तैयार किया गया है। इसे सिंथेटिक डेटाशीट पर मशीन लर्निंग टेक्निक जैसे रिइंफोर्समेंट लर्निंग की मदद से ट्रेनिंग दी गई है।

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न्यू ईयर से पहले बाजार में दिखी तेजी, सरकारी बैंकों के शेयर उछले

मुंंबई ,26 दिसंबर (एजेंसी)। क्रिसमस की छुट्टी के बाद भारतीय शेयर बाजार आज गुरुवार को बढ़त के साथ खुला है। बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक सेंसेक्स आज 78,557.28 अंक पर खुला। शुरुआती कारोबार में यह 0.44 फीसदी या 344 अंक की बढ़त लेकर 78,816 पर ट्रेड करता दिखाई दिया। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स के 30 शेयरों में से 28 शेयर हरे निशान पर और 2 शेयर लाल निशान पर थे। वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक निफ्टी आज 0.37 फीसदी या 88.95 अंक की बढ़त लेकर 23,816 पर ट्रेड करता दिखाई दिया। निफ्टी पैक के 50 शेयरों में से 42 शेयर हरे निशान पर और 8 शेयर लाल निशान पर थे।

इन शेयरों में दिखी तेजी

निफ्टी पैक के शेयरों में सबसे अधिक तेजी मारुति में 1.11 फीसदी, बीपीसीएल में 1.10 फीसदी, एसबीआई में 1 फीसदी, एक्सिस बैंक में 1 फीसदी और आईसीआईसीआई बैंक में 0.94 फीसदी देखने को मिली। वहीं, सबसे अधिक गिरावट एशियन पेंट में 0.49 फीसदी, सिप्ला में 0.32 फीसदी, ट्रेंट में 0.24 फीसदी, डॉ रेड्डी में 0.23 फीसदी और टीसीएस में 0.14 फीसदी देखने को मिली।
सेक्टोरेल सूचकांकों का हाल

सेक्टोरल सूचकांकों की बात करें, तो आज सबसे अधिक तेजी निफ्टी पीएसयू बैंक में 1.42 फीसदी दिखी। इसके अलावा, निफ्टी मेटल में 0.09 फीसदी, निफ्टी प्राइवेट बैंक में 0.71 फीसदी, निफ्टी ऑयल एंड गैस में 0.51 फीसदी देखने को मिली। इससे इतर निफ्टी मिडस्मॉल आईटी एंड टेलीकॉम में 0.10 फीसदी, निफ्टी कंज्यूमर ड्यूरेबल्स में 0.03 फीसदी, निफ्टी हेल्थकेयर इंडेक्स में 0.22 फीसदी, निफ्टी रियल्टी में 0.59 फीसदी, निफ्टी फार्मा में 0.34 फीसदी, निफ्टी मीडिया में 0.65 फीसदी, निफ्टी आईटी में 0.04 फीसदी, निफ्टी एफएमसीजी में 0.16 फीसदी की गिरावट दिखी।

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गौतम अडानी फिर सुर्खियों में, अमेरिका में लगा बड़ा आरोप

265 मिलियन डॉलर को लेकर किया गया ये दावा

नई दिल्ली ,21 नवंबर (एजेंसी) ।  भारतीय अरबपति और अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी पर अमेरिका में गंभीर आरोप लगाए गए हैं। ये आरोप उनकी कंपनी के निवेशकों को धोखा देने के हैं। उन पर अमेरिका में अपनी कंपनी को कॉन्ट्रेक्ट दिलाने के लिए 265 मिलियन डॉलर या करीब 2236 करोड़ रुपये की रिश्वत देने और इसे छिपाने का आरोप लगाया गया है। यह पूरा मामला अडानी ग्रुप की कंपनी अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड और एक अन्य फर्म से जुड़ा हुआ है।

अमेरिका में सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज कमीशन ने बुधवार को इस मामले में गौतम अडानी के भतीजे सागर अडानी, अडानी ग्रीन एनर्जी लिमिटेड के अधिकारियों समेत एक अन्य फर्म एज्योर पावर ग्लोबल लिमिटेड के कार्यकारी सिरिल काबेनेस के खिलाफ भी आरोप लगाए हैं।

रिपोर्ट में कहा गया है कि गौतम अडानी और उनके भतीजे सागर के साथ ही 7 सात अन्य प्रतिवादियों ने अपनी रिन्यूएबल एनर्जी कंपनी को कॉन्ट्रेक्ट दिलाने और भारत की सबसे बड़ी सौर ऊर्जा संयंत्र परियोजना विकसित करने के लिए भारतीय सरकारी अधिकारियों को लगभग 265 मिलियन डॉलर की रिश्वत देने पर सहमति जताई थी।

ऐसा दावा किया गया कि ये पूरा मामला अरबों डॉलर के मुनाफे से जुड़ा हुआ है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अभियोजकों ने आरोप लगाया है कि इस कॉन्ट्रेक्ट के जरिए अडानी ग्रुप को 20 सालों में करीब 2 अरब डॉलर से ज्यादा का मुनाफा होने की उम्मीद थी।

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जुलाई-सितंबर अवधि में भारत के शहरी क्षेत्रों में बढ़ा रोजगार

नई दिल्ली ,20 नवंबर (एजेंसी)। भारत के शहरी क्षेत्रों में 15 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों की श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीआर) जुलाई-सितंबर 2024 में बढ़कर 50.4 प्रतिशत हो गई है, जो कि जुलाई-सितंबर 2023 में 49.3 प्रतिशत थी। यह जानकारी सांख्यिकी मंत्रालय द्वारा सोमवार को जारी किए गए डेटा में दी गई।

बढ़ती हुई श्रम बल भागीदारी दर (एलएफपीआर) दिखाती है कि देश में रोजगार बढ़ रहा है।

लिंग आधार पर देखें तो शहरी क्षेत्रों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के पुरुषों के लिए एलएफपीआर जुलाई-सितंबर 2023 के दौरान 73.8 प्रतिशत से बढ़कर जुलाई-सितंबर 2024 के दौरान 75.0 प्रतिशत हो गया।

वहीं, शहरी क्षेत्रों में 15 वर्ष और उससे अधिक की महिलाओं में एलएफपीआर जुलाई-सितंबर 2024 में बढ़कर 25.5 प्रतिशत हो गया है, जो कि जुलाई-सितंबर 2023 में 24 प्रतिशत था।

श्रमिक जनसंख्या अनुपात (डब्ल्यूपीआर), जिसे शहरी क्षेत्रों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के व्यक्तियों के बीच जनसंख्या में नियुक्त व्यक्तियों के प्रतिशत के रूप में परिभाषित किया गया है, जुलाई-सितंबर 2023 के दौरान 46.0 प्रतिशत से बढ़कर जुलाई-सितंबर 2024 में 47.2 प्रतिशत हो गया है, जो रोजगार में वृद्धि का एक और संकेत है।

शहरी क्षेत्रों में 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के पुरुषों के लिए डब्ल्यूपीआर जुलाई-सितंबर 2023 में 69.4 प्रतिशत से बढ़कर जुलाई-सितंबर 2024 के दौरान 70.7 प्रतिशत हो गया है।

शहरों क्षेत्रों में 15 वर्ष या उससे अधिक के आयु के लोगों में बेरोजगारी दर जुलाई-सितंबर 2024 अवधि में गिरकर 6.4 प्रतिशत रही है, जो कि पिछले साल समान अवधि में 6.6 प्रतिशत थी, जो दिखाता है कि देश में बेरोजगारी दर में कमी आई है।

बेरोजगारी दर को श्रम बल में शामिल व्यक्तियों में बेरोजगार व्यक्तियों के प्रतिशत के रूप में परिभाषित किया जाता है। लिंग के आधार पर 15 वर्ष और उससे अधिक आयु के पुरुषों में बेरोजगारी दर जुलाई-सितंबर 2023 के दौरान 6.0 प्रतिशत से घटकर जुलाई-सितंबर 2024 में 5.7 प्रतिशत हो गई।

डेटा के अनुसार, 15 वर्ष और उससे अधिक आयु की महिलाओं में बेरोजगारी दर जुलाई-सितंबर 2023 में 8.6 प्रतिशत से घटकर जुलाई-सितंबर 2024 में 8.4 प्रतिशत हो गई।

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भारत में जीसीसी से 2030 तक पैदा होंगी 28 लाख नौकरियां

नई दिल्ली  13 Sep, । भारत दुनिया का ‘जीसीसी कैपिटल’ बनकर उभर रहा है। दुनिया के कुल ग्लोबल टेक्नोलॉजी कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) में भारत की हिस्सेदारी 17 प्रतिशत है और इसमें 19 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार मिल रहा है। यह जानकारी एक रिपोर्ट में दी गई।

जीसीसी मार्केट भारत में 2030 तक बढ़कर 99 से 105 अरब डॉलर का हो सकता है। इस दौरान देश में जीसीसी की संख्या बढ़कर 2,100 से लेकर 2,200 पहुंच सकती है। वहीं, इनमें कर्मचारियों की संख्या 25 लाख से 28 लाख तक पहुंच सकती है।

पिछले पांच वर्षों में देश में वैश्विक नौकरियों में तेज इजाफा देखने को मिला है। 6,500 से ज्यादा ऐसी नौकरियां अब पैदा हो चुकी हैं। इसमें 1,100 से ज्यादा पदों पर महिलाएं हैं।

नैस्कॉम-जिनोव की रिपोर्ट में कहा गया कि एक चौथाई से ज्यादा वैश्विक इंजीनियरिंग पद भारत में हैं। ये पद एयरोस्पेस, डिफेंस और सेमीकंडक्टर जैसी नई जनरेशन की टेक्नोलॉजी में हैं।

सेमीकंडक्टर फर्म और टेक सेक्टर की बहुराष्ट्रीय कंपनियां भारत में इनोवेशन को बढ़ाने के लिए प्रोडक्ट टीम का विस्तार कर रही हैं।

पिछले पांच वर्षों में 400 से ज्यादा नए जीसीसी और 1,100 से ज्यादा नए सेंटर्स देश में स्थापित हो चुके हैं और इसके कारण देश में जीसीसी की संख्या 1,700 के पार निकल गई है।

वित्त वर्ष 24 में भारत से जीसीसी ने 64.6 अरब डॉलर का निर्यात किया था। वित्त वर्ष 19 से भारत में औसत जीसीसी टैलेंट 24 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है और वित्त वर्ष 24 में 1,130 से ज्यादा कर्मचारी होने का अनुमान है।

देश में 90 प्रतिशत से ज्यादा जीसीसी फाइनेंसियल सेंटर्स, टेक्नोलॉजी ऑपरेशन और प्रोडक्ट इंजीनियरिंग के क्षेत्र में काम कर रहे हैं।

रिपोर्ट में कहा गया कि 220 से ज्यादा जीसीसी यूनिट्स अहमदाबाद, कोच्चि, तिरुवनंतपुरम और कोयंबटूर जैसे शहरों में स्थित हैं।

शेयर बाजार मजबूत ग्लोबल संकेतों के साथ सकारात्मक खुला

मुंबई 16 Aug, – मजबूत ग्लोबल संकेतों के कारण शुक्रवार के कारोबारी सत्र में भारतीय शेयर सकारात्मक खुला। बाजार में चौतरफा खरीदारी देखने को मिल रही है। सुबह 9:21 पर सेंसेक्स 735 अंक या 0.93 प्रतिशत की तेजी के साथ 79,841 और निफ्टी 224 अंक या 0.93 प्रतिशत की बढ़त के साथ 24,387 पर था।

इंडिया विक्स में 4.21 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिल रही है और यह 14.79 पर बना हुआ है, जो दिखाता है कि बाजार में स्थिरता बनी हुई है। बाजार में रुझान तेजी का है। नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) पर 1704 शेयर हरे निशान में और 345 शेयर लाल निशान में हैं। सेंसेक्स में सभी 30 शेयर हरे निशान में हैं।

एमएंडएम, टाटा मोटर्स, टेक महिंद्रा, टीसीएस, आईसीआईसीआई बैंक, विप्रो, जेएसडब्ल्यू स्टील और टाटा स्टील टॉप गेनर्स हैं। लार्जकैप के साथ मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में भी सकारात्मक रुझान देखने को मिल रहा है। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स 522 अंक या 0.92 प्रतिशत की तेजी के साथ 57,057 और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स 187 अंक या 0.25 प्रतिशत की बढ़त के साथ 18,274 पर है। सेक्टर के हिसाब से देखें तो ऑटो, आईटी, पीएसयू बैंक, फिन सर्विस, फार्मा, एफएमसीजी, रियल्टी और एनर्जी और हेल्थकेयर इंडेक्स में सबसे ज्यादा बढ़त है। ब्रोकरेज फर्म प्रभुदास लीलाधर में टेक्निकल रिसर्च की उपाध्यक्ष वैशाली पारेख का कहना है कि पिछले कुछ समय में निफ्टी ने एक सीमित दायरे में कारोबार किया है। इस कारण से तेजी के लिए 24,200 के ऊपर टिकना काफी जरूरी है।

वहीं, 24,400 एक महत्वपूर्ण रुकावट का स्तर है। वहीं, 24,000 एक सपोर्ट लेवल के तौर पर काम करेगा। एशियाई बाजार में तेजी के साथ कारोबार हो रहा है। टोक्यो, हांगकांग, शंघाई, सोल और जाकार्ता में तेजी है। अमेरिका के बाजार गुरुवार को सकारात्मक बंद हुए थे।

सीआईएस देशों में भारत का कपड़ा निर्यात 113 प्रतिशत बढ़ा

नई दिल्ली ,30 जुलाई (एजेंसी)। भारत की ओर से स्वतंत्र राज्यों के राष्ट्रमंडल (सीआईएस) रीजन (रूस, आर्मेनिया, बेलारूस, कजाकिस्तान और किर्गिस्तान) को किए जाने वाला कपड़ा निर्यात वित्त वर्ष 2024-25 की पहली तिमाही में 113.33 प्रतिशत बढ़कर 64 मिलियन डॉलर हो गया है, जो कि एक वर्ष पहले समान अवधि में 30 मिलियन डॉलर था।

यह जानकारी वाणिज्य मंत्रालय की ओर से जारी किए गए आंकड़ों में मिली।

मंत्रालय के डेटा के मुताबिक, भारत का कपड़ा निर्यात वित्त वर्ष 2024-25 की पहली तिमाही में 4.15 प्रतिशत बढ़कर 8.78 अरब डॉलर हो गया है, जो कि वित्त वर्ष 2023-24 की पहली तिमाही में 8.43 अरब डॉलर था। भारत के कपड़ा और परिधान उद्योग का जीडीपी में योगदान 2.3 प्रतिशत है। वहीं, इंडस्ट्रियल प्रोडक्शन में 13 प्रतिशत और निर्यात में 12 प्रतिशत का योगदान है।

भारत कपड़ा और परिधान में दुनिया का छठा सबसे बड़ा निर्यातक देश है। सीआईएस देशों के साथ दक्षिण एशियाई देशों में भी भारत के कपड़े की मांग बढ़ी है और यह 35.65 प्रतिशत बढ़कर 898 मिलियन डॉलर हो गई है।

जानकारों का कहना है कि भारत के कपड़ा निर्यात में बढ़त की वजह अमेरिकी अर्थव्यवस्था को लेकर सकारात्मक माहौल बनना है। साथ ही इसकी एक प्रमुख वजह चीन और बांग्लादेश के ऊपर भारत को खरीदारों द्वारा तरजीह देना भी है।

दक्षिण अमेरिकी देशों में भी भारत में बने कपड़े का निर्यात चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में 15 प्रतिशत बढ़कर 346 मिलियन डॉलर हो गया है। हालांकि, इस दौरान उत्तर पूर्व एशिया (एनईए) और अफ्रीका में भारतीय कपड़े का निर्यात क्रमश: 28 प्रतिशत घटकर 298 मिलियन डॉलर और 15.74 प्रतिशत घटकर 423 मिलियन डॉलर हो गया है। इसकी वजह बाजार से जुड़ी चुनौतियों को माना जा रहा है।

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भारत में बने टेलीकॉम उपकरणों का 100 देशों में हो रहा निर्यात

नई दिल्ली ,30 जुलाई (एजेंसी)। भारत में बने टेलीकॉम उपकरणों का निर्यात अब 100 से ज्यादा देशों में किया जा रहा है। केंद्र सरकार की ओर से यह जानकारी दी गई है।

पिछले वर्ष भारत से 18.2 अरब डॉलर के टेलीकॉम उपकरण और सर्विसेज का निर्यात किया गया था।

दूरसंचार विभाग के तहत आने वाले डिजिटल संचार आयोग में सदस्य (टेक्नोलॉजी) मधु अरोड़ा ने कहा कि कई घरेलू टेलीकॉम कंपनियों ने अमेरिका जैसे पश्चिमी देशों में कड़ी प्रतिस्पर्धा के बाद भी उपकरण बेचने में सफलता प्राप्त की है।

उन्होंने आगे कहा कि भारतीय सेना की ओर से हाल ही में घरेलू स्तर पर विकसित किया हुआ चिप आधारित 4जी मोबाइल बेस स्टेशन एकीकृत किया गया है, जिसे हमारी आरएंडडी फर्म की ओर से बनाया गया था।

राष्ट्रीय राजधानी में हुए डिफेंस सेक्टर आईसीटी कॉन्क्लेव में अरोड़ा ने कहा कि इन्फॉर्मेशन एंड कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी (आईसीटी) डिफेंस ऑपरेशन की रीढ़ की हड्डी है।

विदेश मंत्रालय में संयुक्त सचिव अभिषेक सिंह ने कहा कि मंत्रालय की ओर से आईसीटी सेक्टर में अफ्रीका के साथ सहयोग बढ़ाने को लेकर काम किया जा रहा है।

भारत, अफ्रीका के टॉप पांच निवेशकों में से एक है। अब तक 75 अरब डॉलर का निवेश अलग-अलग अफ्रीकी देशों में किया जा चुका है। कई भारतीय कंपनियां अफ्रीका में डिजिटल बदलाव का नेतृत्व कर रही हैं।

टेलीकॉम इक्विपमेंट एंड सर्विसेज एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (टीईपीसी) के कार्यकारी चेयरमैन संदीप अग्रवाल ने कहा कि आईसीटी भारत की संप्रभुता और अखंडता को बनाए रखने के लिए काफी जरूरी है।

भारत, अफ्रीका के साथ काफी लंबे समय से सहयोग कर रहा है और उसकी संप्रभुता का भी सम्मान करता है। इस कारण अफ्रीका के लिए एक विश्वसनीय साझेदार है।

अग्रवाल ने आगे कहा कि डेटा एनालिटिक्स और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में हमारी कार्यकुशलता हमारी सेना को पूर्वानुमानित अंतर्दृष्टि और कार्रवाई योग्य इंटेलिजेंस उपलब्ध कराता है, जिससे निर्णय लेने की क्षमता और ऑपरेशन को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।

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