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आमिर खान प्रोडक्शन की फिल्म ‘एक दिन’

* फिल्म समीक्षा

01.05.2026 – आमिर खान प्रोडक्शन की फिल्म ‘एक दिन’ 1मई को रिलीज हो गई है। इस फिल्म की कहानी स्नेहा देसाई और स्पंदन देसाई ने लिखी है और सुनील पांडे ने डायरेक्ट की है। फिल्म की कहानी दिनेश (जुनैद खान) के इर्द-गिर्द घूमती है। दिनेश एक ऐसा कंप्यूटर गीक है जिसे उसके ऑफिस में किसी को भी उसकी मौजूदगी का एहसास नहीं।दिनेश को अपनी कलीग मीरा (साई पल्लवी) से एकतरफा प्यार है।

फिल्म की कहानी में ट्विस्ट तब आता है जब ऑफिस की पूरी टीम जापान के सपोरो जाती है। यहां मीरा के साथ एक हादसा होता है और उसकी याददाश्त एक दिन के लिए (टेम्पररी अमनेशिया) चली जाती है। दिनेश को लगता है कि ये भगवान का इशारा है और आगे क्या होता है ये जानने के लिए आपको थिएटर में जाकर ‘एक दिन’ देखनी होगी। इमोशन को डिजिटल युग के हिसाब से निर्देशक सुनील पांडे ने स्क्रीन पर उतरने की कोशिश की है और इसमें वो आज के हिसाब से सफल भी माने जा सकते हैं।

मनोज लोबो की सिनेमैटोग्राफी फिल्म का इकलौता प्लस पॉइंट है। जापान की लोकेशन, बर्फ से ढकी वादियां और सपोरो का स्नो फेस्टिवल पर्दे पर बेहद खूबसूरत लगता है. राम संपत का बैकग्राउंड स्कोर भी कहानी की भावनाओं को थामने की कोशिश करता है। जुनैद खान फिल्म के हीरो हैं, काम भी ठीक ही किया है लेकिन उनका लाउड होना और किरदार के प्रति जरूरत से ज्यादा डेडिकेशन कभी-कभी बनावटी लगने लगता है।

वहीं साई पल्लवी इस फिल्म की जान हैं। फिल्म के बाकी कलाकारों ने भी अपने किरदारों को न्याय देने की पूरी कोशिश की है। आमिर खान प्रोडक्शन की नवीनतम प्रस्तुति ‘एक दिन’, थाई फिल्म ‘वन डे’ पर आधारित है।

हर इंसान सोचता है कि एक दिन ऐसा हो जाए। एक दिन वैसा हो जाए ये फिल्म उसी इमोशन को समेटने की नाकाम कोशिश करती है और संदेश दे जाती है कि जागती आंखों से सपने देखने वालों के सपने एक दिन सच हो जाते हैं….पूरे हो जाते हैं।

* फिल्म – एक दिन

* कलाकार – जुनैद खान , साई पल्लवी और कुणाल कपूर

* लेखक – स्नेहा देसाई और स्पंदन देसाई

* निर्देशक – सुनील पांडे

* निर्माता – आमिर खान , मंसूर खान और अपर्णा पुरोहित

* रिलीज – 1 मई 2026

* प्रस्तुतकर्ता –  आमिर खान प्रोडक्शन

* रेटिंग 2स्टार

प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

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समावेशी विकास की नई पहल: वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल हेतु DAY-NRLM और HelpAge India के बीच MoU पर हस्ताक्षर

नई दिल्ली – समावेशी ग्रामीण विकास को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए, ग्रामीण विकास मंत्रालय ने हेल्पएज इंडिया(HelpAge India)के साथ दीनदयाल अंत्योदय योजना–राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (DAY-NRLM) के खाद्य, पोषण, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता (FNHW) फ्रेमवर्क के अंतर्गत वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल एवं कल्याण को सुदृढ़ करने हेतु एक समझौता ज्ञापन (MoU) पर हस्ताक्षर किया।

यह MoU मंत्रालय के अपर सचिव श्री टी. के. अनिल कुमार तथा हेल्पएज इंडियाके मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री रोहित प्रसाद द्वारा, वरिष्ठ अधिकारियों एवं बिहार, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, झारखंड और तमिलनाडु के राज्य प्रतिनिधियों की उपस्थिति में हस्ताक्षरित किया गया।

अपर सचिव श्री टी. के. अनिल कुमार ने कहा कि वरिष्ठ नागरिकों से संबंधित चुनौतियों के समाधान हेतु समग्र, समुदाय-आधारित एवं अभिसरित दृष्टिकोण आवश्यक है। उन्होंने नीति आयोगद्वारा सुझाए गए सुलभ, सतत एवं गरिमापूर्ण सामुदायिक देखभाल मॉडल के विकास पर बल देते हुए राज्यों के अनुभवों से सीखकर आगे बढ़ने का आह्वान किया।

संयुक्त सचिव श्रीमती स्वाती शर्मा ने कहा कि यह पहल “लखपति दीदी” अभियान को भी सशक्त बनाएगी, क्योंकि स्वस्थ एवं सक्षम महिलाएँ ही आर्थिक प्रगति में अग्रणी भूमिका निभा सकती हैं।

हेल्पएज इंडिया(HelpAge India)के सीईओ श्री रोहित प्रसाद ने कहा कि भारत में, विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में, वरिष्ठ नागरिकों की संख्या निरंतर बढ़ रही है और उन्हें स्वास्थ्य, पोषण, गतिशीलता तथा सामाजिक अलगाव जैसी अनेक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। उन्होंने कहा कि HelpAge India का अनुभव तथा DAY-NRLM का व्यापक SHG नेटवर्क मिलकर इन चुनौतियों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।

उप सचिव डॉ. मोनिका ने बताया कि FNHW के अंतर्गत किए जा रहे प्रयासों के सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से खाद्य, पोषण, स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के प्रति जागरूकता एवं व्यवहार परिवर्तन में उल्लेखनीय वृद्धि हुई हैऔर इसी क्रम में अब वरिष्ठ नागरिकों की देखभाल को भी प्राथमिकता दी जा रही है।

DAY-NRLM के अंतर्गत स्वयं सहायता समूहों एवं सामुदायिक संस्थाओं के व्यापक नेटवर्क के माध्यम से वरिष्ठ नागरिकों के लिए सामुदायिक-आधारित समाधान विकसित किए जाएंगे। वर्तमान में सामाजिक समावेशन के तहत सक्रिय वरिष्ठ नागरिक SHGs इस पहल के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करते हैं।

यह पहल FNHW फ्रेमवर्क के अंतर्गत वरिष्ठ नागरिक देखभाल के लिए राष्ट्रीय रणनीति के सह-विकास पर केंद्रित होगी। इसके तहत रणनीति निर्माण, क्षमता निर्माण, प्रशिक्षण मॉड्यूल और क्रियान्वयन हेतु आवश्यक संसाधन विकसित किए जाएंगे।

प्रारंभिक चरण में बिहार, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, झारखंड और तमिलनाडु में पायलट परियोजना लागू की जाएगी, जिसके आधार पर एक स्केलेबल मॉडल विकसित किया जाएगा।

इस पहल से अपेक्षा है कि वरिष्ठ नागरिक आश्रित के बजाय सक्रिय योगदानकर्ता के रूप में उभरेंगे, उनकी पेंशन, स्वास्थ्य सेवाओं एवं अन्य अधिकारों तक पहुँच में सुधार होगा तथा सामाजिक अलगाव में कमी आएगी।

यह प्रयास “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिसमें प्रत्येक वरिष्ठ नागरिक को गरिमा, सुरक्षा और समावेशन के साथ जीवन जीने का अवसर सुनिश्चित किया जाएगा।

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भारतीय तटरक्षक बल और एम/एस फिनकैंटिएरी (इटली) के बीच वार्ता

नई दिल्ली – भारतीय तटरक्षक बल ने 30 अप्रैल 2026 को नई दिल्ली स्थित तटरक्षक मुख्यालय में मेसर्स फिनकैंटिएरी के वरिष्ठ प्रतिनिधियों सहित एक इतालवी प्रतिनिधिमंडल की मेजबानी की। चर्चाओं का मुख्य केंद्र भविष्य की परियोजनाओं के लिए भारतीय शिपयार्ड के साथ सहयोग रहा; इसमें उन्नत डिज़ाइन विशेषताओं पर विशेष ज़ोर दिया गया, जैसे कि अधिक उथल-पुथल वाले समुद्री हालात के लिए मज़बूत हल, बेहतर बॉलार्ड पुल, एकीकृत अग्निशमन प्रणालियाँ, और हाइब्रिड/इलेक्ट्रिक प्रोपल्शन। वार्ता में मॉड्यूलर जहाज डिजाइन पर भी चर्चा हुई, जिससे तेजी से परिचालन अनुकूलन क्षमता वाले बहुमुखी, बहु-भूमिका वाले प्लेटफॉर्म तैयार किए जा सकें।

दोनों पक्षों ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ के विज़न के अनुरूप, विशिष्ट तकनीकों के स्वदेशी विकास और सह-विकास पर विचार-विमर्श किया; इन तकनीकों में डायनामिक पोजिशनिंग सिस्टम, उन्नत थ्रस्टर्स, एआई-सक्षम निर्णय सहायता प्रणाली, काउंटर-अनमैन्ड एरियल सिस्टम (सी-यूएएस)/एंटी-ड्रोन रक्षा और अगली पीढ़ी के ग्रीन प्रोपल्शन शामिल हैं।

यह वार्ता भारत की समुद्री सुरक्षा प्राथमिकताओं के अनुरूप जहाज निर्माण, समुद्री प्रौद्योगिकी और क्षमता विकास में सहयोग को आगे बढ़ाने के लिए एक दूरदर्शी मंच के रूप में कार्य करती है।

प्रतिनिधिमंडल ने भारतीय तटरक्षक बल के महानिदेशक परमेश शिवमणि से मुलाकात की।

प्रतिनिधिमंडल में इटली दूतावास की अर्थशास्त्र और नवाचार विभाग की प्रमुख काउंसलर अन्ना रफिनो और फिनकैंटिएरी के सैन्य नौसेना पोत प्रभाग के प्रमुख श्री यूजीनियो सैंटागाटा शामिल थे।

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भारतीय सेना ने लद्दाख के लेह में ‘ऑपरेशन नेत्र 1.0’ के तहत विशाल नेत्र शिविर का सफलतापूर्वक संचालन किया

नई दिल्ली – भारतीय सेना ने अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में चिकित्सा देखभाल और मानवीय सहायता के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए  27 से 30 अप्रैल 2026 तक लेह के 153 जनरल अस्पताल में चार दिवसीय उन्नत सर्जिकल नेत्र शिविर, ‘ऑपरेशन नेत्र 1.0’ का सफलतापूर्वक आयोजन किया। इस शिविर का उद्घाटन 14 कोर के जीओसी, लेफ्टिनेंट जनरल हितेश भल्ला ने किया।

इस शिविर ने नागरिक-सैन्य सहयोग का एक उत्कृष्ट उदाहरण पेश करते हुए, लद्दाख के सात जिलों चुशुल, हानले, दुरबुक, डेमचोक, फुक्चे, द्रास, ज़ांस्कर, बटालिक, चुमाथांग और तुरतुक जैसे दूरस्थ क्षेत्रों में कुल 950 रोगियों की जांच की सुविधा प्रदान की। ब्रिगेडियर (डॉ.) संजय कुमार मिश्रा के नेतृत्व में शल्य चिकित्सा दल ने 214 विशेष प्रक्रियाओं को सफलतापूर्वक पूरा किया, जिनमें 197 जटिल मोतियाबिंद सर्जरी और 10 विट्रियो-रेटिनल समाधान शामिल हैं। इसके अलावा, उन्होंने ग्लूड इंट्राओकुलर लेंस प्रत्यारोपण, मिनिमली इनवेसिव ग्लूकोमा सर्जरी, विट्रेक्टॉमी, टेरिगियम एक्सिशन और इंट्राओकुलर लेंस रिपोजिशनिंग जैसी उन्नत प्रक्रियाओं को भी पूरा किया और 15 पूर्णतः दृष्टिबाधित रोगियों की दृष्टि बहाल की।

इस अभियान का एक प्रमुख आकर्षण 153 जनरल अस्पताल द्वारा स्वदेशी रूप से विकसित ऑपरेशन नेत्र ऐप का शुभारंभ था। यह ऐप रिकॉर्ड के संपूर्ण डिजिटलीकरण को सक्षम बनाकर रोगी प्रबंधन को सुव्यवस्थित करने, निदान की सटीकता बढ़ाने और क्यूआर कोड आधारित पहचान के माध्यम से शल्य चिकित्सा कार्यक्रम को स्वचालित करने में मदद करता है जिससे अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्र में रोगी सुरक्षा और परिचालन दक्षता सुनिश्चित होती है।

यह पहल उस राष्ट्रव्यापी अभियान में योगदान देती है जिसके तहत नवंबर 2025 से अब तक 2,500 से अधिक दृष्टि-बहाली सर्जरी की जा चुकी हैं। इससे पहले उधमपुर, देहरादून, जयपुर, बागडोगरा और गोरखपुर में भी इसी तरह के शिविर आयोजित किए गए थे। भारतीय वायु सेना द्वारा उन्नत चिकित्सा उपकरणों की हवाई आपूर्ति के माध्यम से इस मिशन को और भी सक्षम बनाया गया जिससे यह सुनिश्चित हुआ कि देखभाल का स्तर उच्चतम मानकों के अनुरूप हो।

इस शिविर का समापन लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश के उपराज्यपाल वी.के. सक्सेना की उपस्थिति में एक समारोह के साथ हुआ। सशस्त्र बल चिकित्सा सेवा महानिदेशक, वाइस एडमिरल आरती सरीन के नेतृत्व में ऑपरेशन नेत्र 1.0 का सफल संचालन, “राष्ट्र सर्वोपरि” के सिद्धांत के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता और यह सुनिश्चित करने को दर्शाता है कि भौगोलिक स्थिति की परवाह किए बिना कोई भी नागरिक आवश्यक स्वास्थ्य सेवाओं से वंचित न रहे।

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रक्षा मंत्री ने नई दिल्ली में इटली के रक्षा मंत्री के साथ द्विपक्षीय वार्ता की

नई दिल्ली – रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 30 अप्रैल, 2026 को नई दिल्ली के मानेकशॉ सेंटर में इटली के रक्षा मंत्री श्री गुइडो क्रोसेटो के साथ एक द्विपक्षीय बैठक की। दोनों मंत्रियों ने इस बात को दोहराया कि भारत-इटली रणनीतिक साझेदारी शांति, स्थिरता, स्वतंत्रता और पारस्परिक सम्मान के साझा मूल्यों पर आधारित है।

सोशल मीडिया प्‍लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में रक्षा मंत्री ने कहा कि उन्होंने और उनके इटली के समकक्ष ने पश्चिम एशिया की वर्तमान स्थिति सहित क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर व्‍यापक चर्चा की। दोनों मंत्रियों ने ‘आत्मनिर्भर’ भारत कार्यक्रम और इटली की रक्षा सहयोग पहल के अंतर्गत पारस्परिक रूप से लाभकारी रक्षा औद्योगिक सहयोग को और विकसित करने के तरीकों पर भी विचार-विमर्श किया।

बैठक के दौरान 2026-27 के लिए एक द्विपक्षीय सैन्य सहयोग योजना का आदान-प्रदान किया गया, जो दोनों देशों के रक्षा बलों के बीच सैन्य सहभागिता की दिशा निर्धारित करती है।

विभिन्न प्रमुख समुद्री मुद्दों पर दोनों प्राचीन समुद्री देशों के बीच तालमेल पर भी प्रकाश डाला गया, जिसमें गुरुग्राम स्थित ‘सूचना संनयन केन्‍द्र-हिन्‍द महासागर क्षेत्र’ के माध्‍यम से सूचनाओं का आदान-प्रदान शामिल है।

बैठक से पहले इटली के रक्षा मंत्री ने राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर पुष्पचक्र अर्पित किया और राष्ट्र की सेवा में सर्वोच्च बलिदान देने वाले वीर सपूतों को श्रद्धांजलि दी।

इटली के रक्षा मंत्री ने मानेकशॉ सेंटर में तीनों सेनाओं की ओर से दिए गए गार्ड ऑफ ऑनर का भी निरीक्षण किया।

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पत्रकार से जनप्रतिनिधि बने अरविंद गुप्ता का रांची प्रेस क्लब में सम्मान

रांची,30.04.2026 –  पत्रकारिता से जनसेवा की राह पर आगे बढ़ते हुए नगर निकाय चुनाव जीतकर नगर पंचायत अध्यक्ष बने आरजे अरविंद गुप्ता को रांची प्रेस क्लब में सम्मानित किया गया।

क्लब परिसर में आयोजित कार्यक्रम में सचिव अभिषेक सिन्हा, कोषाध्यक्ष कुबेर सिंह, संयुक्त सचिव चंदन भट्टाचार्य सहित कार्यसमिति के सदस्यों ने अंगवस्त्र और पौधा भेंट कर उनका अभिनंदन किया। इस दौरान विजय गोप, अशोक गोप, पूर्व कोषाध्यक्ष जय शंकर, संतोष गुप्ता, अक्षय तिवारी, जेमिनी सरकार और सुपरवाइजर शिशुपाल समेत कई सदस्य उपस्थित रहे।

इस अवसर पर प्रेस क्लब के सचिव अभिषेक सिन्हा ने कहा कि पत्रकार से जनप्रतिनिधि बनने के बाद जिम्मेदारियां और अपेक्षाएं दोनों बढ़ जाती हैं। उन्होंने आशा जताई कि अरविंद गुप्ता अपने अनुभव और संवेदनशीलता के साथ क्षेत्र के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

सम्मान प्राप्त करने के बाद अरविंद गुप्ता ने कहा कि यह सम्मान उनके लिए प्रेरणा का स्रोत है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि वे जन आकांक्षाओं का सम्मान करते हुए पूरी निष्ठा और प्रतिबद्धता के साथ क्षेत्र के समग्र विकास के लिए कार्य करेंगे। प्रेस क्लब के कोर्पस फण्ड को नगर अध्यक्ष ने ग्यारह हजार रुपये का सहयोग दिया।

कार्यक्रम सौहार्दपूर्ण माहौल में संपन्न हुआ, जहां उपस्थित लोगों ने अरविंद गुप्ता के उज्ज्वल भविष्य की कामना की।

उक्त जानकारी रांची प्रेस क्लब के सचिव अभिषेक सिन्हा ने दी

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01 मई 2026 से जनगणना-2027 के प्रथम चरण की शुरुआत, रांची जिला में तैयारियां पूरी

प्रथम चरण के अंतर्गत होगा मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य

प्रथम चरण दो भागों में विभाजित, 1-15 मई 2026 तक स्व-गणना (Self Enumeration) एवं 16 मई से 14 जून 2026 तक होगा मकान सूचीकरण एवं घर-घर गणना कार्य

रांची जिला में जनगणना कार्य के संपादन हेतु 4232 पदाधिकारियों/कर्मियों की प्रतिनियुक्ति

नागरिकों को सुविधा प्रदान करने हेतु स्व-गणना की व्यवस्था

नागरिक ऑनलाइन पोर्टल (se.census.gov.in) पर स्वयं कर सकते हैं अपना विवरण दर्ज

जनगणना से संबंधित किसी भी प्रकार की जानकारी या सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर 1855 उपलब्ध

प्रधान जनगणना पदाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री की जिलेवाासियों से अपील, जनगणना में सक्रिय भागीदारी निभाएँ, सही जानकारी उपलब्ध कराएँ

रांची,30.04.2026 – हमारी जनगणना, हमारा विकास के मूल मंत्र के साथ आगामी जनगणना-2027 के प्रथम चरण की तैयारियाँ पूरी हो चुकी हैं। प्रथम चरण के अंतर्गत मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना का कार्य जिला में निर्धारित समयावधि के अनुसार संपन्न किया जाएगा। इस संबंध में प्रधान जनगणना पदाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिये गये हैं।

चार हजार से ज्यादा पदाधिकारियों/कर्मियों की प्रतिनियुक्ति

रांची जिला में जनगणना कार्य के संपादन हेतु 4232 पदाधिकारियों/कर्मियों की प्रतिनियुक्ति की गयी है, साथ ही संबंधित पदाधिकारियों एवं क्षेत्र प्रशिक्षकों का प्रशिक्षण भी पूर्ण हो चुका है। 4134 प्रगणकों और पर्यवेक्षकों को नियुक्त किया गया है, जिनमें महिला प्रगणकों और पर्यवेक्षकों की संख्या 1727 और पुरुष प्रगणकों और पर्यवेक्षकों की संख्या 2407 है।

प्रथम चरण दो भागों में विभाजित

जनगणना-2027 के प्रथम चरण को दो भागों में विभाजित किया गया है। 1 मई से 15 मई 2026 तक स्व-गणना (सेल्फ इनुमेरिशन) एवं 16 मई से 14 जून 2026 तक मकान सूचीकरण एवं घर-घर गणना कार्य पूर्ण किया जायेगा। इस अवधि में जिला के प्रत्येक क्षेत्र के हर मकान का विस्तृत विवरण दर्ज किया जाएगा।

स्व-गणना (Self Enumeration) की प्रक्रिया

नागरिकों को सुविधा प्रदान करने हेतु स्व-गणना की व्यवस्था की गई है। स्व-गणना की अवधि 1 मई से 15 मई 2026 निर्धारित है। यह प्रक्रिया ऐच्छिक है, अनिवार्य नहीं। नागरिक ऑनलाइन पोर्टल (se.census.gov.in) पर जाकर स्वयं अपना विवरण दर्ज कर सकते हैं। नागरिक को स्व-गणना के बाद प्राप्त SE-ID को सुरक्षित रखना होगा। जिसे प्रगणक के घर आने पर साझा करना होगा। यदि कोई व्यक्ति स्व-गणना नहीं करता है, तो भी चिंता की आवश्यकता नहीं है। प्रगणक निर्धारित अवधि में घर-घर जाकर जानकारी एकत्र करेंगे।

मकान सूचीकरण एवं मकानों की गणना (House Listing & Housing Census)

16 मई से 14 जून 2026 के बीच प्रगणक प्रत्येक घर का दौरा करेंगे। इस दौरान मकान का विवरण, घर की स्थिति, उपलब्ध सुविधाएँ एवं अन्य मूलभूत जानकारी दर्ज की जाएगी। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि प्रत्येक परिवार का सही और पूर्ण विवरण दर्ज हो।

गोपनीयता और सुरक्षा की गारंटी

जनगणना से संबंधित सभी सूचनाओं की गोपनीयता सुनिश्चित की गई है। जनगणना अधिनियम, 1948 के तहत सभी जानकारी पूर्णतः गोपनीय रखी जाती है। डेटा सुरक्षित सर्वर पर एन्क्रिप्टेड रूप में संग्रहित किया जाता है। प्रकाशित रिपोर्ट में केवल सामूहिक आँकड़े ही प्रदर्शित किए जाते हैं। किसी भी व्यक्ति का नाम या व्यक्तिगत जानकारी साझा नहीं की जाती। इस जानकारी का उपयोग टैक्स, पुलिस या किसी जांच कार्य में नहीं किया जाता है।

नागरिकों के लिए सहायता

जनगणना से संबंधित किसी भी प्रकार की जानकारी या सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर उपलब्ध है। हेल्पलाइन नंबर – 1855 है।

जनभागीदारी का आह्वान

जनगणना एक राष्ट्रीय दायित्व है, जो देश के विकास की आधारशिला तैयार करता है। प्रधान जनगणना पदाधिकारी-सह-उपायुक्त, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा जिला के नागरिकों से अपील की गयी है कि वे इसमें सक्रिय भागीदारी निभाएँ और सही जानकारी उपलब्ध कराएँ।

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DC Ranchi श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने विहार समाज कल्याण संस्थान (ओल्ड एज होम) कुलगु पिस्का नगड़ी पहुंच कर वृद्ध आश्रम में रहने वाले बुजुर्गो से मिले

वृद्धजनों की देखभाल और चिकित्सा व्यवस्था पर दिया विशेष ध्यान, अस्वस्थ वृद्धों के तत्काल इलाज के दिए निर्देश

संत मदर टेरेसा क्लिनिक का भी गहन निरीक्षण किया, जहाँ क्लिनिक में उपलब्ध दवाओं, चिकित्सा सुविधाओं और इलाज की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी ली

“वृद्ध आश्रम में रहने वाले बुजुर्ग हमारे समाज के अनुभवी नागरिक हैं। उनकी देखभाल, आरामदायक आवास, पौष्टिक भोजन और समय पर चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करना हमारा नैतिक दायित्व है:- जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री

रांची,30.04.2026 – जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने आज बिहार समाज कल्याण संस्थान (ओल्ड एज होम) कुलगु पिस्का नगड़ी पहुंच कर बुजुर्गों से मिलकर उनका हाल जाना। निरीक्षण के दौरान उन्होंने वृद्ध आश्रम में रहने वाले बुजुर्गों की रहने की व्यवस्था, भोजन, स्वच्छता तथा चिकित्सा सुविधाओं का जायजा लिया।

इस दौरान जिला जन संपर्क पदाधिकारी राँची, श्रीमती उर्वशी पाण्डेय एवं आश्रम के केयर टेकर उपस्थित थे।

उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने आश्रम परिसर में एक-एक कर सभी रूम, किचन, डाइनिंग एरिया और कैंपस का विस्तृत निरीक्षण किया। उन्होंने संत मदर टेरेसा क्लिनिक का भी गहन निरीक्षण किया, जहाँ उन्होंने क्लिनिक में उपलब्ध दवाओं, चिकित्सा सुविधाओं और इलाज की प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी ली।

बुजुर्गों का उचित चिकित्सा उपचार सुनिश्चित करने के निर्देश

निरीक्षण के दौरान उपायुक्त को सूचना मिली कि वृद्ध आश्रम में दो बुजुर्ग अस्वस्थ हैं और उन्हें वृद्धावस्था से संबंधित बीमारियाँ हैं। इस पर श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने तत्काल सिविल सर्जन सदर को निर्देश देते हुए कहा कि दोनों बुजुर्गों का उचित चिकित्सा उपचार सुनिश्चित किया जाए और उनकी स्वास्थ्य स्थिति पर निरंतर नजर रखी जाए।

उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा, “वृद्ध आश्रम में रहने वाले बुजुर्ग हमारे समाज के अनुभवी नागरिक हैं। उनकी देखभाल, आरामदायक आवास, पौष्टिक भोजन और समय पर चिकित्सा सुविधा सुनिश्चित करना हमारा नैतिक दायित्व है।

निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने आश्रम प्रबंधन को निर्देश दिए कि:

सभी कमरों में स्वच्छता और वेंटिलेशन का पूरा ध्यान रखा जाए

किचन और डाइनिंग एरिया में बेहतर स्वच्छता एवं गुणवत्तापूर्ण भोजन की व्यवस्था हो

क्लिनिक में नियमित एएनएम की उपस्थिति और पर्याप्त दवाओं का स्टॉक बना रहे।

 बुजुर्गों की स्वास्थ्य जांच नियमित रूप से की जाए।

किसी भी आपात स्थिति में तत्काल अस्पताल रेफर करने की व्यवस्था रखी जाए

बिहार समाज कल्याण संस्थान (ओल्ड एज होम) कुलगु पिस्का नगड़ी में वर्तमान में कई वृद्धजन रह रहे हैं, जिन्हें आश्रम द्वारा आवास, भोजन और आधारभूत सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं।

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नगड़ी स्थित ईवीएम वेयर हाउस का मासिक (बाह्य) निरीक्षण

उपायुक्त सह जिला निर्वाचन पदाधिकारी राँची, श्री मंजूनाथ भजंत्री ने किया निरीक्षण

भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित कराने का निर्देश

30.04.2026 – उपायुक्त सह जिला निर्वाचन पदाधिकारी राँची, श्री मंजूनाथ भजंत्री ने आज दिनांक 30 अप्रैल 2026 को नगड़ी स्थित ईवीएम वेयर हाउस का मासिक (बाह्य) निरीक्षण किया। निरीक्षण के दौरान उप निर्वाचन पदाधिकारी, रांची श्री विवेक कुमार सुमन एवं अन्य संबंधित कर्मी उपस्थित थे।

ईवीएम वेयर हाउस के निरीक्षण के दौरान उपायुक्त सह जिला निर्वाचन पदाधिकारी राँची, श्री मंजूनाथ भजंत्री ने उप निर्वाचन पदाधिकारी को भारत निर्वाचन आयोग के दिशा-निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिये।

जानकारी हो की निर्धारित समय पर इवीएम वेयर हाउस की स्थिति का निरीक्षण कर रख-रखाव, सुरक्षा एवं तकनीकी उपकरणों की स्थिति से संबंधित रिपोर्ट राज्य निर्वाचन विभाग को समर्पित करना होता है।

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फिर याद आए…. भारतीय सिनेमा की नींव रखने वाले दिग्गज दादा साहेब फाल्के …..!

** 156वीं जन्म जयंती (30 अप्रैल ) पर विशेष …..!

30.04.2026 – गोरेगाँव (मुम्बई) स्थित दादा साहेब फाल्के चित्रनगरी, फिल्म सिटी स्टूडियो में भारतीय सिनेमा के पितामह दादा साहेब फाल्के की 156 वीं जन्म जयंती के अवसर पर फिल्मसिटी स्टूडियो प्रबंधन द्वारा आयोजित भव्य समारोह में दादा साहेब फाल्के के ग्रैंडसन चंद्रशेखर पुसलकर अपने परिवार के अन्य सदस्यों के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस समारोह में भारतीय फिल्म जगत से जुड़ी संस्थाओं के प्रतिनिधियों, बॉलीवुड के नामचीन शख्सियतों व महाराष्ट्र सरकार के प्रशासनिक पदाधिकारियों के अलावा देश के अन्य राज्यों से आये लोगों ने भारतीय सिनेमा के पितामह दादा साहेब फाल्के की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और आदरांजलि अर्पित की।

भारतीय सिनेमा के जन्मदाता दादा साहब ने फिल्म इंडस्ट्री में अपने 19 साल के करियर में 121 फिल्में बनाई, जिसमें 26 शॉर्ट फिल्में शामिल हैं। दादा साहेब सिर्फ एक निर्देशक ही नहीं बल्कि एक मशहूर निर्माता और स्क्रीन राइटर भी थे। उनकी आखिरी मूक फिल्म ‘सेतुबंधन’ थी और आखिरी फीचर फिल्म ‘गंगावतरण’ थी। उनका निधन 16 फरवरी 1944 को नासिक में हुआ था। उनके सम्मान में भारत सरकार ने 1969 में ‘दादा साहेब फाल्के अवॉर्ड’ देना शुरू किया। यह भारतीय सिनेमा का सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार है। सबसे पहले यह पुरस्कार पाने वाली देविका रानी चौधरी थीं। 1971 में भारतीय डाक विभाग ने दादा साहेब फाल्के के सम्मान में एक डाक टिकट भी जारी किया।

व्यक्तिगत जीवन …….*

भारतीय सिनेमा के जन्मदाता दादा साहेब फाल्के का जन्म 30 अप्रैल 1870 को बंबई प्रेसीडेंसी के त्रिंबक में एक मराठी परिवार में धुंडिराज फाल्के के रूप में हुआ था। धुंडीराज फाल्के के पिता गोविंद सदाशिव फाल्के एक संस्कृत विद्वान और हिंदू पुजारी थे। उनकी मां द्वारकाबाई एक गृहिणी थीं। फाल्के ने अपनी प्राथमिक स्कूली शिक्षा त्र्यंबकेश्वर में और मैट्रिक की पढ़ाई बॉम्बे में पूरी की। 1885 में फाल्के ने सर जेजे स्कूल ऑफ आर्ट्स, बॉम्बे से एक साल का ड्राइंग कोर्स पूरा किया। इसके बाद वह बड़ौदा के महाराजा सयाजीराव विश्वविद्यालय में कला भवन में शामिल हो गए और 1890 में तेल चित्रकला और जल रंग चित्रकला में पाठ्यक्रम पूरा किया। वह वास्तुकला और मॉडलिंग में भी सक्षम थे। फाल्के ने उसी वर्ष एक फिल्म कैमरा खरीदा और फोटोग्राफी, मुद्रण और प्रसंस्करण के साथ प्रयोग करना शुरू किया।

करियर की शुरुआत………..*

कला भवन के उपकरणों का उपयोग करने की अनुमति मिलने पर उन्होंने एक फोटो स्टूडियो स्थापित किया जिसे श्री फाल्के एनग्रेविंग एंड फोटो प्रिंटिंग के नाम से जाना जाता है। प्रारंभिक चरण में असफल होने के बाद उन्होंने नाटक संगठनों के लिए मंच पर काम करते हुए प्रगति की। एसोसिएशन को इसके फायदे भी मिले। फाल्के को उनके नाटकों में छोटी-छोटी भूमिकाएं मिलने लगीं। उन्होंने भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण के लिए एक फोटोग्राफर के रूप में भी कुछ समय बिताया। 1912 में फाल्के ने एक व्यापक पद संभाला जहां उन्होंने फिल्म की शूटिंग के लिए एक छोटा सा कांच का स्थान बनाया। उन्होंने फिल्मों को संसाधित करने की योजना के साथ एक अंधेरे कमरे की भी पूर्व-व्यवस्था की। कुछ चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों से गुजरने के बाद फाल्के ने पहली फिल्म ‘राजा हरिश्चंद्र’ बनाई जिसका प्रीमियर बॉम्बे के ओलंपिया थिएटर में हुआ। यह एक ऐसी फिल्म थी जिसने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा प्रदर्शन किया और फिल्म उद्योग की स्थापना की।

भारतीय सिनेमा में फीमेल आर्टिस्ट को दिए रोल ………*

जब अंग्रेज भारत में पश्चिमी फिल्में दिखा रहे थे तो फाल्के ने भारतीयों को अपनी जड़ों से जोड़ने के लिए पौराणिक कथाओं को एक उपकरण के रूप में शामिल किया जो एक आसान लेकिन प्रगतिशील कदम था। जब फाल्के ने राजा हरिश्चंद्र बनाई तो एक महिला अभिनेता का सामान्य विचार समाज के लिए अभिशाप था। उन्हें राजा हरिश्चंद्र की पत्नी, रानी तारामती की भूमिका निभाने के लिए एक आदमी (अन्ना सालुंके) को प्रोजेक्ट करने की जरूरत थी।

किसी भी स्थिति में उन्होंने अपनी दूसरी मूक फिल्म मोहिनी भस्मासुर (1913) में इसे सही किया जब उन्होंने दुर्गाबाई कामत को पार्वती की भूमिका और उनकी किशोर बेटी कमलाबाई गोखले को मोहिनी की भूमिका की पेशकश की। कामत जो एकल माता-पिता थे को यह भूमिका निभाने के लिए उनके समाज द्वारा अस्वीकार कर दिया गया था। लेकिन उन्होंने महिलाओं के लिए फिल्मों में मुख्य भूमिका निभाना संभव बना दिया। वर्षों बाद फाल्के ने लंका दहन (1917) और श्री कृष्ण जन्म (1918) में अपनी बेटी मंदाकिनी फाल्के को कास्ट किया। फाल्के की पत्नी सरस्वतीबाई ने भी भारतीय फिल्म में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह भारत की पहली फिल्म संपादक थीं जिन्होंने ‘राजा हरिश्चंद्र’ जैसी फिल्मों में काम किया। भारतीय सिनेमा का कारोबार आज करीब साढ़े तीन अरब का हो चला है और लाखों लोग इस उद्योग में लगे हुए हैं लेकिन दादा साहब फाल्के ने महज 20-25 हजार की लागत से इसकी शुरुआत की थी। आज भले ही दादा साहेब फाल्के हमारे बीच नहीं हैं लेकिन आज भी उनका संदेश व उनके संघर्षों को बयां करते पदचिन्ह, भारतीय फिल्म जगत के फिल्मकारों को कर्मपथ पर धैर्य के साथ अग्रसर रहने के लिए सदैव प्रेरित करता है और युगों युगों तक करता रहेगा।

प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

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चर्चाओं के बीच : अभिनेत्री अनन्या दत्ता

30.04.2026 – बॉलीवुड के चर्चित डायरेक्टर अनिल शर्मा के सबसे छोटे भाई कपिल कौस्तुभ शर्मा के भतीजे की शादी में शामिल होने के बाद से अभिनेत्री अनन्या दत्ता इन दिनों सुर्खियों में हैं। कपिल कौस्तुभ शर्मा और अनन्या ने साथ मिलकर कई प्रोजेक्ट्स में काम किया है, जिनमें से आखिरी एक प्यारी और इमोशनल फ़िल्म ‘ज़िंदगी फिर भी खूबसूरत है’ थी।

अनन्या ने नई दिल्ली में हुई इस शादी में खूब मज़े किए और यहाँ तक कि संगीत सेरेमनी में परफ़ॉर्म भी किया। विदित हो कि अभिनय के अलावा मॉडलिंग और विज्ञापन की दुनिया में भी इन दिनों अनन्या दत्ता एक जाना-पहचाना चेहरा हैं। उन्होंने रैंप वॉक, मॉडलिंग असाइनमेंट और प्रिंट शूट में हिस्सा लिया है।

उन्होंने वीडियोकॉन, क्लोज़-अप, स्प्राइट, थम्स अप, वॉक्सवैगन, नेस्ले, ओनिडा, मारुति ओमनी, कैस्ट्रोल, टेटली टी, वासमोल और डी बीयर्स जैसे बड़े ब्रांड्स के साथ काम किया है। प्रिंट विज्ञापन के क्षेत्र में भी वह कोलगेट, बिसलेरी, VIP, सिटीबैंक, मोटोरोला और IBM जैसे जाने-माने नामों से जुड़ी रही हैं।

उन्होंने L’Oréal, Sabyasachi और Shaina NC जैसे टॉप फैशन डिज़ाइनरों के लिए रैंप वॉक भी किया है, और Femina, Elle और Society जैसी जानी-मानी मैगज़ीन में भी उन्हें जगह मिली है।

प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के हरदोई में 594 किलोमीटर लंबे एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज उत्तर प्रदेश के हरदोई में 594 किलोमीटर लंबे एक्सेस-कंट्रोल्ड ग्रीनफील्ड गंगा एक्सप्रेसवे का उद्घाटन किया। भगवान नरसिम्हा की पवित्र भूमि और कुछ किलोमीटर दूर बहने वाली मां गंगा की दिव्य उपस्थिति को नमन करते हुए अपने संबोधन की शुरुआत करते हुए प्रधानमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि पूरा क्षेत्र नदी की आध्यात्मिक और पोषणकारी कृपा से धन्य एक तीर्थस्थल है। श्री मोदी ने कहा कि उत्तर प्रदेश को एक्सप्रेसवे का वरदान मिलना स्वयं मां गंगा का आशीर्वाद है और बताया कि कैसे यह एक्सप्रेसवे कुछ ही घंटों में पवित्र स्थलों की यात्रा को संभव बना देगा।

मां गंगा के शाश्वत महत्व और आधुनिक बुनियादी ढांचे के बीच तुलना करते हुए प्रधानमंत्री ने राज्य के विकास में एक्सप्रेसवे की परिवर्तनकारी भूमिका पर बल दिया। इन नवनिर्मित राजमार्गों को विकासशील भारत की जीवनरेखा बताते हुए श्री मोदी ने कहा कि ये आधुनिक जीवनरेखाएं आज भारत के उज्ज्वल भविष्य की घोषणा कर रही हैं।

हाल ही में अपने आध्यात्मिक अनुभवों का उल्‍लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में माँ गंगा के निकट उनकी उपस्थिति 24 अप्रैल को बंगाल से लेकर कल और फिर आज सुबह काशी तक आस्था और अवसंरचना विकास का एक अद्भुत संगम है। राज्य सरकार द्वारा एक्सप्रेसवे का नाम माँ गंगा के नाम पर रखने के निर्णय पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए श्री मोदी ने कहा कि यह विकास के प्रति हमारे विजन को दर्शाता है और हमारी विरासत की झलक प्रस्तुत करता है।

प्रधानमंत्री ने कहा कि वर्तमान सरकार ने अवसंरचना निर्माण की गति को अभूतपूर्व रूप से तेज किया है। उन्‍होंने बताया कि देश के सबसे लंबे हरित गलियारे वाले एक्सप्रेसवे में से एक, गंगा एक्सप्रेसवे, को पांच वर्ष से भी कम समय में पूरा किया गया है। तीव्र गति से आधुनिकीकरण के अपने विजन को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि यह वर्तमान सरकार के काम की गति है! यह वर्तमान सरकार के काम करने का तरीका है।

इस एक्सप्रेसवे के रणनीतिक महत्व को बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि लगभग 600 किलोमीटर लंबा यह मार्ग पश्चिमी उत्तर प्रदेश के वाणिज्यिक केंद्रों को मध्य उत्तर प्रदेश के कृषि प्रधान क्षेत्रों और पूर्वी उत्तर प्रदेश के सांस्कृतिक स्थलों से जोड़ेगा। इससे बारह जिलों के करोड़ों नागरिकों को लाभी मिलेगा। श्री मोदी ने कहा कि गंगा एक्सप्रेसवे सिर्फ एक तेज रफ्तार सड़क नहीं है। यह नई संभावनाओं, नए सपनों और नए अवसरों का द्वार है।

कृषि समुदाय द्वारा सामना की जाने वाली गंभीर चुनौतियों का उल्‍लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि इन उपजाऊ क्षेत्रों के किसान ऐतिहासिक रूप से अपर्याप्त रसद अवसंरचना और कोल्ड स्टोरेज सुविधाओं के कारण प्रमुख बाजारों तक पहुंचने में संघर्ष करते रहे हैं। बेहतर कनेक्टिविटी की परिवर्तनकारी क्षमता को रेखांकित करते हुए उन्होंने कहा कि इससे हमारे किसानों की आय में वृद्धि होगी।

एक्सप्रेसवे के कनेक्टिविटी लाभों पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि यह उत्तर प्रदेश के एक छोर को दूसरे छोर से जोड़ता है, साथ ही राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की अपार संभावनाओं को भी करीब लाता है, जिसके किनारों पर वाहनों के दौड़ने के साथ-साथ नए औद्योगिक अवसर सृजित होंगे।

एक्सप्रेसवे के साथ उभरते औद्योगिक अवसरों पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि हरदोई जैसे जिलों में रणनीतिक रूप से औद्योगिक गलियारों का विकास किया जा रहा है, ताकि फार्मास्यूटिकल्स, वस्त्र, हथकरघा, चमड़े के सामान और हस्तशिल्प जैसे उद्योगों को आकर्षित किया जा सके और युवाओं के लिए नए रोजगार के अवसर पैदा किए जा सकें। मुद्रा योजना और ओडीओपी (एक जिला एक उत्पाद) जैसी योजनाओं से सशक्त राज्य के युवाओं की उद्यमशीलता की भावना की प्रशंसा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि लघु उद्योगों और एमएसएमई को बढ़ावा मिल रहा है और बेहतर कनेक्टिविटी उनके लिए नए रास्ते खोलेगी। श्री मोदी ने कहा कि इन सभी से घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक बड़े पैमाने पर पहुंच बनेगी। इससे लाखों परिवारों की आय में वृद्धि होगी।

उत्तर प्रदेश के उल्लेखनीय परिवर्तन पर प्रकाश डालते हुए प्रधानमंत्री ने याद दिलाया कि कभी पिछड़ा और ‘बीमारू’ कहलाने वाला यह राज्य आज एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने की ओर अग्रसर है। राज्य की अपार क्षमता और देश की विशाल युवा आबादी की अपार संभावनाओं के कारण यह एक बहुत बड़ा लक्ष्य है, जिसके लिए उतनी ही बड़ी तैयारी भी की जा रही है। इस जनसांख्यिकीय लाभांश का लाभ उठाने की रणनीति बताते हुए पीएम मोदी ने समझाया कि इस शक्ति का उपयोग यूपी को विनिर्माण केंद्र बनाने के लिए किया जा रहा है, जहां नए उद्योग और कारखाने स्थापित किए जाएंगे, बड़े पैमाने पर निवेश आएगा, आर्थिक प्रगति में तेजी आएगी और युवाओं के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे। उन्‍होंने कहा कि भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता बन गया है, जिसका आधा उत्‍पादन यूपी में होता है।

अत्याधुनिक प्रौद्योगिकी क्षेत्रों में राज्य की उभरती भूमिका को रेखांकित करते हुए प्रधानमंत्री ने नोएडा में हाल ही में हुए सेमीकंडक्टर परियोजना की आधारशिला रखे जाने का उल्‍लेख करते हुए कहा कि यह राज्‍य भविष्‍य की एआई आधारित अर्थव्‍यवस्‍था में अग्रणी बन रहा है।

उत्तर प्रदेश के औद्योगिक विकास को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए एक रणनीतिक संपत्ति बताते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत के दो रक्षा गलियारों में से एक इस राज्य के भीतर से होकर गुजरता है, जहां प्रमुख रक्षा निर्माता इकाइयां स्थापित हैं। उत्तर प्रदेश में ब्रह्मोस मिसाइलों जैसी विश्व स्तर पर प्रशंसित प्रणालियों के निर्माण का उल्लेख करते हुए श्री मोदी ने कहा कि उत्तर प्रदेश का औद्योगिक विकास आज भारत के लिए एक रणनीतिक शक्ति बन रहा है।

उन्‍होंने राज्‍य में कनेक्टिविटी के व्‍यापक विस्‍तार का उल्‍लेख करते हुए कहा कि पहले जहां बहुत कम हवाई अड्डे थे, आज 21 हवाई अड्डें सं‍चालित हो रहे हैं,  जिनमें 5 अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे शामिल हैं। उन्‍होंने नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का भी उल्‍लेख किया, जो गंगा एक्सप्रेसवे कॉरिडोर से कुछ ही घंटों की दूरी पर है।

उत्तर प्रदेश के अतीत और वर्तमान की तुलना करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि एक पिछला दौर था, जब राज्‍य अपराध और अराजकता से जुड़ा था, लेकिन आज कानून-व्‍यवस्‍था एक मिसाल बन गई है। श्री मोदी ने कहा कि अब उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था का उदाहरण पूरे देश में दिया जाता है।

भारत की व्यापक सभ्यतागत और आर्थिक महत्वाकांक्षाओं के संदर्भ में उत्तर प्रदेश के विकास को रखते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि राज्य का परिवर्तन राष्ट्र के मूल संकल्प को साकार करता है। श्री मोदी ने कहा कि आज पूरा देश एक ही संकल्प के साथ आगे बढ़ रहा है – विकसित भारत का संकल्प! इस संकल्प को पूरा करने में उत्तर प्रदेश की एक महत्वपूर्ण भूमिका है।

वैश्विक अस्थिरता और भारत के उदय के बाहरी विरोध को स्वीकार करते हुए प्रधानमंत्री ने बाहरी खतरों के बावजूद विकास के प्रति राष्ट्र की अटूट प्रतिबद्धता की पुष्टि की। श्री मोदी ने कहा कि हम न केवल सुरक्षित हैं, बल्कि विकास की नई उपलब्धियां भी हासिल कर रहे हैं। हम आत्मनिर्भर भारत अभियान को आगे बढ़ा रहे हैं। हम अत्याधुनिक बुनियादी ढांचे का निर्माण कर रहे हैं।

गंगा एक्सप्रेसवे को इस व्यापक विकास प्रतिमान का प्रतीक बताते हुए प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के अंत में उत्तर प्रदेश के लोगों पर भरोसा जताया कि वे उभरते अवसरों को वास्तविक समृद्धि में बदल देंगे। श्री मोदी ने कहा कि मुझे विश्वास है कि गंगा एक्सप्रेसवे जो अवसर लेकर आएगा, उत्‍तर प्रदेश के लोग उन अवसरों को अपनी कड़ी मेहनत और प्रतिभा से साकार कर देंगे।




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प्रधानमंत्री ने बाबा विश्वनाथ मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना की; समस्‍त देशवासियों के समृद्धि और अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना की

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने आज काशी स्थित बाबा विश्वनाथ मंदिर में दर्शन और पूजा-अर्चना की, जहां उन्होंने देशवासियों के सुख, समृद्धि और आरोग्‍यपूर्ण जीवन के लिए कामना की।

“हर हर महादेव!

काशी में बाबा विश्वनाथ मंदिर में दर्शन और पूजन का सौभाग्य मिला। यहां भगवान भोलेनाथ से समस्त देशवासियों के लिए सुख-समृद्धि और आरोग्यपूर्ण जीवन की कामना की।

माँ अन्नपूर्णा एवं माँ गंगा के दर्शन से असीम शांति मिली। उनकी कृपा से हर किसी में सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो !

काशी की जनता को पुनः नमन

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केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने आज नई दिल्ली में ‘सीमाओं को जोड़ना, विश्वास का निर्माण’ विषय के साथ एक व्यापक जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित किया

नई दिल्ली – उत्तर क्षेत्र के मुख्य आयकर आयुक्त (अंतर्राष्ट्रीय कर) ने आज नई दिल्ली में ‘सीमाओं को जोड़ना, विश्वास का निर्माण’ शीर्षक से एक व्यापक जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित किया। इस जनसंपर्क कार्यक्रम का उद्देश्य हितधारकों के बीच नए आयकर अधिनियम, 2025; आयकर नियम, 2026 तथा नए फॉर्मों के प्रावधानों के बारे में जागरूकता बढ़ाना था, जिसमें अंतर्राष्ट्रीय कराधान, हस्तांतरण मूल्य निर्धारण और अग्रिम मूल्य निर्धारण समझौतों पर विशेष जोर दिया गया। .

अपने मुख्य भाषण में, केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के सदस्य (विधान) श्री प्रसेनजीत सिंह ने कानूनों और नियमों को सरल बनाने तथा विश्वास-आधारित शासन को बढ़ावा देने के लिए सरकार के प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने आयकर अधिनियम के कई प्रावधानों के अपराध से मुक्ति, करदाताओं को समय पर सेवाएं सुनिश्चित करने के उपायों तथा स्वैच्छिक अनुपालन को प्रोत्साहित करने के लिए आंकड़ा-आधारित ‘नज’ (NUDGE) अभियानों पर भी चर्चा की।

कार्यक्रम के दौरान, श्री प्रसेंजीत सिंह ने अंतर्राष्ट्रीय कर के प्रमुख पहलुओं जैसे सेफ हार्बर, एपीए, विदेशी कर क्रेडिट और टीआरसी पर नौ पुस्तिकाओं का भी विमोचन किया, जिसका उद्देश्य करदाताओं को प्रभावी मार्गदर्शन प्रदान करना है। विभाग के एआई-संचालित चैटबॉट ‘कर साथी’  के बारे में भी बताया।

यह जनसंपर्क कार्यक्रम विभाग की प्रमुख हितधारक सहभागिता श्रृंखला, ‘प्रारंभ’का हिस्सा है। इसमें उद्योग जगत, बहुराष्ट्रीय कंपनियों (एमएनसी), आईसीएआई, कर विशेषज्ञों और विभाग के अधिकारियों सहित लगभग 150 प्रतिभागियों ने भाग लिया।

इससे पहले अपने उद्घाटन संबोधन में, प्रधान मुख्य आयकर आयुक्त (अंतर्राष्ट्रीय कराधान) सुश्री मोनिका भाटिया ने वैश्वीकरण की अर्थव्यवस्था में कर-निश्चितता, एकरूपता और विश्वसनीयता के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने अंतर्राष्ट्रीय कर विभाग द्वारा विदेशों में स्थित भारतीय दूतावासों के सहयोग से आयोजित किए जाने वाले आगामी वैश्विक जनसंपर्क कार्यक्रमों की भी घोषणा की।

विभिन्न संगठनों, आईसीएआई, उद्योग जगत और कर परामर्श फर्मों से आए प्रतिभागियों ने सक्रिय रूप से भाग लिया और विभाग के इस जनसंपर्क कार्यक्रम की सराहना की। उन्होंने अनेक प्रश्न पूछे, जिनका उत्तर केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) के कर नीति प्रभाग और विदेशी कर प्रभाग के संयुक्त सचिव और निदेशक उत्तर विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा दिया गया। प्रतिभागियों ने दिए गए उत्तरों के लिए आभार व्यक्त किया।

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प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने उत्तर प्रदेश के वाराणसी में आयोजित महिला सम्मेलन की झलकियां साझा कीं

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज वाराणसी में आयोजित महिला सम्मेलन की झलकियां साझा कीं, जिसमें उन्होंने महिला सशक्तिकरण के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता, नारी शक्ति की प्रेरणादायी भागीदारी और काशी के निरंतर विकास पर जोर दिया।

एक्स पर पोस्ट की एक श्रृंखला में, प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने लिखा:

“वाराणसी के महिला सम्मेलन में हमारी नारीशक्ति की सहभागिता अत्यंत प्रेरणादायक रही।”

“हमारी सरकार की नीतियों के केंद्र में बहनों-बेटियों को रखा गया है। काशी में महिला सम्मेलन का अवसर भी नारीशक्ति के वंदन और विकास का उत्सव है।”

“उत्तर प्रदेश में बनास डेयरी से जुड़ी लाखों बहनें बहुत ही शानदार काम कर रही हैं। आज इन बहनों को सीधे उनके बैंक खातों में बोनस मिले हैं। मैं इन सभी बहनों को बहुत-बहुत बधाई देता हूं।”

“देश की बहनें-बेटियां महिला आरक्षण पर ब्रेक लगाने वाले परिवारवादी और तुष्टिकरण में डूबे दलों की कुटिल मंशा को पहचान गई हैं। असम, केरलम, पुडुचेरी, बंगाल और तमिलनाडु में रिकॉर्ड मतदान इन्हें सजा देने के लिए ही है।”

“कनेक्टिविटी हो, हेल्थकेयर इकोसिस्टम हो या फिर काशी की विरासत का संरक्षण, यहां के लोगों का जीवन आसान बनाने के लिए हम कोई कोर-कसर नहीं छोड़ रहे हैं।”

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रक्षा मंत्री ने रक्षा सहयोग को और सुदृढ़ करने के उद्देश्य से बिश्केक में अपने किर्गिजस्तान, कज़ाखस्तान और बेलारूसी समकक्षों के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं

नई दिल्ली  – रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने 28 अप्रैल, 2026 को किर्गिस्तान के बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) के रक्षा मंत्रियों की बैठक के दौरान अपने किर्गिजस्तान, कज़ाखस्तान और बेलारूसी समकक्षों के साथ द्विपक्षीय बैठकें कीं। किर्गिजस्तान के रक्षा मंत्री मेजर जनरल मुकाम्बेटोव रुस्लान मुस्तफ़ाएविच के साथ हुई बैठक में दोनों पक्षों ने मौजूदा द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को और सुदृढ़ बनाने के उपायों पर चर्चा की।

 

रक्षा मंत्री ने किर्गिज पक्ष को भारत में स्वदेशी रूप से विकसित हुए दो ‘भीष्म आरोग्य मैत्री हेल्थ क्यूब’ भेंट किए। इनका उद्देश्य प्राकृतिक आपदाओं के दौरान मानवीय सहायता, आपदा राहत तथा खोज एवं बचाव अभियानों को बेहतर बनाना है।

श्री राजनाथ सिंह ने किर्गिज मिलिट्री इंस्टीट्यूट, बिश्केक और मिलिट्री यूनिट 36806-ओश के आईटी केंद्रों में 12-12 कंप्यूटर सिस्टम सेट उपलब्ध कराने की परियोजना पूर्ण होने की भी घोषणा की। इसके तहत वॉरगेमिंग सॉफ्टवेयर का सफलतापूर्वक इंस्टॉलेशन किया गया तथा किर्गिज सशस्त्र बलों के कर्मियों को ऑन-द-जॉब प्रशिक्षण प्रदान किया गया।

श्री राजनाथ सिंह ने कज़ाखस्तान के रक्षा मंत्री के साथ अपनी बैठक में इस बात पर बल दिया कि दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग विविध क्षेत्रों तक फैला हुआ है और यह द्विपक्षीय साझेदारी का एक महत्वपूर्ण स्तंभ है।

श्री राजनाथ सिंह ने बेलारूस के रक्षा मंत्री लेफ्टिनेंट जनरल विक्टर ख्रेनिन के साथ बैठक के दौरान, इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत बेलारूस के साथ आपसी रूप से लाभकारी साझेदारी विकसित करने को उच्च प्राथमिकता देता है और उन्होंने क्षमता निर्माण तथा प्रशिक्षण को सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में से एक के रूप में रेखांकित किया।

इसके अतिरिक्त, रक्षा मंत्री ने चीन के रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जून और रूस के रक्षा मंत्री आंद्रेई बेलौसोव के साथ भी संक्षिप्त बातचीत की। इस दौरान मंत्रियों ने क्षेत्रीय एवं वैश्विक सुरक्षा परिदृश्य, विशेषकर पश्चिम एशिया में जारी घटनाक्रमों पर अपने विचारों का आदान-प्रदान किया।

इससे पहले, श्री राजनाथ सिंह और अन्य रक्षा मंत्रियों ने किर्गिज राष्ट्रपति श्री सादिर ज़ापारोव से शिष्टाचार भेंट की।

रक्षा मंत्रियों ने बिश्केक के विक्ट्री स्क्वायर पर माल्यार्पण भी किया।

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हाई-ऑक्टेन एक्शन थ्रिलर ‘धुरंधर (पार्ट वन) जापान में 10 जुलाई को रिलीज होगी………!

29.04.2026 – हाई-ऑक्टेन एक्शन थ्रिलर ‘धुरंधर (पार्ट वन), अपने शानदार और रिकॉर्ड तोड़ ग्लोबल बॉक्स ऑफिस सफर के बाद अब 10 जुलाई को जापान में थिएटर रिलीज के लिए तैयार है। जियो स्टूडियोज और बी62 स्टूडियोज की इस फिल्म को आदित्य धर ने डायरेक्ट किया है। अपने बड़े पैमाने, दमदार कहानी और अलग जॉनर अपील के साथ, ‘धुरंधर’ जापान के दर्शकों से जुड़ने के लिए पूरी तरह तैयार है।

फिल्म में जबरदस्त एक्शन, इमोशन और गहराई से बुनी कहानी देखने को मिलती है, जो इसे एक संदेशपरक फिल्म के रूप में परिभाषित करतीं है और सभी के लिए एंगेजिंग सिनेमाई अनुभव बनाती है। हाल के समय की सबसे चर्चित हिंदी फिल्मों में से एक ‘धुरंधर’ देशप्रेम को दर्शकों का भरपूर प्यार मिला है और इसने कई बॉक्स ऑफिस रिकॉर्ड भी तोड़े हैं।

फिल्म में रणवीर सिंह के साथ संजय दत्त, अक्षय खन्ना, आर. माधवन, अर्जुन रामपाल और सारा अर्जुन जैसे कलाकार नजर आते हैं। धुरंधर (पार्ट 1) ने इंटरनेशनल मार्केट में भी बड़ा मुकाम हासिल किया।

यह नॉर्थ अमेरिका में अब तक की नंबर 1 हिंदी फिल्म बनी, वहीं कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली भारतीय फिल्म रही और यूके में भी टॉप परफॉर्म करने वाली भारतीय फिल्मों की श्रेणी में शामिल हुई है। इस स्पाई एक्शन एंटरटेनर ने पूर्व में, दुनियाभर में 1328 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार किया था।

प्रस्तुति : काली दास पाण्डेय

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गुजरात की एक संस्था कचरे से बायोगैस बनाकर प्रतिदिन 500 से अधिक लोगों के लिए भोजन पकाती है

नई दिल्ली – गांधीनगर स्थित एक शैक्षणिक संस्थान दो बायोगैस संयंत्रों से प्रतिदिन 500 से अधिक लोगों के लिए भोजन तैयार करता है, जिससे एलपीजी पर निर्भरता समाप्त हो जाती है। यह दर्शाता है कि कुशल अपशिष्ट प्रबंधन ऊर्जा आत्मनिर्भरता और स्थिरता को सक्षम बनाता है।

स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के तहत नवाचार के एक प्रभावशाली उदाहरण के रुप में, गुजरात के गांधीनगर स्थित शैक्षणिक संस्थान ने यह दर्शाया है कि वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन ऊर्जा आत्मनिर्भरता और स्थिरता को बढ़ावा दे सकता है।

अडालज के पास स्थित वासुमति चैरिटेबल ट्रस्ट द्वारा संचालित श्रीमती मानेकबा विनय विहार शैक्षणिक परिसर ने खाना पकाने के लिए बायोगैस आधारित प्रणाली अपनाकर पारंपरिक एलपीजी पर अपनी निर्भरता समाप्त कर दी है। परिसर में अब प्रतिदिन 500 से अधिक लोगों के लिए भोजन तैयार किया जाता है, जिनमें लगभग 250 छात्रावास के छात्र और 15 कर्मचारियों के परिवार शामिल हैं इन्हें दिन में दो बार भोजन परोसा जाता है।

संस्था दो बायोगैस संयंत्रों का संचालन करती है जिनकी संयुक्त क्षमता 90 घन मीटर प्रतिदिन है। इन संयंत्रों में संस्था के गौशाला में रखी गई 222 गायों के गोबर, रसोई के कचरे और आसपास के खेतों से प्राप्त कृषि अवशेषों का उपयोग करके बायोगैस बनाई जाती है जो संस्था की संपूर्ण ईंधन आवश्यकता को पूरा करती है, जिससे एलपीजी सिलेंडरों की आवश्यकता पूरी तरह समाप्त हो जाती है।

शैक्षणिक संस्थान के अधिकारियों ने बताया कि “गुजरात सरकार की संस्थागत बायोगैस संयंत्र योजना के तहत हम खाना पकाने की गैस के मामले में आत्मनिर्भर हो गए हैं। गायें पर्याप्त गोबर देती हैं, और गैस उत्पादन के बाद बनने वाले स्लरी का उपयोग खेतों में खाद के रूप में किया जाता है, जिससे पूरी तरह से जैविक खेती संभव हो पाती है। इस संयंत्र के बिना, हमें हर महीने लगभग 30 एलपीजी सिलेंडरों की आवश्यकता होती,”

जैविक अपशिष्ट से बनी बायोगैस, खाना पकाने के लिए उपलब्ध सबसे व्यवहार्य, किफायती और पर्यावरण के अनुकूल ईंधनों में से एक है। नाइट्रोजन से भरपूर उप-उत्पाद स्लरी, एक प्रभावी जैविक उर्वरक के रूप में प्रयोग की जाती है, जिससे रासायनिक पदार्थों पर निर्भरता कम होती है, लागत घटती है और मिट्टी की उर्वरता बनी रहती है। इस प्रकार एक ही प्रयास से दोहरा लाभ प्राप्त होता है।

गुजरात ऊर्जा विकास एजेंसी (जीईडीए) 25 से 85 घन मीटर क्षमता वाले बायोगैस संयंत्रों के लिए वित्तीय सहायता प्रदान करती है। गैर-लाभकारी संस्थाएं 75 प्रतिशत तक सब्सिडी के लिए पात्र हैं, जिससे संगठनों की एक विस्तृत श्रृंखला के लिए यह परिवर्तन आर्थिक रूप से सुलभ हो जाता है।

पिछले पांच वर्षों में, गुजरात भर में लगभग 193 संस्थागत बायोगैस संयंत्र लगाए गए हैं। गुजरात वैकल्पिक ऊर्जा और सतत विकास को बढ़ावा देने, प्रदूषण कम करने, ऊर्जा आत्मनिर्भरता प्राप्त करने और गौशालाओं और शैक्षणिक संस्थानों से प्राप्त जैविक कचरे के वैज्ञानिक निपटान की दिशा में निरंतर प्रगति कर रहा है।

स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के उद्देश्यों के अनुरूप, ये पहलें दर्शाती हैं कि शहर और संस्थान सतत विकास की दिशा में अग्रणी भूमिका निभा रहे हैं। अपशिष्ट प्रबंधन के लिए नवीन, चक्रीय दृष्टिकोण अपनाकर, वे न केवल पर्यावरणीय प्रभाव को कम कर रहे हैं, बल्कि अपशिष्ट को एक संसाधन के रूप में भी उपयोग में ला रहे हैं। स्वच्छ ऊर्जा उत्पादन से लेकर जैविक प्रथाओं को बढ़ावा देने तक, ये प्रयास, वैज्ञानिक अपशिष्ट प्रबंधन, सामुदायिक भागीदारी और दूरदर्शी नीतियां मिलकर देश में स्वच्छ, हरित और अधिक आत्मनिर्भर शहरों का मार्ग प्रशस्त करती हैं।

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इस्पात मंत्रालय के सचिव संदीप पौंड्रिक ने द्वितीयक इस्पात क्षेत्र के लिए कौशल विकास पाठ्यक्रमों का उद्घाटन किया

नई दिल्ली – इस्पात मंत्रालय के सचिव श्री संदीप पौंड्रिक ने मंडी गोबिंदगढ़ स्थित राष्ट्रीय द्वितीयक इस्पात प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईएसएसटी) में कौशल विकास प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों का उद्घाटन किया। इस नवोन्मेषी पहल का उद्देश्य आईटीआई छात्रों और द्वितीयक इस्पात क्षेत्र के कर्मचारियों की रोजगार क्षमता को बढ़ाना और उन्हें उद्योग – प्रासंगिक कौशल के साथ सशक्‍त बनाना है। इस कार्यक्रम में इस्पात मंत्रालय के संयुक्त सचिवों और अन्य अधिकारियों, उद्योग संघों और द्वितीयक क्षेत्र के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

इस्पात सचिव ने इस बात पर प्रकाश डाला कि 2030 तक इस्पात उत्पादन क्षमता लगभग 200 से 300 मिलियन टन तक पहुंच जाएगी। उन्होंने समझाया कि यदि 1 मिलियन टन इस्पात उत्पादन के लिए 1,500 से 2,000 श्रमिकों की आवश्यकता होती है, तो अतिरिक्त 80 मिलियन टन उत्पादन से रोजगार के व्‍यापक अवसर पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि कुशल मानव संसाधन की कमी रोजगार के क्षेत्र में चुनौतियां पैदा करती हैं, इसलिए कौशल विकास आवश्यक है। उन्होंने सलाह दी कि ध्यान केवल सैद्धांतिक शिक्षा तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि उद्योग की मांगों के अनुरूप व्यावहारिक प्रशिक्षण की ओर बढ़ना चाहिए। सचिव महोदय ने सभी संगठनों से अनुरोध किया कि एनआईएसएसटी के साथ समझौता ज्ञापन के तहत आईटीआई छात्रों और कार्यरत कर्मचारियों के लिए कम से कम एक पाठ्यक्रम प्रायोजित करें। उन्होंने यह कहते हुए अपनी बात समाप्त की कि एनआईएसएसटी का लक्ष्य स्वयं को द्वितीयक इस्पात क्षेत्र के लिए एक आवासीय संस्थान के रूप में स्थापित करना है, जो केवल स्थानीय मानव संसाधन तक सीमित न रहकर पूरे देश के प्रशिक्षुओं की जरूरतों को पूरा करे।

उद्योग जगत ने भी आईटीआई छात्रों और इस उद्योग के कर्मचारियों दोनों के लिए इस पहल का समर्थन करने हेतु कदम आगे बढाए हैं।

इस्पात मंत्रालय की यह पहल औद्योगिक विकास और नवाचार, विशेष रूप से द्वितीयक इस्पात क्षेत्र में एक कुशल कार्यबल तैयार करने के सरकार के व्यापक विजन के अनुरूप है।

पर्यावरणीय रूप से सतत प्रथाओं को अपनाने और हरित इस्पात उत्पादन की दिशा में प्रगति के लिए चार उद्योगिक इकाइयों को ‘ग्रीन स्टील प्रमाणन’ भी प्रदान किया गया।

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डॉ. जितेंद्र सिंह ने भारत भर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में अंतरिक्ष प्रयोगशालाएं स्थापित करने की योजना की समीक्षा की; पहले चरण में ऐसी सात प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी

नई दिल्ली, 26 अप्रैल –  केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज भारत भर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में अंतरिक्ष प्रयोगशालाएं स्थापित करने की योजनाओं की समीक्षा की, जिसके तहत पहले चरण में सात ऐसी प्रयोगशालाएं स्थापित की जाएंगी ताकि छात्रों को उपग्रह प्रणालियों, रॉकेटरी और मिशन डिजाइन में व्यावहारिक अनुभव प्रदान किया जा सके।

इस पहल का उद्देश्य भारत के तेजी से बढ़ते अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए कुशल युवाओं की एक मजबूत श्रृंखला तैयार करना है, जिसने गैर-सरकारी संस्थाओं के लिए इस क्षेत्र को खोलने के बाद पिछले पांच वर्षों में 600 मिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का निजी निवेश आकर्षित किया है।

यह समीक्षा इन-स्‍पेस के अध्यक्ष डॉ. पवन गोयनका द्वारा दी गई विस्तृत जानकारी के बाद हुई, जिन्होंने भारत के अंतरिक्ष सुधारों में हुई प्रगति और मूल्य श्रृंखला में निजी खिलाड़ियों की बढ़ती भागीदारी का अवलोकन प्रस्तुत किया।

भारत का निजी अंतरिक्ष पारिस्थितिकी तंत्र तेजी से विकसित हुआ है, और स्टार्टअप्स की संख्या 2019 में एकल अंक से बढ़कर 2026 की शुरुआत तक 400 से अधिक हो गई है। ये स्टार्टअप्स अब प्रक्षेपण यान, उपग्रह और पेलोड निर्माण, जमीनी अवसंरचना, डेटा सेवाओं और उभरते इन-ऑर्बिट क्षेत्रों में सक्रिय हैं। बढ़ती वैश्विक रुचि स्थापित अंतरिक्ष यात्री देशों सहित अंतर्राष्ट्रीय ग्राहकों के साथ बढ़ते जुड़ाव में भी परिलक्षित होती है।

इस गति को बनाए रखने के लिए कई लक्षित पहलें शुरू की गई हैं। विकास के चरण में स्टार्टअप्स को सहयोग देने के लिए एसआईडीबीआई के साथ मिलकर 1,000 करोड़ रुपये का वेंचर कैपिटल फंड शुरू किया जा रहा है, वहीं 500 करोड़ रुपये का टेक्नोलॉजी एडॉप्शन फंड शुरुआती चरण के नवाचारों को व्यावसायिक रूप से व्यवहार्य उत्पादों में परिवर्तित करने में मदद कर रहा है। सीड फंड योजना के तहत विचार और प्रोटोटाइप चरण में स्टार्टअप्स को 1 करोड़ रुपये तक का अनुदान, मार्गदर्शन और इकोसिस्टम सहायता प्रदान की जा रही है।

कुशल कार्यबल तैयार करने के प्रयास भी जारी हैं, जिसके तहत 17 विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम पूरे किए जा चुके हैं और उपग्रह निर्माण, प्रक्षेपण यान प्रणाली और अंतरिक्ष साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में लगभग 900 प्रतिभागियों को प्रमाणित किया जा चुका है। विश्वविद्यालयों में स्थापित होने वाली आगामी अंतरिक्ष प्रयोगशालाओं से व्यावहारिक और प्रायोगिक शिक्षण के अवसर प्रदान करके इस प्रतिभा भंडार को और मजबूत करने की उम्मीद है।

बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में, सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल के तहत निजी नेतृत्व वाले पृथ्वी अवलोकन उपग्रह समूह, स्टार्टअप्स के लिए साझा उपग्रह बस प्लेटफॉर्म का विकास, और अहमदाबाद स्थित इन-स्‍पेस तकनीकी केंद्र में डिजाइन, एकीकरण और परीक्षण सुविधाओं तक विस्तारित पहुंच जैसी पहलों के माध्यम से नए अवसर सृजित हो रहे हैं। उद्योग की भागीदारी के साथ लघु उपग्रह प्रक्षेपण यान (एसएसएलवी) सहित प्रौद्योगिकी हस्तांतरण कार्यक्रम भी प्रगति कर रहे हैं।

अंतरिक्ष क्षेत्र में भारत की वैश्विक भागीदारी लगातार मजबूत होती जा रही है, और अब इसकी साझेदारी 45 से अधिक देशों तक फैली हुई है। हाल के सहयोगों में सिंगापुर और संयुक्त अरब अमीरात के साथ समझौते, अंतर्राष्ट्रीय अंतरिक्ष मंचों में भारतीय कंपनियों की भागीदारी और घरेलू स्टार्टअप को वैश्विक बाजारों से जोड़ने की पहल शामिल हैं।

स्थापना के बाद से, इन-स्‍पेस को स्टार्टअप्स, एमएसएमई, शैक्षणिक संस्थानों और उद्योग से 1,000 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए हैं, और इसने 129 प्राधिकरण प्रदान किए हैं, जो भारत के सुधारित अंतरिक्ष इको-सिस्‍टम में बढ़ते विश्वास को दर्शाता है।

फोटो – केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह को नई दिल्ली में इन-स्पेस के अध्यक्ष डॉ. पवन गोयनका द्वारा जानकारी दी जा रही है

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रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन ने उन्नत बख्तरबंद वाहनों (ट्रैक्ड और व्हील्ड) का अनावरण किया

नई दिल्ली – रक्षा विभाग (आरएंडडी) के सचिव और रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) के अध्यक्ष डॉ. समीर वी. कामत ने 25 अप्रैल, 2026 को महाराष्ट्र के अहिल्यानगर स्थित डीआरडीओ प्रयोगशाला परिसर में उन्नत बख्तरबंद वाहनों (ट्रैक्ड एवं व्हील्ड) का अनावरण किया। इन अत्याधुनिक वाहनों को व्हीकल्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (वीआरडीई) द्वारा डिजाइन और विकसित किया गया है। आधुनिक तकनीक से लैस ये बख्तरबंद वाहन सशस्त्र बलों की बदलती और जटिल परिचालन आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए तैयार किए गए हैं।

दोनों उन्नत बख्तरबंद वाहनों को स्वदेशी रूप से डिजाइन एवं विकसित 30 मिमी के क्रूलेस टरेट से सुसज्जित किया गया है, जो गतिशीलता, मारक क्षमता और सुरक्षा की आधुनिक आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस है। इन वाहनों में हाई-पावर इंजन और ऑटोमैटिक ट्रांसमिशन का समावेश किया गया है, जिससे उच्च पावर-टू-वेट अनुपात, बेहतर गति, तीव्र ढलानों एवं कठिन बाधाओं को पार करने की क्षमता सुनिश्चित होती है। सुरक्षा के दृष्टिकोण से, इनमें चारों ओर मॉड्यूलर ब्लास्ट और बैलिस्टिक प्रोटेक्शन प्रदान किया गया है, जो एसटीएएनएजी लेवल 4 तथा 5 के मानकों के अनुरूप है। इसके अतिरिक्त, हाइड्रो जेट प्रणाली से युक्त यह एम्फीबियन प्लेटफ़ॉर्म जल अवरोधों को पार करने में सक्षम है, जिससे इसकी ऑपरेशनल लचीलापन और बहुउद्देशीय उपयोगिता में उल्लेखनीय वृद्धि होती है।

30 मिमी का क्रू-लेस टरेट 7.62 मिमी पीकेटी गन के साथ एकीकृत है और इसे एंटी-टैंक गाइडेड मिसाइलों के प्रक्षेपण के लिए भी कॉन्फ़िगर किया गया है, जिससे इसकी मारक क्षमता व बहुआयामी उपयोगिता और बढ़ जाती है। इसके मूल डिजाइन में लचीलापन रखा गया है, जिससे इसे विभिन्न परिचालन भूमिकाओं के अनुरूप आसानी से कॉन्फ़िगर किया जा सकता है। इन उन्नत बख्तरबंद वाहनों में स्वदेशी सामग्री की हिस्सेदारी वर्तमान में लगभग 65 प्रतिशत है, जिसे भविष्य में बढ़ाकर 90 प्रतिशत तक ले जाने की योजना है, जो रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता को और सुदृढ़ करेगा।

इन वाहनों का निर्माण दो औद्योगिक साझेदारों टाटा एडवांस्ड सिस्टमस लिमिटेड और भारत फोर्ज लिमिटेड द्वारा किया गया है, जिन्हें कई एमएसएमई का सहायता प्राप्त है। इस सहयोग के परिणामस्वरूप, विकसित हो रहे रक्षा इकोसिस्टम को मजबूती मिली है।

इस कार्यक्रम में प्रतिष्ठित वैज्ञानिक और आर्मामेंट एंड कॉम्बैट इंजीनियरिंग सिस्टम्स (एसीई); प्रोडक्शन, कोऑर्डिनेशन एंड सर्विसेज इंटरैक्शन (पीसीएंडएसआई) के महानिदेशक; टीएएसएल पुणे के सीईओ व एमडी; बीएफएल पुणे के वाइस चेयरमैन तथा जॉइंट एमडी; एवं उद्योग जगत के अन्य प्रतिनिधि शामिल हुए। कार्यक्रम में विभिन्न डीआरडीओ प्रयोगशालाओं के निदेशक और वैज्ञानिक भी उपस्थित थे, जिनमें व्हीकल्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट, आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट, डिफेंस मेटलर्जिकल रिसर्च लैबोरेटरी, हाई एनर्जी मैटेरियल्स रिसर्च लैबोरेटरी, कॉम्बैट व्हीकल्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट, और रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट (इंजीनियर्स) शामिल हैं।

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“जो देश अपने श्रमिकों की गरिमा को महत्व देता है, वह प्रगति के पथ पर अजेय है”: डॉ. मांडविया

नई दिल्ली – केंद्रीय श्रम और रोजगार तथा युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया ने आज बडगाम के ओमपोरा में 30 बिस्तरों वाले कर्मचारी राज्य बीमा निगम (ईएसआईसी) अस्पताल का उद्घाटन किया। इससे जम्मू-कश्मीर में श्रमिकों और उनके परिवारों के लिए स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और सामाजिक सुरक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूती मिलेगी। नव उद्घाटन किया गया यह अस्पताल कश्मीर का पहला ईएसआईसी अस्पताल है, जो इस क्षेत्र में श्रमिक कल्याण सेवाओं के विस्तार में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर है।

 

सभा को संबोधित करते हुए डॉ. मांडविया ने कहा, “जो देश अपने श्रमिकों की गरिमा को महत्व देता है, वह प्रगति के पथ पर अजेय है।” उन्होंने आगे कहा कि यह कार्यबल ही है जिसके अथक प्रयासों से राष्ट्र आगे बढ़ता है, और इसलिए श्रमिकों का कल्याण शासन के केंद्र में रहना चाहिए। उन्होंने जोर देते हुए कहा, “प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार देश के प्रत्येक श्रमिक के लिए गरिमा, सुरक्षा और स्वास्थ्य सेवा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।”

डॉ. मांडविया ने कहा, “श्रमिक कल्याण के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को वैश्विक मान्यता मिली है। 2025 में, अंतर्राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा संघ ने हमारे देश को ‘सामाजिक सुरक्षा में उत्कृष्टता’ पुरस्कार से सम्मानित किया। अंतर्राष्ट्रीय श्रम संगठन द्वारा प्रकाशित आंकड़ों के अनुसार, हमारी सामाजिक सुरक्षा कवरेज 2015 में 19 प्रतिशत से बढ़कर 2025 में 64.3 प्रतिशत हो गई है।”

पिछले वर्ष लागू किए गए चार श्रम संहिताओं के परिवर्तनकारी प्रभाव पर प्रकाश डालते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इन सुधारों ने भारत के श्रम तंत्र को आधुनिक बनाया है और इसे अधिक श्रमिक-केंद्रित, पारदर्शी और भविष्य के लिए तैयार किया है। उन्होंने कहा, “नई श्रम संहिताएं श्रमिकों के लिए कई लंबे समय से प्रतीक्षित सुरक्षा उपायों की गारंटी देती हैं, जिनमें वार्षिक स्वास्थ्य जांच, अनिवार्य नियुक्ति पत्र और न्यूनतम मजदूरी शामिल हैं। ईएसआईसी अस्पतालों के माध्यम से वार्षिक स्वास्थ्य जांच का प्रावधान बीमारियों का शीघ्र पता लगाने, श्रमिकों के लिए निवारक स्वास्थ्य देखभाल सुनिश्चित करने और उनके भविष्य को सुरक्षित करने में सहायक होगा।”

मंत्री जी ने कहा कि 1952 में अपनी स्थापना के बाद से ईएसआईसी देश में श्रमिक कल्याण के सबसे मजबूत स्तंभों में से एक बन गया है। आज, यह योजना पूरे भारत में 3.84 करोड़ बीमित व्यक्तियों और लगभग 15 करोड़ लाभार्थियों को स्वास्थ्य सेवा और सामाजिक सुरक्षा लाभ प्रदान करती है। उन्होंने यह भी कहा कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के साथ ईएसआईसी के एकीकरण से सूचीबद्ध अस्पतालों में लाभार्थियों के लिए कैशलेस उपचार की सुविधा और भी व्यापक हो गई है।

इस कार्यक्रम के अंतर्गत, डॉ. मनुस्क मांडविया ने ओमपोरा में अस्पताल के निर्माण में योगदान देने वाले श्रमिकों को सम्मानित किया और जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के बीमित व्यक्तियों को विभिन्न सामाजिक सुरक्षा लाभ भी प्रदान किए।

165 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित इस अस्पताल में 100 बिस्तरों तक विस्तार की सुविधा है और इससे 50,000 से अधिक श्रमिकों और उनके परिवार के सदस्यों को प्रत्यक्ष लाभ मिलने की उम्मीद है। ईएसआई योजना 16 अक्टूबर, 1989 को जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश में शुरू की गई थी, जिसमें जम्मू, कठुआ और श्रीनगर के लगभग 7,000 श्रमिकों को शामिल किया गया था। वर्तमान में, ईएसआई योजना जम्मू और कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश के सभी जिलों में लागू है, जिससे लगभग 1,83,119 बीमित व्यक्तियों और लगभग 7,00,000 लाभार्थियों को लाभ मिल रहा है। इसका संचालन जम्मू स्थित ईएसआईसी क्षेत्रीय कार्यालय और जम्मू-कश्मीर कर्मचारी राज्य बीमा सोसायटी (जेकेईएसआईएस) के माध्यम से किया जाता है।

उद्घाटन समारोह में श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, ईएसआईसी, स्थानीय प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारी तथा जन प्रतिनिधि उपस्थित थे।

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रांची पुलिस ने कारवाई करते हुए नशा और कार्ड खेल रहे लोगों को खदेड़ा

रांची,28.04.2026 –  हरमू जतरा मैदान और हरमू नदी के किनारे(27.04.2026) रांची पुलिस ने कारवाई करते हुए नशा और कार्ड खेल रहे लोगों को खदेड़ा।

पुलिस की छापेमारी से हड़कंप मच गया और अफरा तफरी के बीच लोग भागते नजर आए इस दौरान पुलिस ने 2 दर्जन से अधिक लोगों को डिटेन कर पूछताछ भी की।

जुआ खेलने वाला कार्ड सहित कई आपत्तिजनक वस्तुओं को नष्ट किया गया, पूरी कारवाई रांची अरगोड़ा, कोतवाली और सुखदेव नगर थाना प्रभारी के नेतृत्व में की जा रही थी

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मारवाड़ी युवा मंच समर्पण शाखा द्वारा 21 स्थानों पर “अमृतधारा सेवा” का आयोजन

रांची,28.04.2026 – रांची समर्पण शाखा द्वारा अध्यक्षा शुभा अग्रवाल के नेतृत्व में सेवा कार्यों की श्रृंखला के अंतर्गत “अमृतधारा सेवा” का आयोजन किया गया।

शाखा द्वारा शहर के 21 विभिन्न स्थानों पर अमृतधारा प्याऊ सफलतापूर्वक स्थापित की गई।

भीषण गर्मी को देखते हुए इस सेवा के अंतर्गत राहगीरों एवं जरूरतमंद लोगों को शीतल जल पिलाकर राहत प्रदान की गई।

इस अवसर पर अध्यक्षा शुभा अग्रवाल , सचिव रेखा राइका, वर्षा धानुका, वीना शर्मा, कृष्णा अग्रवाल एवं अन्य सदस्यगण उपस्थित रहीं। सभी सदस्यों ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर इस पुनीत कार्य को सफल बनाया।

समर्पण शाखा सदैव समाज सेवा के लिए तत्पर है और आगे भी इसी प्रकार जनहित में कार्य करती रहेगी।

यह जानकारी मीडिया प्रभारी वेदिका सिंघानिया ने दी।

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