केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह आज नई दिल्ली में सीमा सुरक्षा बल (BSF) के अलंकरण समारोह और रुस्तमजी स्मृति व्याख्यान में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए

नई दिल्ली – केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह आज नई दिल्ली में सीमा सुरक्षा बल के अलंकरण समारोह और रुस्तमजी स्मृति व्याख्यान में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर निदेशक, आसूचना ब्यूरो, सचिव, सीमा प्रबंधन और सीमा सुरक्षा बल (BSF) के महानिदेशक सहित अनेक गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

 

अपने संबोधन में केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि यह अलंकरण समारोह बल की अडिग निष्ठा, कतर्व्यपरायणता और राष्ट्र के प्रति पूर्ण समर्पण का प्रतीक है। 1965 के युद्ध के बाद सीमाओं की सुरक्षा व्यवस्था में पाए गए गैप्स और कमियों का गहन अध्ययन करने के बाद एक ऐसे बल की आवश्यकता महसूस की गई जो शांति काल में भी हमारी सीमाओं की सुरक्षा करे। उस समय पद्म विभूषण श्री के एफ रुस्तम जी के नेतृत्व में बीएसएफ का गठन हुआ और तब से इस बल ने पूरे देश की सीमाओं की सुरक्षा को सुनिश्चित किया है। उन्होंने कहा कि श्री रुस्तम जी ने सीमा सुरक्षा बल की जो नींव डाली उस पर सुरक्षा के क्षेत्र में एक भव्य इमारत बनाने का काम आज बीएसएफ ने किया है जो देश के लिए गौरव की बात है।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने बीएसएफ की महिला टीम द्वारा माउंट एवरेस्ट पर सफल आरोहण करने की ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए दल के सभी सदस्यों और सीमा सुरक्षा बल के सभी जवानों को हार्दिक बधाई दी। उन्होंने कहा कि एवरेस्ट की चोटी पर जब वंदे मातरम गाया जाता है तो यहां दिल्ली में बैठकर भी हमारे मन में बहुत आनंद और संतोष की अनुभूति होती है। गृह मंत्री ने कहा कि सीमा सुरक्षा बल की वीरांगनाओं को विश्व की सबसे ऊंची चोटी पर वंदे मातरम का गान करने का सौभाग्य मिला है।

श्री अमित शाह ने कहा कि सीमा सुरक्षा के क्षेत्र में आज कई प्रकार की नई चुनौतियां हमारे सामने खड़ी हैं। अवैध घुसपैठ, नारकोटिक्स की तस्करी, गौ तस्करी, नकली करेंसी, संगठित अपराध, ड्रोन से हथियारों और नशीले पदार्थों की तस्करी सहित कई प्रकार की चुनौतियां सीमा सुरक्षा बल के सामने हैं, लेकिन बीएसएफ ने लगातार इन चुनौतियों से निपटने का सुनियोजित प्रयास किया है। श्री शाह ने कहा कि बीएसएफ ने अपने पास उपलब्ध संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग करते हुए इन सभी चुनौतियों के बखूबी सामना कर देश की सुरक्षा करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में इस बल की भूमिका को और अधिक समन्वित और व्यापक करना होगा।

श्री अमित शाह ने कहा कि अब हम केवल पारंपरिक तरीके से सीमाओं की सुरक्षा नहीं कर सकते। हमें राज्य पुलिस, केन्द्रीय सशस्त्र पुलिस बल (CAPFs), अन्य सशस्त्र बल, नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB), खुफिया एजेंसियों और राज्य प्रशासन के साथ मिलकर सुरक्षा ग्रिड को मजबूत करना पड़ेगा तभी हम इन नई चुनौतियों का सामना कर सकेंगे। हमें सीमा सुरक्षा को एक आइसोलेटेड ज़िम्मेदारी के रूप में देखने की जगह एक टेरिटोरियल रिस्पांसिबिलिटी के रूप में देखना होगा तभी हम इन सभी चुनौतियों को पार करने में सफल होंगे। श्री शाह ने यह भी कहा कि हमें आने वाले खतरों को भी देखना पड़ेगा। हमारी जिम्मेदारी है कि सीमापार से घुसपैठ द्वारा कृत्रिम तरीके से जनसांख्यिकी में किए जा रहे बदलाव को रोकने के लिए भी हमें सतर्क और सजग रहना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि नार्कोटिक्स और फेक करंसी के हमले से हमारे अर्थ तंत्र को खोखला करने के प्रयास के प्रति भी हमें सतर्क रहना होगा। साइबर चुनौतियां, हाइब्रिड वॉरफेयर और ड्रोन के खतरों के लिए एक नई रणनीति के साथ हमें काम करना होगा।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि सियाचिन और कश्मीर की बर्फीली पहाड़ियां, कुपवाड़ा, केरन और उरी जैसे दुर्गम क्षेत्र, राजस्थान का रण, कच्छ का छोटा रण, सरक्रीक के दलदली नाले, सुंदरवन के घने जंगल, त्रिपुरा, मेघालय और मिजोरम की कठिन पूर्वी सीमाएं और ब्रह्मपुत्र से जुड़े कठिन संवेदनशील नदी क्षेत्रों के बीच सीमा सुरक्षा बल डटा हुआ है। इसी कारण 1965 में महज 25 बटालियनों से अल्प संसाधनों के साथ शुरू हुआ सीमा सुरक्षा बल, आज 2,70,000 की नफरी के साथ विश्व का सबसे बड़ा सीमा सुरक्षा बल बन गया है।

श्री अमित शाह ने कहा कि 2014 में प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में सरकार बनने के बाद हमारी रक्षा नीति और सीमाओं की सुरक्षा के बारे में हमारे नजरिए में आमूलचूल परिवर्तन आया है। पाकिस्तान द्वारा किए गए तीनों हमलों का हमने जवाब दिया है, चाहे उरी हो, पुलवामा हो या पहलगाम हो। हमने सर्जिकल स्ट्राइक, एयर स्ट्राइक और ऑपरेशन सिंदूर के माध्यम से पाकिस्तान के अंदर उनके मर्मस्थान पर प्रहार कर मुंहतोड़ जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि वह ज़माना गया कि आतंकी हमलों के बाद वार्ताएं होती थीं, नक्सलवादी बेखौफ होकर जनसंहार करते थे और सरकारें सिर्फ़ वार्ता करती थीं। हमने अपने सुरक्षा परिदृश्य को भारत के संविधान की स्पिरिट के साथ मज़बूत बनाने का काम किया है। यह एक प्रकार से नए Defence Doctrine की घोषणा है और इसमें सीमा सुरक्षा बल का बहुत बड़ा योगदान रहा है।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि भारत सरकार और गृह मंत्रालय, सीमा को एक स्मार्ट बॉर्डर बनाने में सीमा सुरक्षा बल को तकनीकी सहायता प्रदान करेंगे। उन्होंने कहा कि बीएसएफ़ द्वारा किए जा रहे कई प्रयोगों के साथ एक मजबूत सुरक्षा ग्रिड बनाने की दिशा में हम आगे बढ़ रहे हैं। आने वाले 1 साल के अंदर ही स्मार्ट बॉर्डर कंसेप्ट के साथ सीमा सुरक्षा की सुरक्षा में सभी प्रकार की तकनीक को समाहित कर एक अभेद्य बॉर्डर का सुरक्षा ग्रिड बनाने का काम आगे बढ़ रहा है। गृह मंत्रालय बहुत जल्दी, ड्रोन, रडार, आधुनिक कैमरा और अन्य नई तकनीक के साथ एक स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट को देश के सामने लेकर आएगा। गृह मंत्री ने कहा कि इस शुरूआत के बाद सीमा सुरक्षा बल का काम काफी सरल भी हो जाएगा और इसे मजबूती भी मिलेगी।

श्री अमित शाह ने कहा कि सीमा सुरक्षा बल की स्थापना के 60वें साल में ही हम स्मार्ट बॉर्डर प्रोजेक्ट की शुरूआत कर बांग्लादेश और पाकिस्तान की पूरी सीमा को अभेद्य बना देंगे जिससे बीएसएफ़ को बहुत बड़ी तकनीकी सहायता उपलब्ध हो जाएगी। इससे पराक्रम, शौर्य, समर्पण, देशभक्ति के साथ-साथ एक मजबूत तकनीकी सपोर्ट भी बल के पास उपलब्ध होगा जिससे हम दोनों सीमाओं को और अधिक सुरक्षित कर देंगे।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी के नेतृत्व में भारत सरकार ने तय किया है कि हम न केवल घुसपैठ को रोकेंगे, बल्कि एक-एक घुसपैठिए को चुन-चुन कर देश से बाहर निकाल देंगे और अपनी जनसांख्यिकी में कृत्रिम बदलाव नहीं होने देंगे। सीमा सुरक्षा बल को जनसांख्यिकी में बदलाव करने के षड्यंत्र को रोकना होगा। उन्होंने कहा कि अब त्रिपुरा, असम और पश्चिम बंगाल में ऐसी सरकारें हैं जो नीतिगत रूप से मानती है कि देश में घुसपैठ नहीं होनी चाहिए। यह सीमा सुरक्षा बल की जिम्मेदारी है कि हम न केवल सीमाओं की सुरक्षा करें बल्कि गांव के पटवारी, थाने, डिस्ट्रिक्ट कलेक्टर, DDO, जिला पुलिस अधीक्षक के साथ हमारा संवाद होना चाहिए। कौन नया घुसपैठिया आया है, उसके आने का क्या रूट है, कहां से तस्करी, गौ तस्करी हो रही है? इन सभी रूट्स को चुन-चुन कर बंद करना और समाप्त करना बीएसएफ की जिम्मेदारी है। इनसे मिली हुई सारी सूचना का उपयोग कर घुसपैठियों को निकालने और रोकने की एक सुचारू व्यवस्था बनानी चाहिए। गृह मंत्री ने कहा कि अब समय आ गया है कि सालों से बेरोक-टोक चल रही घुसपैठ को हमें रोकना होगा।

श्री अमित शाह ने कहा कि भारत सरकार के अडिग और दृढ़ निश्चय के कारण पांच दशक पुरानी नक्सलवाद की समस्या आज समाप्त हो गई है और भारत नक्सल मुक्त हो चुका है। उन्होंने कहा कि हमारे जवानों ने यह कर दिखाया है। गृह मंत्री ने कहा कि समस्या को बनाए रखना या कंट्रोल में रखना सुरक्षा का दृष्टिकोण नहीं हो सकता, बल्कि समस्या को समूल समाप्त करना ही सुरक्षा का दृष्टिकोण हो सकता है। उन्होंने कहा कि अब घुसपैठ के लिए भी बीएसएफ को इसी दृढ़ता के साथ आगे बढ़ना चाहिए।

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि वाइब्रेंट विलेजेज-1 और वाइब्रेंट विलेजेज -2 सीमा सुरक्षा बल के सहयोग से एक लोकतांत्रिक तरीके से चलाया गया विकास कार्यक्रम है। बीएसएफ के अधिकार क्षेत्र को 15 किलोमीटर से बढ़ाकर हमने 50 किलोमीटर किया है और पश्चिम बंगाल सरकार को जो भूमि देनी थी उसका निर्णय भी हो चुका है।

श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी जी ने High-Powered Demography Mission की घोषणा की है और जल्दी ही इसकी कमेटी बना कर काम शुरू हो जाएगा। हमें दोनों देशों की सीमाओं पर आने वाले दिनों में एक मजबूत सुरक्षा ग्रिड बनानी होगी और इसके लिए एक बहुत बड़ा अभियान भी चलाना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि बीएसएफ का 60वां वर्ष एक स्मार्ट बॉर्डर बनाने और  बीएसएफ के जवानों के कल्याण का भी वर्ष है। श्री शाह ने कहा कि दो महीने के अंदर ही नरेन्द्र मोदी सरकार बीएसएफ और सभी सीएपीएफ के जवानों के कल्याण के लिए एक बहुत बड़ा कार्यक्रम लाएगी। इसके बाद हमारे जवान सुनिश्चित होकर सीमाओं की सुरक्षा कर सकेंगे और उनके परिवारजनों की चिंता भारत सरकार का गृह मंत्रालय करेगा।

केन्द्रीय गृह मंत्री ने कहा कि नारकोटिक्स के खिलाफ भी हम देश में एक बहुत बड़ा अभियान चलाने जा रहे हैं और इसमें भी सीमा सुरक्षा बल की बहुत अहम भूमिका होगी। बीएसएफ़ की सतर्कता से दोनों तरफ की सूचनाएं एकत्रित कर नारकोटिक्स के खिलाफ लड़ाई में भी इस बल का बहुत बड़ा योगदान है। उन्होंने कहा कि आने वाले तीन-चार साल सीमा सुरक्षा में संपूर्ण बदलाव के वर्ष होंगे। उन्होंने कहा कि तकनीकी सहायता मिलने से जवानों की जिम्मेदारी कम नहीं होती, बल्कि बढ़ती है। श्री शाह ने कहा कि तकनीक को आत्मसात कर, स्थानीय लोगों से संवाद प्रस्थापित कर, स्थानीय प्रशासन से तालमेल बढ़ाते हुए हमें इस देश को घुसपैठ से मुक्त करने का लक्ष्य हासिल करना है।

*******************************

 

प्रधानमंत्री ने ‘जीवन में सुगमता’ और ‘कारोबार में सुगमता’ को बढ़ावा देने के लिए मंत्रिपरिषद बैठक की अध्यक्षता की

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने कल आयोजित मंत्रिपरिषद की सफल बैठक के संबंध में आज विस्तृत जानकारी साझा की।

प्रधानमंत्री ने कहा कि परिषद ने ‘जीवन में सुगमता’ और ‘कारोबार में सुगमता’ को बढ़ावा देने से संबंधित महत्वपूर्ण दृष्टिकोणों और सर्वोत्तम कार्य-प्रणालियों पर विचार-विमर्श किया। श्री मोदी ने जानकारी दी कि चर्चा का मुख्य केंद्र बिंदु विकसित भारत के साझा स्वप्न को साकार करने के लिए प्रभावी ढंग से सुधारों को कैसे आगे बढ़ाया जाए, इस विषय पर केंद्रित था।

प्रधानमंत्री ने एक्स पर पोस्ट में लिखा :

“कल मंत्रिपरिषद की एक सार्थक बैठक हुई। हमने ‘जीवन में सुगमता’ और ‘कारोबार में सुगमता’ को बढ़ावा देने से संबंधित दृष्टिकोणों और सर्वोत्तम कार्य-प्रणालियों का आदान-प्रदान किया और ‘विकसित भारत’ के हमारे साझा स्वप्न को साकार करने के लिए भविष्य में सुधार के तरीकों पर चर्चा की।”

 

 

*****************************

 

अहमदाबाद में 138वीं अपतटीय सुरक्षा समन्वय समिति की बैठक संपन्न हुई

नई दिल्ली – भारत के अपतटीय प्रतिष्ठानों और महत्वपूर्ण ऊर्जा अवसंरचना के लिए सुरक्षा ढांचे की समीक्षा और उसे मजबूत करने के उद्देश्य से भारतीय तटरक्षक बल के महानिदेशक परमेश शिवमणि की अध्यक्षता में 21 मई, 2026 को अहमदाबाद में 138वीं अपतटीय सुरक्षा समन्वय समिति (ओएससीसी) की बैठक आयोजित की गई।

बैठक में समुद्री क्षेत्र की जागरूकता बढ़ाने, अंतर-एजेंसी समन्वय को मजबूत करने, निगरानी क्षमताओं को बढ़ाने और उभरती अपतटीय सुरक्षा चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए संयुक्त प्रतिक्रिया तंत्र में सुधार करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। बैठक के दौरान, बदलते वैश्विक और क्षेत्रीय सुरक्षा परिवेश, मानवरहित और ड्रोन-सम्बंधी खतरों सहित आधुनिक युद्ध के पहलूओं और अंडमान और निकोबार क्षेत्र में विस्तारित अपतटीय अन्वेषण गतिविधियों पर विचार-विमर्श किया गया।

भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी), भारतीय नौसेना, भारतीय वायु सेना, गृह मंत्रालय, विदेश मंत्रालय, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय, महानिदेशक हाइड्रोग्राफर, महानिदेशक जहाजरानी, ​​खुफिया ब्यूरो, तेल और प्राकृतिक गैस आयोग और राज्य पुलिस बलों के प्रतिनिधियों ने इस बैठक में भाग लिया।

भारत की अपतटीय संपत्तियों और महत्वपूर्ण समुद्री बुनियादी ढांचे की मजबूत सुरक्षा सुनिश्चित करने के प्रति सभी हितधारकों की प्रतिबद्धता की पुष्टि भी इस बैठक में की गई।

*******************************

 

पूर्वोत्तर क्षेत्र में तस्करी से लाई गई विदेशी सुपारी की 60,000 किलोग्राम खेप जब्त, 5 गिरफ्तार

नई दिल्ली – राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) की गुवाहाटी क्षेत्रीय इकाई ने पूर्वोत्तर क्षेत्र में कल और इस सप्ताह की शुरुआत में संचालित किए गए दो बड़े अभियानों में लगभग 60,000 किलोग्राम तस्करी की गई विदेशी सुपारी जब्त की है।

डीआरआई ने विशिष्ट खुफिया जानकारी के आधार पर मिजोरम और असम में अभियान संचालित करते हुए ये ज़ब्ती की। शुरुआती जांच में पता चला कि इस विदेशी सूखी सुपारी की म्यांमा-मिजोरम सीमा के रास्ते म्यांमा से भारत में तस्करी की जा रही थी। इस अभियान में डीआरआई को असम राइफल्स की 38वीं बटालियन का सहयोग मिला। अब तक इन अभियानों में 5 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है।

पड़ोसी देश से सुपारी की अवैध आवक घरेलू सुपारी उत्पादकों को गंभीर आर्थिक नुकसान पहुंचा रही है और सीमावर्ती क्षेत्रों में आर्थिक सुरक्षा को कमजोर कर रही है।

***************************

 

आंध्र प्रदेश के राज्यपाल ने युवा संगम प्रतिनिधिमंडल से संवाद किया, राष्ट्रीय एकता मजबूत बनाने में युवाओं की भूमिका की चर्चा की

नई दिल्ली – आंध्र प्रदेश के राज्यपाल श्री एस. अब्दुल नज़ीर ने 18 मई, 2026 को युवा संगम कार्यक्रम के अंतर्गत भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान तिरुपति का दौरा कर रहे महाराष्ट्र के युवा प्रतिनिधिमंडल से बातचीत की।

पुणे स्थित भारतीय विज्ञान शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान- आईआईएसईआर के नेतृत्व में यह प्रतिनिधिमंडल देश भर में अंतर्राज्‍यीय समझ और युवाओं के बीच जुड़ाव बढ़ाने के उद्देश्य से शैक्षणिक, सांस्कृतिक और अनुभवकारी गतिविधियों में भाग ले रहा है।

श्री एस. अब्दुल नज़ीर ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए राष्ट्र निर्माण में युवाओं की भागीदारी के महत्व का उल्‍लेख किया और भारत की विविधता में एकता मजबूत बनाने में सांस्कृतिक समझ और अंतर्राज्‍यीय सहयोग की भूमिका रेखांकित की। उन्होंने कहा कि युवा संगम जैसी पहल युवाओं को विभिन्न क्षेत्रों, संस्कृतियों और परंपराओं से जुड़ने के सार्थक अवसर प्रदान करती हैं, जिससे भावनात्मक एकीकरण और राष्ट्रीय सद्भाव को बढ़ावा मिलता है।

राज्यपाल महोदय ने लोगों के बीच आपसी संपर्क बढाने और विद्यार्थियों को भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और विकास उपलब्धियों का प्रत्यक्ष अनुभव प्रदान करने में युवा संगम की भूमिका की सराहना की। उन्होंने प्रतिनिधियों को राष्ट्रीय एकता के दूत के रूप में आपसी सम्मान, ज्ञान और सहयोग की भावना आगे बढ़ाने को प्रोत्साहित किया।

प्रतिनिधिमंडल ने यात्रा के दौरान, आईआईटी तिरुपति के संकाय सदस्यों, शोधकर्ताओं, नवोन्‍मेषकों और विद्यार्थियों के साथ बातचीत की और अत्याधुनिक वैज्ञानिक अनुसंधान, अकादमिक उत्कृष्टता और तकनीकी प्रगति से अवगत हुए। सांस्कृतिक आदान-प्रदान और सामुदायिक सहभागिता गतिविधियों द्वारा उन्हें दक्षिण भारत की जीवंत सांस्कृतिक विरासत और परंपराओं का भी अनुभव प्राप्‍त हुआ।

शिक्षा मंत्रालय के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा आरंभ युवा संगम का छठा चरण गहन शैक्षिक और सांस्कृतिक आदान-प्रदान से राष्ट्रीय एकता, सांस्कृतिक सद्भाव और भावनात्मक एकीकरण सुदृढ बनाने का प्रयास है। इस पहल में 22 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रतिभागी साथ जुड़े हैं, जिससे भारत की विविधता, नवाचार पारितंत्र और राष्ट्र निर्माण की साझा आकांक्षाओं की गहरी समझ विकसित करने का मार्ग प्रशस्त हुआ है।

******************************

 

दूरसंचार विभाग ने भारत की 2026 की ब्रिक्स अध्यक्षता के तहत सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) में सहयोग के लिए ब्रिक्स कार्य समूह की दूसरी बैठक का आयोजन किया

नई दिल्ली – भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 के तहत, दूरसंचार विभाग ने सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (ICT) में सहयोग के लिए ब्रिक्स कार्य समूह की दूसरी बैठक का सफलतापूर्वक आयोजन और उसकी अध्यक्षता की। यह बैठक 21 मई 2026 को वर्चुअल माध्यम से आयोजित की गई। बैठक में डिजिटल प्रौद्योगिकियों, भविष्य के नेटवर्क, नवाचार ईकोसिस्टम, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना (DPI) और सतत एवं समावेशी सामाजिक-आर्थिक विकास के लिए क्षमता निर्माण में सहयोग को मजबूत करने के प्रति ब्रिक्स देशों की साझा प्रतिबद्धता दिखाई दी।

इस बैठक में ब्रिक्स सदस्य देशों के प्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने पर विचार-विमर्श किया। भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता के मुख्य विषय – “लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता के लिए निर्माण” – और ICT ट्रैक के विषय – “लचीले भविष्य के लिए नवाचार, सहयोग और परिवर्तन (ICT)” – के तहत आयोजित इस बैठक में डिजिटल विभाजन को पाटने, नवाचार-आधारित विकास को बढ़ावा देने, डिजिटल लचीलेपन को बढ़ाने और उभरती अर्थव्यवस्थाओं में किफायती और सार्थक कनेक्टिविटी सुनिश्चित करने के लिए सहयोगात्मक दृष्टिकोणों पर ध्यान केंद्रित किया गया।

भारत ने ब्रिक्स देशों के बीच विश्वसनीय डिजिटल अवसंरचना, संस्थागत क्षमता निर्माण और प्रौद्योगिकी साझेदारी के महत्व पर प्रकाश डाला। भारत ने इस बात पर बल दिया कि सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) में सहयोग नागरिकों को सशक्त बनाने, सार्वजनिक सेवा वितरण को बेहतर बनाने, नवाचार को बढ़ावा देने और ग्लोबल साउथ में समावेशी विकास को गति देने के लिए महत्वपूर्ण है।

बैठक का एक प्रमुख आकर्षण भारत द्वारा ब्रिक्स ICT ट्रैक के अंतर्गत ब्रिक्स क्षमता निर्माण केंद्रों पर अवधारणा नोट की प्रस्तुति थी। इस पहल का उद्देश्य ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच उभरती डिजिटल और दूरसंचार प्रौद्योगिकियों में कौशल विकास, ज्ञान का आदान-प्रदान, तकनीकी प्रशिक्षण, अनुसंधान सहयोग और क्षमता विकास के लिए सहयोगी संस्थागत तंत्र स्थापित करना है।

बैठक में बच्चों के ऑनलाइन संरक्षण और ब्रिक्स डिजिटल ईकोसिस्टम सहयोग को मजबूत करने से संबंधित प्रस्तावों पर भी विस्तृत चर्चा हुई। सदस्य देशों ने सुरक्षित और विश्वसनीय कनेक्टिविटी, लचीली डिजिटल अवसंरचना, सुरक्षित डिजिटल वातावरण और उभरते डिजिटल क्षेत्रों में बेहतर सहयोग के बढ़ते महत्व पर जोर दिया।

ब्रिक्स इंस्टीट्यूट फॉर फ्यूचर नेटवर्क्स (BIFN), डिजिटल ब्रिक्स टास्क फोर्स (DBTF) और डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर पर फोकस ग्रुप (DPI) के तहत गतिविधियों पर व्यापक विचार-विमर्श किया गया।

कार्य समूह ने ब्रिक्स ICT सहयोग की चल रही पहल पर हुई प्रगति की भी समीक्षा की और ब्रिक्स ICT ट्रैक के तहत आगामी गतिविधियों के लिए रोडमैप पर चर्चा की, जिसमें वेबिनार, तकनीकी चर्चाएं, मंत्रिस्तरीय बैठकें और डिजिटल परिवर्तन, दूरसंचार में AI, भविष्य के नेटवर्क नवाचार और संस्थागत सुदृढ़ीकरण पर केंद्रित सहयोगी गतिविधियां शामिल हैं।

बैठक का समापन ब्रिक्स सदस्य देशों के बीच सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी (ICT) क्षेत्र में सहयोगात्मक नवाचार, संस्थागत साझेदारी, विश्वसनीय डिजिटल अवसंरचना, क्षमता निर्माण और ज्ञान के आदान-प्रदान तंत्रों के माध्यम से सहयोग को और गहरा करने की साझा प्रतिबद्धता के साथ हुआ। आशा है कि ये चर्चाएं ब्रिक्स देशों और व्यापक ग्लोबल साउथ में लचीले डिजिटल समाजों को बढ़ावा देने, समावेशी डिजिटल विकास को प्रोत्साहित करने और सतत विकास उद्देश्यों का सहयोग करने में और अधिक योगदान देंगी।

********************************

 

केंद्रीय मंत्री श्री नितिन गडकरी ने उत्तर प्रदेश में 11,672 किलोमीटर लंबे राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की गुणवत्ता और रखरखाव की प्रगति की समीक्षा की

नई दिल्ली – सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री श्री नितिन गडकरी ने मीडिया और सोशल मीडिया के माध्यम से प्राप्त फीडबैक के आधार पर आज नई दिल्ली में आयोजित एक बैठक में उत्तर प्रदेश में 11,672 किलोमीटर राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं की गुणवत्ता और रखरखाव की प्रगति की समीक्षा की। समीक्षा बैठक में केंद्रीय राज्य मंत्री श्री अजय टमटा और श्री हर्ष मल्होत्रा ​​के साथ-साथ सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय, राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण के अधिकारी और परियोजना के संवेदक उपस्थित थे।

समीक्षा के दौरान, श्री गडकरी ने टिकाऊ और कुशल राजमार्ग इंफ्रास्‍ट्रक्‍चर सुनिश्चित करने के लिए समयबद्ध कार्यान्वयन, गुणवत्ता मानकों का कड़ाई से पालन और उन्नत प्रौद्योगिकियों को अपनाने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने इस बात पर प्रकाश डाला कि मजबूत सड़क नेटवर्क कनेक्टिविटी बढ़ाने, आर्थिक विकास को गति देने और यात्रियों की सुविधा में सुधार के लिए महत्वपूर्ण हैं।

श्री गडकरी ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि वे रोकथाम के उपायों को लागू करते हुए पूरे नेटवर्क में सड़क सुरक्षा और स्थायित्व बनाए रखने के लिए प्रभावी प्रत्‍युत्तर प्रणाली स्थापित करके मानसून की व्यापक तैयारियों को सुनिश्चित करें।

********************************

 

केन्द्रीय मंत्री श्री एच. डी. कुमारस्वामी ने इलेक्ट्रिक बसों और इलेक्ट्रिक ट्रकों के वित्तपोषण तंत्र के संबंध में एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई

नई दिल्ली – भारत सरकार के भारी उद्योग मंत्रालय (एमएचआई) ने केन्द्रीय भारी उद्योग एवं इस्पात मंत्री श्री एच. डी. कुमारस्वामी की अध्यक्षता में 20 मई 2026 को नई दिल्ली में एसबीआई, पंजाब नेशनल बैंक, केनरा बैंक, सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया, एचडीएफसी एवं एसआईडीबीआई समेत सार्वजनिक व निजी क्षेत्र के बैंकों के वरिष्ठ प्रतिनिधियों और अखिल भारतीय मोटर परिवहन कांग्रेस (एआईएमटीसी), कोडडारामू लॉरी एसोसिएशन, बस ऑपरेटर्स कन्फेडरेशन ऑफ इंडिया (बीओसी), कर्नाटक बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन (केबीओए) तथा साउथ इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन जैसे संगठन सहित बस एवं ट्रक संचालकों के साथ-साथ प्रमुख निजी परिवहन संचालकों व ट्रैवल कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ निजी क्षेत्र में इलेक्ट्रिक बसों और इलेक्ट्रिक ट्रकों को अपनाने में तेजी लाने के लिए आवश्यक वित्तपोषण तंत्र के बारे में विचार-विमर्श करने हेतु एक उच्चस्तरीय बैठक आयोजित की।

इस बैठक का उद्देश्य ई-बसों एवं ई-ट्रकों को अपनाने में आने वाली वित्तीय चुनौतियों, ई-बसों एवं ई-ट्रकों के वित्तपोषण की वर्तमान स्थिति, वित्तीय चुनौतियों से निपटने के संभावित समाधान और आवश्यक सरकारी सहायता को समझना था।

यह बैठक वैश्विक अनिश्चितताओं एवं पश्चिम एशिया में बदलती स्थिति के बीच ईंधन बचाने तथा इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान के अनुरूप एक कदम था, जो ऊर्जा सुरक्षा, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने, तेल आयात बिल कम करने और सभी के लिए एक स्थायी भविष्य के प्रति भारत की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

बैठक के दौरान, निजी क्षेत्र में इलेक्ट्रिक बसों और इलेक्ट्रिक ट्रकों को अपनाने से संबंधित क्रेडिट गारंटी तथा ब्याज सब्सिडी जैसे प्रस्तावित सहायता तंत्र सहित वित्तपोषण की प्रमुख चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया गया। इलेक्ट्रिक वाणिज्यिक वाहनों को तेजी से अपनाने में सहायता के संभावित उपायों के रूप में वित्तीय संस्थानों द्वारा ऋण देने के जोखिम को कम करने के उद्देश्य से क्रेडिट गारंटी योजनाओं और निजी क्षेत्र के खरीदारों के लिए उधार लागत को कम करने के उद्देश्य से ब्याज सब्सिडी तंत्रों पर चर्चा की गई।

सार्वजनिक परिवहन, विशेषकर बसें देश भर में आवागमन की रीढ़ हैं। जबकि, घरेलू सामानों की ढुलाई में ट्रकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। साथ ही, वाणिज्यिक वाहन सड़क परिवहन के दौरान होने वाले उत्सर्जन, ईंधन की खपत और निलंबित कणों के प्रदूषण में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। इस संदर्भ में, भारत में कार्बन उत्सर्जन को कम करने और 2070 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन (नेट जीरो) के लक्ष्य को हासिल करने हेतु बसों और ट्रकों का विद्युतीकरण आवश्यक है।

यह पहल वाणिज्यिक वाहनों के क्षेत्र में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा में बदलाव को सक्षम बनाने के भारी उद्योग मंत्रालय के सक्रिय दृष्टिकोण को दर्शाती है। विभिन्न सरकारी विभागों, बहुपक्षीय संस्थानों, वित्तीय संस्थाओं और उद्योग के हितधारकों को एक साझा मंच पर लाकर, एमएचआई का उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में आने वाली प्रमुख बाधाओं को दूर करने वाले व्यावहारिक वित्तपोषण समाधान विकसित करना है ताकि आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत @2047 की परिकल्पना के तहत ऊर्जा सुरक्षा, उत्सर्जन में कमी तथा स्वदेशी उन्नत मैन्यूफैक्चरिंग के भारत के व्यापक लक्ष्यों को समर्थन मिल सके।

**************************

 

डीआरआई ने महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली और पश्चिम बंगाल में ई-सिगरेट की तस्करी करने वाले गिरोह पर बड़ी कार्रवाई करते हुए 120 करोड़ रुपये मूल्य की 3,00,000 ई-सिगरेट/वेप्स जब्त कीं

नई दिल्ली – राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने प्रतिबंधित निकोटीन उत्पादों के अवैध आयात के विरूद्ध एक बड़ी कार्रवाई में पिछले कुछ दिनों में महाराष्ट्र, गुजरात, दिल्ली और पश्चिम बंगाल के कई बंदरगाहों, हवाई अड्डों और आईसीडी (सूचना नियंत्रण केंद्र) में चलाए गए अपने अभियानों में व्यापक स्तर पर ई-सिगरेट (वेप) तस्करी रैकेट का भंडाफोड़ किया है।

 

विशिष्ट खुफिया जानकारी के आधार पर, डीआरआई ने सीमा शुल्क जांच से बचने के लिए गलत तरीके से घोषित किए गए कई संदिग्ध आयात खेपों की पहचान की, उन पर नज़र रखी और उन्हें जब्त किया। विस्तृत जांच के परिणामस्वरूप विभिन्न ब्रांडों, स्वादों और विशिष्टताओं की लगभग 3,00,000 इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट/वेप्स जब्त की गईं, जिनकी कीमत 120 करोड़ रुपये से अधिक है।

इन प्रतिबंधित ई-सिगरेटों को हर बार चीन से मंगाया गया था और इन्हें “फर्नीचर” और “धातु की कुर्सी के पुर्जों” जैसी वस्तुओं में छिपाकर आयात किया गया था।

भारत में इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट और सभी इलेक्ट्रॉनिक निकोटीन वितरण प्रणालियां (ईएनडी) सार्वजनिक स्वास्थ्य के हित में और लोगों को नुकसान से बचाने के लिए अधिनियमित इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट निषेध (उत्पादन, निर्माण, आयात, निर्यात, परिवहन, बिक्री, वितरण, भंडारण और विज्ञापन) अधिनियम, 2019 के तहत प्रतिबंधित हैं।

*************************

 

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और दक्षिण कोरिया के पूर्व सैनिक मामलों के मंत्री क्वोन ओह-यूल ने सियोल में भारतीय युद्ध स्मारक का उद्घाटन किया

नई दिल्ली – रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह और दक्षिण कोरिया के पूर्व सैनिक मामलों के मंत्री श्री क्वोन ओह-यूल ने 21 मई, 2026 को सियोल के इमजिनगैक पार्क में संयुक्त रूप से भारतीय युद्ध स्मारक का उद्घाटन किया। कोरियाई युद्ध की 75वीं वर्षगांठ के उपलक्ष्य में निर्मित यह स्मारक, युद्ध के दौरान भारतीय सेना की 60 पैरा फील्ड एम्बुलेंस और कस्‍टोडियन फोर्स ऑफ इंडिया (सीएफआई) के साहस, बलिदान और मानवीय सेवा को श्रद्धांजलि अर्पित करता है।

 

दोनों मंत्रियों ने स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की और उन बहादुर भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि दी जिनकी सेवा को कोरिया गणराज्य के लोग आज भी गहरे सम्मान और कृतज्ञता के साथ याद करते हैं।

रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में कोरियाई प्रायद्वीप में शांति और मानवीय सहायता के क्षेत्र में भारत के अमिट योगदान की चर्चा की। उन्होंने कहा कि दोनों देशों का साझा इतिहास और बलिदान भारत-कोरिया विशेष रणनीतिक साझेदारी की मजबूत नींव बने हुए हैं।

श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि भारतीय सैनिकों की भूमिका को याद करने से लोगों के बीच आपसी समझ मजबूत होती है और दोनों देशों के ऐतिहासिक संबंधों पर नए सिरे से ध्यान जाता है। स्मारक की स्थापना में बहुमूल्य सहयोग के लिए उन्होंने कोरिया गणराज्य की सरकार, विशेष रूप से पूर्व सैनिक मामलों के मंत्रालय के प्रति गहरी कृतज्ञता व्यक्त की।

दक्षिण कोरिया के पूर्व सैनिक मामलों के मंत्री ने कोरियाई युद्ध के दौरान भारत की भूमिका की सराहना की। उन्होंने भारतीय सैनिकों के बलिदान और मानवीय सेवा के माध्यम से निर्मित अटूट मित्रता के बंधन को स्वीकार किया।

कोरियाई युद्ध में भाग लेने वाले सैनिकों को सम्मानित करने और उनके बीच आदान-प्रदान को मजबूत करने के उद्देश्य से दोनों मंत्रियों ने एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए। सैनिकों के निस्वार्थ बलिदान की स्मृति में एक संस्मरण भी जारी किया गया।

कोरियाई युद्ध के दौरान लेफ्टिनेंट कर्नल (डॉ.) ए.जी. रंगराज (महावीर चक्र विजेता) के नेतृत्व में 60 पैरा फील्ड एम्बुलेंस ने भीषण गोलीबारी के बीच हजारों घायल सैनिकों और नागरिकों की उत्कृष्ट चिकित्सा सेवा और उपचार करके व्यापक प्रशंसा अर्जित की थी। उनके अद्वितीय साहस और मानवीय दृष्टिकोण के लिए उन्हें घायल सैनिकों और नागरिकों द्वारा ‘मरून एंजल्स’ की उपाधि से नवाजा गया।

युद्धविराम के बाद भी भारत ने सीएफआई के माध्यम से महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिसे तटस्थ राष्ट्र प्रत्यावर्तन आयोग (एनएनआरसी) के तहत जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं। 1953 में कोरियाई युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर के बाद युद्धबंदियों के मानवीय प्रत्यावर्तन और हिरासत को सुविधाजनक बनाने के लिए लेफ्टिनेंट जनरल के.एस. थिमैया के नेतृत्व में भारत की अध्यक्षता में एनएनआरसी की स्थापना की गई थी।

सीएफआई ने इस संवेदनशील और जटिल जिम्मेदारी को पेशेवरता, निष्पक्षता और करुणा के साथ निभाया, जिसके लिए उसे कोरियाई प्रायद्वीप में शांति, सुलह और मानवीय सिद्धांतों में योगदान के लिए अंतरराष्ट्रीय स्‍वीकृति मिली। लेफ्टिनेंट जनरल थिमैया का विशिष्ट नेतृत्व और कूटनीतिक कुशलता कोरियाई युद्ध के दौरान भारत की रचनात्मक और शांतिप्रिय भूमिका का एक स्थायी प्रतीक बनी हुई है।

भारतीय युद्ध स्मारक का निर्माण उसी क्षेत्र में किया गया है जहां सितंबर 1954 में सीएफआई ने ‘हिंद नगर’ की स्थापना की थी, जिसमें लगभग 22,000 युद्धबंदियों को उनके शांतिपूर्ण प्रत्यावर्तन तक रखा गया था। यह परियोजना भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के वित्तीय सहयोग से शुरू की गई है, जो दोनों देशों के साझा इतिहास और अटूट मित्रता के प्रति भारत के गहरे सम्मान को दर्शाती है।

इस समारोह में दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी, सैन्य प्रतिनिधि, पूर्व सैनिक, राजनयिक समुदाय के सदस्य और विशिष्ट अतिथि उपस्थित थे। लेफ्टिनेंट कर्नल (डॉ.) ए.जी. रंगराज की भतीजी सुश्री कल्पना प्रसाद भी इस अवसर पर मौजूद थीं। कोरिया के पूर्व सैनिक मामलों के मंत्रालय ने इस महीने को कर्नल रंगराज के सम्मान में समर्पित किया है।

यह समारोह भारत-दक्षिण कोरिया के साझा इतिहास के एक महत्वपूर्ण लेकिन अपेक्षाकृत कम ज्ञात अध्याय को पुनर्जीवित करने और सम्मानित करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास था। कोरियाई युद्ध के दौरान भारतीय सैनिकों का योगदान शांति, मानवीय सहायता और अंतर्राष्ट्रीय सहयोग के प्रति भारत की दीर्घकालिक प्रतिबद्धता का एक सशक्त प्रतीक बना हुआ है। भारतीय युद्ध स्मारक के उद्घाटन के साथ, रक्षा मंत्री ने वियतनाम और दक्षिण कोरिया की अपनी चार दिवसीय यात्रा का समापन किया।

*******************************

 

भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता में इंदौर में ब्रिक्स युवा परिषद उद्यमिता कार्य समूह की बैठक संपन्न

नई दिल्ली – ब्रिक्स युवा परिषद उद्यमिता कार्य समूह की बैठक मध्य प्रदेश के इंदौर में दो दिनों तक चली चर्चाओं, सहयोगात्मक गतिविधियों और ज्ञान-साझाकरण सत्रों के बाद सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इस बैठक का उद्देश्य ब्रिक्स देशों के बीच उद्यमिता सहयोग को मजबूत करना था।

भारत सरकार के युवा मामले एवं खेल मंत्रालय के युवा मामले विभाग द्वारा भारत की ब्रिक्स अध्यक्षता 2026 के अंतर्गत आयोजित इस बैठक में केंद्रीय युवा मामले एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया (वर्चुअल रूप से), युवा मामले एवं खेल राज्य मंत्री श्रीमती रक्षा निखिल खडसे, मध्य प्रदेश के खेल एवं युवा कल्याण मंत्री श्री विश्वास कैलाश सारंग, युवा मामले विभाग की सचिव डॉ. पल्लवी जैन गोविल, युवा मामले विभाग के अपर सचिव श्री नितेश कुमार मिश्रा, युवा मामले विभाग की निदेशक डॉ. सारा जयल सॉकमी, युवा मामले विभाग के उप सचिव श्री राजेश कुमार कनौजिया और ब्रिक्स देशों के वरिष्ठ अधिकारी एवं प्रतिनिधि उपस्थित थे।

समापन सत्र को संबोधित करते हुए युवा मामले विभाग के अपर सचिव श्री नितेश कुमार मिश्रा ने ब्रिक्स देशों में उद्यमशीलता इकोसिस्टम को मजबूत करने के लिए सामूहिक कार्रवाई के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “उद्यमिता कुछ ही लोगों का विशेषाधिकार नहीं है, यह एक ऐसा अधिकार है जिस तक हर युवा व्यक्ति की पहुंच होनी चाहिए, चाहे वह किसी भी भौगोलिक क्षेत्र, जेंडर या पृष्ठभूमि का हो।”

उन्होंने कहा कि युवा उद्यमियों द्वारा सामना की जाने वाली चुनौतियां, जिनमें पूंजी तक पहुंच, डिजिटल बुनियादी ढांचा, मार्गदर्शन और नियामक समर्थन शामिल हैं, ब्रिक्स देशों में साझा चिंताएं हैं और सतत साझेदारी एवं संवाद के माध्यम से सहयोगात्मक समाधान की आवश्यकता है।

धन्यवाद ज्ञापन देते हुए, युवा मामलों के विभाग की निदेशक डॉ. सारा जयल सॉकमी ने बैठक के सफल संचालन में प्रतिनिधियों, पैनलिस्टों, मॉडरेटरों और आयोजन टीमों के योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा, “आप यहाँ केवल अपने देशों का प्रतिनिधित्व करने नहीं आए हैं। आप यहां मिलकर कुछ बनाने आए हैं और इसी से सब कुछ संभव हो पाया है।”

डॉ. सॉकमी ने मध्य प्रदेश सरकार द्वारा दिए गए समर्थन को भी स्वीकार किया और इस बात पर प्रकाश डाला कि बैठक के दौरान हुए विचार-विमर्श और विकसित साझेदारियां ब्रिक्स युवा उद्यमिता एजेंडा को आगे बढ़ाने में सार्थक योगदान देंगी।

इस बैठक में ब्रिक्स देशों के युवा उद्यमी, प्रतिनिधि, नीति निर्माता और हितधारक एकत्रित हुए, जिससे विचारों का आदान-प्रदान करने, सर्वोत्तम प्रथाओं को साझा करने और ब्रिक्स देशों में युवा नेतृत्व वाले उद्यमशीलता इकोसिस्टम को मजबूत करने के तरीकों का पता लगाने के लिए एक मंच उपलब्ध हुआ।

कार्यक्रम का शुभारंभ प्रौद्योगिकी, सतत विकास, स्वच्छ ऊर्जा और सामाजिक उद्यम सहित विभिन्न क्षेत्रों में नवाचारों और उद्यमशीलता की पहलों को प्रदर्शित करने वाली एक प्रदर्शनी के उद्घाटन के साथ हुआ। बैठक के दौरान, प्रतिनिधियों ने पूर्ण चर्चाओं, देश-विशिष्ट प्रस्तुतियों, पैनल चर्चाओं, नेटवर्किंग कार्यक्रमों, कार्यशालाओं और सहयोग एवं नवाचार को बढ़ावा देने पर केंद्रित अंतःक्रियात्मक सत्रों में भाग लिया।

“स्थानीय नवाचार से वैश्विक प्रभाव तक: युवा नेतृत्व वाले स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए ब्रिक्स सहयोग” विषय पर आयोजित एक विशेष सत्र में भाग लेने वाले देशों को उद्यमिता और स्टार्टअप विकास में अपनी पहलों, अनुभवों और सर्वोत्तम प्रथाओं को प्रस्तुत करने का अवसर मिला। चर्चाओं में ब्रिक्स स्टार्टअप इकोसिस्टम के बीच गहन सहयोग और आदान-प्रदान के अवसरों पर प्रकाश डाला गया।

इस बैठक में डिजिटल नवाचार और प्रौद्योगिकी-आधारित उद्यमिता, समावेशी और सामाजिक उद्यमिता और हरित उद्यमिता और जलवायु-अनुकूल व्यावसायिक मॉडलों पर विषयगत पैनल चर्चाएं भी हुईं। सत्रों में एआई, फिनटेक, एग्रीटेक, स्थिरता और स्वच्छ ऊर्जा जैसे सेक्टरों में उभरते अवसरों का पता लगाया गया, साथ ही समावेशी विकास और युवा नेतृत्व वाले उद्यम के महत्व पर जोर दिया गया।

युवा उद्यमियों के साथ पारस्परिक नेटवर्किंग सत्र और अनौपचारिक बातचीत ने प्रतिभागियों के बीच संवाद, सहकर्मी शिक्षण और अंतर-देशीय सहयोग को और अधिक प्रोत्साहित किया।

बैठक के दूसरे दिन उद्यमिता क्षमता और नेतृत्व विकास पर एक कार्यशाला आयोजित की गई, जिसके बाद एक संवादात्मक प्रश्नोत्तर सत्र हुआ। कार्यक्रम का समापन एक विदाई सत्र के साथ हुआ जिसमें प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए और उन्होंने अपने अनुभव साझा किए। क्षेत्र के बढ़ते नवाचार इकोसिस्टम की जानकारी प्राप्त करने के उद्देश्य से आयोजित एक उद्यमिता भ्रमण के तहत, प्रतिनिधियों ने भारत के मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित क्रिस्टल आईटी पार्क का भी दौरा किया।

बैठक के दौरान हुई चर्चाओं ने युवा उद्यमिता और नवाचार के क्षेत्र में ब्रिक्स देशों के बीच संवाद और सहयोग को मजबूत करने में योगदान दिया।

ब्रिक्स युवा परिषद उद्यमिता कार्य समूह की बैठक में भारत द्वारा गतिशील और भविष्य के लिए तैयार अर्थव्यवस्थाओं को आकार देने में प्रमुख हितधारकों के रूप में युवाओं पर निरंतर बल देने के साथ-साथ अपनी अध्यक्षता के दौरान ब्रिक्स देशों के बीच सहयोग और जुड़ाव को और मजबूत करने पर प्रकाश डाला गया।

*****************************

 

उपराष्ट्रपति ने पूर्व प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की

नई दिल्ली – उपराष्ट्रपति श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने उपराष्ट्रपति भवन में पूर्व प्रधानमंत्री श्री राजीव गांधी की पुण्यतिथि पर आज उन्हें पुष्पांजलि अर्पित की।

अपने संदेश में उपराष्ट्रपति ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में योगदान और राष्ट्र की सेवा में श्री राजीव गांधी के बलिदान को सम्मान और कृतज्ञता के साथ स्‍मरण किया जाएगा।

***********************

डॉ. जितेंद्र सिंह ने यूएमएमआईडी (उम्‍मीद) कार्यक्रम राष्ट्र को समर्पित किया; कहा- जीनोमिक और सटीक चिकित्सा स्वास्थ्य सेवा का भविष्य तय करेगी

नई दिल्ली – केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत एवं पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज दुर्लभ आनुवंशिक विकारों/रोगों के लिए यूएमएमआईडी (वंशानुगत विकारों के इलाज की अनूठी विधियां) कार्यक्रम राष्ट्र को समर्पित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत धीरे-धीरे एक ऐसे युग में प्रवेश कर रहा है जहां स्वास्थ्य सेवा, निदान और उपचार तेजी से जीनोम-आधारित, सटीक और प्रत्येक रोगी की आनुवंशिक प्रोफ़ाइल के अनुसार व्यक्तिगत होते जाएंगे।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि वंशानुगत और दुर्लभ आनुवंशिक विकार दशकों तक उपेक्षित रहे क्योंकि निदान ही कठिन था, उपचार दुर्गम था और दवाएं या तो अनुपलब्ध थीं या अत्यधिक महंगी थीं, इसलिए सभी परिवारों के लिए निदान और इलाज को व्यवहार्य, वहनीय और सुलभ बनाने के लिए एक समन्वित राष्ट्रीय तंत्र का निर्माण करना आवश्यक है।

केंद्रीय मंत्री ने यूएमएमआईडी (उम्मीद) को भारत में सटीक चिकित्सा के भविष्य की दिशा में एक बड़ा कदम बताते हुए कहा कि यह पहल देश के स्वास्थ्य सेवा तंत्र को जीन और जीनोम-आधारित चिकित्सा देखभाल की अगली पीढ़ी के लिए भी तैयार करेगी।

 

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह नई दिल्ली के पृथ्वी भवन में जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा राष्ट्र को यूएमएमआईडी नेटवर्क समर्पित करने के लिए आयोजित एक विशेष समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस अवसर पर उन्होंने यूएमएमआईडी संकलन का विमोचन किया और आनुवंशिक विकारों के निदान, परामर्श, जागरूकता अभियान और कार्यक्रम निगरानी तक राष्ट्रव्यापी पहुंच को मजबूत करने के उद्देश्य से यूएमएमआईडी डैशबोर्ड का शुभारम्भ किया।

इस कार्यक्रम में जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव और ब्रिक के महानिदेशक डॉ. राजेश एस. गोखले; डीबीटी की वरिष्ठ सलाहकार डॉ. सुचिता नीनावे; वरिष्ठ वैज्ञानिक, चिकित्सक, स्वास्थ्य सेवा पेशेवर, यूएमएमआईडी कार्यान्वयन संस्थानों के प्रतिनिधि और देश भर के वैज्ञानिक और स्वास्थ्य संगठनों के अधिकारी उपस्थित रहे।

पिछले एक दशक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में शुरू किए गए स्वास्थ्य सुधारों का जिक्र करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि सरकार ने लगातार किफायती, सुलभ, निवारक और नागरिक-केंद्रित स्वास्थ्य सेवाओं पर ध्यान केंद्रित किया है। उन्होंने कहा कि भारत ने स्वास्थ्य केंद्रों का विस्तार किया है, स्वास्थ्य बीमा कवरेज को मजबूत किया है और सस्ती दवाओं तक पहुंच को व्यापक बनाया है, साथ ही साथ शीघ्र निदान और निवारक स्वास्थ्य देखभाल के लिए प्रणालियां भी विकसित की हैं।

डॉ. सिंह ने कहा कि वंशानुगत और दुर्लभ आनुवंशिक विकार एक मूक लेकिन गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या है, जिसमें परिवार अक्सर निदान और उपचार की तलाश में वर्षों तक एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल भटकते रहते हैं। उन्होंने कहा कि अपेक्षाकृत कम आबादी को प्रभावित करने के बावजूद, ये विकार प्रभावित परिवारों पर भारी भावनात्मक, सामाजिक और आर्थिक बोझ डालते हैं और इसलिए अन्य किसी भी गंभीर बीमारी की तरह ही इस पर भी राष्ट्रीय ध्यान देने और स्वास्थ्य देखभाल को लेकर संवेदनशील होने की जरूरत है।

चिकित्सा जगत से जुड़े अपने दृष्टिकोण को साझा करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि दुर्लभ आनुवंशिक विकारों को ऐतिहासिक रूप से मुख्यधारा की चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य सेवा में सीमित महत्व दिया गया है, क्योंकि ये कम प्रचलित हैं और इनकी निदान प्रक्रिया जटिल है। उन्होंने कहा कि इसके परिणामस्वरूप अक्सर निदान में देरी, जागरूकता की कमी और रोगियों के लिए अपर्याप्त उपचार की सुविधा उपलब्ध होती है। उन्होंने यह भी कि भारत की व्यापक आनुवंशिक विविधता इस चुनौती को और भी जटिल बनाती है और इसके लिए प्रारंभिक जांच, आनुवंशिक निदान, प्रसवपूर्व परामर्श, चिकित्सकों के प्रशिक्षण और सामुदायिक जागरूकता के एक मजबूत तंत्र की जरूरत है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने जैव प्रौद्योगिकी विभाग द्वारा इस कठिन लेकिन सामाजिक परिवर्तनकारी मिशन को हाथ में लेने की सराहना करते हुए कहा कि यूएमएमआईडी यह दर्शाता है कि कैसे विज्ञान, करुणा और जन नीति समय पर हस्तक्षेप और निवारक स्वास्थ्य देखभाल के माध्यम से पीड़ा को कम करने के लिए एक साथ आ सकते हैं। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम ने आनुवंशिक निदान, प्रसवपूर्व और नवजात शिशु स्क्रीनिंग, आनुवंशिक परामर्श, चिकित्सकों की क्षमता निर्माण और सामुदायिक आउटरीच को एकीकृत जन स्वास्थ्य मॉडल के तहत एकीकृत करते हुए एक राष्ट्रीय ढांचा सफलतापूर्वक स्थापित किया है।

डॉ. सिंह ने कहा कि स्क्रीनिंग और निदान सेवाओं के माध्यम से इस कार्यक्रम से पहले ही लगभग तीन लाख लोगों को लाभ मिल चुका है और आकांक्षी जिलों तथा वंचित क्षेत्रों में इसका विस्तार किया गया है। उन्होंने कहा कि इस पहल से उन्नत निदान और परामर्श के लिए लगभग 30 निदान केंद्र स्थापित करने में भी मदद मिली है। इससे यह सुनिश्चित हो रहा है कि उन्नत जीनोमिक स्वास्थ्य सेवा महानगरों से बाहर भी आम नागरिकों तक पहुंचे।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि यूएमएमआईडी के माध्यम से प्राप्त अनुभव सटीक चिकित्सा के भविष्य के लिए एक महत्वपूर्ण आधार बनेगा, जहां मधुमेह, हृदय रोग और कैंसर जैसी बीमारियों के उपचार प्रोटोकॉल रोगियों की व्यक्तिगत आनुवंशिक प्रोफाइल पर आधारित हो सकते हैं। उन्होंने कहा कि आनुवंशिक चिकित्सा और परमाणु चिकित्सा दो प्रमुख क्षेत्र के रूप में उभर रहे हैं जो आने वाले समय में स्वास्थ्य सेवा को नया रूप दे सकते हैं।

इस अवसर पर अपने संबोधन में जैव प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव और ब्रिक के महानिदेशक डॉ. राजेश एस. गोखले ने कहा कि यूएमएमआईडी पहल ने वैज्ञानिक हस्तक्षेप, सहयोगात्मक जैव प्रौद्योगिकी अनुसंधान और शीघ्र निदान के माध्यम से हजारों परिवारों को आशा की किरण दिखाई है। उन्होंने कहा कि भारत की आनुवंशिक विविधता वैज्ञानिक नवाचार और व्यावहारिक स्वास्थ्य समाधानों के लिए अपार अवसर प्रदान करती है, जो न केवल भारत के लिए बल्कि वैश्विक स्तर पर भी प्रासंगिक हैं।

इससे पहले, उपस्थित लोगों का स्वागत करते हुए डॉ. सुचिता नीनावे ने कहा कि यूएमएमआईडी कार्यक्रम ने आनुवंशिक निदान, परामर्श और क्षमता निर्माण तक पहुंच में सुधार करके वंशानुगत आनुवंशिक विकारों के प्रति भारत की प्रतिक्रिया को महत्वपूर्ण रूप से मजबूत किया है। उन्होंने कहा कि इस पहल ने समन्वित संस्थागत साझेदारी के माध्यम से दुर्लभ और वंशानुगत रोगों के इलाज के लिए एक एकीकृत राष्ट्रव्यापी नेटवर्क बनाने में मदद की है।

इस कार्यक्रम में यूएमएमआईडी पहल का एक संक्षिप्त विवरण, उपलब्धियों और सफलता की कहानियों पर प्रस्तुतियां और इस पहल की यात्रा, प्रभाव और भविष्य की रूपरेखा को उजागर करने वाली एक लघु फिल्म का प्रदर्शन भी शामिल था।

*********************************

 

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जेपी नड्डा ने जिनेवा में 79वीं विश्व स्वास्थ्य सभा के दौरान “फेफड़ों की जांच पर मंत्रिस्तरीय दृष्टिकोण” विषय पर आयोजित स्टॉप टीबी पार्टनरशिप के कार्यक्रम को संबोधित किया

नई दिल्ली – केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने जिनेवा में आयोजित 79वीं विश्व स्वास्थ्य सभा के दौरान “फेफड़ों की जांच पर मंत्रिस्तरीय दृष्टिकोण” विषय पर एक उच्च स्तरीय कार्यक्रम को संबोधित किया। “क्या आपकी स्वास्थ्य प्रणाली फेफड़ों की जांच में चुनौतियों का सामना कर रही है?” विषय पर आधारित इस कार्यक्रम का आयोजन स्टॉप टीबी पार्टनरशिप ने किया था, जिसमें भारत, जापान, फिलीपींस और जाम्बिया ने सह-आयोजक के रूप में भाग लिया।

श्री नड्डा ने उपस्थित विशिष्ट व्यक्तियों को संबोधित करते हुए कहा कि समय पर जांच, शीघ्र निदान और स्वास्थ्य सेवाओं तक समान पहुंच, सुदृढ़ और जन-केंद्रित स्वास्थ्य प्रणालियों का आधार हैं। उन्होंने कहा कि फेफड़ों की स्वास्थ्य जांच को मजबूत करना केवल प्रौद्योगिकी या निदान उपकरणों तक सीमित नहीं है, बल्कि जीवन बचाने, पीड़ा कम करने, स्वास्थ्य संबंधी भारी खर्चों को रोकने, आजीविका की रक्षा करने और स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों को मजबूत करने से संबंधित है।

भारत की टीबी उन्मूलन की प्रतिबद्धता पर प्रकाश डालते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि राष्ट्रीय टीबी उन्मूलन कार्यक्रम और ‘टीबी-मुक्त भारत’ की परिकल्पना के अंतर्गत, भारत ने विश्व के सबसे बड़े स्क्रीनिंग और प्रारंभिक पहचान प्रयासों में से एक को अंजाम दिया है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि देश ने घर-घर जाकर जागरूकता अभियान, मोबाइल स्क्रीनिंग टीमों, सामुदायिक अभियानों और उच्च जोखिम वाले क्षेत्रों तथा संवेदनशील आबादी के बीच लक्षित अभियानों के माध्यम से संवेदनशील आबादी में सक्रिय मामलों की पहचान का विस्तार किया है।

श्री नड्डा ने आगे बताया कि भारत ने टीबी और फेफड़ों की अन्य बीमारियों का पता लगाने के लिए आधुनिक निदान प्रणालियों को काफी हद तक विकसित किया है। निदान में देरी को कम  करने के लिए, विशेष रूप से दूरस्थ और कम सुविधा प्राप्त क्षेत्रों में, आणविक परीक्षण प्लेटफॉर्म, डिजिटल चेस्ट एक्स-रे सेवाएं, एआई-सहायता प्राप्त उपकरण, हैंडहेल्ड स्क्रीनिंग डिवाइस और विकेंद्रीकृत परीक्षण प्रणालियों को व्यापक रूप से तैनात किया जा रहा है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि नवाचार समानता के लिए होना चाहिए और प्रौद्योगिकी को अंतिम छोर तक पहुंचना चाहिए।

केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने आयुष्मान भारत स्वास्थ्य एवं कल्याण केंद्रों के तहत प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल सुधारों और अग्रिम पंक्ति के कार्यबल की भूमिका पर भी प्रकाश डाला, जिससे स्वास्थ्य सेवाएं समुदायों के करीब पहुंच सकी हैं। उन्होंने कहा कि केवल बीमारी का निदान करना ही पर्याप्त नहीं होता, बल्कि पोषण संबंधी सहयोग, उपचार का पालन सुनिश्चित करना, सामाजिक सुरक्षा प्रदान करना और सामुदायिक एकजुटता बनाए रखना भी उतना ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने आगे कहा कि टीबी मुक्त भारत अभियान के माध्यम से, भारत ने टीबी रोगियों और उनके परिवारों की मदद के लिए नागरिकों, संस्थानों, निगमों और समुदायों को एकजुट किया है।

भारत की डिजिटल पहलों के बारे में चर्चा करते हुए श्री नड्डा ने बताया कि मंत्रालय ने टीबी मुक्त भारत ऐप लॉन्च किया है जिसमें “खुशी” नामक एक एआई-सक्षम बहुभाषी चैटबॉट शामिल है, जिसे शुरुआती स्तर के स्मार्टफोन पर भी आसानी से इस्तेमाल किया जा सकता है। यह प्लेटफॉर्म लक्षणों, अधिकारों और निकटतम निदान सुविधाओं के बारे में मार्गदर्शन करता है, जिससे लक्षणों की शुरुआत और समय पर उपचार के बीच के अंतर को कम करने में मदद मिलती है।

श्री नड्डा ने मजबूत वैश्विक सहयोग का आह्वान करते हुए फेफड़ों के स्वास्थ्य को बढ़ावा देने के लिए प्रमुख अंतरराष्ट्रीय प्राथमिकताओं का प्रस्ताव रखा। इनमें सार्वभौमिक स्वास्थ्य कवरेज ढांचे के अंतर्गत फेफड़ों के स्वास्थ्य को मुख्यधारा में लाना, निदान, डिजिटल उपकरणों और स्क्रीनिंग तकनीकों तक किफायती पहुंच का विस्तार करना, श्वसन स्वास्थ्य के लिए प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल प्रणालियों को मजबूत करना, नवाचार, घरेलू विनिर्माण और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण को बढ़ावा देना और टीबी तथा फेफड़ों की अन्य बीमारियों की रोकथाम और शीघ्र पता लगाने के लिए सतत वित्तपोषण सुनिश्चित करना शामिल है।

वैश्विक लक्ष्यों से पहले टीबी को समाप्त करने के लिए भारत की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने कहा कि टीबी के खिलाफ लड़ाई मजबूत स्वास्थ्य प्रणालियों, बेहतर निदान, स्वच्छ वातावरण, बेहतर पोषण और अधिक न्यायसंगत समाजों का मार्ग प्रशस्त कर सकती है। उन्होंने वैश्विक समुदाय से आग्रह किया कि वे विलंबित निदान से शीघ्र निदान की ओर, खंडित कार्यक्रमों से एकीकृत देखभाल की ओर और रोग नियंत्रण से स्वास्थ्य प्रणाली परिवर्तन की ओर अग्रसर हों।

अपने संबोधन के समापन में श्री नड्डा ने विश्व स्तर पर फेफड़ों की जांच के लिए व्यावहारिक और व्यापक समाधानों को आगे बढ़ाने में सरकारों, नवप्रवर्तकों, विकास भागीदारों और समुदायों के साथ सहयोग करने के लिए भारत की तत्परता को दोहराया।

***************************

 

झारखंड में गर्मी का कहर, कई जिलों में लू का अलर्ट रांची समेत पूरे राज्य में भीषण गर्मी से जनजीवन प्रभावित, मेदिनीनगर सबसे गर्म

रांची,22.05.2026 – झारखंड में गर्मी अब लोगों की कड़ी परीक्षा लेने लगी है। सुबह से ही तेज धूप और गर्म हवाओं ने लोगों का हाल बेहाल कर दिया है। राजधानी रांची समेत राज्य के कई जिले इन दिनों भीषण गर्मी की चपेट में हैं। हालात ऐसे हैं कि दोपहर के समय सड़कें सूनी नजर आ रही हैं और लोग घरों में रहने को मजबूर हैं। मौसम विभाग ने 22 और 23 मई को कई जिलों में लू चलने की चेतावनी जारी की है।

गुरुवार को रांची का अधिकतम तापमान 38.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो पिछले 24 घंटे में 0.4 डिग्री बढ़ा है। वहीं जमशेदपुर में पारा 43.1 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। चाईबासा में 41.8 डिग्री और बोकारो में 41.1 डिग्री सेल्सियस तापमान रिकॉर्ड किया गया। तेज धूप और उमस भरी गर्मी से लोग दिनभर परेशान रहे। खासकर दोपहर में बाहर निकलना मुश्किल हो गया।

मौसम विभाग के अनुसार शुक्रवार को भी लोगों को गर्मी से राहत मिलने की उम्मीद नहीं है। रांची, गुमला, सिमडेगा, पूर्वी सिंहभूम, पश्चिमी सिंहभूम, रामगढ़, गिरिडीह, बोकारो, धनबाद, सरायकेला, देवघर, जामताड़ा, दुमका, गोड्डा, साहिबगंज और पाकुड़ में दोपहर तक तेज धूप पड़ने की संभावना है। हालांकि दोपहर बाद कुछ इलाकों में मौसम बदल सकता है और तेज हवा के साथ हल्की बारिश होने के आसार हैं, जिससे थोड़ी राहत मिल सकती है।

राजधानी रांची में 26 मई तक येलो अलर्ट जारी किया गया है। मौसम विभाग ने दोपहर बाद बादल छाने, गरज के साथ बारिश और तेज हवा चलने की संभावना जताई है। विभाग का कहना है कि दिन में गर्मी बनी रहेगी, लेकिन शाम के समय मौसम बदलने से तापमान में हल्की गिरावट आ सकती है।

इस बार सबसे ज्यादा गर्मी मेदिनीनगर में पड़ रही है। गुरुवार को यहां का अधिकतम तापमान 45.2 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। तेज धूप और गर्म हवाओं ने लोगों का जीना मुश्किल कर दिया है। मेदिनीनगर का पुराना रिकॉर्ड भी काफी डराने वाला रहा है। छह मई 1978 को यहां तापमान 47.8 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था, जबकि मई 2024 में भी पारा 47.5 डिग्री तक गया था।

मौसम विभाग ने गढ़वा, पलामू और चतरा जिले के लोगों को खास सतर्क रहने की सलाह दी है। विभाग के अनुसार 22 और 23 मई को इन जिलों में लू चलने की पूरी संभावना है। बच्चों, बुजुर्गों और बीमार लोगों को दोपहर के समय घर से बाहर नहीं निकलने की सलाह दी गई है।

भीषण गर्मी और हीट स्ट्रोक के खतरे को देखते हुए राज्य के स्वास्थ्य मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने लोगों से सतर्क रहने की अपील की है। उन्होंने कहा कि बहुत जरूरी होने पर ही लोग दिन के समय घर से बाहर निकलें। उन्होंने बताया कि राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों, सदर अस्पतालों, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों को हाई अलर्ट पर रखा गया है। अस्पतालों में ORS काउंटर, जरूरी दवाइयां, आईवी फ्लूइड्स, अतिरिक्त बेड और कूलिंग सुविधा की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया है।

*********************************

 

भीषण गर्मी में ट्रैफिक जवानों को राहत, रांची पुलिस ने शुरू किया ‘AC जैकेट’ ट्रायल

रांची,22.05.2026 –  राजधानी रांची में पड़ रही भीषण गर्मी और लू के बीच ट्रैफिक पुलिसकर्मियों को राहत देने के लिए रांची पुलिस ने एक नई पहल शुरू की है। एसएसपी के निर्देश पर ट्रैफिक जवानों को विशेष “एयर कूल्ड जैकेट” उपलब्ध कराई गई है, जिससे ड्यूटी के दौरान उन्हें गर्मी से बचाया जा सके। फिलहाल इसे पायलट प्रोजेक्ट के रूप में कुछ चुनिंदा ट्रैफिक पोस्ट पर लागू किया गया है।

यह खास जैकेट दो छोटे पंखों से लैस है, जो पावर बैंक से संचालित होते हैं। जैकेट के भीतर लगातार हवा का प्रवाह बनाए रखकर यह शरीर को ठंडा रखने में मदद करती है। इसके साथ ही इसमें रेडियम रिफ्लैक्टर भी लगाया गया है, जिससे रात में जवान आसानी से दिखाई दे सकें।

ट्रैफिक एसपी ने बताया कि भीषण गर्मी में जवानों को लंबे समय तक सड़क पर खड़े रहकर ड्यूटी करनी पड़ती है, जिससे हीटस्ट्रोक और लू का खतरा बना रहता है। ऐसे में यह जैकेट जवानों के स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकती है। यदि ट्रायल सफल रहा, तो आने वाले दिनों में सभी ट्रैफिक जवानों को यह सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

सड़क पर 8 से 10 घंटे तक धूप, धूल और वाहनों के धुएं के बीच ड्यूटी करने वाले जवानों के लिए यह पहल किसी राहत से कम नहीं मानी जा रही है। रांची पुलिस की इस हाई-टेक पहल की आम लोगों के बीच भी सराहना हो रही है।

*******************************

 

27 नक्सलियों ने भारी संख्या में हथियार के साथ झारखंड पुलिस और सीआरपीएफ के अधिकारियों के समक्ष सरेंडर किया

रांची,21.05.2026 –  नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत झारखंड पुलिस और CRPF को एक बहुत बड़ी सफलता हाथ लगी है. झारखंड गठन से लेकर अबतक के समय में पहली बार ऐसा हुआ है, जब एक साथ 27 नक्सलियों ने भारी संख्या में हथियार के साथ झारखंड पुलिस और सीआरपीएफ के अधिकारियों के समक्ष सरेंडर किया है.

सरेंडर करने वाले 27 नक्सलियों में 25 भाकपा माओवादी संगठन और दो जेजेएमपी उग्रवादी संगठन के नक्सली शामिल है. सरेंडर करने वाले इन नक्सलियों में आठ नक्सलियों के ऊपर कुल 33 लाख रुपया का इनाम घोषित है.

इन सभी नक्सलियों के खिलाफ कुल 426 नक्सल मामले दर्ज है.

****************************

 

राज्यपाल महोदय ने कहा कि झारखण्ड में स्कूली शिक्षा की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर

रांची,लोक भवन, झारखण्ड,21.05.2026 – माननीय राज्यपाल-सह-झारखण्ड राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति श्री संतोष कुमार गंगवार ने आज उच्च एवं तकनीकी शिक्षा विभाग, झारखण्ड सरकार द्वारा चाणक्य बीएनआर होटल, राँची में आयोजित दो दिवसीय कुलपति सम्मेलन के उद्घाटन अवसर पर कहा कि यह सम्मेलन झारखण्ड की उच्च शिक्षा को नई दिशा देने का महत्वपूर्ण अवसर है। उन्होंने कहा कि शिक्षा केवल डिग्री प्राप्त करने का माध्यम नहीं, बल्कि समाज की चेतना एवं राष्ट्र की प्रगति का आधार है। विश्वविद्यालय विचार, ज्ञान, अनुशासन, शोध और चरित्र निर्माण के केंद्र होते हैं तथा किसी भी राज्य का भविष्य उसके शिक्षण संस्थानों में ही आकार लेता है।

राज्यपाल महोदय ने कहा कि झारखण्ड में स्कूली शिक्षा की स्थिति अपेक्षाकृत बेहतर है, किंतु उच्च शिक्षा के क्षेत्र में अभी व्यापक सुधार की आवश्यकता है। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि राज्य का सकल नामांकन अनुपात (GER) राष्ट्रीय औसत से बहुत कम है तथा उच्च शिक्षा में ड्रॉपआउट की समस्या भी गंभीर है। गुणवत्तापूर्ण शैक्षणिक वातावरण, समयबद्ध परीक्षाओं एवं रोजगारोन्मुखी शिक्षा के अभाव में बड़ी संख्या में विद्यार्थी राज्य से बाहर जाने को विवश होते हैं। उन्होंने कहा कि यह स्थिति हम सभी के लिए आत्ममंथन का विषय है।

माननीय राज्यपाल ने कहा कि अब समय केवल समस्याओं की चर्चा करने का नहीं, बल्कि समाधान और परिणाम के साथ आगे बढ़ने का है। आउटकम स्पष्ट दिखाई देना चाहिए। विश्वविद्यालयों की पहचान केवल भवनों एवं परिसरों से नहीं, बल्कि उनके शैक्षणिक वातावरण, अनुशासन, शोध, नवाचार एवं उपलब्धियों से होती है। उन्होंने कहा कि जिस दिन झारखण्ड के विद्यार्थी यह महसूस करेंगे कि उसे बेहतर शिक्षा के लिए राज्य से बाहर जाने की आवश्यकता नहीं है, उस दिन हम कह सके

******************************

 

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने झारखंड आंदोलन के अग्रणी नेता स्व० दुर्गा सोरेन को दी भावपूर्ण श्रद्धांजलि

रांची,21.05.2026 – मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन आज झारखंड आंदोलन के अग्रणी नेता एवं पूर्व विधायक स्वर्गीय दुर्गा सोरेन जी की पुण्यतिथि पर लोवाडीह, नामकुम स्थित दुर्गा सोरेन स्मारक स्थल पहुंचकर उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर उन्हें भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने प्रेस प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए स्व० दुर्गा सोरेन जी के योगदान को याद किया। उन्होंने कहा कि स्व० दुर्गा सोरेन ने अलग झारखंड राज्य की लड़ाई और वंचितों के अधिकारों के लिए अपना जीवन समर्पित किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि हर वर्ष की भांति आज हम सभी लोग यहां एकत्रित होकर स्व० दुर्गा सोरेन जी को याद करते है। स्व० दुर्गा सोरेन एक दूरदर्शी, संघर्षील एवं जनभावनाओं से जुड़े हुए नेता थे, उनका जीवन जन कल्याण के प्रति समर्पित रहा।

मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने कहा कि स्व० दुर्गा सोरेन के विचार एवं आदर्श सदैव हम सभी को प्रेरित करते रहेंगे। स्व० दुर्गा सोरेन जैसे मार्गदर्शक और संघर्षील लोगों के शहादत एवं संघर्ष के बदौलत बहुत बड़ी मंजिल मिली, अलग राज्य मिला। बड़े भाई स्व० दुर्गा सोरेन जैसे कर्मठ एवं युवा नेताओं पर हम सभी को गर्व है। स्व० दुर्गा सोरेन की पुण्यतिथि पर उन्हें शत शत नमन!

दुर्गा सोरेन स्मारक स्थित उनकी प्रतिमा पर जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं एवं गणमान्य लोगों ने भी श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उनके योगदान को स्मरण किया।

****************************

 

केंद्रीय मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने “अरुणाचल कीवी: अरुणाचल प्रदेश की यूएसपी” मिशन लॉन्च किया

नई दिल्ली – पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास और संचार मंत्री श्री ज्योतिरादित्य एम. सिंधिया ने आज “अरुणाचल कीवी: अरुणाचल प्रदेश की यूएसपी – अरुणाचल प्रदेश राज्य के लिए क्लस्टर-आधारित कीवी खेती और मूल्य श्रृंखला विकास मिशन” की शुरुआत की। इस कार्यक्रम में अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री पेमा खांडू, अरुणाचल प्रदेश के मुख्य सचिव श्री मनीष कुमार गुप्ता और सचिव, एमडीओएनईआर श्री संजय जाजू की गरिमामयी उपस्थिति रही।

 

लगभग ₹167 करोड़ के खर्च के साथ, ‘अरुणाचल कीवी पर मिशन: अरुणाचल प्रदेश की यूएसपी’ को एक ‘समग्र-सरकारी’, तालमेल-आधारित दृष्टिकोण के जरिए तैयार किया गया है। इस मिशन की अगुवाई एमडीओएनईआर कर रहा है और इसे कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, ग्रामीण विकास मंत्रालय, खाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालय की योजनाओं के साथ-साथ नाबार्ड, आईसीएआर-सीआईटीएच, एपीडा, एनईआरएएमएसी और समर्पित निजी निवेशकों के साथ मिलकर बुना गया है। इस मिशन को मूल्य श्रृंखला में शामिल हर हिस्सेदार के नजरिए को ध्यान में रखते हुए आकार दिया गया है, ताकि यह सुनिश्चित हो सके कि इसमें किए गए उपाय जमीनी हकीकतों और अरुणाचल के कीवी-खेती करने वाले समुदायों की आकांक्षाओं को सही मायने में दर्शाते हों।

यह मिशन एक क्लस्टर-आधारित दृष्टिकोण अपनाता है, जिसके तहत जीरो वैली (लोअर सुबनसिरी), दिरांग और कलाकतांग (वेस्ट कामेंग), शि योमी, और दिबांग घाटी में छह एकीकृत क्लस्टर-स्तरीय ‘फसल-बाद प्रबंधन हब’ (पोस्ट-हार्वेस्ट मैनेजमेंट हब्स) की पहचान की गई है। इस मिशन के तहत 30 से अधिक रणनीतिक पहलें कीवी की पूरी मूल्य श्रृंखला में मौजूद गंभीर कमियों को दूर करने का प्रयास करती हैं, जिनमें कीमतों में मिलने वाले अंतर को पाटना, अरुणाचल के समाप्त हो चुके एनपीओपी जैविक प्रमाणन को फिर से हासिल करना, 7-10 दिनों की ‘बाध्यकारी बिक्री’ की अवधि को समाप्त करने के लिए कोल्ड-चेन एवं फसल-बाद के बुनियादी ढांचे का निर्माण करना और हजारों किसान परिवारों को वृक्षारोपण विकास, फसल-बाद प्रसंस्करण, ब्रांडिंग, पता लगाने की क्षमता, निर्यात और अनुभवात्मक कृषि-पर्यटन के एक एकीकृत तंत्र से जोड़ना शामिल हैं।

 

केंद्रीय एमडीओएनईआर मंत्री ने माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की उस प्रतिबद्धता पर जोर दिया, जिसके तहत यह सुनिश्चित किया जाना है कि किसान पूरी कृषि मूल्य श्रृंखला में – “खेत से थाली तक” – सही मायने में हितधारक बनें। इस पहल की ‘अभिसरण-आधारित’ प्रकृति पर जोर देते हुए मंत्री ने कहा:

“सभी 8 पूर्वोत्तर राज्यों के साथ गठित उच्च-स्तरीय कार्यबलों के माध्यम सेऔर इन 8 राज्यों के सभी मुख्यमंत्रियों तथा सरकारों के सहयोग सेहमने प्रत्येक राज्य से एक ऐसा अनूठा उत्पाद चुना है जिसकी अपनी एक विशिष्ट अद्वितीय विक्रय विशेषता‘ हैजैसे -मिजोरम का अदरक और नागालैंड की कॉफी से लेकर सिक्किम की जैविक खेतीमणिपुर की पोलो विरासतअसम का मूगा रेशम और मेघालय की लाकाडोंग हल्दी। आजअरुणाचल प्रदेश में परियोजना कीवी‘ के शुभारंभ के साथहम पूर्वोत्तर की ताकतों पर आधारितविश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी मूल्य श्रृंखलाएं बनाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठा रहे हैं।”

“मैं डीओएनईआर मंत्रालयअरुणाचल प्रदेश सरकार और सभी सहयोगी संस्थानों को बधाई देता हूं कि वे ‘समग्र-सरकार’ और ‘समग्र-भारत’ के सच्चे दृष्टिकोण के साथ एक साथ आए हैं। यह केवल एक सरकारी योजना या किसी मंत्रालय के नेतृत्व वाली पहल नहीं हैबल्कि यह अपनी तरह का पहला सहयोगात्मक मॉडल हैजो केंद्र और राज्य सरकारोंनाबार्डखाद्य प्रसंस्करण उद्योग मंत्रालयआईसीएआरएपीडा और निजी क्षेत्र को एक साथ लाता हैताकि किसान से लेकर बाजार तककीवी की पूरी मूल्य श्रृंखला को मज़बूत किया जा सके। हर चरण पर ऐसे उपाय पहचाने गए हैंजो हमारे किसानों के लिए बेहतर शेल्फ-लाइफमूल्य संवर्धनप्रीमियम बाज़ार तक पहुंच और अधिक आय सुनिश्चित करते हैं।”

मंत्री ने बताया कि अरुणाचल प्रदेश को, संकट के समय कम दाम पर कीवी बेचने वाले क्षेत्र से बदलकर, एक ऐसी प्रीमियम, ट्रेस की जा सकने वाली और ‘सिंगल-ओरिजिन’ जैविक कीवी अर्थव्यवस्था में बदलने के लिए “अरुणाचल कीवी: अरुणाचल प्रदेश की यूएसपी” नामक मिशन को एक पूर्ण-मूल्य-श्रृंखला विकास पहल के रूप में तैयार किया गया है, जिसकी घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में मजबूत उपस्थिति हो। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत के कुल कीवी उत्पादन में 50 प्रतिशत से ज्यादा का योगदान देने और हर साल 7,050 एमटी से ज्यादा उत्पादन करने के बावजूद, किसानों को ग्रेड सी की पैदावार के लिए सिर्फ ₹20–40 प्रति किलो और ग्रेड ए के लिए लगभग ₹120 प्रति किलो मिलते हैं; जबकि आयातित कीवी की भारतीय और वैश्विक बाजारों में कीमतें काफी ज्यादा होती हैं। एफपीओ को मजबूत करने और बिचौलियों पर निर्भरता कम करने की जरूरत पर जोर देते हुए, मंत्री ने कहा कि यह मिशन चार रणनीतिक स्तंभों पर आधारित है – तालमेल, मूल्य संवर्धन, ब्रांडिंग और बाजार एकीकरण। उन्होंने आगे कुछ मुख्य लक्ष्य भी बताए, जिनमें कीवी की शेल्फ लाइफ बढ़ाना, मजबूरी में कीवी बेचने की समस्या कम करना, 2,000 एमटी की कोल्ड-चेन क्षमता बनाना, प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन की सुविधाओं को बेहतर बनाना, कीवी से जुड़े स्टार्ट-अप को बढ़ावा देना, किसानों की आय बढ़ाना और वित्त वर्ष 2028 तक अरुणाचल की जैविक कीवी को अंतर्राष्ट्रीय निर्यात बाजारों में एक खास जगह दिलाना शामिल है।

 

केंद्रीय मंत्री ने आगे बताया कि इस पहल का उद्देश्य ब्रांड पूर्वोत्तर- “अरुणाचल जैविक कीवी” – को बढ़ावा देना है, जिसे मीडिया अभियानों, अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेलों में भागीदारी और पायलट क्लस्टरों में कीवी बागानों के अनुभवात्मक पर्यटन पहलों के माध्यम से समर्थन दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि मिशन रणनीतिक रूप से अरुणाचल प्रदेश की नवंबर-जनवरी की प्राकृतिक फसल अवधि का लाभ उठाता है, जो न्यूजीलैंड के ऑफ-सीजन के ठीक भीतर आती है – जिससे अरुणाचल जैविक कीवी को दक्षिण-पूर्व एशियाई, मध्य पूर्वी और यूरोपीय बाजारों में एक अनूठा बाजार अवसर मिलता है। मिशन जीरो घाटी और दिरांग में फार्म-स्टे और फार्म-टू-फोर्क पर्यटन अनुभवों को बढ़ावा देना चाहता है, जिससे अरुणाचल प्रदेश जैविक बागवानी पर्यटन के लिए एक विशिष्ट गंतव्य के रूप में स्थापित हो सके।

केंद्रीय मंत्री ने कहा कि इस पहल की असली सफलता तब दिखेगी जब “अरुणाचल जैविक कीवी” को घरेलू और अंतर्राष्ट्रीय, दोनों बाजारों में खास जगह मिलेगी – जिसे क्यूआर-कोड वाले पैक्स के जरिए अलग-अलग किसानों तक ट्रैक किया जा सकेगा – और साथ ही, पूरे राज्य में कीवी उगाने वाले समुदायों के लिए कीवी से होने वाली कमाई में चार से छह गुना बढ़ोतरी भी सुनिश्चित होगी। उन्होंने इस मिशन को “ब्रांड नॉर्थ ईस्ट” के बड़े विजन के तहत रखा -जिसमें हर राज्य के लिए एक खास पहचान (यूएसपी) है: जैविक राज्य (सिक्किम), मिजोरम का अदरक, त्रिपुरा का क्वीन पाइनएप्पल, नागालैंड की कॉफी, मेघालय की लाकाडोंग हल्दी, और अब अरुणाचल प्रदेश की जैविक कीवी। उन्होंने किसानों और संबंधित पक्षों को भरोसा दिलाया कि सरकार उनके “कंधे से कंधा मिलाकर” खड़ी है और अरुणाचल प्रदेश के लिए विश्व-स्तरीय प्रतिस्पर्धी, खास जैविक कीवी इकोसिस्टम बनाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है।

अरुणाचल प्रदेश के माननीय मुख्यमंत्री श्री पेमा खांडू ने ‘अरुणाचल कीवी: अरुणाचल प्रदेश की यूएसपी’ मिशन की परिकल्पना करने और उसे आगे बढ़ाने के लिए एमडीओएनईआर की गहरी सराहना की; उन्होंने इसे राज्य की कृषि और आर्थिक यात्रा में एक निर्णायक क्षण बताया। उन्होंने कहा कि अरुणाचल प्रदेश भारत का सबसे बड़ा कीवी उत्पादक राज्य है और देश का पहला ऐसा राज्य है जिसे एमओवीसीडी-एनईआर (2020) के तहत जैविक कीवी का प्रमाणन मिला है -यह एक ऐसी उपलब्धि है जिसे यह मिशन अब किसानों की समृद्धि, मूल्य संवर्धन और वैश्विक बाजार से जुड़ने के लिए एक व्यवस्थित मार्ग में बदल रहा है। उन्होंने कहा कि कीवी एक परिवर्तनकारी नकदी फसल के रूप में उभरी है, जो ऊंचे पहाड़ी इलाकों में ‘झूम’ खेती का एक टिकाऊ विकल्प प्रदान करती है; उन्होंने इस बात को फिर से दोहराया कि राज्य सरकार इस मिशन को जमीनी स्तर पर समय-सीमा के भीतर पूरा करने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है, और इसे राज्य के अपने ‘अरुणाचल प्रदेश कीवी मिशन 2025–35’ के साथ जोड़ा जा रहा है।

सचिव, एमडीओएनईआर श्री संजय जाजू ने अपने शुरुआती भाषण में मिशन के लागू करने के तरीके के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अरुणाचल प्रदेश की ऊंची जगहों वाली, जैविक खेती के लिए अनुकूल जलवायु परिस्थितियों में, कीवी की बेहतरीन किस्मों – हेवर्ड और एलिसन – को उगाने की बहुत ज्यादा संभावनाएं हैं। उन्होंने बताया कि कीवी की खेती अब राज्य के 13 जिलों में फैल चुकी है – जो 3,582 हेक्टेयर से ज्यादा जमीन पर हो रही है और इसमें 1,500 से ज़्यादा किसान लगे हुए हैं – लेकिन अब इसकी पैदावार, गुणवत्ता, मूल्य संवर्धन और बाजार तक पहुंच को बेहतर बनाने के लिए कुछ खास कदम उठाने की जरूरत है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि क्लस्टर-आधारित और तालमेल से चलने वाला यह मॉडल छोटे किसानों को एक साथ मिलकर फ़ायदा उठाने में मदद करेगा। इसके तहत वे साझा कोल्ड-चेन इंफ्रास्ट्रक्चर, तकनीकी सहायता, ब्रांडिंग से जुड़ी पहल और बाजार से सीधे जुड़ाव का लाभ उठा पाएंगे और यह सब कुछ साफ तौर पर तय किए गए और समय-सीमा में पूरे किए जाने वाले जरूरी लक्ष्यों पर आधारित होगा।

सचिव, बागवानी विभाग, अरुणाचल प्रदेश सरकार सुश्री कोज रिन्या ने धन्यवाद प्रस्ताव प्रस्तुत किया और माननीय मंत्री, एमडीओएनईआर, भारत सरकार, एमडीओएनईआर के  सहयोगी मंत्रालयों, संस्थानों, किसानों, एफपीओ, उद्यमियों और सभी हितधारकों के प्रति हार्दिक आभार व्यक्त किया। उन्होंने ‘अरुणाचल कीवी: अरुणाचल प्रदेश की यूएसपी’ नामक मिशन की परिकल्पना को साकार करने में उनके निरंतर सहयोग और भागीदारी के लिए यह आभार जताया। उन्होंने कीवी इकोसिस्टम को सुदृढ़ बनाने और पूरे अरुणाचल प्रदेश में किसानों की आजीविका में सुधार लाने के उद्देश्य से, इस मिशन के प्रभावी और समयबद्ध कार्यान्वयन के प्रति राज्य सरकार की प्रतिबद्धता को पुनः दोहराया।

इस पहल से स्थायी आजीविका के अवसर पैदा होने, कटाई के बाद होने वाले नुकसान में भारी कमी आने, खेत के स्तर पर मूल्य प्राप्ति में सुधार होने और पूरे अरुणाचल प्रदेश में कीवी अर्थव्यवस्था में ग्रामीण युवाओं की भागीदारी को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इस शुभारंभ कार्यक्रम का जीरो वैली और दिरांग के कीवी किसानों ने गर्मजोशी से स्वागत किया। इस कार्यक्रम में एमडीओएनईआर और अरुणाचल प्रदेश सरकार के अधिकारियों के साथ-साथ किसान, एफपीओ, उद्यमी और उद्योग के अन्य हितधारक भी शामिल हुए।

*********************************

 

स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के लिए नई दिल्ली में दो दिवसीय राष्ट्रीय समीक्षा बैठक का आयोजन

नई दिल्ली – आवासन और शहरी कार्य मंत्रालय (एमओएचयूए) ने माननीय केंद्रीय आवासन और शहरी कार्य मंत्री श्री मनोहर लाल की अध्यक्षता में 19-20 मई 2026 को स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 की दो दिवसीय राष्ट्रीय समीक्षा बैठक आयोजित की। यह बैठक विज्ञान भवन, नई दिल्ली में आयोजित की गई।

स्वच्छ भारत मिशन-शहरी की प्रगति उल्लेखनीय रही है। वर्तमान में 97% वार्ड घर-घर अपशिष्‍ट संग्रहण के दायरे में आ चुके हैं और समुदायों द्वारा स्रोत स्तर पर अपशिष्‍ट के पृथक्करण को दो-बिन, चार-बिन तथा यहां तक कि छह-बिन प्रणाली के माध्यम से तेजी से अपनाया जा रहा है। अपशिष्‍ट प्रसंस्करण में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है, जो वर्ष 2014 में 16% से बढ़कर 2026 में 81% तक पहुंच गया है। पुराने अपशिष्‍ट के निस्तारण में भी तेजी से प्रगति हुई है। देशभर के 2,482 डम्पसाइट्स पर मौजूद 26 करोड़ मीट्रिक टन अपशिष्‍ट में से 65% का सफलतापूर्वक निस्तारण किया जा चुका है, जिससे लगभग 9,000 एकड़ मूल्यवान शहरी भूमि पुनः प्राप्त हुई है।

स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 की दो दिवसीय राष्ट्रीय समीक्षा बैठक के प्रमुख निष्कर्षों का उल्लेख करते हुए केंद्रीय मंत्री श्री मनोहर लाल ने कहा,“हमें इस बात पर ध्यान केंद्रित करने की आवश्यकता है कि क्या बदलाव किए जाने चाहिए — चाहे वे वित्तीय चुनौतियां हों, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों की हिस्सेदारी का समन्वय हो, निविदा प्रक्रिया में देरी या भूमि आवंटन जैसी कार्यान्वयन संबंधी बाधाओं का समाधान हो, या संस्थागत क्षमताओं को सुदृढ़ करना हो। हमारे पास केंद्रित योजना तैयार करने और निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए केवल 10 महीने हैं। इस मिशन के लिए उच्च स्तरीय मजबूत नेतृत्व और विस्तृत योजना की आवश्यकता है; कृपया याद रखें, किसी भी श्रृंखला की मजबूती उसकी सबसे कमजोर कड़ी पर निर्भर करती है।”

केंद्रीय मंत्री ने राज्यों के अनुसार प्रमुख मुद्दों और चुनौतियों की मैपिंग की आवश्यकता पर जोर दिया। राज्यों को निर्देश दिया गया कि वे मंत्रालय द्वारा नियमित समीक्षा और सख्त निगरानी सुनिश्चित करने के लिए प्रतिदिन स्वच्छतम पोर्टल पर प्रगति के बारे में जानकारी दें। उन्होंने व्यवहार परिवर्तन के महत्व पर भी बल देते हुए कहा कि “स्वभाव स्वच्छता, संस्कार स्वच्छता” को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जाना चाहिए। केंद्रीय मंत्री ने इस बात को भी रेखांकित किया कि आवश्यक प्रोत्साहन देते हुए और विशेषकर पुराने डम्पसाइट्स के निस्तारण जैसे लक्ष्यों को शीघ्र प्राप्त करते हुए कार्यान्वयन में तेजी लाने की दिशा में विशेषकर मुख्यमंत्रियों, केंद्रीय विकास मंत्रियों और अन्य जनप्रतिनिधियों का मजबूत राजनीतिक उत्‍तरदायित्‍व अत्यंत महत्वपूर्ण होगा

इस दो दिवसीय सम्मेलन में तेलंगाना के उप मुख्‍यमंत्री श्री एम. भट्टी विक्रमार्क, महाराष्ट्र के उप मुख्‍यमंत्री श्री एकनाथ शिंदे, छत्तीसगढ़ के उप मुख्‍यमंत्री श्री अरुण साओ सहित कई वरिष्ठ गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए । इनके अलावा 12 राज्यों -आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, बिहार, हरियाणा, मध्य प्रदेश, राजस्थान, सिक्किम, उत्तर प्रदेश, दिल्ली, पश्चिम बंगाल, उत्तराखंड और जम्मू-कश्मीर के शहरी विकास मंत्री, उनके प्रधान सचिव और अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी सम्मेलन में उपस्थित रहे। इस सम्‍मेलन में एमओईएफसीसी, डीडीडब्ल्यूएस, एम ओ आर टी एच, एमओपीआर, एम ई आई टी वाई, एम ओ आर डी, एमओपी जैसे 14 केंद्रीय मंत्रालयों के प्रतिनिधियों ने भी भाग लिया। उन्होंने स्वच्छता और अपशिष्‍ट प्रबंधन तंत्र में समन्वय तथा आवश्यक सुझावों पर विचार-विमर्श किया।

यह सम्मेलन विषय-आधारित समीक्षा और ज्ञान-साझाकरण का एक महत्वपूर्ण मंच रहा, जिसमें स्वच्छ भारत मिशन के विभिन्न पहलुओं पर 11 केंद्रित सत्र आयोजित किए गए। इन सत्रों में संस्थागत सुदृढ़ीकरण, दृश्यमान स्वच्छता, वैज्ञानिक अपशिष्‍ट प्रसंस्करण, स्रोत स्तर पर अपशिष्‍ट पृथक्करण, वेस्ट-टू-एनर्जी प्रणाली, स्वच्छता एवं प्रयुक्त जल प्रबंधन, कर्मियों की सुरक्षा तथा विशेष भौगोलिक क्षेत्रों में कार्यान्वयन जैसे विषयों पर चर्चा की गई। परामर्श प्रक्रिया और विचार-विमर्श के दौरान कई महत्वपूर्ण बिंदु सामने आए, जिनमें जमीनी प्रक्रियाओं में तेजी लाना, एकीकृत कमांड एवं कंट्रोल सेंटर तथा अन्य तंत्रों के माध्यम से स्मार्ट मॉनिटरिंग, क्षेत्रीय योजना एवं क्लस्टर-आधारित अपशिष्‍ट प्रबंधन रणनीतियों को प्रोत्साहित करना, महानगरों एवं बड़े शहरों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता तथा परियोजनाओं की स्थिरता के लिए मजबूत वित्तीय मॉडल विकसित करना शामिल है।

********************************

 

रोजगार और व्यावसायिक हितों से जुड़ने पर भाषा का विकास तेजी से होता है : डॉ. जितेंद्र सिंह

नई दिल्ली – केन्द्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा एवं अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज कहा कि कोई भाषा रोजगार और व्यावसायिक गतिविधियों से जुड़ने पर अधिक तेजी से विकसित होती है। इसी संदर्भ में उन्होंने कहा कि हिंदी भाषा किसी पर थोपी नहीं जा रही है, बल्कि इसे आधिकारिक कार्यों, रोजगार, व्यापार, विज्ञान, प्रौद्योगिकी और जनभागीदारी से जोड़कर बढ़ावा दिया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि जब भी कोई भाषा अवसर और आजीविका से जुड़ जाती है, तो उसकी स्वीकृति और विस्तार स्वाभाविक रूप से होता है।

डॉ. जितेंद्र सिंह विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय के वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान विभाग (डीएसआईआर) द्वारा नई दिल्ली के अरवत हॉल में आयोजित हिंदी सलाहकार समिति की दूसरी बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। इस बैठक में वैज्ञानिक अनुसंधान, प्रशासनिक कार्यों, डिजिटल प्लेटफॉर्म और सार्वजनिक संचार में हिंदी भाषा के उपयोग को बढ़ाने पर व्यापक विचार-विमर्श हुआ।

इस बैठक में प्रयागराज (इलाहाबाद) से सांसद और हिंदी सलाहकार समिति के सदस्य उज्ज्वल रमन सिंह, समिति के सदस्य विपिन खजूरिया और डॉ. रेनू सैनी के साथ ही मंत्रालय और विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे। इसमें उपस्थित प्रमुख लोगों में डीएसआईआर के वित्तीय सलाहकार डॉ. चेतन प्रकाश जैन, संयुक्त सचिव एवं सदस्य सचिव सुरेंद्रपाल सिंह, संयुक्त सचिव महेंद्र कुमार गुप्ता और वैज्ञानिक विविन चंद्र शुक्ला शामिल रहे।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बैठक को संबोधित करते हुए कहा कि भारत जैसे बहुभाषी देश में राजभाषा केवल एक प्रशासनिक विषय नहीं है, बल्कि राष्ट्रीय एकता और संचार का एक महत्वपूर्ण माध्यम भी है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में पिछले एक दशक में आधिकारिक कार्यों में हिंदी के प्रयोग को नई गति मिली है और देश के गैर-हिंदी भाषी क्षेत्रों में भी हिंदी के प्रति सकारात्मक माहौल विकसित हुआ है।

उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत में बड़ी संख्या में युवा स्वेच्छा से हिंदी सीख रहे हैं क्योंकि बहुराष्ट्रीय कंपनियां अंग्रेजी के साथ-साथ हिंदी में भी निपुण उम्मीदवारों को प्राथमिकता दे रही हैं। उन्होंने कहा, “कोई भाषा तभी तेजी से विकसित होती है जब वह रोजगार और व्यावसायिक हितों से जुड़ जाती है।”

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि डिजिटल युग में भी पढ़ने की संस्कृति लुप्त नहीं हुई है, बल्कि माध्यम बदल गया है। युवा पीढ़ी अब मोबाइल फोन और डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से सामग्री का उपभोग करती है। इस संदर्भ में, उन्होंने वैज्ञानिक साहित्य, शोध सामग्री, सरकारी पहलों और मंत्रालयों की उपलब्धियों को हिंदी और अन्य भारतीय भाषाओं में डिजिटल रूप से उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर जोर दिया।

डॉ. जितेन्द्र सिंह ने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी से संबंधित जानकारी को आम लोगों तक सरल और व्यावहारिक हिंदी में पहुंचाने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। चिकित्सा और इंजीनियरिंग शिक्षा में भारतीय भाषाओं के बढ़ते उपयोग का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि मातृभाषा में ज्ञान प्रदान करने से सीखना अधिक सुलभ और प्रभावी हो जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ तकनीकी शब्द अपने अंतरराष्ट्रीय स्वरूप में ही बने रह सकते हैं ताकि छात्र वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बने रहें।

डॉ. सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि हिंदी को बढ़ावा देने का उद्देश्य किसी प्रकार का भाषाई दबाव बनाना नहीं होना चाहिए, बल्कि स्वैच्छिक भागीदारी और व्यावहारिक उपयोग को प्रोत्साहित करना होना चाहिए। उन्होंने कहा कि दक्षिण भारत के कई कर्मचारी अब अत्यंत शुद्ध और प्रभावी हिंदी का प्रयोग कर रहे हैं, जो देश के बदलते भाषाई परिदृश्य को दर्शाता है।

बैठक के दौरान वैज्ञानिक और प्रशासनिक कार्यों में हिंदी के उपयोग को और बढ़ाने के लिए कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए। सांसद उज्ज्वल रमन सिंह ने राजभाषा के कार्यान्वयन और कर्मचारियों की व्यापक भागीदारी से संबंधित संसदीय सुझावों को और तेजी से अमल में लाने की आवश्यकता पर जोर दिया।

समिति के सदस्य विपिन खजूरिया ने वैज्ञानिक पत्रिकाओं और शोध पत्रों के हिंदी अनुवादों को व्यापक रूप से उपलब्ध कराने, हिंदी सोशल मीडिया पोस्ट और इन्फोग्राफिक्स के माध्यम से वैज्ञानिक उपलब्धियों को बढ़ावा देने और अधिकारियों एवं कर्मचारियों के लिए नियमित रूप से कंप्यूटर आधारित हिंदी प्रशिक्षण कार्यशालाओं का आयोजन करने का सुझाव दिया। उन्होंने वैज्ञानिक एवं तकनीकी शब्दावली आयोग द्वारा विकसित हिंदी शब्दावली के व्यापक उपयोग पर भी बल दिया।

समिति सदस्य डॉ. रेनू सैनी ने वैज्ञानिकों और हिंदी लेखकों के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए नियमित कार्यशालाओं के आयोजन का सुझाव दिया, ताकि जटिल वैज्ञानिक शोध को आम जनता तक सरल हिंदी में पहुंचाया जा सके। उन्होंने हिंदी में उत्कृष्ट कार्य करने वाले कर्मचारियों के लिए प्रोत्साहन योजनाएं शुरू करने, कार्यालयों में वैज्ञानिकों के प्रेरणादायक विचारों को हिंदी में प्रदर्शित करने और हिंदी पुस्तकों के पठन को प्रोत्साहित करने पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि “शोध मातृभाषा में ही स्वाभाविक रूप से जीवंत होता है।”

बैठक में हिंदी के कार्यान्वयन, हिंदी में वैज्ञानिक लेखन को बढ़ावा देने, डिजिटल हिंदी सामग्री के विस्तार और विभाग द्वारा चलाई जा रही विभिन्न राजभाषा पहलों की प्रगति की भी समीक्षा की गई।

अपने समापन भाषण में डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि हिंदी सलाहकार समिति की बैठकें केवल औपचारिक कार्यवाही तक ही सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने सदस्यों से आग्रह किया कि वे डिजिटल प्लेटफॉर्म, व्हाट्सएप और अन्य संचार माध्यमों के जरिए मंत्रालय के साथ सुझाव साझा करते रहें ताकि उन्हें नीतिगत और प्रशासनिक स्तर पर तुरंत लागू किया जा सके।

**************************

 

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने इटली की प्रधानमंत्री सुश्री जॉर्जिया मेलोनी से भेंट की

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने 20 मई, 2026 को रोम में इटली गणराज्य की प्रधानमंत्री महामहिम सुश्री जॉर्जिया मेलोनी के साथ औपचारिक वार्ता की।
दोनों प्रधानमंत्रियों ने उच्च स्तरीय आदान-प्रदान की मजबूत गति और द्विपक्षीय सहयोग में मज़बूत वृद्धि और विविधीकरण का स्वागत किया। उन्होंने भारत-इटली रणनीतिक साझेदारी को विशेष रणनीतिक साझेदारी के स्तर तक बढ़ाने का निर्णय लिया।

दोनो नेताओं ने बहुपक्षीय आयोजनों के दौरान होने वाली बैठकों सहित नेताओं की वार्षिक बैठकों के साथ – साथ नियमित मंत्रिस्तरीय और संस्थागत स्तर की बैठकों के आयोजन पर भी सहमति व्यक्त की।

दोनों नेताओं ने भारत-इटली साझेदारी के संपूर्ण पहलुओं पर व्यापक चर्चा की। दोनों प्रधानमंत्रियों ने संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना 2025-2029 के सभी क्षेत्रों में द्विपक्षीय सहयोग में हुई प्रगति की समीक्षा की। दोनों नेताओं ने व्यापार और निवेश, रक्षा और सुरक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, अनुसंधान और नवाचार, अंतरिक्ष, ऊर्जा, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों, शिक्षा, संस्कृति तथा लोगों के बीच आपसी संबंधों में सहयोग को और बढ़ाने पर सहमति व्यक्त की। उन्होंने संयुक्त रणनीतिक कार्य योजना की नियमित समीक्षा के लिए विदेश मंत्री स्तर की एक व्यवस्था स्थापित करने का भी निर्णय लिया।

दोनों नेताओं ने द्विपक्षीय आर्थिक और वाणिज्यिक संबंधों में आई नई गति, बढ़ते निवेश और दीर्घकालिक सहयोग स्थापित करने के प्रयासों पर चर्चा की। इस संदर्भ में, उन्होंने पिछले वर्ष आयोजित तीन व्यापार मंचों के आदान-प्रदान का स्वागत किया।

दोनो प्रधानमंत्रियों ने रक्षा, डिजिटल, ऊर्जा उपयोग में परिवर्तन, अवसंरचना और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करने वाले चुनिंदा इतालवी और भारतीय मुख्य कार्यकारी अधिकारियों से भी मुलाकात की। दोनों नेताओं ने वर्ष 2029 तक द्विपक्षीय व्यापार को 20 अरब यूरो तक विस्तारित करने के साझा लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते से मिलने वाले अवसरों का लाभ उठाने पर सहमति व्यक्त की और इसके शीघ्र कार्यान्वयन का आह्वान किया।

दोनों नेताओं ने मंत्रिस्तरीय और आधिकारिक वार्ताओं, बंदरगाह दौरों के आदान-प्रदान और रक्षा बलों की नियमित भागीदारी के माध्यम से रक्षा सहयोग को मज़बूत करने पर संतोष व्यक्त किया। उन्होंने रक्षा उत्पादों के सह-डिजाइन, सह-विकास और सह-उत्पादन में सहयोग के लिए औद्योगिक रूपरेखा, संयुक्त आशय घोषणापत्र पर हस्ताक्षर का स्वागत किए।

दोनो नेताओं ने दोनों देशों के शोधकर्ताओं और वैज्ञानिक संस्थानों के बीच बढ़ते संपर्क पर संतोष व्यक्त किया।

उन्होंने इतालवी अंतरिक्ष एजेंसी और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन के बीच चल रहे सहयोग और वाणिज्यिक अंतरिक्ष सहयोग को मजबूत करने के प्रयासों का स्वागत किया।

दोनो प्रधानमंत्रियों ने कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सेमीकंडक्टर, महत्वपूर्ण खनिजों और अन्य अत्याधुनिक प्रौद्योगिकियों के क्षेत्रों में अधिक सहयोग का आह्वान किया, जिसमें भारत के प्रतिभाशाली कार्यबल और इटली की तकनीकी क्षमता का समन्वय किया जा सके।

दोनों नेताओं ने आतंकवाद के खतरे से निपटने के लिए अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता को दोहराते हुए द्विपक्षीय और बहुपक्षीय स्तरों पर सहयोग जारी रखने पर सहमति व्यक्त की। उन्होंने नवंबर 2025 में अपनाई गई आतंकवाद के वित्तपोषण का मुकाबला करने की संयुक्त पहल के कार्यान्वयन पर संतोष व्यक्त किया।

दोनों नेताओं ने इटली में प्रवासी भारतीयों के बहुमूल्य योगदान को मान्यता प्रदान की और विद्यार्थियों, शोधकर्ताओं और शिक्षाविदों की आवाजाही को सुगम बनाने पर सहमति व्यक्त की। दोनों नेताओं ने वर्ष 2027 को “भारत और इटली के बीच संस्कृति और पर्यटन वर्ष” के रूप में मनाने पर सहमति व्यक्त की।

उन्होंने गुजरात के लोथल स्थित राष्ट्रीय समुद्री धरोहर परिसर के विकास और भारत से नर्सों की भर्ती पर सहयोग हेतु भारत और इटली के बीच हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापनों का स्वागत किया।

दोनों नेताओं ने ठोस परियोजनाओं के माध्यम से कनेक्टिविटी अवसंरचना के निर्माण की तीव्र इच्छा व्यक्त की और भारत-मध्य पूर्व-यूरोप आर्थिक गलियारे (आईएमईसी) के कार्यान्वयन के लिए अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।

दोनों नेताओं ने पारस्परिक हित के वैश्विक और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया, जिनमें हिंद-प्रशांत क्षेत्र में घटनाक्रम, भारत-यूरोपीय संघ संबंध और पश्चिम एशिया तथा यूरोप में चल रहे संघर्ष शामिल हैं। प्रधानमंत्री मोदी ने मौजूदा संघर्षों के शांतिपूर्ण समाधान के लिए संवाद और कूटनीति के महत्व पर बल दिया।

प्रधानमंत्री मोदी ने इटली गणराज्य की सरकार और जनता के हार्दिक आतिथ्य के लिए प्रधानमंत्री मेलोनी को धन्यवाद दिया और उन्हें आपसी रूप से सुविधाजनक

समय पर भारत आने का निमंत्रण दिया।

******************************

 

वस्त्र मंत्रालय की सचिव सुश्री नीलम शमी राव ने भारत टेक्स 2026 मोबाइल ऐप लॉन्च किया

नई दिल्ली – वस्त्र मंत्रालय की सचिव सुश्री नीलम शमी राव ने आज भारत टेक्स 2026 इवेंट ऐप लॉच किया। यह एकीकृत डिजिटल प्लेटफार्म भारत के सबसे बड़े वैश्विक वस्त्र आयोजन में खरीदारों, अंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियों, वक्ताओं, सोर्सिंग सलाहकारों, भागीदारों, प्रदर्शकों और आगंतुकों के अनुभव को बेहतर बनाने के लिए तैयार किया गया है।

आधिकारिक भारत टेक्स 2026 ऐप इस आयोजन की ‘डिजिटल-प्रथम’ सोच को दर्शाता है और यह व्यावसायिक संपर्क स्थापित करने, प्रतिभागियों के अनुभव को बेहतर बनाने, डेटा-आधारित सहभागिता को सक्षम करने तथा भारत टेक्स 2026 के व्यापक पैमाने और महत्वाकांक्षा को समर्थन देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

यह ऐप भारत टेक्स 2026 के लिए एक व्यापक डिजिटल सहयोगी के रूप में विकसित किया गया है, जिसके माध्यम से पंजीकृत प्रतिभागी आयोजन संबंधी जानकारी प्राप्त कर सकेंगे, प्रदर्शकों को खोज कर सकेंगे, बैठकें निर्धारित कर सकेंगे, आयोजन स्थल पर मार्ग दर्शन प्राप्त कर सकेंगे, लीड कैप्चर कर सकेंगे, ज्ञान सत्रों तक पहुंच बना सकेंगे और वास्तविक समय में अपडेट प्राप्त कर सकेंगे- वो भी एक ही मोबाइल इंटरफेस के माध्यम से।

 

 

यह ऐप प्रदर्शकोंवक्ताओंअंतरराष्ट्रीय प्रतिनिधियोंविदेशी खरीदारोंघरेलू थोक खरीदारोंसोर्सिंग सलाहकारों और आम आगंतुकों सहित  सभी हितधारकों के लिए व्यक्तिगत पहुंच, दृश्य और सहभागिता टूल उपलब्ध कराएगा।

इस ऐप की एक प्रमुख विशेषता इसका एआई स्मार्ट असिस्टेंट है, जिसे प्रतिभागियों के लिए 24×7 संवादात्मक मार्गदर्शक के रूप में डिज़ाइन किया गया है। उपयोगकर्ता सरल भाषा में आयोजन से संबंधित प्रश्न पूछ सकेंगे और उन्हें आयोजन स्थल कार्यक्रम-सारणी, दिशा-निर्देश तथा अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं की प्रासंगिक जानकारी प्राप्त होगी। यह सुविधा भारतीय और अंतर्राष्ट्रीय दोनों प्रकार के प्रतिभागियों को उपयोगकर्ता-अनुकूल और त्वरित डिजिटल इंटरफेस के माध्यम से सहायता प्रदान करेगी।

यह ऐप नेटवर्किंग और मीटिंग मॉड्यूल के माध्यम से व्यवस्थित व्यावसायिक जुड़ाव को भी बढ़ावा देगा। प्रदर्शक, खरीदार और प्रतिनिधि प्रासंगिक साझेदारों को खोज सकेंगे, बैठकें तय कर सकेंगे, अपनी उपलब्धता प्रबंधित कर सकेंगे, बैठक अनुरोध प्राप्त कर सकेंगे और तय कर दी गई बैठकों रिकॉर्ड रख सकेंगी। लीड वॉलेट और क्यूआर-आधारित लीड कैप्चर सुविधा प्रदर्शकों और प्रतिभागियों को डिजिटल बैज स्कैन कर संरचित संपर्क विवरण सुरक्षित रखने में सक्षम बनाएगी, जिससे आयोजन के बाद भी संपर्क बनाए रखना आसान होगा।

यह ऐप भारत मंडपम में उन्नत नेविगेशन और दिशा-निर्देश सहायता भी प्रदान करेगा। प्रतिभागी फ्लोर प्लान देख सकेंगे, बूथ खोज सकेंगे, कंपनियों का पता लगा सकेंगे तथा आयोजन स्थल के भीतर स्टॉल-स्तरीय  दिशा-निर्देश प्राप्त कर सकेंगे।

वैश्विक खरीदारों और व्यापारिक आगंतुकों के लिए प्रदर्शक खोज मॉड्यूल विभिन्न प्रदर्शक श्रेणियों में व्यवस्थित खोज और फिल्टरिंग की सुविधा प्रदान करेगा। उपयोगकर्ता कंपनियों को नाम, उत्पाद श्रेणी और प्रदर्शक प्रकार के आधार पर खोज सकेंगे, जिससे वस्त्र मूल्य श्रृंखला में लक्षित सोर्सिंग और केंद्रित व्यावसायिक बातचीत संभव हो सकेगी।

यह ऐप लाइव इवेंट एजेंडा और ज्ञान सत्रों तक पहुंच भी प्रदान करेगा, जिससे प्रतिभागी सम्पूर्ण सम्मेलन कार्यक्रम देख सकेंगे, अपना व्यक्तिगत एजेंडा बना सकेंगे और सत्र संबंधी अलर्ट प्राप्त कर सकेंगे। इससे नीतिगत संवादों, उद्योग जगत की चर्चाओं और ज्ञान-आधारित गतिविधियों में बेहतर भागीदारी सुनिश्चित होगी, जिनकी योजना भारत टेक्स 2026 के तहत बनाई गई है।

भारत टेक्स ऐप तक पहुंचने का लिंक हैः- https://onelink.to/zcrm4s

भारत टेक्स 2026 का आयोजन भारत टेक्स ट्रेड फेडरेशन द्वारा किया जा रहा है, जो 11 वस्त्र निर्यात संवर्धन परिषदों और उद्योग निकायों का एक संघ है। इसका आयोजन केंद्र सरकार के वस्त्र मंत्रालय के सहयोग से किया जा रहा है। माननीय प्रधानमंत्री के 5एफ विजन- फार्म टू फाइबर टू फैक्ट्री टू फैशन टू फॉरेन- से प्रेरित यह आयोजन भारत को एक विश्वसनीय, सतत एवं नवाचार-आधारित वैश्विक वस्त्र सोर्सिंग और निवेश गंतव्य के रूप में स्थापित करने का प्रयास करता है।

भारत टेक्स 2026, जो 14-17 जुलाई 2026 को नई दिल्ली स्थित भारत मंडपम में आयोजित होगा, में वैश्विक वस्त्र उद्योग से 7,000 से अधिक अंतरराष्ट्रीय खरीदारों और 1,30,000 से अधिक व्यापारिक आगंतुकों के शामिल होने की उम्मीद है। यह आयोजन भारत की एकीकृत वस्त्र मूल्य श्रृंखला को प्रदर्शित करेगा, जिसमें फाइबर, यार्न, वस्त्र, परिधान, घरेलू वस्त्र, तकनीकी वस्त्र, हथकरघा, हस्तशिल्प, टिकाऊ वस्त्र और बुद्धिमान विनिर्माण प्रौद्योगिकियां शामिल हैं। भारत टेक्स 2026 एक्सपो के बारे में अधिक जानकारी बेवसाइट www.bharat-tex.com पर उपलब्ध है।

**********************************