इस बैठक का उद्देश्य ई-बसों एवं ई-ट्रकों को अपनाने में आने वाली वित्तीय चुनौतियों, ई-बसों एवं ई-ट्रकों के वित्तपोषण की वर्तमान स्थिति, वित्तीय चुनौतियों से निपटने के संभावित समाधान और आवश्यक सरकारी सहायता को समझना था।
यह बैठक वैश्विक अनिश्चितताओं एवं पश्चिम एशिया में बदलती स्थिति के बीच ईंधन बचाने तथा इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने के प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के आह्वान के अनुरूप एक कदम था, जो ऊर्जा सुरक्षा, जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम करने, तेल आयात बिल कम करने और सभी के लिए एक स्थायी भविष्य के प्रति भारत की मजबूत प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
बैठक के दौरान, निजी क्षेत्र में इलेक्ट्रिक बसों और इलेक्ट्रिक ट्रकों को अपनाने से संबंधित क्रेडिट गारंटी तथा ब्याज सब्सिडी जैसे प्रस्तावित सहायता तंत्र सहित वित्तपोषण की प्रमुख चुनौतियों पर विचार-विमर्श किया गया। इलेक्ट्रिक वाणिज्यिक वाहनों को तेजी से अपनाने में सहायता के संभावित उपायों के रूप में वित्तीय संस्थानों द्वारा ऋण देने के जोखिम को कम करने के उद्देश्य से क्रेडिट गारंटी योजनाओं और निजी क्षेत्र के खरीदारों के लिए उधार लागत को कम करने के उद्देश्य से ब्याज सब्सिडी तंत्रों पर चर्चा की गई।
सार्वजनिक परिवहन, विशेषकर बसें देश भर में आवागमन की रीढ़ हैं। जबकि, घरेलू सामानों की ढुलाई में ट्रकों की महत्वपूर्ण भूमिका है। साथ ही, वाणिज्यिक वाहन सड़क परिवहन के दौरान होने वाले उत्सर्जन, ईंधन की खपत और निलंबित कणों के प्रदूषण में भी महत्वपूर्ण योगदान देते हैं। इस संदर्भ में, भारत में कार्बन उत्सर्जन को कम करने और 2070 तक शुद्ध शून्य उत्सर्जन (नेट जीरो) के लक्ष्य को हासिल करने हेतु बसों और ट्रकों का विद्युतीकरण आवश्यक है।
यह पहल वाणिज्यिक वाहनों के क्षेत्र में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की दिशा में बदलाव को सक्षम बनाने के भारी उद्योग मंत्रालय के सक्रिय दृष्टिकोण को दर्शाती है। विभिन्न सरकारी विभागों, बहुपक्षीय संस्थानों, वित्तीय संस्थाओं और उद्योग के हितधारकों को एक साझा मंच पर लाकर, एमएचआई का उद्देश्य इलेक्ट्रिक वाहनों को अपनाने में आने वाली प्रमुख बाधाओं को दूर करने वाले व्यावहारिक वित्तपोषण समाधान विकसित करना है ताकि आत्मनिर्भर भारत और विकसित भारत @2047 की परिकल्पना के तहत ऊर्जा सुरक्षा, उत्सर्जन में कमी तथा स्वदेशी उन्नत मैन्यूफैक्चरिंग के भारत के व्यापक लक्ष्यों को समर्थन मिल सके।
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