सरकार ने वर्ष 2017 में न्याय बंधु (जनहितकारी विधिक सेवाएं) कार्यक्रम शुरू किया। इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य जनहितकारी संस्कृति को बढ़ावा देते हुए देश भर में निःशुल्क विधिक सेवाएं प्रदान करने के लिए ढांचे का निर्माण करना है। यह विधिक सेवा प्राधिकरण (एलएसए), 1987 की धारा 12 के अंतर्गत मुफ्त कानूनी सहायता पाने के हकदार व्यक्तियों और जनहित में काम करने वाले अधिवक्ताओं के बीच संपर्क स्थापित करता है।
इस कार्यक्रम को 2021 से 2026 तक 5 वर्षों के लिए एक नागरिक केंद्रित योजना, डिजाइनिंग इनोवेटिव सोल्यूशंस फॉर होलिस्टिक एक्सेस टू जस्टिस इन इंडिया (दिशा) में सम्मिलित कर दिया गया है। न्याय बंधु (जनहितकारी विधिक सेवाएं) कार्यक्रम का एक प्रमुख उद्देश्य उन अधिवक्ताओं का पंजीकरण है जो स्वेच्छा से अपना समय और सेवाएं अदालत में मामला दायर करने और सहायता के लिए दे सकते हैं। न्याय बंधु (जनहितकारी विधिक सेवाएं) पोर्टल पर 30 नवंबर, 2025 तक अपना पंजीकरण करा चुके अधिवक्ताओं की संख्या 9776 है।
युवा विधिक कर्मियों में जनहित की संस्कृति को मजबूत करने के उद्देश्य से देश के 109 विधि विद्यालयों में जनहितकारी क्लब उपयोजना चलाई जा रही है। इसके अलावा, इन प्रयासों को संस्थागत रूप देने के लिए 23 उच्च न्यायालयों में न्याय बंधु (जनहितकारी विधिक सेवाएं) समितियां शुरू की गई हैं।
इसके अतिरिक्त समाज के कमजोर तबकों को मुफ्त और सक्षम विधिक सेवाएं प्रदान करने के उद्देश्य से एलएसए अधिनियम, 1987 के अंतर्गत राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (एनएलएएसए) की स्थापना की गई है। इन तबकों में एलएसए अधिनियम की धारा 12 के अधीन आने वाले लाभार्थी भी शामिल हैं।
इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए तालुका अदालत स्तर से उच्चतम न्यायालय तक विधिक सेवा संस्थान स्थापित किए गए हैं। लेकिन एनएलएएसए और इसके अधीन आने वाले विधिक सेवा संस्थान उन मामलों में शामिल नहीं होते जिनमें अधिवक्ता अपनी ओर से निःशुल्क सेवाएं मुहैया करा रहे हैं।
विधि और न्याय राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा संसदीय कार्य राज्यमंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल ने आज राज्यसभा में यह जानकारी दी।
केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आज कृषि भवन, नई दिल्ली में राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (NHB) के निदेशक मंडल की 33वीं बैठक आयोजित हुई। बैठक में केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री श्री रामनाथ ठाकुर भी उपस्थित थे।
फ्लैगशिप कार्यक्रमों की समीक्षा और रणनीति निर्धारण- बैठक में श्री शिवराज सिंह चौहान ने NHB की योजनाओं की समीक्षा की। विशेष रूप से वाणिज्यिक बागवानी विकास योजनाएं, कोल्ड-चेन अवसंरचना परियोजनाएं, क्लस्टर विकास कार्यक्रम (CDP)- क्षेत्र-विशिष्ट बागवानी क्लस्टरों के माध्यम से उत्पादकता और बाजार जुड़ाव को बढ़ाने की नई पहल, क्लीन प्लांट कार्यक्रम-उच्च मूल्य वाली फसलों के लिए रोग-मुक्त पौध सामग्री उपलब्ध कराने के बारे में चर्चा हुई।
केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने निर्देश दिया कि योजनाओं का क्रियान्वयन समयबद्ध, पारदर्शी और किसान-केंद्रित हो तथा किसानों को सब्सिडी भी समय पर दी जाएं, इस संबंध में कोई शिकायत नहीं आनी चाहिए। साथ ही, श्री शिवराज सिंह ने किसानों के हित में, जल्दी खराब होने वाले बागवानी उत्पादों के संबंध में विशेष रणनीति बनाने पर जोर दिया, ताकि इनकी सेल्फ लाइफ बढ़े, किसानों को नुकसान नहीं हो और नुकसान से बचने के लिए अवेयरनेस प्रोग्राम भी चलाए जाएं।
एनएचबी की भूमिका सुदृढ़ करने के लिए मार्गदर्शन- बैठक के दौरान केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने बागवानी क्षेत्र की उत्पादकता, गुणवत्ता और प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने हेतु कई रणनीतिक सुझाव दिए। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण पौध सामग्री, फसलोत्तर प्रबंधन, उत्पादकता वृद्धि पर विशेष ध्यान देने को कहा। श्री शिवराज सिंह ने कहा कि पूरे समन्वय के साथ किसानों को बाजार, कोल्ड-चेन नेटवर्क और मूल्य संवर्धन के अवसरों से जोड़ने वाली व्यवस्था को सुदृढ़ करना जरूरी है। उन्होंने कहा कि किसानों के फायदे के लिए एनएचबी राज्यवार, क्षेत्रवार रोडमैप बनाकर पूरी ताकत से श्रेष्ठ कार्य करें।
तकनीकी प्रकाशनों का विमोचन- केंद्रीय मंत्री श्री शिवराज सिंह ने राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड द्वारा तैयार गुड एग्रीकल्चर प्रैक्टिस, जैविक खेती मॉडल और उन्नत बागवानी तकनीकों पर आधारित तकनीकी प्रकाशनों का विमोचन किया। ये संसाधन किसानों, उद्यमियों व कृषि विशेषज्ञों के लिए एक उपयोगी संदर्भ सामग्री सिद्ध होंगे। बैठक में केंद्रीय कृषि सचिव डॉ. देवेश चतुर्वेदी, आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. मांगीलाल जाट सहित कृषि, विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी, बागवानी उद्योग से जुड़े गैर-आधिकारिक सदस्य उपस्थित रहे। इस व्यापक प्रतिनिधित्व से बैठक में क्षेत्रीय दृष्टिकोण व सहभागी संवाद को बल मिला। राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड, कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के अंतर्गत एक स्वायत्त संगठन है, जो देशभर में वाणिज्यिक बागवानी और कोल्ड-चेन अवसंरचना के सुदृढ़ विकास के लिए कार्यरत है।
एक ऐतिहासिक क्षण में, भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान ने एस्ट्रोसैट पर अत्यधिक सफल अल्ट्रावायलेट इमेजिंग टेलीस्कोप (यूवीआईटी) के संचालन के 10 वर्ष पूरे होने का जश्न मनाया।
यूआईवीटी, भारत की पहली समर्पित अंतरिक्ष वेधशाला, एस्ट्रोसैट पर प्राथमिक पेलोड है, जिसे इसरो द्वारा 28 सितंबर, 2015 को प्रक्षेपित किया गया था। एस्ट्रोसैट में पांच पेलोड हैं जो पराबैंगनी से लेकर सॉफ्ट एक्स-रे और हार्ड एक्स-रे तक का एक साथ अवलोकन करने में सक्षम हैं।
यूआईवीटी का डिजाइन, संयोजन, परीक्षण और वितरण विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (डीएसटी) के एक स्वायत्त संस्थान यानी भारतीय खगोल भौतिकी संस्थान (आईआईए) ने अपने होसाकोटे स्थित परिसर में किया था। इस उपलब्धि के उपलक्ष्य में और भविष्य के अंतरिक्ष यूवी दूरबीनों की योजना बनाने के लिए, आईआईए ने 30 नवंबर, 2015 को यूवीआईटी के उद्घाटन के 10 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में 4 दिसंबर, 2025 को एक दिवसीय शैक्षणिक कार्यशाला का आयोजन किया।
आईआईए की निदेशक और यूवीआईटी की अंशांकन वैज्ञानिक अन्नपूर्णी सुब्रमण्यम ने बताया, “चूंकि यूवी किरणें हमारे वायुमंडल द्वारा अवशोषित कर ली जाती हैं, इसलिए इन्हें केवल अंतरिक्ष दूरबीनों का उपयोग करके ही देखा जा सकता है। यूवीआईटी भारत का पहला यूवी अंतरिक्ष दूरबीन है और हबल अंतरिक्ष दूरबीन के अलावा सुदूर यूवी में अवलोकन करने में सक्षम एकमात्र कार्यशील दूरबीन है।”
यूवीआईटी ने कई महत्वपूर्ण खोजें की हैं और आज भी भारत तथा विदेशों में खगोलविदों द्वारा इसका इस्तेमाल किया जा रहा है। यह एक विशाल दृश्य क्षेत्र और आकाश के बेहतर स्थानिक विभेदन के संयोजन में दुनिया में अद्वितीय है।
इसरो के पूर्व अध्यक्ष प्रो. के. कस्तूरीरंगन के योगदान को याद करते हुए, इसरो के पूर्व अध्यक्ष श्री ए.एस. किरण कुमार ने कहा, “जब भी हम ब्रह्मांड को देखने और मापने के नए तरीके खोजते हैं, तो ब्रह्मांड को समझने की हमारी क्षमता में सुधार होता है और मैं आईआईए को आज हम सभी को एक साथ लाने के लिए बधाई देता हूं ताकि यह बताया जा सके कि एस्ट्रोसैट और यूवीआईटी को कैसे डिजाइन किया गया, निर्मित किया गया और अंतरिक्ष में सफलतापूर्वक उड़ाया गया।”
यूवीआईटी पेलोड्स ऑपरेशन सेंटर के प्रभारी सीएस स्टालिन ने कहा, “यूवीआईटी एक जुड़वां दूरबीन प्रणाली है। इनमें से एक निकट-पराबैंगनी (एनयूवी; 200-300 नैनोमीटर) और दृश्य बैंड (दृश्य: 320-550 नैनोमीटर) में ब्रह्मांड का अवलोकन करती है और दूसरी सुदूर-पराबैंगनी (एफयूवी; 130-180 नैनोमीटर) में अवलोकन करती है।”
इसका विशाल दृश्य क्षेत्र और 1.5 आर्कसेकेंड से बेहतर उच्च स्थानिक रिजोल्यूशन (गैलेक्स/नासा से बेहतर) का संयोजन इसे खगोल विज्ञान से संबंधित खोजों के लिए एक अद्वितीय उपकरण बनाता है।
यूवीआईटी के डिजाइन और निर्माण में कई संस्थान शामिल थे और पूरी परियोजना का नेतृत्व आईआईए द्वारा किया गया। इसमें एक राष्ट्रीय संगोष्ठी शामिल थी, जिसमें पुणे में आईयूसीएए, मुंबई में टीआईएफआर, इसरो के कई केंद्र शामिल थे। इन सभी ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, जिनमें आईएसएसी/यूआरएससी, एलईओएस, आईआईएसयू और एसएसी और कनाडाई अंतरिक्ष एजेंसी शामिल थे।
सुब्रमण्यम ने कहा, “हमें संवेदनशील घटकों के संचालन हेतु ‘स्वच्छ कक्षों’ वाली एक विशेष प्रयोगशाला स्थापित करनी पड़ी ताकि किसी भी संदूषण से उन्हें ख़राब होने से बचाया जा सके। यह एमजीके मेनन प्रयोगशाला होसाकोटे स्थित हमारे सीआरईएसटी परिसर में स्थापित की गई थी, जिसका इस्तेमाल अन्य अंतरिक्ष अभियानों के लिए भी किया गया है।” उन्होंने कहा कि यूवी खगोल विज्ञान के क्षेत्र में उनके अनुभव का उपयोग करने के लिए कनाडा के साथ एक अंतरराष्ट्रीय सहयोग स्थापित किया गया था। प्रक्षेपण के बाद, आईआईए में यूवीआईटी पेलोड ऑपरेशन सेंटर (पीओसी) की स्थापना की गई, जो खगोलविदों के लिए विज्ञान के अनुकूल डेटा के उत्पादन, यूवीआईटी की नियमित निगरानी, प्रस्तावों के तकनीकी मूल्यांकन और दूरबीन के सॉफ्टवेयर को उन्नत करने के लिए जिम्मेदार है।
कार्यशाला में यूवीआईटी अवलोकनों से प्राप्त कुछ प्रमुख खोजों और विज्ञान संबंधी विशेषताओं पर भी प्रकाश डाला गया, जिनमें बी सितारों और ब्लू स्ट्रैगलर सितारों के गर्म कॉम्पैक्ट आसपास के सितारों की खोज, एंड्रोमेडा आकाशगंगा में तारा निर्माण, नोवा द्वारा सक्रिय गैलेक्टिक नाभिक में फीडबैक प्रभाव, छोटी आकाशगंगाओं और ग्रहीय नेबुला में विस्तारित यूवी डिस्क की खोज, 1.42 के रेडशिफ्ट पर दूरस्थ आकाशगंगाओं से उत्सर्जन का पता लगाना, सक्रिय गैलेक्टिक नाभिक से यूवी और एक्स-रे उत्सर्जन के बीच संबंध, और आकाशगंगाओं में युवा तारा निर्माण की विशेषताएं शामिल हैं।
इस बात पर भी प्रकाश डाला गया कि यूवीआईटी ने आकाश में कुल 1451 लक्ष्यों का अवलोकन किया है और पिछले 10 वर्षों के संचालन में, इसके माध्यम से लगभग 300 रिसर्च आर्टिकल और 19 पीएचडी थीसिस तैयार किए गए हैं। भारत और विदेश में कई अन्य छात्र भी अपने अनुसंधान कार्य के लिए यूवीआईटी के डेटा का उपयोग कर रहे हैं।
विज्ञान के अनुकूल अंतिम छवियों के उन्नत वर्जन को यूवीआईटी पीओसी द्वारा इसरो के आईएसएसडीसी के ‘प्रदान’ अभिलेखागार में अपलोड किया जा रहा है, ताकि आने वाले वर्षों में सभी खगोलविद अपने अनुसंधान के लिए इसका इस्तेमाल कर सकें।
अंत में, वहां एकत्रित खगोलविदों ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि किस प्रकार यूवीआईटी में दो दशकों से अधिक के अनुभव के आधार पर, अगली पीढ़ी की एक बड़ी अंतरिक्ष सुविधा, अर्थात आईएनएसआईएसटी (भारतीय स्पेक्ट्रोस्कोपिक और इमेजिंग स्पेस टेलीस्कोप) को संभव बनाया जा सकता है।
भारतीय नौसेना ने 3 दिसंबर 2025 को तिरुवनंतपुरम के शंगुमुघम समुद्र तट पर एक शानदार ‘परिचालन प्रदर्शन’ के माध्यम से अपनी परिचालन क्षमता और समुद्री क्षमताओं का प्रदर्शन किया। इस विशाल आयोजन ने नौसेना की दुर्जेय युद्ध क्षमताओं, प्रौद्योगिकी उत्कृष्टता और परिचालन तत्परता को जीवंत किया, साथ ही देश की बढ़ती समुद्री शक्ति और आत्मनिर्भरता को भी दर्शाया। राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का स्वागत नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी ने किया। आगमन पर मुख्य अतिथि को 150 जवानों द्वारा औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया।
केरल के राज्यपाल श्री राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर तथा केरल के मुख्यमंत्री श्री पिनाराई विजयन सहित अनेक प्रतिष्ठित व्यक्तियों, वरिष्ठ केंद्रीय एवं राज्य के सरकारीअधिकाररियों, सैन्य अधिकारियों और बड़ी संख्या में स्थानीय नागरिकों ने इस कार्यक्रम को देखा।
इस ऑपरेशन डेमो में अग्रिम पंक्ति के प्लेटफार्मों द्वारा समन्वित युद्धाभ्यास का एक रोमांचक प्रदर्शन किया गया, जो नौसेना की समुद्री क्षेत्र में शक्ति और सटीकता प्रदान करने की क्षमता का प्रतीक था। स्वदेशी विमानवाहक पोत आईएनएस विक्रांत सहित बीस से अधिक नौसैनिक जहाजों और पनडुब्बियों ने एयर असेट्स और इलीट मरीन कमांडो (एमएआरसीओएस) के साथ नौसेना की ताकत और परिचालन उत्कृष्टता का शानदार प्रदर्शन किया।
इसके अतिरिक्त, सी कैडेट कोर द्वारा हॉर्नपाइप नृत्य, सांस्कृतिक कार्यक्रम और नौसैनिक कर्मियों द्वारा तेजी से किए गए क्रमबद्ध ड्रिल ‘कंटीन्यूटी ड्रिल्स’ ने भी दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। इस कार्यक्रम का समापन भारतीय नौसेना बैंड द्वारा बीटिंग रिट्रीट और नौसेना के जहाजों की रोशनी के साथ पारंपरिक सूर्यास्त समारोह के साथ हुआ।
नौसेना दिवस भारतीय इतिहास के पन्नों में एक महत्वपूर्ण दिन है, जो 1971 के युद्ध के दौरान ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ में भारतीय नौसेना की निर्णायक भूमिका का स्मरण कराता है । दशकों से भारतीय नौसेना लगातार मजबूत हुई है और देश के समुद्री हितों के लिए उभरती चुनौतियों का सामना करने के लिए निरंतर विकसित होते हुए दृढ़ और मजबूत बनी हुई है। इस विरासत को आगे बढ़ाते हुए आत्मनिर्भर भारत के मार्गदर्शक विजन के तहत भारतीय नौसेना अपने तेज आधुनिकीकरण की दिशा में बढ़ रही है और एक ‘खरीददार नौसेना’ से एक ‘निर्माता नौसेना’ में पूरी तरह परिवर्तित हो गई है।
ऑप डेमो 2025 ने नौसेना की समुद्री उत्कृष्टता और एक विश्वसनीय बल के रूप में इसकी अटल भूमिका को रेखांकित किया, जो महासागरों में विश्वास प्रेरित करता है, साझेदारी बनाता है और सामूहिक सुरक्षा को बरकरार रखता है। यह एक ऐसी भूमिका है, जो एमएएचएसएजीएआर (क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए आपसी और समग्र उन्नति) के विजन पर आधारित एक स्वतंत्र, खुली और नियम आधारित समुद्री व्यवस्था के प्रति भारत की प्रतिबद्धता के अनुरूप है।
लिंक:- नौसेना दिवस 2025 की पूर्व संध्या पर राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु का संबोधन
काशी तमिल संगमम् 4.0 के द्वितीय समूह के आगमन पर काशी विश्वनाथ मंदिर के अधिकारियों ने परंपरागत गरिमा के साथ सभी अतिथियों का स्वागत किया। मंदिर प्रशासन द्वारा पुष्प वर्षा और डमरू वादन की ध्वनि के बीच सम्पूर्ण समूह का स्वागत किया गया जिससे सभी सदस्यों ने काशी की समृद्ध आध्यात्मिक धारा का अनुभव किया।
स्वागत के उपरांत सदस्यों ने बाबा विश्वनाथ के दर्शन किए और दर्शन के पश्चात मंदिर प्रशासन द्वारा समूह को काशी विश्वनाथ धाम के भव्य कॉरिडोर का विस्तृत भ्रमण करवाया गया। भ्रमण के दौरान सभी ने धाम के ऐतिहासिक स्वरूप, स्थापत्य कला, नवनिर्मित सुविधाओं और निरंतर बढ़ती श्रद्धा-धारा के बारे में जानकारी प्राप्त की।
भ्रमण पूर्ण होने पर सभी अतिथियों के लिए मंदिर द्वारा संचालित अन्नक्षेत्र में दोपहर के भोजन की व्यवस्था की गई। अन्नक्षेत्र में परोसे गए प्रसाद ने सभी को काशी की सेवा-परंपरा और अतिथि-भावना का गहरा अनुभव कराया।
काशी तमिल संगमम् के इस द्वितीय समूह का दर्शन और भ्रमण दोनों समुदायों के सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और ऐतिहासिक संबंधों को और सुदृढ़ करने वाला सिद्ध हुआ। यह दिवस काशी और तमिल परंपराओं के संगम का महत्वपूर्ण प्रतीक बनकर स्मरणीय रहेगा।
उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देशानुसार जिले के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में की जा रही अलाव की पर्याप्त व्यवस्था
ठंड से किसी भी नागरिक को असुविधा न हो, यह जिला प्रशासन की शीर्ष प्राथमिकता – श्री मंजूनाथ भजन्त्री, उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी, राँची।
रांची, 04.12.2025 – लगातार गिरते तापमान को देखते हुए राँची जिला प्रशासन द्वारा आम जनता की सुविधा को प्राथमिकता देते हुए जिले में व्यापक स्तर पर अलाव की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है।
उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देशानुसार जिले के शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों में पर्याप्त अलाव की व्यवस्था की गई है।
जिले के सभी प्रखंडों के पंचायत भवनों, प्रमुख हाट-बाजारों और जरूरतमंद आबादी वाले स्थानों पर भी अलाव की व्यवस्था सुचारू रूप से की जा रही है।
उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री द्वारा प्रत्येक प्रखंड में आवश्यक स्थानों पर अलाव निरंतर जलते रहें, इसके लिए संबंधित अधिकारियों को पूर्व से ही सभी आवश्यक तैयारियाँ सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए थे।
नई दिल्ली – राष्ट्रीय महिला आयोग ने देश भर में संकटग्रस्त महिलाओं के लिए त्वरित और अधिक सुलभ सहायता सुनिश्चित करने के लिए एक नई 24×7 संक्षिप्त कोड हेल्पलाइन – 14490 शुरू की है। यह टोल-फ्री नंबर एनसीडब्ल्यू की मौजूदा हेल्पलाइन 7827170170 से जुड़ा एक आसानी से याद रखने योग्य संक्षिप्त कोड के रूप में कार्य करता है। इस पर संपर्क कर महिलाएं बिना किसी लागत या देरी के सहायता प्राप्त कर सकती हैं।
नया संक्षिप्त कोड हिंसा, उत्पीड़न या किसी भी प्रकार के संकट का सामना कर रही महिलाओं को तत्काल सहायता प्रदान करने के लिए एनसीडब्ल्यू के चल रहे प्रयासों को मजबूत करता है। प्रथम संपर्क बिंदु के रूप में हेल्पलाइन मार्गदर्शन प्रदान करेगा। साथ ही संबंधित प्राधिकारियों के साथ समन्वय स्थापित कराएगा और समय पर सहायता प्रदान करना सुनिश्चित करेगा।
एनसीडब्ल्यू लोगों, सामुदायिक समूहों, संस्थानों और भागीदारों को इस जानकारी को व्यापक रूप से साझा करने के लिए प्रोत्साहित करता है ताकि अधिक से अधिक महिलाएं इस हेल्पलाइन सेवाओं के बारे में जागरूक रहें।महिला एवं बाल विकास मंत्रालय।
नई दिल्ली – पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय (एमओपीएसडब्ल्यू) सर्बानंद सोनोवाल ने आज यहां अपने सरकारी आवास पर असम दिवस का एक शानदार जश्न मनाया। उन्होंने अहोम साम्राज्य के संस्थापक और ग्रेटर असम के आर्किटेक्ट चाओलुंग सुकाफा को श्रद्धांजलि दी। सोनोवाल ने सुकाफा की तस्वीर के सामने पुष्प अर्पित किए और उनकी अनोखी विरासत के बारे में बताया।
इस मौके पर सोनोवाल ने कहा, “ग्रेटर असमिया समुदाय के पूज्य पूर्वज चाओलुंग सुकाफा को समर्पित इस खास जश्न में हिस्सा लेना बहुत गर्व की बात है। 13वीं सदी की शुरुआत में असम के मूल निवासियों को एकजुट करने के लिए उन्होंने जो कदम उठाए, उन्होंने शांति और सद्भाव वाले समाज की नींव रखी। पूरा असमिया राष्ट्र हमेशा उनका ऋणी रहेगा।”
सोनोवाल ने देश की राजधानी में असम दिवस का खास महत्व बताते हुए कहा: “इसका उद्देश्य भारत के लोगों के सामने असम की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान, विरासत और शानदार इतिहास को दिखाना है।”
सोनोवाल ने इस बात पर जोर दिया कि सुकाफा का नेतृत्व दया, न्याय और एकता पर आधारित था। सोनोवाल ने कहा, “चाओलुंग सुकाफा ने ग्रेटर असम की नींव रखने के लिए पटकाई पहाड़ियों को पार किया। उन्होंने महसूस किया कि एकता, सद्भावना, विश्वास और सहानुभूति के जरिए लोगों का दिल जीते बिना, पूरा विकास और खुशहाली नामुमकिन है। अलग-अलग इलाकों में भाषा, संस्कृति और परंपरा में अलग-अलग होने के बावजूद, उन्होंने सद्भाव की ताकत से एकता बनाई और सभी के लिए समान अवसर और अधिकार सुनिश्चित किए।”
आधुनिक देश के निर्माण में सुकाफा की अहमियत बताते हुए, सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “इतिहास हमें सिखाता है कि जब नेतृत्व मजबूत, ईमानदार और भरोसेमंद होता है, तो देश का तेज विकास जरूरी हो जाता है। सुकाफा के दिखाए रास्ते पर ही माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘सबका साथ, सबका विकास’ की सोच से प्रेरित एक गवर्नेंस (शासन) मॉडल बनाया है। अच्छे शासन और सबको साथ लेकर चलने वाले विकास के जरिए, प्रधानमंत्री ने ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की नींव मजबूत की है।”
सर्बानंद सोनोवाल ने याद किया कि असम के मुख्यमंत्री के तौर पर उनके समय में, राज्य ने पहली बार 2 दिसंबर, 2016 को सुकाफा की याद में चराईदेव में आधिकारिक असम दिवस मनाया था। सोनोवाल ने कहा, “माननीय प्रधानमंत्री के समर्थन से, महान अहोम राजाओं से जुड़े चराईदेव मैदाम को यूनेस्को वैश्विक धरोहर की पहचान मिली है, जो असम के लोगों के लिए गर्व और खुशी की बात है।”
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि दुनिया भर में मिली पहचान आने वाली पीढ़ियों को एकता की ताकत की याद दिलाती रहेगी। उन्होंने कहा, “जैसे सुकाफा ने हर समुदाय और संस्कृति का सम्मान करके एक एकजुट, विकसित और आत्मनिर्भर असम बनाया, वैसे ही हमें भी उसी भावना के साथ मिलकर आगे बढ़ना चाहिए।”
इस समारोह में डिब्रूगढ़ विश्वविद्यालय के वाइस चांसलर जितेन हजारिका; गुवाहाटी विश्वविद्यालय के प्रो. राजीब संदिकोई; और आईसीएचआर दिल्ली के सदस्य सचिव डॉ. ओमजी उपाध्याय ने भी अपने विचार रखे, जिन्होंने असम दिवस के महत्व और राष्ट्र-निर्माण में सुकाफा की भूमिका पर रोशनी डाली।
कार्यक्रम के आखिर में, सोनोवाल ने दिल्ली में पढ़ रहे असम और उत्तर-पूर्व के छात्रों से बातचीत की।
इस कार्यक्रम में केंद्रीय राज्य मंत्री पबित्र मार्गेरिटा और शांतनु ठाकुर, सांसद दिलीप सैकिया, रामेश्वर तेली, रंजीत दत्ता, बीरेंद्र प्रसाद बैश्य, जयंत बसुमतारी, कृपानाथ मल्लाह, बिजुली कलिता मेधी, भुवनेश्वर कलिता, परिमल शुक्लबैद्य, प्रदान बरुआ, और अमर सिंह टिचू के साथ-साथ असम के पूर्व मुख्य सचिव जिष्णु बरुआ, और कई प्रतिष्ठित मेहमान शामिल हुए।
वाराणसी के नमो घाट पर आयोजित ‘काशी तमिल संगमम् 4.0’ में केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की इकाई केंद्रीय संचार ब्यूरो द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी बना आकर्षण का केंद्र, प्रदर्शनी के दूसरे दिन आज हजारों की संख्या में छात्र-छात्राओं एवं आम लोगों द्वारा प्रदर्शनी का किया गया अवलोकन
वाराणसी के नमो घाट पर आयोजित ‘काशी तमिल संगमम् 4.0’ में केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय की इकाई केंद्रीय संचार ब्यूरो द्वारा लगाई गई प्रदर्शनी आकर्षण का केंद्र बना रहा। प्रदर्शनी के दूसरे दिन आज हजारों की संख्या में लोगों द्वारा प्रदर्शनी का अवलोकन किया गया, इसमें छात्र-छात्राये, विभिन्न शिक्षण संस्थानों से आए हुए शिक्षक, तमिलनाडु एवं उत्तर प्रदेश के पत्रकारगण एवं जन सामान्य द्वारा प्रदर्शनी का अवलोकन किया गया।
काशी और तमिलनाडु के बीच सदियों पुराने संबंधों को और प्रगाढ़ बनाने वाले ‘काशी तमिल संगमम्’ के इस चतुर्थ संस्करण में केंद्रीय संचार ब्यूरो द्वारा लगायी गयी चित्र प्रदर्शनी में तमिलनाडु एवं काशी की महान विभूतियों के राष्ट्र निर्माण में योगदान एवं उनकी उपलब्धियां को दर्शाया गया है। चित्र प्रदर्शनी में तमिलनाडु की महान विभूतियों जैसे ऋषि अगस्त्य, तमिल महिला कवि संत अव्वैयार, तमिल कवि संत तिरुवल्लुवर, कवयित्री और संत कारैकल अम्माइयार, भक्ति आंदोलन की कवि एवं संत अंडाल (कोधाई), थिरूनावुक्कारसर, तमिल कवि और समाज सुधारक श्री रामलिंग स्वामी (वल्लालर), तमिल विद्वान यू. वी. स्वामीनाथ अय्यर, अग्रणी समाज सुधारक, चिकित्सक, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, ब्रिटिश भारत में पहली महिला विधायक डॉ. मुथुलक्ष्मी रेड्डी, गणितज्ञ श्री निवास रामानुजन, अविष्कारक और उद्योगपति जी.डी. नायडू, खगोलशास्त्री सुब्रमण्यम चंद्रशेखर, भारत में हरित क्रांति के जनक डा. एम. एस. स्वामीनाथन, भारत के पूर्व राष्ट्रपति मिसाइल मैन डॉ. ए. पी. जे. अब्दुल कलाम, नोवेल पुरस्कार विजेता वेंकटरामन रामकृष्णन, स्वतंत्र भारत के प्रथम गवर्नर जनरल चक्रवर्ती राजगोपालाचारी, भारत के प्रथम उपराष्ट्रपति एवं महान दार्शनिक डॉक्टर सर्वपल्ली राधाकृष्णन, नोबेल पुरस्कार विजेता एवं महान वैज्ञानिक चंदशेखर वेंकट रमन, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी, सुप्रसिद्ध राजनेता एवं भारत रत्न के. कामराज, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं सुप्रसिद्ध राजनेता चिदंबरम सुब्रमण्यम, महान अभिनेता एवं राजनेता एम. जी. रामचंद्रन इत्यादि के जीवन दर्शन को चित्रों एवं शब्दों में दर्शाया गया है।
इसी प्रकार काशी की महान विभूतियां जैसे – संत कबीरदास, संत रविदास, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी एवं शिक्षाविद पंडित मदन मोहन मालवीय, सुप्रसिद्ध शहनाई वादक बिस्मिल्लाह खान, विश्व प्रसिद्ध शास्त्रीय संगीतकार पंडित रविशंकर, महान साहित्यकार जयशंकर प्रसाद इत्यादि के जीवन दर्शन को चित्रों शब्दों के माध्यम से दर्शाया गया है।
चित्र प्रदर्शनी में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में किये जा रहे सरकार के जन कल्याणकारी नीतियों, प्रयासों एवं योजनाओं को भी दर्शाया गया है। जिसमें केंद्र सरकार द्वारा हाल में श्रम सुधार के लिए बनाये गये कानूनो, विभिन्न वस्तुओं एवं सेवाओं पर जीएसटी के दरों को कम करने के लिये किए गये प्रयासों की जानकारी दर्शकों और जनसामान्य के लिए प्रदर्शित की गई है। यह प्रदर्शनी 15 दिसंबर तक निरंतर रहेगी।
नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज अंतरराष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस पर दिव्यांग बहनों और भाइयों के लिए सम्मान, पहुंच और अवसर सुनिश्चित करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहरायी है। श्री मोदी ने कहा कि दिव्यांगों ने अपनी रचनात्मकता और पक्के इरादे की वजह से अलग-अलग क्षेत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई है और हमारे देश की तरक्की को काफी बढ़ाया है। श्री मोदी ने कहा, “पिछले कुछ सालों में, भारत ने कानूनों, आसान इंफ्रास्ट्रक्चर, सबको साथ लेकर चलने वाली शिक्षा नीति और मददगार प्रौद्योगिकी में नवाचार के जरिए दिव्यांग कल्याण की दिशा में जरूरी कदम उठाए हैं। हम आने वाले समय में और भी बहुत कुछ करते रहेंगे।”
प्रधानमंत्री ने X पर पोस्ट किया:
“अंतरराष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस पर, हम अपने दिव्यांग बहनों और भाइयों के लिए हमेशा सम्मान, पहुंच और अवसर सुनिश्चित करने के लिए अपना वादा दोहराते हैं। उन्होंने अपनी रचनात्मकता और पक्के इरादे की वजह से अलग-अलग क्ष्ोत्रों में अपनी अलग पहचान बनाई है। साथ ही, उन्होंने हमारे देश की तरक्की को काफी बढ़ाया है। पिछले कुछ सालों में, भारत ने कानूनों, आसान इंफ्रास्ट्रक्चर, सबको साथ लेकर चलने वाली शिक्षा नीति और मददगार प्रौद्योगिकी में नवाचार के जरिए दिव्यांग कल्याण की दिशा में जरूरी कदम उठाए हैं। हम आने वाले समय में और भी बहुत कुछ करते रहेंगे।”
नई दिल्ली – सरकार ने लोगों को साइबर सुरक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से, सभी स्मार्टफ़ोन में संचार साथी ऐप पहले से इंस्टॉल करना अनिवार्य किया था। यह ऐप सुरक्षित है और इसे पूरी तरह साइबर दुनिया के खतरनाक तत्वों से लोगों को बचाने के लिए विकसित किया गया है।
यह उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा के साथ ही लोगों को साइबर अपराधियों की हरकतों की सूचना देने के जनभागीदारी में भी सहायक है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि ऐप का उपयोगकर्ताओं की सुरक्षा के अलावा कोई अन्य इस्तेमाल नहीं है और लोग जब चाहें तब इसे हटा सकते हैं।
इस ऐप को अब तक 1.4 करोड़ उपयोगकर्ता डाउनलोड कर चुके हैं और यह हर रोज धोखाधड़ी की दो हजार कोशिशों की सूचना देकर उन्हें नाकाम करने में योगदान दे रहा है। इस ऐप के इस्तेमाल करने वालों की संख्या तेज़ी से बढ़ रही है और इसे इंस्टॉल करने का आदेश इस प्रक्रिया में तेज़ी लाने और अल्प जागरूक लोगों तक ऐप को सुगमता से सुलभ बनाने के लिए दिया गया था। पिछले एक दिन में ही, छह लाख लोगों ने संचार साथी ऐप डाउनलोड करने के लिए पंजीकरण कराया है, जो इसके उपयोग में 10 गुना वृद्धि दर्शाता है। यह सरकार द्वारा इस ऐप के माध्यम से लोगों को प्रदान की गई आत्म-सुरक्षा के प्रति विश्वास की पुष्टि करता है।
संचार साथी की बढ़ती स्वीकार्यता को देखते हुए सरकार ने मोबाइल निर्माताओं के लिए इस ऐप का प्री-इंस्टालेशन अनिवार्य न बनाने का निर्णय लिया है।
नई दिल्ली – केंद्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने लोकसभा में बताया कि सोशल मीडिया और फर्जी खबरों से जुड़ा मुद्दा बेहद गंभीर है। उन्होंने कहा कि फर्जी खबरें लोकतंत्र के लिए खतरा हैं और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म, गलत सूचनाओं और एआई-जनित डीपफेक पर सख्त कार्रवाई की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि कुछ लोग या समूह जिस तरह से सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर रहे हैं उससे लगता है कि ये भारत के संविधान या संसद द्वारा बनाए गए कानूनों का पालन नहीं करना चाहते। उन्होंने इस मामले सख्त कार्रवाई और कड़े नियम बनाने की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया।
श्री वैष्णव ने संसद में एक प्रश्न का उत्तर देते हुए बताया कि हाल ही में नए नियम लागू किए गए हैं, जिनमें छत्तीस घंटों के भीतर वीडियो हटाने का प्रावधान भी शामिल है। एआई-जनित डीपफेक की पहचान करने और उन पर आवश्यक कार्रवाई करने के लिए एक मसौदा नियम भी प्रकाशित किया गया है और इस पर विचार-विमर्श चल रहा है। उन्होंने संसदीय समिति के कार्य की सराहना की और कानूनी ढांचे को मजबूत करने के लिए प्रमुख सिफारिशों वाली एक विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने के लिए श्री निशिकांत दुबे और सभी सदस्यों को धन्यवाद दिया।
सूचना और प्रसारण मंत्री ने कहा कि फर्जी खबरें तथा सोशल मीडिया से जुड़े मुद्दों में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता व हमारे लोकतंत्र की सुरक्षा के बीच एक नाज़ुक संतुलन की आवश्यकता है और सरकार इस संतुलन को बनाए रखने के लिए पूरी संवेदनशीलता के साथ काम कर रही है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में, डिजिटल इंडिया पहल ने एक बड़ा बदलाव लाया है और तकनीक का लोकतांत्रिकरण किया है जिसके सकारात्मक प्रभावों को स्वीकार किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सोशल मीडिया ने भी प्रत्येक नागरिक को एक मंच प्रदान किया है। इन सभी पहलुओं को ध्यान में रखते हुए, सरकार संस्थाओं और समाज की नींव रखने वाले विश्वास को मज़बूत करने के लिए काम कर रही
नई दिल्ली – राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (3 दिसंबर, 2025) अंतरराष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस के अवसर पर नई दिल्ली में वर्ष 2025 के लिए राष्ट्रीय दिव्यांगजन सशक्तिकरण पुरस्कार प्रदान किए।
इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि दिव्यांगजन समानता के हकदार हैं। समाज और देश की विकास यात्रा में उनकी समान भागीदारी सुनिश्चित करना सभी हितधारकों का कर्तव्य है, न कि कोई दान-पुण्य। दिव्यांगजनों की समान भागीदारी से ही किसी समाज को वास्तविक अर्थों में विकसित माना जा सकता है। उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय दिव्यांगजन दिवस -2025 का विषय, ‘सामाजिक प्रगति को आगे बढ़ाने के लिए दिव्यांगता-समावेशी समाजों को बढ़ावा’ भी इसी प्रगतिशील विचार पर आधारित है।
राष्ट्रपति को यह जानकर खुशी हुई कि हमारा देश कल्याणकारी मानसिकता से आगे बढ़ते हुए, दिव्यांगजनों के लिए अधिकार-आधारित, सम्मान-केंद्रित व्यवस्था अपना रहा है। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों का समावेश हमारी राष्ट्रीय विकास यात्रा का एक अभिन्न अंग है। 2015 से “दिव्यांगजन” शब्द के प्रयोग का निर्णय दिव्यांगजनों के प्रति विशेष सम्मान प्रदर्शित करने के लिए लिया गया था।
राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार दिव्यांगजनों के समावेशन और सशक्तिकरण के लिए इको-सिस्टम को मजबूत कर रही है। उनके लिए सांकेतिक भाषा अनुसंधान एवं प्रशिक्षण, मानसिक स्वास्थ्य पुनर्वास और खेल प्रशिक्षण जैसे विभिन्न क्षेत्रों में कई राष्ट्रीय स्तर के संस्थान स्थापित किए गए हैं। लाखों दिव्यांगजनों को विशिष्ट विकलांगता पहचान पत्र जारी किए गए हैं, जिससे उन्हें विशेष सुविधाओं का लाभ मिल रहा है।
राष्ट्रपति ने कहा कि दिव्यांगजनों के हितों के लिए सरकार के साथ-साथ समाज को भी जागरूक और सक्रिय रहना चाहिए। इससे सरकार के प्रगतिशील प्रयासों को बल मिलेगा। उन्होंने कहा कि दिव्यांगजनों की गरिमा, स्वावलंबन और आत्म-सम्मान सुनिश्चित करना सभी नागरिकों का दायित्व है। प्रत्येक नागरिक को सामाजिक और राष्ट्रीय प्रगति के अपने प्रयासों में दिव्यांगजनों को भागीदार बनाने का संकल्प लेना चाहिए।
नई दिल्ली – राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (3 दिसंबर, 2025) राष्ट्रपति भवन में भारत के प्रथम राष्ट्रपति डॉ. राजेंद्र प्रसाद को उनकी जयंती पर पुष्पांजलि अर्पित की।
नई दिल्ली – 1987 बैच की भारतीय रेलवे लेखा सेवा (आईआरएएस) अधिकारी सुश्री अपर्णा गर्ग ने 01 दिसम्बर, 2025 को रेलवे बोर्ड में सदस्य (वित्त) के रूप में कार्यभार संभाला। वे भारत सरकार के वरिष्ठतम सिविल सेवकों में से एक हैं, जिनके पास 36 वर्षों से अधिक का अनुभव है।
सुश्री गर्ग ने कई प्रमुख पदों पर कार्य किया है, जिनमें मैसूर में मंडल रेल प्रबंधक, रेल व्हील फैक्ट्री में प्रधान वित्तीय सलाहकार तथा आईआरआईएफएम में महानिदेशक शामिल हैं।
वे शेवनिंग फेलो हैं और उन्होंने यूनिवर्सिटी ऑफ लीड्स, ब्रिटेन से परिवहन अर्थशास्त्र में एडवांस्ड मास्टर डिग्री प्राप्त की है। उन्होंने बोकोनी स्कूल ऑफ मैनेजमेंट, मिलान; आईएनएसईएडी, सिंगापुर; और इंडियन स्कूल ऑफ बिजनेस, हैदराबाद से एग्जीक्यूटिव प्रशिक्षण भी प्राप्त किया है।
केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री; प्रधानमंत्री कार्यालय में अंतरिक्ष राज्य मंत्री, डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज संसद को बताया कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन-इसरो द्वारा हाल में एकीकृत मुख्य पैराशूट एयरड्रॉप का सफल परीक्षण भारत के पहले मानव अंतरिक्ष उड़ान कार्यक्रम, गगनयान, के लिए मिशन-तैयारी योजना को मज़बूती देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। लोकसभा में प्रश्नों के उत्तर में, डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि यह परीक्षण, अंतरिक्ष यान चालक दल के पैराशूट-आधारित मंदन प्रणाली के योग्यता अभियान का महत्वपूर्ण घटक है, जो इस मिशन का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
डॉ. सिंह ने बताया कि नवीनतम एकीकृत मुख्य पैराशूट एयरड्रॉप में सबसे चरम अवतरण स्थितियों में से एक का अनुकरण किया गया और दो मुख्य पैराशूटों के बीच डिसरीफिंग क्रम में जानबूझकर समय का अंतर रखा गया। इसमें असममित बलों के तहत प्रणाली की संरचनात्मक जुड़ाव और भार वहन क्षमता, दोनों की पुष्टि हुई। श्री सिंह ने कहा कि यह सफल परीक्षण मानव-योग्यता निर्धारण प्रक्रिया को महत्वपूर्ण रूप से आगे बढ़ाता है और 2027 की पहली तिमाही तक पहला मानवयुक्त गगनयान मिशन प्रक्षेपित करने के सरकार के लक्ष्य का समर्थन करता है।
संसद में प्रश्नकाल के दौरान तृतीय-पक्ष सत्यापन और तकनीकी निगरानी पर पूछे गए प्रश्नों के उत्तर में डॉ. सिंह ने कहा कि इसरो नियमित रूप से क्रू मॉड्यूल पैराशूट प्रणाली और उससे संबंधित सभी परीक्षण परिणामों की स्वतंत्र और कठोर समीक्षा करता है। इनमें डिज़ाइन समीक्षा दल, स्वतंत्र मूल्यांकन समिति और मानव योग्यता निर्धारण एवं प्रमाणन के लिए देश भर के प्रतिष्ठित विशेषज्ञों वाली राष्ट्रीय सलाहकार समिति शामिल हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि ये संस्थागत मंच सभी मानव-मूल्यांकन तत्वों की गहन जांच करते हैं।
पारदर्शिता से संबंधित मुद्दों पर श्री सिंह ने कहा कि इसरो निरंतर और समय-समय पर प्रमुख परीक्षण परिणामों की जानकारी देता रहता है, जिसमें हाल ही किये गए आई.एम.ए.टी. के परिणाम भी शामिल हैं। वह आगे भी कार्यक्रम की प्रगति के बारे में सूचित करना जारी रखेगा।
यान चालक दल की तैयारियों से संबंधित मुददों पर, डॉ. सिंह ने दोहराया कि गगनयान मिशन के लिए उनकी सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई है। उन्होंने कहा कि सभी प्रणालियों का गहन परीक्षण और विशेषज्ञ समीक्षा की जाती है, और प्रत्येक योग्यता परीक्षण के परिणामों का सावधानीपूर्वक विश्लेषण कर प्रणाली में सुधार किया जाता है। इसके बाद फिर उनका पुनर्मूल्यांकन किया जाता है। उन्होंने कहा कि अंतरिक्ष यात्रियों के प्रशिक्षण में आपातकालीन परिदृश्यों का व्यापक अनुकरण, ऑफ-नॉमिनल लैंडिंग की उत्तरजीविता प्रक्रियाएं, आपातकालीन किट का संचालन और गगनयात्रियों की समग्र तैयारी सुनिश्चित करने के लिए निरंतर मनोवैज्ञानिक परामर्श शामिल है।
श्री सिंह ने सदन को यह भी बताया कि इसरो ने स्थापित वैश्विक मानकों के अनुरूप सुदृढ़ जोखिम-मूल्यांकन और न्यूनीकरण ढांचे को संस्थागत रूप दिया है। मानव मूल्यांकन प्रमाणन बोर्ड और राष्ट्रीय सलाहकार पैनल जैसी संस्थाएं इन प्रक्रियाओं की निगरानी करती हैं ताकि सुनिश्चित हो कि समग्र मिशन के दौरान जोखिम नियंत्रण में रहे।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने दोहराया कि हाल के आईएमएटी सहित प्रत्येक परीक्षण का महत्वपूर्ण प्रणालियों को मान्य बनाने के साथ ही चालक दल के प्रशिक्षण, ग्राउंड रिकवरी तैयारियों और भारत के ऐतिहासिक मानव अंतरिक्ष उड़ान मिशन के सुरक्षित निष्पादन में योगदान है।
आसियान देशों में अपनी विदेशी तैनाती के तहत भारतीय तटरक्षक पोत (आईसीजीएस) विग्रह 2 से 5 दिसंबर, 2025 तक इंडोनेशिया में जकार्ता की यात्रा पर है। इस तीन दिवसीय दौरे के दौरान भारतीय तटरक्षक और इंडोनेशियाई तटरक्षक बल (बाकमला) के कर्मी पेशेवर बातचीत, टेबलटॉप अभ्यास, जहाज-आधारित ड्रिल और संयुक्त प्रशिक्षण सत्रों सहित गतिविधियों के विस्तृत कार्यक्रम में भाग ले रहे हैं।
यह यात्रा क्षेत्रीय समुद्री सुरक्षा, संरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को सुदृढ़ करने में तटरक्षक-से-तटरक्षक सहयोग के बढ़ते महत्व को रेखांकित करती है। साथ ही, यह दोनों बलों के बीच परिचालन तालमेल, आपसी विश्वास एवं सहयोग की निरंतर प्रतिबद्धता को और मजबूत बनाती है।
इन गतिविधियों का केंद्र बिंदु समुद्री कानून प्रवर्तन, समुद्री प्रदूषण रोधी कार्रवाई तथा समुद्री खोज एवं बचाव जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर है, जहां दोनों संगठन अपने विस्तृत विशिष्ट आर्थिक क्षेत्रों और भारी समुद्री यातायात के कारण महत्त्वपूर्ण परिचालन जिम्मेदारियां साझा करते हैं।
संयुक्त अभ्यास अवैध, अप्रतिबंधित एवं अनियमित मछली पकड़ने, समुद्री डकैती, तस्करी, समुद्री दुर्घटनाओं तथा पर्यावरणीय खतरों से संबंधित परिस्थितियों में आपसी आपसी सहभागिता को और सुदृढ़ करेंगे। परिचालन सामंजस्य, संचार प्रक्रियाओं एवं नाविक कौशल के समन्वय को और बेहतर बनाने के लिए दोनों तटरक्षक सेवाओं के बीच एक मार्ग अभ्यास (पासेक्स) भी आयोजित किया जाएगा। यह अभ्यास समुद्री संचालन में समन्वय, प्रतिक्रिया क्षमता और सहयोग को नई मजबूती प्रदान करेगा।
वर्तमान यात्रा में शिष्टाचार भेंट, जहाजों का दौरा, योग एवं खेल स्पर्धाएं और समुद्री प्रशिक्षण प्रतिष्ठानों में कार्यात्मक आदान-प्रदान भी शामिल हैं। ये सभी गतिविधियां दोनों देशों के कर्मियों के बीच सौहार्द को बढ़ावा देने, लोगों के बीच संबंधों को मजबूत करने और प्रभावी परिचालन सहयोग के लिए आवश्यक विश्वास-आधार को सशक्त करने में सहायक होंगी।
भारत और इंडोनेशिया दोनों ही देश प्रमुख समुद्री लोकतंत्र के नाते हिंद-प्रशांत क्षेत्र में नियम आधारित अंतर्राष्ट्रीय व्यवस्था (आरबीआईओ) को बनाए रखने के लिए समान रूप से प्रतिबद्ध हैं। नियमित समुद्री प्रवर्तन, संयुक्त प्रतिक्रिया तंत्र और रणनीतिक समुद्री मार्गों की समन्वित निगरानी के माध्यम से इस सिद्धांत को व्यवहार में लागू करने में तटरक्षक-से-तटरक्षक सहयोग एक निर्णायक भूमिका निभाता है।
भारत–इंडोनेशिया समुद्री साझेदारी का एक महत्वपूर्ण स्तंभ जुलाई 2020 में भारतीय तटरक्षक और इंडोनेशियाई तटरक्षक बल के बीच हस्ताक्षरित समझौता ज्ञापन है। इस ऐतिहासिक दस्तावेज ने दोनों एजेंसियों के बीच परिचालन जुड़ाव के लिए एक सुव्यवस्थित और संस्थागत ढांचा स्थापित किया, जिसके परिणामस्वरूप समुद्री कानून प्रवर्तन, समन्वित गश्त, खोज एवं बचाव, समुद्री प्रदूषण प्रतिक्रिया, सूचना साझाकरण और क्षमता निर्माण जैसे प्रमुख क्षेत्रों में सहयोग को नई मजबूती मिली।
समझौता प्रभावी होने के बाद से दोनों तटरक्षक बलों के बीच सतत संपर्क, पेशेवर संवाद और संयुक्त गतिविधियों को प्रोत्साहन मिला है। इससे सर्वोत्तम कार्य प्रणालियों का आदान-प्रदान, उन्नत प्रशिक्षण अवसरों की उपलब्धता और संयुक्त समुद्री अभियानों के दौरान अंतर-संचालन क्षमता में उल्लेखनीय सुधार सुनिश्चित हुआ है।
पिछले कुछ वर्षों में, भारतीय तटरक्षक और इंडोनेशियाई तटरक्षक बल ने नियमित उच्च-स्तरीय यात्राओं, द्विपक्षीय प्रशिक्षण आदान-प्रदान, समन्वित गश्तों तथा आसियान-नेतृत्व वाली और हिंद-प्रशांत समुद्री गतिविधियों के माध्यम से सहयोग की एक सुदृढ़ परंपरा विकसित की है।
इंडोनेशिया लगातार आईसीजी द्वारा संचालित क्षमता-निर्माण कार्यक्रमों एवं विशिष्ट प्रशिक्षण पाठ्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी करता रहा है, जबकि इंडोनेशियाई बंदरगाहों पर आने वाले आईसीजी जहाजों ने व्यावहारिक प्रशिक्षण, साझा संचालन और क्रॉस-डेक बातचीत को महत्वपूर्ण रूप से प्रोत्साहित किया है।
जकार्ता में आईसीजीएस विग्रह की वर्तमान उपस्थिति न केवल सहयोगी समुद्री सुरक्षा के प्रति भारत की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है, बल्कि यह क्षेत्रीय साझेदारों की समुद्री क्षमताओं और परिचालन तत्परता को सुदृढ़ करने में भारत की सक्रिय भूमिका का भी प्रतीक है।
जकार्ता दौरे के पूर्ण होने के बाद आईसीजीएस विग्रह मलेशिया के पोर्ट क्लैंग के लिए प्रस्थान करेगा और आसियान देशों में अपनी परिचालन तैनाती को आगे बढ़ाएगा। इस तैनाती का उद्देश्य क्षेत्रीय जुड़ाव को सुदृढ़ करना, सहयोगात्मक प्रतिक्रिया तंत्र को बेहतर बनाना और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में समुद्री शांति, स्थिरता एवं सुव्यवस्था को बनाए रखने में सक्रिय योगदान देना है।
उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देशानुसार पूरे राँची जिले में आमजन, विशेषकर जरूरतमंद, बेघर, दिहाड़ी मजदूर, रिक्शा चालक, फुटपाथ पर सोने वाले तथा रात में ड्यूटी करने वाले व्यक्तियों के लिए अलाव की व्यापक व्यवस्था की गई
“जिला प्रशासन की प्राथमिकता है कि ठंड से किसी भी नागरिक को परेशानी न हो। हमने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि अलाव नियमित रूप से जलें और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त अलाव की व्यवस्था तुरंत की जाए।”:- उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री
राँची,03.12.2025 – राज्य सरकार के निर्देश के आलोक में बढ़ती शीत लहर और रात के तापमान में निरंतर गिरावट को ध्यान में रखते हुए उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री के निर्देशानुसार पूरे राँची जिले में आमजन, विशेषकर जरूरतमंद, बेघर, दिहाड़ी मजदूर, रिक्शा चालक, फुटपाथ पर सोने वाले तथा रात में ड्यूटी करने वाले व्यक्तियों के लिए अलाव की व्यापक व्यवस्था की गई है।
जिला प्रशासन द्वारा राँची शहर के प्रमुख चौक-चौराहे में अलाव की व्यवस्था की गई है।
जिले के सभी 18 प्रखंडों के प्रखंड मुख्यालयों, पंचायत भवनों, प्रमुख हाट-बाजारों, प्रमुख चौक-चौराहों तथा जरूरतमंद आबादी वाले स्थानों पर अलाव की व्यवस्था की गई है। प्रत्येक प्रखंड में कई जगहों में अलाव जलाए जा रहे हैं।
उपायुक्त ने इस संबंध में जिले के सभी अंचल अधिकारियों, प्रखंड विकास पदाधिकारियों को पूर्व में ही स्पष्ट निर्देश जारी कर दिए थे कि अलाव की व्यवस्था प्रारंभ कर दी जाए तथा लकड़ी, केरोसिन आदि की कोई कमी न हो।
उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने कहा कि “जिला प्रशासन की प्राथमिकता है कि ठंड से किसी भी नागरिक को परेशानी न हो। हमने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया है कि अलाव नियमित रूप से जलें और जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त अलाव की व्यवस्था तुरंत की जाए।”
तूतीकोरिन में 10.42 करोड़ रुपये मूल्य की 45,984 ई-सिगरेट जब्त की, 3 गिरफ्तार
तूतीकोरिन बंदरगाह – राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने तूतीकोरिन बंदरगाह पर 10.41 करोड़ रुपये की प्रतिबंधित इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट से जुड़े एक बड़े तस्करी रैकेट का सफलतापूर्वक भंडाफोड़ किया है। इस मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया गया है।
डीआरआई अधिकारियों को विशिष्ट खुफिया जानकारी मिली थी कि ई-सिगरेट की तस्करी में शामिल एक गिरोह ने छतरी के साथ तूतीकोरिन बंदरगाह के माध्यम से चीन से ई-सिगरेट वाले एक कंटेनर को भारत में आयात करने की योजना बनाई है। उक्त जानकारी के आधार पर डीआरआई के अधिकारियों ने 27 नवंबर, 2025 को तूतीकोरिन में उक्त कंटेनर को रोका और उसकी जांच की।
उक्त कंटेनर की जांच के दौरान, कुछ डिब्बों में छतरियों का घोषित कार्गो पाया गया, जबकि एक बड़े हिस्से में छुपा कर रखी गई ई-सिगरेट पाई गई। सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के प्रावधानों के तहत 27 नवंबर, 2025 को 4.30 लाख रुपये मूल्य के 4,300 छतरियों के साथ छुपाई गई मिश्रित स्वादों की कुल 45,984 ई-सिगरेट मिलीं, जिनकी कुल कीमत 10.41 करोड़ रुपये है।
तेजी से कार्रवाई करते हुए, अधिकारियों ने खेप को ले जाने में शामिल चेन्नई के तीन व्यक्तियों को पकड़ लिया और सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार कर लिया।
ई-सिगरेट का आयात इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट निषेध अधिनियम, 2019 (पीईसीए अधिनियम) के साथ पठित डीजीएफटी अधिसूचना सं. 20/2015-2020 दिनांक 26 सितंबर, 2019 के तहत और सीमा शुल्क अधिनियम, 1962 के प्रावधानों के तहत प्रतिबंधित है।
डीआरआई देश भर में निरंतर सतर्कता और प्रवर्तन की कार्रवाइयों के माध्यम से ई-सिगरेट जैसे प्रतिबंधित और हानिकारक सामानों की तस्करी पर अंकुश लगाकर देश के आर्थिक हितों और सार्वजनिक स्वास्थ्य की रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है।
उपायुक्त–सह–जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री एवं वरीय पुलिस अधीक्षक, रांची श्री राकेश रंजन ने राजेंद्र चौक स्थित प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर दी श्रद्धांजलि
रांची, 03.12.2025 – भारत के प्रथम राष्ट्रपति स्वर्गीय डॉ. राजेंद्र प्रसाद की जयंती के अवसर पर उपायुक्त–सह–जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री एवं वरीय पुलिस अधीक्षक, रांची श्री राकेश रंजन ने राजेंद्र चौक स्थित प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की।
इस अवसर पर उपायुक्त–सह–जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री ने कहा कि डॉ. राजेंद्र प्रसाद भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन के अग्रणी योद्धा, संविधान निर्माण के प्रमुख स्तंभ तथा नैतिक मूल्यों के प्रतीक थे।
उनकी सादगी, कर्तव्यनिष्ठा और आदर्श जीवन से प्रेरणा लेकर हम सभी को राष्ट्रहित में अपने दायित्वों का निर्वहन करना चाहिए।
वरीय पुलिस अधीक्षक ने भी उनके कार्यों एवं योगदान को स्मरण किया।
वडोदरा, गुजरात – रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि ऑपरेशन सिंदूर इस बात का सबूत है कि भारत उन लोगों को करारा जवाब देता है जो शांति और सद्भाव की भाषा नहीं समझते। उन्होंने आतंकवाद के खिलाफ भारत की कार्रवाई की तुलना सरदार वल्लभभाई पटेल की सुदृढ़ इच्छाशक्ति और नेतृत्व से की। उन्होंने कहा कि पटेल ने हमेशा संवाद के ज़रिए समस्याओं को सुलझाने की कोशिश की, लेकिन ज़रूरत पड़ने पर कभी भी साहसी रास्ता चुनने में हिचकिचाए नहीं, जैसा कि हैदराबाद को भारत में विलय के मामले में हुआ था। रक्षा मंत्री 2 दिसंबर, 2025 को गुजरात के वडोदरा में सरदार सभा को संबोधित कर रहे थे। यह सरदार वल्लभभाई पटेल की 150वीं जयंती के उपलक्ष्य में युवा कार्यक्रम और खेल मंत्रालय के तहत मेरा युवा (एमवाई) भारत द्वारा आयोजित ‘एकता मार्च’ का हिस्सा था।
ऑपरेशन सिंदूर को सफलतापूर्वक अंजाम देने के लिए सशस्त्र बलों के साहस और समर्पण की सराहना करते हुए रक्षा मंत्री ने कहा कि आज (वर्तमान समय में) विश्व भारतीय सैनिकों की वीरता और क्षमता को स्वीकार कर रहा है। उन्होंने आगे कहा कि इस अभियान ने स्पष्ट संकेत दिया है कि ‘‘हम शांतिप्रिय राष्ट्र हैं, जो किसी देश को उकसाते नहीं, लेकिन यदि कोई उकसाये तो उसे बख्शते भी नहीं।”
श्री राजनाथ सिंह ने सरदार पटेल को देश को एक करने में अहम योगदान देने वाला बताया और कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ का उनका सपना और मज़बूत हुआ है। अनुच्छेद 370 के निर्सन का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि इस निर्णय ने जम्मू-कश्मीर को देश की मुख्यधारा में पूरी तरह से जोड़ दिया।
रक्षा मंत्री ने रेखांकित किया कि सरकार सरदार पटेल द्वारा दिखाए गए रास्ते पर चल रही है, जिसके परिणामस्वरूप एक समय संदेहों से घिरा भारत आज अपनी शर्तों पर विश्व से संवाद कर रहा है। उन्होंने कहा कि आज पूर्व की तुलना में अब अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की बात ध्यानपूर्वक सुनी जाती है। उन्होंने आगे कहा, “भारत एक बड़ी आर्थिक और सामरिक शक्ति बनने की दिशा में अग्रसर है। यह सरदार पटेल अमूल्य योगदान का परिणाम है।”
सरकार के राष्ट्रीय हितों की रक्षा के संकल्प से बताते हुए रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि 2014 से पहले भारत विश्व की 11वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था थी और आज यह चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है तथा शीघ्र ही शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में शामिल हो जाएगी। उन्होंने कहा कि सरकार ‘न्यूनतम सरकार, अधिकतम शासन’ के लक्ष्य के साथ काम कर रही है, जबकि राजनीतिक और भौगोलिक एकता के ज़रिए यह एक स्वतंत्र राष्ट्र की सरदार पटेल की विरासत को आगे बढ़ा रही है। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार भारत को सांस्कृतिक, सामाजिक, आध्यात्मिक और आर्थिक एकता के सूत्र में पिरो रही है। हम ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ के विज़न के साथ आगे बढ़ रहे हैं। हमारा लक्ष्य 2047 तक एक विकसित भारत का निर्माण करना है।”
रक्षा मंत्री ने कहा कि सरकार सरदार पटेल के राष्ट्रीय सुरक्षा विज़न को आगे बढ़ा रही है, जिन्होंने रक्षा आधुनिकीकरण और रक्षा हथियारों व गोला-बारूद के स्वदेशी उत्पादन पर ज़ोर दिया था। उन्होंने कहा, “आज, ‘मेक-इन-इंडिया’ पहल के कारण हम रक्षा उत्पादन में आत्मनिर्भर बन रहे हैं, जबकि मित्र देशों को सैन्य उपकरण निर्यात कर रहे हैं। पिछले 11 वर्षों में हमारा रक्षा निर्यात लगभग 34 गुना बढ़ गया है। हमारा लक्ष्य 2029 तक 3 लाख करोड़ रुपये का रक्षा उत्पादन और 50,000 करोड़ रुपये का रक्षा निर्यात हासिल करना है।”
श्री राजनाथ सिंह ने आगे कहा कि सरदार पटेल का पूरा जीवन पवित्रता और ईमानदारी का प्रतीक था और इन उच्च आदर्शों से प्रेरित होकर सरकार का लक्ष्य संसद में संविधान (130वां संशोधन) विधेयक 2025 को पारित कराना है, जो उच्चतम पदों पर आसीन लोगों से भ्रष्टाचार के खिलाफ नैतिक व्यवहार करने की मांग करता है। उन्होंने कहा, “इसका मतलब है कि यदि पद पर आसीन किसी व्यक्ति को किसी गंभीर आरोप के तहत गिरफ्तार किया जाता है और 30 दिनों के भीतर ज़मानत नहीं मिलती है, तो वे अपने आप अपने पद से मुक्त हो जाएंगे।”
रक्षा मंत्री ने युवाओं से एक विकसित भारत के सपने को साकार करने के लिए प्रयास करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र की एकता, अखंडता और संप्रभुता बनाए रखना एक ज़िम्मेदारी है, जिसे सरदार पटेल ने देश की भावी पीढ़ियों के लिए छोड़ा था। उन्होंने कहा, “देश और समाज को एकजुट रखना हमारा दायित्व है। हमें संकल्प लेना होगा कि हम न केवल सरदार पटेल के मूल्यों को पूर्व निष्ठा से आत्मसात करेंगे, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी इसके लिए तैयार करेंगे। यही सरदार पटेल की विरासत को एक सच्ची श्रद्धांजलि होगी।”
इस अवसर पर पंजाब के राज्यपाल श्री गुलाब चंद कटारिया, उत्तराखंड के मुख्यमंत्री श्री पुष्कर सिंह धामी, श्रम एवं रोजगार तथा युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया, केंद्रीय सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम तथा श्रम एवं रोजगार राज्य मंत्री श्रीमती शोभा करंदलाजे और राज्य सरकार के अन्य अधिकारी उपस्थित थे।
नई दिल्ली – भारतीय रेलवे कन्याकुमारी, चेन्नई, कोयंबटूर और वाराणसी के बीच सात विशेष रेलगाडियों का संचालन कर रहा है ताकि चौथे काशी तमिल संगमम में बड़े पैमाने पर भागीदारी सुनिश्चित की जा सके और तमिल भाषी क्षेत्र व काशी के प्राचीन आध्यात्मिक केंद्र के बीच सांस्कृतिक संबंधों को और सुदृढ़ किया जा सके। इन विशेष ट्रेनों को इस बहु-दिवसीय सांस्कृतिक कार्यक्रम में आने वाले लोगों के लिए निर्बाध यात्रा, आरामदायक लंबी दूरी की कनेक्टिविटी और समय पर आगमन सुनिश्चित करने के लिए निर्धारित किया गया है।
29 नवंबर 2025 को कन्याकुमारी से पहली ट्रेन के रवाना होने के साथ इन सेवाओं की शुरुआत हुई थी। इसके बाद आज चेन्नई से एक अतिरिक्त विशेष ट्रेन रवाना हुई। अगली प्रस्थान 3 दिसंबर को कोयंबटूर से, 6 दिसंबर को चेन्नई से, 7 दिसंबर को कन्याकुमारी से, 9 दिसंबर को कोयंबटूर से और 12 दिसंबर 2025 को चेन्नई से एक और सेवा निर्धारित है। इन नियोजित प्रस्थानों के साथ, तमिलनाडु के प्रमुख शहरों से बनारस के लिए कुल सात विशेष ट्रेनें एक सुव्यवस्थित और चरणबद्ध तरीके से चलेंगी।
समय पर वापसी की यात्रा सुनिश्चित करने के लिए, भारतीय रेलवे ने बनारस से कई विशेष रेलगाडियों की व्यवस्था की है। इनमें 5 दिसंबर को कन्याकुमारी, 7 दिसंबर को चेन्नई और 9 दिसंबर को कोयंबटूर के लिए ट्रेन शामिल हैं। इसके अलावा 11 दिसंबर को चेन्नई, 13 दिसंबर को कन्याकुमारी, 15 दिसंबर को कोयंबटूर और 17 दिसंबर 2025 को चेन्नई के लिए भी अतिरिक्त रेलगाडि़यां चलेंगी।
आज से शुरू हो रहा काशी तमिल संगमम का चौथा संस्करण तमिलनाडु और काशी के बीच लंबे समय से चले आ रहे सांस्कृतिक संबंध को निरंतरता देता है। यह संस्करण “आइए तमिल सीखें-तमिल करकलम” विषय पर केंद्रित है, जो वाराणसी के स्कूलों में तमिल शिक्षण पहल, काशी क्षेत्र के छात्रों के लिए तमिलनाडु के अध्ययन दौरों और तेनकाशी से काशी तक प्रतीकात्मक ऋषि अगस्त्य वाहन अभियान के माध्यम से दोनों क्षेत्रों के बीच भाषाई और सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देता है।
काशी तमिल संगमम 4.0, एक भारत श्रेष्ठ भारत के सार को दर्शाता है जो लोगों को अपनी संस्कृति के अलावा अन्य समृद्ध संस्कृतियों को समझने और उसकी सराहना करने के लिए प्रोत्साहित करता है। यह पहल शिक्षा मंत्रालय द्वारा संचालित है जिसमें आईआईटी मद्रास और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय प्रमुख ज्ञान भागीदार के रूप में शामलि हैं। रेलवे सहित दस मंत्रालयों की भागीदारी से, यह कार्यक्रम दोनों क्षेत्रों के छात्रों, कारीगरों, विद्वानों, आध्यात्मिक गुरुओं, शिक्षकों और सांस्कृतिक कार्यकर्ताओं को एक साथ जोड़ता है, जिससे उनके बीच विचारों, सांस्कृतिक विधियों और पारंपरिक ज्ञान का आदान-प्रदान सुगम होता है।
इन सात विशेष रेलगाड़ियों के माध्यम से सांस्कृतिक रूप से समृद्ध इस यात्रा कार्यक्रम का समन्वय कर, भारतीय रेलवे देश के विविध क्षेत्रों को जोड़ने तथा तमिलनाडु व काशी के बीच
नई दिल्ली – जागरूकता अभियान, स्थानीय भाषाओं तक पहुंच, क्षमता निर्माण पहल और डिजिटल ऑनबोर्डिंग चैनल देश भर में अटल पेंशन योजना को सशक्त करने में अपना योगदान दे रहे हैं
अटल पेंशन योजना (एपीवाई) 09.05.2015 को शुरू की गई थी, जिसका उद्देश्य सभी भारतीयों, विशेषकर गरीबों, वंचितों और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों के लिए एक सार्वभौमिक सामाजिक सुरक्षा प्रणाली बनाना है। यह योजना 18-40 वर्ष की आयु के सभी भारतीय नागरिकों के लिए उपलब्ध है, जिनका बैंक या डाकघर में बचत खाता हो। इस योजना के अनुसार, ग्राहक को 60 वर्ष की आयु प्राप्त करने पर पेंशन लाभ मिलेगा। इसलिए, एपीवाई के अंतर्गत पेंशन लाभ 2035 से शुरू होने की उम्मीद है। हालांकि, 31.10.2025 तक अटल पेंशन योजना के तहत कुल नामांकन 8,34,13,738 है।
सरकार और पेंशन निधि नियामक एवं विकास प्राधिकरण (पीएफआरडीए) ने ग्रामीण और दूरदराज के क्षेत्रों सहित पूरे देश में एपीवाई के बारे में जागरूकता और कवरेज बढ़ाने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए हैं:
जागरूकता पैदा करने के लिए प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और सोशल मीडिया में समय-समय पर विज्ञापन प्रकाशित किए जाते हैं।
एपीवाई सब्सक्राइबर सूचना ब्रोशर 13 स्थानीय भाषाओं में।
पात्र लाभार्थियों के बीच एपीवाई का प्रचार-प्रसार करने के लिए बैंकिंग कॉरेस्पोंडेंट (बीसी) और बैंकों के क्षेत्रीय कर्मचारियों, स्वयं सहायता समूह (एसएचजी) के सदस्यों, राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (एसआरएलएम) की बैंक-सखियों के लिए वर्चुअल क्षमता निर्माण कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
भारत सरकार के विभिन्न मंत्रालय, राष्ट्रीय वित्तीय शिक्षा केंद्र (एनसीएफई), राष्ट्रीय कृषि और ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड), राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) और एसआरएलएम, एपीवाई के बारे में जागरूकता फैलाने और इसके कवरेज के लिए कार्यरत हैं।
आसान ऑनलाइन ऑनबोर्डिंग के लिए ई-एपीवाई, नेट-बैंकिंग, मोबाइल ऐप और बैंक के वेब-पोर्टल जैसे ऑनलाइन चैनलों को सक्रिय किया जा रहा है।
भारतीय स्तर पर बैंकों और एसएलबीसी/ एलडीएम के सहयोग से एपीवाई आउटरीच कार्यक्रम नियमित आधार पर आयोजित किए जाते हैं।
हाल ही में, पेंशन के लिए पूरे भारत में वित्तीय समावेशन अभियान चलाए गए।
31 अक्टूबर 2025 तक, एपीवाई के अंतर्गत महिलाओं का नामांकन 4,04,41,135 है, जो कुल नामांकन का 48% है। एपीवाई का डाक विभाग (डीओपी) और पब्लिक सेक्टर बैंकों, प्राइवेट बैंकों, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंकों, लघु वित्त बैंकों, भुगतान बैंकों, सहकारी बैंकों सहित बैंकिंग संस्थानों के जरिए किया जा रहा है। ये संस्थान पीएफआरडीए के साथ प्वॉइंट्स ऑफ प्रेजेंस – एपीवाई (पीओपी-एपीवाई) के रूप में पंजीकृत हैं और एपीवाई के वितरण और एपीवाई ग्राहकों की सेवा के लिए जिम्मेदार हैं।
यह जानकारी केंद्रीय वित्त मंत्री श्रीमती निर्मला सीतारमण ने आज लोकसभा में एक प्रश्न के उत्तर में दी।
नई दिल्ली – भारतीय रेलवे ने तीन प्रतिष्ठित महिला क्रिकेटरों प्रतीका रावल, स्नेह राणा और रेणुका सिंह ठाकुर को भारत के 2025 आईसीसी महिला विश्व कप अभियान में उनके असाधारण प्रदर्शन को देखते देते हुए आउट-ऑफ-टर्न प्रमोशन के माध्यम से विशेष कार्य अधिकारी (खेल) के ग्रुप ‘बी’ अधिकारी-ग्रेड पद पर पदोन्नत किया है।
ये तीनों खिलाड़ी सातवें वेतन आयोग के अनुसार वेतन मैट्रिक्स के लेवल-8 के अंतर्गत ग्रुप ‘बी’ राजपत्रित अधिकारी के वेतन और लाभ की हकदार होंगी। रेलवे खेल संवर्धन बोर्ड (आरएसपीबी) की यह पहल न केवल तीनों महिला क्रिकेटरों को वित्तीय सुरक्षा प्रदान करेगी, बल्कि उन्हें प्रशासनिक जिम्मेदारियां भी सौंपेगी।
इससे पहले नवंबर में केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण और तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने रेल भवन में तीनों खिलाड़ियों को सम्मानित किया था।
उत्तर रेलवे में वरिष्ठ लिपिक के पद पर कार्यरत प्रतीका रावल को अब ओएसडी (खेल) के ग्रुप ‘बी’ राजपत्रित पद पर पदोन्नत किया गया है। दिल्ली की सलामी बल्लेबाज प्रतीका रावल ने विश्व कप में भारत की जीत में महत्वपूर्ण योगदान दिया था।
उत्तर रेलवे में कनिष्ठ लिपिक के पद पर कार्यरत रेणुका सिंह ठाकुर को अब ओएसडी (खेल) के ग्रुप ‘बी’ राजपत्रित पद पर पदोन्नत किया गया है। दाएं हाथ की मध्यम तेज गेंदबाज रेणुका सिंह ठाकुर ने महत्वपूर्ण मैचों में निर्णायक गेंदबाजी करके लगातार विजयी प्रदर्शन किया है।
उत्तर रेलवे में कमर्शियल कम टिकट क्लर्क (सीसीटीसी) के पद पर कार्यरत स्नेह राणा को अब ओएसडी (खेल) के ग्रुप ‘बी’ राजपत्रित पद पर पदोन्नत किया गया है। उत्तराखंड की इस ऑलराउंडर खिलाड़ी ने बल्लेबाजी और गेंदबाजी दोनों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।
भारतीय रेलवे की खेल प्रतिभाओं को सहयोग और प्रोत्साहन देने की एक लंबी परंपरा रही है। रेलवे के कई एथलीटों ने लगातार वैश्विक स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व किया है।