नालंदा में बोले राहुल गांधी, सीएम नीतीश का रिमोट कंट्रोल पीएम मोदी के पास है

बिहारशरीफ 30 अक्टूबर (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। बिहार विधानसभा चुनाव प्रचार में गुरुवार को लगातार दूसरे दिन लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी उतरे। यहां उन्होंने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के गृह जिले नालंदा में एक चुनावी सभा को संबोधित करते हुए एनडीए सरकार पर जमकर निशाना साधा।

उन्होंने कहा कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का रिमोट कंट्रोल पीएम नरेंद्र मोदी के पास है। कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने कहा कि आज बिहार की सरकार पीएम मोदी, गृहमंत्री अमित शाह और नागपुर से चल रही है।

उन्होंने बिहार के लोगों को मेहनती बताते हुए कहा कि यहां के लोग सभी प्रदेशों में दिखाई देते हैं। बिहार के लोगों ने दुबई, बेंगलुरु, मुंबई जैसे कई शहरों में इंफ्रास्ट्रक्चर को अपने खून-पसीने से बनाया है।

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल है कि आखिर बिहार में क्या कमी है कि बिहार के लोगों की यही ऊर्जा और क्षमता बिहार को बनाने में नहीं लग पा रही है? उन्होंने बिहार में पेपर लीक को लेकर सरकार को घेरते हुए कहा कि यहां के युवा सपना देखते हैं और उन सपनों को पूरा करने के लिए प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी भी करते हैं, लेकिन परीक्षा के पहले ही पेपर लीक हो जाता है। कुछ खास लोगों को परीक्षा के पहले पेपर मिल जाते हैं।

उन्होंने नीतीश कुमार के विकास के दावे पर कटाक्ष करते हुए कहा कि नीतीश कुमार कहते हैं कि उन्होंने बिहार को बदल दिया है, लेकिन सच्चाई ये है कि बिहार में लोगों को शिक्षा, स्वास्थ्य जैसी सुविधाएं नहीं मिल रही हैं।

दिल्ली के एम्स में बिहार के लोगों की लंबी लाइन लगी रहती है, जो यहां के अलग-अलग जिलों से वहां इलाज करवाने जाते हैं। उन लोगों का कहना होता है कि कोई बिहार के अस्पताल में इलाज करवाने जाता है, तो वह वापस नहीं आता है। यह बिहार का असली चेहरा है।

उन्होंने दिल्ली में यमुना के प्रदूषित होने की चर्चा करते हुए कहा कि एक तरफ मां यमुना बह रही हैं, जिनका पानी गंदा और प्रदूषित है, और दूसरी तरफ पीएम नरेंद्र मोदी के लिए तालाब में साफ पानी भरा गया, यानी दो हिंदुस्तान बन रहे हैं।

कांग्रेस के नेता राहुल गांधी ने गारंटी देते हुए कहा कि जिस दिन महागठबंधन की सरकार बनेगी, उस दिन विश्व की सबसे बड़ी यूनिवर्सिटी यहां नालंदा में बनेगी। नालंदा पहले भी विश्वभर में शिक्षा का केंद्र था और एक बार फिर नालंदा शिक्षा और रोजगार का केंद्र बनेगा।

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राबड़ी देवी का NDA पर तंज, कहा- 20 साल में विकास हुआ तो रैलियों की क्या जरूरत है?

पटना 30 Oct, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की बिहार में हो रही चुनावी सभाओं पर कटाक्ष किया।

उन्होंने कहा कि अगर 20 साल में एनडीए सरकार में विकास हुआ है, तो बिहार में घूमने की क्या जरूरत है? नुक्कड़ सभाएं क्यों हो रही हैं? क्या यह सब शोभा देता है?

पटना में मीडिया से बातचीत में पूर्व सीएम ने कहा कि एनडीए ने 20 साल के शासन में बिहार की जनता को ठगने का काम किया है। अब जनता खुद को ठगा महसूस कर रही है और बदलाव के लिए इस बार वोट करेगी।

उन्होंने आगे कहा कि हम जनता के बीच जा रहे हैं। कोई भी एनडीए शासन और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार से खुश नहीं है। जनता मालिक है और विश्वास है कि इस बार बदलाव होगा।

राबड़ी देवी ने दावा किया कि एनडीए ने पूरी ताकत इसलिए लगा दी है क्योंकि उन्हें पता चल गया है कि इस बार उनकी सरकार जाना तय है। इसी वजह से बार-बार अमित शाह और पीएम मोदी को चुनावी सभाएं करनी पड़ रही हैं।

बिहार में अगली सरकार किसकी बनेगी, इस सवाल पर उन्होंने कहा कि हम जनता के बीच जा रहे हैं और उनकी आवाज सुन रहे हैं। सबकुछ जनता के हाथ में है। उम्मीद है कि 14 नवंबर को परिणाम अच्छा आएगा।

एक सोशल मीडिया पोस्ट में पूर्व सीएम ने लिखा कि तेजस्वी सरकार बनने पर जीविका सीएम दीदियों को पक्की नौकरी, 𝟑𝟎 हजार रुपए की तनख्वाह, 𝟓 लाख रुपए का बीमा, सरकारी कामों के लिए 𝟐 हजार रुपए का भत्ता और पहले के लोन का ब्याज माफ किया जाएगा, साथ ही जीविका दीदियों को अगले 𝟐 वर्ष तक ब्याज मुक्त लोन भी मिलेगा।

गौरतलब है कि बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनजर पीएम मोदी गुरुवार को मुजफ्फरपुर और छपरा में चुनावी सभाओं को संबोधित करेंगे। इन सभाओं को लेकर लोगों में खासा उत्साह देखा जा रहा है।

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कट्टा, क्रूरता, कटुता, कुशासन और करप्शन, मुजफ्फरपुर में बोले पीएम मोदी- राजद और कांग्रेस वालों की पहचान 5 चीजों से

मुजफ्फरपुर  30 Oct, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी) । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को बिहार के मुजफ्फरपुर में रैली को संबोधित करते हुए राजद और कांग्रेस पर बड़ा हमला बोला। उन्होंने कहा कि राजद-कांग्रेस वालों की पहचान 5 चीजों से है, जो कट्टा, क्रूरता, कटुता, कुशासन और करप्शन हैं।

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “बिहार का गौरव बढ़ाना, यहां की मीठी बोली, बिहार की संस्कृति को दुनिया के कोने-कोने में ले जाना, बिहार का विकास करना एनडीए-भाजपा की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। जब भारत समृद्ध था, तब उसमें बिहार की बहुत बड़ी भूमिका थी। आज विकसित भारत बनाने के लिए भी बिहार का विकसित होना बहुत जरूरी है।”

विपक्षी पार्टियों पर हमला बोलते हुए पीएम मोदी ने कहा, “राजद-कांग्रेस कभी भी बिहार को विकसित नहीं बना सकते हैं। इन पार्टियों ने बरसों तक बिहार पर एकछत्र राज किया, लेकिन आपको सिर्फ विश्वासघात दिया। 5 शब्दों में राजद-कांग्रेस के कारनामों की कथा कहना चाहता हूं। ये पांच शब्द हैं, ‘कट्टा, क्रूरता, कटुता, कुशासन और करप्शन’। यह जंगलराज की पहचान है। यह राजद और उनके साथियों की पहचान बन चुकी है।”

उन्होंने कहा, “जहां कट्टा और क्रूरता का राज हो, वहां कानून दम तोड़ता है। जहां कटुता बढ़ाने वाली राजद-कांग्रेस हो, वहां समाज में सद्भाव मुश्किल होता है। जहां राजद-कांग्रेस का कुशासन हो, वहां विकास का नामोनिशान नहीं होता है। जहां करप्शन होता है, वहां सामाजिक न्याय नहीं मिलता है। सिर्फ कुछ परिवार ही फलते-फूलते हैं।

राजद-कांग्रेस पर हमला जारी रखते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “ऐसे लोग कभी भी बिहार का भला नहीं कर सकते हैं।”

उन्होंने विपक्षी पार्टियों पर छठ मईया के अपमान का भी आरोप लगाया। पीएम मोदी ने कहा, “ये कांग्रेस और राजद के लोग छठी मईया का अपमान कर रहे हैं। जो महिलाएं निर्जला इतना लंबा व्रत रखती हैं, जो गंगा जी में खड़ी होकर सूर्यदेव को अर्घ्य देती हैं। वो राजद-कांग्रेस की नजर में ड्रामा करती हैं।”

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “क्या बिहार की माताएं-बहनें छठी मईया का ये अपमान बर्दाश्त करेंगी? मैं जानता हूं कि छठी मईया के इस अपमान को बिहार का कोई भी व्यक्ति भूल नहीं सकता।”

उन्होंने यह भी कहा कि बिहार स्वाभिमान की धरती है। जिन लोगों ने छठ पूजा को गोली देने का काम किया है, बिहार ऐसे लोगों को कभी माफ नहीं करेगा।

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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत बन रहा बड़ी आर्थिक शक्ति – मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी

चंडीगढ 30 Oct, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी) हरियाणा के मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि जिस गति से आज भारत प्रगति के मार्ग पर अग्रसर है, उसके पीछे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी का दूरदर्शी नेतृत्व और केंद्र सरकार की क्रांतिकारी आर्थिक नीतियाँ प्रमुख भूमिका निभा रही हैं। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में देश ने “एक राष्ट्र, एक टैक्स” की अवधारणा को साकार करते हुए जी.एस.टी. लागू किया, जिससे पूरा भारत एक एकीकृत बाजार में परिवर्तित हो गया है। जी.एस.टी. सुधारों से न केवल अर्थव्यवस्था को नई गति मिली है, बल्कि राज्यों के बीच व्यापार आसान हुआ है और व्यापारियों को अनावश्यक करों के जाल से मुक्ति मिली है। हाल ही में किए गए जी.एस.टी. सुधार इस बात का प्रमाण हैं कि प्रधानमंत्री मोदी की “गारंटी” सदैव पूरी होती है। ये सुधार आत्मनिर्भर भारत के निर्माण में मील का पत्थर साबित होंगे।

मुख्यमंत्री बुधवार को बिहार के पटना में बिहार चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री द्वारा आयोजित कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि प्रधानमंत्री द्वारा दिए गए “स्वदेशी” और “मेक इन इंडिया फॉर द वर्ल्ड” के आह्वान ने देश में विनिर्माण क्षेत्र को नई दिशा दी है। हाल ही में जापान यात्रा के दौरान प्रधानमंत्री द्वारा प्रस्तुत यह विजन आत्मनिर्भर भारत की परिकल्पना को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।

उन्होंने कहा कि डिजिटल इंडिया अभियान के अंतर्गत यूपीआई से लेकर डीबीटी तक डिजिटल लेन-देन की क्रांति ने पारदर्शिता को बढ़ावा दिया है और भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया है। आज भारत का डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पूरी दुनिया के लिए एक उदाहरण बन चुका है।

प्रधानमंत्री के नेतृत्व में भारत ने विनिर्माण और उत्पादन पर बल देकर आयात पर निर्भरता घटाई है तथा वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला का एक मजबूत केंद्र बनकर उभरा है।

केंद्र सरकार की दूरदर्शी नीतियों और सुधारों के परिणामस्वरूप आज भारत न केवल आत्मनिर्भरता की दिशा में अग्रसर है, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में एक सशक्त साझेदार के रूप में अपनी पहचान स्थापित कर चुका है।

उन्होंने कहा कि पिछले 11 वर्षों में, सड़क, रेल, हवाई अड्डों और बंदरगाहों के निर्माण में अभूतपूर्व निवेश हुआ है। ये सुविधाएं बेहतरीन कनेक्टिविटी, उद्योगपतियों के लिए व्यापार और लॉजिस्टिक्स की लागत को कम कर रही है।

ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए अनावश्यक कानूनों को खत्म करना, प्रक्रियाओं को सरल बनाना, और लाइसेंस राज से मुक्ति दिलाने के लिए लगातार प्रयास किए गए हैं। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने हमें ‘विकसित भारत-2047’ का लक्ष्य दिया है।

इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए, हमें अपने राज्यों को विकसित करना होगा। हरियाणा और बिहार को मिलकर देश की प्रगति की गति को तेज करना होगा।

उन्होंने कहा कि आज यहां आकर उन्हें बिहार की मिट्टी की महक और हरियाणा की उद्यमशीलता की भावना का एक अद्भुत संगम देखने को मिल रहा है। यह संगम, वास्तव में, हमारे देश की प्रगति और ‘विकसित भारत’ के संकल्प का प्रतीक है।

उन्होंने कहा कि बिहार और हरियाणा का रिश्ता केवल राज्यों की भौगोलिक सीमा तक सीमित नहीं है। यह रिश्ता प्रेम, श्रम और विश्वास का है।

श्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि आज बिहार में डबल इंजन की सरकार के कारण यह पूरे देश में यह प्रदेश दूसरे सबसे तेजी से बढ़ने वाले राज्य के रूप में जाना जा रहा है। आज बिहार की जीडीपी वृद्धि दर 14 प्रतिशत से भी अधिक है। अब बिहार की जीडीपी में औद्योगिक क्षेत्र का हिस्सा 23 प्रतिशत है, जो कृषि के हिस्से से भी अधिक है। यह सिद्ध करता है कि बिहार में उद्योगों के लिए एक सुरक्षित और अनुकूल माहौल बना है।

उन्होंने कहा कि राज्य में युवाओं को उद्योग की जरूरतों संबंधी ट्रेनिंग के लिए भारत रत्न जननायक कर्पूरी ठाकुर स्किल यूनिवर्सिटी का उद्घाटन किया गया है। यह युवाओं को उद्योग-आधारित पाठ्यक्रम प्रदान कर रही है। सरकार की ‘एक जिला-एक उद्योग’ योजना ने इस दिशा में क्रांति ला दी है।

इसका सबसे बड़ा उदाहरण कटिहार का मखाना है, जो अब विश्व बाजार में अपनी चमक बिखेर रहा है। केंद्र सरकार ने इसे ‘सुपर फूड’ के रूप में स्थापित करने के लिए मखाना बोर्ड की घोषणा की है, जिससे किसानों और स्थानीय उद्योगों को नई शक्ति मिली है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि उद्योगों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों को बाजार तक पहुँचाने के लिए बिहार में बुनियादी ढांचे को मजबूत किया है। राज्य में निवेशकों का विश्वास जीतने के लिए नीतिगत सुधारों की एक श्रृंखला शुरू की गई है। सरकार ने निवेशकों को नि:शुल्क भूमि देने का निर्णय लिया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में चमड़ा उद्योग, कपड़ा उद्योग सहित अन्य उद्योगों के प्रोत्साहन के लिए नई नीति बनाई गई है। आगामी समय में बिहार की अर्थव्यवस्था में न केवल गुणात्मक सुधार होगा बल्कि युवाओं को रोजगार के बेहतर अवसर भी उपलब्ध होंगे। इस मौके पर बिहार चैम्बर्स ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री द्वारा मुख्यमंत्री श्री नायब सिंह सैनी का गर्मजोशी से स्वागत किया गया।

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दिल्ली में सांसों पर गहराया संकट, कई इलाकों में AQI खतरे के निशान से ऊपर; आनंद विहार में 409 किया गया दर्ज

नई दिल्ली 30 Oct, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी) : दिवाली के बाद से राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण की स्थिति लगातार गंभीर बनी हुई है। प्रदूषित हवा के कारण लोगों को सांस लेने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सीपीसीबी) के आंकड़ों के अनुसार, गुरुवार सुबह आनंद विहार में वायु गुणवत्ता सूचकांक (एक्यूआई) 409 दर्ज किया गया, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है।

सीपीसीबी की रिपोर्ट बताती है कि लोधी रोड का एक्यूआई 325 तक पहुंच गया है, जो ‘बेहद खराब’ श्रेणी में शामिल है। प्रदूषण पर नियंत्रण पाने के लिए वहां पानी का छिड़काव किया जा रहा है। वहीं, आईटीओ इलाके में एक्यूआई 359 दर्ज किया गया है, जो ‘बेहद खराब’ स्तर को दर्शाता है।

इंडिया गेट के आसपास घनी धुंध छाई हुई है और यहां का एक्यूआई 319 तक पहुंच गया है। यह भी ‘बेहद खराब’ श्रेणी में आता है। इसके अलावा, एम्स क्षेत्र में वायु गुणवत्ता सूचकांक 276 दर्ज किया गया है, जिसे ‘खराब’ श्रेणी में रखा गया है। प्रदूषण के बढ़ते स्तर को देखते हुए विशेषज्ञों ने लोगों को बाहर निकलते समय मास्क पहनने की सलाह दी है।

बुधवार को राजधानी का औसत एक्यूआई 279 दर्ज किया गया था, जो ‘खराब’ श्रेणी में था। इससे पहले मंगलवार को यह स्तर 294 रहा था। मौसम विभाग का अनुमान है कि दिल्ली-एनसीआर में 4 नवंबर तक बारिश की संभावना नहीं है, इसलिए फिलहाल प्रदूषण से राहत के आसार कम हैं।

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भारत के निर्यात को बेहतर बनाने के लिए हम सस्टेनेबल ग्रोथ के नए रास्ते खोलने के लिए प्रतिबद्ध : पीयूष गोयल

नई दिल्ली 30 Oct, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी) : केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जानकारी देते हुए बताया कि उन्होंने अलग-अलग सेक्टर्स के एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल और इंडस्ट्री एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के साथ एक अहम बैठक की। इस बैठक में भारत की निर्यात को बढ़ाने से जुड़ी रणनीतियों पर चर्चा की गई।

केंद्रीय मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “मैंने अलग-अलग सेक्टर के एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल (ईपीसी) और इंडस्ट्री एसोसिएशन के प्रतिनिधियों के साथ एक मीटिंग की अध्यक्षता की, जिसका फोकस भारत के एक्सपोर्ट ग्रोथ को बढ़ाने की रणनीतियों पर था।” केंद्रीय मंत्री गोयल ने आगे जानकारी देते हुए कहा कि चर्चा के मुख्य बिंदुओं में अधिक मार्केट एक्सेस के लिए एफटीए का इस्तेमाल करना, वैल्यू एडिशन बढ़ाना, मार्केट डाइवर्सिफिकेशन का विस्तार करना और सेक्टोरल तालमेल को मजबूत करना शामिल था।

उन्होंने अपनी बात पर जोर देते हुए कहा, “हम भारत के निर्यात को बेहतर बनाने के लिए क्वालिटी-ड्रिवन और सस्टेनेबल ग्रोथ के नए रास्ते खोलने के लिए प्रतिबद्ध हैं।” इसी कड़ी में, वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच इस वर्ष अप्रैल-सितंबर के दौरान कुल निर्यात (मर्चेंडाइस और सर्विस) 413.30 बिलियन डॉलर होने का अनुमान है, जबकि बीते वर्ष 2024 की अप्रैल-सितंबर अवधि में यह 395.71 बिलियन डॉलर था।

वहीं, सितंबर में भारत का कुल निर्यात (मर्चेंडाइस और सर्विस) 67.20 बिलियन डॉलर होने का अनुमान है, जो सितंबर 2024 की तुलना में 0.78 प्रतिशत की सकारात्मक बढ़त को दिखाता है। इससे पहले केंद्रीय मंत्री गोयल ने न्यूजीलैंड के व्यापार और निवेश मंत्री टॉड मैक्ले के साथ एक प्रोडक्टिव वर्चुअल मीटिंग की। उन्होंने मैक्ले के साथ हुई इस मीटिंग को लेकर जानकारी साझा की।

उन्होंने एक दूसरे पोस्ट में लिखा, “हमने अपने व्यापार संबंधों को मजबूत करने और एफटीए पर बातचीत को आगे बढ़ाने पर चर्चा की।” केंद्रीय मंत्री गोयल ने बताया कि इस मीटिंग में दोनों देशों के लिए लाभदायक और दूरदर्शी फ्रेमवर्क बनाने पर फोकस किया गया। उन्होंने कहा, “मैं हमारी पार्टनरशिप को मजबूत करने और अहम सेक्टरों में आपसी ग्रोथ के लिए नए मौकों को तलाशने के लिए उत्सुक हूं।”

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भव्य राम मंदिर में एक साथ आठ हजार भक्त कर सकेंगे दर्शन

श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए परकोटा से जुड़े तीन स्थल बने जूते-चप्पल रखने के लिए

राम मंदिर परिसर में फरवरी तक तैयार होगा बलिदानी कारसेवकों की स्मृति में बना रहा शहीद स्मारक

अयोध्या 29 Oct, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी) ।  राम नगरी अयोध्या एक बार फिर ऐतिहासिक क्षण के साक्षी बनने जा रही है। राम मंदिर के निर्माण कार्य में तेजी के साथ अब अंतिम रूप देने का चरण शुरू हो गया है। भवन निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्रा ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आगमन और ध्वजारोहण कार्यक्रम को लेकर बैठकों का दौर जारी है। समिति की ओर से प्रधानमंत्री से अनुरोध किया जाएगा कि वे ध्वजारोहण के साथ परकोटा और सप्त मंदिर का भी अवलोकन करें।

राम मंदिर परिसर में निर्माण कार्य तेजी से चल रहा है। मिश्रा ने बताया कि परिसर में शहीद स्मारक का निर्माण भी पूर्ण गति से जारी है, जो फरवरी 2025 तक पूरा होने की संभावना है। यह स्मारक धातु से निर्मित होगा और इसे उन कारसेवकों की स्मृति में बनाया जा रहा है

जिन्होंने राम मंदिर आंदोलन में अपना बलिदान दिया। मंदिर की संरचना अत्यंत भव्य और आधुनिक सुविधाओं से युक्त होगी। मुख्य मंदिर में एक साथ 5000 से 8000 श्रद्धालु दर्शन कर सकेंगे। दक्षिण द्वार से प्रवेश करने और निकलने में लगभग 20 मिनट, जबकि सुग्रीव किला मार्ग से दर्शन कर बाहर आने में करीब 40 मिनट का समय लगेगा। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जूते-चप्पल रखने हेतु तीन विशेष स्थान बनाए गए हैं जो परकोटा से जुड़े होंगे।

नृपेंद्र मिश्रा ने बताया कि 23 नवम्बर तक मंदिर परिसर मीडिया अवलोकन के लिए तैयार हो जाएगा। इस दौरान पत्रकारों को मंदिर परिसर में प्रवेश की अनुमति दी जाएगी ताकि वे निर्माण की प्रगति को देख सकें। अस्थायी मंदिर को स्मारक के रूप में संरक्षित रखा जाएगा, जहां सदैव एक प्रज्वलित दीपक जलता रहेगा।

प्रधानमंत्री मोदी के संभावित आगमन को लेकर अयोध्या प्रशासन और श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की तैयारियां युद्ध स्तर पर जारी हैं। रामलला का भव्य मंदिर अब अपने पूर्ण स्वरूप में जगमगाने को तैयार है।

राम मंदिर के लिए भक्तों ने दान किए तीन हजार करोड़ रुपये

राम मंदिर भवन निर्माण समिति के अध्यक्ष नृपेंद्र मिश्र ने बताया है कि रामभक्तों ने अब तक तीन हजार करोड़ रुपये से ज्यादा की धनराशि रामलला को समर्पित की है। राम मंदिर निर्माण के लिए देश भर के श्रद्धालुओं ने दिल खोलकर दान दिया है।

2022 के बाद भी कई भक्तों ने बड़ी धनराशि देकर रामलला के मंदिर निर्माण में सहयोग किया है। अब भवन निर्माण समिति ने फैसला किया है कि ऐसे सभी दानदाताओं को भी ध्वजारोहण कार्यक्रम में आमंत्रित किया जाएगा।

नृपेन्द्र मिश्र के मुताबिक समरसता की दृष्टि से ध्वजारोहण समारोह में छह हजार से अधिक लोगों को आमंत्रित किया जा रहा है लेकिन अब इसमें उन लोगों को भी शामिल किया जाएगा जिन्होंने 2022 के बाद योगदान दिया है।

राम मंदिर निर्माण में योगदान देने वाली कंपनियों, सप्लायर्स और कार्यकर्ताओं का भी सम्मान किया जाएगा। 25 नवंबर के बाद राम मंदिर परिसर में एक वृहद आयोजन किया जाएगा, जिसमें इन सभी को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया जाएगा।  भवन निर्माण समिति के अध्यक्ष ने खुलासा किया कि अब तक लगभग 1500 करोड़ रुपये की बिलिंग हो चुकी है। राम मंदिर निर्माण का कुल खर्च 1800 करोड़ रुपये तक पहुंचने का अनुमान है।

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पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने दूनागिरी की महावतार बाबा गुफा में लगाया ध्यान

अल्मोड़ा 29  Oct, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। देश के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद बुधवार को दो दिवसीय आध्यात्मिक यात्रा के दौरान दूनागिरी की पवित्र वादियों में स्थित महावतार बाबा की गुफा पहुंचे। घने जंगलों के बीच पांडवखोली के समीप स्थित इस ऐतिहासिक गुफा तक पहुंचने के लिए उन्होंने लगभग डेढ़ किलोमीटर लंबी खड़ी चढ़ाई को डोली के माध्यम से पार किया।

गुफा पहुंचने से पूर्व उन्होंने योगदा आश्रम के स्मृति भवन में करीब आधा घंटा व्यतीत किया, जहां सन्यासियों से उन्होंने महावतार बाबा, लाहिड़ी महाशय, युक्तेश्वर गिरी और परमहंस योगानंद जैसे महान संतों के जीवन, उपदेशों और क्रिया योग के महत्व पर जानकारी प्राप्त की। इसके बाद गुफा में ध्यान लगाकर उन्होंने लगभग तीन घंटे का समय साधना में बिताया।

ध्यान के बाद उन्होंने इस अनुभव को ‘अद्भुत और आत्मशांति प्रदान करने वाला’ बताते हुए कहा कि दूनागिरी की वादियां अध्यात्म से परिपूर्ण हैं और वे पुनः यहां आने की इच्छा रखते हैं।

पूर्व राष्ट्रपति के भ्रमण के दौरान सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनजर बड़ी संख्या में पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी तैनात रहे। दिव्य प्रेम सेवा मिशन के आशीष गौतम सहित स्थानीय प्रशासन के अधिकारी पूरे समय मौजूद रहे।

ग्रामीणों ने किया आत्मीय स्वागत

महावतार बाबा की गुफा की यात्रा से पूर्व जब पूर्व राष्ट्रपति का काफिला रतखाल गांव पहुंचा, तो ग्रामीणों ने पारंपरिक पिछोड़ा पहन उनका फूलमालाओं से भव्य स्वागत किया। उन्होंने ग्रामीणों से आत्मीय बातचीत की और उनके स्नेह से अभिभूत नजर आए। इस अवसर पर ग्राम प्रधान नीतू देवी, नंदन सिंह, उमा देवी, मुन्नी देवी, केशव सिंह और शेखर शर्मा सहित अनेक ग्रामीण उपस्थित रहे।

गुफा दर्शन के बाद विश्राम कर रवाना हुए नैनीताल

गुफा में ध्यान लगाने के पश्चात रामनाथ कोविंद ने 18 किलोमीटर की सड़क यात्रा कर द्वाराहाट के भुमकिया स्थित एक रिसोर्ट में दो घंटे विश्राम किया। भोजन के उपरांत वे अपने काफिले के साथ रानीखेत रोड होते हुए नैनीताल के लिए रवाना हुए। कार्यक्रम के सफल समापन के बाद प्रशासन ने राहत की सांस ली। पूर्व राष्ट्रपति की सुरक्षा व्यवस्था के लिए कई जिलों से पुलिस बल और प्रशासनिक अधिकारी तैनात किए गए थे।

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राज्य स्थापना दिवस समारोह की तैयारी को लेकर महत्वपूर्ण बैठक

उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में बैठक

समारोह की सफलता एवं सुचारू संचालन सुनिश्चित करने हेतु विस्तृत समीक्षा

प्रस्तावित कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किया गया

रांची,29.10.2025 – राज्य स्थापना दिवस समारोह की तैयारी को लेकर उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी, रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में 29 अक्टूबर 2025 को महत्वपूर्ण बैठक जिला समाहरणालय सभागार में आयोजित की गई।

बैठक में समारोह की सफलता एवं सुचारू संचालन सुनिश्चित करने हेतु विस्तृत समीक्षा की गई तथा संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

बैठक में उपायुक्त ने कहा की जिला प्रशासन का दायित्व है कि सभी तैयारियाँ समय पर और व्यवस्थित रूप से पूर्ण की जाएं ताकि समारोह भव्य एवं गरिमामय तरीके से संपन्न हो सके।

कार्यक्रम स्थल परिसर की सम्पूर्ण तैयारी को लेकर कई आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए।

विद्युत विभाग को निर्बाध विद्युत आपूर्ति तथा जलापूर्ति विभाग को पेयजल स्टॉल की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया।

सिविल सर्जन रांची को आयोजन स्थल पर एम्बुलेंस, प्राथमिक चिकित्सा केंद्र तथा आवश्यक चिकित्सीय कर्मी तैनात करने के निर्देश दिए गए।

उपायुक्त ने सभी पदाधिकारियों को निर्देश दिया कि समारोह के प्रत्येक घटक की तैयारी की समीक्षा प्रतिदिन की जाए तथा सभी विभाग अपने दायित्वों का निर्वहन समयसीमा के भीतर करें।

बैठक में उप विकास आयुक्त,श्री सौरभ भुवनिया, अनुमंडल पदाधिकारी सदर राँची, श्री उत्कर्ष कुमार, पुलिस अधीक्षक नगर, श्री पारस राणा, एवं पुलिस अधीक्षक यातायात, श्री राकेश सिंह, अपर जिला दंडाधिकारी विधि व्यवस्था, श्री राजेश्वर नाथ आलोक, अपर समाहर्ता, श्री रामनारायण सिंह, सिविल सर्जन, डॉ. प्रभात कुमार, कार्यपालक अभियंता (विद्युत/पेयजल), जिला जनसंपर्क पदाधिकारी, श्रीमती उर्वशी पांडेय सहित विभिन्न विभागों के पदाधिकारी उपस्थित थे।

प्रस्तावित कार्यक्रम स्थल का निरीक्षण किया

राज्य स्थापना दिवस समारोह के सफल आयोजन की तैयारी को लेकर उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी रांची श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने आज प्रस्तावित कार्यक्रम स्थल मोरहाबादी मैदान का निरीक्षण किया। इस दौरान उनके साथ विभिन्न जिलास्तरीय पदाधिकारी उपस्थित थे।

निरीक्षण के क्रम में उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने संबंधित विभागों के अधिकारियों को समयबद्ध रूप से सभी कार्यों को पूर्ण करने के निर्देश दिये। उन्होंने साफ-सफाई, मंच निर्माण, विद्युत एवं पेयजल आपूर्ति, सुरक्षा व्यवस्था, यातायात प्रबंधन, पार्किंग व्यवस्था, बैरिकेडिंग, स्वागत एवं प्रोटोकॉल व्यवस्था सहित अन्य सभी व्यवस्थाओं की समीक्षा की।

उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजंत्री ने पदाधिकारियों को निर्देश देते हुए कहा कि सभी तैयारियाँ उच्च स्तर की एवं व्यवस्थित होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि सभी विभाग आपसी समन्वय के साथ कार्य करें।

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पहले वह लोग अपने दादा, परदादा व बाप का प्रमाणपत्र दिखाएं-अभिषेक बनर्जी

अगरपाड़ा में मृत प्रदीप कर के घर पहुंचे तृणमूल सेकेण्ड-इन चीफ

कोलकाता 29 Oct, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। अगरपाड़ा में एक व्यक्ति प्रदीप कर का फंदे से लटका शव मिलने के बाद से राज्य की राजनीति में उथल-पुथल मची हुई है। अब, कूचबिहार के दिनहाटा में भी इसी कथित डर से एक और व्यक्ति ने आत्महत्या का प्रयास किया है, यह बात तृणमूल कांग्रेस के अखिल भारतीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने आज दोपहर अगरपाड़ा में मारे गए प्रदीप कर के परिवार से मुलाकात के दौरान कही।

साथ ही, अभिषेक ने क्षेत्र के लोगों को आश्वस्त करते हुए कहा, “हम बंगाल में एनआरसी या एसआईआर के नाम पर एक भी वास्तविक मतदाता का नाम नहीं छूटने देंगे।

” अभिषेक बनर्जी ने लोगों से कहा कि, जो लोग आपलोगों का प्रमाणपत्र मांगे आपलोग उनलोगों से उनके  ” बाप, दादा, परदादा जन्म प्रमाण पत्र लेकर आओ।” तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने बुधवार को लोगों से अपील की कि वे यदि कोई स्थानीय भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) नेता उनके माता-पिता के जन्म प्रमाणपत्र मांगता है, तो उसे पकड़कर “बांध दें” और जवाब मांगें।

उन्होंने यह बयान मतदाता सूची के विशेष पुनरीक्षण (एसआईआर) और कथित एनआरसी जांच को लेकर मची अफरातफरी के बीच दिया। अभिषेक बनर्जी ने यह टिप्पणी उस समय की जब उन्होंने पानिहाटी के निवासी प्रदीप कर (57) के परिवार से मुलाकात की। कर ने कथित रूप से एसआईआर और संभावित एनआरसी की आशंका से डरकर आत्महत्या कर ली थी। टीएमसी नेता ने कर की मौत को सीधे एसआईआर प्रक्रिया से जोड़ा और आरोप लगाया कि बीजेपी तथा चुनाव आयोग द्वारा पैदा की गई चिंता ने इस व्यक्ति को आत्महत्या करने के लिए मजबूर किया।

उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को “डर के माहौल” के लिए जिम्मेदार ठहराते हुए उनके खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की मांग की। अभिषेक बनर्जी ने कहा, “प्रदीप कर की मौत एनआरसी और एसआईआर के डर से हुई है। अमित शाह और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ एफआईआर दर्ज होनी चाहिए। क्या वे खुद अपने माता-पिता के दस्तावेज़ दिखा पाएंगे?”

बनर्जी के साथ सांसद पार्थ भौमिक, निर्मल घोष और युवा नेता देबराज चक्रवर्ती भी मृतक के परिवार से मिलने पहुंचे। टीएमसी नेताओं के अनुसार, कर के शव के पास मिला हस्तलिखित नोट स्पष्ट रूप से उसकी दस्तावेज़ी प्रक्रिया को लेकर भय व्यक्त करता है।

बाद में समर्थकों को संबोधित करते हुए अभिषेक बनर्जी ने कहा, “जब भी कोई स्थानीय बीजेपी नेता आपके इलाके में आए और आपके माता-पिता के प्रमाणपत्र मांगे, तो उनसे उनके माता-पिता और दादा-दादी के दस्तावेज़ मांगिए। उन्हें पेड़ या लैम्पपोस्ट से बांध दीजिए और कहिए कि जब तक वे अपने कागज़ नहीं दिखाएंगे, उन्हें छोड़ा नहीं जाएगा। हम हिंसा में विश्वास नहीं करते, बस बांध दीजिए, मारिए मत।”

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने भी बीजेपी पर “डर की राजनीति” करने और एनआरसी को “हथियार” के रूप में इस्तेमाल करने का आरोप लगाया।

वहीं, बीजेपी ने पलटवार करते हुए कहा कि प्रदीप कर की मौत की वास्तविक वजह जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। पार्टी ने आरोप लगाया कि टीएमसी एक निजी त्रासदी का राजनीतिक लाभ उठाने का प्रयास कर रही है। बीजेपी ने दोहराया कि एसआईआर महज़ मतदाता सूची के नियमित संशोधन की प्रक्रिया है।

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पर्व-त्योहार की छुट्टियों के बाद उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री ने किया समाहरणालय स्थित विभिन्न कार्यालयों का औचक निरीक्षण

बिना पूर्व सूचना अनुपस्थित कर्मचारियों पर शोकॉज़ के साथ एक दिन का वेतन काटने का निर्देश

बिना सूचना अनुपस्थित तीन कर्मचारियों को शोकॉज़ और एक दिन का वेतन काटने का निर्देश

आईडी कार्ड नहीं पहनने और नेम प्लेट प्रदर्शित नहीं करने वाले कर्मचारियों को भी शोकॉज़

सभी कार्यालय प्रधानों को अनुशासन और उपस्थिति सुनिश्चित करने का निर्देश

कार्यालयों में स्वच्छता एवं कार्य व्यवस्था बनाए रखने पर जोर

उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने दिए सख्त निर्देश – कार्यालयों में अनुशासन, स्वच्छता और जवाबदेही सुनिश्चित करें

रांची, 29.10.2025 – उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी रांची श्री मंजूनाथ भजंत्री द्वारा पर्व-त्योहार की छुट्टियों के बाद अपराह्न 04:00 बजे के आसपास समाहरणालय परिसर स्थित विभिन्न कार्यालयों का औचक निरीक्षण किया गया। निरीक्षण का उद्देश्य कार्यालयों में कार्य अनुशासन, उपस्थिति, स्वच्छता तथा कार्य संस्कृति की समीक्षा करना था।

बिना पूर्व सूचना अनुपस्थित कर्मचारियों पर शोकॉज़ के साथ एक दिन का वेतन काटने का निर्देश

निरीक्षण के दौरान उपायुक्त ने पाया कि कई कर्मचारी बिना पूर्व सूचना के अनुपस्थित थे। इस पर नाराजगी व्यक्त करते हुए उन्होंने नक्सल शाखा की प्रधान सहायक सुनीता चौधरी, उप निर्वाचन कार्यालय पर प्रतिनियुक्ति हेल्प डेस्क मैनेजर साहिल कुमार तथा आदित्य कुमार झा को अनुपस्थित रहने के कारण शोकॉज़ नोटिस जारी करने का निर्देश दिया। साथ ही उन्होंने यह भी स्पष्ट निर्देश दिया कि बिना सूचना अनुपस्थित पाए गए कर्मचारियों का एक दिन का वेतन काटा जाए, ताकि भविष्य में ऐसी लापरवाही की पुनरावृत्ति न हो।

आईडी कार्ड नहीं पहनने और नेम प्लेट प्रदर्शित नहीं करने वाले कर्मचारियों को भी शोकॉज़

निरीक्षण के दौरान यह भी पाया गया कि कुछ कर्मचारी आईडी कार्ड नहीं पहने हुए थे और उनके द्वारा नेम प्लेट सही ढंग से प्रदर्शित नहीं की गई थी। इस पर उपायुक्त ने संबंधित कर्मचारियों को भी शो कॉज करने का निर्देश दिया तथा सभी को निर्देशित किया कि कार्यालय अवधि में पहचान पत्र अनिवार्य रूप से पहनें।

छुट्टी पर रहने वाले कर्मचारियों के आवेदन की भी जांच

निरीक्षण के दौरान उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने छुट्टी पर रहने वाले कर्मचारियों के आवेदन की भी जांच की, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी कर्मचारी बिना अनुमति अनुपस्थित न रहे। उन्होंने सभी कार्यालय प्रधानों को यह निर्देश दिया कि अनुशासनहीनता और लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी, तथा प्रत्येक कार्यालय में उपस्थिति रजिस्टर का नियमित रूप से सत्यापन किया जाए।

इसके साथ ही उन्होंने सभी कर्मचारियों को कार्यालय परिसर की साफ-सफाई, अभिलेखों के सुव्यवस्थित रखरखाव और समय पर कार्य निष्पादन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजंत्री ने कहा कि समाहरणालय प्रशासनिक कार्यों का केंद्र है, अतः यहाँ अनुशासन, स्वच्छता और पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए।

निरीक्षण के दौरान उप विकास आयुक्त श्री सौरभ कुमार भुवनिया, अपर जिला दंडाधिकारी (विधि व्यवस्था) श्री राजेश्वर नाथ आलोक, सामान्य शाखा प्रभारी, रांची श्री विवेक कुमार सुमन, जिला नजारत उपसमाहर्ता श्री सुदेश कुमार, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी श्रीमती उर्वशी पांडेय तथा सहायक निदेशक सामाजिक सुरक्षा श्री रवि शंकर मिश्रा सहित अन्य पदाधिकारी उपस्थित थे।

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डीआईजी भुल्लर रिश्वत कांड : बिचौलिए कृष्णु शारदा को नौ दिन के सीबीआई रिमांड पर भेजा गया

चंडीगढ़ ,29 अक्टूबर (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी) । पंजाब के पूर्व डीआईजी हरचरण सिंह भुल्लर से जुड़े बहुचर्चित रिश्वत मामले में गिरफ्तार बिचौलिए कृष्णु शारदा को सीबीआई की विशेष अदालत ने नौ दिन के रिमांड पर भेज दिया है। आरोपी को बुड़ैल जेल से अदालत में पेश किया गया।

सीबीआई ने अदालत से कृष्णु का 12 दिन का रिमांड मांगा था, लेकिन मंगलवार को उसकी ओर से कोई वकील पेश नहीं हुआ, जिसके बाद बुधवार सुबह 11 बजे सुनवाई हुई। सीबीआई ने अदालत से कहा कि कृष्णु शारदा इस पूरे रिश्वत नेटवर्क की अहम कड़ी है और उसके ज़रिए उन अधिकारियों तक पहुंचा जा सकता है, जो इस भ्रष्टाचार में शामिल हैं।

एजेंसी ने अदालत से आग्रह किया कि बुड़ैल जेल में कृष्णु से मिलने आने वाले सभी व्यक्तियों का रिकॉर्ड और सीसीटीवी फुटेज सुरक्षित रखा जाए। अदालत ने सीबीआई की इस मांग को मंजूरी देते हुए जेल प्रशासन को आदेश जारी कर दिए हैं।

सूत्रों के अनुसार, पूछताछ के दौरान सीबीआई को कई नई जानकारियां मिली हैं। जांच में यह सामने आया है कि कृष्णु शारदा पंजाब के कई वरिष्ठ अधिकारियों के लिए उगाही का काम करता था।

बताया जा रहा है कि हाल के दिनों में कृष्णु से उसके परिजनों के अलावा कुछ और लोग भी मिलने पहुंचे थे, जिससे एजेंसी को शक है कि वे इस नेटवर्क से जुड़े हो सकते हैं।अब सीबीआई उन सभी लोगों के रिकॉर्ड और कॉल डिटेल्स की जांच करने की तैयारी में है।

सीबीआई के सूत्रों के मुताबिक अब जांच का दायरा बढ़ाया जा रहा है, और कई अन्य आईपीएस अधिकारी भी एजेंसी के रडार पर आ गए हैं।संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में कुछ और वरिष्ठ पुलिस अधिकारी या सरकारी कर्मचारी भी पूछताछ या हिरासत में लिए जा सकते हैं।

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यूपी : योगी सरकार ने बढ़ाया गन्ना मूल्य, जयंत चौधरी ने जताया आभार

लखनऊ ,29 अक्टूबर (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। पश्चिमी यूपी में गन्ना बहुत बड़ा चुनावी मुद्दा रहता है। सरकार ने एक बार फिर गन्ना के मूल्य बढ़ाकर किसानों को चेहरे पर मिठास घोलने का प्रयास किया है। इसे लेकर केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने सरकार का आभार जताया है।

केंद्रीय मंत्री जयंत चौधरी ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, उत्तर प्रदेश सरकार ने गन्ने की मिठास और किसानों की मेहनत का मान रखा। मुख्यमंत्री जी को आभार। उधर, गन्ना विकास एवं चीनी उद्योग मंत्री लक्ष्मी नारायण चौधरी ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी के नेतृत्व में जब से सरकार बनी, तब से, क्योंकि पहले गन्ना माफियाओं का सेंटर बना हुआ था, अब एक पारदर्शी व्यवस्था बनी।

इस व्यवस्था के कारण चीनी उद्योग में 12 हजार करोड़ रुपए का निवेश हुआ है। हमारी जो क्षमता है, 42 चीनी मिलों का विस्तारीकरण किया गया। नई 8 चीनी मिलें लग सकती हैं; इतना विस्तारीकरण किया गया। गन्ना माफिया सिस्टम समाप्त करके, अब हमारे देश में हजारों किसान हैं। अब पर्ची मोबाइल में देख सकतो हैं।

उन्होंने कहा कि एक बार सुप्रीम कोर्ट ने यहां तक कहा कि इसी तरह की पारदर्शी व्यवस्था हर राज्य में होनी चाहिए। हमारे प्रदेश में 2017 में एथेनॉल की केवल 61 आसमी थी जो आज 97 हो गईं।

उन्होंने बताया कि पहले इथेनॉल का उत्पादन 41 करोड़ होता था। आज 182 करोड़ उत्पादन इथेनॉल का होता है जो पूरे देश में सर्वाधिक है। 2017 तक केवल 20 लाख हेक्टेयर में गन्ना उत्पादन होता था; आज साढ़े नौ लाख हेक्टेयर गन्ने का उत्पादन बढ़ा है।

122 चीनी मिलें संचालित हैं। 2007 से 2017 तक 10 साल में एक लाख 47 हजार 346 करोड़ रुपए का भुगतान हुआ था, जबकि आज हमारा भुगतान दोगुना किया गया है। गन्ने का पेमेंट और पारदर्शी व्यवस्था यही सबसे बड़ा कारण है। मुख्यमंत्री ने निर्णय लिया है कि अब गन्ने का मूल्य जो 370 रुपए था, उसे 400 रुपए क्विंटल कर दिया गया है और जो 360 था, उसे 390 किया गया है।

ज्ञात हो कि उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने गन्ना किसानों को बड़ा उपहार दिया है। सरकार ने गन्ने के मूल्य में प्रति कुंतल 30 रुपये की बढ़ोत्तरी की है। नई घोषणा के अनुसार, अगेती प्रजाति के गन्ने का मूल्य 400 रुपये प्रति कुंतल तथा सामान्य प्रजाति के गन्ने का मूल्य 390 रुपये प्रति कुंतल किया गया है।

प्रदेश सरकार के इस फैसले को गन्ना किसानों के लिए बड़ी राहत के तौर पर देखा जा रहा है। यह घोषणा पेराई सत्र 2025-26 के लिए की गई है। गन्ना मूल्य वृद्धि से किसानों को 3000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त भुगतान किया जाएगा। बीते साढ़े 8 वर्षों में गन्ना किसानों को 2,90,225 करोड़ रुपये का रिकॉर्ड भुगतान किया गया है।

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सोनम वांगचुक की नजरबंदी मामले में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टली

नई दिल्ली ,29 अक्टूबर (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी) । सुप्रीम कोर्ट में लद्दाख स्थित जलवायु कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (एनएसए) के तहत नजरबंदी को चुनौती देने वाली याचिका पर बुधवार को सुनवाई टल गई है।

अब अगली सुनवाई 24 नवंबर को होगी। वांगचुक की पत्नी गीतांजलि जे अंगमो की ओर से दायर इस मामले में उनकी नजरबंदी की वैधता और अधिकारियों की ओर से अपनाई गई प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए थे।

सोनम वांगचुक की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस एनवी अंजारिया की बेंच ने कहा कि हमें हलफनामे की कॉपी बुधवार को मिली है। हालांकि हम नई याचिका पर सुनवाई करेंगे।

गीतांजलि अंग्मो के वकील कपिल सिब्बल ने कहा कि हमने मंगलवार शाम नई अर्जी को हलफनामे के साथ दाखिल किया है। बेंच ने कहा कि हम संशोधित याचिका को सुनवाई के लिए स्वीकार करते हैं।

याचिका के साथ अतिरिक्त सबूत वाले दस्तावेज लगाने के लिए एक हफ्ता दिया है। इसके बाद दस दिनों में सरकार जवाब देगी। फिर अगली सुनवाई 24 नवंबर को होगी।

इससे पहले की सुनवाई में सिब्बल ने अदालत को बताया था कि केंद्र सरकार ने वांगचुक को नजरबंदी के आधार बता दिए हैं, जिससे मूल याचिका में संशोधन करना जरूरी हो गया है।

उन्होंने कहा, मैं याचिका में संशोधन करूंगा ताकि मामला यहीं जारी रह सके। इसके बाद, अदालत ने मामले की अगली सुनवाई बुधवार को तय कर दी थी।

सर्वोच्च न्यायालय में दायर याचिका में मूल रूप से यह तर्क दिया गया था कि अधिकारी एनएसए की धारा 8 के तहत हिरासत के आधार प्रस्तुत करने में विफल रहे हैं, जिसके अनुसार बंदियों को एक निश्चित समय के भीतर उनकी हिरासत के कारणों के बारे में सूचित किया जाना आवश्यक है।

हालांकि, लेह प्रशासन ने जिला मजिस्ट्रेट रोमिल सिंह डोंक के माध्यम से दायर अपने हलफनामे में दावा किया कि निर्धारित अवधि के भीतर बंदी को कारणों से विधिवत अवगत करा दिया गया था।

सुनवाई कथित तौर पर एनएसए लगाने के प्रशासन के औचित्य और वांगचुक के प्रतिनिधित्व पर केंद्रित थी, जिसमें इसे चुनौती दी गई थी।
सोनम वांगचुक को राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (एनएसए) के तहत हिरासत में लिया गया था।

इसके बाद देशव्यापी विरोध प्रदर्शन हुए और नागरिक अधिकार समूहों ने भी इसकी आलोचना की। उन्होंने वांगचुक की हिरासत को मनमाना और अनुचित बताया।

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कर्नाटक के विजयपुरा में लगातार भूकंप से दहशत, दो महीने में 11 झटके

विजयपुरा ,29 अक्टूबर (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। कर्नाटक के विजयपुरा जिले में लगातार आ रहे भूकंपों ने लोगों की नींद उड़ा दी है। पिछले दो महीनों में 11 झटके दर्ज किए गए हैं। मंगलवार रात 11:41 बजे के बाद बुधवार सुबह भी करीब 5:30 बजे भूकंप के झटके महसूस किए गए। दोनों बार कंपन के बाद लोग घरों से बाहर भागे। कई इलाकों में सीसीटीवी कैमरों ने भूकंप के दौरान का पूरा दृश्य कैद कर लिया।

वीडियो में साफ दिख रहा है कि जैसे ही झटके लगे, दीवारे और सड़कों पर खड़े वाहन हिलने लगे और कुत्ते जोर-जोर से भौंकने व चीखने लगे। भूकंप के केंद्र के बाहर रिक्टर स्केल पर 3.0 तीव्रता दर्ज की गई। विशेषज्ञों का कहना है कि यह तीव्रता मध्यम स्तर की है, लेकिन बार-बार आने से खतरा बढ़ रहा है। अभी तक किसी के हताहत होने या बड़े नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन लोग सहमे हुए हैं।

स्थानीय लोगों के मुताबिक, रात में सोते वक्त अचानक बिस्तर हिलता है तो दिल बैठ जाता है। बच्चे रोने लगते हैं और बुजुर्ग घबरा जाते हैं। कई परिवार अब रात में घर के बाहर सोने लगे हैं। दुकानदारों का कारोबार प्रभावित हो रहा है। स्कूलों में भी बच्चों में डर दिख रहा है।
भू-वैज्ञानिकों की टीम मौके पर पहुंच गई है।

वे भूकंप के कारणों का पता लगा रहे हैं। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि यह इलाका भूकंपीय रूप से सक्रिय जोन में नहीं है, फिर भी इतने झटके चिंता की बात हैं। विशेषज्ञों ने लोगों को सतर्क रहने और सुरक्षित जगह पर जाने की सलाह दी है।

जिला प्रशासन ने आपातकालीन हेल्पलाइन शुरू की है। लोगों से कहा गया है कि पुरानी इमारतों में न रहें और भूकंप आने पर टेबल के नीचे छिपें। अभी तक राहत शिविर नहीं लगाए गए, लेकिन जरूरत पड़ी तो तुरंत व्यवस्था की जाएगी। लगातार भूकंपों ने विजयपुरा को दहशत में डाल दिया है। जांच जारी है, जल्द ही पूरी रिपोर्ट आएगी।

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आसाराम को राजस्थान हाईकोर्ट से बड़ी राहत, स्वास्थ्य आधार पर मिली सशर्त जमानत

जोधपुर ,29 अक्टूबर (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी) । राजस्थान हाईकोर्ट ने बुधवार को आसाराम को बड़ी राहत देते हुए रेगुलर जमानत मंजूर कर दी है।

यह फैसला कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा की डिवीजन बेंच ने सुनाया। आसाराम की ओर से स्वास्थ्य कारणों का हवाला देते हुए नियमित जमानत याचिका दायर की गई थी।

इस याचिका पर आज जोधपुर स्थित राजस्थान हाईकोर्ट में सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने आसाराम को उपचार और स्वास्थ्य संबंधी कारणों को देखते हुए राहत दी।

ज्ञात हो कि आसाराम इस समय जोधपुर की जेल में यौन शोषण के मामले में सजा काट रहे हैं। इससे पहले भी उन्हें कई बार अस्थायी जमानत  दी गई थी और कई बार जमानत देने से इनकार किया था। लेकिन लगातार बिगड़ते स्वास्थ्य और चिकित्सीय रिपोर्टों को देखने के बाद अदालत ने इस बार रेगुलर जमानत को मंजूरी दी।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला शर्तों के साथ जमानत  के रूप में लागू किया जाएगा, जिसके तहत आसाराम को इलाज के दौरान अदालत द्वारा तय नियमों का पालन करना होगा।

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51 नक्सलियों ने किया आत्मसमर्पण, 66 लाख का इनाम था घोषित

बीजापुर 29 Oct, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी) । जिले में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। सरकार की महत्वपूर्ण ‘पूना नारगेम’ योजना और नक्सली पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर कंपनी नंबर 01 के पीपीसीएम और 8 लाख के इनामी सहित कुल 51 नक्सलियों ने पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण किया है। आत्मसमर्पण करने वालों में 20 नक्सली ऐसे हैं जिन पर कुल 66 लाख रुपये का इनाम घोषित था।

आत्मसमर्पण करने वाले सभी माओवादी विभिन्न फायरिंग, आईईडी ब्लास्ट और आगजनी जैसी घटनाओं में शामिल रहे हैं। यह आत्मसमर्पण बीजापुर पुलिस लाइन में किया गया, जहां सीआरपीएफ डीआईजी बी.एस. नेगी, पुलिस अधीक्षक डॉ. जितेन्द्र यादव, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक यूलेण्डन यार्क, डीएसपी शरद जायसवाल, उप पुलिस अधीक्षक विनीत साहू समेत अन्य अधिकारी मौजूद थे।

पुलिस अधिकारियों ने आत्मसमर्पण करने वाले सभी नक्सलियों को 50-50 हजार रुपये नगद प्रोत्साहन राशि प्रदान की और उन्हें मुख्यधारा से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया।

जानकारी के अनुसार, वर्ष 2025 में अब तक कुल 461 माओवादी आत्मसमर्पण कर चुके हैं, जबकि 485 माओवादियों को गिरफ्तार किया गया है। इसके अलावा 138 माओवादी विभिन्न मुठभेड़ों में मारे गए हैं।

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21 नक्सलियों ने AK-47 समेत अन्य हथियारों के साथ किया आत्मसमर्पण, रेड कारपेट बिछाकर किया गया स्वागत

कांकेर 29 oct, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी). जिले में सक्रिय रहे 21 नक्सलियों ने आज पुलिस के समक्ष आत्मसमर्पण कर मुख्यधारा में लौटने का निर्णय लिया।

जंगलवार कॉलेज परिसर में आयोजित कार्यक्रम में सभी नक्सलियों का रेड कारपेट बिछाकर स्वागत किया गया। बस्तर रेंज के आईजी पी. सुंदरराज ने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को संविधान की प्रति भेंट कर मुख्यधारा में उनका स्वागत किया।

नक्सलवाद के खात्मे को लेकर जारी अभियान के बीच पुलिस ने हाल ही में अपनी रणनीति में बदलाव किया है। अब मुठभेड़ की जगह आत्मसमर्पण को प्राथमिकता दी जा रही है।

पुलिस ने नक्सलियों को साफ संदेश दिया था कि यदि वे आत्मसमर्पण कर समाज की मुख्यधारा में लौटते हैं तो उनका स्वागत होगा अन्यथा फोर्स कार्रवाई के लिए तैयार है।

इस नई रणनीति का असर भी दिखने लगा है। इसी माह जगदलपुर में 208 नक्सलियों ने 109 हथियारों के साथ आत्मसमर्पण किया था। अब कांकेर जिले के दो एरिया कमेटियों के 21 नक्सलियों ने 18 हथियार पुलिस को सौंपे हैं।

आईजी पी. सुंदरराज ने बताया कि एक समय था जब नक्सल संगठन के पोलित ब्यूरो और सेंट्रल कमेटी में 45 सदस्य थे, जो अब घटकर केवल 6 से 7 रह गए हैं।

उन्होंने दक्षिण बस्तर के जंगलों में छिपे नक्सलियों से अपील करते हुए कहा कि वे आत्मसमर्पण कर शांति का रास्ता अपनाएं अन्यथा सुरक्षा बलों की कार्रवाई के लिए तैयार रहें।

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पाक की नापाक हरकत : कुपवाड़ा में किया सीजफायर का उल्लंघन, भारतीय सेना ने दिया मुंहतोड़ जवाब

श्रीनगर 29 oct,(Final Justice Digital News Desk/एजेंसी): उत्तरी कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के टंगडार सेक्टर में नियंत्रण रेखा (LoC) पर मंगलवार को पाकिस्तान ने युद्धविराम का उल्लंघन करते हुए भारतीय चौकियों पर गोलाबारी की। भारतीय जवानों ने भी जवाबी कार्रवाई में नियंत्रण रेखा के पार लीपा घाटी में पाकिस्तानी ठिकानों को निशाना बनाया।

हालांकि रक्षा मंत्रालय ने इस घटना की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। सूत्रों के अनुसार, भारतीय सेना अपने क्षेत्र में कुछ निर्माण कार्य कर रही थी। इसी दौरान पाकिस्तान की ओर से काम रुकवाने के उद्देश्य से गोलाबारी की गई।

भारतीय सैनिकों ने भी तत्परता से जवाब देते हुए पाकिस्तान की अग्रिम चौकियों पर निशाना साधा। इस गोलाबारी के बाद क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है, हालांकि किसी प्रकार के जनहानि या नुकसान की सूचना नहीं है।

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दीपावली के बाद गन्ना किसानों को सरकार का उपहार, बढ़ाए गए दाम

लखनऊ 29 Oct, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी) : उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने गन्ना किसानों को दिवाली के बाद बड़ा उपहार दिया है। सरकार ने गन्ने के मूल्य में 30 प्रति क्विंटल तक की बढ़ोतरी की है।

मुख्यमंत्री योगी के फैसले के अनुसार, अब अगैती प्रजाति के गन्ने का मूल्य 400 प्रति क्विंटल होगा, जबकि सामान्य प्रजाति के लिए यह दर 390 प्रति क्विंटल तय की गई है।

सरकार की तरफ से दी गई जानकारी के अनुसार, गन्ने के मूल्य में 30 प्रति कुन्तल की वृद्धि की गई है। पेराई सत्र 2025-26 के लिए गन्ने का मूल्य निर्धारण भी किया गया है।

अगेती प्रजाति 400 प्रति कुन्तल और सामान्य प्रजाति 390 प्रति कुन्तल की दर तय की गई है। इससे किसानों के चेहरों पर खुशहाली की मिठास घुली है। सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि गन्ना मूल्य वृद्धि से किसानों को 3,000 करोड़ का अतिरिक्त भुगतान होगा।

उन्होंने बताया कि योगी सरकार ने गन्ना मूल्य में लगातार बढ़ोतरी की, 2017 से अब तक चार बार समर्थन मूल्य को बढ़ाया गया है। साढ़े 08 वर्षों में गन्ना किसानों को 2,90,225 करोड़ का रिकॉर्ड भुगतान किया गया है।

2007 से 2017 तक मात्र 1,47,346 करोड़ का गन्ना मूल्य भुगतान हो सका था। 2017 से अब तक साढ़े आठ वर्षों में 2,90,225 करोड़ का गन्ना मूल्य अकेले भुगतान हुआ है।

पिछली सरकारों के 10 वर्षों की तुलना में 1,42,879 करोड़ अधिक भुगतान योगी सरकार में हुआ। प्रदेश में अब 122 चीनी मिलें संचालित हैं, जो देश में दूसरा स्थान है। पूर्ववर्ती सरकारों ने चीनी उद्योग को पहुंचाई थी भारी क्षति, 21 मिलें औने-पौने दामों पर बेची गईं हैं।

योगी सरकार के पारदर्शी प्रबंधन से उद्योग में 12,000 करोड़ का निवेश आया है। आठ वर्षों में चार नई चीनी मिलें स्थापित हुईं, 6 बंद मिलें पुनः शुरू हुईं, और 42 मिलों में क्षमता का विस्तार हुआ। आठ नई बड़ी मिलों के बराबर उत्पादन क्षमता में वृद्धि हुई, और 2 मिलों में सीबीजी संयंत्र स्थापित किया गया।

‘स्मार्ट गन्ना किसान’ प्रणाली से गन्ना पर्ची व्यवस्था पूरी तरह ऑनलाइन हो गई है, और बिचौलियों का राज खत्म हो गया है। गन्ना मूल्य भुगतान सीधे डीबीटी से किसानों के बैंक खाते में किया गया। गन्ना क्षेत्रफल, गन्ना सट्टा, गन्ना कलेंडरिंग एवं गन्ना पर्ची की ऑनलाइन व्यवस्था हेतु विकसित की गई।

सेंट्रलाइज्ड वेब-बेस्ड “स्मार्ट गन्ना किसान” प्रणाली, भारत सरकार ने इसे “मॉडल सिस्टम” बताया है। एथेनॉल उत्पादन में उत्तर प्रदेश देश में प्रथम है। उत्पादन: 41 करोड़ लीटर से बढ़कर 182 करोड़ लीटर, आसवनियां: 61 से बढ़कर 97 हुआ। गन्ना क्षेत्रफल में उल्लेखनीय वृद्धि, 20 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 29.51 लाख हेक्टेयर, उत्तर प्रदेश देश में प्रथम स्थान पर है।

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कर्मचारियों के लिए खुशखबरी, मोदी कैबिनेट ने आठवें वेतन आयोग को दी मंजूरी

नई दिल्ली 29 oct, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)  केंद्र सरकार ने सोमवार को 8वें केंद्रीय वेतन आयोग (8th Central Pay Commission) के गठन की औपचारिक घोषणा कर दी है।

साथ ही आयोग के टर्म ऑफ रेफरेंस (ToR) को भी मंजूरी दे दी गई है। इस आयोग की अध्यक्षता पूर्व सुप्रीम कोर्ट के न्यायमूर्ति रंजन प्रकाश देसाई करेंगे।

18 महीनों में देनी होगी रिपोर्ट

सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कैबिनेट बैठक के बाद बताया कि आयोग को अपनी सिफारिशें 18 महीनों के भीतर सरकार को सौंपनी होंगी। केंद्र सरकार का लक्ष्य है कि आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से लागू की जाएं, जिससे करोड़ों केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों को लाभ मिलेगा।

आयोग किन बातों का ध्यान रखेगा?

वेतन आयोग अपनी सिफारिशें बनाते समय नीचे दी गई इन 5 बातों को खास ध्यान में रखेगा-

1. देश की आर्थिक स्थिति और वित्तीय अनुशासन की आवश्यकता।

2. यह सुनिश्चित करना कि विकास कार्यों और कल्याणकारी योजनाओं के लिए पर्याप्त संसाधन उपलब्ध रहें।

3. गैर-योगदान आधारित पेंशन योजनाओं की लागत पर विचार।

4. राज्य सरकारों पर पड़ने वाले वित्तीय असर, क्योंकि राज्य सरकारें भी आमतौर पर केंद्र की सिफारिशों को अपनाती हैं।

5. केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र (PSU) और निजी क्षेत्र के कर्मचारियों को मिलने वाले वेतन, भत्तों और कार्य परिस्थितियों की तुलना।

कब हुआ था गठन का ऐलान

बता दें कि केंद्रीय वेतन आयोगों का गठन समय-समय पर किया जाता है ताकि केंद्र सरकार के कर्मचारियों के वेतन, पेंशन और सेवा शर्तों की समीक्षा की जा सके और उनमें आवश्यक बदलाव की सिफारिश की जा सके। आमतौर पर, हर 10 साल में नया वेतन आयोग गठित किया जाता है।

इसी क्रम में, 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें 1 जनवरी 2026 से लागू होने की संभावना है। सरकार ने जनवरी 2025 में 8वें केंद्रीय वेतन आयोग के गठन की घोषणा की थी, ताकि केंद्र सरकार के कर्मचारियों के वेतन, भत्तों और अन्य सुविधाओं की समीक्षा की जा सके।

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सहारा इंडिया की मुश्किलें बढ़ीं, EPFO ने थमाया कुर्की का नोटिस, जानिए क्या है पूरा मामला

नई दिल्ली 29 Oct, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी) : कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएफओ) ने सहारा इंडिया ग्रुप के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी है। संगठन ने कंपनी पर 1,180 करोड़ रुपये के पीएफ और पेंशन बकाया को लेकर उसकी संपत्तियों की कुर्की का नोटिस जारी किया है।

ईपीएफओ का कहना है कि सहारा ने लाखों कर्मचारियों के लिए अनिवार्य भविष्य निधि अंशदान जमा नहीं किया है, जिसके चलते अब सख्त कदम उठाना आवश्यक हो गया है।

 लखनऊ स्थित ईपीएफओ के क्षेत्रीय कार्यालय ने सहारा इंडिया को निर्देश दिया है कि 15 दिनों के भीतर पूरी बकाया राशि जमा की जाए। यह बकाया मुख्य रूप से 2010 से 2012 के बीच कंपनी के उन एजेंटों से जुड़ा है, जिन्हें ईपीएफओ ने कर्मचारी की श्रेणी में माना है।

संगठन का तर्क है कि इन एजेंटों को कंपनी का हिस्सा होने के कारण पीएफ का लाभ मिलना चाहिए था। अगर सहारा तय समय में भुगतान नहीं करता, तो ईपीएफओ कानून की धारा 8बी से 8जी के तहत वसूली की कार्रवाई शुरू करेगा। इसमें ब्याज और जुर्माना जोड़ने के बाद कुल देनदारी लगभग 3,500 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है।

यह मामला 2013 से चल रही जांच से जुड़ा है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ बेंच ने पिछले वर्ष चार महीने की समय सीमा तय की थी, जिसके बाद 15 फरवरी को ईपीएफओ ने आदेश जारी किया।

सहारा ने लंबे समय तक यह दावा किया था कि उसके एजेंट कर्मचारी नहीं, बल्कि सदस्य हैं, लेकिन अदालत ने उन्हें कंपनी के कर्मचारी के रूप में मान्यता दी। अधिकारियों के अनुसार, सहारा के लगभग 10 लाख से अधिक कर्मचारियों के पीएफ दावे अब भी लंबित हैं।

सहारा इंडिया ग्रुप पहले से ही कई वित्तीय विवादों में उलझा हुआ है, जिनमें सेबी बॉन्ड घोटाला, भूमि सौदेबाजी और निवेशकों के लगभग 9,000 करोड़ रुपये की वापसी का मामला शामिल है। हाल ही में झारखंड सीआईडी ने 400 करोड़ रुपये के लैंड स्कैम में सुब्रत रॉय के बेटों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी।

ईपीएफओ के इस नोटिस से कंपनी की रियल एस्टेट और वित्तीय संपत्तियों पर कुर्की का खतरा मंडरा रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर वसूली की प्रक्रिया शुरू हुई, तो इससे सहारा की नकदी स्थिति और संपत्तियों की बिक्री क्षमता पर गंभीर असर पड़ सकता है।

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नौकरी के बहाने इंजीनियर युवती को थाईलैंड में बेचा, साइबर स्लेवरी के नर्क से बचकर ऐसे लौटी वतन

संभाजीनगर 29 oct, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी) : महाराष्ट्र के संभाजीनगर से ‘साइबर स्लेवरी’ का एक बेहद चौंकाने वाला मामला सामने आया है। यहां एक इंजीनियर युवती को नौकरी का झांसा देकर थाईलैंड ले जाया गया और वहां उसे डेढ़ लाख रुपये में बेच दिया गया। पीड़िता को वहां बंधक बनाकर जबरन साइबर धोखाधड़ी का काम करवाया जा रहा था।

युवती किसी तरह अपनी जान बचाकर भारतीय दूतावास की मदद से 21 अक्टूबर को भारत लौटी है। पुलिस में दर्ज शिकायत के अनुसार, यह घिनौना काम अविनाश रामभाऊ उढाण नाम के एक कंपनी मालिक ने किया।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोपी अविनाश उढाण ने पीड़िता को थाईलैंड में मार्केटिंग मैनेजर की नौकरी दिलवाने का झांसा दिया और इसके लिए उससे पैसे भी लिए। इसी साल अगस्त में युवती को थाईलैंड भेजा गया। लेकिन वहां पहुंचते ही उसके होश उड़ गए, क्योंकि उसे किसी नौकरी पर नहीं रखा गया, बल्कि एक दूसरी कंपनी को सौंप दिया गया।

लड़की को जब पता चला कि उसे बेच दिया गया है, तो वह समझ ही नहीं पाई कि उसके साथ क्या हो गया है। उसे बंधक बनाकर जबरन साइबर फ्रॉड का काम करने के लिए मजबूर किया गया।

पीड़िता ने हिम्मत नहीं छोड़ी और लगातार भारत लौटने की कोशिश करती रही। उसने किसी तरह उस कंपनी को 2,000 अमेरिकी डॉलर (करीब 1.66 लाख रुपये) चुकाकर अपनी रिहाई हासिल की। इसके बाद, उसने कंबोडिया में स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क साधा।

दूतावास की मदद से वह 21 अक्टूबर को सुरक्षित भारत वापस लौट सकी।

वतन लौटते ही पीड़िता ने संभाजीनगर के पुंडलिकनगर पुलिस स्टेशन में आरोपी अविनाश उढाण के खिलाफ धोखाधड़ी और मानव तस्करी (Human Trafficking) की गंभीर धाराओं में शिकायत दर्ज कराई है।

इस मामले की गंभीरता को देखते हुए मुंबई में इमिग्रेशन अधिकारियों ने भी इस अवैध गतिविधि को लेकर सहारा पुलिस थाने में एक अलग शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस अब आरोपी की तलाश में जुट गई है।

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चक्रवात मोंथा पहुंचा काकीनाडा, तमिलनाडु में छह दिनों तक बारिश की संभावना

चेन्नई  29 oct, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी) : चक्रवात ‘मोंथा’ बुधवार सुबह आंध्र प्रदेश के काकीनाडा पहुंचा, जिससे तटीय जिलों में भारी बारिश और तेज हवाएं चलने लगी।

मौसम विभाग (आईएमडी) ने पुष्टि की है कि इस सप्ताह की शुरुआत में दक्षिण-पूर्वी बंगाल की खाड़ी में बना यह चक्रवात मछलीपट्टनम और कलिंगपट्टनम के बीच 110 किमी प्रति घंटे की गति से टकराया।

आईएमडी अधिकारियों के अनुसार, ‘मोंथा’ के कारण कृष्णा और मछलीपट्टनम जिलों के कई हिस्सों में गरज और बिजली के साथ तेज बारिश हुई, जिससे पेड़ उखड़ गए और संपत्ति को नुकसान पहुंचा।

अल्लूरी जिले में, तूफान के दौरान एक पेड़ गिरने से एक महिला की मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया।

प्रभावित क्षेत्रों में गिरे हुए पेड़ों को हटाने और बिजली बहाल करने के लिए आपदा प्रबंधन टीमों को तैनात किया गया है। सोमवार से उत्तर-पश्चिम दिशा में बढ़ रहा भीषण चक्रवाती तूफान तट पार करने के बाद थोड़ा कमजोर पड़ गया, लेकिन इसके दक्षिण भारत में व्यापक वर्षा लाने की उम्मीद है।

आईएमडी ने कहा कि मोंथा के प्रभाव के कारण, तमिलनाडु में अगले छह दिनों तक मध्यम वर्षा होने की संभावना है।

बुधवार सुबह जारी मौसम बुलेटिन में चेतावनी दी गई है कि तमिलनाडु, पुडुचेरी और कन्याकुमारी सागर के तटीय क्षेत्रों में 45 से 55 किमी प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं, जो कभी-कभी 65 किमी प्रति घंटे तक पहुंच सकती हैं।

मछुआरों को सलाह दी गई है कि वे हालात सुधरने तक समुद्र तट पर न जाएं। चेन्नई में, आसमान में बादल छाए रहने और कुछ इलाकों में रुक-रुक कर हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है।

ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन और तमिलनाडु आपदा प्रबंधन प्राधिकरण ने संभावित वर्षा संबंधी घटनाओं से निपटने के लिए सभी आपातकालीन नियंत्रण कक्षों को अलर्ट पर रखा है।

तमिलनाडु के अधिकारियों ने स्थानीय प्रशासन को नदियों और जलाशयों में जल स्तर की निगरानी करने और निचले व बाढ़-प्रवण क्षेत्रों में निवारक कदम सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया है।

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