ये रिकवरी एजेंट नियम-कानून को ताक पर रखकर प्रशासन की नाक के नीचे वसूली में लगे हुए हैं। ये आरबीआई की गाइडलाइंस का खुल्लम-खुल्ला मज़ाक उड़ा रहे हैं।
रांची,19.05.2026 – आम आदमी अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए कुकुरमुत्तों की तरह उग आए इन प्राइवेट बैंकों के चक्कर में पड़ जाता है। लेकिन उसके बाद इन प्राइवेट बैंकों के रिकवरी एजेंट अपने ग्राहकों के साथ क्या-क्या सलूक करते हैं, आइए उसका विश्लेषण करते हैं।
केस स्टडी नं. 1
एक महिला, जो एक प्राइवेट कंपनी में काम करती हैं, उन्हें अचानक कुछ रुपयों की आवश्यकता पड़ती है। इसके लिए वह रांची स्थित एक प्राइवेट बैंक — जिसे बैंक कहना भी शायद सही नहीं होगा — में ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया पूरी करती हैं। उन्हें लोन मिल जाता है।
जो ईएमआई बनती है, वह हर महीने उनके वेतन से स्वतः कट जाती है। यहां तक सब कुछ ठीक चल रहा था।
लेकिन एक दिन अचानक एक दुर्घटना घट जाती है। उनका एक्सीडेंट हो जाता है। वह गंभीर रूप से घायल हो जाती हैं। उनके पूरे शरीर में जख्म हो जाते हैं, सिर फट जाता है, सिर में टांके लगते हैं, हाथ टूट जाता है जिस पर प्लास्टर चढ़ाया जाता है। उनकी स्थिति काफी नाजुक हो जाती है। इलाज में काफी रुपए खर्च हो जाते हैं और ऑफिस आना-जाना भी बंद हो जाता है।
इसी कारण उनकी एक ईएमआई बाउंस हो जाती है।
अब यहां से शुरू होता है उस प्राइवेट बैंक के एजेंट का लगातार फोन आना। इसी क्रम में एक एजेंट उनके घर तक पहुंच जाता है। जब घर की महिला सदस्य बताती हैं कि वह गंभीर हालत में हैं और बात करने की स्थिति में नहीं हैं, तो उक्त एजेंट कुछ अपमानजनक बातें कह देता है।
इससे आहत होकर एजेंट के व्यवहार की ऑनलाइन शिकायत उक्त प्राइवेट बैंक में की जाती है, लेकिन बैंक अपने एजेंट का बचाव करते हुए उसे क्लीन चिट दे देता है।
फिर अगला महीना आता है। उस महीने की ईएमआई ऑटो-कट हो जाती है। केवल एक महीने की बकाया ईएमआई रह जाती है। बैंक को यह भी बता दिया गया था कि जैसे-जैसे स्थिति सामान्य होगी, वह राशि भी जमा कर दी जाएगी।
लेकिन सुनने में आया है कि इसके बावजूद वहां के एक रिकवरी एजेंट द्वारा 100 से अधिक कॉल किए जा चुके हैं। इस कारण वह महिला काफी सदमे में हैं। उनका कहना है कि यदि उन्हें कुछ होता है, तो इसके लिए वह प्राइवेट बैंक और उसका रिकवरी एजेंट जिम्मेदार होगा।
यहां यह बताना जरूरी है कि आरबीआई की स्पष्ट गाइडलाइंस हैं, जिनमें लोन लेने वाले व्यक्ति के अधिकार भी शामिल हैं। लेकिन ऐसी कंपनियां इन नियमों का पालन नहीं कर रही हैं।
इस मामले में हमारी टीम लगातार जांच और जानकारी जुटाने में लगी हुई है तथा ऐसे अन्य पीड़ितों की भी तलाश कर रही है, जो इन प्राइवेट बैंकों और उनके एजेंटों के शिकार हुए हैं।
आगे भी इस विषय पर लिखना जारी रहेगा।
***************************
