प्रधानमंत्री ने महान संत श्री गुरु रविदास महाराज जी को श्रद्धांजलि अर्पित की

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने संत श्री गुरु रविदास महाराज जी की जन्‍म जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की। श्री मोदी ने कहा कि उनके विचारों में न्याय और करुणा का भाव सर्वोपरि था जो जनकल्याण की हमारी योजनाओं के मूल में है। श्री मोदी ने कहा, “उन्होंने सामाजिक समरसता और सद्भावना के जिस दीप को प्रज्वलित किया, वह देशवासियों के पथ को सदैव आलोकित करता रहेगा।”

श्री मोदी ने एक्‍स पर पोस्ट किया:

“मानवता के अनन्य उपासक महान संत श्री गुरु रविदास महाराज जी को उनकी जयंती पर कोटि-कोटि नमन। उनके विचारों में न्याय और करुणा का भाव सर्वोपरि था, जो जनकल्याण की हमारी योजनाओं के मूल में है। उन्होंने सामाजिक समरसता और सद्भावना के जिस दीप को प्रज्वलित किया, वह देशवासियों के पथ को सदैव आलोकित करता रहेगा।”

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भारत पर्व भारत की एकता में विविधता को दर्शाता है: उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन

नई दिल्ली –  भारत के उपराष्ट्रपति श्री सी. पी. राधाकृष्णन ने आज रेड फोर्ट लॉन्स पर भारत पर्व 2026 के समापन समारोह में भाग लिया। भारत पर्व को मात्र एक उत्सव से अधिक बताते हुए उन्होंने कहा कि यह आयोजन भारत की एकता में विविधता को प्रतिबिंबित करता है, राष्ट्र की सांस्कृतिक जीवंतता और पर्यटन क्षमता को उजागर करता है तथा विकसित भारत@2047 की ओर सामूहिक संकल्प का प्रतीक है।

समागम को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति ने कहा कि भारत आधुनिक इतिहास में अभूतपूर्व स्तर पर परिवर्तन का साक्षी बन रहा है। उन्होंने उल्लेख किया कि अवसंरचना विस्तार, डिजिटल सशक्तिकरण, वित्तीय समावेशन, सामाजिक सुरक्षा, महिला-नेतृत्व वाले विकास तथा युवा नवाचार अर्थव्यवस्था और समाज की नींव को नया आकार दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह प्रगति लोगों के देशभर में यात्रा करने के बढ़ते आत्मविश्वास में भी दिखाई दे रही है। भारत ने 2025 में 400 करोड़ से अधिक आंतरिक पर्यटक यात्राओं का रिकॉर्ड दर्ज किया, जो न केवल महामारी-पूर्व स्तर पर पूर्ण पुनरुद्धार को दर्शाता है बल्कि नागरिकों में अपनी ही धरती की खोज के लिए नई उत्साह को भी प्रतिबिंबित करता है। उन्होंने भारत की सांस्कृतिक समृद्धि का यादगार प्रदर्शन करने के लिए एकत्रित सभी कलाकारों, कारीगरों और शिल्पकारों को बधाई दी।

समापन समारोह के दौरान, पर्यटन एवं पेट्रोलियम राज्य मंत्री श्री सुरेश गोपी ने कहा कि भारत पर्व भारत के रंगों, ध्वनियों, स्वादों और परंपराओं को एक छत के नीचे लाकर देश की विविधता में निहित असाधारण एकता की याद दिलाता है। उन्होंने कहा कि ऐसे उत्सव नागरिकों को राष्ट्र की आत्मा के निकट लाते हैं, राष्ट्रीय एकीकरण को मजबूत करते हैं तथा भारत की सांस्कृतिक विरासत उसके सबसे बड़े राजदूत के रूप में अपनी प्रासंगिकता को पुनः पुष्ट करते हैं।

भारत पर्व 2026, एक छह दिवसीय राष्ट्रीय सांस्कृतिक एवं पर्यटन उत्सव, भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा गणतंत्र दिवस समारोह के हिस्से के रूप में 26 से 31 जनवरी 2026 तक ऐतिहासिक रेड फोर्ट के सामने लॉन्स तथा ज्ञान पथ पर आयोजित किया गया। समापन समारोह में पर्यटन एवं पेट्रोलियम राज्य मंत्री श्री सुरेश गोपी ने भी शिरकत की।

भारत पर्व पर्यटन मंत्रालय का प्रमुख वार्षिक आयोजन है जो भारत की समृद्ध सांस्कृतिक, कलात्मक, पाक एवं आध्यात्मिक विरासत का उत्सव मनाता है तथा “एक भारत, श्रेष्ठ भारत” और “देखो अपना देश” जैसे राष्ट्रीय पहलों को बढ़ावा देता है। वर्षों से यह उत्सव भारत की एकता में विविधता तथा अपार पर्यटन क्षमता को प्रदर्शित करने वाले प्रमुख मंच के रूप में विकसित हुआ है।

यह उत्सव भारत की विविध सांस्कृतिक विरासत को उजागर करने, आंतरिक पर्यटन को प्रोत्साहित करने, कारीगरों एवं राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के लिए मंच प्रदान करने, पर्यटन जागरूकता बढ़ाने तथा सांस्कृतिक आदान-प्रदान के माध्यम से राष्ट्रीय एकीकरण को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित किया जाता है। इस वर्ष के आयोजन में 34 राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों, 25 से अधिक केंद्रीय मंत्रालयों एवं विभागों तथा देश भर से प्रमुख संस्थानों और संगठनों ने भाग लिया।

इस वर्ष का भारत पर्व विशेष महत्वपूर्ण था क्योंकि यह “वंदे मातरम” के 150 वर्ष पूर्ण होने का प्रतीक था—वह प्रतिष्ठित गीत जिसने भारत के स्वतंत्रता आंदोलन को प्रेरित किया और आज भी एकता, सांस्कृतिक गौरव तथा मातृभूमि के प्रति प्रेम का प्रतीक बना हुआ है।भारत पर्व 2026 में भारी जन भागीदारी दर्ज की गई, जिसमें औसतन प्रतिदिन लगभग 40,000 आगंतुकों की उपस्थिति रही।

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योगासन स्पोर्ट एसोसिएशन ऑफ झारखंड की बार्षिक आम बैठक सम्पन्न

रांची,01.02.2026 – महावीर टावर मेन रोड रांची में योगासन स्पोर्ट एसोसिएशन ऑफ झारखंड की बार्षिक आम बैठक अधिवक्ता संजय कुमार की अध्यक्षता में की गई, इस बैठक में 16 जिला के अध्यक्ष एवं सचिव मौजूद रहे |

सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि वर्ष 2026-27 की सब- जुनियर एवं जुनियर राज्य स्तरीय प्रतियोगिता लातेहार एवं सीनियर की प्रतियोगिता जामताड़ा में सितम्बर माह में कराने का निर्णय लिया गया, सभी जिला को पांच – पांच नए निर्णायक तैयार करना है, जिला योग केन्द्र को जिला संघ द्वारा एक वर्ष का संबंध्ता दे सकते हैं |

इस बैठक में सर्वसम्मति से विपिन कुमार पाण्डेय को राज्य संघ का मुख्य सलाहकार बनाया गया | इस बैठक में मुख्य रुप से राज्य संघ के अध्यक्ष श्री मनोज तिवारी सचिव चन्दू कुमार एवं कोषाध्यक्ष प्रशांत कुमार सिंह, संतोषी साहु, मलय कुमार दे, कुणाल कुमार, पूजा सिंह, दीपक कुमार रजक, सर्वेश कुमार सिंह, जन्मेजय सिंह, प्रहलाद भगत, रवि शंकर नेवार, दयनन्द जयसवाल, अमित स्वर्णकार, प्रदीप कुमार ठाकुर, डा. परासर, आकाश सेठ, राहुल सिंह, विनित सिंह, सुरभी सिंह, उपस्थित रहे |

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भारत पर्व 2026 में भव्य कुचिपुड़ी नृत्‍य प्रदर्शन के साथ आंध्र प्रदेश दिवस मनाया गया

नई दिल्ली – ऐतिहासिक लाल किले में आयोजित भारत पर्व 2026 के पावन अवसर पर, 30 जनवरी 2026 आंध्र प्रदेश दिवस के रूप में मनाई गयी, जो राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक, कलात्मक और पर्यटन विरासत का एक जीवंत प्रदर्शन था।

भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय द्वारा गणतंत्र दिवस समारोह के अंतर्गत आयोजित भारत पर्व, ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना के तहत राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की संस्कृति, पर्यटन, व्यंजन, हथकरघा और विरासत को दर्शाने वाला एक भव्य राष्ट्रीय मंच है।

आंध्र प्रदेश पवेलियन एक प्रमुख आकर्षण के रूप में उभरा, जिसमें जीवंत थीम-आधारित पर्यटन प्रदर्शन, एक पारंपरिक फूड कोर्ट और एक उत्कृष्ट हथकरघा प्रदर्शनी प्रस्तुत की गई। इसमें आगंतुकों को राज्य की ऐतिहासिक विरासत, कलात्मक परंपराओं और रचनात्मक उत्कृष्टता की एक जीवंत झलक मिली।

आंध्र प्रदेश दिवस का एक प्रमुख आकर्षण 46 प्रतिष्ठित कलाकारों द्वारा भव्य कुचिपुड़ी शास्त्रीय नृत्य प्रस्तुति थी, जिसने आंध्र प्रदेश की शास्त्रीय नृत्य परंपरा की गरिमा, भव्यता और आध्यात्मिक गहराई को जीवंत कर दिया। इस प्रस्तुति ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया और राज्य की गहरी सांस्कृतिक भावना और शास्त्रीय कला रूपों के संरक्षण के प्रति समर्पण को दर्शाया।

भारतीय संस्कृति के प्रशंसक, पर्यटक और उत्सव में शामिल होने वाले लोग बड़ी संख्या में समारोह में शामिल हुए। इन्‍होंने कलाकारों का उत्साहवर्धन किया और इस प्रतिष्ठित राष्ट्रीय मंच पर आंध्र प्रदेश के गौरव में भागीदार बने।

भारत पर्व 2026 में आंध्र प्रदेश दिवस का उत्सव भारत की सांस्कृतिक विविधता और एकता की एक सशक्त अभिव्यक्ति के रूप में सामने आया, जिसने सांस्कृतिक आदान-प्रदान और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देने में इस उत्सव की भूमिका को और मजबूत किया है।

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अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने उम्‍मीद केन्‍द्रीय पोर्टल पर सर्वे मॉड्यूल और वक्फ प्रॉपर्टी लीज मॉड्यूल नामक दो अतिरिक्त मॉड्यूल लॉन्च किए

नई दिल्ली – अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने एकीकृत वक्फ प्रबंधन, सशक्तिकरण, दक्षता और विकास (उम्‍मीद) केंद्रीय पोर्टल के माध्यम से वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन को पारदर्शी, जनहितैषी और जवाबदेह बनाने के अपने निरंतर प्रयासों के तहत 30 जनवरी 2026 को दो अतिरिक्त मॉड्यूल – सर्वेक्षण मॉड्यूल और वक्फ संपत्ति पट्टा मॉड्यूल लॉन्च किए।

अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय के सचिव डॉ. चंद्र शेखर कुमार ने मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में नए मॉड्यूल्‍स का शुभारंभ किया।

सर्वेक्षण मॉड्यूल इस पोर्टल पर वक्फ संपत्तियों के सर्वेक्षण से संबंधित जानकारी को एकत्रित करने, प्रबंधित करने और अद्यतन करने के लिए एक व्यापक डिजिटल ढांचा प्रदान करता है।

वक्फ संपत्ति पट्टा प्रबंधन मॉड्यूल को पोर्टल के माध्यम से वक्फ संपत्तियों की पट्टा संबंधी जानकारी के संपूर्ण प्रबंधन को सुगम बनाने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह मॉड्यूल पट्टा संबंधी जानकारी, पट्टा अवधि, पट्टा राशि और अन्य प्रासंगिक विवरणों को व्यवस्थित और पारदर्शी तरीके से रिकॉर्ड करने और उनकी निगरानी करने में सक्षम बनाता है, जिससे वक्फ संपत्तियों के पट्टा में जवाबदेही और निगरानी को मजबूती मिलती है।

यह शुभारंभ वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में दक्षता, पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने के लिए डिजिटल शासन विधियों का लाभ उठाने के लिए मंत्रालय के निरंतर प्रयासों को दर्शाता है।

डॉ. चंद्र शेखर कुमार ने सभी राज्य/केंद्र शासित प्रदेश वक्फ बोर्डों को इन मॉड्यूल के व्यापक कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने और पात्र लाभार्थियों के बीच जागरूकता बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया है।

अल्पसंख्यक मामलों के केंद्रीय मंत्री श्री किरेन रिजिजू ने 6 जून 2025 को उम्‍मीद केंद्रीय पोर्टल की शुरूआत की थी। यह एकीकृत वक्फ प्रबंधन, सशक्तिकरण, दक्षता और विकास अधिनियम, 1995 के तहत वक्फ संपत्तियों के वास्तविक समय में अपलोड करने, सत्यापन और निगरानी के लिए एक केंद्रीकृत डिजिटल मंच के रूप में कार्य करता है।

इस पोर्टल का उद्देश्य अधिक पारदर्शिता, जवाबदेही और सार्वजनिक भागीदारी को बढ़ावा देकर पूरे भारत में वक्फ संपत्तियों के प्रशासन के तरीके में एक मौलिक बदलाव लाना है।

इसकी प्रमुख विशेषताओं में सभी वक्फ संपत्तियों की जियो-टैगिंग के साथ एक व्यापक डिजिटल सूची का निर्माण, समय पर और प्रभावी प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने के लिए एक ऑनलाइन शिकायत निवारण तंत्र, पारदर्शी पट्टे और उपयोग ट्रैकिंग, जीआईएस मैपिंग और अन्य ई-गवर्नेंस विधियों के साथ एकीकरण और सत्यापित रिकॉर्ड और रिपोर्ट तक सार्वजनिक पहुंच शामिल हैं।

अल्पसंख्यक मामलों का मंत्रालय देश भर में वक्फ संपत्तियों के कुशल प्रबंधन के लिए राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और राज्य वक्फ बोर्डों के साथ मिलकर काम कर रहा है।

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विकसित भारत के लिए आईआईसीए और नेशनल प्रोडक्टिविटी काउंसिल के बीच रणनीतिक सहयोग की संभावनाओं की खोज

नई दिल्ली –  इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ कॉरपोरेट अफेयर्स (IICA) ने नेशनल प्रोडक्टिविटी काउंसिल (NPC) के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल की मेजबानी की, जिसका नेतृत्व महानिदेशक श्रीमती नीरजा शेखर तथा उप महानिदेशक (ग्रुप) श्री उमाशंकर प्रसाद ने किया। इस बैठक का उद्देश्य प्रशिक्षण, अनुसंधान, उत्पादकता, स्थिरता और अनुपालन सहयोग के क्षेत्रों में संभावित साझेदारी की तलाश करना था।

प्रतिनिधिमंडल का स्वागत आईआईसीए के महानिदेशक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी श्री ज्ञानेश्वर कुमार सिंह ने किया और अतिथियों को शॉल एवं स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया।

अपने संबोधन में महानिदेशक एवं सीईओ, आईआईसीए ने उद्योग जगत से उभरती और निरंतर बदलती मांगों पर प्रकाश डाला तथा संस्थानों के लिए राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के अनुरूप प्रासंगिक बने रहने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि देश के नेतृत्व ने भविष्य के लिए एक स्पष्ट दृष्टि प्रस्तुत की है और “विकसित भारत” के लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए संस्थानों को व्यक्तिगत तथा सामूहिक दोनों स्तरों पर योगदान देना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि एनपीसी जैसे संस्थागत साझेदारी उभरती चुनौतियों—शासन, उत्पादकता, स्थिरता और नवाचार—का प्रभावी समाधान खोजने में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

इस अवसर पर आईआईसीए के विभिन्न स्कूलों और केन्द्रों के प्रमुखों द्वारा संस्थान की भूमिका और गतिविधियों पर विस्तृत प्रस्तुतियाँ दी गईं। इन प्रस्तुतियों में शिक्षा, प्रशिक्षण, अनुसंधान, वकालत (एडवोकेसी) और परामर्श सेवाओं के माध्यम से सरकार एवं निजी क्षेत्र की पहलों को समर्थन देने में आईआईसीए की बहुआयामी भूमिका को रेखांकित किया गया।

संवाद के दौरान एनपीसी की महानिदेशक श्रीमती नीरजा शेखर ने बताया कि एनपीसी की स्थापना 1958 में, स्वतंत्रता के तुरंत बाद उस समय हुई जब देश सीमित संसाधनों और उत्पादकता बढ़ाने की तात्कालिक आवश्यकता से जूझ रहा था। उन्होंने जापान की ऐतिहासिक उत्पादकता यात्रा का उल्लेख किया, जिसने भारत में संस्थागत रूप से उत्पादकता आंदोलन की नींव रखी। तब से एनपीसी ने अपना दायरा उद्योग से आगे बढ़ाकर कृषि, सेवाएँ, एमएसएमई, स्थिरता, हरित उत्पादकता और ईएसजी आधारित पहलों तक विस्तारित किया है।

उन्होंने एमएसएमई और स्टार्टअप्स के लिए अनुपालन सहयोग में एनपीसी की बढ़ती भूमिका पर भी प्रकाश डाला, जिसमें पर्यावरण ऑडिट, ऊर्जा अनुपालन, जल प्रबंधन, बीआरएसआर रिपोर्टिंग और ईएसजी परामर्श शामिल हैं। एनपीसी पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय के साथ भी उभरते अनुपालन ढाँचों और उद्योग की नियामकीय आवश्यकताओं के समर्थन हेतु पेशेवर क्षमता निर्माण पर कार्य कर रहा है।

अपने संबोधन में आईआईसीए के महानिदेशक एवं सीईओ ने कहा कि अब प्रशिक्षण संस्थान, शोध निकाय और नीति संगठन अलग-अलग काम नहीं कर सकते। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय एक्सपोज़र कार्यक्रम, सीएसआर प्रभाव ढाँचे, अनुपालन क्षमता निर्माण और अनुप्रयुक्त अनुसंधान जैसे क्षेत्रों को तत्काल सहयोग के प्रमुख बिंदुओं के रूप में चिन्हित किया, जहाँ दोनों संस्थान मिलकर राष्ट्रीय स्तर पर व्यापक प्रभाव पैदा कर सकते हैं।

दोनों संस्थानों ने आगे मिलकर कार्य करने की मजबूत प्रतिबद्धता व्यक्त की, ताकि आईआईसीए की नीति अनुसंधान, प्रशिक्षण और परामर्श क्षमता को एनपीसी की व्यवहारिक और कार्यान्वयन आधारित उत्पादकता विशेषज्ञता के साथ जोड़कर भारत को एक उच्च आय, प्रतिस्पर्धी, नवोन्मेषी और सतत अर्थव्यवस्था की ओर अग्रसर किया जा सके। इस कार्यक्रम का समन्वय डॉ. नवीन सिरोही, प्रमुख –

स्कूल ऑफ फाइनेंस एंड मैनेजमेंट, आईआईसीए द्वारा किया गया।

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प्रधानमंत्री ने पटना पक्षी अभयारण्य और छारी-ढांड में नए रामसर स्थलों का स्वागत किया

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी ने एटा (उत्तर प्रदेश) में स्थित पटना पक्षी अभयारण्य और कच्छ (गुजरात) में स्थित छारी-ढांड को रामसर स्थल के रूप में शामिल किए जाने का स्वागत किया है। श्री मोदी ने स्थानीय लोगों और आर्द्रभूमि के संरक्षण के प्रति समर्पित सभी लोगों को बधाई देते हुए कहा कि ये पहचान जैव विविधता के संरक्षण और महत्वपूर्ण पारिस्थितिक तंत्रों की रक्षा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता की पुष्टि करती हैं।

प्रधानमंत्री ने केंद्रीय मंत्री श्री भूपेंद्र यादव की पोस्ट का जवाब देते हुए एक्‍स पर पोस्ट किया:

“यह जानकर अत्यंत प्रसन्नता हुई कि एटा (उत्तर प्रदेश) में स्थित पटना पक्षी अभयारण्य और कच्छ (गुजरात) में स्थित छारी-ढांड को रामसर स्थल के रूप में शामिल‍ किया गया है। वहां के स्थानीय निवासियों के साथ-साथ आर्द्रभूमि के संरक्षण के प्रति समर्पित सभी लोगों को हार्दिक बधाई। ये पहचान जैव विविधता के संरक्षण और महत्वपूर्ण पारिस्थितिक तंत्रों की रक्षा के प्रति हमारी प्रतिबद्धता की पुष्टि करती हैं। आशा है कि ये आर्द्रभूमियां असंख्य प्रवासी और स्थानीय प्रजातियों के लिए सुरक्षित आवास के रूप में फलती-फूलती रहेंगी।”

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राष्ट्रीय महिला आयोग ने आज अपना 34वां स्थापना दिवस मनाया

नई दिल्ली – राष्ट्रीय महिला आयोग (एनसीडब्ल्यू) ने आज नई दिल्ली के भारत मंडपम में अपना 34वां स्थापना दिवस मनाया। यह पूरे भारत में महिलाओं के अधिकारों और गरिमा की रक्षा करने, बढ़ावा देने और उनकी उन्नति के प्रति तीन दशकों से अधिक की अटूट प्रतिबद्धता का स्मरण किया।

इस अवसर पर केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित थे। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री श्रीमती अन्नपूर्णा देवी और महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित थीं।

एनसीडब्ल्यू की 34 वर्षों की यात्रा को याद करते हुए, स्थापना दिवस कार्यक्रम का आयोजन “स्वास्थ्य ही सशक्तिकरण” विषय के इर्द-गिर्द किया गया, जो इस विचार को सुदृढ़ करता है कि महिलाओं का स्वास्थ्य सशक्तिकरण, सामाजिक समानता और राष्ट्रीय विकास के मूल में निहित है।

श्री जगत प्रकाश नड्डा ने सभा को संबोधित करते हुए राष्ट्र निर्माण में महिलाओं के स्वास्थ्य की केंद्रीय भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने कहा, “एक स्वस्थ महिला एक स्वस्थ पीढ़ी को जन्म देती है, और एक स्वस्थ पीढ़ी एक मजबूत, लचीले और समृद्ध राष्ट्र का आधार होती है।”

उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि महिलाओं के स्वास्थ्य में निवेश करना केवल एक कल्याणकारी उपाय नहीं है, बल्कि भारत के भविष्य के लिए एक रणनीतिक अनिवार्यता है।

श्रीमती अन्नपूर्णा देवी ने अपने संबोधन में पोषण अभियान के परिवर्तनकारी प्रभाव का उल्‍लेख करते हुए कहा कि पोषण और स्वास्थ्य देखभाल को ध्‍यान में रखकर किए गए प्रयासों ने देश भर में महिलाओं और बच्चों को सशक्‍त बनाने में बहुत योगदान दिया है।

राष्ट्रीय महिला आयोग की अध्यक्ष श्रीमती विजया राहटकर ने आयोग का दृष्टिकोण दोहराया।

समारोह के अंतर्गत, एनसीडब्‍ल्‍यू के कैलेंडर 2026 में शामिल आईएसआरओ और डीआरडीओ के प्रख्यात वैज्ञानिकों को राष्ट्र निर्माण में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। भारत की मिसाइल महिला के रूप में प्रसिद्ध डॉ. टेसी थॉमस को रक्षा विज्ञान में उनकी अनुकरणीय सेवा और नेतृत्व के लिए सम्मानित किया गया।

आयोग ने पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित और आईआईटी मद्रास के निदेशक श्री वी. कामाकोटी को “तेरे मेरे सपने” के लिए एआई मॉड्यूल विकसित करने में उनके अमूल्य सहयोग के लिए सम्मानित किया, यह विवाह पूर्व व्‍यवहार और परामर्श को मजबूत करने के उद्देश्य से एनसीडब्ल्यू का एक प्रमुख कार्यक्रम है।

इस कार्यक्रम ने स्वास्थ्य, नीतिगत समर्थन, नवाचार और समावेशी साझेदारी के माध्यम से महिला सशक्तिकरण को आगे बढ़ाने के लिए एनसीडब्ल्यू की अटूट प्रतिबद्धता की पुष्टि की आयोग भारत में महिलाओं के लिए एक सुरक्षित, स्वस्थ और अधिक न्यायसंगत समाज के निर्माण के अपने मिशन को जारी रखे हुए है।

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केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने नीति आयोग के अटल इनोवेशन मिशन के गणतंत्र दिवस कार्यक्रम में देशभर की अटल टिंकरिंग लैब्स (ATLs) के स्कूली बच्चों से संवाद किया

नई दिल्ली – केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) तथा प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत का भविष्य इसके युवाओं और उनकी नवाचार (इन्नोवेशन) की क्षमता से तय होगा। उन्होंने युवा नवाचारियों को ‘विकसित भारत @2047’ के वास्तुकार के रूप में वर्णित किया।

मंत्री महोदय 77वें गणतंत्र दिवस समारोह की पूर्व संध्या पर अटल इनोवेशन मिशन (AIM), नीति आयोग द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में देश भर के अटल टिंकरिंग लैब्स (ATLs) के स्कूली छात्रों के साथ बातचीत कर रहे थे।

विभिन्न क्षेत्रों और पृष्ठभूमियों के छात्रों को संबोधित करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि भारत दुनिया के सबसे युवा देशों में से एक है, जिसकी आबादी का एक बड़ा हिस्सा 35 वर्ष से कम आयु का है। उन्होंने कहा कि यह जनसांख्यिकीय शक्ति अवसर और जिम्मेदारी दोनों लेकर आती है। आने वाले दशक, विशेष रूप से वर्ष 2047 का विजन, आज के छात्रों के विचारों, कौशल और नवाचार करने के उनके आत्मविश्वास से आकार लेगा।

मंत्री ने समझाया कि अटल इनोवेशन इकोसिस्टम की परिकल्पना जीवन में जल्दी ही इस आत्मविश्वास को जगाने के लिए की गई थी, जिससे छात्र अपनी ताकत को पहचान सकें, वास्तविक दुनिया की समस्याओं का पता लगा सकें और तकनीक के माध्यम से समाधान विकसित कर सकें। उन्होंने कहा कि यह पहल युवा मस्तिष्क को निष्क्रिय शिक्षण (पैसिव लर्निंग) से समस्या-समाधान, टीम वर्क और प्रयोग की ओर ले जाने के लिए डिज़ाइन की गई है, जो प्रौद्योगिकी-संचालित भविष्य के लिए आवश्यक हैं।

छात्रों के साथ खुलकर संवाद करते हुए, मंत्री महोदय ने उन्हें प्रोत्साहित किया कि वे तकनीक को केवल उपभोग के साधन के रूप में नहीं, बल्कि सृजन के एक मंच के रूप में देखें। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आधुनिक शिक्षा अब पूरी तरह से भौतिक पुस्तकालयों या कोचिंग केंद्रों पर निर्भर नहीं है, क्योंकि डिजिटल पहुंच ने ज्ञान का लोकतांत्रीकरण कर दिया है। उन्होंने कहा कि जो बात सबसे ज्यादा मायने रखती है, वह है तकनीक का समझदारी, उत्पादकता और नैतिकता के साथ उपयोग करने की क्षमता।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने शुरुआती वर्षों के दौरान मार्गदर्शन (मेंटरिंग) के महत्व पर भी बात की और उल्लेख किया कि किशोरावस्था वह चरण है जहाँ रुचियाँ, क्षमताएँ और जीवन के मार्ग आकार लेना शुरू करते हैं। उन्होंने कहा कि अटल टिंकरिंग लैब्स जैसे व्यवस्थित नवाचार मंच छात्रों को यह पहचानने में मदद करते हैं कि वे क्या सबसे बेहतर कर सकते हैं, बजाय इसके कि वे एक समान या पारंपरिक करियर विकल्पों के पीछे भागें।

संवाद के दौरान स्वास्थ्य, स्वच्छता, सुरक्षा, कृषि, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स, पर्यावरण और पीयर-टू-पीयर लर्निंग (सहपाठियों से सीखना) जैसे विषयों पर छात्रों द्वारा प्रस्तुत नवाचारों की विस्तृत श्रृंखला का उल्लेख करते हुए मंत्री ने कहा कि ये विचार दर्शाते हैं कि नवाचार अब केवल महानगरों तक सीमित नहीं रह गया है। उन्होंने गौर किया कि आज भारत के लगभग आधे स्टार्टअप टियर-2 और टियर-3 शहरों से उभर रहे हैं, और यह बदलाव निरंतर संस्थागत सहयोग और अवसरों तक समान पहुंच के कारण संभव हुआ है।

मंत्री ने छात्रों को क्षेत्र-विशिष्ट नवाचारों को खोजने के लिए भी प्रोत्साहित किया और कहा कि स्थानीय भूगोल और संसाधन अनूठी संभावनाएँ प्रदान करते हैं। उन्होंने कहा कि तटीय, द्वीप, पहाड़ी और खनन क्षेत्रों के छात्र ऐसे समाधान विकसित करने के लिए बेहतर स्थिति में हैं जो दूसरे नहीं कर सकते, जिससे एक अलग पहचान और टिकाऊ नवाचार मार्ग तैयार होते हैं।

नवाचार और उद्यमिता के बढ़ते मेल पर प्रकाश डालते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने छात्रों को केवल प्रोटोटाइप (नमूनों) से आगे सोचने और उनके विस्तार (स्केलेबिलिटी), बाजार संपर्कों और दीर्घकालिक व्यवहार्यता की दिशा में काम करने की सलाह दी। उन्होंने युवा नवाचारियों के लिए बढ़ते सहायता तंत्र के बारे में बात की, जिसमें विभिन्न विज्ञान और प्रौद्योगिकी कार्यक्रमों के माध्यम से वित्त पोषण, परामर्श, पेटेंट सुविधा और उद्योग जगत से जुड़ाव शामिल है।

नवाचार को एक निरंतर यात्रा बताते हुए, मंत्री ने छात्रों से सहयोग करने, विचारों का आदान-प्रदान करने, सहकर्मी समूह बनाने और सामूहिक रूप से सीखने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि ऐसा सहयोग न केवल समाधानों को मजबूत करता है, बल्कि नेतृत्व, संचार और उद्यमशीलता के कौशल भी विकसित करता है जो भविष्य के कार्यबल के लिए आवश्यक हैं।

संवाद के अंत में मंत्री ने छात्रों को वर्तमान दशक में उपलब्ध अवसरों का अधिकतम लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित किया और इसे व्यक्तिगत विकास और राष्ट्रीय परिवर्तन दोनों के लिए एक निर्णायक चरण बताया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जिज्ञासा, अनुशासन और सही मार्गदर्शन के साथ, आज के युवा नवाचारी एक आत्मनिर्भर, तकनीक-संचालित और समावेशी भारत को आकार देने में निर्णायक भूमिका निभाएंगे।

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डिब्रूगढ़ का उदय और स्वदेशी पुनरुत्थान, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में पूर्वोत्तर के बदलाव को दर्शाता है: सर्बानंद सोणोवाल

नई दिल्ली  – केन्द्रीय पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोणोवाल ने केन्द्रीय गृह मंत्री और सहकारिता मंत्री अमित शाह तथा असम के मुख्यमंत्री डॉ. हिमंता बिस्वा सरमा के साथ मिलकर डिब्रूगढ़ में कई बुनियादी ढांचा परियोजनाओं की आधारशिला रखी। यह डिब्रूगढ़ को असम की दूसरी राजधानी बनाने की दिशा में एक अहम कदम है। इन 5 परियोजनाओं का शिलान्यास और उद्घाटन कुल 1,715 करोड़ रूपए की लागत से पूरा होने की उम्मीद है।

गृह मंत्री अमित शाह ने कई अहम पहलों का उद्घाटन किया और उनकी आधारशिला रखी, जिनमें नई असम विधानसभा भवन और एमएलए आवासीय परिसर का निर्माण, विश्व स्तरीय बहुउद्देश्यीय खेल परिसर, वन्यजीव स्वास्थ्य एवं अनुसंधान संस्थान की स्थापना, और डिब्रूगढ़ क्षेत्र में तालाबों और वेटलैंड्स(जलभूमियों) का बड़े पैमाने पर कायाकल्प शामिल है। ये पहल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में प्रशासनिक कार्यों के विकेंद्रीकरण, शासन संरचना को मजबूत करने और ऊपरी असम में क्षेत्रीय विकास को तेज करने के लक्ष्य को आगे बढ़ाने के लिए किया जा रहा है।

इस अवसर पर बोलते हुए केन्द्रीय मंत्री सर्बानंद सोणोवाल ने कहा, “आज डिब्रूगढ़ के लिए एक ऐतिहासिक दिन है। जैसे ही माननीय गृह मंत्री अमित शाह जी ने कई परियोजनाओं की आधारशिला रखी, यह परियोजनाएं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में डिब्रूगढ़, ऊपरी असम और पूरे पूर्वोत्तर के विकास के लिए उठाए जा रहे परिवर्तनकारी कदमों को दर्शाते हैं। पिछले एक दशक में, प्रधानमंत्री मोदी जी के दूरदर्शी नेतृत्व में असम में अभूतपूर्व बदलाव आया है, जहां जनता की आकांक्षाओं को सुशासन के माध्यम से वास्तविक नतीजों में बदला गया है।”

सर्बानंद सोणोवाल ने कहा कि नया विधानसभा परिसर, विधायक आवास, अंतरराष्ट्रीय स्तर की खेल सुविधाएं, वन्यजीव अनुसंधान संस्थान और जलभूमि(वेटलैंड) को फिर से बेहतर बनाने जैसी बुनियादी ढांचा परियोजनाएं डिब्रूगढ़ को नई गति देंगे और असम के समग्र विकास को भी मजबूत करेंगें। प्रशासनिक क्षमता को मजबूती प्रदान करने के लिए, गृह मंत्री अमित शाह ने डिब्रूगढ़ में नई असम विधान सभा भवन की आधारशिला रखी, जिसका अनुमानित लागत 284 करोड़ रूपए है। यह परियोजना डिब्रूगढ़ को असम की दूसरी राजधानी के रूप में स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

इसके अलावा केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने खानिकर परेड ग्राउंड में राष्ट्रीय आपदा शमन कोष(एनडीएमएफ) फंड के तहत असम वेटलैंड बहाली और कायाकल्प परियोजना का उद्घाटन किया। यह कार्यक्रम असम के लंबे समय से चले आ रहे बाढ़ रोकथाम और जलवायु लचीलापन ढांचा को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम था। 692 करोड़ रूपए के निवेश से लागू की गई यह परियोजना असम के 9-जिलों में फैले 125-वेटलैंड्स के पुनर्जीवन पर केंद्रित है। इस पहल ने जलभराव, गाद जमा होने और पर्यावरण के खराब होने जैसी लंबे समय से चली आ रही चुनौतियों का भी समाधान किया।

खेल विकास को बढ़ावा देने के लिए शाह ने डिब्रूगढ़ के खानिकार में बहुउद्देश्यीय खेल परिसर के पहले चरण का उद्घाटन किया और मुख्य स्टेडियम में बैठने की क्षमता 5,000 से बढ़ाकर 35,000 करने के लिए आधारशिला रखी, ताकि शहर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेल आयोजनों की मेजबानी कर सके। असम की दूसरी राजधानी के रूप में डिब्रूगढ़ का उभरना और मिसिंग समुदाय की समृद्ध विरासत का उत्सव, मोदी सरकार में पूर्वोत्तर के बढ़ते आत्मविश्वास का प्रतीक है।

सोणोवाल ने कहा कि डिब्रूगढ़ ने ने राज्य की दूसरी राजधानी के रूप में खुद को स्थापित करने में बड़ा कदम उठाया है। सोनोवाल ने कहा, “डिब्रूगढ़ को असम की दूसरी राजधानी घोषित किए जाने के बाद, राज्य सरकार ने ज़रूरी बुनियादी ढ़ांचे और आधुनिक सुविधाओं का निर्माण करने के लिए तेज़ी से काम किया, जिससे आज के कार्यक्रम को सफलतापूर्वक पूरा करना संभव हो पाया।”

केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व और केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह के मार्गदर्शन में असम में निरंतर शांति और स्थिरता बनी रही है, जिससे विभिन्न क्षेत्रों में तेज़ विकास हो रहा है।

सोणोवाल ने कहा, “स्थायी शांति ने राज्य में आर्थिक विकास और बुनियादी ढांचे के विस्तार की नींव रखी है। पीएम मोदी जी के गतिशील नेतृत्व और क्षेत्र पर विशेष ध्यान के कारण असम देश की सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं में से एक बनकर उभरा है, जिसे केंद्र सरकार का निरंतर सहयोग प्राप्त हुआ है।”

सर्बानंद सोणोवाल ने पूर्व की कांग्रेस सरकारों की कड़ी आलोचना करते हुए उन्हें लंबे समय तक चली उपेक्षा, भ्रष्टाचार और शासन विफलताओं का प्रतीक बताया, जिसने असम के विकास की अमूल्य संभावनाओं और अवसरों को खत्म कर दिया।

केंद्रीय मंत्री ने असम के विकास के लिए निरंतर मार्गदर्शन और समर्थन देने के लिए गृह मंत्री अमित शाह का आभार व्यक्त किया। साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री डॉ. हिमंता बिस्वा सरमा के नेतृत्व की सराहना की, जिन्होंने विकास पहलों को तेजी और समन्वय के साथ को आगे बढ़ाया।

सोणोवाल ने कहा कि वर्ष 2014 से, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में बीते एक दशक में एक बड़ा बदलाव देखने को मिला है, जिसमें असम और पूर्वोत्तर के राज्य भारत की राष्ट्रीय विकास यात्रा के हिस्से के रूप में आत्मविश्वास से आगे बढ़ रहे हैं।ये पहल सरकार के अमृत काल विजन के अनुरूप है, जो समावेशी विकास, बुनियादी ढांचा निर्माण और राष्ट्रीय आत्मनिर्भरता पर केंद्रित है।

सोणोवाल ने कहा कि एनडीए की “डबल इंजन” सरकार औद्योगिक विकास, रोजगार सृजन और सभी समुदायों के लिए समान विकास की दिशा में निरंतर कार्य कर रही है। उन्होंने बराक और ब्रह्मपुत्र घाटियों, पहाड़ियों और मैदानों के लोगों से असम के विकास लक्ष्यों को आगे बढ़ाने के लिए एकजुट रहने की अपील की।

सोणोवाल ने असम और पूर्वोत्तर में शांति, बुनियादी ढांचा विकास, सांस्कृतिक सशक्तिकरण और दीर्घकालिक समृद्धि को बढ़ावा देने वाली पहलों का समर्थन करने की अपनी प्रतिबद्धता दोहराई। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में असम ने अभूतपूर्व विकास और सांस्कृतिक पुनरुत्थान का दौर देखा है, जिसमें बड़े बुनियादी ढांचा परियोजनाओं और स्वदेशी पहचान पर नए सिरे से जोर दिया गया है।

सोणोवाल ने कहा कि दो कार्यक्रम-डिब्रूगढ़ में असम वेटलैंड्स रिस्टोरेशन एंड रीजुवनेशन प्रोजेक्ट का शुभारंभ और ढेमाजी में 10वें मिसिंग युवा महोत्सव का समापन- विकास, आपदा राहत और सांस्कृतिक संरक्षण के प्रति सरकार के समन्वित दृष्टिकोण को दर्शाता है।

सोणोवाल ने कहा कि असम की वेटलैंड्स ने ऐतिहासिक रूप से बाढ़ नियंत्रण, जैव विविधता संरक्षण और लोगों की आजीविका समर्थन में अहम भूमिका निभाई है, लेकिन दशकों से अतिक्रमण, अव्यवस्थित विकास और गाद जमने होने से उनकी प्राकृतिक क्षमता कमजोर हो गई है। उन्होंने कहा कि इस बहाली के प्रयास से पारिस्थितिक संतुलन, भूजल पुनर्भरण और सतत बाढ़ प्रबंधन प्रणालियों को मजबूती मिली है।

इस पहल से लगभग 7.5 लाख लोगों को बाढ़ से राहत मिलेगी, करीब 77,000 हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होगी, बाढ़ की तीव्रता कम होगी और पानी जमा करने की क्षमता बढ़ने से भूजल स्तर में वृद्धि होगी। उन्होंने बताया कि इन 15 बड़े तालाबों से सिंचाई की सुविधा मिलेगी, जिससे असम के किसान वर्ष में तीन बार फसल उगा सकेंगे, पशुपालन को बढ़ावा मिलेगा और डेयरी उद्योग को भी मजबूती मिलेगी। ये जलाशय जलक्रीड़ा के लिए भी उपयोगी होंगे और पर्यटन के आकर्षण केंद्र बनेंगे।

डिब्रूगढ़ में आयोजित इस कार्यक्रम में केंद्रीय पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री भूपेंद्र यादव, असम के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री केशब महंता, असम के जल संसाधन मंत्री पिजुश हजारिका तथा राज्य और केंद्र सरकार के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे। गृह मंत्री अमित शाह धेमाजी के करेंग चपोड़ी में आयोजित 10वें मिसिंग युवा महोत्सव के समापन समारोह में भी शामिल हुए। यह महोत्सव असम सरकार द्वारा मिसिंग समुदाय की एकता, संस्कृति और पहचान के उत्सव के रूप में आयोजित किया गया था। विदेश एवं वस्त्र मंत्रालय में राज्य मंत्री पबित्रा मार्गेरिटा भी डिब्रूगढ़ में आयोजित समारोह में उपस्थित थे।

सोणोवाल ने कहा कि यह महोत्सव स्वदेशी परंपराओं के संरक्षण, युवाओं के सशक्तिकरण और सामुदायिक भागीदारी को मजबूत करने के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि यह कार्यक्रम असम के सबसे जीवंत स्वदेशी समुदायों में से एक की जीवित विरासत को उजागर करता है और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति तथा सामाजिक एकता का मंच प्रदान करता है।

समापन समारोह में असम के शिक्षा मंत्री डॉ. रनोज पेगू, लखीमपुर के सांसद प्रदन बरुआ और मिसिंग स्वायत्त परिषद के मुख्य कार्यकारी सदस्य परमानंद चायांगिया भी उपस्थित थे।

सोणोवाल ने अंत में कहा कि सरकार “विकसित भारत” के राष्ट्रीय विजन के अनुरूप एक मजबूत, आत्मनिर्भर और सांस्कृतिक रूप से आत्मविश्वासी असम के निर्माण के लिए प्रतिबद्ध है।


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गणतंत्र दिवस समारोह 2026 में आमंत्रित जनजातीय अतिथियों के लिए जनजातीय कार्य मंत्रालय की ओर से स्वागत समारोह का आयोजन किया गया

नई दिल्ली – जनजातीय कार्य मंत्रालय ने आज गणतंत्र दिवस समारोह (आरडीसी) 2026 में भाग लेने के लिए आमंत्रित देश भर से आए 90 विशिष्ट जनजातीय अतिथियों के सम्मान में एक विशेष स्वागत समारोह का आयोजन किया। यह स्वागत समारोह जनजातीय कार्य मंत्री और जनजातीय कार्य के राज्य मंत्री की ओर से आयोजित किया गया था। इसमें भारत के जनजातीय समुदायों की जीवंत सांस्कृतिक विरासत, योगदान और राष्ट्रीय भावना का उत्सव मनाया गया। प्रधानमंत्री के दूरदर्शी नेतृत्व में आयोजित यह कार्यक्रम समावेशी विकास और राष्ट्रीय भागीदारी के प्रति सरकार की अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

 

जनजातीय अतिथियों ने राष्ट्रीय राजधानी में सप्ताह भर के कार्यक्रम में भाग लिया। इसका उद्देश्य उन्हें भारत की लोकतांत्रिक संस्थाओं, समृद्ध इतिहास और सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना था। विश्व युवक केंद्र पहुंचने पर अतिथियों का स्वागत किया गया और उन्होंने मंत्रालय के संयुक्त सचिव के साथ स्वागत बैठक में भाग लिया। यात्रा कार्यक्रम के तहत अतिथियों ने संसद भवन का दौरा किया, जिससे उन्हें दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र के कामकाज की जानकारी मिली। उन्होंने प्रधानमंत्री संग्रहालय का भी भ्रमण किया और म्यूजियम मेट्रो ट्रेन एवं मेट्रो की सवारी का अनुभव प्राप्त किया, जिससे उन्हें भारत के नेतृत्व के सफर और आधुनिक बुनियादी ढांचे की झलक मिली।

गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान मेहमानों ने भव्य परेड देखी और राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने प्रेजिडेंट एट होम समारोह में भाग लिया और प्रधानमंत्री की एनसीसी रैली में भी हिस्सा लिया, जो समावेशी राष्ट्रीय भागीदारी के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इस कार्यक्रम में राष्ट्रीय चिड़ियाघर का दौरा और बीटिंग द रिट्रीट समारोह में भाग लेना भी शामिल था, जिससे उनका प्रवास यादगार और ज्ञानवर्धक बन गया।

स्वागत समारोह में एक जीवंत सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किया गया। इसमें पांच राज्यों महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु, गुजरात और ओडिशा के झांकी कलाकारों द्वारा प्रस्तुतियां शामिल थीं, जो भारत की पारंपरिक कला रूपों की असाधारण विविधता को प्रदर्शित करती हैं।

महाराष्ट्र ने कोल्हापुर के पवित्र ज्योतिबा मंदिर उत्सव से जुड़ा पारंपरिक सासन काठी लोक नृत्य प्रस्तुत किया, जो भक्ति और सामूहिक उत्सव का प्रतीक है।

उत्तर प्रदेश में नृत्य नाटक ‘रक्तबीज’ का मंचन किया गया, जिसमें देवी काली द्वारा बुराई पर विजय और धर्म की जीत को दर्शाया गया।

 

 

तमिलनाडु ने भरतनाट्यम और प्राचीन तमिल मार्शल आर्ट सिलंबम को मिलाकर एक शानदार महिला समूह का प्रदर्शन किया, जिसमें अनुशासन, शक्ति और सुंदरता को दर्शाया गया।

गुजरात ने गरबा परंपरा पर आधारित जीवंत लोक नृत्य डकला का प्रदर्शन किया, जो नारी शक्ति और देवी दुर्गा के प्रति भक्ति का प्रतीक है।

ओडिशा ने भगवान विष्णु के दशावतार की ओडिसी शैली पर आधारित प्रस्तुति से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया, जिसमें रंगारंग लोक नृत्यों का समावेश था और जिसका समापन ‘वंदे मातरम’ के भावपूर्ण गायन के साथ हुआ।

 

 

समारोह में उनके योगदान को मान्यता देते हुए भाग लेने वाले कलाकारों और अतिथियों को प्रमाण पत्र वितरित किए गए।

यह पहल जनजातीय गौरव को बढ़ावा देने, सांस्कृतिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहित करने और राष्ट्रीय कार्यक्रमों में जनजातीय समुदायों की सार्थक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए भारत सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है। देश के विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिनिधियों को एक साथ लाकर, मंत्रालय ने विविधता में एकता और समावेशी राष्ट्र-निर्माण के अपने दृष्टिकोण की पुष्टि की।

स्वागत समारोह का समापन सांस्कृतिक सद्भाव और साझा राष्ट्रीय गौरव के भाव के साथ हुआ, जिससे अतिथियों को गणतंत्र दिवस समारोह 2026 में अपनी भागीदारी की अविस्मरणीय यादें प्राप्त हुईं।

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राँची जिला प्रशासन द्वारा शिक्षकों के सम्मान में आयोजित विशेष पेंशन दरबार सह सेवा-निवृत्ति विदाई सम्मान समारोह

जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजंत्री ने स्वयं कुल 24 सेवानिवृत्त शिक्षकों को शॉल ओढ़ाकर, स्मृति चिह्न (मोमेंटो) प्रदान कर तथा प्रशस्ति पत्र भेंट करके सम्मानित किया

सेवानिवृत्ति के दिन ही सभी पेंशनरी लाभ प्रदान करने की अनूठी पहल

जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय में इस पहल को तुरंत लागू किया जाए, ताकि राँची जिले के सभी सेवानिवृत्त शिक्षकों को नियमित रूप से यह लाभ और सम्मान मिल सके। इससे न केवल शिक्षकों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और कर्मचारी-केंद्रित दृष्टिकोण मजबूत होगा

यह पहल केवल शिक्षा विभाग तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। अन्य सभी विभागों को भी इसी प्रकार के आयोजन की शुरुआत करनी चाहिए:- जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजंत्री

रांची,31.01.2026 – जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजंत्री की अध्यक्षता में समाहरणालय के ब्लॉक-ए स्थित कॉन्फ्रेंस हॉल में एक विशेष पेंशन दरबार सह सेवा-निवृत्ति विदाई सम्मान समारोह का आयोजन किया गया।

इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षकों को उनके समर्पित सेवा-काल के लिए सम्मानित करना तथा रिटायरमेंट के ठीक उसी दिन सभी पेंशन संबंधी लाभ उपलब्ध कराना था।

24 शिक्षकों को व्यक्तिगत सम्मान

उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजंत्री ने स्वयं कुल 24 सेवानिवृत्त शिक्षकों को शॉल ओढ़ाकर, स्मृति चिह्न (मोमेंटो) प्रदान कर तथा प्रशस्ति पत्र भेंट करके सम्मानित किया।

इस दौरान उन्होंने शिक्षकों के योगदान को समाज के निर्माण का आधार बताते हुए कहा कि शिक्षक ही वह मजबूत नींव हैं, जिस पर आने वाली पीढ़ियां खड़ी होती हैं।

सम्मानित होने वाले शिक्षक/शिक्षिकाओं के नाम

1. श्री आत्म प्रकाश पंडा, स.शि. रा.उत्क्र.म.वि. एदलपीड़ी, तमाड़।

2. श्री महेन्द्र सिंह मुण्डा, स.शि. रा.म.वि. लुंगटू तमाड़।

3. श्री लक्ष्मी कान्त सेठ, स.शि. रा.म.वि. रगड़ाबाड़ांग, तमाड़।

4. श्री काशीनाथ महतो, स.शि. रा.प्रा.वि पातसायडीह, तमाड़।

5.श्री अरूण कोनगाड़ी, स.शि. संत पौल्स मध्य विद्यालय चर्च रोड, राँची।

6. श्री त्रिदीप कुमार साहु, स.शि. रा.म.वि. चंदवे, काँके जिला- राँची।

7.श्रीमती नीना ममता दास, स.शि. रा. उत्क्रमित मध्य विद्यालय, आरा, नामकुम, राँची।

8.श्रीमती आभा खलखो, स.शि. रा.उत्क्रमित मध्य विद्यालय, राजाउलातू, नामकुम राँची।

9. श्री रूपचंद उराँव, स.शि. रा.प्रा.वि. खड़देवरी, बेड़ो-1

10. श्रीमती मिलट्रेड सलोमी बड़ा, स.शि. रा.उत्क्र.म.वि. नेहालु, बेड़ो-2

11. मनम्यार भगत, स.शि. रा.उ.म.वि. लतरातु, लापुंग

12. प्रमोद कुमार, स.शि. रा.म.वि. ककरिया, लापुंग

13.रामचन्द्र लोहरा, स.शि. रा.म.वि. लुण्डरी, चान्हों

14. प्रभा सुभाषी मिंज, स.शि. रा.म.वि. चोरेया, बालक, चान्हों

15. बिनको लकड़ा, स.शि. रा.म.वि. ईद, अनगड़ा।

16.अवधेश कुमार गुप्ता, स.शि. रा.म.वि. रेलाडीह, बुण्डू।

17. शिखर महतो, स.शि. रा.म.वि. कोन्चों, सिल्ली।

18. भूषण प्रसाद, प्रधानाध्यापक, रा.म.वि. राहे, सोनाहातु-1।

19.ब्रजेश कुमार मिश्र, स.शि. रा.म.वि. डहु, ओरमाँझी।

20.अवधेश प्रसाद, स.शि. रा.म.वि. डहु, ओरमाँझी।

21. नूतन कुमारी, स.शि. रा.म.वि. खलारी

22. जतरी कुजूर, स.शि. लक्ष्मी गजेन्द्र म.वि. इटकी, बेड़ो-2।

23. शीला कुमारी तिग्गा, स.शि. रा.प्रा.वि. गड़गाँव, कन्या इटकी, बेड़ो-2।

रिटायरमेंट के दिन ही लाभ वितरण – प्रशासन की बड़ी उपलब्धि

उपायुक्त ने विशेष जोर देते हुए कहा,

“सेवानिवृत्ति के ठीक उसी दिन पेंशन, ग्रेच्युटी एवं अन्य सभी रिटायरमेंट लाभ प्रदान करना जिला प्रशासन की संवेदनशीलता और कर्मचारी-हितैषी नीति का जीता-जागता प्रमाण हैं । यह प्रयास है कि हमारे शिक्षक बिना किसी चिंता के अपनी नई जिंदगी शुरू कर सकें।”

नई जिंदगी के लिए शुभकामनाएं एवं सलाह

शिक्षकों को संबोधित करते हुए उपायुक्त ने कहा:

“जीवन की इस नई पारी में आप सभी नई ऊंचाइयों को छुएं। स्वयं को व्यस्त रखें, समाज सेवा में योगदान दें, नई रुचियों को अपनाएं और परिवार के साथ गुणवत्तापूर्ण समय बिताएं। ईश्वर आपको दीर्घायु, उत्तम स्वास्थ्य और सदा खुशहाली प्रदान करे।”

कार्यक्रम के संयोजन में सराहना

कार्यक्रम के सुचारु आयोजन के लिए उपायुक्त ने जिला शिक्षा अधीक्षक श्री बादल राज एवं उनके कार्यालय के समस्त कर्मचारियों का विशेष आभार व्यक्त किया। इस अवसर पर जिला शिक्षा अधीक्षक सहित अन्य सम्बंधित अधिकारी उपस्थित रहे।

शिक्षक कल्याण को सर्वोच्च प्राथमिकता

यह समारोह राँची जिला प्रशासन की उस निरंतर प्रतिबद्धता का हिस्सा है, जिसमें शिक्षकों एवं कर्मचारियों के सम्मान, कल्याण एवं समयबद्ध लाभ वितरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। ऐसे प्रयास न केवल सेवानिवृत्त व्यक्तियों का मनोबल बढ़ाते हैं, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र में पारदर्शिता, संवेदनशीलता एवं विश्वास की भावना को मजबूत करते हैं।

जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त राँची, श्री मंजूनाथ भजंत्री ने सेवानिवृत्त शिक्षकों के सम्मान एवं पेंशन दरबार के सफल आयोजन के बाद एक महत्वपूर्ण संदेश देते हुए अन्य विभागों को भी इस तरह की पहल अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि यह आयोजन न केवल शिक्षकों के प्रति संवेदनशीलता दर्शाता है, बल्कि पूरे प्रशासनिक तंत्र के लिए एक आदर्श मॉडल है।

अन्य सभी विभागों को भी इसी प्रकार के आयोजन की शुरुआत करनी चाहिए

कार्यक्रम के दौरान उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजंत्री ने विशेष रूप से जोर देते हुए कहा:
“अन्य सभी विभागों को भी इसी प्रकार के आयोजन की शुरुआत करनी चाहिए, ताकि सेवानिवृत्त होने वाले हर कर्मचारी को उनके योगदान के लिए उचित सम्मान मिले और रिटायरमेंट के ठीक उसी दिन सभी पेंशनरी लाभ (पेंशन, ग्रेच्युटी, लीव एनकैशमेंट आदि) उपलब्ध हो सकें।”

इस खास पहल की कड़ी में जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) कार्यालय भी शामिल हो

उपायुक्त ने खास तौर पर जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) कार्यालय को निर्देशित किया कि वे भी जल्द से जल्द इस तरह के पेंशन दरबार एवं विदाई सम्मान समारोह की शुरुआत करें।

उन्होंने कहा: “जिला शिक्षा पदाधिकारी कार्यालय में इस पहल को तुरंत लागू किया जाए, ताकि राँची जिले के सभी सेवानिवृत्त शिक्षकों को नियमित रूप से यह लाभ और सम्मान मिल सके। इससे न केवल शिक्षकों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि शिक्षा विभाग में पारदर्शिता और कर्मचारी-केंद्रित दृष्टिकोण मजबूत होगा।”

शिक्षकों के कल्याण को प्राथमिकता देने वाली नीति

उपायुक्त ने इस बात पर बल दिया कि शिक्षक समाज के मूल निर्माणकर्ता हैं। उनकी सेवानिवृत्ति के बाद भी प्रशासन की जिम्मेदारी खत्म नहीं होती। ऐसे आयोजन करके हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि हर कर्मचारी सम्मानजनक तरीके से अपनी नई जिंदगी शुरू कर सके। उन्होंने अन्य विभागाध्यक्षों से अपील की कि वे इस मॉडल को अपनाकर अपने-अपने क्षेत्र में लागू करें।

यह निर्देश राँची जिला प्रशासन की उस व्यापक प्रतिबद्धता को रेखांकित करता है, जिसमें कर्मचारियों—विशेषकर शिक्षकों—के सम्मान, कल्याण एवं समयबद्ध लाभ वितरण को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है। जानकारी हो की जिला शिक्षा अधीक्षक कार्यालय द्वारा पिछले वर्ष जनवरी 2025 से इसका हर माह आयोजन किया जा रहा है।

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250 से ज्यादा प्रेशर हॉर्न और करीब 400 साइलेंसर पर बुलडोजर चलाया गया

राँची,31.01.2026 – राँची  में शनिवार को ट्रैफिक एसपी और ग्रामीण एसपी की अगुवाई में शहर में 250 से ज्यादा प्रेशर हॉर्न और करीब 400 साइलेंसर पर बुलडोजर चलाया गया।

ट्रैफिक पुलिस ने अभियान चलाकर 700 से ज्यादा साइलेंसर और प्रेशर हॉर्न जब्त किए थे, बता दें कि हाल के दिनों में राँची के ट्रैफिक एसपी राकेश सिंह को कई बुजुर्गों ने यह शिकायत की थी कि खासकर अस्पताल के बाहर और रात के समय मोडिफाइड साइलेंसर की वजह से बाइक काफी तेज आवाज करती है।

जिसकी वजह से मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। इसी तरह की शिकायतें अन्य लोगों के द्वारा भी ट्रैफिक एसपी तक पहुंचाई गई थी। जिसके बाद एक बड़ा अभियान चलाकर यह कार्रवाई की गई।

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आईआईएम अहमदाबाद में कृष्णमूर्ति टंडन स्कूल ऑफ आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की स्थापना हेतु समझौता ज्ञापन (MoU) का आदान–प्रदान किया गया

नई दिल्ली – भारतीय प्रबंधन संस्थान अहमदाबाद(आईआईएम अहमदाबाद) ने आज आईआईएम, अहमदाबाद में कृष्णमूर्ति टंडन स्कूल ऑफ आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की स्थापना के लिए सुश्री चंद्रिका कृष्णमूर्ति टंडन और श्री रंजन टंडन के साथ एक समझौता ज्ञापन(MoU)पर हस्ताक्षर किए। यह समझौता ज्ञापन भारत सरकार के शिक्षा मंत्री श्री धर्मेंद्र प्रधान की गरिमामयी उपस्थिति में नई दिल्ली में तथा राजदूत श्री विनय क्वात्रा की वर्चुअल उपस्थिति में (संयुक्त राज्य अमेरिका से) संपन्न हुआ।

यह स्कूल आईआईएम अहमदाबाद के पीजीपी बैच 1975 की पूर्व छात्रा सुश्री चंद्रिका कृष्णमूर्ति टंडन और श्री रंजन टंडन द्वारा दिए गए 100 करोड़ रूपए के बड़े दान से स्थापित किया जाएगा।

 

इस अवसर पर बोलते हुए श्री धर्मेंद्र प्रधान ने आईआईएम,अहमदाबाद में कृष्णमूर्ति टंडन स्कूल ऑफ आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस की स्थापना के लिए समझौता ज्ञापन(MoU)के आदान–प्रदान पर प्रसन्नता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026 से पहले यह समझौता ज्ञापन प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत द्वारा वैश्विक एआई महाशक्ति बनने की दिशा में उठाए जा रहे ठोस कदमों का एक मजबूत उदाहरण है।

श्री प्रधान ने कहा कि आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस लोगों, प्रगति और धरती को सशक्त करने वाला माध्यम बनेगा। भारत का एआई नेतृत्व सिर्फ प्रौद्योगिकी से नहीं, बल्कि हमारे संस्थानों और मानव संसाधन की मजबूती से आकार लेगा। माननीय मंत्री ने आईआईएम, अहमदाबाद की गौरवशाली पूर्व छात्रा चंद्रिका कृष्णमूर्ति टंडन जी और उनके पति रंजन टंडन जी द्वारा दिए गए 100 करोड़ रूपए से इस एआई स्कूल की स्थापना हेतु किए गए परोपकारी योगदान की सराहना की। यह पहल पूर्व छात्रों द्वारा अपने शिक्षण संस्थान को वापस देने की एक उत्कृष्ट परंपरा को स्थापित और सुदृढ़ करती है।

उन्होंने कहा कि कृष्णमूर्ति टंडन स्कूल ऑफ आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस भारत की एआई क्षमताओं को बढ़ाने, एआई को सबके लिए सुलभ बनाने, वैश्विक एआई अर्थव्यवस्था के लिए भारत में रोजगार सृजित करने तथा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के विजन के अनुरूप लोगों के जीवन को बेहतर बनाने और सामाजिक कल्याण के लिए वैश्विक प्रभाव उत्पन्न करने में एआई का इस्तेमाल करने की दिशा में कार्य करेगा।

भारत में किसी प्रबंधन संस्थान के अंदर स्थापित एक अग्रणी आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस स्कूल के रूप में, कृष्णमूर्ति टंडन स्कूल ऑफ आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस प्रौद्योगिकी, प्रबंधन और सार्वजनिक प्रभाव के साथ कार्य करेगा। वैश्विक दृष्टिकोण के साथ, यह स्कूल एआई के जिम्मेदार और प्रभावी अनुप्रयोग के माध्यम से भारत की विशिष्ट एवं जटिल चुनौतियों के समाधान पर ध्यान केंद्रित करेगा।

आईआईएम अहमदाबाद का नेतृत्व, सुशासन और संस्थान निर्माण की पुरानी विरासत से प्रेरित यह स्कूल इस बात को आकार देना चाहता है कि आर्टिफ़िशियल इंटेलिजेंस को किस प्रकार विकसित किया जाए, लागू किया जाए और शासित किया जाए, ताकि स्थायी व्यावसायिक और सामाजिक मूल्य का सृजन हो सके। यह एआई-संचालित विश्व में प्रबंधन शिक्षा के भविष्य को आगे बढ़ाने के आईआईएम अहमदाबाद के मिशन का स्वाभाविक विस्तार होगा।

बिज़नेस-केंद्रित और ट्रांसलेशनल एआई के एक केंद्र के रूप में परिकल्पित यह स्कूल विश्वस्तरीय संकाय सदस्यों, उद्योग जगत के अग्रणी लोगों, नीति निर्माताओं और वैश्विक भागीदारों को एक साथ लाएगा, ताकि एआई अनुसंधान और अनुप्रयोग की नई सीमाओं को परिभाषित किया जा सके। इसका अनुसंधान एजेंडा अनुप्रयोग-आधारित और केस-आधारित होगा, जो वास्तविक प्रबंधकीय, संस्थागत और सामाजिक चुनौतियों पर केंद्रित रहेगा। यह स्कूल अत्याधुनिक एआई अनुसंधान का व्यावहारिक समाधान, उपकरण, ढांचे और स्केलेबल प्रणालियों में बदलने पर फोकस करेगा जिन्हें लागू किया जा सके, जो फैसले लेने की क्षमता को बेहतर बनाए, उत्पादकता बढ़ाए और उद्योग, सरकार तथा समाज में जटिल चुनौतियों का समाधान करे।

इस अवसर पर उच्च शिक्षा विभाग के सचिव डॉ. विनीत जोशी; भारतीय प्रबंधन संस्थान,अहमदाबाद के निदेशक प्रो. भारत भास्कर; संयुक्त सचिव (उच्च शिक्षा) श्री पूर्णेंदु बनर्जी तथा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

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ग्रामीण और दूरदराज वाले क्षेत्रों में इंटरनेट कनेक्टिविटी

नई दिल्ली – संचार एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री डॉ. पेम्मासानी चंद्रशेखर ने आज राज्यसभा में एक अतारांकित प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि सभी ग्राम पंचायतों (जीपी) को ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी प्रदान करने हेतु भारतनेट को चरणबद्ध तरीके से लागू किया जा रहा है। भारतनेट के पहले और दूसरे चरण के अंतर्गत कुल 2,22,341 ग्राम पंचायतें शामिल हैं। इनमें से 2,14,904 ग्राम पंचायतें सेवा के लिए तैयार हैं, जिनमें उत्तर प्रदेश की 46,746 ग्राम पंचायतें शामिल हैं। इसके अलावा, सरकार ने 04.08.2023 को संशोधित भारतनेट कार्यक्रम को मंजूरी दी है, जिसके तहत देश की लगभग 2.64 लाख ग्राम पंचायतों और लगभग 3.8 लाख गैर-ग्राम पंचायत वाले  गांवों को मांग के आधार पर ऑप्टिकल फाइबर कनेक्टिविटी प्रदान की जाएगी। इनमें उत्तर प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतें और 44,530 गैर-ग्राम पंचायत वाले गांव शामिल हैं।

डिजिटल भारत निधि (डीबीएन) के जरिए देश भर के 39,799 ग्रामीण और दूरदराज वाले गांवों में 4जी मोबाइल कनेक्टिविटी की योजना बनाई गई है, जिनमें उत्तर प्रदेश के 1,359 गांव भी शामिल हैं। दिनांक 31.12.2025 तक, इस योजना से संबद्ध गांवों में से 33,044 गांवों को कवर किया जा चुका है, जिनमें उत्तर प्रदेश के 1,199 गांव भी शामिल हैं।

संशोधित भारतनेट कार्यक्रम (एबीपी) में, नेटवर्क की संरचना को उन्नत करने और नेटवर्क की विश्वसनीयता में सुधार करने हेतु निम्नलिखित विशेषताओं के साथ एक संशोधित कार्यान्वयन मॉडल तैयार किया गया है:

(i) रिंग संरचना में भारतनेट नेटवर्क का निर्माण और उन्नयन

(ii) सेवा स्तरीय समझौते (एसएलए) के आधार पर संपूर्ण नेटवर्क का संचालन एवं रखरखाव

(iii) प्रत्येक पैकेज में नेटवर्क के निर्माण और संचालन एवं रखरखाव के लिए एकल परियोजना कार्यान्वयन एजेंसी (पीआईए)

(iv) समर्पित नेटवर्क संचालन केन्द्र

(v) रिमोट फाइबर मॉनिटरिंग सिस्टम

सरकार ने भारत को डिजिटल रूप से सशक्त समाज और ज्ञान-आधारित अर्थव्यवस्था में बदलने के दृष्टिकोण से डिजिटल इंडिया कार्यक्रम शुरू किया है। इसका लक्ष्य डिजिटल पहुंच, डिजिटल समावेशन, डिजिटल सशक्तिकरण सुनिश्चित करना और डिजिटल विभाजन को कम करना है। इसकी विस्तृत जानकारी डिजिटल इंडिया वेबसाइट (https://www.digitalindia.gov.in) पर उपलब्ध है। डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान (पीएमजीदिशा) जैसी योजनाएं शुरू की गईं, जिनका उद्देश्य देश भर में 6.39 करोड़ व्यक्तियों को डिजिटल साक्षरता का प्रशिक्षण प्रदान करना था। राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईईएलआईटी) के जरिए विभिन्न डिजिटल साक्षरता पाठ्यक्रम भी उपलब्ध कराए जा रहे हैं।

टेलीकॉम – साइबर सुरक्षा घटना प्रतिक्रिया दल (टी-सीएसआईआरटी) दूरसंचार संचार इकोसिस्टम  के लिए क्षेत्रीय घटना प्रतिक्रिया और साइबर सुरक्षा समन्वय कार्य करता है। इसका मुख्य उद्देश्य दूरसंचार नेटवर्क, दूरसंचार सेवा प्रदाताओं (टीएसपी), आईएसपी और संबंधित महत्वपूर्ण दूरसंचार अवसंरचना को प्रभावित करने वाली साइबर घटनाओं और कमजोरियों का समय पर पता लगाना, विश्लेषण करना, समन्वय करना और उनका निवारण करना है।

विकास निगरानी एवं मूल्यांकन कार्यालय (डीएमईओ), जो नीति आयोग का एक संबद्ध कार्यालय है, आउटपुट-आउटकम मॉनिटरिंग फ्रेमवर्क (ओओएमएफ) का रखरखाव करता है, जिसमें डीबीएन द्वारा वित्त पोषित परियोजनाओं सहित डिजिटल कनेक्टिविटी कार्यक्रमों के लिए संकेतक शामिल हैं। विस्तृत विवरण डीएमईओ की वेबसाइट (https://dmeo.gov.in/output-outcome-framework?ministry=55&tid_1=223) पर उपलब्ध हैं।

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डॉ. जितेंद्र सिंह ने विशाखापत्तनम में 32 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित सीएसआईआर-एनआईओ के तटवर्ती क्षेत्रीय केन्द्र का उद्घाटन किया

नई दिल्ली – विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी तथा पृथ्वी विज्ञान राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज विशाखापत्तनम स्थित सीएसआईआर-राष्ट्रीय समुद्र विज्ञान संस्थान (एनआईओ) के क्षेत्रीय केन्द्र की तटवर्ती प्रयोगशाला का उद्घाटन किया और इसे “दोहरे इंजन वाली सरकार के प्रभाव”, जहां केन्द्र और राज्य के बीच का निर्बाध समन्वय विकास को गति देता है, का स्पष्ट उदाहरण बताया।

आंध्र प्रदेश की गृह मंत्री श्रीमती अनीता वंगलपुडी, सांसद श्री एम. श्रीभरत, विधायक श्री जी. श्रीनिवास राव, सीएसआईआर-एनआईओ के निदेशक प्रोफेसर सुनील कुमार सिंह, डॉ. वी.वी.एस.एस. शर्मा और सीएसआईआर की महानिदेशक डॉ. कलैसेल्वी की उपस्थिति में सभा को संबोधित करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भले ही इस परियोजना की नींव वर्षों पहले रखी गई थी, लेकिन केन्द्र और राज्य सरकारों के एकमत होने के बाद पिछले 8-10 महीनों में इसमें काफी प्रगति हुई और यह पूरी हो गई।

केन्द्रीय मंत्री ने बताया कि इस परियोजना के लिए भूमि राज्य सरकार द्वारा 2000 के दशक के आरंभ में नाममात्र की कीमत पर हस्तांतरित की गई थी और इस क्षेत्र में हुए तीव्र विकास के कारण इसका वर्तमान मूल्य कई गुना बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार, सीएसआईआर और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी (जो सीएसआईआर के अध्यक्ष हैं) की ओर से, कुल 32 करोड़ रुपये की इस तटवर्ती परियोजना को राष्ट्र को समर्पित कर रही है।

इस सुविधा के रणनीतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की तटरेखा लगभग 11,000-12,000 किलोमीटर लंबी है। इसमें से 1,000 किलोमीटर से अधिक आंध्र प्रदेश से लगती है, जो इसे समुद्री अर्थव्यवस्था और प्रधानमंत्री के ‘नीली अर्थव्यवस्था’ से संबंधित विजन का एक स्वाभाविक केन्द्र बनाती है। उन्होंने कहा कि भारत का पूर्वी तटीय सीमांत भूवैज्ञानिक रूप से विविधतापूर्ण है और इसमें मुख्य रूप से हिमालयी नदी प्रणालियों द्वारा भारी मात्रा में निक्षेपित हाइड्रोकार्बन, समुद्री खनिजों, तेल और प्राकृतिक गैस की अपार संभावनाएं हैं।

केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि विशाखापत्तनम तट एक बहुमुखी समुद्री संसाधन आधार का प्रतिनिधित्व करता है, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ नीली अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है और नव उद्घाटित सीएसआईआर-एनआईओ सुविधा इस प्रयास के एक प्रमुख वैज्ञानिक आधार के रूप में कार्य करेगी।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि सीएसआईआर-एनआईओ पहले से ही ओएनजीसी, ऑयल इंडिया तथा अन्य हितधारकों के साथ मिलकर काम कर रहा है और फार्मास्यूटिकल्स, बंदरगाहों, तापीय ऊर्जा परियोजनाओं व मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों को सक्रिय रूप से सहयोग दे रहा है। उन्होंने कहा कि संभावित मछली पकड़ने वले क्षेत्रों की पहचान, मछुआरों के लिए समुद्री शैवाल की खेती और हानिकारक शैवाल प्रस्फुटन की भविष्यवाणी करने से संबंधित केन्द्र सरकार के कार्यों से आजीविका और सार्वजनिक स्वास्थ्य दोनों को लाभ हो रहा है, क्योंकि समुद्री जैव संसाधनों का उपयोग चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहा है।

सरकार की समन्वित दृष्टि पर जोर देते हुए, केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि भारत का समुद्री विकास अब केन्द्र एवं राज्य सरकारों, सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र, अनुसंधान संस्थानों और स्टार्टअप को एक साथ ला रहा है। उन्होंने उद्योग जगत और उद्यमियों को सक्रिय साझेदार बनने के लिए आमंत्रित किया और कहा कि समुद्री एवं तटीय क्षेत्र में स्टार्टअप व नवोन्मेषकों के लिए तकनीकी तथा वित्तीय समर्थन का एक मजबूत इकोसिस्टम पहले से ही मौजूद है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विशाखापत्तनम केन्द्र क्षमता विकास और कौशल प्रशिक्षण के एक प्रमुख केन्द्र के रूप में भी उभरेगा, जो देश के बढ़ते समुद्री क्षेत्र के लिए युवा वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप और भावी उद्यमियों का मार्गदर्शन करेगा।

केन्द्रीय मंत्री ने मुख्यमंत्री श्री एन. चंद्रबाबू नायडू की विशेष सराहना करते हुए कहा कि उनके व्यक्तिगत हस्तक्षेप के कारण, लगभग एक दशक से लंबित तटीय और पर्यावरणीय मंज़ूरियां  छह महीने के भीतर मिल गईं, जिससे कार्य निष्पादन में एक दिन की भी देरी नहीं हुई। उन्होंने कहा कि तटीय क्षेत्र में स्थित होने के कारण इस परियोजना के लिए कई मंजूरियों की आवश्यकता थी, जिन्हें केन्द्र और राज्य के बीच प्रभावी समन्वय के जरिए त्वरित प्रक्रिया से पूरा किया गया।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने प्रधानमंत्री द्वारा आंध्र प्रदेश और नई राजधानी अमरावती पर विशेष ध्यान दिए जाने का उल्लेख करते हुए घोषणा की कि वहां जल्द ही एक क्वांटम प्रौद्योगिकी केन्द्र  स्थापित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पिछले 7-8 महीनों में विशाखापत्तनम की यह उनकी तीसरी यात्रा है, जो विज्ञान-आधारित विकास में राज्य सरकार की सक्रिय भागीदारी को दर्शाती है।

इस तटवर्ती प्रयोगशाला का निर्माण ऋषिकोंडा के येनदादा गांव में स्थित 4 एकड़ के परिसर के 3.25 एकड़ हिस्से पर किया गया है। इसका निर्मित क्षेत्र 4,550 वर्ग मीटर है और यह जी+1 संरचना में बनी है। इस परियोजना का क्रियान्वयन सीपीडब्ल्यूडी द्वारा किया गया, जिसके तहत निर्माण कार्य नवंबर 2024 में शुरू हुआ और दिसंबर 2025 में पूरा हुआ।

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भारत पर्व 2026 में पंजाबी लोक आर्केस्ट्रा और क़लंदरी धमाल के साथ जीवंत होगी पंजाब की संगीत विरासत

नई दिल्ली – नई दिल्‍ली के एतिहासिक लाल किले में आयोजित होने वाले ‘भारत पर्व 2026’ में पंजाब की समृद्ध संगीत और आध्यात्मिक विरासत को प्रदर्शित किया जाएगा। 31 जनवरी 2026 को पंजाबी लोक ऑर्केस्ट्रा और क़लंदरी धमाल की मनमोहक प्रस्तुतियां दी जाएंगी।

पंजाबी लोक ऑर्केस्ट्रा एक अनूठा समूह है, जिसे ढोल, ढोलकी, ताल-कोज़े, तंसारी, बांसुरी, नगाड़ा, चिमटा, सप, कड़ा और वंजली जैसे पारंपरिक पंजाबी लोक वाद्ययंत्रों के विस्‍तृत चयन के साथ तैयार किया गया है। यह ऑर्केस्ट्रा लयबद्ध, सुरीले और तालबद्ध लोक वाद्ययंत्रों को एक एकल, संरचित संगीतमय प्रस्तुति में पिरोता है। पारंपरिक पंजाबी लोक धुनों को ऑर्केस्ट्रा के लिए बहुत ही सोच-समझकर रचा और व्यवस्थित किया गया है, जिससे उनकी मौलिक लोक आत्‍मा को संरक्षित रखते हुए उन्‍हें एक सामूहिक और सामंजस्यपूर्ण रूप में प्रस्तुत किया जा सके।

 

इस ऑर्केस्ट्रा का प्रदर्शन बारह छात्रों के एक समूह द्वारा किया जाता है, जिनमें से प्रत्येक एक विशिष्ट वाद्य यंत्र बजाने की भूमिका निभाता है। उनका प्रदर्शन टीमवर्क, समन्वय और पंजाबी लोक संगीत परंपराओं की गहरी समझ को उजागर करता है। यह पहल न केवल पंजाबी लोक संगीत के संरक्षण में योगदान देती है, बल्कि छात्रों को समूहिक प्रदर्शन और लोक वाद्योजन तकनीकों का व्यावहारिक अनुभव भी प्रदान करती है।

इस कार्यक्रम में आध्यात्मिक आयाम जोड़ते हुए सिंध और पंजाब के पारंपरिक सूफी लोक नृत्य ‘क़लंदरी धमाल’ की भी प्रस्तुति होगी। क़लंदरी धमाल एक भक्तिमय नृत्य है, जो ईश्वर और सूफी संतों के प्रति प्रेम और समर्पण को व्यक्त करता है और विशेष रूप से सेहवान शरीफ स्थित लाल शाहबाज क़लंदर की दरगाह से जुड़ा है।

इस प्रस्तुति में ढोल, घड़ियाल, सोरना, शंख और तुम्बा जैसे वाद्ययंत्रों द्वारा निर्मित ओजपूर्ण संगीत होता है, जिसके साथ तालियों की गडगड़ाहट और “दमदम मस्त क़लंदर” जैसे भक्तिपूर्ण जयकारे गूंजते हैं। ऊर्जावान ताल नृतकों को एक आनंदमय और आध्यात्मिक अवस्था में ले जाती है। इसकी मुद्राएं स्‍वतंत्र और अभिव्‍यंजक होती हैं, जिनमें नृतक लय पर घूमते, पैर थपथपाते और झूमते हैं। कई नृतक नंगे पैर और भारी धुंधरू पहनकर नृत्य करते हैं, जो विनम्रता और आध्यात्मिक समर्पण का प्रतीक है।

क़़लंदरी धमाल आध्यात्मिक स्वतंत्रता, प्रेम, एकता और भक्ति का प्रतीक है, जो जाति, धर्म और सामाजिक स्थिति की सीमाओं से परे है। संगीत और नृत्य के माध्यम से यह शांति और सांप्रदायिक सद्भाव का एक शक्तिशाली संदेश फैलाता है।

पंजाबी लोक ऑर्केस्ट्रा और क़लंदरी धमाल की ये संयुक्‍त प्रस्‍तुतियां कल आयोजित होने वाले ‘भारत पर्व 2026’ में दर्शकों को पंजाब की जीवंत सांस्कृतिक और आध्यात्मिक परंपराओं का एक गहन अनुभव प्रदान करने का वादा करती हैं।

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इंडिया एनर्जी वीक 2026 का समापन, भारत ने ग्लोबल एनर्जी सेक्टर में अपनी भूमिका को और मजबूत किया

नई दिल्ली – केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री श्री हरदीप सिंह पुरी ने इंडिया एनर्जी वीक (आईईडब्ल्यू) 2026 के समापन समारोह में कहा कि भारत ने ग्लोबल एनर्जी मार्केट में लगातार भू-राजनीतिक अस्थिरता से निपटने के लिए मजबूत तैयारी दिखाई है और इंटरनेशनल एनर्जी डायलॉग में केंद्र में बना रहेगा। यह कार्यक्रम 27 जनवरी से 30 जनवरी, 2026 तक गोवा में आयोजित किया गया।

समापन फायरसाइड चैट के दौरान बोलते हुए, श्री पुरी ने इस बात पर जोर दिया कि भारत की एनर्जी रणनीति विविधीकरण, सशक्तता और भविष्य के अनुकूल बदलावों पर आधारित है। केंद्रीय मंत्री ने कहा, “हमने लगातार भू-राजनीतिक झटकों का बहुत अच्छे से सामना किया है। सप्लाई के सोर्स के विविधीकरण और क्लीनर फ्यूल की ओर तेजी से बदलाव के जरिए हर चुनौती को एक अवसर में बदला गया है।”

 

भारत के वैश्विक रुख से अवगत कराते हुए, श्री पुरी ने कहा कि आज देश तीसरा सबसे बड़ा एनर्जी कंज्यूमर, चौथा सबसे बड़ा रिफाइनर और पेट्रोलियम उत्पादों के शीर्ष निर्यातकों में से एक है। श्री पुरी ने कहा, “ग्लोबल अनिश्चितता के बीच भी, भारत एनर्जी की उपलब्धता, किफायती दाम और सततता सुनिश्चित करता रहेगा।”

केंद्रीय मंत्री ने पारंपरिक ईंधनों में लगातार निवेश के साथ-साथ कंप्रेस्ड बायोगैस (सीबीजी), ग्रीन हाइड्रोजन और स्वदेशी क्लीन-एनर्जी टेक्नोलॉजी पर सरकार द्वारा जोर दिये जाने के बारे में भी बताया। उन्होंने कहा, “पारंपरिक एनर्जी जरूरी रहेगी, लेकिन इथेनॉल ब्लेंडिंग से लेकर सीबीजी, हाइड्रोजन और बायोफ्यूल तक हम जो कदम उठा रहे हैं, वे हमें विश्वास दिलाते हैं कि ग्रीनर फ्यूल एक बड़ी भूमिका निभाएंगे।”

वैश्विक कीमतों में उतार-चढ़ाव के दौरान उपभोक्ताओं पर पड़ने वाले असर के बारे में चिंताओं को दूर करते हुए, श्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि भारत ने अपने नागरिकों को अस्थिरता से सफलतापूर्वक बचाया है। उन्होंने कहा, “वैश्विक उथल-पुथल का असर कभी भी उपभोक्ता पर नहीं पड़ा। आज भारत में एनर्जी की कीमतें दुनिया में सबसे कम हैं और संकट के समय भी बिना किसी रुकावट के आपूर्ति बनाए रखी गई है। तेल मार्केटिंग कंपनियों द्वारा समय पर कार्रवाई के द्वारा यह सुनिश्चित किया गया कि एलपीजी सहित फ्यूल की कीमतें उपभोक्ताओं के लिए किफायती बनी रहें।”

श्री पुरी के बाद, पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय के सचिव डॉ. नीरज मित्तल ने भारत की विकास यात्रा को समर्थन करने के लिए सरकार का ब्लूप्रिंट पेश किया। सचिव ने कहा, “7 प्रतिशत से अधिक की अनुमानित आर्थिक वृद्धि के साथ, ऊर्जा की मांग तेजी से बढ़ेगी। हमारा ध्यान दो मुख्य बातों: घरेलू खोज और उत्पादन को मजबूत करने और भारत को दुनिया के लिए रिफाइंड उत्पादों के एक भरोसेमंद आपूर्तिकर्ता के रूप में स्थापित करने पर केंद्रित है।”

डॉ. मित्तल ने आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए ज्यादा ड्रिलिंग और खोज सहित अपस्ट्रीम गतिविधि को तेज करने की महत्वाकांक्षी योजनाओं के बारे में बताया। उन्होंने मूल्य संवर्धन को ज्यादा से ज्यादा करने और आयात कम करने के लिए रिफाइनिंग और पेट्रोकेमिकल के इंटीग्रेशन पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा, “हम घरेलू स्तर पर बड़े पैमाने पर काम कर रहे हैं, साथ ही विश्व स्तर पर प्रतिस्पर्धी भी बने हुए हैं।”

ऊर्जा परिवर्तन पर, डॉ. मित्तल ने प्रौद्योगिकी और डिजिटलीकरण के महत्व के बारे में बताया। उन्होंने कहा, “लॉजिस्टिक ऑप्टिमाइजेशन से लेकर एआई-संचालित दक्षता तक, प्रौद्योगिकी की लागत कम करने और संचालनात्मक मजबूती को बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।” उन्होंने कहा कि भारत सीबीजी पर अपने लक्ष्यों को पूरा करने की राह पर है, जिसका लक्ष्य 2030 तक 5 प्रतिशत ब्लेंडिंग हासिल करना है, जिसे राज्यों की सक्रिय भागीदारी और किसानों के नेतृत्व वाली बायोमास आपूर्ति श्रृंखला का समर्थन प्राप्त है।

समापन सत्र ने इंडिया एनर्जी वीक 2026 की भूमिका को एक ऐसे प्लेटफॉर्म के रूप में मजबूत किया जो ऊर्जा सुरक्षा, सामर्थ्य और स्थिरता को जोड़ता है, साथ ही भारत को तेजी से बदलते वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य में एक स्थिर, विश्वसनीय और व्यावहारिक तौर पर एक अग्रणी देश के रूप में स्थापित करता है।

इंडिया एनर्जी वीक के बारे में

इंडिया एनर्जी वीक देश का प्रमुख वैश्विक ऊर्जा प्लेटफॉर्म है, जो सरकारी क्षेत्र की हस्तियों, उद्योग जगत के अधिकारियों और नवप्रवर्तकों को एक साथ लाता है ताकि एक सुरक्षित, टिकाऊ और किफायती ऊर्जा भविष्य की दिशा में प्रगति को तेज किया जा सके। एक तटस्थ अंतरराष्ट्रीय मंच के रूप में, आईईडब्ल्यू निवेश, नीतिगत तालमेल और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देता है जो वैश्विक ऊर्जा परिदृश्य को आकार देता है।

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भारत पर्व 2026 का समापन समारोह 31 जनवरी 2026 को होगा

नई दिल्ली – पर्यटन मंत्रालय गणतंत्र दिवस समारोह के हिस्से के रूप में प्रतिवर्ष 26 से 31 जनवरी तक दिल्ली के लाल किले के सामने स्थित लॉन और ज्ञानपथ पर भारत पर्व का आयोजन करता है।

भारत पर्व 2026 का समापन समारोह 31 जनवरी 2026 को शाम 5:30 बजे होगा। उपराष्ट्रपति मुख्य अतिथि के रूप में समारोह में शामिल होंगे।

भारत पर्व देश की सांस्कृतिक और रचनात्मक विरासत की झलक प्रदर्शित करता है, जिसमें गणतंत्र दिवस की झांकियां, सशस्त्र बलों की बैंड प्रस्तुतियां और उत्तर क्षेत्रीय सांस्कृतिक केंद्रों, राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और दिल्ली स्थित सांस्कृतिक समूहों द्वारा सांस्कृतिक प्रस्तुतियां शामिल हैं। इस आयोजन में अखिल भारतीय फूड कोर्ट, हस्तशिल्प और हथकरघा बाजार, केंद्रीय मंत्रालयों तथा राज्य सरकारों के पंडालों के साथ-साथ स्टूडियो किचन सत्र, नुक्कड़ नाटक और डू-इट-योरसेल्फ कार्यशालाओं जैसी क्रियात्मक गतिविधियां भी शामिल हैं।

भारत पर्व 31 जनवरी 2026 तक दोपहर 12:00 बजे से रात 9:00 बजे तक जनता के लिए खुला रहेगा।

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गणतंत्र दिवस-2026 की परेड में संस्कृति मंत्रालय की ‘वंदे मातरम – 150 वर्षों का सफर’ नामक झांकी ने प्रथम पुरस्कार जीता

नई दिल्ली – गणतंत्र दिवस परेड-2026 में संस्कृति मंत्रालय ने एक महत्वपूर्ण दोहरा सम्मान प्राप्‍त किया, जहां उसकी “वंदे मातरम – 150 वर्षों का सफर” शीर्षक वाली झांकी को केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों के बीच सर्वश्रेष्ठ झांकी की श्रेणी में प्रथम पुरस्कार से सम्मानित किया गया, वहीं उसकी भव्य सांस्कृतिक प्रस्तुति “वंदे मातरम: भारत की शाश्वत गूंज” को उसकी असाधारण कलात्मक और विषयगत उत्कृष्टता के लिए विशेष पुरस्कार से सम्‍मानित किया गया।

 

पुरस्कार विजेता झांकी ने वंदे मातरम के 150 वर्षों के सफर को सशक्त रूप से दर्शाया, जिसमें राष्ट्रीय जागरण के गीत के रूप में इसके उद्भव और भारत के स्वतंत्रता संग्राम, एकता और सभ्यतागत चेतना को आकार देने में इसकी स्थायी भूमिका को दिखाया गया है। भावपूर्ण दृश्यों और प्रतीकों के माध्यम से, झांकी ने भारत की सामूहिक राष्ट्रीय पहचान में राष्ट्रगान की शाश्वत प्रासंगिकता को उजागर किया।

विशेष पुरस्कार विजेता सांस्कृतिक नृत्य प्रस्तुति, “वंदे मातरम – भारत की शाश्वत गूंज”, का आयोजन संगीत नाटक अकादमी ने पटियाला स्थित उत्तर क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के सहयोग से किया था। यह प्रस्तुति राष्ट्रऋषि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय की अमर रचना को श्रद्धांजलि अर्पित करती है, जो भारत के स्वतंत्रता आंदोलन की स्‍वर बनी। इस प्रस्तुति में सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 2,500 कलाकारों ने भाग लिया और शास्त्रीय, लोक और आदिवासी कला रूपों के माध्यम से देश की विशाल सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित किया।

नृत्य प्रस्तुति ने देश की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक जड़ों से लेकर स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदानों और सशस्त्र बलों के शौर्य और समर्पण तक की शाश्वत यात्रा को जीवंत कर दिया। संस्कृत मंत्रों, भावपूर्ण संगीत और गतिशील नृत्य संरचनाओं से परिपूर्ण इस प्रस्तुति ने वंदे मातरम के संपूर्ण भावनात्मक और दार्शनिक पहलू को समाहित किया, जिसका समापन एकता, भक्ति और राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक तिरंगे को भावपूर्ण श्रद्धांजलि के साथ हुआ।

संगीत नाटक अकादमी की अध्यक्ष डॉ. संध्या पुरेचा ने समग्र रचनात्मक निर्देशक के रूप में सांस्कृतिक प्रस्तुति का नेतृत्व किया। ऑस्कर विजेता संगीतकार श्री एम.एम. कीरावानी ने संगीत निर्देशन किया, जबकि गीत श्री सुभाष सहगल ने लिखे। राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता अभिनेता श्री अनुपम खेर ने पार्श्व स्वर दिया, श्री संतोष नायर ने नृत्य प्रस्तुत किया और सुश्री संध्या रमन ने वेशभूषा डिजाइन की।

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प्रसाद योजना के अंतर्गत सांस्कृतिक गलियारा

नई दिल्ली – पर्यटन स्थलों और पर्यटन उत्पादों का विकास एवं प्रचार-प्रसार, जिसमें धार्मिक एवं तीर्थयात्रा पर्यटन भी शामिल है, मुख्यतः संबंधित राज्य सरकार/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन द्वारा किया जाता है। पर्यटन मंत्रालय, संबंधित राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों के परामर्श से, अपनी योजनाओं और पहलों के माध्यम से पर्यटन अवसंरचना के विकास हेतु वित्तीय सहायता प्रदान करके राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों के प्रयासों में सहयोग करता है।

पर्यटन मंत्रालय “तीर्थयात्रा पुनरुद्धार और आध्यात्मिक, विरासत संवर्धन अभियान” (प्रसाद) के अंतर्गत तीर्थ और विरासत स्थलों पर पर्यटन अवसंरचना को समग्र रूप से विकसित करके आध्यात्मिक और तीर्थयात्रा के अनुभव को अविस्‍मरणीय बनाने लक्ष्य रखता है।

प्रसाद योजना के अंतर्गत मंत्रालय ने 28 राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों में कुल 1,726.74 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से 54 परियोजनाओं को स्‍वीकृति दी है, जिसमें महाराष्ट्र राज्य में 45.41 करोड़ रुपये की लागत से नासिक स्थित “त्र्यंबकेश्वर का विकास” नामक एक परियोजना भी शामिल है।

प्रसाद योजना के अंतर्गत वित्तीय सहायता प्राप्त करने के लिए राज्य सरकारों/केंद्र शासित प्रदेश प्रशासनों द्वारा प्रस्ताव प्रस्तुत करना एक सतत प्रक्रिया है। राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों से प्राप्त प्रस्तावों की जांच निर्धारित दिशानिर्देशों के अनुसार की जाती है, और वित्तीय सहायता निर्धारित शर्तों की पूर्ति और निधि की उपलब्धता के अधीन प्रदान की जाती है।

फिलहाल, रायगढ़ और रत्नागिरी जिलों में स्थित बल्लालेश्वर मंदिर (पाली), वरद विनायक मंदिर (महाड) और गणपतिपुले मंदिर को जोड़ने वाले सांस्कृतिक गलियारे के विकास का कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।

केंद्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत ने आज राज्यसभा में यह जानकारी लिखित प्रश्न के उत्तर में दी

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नगरपालिका (आम) निर्वाचन-2026 अंतर्गत नाम निर्देशन पत्रों की बिक्री और नामांकन का दूसरा दिन

महापौर के लिए 05 नाम निर्देशन पत्रों की बिक्री, नामांकन शून्य

सभी 53 वार्ड के लिए वार्ड पार्षद हेतु 111 नाम निर्देशन पत्रों की बिक्री, दो अभ्यार्थियों ने दाखिल किया नामांकन

बुण्डू नगर पंचायत अंतर्गत अध्यक्ष के लिए 04 नाम निर्देशन पत्रों की बिक्री, नामांकन शून्य

वार्ड पार्षद के लिए 13 नाम निर्देशन पत्रों की बिक्री, नामांकन शून्य

रांची,30.01.2026 – नगरपालिका (आम) निर्वाचन-2026 अंतर्गत  30.01.2026 को रांची समाहरणालय एवं बुण्डू अनुमंडल कार्यालय में बनाये गये निर्वाची पदाधिकारियों के कक्ष से अभ्यर्थियों ने नाम निर्देशन पत्र प्राप्त किये। महापौर के लिए आज 05 एवं सभी 53 वार्ड के लिए कुल 111 नाम निर्देशन पत्रों की बिक्री हुई। वार्ड-2 से सरिता देवी एवं वार्ड-37 से राहुल कुमार ने नामांकन दाखिल किया।

महापौर पद के लिए रमा खलखो, विनोद कुमार बड़ाइक, तनुत तुलियो तिग्गा, बीरू तिर्की और देवी दयाल मुंडा ने नाम निर्देशन पत्र खरीदे। महापौर के लिए अब तक 11 अभ्यर्थी नाम निर्देशन पत्र खरीद चुके हैं, नामांकन शून्य है।

बुण्डू नगर पंचायत अंतर्गत अध्यक्ष हेतु 04 नाम निर्देशन पत्र की बिक्री हुई जबकि नामांकन शून्य रहा, वार्ड पार्षद के लिए 13 नाम निर्देशन पत्रों की बिक्री हुई।

सभी 53 वार्डों में नाम निर्देशन पत्रों की बिक्री निम्न प्रकार है :-

वार्ड 1 – 00
वार्ड 2 – 02
वार्ड 3 – 01
वार्ड 4 – 05
वार्ड 5 – 02
वार्ड 6 – 02
वार्ड 7 – 03
वार्ड 8 – 03
वार्ड 9 – 05
वार्ड 10 – 00
वार्ड 11 – 02
वार्ड 12 – 03
वार्ड 13 – 05
वार्ड 14 – 01
वार्ड 15 – 03
वार्ड 16 – 02
वार्ड 17 – 01
वार्ड 18 – 03
वार्ड 19 – 03
वार्ड 20 – 01
वार्ड 21 – 03
वार्ड 22 – 02
वार्ड 23 – 00
वार्ड 24 – 01
वार्ड 25 – 03
वार्ड 26 – 02
वार्ड 27 – 01
वार्ड 28 – 03
वार्ड 29 – 03
वार्ड 30 – 01
वार्ड 31 – 01
वार्ड 32 – 06
वार्ड 33 – 02
वार्ड 34 – 11
वार्ड 35 – 01
वार्ड 36 – 00
वार्ड 37 – 00
वार्ड 38 – 02
वार्ड 39 – 04
वार्ड 40 – 02
वार्ड 41 – 01
वार्ड 42 – 00
वार्ड 43 – 00
वार्ड 44 – 00
वार्ड 45 – 00
वार्ड 46 – 00
वार्ड 47 – 00
वार्ड 48 – 02
वार्ड 49 – 02
वार्ड 50 – 05
वार्ड 51 – 00
वार्ड 52 – 02
वार्ड 53 – 04

बुण्डू नगर पंचायत में नाम निर्देशन पत्रों की बिक्री निम्न है:-

अध्यक्ष पद के लिए 04 नाम निर्देशन पत्रों की बिक्री हुई। रितेश कुमार पातर, घासीराम उरांव, राजेश उरांव एवं श्री कृष्ण मुण्डा ने नाम निर्देशन पत्र खरीदे, नामांकन अब तक शून्य है।

वार्ड 1 – 02
वार्ड 2 – 00
वार्ड 3 – 03
वार्ड 4 – 01
वार्ड 5 – 02
वार्ड 6 – 02
वार्ड 7 – 01
वार्ड 8 – 00
वार्ड 9 – 00
वार्ड 10 – 00
वार्ड 11 – 01
वार्ड 12 – 01
वार्ड 13 – 00

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राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की पुण्यतिथि (शहीद दिवस) के अवसर पर उनकी प्रतिमा पर जिला प्रशासन राँची द्वारा माल्यापर्ण एवं पुष्पांजलि अर्पित की गई

रांची,30.01.2026 – राष्ट्रपिता महात्मा गाँधी की पुण्यतिथि (शहीद दिवस) के अवसर पर उनकी प्रतिमा पर जिला प्रशासन द्वारा (बापू वाटिका, मोरहाबादी, राँची में) माल्यापर्ण एवं पुष्पांजलि अर्पित की गई।

उपायुक्त ने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ‘बापू’ को शत्-शत् नमन किया एवं उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किया।

इस दौरान उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री, मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी झारखण्ड राज्य खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड, श्रीमती सुमन पाठक,राज्य सभा सांसद Mahua Maji, अपर जिला दंडाधिकारी राँची, श्री राजेश्वर नाथ आलोक, अनुमंडल पदाधिकारी सदर राँची, श्री कुमार रजत, पुलिस अधीक्षक ग्रामीण राँची, श्री प्रवीण पुष्कर, पुलिस अधीक्षक शहर राँची, श्री पारस राणा, पुलिस अधीक्षक यातायात राँची, श्री राकेश सिंह एवं अन्य  पदाधिकारियों ने भी राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ‘बापू’ की प्रतिमा पर माल्यापर्ण एवं पुष्पांजलि अर्पित की ।

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लेह में नागर विमानन बुनियादी ढांचे की विकास परियोजना का उद्घाटन

नई दिल्ली – केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख के उपराज्यपालश्री कविंदर गुप्ता ने पश्चिमी वायु कमान के वरिष्ठ एयर स्टाफ ऑफिसर एयर मार्शल जेएस मान की उपस्थिति में 28 जनवरी 2026 को एयर फ़ोर्स स्टेशन लेह में नागर विमानन बुनियादी ढांचे को विकसित करने के उद्देश्य से एक परियोजना का उद्घाटन किया।

यह उद्घाटन लद्दाख में नागर विमानन बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और सिविल प्रशासन एवं क्षेत्र के विकास में शामिल सभी एजेंसियों के बीच घनिष्ठ सहयोग की भावना को परिपुष्ट बनाने में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। बेहद चुनौतीपूर्ण ऊंचाई वाले क्षेत्र और प्रतिकूल मौसम की स्थिति के बावजूद बुनियादी ढांचे का रिकॉर्ड समय में उन्नयन किया गया है।

विकसित किया गया बुनियादी ढांचा विमानों की जमीनी आवाजाही को आसान बनाने के साथ-साथ नागरिक उड़ानों के प्रस्थान को तेज करेगा। इन सुधारों से यात्रियों को सुविधा मिलेगी और समय की बचत होगी।

बेहतर वायु संपर्क लेह क्षेत्र में पर्यटन को जबरदस्त बढ़ावा देने के साथ-साथ  आर्थिक अवसरों का सृजन करेगा और स्थानीय आजीविका का समर्थन करेगा। साथ ही, बेहतर सुविधाएं निवासियों और आगंतुकों दोनों के लिए अधिक विश्वसनीय हवाई सेवाएं सुनिश्चित करेंगी, जबकि मानवीय सहायता और आपदा राहत आवश्यकताओं पर तेजी से प्रतिक्रिया देने की क्षेत्र की क्षमता को भी मजबूती मिलेगी।

यह विकास लद्दाख के दीर्घकालिक सामाजिक-आर्थिक विकास में सार्थक योगदान देगा।

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हर समय हर वक्त सच के साथ

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