कार्यक्रम का शुभारंभ एनसीएसटी के सचिव के स्वागत भाषण से हुआ। उन्होंने आयोग के संवैधानिक अधिदेश, उद्देश्यों और अनुसूचित जनजातियों के अधिकारों की रक्षा एवं संवर्धन हेतु की गई विभिन्न पहलों पर प्रकाश डाला।
इस कार्यक्रम के दौरान आयोग के विभिन्न कार्यों और उपलब्धियों पर आधारित एक लघु वीडियो फिल्म प्रदर्शित की गई। इस फिल्म में जनजातीय समुदायों के हित में एनसीएसटी के उपायों, नीतिगत सुझावों और राज्यों व केन्द्र-शासित प्रदेशों के साथ समन्वय के प्रयासों पर प्रकाश डाला गया।
इस अवसर पर श्री जुएल ओराम ने आयोग के कामकाज और जिम्मेदारियों का विस्तृत विवरण देने वाली “एनसीएसटी हैंडबुक” और जुलाई से दिसंबर 2025 तक आयोग की विभिन्न गतिविधियों का दस्तावेजीकरण करने वाली एक पत्रिका का विमोचन किया। जनजातीय सशक्तिकरण से संबंधित आयोग की उल्लेखनीय उपलब्धियों को भी प्रदर्शित किया गया। इस समारोह के हिस्से के रूप में जनजातीय अधिकारों पर केन्द्रित एक नुक्कड़ नाटक का मंचन किया गया।
सभा को संबोधित करते हुए, श्री जुएल ओराम ने कहा कि सरकार अनुसूचित जनजातियों के अधिकारों की रक्षा और उनके समग्र विकास को सुनिश्चित करने के प्रति पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। उन्होंने एनसीएसटी की सक्रिय भूमिका की सराहना की और कहा कि आयोग की सिफारिशों एवं जमीनी स्तर के दौरों ने नीति निर्माण की प्रक्रिया में महत्वपूर्ण योगदान दिया है। केन्द्रीय मंत्री ने जनजातीय समुदायों के उत्थान हेतु शिक्षा, स्वास्थ्य, आजीविका, वन अधिकार और बुनियादी ढांचे के क्षेत्रों में निरंतर एवं समन्वित प्रयासों की जरूरत पर बल दिया।
अपने संबोधन में, श्री दुर्गा दास उइके ने जनजातीय समुदायों के लिए कल्याणकारी योजनाओं की प्रभावी पहुंच सुनिश्चित करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि आयोग और मंत्रालय के बीच समन्वय से शिकायत निवारण तंत्र मजबूत हुआ है। उन्होंने यह भी बताया कि अत्याचारों से संबंधित शिकायतों में कमी आई है और जनजातीय समुदाय विकास संबंधी मुद्दों पर अधिक ध्यान केन्द्रित कर रहे हैं।
आयोग की विभिन्न उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए, माननीय अध्यक्ष श्री अंतर सिंह आर्य ने कहा कि एनसीएसटी अपने संवैधानिक दायित्वों को पूरा करने में सक्रिय और सतर्क बनी हुई है। उन्होंने बताया कि राज्यों के साथ नियमित संवाद, अनुसूचित क्षेत्रों का दौरा और शिकायतों का समय पर निपटान आयोग की प्राथमिकता वाले क्षेत्रों में शामिल हैं। उन्होंने जनजातीय परंपराओं, संस्कृति और अधिकारों की रक्षा करने के साथ-साथ उन्हें विकास की मुख्यधारा में सशक्त रूप से शामिल करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
माननीय सदस्य श्री निरुपम चकमा ने वन अधिकारों, भूमि संबंधी मामलों और टिकाऊ आजीविका से संबंधित मुद्दों पर जोर देते हुए कहा कि आयोग इन मामलों पर राज्यों के साथ निरंतर संवाद में है। उन्होंने जनजातीय क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
माननीय सदस्या डॉ. आशा लकरा ने कौशल विकास के साथ-साथ शिक्षा, विशेष रूप से जनजातीय समुदायों की लड़कियों की शिक्षा के महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि सामुदायिक भागीदारी और स्थानीय नेतृत्व को मजबूत करने से विकास कार्यक्रमों की प्रभावशीलता बढ़ती है।
कार्यक्रम का समापन एनसीएसटी के संयुक्त सचिव श्री अमित निर्मल द्वारा धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
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