कार्यक्रम का प्रारम्भ केन्द्र परिसर में स्थित भारत रत्न डॉ. भीमराव रामजी अम्बेडकर की 18 फुट ऊँची प्रतिमा पर पुष्पांजलि अर्पित कर हुआ। यह प्रतिमा प्रख्यात शिल्पकार राम वी. सुतार द्वारा निर्मित है। माननीय मंत्री ने डॉ. अम्बेडकर के समता, न्याय एवं बौद्धिक जागरण के विचारों के प्रति श्रद्धांजलि अर्पित की।
पुष्पांजलि उपरान्त स्मारिका विक्रय केन्द्र का विधिवत उद्घाटन किया गया। माननीय मंत्री ने केन्द्र का अवलोकन किया तथा प्रदर्शित सामग्री के विषय में जानकारी प्राप्त की। केन्द्र में डॉ. अम्बेडकर के जीवन, कृतित्व एवं संवैधानिक मूल्यों से संबंधित प्रकाशन, स्मृति-चिह्न, हस्तनिर्मित उत्पाद तथा सांस्कृतिक प्रेरणा से निर्मित वस्तुएँ उपलब्ध कराई गई हैं।
अपने संबोधन में माननीय मंत्री ने भारत की विविध कलात्मक परम्पराओं के संरक्षण एवं संवर्धन की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की पहलें शिल्पकारों एवं सृजनशील समुदायों के लिए स्थायी आजीविका के अवसर उत्पन्न करती हैं तथा समावेशी विकास एवं सशक्तिकरण को बढ़ावा देती हैं।
इस अवसर पर मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारीगण, डॉ. अम्बेडकर राष्ट्रीय स्मारक (डीएएनएम) के अधिकारी, विद्वान, शोधार्थी एवं आमंत्रित अतिथि उपस्थित रहे।
कार्यक्रम के समापन पर उच्च अल्पाहार की व्यवस्था की गई, जिसमें उपस्थित अतिथियों ने आपसी संवाद किया। सम्पूर्ण कार्यक्रम गरिमामय एवं प्रेरणादायी वातावरण में सम्पन्न हुआ।
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