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आम आदमी पार्टी ने लांच किया ऐप, लोगों को दी जानकारी

कोटा 02 फरवरी, (एजेंसी)। आम आदमी पार्टी की बैठक सिमलिया में रखी गई। कार्यक्रम की संचालिका पूर्व सांगोद विधानसभा कोर्डिनेटर आरती जानार्दन ने बताया कि पार्टी के दिल्ली से आए पर्यवेक्षक ने आम आदमी पार्टी द्वारा लांच किए गए ऐप की जानकारी दी और ऐप के माध्यम से सदस्य जोडऩे का आव्हान किया।

कार्यक्रम में पार्टी के वरिष्ठ कार्यकर्ता मनमोहन गुप्त , आर.के मीणा, पूर्व सांगोद विधानसभा प्रत्याशी योगेंद्र नागर, पूर्व कोटा दक्षिण विधानसभा प्रत्याशी के.बी सिंघल, पूर्व वार्ड प्रत्याशी रियाज मोहम्मद उपस्थित रहे।

सभी ने आम आदमी पार्टी के 200 विधानसभा सीटों पर चुनाव लडऩे के फैसले का स्वागत किया और समर्थन किया।

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पदयात्रा के कारण राहुल गांधी को देश की विविध भाषा, संस्कृति और परंपराओं को जानने का मौका मिला…?

भोपाल,02 फरवरी (एजेंसी)। भारत जोड़ो यात्रा से राहुल गांधी को निश्चित रूप से व्यक्तिगत लाभ हुआ है। कांग्रेस का संगठन भी चलायमान हो गया तथा कार्यकर्ताओं में जोश जगा है। यह पदयात्रा सात सितम्बर को कन्याकुमारी से प्रारंभ हुई थी। इस यात्रा ने 3570 किलोमीटर दूरी तय की। इस दौरान राहुल गांधी लगातार 145 दिनों तक पैदल चले।

उनकी यह यात्रा 12 राज्यों से होकर गुजरी। इन राज्यों में लोकसभा की 372 सीटें आती हैं। कुल मिलाकर यह यात्रा सफल् मानी जानी चाहिए। भारत में हमेशा पदयात्रा का स्वगात किया जाता रहा है। पदयात्रा को सनातन समय से समन्वय की दृष्टि से देखा जाता रहा है। जाहिर है भारतीय संस्कृति में यह पद यात्रियों को अलग स्थान दिया जाता है। प्राचीन भारत की पद यात्राओं को छोड़ दिया जाए तो आजाद भारत में राहुल गांधी की यह दूसरी पदयात्रा है जिससे भारतीय जनमानस को प्रभावित किया।

इसके पहले 80 के दशक में पूर्व प्रधानमंत्री चंद्रशेखर ने कन्याकुमारी से कश्मीर तक पदयात्रा की थी। चंद्रशेखर ने पदयात्रा के दौरान डायरी लिखी जिसे बाद में प्रकाशित किया गया। उन्होंने इसमें लिखा कि पद यात्रा से पूर्व मुझे लग रहा था कि मैं देश को जानता हूं, लेकिन जैसे-जैसे में आगे बढ़ता गया मुझे लगा कि मुझे देश के बारे में कुछ भी नहीं पता था।

जाहिर है कि पदयात्रा के कारण राहुल गांधी को देश की विविध भाषा, संस्कृति और परंपराओं को जानने का मौका मिला। वे अपनी यात्रा के दौरान हजारों लोगों से मिले। इससे उन्हें आम आदमी की समस्याओं का पता ग्राउंड जीरो पर चला। राहुल गांधी ने पदयात्रा के दौरान देश की समस्याओं के बारे में जानकारी हासिल की और लोगों की बुनियादी जिंदगी का संघर्ष देखा। निश्चित रूप से राहुल गांधी को भविष्य में यह अनुभव काम आने वाला है। राजनीतिक रूप से भी यह पदयात्रा कांग्रेस के लिए लाभकारीसाबित होने वाली है। इस पद यात्रा के कारण कांग्रेसियों में नया जोश जागा है।

आम कांग्रेसी को लगता है कि जब उनके सर्वोच्च नेता मैदान में उतर कर पदयात्रा कर सकते हैं, तो फिर उन्हें भी घर में बैठकर राजनीति नहीं करनी है। जाहिर है कि पदयात्रा से कांग्रेस को मजबूती मिली है। राहुल गांधी नए आभामंडल के साथ राष्ट्रीय राजनीति के फलक पर स्थापित हुए हैं। भारत जोड़ो यात्रा कांग्रेस के लिए जो वातावरण बना है उसका लाभ पार्टी का संगठन चुनाव में कितना ले पाता है यह देखने वाली बात होगी। हालांकि कांग्रेस में बार-बार दावा किया कि इस यात्रा का राजनीतिक उद्देश्य नहीं है।

पूरी यात्रा के दौरान राहुल गांधी व्यापारियों, किसानों, मजदूरों, महिलाओं, दलितों आदिवासियों और अल्पसंख्यकों से मिले। जाहिर है उन्होंनके नजदीक से इन लोगों के जीवन के संघर्ष को देखा और समस्याओं को समझने की कोशिश की है। राहुल गांधी की यात्रा में अनेक बुद्धिजीवी, छात्र, फिल्म कलाकार और पूर्व खिलाड़ी शामिल हुए।

राहुल गांधी ने भारत जोड़ो यात्रा के माध्यम से महंगाई, बेरोजगारी और सामाजिक और आर्थिक विषमता जैसे बुनियादी विषयों पर विमर्श खड़ा करने की कोशिश की है। राहुल गांधी ने यात्रा को जिस जज्बे के साथ पूरा किया उसकी भी चर्चा हुई। वे अपनी पूरी यात्रा के दौरान अनुशंसित और व्यवस्थित दिखे। उन्होंने ठंड में भी एक टी-शर्ट पहनकर आम जनता को यह जताने की कोशिश की कि वे सुविधाओं के साथ यात्रा नहीं कर रहे हैं, बल्कि आम आदमी के जीवन को समझने की कोशिश आम आदमी की तरह कर रहे हैं।

145 दिनों तक राहुल गांधी रोज करीब 25 किलोमीटर की दूरी तय करते थे। उन्होंने कहा कि भारत जोड़ो यात्रा का मूल उद्देश्य देश को स्नेह की डोर से बांधना है। उन्होंने अपने प्रत्येक भाषण में कहा कि वे मोहब्बत बांटने आए हैं। राहुल गांधी अपनी यात्रा को लेकर इतने गंभीर दिखे कि उन्होंने इस दौरान चुनाव प्रचार में हिस्सा लेने से भी इनकार कर दिया।

दरअसल, अखिल भारतीय स्तर पर राहुल गांधी की छवि एक गंभीर और संवेदनशील नेता के रूप में स्थापित हुई है, जिसका लाभ निश्चित रूप से उन्हें और उनकी पार्टी को होगा। भारत जोड़ो यात्रा के कारण 2024 के लोकसभा चुनाव दिलचस्प हो जाएंगे।

अब भाजपा कांग्रेस को हल्के में नहीं ले सकती। एक मजबूत कांग्रेस का सामने आना देश के संसदीय लोकतंत्र के लिए भी आवश्यक है। इसलिए भी कहा जा सकता है कि यह यात्रा अपने उद्देश्य में सफल रही।

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राहुल गांधी की यात्रा में जबरदस्त जनसैलाब उमड़ा, लेकिन विवादित बयानबाजी भी हुई…?

भोपाल,02 फरवरी (एजेंसी)। इसमें कोई शक नहीं कि राहुल गांधी की यात्रा में जबरदस्त जनसैलाब उमड़ा है। उन्हें सभी वर्गों का समर्थन मिला है। लेकिन कांग्रेस इसका लाभ उठाने की स्थिति में इसलिए नहीं है, क्योंकि उसके नेताओं ने विवाद बयान देकर यात्रा का असर लगभग वाश आउट कर दिया है।

तमिलनाडु में भारत माता के खिलाफ लगातार बोलने वाले ईसाई धार्मिक नेता के पोस्टर राहुल गांधी के साथ लागए गए। कर्नाटक के पूर्व मंत्री और कांग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष सतीश जारकीहोली के बयान पर सबवाल मचा है। 60 वर्षीय सतीश जारकीहोली ने कहा कहा कि हिंदू शब्द की उत्पत्ति फारसी से हुई थी और इस मूल शब्द का बहुत बुरा मतलब था।

उन्होंने यहां तक कहा कि हिंदू का जो मतलब है वह इतना शर्मनाक है कि प्रत्येक हिंदू का सिर शर्म से झुक जाएगा। उनके बयान से इतना विवाद हुआ कि कांग्रेस को पल्ला झाडऩा पड़ा। पार्टी के महासचिव रणदीव सुरजेवाला ने कहा कि कर्नाटक के नेता का बयान अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है और पार्टी इससे सहमत नहीं है।

राहुल गांधी की तुलना कई कांग्रेसियों ने भगवान राम से की इसमें भी विवाद हुआ। केरल में राहुल गांधी की यात्रा के समय नेताओं ने भाषण दिए कि देश को अब संघ मुक्त करने की जरूरत है, क्योंकि संघ देशद्रोही संगठन है। राहुल गांधी ने खुद दक्षिण भ्ज्ञारत के अनेक बार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ पर कठोर प्रहार किया इससे संघ परिवार को एकजुट होने में मदद मिली और वह सक्रिय रूप से भाजपा के पक्ष में खड़ा हो गया है।

इसका असर आने वाले चुनाव में देखने को मिलेगा। महाराष्ट्र मं सावरकर को लेकर रहाुल गांधी ने जो कुछ कहा उससे भी बड़ा विवाद हुआ। इस विवाद के कारण कांग्रेस को महाराष्ट्र में नुकसान हुआ है।

तवांग के घटनाक्रम में राहुल ने जिस तरह से सेना का अपमान किया और कहा कि हमारे सैथ्रक रोज पिट रहे हैं इससे भी यात्रा का मकसद भटका हुआ प्रतीत हुआ।

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6 करोड़ साल पुराने शालिग्राम पत्थर से बनेंगी भगवान राम की मूर्ति, अयोध्या में हुआ शिलाओं का भव्य स्वागत

अयोध्या 02 फरवरी, (एजेंसी)। भगवान राम के भक्तों के लिए खुशखबरी है। 373 किलोमीटर और 7 दिन का सफर तय करने के बाद के बाद दो विशाल शालिग्राम शिलाएं अयोध्या पहुंच गई हैं। इसी 6 करोड़ साल पुराने शालिग्राम पत्थर से भगवान राम और सीता की मूर्ति बनेगी, जो राम दरबार में स्थापित होगी।

जैसे ही शालिग्राम शिला अयोध्या पहुंची श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय के साथ ट्रस्टी डॉक्टर अनिल मिश्र, निवर्तमान महापौर ऋषिकेश उपाध्याय सहित अन्य भाजपा नेताओं ने पुष्प वर्षा कर जोरदार स्वागत किया।

आज सुबह रामसेवक पुरम में 51 वैदिक ब्राह्मणों ने शालिग्राम शिलाओं का पूजन कराया। इसके बाद नेपाल के पूर्व उपप्रधानमंत्री विमलेंद्र निधि और जानकी मंदिर के महंत तपेश्वर दास ने चंपत राय को शालिग्राम शिलाएं सौंप दी।

रामनगरी पहुंची शिलाओं को देखने के लिए हजारों की संख्या में लोगों की भीड़ उमड़ पड़ी. सैकड़ों गाडिय़ों के काफिले के साथ नाचते भक्तों की भीड़ व जय श्रीराम के उद्घोष के बीच शालिग्राम शिलाएं रामसेवक पुरम कार्यशाला पहुंचीं, जहां अयोध्या तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के कोषाध्यक्ष गोविंद देव गिरी, सृष्टि महंत देवेंद्र दास ने शिलाओं पर पुष्प वर्षा कर स्वागत किया।

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उपराष्ट्रपति और कानून मंत्री के खिलाफ बॉम्बे HC में याचिका दाखिल, पद से हटाने की मांग

मुंबई 02 Feb, (एजेंसी): उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और केंद्रीय कानून मंत्री किरन रिजिजू के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में एक याचिका दाखिल हुई है। बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन ने जगदीप धनखड़ और किरन रिरिजू के हाल ही में दिये बयानों को लेकर उनके खिलाफ याचिका दायर की है। याचिका में मांग की गई है कि बॉम्बे हाईकोर्ट धनखड़ और रिजिजू को उन्हें अपने आधिकारिक कर्तव्यों का निर्वहन करने से रोके और घोषित करे कि दोनों अपने सार्वजनिक आचरण और अपने बयानों के माध्यम से भारत के संविधान में विश्वास की कमी दिखाते हुए अपने संवैधानिक पदों को धारण करने से अयोग्य हैं।

बॉम्बे लॉयर्स एसोसिएशन की याचिका में कहा गया है कि उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ और केंद्रीय कानून मंत्री किरेन रिजिजू ने अपने गैर जिम्मेदाराना बयानों से सार्वजनिक रूप से सर्वोच्च न्यायालय की प्रतिष्ठा को कम किया है। बता दें कि किरेन रिजिजू ने बार-बार कॉलेजियम प्रणाली पर सवाल उठाया। यहां तक ​​कि उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने भी न्यायपालिका की शक्तियों पर ‘मूल संरचना’ सिद्धांत का हवाला देते हुए सवाल खड़े किए और NJAC अधिनियम को रद्द करने के उसके फैसले को गंभीर कदम बताया।

दोनों के खिलाफ बॉम्बे हाईकोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है, ‘संविधान के तहत उपलब्ध किसी भी उपाय का उपयोग किए बिना सबसे अपमानजनक और अमर्यादित भाषा में न्यायपालिका पर सामने से हमला किया गया। उपराष्ट्रपति और कानून मंत्री ने सार्वजनिक मंच पर खुले तौर पर कॉलेजियम प्रणाली और बुनियादी ढांचे के सिद्धांत पर हमला किया। संवैधानिक पदों पर बैठे जिम्मेदार लोगों की ओर से इस तरह का अशोभनीय व्यवहार बड़े पैमाने पर जनता की नजर में सर्वोच्च न्यायालय की महिमा को घटा रहा है।’

गौरतलब है कि उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने पिछले महीने, केशवानंद भारती मामले में सुप्रीम कोर्ट के 1973 के ऐतिहासिक फैसले पर बयान दिया था। इस मामले में सर्वोच्च अदालत ने फैसला सुनाया था कि संसद के पास संविधान में संशोधन करने का अधिकार है, लेकिन इसकी मूल संरचना में बदलाव करने का नहीं। जगदीप धनखड़ ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पर सवाल खड़ा किया था और कहा था, ‘क्या हम एक लोकतांत्रिक राष्ट्र हैं’ इस सवाल का जवाब देना मुश्किल होगा। वहीं दिसंबर 2022 में संसद के शीतकालीन सत्र के दौरान राज्यसभा की अध्यक्षता करते हुए उन्होंने सुप्रीम कोर्ट द्वारा एनजेएसी अधिनियम को रद्द किए जाने को ‘लोगों के जनादेश’ की अवहेलना बताया था।

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रक्षा बजट : परिचालन तैयारियों पर ध्यान, अग्निवीरों के प्रशिक्षण पर जोर

नई दिल्ली 02 Feb, (एजेंसी): रक्षा बजट में वर्तमान और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए सेवाओं की परिचालन संबंधी तैयारियों के उच्च स्तर को बनाए रखने पर ध्यान दिया गया है, जबकि गैर-वेतन राजस्व परिचालन आवंटन बढ़ाकर 27,570 करोड़ रुपये किया गया है। इस खंड के तहत बजटीय परिव्यय के साथ बजट अनुमान 2022-23 में 62,431 करोड़ रुपये से बढ़कर 2023-24 में 90,000 करोड़ रुपये हो गया। बजट में बढ़ाए गए आवंटन से अग्निवीरों के लिए प्रशिक्षण सहायता और सिमुलेटर को भी पूरा किया जाएगा और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि वे रक्षा बलों में शामिल होने के लिए प्रशिक्षण के निर्धारित मानकों को पूरा करेंगे।

रक्षा मंत्रालय ने कहा, “यह हथियार प्रणालियों, जहाजों/विमान और उनके रसद सहित प्लेटफार्मो के भरण-पोषण को पूरा करेगा, बेड़े की सेवाक्षमता को बढ़ावा देगा, सैन्य भंडार के लिए महत्वपूर्ण गोला-बारूद और पुर्जो की आपातकालीन खरीद, जहां भी आवश्यक होगा, स्टॉकिंग की जाएगी।”

गैर-वेतन राजस्व खंड में इस वृद्धि के अग्रदूत के रूप में मध्यावधि समीक्षा के दौरान सरकार ने चालू वित्तवर्ष के परिचालन आवंटन में भी 26,000 करोड़ रुपये की वृद्धि की थी, जो वर्तमान आवंटन का 42 प्रतिशत है।

संशोधित अनुमान 2022-23 में इस अभूतपूर्व वृद्धि ने चालू वर्ष के दौरान संपूर्ण कैरी ओवर देनदारियों का परिसमापन सुनिश्चित किया है, जिससे यह सुनिश्चित होता है कि सेवाओं के अगले वर्ष के परिचालन परिव्यय में कोई कमी नहीं है।

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आरएसएस के महासचिव बोले, संघ न तो दक्षिणपंथी है, न ही वामपंथी

जयपुर 02 Feb, (एजेंसी): राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरकार्यवाह (महासचिव) दत्तात्रेय होसबोले ने कहा कि संगठन के कार्यकर्ता ‘राष्ट्रवादी’ हैं, ‘न दक्षिणपंथी हैं और न वामपंथी’। एकात्म मानवदर्शन अनुसंधान एवं विकास प्रतिष्ठान द्वारा  आयोजित ‘राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ : काल, आज और कल’ विषय पर दीनदयाल स्मारक व्याख्यान में होसबोले ने कहा, “हम न तो दक्षिणपंथी हैं और न ही वामपंथी। हम राष्ट्रवादी हैं। संघ केवल राष्ट्र के हित में काम कर रहा है।”

होसबोले ने कहा कि भारत में रहने वाले सभी लोग हिंदू हैं, क्योंकि उनके पूर्वज हिंदू थे। उनकी पूजा का तरीका अलग हो सकता है, लेकिन उन सभी का डीएनए एक ही है।

उन्होंने आगे कहा, “संघ केवल शाखा लगाएगा, लेकिन संघ के स्वयंसेवक सभी काम करेंगे। सभी के सामूहिक प्रयास से ही भारत विश्व गुरु बनकर विश्व का नेतृत्व करेगा। संघ सभी को मानता है, भारत के धर्म और संप्रदाय एक हैं।”

उन्होंने कहा, “लोग अपने पंथ की बातों को रखते हुए संघ कार्य कर सकते हैं। संघ कठोर नहीं, बल्कि लचीला है। संघ को समझने के लिए हृदय की आवश्यकता नहीं है। केवल मन काम नहीं करता। हृदय और मन को बनाना संघ का कार्य है। जानिए, जीवन क्या है और जीवन का लक्ष्य क्या है।”

आरएसएस महासचिव ने कहा कि संविधान अच्छा है और उसे चलाने वाले खराब हैं तो संविधान भी कुछ नहीं कर सकता।

उन्होंने कहा कि यह ध्यान में रखा जाना चाहिए कि हमारी अगली पीढ़ी सामाजिक कलंक को आगे नहीं ले जाए। इसलिए पर्यावरण की रक्षा के लिए जल, भूमि और वनों की रक्षा करनी होगी।

“भारत की अस्मिता और अस्तित्व के लिए हमें समाज को सक्रिय रखना है।”

होसबोले ने कहा कि देश में लोकतंत्र की स्थापना में आरएसएस की भूमिका रही है। यह तथ्य विदेशी पत्रकारों द्वारा लिखा गया था। तमिलनाडु में धर्मातरण के खिलाफ हिंदू जागरण का शंखनाद हुआ।

आरएसएस महासचिव ने कहा कि आज संघ देश में सामाजिक जीवन के सभी क्षेत्रों में सक्रिय है, कोई भी आपदा आती है तो संघ के स्वयंसेवकों को ही याद किया जाता है।

होसबोले ने कहा, “आज संघ राष्ट्रीय जीवन के केंद्र में है। संघ व्यक्ति निर्माण और समाज निर्माण का कार्य करता रहेगा। समाज के लोगों को जोड़कर समाज के लिए कार्य करेगा। आज संघ के एक लाख सेवा कार्य हो रहे हैं। संघ एक जीवनशैली और कार्य करने का तरीका है। संघ एक जीवनशैली है और संघ आज एक आंदोलन बन गया है। हिंदुत्व के निरंतर विकास के आविष्कार का नाम आरएसएस है।”

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त्रिपुरा में वाम मोर्चा और कांग्रेस एक-दूसरे के खिलाफ खड़े उम्मीदवारों को वापस लेंगे

अगरतला 02 Feb, (एजेंसी): त्रिपुरा में सीपीआई-एम नीत वाम मोर्चा और कांग्रेस ने घोषणा की कि दोनों पार्टियां सीटों के बंटवारे के समझौते के तहत 16 फरवरी को होने वाले चुनाव में एक-दूसरे के खिलाफ खड़े अपने उम्मीदवारों को वापस ले लेंगी। सीपीआई-एम के नेतृत्व में वामपंथी दलों ने 25 जनवरी को 47 उम्मीदवारों के नामों की घोषणा की, जिसमें 13 सीटें उनके नए सहयोगी कांग्रेस के लिए छोड़ी गईं, जबकि आठ मौजूदा विधायकों को छोड़ दिया गया।

वामपंथी दलों द्वारा कम सीटों के आवंटन से कांग्रेस नेता नाराज थे। 28 जनवरी को कांग्रेस ने 17 उम्मीदवारों की घोषणा की।

नामांकन भरने के आखिरी दिन वामदलों और कांग्रेस दोनों ने कई सीटों पर एक दूसरे के खिलाफ उम्मीदवार उतारे हैं। बुधवार की देर रात सीपीआई-एम ने एक बयान में कहा कि वे कांग्रेस उम्मीदवारों के खिलाफ मैदान में उतरे अपने अतिरिक्त उम्मीदवारों को वापस ले लेंगे और कांग्रेस नेताओं से जवाबी कार्रवाई करने का आग्रह किया।

कांग्रेस प्रवक्ता और पार्टी के प्रदेश महासचिव प्रशांत भट्टाचार्य ने बुधवार देर रात बताया कि वामपंथी उम्मीदवारों के खिलाफ खड़े किए गए उनके उम्मीदवार गुरुवार को वापस ले लिए जाएंगे।

गुरुवार को नाम वापसी का अंतिम दिन है। कांग्रेस नेता और त्रिपुरा में पार्टी के इकलौते विधायक सुदीप रॉय बर्मन ने कहा था कि उन्होंने पहले 27 सीटों की मांग की थी और फिर वामपंथी दलों से 23 सीटों की मांग की थी।

कांग्रेस उम्मीदवारों की सूची के अनुसार, रॉय बर्मन अगरतला निर्वाचन क्षेत्र से फिर से चुनाव लड़ेंगे, जबकि प्रदेश पार्टी अध्यक्ष बिरजीत सिन्हा कैलाशहर से चुनाव लड़ेंगे।

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आरोपी की मौत होने पर उत्तराधिकारी से वसूला जा सकता है जुर्माना: कर्नाटक हाईकोर्ट

बेंगलुरू 02 Feb, (एजेंसी): कर्नाटक उच्च न्यायालय ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि आरोपी की मौत होने पर उसकी संपत्ति या उसके उत्तराधिकारियों से जुर्माना वसूला जा सकता है। न्यायमूर्ति शिवशंकर अमरनवर की अध्यक्षता वाली पीठ ने बुधवार को हासन के दिवंगत टोटिल गौड़ा की याचिका पर गौर करते हुए यह आदेश दिया। जिंदा रहते हुए उन्होंने यह अर्जी दाखिल की थी।

खंडपीठ ने कहा कि याचिकाकर्ता को उसकी मौत के मामले में भी अदालत के आदेश के अनुसार जुर्माना भरने की जवाबदेही से छूट नहीं मिलेगी।

याचिकाकर्ता की मृत्यु के बाद परिवार के किसी भी सदस्य ने मामले को जारी रखने के लिए याचिका प्रस्तुत नहीं की है। दिवंगत टोटाइल गौड़ा के वकील ने प्रस्तुत किया कि कानूनी उत्तराधिकारी याचिका को जारी नहीं रखना चाहते हैं। पीठ ने कहा कि संपत्ति के उत्तराधिकारी को जुर्माने का भुगतान करना चाहिए।

हसन के अतिरिक्त सत्र न्यायालय ने 12 दिसंबर, 2011 को याचिकाकर्ता स्वर्गीय टोटिल गौड़ा को विद्युत अधिनियम के तहत 29,204 रुपये का जुर्माना लगाया था।

टोटिल गौड़ा ने उच्च न्यायालय के समक्ष अपील दायर की और निचली अदालत के आदेश पर सवाल उठाया। लेकिन हाईकोर्ट में याचिका पर सुनवाई के दौरान टोटिल गौड़ा की मौत हो गई।

उच्च न्यायालय ने याचिकाकर्ता की मृत्यु की पृष्ठभूमि में अपील याचिका को खारिज कर दिया। कोर्ट ने दोषी की संपत्ति से या संपत्ति के उत्तराधिकारियों से जुर्मार्ने की रकम वसूलने का आदेश दिया।

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जम्मू-श्रीनगर हाईवे यातायात के लिए खुला

श्रीनगर 02 Feb, (एजेंसी): जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग रामबन और बनिहाल के बीच बारिश के कारण हुए भूस्खलन और पहाड़ों से पत्थरों के गिरने के कारण 30 जनवरी से ज्यादातर बंद रहने के बाद गुरुवार को यातायात के लिए खुल गया। जम्मू-कश्मीर ट्रैफिक पुलिस ने कहा, जम्मू श्रीनगर नेशनल हाईवे पर यातायात सुचारू रूप से चल रहा है। मुगल रोड और एसएसजी रोड बंद है।

राजमार्ग कश्मीर घाटी की जीवन रेखा है और कश्मीर को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाली मुख्य सड़क है।

आवश्यक वस्तुओं और अन्य वाहनों से लदे कश्मीर जाने वाले ट्रक राजमार्ग से गुजरते हैं और कश्मीर से फलों को ले जाने वाले ट्रक इस सड़क के माध्यम से देश के बाकी हिस्सों में जाते हैं।

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व्हाट्सएप की प्राइवेसी पॉलिसी मानने को बाध्य नहीं यूजर्सः सुप्रीम कोर्ट

नई दिल्ली 02 Feb, (एजेंसी)-सर्वोच्च न्यायालय ने व्हाट्सएप को मीडिया में व्यापक प्रचार करने का निर्देश दिया कि उपयोगकर्ता उसकी 2021 की गोपनीयता नीति को स्वीकार करने के लिए बाध्य नहीं हैं और व्हाट्सएप की कार्यक्षमता तब तक प्रभावित नहीं होगी जब तक कि नया डेटा सुरक्षा बिल लागू नहीं हो जाता।

मई 2021 में, व्हाट्सएप ने इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के पत्र के जवाब में आश्वासन दिया था कि यदि वह नई गोपनीयता नीति अपडेट को स्वीकार नहीं करते हैं तो संदेश सेवा अपने उपयोगकर्ताओं के लिए कार्यक्षमता को सीमित नहीं करेगी। न्यायमूर्ति के.एम. जोसेफ की अध्यक्षता वाली पांच-न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने पाया कि व्हाट्सएप उपक्रम को व्यापक प्रचार देने से उन लोगों को लाभ होगा जो इसकी 2021 की गोपनीयता नीति की शर्तों से सहमत नहीं हैं।

शीर्ष अदालत ने व्हाट्सएप से सरकार को दिए गए अपने वचन पत्र के संबंध में पांच अखबारों में विज्ञापन देने को कहा। बेंच- जिसमें जस्टिस अजय रस्तोगी, अनिरुद्ध बोस, हृषिकेश रॉय और सी टी रविकुमार भी शामिल हैं- उन्होंने कहा: हम निर्देशित करते हैं कि व्हाट्सएप इस पहलू को दो बार पांच राष्ट्रीय समाचार पत्रों में प्रचार करेगा।

पीठ ने कहा कि उसने सरकार के जवाब में अपनाए गए रुख को रिकॉर्ड किया है और हम व्हाट्सएप के वरिष्ठ वकील की दलील को रिकॉर्ड करते हैं कि वह सुनवाई की अगली तारीख तक पत्र की शर्तों का पालन करेंगे।

शीर्ष अदालत ने कहा कि केंद्र के वकील ने उसके संज्ञान में लाया है कि एक डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण विधेयक 2022 संसद के समक्ष रखा जाने वाला है, और यह विवाद है कि विधेयक में अधिकांश पहलू शामिल होंगे जो इस अदालत के समक्ष याचिकाओं की विषय वस्तु हैं और इस मामले को बाद के स्तर पर उठाया जा सकता है।

इस अनुरोध को व्हाट्सएप के वकील ने भी प्रतिध्वनित किया। हालांकि, याचिकाकर्ताओं के वकील ने इस पहलू का पुरजोर विरोध किया और प्रस्तुत किया कि सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष याचिकाओं में उठाए गए मुद्दों के समाधान के लिए कानून को आड़े नहीं आना चाहिए। याचिकाकर्ताओं के वकील ने कहा कि व्हाट्सएप द्वारा यूरोप में अपने ग्राहकों के लिए स्टैंड यहां लिए गए अपने स्टैंड के विपरीत है, और अदालत से मामले की सुनवाई करने का आग्रह किया।

याचिकाकर्ताओं के वकील ने जोर देकर कहा कि गोपनीयता नीति में डेटा शेयरिंग से बाहर निकलने का विकल्प होना चाहिए। दिन भर की दलीलें सुनने के बाद, शीर्ष अदालत ने व्हाट्सएप की गोपनीयता नीति को चुनौती देने वाली याचिकाओं के बैच में अंतरिम निर्देश पारित किया और मामले को 11 अप्रैल को आगे की सुनवाई के लिए निर्धारित किया।

वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल ने व्हाट्सएप का प्रतिनिधित्व किया और वरिष्ठ अधिवक्ता अरविंद दातार ने मेटा का प्रतिनिधित्व किया। वरिष्ठ अधिवक्ता श्याम दीवान और के.वी. विश्वनाथन ने अन्य वकीलों के साथ याचिकाकर्ताओं का प्रतिनिधित्व किया।

शीर्ष अदालत कर्मण्य सिंह सरीन और श्रेया सेठी नामक छात्रों की याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें वॉट्सऐप और उसकी मूल कंपनी फेसबुक के बीच यूजर्स के कॉल, फोटो, मैसेज, वीडियो और डॉक्यूमेंट को उपलब्ध कराने के लिए हुए समझौते को चुनौती दी गई थी और इसे लोगों की निजता और बोलने की आजादी का उल्लंघन करार दिया गया था।

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86 मिनट के बजट भाषण में पीएम मोदी ने 100 से भी अधिक बार थपथपाई मेज

नई दिल्ली 01 फरवरी, (एजेंसी)। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लोक सभा में 86 मिनट तक अपना बजट भाषण पढ़ा। वित्त मंत्री के 86 मिनट के इस बजट भाषण के दौरान लगातार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मेज थपथपाकर अपने वित्त मंत्री का हौसला बढ़ाते और बजट घोषणाओं की सराहना करते नजर आए।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के कुल 86 मिनट के बजट भाषण के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 124 बार मेज थपथपा कर वित्त मंत्री द्वारा की जा रही बजट घोषणाओं की सराहना की। प्रधानमंत्री मोदी के साथ ही सत्ता पक्ष की तरफ बैठे सरकार के तमाम मंत्री, भाजपा सांसद और सहयोगी दलों के सांसदों ने भी बजट भाषण के दौरान लोक सभा में 124 बार मेज थपथपा कर बजट की सराहना की।

बजट भाषण के दौरान लोक सभा में भाजपा और कांग्रेस सांसदों के बीच नारे लगाने की भी होड़ दिखाई दी। बजट भाषण के दौरान सदन में कई बार भाजपा सांसद ‘मोदी-मोदी के नारे लगाते नजर आए वहीं इसके जवाब में कांग्रेसी सांसद ‘भारत जोड़ो का नारा लगाते सुनाई दिए।

भाषण के दौरान ही विपक्षी बेंच की तरफ से कई बार टोकाटोकी भी हुई। सदन में कांग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ने दो बार खड़े होकर पेट्रोल-डीजल और गैस की बढ़ी कीमत का मुद्दा उठाया।

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महिलाओं की सेविंग्स के लिए मोदी सरकार लाई खास योजना, मिलेगा इतने प्रतिशत ब्याज

नई दिल्ली 01 फरवरी, (एजेंसी)।  केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट में महिलाओं को वरिष्ठ नागरिकों के लिए अहम घोषणाएं की हैं। महिलाओं के लिए महिला सम्मान बचत पत्र योजना शुरू होगी। इसमें महिलाओं को 2 लाख की बचत पर 7.5त्न का ब्याज मिलेगा। इसके अलावा वरिष्ठ नागरिक खाता स्कीम की सीमा 4.5 लाख से 9 लाख की जाएगी। किसानों के हित की बात करें तो किसानों को लोन देने की राशि 20 लाख करोड़ रुपए की गई है।

*कृषि स्टार्टअप बढ़ाने के लिए एग्रीकल्चर एक्सीलेटर फंड बनेगा

*प्रधाानमंत्री मत्स्य योजना के लिए 6 हजार करोड़ रुपए का ऐलान

*25 लाख रुपये तक के लीव इनकैशमेंट पर कोई शुल्क नहीं

*स्टार्ट-अप के आयकर को बढ़ावा देने के लिए एक साल के लिए बढ़ाया गया

*बजट में रक्षा मंत्रालय के लिए 5.94 लाख करोड़ रूपये का आवंटन

*जेल में बंद गरीब कैदियों को जुर्माने और जमानत राशि के लिए जरूरी वित्तीय मदद

*-कपड़े और कृषि को छोड़कर अन्य वस्तुओं पर आयात शुल्क की मूल दर घटाकर 13 प्रतिशत की

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प्रगतिशील, अग्रणी, समृद्ध और जन-हितैषी है केन्द्रीय बजट : जयवीर शेरगिल

नई दिल्ली 01 फरवरी, (एजेंसी)। भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय प्रवक्ता जयवीर शेरगिल ने कहा है कि वित्तीय वर्ष 2023 के लिए केन्द्रीय बजट भारत की तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में एक टर्बो इंजन का काम करेगा, जो युवाओं, करदाताओं, एमएसएमई क्षेत्र, महिलाओं, किसानों व कम आमदन वाले वर्ग सहित अन्य सभी श्रेणियों के लिए बंपर बोनेंजा बजट है। यह बजट अग्रणी है और निवेश में बढ़ोतरी, रोजगार व कारोबार के आसान अवसरों पर फोकस करते हुए, भारत की तरक्की की कहानी को पंख प्रदान करेगा।

भाजपा प्रवक्ता ने बजट को सभी वर्गों के लिए दूरदर्शी, विकासमुखी और लाभदायक बताते हुए कहा है कि बजट 2023 में समाज के सभी लोगों का ध्यान रखा गया है। शेरगिल ने बजट में किए गए कुछ प्रमुख एलानों का जिक्र करते हुए कहा कि इस केन्द्रीय बजट में रेलवे के लिए सबसे ज्यादा बजट रखा गया है, मध्य वर्ग के लोगों हेतु टैक्स स्लेब्स को रिव्यू किया गया है और महिलाओं के लिए 7.5 प्रतिशत ब्याज दर के साथ महिला सम्मान बचत पत्र के नाम से एक नई छोटी बचत योजना का ऐलान किया गया है।

भाजपा नेता ने कहा कि किसानों को स्टार्टअप स्थापित करने हेतु प्रोत्साहित करने के लिए कृषि क्षेत्र पर केंद्रित एक्सीलेटर फंड शुरू किया गया है। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि कृषि क्षेत्र में किसानों के लिए स्टार्टअप शुरू करने, उन्हें कृषि फंड देने और डिजिटल ट्रेनिंग देने से देश की खेतीबाड़ी में क्रांति आएगी। शेरगिल ने कहा कि वित्त मंत्री द्वारा कृषि क्रेडिट को 20 ट्रिलियन तक बढ़ाने का ऐलान पशुपालन, डेयरी और मछली पालन पर केंद्रित होने के अलावा, केंद्र द्वारा 10 मिलियन किसानों को कुदरती कृषि को अपनाने हेतु प्रोत्साहित करने का कदम कृषि क्षेत्र के कल्याण हेतु किया गया एक बहुत महत्वपूर्ण और बड़ा ऐलान है।

शेरगिल ने केन्द्रीय बजट 2023 की और तारीफ करते हुए कहा है कि वित्त मंत्री के भाषण में कृषि के लिए एक डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर को एक खुले स्रोत और खुले मानक के रूप में निर्मित करने की घोषणा कृषि क्षेत्र की प्रगति में एक लंबा रास्ता तय करेगी। जिस संबध में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा है कि यह किसानों पर केंद्रित समाधानों पर काम करेगा और फार्म इनपुट्स, बाजार की जानकारी तक पहुंच हासिल करने में सुधार करेगा और कृषि उद्योग व स्टार्टअपस के लिए समर्थन देगा।

इस क्रम में, जनकल्याणकारी घोषणाओं के लिए सीतारमण की प्रशंसा करते हुए शेरगिल ने कहा है कि गरीबों को घर मुहैया करवाने के लिए प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत फंड्स के आबंटन में 66 प्रतिशत की बढोतरी करने से पिछड़ों को बहुत फायदा मिलेगा। इसके अलावा सरकार ने अगले 3 सालों के दौरान भारत के युवाओं को उद्योगों के लिए नए कोर्सेज में हुनर प्रदान करने हेतु प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना 4.0 शुरू करने का भी ऐलान किया है।

शेरगिल ने कहा कि कैप्क्स को 33 प्रतिशत बढ़ाने और क्रेडिट स्कीम में बढ़ोतरी, एमएसएमई क्षेत्र में रिफंड के अलावा, उद्योगों के लिए 39000 तक अनुपालनों को कम करना अथवा सरल केवाईसी भी स्वागत योग्य कदम हैं। वास्तव में यह केंद्रीय बजट कमल की सरकार द्वारा पेश किए गए कमाल के बजट से कम नहीं है।

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मुख्तार अंसारी के विधायक बेटे की जमानत अर्जी खारिज की

*विवादित बयान के बाद दर्ज हुए मुकदमे को खारिज करने का मामला*

प्रयागराज 01 Feb,  (एजेंसी)। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पूर्वांचल के माफिया मुख्तार अंसारी के विधायक बेटे अब्बास अंसारी की जमानत अर्जी खारिज कर दी है। हाईकोर्ट ने सुनवाई पूरी होने के बाद 17 जनवरी को फैसला सुरक्षित कर लिया था। विधानसभा चुनाव के दौरान विवादित बयान को लेकर अब्बास अंसारी पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया गया

अब्बास अंसारी ने विधान सभा चुनाव 2022 में मऊ में आयोजित रैली में विवादित बयान दिया था। कहा था कि प्रदेश में उनकी सरकार बनने पर अधिकारियों से हिसाब-किताब किया जाएगा। इस बयान को लेकर प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की गई थी। इस मामले के खिलाफ अब्बास अंसारी ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल की थी और प्राथमिकी को रद्द करने की मांग की थी। जस्टिस दिनेश कुमार सिंह की सिंगल बेंच ने इस मामले की सुनवाई करते हुए बुधवार को अब्बास अंसारी की जमानत अर्जी को खारिज कर दिया है।

कोर्ट ने कहा यदि चार्जशीट से अपराध का खुलासा हो रहा हो तो हस्तक्षेप नहीं किया जा सकता। साक्ष्यों डद ट्रायल में विचार किया जायेगा। अब्बास अंसारी पर सार्वजनिक चुनावी सभा में अधिकारियों को लेकर विवादित बयान देने का आरोप है। याची के एडवोकेट उपेंद्र उपाध्याय का कहना था कि धारा 153 के तहत याची के खिलाफ कोई अपराध नहीं बनता। यह धारा बयान से दो समुदायों के बीच वैमनस्यता फैलाने पर लागू होती है। याची के बयान में सामुदायिक वैमनस्यता फैलाने के तत्व नहीं होते हैं। शेष धाराएं जमानती अपराध की राजनीति से प्रेरित होकर दर्ज कराई गई हैं। इसलिए कार्यवाही रद्द की जाय। राज्य सरकार की तरफ से कहा गया कि याची के बयान कानून-व्यवस्था को बिगाड़ने वाले, समुदाय को धमकाने वाले हैं, जिसमें राहत नहीं दी जा सकती। अब्बास अंसारी ने पिछले विधान सभा चुनाव के दौरान मऊ में आयोजित रैली में प्रदेश में सरकार बनने पर अधिकारियों को 6 माह तक तबादला न कर उनसे हिसाब-किताब करने का विवादित बयान दिया था। इस पर कोतवाली मऊ में प्राथमिकी दर्ज कर कार्रवाई की गई थी।

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फरक्का में अडानी पावर की हाई-टेंशन बिजली लाइनों के खिलाफ कलकत्ता हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर

कोलकाता 01 Feb, (एजेंसी): पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के फरक्का में अडानी समूह के स्वामित्व वाले बिजली संयंत्र द्वारा हाई-टेंशन बिजली लाइनों की स्थापना के खिलाफ मंगलवार को कलकत्ता हाईकोर्ट की एक खंडपीठ में एक जनहित याचिका (पीआईएल) दायर की गई है। झारखंड के गोड्डा जिले से बांग्लादेश तक फैली एक परियोजना के हिस्से के रूप में अडानी समूह के स्वामित्व वाले बिजली संयंत्र द्वारा द्विपक्षीय व्यापार समझौते के तहत हाई-टेंशन बिजली लाइनें स्थापित की जा रही थीं।

मुख्य न्यायाधीश प्रकाश श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति राजर्षि भारद्वाज की खंडपीठ ने एसोसिएशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ डेमोक्रेटिक राइट्स (एपीडीआर) और फरक्का क्षेत्र के 30 फल किसानों द्वारा दायर याचिका को स्वीकार कर लिया। मामले की सुनवाई सात फरवरी को होगी।

याचिकाकर्ताओं ने जनहित याचिका में कहा है कि जिस इलाके से हाईटेंशन बिजली की लाइनें गुजरेंगी, वहां ज्यादातर लोग आम और लीची की खेती पर निर्भर हैं, ओवरहेड लाइनें उनकी आजीविका को प्रभावित करेंगी।

उनका दावा है कि ये हाई-टेंशन बिजली की लाइनें आम और लीची के बागानों के ऊपर से गुजर रही हैं और इसलिए उनके स्थान को वैकल्पिक क्षेत्रों में बदल दिया जाना चाहिए।

उन्होंने यह भी दावा किया है कि पहले भी उन्होंने इस घटनाक्रम का विरोध किया था और इसके लिए पुलिस ने उन्हें पीटा था।

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Budget में किसानों को मिला तोहफा, वित्त मंत्री ने किया श्री अन्न योजना का ऐलान

नई दिल्ली 01 Feb,. (एजेंसी): वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने वित्त वर्ष 2023-24 के आज बजट को पेश करते हुये इसे अमृत काल का पहला बजट बताया और कहा कि यह समग्र विकास का बजट है जिसके परिणाम सभी देशवासियों तक पहुंचाने की कोशिश है। सीतारमण ने यहां लोकसभा में बजट भाषणा का शुभारंभ करते हुये कहा कि चालू वित्त वर्ष में विकास दर सात प्रतिशत रहने का अनुमान है। वैश्विक स्तर पर आर्थिक सुस्ती के बावजूद भारत दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ने वाला अर्थव्यवस्था है। इस आखिरी पूर्ण बजट में कृषि और किसानों पर जोर दिया गया है। केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट 2023 पेश करते हुए कृषि क्षेत्र और किसानों को समृद्ध बनाने के लिए कई घोषणाएं कीं।

वित्त मंत्री ने कहा कि बाजरा, कोदो, सामा जैसे मोटे अनाज को बढ़ावा देने के लिए श्री अन्न योजना शुरू की जाएगी जिससे हम परंपरा में शामिल अच्छा स्वास्थ्य देने वाला भोजन कर सकें और दुनिया को भारत की परंपरा से अवगत करा सकें। उन्होंने कहा कि किसानों को प्रोत्साहित करे और उनकी मदद के लिए राष्ट्रीय मिलेट्स् संस्थान का गठन किया जाएगा। वित्त मंत्री ने कहा कि कृषि क्षेत्र के लिए स्टोर क्षमता भी बढ़ाई जाएगी।

इसमें एग्रिकल्चर एक्सलरेटर फंड की स्थापना की बात कही। होर्टिकल्चर और मत्स्य पालन को बढ़ावा देने पर जोर दिया। साथ ही सहकार से समृद्धि की भी बात कही। वित्त मंत्री ने 63,000 पैक्स के डिजिटाइजेशन के साथ-साथ पैक्स के लिए मॉडल बाईलॉज बनाने की भी बात कही। वित्त मंत्री ने कहा कि कृषि क्षेत्र के लिए डिजिटल पब्लिक इन्फ्रास्ट्रक्चर की स्थापना की जायेगी, जो किसानों से जुड़ी समस्याओं को दूर करने में मददगार साबित होगा।

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पीएम आवास योजना के लिए बजट में इजाफा, 79 हजार करोड़ होंगे जारी

नई दिल्ली 01 Feb, (एजेंसी): वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण के दौरान देश की जनका को किफायती घर मुहैया करने के लिए बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने बताया कि पीएम आवास योजना का बजट आवंटन पहले की तुलना में 66 फीसदी बढ़ा दिया गया है। इसके बाद अब ये बजट बढ़कर 79,000 करोड़ रुपये से ज्यादा कर दिया गया है।

बता दें कि वित्त वर्ष 2022-23 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने प्रधानमंत्री आवास योजना (PMAY) हेतु 48,000 करोड़ रुपये का आवंटन किया था। प्रधानमंत्री आवास योजना का उद्देश्य देश के सभी लोगों को अपना घर देना है। इस योजना के तहत सरकार उन लोगों को घर बनाने के लिए राशि देती है जिनके पक्के घर नहीं हैं।

प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत हर वित्त वर्ष में अलग-अलग लक्ष्य भारत सरकार और राज्य सरकार से आवंटित किए जाते हैं। पात्रता की बात करें तो इस योजना के तहत गरीब परिवारों को मकान आवंटित किए जाते हैं। इसमें उन लोगों को घर दिया जाता है, जिनके पास पक्का मकान न हो। आवास योजना के तहत लिस्ट तैयार करते समय ये चेक किया जाता है कि लाभार्थी के पास कोई मोटर युक्त दुपहिया या तिपहिया वाहन तो नहीं है। इसके साथ ही अन्य कई मानक तय किए गए हैं।

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पहचान पत्र माना जाएगा PAN कार्ड, वित्तमंत्री निर्मला सीतारमण ने की बड़ी घोषणा

नई दिल्ली 01 Feb, (एजेंसी): वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण वित्त वर्ष 2023-24 का आम बजट संसद में पेश कर रही हैं। इस दौरान वित्त मंत्री ने बजट में डिजिटल इकॉनमी को बढ़ावा देने की भी बात कही। उन्होंने कहा कि डिजिलॉकर के इस्तेमाल में इजाफा किया जाएगा। बजट 2023 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने पैन कार्ड को नई पहचान दे दी है। पैन कार्ड का इस्तेमाल सभी के लिए कॉमन होगा। अब पहचान पत्र के रूप में पैन कार्ड का इस्तेमाल कर सकते हैं। कारोबार की शुरुआत भी पैन कार्ड से ही हो सकती है।

बता दें कि आयकर विभाग हर भारत के प्रत्येक व्यक्ति के लिए पैन कार्ड जारी करता है। पैन की मदद से इनकम टैक्स का भुगतान करने वाले व्यक्ति का पता चलता है। ऐसे में इनकम टैक्स रिटर्न, म्यूचुअल फंड लेने और लोन के आवेदन के लिए पैन कार्ड काफी जरूरी होता है।

पैन कार्ड को भारतियों के लिए एक पहचान पत्र के रूप में माना जाता है। कुछ कार्यों के लिए पैन कार्ड होना अनिवार्य है जैसे, इनकम टैक्स रिटर्न, म्यूचुअल फण्ड निवेश, लोन के अप्लाई करना और आदि। हालांकि, पैन कार्ड जारी करने का मुख्य उद्देश्य सभी की वित्तीय जानकारी रखना है ताकि टैक्स संबंधित लक्ष्य पूरे हो सकें।

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सरकार सभी के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध : निर्मला सीतारमण

नई दिल्ली 31 जनवरी ()। केन्‍द्रीय वित्त एवं कॉरपोरेट कार्य मंत्री  निर्मला सीतारमण ने संसद में ‘आर्थिक समीक्षा 2022-23’ पेश करते हुए बताया कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा जिसे संयुक्त राष्ट्र एसडीजी (एसडीजी 4) के अंतर्गत लक्ष्य 4 के रूप में सूचीबद्ध किया गया है, का उद्देश्य 2030 तक ‘समावेशी और समान गुणवत्ता वाली शिक्षा सुनिश्चित करना है और सभी के लिए आजीवन सीखते रहने के अवसरों को बढ़ावा देना’ है। इस संदर्भ में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 (एनईपी) को 21वीं सदी की पहली शिक्षा नीति के रूप में निर्धारित किया गया था, जिसका लक्ष्य देश की कई बढ़ती विकास संबंधी आवश्यकताओं का पता लगाना था।

यह नीति शिक्षा ढांचे के सभी पहलुओं में संशोधन और सुधार के लिए बनायी गई है। वित्त वर्ष 22 में सकल नामांकन अनुपात (जीआईआर) में सुधार और लिंग समानता में सुधार देखा गया। 6 से 10 वर्ष की आयु के लड़के-लड़कियों की जनसंख्या के प्रतिशत के रूप में कक्षा 1 से 5 के प्राथमिक नामांकन में वित्त वर्ष 22 में सकल नामांकन अनुपात में सुधार हुआ। इस सुधार ने वित्त वर्ष 17 और वित्त वर्ष 19 के बीच गिरावट की प्रवृत्ति को उलट दिया है।

उच्च प्राथमिक स्तर पर सकल नामांकन अनुपात (11-13 वर्ष की आयु में जनसंख्या के प्रतिशत के रूप में छठी से आठवीं कक्षा में नामांकन), जो वित्त वर्ष 17 और वित्त वर्ष 19 के बीच स्थिर था, वित्त वर्ष 22 में सुधार हुआ। प्राथमिक और उच्च प्राथमिक स्तरों पर संबंधित आय़ु समूहों में लड़कियों का सकल नामांकन अनुपात लड़कों की तुलना में बेहतर है। वित्त वर्ष 22 में कुल मिलाकर 26.5 करोड़ बच्चे स्कूलो में नामांकित हुए और 19.4 लाख अतिरिक्त बच्चों को प्राथमिक से उच्चतर माध्यमिक स्तर तक नामांकित किया गया। वित्त वर्ष 22 में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (सीडब्ल्यूएसएन) का कुल नामांकन 22.7 लाख है, जबकि वित्त वर्ष 21 में यह 21.9 लाख था, जो 3.3 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाता है।

पूर्व-प्राथमिक स्तर को छोड़कर सभी स्तरों अर्थात् प्राथमिक, उच्च-प्राथमिक, नामांकन 1.1 करोड़ से घटकर वित्त वर्ष 22 में 1.0 करोड़ हो गया। वर्ष के दौरान पूर्व-प्राथमिक स्तर पर लगभग 1.0 करोड़, प्राथमिक पर 12.2 , उच्च प्राथमिक पर 6.7 करोड़, माध्यमिक पर 3.9 करोड़ और उच्चतर माध्यमिक स्तर पर 2.9 करोड़ बच्चों का नामांकन हुआ। हाल के वर्षों में सभी स्तरों पर बच्चों के स्कूल छोड़ने की दर में लगातार गिरावट देखी गई।

लड़कियों और लड़कों दोनों के मामले में गिरावट देखी गई है। समग्र शिक्षा, शिक्षा का अधिकार अधिनियम, स्कूल के बुनियादी ढांचे और सुविधाओं में सुधार, आवासीय छात्रावास भवन, शिक्षकों की उपलब्धता, शिक्षकों का नियमित प्रशिक्षण, मुफ्त पाठ्यपुस्तकें, बच्चों के लिए यूनिफॉर्म, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय और प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण जैसी योजनाएं स्कूलों में नामांकन बढ़ाने और बच्चों की स्कूलों में पढ़ाई जारी रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।शिक्षकों की उपलब्धता, जिसे छात्र-शिक्षक अनुपात द्वारा मापा जाता है, संकेतक जो शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार से विलोम संबंध रखता है, में वित्त वर्ष 13 से वित्त वर्ष 22 की अवधि में लगातार सभी स्तरोः प्राथमिक स्तर पर 34.0 से 26.2, उच्च प्राथमिक में 23.0 से 19.6, माध्यमिक में 30.0 से 17.6 और उच्च माध्यमिक स्तर पर 39.0 से 27.1, तक की कमी हुई जिसके परिणाम स्वरूप शिक्षा के स्तर में सुधार हुआ।

स्कूलों की संख्य, शिक्षकों की उपलब्धता और स्कूलों में सुविधाओं के सुधार से नामांकन में सुधार होने और स्कूल छोड़ने (ड्रॉपआउट) की दरों में कम किए जाने की आशा है।वित्त वर्ष 23 के दौरान स्कूली शिक्षा के लिए शुरू किए गए विभिन्न कार्यक्रम और योजनाएं निम्नलिखित पैरा में प्रस्तुत की गई हैं। सरकार ने 7 सितंबर, 2022 को प्रधानमंत्री-स्कूल फॉर राइजिंग इंडिया (उभरते भारत के लिए विद्यालय) नामक एक केन्द्र प्रयोजित योजना शुरू की गई। इस योजना के अंतर्गत, केन्द्र सरकार/राज्य सरकार/केन्द्र शासित प्रदेश सरकार/स्थानीय निकायों द्वारा प्रबंधित मौजूदा स्कूलों को मजबूत करके वित्त वर्ष 23 से वित्त वर्ष 27 तक 14,500 से अधिक पीएम श्री स्कूल स्थापित करने का प्रावधान है। यह स्कूल आधुनिक अवसंरचना एवं सुविधाओं से सुसज्ज्ति होंगे और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के कार्यान्वयन का निष्पादन करेंगे और समय के साथ-साथ आस-पड़ोस के अन्य स्कूलों को नेतृत्व प्रदान करते हुए अनुकरणीय स्कूलों के रूप में उभरेंगे।

इस योजना से 20 लाख से अधिक छात्रों को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद है। मूलभूत स्तर की शिक्षा के लिए राष्ट्रिय पाठ्यक्रम ढांचा (नेशनल करिकुलम फ्रेमवर्क) को नए 5+3+3+4 करिकुलर स्ट्रक्चर के रूप में लांच किया गया है, जो 3 से 8 साल की उम्र के सभी बच्चों के लिए बचपन की देखभाल और शिक्षा को एकीकृत करता है।

49 केन्द्रीय विद्यालयों में 3+, 4+, और 5+, आयु वर्ग के छात्रों के लिए संज्ञानात्मक, भावात्मक और साइकोमोटर क्षमताओं को विकसित करने और प्रारंभिक साक्षरता और संख्यात्मकता पर ध्यान देने के साथ प्रोजेक्ट बालवाटिका, यानी ‘तैयारी कक्षा’ अक्टूबर 2022 में शुरू की गई थी।

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आसाराम को 2013 के बलात्कार मामले में उम्र कैद की सजा

अहमदाबाद,31 जनवरी (एजेंसी)। गांधीनगर की एक अदालत ने मंगलवार को स्वयंभू बाबा आसाराम को 2013 में एक पूर्व महिला शिष्य द्वारा दायर बलात्कार के एक मामले में दोषी ठहराते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

वर्तमान में जोधपुर जेल में बंद 81 वर्षीय आसाराम 2013 में राजस्थान में अपने आश्रम में एक नाबालिग लड़की से बलात्कार के एक अन्य मामले में आजीवन कारावास की सजा काट रहा है। सत्र अदालत के न्यायाधीश डीके सोनी ने सजा पर दलीलें सुनने के बाद फैसला सुनाया।

अहमदाबाद के चांदखेड़ा थाने में दर्ज प्राथमिकी के मुताबिक, आसाराम ने 2001 से 2006 के बीच सूरत की रहने वाली महिला से कई बार बलात्कार किया, जब वह शहर के बाहरी इलाके मोटेरा में स्थित उसके आश्रम में रहती थी। अदालत ने सोमवार को इस मामले में आसाराम को दोषी ठहराया था।

अदालत ने अभियोजन के मामले को स्वीकार करते हुए आसाराम को भारतीय दंड संहिता की धारा 376 (2) (सी), 377 (अप्राकृतिक यौनाचार) और अवैध रूप से बंधक बनाने से जुड़ी धाराओं के अलावा कई अन्य सुसंगत धाराओं के तहत दोषी ठहराया था। अदालत ने सबूतों के अभाव में आसाराम की पत्नी समेत छह अन्य आरोपियों को बरी कर दिया था।

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ऐसा भारत बनाना है जो आत्मनिर्भर बने और मानवीय दायित्वों को पूरा करने में समर्थ हो : राष्ट्रपति मुर्मू

*बजट सत्र के पहले दिन दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित किया राष्ट्रपति ने*

नयी दिल्ली,31 जनवरी (एजेंसी)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को अगले 25 वर्ष में ऐसे राष्ट्र का निर्माण करने के लिए लोगों से उनके सर्वोत्तम प्रयास करने का अनुरोध किया जो हो। राष्ट्रपति ने यह बात आज बजट सत्र के पहले दिन संसद के ऐतिहासिक केंद्रीय कक्ष में दोनों सदनों की संयुक्त बैठक को संबोधित करते हुए अपने पहले अभिभाषण में कही।

उन्होंने कहा, ‘हमें ऐसा भारत बनाना है जो आत्मनिर्भर हो और जो अपने मानवीय दायित्वों को पूरा करने में समर्थ हो। उन्होंने कहा कि सरकार ने देश की स्वतंत्रता के 100 वर्ष पूरा होने के अंतिम 25 वर्षों को ”अमृत काल की संज्ञा दी है। उन्होंने कहा, ”हमें 2047 तक ऐसे राष्ट्र का निर्माण करना है जो अतीत के गौरव से भी जुड़ा हो और जिसमें आधुनिकता का हर स्वर्णिम अध्याय हो।

उन्होंने कहा कि वर्तमान सरकार के करीब नौ वर्षों के शासनकाल में भारत के लोगों ने कई सकारात्मक बदलाव पहली बार देखे हैं। उन्होंने कहा कि अमृत काल की 25 साल की अवधि आजादी का स्वर्णिम काल और विकसित भारत के निर्माण का समय है।

उन्होंने कहा कि भारत अपनी समस्याओं का समाधान करने के लिए अन्य लोगों पर निर्भर रहा करता था किंतु अब वह वैश्विक समस्याओं का समाधान कर रहा है। उन्होंने कहा कि लोगों को वह बुनियादी सुविधाएं प्रदान की जा रही हैं जो दशकों से गायब थीं और देश भर में आधुनिक आधारभूत ढांचे का निर्माण हो रहा है जिसकी समाज लंबे समय से आकांक्षा कर रहा था।

उन्होंने कहा, ‘भारत के पास आज एक ऐसी सरकार है जो स्थिर, निर्भय और निर्णायक है जो बड़े सपनों को पूरा करने के लिए काम कर रही है। इसके पास एक ऐसी सरकार है जो ईमानदारी का सम्मान करती है, लोगों की समस्याओं का समाधान करती है और उन्हें स्थायी रूप से शक्तिसंपन्न बनाने के लिए काम करती है।

राष्ट्रपति ने कहा कि सरकार ने समाज के वंचित वर्गों की आकांक्षाओं को पूरा किया है। मुर्मू ने कहा कि आज सबसे बड़ा बदलाव यह हुआ है कि हर भारतीय का आत्मविश्वास शीर्ष पर है एवं भारत के प्रति विश्व का नजरिया बदला है।

राष्ट्रपति के अभिभाषण के दौरान संसद के केंद्रीय कक्ष में उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, राज्यसभा के उप सभापति हरिवंश, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनके मंत्रिमंडल के विभिन्न मंत्री, संप्रग अध्यक्ष सोनिया गांधी, राज्यसभा में नेता सदन पीयूष गोयल और विभिन्न पार्टियों के नेता एवं सांसद मौजूद थे।

राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे, कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी एवं पार्टी के कुछ अन्य नेता श्रीनगर में खराब मौसम के कारण उड़ानों में विलंब के चलते राष्ट्रपति अभिभाषण शुरू होने के समय केंद्रीय कक्ष में नहीं पहुंच पाये।

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दुनिया के लिए आशा की किरण बनेगा भारत का आम बजट : प्रधानमंत्री मोदी

नयी दिल्ली,31 जनवरी (एजेंसी)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को कहा कि वैश्विक आर्थिक उथल-पुथल के बीच भारत का बजट आम नागरिकों की आशाओं और आकांक्षाओं को पूरा करने का प्रयास करेगा और साथ ही दुनिया के लिए आशा की किरण भी बनेगा।

संसद के बजट सत्र से पहले मीडिया को संबोधित करते हुए मोदी ने कहा कि अर्थव्यवस्था की दुनिया की जानी-मानी आवाजें देश के लिए सकारात्मक संदेश ला रही हैं। प्रधानमंत्री ने कहा कि बजट सत्र में सरकार और विपक्ष के बीच तकरार होगी लेकिन साथ ही उन्होंने उम्मीद भी जताई कि इस दौरान विपक्षी सदस्य तैयारी के साथ तकरीर भी करेंगे।

उन्होंने कहा, आज की वैश्विक परिस्थिति में भारत के बजट की तरफ न सिर्फ भारत का, बल्कि पूरे विश्व का ध्यान है। विश्व की डांवाडोल आर्थिक परिस्थिति में भारत का बजट भारत के सामान्य जन की आशा-आकांक्षाओं को तो पूरा करने का प्रयास करेगा ही, लेकिन विश्व, जो आशा की किरण देख रहा है उसे वह और अधिक प्रकाशमान पाएगा।

प्रधानमंत्री ने कहा, मुझे पूरा भरोसा है कि वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण इन अपेक्षाओं को पूर्ण करने के लिए भरपूर प्रयास करेंगी। मोदी ने कहा कि आज का अवसर विशेष है क्योंकि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का यह पहला अभिभाषण है। उन्होंने कहा, राष्ट्रपति जी का अभिभाषण भारत के संविधान का गौरव है, भारत की संसदीय प्रणाली का गौरव है और विशेष रूप से आज नारी सम्मान का भी अवसर है।

दूर-सुदूर जंगलों में जीवन बसर करने वाले हमारे देश की महान आदिवासी परंपरा के सम्मान का भी अवसर आया है। मोदी ने कहा कि संसदीय कार्य में छह-सात दशक से जो परंपराएं विकसित हुई हैं, उन परंपराओं में देखा गया है कि अगर कोई भी नया सांसद पहली बार सदन में बोलने के लिए खड़ा होता है तो पूरा सदन उनको सम्मानित करता है। उन्होंने कहा कि उनका आत्मविश्वास बढ़े, इसके लिए एक प्रकार से अनुकूल वातावरण तैयार किया जाता है जो कि एक उज्जवल और उत्तम परंपरा है।

उन्होंने कहा, आज राष्ट्रपति का उद्बोधन भी उनका पहला उद्बोधन है। सभी सांसदों की तरफ से आज का यह पल उमंग, उत्साह और ऊर्जा से भरा हुआ हो, यह हम सबका दायित्व है। मुझे विश्वास है कि हम सभी सांसद इस कसौटी पर खरे उतरेंगे।प्रधानमंत्री ने कहा कि भाजपा के नेतृत्व में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार की कार्य संस्कृति के केंद्र बिंदु में भारत सर्वप्रथम, नागरिक सर्वप्रथम रहा है और उसी भावना को लेकर बजट सत्र में आगे बढ़ाया जाएगा। उन्होंने कहा, बजट सत्र में तकरार भी रहेगी लेकिन तकरीर भी तो होनी चाहिए।

मुझे विश्वास है हमारे विपक्ष के सभी साथी बड़ी तैयारी के साथ, बहुत बारीकी से अध्ययन करके सदन में अपनी बात रखेंगे। देश के नीति निर्धारण में सदन बहुत ही अच्छे तरीके से चर्चा करके अमृत निकालेगा जो देश के काम आएगा। संसद का बजट सत्र आज से शुरू हो रहा है।

संसद के केंद्रीय कक्ष में लोकसभा और राज्यसभा की संयुक्त बैठक में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के अभिभाषण से सत्र की शुरुआत हुई।सत्र के पहले दिन, दोनों सदनों में आर्थिक सर्वेक्षण पटल पर रखा गया। वित्तीय वर्ष 2023-24 के लिए बजट बुधवार को पेश किया जाएगा।

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बजट सत्र कल से, सत्ता पक्ष-विपक्ष तैयार

नई दिल्ली 31 Jan, (एजेंसी): संसद के बजट सत्र के पहले आज सर्वदलीय बैठक में विपक्ष ने जनगणना में जाति आधारित आर्थिक सर्वेक्षण कराने, सहकारी संघीय प्रणाली, किसान फसल बीमा, महिला आरक्षण जैसे मुद्दों पर सरकार से चर्चा कराने की मांग की लेकिन सरकार ने कहा कि राष्ट्रपति अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव एवं आम बजट पर चर्चा के दौरान इन सब विषयों पर चर्चा हो सकती है। संसद के पुस्तकालय भवन में आयोजित सर्वदलीय बैठक के बाद संसदीय कार्य मंत्री प्रल्हाद जोशी ने संवाददाताओं से कहा कि संसद का बजट सत्र कल शुरू हो रहा है। कल राष्ट्रपति का अभिभाषण होगा।

परसों आम बजट पेश किया जाएगा। सदन में राष्ट्रपति के प्रति धन्यवाद प्रस्ताव तथा आम बजट पर चर्चा होगी। इसके बाद 13 फरवरी को मध्यावकाश होगा। इसके बाद 13 मार्च से सदन की कार्यवाही शुरू होगी और तब वित्त विधेयक पारित होगा। जोशी ने कहा कि सर्वदलीय बैठक में 27 पार्टियों के 37 नेताओं ने शिरकत की। कांग्रेस पार्टी ने एक पत्र भेज कर सूचित किया है कि श्रीनगर में मौसम खराब होने के कारण विमान सेवाएं प्रभावित हुईं हैं जिससे पार्टी के नेता बैठक में भाग लेने में असमर्थ रहे। उन्होंने कहा कि बैठक बहुत अच्छे एवं सकारात्मक माहौल में हुई। नेताओं ने कई मांगें की हैं।

सरकार की ओर से शीतकालीन सत्र में कुछ मुद्दों पर अल्पकालिक चर्चा करायी गयी थी। वित्तीय अनुपूरक अनुदानों की मांग पर करीब 12-13 घंटे चर्चा हुई थी। उसमें सभी विषयों को उठाया गया था। इस बार भी सरकार ऐसा ही चाहती है। धन्यवाद प्रस्ताव एवं आम बजट पर चर्चा में सब मुद्दे आ सकते हैं। इसके अलावा नियमों एवं प्रक्रियाओं के अधीन अनुमति से किसी भी मुद्दे पर अलग से भी चर्चा हो सकती है। बैठक में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी ने देश में पिछड़े वर्ग की आर्थिक स्थिति को जानने के लिए जाति आधारित आर्थिक जनगणना कराये जाने की मांग की।

वाईएसआर कांग्रेस की इस मांग को तृणमूल कांग्रेस, जनता दल यूनाइटेड, बीजू जनता दल तथा कुछ अन्य पार्टियों का भी समर्थन मिला। वाईएसआर कांग्रेस के संसदीय दल के नेता वी. विजय साई रेड्डी ने संवाददाताओं से कहा कि उन्होंने सरकार से संसद की कार्यवाही के दिनों में कमी आने पर चिंता व्यक्त की तथा महिलाओं के लिए आरक्षण, ब्लू इकॉनोमी, पिछड़े वर्ग के कल्याण के मुद्दे उठाये। उन्होंने कहा कि देश में करीब 50 प्रतिशत आबादी पिछड़े वर्ग की है।

पिछड़े वर्ग की जाति आधारित जनगणना की मांग पुरानी है। आज उन्होंने मांग की है कि पिछड़ी जातियों की आर्थिक स्थिति विशेष रूप से शैक्षणिक, स्वास्थ्य एवं रोजगार की स्थिति का आकलन किया जाना चाहिए, इसलिए जनगणना में जाति आधारित आर्थिक सर्वेक्षण किया जाना चाहिए। इससे पिछड़े वर्ग की वास्तविक स्थिति का पता चल पाएगा।

तेलंगाना राष्ट्र समिति के संसदीय दल के नेता केशव राव ने संवाददाताओं से कहा कि उन्होंने सहकारी संघीय प्रणाली पर चर्चा की मांग की है। चूंकि सदन में राज्यपाल की भूमिका एवं गतिविधियों पर चर्चा नहीं हो सकती है इसलिए विपक्ष के कई दल संघीय व्यवस्था को लेकर चर्चा कराने के पक्ष में हैं। उन्होंने तमिलनाडु, तेलंगाना में राज्यपालों के आचरण के बारे में उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि संसद में भी केवल सरकारी विधेयकों को पारित कराने के अलावा कुछ नहीं हो रहा है।

लोकसभा अध्यक्ष ने संसद भवन परिसर में व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया

संसद के बजट सत्र से पहले लोक सभा अध्यक्ष ओम बिरला ने आज पूरे संसद भवन परिसर का निरीक्षण किया और अधिकारियों को आवश्यक दिशानिर्देश दिए। बिरला ने लोक सभा सचिवालय, सीपीडब्ल्यूडी और अन्य एजेंसियों के अधिकारियों के साथ संसद भवन परिसर में लोकसभा चैंबर, केन्द्रीय कक्ष, कॉरिडोर, लॉबी, प्रतीक्षालय और अन्य स्थानों का निरीक्षण किया। सत्र के दौरान स्वच्छता के उच्चतम मानकों को बनाए रखने पर ज़ोर देते हुए बिरला ने निर्देश दिया कि बजट सत्र का सुचारू संचालन सुनिश्चित करने के लिए सभी एजेंसियां एकजुट होकर काम करें।

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