भारत का क्वांटम भविष्य अमरावती से शुरू हो रहा है क्योंकि ‘‘नेशनल क्वांटम मिशन’’ राज्य को एक रणनीतिक स्प्रिंगबोर्ड के रूप में स्थापित कर रहा है: डॉ. जितेंद्र सिंह

नई दिल्ली – विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी, पृथ्वी विज्ञान और प्रधानमंत्री कार्यालय, कार्मिक, लोक शिकायत, पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज आंध्र प्रदेश के अमरावती में अमरावती क्वांटम वैली के शिलान्यास समारोह को संबोधित करते हुए घोषणा की कि ‘‘यह केवल एक इमारत की आधारशिला नहीं है, बल्कि भारत के क्वांटम भविष्य की आधारशिला है।’’

क्वांटम प्रौद्योगिकी को एक विकल्प के बजाय एक रणनीतिक आवश्यकता बताते हुए, मंत्री महोदय ने कहा कि यदि भारत आने वाले दशकों में अपनी संचार प्रणालियों, रक्षा वास्तुकला, स्वास्थ्य सेवा नवाचार और वैश्विक तकनीकी स्थिति को सुरक्षित करना चाहता है तो उसके पास इस क्षेत्र में नेतृत्व करने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।

अमरावती क्वांटम वैली के शिलान्यास समारोह में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री श्री एन. चंद्रबाबू नायडू, सूचना प्रौद्योगिकी, इलेक्ट्रॉनिक्स और शिक्षा राज्य मंत्री श्री नारा लोकेश, भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. अजय कुमार सूद, विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग के सचिव प्रो. अभय करंदीकर, आईआईटी मद्रास के निदेशक प्रो. वी. कामाकोटी, डॉ. अमित सिंघी (आईबीएम रिसर्च इंडिया), डॉ. हैरिक विन (टीसीएस), श्री एम.वी. सतीश (एल एंड टी) सहित वरिष्ठ उद्योग जगत के नेता, वरिष्ठ राज्य अधिकारी, संकाय सदस्य और छात्र उपस्थित थे। इस कार्यक्रम में शिलान्यास पट्टिका का अनावरण, अमरावती क्वांटम वैली लोगो का अनावरण, आईबीएम और टीसीएस क्वांटम क्लाउड सेवाओं का शुभारंभ, आईबीएम-टीसीएस क्वांटम इनोवेशन सेंटर की स्थापना, क्वांटम टैलेंट हब की घोषणा, एसआरएम विश्वविद्यालय द्वारा क्वांटम रेफरेंस फैसिलिटी, क्वांटम-सेफ एप्लीकेशन्स पहल और नौ उद्योग भागीदारों के साथ कई समझौता ज्ञापनों का आदान-प्रदान शामिल था, जो एक समन्वित उद्योग-अकादमिक-सरकारी साझेदारी का प्रतीक है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने मुख्यमंत्री श्री एन. चंद्रबाबू नायडू के नेतृत्व की प्रशंसा करते हुए उन्हें एक ऐसा नेता बताया जो ‘‘भविष्य में विश्वास रखता है और आने वाले कल के सपने देखता है।’’ हैदराबाद के हाई-टेक सिटी में अपने पहले कार्यकाल के दौरान मुख्यमंत्री के प्रौद्योगिकी-आधारित शासन से परिचित होने के बारे में बताते हुए कहा कि पिछले एक वर्ष में आंध्र प्रदेश में हुई तीव्र प्रगति सहकारी संघवाद की सच्ची भावना और प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी द्वारा वर्णित ‘‘डबल इंजन’’ दृष्टिकोण – केंद्र और राज्य के बीच समन्वय – को दर्शाती है।

पिछले सप्ताह विशाखापत्तनम की यात्रा का जिक्र करते हुए मंत्री ने राष्ट्रीय महासागर विज्ञान केंद्र परियोजना का उल्लेख किया, जो 2006 में शुरू हुई थी और लगभग दो दशकों तक रुकी रही, लेकिन वर्तमान राज्य सरकार के सत्ता में आने के कुछ ही महीनों के भीतर पूरी हो गई। यह केंद्र भारत के गहन महासागर मिशन के लिए एक महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में कार्य करेगा, जिससे प्रधानमंत्री द्वारा लाल किले से घोषित नीली अर्थव्यवस्था की परिकल्पना को और मजबूती मिलेगी।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि भारत आज उन चुनिंदा देशों में शामिल है जिनके पास एक समर्पित राष्ट्रीय क्वांटम मिशन है। लगभग 6,000 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ, यह मिशन 17 राज्यों और 2 केंद्र शासित प्रदेशों के 43 संस्थानों तक फैला हुआ है, जिसे क्वांटम कंप्यूटिंग, क्वांटम संचार, क्वांटम सेंसिंग और मेट्रोलॉजी तथा क्वांटम सामग्री और उपकरणों पर केंद्रित चार विषयगत केंद्रों के माध्यम से संगठित किया गया है। राष्ट्रीय उद्देश्यों में आठ वर्षों के भीतर 1,000 भौतिक क्यूबिट तक के क्वांटम कंप्यूटर विकसित करना, सुरक्षित ग्राउंड-टू-ग्राउंड क्वांटम संचार नेटवर्क स्थापित करना, लंबी दूरी के क्वांटम संचार को सक्षम बनाना और 2,000 किलोमीटर तक अंतर-शहर क्वांटम कुंजी वितरण प्राप्त करना शामिल है।

कार्यक्रम में उपस्थित छात्रों को संबोधित करते हुए मंत्री जी ने समझाया कि क्वांटम प्रौद्योगिकी अगली औद्योगिक क्रांति के लिए क्यों महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि क्वांटम कंप्यूटिंग क्षमताओं से लैस शत्रुओं की दुनिया में पारंपरिक कंप्यूटिंग और साइबर सुरक्षा प्रणालियां असुरक्षित बनी रहेंगी। उन्होंने बताया कि क्वांटम एन्क्रिप्शन से डेटा को भेदना लगभग असंभव हो जाएगा और इसे डिकोड करने में खगोलीय समय लग सकता है। रक्षा और साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में, यह अभूतपूर्व रणनीतिक सुरक्षा प्रदान करता है।

उन्होंने स्वास्थ्य सेवा में क्रांतिकारी अनुप्रयोगों के बारे में भी बात की, जिनमें ट्यूमर को बिना किसी दुष्प्रभाव के लक्षित करने में सक्षम सटीक विकिरण चिकित्सा, अंगों की गति के अनुसार गतिशील रूप से अनुकूलन और रोगी की तेजी से रिकवरी को सक्षम बनाना शामिल है। उन्होंने कहा कि क्वांटम प्रौद्योगिकी भी इसी तरह उपग्रह संचार, सुरक्षित संचार अवसंरचना और उन्नत संवेदन क्षमताओं को नया रूप देगी।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत ने भले ही कुछ देशों की तुलना में सूचना प्रौद्योगिकी क्रांति में देर से प्रवेश किया हो, लेकिन उभरती प्रौद्योगिकियों में वह यह देरी नहीं दोहराएगा। कृत्रिम बुद्धिमत्ता, जैव प्रौद्योगिकी, अंतरिक्ष और गहरे समुद्र की खोज जैसे क्षेत्रों में समानांतर अभियानों के साथ, भारत खुद को अगली वैश्विक तकनीकी के समय में सबसे आगे अपनी जगह बना रहा है। उन्होंने हाल ही में घोषित बायोफार्मा शक्ति पहल का जिक्र करते हुए कहा कि वैश्विक अर्थव्यवस्था लगातार जैव प्रौद्योगिकी, पुनर्योजी चक्र, आनुवंशिक विज्ञान, सॉफ्टवेयर-आधारित प्रणालियों और क्वांटम कंप्यूटिंग की ओर अग्रसर हो रही है।

मंत्री जी ने बताया कि भारत में क्वांटम प्रौद्योगिकी में बी.टेक माइनर कोर्स शुरू हो चुके हैं और एम.टेक प्रोग्रामों को भी इसमें शामिल करने की तैयारी चल रही है। उन्होंने मुख्यमंत्री से आंध्र प्रदेश में प्रशिक्षित शिक्षकों और संस्थागत सहयोग से संरचित क्वांटम अकादमिक कार्यक्रम शुरू करने की संभावना पर चर्चा की। उन्होंने आगे कहा कि उन्नत निर्माण सुविधाएं और केंद्रीय अनुसंधान अवसंरचना स्थापित की जा रही हैं, जो स्टार्टअप, शोधकर्ताओं और शैक्षणिक संस्थानों के लिए सुलभ होंगी। उन्होंने आईआईटी मद्रास द्वारा शुरू किए गए अग्रणी अनुसंधान पार्क मॉडल की भी सराहना की, जिसे अब पूरे देश में अपनाया जा रहा है।

डॉ. जितेंद्र सिंह ने इस बात पर बल दिया कि अलग-थलग रहकर काम करने का समय समाप्त हो गया है। अमरावती क्वांटम वैली की सफलता सरकार, उद्योग, शिक्षा जगत और स्टार्टअप्स को एक एकीकृत राष्ट्रीय प्रयास में शामिल करने में निहित है। पांच साल पहले अंतरिक्ष क्षेत्र को निजी कंपनियों के लिए खोलना और परमाणु ऊर्जा में निजी भागीदारी का विस्तार करना सहयोगात्मक विकास में वर्तमान सरकार के विश्वास को दर्शाता है। भारत की अंतरिक्ष अर्थव्यवस्था पहले ही एक छोटे से हिस्से से बढ़कर 8 अरब डॉलर का क्षेत्र बन चुकी है, और इस एकीकृत दृष्टिकोण के कारण आने वाले वर्षों में इसके 45 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है।

मंत्री जी ने समापन भाषण में घोषणा की कि भारत की क्वांटम यात्रा पवित्र नगर अमरावती से शुरू होती है और आंध्र प्रदेश विकसित भारत की दिशा में भारत की प्रगति में एक आधारशिला के रूप में कार्य करेगा। उन्होंने राष्ट्रीय मिशनों के अनुरूप अपने नवाचार इकोसिस्‍टम को स्थापित करने वाले राज्यों को भारत सरकार के पूर्ण समर्थन का आश्वासन दिया और इस बात की पुष्टि की कि केंद्र और आंध्र प्रदेश के बीच सहयोग भारत को वैश्विक क्वांटम नेता के रूप में उभरने में गति प्रदान करेगा।

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आईएनएस सुदर्शिनी ने लोकायन 26 के पहले पोर्ट कॉल को पूरा किया, भारत–ओमान समुद्री संबंधों को मजबूत किया

नई दिल्ली – भारतीय नौसेना की सेल ट्रेनिंग शिप आईएनएस सुदर्शिनी ने 05 फरवरी 2026 को सलालाह, ओमान में अपना पहला पोर्ट कॉल सफलतापूर्वक पूरा किया। यह यात्रा जहाज की महत्वाकांक्षी दस महीने की महासागरीय यात्रा लोकायन 26 में एक महत्वपूर्ण पड़ाव साबित हुई।
इसका उद्देश्य भारत की समृद्ध समुद्री विरासत और विश्व परिवार (वसुधैव कुटुम्बकम) के सिद्धांत को दुनिया भर में प्रदर्शित करना है।

भ्रमण के दौरान आईएनएस सुदर्शनिनी के कमांडिंग ऑफिसर ने ओमान की रॉयल नेवी के साउदर्न नेवल एरिया कमांडर कैप्टन मोहम्मद अल ग़ैलेनी और रॉयल नेवी ऑफ़ ओमान के जहाज अल मोज़ेर के कमांडिंग ऑफिसर कैप्टन मोहम्मद अल महारी के साथ बातचीत की।

इन संवादों में भारत और ओमान के बीच ऐतिहासिक समुद्री संबंधों को रेखांकित किया गया और दोनों नौसेनाओं के बीच मित्रता को और मजबूत किया गया।

पेशेवर सहयोग को जारी रखते हुए जहाज ने रॉयल नेवी ऑफ़ ओमान के अधिकारियों के लिए भी एक यात्रा का आयोजन किया।

लोगों के बीच संपर्क के प्रदर्शन में सेैल ट्रेनिंग जहाज आगंतुकों के लिए खुला था। स्कूल के बच्चो सहित 600 से अधिक आगंतुकों को तीन मास्टेड बार्क का प्रत्यक्ष अनुभव कराया गया और उन्हें महासागर में नौकायन की बारीकियों से परिचित कराया गया।

आईएनएस सुदर्शिनी अब लोकायन 26 के अपने अगले चरण पर आगे बढ़ रही है और भारत की शाश्वत समुद्री विरासत को महासागरों में ले जा रही है।

पाल फहराए और उत्साह बनाये रखते हुए, वह समुद्री उत्कृष्टता, मित्रता और सद्भावना का प्रतीक बनकर सेवा जारी  रखती है।

 

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मलेशिया के प्रधानमंत्री के साथ जॉइंट प्रेस स्टेटमेंट के दौरान प्रधानमंत्री का प्रेस स्टेटमेंट

Your Excellency, Prime Minister अनवर इब्राहीम

दोनों देशों के delegates,
मीडिया के साथियों,
नमस्कार!
सलामत पागी!

सबसे पहले, मैं अपने करीबी मित्र प्राइम मिनिस्टर अनवर इब्राहीम का गर्मजोशी भरे स्वागत के लिए हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ। पिछले वर्ष, मैं आसियान समिट के लिए मलेशिया की यात्रा नहीं कर पाया। लेकिन मैने मेरे प्रिय मित्र को वादा किया था, कि मैं जल्द-से-जल्द मलेशिया आऊँगा। और आज वर्ष 2026 की पहली विदेश यात्रा में, मैं मलेशिया आया हूँ।

Friends,

भारत और मलेशिया के संबंध विशेष हैं। हम मैरीटाइम neighbours हैं। सदियों से हमारे लोगों के बीच गहरे और आत्मीय रिश्ते रहे हैं। आज मलेशिया, भारतीय मूल की आबादी वाला दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा देश है। हमारी सभ्यताएँ, साझा सांस्कृतिक विरासत और लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़ी हुई हैं।

Friends,

पिछले कुछ वर्षों में हमारे संबंधों ने नई रफ्तार पकड़ी है। और इसमें मेरे मित्र प्रधान मंत्री अनवर इब्राहीम का विशेष योगदान रहा है।

हमारे बीच एनर्जी, इंफ्रास्ट्रक्चर और मैनुफैक्चरिंग में सहयोग बहुत मजबूत हुआ है। डिजिटल economy, bio-tech, और IT में आपसी इनवेस्टमेंट बढ़ा है। टुरिज़म, और people-to-people ties भी गहरे हुए हैं। इन्हीं उपलब्धियों से प्रेरित होकर, आज हमने हमारी साझेदारी में अभूतपूर्व गति और गहराई लाने का निर्णय लिया है।

Friends,

सिक्युरिटी के क्षेत्र में, हम काउन्टर टेररिज़म, इन्टेलिजेन्स शेरिंग, और मैरीटाइम सिक्युरिटी में सहयोग मजबूत करेंगे। हम रक्षा सहयोग को भी और व्यापक बनाएंगे।

AI और डिजिटल technologies के साथ-साथ, हम सेमीकन्डक्टर, हेल्थ और फूड सिक्युरिटी में साझेदारी को आगे बढ़ाएंगे। आज आयोजित CEO Forum ने trade और investment के नए अवसर खोले हैं। हम Strategic trust से economic transformation का रास्ता बनाएंगे।

Friends,

कल मुझे मलेशिया के भारतीय प्रवासियों से मिलने का मौका मिला। अपनी उपस्थिति से, प्राइम मिनिस्टर अनवर इब्राहीम ने भी इस सम्मेलन का गौरव बढ़ाया। 30 लाख प्रवासियों का यह living bridge हमारी बड़ी शक्ति है। उनके welfare के लिए उठाए गए कदम हमारे रिश्तों को मानवीय आधार देते हैं।

मलेशिया में भारत के workers के संरक्षण के लिए सोशल सिक्युरिटी अग्रीमन्ट, टुरिज़म के लिए ग्रैटिस e-visa, और डिजिटल पेमेंट इंटरफेस UPI का मलेशिया में लागू होना, ये सभी कदम, दोनों देशों के नागरिकों के जीवन को सरल बनाएंगे। क्यूंकि कोई भी Partnership तभी ताकत से सफल होती है, जब लाभ सीधे लोगों तक पहुँचे।

Friends,

भारत और मलेशिया को तमिल भाषा के प्रति साझा प्रेम भी जोड़ता है। मलेशिया में तमिल की मजबूत और जीवंत उपस्थिति शिक्षा, मीडिया और सांस्कृतिक जीवन में दिखाई देती है। मुझे भरोसा है कि आज के ऑडियो-विज़ुअल एग्रीमेंन्ट से फ़िल्म और संगीत, विशेष रूप से तमिल फ़िल्में, हमारे दिलों को और पास लाएंगी।

हम अपने युवाओं के बीच university exchange, start-up connect और skill डेवलपमेंट के अवसर भी बढ़ा रहे है। हमारे बढ़ते संबंधों को सपोर्ट करने के लिए, हम मलेशिया में नया consulate भी खोलने जा रहें हैं।

Friends,

Indo-pacific क्षेत्र विश्व की ग्रोथ इंजन के रूप में उभर रहा है। हम आसियान के साथ पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में विकास, शांति और स्थिरता के लिए प्रतिबद्ध हैं। भारत आसियान centrality को प्राथमिकता देता है। मलेशिया की सफल आसियान अध्यक्षता के लिए मैं एक बार फिर आपको बहुत बहुत बधाई देता हूँ।

मलेशिया जैसे मित्र देशों के सहयोग से भारत, आसियान के साथ अपने संबंधों को और व्यापक बनाएगा। हम इस बात पर सहमत हैं कि आसियान–भारत व्यापार समझौते, आयटिगा की समीक्षा शीघ्र पूरी की जानी चाहिए।

Friends,

आज हमने क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर भी सार्थक चर्चा की। वैश्विक अस्थिरता के इस माहौल में भारत और मलेशिया की बढ़ती मित्रता दोनों देशों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

हमारा साझा मत है कि आज के challenges का समाधान करने के लिए, Global institutions का रिफॉर्म जरूरी है। हम शांति के सभी प्रयासों का समर्थन करते रहेंगे। और आतंकवाद पर हमारा संदेश स्पष्ट है:

No double standards. No compromise.

Excellency,

भारत-मलेशिया संबंधों के प्रति आपकी प्रतिबद्धता की हम सराहना करते हैं। आइए हम साथ मिलकर prosperous मलेशिया का आपका सपना, और विकसित भारत के हमारे संकल्प को साकार करें।

एक बार फिर, आपकी मित्रता, आपके गर्मजोशी भरे स्वागत, और आतिथ्य के लिए बहुत बहुत धन्यवाद। हम आपको भारत में स्वागत करने के लिए उत्सुक हैं।

बहुत बहुत धन्यवाद।
जुम्पा लागी!

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10 फरवरी 2026 को जिले के 619 बूथों पर Mass Drug Administration (MDA) कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है

उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री की विशेष अपील

10 फरवरी को बूथ पर दवा न ले पाने वाले व्यक्तियों को 25 फरवरी 2026 तक घर-घर जाकर दवा उपलब्ध कराई जाएगी

राहे, सोनाहातु, तमाड़ और कांके प्रखंड में 10 फरवरी 2026 को विशेष कैंप का आयोजन

उत्कृष्ट कार्य करने वाले महिला समूहों को उपायुक्त द्वारा प्रशस्ति प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा

फाइलेरिया मुक्त राँची के लिए हर नागरिक की सक्रिय भागीदारी आवश्यक:- उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री

राँची,08.02.2026 – उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी राँची, श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने सभी जिलेवासियों से विशेष कर (राहे, सोनाहातु, तमाड़ और कांके प्रखंड ) अपील करते हुए कहा की राष्ट्रीय लिम्फेटिक फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के अंतर्गत हमारे जिले को फाइलेरिया (हाथीपाँव) से पूर्णतः मुक्त करने का एक महत्वपूर्ण अवसर हमारे सामने है। यह बीमारी रोकथाम योग्य है और इसे जड़ से समाप्त किया जा सकता है—बशर्ते हम सभी मिलकर इस अभियान में पूर्ण सहयोग दें।

10 फरवरी 2026 को जिले के 619 बूथों पर Mass Drug Administration (MDA) कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है।

– प्रभावित प्रखंड: राहे, तमाड़, सोनाहातु, कांके (कांके, सोनाहातु एवं तमाड़ सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र क्षेत्र)

– लक्षित आबादी: *लगभग 4,91,014* व्यक्ति (गर्भवती महिलाएँ, 2 वर्ष से कम आयु के बच्चे एवं अत्यंत गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को छोड़कर)

– दी जाने वाली दवाएँ: *DEC + Albendazole* — पूरी तरह निःशुल्क एवं सुरक्षित
– 10 फरवरी को बूथ पर दवा न ले पाने वाले व्यक्तियों को 25 फरवरी 2026 तक घर-घर जाकर दवा उपलब्ध कराई जाएगी।

उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी, राँची,द्वारा सभी से अपील हुए कहा 10 फरवरी 2026 को अपने नजदीकी बूथ पर जाकर फाइलेरिया रोधी दवा अवश्य लें। अपने परिवार, पड़ोसियों, रिश्तेदारों और मित्रों को भी इस अभियान में शामिल होने के लिए प्रेरित करें।

चिकित्सक (डॉक्टर) द्वारा दी जाने वाली मुख्य सलाह और जानकारी:

दवा (Dose): फाइलेरिया को रोकने के लिए वर्ष में एक बार DEC (डाईथाइलकार्बामाज़ीन) और अल्बेंडाज़ोल की गोलियाँ लेनी चाहिए। तीव्र सूजन होने पर एंटीबायोटिक्स भी दी जा सकती हैं।

सफाई (Hygiene): प्रभावित अंग (हाथ या पैर) को प्रतिदिन साबुन और साफ पानी से धोना, फिर मुलायम कपड़े से सुखाना बेहद आवश्यक है।

सूजन कम करना: प्रभावित अंग को दिन में कई बार ऊपर (हृदय के स्तर से ऊपर) उठाएं ताकि तरल पदार्थ का बहाव हो सके।

व्यायाम: अंगों में तरल पदार्थों के प्रवाह को बढ़ाने के लिए विशिष्ट व्यायाम करें।

त्वचा की देखभाल: घावों को फंगस या बैक्टीरिया से बचाने के लिए एंटीफंगल/एंटीबैक्टीरियल क्रीम का प्रयोग करें।

बचाव: मच्छरों के काटने से बचें, मच्छरदानी का प्रयोग करें और शरीर को ढक कर रखें।
डायग्नोसिस: रात के समय रक्त परीक्षण के द्वारा फाइलेरियल कृमि की जांच की जाती है, क्योंकि ये रात में ही सक्रिय होते हैं।

बच्चों के लिए: बच्चों की उम्र, लंबाई और वजन के आधार पर दवाओं की खुराक निर्धारित की जाती है।

सावधानी: 2 वर्ष से कम उम्र के बच्चों को, गर्भवती महिलाओं और गंभीर रूप से बीमार व्यक्तियों को यह दवा नहीं दी जाती है। 1 से 02 वर्ष के बच्चों को अल्बेंडाज़ोल की आधी गोली खिलाई जानी है।

सभी धर्मों, जातियों और समुदायों के लोग सक्रिय रूप से भाग लें — यह हमारा सामूहिक अभियान है।
JSLPS (जीविका) से जुड़े महिला स्वयं सहायता समूह (SHGs) इस अभियान की रीढ़ हैं। आप सभी दीदियों से अनुरोध है कि ग्राम स्तर पर जागरूकता फैलाएँ और दवा सेवन सुनिश्चित करें। उत्कृष्ट कार्य करने वाले महिला समूहों को प्रशस्ति प्रमाण पत्र प्रदान किया जाएगा।

*फाइलेरिया से मुक्ति संभव है— लेकिन इसके लिए शत-प्रतिशत कवरे अनिवार्य है। यदि एक भी व्यक्ति दवा से वंचित रह गया, तो यह बीमारी समुदाय में फैल सकती है। इसलिए यह मेरा आप सभी से व्यक्तिगत अनुरोध है:
आइए, हम सब मिलकर 2026 को राँची जिले के लिए फाइलेरिया-मुक्त वर्ष बनाएँ।

आने वाली पीढ़ियों को इस विकलांगता से मुक्त रखने की जिम्मेदारी आज हमारी है। सभी आशा कार्यकर्ता, स्वास्थ्य कर्मी, जीविका दीदियाँ, शिक्षक, मुखिया, ग्राम प्रधान, सामुदायिक नेता, कर्मचारीगण एवं आम नागरिकों से पूर्ण सहयोग की अपेक्षा है।

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गंगा और भैरवी का दमदार प्रदर्शन, जीत के साथ दोनों टीमें क्वार्टरफाइनल में

आर पी सी मीडिया कप 2026

रांची,08.02.2026 – रांची स्थित जे के क्रिकेट एकेडमी के मैदान पर खेले जा रहे आरपीसी मीडिया कप 2026 में प्रतियोगिता ने अब रोमांचक मोड़ ले लिया है। टूर्नामेंट के मुकाबले दिन-ब-दिन और अधिक प्रतिस्पर्धी होते जा रहे हैं। इसी क्रम में खेले गए पहले और दूसरे मैच में गंगा और भैरवी की टीमों ने शानदार खेल का प्रदर्शन करते हुए अपने-अपने मुकाबले जीतकर क्वार्टरफाइनल में जगह पक्की कर ली।

पहला मैच: अजय बनाम गंगा

दिन का पहला मुकाबला अजय और गंगा के बीच खेला गया। टॉस के बाद अजय की टीम ने पहले बल्लेबाजी करते हुए निर्धारित 16 ओवर में 7 विकेट के नुकसान पर 112 रन बनाए। अजय की ओर से राकेश सिंह ने 31 रनों की उपयोगी पारी खेली, जबकि सूरज प्रकाश ने 22 और तारकेश्वर महतो ने 21 रन का योगदान दिया। हालांकि मध्यक्रम से अपेक्षित बड़ी साझेदारी नहीं बन सकी, जिससे टीम बड़ा स्कोर खड़ा करने में असफल रही।

गंगा की ओर से गेंदबाजी में समीर सृजन ने किफायती प्रदर्शन करते हुए 1 विकेट के बदले 17 रन दिए, जबकि संतोष सिंह ने 1/20 का आंकड़ा दर्ज किया। लक्ष्य का पीछा करने उतरी गंगा की टीम ने शानदार और आक्रामक बल्लेबाजी का परिचय दिया। गंगा ने 12.5 ओवर में मात्र 2 विकेट खोकर 116 रन बनाते हुए मुकाबला 8 विकेट से अपने नाम कर लिया। ओम प्रकाश झा ने 34 रन बनाए, वहीं संतोष कुमार सिंह ने 29 रनों की सधी हुई पारी खेली। संतोष कुमार सिंह को उनके हरफनमौला योगदान के लिए प्लेयर ऑफ द मैच चुना गया।

दूसरा मैच: कोनार बनाम भैरवी

दिन का दूसरा मुकाबला कोनार और भैरवी के बीच खेला गया, जिसमें दर्शकों को बल्लेबाजों का शानदार खेल देखने को मिला। पहले बल्लेबाजी करते हुए कोनार की टीम ने 16 ओवर में 141 रन बनाए, लेकिन पूरी टीम ऑलआउट हो गई।

कोनार की ओर से सुशील सिंह ने 48 रनों की बेहतरीन पारी खेली, जबकि राकेश कुमार ने 17 रन जोड़े। भैरवी की गेंदबाजी में विक्की कुमार पासवान ने घातक प्रदर्शन करते हुए 4 विकेट 23 रन देकर झटके, वहीं संजय सिंह ने 2/34 विकेट हासिल किए।

जवाब में भैरवी की टीम ने लक्ष्य को बेहद आसानी से हासिल कर लिया। भैरवी ने 15.3 ओवर में सिर्फ 1 विकेट खोकर 142 रन बनाते हुए मुकाबला 9 विकेट से जीत लिया। नवल किशोर ने नाबाद 67 रनों की शानदार पारी खेली, जबकि विक्की पासवान ने 51 रन बनाकर जीत को आसान बना दिया।

इस मैच में शानदार ऑलराउंड प्रदर्शन के लिए विक्की पासवान को प्लेयर ऑफ द मैच का खिताब दिया गया।

इन जीतों के साथ ही गंगा और भैरवी की टीमें क्वार्टरफाइनल में पहुंच चुकी हैं, जिससे टूर्नामेंट का रोमांच अब और भी बढ़ गया है। दर्शकों को आने वाले मुकाबलों में कड़े संघर्ष और रोमांचक क्रिकेट की पूरी उम्मीद है।

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भारत की राष्ट्रपति ने जगदलपुर में बस्तर पैंडम 2026 का उद्घाटन किया

नई दिल्ली – भारत की राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने आज (7 फरवरी, 2026) जगदलपुर, छत्तीसगढ़ में बस्तर पैंडम 2026 का उद्घाटन किया।

इस अवसर पर राष्ट्रपति ने कहा कि जब किसान इस उपजाऊ भूमि में बीज बोते हैं, जब आम का मौसम आता है, तो यह पैंडम का मौसम होता है। बस्तर के लोग जीवन के हर पहलू का उत्सव मनाते हैं। उन्होंने कहा कि अन्य लोग बस्तर के लोगों से जीवन जीने का यह तरीका सीख सकते हैं।

      राष्ट्रपति ने कहा कि बस्तर की परंपराओं और संस्कृति ने हमेशा लोगों को आकर्षित किया है, लेकिन दुर्भाग्य से, यह क्षेत्र चार दशकों तक माओवाद से ग्रस्त रहा। परिणामस्वरूप, यहां के लोगों को भारी कष्ट सहना पड़ा। युवा, आदिवासी और दलित भाई-बहन सबसे अधिक प्रभावित हुए। लेकिन, भारत सरकार द्वारा माओवादी आतंक के खिलाफ उठाए गए निर्णायक कदमों के कारण, वर्षों से व्याप्त असुरक्षा, भय और अविश्वास का माहौल अब समाप्त हो रहा है। माओवाद से जुड़े लोग हिंसा का मार्ग त्याग रहे हैं, जिससे नागरिकों के जीवन में शांति लौट रही है।

राष्ट्रपति ने कहा कि छत्तीसगढ़ में बड़ी संख्या में ऐसे लोग हैं जो पहले माओवादी गतिविधियों में शामिल थे और अब उन्होंने आत्मसमर्पण कर दिया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि हथियार डालकर लोग सामान्य जीवन जी सकें और मुख्य धारा में लौट सकें। उनके लिए कई विकास और कल्याणकारी योजनाएं लागू की जा रही हैं। राज्य सरकार की ‘नियाद नेल्लानार योजना’ ग्रामीणों को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। उन्होंने यह देखकर खुशी जताई कि बस्तर में विकास के एक नये समय की शुरूआत हो रही है। हर गांव में बिजली, सड़कें और पानी की सुविधा उपलब्ध हो रही है। वर्षों से बंद पड़े स्कूल फिर से खुल रहे हैं और बच्चे कक्षाओं में भाग ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह एक बेहद उत्साहजनक तस्वीर है जो सभी नागरिकों के लिए खुशी का स्रोत है।

राष्ट्रपति ने हिंसा का मार्ग त्यागकर मुख्यधारा में लौटने वाले सभी लोगों की प्रशंसा की और उनसे संविधान और देश के लोकतंत्र में पूर्ण विश्वास रखने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि उन्हें लोकतांत्रिक व्यवस्था पर भरोसा रखना चाहिए और कड़ी मेहनत और समर्पण के साथ आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि गरीब, वंचित और पिछड़े वर्गों का कल्याण सरकार की विशेष प्राथमिकता है। प्रधानमंत्री-जनमान योजना और धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान जैसे कार्यक्रमों के माध्यम से विकास के लाभ सबसे वंचित आदिवासी गांवों तक पहुंच रहे हैं।

राष्ट्रपति ने यह भी कहा कि शिक्षा व्यक्तिगत और सामुदायिक विकास की आधारशिला है। आदिवासी क्षेत्रों में एकलव्य मॉडल आवासीय विद्यालय स्थापित किए गए हैं ताकि इन क्षेत्रों के बच्चों को अच्छी शिक्षा मिल सके। उन्होंने सभी अभिभावकों और संरक्षकों से अपने बच्चों को शिक्षित करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इसी तरह छत्तीसगढ़ और भारत का भविष्य उज्ज्वल होगा।

राष्ट्रपति ने कहा कि छत्तीसगढ़ की प्राचीन परंपराएं आज भी गहरी जड़ों से जुड़ी हुई और जीवंत हैं। देवी दंतेश्वरी को समर्पित बस्तर दशहरा आदिवासी संस्कृति और भाईचारे का एक अनूठा उदाहरण है। हमें अपने गौरवशाली इतिहास से प्रेरणा लेकर उज्ज्वल भविष्य का निर्माण करना चाहिए। उन्होंने लोगों से अपनी समृद्ध विरासत को संरक्षित करते हुए विकास को अपनाने का आग्रह किया।

राष्ट्रपति ने कहा कि बस्तर क्षेत्र प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध है। यहां के लोग समर्पित और मेहनती हैं। उन्होंने क्षेत्र के लोगों, विशेषकर युवाओं से, राज्य और केंद्र सरकारों द्वारा कार्यान्वित कल्याण और विकास योजनाओं का लाभ उठाने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि उनकी प्रगति और समृद्धि छत्तीसगढ़ की प्रगति और विकसित भारत के लिए बेहद जरूरी है।

केंद्रीय पर्यावरण मंत्री ने राजस्थान के अलवर में ‘बाघ रेंज राज्यों के मुख्य वन्यजीव वार्डन और बाघ अभ्यारण्यों के फील्ड निदेशकों के सम्मेलन’ की अध्यक्षता की

नई दिल्ली – केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री भूपेंद्र यादव ने शनिवार को राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) की अब तक हुई 28 बैठकों में लिए गए सभी नीतिगत निर्णयों की समीक्षा के लिए सम्‍मेलन बुलाया ताकि उन निर्णयों की पहचान की जा सके जो अप्रचलित हो चुके हैं, जिन्हें लागू नहीं किया जा सका है और जिन्हें पूरी तरह से लागू किया जा चुका है। उन्होंने बताया कि इस पहल से बाघ संरक्षण नीति को वर्तमान समय की चुनौतियों के अनुरूप ढालने और जमीनी स्तर पर संरक्षण उपायों के कुशल कार्यान्वयन को सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।

राजस्थान के अलवर में आयोजित ‘बाघ रेंज राज्यों के मुख्य वन्यजीव वार्डन और बाघ अभ्यारण्यों के फील्ड निदेशकों के सम्मेलन’ के उद्घाटन सत्र को मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित करते हुए मंत्री यादव ने कहा कि भारत ने बाघ संरक्षण के 50 वर्ष पूरे कर लिए हैं और यह व्यापक नीति समीक्षा का उपयुक्त समय है। दो दिवसीय सम्मेलन की दिशा तय करते हुए श्री यादव ने सुझाव दिया कि पिछले पांच दशकों में लिए गए नीतिगत निर्णयों को एक औपचारिक नीतिगत वक्तव्य में संकलित किया जाना चाहिए और इस मुद्दे को एनटीसीए की अगली बैठक के पहले एजेंडा आइटम के रूप में रखा जाना चाहिए।

इस सम्मेलन में राजस्थान सरकार के वन मंत्री श्री संजय शर्मा के अलावा पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन मंत्रालय, एनटीसीए के वरिष्ठ अधिकारी, बाघ रेंज राज्यों के मुख्य वन्यजीव वार्डन और देश भर के बाघ अभ्यारण्यों के फील्ड निदेशकों ने भाग लिया।

श्री यादव ने कहा कि बाघों की संख्या का आकलन, बचाव एवं पुनर्वास संबंधी बुनियादी ढांचा, मानव-वन्यजीव संघर्ष, बाघ अभ्यारण्य निधि का उपयोग और बाघ संरक्षण की नींव को मजबूत करने की आवश्यकता जैसे मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श आवश्यक है। सम्मेलन में देश में बाघ संरक्षण की समग्र स्थिति की समीक्षा की जाएगी और प्रमुख नीतिगत, प्रबंधन और परिचालन संबंधी मुद्दों पर चर्चा की जाएगी।

श्री यादव ने बाघों की संख्या में बदलाव सहित क्षेत्र-विशिष्ट चुनौतियों की समीक्षा करने और देश के बाघ अभ्यारण्यों में केंद्र प्रायोजित योजनाओं के कार्यान्वयन का आकलन करने के लिए चार कार्य समूहों के गठन का भी आह्वान किया। इसके अलावा, मंत्री ने प्रतिभागियों से एनटीसीए और भारतीय वन्यजीव संस्थान, भारतीय वनस्पति सर्वेक्षण, भारतीय प्राणी सर्वेक्षण और भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद जैसे संस्थानों के बीच समन्वय बढ़ाने के तरीकों पर चर्चा करने को भी कहा ताकि इन शीर्ष संगठनों से प्राप्त शोध सुझावों को शामिल किया जा सके और बाघ संरक्षण में व्यावहारिक लाभ प्राप्त किए जा सकें।

 

चीता पुनर्वास कार्यक्रम का उल्लेख करते हुए मंत्री जी ने कहा कि भारत ने सफलतापूर्वक एक ऐसी जंगली प्रजाति का अंतर्राष्ट्रीय स्थानांतरण किया है जो देश में विलुप्त हो चुकी थी, और यह परियोजना अब चीतों की तीसरी भारतीय पीढ़ी तक पहुंच चुकी है। उन्होंने कहा कि बोत्सवाना से चीतों का एक नया समूह फरवरी के अंत तक आने की उम्मीद है।

श्री यादव ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने अंतर्राष्ट्रीय बिग कैट एलायंस की स्थापना की है, जिसमें अब तक 24 सदस्य देश हैं, जबकि कई अन्य देशों ने पर्यवेक्षक का दर्जा मांगा है। उन्होंने कहा कि यूएनडीपी, आईयूसीएन, एफएओ, सीसीएफ, जीटीएफ और जीएसएलईपी जैसी अंतर्राष्ट्रीय एजेंसियों ने भी आईबीसीए के साथ जुड़ने में रुचि दिखाई है। मंत्री ने कहा कि केंद्रीय बजट में घोषणा की गई है कि पहला वैश्विक बिग कैट शिखर सम्मेलन भारत में आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि आईबीसीए के माध्यम से तीन प्रमुख वैश्विक चुनौतियों – बढ़ती गर्मी, भूमि का मरुस्थलीकरण और जैव विविधता का नुकसान – का समाधान किया जा सकता है।

मंत्री जी ने कहा कि बाघों और अन्य वन्यजीवों के निर्धारित क्षेत्रों से बाहर निकलने के कारण मजबूत प्रतिक्रिया प्रणालियों की आवश्यकता अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा कि घायल जानवरों, संघर्ष से संबंधित मामलों, अनाथ शावकों और तनावग्रस्त अन्य जानवरों को समय पर और पेशेवर सहायता की आवश्यकता होती है, इसलिए बाघ अभ्यारण्यों के आसपास बचाव, पुनर्वास और उपचार केंद्रों के लिए एक स्पष्ट और मानकीकृत ढांचा विकसित करना आवश्यक है। इस अवसर पर मंत्री जी ने एनटीसीए की प्रचार पत्रिका – स्ट्राइप्स का विमोचन भी किया और राष्ट्रीय प्राकृतिक इतिहास संग्रहालय (एनएमएनएच) द्वारा आयोजित चित्रकला प्रतियोगिता के छात्रों को पुरस्कार वितरित किए।

दो दिनों तक चलने वाले इस सम्मेलन में राज्य स्तरीय अधिकारी और क्षेत्रीय प्रबंधक संरक्षण प्राथमिकताओं, कार्यान्वयन की चुनौतियों और उभरती आवश्यकताओं पर एकीकृत रूप से चर्चा करेंगे। चर्चाओं में राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर भी ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जिनमें अखिल भारतीय बाघ अनुमान 2026 की समीक्षा, संरक्षण और गश्त तंत्र, बाघों की आबादी का सक्रिय प्रबंधन, बचाव और पुनर्वास अवसंरचना, मानव-वन्यजीव अंतर्संबंधों का प्रबंधन, प्रोजेक्ट टाइगर के तहत निधियों का उपयोग और बाघ संरक्षण फाउंडेशन को मजबूत करना शामिल है।

बाघों की मृत्यु से संबंधित लंबित मामलों की भी समीक्षा की जाएगी ताकि वित्तीय, प्रशासनिक और तकनीकी प्रक्रियाओं को जमीनी आवश्यकताओं के अनुरूप बेहतर ढंग से ढाला जा सके। सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य नीति, प्रबंधन और जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन के बीच प्रत्यक्ष संवाद को सुगम बनाना, सूचित निर्णय लेने में सहयोग करना, राज्यों के बीच अनुभवों का आदान-प्रदान करना और बाघ संरक्षण के राष्ट्रीय उद्देश्यों की दिशा में समन्वित कार्रवाई करना होगा।

 

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केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में म.प्र. के सीहोर जिले के अमलाहा से देशव्यापी दलहन क्रांति का आगाज़ 

नई दिल्ली –  मध्य प्रदेश के सीहोर ज़िले के अमलाहा स्थित खाद्य दलहन अनुसंधान केंद्र (FLRP) से आज देश की दलहन नीति और किसान–केंद्रित कृषि विमर्श का नया अध्याय जुड़ा और केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में देशव्यापी दलहन क्रांति का आगाज़ हुआ। यहाँ आयोजित राष्ट्रीय दलहन परामर्श एवं रणनीति बैठक में एक ही मंच पर केंद्रीय कृषि मंत्री श्री चौहान के साथ ही केंद्रीय राज्य मंत्री तथा मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव, ओडिशा के उपमुख्यमंत्री, कई राज्यों के कृषि मंत्री, शीर्ष वैज्ञानिक, ICAR–ICARDA के प्रतिनिधि, प्रगतिशील किसान, FPO, बीज और दाल मिल प्रतिनिधि जुटे– और संदेश साफ़ था: दलहन में आत्मनिर्भर भारत का रोडमैप अब खेतों के बीच से तय होगा, दिल्ली के फाइलों के कमरों से नहीं।

भारत की दलहन नीति और किसान हितों के मोर्चे पर एक साथ दो बड़ी घोषणाएँ

एक तरफ अमलाहा (सीहोर) में खाद्य दलहन अनुसंधान केंद्र (FLRP) से ‘दलहन आत्मनिर्भरता मिशन’ का रोडमैप तय हुआ, तो दूसरी तरफ केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने विपक्ष की आशंकाओं को ख़ारिज करते हुए स्पष्ट संदेश दिया कि दालें आयात करना हमारे लिए शर्म की बात है, अब भारत दालों का निर्यातक बनेगा और हालिया अंतरराष्ट्रीय समझौतों के बावजूद भारत के किसान के हितों पर ज़रा सी भी आंच नहीं आने दी जाएगी।

किसानों की ओर से प्रधानमंत्री जी को धन्यवाद, विपक्ष पर करारा प्रहार

केंद्रीय कृषि मंत्री ने स्पष्ट कहा कि विपक्ष का “देश बेच दिया, किसान बेच दिए, किसान बर्बाद हो जाएंगे” वाला नैरेटिव आज के तथ्य सामने आने के बाद टिक नहीं सकता। उन्होंने कहा कि यह अपने आप में एक ऐतिहासिक और अद्भुत समझौता है जिसमें भारत की प्रगति और विकास के नए द्वार खुलेंगे, निर्यात बढ़ेगा, रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और किसान की आय भी बढ़ेगी, क्योंकि हमारे मसाले निर्यात होंगे, चावल हमारा इन देशों में कितना जाता है, उसका निर्यात बढ़ेगा, हमारे डेयरी के उत्पाद सुरक्षित रहे हैं और इसलिए भारत के किसानों को इससे बहुत फायदा है। उन्होंने मंच से कहा कि इस ऐतिहासिक समझौते के लिए मैं प्रधानमंत्री जी का, भारत के किसानों की तरफ से– हम सब कृषि मंत्री यहाँ खड़े हैं– हम हृदय से अभिनंदन करते हैं, उनका स्वागत करते हैं, उनको धन्यवाद देते हैं कि उनके नेतृत्व में हमारे किसानों के हित सर्वथा सुरक्षित रहे हैं। प्रत्येक किसान भारत का आज नरेंद्र मोदी जी को बधाई दे रहा है, धन्यवाद दे रहा है और हम सभी उनके आभारी हैं कि किसानों के हितों को सुरक्षित रखा गया है। किसानों के हितों को सुरक्षित रखने के लिए बहुत–बहुत धन्यवाद प्रधानमंत्री जी।

अमलाहा से दलहन आत्मनिर्भर भारत की हुंकार

‘दलहन आत्मनिर्भरता मिशन’ की राष्ट्रीय बैठक में केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह ने कहा कि आप समझ सकते हैं कि पूरा हिंदुस्तान आज अमलाहा में इकट्ठा हो गया है। शिवराज सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी का संकल्प है कि विकसित भारत के लिए आत्मनिर्भर भारत बनाना आवश्यक है और उसी कड़ी में दलहन में आत्मनिर्भरता एक बड़ा लक्ष्य है। प्रधानमंत्री जी का संकल्प है, दलहन में भी भारत आत्मनिर्भर बने, दालें बाहर से नहीं मंगाएँगे, बल्कि कल ऐसी स्थिति आए कि हम दालों का निर्यात करेंगे। इसके लिए उन्होंने ‘दलहन आत्मनिर्भरता मिशन’ बनाया है। आज उसी मिशन की राष्ट्रीय बैठक यहाँ की गई है।

केंद्र–राज्य साझेदारी का भरोसा

श्री चौहान ने म.प्र. के मुख्यमंत्री को इस वर्ष को “कृषक कल्याण वर्ष” घोषित करने के लिए बधाई देते हुए कहा कि भारत सरकार, मध्य प्रदेश सरकार के इस निर्णय में पूरी तरह से कदम से कदम, कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग करेगी, ताकि प्रदेश में किसानों की आय बढ़ाई जा सके, फसलों का उत्पादन बढ़े और वैल्यू एडिशन के नए अवसर तैयार हों। उन्होंने यह भी कहा कि सभी राज्यों के कृषि मंत्री अपने–अपने राज्यों में भी हम सब मिलकर अलग–अलग रोडमैप बनाएंगे, ताकि प्रत्येक राज्य की ज़रूरतों के अनुरूप दलहन मिशन को आगे बढ़ाया जा सके।

विपक्ष पर वार: “किसान बर्बाद हो जाएगा” की अफ़वाहें झूठी साबित

भारत–अमेरिका समझौते को लेकर चल रही राजनीतिक बहस पर केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह ने विपक्ष को कठोर शब्दों में घेरा। उन्होंने कहा कि हमारा विपक्ष हाय–तौबा मचा रहा था कि अमेरिका के साथ ऐसा समझौता हो जाएगा जिसमें भारत का किसान तबाह हो जाएगा, बर्बाद हो जाएगा ।
उन्होंने याद दिलाया कि यह वही नरेंद्र मोदी हैं, जिन्होंने कहा था “देश नहीं झुकने दूँगा” और यह भी कहा था कि चाहे कितनी बड़ी कीमत क्यों न चुकानी पड़े, किसानों के हितों की रक्षा करेंगे। अभी जो समझौता हुआ है USA के साथ, इसके पहले 27 देशों के साथ यूरोपियन यूनियन के, और उसके पहले जो FTA हुए हैं, आज के समझौते ने तो बता दिया है कि देश के और किसानों के हित पूरी तरह से सुरक्षित रखे गए हैं।

कृषि और डेयरी पर स्पष्ट सुरक्षा: “ये उत्पाद अमेरिका से नहीं आएँगे”

किसानों की मुख्य चिंता पर बात करते हुए केंद्रीय मंत्री श्री चौहान ने कहा कि वह केवल किसानों के पक्ष की चर्चा करेंगे। हमारे प्रमुख अनाज मक्का, बड़ा हल्ला मचाया जा रहा था कि आ जाएगा– बिल्कुल नहीं आएगा। मक्का, गेहूँ, चावल, सोयाबीन, पोल्ट्री, दूध, पनीर, इथेनॉल, तंबाकू, कई सब्जियाँ और उसके अलावा कृषि और डेयरी उत्पाद कई तरह के पूरी तरह से सुरक्षित रखे गए हैं। उन्होंने कहा कि इन उत्पादों पर भारत का बाजार भारत के किसानों के लिए सुरक्षित है; अमेरिका से न तो मक्का आएगा, न गेहूँ, न चावल, न सोया, न पोल्ट्री उत्पाद, न दूध, न पनीर, न इथेनॉल, न तंबाकू और न ही कई संवेदनशील सब्जियाँ। उन्होंने जोर देकर कहा कि अमेरिका से नहीं आएँगे, भारत के हितों का पूरी तरह से संरक्षण किया गया है।

निर्यात के नए अवसर: बासमती, मसाले और टेक्सटाइल को बढ़त

श्री चौहान ने कहा कि इस समझौते से देश के अन्य क्षेत्रों को भी लाभ होगा, विशेष रूप से हमारे निर्यातकों, MSME और युवाओं को। उन्होंने कहा कि भारतीय सामानों पर जो परंपरागत शुल्क था, वह घटकर लगभग 18 प्रतिशत हो जाएगा, जिससे टेक्सटाइल, परिधान, चमड़ा, जूते, प्लास्टिक, रबर उत्पाद, ऑर्गेनिक केमिकल, होम डेकोर, हस्तशिल्प और चुनिंदा मशीनरी जैसे क्षेत्रों में विशाल बाजार और अवसर मिलेंगे। उन्होंने बताया कि जेनेरिक दवाओं, रत्नों, हीरों, विमान के पुर्जों और कई तरह के सामान पर शुल्क घटकर शून्य हो जाएगा, जिससे भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धा और ‘Make in India’ को मजबूती मिलेगी।

कृषि के संदर्भ में उन्होंने कहा कि बासमती चावल और मसालों को विशेष लाभ होगा; हरियाणा, पश्चिम उत्तर प्रदेश और पंजाब में बासमती उगाने वाले किसानों के लिए 18% टैरिफ वाले बाजार में नए अवसर खुलेंगे। उन्होंने उल्लेख किया कि पहले लगभग 63,000 करोड़ रुपये का निर्यात हुआ था, जो इस समझौते से और बढ़ने की संभावना है, और टेक्सटाइल निर्यात बढ़ने से कपास उत्पादक किसानों को भी फायदा होगा।

दलहन के संदर्भ में सख्त संदेश: “दालें विदेश से मंगाना आनंद नहीं, शर्म की बात”

दलहन की स्थिति पर बोलते हुए श्री चौहान ने साफ कहा कि दालों का आयात भारत के लिए सम्मान की बात नहीं है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने तय किया है कि “दलहन का उत्पादन बढ़ना चाहिए। अभी दालें हमको मंगानी पड़ती हैं बाहर से… दाल हमें विदेशों से मंगानी पड़े तो ये हमारे लिए आनंद का विषय नहीं है, शर्म की बात है। उन्होंने म.प्र. के किसानों को बधाई देते हुए कहा कि आज भी दलहन के उत्पादन में म.प्र. नंबर वन है देश में, लेकिन साथ ही चेताया कि दलहन का क्षेत्र घट रहा है, जिसे बढ़ाने की आवश्यकता है। उन्होंने माना कि किसान वही फसल बोता है, जिसमें अधिक फायदा हो– गेहूँ में होगा तो गेहूँ बोएँगे और चना में होने लगे तो चना बोएँगे, इसलिए दलहन फसलों की उत्पादकता और लाभ दोनों बढ़ाने पर ज़ोर दिया जा रहा है।

किसान को उचित मूल्य मिले, यह हम सुनिश्चित करेंगे

केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि बीज से लेकर बाज़ार तक की पूरी व्यवस्था पर सरकार का फोकस है। अच्छा उत्पादन होने पर किसान को उचित मूल्य मिले, यह हम सुनिश्चित करेंगे। उन्होंने बताया कि क्लस्टर स्तर पर दाल मिल लगाने को प्रोत्साहन दिया जाएगा और दाल मिल स्थापित करने पर भारत सरकार ₹25 लाख तक की सब्सिडी देगी, ताकि जहाँ दाल का उत्पादन होगा, वहीं उसकी प्रोसेसिंग और बिक्री हो और किसानों को वैल्यू एडिशन का सीधा लाभ मिल सके। श्री चौहान ने कहा कि इस मिशन के तहत देशभर में 1,000 दाल मिलें खोली जाएँगी, जिनमें से 55 दाल मिलें मध्य प्रदेश के अलग-अलग क्लस्टरों में स्थापित की जाएँगी, जिससे प्रदेश के किसानों को विशेष लाभ मिलेगा और स्थानीय स्तर पर रोज़गार के नए अवसर भी पैदा होंगे।

कोई भी बीज अब दिल्ली में रिलीज़ नहीं होगा

बीज सुधार और वितरण की नई व्यवस्था का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि हम एक फैसला कर रहे हैं– कोई भी बीज अब दिल्ली में रिलीज़ नहीं होगा, अलग-अलग प्रदेशों में जाकर किसान के बीच बीज रिलीज़ करेंगे। उन्होंने बताया कि क्लस्टर मॉडल के ज़रिए खेती को मजबूती दी जाएगी, किसानों को जोड़कर संगठित रूप से उत्पादन बढ़ाया जाएगा और हर किसान को पूरा सहयोग मिलेगा। क्लस्टर में आने वाले किसानों को बीज किट दी जाएगी और आदर्श खेती के लिए एक हेक्टेयर पर ₹10,000 की सहायता दी जाएगी, ताकि अच्छे बीज, बेहतर तकनीक और पर्याप्त वित्तीय सहयोग के साथ दलहन उत्पादन को नई ऊँचाई तक पहुँचाया जा सके।

उन्होंने अमलाहा स्थित संस्थान, ICARDA और ICAR के शोध कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि मसूर, चना, उड़द, बटरा, मूंग आदि की उत्पादकता बढ़ाने, जल्दी पकने वाली किस्में विकसित करने, उन्नत बीज तैयार करने और रोग–मुक्त फसलें उगाने पर काम युद्धस्तर पर चल रहा है, ताकि किसान को दलहन बोने पर ज़्यादा फायदा हो।

अमलाहा से निकला संदेश– किसान हित सुरक्षित, दलहन में आत्मनिर्भरता का मार्ग प्रशस्त

अमलाहा में हुई इस राष्ट्रीय बैठक के माध्यम से शिवराज सिंह चौहान ने दो स्पष्ट राजनीतिक–नीतिगत संदेश दिए– पहला, अंतरराष्ट्रीय समझौतों के बावजूद भारत के किसानों के हितों पर आंच नहीं आने दी जाएगी, और दूसरा, दलहन में आत्मनिर्भरता को केवल नारा नहीं, बल्कि वैज्ञानिक शोध, नीति, MSP, बीज सुधार और बाजार के माध्यम से ज़मीन पर उतारा जाएगा। उन्होंने कहा कि विपक्ष का डर फैलाने वाला अभियान आज तथ्यों के सामने कमजोर पड़ गया है और देश के किसान देख रहे हैं कि उनके हितों की रक्षा करते हुए ही भारत आगे बढ़ रहा है। अमलाहा से निकले इस संदेश के साथ, अब दलहन आत्मनिर्भरता मिशन और तेज़ी से आगे बढ़ेगा और भारत को दालों के मामले में आत्मनिर्भर और सशक्त बनाने की दिशा में यह बैठक एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगी।

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केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जेपी नड्डा ने मानव रचना दीक्षांत समारोह 2025-26 को संबोधित किया

नई दिल्ली  – केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण एवं रसायन एवं उर्वरक मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने मानव रचना शैक्षणिक संस्थानों (एमआरईआई) के दीक्षांत समारोह 2025-26 को संबोधित किया, जो शैक्षणिक भव्यता और उत्साह के साथ आयोजित किया गया।

सभा को संबोधित करते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री श्री जगत प्रकाश नड्डा ने दीक्षांत समारोह को वर्षों की कड़ी मेहनत, लगन, अनुशासन और समर्पण के फलस्वरूप हासिल की गई एक उपलब्धि बताया। उन्होंने इसे न केवल शैक्षणिक यात्रा की समाप्ति बल्कि राष्ट्र और समाज के प्रति उत्तरदायित्व के एक नए चरण की शुरुआत भी बताया। उन्होंने स्नातक छात्रों से सशक्त मूल्यों, नैतिक आचरण और जनसेवा के प्रति प्रतिबद्धता के साथ आगे बढ़ने का आग्रह किया।

            श्री नड्डा ने इस बात पर जोर दिया कि स्नातक होने वाले युवाओं को अमृतकाल के दूसरे चरण में अपने पेशेवर जीवन में प्रवेश करने का सौभाग्य प्राप्त है, जो 2047 तक चलेगा, जब भारत एक पूर्ण विकसित राष्ट्र बनने की आकांक्षा रखता है। उन्होंने रेखांकित किया कि यह चरण अपार अवसरों के साथ-साथ उतनी ही महत्वपूर्ण जिम्मेदारियाँ भी प्रस्तुत करता है, और युवाओं से राष्ट्रीय विकास में सार्थक योगदान देने का आह्वान करता है।

पिछले ग्यारह वर्षों में माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व में हासिल की गई अभूतपूर्व प्रगति पर प्रकाश डालते हुए, केंद्रीय मंत्री ने कहा कि पहले मात्र 6 एम्स की तुलना में अब 23 एम्स स्थापित किए गए हैं, जिससे देश भर में अत्याधुनिक स्वास्थ्य संस्थानों का एक मजबूत नेटवर्क तैयार हुआ है। उन्होंने आगे कहा कि भारत ने मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य से लेकर संक्रामक और गैर-संक्रामक रोगों तक, स्वास्थ्य संबंधी सभी सूचकों में उल्लेखनीय प्रगति की है।

उन्होंने बताया कि संस्थागत प्रसवों की संख्या 78 प्रतिशत से बढ़कर 89 प्रतिशत हो गई है, जबकि मातृ मृत्यु दर (एमएमआर) और शिशु मृत्यु दर (आईएमआर) में वैश्विक औसत दर से लगभग तीन गुना गिरावट आई है। तपेदिक नियंत्रण प्रयासों का जिक्र करते हुए श्री नड्डा ने इस बात पर प्रकाश डाला कि विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्‍ल्‍यूएचओ) ने भारत की महत्वपूर्ण प्रगति को स्वीकार किया है, जिसमें टीबी के मामलों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और गिरावट की दर वैश्विक औसत से दोगुनी है। उन्होंने यह भी बताया कि विश्व की लगभग एक-छठे जनसंख्या वाले भारत में रहने के बावजूद मलेरिया से होने वाली मृत्यु दर घटकर 0.6 प्रतिशत हो गई है।

श्री नड्डा ने इस बात पर और जोर दिया कि आयुष्मान भारत, आयुष्मान आरोग्य मंदिर और बड़े पैमाने पर जनसंख्या स्क्रीनिंग कार्यक्रमों जैसी पहलों के कारण स्वास्थ्य सेवा पर जेब से होने वाला खर्च 62 प्रतिशत से घटकर 39.4 प्रतिशत हो गया है, जिससे स्वास्थ्य सेवा अधिक सुलभ और सस्ती हो गई है।

 

आगे आने वाली चुनौतियों पर जोर देते हुए, उन्होंने छात्रों से आग्रह किया कि वे भारत की विशाल जनसंख्या की जरूरतों को पूरा करते हुए सेवा वितरण में गुणवत्ता और व्यापकता दोनों को बनाए रखें।

उन्होंने छात्रों की शैक्षणिक सफलता को आकार देने में अभिभावकों, शिक्षकों, संस्थागत नेतृत्व और सहायक कर्मचारियों के सामूहिक योगदान को भी स्वीकार किया।

अपने संबोधन का समापन करते हुए, श्री नड्डा ने स्नातकों से आग्रह किया कि वे हमेशा इस भावना को बनाए रखें कि समाज ने ही उनकी सफलता को संभव बनाया और बदले में निस्वार्थ और सार्थक रूप से समाज की सेवा करके अपना योगदान देने का प्रयास करना चाहिए।

इस अवसर, मानव रचना अंतर्राष्ट्रीय अनुसंधान एवं अध्ययन संस्थान (एमआरआईआईआरएस) और मानव रचना विश्वविद्यालय (एमआरयू) के कुलाधिपति डॉ. प्रशांत भल्ला ने स्नातक छात्रों को बधाई दी और शैक्षणिक उत्कृष्टता, नवाचार-आधारित शिक्षा, उद्योग सहयोग और वैश्विक अनुभव के प्रति संस्थान की प्रतिबद्धता पर बल दिया। उन्होंने छात्रों को पेशेवर उत्कृष्टता और सामाजिक प्रभाव के लिए प्रयासरत रहते हुए नैतिक मूल्यों में दृढ़ रहने के लिए प्रोत्साहित किया।

समारोह के दौरान, समाज में उत्कृष्ट योगदान के लिए विशिष्ट व्यक्तियों को मानद उपाधियाँ प्रदान की गईं। उपाधि प्राप्त करने वालों में न्यायमूर्ति गीता मित्तल (एमआरयू); बिहार की खेल मंत्री सुश्री श्रेयासी सिंह (एमआरआईआईआरएस); भारतीय चिकित्सा संघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष डॉ. अनिल कुमार जे. नायक (एमआरआईआईआरएस); और माल्टा गणराज्य के माननीय उप प्रधानमंत्री और विदेश एवं पर्यटन मंत्री डॉ. इयान बोर्ग (एमआरआईआईआरएस) शामिल हुए।

दीक्षांत समारोह में इंजीनियरिंग, प्रबंधन, कानून, शिक्षा, विज्ञान और स्वास्थ्य सेवा सहित विभिन्न विषयों के कुल 2,150 छात्रों को डिग्री प्रदान की गई। इनमें 521 स्नातक छात्र, 58 स्नातकोत्तर छात्र और 11 डॉक्टरेट शोधार्थी शामिल थे, जो स्नातक होने वाले छात्रों के लिए एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक उपलब्धि है। उत्कृष्ट शैक्षणिक प्रदर्शन और असाधारण उपलब्धियों के लिए मेधावी छात्रों को स्वर्ण पदक और शैक्षणिक पुरस्कारों से भी सम्मानित किया गया।

इस अवसर पर वरिष्ठ गणमान्य व्यक्ति, संकाय सदस्य, अभिभावक और स्नातक छात्र उपस्थित हुए

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प्रधानमंत्री के कुआला-लंपुर पहुंचने पर मलेशिया के प्रधानमंत्री ने स्वागत किया

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी मलेशिया के प्रधानमंत्री महामहिम दातो सेरी अनवर इब्राहिम के आमंत्रण पर 7-8 फरवरी 2026 को मलेशिया की यात्रा पर हैं। 2015 के बाद से प्रधानमंत्री की यह तीसरी मलेशिया यात्रा है।

प्रधानमंत्री के कुआला-लंपुर पहुंचने पर एक विशेष भाव के तहत उनका स्वागत प्रधानमंत्री दातो सेरी अनवर इब्राहिम के साथ मलेशिया के मानव संसाधन मंत्री दातो श्री रामानन रामकृष्णन और मलेशिया के उप विदेश मंत्री दातो लुकानिस्मान बिन अवांग सौनी ने किया। इसके बाद एक रंगारंग सांस्कृतिक स्वागत समारोह आयोजित किया गया, जिसमें दोनों देशों की साझा विरासत की प्रस्‍तुतियां दी गई।

इस यात्रा का उद्देश्य 2024 में स्थापित भारत-मलेशिया व्यापक रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना है। यह भारत-मलेशिया संबंधों को मजबूत करने की भारत की दृढ़ प्रतिबद्धता को दर्शाता है, जो हमारी एक्ट ईस्ट पॉलिसी, हिंद-प्रशांत विजन और विजन महासागर का एक प्रमुख स्तंभ है।

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केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज जम्मू में जम्मू और कश्मीर में विकास परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा बैठक की

नई दिल्ली – केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री श्री अमित शाह ने आज जम्मू में जम्मू और कश्मीर में विकास परियोजनाओं की प्रगति की समीक्षा बैठक की अध्यक्षता की। बैठक के दौरान, केन्द्रीय गृह मंत्री ने सड़क बुनियादी ढांचे, जल विद्युत परियोजनाओं, बिजली, उद्योग, पर्यटन, 4G और ऑप्टिकल फाइबर कनेक्टिविटी जैसे प्रमुख क्षेत्रों में विकास की व्यापक समीक्षा की। बैठक में जम्मू और कश्मीर के उपराज्यपाल श्री मनोज सिन्हा, मुख्यमंत्री श्री उमर अबदुल्ला, केन्द्रीय गृह सचिव और केन्द्र सरकार और जम्मू और कश्मीर सरकार के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

केन्द्रीय गृह मंत्री श्री अमित शाह ने कहा कि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में भारत सरकार, एक विकसित और समृद्ध जम्मू और कश्मीर के विजन के प्रति कटिबद्ध है। उन्होंने कहा कि मोदी सरकार द्वारा विकास में तेजी लाने के लिए किए जा रहे निरंतर और समर्पित प्रयासों से जम्मू और कश्मीर में विकास परियोजनाओं में अभूतपूर्व प्रगति हुई है। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर को जल विद्युत परियोजनाओं के पूरी क्षमता को विकसित करने की ज़रूरत है । उन्होंने कहा कि सरकार की जनकल्याण योजनाओं का 100% सैचुरेशन प्राप्त करना और सभी विकास परियोजनाओं का लाभ लाभार्थियों को मिलना सुनिश्चित करने पर विशेष ध्यान दिय़ा जाए।

 

केन्द्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री ने कहा कि युवाओं को विकास के साथ जोड़ने के लिए स्पोर्ट्स इन्फ्रास्ट्रक्चर विकसित करने और स्पोर्ट्स अकादमियों की स्थापना पर ध्यान दिया जाए। इस विषय में विभिन्न स्पोर्ट्स बॉडीज से बात करके लगभग 200 करोड़ रुपए के निवेश की कोशिश की जाएगी। श्री शाह ने कहा कि National Dairy Development Board (NDDB) के माध्यम से जम्मू और कश्मीर में डेयरी क्षेत्र को बढ़ावा देने के प्रयास होने चाहिएं।

एक महत्वपूर्ण कदम के तहत, जम्मू और कश्मीर को पहली बार वित्त वर्ष 2025-26 में Special Assistance to States for Capital Investment (SASCI) योजना के दायरे में लाया गया है, जिससे पूंजीगत परियोजनाओं के लिए 50 साल के ब्याज-मुक्त ऋण मिल सकेंगे। गृह मंत्री ने इस बात पर ज़ोर दिया कि मज़बूत वित्तीय अनुशासन से समय के साथ केंद्रशासित प्रदेश के वित्तीय घाटे को स्थिर करने में मदद मिलेगी।

श्री अमित शाह ने कहा कि देश, वर्ष 2047 में आज़ादी के 100 वर्ष पूरे होने तक विकसित भारत के लक्ष्य की ओर तेज़ी से बढ़ रहा है, और भारत सरकार इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए जम्मू और कश्मीर को पूरी सहायता देती रहेगी। गृह मंत्री श्री अमित शाह का दौरा, भारत सरकार के जम्मू और कश्मीर के विकास, शांति और सुरक्षा को सर्वोच्च राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाने के दृढ़ संकल्प को दर्शाता है।

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महिला एवं बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने संयुक्त राष्ट्र में भारत के परमानेंट प्रतिनिधि श्री पर्वतनेनी हरीश से मुलाकात की

नई दिल्ली – महिला और बाल विकास राज्य मंत्री श्रीमती सावित्री ठाकुर ने संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि श्री पर्वतनेनी हरीश से मुलाकात की।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर, श्रीमती सावित्री ठाकुर ने कहा, “ संयुक्त राष्ट्र में भारत के परमानेंट रिप्रेजेंटेटिव श्री पर्वतनेनी हरीश जी के साथ एक प्रोडक्टिव मीटिंग और बातचीत हुई।

हमने UN में भारत की प्रायोरिटीज़ पर चर्चा की और इनक्लूसिव डेवलपमेंट, सोशल जस्टिस और महिलाओं के नेतृत्व वाली ग्रोथ को आगे बढ़ाने पर विचारों का आदान-प्रदान किया, साथ ही ग्लोबल प्लेटफॉर्म पर भारत की आवाज़ और एंगेजमेंट को मज़बूत किया।”

श्रीमती सावित्री ठाकुर UN हेडक्वार्टर में यूनाइटेड नेशंस कमीशन फॉर सोशल डेवलपमेंट (CSocD) के 64वें सेशन में भारतीय डेलीगेशन को लीड करने के लिए न्यूयॉर्क के दौरे पर हैं।

 

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फास्टैग सालाना पास लॉन्च होने के छह महीने के अंदर 50 लाख से ज़्यादा यूजर हो गए

  • लॉन्च के छह महीने के अंदर 50 लाख से ज़्यादा यूज़र्स और 26.55 करोड़ टोटल ट्रांज़ैक्शन के साथ मज़बूती से अपनाया गया।
  • कुल कार यूज़र्स ट्रांज़ैक्शन का लगभग 28% एनुअल पास के ज़रिए रिकॉर्ड किया गया।
  • एनुअल पास इस्तेमाल करने वाले टॉप तीन फ़ीस प्लाज़ा: दिल्ली NCR में बिजवासन 57% के साथ, दिल्ली NCR में मुंडका 53% के साथ और सोनीपत में झिंझोली 53% कुल कार क्रॉसिंग के साथ एनुअल पास का इस्तेमाल करता है।
  • टॉप तीन इलाके: चंडीगढ़, तमिलनाडु और दिल्ली

नई दिल्ली, ‘आवागमन की सुगमता’ को बढ़ावा देते हुए, फास्टैग एनुअल पास ने 15 अगस्त 2025 को अपनी शुरुआत के छह महीने के भीतर 50 लाख उपयोगकर्ताओं का आंकड़ा पार कर और 26.55 करोड़ से अधिक लेनदेन दर्ज कर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। यह मील का पत्थर राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे पर निजी वाहन स्वामियों के बीच वार्षिक पास की बढ़ती स्वीकार्यता को दर्शाता है, जो यात्रा के लिए एक निर्बाध और किफायती विकल्प प्रदान करता है।

राष्ट्रीय राजमार्ग उपयोगकर्ताओं के बीच फास्टैग एनुअल पास की बढ़ती प्राथमिकता को रेखांकित करते हुए, राजमार्ग नेटवर्क पर कारों के कुल लेनदेन का लगभग 28% अब इसी पास के माध्यम से किया जा रहा है।

आंकड़े राष्ट्रीय राजमार्ग यात्रियों द्वारा इसे बड़े पैमाने पर अपनाए जाने का संकेत देते हैं। दिल्ली एनसीआर में बिजवासन शुल्क प्लाजा सबसे प्रमुख स्थान के रूप में उभरा है, जहां कुल कार क्रॉसिंग का लगभग 57% हिस्सा वार्षिक पास का है। इसके बाद दिल्ली एनसीआर का मुंडका शुल्क प्लाजा और सोनीपत का झिंझोली शुल्क प्लाजा आता है, जहां गैर-व्यावसायिक वाहनों की लगभग 53% क्रॉसिंग वार्षिक पास के जरिए दर्ज की गई।

इसके अतिरिक्त, क्षेत्रवार विश्लेषण से पता चलता है कि उपयोग के मामले में चंडीगढ़ सबसे आगे है, जो देश भर में कुल वार्षिक पास लेनदेन का 14% हिस्सा रखता है। इसके बाद तमिलनाडु 12.3% और दिल्ली 11.5% के साथ दूसरे और तीसरे स्थान पर हैं। ये आंकड़े उत्तरी शहरी केंद्रों से लेकर दक्षिणी राज्यों तक विभिन्न भौगोलिक क्षेत्रों में इस वार्षिक पास की व्यापक पहुंच को प्रदर्शित करते हैं।

राष्ट्रीय राजमार्गों और एक्सप्रेसवे के लगभग 1,150 शुल्क प्लाजा पर लागू यह वार्षिक पास, ₹3,000 के एकमुश्त भुगतान के माध्यम से बार-बार रिचार्ज करने की आवश्यकता को समाप्त करता है। इसकी वैधता एक वर्ष या 200 टोल प्लाजा क्रॉसिंग तक होती है। यह पास वैध फास्टैग वाले सभी गैर-व्यावसायिक वाहनों के लिए लागू है। राजमार्गयात्रा ऐप या एनएचएआई (NHAI) की वेबसाइट के माध्यम से भुगतान करने के दो घंटे के भीतर यह पास वाहन से जुड़े मौजूदा फास्टैग पर सक्रिय हो जाता है।

फास्टैग एनुअल पास का यह बढ़ता उपयोग देश भर के राष्ट्रीय राजमार्गों पर सुगम और किफायती यात्रा को बढ़ावा देने में इसकी प्रभावशीलता को और मजबूत करता है।

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भारतीय तटरक्षक बल ने समन्वित समुद्री-हवाई अभियान के जरिए अंतरराष्ट्रीय तेल तस्करी रैकेट का भंडाफोड़ किया

नई दिल्ली – भारतीय तटरक्षक बल (आईसीजी) ने 5-6 फरवरी 2026 को एक सुनियोजित समुद्री-हवाई समन्वित अभियान के जरिए एक अंतरराष्ट्रीय तेल तस्करी रैकेट का सफलतापूर्वक भंडाफोड़ किया। इस अभियान से संघर्षग्रस्त क्षेत्रों से उत्पन्न होने वाले भारी मात्रा में तेल और तेल-आधारित कार्गो के अवैध हस्तांतरण में शामिल एक जटिल नेटवर्क ध्वस्त हुआ है।

5 फरवरी 2026 को, मुंबई से लगभग 100 समुद्री मील पश्चिम में भारतीय तटरक्षक बल के जहाजों ने तीन संदिग्ध जहाजों को रोका। आईसीजी की विशेषज्ञ बोर्डिंग टीमें जहाजों की लगातार तलाशी, जहाज पर बरामद इलेक्ट्रॉनिक डेटा की पुष्टि, दस्तावेजों का सत्यापन और चालक दल के सदस्यों से विस्तृत पूछताछ के द्वारा घटनाक्रम की पूरी जानकारी जुटाने और आपराधिक कार्यप्रणाली की पुष्टि कर पाई।

तस्करी करने वाले गिरोह ने एक ऐसी कार्यप्रणाली अपनाई जिसमें सस्ते तेल को समुद्री जहाजों द्वारा ले जाया जाता था और अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में मोटर टैंकरों में स्थानांतरित किया जाता था। प्रारंभिक जांच से पता चला कि गिरोह में कई देशों में काम करने वाले दलाल शामिल थे, जो समुद्र में जहाजों के बीच माल की बिक्री और हस्तांतरण कार्य का समन्वय करते थे।

आईसीजी की तकनीक-आधारित निगरानी प्रणालियों द्वारा पता चलने के बाद यह अभियान शुरू किया गया, जिसमें भारतीय विशिष्ट आर्थिक क्षेत्र (ईईजेड) के भीतर संदिग्ध गतिविधि में लिप्त एक मोटर टैंकर की पहचान की गई। इसके बाद, जहाजों की आवाजाही की डिजिटल जांच और डेटा पैटर्न विश्लेषण से टैंकर की ओर आ रहे दो अतिरिक्त जहाजों की पहचान हुई, जिन पर अवैध रूप से तेल के जहाज-से-जहाज पर हस्तांतरण में शामिल होने का संदेह था, जिससे भारत सहित तटीय राज्यों को देय भारी शुल्क की चोरी हो रही थी।

5 फरवरी 2026 को भौतिक तलाशी से डिजिटल साक्ष्य की पुष्टि होने पर तीनों जहाजों को जब्त कर लिया गया। प्रारंभिक जांच से पता चलता है कि समुद्री कानून प्रवर्तन एजेंसियों से बचने के लिए ये जहाज अक्सर अपनी पहचान बदलते रहते थे। शुरुआती जांच से यह भी पता चलता है कि जहाजों के मालिक विदेशी देशों में रहते हैं। जब्त किए गए जहाजों को आगे की जांच के लिए मुंबई ले जाया जाएगा और बाद में उचित कानूनी कार्रवाई के लिए भारतीय सीमा शुल्क और अन्य कानून प्रवर्तन एजेंसियों को सौंप दिया जाएगा।

उन्नत डिजिटल निगरानी के माध्यम से शुरू किया गया और भारतीय तटरक्षक बल की बढ़ती समुद्री उपस्थिति द्वारा लागू किया गया यह अभियान, समुद्री क्षेत्र में एक प्रमुख सुरक्षा प्रदाता के रूप में और समुद्र में अंतरराष्ट्रीय नियमों पर आधारित व्यवस्था के एक दृढ़ प्रवर्तक के रूप में भारत की भूमिका को दर्शाता है।

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सीमावर्ती क्षेत्र में रेल संपर्क सुधारने के लिए, काज़ीगुंड-श्रीनगर-बुडगाम दोहरीकरण (118 किमी) और बारामूला से उरी नई लाइन (40 किमी) के लिए डीपीआर तैयार किए गए

नई दिल्ली – श्रीनगर-बारामूला खंड की रेल कनेक्टिविटी को बढ़ाने के लिए, सोपोर से कुपवारा (34 किमी) तक की नई लाइन के सर्वेक्षण को मंजूरी दी गई थी और विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार की गई थी। हालांकि, परियोजना को अव्यवहार्य पाए जाने के कारण रद्द कर दिया गया है। रेल कनेक्टिविटी को और बेहतर बनाने के लिए, सीमावर्ती क्षेत्र में निम्नलिखित परियोजनाओं की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) भी तैयार की गई हैं:

 

  • काज़ीगुंड-श्रीनगर-बुडगाम दोहरीकरण (118 किमी)
  • बारामूला से उरी तक नई लाइन (40 किमी)

 

डीपीआर तैयार होने के बाद, परियोजना की मंजूरी के लिए राज्य सरकारों सहित विभिन्न हितधारकों से परामर्श और नीति आयोग, वित्त मंत्रालय आदि से आवश्यक अनुमोदन की आवश्यकता होती है। चूंकि परियोजनाओं की मंजूरी एक सतत और गतिशील प्रक्रिया है, इसलिए सटीक समयसीमा तय नहीं की जा सकती।

272 किलोमीटर लंबी उधमपुर-श्रीनगर-बारामूला रेल लिंक (यूएसबीआरएल) परियोजना हाल ही में शुरू की गई है। यूएसबीआरएल परियोजना जम्मू और कश्मीर के उधमपुर, रियासी, रामबन, श्रीनगर, अनंतनाग, पुलवामा, बडगाम और बारामूला जिलों को कवर करती है।

यूएसबीआरएल परियोजना ने क्षेत्र के सामाजिक-आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण योगदान दिया है, जिसमें रोजगार सृजन एक महत्वपूर्ण पहलू है। इस परियोजना से 5 करोड़ से अधिक मानव-दिवस का रोजगार सृजित हुआ है।

यूएसबीआरएल परियोजना के सामाजिक-आर्थिक विकास प्रयासों का एक और महत्वपूर्ण पहलू 215 किलोमीटर से अधिक लंबी संपर्क सड़कों का निर्माण है, जिसमें एक सुरंग और 320 छोटे पुलों का निर्माण शामिल है। इस सड़क नेटवर्क ने स्थानीय आबादी को अन्य क्षेत्रों से बेहतर संपर्क स्थापित करने और सामाजिक-आर्थिक स्थिति में सुधार लाने में मदद की है।

घाटी क्षेत्र की शेष भारतीय रेलवे नेटवर्क से सर्वकालिक, विश्वसनीय और आरामदायक रेल कनेक्टिविटी से पर्यटन को बड़ा बढ़ावा मिलेगा।

यह जानकारी केंद्रीय रेल, सूचना एवं प्रसारण एवं इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्री श्री अश्विनी वैष्णव ने आज राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में दी।

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“मुंबई बंदरगाह के पूर्वी तट का 22,672 करोड़ रुपए की समुद्री विकास परियोजना से कायापलट होगा”: सर्बानंद सोनोवाल

नई दिल्ली – केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने मुंबई बंदरगाह प्राधिकरण (एमबीपीए) की चल रही और प्रस्तावित परियोजनाओं की व्यापक समीक्षा की, जिसमें केंद्र ने मुंबई के पूर्वी तट को वैश्विक समुद्री, रसद और पर्यटन केंद्र में बदलने के लिए 22,672 करोड़ रुपए की लागत वाली परियोजना के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की गई।

समीक्षा में 2047 तक मुंबई को एक प्रमुख समुद्री और तटवर्ती पर्यटन स्थल के रूप में स्थापित करने के उद्देश्य से एक दीर्घकालिक विकास रोडमैप की रूपरेखा तैयार की गई। बदलाव की यह रणनीति दो समानांतर विकास मार्गों पर आधारित है – मुंबई बंदरगाह के मुख्य माल ढुलाई कार्यों को मजबूत करना और बंदरगाह की कम उपयोग वाली भूमि को शहरी, पर्यटन और व्यावसायिक अवसंरचना के लिए दोबारा उपयोग में लाना।

सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “हमारे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के गतिशील नेतृत्व में, भारत विश्व के अग्रणी समुद्री राष्ट्रों में से एक बनने की दिशा में निर्णायक रूप से आगे बढ़ रहा है। मुंबई के पूर्वी तट का 22,672 करोड़ रुपए का कायाकल्प इस यात्रा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो समुद्री आत्मनिर्भरता को मजबूत करेगा, व्यापार और पर्यटन का विस्तार करेगा और वैश्विक स्तर पर मानक स्थापित करने वाले तटवर्ती बुनियादी ढांचे का निर्माण करेगा। यह पहल विकसित भारत और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्यों के अनुरूप है, साथ ही मुंबई को वैश्विक समुद्री और नीली अर्थव्यवस्था के केंद्र के रूप में स्थापित करती है”।

पूर्वी तट के किनारे की बड़ी-बड़ी अनुपयोगी भूमि का व्यवस्थित रूप से पुनर्विकास किया जा रहा है, ताकि क्रूज पर्यटन, समुद्री व्यापार, कौशल विकास और नीली अर्थव्यवस्था की गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा सके। यह पुनर्विकास कार्यक्रम समुद्री अमृत काल विजन 2047, क्रूज भारत मिशन और नीति आयोग की मुंबई महानगर क्षेत्र विकास केंद्र योजना के अनुरूप है, जिसका मकसद तट को एक बहुउपयोगी आर्थिक और सार्वजनिक स्थान के रूप में स्थापित करना है।

मुंबई बंदरगाह का लक्ष्य 2047 तक 150 मिलियन टन प्रति वर्ष की माल ढुलाई क्षमता हासिल करना है, जो मुख्य रूप से जवाहर द्वीप और पीरपाऊ में कच्चे तेल, पेट्रोलियम उत्पाद, एलएनजी और रसायनों जैसे अपतटीय तरल थोक माल की आवाजाही से प्रेरित है। प्रमुख अवसंरचना परियोजनाओं में भूमि सुधार और तट संरक्षण कार्य, जवाहर द्वीप में 22 मीट्रिक टन प्रति वर्ष की क्षमता वाले छठे तेल बर्थ का विकास और ठोस थोक माल ढुलाई को बढ़ावा देने के लिए बाहरी बंदरगाह में नई लंगरगाह सुविधाएं शामिल हैं।

केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “मुंबई हमेशा से ही विश्व के लिए भारत का समुद्री प्रवेश द्वार रहा है। प्रधानमंत्री मोदी जी का समुद्री शक्ति के पुनरुद्धार, पुनर्जीवन और सुधार का आह्वान, आत्मनिर्भर भारत बनने की हमारी यात्रा का केंद्रबिंदु है। मुंबई का एक आधुनिक, कुशल और जन-केंद्रित बंदरगाह शहर के रूप में पुनरुद्धार, आने वाले दशकों में अंतरराष्ट्रीय व्यापार, रसद और समुद्री सेवाओं को आकार देने में सक्षम वैश्विक समुद्री शक्ति के रूप में भारत के उत्थान में निर्णायक भूमिका निभाएगा”।

विकसित भारत मुंबई मरीना एक प्रमुख परियोजना है, जिसे हाइब्रिड ईपीसी-पीपीपी मॉडल के ज़रिए 887 करोड़ रुपए के निवेश के साथ भारत के पहले और सबसे बड़े विश्व स्तरीय मरीना के रूप में परिकल्पित किया गया है। इसके पूरक के रूप में नमो भारत इंटरनेशनल सेलिंग स्कूल होगा, जिसका उद्देश्य संरचित नौकायन शिक्षा प्रदान करना और जल-आधारित खेलों और कौशलों तक समान सार्वजनिक पहुंच का विस्तार करना है।

पुनर्विकास योजना में प्रिंसेस डॉक स्थित छत्रपति शिवाजी महाराज अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन केंद्र भी शामिल है, जिसे पीपीपी आधार पर लगभग 5,500 करोड़ रुपए के अनुमानित निवेश से प्रस्तावित किया गया है। एक उत्कृष्ट एमआईसीई गंतव्य के रूप में डिज़ाइन किए गए इस केंद्र के, तटवर्ती क्षेत्र में राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय व्यापार सम्मेलनों और कार्यक्रमों की मेजबानी करने की उम्मीद है। एम-शेड में रोपैक्स टर्मिनल, भाऊचा धक्का ग्लास हाउस और यात्री टर्मिनल जैसी परियोजनाओं के ज़रिए यात्री और क्रूज बुनियादी ढांचे को मजबूत किया जा रहा है, साथ ही घरेलू क्रूज टर्मिनल को शहर के प्रमुख कार्यक्रमों के लिए एक स्थल के रूप में सक्रिय किया जा रहा है।

पारंपरिक समुद्री आजीविका के आधुनिकीकरण के तहत, प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के सहयोग से मल्लेट बंदर में 132 करोड़ रुपए की लागत से एक नया मछली घाट विकसित किया जा रहा है। यह सुविधा मछली पकड़ने वाली ट्रॉलरों की क्षमता को लगभग 300 से बढ़ाकर 1,200 से अधिक कर देगी, साथ ही सुरक्षा और दक्षता में सुधार के लिए मत्स्य पालन कार्यों को यात्री आवागमन से अलग करेगी। आसपास के तटवर्ती क्षेत्र को थीम आधारित सड़कों, खुले में भोजन करने के लिए क्षेत्रों और सार्वजनिक स्थानों के ज़रिए जीवंत बनाया जाएगा, जिससे नागरिकों और पर्यटकों के लिए 3.5 किलोमीटर लंबा एक निरंतर तटवर्ती सैरगाह तैयार होगा।

इस परिवर्तन के तहत संस्थागत और शासन संबंधी बुनियादी ढांचे का भी उन्नयन किया जा रहा है। इसमें 295 करोड़ रुपए की अनुमानित लागत से बन रही नई मुंबई बंदरगाह प्रशासनिक इमारत और मल्लेट बंदर स्थित शिवदुर्ग टावर शामिल हैं, जिसमें वधवन बंदरगाह और जहाजरानी महानिदेशालय के कार्यालय होंगे। इसके अलावा, कई केंद्रीय सरकारी निकायों को एक ही आधुनिक स्थान पर समेकित करने के लिए कॉटन ग्रीन में एक केंद्रीय सरकारी कार्यालय परिसर विकसित किया जा रहा है।

केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा, “मुंबई के पूर्वी तट का कायापलट प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भारत को विश्व के अग्रणी समुद्री राष्ट्रों में शामिल करने के स्पष्ट और दीर्घकालिक दृष्टिकोण का प्रतिबिंब है। विश्व स्तरीय बंदरगाह बुनियादी ढांचे, क्रूज और सम्मेलन सुविधाओं, आधुनिक मत्स्य पालन, कौशल विकास संस्थानों और सार्वजनिक तटवर्ती स्थानों को एकीकृत करके, हम नए समुद्री अवसरों को खोल रहे हैं, जो रोजगार, व्यापार और पर्यटन को बढ़ावा देंगे। समुद्री और नीली अर्थव्यवस्था के केंद्र के रूप में मुंबई का पुनरुत्थान समुद्री सेवाओं और रसद में वैश्विक नेता बनने की दिशा में भारत की यात्रा में निर्णायक भूमिका निभाएगा।”

मुंबई बंदरगाह प्राधिकरण मेट्रो लाइन 11, ऑरेंज गेट-मरीन ड्राइव सुरंग परियोजना और रेडियो क्लब जेटी जैसी प्रमुख राज्य-स्तरीय अवसंरचना परियोजनाओं का भी समर्थन कर रहा है, जिससे बंदरगाह-आधारित विकास का मुंबई के व्यापक शहरी परिवहन नेटवर्क के साथ निर्बाध एकीकरण हो सके। परियोजनाओं के इस एकीकृत पोर्टफोलियो से लगभग 5.5 लाख लोगों को रोजगार मिलेगा, 500 हेक्टेयर से अधिक निर्मित समुद्री और नीली अर्थव्यवस्था क्षेत्र का निर्माण होगा और 2047 तक प्रति वर्ष 25 मिलियन से अधिक पर्यटक आएंगे।

केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि मुंबई के पूर्वी तट का कायापलट भारत को एक अग्रणी समुद्री राष्ट्र के रूप में स्थापित करने में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दूरदर्शी नेतृत्व को दर्शाता है।

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कानूनी सहायता एवं नालसा योजनाओं का कार्यान्वयन

नई दिल्ली –  राष्‍ट्रीय विधि सेवा प्राधिकरण (नालसा) द्वारा कानूनी सहायता योजनाओं के रूप में स्प्रुहा, 2025; वीर परिवार सहायता योजना, 2025; जागृति 2025; और मानव-वन्यजीव संघर्ष पीड़ित योजना जैसी योजनाएं लागू की जाती हैं, जबकि न्याय विभाग की केंद्रीय क्षेत्र योजना ‘डिजाइनिंग इनोवेटिव सॉल्यूशन फॉर होलिस्टिक एक्सेस टू जस्टिस (दिशा)’ के अंतर्गत टेली-लॉ एक कार्यक्रम है, जिसके माध्यम से अब तक 1.12 करोड़ लाभार्थियों को मुकदमा करने से पहले सलाह प्रदान की गई है।

नालसा स्प्रुहा (अदृश्य, पिछड़े और प्रभावित लोगों की क्षमता एवं लचीलेपन का समर्थन) योजना, 2025, कैदियों, विचाराधीन कैदियों और उनके आश्रितों को व्यापक कानूनी एवं सामाजिक सहायता प्रदान करने के लिए शुरू की गई एक नयी पहल है, जिसमें पुनर्वास और समाज में पुनः एकीकरण पर विशेष बल दिया गया है। यह निःशुल्क कानूनी सहायता, परामर्श, जमानत और पैरोल सहायता, कल्याणकारी योजनाओं से जुड़ाव, जेल और जिला अधिकारियों के साथ समन्वय, कानूनी जागरूकता तथा रिहाई के बाद सहायता के माध्यम से कानूनी, सामाजिक एवं आर्थिक कमजोरियों को समाप्त करती है, ताकि अपराध की पुनरावृत्ति में कमी लायी जा सके और सामाजिक पुनर्एकीकरण को बढ़ावा दिया जा सके।

जुलाई 2025 में शुरू की गई नालसा वीर परिवार सहायता योजना, 2025 का उद्देश्य रक्षा कर्मियों, पूर्व सैनिकों और उनके आश्रितों को विशेष रूप से संपत्ति, परिवार, उपभोक्ता एवं उत्तराधिकार संबंधी मामलों में समय पर मुफ्त कानूनी सहायता प्रदान करना है। जुलाई 2025 से सितंबर 2025 के बीच, जिला सैनिक बोर्डों के 417 कानूनी सहायता क्लीनिकों के माध्यम से 5,219 लाभार्थियों को सहायता प्रदान की गई। इस अवधि में, 525 पैरा लीगल स्वयंसेवकों और 355 पैनल वकीलों के समर्थन से 692 कानूनी सहायता एवं आउटरीच कार्यक्रम आयोजित किए गए, जो तीव्र संचालन एवं विस्तारित आउटरीच को दर्शाता है।

नालसा (जागृति – जमीनी स्तर पर सूचना और पारदर्शिता पहल के लिए न्याय जागरूकता) योजना, 2025 का उद्देश्य कानूनी सेवा संस्थानों को स्थानीय स्वशासन निकायों और सामुदायिक अवसंरचना के साथ एकीकृत करके जमीनी स्तर पर कानूनी जागरूकता को मजबूत करना है। जुलाई 2025 से दिसंबर 2025 के बीच 690 जिला इकाइयां और 2,129 तालुक इकाइयां स्थापित की गईं, और 35,000 से अधिक स्थायी कानूनी सहायता क्लीनिक स्थापित किए गए। कुल 35,24,711 लोगों को कानूनी सहायता एवं कल्याणकारी योजनाओं के बारे में जागरूक किया गया। यह योजना मुख्य रूप से महिलाओं एवंबच्चों के संरक्षण पर विशेष ध्यान देने के साथ-साथ, बाल विवाह और घरेलू हिंसा जैसे मुद्दों पर केंद्रित है।

मानव-वन्यजीव संघर्ष के पीड़ितों के लिए नालसा योजना, 2025 का उद्देश्य संविधान के अनुच्छेद 21 और 48ए के अनुरूप कानूनी सहायता, जागरूकता, मुआवजा एवं संबद्ध राहत प्रदान करके वन-सीमावर्ती और जनजातीय क्षेत्रों में प्रभावित लोगों द्वारा सामना की जाने वाली कानूनी, सामाजिक एवं आर्थिक चुनौतियों का समाधान करना है।

वित्तीय वर्ष 2025-26 (दिसंबर 2025 तक) के दौरान विधि सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के अंतर्गत गठित विभिन्न कानूनी सहायता सेवाओं एवं कार्यक्रमों को लागू करने के लिए सरकार द्वारा आवंटित निधियों का विवरण निम्नलिखित है:

करोड़ रुपये में

नालसा को अनुदान नालसा द्वारा उपयोग किए गए अनुदान
200.00 (सहायता अनुदान) 144.65
195.84 (एलएडीसीएस योजना के अंतर्गत) 194.17

राष्ट्रीय कानूनी सेवा प्राधिकरण (एनएएलएसए) की स्थापना पूरे देश में कानूनी सहायता के कार्यान्वयन के समन्वय, निगरानी एवं सुदृढ़ीकरण के लिए कानूनी सेवा प्राधिकरण अधिनियम, 1987 के अंतर्गत की गई।  नालसा 37 राज्य कानूनी सेवा प्राधिकरणों (एसएलएसए), 707 जिला कानूनी सेवा प्राधिकरणों (डीएलएसए) और 2,440 तालुक कानूनी सेवा समितियों (टीएलएससी) से युक्त एक विकेन्द्रीकृत संस्थागत संरचना द्वारा संचालित होता है और सहकारी संघवाद की भावना से प्रेरित होकर सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ घनिष्ठ समन्वय के साथ काम करता है, जिससे कानूनी सहायता तक असमान पहुंच एवं देरी को संबोधित किया जा सके और विशेष रूप से समाज के हाशिए पर रहने वाले एवं कमजोर वर्ग के लोगों को कानूनी सेवाओं की एकसमान, समयबद्ध एवं न्यायसंगत आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके।

नालसा द्वारा तैयार की गई सभी कानूनी सहायता गतिविधियां एवं योजनाएं कानूनी सेवा प्राधिकरण (एलएसए) अधिनियम, 1987 के प्रावधानों के अनुसार कार्यान्वित की जाती हैं। तदनुसार, अधिनियम के अंतर्गत सभी पात्र लाभार्थियों को नालसा द्वारा संचालित विभिन्न कानूनी सहायता कार्यक्रमों एवं गतिविधियों के माध्यम से न्याय तक पहुंच प्रदान की जाती है, जिसका उद्देश्य हाशिए पर पड़े समुदायों के लिए न्याय तक पहुंच में आने वाली आर्थिक एवं सामाजिक बाधाओं को दूर करना है।

यह जानकारी केंद्रीय विधि एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और संसदीय कार्य राज्य मंत्री श्री अर्जुन राम मेघवाल ने आज लोकसभा में दी।

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भारतीय विदेश व्यापार संस्थान में ‘पिच परफेक्ट ऑस्ट्रेलिया-भारत’ व्यापार केस स्टडी संकलन जारी किया गया

नई दिल्ली  – दिल्ली स्थित भारतीय विदेश व्यापार संस्थान में ‘पिच परफेक्ट ऑस्ट्रेलिया-इंडिया: 100 बिलियन डॉलर की साझेदारी के लिए आदर्श स्थितियां’ शीर्षक से भारत-ऑस्ट्रेलिया व्यापार केस स्टडीज संकलन जारी किया गया। इस आयोजन में नीति निर्माताओं, राजनयिकों, उद्योगपतियों और शिक्षाविदों ने भाग लिया, जहां दोनों देशों के बीच आर्थिक सहयोग के अगले चरण पर विचार-विमर्श किया गया।

भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (आईआईएफटी) और न्यूलैंड ग्लोबल ग्रुप के सहयोग से तैयार किया गया यह संकलन भारत और ऑस्ट्रेलिया में कार्यरत कंपनियों की वास्तविक व्यावसायिक यात्राओं का संग्रह है। इसमें उन 30 संगठनों की बाजार प्रवेश की कहानियां, विकास रणनीतियां और सीखी गई अहम बातों को शामिल किया गया है, जिन्होंने दोनों बाजारों में अवसरों का सफलतापूर्वक लाभ उठाया है।

वाणिज्य सचिव श्री राजेश अग्रवाल ने इस पहल को अधिक प्रभावी बनाने में आईआईएफटी के प्रयासों की सराहना की और इसे नीति, उद्योग तथा शैक्षणिक हितधारकों के लिए अत्यधिक प्रासंगिक बताया।

उन्होंने कहा कि केस स्टडीज यह दर्शाते हैं कि व्यापार समझौतों ने कैसे नए अवसरों का निर्माण किया है और व्यवसायों ने इनका उपयोग अपनी प्रगति के लिए किया है। उन्होंने यह भी कहा कि यह पहल भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते (ईसीटीए) के फायदों को सुदृढ़ करने और उन्हें आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएगी।

भारत में ऑस्ट्रेलियाई उच्चायुक्त श्री फिलिप ग्रीन ओएएम ने इस पहल की सराहना की और द्विपक्षीय व्यापार पर सार्थक संवाद को बढ़ावा देने में आईआईएफटी की भूमिका को स्वीकार किया। उन्होंने बताया कि शिक्षा, सरकार और उद्योग जगत को एक ही मंच पर लाने वाले ऐसे प्रयास भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच मजबूत रणनीतिक संबंध स्थापित करने में बेहद महत्वपूर्ण हैं।

संयुक्त सचिव सुश्री पेटल ढिल्लों ने भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक संबंधों में हो रही प्रगति पर प्रकाश डाला। उनका कहना था कि आईआईएफटी ने अनुसंधान आधारित जानकारी प्रदान करने और संवाद को सहज बनाने में अहम भूमिका निभाई है, जो भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक सहयोग और व्यापार समझौते (ईसीटीए) को सुदृढ़ करने और इसे अधिक प्रभावी बनाने में सहायक है।

आईआईएफटी के कुलपति प्रोफेसर राकेश मोहन जोशी ने वास्तविक व्यावसायिक अनुभवों का दस्तावेजीकरण करने और उन्हें उद्योग और शिक्षा जगत के लिए शिक्षण संसाधनों के रूप में परिवर्तित करने के महत्व को रेखांकित किया।

उन्होंने यह भी बताया कि इस प्रकार की साझेदारियां अनुसंधान और व्यवहार के बीच पुल का निर्माण करती हैं और वैश्विक व्यापार में भारत की बढ़ती भूमिका को समर्थन देने के लिए आईआईएफटी की प्रतिबद्धता को प्रदर्शित करती हैं।

ऑस्ट्रेलिया स्थित न्यूलैंड ग्लोबल ग्रुप के संस्थापक और सीईओ, श्री दिपेन रुघानी ने द्विपक्षीय संबंधों को सुदृढ़ करने में व्यावसायिक केस स्टडी की अहमियत पर जोर दिया।

इसी संस्था की कार्यकारी निदेशक, सुश्री नताशा झा भास्कर ने दोनों देशों के बाजारों में सक्रिय कंपनियों की सफलता की कहानियों और अनुभवों को साझा किया। सत्र का समापन दोनों बाजारों में कार्यरत सरकारी प्रतिनिधियों, व्यापारिक संगठनों और कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ एक पैनल चर्चा के साथ हुआ। इसके बाद भागीदारों को नेटवर्किंग के अवसर भी प्रदान किए गए।

राजदूत अनिल वधवा ने केस संकलन की सराहना करते हुए कहा कि यह भारत-ऑस्ट्रेलिया आर्थिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक सार्थक कदम है।

भारत और ऑस्ट्रेलिया के बीच आर्थिक संबंधों को गहरा करने की दिशा में हो रहे प्रयासों को देखते हुए, यह संकलन व्यवसायों, नीति निर्माताओं और शोधकर्ताओं के लिए एक उपयोगी संसाधन सिद्ध होगा। यह न केवल अवसरों की पहचान और चुनौतियों का समाधान करने में सहायक होगा, बल्कि सफल अंतरराष्ट्रीय सहयोग का एक उदाहरण भी प्रस्तुत करेगा।

भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (आईआईएफटी) अपनी स्थापना वर्ष 1963 से ही सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के तहत अंतरराष्ट्रीय व्यापार में क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

2002 में डीम्ड विश्वविद्यालय का दर्जा प्राप्त इस संस्थान ने भारत के वैश्विक व्यापार परिदृश्य में मानव संसाधन और ज्ञान संरचना विकसित करने में अहम योगदान दिया है। शिक्षा, प्रशिक्षण, अनुसंधान और परामर्श के माध्यम से आईआईएफटी ने भारत के बाह्य व्यापार की संतुलित प्रगति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

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एनएमडीसी ने कौशल विकास से प्रशिक्षित किए युवा, सभी को मिला रोजगार

नई दिल्ली – भारत के सबसे बड़े लौह अयस्क उत्पादक एनएमडीसी लिमिटेड ने रोजगार-उन्मुख कौशल प्रशिक्षण सफलतापूर्वक पूर्ण कर 100% प्लेसमेंट प्राप्त करने वाले बस्तर प्रभाग के 80 युवाओं के पहले बैच का स्वागत किया।
यह छत्तीसगढ़ के युवाओं को आत्मनिर्भर बनाने में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है और कौशल विकास, समावेशी विकास और राष्ट्र निर्माण के लिए एनएमडीसी की प्रतिबद्धता को सुदृढ़ करता है।

यह कार्यक्रम एनएमडीसी के  सीएसआर प्रयासों के हिस्से के रूप में केंद्रीय पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग और प्रौद्योगिकी संस्थान (सीआईपीईटी) के सहयोग से लागू की गई कौशल विकास पहल के तहत किया गया था। इस पहल का उद्देश्य बस्तर के बेरोजगार और वंचित आदिवासी युवाओं को उद्योग-प्रासंगिक कौशल से लैस करके स्थायी आजीविका में सक्षम बनाकर सशक्त करना है।

यह सम्मान समारोह और चर्चा सत्र एनएमडीसी के वरिष्ठ नेतृत्व की उपस्थिति में आयोजित किया गया जिसमें श्री अमिताभ मुखर्जी, अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक, श्री विनय कुमार, निदेशक (तकनीकी) और निदेशक (वाणिज्यिक, अतिरिक्त प्रभार), श्री जॉयदीप दासगुप्ता, निदेशक (उत्पादन) और निदेशक (कार्मिक, अतिरिक्त प्रभार), श्री पी.श्याम, महाप्रबंधक (सीएसआर) और श्री बी. रवि, प्रधान निदेशक, सीआईपीईटी, एनएमडीसी और सीआईपीईटी के वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी शामिल हुए।

छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों और साधारण परिवारों (दंतेवाड़ा, बस्तर, सुकमा, नारायणपुर, कोंडागांव और बीजापुर सहित) से आए छात्रों ने वहां के जीवन के बारे में बात की, जहां अवसर सीमित थे और विकल्प कम थे। उन्होंने कहा कि कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल रोजगार प्रदान करता है, बल्कि अपने गृहनगर से बाहर  निकलकर अपनी शर्तों पर आय अर्जित करने का आत्मविश्वास भी प्रदान करता है।

बस्तर से आए कक्षा 12 उत्तीर्ण युवक सुखराम ने बताया कि किस प्रकार उनका बचपन शुरुआत में हुए नुकसान और सीमित साधनों में बीता था। उन्होंने कहा कि नौकरी मिलने से उनके परिवार के जीवन की दिशा बदल जाएगी। उन्होंने कहा, “मुझे कभी नहीं पता था कि मैं अपना गृहनगर कैसे छोड़ूंगा। आज, मैं नौकरी करने और कमाने जा रहा हूं।“

इस अवसर पर बोलते हुए, एनएमडीसी के अध्यक्ष श्री अमिताभ मुखर्जी ने कहा कि बस्तर के युवाओं को औपचारिक रोजगार में कदम रखते देखना इस यह दर्शाता है कि अवसर क्या कर सकता है। उन्होंने कहा कि 80 प्रशिक्षुओं में से अनेक इस क्षण तक पहुंचने के लिए लगन और आत्मविश्वास दोनों के साथ लंबी यात्रा कर चुके हैं।

उन्होंने कहा, “यह सिर्फ नौकरियों के बारे में नहीं है। यह युवा लोगों के बारे में है जो महसूस करते हैं कि वे कार्यबल और देश की विकास यात्रा में शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे क्षण इस बात की पुष्टि करते हैं कि आत्मनिर्भर बस्तर और अधिक समावेशी विकसित भारत के निर्माण के लिए युवाओं को कुशल बनाना केंद्रबिंदु में क्यों है।“

श्री विनय कुमार, निदेशक (तकनीकी) और निदेशक (वाणिज्यिक, अतिरिक्त प्रभार) ने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ वर्षों में हुआ परिवर्तन स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। उन्होंने  कहा कि एनएमडीसी अपनी स्थापना के बाद से ही इस परिवर्तन यात्रा का एक अभिन्न अंग रहा है। उन्होंने छात्रों को उनकी पेशेवर करियर की शुरुआत के लिए शुभकामनाएं दीं।

श्री जयदीप दासगुप्ता, निदेशक (उत्पादन) और निदेशक (कार्मिक, अतिरिक्त प्रभार) ने प्लेसमेंट को एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर बताते हुए इसे छात्रों के जीवन में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने छात्रों को निरंतर सीखने और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ते हुए भविष्य में उद्यमी बनने के लिए प्रोत्साहित किया।

कार्यक्रम के तहत  पात्रता को समावेशी रखा गया था, जिसमें न्यूनतम योग्यता कक्षा 8 थी  और यह सुनिश्चित किया गया कि स्कूल छोड़ देने वाले और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के युवा कौशल पारिस्थितिकी तंत्र से बाहर नहीं रहने पाएं। पहले बैच में 80 प्रायोजित छात्र शामिल थे, जिनमें से सभी को अब सफलतापूर्वक नियोजित कर दिया गया है। यह कार्यक्रम की प्रभावशीलता को दर्शाता है।

एनएमडीसी-सीआईपीईटी कौशल विकास कार्यक्रम के बारे में:

अपने सीएसआर कार्यक्रम के तहत, एनएमडीसी ने दंतेवाड़ा और बस्तर जिलों के 500 युवाओं को निशुल्क कौशल विकास प्रशिक्षण प्रदान करने के लिए सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी (सीआईपीईटी) के साथ भागीदारी की है।

एनएमडीसी द्वारा पूरी तरह से वित्त पोषित, यह पहल प्रतिभागियों को विभिन्न योग्यता स्तरों पर उद्योग-प्रासंगिक कौशल के साथ सुसज्जित करती है, जिसमें ऑपरेटर-स्तर (अल्पकालिक) पाठ्यक्रम से लेकर प्लास्टिक प्रौद्योगिकी में डिप्लोमा और स्नातकोत्तर डिप्लोमा कार्यक्रम शामिल हैं, जिसका उद्देश्य रोजगार क्षमता को बढ़ाना और स्थानीय कार्यबल को मजबूत करना है।

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प्रधानमंत्री ने राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के जवाब की कुछ झलकियां साझा कीं

नई दिल्ली – प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने आज राज्यसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव पर अपने जवाब की कुछ झलकियां साझा कीं।

एक्स पर पोस्ट की एक सीरीज में, श्री मोदी ने लिखा:

“हमारा देश विकास की नित-नई ऊंचाइयों को छूते हुए और युवा होता जा रहा है। यह अपने आप में बहुत अच्छा सुयोग है।”

“आत्मविश्वास से भरा भारत आज दुनिया के अनेक देशों का विश्वस्त पार्टनर बनकर सामने आया है। यूरोपियन यूनियन और अमेरिका के साथ हुई ट्रेड डील्स इसके जीवंत उदाहरण हैं।”

“तुम कितना दुनिया को धोखा दोगे, आईना देख लिया तो अपनी सच्चाई कहां छिपाओगे!”

“कांग्रेस और यूपीए के राज में बैंकिंग व्यवस्था तबाही के कगार पर खड़ी थी, जिससे एनपीए का पहाड़ खड़ा हो गया। हमने बैंकिंग रिफॉर्म्स के साथ उस स्थिति को बदला है।”

“कांग्रेस सिर्फ कल्पना करके छोड़ देती थी, हम कार्यान्वयन करके दिखाते हैं!”

“हम इस सोच के साथ आगे बढ़ते हैं कि चुनौतियां कितनी ही क्यों न हों, 140 करोड़ समाधान हमारे पास हैं।”

“कांग्रेस ने राष्ट्रपति पद, महिला, आदिवासी और संविधान का घोर अपमान किया है। उसके रवैये के चलते ही लोकसभा में राष्ट्रपति के अभिभाषण पर चर्चा नहीं हो पाई।”

“कांग्रेस और उसके साथी इसलिए मोदी की कब्र खोदने के सपने देख रहे हैं…”

“भारत अब कोई Bus miss नहीं करेगा, बल्कि काफिले का नेतृत्व करेगा!”

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रक्षा सचिव ने भुज स्थित सैन्य अस्पताल में आयोजित नेत्र शल्य चिकित्सा शिविर का दौरा किया

नई दिल्ली – रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह ने दक्षिणी कमान के जनरल ऑफिसर कमांडिंग-इन-चीफ लेफ्टिनेंट जनरल धीरज सेठ के साथ भुज स्थित सैन्य अस्पताल में आयोजित नेत्र शल्य चिकित्सा शिविर का दौरा किया। यह शिविर सेना अस्पताल (अनुसंधान एवं रेफरल), नई दिल्ली के सहयोग से आयोजित किया गया था। दक्षिणी कमान के तत्वावधान में आयोजित इस तीन दिवसीय शिविर (03-05 फरवरी 2026) में कच्छ क्षेत्र के 200 से अधिक पूर्व सैनिकों, उनके आश्रितों और नागरिकों की दृष्टि सफलतापूर्वक बहाल की गई।

 

इस जागरूकता कार्यक्रम का लक्ष्य कच्छ जिले के लगभग 3,000 लोगों तक पहुंचना था, जिनमें भुज तालुका के 120 से अधिक गांवों के लाभार्थी भी शामिल थे। इनमें लखपत, नारायण सरोवर और दयापार जैसे दूरस्थ सीमावर्ती गांव भी शामिल थे। सर्जरी अत्याधुनिक नेत्र संबंधी उपकरणों और उच्च गुणवत्ता वाले इंट्राओकुलर लेंस का उपयोग करके की गई, जिसमें उच्चतम नैदानिक और सुरक्षा मानकों का पालन किया गया।

रक्षा सचिव ने इस पहल की सराहना करते हुए इसे पूर्व सैनिकों के कल्याण और सैन्य-नागरिक सहयोग के प्रति भारतीय सेना की प्रतिबद्धता का एक सराहनीय उदाहरण बताया। उन्होंने दूरस्थ और सीमावर्ती क्षेत्रों में लाभार्थियों के जीवन स्तर में सुधार लाने में ऐसे जागरूकता कार्यक्रमों के प्रभाव को स्वीकार किया।

उत्कृष्ट सेवा को मान्यता देते हुए, रक्षा सचिव ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में उच्च गुणवत्ता वाली नेत्र चिकित्सा सेवाएं प्रदान करने में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए सेना अस्पताल (आर एंड आर) के सलाहकार और नेत्र विभागाध्यक्ष ब्रिगेडियर संजय कुमार मिश्रा और नेत्र शल्य चिकित्सा दल को सम्मानित किया। उन्होंने ऑपरेशन वार्ड में भर्ती मरीजों से बातचीत की, उनके स्वास्थ्य के बारे में जानकारी ली और व्यक्तिगत रूप से कई लाभार्थियों को ऑपरेशन के बाद की दवाएं और चश्मे वितरित किए।

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रक्षा विज्ञान और प्रौद्योगिकियों में सहयोग को बढ़ाने के लिए नई दिल्ली के डीआरडीओ मुख्यालय में 24वीं भारत-अमेरिका संयुक्त तकनीकी समूह की पूर्ण बैठक हुई

नई दिल्ली – रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) ने 03-04 फरवरी, 2026 को नई दिल्ली में 24वीं भारत-अमेरिका संयुक्त तकनीकी समूह की पूर्ण बैठक आयोजित की।
इस बैठक की सह-अध्यक्षता डीआरडीओ के महानिदेशक (उत्पादन समन्वय एवं सेवा संपर्क) डॉ. चंद्रिका कौशिक और अंडर सेक्रेटरी ऑफ वॉर फॉर रिसर्च एंड इंजीनियरिंग के ऑफिस में क्रिटिकल टेक्नोलॉजीज फॉर वॉर के असिस्टेंट सेक्रेटरी श्री माइकल फ्रांसिस डोड ने की।

यह पूर्ण बैठक अक्टूबर 2025 में रक्षा मंत्री श्री राजनाथ सिंह और अमेरिकी युद्ध सचिव श्री पीट हेगसेथ द्वारा हस्ताक्षरित भारत-अमेरिका प्रमुख रक्षा साझेदारी के फ्रेमवर्क के विजन और नीतिगत मार्गदर्शन के अनुसार आयोजित की गई।

प्रतिनिधिमंडलों ने रक्षा विज्ञान और प्रौद्योगिकी में मौजूदा सहयोग की समीक्षा की, संबंधित चुनौतियों पर चर्चा की, तथा बदलती आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए महत्वपूर्ण और आधुनिक रक्षा प्रौद्योगिकियों में सहयोग को और मज़बूत करने के प्रस्तावों की समीक्षा की।

इस विचार-विमर्श में सहकारी अनुसंधान और विकास पहलों में विश्वविद्यालय से संबद्ध अनुसंधान केंद्रों, रक्षा प्रयोगशालाओं और उद्योगों की भागीदारी बढ़ाने पर भी ध्यान दिया गया।

इसके अलावा, बैठक में डीआरडीओ और रक्षा नवाचार इकाई के बीच इनोवेशन ब्रिज फ्रेमवर्क के तहत संभावित सहयोग पर भी बात हुई और एक प्रोजेक्ट एग्रीमेंट पर हस्ताक्षर के साथ संपन्न हुई।

इस बैठक में अमेरिकी युद्ध विभाग और विदेश विभाग के संस्थानों एवं प्रयोगशालाओं के वरिष्ठ अधिकारियों, वैज्ञानिकों और टेक्नोक्रेट्स के साथ-साथ डीआरडीओ के वैज्ञानिक और भारत की तीनों सेनाओं, रक्षा मंत्रालय, विदेश मंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद सचिवालय के अधिकारियों ने भी भाग लिया।

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भगवान बुद्ध के पवित्र देवनीमोरी अवशेष पूरे राजकीय सम्मान के साथ श्रीलंका पहुंचे

नई दिल्ली – भगवान बुद्ध के पवित्र देवनीमोरी अवशेषों का श्रीलंका में आगमन और इनकी प्रदर्शनी गहन आध्यात्मिक, सांस्कृतिक और सभ्यतागत महत्व का क्षण है, जो भारत व श्रीलंका के बीच साझा बौद्ध विरासत में निहित स्थायी संबंधों को और मजबूत करता है।

ये पवित्र अवशेष भारतीय वायु सेना के एक विशेष विमान से श्रीलंका पहुंचे और भारत-श्रीलंका के स्थापित प्रोटोकॉल के अनुसार उन्हें पूर्ण राजकीय सम्मान दिया गया। गुजरात के राज्यपाल श्री आचार्य देवव्रत और उपमुख्यमंत्री श्री हर्ष संघवी के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय भारतीय प्रतिनिधिमंडल अवशेषों के साथ आया था। इस प्रतिनिधिमंडल में वरिष्ठ बौद्ध भिक्षु, सरकारी अधिकारी और अन्य विशिष्ट गणमान्य व्यक्ति भी शामिल थे।

 

यह प्रदर्शनी प्रधानमंत्री श्री नरेन्‍द्र मोदी की अप्रैल 2025 में श्रीलंका की राजकीय यात्रा के दौरान की गई घोषणा के अनुरूप आयोजित की जा रही है, जिसमें उन्होंने श्रीलंका के साथ आध्यात्मिक और सांस्कृतिक संबंधों को गहरा करने की प्रतिबद्धता व्‍यक्‍त की थी। इस यात्रा के दौरान, प्रधानमंत्री ने बौद्ध संबंधों को बढ़ावा देने के लिए 2020 में घोषित 15 मिलियन अमेरिकी डॉलर के अनुदान के अतिरिक्त, अनुराधापुरा में पवित्र नगर परिसर परियोजना के विकास के लिए अनुदान सहायता की भी घोषणा की थी।

पवित्र देवनीमोरी अवशेषों की प्रदर्शनी का उद्घाटन 4 फरवरी, 2026 को कोलंबो के गंगारामया मंदिर में श्रीलंका के राष्ट्रपति श्री अनुरा कुमार दिसानायके ने और गुजरात के राज्यपाल तथा उपमुख्यमंत्री ने मिलकर किया। इस अवसर पर गंगारामया मंदिर के मुख्य पुजारी डॉ. किरिंदे असाजी थेरो भी उपस्थित थे।

इस अवसर श्रीलंका सरकार के कई वरिष्ठ गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे जिनमें प्रमुख हैं –  (डॉ.) हिनिदुमा सुनील सेनेवी, बुद्धशासन, धार्मिक और सांस्कृतिक मामलों के मंत्री; (डॉ.) नलिंदा जयतिसा, स्वास्थ्य एवं जनसंचार मंत्री; और (प्रो.) एएचएमएच अबायरत्ना, लोक प्रशासन, प्रांतीय परिषद और स्थानीय सरकार मंत्री।

इस प्रदर्शनी के अंतर्गत गंगारामया मंदिर में “पवित्र पिपरावा का अनावरण” और “समकालीन भारत के पवित्र अवशेष और सांस्कृतिक जुड़ाव” शीर्षक से दो प्रदर्शनियों का भी उद्घाटन किया गया।

पवित्र अवशेषों का पारंपरिक धार्मिक रीति-रिवाजों के साथ विधिपूर्वक स्वागत किया गया और उन्हें गंगारामया मंदिर में स्थापित किया गया। यह प्रदर्शनी 5 फरवरी 2026 से आम जनता के लिए खुली रहेगी, जिससे श्रीलंका और दुनिया भर के श्रद्धालु श्रद्धांजलि अर्पित कर सकेंगे। श्रीलंका के 78वें स्वतंत्रता दिवस के मौके पर ये पवित्र अवशेष वहां पहुंचे जिससे इस आयोजन का महत्व और भी बढ़ गया। यह प्रदर्शनी भारत के बाहर देवनीमोरी अवशेषों की पहली सार्वजनिक प्रदर्शनी है। इससे पहले, भारत ने श्रीलंका में वर्ष 2012 में कपिलवस्तु अवशेषों की प्रदर्शनी और 2018 में सारनाथ अवशेषों की प्रदर्शनी आयोजित की थी।

देवनीमोरी के पवित्र अवशेषों की प्रदर्शनी भगवान बुद्ध के दिए करुणा, शांति और अहिंसा के संदेश का जीवंत प्रमाण है। यह आयोजन भारत और श्रीलंका के बीच गहरे सभ्यतागत संबंधों को दर्शाता है जिससे दोनों देशों के बीच सांस्कृतिक, आध्यात्मिक और जन-संबंध और भी मजबूत होते हैं।

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भारत-किर्गिस्तान संयुक्त विशेष बल अभ्यास खंजर असम में शुरू हुआ

नई दिल्ली – भारत–किर्गिज़स्तान संयुक्त विशेष बल अभ्यास खंजर (KHANJAR) का 13वां संस्करण 04 से 17 फ़रवरी 2026 तक असम के मिसामारी में आयोजित किया जा रहा है।
अभ्यास खंजर एक वार्षिक प्रशिक्षण कार्यक्रम है, जिसका आयोजन भारत और किर्गिज़स्तान के बीच बारी-बारी से किया जाता है। अभ्यास का पिछला संस्करण मार्च 2025 में किर्गिज़स्तान में आयोजित किया गया था।

भारतीय सेना का 20 सदस्यीय दल पैराशूट रेजिमेंट (विशेष बल) के सैनिकों से बना है, जबकि समान संख्या वाला किर्गिज़स्तान का दल ILBRIS स्पेशल फ़ोर्सेज़ ब्रिगेड द्वारा प्रतिनिधित्व किया जा रहा है।

इस अभ्यास का उद्देश्य शहरी एवं पर्वतीय क्षेत्रों में आतंकवाद-रोधी और विशेष बल अभियानों से संबंधित सर्वोत्तम प्रक्रियाओं तथा अनुभवों का आदान-प्रदान करना है। अभ्यास के दौरान स्नाइपिंग, जटिल भवन हस्तक्षेप और पर्वतीय युद्ध कौशल जैसे उन्नत विशेष बल कौशलों के विकास पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

अभ्यास खंजर दोनों देशों को अंतरराष्ट्रीय आतंकवाद और उग्रवाद जैसी साझा चुनौतियों से निपटने के साथ-साथ रक्षा सहयोग को सुदृढ़ करने का अवसर प्रदान करेगा। यह अभ्यास क्षेत्र में शांति, स्थिरता और सुरक्षा को बढ़ावा देने के प्रति भारत और किर्गिज़स्तान की प्रतिबद्धता की पुनः पुष्टि करता है।

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