हॉस्टल में बुनियादी सुविधाओं की कमी और प्रशासनिक लापरवाही का आरोप, एम्बुलेंस में देरी और लिफ्ट बंद रहने को लेकर छात्रों में आक्रोश
रांची: इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी (IIIT), रांची में छात्र आदित्य की मौत के बाद छात्रों का विरोध-प्रदर्शन लगातार जारी है। हॉस्टल के बाहर पिछले तीन दिनों से अनिश्चितकालीन धरने पर बैठे छात्रों ने संस्थान के निदेशक राजीव श्रीवास्तव के इस्तीफे की मांग की है। प्रदर्शनकारी छात्रों ने संस्थान में बुनियादी सुविधाओं की कमी, परीक्षा के दबाव और प्रशासनिक लापरवाही को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।
चिकित्सा सुविधाओं की कमी पर छात्रों में नाराजगी
प्रदर्शन कर रहे छात्रों का आरोप है कि संस्थान के हॉस्टल में आपातकालीन चिकित्सा सुविधाओं की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है। इसके अलावा एम्बुलेंस की उपलब्धता में देरी, बार-बार बिजली कटौती और लिफ्ट खराब रहने जैसी समस्याएं भी छात्रों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई हैं। छात्रों का कहना है कि इन समस्याओं के कारण आपातकालीन परिस्थितियों में समय पर मदद मिलना मुश्किल हो सकता है।
घटना के समय बिजली नहीं होने का दावा
छात्रों के मुताबिक, आदित्य से जुड़ी घटना के समय हॉस्टल में बिजली नहीं थी। उनका दावा है कि लिफ्ट बंद रहने के कारण आदित्य को पांचवीं मंजिल से सीढ़ियों के रास्ते नीचे लाना पड़ा। प्रदर्शनकारी छात्रों ने यह भी आरोप लगाया है कि एम्बुलेंस उपलब्ध होने में करीब 20 मिनट की देरी हुई।
छात्रों का कहना है कि आपातकालीन स्थिति में बिजली, लिफ्ट और चिकित्सा सेवाओं की समुचित व्यवस्था बेहद जरूरी है। उन्होंने संस्थान प्रशासन से इन व्यवस्थाओं को दुरुस्त करने और घटना के दौरान सामने आई समस्याओं की जांच कराने की मांग की है।
परीक्षा के दबाव और प्रशासनिक व्यवस्था पर उठाए सवाल
आदित्य की मौत के बाद छात्रों ने संस्थान में पढ़ाई और परीक्षा से जुड़े दबाव का मुद्दा भी उठाया है। उनका आरोप है कि शैक्षणिक दबाव के साथ-साथ बुनियादी सुविधाओं की कमी और प्रशासन की कथित लापरवाही ने स्थिति को गंभीर बनाया है।
फिलहाल, छात्र निदेशक के इस्तीफे की मांग पर अड़े हुए हैं और हॉस्टल के बाहर उनका अनिश्चितकालीन धरना जारी है। छात्रों की मांग है कि घटना से जुड़े सभी पहलुओं की निष्पक्ष जांच हो तथा हॉस्टल में चिकित्सा सुविधाओं, बिजली, लिफ्ट और एम्बुलेंस की व्यवस्था में सुधार किया जाए।
नोट: घटना के कारणों, एम्बुलेंस पहुंचने में हुई कथित देरी और प्रशासन की भूमिका से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि तथा संस्थान प्रशासन का आधिकारिक पक्ष इस खबर में उपलब्ध जानकारी के आधार पर शामिल नहीं किया जा सका है।
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