उपराष्ट्रपति ने विश्व पर्यावरण दिवस को चिह्नित करते हुए ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत राष्ट्रपति भवन में पौधारोपण किया।
इस अवसर पर उपराष्ट्रपति ने सभी भारतीयों से ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान में शामिल होने और पर्यावरण की रक्षा एवं संरक्षण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करने का आग्रह किया।
उपराष्ट्रपति ने जीवन के सभी क्षेत्रों के लोगों से पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय रूप से योगदान देने और स्थिरता को दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाने का आह्वान किया।
उपराष्ट्रपति ने सोशल मीडिया पर एक संदेश में कहा कि भारत के सभ्यतागत ज्ञान ने लंबे समय से मानवता को प्रकृति के साथ सामंजस्य में रहना सिखाया है। तिरुक्कुरल के चिरस्थायी संदेश— “பகுத்துண்டு பல்லுயிர் ஓம்பல்” (संसाधनों का विवेकपूर्ण बंटवारा और सभी जीवित प्राणियों की रक्षा)— का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि स्थिरता और सभी प्रकार के जीवन के प्रति करुणा भारत की सांस्कृतिक मूल्यों में गहराई से निहित मूलभूत कर्तव्य हैं।
उपराष्ट्रपति ने नागरिकों से पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों को सुदृढ़ करने और दैनिक जीवन में सतत प्रथाओं को अपनाने का आग्रह किया। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि आने वाली पीढ़ियों के लिए हरित, स्वस्थ और समृद्ध भविष्य के निर्माण हेतु सामूहिक प्रयास आवश्यक हैं।
