आठ पूर्वोत्तर राज्यों के राज्यपालों, मुख्यमंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति में पूर्ण बैठक को संबोधित करते हुए श्री सिंधिया ने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय ‘कनेक्ट, कन्वर्ज और कैटलाइज़'(जोड़ना, समन्वय करना और गति देना) के ‘थ्री-सी’ फ्रेमवर्क के आधार पर इस क्षेत्र के विकास के लिए एक सहयोगी, संयोजक और सेतु के रूप में सामने है।
उन्होंने बताया कि 72वीं एनईसी पूर्ण बैठक के बाद गठित आठ उच्च-स्तरीय टास्क फोर्स ने निवेश प्रोत्साहन, कृषि एवं बागवानी, हस्तशिल्प, अवसंरचना एवं संपर्क, आर्थिक गलियारों, पशुपालन और मत्स्य पालन में आत्मनिर्भरता, खेल तथा पर्यटन जैसे क्षेत्रों को कवर करते हुए कार्य योजनाएं और सिफारिशें प्रस्तुत की हैं। इन टास्क फोर्स का गठन मुख्यमंत्रियों की अध्यक्षता में और केंद्र व राज्यों के प्रतिनिधियों के सहयोग से किया गया था। इन्हें पूर्वोत्तर के भविष्य के विकास के लिए एक व्यापक रोडमैप तैयार करने तथा क्षेत्र को “विकसित भारत 2047” के विजन में महत्वपूर्ण योगदान देने में सक्षम बनाने के उद्देश्य से स्थापित किया गया था।
श्री सिंधिया ने कहा कि टास्क फोर्स की सिफारिशें आगे की समीक्षा और कार्यान्वयन हेतु एनईसी अध्यक्ष को सौंपी जाएंगी। उन्होंने यह भी बताया कि सिफारिशों के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए संबंधित मुख्यमंत्रियों और केंद्रीय मंत्रियों को शामिल करते हुए एक उच्च-स्तरीय संचालन समिति के गठन का प्रस्ताव भी रखा गया है।
मंत्रालय की हालिया उपलब्धियां बताते हुए श्री सिंधिया ने कहा कि पूर्वोत्तर क्षेत्र विकास मंत्रालय का व्यय वित्त वर्ष 2022–23 में लगभग ₹1,000 करोड़ से बढ़कर पिछले दो वर्षों में लगभग ₹4,000 करोड़ तक पहुंच गया है, जबकि वर्तमान वित्तीय वर्ष के लिए मंत्रालय को ₹6,500 करोड़ का बजट आवंटन प्राप्त हुआ है। परियोजना स्वीकृति प्रक्रिया को सरल बनाने, पारदर्शिता बढ़ाने और धन-राशि के समय पर प्रवाह को सुनिश्चित करने के लिए कई सुधार भी लागू किए गए हैं।
मंत्री श्री सिंधिया ने “राइजिंग नॉर्थ ईस्ट इन्वेस्टमेंट समिट” की सफलता पर प्रकाश डाला, जिसमें 100 से अधिक राजदूतों ने भाग लिया और लगभग ₹4.5 लाख करोड़ के निवेश का वादा किया गया। उन्होंने बताया कि मई 2025 में आयोजित इस सम्मेलन के बाद से लगभग ₹40,000 करोड़ का निवेश जमीनी स्तर पर शुरू हो चुका है, जो क्षेत्र में निवेशकों के बढ़ते भरोसे को दर्शाता है।
वित्तीय समावेशन के बारे में श्री सिंधिया ने बताया कि पिछले 15 महीनों में पूर्वोत्तर में 131 नई बैंक शाखाएं स्थापित की गई हैं, जबकि 6,500 ऐसे गांवों को औपचारिक बैंकिंग नेटवर्क से जोड़ा गया है, जहां पहले बैंकिंग सुविधा नहीं थी। उन्होंने यह भी कहा कि इस क्षेत्र में यूपीआई के माध्यम से डिजिटल भुगतान का उपयोग लगभग 90 प्रतिशत तक पहुंच गया है।
मंत्री श्री सिंधियाने ‘अष्टलक्ष्मी दर्शन छात्र विनिमय कार्यक्रम’ और इसरो के एक्सपोज़र विज़िट्स की उपलब्धियों पर भी प्रकाश डाला, जिनके माध्यम से देश भर के और पूर्वोत्तर के छात्रों को सांस्कृतिक आदान-प्रदान और वैज्ञानिक शिक्षा के अवसर प्राप्त हुए हैं।
श्री सिंधिया ने आगे बताया कि मंत्रालय द्वारा सभी आठ पूर्वोत्तर राज्यों में प्रतिष्ठित पर्यटन सर्किट विकसित करने के प्रयास किए जा रहे हैं, ताकि क्षेत्र की समृद्ध प्राकृतिक सुंदरता, सांस्कृतिक विरासत, जैव विविधता और साहसिक पर्यटन की संभावनाओं को सामने लाया जा सके। उन्होंने त्रिपुरा के माताबाड़ी पर्यटन सर्किट और मेघालय के सोहरा पर्यटन सर्किट जैसी प्रमुख परियोजनाओं का उल्लेख किया, जिन्हें पर्यटन अवसंरचना को मजबूत करने, आगंतुक सुविधाओं में सुधार, संपर्क बढ़ाने और स्थानीय समुदायों के लिए सतत आजीविका के अवसर सृजित करने के उद्देश्य से विकसित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इन पहलों से घरेलू एवं अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों की संख्या बढ़ने, रोजगार सृजन और क्षेत्र की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान मिलने की उम्मीद है।
मंत्री ने ‘वन स्टेट वन प्रोडक्ट’ पहल के बारे में विस्तार बताया, जिसके तहत हरेक पूर्वोत्तर राज्य ने अपनी तुलनात्मक बढ़त और सांस्कृतिक पहचान के आधार पर एक विशिष्ट उत्पाद या क्षेत्र की पहचान की है। इस पहल के अंतर्गत मेघालय का लाकाडोंग हल्दी, असम का मूगा रेशम, अरुणाचल प्रदेश का कीवी, त्रिपुरा का क्वीन अनानास और सिक्किम की जैविक खेती सहित अन्य उत्पाद शामिल हैं। इस पहल का उद्देश्य मूल्य श्रृंखलाओं को मजबूत करना, ब्रांडिंग और पैकेजिंग में सुधार करना, बाजार तक पहुंच आसान बनाना, निर्यात को बढ़ावा देना और किसानों, कारीगरों तथा उद्यमियों की आय के अवसर बढ़ाना है। श्री सिंधिया ने कहा कि हरेक राज्य की विशिष्ट क्षमताओं का लाभ उठाकर यह पहल पूर्वोत्तर से वैश्विक स्तर पर पहचाने जाने वाले ब्रांड बनाने में मदद करेगी और पूरे क्षेत्र में समावेशी एवं सतत आर्थिक विकास को प्रोत्साहित करेगी।
मंत्री श्री सिंधिया ने कहा कि निवेश को बढ़ावा देने, बुनियादी ढांचे के विकास, बैंकिंग के विस्तार, पर्यटन, लॉजिस्टिक्स और मानव संसाधन विकास में किए जा रहे निरंतर प्रयास एक समृद्ध और आत्मनिर्भर पूर्वोत्तर की नींव रख रहे हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह क्षेत्र भारत के एक प्रमुख विकास इंजन के रूप में उभरेगा और “विकसित भारत 2047” के विजन को साकार करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
