Union Minister Dr. Jitendra Singh hosted a tea party yesterday for the Jammu and Kashmir tableau team that performed at the Republic Day celebrations on Kartavya Path.

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने कल कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस समारोह में प्रस्तुति देने वाली जम्मू-कश्मीर झांकी दल के लिए चाय पार्टी का आयोजन किया

नई दिल्ली – विज्ञान और प्रौद्योगिकी और पृथ्वी विज्ञान राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) और प्रधानमंत्री कार्यालय में कार्मिक, लोक शिकायत और पेंशन, परमाणु ऊर्जा और अंतरिक्ष राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने आज जम्मू और कश्मीर की झांकी टीम के लिए एक चाय भोज का आयोजन किया। इसने कल कर्तव्य पथ पर गणतंत्र दिवस समारोह में प्रस्तुति दी थी।

गणतंत्र दिवस परेड के दौरान जम्मू-कश्मीर की झांकी को क्षेत्र की सांस्कृतिक विविधता के भावपूर्ण और प्रभावशाली चित्रण के लिए व्यापक सराहना मिली। इस झांकी के एक दिन बाद केंद्रीय मंत्री जी ने कलाकारों के साथ व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से विस्तृत बातचीत की। झांकी ने जम्मू-कश्मीर को एक निर्बाध सांस्कृतिक निरंतरता के रूप में प्रस्तुत किया। यहां विरासत, सामुदायिक जीवन और कलात्मक अभिव्यक्ति एक सुसंगत और आकर्षक दृश्य कथा में विलीन हो गईं।

झांकी से जुड़े कलाकारों, प्रस्तुतकर्ताओं, डिजाइनरों और अधिकारियों से बातचीत करते हुए डॉ. जितेंद्र सिंह ने कर्तव्य पथ पर उनकी अनुशासित प्रस्तुति और सामूहिक प्रयास के लिए उन्हें बधाई दी। उन्होंने कहा कि झांकी जम्मू-कश्मीर की सांस्कृतिक गहराई को देश भर के दर्शकों तक पहुंचाने में सफल रही। इससे दूर बैठे लोग भी इस क्षेत्र की परंपराओं, रंगों और लय से जुड़ सके।

केंद्रीय मंत्री जी ने कहा कि इस तरह की सांस्कृतिक प्रस्तुतियाँ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा व्यक्त की गई व्यापक राष्ट्रीय दृष्टि के अनुरूप हैं। इसमें भारत की विकास यात्रा उसकी सभ्यतागत विरासत में निहित है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय मंचों पर स्थानीय परंपराओं, शिल्पकलाओं और सामुदायिक जीवन का प्रदर्शन इस विचार को दर्शाता है कि सांस्कृतिक आत्मविश्वास और विकास को साथ-साथ आगे बढ़ना चाहिए।

झांकी का जिक्र करते हुए मंत्री जी ने बैंगनी रंग के लैवेंडर के खेतों, बशोली की जटिल लघु चित्रकला और जीवंत लोक नृत्य परंपराओं के चित्रण के बारे में बात की। यह  जम्मू और कश्मीर की कलात्मक समृद्धि और सांस्कृतिक निरंतरता को दर्शाते हैं। उन्होंने कहा कि ये इस बात को उजागर करते हैं कि क्षेत्रीय पहचानें किस प्रकार व्यापक राष्ट्रीय ताने-बाने में योगदान देती हैं।

झांकी की दृश्य प्रस्तुति की शुरुआत कश्मीरी आतिथ्य का प्रतीक भव्य नक्काशीदार समोवर से हुई। इसके बाद पारंपरिक लकड़ी की वास्तुकला और हाउसबोट की छवियां प्रदर्शित की गईं। केंद्र में एक ग्रामीण थड्डा पर प्रस्तुत डोगरा छज्जा प्रदर्शन ने जम्मू क्षेत्र के सामुदायिक जीवन और परंपराओं की निरंतरता को दर्शाया। रौफ, कुड, जगर्ना, पहाड़ी, गोजरी और दुमहाल जैसे जोशीले लोक नृत्यों ने इसमें गति और ऊर्जा का संचार किया, जबकि विलो की टोकरी में सजाई गई रंगीन पेपर-माशे कलाकृतियों की अंतिम प्रदर्शनी ने जम्मू और कश्मीर को रचनात्मकता और शिल्प कौशल के जीवंत कैनवास के रूप में प्रस्तुत किया।

इस दौरान केंद्रीय मंत्री ने प्रतिनिधिमंडलों को पारंपरिक कला रूपों के संरक्षण और संवर्धन को जारी रखने के साथ-साथ उन्हें समकालीन मंचों के अनुरूप ढालने के लिए प्रोत्साहित किया। उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित भारत की ओर भारत की यात्रा न केवल आर्थिक विकास और तकनीकी उन्नति से, बल्कि इसकी सांस्कृतिक जड़ों की मजबूती और सामुदायिक भागीदारी से भी आकार लेगी।

बैठक सौहार्दपूर्ण माहौल में समाप्त हुई।  केंद्रीय मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि गणतंत्र दिवस परेड जैसे मंच देश की दीर्घकालिक विकास यात्रा में भारत की सांस्कृतिक विविधता को शक्ति, एकता और प्रेरणा के स्रोत के रूप में प्रस्तुत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते रहेंगे।

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