कोयला एवं खान राज्य मंत्री श्री सतीश चंद्र दुबे ने अपने संबोधन में कहा कि हम हिंदी को केवल राजभाषा के रूप में ही नहीं, अपितु जन-जन की भाषा, ज्ञान की भाषा और भविष्य की भाषा बनाने के लिए प्रयासरत रहेंगे।
उन्होंने कोयला मंत्रालय में राजभाषा हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए किए जा रहे कार्यों के बारे में भी अवगत कराया।
विशिष्ट अतिथि के रूप में मौजूद श्री सुधांशु त्रिवेदी ने भारतीय भाषाओं के अंतर संबंध के बारे में विस्तार से बताया और शब्दों की उत्पत्ति तथा विकास के संदर्भ में अपनी बात रखी। साथ ही, उन्होंने भारतीय संस्कृति के महत्व एवं गौरव पर भी प्रकाश डाला।
वार्षिक प्रारूप एवं टिप्पण-लेखन प्रोत्साहन योजना के विजेताओं को मंत्रीगणों के कर-कमलों से शील्ड प्रदान की गई। इस सम्मेलन में कोयला मंत्रालय के ध्येय गीत को प्रदर्शित किया गया।
इसके अलावा पर्यावरण आधारित संगीतबद्ध नाट्य प्रस्तुति, भारतीय संस्कृति की झलक को दर्शाते हुए नृत्य प्रस्तुति, कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया।
इस सम्मेलन के दूसरे दिन श्री बालेंदु शर्मा दाधीच द्वारा ‘हिंदी और तकनीकी दुनियां’, श्री अनिल शर्मा जोशी द्वारा ‘वैश्विक स्तर पर हिंदी की स्थिति और चुनौतियां’ तथा श्री राजेश चेतन द्वारा ‘संवाद की कला’, विषय पर वक्तव्य दिये गए।
इस सम्मेलन के समापन सत्र में कोयला मंत्रालय और अधीनस्थ कंपनियों के प्रतिभागियों द्वारा हिंदी के प्रचार-प्रसार के संबंध में अपने-अपने विचार रखे गए और काव्य प्रस्तुतियाँ दी गईं।
इस अवसर पर कोयला मंत्रालय के अपर सचिव, संयुक्त सचिव, आर्थिक सलाहकार, निदेशक, अवर सचिव, अनुभाग अधिकारियों और एनएलसी के अध्यक्ष-सह प्रबंध निदेशक, कोल इंडिया लिमिटेड और सभी अनुषंगी कंपनियों के निदेशक (मानव संसाधन), कोयला खान भविष्य निधि संगठन व कोयला नियंत्रक कार्यालय के वरिष्ठ अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।
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