रक्षा मंत्री ने सभा को संबोधित करते हुए सबसे चुनौतीपूर्ण इलाकों में पर्वतीय बचाव दल (टीएमआर) के साहस, अनुशासन और निस्वार्थ सेवा की सराहना की। उन्होंने कहा, “हमारे सैनिक सीमाओं की रक्षा करते हुए अभूतपूर्व कठिनाइयों का सामना करते हैं। कई बार तो प्रकृति भी उनके विरुद्ध हो जाती है। ऐसे में ये पर्वतीय बचावकर्मी अपनी जान जोखिम में डालकर उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाते हैं। वे सैनिकों का मनोबल बढ़ाते हैं और पर्वतीय क्षेत्रों के निवासियों को आश्वस्त करते हैं कि वे अकेले नहीं हैं। उनका मौन लेकिन प्रभावशाली कार्य भारत की सच्ची भावना को दर्शाता है।”
श्री राजनाथ सिंह ने कहा कि मशीनें सहायता प्रदान करती हैं और प्रणालियां समर्थन देती हैं, लेकिन कर्तव्य की गहरी भावना रखने वाला व्यक्ति ही जीवन बचाने के लिए आगे आता है। उन्होंने कहा कि टीएमआर ने बार-बार यह सिद्ध किया है कि वे इस भावना के सच्चे संरक्षक हैं और यह संगठन केवल बचाव कार्यों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि अप्रत्यक्ष रूप से सीमा स्थिरता, सामुदायिक विश्वास और राष्ट्रीय लचीलेपन को मजबूत कर रहा है।
टीएमआर के संस्थापक श्री हेमंत सचदेव ने प्रदर्शनी को न केवल संगठन की यात्रा का प्रतिबिंब बताया, बल्कि उन सभी स्वयंसेवकों के प्रति भी सम्मान प्रकट किया जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी दृढ़ता से अपना योगदान दिया। उन्होंने कहा, “हमारी मौन सेवा हमेशा राष्ट्र के लिए रही है और हम पहाड़ों में जीवन की रक्षा के लिए प्रतिबद्ध हैं, जहां हर बचाव कार्य समय के साथ एक दौड़ है।”
इस अवसर पर सेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, रक्षा सचिव श्री राजेश कुमार सिंह और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।
टीएमआर ने मणिपुर तुपुल भूस्खलन (2022), सिक्किम हिमनदी झील विस्फोट बाढ़ (2023), वायनाड बाढ़ (2024) और धारली भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ (2025) सहित कई बड़ी आपदाओं के दौरान बचाव अभियानों का नेतृत्व और समर्थन किया है। इसके सबसे उल्लेखनीय अभियानों में रोहतांग के पास 1968 में हुए एएन-12 विमान दुर्घटना से अवशेषों को निकालना और उत्तराखंड के माना में बीआरओ कर्मचारियों के लिए राहत अभियान संचालित करना शामिल है।
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