रांची,07.06.2026 – जिला प्रशासन रांची ने अवैध रूप से संचालित अल्ट्रासाउंड सेंटर के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए पंडरा क्षेत्र से तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। आरोप है कि ये लोग बिना वैध पंजीकरण के गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड कर रहे थे, जो PC & PNDT Act (Pre-Conception and Pre-Natal Diagnostic Techniques Act) का गंभीर उल्लंघन है।
जिला दंडाधिकारी सह उपायुक्त रांची मंजूनाथ भजन्त्री के कड़े निर्देश पर शनिवार को पंडरा इलाके में छापेमारी की गई। जिला प्रशासन को गुप्त सूचना मिली थी कि रवि स्टील चौक के पास एक अवैध अल्ट्रासाउंड सेंटर संचालित किया जा रहा है, जहां गर्भवती महिलाओं का अल्ट्रासाउंड किया जा रहा है।
असैनिक शल्य चिकित्सक सह मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. प्रभात कुमार के निर्देश पर गठित टीम ने जब मौके पर छापेमारी की तो तीन व्यक्तियों को एक पोर्टेबल USG मशीन (Micromaxx) के साथ अल्ट्रासाउंड करते हुए रंगे हाथों पकड़ लिया। कार्रवाई के दौरान एग्जीक्यूटिव मजिस्ट्रेट, रातू थाना पुलिस, पीसी एंड पीएनडीटी सेल के कर्मी तथा अन्य प्रशासनिक अधिकारी भी मौजूद थे।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान सुरंजन कुमार, आकाश कुमार और शीला कुमारी के रूप में हुई है। प्रशासन ने मौके से अल्ट्रासाउंड मशीन समेत अन्य आवश्यक साक्ष्य भी जब्त कर लिए हैं।
प्रशासन के अनुसार बिना वैध पंजीकरण के अल्ट्रासाउंड मशीन का संचालन पूरी तरह गैरकानूनी है। PC & PNDT Act के तहत भ्रूण के लिंग निर्धारण (Sex Determination) पर पूर्ण प्रतिबंध है। इस कानून का उद्देश्य कन्या भ्रूण हत्या पर रोक लगाना और लिंगानुपात को संतुलित बनाए रखना है।
मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी ने रातू थाना को पत्र भेजकर तीनों आरोपियों के विरुद्ध PC & PNDT एक्ट के तहत प्राथमिकी दर्ज करने का निर्देश दिया है। मामले से संबंधित सभी साक्ष्य न्यायालय में प्रस्तुत किए जाएंगे।
इस संबंध में अधिकारियों ने कहा कि राज्य सरकार की नीति के अनुरूप अवैध अल्ट्रासाउंड और लिंग निर्धारण जैसी गतिविधियों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। ऐसे मामलों में दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी, जिसमें मशीन जब्ती, लाइसेंस रद्द करने और कारावास तक का प्रावधान है।
प्रशासन ने आम लोगों से भी अपील की है कि यदि कहीं अवैध अल्ट्रासाउंड केंद्र या लिंग निर्धारण संबंधी गतिविधियों की जानकारी मिले तो इसकी सूचना तुरंत पुलिस अथवा मुख्य चिकित्सा पदाधिकारी कार्यालय को दें, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके।
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रिपोर्ट: FinalJustice.in
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