अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा

अनुसूचित जाति (एससी) के छात्रों द्वारा जिन शैक्षिक असमानताओं का सामना किया जा रहा है, उन्‍हें दूर करने और इन छात्रों के लिए गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक समान पहुँच सुनिश्चित करने के उद्देश्‍य से सरकार निम्नलिखित योजनाएँ लागू कर रही है:

1. अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए पोस्‍ट मैट्रिक छात्रवृत्ति (पीएमएस-एससी)

2. अनुसूचित जाति और अन्य छात्रों के लिए प्री-मैट्रिक छात्रवृत्ति योजना

3. अनुसूचित जातियों  के युवा अचीवर्स के लिए उच्च शिक्षा छात्रवृत्ति (श्रेयस), जिसमें शामिल हैं:

i. अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए सर्वोच्‍च स्तर की शिक्षा (टीसीएस);

ii. अनुसूचित जाति (एससी), अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) और पीएम केयर्स चिल्ड्रन के लाभार्थियों के लिए मुफ्त कोचिंग योजना (एफसीएस);

iii. अनुसूचित जाति (एससी) आदि के उम्मीदवारों के लिए राष्ट्रीय विदेशी छात्रवृत्ति (एनओएस) योजना; और

iv. अनुसूचित जाति के छात्रों के लिए राष्ट्रीय फैलोशिप (एनएफ़एससी)

4. लक्षित क्षेत्रों के हाई स्‍कूलों में छात्रों के लिए आवासीय शिक्षा योजना (श्रेष्‍ठ)

5. प्रधान मंत्री अनुसूचित जाति अभ्युदय योजना (पीएम-अजय) के तहत छात्रावास घटक।

6. राष्ट्रीय अनुसूचित जाति वित्त एवं विकास निगम (एनएसएफ़डीसी) की शिक्षा ऋण योजना

7. प्रधान मंत्री उच्चतर शिक्षा प्रोत्साहन (पीएम-यूएसपी) — कॉलेज और विश्वविद्यालय के छात्रों के लिए केंद्र शोषित छात्रवृत्ति योजना, जिसे उच्च शिक्षा विभाग द्वारा लागू किया गया है।

8. राष्ट्रीय साधन-सह-योग्‍यता छात्रवृत्ति योजना (एनएमएमएसएस) जिसे स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग द्वारा लागू किया गया है।

इसके अलावा, केंद्रीय शैक्षिक संस्थान (सीईआई) (प्रवेश में आरक्षण) अधिनियम, 2006, केंद्रीय सरकार द्वारा स्थापित, संचालित या सहायता प्राप्त केंद्रीय शैक्षिक संस्थानों (सीईआई) में अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के छात्रों के लिए आरक्षण प्रदान करता है।

स्‍कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग 2018-19 से समग्र शिक्षा को लागू कर रहा है, जिसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि पूरे देश में सभी बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक समान और समावेशी कक्षा वातावरण में पहुँच मिल सके, जिसमें अनुसूचित जाति क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है। यह पहल आवासीय स्कूलों/छात्रावासों, जैसे नेताजी सुभाष चंद्र बोस आवासीय विद्यालय, कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय,  प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महा अभियान (पीएम जनमन), धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान के हस्तक्षेपों का भी समर्थन करती है। समग्र शिक्षा का एक प्रमुख उद्देश्य सभी स्तरों पर लिंग के आधार पर भेदभाव को समाप्‍त करना और विभिन्‍न सामाजिक वर्गों के बीच मौज़ूद अंतर को पाटना है। यह योजना लड़कियों और सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े समूहों के बच्चों तक पहुँचती है। कक्षा 8 तक की सभी लड़कियों और एससी/एसटी/बीपीएल परिवारों के बच्चों को मुफ्त वर्दी प्रदान की जाती है, और प्राथमिक स्तर पर सभी बच्चों सहित एससी छात्रों को मुफ्त पाठ्यपुस्तकें दी जाती हैं। इसके अलावा, वर्ष 2025-26 के दौरान स्‍कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग ने समग्र शिक्षा के तहत सभी माध्यमिक और उच्चतर माध्यमिक स्कूलों में सूचना और संचार प्रौद्योगिकी (आईसीटी), स्मार्ट क्लास और प्रयोगशालाओं को सघन रूप से लागू करने के लिए विशेष अभियान शुरू किए हैं। उपरोक्त योजनाओं की निगरानी और मूल्यांकन किया जा रहा है।

निगरानी के लिए, सभी राज्यों/केंद्र शासित प्रदेशों और हितधारकों के लिए नियमित क्षमता निर्माण एवं हैंड-होल्डिंग/क्लस्टर/क्षेत्रीय बैठकें और/या कार्यशालाएँ आयोजित की जाती हैं, जिससे राज्यों की प्रगति की समीक्षा की जा सके और किसी भी लंबित समस्या का समाधान किया जा सके। इसके अतिरिक्त, विभिन्न एजेंसियों/साझेदारों को चैनलाइज किया जाता है, नेशनल पेमेंट कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) से सेवाओं का उपयोग किया जाता है, राष्ट्रीय छात्रवृत्ति पोर्टल (एनएसपी) के माध्यम से लाभार्थियों के बैंक खातों का आधार से लिंक सुनिश्चित किया जा रहा है। साथ ही, सार्वजनिक वित्तीय प्रबंधन प्रणाली (पीएफएमएस) ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के तकनीकी मुद्दों के समाधान के लिए दैनिक “ओपन हाउस” शुरू किया है। आवेदनकर्ता अपनी शिकायतें केंद्रीकृत सार्वजनिक शिकायत निवारण और निगरानी प्रणाली (सीपी-जीआरएएमएस) पोर्टल पर भी दर्ज कर सकते हैं, जहाँ सरकार द्वारा उनके मुद्दों का समाधान किया जाता है।

मूल्यांकन अध्ययन और प्रभाव अध्ययन की रिपोर्टों से पता चलता है कि उपरोक्त योजनाओं के तहत सहायता और वित्तीय मदद प्राप्त करने वाले अनुसूचित जाति (एससी) के कई छात्रों ने सफलता प्राप्त की है।

ये योजनाएँ समग्र रूप से अनुसूचित जाति (एससी) समुदाय के छात्रों के शैक्षिक सशक्तिकरण को बढ़ावा देती हैं।

यह जानकारी आज राज्यसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में सामाजिक न्याय और अधिकारिता राज्य मंत्री, श्री रामदास अठावले द्वारा दी गई।

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