protection of endangered languages

विलुप्तप्राय भाषाओं की सुरक्षा

नई दिल्ली – भारत की जनगणना 2011 (भारत के महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त का कार्यालय) के अनुसार, देश में कुल 121 भाषाएँ सूचित की गई हैं। इनमें से कई भाषाओं की अपनी विशिष्ट लिपियां हैं, जबकि अन्य साझा लिपि या क्षेत्रीय लिपियों में लिखी जाती हैं।

शिक्षा मंत्रालय द्वारा भारत की विलुप्तप्राय भाषाओं की सुरक्षा और संरक्षण स्कीम (एसपीपीईएल) के अंतर्गत केन्‍द्रीय भारतीय भाषा संस्थान (सीआईआईएल), मैसूरु के माध्‍यम से 10,000 से कम लोगों द्वारा बोली जाने वाली भारत की उन सभी मातृभाषाओं/भाषाओं जिन्हें विलुप्तप्राय भाषाएं कहा जाता है, के संरक्षण, परिरक्षण और प्रलेखन का कार्य किया जाता है। स्कीम के प्रथम चरण में, पूरे भारत से 117 विलुप्तप्राय भाषाओं/मातृभाषाओं को अध्‍ययन और प्रलेखन के लिए चुना गया है, जिनका ब्यौरा अनुलग्नक में दिया गया है।

संस्कृति मंत्रालय साहित्य अकादमी के माध्यम से 24 मान्यताप्राप्त भाषाओं और अनेक जनजातीय और गैर-मान्यताप्राप्त भाषाओं में पुरस्कारों, अनुवादों और कार्यक्रमों के माध्यम से साहित्यिक संवाद और प्रकाशन को बढ़ावा देता है। यह मौखिक और जनजातीय साहित्य के प्रलेखन और संरक्षण के लिए विशेष कार्यक्रम और केन्द्र भी सृजित करता है, जैसे वाचिक एवं जनजातीय साहित्य केन्द्र और कम मान्यताप्राप्त भाषाओं में काम करने वाले विद्वानों को भाषा सम्मान प्रदान करता है।

यह जानकारी केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह शेखावत ने आज लोकसभा में एक लिखित उत्तर में दी।

*************************