नई दिल्ली ,17 अपै्रल(Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। भाजपा सांगठनिक चुनाव के मद्देनजर बीजेपी अध्यक्ष और केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा की आज पीएम मोदी से मुलाकात हुई है। जेपी नड्डा की प्रधानमंत्री मोदी के साथ आज सुबह 10 बजे मुलाकात हुई जो करीब 1 घंटे तक चली।
भाजपा को अब नए अध्यक्ष मिलने की अटकलें तेज हो गई हैं क्योंकि बुधवार को दिल्ली में पीएम मोदी के नेतृत्व में एक मीटिंग हुई जिसमें भाजपा के कई बड़े नेता शामिल हुए। सूत्रों के मुताबिक, संगठनात्मक फेरबदल और राष्ट्रीय अध्यक्ष के चुनाव पर चर्चा के लिए भाजपा नेताओं ने अहम बैठक की।
प्रधानमंत्री आवास पर हुई इस बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव (संगठन) बीएल संतोष शामिल हुए। इस बैठक में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के आगामी चुनाव पर चर्चा हुई। पार्टी सूत्रों के मुताबिक चुनाव की घोषणा एक सप्ताह के भीतर की जा सकती है।
वहीं, कल रात जेपी नड्डा के आवास पर एक हाई-प्रोफाइल बैठक ने सियासी हलकों में हलचल मचा दी है। बैठक में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल और अश्विनी वैष्णव जैसे दिग्गज नेता शामिल हुए।
यह बैठक करीब ढाई घंटे तक चली। सूत्रों के मुताबिक, इस बैठक में कई अहम मुद्दों पर चर्चा हुई। अमित शाह और राजनाथ सिंह जैसे नेताओं की मौजूदगी इस बात का संकेत देती है कि चर्चा में राष्ट्रीय सुरक्षा और रक्षा से जुड़े मुद्दे भी शामिल हो सकते हैं।
17.04.2025 – देवीदास ग्रुप ऑफ़ कंपनी के निदेशक और संस्थापक श्री देवीदास श्रवण नाइकरे द्वारा पिछले दिनों प्राकृतिक सौंदर्य से आच्छादित महाराष्ट्र के लोनावाला की मनोहारी वादियों में व्यवसायिक दुनिया से जुड़े पेशेवरों के मार्गदर्शन के लिए चार दिवसीय कार्यशाला ‘Ultimate Millionaire Blueprint’ का आयोजन किया गया।
इस कार्यशाला के क्रम में एक भव्य अवॉर्ड समारोह के दौरान महाराष्ट्र के चुनिंदा उद्यमियों को उनके नवाचार, साहसिक दृष्टिकोण और सामाजिक विकास की दिशा में उल्लेखनीय योगदान के लिए भारतीय फिल्म जगत के मशहूर अभिनेता मुश्ताक खान की उपस्थिति में सम्मानित किया गया।
अभिनेता मुश्ताक खान ने सभी विजेताओं को हार्दिक बधाई दी और कहा, “यह पुरस्कार आपकी मेहनत और सोच का प्रतीक है… आगे बढ़ते रहिए..।” कार्यक्रम के दौरान अपने संबोधन में देवीदास ग्रुप ऑफ़ कंपनी के निदेशक और संस्थापक श्री देवीदास श्रवण नाइकरे ने देश के अन्य उद्यमियों को अपने ऑनलाइन मंच www.devidasnaikare.in से जुड़ने का आह्वान करते हुए संदेश दिया “जब आपके अंदर विश्वास, आपकी सोच में स्पष्टता, और आपके कर्मों में समर्पण हो, तो कोई भी सीमा आपको रोक नहीं सकती।
विदित हो कि देवीदास ग्रुप ऑफ कंपनी एक व्यावसायिक निगम है जिसमें विभिन्न उद्यम शामिल हैं, जैसे कि सिटीधन कैपिटल, नैपर शॉप, वेदांत ट्रेनिंग एकेडमी, एस. एम. सर्विसेज, डी. के फाउंडेशन, देवीदास पब्लिकेशन्स, ऑल-इन-वन सर्विसेज, डिजिटल शॉप, इंस्टीट्यूट ऑफ़ बिज़नेस मैनेजमेंट और देवीदास करियर ट्रेनिंग इंस्टीट्यूट। इनमें से प्रत्येक उद्यम देश की जनता को अलग-अलग सेवाएँ और समाधान प्रदान कर रहा है।
देवीदास ग्रुप ऑफ़ कंपनी के संस्थापक निदेशक श्री देवीदास श्रवण नाइकरे भारत के पहले आध्यात्मिक बिजनेस कोच और माइंड ट्रेनर हैं और उन्होंने देश के उद्यमियों को प्रेरित करने के लिए दो भाषा इंग्लिश और हिंदी में भारत में पहली बार ‘साहस’ विषय पर 12 प्रेरणादायक पुस्तकें लिखी हैं, जो हजारों युवाओं और उद्यमियों को आत्म-विकास और सफलता की राह दिखा रही हैं।
माइंड ट्रेनिंग और सशक्तिकरण पहल के साथ भारत में क्रांति लाने की दिशा में अग्रसर श्री देवीदास श्रवण नाइकरे को यंग एंटरप्रेन्योर 2022, महाराष्ट्र बिजनेस आइकन अवार्ड 2023, इंस्पायरिंग लीडर अवार्ड 2023, पुणे एंटरप्रेन्योर और श्री महात्मा गांधी राष्ट्रीय सम्मान अवार्ड 2023 जैसे 30 से अधिक राष्ट्रीय पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है।
देवीदास ग्रुप ऑफ कंपनी का मिशन आत्म-प्रचार की सीमाओं से कहीं आगे तक फैला हुआ है। कंपनी ने 2028 तक भारत में 5,000 मजबूत उद्यमी बनाने का लक्ष्य रखा है। श्री देवीदास श्रवण नाइकरे व्यवसायिक दुनिया में आध्यात्मिक मार्गदर्शन के लिए जाने जाते हैं।उनकी शिक्षाओं का मुख्य बिंदु है, साधारण व्यक्तियों को असाधारण पेशेवरों में बदलना, जिसमें ध्यान, माइंडफुलनेस और आध्यात्मिक तकनीकों को व्यवसायिक रणनीतियों के साथ एकीकृत किया जाता है।
श्री देवीदास श्रवण नाइकरे का मानना है कि नेक इरादे और कर्म की शक्ति से असंभव भी संभव बन जाता है। सच्ची सफलता केवल धन अर्जित करने में नहीं, बल्कि मानसिक शांति, अच्छा स्वास्थ्य और मजबूत रिश्तों को बनाए रखने में भी है।
मुंबई ,16 अपै्रल(Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। सांप्रदायिक हिंसा के आरोपियों की संपत्तियों पर कार्रवाई को लेकर सुप्रीम कोर्ट की स्पष्ट हिदायतों के बावजूद नागपुर नगर निगम (एनएमसी) ने एक आरोपी का मकान गिरा दिया। अब इस मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर बेंच के समक्ष निगम ने बिना शर्त माफी मांगी है।
नगर निगम आयुक्त अभिजीत चौधरी की ओर से दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि नगर निगम के टाउन प्लानिंग और स्लम विभाग के अधिकारी नवंबर 2023 के सुप्रीम कोर्ट के आदेश से अनजान थे।
इसी कारणवश फहीम खान का दो मंजिला मकान 24 मार्च को गिरा दिया गया। यह कार्रवाई नगर निगम की अतिक्रमण विरोधी टीम ने स्थानीय पुलिस की सहायता से की थी, जिसकी तुलना उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश में हुई बुलडोजर कार्रवाई से की जा रही है।
बता दें कि फहीम खान माइनॉरिटीज डेमोक्रेटिक पार्टी (एमडीपी) के प्रमुख हैं। उन्हें 19 मार्च को नागपुर के महल इलाके में हुई सांप्रदायिक हिंसा के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उन पर आगजनी, पथराव और देशद्रोह जैसे गंभीर आरोप हैं।
यह हिंसा 17 मार्च की रात तब फैली थी, जब यह अफवाह उड़ी कि खुलदाबाद में औरंगजेब की मजार को हटाने की मांग के बीच एक धार्मिक चादर की बेअदबी हुई है।
फहीम खान की मां मेहरुन्निसा और एक अन्य बुजुर्ग अब्दुल हफीज की याचिका पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट की न्यायमूर्ति नितिन साम्ब्रे और न्यायमूर्ति वृषाली जोशी की बेंच ने महाराष्ट्र सरकार को दो सप्ताह का समय दिया है।
कोर्ट ने सरकार से पूछा है कि सुप्रीम कोर्ट की हिदायतें स्थानीय अधिकारियों तक क्यों नहीं पहुंचाई गईं। इस मामले में अब अगली सुनवाई दो हफ्ते बाद होगी।
नई दिल्ली ,16 अपै्रल (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। वर्तमान मुख्य न्यायाधीश (सीजेआई) संजीव खन्ना ने बुधवार को केंद्रीय कानून मंत्रालय को न्यायमूर्ति भूषण रामकृष्ण गवई को अगला सीजेआई नियुक्त करने की सिफारिश भेजी है। न्यायमूर्ति गवई वर्तमान सीजेआई के बाद उच्चतम न्यायालय के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश हैं और वह आगामी 14 मई को देश के 52वें प्रधान न्यायाधीश के रूप में शपथ लेंगे। सीजेआई खन्ना 13 मई को सेवानिवृत्त होने वाले हैं।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू जस्टिस गवई को पद की शपथ दिलाएंगी। न्यायमूर्ति डीवाई चंद्रचूड़ के 65 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होने के बाद न्यायमूर्ति खन्ना ने नवंबर 2024 में मुख्य न्यायाधीश का पदभार संभाला था।
जस्टिस गवई का पूरा नाम भूषण रामकृष्ण गवई है और उनका जन्म 24 नवंबर, 1960 को महाराष्ट्र के अमरावती में हुआ था। उन्होंने 12 नवंबर, 2005 को उच्च न्यायालय के स्थायी न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति प्राप्त की थी। तब से वह शीर्ष अदालत की कई महत्वपूर्ण संविधान पीठों का हिस्सा रहे हैं, जिन्होंने कई ऐतिहासिक फैसले सुनाए हैं।
जस्टिस गवई उस पांच न्यायाधीशों की पीठ के सदस्य थे जिसने सर्वसम्मति से केंद्र सरकार के अनुच्छेद 370 को निरस्त करने के फैसले को बरकरार रखा था, जिसने तत्कालीन राज्य जम्मू-कश्मीर को विशेष दर्जा प्रदान किया था।
जस्टिस गवई इसी वर्ष नवंबर में सेवानिवृत्त होने वाले हैं, जिसके कारण वह लगभग छह महीने तक मुख्य न्यायाधीश के पद पर रहेंगे। जस्टिस गवई उस पांच न्यायाधीशों की पीठ में भी शामिल थे जिसने केंद्र सरकार की विवादास्पद चुनावी बॉन्ड योजना को रद्द कर दिया था।
जस्टिस गवई सात न्यायाधीशों वाली संविधान पीठ का हिस्सा थे जिसने 6:1 के बहुमत से यह माना था कि राज्यों को अनुसूचित जातियों के भीतर उप-वर्गीकरण करने का संवैधानिक अधिकार है, ताकि उन जातियों के उत्थान के लिए आरक्षण प्रदान किया जा सके जो सामाजिक और शैक्षणिक रूप से अधिक पिछड़ी हैं।
जस्टिस गवई सहित सात न्यायाधीशों की संविधान पीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाया था कि पक्षों के बीच बिना मुहर लगे या अपर्याप्त रूप से मुहर लगे समझौते में मध्यस्थता खंड लागू करने योग्य है, क्योंकि इस तरह के दोष को ठीक किया जा सकता है और यह अनुबंध को अवैध नहीं बनाता है।
उनके नेतृत्व वाली पीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में अखिल भारतीय स्तर पर दिशानिर्देश जारी करते हुए कहा था कि ‘कारण बताओ’ नोटिस दिए बिना किसी भी संपत्ति को ध्वस्त नहीं किया जाना चाहिए और प्रभावितों को अपना जवाब दाखिल करने के लिए 15 दिनों का समय दिया जाना चाहिए। वह उस पीठ का भी नेतृत्व कर रहे हैं जो वन, वन्यजीव और वृक्षों के संरक्षण से संबंधित महत्वपूर्ण मामलों की सुनवाई कर रही है।
उन्होंने 16 मार्च 1985 को बार में दाखिला लिया था और वह नागपुर नगर निगम, अमरावती नगर निगम और अमरावती विश्वविद्यालय के स्थायी वकील भी रहे थे।
अगस्त 1992 से जुलाई 1993 तक उन्हें बॉम्बे हाईकोर्ट की नागपुर पीठ में सहायक सरकारी वकील और अतिरिक्त लोक अभियोजक के रूप में नियुक्त किया गया था। सत्रह जनवरी 2000 को उन्हें नागपुर पीठ के लिए सरकारी वकील और लोक अभियोजक नियुक्त किया गया था।
उच्च न्यायालय और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीशों की नियुक्ति, पदोन्नति और स्थानांतरण संबंधी प्रक्रिया ज्ञापन के अनुसार, कानून मंत्री सीजेआई को पत्र लिखकर उनसे उनके उत्तराधिकारी का नाम मांगते हैं। प्रक्रिया ज्ञापन के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के सबसे वरिष्ठ न्यायाधीश को सीजेआई का पद संभालने के लिए उपयुक्त माना जाता है और न्यायपालिका के निवर्तमान प्रमुख के विचार ‘उचित समय’ पर मांगे जाते हैं।
जमशेदपुर ,16 अपै्रल(Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। जमशेदपुर के सोनारी इलाके में एक सांड की वजह से घंटों अफरा-तफरी मची रही। सांड एक मकान का दरवाजा खुला पाकर न सिर्फ अंदर घुस आया, बल्कि सीढिय़ों से मकान की तीसरी मंजिल पर जा पहुंचा और जमकर उत्पात मचाया। मोहल्ले के लोगों की लाख मशक्कत के बाद सांड नीचे नहीं उतरा। करीब चार घंटे बाद सांड को एक क्रेन के सहारे छत के रास्ते से नीचे उतारा गया।
बताया गया कि सोनारी आदर्श नगर के न्यू ग्वाला बस्ती के रिहायशी इलाके में बुधवार को तीन सांड सड़क पर आपस में लड़ रहे थे। इसी दौरान एक सांड मनोज यादव नामक शख्स के घर के अंदर दाखिल हो गया।
उसे निकालने की कोशिश की गई तो वह बाहर निकलने के बजाय सीढिय़ों से होता हुआ तीसरी मंजिल पर स्थित बेडरूम में जा पहुंचा। उसने बेडरूम के सामान इधर-उधर कर दिए।
इसकी जानकारी मिलते ही मोहल्ले के सैकड़ों लोग घर के अंदर और बाहर इक_ा हो गए। कुछ लोगों ने सांड की गर्दन में रस्सी बांधकर नीचे उतारने की कोशिश की, लेकिन नाकाम रहे। बाद में ‘बजरंग दल’ संगठन से जुड़े लोगों ने एक क्रेन बुलाया। 10-12 लोगों ने एक साथ ऊपरी
मंजिल पर पहुंचकर सांड को रस्सी से बांधा और इसके बाद छत के रास्ते क्रेन के सहारे धीरे-धीरे नीचे उतारा।
कुछ स्थानीय लोगों ने पूरे घटनाक्रम का वीडियो रिकॉर्ड किया, जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। जमशेदपुर में आवारा सांड के उत्पात और हमले की यह कोई पहली घटना नहीं है। इसी साल जनवरी में साकची थाना अंतर्गत एमजीएम गोलचक्कर के पास पोटका हल्दीपोखर निवासी महफूज सांड के हमले में बुरी तरह जख्मी हो गए थे।
मार्च 2023 में शहर के साकची शीतला मंदिर के पास सड़क पर घूम रहे सांड ने दो लोगों अशोक अग्रवाल और राज किशोर सिंह को पटककर मार डाला था। इस सांड को काबू करने में पुलिस-प्रशासन को भारी मशक्कत करनी पड़ी थी।
नई दिल्ली ,16 अपै्रल (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। दिल्ली सरकार में मंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने बुधवार को नेशनल हेराल्ड घोटाले को लेकर कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने कहा है कि राहुल गांधी और कांग्रेस को लगता है कि उन्हें देश को लूटने का जन्मसिद्ध अधिकार है।
मनजिंदर सिंह सिरसा ने बुधवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर अपना वीडियो पोस्ट किया। उन्होंने वीडियो बयान में कांग्रेस पर कटाक्ष करते हुए कहा, राहुल गांधी और कांग्रेस को लगता है कि उन्हें देश को लूटने और भ्रष्टाचार करने का जन्मसिद्ध अधिकार है।
उन्हें लगता है कि इसका उनसे कोई जवाब नहीं मांग सकता। नेशनल हेराल्ड अखबार को देश की जनता ने एक-एक दो-दो रुपये इक_ा करके देश की आजादी की लड़ाई के लिए शुरू किया था, उसकी सारी संपत्ति को राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने एजीएल के माध्यम से अपने नाम करवा लिया।
उन्होंने आगे कहा कि प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) अब कार्रवाई करते हुए उन संपत्तियों को सीज कर रहा है, राहुल गांधी और सोनिया गांधी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर रहा है, तो वे सड़कों पर उतरकर गुंडागर्दी कर रहे हैं। राहुल गांधी कह रहे हैं कि मुझे देश के कानून पर विश्वास नहीं है। मैं देश के कानून को नहीं मानता।
उन्होंने आगे कहा कि देश का कानून राहुल गांधी और सोनिया गांधी पर भी लागू होता है। यदि आपको कोई गलतफहमी है तो उसे ठीक कर लीजिए। शायद 60 साल में लागू नहीं हुआ होगा, क्योंकि गांधी परिवार और नेहरू परिवार की चल रही थी।
देश का कानून मजबूत है और गांधी परिवार को सबक सिखाने के लिए यही उचित कानून है, आपको इसका पालन करना होगा। इस कानून के तहत आपके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी, क्योंकि आपने देश को लूटने का काम किया है।
मनजिंदर सिंह सिरसा ने वीडियो के कैप्शन में लिखा, राहुल गांधी और कांग्रेस को लगता है कि उन्हें देश को लूटने का जन्मसिद्ध अधिकार है। नेशनल हेराल्ड घोटाला गांधी परिवार के लालच को बेनकाब करता है।
2008 में अखबार बंद होने के बाद कांग्रेस ने पार्टी फंड से 90 करोड़ एक निजी कंपनी एजेएल को दे दिए, जो पूरी तरह से नियमों के खिलाफ है। जब गांधी परिवार के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा रही है तो राहुल गांधी कह रहे हैं, मैं देश के कानून को नहीं मानता, राहुल गांधी, सड़कों पर गुंडागर्दी करने से आप कानूनी कार्रवाई से बच नहीं सकते, आपने देश को लूटा है, उसका हिसाब तो देना पड़ेगा।
नई दिल्ली ,16 अपै्रल (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। वक्फ कानून को लेकर बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई जारी है। मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष इस अहम मामले में वरिष्ठ अधिवक्ताओं ने अपनी दलीलें रखनी शुरू कीं। याचिकाकर्ताओं की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने बहस की शुरुआत की, जिसके बाद अभिषेक मनु सिंघवी ने अपनी दलीलें पेश कीं।
सिब्बल ने अनुच्छेद 26 का जिक्र किया। फिर कहा अगर मुझे वक्फ बनाना है तो मुझे सबूत देना होगा कि मैं 5 साल से इस्लाम का पालन कर रहा हूं, अगर में मुस्लिम ही जन्मा हूं तो मैं ऐसा क्यों करूंगा? मेरा पर्सनल लॉ यहां पर लागू होगा। अगर वक्फ बनाने वाला कागजात देता है तो वक्फ कायम रहेगा। इस पर सीजीआई ने कहा अनुच्छेद 26 धर्मनिरपेक्ष है और ये सभी समुदायों पर लागू होता है।
वहीं, अधिवक्ता सिंघवी ने कोर्ट के समक्ष कहा कि देशभर में करीब आठ लाख वक्फ संपत्तियां हैं, जिनमें से चार लाख से अधिक संपत्तियां ‘वक्फ बाई यूजर’ के तौर पर दर्ज हैं। उन्होंने इस बात को लेकर चिंता जताई कि वक्फ अधिनियम में किए गए संशोधन के बाद इन संपत्तियों पर खतरा उत्पन्न हो गया है।
सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना ने कहा कि जब वे दिल्ली हाईकोर्ट में थे, तब उन्हें बताया गया था कि वह जमीन वक्फ संपत्ति है। उन्होंने कहा, हमें गलत मत समझिए, हम यह नहीं कह रहे हैं कि सभी वक्फ बाई यूजर संपत्तियां गलत हैं।
बहस के दौरान सिंघवी ने यह भी कहा कि उन्हें यह तक सुनने में आया है कि संसद भवन की जमीन भी वक्फ की है। उन्होंने कोर्ट से पूछा कि क्या अयोध्या केस में जो फैसले दिए गए, वे इस मामले में लागू नहीं होते? उन्होंने संशोधित वक्फ अधिनियम पर अंतरिम रोक लगाने की मांग की और कहा कि जब तक इस पर अंतिम निर्णय नहीं आता, तब तक संशोधन लागू नहीं किया जाना चाहिए।
इस बीच, अधिवक्ता हुजेफा अहमदी ने भी कहा कि अधिनियम की धारा 3(आर) के तीन पहलुओं पर ध्यान देना जरूरी है। खासकर इस बात पर कि ‘इस्लाम का पालन करना’ यदि आवश्यक धार्मिक अभ्यास माना जाता है, तो इसका प्रभाव नागरिकों के मौलिक अधिकारों पर भी पड़ सकता है। अहमदी ने कहा कि यह अस्पष्टता पैदा करता है।
नई दिल्ली ,16 अपै्रल (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने आगामी बिहार विधानसभा चुनाव के मद्देनजर बूथ लेवल एजेंटों (बीएलए) का प्रशिक्षण शुरू कर दिया है। भारत निर्वाचन आयोग ने एक प्रेस नोट जारी कर यह जानकारी दी।
ईसीआई की ओर से जारी प्रेस नोट के अनुसार, भारत निर्वाचन आयोग ने बिहार में आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए पहली बार बूथ लेवल एजेंट्स (बीएलए) के लिए प्रशिक्षण शुरू कर दिया है। नई दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर डेमोक्रेसी एंड इलेक्शन मैनेजमेंट (आईआईआईडीईएम) में आयोजित इस दो दिवसीय प्रशिक्षण में बिहार के 10 मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों से जुड़े लगभग 280 बीएलए हिस्सा ले रहे हैं।
मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार, निर्वाचन आयुक्त डॉ. सुखबीर सिंह संधु और डॉ. विवेक जोशी ने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में एजेंट्स को संबोधित किया। यह प्रशिक्षण 4 मार्च, 2025 को आयोजित मुख्य निर्वाचन अधिकारियों (सीईओ) के सम्मेलन में तय किया गया था।
आयोग ने चुनाव प्रक्रिया में बीएलए की महत्वपूर्ण भूमिका पर जोर देते हुए कहा कि यह प्रशिक्षण कार्यक्रम उन्हें जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 और 1951, मतदाता पंजीकरण नियम 1960, चुनाव संचालन नियम 1961 और ईसीआई के दिशा-निर्देशों के तहत अपनी जिम्मेदारियों को बेहतर ढंग से निभाने में मदद करेगा।
बीएलए को कानूनी ढांचे के अनुसार उनकी नियुक्ति, भूमिका और जिम्मेदारियों के बारे में जानकारी दी गई। प्रशिक्षण कार्यक्रम में बीएलए को निर्वाचन प्रक्रिया के विभिन्न पहलुओं से परिचित कराया गया, जिसमें मतदाता सूचियों की तैयारी, अपडेट और संशोधन तथा संबंधित प्रपत्र और प्रारूप शामिल हैं।
मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों द्वारा नियुक्त बीएलए जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 के प्रावधानों के अनुसार बिना गलती के वोटर लिस्ट सुनिश्चित करने में अहम भूमिका निभाते हैं। इसके अलावा, अंतिम वोटर लिस्ट प्रकाशन के बाद असंतुष्ट होने पर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 24(ए) और 24(बी) के तहत पहली और दूसरी अपील के प्रावधानों के उपयोग के बारे में भी प्रशिक्षित किया गया।
दरियापुर , 16 अप्रैल (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)।बाबा भीमराव अंबेडकर साहब भारत के संविधान निर्माता और एक महान सामाजिक सुधारक, विधिवेत्ता और राजनीतिज्ञ थे. बाबा साहेब दलित परिवार में पैदा हुए और उन्होंने अपने जीवन में जातिगत भेदभाव का सामना किया, लेकिन उन्होंने शिक्षा प्राप्त कर और सामाजिक अन्याय के खिलाफ संघर्ष कर एक महान व्यक्ति के रूप में अपनी पहचान बनाया.
भारतीय संविधान के निर्माता बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर एक जाने माने वकील भी थे. उन्होंने न केवल अपने मुवक्किलों के लिए वकालत की बल्कि समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व के लोकतांत्रिक मूल्यों की भी वकालत की. इसलिए, उनकी गिनती आज भी दुनिया के सर्वश्रेष्ठ वकीलों में होती है. उक्त बातें बाबा साहेब भीमराव अंबेडकर जयंती पर भाजपा प्रदेश कार्य समिति सदस्य राकेश कुमार सिंह ने किया.
आगे उन्होंने बाताया कि इंग्लैंड से लौटने के बाद बाबा साहेब ने दलित वर्गों के कल्याण के लिए एक एसोसिएशन की शुरुआत की, जिसमें सर चिमनलाल सीतलवाड़ अध्यक्ष और डॉ. अंबेडकर चेयरमैन थे जिसमें एसोसिएशन का तात्कालिक उद्देश्य शिक्षा का प्रसार करना, आर्थिक स्थितियों में सुधार करना और दलित वर्गों की शिकायतों का प्रतिनिधित्व करना था.
अंबेडकर ने दलितों के अधिकारों के लिए संघर्ष किया और जाति व्यवस्था के खिलाफ आवाज उठाई.उन्होंने दलितों के लिए शिक्षा, रोजगार और सामाजिक न्याय के लिए काम किया.उन्होंने बहिष्कृत भारत नामक एक समाचार पत्र भी शुरू किया, जो दलितों के हितों की रक्षा के लिए था.
बाबासाहेब डॉ. बी.आर. अंबेडकर एक बहुआयामी भारतीय प्रतीक थे, जिनका जीवन और कार्य देश के सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक परिदृश्य को आकार देते रहते हैं. समाज के हाशिए से उठकर स्वतंत्र भारत के सबसे बड़े नेताओं में से एक बनने का उनका सफर पीढ़ियों को प्रेरित करता रहा है.
इस मौके पर सीता राम दास, बिरेंद्र राम, बब्लू कुमार, मुकेश कुमार, सुजीत राम, श्रवण कुमार, सुरेश राम, सोनू कुमार राम, अजीत राम, पिंटू कुमार, अभिशेख कुमार, चंदन कुमार, छोटु कुमार, रवि कुमार, रविन्द्र कुमार दास, सिया राम दास, कुणाल कुमार, मोनू कुमार आदि लोग उपस्थित थे।
लखनऊ ,16 अपै्रल(Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। उत्तर प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने नेशनल हेराल्ड मामले में ईडी की ओर से दायर की गई चार्जशीट पर टिप्पणी की। इसके अलावा, उन्होंने पश्चिम बंगाल में हुई हिंसक घटनाओं पर भी राय व्यक्त की। केशव प्रसाद मौर्य ने बंगाल में हुई हिंसा के लिए सीधे तौर पर प्रदेश की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को जिम्मेदार ठहराया।
केशव प्रसाद मौर्य ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बात करते हुए कहा कि नेशनल हेराल्ड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने चार्जशीट दाखिल की है। अगर कांग्रेस देश के कानून का सम्मान करती है, तो भ्रष्टाचार के आरोपों का सामना करने और कार्रवाई के लिए तैयार रहना चाहिए।
कानून अपना काम करेगा और जो भ्रष्टाचारी है, वह नहीं बचेगा। ईडी ने चार्जशीट में सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप लगाए हैं और वे इस मामले में जमानत पर हैं। अगर कांग्रेस बाबासाहेब अंबेडकर के संविधान और देश के कानून का सम्मान करती है, तो उसे भ्रष्टाचार के आरोपों की सजा भुगतने के लिए तैयार रहना चाहिए।
उन्होंने आगे कहा कि ईडी की कार्रवाई के खिलाफ धरना-प्रदर्शन करना कांग्रेस की घटिया और निम्न मानसिकता को दर्शाता है। देश के 140 करोड़ लोगों के लिए संविधान और कानून एक समान है। लेकिन कांग्रेस यह सोचती है कि गांधी परिवार के सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ कानून काम न करे, जो संभव नहीं है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने स्पष्ट कहा है कि भ्रष्टाचार मुक्त भारत बनाने के लिए, चाहे बड़ा व्यक्ति हो या छोटा, जिसने देश को लूटा, गरीबों और किसानों को लूटा, या विकास कार्यों में भ्रष्टाचार किया, उसकी जांच होगी और दोषी पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई होगी।
मौर्य ने आगे कहा कि साल 2012 में कांग्रेस की सरकार थी, तब नेशनल हेराल्ड मामले की जांच शुरू हुई। जांच पूरी होने में समय लगा, लेकिन नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार में यह प्रक्रिया पूरी हुई। जब आरोप सही पाए गए, तो सोनिया गांधी और राहुल गांधी को जमानत लेनी पड़ी।
सारे सबूत उपलब्ध हैं और चार्जशीट दाखिल हो चुकी है। इसका विरोध करने का कोई औचित्य नहीं है। कांग्रेस इस मामले में घटिया आचरण और राजनीति कर रही है, जिसकी हम निंदा करते हैं।
पश्चिम बंगाल में हो रही हिंसा पर डिप्टी सीएम ने कहा कि पश्चिम बंगाल में वक्फ संशोधन कानून के बाद जो हिंसा हो रही है, इसके लिए मैं ममता बनर्जी की सरकार को पूरी तरह जिम्मेदार मानता हूं। लेकिन सिर्फ ममता सरकार ही नहीं, कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और वे सभी दल जो वक्फ संशोधन बिल के विरोध में मतदान किए हैं, वे भी इसके दोषी हैं।
वहां हिंदुओं और गरीबों पर हमले हो रहे हैं, दुकानें और मकान जलाए जा रहे हैं, हत्याएं हो रही हैं। फिर भी ये दल चुप हैं। इस तरह चुप रहने वालों को समझ लेना चाहिए कि आने वाला समय और इतिहास सब कुछ उजागर करेगा। आज जो हो रहा है, उसके लिए उन्हें कल जवाब देना पड़ेगा।
उन्होंने आगे कहा कि पश्चिम बंगाल से टीएमसी जा रही है और वहां भाजपा की सरकार आ रही है। लेकिन वर्तमान में वहां के हालात बहुत खराब हैं। ममता बनर्जी की सरकार सभी मोर्चों पर विफल हो चुकी है। वहां का हिंदू समुदाय असुरक्षित महसूस कर रहा है।
16.04.2025 – मनोरंजन और फ़ैशन उद्योग में एक नाम बहुत तेजी से उभर कर सामने आ रहा है वो नाम है मॉडल, फ़ैशन इन्फ़्लुएंसर जयता गार्गरी का। जयता गार्गरी एक पारंपरिक परिवार में पली-बढ़ी, जहाँ शिक्षा और स्थिरता पर बहुत ज़ोर दिया जाता था।
उन्होंने फैशन या मीडिया से असंबंधित क्षेत्र में डिग्री हासिल की और अलग-अलग नौकरी के क्षेत्रों में काम किया। 12 साल तक उन्होंने लगन से काम किया, जीत की सीढ़ियाँ चढ़ीं और एक समर्पित और मेहनती पेशेवर के रूप में ख्याति अर्जित की।
अपनी नौकरी के क्षेत्रों में सफलता के बावजूद, जयता गार्गरी इस भावना से बाहर नहीं निकल पाई कि कुछ कमी रह गई है। वह खुद को रचनात्मक गतिविधियों की ओर आकर्षित पाती थी, अपने खाली समय में फैशन शो, संगीत कार्यक्रम और थिएटर प्रदर्शन में भाग लेती थी।
उसके दोस्तों और परिवार ने उसके जुनून को देखा और उसे अपनी रुचियों को तलाशने के लिए प्रोत्साहित किया। विदित हो कि वर्ष 2020 में, जयता गार्गरी ने एक साहसिक कदम उठाया और एक सौंदर्य प्रतियोगिता में भाग लिया। कोई पूर्व अनुभव न होने के बावजूद, उसने प्रतियोगिता में अपना स्थान सुरक्षित कर लिया, जो उसके सफ़र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित हुआ।
सौंदर्य प्रतियोगिता में मिली सफलता और ख्याति ने उसके आत्मविश्वास को बढ़ाया और मनोरंजन और फ़ैशन उद्योग में अपना करियर बनाने के उसके फ़ैसले को पुष्ट किया।
प्रतिफल स्वरूप आज, जयता गार्गरी एक सफल व चर्चित मॉडल, फ़ैशन इन्फ़्लुएंसर, प्रेरक और एक उद्यमी के रूप में मनोरंजन और फ़ैशन जगत में एक्टिव रहने के साथ साथ उन लोगों के लिए प्रेरणास्रोत बन गई हैं जो अपने जुनून को आगे बढ़ाना चाहते हैं और अपना करियर अपनी इच्छा स्वरूप बदलना चाहते हैं।
रांची,15 अपै्रल (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। झामुमो के 13वें महाधिवेशन में सीएम हेमंत सोरेन को पार्टी का केंद्रीय अध्यक्ष चुन लिया गया है. 38 वर्षों तक पार्टी के संस्थापक और दिग्गज नेता शिबू सोरेन के अध्यक्ष रहने के बाद अब ये जिम्मेदारी उनके बेटे हेमंत सोरेन को मिली है.
15 अप्रैल 2025 को झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) के इतिहास में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया. झामुमो के 13वें महाधिवेशन में झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन को पार्टी का केंद्रीय अध्यक्ष चुना गया. इससे पहले जेएमएम के 13 वें महाधिवेशन में केन्द्रीय समिति सदस्यों की जिलावार घोषणा की गई. केन्द्रीय समिति सदस्य में कुल 284 सदस्य हैं.
इसकी घोषणा पार्टी के केन्द्रीय महासचिव विनोद पांडे ने की. केन्द्रीय समिति सदस्य में पार्टी के विधायक, पूर्व विधायक, सांसद भी शामिल हैं. नलिन सोरेन ने शिबू सोरेन को पार्टी का संस्थापक संरक्षण का प्रस्ताव रखा. मथुरा महतो ने समर्थन किया. जिसके बाद सर्वसम्मति से इसे पारित किया गया.
कार्यक्रम में गुरु जी शिबू सोरेन ने हेमंत सोरेन को पार्टी का केन्द्रीय अध्यक्ष बनाने की घोषणा की. जिसके बाद मंच पर नेताओं ने माला पहनाकर हेमंत सोरेन को बधाई दी. शिबू सोरेन के खराब स्वास्थ्य को देखते हुए हेमंत सोरेन को सर्वसम्मति से इस पद की जिम्मेदारी सौंपी गई है.
झारखंड मुक्ति मोर्चा की स्थापना 1972 में शिबू सोरेन के नेतृत्व में हुई थी. शिबू सोरेन ने महाजनों के खिलाफ अभियान छेड़ दिया. लोगों ने उन्होंने इतना काम किया कि लोग उन्हें दिशोम गुरु कहने लगे. झामुमो शुरू में आदिवासी अधिकारों, जल-जंगल-जमीन के संरक्षण और झारखंड की क्षेत्रीय अस्मिता की रक्षा के लिए संघर्षरत रही है.
शिबू सोरेन ने लंबे समय तक पार्टी को नेतृत्व प्रदान किया और इसे झारखंड की राजनीति में एक प्रमुख शक्ति बनाया. हालांकि, उम्र और स्वास्थ्य कारणों से उनकी सक्रियता कम हो गई थी, जिसके चलते हेमंत सोरेन को पहले 2015 में कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था और अब उन्हें केंद्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी सौप दी गई है.
हेमंत सोरेन के नेतृत्व में झामुमो ने 2019 और 2024 के विधानसभा चुनावों में शानदार प्रदर्शन किया, जिसके परिणामस्वरूप पार्टी ने पहले 30 और फिर 34 सीटें जीतीं. 2024 के चुनाव में झामुमो के नेतृत्व वाले इंडिया गठबंधन ने 81 में से 56 सीटें हासिल कीं, जो पार्टी के अब तक के सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन है.
झामुमो का केंद्रीय अध्यक्ष बनने के बाद हेमंत सोरेन ने इस अवसर पर कहा कि यह बदलाव झामुमो की विरासत को और मजबूत करेगा. उन्होंने शिबू सोरेन के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनके पिता ने पार्टी को एक आंदोलन के रूप में स्थापित किया, और अब इसे राष्ट्रीय मंच पर ले जाने की जिम्मेदारी उनकी है.
हेमंत सोरेन ने झामुमो को न केवल झारखंड में मजबूत किया, बल्कि इसे राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान दिलाने की दिशा में कदम उठाए हैं. 2019 के विधानसभा चुनाव में हेमंत के नेतृत्व में झामुमो ने 30 सीटें जीतकर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) को सत्ता से बाहर किया.
इंडिया गठबंधन (झामुमो, कांग्रेस, राजद) ने 47 सीटें हासिल कीं. इसके बाद उन्होंने 2024 के चुनाव में झामुमो ने 34 सीटों के साथ अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया, और गठबंधन ने 56 सीटें जीतीं. हेमंत ने बरहेट सीट से भाजपा के गमलियल हेम्ब्रम को 39,791 मतों से हराया.
हेमंत सोरेन का अध्यक्ष बनना झामुमो के लिए एक पीढ़ीगत बदलाव का संकेत है.
उनके नेतृत्व में पार्टी ने न केवल स्थानीय स्तर पर अपनी पकड़ मजबूत की, बल्कि राष्ट्रीय राजनीति में भी अपनी प्रासंगिकता साबित की. यह बदलाव झारखंड की राजनीति में स्थिरता और निरंतरता का प्रतीक है, क्योंकि हेमंत पहले ऐसे नेता हैं जिन्होंने लगातार दो बार सत्ता में वापसी की और चार बार मुख्यमंत्री बने.
शिबू सोरेन की विरासत को आगे बढ़ाते हुए हेमंत ने झामुमो को एक आधुनिक और गतिशील संगठन में बदलने का प्रयास किया है. उनके सामने चुनौती होगी कि वे पार्टी की मूल विचारधारा को बनाए रखते हुए इसे नए युग की जरूरतों के अनुरूप ढालें.
लखनऊ 15 April, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। यूपी में जीरो पॉवर्टी कार्यक्रम बाबासाहेब अंबेडकर के नाम पर चलाने के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के ऐलान पर समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने चुटकी ली है। उन्होंने कहा कि ‘ज़ीरो पार्वटी’ भी भाजपा का जुमला साबित होगा।
सपा मुखिया अखिलेश यादव ने मंगलवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर लिखा कि ज़ीरो होने से पहले हर तरफ़ ज़ीरो नज़र आ रहा है। जैसे इनका ‘ज़ीरो टॉलरेंस’ ज़ीरो हो गया, वैसे ही ‘ज़ीरो पार्वटी’ भी भाजपा का जुमला होगा। हमारे देश की महान परंपरा ने ‘ज़ीरो’ गणित के लिए दिया था, जनता के बीच झूठ बांटने के लिए नहीं। पावर्टी या कहें गरीबी कामों से जाती है, बातों से नहीं और काम में भाजपा सरकार जीरो है। ये जाते-जाते सब कुछ शून्य करके जाएंगे।
उन्होंने कहा कि भाजपाई ‘अंबेडकर गांव’ और ‘लोहिया गांव’ जैसी पुरानी योजनाओं का नाम बदलकर नए तरह से पेश करने का अपना परंपरागत छलावा कर सकते हैं और कुछ नहीं। भाजपाई नया वादा करने से पहले 15 लाख खातों में भिजवा दें और गोद लिए गांव की बदहाली भी जाकर देख लें और पहले हर किसी को घर और हर घर में जल जैसे झूठे वादों पर कई परतों तक जमा हो चुकी धूल को झाड़ें। कम-से-कम ग़रीबों से तो झूठ न बोलें।
सपा मुखिया अखिलेश यादव ने एक अन्य पोस्ट में कहा कि मध्य प्रदेश के नीमच में एक मंदिर में विश्राम कर रहे अल्पसंख्यक जैन समाज के मुनियों पर हिंसक हमला घोर निंदनीय है। इस मामले की गहरी जांच हो, न कि दिखावटी कार्रवाई और इस दुर्भावनापूर्ण कुकृत्य के पीछे की असली मंशा जगजाहिर हो कि शांतिपूर्ण जैन समाज के आदरणीय-सम्माननीय मुनियों के ऊपर ये घातक हमला क्यों हुआ और सब कुछ त्याग चुके इन मुनियों से भला किसको क्या हासिल होना था।
उन्होंने कहा कि ऐसी हिंसक वारदातों से एक पंथनिरपेक्ष देश के अंदर अल्पसंख्यक समुदाय में भय का वातावरण बनता है और वो असुरक्षित महसूस करता है। इससे सामाजिक सौहार्द बिगड़ता है और एक उद्यमशील, शांतिप्रिय, अहिंसक, शिक्षित समाज-समुदाय हतोत्साहित होता है, जिसका देश के सामाजिक ताने बाने और चतुर्दिक विकास पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है।
मुर्शिदाबाद 15 April, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी): पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले में वक्फ कानून के विरोध में भड़की हिंसा ने विकराल रूप ले लिया है। इस हिंसक झड़पों में अब तक 3 लोगों की जान जा चुकी है, सैकड़ों लोग घायल हुए हैं, और कई परिवारों को अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर पनाह लेनी पड़ी है।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए इलाके में केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती कर दी गई है और कड़ी निगरानी रखी जा रही है। इस बीच, भारतीय जांच एजेंसियों के सूत्रों ने इस हिंसा के पीछे एक गहरी और सुनियोजित साजिश का पर्दाफाश किया है, जिसमें विदेशी फंडिंग और आतंकी कनेक्शन होने के चौंकाने वाले संकेत मिले हैं।
जांच एजेंसियों से जुड़े सूत्रों के मुताबिक, मुर्शिदाबाद में हुई यह हिंसा कोई अचानक भड़की घटना नहीं, बल्कि इसे अंजाम देने की योजना पिछले तीन महीनों से चल रही थी। सूत्रों का दावा है कि इस हिंसा को भड़काने के लिए विदेशों से, विशेषकर तुर्की से, वित्तीय मदद भेजी गई थी।
एजेंसियों ने जांच के दौरान पाया कि यह आतंकवाद फैलाने का एक नया तरीका हो सकता है। सूत्रों ने बताया कि करीब दो महीने पहले, किसी आतंकी समूह (संभवतः एटीबी – अंसारुल्लाह बांग्ला टीम) के दो जाने-माने सदस्य मुर्शिदाबाद आए थे और उन्होंने ‘बड़ी दावत’ (जिसे एजेंसियां कोड वर्ड मान रही हैं) होने की बात कही थी।
ये लोग किसी ‘ट्रिगर पॉइंट’ यानी हिंसा शुरू करने के बहाने का इंतजार कर रहे थे। पहले रामनवमी पर माहौल बिगाड़ने की योजना थी, लेकिन कड़ी सुरक्षा के कारण ऐसा नहीं हो सका। बाद में वक्फ कानून से जुड़ा मुद्दा हिंसा भड़काने का जरिया बन गया।
खुलासे के अनुसार, हमलावरों का पहला लक्ष्य ट्रेनों को रोकना, सरकारी संपत्ति को नष्ट करना, हिंदुओं को निशाना बनाना और घरों में लूटपाट करना था। उन्हें उकसाया गया था कि वे जितनी ज्यादा तबाही मचाएंगे, उन्हें उतना ही ज्यादा पैसा दिया जाएगा।
इसके लिए बाकायदा एक सूची भी तैयार की गई थी, जिसमें बताया गया था कि किस काम के लिए कितना पैसा मिलेगा। सूत्रों का दावा है कि लूटपाट में शामिल हर हमलावर और पत्थरबाज को 500 रुपये दिए गए थे और उन्हें पिछले तीन महीनों से इसकी ट्रेनिंग दी जा रही थी।
जांच एजेंसियों के सूत्रों ने यह भी दावा किया है कि साजिशकर्ताओं की योजना बंगाल में बांग्लादेश जैसे दंगे कराने की थी, ताकि बड़े पैमाने पर अशांति फैलाई जा सके।
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में वक्फ कानून के विरोध में यह हिंसा 10 अप्रैल (2025) के आसपास शुरू हुई थी। इलाके में पहले से ही सीमा सुरक्षा बल (BSF) के करीब 300 जवान तैनात थे। हिंसा बढ़ने के बाद केंद्र सरकार ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय बलों की पांच अतिरिक्त कंपनियां भेजी हैं। फिलहाल हिंसाग्रस्त इलाकों में भारी सुरक्षा बल तैनात है और गश्त बढ़ा दी गई है।
नई दिल्ली 15 April, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी): कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी के पति रॉबर्ट वाड्रा आज प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के कार्यालय पहुंचे। उन्हें गुरुग्राम के शिकोहपुर जमीन घोटाले से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में पूछताछ के लिए बुलाया गया है।
ईडी ने उन्हें दूसरा समन जारी किया था, क्योंकि वह पहले समन पर 8 अप्रैल को पेश नहीं हुए थे। वाड्रा आज पैदल ही ईडी कार्यालय पहुंचे, जहां उनसे जमीन सौदे को लेकर पूछताछ की जा रही है।
ED ऑफिस जाते हुए वाड्रा ने कहा- जब भी मैं लोगों की आवाज बुलंद करूंगा, ये लोग मुझे दबाएंगे। ये एजेंसियों को दुरुपयोग करेंगे। जितने भी सवाल पूछेंगे, मैं हर जवाब दूंगा।
केंद्रीय जांच एजेंसी इस मामले में वाड्रा की फर्म, स्काईलाइट हॉस्पिटैलिटी (Skylight Hospitality), से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच कर रही है। ईडी ने इस भूमि सौदे को लेकर पिछले साल धन शोधन निवारण अधिनियम (PMLA) के तहत मामला दर्ज किया था।
सूत्रों के अनुसार, एजेंसी ने पहले भी वाड्रा को पूछताछ के लिए बुलाया था, लेकिन 8 अप्रैल को उनके पेश न होने के कारण अब यह नया समन जारी करना पड़ा है। नए समन में वाड्रा को आज जांच अधिकारी के समक्ष पेश होकर अपने बयान दर्ज कराने के लिए कहा गया है। ईडी इस मामले में जांच को आगे बढ़ा रही है और आज वाड्रा की पेशी पर सबकी नजरें टिकी हैं।
जयपुर 15 April, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी): प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 2,850 करोड़ रुपये के पीएसीएल घोटाले में पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास के निवास पर छापा मारा। इस मामले में ईडी कांग्रेस नेता प्रताप सिंह खाचरियावास की भूमिका की जांच में जुटी है। पीएसीएल ने देशभर में लगभग 5.85 करोड़ निवेशकों को ठगा था। सेबी ने साल 2014 में कंपनी के खिलाफ एक्शन लिया था। मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा तो 2016 में 1.86 लाख करोड़ रुपये की संपत्ति की वसूली और निवेशकों को पैसे लौटाने के उद्देश्य से एक समिति बनाई। अब इसी मामले में ईडी ने एक्शन लिया है।
उधर, छापेमारी पर कांग्रेस नेता ने कहा कि ईडी यहां तलाशी और छापेमारी करने आई है। मैं उनके साथ सहयोग कर रहा हूं। ईडी अपना काम कर रही है और मैं अपना काम करूंगा। मेरा मानना है कि भाजपा को ईडी का इस्तेमाल करके राजनीति नहीं करना चाहिए। प्रताप सिंह खाचरियावास किसी से नहीं डरता है। मुझे इन सरकारों का इलाज करना आता है।
प्रताप सिंह ने आगे कहा कि भाजपा की सरकार कान खोलकर सुन ले। ईडी और इनकम टैक्स कुछ भी भेज दो। मुझे कोई फर्क नहीं पड़ेगा। भ्रष्टाचार करने वालों को डरना चाहिए। मैं नहीं डरूंगा। उन्होंने कहा कि मुझे ईडी की तरफ से कोई नोटिस नहीं दिया गया। ईडी ने सीधे यहां छापेमारी की। इसे मैं गलत मानता हूं। प्रताप सिंह ने यह भी कहा कि मेरे ऊपर कोई भी चिटफंड का मामला नहीं है। ये गलत बात है।
प्रताप सिंह खाचरियावास ने कहा कि सरकारें बदलती रहती हैं.. यह समय भी बदलेगा। कल्पना कीजिए कि जब राहुल गांधी सत्ता में आएंगे तो भाजपा का क्या होगा। आपने (भाजपा ने) ये कार्रवाई शुरू की है। हम भी भाजपा के लोगों के खिलाफ यही करेंगे। वे जितनी चाहें… उतनी तलाशी ले सकते हैं। हम डरते नहीं हैं। हम अधिकारियों के साथ सहयोग करेंगे।
नई दिल्ली 15 April, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को जनसंवाद कार्यक्रम के दौरान मॉडल टाउन स्थित एक निजी स्कूल में अभिभावकों द्वारा फीस वसूली में अनियमितता और बच्चों को स्कूल से निकाले जाने की शिकायतों का गंभीरता से संज्ञान लिया है।
सीएम ने इस मामले में तत्काल जांच के आदेश दिए हैं और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है। सीएम रेखा गुप्ता ने साफ किया है कि शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शिता, समानता और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता अटूट है और किसी भी अनियमितता को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
सीएम रेखा गुप्ता ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक वीडियो शेयर किया। वीडियो के कैप्शन में सीएम ने कहा, “आज (मंगलवार को) जनसंवाद कार्यक्रम के दौरान क्वीन मैरी स्कूल, मॉडल टाउन से संबंधित एक मामला सामने आया, जिसमें बच्चों के परिजनों ने गलत तरीके से फीस वसूली और बच्चों को स्कूल से निकाले जाने की शिकायत दर्ज की। इस विषय पर तुरंत संज्ञान लेते हुए संबंधित अधिकारियों को तत्काल जांच कर कड़ी और आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “दिल्ली सरकार शिक्षा के क्षेत्र में पारदर्शिता, समान अवसर और बच्चों के अधिकारों की रक्षा के प्रति पूर्णतः प्रतिबद्ध है। किसी भी प्रकार का अन्याय, शोषण या अनियमितता को लेकर जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाई गई है, इसमें कोई ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। हमारा संकल्प स्पष्ट है, हर बच्चे को न्याय, सम्मान और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलनी चाहिए।”
सीएम के द्वारा जारी वीडियो में एक छात्रा के पिता कह रहे हैं कि गैर कानूनी फीस न भरने के कारण हमारी बच्ची को स्कूल में बंधक बना कर रखा गया। बच्ची ने इसकी शिकायत हमसे की। इसके बाद हम स्कूल प्रशासन के पास गए और इस मामले की शिकायत की। उनका रवैया नहीं बदला। आज भी स्कूल से फोन आया और कहा गया कि अपने बच्चे को स्कूल से ले जाइए, जब तक आप फीस नहीं भरते।
कठुआ 15 April, (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी) । श्री अमरनाथ यात्रा 2025 के लिए अग्रिम रजिस्ट्रेशन मंगलवार से शुरू हो गया, लेकिन कठुआ में पहले ही दिन पंजीकरण कराने पहुंचे भक्तों को मायूसी हाथ लगी।
पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की कठुआ शाखा में पंजीकरण की सुविधा उपलब्ध कराई गई थी, लेकिन तकनीकी खामियों के कारण काउंटर नहीं खुल सके। इससे भक्तों में निराशा और असमंजस की स्थिति पैदा हो गई।
हीरानगर से आए विकास महाजन ने बताया कि वे और उनके साथी सुबह जल्दी उठकर उत्साह के साथ रजिस्ट्रेशन के लिए पहुंचे थे। उनका इरादा 3 जुलाई को पहले जत्थे के साथ बाबा बर्फानी के दर्शन करने का था। लेकिन, बैंक प्रबंधन ने बताया कि कंप्यूटर उपलब्ध नहीं है, जिसके चलते पंजीकरण शुरू नहीं हो सका।
उन्होंने इसे निराशाजनक बताते हुए कहा कि श्री अमरनाथ जी श्राइन बोर्ड ने 14 अप्रैल से पंजीकरण शुरू होने की घोषणा की थी, लेकिन स्थानीय स्तर पर व्यवस्था की कमी ने उनके उत्साह को ठेस पहुंचाई।
इसी तरह, हीरानगर के सुमित शर्मा ने अपने साथियों के साथ पंजीकरण कराने की योजना बनाई थी। उन्होंने बताया कि उनके समूह में जम्मू और अन्य जगहों से आए भक्त भी शामिल थे।
सुमित ने कहा, “हम सुबह सात बजे से तैयार होकर आए थे। लेकिन, बैंक अधिकारियों से कोई स्पष्ट जानकारी नहीं मिली। वे कह रहे हैं कि कंप्यूटर जम्मू भेज दिया गया है और ऊपर से कोई दिशा-निर्देश नहीं मिले हैं।”
सुमित ने यह भी बताया कि उनके दिल्ली में रहने वाले कुछ दोस्तों ने वहां की बैंक शाखाओं से पंजीकरण करा लिया है, लेकिन कठुआ में स्थिति अनिश्चित बनी हुई है।
श्रद्धालुओं ने बैंक अधिकारियों पर अस्पष्ट जानकारी देने का आरोप लगाया। उनका कहना था कि पंजीकरण कब शुरू होगा, दोपहर, शाम, अगले दिन या उससे भी बाद में, इस बारे में कोई ठोस जवाब नहीं मिल रहा है। इससे लंबी दूरी तय करके आए श्रद्धालुओं का उत्साह कम हो गया। स्थानीय लोगों ने प्रशासन और श्राइन बोर्ड से बेहतर समन्वय की मांग की है, ताकि भविष्य में ऐसी परेशानियां न हों।
हालांकि, श्रद्धालुओं ने उम्मीद जताई कि जल्द ही व्यवस्था सुधरेगी और वे बाबा बर्फानी के दर्शन के लिए रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे।
श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड के अनुसार, इस साल यात्रा 3 जुलाई से शुरू होगी और 9 अगस्त तक चलेगी। रजिस्ट्रेशन के लिए अनिवार्य स्वास्थ्य प्रमाणपत्र (सीएचसी) और आधार कार्ड जैसे दस्तावेज जरूरी हैं।
बोर्ड ने देशभर में 533 बैंक शाखाओं को पंजीकरण के लिए अधिकृत किया है।
नई दिल्ली ,15 अपै्रल (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। सुप्रीम कोर्ट ने आज बाल तस्करी के मामलों से निपटने के तरीके को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार को फटकार लगाई और ऐसे अपराधों को रोकने के लिए राज्यों को पालन करने के लिए व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगर किसी नवजात बच्चे को हॉस्पिटल से चुराया जाता है तो सबसे पहले उस अस्पताल का लाइसेंस सस्पेंड होना चाहिए।
कोर्ट ने यह टिप्पणी दिल्ली- एनसीआर में नवजात बच्चों की तस्करी के गैंग के पर्दाफाश से जुड़ी खबर पर संज्ञान लेते हुए की। जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने सख्त निर्देश देते हुए निचली अदालतों को बाल तस्करी के मामलों की सुनवाई 6 महीने में पूरी करने का आदेश दिया।
कोर्ट ने कहा कि दिल्ली गैंग के पर्दाफाश की घटना अपने आप मे हतप्रभ कर देने वाली है और कोर्ट के दखल की जरूरत है। सुप्रीम कोर्ट ने चाइल्ड ट्रैफिकिंग के मामले में भारतीय इंस्टीट्यूट की तरफ दिए गए सुझावों को अपने फैसले में जगह दी है और सभी राज्य सरकारों कहा है कि उसे पढ़ कर अमल करें।
नई दिल्ली ,15 अपै्रल(Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। आयोध्या में राम मंदिर को बम से उड़ाने की धमकी के बाद प्रशासन में हड़कंप मच गया है। जानकारी के अनुसार राम जन्मभूमि ट्रस्ट के मेल पर धमकीभरा मेल आया था, जिसमें लिखा था मंदिर की सुरक्षा बढ़ा लो, अगर ऐसा नहीं होगा तो राम मंदिर को बम से उड़ा दिया जाएगा।
इस धमकी भरे मेल के पहुंचने के बाद व्यापक सर्च ऑपरेशन भी चलाया गया। अयोध्या के साथ साथ बाराबंकी और अन्य पड़ोसी जिलों में भी सतर्कता बढ़ाई गई।
इस मामले में राम जन्मभूमि ट्रस्ट कार्यालय के अकाउंट ऑफिसर महेश कुमार ने मुकदमा दर्ज करवाया है। अयोध्या के साथ-साथ बाराबंकी चंदौली समेत कई अन्य जिलों के जिलाधिकारियों को भी धमकी भरा मेल आया है।
बाराबंकी, फिरोजाबाद और चंदौली के जिलाधिकारी को बम से उड़ाने की धमकी का मेल आया है। जानकारी के अनुसार यह मेल तमिलनाडु से किए गए हैं। वहीं अन्य जिलों की बात करें तो कम से कम 10-15 जिलों के डीएम के आधिकारिक सूचना तंत्र पर धमकी भरा ई-मेल आया। धमकी भरा मेल पहुंचने के बाद व्यापक सर्च ऑपरेशन चलाया गया है।
नई दिल्ली ,15 अपै्रल (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों और विभागों में सहायक सचिव के रूप में कार्यरत 2023 बैच के आईएएस अधिकारियों के समूह से राष्ट्रपति भवन के सांस्कृतिक केंद्र में मुलाकात की।
राष्ट्रपति ने आईएएस अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि वे असाधारण दृढ़ संकल्प और कड़ी मेहनत से अधिकारी बने हैं। इससे उनके निजी जीवन में भी बड़ा बदलाव आया है।
उन्हें अब अधिक दृढ़ संकल्प और समर्पण के साथ अनगिनत लोगों के जीवन में परिवर्तनकारी बदलाव लाने का अवसर मिला है। उनके सेवा और अधिकार का क्षेत्र इतना व्यापक है कि वे अपनी पहली पोस्टिंग में ही कई नागरिकों के जीवन को बेहतर बना सकते हैं।
उन्होंने आईएएस अधिकारियों को वंचितों के उत्थान के लिए विशेष प्रयास करने की सलाह दी। उन्होंने यह भी सलाह दी कि अधिकारी अपने करियर के दौरान कुछ समय बाद पोस्टिंग वाले स्थानों पर जाएं और अपने काम के दूरगामी परिणाम देखें।
अधिकारियों को लोक सेवकों के अधिकारों और कर्तव्यों को ध्यान में रखना चाहिए। एक लोक सेवक के कर्तव्य उसकी जिम्मेदारियां हैं और उसके अधिकार उन कर्तव्यों को पूरा करने का साधन हैं।
राष्ट्रपति ने अधिकारियों से कहा कि उनके करियर की असली कहानी उनके काम से बनेगी, न कि सोशल मीडिया पर फॉलोअर्स की संख्या बढ़ाने से। उनकी असली सामाजिक संपत्ति उनके अच्छे काम से तय होगी। प्रत्येक लोक सेवक को ईमानदारी और उद्देश्य के साथ काम करना चाहिए।
पर्यावरण प्रदूषण और जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों का हम सभी सामना कर रहे हैं। नैतिकता और मूल्यों का क्षरण भी बहुत गंभीर चुनौतियां हैं। निष्ठावान और ईमानदार होने के बारे में और कुछ कहने की जरूरत नहीं है।
ईमानदारी, सच्चाई और सादगी के जीवन मूल्यों का पालन करने वाले लोग अधिक सुखी रहते हैं। लोक सेवा में ईमानदारी सबसे वांछनीय नीति है। लोक सेवक से यह अपेक्षा की जाती है कि वे जीवन के हर क्षेत्र में निष्ठा और संवेदनशीलता का उदाहरण प्रस्तुत करेंगे।
उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में लोगों की आकांक्षाएं बढ़ रही हैं। वे प्रशासकों की जवाबदेही के प्रति जागरूक हो रहे हैं। उन्होंने अधिकारियों को आमजनों के साथ निकटता बढ़ाने और स्थानीय प्रयासों में उनकी भागीदारी बढ़ाने की सलाह दी।
उन्होंने जनप्रतिनिधियों के जनहित के मुद्दों को हल करने की भी सलाह दी।
राष्ट्रपति ने कहा कि स्थानीय और राज्य स्तर पर उनके विकास और जन कल्याण के कार्य राष्ट्रीय लक्ष्यों को प्राप्त करने में मदद करेंगे।
लखनऊ ,15 अपै्रल(Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद हिंसा को लेकर एक बार फिर ममता सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि बंगाल जल रहा है और मुख्यमंत्री चुप हैं, दंगाइयों को शांति दूत कहती हैं।
सीएम योगी ने यह भी कहा कि लातों के भूत बातों से कहां मानने वाले हैं? सीएम योगी ने मंगलवार को हरदोई में अमर सेनानी राजा नरपति सिंह स्मारक स्थल पर आयोजित विभिन्न विकास कार्यों के लोकार्पण और शिलान्यास कार्यक्रम को संबोधित किया।
उन्होंने रैली को संबोधित करते हुए कहा कि याद कीजिए 2017 के पहले के उत्तर प्रदेश को, हर दूसरे-तीसरे दिन दंगा होता था, इन दंगाइयों का उपचार ही डंडा है। बिना डंडे के मानेंगे नहीं। आप देख रहे होंगे कि बंगाल जल रहा है, वहां की मुख्यमंत्री चुप हैं, दंगाइयों को शांति दूत कहती हैं, लातों के भूत बातों से कहां मानने वाले हैं, लेकिन सेकुलरिज्म के नाम पर इन लोगों ने दंगाइयों को दंगा करने की पूरी छूट दे रखी है।
सीएम योगी ने ममता सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा कि पूरा मुर्शिदाबाद एक सप्ताह से जल रहा है, राज्य सरकार मौन है, इस प्रकार की अराजकता पर लगाम लगनी चाहिए और मैं वहां के न्यायालय को इस बात के लिए धन्यवाद दूंगा कि जिन्होंने वहां पर केंद्रीय बलों की तैनाती करके अल्पसंख्यक हिंदुओं की सुरक्षा के लिए कदम उठाया है।
उन्होंने विपक्षी दलों की चुप्पी पर कहा कि सब लोग मौन हैं, मुर्शिदाबाद दंगों पर कांग्रेस और समाजवादी पार्टी मौन हैं, टीएमसी मौन है, वे धमकी पर धमकी दिए जा रहे हैं, बांग्लादेश के अंदर जो हुआ था, उसका समर्थन कर रहे हैं, अगर उन्हें बांग्लादेश अच्छा लगता है, तो उन्हें बांग्लादेश जाना चाहिए, क्यों भारत की धरती पर बोझ बने हुए हैं?
सीएम योगी ने जिक्र किया कि हम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के आभारी हैं, जिन्होंने वक्फ कानून को लाकर गरीबों की जमीनों पर डकैती पर लगाम लगाने का काम किया है, अब जो जमीन वापस आएगी, उस पर अस्पताल, गरीबों के लिए घर, ऊंची इमारतें, स्कूल और विश्वविद्यालय बनाए जाएंगे।
निवेश के लिए भूमि बैंक बनाया जाएगा। लेकिन, किसी को भी जमीन पर कब्जा करने और गुंडागर्दी करने की इजाजत नहीं दी जाएगी। इसलिए ये लोग चिंतित हैं क्योंकि जमीन के नाम पर लूट बंद होने वाली है।
उन्होंने वक्फ कानून का विरोध करने वालों पर तंज कसते हुए कहा कि वे सभी परेशान हैं कि अब उनके गुर्गे खाली हो जाएंगे, जो पहले जनता को लूटते थे, इनको अब भय है कि इनके द्वारा पाले गए गुर्गे भस्मासुर बन जाएंगे और इन्हें ही ना लूटना शुरू कर दें। इसलिए, ये अब वक्फ के नाम पर लोगों को बेवकूफ बना रहे हैं और उन्हें गुमराह करने का काम कर रहे हैं।
नई दिल्ली ,14 अपै्रल(Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। दिल्ली सरकार ने बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए पुरानी गाडिय़ों पर शिकंजा कसने की तैयारी कर ली है। सरकार ने 15 साल से पुरानी गाडिय़ों का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया है। दिल्ली में 15 साल से पुराने वाहन करीब 55 लाख से ज्यादा है।
परिवहन विभाग द्वारा जारी सूचना के मुताबिक 2024 से दिल्ली में 10 साल से पुरानी डीजल और 15 साल से पुरानी पेट्रोल/सीएनजी गाडिय़ों का रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया है। इन वाहनों में ट्रक, कैब, कार, मोटरसाइकिल और ऑटो रिक्शा भी शामिल है। सार्वजनिक जगहों पर इन गाडिय़ों को पार्क करने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया गया है।
इसमें घर के बाहर की जगह भी शामिल है। वहीं, इन पुराने वाहनों को फ्यूल स्टेशन पर पेट्रोल और डीजल भी नहीं मिलेगा इस नई नीति को लागू करने के लिए दिल्ली के 477 फ्यूल स्टेशनों पर ्रहृक्कक्र (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) कैमरे लगाए जा चुके हैं।
अगर ये पुराने वाहन दिल्ली के सार्वजनिक स्थानों में चलती या पार्क होती दिखाई दीं तो इन्हें जब्त किया जा सकता है। इसके अलवा 5 हजार या 10 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
बता दें कि सरकार ने यह फैसला पर्यावरण संरक्षण, वाहन जाम में कमी, और सड़क सुरक्षा जैसे कारणों को ध्यान में रखते हुए लिया है। परिवहन विभाग, दिल्ली ट्रैफिक पुलिस, नई दिल्ली नगरपालिका परिषद, दिल्ली नगर निगम और दिल्ली छावनी बोर्ड ऐसे वाहनों को जब्त कर सकते हैं।
1800 करोड़ की ड्रग्स देख फटी रह गईं कोस्टगार्ड की आंखें
अहमदाबाद ,14 अपै्रल (Final Justice Digital News Desk/एजेंसी)। गुजरात एटीएस और भारतीय तटरक्षक बल (कॉस्टगार्ड) ने भारतीय जल सीमा से 1800 करोड़ रुपये मूल्य के नशीले पदार्थों के 311 पैकेट बरामद किए हैं।
एटीएस सूत्रों ने सोमवार को यहां बताया कि 10 अप्रैल को सूचना मिली थी कि पाकिस्तान के फिदा नामक ड्रग माफिया का लगभग 400 किलोग्राम अवैध मादक पदार्थ पसनी बंदरगाह से एक पाकिस्तानी मछली पकडऩे वाली नाव में 12 अप्रैल को रात 2 बजे से 13 अप्रैल की सुबह 04.00 बजे के दौरान पोरबंदर के अंतरराष्ट्रीय समुद्री सीमा रेखा (आईएमबीएल) के पास भारतीय जल क्षेत्र में आएगा और चैनल नंबर 48 पर अपने कॉल साइन ‘रमिज’ के नाम से तमिलनाडु की ओर से किसी भी नाव को ‘सादिक’ के नाम से बुलाकर उसे देगा और वह मादक पदार्थ की मात्रा तमिलनाडु ले जाएगा।
सूचना के आधार पर एटीएस और तटरक्षक बल (कॉस्टगार्ड) के उच्च अधिकारियों ने इसे तुरंत गंभीरता से लिया और एटीएस. और तटरक्षक अधिकारियों ने इस संबंध में एक ऑपरेशन तैयार किया, जिसके तहत एटीएस और तटरक्षक अधिकारी भारतीय जल सीमा में संभावित स्थान पर पहुंच गए और निगरानी करते रहे।
इस बीच जब इस जानकारी वाली नाव को आईएमबीएल के पास देखा गया और तट रक्षक जहाज द्वारा रोका जाने वाला था, तो इस नाव पर मौजूद लोगों ने नीले (ब्ल्यू) ड्रमों को समुद्र में फेंक दिया और आईएमबीएल की ओर बढऩा शुरू कर दिया। तटरक्षक बल ने पाकिस्तानी नाव का पीछा किया लेकिन पाकिस्तानी नाव आईएमबीएल पार कर भाग निकली। लेकिन ड्रम बरामद कर लिए गए।
इन बरामद ड्रमों की जांच करने पर कुल 311 पैकेटों में लगभग 311 किलोग्राम मादक पदार्थ मिला, जिसका अनुमानित अंतरराष्ट्रीय बाजार मूल्य 1800 करोड़ रुपये है। इस संबंध में गुजरात एटीएस ने मामला दर्ज कर लिया है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है। गुजरात एटीएस ने समुद्र के रास्ते मछली पकडऩे के जाल के जरिए तस्करी किए जा रहे नशीले पदार्थों के संबंध में 2018 से अब तक दर्ज किए गए कुल 20 मामले हैं।
जिनमें अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार मूल्य 10277.12 करोड़ रुपये कीमत के 5454.756 किलोग्राम ड्रग्स और पकड़े गए आरोपी 163 हैं। गिरफ्तार आरोपियों में विदेशी नागरिक, पाकिस्तानी 77, ईरानी 34, अफगानी चार, नाइजीरियाई दो और 46 भारतीय शामिल हैं।
उल्लेखनीय है कि गुजरात सरकार गुजरात राज्य में आतंकवाद और किसी भी प्रकार की घुसपैठ और मादक द्रव्य अपराध को पूरी तरह से खत्म करने के लिए प्रतिबद्ध है। जिसक अंतर्गत गुजरात राज्य के 1600 कि.मी. संवेदनशील समुद्री क्षेत्र में किसी भी प्रकार की आतंकवादी घटना को होने से रोकना।
इतने संवेदनशील समुद्री मार्ग पर कोई अवैध गतिविधि न हो, इसके लिए लगातार निगरानी रखी जा रही है। गुजरात एटीएस, तटरक्षक बल और अन्य सुरक्षा एजेंसियां यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध हैं कि गुजरात समुद्री तट पाकिस्तान प्रेरित नशीले पदार्थों के सिंडिकेट का लक्ष्य न बने।