Operation Trident: NCB raids 38 locations, 18 arrested; 1,424 bank accounts frozen

Operation Trident: 38 ठिकानों पर NCB की छापेमारी, 18 गिरफ्तार; 1,424 बैंक खाते फ्रीज

100 करोड़ रुपये के हवाला लेनदेन का खुलासा, 17.82 करोड़ की संपत्ति जब्त; अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स सिंडिकेट के वित्तीय नेटवर्क पर प्रहार

नई दिल्ली। नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ केंद्र सरकार ने बड़ी कार्रवाई की है। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) के नेतृत्व में चलाए गए ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ के तहत असम, मिजोरम और मणिपुर में एक साथ 38 ठिकानों पर छापेमारी की गई। 23 अक्टूबर 2026 को शुरू किए गए इस संयुक्त अभियान में 18 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। कार्रवाई के दौरान करीब 100 करोड़ रुपये के हवाला लेनदेन का खुलासा हुआ, जबकि 1,424 बैंक खातों को फ्रीज कर दिया गया और 17.82 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई।

केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने इस कार्रवाई को नशे के कारोबार के खिलाफ मोदी सरकार का बड़ा प्रहार बताते हुए कहा कि सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति के तहत अंतरराष्ट्रीय नारकोटिक्स नेटवर्क को जड़ से खत्म करने का अभियान जारी रहेगा।

38 टीमों ने तीन राज्यों में एक साथ की कार्रवाई

NCB ने मिजोरम पुलिस और प्रवर्तन निदेशालय (ED) समेत विभिन्न केंद्रीय एवं राज्य एजेंसियों के सहयोग से यह अभियान चलाया। इसके तहत 38 संयुक्त टीमों ने तीन राज्यों में पहले से चिह्नित 38 स्थानों पर एक साथ छापेमारी की।

कार्रवाई के दौरान मिजोरम की राजधानी आइजॉल, चम्फाई और भारत-म्यांमार सीमा के रणनीतिक व्यापारिक कस्बे जोखॉथर में तलाशी ली गई। इसके अलावा मणिपुर के चूड़ाचांदपुर और असम के कछार क्षेत्र के महत्वपूर्ण ट्रांजिट कॉरिडोर में भी कार्रवाई की गई।

जांच एजेंसियों ने तस्करी नेटवर्क के लॉजिस्टिक्स केंद्रों, संदिग्धों के ठिकानों और वित्तीय लेनदेन से जुड़े स्थानों को निशाना बनाया। अभियान का उद्देश्य केवल मादक पदार्थों की बरामदगी तक सीमित नहीं था, बल्कि तस्करी के पूरे नेटवर्क और उसके आर्थिक आधार को खत्म करना था।

100 करोड़ के हवाला नेटवर्क का खुलासा

ऑपरेशन ट्राइडेंट के दौरान जांच एजेंसियों ने अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स सिंडिकेट से जुड़े करीब 100 करोड़ रुपये के हवाला लेनदेन का पता लगाया है।

कार्रवाई के दौरान:

  • 1,424 बैंक खाते फ्रीज किए गए।
  • 17.82 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की गई।
  • 500 डेटोनेटर बरामद किए गए।
  • 12 लाख रुपये नकद जब्त किए गए।
  • 18 लोगों को गिरफ्तार किया गया।

जांच में सामने आए वित्तीय लेनदेन के आधार पर एजेंसियां नेटवर्क से जुड़े सहयोगियों, मुखौटा कंपनियों और धन हस्तांतरित करने वाले बिचौलियों की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं।

म्यांमार से भारत और बांग्लादेश तक फैला था तस्करी का नेटवर्क

गृह मंत्री अमित शाह के मुताबिक, यह अंतरराष्ट्रीय नारको-कार्टेल तथाकथित ‘डेथ ट्रायंगल कॉरिडोर’ के जरिए भारत, म्यांमार और बांग्लादेश की सीमाओं से नशीले पदार्थों की तस्करी करता था।

जांच एजेंसियों के अनुसार, गिरोह म्यांमार से मादक पदार्थों की खेप भारत में लाकर मिजोरम, मणिपुर और असम के रास्ते आगे पहुंचाता था। इसके बाद तस्करी नेटवर्क भारत के मुख्य भूभाग और बांग्लादेश तक सक्रिय रहता था।

इस नेटवर्क में मेथामफेटामाइन और हेरोइन की तस्करी के साथ-साथ खेपों की आवाजाही, वित्तीय लेनदेन और हवाला के जरिए अवैध धन को स्थानांतरित करने की व्यवस्था शामिल थी।

अंतरराष्ट्रीय गिरोह के सरगना समेत कई प्रमुख आरोपी गिरफ्तार

NCB और अन्य एजेंसियों की जांच में म्यांमार स्थित सरगना थांगसिंतुआंग उर्फ चिंतुआंग उर्फ त्लुआंगा के नेतृत्व वाले अंतरराष्ट्रीय तस्करी गिरोह का खुलासा हुआ।

जांच के पिछले चरणों में नेटवर्क के कई प्रमुख सदस्यों को गिरफ्तार किया गया था।

थांगसिंतुआंग उर्फ चिंतुआंग उर्फ त्लुआंगा: गिरोह का कथित सरगना। विभिन्न राज्यों में निगरानी और खुफिया जानकारी जुटाने के बाद उसे दिल्ली से गिरफ्तार किया गया। वह NCB, चम्फाई पुलिस और मिजोरम आबकारी विभाग में NDPS अधिनियम के तहत दर्ज 10 से अधिक मामलों में वांछित था।

वुंगखानथॉना: गिरोह का प्रमुख सहयोगी, जो म्यांमार से आने वाली मादक पदार्थों की खेपों की आवाजाही और डिलीवरी का समन्वय करता था। उसे गिरफ्तार करने के बाद PIT-NDPS अधिनियम के तहत हिरासत में लिया गया।

ललरमपारी: नेटवर्क की प्रमुख हवाला संचालक। NCB ने उसे 8 अगस्त 2024 को गिरफ्तार किया था। जांच में उसके नेटवर्क से जुड़े करीब 100 करोड़ रुपये के अवैध हवाला लेनदेन का खुलासा हुआ। इसके बाद ED के साथ संयुक्त कार्रवाई कर अवैध संपत्तियों को फ्रीज किया गया।

अबू सालेह उर्फ सैफुद्दीन: असम कॉरिडोर में तस्करी का प्रमुख लॉजिस्टिक्स संचालक। उसे 20 नवंबर 2025 को असम के कछार से गिरफ्तार किया गया था। वह मादक पदार्थों की ढुलाई का समन्वय करता था और NDPS अधिनियम के तहत दर्ज कई मामलों से जुड़ा था।

वित्तीय और डिजिटल जांच से सामने आया पूरा नेटवर्क

जांच के दौरान एजेंसियों ने वित्तीय विश्लेषण और डिजिटल फॉरेंसिक तकनीकों की मदद से गिरोह के सहयोगियों, मुखौटा कंपनियों और धन हस्तांतरण में शामिल बिचौलियों की पहचान की।

इसके बाद संयुक्त अभियान के तहत एक साथ तलाशी, पूछताछ और वित्तीय जांच की गई, ताकि संदिग्धों को फरार होने और अवैध संपत्तियों को छिपाने का मौका नहीं मिले।

अधिकारियों के अनुसार, इस कार्रवाई में केंद्रीय एजेंसियों और तीनों राज्यों की पुलिस के बीच खुफिया सूचनाओं का आदान-प्रदान तथा संयुक्त रणनीति महत्वपूर्ण रही।

2029 तक ड्रग्स नेटवर्क खत्म करने का लक्ष्य

गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि मोदी सरकार का लक्ष्य 31 दिसंबर 2029 तक देश में नशीले पदार्थों के हर नेटवर्क को जड़ से खत्म करना है।

उन्होंने ‘ऑपरेशन ट्राइडेंट’ को नशीले पदार्थों के खिलाफ सरकार की जीरो टॉलरेंस नीति और संगठित तस्करी के आर्थिक स्रोतों पर कार्रवाई का उदाहरण बताया।

शाह ने केंद्रीय एजेंसियों और असम, मिजोरम तथा मणिपुर की पुलिस टीमों को संयुक्त अभियान की सफलता के लिए बधाई दी।

उन्होंने कहा कि अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्करी गिरोहों का पूरी तरह खात्मा होने तक कार्रवाई जारी रहेगी।

ऑपरेशन ट्राइडेंट को पूर्वोत्तर भारत में अंतरराष्ट्रीय ड्रग्स तस्करी और हवाला नेटवर्क के खिलाफ बड़ी कार्रवाई माना जा रहा है। जांच एजेंसियों का अगला लक्ष्य इस नेटवर्क से जुड़े अन्य सहयोगियों, वित्तीय स्रोतों और सीमा पार तस्करी के पूरे तंत्र का पता लगाना है।

***************************

#OperationTrident #NCB #AmitShah #DrugSmuggling #DrugCartel #BreakingNews #IndiaNews #Narcotics #Assam #Mizoram #Manipur #HawalaNetwork