On the occasion of the 75th year (Platinum Jubilee Year) of the implementation of the Constitution of India, Constitution Day was also celebrated with joy and dignity in Ranchi district.

भारत के संविधान के लागू होने के 75वें वर्ष (प्लैटिनम जुबिली वर्ष) के अवसर पर राँची जिला में भी संविधान दिवस हर्षोल्लास एवं गरिमा के साथ मनाया गया

उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में भारतीय संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक पठन किया गया।

जिला स्तरीय विभिन्न विभागों के वरीय पदाधिकारी एवं कर्मचारीगण भारतीय संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक पठन किया

“भारतीय संविधान न केवल एक दस्तावेज है, अपितु यह हमारी लोकतांत्रिक परंपरा, समानता, न्याय और स्वतंत्रता का जीवंत प्रतीक है। संविधान की प्रस्तावना में निहित मूल्यों को हमें अपने दैनिक कार्यों में आत्मसात करना चाहिए”:- उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री

भारत के संविधान के लागू होने के 75वें वर्ष (प्लैटिनम जुबिली वर्ष) के अवसर पर आज दिनांक 26 नवंबर 2025 को राँची जिला में भी संविधान दिवस हर्षोल्लास एवं गरिमा के साथ मनाया गया।

जिला प्रशासन राँची द्वारा समाहरणालय ब्लॉक-A स्थित पोर्टिको क्षेत्र में एक औपचारिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया।

राँची,26.11.2025 – उपायुक्त सह जिला दंडाधिकारी, राँची श्री मंजूनाथ भजन्त्री की अध्यक्षता में आयोजित इस कार्यक्रम में भारतीय संविधान की प्रस्तावना का सामूहिक पठन किया गया। कार्यक्रम में, उप विकास आयुक्त राँची, श्री सौरभ भुवनिया, अपर जिला दंडाधिकारी (विधि-व्यवस्था), राँची, श्री राजेश्वर नाथ आलोक, अपर समाहर्ता, श्री रामनारायण सिंह, परियोजना निदेशक ITDA, सह जिला कल्याण पदाधिकारी, श्री संजय कुमार भगत, विशिष्ट अनुभाजन पदाधिकारी, श्रीमती मोनी कुमारी, जिला नजारत उप समाहर्ता, डॉ. सुदेश कुमार, जिला आपूर्ति पदाधिकारी, श्री रामगोपाल पांडेय, एल.आर. डी.सी., श्री मुकेश कुमार, जिला पंचायत राज पदाधिकारी, राजेश कुमार साहू, जिला जनसंपर्क पदाधिकारी, श्रीमती उर्वशी पांडेय, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी, श्रीमती सुरभि सिंह एवं जिला स्तरीय विभिन्न विभागों के वरीय पदाधिकारी एवं कर्मचारीगण उपस्थित थे।

उपायुक्त श्री मंजूनाथ भजन्त्री ने अपने संबोधन में कहा कि “भारतीय संविधान न केवल एक दस्तावेज है, अपितु यह हमारी लोकतांत्रिक परंपरा, समानता, न्याय और स्वतंत्रता का जीवंत प्रतीक है। संविधान की प्रस्तावना में निहित मूल्यों को हमें अपने दैनिक कार्यों में आत्मसात करना चाहिए।”

भारत का संविधान

“हम, भारत के लोग, भारत को एक सम्पूर्ण

प्रभुत्व-संपन्न समाजवादी पंथनिरपेक्ष लोकतंत्रात्मक गणराज्य बनाने के लिए, तथा उसके समस्त नागरिकों कोः

सामाजिक, आर्थिक, और राजनैतिक न्याय; विचार, अभिव्यक्ति, विश्वास, धर्म, और उपासना की स्वतंत्रता;

प्रतिष्ठा और अवसर की समता प्राप्त करने के लिए, तथा उन सब में व्यक्ति की गरिमा और राष्ट्र की एकता और अखंडता सुनिश्चित करने वाली बंधुता बढ़ाने के लिए

दृढ़संकल्प होकर अपनी इस संविधान सभा में आज तारिख २६ नवंबर, १९४९ ई (मिति मार्गशीर्ष शुक्ल सप्तमी, सम्वत दो हजार छह विक्रमी) को एतद्वारा इस संविधान को अंगीकृत, अधिनियमित, और आत्मार्पित करते हैं।”

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