'My Bharat' and NSS are two pillars of youth development working towards a common goal—'Viksit Bharat' (Developed India) Dr. Mansukh Mandaviya

माय भारत और एनएसएस युवा विकास के दो स्तंभ हैं जो एक ही लक्ष्य – विकसित भारत – की दिशा में काम कर रहे हैं : डॉ. मनसुख मांडविया

नई दिल्ली – युवा कार्य और खेल मंत्रालय का दो दिवसीय चिंतन शिविर आज भारतीय प्रबंधन संस्‍थान (आईआईएम), शिलांग में संपन्न हुआ। इस दौरान युवा सहभागिता को सशक्त बनाने, संस्थागत समन्वय में सुधार लाने तथा विकसित भारत 2047 के लक्ष्य को गति देने से संबंधित विषयों पर गहन विचार-विमर्श किया गया। इस कार्यक्रम में देशभर से युवा कार्य विभाग, माय भारत तथा नेशनल सर्विस स्‍कीम (एनएसएस) के अधिकारियों ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा किए, श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों की पहचान की तथा जमीनी स्तर पर प्रभावी क्रियान्वयन के लिए व्यावहारिक और कार्यान्वित किए जा सकने वाले समाधान बताए।

 

चिंतन शिविर के दूसरे दिन युवा कार्य और खेल मंत्री डा. मनसुख मांडविया; युवा कार्य और खेल राज्‍य मंत्री श्रीमती रक्षा निखिल खड़से; युवा कार्य विभाग की सचिव डा. पल्‍लवी जैन गोविल; मंत्रालय के अपर सचिव श्री नितेश कुमार मिश्रा; माय भारत की सीईओ डा. प्रियांका शुक्‍ला; मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी तथा मेरा युवा भारत और नेशनल सर्विस स्‍कीम के क्षेत्रीय कार्यकर्ताओं ने भाग लिया।

सभा को संबोधित करते हुए डा. मनसुख मांडविया ने कहा: “माय भारत और एनएसएस युवा विकास के दो स्तंभ हैं, जो एक ही लक्ष्य—विकसित भारत—की दिशा में कार्य कर रहे हैं। जहाँ एनएसएस परिसर (कैंपस) स्तर पर युवाओं को जोड़ता है, वहीं माय भारत उन्हें जमीनी स्तर पर सक्रिय करता है। दोनों मिलकर राष्ट्र निर्माण के लिए एक सशक्त जन-आंदोलन खड़ा कर सकते हैं।”

डा. मांडविया ने इस बात पर जोर दिया कि प्रतिभागियों से प्राप्त प्रतिक्रिया चिंतन शिविर की सफलता को दर्शाती है। उन्होंने राष्ट्रीय लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए आत्म-जागरूकता, प्रतिबद्धता, नवाचार और समन्वय के महत्व पर जोर किया। उन्होंने जिला युवा अधिकारियों से अपने-अपने जिलों में नेतृत्वकर्ता और प्रेरक की भूमिका निभाने का आह्वान किया। साथ ही युवाओं की भागीदारी बढ़ाने, श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों का दस्तावेजीकरण करने तथा स्थानीय साझेदारियों और सामुदायिक सहभागिता के माध्यम से युवा क्लबों के नेटवर्क को मजबूत करने पर बल दिया।

डॉ. मांडविया ने कहा कि चिंतन शिविर की वास्तविक सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि इससे प्राप्‍त सीख को जिला स्तर पर कितने प्रभावी ढंग से लागू किया जाता है। उन्होंने अधिकारियों को युवाओं की बात ध्यान से सुनने, उनकी आकांक्षाओं को समझने, समाधान-केन्‍द्रित दृष्टिकोण अपनाने तथा दृढ़ संकल्प के साथ अधिक से अधिक युवाओं को माय भारत की पहलों से जोड़ने के लिए कार्य करने की आवश्यकता पर जोर दिया।

समापन समारोह के दौरान वित्त वर्ष 2025–26 में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों और इकाइयों को उनके उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मानित किया गया। भौतिक एवं वित्तीय प्रगति के आधार पर त्रिपुरा, झारखंड और मिजोरम को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले राज्यों के रूप में मान्यता प्रदान की गई। विकसित भारत विलेज क्विज़ पहल के अंतर्गत उत्‍तरी 24 परगना (पश्चिम बंगाल), पटना (बिहार), बरईपुर (पश्चिम बंगाल) को सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले जिलों के रूप में सम्मानित किया गया।

विभिन्न राज्यों से आए प्रतिभागियों ने अपने अनुभव साझा करते हुए चिंतन शिविर को सीखने, मार्गदर्शन प्राप्त करने, समन्वय बढ़ाने और विचारों के आदान-प्रदान के लिए एक महत्वपूर्ण मंच बताया। कई अधिकारियों ने कहा कि इस शिविर की चर्चाओं ने उनके आत्मविश्वास को बढ़ाया, विभागीय प्राथमिकताओं के प्रति उनकी समझ को मजबूत किया तथा जमीनी स्तर पर कार्यक्रमों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए व्यावहारिक मार्गदर्शन प्रदान किया।

धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत करते हुए प्रियंका शुक्‍ला ने कहा कि यह चिंतन शिविर पूर्वोत्‍तर क्षेत्र में विभाग द्वारा आयोजित अपनी तरह का सबसे बड़ा कार्यक्रम था। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इस शिविर के परिणाम देशभर में युवाओं की अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने और विभिन्न कार्यक्रमों के अधिक प्रभावी क्रियान्वयन में सहायक सिद्ध होंगे

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