नई दिल्ली – भारतीय दिवालियापन एवं दिवालियापन बोर्ड (आईबीबीआई) ने इनसोल इंडिया के सहयोग से तीसरे अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन का आयोजन किया । इस कार्यक्रम में विभिन्न न्यायक्षेत्रों के प्रतिष्ठित विशेषज्ञ, नीति निर्माता, विधि विशेषज्ञ और पेशेवर एक साथ आए और आईबीसी के परिवर्तनकारी दशक पर विचार-विमर्श किया तथा भारत में दिवालियापन समाधान के लिए आगे की राह पर चर्चा की।
राष्ट्रीय कंपनी विधि न्यायाधिकरण के अध्यक्ष, न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रामलिंगम सुधाकर ने मुख्य अतिथि के रूप में इस अवसर की शोभा बढ़ाई। अपने संबोधन में उन्होंने दिवालियापन और दिवालिया संहिता की उल्लेखनीय यात्रा का वर्णन किया और भारत में दिवालियापन समाधान के क्षेत्र पर इसके परिवर्तनकारी प्रभाव को रेखांकित किया। उन्होंने संहिता के कार्यान्वयन में राष्ट्रीय दिवालियापन न्यायालय (एनसीएलटी) के बेहतर प्रदर्शन पर प्रकाश डाला और इस बात पर बल दिया कि दिवालियापन के लिए एक समर्पित न्यायिक ढांचा स्थापित करना, आईबीसी से पहले की व्यवस्था की तुलना में संहिता की सफलता में योगदान देने वाला एक प्रमुख पहलू रहा है। उन्होंने कहा कि आईबीसी ने चूक को प्रभावी ढंग से रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हुए ऋण अनुशासन को बढ़ाया है। सभी हितधारकों के सहयोगात्मक प्रयासों को स्वीकार करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय दिवालियापन ढांचा वैश्विक स्तर पर उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए एक आदर्श मॉडल के रूप में कार्य कर सकता है।
वित्त मंत्रालय के वित्तीय सेवा विभाग के सचिव श्री एम. नागराजू ने अपने विशेष संबोधन में बैंकिंग क्षेत्र की स्थिति सुधारने में आईबीसी के महत्वपूर्ण योगदान पर जोर दिया, जिसमें गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) में कमी और मुनाफे में वृद्धि शामिल है। उन्होंने देनदार-लेनदार व्यवस्था में आईबीसी द्वारा लाए गए व्यवहारिक परिवर्तनों और हितधारकों के बीच निरंतर सहयोग के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ चुनौतियों पर निरंतर ध्यान देने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि ढांचे में प्रस्तावित संशोधन इन मुद्दों को हल करने में महत्वपूर्ण योगदान देंगे। उन्होंने आचार संहिता के प्रभावी कार्यान्वयन को मजबूत करने के लिए वित्तीय सेवा विभाग द्वारा की गई विभिन्न पहलों पर भी प्रकाश डाला।
आईबीबीआई के अध्यक्ष श्री रवि मित्तल ने एक विशेष संबोधन दिया, जिसमें उन्होंने पिछले एक दशक में दिवालियापन और दिवालिया संहिता के विकास का विवरण दिया। इसकी प्रमुख उपलब्धियों पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा कि इस अवधि में आईबीसी काफी परिपक्व हो गया है और आज भारत के पास वैश्विक स्तर पर सबसे मजबूत दिवालियापन समाधान ढांचों में से एक है। उन्होंने बताया कि संहिता ने कई मोर्चों पर सकारात्मक परिणाम दिए हैं, जिनमें बेहतर ऋण अनुशासन, गैर-निष्पादित परिसंपत्तियों में कमी, समय पर समाधान को बढ़ावा देना और कंपनियों के समाधान के बाद के प्रदर्शन में सुधार शामिल हैं। उन्होंने आईआईएम अहमदाबाद और आईआईएम बैंगलोर द्वारा किए गए अध्ययनों का भी उल्लेख किया, जो क्रमशः उधारकर्ताओं के बीच बेहतर ऋण अनुशासन और आईबीसी के तहत हल की गई कंपनियों के परिचालन और वित्तीय प्रदर्शन में सुधार को रेखांकित करते हैं।
इनसोल इंडिया की अध्यक्ष सुश्री पूजा महाजन ने अपने स्वागत भाषण में दिवालियापन पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करने में इनसोल इंडिया की भूमिका पर प्रकाश डाला और दिवालियापन समाधान में सर्वोत्तम प्रथाओं को बढ़ावा देने और अंतरराष्ट्रीय सहयोग को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से संगठन की हालिया पहलों की रूपरेखा प्रस्तुत की।
उद्घाटन सत्र के समापन पर आईबीबीआई के पूर्णकालिक सदस्य डॉ. भूषण कुमार सिन्हा ने धन्यवाद ज्ञापन दिया। सभी गणमान्य व्यक्तियों और हितधारकों को धन्यवाद देते हुए उन्होंने बैंकिंग क्षेत्र और समग्र अर्थव्यवस्था पर आईबीसी के सकारात्मक प्रभाव को रेखांकित किया।
इस सम्मेलन में पाँच ज्ञानवर्धक पैनल चर्चाएँ हुईं। पहली पैनल चर्चा “दिवालियापन और दिवालियापन संहिता, 2016 के 10 वर्ष” विषय पर थी। प्रतिष्ठित पैनलिस्टों में आईबीबीआई के पूर्णकालिक सदस्य श्री जयंती प्रसाद, एजेडबी एंड पार्टनर्स के संस्थापक और वरिष्ठ भागीदार श्री बहराम वकील, विश्व बैंक की सुश्री एंटोनिया मेनेजेस और नियोस्ट्रेट एडवाइजर्स एलएलपी के संस्थापक श्री अबीजर दीवानजी शामिल थे। सत्र का संचालन एजेडबी एंड पार्टनर्स के भागीदार श्री सुहर्ष सिन्हा ने किया। पैनल ने आईबीसी के परिवर्तनकारी प्रभाव पर विचार-विमर्श किया, प्रमुख उपलब्धियों और चुनौतियों पर चर्चा की और भारत में दिवालियापन समाधान के लिए आगे के रास्ते पर विचार-विमर्श किया।
दूसरी पैनल चर्चा “संपत्ति का पता लगाना, प्रवर्तन और वसूली” पर केंद्रित थी। पैनल में आईबीबीआई के पूर्णकालिक सदस्य, श्री संदीप गर्ग, , सिंगापुर कैरी ओल्सेन के पार्टनर श्री जेम्स नोबल, बीवीआई के पार्टनर श्री मार्क जे. फोर्टे, ऊन एंड बाजुल, सिंगापुर के पार्टनर श्री कीथ हान, और भारत की दिवालियापन विशेषज्ञ, सुश्री पूजा बाहरी, शामिल थीं। सत्र का संचालन शार्दुल अमरचंद मंगलदास एंड कंपनी के पार्टनर श्री सौरभ पांडा ने किया। पैनल ने विभिन्न न्यायक्षेत्रों में संपत्ति का पता लगाने और वसूली में समकालीन चुनौतियों और सर्वोत्तम प्रथाओं पर चर्चा की।
तीसरी पैनल चर्चा “अदालती कार्यवाही के बाहर समाधान और पूर्व-पैकेज्ड दिवालियापन समाधान” पर थी। पैनल में शामिल प्रख्यात वक्ताओं में आईबीबीआई के पूर्व पूर्णकालिक सदस्य श्री सुधाकर शुक्ला, क्रोल सिंगापुर के एमडी श्री जेम्स एलेक्सियो, हिल्को ग्लोबल, संयुक्त राज्य अमेरिका के उपाध्यक्ष श्री जेमी एचएम स्प्रेरेगन, बैंक ऑफ इंग्लैंड के वरिष्ठ प्रबंधक श्री रॉब डाउनी और स्वामीह फंड के प्रधान निवेश अधिकारी श्री रजत गोयल शामिल थे। सत्र का संचालन ईवाई के पार्टनर श्री पुलकित गुप्ता ने किया। पैनल ने आईबीसी के तहत समय पर समाधान सुनिश्चित करने में अदालती कार्यवाही के बाहर पुनर्गठन तंत्र और पूर्व-पैकेज्ड दिवालियापन ढांचे की प्रभावकारिता पर विचार-विमर्श किया।
चौथी पैनल चर्चा का विषय “संकटग्रस्त अधिग्रहण और विशेष परिस्थितियों का वित्तपोषण” था। पैनल में कार्गमैन एसोसिएट्स, यूएसए के संस्थापक एवं अध्यक्ष, श्री स्टीवन टी. कार्गमै, बर्ड एंड बर्ड, सिंगापुर के लीगल हेड श्री अशोक कुमार, ऑथम इन्वेस्टमेंट एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड के ग्रुप सीईओ श्री आकाश सूरी, श्री अपूर्व मधुप, इंडिया फाइनेंसिंग, ड्यूश बैंक के एमडी एवं हेड, श्री अपूर्व मधुप, और स्वामीह फंड के चीफ इन्वेस्टमेंट ऑफिसर, श्री अब्दुल कादर सूरिया शामिल थे। सत्र का संचालन डॉ. सिद्धार्थ श्रीवास्तव, पार्टनर, खैतान एंड कंपनीज ने किया। पैनल ने संकटग्रस्त परिसंपत्ति वित्तपोषण के बदलते परिदृश्य और आवास क्षेत्र के विशेष संदर्भ में समाधान तंत्र में वैकल्पिक निवेश फंडों की भूमिका पर चर्चा की।
पांचवीं पैनल चर्चा “यूएनसीआईटीआरएएल मॉडल कानून और सीमा पार दिवालियापन” विषय पर थी। पैनल में शामिल विशिष्ट वक्ताओं में यूएनसीआईटीआरएएल की वरिष्ठ कानूनी अधिकारी सुश्री समीरा मुसायेवा; नॉर्टन रोज़ फुलब्राइट, ऑस्ट्रेलिया के पुनर्गठन विभाग के वैश्विक प्रमुख श्री स्कॉट एटकिंस; नॉटिंघम लॉ स्कूल की प्रोफेसर सुश्री रेबेका पैरी; इंसॉल्वेंसी लॉ अकादमी, भारत के अध्यक्ष श्री सुमंत बत्रा; और स्काइरीन एडवोकेट्स एंड सॉलिसिटर्स, मलेशिया की पार्टनर सुश्री शेरोन चोंग शामिल थीं। सत्र का संचालन बीडीओ इंडिया की ग्रुप जनरल काउंसल सुश्री सलोनी कोठारी ने किया। पैनल ने सीमा पार दिवालियापन के लिए यूएनसीआईटीआरएएल मॉडल कानून को अपनाने के महत्व और इसके कार्यान्वयन के लिए भारत की तैयारियों पर विचार-विमर्श किया।
इस सम्मेलन में दिवालियापन विशेषज्ञों, कानूनी विशेषज्ञों, परामर्श फर्मों, वित्तीय लेनदारों, समाधान आवेदकों, सेवा प्रदाताओं, नियामकों, शिक्षाविदों और सरकारी अधिकारियों सहित आईबीसी पारिस्थितिकी तंत्र के बड़ी संख्या में हितधारकों ने भाग लिया।
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