आंध्र प्रदेश की गृह मंत्री श्रीमती अनीता वंगलपुडी, सांसद श्री एम. श्रीभरत, विधायक श्री जी. श्रीनिवास राव, सीएसआईआर-एनआईओ के निदेशक प्रोफेसर सुनील कुमार सिंह, डॉ. वी.वी.एस.एस. शर्मा और सीएसआईआर की महानिदेशक डॉ. कलैसेल्वी की उपस्थिति में सभा को संबोधित करते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भले ही इस परियोजना की नींव वर्षों पहले रखी गई थी, लेकिन केन्द्र और राज्य सरकारों के एकमत होने के बाद पिछले 8-10 महीनों में इसमें काफी प्रगति हुई और यह पूरी हो गई।
केन्द्रीय मंत्री ने बताया कि इस परियोजना के लिए भूमि राज्य सरकार द्वारा 2000 के दशक के आरंभ में नाममात्र की कीमत पर हस्तांतरित की गई थी और इस क्षेत्र में हुए तीव्र विकास के कारण इसका वर्तमान मूल्य कई गुना बढ़ गया है। उन्होंने कहा कि भारत सरकार, सीएसआईआर और प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी (जो सीएसआईआर के अध्यक्ष हैं) की ओर से, कुल 32 करोड़ रुपये की इस तटवर्ती परियोजना को राष्ट्र को समर्पित कर रही है।
इस सुविधा के रणनीतिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए, डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि भारत की तटरेखा लगभग 11,000-12,000 किलोमीटर लंबी है। इसमें से 1,000 किलोमीटर से अधिक आंध्र प्रदेश से लगती है, जो इसे समुद्री अर्थव्यवस्था और प्रधानमंत्री के ‘नीली अर्थव्यवस्था’ से संबंधित विजन का एक स्वाभाविक केन्द्र बनाती है। उन्होंने कहा कि भारत का पूर्वी तटीय सीमांत भूवैज्ञानिक रूप से विविधतापूर्ण है और इसमें मुख्य रूप से हिमालयी नदी प्रणालियों द्वारा भारी मात्रा में निक्षेपित हाइड्रोकार्बन, समुद्री खनिजों, तेल और प्राकृतिक गैस की अपार संभावनाएं हैं।
केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि विशाखापत्तनम तट एक बहुमुखी समुद्री संसाधन आधार का प्रतिनिधित्व करता है, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा के साथ-साथ नीली अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान दे सकता है और नव उद्घाटित सीएसआईआर-एनआईओ सुविधा इस प्रयास के एक प्रमुख वैज्ञानिक आधार के रूप में कार्य करेगी।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने बताया कि सीएसआईआर-एनआईओ पहले से ही ओएनजीसी, ऑयल इंडिया तथा अन्य हितधारकों के साथ मिलकर काम कर रहा है और फार्मास्यूटिकल्स, बंदरगाहों, तापीय ऊर्जा परियोजनाओं व मत्स्य पालन जैसे क्षेत्रों को सक्रिय रूप से सहयोग दे रहा है। उन्होंने कहा कि संभावित मछली पकड़ने वले क्षेत्रों की पहचान, मछुआरों के लिए समुद्री शैवाल की खेती और हानिकारक शैवाल प्रस्फुटन की भविष्यवाणी करने से संबंधित केन्द्र सरकार के कार्यों से आजीविका और सार्वजनिक स्वास्थ्य दोनों को लाभ हो रहा है, क्योंकि समुद्री जैव संसाधनों का उपयोग चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में तेजी से बढ़ रहा है।
सरकार की समन्वित दृष्टि पर जोर देते हुए, केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि भारत का समुद्री विकास अब केन्द्र एवं राज्य सरकारों, सार्वजनिक एवं निजी क्षेत्र, अनुसंधान संस्थानों और स्टार्टअप को एक साथ ला रहा है। उन्होंने उद्योग जगत और उद्यमियों को सक्रिय साझेदार बनने के लिए आमंत्रित किया और कहा कि समुद्री एवं तटीय क्षेत्र में स्टार्टअप व नवोन्मेषकों के लिए तकनीकी तथा वित्तीय समर्थन का एक मजबूत इकोसिस्टम पहले से ही मौजूद है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने कहा कि विशाखापत्तनम केन्द्र क्षमता विकास और कौशल प्रशिक्षण के एक प्रमुख केन्द्र के रूप में भी उभरेगा, जो देश के बढ़ते समुद्री क्षेत्र के लिए युवा वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप और भावी उद्यमियों का मार्गदर्शन करेगा।
केन्द्रीय मंत्री ने मुख्यमंत्री श्री एन. चंद्रबाबू नायडू की विशेष सराहना करते हुए कहा कि उनके व्यक्तिगत हस्तक्षेप के कारण, लगभग एक दशक से लंबित तटीय और पर्यावरणीय मंज़ूरियां छह महीने के भीतर मिल गईं, जिससे कार्य निष्पादन में एक दिन की भी देरी नहीं हुई। उन्होंने कहा कि तटीय क्षेत्र में स्थित होने के कारण इस परियोजना के लिए कई मंजूरियों की आवश्यकता थी, जिन्हें केन्द्र और राज्य के बीच प्रभावी समन्वय के जरिए त्वरित प्रक्रिया से पूरा किया गया।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने प्रधानमंत्री द्वारा आंध्र प्रदेश और नई राजधानी अमरावती पर विशेष ध्यान दिए जाने का उल्लेख करते हुए घोषणा की कि वहां जल्द ही एक क्वांटम प्रौद्योगिकी केन्द्र स्थापित किया जाएगा। उन्होंने बताया कि पिछले 7-8 महीनों में विशाखापत्तनम की यह उनकी तीसरी यात्रा है, जो विज्ञान-आधारित विकास में राज्य सरकार की सक्रिय भागीदारी को दर्शाती है।
इस तटवर्ती प्रयोगशाला का निर्माण ऋषिकोंडा के येनदादा गांव में स्थित 4 एकड़ के परिसर के 3.25 एकड़ हिस्से पर किया गया है। इसका निर्मित क्षेत्र 4,550 वर्ग मीटर है और यह जी+1 संरचना में बनी है। इस परियोजना का क्रियान्वयन सीपीडब्ल्यूडी द्वारा किया गया, जिसके तहत निर्माण कार्य नवंबर 2024 में शुरू हुआ और दिसंबर 2025 में पूरा हुआ।
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